From 22nd September, the next-generation GST reforms will come into effect, marking the beginning of a GST Bachat Utsav: PM
A new wave of GST benefits is coming to every citizen: PM
GST reforms will accelerate India's growth story: PM
New GST reforms are being implemented, Only 5% and 18% tax slabs will now remain: PM
With lower GST, it will be easier for citizens to fulfill their dreams: PM
The essence of serving citizens is reflected clearly in the next-generation GST reforms: PM
What the nation needs and what can be made in India should be made within India itself: PM
India's prosperity will draw strength from self-reliance: PM
Let's buy products that are Made in India: PM
PM extends Navratri greetings to everyone

প্রধানমন্ত্রী শ্রী নরেন্দ্র মোদী আজ ভিডিও কনফারেন্সের মাধ্যমে জাতির উদ্দেশে ভাষণ দেন। নবরাত্রির সূচনা উপলক্ষে তিনি নাগরিকদের আন্তরিক শুভেচ্ছা জানিয়ে বলেন, নবরাত্রির প্রথম দিনে আত্মনির্ভর ভারতের পথে দেশ এক উল্লেখযোগ্য পদক্ষেপ নিতে চলেছে। ২২ সেপ্টেম্বর সূর্যোদয়ের সঙ্গে সঙ্গে দেশে পরবর্তী প্রজন্মের জিএসটি সংস্কার কার্যকর হবে। এর মধ্য দিয়ে দেশের সাশ্রয় উৎসবের সূচনা হবে। তিনি বলেন, এই উৎসব সঞ্চয় বৃদ্ধি করবে এবং পছন্দের জিনিসপত্র কিনতে মানুষকে সহায়তা করবে। শ্রী মোদী বলেন, এই সাশ্রয় উৎসবের সুযোগ-সুবিধা গরিব, মধ্যবিত্ত শ্রেণী, নয়া মধ্যবিত্ত শ্রেণি, তরুণ, কৃষক, মহিলা, দোকানমালিক, ব্যবসায়ী এবং শিল্পোদ্যোগীদের কাছে পৌঁছে যাবে। এই উৎসবের মরশুম প্রতিটি বাড়িতে খুশি এবং আনন্দ নিয়ে আসবে বলে মন্তব্য করেন তিনি। 

 

 

পরবর্তী প্রজন্মের জিএসটি সংস্কার এবং জিএসটি সাশ্রয় উৎসবের জন্য দেশের কোটি কোটি পরিবারকে শুভেচ্ছা জানান শ্রী মোদী। তিনি বলেন, এই সংস্কার ভারতের অগ্রগতি ত্বরান্বিত করবে, ব্যবসায়িক কাজকর্মকে সহজ করবে, বিনিয়োগকে আরও আকর্ষণীয় করে তুলবে এবং উন্নয়নের এই দৌড়ে প্রতিটি রাজ্যের সমান অংশীদারিত্ব সুনিশ্চিত করবে। 

 

২০১৭ সালে জিএসটি সংস্কারের আগে দেশের কর ব্যবস্থার নানা জটিলতার কথা তুলে ধরেন প্রধানমন্ত্রী। তিনি বলেন, এই জটিল কর্ ব্যবস্থার মাশুল দিচ্ছিলেন দেশের কোটি কোটি মানুষ এবং লক্ষ লক্ষ কোম্পানি। তিনি বলেন, ২০১৪-তে ক্ষমতায় আসার পর দেশ এবং মানুষের স্বার্থে সরকার জিএসটি-কে অগ্রাধিকার দেয়। কেন্দ্র এবং রাজ্যগুলির যৌথ প্রয়াসের ফলে বহুস্তরীয় করের হাত থেকে দেশ মুক্ত হয় এবং গোটা দেশে একটি সুসংহত কর ব্যবস্থা গড়ে ওঠে। 

 

