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कनाडा के लोकप्रिय एवं सफल प्रधानमंत्री,मेरे परम मित्र श्री स्टीफन हार्पर जी ,श्रीमती लौरें हार्पर जी और विशाल संख्या में आये हुए मेरे प्यारे भाइयों और बहनों

PM Modi - Indian Diaspora Event, at Ricoh Coliseum, Toronto Canada (13)

 कनाडा की जनता उनका हृदय से धन्‍यवाद करता हूं... जिस प्रकार से कनाडा ने मेरा स्‍वागत किया है सम्‍मान किया है,जिस उमंग और उत्‍साह के साथ उन्‍होंने अपने प्‍यार को प्रकट किया है मैं इसके लिए प्रधानमंत्री जी का और कनाडा का हृदय से बहुत-बहुत धन्‍यवाद व्‍यक्‍त करता हूं,लेकिन यह सम्‍मान किसी व्‍यक्ति का नहीं है,यह सम्‍मान नरेंद्र मोदी का नहीं है,यह सम्‍मान सवा सौ करोड़ हिंदुस्‍तानियों का है और कनाडा में भारत की पहचान नरेंद्र मोदी ने नहीं बनाई है,कनाडा में भारत की पहचान आप सब मेरे देशवासियों ने बनाई है। आपकी बदौलत,आपका पुरूषार्थ,आपका जीवन,मिलजुलकर के सबको साथ लेकर के चलने की हमारी परंपरा,उसको आपने भलीभांति यहां पर जीकर के दिखाया है। कनाडा का हर नागरिक आपके प्रति गौरव अनुभव करता है। आदर-सत्‍कार के साथ आपका नाम लेता है और जब दुनिया के किसी भी देश में किसी भारतीय की पराक्रम की गाथा सुनते हैं तो सीना चौड़ा हो जाता है और कनाडा में बसने वाले हमारे भारतीयों ने अपने सफल कारोबार के माध्‍यम से,अपने सफल जीवन के माध्‍यम से भारत की आन,बान,शान को बढ़ाने में बहुत बड़ी भूमिका अदा की है। इस शहर के साथ तो मेरा नाता पुराना रहा है। पहले भी आना हुआ है और तब मैं कुछ नहीं था। कोई जानता भी नहीं था। तब भी इस शहर ने मुझे जो प्‍यार दिया था,इतने ढेर सारे कार्यक्रम मेरे हुए थे। इतने लोगों से मेरा मिलना हुआ था और इसलिए आज मैं उस धरती पर फिर से एक बार आकर ,नई जिम्‍मेदारी के साथ आया हूं,तब मैं यहां रहने वाले मेरे सभी भारतीय भाईयों और बहनों का हृदय से अभिनंदन करता हूं।

मेरा कनाडा के कारोबार से बड़ा अच्‍छा संबंध रहा,मेरा बहुत अच्‍छा अनुभव रहा। मैं गुजरात में मुख्‍यमंत्री रहा कई वर्षों तक और मुख्‍यमंत्री के कालखंड में मैं एक Vibrant Gujrat InvestorSummitकरता था। 2003 में पहली बार किया। पूरी कल्‍पना नई थी और मैं आज गर्व से कहता हूं कि कनाडा वो देश है जो 2003 से गुजरात का partner countryबना। एक developed countryके लिए किसी देश के छोटे से राज्‍य के साथ partner countryबनना यह निर्णय छोटा नहीं होता है,लेकिन कनाडा ने वो निर्णय किया और अब तक निभाया है। मैं इसके लिए कनाडा का बहुत-बहुत आभारी हूं। मैं कल रात यहां पहुंचा,कल रात चला जाऊंगा लेकिन कनाडा के प्‍यार को मैं कभी भुला नहीं पाऊंगा। आज कल तो विमानों की सेवा इतनी अच्‍छी हो गई है कि 15-17-20..... घंटे में आप भारत से कनाडा पहुंच सकते हो। लेकिन भारत के प्रधानमंत्री को आने में 42 साल लग गए। ये भी बड़ी विचित्रता देखिए कि भारत और कनाडा मिलकर स्पेस में तो प्रगति कर रहे हैं, लेकिन धरती पर कतराते रहते थे। जिस बात को 42 साल बीत गए, उसको मैंने दस महीने के भीतर-भीतर कर दिया।

PM Modi - Indian Diaspora Event, at Ricoh Coliseum, Toronto Canada (8)

मैं जानता हूं कि भारत की शक्ति और भारत की आवश्‍यकता ....कनाडा की संपत्ति और कनाडा का सामर्थ्‍य : इंडिया प्‍लस कनाडा; आप कल्‍पना कर सकते हो। हम दुनिया में कितनी बड़ी ताकत के रूप में उभर सकते हैं| भारत को जिन-जिन प्राकृतिक संपदाओं की जरूरत है उन सारी प्राकृति संपदाओं की पूर्ति कनाडा से हो सकती है। मेरे हिंदुस्‍तान में किसान खेत में मजदूरी करता है, मेहनत करता है, पसीना बहाता है और जब उसको फर्टीलाइजर की जरूरत होती है तो पोटाश कनाडा से आता है। यहां पर इतनी प्राकृतिक संपदा है.. एक बार यहां के एक राज्‍य के प्रीमियर गुजरात आये थे। मैंने उनसे कहा कि मेरा राज्‍य ऐसा है.. तब मैं गुजरात का मुख्‍यमंत्री था। मैंने कहा कि मेरे यहां हीरे की खदानें नहीं हैं, लेकिन मेरे लोगों का कौशल ऐसा है, Entrepreneurshipमें इतना दम है कि दुनिया में दस में से नौ हीरे ऐसे हैं जिस पर किसी न किसी भारतीय का हाथ लगा हुआ होता है। उनको मैंने कहा कि आपके पास हीरे की खदानें हैं, कच्‍चा हीरा मुझे दे दीजिए। मैं आपको मूल्‍य वृद्धि करके वापस लौटा दूंगा और आपके कच्‍चे हीरे पर हिंदुस्‍तान के पसीने की महक दुनिया में आपकी ताकत को चार गुना बढ़ा देगी। यह सामर्थ्‍य है दोनों देशों में। इस सामर्थ्‍य को जोड़ने का एक नया युग आज प्रारंभ हुआ है। आज जो हमने निर्णय किए हैं, मिल बैठ करके, खुलकर के बातें हुईं हैं और एक मित्रतापूर्ण माहौल में हुई हैं। एक दूसरे को समझने में अब हमें कोई तकलीफ नहीं है और इसलिए मैं आपको विश्‍वास दिलाता हूं कि इंडिया और कनाडा का यह संसार बहुत लंबा चलने वाला है। इसके लिए मैं प्रधानमंत्री और मेरे मित्र श्रीमान हार्पर का हृदय से बहुत-बहुत धन्‍यवाद करता हूं, उनका अभिनंदन करता हूं|

 भाईयों और बहनों पिछले वर्ष जब भारत में चुनाव का मौसम था, चुनाव तो वहां चल रहे थे लेकिन नारे यहां से सुनाई देते थे। नतीजे तो वहां आये थे। लेकिन मिठाई यहां बांटी जा रही थी। वहां पर लोग दिन में खुशी मना रहे थे, आप आधी रात में मना रहे थे। मेरे भाईयों  और बहनों, दस महीने पहले सिर्फ सरकार बदली थी। लेकिन आज मैं दस महीनों के बाद कह सकता हूं कि जन-जन का मन भी बदला है। सरकार बदली है, उससे क्‍या होगा?ये तो समय कहेगा, लेकिन मन के बदलने से क्‍या कुछ हो सकता है इसको मैं भली-भांति समझ सकता हूं।

PM Modi - Indian Diaspora Event, at Ricoh Coliseum, Toronto Canada (9)

