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Today I am witnessing 'mini-India' in Dubai: PM
People from all over the world have come here to Dubai. Magnetic power of this place has drawn the world here: PM
There are around 700 flights between India and the UAE but it took 34 years for a PM to visit this Nation: PM
PM Narendra Modi urges audience to give a standing ovation to the Crown Prince of Abu Dhabi
India has been a victim of terrorism for 40 years. Innocent people have lost their lives: PM
Good Taliban, Bad Taliban...Good Terror, Bad Terror...this won't work. A decision has to be taken are you with terrorism or with humanity: PM
Our effort has been to take India to new heights of progress and maintain a strong friendship with our neighbouring countries: PM

दुबई की धरती पर मैं आज मेरे सामने लघु भारत के दर्शन कर रहा हूं। हिन्‍दुस्‍तान के कोने-कोने से आए हुए मेरे प्यारे देशवासियों को मैं नमन करता हूं। आप वे लोग हैं, जिन्होंने परिश्रम की पराकाष्ठा करके..कोई दस साल से, कोई पंद्रह साल से, कोई बीस साल से, कोई तीस साल से, रोजी रोटी कमा रहे हैं, लेकिन साथ-साथ भारत के गौरव को भी बढ़ाने में कभी पीछे नहीं रहे। आपके व्यवहार के कारण आपके आचरण के कारण हमेशा भारत गौरव अनुभव करता रहा है। भारत में अगर अधिक बारिश भी हो जाए तो दुबई में बैठा हुआ मेरा हिंदुस्तानी छाता खोल देता है। भारत में कहीं अगर कोई प्राकृतिक आपदा आ जाए, दुबई में बैठा हुआ मेरा देशवासी चैन से सो नहीं सकता।

जब अटल बिहारी देश के प्रधानमंत्री थे, भारत ने न्यूक्लियर टेस्ट किया था, दुनिया चौंक गई थी, कुछ लोग गुस्से में आए थे और रातों-रात भारत पर sanction लगा दिए गए थे। भारत को आर्थिक मुसीबतों में धकेल दिया गया था.. और तब वाजपेयी जी ने विश्व भर में फैले हुए भारत वासियों को आह्वान किया था, देश की मदद करने के लिए। आज मैं गर्व से कह सकता हूं कि वाजपेयी जी के उस आह्वान पर, हिन्‍दुस्‍तान की तिजोरी भरने में Gulf Countries में जो मजदूरी का काम करते थे, उन मेरे भारतवासियों का सबसे बड़ा योगदान था। इस अर्थ में यहां बसा हुआ हर भारतवासी, एक प्रकार से हिन्‍दुस्‍तान के हर कोने से जुड़ा हुआ है। पिछली बार जब देश लोकसभा के चुनाव के लिए व्यस्त था, चुनाव नतीजे आ रहे थे, हिन्‍दुस्‍तान ही नहीं, पूरा दुबई नाच रहा था। ये प्यार भारत माता के कल्याण के लिए..मां भारती फिर से एक बार सामर्थ्यवान बने, सशक्त बने, सम्‍पन्‍न बने, समृद्ध बने, ये सपना संजोकर के दिन-रात एक करने वाले आप लोग मेरे सामने बैठे हैं।

भाइयों-बहनों, आज..यहां तो हिन्‍दुस्‍तान के हर कोने से आए हुए मेरे भाई-बहन बैठे हैं और दुबई, वो सिर्फ लघु भारत ही रहा है ऐसा नहीं है, अब तो दुबई एक लघु विश्व भी बन गया है। दुनिया के सभी देशों के लोग, कम अधिक मात्रा में दुबई में रह रहे हैं। ठंडे से ठंडे प्रदेश के लोग भी इस 40-45 डिग्री तापमान में रहना पसंद करते हैं। क्या ताकत दिखाई होगी इस देश ने, क्या magnetic power पैदा किया होगा विकास के माध्यम से कि पूरा विश्व यहां आकर्षित हो जाता है।

हिन्‍दुस्‍तान के हर कोने से आए हुए सभी देशवासियों ने अभी दो दिन पूर्व 15 अगस्त, भारत की आज़ादी का पर्व मनाया है। मैं भी आप सब को आज़ादी के पावन पर्व की अनेक-अनेक शुभकामनाएं देता हूं।

यहां केरल से आया हुआ भी समुदाय बहुत बड़ी मात्रा में है। मैं केरल का उल्लेख विशेष रूप से इसलिए कर रहा हूं क्योंकि आज केरल का नववर्ष है। सहोदरकअ एंटे रूदयम निरन्या नववलसरा आशम सफलअ। नमस्कारम्।



हर हफ्ते हिन्‍दुस्‍तान से 700 से भी ज्यादा फ्लाइट यहां आती हैं। दुनिया में किसी एक देश के साथ इतनी बड़ी मात्रा में हवाई आवागमन अगर कहीं है, तो इस इलाके से है। हर हफ्ते 700 से भी अधिक फ्लाइट आती हैं, लेकिन भारत के प्रधानमंत्री को यहां आने में 34 साल लग गए। कभी-कभी मुझे लगता है कि बहुत सारे ऐसे अच्छे अच्छे काम हैं, जो पूर्व के लोग मेरे लिए बाकी छोड़ करके चले गए हैं और इसलिए बहुत सारे बाकी रहे अच्छे काम करने का मुझे भाग्य मिला है। उन अच्छे कामों में से महत्वपूर्ण अच्छा काम मेरा अबुधाबी आना, मेरा दुबई आना है। जिस प्रकार से..ये मेरी पहली मुलाकात है। इसके पहले कभी मैं धरती के इस भू-भाग पर नहीं आया। ..और 34 साल में प्रधानमंत्री के रूप में कोई आएं, तो किसी को भी, किसी को भी नाराज़गी व्यक्त करने का हक बनता है। हक बनता है कि नहीं बनता है? बनता है कि नहीं बनता है? लेकिन अबुधाबी में His Highness Crown Prince ने, दुबई में His Highness अल मख्तूम जी ने नाराज़गी नहीं दिखाई, इतने प्यार की वर्षा की, इतने प्यार की वर्षा की, मैं उनके इस प्यार को कभी भूल नहीं पाउंगा। जो स्वागत किया, जो सम्मान किया.. His Highness Crown Prince अपने सभी पांचों भाइयों के साथ एयरपोर्ट पर लेने के लिए आए। मेरे प्यारे देशवासियों, ये प्यार, ये सम्मान किसी व्यक्ति को नहीं है। ये सवा सौ करोड़ देशवासियों का सम्मान है। ये भारत की बदली हुई तस्वीर का सम्मान है। भारत जिस प्रकार से दुनिया में अपनी जगह बना रहा है, उस बदले हुए हालात का सम्मान है। मैं His Highness Crown Prince का, अमीरात का, दुबई के Rulers का हृदयपूर्वक बहुत-बहुत आभार व्यक्त करता हूं।

एक तरफ संप्रदाय के नाम पर आतंकवाद के खेल खेले जाते हैं। निर्दोषों को मौत के घाट उतार दिया जाता है। पूर्णतया: चिंता का माहौल हो, ऐसे समय अबुधाबी के His Highness Crown Prince भारतीय समुदाय के लिए मंदिर बनाने के लिए जगह देने का निर्णय करते हैं। जो लोग अबुधाबी से परिचित हैं, उन्हें पता है कि निर्णय कितना बड़ा है, ये सौगात कितनी बड़ी है। आप मुझे बताइए, सभी देशवासियों को उनका विशेष रूप से अभिनंदन करना चाहिए कि नहीं करना चाहिए। मैं आप सभी से आग्रह करता हूं कि तालियों की गूंज से Crown Prince का अभिनंदन कीजिए। Crown Prince को Standing Ovation दीजिए। उनका अभिनंदन कीजिए। मैं हृदय से उनका अभिनंदन करता हूं।

भाइयों-बहनों, दो दिन की मेरी यात्रा में जिस प्रकार का विश्वास का माहौल बना, आखिरकार अंतर्राष्ट्रीय संबंधों का आधार..आपकी भाषा क्या है, आप कितने articulate हैं, आप diplomatic relation में कितने बढि़या ढंग से मेलजोल करते हैं..उससे भी ज्यादा महत्व होता है, एक दूसरे पर भरोसे का। अंतर्राष्ट्रीय संबंधों में ये भरोसा, ये विश्वास, एक बहुत बड़ी पूंजी होता है ..और आज मैं चंद घंटों की मेरी मुलाकात के बाद कह सकता हूं कि भारत, अबुधाबी, दुबई, अमीरात.. जो विश्वास का सेतू बना है, वो अभूतपूर्व है और आने वाली पीढि़यों तक काम आए, ऐसा foundation तैयार हुआ है।

आज मुझे खुशी हुई कि जब आज भारत और अमीरात के बीच जो Joint Statement आया है, आपको भी खुशी होगी जान करके.. Crown Prince ने हिन्‍दुस्‍तान में साढ़े चार लाख करोड़ रूपए का निवेश करने का संकल्प दोहराया है। साढ़े चार लाख करोड़ रूपया! कितना? कितना? कितना? भाइयों-बहनों, अगर आप पर किसी का भरोसा न हो, तो कोई 10 रूपया भी आप पर लगाने के लिए तैयार होगा क्या? ये भारत की साख बनी है। आज भारत का बदला हुआ रूप विश्‍व के सामने अपनी स्वीकृति बनाता आगे चल रहा है।

आज अमीरात और भारत की तरफ से आतंकवाद के खिलाफ, दो टूक शब्दों में, बिना लाग लपेट और किसी की परवाह किए बिना साफ-साफ शब्‍दों में संकेत दे दिए गए हैं। आतंकवाद के खिलाफ एकता का स्वर आज इस धरती से उठा है। मैं इसे बहुत अहम मानता हूं और इतना ही नहीं..समझने वाले समझ जाएंगे, अक्लमंद को इशारा काफी। आतंकवाद में लिप्त लोगों को सजा होनी चाहिए, ये स्पष्ट शब्दों में संकेत यहां से निकला है। मैं आज यहां के शासकों का इसलिए भी आभारी हूं कि उन्होंने..United Nations जब अपने 70 साल मनाने जा रहा है, तो यहां से कहा गया है और भारत की इस बात का खुला समर्थन किया गया है कि भारत को United Nations की Security Council की Permanent Membership मिलनी चाहिए। मैं आभारी हूं उनका।

