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कनाडा के लोकप्रिय एवं सफल प्रधानमंत्री,मेरे परम मित्र श्री स्टीफन हार्पर जी ,श्रीमती लौरें हार्पर जी और विशाल संख्या में आये हुए मेरे प्यारे भाइयों और बहनों

PM Modi - Indian Diaspora Event, at Ricoh Coliseum, Toronto Canada (13)

 कनाडा की जनता उनका हृदय से धन्‍यवाद करता हूं... जिस प्रकार से कनाडा ने मेरा स्‍वागत किया है सम्‍मान किया है,जिस उमंग और उत्‍साह के साथ उन्‍होंने अपने प्‍यार को प्रकट किया है मैं इसके लिए प्रधानमंत्री जी का और कनाडा का हृदय से बहुत-बहुत धन्‍यवाद व्‍यक्‍त करता हूं,लेकिन यह सम्‍मान किसी व्‍यक्ति का नहीं है,यह सम्‍मान नरेंद्र मोदी का नहीं है,यह सम्‍मान सवा सौ करोड़ हिंदुस्‍तानियों का है और कनाडा में भारत की पहचान नरेंद्र मोदी ने नहीं बनाई है,कनाडा में भारत की पहचान आप सब मेरे देशवासियों ने बनाई है। आपकी बदौलत,आपका पुरूषार्थ,आपका जीवन,मिलजुलकर के सबको साथ लेकर के चलने की हमारी परंपरा,उसको आपने भलीभांति यहां पर जीकर के दिखाया है। कनाडा का हर नागरिक आपके प्रति गौरव अनुभव करता है। आदर-सत्‍कार के साथ आपका नाम लेता है और जब दुनिया के किसी भी देश में किसी भारतीय की पराक्रम की गाथा सुनते हैं तो सीना चौड़ा हो जाता है और कनाडा में बसने वाले हमारे भारतीयों ने अपने सफल कारोबार के माध्‍यम से,अपने सफल जीवन के माध्‍यम से भारत की आन,बान,शान को बढ़ाने में बहुत बड़ी भूमिका अदा की है। इस शहर के साथ तो मेरा नाता पुराना रहा है। पहले भी आना हुआ है और तब मैं कुछ नहीं था। कोई जानता भी नहीं था। तब भी इस शहर ने मुझे जो प्‍यार दिया था,इतने ढेर सारे कार्यक्रम मेरे हुए थे। इतने लोगों से मेरा मिलना हुआ था और इसलिए आज मैं उस धरती पर फिर से एक बार आकर ,नई जिम्‍मेदारी के साथ आया हूं,तब मैं यहां रहने वाले मेरे सभी भारतीय भाईयों और बहनों का हृदय से अभिनंदन करता हूं।

मेरा कनाडा के कारोबार से बड़ा अच्‍छा संबंध रहा,मेरा बहुत अच्‍छा अनुभव रहा। मैं गुजरात में मुख्‍यमंत्री रहा कई वर्षों तक और मुख्‍यमंत्री के कालखंड में मैं एक Vibrant Gujrat InvestorSummitकरता था। 2003 में पहली बार किया। पूरी कल्‍पना नई थी और मैं आज गर्व से कहता हूं कि कनाडा वो देश है जो 2003 से गुजरात का partner countryबना। एक developed countryके लिए किसी देश के छोटे से राज्‍य के साथ partner countryबनना यह निर्णय छोटा नहीं होता है,लेकिन कनाडा ने वो निर्णय किया और अब तक निभाया है। मैं इसके लिए कनाडा का बहुत-बहुत आभारी हूं। मैं कल रात यहां पहुंचा,कल रात चला जाऊंगा लेकिन कनाडा के प्‍यार को मैं कभी भुला नहीं पाऊंगा। आज कल तो विमानों की सेवा इतनी अच्‍छी हो गई है कि 15-17-20..... घंटे में आप भारत से कनाडा पहुंच सकते हो। लेकिन भारत के प्रधानमंत्री को आने में 42 साल लग गए। ये भी बड़ी विचित्रता देखिए कि भारत और कनाडा मिलकर स्पेस में तो प्रगति कर रहे हैं, लेकिन धरती पर कतराते रहते थे। जिस बात को 42 साल बीत गए, उसको मैंने दस महीने के भीतर-भीतर कर दिया।

PM Modi - Indian Diaspora Event, at Ricoh Coliseum, Toronto Canada (8)

मैं जानता हूं कि भारत की शक्ति और भारत की आवश्‍यकता ....कनाडा की संपत्ति और कनाडा का सामर्थ्‍य : इंडिया प्‍लस कनाडा; आप कल्‍पना कर सकते हो। हम दुनिया में कितनी बड़ी ताकत के रूप में उभर सकते हैं| भारत को जिन-जिन प्राकृतिक संपदाओं की जरूरत है उन सारी प्राकृति संपदाओं की पूर्ति कनाडा से हो सकती है। मेरे हिंदुस्‍तान में किसान खेत में मजदूरी करता है, मेहनत करता है, पसीना बहाता है और जब उसको फर्टीलाइजर की जरूरत होती है तो पोटाश कनाडा से आता है। यहां पर इतनी प्राकृतिक संपदा है.. एक बार यहां के एक राज्‍य के प्रीमियर गुजरात आये थे। मैंने उनसे कहा कि मेरा राज्‍य ऐसा है.. तब मैं गुजरात का मुख्‍यमंत्री था। मैंने कहा कि मेरे यहां हीरे की खदानें नहीं हैं, लेकिन मेरे लोगों का कौशल ऐसा है, Entrepreneurshipमें इतना दम है कि दुनिया में दस में से नौ हीरे ऐसे हैं जिस पर किसी न किसी भारतीय का हाथ लगा हुआ होता है। उनको मैंने कहा कि आपके पास हीरे की खदानें हैं, कच्‍चा हीरा मुझे दे दीजिए। मैं आपको मूल्‍य वृद्धि करके वापस लौटा दूंगा और आपके कच्‍चे हीरे पर हिंदुस्‍तान के पसीने की महक दुनिया में आपकी ताकत को चार गुना बढ़ा देगी। यह सामर्थ्‍य है दोनों देशों में। इस सामर्थ्‍य को जोड़ने का एक नया युग आज प्रारंभ हुआ है। आज जो हमने निर्णय किए हैं, मिल बैठ करके, खुलकर के बातें हुईं हैं और एक मित्रतापूर्ण माहौल में हुई हैं। एक दूसरे को समझने में अब हमें कोई तकलीफ नहीं है और इसलिए मैं आपको विश्‍वास दिलाता हूं कि इंडिया और कनाडा का यह संसार बहुत लंबा चलने वाला है। इसके लिए मैं प्रधानमंत्री और मेरे मित्र श्रीमान हार्पर का हृदय से बहुत-बहुत धन्‍यवाद करता हूं, उनका अभिनंदन करता हूं|

 भाईयों और बहनों पिछले वर्ष जब भारत में चुनाव का मौसम था, चुनाव तो वहां चल रहे थे लेकिन नारे यहां से सुनाई देते थे। नतीजे तो वहां आये थे। लेकिन मिठाई यहां बांटी जा रही थी। वहां पर लोग दिन में खुशी मना रहे थे, आप आधी रात में मना रहे थे। मेरे भाईयों  और बहनों, दस महीने पहले सिर्फ सरकार बदली थी। लेकिन आज मैं दस महीनों के बाद कह सकता हूं कि जन-जन का मन भी बदला है। सरकार बदली है, उससे क्‍या होगा?ये तो समय कहेगा, लेकिन मन के बदलने से क्‍या कुछ हो सकता है इसको मैं भली-भांति समझ सकता हूं।

PM Modi - Indian Diaspora Event, at Ricoh Coliseum, Toronto Canada (9)

हम लोग जब छोटे थे, तो सिनेमा का एक गीत सुना करते थे – “देख तेरे संसार की हालत क्‍या हो गई भगवान, कितना बदल गया इंसान।“  उस समय एक पीड़ा थी, व्‍यथा की बात थी, उस गीत में। मैं आज उस गीत को नए रूप में देख रहा हूं कि इंसान बदला है। उस समय पीड़ा थी कि कितना बदल गया इंसान और मैं आज गर्व से कहता हूं कि कितना अच्‍छा बन गया इंसान। बदला है, बदला है। कोई कल्‍पना कर सकता है? मैंने देश के गरीब भाईयों और बहनों को कहा कि आप बैंक में खाता खोलिए। हमारे यहां मेरे जन्‍म से पहले ही बैंक तो चल रही थी, देश आजाद होने के बाद भी बैंक चल रही थी, कांग्रेस सरकार ने श्रीमति इंदिरा गांधी की सरकार थी तब बैंकों का राष्‍ट्रीयकरण कर दिया था, ताकि बैंक गरीबों के काम आये। लेकिन इसके बावजूद भी दस करोड़ से अधिक परिवार ऐसे थे यानी करीब-करीब 40 प्रतिशत से अधिक जनता ऐसी थी, जिनके नसीब में बैंक का खाता खोलना नहीं था। मैंने 15 अगस्‍त को घोषणा की थी कि मुझे बैंक में खाते खुलवाने हैं और.. एक जमाना था.. आप भी हिन्‍दुस्‍तान में रहे हैं, बैंक में जाते थे तो बैंक का अफसर नीचे से ऊपर देखता भी नहीं था और अगर आप उसका ध्‍यान आकर्षित करने की कोशिश करें, तो काटने के लिए आता था – देखते नहीं हो मैं काम कर रहा हूं!  इंसान बदल गया, बैंक वाले भी बदल गये, यही बैंक के कर्मचारी.. आज मैं उन पर गर्व करता हूं,  उनका अभिनंदन करता हूं कि वो गांव-गांव गये, गरीब के घर गये और 14 करोड़ बैंक खाते खोले| 14 करोड़ ! मतलब कि करीब करीब तीन कनाडा और यह काम सौ दिन में पूरा किया उन्होंने ..सौ दिन में | इंसान बदला है !! भारत का जन मन जो बदला है यह उसका उदाहरण है सरकार सिर्फ नहीं बदली है..जन मन बदला है | जब बैंक खाते खोलने की बारी आई तो.. गरीब के पास पैसे नहीं, बैंक खाता क्‍या खोलेगा और इसलिए हमने कहा था कि जीरो बैलेंस से एकाउंट खोलेंगे। जीरो बैलेंस| बैंक वालों को शुरू में तो थोड़ा ये था कि भई ये क्‍या कर रहे हो आप? हमने कहा कि भई क्‍या जाता, है दो कागज पर उनका नाम लिखना है, बैंक एकाउंट खोलना है, जाता क्‍या है तुम्‍हारा। वो बोलें कि कुछ तो देना चाहिए उन्‍हें। हमने कहा क्‍या देना है, उसने पसीना बहाया है, क्या लेना है , दे दो बैंक का खाता दे दो। मैंने गरीबों को कहा था कि आपको पैसे बैंक में रखने की जरूरत नहीं है, खाता खोल दीजिए, फिर आगे देखेंगे। लेकिन मेरे नौजवान साथियों, दोस्‍तों। जन-मन बदला है, तो कैसे बदला है.. मैंने गरीब को कहा था कि तुम्‍हें बैंक में पैसे डालने की जरूरत नहीं है, मुफ्त में खाता खोल देंगे। लेकिन गरीब की अमीरी भी तो कुछ चीज होती है। गरीब की अमीरी की भी अपनी एक ताकत होती है और मैं आज गर्व से कहता हूं, उन गरीबों के सामने सर को झुकाकर उनका अभिनंदन करता हूं, उन्‍होंने 14 हजार करोड़ रूपया बैंक में जमा करवाया। ये गरीबों की अमीरी, ये बदले हुए जन-मन की निशानी है। देश में एक नया विश्‍वास पैदा हुआ है। सरकार बदली है, इसलिए सब बदलेगा ऐसा नहीं है। बदलने का मेरा विश्‍वास इसलिए है कि जन-मन बदला है । “जन मन गण अधिनायक” जो  कहते हैं न, वो जन-मन बदला है। हमारे देश में आप जब विदेश से आते थे, एयरपोर्ट पर उतरने ही आपकी शिकायत क्‍या रहती थी? कि गंदगी बहुत है, सफाई नहीं है, ऐसा ही लगता था न? हमने तय किया कि काम कठिन है, लेकिन करना चाहिए और हम नहीं करेंगे तो कौन करेगा? जिनको गंदगी करनी थी वे गंदगी करके चले गए लेकिन हम सफाई करके जाएंगे। आज जन-मन ऐसा बदला है कि हर दिन एकाध खबर तो कहीं-कहीं से आती है कि फलाने बैंक के सारे Employee Saturday-Sundayको सफाई करने निकले हैं, फलाने कॉलेज के Studentsसफाई करने के लिए निकले हैं, फलाने मंदिर के सारे संत सफाई करने के लिए निकले हैं, फलाना एम. एल. ए. सफाई कर रहा है, एम पी सफाई कर रहा है, चारों तरफ कहीं न कहीं से खबर आ रही है। मैंने देखा.. आप कभी सचिन तेंदुलकर की वेबसाइट पर जाओगे तो उन्‍होंने अपना एक वीडियो रखा है। उन्‍होंने मुंबई में एक फुटपाथ तय की, रोज सुबह चार बजे जाते थे अपने दोस्‍तों को ले करके। महीने भर गए और पूरी उसकी सफाई करके उसको बढि़या से पार्क में Convert कर दिया। लोग आकर बैठते हैं। सरकार ने नहीं किया, नागरिक कर रहे हैं। दो बेटियां.. एक नगालैंड से और एक बनारस से, दो बेटियां बनारस में एकठ्ठी हुईं और उनका मन कर गया कि काशी की घाटों की सफाई करें और आज मैं हैरान हूं कि उन दो बेटियों ने काम शुरू किया, धीरे-धीरे नौजवान जुड़ते गए और उन्‍होंने पूरे प्रभु घाट को साफ कर दिया। आज लोग जा करके, विदेश के लोग वहां जा करके घंटों तक गंगा के सामने बैठते हैं। देश विशाल है, गंदगी बहुत है, पुरानी है, वक्‍त लगेगा लेकिन जन-मन बदला है, उसका ये उदाहरण है। हमने कहा कि स्‍कूल में टॉयलेट बनाना है, उसमें भी Girl Childके लिए टॉयलट बनाना है। लोगों को लगता है कि प्रधानमंत्री का काम होता है ये क्‍या ? लेकिन ये थोड़ा अलग सा प्रधानमंत्री है, औरों को जो बनाना है बना दें, मुझे तो ऐसे ही छोटे-छोटे काम करने हैं। लोगों को लगता है कि यह प्रधानमंत्री का काम होता है क्‍या,लेकिन यह थोड़ा अलग सा प्रधानमंत्री है। औरों को जो बनाना है बना दे,मुझे तो ऐसे ही छोटे-छोटे काम करने है। और बूंद-बूंद से जैसे समुद्र भर जाता है, छोटे-छोटे कामों से हिंदुस्‍तान की शक्‍ल सूरत बदल जाएगी यह मेरा विश्‍वास है| दोस्‍तों और मेरा विश्‍वास है सवा सौ करोड़ देशवासी एक कदम भी चलें तो देश सवा सौ करोड़ कदम आगे बढ़ जाता है। एक दिन मेरे मन में विचार आया कि जिसके पास पैसे हैं सप्‍ताह में दो दिन तो Dinner किसी बढि़या से होटल में करता होगा। 15-20 हजार को बिल देकर के वापस आता है। क्‍या ऐसे लोगों ने भी गैस सिलेंडर की सब्सिडी लेनी चाहिए क्‍या?उनको शोभा देता है क्‍या?एम.पी है,एम.एल.ए हैं,मंत्री हैं 400 रुपये की सब्सिडी । मैंने ऐसे ही बातों बातों में कह दिया कि भई यह अच्‍छा नहीं लगता,हमारे जेब में दम है तो हमने क्‍यों लेनी चाहिए,गरीब लें,गरीब को मिलनी भी चाहिए। लेकिन जिसके पास संभावना है वो क्‍यों ले?और सब्सिडी से पका हुआ खाना शोभा देता है क्‍या?मैंने सार्वजनिक रूप से नहीं कहा था दोस्‍तों। ऐसे ही बातों बातों में अपने साथियों से बीच बात कर रहा था तो बात फैलनी लगी और बात फैलने लगी आज भी मेरे साथियों का जन मन बदला है। बदला हुआ जन मन ने क्‍या किया?करीब चार लाख लोगों ने अपनी गैस सब्सिडी छोड़ दी। यानी करीब-करीब देश की तिजोरी में 200 करोड़ रुपये बच गया। Two hundred crore rupees. कोई हुकुम नहीं,कानून नहीं,कुछ नहीं,हर व्‍यक्ति को लगने लगा है कि अब देश इंतजार नहीं करेगा। देश को आगे बढ़ना है और हम बढ़ाएंगे यह जन-मन का विश्‍वास बढ़ा है और मैं यह जितनी बातें बता रहा हूं वो मोदी ने नहीं की है। देश के सामान्‍य नागरिक ने की है। सामान्‍य नागरिक के मन में एक नया मिजाज पैदा हुआ है। एक आनंददायक घटना मैं देख रहा हूं और मैंने फिर Publicly एक बार Announce किया। Publicly ऐसा कहा मैंने लोगों से सार्वजनिक रूप से अभी 5-6 दिन पहले ही कहा है। मैंने कहा कि मेरा सबसे आग्रह है कि जिसके जेब में दम है,वो गैस की सब्सिडी लेना छोड़ दे। मुझे विश्‍वास है कि लोग छोड़ देंगे। लेकिन मैंने उनसे एक बात और कही। मैंने कहा कि जो लोग गैस की सब्सिडी छोड़ेंगे,वो पैसा मैं सरकार की तिजोरी में नहीं डालूंगा,इसका मतलब यह नहीं कि मेरी जेब में डालूंगा। मैंने कहा कि जो गरीब परिवार है, जिनके घर में लकड़ी से जलने वाला चूल्‍हा है, जहां गरीब माँ लकड़ी से चूल्‍हा जलाती है। पूरे घर में धुंआ होता है, छोटे बच्‍चे दिन-रात रोते रहते हैं, धुएं में बैठ नहीं पाते, बीमार हो जाते हैं। मैं यह गैस सिलेंडर उन गरीब परिवारों को दूंगा और उससे उस परिवार के स्‍वास्‍थ्‍य को लाभ होगा। लकड़ी जलना बंद होगा तो जंगल बचेंगे, धुंआ नहीं होगा तो पर्यावरण बचेगा।जंगल बचेगा तो पर्यावरण में वृद्धि होगी, एक इंसान सब्सिडी छोड़ता है, कितने फायदे हो सकते हैं, जिसका आप अनुमान लगा सकते हैं और जन-मन बदला है, उसके कारण यह परिणाम आ रहा है। आपको हैरानी होगी, सबसे बड़ी सरप्राइज घटना बता दूं, मेरे लिए भी सरप्राइज है। लेकिन वो सुखद.. आश्‍चर्य है मेरे लिए। एक अखबार के मालिक ने मुझे चिट्ठी लिखी है। बताईये सुखद आश्‍चर्य है या नहीं है। अखबार के मालिक ने चिट्ठी लिखी है और उसमें मुझे लिखा है कि मोदी जी, जो देश मूड है उससे लगता है.. और हमने हमारे अखबार की एक नीति बनाई है और वो नीति ये है कि सप्‍ताह में एक दिन हमारा अखबार सिर्फ और सिर्फ पॉजिटिव न्‍यूज ही छापेगा। ये छोटी घटना नहीं है मित्रों ! भले आज एक अखबार ने काम शुरू किया है लेकिन खुद हो करके, सामने हो करके कहना और ये विचार मैंने नहीं दिया है। अब्‍दुल कलाम हमारे पूर्व राष्‍ट्रपति जी वो बार-बार कहते थे कि पॉजिटिव का कॉलम बनाईए, मैंने कभी कहने की हिम्‍मत नहीं की थी। लेकिन मुझे खुशी हुई कि बदले हुए जन-मन.. कहां-कहां उसका फैलाव हो रहा है, कैसे बात पहुंच रही है, उससे लगता है कि देश.. आप जिन सपनों को लेकर जीते हैं, आप ही आंखों के सामने वो सपने साकार होते हुए आप देखेंगे ये मैं आपको विश्‍वास दिलाता हूं।

