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Swami Vivekananda an inspiration for all youth and a shining example of how much could be accomplished in a short time-span: PM Modi 
Earlier people were inspired to die for the nation. Today it is about living for the nation & doing something for India: PM
The 125 crore people are united in an objective of taking the nation to new highs: PM Narendra Modi
Entire world is looking at India with so much hope because India is a land of opportunities: PM Modi
A youth is one who works towards his future goals, unmindful of the past: Prime Minister Modi
Without peace, unity and harmony, development cannot have any meaning: PM Narendra Modi
India has shown the world, that a land of such diversity, has a unique spirit to stay together: PM Modi
India's objective is to give youth the opportunities to make this century an Indian century: PM
If India can be a manufacturing hub, it is not because we have a market or raw materials...it is because we have skilled youngsters: PM
“Dignity of labour” must be inculcated among people: PM Narendra Modi
Development is about transforming the lives of the poor: Prime Minister Modi

भारत के कौने –कौन से आए मेरे नौजवान साथियों।

आज 12 जनवरी स्‍वामी विवेकानंद जी की जन्‍म जयंती हम युवा दिवस के रूप में मनाते हैं। इस देश में दो महापुरूषों को इस देश का युवा विशेष रूप से नमन करता रहा है। अगर कोई हमारे सामने भगत सिंह का नाम लें या कोई हमें स्‍वामी विवेकानंद की याद दिला दें तो उसी पल हमारा माथा उन महापुरूषों के चरणें में झुक जाता है। बहुत ही छोटी आयु में कोई क्‍या कर सकता है। अगर जीवन में संकल्‍प का सामर्थ्‍य हो, संकल्‍प के लिए समर्पित भाव हो और जीवन आहूत करने की अदम्‍य इच्‍छा हो, तो व्‍यक्ति के लिए उम्र कोई मायना नहीं रखती। मेरे सामने देश के हजारों युवक बैठे हैं, वो हिंदुस्‍तान के कौने-कौने से आए हैं। उनका लालन-पालन अलग-अलग हुआ है। उनकी खान-पान की आदतें अलग है, उनकी बोली अलग है, उनका पहनाव अलग है, लेकिन उसके बावजूद भी ये सारे नौजवान इस एक बात से जुड़े हुए हैं। उनके मन मंदिर में एक मंत्र लगातार गूंजता रहा है। और वह ही हम सब की प्रेरणा है। और वो मंत्र क्‍या है? आजादी के आंदोलन के समय जिस वंदे मारतरम की गूंज ने कश्‍मीर से कन्‍या कुमारी अटक से कटक पूरे हिंदुस्‍तान को आजादी के आंदोलन में पिरो दिया है। एक मंत्र होता है जो जीवन में कुछ कर दिखाने की प्रेरणा बन जाता है। आज वही मंत्र चाहे उसको भारत मां की जय के रूप में कहते हो, चाहे वंदे मातरम के रूप में कहते हो। पहले मां भारती को गुलामी की जंजीरों से मुक्‍त कराने के लिए वो हमारी ताकत बन गया था। और आज आजाद हिंदुस्‍तान में भारत को नई ऊचाईयों पर ले जाने के लिए, विकास की नई ऊंचाईयों को सिद्ध करने के लिए, समस्‍याओं से मुक्ति दिलाने के लिए, हिंदुस्‍तान के गांव, गरीब किसान, मजदूर उनके जीवन में बदलाव लाने के लिए यही मंत्र हमारी प्रेरणा बनता है। पहले देश के लिए मरने की प्रेरणा देता था। आज वही मंत्र हमें देश के लिए जीने की प्रेरणा देता है। और आप सब नौजवान अपने लिए नहीं, देश के लिए कुछ करने के इरादे से किसी न किसी संकल्‍प से बंधे हुए हैं। आप कुछ करना चाहते हैं। और यह देश प्रगति तब करता है जब सवा सौ करोड़ देशवासी किसी न किसी संकल्‍प से बंधे हो। उस संकल्‍प की पूर्ति के लिए कुछ कदम चलने के लिए प्रयासरत हो। मंजिल को पाने के लिए अविरत कोशिश करते हो, तो देश अपने आप उस मंजिलों को पार कर जाता है।

आज पूरे विश्‍व का परिवेश देखे पूरा विश्‍व आज भारत की तरफ एक बड़ी आशा भरी नजर से देख रहा है। क्‍यों ? इसलिए कि हिंदुस्‍तान एक संभावनाओं का देश है। आपार अवसर जहां इंतजार कर रहे हैं। दुनिया इसलिए हिंदुस्‍तान की तरफ देख रही है, क्‍योंकि आज हिंदुस्‍तान विश्‍व का सबसे युवा देश है। 65 प्रतिशत जनसंख्‍या 35 से कम आयु की हो, वो देश कितना सौभाग्‍यशाली है कि जिसके पास कोटि-कोटि युवा लोग हैं। और जहां युवा होता है, वहां संकल्‍पों की कोई मर्यादाएँ नहीं होतीं, सीमाएँ नहीं होतीं। कभी-कभार हमारे देश में युवा की परिभाषा को लेकर अलग-अलग हमें बातें सुनने को मिलती है। शासत्रों से ले करके अब तक युवा की परिभाषा बहुत हो चुकी है। हर किसी का अपना नजरिया होता है। कुछ लोगों के लिए उम्र का दायरा यह युवा की पहचान के रूप में माना जाता है। मैं कभी-कभी सोचता हूं कि युवा यह परिस्थिति का नाम नहीं है। युवा यह मनस्थिति का नाम है। मनस्थिति है, जो युवा की परिचायक होती है। जब कोई व्‍यक्ति अपने बीते हुए पल को बार-बार याद करता है, दोहराता रहता है तो मैं यह सीधा-सीधा अर्थ निकालता हूं कि वो अपनी युववाणी खो चुका है। वो बुढ़ापे की आरे चल चुका है। लेकिन जो बीते हुए कल को बार-बार दोहराने की बजाय आने वाले कल के सपने संजोता रहता है, वो उसके लिए मेरा मन हमेशा कहता है वो सच्‍चे अर्थ में युवा है। अगर आप अपने आप को युवा मानते हो तो युवा वो है जो बीते हुए कल की बातों को दोहरा करके अपने समय को बर्बाद नहीं करता है, लेकिन जो आने वाले सपनों को संजोने के लिए पल-पल प्रयास करता है और हर सपने को साकार करने के लिए अपने आप को खपा देता है।

