Text of PM's address at the Indian Community Reception at Dubai

Published By : Admin | August 17, 2015 | 23:28 IST
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Today I am witnessing 'mini-India' in Dubai: PM
People from all over the world have come here to Dubai. Magnetic power of this place has drawn the world here: PM
There are around 700 flights between India and the UAE but it took 34 years for a PM to visit this Nation: PM
PM Narendra Modi urges audience to give a standing ovation to the Crown Prince of Abu Dhabi
India has been a victim of terrorism for 40 years. Innocent people have lost their lives: PM
Good Taliban, Bad Taliban...Good Terror, Bad Terror...this won't work. A decision has to be taken are you with terrorism or with humanity: PM
Our effort has been to take India to new heights of progress and maintain a strong friendship with our neighbouring countries: PM

दुबई की धरती पर मैं आज मेरे सामने लघु भारत के दर्शन कर रहा हूं। हिन्‍दुस्‍तान के कोने-कोने से आए हुए मेरे प्यारे देशवासियों को मैं नमन करता हूं। आप वे लोग हैं, जिन्होंने परिश्रम की पराकाष्ठा करके..कोई दस साल से, कोई पंद्रह साल से, कोई बीस साल से, कोई तीस साल से, रोजी रोटी कमा रहे हैं, लेकिन साथ-साथ भारत के गौरव को भी बढ़ाने में कभी पीछे नहीं रहे। आपके व्यवहार के कारण आपके आचरण के कारण हमेशा भारत गौरव अनुभव करता रहा है। भारत में अगर अधिक बारिश भी हो जाए तो दुबई में बैठा हुआ मेरा हिंदुस्तानी छाता खोल देता है। भारत में कहीं अगर कोई प्राकृतिक आपदा आ जाए, दुबई में बैठा हुआ मेरा देशवासी चैन से सो नहीं सकता।

जब अटल बिहारी देश के प्रधानमंत्री थे, भारत ने न्यूक्लियर टेस्ट किया था, दुनिया चौंक गई थी, कुछ लोग गुस्से में आए थे और रातों-रात भारत पर sanction लगा दिए गए थे। भारत को आर्थिक मुसीबतों में धकेल दिया गया था.. और तब वाजपेयी जी ने विश्व भर में फैले हुए भारत वासियों को आह्वान किया था, देश की मदद करने के लिए। आज मैं गर्व से कह सकता हूं कि वाजपेयी जी के उस आह्वान पर, हिन्‍दुस्‍तान की तिजोरी भरने में Gulf Countries में जो मजदूरी का काम करते थे, उन मेरे भारतवासियों का सबसे बड़ा योगदान था। इस अर्थ में यहां बसा हुआ हर भारतवासी, एक प्रकार से हिन्‍दुस्‍तान के हर कोने से जुड़ा हुआ है। पिछली बार जब देश लोकसभा के चुनाव के लिए व्यस्त था, चुनाव नतीजे आ रहे थे, हिन्‍दुस्‍तान ही नहीं, पूरा दुबई नाच रहा था। ये प्यार भारत माता के कल्याण के लिए..मां भारती फिर से एक बार सामर्थ्यवान बने, सशक्त बने, सम्‍पन्‍न बने, समृद्ध बने, ये सपना संजोकर के दिन-रात एक करने वाले आप लोग मेरे सामने बैठे हैं।

भाइयों-बहनों, आज..यहां तो हिन्‍दुस्‍तान के हर कोने से आए हुए मेरे भाई-बहन बैठे हैं और दुबई, वो सिर्फ लघु भारत ही रहा है ऐसा नहीं है, अब तो दुबई एक लघु विश्व भी बन गया है। दुनिया के सभी देशों के लोग, कम अधिक मात्रा में दुबई में रह रहे हैं। ठंडे से ठंडे प्रदेश के लोग भी इस 40-45 डिग्री तापमान में रहना पसंद करते हैं। क्या ताकत दिखाई होगी इस देश ने, क्या magnetic power पैदा किया होगा विकास के माध्यम से कि पूरा विश्व यहां आकर्षित हो जाता है।

हिन्‍दुस्‍तान के हर कोने से आए हुए सभी देशवासियों ने अभी दो दिन पूर्व 15 अगस्त, भारत की आज़ादी का पर्व मनाया है। मैं भी आप सब को आज़ादी के पावन पर्व की अनेक-अनेक शुभकामनाएं देता हूं।

यहां केरल से आया हुआ भी समुदाय बहुत बड़ी मात्रा में है। मैं केरल का उल्लेख विशेष रूप से इसलिए कर रहा हूं क्योंकि आज केरल का नववर्ष है। सहोदरकअ एंटे रूदयम निरन्या नववलसरा आशम सफलअ। नमस्कारम्।



हर हफ्ते हिन्‍दुस्‍तान से 700 से भी ज्यादा फ्लाइट यहां आती हैं। दुनिया में किसी एक देश के साथ इतनी बड़ी मात्रा में हवाई आवागमन अगर कहीं है, तो इस इलाके से है। हर हफ्ते 700 से भी अधिक फ्लाइट आती हैं, लेकिन भारत के प्रधानमंत्री को यहां आने में 34 साल लग गए। कभी-कभी मुझे लगता है कि बहुत सारे ऐसे अच्छे अच्छे काम हैं, जो पूर्व के लोग मेरे लिए बाकी छोड़ करके चले गए हैं और इसलिए बहुत सारे बाकी रहे अच्छे काम करने का मुझे भाग्य मिला है। उन अच्छे कामों में से महत्वपूर्ण अच्छा काम मेरा अबुधाबी आना, मेरा दुबई आना है। जिस प्रकार से..ये मेरी पहली मुलाकात है। इसके पहले कभी मैं धरती के इस भू-भाग पर नहीं आया। ..और 34 साल में प्रधानमंत्री के रूप में कोई आएं, तो किसी को भी, किसी को भी नाराज़गी व्यक्त करने का हक बनता है। हक बनता है कि नहीं बनता है? बनता है कि नहीं बनता है? लेकिन अबुधाबी में His Highness Crown Prince ने, दुबई में His Highness अल मख्तूम जी ने नाराज़गी नहीं दिखाई, इतने प्यार की वर्षा की, इतने प्यार की वर्षा की, मैं उनके इस प्यार को कभी भूल नहीं पाउंगा। जो स्वागत किया, जो सम्मान किया.. His Highness Crown Prince अपने सभी पांचों भाइयों के साथ एयरपोर्ट पर लेने के लिए आए। मेरे प्यारे देशवासियों, ये प्यार, ये सम्मान किसी व्यक्ति को नहीं है। ये सवा सौ करोड़ देशवासियों का सम्मान है। ये भारत की बदली हुई तस्वीर का सम्मान है। भारत जिस प्रकार से दुनिया में अपनी जगह बना रहा है, उस बदले हुए हालात का सम्मान है। मैं His Highness Crown Prince का, अमीरात का, दुबई के Rulers का हृदयपूर्वक बहुत-बहुत आभार व्यक्त करता हूं।

एक तरफ संप्रदाय के नाम पर आतंकवाद के खेल खेले जाते हैं। निर्दोषों को मौत के घाट उतार दिया जाता है। पूर्णतया: चिंता का माहौल हो, ऐसे समय अबुधाबी के His Highness Crown Prince भारतीय समुदाय के लिए मंदिर बनाने के लिए जगह देने का निर्णय करते हैं। जो लोग अबुधाबी से परिचित हैं, उन्हें पता है कि निर्णय कितना बड़ा है, ये सौगात कितनी बड़ी है। आप मुझे बताइए, सभी देशवासियों को उनका विशेष रूप से अभिनंदन करना चाहिए कि नहीं करना चाहिए। मैं आप सभी से आग्रह करता हूं कि तालियों की गूंज से Crown Prince का अभिनंदन कीजिए। Crown Prince को Standing Ovation दीजिए। उनका अभिनंदन कीजिए। मैं हृदय से उनका अभिनंदन करता हूं।

भाइयों-बहनों, दो दिन की मेरी यात्रा में जिस प्रकार का विश्वास का माहौल बना, आखिरकार अंतर्राष्ट्रीय संबंधों का आधार..आपकी भाषा क्या है, आप कितने articulate हैं, आप diplomatic relation में कितने बढि़या ढंग से मेलजोल करते हैं..उससे भी ज्यादा महत्व होता है, एक दूसरे पर भरोसे का। अंतर्राष्ट्रीय संबंधों में ये भरोसा, ये विश्वास, एक बहुत बड़ी पूंजी होता है ..और आज मैं चंद घंटों की मेरी मुलाकात के बाद कह सकता हूं कि भारत, अबुधाबी, दुबई, अमीरात.. जो विश्वास का सेतू बना है, वो अभूतपूर्व है और आने वाली पीढि़यों तक काम आए, ऐसा foundation तैयार हुआ है।

आज मुझे खुशी हुई कि जब आज भारत और अमीरात के बीच जो Joint Statement आया है, आपको भी खुशी होगी जान करके.. Crown Prince ने हिन्‍दुस्‍तान में साढ़े चार लाख करोड़ रूपए का निवेश करने का संकल्प दोहराया है। साढ़े चार लाख करोड़ रूपया! कितना? कितना? कितना? भाइयों-बहनों, अगर आप पर किसी का भरोसा न हो, तो कोई 10 रूपया भी आप पर लगाने के लिए तैयार होगा क्या? ये भारत की साख बनी है। आज भारत का बदला हुआ रूप विश्‍व के सामने अपनी स्वीकृति बनाता आगे चल रहा है।

