Text of PM's address at the Indian Community Reception at Dubai

Published By : Admin | August 17, 2015 | 23:28 IST
Today I am witnessing 'mini-India' in Dubai: PM
People from all over the world have come here to Dubai. Magnetic power of this place has drawn the world here: PM
There are around 700 flights between India and the UAE but it took 34 years for a PM to visit this Nation: PM
PM Narendra Modi urges audience to give a standing ovation to the Crown Prince of Abu Dhabi
India has been a victim of terrorism for 40 years. Innocent people have lost their lives: PM
Good Taliban, Bad Taliban...Good Terror, Bad Terror...this won't work. A decision has to be taken are you with terrorism or with humanity: PM
Our effort has been to take India to new heights of progress and maintain a strong friendship with our neighbouring countries: PM

दुबई की धरती पर मैं आज मेरे सामने लघु भारत के दर्शन कर रहा हूं। हिन्‍दुस्‍तान के कोने-कोने से आए हुए मेरे प्यारे देशवासियों को मैं नमन करता हूं। आप वे लोग हैं, जिन्होंने परिश्रम की पराकाष्ठा करके..कोई दस साल से, कोई पंद्रह साल से, कोई बीस साल से, कोई तीस साल से, रोजी रोटी कमा रहे हैं, लेकिन साथ-साथ भारत के गौरव को भी बढ़ाने में कभी पीछे नहीं रहे। आपके व्यवहार के कारण आपके आचरण के कारण हमेशा भारत गौरव अनुभव करता रहा है। भारत में अगर अधिक बारिश भी हो जाए तो दुबई में बैठा हुआ मेरा हिंदुस्तानी छाता खोल देता है। भारत में कहीं अगर कोई प्राकृतिक आपदा आ जाए, दुबई में बैठा हुआ मेरा देशवासी चैन से सो नहीं सकता।

जब अटल बिहारी देश के प्रधानमंत्री थे, भारत ने न्यूक्लियर टेस्ट किया था, दुनिया चौंक गई थी, कुछ लोग गुस्से में आए थे और रातों-रात भारत पर sanction लगा दिए गए थे। भारत को आर्थिक मुसीबतों में धकेल दिया गया था.. और तब वाजपेयी जी ने विश्व भर में फैले हुए भारत वासियों को आह्वान किया था, देश की मदद करने के लिए। आज मैं गर्व से कह सकता हूं कि वाजपेयी जी के उस आह्वान पर, हिन्‍दुस्‍तान की तिजोरी भरने में Gulf Countries में जो मजदूरी का काम करते थे, उन मेरे भारतवासियों का सबसे बड़ा योगदान था। इस अर्थ में यहां बसा हुआ हर भारतवासी, एक प्रकार से हिन्‍दुस्‍तान के हर कोने से जुड़ा हुआ है। पिछली बार जब देश लोकसभा के चुनाव के लिए व्यस्त था, चुनाव नतीजे आ रहे थे, हिन्‍दुस्‍तान ही नहीं, पूरा दुबई नाच रहा था। ये प्यार भारत माता के कल्याण के लिए..मां भारती फिर से एक बार सामर्थ्यवान बने, सशक्त बने, सम्‍पन्‍न बने, समृद्ध बने, ये सपना संजोकर के दिन-रात एक करने वाले आप लोग मेरे सामने बैठे हैं।

भाइयों-बहनों, आज..यहां तो हिन्‍दुस्‍तान के हर कोने से आए हुए मेरे भाई-बहन बैठे हैं और दुबई, वो सिर्फ लघु भारत ही रहा है ऐसा नहीं है, अब तो दुबई एक लघु विश्व भी बन गया है। दुनिया के सभी देशों के लोग, कम अधिक मात्रा में दुबई में रह रहे हैं। ठंडे से ठंडे प्रदेश के लोग भी इस 40-45 डिग्री तापमान में रहना पसंद करते हैं। क्या ताकत दिखाई होगी इस देश ने, क्या magnetic power पैदा किया होगा विकास के माध्यम से कि पूरा विश्व यहां आकर्षित हो जाता है।

हिन्‍दुस्‍तान के हर कोने से आए हुए सभी देशवासियों ने अभी दो दिन पूर्व 15 अगस्त, भारत की आज़ादी का पर्व मनाया है। मैं भी आप सब को आज़ादी के पावन पर्व की अनेक-अनेक शुभकामनाएं देता हूं।

यहां केरल से आया हुआ भी समुदाय बहुत बड़ी मात्रा में है। मैं केरल का उल्लेख विशेष रूप से इसलिए कर रहा हूं क्योंकि आज केरल का नववर्ष है। सहोदरकअ एंटे रूदयम निरन्या नववलसरा आशम सफलअ। नमस्कारम्।



हर हफ्ते हिन्‍दुस्‍तान से 700 से भी ज्यादा फ्लाइट यहां आती हैं। दुनिया में किसी एक देश के साथ इतनी बड़ी मात्रा में हवाई आवागमन अगर कहीं है, तो इस इलाके से है। हर हफ्ते 700 से भी अधिक फ्लाइट आती हैं, लेकिन भारत के प्रधानमंत्री को यहां आने में 34 साल लग गए। कभी-कभी मुझे लगता है कि बहुत सारे ऐसे अच्छे अच्छे काम हैं, जो पूर्व के लोग मेरे लिए बाकी छोड़ करके चले गए हैं और इसलिए बहुत सारे बाकी रहे अच्छे काम करने का मुझे भाग्य मिला है। उन अच्छे कामों में से महत्वपूर्ण अच्छा काम मेरा अबुधाबी आना, मेरा दुबई आना है। जिस प्रकार से..ये मेरी पहली मुलाकात है। इसके पहले कभी मैं धरती के इस भू-भाग पर नहीं आया। ..और 34 साल में प्रधानमंत्री के रूप में कोई आएं, तो किसी को भी, किसी को भी नाराज़गी व्यक्त करने का हक बनता है। हक बनता है कि नहीं बनता है? बनता है कि नहीं बनता है? लेकिन अबुधाबी में His Highness Crown Prince ने, दुबई में His Highness अल मख्तूम जी ने नाराज़गी नहीं दिखाई, इतने प्यार की वर्षा की, इतने प्यार की वर्षा की, मैं उनके इस प्यार को कभी भूल नहीं पाउंगा। जो स्वागत किया, जो सम्मान किया.. His Highness Crown Prince अपने सभी पांचों भाइयों के साथ एयरपोर्ट पर लेने के लिए आए। मेरे प्यारे देशवासियों, ये प्यार, ये सम्मान किसी व्यक्ति को नहीं है। ये सवा सौ करोड़ देशवासियों का सम्मान है। ये भारत की बदली हुई तस्वीर का सम्मान है। भारत जिस प्रकार से दुनिया में अपनी जगह बना रहा है, उस बदले हुए हालात का सम्मान है। मैं His Highness Crown Prince का, अमीरात का, दुबई के Rulers का हृदयपूर्वक बहुत-बहुत आभार व्यक्त करता हूं।

एक तरफ संप्रदाय के नाम पर आतंकवाद के खेल खेले जाते हैं। निर्दोषों को मौत के घाट उतार दिया जाता है। पूर्णतया: चिंता का माहौल हो, ऐसे समय अबुधाबी के His Highness Crown Prince भारतीय समुदाय के लिए मंदिर बनाने के लिए जगह देने का निर्णय करते हैं। जो लोग अबुधाबी से परिचित हैं, उन्हें पता है कि निर्णय कितना बड़ा है, ये सौगात कितनी बड़ी है। आप मुझे बताइए, सभी देशवासियों को उनका विशेष रूप से अभिनंदन करना चाहिए कि नहीं करना चाहिए। मैं आप सभी से आग्रह करता हूं कि तालियों की गूंज से Crown Prince का अभिनंदन कीजिए। Crown Prince को Standing Ovation दीजिए। उनका अभिनंदन कीजिए। मैं हृदय से उनका अभिनंदन करता हूं।

भाइयों-बहनों, दो दिन की मेरी यात्रा में जिस प्रकार का विश्वास का माहौल बना, आखिरकार अंतर्राष्ट्रीय संबंधों का आधार..आपकी भाषा क्या है, आप कितने articulate हैं, आप diplomatic relation में कितने बढि़या ढंग से मेलजोल करते हैं..उससे भी ज्यादा महत्व होता है, एक दूसरे पर भरोसे का। अंतर्राष्ट्रीय संबंधों में ये भरोसा, ये विश्वास, एक बहुत बड़ी पूंजी होता है ..और आज मैं चंद घंटों की मेरी मुलाकात के बाद कह सकता हूं कि भारत, अबुधाबी, दुबई, अमीरात.. जो विश्वास का सेतू बना है, वो अभूतपूर्व है और आने वाली पीढि़यों तक काम आए, ऐसा foundation तैयार हुआ है।

