Swami Vivekananda an inspiration for all youth and a shining example of how much could be accomplished in a short time-span: PM Modi 
Earlier people were inspired to die for the nation. Today it is about living for the nation & doing something for India: PM
The 125 crore people are united in an objective of taking the nation to new highs: PM Narendra Modi
Entire world is looking at India with so much hope because India is a land of opportunities: PM Modi
A youth is one who works towards his future goals, unmindful of the past: Prime Minister Modi
Without peace, unity and harmony, development cannot have any meaning: PM Narendra Modi
India has shown the world, that a land of such diversity, has a unique spirit to stay together: PM Modi
India's objective is to give youth the opportunities to make this century an Indian century: PM
If India can be a manufacturing hub, it is not because we have a market or raw materials...it is because we have skilled youngsters: PM
“Dignity of labour” must be inculcated among people: PM Narendra Modi
Development is about transforming the lives of the poor: Prime Minister Modi

भारत के कौने –कौन से आए मेरे नौजवान साथियों।

आज 12 जनवरी स्‍वामी विवेकानंद जी की जन्‍म जयंती हम युवा दिवस के रूप में मनाते हैं। इस देश में दो महापुरूषों को इस देश का युवा विशेष रूप से नमन करता रहा है। अगर कोई हमारे सामने भगत सिंह का नाम लें या कोई हमें स्‍वामी विवेकानंद की याद दिला दें तो उसी पल हमारा माथा उन महापुरूषों के चरणें में झुक जाता है। बहुत ही छोटी आयु में कोई क्‍या कर सकता है। अगर जीवन में संकल्‍प का सामर्थ्‍य हो, संकल्‍प के लिए समर्पित भाव हो और जीवन आहूत करने की अदम्‍य इच्‍छा हो, तो व्‍यक्ति के लिए उम्र कोई मायना नहीं रखती। मेरे सामने देश के हजारों युवक बैठे हैं, वो हिंदुस्‍तान के कौने-कौने से आए हैं। उनका लालन-पालन अलग-अलग हुआ है। उनकी खान-पान की आदतें अलग है, उनकी बोली अलग है, उनका पहनाव अलग है, लेकिन उसके बावजूद भी ये सारे नौजवान इस एक बात से जुड़े हुए हैं। उनके मन मंदिर में एक मंत्र लगातार गूंजता रहा है। और वह ही हम सब की प्रेरणा है। और वो मंत्र क्‍या है? आजादी के आंदोलन के समय जिस वंदे मारतरम की गूंज ने कश्‍मीर से कन्‍या कुमारी अटक से कटक पूरे हिंदुस्‍तान को आजादी के आंदोलन में पिरो दिया है। एक मंत्र होता है जो जीवन में कुछ कर दिखाने की प्रेरणा बन जाता है। आज वही मंत्र चाहे उसको भारत मां की जय के रूप में कहते हो, चाहे वंदे मातरम के रूप में कहते हो। पहले मां भारती को गुलामी की जंजीरों से मुक्‍त कराने के लिए वो हमारी ताकत बन गया था। और आज आजाद हिंदुस्‍तान में भारत को नई ऊचाईयों पर ले जाने के लिए, विकास की नई ऊंचाईयों को सिद्ध करने के लिए, समस्‍याओं से मुक्ति दिलाने के लिए, हिंदुस्‍तान के गांव, गरीब किसान, मजदूर उनके जीवन में बदलाव लाने के लिए यही मंत्र हमारी प्रेरणा बनता है। पहले देश के लिए मरने की प्रेरणा देता था। आज वही मंत्र हमें देश के लिए जीने की प्रेरणा देता है। और आप सब नौजवान अपने लिए नहीं, देश के लिए कुछ करने के इरादे से किसी न किसी संकल्‍प से बंधे हुए हैं। आप कुछ करना चाहते हैं। और यह देश प्रगति तब करता है जब सवा सौ करोड़ देशवासी किसी न किसी संकल्‍प से बंधे हो। उस संकल्‍प की पूर्ति के लिए कुछ कदम चलने के लिए प्रयासरत हो। मंजिल को पाने के लिए अविरत कोशिश करते हो, तो देश अपने आप उस मंजिलों को पार कर जाता है।

आज पूरे विश्‍व का परिवेश देखे पूरा विश्‍व आज भारत की तरफ एक बड़ी आशा भरी नजर से देख रहा है। क्‍यों ? इसलिए कि हिंदुस्‍तान एक संभावनाओं का देश है। आपार अवसर जहां इंतजार कर रहे हैं। दुनिया इसलिए हिंदुस्‍तान की तरफ देख रही है, क्‍योंकि आज हिंदुस्‍तान विश्‍व का सबसे युवा देश है। 65 प्रतिशत जनसंख्‍या 35 से कम आयु की हो, वो देश कितना सौभाग्‍यशाली है कि जिसके पास कोटि-कोटि युवा लोग हैं। और जहां युवा होता है, वहां संकल्‍पों की कोई मर्यादाएँ नहीं होतीं, सीमाएँ नहीं होतीं। कभी-कभार हमारे देश में युवा की परिभाषा को लेकर अलग-अलग हमें बातें सुनने को मिलती है। शासत्रों से ले करके अब तक युवा की परिभाषा बहुत हो चुकी है। हर किसी का अपना नजरिया होता है। कुछ लोगों के लिए उम्र का दायरा यह युवा की पहचान के रूप में माना जाता है। मैं कभी-कभी सोचता हूं कि युवा यह परिस्थिति का नाम नहीं है। युवा यह मनस्थिति का नाम है। मनस्थिति है, जो युवा की परिचायक होती है। जब कोई व्‍यक्ति अपने बीते हुए पल को बार-बार याद करता है, दोहराता रहता है तो मैं यह सीधा-सीधा अर्थ निकालता हूं कि वो अपनी युववाणी खो चुका है। वो बुढ़ापे की आरे चल चुका है। लेकिन जो बीते हुए कल को बार-बार दोहराने की बजाय आने वाले कल के सपने संजोता रहता है, वो उसके लिए मेरा मन हमेशा कहता है वो सच्‍चे अर्थ में युवा है। अगर आप अपने आप को युवा मानते हो तो युवा वो है जो बीते हुए कल की बातों को दोहरा करके अपने समय को बर्बाद नहीं करता है, लेकिन जो आने वाले सपनों को संजोने के लिए पल-पल प्रयास करता है और हर सपने को साकार करने के लिए अपने आप को खपा देता है।

देशभर से आए हुए युवा उन सपनों का सम्‍पुट है। हम देशभर के लोग विविधताओं के बीच यहां बैठे हैं, क्‍या कारण है। वो कौन सा कारण हमें जोड़ रहा है। सद्भावना यह अपने आप में एक बहुत बड़ी शक्ति होती है। क्‍या हमारे अंदर एक दूसरे के प्रति आदर-भाव न होता, सद्भाव न होता। अपनेपन का कोई नाता न होता, तो हम इतनी अपने आप से जुड़ सकते? भारत विकास करना चाहता है और इस बार आपकी इस युवा परिषद का विषय भी बड़ा महत्‍वपूर्ण है। एक तरफ व्‍यक्ति का, उसके सामर्थ्‍य का और युवा से जुड़े हुए विषय को ले करके आया है उसका एक पहलू है skill, दूसरा है भारत का क्‍या हो तो कहते है विकास। और तीसरी बात आपने कही है कैसे हो तो वो है सद्भाव। क्‍या, क्‍यों, कैसे? इस बात को ले करके इस समारोह को आप चार दिन चर्चा के लिए आज प्रारंभ कर रहे हैं। अगर हमारे देश में एकता नहीं होगी, जन-जन के प्रति सद्भाव नहीं होगा, आदर भाव नहीं होगा, दूसरे की परंपराएं, दूसरे के विचार, उसके प्रति अगर सम्‍मान का भाव नहीं होगा, तो शायद भारत को प्रगति में रुकावटें आएंगी, विकास में रुकावटें आएंगी और इसलिए समय की मांग है और हर नौजवान के जीवन का एक व्‍यवहार है कि हम शांति, एकता, सद्भावना, जो भारत जैसे विविधताओं से भरे हुए देश के लिए प्रगति की गारंटी है। भारत के पास सब कुछ हो, धन हो, दौलत हो, बेशुमार पैसे हों, हर नौजवान को नौकरी हो, हर परिवार में सुख और सम्‍पन्‍नता हो, लेकिन, लेकिन अगर देश में शांति, एकता और सद्भावना नहीं होगी, तो वो सारी सम्‍पत्ति किसी के काम नहीं आएगी। न वो देश का गौरव बढ़ाएगी, न आने वाली पीढि़यों के लिए भविष्‍य का कोई रास्‍ता बनाएगी। और इसलिए हम विकास कितना ही करें, कितनी ही ऊंचाइयों को पार करें, लेकिन शांति, एकता और सद्भावना, ये भारत की पहली आवश्‍यकता रहती है।

और भारत ने दुनिया को दिखाया है कि जिस देश के पास सैंकड़ों बोलियां हो, अनेक भाषाएं हों, अनेक परम्‍पराएं हों, अनगिनत विविधिताएं हों, उसके बाद भी साथ जीने-मरने का स्‍वभाव हो, ये हमारी बहुत बड़ी विरासत हैं जो हमारे पूर्वजों ने हमें दी हैं, स्‍वामी विवेकानंद जैसे महापुरुषों ने दी हैं और इसे हमने संजो के रखना है।

वेद से विवेकानंद तक और उपनिषद से उपग्रह तक हम इसी परम्‍परा में पले-बढ़े हैं। उस परम्‍पराओं को बार, बार, बार, बार स्‍मरण करते हुए, संजोते हुए भारत को एकता के सूत्र में बांधने के लिए सद्भावना को सेतु उसको हम जितना बल दें, देते रहना होगा।

उसी प्रकार से अगर व्‍यक्ति के जीवन में सामर्थ्‍य नहीं होगा तो राष्‍ट्र के जीवन में सामर्थ्‍य कहां से आएगा? 21वीं सदी एशिया की सदी है कहते हैं, 21वीं सदी हिदुस्‍तान की सदी बन सकती है कैसे? जब हम, हमारे देश के युवा शक्ति के समार्थ्‍य को पहचानेंगे। विकास यात्रा में उसको पिरोयें और विकास की ऊंचाइयों को पार करने के लिए उसे हम अपना भागीदार बना लें। तब जा करके, तब जा करके हम राष्‍ट्र के सपनों को पूरा कर सकते हैं। अनेक मार्ग हैं, उसमें एक महत्‍वपूर्ण मार्ग है हुनर, skill development, हमारे देश के नौजवान के हाथ में सिर्फ कागज और कलम होगी तो देश आगे नहीं बढ़ सकता है। अपार ज्ञान का भंडार तो हो ही हो, कागज और कलम का सामर्थ्‍य तो हो ही हो, लेकिन देश को आगे बढ़ने के लिए हुनर चाहिए, skill चाहिए, बदले हुए युग में जहां technology एक महत्‍वपूर्ण रोल अदा कर रही है, भारत के एक manufacturing hub बनने की संभावना है। अगर भारत दुनिया का एक manufacturing hub बन सकता है तो उसका पहला कारण ये नहीं है कि हमारे पास raw material है, पहला कारण ये नहीं है कि हमारे पास market है, पहला कारण ये नहीं है कि हमारी आवश्‍यकता है, पहला कारण ये है कि हमारे देश के पास, नौजवानों के पास अगर हुनर है तो वो सबसे बड़ी ताकत है। और इसलिए हमारी सरकार ने skill को, हुनर को बहुत महत्‍व दिया है।

देश की आजादी के बाद पहली बार skill development एक अलग ministry बनाई गई, skill development की अलग policy बनाई गई, skill development के लिए अलग बजट बनाया गया और हिन्‍दुस्‍तान में एक ऐसी जाल बिछाने की कोशिश है कि गरीब से गरीब व्‍यक्ति, अनपढ़ से अनपढ़ व्‍यक्ति भी अपने जीवन में कुछ करने के लिए इच्‍छा करता है तो उसको सीखने का अवसर मिलना चाहिए, उसके हाथ में कोई हुनर होना चाहिए और वो हुनर को प्राप्‍त कराने के लिए सरकार पुरजोर प्रयास कर रही है।

हमारे छत्‍तीसगढ़ में रमन सिंह जी ने तो skill को एक अधिकार के रूप में develop किया है। उन्‍होंने कानूनी व्‍यवस्‍था का प्रयास किया है। मैं पिछली बार जब छत्‍तीसगढ़ आया था तो skill development किस प्रकार के उन्‍होंने काम की रचनाएं की हैं उसको मैंने अपनी आंखों से देखा। जहां नक्‍सलवाद, नौजवानों को गुमराह करने के लिए भरपूर कोशिश करता है, उसी इलाके में, उसकी छाती पर, skill development के द्वारा सपनों को संजोने के प्रयास छत्‍तीसगढ़ में हो रहे हैं। ये बधाई के पात्र हैं। और जब आप छत्‍तीसगढ़ में हैं तो आपको बहुत सी बातें सुनने को मिलेंगी कि नौजवानों के विकास के लिए क्‍या-क्‍या वहां हो रहा है।

मैं ये ही आपसे कहना चाहता हूं कि हम भी इस बात को ले करके आगे बढ़ना चाहते हैं कि देश में skill development को कैसे बल दिया। skill development से मैं एक बात आप नौजवानों से कहना चाहता हूं, दुर्भाग्‍य से हमारे देश में हम लोगों ने एक ऐसी मनस्थिति बना ली है जो दिमाग से काम करता है वो बड़ा है और जो हाथ से काम करता है वो छोटा है। इस मनस्थिति को बदलना पड़ेगा। हम हमारी मां का इतना सम्‍मान करते हैं, मां का आदर करते हैं, हमारी मां कहा है। बहुत कम लोग होंगे जिसकी मां को दिमाग से काम करने का अवसर मिला है। बाकी सब लोग हम ऐसे हैं जिनकी मां हाथ से काम करती है, कपड़े धेाती हैं, खाना पकाती है, झाड़ू लगाती है, और उस मां का हम सम्‍मान करते हैं, मां का गौरव करते हैं। लेकिन समाज में हाथ से काम करने वाला हमें छोटा लगता है, बढि़या कपड़े पहन करके टेबल-कुर्सी पर बैठा हुआ बाबू हमें बड़ा लगता है, लेकिन हमें कोई ऑटो-रिक्‍शा का ड्राइवर हमें छोटा लगता है। कोई plumber, कोई mechanic , कोई turner, कोई fitter, कोई wireman, कोई फूलों का गुलदस्‍ता बनाने वाला, ये हमें छोटे लगते हैं, हमारी ये मानसिकता हमें बदलनी होगी। हमें उनके प्रति भी सद्भाव पैदा करना होगा और सद्भाव तब होगा जब शुरूआत समभाव से होगी। मेरे में और उसमें कोई अन्‍तर नहीं है, हमारे और उसके बीच में एक समभाव है। जब समभाव होगा तो सद्भाव अपने-आप पनपने लग जाएगा और इसलिए white caller job and blue caller job, ये शब्‍द हमारे यहां चल रहे हैं। जो अपने पैरों पर खड़ा है। जो अपने पैरों पर खड़ा है। जो अपने हाथ की ताकत से अपनी जिंदगी बनाता है। जिसकी उंगलियों में नया करने का दम होता है। उससे बड़ा गौरव करने के लिए क्‍या हो सकता है। और इसलिए हम skill development पर बल देना चाहते हैं। हम समाज में एक मनोवैज्ञानिक बदलाव लाना चाहते हैं। कोई काम छोटा नहीं होता और इसलिए हमने एक movement चलाया है। श्रम एव जयते। dignity of labor हम बल दे रहे हैं उस पर और इसलिए कभी-कभी क्‍या लगता है। कितना ही गरीब व्‍यक्ति हो, उसके मन में मनोवैज्ञानिक प्रभाव पैदा हो गया है कि जब तक बेटा graduate नहीं होता, मां-बाप को भी संकोच होता है कि कोई रिश्‍तेदारों को परिचय क्‍या करवाएं। और इसलिए उसको लगता है कि graduate होना बहुत अनिवार्य है। लेकिन क्‍या सातवीं कक्षा पास, 10वीं कक्षा पास बेटा ITI में गया हो। और Technically बड़ा सामर्थ्‍यवान हो तो उनको संकोच होता है, परिचय करवाने में। यह psychology को बदलना है। यह आवश्‍यक नहीं है कि हमारे पास graduate होने का प्रमाण पत्र हो और बेरोजगारी की जिंदगी हो। हम सातवीं क्‍यों न पास हो, 10वीं पास क्‍यों न हो, हमारे हाथ में हुनर होना चाहिए और अपने पसीने से पैसों को पैदा करने की ताकत होनी चाहिए। ऐसे समाज की अवस्‍था होनी चाहिए और इसलिए नौजवानों में बल देने का प्रयास हम कर रहे हैं। हम विकास की ओर जाना चाहते हैं। और विकास का मेरा सीधा-सीधा मतलब है। देश के गरीबों की जिंदगी में बदलाव, हिंदुस्‍तान के गावों की जिंदगी में बदलाव। गांव में अच्‍छी शिक्षा हो, गांव में अस्‍पताल हो, बच्‍चों को पढ़ने के लिए अच्‍छा टीचर हो। बूढ़े अगर बीमार हैं तो अच्‍छा डॉक्‍टर हो। सस्‍ती दवाइयां हो, रहने के लिए अच्‍छा घर हो। गांव में आने-आने के लिए अच्‍छे रास्‍ते हो, पीने के लिए शुद्ध पानी हो। आजादी के इतने सालों के बाद भी हम इसको पूरा नहीं कर पाए हैं और उसको पूरा करना हमारा एक दायित्‍व है। और विकास, यही विकास है। विकास यानी यह नहीं है कि हम कितने बड़े-बड़े भवन बनाते हैं। और कितनी बड़ी संख्‍या में बाबूओं को तैयार करते हैं। और इसलिए हमारा विकास का मॉडल सामान्‍य मानव की जिंदगी में बदलाव लाना है। और सामान्‍य मानव की जिंदगी में बदलाव लाने के लिए हमने skill development को महत्‍व दिया है।

