Swami Vivekananda an inspiration for all youth and a shining example of how much could be accomplished in a short time-span: PM Modi 
Earlier people were inspired to die for the nation. Today it is about living for the nation & doing something for India: PM
The 125 crore people are united in an objective of taking the nation to new highs: PM Narendra Modi
Entire world is looking at India with so much hope because India is a land of opportunities: PM Modi
A youth is one who works towards his future goals, unmindful of the past: Prime Minister Modi
Without peace, unity and harmony, development cannot have any meaning: PM Narendra Modi
India has shown the world, that a land of such diversity, has a unique spirit to stay together: PM Modi
India's objective is to give youth the opportunities to make this century an Indian century: PM
If India can be a manufacturing hub, it is not because we have a market or raw materials...it is because we have skilled youngsters: PM
“Dignity of labour” must be inculcated among people: PM Narendra Modi
Development is about transforming the lives of the poor: Prime Minister Modi

भारत के कौने –कौन से आए मेरे नौजवान साथियों।

आज 12 जनवरी स्‍वामी विवेकानंद जी की जन्‍म जयंती हम युवा दिवस के रूप में मनाते हैं। इस देश में दो महापुरूषों को इस देश का युवा विशेष रूप से नमन करता रहा है। अगर कोई हमारे सामने भगत सिंह का नाम लें या कोई हमें स्‍वामी विवेकानंद की याद दिला दें तो उसी पल हमारा माथा उन महापुरूषों के चरणें में झुक जाता है। बहुत ही छोटी आयु में कोई क्‍या कर सकता है। अगर जीवन में संकल्‍प का सामर्थ्‍य हो, संकल्‍प के लिए समर्पित भाव हो और जीवन आहूत करने की अदम्‍य इच्‍छा हो, तो व्‍यक्ति के लिए उम्र कोई मायना नहीं रखती। मेरे सामने देश के हजारों युवक बैठे हैं, वो हिंदुस्‍तान के कौने-कौने से आए हैं। उनका लालन-पालन अलग-अलग हुआ है। उनकी खान-पान की आदतें अलग है, उनकी बोली अलग है, उनका पहनाव अलग है, लेकिन उसके बावजूद भी ये सारे नौजवान इस एक बात से जुड़े हुए हैं। उनके मन मंदिर में एक मंत्र लगातार गूंजता रहा है। और वह ही हम सब की प्रेरणा है। और वो मंत्र क्‍या है? आजादी के आंदोलन के समय जिस वंदे मारतरम की गूंज ने कश्‍मीर से कन्‍या कुमारी अटक से कटक पूरे हिंदुस्‍तान को आजादी के आंदोलन में पिरो दिया है। एक मंत्र होता है जो जीवन में कुछ कर दिखाने की प्रेरणा बन जाता है। आज वही मंत्र चाहे उसको भारत मां की जय के रूप में कहते हो, चाहे वंदे मातरम के रूप में कहते हो। पहले मां भारती को गुलामी की जंजीरों से मुक्‍त कराने के लिए वो हमारी ताकत बन गया था। और आज आजाद हिंदुस्‍तान में भारत को नई ऊचाईयों पर ले जाने के लिए, विकास की नई ऊंचाईयों को सिद्ध करने के लिए, समस्‍याओं से मुक्ति दिलाने के लिए, हिंदुस्‍तान के गांव, गरीब किसान, मजदूर उनके जीवन में बदलाव लाने के लिए यही मंत्र हमारी प्रेरणा बनता है। पहले देश के लिए मरने की प्रेरणा देता था। आज वही मंत्र हमें देश के लिए जीने की प्रेरणा देता है। और आप सब नौजवान अपने लिए नहीं, देश के लिए कुछ करने के इरादे से किसी न किसी संकल्‍प से बंधे हुए हैं। आप कुछ करना चाहते हैं। और यह देश प्रगति तब करता है जब सवा सौ करोड़ देशवासी किसी न किसी संकल्‍प से बंधे हो। उस संकल्‍प की पूर्ति के लिए कुछ कदम चलने के लिए प्रयासरत हो। मंजिल को पाने के लिए अविरत कोशिश करते हो, तो देश अपने आप उस मंजिलों को पार कर जाता है।

आज पूरे विश्‍व का परिवेश देखे पूरा विश्‍व आज भारत की तरफ एक बड़ी आशा भरी नजर से देख रहा है। क्‍यों ? इसलिए कि हिंदुस्‍तान एक संभावनाओं का देश है। आपार अवसर जहां इंतजार कर रहे हैं। दुनिया इसलिए हिंदुस्‍तान की तरफ देख रही है, क्‍योंकि आज हिंदुस्‍तान विश्‍व का सबसे युवा देश है। 65 प्रतिशत जनसंख्‍या 35 से कम आयु की हो, वो देश कितना सौभाग्‍यशाली है कि जिसके पास कोटि-कोटि युवा लोग हैं। और जहां युवा होता है, वहां संकल्‍पों की कोई मर्यादाएँ नहीं होतीं, सीमाएँ नहीं होतीं। कभी-कभार हमारे देश में युवा की परिभाषा को लेकर अलग-अलग हमें बातें सुनने को मिलती है। शासत्रों से ले करके अब तक युवा की परिभाषा बहुत हो चुकी है। हर किसी का अपना नजरिया होता है। कुछ लोगों के लिए उम्र का दायरा यह युवा की पहचान के रूप में माना जाता है। मैं कभी-कभी सोचता हूं कि युवा यह परिस्थिति का नाम नहीं है। युवा यह मनस्थिति का नाम है। मनस्थिति है, जो युवा की परिचायक होती है। जब कोई व्‍यक्ति अपने बीते हुए पल को बार-बार याद करता है, दोहराता रहता है तो मैं यह सीधा-सीधा अर्थ निकालता हूं कि वो अपनी युववाणी खो चुका है। वो बुढ़ापे की आरे चल चुका है। लेकिन जो बीते हुए कल को बार-बार दोहराने की बजाय आने वाले कल के सपने संजोता रहता है, वो उसके लिए मेरा मन हमेशा कहता है वो सच्‍चे अर्थ में युवा है। अगर आप अपने आप को युवा मानते हो तो युवा वो है जो बीते हुए कल की बातों को दोहरा करके अपने समय को बर्बाद नहीं करता है, लेकिन जो आने वाले सपनों को संजोने के लिए पल-पल प्रयास करता है और हर सपने को साकार करने के लिए अपने आप को खपा देता है।

