अगली पीढ़ी के वस्तु और सेवाकर सुधार 22 सितंबर से लागू होंगे, यह जीएसटी बचत उत्सव की शुरुआत का प्रतीक है: प्रधानमंत्री
प्रत्येक नागरिक के लिए वस्तु और सेवाकर लाभों की एक नई लहर आ रही है: प्रधानमंत्री मोदी
वस्तु और सेवाकर सुधार भारत की विकास गाथा को गति प्रदान करेंगे: प्रधानमंत्री
नए वस्तु और सेवाकर सुधार लागू होने के बाद अब केवल 5 प्रतिशत और 18 प्रतिशत कर स्लैब रहेंगे: प्रधानमंत्री मोदी
कम वस्तु और सेवाकर के साथ, नागरिकों के लिए अपने सपने पूरे करना आसान होगा: प्रधानमंत्री
नागरिकों की सेवा का सार अगली पीढ़ी के वस्तु और सेवाकर सुधारों में स्पष्ट रूप से प्रदर्शित होता है: प्रधानमंत्री मोदी
देश को जो चाहिए और जो भारत में बनाया जा सकता है, वह भारत में ही बनाया जाना चाहिए: प्रधानमंत्री
भारत की समृद्धि को आत्मनिर्भरता से बल मिलेगा: प्रधानमंत्री मोदी
आइए, भारत में निर्मित उत्पाद खरीदें: प्रधानमंत्री
प्रधानमंत्री ने सभी को नवरात्रि की शुभकामनाएं दीं

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से राष्ट्र को संबोधित किया। शक्ति की उपासना के पर्व नवरात्रि के शुभारम्भ पर सभी नागरिकों को हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए उन्होंने कहा कि नवरात्रि के प्रथम दिन से ही, राष्ट्र आत्मनिर्भर भारत अभियान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम आगे बढ़ा रहा है। श्री मोदी ने कहा कि 22 सितंबर को सूर्योदय से ही, देश अगली पीढ़ी के वस्तु और सेवाकर (जीएसटी) सुधारों को लागू करेगा। प्रधानमंत्री ने इस बात पर प्रकाश डाला कि यह पूरे भारत में जीएसटी बचत उत्सव की शुरुआत है। उन्होंने बल देकर कहा कि यह उत्सव बचत को बढ़ाएगा और लोगों के लिए अपनी पसंदीदा वस्तुएँ खरीदना आसान बनाएगा। श्री मोदी ने कहा कि इस बचत उत्सव का लाभ गरीब, मध्यम वर्ग, नव मध्यम वर्ग, युवाओं, किसानों, महिलाओं, दुकानदारों, व्यापारियों और उद्यमियों, सभी को समान रूप से मिलेगा। उन्होंने कहा कि इस त्यौहारी सीज़न में, हर घर में खुशियाँ और मिठास बढ़ेगी। प्रधानमंत्री ने देश भर के करोड़ों परिवारों को बधाई देते हुए अगली पीढ़ी के जीएसटी सुधारों और जीएसटी बचत उत्सव की शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ये सुधार भारत की विकास गाथा को गति प्रदान करेंगे, व्यापार संचालन को आसान बनाएंगे, निवेश को अधिक आकर्षक बनाएंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि विकास की दौड़ में प्रत्येक राज्य समान भागीदार बने।

