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Swami Vivekananda an inspiration for all youth and a shining example of how much could be accomplished in a short time-span: PM Modi 
Earlier people were inspired to die for the nation. Today it is about living for the nation & doing something for India: PM
The 125 crore people are united in an objective of taking the nation to new highs: PM Narendra Modi
Entire world is looking at India with so much hope because India is a land of opportunities: PM Modi
A youth is one who works towards his future goals, unmindful of the past: Prime Minister Modi
Without peace, unity and harmony, development cannot have any meaning: PM Narendra Modi
India has shown the world, that a land of such diversity, has a unique spirit to stay together: PM Modi
India's objective is to give youth the opportunities to make this century an Indian century: PM
If India can be a manufacturing hub, it is not because we have a market or raw materials...it is because we have skilled youngsters: PM
“Dignity of labour” must be inculcated among people: PM Narendra Modi
Development is about transforming the lives of the poor: Prime Minister Modi

भारत के कौने –कौन से आए मेरे नौजवान साथियों।

आज 12 जनवरी स्‍वामी विवेकानंद जी की जन्‍म जयंती हम युवा दिवस के रूप में मनाते हैं। इस देश में दो महापुरूषों को इस देश का युवा विशेष रूप से नमन करता रहा है। अगर कोई हमारे सामने भगत सिंह का नाम लें या कोई हमें स्‍वामी विवेकानंद की याद दिला दें तो उसी पल हमारा माथा उन महापुरूषों के चरणें में झुक जाता है। बहुत ही छोटी आयु में कोई क्‍या कर सकता है। अगर जीवन में संकल्‍प का सामर्थ्‍य हो, संकल्‍प के लिए समर्पित भाव हो और जीवन आहूत करने की अदम्‍य इच्‍छा हो, तो व्‍यक्ति के लिए उम्र कोई मायना नहीं रखती। मेरे सामने देश के हजारों युवक बैठे हैं, वो हिंदुस्‍तान के कौने-कौने से आए हैं। उनका लालन-पालन अलग-अलग हुआ है। उनकी खान-पान की आदतें अलग है, उनकी बोली अलग है, उनका पहनाव अलग है, लेकिन उसके बावजूद भी ये सारे नौजवान इस एक बात से जुड़े हुए हैं। उनके मन मंदिर में एक मंत्र लगातार गूंजता रहा है। और वह ही हम सब की प्रेरणा है। और वो मंत्र क्‍या है? आजादी के आंदोलन के समय जिस वंदे मारतरम की गूंज ने कश्‍मीर से कन्‍या कुमारी अटक से कटक पूरे हिंदुस्‍तान को आजादी के आंदोलन में पिरो दिया है। एक मंत्र होता है जो जीवन में कुछ कर दिखाने की प्रेरणा बन जाता है। आज वही मंत्र चाहे उसको भारत मां की जय के रूप में कहते हो, चाहे वंदे मातरम के रूप में कहते हो। पहले मां भारती को गुलामी की जंजीरों से मुक्‍त कराने के लिए वो हमारी ताकत बन गया था। और आज आजाद हिंदुस्‍तान में भारत को नई ऊचाईयों पर ले जाने के लिए, विकास की नई ऊंचाईयों को सिद्ध करने के लिए, समस्‍याओं से मुक्ति दिलाने के लिए, हिंदुस्‍तान के गांव, गरीब किसान, मजदूर उनके जीवन में बदलाव लाने के लिए यही मंत्र हमारी प्रेरणा बनता है। पहले देश के लिए मरने की प्रेरणा देता था। आज वही मंत्र हमें देश के लिए जीने की प्रेरणा देता है। और आप सब नौजवान अपने लिए नहीं, देश के लिए कुछ करने के इरादे से किसी न किसी संकल्‍प से बंधे हुए हैं। आप कुछ करना चाहते हैं। और यह देश प्रगति तब करता है जब सवा सौ करोड़ देशवासी किसी न किसी संकल्‍प से बंधे हो। उस संकल्‍प की पूर्ति के लिए कुछ कदम चलने के लिए प्रयासरत हो। मंजिल को पाने के लिए अविरत कोशिश करते हो, तो देश अपने आप उस मंजिलों को पार कर जाता है।

