Share
 
Comments

कनाडा के लोकप्रिय एवं सफल प्रधानमंत्री,मेरे परम मित्र श्री स्टीफन हार्पर जी ,श्रीमती लौरें हार्पर जी और विशाल संख्या में आये हुए मेरे प्यारे भाइयों और बहनों

PM Modi - Indian Diaspora Event, at Ricoh Coliseum, Toronto Canada (13)

 कनाडा की जनता उनका हृदय से धन्‍यवाद करता हूं... जिस प्रकार से कनाडा ने मेरा स्‍वागत किया है सम्‍मान किया है,जिस उमंग और उत्‍साह के साथ उन्‍होंने अपने प्‍यार को प्रकट किया है मैं इसके लिए प्रधानमंत्री जी का और कनाडा का हृदय से बहुत-बहुत धन्‍यवाद व्‍यक्‍त करता हूं,लेकिन यह सम्‍मान किसी व्‍यक्ति का नहीं है,यह सम्‍मान नरेंद्र मोदी का नहीं है,यह सम्‍मान सवा सौ करोड़ हिंदुस्‍तानियों का है और कनाडा में भारत की पहचान नरेंद्र मोदी ने नहीं बनाई है,कनाडा में भारत की पहचान आप सब मेरे देशवासियों ने बनाई है। आपकी बदौलत,आपका पुरूषार्थ,आपका जीवन,मिलजुलकर के सबको साथ लेकर के चलने की हमारी परंपरा,उसको आपने भलीभांति यहां पर जीकर के दिखाया है। कनाडा का हर नागरिक आपके प्रति गौरव अनुभव करता है। आदर-सत्‍कार के साथ आपका नाम लेता है और जब दुनिया के किसी भी देश में किसी भारतीय की पराक्रम की गाथा सुनते हैं तो सीना चौड़ा हो जाता है और कनाडा में बसने वाले हमारे भारतीयों ने अपने सफल कारोबार के माध्‍यम से,अपने सफल जीवन के माध्‍यम से भारत की आन,बान,शान को बढ़ाने में बहुत बड़ी भूमिका अदा की है। इस शहर के साथ तो मेरा नाता पुराना रहा है। पहले भी आना हुआ है और तब मैं कुछ नहीं था। कोई जानता भी नहीं था। तब भी इस शहर ने मुझे जो प्‍यार दिया था,इतने ढेर सारे कार्यक्रम मेरे हुए थे। इतने लोगों से मेरा मिलना हुआ था और इसलिए आज मैं उस धरती पर फिर से एक बार आकर ,नई जिम्‍मेदारी के साथ आया हूं,तब मैं यहां रहने वाले मेरे सभी भारतीय भाईयों और बहनों का हृदय से अभिनंदन करता हूं।

मेरा कनाडा के कारोबार से बड़ा अच्‍छा संबंध रहा,मेरा बहुत अच्‍छा अनुभव रहा। मैं गुजरात में मुख्‍यमंत्री रहा कई वर्षों तक और मुख्‍यमंत्री के कालखंड में मैं एक Vibrant Gujrat InvestorSummitकरता था। 2003 में पहली बार किया। पूरी कल्‍पना नई थी और मैं आज गर्व से कहता हूं कि कनाडा वो देश है जो 2003 से गुजरात का partner countryबना। एक developed countryके लिए किसी देश के छोटे से राज्‍य के साथ partner countryबनना यह निर्णय छोटा नहीं होता है,लेकिन कनाडा ने वो निर्णय किया और अब तक निभाया है। मैं इसके लिए कनाडा का बहुत-बहुत आभारी हूं। मैं कल रात यहां पहुंचा,कल रात चला जाऊंगा लेकिन कनाडा के प्‍यार को मैं कभी भुला नहीं पाऊंगा। आज कल तो विमानों की सेवा इतनी अच्‍छी हो गई है कि 15-17-20..... घंटे में आप भारत से कनाडा पहुंच सकते हो। लेकिन भारत के प्रधानमंत्री को आने में 42 साल लग गए। ये भी बड़ी विचित्रता देखिए कि भारत और कनाडा मिलकर स्पेस में तो प्रगति कर रहे हैं, लेकिन धरती पर कतराते रहते थे। जिस बात को 42 साल बीत गए, उसको मैंने दस महीने के भीतर-भीतर कर दिया।

PM Modi - Indian Diaspora Event, at Ricoh Coliseum, Toronto Canada (8)

मैं जानता हूं कि भारत की शक्ति और भारत की आवश्‍यकता ....कनाडा की संपत्ति और कनाडा का सामर्थ्‍य : इंडिया प्‍लस कनाडा; आप कल्‍पना कर सकते हो। हम दुनिया में कितनी बड़ी ताकत के रूप में उभर सकते हैं| भारत को जिन-जिन प्राकृतिक संपदाओं की जरूरत है उन सारी प्राकृति संपदाओं की पूर्ति कनाडा से हो सकती है। मेरे हिंदुस्‍तान में किसान खेत में मजदूरी करता है, मेहनत करता है, पसीना बहाता है और जब उसको फर्टीलाइजर की जरूरत होती है तो पोटाश कनाडा से आता है। यहां पर इतनी प्राकृतिक संपदा है.. एक बार यहां के एक राज्‍य के प्रीमियर गुजरात आये थे। मैंने उनसे कहा कि मेरा राज्‍य ऐसा है.. तब मैं गुजरात का मुख्‍यमंत्री था। मैंने कहा कि मेरे यहां हीरे की खदानें नहीं हैं, लेकिन मेरे लोगों का कौशल ऐसा है, Entrepreneurshipमें इतना दम है कि दुनिया में दस में से नौ हीरे ऐसे हैं जिस पर किसी न किसी भारतीय का हाथ लगा हुआ होता है। उनको मैंने कहा कि आपके पास हीरे की खदानें हैं, कच्‍चा हीरा मुझे दे दीजिए। मैं आपको मूल्‍य वृद्धि करके वापस लौटा दूंगा और आपके कच्‍चे हीरे पर हिंदुस्‍तान के पसीने की महक दुनिया में आपकी ताकत को चार गुना बढ़ा देगी। यह सामर्थ्‍य है दोनों देशों में। इस सामर्थ्‍य को जोड़ने का एक नया युग आज प्रारंभ हुआ है। आज जो हमने निर्णय किए हैं, मिल बैठ करके, खुलकर के बातें हुईं हैं और एक मित्रतापूर्ण माहौल में हुई हैं। एक दूसरे को समझने में अब हमें कोई तकलीफ नहीं है और इसलिए मैं आपको विश्‍वास दिलाता हूं कि इंडिया और कनाडा का यह संसार बहुत लंबा चलने वाला है। इसके लिए मैं प्रधानमंत्री और मेरे मित्र श्रीमान हार्पर का हृदय से बहुत-बहुत धन्‍यवाद करता हूं, उनका अभिनंदन करता हूं|

 भाईयों और बहनों पिछले वर्ष जब भारत में चुनाव का मौसम था, चुनाव तो वहां चल रहे थे लेकिन नारे यहां से सुनाई देते थे। नतीजे तो वहां आये थे। लेकिन मिठाई यहां बांटी जा रही थी। वहां पर लोग दिन में खुशी मना रहे थे, आप आधी रात में मना रहे थे। मेरे भाईयों  और बहनों, दस महीने पहले सिर्फ सरकार बदली थी। लेकिन आज मैं दस महीनों के बाद कह सकता हूं कि जन-जन का मन भी बदला है। सरकार बदली है, उससे क्‍या होगा?ये तो समय कहेगा, लेकिन मन के बदलने से क्‍या कुछ हो सकता है इसको मैं भली-भांति समझ सकता हूं।

PM Modi - Indian Diaspora Event, at Ricoh Coliseum, Toronto Canada (9)