देशभर से आए हुए युवा उन सपनों का सम्‍पुट है। हम देशभर के लोग विविधताओं के बीच यहां बैठे हैं, क्‍या कारण है। वो कौन सा कारण हमें जोड़ रहा है। सद्भावना यह अपने आप में एक बहुत बड़ी शक्ति होती है। क्‍या हमारे अंदर एक दूसरे के प्रति आदर-भाव न होता, सद्भाव न होता। अपनेपन का कोई नाता न होता, तो हम इतनी अपने आप से जुड़ सकते? भारत विकास करना चाहता है और इस बार आपकी इस युवा परिषद का विषय भी बड़ा महत्‍वपूर्ण है। एक तरफ व्‍यक्ति का, उसके सामर्थ्‍य का और युवा से जुड़े हुए विषय को ले करके आया है उसका एक पहलू है skill, दूसरा है भारत का क्‍या हो तो कहते है विकास। और तीसरी बात आपने कही है कैसे हो तो वो है सद्भाव। क्‍या, क्‍यों, कैसे? इस बात को ले करके इस समारोह को आप चार दिन चर्चा के लिए आज प्रारंभ कर रहे हैं। अगर हमारे देश में एकता नहीं होगी, जन-जन के प्रति सद्भाव नहीं होगा, आदर भाव नहीं होगा, दूसरे की परंपराएं, दूसरे के विचार, उसके प्रति अगर सम्‍मान का भाव नहीं होगा, तो शायद भारत को प्रगति में रुकावटें आएंगी, विकास में रुकावटें आएंगी और इसलिए समय की मांग है और हर नौजवान के जीवन का एक व्‍यवहार है कि हम शांति, एकता, सद्भावना, जो भारत जैसे विविधताओं से भरे हुए देश के लिए प्रगति की गारंटी है। भारत के पास सब कुछ हो, धन हो, दौलत हो, बेशुमार पैसे हों, हर नौजवान को नौकरी हो, हर परिवार में सुख और सम्‍पन्‍नता हो, लेकिन, लेकिन अगर देश में शांति, एकता और सद्भावना नहीं होगी, तो वो सारी सम्‍पत्ति किसी के काम नहीं आएगी। न वो देश का गौरव बढ़ाएगी, न आने वाली पीढि़यों के लिए भविष्‍य का कोई रास्‍ता बनाएगी। और इसलिए हम विकास कितना ही करें, कितनी ही ऊंचाइयों को पार करें, लेकिन शांति, एकता और सद्भावना, ये भारत की पहली आवश्‍यकता रहती है।

और भारत ने दुनिया को दिखाया है कि जिस देश के पास सैंकड़ों बोलियां हो, अनेक भाषाएं हों, अनेक परम्‍पराएं हों, अनगिनत विविधिताएं हों, उसके बाद भी साथ जीने-मरने का स्‍वभाव हो, ये हमारी बहुत बड़ी विरासत हैं जो हमारे पूर्वजों ने हमें दी हैं, स्‍वामी विवेकानंद जैसे महापुरुषों ने दी हैं और इसे हमने संजो के रखना है।

वेद से विवेकानंद तक और उपनिषद से उपग्रह तक हम इसी परम्‍परा में पले-बढ़े हैं। उस परम्‍पराओं को बार, बार, बार, बार स्‍मरण करते हुए, संजोते हुए भारत को एकता के सूत्र में बांधने के लिए सद्भावना को सेतु उसको हम जितना बल दें, देते रहना होगा।

उसी प्रकार से अगर व्‍यक्ति के जीवन में सामर्थ्‍य नहीं होगा तो राष्‍ट्र के जीवन में सामर्थ्‍य कहां से आएगा? 21वीं सदी एशिया की सदी है कहते हैं, 21वीं सदी हिदुस्‍तान की सदी बन सकती है कैसे? जब हम, हमारे देश के युवा शक्ति के समार्थ्‍य को पहचानेंगे। विकास यात्रा में उसको पिरोयें और विकास की ऊंचाइयों को पार करने के लिए उसे हम अपना भागीदार बना लें। तब जा करके, तब जा करके हम राष्‍ट्र के सपनों को पूरा कर सकते हैं। अनेक मार्ग हैं, उसमें एक महत्‍वपूर्ण मार्ग है हुनर, skill development, हमारे देश के नौजवान के हाथ में सिर्फ कागज और कलम होगी तो देश आगे नहीं बढ़ सकता है। अपार ज्ञान का भंडार तो हो ही हो, कागज और कलम का सामर्थ्‍य तो हो ही हो, लेकिन देश को आगे बढ़ने के लिए हुनर चाहिए, skill चाहिए, बदले हुए युग में जहां technology एक महत्‍वपूर्ण रोल अदा कर रही है, भारत के एक manufacturing hub बनने की संभावना है। अगर भारत दुनिया का एक manufacturing hub बन सकता है तो उसका पहला कारण ये नहीं है कि हमारे पास raw material है, पहला कारण ये नहीं है कि हमारे पास market है, पहला कारण ये नहीं है कि हमारी आवश्‍यकता है, पहला कारण ये है कि हमारे देश के पास, नौजवानों के पास अगर हुनर है तो वो सबसे बड़ी ताकत है। और इसलिए हमारी सरकार ने skill को, हुनर को बहुत महत्‍व दिया है।

देश की आजादी के बाद पहली बार skill development एक अलग ministry बनाई गई, skill development की अलग policy बनाई गई, skill development के लिए अलग बजट बनाया गया और हिन्‍दुस्‍तान में एक ऐसी जाल बिछाने की कोशिश है कि गरीब से गरीब व्‍यक्ति, अनपढ़ से अनपढ़ व्‍यक्ति भी अपने जीवन में कुछ करने के लिए इच्‍छा करता है तो उसको सीखने का अवसर मिलना चाहिए, उसके हाथ में कोई हुनर होना चाहिए और वो हुनर को प्राप्‍त कराने के लिए सरकार पुरजोर प्रयास कर रही है।

हमारे छत्‍तीसगढ़ में रमन सिंह जी ने तो skill को एक अधिकार के रूप में develop किया है। उन्‍होंने कानूनी व्‍यवस्‍था का प्रयास किया है। मैं पिछली बार जब छत्‍तीसगढ़ आया था तो skill development किस प्रकार के उन्‍होंने काम की रचनाएं की हैं उसको मैंने अपनी आंखों से देखा। जहां नक्‍सलवाद, नौजवानों को गुमराह करने के लिए भरपूर कोशिश करता है, उसी इलाके में, उसकी छाती पर, skill development के द्वारा सपनों को संजोने के प्रयास छत्‍तीसगढ़ में हो रहे हैं। ये बधाई के पात्र हैं। और जब आप छत्‍तीसगढ़ में हैं तो आपको बहुत सी बातें सुनने को मिलेंगी कि नौजवानों के विकास के लिए क्‍या-क्‍या वहां हो रहा है।