देशभर से आए हुए युवा उन सपनों का सम्‍पुट है। हम देशभर के लोग विविधताओं के बीच यहां बैठे हैं, क्‍या कारण है। वो कौन सा कारण हमें जोड़ रहा है। सद्भावना यह अपने आप में एक बहुत बड़ी शक्ति होती है। क्‍या हमारे अंदर एक दूसरे के प्रति आदर-भाव न होता, सद्भाव न होता। अपनेपन का कोई नाता न होता, तो हम इतनी अपने आप से जुड़ सकते? भारत विकास करना चाहता है और इस बार आपकी इस युवा परिषद का विषय भी बड़ा महत्‍वपूर्ण है। एक तरफ व्‍यक्ति का, उसके सामर्थ्‍य का और युवा से जुड़े हुए विषय को ले करके आया है उसका एक पहलू है skill, दूसरा है भारत का क्‍या हो तो कहते है विकास। और तीसरी बात आपने कही है कैसे हो तो वो है सद्भाव। क्‍या, क्‍यों, कैसे? इस बात को ले करके इस समारोह को आप चार दिन चर्चा के लिए आज प्रारंभ कर रहे हैं। अगर हमारे देश में एकता नहीं होगी, जन-जन के प्रति सद्भाव नहीं होगा, आदर भाव नहीं होगा, दूसरे की परंपराएं, दूसरे के विचार, उसके प्रति अगर सम्‍मान का भाव नहीं होगा, तो शायद भारत को प्रगति में रुकावटें आएंगी, विकास में रुकावटें आएंगी और इसलिए समय की मांग है और हर नौजवान के जीवन का एक व्‍यवहार है कि हम शांति, एकता, सद्भावना, जो भारत जैसे विविधताओं से भरे हुए देश के लिए प्रगति की गारंटी है। भारत के पास सब कुछ हो, धन हो, दौलत हो, बेशुमार पैसे हों, हर नौजवान को नौकरी हो, हर परिवार में सुख और सम्‍पन्‍नता हो, लेकिन, लेकिन अगर देश में शांति, एकता और सद्भावना नहीं होगी, तो वो सारी सम्‍पत्ति किसी के काम नहीं आएगी। न वो देश का गौरव बढ़ाएगी, न आने वाली पीढि़यों के लिए भविष्‍य का कोई रास्‍ता बनाएगी। और इसलिए हम विकास कितना ही करें, कितनी ही ऊंचाइयों को पार करें, लेकिन शांति, एकता और सद्भावना, ये भारत की पहली आवश्‍यकता रहती है।

और भारत ने दुनिया को दिखाया है कि जिस देश के पास सैंकड़ों बोलियां हो, अनेक भाषाएं हों, अनेक परम्‍पराएं हों, अनगिनत विविधिताएं हों, उसके बाद भी साथ जीने-मरने का स्‍वभाव हो, ये हमारी बहुत बड़ी विरासत हैं जो हमारे पूर्वजों ने हमें दी हैं, स्‍वामी विवेकानंद जैसे महापुरुषों ने दी हैं और इसे हमने संजो के रखना है।

वेद से विवेकानंद तक और उपनिषद से उपग्रह तक हम इसी परम्‍परा में पले-बढ़े हैं। उस परम्‍पराओं को बार, बार, बार, बार स्‍मरण करते हुए, संजोते हुए भारत को एकता के सूत्र में बांधने के लिए सद्भावना को सेतु उसको हम जितना बल दें, देते रहना होगा।

उसी प्रकार से अगर व्‍यक्ति के जीवन में सामर्थ्‍य नहीं होगा तो राष्‍ट्र के जीवन में सामर्थ्‍य कहां से आएगा? 21वीं सदी एशिया की सदी है कहते हैं, 21वीं सदी हिदुस्‍तान की सदी बन सकती है कैसे? जब हम, हमारे देश के युवा शक्ति के समार्थ्‍य को पहचानेंगे। विकास यात्रा में उसको पिरोयें और विकास की ऊंचाइयों को पार करने के लिए उसे हम अपना भागीदार बना लें। तब जा करके, तब जा करके हम राष्‍ट्र के सपनों को पूरा कर सकते हैं। अनेक मार्ग हैं, उसमें एक महत्‍वपूर्ण मार्ग है हुनर, skill development, हमारे देश के नौजवान के हाथ में सिर्फ कागज और कलम होगी तो देश आगे नहीं बढ़ सकता है। अपार ज्ञान का भंडार तो हो ही हो, कागज और कलम का सामर्थ्‍य तो हो ही हो, लेकिन देश को आगे बढ़ने के लिए हुनर चाहिए, skill चाहिए, बदले हुए युग में जहां technology एक महत्‍वपूर्ण रोल अदा कर रही है, भारत के एक manufacturing hub बनने की संभावना है। अगर भारत दुनिया का एक manufacturing hub बन सकता है तो उसका पहला कारण ये नहीं है कि हमारे पास raw material है, पहला कारण ये नहीं है कि हमारे पास market है, पहला कारण ये नहीं है कि हमारी आवश्‍यकता है, पहला कारण ये है कि हमारे देश के पास, नौजवानों के पास अगर हुनर है तो वो सबसे बड़ी ताकत है। और इसलिए हमारी सरकार ने skill को, हुनर को बहुत महत्‍व दिया है।

देश की आजादी के बाद पहली बार skill development एक अलग ministry बनाई गई, skill development की अलग policy बनाई गई, skill development के लिए अलग बजट बनाया गया और हिन्‍दुस्‍तान में एक ऐसी जाल बिछाने की कोशिश है कि गरीब से गरीब व्‍यक्ति, अनपढ़ से अनपढ़ व्‍यक्ति भी अपने जीवन में कुछ करने के लिए इच्‍छा करता है तो उसको सीखने का अवसर मिलना चाहिए, उसके हाथ में कोई हुनर होना चाहिए और वो हुनर को प्राप्‍त कराने के लिए सरकार पुरजोर प्रयास कर रही है।

हमारे छत्‍तीसगढ़ में रमन सिंह जी ने तो skill को एक अधिकार के रूप में develop किया है। उन्‍होंने कानूनी व्‍यवस्‍था का प्रयास किया है। मैं पिछली बार जब छत्‍तीसगढ़ आया था तो skill development किस प्रकार के उन्‍होंने काम की रचनाएं की हैं उसको मैंने अपनी आंखों से देखा। जहां नक्‍सलवाद, नौजवानों को गुमराह करने के लिए भरपूर कोशिश करता है, उसी इलाके में, उसकी छाती पर, skill development के द्वारा सपनों को संजोने के प्रयास छत्‍तीसगढ़ में हो रहे हैं। ये बधाई के पात्र हैं। और जब आप छत्‍तीसगढ़ में हैं तो आपको बहुत सी बातें सुनने को मिलेंगी कि नौजवानों के विकास के लिए क्‍या-क्‍या वहां हो रहा है।

