ସେୟାର
 
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Today I am witnessing 'mini-India' in Dubai: PM
People from all over the world have come here to Dubai. Magnetic power of this place has drawn the world here: PM
There are around 700 flights between India and the UAE but it took 34 years for a PM to visit this Nation: PM
PM Narendra Modi urges audience to give a standing ovation to the Crown Prince of Abu Dhabi
India has been a victim of terrorism for 40 years. Innocent people have lost their lives: PM
Good Taliban, Bad Taliban...Good Terror, Bad Terror...this won't work. A decision has to be taken are you with terrorism or with humanity: PM
Our effort has been to take India to new heights of progress and maintain a strong friendship with our neighbouring countries: PM

दुबई की धरती पर मैं आज मेरे सामने लघु भारत के दर्शन कर रहा हूं। हिन्‍दुस्‍तान के कोने-कोने से आए हुए मेरे प्यारे देशवासियों को मैं नमन करता हूं। आप वे लोग हैं, जिन्होंने परिश्रम की पराकाष्ठा करके..कोई दस साल से, कोई पंद्रह साल से, कोई बीस साल से, कोई तीस साल से, रोजी रोटी कमा रहे हैं, लेकिन साथ-साथ भारत के गौरव को भी बढ़ाने में कभी पीछे नहीं रहे। आपके व्यवहार के कारण आपके आचरण के कारण हमेशा भारत गौरव अनुभव करता रहा है। भारत में अगर अधिक बारिश भी हो जाए तो दुबई में बैठा हुआ मेरा हिंदुस्तानी छाता खोल देता है। भारत में कहीं अगर कोई प्राकृतिक आपदा आ जाए, दुबई में बैठा हुआ मेरा देशवासी चैन से सो नहीं सकता।

जब अटल बिहारी देश के प्रधानमंत्री थे, भारत ने न्यूक्लियर टेस्ट किया था, दुनिया चौंक गई थी, कुछ लोग गुस्से में आए थे और रातों-रात भारत पर sanction लगा दिए गए थे। भारत को आर्थिक मुसीबतों में धकेल दिया गया था.. और तब वाजपेयी जी ने विश्व भर में फैले हुए भारत वासियों को आह्वान किया था, देश की मदद करने के लिए। आज मैं गर्व से कह सकता हूं कि वाजपेयी जी के उस आह्वान पर, हिन्‍दुस्‍तान की तिजोरी भरने में Gulf Countries में जो मजदूरी का काम करते थे, उन मेरे भारतवासियों का सबसे बड़ा योगदान था। इस अर्थ में यहां बसा हुआ हर भारतवासी, एक प्रकार से हिन्‍दुस्‍तान के हर कोने से जुड़ा हुआ है। पिछली बार जब देश लोकसभा के चुनाव के लिए व्यस्त था, चुनाव नतीजे आ रहे थे, हिन्‍दुस्‍तान ही नहीं, पूरा दुबई नाच रहा था। ये प्यार भारत माता के कल्याण के लिए..मां भारती फिर से एक बार सामर्थ्यवान बने, सशक्त बने, सम्‍पन्‍न बने, समृद्ध बने, ये सपना संजोकर के दिन-रात एक करने वाले आप लोग मेरे सामने बैठे हैं।

भाइयों-बहनों, आज..यहां तो हिन्‍दुस्‍तान के हर कोने से आए हुए मेरे भाई-बहन बैठे हैं और दुबई, वो सिर्फ लघु भारत ही रहा है ऐसा नहीं है, अब तो दुबई एक लघु विश्व भी बन गया है। दुनिया के सभी देशों के लोग, कम अधिक मात्रा में दुबई में रह रहे हैं। ठंडे से ठंडे प्रदेश के लोग भी इस 40-45 डिग्री तापमान में रहना पसंद करते हैं। क्या ताकत दिखाई होगी इस देश ने, क्या magnetic power पैदा किया होगा विकास के माध्यम से कि पूरा विश्व यहां आकर्षित हो जाता है।

हिन्‍दुस्‍तान के हर कोने से आए हुए सभी देशवासियों ने अभी दो दिन पूर्व 15 अगस्त, भारत की आज़ादी का पर्व मनाया है। मैं भी आप सब को आज़ादी के पावन पर्व की अनेक-अनेक शुभकामनाएं देता हूं।

यहां केरल से आया हुआ भी समुदाय बहुत बड़ी मात्रा में है। मैं केरल का उल्लेख विशेष रूप से इसलिए कर रहा हूं क्योंकि आज केरल का नववर्ष है। सहोदरकअ एंटे रूदयम निरन्या नववलसरा आशम सफलअ। नमस्कारम्।



हर हफ्ते हिन्‍दुस्‍तान से 700 से भी ज्यादा फ्लाइट यहां आती हैं। दुनिया में किसी एक देश के साथ इतनी बड़ी मात्रा में हवाई आवागमन अगर कहीं है, तो इस इलाके से है। हर हफ्ते 700 से भी अधिक फ्लाइट आती हैं, लेकिन भारत के प्रधानमंत्री को यहां आने में 34 साल लग गए। कभी-कभी मुझे लगता है कि बहुत सारे ऐसे अच्छे अच्छे काम हैं, जो पूर्व के लोग मेरे लिए बाकी छोड़ करके चले गए हैं और इसलिए बहुत सारे बाकी रहे अच्छे काम करने का मुझे भाग्य मिला है। उन अच्छे कामों में से महत्वपूर्ण अच्छा काम मेरा अबुधाबी आना, मेरा दुबई आना है। जिस प्रकार से..ये मेरी पहली मुलाकात है। इसके पहले कभी मैं धरती के इस भू-भाग पर नहीं आया। ..और 34 साल में प्रधानमंत्री के रूप में कोई आएं, तो किसी को भी, किसी को भी नाराज़गी व्यक्त करने का हक बनता है। हक बनता है कि नहीं बनता है? बनता है कि नहीं बनता है? लेकिन अबुधाबी में His Highness Crown Prince ने, दुबई में His Highness अल मख्तूम जी ने नाराज़गी नहीं दिखाई, इतने प्यार की वर्षा की, इतने प्यार की वर्षा की, मैं उनके इस प्यार को कभी भूल नहीं पाउंगा। जो स्वागत किया, जो सम्मान किया.. His Highness Crown Prince अपने सभी पांचों भाइयों के साथ एयरपोर्ट पर लेने के लिए आए। मेरे प्यारे देशवासियों, ये प्यार, ये सम्मान किसी व्यक्ति को नहीं है। ये सवा सौ करोड़ देशवासियों का सम्मान है। ये भारत की बदली हुई तस्वीर का सम्मान है। भारत जिस प्रकार से दुनिया में अपनी जगह बना रहा है, उस बदले हुए हालात का सम्मान है। मैं His Highness Crown Prince का, अमीरात का, दुबई के Rulers का हृदयपूर्वक बहुत-बहुत आभार व्यक्त करता हूं।

एक तरफ संप्रदाय के नाम पर आतंकवाद के खेल खेले जाते हैं। निर्दोषों को मौत के घाट उतार दिया जाता है। पूर्णतया: चिंता का माहौल हो, ऐसे समय अबुधाबी के His Highness Crown Prince भारतीय समुदाय के लिए मंदिर बनाने के लिए जगह देने का निर्णय करते हैं। जो लोग अबुधाबी से परिचित हैं, उन्हें पता है कि निर्णय कितना बड़ा है, ये सौगात कितनी बड़ी है। आप मुझे बताइए, सभी देशवासियों को उनका विशेष रूप से अभिनंदन करना चाहिए कि नहीं करना चाहिए। मैं आप सभी से आग्रह करता हूं कि तालियों की गूंज से Crown Prince का अभिनंदन कीजिए। Crown Prince को Standing Ovation दीजिए। उनका अभिनंदन कीजिए। मैं हृदय से उनका अभिनंदन करता हूं।

भाइयों-बहनों, दो दिन की मेरी यात्रा में जिस प्रकार का विश्वास का माहौल बना, आखिरकार अंतर्राष्ट्रीय संबंधों का आधार..आपकी भाषा क्या है, आप कितने articulate हैं, आप diplomatic relation में कितने बढि़या ढंग से मेलजोल करते हैं..उससे भी ज्यादा महत्व होता है, एक दूसरे पर भरोसे का। अंतर्राष्ट्रीय संबंधों में ये भरोसा, ये विश्वास, एक बहुत बड़ी पूंजी होता है ..और आज मैं चंद घंटों की मेरी मुलाकात के बाद कह सकता हूं कि भारत, अबुधाबी, दुबई, अमीरात.. जो विश्वास का सेतू बना है, वो अभूतपूर्व है और आने वाली पीढि़यों तक काम आए, ऐसा foundation तैयार हुआ है।

आज मुझे खुशी हुई कि जब आज भारत और अमीरात के बीच जो Joint Statement आया है, आपको भी खुशी होगी जान करके.. Crown Prince ने हिन्‍दुस्‍तान में साढ़े चार लाख करोड़ रूपए का निवेश करने का संकल्प दोहराया है। साढ़े चार लाख करोड़ रूपया! कितना? कितना? कितना? भाइयों-बहनों, अगर आप पर किसी का भरोसा न हो, तो कोई 10 रूपया भी आप पर लगाने के लिए तैयार होगा क्या? ये भारत की साख बनी है। आज भारत का बदला हुआ रूप विश्‍व के सामने अपनी स्वीकृति बनाता आगे चल रहा है।

आज अमीरात और भारत की तरफ से आतंकवाद के खिलाफ, दो टूक शब्दों में, बिना लाग लपेट और किसी की परवाह किए बिना साफ-साफ शब्‍दों में संकेत दे दिए गए हैं। आतंकवाद के खिलाफ एकता का स्वर आज इस धरती से उठा है। मैं इसे बहुत अहम मानता हूं और इतना ही नहीं..समझने वाले समझ जाएंगे, अक्लमंद को इशारा काफी। आतंकवाद में लिप्त लोगों को सजा होनी चाहिए, ये स्पष्ट शब्दों में संकेत यहां से निकला है। मैं आज यहां के शासकों का इसलिए भी आभारी हूं कि उन्होंने..United Nations जब अपने 70 साल मनाने जा रहा है, तो यहां से कहा गया है और भारत की इस बात का खुला समर्थन किया गया है कि भारत को United Nations की Security Council की Permanent Membership मिलनी चाहिए। मैं आभारी हूं उनका।

