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Today I am witnessing 'mini-India' in Dubai: PM
People from all over the world have come here to Dubai. Magnetic power of this place has drawn the world here: PM
There are around 700 flights between India and the UAE but it took 34 years for a PM to visit this Nation: PM
PM Narendra Modi urges audience to give a standing ovation to the Crown Prince of Abu Dhabi
India has been a victim of terrorism for 40 years. Innocent people have lost their lives: PM
Good Taliban, Bad Taliban...Good Terror, Bad Terror...this won't work. A decision has to be taken are you with terrorism or with humanity: PM
Our effort has been to take India to new heights of progress and maintain a strong friendship with our neighbouring countries: PM

दुबई की धरती पर मैं आज मेरे सामने लघु भारत के दर्शन कर रहा हूं। हिन्‍दुस्‍तान के कोने-कोने से आए हुए मेरे प्यारे देशवासियों को मैं नमन करता हूं। आप वे लोग हैं, जिन्होंने परिश्रम की पराकाष्ठा करके..कोई दस साल से, कोई पंद्रह साल से, कोई बीस साल से, कोई तीस साल से, रोजी रोटी कमा रहे हैं, लेकिन साथ-साथ भारत के गौरव को भी बढ़ाने में कभी पीछे नहीं रहे। आपके व्यवहार के कारण आपके आचरण के कारण हमेशा भारत गौरव अनुभव करता रहा है। भारत में अगर अधिक बारिश भी हो जाए तो दुबई में बैठा हुआ मेरा हिंदुस्तानी छाता खोल देता है। भारत में कहीं अगर कोई प्राकृतिक आपदा आ जाए, दुबई में बैठा हुआ मेरा देशवासी चैन से सो नहीं सकता।

जब अटल बिहारी देश के प्रधानमंत्री थे, भारत ने न्यूक्लियर टेस्ट किया था, दुनिया चौंक गई थी, कुछ लोग गुस्से में आए थे और रातों-रात भारत पर sanction लगा दिए गए थे। भारत को आर्थिक मुसीबतों में धकेल दिया गया था.. और तब वाजपेयी जी ने विश्व भर में फैले हुए भारत वासियों को आह्वान किया था, देश की मदद करने के लिए। आज मैं गर्व से कह सकता हूं कि वाजपेयी जी के उस आह्वान पर, हिन्‍दुस्‍तान की तिजोरी भरने में Gulf Countries में जो मजदूरी का काम करते थे, उन मेरे भारतवासियों का सबसे बड़ा योगदान था। इस अर्थ में यहां बसा हुआ हर भारतवासी, एक प्रकार से हिन्‍दुस्‍तान के हर कोने से जुड़ा हुआ है। पिछली बार जब देश लोकसभा के चुनाव के लिए व्यस्त था, चुनाव नतीजे आ रहे थे, हिन्‍दुस्‍तान ही नहीं, पूरा दुबई नाच रहा था। ये प्यार भारत माता के कल्याण के लिए..मां भारती फिर से एक बार सामर्थ्यवान बने, सशक्त बने, सम्‍पन्‍न बने, समृद्ध बने, ये सपना संजोकर के दिन-रात एक करने वाले आप लोग मेरे सामने बैठे हैं।

भाइयों-बहनों, आज..यहां तो हिन्‍दुस्‍तान के हर कोने से आए हुए मेरे भाई-बहन बैठे हैं और दुबई, वो सिर्फ लघु भारत ही रहा है ऐसा नहीं है, अब तो दुबई एक लघु विश्व भी बन गया है। दुनिया के सभी देशों के लोग, कम अधिक मात्रा में दुबई में रह रहे हैं। ठंडे से ठंडे प्रदेश के लोग भी इस 40-45 डिग्री तापमान में रहना पसंद करते हैं। क्या ताकत दिखाई होगी इस देश ने, क्या magnetic power पैदा किया होगा विकास के माध्यम से कि पूरा विश्व यहां आकर्षित हो जाता है।

हिन्‍दुस्‍तान के हर कोने से आए हुए सभी देशवासियों ने अभी दो दिन पूर्व 15 अगस्त, भारत की आज़ादी का पर्व मनाया है। मैं भी आप सब को आज़ादी के पावन पर्व की अनेक-अनेक शुभकामनाएं देता हूं।

यहां केरल से आया हुआ भी समुदाय बहुत बड़ी मात्रा में है। मैं केरल का उल्लेख विशेष रूप से इसलिए कर रहा हूं क्योंकि आज केरल का नववर्ष है। सहोदरकअ एंटे रूदयम निरन्या नववलसरा आशम सफलअ। नमस्कारम्।



हर हफ्ते हिन्‍दुस्‍तान से 700 से भी ज्यादा फ्लाइट यहां आती हैं। दुनिया में किसी एक देश के साथ इतनी बड़ी मात्रा में हवाई आवागमन अगर कहीं है, तो इस इलाके से है। हर हफ्ते 700 से भी अधिक फ्लाइट आती हैं, लेकिन भारत के प्रधानमंत्री को यहां आने में 34 साल लग गए। कभी-कभी मुझे लगता है कि बहुत सारे ऐसे अच्छे अच्छे काम हैं, जो पूर्व के लोग मेरे लिए बाकी छोड़ करके चले गए हैं और इसलिए बहुत सारे बाकी रहे अच्छे काम करने का मुझे भाग्य मिला है। उन अच्छे कामों में से महत्वपूर्ण अच्छा काम मेरा अबुधाबी आना, मेरा दुबई आना है। जिस प्रकार से..ये मेरी पहली मुलाकात है। इसके पहले कभी मैं धरती के इस भू-भाग पर नहीं आया। ..और 34 साल में प्रधानमंत्री के रूप में कोई आएं, तो किसी को भी, किसी को भी नाराज़गी व्यक्त करने का हक बनता है। हक बनता है कि नहीं बनता है? बनता है कि नहीं बनता है? लेकिन अबुधाबी में His Highness Crown Prince ने, दुबई में His Highness अल मख्तूम जी ने नाराज़गी नहीं दिखाई, इतने प्यार की वर्षा की, इतने प्यार की वर्षा की, मैं उनके इस प्यार को कभी भूल नहीं पाउंगा। जो स्वागत किया, जो सम्मान किया.. His Highness Crown Prince अपने सभी पांचों भाइयों के साथ एयरपोर्ट पर लेने के लिए आए। मेरे प्यारे देशवासियों, ये प्यार, ये सम्मान किसी व्यक्ति को नहीं है। ये सवा सौ करोड़ देशवासियों का सम्मान है। ये भारत की बदली हुई तस्वीर का सम्मान है। भारत जिस प्रकार से दुनिया में अपनी जगह बना रहा है, उस बदले हुए हालात का सम्मान है। मैं His Highness Crown Prince का, अमीरात का, दुबई के Rulers का हृदयपूर्वक बहुत-बहुत आभार व्यक्त करता हूं।

एक तरफ संप्रदाय के नाम पर आतंकवाद के खेल खेले जाते हैं। निर्दोषों को मौत के घाट उतार दिया जाता है। पूर्णतया: चिंता का माहौल हो, ऐसे समय अबुधाबी के His Highness Crown Prince भारतीय समुदाय के लिए मंदिर बनाने के लिए जगह देने का निर्णय करते हैं। जो लोग अबुधाबी से परिचित हैं, उन्हें पता है कि निर्णय कितना बड़ा है, ये सौगात कितनी बड़ी है। आप मुझे बताइए, सभी देशवासियों को उनका विशेष रूप से अभिनंदन करना चाहिए कि नहीं करना चाहिए। मैं आप सभी से आग्रह करता हूं कि तालियों की गूंज से Crown Prince का अभिनंदन कीजिए। Crown Prince को Standing Ovation दीजिए। उनका अभिनंदन कीजिए। मैं हृदय से उनका अभिनंदन करता हूं।

भाइयों-बहनों, दो दिन की मेरी यात्रा में जिस प्रकार का विश्वास का माहौल बना, आखिरकार अंतर्राष्ट्रीय संबंधों का आधार..आपकी भाषा क्या है, आप कितने articulate हैं, आप diplomatic relation में कितने बढि़या ढंग से मेलजोल करते हैं..उससे भी ज्यादा महत्व होता है, एक दूसरे पर भरोसे का। अंतर्राष्ट्रीय संबंधों में ये भरोसा, ये विश्वास, एक बहुत बड़ी पूंजी होता है ..और आज मैं चंद घंटों की मेरी मुलाकात के बाद कह सकता हूं कि भारत, अबुधाबी, दुबई, अमीरात.. जो विश्वास का सेतू बना है, वो अभूतपूर्व है और आने वाली पीढि़यों तक काम आए, ऐसा foundation तैयार हुआ है।

आज मुझे खुशी हुई कि जब आज भारत और अमीरात के बीच जो Joint Statement आया है, आपको भी खुशी होगी जान करके.. Crown Prince ने हिन्‍दुस्‍तान में साढ़े चार लाख करोड़ रूपए का निवेश करने का संकल्प दोहराया है। साढ़े चार लाख करोड़ रूपया! कितना? कितना? कितना? भाइयों-बहनों, अगर आप पर किसी का भरोसा न हो, तो कोई 10 रूपया भी आप पर लगाने के लिए तैयार होगा क्या? ये भारत की साख बनी है। आज भारत का बदला हुआ रूप विश्‍व के सामने अपनी स्वीकृति बनाता आगे चल रहा है।

आज अमीरात और भारत की तरफ से आतंकवाद के खिलाफ, दो टूक शब्दों में, बिना लाग लपेट और किसी की परवाह किए बिना साफ-साफ शब्‍दों में संकेत दे दिए गए हैं। आतंकवाद के खिलाफ एकता का स्वर आज इस धरती से उठा है। मैं इसे बहुत अहम मानता हूं और इतना ही नहीं..समझने वाले समझ जाएंगे, अक्लमंद को इशारा काफी। आतंकवाद में लिप्त लोगों को सजा होनी चाहिए, ये स्पष्ट शब्दों में संकेत यहां से निकला है। मैं आज यहां के शासकों का इसलिए भी आभारी हूं कि उन्होंने..United Nations जब अपने 70 साल मनाने जा रहा है, तो यहां से कहा गया है और भारत की इस बात का खुला समर्थन किया गया है कि भारत को United Nations की Security Council की Permanent Membership मिलनी चाहिए। मैं आभारी हूं उनका।