हम लोग जब छोटे थे, तो सिनेमा का एक गीत सुना करते थे – “देख तेरे संसार की हालत क्‍या हो गई भगवान, कितना बदल गया इंसान।“  उस समय एक पीड़ा थी, व्‍यथा की बात थी, उस गीत में। मैं आज उस गीत को नए रूप में देख रहा हूं कि इंसान बदला है। उस समय पीड़ा थी कि कितना बदल गया इंसान और मैं आज गर्व से कहता हूं कि कितना अच्‍छा बन गया इंसान। बदला है, बदला है। कोई कल्‍पना कर सकता है? मैंने देश के गरीब भाईयों और बहनों को कहा कि आप बैंक में खाता खोलिए। हमारे यहां मेरे जन्‍म से पहले ही बैंक तो चल रही थी, देश आजाद होने के बाद भी बैंक चल रही थी, कांग्रेस सरकार ने श्रीमति इंदिरा गांधी की सरकार थी तब बैंकों का राष्‍ट्रीयकरण कर दिया था, ताकि बैंक गरीबों के काम आये। लेकिन इसके बावजूद भी दस करोड़ से अधिक परिवार ऐसे थे यानी करीब-करीब 40 प्रतिशत से अधिक जनता ऐसी थी, जिनके नसीब में बैंक का खाता खोलना नहीं था। मैंने 15 अगस्‍त को घोषणा की थी कि मुझे बैंक में खाते खुलवाने हैं और.. एक जमाना था.. आप भी हिन्‍दुस्‍तान में रहे हैं, बैंक में जाते थे तो बैंक का अफसर नीचे से ऊपर देखता भी नहीं था और अगर आप उसका ध्‍यान आकर्षित करने की कोशिश करें, तो काटने के लिए आता था – देखते नहीं हो मैं काम कर रहा हूं!  इंसान बदल गया, बैंक वाले भी बदल गये, यही बैंक के कर्मचारी.. आज मैं उन पर गर्व करता हूं,  उनका अभिनंदन करता हूं कि वो गांव-गांव गये, गरीब के घर गये और 14 करोड़ बैंक खाते खोले| 14 करोड़ ! मतलब कि करीब करीब तीन कनाडा और यह काम सौ दिन में पूरा किया उन्होंने ..सौ दिन में | इंसान बदला है !! भारत का जन मन जो बदला है यह उसका उदाहरण है सरकार सिर्फ नहीं बदली है..जन मन बदला है | जब बैंक खाते खोलने की बारी आई तो.. गरीब के पास पैसे नहीं, बैंक खाता क्‍या खोलेगा और इसलिए हमने कहा था कि जीरो बैलेंस से एकाउंट खोलेंगे। जीरो बैलेंस| बैंक वालों को शुरू में तो थोड़ा ये था कि भई ये क्‍या कर रहे हो आप? हमने कहा कि भई क्‍या जाता, है दो कागज पर उनका नाम लिखना है, बैंक एकाउंट खोलना है, जाता क्‍या है तुम्‍हारा। वो बोलें कि कुछ तो देना चाहिए उन्‍हें। हमने कहा क्‍या देना है, उसने पसीना बहाया है, क्या लेना है , दे दो बैंक का खाता दे दो। मैंने गरीबों को कहा था कि आपको पैसे बैंक में रखने की जरूरत नहीं है, खाता खोल दीजिए, फिर आगे देखेंगे। लेकिन मेरे नौजवान साथियों, दोस्‍तों। जन-मन बदला है, तो कैसे बदला है.. मैंने गरीब को कहा था कि तुम्‍हें बैंक में पैसे डालने की जरूरत नहीं है, मुफ्त में खाता खोल देंगे। लेकिन गरीब की अमीरी भी तो कुछ चीज होती है। गरीब की अमीरी की भी अपनी एक ताकत होती है और मैं आज गर्व से कहता हूं, उन गरीबों के सामने सर को झुकाकर उनका अभिनंदन करता हूं, उन्‍होंने 14 हजार करोड़ रूपया बैंक में जमा करवाया। ये गरीबों की अमीरी, ये बदले हुए जन-मन की निशानी है। देश में एक नया विश्‍वास पैदा हुआ है। सरकार बदली है, इसलिए सब बदलेगा ऐसा नहीं है। बदलने का मेरा विश्‍वास इसलिए है कि जन-मन बदला है । “जन मन गण अधिनायक” जो  कहते हैं न, वो जन-मन बदला है। हमारे देश में आप जब विदेश से आते थे, एयरपोर्ट पर उतरने ही आपकी शिकायत क्‍या रहती थी? कि गंदगी बहुत है, सफाई नहीं है, ऐसा ही लगता था न? हमने तय किया कि काम कठिन है, लेकिन करना चाहिए और हम नहीं करेंगे तो कौन करेगा? जिनको गंदगी करनी थी वे गंदगी करके चले गए लेकिन हम सफाई करके जाएंगे। आज जन-मन ऐसा बदला है कि हर दिन एकाध खबर तो कहीं-कहीं से आती है कि फलाने बैंक के सारे Employee Saturday-Sundayको सफाई करने निकले हैं, फलाने कॉलेज के Studentsसफाई करने के लिए निकले हैं, फलाने मंदिर के सारे संत सफाई करने के लिए निकले हैं, फलाना एम. एल. ए. सफाई कर रहा है, एम पी सफाई कर रहा है, चारों तरफ कहीं न कहीं से खबर आ रही है। मैंने देखा.. आप कभी सचिन तेंदुलकर की वेबसाइट पर जाओगे तो उन्‍होंने अपना एक वीडियो रखा है। उन्‍होंने मुंबई में एक फुटपाथ तय की, रोज सुबह चार बजे जाते थे अपने दोस्‍तों को ले करके। महीने भर गए और पूरी उसकी सफाई करके उसको बढि़या से पार्क में Convert कर दिया। लोग आकर बैठते हैं। सरकार ने नहीं किया, नागरिक कर रहे हैं। दो बेटियां.. एक नगालैंड से और एक बनारस से, दो बेटियां बनारस में एकठ्ठी हुईं और उनका मन कर गया कि काशी की घाटों की सफाई करें और आज मैं हैरान हूं कि उन दो बेटियों ने काम शुरू किया, धीरे-धीरे नौजवान जुड़ते गए और उन्‍होंने पूरे प्रभु घाट को साफ कर दिया। आज लोग जा करके, विदेश के लोग वहां जा करके घंटों तक गंगा के सामने बैठते हैं। देश विशाल है, गंदगी बहुत है, पुरानी है, वक्‍त लगेगा लेकिन जन-मन बदला है, उसका ये उदाहरण है। हमने कहा कि स्‍कूल में टॉयलेट बनाना है, उसमें भी Girl Childके लिए टॉयलट बनाना है। लोगों को लगता है कि प्रधानमंत्री का काम होता है ये क्‍या ? लेकिन ये थोड़ा अलग सा प्रधानमंत्री है, औरों को जो बनाना है बना दें, मुझे तो ऐसे ही छोटे-छोटे काम करने हैं। लोगों को लगता है कि यह प्रधानमंत्री का काम होता है क्‍या,लेकिन यह थोड़ा अलग सा प्रधानमंत्री है। औरों को जो बनाना है बना दे,मुझे तो ऐसे ही छोटे-छोटे काम करने है। और बूंद-बूंद से जैसे समुद्र भर जाता है, छोटे-छोटे कामों से हिंदुस्‍तान की शक्‍ल सूरत बदल जाएगी यह मेरा विश्‍वास है| दोस्‍तों और मेरा विश्‍वास है सवा सौ करोड़ देशवासी एक कदम भी चलें तो देश सवा सौ करोड़ कदम आगे बढ़ जाता है। एक दिन मेरे मन में विचार आया कि जिसके पास पैसे हैं सप्‍ताह में दो दिन तो Dinner किसी बढि़या से होटल में करता होगा। 15-20 हजार को बिल देकर के वापस आता है। क्‍या ऐसे लोगों ने भी गैस सिलेंडर की सब्सिडी लेनी चाहिए क्‍या?उनको शोभा देता है क्‍या?एम.पी है,एम.एल.ए हैं,मंत्री हैं 400 रुपये की सब्सिडी । मैंने ऐसे ही बातों बातों में कह दिया कि भई यह अच्‍छा नहीं लगता,हमारे जेब में दम है तो हमने क्‍यों लेनी चाहिए,गरीब लें,गरीब को मिलनी भी चाहिए। लेकिन जिसके पास संभावना है वो क्‍यों ले?और सब्सिडी से पका हुआ खाना शोभा देता है क्‍या?मैंने सार्वजनिक रूप से नहीं कहा था दोस्‍तों। ऐसे ही बातों बातों में अपने साथियों से बीच बात कर रहा था तो बात फैलनी लगी और बात फैलने लगी आज भी मेरे साथियों का जन मन बदला है। बदला हुआ जन मन ने क्‍या किया?करीब चार लाख लोगों ने अपनी गैस सब्सिडी छोड़ दी। यानी करीब-करीब देश की तिजोरी में 200 करोड़ रुपये बच गया। Two hundred crore rupees. कोई हुकुम नहीं,कानून नहीं,कुछ नहीं,हर व्‍यक्ति को लगने लगा है कि अब देश इंतजार नहीं करेगा। देश को आगे बढ़ना है और हम बढ़ाएंगे यह जन-मन का विश्‍वास बढ़ा है और मैं यह जितनी बातें बता रहा हूं वो मोदी ने नहीं की है। देश के सामान्‍य नागरिक ने की है। सामान्‍य नागरिक के मन में एक नया मिजाज पैदा हुआ है। एक आनंददायक घटना मैं देख रहा हूं और मैंने फिर Publicly एक बार Announce किया। Publicly ऐसा कहा मैंने लोगों से सार्वजनिक रूप से अभी 5-6 दिन पहले ही कहा है। मैंने कहा कि मेरा सबसे आग्रह है कि जिसके जेब में दम है,वो गैस की सब्सिडी लेना छोड़ दे। मुझे विश्‍वास है कि लोग छोड़ देंगे। लेकिन मैंने उनसे एक बात और कही। मैंने कहा कि जो लोग गैस की सब्सिडी छोड़ेंगे,वो पैसा मैं सरकार की तिजोरी में नहीं डालूंगा,इसका मतलब यह नहीं कि मेरी जेब में डालूंगा। मैंने कहा कि जो गरीब परिवार है, जिनके घर में लकड़ी से जलने वाला चूल्‍हा है, जहां गरीब माँ लकड़ी से चूल्‍हा जलाती है। पूरे घर में धुंआ होता है, छोटे बच्‍चे दिन-रात रोते रहते हैं, धुएं में बैठ नहीं पाते, बीमार हो जाते हैं। मैं यह गैस सिलेंडर उन गरीब परिवारों को दूंगा और उससे उस परिवार के स्‍वास्‍थ्‍य को लाभ होगा। लकड़ी जलना बंद होगा तो जंगल बचेंगे, धुंआ नहीं होगा तो पर्यावरण बचेगा।जंगल बचेगा तो पर्यावरण में वृद्धि होगी, एक इंसान सब्सिडी छोड़ता है, कितने फायदे हो सकते हैं, जिसका आप अनुमान लगा सकते हैं और जन-मन बदला है, उसके कारण यह परिणाम आ रहा है। आपको हैरानी होगी, सबसे बड़ी सरप्राइज घटना बता दूं, मेरे लिए भी सरप्राइज है। लेकिन वो सुखद.. आश्‍चर्य है मेरे लिए। एक अखबार के मालिक ने मुझे चिट्ठी लिखी है। बताईये सुखद आश्‍चर्य है या नहीं है। अखबार के मालिक ने चिट्ठी लिखी है और उसमें मुझे लिखा है कि मोदी जी, जो देश मूड है उससे लगता है.. और हमने हमारे अखबार की एक नीति बनाई है और वो नीति ये है कि सप्‍ताह में एक दिन हमारा अखबार सिर्फ और सिर्फ पॉजिटिव न्‍यूज ही छापेगा। ये छोटी घटना नहीं है मित्रों ! भले आज एक अखबार ने काम शुरू किया है लेकिन खुद हो करके, सामने हो करके कहना और ये विचार मैंने नहीं दिया है। अब्‍दुल कलाम हमारे पूर्व राष्‍ट्रपति जी वो बार-बार कहते थे कि पॉजिटिव का कॉलम बनाईए, मैंने कभी कहने की हिम्‍मत नहीं की थी। लेकिन मुझे खुशी हुई कि बदले हुए जन-मन.. कहां-कहां उसका फैलाव हो रहा है, कैसे बात पहुंच रही है, उससे लगता है कि देश.. आप जिन सपनों को लेकर जीते हैं, आप ही आंखों के सामने वो सपने साकार होते हुए आप देखेंगे ये मैं आपको विश्‍वास दिलाता हूं।

PM Modi - Indian Diaspora Event, at Ricoh Coliseum, Toronto Canada (6)

हमारे देश में कई समस्‍याएं हैं लेकिन उन समस्‍याओं का समाधान एक ही जड़ी-बूटी में है। सब दु:खों की दवाई एक ही जड़ी-बूटी है। वो जड़ी-बूटी मोदी नहीं है, उस जड़ी बूटी का नाम है- विकास। हमारी सभी समस्‍याओं का समाधान है कि हम देश में विकास के एजेंडा पर आगे बढ़ें। हम विकास करें और मैं बताता हूं भाईयों और बहनों कि भारत के अंदर ताकत है, सिर्फ अवसर चाहिए। पिछले दस साल में हमारे देश में प्रति दिन जो रोड का Construction होता था वो 2 किलोमीटर होता था Per Dayऔर पिछले दस महीने से  Per Day 11 किलोमीटर होता है यानी आप देख सकते हैं कि विकास.. 11 किलोमीटर है ...यानी बहुत बड़ी बात नहीं बता रहा लेकिन तुलनात्‍मक रूप से पता चलेगा कि हम कैसे आगे बढ़ रहे हैं। भाईयों और बहनों, विकास का रास्‍ता ही देश को आगे ले जाएगा।

आप कल्‍पना कीजिए कि भारत के पास आज कौन सी बड़ी संपत्ति है? मेरे नौजवान साथियों: भारत के पास वो संपत्ति है, जो दुनिया में किसी के पास नहीं है और वो है –भारत की 65 प्रतिशत जनसंख्‍या 35 से कम उम्र की है। हिंदुस्तान नौजवान है| 80 करोड़ नौजवान जिस देश के पास हों.. 160 करोड़ मजबूत भुजाएं हों, 80 करोड़ सपने हों, वो देश क्‍या नहीं कर सकता?यह एक बहुत बड़ी संपत्ति है हमारी और इसलिए विकास के केंद्र में, मेरे दिमाग में ये 80 करोड़ नौजवान हैं, जिनके हाथ में हुनर हो, जिनको रोजगार के अवसर हों, वे मिट्ठी में से सोना बनाने की ताकत रखते हैं और देश सोने की चिडि़या फिर एक बार बन सकता है दोस्‍तों। ये आत्‍मविश्‍वास उन सवा सौ करोड़ देशवासियों के आर्शीवाद से पनपा है। ये आत्‍मविश्‍वास उन 80 करोड़, 35 साल से कम उम्र के नौजवानों की आंखों में से पैदा हुआ है और मैं दुनिया को कहता हूं कि दुनिया कल्‍पना करे , प्रगतिशील देश कल्‍पना करें, समृद्ध देश कल्‍पना करें, 2030 : 2030 के बाद उनके पास कितने ही कारखाने होंगे, कितने ही काम होंगे, उनके पास Work Force होगा क्‍या ? दुनिया के सभी समृद्ध देशों में उम्र बहुत तेजी से बढ़ रही है। जवानी मुरझा रही है और तब अगर जवानी मुरझा गई तो उस देश को चलाने की ताकत बाहर से लानी पड़ेगी। पूरे विश्‍व को 2030 के बाद जो Work Force की जरूरत होने वाली है वो एक ही जगह से मिलने वाला है, उस जगह का नाम है – हिन्‍दुस्‍तान | इसलिए हम अभी से इस बात पर ध्‍यान केंद्रित कर रहे हैं और उसमें हमारी प्राथमिकता है Skill Development... हमारा मिशन है Skill India| पहले भारत की पहचान थी- Scam India। हम बनाना चाहते हैं Skill Indiaऔर इसलिए Skill Development  को प्राथमिकता देना चाहते हैं और Skill Development में भी मेरे मन में अलग-अलग कल्‍पनाएं हैं। एक तो हम अभी से दुनिया का Mapping करना चाहते हैं कि किस देश को किस प्रकार के मानव बल की आवश्‍यकता होगी। दुनिया के कई देश हैं, जिनको Maths और Science के Teachers की जरूरत होगी। दुनिया के कई देश हैं, जिनको Nurses चाहिएं। दुनिया के कई देश हैं जहां हाथ से काम करने वाले कारीगर चाहिए। अलग-अलग प्रकार की आवश्‍यकताएं हैं। दुनिया की Mapping करके, जिसको जिस प्रकार के Work Force की जरूरत पड़ेगी उसका अनुमान लगाया जा सकता है, उस प्रकार का Work Force अभी से तैयार करने के लिए Skill Development मिशन.. और Skill Development में दुनिया में आज जिसके पास बढि़या से बढि़या Skill Development की व्‍यवस्‍थाएं, योजनाएं हैं सबको मैं भारत में लाना चाहता हूं, दूसरा Skill Development वो हो जिसमें Enterpreneur तैयार हो। नए स्टार्ट अप, नई पीढ़ी, नए-नए व्‍यवसाय में खुद जुटें, स्‍वरोजगार में आगे आए किसी से नौकरी पाने के लिए इंतजार न करे, वो Job Seeker न बने, वो Job Creater बने। भले दो को नौकरी दें, पांच को दें लेकिन वो Job Creater बने। उनके लिए जो Skill Development होनी चाहिए, उस पर बल देना चाहिए, तीसरा जो खुद रोजी-रोटी कमाने के लिए कुछ करना चाहते हैं। उनके लिए उस प्रकार का Skill Development| इस तरह Skill Development पर बल दे करके, Value Addition करके.. और हमारे देश में दुर्भाग्‍य से कोई कितना भी बदमाश व्‍यक्ति क्‍यों न हो? लेकिन अगर खादी का बढि़या कुर्ता पहन करके, लंबा कुर्ता पहन करके आ जाए या कोट पैंट और टाई पहन करके आ जाए और अपने घर की घंटी बजाए, तो हम कहेंगे कि आइये-आइये बैठिए, क्‍या काम है? लेकिन कोई बेचारा गरीब मजदूर, ऑटो रिक्‍शा वाला, कपड़े गंदे हों और वो आ करके घंटी बजाए और पूछे कि फलाने भाई कहां गये तो हम कहते हैं कि अरे चलो चलो ! ये कोई टाईम है क्‍या? भागो शाम को आना!क्‍यों? हमारे मन में Labour के प्रति जो Dignity चाहिए, उसका अभाव भर गया है। जब तक एक सामान्‍य व्‍यक्ति की Dignity.. ये हमारा स्‍वभाव नहीं होगा, Dignity of Labour, ये हमारी प्रकृति नहीं होगी, तो शायद दुनिया जो हमसे मांग रही है उसको हम गौरव से नहीं कर पाएंगे। मैं आज गर्व से कहता हूं कि दुनिया में जिस प्रकार से युवा पीढ़ी को हम देख रहे हैं, भारत की युवा पीढ़ी भी जो भी काम मिले, बिना शर्म के, बिना संकोच के, वह करने को तैयार है। कोई संकोच नहीं, कोई शर्म नहीं, वो मेहनत करने को तैयार है। ये जन-मन बदला है, उसी का परिणाम है। नौजवान का मिजाज बदला है,वो मेहनत करने को तैयार है, काम करने को तैयार है, हम उसे अवसर देना चाहते हैं, Human Resources Development, इस पर हम ध्‍यान केंद्रित करना चाहते हैं, उसके साथ-साथ हम थोड़ा ऊपर के लेयर का भी सोच सकते हैं। भारत के पास Talent है।Talent में कोई कमी नहीं है।हमारे टैलेंट का सबसे बड़ा सबूत है- भारत ने अभी मंगलयान भेजा है। Mars पर हम गये और छोटी-छोटी जगहों पर वे Mars पर जाने वाले सारे पुर्जे तैयार हुए। हिंदुस्‍तान के पांच छह राज्‍यों में छोटे-छोटे Small Scale Industry वालों के यहां एक-एक पुर्जा बना। हमारे Scientist जो हैं, नौजवान हैं, उनका Talent देखिए। उन्होंने  पहुंचा दिया मंगलयान।दुनिया में हम पहला देश हैं जो पहले ही Trial में सफल हो गये और मंगलयान में हमारे Talent का कमाल देखिए। हॉलीवुड की फिल्‍म पर जितना खर्चा होता है न, उससे कम खर्चे में मंगलयान पहुंच गया। आप अगर दिल्‍ली में, लखनऊ में, कानपुर में, हैदराबाद में, बंगलोर में ऑटो रिक्‍शा में अगर जाते हैं तो एक किलोमीटर का करीब दस रूपया खर्चा आता है। मंगलयान पर हमारा खर्चा सिर्फ सात रूपया किलोमीटर आया है। मैं कहना यह चाहता हूं कि देश के पास Talent है। क्‍या कारण है कि आईटी की दुनिया में हिन्‍दुस्‍तान के नौजवानों ने नाम रोशन किया। कनाडा में भी हिंदुस्‍तान के आईटी के नौजवान अपना करतब  दिखा रहे हैं। अमेरिका में भी हिंदुस्‍तान के नौजवान आईटी में अपना करतब दिखा रहे हैं। उंगलियां तो उनकी हैं, लेकिन मेरे नौजवान दोस्‍तों जवाब हमें खोजना पड़ेगा कि बुद्धि वहां से है, उंगलियां उसकी चल रही हैं, लेकिन Googleभारत की गोद से पैदा क्‍यों नहीं होता? Microsoftभारत की गोद से पैदा क्‍यों नहीं होता?