इससे भी आगे एक बहुत-बहुत महत्वपूर्ण बात पर..आज भारत की लंबे अर्से से एक position है। उसका आज His Highness Crown Prince ने खुले आम समर्थन घोषित किया। भाइयों-बहनों, कई वर्षों से United Nations में एक Resolution लटका पड़ा है। आपको भी बड़ी हैरानी होगी..और दो-पांच साल से नहीं, कई वर्षों से लटका पड़ा है। क्या.. ? United Nations, जो कि प्रथम और द्वितीय विश्वयुद्ध से पीडि़त मानव समुदाय को मरहम लगाने के लिए..आगे मानव जाति को ऐसे संकट झेलने की नौबत न आए, इसके लिए precaution लेने के लिए, व्यवस्थाएं विकसित करने के लिए 70 साल पहले United Nations का जन्म हुआ। लेकिन वह United Nations आतंकवाद की अभी तक परिभाषा नहीं कर पाया। आतंकवादी किसको कहें, आतंकवाद किसको कहें, आतंकवाद को समर्थन करने वाले कौन माना जाए, किस देश को आतंकवाद का समर्थक माना जाएं, किस देश को समर्थक न माना जाए। इसलिए Comprehensive Convention on International Terrorism..इसका निर्णय करने का प्रस्ताव लंबे अर्से से United Nations में लंबित पड़ा हुआ है। भारत ने position ली हैं सालों से किए एक प्रस्ताव पर चर्चा हो जाए, निर्णय होना चाहिए और ये टाला जा रहा है। आज मुझे खुशी इस बात की है कि His Highness Crown Prince ने भारत की स्थिति का समर्थन का किया है, भारत की position का समर्थन किया है और आतंकवाद के खिलाफ लड़ने के संबंध में आपने स्पष्ट संकेत दे दिए हैं। न सिर्फ.. साढ़े चार लाख करोड़ का पूंजी निवेश की बात नहीं है ये। ये एक निश्चित दिशा में कंधे से कंधा मिलाकर चलने का एक प्रकार का संकेत, इस Joint Statement में है। मैं इसे बहुत महत्वपूर्ण मानता हूं।

भाइयों-बहनों आप तो सालों से बाहर हैं। आज भारत का नाम सुनते ही आपके सामने खड़े हुए व्यक्ति की आंखों में चमक आती है कि नहीं आती है? आपका माथा गर्व से ऊंचा होता है कि नहीं होता है, आपका सीना गर्व से तन जाता है कि नहीं तन जाता है? एक गर्व महसूस करते हैं कि नहीं करते हैं? भाइयों बहनों आज दुनिया का हिन्‍दुस्‍तान की तरफ देखने का नज़रिया पूरी तरह बदल गया है और उसका एक कारण..क्या कारण है?.. क्या कारण है, ये बदलाव आया है? मोदी के कारण नहीं, ये जो बदलाव आया है, सवा सौ करोड़ देशवासियों की संकल्प शक्ति के कारण आया है। सवा सौ करोड़ देशवासियों ने 2014 मई महीने में 30 साल के बाद पूर्ण बहुमत वाली सरकार चुनी। आज दुनिया का कोई भी महापुरूष, दुनिया का कोई भी राजनेता मोदी से जब हाथ मिलाता है न, तब उसे मोदी नहीं दिखता है। उसे सवा सौ करोड़ हिंदुस्तानी दिखाई देते हैं। दुनिया की तेज़ गति से बढ़ रही economy दिखाई दे रही है।

भाइयों-बहनों, पिछले दिनों, IMF हो, World Bank हो, Moody हो, विश्व की जितनी भी आर्थिक पैमाने पर Rating Institutions हैं, सब किसी ने एक स्वर से कहा है कि आज दुनिया में बड़े देशों में सबसे तेज गति से अगर आर्थिक सुधार हो रहा है, तेज गति से growth हो रहा है तो उस देश का नाम है.. (दर्शक दीर्घा से भारत-भारत के नारे). मुझे बताइए सीना तन जाएगा कि नहीं तन जाएगा? माथा ऊंचा हो जाएगा कि नहीं होगा कि नहीं होगा। एक साल के भीतर-भीतर ये बदलाव आया है। भाइयों बहनों, हमने मेक इन इंडिया.. कुछ महीने पहले इस अभियान का प्रारंभ किया। दुनिया को मैं कह रहा हूं- मेक इन इंडिया। आइए, हिन्‍दुस्‍तान एक ऐसा देश है जो संभावनाओं से भरा हुआ है, Opportunities ही Opportunities हैं। ये एक ऐसा भाग्‍यशाली देश है, जिसके पास 65 प्रतिशत जनसंख्या 35 साल से कम उम्र की है। भारत एक नौजवान देश है। आज यहां जवानी लबालब भरी पड़ी है और विश्व वहां आए, हमारे युवकों की शक्ति जुटाए, उत्पादन करे, दुनिया के बाज़ार में जाकर बेचे। और आज..ये कुछ ही महीनों का मामला है.. Foreign Direct Investment..FDI में 48 प्रतिशत वृद्धि हुई है, 48%। भाइयों-बहनों विकास को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए Ease of doing Business का माध्‍यम हो। देश की युवा शक्‍ति में Skill Development का अभियान हो। आधुनिक भारत के निर्माण के लिए डिजिटल इंडिया का सपना साकार करने के लिए दिन-रात पुरुषार्थ चलता हो। तो विश्‍व का आना बहुत स्‍वाभाविक है मेरे भाइयों और बहनों, बहुत स्‍वाभाविक है।

भाइयों-बहनों, आज दुनिया जिस आतंकवाद के नाम सुनते ही कांप उठती हैं, एक नफरत पैदा होती है। मैं दुनिया को कहता हूं हम हिन्‍दुस्‍तान के लोग 40-40 साल से ये आतंकवाद के शिकार हुए हैं। हमारे निर्दोष लोग आतंकवादियों की गोलियों से भून दिए गए हैं, मौत के घाट उतार दिए गए हैं और जब कभी मैं विश्‍व के लोगों के साथ आज से 25-30 साल पहले कभी मुझे बात करने का अवसर मिलता था, तो वे आतंकवाद समझने की उनकी क्षमता ही नहीं थी। कभी मैं आतंकवाद की बात करता था तो वे मुझे कहते थे ये तो आपका Policing का problem है Law and Order का problem है। अब उनको समझ आ गया है कि आतंकवाद का कितना भयंकर रूप होता है। आतंकवाद की कोई सीमाएं नहीं होती है, वो पता नहीं कब किस सीमा पर जाकर आ धमकेगा। आज अभी मैं यहां पहुंच रहा था, मैंने सुना बैंकॉक के अंदर आज एक बम धमाका हुआ, निर्दोष लोगों को मार दिया गया। भारत तो लगातार इन हरकतों को झेलता रहा है और विश्‍व समुदाय जब तक आतंकवाद की मानसिकता वाले देशों को, आतंकवाद को, उसको समर्थन करने वालों को एक ओर, और मानवता में विश्‍वास करने वाले दूसरी ओर, और मानवतावाद में विश्‍वास करने वाले दुनिया के देश एक होकर के आतंकवाद के खिलाफ लड़ने का वक्‍त आ चुका है।

Good Taliban-Bad Taliban, Good Terrorism- Bad Terrorism ये अब चलने वाला नहीं है। हर किसी को तय करना पड़ेगा कि फैसला करो कि आप आतंकवाद के साथ हो या मानवता के साथ हो, निर्णय करो। भारत को तो आज भी आए दिन इन नापाक हरकतों का शिकार होना पड़ता है। हम समस्‍याओं का समाधान खोजने की दिशा में लगातार कोशिश कर रहे हैं। यहां बहुत कम लोगों को पता होगा कि भारत की आजादी के पहले से नागालैंड में अतिवाद, insurgency इस समस्‍या से नागालैंड जूझता रहा और उसके कारण भारत का पूरा ये पूर्वी हिस्‍सा, नॉर्थ-ईस्‍ट, आए दिन हिंसा का शिकार होता था और धीरे-धीरे वो बीमारी इतनी फैलती गई कि अन्‍य राज्‍यों में भी अलग-अलग नाम से, अलग-अलग अतिवादी, आतंकवादी गुट बनते चले गए। आजादी के भी पहले से चल रहा था।

आज मैं बहुत संतोष के साथ मेरे देशवासियों, आपको कहना चाहता हूं कि अभी एक महीने पहले नागालैंड के इन गुटों के साथ, जो कभी हिंसा में विश्‍वास करते थे, जो शस्‍त्रों को लेकर के गतिविधि चलाते थे। उनसे जो बातचीत चल रही थी, वो सफलतापूर्वक आगे बढ़ी, निर्णय हुआ, मुख्‍य धारा में आने का निर्णय हुआ। 60-70 साल के बाद ये संभव हुआ। मैं नागालैंड की ये घटना का जिक्र इसलिए करना चाहता हूं कि हिंसा के राह पर चले हुए भारत के नौजवानों को और विश्‍व के नौजवानों को मैं एक उदाहरण के रूप में कहना चाहता हूं, समस्‍या कितनी भी गंभीर क्‍यों न हो, आखिर तो बातचीत से ही रास्‍ता निकलता है। कोई 10 साल लड़ाई लड़ने के बाद बात करें, कोई 20 साल लड़ाई लड़ने के बाद करें, कोई 40 साल लड़ाई लड़ने के बाद बात करें, लेकिन आखिर में तो बात ही होती है और टेबल पर ही फैसले होते हैं और इसलिए विश्‍व भर से इस गलत रास्‍ते पर चल पड़ लोग बम-बंदूक के भरोसे, अपने सपनों को साकार करने के रास्‍ते पर चले हुए लोग। ये रास्‍ता कभी आपका भला नहीं करेगा। ये रास्‍ता कभी किसी और का भला नहीं करेगा। ये रास्‍ता कभी मानवता का भला नहीं करेगा। ये रास्‍ता इतिहास को बेदाग नहीं रहने देगा। ये पूरे इतिहास को कलंकित कर देगा, ये पूरे इतिहास को दागदार बना देगा और इसलिए हिंसा का मार्ग छोड़कर के मुख्‍यधारा में जाना, ये आज समय की मांग है।

