Text of PM's address at the Indian Community Reception at Dubai

Published By : Admin | August 17, 2015 | 23:28 IST
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Today I am witnessing 'mini-India' in Dubai: PM
People from all over the world have come here to Dubai. Magnetic power of this place has drawn the world here: PM
There are around 700 flights between India and the UAE but it took 34 years for a PM to visit this Nation: PM
PM Narendra Modi urges audience to give a standing ovation to the Crown Prince of Abu Dhabi
India has been a victim of terrorism for 40 years. Innocent people have lost their lives: PM
Good Taliban, Bad Taliban...Good Terror, Bad Terror...this won't work. A decision has to be taken are you with terrorism or with humanity: PM
Our effort has been to take India to new heights of progress and maintain a strong friendship with our neighbouring countries: PM

दुबई की धरती पर मैं आज मेरे सामने लघु भारत के दर्शन कर रहा हूं। हिन्‍दुस्‍तान के कोने-कोने से आए हुए मेरे प्यारे देशवासियों को मैं नमन करता हूं। आप वे लोग हैं, जिन्होंने परिश्रम की पराकाष्ठा करके..कोई दस साल से, कोई पंद्रह साल से, कोई बीस साल से, कोई तीस साल से, रोजी रोटी कमा रहे हैं, लेकिन साथ-साथ भारत के गौरव को भी बढ़ाने में कभी पीछे नहीं रहे। आपके व्यवहार के कारण आपके आचरण के कारण हमेशा भारत गौरव अनुभव करता रहा है। भारत में अगर अधिक बारिश भी हो जाए तो दुबई में बैठा हुआ मेरा हिंदुस्तानी छाता खोल देता है। भारत में कहीं अगर कोई प्राकृतिक आपदा आ जाए, दुबई में बैठा हुआ मेरा देशवासी चैन से सो नहीं सकता।

जब अटल बिहारी देश के प्रधानमंत्री थे, भारत ने न्यूक्लियर टेस्ट किया था, दुनिया चौंक गई थी, कुछ लोग गुस्से में आए थे और रातों-रात भारत पर sanction लगा दिए गए थे। भारत को आर्थिक मुसीबतों में धकेल दिया गया था.. और तब वाजपेयी जी ने विश्व भर में फैले हुए भारत वासियों को आह्वान किया था, देश की मदद करने के लिए। आज मैं गर्व से कह सकता हूं कि वाजपेयी जी के उस आह्वान पर, हिन्‍दुस्‍तान की तिजोरी भरने में Gulf Countries में जो मजदूरी का काम करते थे, उन मेरे भारतवासियों का सबसे बड़ा योगदान था। इस अर्थ में यहां बसा हुआ हर भारतवासी, एक प्रकार से हिन्‍दुस्‍तान के हर कोने से जुड़ा हुआ है। पिछली बार जब देश लोकसभा के चुनाव के लिए व्यस्त था, चुनाव नतीजे आ रहे थे, हिन्‍दुस्‍तान ही नहीं, पूरा दुबई नाच रहा था। ये प्यार भारत माता के कल्याण के लिए..मां भारती फिर से एक बार सामर्थ्यवान बने, सशक्त बने, सम्‍पन्‍न बने, समृद्ध बने, ये सपना संजोकर के दिन-रात एक करने वाले आप लोग मेरे सामने बैठे हैं।

भाइयों-बहनों, आज..यहां तो हिन्‍दुस्‍तान के हर कोने से आए हुए मेरे भाई-बहन बैठे हैं और दुबई, वो सिर्फ लघु भारत ही रहा है ऐसा नहीं है, अब तो दुबई एक लघु विश्व भी बन गया है। दुनिया के सभी देशों के लोग, कम अधिक मात्रा में दुबई में रह रहे हैं। ठंडे से ठंडे प्रदेश के लोग भी इस 40-45 डिग्री तापमान में रहना पसंद करते हैं। क्या ताकत दिखाई होगी इस देश ने, क्या magnetic power पैदा किया होगा विकास के माध्यम से कि पूरा विश्व यहां आकर्षित हो जाता है।

हिन्‍दुस्‍तान के हर कोने से आए हुए सभी देशवासियों ने अभी दो दिन पूर्व 15 अगस्त, भारत की आज़ादी का पर्व मनाया है। मैं भी आप सब को आज़ादी के पावन पर्व की अनेक-अनेक शुभकामनाएं देता हूं।

यहां केरल से आया हुआ भी समुदाय बहुत बड़ी मात्रा में है। मैं केरल का उल्लेख विशेष रूप से इसलिए कर रहा हूं क्योंकि आज केरल का नववर्ष है। सहोदरकअ एंटे रूदयम निरन्या नववलसरा आशम सफलअ। नमस्कारम्।



हर हफ्ते हिन्‍दुस्‍तान से 700 से भी ज्यादा फ्लाइट यहां आती हैं। दुनिया में किसी एक देश के साथ इतनी बड़ी मात्रा में हवाई आवागमन अगर कहीं है, तो इस इलाके से है। हर हफ्ते 700 से भी अधिक फ्लाइट आती हैं, लेकिन भारत के प्रधानमंत्री को यहां आने में 34 साल लग गए। कभी-कभी मुझे लगता है कि बहुत सारे ऐसे अच्छे अच्छे काम हैं, जो पूर्व के लोग मेरे लिए बाकी छोड़ करके चले गए हैं और इसलिए बहुत सारे बाकी रहे अच्छे काम करने का मुझे भाग्य मिला है। उन अच्छे कामों में से महत्वपूर्ण अच्छा काम मेरा अबुधाबी आना, मेरा दुबई आना है। जिस प्रकार से..ये मेरी पहली मुलाकात है। इसके पहले कभी मैं धरती के इस भू-भाग पर नहीं आया। ..और 34 साल में प्रधानमंत्री के रूप में कोई आएं, तो किसी को भी, किसी को भी नाराज़गी व्यक्त करने का हक बनता है। हक बनता है कि नहीं बनता है? बनता है कि नहीं बनता है? लेकिन अबुधाबी में His Highness Crown Prince ने, दुबई में His Highness अल मख्तूम जी ने नाराज़गी नहीं दिखाई, इतने प्यार की वर्षा की, इतने प्यार की वर्षा की, मैं उनके इस प्यार को कभी भूल नहीं पाउंगा। जो स्वागत किया, जो सम्मान किया.. His Highness Crown Prince अपने सभी पांचों भाइयों के साथ एयरपोर्ट पर लेने के लिए आए। मेरे प्यारे देशवासियों, ये प्यार, ये सम्मान किसी व्यक्ति को नहीं है। ये सवा सौ करोड़ देशवासियों का सम्मान है। ये भारत की बदली हुई तस्वीर का सम्मान है। भारत जिस प्रकार से दुनिया में अपनी जगह बना रहा है, उस बदले हुए हालात का सम्मान है। मैं His Highness Crown Prince का, अमीरात का, दुबई के Rulers का हृदयपूर्वक बहुत-बहुत आभार व्यक्त करता हूं।

एक तरफ संप्रदाय के नाम पर आतंकवाद के खेल खेले जाते हैं। निर्दोषों को मौत के घाट उतार दिया जाता है। पूर्णतया: चिंता का माहौल हो, ऐसे समय अबुधाबी के His Highness Crown Prince भारतीय समुदाय के लिए मंदिर बनाने के लिए जगह देने का निर्णय करते हैं। जो लोग अबुधाबी से परिचित हैं, उन्हें पता है कि निर्णय कितना बड़ा है, ये सौगात कितनी बड़ी है। आप मुझे बताइए, सभी देशवासियों को उनका विशेष रूप से अभिनंदन करना चाहिए कि नहीं करना चाहिए। मैं आप सभी से आग्रह करता हूं कि तालियों की गूंज से Crown Prince का अभिनंदन कीजिए। Crown Prince को Standing Ovation दीजिए। उनका अभिनंदन कीजिए। मैं हृदय से उनका अभिनंदन करता हूं।

भाइयों-बहनों, दो दिन की मेरी यात्रा में जिस प्रकार का विश्वास का माहौल बना, आखिरकार अंतर्राष्ट्रीय संबंधों का आधार..आपकी भाषा क्या है, आप कितने articulate हैं, आप diplomatic relation में कितने बढि़या ढंग से मेलजोल करते हैं..उससे भी ज्यादा महत्व होता है, एक दूसरे पर भरोसे का। अंतर्राष्ट्रीय संबंधों में ये भरोसा, ये विश्वास, एक बहुत बड़ी पूंजी होता है ..और आज मैं चंद घंटों की मेरी मुलाकात के बाद कह सकता हूं कि भारत, अबुधाबी, दुबई, अमीरात.. जो विश्वास का सेतू बना है, वो अभूतपूर्व है और आने वाली पीढि़यों तक काम आए, ऐसा foundation तैयार हुआ है।

आज मुझे खुशी हुई कि जब आज भारत और अमीरात के बीच जो Joint Statement आया है, आपको भी खुशी होगी जान करके.. Crown Prince ने हिन्‍दुस्‍तान में साढ़े चार लाख करोड़ रूपए का निवेश करने का संकल्प दोहराया है। साढ़े चार लाख करोड़ रूपया! कितना? कितना? कितना? भाइयों-बहनों, अगर आप पर किसी का भरोसा न हो, तो कोई 10 रूपया भी आप पर लगाने के लिए तैयार होगा क्या? ये भारत की साख बनी है। आज भारत का बदला हुआ रूप विश्‍व के सामने अपनी स्वीकृति बनाता आगे चल रहा है।

आज अमीरात और भारत की तरफ से आतंकवाद के खिलाफ, दो टूक शब्दों में, बिना लाग लपेट और किसी की परवाह किए बिना साफ-साफ शब्‍दों में संकेत दे दिए गए हैं। आतंकवाद के खिलाफ एकता का स्वर आज इस धरती से उठा है। मैं इसे बहुत अहम मानता हूं और इतना ही नहीं..समझने वाले समझ जाएंगे, अक्लमंद को इशारा काफी। आतंकवाद में लिप्त लोगों को सजा होनी चाहिए, ये स्पष्ट शब्दों में संकेत यहां से निकला है। मैं आज यहां के शासकों का इसलिए भी आभारी हूं कि उन्होंने..United Nations जब अपने 70 साल मनाने जा रहा है, तो यहां से कहा गया है और भारत की इस बात का खुला समर्थन किया गया है कि भारत को United Nations की Security Council की Permanent Membership मिलनी चाहिए। मैं आभारी हूं उनका।