आने वाले दिनों में चार दिन के बाद 16 तारीख को हमें एक कार्यक्रम को लॉन्‍ज कर रहे हैं – Startup India Standup India हमारे देश के नौजवानों के पास कल्‍पकता के वो धनी है, अनेक नई चीजों की उनके पास सोच है, समस्‍याओं के समाधान के लिए वो रास्‍ते खोजते हैं। हमारे यहां गांव में हमने देखा होगा खेत में काम करने वाला व्‍यक्ति भी अपने आप Technology develop कर देता है और उस Technology से अपना काम कर लेता है। अपनी एक ही मोटर साइकिल होगी, उस मोटरसाइकिल से दस प्रकार के काम लेना गांव का आदमी जानता है। इसका मतलब कि हमारे पास innovative सोच, innovation यह भारत के पास हैं। लेकिन उसे प्रतिष्‍ठा कैसे मिले, पुरस्‍कार कैसे मिले, प्रोत्‍साहन कैसे मिले, आगे बढ़ने के लिए रास्‍ता कैसे मिले। उस दिशा में सरकार एक गंभीरता से सोच करके उस योजना को लागू कर रही है। 16 तारीख को जब यह बड़ा कार्यक्रम होगा आप भी अपने-अपने इलाके में कहीं पर वीडियो कॉनफ्रेंस के द्वारा अगर इस कार्यक्रम में शरीक होते हैं, तो आपने शरीक होने का प्रयास करना चाहिए। और skill development का next stage होता है Startup India उसी प्रकार से सरकार ने मुद्रा योजना घोषित की है। प्रधानमंत्री मुद्रा योजना।

हमारे देश में बहुत लोग हैं जिनके पास कुछ करने की इच्‍छा है। लेकिन पैसों के आभाव में कर नहीं पाते। वो unfunded है। बैंकों के दरवाजे उनके लिए खुले नहीं थे। हमने बदलाव लाया और बैंकों के दरवाजों को खोल दिया।

बैंकों को, दरवाजों को खोल करके मुद्रा योजना के तहत उन नौजवानों को पैसे देने का प्रयास शुरू किया है और मुझ खुशी है कि बहुत ही कम समय में ये जो योजना बनाई गई, प्रधानमंत्री मुद्रा योजना, करीब-करीब दो करोड़ लोगों को बैंक से बिना कोई गारंटी, पैसे दिए गए। इतने कम समय में बैंकों के द्वारा दो करोड़ लोगों को पैसे मिल रहा है और करीब-करीब 80 हजार करोड़ रुपये नौजवानों के हाथ में रख दिए हैं। नौजवानों पर मेरा भरोसा है। देश की युवा शक्ति पर भरोसा है। देश के सपने अगर कहीं पर निवास करते हैं तो देश के युवा दिलों में रहते हैं। और इसलिए उस पर हमने ध्‍यान केंद्रित किया है। मैं चाहता हूं कि जो लोग कुछ कर गुजरना चाहते हैं, वे नौकरी की तलाश क्‍यों करें, अपने पैरों पर खड़े क्‍यों न हों। मैं नहीं चाहता हूं मेरे देश का नौजवान job seeker बने, मैं चाहता हूं मेरे देश का नौजवान job creator बने। मैं ऐसी जिंदगी जिऊंगा कि दो-चार और पांच लोगों को मैं कोई न कोई रोजगार दूंगा, ये भी हमारा सपना होना चाहिए। मैं रोजगार के लिए तड़पने वाला नौजवान नहीं हो सकता हूं, मैं रोजगार देने वाला एक साहसिक नौजवान हो सकता हूं। और ये ही तो जिंदगी का लक्ष्‍य होना चाहिए कि मैं ओरों के लिए कुछ कर सकता हूं। और एक बार ये सपना ले करके चलोगे तो कर भी पाओगे। और इसलिए आप अगर उस बात को ले करके चलते हैं तो मेरा आपसे अनुरोध है, मैं आपको विश्‍वास दिलाना चाहता हूं, मैं आपके साथ हूं। ये सरकार आपके साथ है, ये पूरा हिन्‍दुस्‍तान आपके साथ है। आप उस लिए सपने संजो करके ले करके निकलिए। और इसीलिए skill development का अपना एक महत्‍व है, start-up India, stand up India का महत्‍व है, प्रधानमंत्री मुद्रा योजना का महत्‍व है।

मैंने अभी एक स्‍वच्‍छता का अभियान चलाया है। 15 अगस्‍त को मैंने लालकिले से कहा था, लेकिन मैं आज गर्व से कह सकता हूं कि वो स्‍वच्‍छता अभियान किसी प्रधानमंत्री का अभियान नहीं है, वो नरेंद्र मोदी का अभियान नहीं है। देश के हर नागरिक ने इसको अपना बना लिया है। हर कोई उसमें कुछ न कुछ करना चाहता है। अभी मैंने कहा 26 जनवरी को हमारे महापुरुषों के जितने statue हैं, उसकी सफाई एक नागरिक के नाते हम क्‍यों न करें? और मेरे पास खबरें हैं कि देश भर में इतने नौजवान आगे आए हैं, इतने स्‍कूल कॉलेज आगे आए हैं, इतने संगठन आगे आए हैं, even मुझे बताया गया नेहरू युवा केंद्र हो, NCC हो, NSS हो, ये सब लोग मैदान में आए हैं। सबने तय कर लिया है कि अब हमारे गांव में महापुरुषों के statue और वो परिसर हम गंदा नहीं रहने देंगे। कुछ लोगों ने तो 26 जनवरी का भी इंतजार नहीं किया है और already काम शुरू कर दिया है। यही तो देश की ताकत होती है। लेकिन पहला एक समय था, हम सब देखते थे हां ये महापुरुष की प्रतिमा है, फिर बात भी करते देखो यार कितना गंदा है, कोई संभालता नहीं है। आज, आज हर कोई चर्चा करता है, यार ये हमारे गांव के अंदर ये छह महापुरुषों के पुतले हैं उसकी सफाई हम करेंगे। एक नया माहौल बना है। नेहरू युवा केंद्र के और NSS के नौजवानों ने इसका बीड़ा उठाया है। मुझे विश्‍वास है बहुत बड़ी सफलता मिलेगी।

इस बार आप पिछले करीब 20 साल से ये समागम करते आए हैं, मेरी आपसे आग्रह है, मेरा आपसे अनुरोध है, इस बार जाने से पहले आप 2019 का कोई संकल्‍प ले करके जा सकते हैं क्‍या और 2019 तक हम इतना करेंगे। मैं 2019 इसलिए कह रहा हूं कि 2019 महात्‍मा गांधी की 150वीं जयंती है। महात्‍मा गांधी को स्‍वच्‍छता बहुत पसंद थी। 2019 तक का हमारा कोई time table बना करके हम जा सकते हैं क्‍या। और हम हर महीने उसका लेखा-जोखा लें, हिसाबा-किताब करें, संकल्‍प तय करें, योजना बनाएं, रोडमैप बनाएं और आंखों को दिखने वाला परिवर्तन ला करके रहें और दूसरा सपना 2022 का हम लें।

एक 2019 का हमारा रोडमैप और दूसरा 2022 का रोडमैप हम लें। 2022 इसलिए कि भारत की आजादी के 75 साल हो रहे हैं। हिंदुस्‍तान की आजादी के 75 साल हम कैसे मनाएंगे। अभी से हम कैसी तैयारियां करेंगे। हम अपने आप को उसके लिए उसको कैसे तैयार करेंगे। हमारी अपनी संस्था हो, हमारा परिवार हो, हम व्‍यक्ति हो, हम खुद क्‍या कर सकते हैं। इस पर हम सोचते हैं। और इसलिए रायपुर से आप जब निकले तब 2019 और 2022 कोई न कोई लक्ष्‍य निर्धारित करके उसका रोडमैप तय करके निकलिए । उसके लिए कौन समय देगा, कितने घंटे देगा। यह संकल्‍प ले करके चलिए। उसी प्रकार से मैं विशेष रूप से नौजवानों का एक बात के लिए आभार व्‍यक्‍त करना चाहता हूं कि आज के इस युवा समारोह के लिए मैंने देश के नौजवानों को आग्रह किया था कि आप मुझे नरेंद्र मोदी एप आप मोबाइल पर उसको download कर सकते हैं। नरेंद्र मोदी एप पर अपने सुझाव भेजिए। मुझे इस बात का गर्व है कि देश के हर कौने से हजारों नौजवानों ने मुझे हजारो सुझाव भेजे। देश का नौजवान कितना जागरूक है और नरेंद्र मोदी एप मेरे लिए एक सरल माध्‍यम बन गया है कि मैं सीधे आपसे जुड़ जाता हूं। मैं उन सभी नौजवानों का अभिनंदन करना चाहता हूं, जिन्‍होंने समय निकाल करके, सोच करके देश के काम आने के लिए अपने विचारों से मुझे लाभान्वित कराया। हजारों नौजवानों ने मुझे सुझाव भेजे, मैं उन सबका आभारी हूं।

26 जनवरी मैंने देश के सामने, देश के नौजवानों के सामने एक विषय रखा है और आग्रह किया है कि हमारे यहां एक चर्चा होनी चाहिए। अधिकार और कर्तव्‍य। भारत के संविधान ने हमें दोनों जिम्‍मेदारियां दी हैं। लेकिन आजादी के बाद ज्‍यादातर हम लोगों की प्राथमिकता अधिकार पर रही है। कर्तव्‍य ज्‍यादातर व्‍यक्तिगत स्‍वभाव से जुड़ गया, समाज स्‍वभाव से छूट गया। कर्तव्‍य सामाजिक स्‍वभाव बनाना है। कुछ लोगों को कर्तव्‍य में रूचि हो, कर्तव्‍य करते रहे इससे देश नहीं चल सकता। सवा सौ करोड़ देशवासियों का कर्तव्‍य का भी स्‍वभाव बनना चाहिए। और अगर एक बार कर्तव्‍य की हवा बन जाती है तो अधिकारों की रक्षा अपने आप हो जाती है। मैं चाहूंगा कि 26 जनवरी को मैंने पिछली मन की बात में इस बार तो कहा, कईयों ने इस बात को आगे बढ़ाया है। आप भी इस बात को आगे बढ़ाएं ऐसी मैं अपेक्षा करता हूं। छत्‍तीसगढ़ का प्‍यार छत्‍तीसगढ़ की मेहमाननवाजी, आप सबको बहुत याद रहेगी। मेरा सौभाग्‍य रहा मुझे छत्‍तीसगढ़ में बहुत लम्‍बे अर्से तक रहने का अवसर मिला है, इसलिए मैं उनके प्‍यार को भली-भांति समझता हूं। उनके स्‍वागत करने की परंपरा को भली-भांति समझता हूं। लेकिन मैं इस बार इसका आनंद नहीं ले पा रहा हूं। क्‍योंकि कुछ जिम्‍मेदारियां यहां भी मेरे सिर पर रहती हैं। लेकिन मैं मन से आपके साथ हूं। इस समारोह की मैं सफलता के लिए शुभकामनाएं देता हूं और देख सकते हैं कि संकटों के बीच में भी कैसी जिंदगी गुजारी जा सकती है। छत्‍तीसगढ़ कुछ वर्षों से नक्‍सलवाद के कारण परेशान है। माओवाद के कारण परेशान है। और मैं नौजवानों को कहता हूं। हमारे हाथ में हुनर होना चाहिए, हत्‍या करने के लिए हमारा हाथ कभी काम नहीं आना चाहिए। यह हाथ हुनर से नए सपनों को संजोने के लिए काम आना चाहिए। यह हाथ किसी के सपनों को समाप्‍त करने के लिए हत्‍या का कारण नहीं बनना चाहिए। छत्‍तीसगढ़ के नौजवानों ने माओवाद की इस भयानकता के बीच भी छत्‍तीसगढ़ को भरपूर बढ़ाने का प्रसास किया है। छत्‍तसीगढ़ को नई ऊंचाईयों पर ले जाने की कोशिश की है। संकटों के बीच भी समाधान के रास्‍ते निकाले जा सकते हैं। संकटों के बीच में भी विकास की यात्रा की जा सकती है। संकटों के बीच भी संकल्‍पों को पूरा किया जा सकता है। यह छत्‍तीसगढ़ से हम अनुभव कर सकते हैं। आज उस धरती में हैं, रायपुर में हैं। आपको प्रेरणा मिलेगी। मेरी आप सबको बहुत-बहुत शुभकामनाएं। और हमारे खेल मंत्री श्रीमान सोनेवाल जी, वो आपके बीच में हैं। बड़े उत्‍साही हैं। जरूर उनका लाभ मिलेगा आपको। आप सबको बहुत-बहुत शुभकामनाएं, बहुत बहुत धन्‍यवाद।

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৮০ সংখ্যক স্বাধীনতা দিৱস উপলক্ষ্যে লালকিল্লাৰ প্ৰাচীৰৰ পৰা প্ৰধানমন্ত্ৰী শ্ৰী নৰেন্দ্ৰ মোদীয়ে আগবঢ়োৱা ভাষণৰ পূৰ্ণপাঠ
August 15, 2026
আজি আমাৰ সপোন, সংকল্প আৰু শক্তিৰে আগবাঢ়ি যোৱাৰ দিন: প্ৰধানমন্ত্ৰী
আজি দৃঢ় সংকল্পৰে ভাৰতে এটা অতি ডাঙৰ সপোনৰ বিষয়ে কল্পনা কৰিছে; সেই সপোনটো হ’ল যেতিয়া স্বাধীনতাৰ ১০০ বছৰ সম্পূৰ্ণ হ’ব, ২০৪৭ চনৰ ভিতৰত আমি গঢ়ি তুলিম বিকশিত ভাৰত: প্ৰধানমন্ত্ৰী
আমি নিজকে বিশ্বাস কৰিব লাগিব আৰু আত্মনিৰ্ভৰ ভাৰত গঢ়ি তুলি গৌৰৱ কৰিব লাগিব: প্ৰধানমন্ত্ৰী
এসময়ত ‘ন’-গ’ এৰিয়া’ হিচাপে গণ্য কৰা খণ্ডবোৰ এতিয়া ‘গ’-এহেড এৰিয়া’ হৈ পৰিছে: প্ৰধানমন্ত্ৰী
প্ৰতিজন ভাৰতীয়ই মেক ইন ইণ্ডিয়া আৰু ভোকেল ফৰ লোকেলৰ মনোভাবক আঁকোৱালি লৈছে: প্ৰধানমন্ত্ৰী
ভাৰতৰ সুস্থিৰ ৰাজনৈতিক আদেশ, সুস্থিৰ চৰকাৰ, সজীৱ গণতন্ত্ৰ, শক্তিশালী ন্যায়িক ব্যৱস্থা আৰু আমাক সকলোকে পথ প্ৰদৰ্শন কৰা সংবিধান আছে:প্ৰধানমন্ত্ৰী
আমি তিনিটা কথাত গুৰুত্ব দিব লাগিব; খৰচ, গুণগত মান আৰু পৰিসৰ: প্ৰধানমন্ত্ৰী
আমাৰ কাৰখানাসমূহ প্ৰতিযোগিতামূলক হ’ব লাগিব, আমাৰ সামগ্ৰীসমূহ ব্যৱহাৰকাৰী-বন্ধুত্বপূৰ্ণ হ’ব লাগিব আৰু আমাৰ পেকেজিং হ’ব লাগিব সৰ্বোত্তম: প্ৰধানমন্ত্ৰী
এসময়ত নক্সালবাদীৰ হিংসাৰ দ্বাৰা প্ৰভাৱান্বিত স্থানসমূহে শান্তি, উন্নয়ন আৰু নতুন আশাৰ সাক্ষী হৈ পৰিছে: প্ৰধানমন্ত্ৰী
অনাগত বছৰবোৰত এই সপ্তধাৰাবোৰে ভাৰতক আগুৱাই লৈ যাব আৰু দেশখনক নতুন উচ্চতালৈ লৈ যাব: প্ৰধানমন্ত্ৰী

মোৰ প্ৰিয় দেশবাসী,

আজি আমি সকলোৱে ৮০ সংখ্যক স্বাধীনতা দিৱস উদযাপন কৰিছো। আজি প্ৰতিজন নাগৰিকৰ হৃদয়ত ‘বন্দে মাতৰম’ৰ ধ্বনি অনুৰণিত হৈছে। আজি ত্ৰিৰংগা প্ৰতিখন ঘৰতে উৰি আছে আৰু প্ৰতিখন হৃদয় ত্ৰিৰংগা হৈ পৰিছে; দেশখনে নতুন সংকল্প আঁকোৱালি লৈ উৎসাহ তথা উদ্যমৰ সৈতে আগবাঢ়িছে। স্বাধীনতা দিৱসৰ দিনা আপোনালোক সকলোলৈ আন্তৰিক শুভেচ্ছা জ্ঞাপন কৰিলোঁ। দেশৰ স্বাধীনতাৰ বাবে ত্যাগ আৰু নিঃস্বাৰ্থভাবে প্ৰাপ্তিৰ শিখৰত উপনীত হোৱা সেই মহান পুত্ৰসকলক আজি দেশে শ্ৰদ্ধাৰে সোঁৱৰিছো। তেওঁলোকে নিজৰ তপস্যা আৰু ত্যাগৰ জৰিয়তে স্বাধীনতাৰ একক লক্ষ্যত উপনীত হ'বলৈ সমগ্ৰ জীৱন উৎসৰ্গা কৰিছিল। আজি মই সকলো স্বাধীনতা সংগ্ৰামীক—শ্ৰদ্ধাৰ বাপুকে ধৰি— ত্যাগৰ উদাৰ পৰম্পৰাক প্ৰজ্জ্বলিত কৰি ৰখা মহান বিপ্লৱীসকলৰ ওচৰত শ্ৰদ্ধাৰে প্ৰণাম জনাইছো। এই অনুষ্ঠানত উপস্থিত থকা সকলোৰে বাবে আজি এয়া এক ঐতিহাসিক মুহূৰ্ত। স্বাধীনতাৰ পাছত প্ৰথমবাৰৰ বাবে ১৫ আগষ্টত লালকিল্লাত প্ৰতিধ্বনিত হৈছে ‘বন্দে মাতৰম’ৰ ধ্বনি। ‘বন্দে মাতৰম’ৰ ১৫০ বছৰীয়া জয়ন্তী উদযাপন কৰাৰ সময়তে আজিৰ এই অনুষ্ঠানৰ দৰে ভাল অনুষ্ঠান আৰু কি হ’ব পাৰে?