मेरे प्‍यारे भाइयों-बहनों, बांग्‍लादेश 1947 में भारत का विभाजन हुआ, 1947 में। तब से पूर्व पाकिस्‍तान, पश्‍चिम पाकिस्‍तान थे उस समय। पूर्वी पाकिस्‍तान जो आज बांग्‍लादेश बना, भारत और उनके बीच सीमा का विवाद चल रहा था। तनाव का कारण बना हुआ था। आशंकाओं का कारण बना हुआ था। घुसपैठ के लिए एक सुविधाजनक स्‍थिति बनी हुई थी। आप सब के आशीर्वाद से हिन्‍दुस्‍तान ने बीड़ा उठाया, सबने मिलकर के बीड़ा उठाया। इस समस्‍या का समाधान करना है, बातचीत से करना है। मैं पिछले सितंबर में बांग्‍लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना जी से मिला था और मैंने उनको वादा किया था कि मुझ पर भरोसा कीजिए और मुझे थोड़ा समय दीजिए। उन्‍होंने कहा कि मेरे पास भरोसा रखने के सिवाए है भी क्‍या! लेकिन आज, आज मैं मेरे प्‍यारे देशवासियों आपके सामने सर झुकाकर के कहना चाहता हूं कि आजादी से लटका हुआ ये सवाल 1 अगस्‍त को समाप्‍त कर दिया गया है। सीमा निर्धारित हो गई। जिनको बांग्‍लादेश जाना था, बांग्‍लादेश चले गए, जिनको भारत आना था भारत आ गए। हम लोग तो 15 अगस्‍त, 1947 को आजाद हो गए थे। भारत के नागरिक के नाते गौरवगान करने लगे थे। लेकिन ये हमारे भाई-बहन अभी 1 अगस्‍त, 2015 को भारत की भूमि पर आजादी का स्‍वाद लेने का उन्‍हें सौभाग्‍यमान मिला है। भारत की संसद में सर्वसम्‍मति से सभी राजनैतिक दलों ने साथ दिया और सर्वसम्‍मति से फैसला हुआ, बातचीत के माध्‍यम से फैसला हुआ।

ये छोटी-मोटी उपलब्‍धि नहीं है मेरे भाइयों-बहनों। और मैं, औरों को भी हमेशा कहता हूं, अड़ोस-पड़ोस के देशों को भी कहता रहता हूं। जैसे हिंसा के रास्‍ते पर गए हुए लोगों को भी कभी न कभार बातचीत के रास्‍ते पर आना पड़ता है। वैसे अड़ोस-पड़ोस में भी समस्‍याओं का समाधान बातचीत से ही निकलता है।

अंतर्राष्‍ट्रीय संबंधों में आज भारत एक महत्‍वपूर्ण भूमिका अदा कर रहा है। मानवता के अधिष्‍ठान पर कर रहा है। जब नेपाल में भूकंप आया चंद घंटों में, ऐसा नहीं है कि भई ज़रा पूछो तो क्‍या हुआ है? जरा जानकारी लो क्‍या हुआ है? ऐसा करो अफसरों का delegation भेजो, देखो ज़रा क्‍या मुसीबत आई है? ऐसा करो भई कोई अपने रिश्‍तेदार वहां हो तो पूछो भई हुआ क्‍या है? ऐसा इंतजार नहीं किया? आज दिल्‍ली में ऐसी सरकार है, जो हर पल नज़र आती है, हर जगह पर नज़र आती है और चंद घंटों में, चंद घंटों में, भारत से जो भी हो सकता था, ये मानवता का काम था। नेपाल के चरणों में जाकर के हमारे लोग बैठ गए और उनकी सेवा में लग गए और आज भी सेवा चालू है। नेपाल हमारा पड़ोसी है। वो दुखी हो और हम सुखी हों, ये कभी संभव नहीं होता है। उसके सुख में भी हमारा सुख समा हुआ है।

श्रीलंका, आपको हैरानी होगी। जब मैं नेपाल गया, प्रधानमंत्री बनने के बाद। नेपाल जाना है, तो 70 मिनट नहीं लगते। दिल्‍ली से नेपाल जाना हो, तो 70 मिनट नहीं लगते। लेकिन भारत के प्रधानमंत्री को नेपाल पहुंचने में 17 साल लग गए। फिर से हम गए, संबंधों को फिर से जोड़ा। अपनापन। आज नेपाल भारत पर भरोसा कर रहा है। भारत नेपाल का सुख-दु:ख का साथी बन रहा है। श्रीलंका, राजीव गांधी जब प्रधानमंत्री थे, उसके बाद कोई प्रधानमंत्री की stand alone visit नहीं हुई थी। कितने साल बीत गए। हमारा पड़ोसी है, आए दिन हमारे तमिलनाडु, केरल के मछुआरे और उनके मछुआरे आपस में भिड़ जाते हैं। लेकिन उधर कोई जाता नहीं था। हम गए, इतना ही नहीं। जाफना जहां 20-20 साल तक बम और बंदूक का ही कारोबार चलता था, उस जाफना में जाकर के उन दुखियारों के आंसू पोंछने का काम करने का सौभाग्‍य मुझे मिला। एक प्रधानमंत्री के रूप में जाफना जाने का सौभाग्‍य मुझे मिला।

हमारे पड़ोस में मालदीव, आइलैंड पर बसा हुआ देश, tourism की दृष्‍टि से काफी आगे बढ़ा है। अचानक एक दिन उनके यहां पानी के सारे संयंत्र खराब हो गए। पूरे देश के पास पीने का पानी नहीं था। आप कल्‍पना कर सकते हो, कोई देश के पास पीने का पानी न हो। कितना बड़ा गहरा संकट आया। मालदीव से हमें message आया कि ऐसी मुसीबत आई है। एक पल का इंतज़ार नहीं किया, भाइयों और बहनों। हवाई जहाज से पीने का पानी पहुंचाया मालदीव में। दूसरे दिन स्‍टीमर से पानी पहुंचाना शुरू कर दिया और जब तक उनकी वो मशीन चालू नहीं हुई, पानी की व्‍यवस्‍था दुबारा पुनर्जीवित नहीं हुई, हमने मालदीव को प्‍यासा नहीं रहने दिया।

अफगानिस्‍तान हमारा पड़ोसी है। अफगानिस्‍तान संकटों से गुजर रहा है। लंबे अरसे से आए दिन वो घाव झेलता चला जा रहा है। हर पल अफगानिस्‍तान को मरहम लगाने का काम हिन्‍दुस्‍तान करता आया है। अफगानिस्‍तान फिर से एक बार खड़ा हो जाए, क्‍योंकि हम सब बचपन से काबुलीवाला से तो बहुत परिचित हैं। जब काबुली वाले की बात करते हैं, तो हमें कितना अपनापन महसूस होता है। भाइयों-बहनों हमारी कोशिश रही है भारत को विकास की नई ऊचाइयों पर ले जाना। भारत में निरंतर विकास को आगे बढ़ाना और अपने अड़ोस-पड़ोस के देशों से दोस्‍ती बनाकर करके साथ और सहयोग लेकर करके आगे चल पड़ना।

SAARC देशों का समूह उसमें एक नया प्राण पूरने का प्रयास किया है, सफलतापूर्वक प्रयास किया है। वरना पहले SAARC देशों के मंच का उपयोग तू-तू मैं मैं के लिए होता था, कभी भारत को घेरने के लिए होता था। आज SAARC देशों के लोग, जितने साथ चल सकते हैं, उनको ले करके इन SAARC की इकाई का विकास की ऊंचाइयों पर ले जाने का सपना हमने देखा था। हमने घोषित किया है कि 2016 में हम आकाश में एक SAARC Satellite छोड़ेंगे जिसकी सेवाएं SAARC देशों में मुफ्त में देंगे, जो शिक्षा के काम आए , जो आरोग्‍य के लिए काम आये, जो किसानों को काम आये, जो मछुआरों के काम आये, सामान्‍य जन को काम आये। अभी हम बीच में सोच रहे थे कि SAARC देश Connectivity के लिए गंभीरता से सोचे और हम जानते हैं, आज विकास में Connectivity का महत्‍व बहुत है। आप समुद्री मार्ग से जुडि़ए या रेल मार्ग से जुडि़ए, या रोड मार्ग से जुडि़ए, जुड़ना जरूरी है। यूरोप के देशों को ये लाभ मिला हुआ है। एक देश से दूसरे देश चले जाओ पता तक नहीं चलता कि देश कब बदल गया। क्‍या ये SAARC देशों के बीच नहीं हो सकता है? हमने मिल करके सामूहिक निर्णय करने का प्रयास किया नेपाल में। लेकिन आप जानते हैं, कुछ लोगों को जरा तकलीफ होती है, लेकिन कुछ लोगों की तकलीफ के लिए क्‍या रुकना चाहिए? हमारे काम को क्‍या हमें रोक देना चाहिए? हमें अटक जाना चाहिए क्‍या? ठीक है आपकी मर्जी, आप वहां रह जाइये, हम तो चल पड़े भाई और हमने क्‍या किया। एक बहुत बड़ा अहम फैसला लिया है भाइयों और बहनों, इसका प्रभाव आने वाले दिनों में क्‍या होने वाला है, वो तो वक्‍त बताएगा। नेपाल, भूटान, भारत, बांग्‍लादेश, इन चार देशों ने एक नया इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर बना करके Connectivity का एक पूरा काम तय कर लिया, Agreement हो गया, ये आगे चल करके नॉर्थ-ईस्‍ट से जुड़ेगा। वहां से ये म्‍यांमार मार्ग से जुड़ेगा। वो इंडोनेशिया, थाइलैंड, पूरब, हिन्‍दुस्‍तान, पूरब की बीच की तरफ भारत को Connectivity की ताकत देगा एक नया भारत का बदला हुआ, संबंधों का नया विश्‍व खड़ा हो जाएगा।