हम लोग जब छोटे थे, तो सिनेमा का एक गीत सुना करते थे – “देख तेरे संसार की हालत क्‍या हो गई भगवान, कितना बदल गया इंसान।“  उस समय एक पीड़ा थी, व्‍यथा की बात थी, उस गीत में। मैं आज उस गीत को नए रूप में देख रहा हूं कि इंसान बदला है। उस समय पीड़ा थी कि कितना बदल गया इंसान और मैं आज गर्व से कहता हूं कि कितना अच्‍छा बन गया इंसान। बदला है, बदला है। कोई कल्‍पना कर सकता है? मैंने देश के गरीब भाईयों और बहनों को कहा कि आप बैंक में खाता खोलिए। हमारे यहां मेरे जन्‍म से पहले ही बैंक तो चल रही थी, देश आजाद होने के बाद भी बैंक चल रही थी, कांग्रेस सरकार ने श्रीमति इंदिरा गांधी की सरकार थी तब बैंकों का राष्‍ट्रीयकरण कर दिया था, ताकि बैंक गरीबों के काम आये। लेकिन इसके बावजूद भी दस करोड़ से अधिक परिवार ऐसे थे यानी करीब-करीब 40 प्रतिशत से अधिक जनता ऐसी थी, जिनके नसीब में बैंक का खाता खोलना नहीं था। मैंने 15 अगस्‍त को घोषणा की थी कि मुझे बैंक में खाते खुलवाने हैं और.. एक जमाना था.. आप भी हिन्‍दुस्‍तान में रहे हैं, बैंक में जाते थे तो बैंक का अफसर नीचे से ऊपर देखता भी नहीं था और अगर आप उसका ध्‍यान आकर्षित करने की कोशिश करें, तो काटने के लिए आता था – देखते नहीं हो मैं काम कर रहा हूं!  इंसान बदल गया, बैंक वाले भी बदल गये, यही बैंक के कर्मचारी.. आज मैं उन पर गर्व करता हूं,  उनका अभिनंदन करता हूं कि वो गांव-गांव गये, गरीब के घर गये और 14 करोड़ बैंक खाते खोले| 14 करोड़ ! मतलब कि करीब करीब तीन कनाडा और यह काम सौ दिन में पूरा किया उन्होंने ..सौ दिन में | इंसान बदला है !! भारत का जन मन जो बदला है यह उसका उदाहरण है सरकार सिर्फ नहीं बदली है..जन मन बदला है | जब बैंक खाते खोलने की बारी आई तो.. गरीब के पास पैसे नहीं, बैंक खाता क्‍या खोलेगा और इसलिए हमने कहा था कि जीरो बैलेंस से एकाउंट खोलेंगे। जीरो बैलेंस| बैंक वालों को शुरू में तो थोड़ा ये था कि भई ये क्‍या कर रहे हो आप? हमने कहा कि भई क्‍या जाता, है दो कागज पर उनका नाम लिखना है, बैंक एकाउंट खोलना है, जाता क्‍या है तुम्‍हारा। वो बोलें कि कुछ तो देना चाहिए उन्‍हें। हमने कहा क्‍या देना है, उसने पसीना बहाया है, क्या लेना है , दे दो बैंक का खाता दे दो। मैंने गरीबों को कहा था कि आपको पैसे बैंक में रखने की जरूरत नहीं है, खाता खोल दीजिए, फिर आगे देखेंगे। लेकिन मेरे नौजवान साथियों, दोस्‍तों। जन-मन बदला है, तो कैसे बदला है.. मैंने गरीब को कहा था कि तुम्‍हें बैंक में पैसे डालने की जरूरत नहीं है, मुफ्त में खाता खोल देंगे। लेकिन गरीब की अमीरी भी तो कुछ चीज होती है। गरीब की अमीरी की भी अपनी एक ताकत होती है और मैं आज गर्व से कहता हूं, उन गरीबों के सामने सर को झुकाकर उनका अभिनंदन करता हूं, उन्‍होंने 14 हजार करोड़ रूपया बैंक में जमा करवाया। ये गरीबों की अमीरी, ये बदले हुए जन-मन की निशानी है। देश में एक नया विश्‍वास पैदा हुआ है। सरकार बदली है, इसलिए सब बदलेगा ऐसा नहीं है। बदलने का मेरा विश्‍वास इसलिए है कि जन-मन बदला है । “जन मन गण अधिनायक” जो  कहते हैं न, वो जन-मन बदला है। हमारे देश में आप जब विदेश से आते थे, एयरपोर्ट पर उतरने ही आपकी शिकायत क्‍या रहती थी? कि गंदगी बहुत है, सफाई नहीं है, ऐसा ही लगता था न? हमने तय किया कि काम कठिन है, लेकिन करना चाहिए और हम नहीं करेंगे तो कौन करेगा? जिनको गंदगी करनी थी वे गंदगी करके चले गए लेकिन हम सफाई करके जाएंगे। आज जन-मन ऐसा बदला है कि हर दिन एकाध खबर तो कहीं-कहीं से आती है कि फलाने बैंक के सारे Employee Saturday-Sundayको सफाई करने निकले हैं, फलाने कॉलेज के Studentsसफाई करने के लिए निकले हैं, फलाने मंदिर के सारे संत सफाई करने के लिए निकले हैं, फलाना एम. एल. ए. सफाई कर रहा है, एम पी सफाई कर रहा है, चारों तरफ कहीं न कहीं से खबर आ रही है। मैंने देखा.. आप कभी सचिन तेंदुलकर की वेबसाइट पर जाओगे तो उन्‍होंने अपना एक वीडियो रखा है। उन्‍होंने मुंबई में एक फुटपाथ तय की, रोज सुबह चार बजे जाते थे अपने दोस्‍तों को ले करके। महीने भर गए और पूरी उसकी सफाई करके उसको बढि़या से पार्क में Convert कर दिया। लोग आकर बैठते हैं। सरकार ने नहीं किया, नागरिक कर रहे हैं। दो बेटियां.. एक नगालैंड से और एक बनारस से, दो बेटियां बनारस में एकठ्ठी हुईं और उनका मन कर गया कि काशी की घाटों की सफाई करें और आज मैं हैरान हूं कि उन दो बेटियों ने काम शुरू किया, धीरे-धीरे नौजवान जुड़ते गए और उन्‍होंने पूरे प्रभु घाट को साफ कर दिया। आज लोग जा करके, विदेश के लोग वहां जा करके घंटों तक गंगा के सामने बैठते हैं। देश विशाल है, गंदगी बहुत है, पुरानी है, वक्‍त लगेगा लेकिन जन-मन बदला है, उसका ये उदाहरण है। हमने कहा कि स्‍कूल में टॉयलेट बनाना है, उसमें भी Girl Childके लिए टॉयलट बनाना है। लोगों को लगता है कि प्रधानमंत्री का काम होता है ये क्‍या ? लेकिन ये थोड़ा अलग सा प्रधानमंत्री है, औरों को जो बनाना है बना दें, मुझे तो ऐसे ही छोटे-छोटे काम करने हैं। लोगों को लगता है कि यह प्रधानमंत्री का काम होता है क्‍या,लेकिन यह थोड़ा अलग सा प्रधानमंत्री है। औरों को जो बनाना है बना दे,मुझे तो ऐसे ही छोटे-छोटे काम करने है। और बूंद-बूंद से जैसे समुद्र भर जाता है, छोटे-छोटे कामों से हिंदुस्‍तान की शक्‍ल सूरत बदल जाएगी यह मेरा विश्‍वास है| दोस्‍तों और मेरा विश्‍वास है सवा सौ करोड़ देशवासी एक कदम भी चलें तो देश सवा सौ करोड़ कदम आगे बढ़ जाता है। एक दिन मेरे मन में विचार आया कि जिसके पास पैसे हैं सप्‍ताह में दो दिन तो Dinner किसी बढि़या से होटल में करता होगा। 15-20 हजार को बिल देकर के वापस आता है। क्‍या ऐसे लोगों ने भी गैस सिलेंडर की सब्सिडी लेनी चाहिए क्‍या?उनको शोभा देता है क्‍या?एम.पी है,एम.एल.ए हैं,मंत्री हैं 400 रुपये की सब्सिडी । मैंने ऐसे ही बातों बातों में कह दिया कि भई यह अच्‍छा नहीं लगता,हमारे जेब में दम है तो हमने क्‍यों लेनी चाहिए,गरीब लें,गरीब को मिलनी भी चाहिए। लेकिन जिसके पास संभावना है वो क्‍यों ले?और सब्सिडी से पका हुआ खाना शोभा देता है क्‍या?मैंने सार्वजनिक रूप से नहीं कहा था दोस्‍तों। ऐसे ही बातों बातों में अपने साथियों से बीच बात कर रहा था तो बात फैलनी लगी और बात फैलने लगी आज भी मेरे साथियों का जन मन बदला है। बदला हुआ जन मन ने क्‍या किया?करीब चार लाख लोगों ने अपनी गैस सब्सिडी छोड़ दी। यानी करीब-करीब देश की तिजोरी में 200 करोड़ रुपये बच गया। Two hundred crore rupees. कोई हुकुम नहीं,कानून नहीं,कुछ नहीं,हर व्‍यक्ति को लगने लगा है कि अब देश इंतजार नहीं करेगा। देश को आगे बढ़ना है और हम बढ़ाएंगे यह जन-मन का विश्‍वास बढ़ा है और मैं यह जितनी बातें बता रहा हूं वो मोदी ने नहीं की है। देश के सामान्‍य नागरिक ने की है। सामान्‍य नागरिक के मन में एक नया मिजाज पैदा हुआ है। एक आनंददायक घटना मैं देख रहा हूं और मैंने फिर Publicly एक बार Announce किया। Publicly ऐसा कहा मैंने लोगों से सार्वजनिक रूप से अभी 5-6 दिन पहले ही कहा है। मैंने कहा कि मेरा सबसे आग्रह है कि जिसके जेब में दम है,वो गैस की सब्सिडी लेना छोड़ दे। मुझे विश्‍वास है कि लोग छोड़ देंगे। लेकिन मैंने उनसे एक बात और कही। मैंने कहा कि जो लोग गैस की सब्सिडी छोड़ेंगे,वो पैसा मैं सरकार की तिजोरी में नहीं डालूंगा,इसका मतलब यह नहीं कि मेरी जेब में डालूंगा। मैंने कहा कि जो गरीब परिवार है, जिनके घर में लकड़ी से जलने वाला चूल्‍हा है, जहां गरीब माँ लकड़ी से चूल्‍हा जलाती है। पूरे घर में धुंआ होता है, छोटे बच्‍चे दिन-रात रोते रहते हैं, धुएं में बैठ नहीं पाते, बीमार हो जाते हैं। मैं यह गैस सिलेंडर उन गरीब परिवारों को दूंगा और उससे उस परिवार के स्‍वास्‍थ्‍य को लाभ होगा। लकड़ी जलना बंद होगा तो जंगल बचेंगे, धुंआ नहीं होगा तो पर्यावरण बचेगा।जंगल बचेगा तो पर्यावरण में वृद्धि होगी, एक इंसान सब्सिडी छोड़ता है, कितने फायदे हो सकते हैं, जिसका आप अनुमान लगा सकते हैं और जन-मन बदला है, उसके कारण यह परिणाम आ रहा है। आपको हैरानी होगी, सबसे बड़ी सरप्राइज घटना बता दूं, मेरे लिए भी सरप्राइज है। लेकिन वो सुखद.. आश्‍चर्य है मेरे लिए। एक अखबार के मालिक ने मुझे चिट्ठी लिखी है। बताईये सुखद आश्‍चर्य है या नहीं है। अखबार के मालिक ने चिट्ठी लिखी है और उसमें मुझे लिखा है कि मोदी जी, जो देश मूड है उससे लगता है.. और हमने हमारे अखबार की एक नीति बनाई है और वो नीति ये है कि सप्‍ताह में एक दिन हमारा अखबार सिर्फ और सिर्फ पॉजिटिव न्‍यूज ही छापेगा। ये छोटी घटना नहीं है मित्रों ! भले आज एक अखबार ने काम शुरू किया है लेकिन खुद हो करके, सामने हो करके कहना और ये विचार मैंने नहीं दिया है। अब्‍दुल कलाम हमारे पूर्व राष्‍ट्रपति जी वो बार-बार कहते थे कि पॉजिटिव का कॉलम बनाईए, मैंने कभी कहने की हिम्‍मत नहीं की थी। लेकिन मुझे खुशी हुई कि बदले हुए जन-मन.. कहां-कहां उसका फैलाव हो रहा है, कैसे बात पहुंच रही है, उससे लगता है कि देश.. आप जिन सपनों को लेकर जीते हैं, आप ही आंखों के सामने वो सपने साकार होते हुए आप देखेंगे ये मैं आपको विश्‍वास दिलाता हूं।

PM Modi - Indian Diaspora Event, at Ricoh Coliseum, Toronto Canada (6)

हमारे देश में कई समस्‍याएं हैं लेकिन उन समस्‍याओं का समाधान एक ही जड़ी-बूटी में है। सब दु:खों की दवाई एक ही जड़ी-बूटी है। वो जड़ी-बूटी मोदी नहीं है, उस जड़ी बूटी का नाम है- विकास। हमारी सभी समस्‍याओं का समाधान है कि हम देश में विकास के एजेंडा पर आगे बढ़ें। हम विकास करें और मैं बताता हूं भाईयों और बहनों कि भारत के अंदर ताकत है, सिर्फ अवसर चाहिए। पिछले दस साल में हमारे देश में प्रति दिन जो रोड का Construction होता था वो 2 किलोमीटर होता था Per Dayऔर पिछले दस महीने से  Per Day 11 किलोमीटर होता है यानी आप देख सकते हैं कि विकास.. 11 किलोमीटर है ...यानी बहुत बड़ी बात नहीं बता रहा लेकिन तुलनात्‍मक रूप से पता चलेगा कि हम कैसे आगे बढ़ रहे हैं। भाईयों और बहनों, विकास का रास्‍ता ही देश को आगे ले जाएगा।