मैं ये ही आपसे कहना चाहता हूं कि हम भी इस बात को ले करके आगे बढ़ना चाहते हैं कि देश में skill development को कैसे बल दिया। skill development से मैं एक बात आप नौजवानों से कहना चाहता हूं, दुर्भाग्‍य से हमारे देश में हम लोगों ने एक ऐसी मनस्थिति बना ली है जो दिमाग से काम करता है वो बड़ा है और जो हाथ से काम करता है वो छोटा है। इस मनस्थिति को बदलना पड़ेगा। हम हमारी मां का इतना सम्‍मान करते हैं, मां का आदर करते हैं, हमारी मां कहा है। बहुत कम लोग होंगे जिसकी मां को दिमाग से काम करने का अवसर मिला है। बाकी सब लोग हम ऐसे हैं जिनकी मां हाथ से काम करती है, कपड़े धेाती हैं, खाना पकाती है, झाड़ू लगाती है, और उस मां का हम सम्‍मान करते हैं, मां का गौरव करते हैं। लेकिन समाज में हाथ से काम करने वाला हमें छोटा लगता है, बढि़या कपड़े पहन करके टेबल-कुर्सी पर बैठा हुआ बाबू हमें बड़ा लगता है, लेकिन हमें कोई ऑटो-रिक्‍शा का ड्राइवर हमें छोटा लगता है। कोई plumber, कोई mechanic , कोई turner, कोई fitter, कोई wireman, कोई फूलों का गुलदस्‍ता बनाने वाला, ये हमें छोटे लगते हैं, हमारी ये मानसिकता हमें बदलनी होगी। हमें उनके प्रति भी सद्भाव पैदा करना होगा और सद्भाव तब होगा जब शुरूआत समभाव से होगी। मेरे में और उसमें कोई अन्‍तर नहीं है, हमारे और उसके बीच में एक समभाव है। जब समभाव होगा तो सद्भाव अपने-आप पनपने लग जाएगा और इसलिए white caller job and blue caller job, ये शब्‍द हमारे यहां चल रहे हैं। जो अपने पैरों पर खड़ा है। जो अपने पैरों पर खड़ा है। जो अपने हाथ की ताकत से अपनी जिंदगी बनाता है। जिसकी उंगलियों में नया करने का दम होता है। उससे बड़ा गौरव करने के लिए क्‍या हो सकता है। और इसलिए हम skill development पर बल देना चाहते हैं। हम समाज में एक मनोवैज्ञानिक बदलाव लाना चाहते हैं। कोई काम छोटा नहीं होता और इसलिए हमने एक movement चलाया है। श्रम एव जयते। dignity of labor हम बल दे रहे हैं उस पर और इसलिए कभी-कभी क्‍या लगता है। कितना ही गरीब व्‍यक्ति हो, उसके मन में मनोवैज्ञानिक प्रभाव पैदा हो गया है कि जब तक बेटा graduate नहीं होता, मां-बाप को भी संकोच होता है कि कोई रिश्‍तेदारों को परिचय क्‍या करवाएं। और इसलिए उसको लगता है कि graduate होना बहुत अनिवार्य है। लेकिन क्‍या सातवीं कक्षा पास, 10वीं कक्षा पास बेटा ITI में गया हो। और Technically बड़ा सामर्थ्‍यवान हो तो उनको संकोच होता है, परिचय करवाने में। यह psychology को बदलना है। यह आवश्‍यक नहीं है कि हमारे पास graduate होने का प्रमाण पत्र हो और बेरोजगारी की जिंदगी हो। हम सातवीं क्‍यों न पास हो, 10वीं पास क्‍यों न हो, हमारे हाथ में हुनर होना चाहिए और अपने पसीने से पैसों को पैदा करने की ताकत होनी चाहिए। ऐसे समाज की अवस्‍था होनी चाहिए और इसलिए नौजवानों में बल देने का प्रयास हम कर रहे हैं। हम विकास की ओर जाना चाहते हैं। और विकास का मेरा सीधा-सीधा मतलब है। देश के गरीबों की जिंदगी में बदलाव, हिंदुस्‍तान के गावों की जिंदगी में बदलाव। गांव में अच्‍छी शिक्षा हो, गांव में अस्‍पताल हो, बच्‍चों को पढ़ने के लिए अच्‍छा टीचर हो। बूढ़े अगर बीमार हैं तो अच्‍छा डॉक्‍टर हो। सस्‍ती दवाइयां हो, रहने के लिए अच्‍छा घर हो। गांव में आने-आने के लिए अच्‍छे रास्‍ते हो, पीने के लिए शुद्ध पानी हो। आजादी के इतने सालों के बाद भी हम इसको पूरा नहीं कर पाए हैं और उसको पूरा करना हमारा एक दायित्‍व है। और विकास, यही विकास है। विकास यानी यह नहीं है कि हम कितने बड़े-बड़े भवन बनाते हैं। और कितनी बड़ी संख्‍या में बाबूओं को तैयार करते हैं। और इसलिए हमारा विकास का मॉडल सामान्‍य मानव की जिंदगी में बदलाव लाना है। और सामान्‍य मानव की जिंदगी में बदलाव लाने के लिए हमने skill development को महत्‍व दिया है।

आने वाले दिनों में चार दिन के बाद 16 तारीख को हमें एक कार्यक्रम को लॉन्‍ज कर रहे हैं – Startup India Standup India हमारे देश के नौजवानों के पास कल्‍पकता के वो धनी है, अनेक नई चीजों की उनके पास सोच है, समस्‍याओं के समाधान के लिए वो रास्‍ते खोजते हैं। हमारे यहां गांव में हमने देखा होगा खेत में काम करने वाला व्‍यक्ति भी अपने आप Technology develop कर देता है और उस Technology से अपना काम कर लेता है। अपनी एक ही मोटर साइकिल होगी, उस मोटरसाइकिल से दस प्रकार के काम लेना गांव का आदमी जानता है। इसका मतलब कि हमारे पास innovative सोच, innovation यह भारत के पास हैं। लेकिन उसे प्रतिष्‍ठा कैसे मिले, पुरस्‍कार कैसे मिले, प्रोत्‍साहन कैसे मिले, आगे बढ़ने के लिए रास्‍ता कैसे मिले। उस दिशा में सरकार एक गंभीरता से सोच करके उस योजना को लागू कर रही है। 16 तारीख को जब यह बड़ा कार्यक्रम होगा आप भी अपने-अपने इलाके में कहीं पर वीडियो कॉनफ्रेंस के द्वारा अगर इस कार्यक्रम में शरीक होते हैं, तो आपने शरीक होने का प्रयास करना चाहिए। और skill development का next stage होता है Startup India उसी प्रकार से सरकार ने मुद्रा योजना घोषित की है। प्रधानमंत्री मुद्रा योजना।

हमारे देश में बहुत लोग हैं जिनके पास कुछ करने की इच्‍छा है। लेकिन पैसों के आभाव में कर नहीं पाते। वो unfunded है। बैंकों के दरवाजे उनके लिए खुले नहीं थे। हमने बदलाव लाया और बैंकों के दरवाजों को खोल दिया।

बैंकों को, दरवाजों को खोल करके मुद्रा योजना के तहत उन नौजवानों को पैसे देने का प्रयास शुरू किया है और मुझ खुशी है कि बहुत ही कम समय में ये जो योजना बनाई गई, प्रधानमंत्री मुद्रा योजना, करीब-करीब दो करोड़ लोगों को बैंक से बिना कोई गारंटी, पैसे दिए गए। इतने कम समय में बैंकों के द्वारा दो करोड़ लोगों को पैसे मिल रहा है और करीब-करीब 80 हजार करोड़ रुपये नौजवानों के हाथ में रख दिए हैं। नौजवानों पर मेरा भरोसा है। देश की युवा शक्ति पर भरोसा है। देश के सपने अगर कहीं पर निवास करते हैं तो देश के युवा दिलों में रहते हैं। और इसलिए उस पर हमने ध्‍यान केंद्रित किया है। मैं चाहता हूं कि जो लोग कुछ कर गुजरना चाहते हैं, वे नौकरी की तलाश क्‍यों करें, अपने पैरों पर खड़े क्‍यों न हों। मैं नहीं चाहता हूं मेरे देश का नौजवान job seeker बने, मैं चाहता हूं मेरे देश का नौजवान job creator बने। मैं ऐसी जिंदगी जिऊंगा कि दो-चार और पांच लोगों को मैं कोई न कोई रोजगार दूंगा, ये भी हमारा सपना होना चाहिए। मैं रोजगार के लिए तड़पने वाला नौजवान नहीं हो सकता हूं, मैं रोजगार देने वाला एक साहसिक नौजवान हो सकता हूं। और ये ही तो जिंदगी का लक्ष्‍य होना चाहिए कि मैं ओरों के लिए कुछ कर सकता हूं। और एक बार ये सपना ले करके चलोगे तो कर भी पाओगे। और इसलिए आप अगर उस बात को ले करके चलते हैं तो मेरा आपसे अनुरोध है, मैं आपको विश्‍वास दिलाना चाहता हूं, मैं आपके साथ हूं। ये सरकार आपके साथ है, ये पूरा हिन्‍दुस्‍तान आपके साथ है। आप उस लिए सपने संजो करके ले करके निकलिए। और इसीलिए skill development का अपना एक महत्‍व है, start-up India, stand up India का महत्‍व है, प्रधानमंत्री मुद्रा योजना का महत्‍व है।

