Text of PM's address at the Indian Community Reception at Dubai

Published By : Admin | August 17, 2015 | 23:28 IST
Today I am witnessing 'mini-India' in Dubai: PM
People from all over the world have come here to Dubai. Magnetic power of this place has drawn the world here: PM
There are around 700 flights between India and the UAE but it took 34 years for a PM to visit this Nation: PM
PM Narendra Modi urges audience to give a standing ovation to the Crown Prince of Abu Dhabi
India has been a victim of terrorism for 40 years. Innocent people have lost their lives: PM
Good Taliban, Bad Taliban...Good Terror, Bad Terror...this won't work. A decision has to be taken are you with terrorism or with humanity: PM
Our effort has been to take India to new heights of progress and maintain a strong friendship with our neighbouring countries: PM

दुबई की धरती पर मैं आज मेरे सामने लघु भारत के दर्शन कर रहा हूं। हिन्‍दुस्‍तान के कोने-कोने से आए हुए मेरे प्यारे देशवासियों को मैं नमन करता हूं। आप वे लोग हैं, जिन्होंने परिश्रम की पराकाष्ठा करके..कोई दस साल से, कोई पंद्रह साल से, कोई बीस साल से, कोई तीस साल से, रोजी रोटी कमा रहे हैं, लेकिन साथ-साथ भारत के गौरव को भी बढ़ाने में कभी पीछे नहीं रहे। आपके व्यवहार के कारण आपके आचरण के कारण हमेशा भारत गौरव अनुभव करता रहा है। भारत में अगर अधिक बारिश भी हो जाए तो दुबई में बैठा हुआ मेरा हिंदुस्तानी छाता खोल देता है। भारत में कहीं अगर कोई प्राकृतिक आपदा आ जाए, दुबई में बैठा हुआ मेरा देशवासी चैन से सो नहीं सकता।

जब अटल बिहारी देश के प्रधानमंत्री थे, भारत ने न्यूक्लियर टेस्ट किया था, दुनिया चौंक गई थी, कुछ लोग गुस्से में आए थे और रातों-रात भारत पर sanction लगा दिए गए थे। भारत को आर्थिक मुसीबतों में धकेल दिया गया था.. और तब वाजपेयी जी ने विश्व भर में फैले हुए भारत वासियों को आह्वान किया था, देश की मदद करने के लिए। आज मैं गर्व से कह सकता हूं कि वाजपेयी जी के उस आह्वान पर, हिन्‍दुस्‍तान की तिजोरी भरने में Gulf Countries में जो मजदूरी का काम करते थे, उन मेरे भारतवासियों का सबसे बड़ा योगदान था। इस अर्थ में यहां बसा हुआ हर भारतवासी, एक प्रकार से हिन्‍दुस्‍तान के हर कोने से जुड़ा हुआ है। पिछली बार जब देश लोकसभा के चुनाव के लिए व्यस्त था, चुनाव नतीजे आ रहे थे, हिन्‍दुस्‍तान ही नहीं, पूरा दुबई नाच रहा था। ये प्यार भारत माता के कल्याण के लिए..मां भारती फिर से एक बार सामर्थ्यवान बने, सशक्त बने, सम्‍पन्‍न बने, समृद्ध बने, ये सपना संजोकर के दिन-रात एक करने वाले आप लोग मेरे सामने बैठे हैं।

भाइयों-बहनों, आज..यहां तो हिन्‍दुस्‍तान के हर कोने से आए हुए मेरे भाई-बहन बैठे हैं और दुबई, वो सिर्फ लघु भारत ही रहा है ऐसा नहीं है, अब तो दुबई एक लघु विश्व भी बन गया है। दुनिया के सभी देशों के लोग, कम अधिक मात्रा में दुबई में रह रहे हैं। ठंडे से ठंडे प्रदेश के लोग भी इस 40-45 डिग्री तापमान में रहना पसंद करते हैं। क्या ताकत दिखाई होगी इस देश ने, क्या magnetic power पैदा किया होगा विकास के माध्यम से कि पूरा विश्व यहां आकर्षित हो जाता है।

हिन्‍दुस्‍तान के हर कोने से आए हुए सभी देशवासियों ने अभी दो दिन पूर्व 15 अगस्त, भारत की आज़ादी का पर्व मनाया है। मैं भी आप सब को आज़ादी के पावन पर्व की अनेक-अनेक शुभकामनाएं देता हूं।

यहां केरल से आया हुआ भी समुदाय बहुत बड़ी मात्रा में है। मैं केरल का उल्लेख विशेष रूप से इसलिए कर रहा हूं क्योंकि आज केरल का नववर्ष है। सहोदरकअ एंटे रूदयम निरन्या नववलसरा आशम सफलअ। नमस्कारम्।



हर हफ्ते हिन्‍दुस्‍तान से 700 से भी ज्यादा फ्लाइट यहां आती हैं। दुनिया में किसी एक देश के साथ इतनी बड़ी मात्रा में हवाई आवागमन अगर कहीं है, तो इस इलाके से है। हर हफ्ते 700 से भी अधिक फ्लाइट आती हैं, लेकिन भारत के प्रधानमंत्री को यहां आने में 34 साल लग गए। कभी-कभी मुझे लगता है कि बहुत सारे ऐसे अच्छे अच्छे काम हैं, जो पूर्व के लोग मेरे लिए बाकी छोड़ करके चले गए हैं और इसलिए बहुत सारे बाकी रहे अच्छे काम करने का मुझे भाग्य मिला है। उन अच्छे कामों में से महत्वपूर्ण अच्छा काम मेरा अबुधाबी आना, मेरा दुबई आना है। जिस प्रकार से..ये मेरी पहली मुलाकात है। इसके पहले कभी मैं धरती के इस भू-भाग पर नहीं आया। ..और 34 साल में प्रधानमंत्री के रूप में कोई आएं, तो किसी को भी, किसी को भी नाराज़गी व्यक्त करने का हक बनता है। हक बनता है कि नहीं बनता है? बनता है कि नहीं बनता है? लेकिन अबुधाबी में His Highness Crown Prince ने, दुबई में His Highness अल मख्तूम जी ने नाराज़गी नहीं दिखाई, इतने प्यार की वर्षा की, इतने प्यार की वर्षा की, मैं उनके इस प्यार को कभी भूल नहीं पाउंगा। जो स्वागत किया, जो सम्मान किया.. His Highness Crown Prince अपने सभी पांचों भाइयों के साथ एयरपोर्ट पर लेने के लिए आए। मेरे प्यारे देशवासियों, ये प्यार, ये सम्मान किसी व्यक्ति को नहीं है। ये सवा सौ करोड़ देशवासियों का सम्मान है। ये भारत की बदली हुई तस्वीर का सम्मान है। भारत जिस प्रकार से दुनिया में अपनी जगह बना रहा है, उस बदले हुए हालात का सम्मान है। मैं His Highness Crown Prince का, अमीरात का, दुबई के Rulers का हृदयपूर्वक बहुत-बहुत आभार व्यक्त करता हूं।

एक तरफ संप्रदाय के नाम पर आतंकवाद के खेल खेले जाते हैं। निर्दोषों को मौत के घाट उतार दिया जाता है। पूर्णतया: चिंता का माहौल हो, ऐसे समय अबुधाबी के His Highness Crown Prince भारतीय समुदाय के लिए मंदिर बनाने के लिए जगह देने का निर्णय करते हैं। जो लोग अबुधाबी से परिचित हैं, उन्हें पता है कि निर्णय कितना बड़ा है, ये सौगात कितनी बड़ी है। आप मुझे बताइए, सभी देशवासियों को उनका विशेष रूप से अभिनंदन करना चाहिए कि नहीं करना चाहिए। मैं आप सभी से आग्रह करता हूं कि तालियों की गूंज से Crown Prince का अभिनंदन कीजिए। Crown Prince को Standing Ovation दीजिए। उनका अभिनंदन कीजिए। मैं हृदय से उनका अभिनंदन करता हूं।

भाइयों-बहनों, दो दिन की मेरी यात्रा में जिस प्रकार का विश्वास का माहौल बना, आखिरकार अंतर्राष्ट्रीय संबंधों का आधार..आपकी भाषा क्या है, आप कितने articulate हैं, आप diplomatic relation में कितने बढि़या ढंग से मेलजोल करते हैं..उससे भी ज्यादा महत्व होता है, एक दूसरे पर भरोसे का। अंतर्राष्ट्रीय संबंधों में ये भरोसा, ये विश्वास, एक बहुत बड़ी पूंजी होता है ..और आज मैं चंद घंटों की मेरी मुलाकात के बाद कह सकता हूं कि भारत, अबुधाबी, दुबई, अमीरात.. जो विश्वास का सेतू बना है, वो अभूतपूर्व है और आने वाली पीढि़यों तक काम आए, ऐसा foundation तैयार हुआ है।