यह याद करते हुए कि भारत ने 2017 में जीएसटी सुधार की दिशा में अपना पहला कदम उठाया, जिसने देश के आर्थिक इतिहास में एक पुराने अध्याय की समाप्ति और एक नए अध्याय की शुरुआत की, श्री मोदी ने इस बात पर प्रकाश डाला कि दशकों से नागरिक और व्यापारी करों - चुंगी, प्रवेश कर, बिक्री कर, उत्पाद शुल्क, वैट और सेवा कर - देश भर में दर्जनों शुल्कों के बराबर करों के एक जटिल जाल में उलझे हुए थे। प्रधानमंत्री ने बताया कि एक शहर से दूसरे शहर में माल परिवहन के लिए कई जांच चौकियों को पार करना, कई फॉर्म भरना और हर स्थान पर अलग-अलग कर नियमों के चक्रव्यूह से गुजरना पड़ता था। उन्होंने 2014 की एक व्यक्तिगत स्मृति साझा की, जब उन्होंने प्रधानमंत्री के रूप में पदभार संभाला, एक विदेशी समाचार पत्र में प्रकाशित एक उल्लेखनीय उदाहरण का उल्लेख किया। लेख में एक कंपनी के सामने आने वाली चुनौतियों का वर्णन किया गया था, जिसे बेंगलुरु से हैदराबाद - मात्र 570 किलोमीटर की दूरी - तक माल भेजना इतना कठिन लगा कि उसने बेंगलुरु से यूरोप और फिर वापस हैदराबाद अपना माल भेजना पसंद किया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि करों और टोल की उलझनों के कारण ऐसी स्थितियाँ पैदा हुई हैं। उन्होंने दोहराया कि पिछला उदाहरण अनगिनत उदाहरणों में से एक है। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि लाखों कंपनियों और करोड़ों नागरिकों को विभिन्न करों के जटिल जाल के कारण रोज़ाना कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। श्री मोदी ने ज़ोर देकर कहा कि एक शहर से दूसरे शहर तक माल पहुँचाने की बढ़ी हुई लागत अंततः गरीबों को वहन करनी पड़ती है और आम जनता जैसे ग्राहकों से वसूली जाती है।

देश को मौजूदा कर जटिलताओं से मुक्त करना अनिवार्य बताते हुए, श्री मोदी ने याद दिलाया कि 2014 में जनादेश प्राप्त करने के बाद, सरकार ने लोगों और राष्ट्र के हित में जीएसटी को प्राथमिकता दी थी। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि सभी हितधारकों के साथ व्यापक विचार-विमर्श किया गया, राज्यों द्वारा उठाई गई हर चिंता का समाधान किया गया और हर प्रश्न का समाधान निकाला गया। उन्होंने कहा कि सभी राज्यों को एक साथ लाकर, स्वतंत्र भारत में इतना बड़ा कर सुधार संभव हो पाया। प्रधानमंत्री ने कहा कि केंद्र और राज्यों के संयुक्त प्रयासों का ही परिणाम था कि देश विभिन्न करों के जाल से मुक्त हुआ और पूरे देश में एक समान व्यवस्था स्थापित हुई। उन्होंने कहा कि एक राष्ट्र-एक कर का सपना साकार हो गया है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि सुधार एक सतत प्रक्रिया है और जैसे-जैसे समय बदलता है और राष्ट्रीय आवश्यकताएँ विकसित होती हैं, अगली पीढ़ी के सुधार भी उतने ही आवश्यक हो जाते हैं। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि देश की वर्तमान आवश्यकताओं और भविष्य की आकांक्षाओं को ध्यान में रखते हुए, ये नए जीएसटी सुधार लागू किए जा रहे हैं। श्री मोदी ने इस बात पर प्रकाश डाला कि नए जीएसटी ढांचे के अंतर्गत, मुख्य रूप से केवल 5 प्रतिशत और 18 प्रतिशत के कर स्लैब ही रहेंगे। उन्होंने कहा कि इसका मतलब है कि ज़्यादातर रोज़मर्रा की चीज़ें ज़्यादा सस्ती हो जाएँगी। उन्होंने खाने-पीने की चीज़ें, दवाइयाँ, साबुन, टूथब्रश, टूथपेस्ट, स्वास्थ्य और जीवन बीमा जैसी कई वस्तुओं और सेवाओं का वर्णन करते हुए कहा कि या तो अधिकतर वस्तुएं कर-मुक्त होंगी या केवल 5 प्रतिशत कर ही लगेगा। प्रधानमंत्री ने आगे बताया कि जिन वस्तुओं पर पहले 12 प्रतिशत कर लगता था, उनमें से 99 प्रतिशत या लगभग सभी वस्तुएं अब 5 प्रतिशत कर दायरे में आ गई हैं।