इससे भी आगे एक बहुत-बहुत महत्वपूर्ण बात पर..आज भारत की लंबे अर्से से एक position है। उसका आज His Highness Crown Prince ने खुले आम समर्थन घोषित किया। भाइयों-बहनों, कई वर्षों से United Nations में एक Resolution लटका पड़ा है। आपको भी बड़ी हैरानी होगी..और दो-पांच साल से नहीं, कई वर्षों से लटका पड़ा है। क्या.. ? United Nations, जो कि प्रथम और द्वितीय विश्वयुद्ध से पीडि़त मानव समुदाय को मरहम लगाने के लिए..आगे मानव जाति को ऐसे संकट झेलने की नौबत न आए, इसके लिए precaution लेने के लिए, व्यवस्थाएं विकसित करने के लिए 70 साल पहले United Nations का जन्म हुआ। लेकिन वह United Nations आतंकवाद की अभी तक परिभाषा नहीं कर पाया। आतंकवादी किसको कहें, आतंकवाद किसको कहें, आतंकवाद को समर्थन करने वाले कौन माना जाए, किस देश को आतंकवाद का समर्थक माना जाएं, किस देश को समर्थक न माना जाए। इसलिए Comprehensive Convention on International Terrorism..इसका निर्णय करने का प्रस्ताव लंबे अर्से से United Nations में लंबित पड़ा हुआ है। भारत ने position ली हैं सालों से किए एक प्रस्ताव पर चर्चा हो जाए, निर्णय होना चाहिए और ये टाला जा रहा है। आज मुझे खुशी इस बात की है कि His Highness Crown Prince ने भारत की स्थिति का समर्थन का किया है, भारत की position का समर्थन किया है और आतंकवाद के खिलाफ लड़ने के संबंध में आपने स्पष्ट संकेत दे दिए हैं। न सिर्फ.. साढ़े चार लाख करोड़ का पूंजी निवेश की बात नहीं है ये। ये एक निश्चित दिशा में कंधे से कंधा मिलाकर चलने का एक प्रकार का संकेत, इस Joint Statement में है। मैं इसे बहुत महत्वपूर्ण मानता हूं।

भाइयों-बहनों आप तो सालों से बाहर हैं। आज भारत का नाम सुनते ही आपके सामने खड़े हुए व्यक्ति की आंखों में चमक आती है कि नहीं आती है? आपका माथा गर्व से ऊंचा होता है कि नहीं होता है, आपका सीना गर्व से तन जाता है कि नहीं तन जाता है? एक गर्व महसूस करते हैं कि नहीं करते हैं? भाइयों बहनों आज दुनिया का हिन्‍दुस्‍तान की तरफ देखने का नज़रिया पूरी तरह बदल गया है और उसका एक कारण..क्या कारण है?.. क्या कारण है, ये बदलाव आया है? मोदी के कारण नहीं, ये जो बदलाव आया है, सवा सौ करोड़ देशवासियों की संकल्प शक्ति के कारण आया है। सवा सौ करोड़ देशवासियों ने 2014 मई महीने में 30 साल के बाद पूर्ण बहुमत वाली सरकार चुनी। आज दुनिया का कोई भी महापुरूष, दुनिया का कोई भी राजनेता मोदी से जब हाथ मिलाता है न, तब उसे मोदी नहीं दिखता है। उसे सवा सौ करोड़ हिंदुस्तानी दिखाई देते हैं। दुनिया की तेज़ गति से बढ़ रही economy दिखाई दे रही है।

भाइयों-बहनों, पिछले दिनों, IMF हो, World Bank हो, Moody हो, विश्व की जितनी भी आर्थिक पैमाने पर Rating Institutions हैं, सब किसी ने एक स्वर से कहा है कि आज दुनिया में बड़े देशों में सबसे तेज गति से अगर आर्थिक सुधार हो रहा है, तेज गति से growth हो रहा है तो उस देश का नाम है.. (दर्शक दीर्घा से भारत-भारत के नारे). मुझे बताइए सीना तन जाएगा कि नहीं तन जाएगा? माथा ऊंचा हो जाएगा कि नहीं होगा कि नहीं होगा। एक साल के भीतर-भीतर ये बदलाव आया है। भाइयों बहनों, हमने मेक इन इंडिया.. कुछ महीने पहले इस अभियान का प्रारंभ किया। दुनिया को मैं कह रहा हूं- मेक इन इंडिया। आइए, हिन्‍दुस्‍तान एक ऐसा देश है जो संभावनाओं से भरा हुआ है, Opportunities ही Opportunities हैं। ये एक ऐसा भाग्‍यशाली देश है, जिसके पास 65 प्रतिशत जनसंख्या 35 साल से कम उम्र की है। भारत एक नौजवान देश है। आज यहां जवानी लबालब भरी पड़ी है और विश्व वहां आए, हमारे युवकों की शक्ति जुटाए, उत्पादन करे, दुनिया के बाज़ार में जाकर बेचे। और आज..ये कुछ ही महीनों का मामला है.. Foreign Direct Investment..FDI में 48 प्रतिशत वृद्धि हुई है, 48%। भाइयों-बहनों विकास को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए Ease of doing Business का माध्‍यम हो। देश की युवा शक्‍ति में Skill Development का अभियान हो। आधुनिक भारत के निर्माण के लिए डिजिटल इंडिया का सपना साकार करने के लिए दिन-रात पुरुषार्थ चलता हो। तो विश्‍व का आना बहुत स्‍वाभाविक है मेरे भाइयों और बहनों, बहुत स्‍वाभाविक है।

भाइयों-बहनों, आज दुनिया जिस आतंकवाद के नाम सुनते ही कांप उठती हैं, एक नफरत पैदा होती है। मैं दुनिया को कहता हूं हम हिन्‍दुस्‍तान के लोग 40-40 साल से ये आतंकवाद के शिकार हुए हैं। हमारे निर्दोष लोग आतंकवादियों की गोलियों से भून दिए गए हैं, मौत के घाट उतार दिए गए हैं और जब कभी मैं विश्‍व के लोगों के साथ आज से 25-30 साल पहले कभी मुझे बात करने का अवसर मिलता था, तो वे आतंकवाद समझने की उनकी क्षमता ही नहीं थी। कभी मैं आतंकवाद की बात करता था तो वे मुझे कहते थे ये तो आपका Policing का problem है Law and Order का problem है। अब उनको समझ आ गया है कि आतंकवाद का कितना भयंकर रूप होता है। आतंकवाद की कोई सीमाएं नहीं होती है, वो पता नहीं कब किस सीमा पर जाकर आ धमकेगा। आज अभी मैं यहां पहुंच रहा था, मैंने सुना बैंकॉक के अंदर आज एक बम धमाका हुआ, निर्दोष लोगों को मार दिया गया। भारत तो लगातार इन हरकतों को झेलता रहा है और विश्‍व समुदाय जब तक आतंकवाद की मानसिकता वाले देशों को, आतंकवाद को, उसको समर्थन करने वालों को एक ओर, और मानवता में विश्‍वास करने वाले दूसरी ओर, और मानवतावाद में विश्‍वास करने वाले दुनिया के देश एक होकर के आतंकवाद के खिलाफ लड़ने का वक्‍त आ चुका है।

Good Taliban-Bad Taliban, Good Terrorism- Bad Terrorism ये अब चलने वाला नहीं है। हर किसी को तय करना पड़ेगा कि फैसला करो कि आप आतंकवाद के साथ हो या मानवता के साथ हो, निर्णय करो। भारत को तो आज भी आए दिन इन नापाक हरकतों का शिकार होना पड़ता है। हम समस्‍याओं का समाधान खोजने की दिशा में लगातार कोशिश कर रहे हैं। यहां बहुत कम लोगों को पता होगा कि भारत की आजादी के पहले से नागालैंड में अतिवाद, insurgency इस समस्‍या से नागालैंड जूझता रहा और उसके कारण भारत का पूरा ये पूर्वी हिस्‍सा, नॉर्थ-ईस्‍ट, आए दिन हिंसा का शिकार होता था और धीरे-धीरे वो बीमारी इतनी फैलती गई कि अन्‍य राज्‍यों में भी अलग-अलग नाम से, अलग-अलग अतिवादी, आतंकवादी गुट बनते चले गए। आजादी के भी पहले से चल रहा था।

आज मैं बहुत संतोष के साथ मेरे देशवासियों, आपको कहना चाहता हूं कि अभी एक महीने पहले नागालैंड के इन गुटों के साथ, जो कभी हिंसा में विश्‍वास करते थे, जो शस्‍त्रों को लेकर के गतिविधि चलाते थे। उनसे जो बातचीत चल रही थी, वो सफलतापूर्वक आगे बढ़ी, निर्णय हुआ, मुख्‍य धारा में आने का निर्णय हुआ। 60-70 साल के बाद ये संभव हुआ। मैं नागालैंड की ये घटना का जिक्र इसलिए करना चाहता हूं कि हिंसा के राह पर चले हुए भारत के नौजवानों को और विश्‍व के नौजवानों को मैं एक उदाहरण के रूप में कहना चाहता हूं, समस्‍या कितनी भी गंभीर क्‍यों न हो, आखिर तो बातचीत से ही रास्‍ता निकलता है। कोई 10 साल लड़ाई लड़ने के बाद बात करें, कोई 20 साल लड़ाई लड़ने के बाद करें, कोई 40 साल लड़ाई लड़ने के बाद बात करें, लेकिन आखिर में तो बात ही होती है और टेबल पर ही फैसले होते हैं और इसलिए विश्‍व भर से इस गलत रास्‍ते पर चल पड़ लोग बम-बंदूक के भरोसे, अपने सपनों को साकार करने के रास्‍ते पर चले हुए लोग। ये रास्‍ता कभी आपका भला नहीं करेगा। ये रास्‍ता कभी किसी और का भला नहीं करेगा। ये रास्‍ता कभी मानवता का भला नहीं करेगा। ये रास्‍ता इतिहास को बेदाग नहीं रहने देगा। ये पूरे इतिहास को कलंकित कर देगा, ये पूरे इतिहास को दागदार बना देगा और इसलिए हिंसा का मार्ग छोड़कर के मुख्‍यधारा में जाना, ये आज समय की मांग है।