आज मुझे खुशी हुई कि जब आज भारत और अमीरात के बीच जो Joint Statement आया है, आपको भी खुशी होगी जान करके.. Crown Prince ने हिन्‍दुस्‍तान में साढ़े चार लाख करोड़ रूपए का निवेश करने का संकल्प दोहराया है। साढ़े चार लाख करोड़ रूपया! कितना? कितना? कितना? भाइयों-बहनों, अगर आप पर किसी का भरोसा न हो, तो कोई 10 रूपया भी आप पर लगाने के लिए तैयार होगा क्या? ये भारत की साख बनी है। आज भारत का बदला हुआ रूप विश्‍व के सामने अपनी स्वीकृति बनाता आगे चल रहा है।

आज अमीरात और भारत की तरफ से आतंकवाद के खिलाफ, दो टूक शब्दों में, बिना लाग लपेट और किसी की परवाह किए बिना साफ-साफ शब्‍दों में संकेत दे दिए गए हैं। आतंकवाद के खिलाफ एकता का स्वर आज इस धरती से उठा है। मैं इसे बहुत अहम मानता हूं और इतना ही नहीं..समझने वाले समझ जाएंगे, अक्लमंद को इशारा काफी। आतंकवाद में लिप्त लोगों को सजा होनी चाहिए, ये स्पष्ट शब्दों में संकेत यहां से निकला है। मैं आज यहां के शासकों का इसलिए भी आभारी हूं कि उन्होंने..United Nations जब अपने 70 साल मनाने जा रहा है, तो यहां से कहा गया है और भारत की इस बात का खुला समर्थन किया गया है कि भारत को United Nations की Security Council की Permanent Membership मिलनी चाहिए। मैं आभारी हूं उनका।

इससे भी आगे एक बहुत-बहुत महत्वपूर्ण बात पर..आज भारत की लंबे अर्से से एक position है। उसका आज His Highness Crown Prince ने खुले आम समर्थन घोषित किया। भाइयों-बहनों, कई वर्षों से United Nations में एक Resolution लटका पड़ा है। आपको भी बड़ी हैरानी होगी..और दो-पांच साल से नहीं, कई वर्षों से लटका पड़ा है। क्या.. ? United Nations, जो कि प्रथम और द्वितीय विश्वयुद्ध से पीडि़त मानव समुदाय को मरहम लगाने के लिए..आगे मानव जाति को ऐसे संकट झेलने की नौबत न आए, इसके लिए precaution लेने के लिए, व्यवस्थाएं विकसित करने के लिए 70 साल पहले United Nations का जन्म हुआ। लेकिन वह United Nations आतंकवाद की अभी तक परिभाषा नहीं कर पाया। आतंकवादी किसको कहें, आतंकवाद किसको कहें, आतंकवाद को समर्थन करने वाले कौन माना जाए, किस देश को आतंकवाद का समर्थक माना जाएं, किस देश को समर्थक न माना जाए। इसलिए Comprehensive Convention on International Terrorism..इसका निर्णय करने का प्रस्ताव लंबे अर्से से United Nations में लंबित पड़ा हुआ है। भारत ने position ली हैं सालों से किए एक प्रस्ताव पर चर्चा हो जाए, निर्णय होना चाहिए और ये टाला जा रहा है। आज मुझे खुशी इस बात की है कि His Highness Crown Prince ने भारत की स्थिति का समर्थन का किया है, भारत की position का समर्थन किया है और आतंकवाद के खिलाफ लड़ने के संबंध में आपने स्पष्ट संकेत दे दिए हैं। न सिर्फ.. साढ़े चार लाख करोड़ का पूंजी निवेश की बात नहीं है ये। ये एक निश्चित दिशा में कंधे से कंधा मिलाकर चलने का एक प्रकार का संकेत, इस Joint Statement में है। मैं इसे बहुत महत्वपूर्ण मानता हूं।

भाइयों-बहनों आप तो सालों से बाहर हैं। आज भारत का नाम सुनते ही आपके सामने खड़े हुए व्यक्ति की आंखों में चमक आती है कि नहीं आती है? आपका माथा गर्व से ऊंचा होता है कि नहीं होता है, आपका सीना गर्व से तन जाता है कि नहीं तन जाता है? एक गर्व महसूस करते हैं कि नहीं करते हैं? भाइयों बहनों आज दुनिया का हिन्‍दुस्‍तान की तरफ देखने का नज़रिया पूरी तरह बदल गया है और उसका एक कारण..क्या कारण है?.. क्या कारण है, ये बदलाव आया है? मोदी के कारण नहीं, ये जो बदलाव आया है, सवा सौ करोड़ देशवासियों की संकल्प शक्ति के कारण आया है। सवा सौ करोड़ देशवासियों ने 2014 मई महीने में 30 साल के बाद पूर्ण बहुमत वाली सरकार चुनी। आज दुनिया का कोई भी महापुरूष, दुनिया का कोई भी राजनेता मोदी से जब हाथ मिलाता है न, तब उसे मोदी नहीं दिखता है। उसे सवा सौ करोड़ हिंदुस्तानी दिखाई देते हैं। दुनिया की तेज़ गति से बढ़ रही economy दिखाई दे रही है।

भाइयों-बहनों, पिछले दिनों, IMF हो, World Bank हो, Moody हो, विश्व की जितनी भी आर्थिक पैमाने पर Rating Institutions हैं, सब किसी ने एक स्वर से कहा है कि आज दुनिया में बड़े देशों में सबसे तेज गति से अगर आर्थिक सुधार हो रहा है, तेज गति से growth हो रहा है तो उस देश का नाम है.. (दर्शक दीर्घा से भारत-भारत के नारे). मुझे बताइए सीना तन जाएगा कि नहीं तन जाएगा? माथा ऊंचा हो जाएगा कि नहीं होगा कि नहीं होगा। एक साल के भीतर-भीतर ये बदलाव आया है। भाइयों बहनों, हमने मेक इन इंडिया.. कुछ महीने पहले इस अभियान का प्रारंभ किया। दुनिया को मैं कह रहा हूं- मेक इन इंडिया। आइए, हिन्‍दुस्‍तान एक ऐसा देश है जो संभावनाओं से भरा हुआ है, Opportunities ही Opportunities हैं। ये एक ऐसा भाग्‍यशाली देश है, जिसके पास 65 प्रतिशत जनसंख्या 35 साल से कम उम्र की है। भारत एक नौजवान देश है। आज यहां जवानी लबालब भरी पड़ी है और विश्व वहां आए, हमारे युवकों की शक्ति जुटाए, उत्पादन करे, दुनिया के बाज़ार में जाकर बेचे। और आज..ये कुछ ही महीनों का मामला है.. Foreign Direct Investment..FDI में 48 प्रतिशत वृद्धि हुई है, 48%। भाइयों-बहनों विकास को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए Ease of doing Business का माध्‍यम हो। देश की युवा शक्‍ति में Skill Development का अभियान हो। आधुनिक भारत के निर्माण के लिए डिजिटल इंडिया का सपना साकार करने के लिए दिन-रात पुरुषार्थ चलता हो। तो विश्‍व का आना बहुत स्‍वाभाविक है मेरे भाइयों और बहनों, बहुत स्‍वाभाविक है।

भाइयों-बहनों, आज दुनिया जिस आतंकवाद के नाम सुनते ही कांप उठती हैं, एक नफरत पैदा होती है। मैं दुनिया को कहता हूं हम हिन्‍दुस्‍तान के लोग 40-40 साल से ये आतंकवाद के शिकार हुए हैं। हमारे निर्दोष लोग आतंकवादियों की गोलियों से भून दिए गए हैं, मौत के घाट उतार दिए गए हैं और जब कभी मैं विश्‍व के लोगों के साथ आज से 25-30 साल पहले कभी मुझे बात करने का अवसर मिलता था, तो वे आतंकवाद समझने की उनकी क्षमता ही नहीं थी। कभी मैं आतंकवाद की बात करता था तो वे मुझे कहते थे ये तो आपका Policing का problem है Law and Order का problem है। अब उनको समझ आ गया है कि आतंकवाद का कितना भयंकर रूप होता है। आतंकवाद की कोई सीमाएं नहीं होती है, वो पता नहीं कब किस सीमा पर जाकर आ धमकेगा। आज अभी मैं यहां पहुंच रहा था, मैंने सुना बैंकॉक के अंदर आज एक बम धमाका हुआ, निर्दोष लोगों को मार दिया गया। भारत तो लगातार इन हरकतों को झेलता रहा है और विश्‍व समुदाय जब तक आतंकवाद की मानसिकता वाले देशों को, आतंकवाद को, उसको समर्थन करने वालों को एक ओर, और मानवता में विश्‍वास करने वाले दूसरी ओर, और मानवतावाद में विश्‍वास करने वाले दुनिया के देश एक होकर के आतंकवाद के खिलाफ लड़ने का वक्‍त आ चुका है।