आज मुझे खुशी हुई कि जब आज भारत और अमीरात के बीच जो Joint Statement आया है, आपको भी खुशी होगी जान करके.. Crown Prince ने हिन्‍दुस्‍तान में साढ़े चार लाख करोड़ रूपए का निवेश करने का संकल्प दोहराया है। साढ़े चार लाख करोड़ रूपया! कितना? कितना? कितना? भाइयों-बहनों, अगर आप पर किसी का भरोसा न हो, तो कोई 10 रूपया भी आप पर लगाने के लिए तैयार होगा क्या? ये भारत की साख बनी है। आज भारत का बदला हुआ रूप विश्‍व के सामने अपनी स्वीकृति बनाता आगे चल रहा है।

आज अमीरात और भारत की तरफ से आतंकवाद के खिलाफ, दो टूक शब्दों में, बिना लाग लपेट और किसी की परवाह किए बिना साफ-साफ शब्‍दों में संकेत दे दिए गए हैं। आतंकवाद के खिलाफ एकता का स्वर आज इस धरती से उठा है। मैं इसे बहुत अहम मानता हूं और इतना ही नहीं..समझने वाले समझ जाएंगे, अक्लमंद को इशारा काफी। आतंकवाद में लिप्त लोगों को सजा होनी चाहिए, ये स्पष्ट शब्दों में संकेत यहां से निकला है। मैं आज यहां के शासकों का इसलिए भी आभारी हूं कि उन्होंने..United Nations जब अपने 70 साल मनाने जा रहा है, तो यहां से कहा गया है और भारत की इस बात का खुला समर्थन किया गया है कि भारत को United Nations की Security Council की Permanent Membership मिलनी चाहिए। मैं आभारी हूं उनका।

इससे भी आगे एक बहुत-बहुत महत्वपूर्ण बात पर..आज भारत की लंबे अर्से से एक position है। उसका आज His Highness Crown Prince ने खुले आम समर्थन घोषित किया। भाइयों-बहनों, कई वर्षों से United Nations में एक Resolution लटका पड़ा है। आपको भी बड़ी हैरानी होगी..और दो-पांच साल से नहीं, कई वर्षों से लटका पड़ा है। क्या.. ? United Nations, जो कि प्रथम और द्वितीय विश्वयुद्ध से पीडि़त मानव समुदाय को मरहम लगाने के लिए..आगे मानव जाति को ऐसे संकट झेलने की नौबत न आए, इसके लिए precaution लेने के लिए, व्यवस्थाएं विकसित करने के लिए 70 साल पहले United Nations का जन्म हुआ। लेकिन वह United Nations आतंकवाद की अभी तक परिभाषा नहीं कर पाया। आतंकवादी किसको कहें, आतंकवाद किसको कहें, आतंकवाद को समर्थन करने वाले कौन माना जाए, किस देश को आतंकवाद का समर्थक माना जाएं, किस देश को समर्थक न माना जाए। इसलिए Comprehensive Convention on International Terrorism..इसका निर्णय करने का प्रस्ताव लंबे अर्से से United Nations में लंबित पड़ा हुआ है। भारत ने position ली हैं सालों से किए एक प्रस्ताव पर चर्चा हो जाए, निर्णय होना चाहिए और ये टाला जा रहा है। आज मुझे खुशी इस बात की है कि His Highness Crown Prince ने भारत की स्थिति का समर्थन का किया है, भारत की position का समर्थन किया है और आतंकवाद के खिलाफ लड़ने के संबंध में आपने स्पष्ट संकेत दे दिए हैं। न सिर्फ.. साढ़े चार लाख करोड़ का पूंजी निवेश की बात नहीं है ये। ये एक निश्चित दिशा में कंधे से कंधा मिलाकर चलने का एक प्रकार का संकेत, इस Joint Statement में है। मैं इसे बहुत महत्वपूर्ण मानता हूं।

भाइयों-बहनों आप तो सालों से बाहर हैं। आज भारत का नाम सुनते ही आपके सामने खड़े हुए व्यक्ति की आंखों में चमक आती है कि नहीं आती है? आपका माथा गर्व से ऊंचा होता है कि नहीं होता है, आपका सीना गर्व से तन जाता है कि नहीं तन जाता है? एक गर्व महसूस करते हैं कि नहीं करते हैं? भाइयों बहनों आज दुनिया का हिन्‍दुस्‍तान की तरफ देखने का नज़रिया पूरी तरह बदल गया है और उसका एक कारण..क्या कारण है?.. क्या कारण है, ये बदलाव आया है? मोदी के कारण नहीं, ये जो बदलाव आया है, सवा सौ करोड़ देशवासियों की संकल्प शक्ति के कारण आया है। सवा सौ करोड़ देशवासियों ने 2014 मई महीने में 30 साल के बाद पूर्ण बहुमत वाली सरकार चुनी। आज दुनिया का कोई भी महापुरूष, दुनिया का कोई भी राजनेता मोदी से जब हाथ मिलाता है न, तब उसे मोदी नहीं दिखता है। उसे सवा सौ करोड़ हिंदुस्तानी दिखाई देते हैं। दुनिया की तेज़ गति से बढ़ रही economy दिखाई दे रही है।

भाइयों-बहनों, पिछले दिनों, IMF हो, World Bank हो, Moody हो, विश्व की जितनी भी आर्थिक पैमाने पर Rating Institutions हैं, सब किसी ने एक स्वर से कहा है कि आज दुनिया में बड़े देशों में सबसे तेज गति से अगर आर्थिक सुधार हो रहा है, तेज गति से growth हो रहा है तो उस देश का नाम है.. (दर्शक दीर्घा से भारत-भारत के नारे). मुझे बताइए सीना तन जाएगा कि नहीं तन जाएगा? माथा ऊंचा हो जाएगा कि नहीं होगा कि नहीं होगा। एक साल के भीतर-भीतर ये बदलाव आया है। भाइयों बहनों, हमने मेक इन इंडिया.. कुछ महीने पहले इस अभियान का प्रारंभ किया। दुनिया को मैं कह रहा हूं- मेक इन इंडिया। आइए, हिन्‍दुस्‍तान एक ऐसा देश है जो संभावनाओं से भरा हुआ है, Opportunities ही Opportunities हैं। ये एक ऐसा भाग्‍यशाली देश है, जिसके पास 65 प्रतिशत जनसंख्या 35 साल से कम उम्र की है। भारत एक नौजवान देश है। आज यहां जवानी लबालब भरी पड़ी है और विश्व वहां आए, हमारे युवकों की शक्ति जुटाए, उत्पादन करे, दुनिया के बाज़ार में जाकर बेचे। और आज..ये कुछ ही महीनों का मामला है.. Foreign Direct Investment..FDI में 48 प्रतिशत वृद्धि हुई है, 48%। भाइयों-बहनों विकास को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए Ease of doing Business का माध्‍यम हो। देश की युवा शक्‍ति में Skill Development का अभियान हो। आधुनिक भारत के निर्माण के लिए डिजिटल इंडिया का सपना साकार करने के लिए दिन-रात पुरुषार्थ चलता हो। तो विश्‍व का आना बहुत स्‍वाभाविक है मेरे भाइयों और बहनों, बहुत स्‍वाभाविक है।