प्रधानमंत्री ने पिछले ग्यारह वर्षों में 25 करोड़ भारतीयों के गरीबी से उबरने और देश की प्रगति में प्रमुख भूमिका निभाने वाले नव-मध्यम वर्ग के एक महत्वपूर्ण वर्ग के रूप में उभरने पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस नव-मध्यम वर्ग की अपनी आकांक्षाएँ और सपने हैं। उन्होंने कहा कि इस वर्ष, सरकार ने 12 लाख रुपये तक की आय को कर-मुक्त करके आयकर में राहत का तोहफ़ा दिया है, जिससे मध्यम वर्ग के जीवन में काफ़ी आसानी और सुविधा आई है। श्री मोदी ने कहा कि अब गरीबों और नव-मध्यम वर्ग को लाभ मिलने की बारी है। उन्होंने कहा कि उन्हें दोहरा लाभ मिल रहा है—पहले आयकर में राहत के रूप में और अब कम जीएसटी के माध्यम से। प्रधानमंत्री ने इस बात पर ज़ोर दिया कि जीएसटी की कम दरों से नागरिकों के लिए अपने सपनों को पूरा करना आसान हो जाएगा—चाहे वह घर बनाना हो, टीवी या रेफ्रिजरेटर खरीदना हो, या स्कूटर, बाइक या कार खरीदना हो—अब सब कम खर्च में होगा। उन्होंने आगे कहा कि यात्रा भी अधिक किफायती हो जाएगी, क्योंकि अधिकांश होटल कमरों पर जीएसटी कम कर दिया गया है। श्री मोदी ने जीएसटी सुधारों के प्रति दुकानदारों की उत्साहजनक प्रतिक्रिया पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि वे जीएसटी में कटौती का लाभ ग्राहकों तक पहुँचाने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। प्रधानमंत्री ने इस बात पर बल दिया कि कई जगहों पर, सुधारों से पहले और बाद में कीमतों की तुलना करने वाले बोर्ड प्रमुखता से लगाए जा रहे हैं।

यह रेखांकित करते हुए कि 'नागरिक देवोभव' का मंत्र अगली पीढ़ी के जीएसटी सुधारों में स्पष्ट रूप से प्रदर्शित होता है, प्रधानमंत्री ने इस बात पर प्रकाश डाला कि जब आयकर राहत और जीएसटी कटौती को मिला दिया जाए, तो पिछले वर्ष में लिए गए निर्णयों से भारत के लोगों को 2.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक की बचत होगी। उन्होंने पुष्टि की कि यही कारण है कि वे इसे 'बचत उत्सव' कहते हैं।

इस बात पर बल देते हुए कि विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए आत्मनिर्भरता के मार्ग पर अटूट प्रतिबद्धता की आवश्यकता है, श्री मोदी ने कहा कि भारत को आत्मनिर्भर बनाने की एक बड़ी ज़िम्मेदारी एमएसएमई - भारत के सूक्ष्म, लघु और कुटीर उद्योगों पर है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि जो कुछ भी लोगों की ज़रूरतों को पूरा करता है और देश के भीतर निर्मित किया जा सकता है, उसका उत्पादन घरेलू स्तर पर किया जाना चाहिए।