आज अमीरात और भारत की तरफ से आतंकवाद के खिलाफ, दो टूक शब्दों में, बिना लाग लपेट और किसी की परवाह किए बिना साफ-साफ शब्‍दों में संकेत दे दिए गए हैं। आतंकवाद के खिलाफ एकता का स्वर आज इस धरती से उठा है। मैं इसे बहुत अहम मानता हूं और इतना ही नहीं..समझने वाले समझ जाएंगे, अक्लमंद को इशारा काफी। आतंकवाद में लिप्त लोगों को सजा होनी चाहिए, ये स्पष्ट शब्दों में संकेत यहां से निकला है। मैं आज यहां के शासकों का इसलिए भी आभारी हूं कि उन्होंने..United Nations जब अपने 70 साल मनाने जा रहा है, तो यहां से कहा गया है और भारत की इस बात का खुला समर्थन किया गया है कि भारत को United Nations की Security Council की Permanent Membership मिलनी चाहिए। मैं आभारी हूं उनका।

इससे भी आगे एक बहुत-बहुत महत्वपूर्ण बात पर..आज भारत की लंबे अर्से से एक position है। उसका आज His Highness Crown Prince ने खुले आम समर्थन घोषित किया। भाइयों-बहनों, कई वर्षों से United Nations में एक Resolution लटका पड़ा है। आपको भी बड़ी हैरानी होगी..और दो-पांच साल से नहीं, कई वर्षों से लटका पड़ा है। क्या.. ? United Nations, जो कि प्रथम और द्वितीय विश्वयुद्ध से पीडि़त मानव समुदाय को मरहम लगाने के लिए..आगे मानव जाति को ऐसे संकट झेलने की नौबत न आए, इसके लिए precaution लेने के लिए, व्यवस्थाएं विकसित करने के लिए 70 साल पहले United Nations का जन्म हुआ। लेकिन वह United Nations आतंकवाद की अभी तक परिभाषा नहीं कर पाया। आतंकवादी किसको कहें, आतंकवाद किसको कहें, आतंकवाद को समर्थन करने वाले कौन माना जाए, किस देश को आतंकवाद का समर्थक माना जाएं, किस देश को समर्थक न माना जाए। इसलिए Comprehensive Convention on International Terrorism..इसका निर्णय करने का प्रस्ताव लंबे अर्से से United Nations में लंबित पड़ा हुआ है। भारत ने position ली हैं सालों से किए एक प्रस्ताव पर चर्चा हो जाए, निर्णय होना चाहिए और ये टाला जा रहा है। आज मुझे खुशी इस बात की है कि His Highness Crown Prince ने भारत की स्थिति का समर्थन का किया है, भारत की position का समर्थन किया है और आतंकवाद के खिलाफ लड़ने के संबंध में आपने स्पष्ट संकेत दे दिए हैं। न सिर्फ.. साढ़े चार लाख करोड़ का पूंजी निवेश की बात नहीं है ये। ये एक निश्चित दिशा में कंधे से कंधा मिलाकर चलने का एक प्रकार का संकेत, इस Joint Statement में है। मैं इसे बहुत महत्वपूर्ण मानता हूं।

भाइयों-बहनों आप तो सालों से बाहर हैं। आज भारत का नाम सुनते ही आपके सामने खड़े हुए व्यक्ति की आंखों में चमक आती है कि नहीं आती है? आपका माथा गर्व से ऊंचा होता है कि नहीं होता है, आपका सीना गर्व से तन जाता है कि नहीं तन जाता है? एक गर्व महसूस करते हैं कि नहीं करते हैं? भाइयों बहनों आज दुनिया का हिन्‍दुस्‍तान की तरफ देखने का नज़रिया पूरी तरह बदल गया है और उसका एक कारण..क्या कारण है?.. क्या कारण है, ये बदलाव आया है? मोदी के कारण नहीं, ये जो बदलाव आया है, सवा सौ करोड़ देशवासियों की संकल्प शक्ति के कारण आया है। सवा सौ करोड़ देशवासियों ने 2014 मई महीने में 30 साल के बाद पूर्ण बहुमत वाली सरकार चुनी। आज दुनिया का कोई भी महापुरूष, दुनिया का कोई भी राजनेता मोदी से जब हाथ मिलाता है न, तब उसे मोदी नहीं दिखता है। उसे सवा सौ करोड़ हिंदुस्तानी दिखाई देते हैं। दुनिया की तेज़ गति से बढ़ रही economy दिखाई दे रही है।

भाइयों-बहनों, पिछले दिनों, IMF हो, World Bank हो, Moody हो, विश्व की जितनी भी आर्थिक पैमाने पर Rating Institutions हैं, सब किसी ने एक स्वर से कहा है कि आज दुनिया में बड़े देशों में सबसे तेज गति से अगर आर्थिक सुधार हो रहा है, तेज गति से growth हो रहा है तो उस देश का नाम है.. (दर्शक दीर्घा से भारत-भारत के नारे). मुझे बताइए सीना तन जाएगा कि नहीं तन जाएगा? माथा ऊंचा हो जाएगा कि नहीं होगा कि नहीं होगा। एक साल के भीतर-भीतर ये बदलाव आया है। भाइयों बहनों, हमने मेक इन इंडिया.. कुछ महीने पहले इस अभियान का प्रारंभ किया। दुनिया को मैं कह रहा हूं- मेक इन इंडिया। आइए, हिन्‍दुस्‍तान एक ऐसा देश है जो संभावनाओं से भरा हुआ है, Opportunities ही Opportunities हैं। ये एक ऐसा भाग्‍यशाली देश है, जिसके पास 65 प्रतिशत जनसंख्या 35 साल से कम उम्र की है। भारत एक नौजवान देश है। आज यहां जवानी लबालब भरी पड़ी है और विश्व वहां आए, हमारे युवकों की शक्ति जुटाए, उत्पादन करे, दुनिया के बाज़ार में जाकर बेचे। और आज..ये कुछ ही महीनों का मामला है.. Foreign Direct Investment..FDI में 48 प्रतिशत वृद्धि हुई है, 48%। भाइयों-बहनों विकास को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए Ease of doing Business का माध्‍यम हो। देश की युवा शक्‍ति में Skill Development का अभियान हो। आधुनिक भारत के निर्माण के लिए डिजिटल इंडिया का सपना साकार करने के लिए दिन-रात पुरुषार्थ चलता हो। तो विश्‍व का आना बहुत स्‍वाभाविक है मेरे भाइयों और बहनों, बहुत स्‍वाभाविक है।

भाइयों-बहनों, आज दुनिया जिस आतंकवाद के नाम सुनते ही कांप उठती हैं, एक नफरत पैदा होती है। मैं दुनिया को कहता हूं हम हिन्‍दुस्‍तान के लोग 40-40 साल से ये आतंकवाद के शिकार हुए हैं। हमारे निर्दोष लोग आतंकवादियों की गोलियों से भून दिए गए हैं, मौत के घाट उतार दिए गए हैं और जब कभी मैं विश्‍व के लोगों के साथ आज से 25-30 साल पहले कभी मुझे बात करने का अवसर मिलता था, तो वे आतंकवाद समझने की उनकी क्षमता ही नहीं थी। कभी मैं आतंकवाद की बात करता था तो वे मुझे कहते थे ये तो आपका Policing का problem है Law and Order का problem है। अब उनको समझ आ गया है कि आतंकवाद का कितना भयंकर रूप होता है। आतंकवाद की कोई सीमाएं नहीं होती है, वो पता नहीं कब किस सीमा पर जाकर आ धमकेगा। आज अभी मैं यहां पहुंच रहा था, मैंने सुना बैंकॉक के अंदर आज एक बम धमाका हुआ, निर्दोष लोगों को मार दिया गया। भारत तो लगातार इन हरकतों को झेलता रहा है और विश्‍व समुदाय जब तक आतंकवाद की मानसिकता वाले देशों को, आतंकवाद को, उसको समर्थन करने वालों को एक ओर, और मानवता में विश्‍वास करने वाले दूसरी ओर, और मानवतावाद में विश्‍वास करने वाले दुनिया के देश एक होकर के आतंकवाद के खिलाफ लड़ने का वक्‍त आ चुका है।

Good Taliban-Bad Taliban, Good Terrorism- Bad Terrorism ये अब चलने वाला नहीं है। हर किसी को तय करना पड़ेगा कि फैसला करो कि आप आतंकवाद के साथ हो या मानवता के साथ हो, निर्णय करो। भारत को तो आज भी आए दिन इन नापाक हरकतों का शिकार होना पड़ता है। हम समस्‍याओं का समाधान खोजने की दिशा में लगातार कोशिश कर रहे हैं। यहां बहुत कम लोगों को पता होगा कि भारत की आजादी के पहले से नागालैंड में अतिवाद, insurgency इस समस्‍या से नागालैंड जूझता रहा और उसके कारण भारत का पूरा ये पूर्वी हिस्‍सा, नॉर्थ-ईस्‍ट, आए दिन हिंसा का शिकार होता था और धीरे-धीरे वो बीमारी इतनी फैलती गई कि अन्‍य राज्‍यों में भी अलग-अलग नाम से, अलग-अलग अतिवादी, आतंकवादी गुट बनते चले गए। आजादी के भी पहले से चल रहा था।