भाइयों-बहनों, एक निश्चत समय के साथ भारत अपनी भूमिका भी अदा करें, भारत बड़े होने के अहंकार से नहीं, हर किसी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलना चाहता । विकास की नई ऊंचाईयों को पार करना चाहता। भारत में नौजवानों को रोजगार मिले, हमारे कृषि में Second Green Revolution हो, हमारा पूर्वी हिन्‍दुस्‍तान, चाहे पूर्वी उत्‍तर प्रदेश हो, चाहे बिहार हो, चाहे पश्चिम बंगाल हो, चाहे असम हो, चाहे नॉर्थ-ईस्‍ट हो, चाहे ओडि़शा हो, ये हमारा जो इलाका है, ये मानना पड़ेगा कि वहां विकास की ज्‍यादा जरूरत है। अगर वहां पर विकास हो गया और हिन्‍दुस्‍तान का पश्चिमी छोर और पूरब का छोर बराबर हो गये, तो भारत बहुत तेज गति से दौड़ने लग जाएगा और इसलिए भारत के इस पूर्वी छोर पर आर्थिक विकास का एक नया अभियान हमने चलाया है। Infrastructure खड़ा करने का एक नया अभियान चलाया है। Fertiliser के नये कारखाने शुरू कर रहे हैं। गैस की पाइप लाइन लगानी है। बिजली पहुंचानी है। आप मुझे बताइए आजादी के इतने सालों के बाद बिजली होनी चाहिए कि नहीं होनी चाहिए? बिजली मिलनी चाहिए या नहीं मिलनी चाहिए? क्‍या आज के युग में बिजली के बिना गुजारा संभव है? भाइयों-बहनों हमने सपना संजोया है। पांच साल के भीतर-भीतर हम देश के कोने-कोने में 24 घंटे बिजली मैंने देने के लिए फैसला किया। ये हम करके रहेंगे।

दुबई में रहने वाले मेरे प्‍यारे भाइयो-बहनों, हमने एक महत्‍वपूर्ण योजना घोषित की है । हमारे देश में लोगों को पहले Bank Accounts नहीं थे, हमने हर हिन्‍दुस्‍तानी का Bank Account खोल दिया, एक काम किया। भारत में हमारे देश के नागरिकों को इंश्‍योरंस नहीं है, बीमा नहीं है। उसके परिवार में कोई आपत्ति आ जाए, पीछे वालों को देखने की कोई व्‍यवस्‍था नहीं। हमने तीन योजनाएं लगाई हैं, एक प्रधानमंत्री बीमा सुरक्षा योजना, प्रधानमंत्री जीवन ज्‍योति योजना और इंश्‍योरेंस के लिए कितना पैसा देना है? एक स्‍कीम ऐसी है कि जिसमें एक महीने में सिर्फ एक रुपया देना है, 12 महीने में 12 रुपया। हमारे देश का गरीब से गरीब व्‍यक्ति भी दे सकता है या नहीं दे सकता है? मुझे बताइए दे सकता है या नहीं दे सकता है? गरीब से गरीब व्‍यक्ति एक रुपया महीने में दे सकता है या नहीं दे सकता है? महीने का 12 रुपया,.. साल भर का 12 रुपया, साल भर का 12 रुपया देगा, दो लाख रुपयों का सुरक्षा का बीमा मिलेगा। दूसरी योजना है जिसमें उसे और भी मददें मिलेंगी, वो है एक दिन का नब्‍बे पैसा, एक रुपया भी नहीं, एक दिन का एक रुपया भी नहीं, आज तो चाय भी एक रुपये में मिलती नहीं है। मैं जब चाय बेचता था तो एक रुपया भी नहीं मिलता था। लेकिन आज एक रुपये में चाय नहीं मिलती है। एक दिन का नब्‍बे पैसा, साल भर के 330 रुपये, और उसे भी ये सुरक्षा कवच मिलेगा। Natural मृत्‍यु होगा Natural अकस्‍मात नहीं हुआ है, सहज, तो भी उसके परिवार को दो लाख रुपया मिलेगा। हमने लोगों से आग्रह किया है कि रक्षाबन्‍धन के पर्व पर हमारे देश की परम्‍परा है, हम अपनी बहनों को Best सौगात देते हैं। कोई न कोई Gift देते हैं। मैं मेरे, Gulf Countries में रहने वाले मेरे प्‍यारे भाइयों बहनों का आग्रह करता हूं, इस बार रखी के त्‍यौहार पर आप अपनी बहन को ये जीवन सुरक्षा योजना दे दीजिए। अगर आप 600 रुपया बैंक में Fixed Deposit करा दोगे, तो हर साल उसको 12 रुपये से ज्‍यादा Interest मिलेगा, कटता जाएगा और आपकी बहन को दो लाख रुपये का सुरक्षा का कवच मिल जाएगा, और दोनों योजना लें लेगे, उतने पैसे जमा करा दिये, तो चार लाख रुपया उसके चरणों में आपकी तरफ से पहुंच जाएगा। भाइयो-बहनों, हमनें समाज-जीवन को एक सुरक्षित बनाना है, हमारी नई पीढ़ी को शिक्षित बनाना है, देश को आधुनिक बनाना है, और आज जब विश्‍व का भारत की तरफ आकर्षण बढ़ा है, उस परि‍स्थिति का हमने लाभ उठाना है और देश को विकास की नई ऊंचाइयों पर ले जाना है।

मेरे प्‍यारे भाइयो, बहनों, आपने जो मुझे सम्‍मान दिया, प्‍यार दिया, पूरा हिन्‍दुस्‍तान आपको देख रहा होगा। ये बदले हुए माहौल का असर हर भारतवासी के दिल पर भी होता है। और मुझे लगता है कि विश्‍व भर में जो हमारा भारतीय समुदाय पहुंचा है, उस भारतीय समुदाय को भी आज एक नई ऊर्जा, नई शक्ति मिली है। आज जब मैं अबुधाबी आया, दुबई आया, तो कुछ बातें मेरे ध्‍यान में आई हैं, उसके विषय में भी आज आपको मैं कह करके जाना चाहता हूं, Embassy के संबंध में, Counsel के संबंध में, आपकी शिकायतें रहती हैं, नहीं रहती हैं? नहीं रहती हैं तो अच्‍छी बात है। लेकिन अगर रहती हैं तो भारत सरकार ने ‘MADAD’ नाम का एक Online Platform बनाया है, इस ‘MADAD’ नाम के Online Platform का उपयोग दुनिया भर में फैले हुए हमारे भारतीय भाई, बहन उसका उपयोग कर सकते हैं, ताकि आपकी बात आगे पहुंच सकती है। मोबाइल फोन के द्वारा भी आप उनका सम्‍पर्क कर सकते हैं। एक, दूसरा काम किया है, E-migrate portal शुरू किया गया है। जिसके द्वारा इस प्रकार सके हमारे प्रवासी भारतीयों को कोई शिकायत हो, कोई कठिनाई हो, तो उनको Emigration Office के चक्‍कर काटने नहीं पड़ेंगे ये E-migrate portal पर अपनी बात रख करके वो मदद ले सकता है, इसकी एक व्‍यवस्‍था की गई है, क्‍यों यहां दूर-दूर से आपका वहां जाना, बहुत तकलीफ होती है। मुझे ये भी बताया गया कि कही- कहीं पर E-migrate Portal का उपयेाग करने में नागरिकों को दिक्‍कत होती है इसके लिए मैंने हमारे Embassy को आदेश किया है कि वे ये जो Technical Problem है इसका 30 दिन के भीतर-भीतर Solution दें। आज 17 अगस्‍त है, 17 सितम्‍बर तक Solution दें, ऐसा मैंने उनसे कहा है और मुझे विश्‍वास है कि हमारे Embassy के भाई, ये जो Technical Problem कहीं-कहीं आता है, उसका रास्‍ता निकालेंगे।

एक और काम मैंने कहा है, यहां भारतीय समुदाय ज्‍यादातर workers हैं। उनके पास इतने पैसे नहीं कि एक जगह से दूसरी जगह पर वो भागते रहें और इसलिए हमने कहा है, कि हम समय-समय पर जहां हमारे भारतीय भाई समुदाय रहते हैं, वहां जा करके, Counselor Camp लगाएं। महीने में एक बार, दो महीने में एक बार, और वहीं जा करके उनसे बैठें, बातचीत करें, और उनकी समस्‍या के समाधान के लिए योग्‍य व्‍यवस्‍था करें। मैं यहां ये बातें इसलिए कह रहा हूं कि ये भू-भाग ऐसा है, के जहां मेरे गरीब तबके के भाई-बहन रहते हैं, मजदूरी करने के लिए यहां आए हुए हैं। अमेरिका के लिए कुछ कर पाऊं, या न कर पाऊं लेकिन अगर आपके लिए नहीं कुछ करता तो मैं बेचैन हो जाता हूं। और इसलिए हमने एक और काम किया है, इन दिनों विदेशों में कभी-कभी जाते हैं तो हमारे भारतीय भाई कभी-कभी संकट में जैसे अचानक बीमारी आ गई, कुछ हो गया, कभी कोई कानूनी पचड़े में फंस गए, बेचारे जेल चले गए। तो दुनिया के बाहर कौन उनको देखने वाला है? परिवार तो है नहीं, और इन हमारे कभी-कभी मुसीबत में कोई परिवार आ जाए तो उनकी मदद करने के लिए Indian Community Welfare Fund (ICWF) स्‍थापित किया गया है। सब दूतावासों को ये Welfare Fund दिया गया है, और इसलिए ऐसी मुसीबत में कोई फंस गया हो तो उनको कानून की मर्यादा में रह करके जो मदद हो सकती है, कोई अगर जेल में बंद हुआ है, तो कम से कम उसको खाना-पीना मिल जाए मानवता की दृष्‍टि से कोई व्‍यवस्‍था हो जाए, इन सारे कामों के लिए एक Fund की हमने व्‍यवस्‍था की है। हमने ये भी निर्णय किया है, इस Fund के द्वारा दूतावास, Counsel में Counselor सुविधाएं और अच्‍छी कैसे बनें, जो नागरिकों की भलाई के लिए हों, उनके लिए भी इसका उपयोग किया जाएगा। जिनको कानूनी सलाह की जरूरत पड़ेगी और अगर वो खुद इसको करने के लिए स्थिति नहीं है, कभी-कभार तो एक हजार-दो हजार का दंड बेचारा नहीं भर पाता, उसके कारण जेलों में सड़ता रहता है। ऐसे लोगों को मदद करके, भारतीय नागरिक होने के नाते उनको मदद करना इसके लिए Welfare Fund का उपयोग हो, ताकि वो संकटों से बाहर आ सकें, ये भी हमने व्‍यवस्‍था करने के लिए कहा है। मैं जानता हूं यहां पर स्‍कूलों में Admission में कितनी दिक्‍कत होती है, आपके बच्‍चों को स्‍कूलों में पढ़ाई की कितनी दिक्‍कत होती है? मैंने यहां के संबंधित लोगों से ये बात कही है और मैंने कहा है कि अधिक स्‍कूल कैसे बनें, उसकी चिन्‍ता मैंने की है, देखते हैं, मुझे विश्‍वास है कि आने वाले दिनों में उसका भी लाभ आप लोगों को मिलेगा।