मैंने अभी एक स्‍वच्‍छता का अभियान चलाया है। 15 अगस्‍त को मैंने लालकिले से कहा था, लेकिन मैं आज गर्व से कह सकता हूं कि वो स्‍वच्‍छता अभियान किसी प्रधानमंत्री का अभियान नहीं है, वो नरेंद्र मोदी का अभियान नहीं है। देश के हर नागरिक ने इसको अपना बना लिया है। हर कोई उसमें कुछ न कुछ करना चाहता है। अभी मैंने कहा 26 जनवरी को हमारे महापुरुषों के जितने statue हैं, उसकी सफाई एक नागरिक के नाते हम क्‍यों न करें? और मेरे पास खबरें हैं कि देश भर में इतने नौजवान आगे आए हैं, इतने स्‍कूल कॉलेज आगे आए हैं, इतने संगठन आगे आए हैं, even मुझे बताया गया नेहरू युवा केंद्र हो, NCC हो, NSS हो, ये सब लोग मैदान में आए हैं। सबने तय कर लिया है कि अब हमारे गांव में महापुरुषों के statue और वो परिसर हम गंदा नहीं रहने देंगे। कुछ लोगों ने तो 26 जनवरी का भी इंतजार नहीं किया है और already काम शुरू कर दिया है। यही तो देश की ताकत होती है। लेकिन पहला एक समय था, हम सब देखते थे हां ये महापुरुष की प्रतिमा है, फिर बात भी करते देखो यार कितना गंदा है, कोई संभालता नहीं है। आज, आज हर कोई चर्चा करता है, यार ये हमारे गांव के अंदर ये छह महापुरुषों के पुतले हैं उसकी सफाई हम करेंगे। एक नया माहौल बना है। नेहरू युवा केंद्र के और NSS के नौजवानों ने इसका बीड़ा उठाया है। मुझे विश्‍वास है बहुत बड़ी सफलता मिलेगी।

इस बार आप पिछले करीब 20 साल से ये समागम करते आए हैं, मेरी आपसे आग्रह है, मेरा आपसे अनुरोध है, इस बार जाने से पहले आप 2019 का कोई संकल्‍प ले करके जा सकते हैं क्‍या और 2019 तक हम इतना करेंगे। मैं 2019 इसलिए कह रहा हूं कि 2019 महात्‍मा गांधी की 150वीं जयंती है। महात्‍मा गांधी को स्‍वच्‍छता बहुत पसंद थी। 2019 तक का हमारा कोई time table बना करके हम जा सकते हैं क्‍या। और हम हर महीने उसका लेखा-जोखा लें, हिसाबा-किताब करें, संकल्‍प तय करें, योजना बनाएं, रोडमैप बनाएं और आंखों को दिखने वाला परिवर्तन ला करके रहें और दूसरा सपना 2022 का हम लें।

एक 2019 का हमारा रोडमैप और दूसरा 2022 का रोडमैप हम लें। 2022 इसलिए कि भारत की आजादी के 75 साल हो रहे हैं। हिंदुस्‍तान की आजादी के 75 साल हम कैसे मनाएंगे। अभी से हम कैसी तैयारियां करेंगे। हम अपने आप को उसके लिए उसको कैसे तैयार करेंगे। हमारी अपनी संस्था हो, हमारा परिवार हो, हम व्‍यक्ति हो, हम खुद क्‍या कर सकते हैं। इस पर हम सोचते हैं। और इसलिए रायपुर से आप जब निकले तब 2019 और 2022 कोई न कोई लक्ष्‍य निर्धारित करके उसका रोडमैप तय करके निकलिए । उसके लिए कौन समय देगा, कितने घंटे देगा। यह संकल्‍प ले करके चलिए। उसी प्रकार से मैं विशेष रूप से नौजवानों का एक बात के लिए आभार व्‍यक्‍त करना चाहता हूं कि आज के इस युवा समारोह के लिए मैंने देश के नौजवानों को आग्रह किया था कि आप मुझे नरेंद्र मोदी एप आप मोबाइल पर उसको download कर सकते हैं। नरेंद्र मोदी एप पर अपने सुझाव भेजिए। मुझे इस बात का गर्व है कि देश के हर कौने से हजारों नौजवानों ने मुझे हजारो सुझाव भेजे। देश का नौजवान कितना जागरूक है और नरेंद्र मोदी एप मेरे लिए एक सरल माध्‍यम बन गया है कि मैं सीधे आपसे जुड़ जाता हूं। मैं उन सभी नौजवानों का अभिनंदन करना चाहता हूं, जिन्‍होंने समय निकाल करके, सोच करके देश के काम आने के लिए अपने विचारों से मुझे लाभान्वित कराया। हजारों नौजवानों ने मुझे सुझाव भेजे, मैं उन सबका आभारी हूं।

26 जनवरी मैंने देश के सामने, देश के नौजवानों के सामने एक विषय रखा है और आग्रह किया है कि हमारे यहां एक चर्चा होनी चाहिए। अधिकार और कर्तव्‍य। भारत के संविधान ने हमें दोनों जिम्‍मेदारियां दी हैं। लेकिन आजादी के बाद ज्‍यादातर हम लोगों की प्राथमिकता अधिकार पर रही है। कर्तव्‍य ज्‍यादातर व्‍यक्तिगत स्‍वभाव से जुड़ गया, समाज स्‍वभाव से छूट गया। कर्तव्‍य सामाजिक स्‍वभाव बनाना है। कुछ लोगों को कर्तव्‍य में रूचि हो, कर्तव्‍य करते रहे इससे देश नहीं चल सकता। सवा सौ करोड़ देशवासियों का कर्तव्‍य का भी स्‍वभाव बनना चाहिए। और अगर एक बार कर्तव्‍य की हवा बन जाती है तो अधिकारों की रक्षा अपने आप हो जाती है। मैं चाहूंगा कि 26 जनवरी को मैंने पिछली मन की बात में इस बार तो कहा, कईयों ने इस बात को आगे बढ़ाया है। आप भी इस बात को आगे बढ़ाएं ऐसी मैं अपेक्षा करता हूं। छत्‍तीसगढ़ का प्‍यार छत्‍तीसगढ़ की मेहमाननवाजी, आप सबको बहुत याद रहेगी। मेरा सौभाग्‍य रहा मुझे छत्‍तीसगढ़ में बहुत लम्‍बे अर्से तक रहने का अवसर मिला है, इसलिए मैं उनके प्‍यार को भली-भांति समझता हूं। उनके स्‍वागत करने की परंपरा को भली-भांति समझता हूं। लेकिन मैं इस बार इसका आनंद नहीं ले पा रहा हूं। क्‍योंकि कुछ जिम्‍मेदारियां यहां भी मेरे सिर पर रहती हैं। लेकिन मैं मन से आपके साथ हूं। इस समारोह की मैं सफलता के लिए शुभकामनाएं देता हूं और देख सकते हैं कि संकटों के बीच में भी कैसी जिंदगी गुजारी जा सकती है। छत्‍तीसगढ़ कुछ वर्षों से नक्‍सलवाद के कारण परेशान है। माओवाद के कारण परेशान है। और मैं नौजवानों को कहता हूं। हमारे हाथ में हुनर होना चाहिए, हत्‍या करने के लिए हमारा हाथ कभी काम नहीं आना चाहिए। यह हाथ हुनर से नए सपनों को संजोने के लिए काम आना चाहिए। यह हाथ किसी के सपनों को समाप्‍त करने के लिए हत्‍या का कारण नहीं बनना चाहिए। छत्‍तीसगढ़ के नौजवानों ने माओवाद की इस भयानकता के बीच भी छत्‍तीसगढ़ को भरपूर बढ़ाने का प्रसास किया है। छत्‍तसीगढ़ को नई ऊंचाईयों पर ले जाने की कोशिश की है। संकटों के बीच भी समाधान के रास्‍ते निकाले जा सकते हैं। संकटों के बीच में भी विकास की यात्रा की जा सकती है। संकटों के बीच भी संकल्‍पों को पूरा किया जा सकता है। यह छत्‍तीसगढ़ से हम अनुभव कर सकते हैं। आज उस धरती में हैं, रायपुर में हैं। आपको प्रेरणा मिलेगी। मेरी आप सबको बहुत-बहुत शुभकामनाएं। और हमारे खेल मंत्री श्रीमान सोनेवाल जी, वो आपके बीच में हैं। बड़े उत्‍साही हैं। जरूर उनका लाभ मिलेगा आपको। आप सबको बहुत-बहुत शुभकामनाएं, बहुत बहुत धन्‍यवाद।