आज पूरे विश्‍व का परिवेश देखे पूरा विश्‍व आज भारत की तरफ एक बड़ी आशा भरी नजर से देख रहा है। क्‍यों ? इसलिए कि हिंदुस्‍तान एक संभावनाओं का देश है। आपार अवसर जहां इंतजार कर रहे हैं। दुनिया इसलिए हिंदुस्‍तान की तरफ देख रही है, क्‍योंकि आज हिंदुस्‍तान विश्‍व का सबसे युवा देश है। 65 प्रतिशत जनसंख्‍या 35 से कम आयु की हो, वो देश कितना सौभाग्‍यशाली है कि जिसके पास कोटि-कोटि युवा लोग हैं। और जहां युवा होता है, वहां संकल्‍पों की कोई मर्यादाएँ नहीं होतीं, सीमाएँ नहीं होतीं। कभी-कभार हमारे देश में युवा की परिभाषा को लेकर अलग-अलग हमें बातें सुनने को मिलती है। शासत्रों से ले करके अब तक युवा की परिभाषा बहुत हो चुकी है। हर किसी का अपना नजरिया होता है। कुछ लोगों के लिए उम्र का दायरा यह युवा की पहचान के रूप में माना जाता है। मैं कभी-कभी सोचता हूं कि युवा यह परिस्थिति का नाम नहीं है। युवा यह मनस्थिति का नाम है। मनस्थिति है, जो युवा की परिचायक होती है। जब कोई व्‍यक्ति अपने बीते हुए पल को बार-बार याद करता है, दोहराता रहता है तो मैं यह सीधा-सीधा अर्थ निकालता हूं कि वो अपनी युववाणी खो चुका है। वो बुढ़ापे की आरे चल चुका है। लेकिन जो बीते हुए कल को बार-बार दोहराने की बजाय आने वाले कल के सपने संजोता रहता है, वो उसके लिए मेरा मन हमेशा कहता है वो सच्‍चे अर्थ में युवा है। अगर आप अपने आप को युवा मानते हो तो युवा वो है जो बीते हुए कल की बातों को दोहरा करके अपने समय को बर्बाद नहीं करता है, लेकिन जो आने वाले सपनों को संजोने के लिए पल-पल प्रयास करता है और हर सपने को साकार करने के लिए अपने आप को खपा देता है।

देशभर से आए हुए युवा उन सपनों का सम्‍पुट है। हम देशभर के लोग विविधताओं के बीच यहां बैठे हैं, क्‍या कारण है। वो कौन सा कारण हमें जोड़ रहा है। सद्भावना यह अपने आप में एक बहुत बड़ी शक्ति होती है। क्‍या हमारे अंदर एक दूसरे के प्रति आदर-भाव न होता, सद्भाव न होता। अपनेपन का कोई नाता न होता, तो हम इतनी अपने आप से जुड़ सकते? भारत विकास करना चाहता है और इस बार आपकी इस युवा परिषद का विषय भी बड़ा महत्‍वपूर्ण है। एक तरफ व्‍यक्ति का, उसके सामर्थ्‍य का और युवा से जुड़े हुए विषय को ले करके आया है उसका एक पहलू है skill, दूसरा है भारत का क्‍या हो तो कहते है विकास। और तीसरी बात आपने कही है कैसे हो तो वो है सद्भाव। क्‍या, क्‍यों, कैसे? इस बात को ले करके इस समारोह को आप चार दिन चर्चा के लिए आज प्रारंभ कर रहे हैं। अगर हमारे देश में एकता नहीं होगी, जन-जन के प्रति सद्भाव नहीं होगा, आदर भाव नहीं होगा, दूसरे की परंपराएं, दूसरे के विचार, उसके प्रति अगर सम्‍मान का भाव नहीं होगा, तो शायद भारत को प्रगति में रुकावटें आएंगी, विकास में रुकावटें आएंगी और इसलिए समय की मांग है और हर नौजवान के जीवन का एक व्‍यवहार है कि हम शांति, एकता, सद्भावना, जो भारत जैसे विविधताओं से भरे हुए देश के लिए प्रगति की गारंटी है। भारत के पास सब कुछ हो, धन हो, दौलत हो, बेशुमार पैसे हों, हर नौजवान को नौकरी हो, हर परिवार में सुख और सम्‍पन्‍नता हो, लेकिन, लेकिन अगर देश में शांति, एकता और सद्भावना नहीं होगी, तो वो सारी सम्‍पत्ति किसी के काम नहीं आएगी। न वो देश का गौरव बढ़ाएगी, न आने वाली पीढि़यों के लिए भविष्‍य का कोई रास्‍ता बनाएगी। और इसलिए हम विकास कितना ही करें, कितनी ही ऊंचाइयों को पार करें, लेकिन शांति, एकता और सद्भावना, ये भारत की पहली आवश्‍यकता रहती है।