मुझे विश्‍वास है मेरे भाइयो, बहनों, कि जो आपकी छोटी-मोटी बातें मेरे ध्‍यान में आई थीं, इसको पूरा करने का मैंने प्रयास किया है। मैं फिर एक बार आप सबको दृदय से बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं और दुनिया में कहीं पर भी मेरा भारतवासी है, तो हम पासपोर्ट का रंग नहीं देखते हैं। हमारा खून का रंग काफी है, वो धरती का नाता काफी है, और इसलिए आइए मेरे साथियो हम सब मिल करके जहां भी हों, मां भारती का माथा ऊंचा करने के लिए, गौरव से जीवन जीने के लिए एक माहौल बनाने में सक्रिय शरीक हों और आपका योगदान आपकी शक्ति सामर्थ्‍यवान आपके परिवार को भी भला करने में काम आए, देश का भी भला करने के लिए काम आए।

इसी शुभ कामनाओं के साथ आप सबका बहुत-बहुत धन्‍यवाद।

मेरे साथ दोनों मुट्ठी बंद करके बोलिए, भारत माता की जय। दोनों मुट्ठी पूरी बंद करके पूरी ताकत से बोलिए, भारत के कोने-कोने में, आपके अपने गांव में आवाज पहुंचनी चाहिए भारत माता की जय, भारत माता की जय, भारत माता की जय, भारत माता की जय।

बहुत-बहुत धन्‍यवाद।

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You are lucky to enter Service in the 75th Year of Azadi, next 25 years are critical for both you and India: PM
“They fought for ‘Swarajya’; you have to move forward for ‘Su-rajya’”: PM
Challenge is to keep police ready in these times of technological disruptions: PM
You are the flag-bearers of ‘Ek Bharat -Shreshth Bharat’, always keep the mantra of ‘Nation First, Always First’ foremost: PM
Remain friendly and keep the honour of the uniform supreme: PM
I am witnessing a bright new generation of women officers, we have worked to increase the participation of women in police force: PM
Pays tribute to members of the Police Service who lost their lives serving during the pandemic
Officer trainees from the neighbouring counties underline the closeness and deep relation of our countries: PM

ଆପଣମାନଙ୍କ ସହିତ କଥା ହୋଇ ମୋତେ ବହୁତ ଭଲ ଲାଗିଲା । ପ୍ରତ୍ୟେକ ବର୍ଷ ମୋର ଏହି ପ୍ରୟାସ ରହିଥାଏ ଯେ ଆପଣମାନଙ୍କ ଭଳି ଯୁବ ସାଥୀମାନଙ୍କ ସହିତ କଥା ହୁଏ, ଆପଣମାନଙ୍କ ଚିନ୍ତାଧାରା ସଂପର୍କରେ କ୍ରମାଗତ ଭାବେ ଜାଣୁଥାଏ। ଆପଣମାନଙ୍କର କଥା, ଆପଣମାନଙ୍କର ପ୍ରଶ୍ନ, ଆପଣମାନଙ୍କର ଉତ୍ସୁକତା, ମୋତେ ମଧ୍ୟ ଭବିଷ୍ୟତର ଆହ୍ୱାନ ମୁକାବିଲା କରିବାରେ ସହାୟତା କରିଥାଏ।

ସାଥୀଗଣ,

ଚଳିତ ଥରର ଏହି ଚର୍ଚ୍ଚା ଏଭଳି ସମୟରେ ହେଉଛି ଯେତେବେଳେ ଭାରତ, ନିଜ ସ୍ୱାଧନତାର 75 ବର୍ଷର ଅମୃତ ମହୋତ୍ସବ ପାଳନ କରୁଛି। ଚଳିତ ବର୍ଷର ଅଗଷ୍ଟ 15 ତାରିଖ, ନିଜ ସହିତ ସ୍ୱାଧୀନତାର 75 ବର୍ଷ ପୂର୍ତି ନେଇକରି ଆସିଛି। ବିଗତ 75 ବର୍ଷରେ ଭାରତ ଏକ ଉନ୍ନତ ପୁଲିସ ସେବାର ନିର୍ମାଣ ପାଇଁ ପ୍ରୟାସ କରିଛି। ପୁଲିସ ଟ୍ରେନିଂ ସହିତ ଜଡ଼ିତ ଭିତିଭୂମିରେ ମଧ୍ୟ ଏହି କିଛି ବର୍ଷ ହେବ ବହୁତ ସଂସ୍କାର ହୋଇଛି। ଆଜି ଯେତେବେଳେ ମୁଁ ଆପଣମାନଙ୍କ ସହିତ କଥା ହେଉଛି, ସେତେବେଳେ ସେହି ଯୁବକମାନଙ୍କୁ ଦେଖୁଛି, ଯେଉଁମାନେ ଆଗାମୀ 25 ବର୍ଷ ପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ ଭାରତରେ ଆଇନ ବ୍ୟବସ୍ଥାକୁ ସୁନିଶ୍ଚିତ କରବାରେ ସହଭାଗୀ ହେବେ। ଏହା ହେଉଛି ବହୁତ ବଡ଼ ଦାୟିତ୍ୱ। ଏଥିପାଇଁ ଏବେ ଏକ ନୂତନ ଶୁଭାରମ୍ଭ, ଏକ ନୂଆ ସଂକଳ୍ପର ଲକ୍ଷ୍ୟକୁ ନେଇ ଆଗକୁ ବଢ଼ିବାକୁ ହେବ।

ସାଥୀଗଣ,

ମୋତେ ସମ୍ପୂର୍ଣ୍ଣ ସୂଚନା ମିଳିନାହିଁ ଯେ ଆପଣମାନଙ୍କ ମଧ୍ୟରୁ କେତେ ଲୋକ ଦାଣ୍ଡି ଯାଇଛନ୍ତି ଅବା ପୁଣି କେତେ ଜଣ ସାବରମତୀ ଆଶ୍ରମ ଦେଖିଛନ୍ତି। କିନ୍ତୁ ମୁଁ ଆପଣମାନଙ୍କୁ 1930ର ଦାଣ୍ଡି ଯାତ୍ରା ସମ୍ପର୍କରେ ସ୍ମରଣ କରାଇ ଦେବାକୁ ଚାହୁଁଛି। ଗାନ୍ଧିଜୀ ଯେଉଁ ଲବଣ ସତ୍ୟାଗ୍ରହ ବଳରେ ଇଂରେଜ ଶାସନର ମୂଳଦୁଆକୁ ଦୋହଲାଇ ଦେବାର କଥା କହିଥିଲେ। ସେ ମଧ୍ୟ ଏହା କହିଥିଲେ ଯେ ‘ଯେତେବେଳେ ସାଧନ ନ୍ୟାୟପୂର୍ଣ୍ଣ ଏବଂ ଠିକ୍ ହୋଇଥାଏ, ସେତେବେଳେ ଭଗବାନ ମଧ୍ୟ ସାଙ୍ଗରେ ଠିଆ ହେବା ପାଇଁ ଉପସ୍ଥିତ ହୋଇ ଯାଇଥାଆନ୍ତି।’

 

 