PM Modi - Indian Diaspora Event, at Ricoh Coliseum, Toronto Canada (6)

हमारे देश में कई समस्‍याएं हैं लेकिन उन समस्‍याओं का समाधान एक ही जड़ी-बूटी में है। सब दु:खों की दवाई एक ही जड़ी-बूटी है। वो जड़ी-बूटी मोदी नहीं है, उस जड़ी बूटी का नाम है- विकास। हमारी सभी समस्‍याओं का समाधान है कि हम देश में विकास के एजेंडा पर आगे बढ़ें। हम विकास करें और मैं बताता हूं भाईयों और बहनों कि भारत के अंदर ताकत है, सिर्फ अवसर चाहिए। पिछले दस साल में हमारे देश में प्रति दिन जो रोड का Construction होता था वो 2 किलोमीटर होता था Per Dayऔर पिछले दस महीने से  Per Day 11 किलोमीटर होता है यानी आप देख सकते हैं कि विकास.. 11 किलोमीटर है ...यानी बहुत बड़ी बात नहीं बता रहा लेकिन तुलनात्‍मक रूप से पता चलेगा कि हम कैसे आगे बढ़ रहे हैं। भाईयों और बहनों, विकास का रास्‍ता ही देश को आगे ले जाएगा।

आप कल्‍पना कीजिए कि भारत के पास आज कौन सी बड़ी संपत्ति है? मेरे नौजवान साथियों: भारत के पास वो संपत्ति है, जो दुनिया में किसी के पास नहीं है और वो है –भारत की 65 प्रतिशत जनसंख्‍या 35 से कम उम्र की है। हिंदुस्तान नौजवान है| 80 करोड़ नौजवान जिस देश के पास हों.. 160 करोड़ मजबूत भुजाएं हों, 80 करोड़ सपने हों, वो देश क्‍या नहीं कर सकता?यह एक बहुत बड़ी संपत्ति है हमारी और इसलिए विकास के केंद्र में, मेरे दिमाग में ये 80 करोड़ नौजवान हैं, जिनके हाथ में हुनर हो, जिनको रोजगार के अवसर हों, वे मिट्ठी में से सोना बनाने की ताकत रखते हैं और देश सोने की चिडि़या फिर एक बार बन सकता है दोस्‍तों। ये आत्‍मविश्‍वास उन सवा सौ करोड़ देशवासियों के आर्शीवाद से पनपा है। ये आत्‍मविश्‍वास उन 80 करोड़, 35 साल से कम उम्र के नौजवानों की आंखों में से पैदा हुआ है और मैं दुनिया को कहता हूं कि दुनिया कल्‍पना करे , प्रगतिशील देश कल्‍पना करें, समृद्ध देश कल्‍पना करें, 2030 : 2030 के बाद उनके पास कितने ही कारखाने होंगे, कितने ही काम होंगे, उनके पास Work Force होगा क्‍या ? दुनिया के सभी समृद्ध देशों में उम्र बहुत तेजी से बढ़ रही है। जवानी मुरझा रही है और तब अगर जवानी मुरझा गई तो उस देश को चलाने की ताकत बाहर से लानी पड़ेगी। पूरे विश्‍व को 2030 के बाद जो Work Force की जरूरत होने वाली है वो एक ही जगह से मिलने वाला है, उस जगह का नाम है – हिन्‍दुस्‍तान | इसलिए हम अभी से इस बात पर ध्‍यान केंद्रित कर रहे हैं और उसमें हमारी प्राथमिकता है Skill Development... हमारा मिशन है Skill India| पहले भारत की पहचान थी- Scam India। हम बनाना चाहते हैं Skill Indiaऔर इसलिए Skill Development  को प्राथमिकता देना चाहते हैं और Skill Development में भी मेरे मन में अलग-अलग कल्‍पनाएं हैं। एक तो हम अभी से दुनिया का Mapping करना चाहते हैं कि किस देश को किस प्रकार के मानव बल की आवश्‍यकता होगी। दुनिया के कई देश हैं, जिनको Maths और Science के Teachers की जरूरत होगी। दुनिया के कई देश हैं, जिनको Nurses चाहिएं। दुनिया के कई देश हैं जहां हाथ से काम करने वाले कारीगर चाहिए। अलग-अलग प्रकार की आवश्‍यकताएं हैं। दुनिया की Mapping करके, जिसको जिस प्रकार के Work Force की जरूरत पड़ेगी उसका अनुमान लगाया जा सकता है, उस प्रकार का Work Force अभी से तैयार करने के लिए Skill Development मिशन.. और Skill Development में दुनिया में आज जिसके पास बढि़या से बढि़या Skill Development की व्‍यवस्‍थाएं, योजनाएं हैं सबको मैं भारत में लाना चाहता हूं, दूसरा Skill Development वो हो जिसमें Enterpreneur तैयार हो। नए स्टार्ट अप, नई पीढ़ी, नए-नए व्‍यवसाय में खुद जुटें, स्‍वरोजगार में आगे आए किसी से नौकरी पाने के लिए इंतजार न करे, वो Job Seeker न बने, वो Job Creater बने। भले दो को नौकरी दें, पांच को दें लेकिन वो Job Creater बने। उनके लिए जो Skill Development होनी चाहिए, उस पर बल देना चाहिए, तीसरा जो खुद रोजी-रोटी कमाने के लिए कुछ करना चाहते हैं। उनके लिए उस प्रकार का Skill Development| इस तरह Skill Development पर बल दे करके, Value Addition करके.. और हमारे देश में दुर्भाग्‍य से कोई कितना भी बदमाश व्‍यक्ति क्‍यों न हो? लेकिन अगर खादी का बढि़या कुर्ता पहन करके, लंबा कुर्ता पहन करके आ जाए या कोट पैंट और टाई पहन करके आ जाए और अपने घर की घंटी बजाए, तो हम कहेंगे कि आइये-आइये बैठिए, क्‍या काम है? लेकिन कोई बेचारा गरीब मजदूर, ऑटो रिक्‍शा वाला, कपड़े गंदे हों और वो आ करके घंटी बजाए और पूछे कि फलाने भाई कहां गये तो हम कहते हैं कि अरे चलो चलो ! ये कोई टाईम है क्‍या? भागो शाम को आना!क्‍यों? हमारे मन में Labour के प्रति जो Dignity चाहिए, उसका अभाव भर गया है। जब तक एक सामान्‍य व्‍यक्ति की Dignity.. ये हमारा स्‍वभाव नहीं होगा, Dignity of Labour, ये हमारी प्रकृति नहीं होगी, तो शायद दुनिया जो हमसे मांग रही है उसको हम गौरव से नहीं कर पाएंगे। मैं आज गर्व से कहता हूं कि दुनिया में जिस प्रकार से युवा पीढ़ी को हम देख रहे हैं, भारत की युवा पीढ़ी भी जो भी काम मिले, बिना शर्म के, बिना संकोच के, वह करने को तैयार है। कोई संकोच नहीं, कोई शर्म नहीं, वो मेहनत करने को तैयार है। ये जन-मन बदला है, उसी का परिणाम है। नौजवान का मिजाज बदला है,वो मेहनत करने को तैयार है, काम करने को तैयार है, हम उसे अवसर देना चाहते हैं, Human Resources Development, इस पर हम ध्‍यान केंद्रित करना चाहते हैं, उसके साथ-साथ हम थोड़ा ऊपर के लेयर का भी सोच सकते हैं। भारत के पास Talent है।Talent में कोई कमी नहीं है।हमारे टैलेंट का सबसे बड़ा सबूत है- भारत ने अभी मंगलयान भेजा है। Mars पर हम गये और छोटी-छोटी जगहों पर वे Mars पर जाने वाले सारे पुर्जे तैयार हुए। हिंदुस्‍तान के पांच छह राज्‍यों में छोटे-छोटे Small Scale Industry वालों के यहां एक-एक पुर्जा बना। हमारे Scientist जो हैं, नौजवान हैं, उनका Talent देखिए। उन्होंने  पहुंचा दिया मंगलयान।दुनिया में हम पहला देश हैं जो पहले ही Trial में सफल हो गये और मंगलयान में हमारे Talent का कमाल देखिए। हॉलीवुड की फिल्‍म पर जितना खर्चा होता है न, उससे कम खर्चे में मंगलयान पहुंच गया। आप अगर दिल्‍ली में, लखनऊ में, कानपुर में, हैदराबाद में, बंगलोर में ऑटो रिक्‍शा में अगर जाते हैं तो एक किलोमीटर का करीब दस रूपया खर्चा आता है। मंगलयान पर हमारा खर्चा सिर्फ सात रूपया किलोमीटर आया है। मैं कहना यह चाहता हूं कि देश के पास Talent है। क्‍या कारण है कि आईटी की दुनिया में हिन्‍दुस्‍तान के नौजवानों ने नाम रोशन किया। कनाडा में भी हिंदुस्‍तान के आईटी के नौजवान अपना करतब  दिखा रहे हैं। अमेरिका में भी हिंदुस्‍तान के नौजवान आईटी में अपना करतब दिखा रहे हैं। उंगलियां तो उनकी हैं, लेकिन मेरे नौजवान दोस्‍तों जवाब हमें खोजना पड़ेगा कि बुद्धि वहां से है, उंगलियां उसकी चल रही हैं, लेकिन Googleभारत की गोद से पैदा क्‍यों नहीं होता? Microsoftभारत की गोद से पैदा क्‍यों नहीं होता?

PM Modi - Indian Diaspora Event, at Ricoh Coliseum, Toronto Canada (11)

Talentवो ही है काम वही कर रहे हैं, मुझे वो माहौल बदलना है, ये हमारे TalentedYouthको अवसर देना है, ताकि वो Innovationकरें। आने वाले दिनों में दुनिया को क्‍या चाहिए? अपने Innovationसे वो दें। इसलिए छोटे-छोटे से काम के लिए एक मजदूर को जिस प्रकार का Skill Development चाहिए वो हमारे Talented Youthके लिए, Innovation के लिए अवसर चाहिए। उस दिशा में हम काम कर रहे हैं। हमने इस बार हमारे बजट में कार्यक्रम रखा है –AIM –Atal Innovation Mission. हम नौजवानों को अवसर देना चाहते हैं। कहने का तात्‍पर्य यह है कि देश को आगे ले जाने के लिए हमारी युवा शक्ति का जो सामर्थ्‍य है, जो हमारी सबसे बड़ी संपदा है और यह संपदा केवल भारत के अपने लिए नहीं, पूरे विश्‍व के अंदर काम आने वाली संपदा हमारे पास है। भले हमारे पास हीरे की खदानें नहीं होगी, भले हमारे पास गैस के भंडार नहीं होंगे, भले हमारे पास पेट्रोलियम के भंडार नहीं होंगे, हमें यू‍रेनियम बाहर से लाना पड़ता होगा, लेकिन हमारे पास जो ताकत है उस ताकत के भरोसे हम दुनिया में देश की ताकत बढ़ाना चाहते हैं। ये विश्‍वास ले करके हम आगे बढ़ रहे हैं।

आज हमने कनाडा में एक बहुत महत्‍वपूर्ण निर्णय लिया। मेरी इस यात्रा में एक महत्‍वपूर्ण निर्णय हमने फ्रांस में किया, दूसरा महत्‍वपूर्ण निर्णय आज हमने कनाडा में किया, बाकी तो बहुत महत्‍वपूर्ण हुआ है, लेकिन दो चीज ऐसी हैं, जिनकी तरफ लोगों का ध्‍यान नहीं गया है। पता नहीं जब मैं वापस पहुंचूंगा तो तब जाएगा कि नहीं जाएगा या तो कहीं और ध्‍यान होगा अभी लोगों का लेकिन हो सकता है कि चार छह महीने के बाद ध्‍यान दें। फ्रांस में एक महत्‍वपूर्ण निर्णय हुआ, वो यह हुआ कि हम लोग Nuclear Energyके लिए दुनिया भर से रियेक्‍टर मांगते थे। हर कोई देश हाथ ऊपर कर देता था, बात चलती थी, दो चार साल बात चलती थी, फिर बात ऊपर हो जाती थी। बहुत लंबे अरसे से विषय Pendingथा, कोई देने को तैयार नहीं था क्‍योंकि सबको लगता है कि कहीं बम न बना दें और जो बनाते हैं उनको कोई रोकता नहीं है, रोक पाते भी नहीं। जो गांधी का देश है, जिसने कभी दुनिया में किसी पर आक्रमण नहीं किया, जिसने शांति के शहादत मोल ली है। ऐसे हम लोग हैं| उनको कई वर्षों के लिए भटकना पड़ता है। इस बार हमने फ्रांस के अंदर एक कंपनी के साथ भारत की एक कंपनी का MOUहुआ है। मेरे लिए खुशी की बात है कि सबसे बड़ा काम होने वाला है कि अब वो रियेक्‍टर भारत में बनेगा। अब रियेक्‍टर तो बनेगा लेकिन NuclearEnergyके लिए यूरेनियम चाहिए। यूरेनियम आपका कनाडा मुझे देगा। पूरी दुनिया GlobalWarmingके कारण परेशान है,Climate Changeकी चर्चा है, Air Conditionedकमरों में सर्वाधिक एनर्जी का उपयोग करके Climateकी चर्चा की Meetingहुआ करती है। भारत अगर Environment Protectionमें सफल होता है तो दुनिया का 1/6 जिम्मा हम अकेले उठा सकते हैं। उसमें सबसे बड़ा काम है Clean Energyऔर उस Clean Energyमें Nuclear Energyकी ताकत बहुत है। इसलिए हम रियेक्‍टर बनाएंगे, हम कनाडा से यूरेनियम लेंगे, हम Nuclear Energyबनाएंगे और दुनिया को जिस चीज की चिंता है- Climate Changeकी उसमें मददगार होने का काम हिंदुस्‍तान बीड़ा उठाएगा।

भारत के राष्‍ट्र ध्‍वज में चार रंग हैं। हम बोलते हैं तिरंगा, रंग चार हैं, लेकिन वो हमारी विशेषता है। मैं एक चतुर्रंगी क्रांति का सपना ले करके चल रहा हूं, चतुर्रंगी क्रांति का। भारत का तिरंगा झंडा, जिसको देखते हम जिसमें कि चार रंग हैं –Saffron है, Whiteहै, Green है और बीच में Blueहै। अशोक चक्र है Blue Colourका। मैं चतुर्रंगी क्रांति का सपना देख करके चल रहा हूं। चतुर्रंगी क्रांति का सपना देख रहा हूं.. केसरिया रंग.. अब कुछ लोगों को तो केसरिया रंग का अर्थ भी ढंग से मालूम नहीं है। वो अपनी मन-मर्जी का अर्थ करते रहते हैं, वो उनका काम है करते रहें। Saffron Colour,ये ऊर्जा का रंग है, Energy का रंग है। सूर्य का सात घोड़ों का रथ देखते हैं तो Saffron Colourका दिखाई देता है। ये ऊर्जा क्रांति करनी है हिंदुस्‍तान में। इसलिए Nuclear Energy, Solar Energy,Wind Energy, Biomassसे बनने वाली Energy, Energy Saving,इन सारे विषयों को एक साथ चलाया है।

PM Modi - Indian Diaspora Event, at Ricoh Coliseum, Toronto Canada (5)

हमारे देश में कुछ तो Terminologyएक दम से बदल रही है। भारत कभी भी.. ज्‍यादा से ज्‍यादा चर्चा मेगावाट की करता था, कि भई इतने मेगावाट, इतने मेगावाट। पहली बार देश में गीगावाट की चर्चा होनी शुरू हुई है। वरना हमारा.. क्रिकेट में भी Lastके जो बॉलर वगैरह खेलने जाते हैं, सेंचुरी की कहां चर्चा करते हैं?.. तो मेगावाट के आस-पास खेलते थे, पहली बार सरकार गीगावॉट की परिभाषा ले करके चल रही है और 175 गीगावाट Renewable Energyकी तरफ हम जा रहे हैं, 100 गीगावाट Solar Energy, 75 गीगावाट Wind Energy| यह सपना देखा है। Energysaving.. LED Bulbका एक पूरा मूवमेंट खड़ा किया है। स्‍कूलों में बच्‍चों को बताते है, बिजली बचाने के लिए अपने घर में माहौल बनाओ। LED Bulbऔर Transparency.. आपको जानकर हैरानी होगी कि एक साल पहले जो सरकार थी, उस समय 2012-13 के कार्यक्रम में LEDका Bulbसरकार 350 रूपये में लेती थी। कितना? ये सरकार 85 रूपये में लेती है। ये Transparencyहै कि नहीं है, है कि नहीं है, भ्रष्‍टाचार गया कि नहीं गया, ईमानदारी आई कि नहीं आई, ईमानदारी से काम हो सकता है कि नहीं हो सकता। हर छोटी चीज में यदि ध्‍यान बारीकी से रखा जाए,तो बदलाव लाया जा सकता है। जन-मन बदला है दोस्‍तों इसलिए परिस्थितियां पलट रही हैं। दूसरा Revolutionहै –White Revolution.हमारे देश में, दुनिया में दूध देने वाले पशुओं की तुलना में हमारे यहां Productivityबहुत ज्‍यादा नहीं है। जो काम दो दूध देने वाले पशुओं से होना चाहिए,उतना काम करने के लिए हमको 20 पशु पालने पड़ते हैं, क्योंकि उसका लालन-पालन करने के लिए जिन चीजों को वैज्ञानिक तरीके से बढ़ाना चाहिए, हम नहीं बढ़ा पाते। गांव के गरीब के पास यदि एक पशु हो,तो उसको जिंदगी में कभी देखना न पड़े, उसकी Productivityकैसे बढ़े, वैज्ञानिक तौर-तरीके कैसे आएं और हिंदुस्‍तान में सेकेंड White Revolutionकैसे हो,उस पर हम बल दे रहे हैं। तीसरा, Green Revolution .. Green Revolutionमें वही बात, अब जमीन पहले पांच एकड़ थी, दो भाई थे, अब पांच एकड़ में दस भाई हो गए, दो भाई के बच्‍चे हो गए, उनके बेटे हो गए, अब इतना बड़ा परिवार दस बीघा जमीन में कैसे चलेगा? वो परिवार तब चलेगा कि हम सीमित जमीन में भी Productivityकैसे बढ़ाएं। इसके लिए एक काम हमने उठाया है –Soil Health Card.इंसान की Healthके लिए जैसे HealthCardहोता है,  वैसे धरती माता की तबीयत के लिए Health Cardहो । कहीं हमारी पृथ्‍वी मां बीमार तो नहीं है?  हमारी पृथ्‍वी मां को जो खाना चाहिए, वो नहीं खिलाते,कुछ और खिला दिया, ऐसा तो नहीं है? माँ को कैसे बचाएं, इसलिए हमने अभियान उठाया है धरती मां की रक्षा करने का। Soil Health Cardका मिशन चलाया है। पानी बचाना, ये दुनिया पर बहुत बड़ा जिम्‍मा आ पड़ा है। Per Drop More Cropएक-एक बूंद से फसल कैसे ज्‍यादा पैदा हो?उस पर हम बल देना चाहते हैं, जो पैदा हो उसका Value Additionकैसे हो, मूल्‍य वृद्धि कैसे हो?किसान का माल .. Forward Linkageकैसे उसको मिले, Green Revolution.. हिंदुस्‍तान में सेकेंड Green Revolutionके लिए, भारत का जो पूर्वी हिंदुस्‍तान है, जिसकी जब चर्चा होती है, तो गरीबी के नाम पर होती है, वो सबसे समृ‍द्ध बन सकता है। बिहार हो, ओडि़शा हो, पूर्वी उत्‍तर प्रदेश हो, पश्चिम बंगाल हो, असम हो, जहां विपुल मात्रा में पानी है। इसलिए हमारा फोकस है सेकेंड Green Revolutionऔर स्‍पेशल फोकस है हिंदुस्‍तान के पूर्वी इलाके में, वहां के किसान और गांव की जिंदगी को बदलना है। चौथा है, Blue Revolution, Blueक्रांति करनी है। BlueRevolutionजब मैं कहता हूं तब, एक नीला आसमान। पर्यावरण के संकटों से मुक्‍त नीला आसमान। Environment Protectionकी चिंता करते हुए नीला आसमान। मैं Manufacturing में कहता हूं – Zero Defect,  Zero Effectजो पैदा करें,उसमें कोई Defect न हो और ऐसे पैदा करे कि Environmentपर Effectन हो। Zero Defect,  Zero Effect,नीला आसमान। और दूसरा नीला समुंदर के पानी का रंग। नीला आसमान भी चाहिए, वो भी Revolutionकरना है और सामुद्रिक शक्ति का भी Revolutionहोना चाहिए। मेरे मछुआरे, उनकी आर्थिक स्थिति सुधरनी चाहिए। समंदर के अंदर प्राकृतिक संपदा पड़ी है। गैस और पेट्रोलियम के भंडार पड़े हैं। इन प्राकृतिक संपदाओं का सर्वाधिक उपयोग मानव जाति के लिए कैसे हो, Blue Revolutionकरना है, Saffron  Revolution, WhiteRevolution, Blue Revolution,Green Revolution, Blue Revolution| जल-थल नभ सबकुछ.. और इसलिए भाईयों और बहनों विकास की उन नई-नई ऊचाईयों को पार कर रहे हैं। आप कनाडा के भाईयों और बहनों कुछ बातें हैं जो मैं आपको जानकारी देना चाहता हूं। ओसीआई और पीआईओ.. मैंने जब Madison Squareपर बोल रहा था,तो मैंने वादा किया था। इन दोनों को Mergeकर देंगे, वो काम पूरा कर दिया है। हर किसी को पीआईओ कार्ड हो, वो ओसीआई की तरह ही, उसको सारी सुविधाएं दी जाएंगी। दूसरी बात है, ओसीआई पूरे जीवन के लिए मिलेगा। पहले वो सिर्फ 15 साल के लिए था। आपको पता होगा, आप में से जो बड़ी आयु के लोग वहां आ करके रहते होंगे, छुट्टियों में, तो हमारे यहां यह नियम था, उसको हर 15 दिन में एक बार पुलिस थाने ले जा करके बताना पड़ता था कि मैं वही हूं और कुछ गलत नहीं कर रहा हूं। मुझे बताइये कि आप पर मुझे भरोसा करना चाहिए कि नहीं करना चाहिए?  करना चाहिए कि नहीं चाहिए? जन-मन बदला है दोस्‍तों! इसलिए हमने तय किया है कि ओसीआई कार्ड वालों को पुलिस थाने में हाजिरी लगाने की जरूरत नहीं है। ओसीआई को चार पीढ़ी तक विदेश गए लोग.. अब उनको इसमें समाहित कर दिया गया है। चार पीढ़ी तक को स्‍वीकार कर लिया गया है। कुछ जगह पर अभी कुछ चीजें Processमें हैं। अगले पांच छह महीनों में सारी प्रक्रियाएं पूरी हो जाएंगी।