भाइयों-बहनों, आज दुनिया जिस आतंकवाद के नाम सुनते ही कांप उठती हैं, एक नफरत पैदा होती है। मैं दुनिया को कहता हूं हम हिन्‍दुस्‍तान के लोग 40-40 साल से ये आतंकवाद के शिकार हुए हैं। हमारे निर्दोष लोग आतंकवादियों की गोलियों से भून दिए गए हैं, मौत के घाट उतार दिए गए हैं और जब कभी मैं विश्‍व के लोगों के साथ आज से 25-30 साल पहले कभी मुझे बात करने का अवसर मिलता था, तो वे आतंकवाद समझने की उनकी क्षमता ही नहीं थी। कभी मैं आतंकवाद की बात करता था तो वे मुझे कहते थे ये तो आपका Policing का problem है Law and Order का problem है। अब उनको समझ आ गया है कि आतंकवाद का कितना भयंकर रूप होता है। आतंकवाद की कोई सीमाएं नहीं होती है, वो पता नहीं कब किस सीमा पर जाकर आ धमकेगा। आज अभी मैं यहां पहुंच रहा था, मैंने सुना बैंकॉक के अंदर आज एक बम धमाका हुआ, निर्दोष लोगों को मार दिया गया। भारत तो लगातार इन हरकतों को झेलता रहा है और विश्‍व समुदाय जब तक आतंकवाद की मानसिकता वाले देशों को, आतंकवाद को, उसको समर्थन करने वालों को एक ओर, और मानवता में विश्‍वास करने वाले दूसरी ओर, और मानवतावाद में विश्‍वास करने वाले दुनिया के देश एक होकर के आतंकवाद के खिलाफ लड़ने का वक्‍त आ चुका है।

Good Taliban-Bad Taliban, Good Terrorism- Bad Terrorism ये अब चलने वाला नहीं है। हर किसी को तय करना पड़ेगा कि फैसला करो कि आप आतंकवाद के साथ हो या मानवता के साथ हो, निर्णय करो। भारत को तो आज भी आए दिन इन नापाक हरकतों का शिकार होना पड़ता है। हम समस्‍याओं का समाधान खोजने की दिशा में लगातार कोशिश कर रहे हैं। यहां बहुत कम लोगों को पता होगा कि भारत की आजादी के पहले से नागालैंड में अतिवाद, insurgency इस समस्‍या से नागालैंड जूझता रहा और उसके कारण भारत का पूरा ये पूर्वी हिस्‍सा, नॉर्थ-ईस्‍ट, आए दिन हिंसा का शिकार होता था और धीरे-धीरे वो बीमारी इतनी फैलती गई कि अन्‍य राज्‍यों में भी अलग-अलग नाम से, अलग-अलग अतिवादी, आतंकवादी गुट बनते चले गए। आजादी के भी पहले से चल रहा था।

आज मैं बहुत संतोष के साथ मेरे देशवासियों, आपको कहना चाहता हूं कि अभी एक महीने पहले नागालैंड के इन गुटों के साथ, जो कभी हिंसा में विश्‍वास करते थे, जो शस्‍त्रों को लेकर के गतिविधि चलाते थे। उनसे जो बातचीत चल रही थी, वो सफलतापूर्वक आगे बढ़ी, निर्णय हुआ, मुख्‍य धारा में आने का निर्णय हुआ। 60-70 साल के बाद ये संभव हुआ। मैं नागालैंड की ये घटना का जिक्र इसलिए करना चाहता हूं कि हिंसा के राह पर चले हुए भारत के नौजवानों को और विश्‍व के नौजवानों को मैं एक उदाहरण के रूप में कहना चाहता हूं, समस्‍या कितनी भी गंभीर क्‍यों न हो, आखिर तो बातचीत से ही रास्‍ता निकलता है। कोई 10 साल लड़ाई लड़ने के बाद बात करें, कोई 20 साल लड़ाई लड़ने के बाद करें, कोई 40 साल लड़ाई लड़ने के बाद बात करें, लेकिन आखिर में तो बात ही होती है और टेबल पर ही फैसले होते हैं और इसलिए विश्‍व भर से इस गलत रास्‍ते पर चल पड़ लोग बम-बंदूक के भरोसे, अपने सपनों को साकार करने के रास्‍ते पर चले हुए लोग। ये रास्‍ता कभी आपका भला नहीं करेगा। ये रास्‍ता कभी किसी और का भला नहीं करेगा। ये रास्‍ता कभी मानवता का भला नहीं करेगा। ये रास्‍ता इतिहास को बेदाग नहीं रहने देगा। ये पूरे इतिहास को कलंकित कर देगा, ये पूरे इतिहास को दागदार बना देगा और इसलिए हिंसा का मार्ग छोड़कर के मुख्‍यधारा में जाना, ये आज समय की मांग है।

मेरे प्‍यारे भाइयों-बहनों, बांग्‍लादेश 1947 में भारत का विभाजन हुआ, 1947 में। तब से पूर्व पाकिस्‍तान, पश्‍चिम पाकिस्‍तान थे उस समय। पूर्वी पाकिस्‍तान जो आज बांग्‍लादेश बना, भारत और उनके बीच सीमा का विवाद चल रहा था। तनाव का कारण बना हुआ था। आशंकाओं का कारण बना हुआ था। घुसपैठ के लिए एक सुविधाजनक स्‍थिति बनी हुई थी। आप सब के आशीर्वाद से हिन्‍दुस्‍तान ने बीड़ा उठाया, सबने मिलकर के बीड़ा उठाया। इस समस्‍या का समाधान करना है, बातचीत से करना है। मैं पिछले सितंबर में बांग्‍लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना जी से मिला था और मैंने उनको वादा किया था कि मुझ पर भरोसा कीजिए और मुझे थोड़ा समय दीजिए। उन्‍होंने कहा कि मेरे पास भरोसा रखने के सिवाए है भी क्‍या! लेकिन आज, आज मैं मेरे प्‍यारे देशवासियों आपके सामने सर झुकाकर के कहना चाहता हूं कि आजादी से लटका हुआ ये सवाल 1 अगस्‍त को समाप्‍त कर दिया गया है। सीमा निर्धारित हो गई। जिनको बांग्‍लादेश जाना था, बांग्‍लादेश चले गए, जिनको भारत आना था भारत आ गए। हम लोग तो 15 अगस्‍त, 1947 को आजाद हो गए थे। भारत के नागरिक के नाते गौरवगान करने लगे थे। लेकिन ये हमारे भाई-बहन अभी 1 अगस्‍त, 2015 को भारत की भूमि पर आजादी का स्‍वाद लेने का उन्‍हें सौभाग्‍यमान मिला है। भारत की संसद में सर्वसम्‍मति से सभी राजनैतिक दलों ने साथ दिया और सर्वसम्‍मति से फैसला हुआ, बातचीत के माध्‍यम से फैसला हुआ।

ये छोटी-मोटी उपलब्‍धि नहीं है मेरे भाइयों-बहनों। और मैं, औरों को भी हमेशा कहता हूं, अड़ोस-पड़ोस के देशों को भी कहता रहता हूं। जैसे हिंसा के रास्‍ते पर गए हुए लोगों को भी कभी न कभार बातचीत के रास्‍ते पर आना पड़ता है। वैसे अड़ोस-पड़ोस में भी समस्‍याओं का समाधान बातचीत से ही निकलता है।

अंतर्राष्‍ट्रीय संबंधों में आज भारत एक महत्‍वपूर्ण भूमिका अदा कर रहा है। मानवता के अधिष्‍ठान पर कर रहा है। जब नेपाल में भूकंप आया चंद घंटों में, ऐसा नहीं है कि भई ज़रा पूछो तो क्‍या हुआ है? जरा जानकारी लो क्‍या हुआ है? ऐसा करो अफसरों का delegation भेजो, देखो ज़रा क्‍या मुसीबत आई है? ऐसा करो भई कोई अपने रिश्‍तेदार वहां हो तो पूछो भई हुआ क्‍या है? ऐसा इंतजार नहीं किया? आज दिल्‍ली में ऐसी सरकार है, जो हर पल नज़र आती है, हर जगह पर नज़र आती है और चंद घंटों में, चंद घंटों में, भारत से जो भी हो सकता था, ये मानवता का काम था। नेपाल के चरणों में जाकर के हमारे लोग बैठ गए और उनकी सेवा में लग गए और आज भी सेवा चालू है। नेपाल हमारा पड़ोसी है। वो दुखी हो और हम सुखी हों, ये कभी संभव नहीं होता है। उसके सुख में भी हमारा सुख समा हुआ है।