इस बात पर प्रकाश डालते हुए कि जीएसटी की कम दरें और सरल प्रक्रियाएं भारत के एमएसएमई, लघु उद्योग और कुटीर उद्यमों को महत्वपूर्ण रूप से लाभान्वित करेंगी, प्रधानमंत्री ने कहा कि ये सुधार उनकी बिक्री को बढ़ावा देंगे और उनके कर के बोझ को कम करेंगे, जिसके परिणामस्वरूप दोहरा लाभ होगा। उन्होंने एमएसएमई से अधिक उम्मीदें व्यक्त कीं और समृद्धि के उत्कर्ष के दौरान भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ के रूप में उनकी ऐतिहासिक भूमिका का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत का विनिर्माण और उत्पाद की गुणवत्ता कभी विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त और श्रेष्ठ थी। श्री मोदी ने उस गौरव को पुनः प्राप्त करने की आवश्यकता पर बल दिया। प्रधानमंत्री ने आग्रह किया कि छोटे उद्योगों द्वारा बनाए गए उत्पादों को उच्चतम वैश्विक मानकों को पूरा करना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत के विनिर्माण को गरिमा और उत्कृष्टता के साथ सभी मानदंडों को पार करना चाहिए और भारतीय उत्पादों की गुणवत्ता को देश की वैश्विक पहचान और प्रतिष्ठा को बढ़ाना चाहिए। प्रधानमंत्री ने सभी हितधारकों से इस लक्ष्य को ध्यान में रखकर काम करने का आह्वान किया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि जिस तरह स्वदेशी के मंत्र ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम को सशक्त बनाया, उसी तरह यह राष्ट्र की समृद्धि की यात्रा को भी ऊर्जा प्रदान करेगा। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि कई विदेशी वस्तुएँ अनजाने में ही दैनिक जीवन का हिस्सा बन गई हैं और नागरिकों को अक्सर यह भी पता नहीं चलता कि उनकी जेब में रखी कंघी विदेशी है या स्वदेशी। श्री मोदी ने इस निर्भरता से मुक्ति पाने की आवश्यकता पर बल दिया और लोगों से ऐसे उत्पाद खरीदने का आग्रह किया जो भारत में निर्मित हों और जिनमें देश के युवाओं की कड़ी मेहनत और पसीने की खुशबू हो। उन्होंने आह्वान किया कि हर घर स्वदेशी का प्रतीक बने और हर दुकान स्वदेशी वस्तुओं से सजी हो। प्रधानमंत्री ने नागरिकों को स्वदेशी के प्रति अपनी प्रतिबद्धता —“मैं स्वदेशी खरीदता हूँ,” “मैं स्वदेशी बेचता हूँ” का गर्व से उद्घोष करने के लिए प्रोत्साहित किया। श्री मोदी ने कहा कि यह मानसिकता प्रत्येक भारतीय में अंतर्निहित होनी चाहिए। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि इस तरह के परिवर्तन से भारत के विकास को गति मिलेगी। उन्होंने सभी राज्य सरकारों से अपने क्षेत्रों में पूरी ऊर्जा और उत्साह के साथ विनिर्माण को बढ़ावा देकर और निवेश के लिए अनुकूल वातावरण बनाकर आत्मनिर्भर भारत और स्वदेशी अभियानों का सक्रिय रूप से समर्थन करने की अपील की। उन्होंने कहा कि जब केंद्र और राज्य मिलकर आगे बढ़ेंगे, तो आत्मनिर्भर भारत का सपना साकार होगा, हर राज्य का विकास होगा और भारत एक विकसित राष्ट्र बनेगा। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन के समापन पर जीएसटी बचत उत्सव और नवरात्रि के पावन अवसर की हार्दिक शुभकामनाएँ दीं।

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August 01, 2026

एल्लरिगू नन्ना नमस्कारगलु।

रामकृष्ण मठ और रामकृष्ण मिशनबेलूर मठ के अध्यक्ष परम पूज्य स्वामी गौतमानंद जी महाराज, श्री रामकृष्ण आश्रम, मैसुरू के अध्यक्ष पूज्य स्वामी मुक्तिदानंद जी, रामकृष्ण मठ और रामकृष्ण मिशन के ट्रस्टी पूज्य स्वामी यादवेंद्रानंद जी, राज्यपाल श्री थावरचंद गहलोत जी, मुख्यमंत्री श्री डी.के. शिवकुमार जी, सांसद यदुवीर कृष्णदत्त चामराज वाडियार जी, विधायक विजयेंद्र येदियुरप्पा जी, के. हरीश गौड़ा जी, अन्य महानुभाव, पूज्य संतगण और भाईयों और बहनों।

सर्वप्रथम मैं मैसूरू की अधिष्ठात्री देवी मां चामुंडेश्वरी को प्रणाम करता हूं। अभी दो दिन पहले ही हम सभी ने गुरू पूर्णिमा भी मनाई है। आप सब जानते हैं, मेरी यात्रा जहां से शुरू हुई और आज मैं जहां हूं, इसमें राम कृष्ण मिशन का बहुत अहम योगदान है। मैं तीन महीने पहले हावड़ा में बेलूर मठ गया था। सभी पूज्य संतों से सतसंग करने का अवसर मिला था। मेरा सौभाग्य है कि आज मुझे फिर मैसूरू में श्री रामकृष्ण आश्रम से जुड़े संतों से, मेरे गुरू बंधुओं से मिलने का, उनसे आशीर्वाद लेने का अवसर मिला है। आप सभी की उपस्थिति की वजह से, आज मैसूरू की इस पवित्र भूमि पर मुझे एक अलग ही ऊर्जा अनुभव हो रही है। मैं आप सभी संतों के चरणों में सादर प्रणाम करता हूं।