इससे भी आगे एक बहुत-बहुत महत्वपूर्ण बात पर..आज भारत की लंबे अर्से से एक position है। उसका आज His Highness Crown Prince ने खुले आम समर्थन घोषित किया। भाइयों-बहनों, कई वर्षों से United Nations में एक Resolution लटका पड़ा है। आपको भी बड़ी हैरानी होगी..और दो-पांच साल से नहीं, कई वर्षों से लटका पड़ा है। क्या.. ? United Nations, जो कि प्रथम और द्वितीय विश्वयुद्ध से पीडि़त मानव समुदाय को मरहम लगाने के लिए..आगे मानव जाति को ऐसे संकट झेलने की नौबत न आए, इसके लिए precaution लेने के लिए, व्यवस्थाएं विकसित करने के लिए 70 साल पहले United Nations का जन्म हुआ। लेकिन वह United Nations आतंकवाद की अभी तक परिभाषा नहीं कर पाया। आतंकवादी किसको कहें, आतंकवाद किसको कहें, आतंकवाद को समर्थन करने वाले कौन माना जाए, किस देश को आतंकवाद का समर्थक माना जाएं, किस देश को समर्थक न माना जाए। इसलिए Comprehensive Convention on International Terrorism..इसका निर्णय करने का प्रस्ताव लंबे अर्से से United Nations में लंबित पड़ा हुआ है। भारत ने position ली हैं सालों से किए एक प्रस्ताव पर चर्चा हो जाए, निर्णय होना चाहिए और ये टाला जा रहा है। आज मुझे खुशी इस बात की है कि His Highness Crown Prince ने भारत की स्थिति का समर्थन का किया है, भारत की position का समर्थन किया है और आतंकवाद के खिलाफ लड़ने के संबंध में आपने स्पष्ट संकेत दे दिए हैं। न सिर्फ.. साढ़े चार लाख करोड़ का पूंजी निवेश की बात नहीं है ये। ये एक निश्चित दिशा में कंधे से कंधा मिलाकर चलने का एक प्रकार का संकेत, इस Joint Statement में है। मैं इसे बहुत महत्वपूर्ण मानता हूं।

भाइयों-बहनों आप तो सालों से बाहर हैं। आज भारत का नाम सुनते ही आपके सामने खड़े हुए व्यक्ति की आंखों में चमक आती है कि नहीं आती है? आपका माथा गर्व से ऊंचा होता है कि नहीं होता है, आपका सीना गर्व से तन जाता है कि नहीं तन जाता है? एक गर्व महसूस करते हैं कि नहीं करते हैं? भाइयों बहनों आज दुनिया का हिन्‍दुस्‍तान की तरफ देखने का नज़रिया पूरी तरह बदल गया है और उसका एक कारण..क्या कारण है?.. क्या कारण है, ये बदलाव आया है? मोदी के कारण नहीं, ये जो बदलाव आया है, सवा सौ करोड़ देशवासियों की संकल्प शक्ति के कारण आया है। सवा सौ करोड़ देशवासियों ने 2014 मई महीने में 30 साल के बाद पूर्ण बहुमत वाली सरकार चुनी। आज दुनिया का कोई भी महापुरूष, दुनिया का कोई भी राजनेता मोदी से जब हाथ मिलाता है न, तब उसे मोदी नहीं दिखता है। उसे सवा सौ करोड़ हिंदुस्तानी दिखाई देते हैं। दुनिया की तेज़ गति से बढ़ रही economy दिखाई दे रही है।

भाइयों-बहनों, पिछले दिनों, IMF हो, World Bank हो, Moody हो, विश्व की जितनी भी आर्थिक पैमाने पर Rating Institutions हैं, सब किसी ने एक स्वर से कहा है कि आज दुनिया में बड़े देशों में सबसे तेज गति से अगर आर्थिक सुधार हो रहा है, तेज गति से growth हो रहा है तो उस देश का नाम है.. (दर्शक दीर्घा से भारत-भारत के नारे). मुझे बताइए सीना तन जाएगा कि नहीं तन जाएगा? माथा ऊंचा हो जाएगा कि नहीं होगा कि नहीं होगा। एक साल के भीतर-भीतर ये बदलाव आया है। भाइयों बहनों, हमने मेक इन इंडिया.. कुछ महीने पहले इस अभियान का प्रारंभ किया। दुनिया को मैं कह रहा हूं- मेक इन इंडिया। आइए, हिन्‍दुस्‍तान एक ऐसा देश है जो संभावनाओं से भरा हुआ है, Opportunities ही Opportunities हैं। ये एक ऐसा भाग्‍यशाली देश है, जिसके पास 65 प्रतिशत जनसंख्या 35 साल से कम उम्र की है। भारत एक नौजवान देश है। आज यहां जवानी लबालब भरी पड़ी है और विश्व वहां आए, हमारे युवकों की शक्ति जुटाए, उत्पादन करे, दुनिया के बाज़ार में जाकर बेचे। और आज..ये कुछ ही महीनों का मामला है.. Foreign Direct Investment..FDI में 48 प्रतिशत वृद्धि हुई है, 48%। भाइयों-बहनों विकास को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए Ease of doing Business का माध्‍यम हो। देश की युवा शक्‍ति में Skill Development का अभियान हो। आधुनिक भारत के निर्माण के लिए डिजिटल इंडिया का सपना साकार करने के लिए दिन-रात पुरुषार्थ चलता हो। तो विश्‍व का आना बहुत स्‍वाभाविक है मेरे भाइयों और बहनों, बहुत स्‍वाभाविक है।

भाइयों-बहनों, आज दुनिया जिस आतंकवाद के नाम सुनते ही कांप उठती हैं, एक नफरत पैदा होती है। मैं दुनिया को कहता हूं हम हिन्‍दुस्‍तान के लोग 40-40 साल से ये आतंकवाद के शिकार हुए हैं। हमारे निर्दोष लोग आतंकवादियों की गोलियों से भून दिए गए हैं, मौत के घाट उतार दिए गए हैं और जब कभी मैं विश्‍व के लोगों के साथ आज से 25-30 साल पहले कभी मुझे बात करने का अवसर मिलता था, तो वे आतंकवाद समझने की उनकी क्षमता ही नहीं थी। कभी मैं आतंकवाद की बात करता था तो वे मुझे कहते थे ये तो आपका Policing का problem है Law and Order का problem है। अब उनको समझ आ गया है कि आतंकवाद का कितना भयंकर रूप होता है। आतंकवाद की कोई सीमाएं नहीं होती है, वो पता नहीं कब किस सीमा पर जाकर आ धमकेगा। आज अभी मैं यहां पहुंच रहा था, मैंने सुना बैंकॉक के अंदर आज एक बम धमाका हुआ, निर्दोष लोगों को मार दिया गया। भारत तो लगातार इन हरकतों को झेलता रहा है और विश्‍व समुदाय जब तक आतंकवाद की मानसिकता वाले देशों को, आतंकवाद को, उसको समर्थन करने वालों को एक ओर, और मानवता में विश्‍वास करने वाले दूसरी ओर, और मानवतावाद में विश्‍वास करने वाले दुनिया के देश एक होकर के आतंकवाद के खिलाफ लड़ने का वक्‍त आ चुका है।

Good Taliban-Bad Taliban, Good Terrorism- Bad Terrorism ये अब चलने वाला नहीं है। हर किसी को तय करना पड़ेगा कि फैसला करो कि आप आतंकवाद के साथ हो या मानवता के साथ हो, निर्णय करो। भारत को तो आज भी आए दिन इन नापाक हरकतों का शिकार होना पड़ता है। हम समस्‍याओं का समाधान खोजने की दिशा में लगातार कोशिश कर रहे हैं। यहां बहुत कम लोगों को पता होगा कि भारत की आजादी के पहले से नागालैंड में अतिवाद, insurgency इस समस्‍या से नागालैंड जूझता रहा और उसके कारण भारत का पूरा ये पूर्वी हिस्‍सा, नॉर्थ-ईस्‍ट, आए दिन हिंसा का शिकार होता था और धीरे-धीरे वो बीमारी इतनी फैलती गई कि अन्‍य राज्‍यों में भी अलग-अलग नाम से, अलग-अलग अतिवादी, आतंकवादी गुट बनते चले गए। आजादी के भी पहले से चल रहा था।

आज मैं बहुत संतोष के साथ मेरे देशवासियों, आपको कहना चाहता हूं कि अभी एक महीने पहले नागालैंड के इन गुटों के साथ, जो कभी हिंसा में विश्‍वास करते थे, जो शस्‍त्रों को लेकर के गतिविधि चलाते थे। उनसे जो बातचीत चल रही थी, वो सफलतापूर्वक आगे बढ़ी, निर्णय हुआ, मुख्‍य धारा में आने का निर्णय हुआ। 60-70 साल के बाद ये संभव हुआ। मैं नागालैंड की ये घटना का जिक्र इसलिए करना चाहता हूं कि हिंसा के राह पर चले हुए भारत के नौजवानों को और विश्‍व के नौजवानों को मैं एक उदाहरण के रूप में कहना चाहता हूं, समस्‍या कितनी भी गंभीर क्‍यों न हो, आखिर तो बातचीत से ही रास्‍ता निकलता है। कोई 10 साल लड़ाई लड़ने के बाद बात करें, कोई 20 साल लड़ाई लड़ने के बाद करें, कोई 40 साल लड़ाई लड़ने के बाद बात करें, लेकिन आखिर में तो बात ही होती है और टेबल पर ही फैसले होते हैं और इसलिए विश्‍व भर से इस गलत रास्‍ते पर चल पड़ लोग बम-बंदूक के भरोसे, अपने सपनों को साकार करने के रास्‍ते पर चले हुए लोग। ये रास्‍ता कभी आपका भला नहीं करेगा। ये रास्‍ता कभी किसी और का भला नहीं करेगा। ये रास्‍ता कभी मानवता का भला नहीं करेगा। ये रास्‍ता इतिहास को बेदाग नहीं रहने देगा। ये पूरे इतिहास को कलंकित कर देगा, ये पूरे इतिहास को दागदार बना देगा और इसलिए हिंसा का मार्ग छोड़कर के मुख्‍यधारा में जाना, ये आज समय की मांग है।