মোৰ প্ৰিয় দেশবাসীসকল,

শেহতীয়াকৈ দেশৰ কিছু অংশত বানপানী আৰু ভূমিস্খলনে বিধ্বংসী ৰূপ ধাৰণ কৰিছে, যাৰ ফলত বহু পৰিয়াল ক্ষতিগ্ৰস্ত হৈছে। তেওঁলোকৰ যন্ত্ৰণা আৰু দুখ-কষ্টৰ প্ৰতি আমি গভীৰভাৱে সহানুভূতিশীল। ক্ষতিগ্ৰস্ত পৰিয়ালসমূহক আশ্বস্ত কৰিছো যে আমি, আৰু সমগ্ৰ দেশখনে তেওঁলোকৰ সৈতে থিয় দিছো।

মোৰ প্ৰিয় দেশবাসীসকল,

এখন দেশ তেতিয়াহে সঁচাকৈয়ে মহান হয় আৰু সফলতা অৰ্জন কৰে, যেতিয়া ই নিজৰ সপোন, নিজৰ সংকল্প আৰু নিজৰ অন্তৰ্নিহিত শক্তিৰ দ্বাৰা পৰিচালিত হৈ আগবাঢ়ি যায়।

 

মোৰ প্ৰিয় দেশবাসীসকল,

সৰু সৰু সপোন দেখিলেই যথেষ্ট নহ’ব; আমি ডাঙৰ সপোন দেখিব লাগিব। ডাঙৰ ডাঙৰ সপোনবোৰে আমাৰ চিন্তাধাৰাক সম্প্ৰসাৰিত কৰে আৰু আমাৰ দৃষ্টিও প্ৰসাৰিত কৰে। আমাৰ সংকল্পবোৰ দৃঢ় হ’ব লাগিব; যেতিয়া এটা সংকল্প অটল হয়, তেতিয়া অসুবিধা আৰু দুৰ্যোগৰ মাজেৰে এটা পথ উলিওৱাৰ ক্ষমতা স্বাভাৱিকতে শক্তিশালী হয়।

মোৰ প্ৰিয় দেশবাসীসকল,

আমাৰ সংকল্প উচ্চ হ’ব লাগিব; কাৰণ যেতিয়া আমাৰ সপোন আৰু আমাৰ দৃঢ়তা উচ্চ হয়, তেতিয়া আমাৰ সামৰ্থ্য তথা প্ৰচেষ্টাৰ পৰিসৰো বৃদ্ধি পায়—আৰু তেতিয়াহে আমি সেই সপোনবোৰক বাস্তৱত পৰিণত কৰিব পাৰিম।

মোৰ প্ৰিয় দেশবাসীসকল,

আজি ভাৰতে কল্পনা কৰিছে এনে এক ভৱিষ্যৎ —যিটো দৃঢ় সংকল্পৰে ধৰি ৰখা হৈছে আৰু নতুন উচ্চতা বৃদ্ধিৰ লক্ষ্যৰে সেয়া গ্ৰহণ কৰা হৈছে—যি সময়ত আমি স্বাধীনতাৰ ১০০ বছৰ সম্পূৰ্ণ কৰিম সেই সময়ত আমি , ২০৪৭ চনৰ ভিতৰত এখন উন্নত ভাৰত গঢ়িবলৈ সংকল্পবদ্ধ।আমাৰ ১৪ কোটি নাগৰিকৰ সামূহিক প্ৰচেষ্টাৰ জৰিয়তে আমি এই লক্ষ্যত উপনীত হ’ব লাগিব; যেতিয়া বিশ্বৰ আটাইতকৈ জনবহুল ৰাষ্ট্ৰখনে এখন উন্নত দেশ হোৱাৰ সংকল্প লয়, তেতিয়া ই বিশ্ব সম্প্ৰদায়ৰ দৃষ্টিত আমাৰ সাহসৰ প্ৰমাণ হিচাপে থিয় দিয়ে। পৃথিৱীয়ে আমাৰ প্ৰতি থকা নিজৰ দৃষ্টিভংগী সলনি কৰিবলৈ বাধ্য হৈছে।

প্ৰিয় সহ দেশবাসীসকল,

মই এই কথা অকাৰণতে কোৱা নাই। যোৱা ১২ বছৰত অগণন নাগৰিক— দলিতই হওক, নিপীড়িতই হওক, বঞ্চিতই হওক বা জনজাতীয়ই হওক; গাঁৱৰ পৰাই হওক বা চহৰৰ পৰাই হওক; দুখীয়া বা মধ্যবিত্তীয়; ডেকা বা বৃদ্ধ; মহিলা বা পুৰুষ; উত্তৰ, দক্ষিণ, পূব বা পশ্চিমৰ পৰা অহা—সকলোৱে দেশখনক নতুন উচ্চতালৈ লৈ যাবলৈ সংকল্প আৰু নিষ্ঠাৰে চেষ্টা কৰিছে। এই প্ৰচেষ্টাসমূহ মই সন্মানসহকাৰে স্বীকাৰ কৰিছো; ইয়াৰ ফলতেই ইমান কম সময়ৰ ভিতৰতে ২৫ কোটি নাগৰিকে দৰিদ্ৰতা জয় কৰি তাৰ পৰা ওলাই আহিবলৈ সক্ষম হৈছে । এই নাগৰিকসকলৰ প্ৰচেষ্টাৰ বাবেই আমি এসময়ত ‘ভংগুৰ পাঁচ’ৰ ভিতৰত থকা বুলি গণ্য কৰা দেশৰ পৰা মাত্ৰ ১২ বছৰৰ ভিতৰতে আটাইতকৈ দ্ৰুতগতিত বৃদ্ধি পোৱা বৃহৎ অৰ্থনীতিলৈ ৰূপান্তৰিত হৈছো।

বন্ধুসকল,

দেশখনে বহু সপোনেৰে স্বাধীনতা লাভ কৰিছিল, তথাপিও আমি সঠিক গতি লাভ কৰাত ব্যৰ্থ হ’লোঁ। আমি আত্মতুষ্টিৰ মানসিকতাত আবদ্ধ হৈ থাকিলোঁ— কথাবোৰ কেৱল নিজাববীয়াকৈ সমাধান হ’ব বা পিছত মোকাবিলা কৰিব পৰা যাব বুলি ভাবি থাকোতেই সময় বাগৰিল। ২০১৪ চনলৈকে বিশ্বই আমাক ‘ফ্ৰেজিল ফাইভ’ হিচাবে গণ্য কৰিছিল। তথাপিও যোৱা ১২ বছৰত ভাৰতে নতুন গতি লাভ কৰিছে আৰু দ্ৰুতগতিত আগবাঢ়িছে; আমাৰ ১৪০ কোটি নাগৰিকৰ সংকল্প এনে যে এতিয়া আমাৰ সামূহিক শক্তি তথা দৃঢ়তাক একোৱেই বাধা দিব নোৱাৰে৷

প্ৰিয় দেশবাসীসকল,

বিগত ১২ বছৰত প্ৰতিৰক্ষা উৎপাদন প্ৰায় চাৰিগুণ বৃদ্ধি পাইছে। খাদী আৰু গ্ৰাম্য উদ্যোগ খণ্ডত উৎপাদন প্ৰায় পাঁচগুণ বৃদ্ধি পাইছে, ইলেক্ট্ৰনিকছ উৎপাদন প্ৰায় সাতগুণ বৃদ্ধি পাইছে, আধুনিক ৰে'লৱেৰ দবাৰ উৎপাদন ২১গুণ বৃদ্ধি পাইছে আৰু মোবাইল ফোন উৎপাদন পঁয়ত্ৰিশগুণ বৃদ্ধি পাইছে। তদুপৰি আধুনিক যুগৰ সৈতে খোজ মিলাই আমিও ডিজিটেল প্ৰযুক্তি আৰু উদ্ভাৱনৰ ক্ষেত্ৰখনত নিজৰ নাম উজলাইছো আৰু এইক্ষেত্ৰত যথেষ্ট সফলতা লাভ কৰিছো। ইণ্টাৰনেট ব্যৱহাৰকাৰী আৰু গ্ৰাহকৰ সংখ্যা প্ৰায় চাৰিগুণ বৃদ্ধি পাইছে, পেটেণ্ট চাৰিগুণ বৃদ্ধি পাইছে, ডিজিটেল লেনদেন এশগুণ বৃদ্ধি পাইছে; আমি সাধাৰণ নাগৰিকৰ বাবে সুবিধা বৃদ্ধিৰ বাবে সমান গুৰুত্বৰে কাম কৰিছো। আমি আগৰ তুলনাত বাৰ্ষিক ভিত্তিত পোন্ধৰগুণ বেছি বেগেৰে ‘টেপৰ পানী’ৰ সংযোগ প্ৰদান কৰিলোঁ। আমি মানুহক গড় বাৰ্ষিক হাৰত ছয়গুণ বেছি দ্ৰুততাৰে গেছ সংযোগ প্ৰদান কৰিলোঁ। আমি আগৰ বাৰ্ষিক গতিতকৈ চাৰিগুণ বেগেৰে দৰিদ্ৰ লোকৰ বাবে শৌচাগাৰ নিৰ্মাণ কৰিলো আৰু প্ৰতি বছৰে তিনিগুণ বেগেৰে দৰিদ্ৰসকলৰ বাবে ঘৰৰ ব্যৱস্থা কৰিলো। দেশখনে শাসন ব্যৱস্থাতো উল্লেখযোগ্য পৰিৱৰ্তন আনিছে; হাজাৰ হাজাৰ অনুপালনৰ প্ৰয়োজনীয়তা নাইকিয়া কৰা হৈছে আৰু শ শ প্ৰাচীন আইন বাতিল কৰা হৈছে—কাৰণ যোৱা শতিকাৰ আইনসমূহ একবিংশ শতিকাৰ প্ৰয়োজনীয়তাৰ সৈতে খাপ খাব নোৱাৰে। আধুনিক আন্তঃগাঁথনি নিৰ্মাণৰ বাবে আমি মেট্ৰ’ নেটৱৰ্কৰ সম্প্ৰসাৰণ কৰিলোঁ আৰু ৰাজহুৱা পৰিবহণ শক্তিশালী কৰিলোঁ। এই কামটো যি গতি আৰু পৰিসৰত সম্পন্ন হৈছে—এই গতিবেগ, সম্প্ৰসাৰণ আৰু কৃতিত্ব—যোৱা দশকত, স্বাধীনতাৰ পিছত প্ৰথমবাৰৰ বাবে প্ৰত্যক্ষ কৰা হৈছে। আমি যেতিয়া এনে সাফল্য আৰু ইমান দ্ৰুত অগ্ৰগতি দেখিবলৈ পাওঁ আৰু যেতিয়া আমাৰ নাগৰিকসকলৰ সম্ভাৱনা অধিক শক্তিশালী হৈ উঠে, তেতিয়া ২০৪৭ চনৰ ভিতৰত ভাৰতক এখন উন্নত ৰাষ্ট্ৰলৈ ৰূপান্তৰিত কৰাৰ সংকল্পও বাস্তৱায়িত হোৱাটো নিশ্চিত। এই সকলোবোৰ পৰিসংখ্যাই এই কথাৰ সাক্ষ্য দিয়ে যে আমি অগ্ৰগতিৰ বাবে সাজু হৈছো।

মোৰ প্ৰিয় দেশবাসীসকল,

অৱশ্যে ইয়াৰ বাবে প্ৰয়োজন আত্মবিশ্বাস আৰু জাতীয় গৌৰৱৰ ভাৱ; ইয়াৰ বাবে আত্মনিৰ্ভৰ ভাৰতৰো প্ৰয়োজন। সেইবাবেই যোৱা কেইবছৰমানৰ পৰা আমি এই দৃঢ় বিশ্বাস ৰাখিছো যে ভাৰতে আৰু আন দেশৰ ওপৰত নিৰ্ভৰশীল হৈ জীয়াই থাকিব নালাগে; আমি আত্মনিৰ্ভৰশীল হ’ব লাগিব। পৃথিৱীখনে বহুতো সামগ্ৰী আগবঢ়াইছে, যদিও সেইবোৰ প্ৰায়ে সস্তা বা অধিক সোনকালে উপলব্ধ—সেইবোৰৰ ওপৰত নিৰ্ভৰ কৰিলে আমাৰ নিজৰ সামৰ্থ্য গঢ়ি তোলা নহ'ব বা আমাৰ সম্ভাৱনাৰো বিকশিত কৰা নহ'ব । আমি নিজৰ সামৰ্থ্য বৃদ্ধি কৰিব লাগিব আৰু নিজেই নিজৰ স্বাৰ্থ সুৰক্ষিত কৰিব লাগিব; সেয়েহে আমি আত্মনিৰ্ভৰ ভাৰতৰ প্ৰতি দৃঢ় প্ৰতিশ্ৰুতিৰে আগবাঢ়িছো। আজি প্ৰতিজন ভাৰতীয়ই 'মেক ইন ইণ্ডিয়া', স্বদেশী (থলুৱা উৎপাদন), আৰু 'ভ'কেল ফৰ লোকেল' আদি পদক্ষেপৰ সৈতে নিজকে সম্পৃক্ত কৰিছে।

মোৰ প্ৰিয় দেশবাসীসকল,

অৰ্ধপৰিবাহীৰ উদাহৰণ দিওঁ। ভাৰতে স্বাধীনতা লাভ কৰাৰ পিছত ইতিমধ্যে বিশ্বজুৰি অৰ্ধপৰিবাহীৰ বিষয়ে আলোচনা চলি আছিল। ইয়াতো বিষয়টো আলোচনা কৰা হৈছিল যদিও আমি কোনো ডাঙৰ অৰ্ধপৰিবাহীৰ পৰিকল্পনা আগবঢ়াই নিব নোৱাৰিলোঁ। আৰু আজিৰ পৰিস্থিতি কি? আজিৰ ডিজিটেল জগত আৰু প্ৰযুক্তিগত পৰিৱেশত আমি চিপৰ অপৰিসীম গুৰুত্ব সম্পূৰ্ণৰূপে বুজি পাইছো। ইলেক্ট্ৰনিক সামগ্ৰীয়েই হওক, চিকিৎসা সঁজুলিয়েই হওক, পৰিবহণ ব্যৱস্থাই হওক, সকলোতে চিপ অপৰিহাৰ্য; ইয়াৰ অবিহনে পৃথিৱীখন স্তব্ধ হৈ পৰিব। এই কথা স্বীকাৰ কৰি ভাৰতে আত্মনিৰ্ভৰশীলতাৰ পথত আগবাঢ়িছে; প্ৰধান অৰ্ধপৰিবাহী উদ্যোগ—ইয়াৰে তিনিটা—ইতিমধ্যে স্থাপন কৰা হৈছে। মোক জনোৱা হৈছে যে সেইবোৰত উৎপাদন চলি আছে আৰু ইতিমধ্যে ৰপ্তানি আৰম্ভ হৈছে। মই মোৰ দেশবাসীসকলক ক’ব বিচাৰিছো যে অনাগত সাতৰ পৰা আঠ বছৰত আৰু পাঁচৰ পৰা আঠটা অৰ্ধপৰিবাহী প্ৰকল্পৰ কাম আৰম্ভ কৰা হ’ব। এই আত্মনিৰ্ভৰ ভাৰত পদক্ষেপে আমাক উন্নত ভাৰতৰ দিশে লৈ যোৱাৰ এক ভৱিষ্যতৰ পথ প্ৰশস্ত কৰিছে।

মোৰ প্ৰিয় দেশবাসীসকল,

বৰ্তমান ‘গুৰুত্বপূৰ্ণ খনিজ’ৰ সন্দৰ্ভত একেধৰণৰ আলোচনা চলি আছে। আধুনিক প্ৰযুক্তি সম্পূৰ্ণৰূপে গুৰুত্বপূৰ্ণ খনিজ পদাৰ্থৰ ওপৰত নিৰ্ভৰশীল আৰু ভাৰতে এই খণ্ডতো নিজৰ স্থান নিশ্চিত কৰাৰ বাবে সক্ৰিয়ভাৱে কাম কৰি আছে। আমি ৰাষ্ট্ৰীয় জটিল খনিজ অভিযান আৰম্ভ কৰিছো আৰু জটিল খনিজৰ বাবে লক্ষ্য নিৰ্ধাৰণ কৰিছো। আমি বাজেটত ‘ক্ৰিটিকেল মিনাৰেলছ কৰিডৰ’ ঘোষণা কৰিছো আৰু বিভিন্ন দেশৰ সৈতে চুক্তিবদ্ধ হৈছো; প্ৰকৃততে, সমগ্ৰ বিশ্বৰ বহু দেশে এতিয়া জটিল খনিজ পদাৰ্থৰ ক্ষেত্ৰত ভাৰতৰ ওপৰত আস্থা ৰাখিছে।