मैं ये ही आपसे कहना चाहता हूं कि हम भी इस बात को ले करके आगे बढ़ना चाहते हैं कि देश में skill development को कैसे बल दिया। skill development से मैं एक बात आप नौजवानों से कहना चाहता हूं, दुर्भाग्‍य से हमारे देश में हम लोगों ने एक ऐसी मनस्थिति बना ली है जो दिमाग से काम करता है वो बड़ा है और जो हाथ से काम करता है वो छोटा है। इस मनस्थिति को बदलना पड़ेगा। हम हमारी मां का इतना सम्‍मान करते हैं, मां का आदर करते हैं, हमारी मां कहा है। बहुत कम लोग होंगे जिसकी मां को दिमाग से काम करने का अवसर मिला है। बाकी सब लोग हम ऐसे हैं जिनकी मां हाथ से काम करती है, कपड़े धेाती हैं, खाना पकाती है, झाड़ू लगाती है, और उस मां का हम सम्‍मान करते हैं, मां का गौरव करते हैं। लेकिन समाज में हाथ से काम करने वाला हमें छोटा लगता है, बढि़या कपड़े पहन करके टेबल-कुर्सी पर बैठा हुआ बाबू हमें बड़ा लगता है, लेकिन हमें कोई ऑटो-रिक्‍शा का ड्राइवर हमें छोटा लगता है। कोई plumber, कोई mechanic , कोई turner, कोई fitter, कोई wireman, कोई फूलों का गुलदस्‍ता बनाने वाला, ये हमें छोटे लगते हैं, हमारी ये मानसिकता हमें बदलनी होगी। हमें उनके प्रति भी सद्भाव पैदा करना होगा और सद्भाव तब होगा जब शुरूआत समभाव से होगी। मेरे में और उसमें कोई अन्‍तर नहीं है, हमारे और उसके बीच में एक समभाव है। जब समभाव होगा तो सद्भाव अपने-आप पनपने लग जाएगा और इसलिए white caller job and blue caller job, ये शब्‍द हमारे यहां चल रहे हैं। जो अपने पैरों पर खड़ा है। जो अपने पैरों पर खड़ा है। जो अपने हाथ की ताकत से अपनी जिंदगी बनाता है। जिसकी उंगलियों में नया करने का दम होता है। उससे बड़ा गौरव करने के लिए क्‍या हो सकता है। और इसलिए हम skill development पर बल देना चाहते हैं। हम समाज में एक मनोवैज्ञानिक बदलाव लाना चाहते हैं। कोई काम छोटा नहीं होता और इसलिए हमने एक movement चलाया है। श्रम एव जयते। dignity of labor हम बल दे रहे हैं उस पर और इसलिए कभी-कभी क्‍या लगता है। कितना ही गरीब व्‍यक्ति हो, उसके मन में मनोवैज्ञानिक प्रभाव पैदा हो गया है कि जब तक बेटा graduate नहीं होता, मां-बाप को भी संकोच होता है कि कोई रिश्‍तेदारों को परिचय क्‍या करवाएं। और इसलिए उसको लगता है कि graduate होना बहुत अनिवार्य है। लेकिन क्‍या सातवीं कक्षा पास, 10वीं कक्षा पास बेटा ITI में गया हो। और Technically बड़ा सामर्थ्‍यवान हो तो उनको संकोच होता है, परिचय करवाने में। यह psychology को बदलना है। यह आवश्‍यक नहीं है कि हमारे पास graduate होने का प्रमाण पत्र हो और बेरोजगारी की जिंदगी हो। हम सातवीं क्‍यों न पास हो, 10वीं पास क्‍यों न हो, हमारे हाथ में हुनर होना चाहिए और अपने पसीने से पैसों को पैदा करने की ताकत होनी चाहिए। ऐसे समाज की अवस्‍था होनी चाहिए और इसलिए नौजवानों में बल देने का प्रयास हम कर रहे हैं। हम विकास की ओर जाना चाहते हैं। और विकास का मेरा सीधा-सीधा मतलब है। देश के गरीबों की जिंदगी में बदलाव, हिंदुस्‍तान के गावों की जिंदगी में बदलाव। गांव में अच्‍छी शिक्षा हो, गांव में अस्‍पताल हो, बच्‍चों को पढ़ने के लिए अच्‍छा टीचर हो। बूढ़े अगर बीमार हैं तो अच्‍छा डॉक्‍टर हो। सस्‍ती दवाइयां हो, रहने के लिए अच्‍छा घर हो। गांव में आने-आने के लिए अच्‍छे रास्‍ते हो, पीने के लिए शुद्ध पानी हो। आजादी के इतने सालों के बाद भी हम इसको पूरा नहीं कर पाए हैं और उसको पूरा करना हमारा एक दायित्‍व है। और विकास, यही विकास है। विकास यानी यह नहीं है कि हम कितने बड़े-बड़े भवन बनाते हैं। और कितनी बड़ी संख्‍या में बाबूओं को तैयार करते हैं। और इसलिए हमारा विकास का मॉडल सामान्‍य मानव की जिंदगी में बदलाव लाना है। और सामान्‍य मानव की जिंदगी में बदलाव लाने के लिए हमने skill development को महत्‍व दिया है।

आने वाले दिनों में चार दिन के बाद 16 तारीख को हमें एक कार्यक्रम को लॉन्‍ज कर रहे हैं – Startup India Standup India हमारे देश के नौजवानों के पास कल्‍पकता के वो धनी है, अनेक नई चीजों की उनके पास सोच है, समस्‍याओं के समाधान के लिए वो रास्‍ते खोजते हैं। हमारे यहां गांव में हमने देखा होगा खेत में काम करने वाला व्‍यक्ति भी अपने आप Technology develop कर देता है और उस Technology से अपना काम कर लेता है। अपनी एक ही मोटर साइकिल होगी, उस मोटरसाइकिल से दस प्रकार के काम लेना गांव का आदमी जानता है। इसका मतलब कि हमारे पास innovative सोच, innovation यह भारत के पास हैं। लेकिन उसे प्रतिष्‍ठा कैसे मिले, पुरस्‍कार कैसे मिले, प्रोत्‍साहन कैसे मिले, आगे बढ़ने के लिए रास्‍ता कैसे मिले। उस दिशा में सरकार एक गंभीरता से सोच करके उस योजना को लागू कर रही है। 16 तारीख को जब यह बड़ा कार्यक्रम होगा आप भी अपने-अपने इलाके में कहीं पर वीडियो कॉनफ्रेंस के द्वारा अगर इस कार्यक्रम में शरीक होते हैं, तो आपने शरीक होने का प्रयास करना चाहिए। और skill development का next stage होता है Startup India उसी प्रकार से सरकार ने मुद्रा योजना घोषित की है। प्रधानमंत्री मुद्रा योजना।

हमारे देश में बहुत लोग हैं जिनके पास कुछ करने की इच्‍छा है। लेकिन पैसों के आभाव में कर नहीं पाते। वो unfunded है। बैंकों के दरवाजे उनके लिए खुले नहीं थे। हमने बदलाव लाया और बैंकों के दरवाजों को खोल दिया।