PM Modi - Indian Diaspora Event, at Ricoh Coliseum, Toronto Canada (11)

Talentवो ही है काम वही कर रहे हैं, मुझे वो माहौल बदलना है, ये हमारे TalentedYouthको अवसर देना है, ताकि वो Innovationकरें। आने वाले दिनों में दुनिया को क्‍या चाहिए? अपने Innovationसे वो दें। इसलिए छोटे-छोटे से काम के लिए एक मजदूर को जिस प्रकार का Skill Development चाहिए वो हमारे Talented Youthके लिए, Innovation के लिए अवसर चाहिए। उस दिशा में हम काम कर रहे हैं। हमने इस बार हमारे बजट में कार्यक्रम रखा है –AIM –Atal Innovation Mission. हम नौजवानों को अवसर देना चाहते हैं। कहने का तात्‍पर्य यह है कि देश को आगे ले जाने के लिए हमारी युवा शक्ति का जो सामर्थ्‍य है, जो हमारी सबसे बड़ी संपदा है और यह संपदा केवल भारत के अपने लिए नहीं, पूरे विश्‍व के अंदर काम आने वाली संपदा हमारे पास है। भले हमारे पास हीरे की खदानें नहीं होगी, भले हमारे पास गैस के भंडार नहीं होंगे, भले हमारे पास पेट्रोलियम के भंडार नहीं होंगे, हमें यू‍रेनियम बाहर से लाना पड़ता होगा, लेकिन हमारे पास जो ताकत है उस ताकत के भरोसे हम दुनिया में देश की ताकत बढ़ाना चाहते हैं। ये विश्‍वास ले करके हम आगे बढ़ रहे हैं।

आज हमने कनाडा में एक बहुत महत्‍वपूर्ण निर्णय लिया। मेरी इस यात्रा में एक महत्‍वपूर्ण निर्णय हमने फ्रांस में किया, दूसरा महत्‍वपूर्ण निर्णय आज हमने कनाडा में किया, बाकी तो बहुत महत्‍वपूर्ण हुआ है, लेकिन दो चीज ऐसी हैं, जिनकी तरफ लोगों का ध्‍यान नहीं गया है। पता नहीं जब मैं वापस पहुंचूंगा तो तब जाएगा कि नहीं जाएगा या तो कहीं और ध्‍यान होगा अभी लोगों का लेकिन हो सकता है कि चार छह महीने के बाद ध्‍यान दें। फ्रांस में एक महत्‍वपूर्ण निर्णय हुआ, वो यह हुआ कि हम लोग Nuclear Energyके लिए दुनिया भर से रियेक्‍टर मांगते थे। हर कोई देश हाथ ऊपर कर देता था, बात चलती थी, दो चार साल बात चलती थी, फिर बात ऊपर हो जाती थी। बहुत लंबे अरसे से विषय Pendingथा, कोई देने को तैयार नहीं था क्‍योंकि सबको लगता है कि कहीं बम न बना दें और जो बनाते हैं उनको कोई रोकता नहीं है, रोक पाते भी नहीं। जो गांधी का देश है, जिसने कभी दुनिया में किसी पर आक्रमण नहीं किया, जिसने शांति के शहादत मोल ली है। ऐसे हम लोग हैं| उनको कई वर्षों के लिए भटकना पड़ता है। इस बार हमने फ्रांस के अंदर एक कंपनी के साथ भारत की एक कंपनी का MOUहुआ है। मेरे लिए खुशी की बात है कि सबसे बड़ा काम होने वाला है कि अब वो रियेक्‍टर भारत में बनेगा। अब रियेक्‍टर तो बनेगा लेकिन NuclearEnergyके लिए यूरेनियम चाहिए। यूरेनियम आपका कनाडा मुझे देगा। पूरी दुनिया GlobalWarmingके कारण परेशान है,Climate Changeकी चर्चा है, Air Conditionedकमरों में सर्वाधिक एनर्जी का उपयोग करके Climateकी चर्चा की Meetingहुआ करती है। भारत अगर Environment Protectionमें सफल होता है तो दुनिया का 1/6 जिम्मा हम अकेले उठा सकते हैं। उसमें सबसे बड़ा काम है Clean Energyऔर उस Clean Energyमें Nuclear Energyकी ताकत बहुत है। इसलिए हम रियेक्‍टर बनाएंगे, हम कनाडा से यूरेनियम लेंगे, हम Nuclear Energyबनाएंगे और दुनिया को जिस चीज की चिंता है- Climate Changeकी उसमें मददगार होने का काम हिंदुस्‍तान बीड़ा उठाएगा।

भारत के राष्‍ट्र ध्‍वज में चार रंग हैं। हम बोलते हैं तिरंगा, रंग चार हैं, लेकिन वो हमारी विशेषता है। मैं एक चतुर्रंगी क्रांति का सपना ले करके चल रहा हूं, चतुर्रंगी क्रांति का। भारत का तिरंगा झंडा, जिसको देखते हम जिसमें कि चार रंग हैं –Saffron है, Whiteहै, Green है और बीच में Blueहै। अशोक चक्र है Blue Colourका। मैं चतुर्रंगी क्रांति का सपना देख करके चल रहा हूं। चतुर्रंगी क्रांति का सपना देख रहा हूं.. केसरिया रंग.. अब कुछ लोगों को तो केसरिया रंग का अर्थ भी ढंग से मालूम नहीं है। वो अपनी मन-मर्जी का अर्थ करते रहते हैं, वो उनका काम है करते रहें। Saffron Colour,ये ऊर्जा का रंग है, Energy का रंग है। सूर्य का सात घोड़ों का रथ देखते हैं तो Saffron Colourका दिखाई देता है। ये ऊर्जा क्रांति करनी है हिंदुस्‍तान में। इसलिए Nuclear Energy, Solar Energy,Wind Energy, Biomassसे बनने वाली Energy, Energy Saving,इन सारे विषयों को एक साथ चलाया है।

PM Modi - Indian Diaspora Event, at Ricoh Coliseum, Toronto Canada (5)

हमारे देश में कुछ तो Terminologyएक दम से बदल रही है। भारत कभी भी.. ज्‍यादा से ज्‍यादा चर्चा मेगावाट की करता था, कि भई इतने मेगावाट, इतने मेगावाट। पहली बार देश में गीगावाट की चर्चा होनी शुरू हुई है। वरना हमारा.. क्रिकेट में भी Lastके जो बॉलर वगैरह खेलने जाते हैं, सेंचुरी की कहां चर्चा करते हैं?.. तो मेगावाट के आस-पास खेलते थे, पहली बार सरकार गीगावॉट की परिभाषा ले करके चल रही है और 175 गीगावाट Renewable Energyकी तरफ हम जा रहे हैं, 100 गीगावाट Solar Energy, 75 गीगावाट Wind Energy| यह सपना देखा है। Energysaving.. LED Bulbका एक पूरा मूवमेंट खड़ा किया है। स्‍कूलों में बच्‍चों को बताते है, बिजली बचाने के लिए अपने घर में माहौल बनाओ। LED Bulbऔर Transparency.. आपको जानकर हैरानी होगी कि एक साल पहले जो सरकार थी, उस समय 2012-13 के कार्यक्रम में LEDका Bulbसरकार 350 रूपये में लेती थी। कितना? ये सरकार 85 रूपये में लेती है। ये Transparencyहै कि नहीं है, है कि नहीं है, भ्रष्‍टाचार गया कि नहीं गया, ईमानदारी आई कि नहीं आई, ईमानदारी से काम हो सकता है कि नहीं हो सकता। हर छोटी चीज में यदि ध्‍यान बारीकी से रखा जाए,तो बदलाव लाया जा सकता है। जन-मन बदला है दोस्‍तों इसलिए परिस्थितियां पलट रही हैं। दूसरा Revolutionहै –White Revolution.हमारे देश में, दुनिया में दूध देने वाले पशुओं की तुलना में हमारे यहां Productivityबहुत ज्‍यादा नहीं है। जो काम दो दूध देने वाले पशुओं से होना चाहिए,उतना काम करने के लिए हमको 20 पशु पालने पड़ते हैं, क्योंकि उसका लालन-पालन करने के लिए जिन चीजों को वैज्ञानिक तरीके से बढ़ाना चाहिए, हम नहीं बढ़ा पाते। गांव के गरीब के पास यदि एक पशु हो,तो उसको जिंदगी में कभी देखना न पड़े, उसकी Productivityकैसे बढ़े, वैज्ञानिक तौर-तरीके कैसे आएं और हिंदुस्‍तान में सेकेंड White Revolutionकैसे हो,उस पर हम बल दे रहे हैं। तीसरा, Green Revolution .. Green Revolutionमें वही बात, अब जमीन पहले पांच एकड़ थी, दो भाई थे, अब पांच एकड़ में दस भाई हो गए, दो भाई के बच्‍चे हो गए, उनके बेटे हो गए, अब इतना बड़ा परिवार दस बीघा जमीन में कैसे चलेगा? वो परिवार तब चलेगा कि हम सीमित जमीन में भी Productivityकैसे बढ़ाएं। इसके लिए एक काम हमने उठाया है –Soil Health Card.इंसान की Healthके लिए जैसे HealthCardहोता है,  वैसे धरती माता की तबीयत के लिए Health Cardहो । कहीं हमारी पृथ्‍वी मां बीमार तो नहीं है?  हमारी पृथ्‍वी मां को जो खाना चाहिए, वो नहीं खिलाते,कुछ और खिला दिया, ऐसा तो नहीं है? माँ को कैसे बचाएं, इसलिए हमने अभियान उठाया है धरती मां की रक्षा करने का। Soil Health Cardका मिशन चलाया है। पानी बचाना, ये दुनिया पर बहुत बड़ा जिम्‍मा आ पड़ा है। Per Drop More Cropएक-एक बूंद से फसल कैसे ज्‍यादा पैदा हो?उस पर हम बल देना चाहते हैं, जो पैदा हो उसका Value Additionकैसे हो, मूल्‍य वृद्धि कैसे हो?किसान का माल .. Forward Linkageकैसे उसको मिले, Green Revolution.. हिंदुस्‍तान में सेकेंड Green Revolutionके लिए, भारत का जो पूर्वी हिंदुस्‍तान है, जिसकी जब चर्चा होती है, तो गरीबी के नाम पर होती है, वो सबसे समृ‍द्ध बन सकता है। बिहार हो, ओडि़शा हो, पूर्वी उत्‍तर प्रदेश हो, पश्चिम बंगाल हो, असम हो, जहां विपुल मात्रा में पानी है। इसलिए हमारा फोकस है सेकेंड Green Revolutionऔर स्‍पेशल फोकस है हिंदुस्‍तान के पूर्वी इलाके में, वहां के किसान और गांव की जिंदगी को बदलना है। चौथा है, Blue Revolution, Blueक्रांति करनी है। BlueRevolutionजब मैं कहता हूं तब, एक नीला आसमान। पर्यावरण के संकटों से मुक्‍त नीला आसमान। Environment Protectionकी चिंता करते हुए नीला आसमान। मैं Manufacturing में कहता हूं – Zero Defect,  Zero Effectजो पैदा करें,उसमें कोई Defect न हो और ऐसे पैदा करे कि Environmentपर Effectन हो। Zero Defect,  Zero Effect,नीला आसमान। और दूसरा नीला समुंदर के पानी का रंग। नीला आसमान भी चाहिए, वो भी Revolutionकरना है और सामुद्रिक शक्ति का भी Revolutionहोना चाहिए। मेरे मछुआरे, उनकी आर्थिक स्थिति सुधरनी चाहिए। समंदर के अंदर प्राकृतिक संपदा पड़ी है। गैस और पेट्रोलियम के भंडार पड़े हैं। इन प्राकृतिक संपदाओं का सर्वाधिक उपयोग मानव जाति के लिए कैसे हो, Blue Revolutionकरना है, Saffron  Revolution, WhiteRevolution, Blue Revolution,Green Revolution, Blue Revolution| जल-थल नभ सबकुछ.. और इसलिए भाईयों और बहनों विकास की उन नई-नई ऊचाईयों को पार कर रहे हैं। आप कनाडा के भाईयों और बहनों कुछ बातें हैं जो मैं आपको जानकारी देना चाहता हूं। ओसीआई और पीआईओ.. मैंने जब Madison Squareपर बोल रहा था,तो मैंने वादा किया था। इन दोनों को Mergeकर देंगे, वो काम पूरा कर दिया है। हर किसी को पीआईओ कार्ड हो, वो ओसीआई की तरह ही, उसको सारी सुविधाएं दी जाएंगी। दूसरी बात है, ओसीआई पूरे जीवन के लिए मिलेगा। पहले वो सिर्फ 15 साल के लिए था। आपको पता होगा, आप में से जो बड़ी आयु के लोग वहां आ करके रहते होंगे, छुट्टियों में, तो हमारे यहां यह नियम था, उसको हर 15 दिन में एक बार पुलिस थाने ले जा करके बताना पड़ता था कि मैं वही हूं और कुछ गलत नहीं कर रहा हूं। मुझे बताइये कि आप पर मुझे भरोसा करना चाहिए कि नहीं करना चाहिए?  करना चाहिए कि नहीं चाहिए? जन-मन बदला है दोस्‍तों! इसलिए हमने तय किया है कि ओसीआई कार्ड वालों को पुलिस थाने में हाजिरी लगाने की जरूरत नहीं है। ओसीआई को चार पीढ़ी तक विदेश गए लोग.. अब उनको इसमें समाहित कर दिया गया है। चार पीढ़ी तक को स्‍वीकार कर लिया गया है। कुछ जगह पर अभी कुछ चीजें Processमें हैं। अगले पांच छह महीनों में सारी प्रक्रियाएं पूरी हो जाएंगी।