और भारत ने दुनिया को दिखाया है कि जिस देश के पास सैंकड़ों बोलियां हो, अनेक भाषाएं हों, अनेक परम्‍पराएं हों, अनगिनत विविधिताएं हों, उसके बाद भी साथ जीने-मरने का स्‍वभाव हो, ये हमारी बहुत बड़ी विरासत हैं जो हमारे पूर्वजों ने हमें दी हैं, स्‍वामी विवेकानंद जैसे महापुरुषों ने दी हैं और इसे हमने संजो के रखना है।

वेद से विवेकानंद तक और उपनिषद से उपग्रह तक हम इसी परम्‍परा में पले-बढ़े हैं। उस परम्‍पराओं को बार, बार, बार, बार स्‍मरण करते हुए, संजोते हुए भारत को एकता के सूत्र में बांधने के लिए सद्भावना को सेतु उसको हम जितना बल दें, देते रहना होगा।

उसी प्रकार से अगर व्‍यक्ति के जीवन में सामर्थ्‍य नहीं होगा तो राष्‍ट्र के जीवन में सामर्थ्‍य कहां से आएगा? 21वीं सदी एशिया की सदी है कहते हैं, 21वीं सदी हिदुस्‍तान की सदी बन सकती है कैसे? जब हम, हमारे देश के युवा शक्ति के समार्थ्‍य को पहचानेंगे। विकास यात्रा में उसको पिरोयें और विकास की ऊंचाइयों को पार करने के लिए उसे हम अपना भागीदार बना लें। तब जा करके, तब जा करके हम राष्‍ट्र के सपनों को पूरा कर सकते हैं। अनेक मार्ग हैं, उसमें एक महत्‍वपूर्ण मार्ग है हुनर, skill development, हमारे देश के नौजवान के हाथ में सिर्फ कागज और कलम होगी तो देश आगे नहीं बढ़ सकता है। अपार ज्ञान का भंडार तो हो ही हो, कागज और कलम का सामर्थ्‍य तो हो ही हो, लेकिन देश को आगे बढ़ने के लिए हुनर चाहिए, skill चाहिए, बदले हुए युग में जहां technology एक महत्‍वपूर्ण रोल अदा कर रही है, भारत के एक manufacturing hub बनने की संभावना है। अगर भारत दुनिया का एक manufacturing hub बन सकता है तो उसका पहला कारण ये नहीं है कि हमारे पास raw material है, पहला कारण ये नहीं है कि हमारे पास market है, पहला कारण ये नहीं है कि हमारी आवश्‍यकता है, पहला कारण ये है कि हमारे देश के पास, नौजवानों के पास अगर हुनर है तो वो सबसे बड़ी ताकत है। और इसलिए हमारी सरकार ने skill को, हुनर को बहुत महत्‍व दिया है।

देश की आजादी के बाद पहली बार skill development एक अलग ministry बनाई गई, skill development की अलग policy बनाई गई, skill development के लिए अलग बजट बनाया गया और हिन्‍दुस्‍तान में एक ऐसी जाल बिछाने की कोशिश है कि गरीब से गरीब व्‍यक्ति, अनपढ़ से अनपढ़ व्‍यक्ति भी अपने जीवन में कुछ करने के लिए इच्‍छा करता है तो उसको सीखने का अवसर मिलना चाहिए, उसके हाथ में कोई हुनर होना चाहिए और वो हुनर को प्राप्‍त कराने के लिए सरकार पुरजोर प्रयास कर रही है।

हमारे छत्‍तीसगढ़ में रमन सिंह जी ने तो skill को एक अधिकार के रूप में develop किया है। उन्‍होंने कानूनी व्‍यवस्‍था का प्रयास किया है। मैं पिछली बार जब छत्‍तीसगढ़ आया था तो skill development किस प्रकार के उन्‍होंने काम की रचनाएं की हैं उसको मैंने अपनी आंखों से देखा। जहां नक्‍सलवाद, नौजवानों को गुमराह करने के लिए भरपूर कोशिश करता है, उसी इलाके में, उसकी छाती पर, skill development के द्वारा सपनों को संजोने के प्रयास छत्‍तीसगढ़ में हो रहे हैं। ये बधाई के पात्र हैं। और जब आप छत्‍तीसगढ़ में हैं तो आपको बहुत सी बातें सुनने को मिलेंगी कि नौजवानों के विकास के लिए क्‍या-क्‍या वहां हो रहा है।