बैंकों को, दरवाजों को खोल करके मुद्रा योजना के तहत उन नौजवानों को पैसे देने का प्रयास शुरू किया है और मुझ खुशी है कि बहुत ही कम समय में ये जो योजना बनाई गई, प्रधानमंत्री मुद्रा योजना, करीब-करीब दो करोड़ लोगों को बैंक से बिना कोई गारंटी, पैसे दिए गए। इतने कम समय में बैंकों के द्वारा दो करोड़ लोगों को पैसे मिल रहा है और करीब-करीब 80 हजार करोड़ रुपये नौजवानों के हाथ में रख दिए हैं। नौजवानों पर मेरा भरोसा है। देश की युवा शक्ति पर भरोसा है। देश के सपने अगर कहीं पर निवास करते हैं तो देश के युवा दिलों में रहते हैं। और इसलिए उस पर हमने ध्‍यान केंद्रित किया है। मैं चाहता हूं कि जो लोग कुछ कर गुजरना चाहते हैं, वे नौकरी की तलाश क्‍यों करें, अपने पैरों पर खड़े क्‍यों न हों। मैं नहीं चाहता हूं मेरे देश का नौजवान job seeker बने, मैं चाहता हूं मेरे देश का नौजवान job creator बने। मैं ऐसी जिंदगी जिऊंगा कि दो-चार और पांच लोगों को मैं कोई न कोई रोजगार दूंगा, ये भी हमारा सपना होना चाहिए। मैं रोजगार के लिए तड़पने वाला नौजवान नहीं हो सकता हूं, मैं रोजगार देने वाला एक साहसिक नौजवान हो सकता हूं। और ये ही तो जिंदगी का लक्ष्‍य होना चाहिए कि मैं ओरों के लिए कुछ कर सकता हूं। और एक बार ये सपना ले करके चलोगे तो कर भी पाओगे। और इसलिए आप अगर उस बात को ले करके चलते हैं तो मेरा आपसे अनुरोध है, मैं आपको विश्‍वास दिलाना चाहता हूं, मैं आपके साथ हूं। ये सरकार आपके साथ है, ये पूरा हिन्‍दुस्‍तान आपके साथ है। आप उस लिए सपने संजो करके ले करके निकलिए। और इसीलिए skill development का अपना एक महत्‍व है, start-up India, stand up India का महत्‍व है, प्रधानमंत्री मुद्रा योजना का महत्‍व है।

मैंने अभी एक स्‍वच्‍छता का अभियान चलाया है। 15 अगस्‍त को मैंने लालकिले से कहा था, लेकिन मैं आज गर्व से कह सकता हूं कि वो स्‍वच्‍छता अभियान किसी प्रधानमंत्री का अभियान नहीं है, वो नरेंद्र मोदी का अभियान नहीं है। देश के हर नागरिक ने इसको अपना बना लिया है। हर कोई उसमें कुछ न कुछ करना चाहता है। अभी मैंने कहा 26 जनवरी को हमारे महापुरुषों के जितने statue हैं, उसकी सफाई एक नागरिक के नाते हम क्‍यों न करें? और मेरे पास खबरें हैं कि देश भर में इतने नौजवान आगे आए हैं, इतने स्‍कूल कॉलेज आगे आए हैं, इतने संगठन आगे आए हैं, even मुझे बताया गया नेहरू युवा केंद्र हो, NCC हो, NSS हो, ये सब लोग मैदान में आए हैं। सबने तय कर लिया है कि अब हमारे गांव में महापुरुषों के statue और वो परिसर हम गंदा नहीं रहने देंगे। कुछ लोगों ने तो 26 जनवरी का भी इंतजार नहीं किया है और already काम शुरू कर दिया है। यही तो देश की ताकत होती है। लेकिन पहला एक समय था, हम सब देखते थे हां ये महापुरुष की प्रतिमा है, फिर बात भी करते देखो यार कितना गंदा है, कोई संभालता नहीं है। आज, आज हर कोई चर्चा करता है, यार ये हमारे गांव के अंदर ये छह महापुरुषों के पुतले हैं उसकी सफाई हम करेंगे। एक नया माहौल बना है। नेहरू युवा केंद्र के और NSS के नौजवानों ने इसका बीड़ा उठाया है। मुझे विश्‍वास है बहुत बड़ी सफलता मिलेगी।

इस बार आप पिछले करीब 20 साल से ये समागम करते आए हैं, मेरी आपसे आग्रह है, मेरा आपसे अनुरोध है, इस बार जाने से पहले आप 2019 का कोई संकल्‍प ले करके जा सकते हैं क्‍या और 2019 तक हम इतना करेंगे। मैं 2019 इसलिए कह रहा हूं कि 2019 महात्‍मा गांधी की 150वीं जयंती है। महात्‍मा गांधी को स्‍वच्‍छता बहुत पसंद थी। 2019 तक का हमारा कोई time table बना करके हम जा सकते हैं क्‍या। और हम हर महीने उसका लेखा-जोखा लें, हिसाबा-किताब करें, संकल्‍प तय करें, योजना बनाएं, रोडमैप बनाएं और आंखों को दिखने वाला परिवर्तन ला करके रहें और दूसरा सपना 2022 का हम लें।

एक 2019 का हमारा रोडमैप और दूसरा 2022 का रोडमैप हम लें। 2022 इसलिए कि भारत की आजादी के 75 साल हो रहे हैं। हिंदुस्‍तान की आजादी के 75 साल हम कैसे मनाएंगे। अभी से हम कैसी तैयारियां करेंगे। हम अपने आप को उसके लिए उसको कैसे तैयार करेंगे। हमारी अपनी संस्था हो, हमारा परिवार हो, हम व्‍यक्ति हो, हम खुद क्‍या कर सकते हैं। इस पर हम सोचते हैं। और इसलिए रायपुर से आप जब निकले तब 2019 और 2022 कोई न कोई लक्ष्‍य निर्धारित करके उसका रोडमैप तय करके निकलिए । उसके लिए कौन समय देगा, कितने घंटे देगा। यह संकल्‍प ले करके चलिए। उसी प्रकार से मैं विशेष रूप से नौजवानों का एक बात के लिए आभार व्‍यक्‍त करना चाहता हूं कि आज के इस युवा समारोह के लिए मैंने देश के नौजवानों को आग्रह किया था कि आप मुझे नरेंद्र मोदी एप आप मोबाइल पर उसको download कर सकते हैं। नरेंद्र मोदी एप पर अपने सुझाव भेजिए। मुझे इस बात का गर्व है कि देश के हर कौने से हजारों नौजवानों ने मुझे हजारो सुझाव भेजे। देश का नौजवान कितना जागरूक है और नरेंद्र मोदी एप मेरे लिए एक सरल माध्‍यम बन गया है कि मैं सीधे आपसे जुड़ जाता हूं। मैं उन सभी नौजवानों का अभिनंदन करना चाहता हूं, जिन्‍होंने समय निकाल करके, सोच करके देश के काम आने के लिए अपने विचारों से मुझे लाभान्वित कराया। हजारों नौजवानों ने मुझे सुझाव भेजे, मैं उन सबका आभारी हूं।