मेरे प्‍यारे भाइयों-बहनों, बांग्‍लादेश 1947 में भारत का विभाजन हुआ, 1947 में। तब से पूर्व पाकिस्‍तान, पश्‍चिम पाकिस्‍तान थे उस समय। पूर्वी पाकिस्‍तान जो आज बांग्‍लादेश बना, भारत और उनके बीच सीमा का विवाद चल रहा था। तनाव का कारण बना हुआ था। आशंकाओं का कारण बना हुआ था। घुसपैठ के लिए एक सुविधाजनक स्‍थिति बनी हुई थी। आप सब के आशीर्वाद से हिन्‍दुस्‍तान ने बीड़ा उठाया, सबने मिलकर के बीड़ा उठाया। इस समस्‍या का समाधान करना है, बातचीत से करना है। मैं पिछले सितंबर में बांग्‍लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना जी से मिला था और मैंने उनको वादा किया था कि मुझ पर भरोसा कीजिए और मुझे थोड़ा समय दीजिए। उन्‍होंने कहा कि मेरे पास भरोसा रखने के सिवाए है भी क्‍या! लेकिन आज, आज मैं मेरे प्‍यारे देशवासियों आपके सामने सर झुकाकर के कहना चाहता हूं कि आजादी से लटका हुआ ये सवाल 1 अगस्‍त को समाप्‍त कर दिया गया है। सीमा निर्धारित हो गई। जिनको बांग्‍लादेश जाना था, बांग्‍लादेश चले गए, जिनको भारत आना था भारत आ गए। हम लोग तो 15 अगस्‍त, 1947 को आजाद हो गए थे। भारत के नागरिक के नाते गौरवगान करने लगे थे। लेकिन ये हमारे भाई-बहन अभी 1 अगस्‍त, 2015 को भारत की भूमि पर आजादी का स्‍वाद लेने का उन्‍हें सौभाग्‍यमान मिला है। भारत की संसद में सर्वसम्‍मति से सभी राजनैतिक दलों ने साथ दिया और सर्वसम्‍मति से फैसला हुआ, बातचीत के माध्‍यम से फैसला हुआ।

ये छोटी-मोटी उपलब्‍धि नहीं है मेरे भाइयों-बहनों। और मैं, औरों को भी हमेशा कहता हूं, अड़ोस-पड़ोस के देशों को भी कहता रहता हूं। जैसे हिंसा के रास्‍ते पर गए हुए लोगों को भी कभी न कभार बातचीत के रास्‍ते पर आना पड़ता है। वैसे अड़ोस-पड़ोस में भी समस्‍याओं का समाधान बातचीत से ही निकलता है।

अंतर्राष्‍ट्रीय संबंधों में आज भारत एक महत्‍वपूर्ण भूमिका अदा कर रहा है। मानवता के अधिष्‍ठान पर कर रहा है। जब नेपाल में भूकंप आया चंद घंटों में, ऐसा नहीं है कि भई ज़रा पूछो तो क्‍या हुआ है? जरा जानकारी लो क्‍या हुआ है? ऐसा करो अफसरों का delegation भेजो, देखो ज़रा क्‍या मुसीबत आई है? ऐसा करो भई कोई अपने रिश्‍तेदार वहां हो तो पूछो भई हुआ क्‍या है? ऐसा इंतजार नहीं किया? आज दिल्‍ली में ऐसी सरकार है, जो हर पल नज़र आती है, हर जगह पर नज़र आती है और चंद घंटों में, चंद घंटों में, भारत से जो भी हो सकता था, ये मानवता का काम था। नेपाल के चरणों में जाकर के हमारे लोग बैठ गए और उनकी सेवा में लग गए और आज भी सेवा चालू है। नेपाल हमारा पड़ोसी है। वो दुखी हो और हम सुखी हों, ये कभी संभव नहीं होता है। उसके सुख में भी हमारा सुख समा हुआ है।

श्रीलंका, आपको हैरानी होगी। जब मैं नेपाल गया, प्रधानमंत्री बनने के बाद। नेपाल जाना है, तो 70 मिनट नहीं लगते। दिल्‍ली से नेपाल जाना हो, तो 70 मिनट नहीं लगते। लेकिन भारत के प्रधानमंत्री को नेपाल पहुंचने में 17 साल लग गए। फिर से हम गए, संबंधों को फिर से जोड़ा। अपनापन। आज नेपाल भारत पर भरोसा कर रहा है। भारत नेपाल का सुख-दु:ख का साथी बन रहा है। श्रीलंका, राजीव गांधी जब प्रधानमंत्री थे, उसके बाद कोई प्रधानमंत्री की stand alone visit नहीं हुई थी। कितने साल बीत गए। हमारा पड़ोसी है, आए दिन हमारे तमिलनाडु, केरल के मछुआरे और उनके मछुआरे आपस में भिड़ जाते हैं। लेकिन उधर कोई जाता नहीं था। हम गए, इतना ही नहीं। जाफना जहां 20-20 साल तक बम और बंदूक का ही कारोबार चलता था, उस जाफना में जाकर के उन दुखियारों के आंसू पोंछने का काम करने का सौभाग्‍य मुझे मिला। एक प्रधानमंत्री के रूप में जाफना जाने का सौभाग्‍य मुझे मिला।

हमारे पड़ोस में मालदीव, आइलैंड पर बसा हुआ देश, tourism की दृष्‍टि से काफी आगे बढ़ा है। अचानक एक दिन उनके यहां पानी के सारे संयंत्र खराब हो गए। पूरे देश के पास पीने का पानी नहीं था। आप कल्‍पना कर सकते हो, कोई देश के पास पीने का पानी न हो। कितना बड़ा गहरा संकट आया। मालदीव से हमें message आया कि ऐसी मुसीबत आई है। एक पल का इंतज़ार नहीं किया, भाइयों और बहनों। हवाई जहाज से पीने का पानी पहुंचाया मालदीव में। दूसरे दिन स्‍टीमर से पानी पहुंचाना शुरू कर दिया और जब तक उनकी वो मशीन चालू नहीं हुई, पानी की व्‍यवस्‍था दुबारा पुनर्जीवित नहीं हुई, हमने मालदीव को प्‍यासा नहीं रहने दिया।

अफगानिस्‍तान हमारा पड़ोसी है। अफगानिस्‍तान संकटों से गुजर रहा है। लंबे अरसे से आए दिन वो घाव झेलता चला जा रहा है। हर पल अफगानिस्‍तान को मरहम लगाने का काम हिन्‍दुस्‍तान करता आया है। अफगानिस्‍तान फिर से एक बार खड़ा हो जाए, क्‍योंकि हम सब बचपन से काबुलीवाला से तो बहुत परिचित हैं। जब काबुली वाले की बात करते हैं, तो हमें कितना अपनापन महसूस होता है। भाइयों-बहनों हमारी कोशिश रही है भारत को विकास की नई ऊचाइयों पर ले जाना। भारत में निरंतर विकास को आगे बढ़ाना और अपने अड़ोस-पड़ोस के देशों से दोस्‍ती बनाकर करके साथ और सहयोग लेकर करके आगे चल पड़ना।

SAARC देशों का समूह उसमें एक नया प्राण पूरने का प्रयास किया है, सफलतापूर्वक प्रयास किया है। वरना पहले SAARC देशों के मंच का उपयोग तू-तू मैं मैं के लिए होता था, कभी भारत को घेरने के लिए होता था। आज SAARC देशों के लोग, जितने साथ चल सकते हैं, उनको ले करके इन SAARC की इकाई का विकास की ऊंचाइयों पर ले जाने का सपना हमने देखा था। हमने घोषित किया है कि 2016 में हम आकाश में एक SAARC Satellite छोड़ेंगे जिसकी सेवाएं SAARC देशों में मुफ्त में देंगे, जो शिक्षा के काम आए , जो आरोग्‍य के लिए काम आये, जो किसानों को काम आये, जो मछुआरों के काम आये, सामान्‍य जन को काम आये। अभी हम बीच में सोच रहे थे कि SAARC देश Connectivity के लिए गंभीरता से सोचे और हम जानते हैं, आज विकास में Connectivity का महत्‍व बहुत है। आप समुद्री मार्ग से जुडि़ए या रेल मार्ग से जुडि़ए, या रोड मार्ग से जुडि़ए, जुड़ना जरूरी है। यूरोप के देशों को ये लाभ मिला हुआ है। एक देश से दूसरे देश चले जाओ पता तक नहीं चलता कि देश कब बदल गया। क्‍या ये SAARC देशों के बीच नहीं हो सकता है? हमने मिल करके सामूहिक निर्णय करने का प्रयास किया नेपाल में। लेकिन आप जानते हैं, कुछ लोगों को जरा तकलीफ होती है, लेकिन कुछ लोगों की तकलीफ के लिए क्‍या रुकना चाहिए? हमारे काम को क्‍या हमें रोक देना चाहिए? हमें अटक जाना चाहिए क्‍या? ठीक है आपकी मर्जी, आप वहां रह जाइये, हम तो चल पड़े भाई और हमने क्‍या किया। एक बहुत बड़ा अहम फैसला लिया है भाइयों और बहनों, इसका प्रभाव आने वाले दिनों में क्‍या होने वाला है, वो तो वक्‍त बताएगा। नेपाल, भूटान, भारत, बांग्‍लादेश, इन चार देशों ने एक नया इन्‍फ्रास्‍ट्रक्‍चर बना करके Connectivity का एक पूरा काम तय कर लिया, Agreement हो गया, ये आगे चल करके नॉर्थ-ईस्‍ट से जुड़ेगा। वहां से ये म्‍यांमार मार्ग से जुड़ेगा। वो इंडोनेशिया, थाइलैंड, पूरब, हिन्‍दुस्‍तान, पूरब की बीच की तरफ भारत को Connectivity की ताकत देगा एक नया भारत का बदला हुआ, संबंधों का नया विश्‍व खड़ा हो जाएगा।