इससे भी आगे एक बहुत-बहुत महत्वपूर्ण बात पर..आज भारत की लंबे अर्से से एक position है। उसका आज His Highness Crown Prince ने खुले आम समर्थन घोषित किया। भाइयों-बहनों, कई वर्षों से United Nations में एक Resolution लटका पड़ा है। आपको भी बड़ी हैरानी होगी..और दो-पांच साल से नहीं, कई वर्षों से लटका पड़ा है। क्या.. ? United Nations, जो कि प्रथम और द्वितीय विश्वयुद्ध से पीडि़त मानव समुदाय को मरहम लगाने के लिए..आगे मानव जाति को ऐसे संकट झेलने की नौबत न आए, इसके लिए precaution लेने के लिए, व्यवस्थाएं विकसित करने के लिए 70 साल पहले United Nations का जन्म हुआ। लेकिन वह United Nations आतंकवाद की अभी तक परिभाषा नहीं कर पाया। आतंकवादी किसको कहें, आतंकवाद किसको कहें, आतंकवाद को समर्थन करने वाले कौन माना जाए, किस देश को आतंकवाद का समर्थक माना जाएं, किस देश को समर्थक न माना जाए। इसलिए Comprehensive Convention on International Terrorism..इसका निर्णय करने का प्रस्ताव लंबे अर्से से United Nations में लंबित पड़ा हुआ है। भारत ने position ली हैं सालों से किए एक प्रस्ताव पर चर्चा हो जाए, निर्णय होना चाहिए और ये टाला जा रहा है। आज मुझे खुशी इस बात की है कि His Highness Crown Prince ने भारत की स्थिति का समर्थन का किया है, भारत की position का समर्थन किया है और आतंकवाद के खिलाफ लड़ने के संबंध में आपने स्पष्ट संकेत दे दिए हैं। न सिर्फ.. साढ़े चार लाख करोड़ का पूंजी निवेश की बात नहीं है ये। ये एक निश्चित दिशा में कंधे से कंधा मिलाकर चलने का एक प्रकार का संकेत, इस Joint Statement में है। मैं इसे बहुत महत्वपूर्ण मानता हूं।

भाइयों-बहनों आप तो सालों से बाहर हैं। आज भारत का नाम सुनते ही आपके सामने खड़े हुए व्यक्ति की आंखों में चमक आती है कि नहीं आती है? आपका माथा गर्व से ऊंचा होता है कि नहीं होता है, आपका सीना गर्व से तन जाता है कि नहीं तन जाता है? एक गर्व महसूस करते हैं कि नहीं करते हैं? भाइयों बहनों आज दुनिया का हिन्‍दुस्‍तान की तरफ देखने का नज़रिया पूरी तरह बदल गया है और उसका एक कारण..क्या कारण है?.. क्या कारण है, ये बदलाव आया है? मोदी के कारण नहीं, ये जो बदलाव आया है, सवा सौ करोड़ देशवासियों की संकल्प शक्ति के कारण आया है। सवा सौ करोड़ देशवासियों ने 2014 मई महीने में 30 साल के बाद पूर्ण बहुमत वाली सरकार चुनी। आज दुनिया का कोई भी महापुरूष, दुनिया का कोई भी राजनेता मोदी से जब हाथ मिलाता है न, तब उसे मोदी नहीं दिखता है। उसे सवा सौ करोड़ हिंदुस्तानी दिखाई देते हैं। दुनिया की तेज़ गति से बढ़ रही economy दिखाई दे रही है।

भाइयों-बहनों, पिछले दिनों, IMF हो, World Bank हो, Moody हो, विश्व की जितनी भी आर्थिक पैमाने पर Rating Institutions हैं, सब किसी ने एक स्वर से कहा है कि आज दुनिया में बड़े देशों में सबसे तेज गति से अगर आर्थिक सुधार हो रहा है, तेज गति से growth हो रहा है तो उस देश का नाम है.. (दर्शक दीर्घा से भारत-भारत के नारे). मुझे बताइए सीना तन जाएगा कि नहीं तन जाएगा? माथा ऊंचा हो जाएगा कि नहीं होगा कि नहीं होगा। एक साल के भीतर-भीतर ये बदलाव आया है। भाइयों बहनों, हमने मेक इन इंडिया.. कुछ महीने पहले इस अभियान का प्रारंभ किया। दुनिया को मैं कह रहा हूं- मेक इन इंडिया। आइए, हिन्‍दुस्‍तान एक ऐसा देश है जो संभावनाओं से भरा हुआ है, Opportunities ही Opportunities हैं। ये एक ऐसा भाग्‍यशाली देश है, जिसके पास 65 प्रतिशत जनसंख्या 35 साल से कम उम्र की है। भारत एक नौजवान देश है। आज यहां जवानी लबालब भरी पड़ी है और विश्व वहां आए, हमारे युवकों की शक्ति जुटाए, उत्पादन करे, दुनिया के बाज़ार में जाकर बेचे। और आज..ये कुछ ही महीनों का मामला है.. Foreign Direct Investment..FDI में 48 प्रतिशत वृद्धि हुई है, 48%। भाइयों-बहनों विकास को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए Ease of doing Business का माध्‍यम हो। देश की युवा शक्‍ति में Skill Development का अभियान हो। आधुनिक भारत के निर्माण के लिए डिजिटल इंडिया का सपना साकार करने के लिए दिन-रात पुरुषार्थ चलता हो। तो विश्‍व का आना बहुत स्‍वाभाविक है मेरे भाइयों और बहनों, बहुत स्‍वाभाविक है।

भाइयों-बहनों, आज दुनिया जिस आतंकवाद के नाम सुनते ही कांप उठती हैं, एक नफरत पैदा होती है। मैं दुनिया को कहता हूं हम हिन्‍दुस्‍तान के लोग 40-40 साल से ये आतंकवाद के शिकार हुए हैं। हमारे निर्दोष लोग आतंकवादियों की गोलियों से भून दिए गए हैं, मौत के घाट उतार दिए गए हैं और जब कभी मैं विश्‍व के लोगों के साथ आज से 25-30 साल पहले कभी मुझे बात करने का अवसर मिलता था, तो वे आतंकवाद समझने की उनकी क्षमता ही नहीं थी। कभी मैं आतंकवाद की बात करता था तो वे मुझे कहते थे ये तो आपका Policing का problem है Law and Order का problem है। अब उनको समझ आ गया है कि आतंकवाद का कितना भयंकर रूप होता है। आतंकवाद की कोई सीमाएं नहीं होती है, वो पता नहीं कब किस सीमा पर जाकर आ धमकेगा। आज अभी मैं यहां पहुंच रहा था, मैंने सुना बैंकॉक के अंदर आज एक बम धमाका हुआ, निर्दोष लोगों को मार दिया गया। भारत तो लगातार इन हरकतों को झेलता रहा है और विश्‍व समुदाय जब तक आतंकवाद की मानसिकता वाले देशों को, आतंकवाद को, उसको समर्थन करने वालों को एक ओर, और मानवता में विश्‍वास करने वाले दूसरी ओर, और मानवतावाद में विश्‍वास करने वाले दुनिया के देश एक होकर के आतंकवाद के खिलाफ लड़ने का वक्‍त आ चुका है।

Good Taliban-Bad Taliban, Good Terrorism- Bad Terrorism ये अब चलने वाला नहीं है। हर किसी को तय करना पड़ेगा कि फैसला करो कि आप आतंकवाद के साथ हो या मानवता के साथ हो, निर्णय करो। भारत को तो आज भी आए दिन इन नापाक हरकतों का शिकार होना पड़ता है। हम समस्‍याओं का समाधान खोजने की दिशा में लगातार कोशिश कर रहे हैं। यहां बहुत कम लोगों को पता होगा कि भारत की आजादी के पहले से नागालैंड में अतिवाद, insurgency इस समस्‍या से नागालैंड जूझता रहा और उसके कारण भारत का पूरा ये पूर्वी हिस्‍सा, नॉर्थ-ईस्‍ट, आए दिन हिंसा का शिकार होता था और धीरे-धीरे वो बीमारी इतनी फैलती गई कि अन्‍य राज्‍यों में भी अलग-अलग नाम से, अलग-अलग अतिवादी, आतंकवादी गुट बनते चले गए। आजादी के भी पहले से चल रहा था।

आज मैं बहुत संतोष के साथ मेरे देशवासियों, आपको कहना चाहता हूं कि अभी एक महीने पहले नागालैंड के इन गुटों के साथ, जो कभी हिंसा में विश्‍वास करते थे, जो शस्‍त्रों को लेकर के गतिविधि चलाते थे। उनसे जो बातचीत चल रही थी, वो सफलतापूर्वक आगे बढ़ी, निर्णय हुआ, मुख्‍य धारा में आने का निर्णय हुआ। 60-70 साल के बाद ये संभव हुआ। मैं नागालैंड की ये घटना का जिक्र इसलिए करना चाहता हूं कि हिंसा के राह पर चले हुए भारत के नौजवानों को और विश्‍व के नौजवानों को मैं एक उदाहरण के रूप में कहना चाहता हूं, समस्‍या कितनी भी गंभीर क्‍यों न हो, आखिर तो बातचीत से ही रास्‍ता निकलता है। कोई 10 साल लड़ाई लड़ने के बाद बात करें, कोई 20 साल लड़ाई लड़ने के बाद करें, कोई 40 साल लड़ाई लड़ने के बाद बात करें, लेकिन आखिर में तो बात ही होती है और टेबल पर ही फैसले होते हैं और इसलिए विश्‍व भर से इस गलत रास्‍ते पर चल पड़ लोग बम-बंदूक के भरोसे, अपने सपनों को साकार करने के रास्‍ते पर चले हुए लोग। ये रास्‍ता कभी आपका भला नहीं करेगा। ये रास्‍ता कभी किसी और का भला नहीं करेगा। ये रास्‍ता कभी मानवता का भला नहीं करेगा। ये रास्‍ता इतिहास को बेदाग नहीं रहने देगा। ये पूरे इतिहास को कलंकित कर देगा, ये पूरे इतिहास को दागदार बना देगा और इसलिए हिंसा का मार्ग छोड़कर के मुख्‍यधारा में जाना, ये आज समय की मांग है।

मेरे प्‍यारे भाइयों-बहनों, बांग्‍लादेश 1947 में भारत का विभाजन हुआ, 1947 में। तब से पूर्व पाकिस्‍तान, पश्‍चिम पाकिस्‍तान थे उस समय। पूर्वी पाकिस्‍तान जो आज बांग्‍लादेश बना, भारत और उनके बीच सीमा का विवाद चल रहा था। तनाव का कारण बना हुआ था। आशंकाओं का कारण बना हुआ था। घुसपैठ के लिए एक सुविधाजनक स्‍थिति बनी हुई थी। आप सब के आशीर्वाद से हिन्‍दुस्‍तान ने बीड़ा उठाया, सबने मिलकर के बीड़ा उठाया। इस समस्‍या का समाधान करना है, बातचीत से करना है। मैं पिछले सितंबर में बांग्‍लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना जी से मिला था और मैंने उनको वादा किया था कि मुझ पर भरोसा कीजिए और मुझे थोड़ा समय दीजिए। उन्‍होंने कहा कि मेरे पास भरोसा रखने के सिवाए है भी क्‍या! लेकिन आज, आज मैं मेरे प्‍यारे देशवासियों आपके सामने सर झुकाकर के कहना चाहता हूं कि आजादी से लटका हुआ ये सवाल 1 अगस्‍त को समाप्‍त कर दिया गया है। सीमा निर्धारित हो गई। जिनको बांग्‍लादेश जाना था, बांग्‍लादेश चले गए, जिनको भारत आना था भारत आ गए। हम लोग तो 15 अगस्‍त, 1947 को आजाद हो गए थे। भारत के नागरिक के नाते गौरवगान करने लगे थे। लेकिन ये हमारे भाई-बहन अभी 1 अगस्‍त, 2015 को भारत की भूमि पर आजादी का स्‍वाद लेने का उन्‍हें सौभाग्‍यमान मिला है। भारत की संसद में सर्वसम्‍मति से सभी राजनैतिक दलों ने साथ दिया और सर्वसम्‍मति से फैसला हुआ, बातचीत के माध्‍यम से फैसला हुआ।