आप कल्‍पना कीजिए कि भारत के पास आज कौन सी बड़ी संपत्ति है? मेरे नौजवान साथियों: भारत के पास वो संपत्ति है, जो दुनिया में किसी के पास नहीं है और वो है –भारत की 65 प्रतिशत जनसंख्‍या 35 से कम उम्र की है। हिंदुस्तान नौजवान है| 80 करोड़ नौजवान जिस देश के पास हों.. 160 करोड़ मजबूत भुजाएं हों, 80 करोड़ सपने हों, वो देश क्‍या नहीं कर सकता?यह एक बहुत बड़ी संपत्ति है हमारी और इसलिए विकास के केंद्र में, मेरे दिमाग में ये 80 करोड़ नौजवान हैं, जिनके हाथ में हुनर हो, जिनको रोजगार के अवसर हों, वे मिट्ठी में से सोना बनाने की ताकत रखते हैं और देश सोने की चिडि़या फिर एक बार बन सकता है दोस्‍तों। ये आत्‍मविश्‍वास उन सवा सौ करोड़ देशवासियों के आर्शीवाद से पनपा है। ये आत्‍मविश्‍वास उन 80 करोड़, 35 साल से कम उम्र के नौजवानों की आंखों में से पैदा हुआ है और मैं दुनिया को कहता हूं कि दुनिया कल्‍पना करे , प्रगतिशील देश कल्‍पना करें, समृद्ध देश कल्‍पना करें, 2030 : 2030 के बाद उनके पास कितने ही कारखाने होंगे, कितने ही काम होंगे, उनके पास Work Force होगा क्‍या ? दुनिया के सभी समृद्ध देशों में उम्र बहुत तेजी से बढ़ रही है। जवानी मुरझा रही है और तब अगर जवानी मुरझा गई तो उस देश को चलाने की ताकत बाहर से लानी पड़ेगी। पूरे विश्‍व को 2030 के बाद जो Work Force की जरूरत होने वाली है वो एक ही जगह से मिलने वाला है, उस जगह का नाम है – हिन्‍दुस्‍तान | इसलिए हम अभी से इस बात पर ध्‍यान केंद्रित कर रहे हैं और उसमें हमारी प्राथमिकता है Skill Development... हमारा मिशन है Skill India| पहले भारत की पहचान थी- Scam India। हम बनाना चाहते हैं Skill Indiaऔर इसलिए Skill Development  को प्राथमिकता देना चाहते हैं और Skill Development में भी मेरे मन में अलग-अलग कल्‍पनाएं हैं। एक तो हम अभी से दुनिया का Mapping करना चाहते हैं कि किस देश को किस प्रकार के मानव बल की आवश्‍यकता होगी। दुनिया के कई देश हैं, जिनको Maths और Science के Teachers की जरूरत होगी। दुनिया के कई देश हैं, जिनको Nurses चाहिएं। दुनिया के कई देश हैं जहां हाथ से काम करने वाले कारीगर चाहिए। अलग-अलग प्रकार की आवश्‍यकताएं हैं। दुनिया की Mapping करके, जिसको जिस प्रकार के Work Force की जरूरत पड़ेगी उसका अनुमान लगाया जा सकता है, उस प्रकार का Work Force अभी से तैयार करने के लिए Skill Development मिशन.. और Skill Development में दुनिया में आज जिसके पास बढि़या से बढि़या Skill Development की व्‍यवस्‍थाएं, योजनाएं हैं सबको मैं भारत में लाना चाहता हूं, दूसरा Skill Development वो हो जिसमें Enterpreneur तैयार हो। नए स्टार्ट अप, नई पीढ़ी, नए-नए व्‍यवसाय में खुद जुटें, स्‍वरोजगार में आगे आए किसी से नौकरी पाने के लिए इंतजार न करे, वो Job Seeker न बने, वो Job Creater बने। भले दो को नौकरी दें, पांच को दें लेकिन वो Job Creater बने। उनके लिए जो Skill Development होनी चाहिए, उस पर बल देना चाहिए, तीसरा जो खुद रोजी-रोटी कमाने के लिए कुछ करना चाहते हैं। उनके लिए उस प्रकार का Skill Development| इस तरह Skill Development पर बल दे करके, Value Addition करके.. और हमारे देश में दुर्भाग्‍य से कोई कितना भी बदमाश व्‍यक्ति क्‍यों न हो? लेकिन अगर खादी का बढि़या कुर्ता पहन करके, लंबा कुर्ता पहन करके आ जाए या कोट पैंट और टाई पहन करके आ जाए और अपने घर की घंटी बजाए, तो हम कहेंगे कि आइये-आइये बैठिए, क्‍या काम है? लेकिन कोई बेचारा गरीब मजदूर, ऑटो रिक्‍शा वाला, कपड़े गंदे हों और वो आ करके घंटी बजाए और पूछे कि फलाने भाई कहां गये तो हम कहते हैं कि अरे चलो चलो ! ये कोई टाईम है क्‍या? भागो शाम को आना!क्‍यों? हमारे मन में Labour के प्रति जो Dignity चाहिए, उसका अभाव भर गया है। जब तक एक सामान्‍य व्‍यक्ति की Dignity.. ये हमारा स्‍वभाव नहीं होगा, Dignity of Labour, ये हमारी प्रकृति नहीं होगी, तो शायद दुनिया जो हमसे मांग रही है उसको हम गौरव से नहीं कर पाएंगे। मैं आज गर्व से कहता हूं कि दुनिया में जिस प्रकार से युवा पीढ़ी को हम देख रहे हैं, भारत की युवा पीढ़ी भी जो भी काम मिले, बिना शर्म के, बिना संकोच के, वह करने को तैयार है। कोई संकोच नहीं, कोई शर्म नहीं, वो मेहनत करने को तैयार है। ये जन-मन बदला है, उसी का परिणाम है। नौजवान का मिजाज बदला है,वो मेहनत करने को तैयार है, काम करने को तैयार है, हम उसे अवसर देना चाहते हैं, Human Resources Development, इस पर हम ध्‍यान केंद्रित करना चाहते हैं, उसके साथ-साथ हम थोड़ा ऊपर के लेयर का भी सोच सकते हैं। भारत के पास Talent है।Talent में कोई कमी नहीं है।हमारे टैलेंट का सबसे बड़ा सबूत है- भारत ने अभी मंगलयान भेजा है। Mars पर हम गये और छोटी-छोटी जगहों पर वे Mars पर जाने वाले सारे पुर्जे तैयार हुए। हिंदुस्‍तान के पांच छह राज्‍यों में छोटे-छोटे Small Scale Industry वालों के यहां एक-एक पुर्जा बना। हमारे Scientist जो हैं, नौजवान हैं, उनका Talent देखिए। उन्होंने  पहुंचा दिया मंगलयान।दुनिया में हम पहला देश हैं जो पहले ही Trial में सफल हो गये और मंगलयान में हमारे Talent का कमाल देखिए। हॉलीवुड की फिल्‍म पर जितना खर्चा होता है न, उससे कम खर्चे में मंगलयान पहुंच गया। आप अगर दिल्‍ली में, लखनऊ में, कानपुर में, हैदराबाद में, बंगलोर में ऑटो रिक्‍शा में अगर जाते हैं तो एक किलोमीटर का करीब दस रूपया खर्चा आता है। मंगलयान पर हमारा खर्चा सिर्फ सात रूपया किलोमीटर आया है। मैं कहना यह चाहता हूं कि देश के पास Talent है। क्‍या कारण है कि आईटी की दुनिया में हिन्‍दुस्‍तान के नौजवानों ने नाम रोशन किया। कनाडा में भी हिंदुस्‍तान के आईटी के नौजवान अपना करतब  दिखा रहे हैं। अमेरिका में भी हिंदुस्‍तान के नौजवान आईटी में अपना करतब दिखा रहे हैं। उंगलियां तो उनकी हैं, लेकिन मेरे नौजवान दोस्‍तों जवाब हमें खोजना पड़ेगा कि बुद्धि वहां से है, उंगलियां उसकी चल रही हैं, लेकिन Googleभारत की गोद से पैदा क्‍यों नहीं होता? Microsoftभारत की गोद से पैदा क्‍यों नहीं होता?

PM Modi - Indian Diaspora Event, at Ricoh Coliseum, Toronto Canada (11)

Talentवो ही है काम वही कर रहे हैं, मुझे वो माहौल बदलना है, ये हमारे TalentedYouthको अवसर देना है, ताकि वो Innovationकरें। आने वाले दिनों में दुनिया को क्‍या चाहिए? अपने Innovationसे वो दें। इसलिए छोटे-छोटे से काम के लिए एक मजदूर को जिस प्रकार का Skill Development चाहिए वो हमारे Talented Youthके लिए, Innovation के लिए अवसर चाहिए। उस दिशा में हम काम कर रहे हैं। हमने इस बार हमारे बजट में कार्यक्रम रखा है –AIM –Atal Innovation Mission. हम नौजवानों को अवसर देना चाहते हैं। कहने का तात्‍पर्य यह है कि देश को आगे ले जाने के लिए हमारी युवा शक्ति का जो सामर्थ्‍य है, जो हमारी सबसे बड़ी संपदा है और यह संपदा केवल भारत के अपने लिए नहीं, पूरे विश्‍व के अंदर काम आने वाली संपदा हमारे पास है। भले हमारे पास हीरे की खदानें नहीं होगी, भले हमारे पास गैस के भंडार नहीं होंगे, भले हमारे पास पेट्रोलियम के भंडार नहीं होंगे, हमें यू‍रेनियम बाहर से लाना पड़ता होगा, लेकिन हमारे पास जो ताकत है उस ताकत के भरोसे हम दुनिया में देश की ताकत बढ़ाना चाहते हैं। ये विश्‍वास ले करके हम आगे बढ़ रहे हैं।

आज हमने कनाडा में एक बहुत महत्‍वपूर्ण निर्णय लिया। मेरी इस यात्रा में एक महत्‍वपूर्ण निर्णय हमने फ्रांस में किया, दूसरा महत्‍वपूर्ण निर्णय आज हमने कनाडा में किया, बाकी तो बहुत महत्‍वपूर्ण हुआ है, लेकिन दो चीज ऐसी हैं, जिनकी तरफ लोगों का ध्‍यान नहीं गया है। पता नहीं जब मैं वापस पहुंचूंगा तो तब जाएगा कि नहीं जाएगा या तो कहीं और ध्‍यान होगा अभी लोगों का लेकिन हो सकता है कि चार छह महीने के बाद ध्‍यान दें। फ्रांस में एक महत्‍वपूर्ण निर्णय हुआ, वो यह हुआ कि हम लोग Nuclear Energyके लिए दुनिया भर से रियेक्‍टर मांगते थे। हर कोई देश हाथ ऊपर कर देता था, बात चलती थी, दो चार साल बात चलती थी, फिर बात ऊपर हो जाती थी। बहुत लंबे अरसे से विषय Pendingथा, कोई देने को तैयार नहीं था क्‍योंकि सबको लगता है कि कहीं बम न बना दें और जो बनाते हैं उनको कोई रोकता नहीं है, रोक पाते भी नहीं। जो गांधी का देश है, जिसने कभी दुनिया में किसी पर आक्रमण नहीं किया, जिसने शांति के शहादत मोल ली है। ऐसे हम लोग हैं| उनको कई वर्षों के लिए भटकना पड़ता है। इस बार हमने फ्रांस के अंदर एक कंपनी के साथ भारत की एक कंपनी का MOUहुआ है। मेरे लिए खुशी की बात है कि सबसे बड़ा काम होने वाला है कि अब वो रियेक्‍टर भारत में बनेगा। अब रियेक्‍टर तो बनेगा लेकिन NuclearEnergyके लिए यूरेनियम चाहिए। यूरेनियम आपका कनाडा मुझे देगा। पूरी दुनिया GlobalWarmingके कारण परेशान है,Climate Changeकी चर्चा है, Air Conditionedकमरों में सर्वाधिक एनर्जी का उपयोग करके Climateकी चर्चा की Meetingहुआ करती है। भारत अगर Environment Protectionमें सफल होता है तो दुनिया का 1/6 जिम्मा हम अकेले उठा सकते हैं। उसमें सबसे बड़ा काम है Clean Energyऔर उस Clean Energyमें Nuclear Energyकी ताकत बहुत है। इसलिए हम रियेक्‍टर बनाएंगे, हम कनाडा से यूरेनियम लेंगे, हम Nuclear Energyबनाएंगे और दुनिया को जिस चीज की चिंता है- Climate Changeकी उसमें मददगार होने का काम हिंदुस्‍तान बीड़ा उठाएगा।

भारत के राष्‍ट्र ध्‍वज में चार रंग हैं। हम बोलते हैं तिरंगा, रंग चार हैं, लेकिन वो हमारी विशेषता है। मैं एक चतुर्रंगी क्रांति का सपना ले करके चल रहा हूं, चतुर्रंगी क्रांति का। भारत का तिरंगा झंडा, जिसको देखते हम जिसमें कि चार रंग हैं –Saffron है, Whiteहै, Green है और बीच में Blueहै। अशोक चक्र है Blue Colourका। मैं चतुर्रंगी क्रांति का सपना देख करके चल रहा हूं। चतुर्रंगी क्रांति का सपना देख रहा हूं.. केसरिया रंग.. अब कुछ लोगों को तो केसरिया रंग का अर्थ भी ढंग से मालूम नहीं है। वो अपनी मन-मर्जी का अर्थ करते रहते हैं, वो उनका काम है करते रहें। Saffron Colour,ये ऊर्जा का रंग है, Energy का रंग है। सूर्य का सात घोड़ों का रथ देखते हैं तो Saffron Colourका दिखाई देता है। ये ऊर्जा क्रांति करनी है हिंदुस्‍तान में। इसलिए Nuclear Energy, Solar Energy,Wind Energy, Biomassसे बनने वाली Energy, Energy Saving,इन सारे विषयों को एक साथ चलाया है।

PM Modi - Indian Diaspora Event, at Ricoh Coliseum, Toronto Canada (5)