 एक ई-पोर्टल हमने शुरू किया है, जिसका आप फायदा ले सकते हैं। ट्रैकिंग, मॉनिटरिंग, फीडबैक ये सारी चीजें ई-पोर्टल के अंदर हैं। ई-पोर्टल का नाम है, मदद। एक ई-माइग्रेट पोर्टल शुरू किया है, जिसके द्वारा भी आपको कोई शिकायत हो, कोई कठिनाई हो तो इमीग्रेशन ऑफिस जाना नहीं पड़ेगा। आप उसी के द्वारा अपना काम कर सकते हैं, आपका समय बच सकता है। जो भारत के बाहर रहने वाले लोग हैं, जिनको ऑनलाइन अप्‍लीकेशन करने हैं,वे ई-माइग्रेशन इस व्‍यवस्‍था के तहत कर सकते हैं। आपने देखा है कि दुनिया में कुछ न कुछ देशों में संकट चलते रह‍ते हैं और हमारे भारतीय भाई-बहन बड़े उदार रहते हैं, उनको हम समझाते हैं कि भई निकलो, मुसीबत आ रही है। उनको लगता है नहीं-नहीं ये तो अच्‍छे लोग हैं, हमें कुछ नहीं होगा। वो निकलते नहीं हैं। हम यमन में जनवरी महीने से कह रहे थे कि निकलो!निकलो! कहते थे नहीं। आखिरकार,हमें अभी निकालना पड़ा चार हजार लोगों को, मुश्किल से ले करके आये हैं। पिछले दस महीने में West Asia में जो मुसीबतें आईं हैं, करीब 17 हजार भारतीयों को सुरक्षित बचा करके वापस लाने का काम किया है। देशवासियों मैं आपको एक बात बताना चाहता हूं, संकट की घड़ी में हम पासपोर्ट के रंग नहीं देखते हैं। अपनों के लिए जो भी करना पड़ता है, पूरी शक्ति लगा करके करते हैं। लेकिन विश्‍व में रहने वाले भारतीयों से भी हमारा आग्रह रहेगा कि हम संकटों में फंसे नहीं, समय रहते हम जागरूकता पूर्वक अपने विषयों को आगे बढ़ाये तो अच्‍छा होगा।

PM Modi - Indian Diaspora Event, at Ricoh Coliseum, Toronto Canada (7)

पहली बार हमने प्‍लानिंग कमीशन की जगह पर नीति आयोग बनाया है और नीति आयोग में एक पैराग्राफ.. प्रवासी भारतीयों को भी एक शक्ति के रूप में माना गया है। वो भी एक बहुत बड़ी भारत की विकास की ताकत है और उसके लिए भी भारत को सोचते रहना चाहिए। ये पहली बार एक Specific काम उनके लिए तय किया है। उसके चार्टर में इसको लिखा गया है। कनाडा के मित्रों के लिए एक खुश खबरी है। इलैक्‍ट्रोनिक टूरिस्‍ट वीजा, इसकी व्‍यवस्‍था हमने कर दी है, बहुत ही जल्‍द इसका लाभ आपको मिलेगा। दूसरी बात, मुझे मालूम है कि आप बोलेंगे नहीं,लेकिन कभी-कभी आपको भी वीजा लेने में तकलीफ पड़ती है, पड़ती है न? अब हमने तय किया है कि दस साल के लिए देंगे। अगर जन-मन बदला है,तो भरोसा भी बढ़ना चाहिए और भरोसे से दुनिया चलती है मेरे दोस्तों ! इसको ले करके हम चलने वाले हैं और चल रहे हैं। भाईयों और बहनों,काफी लंबी बातें कर ली आपसे, मुझे आनंद आया, आपने स्‍वागत किया, सम्‍मान किया। मैं आप सबसे आग्रह करूंगा कि हमारा देश, हम जो भी पढ़े हैं, जो भी अनुभव पाया है, दुनिया में कहीं से भी जो Disciplineसीखें हैं, जो भी अच्‍छा है हमारे पास, कहीं से भी मिला हो, वो हमारे देश के लिए भी काम आना चाहिए, हमारे देश के उन गरीबों के लिए भी काम आना चाहिए। जो हमारे लोग यहां आये हैं, हम ये न भूलें कि आज जो हम पहुंचें हैं जहां पर उसके मूल में किसी न किसी गरीब ने हमारे लिए कुछ न कुछ तो छोड़ा होगा। किसी न किसी ने कष्‍ट झेला होगा,तब हमारी जिंदगी बनी है। मानवता का तो यही तकाजा है कि जिन्‍होंने हमें दिया है हमें उनको भी तो कुछ लौटाना है। इस बात को ले करके आप चलें। भारत के प्रति हमारी भक्ति अपरमपार बनी रहे। मैं फिर एक बार, कनाडा ने मेरा जो स्‍वागत किया, सम्‍मान किया, प्रधानमंत्री जी ने इतना समय दिया, उनके मंत्रि-परिषद के इतने वरिष्‍ठ लोग आ करके बैठे, यहां के सभी सांसद आ करके बैठे, मैं उनका सबका हृदय से बहुत-बहुत धन्‍यवाद करता हूं। कनाडा और भारत की दोस्‍ती एक ऐसी युक्ति है, जो शक्तियों का संवर्धन करती है और ये ऐसी शक्ति है.. मान लीजिये हम Mathematic में a2 + b2करें तो Result क्‍या आता है? लेकिन मान लीजिए (a+b)2 तो Resultआता है a2 +2ab+b2 ... Extra 2ab मिलता है कि नहीं मिलता है? ये Extra 2ab कहां से आया? तो भारत और कनाडा जब मिलता है तो Extra 2ab निकलता है। यह हमारी ताकत है। उस ताकत को लेकर आगे बढ़ें। इसी एक अपेक्षा के साथ मैं फिर एक बार आप सबका धन्‍यवाद करता हूं। मेरी तरफ से आपको बहुत शुभकामनाएं देता हूं और समाज के सब लोगों ने मेरा इतना सम्‍मान किया, आशीर्वाद दिए, मैं सदा सर्वदा आपके इस प्रेम को याद रखूंगा। आपके आशीर्वाद की ताकत को याद रखूंगा। मैं आपको सबको वंदन करते हुए मेरी बात को विराम करता हूं। दोनों मुट्ठी बंद करके मेरे साथ पूरी ताकत से बोलिए –भारत माता की जय। ऐसे नहीं, आवाज हिंदुस्‍तान तक जानी चाहिए।

भारत माता की जय।

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At this moment, we have to give utmost importance to what doctors, experts and scientists are advising: PM
Do not believe in rumours relating to vaccine, urges PM Modi
Vaccine allowed for those over 18 years from May 1: PM Modi
Doctors, nursing staff, lab technicians, ambulance drivers are like Gods: PM Modi
Several youth have come forward in the cities and reaching out those in need: PM
Everyone has to take the vaccine and always keep in mind - 'Dawai Bhi, Kadai Bhi': PM Modi

ನನ್ನ ಪ್ರಿಯ ದೇಶವಾಸಿಗಳೇ, ನಮಸ್ಕಾರ. ಇಂದು ಕೊರೊನಾ, ನಮ್ಮೆಲ್ಲರ ಧೈರ್ಯ ದುಖಃವನ್ನು ಭರಿಸುವ ಶಕ್ತಿಯನ್ನು ಪರೀಕ್ಷಿಸುತ್ತಿರುವ ಸಮಯದಲ್ಲಿ ನಿಮ್ಮೊಂದಿಗೆ ಮನದ ಮಾತನ್ನಾಡುತ್ತಿದ್ದೇನೆ. ನಮ್ಮ ಬಹಳಷ್ಟು ಪ್ರಿಯರು ಸಮಯಕ್ಕೂ ಮುನ್ನವೇ ನಮ್ಮಿಂದ ಅಗಲಿದ್ದಾರೆ. ಕೊರೊನಾದ ಮೊದಲ ಅಲೆಯ ವಿರುದ್ಧ ಯಶಸ್ವಿಯಾಗಿ ಹೋರಾಡಿ ಗೆದ್ದ ನಂತರ ದೇಶದ ವಿಶ್ವಾಸ ಹೆಚ್ಚಿತ್ತು. ಆತ್ಮ ವಿಶ್ವಾಸದಿಂದ ಕೂಡಿತ್ತು. ಆದರೆ ಈ ಬಿರುಗಾಳಿ ದೇಶವನ್ನು ತಲ್ಲಣಗೊಳಿಸಿದೆ.

ಸ್ನೇಹಿತರೆ, ಕಳೆದ ದಿನಗಳಲ್ಲಿ ಈ ಸಂಕಷ್ಟದಿಂದ ಹೊರಬರಲು ಬೇರೆ ಬೇರೆ ವಿಭಾಗದ ಪರಿಣಿತರೊಂದಿಗೆ, ತಜ್ಞರೊಂದಿಗೆ ನಾನು ಸುದೀರ್ಘ ಚರ್ಚೆ ನಡೆಸಿದ್ದೇನೆ. ನಮ್ಮ ಔಷಧೀಯ ಕ್ಷೇತ್ರದವರಾಗಲಿ, ಲಸಿಕೆ ತಯಾರಕರಾಗಲಿ, ಆಮ್ಲಜನಕ ಉತ್ಪಾದನಾ ಸಂಬಂಧಿ ಜನರಾಗಲಿ ಅಥವಾ ವೈದ್ಯಕೀಯ ಕ್ಷೇತ್ರದ ಪರಿಣಿತರಾಗಲಿ ಎಲ್ಲರೂ ಮಹತ್ವಪೂರ್ಣ ಸಲಹೆಗಳನ್ನು ಸರ್ಕಾರಕ್ಕೆ ನೀಡಿದ್ದಾರೆ. ಪ್ರಸ್ತುತ ನಾವು ಈ ಹೋರಾಟದಲ್ಲಿ ಜಯಗಳಿಸಲು ತಜ್ಞರ ಮತ್ತು ವಿಜ್ಞಾನಿಗಳ ಸಲಹೆಗಳಿಗೆ ಆದ್ಯತೆ ನೀಡಬೇಕಿದೆ. ರಾಜ್ಯ ಸರ್ಕಾರದ ಪ್ರಯತ್ನಗಳನ್ನು ಮುಂದುವರಿಸಲು ಭಾರತ ಸರ್ಕಾರ ಸಂಪೂರ್ಣ ಶಕ್ತಿಯೊಂದಿಗೆ ಸಿದ್ಧವಾಗಿದೆ. ರಾಜ್ಯ ಸರ್ಕಾರಗಳೂ ತಮ್ಮ ಕರ್ತವ್ಯ ನಿಭಾಯಿಸುವ ಸಂಪೂರ್ಣ ಪ್ರಯತ್ನ ಮಾಡುತ್ತಿವೆ.

ಸ್ನೇಹಿತರೆ, ಈ ಸಂದರ್ಭದಲ್ಲಿ ಕೊರೊನಾ ವಿರುದ್ಧ ವೈದ್ಯರು ಮತ್ತು ಆರೋಗ್ಯ ಕಾರ್ಯಕರ್ತರು ಬಹುದೊಡ್ಡ ಹೋರಾಟವನ್ನೇ ಮಾಡುತ್ತಿದ್ದಾರೆ. ಕಳೆದ ಒಂದು ವರ್ಷದಲ್ಲಿ ಅವರಿಗೆ ಈ ರೋಗದ ಬಗ್ಗೆ ಎಲ್ಲ ರೀತಿಯ ಅನುಭವಗಳಾಗಿವೆ. ನಮ್ಮೊಂದಿಗೆ ಈಗ ಮುಂಬೈಯಿಂದ ಪ್ರಸಿದ್ಧ ವೈದ್ಯರಾದ ಶಶಾಂಕ್ ಜೋಷಿ ಸಂಪರ್ಕದಲ್ಲಿದ್ದಾರೆ.

ಡಾಕ್ಟರ್ ಶಶಾಂಕ್ ಅವರಿಗೆ ಕೊರೊನಾ ಚಿಕಿತ್ಸೆ ಮತ್ತು ಇದಕ್ಕೆ ಸಂಬಂಧಿಸಿದ ಸಂಶೋಧನೆ ಕುರಿತು ಬಹಳ ಆಳವಾದ ಅನುಭವವಿದೆ. ಅವರು ‘ಇಂಡಿಯನ್ ಕಾಲೇಜ್ ಆಫ್ ಫಿಸಿಶಿಯನ್ಸ್’ ನ ಡೀನ್ ಆಗಿ ಕಾರ್ಯನಿರ್ವಹಿಸಿದ್ದಾರೆ. ಬನ್ನಿ ಡಾಕ್ಟರ್ ಶಶಾಂಕ್ ಅವರೊಂದಿಗೆ ಮಾತನಾಡೋಣ

ಮೋದಿಯವರು: ಡಾಕ್ಟರ್ ಶಶಾಂಕ್ ಅವರೇ ನಮಸ್ಕಾರ

ಡಾ.ಶಶಾಂಕ್ : ನಮಸ್ಕಾರ ಸರ್

ಮೋದಿಯವರು: ಈಗ ಕೆಲ ದಿನಗಳ ಹಿಂದೆಯಷ್ಟೇ ನಿಮ್ಮೊಂದಿಗೆ ಮಾತನಾಡುವ ಅವಕಾಶ ಲಭಿಸಿತ್ತು. ನಿಮ್ಮ ವಿಚಾರಗಳಲ್ಲಿನ ಸ್ಪಷ್ಟತೆ ನನಗೆ ಬಹಳ ಇಷ್ಟವಾಯಿತು. ದೇಶದ ಸಮಸ್ತ ನಾಗರಿಕರು ನಿಮ್ಮ ವಿಚಾರಗಳನ್ನು ಅರಿಯಲಿ ಎಂದು ನನಗೆ ಅನ್ನಿಸಿತು. ಯಾವ ವಿಚಾರಗಳು ಕೇಳಿ ಬರುತ್ತಿವೆಯೋ ಅವನ್ನೇ ಒಂದು ಪ್ರಶ್ನೆಯ ರೂಪದಲ್ಲಿ ನಿಮ್ಮ ಮುಂದಿಡುತ್ತಿದ್ದೇನೆ. ಡಾ.ಶಶಾಂಕ್ ಅವರೇ ನೀವು ಹಗಲಿರುಳು ಜೀವನ ರಕ್ಷಣೆಯ ಕೆಲಸದಲ್ಲಿ ತೊಡಗಿದ್ದೀರಿ. ಎಲ್ಲಕ್ಕಿಂತ ಮೊದಲು 2 ನೇ ಅಲೆಯ ಬಗ್ಗೆ ನೀವು ಜನರಿಗೆ ಮಾಹಿತಿ ನೀಡಿ ಎಂದು ನಾನು ಬಯಸುತ್ತೇನೆ. ವೈದ್ಯಕೀಯವಾಗಿ ಇದು ಹೇಗೆ ಭಿನ್ನವಾಗಿದೆ ಮತ್ತು ಏನೇನು ಮುಂಜಾಗೃತೆಗಳನ್ನು ಕೈಗೊಳ್ಳಬೇಕು?