श्रीलंका, आपको हैरानी होगी। जब मैं नेपाल गया, प्रधानमंत्री बनने के बाद। नेपाल जाना है, तो 70 मिनट नहीं लगते। दिल्‍ली से नेपाल जाना हो, तो 70 मिनट नहीं लगते। लेकिन भारत के प्रधानमंत्री को नेपाल पहुंचने में 17 साल लग गए। फिर से हम गए, संबंधों को फिर से जोड़ा। अपनापन। आज नेपाल भारत पर भरोसा कर रहा है। भारत नेपाल का सुख-दु:ख का साथी बन रहा है। श्रीलंका, राजीव गांधी जब प्रधानमंत्री थे, उसके बाद कोई प्रधानमंत्री की stand alone visit नहीं हुई थी। कितने साल बीत गए। हमारा पड़ोसी है, आए दिन हमारे तमिलनाडु, केरल के मछुआरे और उनके मछुआरे आपस में भिड़ जाते हैं। लेकिन उधर कोई जाता नहीं था। हम गए, इतना ही नहीं। जाफना जहां 20-20 साल तक बम और बंदूक का ही कारोबार चलता था, उस जाफना में जाकर के उन दुखियारों के आंसू पोंछने का काम करने का सौभाग्‍य मुझे मिला। एक प्रधानमंत्री के रूप में जाफना जाने का सौभाग्‍य मुझे मिला।

हमारे पड़ोस में मालदीव, आइलैंड पर बसा हुआ देश, tourism की दृष्‍टि से काफी आगे बढ़ा है। अचानक एक दिन उनके यहां पानी के सारे संयंत्र खराब हो गए। पूरे देश के पास पीने का पानी नहीं था। आप कल्‍पना कर सकते हो, कोई देश के पास पीने का पानी न हो। कितना बड़ा गहरा संकट आया। मालदीव से हमें message आया कि ऐसी मुसीबत आई है। एक पल का इंतज़ार नहीं किया, भाइयों और बहनों। हवाई जहाज से पीने का पानी पहुंचाया मालदीव में। दूसरे दिन स्‍टीमर से पानी पहुंचाना शुरू कर दिया और जब तक उनकी वो मशीन चालू नहीं हुई, पानी की व्‍यवस्‍था दुबारा पुनर्जीवित नहीं हुई, हमने मालदीव को प्‍यासा नहीं रहने दिया।

अफगानिस्‍तान हमारा पड़ोसी है। अफगानिस्‍तान संकटों से गुजर रहा है। लंबे अरसे से आए दिन वो घाव झेलता चला जा रहा है। हर पल अफगानिस्‍तान को मरहम लगाने का काम हिन्‍दुस्‍तान करता आया है। अफगानिस्‍तान फिर से एक बार खड़ा हो जाए, क्‍योंकि हम सब बचपन से काबुलीवाला से तो बहुत परिचित हैं। जब काबुली वाले की बात करते हैं, तो हमें कितना अपनापन महसूस होता है। भाइयों-बहनों हमारी कोशिश रही है भारत को विकास की नई ऊचाइयों पर ले जाना। भारत में निरंतर विकास को आगे बढ़ाना और अपने अड़ोस-पड़ोस के देशों से दोस्‍ती बनाकर करके साथ और सहयोग लेकर करके आगे चल पड़ना।

SAARC देशों का समूह उसमें एक नया प्राण पूरने का प्रयास किया है, सफलतापूर्वक प्रयास किया है। वरना पहले SAARC देशों के मंच का उपयोग तू-तू मैं मैं के लिए होता था, कभी भारत को घेरने के लिए होता था। आज SAARC देशों के लोग, जितने साथ चल सकते हैं, उनको ले करके इन SAARC की इकाई का विकास की ऊंचाइयों पर ले जाने का सपना हमने देखा था। हमने घोषित किया है कि 2016 में हम आकाश में एक SAARC Satellite छोड़ेंगे जिसकी सेवाएं SAARC देशों में मुफ्त में देंगे, जो शिक्षा के काम आए , जो आरोग्‍य के लिए काम आये, जो किसानों को काम आये, जो मछुआरों के काम आये, सामान्‍य जन को काम आये। अभी हम बीच में सोच रहे थे कि SAARC देश Connectivity के लिए गंभीरता से सोचे और हम जानते हैं, आज विकास में Connectivity का महत्‍व बहुत है। आप समुद्री मार्ग से जुडि़ए या रेल मार्ग से जुडि़ए, या रोड मार्ग से जुडि़ए, जुड़ना जरूरी है। यूरोप के देशों को ये लाभ मिला हुआ है। एक देश से दूसरे देश चले जाओ पता तक नहीं चलता कि देश कब बदल गया। क्‍या ये SAARC देशों के बीच नहीं हो सकता है? हमने मिल करके सामूहिक निर्णय करने का प्रयास किया नेपाल में। लेकिन आप जानते हैं, कुछ लोगों को जरा तकलीफ होती है, लेकिन कुछ लोगों की तकलीफ के लिए क्‍या रुकना चाहिए? हमारे काम को क्‍या हमें रोक देना चाहिए? हमें अटक जाना चाहिए क्‍या? ठीक है आपकी मर्जी, आप वहां रह जाइये, हम तो चल पड़े भाई और हमने क्‍या किया। एक बहुत बड़ा अहम फैसला लिया है भाइयों और बहनों, इसका प्रभाव आने वाले दिनों में क्‍या होने वाला है, वो तो वक्‍त बताएगा। नेपाल, भूटान, भारत, बांग्‍लादेश, इन चार देशों ने एक नया इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर बना करके Connectivity का एक पूरा काम तय कर लिया, Agreement हो गया, ये आगे चल करके नॉर्थ-ईस्‍ट से जुड़ेगा। वहां से ये म्‍यांमार मार्ग से जुड़ेगा। वो इंडोनेशिया, थाइलैंड, पूरब, हिन्‍दुस्‍तान, पूरब की बीच की तरफ भारत को Connectivity की ताकत देगा एक नया भारत का बदला हुआ, संबंधों का नया विश्‍व खड़ा हो जाएगा।

भाइयों-बहनों, एक निश्चत समय के साथ भारत अपनी भूमिका भी अदा करें, भारत बड़े होने के अहंकार से नहीं, हर किसी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलना चाहता । विकास की नई ऊंचाईयों को पार करना चाहता। भारत में नौजवानों को रोजगार मिले, हमारे कृषि में Second Green Revolution हो, हमारा पूर्वी हिन्‍दुस्‍तान, चाहे पूर्वी उत्‍तर प्रदेश हो, चाहे बिहार हो, चाहे पश्चिम बंगाल हो, चाहे असम हो, चाहे नॉर्थ-ईस्‍ट हो, चाहे ओडि़शा हो, ये हमारा जो इलाका है, ये मानना पड़ेगा कि वहां विकास की ज्‍यादा जरूरत है। अगर वहां पर विकास हो गया और हिन्‍दुस्‍तान का पश्चिमी छोर और पूरब का छोर बराबर हो गये, तो भारत बहुत तेज गति से दौड़ने लग जाएगा और इसलिए भारत के इस पूर्वी छोर पर आर्थिक विकास का एक नया अभियान हमने चलाया है। Infrastructure खड़ा करने का एक नया अभियान चलाया है। Fertiliser के नये कारखाने शुरू कर रहे हैं। गैस की पाइप लाइन लगानी है। बिजली पहुंचानी है। आप मुझे बताइए आजादी के इतने सालों के बाद बिजली होनी चाहिए कि नहीं होनी चाहिए? बिजली मिलनी चाहिए या नहीं मिलनी चाहिए? क्‍या आज के युग में बिजली के बिना गुजारा संभव है? भाइयों-बहनों हमने सपना संजोया है। पांच साल के भीतर-भीतर हम देश के कोने-कोने में 24 घंटे बिजली मैंने देने के लिए फैसला किया। ये हम करके रहेंगे।