साथियों,

मैसूरू भारत की अनादि सांस्कृतिक चेतना का केंद्र रहा है। यहां के मंदिर, यहां की परंपराएं और उत्सव, मैसूरू का दशहरा, यहां के भव्य महल, इसका संगीत और साहित्य, भारत की विरासत इस शहर के कण-कण में रची बसी है। और यह देखकर बहुत संतोष मिलता है। इस शहर ने इस विरासत को उसी कुशलता से सहेजा भी है, संवारा भी है। श्री रामकृष्ण आश्रम और स्वामी विवेकानंद जी की स्मृतियां भी मैसुरू की विरासत का ही एक समृद्ध हिस्सा हैं। कुछ देर पहले मैं उस ऐतिहासिक भवन में भी गया था, जहां स्वामी विवेकानंद जी ने अपने प्रवास के दौरान कुछ समय बिताया था। कर्नाटका के कितने ही विद्वान और मनीषी इस स्थान से जुड़े रहे हैं। राष्ट्रकवि कुवेम्पु जैसे महापुरुष जब मैसुरू में थे, उनका भी श्रीरामकृष्ण आश्रम से गहरा जुड़ाव था। आज स्वामी विवेकानंद कल्चरल यूथ सेंटर, यानी विवेका स्मारका के उद्घाटन के जरिए, हम इस मिशन को नया विस्तार दे रहे हैं। इसके लिए मैं श्रीरामकृष्ण आश्रम और इससे जुड़े सभी विद्वानों को हार्दिक बधाई देता हूं।

साथियों,

व्यक्ति से विभूति का निर्माण एकाएक नहीं होता। इसके लिए हमें जीवन की अनगिनत परीक्षाएँ देनी होती हैं। साधना करनी होती है, तप करना होता है, खुद को तपाना पड़ता है, खपाना पड़ता है। ख्याति के बाद तो संसार पीछे खड़ा होता है। लेकिन, तप के समय महान विभूतियों को पहचानना आसान नहीं होता। जो साधक को तपस्या में पहचानता है, वो उसकी सिद्धि का सहभागी भी होता है।

इसलिए भाइयों बहनों,

स्वामी विवेकानंद के जीवन में मैसुरू का इतना अहम योगदान था। करीब 130 वर्ष पहले, स्वामी जी, एक युवा संन्यासी के रूप में भ्रमण करते हुए मैसुरू आए थे। तब उनकी प्रसिद्धि वैसी नहीं थी। लेकिन, विचार उतने ही ऊंचे थे। उस समय उन्हें जिन लोगों ने पहचाना, जो उनके साथ जुड़े, उनमें से एक प्रमुख नाम मैसुरू के तत्कालीन महाराजा का भी था। जब स्वामी विवेकानंद जी अमेरिका में थे, तो उन्होंने वहाँ से मैसुरू के तत्कालीन महाराजा को एक पत्र लिखा था। उसमें उन्होंने स्वयं महाराजा के सहयोग का उल्लेख किया था।

साथियों,

स्वामी विवेकानंद जी ने भारतीय चेतना को आत्मसात किया था। उन्होंने शास्त्रों को आत्मसात किया था जो कहते हैं- “परं परोपकारार्थं यो जीवति स जीवति”। अर्थात्, वास्तव में वही जीता है जो दूसरों के लिए जीता है। इसी मंत्र पर चलते हुए, मैसुरू के इस श्री रामकृष्ण आश्रम ने पिछले वर्ष अपने सौ साल पूरे किए हैं। शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़ी सेवाएँ हों, या प्राकृतिक आपदा में राहत कार्य, श्री रामकृष्ण आश्रम ने स्वामी विवेकानंद जी की विरासत को जीवंत रखा है। मुझे विश्वास है विवेका स्मारका साधकों और श्रद्धालुओं के लिए आत्मिक उत्थान का तीर्थ बनेगा। स्वामी विवेकानंद जी की प्रेरणा थी- ‘शिव ज्ञाने जीव सेवा’। यानी जीव की सेवा ही शिव की सेवा है। हमें इस विवेका स्मारक में इसलिए, ऐसे युवाओं को गढ़ना है, जिनके लिए समाज और राष्ट्र के हित, गरीब-वंचित के दुःख, अपने सुख-दुःख से ऊपर हों। जिन युवाओं के लिए राष्ट्र प्रथम ही सर्वोपरि मंत्र हो, मां भारती की सेवा ही जिनका जीवन लक्ष्य हो।

साथियों,

स्वामी विवेकानंद जी युवाओँ की शिक्षा को राष्ट्र निर्माण का मजबूत आधार मानते थे। उन्होंने स्वयं ये देखा था कि कैसे दुनिया के देश अपने युवाओं को शिक्षित बना रहे हैं। लेकिन दुर्भाग्य से तब भारत गुलाम था। भारत के युवा भी गुलामी की जंजीरों में जक़ड़े हुए थे। उस दौर से लेकर अब तक, भारत के युवा ने एक लंबी यात्रा तय की है। भारत का जो युवा कभी जंजीरों में था, आज वो युवा दुनिया के विकास को गति दे रहा है।