हमारे देश में कुछ तो Terminologyएक दम से बदल रही है। भारत कभी भी.. ज्‍यादा से ज्‍यादा चर्चा मेगावाट की करता था, कि भई इतने मेगावाट, इतने मेगावाट। पहली बार देश में गीगावाट की चर्चा होनी शुरू हुई है। वरना हमारा.. क्रिकेट में भी Lastके जो बॉलर वगैरह खेलने जाते हैं, सेंचुरी की कहां चर्चा करते हैं?.. तो मेगावाट के आस-पास खेलते थे, पहली बार सरकार गीगावॉट की परिभाषा ले करके चल रही है और 175 गीगावाट Renewable Energyकी तरफ हम जा रहे हैं, 100 गीगावाट Solar Energy, 75 गीगावाट Wind Energy| यह सपना देखा है। Energysaving.. LED Bulbका एक पूरा मूवमेंट खड़ा किया है। स्‍कूलों में बच्‍चों को बताते है, बिजली बचाने के लिए अपने घर में माहौल बनाओ। LED Bulbऔर Transparency.. आपको जानकर हैरानी होगी कि एक साल पहले जो सरकार थी, उस समय 2012-13 के कार्यक्रम में LEDका Bulbसरकार 350 रूपये में लेती थी। कितना? ये सरकार 85 रूपये में लेती है। ये Transparencyहै कि नहीं है, है कि नहीं है, भ्रष्‍टाचार गया कि नहीं गया, ईमानदारी आई कि नहीं आई, ईमानदारी से काम हो सकता है कि नहीं हो सकता। हर छोटी चीज में यदि ध्‍यान बारीकी से रखा जाए,तो बदलाव लाया जा सकता है। जन-मन बदला है दोस्‍तों इसलिए परिस्थितियां पलट रही हैं। दूसरा Revolutionहै –White Revolution.हमारे देश में, दुनिया में दूध देने वाले पशुओं की तुलना में हमारे यहां Productivityबहुत ज्‍यादा नहीं है। जो काम दो दूध देने वाले पशुओं से होना चाहिए,उतना काम करने के लिए हमको 20 पशु पालने पड़ते हैं, क्योंकि उसका लालन-पालन करने के लिए जिन चीजों को वैज्ञानिक तरीके से बढ़ाना चाहिए, हम नहीं बढ़ा पाते। गांव के गरीब के पास यदि एक पशु हो,तो उसको जिंदगी में कभी देखना न पड़े, उसकी Productivityकैसे बढ़े, वैज्ञानिक तौर-तरीके कैसे आएं और हिंदुस्‍तान में सेकेंड White Revolutionकैसे हो,उस पर हम बल दे रहे हैं। तीसरा, Green Revolution .. Green Revolutionमें वही बात, अब जमीन पहले पांच एकड़ थी, दो भाई थे, अब पांच एकड़ में दस भाई हो गए, दो भाई के बच्‍चे हो गए, उनके बेटे हो गए, अब इतना बड़ा परिवार दस बीघा जमीन में कैसे चलेगा? वो परिवार तब चलेगा कि हम सीमित जमीन में भी Productivityकैसे बढ़ाएं। इसके लिए एक काम हमने उठाया है –Soil Health Card.इंसान की Healthके लिए जैसे HealthCardहोता है,  वैसे धरती माता की तबीयत के लिए Health Cardहो । कहीं हमारी पृथ्‍वी मां बीमार तो नहीं है?  हमारी पृथ्‍वी मां को जो खाना चाहिए, वो नहीं खिलाते,कुछ और खिला दिया, ऐसा तो नहीं है? माँ को कैसे बचाएं, इसलिए हमने अभियान उठाया है धरती मां की रक्षा करने का। Soil Health Cardका मिशन चलाया है। पानी बचाना, ये दुनिया पर बहुत बड़ा जिम्‍मा आ पड़ा है। Per Drop More Cropएक-एक बूंद से फसल कैसे ज्‍यादा पैदा हो?उस पर हम बल देना चाहते हैं, जो पैदा हो उसका Value Additionकैसे हो, मूल्‍य वृद्धि कैसे हो?किसान का माल .. Forward Linkageकैसे उसको मिले, Green Revolution.. हिंदुस्‍तान में सेकेंड Green Revolutionके लिए, भारत का जो पूर्वी हिंदुस्‍तान है, जिसकी जब चर्चा होती है, तो गरीबी के नाम पर होती है, वो सबसे समृ‍द्ध बन सकता है। बिहार हो, ओडि़शा हो, पूर्वी उत्‍तर प्रदेश हो, पश्चिम बंगाल हो, असम हो, जहां विपुल मात्रा में पानी है। इसलिए हमारा फोकस है सेकेंड Green Revolutionऔर स्‍पेशल फोकस है हिंदुस्‍तान के पूर्वी इलाके में, वहां के किसान और गांव की जिंदगी को बदलना है। चौथा है, Blue Revolution, Blueक्रांति करनी है। BlueRevolutionजब मैं कहता हूं तब, एक नीला आसमान। पर्यावरण के संकटों से मुक्‍त नीला आसमान। Environment Protectionकी चिंता करते हुए नीला आसमान। मैं Manufacturing में कहता हूं – Zero Defect,  Zero Effectजो पैदा करें,उसमें कोई Defect न हो और ऐसे पैदा करे कि Environmentपर Effectन हो। Zero Defect,  Zero Effect,नीला आसमान। और दूसरा नीला समुंदर के पानी का रंग। नीला आसमान भी चाहिए, वो भी Revolutionकरना है और सामुद्रिक शक्ति का भी Revolutionहोना चाहिए। मेरे मछुआरे, उनकी आर्थिक स्थिति सुधरनी चाहिए। समंदर के अंदर प्राकृतिक संपदा पड़ी है। गैस और पेट्रोलियम के भंडार पड़े हैं। इन प्राकृतिक संपदाओं का सर्वाधिक उपयोग मानव जाति के लिए कैसे हो, Blue Revolutionकरना है, Saffron  Revolution, WhiteRevolution, Blue Revolution,Green Revolution, Blue Revolution| जल-थल नभ सबकुछ.. और इसलिए भाईयों और बहनों विकास की उन नई-नई ऊचाईयों को पार कर रहे हैं। आप कनाडा के भाईयों और बहनों कुछ बातें हैं जो मैं आपको जानकारी देना चाहता हूं। ओसीआई और पीआईओ.. मैंने जब Madison Squareपर बोल रहा था,तो मैंने वादा किया था। इन दोनों को Mergeकर देंगे, वो काम पूरा कर दिया है। हर किसी को पीआईओ कार्ड हो, वो ओसीआई की तरह ही, उसको सारी सुविधाएं दी जाएंगी। दूसरी बात है, ओसीआई पूरे जीवन के लिए मिलेगा। पहले वो सिर्फ 15 साल के लिए था। आपको पता होगा, आप में से जो बड़ी आयु के लोग वहां आ करके रहते होंगे, छुट्टियों में, तो हमारे यहां यह नियम था, उसको हर 15 दिन में एक बार पुलिस थाने ले जा करके बताना पड़ता था कि मैं वही हूं और कुछ गलत नहीं कर रहा हूं। मुझे बताइये कि आप पर मुझे भरोसा करना चाहिए कि नहीं करना चाहिए?  करना चाहिए कि नहीं चाहिए? जन-मन बदला है दोस्‍तों! इसलिए हमने तय किया है कि ओसीआई कार्ड वालों को पुलिस थाने में हाजिरी लगाने की जरूरत नहीं है। ओसीआई को चार पीढ़ी तक विदेश गए लोग.. अब उनको इसमें समाहित कर दिया गया है। चार पीढ़ी तक को स्‍वीकार कर लिया गया है। कुछ जगह पर अभी कुछ चीजें Processमें हैं। अगले पांच छह महीनों में सारी प्रक्रियाएं पूरी हो जाएंगी।

 एक ई-पोर्टल हमने शुरू किया है, जिसका आप फायदा ले सकते हैं। ट्रैकिंग, मॉनिटरिंग, फीडबैक ये सारी चीजें ई-पोर्टल के अंदर हैं। ई-पोर्टल का नाम है, मदद। एक ई-माइग्रेट पोर्टल शुरू किया है, जिसके द्वारा भी आपको कोई शिकायत हो, कोई कठिनाई हो तो इमीग्रेशन ऑफिस जाना नहीं पड़ेगा। आप उसी के द्वारा अपना काम कर सकते हैं, आपका समय बच सकता है। जो भारत के बाहर रहने वाले लोग हैं, जिनको ऑनलाइन अप्‍लीकेशन करने हैं,वे ई-माइग्रेशन इस व्‍यवस्‍था के तहत कर सकते हैं। आपने देखा है कि दुनिया में कुछ न कुछ देशों में संकट चलते रह‍ते हैं और हमारे भारतीय भाई-बहन बड़े उदार रहते हैं, उनको हम समझाते हैं कि भई निकलो, मुसीबत आ रही है। उनको लगता है नहीं-नहीं ये तो अच्‍छे लोग हैं, हमें कुछ नहीं होगा। वो निकलते नहीं हैं। हम यमन में जनवरी महीने से कह रहे थे कि निकलो!निकलो! कहते थे नहीं। आखिरकार,हमें अभी निकालना पड़ा चार हजार लोगों को, मुश्किल से ले करके आये हैं। पिछले दस महीने में West Asia में जो मुसीबतें आईं हैं, करीब 17 हजार भारतीयों को सुरक्षित बचा करके वापस लाने का काम किया है। देशवासियों मैं आपको एक बात बताना चाहता हूं, संकट की घड़ी में हम पासपोर्ट के रंग नहीं देखते हैं। अपनों के लिए जो भी करना पड़ता है, पूरी शक्ति लगा करके करते हैं। लेकिन विश्‍व में रहने वाले भारतीयों से भी हमारा आग्रह रहेगा कि हम संकटों में फंसे नहीं, समय रहते हम जागरूकता पूर्वक अपने विषयों को आगे बढ़ाये तो अच्‍छा होगा।

PM Modi - Indian Diaspora Event, at Ricoh Coliseum, Toronto Canada (7)

पहली बार हमने प्‍लानिंग कमीशन की जगह पर नीति आयोग बनाया है और नीति आयोग में एक पैराग्राफ.. प्रवासी भारतीयों को भी एक शक्ति के रूप में माना गया है। वो भी एक बहुत बड़ी भारत की विकास की ताकत है और उसके लिए भी भारत को सोचते रहना चाहिए। ये पहली बार एक Specific काम उनके लिए तय किया है। उसके चार्टर में इसको लिखा गया है। कनाडा के मित्रों के लिए एक खुश खबरी है। इलैक्‍ट्रोनिक टूरिस्‍ट वीजा, इसकी व्‍यवस्‍था हमने कर दी है, बहुत ही जल्‍द इसका लाभ आपको मिलेगा। दूसरी बात, मुझे मालूम है कि आप बोलेंगे नहीं,लेकिन कभी-कभी आपको भी वीजा लेने में तकलीफ पड़ती है, पड़ती है न? अब हमने तय किया है कि दस साल के लिए देंगे। अगर जन-मन बदला है,तो भरोसा भी बढ़ना चाहिए और भरोसे से दुनिया चलती है मेरे दोस्तों ! इसको ले करके हम चलने वाले हैं और चल रहे हैं। भाईयों और बहनों,काफी लंबी बातें कर ली आपसे, मुझे आनंद आया, आपने स्‍वागत किया, सम्‍मान किया। मैं आप सबसे आग्रह करूंगा कि हमारा देश, हम जो भी पढ़े हैं, जो भी अनुभव पाया है, दुनिया में कहीं से भी जो Disciplineसीखें हैं, जो भी अच्‍छा है हमारे पास, कहीं से भी मिला हो, वो हमारे देश के लिए भी काम आना चाहिए, हमारे देश के उन गरीबों के लिए भी काम आना चाहिए। जो हमारे लोग यहां आये हैं, हम ये न भूलें कि आज जो हम पहुंचें हैं जहां पर उसके मूल में किसी न किसी गरीब ने हमारे लिए कुछ न कुछ तो छोड़ा होगा। किसी न किसी ने कष्‍ट झेला होगा,तब हमारी जिंदगी बनी है। मानवता का तो यही तकाजा है कि जिन्‍होंने हमें दिया है हमें उनको भी तो कुछ लौटाना है। इस बात को ले करके आप चलें। भारत के प्रति हमारी भक्ति अपरमपार बनी रहे। मैं फिर एक बार, कनाडा ने मेरा जो स्‍वागत किया, सम्‍मान किया, प्रधानमंत्री जी ने इतना समय दिया, उनके मंत्रि-परिषद के इतने वरिष्‍ठ लोग आ करके बैठे, यहां के सभी सांसद आ करके बैठे, मैं उनका सबका हृदय से बहुत-बहुत धन्‍यवाद करता हूं। कनाडा और भारत की दोस्‍ती एक ऐसी युक्ति है, जो शक्तियों का संवर्धन करती है और ये ऐसी शक्ति है.. मान लीजिये हम Mathematic में a2 + b2करें तो Result क्‍या आता है? लेकिन मान लीजिए (a+b)2 तो Resultआता है a2 +2ab+b2 ... Extra 2ab मिलता है कि नहीं मिलता है? ये Extra 2ab कहां से आया? तो भारत और कनाडा जब मिलता है तो Extra 2ab निकलता है। यह हमारी ताकत है। उस ताकत को लेकर आगे बढ़ें। इसी एक अपेक्षा के साथ मैं फिर एक बार आप सबका धन्‍यवाद करता हूं। मेरी तरफ से आपको बहुत शुभकामनाएं देता हूं और समाज के सब लोगों ने मेरा इतना सम्‍मान किया, आशीर्वाद दिए, मैं सदा सर्वदा आपके इस प्रेम को याद रखूंगा। आपके आशीर्वाद की ताकत को याद रखूंगा। मैं आपको सबको वंदन करते हुए मेरी बात को विराम करता हूं। दोनों मुट्ठी बंद करके मेरे साथ पूरी ताकत से बोलिए –भारत माता की जय। ऐसे नहीं, आवाज हिंदुस्‍तान तक जानी चाहिए।