মোৰ প্ৰিয় দেশবাসীসকল,

অৰ্ধপৰিবাহী আৰু জটিল খনিজ পদাৰ্থ যেনেকৈ অতি প্ৰয়োজনীয়, আমি তথা বিশ্বৰ বাকী অংশ যি প্ৰযুক্তিগত পৰিৱেশৰ দিশত আগবাঢ়িছো তাত শক্তিৰ গুৰুত্ব ক্ৰমান্বয়ে বৃদ্ধি পাইছে। শক্তি অবিহনে এই নতুন পৃথিৱীখন বৰ্তাই ৰখাটো কঠিন; চিপ, এআই বা ডাটা চেণ্টাৰৰ বাবেই হওক, আমাক বিপুল পৰিমাণৰ বিদ্যুতৰ প্ৰয়োজন হ'ব। শক্তি সুৰক্ষা এই সময়ৰ প্ৰয়োজনীয়তা আৰু আমি ইতিমধ্যে এই দিশত ধাৰাবাহিকভাৱে শক্তিশালী পদক্ষেপ গ্ৰহণ কৰিছো। পাৰমাণৱিক শক্তি শক্তি সুৰক্ষাৰ এটা মূল উপাদান; সংসদত প্ৰয়োজনীয় আইন প্ৰণয়ন কৰি আমি এটা নতুন লক্ষ্যৰ দিশত এক পথ নিৰ্ধাৰণ কৰিছো। আমি ২০৪৭ চনৰ ভিতৰত ১০০ গিগাৱাট পাৰমাণৱিক শক্তি ক্ষমতা লাভৰ লক্ষ্যৰ দিশত কাম কৰি আছো।এই দশকৰ ভিতৰত পাঁচটা নতুন পাৰমাণৱিক ৰিয়েক্টৰ কাৰ্যক্ষম কৰাৰ লক্ষ্যও আমি লৈছো। এইবাৰ ভাৰতে বিশেষ পাৰমাণৱিক প্ৰযুক্তি আয়ত্ত কৰি এক উল্লেখযোগ্য মাইলৰ খুঁটি অৰ্জন কৰিছে। এই কথাই পাৰমাণৱিক ইন্ধনত আত্মনিৰ্ভৰশীলতাৰ দিশত এক বৃহৎ অগ্ৰগতিকেই চিহ্নিত কৰিছে।

মোৰ প্ৰিয় দেশবাসীসকল,

সম্পদৰ অভাৱত এখন দেশ স্তব্ধ হৈ নাথাকে; বৰঞ্চ ইয়াৰ মানসিকতাৰ সীমাবদ্ধতাৰ বাবেহে ই স্তব্ধ হৈ পৰে। যেতিয়া আমাৰ চিন্তাধাৰা আৱদ্ধ হৈ পৰে—সীমাৰ ভিতৰত স্থবিৰ হৈ পৰে—তেতিয়া আমি নিজৰ সম্ভাৱনাক চিনাক্ত কৰিব নোৱাৰো। আজিও দেশ খাৰুৱা তেলৰ ওপৰত নিৰ্ভৰশীল হৈয়েই আছে, আমাৰ ত্ৰুটিপূৰ্ণ মানসিকতাৰ পৰা উদ্ভৱ হোৱা পৰিস্থিতিৰ বাবে। আপোনালোকে জানি আচৰিত হ'ব যে, এই মানসিকতাৰ বাবেই আমি আমাৰ উপকূলৰ ৯৯% অংশক "নো-গ' এৰিয়া" হিচাপে নিৰ্ধাৰণ কৰিছিলোঁ; আমি ফলপ্ৰসূভাৱে সাগৰসমূহ অন্বেষণ কৰাৰ বিৰুদ্ধে সিদ্ধান্ত লৈছিলোঁ। এয়া আছিল চিন্তাৰ দৰিদ্ৰতা। আমি সিদ্ধান্ত লৈছিলো যে এয়া চলি থাকিব নোৱাৰে। আমি সেই ৯৯%—যিবোৰ এসময়ত অফ-লিমিট আছিল—"গ'-এহেড এৰিয়া" হিচাপে মুকলি কৰিছো। আমি এতিয়া সক্ৰিয়ভাৱে অন্বেষণৰ কাম কৰি আছো আৰু সাগৰৰ গভীৰতাৰ ভিতৰত নতুন অঞ্চল বিচাৰিছো। যোৱা বছৰ এই দিশত এক উল্লেখযোগ্য পদক্ষেপ গ্ৰহণ কৰি আমি ‘সমুদ্ৰ মন্থন’ পদক্ষেপৰ কথা ঘোষণা কৰিছিলো; শেহতীয়াকৈ আমি ৮৫,০০০ কোটি টকা আবণ্টন দি এই কাম ত্বৰান্বিত কৰাৰ সিদ্ধান্ত লৈছো।

মোৰ প্ৰিয় দেশবাসীসকল,

শক্তি সুৰক্ষাৰ সন্দৰ্ভত মই আমাৰ সম্পূৰ্ণ শক্তিক বিকল্প উৎসলৈ প্ৰেৰণ কৰাৰ অতি প্ৰয়োজনীয়তাৰ বিষয়ত গুৰুত্ব আৰোপ কৰিছো; ভাৰতে এই দিশত দ্ৰুতগতিত আগবাঢ়িছে আৰু লগতে শক্তিৰ ব্যৱহাৰো অনুকূল কৰি তুলিছে। ২০১৪ চনৰ আগতে—অৰ্থাৎ ১২ বছৰৰ আগতে—দেশৰ মাত্ৰ ৭০খন চহৰতহে পাইপেৰে গেছ বিতৰণৰ ব্যৱস্থা আছিল। এই ১২ বছৰত আমি এই নেটৱৰ্ক ৭০ খন চহৰৰ পৰা ৭০০ খন চহৰলৈ সম্প্ৰসাৰিত কৰিছো।এয়াই হৈছে অগ্ৰগতিৰ বেগ; এয়াই হৈছে সম্প্ৰসাৰণৰ পৰিসৰ। ২০১৪ চনৰ আগতে পাইপ গেছ মাত্ৰ ২০ৰ পৰা ২২ লাখ পৰিয়াললৈহে গৈছিল; আজি আমি ১.৭৫ কোটি পৰিয়াললৈ পাইপ গেছ যোগান ধৰিছো। বাৰ বছৰৰ আগতে দেশখনৰ সৌৰশক্তিৰ ক্ষমতা আছিল মাত্ৰ ২ গিগাৱাট; আজি আমি ১৬০ গিগাৱাটৰ ক্ষমতা লাভ কৰিছো।

মোৰ প্ৰিয় দেশবাসীসকল,

মই আৰু এটা তথ্য আগবঢ়াব বিচাৰিছো যে দেশৰ মধ্যবিত্ত আৰু সাধাৰণ পৰিয়ালে যাতে এই পদক্ষেপৰ সুফল লাভ কৰে সেই বিষয়ত আমি সমানে মনোনিৱেশ কৰিছো। আমি ‘পি এম সূৰ্য ঘৰ মুফট বিজলী যোজনা’ (বিনামূলীয়া বিদ্যুৎ আঁচনি) আৰম্ভ কৰিলোঁ আৰু আজি মই এই কথা ভাবি আনন্দিত হৈছো যে ইমান কম সময়ৰ ভিতৰতে আমি ৫০ লাখ ঘৰত সৌৰশক্তি ব্যৱস্থা স্থাপনৰ মাইলৰ খুঁটি অতিক্ৰম কৰিছো; কামটো দ্ৰুতগতিত আগবাঢ়িছে। ফলত হাজাৰ হাজাৰ পৰিয়ালৰ বিদ্যুতৰ বিল শূন্যলৈ নামি অহা দেখা গৈছে আৰু বহুতে এতিয়া নিজৰ ব্যৱস্থাৰ পৰা উৎপাদিত উদ্বৃত্ত বিদ্যুৎ বিক্ৰী কৰি উপাৰ্জনো কৰিছে। এই কামৰ সুবিধাৰ বাবে চৰকাৰে প্ৰতিটো পৰিয়ালক ৮০,০০০ টকাৰ আৰ্থিক সাহায্য আগবঢ়াইছে, যাৰ ফলত আমি এই পদক্ষেপক আগুৱাই নিবলৈ সক্ষম হৈছো।

মোৰ প্ৰিয় দেশবাসীসকল,

আপোনালোকে হয়তো জানি আচৰিত হ’ব যে আমাৰ ৰে’লৱে নেটৱৰ্কৰ বৈদ্যুতিকৰণ ১৯২৫ চনৰ পৰাই আৰম্ভ হৈছিল।যদিও তেতিয়াৰে পৰাই এই প্ৰক্ৰিয়া আৰম্ভ হৈছিল, তথাপিও পৰৱৰ্তী ৯০ বছৰত ৰে’লৱে নেটৱৰ্কৰ মাত্ৰ ৩০%ত বিদ্যুৎ সংযোগ হৈছিল। ৯০ বছৰত মাত্ৰ ৩০%— আমি আমাৰ লক্ষ্যত উপনীত হ’বলৈ যি গতিৰে দৌৰিছো তাৰ সৈতে তুলনা কৰক। আমি এই একক দশকৰ ভিতৰতে ১০০% কাম সম্পূৰ্ণ কৰিলোঁ। ৯০ বছৰত ৩০% বনাম ১০ বছৰত ৭০%—প্ৰকৃততে কাম এনেকুৱাই হৈছে। এই কৃতিত্বৰ ফলত ডিজেল সঞ্চয় হৈছে, যিটো আমি পূৰ্বে আমদানি কৰিবলগীয়া হৈছিল। আমাৰ ৰে’লসমূহ এতিয়া বিদ্যুতেৰে চলাৰ লগে লগে পৰিৱেশো লাভাৱান্বিত হৈছে।

মোৰ প্ৰিয় দেশবাসীসকল,

আমি ইয়াতে ৰৈ যোৱা নাই। আমি বাকী পৃথিৱীৰ পৰা পিছ পৰি থাকিব নিবিচাৰো; শেহতীয়াকৈ আপোনালোকে নিশ্চয় শুনিছে যে ভাৰতে ইন্ধন প্ৰযুক্তিৰ নতুন খণ্ডত এক অগ্ৰগতি লাভ কৰিছে। দেশত হাইড্ৰজেন চালিত প্ৰথমখন ৰে’ল মুকলি কৰা হৈছে। মই আনন্দিত যে এইখনেই এই ধৰণৰ আটাইতকৈ দীঘল আৰু শক্তিশালী ৰে’লআৰু ভাৰতে সঁচাকৈয়ে হাইড্ৰজেন ৰে’লৰ ক্ষেত্ৰত বিশ্বৰ মঞ্চত নিজৰ নাম উজলাইছে।

প্ৰিয় সহ দেশবাসীসকল,

যোৱা ১০–১২ বছৰ ধৰি আমি ২০৪৭ চনৰ লক্ষ্যৰ দিশে দৌৰি আহিছো, ইটোৰ পিছত সেই মাইলৰ খুঁটি অৰ্জন কৰি আহিছো। আমি কল্পনাও কৰা নাছিলোঁ যে বাটত আমি কিছুমান বিশেষ প্ৰতিকূলতাৰ সন্মুখীন হ’ব লাগিব। যোৱা এটা দশকত আমি অসংখ্য সংকটৰ সন্মুখীন হৈছো। ক’ভিডৰ দৰে বিশ্বব্যাপী মহামাৰীয়ে সমগ্ৰ বিশ্বক উদ্বিগ্নতাত ডুবাই পেলালে আৰু ব্যৱস্থাবোৰ ছিন্নভিন্ন হৈ পৰিল। আমি মহামাৰীৰ পৰা ওলাই অহাৰ লগে লগে যুদ্ধৰ ভয়াবহতাৰ খবৰ আহিবলৈ ধৰিলে— ইউক্ৰেইনতেই হওক বা পশ্চিম এছিয়াতেই হওক—সকলোতে উত্তেজনাৰ পৰিৱেশৰ সৃষ্টি হ’ল। তদুপৰি ভৱিষ্যদ্বাণী কৰোতা আৰু পণ্ডিতসকলে নানা ধৰণৰ ভয়ানক ভৱিষ্যদ্বাণী কৰিছিল। কিছুমান মানুহে দেশক ভয় খুৱাই, ভয় আৰু উদ্বিগ্নতাৰ অৱস্থাত ৰাখিয়েই যেন আনন্দ লাভ কৰে। তেওঁলোকে দাবী কৰিছিল যে আমি ভেকচিন নাপাম, মানুহ ক’ভিডৰ পৰা বাচিব নোৱাৰিব আৰু একোৱেই নহ’ব। পশ্চিম এছিয়াৰ সংকটে যেতিয়া আঘাত হানিছিল, তেতিয়া তেওঁলোকে উৰাবাতৰি বিয়পাইছিল যে পেট্ৰ’ল পাম্পবোৰ শুকাই যাব—পেট্ৰ’ল, গেছ, ডিজেল বা সাৰ নাথাকিব—ভাৰতবাসীক আতংকিত কৰি চিন্তাত ডুবাই পেলোৱাৰ প্ৰয়াসেৰে তেওঁলোক আনন্দিত হৈছিল। কিন্তু যোৱা ১০–১২ বছৰৰ সুকল্পিত পৰিকল্পনাই কেনেদৰে ফল দিছে সেয়া দেশে প্ৰত্যক্ষ কৰিছে। এনে বৃহৎ সংকটৰ মাজতো, আৰু ‘নাগৰিক দেৱো ভৱ’ মন্ত্ৰৰ দ্বাৰা পৰিচালিত হৈ ভাৰতৰ প্ৰস্তুতি তথা গ্ৰহণ কৰা পদক্ষেপসমূহ এই নিৰ্দিষ্ট সংকটসমূহৰ সময়ত অমূল্য বুলি প্ৰমাণিত হ’ল। আজি দেশত গেছ, পেট্ৰ’ল, ইউৰিয়াৰ যথেষ্ট মজুত আছে। আমি মূৰ দাঙি থিয় হৈ আগবাঢ়িছো, নিজৰ শক্তিৰ ওপৰত নিৰ্ভৰ কৰি।

 

মোৰ প্ৰিয় দেশবাসীসকল,

এই বিশ্ব সংকটৰ ফলত সকলোৱেই প্ৰভাৱান্বিত হৈছে, আমিও ইয়াৰ ব্যতিক্ৰম নহয়। বিশ্বজুৰি এক বেগ ইউৰিয়াৰ মূল্য ৩ হাজাৰ টকা হৈছেগৈ। তথাপিও আমি দেশৰ কৃষকক সেই বোজা বহন কৰিবলৈ বাধ্য কৰোৱা নাই; চৰকাৰে সেই বোজা কান্ধত লৈছে। আমি বিশ্বৰ বজাৰৰ পৰা প্ৰতি বেগত ৩,০০০ টকাত ইউৰিয়া ক্ৰয় কৰো কিন্তু আমাৰ কৃষকসকলক মাত্ৰ ৩০০ টকাত সেয়া যোগান ধৰো। কেৱল সেয়াই নহয়—ডি এ পিৰ বিশ্বজুৰি বজাৰ মূল্য ৫,০০০ টকা হৈছে যদিও আমি আমাৰ কৃষকসকলক ১,৩৫০ টকাত যোগান ধৰিছো , যাতে তেওঁলোকে কোনো কষ্টৰ সন্মুখীন নহয়।

মোৰ প্ৰিয় দেশবাসীসকল,

এটা সময় আছিল যেতিয়া মই আত্মনিৰ্ভৰশীলতাৰ কথা কৈছিলো আৰু সমালোচকসকলে—শীততাপ নিয়ন্ত্ৰিত কোঠাত বহি—গোলকীকৰণৰ কি হ’ব বুলি প্ৰশ্ন উত্থাপন কৰিছিল। তথাপিও বিশ্বই প্ৰত্যক্ষ কৰিছে যে যোৱা দশকত বিশ্বায়নৰ চাৰিওফালে ঘূৰি থকা কথাবোৰ যেন বন্ধ হৈ গৈছে; এসময়ত ইয়াৰ পোষকতা কৰা কণ্ঠবোৰ নিমাত হৈ পৰিছে। প্ৰতিখন দেশে নিজৰ নিজৰ জৰুৰী চিন্তাৰ ক্ষেত্ৰত মনোনিৱেশ কৰিছে। দুৰ্ভাগ্যজনকভাৱে এই সংকটৰ সময়ছোৱাত একাংশই নিজৰ আধিপত্য বজাই ৰাখিবলৈ নানান খেল খেলিছে। পৃথিৱীখনে নিজৰ হাতত থকা যিকোনো বস্তুকে সজ্জিত কৰাত ব্যস্ত হৈ পৰিছে— সেয়া পেট্ৰ’লেই হওক, ডিজেলেই হওক, সাৰেই হওক, ঔষধেই হওক, প্ৰযুক্তিৰ চিপেই হওক, আনকি ভূখণ্ডই হওক। যোৱা দহ বছৰত আমি আত্মনিৰ্ভৰশীলতাৰ মন্ত্ৰটো লৈ সঠিক দিশত আগবাঢ়িব নোৱাৰা হ’লে এনে প্ৰত্যাহ্বানৰ সন্মুখীন হ’লোঁহেঁতেন কেনেকৈ; যিদৰে আছে, আমাৰ প্ৰস্তুতি ক্ৰমাগতভাৱে বৃদ্ধি পাইছে।