 एक ई-पोर्टल हमने शुरू किया है, जिसका आप फायदा ले सकते हैं। ट्रैकिंग, मॉनिटरिंग, फीडबैक ये सारी चीजें ई-पोर्टल के अंदर हैं। ई-पोर्टल का नाम है, मदद। एक ई-माइग्रेट पोर्टल शुरू किया है, जिसके द्वारा भी आपको कोई शिकायत हो, कोई कठिनाई हो तो इमीग्रेशन ऑफिस जाना नहीं पड़ेगा। आप उसी के द्वारा अपना काम कर सकते हैं, आपका समय बच सकता है। जो भारत के बाहर रहने वाले लोग हैं, जिनको ऑनलाइन अप्‍लीकेशन करने हैं,वे ई-माइग्रेशन इस व्‍यवस्‍था के तहत कर सकते हैं। आपने देखा है कि दुनिया में कुछ न कुछ देशों में संकट चलते रह‍ते हैं और हमारे भारतीय भाई-बहन बड़े उदार रहते हैं, उनको हम समझाते हैं कि भई निकलो, मुसीबत आ रही है। उनको लगता है नहीं-नहीं ये तो अच्‍छे लोग हैं, हमें कुछ नहीं होगा। वो निकलते नहीं हैं। हम यमन में जनवरी महीने से कह रहे थे कि निकलो!निकलो! कहते थे नहीं। आखिरकार,हमें अभी निकालना पड़ा चार हजार लोगों को, मुश्किल से ले करके आये हैं। पिछले दस महीने में West Asia में जो मुसीबतें आईं हैं, करीब 17 हजार भारतीयों को सुरक्षित बचा करके वापस लाने का काम किया है। देशवासियों मैं आपको एक बात बताना चाहता हूं, संकट की घड़ी में हम पासपोर्ट के रंग नहीं देखते हैं। अपनों के लिए जो भी करना पड़ता है, पूरी शक्ति लगा करके करते हैं। लेकिन विश्‍व में रहने वाले भारतीयों से भी हमारा आग्रह रहेगा कि हम संकटों में फंसे नहीं, समय रहते हम जागरूकता पूर्वक अपने विषयों को आगे बढ़ाये तो अच्‍छा होगा।

PM Modi - Indian Diaspora Event, at Ricoh Coliseum, Toronto Canada (7)

पहली बार हमने प्‍लानिंग कमीशन की जगह पर नीति आयोग बनाया है और नीति आयोग में एक पैराग्राफ.. प्रवासी भारतीयों को भी एक शक्ति के रूप में माना गया है। वो भी एक बहुत बड़ी भारत की विकास की ताकत है और उसके लिए भी भारत को सोचते रहना चाहिए। ये पहली बार एक Specific काम उनके लिए तय किया है। उसके चार्टर में इसको लिखा गया है। कनाडा के मित्रों के लिए एक खुश खबरी है। इलैक्‍ट्रोनिक टूरिस्‍ट वीजा, इसकी व्‍यवस्‍था हमने कर दी है, बहुत ही जल्‍द इसका लाभ आपको मिलेगा। दूसरी बात, मुझे मालूम है कि आप बोलेंगे नहीं,लेकिन कभी-कभी आपको भी वीजा लेने में तकलीफ पड़ती है, पड़ती है न? अब हमने तय किया है कि दस साल के लिए देंगे। अगर जन-मन बदला है,तो भरोसा भी बढ़ना चाहिए और भरोसे से दुनिया चलती है मेरे दोस्तों ! इसको ले करके हम चलने वाले हैं और चल रहे हैं। भाईयों और बहनों,काफी लंबी बातें कर ली आपसे, मुझे आनंद आया, आपने स्‍वागत किया, सम्‍मान किया। मैं आप सबसे आग्रह करूंगा कि हमारा देश, हम जो भी पढ़े हैं, जो भी अनुभव पाया है, दुनिया में कहीं से भी जो Disciplineसीखें हैं, जो भी अच्‍छा है हमारे पास, कहीं से भी मिला हो, वो हमारे देश के लिए भी काम आना चाहिए, हमारे देश के उन गरीबों के लिए भी काम आना चाहिए। जो हमारे लोग यहां आये हैं, हम ये न भूलें कि आज जो हम पहुंचें हैं जहां पर उसके मूल में किसी न किसी गरीब ने हमारे लिए कुछ न कुछ तो छोड़ा होगा। किसी न किसी ने कष्‍ट झेला होगा,तब हमारी जिंदगी बनी है। मानवता का तो यही तकाजा है कि जिन्‍होंने हमें दिया है हमें उनको भी तो कुछ लौटाना है। इस बात को ले करके आप चलें। भारत के प्रति हमारी भक्ति अपरमपार बनी रहे। मैं फिर एक बार, कनाडा ने मेरा जो स्‍वागत किया, सम्‍मान किया, प्रधानमंत्री जी ने इतना समय दिया, उनके मंत्रि-परिषद के इतने वरिष्‍ठ लोग आ करके बैठे, यहां के सभी सांसद आ करके बैठे, मैं उनका सबका हृदय से बहुत-बहुत धन्‍यवाद करता हूं। कनाडा और भारत की दोस्‍ती एक ऐसी युक्ति है, जो शक्तियों का संवर्धन करती है और ये ऐसी शक्ति है.. मान लीजिये हम Mathematic में a2 + b2करें तो Result क्‍या आता है? लेकिन मान लीजिए (a+b)2 तो Resultआता है a2 +2ab+b2 ... Extra 2ab मिलता है कि नहीं मिलता है? ये Extra 2ab कहां से आया? तो भारत और कनाडा जब मिलता है तो Extra 2ab निकलता है। यह हमारी ताकत है। उस ताकत को लेकर आगे बढ़ें। इसी एक अपेक्षा के साथ मैं फिर एक बार आप सबका धन्‍यवाद करता हूं। मेरी तरफ से आपको बहुत शुभकामनाएं देता हूं और समाज के सब लोगों ने मेरा इतना सम्‍मान किया, आशीर्वाद दिए, मैं सदा सर्वदा आपके इस प्रेम को याद रखूंगा। आपके आशीर्वाद की ताकत को याद रखूंगा। मैं आपको सबको वंदन करते हुए मेरी बात को विराम करता हूं। दोनों मुट्ठी बंद करके मेरे साथ पूरी ताकत से बोलिए –भारत माता की जय। ऐसे नहीं, आवाज हिंदुस्‍तान तक जानी चाहिए।

भारत माता की जय।

Pariksha Pe Charcha with PM Modi
Explore More
It is now time to leave the 'Chalta Hai' attitude & think of 'Badal Sakta Hai': PM Modi

Popular Speeches

It is now time to leave the 'Chalta Hai' attitude & think of 'Badal Sakta Hai': PM Modi
Oxygen Express trains so far delivered 2,067 tonnes of medical oxygen across India

Media Coverage

Oxygen Express trains so far delivered 2,067 tonnes of medical oxygen across India
...

Nm on the go

Always be the first to hear from the PM. Get the App Now!
...
Share
 
Comments
At this moment, we have to give utmost importance to what doctors, experts and scientists are advising: PM
Do not believe in rumours relating to vaccine, urges PM Modi
Vaccine allowed for those over 18 years from May 1: PM Modi
Doctors, nursing staff, lab technicians, ambulance drivers are like Gods: PM Modi
Several youth have come forward in the cities and reaching out those in need: PM
Everyone has to take the vaccine and always keep in mind - 'Dawai Bhi, Kadai Bhi': PM Modi

মোৰ মৰমৰ দেশবাসীসকল, নমস্কাৰ। আজি, মই এনে এক সময়ত আপোনালোকৰ সৈতে 'মন কী বাত'ত উপস্থিত হৈছো য’ত আমাৰ সকলোৰে ধৈৰ্য, ক’ৰোনাই আমাৰ সকলোৰে দুখ-কষ্ট সহ্য কৰাৰ সীমা পৰীক্ষা কৰি আছে। বহুতে আমাক অকালতে এৰি গৈছে। ক’ৰোনাৰ প্ৰথমটো ঢৌক সফলতাৰে প্ৰতিহত কৰাৰ পিছত দেশখনত সাহসেৰে ভৰি পৰিছিল, আত্মবিশ্বাসেৰে ভৰি পৰিছিল, কিন্তু এই ধুমুহাই দেশখনক হতবাক কৰি তুলিছে।

বন্ধুসকল, শেহতীয়াকৈ এই সংকটৰ মোকাবিলা কৰিবলৈ মই বিভিন্ন খণ্ডৰ বিশেষজ্ঞসকলৰ সৈতে দীঘলীয়া আলোচনা কৰিছো। আমাৰ ফাৰ্মা-উদ্যোগৰ লোক, প্ৰতিষেধক নিৰ্মাতা বা অক্সিজেন উৎপাদনৰ সৈতে সম্পৰ্কিত লোক হওক বা চিকিৎসা ক্ষেত্ৰৰ বিষয়ে বিজ্ঞ লোক হওক, তেওঁলোকে নিজৰ গুৰুত্বপূৰ্ণ পৰামৰ্শ চৰকাৰক প্ৰদান কৰিছে। এই সময়ত, আমি এই যুঁজত জয়ী হ'বলৈ বিশেষজ্ঞ আৰু বৈজ্ঞানিক পৰামৰ্শক অগ্ৰাধিকাৰ দিব লাগিব। ভাৰত চৰকাৰে ৰাজ্য চৰকাৰৰ প্ৰচেষ্টা আগবঢ়াই নিয়াৰ বাবে সকলো শক্তিৰে কাম কৰি আছে। ৰাজ্য চৰকাৰসমূহেও তেওঁলোকৰ দায়িত্ব পালন কৰিবলৈ যথাসাধ্য ধৰণে চেষ্টা কৰি আছে।

বন্ধুসকল, দেশৰ চিকিৎসক আৰু স্বাস্থ্য কৰ্মীসকলে বৰ্তমান ক’ৰোনাৰ বিৰুদ্ধে এক ডাঙৰ যুঁজত অৱতীৰ্ণ হৈছে। যোৱা এবছৰত তেওঁলোকে ৰোগটোৰ বিষয়ে সকলো ধৰণৰ অভিজ্ঞতা লাভ কৰিছে। আমাৰ সৈতে বৰ্তমান মুম্বাইৰ প্ৰখ্যাত ড০ শশাংক যোশীজী উপস্থিত আছে।

ক’ৰোনা আৰু এই সম্পৰ্কীয় গৱেষণাৰ চিকিৎসাৰ ক্ষেত্ৰত ডাঃ শশাংকজীৰ যথেষ্ট অভিজ্ঞতা আছে, তেওঁ ইণ্ডিয়ান কলেজ অব্ ফিজিচিয়ানৰ ডীনো আছিল। ডাঃ শশাংকৰ সৈতে কথা পাতোঁ আহক:-

মোদী জী- নমস্কাৰ ডাঃ শশাংকজী

ডাঃ শশাংক- নমস্কাৰ মহোদয়

মোদী জী- মাত্ৰ কিছুদিন পূৰ্বে মই আপোনাৰ সৈতে কথা পাতিবলৈ সুযোগ পাইছিলো। মই আপোনাৰ চিন্তাৰ স্পষ্টতা ভাল পাইছিলো। মই ভাবিছিলো দেশৰ সকলো নাগৰিকে আপোনাৰ মতামতৰ বিষয়ে জনা উচিত। মই কি শুনিছো সেই বিষয়ে এটা প্ৰশ্ন হিচাপে মই আপোনাৰ সন্মুখত উপস্থাপন কৰি আছো। ডাঃ শশাংক, আপোনালোকে বৰ্তমান জীৱন ৰক্ষাৰ বাবে দিন-ৰাতিয়ে কাম কৰি আছে, প্ৰথমতে মই বিচাৰো যে আপুনি জনসাধাৰণক দ্বিতীয় ঢৌৰ বিষয়ে কওক। চিকিৎসীয়ভাৱে ই কেনেকৈ পৃথক আৰু কি কি সাৱধানতাৰ প্ৰয়োজন।