Good Taliban-Bad Taliban, Good Terrorism- Bad Terrorism ये अब चलने वाला नहीं है। हर किसी को तय करना पड़ेगा कि फैसला करो कि आप आतंकवाद के साथ हो या मानवता के साथ हो, निर्णय करो। भारत को तो आज भी आए दिन इन नापाक हरकतों का शिकार होना पड़ता है। हम समस्‍याओं का समाधान खोजने की दिशा में लगातार कोशिश कर रहे हैं। यहां बहुत कम लोगों को पता होगा कि भारत की आजादी के पहले से नागालैंड में अतिवाद, insurgency इस समस्‍या से नागालैंड जूझता रहा और उसके कारण भारत का पूरा ये पूर्वी हिस्‍सा, नॉर्थ-ईस्‍ट, आए दिन हिंसा का शिकार होता था और धीरे-धीरे वो बीमारी इतनी फैलती गई कि अन्‍य राज्‍यों में भी अलग-अलग नाम से, अलग-अलग अतिवादी, आतंकवादी गुट बनते चले गए। आजादी के भी पहले से चल रहा था।

आज मैं बहुत संतोष के साथ मेरे देशवासियों, आपको कहना चाहता हूं कि अभी एक महीने पहले नागालैंड के इन गुटों के साथ, जो कभी हिंसा में विश्‍वास करते थे, जो शस्‍त्रों को लेकर के गतिविधि चलाते थे। उनसे जो बातचीत चल रही थी, वो सफलतापूर्वक आगे बढ़ी, निर्णय हुआ, मुख्‍य धारा में आने का निर्णय हुआ। 60-70 साल के बाद ये संभव हुआ। मैं नागालैंड की ये घटना का जिक्र इसलिए करना चाहता हूं कि हिंसा के राह पर चले हुए भारत के नौजवानों को और विश्‍व के नौजवानों को मैं एक उदाहरण के रूप में कहना चाहता हूं, समस्‍या कितनी भी गंभीर क्‍यों न हो, आखिर तो बातचीत से ही रास्‍ता निकलता है। कोई 10 साल लड़ाई लड़ने के बाद बात करें, कोई 20 साल लड़ाई लड़ने के बाद करें, कोई 40 साल लड़ाई लड़ने के बाद बात करें, लेकिन आखिर में तो बात ही होती है और टेबल पर ही फैसले होते हैं और इसलिए विश्‍व भर से इस गलत रास्‍ते पर चल पड़ लोग बम-बंदूक के भरोसे, अपने सपनों को साकार करने के रास्‍ते पर चले हुए लोग। ये रास्‍ता कभी आपका भला नहीं करेगा। ये रास्‍ता कभी किसी और का भला नहीं करेगा। ये रास्‍ता कभी मानवता का भला नहीं करेगा। ये रास्‍ता इतिहास को बेदाग नहीं रहने देगा। ये पूरे इतिहास को कलंकित कर देगा, ये पूरे इतिहास को दागदार बना देगा और इसलिए हिंसा का मार्ग छोड़कर के मुख्‍यधारा में जाना, ये आज समय की मांग है।

मेरे प्‍यारे भाइयों-बहनों, बांग्‍लादेश 1947 में भारत का विभाजन हुआ, 1947 में। तब से पूर्व पाकिस्‍तान, पश्‍चिम पाकिस्‍तान थे उस समय। पूर्वी पाकिस्‍तान जो आज बांग्‍लादेश बना, भारत और उनके बीच सीमा का विवाद चल रहा था। तनाव का कारण बना हुआ था। आशंकाओं का कारण बना हुआ था। घुसपैठ के लिए एक सुविधाजनक स्‍थिति बनी हुई थी। आप सब के आशीर्वाद से हिन्‍दुस्‍तान ने बीड़ा उठाया, सबने मिलकर के बीड़ा उठाया। इस समस्‍या का समाधान करना है, बातचीत से करना है। मैं पिछले सितंबर में बांग्‍लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना जी से मिला था और मैंने उनको वादा किया था कि मुझ पर भरोसा कीजिए और मुझे थोड़ा समय दीजिए। उन्‍होंने कहा कि मेरे पास भरोसा रखने के सिवाए है भी क्‍या! लेकिन आज, आज मैं मेरे प्‍यारे देशवासियों आपके सामने सर झुकाकर के कहना चाहता हूं कि आजादी से लटका हुआ ये सवाल 1 अगस्‍त को समाप्‍त कर दिया गया है। सीमा निर्धारित हो गई। जिनको बांग्‍लादेश जाना था, बांग्‍लादेश चले गए, जिनको भारत आना था भारत आ गए। हम लोग तो 15 अगस्‍त, 1947 को आजाद हो गए थे। भारत के नागरिक के नाते गौरवगान करने लगे थे। लेकिन ये हमारे भाई-बहन अभी 1 अगस्‍त, 2015 को भारत की भूमि पर आजादी का स्‍वाद लेने का उन्‍हें सौभाग्‍यमान मिला है। भारत की संसद में सर्वसम्‍मति से सभी राजनैतिक दलों ने साथ दिया और सर्वसम्‍मति से फैसला हुआ, बातचीत के माध्‍यम से फैसला हुआ।

ये छोटी-मोटी उपलब्‍धि नहीं है मेरे भाइयों-बहनों। और मैं, औरों को भी हमेशा कहता हूं, अड़ोस-पड़ोस के देशों को भी कहता रहता हूं। जैसे हिंसा के रास्‍ते पर गए हुए लोगों को भी कभी न कभार बातचीत के रास्‍ते पर आना पड़ता है। वैसे अड़ोस-पड़ोस में भी समस्‍याओं का समाधान बातचीत से ही निकलता है।

अंतर्राष्‍ट्रीय संबंधों में आज भारत एक महत्‍वपूर्ण भूमिका अदा कर रहा है। मानवता के अधिष्‍ठान पर कर रहा है। जब नेपाल में भूकंप आया चंद घंटों में, ऐसा नहीं है कि भई ज़रा पूछो तो क्‍या हुआ है? जरा जानकारी लो क्‍या हुआ है? ऐसा करो अफसरों का delegation भेजो, देखो ज़रा क्‍या मुसीबत आई है? ऐसा करो भई कोई अपने रिश्‍तेदार वहां हो तो पूछो भई हुआ क्‍या है? ऐसा इंतजार नहीं किया? आज दिल्‍ली में ऐसी सरकार है, जो हर पल नज़र आती है, हर जगह पर नज़र आती है और चंद घंटों में, चंद घंटों में, भारत से जो भी हो सकता था, ये मानवता का काम था। नेपाल के चरणों में जाकर के हमारे लोग बैठ गए और उनकी सेवा में लग गए और आज भी सेवा चालू है। नेपाल हमारा पड़ोसी है। वो दुखी हो और हम सुखी हों, ये कभी संभव नहीं होता है। उसके सुख में भी हमारा सुख समा हुआ है।

श्रीलंका, आपको हैरानी होगी। जब मैं नेपाल गया, प्रधानमंत्री बनने के बाद। नेपाल जाना है, तो 70 मिनट नहीं लगते। दिल्‍ली से नेपाल जाना हो, तो 70 मिनट नहीं लगते। लेकिन भारत के प्रधानमंत्री को नेपाल पहुंचने में 17 साल लग गए। फिर से हम गए, संबंधों को फिर से जोड़ा। अपनापन। आज नेपाल भारत पर भरोसा कर रहा है। भारत नेपाल का सुख-दु:ख का साथी बन रहा है। श्रीलंका, राजीव गांधी जब प्रधानमंत्री थे, उसके बाद कोई प्रधानमंत्री की stand alone visit नहीं हुई थी। कितने साल बीत गए। हमारा पड़ोसी है, आए दिन हमारे तमिलनाडु, केरल के मछुआरे और उनके मछुआरे आपस में भिड़ जाते हैं। लेकिन उधर कोई जाता नहीं था। हम गए, इतना ही नहीं। जाफना जहां 20-20 साल तक बम और बंदूक का ही कारोबार चलता था, उस जाफना में जाकर के उन दुखियारों के आंसू पोंछने का काम करने का सौभाग्‍य मुझे मिला। एक प्रधानमंत्री के रूप में जाफना जाने का सौभाग्‍य मुझे मिला।