মোৰ প্ৰিয় দেশবাসীসকল,

আনহাতে ভাৰতৰ বিশ্বজোৰা ভাবমূৰ্তি আজি যথেষ্ট বৃদ্ধি পাইছে। ভাৰতে বিশ্ব মঞ্চত এক গ্ৰহণযোগ্য আৰু সন্মানীয় দেশ হিচাপে আত্মপ্ৰকাশ কৰিছে। আমাৰ হাতত আছে এক সুস্থিৰ ৰাজনৈতিক আদেশ আৰু এখন সুস্থিৰ চৰকাৰ; আমাৰ এটা সজীৱ গণতন্ত্ৰ, এটা শক্তিশালী ন্যায়িক ব্যৱস্থা আৰু আমাক সকলোকে পথ প্ৰদৰ্শন কৰা সংবিধান আছে—আৰু বিশ্বই এতিয়া আমাৰ এই অন্তৰ্নিহিত শক্তিক স্বীকৃতি দিবলৈ আৰম্ভ কৰিছে। ফলস্বৰূপে ২০১৪ চনৰ পৰা আমি প্ৰায় ৪০খন দেশৰ সৈতে মুক্ত বাণিজ্য চুক্তি (এফটিএ) কৰি আহিছো। এই বাণিজ্যিক চুক্তিসমূহে এক প্ৰচণ্ড সুযোগৰ সৃষ্টি কৰিছে আৰু মই বিশেষভাৱে আমাৰ এম এছ এম ই খণ্ডক আহ্বান জনাব বিচাৰো যে এই সুযোগ হাতৰ পৰা পিছলি যাবলৈ নিদিব। আমি বিশ্বৰ বজাৰত উপনীত হ’ব লাগিব; ভাৰতীয় সামগ্ৰী—সেয়া বস্ত্ৰই হওক, যন্ত্ৰপাতিয়েই হওক বা ঔষধেই হওক—তাত নিজৰ স্থান বিচাৰি উলিওৱাটো প্ৰয়োজন। আমি এই সুযোগ হেৰুৱাব নোৱাৰো, কিন্তু আমি বিশ্বজুৰি মানো পূৰণ আৰু অতিক্ৰম কৰিব লাগিব। আমি এনে সামগ্ৰী আগবঢ়াব লাগিব যিবোৰৰ মান উন্নত আৰু বৰ্তমান বিশ্বজুৰি উপলব্ধতকৈ অধিক প্ৰতিযোগিতামূলক মূল্যৰ। পঞ্জাৱৰ লুধিয়ানাৰ পৰা তামিলনাডুৰ তিৰুপপুৰলৈকে আমাৰ বস্ত্ৰ খণ্ডই বিশ্ব মঞ্চত চিনাকি দিয়াৰ সম্ভাৱনা আছে। তদুপৰি আমাৰ বিশাল উপকূল—কেৰালাৰ পৰা গুজৰাট আৰু তামিলনাডুৰ পৰা বংগলৈকে বিস্তৃত—আৰু আমাৰ মাছমৰীয়া সম্প্ৰদায়সমূহে বহুখিনি লাভাৱান্বিত হ’বলৈ ধৰিছে; এই এফটিএসমূহৰ বাবেই আমাৰ চিংৰা আৰু অন্যান্য সাগৰীয় খাদ্য সামগ্ৰী বিশ্বলৈ ৰপ্তানি কৰাৰ অপৰিসীম সম্ভাৱনা আছে। মই বিচাৰিম যে আমি এই পৰিস্থিতিক মূলধন হিচাপে লৈ আগবাঢ়ি যোৱাৰ লগে লগে লক্ষ্যসমূহ পূৰণ কৰিবলৈ চেষ্টা কৰিব লাগিব ।

মোৰ প্ৰিয় দেশবাসীসকল ,

মই ৰূপৰেখা প্ৰস্তুত কৰা দৃষ্টিভংগীটো এটা শক্তিশালী ভেটিৰ ওপৰত নিৰ্ভৰশীল, যাৰ মূলতে ২০৪৭ চনৰ ভিতৰত ‘বিকশিত ভাৰত’ (উন্নত ভাৰত)ৰ লক্ষ্য নিহিত আছে। ২০৪৭ চনৰ ভিতৰত এখন উন্নত ভাৰতৰ এই উদ্দেশ্য বিগত ১০ৰ পৰা ১২ বছৰত আমাৰ নাগৰিকসকলে যি অপৰিসীম সামৰ্থ্য প্ৰদৰ্শন কৰিছে তাৰ প্ৰতিফলন ঘটিছে। আৰু সেইবাবেই মোৰ মৰমৰ ভাই-ভনীসকল,

শতিকাৰ এক চতুৰ্থাংশ পাৰ হৈ গ’ল আৰু পৰৱৰ্তী চতুৰ্থাংশ আমাৰ বাবে অতি গুৰুত্বপূৰ্ণ। আমি এতিয়া ৰৈ থাকিব নোৱাৰো; আমাৰ গতিবেগ হ্ৰাস কৰিব নালাগে। আমাৰ গতিপথ নিৰ্ধাৰণ কৰা হৈছে আৰু আমি আমাৰ লক্ষ্যত উপনীত হ’বলৈ দৃঢ়প্ৰতিজ্ঞ। ইয়াৰ বাবে আমি আমাৰ কৰ্ম সংস্কৃতিক ৰূপান্তৰিত কৰিব লাগিব; আমাৰ কৰ্ম সংস্কৃতি সলনি কৰিবলৈ হ’লে আমাৰ মানসিকতাৰ পৰিৱৰ্তন আৰু আমাৰ কামৰ গতি ত্বৰান্বিত হোৱাৰ প্ৰয়োজন। যোৱা পাঁচ-সাত দশকত যিখিনি কাম নকৰাকৈয়ে থাকিল, সেই কাম আমি অহা পাঁচ-সাত বছৰত সম্পন্ন কৰিব লাগিব৷ মোৰ বিশ্বাস আছে—মোৰ দেশৰ যুৱ শক্তিৰ ওপৰত, আমাৰ যুৱক-যুৱতীসকলৰ ওপৰত, আমাৰ মাতৃ-ভগ্নীৰ ওপৰত, আমাৰ কৃষকৰ ওপৰত, আমাৰ শ্ৰমিকৰ ওপৰত— বিশ্বাস আছে যে আমি এই সপোনক বাস্তৱত পৰিণত কৰিব পাৰিম। সংস্কাৰৰ গতি আমি ত্বৰান্বিত কৰিব লাগিব। সংস্কাৰৰ কথা ক’লে আমাৰ বাবে ই কোনো বাধ্যবাধকতা নহয়; ই গভীৰ প্ৰত্যয়ৰ পৰাই উদ্ভৱ হৈছে। আমি ‘ৰিফৰ্ম এক্সপ্ৰেছ’ত উঠি আহিছো আৰু আগন্তুক দিনত সংস্কাৰৰ পৰৱৰ্তী পৰ্যায়লৈ আগবাঢ়ি যাবলৈ সাজু হৈছো। গতিকে চৰকাৰ, সমাজ, উদ্যোগ, উৎপাদক, কৃষক—প্ৰত্যেকেই— নিজৰ পৰম্পৰাগত ব্যৱস্থা, মানসিকতা, লক্ষ্যৰ সংস্কাৰ সাধন কৰিব লাগিব।

মোৰ প্ৰিয় দেশবাসীসকল ,

আমি স্পষ্ট দিশেৰে আগবাঢ়িব লাগিব। ‘সপ্ত সিন্ধু’ (সাতখন মহানদী)ৰ ধাৰণাটোৰ জৰিয়তে ভাৰতৰ শক্তিক স্বীকৃতি দিয়া এটা যুগৰ কথা মনত পেলাব বিচাৰিছো; আজি এখন উন্নত ভাৰত গঢ়িবলৈ আমাক শক্তিৰ এক নতুন ধাৰা লাগিব। লালকিল্লাৰ প্ৰাচীৰৰ পৰা মই এই ‘সপ্ত ধাৰা’—এই সাতটা ক্ষমতাৰ ধাৰা—দেশৰ বাবে আমন্ত্ৰণ জনাইছো। এই সাতটা ধাৰাৰ শক্তি আৰু সম্ভাৱনাক ব্যৱহাৰ কৰি আমি অহা পাঁচ-সাত বছৰত দেশখনক নতুন উচ্চতা আৰু গতিলৈ আগুৱাই নিম—যিবোৰ কৃতিত্ব আমাৰ পৰা দশক দশক ধৰি আঁতৰি আছিল—আৰু দেশক নতুন মাইলৰ খুঁটি অতিক্ৰম কৰিবলৈ শক্তিশালী কৰিম। ইয়াৰ সমান্তৰালভাৱে আমাৰ যুৱ শক্তিৰ অপৰিসীম সম্ভাৱনাক দেশ নিৰ্মাণৰ বাবে সম্পূৰ্ণৰূপে ব্যৱহাৰ কৰা হ’ব; তেওঁলোকৰ শক্তি এই সামূহিক প্ৰচেষ্টাত একত্ৰিত হ’ব। আগন্তুক দিনত যেতিয়া মই ‘সপ্ত ধাৰা’ (সাতটা ধাৰা)ৰ কথা কওঁ, তেতিয়া প্ৰথম শক্তি হ’ল—উৎপাদন শক্তি।

মোৰ প্ৰিয় দেশবাসীসকল,

আমি উৎপাদন খণ্ডটোক যথেষ্ট আগুৱাই নিব লাগিব; উৎপাদন বৃদ্ধিৰ সমান্তৰালভাৱে আমি সৰু উপাদানৰ পৰা আৰম্ভ কৰি বৃহৎ পৰিসৰৰ সামগ্ৰীলৈকে সকলো উৎপাদন কৰিব লাগিব। আমি সমগ্ৰ মূল্য শৃংখলটোৰ মালিক হ’ব লাগিব—ব্যক্তিগত উপাদানৰ পৰা আৰম্ভ কৰি সম্পূৰ্ণ, সম্পূৰ্ণ সামগ্ৰীলৈকে সকলোকে সামৰি লোৱা। ভাৰতে বিশ্বৰ যোগান শৃংখলত এক বিশ্বাসযোগ্য কেন্দ্ৰ হিচাপে আত্মপ্ৰকাশ কৰিব লাগিব, যিয়ে ডিজাইনৰ পৰা উৎপাদনলৈকে সমগ্ৰ প্ৰক্ৰিয়াটোক সামৰি ল’ব লাগিব। এই সন্দৰ্ভত মই উৎপাদন খণ্ডত মোৰ ভাই-ভনীসকলৰ বাবে তিনিটা দিশত বিশেষ গুৰুত্ব দিব বিচাৰিছো। এইটো এটা গুৰুত্বপূৰ্ণ সুযোগ—যিটো হেৰুৱাব নালাগে। সফল হ’বলৈ হ’লে আমি খৰচ, গুণগত মান আৰু পৰিসৰৰ ক্ষেত্ৰত বিশ্বব্যাপী মান পূৰণ কৰিব লাগিব। আমাৰ কাৰখানাসমূহ প্ৰতিযোগিতামূলক, আমাৰ সামগ্ৰীসমূহ ব্যৱহাৰকাৰী-বন্ধুত্বপূৰ্ণ, আৰু আমাৰ পেকেজিং বিশ্বৰ বাবে আকৰ্ষণীয় আৰু আকৰ্ষণীয় হ’ব লাগিব। ‘জিৰ’-ডিফেক্ট প্ৰিচিচন মেনুফেকচাৰিং’ আমাৰ চিনাকি হ’ব লাগিব। মই প্ৰতিজন নিৰ্মাতা, উদ্যোগী, আৰু এম এছ এম ইক আহ্বান জনাইছো যে বিশ্বৰ বজাৰত আমাৰ পৰিচয় যাতে নিৰ্ভৰযোগ্যতা আৰু গুণগত মানৰ দ্বাৰা সংজ্ঞায়িত হয়। গুণগত মানৰ ক্ষেত্ৰত কোনো আপোচ কৰিব নোৱাৰি; সঁচাকৈয়ে ‘গুণগত মান, গুণগত মান, গুণগত মান’ আমাৰ মন্ত্ৰ হ’ব লাগিব। এইটোৱেই আমাৰ বিশ্বব্যাপী ব্ৰেণ্ড মূল্য গঢ়ি তুলিব।

মোৰ প্ৰিয় দেশবাসীসকল,

এই ‘সপ্ত-ধাৰা’ৰ দ্বিতীয় স্তম্ভ হ’ল কৃষি আৰু খাদ্য উৎপাদন—বিশেষকৈ খাদ্য সংসাধন। আমাৰ কৃষকৰ বাবে বিশ্বব্যাপী বজাৰ মুকলি হৈছে; মুক্ত বাণিজ্য চুক্তিসমূহে (এফটিএ) আমাক বজাৰত বিস্তৃত প্ৰৱেশৰ সুবিধা প্ৰদান কৰিছে। আমি এই সুযোগসমূহ আত্মসাৎ কৰি পামৰ পৰা ৰপ্তানি বজাৰলৈ যোৱা যাত্ৰাৰ সেতুবন্ধন কৰিব লাগিব। আমাৰ পৰম্পৰাগত খাদ্য আৰু বাজৰাৰ পৰা আৰম্ভ কৰি আমাৰ মছলা, ফল-মূল আৰু ফুললৈকে—আমাৰ হাতত অবিশ্বাস্য সামগ্ৰীৰ শৃংখল আছে। এইবোৰ গ্ল’বেল ব্ৰেণ্ড হ’ব লাগিব। আমাৰ কৃষকসকলে ৰাসায়নিক মুক্ত কৃষি ক্ৰমান্বয়ে গ্ৰহণ কৰাৰ লগে লগে—যি প্ৰথাৰ বাবে বিশ্বব্যাপী চাহিদা বৃদ্ধি পাইছে—আমি বিশ্বৰ সকলো মান পূৰণ কৰা কৃষিজাত সামগ্ৰীৰে আন্তঃৰাষ্ট্ৰীয় বজাৰত সহজেই প্ৰৱেশ কৰিবলৈ সক্ষম হ’ম। মোৰ ‘সপ্ত-ধাৰা’ৰ তৃতীয় স্তম্ভ হ’ল প্ৰযুক্তি আৰু উদ্ভাৱন।

 

মোৰ প্ৰিয় দেশবাসীসকল,

আজি এআই, কোৱাণ্টাম প্ৰযুক্তি, মহাকাশ অন্বেষণ, ৰবটিক্স, আৰু ডাটা চেণ্টাৰৰ যুগ; সম্পূৰ্ণ নতুন সীমান্ত মুকলি হৈছে। উদীয়মান প্ৰযুক্তিয়ে আমাক অহৰহ প্ৰত্যাহ্বান জনাইছে; গতিকে আমি দেশখনক কেৱল বিশ্বৰ বাবে বজাৰ হ’বলৈ নিদিব নালাগে—আমি উদ্ভাৱনৰ কেন্দ্ৰ হ’ব লাগিব। ইতিমধ্যে আমি ইউপিআই আৰু ডিজিটেল ৰাজহুৱা আন্তঃগাঁথনিত আমাৰ মেবল প্ৰমাণ কৰিছো আৰু আমাৰ শক্তি প্ৰদৰ্শন কৰিছো। এতিয়া আমি ডিজিটেল ৰাজহুৱা প্ৰযুক্তিক বিশ্বৰ প্ৰতিটো চুকলৈ লৈ যাব লাগিব। পৰৱৰ্তী প্ৰজন্মৰ যোগাযোগ প্ৰযুক্তিৰ ক্ষেত্ৰত ভাৰতে আগবাঢ়িব লাগিব। আমাৰ লক্ষ্য হ’ব লাগে যে ‘মেড ইন ইণ্ডিয়া’ ৬জি প্ৰতিটো চুকত উপনীত হোৱাটো নিশ্চিত কৰা; আমি এই প্ৰক্ৰিয়াটো ত্বৰান্বিত কৰিব লাগিব আৰু আমাৰ প্ৰচেষ্টাসমূহৰ পৰা আঁতৰি নোযোৱাটো নিশ্চিত কৰিব লাগিব। 'সপ্ত ধাৰা' (শক্তিৰ সাতটা ধাৰা)ৰ ভিতৰত চতুৰ্থ শক্তি হ'ল গতি শক্তি (গতি/সংযোগ শক্তি)। আমি দেশৰ ভিতৰত নিৰৱচ্ছিন্ন, দ্ৰুত সংযোগৰ ওপৰত গুৰুত্ব দিব লাগিব। আমি তীব্ৰবেগী ৰে’লৰ জৰিয়তে চহৰসমূহক সংযোগ কৰিব লাগিব। আমাক আধুনিক ঘাইপথ, আভ্যন্তৰীণ জলপথ, বিমানবন্দৰ, আৰু মাল্টিম’ডাল লজিষ্টিক ব্যৱস্থাৰ প্ৰয়োজন। আমি বন্দৰক কেৱল মাল বোজাই আৰু নমোৱাৰ ঠাই হিচাপে বা বিশ্বজুৰি জাহাজৰ বাবে কেৱল ডকিং পইণ্ট হিচাপে চোৱাৰ বাহিৰলৈ যাব লাগিব; বৰঞ্চ আমি আমাৰ বন্দৰসমূহক বন্দৰ নেতৃত্বাধীন উন্নয়ন আৰু বৃদ্ধিৰ দিশত আগুৱাই নিব লাগিব। এই সপ্ত ধাৰাত পঞ্চম শক্তি হৈছে প্ৰতিৰক্ষা শক্তি (ৰক্ষা ক্ষমতা), যি সকলো দিশতে অতি গুৰুত্বপূৰ্ণ।

মোৰ প্ৰিয় দেশবাসীসকল,

ভাৰতে—আৰু সঁচাকৈয়ে বিশ্বই— উপলব্ধি কৰিছে যে প্ৰতিৰক্ষাৰ ক্ষেত্ৰত আত্মনিৰ্ভৰশীলতাই একমাত্ৰ আগবাঢ়ি যোৱাৰ পথ; ইয়াৰ কোনো বিকল্প নাই। যি সময়ত দেশসমূহে নিজৰ স্বাৰ্থক অগ্ৰাধিকাৰ দিছে, সেই সময়ত ভাৰতে কেৱল বিশ্বৰ বাবে বজাৰ হৈ থাকিব নোৱাৰে। আমি প্ৰতিৰক্ষা খণ্ডত আত্মনিৰ্ভৰশীলতা লাভ কৰিব লাগিব। আমি পৰৱৰ্তী প্ৰজন্মৰ প্ৰতিৰক্ষা প্ৰযুক্তি বিকশিত কৰি বিশ্বজুৰি যোগানকাৰী হোৱাৰ লক্ষ্য ৰাখিব লাগিব। আমি ড্ৰ’ন আৰু কাউণ্টাৰ ড্ৰ’ন ব্যৱস্থা গঢ়ি তুলিব লাগিব আৰু হাইপাৰছ’নিক প্ৰতিৰক্ষা প্ৰযুক্তিৰ ক্ষেত্ৰত আমি আগভাগ ল’ব লাগিব।