· आज भारत की अर्थव्यवस्था, सबसे तेजी से आगे बढ़ रही है।

· किसकी वजह से? भारत के युवाओँके सामर्थ्य से।

· आज भारत में दुनिया की तीसरा सबसे बड़ा स्टार्ट-अप इकोसिस्टम है।

· किसकी वजह से? भारत के युवाओँ के सामर्थ्य से।

· आज भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन निर्माता बन चुका है।

· किसकी वजह से?

· भारत के युवाओं के सामर्थ्य से।

· आज भारत से बने Digital Solutions, दुनिया के अनेक देशों के लिए प्रेरणा बन रहे हैं।

· किसकी वजह से?

· भारत के युवाओं के सामर्थ्य से।

· आज भारत सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग की नई यात्रा पर तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।

· किसकी वजह से?

· भारत के युवाओं के सामर्थ्य से।

· आज भारत AI, Deep Tech, Space Technology और Innovation के नए अध्याय लिख रहा है।

· किसकी वजह से?

· भारत के युवाओं के सामर्थ्य से।

अभी कुछ दिन पहले ही हमने देखा है, भारत के युवाओं ने अंतरिक्ष में कमाल कर दिया है। पहली बार युवाओं का बनाया हुआ एक प्राइवेट कंपनी का रॉकेट, अंतरिक्ष तक पहुंचा है। आज कोई भी सेक्टर हो, भारत युवा अपना दम-खम दिखा रहा है। हम सभी अपने आसपास देख रहे हैं, आज छोटे से छोटे व्यवसाय में लगा युवा, भारत की डिजिटल इकॉनमी को आगे बढ़ा रहा है। वो मुद्रा लोन के जरिए नई शुरुआत कर रहा है। वो देश की स्टार्टअप revolutionको लीड कर रहा है। आत्मनिर्भर भारत का अभियान हो, मेक इन इंडिया का अभियान हो, इसकी सफलता के पीछे भारत के युवाओं की ही ताकत है।

साथियों,

किसी भी देश में, युवाओं का सामर्थ्य तभी उस राष्ट्र की शक्ति बनता है, जब उसे सही अवसर मिले, जब उसे सही दिशा मिले, और जब उसे अपनी ही धरती पर बड़े सपने देखने, उन्हें पूरा करने का भरोसा मिले। और इसमें बहुत बड़ी भूमिका हमारे शिक्षा संस्थानों की होती है। मुझे खुशी है कि आज भारत में शिक्षण संस्थाओँ की संख्या लगातार बढ़ रही है। पिछले 12 वर्षों में, 650 से ज्यादा नई यूनिवर्सिटीज बनी हैं। पिछले 12 वर्षों में करीब 14 हजार नए कॉलेज बने हैं। 4 हजार से ज्यादा नई ITI बनाई गई हैं। 9 नए आई.आई.एम, 7 नई आई.आई.टी, और13 नए एम्स भी स्थापित किए गए हैं। आज देश में MBBS की सीटें करीब 1 लाख 40 हजार हो चुकी हैं। मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़कर 823 हो गई है।

साथियों,

एक ओर हम एजुकेशन इनफ्रास्ट्रक्चर को modernize कर रहे हैं। साथ ही, शिक्षा व्यवस्था को भी आधुनिक जरूरतों के हिसाब से ढाला जा रहा है। नेशनल एजुकेशन पॉलिसी, भारत के युवाओँ को 21वीं सदी के अनुरूप तैयार करने का माध्यम बन रही है।

साथियों,

स्कूली शिक्षा में भी बड़े स्तर पर काम हुआ है। देशभर में 14 हजार से ज्यादा पीएम श्री स्कूल विकसित किए गए हैं। शिक्षा केवल किताबी न रहे, बच्चों में इनोवेशन और साइंटिफिक टेंपरामेंट विकसित हो, इसके लिए,10 हजार से ज्यादा अटल टिंकरिंग लैब्स स्थापित हुई हैं।