हमारे पड़ोस में मालदीव, आइलैंड पर बसा हुआ देश, tourism की दृष्‍टि से काफी आगे बढ़ा है। अचानक एक दिन उनके यहां पानी के सारे संयंत्र खराब हो गए। पूरे देश के पास पीने का पानी नहीं था। आप कल्‍पना कर सकते हो, कोई देश के पास पीने का पानी न हो। कितना बड़ा गहरा संकट आया। मालदीव से हमें message आया कि ऐसी मुसीबत आई है। एक पल का इंतज़ार नहीं किया, भाइयों और बहनों। हवाई जहाज से पीने का पानी पहुंचाया मालदीव में। दूसरे दिन स्‍टीमर से पानी पहुंचाना शुरू कर दिया और जब तक उनकी वो मशीन चालू नहीं हुई, पानी की व्‍यवस्‍था दुबारा पुनर्जीवित नहीं हुई, हमने मालदीव को प्‍यासा नहीं रहने दिया।

अफगानिस्‍तान हमारा पड़ोसी है। अफगानिस्‍तान संकटों से गुजर रहा है। लंबे अरसे से आए दिन वो घाव झेलता चला जा रहा है। हर पल अफगानिस्‍तान को मरहम लगाने का काम हिन्‍दुस्‍तान करता आया है। अफगानिस्‍तान फिर से एक बार खड़ा हो जाए, क्‍योंकि हम सब बचपन से काबुलीवाला से तो बहुत परिचित हैं। जब काबुली वाले की बात करते हैं, तो हमें कितना अपनापन महसूस होता है। भाइयों-बहनों हमारी कोशिश रही है भारत को विकास की नई ऊचाइयों पर ले जाना। भारत में निरंतर विकास को आगे बढ़ाना और अपने अड़ोस-पड़ोस के देशों से दोस्‍ती बनाकर करके साथ और सहयोग लेकर करके आगे चल पड़ना।

SAARC देशों का समूह उसमें एक नया प्राण पूरने का प्रयास किया है, सफलतापूर्वक प्रयास किया है। वरना पहले SAARC देशों के मंच का उपयोग तू-तू मैं मैं के लिए होता था, कभी भारत को घेरने के लिए होता था। आज SAARC देशों के लोग, जितने साथ चल सकते हैं, उनको ले करके इन SAARC की इकाई का विकास की ऊंचाइयों पर ले जाने का सपना हमने देखा था। हमने घोषित किया है कि 2016 में हम आकाश में एक SAARC Satellite छोड़ेंगे जिसकी सेवाएं SAARC देशों में मुफ्त में देंगे, जो शिक्षा के काम आए , जो आरोग्‍य के लिए काम आये, जो किसानों को काम आये, जो मछुआरों के काम आये, सामान्‍य जन को काम आये। अभी हम बीच में सोच रहे थे कि SAARC देश Connectivity के लिए गंभीरता से सोचे और हम जानते हैं, आज विकास में Connectivity का महत्‍व बहुत है। आप समुद्री मार्ग से जुडि़ए या रेल मार्ग से जुडि़ए, या रोड मार्ग से जुडि़ए, जुड़ना जरूरी है। यूरोप के देशों को ये लाभ मिला हुआ है। एक देश से दूसरे देश चले जाओ पता तक नहीं चलता कि देश कब बदल गया। क्‍या ये SAARC देशों के बीच नहीं हो सकता है? हमने मिल करके सामूहिक निर्णय करने का प्रयास किया नेपाल में। लेकिन आप जानते हैं, कुछ लोगों को जरा तकलीफ होती है, लेकिन कुछ लोगों की तकलीफ के लिए क्‍या रुकना चाहिए? हमारे काम को क्‍या हमें रोक देना चाहिए? हमें अटक जाना चाहिए क्‍या? ठीक है आपकी मर्जी, आप वहां रह जाइये, हम तो चल पड़े भाई और हमने क्‍या किया। एक बहुत बड़ा अहम फैसला लिया है भाइयों और बहनों, इसका प्रभाव आने वाले दिनों में क्‍या होने वाला है, वो तो वक्‍त बताएगा। नेपाल, भूटान, भारत, बांग्‍लादेश, इन चार देशों ने एक नया इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर बना करके Connectivity का एक पूरा काम तय कर लिया, Agreement हो गया, ये आगे चल करके नॉर्थ-ईस्‍ट से जुड़ेगा। वहां से ये म्‍यांमार मार्ग से जुड़ेगा। वो इंडोनेशिया, थाइलैंड, पूरब, हिन्‍दुस्‍तान, पूरब की बीच की तरफ भारत को Connectivity की ताकत देगा एक नया भारत का बदला हुआ, संबंधों का नया विश्‍व खड़ा हो जाएगा।

भाइयों-बहनों, एक निश्चत समय के साथ भारत अपनी भूमिका भी अदा करें, भारत बड़े होने के अहंकार से नहीं, हर किसी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलना चाहता । विकास की नई ऊंचाईयों को पार करना चाहता। भारत में नौजवानों को रोजगार मिले, हमारे कृषि में Second Green Revolution हो, हमारा पूर्वी हिन्‍दुस्‍तान, चाहे पूर्वी उत्‍तर प्रदेश हो, चाहे बिहार हो, चाहे पश्चिम बंगाल हो, चाहे असम हो, चाहे नॉर्थ-ईस्‍ट हो, चाहे ओडि़शा हो, ये हमारा जो इलाका है, ये मानना पड़ेगा कि वहां विकास की ज्‍यादा जरूरत है। अगर वहां पर विकास हो गया और हिन्‍दुस्‍तान का पश्चिमी छोर और पूरब का छोर बराबर हो गये, तो भारत बहुत तेज गति से दौड़ने लग जाएगा और इसलिए भारत के इस पूर्वी छोर पर आर्थिक विकास का एक नया अभियान हमने चलाया है। Infrastructure खड़ा करने का एक नया अभियान चलाया है। Fertiliser के नये कारखाने शुरू कर रहे हैं। गैस की पाइप लाइन लगानी है। बिजली पहुंचानी है। आप मुझे बताइए आजादी के इतने सालों के बाद बिजली होनी चाहिए कि नहीं होनी चाहिए? बिजली मिलनी चाहिए या नहीं मिलनी चाहिए? क्‍या आज के युग में बिजली के बिना गुजारा संभव है? भाइयों-बहनों हमने सपना संजोया है। पांच साल के भीतर-भीतर हम देश के कोने-कोने में 24 घंटे बिजली मैंने देने के लिए फैसला किया। ये हम करके रहेंगे।

दुबई में रहने वाले मेरे प्‍यारे भाइयो-बहनों, हमने एक महत्‍वपूर्ण योजना घोषित की है । हमारे देश में लोगों को पहले Bank Accounts नहीं थे, हमने हर हिन्‍दुस्‍तानी का Bank Account खोल दिया, एक काम किया। भारत में हमारे देश के नागरिकों को इंश्‍योरंस नहीं है, बीमा नहीं है। उसके परिवार में कोई आपत्ति आ जाए, पीछे वालों को देखने की कोई व्‍यवस्‍था नहीं। हमने तीन योजनाएं लगाई हैं, एक प्रधानमंत्री बीमा सुरक्षा योजना, प्रधानमंत्री जीवन ज्‍योति योजना और इंश्‍योरेंस के लिए कितना पैसा देना है? एक स्‍कीम ऐसी है कि जिसमें एक महीने में सिर्फ एक रुपया देना है, 12 महीने में 12 रुपया। हमारे देश का गरीब से गरीब व्‍यक्ति भी दे सकता है या नहीं दे सकता है? मुझे बताइए दे सकता है या नहीं दे सकता है? गरीब से गरीब व्‍यक्ति एक रुपया महीने में दे सकता है या नहीं दे सकता है? महीने का 12 रुपया,.. साल भर का 12 रुपया, साल भर का 12 रुपया देगा, दो लाख रुपयों का सुरक्षा का बीमा मिलेगा। दूसरी योजना है जिसमें उसे और भी मददें मिलेंगी, वो है एक दिन का नब्‍बे पैसा, एक रुपया भी नहीं, एक दिन का एक रुपया भी नहीं, आज तो चाय भी एक रुपये में मिलती नहीं है। मैं जब चाय बेचता था तो एक रुपया भी नहीं मिलता था। लेकिन आज एक रुपये में चाय नहीं मिलती है। एक दिन का नब्‍बे पैसा, साल भर के 330 रुपये, और उसे भी ये सुरक्षा कवच मिलेगा। Natural मृत्‍यु होगा Natural अकस्‍मात नहीं हुआ है, सहज, तो भी उसके परिवार को दो लाख रुपया मिलेगा। हमने लोगों से आग्रह किया है कि रक्षाबन्‍धन के पर्व पर हमारे देश की परम्‍परा है, हम अपनी बहनों को Best सौगात देते हैं। कोई न कोई Gift देते हैं। मैं मेरे, Gulf Countries में रहने वाले मेरे प्‍यारे भाइयों बहनों का आग्रह करता हूं, इस बार रखी के त्‍यौहार पर आप अपनी बहन को ये जीवन सुरक्षा योजना दे दीजिए। अगर आप 600 रुपया बैंक में Fixed Deposit करा दोगे, तो हर साल उसको 12 रुपये से ज्‍यादा Interest मिलेगा, कटता जाएगा और आपकी बहन को दो लाख रुपये का सुरक्षा का कवच मिल जाएगा, और दोनों योजना लें लेगे, उतने पैसे जमा करा दिये, तो चार लाख रुपया उसके चरणों में आपकी तरफ से पहुंच जाएगा। भाइयो-बहनों, हमनें समाज-जीवन को एक सुरक्षित बनाना है, हमारी नई पीढ़ी को शिक्षित बनाना है, देश को आधुनिक बनाना है, और आज जब विश्‍व का भारत की तरफ आकर्षण बढ़ा है, उस परि‍स्थिति का हमने लाभ उठाना है और देश को विकास की नई ऊंचाइयों पर ले जाना है।