বন্ধুসকল,

চাইবাৰ সুৰক্ষাও আজি প্ৰতিটো ঘৰৰ বাবে চিন্তাৰ বিষয় হৈ পৰিছে। ই প্ৰতিৰক্ষাৰ এক ক্ষেত্ৰ য’ত আমি আমাৰ যুৱক-যুৱতীসকলৰ সামৰ্থ্যক দেশ আৰু বিশ্ব উভয়ৰে সুবিধাৰ বাবে ব্যৱহাৰ কৰিব পাৰো। আমাৰ ‘সপ্ত-ধাৰা’ (সাতটা ধাৰা)ৰ ষষ্ঠ স্তম্ভ হ’ল সেউজ অৰ্থনীতি আৰু নীলা অৰ্থনীতি, যিবোৰেও চাকৰিৰ সৃষ্টি কৰিব। আমি সেউজ হাইড্ৰজেন, নবীকৰণযোগ্য শক্তি, শক্তি সংৰক্ষণ, সেউজ গতিশীলতা, আৰু সেউজ উৎপাদনৰ ক্ষেত্ৰত বিশ্বজুৰি সফলতা লাভ কৰিব লাগিব। বিশ্বই গোলকীয় উষ্ণতা বৃদ্ধিৰ বিষয়ে আলোচনা কৰি আগবাঢ়ি যোৱাৰ পথ বিচাৰি থকাৰ সময়তে আমি সমাধান আগবঢ়াইছো; ভাৰতে অপৰিসীম সম্ভাৱনাৰে এই সেউজ আন্দোলনত নামিছে। নীলা অৰ্থনীতিতো ভাৰতৰ বিশাল সুযোগ আছে; আমাৰ বিস্তৃত উপকূলৰ সৈতে, মীন, উপকূলীয় পৰ্যটন, সাগৰীয় প্ৰযুক্তি, আৰু আন বহুতো খণ্ডত অপৰিসীম পৰিসৰ আছে য'ত আমি আগবাঢ়িব পাৰো।

মোৰ প্ৰিয় দেশবাসীসকল,

এই ‘সপ্ত-ধাৰা’ কাঠামোৰে ভাৰত আগবাঢ়ি যোৱাৰ লগে লগে সপ্তম ধাৰাটো—যিটোৱে বিশ্বৰ বাবে অতি তাৎপৰ্য বহন কৰে—সেয়া হৈছে ভাৰতৰ ‘কোমল শক্তি’। ভাৰতৰ কোমল শক্তি এক সুন্দৰ শক্তি। আজি যোগে সমগ্ৰ বিশ্বক ভাৰতৰ সৈতে একত্ৰিত কৰিছে; ই বিশ্বৰ বাবে শক্তিৰ উৎস হৈ পৰিছে আৰু ভাৰতৰ ওপৰত বিশ্বৰ আস্থাৰ এটা ডাঙৰ কাৰণ হৈ পৰিছে। আমাৰ বিশ্বাসৰ কেন্দ্ৰ, আয়ুৰ্বেদ, সামগ্ৰিক স্বাস্থ্যসেৱা ব্যৱস্থা আৰু ‘ সুস্থতা’ আন্দোলনৰ জৰিয়তে আমি বিশ্বৰ আগত আমাৰ সামৰ্থ্য প্ৰদৰ্শন কৰিব পাৰিছো। হস্তশিল্পই হওক, সংস্কৃতিয়েই হওক, ছবিয়েই হওক, সৃষ্টিশীল খণ্ডই হওক, ভিএফএক্সেই হওক, এনিমেচনেই হওক, গেমিঙেই হওক অথবা ডিজিটেল কন্টেন্টেই হওক— ভাৰতে সৃষ্টিশীল জগতখনত নিজৰ পাৰদৰ্শিতা প্ৰদৰ্শন কৰিব পাৰিছে। আমি ইয়াক বিশ্বজুৰি শক্তি হিচাপে গঢ়ি তুলিব লাগিব। আজি ভাৰতে ৱেভছ শীৰ্ষ সন্মিলনক ​​ গতি প্ৰদান কৰিছে। ভাৰতৰ ‘বিশ্ব অডিঅ’-ভিজুৱেল আৰু মনোৰঞ্জন সন্মিলন’ৰ বাবে বিশ্বই আগ্ৰহেৰে অপেক্ষা কৰি আছে; ই ভাৰতৰ কোমল শক্তি আৰু সৃষ্টিশীল পৰিৱেশক বিশ্ব সমাজৰ আগত প্ৰদৰ্শন কৰিব।

মোৰ প্ৰিয় দেশবাসীসকল ,

ভাৰতত বন্যপ্ৰাণীৰ অপৰিসীম সম্পদ আছে; আমাৰ ১০০ খনতকৈও অধিক ৰাষ্ট্ৰীয় উদ্যান আছে। সম্ভাৱনা বিশাল হ’লেও বিদেশী পৰ্যটকক আকৰ্ষণ কৰাত আমি কিছু পিছ পৰি ৰৈছো। আমাৰ কোমল শক্তিৰ সহায় লৈ আৰু বিশ্বৰ আগত আমাৰ সামৰ্থ্য প্ৰদৰ্শন কৰি বিশ্ব পৰ্যটকক ভাৰতলৈ আকৰ্ষণ কৰাৰ সুযোগ আমি পাইছো। ইয়াৰ ওপৰত আমি ক্ষিপ্ৰতাৰে কাম কৰিব লাগিব। আজি ক্ৰীড়াই এক প্ৰধান আকৰ্ষণ হিচাপে কাম কৰিছে; ভাৰতত কিয় বিশ্বৰ ক্ৰীড়া অনুষ্ঠান অনুষ্ঠিত কৰা উচিত নহয়? ‘কনচাৰ্ট ইকনমি’ও দ্ৰুতগতিত সম্প্ৰসাৰণ কৰি দেশৰ যুৱক-যুৱতীসকলৰ আগ্ৰহ আকৰ্ষণ কৰিছে। সমগ্ৰ বিশ্বৰ শিল্পীসকলে কোনো এটা সময়ত ভাৰতীয় ভূমিত অনুষ্ঠান পৰিৱেশন কৰাৰ আকাংক্ষা কৰিছে। এয়া এক সুবৰ্ণ সুযোগ আৰু ইয়াক ব্যৱহাৰ কৰিবলৈ আমি প্ৰয়োজনীয় ব্যৱস্থা গ্ৰহণ কৰিব লাগিব।

বন্ধুসকল,

এই ‘সপ্ত-ধাৰা’—এই সাতটা শক্তি বা শক্তিৰ আঁৰৰ উদ্দেশ্য কেৱল এটা খণ্ডৰ প্ৰগতি নহয়। আমি এক সামগ্ৰিক দৃষ্টিভংগী গ্ৰহণ কৰিব লাগিব আৰু দেশৰ বাবে আমি নিৰ্ধাৰণ কৰা অভিলাষী লক্ষ্য তথা পৰিমাপসমূহ অতিক্ৰম কৰাৰ দিশত কাম কৰিব লাগিব।

মোৰ প্ৰিয় দেশবাসীসকল,

মই দুই এটা কথাহে উল্লেখ কৰিছোঁ, কিন্তু তাৰ বাহিৰেও বহু চিন্তা কৰিছোঁ। দেশক অলপ জোকাৰি দিব বিচাৰিছো; দেশৰ সুপ্ত শক্তিক আলোড়িত কৰিব বিচাৰিছো। এখন দেশ মানে কেৱল চৰকাৰ নহয়; ই প্ৰতিজন নাগৰিকক সামৰি লৈছে। আমি ‘ফৰ্চুন ৫০০’ৰ বিষয়ে বহু কথা শুনিবলৈ পাওঁ—আগন্তুক দশকৰ ভিতৰত সেই তালিকাত ৫০টা ভাৰতীয় কোম্পানীক আমি কিয় স্থান দিয়াৰ লক্ষ্য ৰাখিব নালাগে? বিশ্বৰ শীৰ্ষ বেংকৰ মাজত কিয় ভাৰতীয় বেংকে নিজৰ পতাকা উৰুৱাব নালাগে? এটা ভাৰতীয় বেংক নিশ্চয়কৈ শীৰ্ষ পাঁচটা বিশ্বজুৰি থকা বেংকৰ ভিতৰত থাকিব লাগে। আমি ঔষধ খণ্ডত উল্লেখযোগ্য কাম কৰিছো, কিন্তু সময়ৰ প্ৰয়োজনীয়তা হ’ল এটা বা দুটা ভাৰতীয় কোম্পানীক বিশ্বৰ শীৰ্ষ পাঁচটা ফাৰ্মা জায়ান্টৰ ভিতৰত গণ্য কৰা; তাত ভাৰতে নিজৰ স্থান খোদিত কৰিব লাগিব। আইন সংস্থা আৰু ৰেটিং এজেন্সীৰ কথা বিবেচনা কৰক—আমাৰ বাবে বিশ্বজুৰি নেতৃত্ব লোৱাৰ সময় নহয়নে? আমাৰ হাতত প্ৰতিভা, সামৰ্থ্য, চহকী ইতিহাস আৰু আদেশ আছে; আমি বিশ্বৰ মঞ্চত নিজৰ স্থান দখল কৰিব লাগিব। ভাৰতীয় কনচালটিং বা একাউণ্টিং ফাৰ্মসমূহে কিয় বিশ্বৰ শ্ৰেষ্ঠ প্ৰতিষ্ঠানৰ ভিতৰত স্থান লাভ কৰিব নালাগে? ভাৰতীয় প্ৰযুক্তি কোম্পানীসমূহে বিশ্বজুৰি সৰ্বোচ্চ ৰাজত্ব কৰাটো আমাৰ লক্ষ্য হ’ব লাগে। আমাক এনে ব্ৰেণ্ড লাগে যিয়ে বিশ্বক মোহিত কৰে—যি ব্ৰেণ্ড আমাৰ দেশৰ পৰিচয় হৈ পৰে। সেই দিশত আমি কাম কৰিব লাগিব। ইয়াৰ বাবে ৰাজ্য চৰকাৰ আৰু স্থানীয় স্বায়ত্ব-শাসিত সংস্থাসমূহক আহ্বান জনাইছো—আৰু ভাৰত চৰকাৰৰো দায়িত্ব—আমাৰ সংস্কাৰৰ গতি ত্বৰান্বিত কৰিবলৈ। আমি ২০৪৭ চনৰ লক্ষ্যৰ সৈতে সংগতি ৰাখি আমাৰ ব্যৱস্থাসমূহ বিকশিত কৰিব লাগিব।আমি অতীতৰ নীতি আৰু নিয়মৰ ওপৰত ভিত্তি কৰি কাম কৰিব নোৱাৰো; আমি এনে নীতি আৰু নিয়ম তৈয়াৰ কৰিব লাগিব যিয়ে আমাৰ ভৱিষ্যতৰ আকাংক্ষাক গঢ় দিয়ে। যদি আমি এই কাম কৰো তেন্তে মোৰ সম্পূৰ্ণ আস্থা আছে—আৰু মই মোৰ দেশৰ নাগৰিকসকলক আশ্বস্ত কৰিছো... এই পথত আমাৰ কঠোৰ পৰিশ্ৰম অটলভাৱে অব্যাহত ৰাখি আমি নিশ্চয়কৈ ‘বিকশিত ভাৰত’ (উন্নত ভাৰত)ৰ সপোন বাস্তৱায়িত কৰিম। আমি একেলগে আগবাঢ়িব লাগিব—কেন্দ্ৰীয় চৰকাৰেই হওক, ৰাজ্য চৰকাৰেই হওক, উদ্যোগেই হওক; আমি সকলোৱে একেলগে আগবাঢ়িব লাগিব। আমি সংস্কাৰৰ ধাৰণাত অটল থাকিব লাগিব আৰু ইয়াক আগুৱাই লৈ যাব লাগিব। মই আগতেও উল্লেখ কৰা মতে আমি বাধ্যবাধকতাৰ বাবে নহয়, প্ৰত্যয়ৰ বাবেই সংস্কাৰৰ পদক্ষেপ হাতত লওঁ।

মোৰ প্ৰিয় দেশবাসীসকল,

যেতিয়া মই এখন ‘বিকশিত ভাৰত’ৰ কথা কৈ আহিছো আৰু দেশক দ্ৰুতগতিত আগুৱাই নিয়াৰ কথা কওঁ, তেতিয়া কোনে আটাইতকৈ বেছি লাভাৱান্বিত হ’বলৈ আগবাঢ়িছে? এই প্ৰচেষ্টাসমূহৰ প্ৰাথমিক চালিকা শক্তি কোন? ই মোৰ দেশৰ যুৱক-যুৱতী—দেশৰ যুৱ শক্তি। উন্নত ভাৰতৰ এই যাত্ৰাত যুৱক-যুৱতীসকলে গুৰুত্বপূৰ্ণ ভূমিকা পালন কৰে। তদুপৰি এই দৃষ্টিভংগীৰ আটাইতকৈ বেছি লাভাৱান্বিত হোৱাসকল তেওঁলোক; সেয়েহে আমি এখন উন্নত ভাৰতৰ লক্ষ্যৰ দিশে আগবাঢ়িব লাগিব, ইয়াৰ সৈতে আমাৰ যুৱক-যুৱতীসকলক সংযুক্ত কৰি। আমি যুৱক-যুৱতীসকলক আমাৰ শীৰ্ষ অগ্ৰাধিকাৰ হিচাপে লৈ আগবাঢ়িব লাগিব।

বন্ধুসকল,

এই দিশত বিগত ১০ৰ পৰা ১২ বছৰত বহুখিনি সফলতা লাভ কৰা হৈছে। ‘ষ্টাৰ্টআপ ইণ্ডিয়া’ পদক্ষেপৰ অধীনত সমগ্ৰ দেশতে ২.৫ লাখৰো অধিক ষ্টাৰ্টআপৰ পঞ্জীয়ন কৰা হৈছে। আমাৰ যুৱক-যুৱতীসকলে কেৱল নিজৰ বাবেই কাম কৰাই নহয়, আন বহুতৰ বাবেও কৰ্মসংস্থাপনৰ সৃষ্টি কৰিছে। ভাৰত চৰকাৰে ১ লাখ কোটি টকাৰ উদ্ভাৱনীমূলক পুঁজি ঘোষণা কৰিছে। দেশৰ যুৱক-যুৱতীসকলক ক’ব বিচাৰো- আপোনালোকৰ সপোনবোৰ আগুৱাই লৈ যাওক আৰু আমি নিশ্চিত কৰিম যে সম্পদৰ কোনো অভাৱ নহয়। আমি এটা ব্যৱস্থা স্থাপন কৰিছো—সেই ১ লাখ কোটি টকাৰ পুঁজিৰ দ্বাৰা—আপোনালোকৰ ধাৰণা আৰু আকাংক্ষাক শক্তিশালী কৰিবলৈ। গৱেষণাৰ নতুন সুযোগ আৰু ‘ডিজিটেল ইণ্ডিয়া’ৰ জৰিয়তে সুলভ মূল্যৰ তথ্যৰ উপলব্ধতাই আমাৰ যুৱক-যুৱতীসকলক সবল কৰি তুলিছে। যদি বিশ্বৰ যিকোনো ঠাইতে সুলভ মূল্যৰ তথ্য আছে, তেন্তে সেয়া ইয়াত ভাৰতত আছে, আৰু ই আমাৰ যুৱক-যুৱতীসকলক নতুন শক্তি প্ৰদান কৰিছে। আমি ‘স্কিল ইণ্ডিয়া’ ৰাষ্ট্ৰীয় কাৰ্যসূচী আৰম্ভ কৰিলোঁ। আমি মহাকাশ খণ্ডটো মুকলি কৰি দিলোঁ। আমি ৰাষ্ট্ৰীয় ড্ৰোন নীতি আৰু ‘খেলো ইণ্ডিয়া’ নীতি প্ৰণয়ন কৰিলোঁ। ৩৫ বছৰ পিছত আমি নতুন শিক্ষা নীতি প্ৰৱৰ্তন কৰিলোঁ, যাৰ ফলত মধ্যবিত্ত পৰিয়ালসমূহ উপকৃত হৈছে।

 বন্ধুসকল,

২০০৪ চনৰ পৰা ২০১৪ চনলৈকে সময়ছোৱাৰ সন্দৰ্ভত কিছু পৰিসংখ্যা আপোনালোকৰ আগত দাঙি ধৰা উচিত হ'ব।২০০৪ চনৰ পৰা ২০১৪ চনৰ ভিতৰত আমাৰ দেশত ৩৫০ খনতকৈও কম বিশ্ববিদ্যালয় আছিল; তথাপিও আজি মাত্ৰ ১০–১২ বছৰৰ ভিতৰতে প্ৰায় ৬৫০খন নতুন বিশ্ববিদ্যালয় সংযোজন কৰা হৈছে। আমি ১০০০ৰ নিৰ্দিষ্ট সীমাৰ কাষ চাপিছো। ২০১৪ চনৰ আগতে চিকিৎসাৰ আসন আছিল মাত্ৰ ৪০০ খন; আজি সেই সংখ্যা প্ৰায় ৮৫০ লৈ বৃদ্ধি পাইছে। কেৱল সেয়াই নহয়, বিদেশী বিশ্ববিদ্যালয়সমূহেও ভাৰতৰ মাটিত উপস্থিতি প্ৰতিপন্ন কৰিছে; আমাৰ যুৱক-যুৱতীসকলে ইয়াতেই ভাৰতৰ বিদেশী বিশ্ববিদ্যালয়ৰ পৰা ডিগ্ৰী লাভ কৰাৰ ব্যৱস্থা কৰা হৈছে। আমি সৰুৰে পৰাই আমাৰ দেশৰ যুৱক-যুৱতীসকলৰ মাজত প্ৰযুক্তিৰ প্ৰতি আগ্ৰহ জগাই তোলাৰ বাবে কাম কৰি আছো; ইয়াৰ বাবে আমি সৰু ল’ৰা-ছোৱালীক ১০,০০০ৰো অধিক ‘অটল টিংকাৰিং লেব’ অৰ্পণ কৰিছো, তেওঁলোকক উদ্ভাৱন আৰু প্ৰযুক্তিৰ সৈতে জড়িত হ’বলৈ উৎসাহিত কৰিছো। আমি অসংখ্য পথ মুকলি কৰিছো আৰু ষ্টাৰ্টআপৰ বাবে সুযোগ সৃষ্টি কৰিছো। আপোনালোকে হয়তো প্ৰত্যক্ষ কৰিছে যে ভাৰতীয় যুৱক-যুৱতীসকলে—তেওঁলোকৰ গড় বয়স মাত্ৰ ২৮ বছৰ—কেনেকৈ প্ৰথম প্ৰচেষ্টাতে উপগ্ৰহ আৰু ৰকেট সফলতাৰে নিক্ষেপ কৰি বিশ্বত প্ৰথম স্থান লাভ কৰিছে; সঁচাকৈয়ে এয়া হৈছে এক উল্লেখযোগ্য কৃতিত্ব।