आज मैं बहुत संतोष के साथ मेरे देशवासियों, आपको कहना चाहता हूं कि अभी एक महीने पहले नागालैंड के इन गुटों के साथ, जो कभी हिंसा में विश्‍वास करते थे, जो शस्‍त्रों को लेकर के गतिविधि चलाते थे। उनसे जो बातचीत चल रही थी, वो सफलतापूर्वक आगे बढ़ी, निर्णय हुआ, मुख्‍य धारा में आने का निर्णय हुआ। 60-70 साल के बाद ये संभव हुआ। मैं नागालैंड की ये घटना का जिक्र इसलिए करना चाहता हूं कि हिंसा के राह पर चले हुए भारत के नौजवानों को और विश्‍व के नौजवानों को मैं एक उदाहरण के रूप में कहना चाहता हूं, समस्‍या कितनी भी गंभीर क्‍यों न हो, आखिर तो बातचीत से ही रास्‍ता निकलता है। कोई 10 साल लड़ाई लड़ने के बाद बात करें, कोई 20 साल लड़ाई लड़ने के बाद करें, कोई 40 साल लड़ाई लड़ने के बाद बात करें, लेकिन आखिर में तो बात ही होती है और टेबल पर ही फैसले होते हैं और इसलिए विश्‍व भर से इस गलत रास्‍ते पर चल पड़ लोग बम-बंदूक के भरोसे, अपने सपनों को साकार करने के रास्‍ते पर चले हुए लोग। ये रास्‍ता कभी आपका भला नहीं करेगा। ये रास्‍ता कभी किसी और का भला नहीं करेगा। ये रास्‍ता कभी मानवता का भला नहीं करेगा। ये रास्‍ता इतिहास को बेदाग नहीं रहने देगा। ये पूरे इतिहास को कलंकित कर देगा, ये पूरे इतिहास को दागदार बना देगा और इसलिए हिंसा का मार्ग छोड़कर के मुख्‍यधारा में जाना, ये आज समय की मांग है।

मेरे प्‍यारे भाइयों-बहनों, बांग्‍लादेश 1947 में भारत का विभाजन हुआ, 1947 में। तब से पूर्व पाकिस्‍तान, पश्‍चिम पाकिस्‍तान थे उस समय। पूर्वी पाकिस्‍तान जो आज बांग्‍लादेश बना, भारत और उनके बीच सीमा का विवाद चल रहा था। तनाव का कारण बना हुआ था। आशंकाओं का कारण बना हुआ था। घुसपैठ के लिए एक सुविधाजनक स्‍थिति बनी हुई थी। आप सब के आशीर्वाद से हिन्‍दुस्‍तान ने बीड़ा उठाया, सबने मिलकर के बीड़ा उठाया। इस समस्‍या का समाधान करना है, बातचीत से करना है। मैं पिछले सितंबर में बांग्‍लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना जी से मिला था और मैंने उनको वादा किया था कि मुझ पर भरोसा कीजिए और मुझे थोड़ा समय दीजिए। उन्‍होंने कहा कि मेरे पास भरोसा रखने के सिवाए है भी क्‍या! लेकिन आज, आज मैं मेरे प्‍यारे देशवासियों आपके सामने सर झुकाकर के कहना चाहता हूं कि आजादी से लटका हुआ ये सवाल 1 अगस्‍त को समाप्‍त कर दिया गया है। सीमा निर्धारित हो गई। जिनको बांग्‍लादेश जाना था, बांग्‍लादेश चले गए, जिनको भारत आना था भारत आ गए। हम लोग तो 15 अगस्‍त, 1947 को आजाद हो गए थे। भारत के नागरिक के नाते गौरवगान करने लगे थे। लेकिन ये हमारे भाई-बहन अभी 1 अगस्‍त, 2015 को भारत की भूमि पर आजादी का स्‍वाद लेने का उन्‍हें सौभाग्‍यमान मिला है। भारत की संसद में सर्वसम्‍मति से सभी राजनैतिक दलों ने साथ दिया और सर्वसम्‍मति से फैसला हुआ, बातचीत के माध्‍यम से फैसला हुआ।

ये छोटी-मोटी उपलब्‍धि नहीं है मेरे भाइयों-बहनों। और मैं, औरों को भी हमेशा कहता हूं, अड़ोस-पड़ोस के देशों को भी कहता रहता हूं। जैसे हिंसा के रास्‍ते पर गए हुए लोगों को भी कभी न कभार बातचीत के रास्‍ते पर आना पड़ता है। वैसे अड़ोस-पड़ोस में भी समस्‍याओं का समाधान बातचीत से ही निकलता है।

अंतर्राष्‍ट्रीय संबंधों में आज भारत एक महत्‍वपूर्ण भूमिका अदा कर रहा है। मानवता के अधिष्‍ठान पर कर रहा है। जब नेपाल में भूकंप आया चंद घंटों में, ऐसा नहीं है कि भई ज़रा पूछो तो क्‍या हुआ है? जरा जानकारी लो क्‍या हुआ है? ऐसा करो अफसरों का delegation भेजो, देखो ज़रा क्‍या मुसीबत आई है? ऐसा करो भई कोई अपने रिश्‍तेदार वहां हो तो पूछो भई हुआ क्‍या है? ऐसा इंतजार नहीं किया? आज दिल्‍ली में ऐसी सरकार है, जो हर पल नज़र आती है, हर जगह पर नज़र आती है और चंद घंटों में, चंद घंटों में, भारत से जो भी हो सकता था, ये मानवता का काम था। नेपाल के चरणों में जाकर के हमारे लोग बैठ गए और उनकी सेवा में लग गए और आज भी सेवा चालू है। नेपाल हमारा पड़ोसी है। वो दुखी हो और हम सुखी हों, ये कभी संभव नहीं होता है। उसके सुख में भी हमारा सुख समा हुआ है।

श्रीलंका, आपको हैरानी होगी। जब मैं नेपाल गया, प्रधानमंत्री बनने के बाद। नेपाल जाना है, तो 70 मिनट नहीं लगते। दिल्‍ली से नेपाल जाना हो, तो 70 मिनट नहीं लगते। लेकिन भारत के प्रधानमंत्री को नेपाल पहुंचने में 17 साल लग गए। फिर से हम गए, संबंधों को फिर से जोड़ा। अपनापन। आज नेपाल भारत पर भरोसा कर रहा है। भारत नेपाल का सुख-दु:ख का साथी बन रहा है। श्रीलंका, राजीव गांधी जब प्रधानमंत्री थे, उसके बाद कोई प्रधानमंत्री की stand alone visit नहीं हुई थी। कितने साल बीत गए। हमारा पड़ोसी है, आए दिन हमारे तमिलनाडु, केरल के मछुआरे और उनके मछुआरे आपस में भिड़ जाते हैं। लेकिन उधर कोई जाता नहीं था। हम गए, इतना ही नहीं। जाफना जहां 20-20 साल तक बम और बंदूक का ही कारोबार चलता था, उस जाफना में जाकर के उन दुखियारों के आंसू पोंछने का काम करने का सौभाग्‍य मुझे मिला। एक प्रधानमंत्री के रूप में जाफना जाने का सौभाग्‍य मुझे मिला।

हमारे पड़ोस में मालदीव, आइलैंड पर बसा हुआ देश, tourism की दृष्‍टि से काफी आगे बढ़ा है। अचानक एक दिन उनके यहां पानी के सारे संयंत्र खराब हो गए। पूरे देश के पास पीने का पानी नहीं था। आप कल्‍पना कर सकते हो, कोई देश के पास पीने का पानी न हो। कितना बड़ा गहरा संकट आया। मालदीव से हमें message आया कि ऐसी मुसीबत आई है। एक पल का इंतज़ार नहीं किया, भाइयों और बहनों। हवाई जहाज से पीने का पानी पहुंचाया मालदीव में। दूसरे दिन स्‍टीमर से पानी पहुंचाना शुरू कर दिया और जब तक उनकी वो मशीन चालू नहीं हुई, पानी की व्‍यवस्‍था दुबारा पुनर्जीवित नहीं हुई, हमने मालदीव को प्‍यासा नहीं रहने दिया।

अफगानिस्‍तान हमारा पड़ोसी है। अफगानिस्‍तान संकटों से गुजर रहा है। लंबे अरसे से आए दिन वो घाव झेलता चला जा रहा है। हर पल अफगानिस्‍तान को मरहम लगाने का काम हिन्‍दुस्‍तान करता आया है। अफगानिस्‍तान फिर से एक बार खड़ा हो जाए, क्‍योंकि हम सब बचपन से काबुलीवाला से तो बहुत परिचित हैं। जब काबुली वाले की बात करते हैं, तो हमें कितना अपनापन महसूस होता है। भाइयों-बहनों हमारी कोशिश रही है भारत को विकास की नई ऊचाइयों पर ले जाना। भारत में निरंतर विकास को आगे बढ़ाना और अपने अड़ोस-पड़ोस के देशों से दोस्‍ती बनाकर करके साथ और सहयोग लेकर करके आगे चल पड़ना।