मेरे प्‍यारे भाइयो, बहनों, आपने जो मुझे सम्‍मान दिया, प्‍यार दिया, पूरा हिन्‍दुस्‍तान आपको देख रहा होगा। ये बदले हुए माहौल का असर हर भारतवासी के दिल पर भी होता है। और मुझे लगता है कि विश्‍व भर में जो हमारा भारतीय समुदाय पहुंचा है, उस भारतीय समुदाय को भी आज एक नई ऊर्जा, नई शक्ति मिली है। आज जब मैं अबुधाबी आया, दुबई आया, तो कुछ बातें मेरे ध्‍यान में आई हैं, उसके विषय में भी आज आपको मैं कह करके जाना चाहता हूं, Embassy के संबंध में, Counsel के संबंध में, आपकी शिकायतें रहती हैं, नहीं रहती हैं? नहीं रहती हैं तो अच्‍छी बात है। लेकिन अगर रहती हैं तो भारत सरकार ने ‘MADAD’ नाम का एक Online Platform बनाया है, इस ‘MADAD’ नाम के Online Platform का उपयोग दुनिया भर में फैले हुए हमारे भारतीय भाई, बहन उसका उपयोग कर सकते हैं, ताकि आपकी बात आगे पहुंच सकती है। मोबाइल फोन के द्वारा भी आप उनका सम्‍पर्क कर सकते हैं। एक, दूसरा काम किया है, E-migrate portal शुरू किया गया है। जिसके द्वारा इस प्रकार सके हमारे प्रवासी भारतीयों को कोई शिकायत हो, कोई कठिनाई हो, तो उनको Emigration Office के चक्‍कर काटने नहीं पड़ेंगे ये E-migrate portal पर अपनी बात रख करके वो मदद ले सकता है, इसकी एक व्‍यवस्‍था की गई है, क्‍यों यहां दूर-दूर से आपका वहां जाना, बहुत तकलीफ होती है। मुझे ये भी बताया गया कि कही- कहीं पर E-migrate Portal का उपयेाग करने में नागरिकों को दिक्‍कत होती है इसके लिए मैंने हमारे Embassy को आदेश किया है कि वे ये जो Technical Problem है इसका 30 दिन के भीतर-भीतर Solution दें। आज 17 अगस्‍त है, 17 सितम्‍बर तक Solution दें, ऐसा मैंने उनसे कहा है और मुझे विश्‍वास है कि हमारे Embassy के भाई, ये जो Technical Problem कहीं-कहीं आता है, उसका रास्‍ता निकालेंगे।

एक और काम मैंने कहा है, यहां भारतीय समुदाय ज्‍यादातर workers हैं। उनके पास इतने पैसे नहीं कि एक जगह से दूसरी जगह पर वो भागते रहें और इसलिए हमने कहा है, कि हम समय-समय पर जहां हमारे भारतीय भाई समुदाय रहते हैं, वहां जा करके, Counselor Camp लगाएं। महीने में एक बार, दो महीने में एक बार, और वहीं जा करके उनसे बैठें, बातचीत करें, और उनकी समस्‍या के समाधान के लिए योग्‍य व्‍यवस्‍था करें। मैं यहां ये बातें इसलिए कह रहा हूं कि ये भू-भाग ऐसा है, के जहां मेरे गरीब तबके के भाई-बहन रहते हैं, मजदूरी करने के लिए यहां आए हुए हैं। अमेरिका के लिए कुछ कर पाऊं, या न कर पाऊं लेकिन अगर आपके लिए नहीं कुछ करता तो मैं बेचैन हो जाता हूं। और इसलिए हमने एक और काम किया है, इन दिनों विदेशों में कभी-कभी जाते हैं तो हमारे भारतीय भाई कभी-कभी संकट में जैसे अचानक बीमारी आ गई, कुछ हो गया, कभी कोई कानूनी पचड़े में फंस गए, बेचारे जेल चले गए। तो दुनिया के बाहर कौन उनको देखने वाला है? परिवार तो है नहीं, और इन हमारे कभी-कभी मुसीबत में कोई परिवार आ जाए तो उनकी मदद करने के लिए Indian Community Welfare Fund (ICWF) स्‍थापित किया गया है। सब दूतावासों को ये Welfare Fund दिया गया है, और इसलिए ऐसी मुसीबत में कोई फंस गया हो तो उनको कानून की मर्यादा में रह करके जो मदद हो सकती है, कोई अगर जेल में बंद हुआ है, तो कम से कम उसको खाना-पीना मिल जाए मानवता की दृष्‍टि से कोई व्‍यवस्‍था हो जाए, इन सारे कामों के लिए एक Fund की हमने व्‍यवस्‍था की है। हमने ये भी निर्णय किया है, इस Fund के द्वारा दूतावास, Counsel में Counselor सुविधाएं और अच्‍छी कैसे बनें, जो नागरिकों की भलाई के लिए हों, उनके लिए भी इसका उपयोग किया जाएगा। जिनको कानूनी सलाह की जरूरत पड़ेगी और अगर वो खुद इसको करने के लिए स्थिति नहीं है, कभी-कभार तो एक हजार-दो हजार का दंड बेचारा नहीं भर पाता, उसके कारण जेलों में सड़ता रहता है। ऐसे लोगों को मदद करके, भारतीय नागरिक होने के नाते उनको मदद करना इसके लिए Welfare Fund का उपयोग हो, ताकि वो संकटों से बाहर आ सकें, ये भी हमने व्‍यवस्‍था करने के लिए कहा है। मैं जानता हूं यहां पर स्‍कूलों में Admission में कितनी दिक्‍कत होती है, आपके बच्‍चों को स्‍कूलों में पढ़ाई की कितनी दिक्‍कत होती है? मैंने यहां के संबंधित लोगों से ये बात कही है और मैंने कहा है कि अधिक स्‍कूल कैसे बनें, उसकी चिन्‍ता मैंने की है, देखते हैं, मुझे विश्‍वास है कि आने वाले दिनों में उसका भी लाभ आप लोगों को मिलेगा।

मुझे विश्‍वास है मेरे भाइयो, बहनों, कि जो आपकी छोटी-मोटी बातें मेरे ध्‍यान में आई थीं, इसको पूरा करने का मैंने प्रयास किया है। मैं फिर एक बार आप सबको दृदय से बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं और दुनिया में कहीं पर भी मेरा भारतवासी है, तो हम पासपोर्ट का रंग नहीं देखते हैं। हमारा खून का रंग काफी है, वो धरती का नाता काफी है, और इसलिए आइए मेरे साथियो हम सब मिल करके जहां भी हों, मां भारती का माथा ऊंचा करने के लिए, गौरव से जीवन जीने के लिए एक माहौल बनाने में सक्रिय शरीक हों और आपका योगदान आपकी शक्ति सामर्थ्‍यवान आपके परिवार को भी भला करने में काम आए, देश का भी भला करने के लिए काम आए।

इसी शुभ कामनाओं के साथ आप सबका बहुत-बहुत धन्‍यवाद।

मेरे साथ दोनों मुट्ठी बंद करके बोलिए, भारत माता की जय। दोनों मुट्ठी पूरी बंद करके पूरी ताकत से बोलिए, भारत के कोने-कोने में, आपके अपने गांव में आवाज पहुंचनी चाहिए भारत माता की जय, भारत माता की जय, भारत माता की जय, भारत माता की जय।

बहुत-बहुत धन्‍यवाद।

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শ্রী রাম জন্মভূমি মন্দিরের ধ্বজারোহণ উৎসবে প্রধানমন্ত্রীর বক্তব্যের বাংলা অনুবাদ

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India-New Zealand relationship built on enduring friendship, shared values, common commitment: PM Modi in Auckland
July 11, 2026

नमस्ते !
की ओरा New Zealand!