भारत माता की जय।

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माझ्या प्रिय देशवासियांनो, नमस्कार! आज जेंव्हा आपल्या सर्वांचं धैर्य, दुःख सहन करण्याच्या मर्यादेची कोरोना परीक्षा पहात आहे, अशा वेळेस आपल्याशी मन की बात मधून संवाद साधत आहे. आपल्या सर्वांचे कित्येक जिवलग अकालीच आपल्याला सोडून गेले आहेत. कोरोनाच्या पहिल्या लाटेचा यशस्वीपणे सामना केल्यानंतर देशामध्ये खूप मोठी उमेद निर्माण झाली होती, आत्मविश्वासाने देश भारलेला होता, परंतु या कोरोनाच्या वादळाने देशाला हादरवून टाकलं आहे.

 

मित्रांनो गेल्या काही दिवसात, या संकटाचा मुकाबला करण्यासंदर्भात माझी, वेगवेगळ्या क्षेत्रांतल्या तज्ज्ञांबरोबर दीर्घ चर्चा झाली आहे. आमच्या औषध निर्माण उद्योगांच्या क्षेत्रातले लोक असोत की लस उत्पादनाशी संबंधित लोक असोत, ऑक्सिजनच्या निर्मितीशी संबंधित लोक असोत किंवा मग वैद्यकीय क्षेत्रातले जाणकार असोत, त्यांनी अत्यंत महत्वपूर्ण सूचना सरकारला केल्या आहेत. यावेळी, आम्हाला हे युद्ध जिंकण्यासाठी, तज्ज्ञ आणि वैज्ञानिक सल्ल्याला प्राधान्य द्यायचं आहे. राज्यसरकारांच्या प्रयत्नांना पुढे नेण्यासाठी, भारत सरकार पूर्ण शक्तिनं त्यांच्या पाठिशी खंबीरपणे उभं आहे. राज्य सरकारंही आपापली जबाबदारी निभावण्यासाठी पूर्ण प्रयत्न करत आहेत.

 

मित्रांनो, देशातले डॉक्टर्स आणि आरोग्य कर्मचारी कोरोनाच्या विरोधात यावेळी खूप मोठ्या लढाईमध्ये गुंतले आहेत. या आजाराबाबत त्यांना गेल्या एक वर्षात वेगवेगळ्या प्रकारचे अनुभवही आले आहेत. आमच्याबरोबर, आता यावेळी मुंबईतले प्रसिद्ध डॉक्टर शशांक जोशीजी जोडले गेले आहेत.

 

डॉक्टर जोशी जींकडे कोरोनावरील उपचार आणि त्यासंदर्भातल्या संशोधनाचा प्रत्यक्ष अनुभव मोठा आहे, आणि ते इंडियन कॉलेज ऑफ फिजिशियन्सचे अधिष्ठाताही राहिले आहेत. या आपण आता डॉ. शशांक यांच्याशी बातचीत करू या.

 

मोदी जीः नमस्कार, डॉ. शशांक जी.

 

डॉ० शशांक – नमस्कार सर |

 

मोदी जीः आता अलिकडेच काही दिवसांपूर्वीच आपल्याशी चर्चा करण्याची संधी मिळाली होती. आपले स्पष्ट विचार मला अत्यंत आवडले होते. मला असं वाटलं की, देशातल्या सर्व नागरिकांनी आपले विचार जाणून घ्यायला हवेत. ज्या गोष्टी हल्ली ऐकायला मिळतात, त्याबाबतच मी एक प्रश्न विचारू इच्छितो. डॉ. शशांक, आपण सर्व जण सध्या दिवसरात्र लोकांचे जीव वाचवण्याच्या कामात गुंतला आहात. सर्वात प्रथम आपण लोकांना कोरोनाच्या दुसऱ्या लाटेबद्दल सांगावं, असं मला वाटतं. वैद्यकीय दृष्ट्या ही लाट कशी वेगळी आहे आणि त्यासाठी काय खबरदारी आवश्यक आहे.

 

डॉ० शशांक – धन्यवाद, सर. ही दुसरी लाट आली आहे, ती खूप वेगानं आली आहे आणि पहिल्या लाटेपेक्षा विषाणुच्या संसर्गाची गति जोरात आहे. परंतु, त्याच्या संसर्गापेक्षाही जास्त गतिनं लोक बरे होत आहेत आणि मृत्युदरही खूप कमी आहे, ही याच्याबाबतीत दिलासादायक गोष्ट आहे. या लाटेबाबत दोन- तीन फरक आहेत. पहिल्यांदा कोरोनाचा संसर्ग युवक आणि मुलांमध्येही थोडा दिसून येत आहे. त्याची जी श्वास लागणं, कोरडा खोकला येणं, ताप येणं ही पहिल्या लाटेसारखी लक्षणं तर आहेतच, परंतु त्याबरोबर वासाची जाणिव नष्ट होणं, चव न लागणं हीही आहेत. आणि लोक थोडे घाबरले आहेत. खरंतर लोकांनी घाबरण्याची अजिबात गरज नाही. 80 ते 90 टक्के लोकांमध्ये याची कोणतीही लक्षणं दिसत नाहीत. आणि हे जे उत्परिवर्तन किंवा म्युटेशन वगैरेबाबत बोललं जातं, त्यामुळे घाबरण्याची काहीच आवश्यकता नाही. हे म्युटेशन्स होत राहतात अगदी आपण जसं कपडे बदलतो तसे विषाणुही आपलं रूप बदलत असतात आणि त्यामुळे मुळीच घाबरण्याची आवश्यकता नाही. आम्ही या लाटेला परतवून लावू. लाटा येत जात राहतात आणि विषाणुही येत जात असतात आणि त्यांची लक्षणं वेगवेगळी असतात. वैद्यकीय दृष्ट्या आम्हाला सतर्क रहाण्याची गरज आहे. कोविडचा 14 ते 21 दिवसांचा कालावधी असून त्यात आपल्या डॉक्टरांचा सल्ला घेत राहिलं पाहिजे.

 

मोदी जीः डॉ. शशांक, आपण जे विश्लेषण सांगितलं, ते माझ्यासाठीही खूप महत्वाचं आहे. मला खूप पत्रं आली असून त्यात उपचारांबाबत लोकांच्या मनात अनेक शंका आहेत. औषधांची मागणी काहीशी जास्त प्रमाणात आहे. म्हणून आपण कोविडवरील उपचारांबाबतही लोकांना माहिती द्यावी, असं मला वाटतं.

 

डॉ० शशांकः हां सर. लोक खूप उशिरानं क्लिनिकल उपचार सुरू करतात आणि आपोआप आजार जाईल, अशा विश्वासावर रहातात. तसंच मोबाईलवर येणाऱ्या माहितीवर विश्वास ठेवतात. आणि, जर सरकारच्या कडून देण्यात आलेल्या सूचनांचं पालन केलं तर या संकटाचा सामना करण्याची वेळच येत नाही. कोविडमध्ये क्लिनिकल उपचारांबाबत नियमावली आहे आणि त्यात तीन प्रकारच्या तीव्रतेनुसार म्हणजे सौम्य कोविड, मध्यम किंवा माफक प्रमाणातला कोविड आणि तीव्र कोविड ज्याला म्हणतात, त्याच्यासाठी हे नियम आहेत. जो सौम्य कोविड आहे,त्यासाठी आम्ही ऑक्सिजनवर नजर ठेवून असतो, तापावर देखरेख करत असतो आणि ताप वाढला तर पॅरासिटॅमॉलसारख्या औषधाचा वापर करतो. सौम्य कोविड किंवा मध्यम किंवा तीव्र स्वरूपाचा असला तरीही, आपल्या डॉक्टरांशी संपर्क साधला पाहिजे. कोविड कोणत्याही स्वरूपाचा असला तरीही आपल्या डॉक्टरशी संपर्क ठेवणं खूप आवश्यक आहे. अगदी अचूक आणि स्वस्त औषधंही उपलब्ध आहेत. यामध्ये उत्तेजक म्हणजे स्टेरॉईड आहे, जे जीव वाचवू शकते. इनहेलर देता येतं तसंच टॅबलेटही देता येतात आणि त्याबरोबरच प्राणवायु द्यावा लागतो आणि त्यासाठी लहान लहान स्वरूपाचे उपचार आहेत. परंतु हल्ली एक नवीन प्रयोगात्मक औषध ज्याचं नाव रेमडेसिवीर आहे. त्याच्या वापरामुळे रूग्णाचा रूग्णालयात राहण्याचा कालावधी दोन ते तीन दिवसांनी कमी होतो आणि क्लिनिकल रिकव्हरीमध्ये त्याची मदत होते. आणि हे ही औषध पहिल्या नऊ ते दहा दिवसात दिलं तरच काम करतं आणि पाचच दिवस ते देता येतं. परंतु असं पाहिलं गेलं आहे की, लोक रेमडेसिवीरच्या मागे धावत सुटले आहेत. असं मुळीच धावता कामा नये. हे औषध थोड्या प्रमाणातच काम करतं. ज्यांना प्राणवायुची आवश्यकता आहे,ते रूग्णालयात दाखल होतात. परंतु डॉक्टर सांगतील तेव्हाच बाहेरून प्राणवायु घेतला पाहिजे. लोकांनी हे समजून घेणं खूप आवश्यक आहे. आपण प्राणायाम केला, आपल्या शरिरातल्या फुफ्फुसांना जरासं विस्तारित केलं, आणि शरिरातलं रक्त पातळ करणारी जी इंजेक्शन्स येतात, ती घेतली, ज्यांना आम्ही हेपरिन म्हणतो, या छोट्या छोट्या औषधांनीही 98 टक्के रूग्ण बरे होतात. शिवाय, लोकांनी सकारात्मक रहाणंही खूप आवश्यक आहे. उपचार डॉक्टरांच्या सल्ल्यानंच घेणं अत्यंत आवश्यक आहे. या महागड्या औषधांच्या मागं धावण्याची काहीच गरज नाही सर.

 

आपल्याकडे चांगले उपचार सुरू आहेत. प्राणवायु आहे, व्हेंटीलेटरची सुविधाही आहे आणि सर्व काही आहे. आणि जेंव्हा केंव्हा ही औषधे मिळतील तेंव्हा ती पात्र लोकांनाच दिली गेली पाहिजेत. आपल्याकडे याबाबतीत खूप गैरसमज पसरवले जात आहेत. यासाठी, आपल्याकडे जगातले सर्वात उत्कृष्ट उपचार उपलब्ध आहेत, हे मी स्पष्ट करु इच्छितो. आपण पाहू शकता की, भारतात रूग्ण बरे होण्याचा दर (रिकव्हरी रेट) सर्वात चांगला आहे. आपण युरोप किंवा अमेरिकेशी तुलना केली तर आमच्याकड़े रूग्ण उपचारांच्या नियमावलीनुसार बरे होत आहेत सर.

 

मोदी जीः डॉ. शशांक, आपले खूप खूप धन्यवाद. डॉ. शशांक यांनी जी माहिती आपल्याला दिली, ती खूप आवश्यक आहे आणि आपल्या सर्वांना उपयुक्त ठरेल.