26 जनवरी मैंने देश के सामने, देश के नौजवानों के सामने एक विषय रखा है और आग्रह किया है कि हमारे यहां एक चर्चा होनी चाहिए। अधिकार और कर्तव्‍य। भारत के संविधान ने हमें दोनों जिम्‍मेदारियां दी हैं। लेकिन आजादी के बाद ज्‍यादातर हम लोगों की प्राथमिकता अधिकार पर रही है। कर्तव्‍य ज्‍यादातर व्‍यक्तिगत स्‍वभाव से जुड़ गया, समाज स्‍वभाव से छूट गया। कर्तव्‍य सामाजिक स्‍वभाव बनाना है। कुछ लोगों को कर्तव्‍य में रूचि हो, कर्तव्‍य करते रहे इससे देश नहीं चल सकता। सवा सौ करोड़ देशवासियों का कर्तव्‍य का भी स्‍वभाव बनना चाहिए। और अगर एक बार कर्तव्‍य की हवा बन जाती है तो अधिकारों की रक्षा अपने आप हो जाती है। मैं चाहूंगा कि 26 जनवरी को मैंने पिछली मन की बात में इस बार तो कहा, कईयों ने इस बात को आगे बढ़ाया है। आप भी इस बात को आगे बढ़ाएं ऐसी मैं अपेक्षा करता हूं। छत्‍तीसगढ़ का प्‍यार छत्‍तीसगढ़ की मेहमाननवाजी, आप सबको बहुत याद रहेगी। मेरा सौभाग्‍य रहा मुझे छत्‍तीसगढ़ में बहुत लम्‍बे अर्से तक रहने का अवसर मिला है, इसलिए मैं उनके प्‍यार को भली-भांति समझता हूं। उनके स्‍वागत करने की परंपरा को भली-भांति समझता हूं। लेकिन मैं इस बार इसका आनंद नहीं ले पा रहा हूं। क्‍योंकि कुछ जिम्‍मेदारियां यहां भी मेरे सिर पर रहती हैं। लेकिन मैं मन से आपके साथ हूं। इस समारोह की मैं सफलता के लिए शुभकामनाएं देता हूं और देख सकते हैं कि संकटों के बीच में भी कैसी जिंदगी गुजारी जा सकती है। छत्‍तीसगढ़ कुछ वर्षों से नक्‍सलवाद के कारण परेशान है। माओवाद के कारण परेशान है। और मैं नौजवानों को कहता हूं। हमारे हाथ में हुनर होना चाहिए, हत्‍या करने के लिए हमारा हाथ कभी काम नहीं आना चाहिए। यह हाथ हुनर से नए सपनों को संजोने के लिए काम आना चाहिए। यह हाथ किसी के सपनों को समाप्‍त करने के लिए हत्‍या का कारण नहीं बनना चाहिए। छत्‍तीसगढ़ के नौजवानों ने माओवाद की इस भयानकता के बीच भी छत्‍तीसगढ़ को भरपूर बढ़ाने का प्रसास किया है। छत्‍तसीगढ़ को नई ऊंचाईयों पर ले जाने की कोशिश की है। संकटों के बीच भी समाधान के रास्‍ते निकाले जा सकते हैं। संकटों के बीच में भी विकास की यात्रा की जा सकती है। संकटों के बीच भी संकल्‍पों को पूरा किया जा सकता है। यह छत्‍तीसगढ़ से हम अनुभव कर सकते हैं। आज उस धरती में हैं, रायपुर में हैं। आपको प्रेरणा मिलेगी। मेरी आप सबको बहुत-बहुत शुभकामनाएं। और हमारे खेल मंत्री श्रीमान सोनेवाल जी, वो आपके बीच में हैं। बड़े उत्‍साही हैं। जरूर उनका लाभ मिलेगा आपको। आप सबको बहुत-बहुत शुभकामनाएं, बहुत बहुत धन्‍यवाद।

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ہردوئی، اتر پردیش میں گنگا ایکسپریس وے کے سنگ بنیاد کے موقع پر وزیراعظم کے خطاب کا متن:
April 29, 2026
This transformative infrastructure project will boost connectivity and drive progress across Uttar Pradesh: PM
Just as Maa Ganga has been the lifeline of UP and this country for thousands of years, similarly, in this era of modern progress, this expressway passing near her, will become the new lifeline of UP's development: PM
Recently, I had the opportunity to dedicate the Delhi-Dehradun Expressway to the nation.
I had then remarked that these emerging expressways are the lifelines shaping the destiny of a developing India, and these modern pathways are today heralding India's bright future: PM
Ganga Expressway will not only connect one end of UP to the other, it will also bring limitless possibilities of the NCR closer: PM

بھارت ماتا کی جے!

گنگا میا کی جے!

گنگا میا کی جے!

اتر پردیش کی گورنر آنندی بین پٹیل، یہاں کے وزیرِ اعلیٰ جناب یوگی آدتیہ ناتھ جی، نائب وزرائے اعلیٰ کیشو پرساد موریہ، برجیش جی پاٹھک، مرکزی کابینہ میں میرے ساتھی جتن پرساد جی، پنکج چودھری جی، یوپی حکومت کے وزراء، ارکانِ پارلیمنٹ اور ارکانِ اسمبلی، دیگر عوامی نمائندے اور اتنی بڑی تعداد میں تشریف لائے ہوئے میرے پیارے بھائیو اور بہنو!

 

سب سے پہلے، میں بھگوان نرسنگھ کی اس مقدس سرزمین کو سلام پیش کرتا ہوں۔ یہاں سے چند کلومیٹر کے فاصلے پر ماں گنگا اپنی عنایتیں لٹاتی ہوئی گزرتی ہیں۔ اس لیے، یہ پورا خطہ کسی تیرتھ (مقدس مقام) سے کم نہیں ہے۔ اور میں مانتا ہوں کہ اتر پردیش کو ایکسپریس وے کی یہ نعمت، یہ بھی ماں گنگا کا ہی آشیرواد ہے۔ اب آپ کچھ ہی گھنٹوں میں سنگم بھی پہنچ سکتے ہیں، اور کاشی میں بابا کے درشن کر کے واپس بھی آ سکتے ہیں۔

ساتھیو،

جس طرح ماں گنگا ہزاروں سالوں سے یوپی اور اس ملک کی شہ رگ رہی ہیں، بالکل اسی طرح جدید ترقی کے اس دور میں، ان کے قریب سے گزرنے والا یہ ایکسپریس وے، یوپی کی ترقی کی نئی 'لائف لائن' بنے گا۔ یہ بھی ایک حیرت انگیز اتفاق ہے کہ گزشتہ چار پانچ دنوں سے میں ماں گنگا کے قرب میں ہی رہا ہوں۔ 24 اپریل کو جب میں بنگال میں تھا، تو ماں گنگا کے درشن کیے تھے، اور پھر کل تو میں کاشی میں تھا۔ آج صبح ہی دوبارہ بابا وشوناتھ، ماں انپورنا اور ماں گنگا کے درشن کرنے کی سعادت ملی ہے، اور اب ماں گنگا کے نام پر بنے اس ایکسپریس وے کے افتتاح کا موقع ملا ہے۔ مجھے خوشی ہے کہ یوپی حکومت نے اس ایکسپریس وے کا نام ماں گنگا کے نام پر رکھا ہے۔ اس میں ترقی کا ہمارا وژن بھی جھلکتا ہے اور ہماری وراثت کے بھی درشن ہوتے ہیں۔ میں یوپی کے کروڑوں لوگوں کو گنگا ایکسپریس وے کی مبارکباد دیتا ہوں۔