ସାଥୀଗଣ,

ଗୋଟିଏ ଛୋଟିଆ ଲାଠିକୁ ସାଙ୍ଗରେ ଧରି ମହାତ୍ମା ଗାନ୍ଧି ସାବରମତୀ ଆଶ୍ରମରୁ ବାହାରି ପଡ଼ିଥିଲେ। ଦିନ ପରେ ଦିନ ବିତି ଚାଲିଲା ଆଉ ଲୋକମାନେ ଯିଏ ଯେଉଁଠାରେ ଥିଲେ, ସେମାନେ ଲବଣ ସତ୍ୟାଗ୍ରହ ସହିତ ଯୋଡ଼ି ହୋଇ ଚାଲିଲେ । 24 ଦିନ ପରେ ଯେତେବେଳେ ଗାନ୍ଧିଜୀ ଦାଣ୍ଡିରେ ନିଜର ଯାତ୍ରା ସମ୍ପୂର୍ଣ୍ଣ କଲେ, ସେତେବେଳେ ସମଗ୍ର ଦେଶ, ଏକ ପ୍ରକାରରେ ସାରା ଦେଶ ଜାଗ୍ରତ ହୋଇ ଠିଆ ହୋଇ ପଡ଼ିଥିଲା । କଶ୍ମୀରରୁ କନ୍ୟାକୁମାରୀ, ଅଟକରୁ କଟକ। ସମଗ୍ର ହିନ୍ଦୁସ୍ତାନ ଚେତନାଯୁକ୍ତ ହୋଇ ଯାଇଥିଲା। ସେହି ମନୋଭାବକୁ ସ୍ମରଣ କରିବା, ସେହି ଇଚ୍ଛାଶକ୍ତିକୁ ସ୍ମରଣ କରନ୍ତୁ। ସେହି ଲକ୍ଷ୍ୟ ନେଇ, ସେହି ଐକ୍ୟବଦ୍ଧ ମନୋଭାବ ଭାରତର ସ୍ୱାଧୀନତା ସଂଗ୍ରାମକୁ ସାମୁହିକତାର ଶକ୍ତିରେ ଭରି ଦେଇଥିଲା। ପରିବର୍ତନର ସେହି ଭାବ, ସଂକଳ୍ପର ସେହି ଇଚ୍ଛାଶକ୍ତି ଆଜି ଦେଶ ଆପଣମାନଙ୍କ ଭଳି ଯୁବକମାନଙ୍କ ଠାରୁ ଆଶା କରୁଛି। 1930 ରୁ 1947 ମଧ୍ୟରେ ଦେଶରେ ଯେଉଁ ଜୁଆର ଉଠିଥିଲା, ଯେଉଁଭଳି ଭାବେ ଦେଶର ଯୁବକମାନେ ଆଗକୁ ଆସିଲେ, ଏକ ଲକ୍ଷ୍ୟ ପାଇଁ ଏକଜୁଟ ହୋଇ ସମଗ୍ର ଯୁବପିଢ଼ୀ ଏକାଠି ଯୋଡ଼ି ହୋଇଗଲେ, ଆଜି ସେହି ମନୋଭାବ ଆପଣମାନଙ୍କ ଠାରୁ ଆଶା କରାଯାଉଛି। ଆମ ସମସ୍ତଙ୍କୁ ଏହି ଭାବ ସହିତ ବଂଚିବାକୁ ହେବ। ଏହି ସଂକଳ୍ପ ସହିତ ଯୋଡି ହେବା। ସେହି ସମୟରେ ଦେଶର ଲୋକ ବିଶେଷ କରି ଦେଶର ଯୁବକମାନେ ସ୍ୱରାଜ୍ୟ ପାଇଁ ଲଢ଼େଇ କରିଥିଲେ। ଆଜି ଆପଣମାନଙ୍କୁ ସୁରାଜ୍ୟ ପାଇଁ ମନ-ପ୍ରାଣ ଦେଇ ଏକାଠି ହେବାକୁ ପଡ଼ିବ। ସେହି ସମୟରେ ଲୋକମାନେ ଦେଶର ସ୍ୱାଧୀନତା ପାଇଁ ପ୍ରାଣବଳୀ ଦେବାକୁ ପ୍ରସ୍ତୁତ ଥିଲେ। ଆଜି ଆପଣମାନଙ୍କୁ ଦେଶ ପାଇଁ ଜୀଇଁବାର ଭାବନା ନେଇ ଆଗକୁ ଚାଲିବାର ଅଛି। 25 ବର୍ଷ ପରେ ଯେତେବେଳେ ଦେଶର ସ୍ୱାଧୀନତାର 100 ବର୍ଷ ପୂରଣ ହେବ, ସେତେବେଳେ ଆମ ଦେଶର ପୁଲିସ ସେବା କିପରି ହେବ, କେତେ ସଶକ୍ତ ହେବ, ତାହା ଆପଣମାନଙ୍କର ଆଜିର କାର୍ଯ୍ୟ ଉପରେ ମଧ୍ୟ ନିର୍ଭର କରିବ। ଆପଣମାନଙ୍କୁ ସେହି ମୂଳଦୁଆ ପ୍ରସ୍ତୁତ କରିବାର ଅଛି, ଯାହା ଉପରେ 2047ର ଭବ୍ୟ, ଅନୁଶାସିତ ଭାରତର ଭବନ ନିର୍ମାଣ ହେବ। ସମୟ ଏହି ସଂକଳ୍ପକୁ ସିଦ୍ଧି କରିବା ପାଇଁ ଆପଣଙ୍କ ଭଳି ଯୁବକମାନଙ୍କୁ ମନୋନୀତ କରିଛି। ଆଉ ମୁଁ ଏହାକୁ ଆପଣମାନଙ୍କ ପାଇଁ ବହୁତ ବଡ଼ ସୌଭାଗ୍ୟ ବୋଲି ଭାବୁଛି। ଆପଣ ଏକ ଏଭଳି ସମୟରେ କ୍ୟାରିୟର ଆରମ୍ଭ କରୁଛନ୍ତି, ଯେତେବେଳେ ଭାରତର ପ୍ରତ୍ୟେକ କ୍ଷେତ୍ର, ପ୍ରତ୍ୟେକ ସ୍ତରରେ ରୂପାନ୍ତରଣର ସମୟ ଦେଇ ଗତି କରୁଛି। ଆପଣଙ୍କ କ୍ୟାରିୟରରେ ଆଗାମୀ 25 ବର୍ଷ ଭାରତର ବିକାଶ କ୍ଷେତ୍ରରେ ମଧ୍ୟ ସବୁଠାରୁ ଗୁରୁତ୍ୱପୂର୍ଣ୍ଣ 25ବର୍ଷ ହେବାକୁ ଯାଉଛି। ଏଥିପାଇଁ ଆପଣଙ୍କ ପ୍ରସ୍ତୁତି, ଆପଣମାନଙ୍କର ମନର ସ୍ଥିତି, ଏହି ବଡ଼ ଲକ୍ଷ୍ୟର ଅନୁକୂଳ ହେବା ଉଚିତ। ଆଗାମୀ 25 ବର୍ଷରେ ଆପଣ ଦେଶର ଭିନ୍ନ-ଭିନ୍ନ ଭାଗରେ, ଭିନ୍ନ-ଭିନ୍ନ ପଦରେ କାର୍ଯ୍ୟ କରିବେ, ଭିନ୍ନ-ଭିନ୍ନ ଭୂମିକା ତୁଲାଇବେ। ଆପଣ ସମସ୍ତଙ୍କ ଉପରେ ଏକ ଆଧୁନିକ, ପ୍ରଭାବଶାଳୀ ଏବଂ ସମ୍ବେଦନଶୀଳ ପୁଲିସ ସେବାକ ନିର୍ମାଣର ବହୁତ ବଡ଼ ଦାୟିତ୍ୱ ରହିଛି। ଆଉ ଏଥିପାଇଁ, ଆପଣମାନଙ୍କୁ ସଦା ସର୍ବଦା ଏହା ସ୍ମରଣ ରଖିବାକୁ ହେବ ଯେ ଆପଣ 25 ବର୍ଷ ପାଇଁ ଏକ ସ୍ୱତନ୍ତ୍ର ମିଶନରେ ଅଛନ୍ତି, ଆଉ ଭାରତ ଏଥିପାଇଁ ବିଶେଷ ଭାବେ ଆପଣମାନଙ୍କୁ ମନୋନନୀତ କରିଛି।

ସାଥୀଗଣ,

ସାରା ବିଶ୍ୱର ଅନୁଭବ କହୁଛି ଯେ ଯେତେବେଳେ କୌଣସି ରାଷ୍ଟ୍ର ବିକାଶ ପଥରେ ଆଗକୁ ବଢ଼ିଥାଏ, ତେବେ ଦେଶ ବାହାରୁ ଏବଂ ଦେଶ ଭିତରୁ, ଆହ୍ୱାନ ମଧ୍ୟ ସେତିକି ବୃଦ୍ଧି ପାଇଥାଏ। ଏଭଳି ପରିସ୍ଥିତିରେ ଆପଣମାନଙ୍କର ଆହ୍ୱାନ, ବୈଷୟିକ ବିଘଟନର ଏହି ସମୟରେ ପୁଲିସିଂକୁ ନିରନ୍ତର ପ୍ରସ୍ତୁତ କରିବାର ଅଛି। ଆପଣମାନଙ୍କର ଆହ୍ୱାନ, ଅପରାଧର ନୂଆ-ନୂଆ କୌଶଳକୁ ଆପଣମାନେ ମଧ୍ୟ ଅଧିକ ଅଭିନବତାର ସହିତ ରୋକିବାକୁ ଅଛି। ବିଶେଷ ଭାବେ ସାଇବର ସୁରକ୍ଷାକୁ ନେଇ ନୂଆ ପ୍ରୟୋଗ, ନୂତନ ଗବେଷଣା ଏବଂ ନୂଆ କଳା କୌଶଳକୁ ଆପଣମାନଙ୍କୁ ମଧ୍ୟ ବିକଶିତ କରିବାକୁ ହେବ ଏବଂ ତାହାକୁ ମଧ୍ୟ ଉପଯୋଗ କରିବାର ଅଛି।

 