SAARC देशों का समूह उसमें एक नया प्राण पूरने का प्रयास किया है, सफलतापूर्वक प्रयास किया है। वरना पहले SAARC देशों के मंच का उपयोग तू-तू मैं मैं के लिए होता था, कभी भारत को घेरने के लिए होता था। आज SAARC देशों के लोग, जितने साथ चल सकते हैं, उनको ले करके इन SAARC की इकाई का विकास की ऊंचाइयों पर ले जाने का सपना हमने देखा था। हमने घोषित किया है कि 2016 में हम आकाश में एक SAARC Satellite छोड़ेंगे जिसकी सेवाएं SAARC देशों में मुफ्त में देंगे, जो शिक्षा के काम आए , जो आरोग्‍य के लिए काम आये, जो किसानों को काम आये, जो मछुआरों के काम आये, सामान्‍य जन को काम आये। अभी हम बीच में सोच रहे थे कि SAARC देश Connectivity के लिए गंभीरता से सोचे और हम जानते हैं, आज विकास में Connectivity का महत्‍व बहुत है। आप समुद्री मार्ग से जुडि़ए या रेल मार्ग से जुडि़ए, या रोड मार्ग से जुडि़ए, जुड़ना जरूरी है। यूरोप के देशों को ये लाभ मिला हुआ है। एक देश से दूसरे देश चले जाओ पता तक नहीं चलता कि देश कब बदल गया। क्‍या ये SAARC देशों के बीच नहीं हो सकता है? हमने मिल करके सामूहिक निर्णय करने का प्रयास किया नेपाल में। लेकिन आप जानते हैं, कुछ लोगों को जरा तकलीफ होती है, लेकिन कुछ लोगों की तकलीफ के लिए क्‍या रुकना चाहिए? हमारे काम को क्‍या हमें रोक देना चाहिए? हमें अटक जाना चाहिए क्‍या? ठीक है आपकी मर्जी, आप वहां रह जाइये, हम तो चल पड़े भाई और हमने क्‍या किया। एक बहुत बड़ा अहम फैसला लिया है भाइयों और बहनों, इसका प्रभाव आने वाले दिनों में क्‍या होने वाला है, वो तो वक्‍त बताएगा। नेपाल, भूटान, भारत, बांग्‍लादेश, इन चार देशों ने एक नया इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर बना करके Connectivity का एक पूरा काम तय कर लिया, Agreement हो गया, ये आगे चल करके नॉर्थ-ईस्‍ट से जुड़ेगा। वहां से ये म्‍यांमार मार्ग से जुड़ेगा। वो इंडोनेशिया, थाइलैंड, पूरब, हिन्‍दुस्‍तान, पूरब की बीच की तरफ भारत को Connectivity की ताकत देगा एक नया भारत का बदला हुआ, संबंधों का नया विश्‍व खड़ा हो जाएगा।

भाइयों-बहनों, एक निश्चत समय के साथ भारत अपनी भूमिका भी अदा करें, भारत बड़े होने के अहंकार से नहीं, हर किसी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलना चाहता । विकास की नई ऊंचाईयों को पार करना चाहता। भारत में नौजवानों को रोजगार मिले, हमारे कृषि में Second Green Revolution हो, हमारा पूर्वी हिन्‍दुस्‍तान, चाहे पूर्वी उत्‍तर प्रदेश हो, चाहे बिहार हो, चाहे पश्चिम बंगाल हो, चाहे असम हो, चाहे नॉर्थ-ईस्‍ट हो, चाहे ओडि़शा हो, ये हमारा जो इलाका है, ये मानना पड़ेगा कि वहां विकास की ज्‍यादा जरूरत है। अगर वहां पर विकास हो गया और हिन्‍दुस्‍तान का पश्चिमी छोर और पूरब का छोर बराबर हो गये, तो भारत बहुत तेज गति से दौड़ने लग जाएगा और इसलिए भारत के इस पूर्वी छोर पर आर्थिक विकास का एक नया अभियान हमने चलाया है। Infrastructure खड़ा करने का एक नया अभियान चलाया है। Fertiliser के नये कारखाने शुरू कर रहे हैं। गैस की पाइप लाइन लगानी है। बिजली पहुंचानी है। आप मुझे बताइए आजादी के इतने सालों के बाद बिजली होनी चाहिए कि नहीं होनी चाहिए? बिजली मिलनी चाहिए या नहीं मिलनी चाहिए? क्‍या आज के युग में बिजली के बिना गुजारा संभव है? भाइयों-बहनों हमने सपना संजोया है। पांच साल के भीतर-भीतर हम देश के कोने-कोने में 24 घंटे बिजली मैंने देने के लिए फैसला किया। ये हम करके रहेंगे।

दुबई में रहने वाले मेरे प्‍यारे भाइयो-बहनों, हमने एक महत्‍वपूर्ण योजना घोषित की है । हमारे देश में लोगों को पहले Bank Accounts नहीं थे, हमने हर हिन्‍दुस्‍तानी का Bank Account खोल दिया, एक काम किया। भारत में हमारे देश के नागरिकों को इंश्‍योरंस नहीं है, बीमा नहीं है। उसके परिवार में कोई आपत्ति आ जाए, पीछे वालों को देखने की कोई व्‍यवस्‍था नहीं। हमने तीन योजनाएं लगाई हैं, एक प्रधानमंत्री बीमा सुरक्षा योजना, प्रधानमंत्री जीवन ज्‍योति योजना और इंश्‍योरेंस के लिए कितना पैसा देना है? एक स्‍कीम ऐसी है कि जिसमें एक महीने में सिर्फ एक रुपया देना है, 12 महीने में 12 रुपया। हमारे देश का गरीब से गरीब व्‍यक्ति भी दे सकता है या नहीं दे सकता है? मुझे बताइए दे सकता है या नहीं दे सकता है? गरीब से गरीब व्‍यक्ति एक रुपया महीने में दे सकता है या नहीं दे सकता है? महीने का 12 रुपया,.. साल भर का 12 रुपया, साल भर का 12 रुपया देगा, दो लाख रुपयों का सुरक्षा का बीमा मिलेगा। दूसरी योजना है जिसमें उसे और भी मददें मिलेंगी, वो है एक दिन का नब्‍बे पैसा, एक रुपया भी नहीं, एक दिन का एक रुपया भी नहीं, आज तो चाय भी एक रुपये में मिलती नहीं है। मैं जब चाय बेचता था तो एक रुपया भी नहीं मिलता था। लेकिन आज एक रुपये में चाय नहीं मिलती है। एक दिन का नब्‍बे पैसा, साल भर के 330 रुपये, और उसे भी ये सुरक्षा कवच मिलेगा। Natural मृत्‍यु होगा Natural अकस्‍मात नहीं हुआ है, सहज, तो भी उसके परिवार को दो लाख रुपया मिलेगा। हमने लोगों से आग्रह किया है कि रक्षाबन्‍धन के पर्व पर हमारे देश की परम्‍परा है, हम अपनी बहनों को Best सौगात देते हैं। कोई न कोई Gift देते हैं। मैं मेरे, Gulf Countries में रहने वाले मेरे प्‍यारे भाइयों बहनों का आग्रह करता हूं, इस बार रखी के त्‍यौहार पर आप अपनी बहन को ये जीवन सुरक्षा योजना दे दीजिए। अगर आप 600 रुपया बैंक में Fixed Deposit करा दोगे, तो हर साल उसको 12 रुपये से ज्‍यादा Interest मिलेगा, कटता जाएगा और आपकी बहन को दो लाख रुपये का सुरक्षा का कवच मिल जाएगा, और दोनों योजना लें लेगे, उतने पैसे जमा करा दिये, तो चार लाख रुपया उसके चरणों में आपकी तरफ से पहुंच जाएगा। भाइयो-बहनों, हमनें समाज-जीवन को एक सुरक्षित बनाना है, हमारी नई पीढ़ी को शिक्षित बनाना है, देश को आधुनिक बनाना है, और आज जब विश्‍व का भारत की तरफ आकर्षण बढ़ा है, उस परि‍स्थिति का हमने लाभ उठाना है और देश को विकास की नई ऊंचाइयों पर ले जाना है।

मेरे प्‍यारे भाइयो, बहनों, आपने जो मुझे सम्‍मान दिया, प्‍यार दिया, पूरा हिन्‍दुस्‍तान आपको देख रहा होगा। ये बदले हुए माहौल का असर हर भारतवासी के दिल पर भी होता है। और मुझे लगता है कि विश्‍व भर में जो हमारा भारतीय समुदाय पहुंचा है, उस भारतीय समुदाय को भी आज एक नई ऊर्जा, नई शक्ति मिली है। आज जब मैं अबुधाबी आया, दुबई आया, तो कुछ बातें मेरे ध्‍यान में आई हैं, उसके विषय में भी आज आपको मैं कह करके जाना चाहता हूं, Embassy के संबंध में, Counsel के संबंध में, आपकी शिकायतें रहती हैं, नहीं रहती हैं? नहीं रहती हैं तो अच्‍छी बात है। लेकिन अगर रहती हैं तो भारत सरकार ने ‘MADAD’ नाम का एक Online Platform बनाया है, इस ‘MADAD’ नाम के Online Platform का उपयोग दुनिया भर में फैले हुए हमारे भारतीय भाई, बहन उसका उपयोग कर सकते हैं, ताकि आपकी बात आगे पहुंच सकती है। मोबाइल फोन के द्वारा भी आप उनका सम्‍पर्क कर सकते हैं। एक, दूसरा काम किया है, E-migrate portal शुरू किया गया है। जिसके द्वारा इस प्रकार सके हमारे प्रवासी भारतीयों को कोई शिकायत हो, कोई कठिनाई हो, तो उनको Emigration Office के चक्‍कर काटने नहीं पड़ेंगे ये E-migrate portal पर अपनी बात रख करके वो मदद ले सकता है, इसकी एक व्‍यवस्‍था की गई है, क्‍यों यहां दूर-दूर से आपका वहां जाना, बहुत तकलीफ होती है। मुझे ये भी बताया गया कि कही- कहीं पर E-migrate Portal का उपयेाग करने में नागरिकों को दिक्‍कत होती है इसके लिए मैंने हमारे Embassy को आदेश किया है कि वे ये जो Technical Problem है इसका 30 दिन के भीतर-भीतर Solution दें। आज 17 अगस्‍त है, 17 सितम्‍बर तक Solution दें, ऐसा मैंने उनसे कहा है और मुझे विश्‍वास है कि हमारे Embassy के भाई, ये जो Technical Problem कहीं-कहीं आता है, उसका रास्‍ता निकालेंगे।