ساتھیو،

آج جمہوریت کے جشن کا بھی ایک اہم دن ہے۔ بنگال میں اس وقت دوسرے مرحلے کی پولنگ ہو رہی ہے، اور جو خبریں آ رہی ہیں ان سے پتہ چلتا ہے کہ وہاں بھرپور ووٹنگ ہو رہی ہے۔ پہلے مرحلے کی طرح ہی عوام ووٹ دینے کے لیے بڑی تعداد میں گھروں سے نکل رہے ہیں، لمبی لمبی قطاروں کی تصویریں سوشل میڈیا پر چھائی ہوئی ہیں۔ گزشتہ 6-7 دہائیوں میں جو نہیں ہوا، جس کا تصور بھی مشکل تھا، اس بار بنگال میں ویسے ہی نڈر ماحول میں ووٹنگ ہو رہی ہے۔ لوگ خوف سے آزاد ہو کر ووٹ دے رہے ہیں۔ یہ ملک کے آئین اور ملک کی مضبوط ہوتی جمہوریت کی ایک مبارک علامت ہے۔ میں بنگال کی عظیم عوام کا شکریہ ادا کرتا ہوں کہ وہ اپنے حق کے تئیں اتنے بیدار ہیں اور بڑی تعداد میں ووٹ ڈال رہے ہیں۔ ابھی ووٹنگ ختم ہونے میں کئی گھنٹے باقی ہیں، میں بنگال کے عوام سے گزارش کروں گا کہ جمہوریت کے اس تہوار میں اسی جوش و خروش سے حصہ لیں۔

 

ساتھیو،

کچھ عرصہ قبل جب بہار میں انتخابات ہوئے، تو بی جے پی - این ڈی اے نے زبردست جیت درج کی تھی اور ایک تاریخ رقم کی تھی۔ ابھی کل ہی گجرات میں میونسپل کارپوریشنز، بلدیات، ضلع پنچایتوں، نگر پنچایتوں اور تحصیل پنچایتوں کے انتخابی نتائج آئے ہیں۔ اور میرے اتر پردیش کے عوام کو یہ جان کر خوشی ہوگی کہ 80 سے 85 فیصد بلدیات اور پنچایتیں بی جے پی نے جیت لی ہیں۔ مجھے یقین ہے کہ ان پانچ ریاستوں کے انتخابات میں بھی بی جے پی تاریخی جیت کی ہیٹرک لگانے جا رہی ہے۔ 4 مئی کے نتائج 'وکست بھارت' کے عزم کو مضبوط کریں گے اور ملک کی ترقی کی رفتار کو نئی توانائی سے بھر دیں گے۔

ساتھیو،

ملک کی تیز رفتار ترقی کے لیے ہمیں تیزی سے جدید انفراسٹرکچر کی تعمیر بھی کرنی ہے۔ دسمبر 2021 میں گنگا ایکسپریس وے کا سنگِ بنیاد رکھنے میں شاہجہاں پور آیا تھا۔ ابھی 5 سال سے بھی کم وقت ہوا ہے، اور آپ دیکھیے، ملک کے سب سے بڑے ایکسپریس ویز میں شمار یوپی کا سب سے طویل 'گرین کوریڈور ایکسپریس وے'، یہ 5 سال کے اندر اندر بن کر تیار ہو گیا ہے۔ آج ہردوئی سے اس کا افتتاح بھی ہو رہا ہے۔ یہی نہیں، ایک طرف گنگا ایکسپریس وے کی تعمیر مکمل ہوئی ہے، تو ساتھ ہی اس کی توسیع کے منصوبے پر کام بھی شروع ہو گیا ہے۔ جلد ہی، گنگا ایکسپریس وے میرٹھ سے آگے بڑھ کر ہریدوار تک پہنچے گا۔ اس کے مزید بہتر استعمال کے لیے فرخ آباد لنک ایکسپریس وے تعمیر کر کے اسے دیگر ایکسپریس ویز سے بھی جوڑا جائے گا۔ یہ ہے ڈبل انجن حکومت کا وژن! یہ ہے بی جے پی حکومت کے کام کرنے کی رفتار! یہ ہے بی جے پی حکومت کے کام کا طریقہ!

بھائیو اور بہنو،

کچھ ہی دن پہلے مجھے دہلی-دہرا دون ایکسپریس وے کے افتتاح کا موقع ملا تھا۔ تب میں نے کہا تھا کہ یہ نئے بنتے ایکسپریس ویز، ترقی یافتہ ہندوستان کی 'ہست ریکھائیں' (ہاتھ کی لکیریں) ہیں اور یہ جدید لکیریں آج بھارت کے روشن مستقبل کا اعلان کر رہی ہیں۔

 

ساتھیو،

اب وہ دور چلا گیا جب ایک سڑک کے لیے دہائیوں تک انتظار کرنا پڑتا تھا! ایک بار اعلان ہو گیا تو برسوں تک فائلیں چلتی رہتی تھیں! انتخاب کے لیے پتھر لگ جاتا تھا، اس کے بعد حکومتیں آتی رہتی تھیں، جاتی رہتی تھیں، لیکن کام کا کچھ پتا نہیں چلتا تھا۔ کبھی کبھی تو پرانی فائلیں ڈھونڈنے کے لیے بڑے بڑے افسروں کو دو دو سال تک محنت کرنی پڑتی تھی۔ ڈبل انجن حکومت میں سنگِ بنیاد بھی رکھا جاتا ہے اور مقررہ وقت میں افتتاح بھی ہو کر رہتا ہے۔ اسی لیے آج یوپی کے ایکسپریس ویز سے بھی زیادہ رفتار اگر کہیں ہے، تو وہ یوپی کی ترقی کی رفتار ہی ہے۔

ساتھیو،

یہ ایکسپریس وے صرف ایک ہائی اسپیڈ سڑک نہیں ہے۔ یہ نئے امکانات، نئے خوابوں اور نئے مواقع کا راستہ (گیٹ وے) ہے۔ گنگا ایکسپریس وے تقریباً 600 کلومیٹر طویل ہے۔ مغربی یوپی میں میرٹھ، بلند شہر، ہاپوڑ، امروہہ، سنبھل اور بدایوں؛ وسطی یوپی میں شاہجہاں پور، ہردوئی، اناؤ، رائے بریلی؛ مشرقی یوپی میں پرتاپ گڑھ اور پریاگ راج، ان کے آس پاس کے دوسرے اضلاع—گنگا ایکسپریس وے سے ان علاقوں کے کروڑوں لوگوں کی زندگی بدل جائے گی۔