ये छोटी-मोटी उपलब्‍धि नहीं है मेरे भाइयों-बहनों। और मैं, औरों को भी हमेशा कहता हूं, अड़ोस-पड़ोस के देशों को भी कहता रहता हूं। जैसे हिंसा के रास्‍ते पर गए हुए लोगों को भी कभी न कभार बातचीत के रास्‍ते पर आना पड़ता है। वैसे अड़ोस-पड़ोस में भी समस्‍याओं का समाधान बातचीत से ही निकलता है।

अंतर्राष्‍ट्रीय संबंधों में आज भारत एक महत्‍वपूर्ण भूमिका अदा कर रहा है। मानवता के अधिष्‍ठान पर कर रहा है। जब नेपाल में भूकंप आया चंद घंटों में, ऐसा नहीं है कि भई ज़रा पूछो तो क्‍या हुआ है? जरा जानकारी लो क्‍या हुआ है? ऐसा करो अफसरों का delegation भेजो, देखो ज़रा क्‍या मुसीबत आई है? ऐसा करो भई कोई अपने रिश्‍तेदार वहां हो तो पूछो भई हुआ क्‍या है? ऐसा इंतजार नहीं किया? आज दिल्‍ली में ऐसी सरकार है, जो हर पल नज़र आती है, हर जगह पर नज़र आती है और चंद घंटों में, चंद घंटों में, भारत से जो भी हो सकता था, ये मानवता का काम था। नेपाल के चरणों में जाकर के हमारे लोग बैठ गए और उनकी सेवा में लग गए और आज भी सेवा चालू है। नेपाल हमारा पड़ोसी है। वो दुखी हो और हम सुखी हों, ये कभी संभव नहीं होता है। उसके सुख में भी हमारा सुख समा हुआ है।

श्रीलंका, आपको हैरानी होगी। जब मैं नेपाल गया, प्रधानमंत्री बनने के बाद। नेपाल जाना है, तो 70 मिनट नहीं लगते। दिल्‍ली से नेपाल जाना हो, तो 70 मिनट नहीं लगते। लेकिन भारत के प्रधानमंत्री को नेपाल पहुंचने में 17 साल लग गए। फिर से हम गए, संबंधों को फिर से जोड़ा। अपनापन। आज नेपाल भारत पर भरोसा कर रहा है। भारत नेपाल का सुख-दु:ख का साथी बन रहा है। श्रीलंका, राजीव गांधी जब प्रधानमंत्री थे, उसके बाद कोई प्रधानमंत्री की stand alone visit नहीं हुई थी। कितने साल बीत गए। हमारा पड़ोसी है, आए दिन हमारे तमिलनाडु, केरल के मछुआरे और उनके मछुआरे आपस में भिड़ जाते हैं। लेकिन उधर कोई जाता नहीं था। हम गए, इतना ही नहीं। जाफना जहां 20-20 साल तक बम और बंदूक का ही कारोबार चलता था, उस जाफना में जाकर के उन दुखियारों के आंसू पोंछने का काम करने का सौभाग्‍य मुझे मिला। एक प्रधानमंत्री के रूप में जाफना जाने का सौभाग्‍य मुझे मिला।

हमारे पड़ोस में मालदीव, आइलैंड पर बसा हुआ देश, tourism की दृष्‍टि से काफी आगे बढ़ा है। अचानक एक दिन उनके यहां पानी के सारे संयंत्र खराब हो गए। पूरे देश के पास पीने का पानी नहीं था। आप कल्‍पना कर सकते हो, कोई देश के पास पीने का पानी न हो। कितना बड़ा गहरा संकट आया। मालदीव से हमें message आया कि ऐसी मुसीबत आई है। एक पल का इंतज़ार नहीं किया, भाइयों और बहनों। हवाई जहाज से पीने का पानी पहुंचाया मालदीव में। दूसरे दिन स्‍टीमर से पानी पहुंचाना शुरू कर दिया और जब तक उनकी वो मशीन चालू नहीं हुई, पानी की व्‍यवस्‍था दुबारा पुनर्जीवित नहीं हुई, हमने मालदीव को प्‍यासा नहीं रहने दिया।

अफगानिस्‍तान हमारा पड़ोसी है। अफगानिस्‍तान संकटों से गुजर रहा है। लंबे अरसे से आए दिन वो घाव झेलता चला जा रहा है। हर पल अफगानिस्‍तान को मरहम लगाने का काम हिन्‍दुस्‍तान करता आया है। अफगानिस्‍तान फिर से एक बार खड़ा हो जाए, क्‍योंकि हम सब बचपन से काबुलीवाला से तो बहुत परिचित हैं। जब काबुली वाले की बात करते हैं, तो हमें कितना अपनापन महसूस होता है। भाइयों-बहनों हमारी कोशिश रही है भारत को विकास की नई ऊचाइयों पर ले जाना। भारत में निरंतर विकास को आगे बढ़ाना और अपने अड़ोस-पड़ोस के देशों से दोस्‍ती बनाकर करके साथ और सहयोग लेकर करके आगे चल पड़ना।

SAARC देशों का समूह उसमें एक नया प्राण पूरने का प्रयास किया है, सफलतापूर्वक प्रयास किया है। वरना पहले SAARC देशों के मंच का उपयोग तू-तू मैं मैं के लिए होता था, कभी भारत को घेरने के लिए होता था। आज SAARC देशों के लोग, जितने साथ चल सकते हैं, उनको ले करके इन SAARC की इकाई का विकास की ऊंचाइयों पर ले जाने का सपना हमने देखा था। हमने घोषित किया है कि 2016 में हम आकाश में एक SAARC Satellite छोड़ेंगे जिसकी सेवाएं SAARC देशों में मुफ्त में देंगे, जो शिक्षा के काम आए , जो आरोग्‍य के लिए काम आये, जो किसानों को काम आये, जो मछुआरों के काम आये, सामान्‍य जन को काम आये। अभी हम बीच में सोच रहे थे कि SAARC देश Connectivity के लिए गंभीरता से सोचे और हम जानते हैं, आज विकास में Connectivity का महत्‍व बहुत है। आप समुद्री मार्ग से जुडि़ए या रेल मार्ग से जुडि़ए, या रोड मार्ग से जुडि़ए, जुड़ना जरूरी है। यूरोप के देशों को ये लाभ मिला हुआ है। एक देश से दूसरे देश चले जाओ पता तक नहीं चलता कि देश कब बदल गया। क्‍या ये SAARC देशों के बीच नहीं हो सकता है? हमने मिल करके सामूहिक निर्णय करने का प्रयास किया नेपाल में। लेकिन आप जानते हैं, कुछ लोगों को जरा तकलीफ होती है, लेकिन कुछ लोगों की तकलीफ के लिए क्‍या रुकना चाहिए? हमारे काम को क्‍या हमें रोक देना चाहिए? हमें अटक जाना चाहिए क्‍या? ठीक है आपकी मर्जी, आप वहां रह जाइये, हम तो चल पड़े भाई और हमने क्‍या किया। एक बहुत बड़ा अहम फैसला लिया है भाइयों और बहनों, इसका प्रभाव आने वाले दिनों में क्‍या होने वाला है, वो तो वक्‍त बताएगा। नेपाल, भूटान, भारत, बांग्‍लादेश, इन चार देशों ने एक नया इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर बना करके Connectivity का एक पूरा काम तय कर लिया, Agreement हो गया, ये आगे चल करके नॉर्थ-ईस्‍ट से जुड़ेगा। वहां से ये म्‍यांमार मार्ग से जुड़ेगा। वो इंडोनेशिया, थाइलैंड, पूरब, हिन्‍दुस्‍तान, पूरब की बीच की तरफ भारत को Connectivity की ताकत देगा एक नया भारत का बदला हुआ, संबंधों का नया विश्‍व खड़ा हो जाएगा।

भाइयों-बहनों, एक निश्चत समय के साथ भारत अपनी भूमिका भी अदा करें, भारत बड़े होने के अहंकार से नहीं, हर किसी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलना चाहता । विकास की नई ऊंचाईयों को पार करना चाहता। भारत में नौजवानों को रोजगार मिले, हमारे कृषि में Second Green Revolution हो, हमारा पूर्वी हिन्‍दुस्‍तान, चाहे पूर्वी उत्‍तर प्रदेश हो, चाहे बिहार हो, चाहे पश्चिम बंगाल हो, चाहे असम हो, चाहे नॉर्थ-ईस्‍ट हो, चाहे ओडि़शा हो, ये हमारा जो इलाका है, ये मानना पड़ेगा कि वहां विकास की ज्‍यादा जरूरत है। अगर वहां पर विकास हो गया और हिन्‍दुस्‍तान का पश्चिमी छोर और पूरब का छोर बराबर हो गये, तो भारत बहुत तेज गति से दौड़ने लग जाएगा और इसलिए भारत के इस पूर्वी छोर पर आर्थिक विकास का एक नया अभियान हमने चलाया है। Infrastructure खड़ा करने का एक नया अभियान चलाया है। Fertiliser के नये कारखाने शुरू कर रहे हैं। गैस की पाइप लाइन लगानी है। बिजली पहुंचानी है। आप मुझे बताइए आजादी के इतने सालों के बाद बिजली होनी चाहिए कि नहीं होनी चाहिए? बिजली मिलनी चाहिए या नहीं मिलनी चाहिए? क्‍या आज के युग में बिजली के बिना गुजारा संभव है? भाइयों-बहनों हमने सपना संजोया है। पांच साल के भीतर-भीतर हम देश के कोने-कोने में 24 घंटे बिजली मैंने देने के लिए फैसला किया। ये हम करके रहेंगे।

दुबई में रहने वाले मेरे प्‍यारे भाइयो-बहनों, हमने एक महत्‍वपूर्ण योजना घोषित की है । हमारे देश में लोगों को पहले Bank Accounts नहीं थे, हमने हर हिन्‍दुस्‍तानी का Bank Account खोल दिया, एक काम किया। भारत में हमारे देश के नागरिकों को इंश्‍योरंस नहीं है, बीमा नहीं है। उसके परिवार में कोई आपत्ति आ जाए, पीछे वालों को देखने की कोई व्‍यवस्‍था नहीं। हमने तीन योजनाएं लगाई हैं, एक प्रधानमंत्री बीमा सुरक्षा योजना, प्रधानमंत्री जीवन ज्‍योति योजना और इंश्‍योरेंस के लिए कितना पैसा देना है? एक स्‍कीम ऐसी है कि जिसमें एक महीने में सिर्फ एक रुपया देना है, 12 महीने में 12 रुपया। हमारे देश का गरीब से गरीब व्‍यक्ति भी दे सकता है या नहीं दे सकता है? मुझे बताइए दे सकता है या नहीं दे सकता है? गरीब से गरीब व्‍यक्ति एक रुपया महीने में दे सकता है या नहीं दे सकता है? महीने का 12 रुपया,.. साल भर का 12 रुपया, साल भर का 12 रुपया देगा, दो लाख रुपयों का सुरक्षा का बीमा मिलेगा। दूसरी योजना है जिसमें उसे और भी मददें मिलेंगी, वो है एक दिन का नब्‍बे पैसा, एक रुपया भी नहीं, एक दिन का एक रुपया भी नहीं, आज तो चाय भी एक रुपये में मिलती नहीं है। मैं जब चाय बेचता था तो एक रुपया भी नहीं मिलता था। लेकिन आज एक रुपये में चाय नहीं मिलती है। एक दिन का नब्‍बे पैसा, साल भर के 330 रुपये, और उसे भी ये सुरक्षा कवच मिलेगा। Natural मृत्‍यु होगा Natural अकस्‍मात नहीं हुआ है, सहज, तो भी उसके परिवार को दो लाख रुपया मिलेगा। हमने लोगों से आग्रह किया है कि रक्षाबन्‍धन के पर्व पर हमारे देश की परम्‍परा है, हम अपनी बहनों को Best सौगात देते हैं। कोई न कोई Gift देते हैं। मैं मेरे, Gulf Countries में रहने वाले मेरे प्‍यारे भाइयों बहनों का आग्रह करता हूं, इस बार रखी के त्‍यौहार पर आप अपनी बहन को ये जीवन सुरक्षा योजना दे दीजिए। अगर आप 600 रुपया बैंक में Fixed Deposit करा दोगे, तो हर साल उसको 12 रुपये से ज्‍यादा Interest मिलेगा, कटता जाएगा और आपकी बहन को दो लाख रुपये का सुरक्षा का कवच मिल जाएगा, और दोनों योजना लें लेगे, उतने पैसे जमा करा दिये, तो चार लाख रुपया उसके चरणों में आपकी तरफ से पहुंच जाएगा। भाइयो-बहनों, हमनें समाज-जीवन को एक सुरक्षित बनाना है, हमारी नई पीढ़ी को शिक्षित बनाना है, देश को आधुनिक बनाना है, और आज जब विश्‍व का भारत की तरफ आकर्षण बढ़ा है, उस परि‍स्थिति का हमने लाभ उठाना है और देश को विकास की नई ऊंचाइयों पर ले जाना है।