मेरे प्‍यारे भाइयों-बहनों, बांग्‍लादेश 1947 में भारत का विभाजन हुआ, 1947 में। तब से पूर्व पाकिस्‍तान, पश्‍चिम पाकिस्‍तान थे उस समय। पूर्वी पाकिस्‍तान जो आज बांग्‍लादेश बना, भारत और उनके बीच सीमा का विवाद चल रहा था। तनाव का कारण बना हुआ था। आशंकाओं का कारण बना हुआ था। घुसपैठ के लिए एक सुविधाजनक स्‍थिति बनी हुई थी। आप सब के आशीर्वाद से हिन्‍दुस्‍तान ने बीड़ा उठाया, सबने मिलकर के बीड़ा उठाया। इस समस्‍या का समाधान करना है, बातचीत से करना है। मैं पिछले सितंबर में बांग्‍लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना जी से मिला था और मैंने उनको वादा किया था कि मुझ पर भरोसा कीजिए और मुझे थोड़ा समय दीजिए। उन्‍होंने कहा कि मेरे पास भरोसा रखने के सिवाए है भी क्‍या! लेकिन आज, आज मैं मेरे प्‍यारे देशवासियों आपके सामने सर झुकाकर के कहना चाहता हूं कि आजादी से लटका हुआ ये सवाल 1 अगस्‍त को समाप्‍त कर दिया गया है। सीमा निर्धारित हो गई। जिनको बांग्‍लादेश जाना था, बांग्‍लादेश चले गए, जिनको भारत आना था भारत आ गए। हम लोग तो 15 अगस्‍त, 1947 को आजाद हो गए थे। भारत के नागरिक के नाते गौरवगान करने लगे थे। लेकिन ये हमारे भाई-बहन अभी 1 अगस्‍त, 2015 को भारत की भूमि पर आजादी का स्‍वाद लेने का उन्‍हें सौभाग्‍यमान मिला है। भारत की संसद में सर्वसम्‍मति से सभी राजनैतिक दलों ने साथ दिया और सर्वसम्‍मति से फैसला हुआ, बातचीत के माध्‍यम से फैसला हुआ।

ये छोटी-मोटी उपलब्‍धि नहीं है मेरे भाइयों-बहनों। और मैं, औरों को भी हमेशा कहता हूं, अड़ोस-पड़ोस के देशों को भी कहता रहता हूं। जैसे हिंसा के रास्‍ते पर गए हुए लोगों को भी कभी न कभार बातचीत के रास्‍ते पर आना पड़ता है। वैसे अड़ोस-पड़ोस में भी समस्‍याओं का समाधान बातचीत से ही निकलता है।

अंतर्राष्‍ट्रीय संबंधों में आज भारत एक महत्‍वपूर्ण भूमिका अदा कर रहा है। मानवता के अधिष्‍ठान पर कर रहा है। जब नेपाल में भूकंप आया चंद घंटों में, ऐसा नहीं है कि भई ज़रा पूछो तो क्‍या हुआ है? जरा जानकारी लो क्‍या हुआ है? ऐसा करो अफसरों का delegation भेजो, देखो ज़रा क्‍या मुसीबत आई है? ऐसा करो भई कोई अपने रिश्‍तेदार वहां हो तो पूछो भई हुआ क्‍या है? ऐसा इंतजार नहीं किया? आज दिल्‍ली में ऐसी सरकार है, जो हर पल नज़र आती है, हर जगह पर नज़र आती है और चंद घंटों में, चंद घंटों में, भारत से जो भी हो सकता था, ये मानवता का काम था। नेपाल के चरणों में जाकर के हमारे लोग बैठ गए और उनकी सेवा में लग गए और आज भी सेवा चालू है। नेपाल हमारा पड़ोसी है। वो दुखी हो और हम सुखी हों, ये कभी संभव नहीं होता है। उसके सुख में भी हमारा सुख समा हुआ है।

श्रीलंका, आपको हैरानी होगी। जब मैं नेपाल गया, प्रधानमंत्री बनने के बाद। नेपाल जाना है, तो 70 मिनट नहीं लगते। दिल्‍ली से नेपाल जाना हो, तो 70 मिनट नहीं लगते। लेकिन भारत के प्रधानमंत्री को नेपाल पहुंचने में 17 साल लग गए। फिर से हम गए, संबंधों को फिर से जोड़ा। अपनापन। आज नेपाल भारत पर भरोसा कर रहा है। भारत नेपाल का सुख-दु:ख का साथी बन रहा है। श्रीलंका, राजीव गांधी जब प्रधानमंत्री थे, उसके बाद कोई प्रधानमंत्री की stand alone visit नहीं हुई थी। कितने साल बीत गए। हमारा पड़ोसी है, आए दिन हमारे तमिलनाडु, केरल के मछुआरे और उनके मछुआरे आपस में भिड़ जाते हैं। लेकिन उधर कोई जाता नहीं था। हम गए, इतना ही नहीं। जाफना जहां 20-20 साल तक बम और बंदूक का ही कारोबार चलता था, उस जाफना में जाकर के उन दुखियारों के आंसू पोंछने का काम करने का सौभाग्‍य मुझे मिला। एक प्रधानमंत्री के रूप में जाफना जाने का सौभाग्‍य मुझे मिला।

हमारे पड़ोस में मालदीव, आइलैंड पर बसा हुआ देश, tourism की दृष्‍टि से काफी आगे बढ़ा है। अचानक एक दिन उनके यहां पानी के सारे संयंत्र खराब हो गए। पूरे देश के पास पीने का पानी नहीं था। आप कल्‍पना कर सकते हो, कोई देश के पास पीने का पानी न हो। कितना बड़ा गहरा संकट आया। मालदीव से हमें message आया कि ऐसी मुसीबत आई है। एक पल का इंतज़ार नहीं किया, भाइयों और बहनों। हवाई जहाज से पीने का पानी पहुंचाया मालदीव में। दूसरे दिन स्‍टीमर से पानी पहुंचाना शुरू कर दिया और जब तक उनकी वो मशीन चालू नहीं हुई, पानी की व्‍यवस्‍था दुबारा पुनर्जीवित नहीं हुई, हमने मालदीव को प्‍यासा नहीं रहने दिया।

अफगानिस्‍तान हमारा पड़ोसी है। अफगानिस्‍तान संकटों से गुजर रहा है। लंबे अरसे से आए दिन वो घाव झेलता चला जा रहा है। हर पल अफगानिस्‍तान को मरहम लगाने का काम हिन्‍दुस्‍तान करता आया है। अफगानिस्‍तान फिर से एक बार खड़ा हो जाए, क्‍योंकि हम सब बचपन से काबुलीवाला से तो बहुत परिचित हैं। जब काबुली वाले की बात करते हैं, तो हमें कितना अपनापन महसूस होता है। भाइयों-बहनों हमारी कोशिश रही है भारत को विकास की नई ऊचाइयों पर ले जाना। भारत में निरंतर विकास को आगे बढ़ाना और अपने अड़ोस-पड़ोस के देशों से दोस्‍ती बनाकर करके साथ और सहयोग लेकर करके आगे चल पड़ना।

SAARC देशों का समूह उसमें एक नया प्राण पूरने का प्रयास किया है, सफलतापूर्वक प्रयास किया है। वरना पहले SAARC देशों के मंच का उपयोग तू-तू मैं मैं के लिए होता था, कभी भारत को घेरने के लिए होता था। आज SAARC देशों के लोग, जितने साथ चल सकते हैं, उनको ले करके इन SAARC की इकाई का विकास की ऊंचाइयों पर ले जाने का सपना हमने देखा था। हमने घोषित किया है कि 2016 में हम आकाश में एक SAARC Satellite छोड़ेंगे जिसकी सेवाएं SAARC देशों में मुफ्त में देंगे, जो शिक्षा के काम आए , जो आरोग्‍य के लिए काम आये, जो किसानों को काम आये, जो मछुआरों के काम आये, सामान्‍य जन को काम आये। अभी हम बीच में सोच रहे थे कि SAARC देश Connectivity के लिए गंभीरता से सोचे और हम जानते हैं, आज विकास में Connectivity का महत्‍व बहुत है। आप समुद्री मार्ग से जुडि़ए या रेल मार्ग से जुडि़ए, या रोड मार्ग से जुडि़ए, जुड़ना जरूरी है। यूरोप के देशों को ये लाभ मिला हुआ है। एक देश से दूसरे देश चले जाओ पता तक नहीं चलता कि देश कब बदल गया। क्‍या ये SAARC देशों के बीच नहीं हो सकता है? हमने मिल करके सामूहिक निर्णय करने का प्रयास किया नेपाल में। लेकिन आप जानते हैं, कुछ लोगों को जरा तकलीफ होती है, लेकिन कुछ लोगों की तकलीफ के लिए क्‍या रुकना चाहिए? हमारे काम को क्‍या हमें रोक देना चाहिए? हमें अटक जाना चाहिए क्‍या? ठीक है आपकी मर्जी, आप वहां रह जाइये, हम तो चल पड़े भाई और हमने क्‍या किया। एक बहुत बड़ा अहम फैसला लिया है भाइयों और बहनों, इसका प्रभाव आने वाले दिनों में क्‍या होने वाला है, वो तो वक्‍त बताएगा। नेपाल, भूटान, भारत, बांग्‍लादेश, इन चार देशों ने एक नया इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर बना करके Connectivity का एक पूरा काम तय कर लिया, Agreement हो गया, ये आगे चल करके नॉर्थ-ईस्‍ट से जुड़ेगा। वहां से ये म्‍यांमार मार्ग से जुड़ेगा। वो इंडोनेशिया, थाइलैंड, पूरब, हिन्‍दुस्‍तान, पूरब की बीच की तरफ भारत को Connectivity की ताकत देगा एक नया भारत का बदला हुआ, संबंधों का नया विश्‍व खड़ा हो जाएगा।