ডাঃ শশাংক- ধন্যবাদ মহোদয়, এইটো দ্বিতীয়টো ঢৌ। ই দ্ৰুতগতিত আহিছে, সেয়েহে ভাইৰাছটোৱে প্ৰথমটো ঢৌৰ তুলনাত দ্ৰুত গতিত কাম কৰি আছে, কিন্তু ভাল কথাটো হ'ল তাতকৈ ক্ষীপ্ৰতাৰে পুনৰুদ্ধাৰ হৈছে আৰু মৃত্যুৰ হাৰো যথেষ্ট কম। দুটা বা তিনিটা পাৰ্থক্য আছে, প্ৰথমতে, ই যুৱচাম আৰু শিশুসকলৰ মাজত সামান্য দৃশ্যমান হয়। ইয়াৰ লক্ষণবোৰ পূৰ্বৰ দৰে উশাহ লোৱা, শুকান কাহ, জ্বৰ, আৰু ইয়াৰ সৈতে অলপ গোন্ধ, সোৱাদ নাইকিয়া হোৱা। আৰু মানুহবোৰ অলপ ভয় খাইছে। ভয় কৰাৰ কোনো প্ৰয়োজন নাই। ৮০-৯০ শতাংশ লোকৰ কোনো লক্ষণ প্ৰদৰ্শন নহয়, আৰু মিউটেচন-মিউটেচনৰ বিষয়ে যি কোৱা হৈছে, তাতো ভয় খোৱাৰ প্ৰয়োজন নাই৷ আমি কাপোৰ সলনি কৰাৰ দৰে ভাইৰাছে ইয়াৰ ৰং সলনি কৰি আছে আৰু সেয়েহে ভয় কৰিব লগীয়া একো নাই আৰু আমি এই ঢৌবোৰো অতিক্ৰম কৰিম। ঢৌ আহে আৰু যায় আৰু এই ভাইৰাছবোৰো আহি থাকে আৰু গৈ থাকে, সেয়েহে ভিন্ন ভিন্ন লক্ষণে দেখা দিছে আৰু চিকিৎসাগতভাৱে আমি সাৱধান হোৱা উচিত। ১৪ ৰ পৰা ২১ দিনৰ ক’ভিড সময় তালিকা আছে য'ত আমি চিকিৎসকৰ পৰামৰ্শ লোৱা উচিত।

মোদী জী- ডাঃ শশাংক, আপুনি উল্লেখ কৰা বিশ্লেষণ মোৰ বাবেও আকৰ্ষণীয়, মই বহুতো চিঠি পাইছো, য'ত চিকিৎসাৰ বিষয়ে মানুহৰ বহুতো আশংকা আছে, কিছুমান ঔষধৰ যথেষ্ট চাহিদা বাঢ়িছে, সেয়েহে মই বিচাৰো যে আপুনি জনসাধাৰণক ক’ভিডৰ চিকিৎসাৰ বিষয়ে কওক।

ডাঃ শশাংক- হয়, মহাশয়, নিদানিক চিকিৎসা লোকসকলে অতি পলমকৈ আৰম্ভ কৰে আৰু স্বয়ংক্ৰিয়ভাৱে ৰোগ ভাল হ’ব, এই বুলি বিশ্বাস কৰে, ম’বাইলত কি আহে তাৰ ওপৰত বিশ্বাস ৰাখে, আৰু যদি আপুনি চৰকাৰী তথ্য অনুসৰণ কৰে, তেন্তে কষ্টৰ সন্মুখীন হ’বলগীয়া নহয়। ক’ভিডৰ চিকিৎসাৰ যি প্ৰট’ক’ল আছে তাত তিনি প্ৰকাৰৰ তীব্ৰতা আছে, পাতল বা মৃদু ক’ভিডৰ বাবে ক্লিনিক চিকিৎসা প্ৰটোকল, মজলীয়া বা মডাৰেট ক’ভিড আৰু তীব্ৰ ক’ভিড যাক গুৰুতৰ ক’ভিড বুলি কোৱা হয়। সেয়েহে পাতল ক’ভিডৰ বাবে, আমি অক্সিজেন নিৰীক্ষণ কৰো, নাড়ী নিৰীক্ষণ কৰো, জ্বৰ নিৰীক্ষণ কৰো, কেতিয়াবা পেৰাচিটামলৰ দৰে ঔষধ ব্যৱহাৰ কৰো আৰু নিজৰ চিকিৎসকৰ সৈতে যোগাযোগ কৰো৷ যি মজলীয়া ক’ভিড, মডাৰেট ক’ভিড বা শক্তিশালী ক’ভিড আছে, তেন্তে চিকিৎসকৰ সৈতে যোগাযোগ কৰাটো অতি গুৰুত্বপূৰ্ণ। সঠিক আৰু সুলভ ঔষধ উপলব্ধ আছে। ইয়াত ষ্টেৰইড যি আছে ই জীৱন ৰক্ষা কৰিব পাৰে, ইনহেলাৰ দিব পাৰো, টেবলেট আমি দিব পাৰো, আৰু একে সময়তে আমি জীৱনদায়িনী অক্সিজেন দিব পাৰো আৰু ইয়াৰ বাবে সৰু সৰু চিকিৎসা আছে কিন্তু প্ৰায়ে যি ঘটি আছে সেয়া হ'ল ৰেমডেচিভিৰ নামৰ এটা নতুন পৰীক্ষামূলক ঔষধ উপলব্ধ হৈছে। এই ঔষধৰ গুৰুত্বপূৰ্ণ কথাটো হ'ল চিকিৎসালয়ত দুই তিনি দিন কমকৈ থাকিব পাৰি আৰু নিদানিক পুনৰুদ্ধাৰত সহায়ো কৰে। এই ঔষধটোৱেও কেতিয়া কাম কৰে, যেতিয়া ইয়াক প্ৰথম ৯-১০ দিনত দিয়া হয় আৰু ইয়াক পাঁচ দিনলৈ দিয়া হয়, এই যে মানুহবোৰে ৰেমডেচিভিৰৰ পিছে পিছে দৌৰি আছে, সেয়া কৰা আৱশ্যক নহয়। এয়া হৈছে অলপ ঔষধৰ কাম, যাক অক্সিজেনৰ প্ৰয়োজন, প্ৰাণ বায়ু অক্সিজেনৰ প্ৰয়োজন, যাক চিকিৎসালয়ত ভৰ্তি কৰোৱা হয় আৰু চিকিৎসকে ক'লেহে গ্ৰহণ কৰিব লাগে। গতিকে সকলো মানুহে ইয়াক বুজি পোৱাটো অতি গুৰুত্বপূৰ্ণ। আমি প্ৰাণায়াম কৰিম, আমাৰ শৰীৰৰ হাঁওফাঁও অলপ সম্প্ৰসাৰিত কৰিম আৰু আমাৰ তেজ পাতল কৰা বেজী যাক আমি হেপাৰিন বুলি কও, এই সৰু সৰু ঔষধ দিলে ৯৮% লোক যদি আৰোগ্য হয় তেন্তে ইতিবাচক হৈ থকাটো অতি গুৰুত্বপূৰ্ণ কথা। চিকিৎসকৰ পৰামৰ্শৰ সৈতে চিকিৎসা প্ৰট’কল গ্ৰহণ কৰাটো অতি গুৰুত্বপূৰ্ণ। আৰু এই ব্যয়বহুল ঔষধৰ পিছত দৌৰাৰ কোনো প্ৰয়োজন নাই, মহোদয়, আমাৰ ওচৰত ভাল চিকিৎসা আছে, প্ৰাণবায়ু অক্সিজেন আছে, ভেণ্টিলেটৰৰ সুবিধাও আছে, সকলো আছে, মহোদয়, আৰু, কেতিয়াবা যদি এই ঔষধ উপলব্ধ হয় তেন্তে ইয়াক উপযুক্ত লোকসকলক দিব লাগে৷ যথেষ্ট বিভ্ৰান্তিৰ সৃষ্টি হৈছে আৰু সেয়েহে, মই এই স্পষ্টীকৰণ দিব বিচাৰো যে মহোদয়, আমাৰ ওচৰত বিশ্বৰ সৰ্বশ্ৰেষ্ঠ চিকিৎসা উপলব্ধ আছে। আপুনি দেখিব যে ভাৰতত পুনৰুদ্ধাৰৰ হাৰ সৰ্বশ্ৰেষ্ঠ৷ যদি আপুনি ইউৰোপৰ সৈতে তুলনা কৰে, আমেৰিকাই একেই চিকিৎসা প্ৰট’কলৰ দ্বাৰা ৰোগীসকলক চিকিৎসা কৰি আছে৷

মোদী জী- ডাঃ শশাংক আপোনাক বহুত ধন্যবাদ। ডাঃ শশাংকই আমাক দিয়া তথ্য অতি গুৰুত্বপূৰ্ণ আৰু এয়া আমাৰ সকলোৰে বাবে উপযোগী হ'ব।

বন্ধুসকল, মই আপোনালোক সকলোকে অনুৰোধ জনাইছো, যদি আপোনাক কোনো তথ্যৰ প্ৰয়োজন হয়, আন কোনো আশংকা আচে তেন্তে সঠিক উৎসৰ পৰা তথ্য প্ৰাপ্ত কৰক। আপোনাৰ পাৰিবাৰিক চিকিৎসক, ওচৰৰ চিকিৎসকৰ সৈতে ফোনযোগে যোগাযোগ কৰক আৰু তেওঁলোকৰ পৰামৰ্শ লওক। মই দেখিছো যে আমাৰ বহুতো চিকিৎসকে নিজেই এই দায়িত্ব গ্ৰহণ কৰি আছে। বহুতো চিকিৎসকে সামাজিক মাধ্যমৰ জৰিয়তে লোকসকলক অৱগত কৰি আছে। ফোনত, হোৱাটছএপৰ জৰিয়তেও পৰামৰ্শ দি আছে। বহুতো চিকিৎসালয়ৰ ৱেবছাইট আছে য'ত তথ্যও উপলব্ধ আৰু আপুনি তাত চিকিৎসকৰ পৰামৰ্শও ল'ব পাৰে। এইটো অতি প্ৰশংসনীয় কাম হৈছে।

মোৰ সৈতে শ্ৰীনগৰৰ ডাঃ নাভিদ নাজিৰ শ্বাহে যোগদান কৰিছে। ডাঃ নাভিদ শ্ৰীনগৰৰ এখন চৰকাৰী চিকিৎসা মহাবিদ্যালয়ৰ অধ্যাপক। নাভিদজীয়ে তেওঁৰ তত্বাৱধানত বহুতো ক’ৰোনা ৰোগীক চিকিৎসা কৰিছে আৰু ডাঃ নাভিদে এই পবিত্ৰ ৰমজান মাহতো তেওঁৰ কাম কৰি আছে আৰু তেওঁ আমাৰ সৈতে কথা পাতিবলৈ আহৰি উলিয়াইছে। তেওঁৰ সৈতে কথা পাতো আহক।

মোদী জী- নাভিদজী নমস্কাৰ৷

ডাঃ নাভিদ- নমস্কাৰ মহোদয়৷

মোদী জী- ড০ নাভিদ 'মন কী বাত'ৰ আমাৰ শ্ৰোতাসকলে এই কঠিন সময়ত আতংক ব্যৱস্থাপনাৰ প্ৰশ্ন উত্থাপন কৰিছে। আপুনি আপোনাৰ অভিজ্ঞতাৰ পৰা তেওঁলোকক কেনেদৰে সঁহাৰি দিব?

ডাঃ নাভিদ- চাওক, যেতিয়া ক’ৰোনা আৰম্ভ হৈছিল, কাশ্মীৰত কোভিড চিকিৎসালয় হিচাপে নিৰ্ধাৰিত প্ৰথম চিকিৎসালয়খন আমাৰ মহানগৰ চিকিৎসালয় আছিল। সেই সময়ত এক ভয়ৰ পৰিৱেশ আছিল৷ মানুহে ভাবিছিল যে ক’ৰোনা সংক্ৰমণ হ’লে ইয়াক মৃত্যুদণ্ড বুলি গণ্য কৰা হ'ব আৰু এনে পৰিস্থিতিত, ডাঃ চাহিবান অথবা পেৰা-মেডিকেল কৰ্মচাৰীসকল যিসকলে আমাৰ চিকিৎসালয়ত কাম কৰিছিল, তেওঁলোকৰ মাজত ভয় আছিল যে আমি এই ৰোগীসকলৰ কিদৰে সন্মুখীন হ'ম। আমাৰ সংক্ৰমণ নহয়তো? কিন্তু আমি এইটোও দেখিছিলো যে যদি আমি সম্পূৰ্ণৰূপে পৰিধান কৰা সুৰক্ষামূলক গীয়েৰৰ পদক্ষেপসমূহ কাৰ্যকৰী কৰো তেতিয়া আমি সুৰক্ষিত থাকিব পাৰো আৰু আমাৰ বাকী কৰ্মচাৰীসকলেও সুৰক্ষিত থাকিব পাৰে আৰু লগতে আমি দেখিছিলো যে কিছুমান ৰোগী এনে আছিল যি লক্ষণহীন আছিল, যাৰ ৰোগৰ কোনো লক্ষণ নাছিল। আমি দেখিছোযে ঔষধ গ্ৰহণ নকৰা ৯০-৯৫% ৰো অধিক ৰোগীও আৰোগ্য হয়, সেয়েহে বিগত সময়ৰ পৰা ক’ৰোনাৰ ভয় যথেষ্ট হ্ৰাস পাইছে। আজি আমি এইবাৰৰ ক’ৰোনাৰ দ্বিতীয় ঢৌতো আতংকিত হ'ব নালাগে৷ যদি আমি এছ.অ’.পিৰ সুৰক্ষামূলক ব্যৱস্থা ৰূপায়ণ কৰো, যেনে মাস্ক পৰিধাৰ কৰা, হেণ্ড চেনিটাইজাৰ ব্যৱহাৰ কৰা, শাৰীৰিক দূৰত্ব বিধি বা সামাজিক সমাৱেশ পৰিহাৰ কৰা, তেতিয়া আমি আমাৰ দৈনন্দিন কামবোৰো কৰিব পাৰিম আৰু এই ৰোগৰ পৰাও সুৰক্ষা লাভ কৰিব পাৰিম।