मेरे प्‍यारे भाइयो, बहनों, आपने जो मुझे सम्‍मान दिया, प्‍यार दिया, पूरा हिन्‍दुस्‍तान आपको देख रहा होगा। ये बदले हुए माहौल का असर हर भारतवासी के दिल पर भी होता है। और मुझे लगता है कि विश्‍व भर में जो हमारा भारतीय समुदाय पहुंचा है, उस भारतीय समुदाय को भी आज एक नई ऊर्जा, नई शक्ति मिली है। आज जब मैं अबुधाबी आया, दुबई आया, तो कुछ बातें मेरे ध्‍यान में आई हैं, उसके विषय में भी आज आपको मैं कह करके जाना चाहता हूं, Embassy के संबंध में, Counsel के संबंध में, आपकी शिकायतें रहती हैं, नहीं रहती हैं? नहीं रहती हैं तो अच्‍छी बात है। लेकिन अगर रहती हैं तो भारत सरकार ने ‘MADAD’ नाम का एक Online Platform बनाया है, इस ‘MADAD’ नाम के Online Platform का उपयोग दुनिया भर में फैले हुए हमारे भारतीय भाई, बहन उसका उपयोग कर सकते हैं, ताकि आपकी बात आगे पहुंच सकती है। मोबाइल फोन के द्वारा भी आप उनका सम्‍पर्क कर सकते हैं। एक, दूसरा काम किया है, E-migrate portal शुरू किया गया है। जिसके द्वारा इस प्रकार सके हमारे प्रवासी भारतीयों को कोई शिकायत हो, कोई कठिनाई हो, तो उनको Emigration Office के चक्‍कर काटने नहीं पड़ेंगे ये E-migrate portal पर अपनी बात रख करके वो मदद ले सकता है, इसकी एक व्‍यवस्‍था की गई है, क्‍यों यहां दूर-दूर से आपका वहां जाना, बहुत तकलीफ होती है। मुझे ये भी बताया गया कि कही- कहीं पर E-migrate Portal का उपयेाग करने में नागरिकों को दिक्‍कत होती है इसके लिए मैंने हमारे Embassy को आदेश किया है कि वे ये जो Technical Problem है इसका 30 दिन के भीतर-भीतर Solution दें। आज 17 अगस्‍त है, 17 सितम्‍बर तक Solution दें, ऐसा मैंने उनसे कहा है और मुझे विश्‍वास है कि हमारे Embassy के भाई, ये जो Technical Problem कहीं-कहीं आता है, उसका रास्‍ता निकालेंगे।

एक और काम मैंने कहा है, यहां भारतीय समुदाय ज्‍यादातर workers हैं। उनके पास इतने पैसे नहीं कि एक जगह से दूसरी जगह पर वो भागते रहें और इसलिए हमने कहा है, कि हम समय-समय पर जहां हमारे भारतीय भाई समुदाय रहते हैं, वहां जा करके, Counselor Camp लगाएं। महीने में एक बार, दो महीने में एक बार, और वहीं जा करके उनसे बैठें, बातचीत करें, और उनकी समस्‍या के समाधान के लिए योग्‍य व्‍यवस्‍था करें। मैं यहां ये बातें इसलिए कह रहा हूं कि ये भू-भाग ऐसा है, के जहां मेरे गरीब तबके के भाई-बहन रहते हैं, मजदूरी करने के लिए यहां आए हुए हैं। अमेरिका के लिए कुछ कर पाऊं, या न कर पाऊं लेकिन अगर आपके लिए नहीं कुछ करता तो मैं बेचैन हो जाता हूं। और इसलिए हमने एक और काम किया है, इन दिनों विदेशों में कभी-कभी जाते हैं तो हमारे भारतीय भाई कभी-कभी संकट में जैसे अचानक बीमारी आ गई, कुछ हो गया, कभी कोई कानूनी पचड़े में फंस गए, बेचारे जेल चले गए। तो दुनिया के बाहर कौन उनको देखने वाला है? परिवार तो है नहीं, और इन हमारे कभी-कभी मुसीबत में कोई परिवार आ जाए तो उनकी मदद करने के लिए Indian Community Welfare Fund (ICWF) स्‍थापित किया गया है। सब दूतावासों को ये Welfare Fund दिया गया है, और इसलिए ऐसी मुसीबत में कोई फंस गया हो तो उनको कानून की मर्यादा में रह करके जो मदद हो सकती है, कोई अगर जेल में बंद हुआ है, तो कम से कम उसको खाना-पीना मिल जाए मानवता की दृष्‍टि से कोई व्‍यवस्‍था हो जाए, इन सारे कामों के लिए एक Fund की हमने व्‍यवस्‍था की है। हमने ये भी निर्णय किया है, इस Fund के द्वारा दूतावास, Counsel में Counselor सुविधाएं और अच्‍छी कैसे बनें, जो नागरिकों की भलाई के लिए हों, उनके लिए भी इसका उपयोग किया जाएगा। जिनको कानूनी सलाह की जरूरत पड़ेगी और अगर वो खुद इसको करने के लिए स्थिति नहीं है, कभी-कभार तो एक हजार-दो हजार का दंड बेचारा नहीं भर पाता, उसके कारण जेलों में सड़ता रहता है। ऐसे लोगों को मदद करके, भारतीय नागरिक होने के नाते उनको मदद करना इसके लिए Welfare Fund का उपयोग हो, ताकि वो संकटों से बाहर आ सकें, ये भी हमने व्‍यवस्‍था करने के लिए कहा है। मैं जानता हूं यहां पर स्‍कूलों में Admission में कितनी दिक्‍कत होती है, आपके बच्‍चों को स्‍कूलों में पढ़ाई की कितनी दिक्‍कत होती है? मैंने यहां के संबंधित लोगों से ये बात कही है और मैंने कहा है कि अधिक स्‍कूल कैसे बनें, उसकी चिन्‍ता मैंने की है, देखते हैं, मुझे विश्‍वास है कि आने वाले दिनों में उसका भी लाभ आप लोगों को मिलेगा।

मुझे विश्‍वास है मेरे भाइयो, बहनों, कि जो आपकी छोटी-मोटी बातें मेरे ध्‍यान में आई थीं, इसको पूरा करने का मैंने प्रयास किया है। मैं फिर एक बार आप सबको दृदय से बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं और दुनिया में कहीं पर भी मेरा भारतवासी है, तो हम पासपोर्ट का रंग नहीं देखते हैं। हमारा खून का रंग काफी है, वो धरती का नाता काफी है, और इसलिए आइए मेरे साथियो हम सब मिल करके जहां भी हों, मां भारती का माथा ऊंचा करने के लिए, गौरव से जीवन जीने के लिए एक माहौल बनाने में सक्रिय शरीक हों और आपका योगदान आपकी शक्ति सामर्थ्‍यवान आपके परिवार को भी भला करने में काम आए, देश का भी भला करने के लिए काम आए।

इसी शुभ कामनाओं के साथ आप सबका बहुत-बहुत धन्‍यवाद।

मेरे साथ दोनों मुट्ठी बंद करके बोलिए, भारत माता की जय। दोनों मुट्ठी पूरी बंद करके पूरी ताकत से बोलिए, भारत के कोने-कोने में, आपके अपने गांव में आवाज पहुंचनी चाहिए भारत माता की जय, भारत माता की जय, भारत माता की जय, भारत माता की जय।

बहुत-बहुत धन्‍यवाद।

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माझ्या प्रिय देशवासियांनो, नमस्कार! आज जेंव्हा आपल्या सर्वांचं धैर्य, दुःख सहन करण्याच्या मर्यादेची कोरोना परीक्षा पहात आहे, अशा वेळेस आपल्याशी मन की बात मधून संवाद साधत आहे. आपल्या सर्वांचे कित्येक जिवलग अकालीच आपल्याला सोडून गेले आहेत. कोरोनाच्या पहिल्या लाटेचा यशस्वीपणे सामना केल्यानंतर देशामध्ये खूप मोठी उमेद निर्माण झाली होती, आत्मविश्वासाने देश भारलेला होता, परंतु या कोरोनाच्या वादळाने देशाला हादरवून टाकलं आहे.

 

मित्रांनो गेल्या काही दिवसात, या संकटाचा मुकाबला करण्यासंदर्भात माझी, वेगवेगळ्या क्षेत्रांतल्या तज्ज्ञांबरोबर दीर्घ चर्चा झाली आहे. आमच्या औषध निर्माण उद्योगांच्या क्षेत्रातले लोक असोत की लस उत्पादनाशी संबंधित लोक असोत, ऑक्सिजनच्या निर्मितीशी संबंधित लोक असोत किंवा मग वैद्यकीय क्षेत्रातले जाणकार असोत, त्यांनी अत्यंत महत्वपूर्ण सूचना सरकारला केल्या आहेत. यावेळी, आम्हाला हे युद्ध जिंकण्यासाठी, तज्ज्ञ आणि वैज्ञानिक सल्ल्याला प्राधान्य द्यायचं आहे. राज्यसरकारांच्या प्रयत्नांना पुढे नेण्यासाठी, भारत सरकार पूर्ण शक्तिनं त्यांच्या पाठिशी खंबीरपणे उभं आहे. राज्य सरकारंही आपापली जबाबदारी निभावण्यासाठी पूर्ण प्रयत्न करत आहेत.

 

मित्रांनो, देशातले डॉक्टर्स आणि आरोग्य कर्मचारी कोरोनाच्या विरोधात यावेळी खूप मोठ्या लढाईमध्ये गुंतले आहेत. या आजाराबाबत त्यांना गेल्या एक वर्षात वेगवेगळ्या प्रकारचे अनुभवही आले आहेत. आमच्याबरोबर, आता यावेळी मुंबईतले प्रसिद्ध डॉक्टर शशांक जोशीजी जोडले गेले आहेत.