भाइयों-बहनों, एक निश्चत समय के साथ भारत अपनी भूमिका भी अदा करें, भारत बड़े होने के अहंकार से नहीं, हर किसी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलना चाहता । विकास की नई ऊंचाईयों को पार करना चाहता। भारत में नौजवानों को रोजगार मिले, हमारे कृषि में Second Green Revolution हो, हमारा पूर्वी हिन्‍दुस्‍तान, चाहे पूर्वी उत्‍तर प्रदेश हो, चाहे बिहार हो, चाहे पश्चिम बंगाल हो, चाहे असम हो, चाहे नॉर्थ-ईस्‍ट हो, चाहे ओडि़शा हो, ये हमारा जो इलाका है, ये मानना पड़ेगा कि वहां विकास की ज्‍यादा जरूरत है। अगर वहां पर विकास हो गया और हिन्‍दुस्‍तान का पश्चिमी छोर और पूरब का छोर बराबर हो गये, तो भारत बहुत तेज गति से दौड़ने लग जाएगा और इसलिए भारत के इस पूर्वी छोर पर आर्थिक विकास का एक नया अभियान हमने चलाया है। Infrastructure खड़ा करने का एक नया अभियान चलाया है। Fertiliser के नये कारखाने शुरू कर रहे हैं। गैस की पाइप लाइन लगानी है। बिजली पहुंचानी है। आप मुझे बताइए आजादी के इतने सालों के बाद बिजली होनी चाहिए कि नहीं होनी चाहिए? बिजली मिलनी चाहिए या नहीं मिलनी चाहिए? क्‍या आज के युग में बिजली के बिना गुजारा संभव है? भाइयों-बहनों हमने सपना संजोया है। पांच साल के भीतर-भीतर हम देश के कोने-कोने में 24 घंटे बिजली मैंने देने के लिए फैसला किया। ये हम करके रहेंगे।

दुबई में रहने वाले मेरे प्‍यारे भाइयो-बहनों, हमने एक महत्‍वपूर्ण योजना घोषित की है । हमारे देश में लोगों को पहले Bank Accounts नहीं थे, हमने हर हिन्‍दुस्‍तानी का Bank Account खोल दिया, एक काम किया। भारत में हमारे देश के नागरिकों को इंश्‍योरंस नहीं है, बीमा नहीं है। उसके परिवार में कोई आपत्ति आ जाए, पीछे वालों को देखने की कोई व्‍यवस्‍था नहीं। हमने तीन योजनाएं लगाई हैं, एक प्रधानमंत्री बीमा सुरक्षा योजना, प्रधानमंत्री जीवन ज्‍योति योजना और इंश्‍योरेंस के लिए कितना पैसा देना है? एक स्‍कीम ऐसी है कि जिसमें एक महीने में सिर्फ एक रुपया देना है, 12 महीने में 12 रुपया। हमारे देश का गरीब से गरीब व्‍यक्ति भी दे सकता है या नहीं दे सकता है? मुझे बताइए दे सकता है या नहीं दे सकता है? गरीब से गरीब व्‍यक्ति एक रुपया महीने में दे सकता है या नहीं दे सकता है? महीने का 12 रुपया,.. साल भर का 12 रुपया, साल भर का 12 रुपया देगा, दो लाख रुपयों का सुरक्षा का बीमा मिलेगा। दूसरी योजना है जिसमें उसे और भी मददें मिलेंगी, वो है एक दिन का नब्‍बे पैसा, एक रुपया भी नहीं, एक दिन का एक रुपया भी नहीं, आज तो चाय भी एक रुपये में मिलती नहीं है। मैं जब चाय बेचता था तो एक रुपया भी नहीं मिलता था। लेकिन आज एक रुपये में चाय नहीं मिलती है। एक दिन का नब्‍बे पैसा, साल भर के 330 रुपये, और उसे भी ये सुरक्षा कवच मिलेगा। Natural मृत्‍यु होगा Natural अकस्‍मात नहीं हुआ है, सहज, तो भी उसके परिवार को दो लाख रुपया मिलेगा। हमने लोगों से आग्रह किया है कि रक्षाबन्‍धन के पर्व पर हमारे देश की परम्‍परा है, हम अपनी बहनों को Best सौगात देते हैं। कोई न कोई Gift देते हैं। मैं मेरे, Gulf Countries में रहने वाले मेरे प्‍यारे भाइयों बहनों का आग्रह करता हूं, इस बार रखी के त्‍यौहार पर आप अपनी बहन को ये जीवन सुरक्षा योजना दे दीजिए। अगर आप 600 रुपया बैंक में Fixed Deposit करा दोगे, तो हर साल उसको 12 रुपये से ज्‍यादा Interest मिलेगा, कटता जाएगा और आपकी बहन को दो लाख रुपये का सुरक्षा का कवच मिल जाएगा, और दोनों योजना लें लेगे, उतने पैसे जमा करा दिये, तो चार लाख रुपया उसके चरणों में आपकी तरफ से पहुंच जाएगा। भाइयो-बहनों, हमनें समाज-जीवन को एक सुरक्षित बनाना है, हमारी नई पीढ़ी को शिक्षित बनाना है, देश को आधुनिक बनाना है, और आज जब विश्‍व का भारत की तरफ आकर्षण बढ़ा है, उस परि‍स्थिति का हमने लाभ उठाना है और देश को विकास की नई ऊंचाइयों पर ले जाना है।

मेरे प्‍यारे भाइयो, बहनों, आपने जो मुझे सम्‍मान दिया, प्‍यार दिया, पूरा हिन्‍दुस्‍तान आपको देख रहा होगा। ये बदले हुए माहौल का असर हर भारतवासी के दिल पर भी होता है। और मुझे लगता है कि विश्‍व भर में जो हमारा भारतीय समुदाय पहुंचा है, उस भारतीय समुदाय को भी आज एक नई ऊर्जा, नई शक्ति मिली है। आज जब मैं अबुधाबी आया, दुबई आया, तो कुछ बातें मेरे ध्‍यान में आई हैं, उसके विषय में भी आज आपको मैं कह करके जाना चाहता हूं, Embassy के संबंध में, Counsel के संबंध में, आपकी शिकायतें रहती हैं, नहीं रहती हैं? नहीं रहती हैं तो अच्‍छी बात है। लेकिन अगर रहती हैं तो भारत सरकार ने ‘MADAD’ नाम का एक Online Platform बनाया है, इस ‘MADAD’ नाम के Online Platform का उपयोग दुनिया भर में फैले हुए हमारे भारतीय भाई, बहन उसका उपयोग कर सकते हैं, ताकि आपकी बात आगे पहुंच सकती है। मोबाइल फोन के द्वारा भी आप उनका सम्‍पर्क कर सकते हैं। एक, दूसरा काम किया है, E-migrate portal शुरू किया गया है। जिसके द्वारा इस प्रकार सके हमारे प्रवासी भारतीयों को कोई शिकायत हो, कोई कठिनाई हो, तो उनको Emigration Office के चक्‍कर काटने नहीं पड़ेंगे ये E-migrate portal पर अपनी बात रख करके वो मदद ले सकता है, इसकी एक व्‍यवस्‍था की गई है, क्‍यों यहां दूर-दूर से आपका वहां जाना, बहुत तकलीफ होती है। मुझे ये भी बताया गया कि कही- कहीं पर E-migrate Portal का उपयेाग करने में नागरिकों को दिक्‍कत होती है इसके लिए मैंने हमारे Embassy को आदेश किया है कि वे ये जो Technical Problem है इसका 30 दिन के भीतर-भीतर Solution दें। आज 17 अगस्‍त है, 17 सितम्‍बर तक Solution दें, ऐसा मैंने उनसे कहा है और मुझे विश्‍वास है कि हमारे Embassy के भाई, ये जो Technical Problem कहीं-कहीं आता है, उसका रास्‍ता निकालेंगे।

एक और काम मैंने कहा है, यहां भारतीय समुदाय ज्‍यादातर workers हैं। उनके पास इतने पैसे नहीं कि एक जगह से दूसरी जगह पर वो भागते रहें और इसलिए हमने कहा है, कि हम समय-समय पर जहां हमारे भारतीय भाई समुदाय रहते हैं, वहां जा करके, Counselor Camp लगाएं। महीने में एक बार, दो महीने में एक बार, और वहीं जा करके उनसे बैठें, बातचीत करें, और उनकी समस्‍या के समाधान के लिए योग्‍य व्‍यवस्‍था करें। मैं यहां ये बातें इसलिए कह रहा हूं कि ये भू-भाग ऐसा है, के जहां मेरे गरीब तबके के भाई-बहन रहते हैं, मजदूरी करने के लिए यहां आए हुए हैं। अमेरिका के लिए कुछ कर पाऊं, या न कर पाऊं लेकिन अगर आपके लिए नहीं कुछ करता तो मैं बेचैन हो जाता हूं। और इसलिए हमने एक और काम किया है, इन दिनों विदेशों में कभी-कभी जाते हैं तो हमारे भारतीय भाई कभी-कभी संकट में जैसे अचानक बीमारी आ गई, कुछ हो गया, कभी कोई कानूनी पचड़े में फंस गए, बेचारे जेल चले गए। तो दुनिया के बाहर कौन उनको देखने वाला है? परिवार तो है नहीं, और इन हमारे कभी-कभी मुसीबत में कोई परिवार आ जाए तो उनकी मदद करने के लिए Indian Community Welfare Fund (ICWF) स्‍थापित किया गया है। सब दूतावासों को ये Welfare Fund दिया गया है, और इसलिए ऐसी मुसीबत में कोई फंस गया हो तो उनको कानून की मर्यादा में रह करके जो मदद हो सकती है, कोई अगर जेल में बंद हुआ है, तो कम से कम उसको खाना-पीना मिल जाए मानवता की दृष्‍टि से कोई व्‍यवस्‍था हो जाए, इन सारे कामों के लिए एक Fund की हमने व्‍यवस्‍था की है। हमने ये भी निर्णय किया है, इस Fund के द्वारा दूतावास, Counsel में Counselor सुविधाएं और अच्‍छी कैसे बनें, जो नागरिकों की भलाई के लिए हों, उनके लिए भी इसका उपयोग किया जाएगा। जिनको कानूनी सलाह की जरूरत पड़ेगी और अगर वो खुद इसको करने के लिए स्थिति नहीं है, कभी-कभार तो एक हजार-दो हजार का दंड बेचारा नहीं भर पाता, उसके कारण जेलों में सड़ता रहता है। ऐसे लोगों को मदद करके, भारतीय नागरिक होने के नाते उनको मदद करना इसके लिए Welfare Fund का उपयोग हो, ताकि वो संकटों से बाहर आ सकें, ये भी हमने व्‍यवस्‍था करने के लिए कहा है। मैं जानता हूं यहां पर स्‍कूलों में Admission में कितनी दिक्‍कत होती है, आपके बच्‍चों को स्‍कूलों में पढ़ाई की कितनी दिक्‍कत होती है? मैंने यहां के संबंधित लोगों से ये बात कही है और मैंने कहा है कि अधिक स्‍कूल कैसे बनें, उसकी चिन्‍ता मैंने की है, देखते हैं, मुझे विश्‍वास है कि आने वाले दिनों में उसका भी लाभ आप लोगों को मिलेगा।