ସାଥୀଗଣ,

ଦେଶର ସମ୍ବିଧାନ, ଦେଶର ଗଣତନ୍ତ୍ର, ଦେଶବାସୀଙ୍କୁ ଯାହା ମଧ୍ୟ ଅଧିକାର ଦେଇଛି, ଯେଉଁ କର୍ତବ୍ୟଗୁଡ଼ିକୁ ପାଳନ କରିବାର ଆଶା ରଖିଛି, ତାହାକୁ ସୁନିଶ୍ଚିତ କରିବାରେ ଆପଣମାନଙ୍କର ଭୂମିକା ହେଉଛି ଗୁରୁତ୍ୱପୂର୍ଣ୍ଣ। ଆଉ ଏଥିପାଇଁ, ଆପଣମାନଙ୍କ ଠାରୁ ବହୁତ କିଛି ଆଶା ରହିଛି। ଆପଣଙ୍କ ଆଚରଣ ଉପରେ ସର୍ବଦା ଦୃଷ୍ଟି ରହିଛି। ଆପଣମାନଙ୍କ ଉପରେ ମଧ୍ୟ ବହୁତ ଚାପ ଆସିଥାଏ। ଆପଣମାନଙ୍କୁ କେବଳ ପୁଲିସ ଥାନାରୁ ନେଇ ପୁଲିସ ମୁଖ୍ୟାଳୟର ସୀମା ଭିତରେ ରହିବା ଚିନ୍ତା କରିବା ଉଚିତ ନୁହେଁ। ଆପଣମାନଙ୍କୁ ସମାଜରେ ପ୍ରତ୍ୟେକ କ୍ଷେତ୍ରରେ, ପ୍ରତ୍ୟେକ ଭୂମିକା ସହିତ ମଧ୍ୟ ପରିଚିତ ରହିବାର ଅଛି, ବନ୍ଧୁତ୍ୱପୂର୍ଣ୍ଣ ଭାବ ସହିତ ରହିବାର ଅଛି ଏବଂ ପୋଷାକର ମର୍ଯ୍ୟାଦାକୁ ସର୍ବୋଚ୍ଚ ସ୍ଥାନରେ ରଖିବାର ଅଛି। ଆଉ ଏକ କଥା ଆପଣମାନଙ୍କୁ ସଦା ସର୍ବଦା ଧ୍ୟାନରେ ରଖିବାକୁ ହେବ। ଆପଣମାନଙ୍କର ସେବା, ଦେଶର ଭିନ୍ନ-ଭିନ୍ନ ଜିଲ୍ଲାରେ ରହିବ, ସହରରେ ମଧ୍ୟ ରହିବ, ଏଥିପାଇଁ ଆପଣମାନଙ୍କୁ ଏକ ମନ୍ତ୍ର ସଦା ସର୍ବଦା ମନେ ରଖିବାର ଅଛି। କ୍ଷେତ୍ରରେ ରହିବା ସମୟରେ ଆପଣମାନେ ଯାହା ମଧ୍ୟ ନିଷ୍ପତି ନେବେ, ତାହା ଦ୍ୱାରା ଦେଶର ହିତ ହେବା ଆବଶ୍ୟକ। ରାଷ୍ଟ୍ରୀୟ ପରିପ୍ରେକ୍ଷ୍ୟ ହେବା ଉଚିତ। ଆପଣମାନଙ୍କ କାର୍ଯ୍ୟକଳାପର ପରିସର ଏବଂ ସମସ୍ୟାମାନ ଯଦିଓ ସ୍ଥାନୀୟ ହେବ, ଏଭଳି କ୍ଷେତ୍ରରେ ତାହାର ମୁକାବିଲା କରିବା ସମୟରେ ଏହି ମନ୍ତ୍ର ବହୁତ କାର୍ଯ୍ୟରେ ଆସିବ। ଆପଣମାନଙ୍କୁ ସଦା ସର୍ବଦା ଏହା ସ୍ମରଣ ରଖିବାକୁ ହେବ ଯେ ଆପଣ ଏକ ଭାରତ, ଶ୍ରେଷ୍ଠ ଭାରତ ଭାବନାର ହେଉଛନ୍ତି ଧ୍ୱଜାବାହକ। ଏଥିପାଇଁ ଆପଣମାନଙ୍କର ପ୍ରତ୍ୟେକ କାର୍ଯ୍ୟ, ଆପଣମାନଙ୍କର ପ୍ରତ୍ୟେକ ଗତିବିଧିରେ ଦେଶ ପ୍ରଥମେ, ସଦୈବ ପ୍ରଥମେ- ରାଷ୍ଟ୍ର ପ୍ରଥମ, ସଦୈବ ପ୍ରଥମ ଏହି ଭାବନାକୁ ପ୍ରତିଫଳିତ କରିବା ଭଳି ହେବା ଉଚିତ।

ସାଥୀଗଣ,

ମୁଁ ଆପଣଙ୍କ ସମ୍ମୁଖରେ ତେଜସ୍ୱୀ ମହିଳା ଅଫିସରମାନଙ୍କର ନୂଆ ପିଢ଼ୀକୁ ଦେଖୁଛି। ବିଗତ ବର୍ଷମାନଙ୍କରେ ପୁଲିସ ବଳରେ ଝିଅମାନଙ୍କର ଯୋଗଦାନକୁ ବୃଦ୍ଧି କରିବା ପାଇଁ ନିରନ୍ତର ପ୍ରୟାସ କରାଯାଇଛି। ଆମର ଝିଅମାନେ ପୁଲିସ ସେବାରେ ଦକ୍ଷତା ଏବଂ ଉତରଦାୟିତ୍ୱ ସହିତ, ବିନମ୍ରତା, ସହଜତା ଏବଂ ସମ୍ବେଦନଶୀଳତାର ମୂଲ୍ୟବୋଧକୁ ମଧ୍ୟ ସଶକ୍ତ କରିଛନ୍ତି। ଏହିଭଳି ଭାବେ ୧୦ ଲକ୍ଷରୁ ଅଧିକ ଜନସଂଖ୍ୟା ବିଶିଷ୍ଟ ସହରରେ କମିଶନର ପଦ୍ଧତି ଲାଗୁ କରିବାକୁ ନେଇ ମଧ୍ୟ ରାଜ୍ୟଗୁଡ଼ିକ କାର୍ଯ୍ୟ କରୁଛନ୍ତି। ଏ ପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ 16ଟି ରାଜ୍ୟର ଅନେକ ସହରରେ କମିଶନର ବ୍ୟବସ୍ଥା ଲାଗୁ କରାଯାଇ ସାରିଛି। ମୋର ବିଶ୍ୱାସ ଯେ ଅନ୍ୟ ସ୍ଥାନରେ ମଧ୍ୟ ଏହାକୁ ନେଇ ସକରାତ୍ମକ ପଦକ୍ଷେପ ଉଠାଯିବ।

ସାଥୀଗଣ,

ପୁଲିସିଂକୁ ଭବିଷ୍ୟତବାଦୀ ଏବଂ ପ୍ରଭାବଶାଳୀ କରିବା ପାଇଁ ସାମୁହିକତା ଏବଂ ସମ୍ବେଦନଶୀଳତାର ସହିତ କାର୍ଯ୍ୟ କରିବା ହେଉଛି ବହୁତ ଜରୁରୀ। ଏହି କରୋନା ସମୟରେ ମଧ୍ୟ ଆମେ ଦେଖିଛୁ ପୁଲିସ ସାଥୀମାନେ କିଭଳି ସ୍ଥିତିକୁ ନିୟନ୍ତ୍ରଣ କରିବାରେ ବହୁତ ବଡ଼ ଭୂମିକା ତୁଲାଇଛନ୍ତି। କରୋନା ବିରୋଧୀ ଲଢେଇରେ ଆମର ପୁଲିସ କର୍ମୀମାନେ, ଦେଶବାସୀଙ୍କ ସହିତ କାନ୍ଧକୁ କାନ୍ଧ ମିଳାଇ କାର୍ଯ୍ୟ କରିଛନ୍ତି। ଏହି ପ୍ରୟାସରେ ଅନେକ ପୁଲିସ କର୍ମୀଙ୍କୁ ନିଜ ଜୀବନକୁ ଆହୁତି ଦେବାକୁ ପଡିଛି। ମୁଁ ସେହି ସମସ୍ତ ଯବାନଙ୍କୁ, ପୁଲିସ ସାଥୀମାନଙ୍କୁ ଆଦର ପୂର୍ବକ ଶ୍ରଦ୍ଧାଞ୍ଜଳି ଜଣାଉଛି ଏବଂ ଦେଶ ତରଫରୁ ସେମାନଙ୍କ ପରିବାର ପ୍ରତି ସମ୍ବେଦନା ପ୍ରକଟ କରୁଛି।

 