भाइयों-बहनों, एक निश्चत समय के साथ भारत अपनी भूमिका भी अदा करें, भारत बड़े होने के अहंकार से नहीं, हर किसी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलना चाहता । विकास की नई ऊंचाईयों को पार करना चाहता। भारत में नौजवानों को रोजगार मिले, हमारे कृषि में Second Green Revolution हो, हमारा पूर्वी हिन्‍दुस्‍तान, चाहे पूर्वी उत्‍तर प्रदेश हो, चाहे बिहार हो, चाहे पश्चिम बंगाल हो, चाहे असम हो, चाहे नॉर्थ-ईस्‍ट हो, चाहे ओडि़शा हो, ये हमारा जो इलाका है, ये मानना पड़ेगा कि वहां विकास की ज्‍यादा जरूरत है। अगर वहां पर विकास हो गया और हिन्‍दुस्‍तान का पश्चिमी छोर और पूरब का छोर बराबर हो गये, तो भारत बहुत तेज गति से दौड़ने लग जाएगा और इसलिए भारत के इस पूर्वी छोर पर आर्थिक विकास का एक नया अभियान हमने चलाया है। Infrastructure खड़ा करने का एक नया अभियान चलाया है। Fertiliser के नये कारखाने शुरू कर रहे हैं। गैस की पाइप लाइन लगानी है। बिजली पहुंचानी है। आप मुझे बताइए आजादी के इतने सालों के बाद बिजली होनी चाहिए कि नहीं होनी चाहिए? बिजली मिलनी चाहिए या नहीं मिलनी चाहिए? क्‍या आज के युग में बिजली के बिना गुजारा संभव है? भाइयों-बहनों हमने सपना संजोया है। पांच साल के भीतर-भीतर हम देश के कोने-कोने में 24 घंटे बिजली मैंने देने के लिए फैसला किया। ये हम करके रहेंगे।

दुबई में रहने वाले मेरे प्‍यारे भाइयो-बहनों, हमने एक महत्‍वपूर्ण योजना घोषित की है । हमारे देश में लोगों को पहले Bank Accounts नहीं थे, हमने हर हिन्‍दुस्‍तानी का Bank Account खोल दिया, एक काम किया। भारत में हमारे देश के नागरिकों को इंश्‍योरंस नहीं है, बीमा नहीं है। उसके परिवार में कोई आपत्ति आ जाए, पीछे वालों को देखने की कोई व्‍यवस्‍था नहीं। हमने तीन योजनाएं लगाई हैं, एक प्रधानमंत्री बीमा सुरक्षा योजना, प्रधानमंत्री जीवन ज्‍योति योजना और इंश्‍योरेंस के लिए कितना पैसा देना है? एक स्‍कीम ऐसी है कि जिसमें एक महीने में सिर्फ एक रुपया देना है, 12 महीने में 12 रुपया। हमारे देश का गरीब से गरीब व्‍यक्ति भी दे सकता है या नहीं दे सकता है? मुझे बताइए दे सकता है या नहीं दे सकता है? गरीब से गरीब व्‍यक्ति एक रुपया महीने में दे सकता है या नहीं दे सकता है? महीने का 12 रुपया,.. साल भर का 12 रुपया, साल भर का 12 रुपया देगा, दो लाख रुपयों का सुरक्षा का बीमा मिलेगा। दूसरी योजना है जिसमें उसे और भी मददें मिलेंगी, वो है एक दिन का नब्‍बे पैसा, एक रुपया भी नहीं, एक दिन का एक रुपया भी नहीं, आज तो चाय भी एक रुपये में मिलती नहीं है। मैं जब चाय बेचता था तो एक रुपया भी नहीं मिलता था। लेकिन आज एक रुपये में चाय नहीं मिलती है। एक दिन का नब्‍बे पैसा, साल भर के 330 रुपये, और उसे भी ये सुरक्षा कवच मिलेगा। Natural मृत्‍यु होगा Natural अकस्‍मात नहीं हुआ है, सहज, तो भी उसके परिवार को दो लाख रुपया मिलेगा। हमने लोगों से आग्रह किया है कि रक्षाबन्‍धन के पर्व पर हमारे देश की परम्‍परा है, हम अपनी बहनों को Best सौगात देते हैं। कोई न कोई Gift देते हैं। मैं मेरे, Gulf Countries में रहने वाले मेरे प्‍यारे भाइयों बहनों का आग्रह करता हूं, इस बार रखी के त्‍यौहार पर आप अपनी बहन को ये जीवन सुरक्षा योजना दे दीजिए। अगर आप 600 रुपया बैंक में Fixed Deposit करा दोगे, तो हर साल उसको 12 रुपये से ज्‍यादा Interest मिलेगा, कटता जाएगा और आपकी बहन को दो लाख रुपये का सुरक्षा का कवच मिल जाएगा, और दोनों योजना लें लेगे, उतने पैसे जमा करा दिये, तो चार लाख रुपया उसके चरणों में आपकी तरफ से पहुंच जाएगा। भाइयो-बहनों, हमनें समाज-जीवन को एक सुरक्षित बनाना है, हमारी नई पीढ़ी को शिक्षित बनाना है, देश को आधुनिक बनाना है, और आज जब विश्‍व का भारत की तरफ आकर्षण बढ़ा है, उस परि‍स्थिति का हमने लाभ उठाना है और देश को विकास की नई ऊंचाइयों पर ले जाना है।

मेरे प्‍यारे भाइयो, बहनों, आपने जो मुझे सम्‍मान दिया, प्‍यार दिया, पूरा हिन्‍दुस्‍तान आपको देख रहा होगा। ये बदले हुए माहौल का असर हर भारतवासी के दिल पर भी होता है। और मुझे लगता है कि विश्‍व भर में जो हमारा भारतीय समुदाय पहुंचा है, उस भारतीय समुदाय को भी आज एक नई ऊर्जा, नई शक्ति मिली है। आज जब मैं अबुधाबी आया, दुबई आया, तो कुछ बातें मेरे ध्‍यान में आई हैं, उसके विषय में भी आज आपको मैं कह करके जाना चाहता हूं, Embassy के संबंध में, Counsel के संबंध में, आपकी शिकायतें रहती हैं, नहीं रहती हैं? नहीं रहती हैं तो अच्‍छी बात है। लेकिन अगर रहती हैं तो भारत सरकार ने ‘MADAD’ नाम का एक Online Platform बनाया है, इस ‘MADAD’ नाम के Online Platform का उपयोग दुनिया भर में फैले हुए हमारे भारतीय भाई, बहन उसका उपयोग कर सकते हैं, ताकि आपकी बात आगे पहुंच सकती है। मोबाइल फोन के द्वारा भी आप उनका सम्‍पर्क कर सकते हैं। एक, दूसरा काम किया है, E-migrate portal शुरू किया गया है। जिसके द्वारा इस प्रकार सके हमारे प्रवासी भारतीयों को कोई शिकायत हो, कोई कठिनाई हो, तो उनको Emigration Office के चक्‍कर काटने नहीं पड़ेंगे ये E-migrate portal पर अपनी बात रख करके वो मदद ले सकता है, इसकी एक व्‍यवस्‍था की गई है, क्‍यों यहां दूर-दूर से आपका वहां जाना, बहुत तकलीफ होती है। मुझे ये भी बताया गया कि कही- कहीं पर E-migrate Portal का उपयेाग करने में नागरिकों को दिक्‍कत होती है इसके लिए मैंने हमारे Embassy को आदेश किया है कि वे ये जो Technical Problem है इसका 30 दिन के भीतर-भीतर Solution दें। आज 17 अगस्‍त है, 17 सितम्‍बर तक Solution दें, ऐसा मैंने उनसे कहा है और मुझे विश्‍वास है कि हमारे Embassy के भाई, ये जो Technical Problem कहीं-कहीं आता है, उसका रास्‍ता निकालेंगे।

एक और काम मैंने कहा है, यहां भारतीय समुदाय ज्‍यादातर workers हैं। उनके पास इतने पैसे नहीं कि एक जगह से दूसरी जगह पर वो भागते रहें और इसलिए हमने कहा है, कि हम समय-समय पर जहां हमारे भारतीय भाई समुदाय रहते हैं, वहां जा करके, Counselor Camp लगाएं। महीने में एक बार, दो महीने में एक बार, और वहीं जा करके उनसे बैठें, बातचीत करें, और उनकी समस्‍या के समाधान के लिए योग्‍य व्‍यवस्‍था करें। मैं यहां ये बातें इसलिए कह रहा हूं कि ये भू-भाग ऐसा है, के जहां मेरे गरीब तबके के भाई-बहन रहते हैं, मजदूरी करने के लिए यहां आए हुए हैं। अमेरिका के लिए कुछ कर पाऊं, या न कर पाऊं लेकिन अगर आपके लिए नहीं कुछ करता तो मैं बेचैन हो जाता हूं। और इसलिए हमने एक और काम किया है, इन दिनों विदेशों में कभी-कभी जाते हैं तो हमारे भारतीय भाई कभी-कभी संकट में जैसे अचानक बीमारी आ गई, कुछ हो गया, कभी कोई कानूनी पचड़े में फंस गए, बेचारे जेल चले गए। तो दुनिया के बाहर कौन उनको देखने वाला है? परिवार तो है नहीं, और इन हमारे कभी-कभी मुसीबत में कोई परिवार आ जाए तो उनकी मदद करने के लिए Indian Community Welfare Fund (ICWF) स्‍थापित किया गया है। सब दूतावासों को ये Welfare Fund दिया गया है, और इसलिए ऐसी मुसीबत में कोई फंस गया हो तो उनको कानून की मर्यादा में रह करके जो मदद हो सकती है, कोई अगर जेल में बंद हुआ है, तो कम से कम उसको खाना-पीना मिल जाए मानवता की दृष्‍टि से कोई व्‍यवस्‍था हो जाए, इन सारे कामों के लिए एक Fund की हमने व्‍यवस्‍था की है। हमने ये भी निर्णय किया है, इस Fund के द्वारा दूतावास, Counsel में Counselor सुविधाएं और अच्‍छी कैसे बनें, जो नागरिकों की भलाई के लिए हों, उनके लिए भी इसका उपयोग किया जाएगा। जिनको कानूनी सलाह की जरूरत पड़ेगी और अगर वो खुद इसको करने के लिए स्थिति नहीं है, कभी-कभार तो एक हजार-दो हजार का दंड बेचारा नहीं भर पाता, उसके कारण जेलों में सड़ता रहता है। ऐसे लोगों को मदद करके, भारतीय नागरिक होने के नाते उनको मदद करना इसके लिए Welfare Fund का उपयोग हो, ताकि वो संकटों से बाहर आ सकें, ये भी हमने व्‍यवस्‍था करने के लिए कहा है। मैं जानता हूं यहां पर स्‍कूलों में Admission में कितनी दिक्‍कत होती है, आपके बच्‍चों को स्‍कूलों में पढ़ाई की कितनी दिक्‍कत होती है? मैंने यहां के संबंधित लोगों से ये बात कही है और मैंने कहा है कि अधिक स्‍कूल कैसे बनें, उसकी चिन्‍ता मैंने की है, देखते हैं, मुझे विश्‍वास है कि आने वाले दिनों में उसका भी लाभ आप लोगों को मिलेगा।