মোদী জী- ডাঃ নাভিদ, প্ৰতিষেধকক লৈ লোকসকলৰ বহুতো প্ৰশ্ন আছে, যেনে কিমান সুৰক্ষা প্ৰতিষেধকে প্ৰদান কৰিব পাৰে, প্ৰতিষেধক গ্ৰহণৰ পিছত তেওঁলোক কিমান আত্মবিশ্বাসী হ'ব পাৰে? আপুনি মোক ইয়াৰ বিষয়ে জনালে শ্ৰোতাসকল বহু উপকৃত হ'ব।

ডাঃ নাভিদ- যিহেতু ক’ৰোনাৰ সংক্ৰমণ পোহৰলৈ আহিছে, আমাৰ ওচৰত ক’ভিড ১৯-ৰ বাবে কোনো কাৰ্যকৰী চিকিৎসা উপলব্ধ নাই, আমি এই ৰোগৰ সৈতে মাত্ৰ দুটা বস্তুৰে যুঁজিব পাৰো, এটা সুৰক্ষামূলক পদক্ষেপ আৰু আমি ইতিমধ্যে কৈ আহিছো যে যদি এটা কাৰ্যকৰী প্ৰতিষেধক আমাৰ ওচৰলৈ আহে, তেন্তে ই আমাক এই ৰোগৰ পৰা আৰোগ্য কৰিব পাৰে৷ এই সময়ত আমাৰ দেশত দুটা ভেকছিন উপলব্ধ আছে। কভাক্সিন আৰু কভিশ্বিল্ড যাক ইয়াত নিৰ্মাণ কৰা হৈছে। আৰু কোম্পানীবোৰেও নিজৰ যিবোৰ পৰীক্ষণ কৰিছে, তাতো দেখা গৈছে যে কাৰ্যকাৰিতা ৬০% তকৈ অধিক আৰু যদি আমি জম্মু আৰু কাশ্মীৰৰ কথা কও, এতিয়ালৈকে ১৫ ৰ পৰা ১৬ লাখ লোকে আমাৰ কেন্দ্ৰীয়শাসিত অঞ্চলত এই প্ৰতিষেধক লাভ কৰিছে। হয়, ছ'চিয়েল মিডিয়াত ইয়াক লৈ বহুতো ভুল ধাৰণা উপলব্ধ হৈছে যে এইবোৰৰ পাৰ্শ্বক্ৰিয়া আছে৷ এতিয়ালৈকে আমাৰ সকলো প্ৰতিষেধকত কোনো পাৰ্শ্বক্ৰিয়া পোৱা হোৱা নাই। কেৱল সেইটোৱেই সকলো প্ৰতিষেধকৰ সৈতে হয়, কাৰোবাৰ জ্বৰ, গোটেই শৰীৰত বিষ বা বেজী দিয়া স্থানত বিষ হয়, আমি প্ৰতিটো ৰোগীৰ পাৰ্শ্বক্ৰিয়াত দেখিছোঁ আমি কোনো স্থুল প্ৰভাৱ দেখা নাই, আমি কোনো বিৰূপ প্ৰভাৱ দেখা নাই। আৰু অৱশ্যে, লোকসকলৰ মাজত আন এটা আশংকাও আছিল যে টীকাকৰণৰ পিছত কিছুমান লোকে অৰ্থাৎ টীকাকৰণৰ পিছতো পজিটিভ হৈছে, কোম্পানীবোৰৰ পৰা নিৰ্দেশনা প্ৰকাশ কৰা হৈছে যে যদি কাৰোবাক টীকাকৰণ কৰা হয় তাৰ পিছতো পজিটিভ হ’ব পাৰে। তাৰ পিছত সংক্ৰমণ হ'ব পাৰে, ই পজিটিভ হ'ব পাৰে। কিন্তু ৰোগৰ যি তীব্ৰতা সেয়া ৰোগীসকলৰ দেহত দেখা পোৱা নাযায়৷ সেয়ে ইয়াৰ ক্ষেত্ৰত থকা ভুল ধাৰণাসমূহ আঁতৰাব লাগে আৰু ১ মে’ৰ পৰা সমগ্ৰ দেশতে ১৮ বছৰৰ ঊৰ্ধৰ লোকসকলৰ টীকাকৰণৰ কাম আৰম্ভ হ’ব, তেওঁলোককো আপীল কৰিছো, আহক আপোনালোক আৰু প্ৰতিষেধক গ্ৰহণ কৰক৷ ইয়াৰ দ্বাৰা নিজেও সুৰক্ষিত হৈ থকাৰ লগতে আমাৰ সমাজখনো ক’ভিড-১৯ৰ আক্ৰমণৰ পৰা সুৰক্ষিত হৈ পৰিব৷

মোদী জী- ডাঃ নাভিদ, আপোনাক বহু ধন্যবাদ৷ ৰমজানৰ পবিত্ৰ মাহ উপলক্ষেও আপোনালৈ অলেখ শুভকামনা থাকিল৷

ডাঃ নাভিদ- অশেষ ধন্যবাদ৷

মোদী জী- বন্ধুসকল, যিহেতু ক’ৰোনাৰ এই সংকটৰ সময়ছোৱাত প্ৰতিষেধকৰ গুৰুত্ব সকলোৱে জানে, মই আপোনালোকক প্ৰতিষেধকৰ বিষয়ে কোনো উৰাবাতৰিত ভোল নাযাবলৈ অনুৰোধ জনাইছো। আপোনালোকে এইটোও জানিব যে ভাৰত চৰকাৰে সকলো ৰাজ্য চৰকাৰলৈ বিনামূলীয়া প্ৰতিষেধক প্ৰেৰণ কৰিছে যিবোৰ ৪৫ বছৰৰ অধিক বয়সৰ লোকসকলে গ্ৰহণ কৰিব পাৰে। এতিয়া, ১ মে'ৰ পৰা, দেশৰ ১৮ বছৰৰ অধিক বয়সৰ সকলোৰে বাবে প্ৰতিষেধক উপলব্ধ হ'ব। এতিয়া কৰ্পোৰেট খণ্ড, দেশৰ কোম্পানীবোৰেও তেওঁলোকৰ কৰ্মচাৰীসকলক প্ৰতিষেধক দিয়াৰ অভিযানত অংশগ্ৰহণ কৰিবলৈ সক্ষম হ'ব। মই এইটোও ক'ব লাগিব যে ভাৰত চৰকাৰে চলাই থকা বিনামূলীয়া প্ৰতিষেধক প্ৰদান কাৰ্যসূচী অব্যাহত থাকিব। মই ৰাজ্যসমূহক ভাৰত চৰকাৰৰ এই বিনামূলীয়া প্ৰতিষেধক অভিযানৰ লাভালাভ যিমান পাৰি সিমান লোকক তেওঁলোকৰ ৰাজ্যত প্ৰদান কৰিবলৈও অনুৰোধ জনাইছো।

 

বন্ধুসকল, আমি সকলোৱে জানো যে আমাৰ বাবে মানসিকভাৱে নিজৰ, আমাৰ পৰিয়ালৰ যত্ন লোৱাটো কিমান কঠিন, কিন্তু আমাৰ চিকিৎসালয়ৰ নাৰ্চিং কৰ্মচাৰীসকলে একেটা কাম একেলগে বহুতো ৰোগীৰ বাবে কৰিব লাগিব। সেৱাৰ এই অনুভূতি আমাৰ সমাজৰ এক ডাঙৰ শক্তি। কেৱল নাৰ্চেহে নাৰ্চিং কৰ্মচাৰীৰ দ্বাৰা কৰা সেৱা আৰু কঠোৰ পৰিশ্ৰমৰ বিষয়ে ভালদৰে ক'ব পাৰে। সেইবাবে মই ৰায়পুৰৰ ড০ বি আৰ আম্বেদকাৰৰ মেডিকেল কলেজ চিকিৎসালয়ত সেৱা আগবঢ়োৱা ভগ্নী ভাৱনা ধ্ৰুৱজীক 'মন কী বাত'লৈ আমন্ত্ৰণ জনাইছো, তেওঁ বহুতো ক’ৰোনা ৰোগীৰ যত্ন লৈ আছে। আহক! তেওঁৰ সৈতে কথা পাতো –

মোদী জী- নমস্কাৰ ভাৱনা জী!

ভাৱনা- আদৰণীয় প্ৰধানমন্ত্ৰী মহোদয়, নমস্কাৰ!

মোদী জী- ভাৱনা জী…

ভাৱনা- হয় মহোদয়৷

মোদী জী- ‘মন কী বাত’ শুনি থকা শ্ৰোতাসকলক আপুনি জনাওক যে আপোনাৰ পৰিয়ালত আপোনাৰ ইমান দায়িত্ব, ইমান কাম, তথাপিও আপুনি ক’ৰোনা ৰোগীসকলৰ সৈতে কাম কৰি আছে৷ ক’ৰোনাৰ ৰোগীসকলৰ সৈতে আপোনাৰ যি অভিজ্ঞতা হৈছে সেয়া দেশবাসীয়ে নিশ্চয় শুনিব বিচাৰিব আৰু ছিষ্টাৰ, নাৰ্চসকল ৰোগীৰ নিকটতম হয় আৰু দীৰ্ঘসময়লৈ সম্পৰ্ক থাকে৷ প্ৰতিটো কথা বিশদভাৱে তেওঁ বুজাই দিব পাৰে৷ কওক৷

ভাৱনা- হয়, মহোদয়৷ ক’ভিডৰ সৈতে মোৰ মুঠ অভিজ্ঞতা হৈছে ২ মাহ। আমি ১৪ দিনৰ কৰ্তব্য কৰোঁ আৰু ১৪ দিনৰ পিছত আমাক বিশ্ৰাম দিয়া হয়। তাৰ পিছত, ২ মাহৰ পিছত, আমাৰ এই ক’ভিড কৰ্তব্যবোৰৰ পুনৰাবৃত্তি কৰা হয় মহোদয়। যেতিয়া মই প্ৰথম ক’ভিড কৰ্তব্যত যোগদান কৰিছিলো, মই প্ৰথমে মোৰ পৰিয়ালৰ সদস্যসকলক এই ক’ভিড কৰ্তব্যৰ বিষয়ে জনাইছিলো। এয়া মে’ মাহৰ কথা আছিল আৰু মই কোৱাৰ লগে লগে সকলোৱে ভয় খাইছিল, মোক ভয় খাইছিল, কৈছিল যে ভালদৰে কাম কৰিবা, এক আৱেগিক পৰিস্থিতিৰ সৃষ্টি হৈছিল মহোদয়। ইয়াৰ মাজতে, যেতিয়া মোৰ ছোৱালীয়ে মোক সুধিছিল, মা আপুনি ক’ভিড ডিউটিলৈ যাব, সেই সময়ত মোৰ বাবে এয়া যথেষ্ট আৱেগিক মুহূৰ্ত আছিল, কিন্তু, যেতিয়া মই ক’ভিড ৰোগীৰ ওচৰলৈ গৈছিলো, মই ঘৰত এটা দায়িত্ব এৰি আহিছিলো আৰু যেতিয়া মই ক’ভিড ৰোগীসকলৰ কাষলৈ গ’লো, তেওঁলোক বহু বেছি উদ্বিগ্ন হৈ আছিল, সকলো ৰোগী ক’ভিডৰ নামত ইমান ভয় খাইছিল যে তেওঁলোকে বুজি পোৱা নাছিল যে তেওঁলোকৰ কি হৈছে, পৰৱৰ্তী সময়ত তেওঁলোকে কি কৰিব। আমি তেওঁলোকৰ ভয় দূৰ কৰিবলৈ এটা ভাল স্বাস্থ্যকৰ পৰিৱেশ দিছিলো মহোদয়। যেতিয়া আমাক এই ক’ভিড কৰ্তব্য কৰিবলৈ কোৱা হৈছিল, প্ৰথমতে, আমাক পিপিই কিট পিন্ধিবলৈ কোৱা হৈছিল, যিটো অতি কঠিন৷ পিপিই কিট পিন্ধি কৰ্তব্য সমাপন কৰাটো অতিশয় কঠিন। মহাশয়, এইটো আমাৰ বাবে বৰ কঠিন আছিল, মই ৱাৰ্ড, আইচিইউ, আইচ’লেচন সকলোতে ২ মাহৰ কৰ্তব্যত সকলো ঠাইতে ১৪-১৪ দিন কৰ্তব্য পালন কৰিছিলো৷

মোদী- অৰ্থাৎ, মুঠ আপুনি এবছৰ ধৰি এনেদৰে কাম কৰি আহিছে৷

ভাৱনা- হয় মহোদয়, মই তালৈ যোৱাৰ আগতে মই নাজানিছিলো মোৰ সহকৰ্মীসকল কোন। আমি দলৰ সদস্যৰ দৰে কাম কৰিছিলো মহোদয়৷ আমি তেওঁলোকৰ যিকোনো সমস্যা ভাগ বতৰা কৰো, আমি ধৈৰ্য্যশীল হৈ তেওঁলোকৰ দুঃশ্চিন্তা আঁতৰ কৰো মহোদয়, বহুতো লোক আছিল যিয়ে ক’ভিডৰ নামটো শুনিয়েই ভয় খাইছিল। সেই সকলোবোৰ লক্ষণ তেওঁলোকৰ দেখা দিছিল, যেতিয়া আমি সেইবোৰ ইতিহাস তৈয়াৰ কৰিছিলো, কিন্তু ভয়ৰ বাবে, তেওঁলোকে পৰীক্ষা কৰোৱাব পৰা নাছিল, সেয়েহে আমি তেওঁলোকক বুজাই দিছিলো, আৰু মহোদয়, যেতিয়া তীব্ৰতা বাঢ়ি আহিছিল, হাঁওফাঁও সংক্ৰমিত হোৱাত আইচিইউৰ প্ৰয়োজন হৈছিল৷ লগতে তেওঁলোকৰ সম্পূৰ্ণ পৰিয়াল আহিছিল। গতিকে আমি এনেকুৱা ১-২টা ঘটনা দেখিছিলো মহোদয় আৰু এনে নহয়, আমি প্ৰতিটো বয়সৰ গোটৰ সৈতে কাম কৰিছিলো মহোদয়। তাত সৰু ল'ৰা-ছোৱালী, মহিলা, পুৰুষ, বৃদ্ধ, সকলো ধৰণৰ ৰোগী আছিল। যেতিয়া আমি তেওঁলোকৰ সকলোৰে সৈতে কথা পাতিছিলো, সকলোৱে কৈছিল যে আমি ভয়ত আহিব পৰা নাই, সকলোৰে পৰা সেইটোৱেই আমি উত্তৰ পাইছিলো। গতিকে আমি তেওঁলোকক বুজালো যে ভয় একো নহয়। আপোনালোকে আমাক সমৰ্থন কৰক, আমি আপোনালোকক সমৰ্থন কৰিম। আপুনি প্ৰট’কল অনুসৰণ কৰক, কেৱল আমি তেওঁলোকৰ সৈতে এইখিনি কৰিব পাৰিলো মহোদয়।

মোদী জী- ভাৱনা জী, মই আপোনাৰ সৈতে কথা পাতি খুব ভাল পালো, আপুনি খুব ভাল তথ্য দিলে। আপুনিআপোনাৰ নিজৰ অভিজ্ঞতাৰ পৰা কৈছে, নিশ্চিতভাৱে দেশবাসীৰ বাবে ই ইতিবাচকত বাৰ্তা হ'ব। ভাৱনা জী, আপোনাক বহুত বহুত ধন্যবাদ!