दुबई में रहने वाले मेरे प्‍यारे भाइयो-बहनों, हमने एक महत्‍वपूर्ण योजना घोषित की है । हमारे देश में लोगों को पहले Bank Accounts नहीं थे, हमने हर हिन्‍दुस्‍तानी का Bank Account खोल दिया, एक काम किया। भारत में हमारे देश के नागरिकों को इंश्‍योरंस नहीं है, बीमा नहीं है। उसके परिवार में कोई आपत्ति आ जाए, पीछे वालों को देखने की कोई व्‍यवस्‍था नहीं। हमने तीन योजनाएं लगाई हैं, एक प्रधानमंत्री बीमा सुरक्षा योजना, प्रधानमंत्री जीवन ज्‍योति योजना और इंश्‍योरेंस के लिए कितना पैसा देना है? एक स्‍कीम ऐसी है कि जिसमें एक महीने में सिर्फ एक रुपया देना है, 12 महीने में 12 रुपया। हमारे देश का गरीब से गरीब व्‍यक्ति भी दे सकता है या नहीं दे सकता है? मुझे बताइए दे सकता है या नहीं दे सकता है? गरीब से गरीब व्‍यक्ति एक रुपया महीने में दे सकता है या नहीं दे सकता है? महीने का 12 रुपया,.. साल भर का 12 रुपया, साल भर का 12 रुपया देगा, दो लाख रुपयों का सुरक्षा का बीमा मिलेगा। दूसरी योजना है जिसमें उसे और भी मददें मिलेंगी, वो है एक दिन का नब्‍बे पैसा, एक रुपया भी नहीं, एक दिन का एक रुपया भी नहीं, आज तो चाय भी एक रुपये में मिलती नहीं है। मैं जब चाय बेचता था तो एक रुपया भी नहीं मिलता था। लेकिन आज एक रुपये में चाय नहीं मिलती है। एक दिन का नब्‍बे पैसा, साल भर के 330 रुपये, और उसे भी ये सुरक्षा कवच मिलेगा। Natural मृत्‍यु होगा Natural अकस्‍मात नहीं हुआ है, सहज, तो भी उसके परिवार को दो लाख रुपया मिलेगा। हमने लोगों से आग्रह किया है कि रक्षाबन्‍धन के पर्व पर हमारे देश की परम्‍परा है, हम अपनी बहनों को Best सौगात देते हैं। कोई न कोई Gift देते हैं। मैं मेरे, Gulf Countries में रहने वाले मेरे प्‍यारे भाइयों बहनों का आग्रह करता हूं, इस बार रखी के त्‍यौहार पर आप अपनी बहन को ये जीवन सुरक्षा योजना दे दीजिए। अगर आप 600 रुपया बैंक में Fixed Deposit करा दोगे, तो हर साल उसको 12 रुपये से ज्‍यादा Interest मिलेगा, कटता जाएगा और आपकी बहन को दो लाख रुपये का सुरक्षा का कवच मिल जाएगा, और दोनों योजना लें लेगे, उतने पैसे जमा करा दिये, तो चार लाख रुपया उसके चरणों में आपकी तरफ से पहुंच जाएगा। भाइयो-बहनों, हमनें समाज-जीवन को एक सुरक्षित बनाना है, हमारी नई पीढ़ी को शिक्षित बनाना है, देश को आधुनिक बनाना है, और आज जब विश्‍व का भारत की तरफ आकर्षण बढ़ा है, उस परि‍स्थिति का हमने लाभ उठाना है और देश को विकास की नई ऊंचाइयों पर ले जाना है।

मेरे प्‍यारे भाइयो, बहनों, आपने जो मुझे सम्‍मान दिया, प्‍यार दिया, पूरा हिन्‍दुस्‍तान आपको देख रहा होगा। ये बदले हुए माहौल का असर हर भारतवासी के दिल पर भी होता है। और मुझे लगता है कि विश्‍व भर में जो हमारा भारतीय समुदाय पहुंचा है, उस भारतीय समुदाय को भी आज एक नई ऊर्जा, नई शक्ति मिली है। आज जब मैं अबुधाबी आया, दुबई आया, तो कुछ बातें मेरे ध्‍यान में आई हैं, उसके विषय में भी आज आपको मैं कह करके जाना चाहता हूं, Embassy के संबंध में, Counsel के संबंध में, आपकी शिकायतें रहती हैं, नहीं रहती हैं? नहीं रहती हैं तो अच्‍छी बात है। लेकिन अगर रहती हैं तो भारत सरकार ने ‘MADAD’ नाम का एक Online Platform बनाया है, इस ‘MADAD’ नाम के Online Platform का उपयोग दुनिया भर में फैले हुए हमारे भारतीय भाई, बहन उसका उपयोग कर सकते हैं, ताकि आपकी बात आगे पहुंच सकती है। मोबाइल फोन के द्वारा भी आप उनका सम्‍पर्क कर सकते हैं। एक, दूसरा काम किया है, E-migrate portal शुरू किया गया है। जिसके द्वारा इस प्रकार सके हमारे प्रवासी भारतीयों को कोई शिकायत हो, कोई कठिनाई हो, तो उनको Emigration Office के चक्‍कर काटने नहीं पड़ेंगे ये E-migrate portal पर अपनी बात रख करके वो मदद ले सकता है, इसकी एक व्‍यवस्‍था की गई है, क्‍यों यहां दूर-दूर से आपका वहां जाना, बहुत तकलीफ होती है। मुझे ये भी बताया गया कि कही- कहीं पर E-migrate Portal का उपयेाग करने में नागरिकों को दिक्‍कत होती है इसके लिए मैंने हमारे Embassy को आदेश किया है कि वे ये जो Technical Problem है इसका 30 दिन के भीतर-भीतर Solution दें। आज 17 अगस्‍त है, 17 सितम्‍बर तक Solution दें, ऐसा मैंने उनसे कहा है और मुझे विश्‍वास है कि हमारे Embassy के भाई, ये जो Technical Problem कहीं-कहीं आता है, उसका रास्‍ता निकालेंगे।

एक और काम मैंने कहा है, यहां भारतीय समुदाय ज्‍यादातर workers हैं। उनके पास इतने पैसे नहीं कि एक जगह से दूसरी जगह पर वो भागते रहें और इसलिए हमने कहा है, कि हम समय-समय पर जहां हमारे भारतीय भाई समुदाय रहते हैं, वहां जा करके, Counselor Camp लगाएं। महीने में एक बार, दो महीने में एक बार, और वहीं जा करके उनसे बैठें, बातचीत करें, और उनकी समस्‍या के समाधान के लिए योग्‍य व्‍यवस्‍था करें। मैं यहां ये बातें इसलिए कह रहा हूं कि ये भू-भाग ऐसा है, के जहां मेरे गरीब तबके के भाई-बहन रहते हैं, मजदूरी करने के लिए यहां आए हुए हैं। अमेरिका के लिए कुछ कर पाऊं, या न कर पाऊं लेकिन अगर आपके लिए नहीं कुछ करता तो मैं बेचैन हो जाता हूं। और इसलिए हमने एक और काम किया है, इन दिनों विदेशों में कभी-कभी जाते हैं तो हमारे भारतीय भाई कभी-कभी संकट में जैसे अचानक बीमारी आ गई, कुछ हो गया, कभी कोई कानूनी पचड़े में फंस गए, बेचारे जेल चले गए। तो दुनिया के बाहर कौन उनको देखने वाला है? परिवार तो है नहीं, और इन हमारे कभी-कभी मुसीबत में कोई परिवार आ जाए तो उनकी मदद करने के लिए Indian Community Welfare Fund (ICWF) स्‍थापित किया गया है। सब दूतावासों को ये Welfare Fund दिया गया है, और इसलिए ऐसी मुसीबत में कोई फंस गया हो तो उनको कानून की मर्यादा में रह करके जो मदद हो सकती है, कोई अगर जेल में बंद हुआ है, तो कम से कम उसको खाना-पीना मिल जाए मानवता की दृष्‍टि से कोई व्‍यवस्‍था हो जाए, इन सारे कामों के लिए एक Fund की हमने व्‍यवस्‍था की है। हमने ये भी निर्णय किया है, इस Fund के द्वारा दूतावास, Counsel में Counselor सुविधाएं और अच्‍छी कैसे बनें, जो नागरिकों की भलाई के लिए हों, उनके लिए भी इसका उपयोग किया जाएगा। जिनको कानूनी सलाह की जरूरत पड़ेगी और अगर वो खुद इसको करने के लिए स्थिति नहीं है, कभी-कभार तो एक हजार-दो हजार का दंड बेचारा नहीं भर पाता, उसके कारण जेलों में सड़ता रहता है। ऐसे लोगों को मदद करके, भारतीय नागरिक होने के नाते उनको मदद करना इसके लिए Welfare Fund का उपयोग हो, ताकि वो संकटों से बाहर आ सकें, ये भी हमने व्‍यवस्‍था करने के लिए कहा है। मैं जानता हूं यहां पर स्‍कूलों में Admission में कितनी दिक्‍कत होती है, आपके बच्‍चों को स्‍कूलों में पढ़ाई की कितनी दिक्‍कत होती है? मैंने यहां के संबंधित लोगों से ये बात कही है और मैंने कहा है कि अधिक स्‍कूल कैसे बनें, उसकी चिन्‍ता मैंने की है, देखते हैं, मुझे विश्‍वास है कि आने वाले दिनों में उसका भी लाभ आप लोगों को मिलेगा।