ಡಾ.ಶಶಾಂಕ್ : ಧನ್ಯವಾದಗಳು ಸರ್, ಈ 2 ನೇ ಅಲೆ ಬಹಳ ತೀವ್ರವಾಗಿ ಹರಡುತ್ತಿದೆ. ಮೊದಲನೇ ಅಲೆಗಿಂತಲೂ ವೇಗವಾಗಿ ವೈರಾಣು ಹರಡುತ್ತಿದೆ, ಆದರೆ ಅದಕ್ಕಿಂತ ಹೆಚ್ಚಿನ ವೇಗದಲ್ಲಿ ಚೇತರಿಕೆ ಇದೆ ಮತ್ತು ಮೃತ್ಯು ದರ ಬಹಳ ಕಡಿಮೆ ಇದೆ ಎಂಬುದು ಒಳ್ಳೆಯ ವಿಷಯ. ಇದರಲ್ಲಿ 2-3 ವ್ಯತ್ಯಾಸಗಳಿವೆ, ಮೊದಲನೇಯದ್ದು ಯುವಜನತೆ ಮತ್ತು ಮಕ್ಕಳಲ್ಲಿ ಇದು ಕಾಣಿಸಿಕೊಳ್ಳುತ್ತಿದೆ. ಅದರ ಲಕ್ಷಣಗಳು ಹಿಂದಿನಂತೆಯೇ ಉಸಿರಾಟದ ತೊಂದರೆ, ಒಣ ಕೆಮ್ಮು, ಜ್ವರ, ಎಲ್ಲವೂ ಇವೆ. ಆದರೆ ಅದರೊಂದಿಗೆ ರುಚಿ ಕಳೆದುಕೊಳ್ಳುತ್ತಾರೆ ಮತ್ತು ವಾಸನೆ ಗ್ರಹಿಸುವ ಶಕ್ತಿಯನ್ನು ಕಳೆದುಕೊಳ್ಳುತ್ತಾರೆ. ಜನರು ಸ್ವಲ್ಪ ಭಯಭೀತರಾಗಿದ್ದಾರೆ. ಭೀತಿಗೊಳಗಾಗುವ ಅವಶ್ಯಕತೆ ಖಂಡಿತ ಇಲ್ಲ. ಶೇ 80-90 ಜನರಲಲಿ ಈ ಯಾವ ಲಕ್ಷಣಗಳು ಕಂಡುಬರುವುದಿಲ್ಲ. ಮ್ಯುಟೇಶನ್ ಎಂದು ಹೇಳುತ್ತಾರಲ್ಲವೇ ಅದಕ್ಕೆ ಹೆದರುವ ಅವಶ್ಯಕತೆಯಿಲ್ಲ. ಮ್ಯುಟೇಶನ್ ಆಗುತ್ತಲೇ ಇರುತ್ತದೆ, ನಾವು ಬಟ್ಟೆ ಬದಲಿಸಿದಂತೆ ವೈರಾಣು ತನ್ನ ಸ್ವರೂಪವನ್ನು ಬದಲಿಸುತ್ತಲೇ ಇರುತ್ತದೆ. ಆದ್ದರಿಂದ ಹೆದರುವ ಅವಶ್ಯಕತೆಯಿಲ್ಲ. ಈ ಅಲೆಯನ್ನೂ ನಾವು ದಾಟಿ ಬರಲಿದ್ದೇವೆ. ಅಲೆಗಳು ಬರುತ್ತಲೇ ಇರುತ್ತವೆ, ವೈರಾಣು ಕೂಡಾ ಬಂದು ಹೋಗುತ್ತಿರುತ್ತದೆ. ಇವೇ ಬೇರೆ ಬೇರೆ ಲಕ್ಷಣಗಳಾಗಿವೆ. ವೈದ್ಯಕೀಯವಾಗಿ ನಾವು ಸನ್ನದ್ಧರಾಗಿರಬೇಕು. 14 ರಿಂದ 21 ದಿನಗಳ ಕೋವಿಡ್ ಇರುತ್ತದೆ. ಈ ಸಮಯದಲ್ಲಿ ವೈದ್ಯರ ಸಲಹೆಯನ್ನು ಪಡೆದುಕೊಳ್ಳಬೇಕು

ಮೋದಿಯವರು: ಡಾ.ಶಶಾಂಕ್ ಅವರೇ ನಿಮ್ಮ ವಿಶ್ಲೇಷಣೆ ನನಗೂ ಬಹಳ ಆಸಕ್ತಿಕರವಾಗಿದೆ. ನನಗೆ ಬಹಳಷ್ಟು ಪತ್ರಗಳು ಬಂದಿವೆ. ಚಿಕಿತ್ಸೆ ಕುರಿತು ಜನರಲ್ಲಿ ಬಹಳ ಸಂದೇಹಗಳಿವೆ. ಕೆಲ ಔಷಧಿಗಳ ಬೇಡಿಕೆ ಹೆಚ್ಚಿದೆ. ಆದ್ದರಿಂದ ಕೋವಿಡ್ ಚಿಕಿತ್ಸೆ ಬಗ್ಗೆಯೂ ಸಹ ಖಂಡಿತ ನೀವು ತಿಳಿಸಬೇಕೆಂದು ನಾನು ಬಯಸುತ್ತೇನೆ

ಡಾ.ಶಶಾಂಕ್ : ಹಾಂ ಸರ್, ಕ್ಲಿನಿಕಲ್ ಚಿಕಿತ್ಸೆಯನ್ನು ಜನರು ಬಹಳ ತಡವಾಗಿ ಆರಂಭಿಸುತ್ತಾರೆ. ಹಾಗಾಗಿ ರೋಗ ತಂತಾನೇ ಹೊರಟುಹೋಗುತ್ತದೆ ಎಂಬ ಭರವಸೆಯಲ್ಲಿರುತ್ತಾರೆ ಮತ್ತು ಮೊಬೈಲ್ ನಲ್ಲಿ ಹರಿದಾಡುವ ಸುದ್ದಿಗಳನ್ನು ನಂಬುತ್ತಾರೆ. ಸರ್ಕಾರ ನೀಡಿದ ಸೂಚನೆಗಳನ್ನು ಪಾಲಿಸಿದರೆ ಇಂಥ ಸಂಕಷ್ಟಗಳು ಎದುರಾಗುವುದಿಲ್ಲ. ಹಾಗಾಗಿ ಕೋವಿಡ್ ಚಿಕಿತ್ಸೆ ವಿಧಾನದಲ್ಲಿ 3 ಬಗೆಯ ಹಂತಗಳಿವೆ. ಅಲ್ಪ ಅಥವಾ ಮೈಲ್ಡ್ ಕೋವಿಡ್, ಮಧ್ಯಮ ಅಥವಾ ಮಾಡರೇಟ್ ಕೋವಿಡ್ ಅಥವಾ ತೀವ್ರತರವಾದ ಕೋವಿಡ್ ಇದನ್ನು ಸಿವಿಯರ್ ಕೋವಿಡ್ ಎನ್ನುತ್ತಾರೆ. ಅಲ್ಪ ಕೋವಿಡ್ ರೋಗಿಗಳಿಗೆ ಆಕ್ಸಿಜೆನ್ ಮಾನಿಟರಿಂಗ್ ಮಾಡುತ್ತೇವೆ. ನಾಡಿ ಮಿಡಿತ, ಜ್ವರದ ಮೇಲೆ ನಿಗಾವಹಿಸುತ್ತೇವೆ. ಜ್ವರ ಹೆಚ್ಚಾಗುವಂತಿದ್ದರೆ ಕೆಲವೊಮ್ಮೆ ಪ್ಯಾರಾಸಿಟಮಾಲ್ ಔಷಧಿ ಬಳಸುತ್ತೇವೆ. ಮಾಡರೇಟ್ ಕೋವಿಡ್ ಇದ್ದಲ್ಲಿ ಅಥವಾ ತೀವ್ರತರವಾದ ಕೋವಿಡ್ ಇದ್ದಲ್ಲಿ ತಮ್ಮ ವೈದ್ಯರನ್ನು ಸಂಪರ್ಕಿಸುವುದು ಅತ್ಯಂತ ಅವಶ್ಯಕ. ಸೂಕ್ತ ಮತ್ತು ಕಡಿಮೆ ದರದ ಔಷಧಿಗಳು ಲಭ್ಯವಿವೆ. ಇಂಥದ್ದರಲ್ಲಿ ಸ್ಟೆರಾಯ್ಡ್ ಗಳು ಜೀವರಕ್ಷಣೆ ಮಾಡಬಲ್ಲವು. ಇನ್ ಹೇಲರ್ಸ್ ನೀಡುತ್ತೇವೆ, ಮಾತ್ರೆಗಳನ್ನು ನೀಡಬಹುದು, ಇದರೊಟ್ಟಿಗೆ ಆಕ್ಸಿಜೆನ್ ಕೂಡ ಕೊಡಬೇಕಾಗುತ್ತದೆ. ಇದಕ್ಕೆ ಸಣ್ಣ ಪುಟ್ಟ ಚಿಕಿತ್ಸೆಗಳಿವೆ. ಆದರೆ ಒಂದು ಹೊಸ ಪ್ರಯೋಗಾತ್ಮಕ ಔಷಧಿಯೂ ಲಭ್ಯವಿದೆ. ಅದರ ಹೆಸರು ರೆಮ್ ಡೆಸಿವಿರ್. ಇದರಿಂದ ಆಸ್ಪತ್ರೆಯಲ್ಲಿ ಉಳಿಯಬೇಕಾಗುವ ಅವಧಿ 2-3 ದಿನ ಕಡಿಮೆ ಆಗುವ ಉಪಯೋಗವಿದೆ. ಉಪಯುಕ್ತತೆ ಇದೆ. ವೈದ್ಯಕೀಯ ಚಿಕಿತ್ಸೆಯಲ್ಲಿ ಸಹಾಯಕಾರಿಯಾಗಿದೆ. ಮೊದಲ 9-10 ದಿನಗಳೊಳಗೆ ನೀಡಿದಾಗ ಮಾತ್ರ ಈ ಔಷಧಿ ಕೆಲಸ ಮಾಡುತ್ತದೆ ಮತ್ತು ಇದನ್ನು 5 ದಿನ ಮಾತ್ರ ನೀಡಬೇಕಾಗುತ್ತದೆ. ರೆಮ್ ಡೆಸಿವಿರ್ ಹಿಂದೆ ಜನರು ಮುಗಿಬೀಳುತ್ತಿದ್ದಾರೆ. ಇದರ ಅವಶ್ಯಕತೆಯಿಲ್ಲ. ಈ ಔಷಧಿ ಸ್ವಲ್ಪ ಪರಿಣಾಮಕಾರಿಯಾಗಿದೆ. ಯಾರಿಗೆ ಪ್ರಾಣವಾಯು ಆಕ್ಸಿಜೆನ್ ನೀಡಲಾಗುತ್ತದೆಯೋ, ಆಸ್ಪತ್ರೆಯಲ್ಲಿ ಯಾರು ಭರ್ತಿಯಾಗುತ್ತಾರೋ ಅವರು ವೈದ್ಯರ ಸಲಹೆ ಮೇರೆಗೆ ಇದನ್ನು ತೆಗೆದುಕೊಳ್ಳಬೇಕು. ಇದನ್ನು ಎಲ್ಲರೂ ಅರಿತುಕೊಳ್ಳುವುದು ಬಹಳ ಅವಶ್ಯಕವಾಗಿದೆ. ನಾವು ಪ್ರಾಣಾಯಾಮ ಮಾಡೋಣ. ನಮ್ಮ ದೇಹದಲ್ಲಿರುವ ಶ್ವಾಸಕೋಶಗಳನ್ನು ಸ್ವಲ್ಪ ಹಿಗ್ಗಿಸೋಣ. ಹೆಪಾರಿನ್ ಎಂದು ಕರೆಯಲ್ಪಡುವ ರಕ್ತವನ್ನು ತೆಳುವಾಗಿಸುವ ಔಷಧಿಯಂಥ ಸಣ್ಣ ಪುಟ್ಟ ಔಷಧಿಗಳನ್ನು ನೀಡುವುದರಿಂದ ಶೇ 98 ರಷ್ಟು ಜನರು ಚೇತರಿಸಿಕೊಳ್ಳುತ್ತಾರೆ. ವೈದ್ಯಕೀಯ ಚಿಕಿತ್ಸೆಯನ್ನು ವೈದ್ಯರ ಸಲಹೆ ಮೇರೆಗೆ ತೆಗೆದುಕೊಳ್ಳುವುದು ಅವಶ್ಯಕ. ದುಬಾರಿ ಔಷಧಿಗಳ ಹಿಂದೆ ಬೀಳುವ ಅವಶ್ಯಕತೆಯಿಲ್ಲ ಸರ್. ನಮ್ಮ ಬಳಿ ಉತ್ತಮ ಚಿಕಿತ್ಸೆ ಲಭ್ಯವಿದೆ. ಪ್ರಾಣವಾಯು ಆಕ್ಸಿಜೆನ್ ಲಭ್ಯವಿದೆ, ವೆಂಟಿಲೇಟರ್ ಸೌಲಭ್ಯವಿದೆ. ಎಲ್ಲವೂ ಇದೆ ಸರ್. ಈ ಔಷಧಿ ದೊರೆತಾಗ ಅದನ್ನು ಅವಶ್ಯಕತೆಯಿದ್ದವರಿಗೆ ಮಾತ್ರ ನೀಡಬೇಕು. ಇದರ ಬಗ್ಗೆ ಬಹಳಷ್ಟು ಭ್ರಮೆ ಆವರಿಸಿದೆ. ಆದ್ದರಿಂದಲೇ ನಮ್ಮ ಬಳಿ ವಿಶ್ವದ ಅತ್ಯುತ್ತಮ ಚಿಕಿತ್ಸಾ ಸೌಲಭ್ಯವಿದೆ ಎಂದು ಸ್ಪಷ್ಟೀಕರಣೆ ನೀಡಬಯಸುತ್ತೇನೆ ಸರ್. ಭಾರತದಲ್ಲಿ ಚೇತರಿಕೆ ಪ್ರಮಾಣ ಅತ್ಯಂತ ಹೆಚ್ಚಾಗಿದೆ ಎಂಬುದನ್ನು ನೀವು ನೋಡಬಹುದು. ನೀವು ಯುರೋಪ್, ಅಮೇರಿಕಕ್ಕೆ ಹೋಲಿಸಿದಲ್ಲಿ ನಮ್ಮ ಚಿಕಿತ್ಸಾ ಶಿಷ್ಠಾಚಾರದಿಂದ ರೋಗಿಗಳು ಗುಣಮುಖರಾಗುತ್ತಿದ್ದಾರೆ.

ಮೋದಿಯವರು: ಡಾ.ಶಶಾಂಕ್ ಅವರೇ ಅನಂತ ಧನ್ಯವಾದಗಳು. ನಮಗೆ ಡಾ.ಶಶಾಂಕ್ ಅವರು ನೀಡಿದ ಮಾಹಿತಿ ಬಹಳ ಅವಶ್ಯಕವಾಗಿದೆ ಮತ್ತು ಲಾಭದಾಯಕವಾಗಿದೆ.

ಸ್ನೇಹಿತರೆ, ನಿಮಗೆ ಯಾವುದೇ ಮಾಹಿತಿ ಬೇಕೆಂದಲ್ಲಿ, ಯಾವುದೇ ಅನುಮಾನಗಳಿದ್ದಲ್ಲಿ ವಿಶ್ವಾಸಾರ್ಹ ಮೂಲದಿಂದಲೇ ಮಾಹಿತಿ ಪಡೆಯಿರಿ ಎಂದು ನಿಮ್ಮೆಲ್ಲರನ್ನು ಕೇಳಿಕೊಳ್ಳುತ್ತೇನೆ. ನಿಮ್ಮ ಕುಟುಂಬ ವೈದ್ಯರಾಗಲಿ, ಸಮೀಪದ ವೈದ್ಯರಿಂದಾಗಲಿ ಫೋನ್ ಮೂಲಕ ಸಂಪರ್ಕಿಸಿ ಸಲಹೆಗಳನ್ನು ಪಡೆಯಿರಿ. ನಮ್ಮ ವೈದ್ಯರು ಸ್ವತಃ ತಾವೇ ಜವಾಬ್ದಾರಿ ಹೊತ್ತು ಮುಂದೆ ಬರುತ್ತಿರುವುದನ್ನು ನಾವು ನೋಡುತ್ತಿದ್ದೇವೆ. ಅದೆಷ್ಟೋ ವೈದ್ಯರು ಸಾಮಾಜಿಕ ಜಾಲತಾಣಗಳ ಮೂಲಕ ಜನರಿಗೆ ಮಾಹಿತಿ ಒದಗಿಸುತ್ತಿದ್ದಾರೆ. ಫೋನ್ ಮೂಲಕ, ವಾಟ್ಸಾಪ್ ಮೂಲಕ ಸಮಾಲೋಚನೆ ನಡೆಸುತ್ತಿದ್ದಾರೆ. ಹಲವಾರು ಆಸ್ಪತ್ರೆಗಳ ವೆಬ್ ಸೈಟ್ ಗಳಿವೆ ಅಲ್ಲಿ ಮಾಹಿತಿಯೂ ಲಭ್ಯ ಮತ್ತು ವೈದ್ಯರೊಂದಿಗೆ ಸಮಾಲೋಚನೆಗೂ ಅವಕಾಶವಿದೆ. ಇದು ತುಂಬಾ ಮೆಚ್ಚುಗೆಯ ವಿಷಯವಾಗಿದೆ

ನನ್ನೊಂದಿಗೆ ಶ್ರೀನಗರದಿಂದ ಡಾಕ್ಟರ್ ನಾವೀದ್ ನಜೀರ್ ಶಾ ಸಂಪರ್ಕದಲ್ಲಿದ್ದಾರೆ. ಡಾಕ್ಟರ್ ನಾವೀದ್ ಶ್ರೀನಗರದ ಒಂದು ಸರ್ಕಾರಿ ವೈದ್ಯಕೀಯ ಕಾಲೇಜಿನಲ್ಲಿ ಪ್ರಾಧ್ಯಾಪಕರಾಗಿದ್ದಾರೆ. ನಾವೀದ್ ತಮ್ಮ ಉಸ್ತುವಾರಿಯಲ್ಲಿ ಅನೇಕ ಕೊರೋನಾ ರೋಗಿಗಳನ್ನು ಗುಣಪಡಿಸಿದ್ದಾರೆ. ರಮ್ ಜಾನ್ ನ ಈ ಪವಿತ್ರ ಮಾಸದಲ್ಲಿ ಡಾ. ನಾವೀದ್ ತಮ್ಮ ಕಾರ್ಯವನ್ನೂ ನಿಭಾಯಿಸುತ್ತಿದ್ದಾರೆ ಹಾಗೂ ಅವರು ನಮ್ಮೊಂದಿಗೆ ಮಾತುಕತೆಗೆ ಸಮಯವನ್ನೂ ಮೀಸಲಿಟ್ಟಿದ್ದಾರೆ. ಬನ್ನಿ, ಅವರೊಂದಿಗೇ ಮಾತನಾಡೋಣ.

ಮೋದಿ: ಡಾ. ನಾವೀದ್ ಅವರೇ, ನಮಸ್ಕಾರ

ಡಾ.ನಾವೀದ್: ನಮಸ್ಕಾರ ಸರ್

ಮೋದಿ: ಡಾಕ್ಟರ್ ನಾವೀದ್, “ಮನದ ಮಾತು’ ಕಾರ್ಯಕ್ರಮದಲ್ಲಿ ನಮ್ಮ ಶ್ರೋತೃಗಳು ಈ ಕಠಿಣ ಕಾಲದಲ್ಲಿ ಭಯ ನಿರ್ವಹಣೆಯ ಪ್ರಶ್ನೆಯನ್ನು ಎತ್ತಿದ್ದಾರೆ. ತಾವು ತಮ್ಮ ಅನುಭವದಿಂದ ಅವರಿಗೆ ಏನು ಉತ್ತರ ನೀಡುತ್ತೀರಿ?