প্রধানমন্ত্রী বলেন, সংস্কার একটি ধারাবাহিক প্রক্রিয়া এবং সময়ের পরিবর্তনের সঙ্গে সঙ্গে পরবর্তী প্রজন্মের সংস্কারও সমান গুরুত্বপূর্ণ। তিনি জানান, নতুন কাঠামোয় প্রাথমিকভাবে করের শুধুমাত্র দুটি হার – ৫% এবং ১৮% রাখা হয়েছে। তাঁর কথায়, এর ফলে অধিকাংশ নিত্যপ্রয়োজনীয় জিনিস আরও ব্যয়সাশ্রয়ী হয়ে উঠবে। খাদ্য সামগ্রী, ওষুধ, সাবান, টুথব্রাশ, টুথপেস্ট, স্বাস্থ্য এবং জীবন বিমার উল্লেখ করে তিনি বলেন, এগুলির মধ্যে কোনও কোনওটি পুরোপুরি কর মুক্ত অথবা কোনওটিতে ৫% কর ধার্য করা হয়েছে। আগে এসব পণ্যের কর ১২% ছিল, সেগুলির ৯৯% পণ্য এখন ৫% করের আওতায় নিয়ে আনা হয়েছে। 

 

গত ১১ বছরে ২৫ কোটি ভারতবাসীকে দারিদ্র্যসীমার উপরে তুলে আনা এবং দেশের অগ্রগতিতে নতুন মধ্যবিত্ত শ্রেণীর গুরুত্বপূর্ণ ভূমিকার কথা উল্লেখ করে শ্রী মোদী বলেন, এই বছর ১২ লক্ষ টাকা পর্যন্ত আয়কে পুরোপুরি করমুক্ত করা হয়েছে, যা মধ্যবিত্ত শ্রেণীর মানুষের জীবনকে সহজ করে তুলেছে। 

 

 

তিনি বলেন, জিএসটি-র হার কমানোর ফলে টিভি, রেফ্রিজারেটর, স্কুটার, বাইক বা গাড়ি কেনার খরচ এখন অনেক কম পড়বে। ‘নাগরিক দেবভব’ মন্ত্রে আগামী প্রজন্মের জিএসটি সংস্কার স্পষ্টভাবে প্রতিফলিত হওয়ার কথা উল্লেখ করে প্রধানমন্ত্রী বলেন, আয় করে স্বস্তি এবং জিএসটি হ্রাস একসঙ্গে হওয়ার ফলে দেশের মানুষের সঞ্চয় ২.৫ লক্ষ কোটি টাকা ছাড়িয়ে যাবে। সেই কারণে একে ‘সাশ্রয় উৎসব’ হিসেবে চিহ্নিত করা হয়েছে বলে মন্তব্য করেন প্রধানমন্ত্রী। 

 

জিএসটি-র হার কমানো এবং প্রক্রিয়া সহজ করার ফলে ভারতের এমএসএমই, ক্ষুদ্র শিল্প ও কুঠির শিল্পের লাভবান হওয়ার কথা উল্লেখ করে শ্রী মোদী বলেন, এই সংস্কার বিক্রি বাড়াবে এবং করের বোঝা কমাবে। এমএসএমই ক্ষেত্রকে ভারতের অর্থনীতির মেরুদন্ড হিসেবে চিহ্নিত করেন তিনি। সেই সঙ্গে ক্ষুদ্র শিল্প প্রতিষ্ঠানগুলিতে আন্তর্জাতিক উচ্চমানের পণ্য তৈরির ওপর জোর দেন তিনি। সেই লক্ষ্যে সংশ্লিষ্ট সব পক্ষকে একযোগে কাজ করার আবেদন জানান তিনি। 

 