मुझे विश्‍वास है मेरे भाइयो, बहनों, कि जो आपकी छोटी-मोटी बातें मेरे ध्‍यान में आई थीं, इसको पूरा करने का मैंने प्रयास किया है। मैं फिर एक बार आप सबको दृदय से बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं और दुनिया में कहीं पर भी मेरा भारतवासी है, तो हम पासपोर्ट का रंग नहीं देखते हैं। हमारा खून का रंग काफी है, वो धरती का नाता काफी है, और इसलिए आइए मेरे साथियो हम सब मिल करके जहां भी हों, मां भारती का माथा ऊंचा करने के लिए, गौरव से जीवन जीने के लिए एक माहौल बनाने में सक्रिय शरीक हों और आपका योगदान आपकी शक्ति सामर्थ्‍यवान आपके परिवार को भी भला करने में काम आए, देश का भी भला करने के लिए काम आए।

इसी शुभ कामनाओं के साथ आप सबका बहुत-बहुत धन्‍यवाद।

मेरे साथ दोनों मुट्ठी बंद करके बोलिए, भारत माता की जय। दोनों मुट्ठी पूरी बंद करके पूरी ताकत से बोलिए, भारत के कोने-कोने में, आपके अपने गांव में आवाज पहुंचनी चाहिए भारत माता की जय, भारत माता की जय, भारत माता की जय, भारत माता की जय।

बहुत-बहुत धन्‍यवाद।

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There is scale, security and democratic values in our digital solutions: PM Modi
July 04, 2022
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The theme for Digital India Week 2022: Catalyzing New India’s Techade
PM launches ‘Digital India Bhashini’, ‘Digital India GENESIS’ and ‘Indiastack.global’; also dedicates ‘MyScheme’ and ‘Meri Pehchaan’
PM announces the first cohort of 30 Institutions to be supported under Chips to Startup Programme
“India is guiding the world in the fourth industrial revolution, Industry 4.0”
“India has removed so many lines by getting online”
“Digital India has brought the government to the doorsteps and phones of the citizens”
“India’s FinTech endeavour is truly a solution by the people, of the people and for the people”
“There is scale, security and democratic values in our digital solutions”
“India is working on the target of taking electronics manufacturing to more than $ 300 billion in the next three-four years”
“India wants to become a chip maker from a chip taker.”

नमस्ते, गुजरात के मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्र भाई पटेल जी, केंद्रीय मंत्री परिषद के मेरे सहयोगी श्री अश्विनी वैष्णव जी, श्री राजीव चंद्रशेखर जी, अलग-अलग राज्यों से जुड़े सभी प्रतिनिधि, डिजिटल इंडिया के सभी लाभार्थी, स्टार्ट अप्स और इंडस्ट्री से जुड़े सभी साथी, एक्सपर्ट्स, अकदमीशियनस, researchers, देवियों और सज्जनों!

आज का ये कार्यक्रम, 21वीं सदी में निरंतर आधुनिक होते भारत की एक झलक लेकर आया है। टेक्नोलॉजी का सही इस्तेमाल पूरी मानवता के लिए कितना क्रांतिकारी है, इसका उदाहरण भारत ने डिजिटल इंडिया अभियान के तौर पर पूरे विश्व के सामने रखा है।

मुझे खुशी है कि आठ वर्ष पहले शुरू हुआ ये अभियान, बदलते हुए समय के साथ खुद को विस्तार देता रहा है। हर साल डिजिटल इंडिया अभियान में नए आयाम जुड़े हैं, नई टेक्नोलॉजी का समावेश हुआ है। आज के इस कार्यक्रम में जो नए प्लेटफॉर्म, नए प्रोग्राम लॉन्च हुए हैं, वो इसी श्रंखला को आगे बढ़ा रहे हैं। अभी आपने छोटे-छोटे वीडियो में देखा, myScheme हो, भाषिणी-भाषादान हो, Digital India - जेनीसिस हो, Chips to startup program हो, या बाकी सारे प्रॉडक्ट्स, ये सारे Ease of living और Ease of doing business को मजबूती देने वाले हैं। विशेषतौर पर इनका बड़ा लाभ भारत के स्टार्ट अप इकोसिस्टम को होगा।

साथियों,

समय के साथ जो देश आधुनिक टेक्नोलॉजी को नहीं अपनाता, समय उसे पीछे छोड़कर आगे निकल जाता है और वो वहीं का वहीं रह जाता है। तीसरी औद्योगिक क्रांति के समय भारत इसका भुक्तभोगी रहा है। लेकिन आज हम ये गर्व से कह सकते हैं कि भारत चौथी औदयोगिक क्रांति, इंडस्ट्री 4.0, आज भारत गर्व से कह सकता है कि हिन्‍दुस्‍तान दुनिया को दिशा दे रहा है। और मुझे इस बात की दोहरी खुशी है कि गुजरात ने इसमें भी एक तरह से पथ-प्रदर्शक की भूमिका निभाई है।

थोड़ी देर पहले यहां डिजिटल गवर्नेंस को लेकर गुजरात के बीते 2 दशकों के अनुभवों को दिखाया गया है। गुजरात देश का पहला राज्य था जहां Gujarat State Data Centre (GSDC), Gujarat Statewide Area Network (GSWAN), e-Gram centers, और ATVT / Jan Seva Kendra जैसे pillars खड़े किए गए।

सुरत, बारडोली के पास जब सुभाष बाबु कोंग्रेस के अध्यक्ष बने थे, वहां सुभाष बाबु कि याद में कार्यक्रम किया और ई विश्वग्राम का उस समय लोन्चिंग किया था।

गुजरात के अनुभवों ने 2014 के बाद राष्ट्रीय स्तर पर टेक्नॉलॉजी को गवर्नेंस का व्यापक हिस्सा बनाने में बहुत मदद की है, धन्‍यवाद गुजरात। यही अनुभव डिजिटल इंडिया मिशन का आधार बने। आज जब हम पीछे मुड़कर देखते हैं तो आपको महसूस होता है कि इन 7-8 सालों में डिजिटल इंडिया ने हमारा जीवन कितना आसान बना दिया है। 21वीं सदी में जिनका जन्म हुआ है, जो हमारी युवा पीढ़ी है, जिसका जन्‍म 21वीं सदी में हुआ है, उनके लिए तो आज डिजिटल लाइफ बहुत Cool लगती है, फैशन स्‍टेटमेंट लगता है उनको।

लेकिन सिर्फ 8-10 साल पहले की स्थितियों को याद कीजिए। Birth certificate लेने के लिए लाइन, बिल जमा करना है तो लाइन, राशन के लिए लाइन, एडमिशन के लिए लाइन, रिजल्ट और सर्टिफिकेट के लिए लाइन, बैंकों में लाइन, इतनी सारी लाइनों का समाधान भारत ने Online होकर कर दिया। आज जन्म प्रमाण पत्र से लेकर वरिष्ठ नागरिक की पहचान देने वाले जीवन प्रमाण पत्र तक, सरकार की अधिकतर सेवाएं डिजिटल हैं वरना पहले सीनियर सिटिजन को खास करके पेंशनर्स को जा करके कहना पड़ता था कि मैं जिंदा हूं। जिन कामों के लिए कभी कई-कई दिन लग जाते थे वो आज कुछ पलों में हो जाते हैं।

साथियों,

आज डिजिटल गवर्नेंस का एक बेहतरीन इंफ्रास्ट्रक्चर भारत में है। जनधन-मोबाइल और आधार, GEM, इसकी जो त्रिशक्ति का देश के गरीब और मिडिल क्लास को सबसे अधिक लाभ हुआ है। इससे जो सुविधा मिली है और जो पारदर्शिता आई है, उससे देश के करोड़ों परिवारों का पैसा बच रहा है। 8 साल पहले इंटरनेट डेटा के लिए जितना पैसा खर्च करना पड़ता था, उससे कई गुना कम यानी एक प्रकार से नगण्‍य, उस कीमत में आज उससे भी बेहतर डेटा सुविधा मिल रही है। पहले बिल भरने के लिए, कहीं एप्लीकेशन देने के लिए, रिज़र्वेशन के लिए, बैंक से जुड़े काम हों, ऐसी हर सेवा के लिए दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते थे। रेलवे का आरक्षण करवाना हो और गांव में रहता हो तो बेचारा पूरा दिन खपा करके शहर जाता था, 100-150 रुपया बस का किराया खर्च करताथा, और फिर लाइन में लगता था रेलवे आरक्षण के लिए। आज वो कॉमन सर्विस सेंटर पर जाता है और वहीं से उसको, यह मेरी कॉमर्स सर्विस वाली फ़ौज देखती है। और वहीं से उसका काम हो जाता है, गांव में ही हो जाता है। और गांव वालों को भी पता है कहां ये व्‍यवस्‍था है। इसमें भी किराए-भाड़े, आना-जाना, दिन लगाना, सभी खर्चों में कटौती आई है। गरीब, मेहनत-मज़दूरी करने वालों के लिए तो ये बचत और भी बड़ी है क्योंकि उनका पूरा दिन बच जाता है।