ಡಾ.ನಾವೀದ್: ನೋಡಿ, ಕೊರೋನಾ ಆರಂಭವಾದಾಗ ನಮ್ಮ ಸಿಟಿ ಆಸ್ಪತ್ರೆಯೇ ಕಾಶ್ಮೀರದ ಮೊಟ್ಟಮೊದಲ ಕೋವಿಡ್ ಆಸ್ಪತ್ರೆಯೆಂದು ಗುರುತಿಸಲ್ಪಟ್ಟಿತು. ವೈದ್ಯಕೀಯ ಕಾಲೇಜಿನಲ್ಲಿ ಆ ಸಮಯದಲ್ಲಿ ಒಂದು ಭಯದ ವಾತಾವರಣವಿತ್ತು. ಜನರಲ್ಲಂತೂ ಕೋವಿಡ್ ಸೋಂಕು ಯಾರಿಗಾದರೂ ಬಂದರೆ ಮರಣಶಿಕ್ಷೆಯೆಂದೇ ಪರಿಗಣಿಸುವ ಭಾವನೆಯಿತ್ತು. ಇಂಥದ್ದರಲ್ಲಿ ನಮ್ಮ ಆಸ್ಪತ್ರೆಯ ವೈದ್ಯವೃಂದ ಹಾಗೂ ಪ್ಯಾರಾ ಮೆಡಿಕಲ್ ಸಿಬ್ಬಂದಿ ಕೆಲಸ ಮಾಡುತ್ತಿದ್ದೆವು. ನಾವು ಈ ರೋಗಿಗಳನ್ನು ಹೇಗೆ ಎದುರಿಸಬೇಕು ಎಂದು ಅವರಲ್ಲೂ ಒಂದು ರೀತಿಯ ಆತಂಕದ ವಾತಾವರಣವಿತ್ತು. ನಮಗೆ ಸೋಂಕು ಉಂಟಾಗಬಹುದೆನ್ನುವ ಭಯ ಇರಲಿಲ್ಲ ಎಂದೇನಲ್ಲ. ಆದರೆ, ಆ ಸಮಯ ಕಳೆದಂತೆ . ಸಮರ್ಪಕವಾಗಿ ರಕ್ಷಣಾ ಸಲಕರಣೆ ಧರಿಸಿದರೆ, ನಿಯಮಗಳು, ನಿಖರವಾದ ಯೋಜನೆಯನ್ನು ಪರಿಪಾಲಿಸಿದರೆ ನಾವೂ ಸುರಕ್ಷಿತವಾಗಿ ಇರಬಹುದು. ಹಾಗೂ ಇತರ ಸಿಬ್ಬಂದಿಯೂ ಸುರಕ್ಷಿತವಾಗಿರಬಹುದು ಎಂಬುದನ್ನು ನಾವು ಮನಗಂಡೆವು. ರೋಗಿಗಳ ಕೆಲವು ಸಂಬಂಧಿಗಳು ಅನಾರೋಗ್ಯಕ್ಕೀಡಾದರು, ಅವರಿಗೆ ರೋಗದ ಯಾವ ಲಕ್ಷಣಗಳು ಇರಲಿಲ್ಲ. ಸರಿಸುಮಾರು ಶೇಕಡ 90-95ಕ್ಕೂ ಹೆಚ್ಚು ರೋಗಿಗಳು ಔಷಧಗಳಿಲ್ಲದೆಯೂ ಗುಣಮುಖರಾಗುತ್ತಿದ್ದುದನ್ನೂ ನಾವು ನೋಡಿದೆವು. ಸಮಯ ಕಳೆದಂತೆ ಜನರಲ್ಲಿ ಕೊರೋನಾ ಬಗ್ಗೆ ಇದ್ದ ಭಯ ಕಡಿಮೆಯಾಯಿತು. ಈಗ ಎರಡನೇ ಅಲೆ ನಮಗೆ ಬಂದೆರಗಿದೆ. ಈ ಸಮಯದಲ್ಲಿಯೂ ನಾವು ಭಯಪಡುವ ಅಗತ್ಯವಿಲ್ಲ. ಈ ಸಂದರ್ಭದಲ್ಲೂ ರಕ್ಷಣಾತ್ಮಕ ಮಾರ್ಗಗಳನ್ನು ಪಾಲನೆ ಮಾಡಬೇಕು. ಏನೇನು ಕೊರೋನಾ ಮಾರ್ಗಸೂಚಿಗಳಿವೆಯೋ ಅವುಗಳನ್ನು ಪಾಲಿಸಬೇಕು. ಮಾಸ್ಕ್ ಧರಿಸುವುದು, ಕೈಗಳಿಗೆ ಸ್ಯಾನಿಟೈಸರ್ ಬಳಕೆ ಮಾಡುವುದು, ಅಷ್ಟೇ ಅಲ್ಲದೆ, ವ್ಯಕ್ತಿಗತ ಅಂತರ ಕಾಪಾಡಿಕೊಳ್ಳುವುದು, ಗುಂಪು ಸೇರುವುದನ್ನು ತಡೆಯಬೇಕು. ಇವುಗಳನ್ನು ಅನುಸರಿಸಿದರೆ ನಾವು ನಮ್ಮ ದಿನನಿತ್ಯದ ಕೆಲಸ ಕಾರ್ಯಗಳನ್ನು ಚೆನ್ನಾಗಿಯೇ ನಿಭಾಯಿಸಿಕೊಂಡು ಹೋಗಬಹುದು ಹಾಗೂ ಸೋಂಕಿನಿಂದ ರಕ್ಷಿಸಿಕೊಳ್ಳಲೂಬಹುದು.

ಮೋದಿ ಜಿ: ಡಾ.ನಾವೀದ್, ಲಸಿಕೆಯ ಕುರಿತಾಗಿಯೂ ಜನರಲ್ಲಿ ಹಲವಾರು ಪ್ರಶ್ನೆಗಳಿವೆ. ಲಸಿಕೆಯಿಂದ ಎಷ್ಟು ರಕ್ಷಣೆ ಸಿಗುತ್ತದೆ, ಲಸಿಕೆ ತೆಗೆದುಕೊಂಡ ಬಳಿಕ ಎಷ್ಟು ಅಸ್ವಸ್ಥರಾಗುತ್ತೇವೆ? ಈ ಬಗ್ಗೆ ಸ್ವಲ್ಪ ಹೇಳಿ, ಇದರಿಂದ ನಮ್ಮ ಕೇಳುಗರಿಗೂ ಸಾಕಷ್ಟು ಲಾಭವಾಗುತ್ತದೆ.

ಡಾ.ನಾವೀದ್: ಯಾವಾಗ ಕೊರೋನಾ ಸೋಂಕು ನಮಗೆ ಎದುರಾಯಿತೋ, ಅಂದಿನಿಂದ ಇಂದಿನವರೆಗೂ ನಮ್ಮಲ್ಲಿ ಕೋವಿಡ್-19 ಗೆ ಯಾವುದೇ ಪರಿಣಾಮಕಾರಿ ಚಿಕಿತ್ಸೆ ಲಭ್ಯವಿಲ್ಲ. ಅಂದರೆ, ನಾವು ಈ ರೋಗದ ವಿರುದ್ಧ ಎರಡು ಮಾರ್ಗಗಳ ಮೂಲಕ ಮಾತ್ರ ಹೋರಾಟ ಮಾಡಬಹುದು. ಮೊದಲನೆಯದಾಗಿ, ರಕ್ಷಣಾ ವಿಧಾನಗಳನ್ನು ಪರಿಪಾಲಿಸುವುದು. ಯಾವುದೇ ಪರಿಣಾಮಕಾರಿ ಲಸಿಕೆ ನಮಗೆ ಸಿಕ್ಕರೂ ಈ ರೋಗದಿಂದ ನಮಗೆ ಮುಕ್ತಿ ದೊರೆಯುತ್ತದೆ ಎಂದು ನಾವು ಮೊದಲಿನಿಂದಲೂ ಹೇಳುತ್ತ ಬಂದಿದ್ದೇವೆ. ನಮ್ಮ ದೇಶದಲ್ಲಿ ಎರಡು ಲಸಿಕೆಗಳು ಈ ಸಮಯದಲ್ಲಿ ಲಭ್ಯ ಇವೆ. ಅವು ಕೋವ್ಯಾಕ್ಸೀನ್ ಮತ್ತು ಕೋವಿಶೀಲ್ಡ್. ಇವು ನಮ್ಮಲ್ಲಿಯೇ ತಯಾರಿಸುತ್ತಿರುವ ಲಸಿಕೆಗಳು. ಇತರ ಸಂಸ್ಥೆಗಳು ಸಹ ತಮ್ಮ ಪ್ರಯೋಗಗಳನ್ನು ಮಾಡಿವೆ. ಅದರಲ್ಲಿ ಶೇ.60ಕ್ಕಿಂತ ಹೆಚ್ಚು ಪರಿಣಾಮಕಾರಿ ಎಂಬುದು ದೃಢಪಟ್ಟಿದೆ. ನಾವು ಜಮ್ಮು ಕಾಶ್ಮೀರದ ಬಗ್ಗೆಯೇ ಹೇಳಿದರೆ, ನಮ್ಮ ಕೇಂದ್ರಾಡಳಿತ ಪ್ರದೇಶದಲ್ಲಿ ಈವರೆಗೆ 15ರಿಂದ 16 ಲಕ್ಷ ಜನ ಈ ಲಸಿಕೆ ಪಡೆದಿದ್ದಾರೆ. ಹೌದು, ಸಾಮಾಜಿಕ ಜಾಲತಾಣಗಳಲ್ಲಿ ಇವುಗಳ ಬಗ್ಗೆ ಸಾಕಷ್ಟು ತಪ್ಪು ತಿಳಿವಳಿಕೆ ಅಥವಾ ಮಿಥ್ಯಗಳು ಪ್ರಚಲಿತದಲ್ಲಿವೆ. ಇಂತಿಂಥ ಅಡ್ಡ ಪರಿಣಾಮಗಳು ಇವೆ ಎಂದು ಹೇಳಲಾಗುತ್ತಿದ್ದರೂ ಇಲ್ಲಿಯವರೆಗೆ ಲಸಿಕೆ ಪಡೆದುಕೊಂಡವರಲ್ಲಿ ಯಾವುದೇ ಅಡ್ಡ ಪರಿಣಾಮಗಳು ಕಂಡುಬಂದಿಲ್ಲ. ಯಾವುದೇ ಇನ್ನಿತರ ಲಸಿಕೆ ಪಡೆದುಕೊಂಡಾಗಲೂ ಆಗುವ ಕೆಲವು ಅಡ್ಡಪರಿಣಾಮಗಳು ಮಾತ್ರ ಕಂಡುಬಂದಿವೆ. ಕೆಲವರಿಗೆ ಜ್ವರ ಬಂದಿರಬಹುದು, ಇಡೀ ದೇಹದಲ್ಲಿ ನೋವು, ಲಸಿಕೆ ಹಾಕಿಸಿಕೊಂಡ ಜಾಗದಲ್ಲಿ ನೋವು ಇವು ಸಾಮಾನ್ಯ. ಇವುಗಳನ್ನು ನಾವು ಪ್ರತಿಯೊಬ್ಬರಲ್ಲಿ ನೋಡಿದ್ದೇವೆ. ಆದರೆ, ಯಾವುದೇ ಅತಿಯಾದ ತೊಂದರೆ, ಕೆಟ್ಟ ಪರಿಣಾಮಗಳನ್ನು ನಾವು ನೋಡಿಲ್ಲ. ಜನರಲ್ಲಿ ಇನ್ನೊಂದು ಶಂಕೆಯಿದೆ. ಎರಡನೆಯದಾಗಿ ಲಸಿಕೆ ಪಡೆದುಕೊಂಡ ಬಳಿಕವೂ ಸೋಂಕು ಉಂಟಾಗುತ್ತಿದೆಯಲ್ಲ ಎನ್ನುವುದು. ಲಸಿಕೆ ಪಡೆದುಕೊಂಡ ಬಳಿಕವೂ ಸೋಂಕು ಉಂಟಾಗಬಹುದು ಎಂದು ಕಂಪೆನಿಗಳೇ ಸೂಚನೆ ನೀಡಿವೆ. ಅವರಲ್ಲೂ ಸೋಂಕು ದೃಢಪಡಬಹುದು. ಆದರೆ, ರೋಗದ ತೀವ್ರತೆ ಲಸಿಕೆ ಪಡೆದವರಲ್ಲಿ ಹೆಚ್ಚಾಗಿರುವುದಿಲ್ಲ. ಅಂದರೆ, ಸೋಂಕು ಬರಬಹುದು ಆದರೆ, ಜೀವಕ್ಕೆ ಎರವಾಗುವಷ್ಟರ ಮಟ್ಟಿಗೆ ಅನಾರೋಗ್ಯ ಉಂಟಾಗುವುದಿಲ್ಲ. ಹೀಗಾಗಿ, ಲಸಿಕೆಯ ಕುರಿತು ಇಂಥ ಯಾವುದೇ ತಪ್ಪು ತಿಳಿವಳಿಕೆಗಳಿದ್ದರೆ ಅವುಗಳನ್ನು ತಲೆಯಿಂದ ತೆಗೆದುಹಾಕುವುದು ಉತ್ತಮ. ಯಾರ್ಯಾರ ಪಾಳಿ ಬಂದಿದೆಯೋ ಅವರು ಲಸಿಕೆ ಹಾಕಿಸಿಕೊಳ್ಳಬೇಕು. ಮೇ 1ರಿಂದ ಇಡೀ ದೇಶದಲ್ಲಿ 18 ವರ್ಷ ಮೇಲ್ಪಟ್ಟವರಿಗೆ ಲಸಿಕೆ ಕಾರ್ಯಕ್ರಮ ಆರಂಭವಾಗುತ್ತಿದೆ. ಜನರಲ್ಲಿ ನಾನು ಮನವಿ ಮಾಡುವುದೇನೆಂದರೆ, ಎಲ್ಲರೂ ಬಂದು ಲಸಿಕೆ ಹಾಕಿಸಿಕೊಳ್ಳಿ. ಈ ಮೂಲಕ ತಮ್ಮನ್ನು ತಾವು ರಕ್ಷಿಸಿಕೊಳ್ಳಿ. ಆಗ ಒಟ್ಟಾರೆ ನಮ್ಮ ಸಮಾಜ, ಸಮುದಾಯವೂ ಕೋವಿಡ್-19 ಸೋಂಕಿನಿಂದ ರಕ್ಷಣೆ ಪಡೆಯುತ್ತದೆ.

ಮೋದಿ ಜಿ: ಡಾ.ನಾವೀದ್ ತುಂಬು ಹೃದಯದ ಧನ್ಯವಾದಗಳು. ತಮಗೆ ರಂಜಾನ್ ಪವಿತ್ರ ಮಾಸದ ಅನೇಕಾನೇಕ ಶುಭಕಾಮನೆಗಳು.

ಡಾ.ನಾವೀದ್: ಅನೇಕಾನೇಕ ಧನ್ಯವಾದಗಳು.

ಮೋದಿ ಜಿ: ಸ್ನೇಹಿತರೆ, ಕೊರೋನಾದ ಈ ಸಂಕಟ ಕಾಲದಲ್ಲಿ ಲಸಿಕೆಯ ಪ್ರಾಮುಖ್ಯತೆ ಬಗೆಗೆ ಎಲ್ಲರಿಗೂ ತಿಳಿಯುತ್ತಿದೆ. ಹೀಗಾಗಿ, ಲಸಿಕೆಯ ಕುರಿತು ಯಾವುದೇ ರೀತಿಯ ವದಂತಿಗೆ ಕಿವಿಗೊಡಬೇಡಿ ಎನ್ನುವುದು ನನ್ನ ಒತ್ತಾಯ. ಭಾರತ ಸರ್ಕಾರದ ವತಿಯಿಂದ ಎಲ್ಲ ರಾಜ್ಯಗಳಿಗೆ ಉಚಿತವಾಗಿ ಲಸಿಕೆ ಕಳುಹಿಸಲಾಗಿದೆ. ಅದರ ಲಾಭವನ್ನು 45 ವರ್ಷ ಮೇಲ್ಪಟ್ಟವರು ಪಡೆದುಕೊಳ್ಳಬಹುದೆಂದು ತಮಗೆಲ್ಲರಿಗೂ ತಿಳಿದಿದೆ. ಇನ್ನು, ಮೇ 1ರಿಂದ ದೇಶದಲ್ಲಿ 18 ವರ್ಷ ಮೇಲ್ಪಟ್ಟ ಪ್ರತಿ ವ್ಯಕ್ತಿಗೆ ಲಸಿಕೆ ಲಭ್ಯವಾಗುತ್ತದೆ. ಈಗ ದೇಶದ ಕಾರ್ಪೋರೇಟ್ ವಲಯ, ಕಂಪೆನಿಗಳು ಸಹ ತಮ್ಮ ಉದ್ಯೋಗಿಗಳಿಗೆ ಲಸಿಕೆ ಹಾಕಿಸುವ ಅಭಿಯಾನದಲ್ಲಿ ಭಾಗಿಯಾಗಲು ಸಾಧ್ಯವಿದೆ. ಪ್ರಸ್ತುತ ನಡೆಯುತ್ತಿರುವ ಭಾರತ ಸರ್ಕಾರದಿಂದ ಉಚಿತವಾಗಿ ಲಸಿಕೆ ನೀಡುವ ಕಾರ್ಯಕ್ರಮ ಮುಂದೆಯೂ ಚಾಲ್ತಿಯಲ್ಲಿರುತ್ತದೆ ಎಂದು ಹೇಳಲು ನಾನು ಇಚ್ಛಿಸುತ್ತೇನೆ. ಕೇಂದ್ರದಿಂದ ದೊರೆಯುತ್ತಿರುವ ಈ ಉಚಿತ ಲಸಿಕೆಯ ಲಾಭವನ್ನು ತಮ್ಮ ರಾಜ್ಯಗಳಲ್ಲಿ ಹೆಚ್ಚು ಹೆಚ್ಚು ಜನರಿಗೆ ತಲುಪುವಂತೆ ನೋಡಿಕೊಳ್ಳಬೇಕೆಂದು ನಾನು ರಾಜ್ಯಗಳಿಗೆ ಒತ್ತಾಯಿಸುತ್ತೇನೆ.

ಸ್ನೇಹಿತರೆ, ರೋಗವಿದ್ದಾಗ ನಮ್ಮ ಹಾಗೂ ನಮ್ಮ ಪರಿವಾರದ ಕಾಳಜಿ ವಹಿಸುವುದು ಮಾನಸಿಕವಾಗಿ ಎಷ್ಟು ಕಷ್ಟದ್ದೆಂದು ನಮಗೆ ತಿಳಿದಿದೆ. ಆದರೆ, ನಮ್ಮ ಆಸ್ಪತ್ರೆಗಳ ಶುಶ್ರೂಷಾ ಸಿಬ್ಬಂದಿ ಇದೇ ಕೆಲಸವನ್ನು ಏಕಕಾಲದಲ್ಲಿ ಅನೇಕ ಮಂದಿಗೆ ನಿರಂತರವಾಗಿ ಮಾಡಬೇಕಿರುತ್ತದೆ. ಈ ಸೇವಾ ಭಾವನೆ ನಮ್ಮ ಸಮಾಜದ ಅತ್ಯಂತ ದೊಡ್ಡ ಶಕ್ತಿಯಾಗಿದೆ. ಶುಶ್ರೂಷಾ ಸಿಬ್ಬಂದಿ ಮೂಲಕ ನಡೆಯುತ್ತಿರುವ ಈ ಸೇವೆ ಮತ್ತು ಪರಿಶ್ರಮದ ಬಗ್ಗೆ ಎಲ್ಲರಿಗಿಂತ ಚೆನ್ನಾಗಿ ಓರ್ವ ಸಿಬ್ಬಂದಿಯೇ ಚೆನ್ನಾಗಿ ಹೇಳಬಲ್ಲರು. ಹೀಗಾಗಿ, ನಾನು ರಾಯ್ ಪುರದ ಡಾ.ಬಿ.ಆರ್. ಅಂಬೇಡ್ಕರ್ ವೈದ್ಯಕೀಯ ಕಾಲೇಜಿನ ಆಸ್ಪತ್ರೆಯಲ್ಲಿ ಸೇವೆ ಸಲ್ಲಿಸುತ್ತಿರುವ ಸಿಸ್ಟರ್ ಭಾವನಾ ಧ್ರುವ ಅವರೊಂದಿಗೆ “ಮನದ ಮಾತು’ ಕಾರ್ಯಕ್ರಮಕ್ಕೆ ಆಹ್ವಾನವಿತ್ತಿದ್ದೆ. ಅವರು ಅನೇಕ ಕೊರೋನಾ ರೋಗಿಗಳನ್ನು ಕಾಳಜಿಯಿಂದ ನೋಡಿಕೊಳ್ಳುತ್ತಿದ್ದಾರೆ, ಬನ್ನಿ, ಅವರೊಂದಿಗೆ ಮಾತನಾಡೋಣ.