প্রধানমন্ত্রী বলেন, স্বদেশী মন্ত্র ভারতের স্বাধীনতা আন্দোলনকে জোরদার করেছিল। একই ভাবে এই মন্ত্র দেশের সমৃদ্ধির পথে শক্তি যোগাবে বলে মন্তব্য করেন তিনি। প্রধানমন্ত্রী বলেন, বহু বিদেশী পণ্য আমাদের দৈনন্দিন জীবনের অংশ হয়ে উঠেছে এবং মানুষ নিজের অজ্ঞাতেই সেগুলি ব্যবহার করেন। বিদেশী নির্ভরশীলতা থেকে মুক্ত হওয়ার প্রয়োজনীয়তার ওপর জোর দিয়ে মেড ইন ইন্ডিয়া পণ্য কেনার জন্য মানুষের কাছে আর্জি জানান তিনি। প্রতিটি বাড়িকে স্বদেশীর প্রতীক হয়ে ওঠার এবং প্রতিটি দোকানে দেশীয় পণ্য রাখার ডাক দেন তিনি। স্বদেশীর প্রতি অঙ্গীকার তুলে ধরার জন্য “আমি স্বদেশী কিনি”, “আমি স্বদেশী বিক্রি করি”, এই শব্দবন্দের কথা উল্লেখ করেন প্রধানমন্ত্রী। এই মানসিকতা প্রত্যেক ভারতবাসী অন্তঃস্থলের জায়গা করে নেবে বলে মন্তব্য করেন তিনি। শ্রী মোদী বলেন, পরিবর্তনই ভারতের উন্নয়নকে এগিয়ে নিয়ে যাবে। আত্মনির্ভর ভারত এবং স্বদেশী প্রচারাভিযানে সক্রিয় ভাবে সহায়তা করার জন্য রাজ্য সরকারগুলির কাছে আবেদন জানান প্রধানমন্ত্রী। তিনি বলেন, যখন কেন্দ্র এবং রাজ্যগুলি একযোগে সামনের দিকে এগিয়ে যাবে, তখন স্বনির্ভর ভারতের স্বপ্ন পূরণ হবে, প্রতিটি রাজ্য বিকশিত হবে এবং ভারত উন্নত দেশে পরিণত হবে। তাঁর ভাষণের শেষে প্রধানমন্ত্রী জিএসটি সাশ্রয় উৎসব এবং নবরাত্রি উপলক্ষে সকলকে শুভেচ্ছা জানান।

 

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Text of PM’s address during inauguration of the Swami Vivekananda Cultural Youth Centre-Viveka Smaraka in Mysuru
August 01, 2026

एल्लरिगू नन्ना नमस्कारगलु।

रामकृष्ण मठ और रामकृष्ण मिशनबेलूर मठ के अध्यक्ष परम पूज्य स्वामी गौतमानंद जी महाराज, श्री रामकृष्ण आश्रम, मैसुरू के अध्यक्ष पूज्य स्वामी मुक्तिदानंद जी, रामकृष्ण मठ और रामकृष्ण मिशन के ट्रस्टी पूज्य स्वामी यादवेंद्रानंद जी, राज्यपाल श्री थावरचंद गहलोत जी, मुख्यमंत्री श्री डी.के. शिवकुमार जी, सांसद यदुवीर कृष्णदत्त चामराज वाडियार जी, विधायक विजयेंद्र येदियुरप्पा जी, के. हरीश गौड़ा जी, अन्य महानुभाव, पूज्य संतगण और भाईयों और बहनों।

सर्वप्रथम मैं मैसूरू की अधिष्ठात्री देवी मां चामुंडेश्वरी को प्रणाम करता हूं। अभी दो दिन पहले ही हम सभी ने गुरू पूर्णिमा भी मनाई है। आप सब जानते हैं, मेरी यात्रा जहां से शुरू हुई और आज मैं जहां हूं, इसमें राम कृष्ण मिशन का बहुत अहम योगदान है। मैं तीन महीने पहले हावड़ा में बेलूर मठ गया था। सभी पूज्य संतों से सतसंग करने का अवसर मिला था। मेरा सौभाग्य है कि आज मुझे फिर मैसूरू में श्री रामकृष्ण आश्रम से जुड़े संतों से, मेरे गुरू बंधुओं से मिलने का, उनसे आशीर्वाद लेने का अवसर मिला है। आप सभी की उपस्थिति की वजह से, आज मैसूरू की इस पवित्र भूमि पर मुझे एक अलग ही ऊर्जा अनुभव हो रही है। मैं आप सभी संतों के चरणों में सादर प्रणाम करता हूं।