साथियों,

स्वामी विवेकानंद जी, राष्ट्र उत्थान के लिए शिक्षा के साथ-साथ समानता को भी उतना ही अहम मानते थे। शिक्षा में भेदभाव न हो, अवसरों में भेदभाव न हो, आज ये देश का विज़न बन गया है। आज बेटियाँ भी सैनिक स्कूलों में एड्मिशन ले रहीं हैं। एनडीए में बेटियां राष्ट्र के लिए योगदान दे रही हैं। आज मेडिकल और इंजीनियरिंग जैसी पढ़ाई मातृभाषा में करने की सुविधा हो गई है। इससे, भाषा के आधार पर अवसरों में होने वाले भेदभाव पर लगाम लग रही है।

साथियों,

युवा शक्ति का स्वस्थ, अनुशासित और आत्मविश्वास से भरे रहना उतना ही जरूरी है। जो देश खेलों को महत्व देते हैं, वहां के युवाओं में इन तीनों गुणों का तेजी से विकास होता है। इसलिए आज खेलों को राष्ट्र निर्माण की एक महत्वपूर्ण धारा के रूप में देखा जा रहा है। खेलो इंडिया यूथ गेम्स, यूनिवर्सिटी गेम्स, पैरा गेम्स और विंटर गेम्स जैसे आयोजनों ने देशभर के युवाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने का मंच दिया है। आज देशभर में आधुनिक स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार हो रहा है, खेलो इंडिया सेंटर के माध्यम से सुविधाएं बढ़ रही हैं, गांवों से लेकर छोटे शहरों तक नई प्रतिभाओं की पहचान की जा रही है।

और साथियों,

आज इस अभियान के परिणाम भी साफ - साफ दिखाई दे रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं में भारत का प्रदर्शन बेहतर होता जा रहा है। हमारे खिलाड़ी नए-नए कीर्तिमान बना रहे हैं, हमारी बेटियां देश का गौरव बढ़ा रही हैं।

साथियों,

स्वामी विवेकानंद जी की तरह, हमें विवेका स्मारका, बड़े उद्देश्य के लिए कार्य करने की प्रेरणा देता है। ऐसे स्थान पर मैं हमारे युवाओं से कुछ आग्रह करना चाहता हूं।

साथियों,

मैसुरू को अक्सर भारत के सबसे स्वच्छ शहरों में स्थान मिला है। मैं इसके लिए यहां के लोगों को हृदय से बधाई देता हूं। क्या इस अवसर पर हम ये संकल्प ले सकते हैं, कि भविष्य में स्वच्छता के संकल्प को निरंतर मजबूत करते रहेंगे। हमें यहाँ की प्राकृतिक संपदाओं को संरक्षित करना चाहिए। हमें पर्यावरण से जुड़े संकल्प लेने चाहिए। हमें पानी की हर बूंद बचाने के लिए मिशन मोड में काम करना होगा।

साथियों,

आज ही यहां ‘वाल्मीकि रामायण’ के कन्नड़ा अनुवाद का विमोचन भी हुआ है। मैं कन्नड़ा भाषा से जुड़ी एक अपील भी करना चाहता हूं। कर्नाटका महान लेखकों और कवियों की धरती है। कन्नड़ा भाषी लोग हमेशा से पढ़ने की संस्कृति के लिए जाने जाते हैं। स्मार्टफोन के इस युग में इस स्वभाव को और बढ़ावा मिलना चाहिए। क्या हम युवा पीढ़ी को कन्नड़ा साहित्य से गहराई से जुड़ने के लिए प्रेरित कर सकते हैं।

साथियों,

मैसुरू अपने सिल्क, चंदन और हस्तशिल्प के लिए प्रसिद्ध है। जब भी हम किसी को उपहार दें, तो क्या हम ये सुनिश्चित कर सकते हैं कि वो किसी भारतीय के हाथों और पसीने से बनी चीज हो? इससे हमारी संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा, साथ ही, एक और परिवार को आर्थिक सहायता भी मिलेगी।

साथियों,

स्वामी विवेकानंद जी ने जिस तरह के भारत का सपना देखा था, उसे पूरा करने का दायित्व आज की पीढ़ी पर है। मुझे विश्वास है, विवेका स्मारका इसके लिए एक ऊर्जा स्रोत का काम करेगा। मैं एक बार फिर, यहां एकत्र पूज्य संतजनों गुरू बंधुओं और मैसुरू के लोगों को नमन करते हुए मेरी वाणी को विराम देता हूं। आप सबका बहुत-बहुत धन्यवाद।