मुझे विश्‍वास है मेरे भाइयो, बहनों, कि जो आपकी छोटी-मोटी बातें मेरे ध्‍यान में आई थीं, इसको पूरा करने का मैंने प्रयास किया है। मैं फिर एक बार आप सबको दृदय से बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं और दुनिया में कहीं पर भी मेरा भारतवासी है, तो हम पासपोर्ट का रंग नहीं देखते हैं। हमारा खून का रंग काफी है, वो धरती का नाता काफी है, और इसलिए आइए मेरे साथियो हम सब मिल करके जहां भी हों, मां भारती का माथा ऊंचा करने के लिए, गौरव से जीवन जीने के लिए एक माहौल बनाने में सक्रिय शरीक हों और आपका योगदान आपकी शक्ति सामर्थ्‍यवान आपके परिवार को भी भला करने में काम आए, देश का भी भला करने के लिए काम आए।

इसी शुभ कामनाओं के साथ आप सबका बहुत-बहुत धन्‍यवाद।

मेरे साथ दोनों मुट्ठी बंद करके बोलिए, भारत माता की जय। दोनों मुट्ठी पूरी बंद करके पूरी ताकत से बोलिए, भारत के कोने-कोने में, आपके अपने गांव में आवाज पहुंचनी चाहिए भारत माता की जय, भारत माता की जय, भारत माता की जय, भारत माता की जय।

बहुत-बहुत धन्‍यवाद।

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June 05, 2026
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Today, India is advancing its development guided by the principle of 'progress in harmony with nature': PM
'Waste to wealth' public movement active in the country for the past 12 years is significantly contributing to city sanitation and helping keep our urban areas green and clean: PM
Amid unprecedented global challenges, the country continues to move ahead through the collective efforts of 140 crore Indians: PM

भारत माता की जय। भारत माता की जय। भारत माता की जय।

गुजरात के लोकप्रिय मुख्यमंत्री श्रीमान भूपेंद्र भाई पटेल, केंद्रीय मंत्रिमंडल के मेरे साथी सी आर पाटिल, राज्य के उपमुख्यमंत्री भाई हर्ष संघवी, गुजरात भाजपा के अध्यक्ष जगदीश विश्वकर्मा जी, उपस्थित अन्य मंत्रीगण, जनप्रतिनिधिगण और यहाँ उपस्थित सूरत के मेरे प्यारे भाइयों और बहनों।

कैसे हो सभी, और अपना सूरत मजे में है ना? तुम क्या लेकर आये हो भाई, धन्यवाद दोस्त, बहुत अच्छा चित्र बनाया है तुमने, जरा एसपीजी के लोग, यह भाई भेंट देना चाहते हैं, बहुत आभार भाई, मेरी टीम को दे दो।

साथियों,

मेरी बात शुरु करुं उससे पहले, कुछ दिन पहले ही मेरे अनन्य साथी, जिनके साथ मैंने वर्षों तक काम किया और जीवन के अंतिम क्षण तक जो कार्यरत रहे, ऐसे कनुभाई मावाणी की विदाई, आदर पूर्वक मैं उनको श्रद्धांजलि देता हूं। एक साथी खोने का दर्द स्वभाविक है, लेकिन आज सूरत की धरती पर आया हूं तब, उनके पुण्य स्मरण के साथ मेरी बात आगे बढाता हूं।

साथियों,

मुझे कई बार लगता है कि, ये सूरत शहर नहीं है, सूरत एक स्पिरिट है, और ये स्पिरिट हो, तो ही पर्यावरण दिवस पर प्रत्येक परिवार को जोड़कर, ऐसे 15000 पर्यावरण को समर्पित, ऐसे बहुत अच्छे पोस्टर बनाकर लोग लाए हैं। जो-जो परिवार के साथियों ने यह कार्य किया है, उन सभी का मैं बहुत-बहुत अभिनंदन करता हूं। क्योंकि जब उन्होंने यह विचार किया होगा न, तो उनका मन अब इस पर्यावरण की रक्षा में लगा होगा। और हमारे काठियावाड़ के बहुत सारे भाई यहाँ सूरत में रहते हैं, और उनकी वहाँ खेती है, तो मेरा उनको एक आग्रह है कि पर्यावरण के एक कार्य के भाग के रुप में ‘खेत बचाओ’, वह अभियान में जुड़ जाएंI केमिकल फ्री खेती, अपने बुजुर्ग जो प्राकृतिक खेती करते थे, और मैं तो सूरत के जो-जो लोगों की जहाँ-जहाँ खेती हो, सभी को मुझे हक से कहना है, कि इतना मेरा काम करना।

साथियों,

यहाँ सभी ने मेरा स्वागत किया, अलग-अलग स्मृति चिन्ह दिए, भेंट-सौगात दी, लेकिन इसके अलावा भी अनमोल भेट सूरत ने मुझे दी है, इससे भी अधिक मूल्यवान। सूरत का कचरा मुझे भेट दिया है। 1 लाख लोगों ने 5 दिन सफाई का अभियान चलाया। मेरे लिए यह सबसे बड़ी सौगात है और मैं 1 लाख लोगों का और पूरे सूरत का हृदय से आभार मानता हूं। लोगों को होगा कि यह कैसा प्रधानमंत्री है? स्वागत में कचरा मिला उसका गौरव कर रहा है, क्योंकि मुझे स्वच्छता, उसको संस्कार बनाना है। 1 लाख लोगों का जुड़ना, यानी 1 लाख परिवारों का जुड़ना, और यह केवल स्वच्छता का अभियान नहीं है, यह एक प्रकार से स्वस्थ भविष्य के लिए संस्कार पर्व है, और उसके लिए सूरत के सभी साथी बहुत-बहुत अभिनंदन के अधिकारी हैं।

साथियों,

स्थानीय निकायों के चुनावों के बाद, मैं पहली बार गुजरात आया हूं, सूरत आया हूं। मैं सूरत से, पूरे गुजरात के लोगों का वंदन करता हूं, अभिनंदन करता हूं।

साथियों,

ढाई दशक से अधिक का समय हो गया है, आप हम सभी को, भाजपा को, निरंतर अपना आशीर्वाद दे रहे हैं। और समय के साथ ये आशीर्वाद बढ़ता ही जा रहा है। देखिए एक बेटी आप सबको खींचकर ले गई। हाल ही में, जिला परिषद, तहसील परिषद, नगरपालिका और महानगरपालिका के चुनाव हुए हैं। इनमें गुजरात के लोगों ने भाजपा को इतना समर्थन दिया, कि पुराने सारे रिकॉर्ड टूट गए। और मैं आज ज्यादा खुश इसलिए हूं कि मेरे रिकॉर्ड भी आप सब ने तोड़ दिए। मैं राजनीति में बहुत देर से आया था, शायद 87 में मैं पॉलिटिक्स में आया, और उसके बाद पहला चुनाव था सूरत अहमदाबाद कॉरपोरेशन वगैरह का, और पहले चुनाव में हमने भारी विजय प्राप्त किया, और तब से लेकर आज तक ये विजय की यात्रा चल ही रही है। दुनिया के लोकतांत्रिक समाज में, ऐसा कम ही देखने को मिलता है। किसी भी दल को इतने लंबे समय तक जनता जनार्दन के आशीर्वाद मिले और सेवा का अवसर मिलना, ये बहुत बड़ी बात है।

साथियों,

यहां सूरत और नवसारी के अनेक चुने हुए जन-प्रतिनिधि भी आए हुए हैं। मैं आप सभी को भी बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं। हम सभी को हमेशा याद रखना है, गुजरात की जनता ने हमारे सेवा भाव को अपना समर्थन दिया है। ये प्रचंड विजय, सेवा के इस मिशन को और विस्तार देने के लिए है। हम सभी को, अब और भी अधिक परिश्रम करना है। हमारा संकल्प, विकसित गुजरात, विकसित भारत, इस संकल्प को सिद्ध करना, सेवा के भाव से समर्पित होकर के करना है। जब मैं कहता हूं, सूरत एक शहर नहीं, सूरत एक स्पिरिट है, इसके पीछे मेरा conviction है। आप कल्पना कर सकते हैं, पूरे हिन्दुस्तान में जो शहर लगातार स्वच्छता के अवार्ड प्राप्त करता हो, स्वाभाविक है उसको मन कर जाए, यार बहुत हो गया, इतने अवार्ड ले लिए, अब क्या करना है। लेकिन सूरत ऐसा नहीं कर रहा है, वो आज भी सफाई के अभियान को प्राथमिकता देता है, तब मैं कहता हूं, सूरत शहर नहीं, सूरत एक स्पिरिट है।