मित्रांनो, आपल्याला कोणतीही माहिती हवी असेल किंवा कोणतीही शंका असेल तर ती योग्य व्यक्तिकडूनच ती माहिती घ्या. आपले फॅमिली डॉक्टर्स असतील किवा आसपास जे डॉक्टर्स असतील, त्यांच्याकडून दूरध्वनीवरून संपर्क करून माहिती घ्या. आमचे खूप सारे डॉक्टर्स स्वतःच ही जबाबदारी घेत आहेत, हे ही मी पहात आहे. काही डॉक्टर्स समाजमाध्यमांच्या द्वारे लोकांना माहिती देत आहेत. फोनवर किंवा व्हॉट्सअपवर लोकांचे समुपदेशन करत आहेत. अनेक रूग्णालयांच्या वेबसाईट आहेत ज्यावरही माहिती उपलब्ध आहे. तेथे आपण डॉक्टर्सकडून सल्लाही घेऊ शकता, हे खूप प्रशंसनीय आहे.

 

माझ्या समवेत श्रीनगरचे डॉक्टर नाविद शाह जोडले गेले आहेत. डॉक्टर नाविद हे श्रीनगरच्या सरकारी वैद्यकीय महाविद्यालयात प्राध्यापक आहेत. नाविदजी यांनी आपल्या देखरेखीखाली अनेक कोरोना रूग्णांना बरं केलं आहे आणि रमजानच्या या पवित्र महिन्यातही डॉ. नाविद आपलं कार्य करत आहेत. त्यांनी आमच्याशी बातचीत करण्यासाठी वेळ काढला आहे. त्यांच्याशी आता चर्चा करू या.

 

मोदी जीः नाविद जी, नमस्कार.

डॉ. नावीदः नमस्कार सर |

 

मोदी जीः डॉक्टर नाविद, मन की बातच्या आमच्या श्रोत्यांनी या बिकट प्रसंगी घबराट व्यवस्थापन म्हणजे पॅनिक मॅनेजमेंटचा प्रश्न उपस्थित केला आहे. आपण आपल्या अनुभवानुसार त्यांना काय सांगाल?

 

डॉ. नावीदः जेंव्हा कोरोना महामारी सुरू झाली तेव्हा सर्वप्रथम जे रूग्णालय कोविड़साठी विशेष रूग्णालय म्हणून नियुक्त करण्यात आलं, ते आमचं सिटी हॉस्पिटल होतं. जे वैद्यकीय महाविद्यालयाच्या अंतर्गत येतं. त्यावेळेस एक दहशतीचं वातावरण होतं. कोविडचां संसर्ग ज्याला होतो, त्याच्यासाठी हे मृत्युचं आमंत्रणच आहे, असं लोक मानायचे आणि आमच्या रूग्णालयातले डॉक्टर आणि निम वैद्यकीय कर्मचार्यांमध्येही अशा रूग्णांना आम्ही सामोरं कसं जायचं, आम्हाला संसर्ग होण्याचा धोका तर नाहि, अशी दहशत होती. जसा काळ गेला तसं आम्ही पाहिलं की, संपूर्ण प्रकारचं संरक्षक साधनं आम्ही वापरून सुरक्षेची खबरदारी घेतली, तर आम्ही सुरक्षित राहू शकतो आणि आमचे बाकी कर्मचारीही सुरक्षित राहू शकतात. पुढे तर आम्ही पाहिलं की, काही रूग्ण किंवा जे आजारी लोक होते ते असिम्प्टोमॅटिक म्हणजे त्यांच्यात कोविडची कसलीच लक्षणं नव्हती. जवळपास 90 ते 95 टक्के उपचाराविनाही ठीक होतात, हेही आम्ही पाहिलं आणि जसा काळ गेला तसा लोकांमध्ये कोरोनाच्या बाबतीत जी एक भीती होती ती खूपच कमी झाली. आज आमच्याकडे कोरोनाची दुसरी लाट आली आहे. परंतु यावेळीही आम्हाला घाबरण्याची अजिबात गरज नाहि. यावेळीही जे संरक्षक उपाय आहेत, मास्क वापरणं, सॅनिटायझरनं हात सतत धुणं आणि शारिरिक अंतर राखणं किंवा सामाजिक मेळावे टाळणं अशी जी आदर्श कार्यप्रणाली आहे तिचं पालन केलं तर आम्ही आपलं दैनंदिन काम अगदी चांगल्या प्रकारे पार पाडू शकतो आणि या आजारापासून संरक्षणही प्राप्त करू शकतो.

 

मोदी जीः डॉ. नाविद, लसीबाबतही लोकांच्या मनात खूप प्रश्न आहेत. लसीपासून कितपत सुरक्षा मिळेल, लस घेतल्यानंतर किती प्रमाणात आश्वस्त राहू शकतो? आपण याबाबतीत काही सांगितलं तर श्रोत्यांना त्याचा खूप फायदा होईल.

 

डॉ० नावीदः आपल्याकडे कोरोनाचा संसर्ग झाल्याचं समोर आलं तेव्हापासून आजपर्यत आमच्याकडे कोविड-19 साठी कोणतेही परिणामकारक उपचार उपलब्ध नाहित. म्हणून, आम्ही या आजाराशी दोन प्रकारे लढा देऊ शकतो. एक म्हणजे प्रमुख संरक्षक उपाय आणि आम्ही प्रथमपासून हेच सांगत आलो आहोत की, जर एखादी परिणामकारक लस आमच्याकडे आली तर या आजारापासून आम्हाला मुक्ती मिळू शकते. यावेळी आमच्या देशात कोवॅक्सिन आणि कोव्हिशिल्ड या दोन लस उपलब्ध आहेत. या दोन्ही लस याच देशात तयार झाल्या आहेत. आणि ज्या कंपन्यांनी ज्या चाचण्या घेतल्या आहेत, त्यातून असं पाहिलं गेलं आहे की, त्यांची परिणामकारकता 60 टक्क्याहून अधिक आहे. आणि जम्मू आणि काश्मीरबाबत बोलायचं तर, आमच्या केंद्रशासित प्रदेशात आतापर्यंत 15 ते 16 लाख लोकांनी लस घेतली आहे. एक आहे की, समाजमाध्यमांमध्ये या बद्दल खूप गैरसमज आहेत किंवा गृहितकं आहेत. लस घेतल्यानं दुष्परिणाम होतात वगैरे. तर आमच्याकडे ज्यांनी लस टोचून घेतली आहे, त्यांच्यात काहीही दुष्परिणाम दिसलेले नाहित. कोणत्याही नेहमीच्या लसीसोबत जे परिणाम संबंधित असतात म्हणजे ताप येणं, संपूर्ण अंगदुखी किंवा जेथे इंजेक्शन टोचलं जातं त्या भागात वेदना होणं हे दुष्परिणाम प्रत्येक रूग्णाच्या बाबतीत पाहिले आहेत. परंतु एकंदरीत कोणतेही विपरित परिणाम आम्ही पाहिलेले नाहित. दुसरी गोष्ट म्हणजे, काही लोक लसीकरणाच्या नंतर कोविड पॉझिटिव्ह झाले. याबाबतीत तर कंपन्यांनीच मार्गदर्शक तत्वांमध्ये जाहिर केलं आहे की, जर लस टोचून घेतल्यानंतर कुणाला संसर्ग झाला तर तो पॉझिटिव्ह असू शकतो. परंतु, त्या रूग्णांमध्ये आजाराची जी तीव्रता आहे ती तितकीशी रहाणार नाही म्हणजे ते पॉझटीव्ह असू शकतात परंतु तो आजार जीवघेणा सिद्ध होऊ शकत नाही. त्यामुळे लसीबाबत जो आमच्या मनात गैरसमज आहे तो आपण काढून टाकला पाहिजे. आणि जे जे पात्र ठरतील त्यांनी लस टोचून घेतली पाहिजे. कारण एक मे नंतर देशात 18 वर्षावरील प्रत्येकाला लस टोचण्याचा कार्यक्रम सुरू होईल. म्हणून लोकांना हेच आवाहन करेन की, आपण लस टोचून घ्या आणि स्वतःला सुरक्षित करून घ्या. त्यामुळे एकंदरीत आमचा समाज, आमचा समुदाय कोविड-19 संसर्गापासून संरक्षित होईल.

 

मोदी जीः डॉ. नाविद, आपल्याला खूप खूप धन्यवाद. आणि आपल्याला रमजानच्या पवित्र महिन्याच्या खूप खूप शुभेच्छा.

 

डॉ० नाविद: खूप खूप धन्यवाद.

 

मोदी जीः मित्रांनो, कोरोनाच्या या संकट काळात लसीचं महत्व तर सगळ्यांनाच पटलं आहे. म्हणून, लसीच्या बाबतीत कोणत्याही अफवांना बळी पडू नका, असा माझा आग्रह आहे. आपल्याला सर्वांना माहितच असेल की, भारत सरकारकडून सर्व राज्यसरकारांना विनामूल्य लस पुरवण्यात आली आहे, जिचा लाभ 45 वर्षांवरील सर्व लोक घेऊ शकतात. आता तर एक मेपासून देशात 18 वर्षांवरील प्रत्येकाला लस उपलब्ध होणार आहे. आता देशातलं कॉर्पोरेट क्षेत्र, कंपन्यासुद्धा आपल्या कर्मचाऱ्यांच्या लसीकरणाची मोहिम राबवण्यातील भागीदारीचं पालन करू शकतील. भारत सरकारकडून जो विनामूल्य लसीकरणाचा कार्यक्रम सुरू आहे, तो पुढेही चालूच राहिल, हे ही मला सांगायचं आहे. माझा राज्यांना आग्रह आहे की, त्यांनी भारत सरकारच्या या विनामूल्य लसीकरण मोहिमेचा फायदा आपल्या राज्यातील नागरिकांना जास्तीत जास्त प्रमाणात पोहचवावा.

 

मित्रांनो, आजाराच्या काळात, आपली तसंच आमच्या कुटुंबाची देखभाल करणं मानसिक स्तरावर किती अवघड असतं, हे आपणा सर्वाना माहितच आहे. परंतु, आमच्या रूग्णालयातील परिचारिकांना तर हेच काम सातत्यानं, अनेक रूग्णांसाठी एकाचवेळेस करावं लागतं. हा सेवाभाव आमच्या समाजाची खूप मोठी शक्ति आहे. परिचारिका ज्या प्रकारची सेवा देतात आणि कठोर कष्ट करतात, त्याबाबतीत तर सर्वात चांगल्या प्रकारे एखादी परिचारिकाच सांगू शकेल. म्हणून, मी रायपूरच्या डॉ. बी आर आंबेडकर मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटलमध्ये सेवारत असलेल्या सिस्टर भावना ध्रुवजी यांना मन की बातमध्ये निमंत्रित केलं आहे. त्या अनेक कोरोना रूग्णांची शुश्रुषा करत आहेत. आता त्यांच्याशी बोलू या.

 

मोदी जीः नमस्कार भावना जी!

भावना: आदरणीय प्रधानमंत्री जी, नमस्कार !

मोदी जी: भावना जी...

भावना:- येस सर

 

मोदी जी: मन की बात ऐकणाऱ्यांना आपण हे सांगा की, आपल्या कुटुंबात इतक्या मोठ्या जबाबदाऱ्या पार पाडतानाच मल्टीटास्क करत असताना आपण कोविड रूग्णांच्या शुश्रुषेचं काम करत आहात. कोरोना रूग्णांबाबतीत आपला अनुभव देशवासियांना ऐकायला आवडेल कारण सिस्टर किंवा परिचारिका ही रूग्णाच्या सर्वात जवळ शिवाय सर्वात दीर्घकाळ असते. प्रत्येक गोष्ट ती बारकाईने समजून घेऊ शकते.