ಮೋದಿ ಜಿ: ನಮಸ್ಕಾರ ಭಾವನಾ ಜೀ.

ಭಾವನಾ: ಆದರಣೀಯ ಪ್ರಧಾನಮಂತ್ರಿಯವರೇ, ನಮಸ್ಕಾರ

ಮೋದಿ : ಭಾವನಾ ಅವರೇ

ಭಾವನಾ: ಹಾ ಸರ್

ಮೋದಿ: ತಾವು ಪರಿವಾರದಲ್ಲಿ ಎಷ್ಟೆಲ್ಲ ಜವಾಬ್ದಾರಿ ನಿಭಾಯಿಸುತ್ತೀರಿ, ಎಷ್ಟು ವಿಧವಿಧವಾದ ಕೆಲಸ ಮಾಡುತ್ತೀರಿ, ಅದರೊಂದಿಗೇ ಕೊರೋನಾ ರೋಗಿಗಳ ಜತೆಗೂ ಕೆಲಸ ಮಾಡುತ್ತೀರಿ ಎನ್ನುವುದನ್ನು “ಮನದ ಮಾತು’ ಕಾರ್ಯಕ್ರಮದ ಕೇಳುಗರಿಗೆ ಹೇಳಿ. ಕೊರೋನಾ ರೋಗಿಗಳಿಗಾಗಿ ಮಾಡಿದ ಕೆಲಸದ ಅನುಭವವನ್ನು ದೇಶವಾಸಿಗಳು ಖಂಡಿತವಾಗಿ ಕೇಳಲು ಇಚ್ಛಿಸುತ್ತಾರೆ. ಏಕೆಂದರೆ, ಸಿಸ್ಟರ್ , ನರ್ಸ್ ಗಳು ರೋಗಿಗಳ ನಿಕಟ ಸಂಪರ್ಕದಲ್ಲಿರುವವರಾಗಿದ್ದಾರೆ. ಈ ಸಂಪರ್ಕ ದೀರ್ಘಕಾಲದವರೆಗೂ ಇರುತ್ತದೆ. ಅವರು ಪ್ರತಿಯೊಂದನ್ನೂ ಅತ್ಯಂತ ನಿಕಟವಾಗಿ ಅರ್ಥ ಮಾಡಿಕೊಳ್ಳುತ್ತಾರೆ. ಈಗ ಹೇಳಿ.

ಭಾವನಾ: ಹೌದು, ಸರ್. ಕೋವಿಡ್ ಸೋಂಕು ಚಿಕಿತ್ಸೆಯಲ್ಲಿ ನನ್ನ ಒಟ್ಟಾರೆ ಅನುಭವ 2 ತಿಂಗಳದ್ದು ಸರ್. ನಾವು 14 ದಿನಗಳ ಕಾಲ ಕರ್ತವ್ಯ ನಿಭಾಯಿಸುತ್ತೇವೆ, ಬಳಿಕ ನಮಗೆ 14 ದಿನಗಳ ಕಾಲ ವಿರಾಮ ನೀಡಲಾಗುತ್ತದೆ. ಪುನಃ ಎರಡು ತಿಂಗಳ ಬಳಿಕ ಕೋವಿಡ್ ಕರ್ತವ್ಯಪಾಳಿ ಪುನರಾವರ್ತನೆಯಾಗುತ್ತದೆ ಸರ್. ಯಾವಾಗ ನನ್ನನ್ನು ಮೊದಲ ಬಾರಿ ಕೋವಿಡ್ ಕರ್ತವ್ಯಕ್ಕೆ ನಿಯೋಜಿಸಲಾಯಿತೊ ಆಗ ಇದರ ಬಗ್ಗೆ ನನ್ನ ಕುಟುಂಬದ ಸದಸ್ಯರಿಗೆ ಮಾಹಿತಿ ನೀಡಿದೆ, ಇದು ಮೇ ತಿಂಗಳ ಮಾತು. ನಾನು ಈ ಮಾಹಿತಿ ನೀಡುತ್ತಿದ್ದಂತೆಯೇ ಎಲ್ಲರೂ ಹೆದರಿಕೊಂಡರು. ಗಾಬರಿಯಾದರು. “ಮಗಳೇ, ಜಾಗರೂಕತೆವಹಿಸಿ ಕೆಲಸ ಮಾಡು’ ಎಂದರು. ಅದೊಂದು ಭಾವನಾತ್ಮಕ ಸನ್ನಿವೇಶವಾಗಿತ್ತು ಸರ್. ಮಧ್ಯದಲ್ಲಿ ನನ್ನ ಮಗಳು ನನ್ನನ್ನು ಕೇಳಿದಳು, “ಅಮ್ಮಾ, ನೀವು ಕೋವಿಡ್ ಕರ್ತವ್ಯಕ್ಕೆ ಹೋಗುತ್ತಿದ್ದೀರಾ?’ ಎಂದು. ಆ ಸಮಯ ನನಗೆ ಅತ್ಯಂತ ಭಾವನಾತ್ಮಕ ಕ್ಷಣವಾಗಿತ್ತು.

ಆದರೆ, ಕೋವಿಡ್ ರೋಗಿಗಳ ಬಳಿಗೆ ಹೋದಾಗ ಮನೆಯ ಜವಾಬ್ದಾರಿಯನ್ನು ಮನೆಯಲ್ಲೇ ಬಿಟ್ಟು ನಡೆದೆ. ನಾನು ಕೋವಿಡ್ ರೋಗಿಗಳೊಂದಿಗೆ ಬೆರೆತಾಗ ಅವರು ತೀವ್ರವಾಗಿ ಭಯಗೊಂಡಿದ್ದರು, ಆತಂಕಿತರಾಗಿದ್ದರು. ಕೋವಿಡ್ ಹೆಸರಿನಿಂದಲೇ ರೋಗಿಗಳು ಎಷ್ಟು ಕಂಗಾಲಾಗುತ್ತಿದ್ದರೆಂದರೆ, ತಮಗೇನು ಆಗುತ್ತಿದೆ ಎನ್ನುವುದು ಅವರಿಗೆ ತಿಳಿಯುತ್ತಿರಲಿಲ್ಲ. ಹಾಗೂ ಮುಂದೇನು ಮಾಡಬೇಕೆಂಬುದೇ ತೋಚುತ್ತಿರಲಿಲ್ಲ. ನಾವು ಅವರ ಭಯವನ್ನು ದೂರವಿಡಲು ಅವರೊಂದಿಗೆ ಆತ್ಮೀಯವಾಗಿ ಬೆರೆತು, ಅವರಿಗೆ ಆರೋಗ್ಯಪೂರ್ಣ ವಾತಾವರಣ ನೀಡಿದೆವು ಸರ್. ನಮಗೆ ಯಾವಾಗ ಕೋವಿಡ್ ಕರ್ತವ್ಯ ಆರಂಭವಾಯಿತೋ ಆಗ ಎಲ್ಲಕ್ಕಿಂತ ಮೊದಲು ಪಿಪಿಇ ಕಿಟ್ ಧರಿಸಲು ಸೂಚಿಸಲಾಯಿತು. ಪಿಪಿಇ ಕಿಟ್ ಧರಿಸಿ ಕೆಲಸ ಮಾಡುವುದು ಬಹಳ ಕಠಿಣ. ಸರ್, ನಮಗೆ ಅದು ನಮಗೆ ಬಹಳ ಕಷ್ಟವಾಗಿತ್ತು. ನಾನು 2 ತಿಂಗಳ ಕೆಲಸದಲ್ಲಿ ಪ್ರತಿ ಸ್ಥಳದಲ್ಲೂ 14-14 ದಿನಗಳ ಕಾಲ ಕರ್ತವ್ಯ ನಿಭಾಯಿಸಿದ್ದೇನೆ. ವಾರ್ಡಲ್ಲಿ, ತೀವ್ರ ನಿಗಾ ಘಟಕದಲ್ಲಿ, ಐಸೋಲೇಷನ್ ನಲ್ಲಿ ಕೆಲಸ ಮಾಡಿದ್ದೇನೆ ಸರ್.

ಮೋದಿ: ಅಂದರೆ, ಒಟ್ಟಾರೆಯಾಗಿ, ತಾವು ಒಂದು ವರ್ಷದಿಂದ ಇದೇ ಕೆಲಸವನ್ನು ಮಾಡುತ್ತಿದ್ದೀರಿ.

ಭಾವನಾ: ಹೌದು ಸರ್, ಅಲ್ಲಿಗೆ ಹೋಗುವ ಮುನ್ನ ನನ್ನ ಸಹೋದ್ಯೋಗಿಗಳು ಯಾರೆಂದು ತಿಳಿದಿರಲಿಲ್ಲ. ನಾವು ಒಂದು ತಂಡದ ಸದಸ್ಯರಂತೆ ಕೆಲಸ ಮಾಡಿದ್ದೇವೆ ಸರ್. ಏನೇ ಸಮಸ್ಯೆಗಳಿದ್ದರೂ ಅವರೊಂದಿಗೆ ಹಂಚಿಕೊಂಡೆವು. ನಾವು ರೋಗಿಗಳ ಭಯ ದೂರ ಮಾಡುವಲ್ಲಿ ನಿರತರಾದೆವು ಸರ್. ಕೆಲವು ಜನರು ಕೋವಿಡ್ ಹೆಸರು ಕೇಳಿದರೇ ಹೆದರುತ್ತಿದ್ದರು. ಅವರ ರೋಗ ಲಕ್ಷಣ ಪಟ್ಟಿ ಮಾಡುವಾಗಲೇ ಅವರಿಗೆ ಲಕ್ಷಣಗಳಿದ್ದವು ಎಂಬುದು ನಮಗೆ ತಿಳಿಯುತ್ತಿತ್ತು. ಆದರೆ, ಅವರು ಪರೀಕ್ಷೆ ಮಾಡಿಸಿಕೊಳ್ಳಲು ಹಿಂದೇಟು ಹಾಕುತ್ತಿದ್ದರು, ಮಾಡಿಸಿಕೊಳ್ಳುತ್ತಿರಲಿಲ್ಲ. ನಾವು ಅವರಿಗೆ ಸಮಾಧಾನ, ತಿಳಿವಳಿಕೆ ಹೇಳುತ್ತಿದ್ದೆವು, ಮತ್ತು ಸರ್ ರೋಗದ ತೀವ್ರತೆ ಹೆಚ್ಚಾದಾಗ ಅವರ ಶ್ವಾಸಕೋಶಕ್ಕೂ ಸೋಂಕು ತಾಗಿರುತ್ತಿತ್ತು. ಆಗ ಅವರಿಗೆ ತೀವ್ರ ನಿಗಾ ಘಟಕದ ಅಗತ್ಯವುಂಟಾಗುತ್ತಿತ್ತು. ಜತೆಗೆ, ಸೋಂಕಿನಿಂದ ಅವರ ಪೂರ್ತಿ ಕುಟುಂಬ ಚಿಕಿತ್ಸೆಗಾಗಿ ಬರುತ್ತಿತ್ತು. ಇಂಥ 1-2 ಪ್ರಕರಣಗಳನ್ನು ನೋಡಿದ್ದೇವೆ ಸರ್. ಮತ್ತು ಎಲ್ಲ ವಯೋಮಾನದವರೊಂದಿಗೂ ನಾನು ಕೆಲಸ ಮಾಡಿದ್ದೇನೆ. ಅವರಲ್ಲಿ ಚಿಕ್ಕ ಮಕ್ಕಳಿದ್ದರು. ಮಹಿಳೆಯರು, ಪುರುಷರು, ಹಿರಿಯರು ಎಲ್ಲ ರೀತಿಯ ರೋಗಿಗಳೂ ಇರುತ್ತಿದ್ದರು. ಅವರಲ್ಲಿ ನಾವು ವಿಚಾರಿಸಿದಾಗ ಎಲ್ಲರೂ ಹೇಳುತ್ತಿದ್ದುದು ಒಂದೇ, ನಾವು ಭಯದಿಂದ ಮೊದಲೇ ಬರಲಿಲ್ಲ ಎಂದು. ಎಲ್ಲರಿಂದಲೂ ಇದೇ ಉತ್ತರ ದೊರೆತಿತ್ತು. ಭಯಪಡುವುದ ಏನೂ ಇಲ್ಲ, ನೀವು ನನಗೆ ಸಹಕಾರ ನೀಡಿ ನಾನು ನಿಮ್ಮ ಜತೆ ಇರುತ್ತೇನೆ, ನೀವು ಕೋವಿಡ್ ಮಾರ್ಗಸೂಚಿ ಪಾಲನೆ ಮಾಡಿ ಎಂದು ನಾನು ಅವರಿಗೆ ತಿಳಿಹೇಳಿದೆ ಸರ್. ನಾವು ಅವರಿಂದ ಇಷ್ಟನ್ನು ಮಾಡಿಸಿದೆವು ಸರ್.

ಮೋದಿ: ಭಾವನಾ ಅವರೇ, ನಿಮ್ಮೊಂದಿಗೆ ಮಾತನಾಡಿದ್ದು ನನಗೆ ಸಂತಸ ನೀಡಿದೆ. ತಾವು ಬಹಳಷ್ಟು ಉತ್ತಮ ಮಾಹಿತಿ ನೀಡಿದ್ದೀರಿ. ತಾವು ಸ್ವಂತ ಅನುಭವ ಹಂಚಿಕೊಂಡಿದ್ದೀರಿ. ಇದರಿಂದ ದೇಶವಾಸಿಗಳಿಗೆ ಒಂದು ಸಕಾರಾತ್ಮಕ ಸಂದೇಶ ಹೋಗುತ್ತದೆ. ತಮಗೆ ಅತ್ಯಂತ ಧನ್ಯವಾದಗಳು ಭಾವನಾ.

ಭಾವನಾ: ತುಂಬ ಧನ್ಯವಾದಗಳು ಸರ್. ತುಂಬ ಧನ್ಯವಾದಗಳು, ಜೈ ಹಿಂದ್ ಸರ್

ಮೋದಿ: ಜೈ ಹಿಂದ್

ಭಾವನಾ ಅವರೇ ಮತ್ತು ಶುಶ್ರೂಷೆ ಸಿಬ್ಬಂದಿ, ತಮ್ಮಂಥಹ ಸಾವಿರಾರು-ಲಕ್ಷಾಂತರ ಸಹೋದರ-ಸಹೋದರಿಯರು ಸರಿಯಾಗಿ ತಮ್ಮ ಕರ್ತವ್ಯ ನಿಭಾಯಿಸುತ್ತಿದ್ದೀರಿ. ಇದು ನಮಗೆಲ್ಲರಿಗೂ ಪ್ರೇರಣೆಯಾಗಿದೆ. ತಾವು ತಮ್ಮ ಆರೋಗ್ಯದ ಬಗೆಗೂ ಹೆಚ್ಚಿನ ಗಮನ ನೀಡಿ. ತಮ್ಮ ಕುಟುಂಬದ ಕುರಿತೂ ಕಾಳಜಿವಹಿಸಿ.

ಸ್ನೇಹಿತರೆ, ಈಗ ನಮ್ಮ ಜೊತೆಗೆ ಬೆಂಗಳೂರಿನಿಂದ ಸೋದರಿ ಸುರೇಖಾ ಸಂಪರ್ಕಕ್ಕೆ ಬರಲಿದ್ದಾರೆ. ಸುರೇಖಾ ಅವರು ಕೆ ಸಿ ಜನರಲ್ ಆಸ್ಪತ್ರೆಯಲ್ಲಿ ಹಿರಿಯ ಶುಶ್ರೂಷಕಿಯಾಗಿ ಕಾರ್ಯನಿರ್ವಹಿಸುತ್ತಿದ್ದಾರೆ. ಬನ್ನಿ ಅವರ ಅನುಭವಗಳನ್ನು ಕೇಳೋಣ.

ಮೋದಿಯವರು: ಸುರೇಖಾ ಅವರೇ ನಮಸ್ಕಾರ

ಸುರೇಖಾ: ನಮ್ಮ ದೇಶದ ಪ್ರಧಾನಿಯವರೊಂದಿಗೆ ಮಾತನಾಡುತ್ತಿರುವುದು ನಿಜಕ್ಕೂ ಬಹಳ ಹೆಮ್ಮೆಯ ಮತ್ತು ಗೌರವದ ವಿಷಯ ಸರ್

ಮೋದಿಯವರು: ಸುರೇಖಾ ಅವರೇ ಎಲ್ಲ ಸುಶ್ರೂಷಕ ಸಿಬ್ಬಂದಿ ಮತ್ತು ಆಸ್ಪತ್ರೆಯ ಸಿಬ್ಬಂದಿ ಜೊತೆಗೆ ನೀವು ತುಂಬಾ ಅದ್ಭುತವಾದ ಕೆಲಸವನ್ನು ಮಾಡುತ್ತಿದ್ದೀರಿ. ಇಡೀ ದೇಶ ತಮಗೆ ಆಭಾರಿಯಾಗಿದೆ. ಕೋವಿಡ್ – 19 ರ ವಿರುದ್ಧದ ಹೋರಾಟದಲ್ಲಿ ಜನರಿಗೆ ನಿಮ್ಮ ಸಂದೇಶವೇನು?

ಸುರೇಖಾ: ಹೌದು ಸರ್…. ಒಬ್ಬ ಜವಾಬ್ದಾರಿಯುತ ನಾಗರಿಕಳಾಗಿ ನಾನು ಖಂಡಿತ ಕೆಲ ವಿಷಯ ಹೇಳಬಯಸುತ್ತೇನೆ. ನಿಮ್ಮ ನೆರೆಹೊರೆಯವರೊಂದಿಗೆ ಮಾನವೀಯತೆಯಿಂದ ವರ್ತಿಸಿ ಮತ್ತು ಬೇಗ ಪರೀಕ್ಷೆ ಮಾಡಿಸಿಕೊಳ್ಳುವುದು ಮತ್ತು ಸೂಕ್ತ ಅನುಸರಣೆ ನಮಗೆ ಸಾವಿನ ಪ್ರಮಾಣವನ್ನು ಕಡಿಮೆ ಮಾಡಲು ಸಹಾಯ ಮಾಡುತ್ತದೆ. ಇಷ್ಟೇ ಅಲ್ಲ ನಿಮಗೆ ಯಾವುದೇ ಲಕ್ಷಣಗಳು ಕಂಡು ಬಂದಲ್ಲಿ ದಯವಿಟ್ಟು ನೀವು ಉಳಿದವರಿಂದ ದೂರ ಉಳಿಯಿರಿ. ಹತ್ತಿರದ ವೈದ್ಯರನ್ನು ಸಂಪರ್ಕಿಸಿ. ಎಷ್ಟು ಬೇಗ ಸಾಧ್ಯವೋ ಚಿಕಿತ್ಸೆ ಪಡೆಯಿರಿ.