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When science, government and society work together, results are better: PM Modi
September 28, 2021
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PM dedicates the newly constructed campus of the National Institute of Biotic Stress Management, Raipur to the Nation
PM also distributes the Green Campus Award to the Agricultural Universities
“Whenever farmers and agriculture get a safety net, their growth becomes rapid”
“When science, government and society work together, results are better. Such an alliance of farmers and scientists will strengthen the country in dealing with new challenges”
“Efforts are being made to take the farmers out of the crop based income system and encourage them for value-addition and other farming options”
“Along with our ancient farming traditions, marching towards the future is equally important”

नमस्कार जी! केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्रीमान नरेंद्र सिंह तोमर जी, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्रीमान भूपेश बघेल जी, मंत्रिमंडल के मेरे अन्य सहयोगी श्री पुरुषोत्तम रुपाला जी, श्री कैलाश चौधरी जी, बहन शोभा जी, छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री श्री रमन सिंह जी, नेता विपक्ष श्री धर्म लाल कौशिक जी, कृषि शिक्षा से जुड़े सभी वीसी, डायरेक्टर्स, वैज्ञानिक साथी और मेरे प्यारे किसान बहनों और भाइयों !

हमारे यहां उत्तर भारत में घाघ और भड्डरी की कृषि संबंधी कहावतें बहुत लोकप्रिय रही हैं। घाघ ने आज से कई शताब्दी पहले कहा था-

जेते गहिरा जोते खेत,

परे बीज, फल तेते देत।

यानि खेत की जुताई जितनी गहरी की जाती है, बीज बोने पर उपज भी उतनी ही अधिक होती है। ये कहावतें, भारत की कृषि के सैकड़ों साल पुराने अनुभवों के बाद बनी हैं। ये बताती हैं कि भारतीय कृषि हमेशा से कितनी वैज्ञानिक रही है। कृषि और विज्ञान के इस तालमेल का निरंतर बढ़ते रहना, 21वीं सदी के भारत के लिए बहुत जरूरी है। आज इसी से जुड़ा एक और अहम कदम उठाया जा रहा है। हमारे देश के आधुनिक सोच वाले किसानों को ये समर्पित किया जा रहा है और छोटे-छोटे किसानों की जिन्दगी में बदलाव की आशा के साथ ये बहुत बड़ी सौगात आज मैं मेरे देश के कोटि-कोटि किसानों के चरणों में समर्पित कर रहा हूँ। अलग-अलग फसलों की 35 नई वैरायटीज आज जारी हुई हैं। आज रायपुर में National Institute of Biotic Stress Management का लोकार्पण भी हुआ है। चार एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटीज को ग्रीन कैंपस अवार्ड भी दिए गए हैं। मैं आप सभी को, देश के किसानों को, कृषि वैज्ञानिकों को बहुत-बहुत बधाई देता हूं।

साथियों,

बीते 6-7 सालों में साइंस और टेक्नॉलॉजी को खेती से जुड़ी चुनौतियों के समाधान के लिए प्राथमिकता के आधार पर उपयोग किया जा रहा है। विशेष रूप से बदलते हुए मौसम में, नई परिस्थितियों के अनुकूल, अधिक पोषण युक्त बीजों, इस पर हमारा फोकस बहुत अधिक है। हाल के वर्षों में अलग-अलग फसलों की ऐसी 1300 से अधिक Seed Varieties, बीज की विविधताएं तैयार की गई है। इसी श्रंखला में आज 35 और Crop Varieties देश के किसानों के चरणों में समर्पित की जा रही हैं। ये Crop Varieties, ये बीज, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव से खेती की सुरक्षा करने और कुपोषण मुक्त भारत के अभियान में बहुत सहायक होने वाला ये हमारे वैज्ञानिकों की खोज का परिणाम है। ये नई Varieties, मौसम की कई तरह की चुनौतियों से निपटने में सक्षम तो हैं हीं, इनमें पौष्टिक तत्व भी ज्यादा हैं। इनमें से कुछ Varieties कम पानी वाले क्षेत्रों के लिए हैं, कुछ crop गंभीर रोगों से सुरक्षित हैं, कुछ जल्दी तैयार हो जाने वाली हैं, कुछ खारे पानी में हो सकती हैं। यानि देश की अलग-अलग परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए, इन्हें तैयार किया गया है। छत्तीसगढ़ के National Institute of Biotic Stress Management के तौर पर देश को एक नया राष्ट्रीय संस्थान मिला है। ये संस्थान, मौसम और अन्य परिस्थितियों के बदलाव से पैदा हुई चुनौतियों-Biotic stress इससे निपटने में देश के प्रयासों को वैज्ञानिक मार्गदर्शन मिलेगा, वैज्ञानिक सहायताएं मिलेंगी और वो बहुत बल देगा। यहां से जो मैनपावर ट्रेन होगा, जो हमारा युवाधन तैयार होंगे, वैज्ञानिक मन-मस्तिष्क के साथ जो हमारा वैज्ञानिक तैयार होगा, जो यहां पर समाधान तैयार होंगे, जो solution निकलेंगे, वो देश की कृषि और किसानों की आय बढ़ाने में कारगर सिद्ध होंगे।

साथियों,

हम सभी जानते हैं कि हमारे देश में फसलों का कितना बड़ा हिस्सा, कीड़ों की वजह से बर्बाद हो जाता है। इससे किसानों का भी बहुत नुकसान होता है। पिछले वर्ष ही कोरोना से लड़ाई के बीच में हमने देखा है कि कैसे टिड्डी दल ने भी अनेक राज्यों में बड़ा हमला कर दिया था। भारत ने बहुत प्रयास करके तब इस हमले को रोका था, किसानों का ज्यादा नुकसान होने से बचाने का भरपूर प्रयास किया गया था। मैं समझता हूं कि इस नए संस्थान पर बहुत बड़ा दायित्व है और मुझे विश्वास है कि यहां काम करने वाले वैज्ञानिक देश की उम्मीदों पर खरा उतरेंगे।