मुझे विश्‍वास है मेरे भाइयो, बहनों, कि जो आपकी छोटी-मोटी बातें मेरे ध्‍यान में आई थीं, इसको पूरा करने का मैंने प्रयास किया है। मैं फिर एक बार आप सबको दृदय से बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं और दुनिया में कहीं पर भी मेरा भारतवासी है, तो हम पासपोर्ट का रंग नहीं देखते हैं। हमारा खून का रंग काफी है, वो धरती का नाता काफी है, और इसलिए आइए मेरे साथियो हम सब मिल करके जहां भी हों, मां भारती का माथा ऊंचा करने के लिए, गौरव से जीवन जीने के लिए एक माहौल बनाने में सक्रिय शरीक हों और आपका योगदान आपकी शक्ति सामर्थ्‍यवान आपके परिवार को भी भला करने में काम आए, देश का भी भला करने के लिए काम आए।

इसी शुभ कामनाओं के साथ आप सबका बहुत-बहुत धन्‍यवाद।

मेरे साथ दोनों मुट्ठी बंद करके बोलिए, भारत माता की जय। दोनों मुट्ठी पूरी बंद करके पूरी ताकत से बोलिए, भारत के कोने-कोने में, आपके अपने गांव में आवाज पहुंचनी चाहिए भारत माता की जय, भारत माता की जय, भारत माता की जय, भारत माता की जय।

बहुत-बहुत धन्‍यवाद।

Modi Govt's #7YearsOfSeva
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ವಿವಾ ಟೆಕ್ 5 ನೇ ಆವೃತ್ತಿಯಲ್ಲಿ ಪ್ರಧಾನ ಮಂತ್ರಿ ಅವರ ದಿಕ್ಸೂಚಿ ಭಾಷಣದ ಪಠ್ಯ
June 16, 2021
ಶೇರ್
 
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ಮುಂದಿನ ಸಾಂಕ್ರಾಮಿಕ ರೋಗದ ವಿರುದ್ಧ ನಮ್ಮ ಗ್ರಹಕ್ಕೆ ರಕ್ಷಣೆಯ ಅಗತ್ಯವಿದೆ: ಪ್ರಧಾನಿ
ಸಾಂಕ್ರಾಮಿಕ ಸಂದರ್ಭದಲ್ಲಿ ಡಿಜಿಟಲ್ ತಂತ್ರಜ್ಞಾನವು ನಿಭಾಯಿಸಲು, ಸಂಪರ್ಕಿಸಲು, ಸೌಕರ್ಯ ಕಲ್ಪಿಸಲು ಮತ್ತು ಸಾಂತ್ವನಕ್ಕೆ ನೆರವಾಯಿತು: ಪ್ರಧಾನಿ
ಅಡಚಣೆಯಿಂದ ಹತಾಶರಾಗಬೇಕಿಲ್ಲ, ದುರಸ್ತಿ ಮತ್ತು ಸಿದ್ಧತೆ ಎಂಬ ಅವಳಿ ಅಡಿಪಾಯಗಳತ್ತ ನಾವು ಗಮನ ಹರಿಸಬೇಕು: ಪ್ರಧಾನಿ
ನಮ್ಮ ಗ್ರಹವು ಎದುರಿಸುತ್ತಿರುವ ಸವಾಲುಗಳನ್ನು ಸಾಮೂಹಿಕ ಮನೋಭಾವ ಮತ್ತು ಮಾನವ ಕೇಂದ್ರಿತ ವಿಧಾನದಿಂದ ಮಾತ್ರ ನಿವಾರಿಸಬಹುದು: ಪ್ರಧಾನಿ
ಸಾಂಕ್ರಾಮಿಕವು ನಮ್ಮ ಸ್ಥಿತಿಸ್ಥಾಪಕತ್ವವನ್ನು ಮಾತ್ರ ಪರೀಕ್ಷಿಸುತ್ತಿಲ್ಲ, ನಮ್ಮ ಕಲ್ಪನೆಯನ್ನೂ ಪರೀಕ್ಷಿಸುತ್ತಿದೆ. ಪ್ರತಿಯೊಬ್ಬರಿಗೂ ಹೆಚ್ಚು ಅಂತರ್ಗತವಾದ, ಕಾಳಜಿಯ ಮತ್ತು ಸುಸ್ಥಿರ ಭವಿಷ್ಯವನ್ನು ನಿರ್ಮಿಸಲು ಇದೊಂದು ಅವಕಾಶ: ಪ್ರಧಾನಿ
ಭಾರತವು ವಿಶ್ವದ ಅತಿದೊಡ್ಡ ನವೋದ್ಯಮ ವ್ಯವಸ್ಥೆಗಳಲ್ಲಿ ಒಂದಾಗಿದೆ, ಭಾರತವು ನಾವೀನ್ಯಕಾರರು ಮತ್ತು ಹೂಡಿಕೆದಾರರಿಗೆ ಬೇಕಾದುದನ್ನು ನೀಡುತ್ತದೆ: ಪ್ರಧಾನಿ
ಪ್ರತಿಭೆ, ಮಾರುಕಟ್ಟೆ, ಬಂಡವಾಳ, ಪರಿಸರ ವ್ಯವಸ್ಥೆ ಮತ್ತು ಮುಕ್ತ ಸಂಸ್ಕೃತಿ ಎಂಬ ಐದು ಸ್ತಂಭಗಳ ಆಧಾರದ ಮೇಲೆ ನಿಂತಿರುವ ಭಾರತದಲ್ಲಿ ಹೂಡಿಕೆ ಮಾಡಲು ಜಗತ್ತನ್ನು ಆಹ್ವಾನಿಸುತ್ತೇನೆ: ಪ್ರಧಾನಿ
ಫ್ರಾನ್ಸ್ ಮತ್ತು ಯುರೋಪ್ ನಮ್ಮ ಪ್ರಮುಖ ಪಾಲುದಾರರು, ನಮ್ಮ ಪಾಲುದಾರಿಕೆಗಳು ಮನುಕುಲದ ಸೇವೆಯ ದೊಡ್ಡ ಉದ್ದೇಶವನ್ನು ಪೂರೈಸಬೇಕು: ಪ್ರಧಾನಿ

ಗೌರವಾನ್ವಿತ, ನನ್ನ ನಲ್ಮೆಯ ಸ್ನೇಹಿತ ಅಧ್ಯಕ್ಷ ಮ್ಯಾಕ್ರಾನ್

ಪಬ್ಲಿಸಿಸ್ ಗುಂಪಿನ ಅಧ್ಯಕ್ಷ ಶ್ರೀ ಮೌರಿಸ್ ಲೆವಿ

ವಿಶ್ವದಾದ್ಯಂತದಿಂದ ಇದರಲ್ಲಿ ಭಾಗವಹಿಸಿರುವ ಪ್ರತಿನಿಧಿಗಳೇ

ನಮಸ್ತೇ!

ಈ ಕಷ್ಟದ ಸಮಯದಲ್ಲಿಯೂ ವಿವಾಟೆಕ್ ನ್ನು ಯಶಸ್ವಿಯಾಗಿ ಸಂಘಟಿಸುತ್ತಿರುವುದಕ್ಕೆ ಸಂಘಟಕರಿಗೆ ಅಭಿನಂದನೆಗಳು.

ಈ ವೇದಿಕೆಯು ಫ್ರಾನ್ಸ್ ನ ತಾಂತ್ರಿಕ ಮುನ್ನೋಟವನ್ನು ಪ್ರತಿಬಿಂಬಿಸುತ್ತದೆ. ಭಾರತ ಮತ್ತು ಫ್ರಾನ್ಸ್ ಗಳು ಅನೇಕ ವಿಷಯಗಳಲ್ಲಿ ಬಹಳ ನಿಕಟವಾಗಿ ಕೆಲಸ ಮಾಡುತ್ತಿವೆ. ಇವುಗಳಲ್ಲಿ, ತಂತ್ರಜ್ಞಾನ ಮತ್ತು ಡಿಜಿಟಲ್ ಕ್ಷೇತ್ರಗಳು ಸಹಕಾರದ ವಲಯಗಳಾಗಿ ಮೂಡಿ ಬರುತ್ತಿವೆ. ಇಂತಹ ಸಹಕಾರ ಇನ್ನಷ್ಟು ಬೆಳೆಯಬೇಕು ಎನ್ನುವುದು ಈ ಸಮಯದ ಆವಶ್ಯಕತೆಯಾಗಿದೆ. ಇದರಿಂದ ನಮ್ಮ ದೇಶಗಳಿಗೆ ಲಾಭವಾಗುವುದು ಮಾತ್ರವಲ್ಲ ವಿಸ್ತಾರವ್ಯಾಪ್ತಿಯಲ್ಲಿ ವಿಶ್ವಕ್ಕೂ ಲಾಭವಾಗಲಿದೆ.