एक और काम मैंने कहा है, यहां भारतीय समुदाय ज्‍यादातर workers हैं। उनके पास इतने पैसे नहीं कि एक जगह से दूसरी जगह पर वो भागते रहें और इसलिए हमने कहा है, कि हम समय-समय पर जहां हमारे भारतीय भाई समुदाय रहते हैं, वहां जा करके, Counselor Camp लगाएं। महीने में एक बार, दो महीने में एक बार, और वहीं जा करके उनसे बैठें, बातचीत करें, और उनकी समस्‍या के समाधान के लिए योग्‍य व्‍यवस्‍था करें। मैं यहां ये बातें इसलिए कह रहा हूं कि ये भू-भाग ऐसा है, के जहां मेरे गरीब तबके के भाई-बहन रहते हैं, मजदूरी करने के लिए यहां आए हुए हैं। अमेरिका के लिए कुछ कर पाऊं, या न कर पाऊं लेकिन अगर आपके लिए नहीं कुछ करता तो मैं बेचैन हो जाता हूं। और इसलिए हमने एक और काम किया है, इन दिनों विदेशों में कभी-कभी जाते हैं तो हमारे भारतीय भाई कभी-कभी संकट में जैसे अचानक बीमारी आ गई, कुछ हो गया, कभी कोई कानूनी पचड़े में फंस गए, बेचारे जेल चले गए। तो दुनिया के बाहर कौन उनको देखने वाला है? परिवार तो है नहीं, और इन हमारे कभी-कभी मुसीबत में कोई परिवार आ जाए तो उनकी मदद करने के लिए Indian Community Welfare Fund (ICWF) स्‍थापित किया गया है। सब दूतावासों को ये Welfare Fund दिया गया है, और इसलिए ऐसी मुसीबत में कोई फंस गया हो तो उनको कानून की मर्यादा में रह करके जो मदद हो सकती है, कोई अगर जेल में बंद हुआ है, तो कम से कम उसको खाना-पीना मिल जाए मानवता की दृष्‍टि से कोई व्‍यवस्‍था हो जाए, इन सारे कामों के लिए एक Fund की हमने व्‍यवस्‍था की है। हमने ये भी निर्णय किया है, इस Fund के द्वारा दूतावास, Counsel में Counselor सुविधाएं और अच्‍छी कैसे बनें, जो नागरिकों की भलाई के लिए हों, उनके लिए भी इसका उपयोग किया जाएगा। जिनको कानूनी सलाह की जरूरत पड़ेगी और अगर वो खुद इसको करने के लिए स्थिति नहीं है, कभी-कभार तो एक हजार-दो हजार का दंड बेचारा नहीं भर पाता, उसके कारण जेलों में सड़ता रहता है। ऐसे लोगों को मदद करके, भारतीय नागरिक होने के नाते उनको मदद करना इसके लिए Welfare Fund का उपयोग हो, ताकि वो संकटों से बाहर आ सकें, ये भी हमने व्‍यवस्‍था करने के लिए कहा है। मैं जानता हूं यहां पर स्‍कूलों में Admission में कितनी दिक्‍कत होती है, आपके बच्‍चों को स्‍कूलों में पढ़ाई की कितनी दिक्‍कत होती है? मैंने यहां के संबंधित लोगों से ये बात कही है और मैंने कहा है कि अधिक स्‍कूल कैसे बनें, उसकी चिन्‍ता मैंने की है, देखते हैं, मुझे विश्‍वास है कि आने वाले दिनों में उसका भी लाभ आप लोगों को मिलेगा।

मुझे विश्‍वास है मेरे भाइयो, बहनों, कि जो आपकी छोटी-मोटी बातें मेरे ध्‍यान में आई थीं, इसको पूरा करने का मैंने प्रयास किया है। मैं फिर एक बार आप सबको दृदय से बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं और दुनिया में कहीं पर भी मेरा भारतवासी है, तो हम पासपोर्ट का रंग नहीं देखते हैं। हमारा खून का रंग काफी है, वो धरती का नाता काफी है, और इसलिए आइए मेरे साथियो हम सब मिल करके जहां भी हों, मां भारती का माथा ऊंचा करने के लिए, गौरव से जीवन जीने के लिए एक माहौल बनाने में सक्रिय शरीक हों और आपका योगदान आपकी शक्ति सामर्थ्‍यवान आपके परिवार को भी भला करने में काम आए, देश का भी भला करने के लिए काम आए।

इसी शुभ कामनाओं के साथ आप सबका बहुत-बहुत धन्‍यवाद।

मेरे साथ दोनों मुट्ठी बंद करके बोलिए, भारत माता की जय। दोनों मुट्ठी पूरी बंद करके पूरी ताकत से बोलिए, भारत के कोने-कोने में, आपके अपने गांव में आवाज पहुंचनी चाहिए भारत माता की जय, भारत माता की जय, भारत माता की जय, भारत माता की जय।

बहुत-बहुत धन्‍यवाद।

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नमस्कार !

भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय पदाधिकारी बैठक में उपस्थित भाजपा के सभी साथियों,
देश भर से हमारे साथ जुड़े हमारे सहयोगी, सबसे पहले तो हमें देश के कोने कोने में मातृभूमि की सेवा में लगे हुए, जन-जन के कल्याण में खप रहे भाजपा के कोटि-कोटि कार्यकर्ताओं का अभिनंदन करता हूं। जनसंघ से लेकर जो हमारी यात्रा शुरू हुई भाजपा के रूप में फली-फूली इस पार्टी के इस रूप को इसके स्वरूप को और इसके विस्तार को देखते हैं तब गर्व तो होता ही है, लेकिन इसके निर्माण में खुद को खपाने वाले पार्टी के सभी मनीषियों, सभी विभूतियों उन सभी को मैं आज नमन करता हूं।

साथियों,

हम राजस्थान की धरती पर हैं, मुझे भी आप सबके बीच में रह कर के इस कार्यक्रम में शरीक होने का अवसर मिला होता, मेरे लिए भी वो प्रेरणा का कारण बनता, ऊर्जा का स्रोत मिलता। क्योंकि मैं जब भी कार्यकर्ताओं से मिला हूं, कार्यकर्ता छोटा हो बड़ा हो बहुत कुछ जानने को मिलता है बहुत की बातों से अनेक पहलू समझने को मिलते हैं। कार्यकर्ता के द्वारा जो इनफॉरमेशन आती है वो बहुत ही सटीक इनफॉरमेशन आती है, और जब मिलते है तो बहुत कुछ बातें भी होती हैं, तो मेरे मन में तो कसक रह जाएगी कि मैं नहीं पहुंच पाया, लेकिन वर्चुअली आप सबका दर्शन कर रहा हूं आप सबसे बात कर रहा हूं। साथियों राजस्थान की धरती पर हैं तब हम सब को श्रद्धेय सुंदर सिंह जी भंडारी की याद आना बहुत ही स्वाभाविक है आज ये वर्ष सुंदर सिंह भंडारी जी का जन्म शताब्दी वर्ष भी है। हम सब ऐसे प्रेरणा पुरुष का हृदय से अभिवादन करते हैं प्रणाम करते हैं।

साथियो,


राजस्थान की धरती, राजस्थान की बात हो, राजस्थान भारतीय जनता पार्टी की विकास यात्रा की चर्चा हो तो मैं इस बात को गर्व से कह सकता हूं कि मुझे ऐसे-ऐसे दिग्गजों के साथ काम करने का मौका मिला, ऐसे-ऐसे दिग्गजों की उंगली पकड़ कर चलने का सौभाग्य मिला, औन उन सब का स्मरण आना बहुत स्वाभाविक है। श्रद्धेय स्वर्गीय भैरों सिंह शेखावत जी की बात हों, आदरणीय जगदीश प्रसाद माथुर जी का स्मरण आना, भानु कुमार शास्त्री जी, हमारे रघुवीर सिंह कौशल जी, हमारे भंवर लाल शर्मा जी, हमारे गंगाराम कोली जी, अनगिनत नाम ऐसे सभी वरिष्ठ जनों की उंगली पकड़ कर चलने का मुझे सौभाग्य मिला। ये सारे वो लोग है जिन्होंने पार्टी को दिशा दिखाई है, पार्टी के लिए अपना पूरा जीवन खपा दिया।

ऐसे ही अनगिनत समर्पित जीवन का आज स्मरण होना बहुत ही स्वाभाविक है। और इसलिए जब कमलपुष्प की रचना हुई है, मैं पार्टी को अभिनंदन करता हूं, आज कमल पुष्प पर हमारे बूथ स्तर के कार्यकर्ता को पुराने कार्यकर्ताओं के जीवन की जो कथाएं हैं उसमें प्रस्तुत करते हैं वो अपनेआप में प्रेरक हैं। अतः मैं आप सभी से कहता हूं कि कभी भी मन में आलस आ जाए, पल भर के लिए उस कमल पुष्प को मोबाइल फोन पर खोलकर के देखिए, ऐसी प्रेरणा की कथाएं हैं, ऐसी प्रेरक जीवन की घटनाएं हैं, हमें मार्गदर्शन के लिए प्रेरणा के लिए कुछ करने की जरूरत ही नहीं है। एक-एक का जीवन, एक-एक पल का काम कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणा का स्वरूप है।