ಸಮುದಾಯಕ್ಕೆ ಈ ರೋಗದ ಬಗ್ಗೆ ಜಾಗೃತಿ ಅವಶ್ಯಕವಾಗಿದೆ. ಸಕಾರಾತ್ಮಕ ಚಿಂತನೆ ಇರಲಿ, ಆತಂಕಕ್ಕೊಳಗಾಗಬೇಡಿ ಹಾಗೂ ಒತ್ತಡಕ್ಕೊಳಗಾಗಬೇಡಿ. ಇದು ರೋಗಿಯ ಸ್ಥಿತಿಯನ್ನು ಮತ್ತಷ್ಟು ಬಿಗಡಾಯಿಸುತ್ತದೆ. ಲಸಿಕೆ ದೊರಕಿರುವುದಕ್ಕೆ ಹೆಮ್ಮೆ ಪಡುತ್ತೇವೆ ಮತ್ತು ಸರ್ಕಾರಕ್ಕೆ ಕೃತಜ್ಞರಾಗಿದ್ದೇವೆ. ನಾನು ಈಗಾಗಲೇ ಲಸಿಕೆ ಪಡೆದಿದ್ದೇನೆ. ನನ್ನ ಸ್ವಂತ ಅನುಭವವನ್ನು ಜನತೆಯೊಂದಿಗೆ ಹಂಚಿಕೊಳ್ಳಬಯಸುತ್ತೇನೆ. ಯಾವುದೇ ಲಸಿಕೆ ತಕ್ಷಣ ಶೇ 100 ರಷ್ಟು ಸುರಕ್ಷತೆಯನ್ನು ನೀಡಲಾರದು. ರೋಗನಿರೋಧಕ ಶಕ್ತಿ ಬೆಳೆಯಲು ಸಮಯ ಬೇಕಾಗುತ್ತದೆ. ಲಸಿಕೆ ಪಡೆಯಲು ಭಯಬೇಡ. ಎಲ್ಲರೂ ಲಸಿಕೆ ಪಡೆದುಕೊಳ್ಳಿ; ಸ್ವಲ್ಪ ಅಡ್ಡಪರಿಣಾಮ ಆಗಬಹುದು ಮನೆಯಲ್ಲೇ ಇರಿ, ಆರೋಗ್ಯವಾಗಿರಿ, ರೋಗಲಕ್ಷಣಗಳಿರುವವರಿಂದ ದೂರವಿರಿ ಮತ್ತು ಅನವಶ್ಯಕವಾಗಿ ಮೂಗು, ಕಣ್ಣುಗಳನ್ನು ಮತ್ತು ಬಾಯನ್ನು ಮುಟ್ಟಬೇಡಿ ಎಂಬ ಸಂದೇಶವನ್ನು ನಾನು ನೀಡಬಯಸುತ್ತೇನೆ. ದಯಮಾಡಿ ವೈಯಕ್ತಿಕ ಅಂತರ ಕಾಯ್ದುಕೊಳ್ಳಿ, ಸರಿಯಾಗಿ ಮುಖಗವಸು ಧರಿಸಿ, ನಿಯಮಿತವಾಗಿ ಕೈತೊಳೆಯಿರಿ ಮತ್ತು ಮನೆಯಲ್ಲಿಯೇ ಮನೆಮದ್ದುಗಳನ್ನು ಬಳಸಬಹುದಾಗಿದೆ. ದಯಮಾಡಿ ಆಯುರ್ವೇದ ಕಷಾಯ ಕುಡಿಯಿರಿ, ಆವಿ ತೆಗೆದುಕೊಳ್ಳಿ ಮತ್ತು ಪ್ರತಿದಿನ ಪದೇ ಪದೇ ಬಾಯಿ ಮುಕ್ಕಳಿಸಿ ಜೊತೆಗೆ ಉಸಿರಾಟದ ವ್ಯಾಯಾವನ್ನೂ ಮಾಡಿರಿ. ಕೊನೆಯದಾಗಿ ಮುಂಚೂಣಿ ಕಾರ್ಯಕರ್ತರು ಮತ್ತು ವೃತ್ತಿಪರರ ಬಗ್ಗೆ ಸಹಾನುಭೂತಿ ಇರಲಿ. ನಿಮ್ಮ ಸಹಕಾರ ಮತ್ತು ಬೆಂಬಲ ನಮಗೆ ಬೇಕು. ನಾವು ಒಗ್ಗೂಡಿ ಹೋರಾಡೋಣ. ನಾವು ಖಂಡಿತ ಕೊರೊನಾವನ್ನು ಹಿಮ್ಮೆಟ್ಟಿಸಬಲ್ಲೆವು. ಇದೇ ನಾನು ಜನರಿಗೆ ನೀಡುವ ಸಂದೇಶ ಸರ್.

ಮೋದಿಯವರು: ಧನ್ಯವಾದ ಸುರೇಖಾ ಅವರೇ

ಸುರೇಖಾ: ಧನ್ಯವಾದ ಸರ್

ಸುರೇಖಾ ಅವರೇ ಖಂಡಿತ ನೀವು ಸಂಕಷ್ಟದ ಸಮಯದಲ್ಲಿ ಚುಕ್ಕಾಣಿ ಹಿಡಿದಿದ್ದೀರಿ. ನಿಮ್ಮ ಬಗ್ಗೆ ಕಾಳಜಿ ಇರಲಿ. ನಿಮ್ಮ ಕುಟುಂಬದವರಿಗೂ ನನ್ನ ಅನಂತ ಶುಭಹಾರೈಕೆಗಳು. ಭಾವನಾ ಅವರು ಮತ್ತು ಸುರೇಖಾ ಅವರು ಹೇಳಿದಂತೆ ಕೊರೊನಾ ವಿರುದ್ಧ ಹೋರಾಟಕ್ಕೆ ಸಕಾರಾತ್ಮಕ ಭಾವನೆ ಬಹಳ ಅವಶ್ಯಕವಾದದ್ದು ಮತ್ತು ದೇಶಬಾಂಧವರು ಇದನ್ನು ಕಾಪಾಡಿಕೊಳ್ಳಬೇಕು ಎಂದು ದೇಶದ ಜನತೆಗೂ ನಾನು ಆಗ್ರಹಿಸುತ್ತೇನೆ.

ಸ್ನೇಹಿತರೆ, ವೈದ್ಯರು, ಶುಶ್ರೂಷಕ ಸಿಬ್ಬಂದಿ ಜೊತೆ ಜೊತೆಗೆ ಈ ಸಮಯದಲ್ಲಿ ಆಂಬುಲೆನ್ಸ್ ಚಾಲಕರು ಮತ್ತು ಪ್ರಯೋಗಾಲಯದ ತಂತ್ರಜ್ಞರಂತಹ ಮುಂಚೂಣಿ ಕಾರ್ಯಕರ್ತರು ಇದನ್ನು ದೇವರಂತೆ ಕೆಲಸ ಮಾಡುತ್ತಿದ್ದಾರೆ. ಒಬ್ಬ ರೋಗಿಯ ಬಳಿ ಒಂದು ಆಂಬುಲೆನ್ಸ್ ತಲುಪಿದರೆ ಅವನಿಗೆ ಆ ಚಾಲಕ ದೇವದೂತನಂತೆಯೇ ಕಾಣುತ್ತಾನೆ. ಈಎಲ್ಲ ಸೇವೆಗಳ ಬಗ್ಗೆ, ಅವರ ಅನುಭವದ ಬಗ್ಗೆ ದೇಶ ಖಂಡಿತ ತಿಳಿದುಕೊಳ್ಳಬೇಕು. ನಮ್ಮ ಜೊತೆ ಈಗ ಇಂಥ ಒಬ್ಬ ಸಜ್ಜನರಾದ ಶ್ರೀಯುತ ಪ್ರೇಮ್ ವರ್ಮಾ ಅವರಿದ್ದಾರೆ. ಅವರ ಹೆಸರಿಂದಲೇ ಅದರ ಅರಿವಾಗುತ್ತದೆ. ಅವರು ಆಂಬುಲೆನ್ಸ್ ಚಾಲಕರಾಗಿ ಕೆಲಸ ಮಾಡುತ್ತಿದ್ದಾರೆ. ಪ್ರೇಮ್ ವರ್ಮಾ ಅವರು ತಮ್ಮ ಕೆಲಸವನ್ನು ಸಂಪೂರ್ಣ ಶ್ರದ್ಧೆ ಮತ್ತು ಪ್ರೀತಿಯಿಂದ ನಿರ್ವಹಿಸುತ್ತಾರೆ, ಬನ್ನಿ ಅವರೊಂದಿಗೆ ಮಾತಾಡೋಣ

ಮೋದಿಯವರು: ನಮಸ್ತೆ ಪ್ರೇಮ್ ಅವರೇ..

ಪ್ರೇಮ್ ವರ್ಮಾ: ನಮಸ್ತೆ ಸರ್

ಮೋದಿಯವರು: ಸೋದರ ಪ್ರೇಮ್

ಪ್ರೇಮ್ ವರ್ಮಾ: ಹೇಳಿ ಸರ್

ಮೋದಿಯವರು: ನೀವು ನಿಮ್ಮ ಕೆಲಸದ ಬಗ್ಗೆ

ಪ್ರೇಮ್ ವರ್ಮಾ: ಹಾಂ ಸರ್

ಮೋದಿಯವರು: ಸ್ವಲ್ಪ ವಿಸ್ತಾರವಾಗಿ ಹೇಳುತ್ತೀರಾ, ನಿಮ್ಮ ಅನುಭವದ ಬಗ್ಗೆಯೂ ಹೇಳಿ ಪ್ರೇಮ್: ನಾನು CATS ಆಂಬುಲೆನ್ಸ್ ನಲ್ಲಿ ಚಾಲಕನಾಗಿ ಕೆಲಸ ಮಾಡುತ್ತಿದ್ದೇನೆ ಮತ್ತು ನಮಗೆ ಕಂಟ್ರೋಲ್ ರೂಮಿನಿಂದ ಟ್ಯಾಬ್ ಗೆ ಕರೆ ಬರುತ್ತದೆ. 102 ರಿಂದ ಕರೆ ಬಂದ ಕೂಡಲೇ ನಾವು ರೋಗಿಯ ಬಳಿಗೆ ಹೋಗುತ್ತೇವೆ. 2 ವರ್ಷಗಳಿಂದ ನಿರಂತರವಾಗಿ ಈ ಕೆಲಸ ಮಾಡುತ್ತಿದ್ದೇನೆ. ನನ್ನ ಕಿಟ್ ಧರಿಸಿ, ಕೈಗವಸು, ಮುಖಗವಸು ಧರಿಸಿ, ರೋಗಿ ಎಲ್ಲಿಗೆ, ಯಾವ ಆಸ್ಪತ್ರೆಗೆ ಡ್ರಾಪ್ ಮಾಡು ಎಂದು ಹೇಳುತ್ತಾರೋ ಅಲ್ಲಿಗೆ ಆದಷ್ಟೂ ಬೇಗ ಡ್ರಾಪ್ ಮಾಡುತ್ತೇವೆ.

ಮೋದಿಯವರು: ನಿಮಗೆ ಎರಡೂ ಡೋಸ್ ಲಸಿಕೆ ನೀಡಲಾಗಿದೆಯೇ?

ಪ್ರೇಮ್: ಖಂಡಿತ ಸರ್

ಮೋದಿಯವರು: ಹಾಗಾದರೆ ಬೇರೆಯವರು ಲಸಿಕೆ ಹಾಕಿಸಿಕೊಳ್ಳುವ ಬಗ್ಗೆ ನಿಮ್ಮ ಅನಿಸಿಕೆಯೇನು? ಈ ಕುರಿತು ನಿಮ್ಮ ಸಂದೇಶವೇನು?

ಪ್ರೇಮ್: ಖಂಡಿತ ಸರ್. ಎಲ್ಲರೂ ಈ ಡೋಸ್ ಗಳನ್ನುಹಾಕಿಸಿಕೊಳ್ಳಲೇಬೇಕು. ಇದು ಅವರ ಕುಟುಂಬಕ್ಕೂ ಒಳ್ಳೆಯದು. ನನ್ನ ತಾಯಿಯೇ ನನಗೆ ಈ ಉದ್ಯೋಗವನ್ನು ಬಿಟ್ಟುಬಿಡು ಎಂದು ಹೇಳುತ್ತಿದ್ದಾರೆ. ಅದಕ್ಕೆ ನಾನು ಕೂಡ ಈ ಉದ್ಯೋಗ ಬಿಟ್ಟುಬಿಟ್ಟರೆ ರೋಗಿಗಳನ್ನು ಆಸ್ಪತ್ರೆಗೆ ಸೇರಿಸಲು ಯಾರು ಹೋಗುತ್ತಾರೆ? ಎಂದು ಕೇಳಿದೆ. ಏಕೆಂದರೆ ಈ ಕೊರೊನಾ ಕಾಲಘಟ್ಟದಲ್ಲಿ ಎಲ್ಲರೂ ಪಲಾಯನಗೈಯ್ಯುತ್ತಿದ್ದಾರೆ. ಎಲ್ಲರೂ ಉದ್ಯೋಗ ತೊರೆಯುತ್ತಿದ್ದಾರೆ. ನಾನು ಉದ್ಯೋಗ ತೊರೆಯಲಾರೆ ಎಂದು ನನ್ನ ತಾಯಿಗೆ ಹೇಳಿದೆ.

ಮೋದಿಯವರು: ಪ್ರೇಮ್ ಅವರೆ ತಾಯಿಯನ್ನು ದುಖಿಃತಳಾಗಿಸಬೇಡಿ. ಅವರಿಗೆ ತಿಳಿಹೇಳಿ.

ಪ್ರೇಮ್: ಆಯ್ತು ಸರ್

ಮೋದಿಯವರು: ಆದರೆ ನೀವು ತಾಯಿಯ ಬಗ್ಗೆ ಹೇಳಿದಿರಲ್ಲ

ಪ್ರೇಮ್: ಹಾಂ ಸರ್

ಮೋದಿಯವರು: ಇದು ಮನಸ್ಸಿಗೆ ತಾಗುವ ವಿಷಯ

ಪ್ರೇಮ್: ಹಾಂ ಸರ್

ಮೋದಿಯವರು: ನಿಮ್ಮ ತಾಯಿಯವರಿಗೂ ನನ್ನ ನಮಸ್ಕಾರ ತಿಳಿಸಿ

ಪ್ರೇಮ್: ಖಂಡಿತ

ಮೋದಿಯವರು: ಹಾಂ

ಪ್ರೇಮ್: ಆಯ್ತು ಸರ್

ಮೋದಿಯವರು: ಪ್ರೇಮ್ ಅವರೆ ನಿಮ್ಮ ಮೂಲಕ

ಪ್ರೇಮ್: ಹಾಂ ಸರ್

ಮೋದಿಯವರು: ನಮ್ಮ ಆಂಬುಲೆನ್ಸ್ ಚಾಲಕರು

ಪ್ರೇಮ್: ಹಾಂ ಸರ್

ಮೋದಿಯವರು: ಎಷ್ಟೊಂದು ಅಪಾಯದ ಮಧ್ಯೆಯೇ ಕೆಲಸ ಮಾಡುತ್ತಿದ್ದಾರೆ

ಪ್ರೇಮ್: ಹೌದು ಸರ್

ಮೋದಿಯವರು: ಇವರೆಲ್ಲರ ತಾಯಿ ಏನು ಯೋಚಿಸುತ್ತಿರಬೇಕು?

ಪ್ರೇಮ್: ಖಂಡಿತ ಸರ್

ಮೋದಿಯವರು: ಈ ವಿಚಾರ ಶ್ರೋತೃಗಳಿಗೆ ತಲುಪಿದಾಗ

ಪ್ರೇಮ್: ಹಾಂ ಸರ್

ಮೋದಿಯವರು: ಖಂಡಿತ ಅವರ ಮನಸ್ಸಿಗೂ ಅದು ನಾಟುತ್ತದೆ.

ಪ್ರೇಮ್: ಹೌದು ಸರ್

ಮೋದಿಯವರು : ಪ್ರೇಮ್ ಅವರೆ ಅನಂತ ಧನ್ಯವಾದಗಳು ನೀವು ಒಂದು ರೀತಿಯಲ್ಲಿ ಪ್ರೀತಿಯ ಹೊಳೆಯನ್ನೇ ಹರಿಸುತ್ತಿದ್ದೀರಿ

ಪ್ರೇಮ್: ಧನ್ಯವಾದಗಳು ಸರ್

ಮೋದಿಯವರು : ಧನ್ಯವಾದಗಳು ಸೋದರ

ಪ್ರೇಮ್: ಧನ್ಯವಾದಗಳು

ಸ್ನೇಹಿತರೆ, ಪ್ರೇಮ್ ವರ್ಮಾ ಅವರು ಮತ್ತು ಇಂಥ ಸಾವಿರಾರು ಜನರು ಇಂದು ತಮ್ಮ ಜೀವವನ್ನು ಪಣಕ್ಕೊಡ್ಡಿ ಜನರ ಸೇವೆಗೈಯ್ಯುತ್ತಿದ್ದಾರೆ. ಕೊರೊನಾ ವಿರುದ್ಧದ ಈ ಹೋರಾಟದಲ್ಲಿ ಬದುಕುಳಿಯುತ್ತಿರುವ ಎಲ್ಲ ಜೀವಗಳ ರಕ್ಷಣೆಯಲ್ಲಿ ಆಂಬುಲೆನ್ಸ್ ಚಾಲಕರ ಪಾತ್ರವೂ ಹಿರಿದಾದುದು. ಪ್ರೇಮ್ ಅವರೇ ನಿಮಗೆ ಮತ್ತು ದೇಶಾದ್ಯಂತದ ನಿಮ್ಮ ಸಹೋದ್ಯೋಗಿಗಳಿಗೆ ನಾನು ಮನಃಪೂರ್ವಕ ಪ್ರೇಮ್: ಧನ್ಯವಾದಗಳು ತಿಳಿಸುತ್ತೇನೆ. ಸಕಾಲಕ್ಕೆ ತಲುಪುತ್ತಿರಿ ಜೀವಗಳನ್ನು ಉಳಿಸುತ್ತಿರಿ ಎಂದು ಹಾರೈಸುತ್ತೇನೆ

ನಮ್ಮ ಪ್ರೀತಿಯ ದೇಶವಾಸಿಗಳೇ, ಈಗ ಬಹಳಷ್ಟು ಜನರು ಕೊರೋನಾ ಸೋಂಕಿತರಾಗುತ್ತಿದ್ದಾರೆ. ಆದರೆ, ಕೊರೋನಾದಿಂದ ಗುಣಮುಖರಾಗಿ ಚೇತರಿಸಿಕೊಳ್ಳುತ್ತಿರುವವರ ಸಂಖ್ಯೆಯೂ ಅದಕ್ಕಿಂತ ಹೆಚ್ಚಿದೆ ಎನ್ನುವುದು ಸತ್ಯವಾದ ವಿಚಾರ. ಗುರುಗ್ರಾಮದ ಪ್ರೀತಿ ಚತುರ್ವೇದಿ ಅವರೂ ಕೊರೋನಾವನ್ನು ಸೋಲಿಸಿದ್ದಾರೆ. ಪ್ರೀತಿ ಅವರು, “ಮನದ ಮಾತು’ ಕಾರ್ಯಕ್ರಮದಲ್ಲಿ ನಮ್ಮ ಜೊತೆಯಾಗಿದ್ದಾರೆ. ಅವರ ಅನುಭವ ಎಲ್ಲರಿಗೂ ಪ್ರಯೋಜನ ನೀಡಬಲ್ಲದು.

ಮೋದಿ: ಪ್ರೀತಿ ಅವರೇ, ನಮಸ್ತೆ

ಪ್ರೀತಿ: ನಮಸ್ತೆ ಸರ್, ತಾವು ಹೇಗಿದ್ದೀರಿ?

ಮೋದಿ: ನಾನು ಚೆನ್ನಾಗಿದ್ದೇನೆ. ಎಲ್ಲಕ್ಕಿಂತ ಮೊದಲು ನಾನು ತಮ್ಮ ಕೋವಿಡ್ -19 ಸೋಂಕಿನ

ಪ್ರೀತಿ: ಸರ್

ಮೋದಿ: ಪರಿಣಾಮಕಾರಿ ಹೋರಾಟ ನಡೆಸುತ್ತಿರುವ ಬಗ್ಗೆ

ಪ್ರೀತಿ: ಜೀ

ಮೋದಿ: ಮೆಚ್ಚುಗೆ ಸೂಸುತ್ತೇನೆ.