 

भावना: जी सर, कोविडच्या संदर्भात माझा एकूण अनुभव दोन महिन्यांचा आहे. आम्ही 14 दिवस ड्युटी करतो आणि 14 दिवस आम्हाला विश्रांती दिली जाते. नंतर दोन महिन्यांनी आमची कोविडची ड्युटी पुन्हा लावली जाते. जेंव्हा सर्वप्रथम माझी कोविड ड्युटी लागली तेव्हा मी आपल्या कुटुंबातील लोकांना कोविड ड्युटीबाबत सांगितलं. मे महिन्यातली ही गोष्ट आहे आणि मी जसं हे सांगितलं तसं सर्वजण घाबरले. व्यवस्थित काम कर, असं मला बजावत होते. तो एक भावनात्मक क्षण होता, सर. जेंव्हा माझी मुलगी मला म्हणाली, “ममा आप कोविड ड्युटीवर जा रहे हो”, तेंव्हा तो क्षण माझ्यासाठी खूपच भावनिक होता. परंतु, जेंव्हा मी कोविड रूग्णाच्या जवळ गेले तेंव्हा एक जबाबदारी घरी सोडून आले. जेंव्हा मी कोविड रूग्णाला भेटले तेंव्हा ते सर्वात जास्त घाबरले होते. कोविडच्या नावानेच सारे रूग्ण इतके घाबरले होते सर की, आपल्याला हे काय होत आहे, आपलं पुढे काय होणार आहे. हेच त्यांना समजत नव्हते. त्यांची भीती दूर करण्यासाठी आम्ही त्यांना एक चांगलं आरोग्यदायी वातावरण तयार केलं सर. आम्हाला जेव्हा कोविड ड्युटी करायला सांगण्यात आलं तेव्हा सर्वप्रथम आम्हाला पीपीई किट घालण्यास सांगण्यात आलं सर, पीपीई किट घालून काम करणं खूपच अवघड आहे. सर, आमच्यासाठी हे सारं खूप अवघड होतं, मी दोन महिन्याच्या ड्युटीमध्ये चौदा चौदा दिवस वॉर्डात, आयसीयू मध्ये आणि आयसोलेशनमध्ये ड्युटी केली, सर.

मोदी जी: म्हणजे एकूण आपण एक वर्षापासून याच प्रकारचे काम करत आहात.

 

भावना: येस सर. तिथं जाण्यापूर्वी मला माझे सहकारी कोण आहेत, हे माहित नव्हतं. आम्ही एका टीमप्रमाणे काम केलं. त्यांचे जे प्रश्न होते, ते सांगितले. आम्ही रूग्णांच्या बाबतीतील माहिती घेतली आणि त्यांच्यातील गैरसमज दूर केले. अनेक लोक कोविडच्या नावानेच घाबरत असत. जेंव्हा आम्ही त्यांची केस हिस्टरी घेत असू तेव्हा त्यांच्यात आम्हाला लक्षणं दिसत होती परंतु भीतीपोटी ते आपली चाचणी करायला धजावत नव्हते. तेंव्हा आम्ही त्यांना समजावून सांगत होतो आणि सर, जेंव्हा आजाराची तीव्रता वाढायची, तेव्हा त्यांची फुफ्फुसं संसर्गित झालेली असत. त्यांना आयसीयूची गरज लागे आणि तेंव्हा ते त्यांच्या संपूर्ण कुटुंबासह येत. एक दोन प्रकरणात आम्ही हे पाहिलं सर आणि प्रत्येक वयोगटाबरोबर आम्ही काम केलं सर. ज्यात लहान मुलं होती, महिला, पुरूष, ज्येष्ठ नागरिक, सर्व प्रकारचे रूग्ण होते. त्या सर्वांशी आम्ही बोललो तेव्हा सर्वांनी हेच सांगितलं की, घाबरल्यामुळे आम्ही आलो नाही. सर्वांकडून आम्हाली हीच उत्तरं मिळाली सर. आम्ही त्याना समजावून सांगितलं की, भीती वगैरे काही नसते आणि आपण आम्हाला साथ द्या, आम्ही आपल्याला मदत करू. बस आपण कोविडच्या नियमावलीचं पालन करा आणि आम्ही त्यांच्याकडून हे करून घेऊ शकलो सर.

 

मोदी जीः भावना जी, आपल्याशी बोलल्यामुळे मला खूप छान वाटलं. आपण खूप चांगली माहिती दिली आहे. आपल्या स्वतःच्या अनुभवावरून दिली आहे. त्यामुळे देशवासियांना यातून एक प्रकारचा सकारात्मकतेचा संदेश जाईल . आपल्याला खूप खूप धन्यवाद भावना जी.

 

भावनाः धन्यवाद सर. जय हिंद सर.

 

 

भावना जी, नर्सिंग स्टाफचे आपल्यासारखेच लाखो बंधुभगिनी आपलं कर्तव्य अत्यंत चांगल्या प्रकारे पार पाडत आहेत. आपण आपल्या आरोग्याची काळजी घ्या. आपल्या परिवाराचींही काळजी घ्या.

मित्रांनो, आपल्या सोबत आता बंगळूरू इथल्या सिस्टर सुरेखा जी आहेत. सुरेखा जी के सी सामान्य रुग्णालयात वरिष्ठ परिचारिका अधिकारी म्हणून कार्यरत आहेत. चला, त्यांचे अनुभवही जाणून घेऊया.

मोदीजी: नमस्कार सुरेखा जी

सुरेखा: देशाच्या पंतप्रधानांसोबत बोलण्याची संधी मला मिळाली. याचा मला अभिमान वाटतो आणि हा मी माझा गौरव समजते.

मोदीजी:सुरेखा जी, आपण आपल्या सहकारी परीचारिकांसोबत तसंच रुग्णालयातल्या इतर कर्मचाऱ्यांसोबत अत्यंत उत्कृष्ट काम करत आहात. भारत तुम्हा सर्वांचा ऋणी आहे. कोविड-19 विरुद्धच्या या लढाईत देशातल्या नागरिकांना तुम्ही काय संदेश द्याल?

सुरेखा: हो सर. एक जवाबदार नागरिक म्हणून मला सर्वांना नक्कीच सांगयला आवडेल की, तुमच्या शेजाऱ्यांशी प्रेमाने वागा तसंच लवकर चाचण्या आणि संपर्कात आलेल्या संशयित रुग्णांचा शोध आपल्याला मृत्यू दर कमी करण्यात नक्कीच मदत करेल. तसंच जर तुम्हाला कोविडची लक्षणं आढळली, तर स्वतःला वेगळं करा आणि जवळच्या डॉक्टरांचा सल्ला घेऊन जितक्या लवकर शक्य आहे, तितक्या लवकर उपचार सुरु करा. सर्व लोकांमध्ये या आजाराबाबत जागृती होणं गरजेचं आहे. सकारात्मक दृष्टीकोन ठेवा. घाबरू नका आणि कुठलाच तणावही घेऊ नका. यामुळे रुग्णाची स्थिती आणखी ढासळू शकते. आणि आमच्या सरकारचे आभारी आहोत आणि आपल्या देशात लस उपलब्ध झाल्याचा आम्हाला अभिमान आहे. मी स्वतः लस घेतली आणि माझ्या अनुभवावरून मला भारताच्या सर्व नागरिकांना सांगायचं आहे की कोणतीही लस तुमचं लगेचच 100% संरक्षण करू शकत नाही. आपल्यात रोगप्रतिकारशक्ती निर्माण व्हायला वेळ लागतो. लस घ्यायला अजिबात घाबरू नका. स्वतःचं लसीकरण करून घ्या. त्याचे अगदी किरकोळ दुष्परिणाम होतात आणि मला आणखी एक संदेश द्यायचा आहे की, घरी राहा, निरोगी राहा, आजारी लोकांसोबत संपर्क टाळा तसंच गरज नसताना नाक, डोळे आणि तोंडाला स्पर्श करू नका. शारीरिक अंतराचे नियम पाळा, मास्क योग्य प्रकारे लावा. आपले हात नियमितपणे स्वच्छ धुवा. आणि आपण घरी जे उपाय करू शकता ते अवश्य करा. आयुर्वेदीक काढा प्या, वाफ घ्या आणि दररोज गुळण्या करा. तसंच श्वसनाचे व्यायाम देखील तुम्ही करू शकता. आणखी एक शेवटची, मात्र अत्यंत महत्वाची गोष्ट म्हणजे कोरोना योद्धे आणि वैद्यकीय व्यावासायिकांबद्दल सहानुभूती असू द्या. आम्हाला आपला पाठिंबा आणि सहकार्याची गरज आहे. आपण एकत्र लढूया. आपण या महामारीतून निश्चित बाहेर पडू. हाच माझा लोकांसाठी संदेश आहे सर.

मोदीजी: धान्यवाद सुरेखा जी.

सुरेखा: धन्यवाद सर.

सुरेखाजी, खरंच या अत्यंत कठीण प्रसंगी आपण नेटाने मोर्चा सांभाळला आहे. आपण आपली काळजी घ्या आपल्या कुटुंबालाही माझ्या खूप खूप शुभेच्छा आहेत. मी सर्व देशबांधवांनाही आग्रह करेन की, जसं भावना जी, सुरेखा जी यांनी त्यांच्या अनुभवातून सांगितलं आहे, तसं कोरोनाशी लढण्यासाठी सकारात्मक उर्जा अत्यंत आवश्यक आहे. आणि देशबांधवांना ही ऊर्जा कायम ठेवायची आहे.

मित्रांनो,

डॉक्टर्स आणि परिचारिकांसोबतच या काळात प्रयोगशाळेतले तंत्रज्ञ आणि रुग्णवाहिकांचे चालक यांच्यासारखे पहिल्या फळीतले कोरोना योद्धे ही देवाप्रमाणेच काम करत आहेत. जेंव्हा एखादी रुग्णवाहिका रूग्णांना घ्याला येते, तेव्हा त्यांना रुग्णवाहिकेचा चालक देवदूतासारखाच वाटतो. हे सर्व लोक करत असलेल्या सेवांविषयी, त्यांच्या अनुभवांविषयी देशाला नक्कीच कळायला हवं. माझ्यासोबत आता असेच एक सज्जन आहेत. श्री प्रेम वर्मा जी. हे एक रुग्णवाहिका चालक आहेत. त्यांच्या नावावरूनच जसं आपल्याला कळतं

तसं प्रेम वर्मा जी आपलं काम, आपलं कर्तव्य अत्यंत प्रेमानं आणि चिकाटीनं करत असतात. चला, आपण त्यांच्याशी बोलूया.

मोदी जी: नमस्कार प्रेमजी.

प्रेम जी: नमस्ते सर.

मोदी जी: भाई प्रेम

प्रेम जी: हो सर..

मोदी जी: आपण आपल्या कार्याविषयी...

प्रेम जी: हां सर...

मोदी जी: जरा विस्तारानं सांगा. आपल्याला जे अनुभव येतात ते ही सांगा.

प्रेम जी: सर, मी CATS रुग्णवाहिकामध्ये चालक म्हणून काम करतो. नियंत्रण कक्षातून जसा आमच्या टॅब वर कॉल येतो. 102 क्रमांकावरून जेंव्हा फोन येतो, त्यावेळी आम्ही आमच्या रुग्णाकडे जातो. गेल्या दोन वर्षांपासून आम्ही सातत्यानं हे काम करतो आहोत. आपली कीट घालून, हात मोजे, मास्क घालून रुग्णांना, ते जिथे घेऊन जायला सांगतात, मग ते कोणतेही रुग्णालय असो, आम्ही लवकरात लवकर त्यांना तिथे पोहोचवतो.

मोदी जी: आपण तर लसींच्या दोन्ही मात्रा घेतल्या असतील.

प्रेम जी: हो, नक्कीच सर.

मोदी जी: मग इतरांनी ही लस घ्यावी यासाठी तुम्ही त्यांना काय संदेश द्याल?

प्रेम जी: हो सर, नक्कीच. सर्वांना लसीच्या मात्रा घ्यायला हव्यात. आपल्या कुटुंबासाठी हे लसीकरण हिताचेच आहे. आता माझी आई मला म्हणत असते की ही नोकरी सोडून दे. मी सांगितलं, आई, मी जर नोकरी सोडून घरी बसलो, तर सगळीकडे रुग्णांना सोडायला कोण जाणार? कारण आता कोरोना काळात तर सगळेच दूर पळताहेत. सगळे नोकरी सोडून जात आहेत. आई मलाही म्हणत असते की बेटा ही नोकरी सोडून दे. मात्र मी सांगितलं, आई मी नोकरी नाही सोडणार.