साथियो,


21वीं सदी का ये समय भारत के लिए बहुत अहम समय है। और आप को याद होगा मैंने लाल किले से कहा था, यही समय है और सही समय है। आज हम सभी देख रहे हैं कि दुनिया में भारत के प्रति किस तरह की विशेष भावना जागृत हुई है। दुनिया आज भारत को बहुत उम्मीदों से देख रही है। ठीक वैसे ही भारत में भाजपा के प्रति, जनता का एक विशेष स्नेह जुड़ा हुआ अनुभव हो रहा है। देश की जनता भाजपा को बहुत विश्वास से, बहुत उम्मीद से देख रही है। देश की जनता की ये आशा-आकांक्षा हमारा दायित्व बहुत ज्यादा बढ़ा देती है।

आजादी के इस अमृतकाल में देश अपने लिए अगले 25 वर्षों के लक्ष्य तय कर रहा है। भाजपा के लिए ये समय है, अगले 25 वर्षों के लक्ष्य तय करने का, उनके लिए निरंतर काम करने का। देश के लोगों की जो उम्मीदें हैं, हमें वो पूरी करनी हैं। देश के सामने जो चुनौतियां हैं, हमें देश के लोगों के साथ मिलकर हर चुनौतियों को पार करना है उन्हें परास्त करना है और विजय के संकल्प के साथ आगे बढ़ना है। और हम जानते हैं कि इसका मार्ग क्या है। हमारा दर्शन है पंडित दीनदयाल उपाध्याय का एकात्म मानववाद और अंत्योदय। हमारा चिंतन है डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी की सांस्कृतिक राष्ट्रनीति। हमारा मंत्र है 'सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास'।

साथियो,


मैं अलग तरीके से एक बात बताना चाहता हूं, मान लीजिए, आप कल्पना कीजिए किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित व्यक्ति, जब लंबे उपचार के बाद भी ठीक नहीं होता तो बीमारी को ही अपनी नियति मान लेता है। वो बीमारी से बनी उन परिस्थितियों को स्वीकार कर लेता है। उसके साथ जीना सीख लेता है वो सोचता है कि किसी भी तरह चलो भाई दिन कट जाए। व्यक्ति का जीवन जैसा होता है न कभी-कभी राष्ट्र का भी जीवन वैसा होता है। हमारे देश में भी एक लंबा कालखंड ऐसा रहा जब लोगों की सोच मजबूरन ऐसी हो गई थी कि बस और कोई सहारा न बचा अब तो इसी में गुजारा करना है बस किसी तरह समय निकल जाए। जिंदगी गुजर जाए। ना सरकार से उनको अपेक्षा थी और ना ही सरकार उनके प्रति कोई जवाबदेही समझती थी।

साथियो,


देश की जनता 2014 में एक नया इतिहास लिखने का फैसला किया। फैसला जनता का था। 2014 के बाद, भाजपा, देश को इस सोच से बाहर निकालकर लाई है। आज निराशा नहीं आशा और अपेक्षा का युग है। साथियों, आज भारत के लोग Aspirations से भरे हुए हैं। वो नतीजे चाहते हैं, सरकारों को काम करते हुए देखना चाहते हैं, अपनी आंखों के सामने परिणाम प्राप्त करना चाहता है परिणाम देखना चाहता है। राजनीतिक नफा-नुकसान से अलग, मैं इसे जनमानस में आया बहुत बड़ा Positive Change मानता हूं। जब देश के 130 करोड़ लोगों की आकांक्षाएं इस प्रकार से जग जाती है तो निश्चित रूप से सरकारों की जवाबदेही भी बढ़ जाती है उनके लिए काम करना अनिवार्य हो जाता है। सार्वजनिक जीवन में हर व्यक्ति के लिए जन जागृति अनिवार्य रूप से काम करने के लिए प्रेरित भी करती है और दबाव भी बनाती है। और इसलिए देश के लोगों की बढ़ती हुई Aspirations में, मैं देश के उज्जवल भविष्य को भलीभांति देख रहा हूं। और जब ये सारे चित्र मेरे सामने मैं देख पा रहा हूं आत्मविश्वास से भरे हुए देश के युवाओं को देखता हूं, कुछ कर गुजरने के हौसले के साथ भागीदारी के विश्वास के साथ आगे बढ़ती बहन-बेटियों को देखता हूं तो मेरा आत्मविश्वास भी कई गुना बढ़ जाता है।

साथियो,


जब अपेक्षाएं बढ़ती हैं, तो अपेक्षित परिणाम लाने के लिए परिश्रम की पराकाष्ठा करने का जज्बा भी बढ़ता है। यही जज्बा देश को आजादी के इस अमृतकाल में नई ऊंचाई पर ले जाएगा। साथियों, आजादी के इस अमृतकाल में देश जिन बड़े लक्ष्यों पर काम कर रहा है, तब, हमें कुछ बातें और भी याद रखनी जरूरी हो जाती है। भाजपा का कार्यकर्ता होने के नाते हमें चैन से बैठने का कोई हक नहीं है, कोई अधिकार नहीं है। नहीं तो दुनिया कहेगी, सच्चाई भी है कि आज देश के 18 राज्यों में भाजपा की सरकार है, हमारे 1300 से अधिक विधायक और 400 से अधिक सांसद हैं। राज्य सभा में भी वर्षों के बाद कोई दल 100 के आंकड़ों को छूने जा रहा है, वो नसीब भी भाजपा के पास है। यदि इन सारी सफलताओं को जब सामने देखते हैं तो स्वाभाविक मन करेगा कि अब बहुत हो गया। लेकिन साथियों, अगर हमें सत्ता भोग ही करना होता, तो भारत जैसे विशाल देश में कोई भी सोच सकता है कि भाई, इतना सारा ले गया, इतना सारा प्राप्त कर लिया, यार अब तो बैठो अब तो आराम करते हैं, चलो यार। जी नहीं ये रास्ता हमारे ले नहीं है, वो रास्ता हमें मंजूर नहीं, जिन्होंने हमारे देश के लिए, हमारी पार्टी के लिए जीवन खपाया है, उन्होंने हमें आराम करने की इजाजत नहीं दी है, इसलिए हमें आराम नहीं करना है।

साथियो,


इतना सब विजय पताका फहर रही है तो भी आज भी हम अधीर हैं, आज भी हम बेचैन हैं, आज भी हम आतुर हैं, क्योंकि हमारा मूल लक्ष्य, भारत को उस उंचाई पर पहुंचाना है जिसका सपना देश की आजादी के लिए मर-मिटने वालों ने देखा था। जिन सपनों को लेकर के वीर गले में फांसी के फंदे लगाकर के मातृभूमि के लिए आहूति दी। हमें अपने स्वतंत्रता सेनानियों का ऋण कभी चुका नहीं सकते दोस्तो, लेकिन दिन रात मेहनत कर सकते हैं, खुद को देश के लिए खपा सकते हैं। और मुझे खुशी है कि भाजपा का प्रत्येक कार्यकर्ता, आज इन भावनाओं से प्रेरित होकर के नित्य नूतन प्राण शक्ति लेकर के अविरत न थके न झुके काम कर रहा है। जिस पार्टी के पास कर्तव्य पथ पर चलने वाले कोटि-कोटि कार्यकर्ता हो वो कौन होगा जिसको गर्व नहीं होगा, मुझे आप सब के लिए गर्व है।

साथियो,


इस महीने केंद्र की भाजपा सरकार के, एनडीए सरकार के 8 वर्ष पूरे हो रहे हैं। ये आठ वर्ष संकल्प के रहे हैं, सिद्धियों के रहे हैं। ये 8 वर्ष सेवा, सुशासन और गरीब कल्याण को समर्पित रहे हैं। ये 8 वर्ष, देश के छोटे किसानों, देश के श्रमिकों, देश के मध्यम वर्ग की अपेक्षाओं को पूरा करने वाले रहे हैं। ये 8 वर्ष, देश के संतुलित विकास, सामाजिक न्याय और सामाजिक सुरक्षा के लिए भी रहे हैं। और ये 8 वर्ष, देश की माताओं-बहनों-बेटियों के सशक्तिकरण, उनकी गरिमा बढ़ाने के प्रयासों के नाम रहे हैं।

साथियो,


सरकार पर, सरकार की व्यवस्थाओं पर, सरकार के डिलिवरी मैकेनिज्म पर किसी समय देश का जो भरोसा उठ गया था, उसे 2014 के बाद जनता-जनार्दन के आशीर्वाद से भाजपा सरकार उसे वापस लेकर आई है। आज गरीब से गरीब भी ये नहीं सोचता कि ये सरकारी योजना तो सिर्फ सिफारिश वालों के लिए है, जान-पहचान वालों के लिए है, जो पैसे खर्च कर सकता है उनके लिए है। आज वो अपने आसपास लोगों को योजनाओं का लाभ मिलते देख रहा है। वो आज बहुत विश्वास से कहता है कि एक ना एक दिन मुझे भी इस योजना का लाभ अवश्य मिलेगा। और ये बहुत विश्वास से कहता है। साथियों, इसलिए इस बार आपको याद होगा, मैंने 15 अगस्त को लाल किले से शत-प्रतिशत लाभार्थियों तक पहुंचने की बात की थी।