বন্ধুসকল,

আজি ২ লাখ ৫০ হাজাৰৰো অধিক পঞ্জীয়নভুক্ত ষ্টাৰ্টআপ আছে। শেহতীয়াকৈ আমি এআই ইমপেক্ট ছামিট আয়োজন কৰিছিলো। এআইৰ প্ৰসাৰ দ্ৰুতগতিত বৃদ্ধি পাইছে। লালকিল্লাৰ প্ৰাচীৰৰ পৰা দেশৰ যুৱক-যুৱতীসকলৰ বাবে এটা ঘোষণা কৰিব বিচাৰিছো। আমি আগন্তুক বছৰত এক কোটি যুৱক-যুৱতীক এআই দক্ষতাৰ প্ৰশিক্ষণ দিয়াৰ সিদ্ধান্ত লৈছো, যাতে আমাৰ দেশৰ যুৱক-যুৱতীসকলে এআইৰ জগতখনতো নেতৃত্ব দিয়াৰ ক্ষমতা লাভ কৰে।

মোৰ বন্ধুসকল,

জৈৱ অৰ্থনীতি এক নতুন বিষয় হৈ পৰিছে। ২০১৪ চনৰ আগৰ এটা সময় আছিল যেতিয়া জৈৱ অৰ্থনীতি খণ্ডৰ মূল্য আছিল মাত্ৰ ৬০,০০০ কোটি টকা । মোৰ দেশৰ যুৱক-যুৱতীসকলে কিমান আচৰিত অৰ্জন কৰিছে চাওকচোন। নীতিসমূহ সুস্থ আৰু লক্ষ্য স্পষ্ট হ’লে যুৱক-যুৱতীসকলে কেনেকৈ ফলাফল প্ৰদান কৰে সেয়া পৰ্যবেক্ষণ কৰকচোন। জৈৱ-অৰ্থনীতি খণ্ডত দেশৰ যুৱক-যুৱতীসকলে নিজৰ দক্ষতা প্ৰদৰ্শন কৰিছে। ২০১৪ চনৰ পূৰ্বে ৬০ হাজাৰ কোটি টকাৰ জৈৱ অৰ্থনীতি এতিয়া ২০ লাখ কোটি টকা হৈছেগৈ। ২০০৯-১০ চনৰ সময়ছোৱালৈ মন কৰকচোন: মাত্ৰ ১ লাখ ৫০ হাজাৰ ইলেক্ট্ৰিক বাহনহে বিক্ৰী হৈছিল—২০০৯-১০ চনত মাত্ৰ ১ লাখ ৫০ হাজাৰ। ইয়াৰ বিপৰীতে ২০২৫-২৬ বৰ্ষত ২৫ লাখ বৈদ্যুতিক বাহন বিক্ৰী হৈছে।

মোৰ প্ৰিয় দেশবাসীসকল,

আমাৰ যুৱক-যুৱতীসকলৰ বাবে বিমান পৰিবহণ খণ্ডও দ্ৰুতগতিত আগবাঢ়িছে। নতুন বিমানবন্দৰ, নতুন পথ, নতুন নিয়োগৰ সুযোগ সৃষ্টি কৰা হৈছে। ৰক্ষণাবেক্ষণ আৰু অভাৰহ’লিঙৰ দৰে কাৰ্য্যকলাপে সমগ্ৰ দেশতে বিপুল সংখ্যক দক্ষ কৰ্মীক চাকৰিৰ সুবিধা প্ৰদান কৰিছে। আমি ‘মেড ইন ইণ্ডিয়া’ বিমান নিৰ্মাণৰ ক্ষেত্ৰত সফলতা লাভ কৰিছো। ‘মেড ইন ইণ্ডিয়া’ চি২৯৫ প্ৰতিৰক্ষা পৰিবহণ বিমানখনে ইতিমধ্যে উৰণ আৰম্ভ কৰিছে—প্ৰথম উৰণ সফলতাৰে সম্পূৰ্ণ কৰিছে। তদুপৰি ড্ৰ’নে দেশৰ যুৱক-যুৱতীসকলৰ বাবে উল্লেখযোগ্য ভূমিকা পালন কৰিছে; ড্ৰোন প্ৰযুক্তিৰ ব্যৱহাৰৰ জৰিয়তে গাঁৱে গাঁৱে ‘স্বামীত্ব যোজনা’ সফল বুলি প্ৰমাণিত হৈছে। স্বামীত্ব যোজনাৰ দ্বাৰা প্ৰায় ৩.২৫ কোটি পৰিয়াল উপকৃত হৈছে,ইয়াৰ ফলত তেওঁলোকে বেংকৰ ঋণ লাভ কৰিব পাৰে আৰু নিজাকৈ ব্যৱসায় আৰম্ভ কৰিব পাৰে।

মোৰ প্ৰিয় দেশবাসীসকল,

প্ৰশিক্ষণ গ্ৰহণৰ প্ৰতিযোগিতামূলক দৌৰ আমাৰ মধ্যবিত্ত পৰিয়ালৰ বাবে এক বৃহৎ বোজা হৈ পৰিছে; প্ৰতিজন অভিভাৱকে অনুভৱ কৰে যে যদি তেওঁলোকে নিজৰ সন্তানক কোচিং ক্লাছলৈ পঠিয়াই নিদিয়ে তেন্তে তেওঁলোকক ‘প্ৰতিষ্ঠিত’ পৰিয়ালৰ বুলি গণ্য কৰা নহয়। এই দৰিদ্ৰ আৰু মধ্যবিত্ত পৰিয়ালক লৈ চিন্তিত হৈ—আৰু তেওঁলোকৰ হাজাৰ হাজাৰ কোটি টকাৰ খৰচ ৰাহি কৰাৰ লক্ষ্যৰে, সন্তানৰ উন্নত যত্নৰ বাবে তেওঁলোকক ঘৰৰ ওচৰতে ৰখা, পৰিয়ালটোৰ আৰ্থিক চাপ দূৰ কৰাৰ লক্ষ্যৰে—যুৱক-যুৱতীসকলৰ বাবে বিভিন্ন পৰীক্ষাৰ বাবে বিনামূলীয়া অনলাইন কোচিং প্ৰদান কৰাৰ সিদ্ধান্ত লৈছো। আমাৰ ডিজিটেল ৰাজহুৱা আন্তঃগাঁথনি, উৎকৃষ্ট প্ৰতিভা আৰু শিক্ষকসকলৰ সহায় লৈ আমি দেশৰ যুৱক-যুৱতীসকলক বিনামূলীয়া প্ৰশিক্ষণ প্ৰদান কৰিবলৈ এক বিস্তৃত নেটৱৰ্ক স্থাপন কৰিছো।

মোৰ প্ৰিয় দেশবাসীসকল,

মই সদায় কৈ আহিছো: "যিসকলে খেলে, তেওঁলোকেই ফুলি উঠে।" খেলা-ধূলা আৰু ফুলৰ কথা কওঁতে মন কৰিছোঁ যে আজি ভাৰতে ক্ৰীড়াৰ জগতখনত নিজৰ বাবে এক স্থান নিৰ্ধাৰণ কৰিছে। ভাৰতৰ জাতীয় সংগীত এতিয়া ক্ৰীড়া মঞ্চত প্ৰতিধ্বনিত হৈছে, আৰু তিনিবৰণীয়াই ওখকৈ উৰি থকা দেখা গৈছে। টপছ আঁচনিখনে প্ৰচণ্ড সফলতা লাভ কৰিছে। ভাৰতে ক্ৰীড়াৰ দিশত উৎকৃষ্টতাৰ দিশত আগবাঢ়িছে—খেলো ইণ্ডিয়া গেমছ, ইউনিভাৰ্চিটি গেমছ, শীতকালীন গেমছ আৰু বীচ গেমছকে ধৰি, ক্ৰীড়া আন্তঃগাঁথনি, প্ৰশিক্ষক, ক্ৰীড়া চিকিৎসা, আৰু পুষ্টিৰ ক্ষেত্ৰতো ভাৰত আগবাঢ়িছে। যুৱক-যুৱতীসকলৰ বাবে সুযোগৰ এক বিশাল নতুন ক্ষেত্ৰ মুকলি কৰা হৈছে; এতিয়া ক্ৰীড়াক সমৰ্থন কৰা পৰিৱেশ তন্ত্ৰৰ ভিতৰত অপৰিসীম সম্ভাৱনা আছে। ক্ৰীড়া জগতত ভাৰতৰ প্ৰদৰ্শন ক্ৰমাগতভাৱে উন্নত হৈছে; আমি ২০৩৬ চনত অলিম্পিক আয়োজনৰ বাবে শক্তিশালী প্ৰতিদ্বন্দ্বী হিচাপে আগবাঢ়িছো, আৰু ভাৰতে ২০৩০ চনত কমনৱেলথ গেমছ আয়োজন কৰিবলৈ সাজু হৈছে।

অলিম্পিক গেমছত প্ৰায় ৪০ ধৰণৰ খেল আৰু প্ৰায় ৩২৫ৰ পৰা ৩৫০টা ইভেণ্ট অনুষ্ঠিত হয়। আপোনালোকে জানি দুখ পাব—আৰু মই আপোনালোকক, মোৰ দেশৰ যুৱক-যুৱতীসকলক আপোনালোকৰ সমৰ্থনৰ বাবে আহ্বান জনাইছো—যে ভাৰত এইবোৰৰ দুই তৃতীয়াংশ অনুষ্ঠানৰ পৰা সম্পূৰ্ণৰূপে অনুপস্থিত। আমাৰ কোনো উপস্থিতি নাই; আমি যোগ্যতা অৰ্জন কৰাত ব্যৰ্থ হওঁ। আমি সংকল্প লৈছো যে ২০৩৬ চনৰ অলিম্পিক ভাৰতত অনুষ্ঠিত হোৱাটো আমি বিচাৰো। কিন্তু বৰ্তমান ভাৰতে যিবোৰ শাখাত প্ৰতিযোগিতা বা যোগ্যতা অৰ্জন নকৰে সেইবোৰৰ সন্দৰ্ভত—যিবোৰ ইভেণ্ট আমি মূলতঃ আঁতৰাই ৰাখিছো—তিনি চতুৰ্থাংশ খেলপথাৰে আমাৰ বাবে অপেক্ষা কৰি আছে। ভাৰতে এই ক্ষেত্ৰসমূহত গুৰুত্ব দিব আৰু ইয়াৰ বাবে আমি প্ৰতিভা সন্ধানৰ অভিযান আৰম্ভ কৰাৰ কথা মনস্থ কৰিছো। ২০৩৬ চনৰ বাবে যদি আমাক খেলুৱৈৰ প্ৰয়োজন হয়, তেন্তে আজি আমি বৰ্তমান ৫ৰ পৰা ১৫ বছৰৰ ভিতৰৰ সৰু ল’ৰা-ছোৱালীবোৰৰ বিষয়ত গুৰুত্ব দিব লাগিব।সেয়েহে শিশুৰ মাজত ক্ৰীড়া প্ৰতিভা চিনাক্ত কৰিবলৈ গাঁও, চহৰ, বিদ্যালয়ত প্ৰতিভা সন্ধানী অভিযান চলোৱা হ’ব; তেওঁলোকৰ সামৰ্থ্যৰ মূল্যায়ন কৰা হ’ব আৰু তেওঁলোকক দেশক প্ৰতিনিধিত্ব কৰা নিপুণ খেলুৱৈ কৰি তুলিবলৈ বিশেষ প্ৰশিক্ষণ প্ৰদান কৰা হ’ব।

মোৰ প্ৰিয় যুৱ বন্ধুসকল,

দেশ আৰু ইয়াৰ যুৱক-যুৱতীসকলৰ সন্মুখত এক বৃহৎ সংকট হিচাপে নিচাজাতীয় দ্ৰব্যৰ অপব্যৱহাৰৰ বিষয়টোৱে থিয় দিছে। ড্ৰাগছমুক্ত ভাৰত আমাৰ সামূহিক দায়িত্ব হ’ব লাগিব। আমাৰ যুৱক-যুৱতীসকল শক্তিশালী আৰু তেওঁলোকৰ সম্ভাৱনাই দেশৰ সেৱা কৰা এক উজ্জ্বল ভৱিষ্যত নিশ্চিত কৰিবলৈ আমি ড্ৰাগছমুক্ত ভাৰতৰ বাবে চেষ্টা কৰিব লাগিব। শেহতীয়াকৈ ‘মাই ভাৰত’ৰ স্বেচ্ছাসেৱক, এন জি অ’, সামাজিক-সাংস্কৃতিক সংগঠন, আধ্যাত্মিক নেতাসকলে একত্ৰিত হৈ ড্ৰাগছমুক্ত ভাৰতৰ বাবে ১০০ সপ্তাহৰ এক কাৰ্যসূচী প্ৰস্তুত কৰিছে। ১০০ সপ্তাহৰ এক অভিযান আৰম্ভ হ’ব। মই প্ৰতিটো পৰিয়ালক এই অভিযানৰ অংশ হ’বলৈ আহ্বান জনাইছো, এই কাৰ্য্যত যোগদান কৰক আৰু ড্ৰাগছমুক্ত ভাৰতৰ সপোন বাস্তৱায়িত কৰাত সহায় কৰিবলৈ আগবাঢ়ি আহক।

মোৰ প্ৰিয় দেশবাসীসকল,

একবিংশ শতিকাত দশক দশক বিৰাজমান প্ৰত্যাহ্বানসমূহ দূৰ কৰাটো অতি প্ৰয়োজনীয়। নক্সালবাদ আৰু মাওবাদে অগণন যুৱক-যুৱতীৰ ভৱিষ্যত ধ্বংস কৰি পেলাইছে। বহু মাতৃৰ কণমানি পুত্ৰ কাঢ়ি লৈ ​​জীৱন ধ্বংস কৰি মাক-দেউতাকৰ সপোনক ভেঙুচালি কৰিছে। চাৰি দশক ধৰি নক্সালবাদে ভাৰতৰ বিশাল অঞ্চল আৰু বৃহৎ জনসংখ্যাক নিজৰ কবলত ৰাখিছিল— বন্দুকৰ গুলীৰে আধিপত্য বিস্তাৰ কৰিছিল আৰু সংবিধানক ভৰিৰে মোহাৰিছিল। সাধাৰণ নাগৰিকক সুৰক্ষা দি ৩৫০০ৰো অধিক আৰক্ষী তথা নিৰাপত্তাৰক্ষীয়ে প্ৰাণ আহুতি দিলে। এই সকলোবোৰ সাধাৰণ মানুহৰ সুৰক্ষা নিশ্চিত কৰাৰ বাবে হৈছে। নক্সালবাদে দেশখন তেজেৰে বুৰাই পেলাইছিল। ২০১৪ চনত আপোনালোকে যিদিনা আমাক আদেশ দিছিল, সেইদিনা আমি দেশখনক নক্সালবাদৰ পৰা মুক্ত কৰাৰ সংকল্প লৈছিলো। আজি মই এই কথা ক’বলৈ পাই সুখী যে নক্সাল-মাওবাদী হিংসাই এতিয়া শেষ উশাহ ল’ব পৰাৰ শক্তিও হেৰুৱাই পেলাইছে; আমি ইয়াক সম্পূৰ্ণ নিৰ্মূলৰ দিশত আগবাঢ়িছো। সেই অঞ্চল আৰু অঞ্চলবোৰতে—য’ত এসময়ত নক্সালৰ গুলী ফুটিছিল আৰু এসময়ত তেজৰ দাগ বিয়পি পৰিছিল—এতিয়া তাত উন্নয়ন, বিশ্বাস আৰু সামূহিক প্ৰচেষ্টাৰ ত্ৰিৰংগা উৰিছে, কাৰণ সেইবোৰ নক্সালবাদৰ পৰা মুক্ত হৈছে।

মোৰ প্ৰিয় দেশবাসীসকল,

অৱশ্যে এই প্ৰত্যাহ্বানক আমি তুচ্ছজ্ঞান কৰিব নালাগে; আমি ইয়াৰ বিৰুদ্ধে আৰু অধিক সজাগ হৈ থকাটো প্ৰয়োজন। বছৰ বছৰ ধৰি মাওবাদী মানসিকতাক আশ্ৰয় দিয়া ব্যক্তিসকলে ক্ষমতাৰ কৰিডৰৰ ভিতৰত শিপাই আছিল। এই মাওবাদী মতাদৰ্শই উপদেষ্টা হিচাপে গ্ৰহণ কৰা ভূমিকাই নীতিসমূহক প্ৰভাৱান্বিত কৰিছিল।

মোৰ প্ৰিয় দেশবাসীসকল,

অৰণ্যত অস্ত্ৰধাৰী নক্সালক নিৰ্মূল কৰি সেই সংকটৰ পৰা দেশক মুক্ত কৰাত আমি সফল হৈছো। তথাপিও সশস্ত্ৰ নক্সাল নোহোৱাৰ সময়ত ‘মতাদৰ্শগত নক্সাল’— নক্সাল মানসিকতা থকাসকলে—এটা সুযোগৰ বাবে অপেক্ষা কৰি আছে। তেওঁলোকে হিংসা আৰু অৰাজকতাৰ পথ বিচাৰি, বিভিন্ন কৌশল প্ৰয়োগ কৰি সমাজখনক ভুল পথলৈ টানি লৈ গৈছে। আমি এই মতাদৰ্শগত নক্সালসকলক চিনাক্ত কৰি , বিচ্ছিন্ন কৰি দেশৰ যুৱক-যুৱতীসকলক এখন উন্নত ভাৰত গঢ়াৰ মূলসুঁতিলৈ আনিব লাগিব।