 

डॉक्टर जोशी जींकडे कोरोनावरील उपचार आणि त्यासंदर्भातल्या संशोधनाचा प्रत्यक्ष अनुभव मोठा आहे, आणि ते इंडियन कॉलेज ऑफ फिजिशियन्सचे अधिष्ठाताही राहिले आहेत. या आपण आता डॉ. शशांक यांच्याशी बातचीत करू या.

 

मोदी जीः नमस्कार, डॉ. शशांक जी.

 

डॉ० शशांक – नमस्कार सर |

 

मोदी जीः आता अलिकडेच काही दिवसांपूर्वीच आपल्याशी चर्चा करण्याची संधी मिळाली होती. आपले स्पष्ट विचार मला अत्यंत आवडले होते. मला असं वाटलं की, देशातल्या सर्व नागरिकांनी आपले विचार जाणून घ्यायला हवेत. ज्या गोष्टी हल्ली ऐकायला मिळतात, त्याबाबतच मी एक प्रश्न विचारू इच्छितो. डॉ. शशांक, आपण सर्व जण सध्या दिवसरात्र लोकांचे जीव वाचवण्याच्या कामात गुंतला आहात. सर्वात प्रथम आपण लोकांना कोरोनाच्या दुसऱ्या लाटेबद्दल सांगावं, असं मला वाटतं. वैद्यकीय दृष्ट्या ही लाट कशी वेगळी आहे आणि त्यासाठी काय खबरदारी आवश्यक आहे.

 

डॉ० शशांक – धन्यवाद, सर. ही दुसरी लाट आली आहे, ती खूप वेगानं आली आहे आणि पहिल्या लाटेपेक्षा विषाणुच्या संसर्गाची गति जोरात आहे. परंतु, त्याच्या संसर्गापेक्षाही जास्त गतिनं लोक बरे होत आहेत आणि मृत्युदरही खूप कमी आहे, ही याच्याबाबतीत दिलासादायक गोष्ट आहे. या लाटेबाबत दोन- तीन फरक आहेत. पहिल्यांदा कोरोनाचा संसर्ग युवक आणि मुलांमध्येही थोडा दिसून येत आहे. त्याची जी श्वास लागणं, कोरडा खोकला येणं, ताप येणं ही पहिल्या लाटेसारखी लक्षणं तर आहेतच, परंतु त्याबरोबर वासाची जाणिव नष्ट होणं, चव न लागणं हीही आहेत. आणि लोक थोडे घाबरले आहेत. खरंतर लोकांनी घाबरण्याची अजिबात गरज नाही. 80 ते 90 टक्के लोकांमध्ये याची कोणतीही लक्षणं दिसत नाहीत. आणि हे जे उत्परिवर्तन किंवा म्युटेशन वगैरेबाबत बोललं जातं, त्यामुळे घाबरण्याची काहीच आवश्यकता नाही. हे म्युटेशन्स होत राहतात अगदी आपण जसं कपडे बदलतो तसे विषाणुही आपलं रूप बदलत असतात आणि त्यामुळे मुळीच घाबरण्याची आवश्यकता नाही. आम्ही या लाटेला परतवून लावू. लाटा येत जात राहतात आणि विषाणुही येत जात असतात आणि त्यांची लक्षणं वेगवेगळी असतात. वैद्यकीय दृष्ट्या आम्हाला सतर्क रहाण्याची गरज आहे. कोविडचा 14 ते 21 दिवसांचा कालावधी असून त्यात आपल्या डॉक्टरांचा सल्ला घेत राहिलं पाहिजे.

 

मोदी जीः डॉ. शशांक, आपण जे विश्लेषण सांगितलं, ते माझ्यासाठीही खूप महत्वाचं आहे. मला खूप पत्रं आली असून त्यात उपचारांबाबत लोकांच्या मनात अनेक शंका आहेत. औषधांची मागणी काहीशी जास्त प्रमाणात आहे. म्हणून आपण कोविडवरील उपचारांबाबतही लोकांना माहिती द्यावी, असं मला वाटतं.

 

डॉ० शशांकः हां सर. लोक खूप उशिरानं क्लिनिकल उपचार सुरू करतात आणि आपोआप आजार जाईल, अशा विश्वासावर रहातात. तसंच मोबाईलवर येणाऱ्या माहितीवर विश्वास ठेवतात. आणि, जर सरकारच्या कडून देण्यात आलेल्या सूचनांचं पालन केलं तर या संकटाचा सामना करण्याची वेळच येत नाही. कोविडमध्ये क्लिनिकल उपचारांबाबत नियमावली आहे आणि त्यात तीन प्रकारच्या तीव्रतेनुसार म्हणजे सौम्य कोविड, मध्यम किंवा माफक प्रमाणातला कोविड आणि तीव्र कोविड ज्याला म्हणतात, त्याच्यासाठी हे नियम आहेत. जो सौम्य कोविड आहे,त्यासाठी आम्ही ऑक्सिजनवर नजर ठेवून असतो, तापावर देखरेख करत असतो आणि ताप वाढला तर पॅरासिटॅमॉलसारख्या औषधाचा वापर करतो. सौम्य कोविड किंवा मध्यम किंवा तीव्र स्वरूपाचा असला तरीही, आपल्या डॉक्टरांशी संपर्क साधला पाहिजे. कोविड कोणत्याही स्वरूपाचा असला तरीही आपल्या डॉक्टरशी संपर्क ठेवणं खूप आवश्यक आहे. अगदी अचूक आणि स्वस्त औषधंही उपलब्ध आहेत. यामध्ये उत्तेजक म्हणजे स्टेरॉईड आहे, जे जीव वाचवू शकते. इनहेलर देता येतं तसंच टॅबलेटही देता येतात आणि त्याबरोबरच प्राणवायु द्यावा लागतो आणि त्यासाठी लहान लहान स्वरूपाचे उपचार आहेत. परंतु हल्ली एक नवीन प्रयोगात्मक औषध ज्याचं नाव रेमडेसिवीर आहे. त्याच्या वापरामुळे रूग्णाचा रूग्णालयात राहण्याचा कालावधी दोन ते तीन दिवसांनी कमी होतो आणि क्लिनिकल रिकव्हरीमध्ये त्याची मदत होते. आणि हे ही औषध पहिल्या नऊ ते दहा दिवसात दिलं तरच काम करतं आणि पाचच दिवस ते देता येतं. परंतु असं पाहिलं गेलं आहे की, लोक रेमडेसिवीरच्या मागे धावत सुटले आहेत. असं मुळीच धावता कामा नये. हे औषध थोड्या प्रमाणातच काम करतं. ज्यांना प्राणवायुची आवश्यकता आहे,ते रूग्णालयात दाखल होतात. परंतु डॉक्टर सांगतील तेव्हाच बाहेरून प्राणवायु घेतला पाहिजे. लोकांनी हे समजून घेणं खूप आवश्यक आहे. आपण प्राणायाम केला, आपल्या शरिरातल्या फुफ्फुसांना जरासं विस्तारित केलं, आणि शरिरातलं रक्त पातळ करणारी जी इंजेक्शन्स येतात, ती घेतली, ज्यांना आम्ही हेपरिन म्हणतो, या छोट्या छोट्या औषधांनीही 98 टक्के रूग्ण बरे होतात. शिवाय, लोकांनी सकारात्मक रहाणंही खूप आवश्यक आहे. उपचार डॉक्टरांच्या सल्ल्यानंच घेणं अत्यंत आवश्यक आहे. या महागड्या औषधांच्या मागं धावण्याची काहीच गरज नाही सर.

 

आपल्याकडे चांगले उपचार सुरू आहेत. प्राणवायु आहे, व्हेंटीलेटरची सुविधाही आहे आणि सर्व काही आहे. आणि जेंव्हा केंव्हा ही औषधे मिळतील तेंव्हा ती पात्र लोकांनाच दिली गेली पाहिजेत. आपल्याकडे याबाबतीत खूप गैरसमज पसरवले जात आहेत. यासाठी, आपल्याकडे जगातले सर्वात उत्कृष्ट उपचार उपलब्ध आहेत, हे मी स्पष्ट करु इच्छितो. आपण पाहू शकता की, भारतात रूग्ण बरे होण्याचा दर (रिकव्हरी रेट) सर्वात चांगला आहे. आपण युरोप किंवा अमेरिकेशी तुलना केली तर आमच्याकड़े रूग्ण उपचारांच्या नियमावलीनुसार बरे होत आहेत सर.

 

मोदी जीः डॉ. शशांक, आपले खूप खूप धन्यवाद. डॉ. शशांक यांनी जी माहिती आपल्याला दिली, ती खूप आवश्यक आहे आणि आपल्या सर्वांना उपयुक्त ठरेल.

मित्रांनो, आपल्याला कोणतीही माहिती हवी असेल किंवा कोणतीही शंका असेल तर ती योग्य व्यक्तिकडूनच ती माहिती घ्या. आपले फॅमिली डॉक्टर्स असतील किवा आसपास जे डॉक्टर्स असतील, त्यांच्याकडून दूरध्वनीवरून संपर्क करून माहिती घ्या. आमचे खूप सारे डॉक्टर्स स्वतःच ही जबाबदारी घेत आहेत, हे ही मी पहात आहे. काही डॉक्टर्स समाजमाध्यमांच्या द्वारे लोकांना माहिती देत आहेत. फोनवर किंवा व्हॉट्सअपवर लोकांचे समुपदेशन करत आहेत. अनेक रूग्णालयांच्या वेबसाईट आहेत ज्यावरही माहिती उपलब्ध आहे. तेथे आपण डॉक्टर्सकडून सल्लाही घेऊ शकता, हे खूप प्रशंसनीय आहे.

 

माझ्या समवेत श्रीनगरचे डॉक्टर नाविद शाह जोडले गेले आहेत. डॉक्टर नाविद हे श्रीनगरच्या सरकारी वैद्यकीय महाविद्यालयात प्राध्यापक आहेत. नाविदजी यांनी आपल्या देखरेखीखाली अनेक कोरोना रूग्णांना बरं केलं आहे आणि रमजानच्या या पवित्र महिन्यातही डॉ. नाविद आपलं कार्य करत आहेत. त्यांनी आमच्याशी बातचीत करण्यासाठी वेळ काढला आहे. त्यांच्याशी आता चर्चा करू या.

 

मोदी जीः नाविद जी, नमस्कार.

डॉ. नावीदः नमस्कार सर |

 

मोदी जीः डॉक्टर नाविद, मन की बातच्या आमच्या श्रोत्यांनी या बिकट प्रसंगी घबराट व्यवस्थापन म्हणजे पॅनिक मॅनेजमेंटचा प्रश्न उपस्थित केला आहे. आपण आपल्या अनुभवानुसार त्यांना काय सांगाल?