साथियों,

खेती-किसानी को जब संरक्षण मिलता है, सुरक्षा कवच मिलता है, तो उसका और तेजी से विकास होता है। किसानों की जमीन को सुरक्षा देने के लिए, उन्हें अलग-अलग चरणों में 11 करोड़ Soil Health Card दिए गए हैं। इसकी वजह से किसानों को अपनी जो जमीन है उसकी क्या मर्यादाएं हैं, उस जमीन की क्या शक्ति है, इस प्रकार के बीज बोने से किस प्रकार की फसल बोने से अधि‍क लाभ होता है। दवाईयां कौन सी जरूरी पड़ेगी, fertilizer कौन सा जरूरी पड़ेगा, ये सारी चीजें उस Soil Health Card के कारण जमीन की सेहत का पता चलने के कारण, इसकी वजह से किसानों को बहुत लाभ हुआ है, उनका खर्चा भी कम हुआ है और उपज भी बढ़ी है। उसी प्रकार से, यूरिया की 100 परसेंट नीम कोटिंग करके, हमने खाद को लेकर होने वाली चिंता को भी दूर किया। किसानों को पानी की सुरक्षा देने के लिए, हमने सिंचाई परियोजनाएं शुरू कीं, दशकों से लटकी करीब-करीब 100 सिंचाई परियोजनाओं को पूरा करने का अभियान चलाया, बहुत बड़ी मात्रा में बजट लगा दिया इसके लिए, उसके कारण किसानों को पानी मिल जाए तो वो पानी से पराक्रम करके दिखाता है। उसी प्रकार से पानी बचाने के लिए हमने micro irrigation, sprinkler इन चीजों के लिए भी बड़ी आर्थि‍क मदद करके किसानों तक ये व्यवस्थाएं पहुंचाने का प्रयास किया। फसलों को रोगों से बचाने के लिए, ज्यादा उपज के लिए किसानों को नई-नई वैरायटी के बीज दिए गए। किसान, खेती के साथ-साथ बिजली पैदा करे, अन्नदाता उर्जादाता भी बने, अपनी खुद की जरूरतें भी पूरी कर सके, इसके लिए पीएम कुसुम अभियान भी चलाया जा रहा है। लाखों किसानों को सोलर पंप भी दिए गए हैं। उसी प्रकार से, आज तो मौसम के विषय में तो हमेशा दुनिया भर में चिंता का विषय बना हुआ है। अभी हमारे छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री जी कितने प्रकार के प्राकृतिक आपदाएं आती रहती हैं, climate change के कारण क्या-क्या मुसीबतें आती हैं। बड़े अच्छे ढंग से उन्होंने वर्णन किया। अब आप जानते हैं, ओलावृष्टि और मौसम की मार से किसानों को सुरक्षा देने के लिए हमने कई चीजों में परिवर्तन किये, पहले के सारे नियमों में बदलाव लाये ताकि किसान को सर्वाधि‍क लाभ हो, इस नुकसान के समय उसको दिक्कत ना आए, ये सारे परिवर्तन किये। पीएम फसल बीमा योजना, इससे भी किसानों को बहुत लाभ हो और सुरक्षा मिले, इसकी चिंता की। इस परिवर्तन के बाद किसानों को करीब-करीब ये जो प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में जो परिवर्तन लाए उसके कारण किसानों को करीब-करीब एक लाख करोड़ रुपए की क्लेम राशि का भुगतान किया गया है। एक लाख करोड़ रुपया इस संकट की घड़ी में किसान के जेब में गया है।

साथियों,

MSP में बढ़ोत्तरी के साथ-साथ हमने खरीद प्रक्रिया में भी सुधार किया ताकि अधिक-से-अधिक किसानों को इसका लाभ मिल सके। रबी सीजन में 430 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा गेंहूं खरीदा गया है। इसके लिए किसानों को 85 हजार करोड़ से अधिक का भुगतान किया गया है। कोविड के दौरान गेहूं खरीद केंद्रों की संख्या 3 गुना तक बढ़ाई है। साथ ही दलहल-तिलहन इन खरीद केन्द्रों की संख्या भी तीन गुना बढ़ाई गई है। किसानों की छोटी-छोटी जरूरतों को पूरा करने के लिए किसान सम्मान निधि के तहत 11 करोड़ से अधिक हमारे हर किसान को और उसमें ज्यादातर छोटे किसान हैं। 10 में से 8 किसान हमारे देश में छोटे किसान हैं, बहुत छोटे-छोटे जमीन के टुकड़े पर पल रहे हैं। ऐसे किसानों को करीब-करीब 1 लाख 60 हजार करोड़ से भी ज्यादा रुपए सीधे उनके बैंक अकाउंट के पास भेजे गए हैं। इसमें से एक लाख करोड़ रुपए से अधिक राशि तो इसी कोरोना काल में भेजी गई है। किसानों को टेक्नोलॉजी से जोड़ने के लिए हमने उन्हें बैंकों से मदद की और उस मदद की पूरी प्रक्रिया को बहुत आसान बनाया गया है। आज किसानों को और बेहतर तरीके से मौसम की जानकारी मिल रही है। हाल ही में अभियान चलाकर 2 करोड़ से ज्यादा किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड दिए गए हैं। मछली पालन करने वाले और डेयरी सेक्टर से जुड़े किसानों को भी KCC से जोड़ा गया है। 10 हजार से ज्यादा किसान उत्पादक संगठन हों, e-Nam योजना के तहत ज्यादा से ज्यादा कृषि मंडियों को जोड़ना हो, मौजूदा कृषि मंडियों का आधुनिकिकीकरण हो, ये सारे कार्य तेज गति से किए जा रहे हैं। देश के किसानों और देश की कृषि से जुड़े जो काम बीते 6-7 वर्षों में हुए हैं, उन्होंने आने वाले 25 वर्षों के बड़े राष्ट्रीय संकल्पों की सिद्धि के लिए क्योंकि 25 साल के बाद हमारा देश आजादी की शताब्दी मनाएगा, आज हम आजादी का अमृत महोत्सव मना रहे हैं, 25 साल के बाद आजादी की शताब्दी मनाएंगे और इसके लिए इन 25 वर्षों के बड़े राष्ट्र संकल्पों की सिद्ध‍ि के लिए एक बड़ा मजबूत आधार बना दिया है। बीज से लेकर बाजार तक हुए ये कार्य एक बड़ी आर्थिक ताकत के रूप में भारत की प्रगति की गति को सुनिश्चित करने वाले हैं।

साथियों,

हम सब जानते हैं कि Agriculture एक प्रकार से राज्य का विषय है और इसके विषय में अनेक बार लिखा भी जाता है कि ये तो राज्य का विषय है, भारत सरकार को इसमें कुछ नहीं करना चाहिए, ऐसा भी कहा जाता है क्योंकि State subject है और मैं जानता हूं क्योंकि मुझे भी कई वर्षों तक गुजरात में मुख्यमंत्री के रूप में काम करने का अवसर मिला था, गुजरात का मुख्यमंत्री रहते हुए क्योंकि राज्य की भी विशेष जिम्मेवारी है, ये मैं जानता था और इस जिम्मेवारी को मुझे निभाना चाहिए, ये मुख्यमंत्री होने के नाते मैं पूरी कोशि‍श करता था। गुजरात का मुख्यमंत्री रहते हुए मैंने कृषि व्यवस्था को, कृषि नीतियों और उनके खेती पर प्रभावों को बहुत निकट से अनुभव किया और अभी हमारे नरेंद्र सिंह तोमर जी, मेरे गुजरात के कार्यकाल में मैं क्या काम कर रहा था उसका भी ये बड़ा वर्णन कर रहे थे। एक समय था जब गुजरात में खेती कुछ फसलों तक ही सीमित थी। गुजरात के एक बड़े हिस्से में पानी के अभाव में किसान खेती छोड़ चुके थे। उस समय एक ही मंत्र को लेकर हम चले, किसानों को साथ लेकर के चले और मंत्र था- स्थिति बदलनी चाहिए, हम मिलकर स्थितियां ज़रूर बदलेंगे। इसके लिए उस दौर में ही हमने साइंस और आधुनिक टेक्नॉलॉजी का व्यापक उपयोग शुरू कर दिया था। आज देश के Agriculture और Horticulture में गुजरात की एक बड़ी हिस्सेदारी है। अब आज गुजरात में 12 महीने खेती होती है। कच्छ जैसे क्षेत्रों में भी आज वो फल-सब्जियां पैदा होती हैं, जिनके बारे में कभी सोच नहीं सकते थे। आज कच्छ के रेगिस्तान में से वहां की कृषि‍ पैदावार विदेशों में export होना शुरू हुआ है।