ସାଥୀଗଣ,

ଆଜି ଆପଣମାନଙ୍କ ସହିତ କଥା ହୋଇ, ମୁଁ ଆଉ ଗୋଟିଏ ପକ୍ଷ ଆପଣମାନଙ୍କ ସମ୍ମୁଖରେ ରଖିବାକୁ ଚାହୁଁଛି। ଆଜିକାଲି ଆମେ ଦେଖୁଛେ ଯେ ଯେଉଁଠି– ଯେଉଁଠି ପ୍ରାକୃତିକ ବିପର୍ଯ୍ୟୟ ଆସିଥାଏ, କେଉଁଠାରେ ବନ୍ୟା, କେଉଁଠାରେ ସାମୁଦ୍ରିକ ଝଡ଼, କେଉଁଠାରେ ଭୂସ୍ଖଳନ, ତେବେ ଆମର ଏନଡିଆରଏଫର ସାଥୀମାନେ ସମ୍ପୂର୍ଣ୍ଣ ସାମର୍ଥ୍ୟର ସହିତ ସେଠାରେ ଦୃଷ୍ଟିଗୋଚର ହୋଇଥାଆନ୍ତି। ପ୍ରାକୃତିକ ବିପର୍ଯ୍ୟୟ ସମୟରେ ଏନଡିଆରଏଫର ନାମ ଶୁଣି ଲୋକମାନଙ୍କ ମନରେ ଏକପ୍ରକାରର ବିଶ୍ୱାସ ଜନ୍ମିଥାଏ। ଏନଡିଆରଏଫର ଏହି ଶାଖା ନିଜର ଉନ୍ନତ କାର୍ଯ୍ୟ ଯୋଗୁଁ ଏହି ସୁନାମ ଅର୍ଜନ କରି ପାରିଛି। ଆଜି ଲୋକଙ୍କୁ ଏହି ଭରସା ରହିଛି ଯେ ବିପର୍ଯ୍ୟୟ ସମୟରେ ଏନଡିଆରଏଫର ଯବାନମାନେ ନିଜ ଜୀବନକୁ ମଧ୍ୟ ବାଜି ଲଗାଇ ଆମକୁ ବଂଚାଇବେ। ଏନଡିଆରଏଫ ମଧ୍ୟ ଅଧିକାଂଶ ପୁଲିସ ବଳର ଯବାନ ଥାଆନ୍ତି। ଆପଣମାନଙ୍କର ସାଥୀମାନେ ଥାଆନ୍ତି। କିନ୍ତୁ କ’ଣ ଏହି ଭାବନା, ଏହି ସମ୍ମାନ, ପୁଲିସ ପ୍ରତି ରହିଛି? ଏନଡିଆରଏଫରେ ପୁଲିସର ଲୋକମାନେ ମଧ୍ୟ ଅଛନ୍ତି । ଏନଡିଆରଏଫକୁ ସମ୍ମାନ ମଧ୍ୟ ମିଳୁଛି । ଏନଡିଆରଏଫରେ କାର୍ଯ୍ୟ କରୁଥିବା ପୁଲିସ ଯବାନଙ୍କୁ ମଧ୍ୟ ସମ୍ମାନ ମିଳୁଛି। କିନ୍ତୁ ସାମାଜିକ ବ୍ୟବସ୍ଥା ସେପରି ରହିଛି କି? କିନ୍ତୁ କ’ଣ ପାଇଁ ? ଏହାର ଉତର,   ଆପଣମାନଙ୍କୁ ମଧ୍ୟ ଜଣାଅଛି । ଜନମାନସରେ ପୁଲିସ ପ୍ରତି ଏ ଯେଉଁ ନକରାତ୍ମକ ଦୃଷ୍ଟିଭଙ୍ଗୀ ରହିଛି, ତାହା ନିଜକୁ ନିଜ ମଧ୍ୟରେ ହେଉଛି ବହୁତ ବଡ଼ ଆହ୍ୱାନ । କରୋନା ସମୟରେ ପ୍ରାରମ୍ଭିକ ଅବସ୍ଥାରେ ଅନୁଭବ କରାଯାଇଥିଲା ଯେ ଏହି ଦୃଷ୍ଟିଭଙ୍ଗୀ ଟିକେ ବଦଳି ଯାଇଛି । କାରଣ ଲୋକମାନେ ଯେତେବେଳେ ଭିଡିଓଗୁଡ଼ିକୁ ସାମାଜିକ ଗଣମାଧ୍ୟମରେ ଦେଖୁଥିଲେ । ପୁଲିସ କର୍ମୀମାନେ ଗରିବମାନଙ୍କର ସେବା କରୁଥିଲେ। ଭୋକିଲା ଲୋକମାନଙ୍କୁ ଖାଦ୍ୟ ଖାଇବାକୁ ଦେଉଥିଲେ । କେଉଁଠାରେ ଖାଦ୍ୟ ପ୍ରସ୍ତୁତ କରି ଗରିବଙ୍କ ନିକଟରେ ପହଂଚାଉଥିଲେ, ସେତେବେଳେ ସମାଜରେ ଲୋକମାନେ ପୁଲିସକୁ ଏକ ଭିନ୍ନ ଦୃଷ୍ଟିରେ ଦେଖୁଥିଲେ, ଚିନ୍ତା କରିବାର ବାତାବରଣ ବଦଳୁଥିଲା। କିନ୍ତୁ ଏବେ ପୁଣି ସେହି ପୁରୁଣା ସ୍ଥିତି ହୋଇ ଯାଇଛି। ତେବେ କାହିଁକି ଜନତାଙ୍କ ବିଶ୍ୱାସ ବୃଦ୍ଧି ପାଉନାହିଁ, ଭରସା କାହିଁକି ବୃଦ୍ଧି ପାଉନାହିଁ?

ସାଥୀଗଣ,

ଦେଶର ସୁରକ୍ଷା ପାଇଁ, ଆଇନ ବ୍ୟବସ୍ଥା ବଜାୟ ରଖିବା ପାଇଁ, ଆତଙ୍କର ସମାପ୍ତି ପାଇଁ ଆମର ପୁଲିସ ସାଥୀ, ନିଜ ପ୍ରାଣ ଉତ୍ସର୍ଗ କରି ଦେଇଥାଆନ୍ତି। ଅନେକ- ଅନେକ ଦିନ ପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ ଆପଣମାନେ ଘରକୁ ଯାଇ ପାରନ୍ତି ନାହିଁ, ପର୍ବପର୍ବାଣୀ ଉତ୍ସବ ସମୟରେ ମଧ୍ୟ ପ୍ରାୟତଃ ଆପଣମାନଙ୍କୁ ପରିବାର ଠାରୁ ଦୂରରେ ରହିବାକୁ ପଡ଼ିଥାଏ। କିନ୍ତୁ ଯେତେବେଳେ ପୁଲିସର ଭାବମୂର୍ତିର କଥା ଆସିଥାଏ, ସେତେବେଳେ ଲୋକଙ୍କ ମନୋଭାବ ବଦଳି ଯାଇଥାଏ। ପୁଲିସ ବିଭାଗକୁ ଆସୁଥିବା ନୂତନ ପିଢ଼ୀର ଏହା ହେଉଛି ଦାୟିତ୍ୱ ଯେ ଏହି ଭାବମୂର୍ତି ବଦଳୁ, ପୁଲିସ ପ୍ରତି ଥିବା ଏହି ନକରାତ୍ମକ ଦୃଷ୍ଟିଭଙ୍ଗୀର ଅନ୍ତ ହେଉ। ଏହା ଆପଣମାନଙ୍କୁ କରିବାର ଅଛି। ଆପଣମାନଙ୍କର ତାଲିମ, ଆପଣମାନଙ୍କର ଚିନ୍ତାଧାରା ମଧ୍ୟରେ ବର୍ଷ-ବର୍ଷ ଧରି ଚଳି ଆସୁଥିବା ପୁଲିସ ବିଭାଗର ଯେଉଁ ସ୍ଥାପିତ ପରମ୍ପରା ରହିଛି, ତାହା ସହିତ ଆପଣମାନଙ୍କୁ ପ୍ରତିଦିନ ସାମ୍ନା-ସାମ୍ନି ହେବାକୁ ପଡ଼ିଥାଏ। ବ୍ୟବସ୍ଥା ଆପଣମାନଙ୍କୁ ବଦଳାଇ ଦେଇଥାଏ ଅବା ଆପଣ ବ୍ୟବସ୍ଥାକୁ ବଦଳାଇ ଦେଉଛନ୍ତି, ଆପଣଙ୍କର ଏହି ଟ୍ରେନିଂ, ଆପଣଙ୍କର ଇଚ୍ଛାଶକ୍ତି ଏବଂ ଆପଣଙ୍କର ମନୋବଳ ଉପରେ ନିର୍ଭର କରିଥାଏ। ଆପଣଙ୍କର କ’ଣ ଲକ୍ଷ୍ୟ ରହିଛି। କେଉଁ ଆଦର୍ଶ ସହିତ ଆପଣ ଯୋଡ଼ି ହୋଇଛନ୍ତି? ସେହି ଆଦର୍ଶର ପରିପୂରଣ ପାଇଁ କେଉଁ ସଂକଳ୍ପ ନେଇ ଆପଣ ଚାଲୁଛନ୍ତି। ତାହା ହିଁ ନିର୍ଭର କରୁଛି ଆପଣ କିଭଳି ବ୍ୟବହାର କରିବେ। ଏହା ଏକ ପ୍ରକାରରେ ଆପଣଙ୍କର ଆଉ ଏକ ପରୀକ୍ଷା ହେବ। ଆଉ ମୋର ଭରସା ରହିଛି, ଆପଣମାନେ ମଧ୍ୟ ସଫଳ ହେବେ, ନିଶ୍ଚୟ ସଫଳ ହେବେ ।

ସାଥୀଗଣ,

ଏଠାରେ ଆମର ଯେଉଁ ପଡୋଶୀ ଦେଶର ଯୁବ ଅଫିସର ଅଛନ୍ତି, ସେମାନଙ୍କୁ ମଧ୍ୟ ମୁଁ ବହୁତ-ବହୁତ ଶୁଭକାମନା ଦେବାକୁ ଚାହୁଁଛି। ଭୁଟାନ ହେଉ, ନେପାଳ ହେଉ, ମାଳଦ୍ୱୀପ ହେଉ, ମରିସସ ହେଉ, ଆମେ ସମସ୍ତେ କେବଳ ପଡୋଶୀ ହିଁ ନୁହେଁ, ବରଂ ଆମର ଚିନ୍ତାଧାରା ଏବଂ ସାମାଜିକ ଚାଲିଚଳଣୀରେ ମଧ୍ୟ ବହୁତ ସମାନତା ରହିଛି। ଆମେ ସମସ୍ତେ ହେଉଛେ ସୁଖ-ଦୁଃଖର ସାଥୀ। ଯେତେବେଳେ ମଧ୍ୟ କୌଣସି ବିପର୍ଯ୍ୟୟ ଆସିଥାଏ, ବିପତି ଆସିଥାଏ, ସେତେବେଳେ ସର୍ବପ୍ରଥମେ ପରସ୍ପରକୁ ସହାୟତା କରିଥାଉ। କରୋନା ସମୟରେ ମଧ୍ୟ ଆମେ ଏହା ଅନୁଭବ କରିଛେ। ଏଥିପାଇଁ, ଆଗାମୀ ବର୍ଷରେ ହେବାକୁ ଥିବା ବିକାଶରେ ମଧ୍ୟ ଆମର ଭାଗିଦାରୀ ବଢ଼ିବା ଥୟ। ବିଶେଷ ଭାବେ ଆଜି ଯେତେବେଳେ ଅପରାଧ ଏବଂ ଅପରାଧୀ, ସୀମାରେଖା ମଧ୍ୟରେ ସୀମିତ ନାହାଁନ୍ତି, ସେଭଳି ସମୟରେ ପାରସ୍ପରିକ ସମନ୍ୱୟ ଅଧିକ ଜରୁରୀ ହୋଇ ପଡ଼ିଛି। ମୋର ବିଶ୍ୱାସ ଯେ ସର୍ଦ୍ଦାର ପଟେଲ ଏକାଡେମୀରେ ବିତାଇଥିବା ଆପଣଙ୍କର ଏହି ଦିନ, ଆପଣଙ୍କ କ୍ୟାରିୟର, ଆପଣଙ୍କର ଜାତୀୟ ଏବଂ ସାମାଜିକ ଦାୟିତ୍ୱବୋଧ ଆଉ ଭାରତ ସହିତ ବନ୍ଧୁତାକୁ ମଧ୍ୟ ଦୃଢ଼ କରିବାରେ ସାହାଯ୍ୟ କରିବ। ପୁଣିଥରେ ଆପଣ ସମସ୍ତଙ୍କୁ ବହୁତ-ବହୁତ ଶୁଭକାମନା!

ଧନ୍ୟବାଦ!