काम कठिन है, मैं जानता हूं। देश बहुत विशाल है, जिम्मेवारियां बहुत बड़ी हैं। कई काम है जो राज्य सरकारों पर डिपेंडेंट हैं। कई काम है जो स्थानीय निकायों पर डिपेंडेंट हैं। भांति-भांति के प्रभाव भी है, इसके बावजूद भी साथियों जब ये ठान लेंगे कि हमें हर लाभार्थी तक पहुंचना है, एक भी व्यक्ति के छूटने की गुंजाइश को समाप्त कर देना है, तो तय लक्ष्य तक जरूर पहुंचेंगे। और इसके लिए मैं लगातार एक बात सरकारी अधिकारियों से अन्य राज्य सरकारों से करता रहता हूं रहता हूं, सैचुरेशन की बात करता हूं। सैचुरेशन का यह सिर्फ पूर्णता का आंकड़ा भर नहीं है, लेकिन जब हम सैचुरेशन की बात करते हैं तो सैचुरेशन पर बल देना ये भेदभाव, भाई-भतीजावाद, तुष्टिकरण, भ्रष्टाचार के चंगुल से देश को बाहर निकालने का माध्यम है।

भारत के सामान्य नागरिक को सरकारी दफ्तरों के चक्कर से मुक्ति दिलाने का जो अभियान बीते 8 साल से देश में चल रहा है, सैचुरेशन का अभियान उसको औऱ सशक्त करेगा। और इसलिए, आज राष्ट्रीय पदाधिकारियों की इस बैठक में, हम सभी को इस संकल्प के साथ आगे बढ़ना है कि हम जिस भी क्षेत्र के होंगे, जो भी हमारा कार्यक्षेत्र रहा है, वहां कोई भी गरीब, कोई भी समझदार नागरिक योजनाओं के लाभ से वंचित नहीं रहेगा। इसके लिए भाजपा को नए जागरूकता अभियान शुरू करना चाहिए। चुनाव के समय जैसे आप हर बूथ तक जाते हैं, हर परिवार तक जाते हैं, उसी स्पीरिट से हर घर तक जाना होगा। एक-एक नागरिक तक पहुंचना होगा। हर घर भाजपा, हर गरीब का कल्याण, हमें इसी भावना के साथ लगातार काम करना होगा। आप में से बहुत सारे लोग जानते होंगे, और खासकर के जब राजस्थान में बैठे हैं तो शायद ये कहावत जरूर आपके कान तक पहुंची होगी राजस्थान में अक्सर एक कहावत कही जाती है- अम्मर को तारो, हाथ सै कोनी टूटे। यानि आसमान का तारा हाथ से नहीं टूटता है। साथियों, ये कहावत अपनी जगह पर सही है, और इसलिए हमें भूलना नहीं चाहिए कि हमारा लक्ष्य आसमान जितना ऊंचा है, इतनी आसानी से नहीं मिलेगा लेकिन, मेहनत करेंगे तो उसे प्राप्त जरूर करेंगे।

साथियो,


जिस एक और विषय पर हमें निरंतर कार्य करते रहना है, वो है देश में विकासवाद की राजनीति की चौतरफा-चहुं-दिशा में स्थापना होनी चाहिए। कोई भी दल हो उसको भी विकासवाद की राजनीति पर आने के लिए मजबूर कर देना, साथियों हम बड़े गर्व से कह सकते हैं कि ये भारतीय जनता पार्टी ही है जिसने विकासवाद की राजनीति को देश की राजनीति की मुख्यधारा बना दिया है। आज कोई भी चुनाव हो, विकास पर विश्वास करने वाले लोग हो या न हो, समाज को तोड़ने की राजनीति करने वाले लोग हो तो भी। शॉर्टकट ढूंढकर के सत्ता पाने के नुस्खे आजमाने वाले लोग हो तो भी, चाहते हो या न चाहते हों, लेकिन चुनाव में हर किसी को विकास के नाम पर बात करनी ही पड़ती है। चुनाव के मैदान में विकास की चर्चा करनी ही पड़ती है। और गर्व है भारतीय जनता पार्टी पर कि हमने राजनीति को विकासवाद की धारा के साथ प्रमुख रूप से बल दिया है। लेकिन साथियों हमें ये भी देखना है कि जो लोग विकासवाद की राजनीति से बच नहीं सकते, मजबूरन विकासवाद पर आना ही पड़ रहा है, उन्होंने राजनीति में विकासवाद को भी विकृति की दिशा में धकेल दिया। ये राजनीतिक दल तात्कालिक लाभ के लिए फायदे के लिए देश के उज्ज्वल भविष्य के साथ, राज्य के उज्ज्वल भविष्य के साथ, देश की युवा पीढ़ी के भविष्य के साथ खिलवाड़ करती है उसे खोखला करने का ही काम करती है। ये राजनीतिक दल अपने स्वार्थ के लिए समाज में जो छोटे-मोटे तनाव होते हैं, कुछ कमजोरियां होती हैं, कुछ पर्सनल होते हैं उन्हें ढूंढ-ढूंढ़ कर के उसमें जहर डालने का काम करते हैं। उन कमजोरी को उभार रहे हैं, कभी जाति के नाम पर, कभी क्षेत्रवाद के नाम पर लोगों को भड़का रहे हैं। साथियों, एक भारत श्रेष्ठ भारत का सपना लेकर के चल रही भारतीय जनता पार्टी के लिए ये भी अनिवार्य है कि देश के लोगों को लगातार हमें सावधान करते रहना है। इस प्रकार के लोगों से सचेत करना होगा, और इस प्रकार के दलों से सचेत करना होगा।

साथियो,


हमें एक और बात हमेशा याद रखनी है। हम सब को याद है जनसंघ के जमाने से ही जब हम कहीं हाशिए पर खड़े थे। तब हमें कोई जानता भी नहीं था, न उस नगर में जानता था, न उस राज्य में जानता था न उस जिले में जानता था। फिर भी उस जमाने में जब हमारे बातों को कोई कान पर ले इसकी संभावना भी नहीं थी उस समय भी, जनसंघ के समय में हमारे कार्यकर्ता, हमारी पुरानी पीढ़ियां, जिन नीतियों पर ड़टे रहे, जिन नीतियों को लेकर चलते रहे, कार्यक्रम करते रहे उसकी मुख्यधारा थी राष्ट्र भक्ति, राष्ट्र हित, राष्ट्र सेवा राष्ट्र निर्माण यही प्राथमिकता थी ई। हम सत्ता से कोसों दूर थे, फिर भी, उस जमाने के हमारे छोटे-छोटे कार्यकर्ताओं का मातृभूमि के प्रति प्रेम, राष्ट्र सर्वोपरि की निष्ठा, उसमें इतनी ताकत थी, कि सत्ता पर बैठे उन पर काबिज बड़े-बड़े लोगों को भी भारतीय जनसंघ की उस राष्ट्र भक्ति और राष्ट्रीय विचारधारा को वो कभी चुनौती नहीं दे पा रहे थे। जाने अनजाने में भी उसके महत्व को समझना पड़ता था। स्वीकार नहीं करते थे, समझना पड़ता था और आज भाजपा की नीतियां उसी राष्ट्रभक्ति से प्रेरित होकर विकास पर केंद्रित हुई है, विश्वास पर केंद्रित है। इसलिए साथियों हमें कभी कोई शॉर्ट-कट नहीं लेना है। हमें देशहित से जुड़े जो भी बुनियादी विषय हैं, जो Core-Issues हैं उन्हीं पर आगे बढ़ना है।

कदम को दाएं-बाएं जाने नहीं देना है, जुबां को इधर-उधर फिसलने नहीं देना है। और ये Core-Issues क्या हैं? गरीब का कल्याण, गरीब का जीवन आसान बनाने के लिए, गरीब को सशक्त करने के लिए हमें लगातार काम करना है। हमें कभी भी भटकना नहीं है। और मैं आपको सतर्क भी करूंगा, आपसे आग्रह भी करूंगा कि आपको विकास से जुड़े मुख्य मुद्दों से भटकाने की लाख कोशिशें होंगी. लेकिन आपको देश के विकास से जुड़े विषयों पर ही टिके रहना है। हम देखते ही हैं कि आजकल किस तरह कुछ पार्टियों का इकोसिस्टम पूरी शक्ति से देश को मुख्य मुद्दों से भटकाने में लगा हुआ है। हमें कभी ऐसी पार्टियों के जाल में नहीं फंसना है। मैं जानता हूं कि आप अपने संवादों में, बातचीत में, संबोधनों में पत्रकार वार्ता में अगर आप कहते हैं कि हमारी सरकार ने 2014 के बाद गरीबों के लिए 3 करोड़ घर बनाए, ठीक है उस खबर को फ्रंट पेज पर नहीं छापा। टीवी के परदे पर नहीं दिखाया। अगर आप कहें कि 50 करोड़ से ज्यादा लोगों को 5 लाख रुपए तक के मुफ्त इलाज की व्यवस्था हमने की है, हो सकता है कि उसे कान पर न भी ले, 8 हजार से ज्यादा जन औषधि केंद्रों की बात अगर हम करें तो हो सकता है टीवी में, मीडिया में अखबार में, सुर्खियों में नजर ना भी आएं।