और कभी-कभी हम सुनते थे ना Time is money. सुनने और कहने में तो अच्‍छा लगता है लेकिन जब उसका अनुभव सुनते हैं तो दिल को छू जाता है। मैं अभी काशी गया था, तो काशी में रात को…दिन में तो इधर-उधर जाता हूं तो ट्रैफिक और लोगों को परेशानी तो फिर मैं रात को एक-डेढ़ बजे रेलवे प्‍लेटफॉर्म पर चला गया देखने के लिए कि भई कहां क्‍या हाल है। क्‍योंकि वहां का एमपी हूं तो काम तो करना है। तो मैं वहां पैसेंजरों से बात कर रहा था, स्‍टेशन मास्‍टर से बात कर रहा था। क्‍योंकि मेरा सरप्राइज विजिट था, किसी को बताकर तो गया नहीं था। तो मैंने कहा भई ये जो वंदे भारत ट्रेन चल रही है क्‍या अनुभव है और occupancy कैसी लगी...अरे बोले साहब इतनी उसकी मांग है कि हमें कम पड़ रही हैं। मैंने कहा वो तो ट्रेन थोड़ी महंगी है, इसकी टिकट ज्‍यादा लगती है, इसमें लोग क्‍यों जाते हैं। बोले साहब, इसमें मजदूर लोग सबसे ज्‍यादा जाते हैं, गरीब लोग सबसे ज्‍यादा जाते हैं। मैंने कहा कैसे भई! मेरे लिए सरप्राइज था। बोले वो दो कारणों से जाते हैं। एक- बोले वंदे भारत ट्रेन में स्‍पेस इतनी है‍ कि सामान उठाकर लेकर जाते हैं तो रखने की जगह मिल जाती है। गरीब का अपना एक हिसाब है। और दूसरा- समय जाने में चार घंटे बच जाता है तो वहां तुरंत काम पर लगा जाता हूं तो छह-आठ घंटे में जो कमाई होती है टिकट तो उससे भी कम में पड़ जाती है। Time is money, कैसे गरीब हिसाब लगाता है, बहुत पढ़े-लिखे लोगों को इसकी समझ कम होती है।

साथियों,

ई-संजीवनी जैसी टेलिकंसल्टेशन की जो सेवा शुरू हुई है। मोबाइल फोन से बड़े-बड़े अस्‍पताल, बड़े-बड़े डॉक्‍टरों के साथ प्राइमरी सारी चीजें पूरी हो जाती हैं। और इसके माध्यम से अब तक 3 करोड़ से अधिक लोगों ने घर बैठे ही अपने मोबाइल से अच्‍छे से अच्‍छे अस्‍पताल में, अच्‍छे से अच्‍छे डॉक्टर से कंसल्ट किया है। अगर उनको डॉक्टर के पास जाना पड़ता तो आप कल्‍पना कर सकते हैं कितनी कठिनाइयां होती, कितना खर्चा होता। ये सारी चीजें डिजिटल इंडिया सेवा के कारण जरूरत नहीं पड़ेंगी।

साथियों,

सबसे बड़ी बात, जो पारदर्शिता इससे आई है, उसने गरीब और मध्यम वर्ग को अनेक स्तरों पर चलने वाले भ्रष्टाचार से मुक्ति दी है। हमने वो समय देखा है जब बिना घूस दिए कोई भी सुविधा लेना मुश्किल था। डिजिटल इंडिया ने सामान्य परिवार का ये पैसा भी बचाया है। डिजिटल इंडिया, बिचौलियों के नेटवर्क को भी समाप्त कर रहा है।

और मुझे याद है एकबार विधान सभा में चर्चा हुई थी, आज इस चर्चा को याद करुं तो मुझे लगता है कि विधानसभा में ऐसी चर्चा होती थी। कुछ पत्रकार सब ढूंढ लेंगे। विषय ऐसा था की जो विधवा पेन्शन मिलता है तो उस समय मैंने कहा कि एक काम करो भाई, पोस्ट ओफिस में खातें खुलवा दिजिए और वहां उनकी फोटो हो और यह सब व्यवस्था हो और पोस्ट ओफिस में जाकर जो विधवा बहन हो उसे पेन्शन मिल जाए। हंगामा हो गया, तुफान हो गया, मोदी साहब आप क्या लाए हो विधवा बहन घर के बाहर कैसे निकले? वह बेंक या पोस्ट ओफिस में कैसे जाएं, उसे पैसे मिले कैसे, सब अलग अलग प्रकार से भाषण में आप देखों तो मजा आएं ऐसा बोले थे। मैंने तो कहा कि मुझे तो इस रास्ते पर जाना है आप मदद करें तो अच्छा है। ना की मदद लेकिन पर हम तो गए क्योंकि जनताने मदद की है ना? लेकिन ये हंगाम क्यों कर रहे थे साहब, उन्हें विधवा की चिंता नहीं थी, जब मैं पोस्ट ओफिस में फोटो, पहचान ऐसी सब व्यवस्थाएं की तब डिजिटल कि दुनिया तो इतने आगे बढी नही थी। आपको आश्चर्य होगा की अनेक विधवाएं ऐसी मिली कि जो बेटी का जन्म ही नहीं हुआ था और विधवा हो गई थी और पेन्शन जा रहा था। ये किसके खाते में जाता होगा ये आपको समज आया होगा। तो फिर कोलाहल होगा कि नहीं होगा। ऐसे सब बूच बंद कर दें तो तकलीफ तो होगी ही। आज टेकनोलोजी का उपयोग करके डायरेक्‍ट बेनिफिट ट्रांसफर के माध्यम से बीते 8 साल में 23 लाख करोड़ रुपए से अधिक सीधे लाभार्थियों के बैंक खाते में भेजे गए हैं। इस टेक्नोलॉजी की वजह से देश के 2 लाख 23 हजार करोड़ रुपए यानी करीब-करीब सवा दो लाख करोड़ रुपये जो किसी और के हाथ में, गलत हाथ में जाते थे, वो बच गए हैं, दोस्‍तों।

साथियों,

डिजिटल इंडिया अभियान ने जो एक बहुत बड़ा काम किया है, वो है शहर और गांवों को बीच की खाई को कम करना। हमें याद होगा, शहरों में तो फिर भी कुछ सुविधा थी, गांवों के लोगों के लिए तो हालात और भी मुश्किल भरे थे। गांव और शहर की खाई भरेगी, इसकी भी कोई कल्पना भी नहीं कर सकता था। गांव में छोटी सी छोटी सुविधा के लिए भी आपको ब्लॉक, तहसील या जिला हैडक्वार्टर के दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते थे। ऐसी सारी मुश्किलों को भी डिजिटल इंडिया अभियान ने आसान बनाया है और सरकार को नागरिक के द्वार पर, उसके गांव, घर और उसकी हथेली में फोन पर लाकर खड़ा कर दिया है।

गांव में सैकड़ों सरकारी सेवाएं डिजिटली देने के लिए पिछले 8 वर्ष में 4 लाख से अधिक नए कॉमन सर्विस सेंटर जोड़े जा चुके हैं। आज गांव के लोग, इन केंद्रों से डिजिटल इंडिया का लाभ ले रहे हैं।

मैं वहां दाहोद आया था तो दाहोद में मेरे आदिवासी भाईओ-बहनों से मिलना हुआ। वहां एक दिव्यांग कपल था। 30-32 साल कि आयु होगी, उन्होंने मुद्रा योजना में से पैसे लिए, कम्प्युटर का थोडा बहुत सिखे, और पति पत्नीने कोमन सर्विस सेन्टर शुरु किया, दाहोद के आदिवासी जिले के एक छोटे से गांव में। वह भाई और उनके पत्नी मुझे मिले तो उन्होंने मुझे कहा की साहब, एवरेज मेरी प्रति मास 28000 रुपए की आय है, गांव में लोग अब मेरे यहां ही सेवा ले रहे है। डिजिटल ईन्डिया की ताकत देखों भाई

सवा लाख से अधिक कॉमन सर्विस सेंटर ग्रामीण स्टोर, अब e-commerce को भी ग्रामीण भारत तक ले जा रहे हैं।

एक दुसरा अनुभव, व्यवस्थाओँ का किस तरह लाभ लिया जा सकता है। मुझे याद है जब मैं यहां गुजरात में था तो किसानों को बीजली का बिल चूकाने के लिए समस्या होती थी, पैसे लेने के स्थान 800-900 थे। देरी हो तो नियम के अनुसार बीजली का कनेक्शन कट जाता था, कट जाएं तो फिर से नया कनेक्शन लेना पडे तो फिर से पैसे देने पडते थे। हमने भारत सरकार को उस समय बिनती की, अटलजी की सरकार थी, अनुरोध किया कि ये पोस्ट ओफिस में चालु कर दिजिएना, बीजली का बिल हमारे पोस्ट ओफिस वालें लेना शुरु करे ऐसा कर दिजिए, अटलजीने मेरीबात मानी और गुजरात में किसानों को समस्या से मुक्ति मिल गई, व्यवस्थाओं का उपयोग किस तरह किया जा सकता है ऐसा एक प्रयोग मैंने दिल्ही में जाकर किया, आदत जाएगी नहीं, क्योंकी हम लोग अहमदाबादी, सिंगल फेर डबल जर्नी की आदत पडी है, इसलिए रेलवे को खुद का वाईफाई, बहुत स्ट्रोंग नेटवर्क है, तो उस समय हमारे रेलवे के मित्रो को मैंने कहा , ये 2019 के चुनाव से पहले कि बात है। मैंने उनसे कहा कि रेलवे के जो प्लेटफोर्म है उनके उपर वाईफाई मुफ्त कर दिजिए। और आसपास के गांवों के बच्चों को वहां आकर पढना हो तो आएं और उन्हें कनेक्टिविटी मिल जाएं और उन्हें जो पढना लिखना हो करें, आपको आश्चर्य होगा कि मैं एकबार वर्च्युअली कुछ विद्यार्थीओ के साथ बात कर रहा था। बहुत सारे लोग रेलवे प्लेटफोर्म पर मुफ्त वाईफाई कि मदद से कोम्पिटिटिव परीक्षा की तैयारी करते थे और पास होते थे, कोचिंग क्लास में जाना नहीं, खर्च करना नहीं, घर छोडना नहीं, बस हमें बा के हाथ का रोटला मिले और पढने का, रेलवे के प्लेटफोर्म का उपयोग डिजिटल ईन्डिया की ताकत देखें दोस्तो