ساتھیو،

ان علاقوں کو گنگا جی اور ان کی معاون ندیوں کی زرخیز مٹی کی نعمت ملی ہے۔ لیکن پہلے کی حکومتوں نے جس طرح کسانوں کو نظر انداز کیا، اس کی وجہ سے کسان پریشانیوں میں ہی گھر کر رہ گئے! یہاں کے کسانوں کی فصلیں بڑی منڈیوں تک نہیں پہنچ پاتی تھیں۔ کولڈ اسٹوریج کی کمی تھی، لاجسٹکس کا فقدان تھا۔ کسانوں کو ان کی محنت کی صحیح قیمت نہیں ملتی تھی۔ اب ان مشکلات کا حل بھی تیزی سے ہوگا۔ گنگا ایکسپریس وے سے کم وقت میں بڑی منڈیوں تک رسائی ملے گی۔ یہاں کھیتی کے لیے ضروری انفراسٹرکچر ترقی پائے گا، جس سے ہمارے کسانوں کی آمدنی بڑھے گی۔

 

ساتھیو،

گنگا ایکسپریس وے یوپی کے ایک سرے کو دوسرے سرے سے تو جوڑتا ہی ہے، یہ این سی آر (قومی دارالحکومت خطہ) کے بے پناہ امکانات کو بھی قریب لائے گا۔ گنگا ایکسپریس وے پر صرف گاڑیاں ہی نہیں دوڑیں گی، بلکہ اس کے کنارے نئے صنعتی مواقع بھی پروان چڑھیں گے۔ اس کے لیے ہردوئی جیسے دوسرے اضلاع میں صنعتی راہداریاں  تیار کی جا رہی ہیں۔ اس سے ہردوئی، شاہجہاں پور اور اناؤ سمیت تمام 12 اضلاع میں نئی صنعتیں آئیں گی۔ فارما اور ٹیکسٹائل جیسے مختلف شعبوں کے کلسٹرز تیار ہوں گے اور نوجوانوں کے لیے روزگار کے نئے مواقع پیدا ہوں گے۔

ساتھیو،

ہمارے یہ نوجوان مدرا یوجنا اور او ڈی او پی (ایک ضلع ایک پروڈکٹ) جیسی اسکیموں کی طاقت سے خود بھی نئے نئے ریکارڈ قائم کر رہے ہیں۔ یہاں چھوٹی صنعتوں اور ایم ایس ایم ای کو فروغ مل رہا ہے۔ بہتر کنیکٹیویٹی کی سہولت سے ان کے لیے بھی نئی راہیں کھلیں گی۔ میرٹھ کی اسپورٹس انڈسٹری، سنبھل کا دستکاری کا کام ، بلند شہر کا سیرامک، ہردوئی کا ہینڈ لوم، اناؤ کا چمڑا اور پرتاپ گڑھ کی آملہ مصنوعات—یہ سب بڑے پیمانے پر ملک اور دنیا کی منڈیوں تک پہنچیں گے۔ اس سے لاکھوں خاندانوں کی آمدنی بڑھے گی۔ آپ مجھے بتائیے، کیا پرانی سپا (سماج وادی پارٹی) حکومت میں ہردوئی اور اناؤ جیسے اضلاع میں انڈسٹریل کوریڈور بنانے کا تصور بھی کیا جا سکتا تھا؟ کیا کبھی کوئی سوچ سکتا تھا کہ ہمارے ہردوئی سے بھی ایکسپریس وے گزرے گا؟ یہ کام صرف بی جے پی حکومت میں ہی ممکن ہے۔

ساتھیو،

پہلے یوپی کو پسماندہ اور 'بیمارُو' ریاست کہا جاتا تھا۔ وہی اتر پردیش آج 1 ٹریلین ڈالر کی معیشت بننے کے لیے آگے بڑھ رہا ہے۔ یہ ایک بہت بڑا ہدف ہے، لیکن اس کے پیچھے اتنی ہی بڑی تیاری بھی ہے، کیونکہ یوپی کے پاس بے پناہ صلاحیت ہے۔ ملک کی اتنی بڑی نوجوان آبادی کی توانائی یوپی کے پاس ہے۔ اس طاقت کا استعمال ہم یوپی کو مینوفیکچرنگ ہب بنانے کے لیے کر رہے ہیں۔ یوپی میں نئی صنعتیں اور کارخانے لگیں گے، یہاں جب بڑی مقدار میں سرمایہ کاری آئے گی، تب ہی یہاں معاشی ترقی کے دروازے کھلیں گے اور نوجوانوں کے لیے روزگار کے مواقع پیدا ہوں گے۔

 

بھائیو اور بہنو،

اسی وژن کو مدنظر رکھ کر گزشتہ برسوں میں مسلسل کام ہوا ہے۔ آپ سب خود بھی محسوس کر رہے ہیں کہ جس یوپی کی پہچان پہلے ہجرت (پلان) سے ہوتی تھی، آج اسے 'انویسٹرز سمٹ' اور 'انڈسٹریل کوریڈور' کے لیے جانا جا رہا ہے۔ یوپی کی انویسٹر سمٹ میں ملک اور دنیا سے کمپنیاں آتی ہیں۔ یوپی میں ہزاروں کروڑ روپے کی سرمایہ کاری ہو رہی ہے۔ آج اگر بھارت دنیا میں دوسرا سب سے بڑا موبائل بنانے والا ملک ہے، تو اس میں یوپی کا بہت بڑا تعاون ہے۔ آج بھارت جتنے موبائل بنا رہا ہے، ان میں سے آدھے موبائل ہمارے یوپی میں بن رہے ہیں۔ ابھی کچھ ہی ہفتے پہلے میں نے نوئیڈا میں سیمی کنڈکٹر پلانٹ کا سنگِ بنیاد بھی رکھا ہے۔

ساتھیو،

آپ سب جانتے ہیں کہ اے آئی (مصنوعی ذہانت) کے اس دور میں سیمی کنڈکٹر کتنی بڑی فیلڈ بنتی جا رہی ہے۔ یوپی اس میں بھی قیادت کرنے کے لیے آگے بڑھ رہا ہے۔ مستقبل میں بے پناہ مواقع والا ایک بہت بڑا شعبہ یوپی کے لوگوں کے لیے کھل رہا ہے۔

ساتھیو،

اتر پردیش کی صنعتی ترقی آج بھارت کی دفاعی طاقت بھی بن رہی ہے۔ آج ملک کی دو ڈیفنس کوریڈورز میں سے ایک یوپی میں ہے۔ بڑی بڑی دفاعی کمپنیاں یہاں اپنی فیکٹریاں لگا رہی ہیں۔ برہموس جیسی میزائلیں، جن کا لوہا دنیا مانتی ہے، آج وہ یوپی میں بن رہی ہیں۔ دفاعی ساز و سامان کی تیاری میں جو چھوٹے چھوٹے پرزے درکار ہوتے ہیں، ان کی فراہمی کے لیے ایم ایس ایم ایز کو کام ملتا ہے۔ اس کا بہت بڑا فائدہ اتر پردیش کے ایم ایس ایم ای سیکٹر کو ہو رہا ہے۔ چھوٹے چھوٹے اضلاع میں بھی اب نوجوان بڑی بڑی صنعتوں سے وابستہ ہونے کا خواب دیکھ سکتے ہیں۔