मैं जानता हूं कि आप 10 करोड़ से ज्यादा छोटे किसानों के बैंक खाते में सीधे पैसे ट्रांसफर करने की बात करेंगे, हो सकता है उसको भी नजरंदाज कर दिया जाएगा, उसको भी किसी अखबार के पन्नों पर नहीं दिखाया जाएगा, टीवी पर नहीं बताया जाएगा, हो सकता है मैं जानता हूं कि आप हर घर जल की बात करेंगे, हर गांव तक ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी की बात करेंगे, आप देश में डिजिटल क्रांति की बात करेंगे, थिंकटैंक की बात करेंगे, डिजिटल ट्रांजेक्शन की बात करेंगे, यही वो सिस्टम है इस पर तवज्जो नहीं देने देगी। इस बात को आगे नहीं बढ़ने देगी। आप प्रधानमंत्री म्यूजियम बनाएंगे, डेमोक्रेसी के ट्रू स्पीरिट को हिंदुस्तान की आजादी के अमृत महोत्सव में लाकर के खड़ा कर देंगे, आंखें मूंद ली जाएगी, चूटकी तक ली जाएगी, होगा, आप जितने भी अच्छे काम करेंगे कोई पब्लिसिटी नहीं मिलेगी,कोई हेडलाइन नहीं बनेगी। टीवी पर वो बात चमकेगी नहीं लेकिन, इस सब के बावजूद भी साथियों हमें अपने मार्ग पर डटे रहना विकास के मुद्दों पर टिके रहना है, देशहित के मुद्दों पर टिके रहना है। कभी न कभी मजबूरन उनको भी इन मुद्दों की सकारात्मक रूप में स्वीकृति देनी ही पड़ेगी। बस हम इस इकोसिस्टम के गब्बारों में उसको एड्रेस करने की कोशिश न करने लगें। साथियों, ऐसा करके ही इस अमृतकाल में हम देश की राजनीति को पूरी तरह विकास पर केंद्रित कर पाएंगे।

साथियो,


एक और कोशिश जो हम सब को करनी है, वो है ज्यादा से ज्यादा लोगों को भाजपा से जोड़ने की। करोड़ों की सदस्य संख्या हमारा गर्व बढ़ाती है, लेकिन हमें फिर भी रुकना नहीं है, हर क्षेत्र के लोग, हर समाज के लोग, हर कोई भाजपा को अपना माने, अपने सपनों का प्रतिबिंब भाजपा में देखे, अपने संकल्पों का सामर्थ्य भाजपा में देखे, भारतीय जनता पार्टी ऐसा वटवृक्ष हो, ऐसा गुलदस्ता हो कि समाज के हर व्यक्ति को उसमें अपने सपने नजर आए। साथियों हर किसी को जागरूक करना है, सिर्फ सदस्य ही नहीं बनाना है बल्कि राष्ट्रनीति के पथ पर चलने वाले कर्मठ युवा कार्यकर्ताओं को मंच देना है, अवसर देना है। जिसका राजनीति से कोई लेना-देना नहीं रहा हो, ऐसे परिवारों को भी अवसर देना है। अगर मैं आज के युवाओं की भाषा में कहूं, तो जो भारत के समृद्ध भविष्य के कोड लिखने के लिए लालायित हैं, ऐसे हर युवा को हर बेटे-बेटी को हमें भाजपा के साथ जोड़ना है। हमें ये याद रखना है कि परिवारवाद की राजनीति में उस राजनीति से विश्वासघात खाने वाले देश के युवाओं का विश्वास सिर्फ और सिर्फ भाजपा ही लौटा सकती है।

साथियो,


हम सभी जानते हैं कि आजादी के बाद से ही वंशवाद और परिवारवाद ने देश का कितना भयंकर नुकसान किया है। परिवारवादी पार्टियों ने देश में भ्रष्टाचार को, धांधली को, भाई-भतीजावाद को, इसी को आधार बनाकर देश का बहुत मूल्यवान समय बर्बाद किया है। ये परिवारवादी पार्टियां आज भी देश को पीछे ले जाने पर तुली हुई हैं। उनका सार्वजनिक जीवन परिवार से शुरू होता है और परिवार के लिए चलता है, परिवार की खातिर ही करता है। भाजपा को इन परिवारवादी पार्टियों से निरंतर मुकाबला करना है। लोकतंत्र के लिए ये सबसे घातक परंपरा है। अगर लोकतंत्र बचाना है, लोकतंत्र को सामर्थ्यवान बनाना है, लोकतंत्र को मूल्यनिष्ठ बनाना है, तो हमें ये वंशवाद, परिवारवाद की राजनीति के खिलाफ अतिरिक्त संघर्ष करना ही है दोस्तों। इस अमृतकाल में देश को, हमारा यह भी संकल्प है कि देश को लोकतांत्रिक मूल्यों से जरा भी हटने नहीं देंगे। लोकतंत्र की रक्षा करेंगे और वंशवादी, परिवारवादी शक्तियों को देश की जनता नकार दें, देश की जनता का हम विश्वास जीतेंगे। और साथियों अपने इस प्रयास में हमें भारतीय जनता पार्टी में लोकतांत्रिक मूल्यों की जो मर्यादित परंपरा है मजबूत नींव है उसे निरंतर मजबूत करते ही रहना है।

साथियो,


अटल जी की एक प्रसिद्ध कविता की पंक्तियां हैं- अटल जी ने लिखा था… काल के कपाल पर लिखता मिटाता हूँ… गीत नया गाता हूँ।.. ये अटल जी के व्यक्तित्व के साथ ही भाजपा की इतने वर्षों की तपस्या का सार भी है। साथियों ये भाजपा है यह ठहरा हुआ पानी नहीं है। भाजपा निरंतर प्रवाहमान है। हमने एक दल के रूप में खुद को लगातार evolve किया है, वंशवाद, परिवारवाद के कीचड़ में भी हमने कमल को खिलाया है, जो लोकतंत्र की मूलभूत पंखुड़ियों की तरह प्रकाशमान है। साथियों, नई चुनौतियों के साथ अपनी नीति-रणनीति हम निरंतर, जब भी जरूरत पड़ी, देश हित को आवश्यक मानकर हम आधुनिकता की ओर आगे बढ़ते हैं। और आज भाजपा ने सिर्फ नूतन को ही नहीं अपनाया, बल्कि पुरातन से निकले संस्कारों को भी उतना ही सम्मान दिया है। हमने अपने पूर्वजों की ज्ञानशक्ति पर भरोसा किया है। मैं आपको एक उदाहरण देना चाहता हूं। हम सब जानते हैं कि पूज्य महात्मा गांधी, बापू, आज़ाद भारत में स्वाबलंबन आधारित नीतियों को देखना चाहते थे। लेकिन दशकों तक सिर्फ गांधी जी का नाम ही लिया गया, काम बिल्कुल उनके विजन के विपरीत किया गया। वो देश में स्वाबलंबन चाहते थे, लेकिन भारत को पॉलिसी से लेकर प्रैक्टिस तक विदेशों पर निर्भर बना दिया गया। अब आज देश देख रहा है कि भाजपा सरकारों के समय स्थितियां कैसे बदल रही हैं। आज देश पहली बार आत्मनिर्भरता के रास्ते पर चल पड़ा है। आज हर भारतीय लोकल के लिए वोकल हो रहा है, स्थानीय उत्पादों पर गर्व कर रहा है।

साथियो,


ये भाजपा ही है जिसने भारत की सांस्कृतिक और भाषाई विविधता को पहली बार राष्ट्रीय स्वाभिमान से जोड़ा है। नई नेशनल एजुकेशन पॉलिसी में स्थानीय भाषाओं को प्राथमिकता देना, हर क्षेत्रीय भाषा के प्रति हमारे कमिटमेंट को दिखाता है। भाजपा, भारतीय भाषाओं को भारतीयता की आत्मा मानती है और राष्ट्र के बेहतर भविष्य की कड़ी मानती है। इसका जिक्र आज मैं विशेष तौर पर इसलिए करना चाहता हूं, क्योंकि बीते कुछ समय से देश में भाषा के आधार पर नए विवाद खड़े करने की कोशिश की जा रही है। हमें इससे देशवासियों को निरंतर सतर्क करना है। भाजपा, भारत की हर भाषा में भारतीय संस्कृति का प्रतिबिंब देखती है, हर भाषा को पूजनीय मानती है।

साथियो,


आजादी का ये अमृतकाल, भाजपा के प्रत्येक कार्यकर्ता के लिए कर्तव्यकाल की तरह है। हमें अपने कर्तव्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी है। कर्तव्य पथ पर चलते हुए भारत, आने वाले वर्षों में उस उज्ज्वल भविष्य को प्राप्त करेगा, जिसका वो हमेशा से हकदार रहा है। मुझे भाजपा के प्रत्येक कार्यकर्ता पर पूरा भरोसा है, मुझे देश के प्रत्येक नागरिक पर पूरा भरोसा है। साथियों, दो दिन आप अनेक विषयों पर चर्चा करने वाले है, हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष आदरनीय नड्डा जी के मार्गदर्शन में नित नूतन विचारों से आगे बढ़ रही भारतीय जनता पार्टी न कभी रुकने का न कभी थकने का, न कभी चैन से बैठने का, चरैवेति… चरैवेति… चरैवेति के मंत्र को लेकर के ये दो दिन की चर्चा के बाद आप जब जाएंगे, जहां भी जाएंगे आप एक ऊर्जा का स्रोत बनकर के जाएंगे, ये मेरा पूरा विश्वास है। आप सभी को अनेक-अनेक शुभकामनाएं देता हूं। और मैं आज रूबरू नहीं आ पाया, आपके बीच नहीं बैठ पाया, उसकी कसक मन में रखते हुए भी आप जो भी निर्णय करेंगे, जो भी योजना बनाएंगे, मैं भी एक कार्यकर्ता हूं, एक कार्यकर्ता के नाते, आप वहां जो भी निर्णय लेंगे, मैं अपने सर आंखों पर चढ़ा कर के मैं भी एक कार्यकर्ता के रूप में उन सब कामों में पूरी ताकत से जुड़ता रहूंगा। ये विश्वास देते हुए एक बार फिर शुभकामनाएं देते हुए मेरी वाणी को विराम देता हूं।

बहुत-बहुत धन्यवाद !