भाईयों और बहनों,

सिर्फ पैदावार पर ही फोकस नहीं किया गया, बल्कि पूरे गुजरात में कोल्ड चेन का एक बहुत बड़ा नेटवर्क तैयार किया गया। ऐसे अनेक प्रयासों से खेती का दायरा तो बढ़ा ही, साथ ही खेती से जुड़े उद्योग और रोज़गार भी बड़ी मात्रा में तैयार हुए और क्योंकि एक मुख्यमंत्री होने के नाते राज्य सरकार की सारी जिम्मेवादी होती है तो मुझे उस समय इन सारे कामों को करने का एक अच्छा सा अवसर भी मिला और मैंने पूरी मेहनत भी की।

भाइयों और बहनों,

खेती में हुए ऐसे ही आधुनिक परिवर्तनों को आज़ादी के इस अमृतकाल में और विस्तार देने की जरूरत है। जलवायु परिवर्तन खेती ही नहीं, बल्कि हमारे पूरे इकोसिस्टम के लिए बहुत बड़ी चुनौती है। मौसम में बदलाव से हमारा मत्स्य उत्पादन, पशुओं का स्वास्थ्य और उत्पादकता बहुत अधिक प्रभावित होती है। इसका नुकसान किसानों को, मछुआरे साथियों को उठाना पड़ता है। जलवायु परिवर्तन के कारण जो नए प्रकार के कीट, नई बीमारियां, महामारियां आ रही हैं, इससे इंसान और पशुधन के स्वास्थ्य पर भी बहुत बड़ा संकट आ रहा है और फसलें भी प्रभावित हो रही है। इन पहलुओं पर गहन रिसर्च निरंतर ज़रूरी है। जब साइंस, सरकार और सोसायटी मिलकर काम करेंगे तो उसके नतीजे और बेहतर आएंगे। किसानों और वैज्ञानिकों का ऐसा गठजोड़, नई चुनौतियों से निपटने में देश की ताकत बढ़ाएगा। जिला स्तर पर साइंस आधारित ऐसे कृषि मॉडल खेती को अधिक प्रोफेशनल, अधिक लाभकारी बनाएंगे। आज जलवायु परिवर्तन से बचाव करने वाली तकनीक और प्रक्रियाओं को प्रोत्साहित करने के लिए जो अभियान आज लॉन्च किया गया है, उसके मूल में भी यही भावना है।

भाइयों और बहनो,

ये वो समय है जब हमें बैक टू बेसिक और मार्च फॉर फ्यूचर, दोनों में संतुलन साधना है। जब मैं बैक टू बेसिक कहता हूं तब, मेरा आशय हमारी पारंपरिक कृषि की उस ताकत से है जिसमें आज की अधिकतर चुनौतियों से जुड़ा सुरक्षा कवच था। पारंपरिक रूप से हम खेती, पशुपालन और मत्स्यपालन एक साथ करते आए हैं। इसके अलावा, एक साथ, एक ही खेत में, एक ही समय पर कई फसलों को भी उगाया जाता था। यानि पहले हमारे देश की Agriculture, Multiculture थी, लेकिन ये धीरे-धीरे Monoculture में बदलती चली गई। भिन्न भिन्न परिस्थितियों की वजह से किसान एक ही फसल उगाने लग गया। इस स्थिति को भी हमें मिलकर बदलना ही होगा। आज जब Climate Change की चुनौती बढ़ रही है, तो हमें अपने कार्यों की गति को भी बढ़ाना होगा। बीते वर्षों में इसी भावना को हमने किसानों की आय में बढ़ोतरी करने के लिए भी प्रोत्साहित किया है। किसान को सिर्फ फसल आधारित इनकम सिस्टम से बाहर निकालकर, उन्हें वैल्यू एडिशन और खेती के अन्य विकल्पों के लिए भी प्रेरित किया जा रहा है और छोटे किसानों को इसकी बहुत जरूरत है और हमने पूरा ध्यान 100 में से 80 जो छोटे किसान हैं, उन पर लगाना ही है और हमारे किसानों के लिए, इसमें पशुपालन और मत्स्यपालन के साथ-साथ मधुमक्खी पालन, खेत में सौर ऊर्जा उत्पादन, कचरे से कंचन- यानि इथेनॉल, बायोफ्यूल जैसे विकल्प भी किसानों को दिए जा रहे हैं। मुझे खुशी है कि छत्तीसगढ़ समेत देश के किसान इन्हें तेज़ी से इन सारी नई-नई बातों को अपना रहे हैं। खेती के साथ-साथ में दो-चार और चीजों का विस्तार कर रहे हैं।

साथियों,

मौसम की स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार फसलों का उत्पादन, हमारी पारंपरिक कृषि की एक और ताकत है। जहां सूखा रहता है, वहां उस प्रकार की फसलों का उत्पादन होता है। जहां बाढ़ रहती है, पानी ज्यादा रहता है, जहां बर्फ रहती है, वहां उस प्रकार की फसलें उगाई जाती हैं। मौसम के हिसाब से उगाई जाने वाली इन फसलों में न्यूट्रिशन वैल्यू भी ज्यादा रहती है। विशेषरूप से जो हमारे मोटे अनाज- मिलेट्स हैं, उनका बहुत महत्व है। एक्सपर्ट्स कहते हैं कि ये हमारे स्वास्थ्य को मज़बूती देते हैं। इसलिए आज की लाइफ स्टाइल से जिस प्रकार की बीमारियां बढ़ रही हैं, उनको देखते हुए हमारे इन मिलेट्स की डिमांड बहुत अधिक बढ़ रही है।