पीएम स्वामित्व योजना, शायद शहर के लोगों का बहुत कम इस पर ध्‍यान गया है। पहली बार शहरों की तरह ही गांव के घरों की मैपिंग और डिजिटल लीगल डॉक्यूमेंट ग्रामीणों को देने का काम चल रहा है। ड्रोन गांव के अंदर जा करके हर घर की ऊपर से मैपिंग कर रहा है, मैप बनाता है, वो convince होता है, उसको सर्टिफिकेट मिलता है, अब उसके कोर्ट-कचहरी के सारे झंझट बंद, ये है डिजिटल इंडिया के कारण। डिजिटल इंडिया अभियान ने देश में बड़ी संख्या में रोज़गार और स्वरोज़गार के अवसर भी बनाए हैं।

साथियों,

डिजिटल इंडिया का एक बहुत ही संवेदनशील पहलू भी है, जिसकी उतनी चर्चा शायद बहुत ज्‍यादा होती नहीं। डिजिटल इंडिया ने खोए हुए अनेक बच्चों को कैसे अपने परिवार तक वापस पहुंचाया ये जान करके आपके हृदय को छू जाएगा। अभी मैं, और मेरा तो आपसे आग्रह है जो यहां digital का exhibition लगा है आप जरूर देखिए। आप तो देखिए, अपने बच्‍चों को ले करके दोबारा आइए। कैसे दुनिया बदल रही है, वहां जा करके देखोगे तो पता चलेगा। मुझे वहां अभी एक बिटिया से मिलना हुआ। वो बेटी 6 साल की थी, तो अपने परिवार से बिछुड़ गई थी। रेलवे प्‍लेटफार्म पर मां का हाथ छूट गया, वो किसी और ट्रेन में बैठ गई।, माता-पिता के बारे में बहुत कुछ बता नहीं पा रही थी। उसके परिवार को खोजने की बहुत कोशिश हुई लेकिन किसी को सफलता नहीं मिली। फिर आधार डेटा की मदद से उसके परिवार को खोजने का प्रयास हुआ। उस बच्ची का आधार बायोमीट्रिक लिया तो वो रिजेक्ट हो गया। पता चला कि बच्ची का पहले ही आधार कार्ड बन चुका है। उस आधार डिटेल के आधार पर उस बिटिया का परिवार खोज निकाला गया।

आपको जानकर अच्छा लगेगा कि आज वो बच्‍ची अपने परिवार के साथ अपनी जिंदगी जी रही है। अपने सपनों को साकार करने के लिए अपने गांव में कोशिश कर रही है। आपको भी ये जान करके अच्‍छा लगेगा और मेरी जानकारी है ऐसे अनेक सालों से 500 से अधिक बच्‍चों को इस टेक्‍नोलॉजी की मदद अपने परिवार से मिलाया जा चुका है।

साथियों,

बीते आठ वर्षों में डिजिटल इंडिया ने देश में जो सामर्थ्य पैदा किया है, उसने कोरोना वैश्विक महामारी से मुकाबला करने में भारत की बहुत मदद की है। आप कल्पना कर सकते हैं कि अगर डिजिटल इंडिया अभियान नहीं होता तो 100 साल आए से सबसे बड़े संकट में देश में हम क्‍या कर पाते? हमने देश की करोड़ों महिलाओं, किसानों, मज़दूरों, के बैंक अकाउंट में एक क्लिक पर हज़ारों करोड़ रुपए उनको पहुंचा दिए, पहुंचाए। वन नेशन-वन राशन कार्ड की मदद से हमने 80 करोड़ से अधिक देशवासियों को मुफ्त राशन सुनिश्चित किया है, ये टेक्‍नोलॉजी का कमाल है।

हमने दुनिया का सबसे बड़ा और सबसे efficient covid vaccination और covid relief program चलाया। Arogya setu और Co-win, ये ऐसे प्‍लेटफॉर्म हैं कि उसके माध्यम से अब तक करीब-करीब 200 करोड़ वैक्सीन डोज़...उसका पूरा रिकॉर्ड उपलब्‍ध है, कौन रह गया, कहां रह गया, उसकी जानकारी उसके माध्‍यम से प्राप्‍त होती है, और हम टारगेटेड व्‍यक्ति को वैक्‍सीनेशन का काम कर पा रहे हैं। दुनिया मेंमें आज भी चर्चा है कि वैक्‍सीन सर्टिफिकेट कैसे लेना है, कई दिन निकल जाते हैं। हिन्‍दुस्‍तान में वो वैक्‍सीन लगा करके बाहर निकलता है, उसके मोबाइल साइट पर सर्टिफिकेट मौजूद होता है। दुनिया कोविन के द्वारा वैक्‍सीनेशन के डिटेल सर्टिफिकेट की जानकारी की चर्चा कर रही है, हिन्‍दुस्‍तान में कुछ लोग उनका कांटा इसी बात पर अटक गया, इस पर मोदी की फोटो क्‍यों है। इतना बड़ा काम, उनका दिमाग वहीं अटक गया था।

साथियों,

भारत का Digital fintech solution, और आज U-fintech का है, इसके विषय में भी मैं कहूंगा। कभी पार्लियामेंट के अंदर एक बार चर्चा हुई है उसमें देख लेना। जिसमें देश के भूतपूर्व वित्‍त मंत्रीजी भाषण कर रहे हैं कि उन लोगों के पास मोबाइल फोन नहीं हैं, लोग डिजिटल कैसे करेंगे। पता नहीं क्‍या-क्‍या वो बोले हैं, आप सुनोगे तो आपको आश्‍चर्य होगा। बहुत पढ़े-लिखे लोगों का यही तो हाल होता है जी। Fintech UPI यानि Unified Payment Interface, आज पूरी दुनिया इस पर आकर्षित हो रही है। वर्ल्‍ड बैंक समेत सबने ये उत्‍तम से उत्‍तम प्‍लेटफार्म के रूप में उसकी सराहना की है। और मैं आपसे कहूंगा कि यहां प्रदर्शन में पूरा फिनटेक डिविजन है। ये कैसे काम करते हैं उसका वहां देखने को मिलेगा। किस प्रकार से मोबाइल फोन पर पेमेंट होते हैं, कैसे पैसे आते हैं, जाते हैं, सारा वैसे आपको यहां देखने को मिलेगा। और मैं कहता हूं ये फिनटेक का जो प्रयास हुआ है, ये सही मायने में by the people, of the people, for the people इसका उत्‍तम से उत्‍तम समाधान है। इसमें जो टेक्नॉलॉजी है वो भारत की अपनी है, यानि by the people. देशवासियों ने इसे अपने जीवन का हिस्सा बनाया यानि of the people. इसने देशवासियों के लेनदेन को आसान बनाया यानि for the people.

इसी वर्ष मई के महीने में भारत में हर मिनट...गर्व करेंगे दोस्‍तों आप, भारत में हर मिनट में 1 लाख 30 हज़ार से अधिक UPI transactions हुए हैं। हर सेकंड औसतन 2200 ट्रांजेक्शन कंप्लीट हुए हैं। यानि अभी जो मैं आपसे भाषण कर रहा हूं जब तक मैं Unified Payment interface इतने शब्‍द बोलता हूं, इतने समय में UPI से 7000 ट्रांजेक्शन कंप्लीट हो चुके हैं...मैं जो दो शब्‍द बोल रहा हूं, उतने समय में। ये काम आज डिजिटल इंडिया के माध्‍यम से हो रहा है।

और साथियो, आपको गर्व होगा भारत में कोई कहता है अनपढ़ है, ढिकना है, फलाना है, ये है, वो है, वो देश की ताकत देखिए, मेरे देशवासियों की ताकत देखिए, दुनिया के समृद्ध देश, उनके सामने मेरा देश, जो डेव‍लपिंग कंट्री की दुनिया में है, दुनिया का 40 प्रतिशत डिजिटल लेनदेन हमारे हिन्‍दुस्‍तान में होता है, दोस्‍तों।

इसमें भी BHIM-UPI आज सरल डिजिटल ट्रांजेक्शन का सशक्त माध्यम बनकर उभरा है। और सबसे बड़ी बात, आज किसी मॉल के भीतर बड़े-बड़े ब्रांड्स बेचने वाले के पास ट्रांजेक्शन की जो टेक्नॉलॉजी है, वही टेक्नॉलॉजी आज उसके सामने रेहड़ी- पटरी और ठेला वाले बैठे हुए हैं ना फुटपाथ पर, 700-800 रुपए कमाते हैं, ऐसे मजदूर के पास भी वो ही व्‍यवस्‍था है, जो बड़े-बड़े मॉल में अमीरों के पास है। वरना वो दिन भी हमने देखे हैं जब बड़ी-बड़ी दुकानों में क्रेडिट और डेबिट कार्ड चलते थे, और रेहड़ी-ठेले वाला साथी, ग्राहक के लिए छुट्टे पैसे की तलाश में ही रहता था। और अभी तो मैं देख रहा था एक दिन, बिहार का कोई, प्‍लेटफार्म पर कोई भिक्षा मांग रहा था तो वो डिजिटल पैसे लेता था। अब देखिए न अब दोनों के पास समान शक्ति है, डिजिटल इंडिया की ताकत है।