साथियों,

मैसूरू भारत की अनादि सांस्कृतिक चेतना का केंद्र रहा है। यहां के मंदिर, यहां की परंपराएं और उत्सव, मैसूरू का दशहरा, यहां के भव्य महल, इसका संगीत और साहित्य, भारत की विरासत इस शहर के कण-कण में रची बसी है। और यह देखकर बहुत संतोष मिलता है। इस शहर ने इस विरासत को उसी कुशलता से सहेजा भी है, संवारा भी है। श्री रामकृष्ण आश्रम और स्वामी विवेकानंद जी की स्मृतियां भी मैसुरू की विरासत का ही एक समृद्ध हिस्सा हैं। कुछ देर पहले मैं उस ऐतिहासिक भवन में भी गया था, जहां स्वामी विवेकानंद जी ने अपने प्रवास के दौरान कुछ समय बिताया था। कर्नाटका के कितने ही विद्वान और मनीषी इस स्थान से जुड़े रहे हैं। राष्ट्रकवि कुवेम्पु जैसे महापुरुष जब मैसुरू में थे, उनका भी श्रीरामकृष्ण आश्रम से गहरा जुड़ाव था। आज स्वामी विवेकानंद कल्चरल यूथ सेंटर, यानी विवेका स्मारका के उद्घाटन के जरिए, हम इस मिशन को नया विस्तार दे रहे हैं। इसके लिए मैं श्रीरामकृष्ण आश्रम और इससे जुड़े सभी विद्वानों को हार्दिक बधाई देता हूं।

साथियों,

व्यक्ति से विभूति का निर्माण एकाएक नहीं होता। इसके लिए हमें जीवन की अनगिनत परीक्षाएँ देनी होती हैं। साधना करनी होती है, तप करना होता है, खुद को तपाना पड़ता है, खपाना पड़ता है। ख्याति के बाद तो संसार पीछे खड़ा होता है। लेकिन, तप के समय महान विभूतियों को पहचानना आसान नहीं होता। जो साधक को तपस्या में पहचानता है, वो उसकी सिद्धि का सहभागी भी होता है।

इसलिए भाइयों बहनों,

स्वामी विवेकानंद के जीवन में मैसुरू का इतना अहम योगदान था। करीब 130 वर्ष पहले, स्वामी जी, एक युवा संन्यासी के रूप में भ्रमण करते हुए मैसुरू आए थे। तब उनकी प्रसिद्धि वैसी नहीं थी। लेकिन, विचार उतने ही ऊंचे थे। उस समय उन्हें जिन लोगों ने पहचाना, जो उनके साथ जुड़े, उनमें से एक प्रमुख नाम मैसुरू के तत्कालीन महाराजा का भी था। जब स्वामी विवेकानंद जी अमेरिका में थे, तो उन्होंने वहाँ से मैसुरू के तत्कालीन महाराजा को एक पत्र लिखा था। उसमें उन्होंने स्वयं महाराजा के सहयोग का उल्लेख किया था।

साथियों,

स्वामी विवेकानंद जी ने भारतीय चेतना को आत्मसात किया था। उन्होंने शास्त्रों को आत्मसात किया था जो कहते हैं- “परं परोपकारार्थं यो जीवति स जीवति”। अर्थात्, वास्तव में वही जीता है जो दूसरों के लिए जीता है। इसी मंत्र पर चलते हुए, मैसुरू के इस श्री रामकृष्ण आश्रम ने पिछले वर्ष अपने सौ साल पूरे किए हैं। शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़ी सेवाएँ हों, या प्राकृतिक आपदा में राहत कार्य, श्री रामकृष्ण आश्रम ने स्वामी विवेकानंद जी की विरासत को जीवंत रखा है। मुझे विश्वास है विवेका स्मारका साधकों और श्रद्धालुओं के लिए आत्मिक उत्थान का तीर्थ बनेगा। स्वामी विवेकानंद जी की प्रेरणा थी- ‘शिव ज्ञाने जीव सेवा’। यानी जीव की सेवा ही शिव की सेवा है। हमें इस विवेका स्मारक में इसलिए, ऐसे युवाओं को गढ़ना है, जिनके लिए समाज और राष्ट्र के हित, गरीब-वंचित के दुःख, अपने सुख-दुःख से ऊपर हों। जिन युवाओं के लिए राष्ट्र प्रथम ही सर्वोपरि मंत्र हो, मां भारती की सेवा ही जिनका जीवन लक्ष्य हो।

साथियों,

स्वामी विवेकानंद जी युवाओँ की शिक्षा को राष्ट्र निर्माण का मजबूत आधार मानते थे। उन्होंने स्वयं ये देखा था कि कैसे दुनिया के देश अपने युवाओं को शिक्षित बना रहे हैं। लेकिन दुर्भाग्य से तब भारत गुलाम था। भारत के युवा भी गुलामी की जंजीरों में जक़ड़े हुए थे। उस दौर से लेकर अब तक, भारत के युवा ने एक लंबी यात्रा तय की है। भारत का जो युवा कभी जंजीरों में था, आज वो युवा दुनिया के विकास को गति दे रहा है।

· आज भारत की अर्थव्यवस्था, सबसे तेजी से आगे बढ़ रही है।

· किसकी वजह से? भारत के युवाओँके सामर्थ्य से।

· आज भारत में दुनिया की तीसरा सबसे बड़ा स्टार्ट-अप इकोसिस्टम है।

· किसकी वजह से? भारत के युवाओँ के सामर्थ्य से।

· आज भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन निर्माता बन चुका है।

· किसकी वजह से?