 

डॉ. नावीदः जेंव्हा कोरोना महामारी सुरू झाली तेव्हा सर्वप्रथम जे रूग्णालय कोविड़साठी विशेष रूग्णालय म्हणून नियुक्त करण्यात आलं, ते आमचं सिटी हॉस्पिटल होतं. जे वैद्यकीय महाविद्यालयाच्या अंतर्गत येतं. त्यावेळेस एक दहशतीचं वातावरण होतं. कोविडचां संसर्ग ज्याला होतो, त्याच्यासाठी हे मृत्युचं आमंत्रणच आहे, असं लोक मानायचे आणि आमच्या रूग्णालयातले डॉक्टर आणि निम वैद्यकीय कर्मचार्यांमध्येही अशा रूग्णांना आम्ही सामोरं कसं जायचं, आम्हाला संसर्ग होण्याचा धोका तर नाहि, अशी दहशत होती. जसा काळ गेला तसं आम्ही पाहिलं की, संपूर्ण प्रकारचं संरक्षक साधनं आम्ही वापरून सुरक्षेची खबरदारी घेतली, तर आम्ही सुरक्षित राहू शकतो आणि आमचे बाकी कर्मचारीही सुरक्षित राहू शकतात. पुढे तर आम्ही पाहिलं की, काही रूग्ण किंवा जे आजारी लोक होते ते असिम्प्टोमॅटिक म्हणजे त्यांच्यात कोविडची कसलीच लक्षणं नव्हती. जवळपास 90 ते 95 टक्के उपचाराविनाही ठीक होतात, हेही आम्ही पाहिलं आणि जसा काळ गेला तसा लोकांमध्ये कोरोनाच्या बाबतीत जी एक भीती होती ती खूपच कमी झाली. आज आमच्याकडे कोरोनाची दुसरी लाट आली आहे. परंतु यावेळीही आम्हाला घाबरण्याची अजिबात गरज नाहि. यावेळीही जे संरक्षक उपाय आहेत, मास्क वापरणं, सॅनिटायझरनं हात सतत धुणं आणि शारिरिक अंतर राखणं किंवा सामाजिक मेळावे टाळणं अशी जी आदर्श कार्यप्रणाली आहे तिचं पालन केलं तर आम्ही आपलं दैनंदिन काम अगदी चांगल्या प्रकारे पार पाडू शकतो आणि या आजारापासून संरक्षणही प्राप्त करू शकतो.

 

मोदी जीः डॉ. नाविद, लसीबाबतही लोकांच्या मनात खूप प्रश्न आहेत. लसीपासून कितपत सुरक्षा मिळेल, लस घेतल्यानंतर किती प्रमाणात आश्वस्त राहू शकतो? आपण याबाबतीत काही सांगितलं तर श्रोत्यांना त्याचा खूप फायदा होईल.

 

डॉ० नावीदः आपल्याकडे कोरोनाचा संसर्ग झाल्याचं समोर आलं तेव्हापासून आजपर्यत आमच्याकडे कोविड-19 साठी कोणतेही परिणामकारक उपचार उपलब्ध नाहित. म्हणून, आम्ही या आजाराशी दोन प्रकारे लढा देऊ शकतो. एक म्हणजे प्रमुख संरक्षक उपाय आणि आम्ही प्रथमपासून हेच सांगत आलो आहोत की, जर एखादी परिणामकारक लस आमच्याकडे आली तर या आजारापासून आम्हाला मुक्ती मिळू शकते. यावेळी आमच्या देशात कोवॅक्सिन आणि कोव्हिशिल्ड या दोन लस उपलब्ध आहेत. या दोन्ही लस याच देशात तयार झाल्या आहेत. आणि ज्या कंपन्यांनी ज्या चाचण्या घेतल्या आहेत, त्यातून असं पाहिलं गेलं आहे की, त्यांची परिणामकारकता 60 टक्क्याहून अधिक आहे. आणि जम्मू आणि काश्मीरबाबत बोलायचं तर, आमच्या केंद्रशासित प्रदेशात आतापर्यंत 15 ते 16 लाख लोकांनी लस घेतली आहे. एक आहे की, समाजमाध्यमांमध्ये या बद्दल खूप गैरसमज आहेत किंवा गृहितकं आहेत. लस घेतल्यानं दुष्परिणाम होतात वगैरे. तर आमच्याकडे ज्यांनी लस टोचून घेतली आहे, त्यांच्यात काहीही दुष्परिणाम दिसलेले नाहित. कोणत्याही नेहमीच्या लसीसोबत जे परिणाम संबंधित असतात म्हणजे ताप येणं, संपूर्ण अंगदुखी किंवा जेथे इंजेक्शन टोचलं जातं त्या भागात वेदना होणं हे दुष्परिणाम प्रत्येक रूग्णाच्या बाबतीत पाहिले आहेत. परंतु एकंदरीत कोणतेही विपरित परिणाम आम्ही पाहिलेले नाहित. दुसरी गोष्ट म्हणजे, काही लोक लसीकरणाच्या नंतर कोविड पॉझिटिव्ह झाले. याबाबतीत तर कंपन्यांनीच मार्गदर्शक तत्वांमध्ये जाहिर केलं आहे की, जर लस टोचून घेतल्यानंतर कुणाला संसर्ग झाला तर तो पॉझिटिव्ह असू शकतो. परंतु, त्या रूग्णांमध्ये आजाराची जी तीव्रता आहे ती तितकीशी रहाणार नाही म्हणजे ते पॉझटीव्ह असू शकतात परंतु तो आजार जीवघेणा सिद्ध होऊ शकत नाही. त्यामुळे लसीबाबत जो आमच्या मनात गैरसमज आहे तो आपण काढून टाकला पाहिजे. आणि जे जे पात्र ठरतील त्यांनी लस टोचून घेतली पाहिजे. कारण एक मे नंतर देशात 18 वर्षावरील प्रत्येकाला लस टोचण्याचा कार्यक्रम सुरू होईल. म्हणून लोकांना हेच आवाहन करेन की, आपण लस टोचून घ्या आणि स्वतःला सुरक्षित करून घ्या. त्यामुळे एकंदरीत आमचा समाज, आमचा समुदाय कोविड-19 संसर्गापासून संरक्षित होईल.

 

मोदी जीः डॉ. नाविद, आपल्याला खूप खूप धन्यवाद. आणि आपल्याला रमजानच्या पवित्र महिन्याच्या खूप खूप शुभेच्छा.

 

डॉ० नाविद: खूप खूप धन्यवाद.

 

मोदी जीः मित्रांनो, कोरोनाच्या या संकट काळात लसीचं महत्व तर सगळ्यांनाच पटलं आहे. म्हणून, लसीच्या बाबतीत कोणत्याही अफवांना बळी पडू नका, असा माझा आग्रह आहे. आपल्याला सर्वांना माहितच असेल की, भारत सरकारकडून सर्व राज्यसरकारांना विनामूल्य लस पुरवण्यात आली आहे, जिचा लाभ 45 वर्षांवरील सर्व लोक घेऊ शकतात. आता तर एक मेपासून देशात 18 वर्षांवरील प्रत्येकाला लस उपलब्ध होणार आहे. आता देशातलं कॉर्पोरेट क्षेत्र, कंपन्यासुद्धा आपल्या कर्मचाऱ्यांच्या लसीकरणाची मोहिम राबवण्यातील भागीदारीचं पालन करू शकतील. भारत सरकारकडून जो विनामूल्य लसीकरणाचा कार्यक्रम सुरू आहे, तो पुढेही चालूच राहिल, हे ही मला सांगायचं आहे. माझा राज्यांना आग्रह आहे की, त्यांनी भारत सरकारच्या या विनामूल्य लसीकरण मोहिमेचा फायदा आपल्या राज्यातील नागरिकांना जास्तीत जास्त प्रमाणात पोहचवावा.

 

मित्रांनो, आजाराच्या काळात, आपली तसंच आमच्या कुटुंबाची देखभाल करणं मानसिक स्तरावर किती अवघड असतं, हे आपणा सर्वाना माहितच आहे. परंतु, आमच्या रूग्णालयातील परिचारिकांना तर हेच काम सातत्यानं, अनेक रूग्णांसाठी एकाचवेळेस करावं लागतं. हा सेवाभाव आमच्या समाजाची खूप मोठी शक्ति आहे. परिचारिका ज्या प्रकारची सेवा देतात आणि कठोर कष्ट करतात, त्याबाबतीत तर सर्वात चांगल्या प्रकारे एखादी परिचारिकाच सांगू शकेल. म्हणून, मी रायपूरच्या डॉ. बी आर आंबेडकर मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटलमध्ये सेवारत असलेल्या सिस्टर भावना ध्रुवजी यांना मन की बातमध्ये निमंत्रित केलं आहे. त्या अनेक कोरोना रूग्णांची शुश्रुषा करत आहेत. आता त्यांच्याशी बोलू या.

 

मोदी जीः नमस्कार भावना जी!

भावना: आदरणीय प्रधानमंत्री जी, नमस्कार !

मोदी जी: भावना जी...

भावना:- येस सर

 

मोदी जी: मन की बात ऐकणाऱ्यांना आपण हे सांगा की, आपल्या कुटुंबात इतक्या मोठ्या जबाबदाऱ्या पार पाडतानाच मल्टीटास्क करत असताना आपण कोविड रूग्णांच्या शुश्रुषेचं काम करत आहात. कोरोना रूग्णांबाबतीत आपला अनुभव देशवासियांना ऐकायला आवडेल कारण सिस्टर किंवा परिचारिका ही रूग्णाच्या सर्वात जवळ शिवाय सर्वात दीर्घकाळ असते. प्रत्येक गोष्ट ती बारकाईने समजून घेऊ शकते.

 

भावना: जी सर, कोविडच्या संदर्भात माझा एकूण अनुभव दोन महिन्यांचा आहे. आम्ही 14 दिवस ड्युटी करतो आणि 14 दिवस आम्हाला विश्रांती दिली जाते. नंतर दोन महिन्यांनी आमची कोविडची ड्युटी पुन्हा लावली जाते. जेंव्हा सर्वप्रथम माझी कोविड ड्युटी लागली तेव्हा मी आपल्या कुटुंबातील लोकांना कोविड ड्युटीबाबत सांगितलं. मे महिन्यातली ही गोष्ट आहे आणि मी जसं हे सांगितलं तसं सर्वजण घाबरले. व्यवस्थित काम कर, असं मला बजावत होते. तो एक भावनात्मक क्षण होता, सर. जेंव्हा माझी मुलगी मला म्हणाली, “ममा आप कोविड ड्युटीवर जा रहे हो”, तेंव्हा तो क्षण माझ्यासाठी खूपच भावनिक होता. परंतु, जेंव्हा मी कोविड रूग्णाच्या जवळ गेले तेंव्हा एक जबाबदारी घरी सोडून आले. जेंव्हा मी कोविड रूग्णाला भेटले तेंव्हा ते सर्वात जास्त घाबरले होते. कोविडच्या नावानेच सारे रूग्ण इतके घाबरले होते सर की, आपल्याला हे काय होत आहे, आपलं पुढे काय होणार आहे. हेच त्यांना समजत नव्हते. त्यांची भीती दूर करण्यासाठी आम्ही त्यांना एक चांगलं आरोग्यदायी वातावरण तयार केलं सर. आम्हाला जेव्हा कोविड ड्युटी करायला सांगण्यात आलं तेव्हा सर्वप्रथम आम्हाला पीपीई किट घालण्यास सांगण्यात आलं सर, पीपीई किट घालून काम करणं खूपच अवघड आहे. सर, आमच्यासाठी हे सारं खूप अवघड होतं, मी दोन महिन्याच्या ड्युटीमध्ये चौदा चौदा दिवस वॉर्डात, आयसीयू मध्ये आणि आयसोलेशनमध्ये ड्युटी केली, सर.