मोदी जी –प्रेम जी, आपल्या आईचे मान नाराज करु नका, त्यांना समजून घ्या.

प्रेम जी- हो, सर.

मोजी जी – पण ही जी आईची गोष्ट तुम्ही सांगितलीत ना....

प्रेम जी – हो सर,

मोदी जी –ती मनाला स्पर्शून जाणारी आहे.

प्रेम जी –हो, सर.

मोदी जी –आपल्या आईंनाही.....

प्रेम जी – हो सर,

मोदी जी- माझा नमस्कार सांगा.

प्रेम जी – बिलकूल !

मोदी जी – हो...

प्रेम जी – हो सर...

मोदी सर- आणि प्रेम जी, आपल्या माध्यमातून...

प्रेम जी—हो सर,

मोदी जी—हे रुग्णवाहिका चालवणारे सगळे चालक देखील ....

प्रेम जी—हो ...

मोदी जी --किती मोठा धोका पत्करून काम करत आहेत.

प्रेम जी---हो सर

मोदी जी —आणि प्रत्येकाची आई काय विचार करत असेल?

प्रेम जी –बिलकूल सर

मोदी जी—जेव्हा आपल्या श्रोत्यांपर्यंत हे तुमचं हे बोलणं पोहोचेल..

प्रेम जी—हो सर,

मोदी जी—मला निश्चित वाटतं की त्यांच्याही मनाला ही गोष्ट स्पर्शून जाईल.

प्रेम जी—हो सर..

मोदी जी—प्रेम जी, खूप खूप धन्यवाद ! आपण एकप्रकारे प्रेमाची गंगाच पुढे नेत आहात...

प्रेम जी –धन्यवाद सर !

मोदी जी- धन्यवाद भाऊ..

प्रेम जी—धन्यवाद !!

मित्रांनो,

प्रेम वर्मा जी आणि त्यांच्यासारखे हजारो लोक आज आपल्या जीवाची पर्वा न करता, लोकांची सेवा करत आहेत. कोरोना विरुध्दच्या या लढाईत जितकी आयुष्ये वाचवली जात आहेत, त्यात या रुग्णवाहिका चालकांचेयोगदान खूप मोठे आहे.

प्रेम जी, आपल्याला आणि देशभरातल्या आपल्या सर्व सहकाऱ्यांना मी खूप खूप साधूवाद देतो. आपण वेळेवर पोहोचत रहा, असेच लोकांचे जीव वाचवत रहा.

माझ्या प्रिय देशबांधवांनो, हे खरे आहे की सध्या कोरोनाचा संसर्ग खूप लोकांना होतो आहे. मात्र, कोरोनामधून बरे होणाऱ्या लोकांची संख्या देखील तितकीच जास्त आहे.

गुरूग्रामच्या प्रीती चतुर्वेदी जी यांनी अलीकडेच कोरोनावर मात केली आहे. प्रीती जी, ‘मन की बात’ मध्ये आपल्याशी संवाद साधण्यासाठी आल्या आहेत. त्यांचे अनुभव आपल्याला खूप उपयोगी पडतील.

मोदी जी-प्रीती जी, नमस्कार !

प्रीती—नमस्कार सर. कसे आहात आपण?

मोदी जी—मी तर ठीक आहे. सर्वात आधी मी कोविड-19 वर ...

प्रीती—जी

मोदी जी—यशस्वीपणे मात मिळवल्याबद्दल ..

प्रीती –जी

मोदी जी—आपलं कौतुक करतो.

प्रीती – धन्यवाद सर !

मोदी जी—आपले आरोग्य लवकरच सुदृढ, निरोगी व्हावे,याच शुभेच्छा !

प्रीती – धन्यवाद सर !

मोदी जी—प्रीती जी,

प्रीती—हो सर

मोदी जी—या कोविड लाटेत केवळ आपल्याला संसर्ग झाला की आपल्या कुटुंबांतल्या इतर व्यक्तीनांही त्याची बाधा पोहोचली?

प्रीती—नाही नाही सर, मला एकटीलाच संसर्ग झाला होता.

मोदी जी- चला, देवाची कृपा झाली. अच्छा, माझी अशी इच्छा आहे...

प्रीती—हो सर..

मोदी जी—की आपण जर आपल्या या त्रासाच्या काळातले काही अनुभव लोकांना सांगितले, तर कदाचित जे श्रोते आहेत, त्यांनाही अशा वेळी आपल्या स्वतःला कसं सांभाळायचं याविषयी मार्गदर्शन मिळू शकेल.

प्रीती—हो सर, नक्कीच ! सर सुरुवातीला मला खूप आळस... सुस्त सुस्त वाटतहोतं. त्यानंतर, माझ्या गळ्यात थोडीशी खवखव जाणवायला लागली. त्यावेळी, माझ्या असं लक्षात आलं की ही लक्षणे वाटताहेत, त्यामुळे मग मी चाचणी करुन घेतली आणि दुसऱ्या दिवशी रिपोर्ट आल्यावर मी पॉझिटिव्ह असल्याचं कळलं. मग मी स्वतःला सर्वांपासून विलग केलं. एका वेगळ्या खोलीत गेले. डॉक्टरांचा सल्ला घेतली. त्यांच्या सल्ल्यानुसार औषधे सुरु केली.

मोदी – म्हणजे आपल्या या तत्परतेमुळे आपले कुटुंबीय सुरक्षित राहिले.

प्रीती- हो सर, इतरांचीही नंतर चाचणी केली. ते सगळे निगेटिव्ह होते. मी एकटीच पॉझिटिव्ह आले होते. आणि आधीच मी स्वतःला आयसोलेट केलं होतं, एका वेगळ्या खोलीत.

मला आवश्यक ते सगळं सामान ठेवून घेत,मी स्वतःला खोलीत बंद करुन घेतलं होतं. त्यासोबतच मी नंतर डॉक्टरांच्या सल्ल्यानं औषधोपाचार पण सुरु केले होते. सर, मी या औषधोपचारांसह योगाभ्यास, आयुर्वेदिक उपचारही सुरु केले होते.आणि त्यासोबतच, मी काढाही घ्यायला सुरुवात केली होती. माझी रोगप्रतिकारशक्ती वाढावी, यासाठी सर, मी जेंव्हाही जेवत असे, त्यावेळी सकस अन्न घेत असे. प्रथिनयुक्त पदार्थ खात असे. मी खूप द्रवपदार्थ ही खात होते. मी वाफ घेत होते, गुळण्या करत होते आणि गरम पाणी पीत होते. रोज दिवसभर मी हेच सगळं करत होते. आणि सर, या दिवसांबद्दल सांगायचं ना, तर एक सर्वात मोठी गोष्ट मला सांगायची आहे ती अशी-, की अजिबात घाबरू नका. मानसिक शक्ती मजबूत असू द्यात. आणि यासाठी मला योगाभ्यासाची, श्वसनाच्या व्यायामांची खूपच मदत झाली. मला ते सगळं करतानांच खूप छान वाटत असे.

मोदी जी—हो. अच्छा,प्रीती जी, आता जेंव्हा तुमची सगळी प्रक्रिया पूर्ण झाली, आपण संकटांतून बाहेर पडलात ना ?

प्रीती – हो सर...

मोदी जी—मग आता आपल्या आरोग्याच्या रक्षणासाठी, त्याची काळजी घेण्यासाठी आपण काय करताय?

प्रीती- सर, एकतर मी योगाभ्यास बंद केलेला नाही.

मोदी जी- हो..

प्रीती—त्यासोबतच, मी काढाही घेते आणि माझी रोगप्रतिकार शक्ती उत्तम ठेवण्यासाठी मी अजूनही उत्तम सकस आहार घेते आहे.

मोदी जी—हो, बरोबर

प्रीती—आधी मी स्वतःच्या प्रकृतीकडे फार दुर्लक्ष करत असे. आता मात्र मी त्याकडे नीट लक्ष देते.

मोदी जी—धन्यवाद प्रीती जी!

प्रीती—धन्यवाद सर !

मोदी जी—आपण आता जी माहिती आणि आपला अनुभव सांगितला तो अनेकांना उपयोगी पडेल असे मला वाटते. आपण निरोगी रहा, आपल्या कुटुंबातले लोक निरोगी राहावेत, यासाठी माझ्या खूप खूप शुभेच्छा !

माझ्या प्रिय देशबांधवांनो, आज आपल्या वैद्यकीय क्षेत्रातले लोक, पहिल्या फळीत काम करणारे सर्व कर्मचारी, अहोरात्र सेवाकार्य करत आहेत. तसेच, समाजातले इतर लोकही, या काळात कुठेहही मागे नाहीत. देश पुन्हा एकदा एकजूट होऊन कोरोनाविरुध्द लढा देत आहेत. आजकाल मी पाहतो,

कोणी विलगीकरणात असलेल्या कुटुंबांपर्यंत औषधं पोहोचवत आहेत. कोणी भाज्या, दूध, फळे अशा गोष्टी पोहचवत आहेत. कोणी मोफत रुग्णवाहिका सेवा रूग्णांना देत आहेत. देशाच्या कानाकोपऱ्यातून या आव्हानात्मक काळात देखील अनेक स्वयंसेवी संस्था पुढाकार घेऊन इतरांची मदत करण्यासाठी जे जे करु शकतात, ते करण्याचा प्रयत्न करत आहेत. यावेळी, गावांमध्ये देखील नवी जागृती दिसते आहे. कोविड नियमांचं पालन कठोर पालन करत लोक आपापल्या गावांचं कोरोनापासून रक्षण करत आहेत. जे लोक बाहेरून येत आहेत, त्यांच्यासाठी योग्य त्या व्यवस्था तयार केल्या जात आहेत. शहरात देखील अनेक युवक मैदानात उतरले आहेत. ते आपापल्या भागात, कोरोनाचे रुग्ण वाढू नयेत, यासाठी, स्थानिक रहिवाशांसोबत प्रयत्न करत आहेत. म्हणजे एकीकडे देश, दिवसरात्र रुग्णालये, व्हेंटीलेटर्स आणि औषधांसाठी काम करत आहे, तर दुसरीकडे, देशबांधव देखील प्राणपणाने कोरोनाच्या या आव्हानाचा सामना करत आहेत. ही भावना आपल्याला किती बळ देते ! केवढा विश्वास निर्माण करते. हे जे सगळे प्रयत्न सुरु आहेत, ते समाजाची खूप मोठी सेवा आहे. यातून समाजाची शक्ती वाढत असते.

माझ्या प्रिय देशबांधवांनो, आज ‘मन की बात’ मधली पूर्ण चर्चा आपण कोरोना महामारीवरच घेतली. कारण, आज आपली सर्वात मोठी प्राथमिकता आहे, या आजारावर मात करणे. आज भगवान महावीर जयंती देखील आहे. यानिमित्त मी सर्व देशबांधवांना शुभेच्छा देतो. भगवान महावीरांची शिकवण आपल्याला तप आणि आत्मसंयमाची प्रेरणा देते. सध्या रमझानचा पवित्र महिनाही सुरु आहे. पुढे बुद्धपौर्णिमा आहे. गुरु तेगबहादूर यांचे 400 वे प्रकाश पर्व देखील आहे. आणखी एक महत्वाचा दिवस म्हणजे- पोचीशे बोईशाक- टागोर जयंतीचा दिवस आहे. हे सगळे उत्सव आपल्याला प्रेरणा देतात.

आपली कर्तव्ये पूर्ण करण्याची प्रेरणा देतात. एक नागरिक म्हणून आपण आपल्या आयुष्यात जेवढ्या कौशल्याने आपली कर्तव्ये पार पाडू, तेवढ्या लवकर आपण संकटातून मुक्त होत भविष्याच्या आपल्या मार्गांवर तितक्याच वेगाने आपण पुढे जाऊ. याच कामनेसह, मी आपल्या सर्वांना पुन्हा एकदा आग्रह करतो की लस आपण सर्वांनी घ्यायची आहे आणि पूर्णपणे सतर्कही राहायचं आहे. ‘औषधही –अनुशासन ही’. हा मंत्र कधीही विसरायचा नाही. आपण सगळे एकत्रितपणे या संकटातून बाहेर पडणार आहोत. याच विश्वासासह आपल्या सर्वांना खूप खूप धन्यवाद ! नमस्कार !!