· भारत के युवाओं के सामर्थ्य से।

· आज भारत से बने Digital Solutions, दुनिया के अनेक देशों के लिए प्रेरणा बन रहे हैं।

· किसकी वजह से?

· भारत के युवाओं के सामर्थ्य से।

· आज भारत सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग की नई यात्रा पर तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।

· किसकी वजह से?

· भारत के युवाओं के सामर्थ्य से।

· आज भारत AI, Deep Tech, Space Technology और Innovation के नए अध्याय लिख रहा है।

· किसकी वजह से?

· भारत के युवाओं के सामर्थ्य से।

अभी कुछ दिन पहले ही हमने देखा है, भारत के युवाओं ने अंतरिक्ष में कमाल कर दिया है। पहली बार युवाओं का बनाया हुआ एक प्राइवेट कंपनी का रॉकेट, अंतरिक्ष तक पहुंचा है। आज कोई भी सेक्टर हो, भारत युवा अपना दम-खम दिखा रहा है। हम सभी अपने आसपास देख रहे हैं, आज छोटे से छोटे व्यवसाय में लगा युवा, भारत की डिजिटल इकॉनमी को आगे बढ़ा रहा है। वो मुद्रा लोन के जरिए नई शुरुआत कर रहा है। वो देश की स्टार्टअप revolutionको लीड कर रहा है। आत्मनिर्भर भारत का अभियान हो, मेक इन इंडिया का अभियान हो, इसकी सफलता के पीछे भारत के युवाओं की ही ताकत है।

साथियों,

किसी भी देश में, युवाओं का सामर्थ्य तभी उस राष्ट्र की शक्ति बनता है, जब उसे सही अवसर मिले, जब उसे सही दिशा मिले, और जब उसे अपनी ही धरती पर बड़े सपने देखने, उन्हें पूरा करने का भरोसा मिले। और इसमें बहुत बड़ी भूमिका हमारे शिक्षा संस्थानों की होती है। मुझे खुशी है कि आज भारत में शिक्षण संस्थाओँ की संख्या लगातार बढ़ रही है। पिछले 12 वर्षों में, 650 से ज्यादा नई यूनिवर्सिटीज बनी हैं। पिछले 12 वर्षों में करीब 14 हजार नए कॉलेज बने हैं। 4 हजार से ज्यादा नई ITI बनाई गई हैं। 9 नए आई.आई.एम, 7 नई आई.आई.टी, और13 नए एम्स भी स्थापित किए गए हैं। आज देश में MBBS की सीटें करीब 1 लाख 40 हजार हो चुकी हैं। मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़कर 823 हो गई है।

साथियों,

एक ओर हम एजुकेशन इनफ्रास्ट्रक्चर को modernize कर रहे हैं। साथ ही, शिक्षा व्यवस्था को भी आधुनिक जरूरतों के हिसाब से ढाला जा रहा है। नेशनल एजुकेशन पॉलिसी, भारत के युवाओँ को 21वीं सदी के अनुरूप तैयार करने का माध्यम बन रही है।

साथियों,

स्कूली शिक्षा में भी बड़े स्तर पर काम हुआ है। देशभर में 14 हजार से ज्यादा पीएम श्री स्कूल विकसित किए गए हैं। शिक्षा केवल किताबी न रहे, बच्चों में इनोवेशन और साइंटिफिक टेंपरामेंट विकसित हो, इसके लिए,10 हजार से ज्यादा अटल टिंकरिंग लैब्स स्थापित हुई हैं।