ಬಹಳಷ್ಟು ಯುವಜನತೆ ಫ್ರೆಂಚ್ ಓಪನ್ ನ್ನು ಬಹಳ ಉತ್ಸಾಹದಿಂದ ನೋಡಿದ್ದಾರೆ. ಭಾರತದ ಟೆಕ್ ಕಂಪೆನಿಗಳಲ್ಲಿ ಒಂದಾದ ಇನ್ಫೋಸಿಸ್ ಈ ಪಂದ್ಯಾಟಕ್ಕೆ ತಾಂತ್ರಿಕ ಬೆಂಬಲವನ್ನು ಒದಗಿಸಿದೆ. ಅದೇ ರೀತಿ ಫ್ರೆಂಚ್ ಕಂಪೆನಿ ಅಟೋಸ್ ಭಾರತದಲ್ಲಿ ಅತ್ಯಂತ ವೇಗದ ಸೂಪರ್ ಕಂಪ್ಯೂಟರ್ ನಿರ್ಮಾಣ ಮಾಡುವ ಯೋಜನೆಯಲ್ಲಿ ಭಾಗಿಯಾಗಿದೆ. ಫ್ರಾನ್ಸಿನ ಕ್ಯಾಪ್ ಜೆಮಿನಿ ಇರಲಿ ಅಥವಾ ಭಾರತದ ಟಿ.ಸಿ.ಎಸ್. ಮತ್ತು ವಿಪ್ರೋ ಇರಲಿ, ನಮ್ಮ ಐ.ಟಿ. ಪ್ರತಿಭೆಗಳು ಜಗತ್ತಿನಾದ್ಯಂತ ಕಂಪೆನಿಗಳಿಗೆ  ಮತ್ತು ನಾಗರಿಕರಿಗೆ ಸೇವೆಯನ್ನು ಒದಗಿಸುತ್ತಿವೆ.

ಸ್ನೇಹಿತರೇ,

ನಾನು ನಂಬುತ್ತೇನೆ- ಸಂಪ್ರದಾಯಗಳು ವಿಫಲವಾಗುವಲ್ಲಿ, ಅನ್ವೇಷಣೆ ಸಹಾಯ ಮಾಡಬಲ್ಲದು. ಕೋವಿಡ್ -19 ಜಾಗತಿಕ ಸಾಂಕ್ರಾಮಿಕದ ಸಂದರ್ಭದಲ್ಲಿ ಇದನ್ನು ನೋಡಬಹುದು. ಇದು ನಮ್ಮ ಕಾಲದ ಅತ್ಯಂತ ದೊಡ್ಡ ಅಸ್ತವ್ಯಸ್ತ ಸ್ಥಿತಿ. ಎಲ್ಲಾ ರಾಷ್ಟ್ರಗಳೂ ನಷ್ಟ ಅನುಭವಿಸಿವೆ ಮತ್ತು ಭವಿಷ್ಯದ ಬಗ್ಗೆ ಆತಂಕದಿಂದಿವೆ. ಕೋವಿಡ್ -19 ನಮ್ಮ ಹಲವು ಸಾಂಪ್ರದಾಯಿಕ ವಿಧಾನಗಳನ್ನು ಪರೀಕ್ಷೆಗೆ ಒಳಪಡಿಸಿದೆ. ಆದಾಗ್ಯೂ ಅನ್ವೇಷಣೆ ನಮ್ಮನ್ನು ರಕ್ಷಿಸಿತು. ಅನ್ವೇಷಣೆಯನ್ನು ನಾನು ಹೀಗೆ ಉಲ್ಲೇಖಿಸುತ್ತೇನೆ:

ಜಾಗತಿಕ ಸಾಂಕ್ರಾಮಿಕಕ್ಕೆ ಮೊದಲು ಅನ್ವೇಷಣೆ.

ಜಾಗತಿಕ ಸಾಂಕ್ರಾಮಿಕದ ಸಂದರ್ಭದಲ್ಲ್ಲಿ ಅನ್ವೇಷಣೆ.

ಜಾಗತಿಕ ಸಾಂಕ್ರಾಮಿಕಕ್ಕೆ ಮೊದಲಿನ ಅನ್ವೇಷಣೆಯ ಬಗ್ಗೆ ನಾನು ಮಾತನಾಡುವಾಗ ಜಾಗತಿಕ ಸಾಂಕ್ರಾಮಿಕದ ಕಾಲದಲ್ಲಿ ನೆರವಿಗೆ ಬಂದ ಈ ಮೊದಲು ಇದ್ದಂತಹ ಸವಲತ್ತುಗಳನ್ನು ಪ್ರಸ್ತಾಪಿಸುತ್ತೇನೆ. ಡಿಜಿಟಲ್ ತಂತ್ರಜ್ಞಾನ ನಮಗೆ ಸಂದರ್ಭವನ್ನು ನಿಭಾಯಿಸಲು, ಸಂಪರ್ಕ ಮಾಡಲು, ಸವಲತ್ತುಗಳನ್ನು ಒದಗಿಸಲು ಮತ್ತು ಸಮಾಧಾನ ಮಾಡಲು ಸಹಾಯ ಮಾಡಿತು. ಡಿಜಿಟಲ್ ಮಾಧ್ಯಮದ ಮೂಲಕ ನಾವು ಕೆಲಸ ಮಾಡಲು ಸಾಧ್ಯವಾಯಿತು. ನಮ್ಮ ಪ್ರೀತಿ ಪಾತ್ರರ ಜೊತೆ ಮಾತನಾಡಲು ಮತ್ತು ಇತರರಿಗೆ ಸಹಾಯ ಮಾಡಲು ಸಾಧ್ಯವಾಯಿತು. ಭಾರತದ ಸಾರ್ವತ್ರಿಕ ಮತ್ತು ವಿಶಿಷ್ಟ ಬಯೋಮೆಟ್ರಿಕ್ ಡಿಜಿಟಲ್ ಗುರುತಿಸುವ ವ್ಯವಸ್ಥೆ –ಆಧಾರ್- ಬಡವರಿಗೆ ಸಕಾಲದಲ್ಲಿ ಹಣಕಾಸು ಬೆಂಬಲ ನೀಡುವುದಕ್ಕೆ ಸಹಕಾರಿಯಾಯಿತು. ನಮಗೆ 800 ಮಿಲಿಯನ್ ಜನರಿಗೆ ಉಚಿತ ಆಹಾರ ಪೂರೈಕೆ ಮಾಡಲು ಮತ್ತು ಅಡುಗೆ ಅನಿಲ ಸಬ್ಸಿಡಿಗಳನ್ನು ಹಲವಾರು ಮನೆಗಳಿಗೆ ತಲುಪಿಸುವುದಕ್ಕೆ ಸಾಧ್ಯವಾಯಿತು. ನಾವು ಭಾರತದಲ್ಲಿದ್ದವರು ಎರಡು ಸಾರ್ವಜನಿಕ ಡಿಜಿಟಲ್ ಶಿಕ್ಷಣ ಕಾರ್ಯಕ್ರಮಗಳಾದ –ಸ್ವಯಂ ಮತ್ತು ದೀಕ್ಷಾ ಗಳನ್ನು ವಿದ್ಯಾರ್ಥಿಗಳಿಗೆ ನೆರವಾಗುವ ರೀತಿಯಲ್ಲಿ ಬಹಳ ತ್ವರಿತವಾಗಿ ಕಾರ್ಯಾಚರಿಸುವಂತೆ ಮಾಡಲು ಸಮರ್ಥರಾದೆವು.

ಎರಡನೇ ಭಾಗದಲ್ಲಿ, ಜಾಗತಿಕ ಸಾಂಕ್ರಾಮಿಕಕ್ಕೆ ಸಂಬಂಧಿಸಿದ ಅನ್ವೇಷಣೆಯನ್ನು ಉಲ್ಲೇಖಿಸುವಾಗ ಆ ಸಂದರ್ಭಕ್ಕೆ ಅನುಗುಣವಾಗಿ ಹೇಗೆ ಮಾನವತೆ ಜಾಗೃತವಾಯಿತು ಮತ್ತು ಅದರ ವಿರುದ್ಧದ ಹೋರಾಟ ಹೇಗೆ ಹೆಚ್ಚು ಪರಿಣಾಮಕಾರಿಯಾಯಿತು ಎಂಬುದರ ಉಲ್ಲೇಖ ಅವಶ್ಯ. ಈ ನಿಟ್ಟಿನಲ್ಲಿ ನಮ್ಮ ನವೋದ್ಯಮ ವಲಯದ ಪಾತ್ರ ಬಹಳ ಮುಖ್ಯ. ನಾನು ನಿಮಗೆ ಭಾರತದ ಉದಾಹರಣೆಯೊಂದನ್ನು ಕೊಡುತ್ತೇನೆ. ಜಾಗತಿಕ ಸಾಂಕ್ರಾಮಿಕ ನಮ್ಮ ತೀರಗಳನ್ನು ಅಪ್ಪಳಿಸಿದಾಗ ನಮ್ಮಲ್ಲಿ ಸಾಕಷ್ಟು ಪರೀಕ್ಷಾ ಸಾಮರ್ಥ್ಯ ಇರಲಿಲ್ಲ. ಮುಖಗವಸು, ಪಿ.ಪಿ.ಇ., ವೆಂಟಿಲೇಟರುಗಳು ಮತ್ತು ಇತರ ಇಂತಹ ಸಲಕರಣೆಗಳ ಕೊರತೆ ಇತ್ತು. ಈ ಕೊರತೆಯನ್ನು ನಿಭಾಯಿಸುವಲ್ಲಿ ನಮ್ಮ ಖಾಸಗಿ ವಲಯ ಪ್ರಮುಖ ಪಾತ್ರವನ್ನು ವಹಿಸಿತು. ಕೆಲವು ಕೋವಿಡ್ ಮತ್ತು ಕೋವಿಡೇತರ ವಿಷಯಗಳನ್ನು ವರ್ಚುವಲ್ ಆಗಿ ನಿರ್ವಹಿಸಲು ನಮ್ಮ ವೈದ್ಯರು ಟೆಲಿಮೆಡಿಸಿನ್ ನ್ನು ಬಹಳ ದೊಡ್ಡ ಮಟ್ಟದಲ್ಲಿ ಬಳಸಿಕೊಂಡರು. ಭಾರತದಲ್ಲಿ ಎರಡು ಲಸಿಕೆಗಳನ್ನು ತಯಾರಿಸಲಾಯಿತು. ಮತ್ತು ಇನ್ನೂ ಕೆಲವು ಅಭಿವೃದ್ಧಿಯಾಗುತ್ತಿವೆ ಇಲ್ಲವೇ ಪರೀಕ್ಷಾ ಹಂತದಲ್ಲಿವೆ. ಸರಕಾರದ ವತಿಯಿಂದ ನಮ್ಮ ದೇಶೀಯ ಐ.ಟಿ. ವೇದಿಕೆ, ಆರೋಗ್ಯ ಸೇತು ಸಮರ್ಪಕವಾಗಿ ಸಂಪರ್ಕ ಪತ್ತೆಗೆ ಸಹಾಯ ಮಾಡಿತು.ನಮ್ಮ ಕೊವಿನ್ ಡಿಜಿಟಲ್ ವೇದಿಕೆ ಈಗಾಗಲೇ ಮಿಲಿಯಾಂತರ ಜನರಿಗೆ ಲಸಿಕೆಗಳನ್ನು ಖಾತ್ರಿಪಡಿಸಲು ಸಹಾಯ ಮಾಡಿದೆ. ನಾವು ಅನ್ವೇಷಣೆ ಮಾಡದೇ ಇರುತ್ತಿದ್ದರೆ, ಆಗ ಕೋವಿಡ್ -19 ವಿರುದ್ಧದ ನಮ್ಮ ಹೋರಾಟ ಬಹಳಷ್ಟು ದುರ್ಬಲವಾಗಿರುತ್ತಿತ್ತು. ನಾವು ಈ ಅನ್ವೇಷಣಾ ಉತ್ಸಾಹವನ್ನು,  ಹಟವನ್ನು   ಕೈಬಿಡಬಾರದು, ಅದರಿಂದ  ಮುಂದಿನ ಸವಾಲು ಬಂದಪ್ಪಳಿಸುವಾಗ ನಾವು ಇನ್ನಷ್ಟು ಉತ್ತಮವಾಗಿ ಸಿದ್ದತೆಗಳನ್ನು ಮಾಡಿಕೊಂಡಿರುತ್ತೇವೆ.