मेरे किसान भाईयों-बहनों,

आपको जानकर खुशी होगी भारत के प्रयासों से ही संयुक्त राष्ट्र संघ ने अगले वर्ष यानि 2023 को इंटरनेशनल ईयर ऑफ मिलेट्स घोषित किया है। ये मिलेट्स की खेती की हमारी परंपरा, हमारे अनाज को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर showcase करने का और नए बाज़ार तलाशने का बहुत बड़ा अवसर है। लेकिन इसके लिए अभी से काम करना पड़ेगा। आज इस अवसर पर मैं देश के सभी सामाजिक और शैक्षि‍क संगठनों से कहूंगा कि मिलेट्स से जुड़े फूड फेस्टिवल लगाएं, मिलेट्स में से नई-नई food varieties कैसे बनें, इसकी स्पर्धाएं करें क्योंकि 2023 में अगर दुनिया में हमें अपनी बात लेकर के जाना है तो हमें इन चीजों में नयापन लाना पड़ेगा और लोगों में भी जागरुकता बढ़ाएं। मिलेट्स से जुड़ी नई वेबसाइट्स भी बनाई जा सकती हैं, लोग आएं मिलेट्स से क्या-क्या बन सकता है, क्या कैसे बन सकता है, क्या फायदा हो सकता है, एक जागरुकता अभि‍यान चल सकता है। मैं मानता हूं कि इसके फायदे क्या होते हैं, इससे जुड़ी रोचक जानकारी हम इस वेबसाइट पर रख सकते हैं ताकि लोग उसके साथ जुड़ सकते हैं। मैं तो सभी राज्यों से भी आग्रह करूंगा कि आपका राज्य का एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट, आपकी एग्रीकल्चरल यूनिवर्स्‍िटीज, आपके साइंटिस्ट और प्रोग्रेसिव किसान इनमें से कोई टास्क फोर्स बनाईए और 2023 में जब विश्व मिलेट्स ईयर मनाता होगा तब भारत को उसे कैसे योगदान करे, भारत कैसे लीड करे, भारत के किसान उसमें कैसे फायेदा उठाएं, अभी से उसकी तैयारी करनी चाहिए।

साथियों,

साइंस और रिसर्च के समाधानों से अब मिलेट्स और अन्य अनाजों को और विकसित करना ज़रूरी है। मकसद ये कि देश के अलग-अलग हिस्सों में, अलग-अलग ज़रूरतों के हिसाब से इन्हें उगाया जा सके। आज जिन Crops की वैरायटी लॉन्च हुई हैं, उनमें इन प्रयासों की झलक भी हमें दिख रही है। मुझे ये भी बताया गया है कि इस समय देश में डेढ़ सौ से अधिक क्लस्टर्स में वहां की परिस्थितियों के मुताबिक कृषि तकनीकों पर प्रयोग चल रहे हैं।

साथियों,

खेती की जो हमारी पुरातन परंपरा है उसके साथ-साथ मार्च टू फ्यूचर भी उतना ही आवश्यक है। फ्यूचर की जब हम बात करते हैं तो उसके मूल में आधुनिक टेक्नॉलॉजी है, खेती के नए औज़ार हैं। आधुनिक कृषि मशीनों और उपकरणों को बढ़ावा देने के प्रयासों का परिणाम आज दिख रहा है। आने वाला समय स्मार्ट मशीनों का है, स्मार्ट उपकरणों का है। देश में पहली बार गांव की प्रॉपर्टी के दस्तावेज़ तैयार करने में ड्रोन की भूमिका हम देख रहे हैं। अब खेती में भी आधुनिक ड्रोन्स और सेंसर्स के उपयोग को बढ़ाना है। इससे खेती से जुड़ा हाई क्वालिटी डेटा हमें मिल सकता है। ये खेती की चुनौतियों से जुड़े रियल टाइम समाधान तैयार करने में भी मदद करेगा। हाल में लागू की गई नई ड्रोन नीति इसमें और सहायक सिद्ध होने वाली है।

साथियों,

बीज से लेकर बाज़ार तक का जो पूरा इकोसिस्टम है, देश उसे जो तैयार कर रहा है, उसे हमें लगातार आधुनिक बनाते रहना है। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस, डेटा एनालिटिक्स और ब्लॉक चेन टेक्नॉलॉजी, डिमांड और सप्लाई से जुड़ी चुनौतियों को दूर करने में बहुत मदद कर सकती हैं। हमें ऐसे innovations, ऐसे startups को प्रमोट करना है जो इन तकनीकों को गांव-गांव तक पहुंचा सकें। देश का हर किसान, विशेष रूप से छोटा किसान, इन नए उपकरणों, नई टेक्नॉलॉजी का उपयोग करेगा, तो कृषि सेक्टर में बड़े परिवर्तन आएंगे। किसानों को कम दाम में आधुनिक टेक्नॉलॉजी उपलब्ध कराने वाले startups के लिए भी ये बेहतरीन अवसर है। मैं देश के युवाओं से इस अवसर का लाभ उठाने का आग्रह करूंगा।

साथियों,

आज़ादी के इस अमृतकाल में हमें कृषि से जुड़े आधुनिक विज्ञान को गांव-गांव, घर-घर तक पहुंचाना है। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में इसके लिए कुछ बड़े कदम उठाए गए हैं। हमें अब कोशिश करनी है कि मिडिल स्कूल लेवल तक कृषि से जुड़ी रिसर्च और टेक्नॉलॉजी हमारे स्कूली पाठयक्रम का भी हिस्सा बने। स्कूलों के स्तर पर ही हमारे विद्यार्थियों के पास ये विकल्प हो कि वो कृषि को करियर के रूप में चुनने के लिए खुद को तैयार कर सकें।

साथियों,

आज जो अभियान हमने शुरु किया है, इसको जनआंदोलन में बदलने के लिए हम सभी को अपनी भागीदारी सुनिश्चित करनी है। देश को कुपोषण से मुक्ति देने के लिए जो अभियान चल रहा है, राष्ट्रीय पोषण मिशन को भी ये अभियान सशक्त करेगा। अब तो सरकार ने ये भी फैसला लिया है कि सरकारी योजना के तहत गरीबों को, स्कूलों में बच्चों को, फोर्टिफाइड चावल ही दिया जाएगा। हाल में ही मैंने अपने ओलंपिक चैंपियंस से कुपोषण को लेकर जागरूकता बढ़ाने के लिए हर एक खि‍लाड़ी से मैने आग्रह किया था, कि आप कम से कम आने वाले एक-दो साल में कम से कम 75 स्कूलों में जाने का आग्रह किया था, वहां विद्यार्थि‍यों से पोषण के संबंध में बाते करें, खेल-कूद के संबंध में बाते करें, physical exercise के संबंध में बाते करें। आज मैं सभी शिक्षाविदों, सभी कृषि वैज्ञानिकों, सभी संस्थानों को कहूंगा कि आप भी आज़ादी के अमृत महोत्सव के लिए अपने लक्ष्य तय करें। 75 दिन का अभि‍यान उठा ले कोई, 75 गांवों को गोद लेकर के परिवर्तन का अभि‍यान उठा लें, 75 स्कूलों को जागरुक करके हर एक स्कूल को कोई काम में लगा दे, ऐसा एक अभियान अगर देश के हर जिले में अपने स्तर पर भी और संस्थानों के स्तर पर भी चलाया जा सकता है। इसमें नई फसलों, फोर्टिफाइड बीजों, जलवायु परिवर्तन से बचाव को लेकर किसानों को जानकारी दी जा सकती है। मुझे विश्वास है कि हम सबका प्रयास, ये सबका प्रयास बहुत महत्वूपर्ण है, हम सबका प्रयास मौसम के बदलाव से देश की खेती को बचाएगा, किसान की समृद्धि और देश के स्वास्थ्य की सुरक्षा भी सुनिश्चित करेगा। एक बार फिर सभी किसान साथियों को, नई क्रॉप वैरायटी और नए राष्ट्रीय रिसर्च संस्थान के लिए मेरी तरफ से बहुत-बहुत बधाई। फिर से एक बार जो जिन यूनिवर्सिटियों ने आज पुरस्कार पाए ताकि वैज्ञानिक व्यवस्था ही, वैज्ञानिक मन ही, वैज्ञानिक तरीका ही चुनौतियों से मुक्ति पाने के उत्तम रास्ते दे सकता है, उन सबको मेरी तरफ से बहुत-बहुत शुभकामनाएं !

बहुत-बहुत धन्यवाद !