हम भारत के लोग सुनते आए थे, 20 साल के बाद। लेकिन आज चालीस साल बाद कोई भारतीय पीएम न्यूज़ीलैंड की धरती पर आया है। ये मेरा सौभाग्य है। मैं न्यूजीलैंड के सभी निवासियों के लिए, आप सभी लोगों के लिए, 140 करोड़ भारतीयों की शुभकामनाएं लेकर आया हूं।

साथियों,

ये प्रधानमंत्री के रूप में भले ही मेरा पहला न्यूज़ीलैंड दौरा है। लेकिन 25-30 साल पहले, जब मैं किसी सरकार में भी हिस्सा नहीं था, सार्वजनिक जीवन में मुझे कोई जानता नहीं था, तब भी मुझे यहां न्यूजीलैंड आने का अवसर मिला था। और उस समय, मुझे किसी ने गिफ्ट में तीन चीजें दी थीं जो मैं वापस इंडिया लेकर के गया था। एक, यह मफ़लर। एक कैप, और एक दस्ताना। क्योंकि ठंड का मौसम था।

और उसमें से एक चीज़ मैं अभी यहां इस कार्यक्रम में भी लेकर आया हूं। यह मफ़लर जो आप देख रहे हैं, यह 25-30 साल पहले मुझे न्यूजीलैंड के एक साथी ने दिया था। इतने साल में मैंने कई बार इसका उपयोग किया, और आज भी इसे बहुत संभाल कर के रखा है। जैसे आपके प्यार को संभाल के रखता हूं।

इस बार जब मेरा यहां आने का कार्यक्रम बना, तो मैं विशेष तौर पर इसे अपने साथ लेकर के आया क्योंकि खबर थी कि ठंड ज्यादा है।

साथियों,

भारत और न्यूज़ीलैंड के रिश्ते में यादें भी हैं, दोस्ती भी है, वैल्यूज़ भी हैं और एक कमिटमेंट भी है। इस रिश्ते को न्यूज़ीलैंड की एक सुंदर परंपरा अच्छे से डिफाइन करती है। यहाँ सदियों से एक शब्द लोगों को जोड़ता आया है - वाका। वाका सिर्फ़ एक नाव का नाम नहीं है, वाका हमारी शेयर्ड जर्नी की प्रतीक है। और आज भारत-न्यूजीलैंड की यही वाका एक नई यात्रा पर निकलने के लिए तैयार है।

हमारे सामने अवसरों से भरा खुला समुद्र है, हवाएँ हमारे साथ हैं, समंदर की विशाल लहरें हमारे साथ हैं, इच्छाशक्ति का नीला आसमान हमारे साथ है, पाने को काफी कुछ है, और मैं जानता हूं, हम सफल होंगे।

साथियों,

मुझे इस यात्रा की सफलता पर पूरा भरोसा है, जानते हैं क्यों? मोदी नहीं, क्योंकि इसके असली नाविक आप सभी हैं। ऑकलैंड से वेलिंगटन तक, क्राइस्टचर्च से क्वीन्सटाउन तक, न्यूज़ीलैंड के कोने-कोने में फैला भारतीय समुदाय इस शेयर्ड जर्नी का एक नाविक है।

साथियों,

आगे बढ़ने से पहले, मैं अपने मित्र, प्राइम मिनिस्टर क्रिस्टोफर लक्सन, न्यूज़ीलैंड सरकार के सभी साथियों और यहां लेबर पार्टी के मंबर्स का अभिनंदन करूंगा।

ये दिखाता है कि भारत-न्यूज़ीलैंड रिश्ते को कितना बड़ा बाइ-पार्टिसन सपोर्ट है। इससे ये भी पता चलता है कीवी इंडियन कम्यूनिटी की अचीवमेंट्स आपका कंट्रीब्यूशन कितना बड़ा है। आप यहां आए किवी इंडियन कम्यूनिटी के इस उत्सव का हिस्सा बने इससे ये सेलिब्रेशन और वाइब्रेंट हो गया है।

आपने जिस गर्मजोशी से जिस स्नेह और उत्साह से, आप ने हम सभी का स्वागत किया है मैं आपका बहुत-बहुत आभारी हूं।

वैसे एक्सीलेंसी, किवी इंडियन कम्यूनिटी में भी सुपरहिट हैं। भारत के इंडिपेंडेंस डे पर आपने क्रिस हिपकिंस के साथ मिलकर दमादम मस्त कलंदर गाने पर जो डांस किया वो काफी वायरल हुआ। आपके वो मूव, Kiwi Indians के दिलों में छप गए हैं।

साथियों,

न्यूज़ीलैंड वाकई एक अद्भुत देश है। यहां पीस है, प्रॉसपैरिटी है, नेचर है, कल्चर है, और न्यूज़ीलैंड की असली ताकत, यहां के स्थानीय लोग हैं। न्यूज़ीलैंड के लोगों ने दिखाया है कि कोई देश जब एक जूनून, एक जज्बे के साथ आगे बढ़ता है, तो वो दुनिया को इंस्पायर करता है।

यहां जो किवी इंडियन कम्यूनिटी है, आप सभी को भी न्यूज़ीलैंड के दिलदार लोगों ने बहुत प्रेम से अपनाया है, अपनी टीम का हिस्सा बनाया है। उन्होंने आपके टैलेंट, आपके विजन पर ट्रस्ट किया है। और आज देखिए, न्यूज़ीलैंड की इकॉनॉमी हो, यहां की सोसायटी हो, किवी इंडियन्स नए-नए रंग भर रहे हैं।

न्यूजीलैंड वो जगह है जहां निखिल रविशंकर Air New Zealand के CEO बन सकते हैं। जहां आनंद सत्यानंद गवर्नर जनरल बन सकते हैं जहां क्रिकेट टीम में रचिन रविंद्र, ईश सोढी और एजाज़ पटेल जैसे टैलेंट को अवसर मिल सकता है।

न्यूजीलैंड वो जगह है जहां की सड़कों में भी भारतीय शहरों को सम्मान दिया गया है। कहीं खंडाला है। कहीं बॉम्बे हिल्स हैं। कहीं कोरोमंडल है।

कलकत्ता स्ट्रीट, दिल्ली क्रिसेंट, अमृतसर स्ट्रीट, ऐसे कितने ही नाम हैं। यहां रहते-रहते आप भी पूरे के पूरे Kiwi हो गए हैं। जैसे मुझे बताया गया है कि किसी भी विषय पर बात शुरू कीजिए थोड़ी ही देर में बात मौसम पर पहुँच जाती है!