ಸ್ನೇಹಿತರೇ,

ತಂತ್ರಜ್ಞಾನ ಕ್ಷೇತ್ರದಲ್ಲಿ ಮತ್ತು ನವೋದ್ಯಮ ಕ್ಷೇತ್ರದಲ್ಲಿ ಭಾರತದ ದಾಪುಗಾಲು ಜನಜನಿತವಾಗಿದೆ. ನಮ್ಮ ದೇಶವು ವಿಶ್ವದ ಅತ್ಯಂತ ದೊಡ್ಡ ನವೋದ್ಯಮ ಪರಿಸರ ವ್ಯವಸ್ಥೆಗೆ ಮನೆಯಾಗಿದೆ. ಇತ್ತೀಚಿನ ವರ್ಷಗಳಲ್ಲಿ ಹಲವಾರು ಬೃಹತ್ ನವೋದ್ಯಮ ಕಂಪೆನಿಗಳು (ಯೂನಿಕಾರ್ನ್ –ಸಾಫ್ಟ್ ವೇರ್ ಕ್ಷೇತ್ರದಲ್ಲಿ ಸಾಮಾನ್ಯವಾಗಿ ಒಂದು ಬಿಲಿಯನ್ ಡಾಲರಿಗಿಂತ ಹೆಚ್ಚು ಮೌಲ್ಯದ ನವೋದ್ಯಮ  ಕಂಪೆನಿ)  ತಲೆ ಎತ್ತಿವೆ. ಭಾರತವು ಅನ್ವೇಷಕರಿಗೆ ಮತ್ತು ಹೂಡಿಕೆದಾರರಿಗೆ ಏನು ಬೇಕೋ ಅದನ್ನು ಒದಗಿಸುತ್ತಿದೆ. ಪ್ರತಿಭೆ, ಮಾರುಕಟ್ಟೆ, ಬಂಡವಾಳ, ಪರಿಸರ ವ್ಯವಸ್ಥೆ ಮತ್ತು ಮುಕ್ತತೆಯ ಸಂಸ್ಕೃತಿ-ಎಂಬ ಐದು ಸ್ತಂಭಗಳ ಆಧಾರದ ಮೇಲೆ ಭಾರತದಲ್ಲಿ ಹೂಡಿಕೆ ಮಾಡುವಂತೆ ನಾನು ವಿಶ್ವಕ್ಕೆ ಆಹ್ವಾನ ನೀಡುತ್ತೇನೆ.

ಭಾರತದ ತಂತ್ರಜ್ಞಾನ ಪ್ರತಿಭಾ ಸಮೂಹ ಜಗತ್ತಿನಾದ್ಯಂತ ಪ್ರಖ್ಯಾತವಾಗಿದೆ. ಭಾರತೀಯ ಯುವಜನತೆ ಜಗತ್ತಿನ ಅತ್ಯಂತ ಜರೂರಿನ ಸಮಸ್ಯೆಗಳಿಗೆ ತಾಂತ್ರಿಕ ಪರಿಹಾರಗಳನ್ನು ಒದಗಿಸಿದ್ದಾರೆ. ಇಂದು ಭಾರತವು ಒಂದು ಬಿಂದು ಒಂದು ಎಂಟು ಬಿಲಿಯನ್ ಮೊಬೈಲ್ ಫೋನುಗಳನ್ನು ಮತ್ತು 775 ಮಿಲಿಯನ್ ಅಂತರ್ಜಾಲ ಬಳಕೆದಾರರನ್ನು ಹೊಂದಿದೆ. ಇದು ಹಲವು ರಾಷ್ಟ್ರಗಳ ಜನಸಂಖ್ಯೆಗಿಂತ ಹೆಚ್ಚು. ಭಾರತದಲ್ಲಿ ದತ್ತಾಂಶ ಬಳಕೆ ವಿಶ್ವದಲ್ಲಿಯೇ ಗರಿಷ್ಠ ಮತ್ತು ಅತ್ಯಂತ ಅಗ್ಗ. ಭಾರತೀಯರು ಸಾಮಾಜಿಕ ತಾಣಗಳ ಬೃಹತ್ ಬಳಕೆದಾರರು. ಅಲ್ಲಿ ವೈವಿಧ್ಯಮಯ ಮತ್ತು ವಿಸ್ತಾರ ವ್ಯಾಪ್ತಿಯ ಮಾರುಕಟ್ಟೆ ನಿಮಗಾಗಿ ಕಾಯುತ್ತಿದೆ.

ಸ್ನೇಹಿತರೇ,

ಈ ಡಿಜಿಟಲ್ ವಿಸ್ತರಣೆಗೆ ಅತ್ಯಾಧುನಿಕ ಸಾರ್ವಜನಿಕ ಡಿಜಿಟಲ್ ಮೂಲಸೌಕರ್ಯ ರೂಪಿಸುವ ಮೂಲಕ ಬಲ ತುಂಬಲಾಗುತ್ತಿದೆ. ಐನೂರ ಇಪ್ಪತ್ತಮೂರು ಸಾವಿರ ಕಿಲೋಮೀಟರ್ ಫೈಬರ್ ಜಾಲ ಈಗಾಗಲೇ ನಮ್ಮ ನೂರ ಐವತ್ತಾರು ಗ್ರಾಮ ಪಂಚಾಯತ್ ಗಳಿಗೆ ಸಂಪರ್ಕ ಬೆಸೆದಿದೆ. ಬರಲಿರುವ ದಿನಗಳಲ್ಲಿ ಇನ್ನಷ್ಟು ಗ್ರಾಮ ಪಂಚಾಯತ್ ಗಳಿಗೆ ಸಂಪರ್ಕ ಒದಗಿಸಲಾಗುವುದು. ದೇಶಾದ್ಯಂತ ಸಾರ್ವಜನಿಕ ವೈ-ಫೈ ಜಾಲ ವಿಸ್ತರಣೆಯಾಗುತ್ತಿದೆ. ಅದೇ ರೀತಿ ಭಾರತವು ಅನ್ವೇಷಣೆಯ ಸಂಸ್ಕೃತಿಯನ್ನು ಪೋಷಿಸುವ ನಿಟ್ಟಿನಲ್ಲಿ ಕಾರ್ಯನಿರತವಾಗಿದೆ. ಏಳು ಸಾವಿರದ ಐನೂರು ಶಾಲೆಗಳು ಅಟಲ್ ಅನ್ವೇಷಣಾ ಆಂದೋಲನದಡಿಯಲ್ಲಿ ಅತ್ಯಾಧುನಿಕ ಅನ್ವೇಷಣಾ ಪ್ರಯೋಗಾಲಯಗಳನ್ನು ಹೊಂದಿವೆ. ನಮ್ಮ ವಿದ್ಯಾರ್ಥಿಗಳು ವಿದೇಶಗಳಲ್ಲಿರುವ ವಿದ್ಯಾರ್ಥಿಗಳನ್ನೂ ಒಳಗೊಂಡ ಹಲವಾರು ಹ್ಯಾಕಥಾನ್ ಗಳಲ್ಲಿ ಭಾಗವಹಿಸುತ್ತಿದ್ದಾರೆ. ಇದು ಅವರಿಗೆ ಅತ್ಯಂತ ಅವಶ್ಯವಾದ ಜಾಗತಿಕ ಪ್ರತಿಭೆ ಮತ್ತು ಉತ್ತಮ ಪದ್ಧತಿಗಳ ಬಗ್ಗೆ ಅರಿವು ಮೂಡಿಸುತ್ತಿದೆ.