मोदी जी: म्हणजे एकूण आपण एक वर्षापासून याच प्रकारचे काम करत आहात.

 

भावना: येस सर. तिथं जाण्यापूर्वी मला माझे सहकारी कोण आहेत, हे माहित नव्हतं. आम्ही एका टीमप्रमाणे काम केलं. त्यांचे जे प्रश्न होते, ते सांगितले. आम्ही रूग्णांच्या बाबतीतील माहिती घेतली आणि त्यांच्यातील गैरसमज दूर केले. अनेक लोक कोविडच्या नावानेच घाबरत असत. जेंव्हा आम्ही त्यांची केस हिस्टरी घेत असू तेव्हा त्यांच्यात आम्हाला लक्षणं दिसत होती परंतु भीतीपोटी ते आपली चाचणी करायला धजावत नव्हते. तेंव्हा आम्ही त्यांना समजावून सांगत होतो आणि सर, जेंव्हा आजाराची तीव्रता वाढायची, तेव्हा त्यांची फुफ्फुसं संसर्गित झालेली असत. त्यांना आयसीयूची गरज लागे आणि तेंव्हा ते त्यांच्या संपूर्ण कुटुंबासह येत. एक दोन प्रकरणात आम्ही हे पाहिलं सर आणि प्रत्येक वयोगटाबरोबर आम्ही काम केलं सर. ज्यात लहान मुलं होती, महिला, पुरूष, ज्येष्ठ नागरिक, सर्व प्रकारचे रूग्ण होते. त्या सर्वांशी आम्ही बोललो तेव्हा सर्वांनी हेच सांगितलं की, घाबरल्यामुळे आम्ही आलो नाही. सर्वांकडून आम्हाली हीच उत्तरं मिळाली सर. आम्ही त्याना समजावून सांगितलं की, भीती वगैरे काही नसते आणि आपण आम्हाला साथ द्या, आम्ही आपल्याला मदत करू. बस आपण कोविडच्या नियमावलीचं पालन करा आणि आम्ही त्यांच्याकडून हे करून घेऊ शकलो सर.

 

मोदी जीः भावना जी, आपल्याशी बोलल्यामुळे मला खूप छान वाटलं. आपण खूप चांगली माहिती दिली आहे. आपल्या स्वतःच्या अनुभवावरून दिली आहे. त्यामुळे देशवासियांना यातून एक प्रकारचा सकारात्मकतेचा संदेश जाईल . आपल्याला खूप खूप धन्यवाद भावना जी.

 

भावनाः धन्यवाद सर. जय हिंद सर.

 

 

भावना जी, नर्सिंग स्टाफचे आपल्यासारखेच लाखो बंधुभगिनी आपलं कर्तव्य अत्यंत चांगल्या प्रकारे पार पाडत आहेत. आपण आपल्या आरोग्याची काळजी घ्या. आपल्या परिवाराचींही काळजी घ्या.

मित्रांनो, आपल्या सोबत आता बंगळूरू इथल्या सिस्टर सुरेखा जी आहेत. सुरेखा जी के सी सामान्य रुग्णालयात वरिष्ठ परिचारिका अधिकारी म्हणून कार्यरत आहेत. चला, त्यांचे अनुभवही जाणून घेऊया.

मोदीजी: नमस्कार सुरेखा जी

सुरेखा: देशाच्या पंतप्रधानांसोबत बोलण्याची संधी मला मिळाली. याचा मला अभिमान वाटतो आणि हा मी माझा गौरव समजते.

मोदीजी:सुरेखा जी, आपण आपल्या सहकारी परीचारिकांसोबत तसंच रुग्णालयातल्या इतर कर्मचाऱ्यांसोबत अत्यंत उत्कृष्ट काम करत आहात. भारत तुम्हा सर्वांचा ऋणी आहे. कोविड-19 विरुद्धच्या या लढाईत देशातल्या नागरिकांना तुम्ही काय संदेश द्याल?

सुरेखा: हो सर. एक जवाबदार नागरिक म्हणून मला सर्वांना नक्कीच सांगयला आवडेल की, तुमच्या शेजाऱ्यांशी प्रेमाने वागा तसंच लवकर चाचण्या आणि संपर्कात आलेल्या संशयित रुग्णांचा शोध आपल्याला मृत्यू दर कमी करण्यात नक्कीच मदत करेल. तसंच जर तुम्हाला कोविडची लक्षणं आढळली, तर स्वतःला वेगळं करा आणि जवळच्या डॉक्टरांचा सल्ला घेऊन जितक्या लवकर शक्य आहे, तितक्या लवकर उपचार सुरु करा. सर्व लोकांमध्ये या आजाराबाबत जागृती होणं गरजेचं आहे. सकारात्मक दृष्टीकोन ठेवा. घाबरू नका आणि कुठलाच तणावही घेऊ नका. यामुळे रुग्णाची स्थिती आणखी ढासळू शकते. आणि आमच्या सरकारचे आभारी आहोत आणि आपल्या देशात लस उपलब्ध झाल्याचा आम्हाला अभिमान आहे. मी स्वतः लस घेतली आणि माझ्या अनुभवावरून मला भारताच्या सर्व नागरिकांना सांगायचं आहे की कोणतीही लस तुमचं लगेचच 100% संरक्षण करू शकत नाही. आपल्यात रोगप्रतिकारशक्ती निर्माण व्हायला वेळ लागतो. लस घ्यायला अजिबात घाबरू नका. स्वतःचं लसीकरण करून घ्या. त्याचे अगदी किरकोळ दुष्परिणाम होतात आणि मला आणखी एक संदेश द्यायचा आहे की, घरी राहा, निरोगी राहा, आजारी लोकांसोबत संपर्क टाळा तसंच गरज नसताना नाक, डोळे आणि तोंडाला स्पर्श करू नका. शारीरिक अंतराचे नियम पाळा, मास्क योग्य प्रकारे लावा. आपले हात नियमितपणे स्वच्छ धुवा. आणि आपण घरी जे उपाय करू शकता ते अवश्य करा. आयुर्वेदीक काढा प्या, वाफ घ्या आणि दररोज गुळण्या करा. तसंच श्वसनाचे व्यायाम देखील तुम्ही करू शकता. आणखी एक शेवटची, मात्र अत्यंत महत्वाची गोष्ट म्हणजे कोरोना योद्धे आणि वैद्यकीय व्यावासायिकांबद्दल सहानुभूती असू द्या. आम्हाला आपला पाठिंबा आणि सहकार्याची गरज आहे. आपण एकत्र लढूया. आपण या महामारीतून निश्चित बाहेर पडू. हाच माझा लोकांसाठी संदेश आहे सर.

मोदीजी: धान्यवाद सुरेखा जी.

सुरेखा: धन्यवाद सर.

सुरेखाजी, खरंच या अत्यंत कठीण प्रसंगी आपण नेटाने मोर्चा सांभाळला आहे. आपण आपली काळजी घ्या आपल्या कुटुंबालाही माझ्या खूप खूप शुभेच्छा आहेत. मी सर्व देशबांधवांनाही आग्रह करेन की, जसं भावना जी, सुरेखा जी यांनी त्यांच्या अनुभवातून सांगितलं आहे, तसं कोरोनाशी लढण्यासाठी सकारात्मक उर्जा अत्यंत आवश्यक आहे. आणि देशबांधवांना ही ऊर्जा कायम ठेवायची आहे.

मित्रांनो,

डॉक्टर्स आणि परिचारिकांसोबतच या काळात प्रयोगशाळेतले तंत्रज्ञ आणि रुग्णवाहिकांचे चालक यांच्यासारखे पहिल्या फळीतले कोरोना योद्धे ही देवाप्रमाणेच काम करत आहेत. जेंव्हा एखादी रुग्णवाहिका रूग्णांना घ्याला येते, तेव्हा त्यांना रुग्णवाहिकेचा चालक देवदूतासारखाच वाटतो. हे सर्व लोक करत असलेल्या सेवांविषयी, त्यांच्या अनुभवांविषयी देशाला नक्कीच कळायला हवं. माझ्यासोबत आता असेच एक सज्जन आहेत. श्री प्रेम वर्मा जी. हे एक रुग्णवाहिका चालक आहेत. त्यांच्या नावावरूनच जसं आपल्याला कळतं

तसं प्रेम वर्मा जी आपलं काम, आपलं कर्तव्य अत्यंत प्रेमानं आणि चिकाटीनं करत असतात. चला, आपण त्यांच्याशी बोलूया.

मोदी जी: नमस्कार प्रेमजी.

प्रेम जी: नमस्ते सर.

मोदी जी: भाई प्रेम

प्रेम जी: हो सर..

मोदी जी: आपण आपल्या कार्याविषयी...

प्रेम जी: हां सर...

मोदी जी: जरा विस्तारानं सांगा. आपल्याला जे अनुभव येतात ते ही सांगा.

प्रेम जी: सर, मी CATS रुग्णवाहिकामध्ये चालक म्हणून काम करतो. नियंत्रण कक्षातून जसा आमच्या टॅब वर कॉल येतो. 102 क्रमांकावरून जेंव्हा फोन येतो, त्यावेळी आम्ही आमच्या रुग्णाकडे जातो. गेल्या दोन वर्षांपासून आम्ही सातत्यानं हे काम करतो आहोत. आपली कीट घालून, हात मोजे, मास्क घालून रुग्णांना, ते जिथे घेऊन जायला सांगतात, मग ते कोणतेही रुग्णालय असो, आम्ही लवकरात लवकर त्यांना तिथे पोहोचवतो.

मोदी जी: आपण तर लसींच्या दोन्ही मात्रा घेतल्या असतील.

प्रेम जी: हो, नक्कीच सर.

मोदी जी: मग इतरांनी ही लस घ्यावी यासाठी तुम्ही त्यांना काय संदेश द्याल?

प्रेम जी: हो सर, नक्कीच. सर्वांना लसीच्या मात्रा घ्यायला हव्यात. आपल्या कुटुंबासाठी हे लसीकरण हिताचेच आहे. आता माझी आई मला म्हणत असते की ही नोकरी सोडून दे. मी सांगितलं, आई, मी जर नोकरी सोडून घरी बसलो, तर सगळीकडे रुग्णांना सोडायला कोण जाणार? कारण आता कोरोना काळात तर सगळेच दूर पळताहेत. सगळे नोकरी सोडून जात आहेत. आई मलाही म्हणत असते की बेटा ही नोकरी सोडून दे. मात्र मी सांगितलं, आई मी नोकरी नाही सोडणार.

मोदी जी –प्रेम जी, आपल्या आईचे मान नाराज करु नका, त्यांना समजून घ्या.

प्रेम जी- हो, सर.

मोजी जी – पण ही जी आईची गोष्ट तुम्ही सांगितलीत ना....

प्रेम जी – हो सर,

मोदी जी –ती मनाला स्पर्शून जाणारी आहे.

प्रेम जी –हो, सर.

मोदी जी –आपल्या आईंनाही.....

प्रेम जी – हो सर,

मोदी जी- माझा नमस्कार सांगा.

प्रेम जी – बिलकूल !

मोदी जी – हो...

प्रेम जी – हो सर...

मोदी सर- आणि प्रेम जी, आपल्या माध्यमातून...

प्रेम जी—हो सर,

मोदी जी—हे रुग्णवाहिका चालवणारे सगळे चालक देखील ....

प्रेम जी—हो ...

मोदी जी --किती मोठा धोका पत्करून काम करत आहेत.