ভাৱনা- ধন্যবাদ মহোদয়, জয় হিন্দ মহোদয়৷

মোদী জী- জয় হিন্দ!

ভাৱনা জী আৰু নাৰ্চিং ষ্টাফৰ দৰে হাজাৰ-লক্ষাধিক ভাই-ভনীয়ে তেওঁলোকৰ কৰ্তব্য ভালদৰে কৰি আছে। এইটো আমাৰ সকলোৰে বাবে এক ডাঙৰ অনুপ্ৰেৰণা। আপোনালোকে আপোনালোকৰ স্বাস্থ্যৰ প্ৰতিও যথেষ্ট মনোযোগ দিয়া উচিত। নিজৰ পৰিয়ালৰো যত্ন লওক।

বন্ধুসকল, আমাৰ সৈতে বৰ্তমান বেংগালুৰুৰ চিষ্টাৰ সুৰেখা জী জড়িত হৈছে। সুৰেখা জী কে.চি সাধাৰণ চিকিৎসালয়ৰ জ্যেষ্ঠ নাৰ্চিং বিষয়া। আহক! তেওঁলোকৰ অভিজ্ঞতাৰ বিষয়ে জানো –

মোদী জী- নমস্কাৰ সুৰেখা জী!

সুৰেখা- আমাৰ দেশ প্ৰধানমন্ত্ৰীৰ সৈতে কথা পাতিবলৈ পাই মই গৌৰৱ আৰু সন্মানিত অনুভৱ কৰিছো মহোদয়৷

মোদী জী- সুৰেখা জী, আপুনি সকলো সহকৰ্মী নাৰ্ছ আৰু চিকিৎসালয়ৰ কৰ্মচাৰীৰ সৈতে উৎকৃষ্ট কাম কৰি আছে। ভাৰতবাসী আপোনালোক সকলোৰে প্ৰতি কৃতজ্ঞ। ক’ভিড-১৯ৰ বিৰুদ্ধে এই যুঁজত নাগৰিকসকলৰ বাবে আপোনাৰ বাৰ্তা কি।

সুৰেখা- হয় মহোদয়। এজন দায়িত্বশীল নাগৰিক হিচাপে মই সঁচাকৈয়ে ক'ব বিচাৰো যে অনুগ্ৰহ কৰি আপোনাৰ চুবুৰীয়াসকলৰ প্ৰতি নম্ৰ হওক আৰু আগতীয়া পৰীক্ষা আৰু সঠিক ট্ৰেকিঙে আমাক মৃত্যুৰ হাৰ হ্ৰাস কৰাত সহায় কৰে আৰু তাৰোপৰি অনুগ্ৰহ কৰি যদি আপুনি কোনো লক্ষণ দেখা পাইছে তেন্তে নিজকে আচুতীয়াকৈ ৰাখক আৰু ওচৰৰ চিকিৎসকৰ পৰামৰ্শ লওক তথা যিমান সম্ভৱ সিমান সোনকালে চিকিৎসা কৰাওক। সেয়েহে, সমাজত এই ৰোগটোৰ বিষয়ে সজাগতা আনিব লাগিব আৰু ইতিবাচক হ'ব লাগিব, আতংকিত নহ'ব আৰু চাপত নাথাকিব। ই ৰোগীৰ অৱস্থা বেয়া কৰে। আমি আমাৰ চৰকাৰৰ ওচৰত এটা প্ৰতিষেধক উপলব্ধ হোৱাৰ বাবে গৌৰৱান্বিত আৰু মই ইতিমধ্যে মোৰ নিজৰ অভিজ্ঞতাৰ সৈকে প্ৰতিষেধক গ্ৰহণ কৰিছো, মই ভাৰতৰ নাগৰিকসকলক ক'ব বিচাৰিছো যে কোনো প্ৰতিষেধকেই লগে লগে ১০০% সুৰক্ষা প্ৰদান নকৰে। ৰোগ প্ৰতিৰোধ ক্ষমতা গঢ়িবলৈ সময় লাগে। অনুগ্ৰহ কৰি টীকাকৰণ কৰিবলৈ ভয় নকৰিব। অনুগ্ৰহ কৰি নিজকে টীকাকৰণ কৰক; এক নিম্নতম পাৰ্শ্বক্ৰিয়াই দেখা দিব পাৰে আৰু মই এই বাৰ্তা প্ৰদান কৰিব বিচাৰো যে, ঘৰত থাকক, সুস্থ হৈ থাকক, অসুস্থ লোকসকলৰ সংস্পৰ্শ পৰিহাৰ কৰক আৰু অপ্ৰয়োজনীয়ভাৱে নাক, চকু আৰু মুখ স্পৰ্শ কৰা পৰিহাৰ কৰক। অনুগ্ৰহ কৰি শাৰীৰিকভাৱে দূৰত্ব ৰখা, মাস্ক ভালদৰে পিন্ধা, নিয়মীয়াকৈ হাত ধোৱা আৰু আপুনি ঘৰতে অনুশীলন কৰিব পৰা ঘৰুৱা প্ৰতিকাৰৰ অভ্যাস কৰক। অনুগ্ৰহ কৰি আয়ুৰ্বেদিক কাঢ়া খাওক, বাষ্প উশাহত লওক আৰু প্ৰতিদিনে মুখ কুলিকুলি কৰক আৰু উশাহ-নিশাহৰ ব্যায়ামো কৰিব পাৰে। আৰু এটা কথা, অনুগ্ৰহ কৰি ফ্ৰণ্টলাইন কৰ্মী আৰু পেছাদাৰীসকলৰ প্ৰতি সহানুভূতি প্ৰদৰ্শন কৰক। আমাক আপোনাৰ সমৰ্থন আৰু সহযোগিতাৰ প্ৰয়োজন। আমি একেলগে যুঁজিম। আমি মহামাৰীৰ মাজেৰে পাৰ হ'ম। এইটোৱেই মোৰ জনসাধাৰণলৈ বাৰ্তা মহোদয়।

মোদী জী- ধন্যবাদ সুৰেখা জী৷

সুৰেখা- ধন্যবাদ মহোদয়৷

সুৰেখাজী, সঁচাকৈয়ে, আপুনি অতি কঠিন সময়ত নেতৃত্ব বহন কৰি আছে। আপুনি নিজৰো যত্ন লওক! আপোনাৰ পৰিয়াললৈও মোৰ শুভেচ্ছা থাকিল। মই দেশৰ জনসাধাৰণক সুৰেখাজীয়ে তেওঁৰ অভিজ্ঞতাৰ পৰা জনোৱা অনুভূতিবোৰ প্ৰকাশ কৰিবলৈও অনুৰোধ কৰিম। ক’ৰোনাৰ বিৰুদ্ধে যুঁজিবলৈ ইতিবাচক মনোভাৱ অতি গুৰুত্বপূৰ্ণ আৰু দেশবাসীয়ে ইয়াক বজাই ৰাখিব লাগিব।

বন্ধুবৰ্গ, চিকিৎসক আৰু নাৰ্চিং কৰ্মচাৰীৰ লগতে লেব-টেকনিচিয়ান আৰু এম্বুলেন্স চালকৰ দৰে ফ্ৰণ্টলাইন কৰ্মীসকলে এই মুহূৰ্তত ঈশ্বৰৰ দৰে কাম কৰি আছে। যেতিয়া এম্বুলেন্স এজন ৰোগীৰ ওচৰলৈ যায়, তেওঁলোকে এম্বুলেন্স চালকক দেৱদূতৰ দৰে অনুভৱ কৰে। দেশবাসীয়ে এই সকলোবোৰৰ সেৱা, তেওঁলোকৰ অভিজ্ঞতাৰ বিষয়ে জানিব লাগিব। মোৰ লগত এনে এজন ভদ্ৰলোক আছে, শ্ৰীযুত প্ৰেম বাৰ্মাজী, যি এজন এম্বুলেন্স চালক, তেওঁৰ নাম অনুসৰি। প্ৰেম বাৰ্মাজীয়ে তেওঁৰ কাম, তেওঁৰ কৰ্তব্য, সকলো প্ৰেম আৰু নিষ্ঠাৰে কৰে। আহক! তেওঁৰ সৈতে কথা পাতো –

মোদী জী- নমস্কাৰ প্ৰেম জী৷

প্ৰেম জী- নমস্কাৰ মহোদয়৷

মোদী জী- ভাই! প্ৰেম৷

প্ৰেম জী- হয় মহোদয়৷

মোদী জী- আপুনি নিজৰ কামৰ বিষয়ে৷

প্ৰেম জী- হয় মহোদয়৷

মোদী জী- সামান্য বিশদভাৱে কওক৷ আপোনাৰ অভিজ্ঞতাৰ বিষয়ে কওক৷

প্ৰেম জী- মই কেটছ এম্বুলেন্সত চালকৰ পদত আছো আৰু কণ্ট্ৰ’লত আমালৈ এটা টেবত কল আহে। আমি 102 ৰ পৰা কলৰ ৰোগীৰ কাষলৈ যাও। আমি দুবছৰ ধৰি এই কাম অব্যাহত ৰাখিছো। নিজৰ কিট পিন্ধি, নিজৰ হাতমোজা পিন্ধি, মাস্ক পিন্ধি, ৰোগীয়ে য'ত তেওঁক লৈ যাবলৈ কয়, যিকোনো চিকিৎসালয়তে, আমি যিমান সম্ভৱ সিমান সোনকালে তেওঁলোকক গন্তব্যস্থানলৈ প্ৰেৰণ কৰো।

মোদী জী- আপুনিটো প্ৰতিষেধকৰ দুয়োটা পালিয়েই গ্ৰহণ কৰিছে৷

প্ৰেম জী- নিশ্চয় মহোদয়৷

মোদী জী- আনসকল লোকে যি প্ৰতিষেধক গ্ৰহণ কৰিছে৷ তেওঁলোকলৈ আপোনাৰ বাৰ্তা কি?

প্ৰেম জী- নিশ্চিতভাৱে মহোদয়। সকলোৱেই এই প্ৰতিষেধকৰ পালি গ্ৰহণ কৰা উচিত আৰু ই পৰিয়ালৰ বাবেও ভাল কথা। এতিয়া মোৰ মায়ে মোক এই চাকৰিটো এৰি দিবলৈ কৈছে। মই ক’লো, মা, যদি মই মোৰ চাকৰি এৰি দিও, কোনে ৰোগীসকলক গন্তব্যস্থানলৈ প্ৰেৰণ কৰিব? কাৰণ এই ক’ৰোনা কালত সকলোৱে পলাই গৈছে। সকলোৱে তেওঁলোকৰ চাকৰি এৰি আছে। মায়েও মোক কৈছে এই চাকৰি এৰি দিব লাগে। মই কৈছিলো যে নহয় মা, মই মোৰ চাকৰি এৰি নিদিও।

মোদী জী- প্ৰেম জী, মাক দুখী নকৰিব, তেওঁক বুজাব৷

প্ৰেম জী- হয়৷

মোদী জী- কিন্তু আপুনি যি এই মাৰ কথা কথা নহয়৷

প্ৰেম জী- হয়৷

মোদী জী- ই হৃদয়স্পৰ্শী আছিল৷

প্ৰেম জী- হয়৷

মোদী জী- আপোনাৰ মাতৃকো৷

প্ৰেম জী- হয়৷

মোদী জী-মোৰ প্ৰণাম জনাব৷

প্ৰেম জী- নিশ্চয়৷

মোদী জী- হয়৷

প্ৰেম জী- হয়৷

মোদী জী- আৰু প্ৰেম জী, আপোনাৰ জৰিয়তে

প্ৰেম জী- হয়

মোদী জী- এম্বুলেঞ্চ চলোৱা সকলো চালকে

প্ৰেম জী- হয়

মোদী জী- তেওঁলোকে কিমান বিপদশংকুল কাম কৰি আছে৷

প্ৰেম জী- হয়

মোদী জী- আৰু প্ৰত্যেকৰে মাতৃয়ে কি ভাবে?