साथियों,

मैं न्यूज़ीलैंड की लीडरशिप से जब भी मिला हूं, वो आप सभी की बहुत प्रशंसा करते हैं। प्रशंसा आपकी होती है, और माथा मेरा ऊंचा होता है।

साथियों,

आप सभी जानते हैं, कि भारत, हज़ारों वर्षों पुरानी सभ्यता है जो आज अपनी प्राचीनता को सहेजते हुए आधुनिकता को स्वीकार कर रहा है। हर युग में हर दौर में भारत ने खुद को ट्रांसफॉर्म किया है और इसका कारण है, हमारी सीखने की ललक।

भारत सबसे सीखता है हमारे लिए सामने वाले देश की जनसंख्या नहीं जनकल्याण की भावना मायने रखती है और इसलिए हमने न्यूज़ीलैंड से भी बहुत कुछ सीखा है और अब भी सीख रहे हैं।

न्यूज़ीलैंड, दुनिया का वो देश है जिसने सबसे पहले महिलाओं को वोटिंग का राइट दिया था। आज हम देखते हैं कि न्यूज़ीलैंड की सोसायटी में वीमेन, बहुत बड़े पैमाने में कंट्रीब्यूट कर रही हैं। भारत भी आज Women Led Development के मंत्र के साथ महिलाओं के लिए संभावनाओं के नए द्वार खोल रहा है।

साथियों,

रूरल इकॉनॉमी, कैसे किसी देश की तकदीर बदल सकती है ये न्यूज़ीलैंड ने करके दिखाया है। न्यूज़ीलैंड की ताकत, एग्रीकल्चर के इर्द-गिर्द बनाया गया एक एफिशियंट इकोसिस्टम है। ट्रेसेबिलिटी हो, फूड सेफ्टी हो, कंप्लायंस सिस्टम हो ये बहुत बड़ी प्रेरणा है। ये भारत जैसे, छोटे किसानों वाले बड़े एग्रीकल्चर नेशन के लिए बहुत बड़ी सीख है।

न्यूज़ीलैंड ने ज़ेस्प्री मॉडल से दिखाया है कि छोटे किसान भी बाज़ार के एक बड़े ब्रैंड बन सकते हैं। न्यूज़ीलैंड की क्लाइमेट-स्मार्ट प्रिसिजन फार्मिंग टेक्नॉलॉजी में भी हमारे लिए सीखने को बहुत कुछ है।

साथियों,

यहां के मानुका हनी को लिक्विड गोल्ड कहा जाता है। जैसे यहां हनी ट्रेडिशन और टेस्ट के अलावा हेल्थ एंड वेलनेस से जुड़ा है वैसे ही भारत के आयुर्वेद में भी हनी का बहुत बड़ा महत्व है। आपको ये जानकर अच्छा लगेगा कि भारत में भी हम बी-कीपिंग को लेकर एक मिशन चला रहे हैं। इससे भारत में हनी प्रोडक्शन में काफी बढ़ोतरी हुई है।

और आजकल तो हिमालय की ऊंचाइयों से जो हनी आता है, वो गोल्ड क्या, डायमंड बनता जा रहा है। मैं समझता हूं, न्यूजीलैंड से हम हनी प्रोडक्शन और बढ़ाने के बारे में भी बहुत कुछ सीख सकते हैं।

साथियों,

इस साल इंडिया–न्यूजीलैंड स्पोर्टिंग रिलेशन्स के सौ साल पूरे हो रहे हैं। सौ साल पहले हमारी हॉकी टीम न्यूजीलैंड खेलने आई थी। उस टूर में मेजर ध्यानचंद के शानदार परफॉर्मेंस की हर तरफ चर्चा हुई थी। उनकी हॉकी ने न्यूजीलैंड के लोगों का भी दिल जीत लिया था।

साथियों,

कंटेंट क्रिएटर्स की भाषा में कहूं, तो ये कोलैब का जमाना है। न्यूज़ीलैंड और भारत स्पोर्ट्स में भी बहुत ही शानदार कोलैब कर सकते हैं। जैसे एक उदाहरण रग्बी का है। मुझे अभी-अभी बताया गया है कि कुछ देर पहले ही ऑल ब्लैक ने रग्बी के मैच में शानदार जीत दर्ज की है। भारत रग्बी में न्यूजीलैंड से सीखना चाहता है। भारत भी रग्बी में आगे आए, इसके लिए हमें हमें कोच चाहिए, एक्सपर्ट्स चाहिए, इसमें न्यूज़ीलैंड इसमें हमारी बहुत help कर सकता है। हाल ही में भुवनेश्वर में “न्यूज़ीलैंड रग्बी” और “रग्बी इंडिया” के coaching program को मैं एक अच्छी शुरुआत मानता हूं।

साथियों,

आज यहां आने से पहले, मैं यहाँ न्यूज़ीलैंड के एक स्पोर्ट्स स्टार्टअप event में गया था। स्पोर्ट्स टेक में हो रहे इनोवेशन्स ने नए ideas ने वाकई मुझे प्रभावित किया। मुझे विश्वास है कि हम स्पोर्ट्स टेक में साथ मिलकर काफी कुछ कर सकते हैं।

भारत और न्यूज़ीलैंड का फ्यूचर, आपस में जुड़ा हुआ है। इसका एक उदाहरण, स्पेस सेक्टर भी है। भारत का चंद्रयान जब मून के साउथ पोल पर लैंड किया, पूरा न्यूजीलैंड नाच रहा था उस दिन। और उस दिन हम सबको गर्व हुआ।

अब आपको मैं गर्व की एक और बात बताता हूं। आपको गर्व दिलाने में इस सक्सेस में न्यूजीलैंड की टेक्नॉलजी का भी योगदान रहा है। न्यूजीलैंड की स्पेस कंपनी ने कई अवसरों पर हमारे साथ मिलकर काम किया है। हम इस सहयोग को और आगे ले जाने के लिए काम कर रहे हैं।

साथियों,

स्पेस सेक्टर ये बताने के लिए काफी है कि भारत और न्यूज़ीलैंड की इकॉनॉमी, एक-दूसरे को कितना कुछ दे सकती हैं। यही हमारे ट्रेड अग्रीमेंट की भी स्पिरिट है। ये ट्रेड अग्रीमेंट विकसित भारत की तरफ हमारी यात्रा को गति देगा। और भारत और न्यूज़ीलैंड दोनों के बिजनेस को नए अवसर देगा।

साथियों,

भारत और न्यूज़ीलैंड के बीच एक और बहुत बड़ी सम्मानता है। ये समानता, हमारे इंडिजनेस कल्चर की है, इंडिजनेस कल्चर को सेलिब्रेट करने, उसको संरक्षण देने की है। और आज मैं माओरी समाज को विशेष रूप से याद करना चाहता हूं।

मैंने हाका को केवल एक performance के रूप में ही नहीं देखा। मैंने हाका में, एक समाज की आत्मा देखी है। उसमें साहस है, आत्मसम्मान है, अपने पूर्वजों के प्रति श्रद्धा है, और पूरे समुदाय की सामूहिक शक्ति का एहसास है।

साथियों,

माओरी संस्कृति में एक बहुत सुंदर शब्द है- मना-कितांगा। इसका मतलब है, सम्मान देना, अपनापन देना, और पूरे मन से उसकी देखभाल करना। भारत में भी हम कहते हैं 'अतिथि देवो भवः।'

शब्द अलग हैं, परिवेश अलग हैं, पहनावा अलग हैं, भाषाएं अलग हैं, लेकिन भावना बिल्कुल एक ही है।

ऐसे ही माओरी संस्कृति में परिवार के लिए एक सुंदर शब्द है—फानो यानि परिवार। इसमें कई पीढ़ियाँ होती हैं। रिश्ते होते हैं। पूरा समुदाय होता है। भारत भी, परिवार को केवल एक सामाजिक व्यवस्था नहीं मानता, हमारे लिए फैमिली, एक इंस्टीट्यूशन है।

साथियों,

माओरी परंपरा का एक और सुंदर विचार है— काईत्या कितांगा। ये हमें सिखाती है कि हम प्रकृति के मालिक नहीं हैं। हम उसके संरक्षक हैं। भारत में भी कहा गया है— 'माता भूमिः पुत्रोऽहं पृथिव्याः।' पृथ्वी हमारी माता है। इसी सोच को आधार बनाते हुए हम भारत में धरती मां के संरक्षण के लिए, एक पेड़ मां के नाम, प्राकृतिक खेती मिशन, जैसे अनेकों अभियान चला रहे हैं।

साथियों,

मैं जानता हूं, हजारों किलोमीटर दूर रहते हुए भी आपके दिल के किसी न किसी कोने में, दिनभर की प्रक्रिया में कहीं न कहीं हिंदुस्तान झलकता ही रहता है, हिंदुस्तान बसता ही है। सही है कि नहीं है? शरीर यहां होगा, मन? और इसीलिए, आप भारत की हर उपलब्धि पर भी नज़र रखते हैं।

और जब क्रिकेट स्टेडियम में बैठकर के देखते हैं, तो बहुत सी चीज़ें देखने की छूट जाती हैं। लेकिन घर में टी.वी. पर बैठकर के जब देखते हैं, तो हर बारीकी का पता चलता है। वैसा ही, आपको भी भारत की हर बारीकी का पता चलता है। और यही बात हमें सबसे खास बनाती है।

भारतीय देश से बाहर जिस देश में रहते हैं, वहां उस देश की प्रगति में मदद करते हैं, और अपने देश के विकास की भी जानकारी रखते हैं।