इसलिए आज दुनिया के विकसित देश हों, या फिर वो देश जो इस प्रकार की टेक्नॉलॉजी में इन्वेस्टमेंट नहीं कर सकते, उनके लिए UPI जैसे भारत के डिजिटल प्रोडक्ट आज आकर्षण का केंद्र हैं। हमारे digital solutions में scale भी है, ये secure भी हैं और democratic values भी हैं। हमारा ये जो गिफ्ट सिटी का काम है ना, मेरे शब्‍द लिखकर रखिएगा उसको, और मेरा 2005 या 2006 का भाषण है वो भी सुन लीजिएगा। उस समय जो मैंने कहा था, कि गिफ्ट सिटी में क्‍या–क्‍या होने वाला है, आज वो धरती पर उतर होता हुआ दिखाई दे रहा है। और आने वाले दिनों में फिनटेक की दुनिया में डेटा सिक्‍योरिटी के विषय में, फाइनेंस की दुनिया में गिफ्ट सिटी बहुत बड़ी ताकत बन करके उभर रहा है। ये सिर्फ गुजरात नहीं, पूरे हिन्‍दुस्‍तान की आन-बान-शान बन रहा है।

साथियों,

डिजिटिल इंडिया भविष्य में भी भारत की नई अर्थव्यवस्था का ठोस आधार बने, इंडस्ट्री 4.0 में भारत को अग्रणी रखे, इसके लिए भी आज अनेक प्रकार के initiative लिए जा रहे हैं, प्रयास किए जा रहे हैं। आज AI, block-chain, AR-VR, 3D printing, Drones, robotics, green energy ऐसी अनेक New Age industries के लिए 100 से अधिक स्किल डेवलपमेंट के कोर्सेज चलाए जा रहे हैं देशभर में। हमारा प्रयास है कि विभिन्न संस्थाओं के साथ मिलकर, आने वाले 4-5 सालों में 14-15 लाख युवाओं को future skills के लिए reskill और upskill किया जाए, उस दिशा में हमारा प्रयास है।

इंडस्ट्री 4.0 के लिए ज़रूरी स्किल्स तैयार करने के लिए आज स्कूल के स्तर पर भी फोकस है। करीब 10 हज़ार अटल टिंकरिंग लैब्स में आज 75 लाख से अधिक छात्र-छात्राएं Innovative Ideas पर काम कर रहे हैं, आधुनिक टेक्नॉलॉजी से रूबरू हो रहे हैं। अभी मैं यहां प्रदर्शनी देखने गया था। मेरे मन को इतना आनंद हुआ कि दूर-सुदूर उड़ीसा की बेटी है, कोई त्रिपुरा की बेटी है, कोई उत्‍तर प्रदेश के किसी गांव की बेटी है, वो अपने प्रॉडक्‍ट ले करके आई है। 15 साल, 16 साल, 18 साल की बच्चियां दुनिया की समस्‍याओं का समाधान ले करके आई हैं। आप जब उन बच्चियों से बात करोगे तो आपको लगेगा ये मेरे देश की ताकत है दोस्‍तो। अटल टिंकरिंग लैब्स के कारण स्‍कूल के अंदर ही जो वातावरण बना है उसी का ये नतीजा है कि बच्‍चे बड़ी बात ले करके, बड़ी समस्‍याओं के समाधान ले करके आते हैं। वो 17 साल का होगा, मैंने उसको अपना परिचय पूछा, वो कहता है मैं तो ब्रांड एम्‍बेसेडर हूं। यानी डिजिटल इंडिया के क्षेत्र में हम जो equipment को लेकर काम कर रहे हैं, मैं उसका ब्रांड एमबेसेडर हूं। इतने confidence से वो बात कर रहा था। यानी ये सामर्थ्‍य जब देखते हैं तो विश्‍वास और मजबूत हो जाता है। ये देश सपने साकार करके रहेगा, संकल्‍प पूरे करके रहेगा।

साथियो,

नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति भी टेक्नॉलॉजी के लिए ज़रूरी माइंडसेट तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली है। अटल इंक्यूबेशन सेंटर्स का एक बहुत बड़ा नेटवर्क देश में तैयार किया जा रहा है। इसी प्रकार, पीएम ग्रामीण डिजिटल साक्षरता अभियान यानि PM-दिशा देश में डिजिटल सशक्तिकरण को प्रोत्साहित करने का एक अभियान चला रहा है। अभी तक इसके 40 हज़ार से अधिक सेंटर देशभर में बन चुके हैं और 5 करोड़ से अधिक लोगों को ट्रेनिंग दी जा चुकी है।

साथियों,

डिजिटल स्किल्स और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ-साथ टेक्नॉलॉजी के सेक्टर में युवाओं को ज्यादा से ज्यादा अवसर देने के लिए अनेक विविध दिशाओं में रिफॉर्म्स किए जा रहे हैं। स्पेस हो, मैपिंग हो, ड्रोन हो, गेमिंग और एनीमेशन हो, ऐसे अनेक सेक्टर जो future digital tech को विस्तार देने वाले हैं, उनको इनोवेशन के लिए खोल दिया गया है। In-space…अब In-space हेडक्‍वार्टर अहमदाबाद में बना है। In-space और नई ड्रोन पॉलिसी जैसे प्रावधान आने वाले वर्षों में भारत के tech potential को इस दशक में नई ऊर्जा देंगे। मैं जब यहां In-space के हेडक्‍वार्टर के उद्घाटन के लिए आया था पिछले महीने तो कुछ बच्‍चों से मेरी बातचीत हुई, स्‍कूल के बच्‍चे थे। वे सेटेलाइट छोड़ने की तैयारी कर रहे थे..अंतरिक्ष में सेटेलाइट छोड़ने की तैयारी कर रहे थे। तो मुझे वहां बताया गया कि हम आजादी के अमृत महोत्‍सव के निमित्‍त स्‍कूल के बच्‍चों द्वारा बनाए 75 सेटेलाइट आसमान में छोड़ने वाले हैं, अंतरिक्ष में छोड़ने वाले हैं। ये मेरे देश की स्‍कूल की शिक्षा में हो रहा है दोस्‍तो।

साथियों,

आज भारत, अगले तीन-चार साल में इलेक्ट्रॉनिक मैन्यूफैक्चरिंग को 300 बिलियन डॉलर से भी ऊपर ले जाने के लक्ष्य पर काम कर रहा है। भारत Chip Taker से Chip Maker बनना चाहता है। सेमीकंडक्टर्स का उत्पादन बढ़ाने के लिए भारत में तेजी से निवेश बढ़ रहा है। PLI स्कीम से भी इसमें मदद मिल रही है। यानि मेक इन इंडिया की शक्ति और डिजिटल इंडिया की ताकत की डबल डोज, भारत में इंडस्ट्री 4.0 को नई ऊंचाई पर ले जाने वाली है।

आज का भारत उस दिशा की तरफ बढ़ रहा है जिसमें नागरिकों को, योजनाओं के लाभ के लिए, दस्तावेजों के लिए सरकार के पास Physical रूप में आने की जरूरत नहीं होगी। हर घर में पहुंचता इंटरनेट और भारत की क्षेत्रीय भाषाओं की विविधता, भारत के डिजिटल इंडिया अभियान को नई गति देगी। डिजिटल इंडिया अभियान, ऐसे ही नए-नए आयाम खुद में जोड़ता चलेगा, Digital space में global leadership को दिशा देगा। और मैं आज समय मेरे पास कम था, मैं हर चीज़ें को नहीं देख पाया। लेकिन शायद दो दिन भी कम पड़ जाएं इतनी सारी चीजें हैं वहां। और मैं गुजरात के लोगों से कहूंगा मौका मत छोडि़ए। आप जरूर अपने स्‍कूल-कॉलेज के बच्‍चों को वहां ले जाइए। आप भी समय निकाल कर जाइए। एक नया हिन्‍दुस्‍तान आपकी आंखों के सामने दिखाई देगा। और सामान्‍य मानवी के जीवन की जरूरतों से जुड़ा हुआ हिन्‍दुस्‍तान दिखेगा। एक नया विश्‍वास पैदा होगा, नए संकल्‍प भरे जाएंगे। और आशा-आकांक्षाओं की पूर्ति का विश्‍वास ले करके डिजिटल इंडिया के माध्‍यम से भी देश भविष्‍य का भारत, आधुनिक भारत, समृद्ध और सशक्‍त भारत, उस दिशा में आगे बढ़ने की तैयारी की त‍रफ तेज गति से बढ़ रहा है। इतने कम समय में जो प्राप्‍त किया है, भारत के पास टेलेंट है, भारत नौजवानों का सामर्थ्‍य है, उन्‍हें अवसर चाहिए। और आज देश में एक ऐसी सरकार है जो देश की जनता पर भरोसा करती है, देश के नौजवान पर भरोसा करती है और उसको नए प्रयोग करने के लिए अवसर दे रही है और उसी का परिणाम है कि देश अनेक दिशाओं में अभूतपूर्व ताकत के साथ आगे बढ़ रहा है।

इस डिजिटल इंडिया वीक के लिए मैं आपको बहुत शुभकामनाएं देता हूं। आने वाले दो-तीन दिन तो ये शायद प्रदर्शनी चालू रहेगी। उसका लाभ आप लोग लेंगे। फिर से एक बार मैं भारत सरकार के विभाग का भी अभिनंदन करता हूं कि उन्‍होंने इतने बढ़िया कार्यक्रम की रचना की। मुझे, आज मैं सुबह तो तेलंगाना था, फिर आंध्र चला गया और फिर यहां आपके बीच आने का मुझे मौका मिला, और अच्‍छा लगता है। आप सबका उत्‍साह देखता हूं, उमंग देखता हूं तो और आनंद आता है। इस कार्यक्रम को गुजरात में करने के लिए मैं डिपार्टमेंट को बधाई देता हूं और इतना शानदार कार्यक्रम करने के लिए अभिनंदन करता हूं। और देशभर के नौजवानों के लिए ये प्रेरणा बनकर रहेगा, इसी विश्‍वास के साथ आप सब को बहुत-बहुत शुभकामनाएं।

धन्यवाद !