ಪ್ರೀತಿ: ತುಂಬ ಧನ್ಯವಾದಗಳು ಸರ್

ಮೋದಿ: ತಮ್ಮ ಆರೋಗ್ಯ ಇನ್ನಷ್ಟು ಶೀಘ್ರವಾಗಿ ಉತ್ತಮಗೊಳ್ಳಲಿ ಎಂದು ನಾನು ಆಶಿಸುತ್ತೇನೆ.

ಪ್ರೀತಿ: ಧನ್ಯವಾದಗಳು ಸರ್

ಮೋದಿ: ಪ್ರೀತಿ ಅವರೇ

ಪ್ರೀತಿ: ಹಾ ಸರ್

ಮೋದಿ: ತಮ್ಮ ಅಲೆಯಲ್ಲಿ ತಮ್ಮದೇ ಸಂಖ್ಯೆ ಭರ್ತಿಯಾಗಿದೆ, ತಮ್ಮ ಕುಟುಂಬದ ಎಲ್ಲ ಸದಸ್ಯರಿಗೂ ಇದಕ್ಕೆ ತುತ್ತಾಗಿದ್ದಾರೆ ಎನಿಸುತ್ತದೆ.

ಪ್ರೀತಿ: ಇಲ್ಲ..ಇಲ್ಲ ಸರ್. ನನಗೊಬ್ಬಳಿಗೇ ಬಂದಿತ್ತು.

ಮೋದಿ: ದೇವರ ಕೃಪೆ ಆಯಿತು. ಒಳ್ಳೆಯದಾಯಿತು.

ಪ್ರೀತಿ; ಹೌದು ಸರ್

ಮೋದಿ: ತಾವು ತಮ್ಮ ಸೋಂಕಿನ ಸ್ಥಿತಿ, ಅನುಭವದ ಬಗ್ಗೆ ಹೇಳಿದರೆ ಇಂಥ ಸಮಯದಲ್ಲಿ ಹೇಗೆ ತಮ್ಮನ್ನು ತಾವು ನಿಭಾಯಿಸಿಕೊಳ್ಳಬೇಕೆಂದು ನಮ್ಮ ಕೇಳುಗರಿಗೆ ಬಹುಶಃ ಮಾರ್ಗದರ್ಶನ ಸಿಗುತ್ತದೆ.

ಪ್ರೀತಿ: ಆಯಿತು ಸರ್. ನನಗೆ ಆರಂಭಿಕ ಹಂತದಲ್ಲಿ ಅತೀವ ಸುಸ್ತಾಯಿತು. ಅದಾದ ಬಳಿಕ, ಗಂಟಲಿನಲ್ಲಿ ಸ್ವಲ್ಪ ಕಿರಿಕಿರಿ ಆಗಲು ಆರಂಭವಾಯಿತು. ಆಗ ನನಗೆ ಇದು ಕೊರೋನಾ ಲಕ್ಷಣ ಎಂದೆನಿಸಿ ನಾನು ಪರೀಕ್ಷೆ ಮಾಡಿಸಿಕೊಂಡೆ. ಎರಡನೇ ದಿನ ಬಂದ ವರದಿಯಲ್ಲಿ ಸೋಂಕು ದೃಢಪಟ್ಟಿತ್ತು. ನಾಣು ಸ್ವಯಂ ಕ್ವಾರಂಟೈನ್ ಮಾಡಿಕೊಂಡೆ. ಒಂದು ಕೋಣೆಯಲ್ಲಿ ಪ್ರತ್ಯೇಕವಾಗಿದ್ದು, ವೈದ್ಯರೊಂದಿಗೆ ಸಮಾಲೋಚನೆ ಮಾಡಿದೆ. ಅವರು ಸೂಚಿಸಿದ ಚಿಕಿತ್ಸೆ ಆರಂಭಿಸಿದೆ.

ಮೋದಿ: ಹಾಗಾದರೆ, ತಾವು ಶೀಘ್ರವಾಗಿ ಕಾರ್ಯತ್ಪರವಾಗಿದ್ದರಿಂದ ತಮ್ಮ ಕುಟುಂಬ ಬಚಾವಾಯಿತು.

ಪ್ರೀತಿ: ಹೌದು ಸರ್. ಕುಟುಂಬದ ಎಲ್ಲರಿಗೂ ಪರೀಕ್ಷೆ ಮಾಡಿಸಲಾಗಿತ್ತು. ಎಲ್ಲರದ್ದೂ ನೆಗೆಟಿವ್ ಬಂತು, ನಾನೊಬ್ಬಳೇ ಪಾಸಿಟಿವ್ ಆಗಿದ್ದುದು. ಅದಕ್ಕೂ ಮುನ್ನವೇ ನಾನೇ ಮುಂದಾಗಿ ಒಂದು ಕೋಣೆಯೊಳಗೆ ಪ್ರತ್ಯೇಕವಾಗಿದ್ದೆ. ನನಗೆ ಅಗತ್ಯವಾಗಿದ್ದ ಎಲ್ಲ ಸಾಮಗ್ರಿಗಳನ್ನು ಇರಿಸಿಕೊಂಡು ಸ್ವಯಂ ಬಂಧನ ವಿಧಿಸಿಕೊಂಡಿದ್ದೆ. ಅದರೊಂದಿಗೆ ನಾನು ವೈದ್ಯರೊಂದಿಗೆ ಸಮಾಲೋಚಿಸಿ ಚಿಕಿತ್ಸೆಯನ್ನೂ ಆರಂಭಿಸಿದೆ. ಸರ್. ನಾನು ಔಷಧದ ಜತೆ ಜತೆಗೇ ಯೋಗ, ಪ್ರಾಣಾಯಾಮ, ಆಯುರ್ವೇದವನ್ನೂ ಶುರು ಮಾಡಿದೆ. ರೋಗ ನಿರೋಧಕ ಶಕ್ತಿ ಹೆಚ್ಚಲು ಕಾಡಾವನ್ನೂ ತೆಗೆದುಕೊಳ್ಳಲು ಆರಂಭಿಸಿದೆ. ಅತ್ಯಂತ ಆರೋಗ್ಯಕರ ಆಹಾರವನ್ನೇ ಸೇವನೆ ಮಾಡುತ್ತಿದ್ದೆ. ಪ್ರೊಟೀನ್ ಭರಿತವಾಗಿರುವ ಆಹಾರ ಪದ್ಧತಿ ಅನುಸರಿಸಿದೆ. ಸಾಕಷ್ಟು ದ್ರವಾಹಾರ ಸೇವನೆ ಮಾಡಿದೆ. ಬಿಸಿನೀರಿನ ಆವಿ ತೆಗೆದುಕೊಂಡೆ. ಗಂಟಲಿನ ಗಾರ್ಗಲ್ ಮಾಡಿದೆ ಮತ್ತು ಬಿಸಿನೀರನ್ನೇ ಕುಡಿಯುತ್ತಿದ್ದೆ. ಪ್ರತಿದಿನ ಈ ಎಲ್ಲ ಕ್ರಮಗಳನ್ನು ಅನುಸರಿಸಿದೆ. ಮಾನಸಿಕ ದೃಢತೆ ಹೆಚ್ಚಿಸಿಕೊಳ್ಳಲು ಯೋಗದ ಮೊರೆ ಹೋಗಿದ್ದೆ. ಉಸಿರಾಟದ ವ್ಯಾಯಾಮಗಳನ್ನು ಹೆಚ್ಚು ಹೆಚ್ಚು ಮಾಡುತ್ತಿದ್ದೆ. ಇದರಿಂದ ನನಗೆ ಆರಾಮವೆನಿಸುತ್ತಿತ್ತು.

ಮೋದಿ: ಹಾಂ, ಒಳ್ಳೆಯದು ಪ್ರೀತಿ, ತಮ್ಮ ಹಂತಹಂತದ ಪ್ರಕ್ರಿಯೆ ಮುಗಿದ ಬಳಿಕ ತಾವು ಈ ಸಂಕಟದಿಂದ ಹೊರಬಂದಿರಿ.

ಪ್ರೀತಿ: ಹೌದು ಸರ್

ಮೋದಿ: ಈಗ ತಮ್ಮ ನೆಗೆಟಿವ್ ವರದಿಯೂ ಬಂದಿದೆ

ಪ್ರೀತಿ: ಹೌದು ಸರ್

ಮೋದಿ: ಹಾಗಿದ್ದರೆ ತಾವು ತಮ್ಮ ಆರೋಗ್ಯಕ್ಕಾಗಿ ಹಾಗೂ ಅದರ ಕಾಳಜಿಗಾಗಿ ಈಗ ಏನು ಮಾಡುತ್ತಿರುವಿರಿ?

ಪ್ರೀತಿ: ಸರ್, ನಾನು ಯೋಗವನ್ನು ನಿಲ್ಲಿಸಿಯೇ ಇಲ್ಲ.

ಮೋದಿ: ಹಾಂ.

ಪ್ರೀತಿ: ಈ ಮೊದಲು ನನ್ನನ್ನು ನಾನು ಸಾಕಷ್ಟು ನಿರ್ಲಕ್ಷ್ಯ ಮಾಡುತ್ತಿದ್ದೆ. ಈಗ ಬಹಳಷ್ಟು ಗಮನ ನೀಡುತ್ತಿದ್ದೇನೆ.

ಮೋದಿ: ಧನ್ಯವಾದ ಪ್ರೀತಿ ಅವರೇ

ಪ್ರೀತಿ: ತುಂಬ ಧನ್ಯವಾದಗಳು ಸರ್

ಮೋದಿ: ತಾವು ಯಾವ ಮಾಹಿತಿ ನೀಡಿದ್ದೀರೋ ಅದು ಬಹಳಷ್ಟು ಜನರಿಗೆ ಉಪಯೋಗವಾಗುತ್ತದೆ. ತಾವು ಆರೋಗ್ಯದಿಂದಿರಿ, ತಮ್ಮ ಕುಟುಂಬದ ಜನರು ಆರೋಗ್ಯದಿಂದಿರಲಿ. ತಮಗೆ ಅತ್ಯಂತ ಶುಭಕಾಮನೆಗಳು.

ನನ್ನ ಪ್ರೀತಿಯ ದೇಶವಾಸಿಗಳೇ, ನಮ್ಮ ವೈದ್ಯಕೀಯ ವಲಯದ ಜನರು, ಮುಂಚೂಣಿ ಕಾರ್ಯಕರ್ತರು ಹೇಗೆ ಹಗಲು –ರಾತ್ರಿ ಸೇವೆಯಲ್ಲಿ ನಿರತರಾಗಿದ್ದಾರೋ ಹಾಗೆಯೇ, ಸಮಾಜದ ಇತರ ಜನರು ಸಹ ಈ ಸಮಯದಲ್ಲಿ ಹಿಂದುಳಿದಿಲ್ಲ. ದೇಶ ಮತ್ತೊಂದು ಬಾರಿ ಒಂದಾಗಿ ಕೊರೋನಾ ವಿರುದ್ಧ ಹೋರಾಟ ನಡೆಸುತ್ತಿದೆ. ಈ ದಿನಗಳಲ್ಲಿ ಕ್ವಾರಂಟೈನ್ ನಲ್ಲಿರುವ ಕುಟುಂಬಗಳಿಗೆ ಔಷಧ ತಲುಪುತ್ತಿರುವುದನ್ನು ನಾನು ನೋಡುತ್ತಿದ್ದೇನೆ. ಯಾರೋ ತರಕಾರಿ, ಹಾಲು, ಹಣ್ಣುಗಳನ್ನು ಪೂರೈಸುತ್ತಿದ್ದಾರೆ. ಕೆಲವರು ಆಂಬುಲೆನ್ಸ್ ಅನ್ನು ಉಚಿತವಾಗಿ ರೋಗಿಗಳಿಗೆ ಒದಗಿಸುತ್ತಿದ್ದಾರೆ. ಈ ಸವಾಲಿನ ಸಮಯದಲ್ಲೂ ಸ್ವಯಂ ಸೇವಾ ಸಂಘಟನೆಗಳು ಮುಂದೆ ಬಂದು ದೇಶದ ಬೇರೆ ಬೇರೆ ಭಾಗಗಳಲ್ಲಿ ಇನ್ನೊಬ್ಬರಿಗೆ ಎಷ್ಟು ಸಾಧ್ಯವೋ ಅಷ್ಟು ಸೇವೆ ಸಲ್ಲಿಸಲು ಪ್ರಯತ್ನಿಸುತ್ತಿವೆ. ಈ ಬಾರಿ, ಗ್ರಾಮಗಳಲ್ಲಿ ಹೊಸ ರೀತಿಯ ಜಾಗೃತಿ ಕಂಡುಬರುತ್ತಿದೆ. ಕೋವಿಡ್ ನಿಯಮಗಳನ್ನು ಶಿಸ್ತಾಗಿ ಪಾಲನೆ ಮಾಡುತ್ತಿರುವ ಜನರು ತಮ್ಮ ಗ್ರಾಮವನ್ನು ಕೊರೋನಾದಿಂದ ರಕ್ಷಿಸುತ್ತಿದ್ದಾರೆ. ಈ ಜನರು ಹೊರಗಡೆಯಿಂದ ಬರುತ್ತಿರುವ ಜನರಿಗೆ ಸರಿಯಾದ ವ್ಯವಸ್ಥೆಯನ್ನೂ ಕಲ್ಪಿಸುತ್ತಿದ್ದಾರೆ. ನಗರಗಳಲ್ಲೂ ಸಾಕಷ್ಟು ಸಂಖ್ಯೆಯ ಯುವಕರು ಮುಂದೆ ಬಂದು, ತಮ್ಮ ಭಾಗದಲ್ಲಿ ಕೊರೋನಾ ಪ್ರಕರಣಗಳು ಹೆಚ್ಚದಂತೆ ಸ್ಥಳೀಯ ನಿವಾಸಿಗಳ ಜತೆಗೂಡಿ ಪ್ರಯತ್ನಿಸುತ್ತಿದ್ದಾರೆ. ಅಂದರೆ, ಒಂದೆಡೆ ದೇಶವು ಹಗಲು-ರಾತ್ರಿ ಆಸ್ಪತ್ರೆ, ವೆಂಟಿಲೇಟರ್ ಹಾಗೂ ಔಷಧಗಳಿಗಾಗಿ ಕೆಲಸ ಮಾಡುತ್ತಿದ್ದರೆ, ಇನ್ನೊಂದೆಡೆ ದೇಶವಾಸಿಗಳು ಸಹ ಮನಃಪೂರ್ವಕವಾಗಿ ಕೊರೋನಾ ಸವಾಲನ್ನು ಎದುರಿಸುತ್ತಿದ್ದಾರೆ. ಈ ಭಾವನೆ ನಮಗೆ ಎಷ್ಟು ಚೈತನ್ಯ ನೀಡುತ್ತದೆ, ವಿಶ್ವಾಸ ನೀಡುತ್ತದೆ. ಈಗ ನಡೆಯುತ್ತಿರುವ ಈ ಎಲ್ಲ ಪ್ರಯತ್ನಗಳು ಸಮಾಜದ ಅತಿ ದೊಡ್ಡ ಸೇವೆಯಾಗಿದೆ. ಇದು ಸಮಾಜದ ಶಕ್ತಿಯನ್ನು ಹೆಚ್ಚಿಸುತ್ತದೆ.

ನನ್ನ ಪ್ರೀತಿಯ ದೇಶವಾಸಿಗಳೇ, ಇಂದು “ಮನದ ಮಾತು’ ಕಾರ್ಯಕ್ರಮದ ಸಂಪೂರ್ಣ ಚರ್ಚೆಯನ್ನು ನಾವು ಕೊರೋನಾ ಮಹಾಮಾರಿ ಮೇಲೆಯೇ ಮಾಡಿದ್ದೇವೆ. ಏಕೆಂದರೆ, ಈ ರೋಗವನ್ನು ನಿರ್ಮೂಲನೆ ಮಾಡುವುದು ಇಂದು ನಮ್ಮ ಪ್ರಾಥಮಿಕ ಆದ್ಯತೆಯಾಗಿದೆ. ಇಂದು ಭಗವಾನ್ ಮಹಾವೀರ ಜಯಂತಿಯನ್ನು ಆಚರಿಸುತ್ತಿದ್ದೇವೆ. ಈ ಸಂದರ್ಭದಲ್ಲಿ ನಾನು ಎಲ್ಲ ದೇಶವಾಸಿಗಳಿಗೆ ಶುಭಾಶಯ ಕೋರುತ್ತೇನೆ. ಭಗವಾನ್ ಮಹಾವೀರರ ಸಂದೇಶ ನಮಗೆ ಸ್ಥಿರತೆ ಮತ್ತು ಆತ್ಮಸಂಯಮದ ಪ್ರೇರಣೆ ನೀಡುತ್ತದೆ. ಇದು ರಮ್ ಜಾನ್ ಪವಿತ್ರ ಮಾಸದ ಆಚರಣೆಯೂ ನಡೆಯುತ್ತಿದೆ, ಮುಂದೆ ಬುದ್ಧ ಪೂರ್ಣಿಮೆಯೂ ಇದೆ. ಗುರು ತೇಗ್ ಬಹಾದ್ದೂರ್ ಅವರ 400ನೇ ಜನ್ಮ ಶತಮಾನೋತ್ಸವದ ಪ್ರಕಾಶ ಪರ್ವವೂ ಇದೆ. ಇನ್ನೊಂದು ಮಹತ್ವಪೂರ್ಣ ದಿನ-ಪೋಚಿಶೆ ಬೋಯಿಶಾಕ್-ಅಂದರೆ, ಟ್ಯಾಗೋರ್ ಜಯಂತಿಯೂ ಇದೆ. ಇವರೆಲ್ಲರೂ ನಮಗೆ ನಮ್ಮ ಕರ್ತವ್ಯ ನಿಭಾಯಿಸಲು ಪ್ರೇರಣೆ ನೀಡುತ್ತಾರೆ. ಓರ್ವ ನಾಗರಿಕರಾಗಿ ನಾವು ನಮ್ಮ ಜೀವನದಲ್ಲಿ ಎಷ್ಟು ಕುಶಲತೆಯಿಂದ ನಮ್ಮ ಕರ್ತವ್ಯ ನಿಭಾಯಿಸುತ್ತೇವೋ ಅಷ್ಟು ಶೀಘ್ರ ನಾವು ಸಂಕಟದಿಂದ ಮುಕ್ತರಾಗಿ ಭವಿಷ್ಯದ ಪಥದಲ್ಲಿ ಮುಂದೆ ಹೆಜ್ಜೆ ಇಡಬಲ್ಲೆವು. ಈ ಆಶಯಗಳೊಂದಿಗೆ ನಾನು ತಮ್ಮೆಲ್ಲರಲ್ಲಿ ಮತ್ತೊಮ್ಮೆ ಒತ್ತಾಯಿಸುತ್ತೇನೆ, ಏನೆಂದರೆ, ಲಸಿಕೆಯನ್ನು ನಮಗೆಲ್ಲರಿಗೂ ಹಾಕಲಾಗುತ್ತದೆ. ಆದರೂ ಎಚ್ಚರಿಕೆಯಿಂದಿರಬೇಕು. ಔಷಧವೂ…ನಿಯಮವೂ. ಈ ಮಂತ್ರವನ್ನು ಎಂದಿಗೂ ಮರೆಯಬಾರದು. ನಾವೆಲ್ಲರೂ ಸೇರಿ ಬಹುಬೇಗ ಈ ಆಪತ್ತಿನಿಂದ ಹೊರಬರುತ್ತೇವೆ. ಈ ವಿಶ್ವಾಸದೊಂದಿಗೆ, ತಮಗೆಲ್ಲರಿಗೂ ಅತ್ಯಂತ ಧನ್ಯವಾದಗಳು, ನಮಸ್ಕಾರ.