साथियों,

हम जितना प्यार जन्मभूमि को करते हैं, उतना ही समर्पण कर्मभूमि को भी करते हैं।

साथियों,

वैश्विक चुनौतियों के बीच, आज भारत जिस तेजी से विकास कर रहा है वो अभूतपूर्व है। मैं आपके सामने देश की उपलब्धियों का भारत के सामर्थ्य का एक गुलदस्ता प्रस्तुत करुंगा। यह गुलदस्ता मैं आपके लिए लेकर के आया हूँ। और मैं पक्का मानता हूँ इस गुलदस्ते में आपकी पसंद का कोई न कोई फूल ज़रूर होगा, जो आपको सुंदर भी लगेगा और गर्व से भर भी देगा।

तो आप तैयार हैं? गुलदस्ता पेश करूँ? अब आपको ढूँढना है आपका फूल कहाँ है उसमें, या तो सारे के सारे फूल आपके हैं।

साथियों,

भारत आज दुनिया की fastest growing major economy है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा Vaccine Producer है। भारत Mobile Data Consumption में दुनिया के अग्रणी देशों में है। आज भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा Mobile Manufacturer है। आज भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा Telecom Market है। आज भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा Wheat Producer है। आज भारत दुनिया का सबसे बड़ा Milk Producer है। आज भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा Fish Producer है।

साथियों,

इतना ही नहीं, आज भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा Automobile Market है। आज भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा Startup Ecosystem बन चुका है। भारत बहुत जल्द दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा Renewable Energy Producer बनने जा रहा है। Solar Energy Capacity में भी भारत दुनिया के बड़े देशों में शामिल हो चुका है।

साथियों,

आज का भारत, दुनिया को विकास के नए मॉडल भी दे रहा है। आज भारत दुनिया के सबसे बड़े Digital Identity Platform का सफल संचालन कर रहा है। आज भारत में UPI के माध्यम से हर महीने अरबों Digital Transactions हो रहे हैं। भारत के Digital Public Infrastructure में आज दुनिया के दर्जनों देश दिलचस्पी दिखा रहे हैं। Drone Technology और Space Economy में भारत नई ऊंचाइयों को छू रहा है।

साथियों,

ये उस नए भारत की तस्वीर हैं, जो दिखाती हैं कि कैसे भारत न्यूजीलैंड की तरह की इकॉलॉजी और इकॉनॉमी दोनों में बैलेंस बनाकर चल रहा है।

साथियों,

भारत की इस ग्रोथ का एक और पहलू भी है, ये पहलू हमारी विरासत है, हमारी हैरिटेज है। भारत, जितना महत्व अपनी इकॉनॉमी और इकॉलॉजी को देता है, उतना ही फोकस, अपनी हैरिटेज पर भी करता है।

साथियों,

भारत कैसे काम करता है, इसका उदाहरण श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के पवित्र स्वरूप हैं। जब अफगानिस्तान में संकट आया, तो हम गुरू ग्रंथ साहिब के पवित्र स्वरूपों को पूरे मान के साथ भारत लेकर आए।

साथियों,

हमारे महान सिख गुरुओं ने पूरी मानवता को सेवा, साहस, समानता और करुणा का संदेश दिया है। दुनिया के हर हिस्से में गुरुद्वारे, सेवा के सेंटर हैं। कोई भूखा आए, उसे भोजन मिलता है। कोई संकट में हो, उसे सहारा मिलता है।

इसी माहौल में सिख कम्युनिटी के कुछ भाइयों और बहनों ने हमें बताया था कि श्री हरमंदिर साहिब में सेवा के लिए FCRA से जुड़ी कुछ परेशानियां आ रही हैं। हमने उस समस्या का तुरंत समाधान किया।

साथियों,

आप सभी श्री हेमकुंड साहिब जी के बारे में भी जानते हैं। हैं। हिमालय की ऊंचाइयों पर है। साल का लंबा समय बर्फ की चोटियों से घिरा रहता है। वहाँ अगर कोई दर्शन करने के लिए जाना चाहे तो बड़ा कठिन मार्ग है, बहुत कम लोग जा पाते हैं। खास करके हमारे सिख भाई-बहन वहाँ यात्रा के लिए जाते हैं।

वहाँ दर्शन के लिए जाने में, खास करके हमारे बुज़ुर्गों को, हमारे सिख भाई-बहनों को सहूलियत हो, इसलिए सरकार हेमकुंड साहिब तक रोपवे भी बनवा रही है।

साथियों,

हमारी ही सरकार ने साहिबजादों के शौर्य और बलिदान की अमर स्मृति में प्रति वर्ष 26 दिसंबर को ‘वीर बाल दिवस’ मनाना प्रारंभ किया है। आज यह दिवस पूरे देश के लिए, प्रेरणा का पर्व बन चुका है। आज केरलम से लेकर असम तक का बच्चा भी चारो साहिबजादों और माता गुजरी के बलिदान के बारे में जानने लगा है।

‘वीर बाल दिवस’ ने भारत के अनगिनत बच्चों के मन में युवाओं के हृदय में अटूट साहस का संचार किया है।

साथियों,

मैं आपसे पवित्र जोड़े साहब की भी बात करूंगा। मेरी सरकार में मेरे एक साथी हैं, श्रीमान हरदीप पुरी जी। पुरी परिवार के पूर्वज श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के सेवादार थे। हरदीप पुरी जी ने मुझे यह बताया था की उनके परिवार ने श्री गुरु गोबिंद सिंह जी और माता साहिब कौर जी के “जोड़े साहब” 300 साल से संजो के रखे हैं।

बंटवारे के समय पुरी साहब के पूर्वज इन्हें सुरक्षित दिल्ली ले आए थे। पवित्र “जोड़े साहब” को उनका परिवार सिख संगत को सौंपना चाहता था जिससे की ज़्यादा से ज़्यादा लोग इनके दर्शन कर सकें।

फिर हमने एक समिति बनाई, जो सिख परंपराओं को जानते हैं, जानकारों की हमने advice ली और हमने निर्णय लिया कि इन पवित्र जोड़े साहब को वहां ले जाया जाए जहां श्री गुरु गोविंद सिंह जी के चरण पहली बार पावन भूमि पर आए, जहां उनका जन्म हुआ, यानी हमारे श्री पटना साहिब।

मुझे बहुत खुशी है कि अब यह पवित्र जोड़े साहब पटना साहिब की पावन भूमि पर है और यह मेरा सौभाग्य है कि उस पवित्र अवसर का मुझे साक्षी बनने का, वहां मौजूद रहने का सौभाग्य मिला था। मैं आपसे भी आग्रह करूंगा कि जब भी भारत जाएं, पटना साहिब में उनके दर्शन जरूर करें।

साथियों,

आज मैं यहां से बहुत सारा विश्वास, बहुत सारा प्यार, और बहुत सारी स्मृतियां लेकर जा रहा हूं। और मैं आपसे ये भी कहूंगा, इस बार भारतीय पीएम को न्यूज़ीलैंड आने में 40 साल लगे हैं, लेकिन अब इतना लंबा इंतज़ार आपको नहीं करना पड़ेगा। अब 40 साल नहीं लगेंगे, ये मोदी की गारंटी है।

और मोदी की गारंटी मतलब, गारंटी पूरा होने की गारंटी।

साथियों,

मैं आपसे एक आग्रह भी करना चाहता हूं। हमने कुछ समय पहले, हमारी इंडियन डायस्पोरा के बच्चों के लिए एक नया प्रयोग किया है। हमारे बच्चे भारत को समझें और भारत की विविधता की बात दुनिया तक पहुँचे, इसके लिए हमने भारत को जानो क्विज की शुरुआत की है। अभी इसका कर्टेन रेजर ही हुआ है, और हमारे साथियों ने इसमें ही जिस एनर्जी से पार्टिसिपेट किया है, मैं वही देखकर बहुत प्रभावित हूं।

अब हम इस इवेंट के सिक्स्थ एडिशन को और हाईटेक बना रहे हैं। बहुत सारे इवेंट्स इस बार ऐप के माध्यम से होने वाले हैं। मेरा आग्रह है कि यहाँ जितने भी युवा साथी हैं, वो इस कार्यक्रम का हिस्सा बनें। भारत को जाने और भारत की विरासत को न्यूजीलैंड के लोगों से जोड़ें।

साथियों,

मैं एक शानदार फ्यूचर सामने देख रहा हूं, जिसमें विकसित भारत की रोशनी भी है, और न्यूज़ीलैंड की प्रॉसपैरिटी भी है। इसी विश्वास के साथ, आप सभी का फिर से बहुत-बहुत धन्यवाद।

प्राइम मिनिस्टर लक्सन और उनकी टीम का आभार! न्यूज़ीलैंड की जनता का धन्यवाद!

एक बार फिर मेरे साथ बोलिए, भारत माता की जय! वंदे मातरम्!

थैंक यू !
की ओरा !