মোৰ প্ৰিয় দেশবাসীসকল,

এখন নিৰাপদ ভাৰত গঢ়ি তোলাটো আমাৰ সকলোৰে দায়িত্ব। প্ৰত্যাহ্বান আমাৰ সীমাৰ ভিতৰৰ পৰাই হওক বা বাহিৰৰ পৰাই হওক, ভাৰত প্ৰতিটো পৰিস্থিতিৰ বাবে সাজু। যুদ্ধৰ স্বৰূপ আজি সলনি হৈছে; যুদ্ধ যে সীমান্ততে সীমাবদ্ধ থাকিব তাৰ নিশ্চয়তা আৰু নাই। আধুনিক যুদ্ধই যিকোনো ঠাইতে আক্ৰমণ কৰিব পাৰে—শোধনাগাৰ, বেংকিং খণ্ড বা ডাটা চেণ্টাৰক লক্ষ্য কৰি—যিটোৱে আন্তঃগাঁথনি আৰু কাৰখানা ধ্বংস কৰাৰ এক নতুন ধৰণৰ বিপদক প্ৰতিনিধিত্ব কৰে। আমি কিছু বছৰৰ আগতে ‘মিছন সুদৰ্শন চক্ৰ’ ঘোষণা কৰিছিলো আৰু ইয়াৰ কাম দ্ৰুতগতিত আগবাঢ়িছে। আজি আমাৰ প্ৰতিৰক্ষা ৰপ্তানি প্ৰায় পঞ্চাশগুণ বৃদ্ধি পাইছে। আমাৰ অস্ত্ৰ-শস্ত্ৰ প্ৰায় ১০০খন দেশলৈ গৈ আছে। বিশ্বৰ মঞ্চত ভাৰতৰ উচ্চতা ক্ৰমাৎ বৃদ্ধি পাইছে। এই পৰিৱৰ্তিত সময়ত আমি প্ৰতিৰক্ষা ক্ষমতাৰ বিষয়ত গুৰুত্ব দিব লাগিব আৰু আমাৰ সশস্ত্ৰ বাহিনীৰ শক্তি বৃদ্ধি কৰিব লাগিব; কিন্তু আমি একেসময়তে আমাৰ নাগৰিকসকলক প্ৰস্তুত কৰিব লাগিব। যোৱা শতিকাৰ যুদ্ধৰ আধাৰত আমাৰ দেশত প্ৰতিষ্ঠিত অসামৰিক প্ৰতিৰক্ষা ব্যৱস্থা অচল হৈ পৰিছে। সেয়ে আজি লালকিল্লাৰ পৰা ঘোষণা কৰিছো যে অদূৰ ভৱিষ্যতে আমি এক সজীৱ অসামৰিক প্ৰতিৰক্ষা নেটৱৰ্ক গঢ়ি তুলিম। আমি তেওঁলোকক আধুনিক ব্যৱস্থাৰ সৈতে পৰিচিত কৰিম। আমি আধুনিক প্ৰত্যাহ্বানৰ সৈতে মোকাবিলা কৰিব পৰা আৰু সমসাময়িক ভাবুকিৰ পৰা নাগৰিকক ৰক্ষা কৰিব পৰা এক বৃহৎ অসামৰিক প্ৰতিৰক্ষা স্বেচ্ছাসেৱী বাহিনী সৃষ্টি কৰিবলৈ ওলাইছো।

মোৰ প্ৰিয় দেশবাসীসকল,

আজি দেশ নিৰ্মাণৰ ক্ষেত্ৰত আমাৰ ভগ্নী আৰু কন্যাসকলৰ অৱদান আমাৰ সকলোৰে বাবে এক প্ৰেৰণাৰ উৎস হিচাপে কাম কৰিছে। যুঁজাৰু বিমানতেই হওক বা অসামৰিক বিমান পৰিবহণতেই হওক, আমাৰ কন্যাসকল আগৰণুৱা। ক্ৰীড়াৰ ক্ষেত্ৰই হওক, আমাৰ ছোৱালীবোৰে আগবাঢ়িছে। ষ্টেম শিক্ষাৰ ক্ষেত্ৰখনতো আমাৰ ছোৱালীবোৰে ক্ৰমান্বয়ে আগভাগ লৈছে। আনকি সশস্ত্ৰ বাহিনীতো এন ডি এৰ পৰা স্নাতক হোৱা কন্যাই দেশৰ সামৰিক বাহিনীক অতি আত্মবিশ্বাস আৰু সাহসেৰে নেতৃত্ব দিয়াৰ সামৰ্থ্য প্ৰদৰ্শন কৰিছে। আমাৰ কন্যা সন্তানৰ শক্তিৰ সাক্ষী হ’বলৈ অলপতে সানন্দৰ এটা অৰ্ধপৰিবাহী প্লাণ্টলৈ গৈছিলো, য’ত দেশৰ বিভিন্ন কোণৰ পৰা অহা জনজাতীয় কন্যাই কাম কৰি আছিল। তেওঁলোকে এনে গাঁৱৰ পৰা আহিছিল য’ত মানুহে পাছপ’ৰ্ট কি তাকো নাজানে। এই কন্যাসকলেই বিদেশ ভ্ৰমণ কৰিছিল, প্ৰশিক্ষণ লৈছিল আৰু এতিয়া চিপ নিৰ্মাণত নিয়োজিত হৈছে; তেওঁলোকে প্ৰদৰ্শন কৰা অপৰিসীম আত্মবিশ্বাসত মই সঁচাকৈয়ে আপ্লুত হৈছিলো। আমি তিনি কোটি ভগ্নীক ‘লাখপতি দিদি’ হিচাপে সবলীকৰণৰ লক্ষ্য নিৰ্ধাৰণ কৰিছিলোঁ আৰু আমি সেই লক্ষ্য অতিক্ৰম কৰিছো। এতিয়া আমি ছয় কোটি ‘লাখপতি দিদি’ সৃষ্টিৰ লক্ষ্য লৈ আগবাঢ়িছো। তিনি কোটি নতুন ‘লাখপতি দিদি’ৰ সৃষ্টিয়ে মহিলাৰ শক্তিৰ দ্বাৰা পৰিচালিত গ্ৰাম্য অৰ্থনীতিৰ এক বৃহৎ পৰিৱৰ্তনৰ ইংগিত দিয়ে।

মোৰ প্ৰিয় দেশবাসীসকল,

আজি বিপুল সংখ্যক মহিলাই পঞ্চায়ত, পৌৰসভা, পৌৰ নিগমত নিৰ্বাচিত প্ৰতিনিধি হিচাপে কাৰ্যনিৰ্বাহ কৰি দেশক পথ প্ৰদৰ্শন কৰি, সমস্যা সমাধান কৰি অতি সক্ষম নেতৃত্ব প্ৰদান কৰি আছে। এই কথা মনত ৰাখি আমি সংসদত ‘নাৰী শক্তি বন্দন অধিনিয়ম’ (মহিলা সংৰক্ষণ আইন) গৃহীত কৰিলোঁ। কিন্তু কিবা নহয় কিবা কাৰণত বিগত ৪০ বছৰ ধৰি এই সপোন বহুদিনৰ পৰা ৰাজনৈতিক বিষয়ৰ বলি হৈ পৰিছিল। আজি ইয়াত লালকিল্লাৰ প্ৰাচীৰত ত্ৰিৰংগাৰ তলত থিয় হৈ দেশৰ সকলো ৰাজনৈতিক দললৈ আহ্বান জনাইছো: আহক, আমি এই মহিলাসকলৰ সামৰ্থ্যক সন্মান জনাও । এই মহিলাসকলক সন্মান জনাবলৈ আগবাঢ়ি আহক আৰু আমাৰ মাতৃ-ভগ্নীসকলে যাতে অতি সোনকালে বিধানসভা আৰু লোকসভাত ৩৩% প্ৰতিনিধিত্ব নিশ্চিত কৰে, যাতে তেওঁলোকে ভাৰতৰ নীতি গঢ় দিয়াত অৰিহণা যোগাব পাৰে সেই কথাত মন দিওঁ । এয়াই সময়ৰ প্ৰয়োজনীয়তা, আৰু মই সকলো ৰাজনৈতিক দলকে আকৌ এবাৰ আহ্বান জনাইছো: নাৰী সংৰক্ষণ কাৰ্যকৰী কৰি নাৰীক সন্মান জনোৱাত যোগদান কৰক। প্ৰশংসা অৰ্জন কৰক আৰু ক্ৰেডিট লওক, আৰু সৰ্বোপৰি মোৰ মাতৃ আৰু ভগ্নীসকলক তেওঁলোকৰ উচিত অধিকাৰ প্ৰদান কৰক।

মোৰ প্ৰিয় দেশবাসীসকল,

‘বিকশিত ভাৰত’ (উন্নত ভাৰত)ৰ সংকল্প তেতিয়াহে পূৰণ হ’ব যেতিয়া উন্নয়নে সমাজৰ শেষ ব্যক্তিজনৰো ওচৰ পাব। ২০১৪ চনৰ আগতে মাত্ৰ ২৫ কোটি লোকৰ সামাজিক সুৰক্ষাৰ কভাৰেজ আছিল—মাত্ৰ ২৫ কোটি।

বন্ধুসকল,

পূৰ্বৰ পাঁচ-সাত দশকত মাত্ৰ ২৫ কোটি লোককহে সামৰি লোৱা হৈছিল যদিও মাত্ৰ এটা দশকৰ ভিতৰত আমি ১০০ কোটি নাগৰিকক সামাজিক সুৰক্ষাৰ সুৰক্ষামূলক ঢাল প্ৰদান কৰিছো। আয়ুষ্মান ভাৰত আঁচনিৰ অধীনত এতিয়া ৫ লাখ টকা পৰ্যন্ত বিনামূলীয়া চিকিৎসাৰ ব্যৱস্থা কৰা হৈছে, য’ত ৭০ বছৰ আৰু তাতোকৈ অধিক বয়সৰ বৃদ্ধসকলকো অন্তৰ্ভুক্ত কৰা হৈছে। ইয়াৰ ফলত কোটি কোটি পৰিয়ালে অপৰিসীম সকাহ লাভ কৰিছে; আয়ুষ্মান কাৰ্ডৰ সহায়ত ২ লাখ কোটি টকা—যি ধন ঔষধ আৰু অস্ত্ৰোপচাৰৰ বাবে ব্যয় কৰা হ’লহেঁতেন—এই পৰিয়ালসমূহে ৰাহি কৰিছে। দুখীয়াই হওক বা মধ্যবিত্তীয়ই হওক, তেওঁলোকে উল্লেখযোগ্য সমৰ্থন লাভ কৰিছে!

মোৰ প্ৰিয় দেশবাসীসকল,

আজি এটা নিৰ্দিষ্ট কামত আপোনালোকৰ সহায়ৰ প্ৰয়োজন। আপোনালোকৰ সহায় বিচাৰিছো। মই বিচাৰো যুৱক-যুৱতীসকলে এই ক্ষেত্ৰত আগভাগ লওক। আপোনালোকৰ সময়ৰ মাত্ৰ এঘণ্টা বা দুঘণ্টাই দেশক অপৰিসীমভাৱে শক্তিশালী কৰিব পাৰে। আপোনালোকে হয়তো ভাবিব পাৰে যে এঘণ্টা বা দুঘণ্টাই দেশৰ শক্তিৰ ওপৰত কি প্ৰভাৱ পেলাব পাৰে—মই বুজাই দিওঁ। আপোনালোকে এক শক্তিশালী শক্তি হ’বলৈ সাজু হৈছে; সেয়েহে আমি প্ৰতিটো ঘৰতে সঠিক পৰিৱেশ সৃষ্টি কৰিব লাগিব। বৰ্তমান দেশত লোকপিয়ল প্ৰক্ৰিয়া চলি আছে। লোকপিয়ল কেৱল পৰিসংখ্যাৰ বিষয়ে নহয়; ইয়াৰ জটিল বিৱৰণে নীতি আৰু আঁচনিৰ ভিত্তি গঠন কৰে আৰু দেশক অগ্ৰগতিৰ খচৰা প্ৰস্তুত কৰাত সহায় কৰে। সেইবাবেই সঠিক তথ্য অতি গুৰুত্বপূৰ্ণ। কেতিয়াবা চৰকাৰী প্ৰতিনিধিসকল ইমানেই খৰখেদাকৈ আহি পৰে যে বানান বেলেগ বেলেগ হ’ব পাৰে—কেতিয়াবা এটা ধৰণে আৰু আন কেতিয়াবা বেলেগ ধৰণে লিখা হ’ব পাৰে—যাৰ ফলত শেষত সঠিক ফলাফল পোৱাটো কঠিন হৈ পৰে। এতিয়া যেতিয়া প্ৰযুক্তি উপলব্ধ হৈছে, তেতিয়া এটা সিদ্ধান্ত লোৱা হৈছে যে আপোনালোকে আপোনালোকৰ লোকপিয়লৰ সবিশেষ নিজেই মোবাইল ফোন ব্যৱহাৰ কৰি জমা দিব পাৰিব। পিছত কোনো বিষয়া বা প্ৰতিনিধিয়ে আপোনালোকৰ ঘৰলৈ গৈ কথা পাতিব , যদি আপোনালোকৰৰ সমগ্ৰ পৰিয়ালে একেলগে বহি ডিজিটেল পঞ্জীয়ন সম্পূৰ্ণ কৰে—বানান বা বিৱৰণত কোনো ভুল হোৱাটো নিশ্চিত কৰে—তেন্তে প্ৰদান কৰা তথ্যৰ সঠিক ৰূপে দেশৰ অগ্ৰগতিত বহুখিনি সহায় কৰিব। সেইবাবেই দেশৰ যুৱক-যুৱতীসকলক তেওঁলোকৰ পৰিয়ালৰ সদস্যৰ সৈতে বহি ফৰ্মখন সম্পূৰ্ণৰূপে বুজিবলৈ আহ্বান জনাইছো। প্ৰথমে কাগজত পূৰণ কৰক, যিকোনো ভুল শুধৰাই দিয়ক, আৰু তাৰ পিছত ডিজিটেলভাৱে আপলোড কৰক। আপোনালোকে দেখিব যে দেশখনে এই বৃহৎ কামটো দক্ষতাৰে সম্পন্ন কৰিব পাৰে, যাতে দেশৰ সময় আৰু শক্তি উৎপাদনশীল উদ্দেশ্যত ব্যৱহাৰ কৰাটো নিশ্চিত কৰিব পাৰে; সেয়েহে মোৰ দেশৰ যুৱক-যুৱতীসকলক এই লোকপিয়লৰ অনুশীলনত সক্ৰিয়ভাৱে অংশগ্ৰহণ কৰিবলৈ আহ্বান জনাইছো।

মোৰ প্ৰিয় দেশপ্ৰেমিকসকল,

লালকিল্লাৰ পৰা ‘পঞ্চ প্ৰাণ’ (পাঁচটা প্ৰতিজ্ঞা)ৰ কথা ক’লোঁ৷ এই পাঁচটা প্ৰতিশ্ৰুতিয়ে দেশক অপৰিসীম শক্তি প্ৰদান কৰিছে, আত্মগৌৰৱ আৰু লক্ষ্য অতিক্ৰম কৰাৰ সামৰ্থ্যৰে আগবাঢ়ি যাবলৈ সক্ষম কৰিছে। আমি প্ৰতিটো মুহূৰ্ততে দাসত্বৰ মানসিকতাপৰিহাৰ কৰিব লাগিব। নেতাজী সুভাষ চন্দ্ৰ বসু, বাবাচাহেব আম্বেদকাৰ, পণ্ডিত নেহৰু, চৰ্দাৰ পেটেল, ভগত সিং, সুখদেৱ, ৰাজগুৰু, ড° শ্যামা প্ৰসাদ মুখাৰ্জী, ভগৱান বীৰছা মুণ্ডা আৰু জ্যোতিবা ফুলেই সপোন দেখা ভাৰতৰ দৃষ্টিভংগীৰ পৰা প্ৰেৰণা লৈ আগবাঢ়ি যাওঁ আহক। এই সংকল্পটো পুনৰ লওঁক: জাতীয় স্বাৰ্থ আত্ম স্বাৰ্থৰ ওপৰত ; জাতীয় স্বাৰ্থ আত্ম স্বাৰ্থৰ ওপৰত আৰু কৰ্তব্যই আমাৰ পৰিচয়ক সংজ্ঞায়িত কৰে। মোৰ দেশৰ সকলো নাগৰিকক কওঁ—এইবাৰ আমাৰ; সুযোগ আমাৰ; সংকল্প আমাৰ। সপোনক সংকল্পলৈ, সংকল্পক সামৰ্থ্যলৈ আৰু সামৰ্থ্যক সফলতালৈ ৰূপান্তৰিত কৰোঁ আহক। প্ৰতিটো খোজ উন্নয়নৰ দিশত এক খোজ হওক; আহক আমি একেলগে যাত্ৰা কৰোঁ, হৃদয়ক একত্ৰিত কৰোঁ আৰু নিজৰ লক্ষ্যত অটল হৈ থাকোঁ। এটি শিখাৰ পৰাই জ্বলোৱা হাজাৰ হাজাৰ চাকিৰ দৰে আহক আমি একত্ৰিত হৈ এখন উন্নত ভাৰত গঢ়ি তোলোঁ। এই আবেগেৰেই এই শুভ অনুষ্ঠানত আপোনালোক সকলোলৈ মোৰ আন্তৰিক শুভেচ্ছা জ্ঞাপন কৰিছোঁ।

মোৰ লগত কওক:

ভাৰত মাতা কি জয়!

ভাৰত মাতা কি জয়!

ভাৰত মাতা কি জয়!

বন্দে মাতৰম!

বন্দে মাতৰম!

বন্দে মাতৰম!