ಸ್ನೇಹಿತರೇ,

ಕಳೆದ ಕೆಲವು ವರ್ಷಗಳಲ್ಲಿ ವಿವಿಧ ವಲಯಗಳಲ್ಲಿ ಬಹಳಷ್ಟು ಅಸ್ತವ್ಯಸ್ತ ಸ್ಥಿತಿಯನ್ನು ನಾವು ಸಾಕ್ಷೀಕರಿಸಿದ್ದೇವೆ. ಇದರಲ್ಲಿ ಬಹುಪಾಲು ಈಗಲೂ ಇದೆ. ಆದಾಗ್ಯೂ ಅಸ್ತವ್ಯಸ್ತ ಸ್ಥಿತಿ ಎಂದರೆ ಕಂಗೆಡಬೇಕಾಗಿಲ್ಲ. ಅದಕ್ಕೆ ಬದಲು ನಾವು ದುರಸ್ಥಿ ಮತ್ತು ಸಿದ್ಧತೆ ಎಂಬ ಎರಡು ಸ್ಥಂಭಗಳ ಮೇಲೆ ನಮ್ಮ ಗಮನ ನೆಟ್ಟರಾಯಿತು. ಕಳೆದ ವರ್ಷ ಈ ಸಮಯಕ್ಕೆ ವಿಶ್ವವು ಇನ್ನೂ ಲಸಿಕೆಯನ್ನು ಹುಡುಕುತ್ತಿತ್ತು. ಇಂದು ನಮ್ಮ ಬಳಿ ಕೆಲವು ಇವೆ. ಅದೇ ರೀತಿ ನಾವು ಆರೋಗ್ಯ ಮೂಲಸೌಕರ್ಯ ಮತ್ತು ನಮ್ಮ ಆರ್ಥಿಕತೆಗಳನ್ನು ದುರಸ್ತಿ ಮಾಡುವುದನ್ನು ಮುಂದುವರಿಸಿಕೊಂಡು ಹೋಗಬೇಕಾಗಿದೆ. ಭಾರತದಲ್ಲಿ ನಾವು ವಿವಿಧ ರಂಗಗಳಲ್ಲಿ ಭಾರೀ ಪ್ರಮಾಣದ ಸುಧಾರಣೆಗಳನ್ನು ಜಾರಿಗೆ ತಂದಿದ್ದೇವೆ. ಗಣಿಗಾರಿಕೆ, ಬಾಹ್ಯಾಕಾಶ, ಬ್ಯಾಂಕಿಂಗ್, ಅಣು ವಿದ್ಯುತ್, ಮತ್ತು ಇತರ ಹಲವಾರು ಕ್ಷೇತ್ರಗಳಲ್ಲಿ ಸುಧಾರಣೆಗಳಾಗಿವೆ. ಇದು ಭಾರತವು ಒಂದು ದೇಶವಾಗಿ ಜಾಗತಿಕ ಸಾಂಕ್ರಾಮಿಕದ ನಡುವೆಯೂ ಹೊಂದಿಕೊಳ್ಳಬಲ್ಲ  ಮತ್ತು ಚುರುಕಿನ ದೇಶ ಎಂಬುದನ್ನು ತೋರಿಸುತ್ತದೆ. ಮತ್ತು ನಾನು ಸಿದ್ಧತೆ ಮಾಡಿಕೊಳ್ಳಿ ಎಂದು ಹೇಳುವಾಗ ಅದರ ಅರ್ಥ ನಮ್ಮ ಭೂಗ್ರಹಕ್ಕೆ ಇನ್ನೊಂದು ಜಾಗತಿಕ ಸಾಂಕ್ರಾಮಿಕದ ವಿರುದ್ಧ  ರಕ್ಷಾಕವಚ ತೊಡಿಸಬೇಕು ಎಂಬುದಾಗಿದೆ. ಪರಿಸರವನ್ನು ಹಾಳುಗೆಡವುದನ್ನು ತಡೆಯುವ ಸುಸ್ಥಿರ ಜೀವನ ಶೈಲಿಯತ್ತ ನಾವು ಗಮನ ಕೊಟ್ಟಿದ್ದೇವೆ. ಇನ್ನಷ್ಟು ಸಂಶೋಧನೆ ಮತು ಅನ್ವೇಷಣೆಯಲ್ಲಿಯೂ ಸಹಕಾರವನ್ನು ವಿಸ್ತರಿಸಿ ಬಲಪಡಿಸುವುದಕ್ಕೂ ಆದ್ಯತೆ ನೀಡುತ್ತೇವೆ.

ಸ್ನೇಹಿತರೇ,

ನಮ್ಮ ಭೂಗ್ರಹ ಎದುರಿಸುತ್ತಿರುವ ಸವಾಲುಗಳನ್ನು ಸಾಮೂಹಿಕ ಸ್ಫೂರ್ತಿ ಮತ್ತು ಮಾನವ ಕೇಂದ್ರಿತ ಧೋರಣೆಯ ನಿವಾರಿಸಬಹುದು. ಇದಕ್ಕಾಗಿ ನವೋದ್ಯಮ ಸಮುದಾಯಗಳು ಮುಂಚೂಣಿ ನಾಯಕತ್ವ ವಹಿಸಬೇಕು ಎಂದು ನಾನು ಕೋರುತ್ತೇನೆ. ನವೋದ್ಯಮದಲ್ಲಿ ಯುವಜನತೆಯ ಪ್ರಾಬಲ್ಯವಿದೆ. ಈ ಜನರು ಭೂತಕಾಲದ ಹೊರೆಯಿಂದ ಮುಕ್ತರು. ಅವರು ಜಾಗತಿಕ ಪರಿವರ್ತನೆಯ ಶಕ್ತಿಯನ್ನು ನಿಭಾಯಿಸಲು ಅತ್ಯಂತ ಸಮರ್ಥರು. ನಮ್ಮ ನವೋದ್ಯಮಗಳು ಆರೋಗ್ಯ ರಕ್ಷಣೆ, ತ್ಯಾಜ್ಯ ಮರುಬಳಕೆ ಸಹಿತ ಪರಿಸರ ಸ್ನೇಹಿ ತಂತ್ರಜ್ಞಾನ, ಕೃಷಿ, ಹೊಸ ಕಾಲದ ಕಲಿಕಾ ಸಲಕರಣೆಗಳು ಕ್ಷೇತ್ರಗಳಲ್ಲಿ ಅನ್ವೇಷಣೆಯನ್ನು ಕೈಗೊಳ್ಳಬೇಕು.

ಸ್ನೇಹಿತರೇ,

ಮುಕ್ತ ಸಮಾಜ ಮತ್ತು ಆರ್ಥಿಕತೆಯಲ್ಲಿ, ಅಂತಾರಾಷ್ಟ್ರೀಯ ವ್ಯವಸ್ಥೆಗೆ ಬದ್ಧವಾದ ರಾಷ್ಟ್ರವಾಗಿ ನಮಗೆ ಸಹಭಾಗಿತ್ವ ಮುಖ್ಯ ವಿಷಯವಾಗುತ್ತದೆ. ಫ್ರಾನ್ಸ್ ಮತ್ತು ಯುರೋಪ್ ಗಳು ನಮ್ಮ ಪ್ರಮುಖ ಸಹಭಾಗಿಗಳಲ್ಲಿ ಸೇರಿದ್ದಾರೆ. ಅಧ್ಯಕ್ಷ ಮ್ಯಾಕ್ರಾನ್ ಜೊತೆಗಿನ ನನ್ನ ಸಂಭಾಷಣೆಯಲ್ಲಿ,  ಮೇ ತಿಂಗಳಲ್ಲಿ ಪೋರ್ಟೋದಲ್ಲಿ ನಡೆದ ಇ.ಯು. ನಾಯಕರ ಜೊತೆಗಿನ ನನ್ನ ಶೃಂಗದಲ್ಲಿ ಡಿಜಿಟಲ್ ಸಹಭಾಗಿತ್ವ, ನವೋದ್ಯಮಗಳಿಂದ ಹಿಡಿದು ಕ್ವಾಂಟಂ ಕಂಪ್ಯೂಟಿಂಗ್ ವರೆಗಿನ ಕ್ಷೇತ್ರಗಳು  ಪ್ರಮುಖ ಆದ್ಯತೆಯ ಕ್ಷೇತ್ರಗಳಾಗಿದ್ದವು.  ನವ ತಂತ್ರಜ್ಞಾನ  ಕ್ಷೇತ್ರದಲ್ಲಿಯ ನಾಯಕತ್ವವು ಆರ್ಥಿಕ ಶಕ್ತಿ, ಉದ್ಯೋಗ ಮತ್ತು ಸಮೃದ್ಧಿಯನ್ನು ತರುತ್ತದೆ ಎಂಬುದನ್ನು ಇತಿಹಾಸ ತೋರಿಸಿಕೊಟ್ಟಿದೆ. ಆದರೆ, ನಮ್ಮ ಸಹಭಾಗಿತ್ವ ವಿಸ್ತಾರವಾದ ಉದ್ದೇಶವನ್ನು ಈಡೇರಿಸುವಂತಿರಬೇಕು ಮತ್ತು ಮಾನವತೆಗೆ ಸೇವೆ ಸಲ್ಲಿಸುವಂತಿರಬೇಕು. ಈ ಜಾಗತಿಕ ಸಾಂಕ್ರಾಮಿಕವು ನಮ್ಮ ಪುನಶ್ಚೇತನಕ್ಕೆ ಪರೀಕ್ಷೆ ಮಾತ್ರವಲ್ಲ ನಮ್ಮ ಕಲ್ಪನಾ ಶಕ್ತಿಗೂ ಪರೀಕ್ಷೆ. ಇದು ಹೆಚ್ಚು ಒಳಗೊಳ್ಳುವಂತಹ, ಪೋಷಣೆ ಮಾಡುವಂತಹ ಮತ್ತು ಎಲ್ಲರಿಗೂ ಸುಸ್ಥಿರ ಭವಿಷ್ಯವನ್ನು ನಿರ್ಮಾಣ ಮಾಡುವ ಅವಕಾಶ ಕೂಡಾ. ಆಧ್ಯಕ್ಷರಾದ ಮ್ಯಾಕ್ರಾನ್ ಅವರಂತೆ ನಾನು ಕೂಡಾ ವಿಜ್ಞಾನದ ಶಕ್ತಿಯಲ್ಲಿ ನಂಬಿಕೆ ಇಟ್ಟಿದ್ದೇನೆ ಮತ್ತು ಅನ್ವೇಷಣೆಯ ಸಾಧ್ಯತೆಗಳು ಆ ಭವಿಷ್ಯದ ಸ್ಥಿತಿಯನ್ನು ಸಾಧಿಸಲು ಸಹಾಯ ಮಾಡಬಹುದು ಎಂದೂ ನಂಬಿದ್ದೇನೆ.