साथियों,

ये जो हमारा संकल्प है, विकसित भारत का, विकसित गुजरात का। ये संकल्प, देश के गांव, हर जिले, हर शहर को, हम जब विकसित करेंगे, तभी सिद्ध होने वाला है। और इसलिए, सभी चुने हुए भाजपा जन-प्रतिनिधियों की भूमिका बहुत बड़ी है।

साथियों,

आज का दिन एक और सुखद संयोग का है। आज 5 जून, पर्यावरण दिवस है। और पर्यावरण दिवस के इस अवसर पर, मैं देश के सबसे स्वच्छ शहरों में से एक, सूरत में हूं। और ये कितना बड़ा गर्व का विषय है, ये यही सूरत है, जो कभी प्लेग जैसी महामारी से प्रभावित था, और आज स्वच्छता के लिए, पहचाना जा रहा है। इसके लिए बीते ढाई दशक से निरंतर प्रयास किए गए हैं। इसमें सूरत के सभी लोग, अधिकारी-कर्मचारी, जनप्रतिनिधि, सबका योगदान है। मुझे बताया गया है कि बीते कुछ दिनों में यहां स्वच्छता के लिए विशेष अभियान भी चला है। मैं आप सभी सूरत के वासियों को, और देशी भाषा में कहते है सूरतियों को, मेरे प्यारे सूरतियों को बहुत-बहुत अभिनंदन। सूरत के विकास को गति देने के लिए आज यहां अनेक प्रोजेक्ट्स का शिलान्यास और लोकार्पण हुआ है। मैं आप सभी को इन प्रोजेक्ट्स के लिए बहुत–बहुत बधाई देता हूं।

साथियों,

दुनिया, अब हरित युग की तरफ, Green Future की तरफ बहुत ही सावधान हो चुकी है, धीरे-धीरे कदम रखने का प्रयास भी कर रही है। भारत भी ग्रीन ग्रोथ पर बहुत अधिक काम कर रहा है। और इसमें भी गुजरात ने बरसों पहले ही तेज कदम उठाने शुरू कर दिए थे। गुजरात राज्य है, जिसने इस शताब्दी के प्रारंभ में ही सरकार ने क्लाइमेट चेंज का अलग डिपार्टमेंट बनाया था। एक अलग डिपार्टमेंट बनाया था। ऐसी व्यवस्था बनाने वाला गुजरात, देश का पहला राज्य था। और जैसा अभी मुख्यमंत्री जी ने जिसका वर्णन किया, गुजरात के अपने पाटण के चारणका गांव में, भारत का पहला सोलर पार्क भी बनाया गया था। और एक प्रकार से उस समय तो वो तीर्थ क्षेत्र बन गया था, लोग देखने आते थे कि इतना, दूर-दूर तक दिखाई दे इतना बड़ा सोलर प्लांट।

साथियों,

गुजरात में उस समय आप सभी ने जो किया, उसने पूरे देश को प्रेरणा दी है। आज भारत, प्रकृति के साथ प्रगति का मंत्र लेकर विकास कर रहा है। इकोनॉमी भी, इकोलॉजी भी।

और साथियों,

सूरत में तो ये प्रत्यक्ष दिखता है। आजकल सूरत की 'सर्कुलर वाटर इकोनॉमी' की बहुत चर्चा होती है। यहां शहर के वेस्ट वॉटर को ट्रीट करके इंडस्ट्री को सप्लाई किया जाता है। इससे गंदे पानी का मैनेजमेंट भी हो जाता है, और पानी से कमाई भी होती है। बीते 12 वर्षों से देश में waste to wealth का एक बहुत बड़ा जन-आंदोलन चला है। ये हमारे शहरों की स्वच्छता और उन्हें ग्रीन और क्लीन बनाने में बहुत काम आ रहा है।

साथियों,

अब प्रयास ये है कि आने वाले कई दशकों तक सूरत के लिए पीने के पानी की पूरी व्यवस्था हो, इसके लिए तापी बराज प्रोजेक्ट स्वीकृत किया गया है। इसके अलावा वॉटर मैनेजमेंट और वॉटर ड्रेनेज भी सरकार की बहुत बड़ी प्राथमिकता है। आज भी यहां ऐसे अनेक प्रोजेक्ट्स का लोकार्पण हुआ है।

साथियों,

सूरत सिर्फ स्वच्छता और सर्कुलर इकॉनॉमी तक ही सीमित नहीं है। बल्कि ग्रीन ग्रोथ के दूसरे माध्यमों का भी अभूतपूर्व गति से विस्तार हो रहा है। अब जैसे इलेक्ट्रिक मोबिलिटी है। सूरत, ऐसी व्यवस्था बनाने में जुटा है, जहां सड़कों पर चलने वाली सारी बसें इलेक्ट्रिक होंगी। साथ ही यहां सूरत मेट्रो का भी विस्तार हो रहा है। ये सारे कदम, हरित शहर के रूप में सूरत की पहचान को और सशक्त करेंगे। और हां, आने वाले समय में, हज़ीरा इंडस्ट्रियल एरिया, ग्रीन स्टील के उत्पादन के लिए भी जाना जाएगा। यानी स्टील के प्रोडक्शन में, ग्रीन एनर्जी का इस्तेमाल होगा।

साथियों,

आज दुनिया अभूतपूर्व चुनौतियों के दौर से गुज़र रही है। कुछ समय पहले मैंने कहा था, कि ये दशक, दुनिया के लिए आपदा का दशक सिद्ध हो रहा है। हमने बीते समय में एक के बाद एक वैश्विक आपदाएं देखी हैं। पहले बहुत बड़ा कोरोना का संकट आया, फिर जगह-जगह युद्ध शुरू हो गए, और अब इतना बड़ा ऊर्जा संकट, इसने पूरी दुनिया को अस्त व्यस्त कर दिया है। दुनिया भर में पेट्रोल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव हो रहा है, गैस की सप्लाई चेन ध्वस्त हो रही है।

लेकिन भाइयों और बहनों,

मुझे बहुत संतोष है कि 140 करोड़ भारतीयों के साझा प्रयासों से, देश ऐसे हर संकट का मजबूती से मुकाबला कर रहा है। इस लड़ाई में आप मेरे साथ हैं ना? हमें यह लड़ाई भी जीतनी है न?

 

और साथियों,

इसमें भी गुजरात की बहुत बड़ी भूमिका है। बीते वर्षों में गुजरात ने रिफाइनिंग के क्षेत्र में, सोलर और विंड पावर के क्षेत्र में, अपना जो सामर्थ्य बढ़ाया है, वो देश के बहुत काम आ रहा है। आज भारत की रीन्युएबल कैपेसिटी, 250 गीगावॉट है। हमारे देश में कभी मेगावॉट से आगे सोचा ही नहीं जाता था, आज गीगावॉट की चर्चा हो रही है। और इसमें 50 गीगावॉट का योगदान अकेले गुजरात का है। 250 गीगावॉट में 50 गीगावॉट, आप सबकी ताकत है ये। यानी देश की ग्रीन एनर्जी का पांचवां हिस्सा, अकेला गुजरात प्रोड्यूस करता है। सौर ऊर्जा के उत्पादन में गुजरात ने प्रशंसनीय काम किया है। और अब, जब देश ग्रीन हाइड्रोजन और ग्रीन अमोनिया जैसे क्षेत्रों में काम कर रहा है, तो इसमें भी गुजरात का रोल बहुत बड़ा होने वाला है।

साथियों,

ये जो वैश्विक संकट चल रहा है, ये दिखाता है कि एनर्जी के मामले में आत्मनिर्भरता कितनी ज़रूरी है। और बीते 12 वर्षों में देश ने जो कैपेसिटी तैयार की है, उसका कितना बड़ा महत्व है। एक तरफ हमने दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से तेल और गैस की आपूर्ति सुनिश्चित की। दूसरी तरफ हमने Renewable Energy में ऐतिहासिक निवेश बढ़ाया। 12 वर्ष पहले भारत में सौर ऊर्जा का उत्पादन नाम मात्र का था, आज हम दुनिया के टॉप 5 देशों में से एक हैं, 5 देशों में से एक हैं। और सिर्फ सौर ऊर्जा ही नहीं, हमने भारत में Ethanol Blending की कैपेसेटी बढ़ाई, रेलवे के बिजलीकरण को गति दी, परमाणु ऊर्जा पर काम किया, हमारा जो बिजली का ट्रांसमिशन नेटवर्क पुराना पड़ गया था, उसका आधुनिकीकरण किया, उसका विस्तार किया। गैस पाइपलाइन के नेटवर्क का दायरा बहुत अधिक बढ़ाया। हमारे जो पोर्ट हैं, उनकी कैपेसिटी बढ़ाई, ताकि वहां ज्यादा से ज्यादा पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स पहुंच सकें और जहां संभव है, वहां स्टोर भी हो सकें। आने वाले समय में देश का ये सामर्थ्य और अधिक बढ़ने वाला है। इस दिशा में हमारी सरकार के प्रयास लगातार जारी हैं।