প্ৰেম জী- নিশ্চয় মহোদয়

মোদী জী- এইখিনি কথা যেতিয়া শ্ৰোতা ৰাইজে শুনিব

প্ৰেম জী- হয়

মোদী জী- মই ভাবো যে প্ৰত্যেকৰে হৃদয় চুই যাব

প্ৰেম জী- হয়

মোদী জী- প্ৰেম জী, অশেষ ধন্যবাদ৷ আপুনি এক প্ৰকাৰে প্ৰেমৰ গংগা বোৱাই আছে৷

প্ৰেম জী- ধন্যবাদ মহোদয়৷

মোদী জী- ধন্যবাদ ভাই৷

প্ৰেম জী- ধন্যবাদ৷

বন্ধুসকল, প্ৰেম বাৰ্মাজী আৰু তেওঁৰ দৰে হাজাৰ হাজাৰ লোকে আজি তেওঁলোকৰ জীৱন বিপদত পেলাই জনসাধাৰণৰ সেৱা কৰি আছে। ক’ৰোনাৰ বিৰুদ্ধে এই যুঁজত ৰক্ষা পোৱা সকলোৰে জীৱনত এম্বুলেন্স চালকসকলেও যথেষ্ট অৱদান আগবঢ়াইছে। প্ৰেমজী, মই আপোনাক আৰু সমগ্ৰ দেশৰ আপোনাৰ সকলো সহকৰ্মীক বহুতো সাধুবাদ দিছো। আপুনি সময়মতে গৈ থাককক, জীৱন ৰক্ষা কৰি থাকক।

মোৰ মৰমৰ দেশবাসীসকল, এইটো সঁচা যে বহুতো লোক ক’ৰোনাৰ দ্বাৰা সংক্ৰমিত হৈছে, কিন্তু, ক’ৰোনাৰ পৰা আৰোগ্য হোৱা লোকৰ সংখ্যাও সমানে বেছি। গুৰুগ্ৰামৰ প্ৰীতি চতুৰ্বেদীজীয়েও শেহতীয়াকৈ ক’ৰোনাক পৰাজিত কৰিছে। প্ৰীতিজীয়ে আমাৰ সৈতে 'মন কী বাত'ত যোগদান কৰিছে। তেওঁৰ অভিজ্ঞতা আমাৰ সকলোৰে বাবে যথেষ্ট উপযোগী হ'ব।

মোদী জী- প্ৰীতি জী নমস্কাৰ

প্ৰীতি জী- নমস্কাৰ মহোদয়৷ আপোনাৰ ভাল নে?

মোদী জী- মোৰ ভাল ৷ সবাতোকৈ প্ৰথমে আপুনি ক’ভিড-১৯ৰ পৰা

প্ৰীতি জী- হয়

মোদী জী- সফলতাৰে যুঁজি অহাৰ বাবে

প্ৰীতি জী- হয়

মোদী জী- আপোনাক প্ৰশংসা কৰিছো

প্ৰীতি জী- অশেষ ধন্যবাদ মহোদয়

মোদী জী- আপোনাৰ স্বাস্থ্যৰ শীঘ্ৰ আৰোগ্য হওক তাৰে কামনা কৰিলো ৷

প্ৰীতি জী- ধন্যবাদ মহোদয় ৷

মোদী জী- প্ৰীতি জী

প্ৰীতি জী- হয়

মোদী জী- এই ঢৌত কেৱল আপোনাৰেই নম্বৰ লাগিছিল নে পৰিয়ালৰ আন সদস্যৰো হৈছিল ৷

প্ৰীতি জী- নহয় নহয় মহোদয়, মোৰ অকলে হৈছিল৷

মোদী জী- ভগৱানৰ কৃপা৷ আচ্ছা মই বিচাৰিম যে

প্ৰীতি জী- হয়

মোদী জী- আপুনি আপোনাৰ এই পীড়া অৱস্থাৰ কিছু অভিজ্ঞতা যদি বৰ্ণনা কৰে তেন্তে শ্ৰোতাসকলে নিজকে এনে সময়ত কিদৰে চম্ভালিব লাগে সেই বিষয়ে সঠিক মাৰ্গদৰ্শন লাভ কৰিব ৷

প্ৰীতি জী- হয় মহোদয়, নিশ্চয়৷ মই আৰম্ভণিৰ পৰ্যায়ত অত্যাধিক আলস্য ভাৱ অনুভৱ কৰিছিলো, আৰু তাৰ পিছত মোৰ ডিঙিত অলপ বিষ যেন হৈছিল। ইয়াৰ পিছত মই লক্ষণবোৰ অলপ অনুভৱ কৰা যেন পালো আৰু সেয়েহে মই পৰীক্ষা কৰোৱালো। পিছদিনা প্ৰতিবেদন দিয়াৰ লগে লগে, মই পজিটিভ ঘোষিত হোৱা লগে লগে, মই নিজকে আচুতীয়াকৈ ৰাখিলো ৷ এটা কোঠাত নিজতে পৃথক কৰি চিকিৎসকৰ পৰামৰ্শ গ্ৰহণ কৰিলো ৷ তেওঁলোকৰ ঔষধ গ্ৰহণ কৰা আৰম্ভ কৰিলো।

মোদী জী- আপোনাৰ এই তৎকালীন পদক্ষেপৰ ফলত পৰিয়ালৰ অন্য লোক বাচি গ’ল৷

প্ৰীতি জী- হয় মহোদয়। বাকী সকলোৰে পৰীক্ষা কৰোৱা হ’ল। সকলোৰে নিগেটিভ আছিল। মই পজিটিভ আছিলো। তাৰ পূৰ্বেই মই এটা কোঠাৰ ভিতৰত নিজকে পৃথক কৰি ৰাখিছিলো। মই প্ৰয়োজনীয় সকলো সামগ্ৰী ৰাখিছিলো আৰু নিজেই কোঠাটো বন্ধ কৰি দিছিলো। আৰু তাৰ লগতে মই ঔষধটো পুনৰ চিকিৎসকৰ পৰামৰ্শৰ সৈতে আৰম্ভ কৰিছিলো। মহাশয়, ঔষধৰ লগতে মই কেৱল যোগ, আয়ুৰ্বেদিক কৰাই নহয় বৰঞ্চ মই কাঢ়া গ্ৰহণ কৰাও আৰম্ভ কৰিছিলো ৷ ৰোগ প্ৰতিৰোধ ক্ষমতা বৃদ্ধিৰ বাবে, মই দিনটোত যেতিয়াই মোৰ খাদ্য খাও, তেতিয়াই মই যি প্ৰ'টিন সমৃদ্ধ আহাৰ, স্বাস্থ্যকৰ খাদ্য গ্ৰহণ কৰিছিলো। মই অত্যাধিক জুলীয়া খাদ্য খাইছিলো, ষ্টীম লৈছিলো, গাৰ্গল কৰিছিলো আৰু গৰম পানীৰ সেক লৈছিলো। মই মোৰ দৈনিক জীৱনৰ এই সকলোবোৰ বস্তুৱেই গ্ৰহণ কৰিছো। আৰু মহোদয়, মই আটাইতকৈ ডাঙৰ কথাটো ক'ব বিচাৰো যে এই কেইটা দিনত আতংকিত হোৱাৰ কোনো প্ৰয়োজন নাই। মই মানসিকভাৱে শক্তিশালী হ'ব লাগিব যাৰ বাবে মোক যোগাভ্যাসে, উশাহ-নিশাহৰ ব্যায়ামে যথেষ্ট সহায় কৰিছিল ৷

মোদী জী- হয়৷ আচ্ছা, প্ৰীতি, এতিয়া আপোনাৰ সকলো কাৰ্য সম্পন্ন হ’ল৷ আপুনি সংকটমুক্ত হ’ল৷

প্ৰীতি জী- হয়৷

মোদী জী- এতিয়া আপোনাৰ পৰীক্ষাৰ ফলাফলো নিগেটিভ আহিছে৷

প্ৰীতি জী- হয়৷

মোদী জী- তেন্তে এতিয়া আপোনাৰ স্বাস্থ্যৰ বাবে কি কৰে?

প্ৰীতি জী- মহোদয়, প্ৰথম কথাটো হ’ল মই যোগাভ্যাস বন্ধ কৰা নাই ৷

মোদী জী- হয়

প্ৰীতি জী- ৰোগ প্ৰতিৰোধক ক্ষমতা বৃদ্ধিৰ বাবে মই কাঢ়াও খাই আছো আৰু স্বাস্থ্যকৰ খাদ্যও গ্ৰহণ কৰি আছো৷

মোদী জী- হয়

প্ৰীতি জী- নিজকে পূৰ্বে মই বহু আওকাণ কৰিছিলো, এতিয়া ধ্যান দিবলৈ আৰম্ভ কৰিছো ৷

মোদী জী- ধন্যবাদ প্ৰীতি জী৷

প্ৰীতি জী- অশেষ ধন্যবাদ মহোদয় ৷

মোদী জী- আপুনি যি তথ্য প্ৰদান কৰিলে, মই ভাবো বহু লোক উপকৃত হ’ব ইয়াৰ জৰিয়তে৷ আপুনি সুস্বাস্থ্যবান হৈ থাকক, আপোনাৰ পৰিয়ালৰ লোক স্বাস্থ্যৱান হৈ থাকক, আপোনালৈ মোৰ তৰফৰ পৰা অশেষ শুভকামনা থাকিল ৷

মোৰ মৰমৰ দেশবাসীসকল, যিদৰে আজি আমাৰ চিকিৎসা ক্ষেত্ৰৰ লোকসকলে, ফ্ৰণ্টলাইন কৰ্মীসকলে অহৰ্নিশে সেৱাত জড়িত হৈ আছে ৷ একেদৰে সমাজৰ আন লোকসকল এই মুহূৰ্তত এনেয়ে থকা নাই। দেশবাসী পুনৰ একত্ৰিত হৈছে আৰু ক’ৰোনাৰ বিৰুদ্ধে যুঁজ দিছে। আজিকালি মই দেখিবলৈ পাইছো যে কোনোবাই কোৱেৰাণ্টাইনত বাস কৰা পৰিয়ালক পাচলি, গাখীৰ, ফল, ঔষধ আদি প্ৰদান কৰি আছে। কোনোবাই ৰোগীসকললৈ বিনামূলীয়া এম্বুলেন্স সেৱা আগবঢ়াইছে। আনকি দেশৰ বিভিন্ন প্ৰান্তত এই প্ৰত্যাহ্বানপূৰ্ণ সময়তো, স্বয়ং-সহায়ক সংগঠনবোৰ আগবাঢ়ি আহিছে আৰু আনক সহায় কৰিবলৈ যি পাৰি সেয়া কৰিবলৈ চেষ্টা কৰি আছে। এইবাৰ, গাওঁবোৰত নতুন সজাগতাও দেখা গৈছে। ক’ভিড নিয়মবোৰ কঠোৰভাৱে অনুসৰণ কৰি, মানুহে তেওঁলোকৰ গাওঁখনক ক’ৰোনাৰ পৰা সুৰক্ষিত কৰি আছে, বাহিৰৰ পৰা অহা লোকসকলৰ বাবেও সঠিক ব্যৱস্থা কৰা হৈছে। স্থানীয় বাসিন্দাসকলৰ সৈতে কাম কৰি থকা চহৰসমূহতো বহু যুৱক-যুৱতীয়ে তেওঁলোকৰ এলেকাত ক’ৰোনাৰ ঘটনা বৃদ্ধি নোহোৱাটো নিশ্চিত কৰিবলৈ আগবাঢ়ি আহিছে, অৰ্থাৎ এফালে দেশখনে চিকিৎসালয়, ভেণ্টিলেটৰ আৰু ঔষধৰ বাবে দিন-ৰাতিয়ে কাম কৰি আছে, আনফালে দেশবাসীয়েও ক’ৰোনাৰ মোকাবিলা কৰি আছে। এই অনুভৱে আমাক ইমান শক্তি প্ৰদান কৰে, ই আমাক ইমান বিশ্বাস দিয়ে। যিকোনো প্ৰচেষ্টাই হওক, ই সমাজৰ বাবে এক মহান সেৱা। ইয়েই সমাজৰ শক্তি বৃদ্ধি কৰে।

মোৰ মৰমৰ দেশবাসীসকল, আজি আমি ক’ৰোনা মহামাৰীৰ ওপৰত 'মন কী বাত'ৰ সমগ্ৰ আলোচনা কৰিছো, কিয়নো আজি আমাৰ আটাইতকৈ ডাঙৰ অগ্ৰাধিকাৰ হৈছে এই ৰোগক পৰাস্ত কৰা। আজি ভগৱান মহাবীৰৰ জয়ন্তীও। মই এই উপলক্ষে সকলো দেশবাসীক শুভকামনা জনাইছো। ভগৱান মহাবীৰৰ বাৰ্তাই আমাক তপস্যা আৰু আত্মসংযমৰ অনুপ্ৰেৰণা যোগায়। পবিত্ৰ ৰমজান মাহো চলি আছে। তাৰ পিছত আছে বুদ্ধ পূৰ্ণিমা। গুৰু টেগ বাহাদুৰজীৰ ৪০০তম প্ৰকাশ পৰ্বও আছে। এটা গুৰুত্বপূৰ্ণ দিন হৈছে পোচিচে বৈশাক-ঠাকুৰৰ জন্ম জয়ন্তী। তেওঁলোক সকলোৱে আমাক আমাৰ কৰ্তব্য পালন কৰিবলৈ অনুপ্ৰাণিত কৰে। নাগৰিক হিচাপে, আমি আমাৰ জীৱনত যিমান পাৰি সিমান দক্ষতাৰে আমাৰ কৰ্তব্য পালন কৰিম। আমি সংকটৰ পৰা মুক্ত হৈ ভৱিষ্যতৰ পথত যিমান পাৰি দ্ৰুত গতিত আগবাঢ়িম। এই ইচ্ছাৰ সৈতে, মই আপোনালোক সকলোকে আকৌ এবাৰ প্ৰতিষেধক গ্ৰহণ কৰাৰ বাবে অনুৰোধ জনাইছো আৰু সাৱধানো হ’ব লাগিব। 'ঔষধো – কঠোৰ নিয়মানুৱৰ্তিতাও'। এই মন্ত্ৰটো কেতিয়াও নাপাহৰিব। আমি শীঘ্ৰেই এই দুৰ্যোগৰ পৰা ওলাই আহিবলৈ সক্ষম হ'ম। এই বিশ্বাসেৰে আপোনালোকলৈ অশেষ ধন্যবাদ। নমস্কাৰ।