साथियों,

स्वामी विवेकानंद जी, राष्ट्र उत्थान के लिए शिक्षा के साथ-साथ समानता को भी उतना ही अहम मानते थे। शिक्षा में भेदभाव न हो, अवसरों में भेदभाव न हो, आज ये देश का विज़न बन गया है। आज बेटियाँ भी सैनिक स्कूलों में एड्मिशन ले रहीं हैं। एनडीए में बेटियां राष्ट्र के लिए योगदान दे रही हैं। आज मेडिकल और इंजीनियरिंग जैसी पढ़ाई मातृभाषा में करने की सुविधा हो गई है। इससे, भाषा के आधार पर अवसरों में होने वाले भेदभाव पर लगाम लग रही है।

साथियों,

युवा शक्ति का स्वस्थ, अनुशासित और आत्मविश्वास से भरे रहना उतना ही जरूरी है। जो देश खेलों को महत्व देते हैं, वहां के युवाओं में इन तीनों गुणों का तेजी से विकास होता है। इसलिए आज खेलों को राष्ट्र निर्माण की एक महत्वपूर्ण धारा के रूप में देखा जा रहा है। खेलो इंडिया यूथ गेम्स, यूनिवर्सिटी गेम्स, पैरा गेम्स और विंटर गेम्स जैसे आयोजनों ने देशभर के युवाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने का मंच दिया है। आज देशभर में आधुनिक स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार हो रहा है, खेलो इंडिया सेंटर के माध्यम से सुविधाएं बढ़ रही हैं, गांवों से लेकर छोटे शहरों तक नई प्रतिभाओं की पहचान की जा रही है।

और साथियों,

आज इस अभियान के परिणाम भी साफ - साफ दिखाई दे रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं में भारत का प्रदर्शन बेहतर होता जा रहा है। हमारे खिलाड़ी नए-नए कीर्तिमान बना रहे हैं, हमारी बेटियां देश का गौरव बढ़ा रही हैं।

साथियों,

स्वामी विवेकानंद जी की तरह, हमें विवेका स्मारका, बड़े उद्देश्य के लिए कार्य करने की प्रेरणा देता है। ऐसे स्थान पर मैं हमारे युवाओं से कुछ आग्रह करना चाहता हूं।

साथियों,

मैसुरू को अक्सर भारत के सबसे स्वच्छ शहरों में स्थान मिला है। मैं इसके लिए यहां के लोगों को हृदय से बधाई देता हूं। क्या इस अवसर पर हम ये संकल्प ले सकते हैं, कि भविष्य में स्वच्छता के संकल्प को निरंतर मजबूत करते रहेंगे। हमें यहाँ की प्राकृतिक संपदाओं को संरक्षित करना चाहिए। हमें पर्यावरण से जुड़े संकल्प लेने चाहिए। हमें पानी की हर बूंद बचाने के लिए मिशन मोड में काम करना होगा।

साथियों,

आज ही यहां ‘वाल्मीकि रामायण’ के कन्नड़ा अनुवाद का विमोचन भी हुआ है। मैं कन्नड़ा भाषा से जुड़ी एक अपील भी करना चाहता हूं। कर्नाटका महान लेखकों और कवियों की धरती है। कन्नड़ा भाषी लोग हमेशा से पढ़ने की संस्कृति के लिए जाने जाते हैं। स्मार्टफोन के इस युग में इस स्वभाव को और बढ़ावा मिलना चाहिए। क्या हम युवा पीढ़ी को कन्नड़ा साहित्य से गहराई से जुड़ने के लिए प्रेरित कर सकते हैं।

साथियों,

मैसुरू अपने सिल्क, चंदन और हस्तशिल्प के लिए प्रसिद्ध है। जब भी हम किसी को उपहार दें, तो क्या हम ये सुनिश्चित कर सकते हैं कि वो किसी भारतीय के हाथों और पसीने से बनी चीज हो? इससे हमारी संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा, साथ ही, एक और परिवार को आर्थिक सहायता भी मिलेगी।

साथियों,

स्वामी विवेकानंद जी ने जिस तरह के भारत का सपना देखा था, उसे पूरा करने का दायित्व आज की पीढ़ी पर है। मुझे विश्वास है, विवेका स्मारका इसके लिए एक ऊर्जा स्रोत का काम करेगा। मैं एक बार फिर, यहां एकत्र पूज्य संतजनों गुरू बंधुओं और मैसुरू के लोगों को नमन करते हुए मेरी वाणी को विराम देता हूं। आप सबका बहुत-बहुत धन्यवाद।