साथियों,

यहां सूरत में आपके बीच आने से पहले मैं हजीरा गया था, अभी हर्ष भाई जिसका वर्णन कर रहे थे। आत्मनिर्भर भारत का क्या मतलब होता है, ये हजीरा जाने पर भी साफ दिखता है। हजीरा आज केवल एक औद्योगिक क्षेत्र नहीं है। यह एक ऐसा इकोसिस्टम बन चुका है जहां, एनर्जी है, स्टील है, डिफेंस प्रोडक्शन है, पोर्ट है, और ग्लोबल ट्रेड का इकोसिस्टम है। हजीरा, देश के एक बड़े Maritime-Industrial Hub के रूप में विकसित हो रहा है, आत्मनिर्भर भारत के एक बड़े सेंटर के रूप में उभर रहा है।

लेकिन साथियों,

आज देश में कुछ निराशावादी लोग हैं, जो आत्मनिर्भर भारत अभियान का मज़ाक उड़ाते रहते हैं। देश के इस संकल्प को वो लगातार नीचा ही दिखाते हैं, ये वो लोग हैं जिन्होंने हमेशा भारत को दूसरे देशों पर निर्भर रखा। वो लोग ये भूल जाते हैं, कि दूसरों पर निर्भर देश, विकास की वो ऊंचाई कभी प्राप्त नहीं कर सकता, जिसका वो हकदार है।

साथियों,

आत्मनिर्भर भारत को गति देने के लिए, आज देश का कनेक्टिविटी पर बहुत अधिक फोकस है। वडोदरा-मुंबई एक्सप्रेसवे, डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर और बुलेट ट्रेन जैसे प्रोजेक्ट, भारत की इसी प्राथमिकता को दर्शाते हैं। आज वड़ोदरा-मुंबई एक्सप्रेसवे के एक बड़े हिस्से का उद्घाटन हो गया है। ये देश के दो बड़े इंडस्ट्रियल और ट्रेड सेंटर्स को और बेहतर कनेक्टिविटी देगा।

साथियों,

हमारा प्रयास सबको जोड़ने का है, सबको समान अवसर और सुविधा देने का है। दूर-सूदूर के इलाके, आदिवासी क्षेत्र, जिन तक सुविधाएं नहीं पहुंचीं, उन तक आज आधुनिक कनेक्टिविटी पहुंच रही है। दाहोद-बोडेली-वापी कॉरिडोर, इसी संकल्प का प्रतिबिंब है। आप सोचिए, नर्मदा और तापी जिलों के आदिवासी क्षेत्रों तक फोर-लेन की सुविधा पहुंच रही है। इससे यात्रा का समय बहुत कम होगा, किराया भाड़ा कम होगा, यानी आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को, पढ़ाई, दवाई और कमाई की बेहतरीन सुविधा मिलेगी।

साथियों,

इस कॉरिडोर से, छोटा उदयपुर, नर्मदा, भरूच और तापी जिलों के आदिवासी क्षेत्रों के, ये इंडस्ट्रियल बेल्ट से जुड़ जाएंगे। इससे, दक्षिण गुजरात के आदिवासी क्षेत्रों में टूरिज्म को भी बल मिलेगा। Statue of Unity, सापुतारा और आसपास के पर्यटन स्थलों तक पहुंचना बहुत आसान हो जाएगा।

साथियों,

आज यहां सूरत में एक आधुनिक ESIC अस्पताल का भी लोकार्पण हुआ है। ये अस्पताल हमारे श्रमिक भाइयों-बहनों और उनके परिवारों के लिए, बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं का नया केंद्र बनेगा। दूसरे राज्यों से जो साथी यहां रहने आए हैं, रोजगार करने आए हैं, उन्हें भी इस अस्पताल से बहुत मदद मिलने वाली है।

साथियों,

हमारी सरकार, देश के विकास को सर्वोपरि रखते हुए काम कर रही है। और इसलिए, देश का भरोसा भाजपा पर है, भाजपा के विकास कार्यों पर है। इसलिए देश की जनता बार-बार भाजपा को जनादेश दे रही है। हाल में ही हुए, बंगाल के चुनाव, आपको लगता होगा कि मैं बंगाल बोल दिया, एकदम से यहां ऊर्जा आ गई, लेकिन मेरा अनुभव था, मैं पिछले दिनों 5 देशों की यात्रा पर था, वहां भी बंगाल-बंगाल चल रहा था, हर कोई बंगाल की चर्चा करता था। चुनाव बंगाल के, असम और पुडुचेरी के चुनावों में, भाजपा को, NDA को बहुत बड़ा जनादेश मिला है। इसके अलावा जो पंचायतों और कॉर्पोरेशन के भी चुनाव देशभर में हो रहे हैं, वहां भी बीजेपी को विजय मिल रही है।

साथियों,

ऐसे हर चुनाव का एक ही मैसेज है, देश अराजकता, अनिश्चितता और निराशा को पसंद नहीं करता। कांग्रेस, बीते 12 वर्षों से अराजकता और अनिश्चितता फैलाकर अपने लिए अवसर खोज रही है, लेकिन देश की जनता, उसे बार बार करारा जवाब दे रही है। गुजरात के आप लोगों ने तो कांग्रेस को हाशिए पर धकेल दिया है, लेकिन जहां कांग्रेस की सरकारें हैं, वहां भी जनता कांग्रेस के कुशासन से तंग आ गई हैं। अभी-अभी हिमाचल में भी स्थानीय निकाय के चुनाव हुए, कांग्रेस की सरकार है, वहां कांग्रेस बुरी तरह से हार गई। हिमाचल की जनता ने, कांग्रेस के कुशासन को नकार दिया है। इससे पहले, हरियाणा के निकाय चुनावों में कांग्रेस को हार मिली, और पंजाब के लोगों ने भी कांग्रेस को स्पष्ट संदेश दे दिया है। संदेश ये है कि, कांग्रेस की परजीवी पॉलिटिक्स नहीं चलेगी, कांग्रेस की अराजकता में अवसर ढूंढने की राजनीति नहीं चलेगी। कर्नाटका की जनता में भी कांग्रेस सरकार को लेकर के बहुत आक्रोश है। और यही कारण है, कि कर्नाटका में भी कांग्रेस को सीएम बदलना पड़ रहा है।

साथियों,

भारत, नकारात्मकता से कहीं आगे निकल चुका है। ये असीमित आशावाद वाला देश है। अद्भुत आकांक्षाओं से लैस देश है। भारत के नागरिक सपनों से भरे हुए हैं, संकल्पों से भरे हुए हैं। और संकल्प को सिद्धि में बदलने के लिए प्रतिबद्ध जनता जनार्दन है। और जब देश की जनशक्ति संकल्पित है, तो देश हर लक्ष्य पा सकता है। और यही, यही भारत की ताकत है। आइए, हम विकसित भारत के निर्माण को मिलकर, एक साथ मिलकर के गति दें, हम सपनों को संकल्प में बदलें, और संकल्प को सिद्धि में परिवर्तित करने के लिए अपने आप को झोंक दे दोस्तों। मैं आपके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा हूं। आप दो कदम चलेंगे, मैं तीन कदम चलने के लिए तैयार हूं। रूकना और थकना हमें मंजूर नहीं है। इसी आह्वान के साथ, एक बार फिर विकास परियोजनाओं के लिए बहुत-बहुत शुभकामनाएं।

भारत माता की जय।

भारत माता की जय।

वंदे मातरम।

वंदे मातरम।

वंदे मातरम।

वंदे मातरम।

वंदे मातरम।

वंदे मातरम।

वंदे मातरम।

वंदे मातरम।

वंदे मातरम।

वंदे मातरम।

वंदे मातरम।