 

ساتھیو،

آج اتر پردیش اتنی تیز رفتاری سے ترقی کر رہا ہے، کیونکہ یوپی نے پرانی سیاست کو بھی بدلا ہے اور نئی پہچان بھی بنائی ہے۔ آپ یاد کیجیے، ایک وقت تھا جب یوپی کی پہچان گڑھوں سے ہوتی تھی۔ آج وہی یوپی، ملک میں سب سے زیادہ ایکسپریس ویز والی ریاست بن چکا ہے۔ پہلے یہاں پڑوس کے ضلع تک جانا بھی بڑا مشکل تھا، لیکن آج اتر پردیش میں 21 ہوائی اڈے  ہیں، جن میں 5 بین الاقوامی ہوائی اڈے شامل ہیں۔ اب تو نوئیڈا بین الاقوامی ہوائی اڈے کا افتتاح بھی ہو چکا ہے۔ گنگا ایکسپریس وے سے نوئیڈا بین الاقوامی ہوائی اڈا کچھ ہی گھنٹوں کی دوری پر ہے۔

بھائیو اور بہنو،

ہمارا اتر پردیش بھگوان رام اور بھگوان کرشن کی دھرتی ہے۔ لیکن، پچھلی حکومتوں نے اپنے کرتوتوں کی وجہ سے جرائم اور 'جنگل راج' کو یوپی کی پہچان بنا دیا تھا۔ یوپی کے مافیاؤں پر فلمیں بنتی تھیں۔ لیکن، اب یوپی کے امن و امان (لا اینڈ آرڈر) کی مثال پورے ملک میں دی جاتی ہے۔

بھائیو اور بہنو،

وسائل کی بندر بانٹ کرنے والے سماج وادی پارٹی کےجن لوگوں کے ہاتھ سے اقتدار گیا ہے، انہیں یوپی کی یہ ترقی پسند نہیں آ رہی ہے۔ وہ ایک بار پھر یوپی کو پرانے دور میں دھکیلنا چاہتے ہیں۔ وہ ایک بار پھر معاشرے کو بانٹنا اور توڑنا چاہتے ہیں۔

 

ساتھیو،

سماج وادی پارٹی ترقی کی بھی مخالف ہے اور خواتین (ناری شکتی) کی بھی مخالف ہے۔ ابھی گزشتہ دنوں ملک نے ایک بار پھر سماجوادی پارٹی اور کانگریس جیسی پارٹیوں کا اصلی چہرہ دیکھا ہے۔ مرکز کی این ڈی اے حکومت پارلیمنٹ میں 'ناری شکتی وندن ترمیم' لے کر آئی تھی۔ اگر یہ ترمیم پاس ہو جاتی، تو سال 2029 کے انتخابات سے ہی خواتین کو اسمبلی اور لوک سبھا میں ریزرویشن ملتا! بڑی تعداد میں ہماری مائیں بہنیں رکن پارلیمنٹ اور رکن اسمبلی بن کر دہلی اور لکھنؤ پہنچتیں، اور وہ بھی کسی دوسرے طبقے کی سیٹیں کم ہوئے بغیر! لیکن، سماجوادی پارٹی  نے اس ترمیمی بل کے خلاف ووٹ دیا۔

ساتھیو،

اس بل سے تمام ریاستوں کی سیٹیں بھی بڑھتیں۔ ہم نے پارلیمنٹ میں صاف صاف کہا تھا کہ تمام ریاستوں کی سیٹیں ایک ہی تناسب میں بڑھیں گی۔ لیکن یوپی کو گالی دے کر سیاست کرنے والی ڈی ایم کے جیسی پارٹیاں، انہیں اس بات پر اعتراض تھا کہ یوپی کی سیٹیں کیوں بڑھیں گی؟ آپ دیکھیے، سماج وادی پارٹی پارلیمنٹ میں انہی کے سر میں سر ملا رہی تھی۔ یہ سماجوادی پارٹی  والے یہاں سے آپ کے ووٹ لے کر پارلیمنٹ جاتے ہیں، اور پارلیمنٹ میں یوپی کے لوگوں کو گالی دینے والوں کے ساتھ کھڑے ہوتے ہیں۔ اسی لیے، یوپی کے لوگ کہتے ہیں کہ سماج وادی پارٹی کبھی سدھر نہیں سکتی۔ یہ لوگ ہمیشہ خواتین مخالف سیاست ہی کریں گے۔ یہ ہمیشہ خوشامد  اور مجرموں کے ساتھ کھڑے ہوں گے۔ سپا کبھی بھی اقربا پروری (خاندانی سیاست) اور ذات پات سے اوپر نہیں اٹھ سکتی۔ یہ لوگ ہمیشہ ترقی مخالف سیاست ہی کریں گے۔ اترپردیش  کو سماجوادی پارٹی اور اس کے ساتھیوں سے ہوشیار رہنا ہے۔

ساتھیو،

آج ملک ایک ہی عزم لے کر آگے بڑھ رہا ہے— 'وکست بھارت' (ترقی یافتہ ہندوستان) کا عزم! اس عزم کو پورا کرنے میں اتر پردیش کا بہت بڑا کردار ہے۔ آپ سب دیکھ رہے ہیں، آج پوری دنیا کیسے جنگ، بدامنی اور عدم استحکام میں پھنسی ہوئی ہے۔ دنیا کے بڑے بڑے ممالک میں حالات خراب ہیں، لیکن بھارت ترقی کی راہ پر اسی رفتار سے آگے بڑھ رہا ہے۔ باہر کے دشمنوں کو یہ پسند نہیں آ رہا۔ اندر بیٹھے کچھ لوگ بھی اقتدار کی بھوک میں بھارت کو نیچا دکھانے کی کوششوں میں لگے ہیں۔ پھر بھی، ہم نہ صرف محفوظ ہیں بلکہ ترقی کے نئے نئے ریکارڈ بھی قائم کر رہے ہیں۔ ہم 'آتم نربھر بھارت' (خود کفیل ہندوستان) مہم کو آگے بڑھا رہے ہیں۔ ہم جدید سے جدید ترین انفراسٹرکچر تعمیر کر رہے ہیں۔ گنگا ایکسپریس وے اسی سمت میں ایک اور مضبوط قدم ہے۔ مجھے یقین ہے کہ گنگا ایکسپریس وے جن امکانات کو ہمارے دروازے تک لے کر آئے گا، یوپی کے لوگ اپنی محنت اور اپنی صلاحیت سے انہیں حقیقت بنا کر رہیں گے۔ اسی عزم کے ساتھ، آپ سب کو ایک بار پھر بہت بہت مبارکباد۔ بہت بہت شکریہ!

بھارت ماتا کی جے!

بھارت ماتا کی جے!

وندے ماترم!

وندے ماترم!

وندے ماترم!

وندے ماترم!

وندے ماترم!

بہت بہت شکریہ!