प्रेम जी---हो सर

मोदी जी —आणि प्रत्येकाची आई काय विचार करत असेल?

प्रेम जी –बिलकूल सर

मोदी जी—जेव्हा आपल्या श्रोत्यांपर्यंत हे तुमचं हे बोलणं पोहोचेल..

प्रेम जी—हो सर,

मोदी जी—मला निश्चित वाटतं की त्यांच्याही मनाला ही गोष्ट स्पर्शून जाईल.

प्रेम जी—हो सर..

मोदी जी—प्रेम जी, खूप खूप धन्यवाद ! आपण एकप्रकारे प्रेमाची गंगाच पुढे नेत आहात...

प्रेम जी –धन्यवाद सर !

मोदी जी- धन्यवाद भाऊ..

प्रेम जी—धन्यवाद !!

मित्रांनो,

प्रेम वर्मा जी आणि त्यांच्यासारखे हजारो लोक आज आपल्या जीवाची पर्वा न करता, लोकांची सेवा करत आहेत. कोरोना विरुध्दच्या या लढाईत जितकी आयुष्ये वाचवली जात आहेत, त्यात या रुग्णवाहिका चालकांचेयोगदान खूप मोठे आहे.

प्रेम जी, आपल्याला आणि देशभरातल्या आपल्या सर्व सहकाऱ्यांना मी खूप खूप साधूवाद देतो. आपण वेळेवर पोहोचत रहा, असेच लोकांचे जीव वाचवत रहा.

माझ्या प्रिय देशबांधवांनो, हे खरे आहे की सध्या कोरोनाचा संसर्ग खूप लोकांना होतो आहे. मात्र, कोरोनामधून बरे होणाऱ्या लोकांची संख्या देखील तितकीच जास्त आहे.

गुरूग्रामच्या प्रीती चतुर्वेदी जी यांनी अलीकडेच कोरोनावर मात केली आहे. प्रीती जी, ‘मन की बात’ मध्ये आपल्याशी संवाद साधण्यासाठी आल्या आहेत. त्यांचे अनुभव आपल्याला खूप उपयोगी पडतील.

मोदी जी-प्रीती जी, नमस्कार !

प्रीती—नमस्कार सर. कसे आहात आपण?

मोदी जी—मी तर ठीक आहे. सर्वात आधी मी कोविड-19 वर ...

प्रीती—जी

मोदी जी—यशस्वीपणे मात मिळवल्याबद्दल ..

प्रीती –जी

मोदी जी—आपलं कौतुक करतो.

प्रीती – धन्यवाद सर !

मोदी जी—आपले आरोग्य लवकरच सुदृढ, निरोगी व्हावे,याच शुभेच्छा !

प्रीती – धन्यवाद सर !

मोदी जी—प्रीती जी,

प्रीती—हो सर

मोदी जी—या कोविड लाटेत केवळ आपल्याला संसर्ग झाला की आपल्या कुटुंबांतल्या इतर व्यक्तीनांही त्याची बाधा पोहोचली?

प्रीती—नाही नाही सर, मला एकटीलाच संसर्ग झाला होता.

मोदी जी- चला, देवाची कृपा झाली. अच्छा, माझी अशी इच्छा आहे...

प्रीती—हो सर..

मोदी जी—की आपण जर आपल्या या त्रासाच्या काळातले काही अनुभव लोकांना सांगितले, तर कदाचित जे श्रोते आहेत, त्यांनाही अशा वेळी आपल्या स्वतःला कसं सांभाळायचं याविषयी मार्गदर्शन मिळू शकेल.

प्रीती—हो सर, नक्कीच ! सर सुरुवातीला मला खूप आळस... सुस्त सुस्त वाटतहोतं. त्यानंतर, माझ्या गळ्यात थोडीशी खवखव जाणवायला लागली. त्यावेळी, माझ्या असं लक्षात आलं की ही लक्षणे वाटताहेत, त्यामुळे मग मी चाचणी करुन घेतली आणि दुसऱ्या दिवशी रिपोर्ट आल्यावर मी पॉझिटिव्ह असल्याचं कळलं. मग मी स्वतःला सर्वांपासून विलग केलं. एका वेगळ्या खोलीत गेले. डॉक्टरांचा सल्ला घेतली. त्यांच्या सल्ल्यानुसार औषधे सुरु केली.

मोदी – म्हणजे आपल्या या तत्परतेमुळे आपले कुटुंबीय सुरक्षित राहिले.

प्रीती- हो सर, इतरांचीही नंतर चाचणी केली. ते सगळे निगेटिव्ह होते. मी एकटीच पॉझिटिव्ह आले होते. आणि आधीच मी स्वतःला आयसोलेट केलं होतं, एका वेगळ्या खोलीत.

मला आवश्यक ते सगळं सामान ठेवून घेत,मी स्वतःला खोलीत बंद करुन घेतलं होतं. त्यासोबतच मी नंतर डॉक्टरांच्या सल्ल्यानं औषधोपाचार पण सुरु केले होते. सर, मी या औषधोपचारांसह योगाभ्यास, आयुर्वेदिक उपचारही सुरु केले होते.आणि त्यासोबतच, मी काढाही घ्यायला सुरुवात केली होती. माझी रोगप्रतिकारशक्ती वाढावी, यासाठी सर, मी जेंव्हाही जेवत असे, त्यावेळी सकस अन्न घेत असे. प्रथिनयुक्त पदार्थ खात असे. मी खूप द्रवपदार्थ ही खात होते. मी वाफ घेत होते, गुळण्या करत होते आणि गरम पाणी पीत होते. रोज दिवसभर मी हेच सगळं करत होते. आणि सर, या दिवसांबद्दल सांगायचं ना, तर एक सर्वात मोठी गोष्ट मला सांगायची आहे ती अशी-, की अजिबात घाबरू नका. मानसिक शक्ती मजबूत असू द्यात. आणि यासाठी मला योगाभ्यासाची, श्वसनाच्या व्यायामांची खूपच मदत झाली. मला ते सगळं करतानांच खूप छान वाटत असे.

मोदी जी—हो. अच्छा,प्रीती जी, आता जेंव्हा तुमची सगळी प्रक्रिया पूर्ण झाली, आपण संकटांतून बाहेर पडलात ना ?

प्रीती – हो सर...

मोदी जी—मग आता आपल्या आरोग्याच्या रक्षणासाठी, त्याची काळजी घेण्यासाठी आपण काय करताय?

प्रीती- सर, एकतर मी योगाभ्यास बंद केलेला नाही.

मोदी जी- हो..

प्रीती—त्यासोबतच, मी काढाही घेते आणि माझी रोगप्रतिकार शक्ती उत्तम ठेवण्यासाठी मी अजूनही उत्तम सकस आहार घेते आहे.

मोदी जी—हो, बरोबर

प्रीती—आधी मी स्वतःच्या प्रकृतीकडे फार दुर्लक्ष करत असे. आता मात्र मी त्याकडे नीट लक्ष देते.

मोदी जी—धन्यवाद प्रीती जी!

प्रीती—धन्यवाद सर !

मोदी जी—आपण आता जी माहिती आणि आपला अनुभव सांगितला तो अनेकांना उपयोगी पडेल असे मला वाटते. आपण निरोगी रहा, आपल्या कुटुंबातले लोक निरोगी राहावेत, यासाठी माझ्या खूप खूप शुभेच्छा !

माझ्या प्रिय देशबांधवांनो, आज आपल्या वैद्यकीय क्षेत्रातले लोक, पहिल्या फळीत काम करणारे सर्व कर्मचारी, अहोरात्र सेवाकार्य करत आहेत. तसेच, समाजातले इतर लोकही, या काळात कुठेहही मागे नाहीत. देश पुन्हा एकदा एकजूट होऊन कोरोनाविरुध्द लढा देत आहेत. आजकाल मी पाहतो,

कोणी विलगीकरणात असलेल्या कुटुंबांपर्यंत औषधं पोहोचवत आहेत. कोणी भाज्या, दूध, फळे अशा गोष्टी पोहचवत आहेत. कोणी मोफत रुग्णवाहिका सेवा रूग्णांना देत आहेत. देशाच्या कानाकोपऱ्यातून या आव्हानात्मक काळात देखील अनेक स्वयंसेवी संस्था पुढाकार घेऊन इतरांची मदत करण्यासाठी जे जे करु शकतात, ते करण्याचा प्रयत्न करत आहेत. यावेळी, गावांमध्ये देखील नवी जागृती दिसते आहे. कोविड नियमांचं पालन कठोर पालन करत लोक आपापल्या गावांचं कोरोनापासून रक्षण करत आहेत. जे लोक बाहेरून येत आहेत, त्यांच्यासाठी योग्य त्या व्यवस्था तयार केल्या जात आहेत. शहरात देखील अनेक युवक मैदानात उतरले आहेत. ते आपापल्या भागात, कोरोनाचे रुग्ण वाढू नयेत, यासाठी, स्थानिक रहिवाशांसोबत प्रयत्न करत आहेत. म्हणजे एकीकडे देश, दिवसरात्र रुग्णालये, व्हेंटीलेटर्स आणि औषधांसाठी काम करत आहे, तर दुसरीकडे, देशबांधव देखील प्राणपणाने कोरोनाच्या या आव्हानाचा सामना करत आहेत. ही भावना आपल्याला किती बळ देते ! केवढा विश्वास निर्माण करते. हे जे सगळे प्रयत्न सुरु आहेत, ते समाजाची खूप मोठी सेवा आहे. यातून समाजाची शक्ती वाढत असते.

माझ्या प्रिय देशबांधवांनो, आज ‘मन की बात’ मधली पूर्ण चर्चा आपण कोरोना महामारीवरच घेतली. कारण, आज आपली सर्वात मोठी प्राथमिकता आहे, या आजारावर मात करणे. आज भगवान महावीर जयंती देखील आहे. यानिमित्त मी सर्व देशबांधवांना शुभेच्छा देतो. भगवान महावीरांची शिकवण आपल्याला तप आणि आत्मसंयमाची प्रेरणा देते. सध्या रमझानचा पवित्र महिनाही सुरु आहे. पुढे बुद्धपौर्णिमा आहे. गुरु तेगबहादूर यांचे 400 वे प्रकाश पर्व देखील आहे. आणखी एक महत्वाचा दिवस म्हणजे- पोचीशे बोईशाक- टागोर जयंतीचा दिवस आहे. हे सगळे उत्सव आपल्याला प्रेरणा देतात.

आपली कर्तव्ये पूर्ण करण्याची प्रेरणा देतात. एक नागरिक म्हणून आपण आपल्या आयुष्यात जेवढ्या कौशल्याने आपली कर्तव्ये पार पाडू, तेवढ्या लवकर आपण संकटातून मुक्त होत भविष्याच्या आपल्या मार्गांवर तितक्याच वेगाने आपण पुढे जाऊ. याच कामनेसह, मी आपल्या सर्वांना पुन्हा एकदा आग्रह करतो की लस आपण सर्वांनी घ्यायची आहे आणि पूर्णपणे सतर्कही राहायचं आहे. ‘औषधही –अनुशासन ही’. हा मंत्र कधीही विसरायचा नाही. आपण सगळे एकत्रितपणे या संकटातून बाहेर पडणार आहोत. याच विश्वासासह आपल्या सर्वांना खूप खूप धन्यवाद ! नमस्कार !!