मैं ये ही आपसे कहना चाहता हूं कि हम भी इस बात को ले करके आगे बढ़ना चाहते हैं कि देश में skill development को कैसे बल दिया। skill development से मैं एक बात आप नौजवानों से कहना चाहता हूं, दुर्भाग्‍य से हमारे देश में हम लोगों ने एक ऐसी मनस्थिति बना ली है जो दिमाग से काम करता है वो बड़ा है और जो हाथ से काम करता है वो छोटा है। इस मनस्थिति को बदलना पड़ेगा। हम हमारी मां का इतना सम्‍मान करते हैं, मां का आदर करते हैं, हमारी मां कहा है। बहुत कम लोग होंगे जिसकी मां को दिमाग से काम करने का अवसर मिला है। बाकी सब लोग हम ऐसे हैं जिनकी मां हाथ से काम करती है, कपड़े धेाती हैं, खाना पकाती है, झाड़ू लगाती है, और उस मां का हम सम्‍मान करते हैं, मां का गौरव करते हैं। लेकिन समाज में हाथ से काम करने वाला हमें छोटा लगता है, बढि़या कपड़े पहन करके टेबल-कुर्सी पर बैठा हुआ बाबू हमें बड़ा लगता है, लेकिन हमें कोई ऑटो-रिक्‍शा का ड्राइवर हमें छोटा लगता है। कोई plumber, कोई mechanic , कोई turner, कोई fitter, कोई wireman, कोई फूलों का गुलदस्‍ता बनाने वाला, ये हमें छोटे लगते हैं, हमारी ये मानसिकता हमें बदलनी होगी। हमें उनके प्रति भी सद्भाव पैदा करना होगा और सद्भाव तब होगा जब शुरूआत समभाव से होगी। मेरे में और उसमें कोई अन्‍तर नहीं है, हमारे और उसके बीच में एक समभाव है। जब समभाव होगा तो सद्भाव अपने-आप पनपने लग जाएगा और इसलिए white caller job and blue caller job, ये शब्‍द हमारे यहां चल रहे हैं। जो अपने पैरों पर खड़ा है। जो अपने पैरों पर खड़ा है। जो अपने हाथ की ताकत से अपनी जिंदगी बनाता है। जिसकी उंगलियों में नया करने का दम होता है। उससे बड़ा गौरव करने के लिए क्‍या हो सकता है। और इसलिए हम skill development पर बल देना चाहते हैं। हम समाज में एक मनोवैज्ञानिक बदलाव लाना चाहते हैं। कोई काम छोटा नहीं होता और इसलिए हमने एक movement चलाया है। श्रम एव जयते। dignity of labor हम बल दे रहे हैं उस पर और इसलिए कभी-कभी क्‍या लगता है। कितना ही गरीब व्‍यक्ति हो, उसके मन में मनोवैज्ञानिक प्रभाव पैदा हो गया है कि जब तक बेटा graduate नहीं होता, मां-बाप को भी संकोच होता है कि कोई रिश्‍तेदारों को परिचय क्‍या करवाएं। और इसलिए उसको लगता है कि graduate होना बहुत अनिवार्य है। लेकिन क्‍या सातवीं कक्षा पास, 10वीं कक्षा पास बेटा ITI में गया हो। और Technically बड़ा सामर्थ्‍यवान हो तो उनको संकोच होता है, परिचय करवाने में। यह psychology को बदलना है। यह आवश्‍यक नहीं है कि हमारे पास graduate होने का प्रमाण पत्र हो और बेरोजगारी की जिंदगी हो। हम सातवीं क्‍यों न पास हो, 10वीं पास क्‍यों न हो, हमारे हाथ में हुनर होना चाहिए और अपने पसीने से पैसों को पैदा करने की ताकत होनी चाहिए। ऐसे समाज की अवस्‍था होनी चाहिए और इसलिए नौजवानों में बल देने का प्रयास हम कर रहे हैं। हम विकास की ओर जाना चाहते हैं। और विकास का मेरा सीधा-सीधा मतलब है। देश के गरीबों की जिंदगी में बदलाव, हिंदुस्‍तान के गावों की जिंदगी में बदलाव। गांव में अच्‍छी शिक्षा हो, गांव में अस्‍पताल हो, बच्‍चों को पढ़ने के लिए अच्‍छा टीचर हो। बूढ़े अगर बीमार हैं तो अच्‍छा डॉक्‍टर हो। सस्‍ती दवाइयां हो, रहने के लिए अच्‍छा घर हो। गांव में आने-आने के लिए अच्‍छे रास्‍ते हो, पीने के लिए शुद्ध पानी हो। आजादी के इतने सालों के बाद भी हम इसको पूरा नहीं कर पाए हैं और उसको पूरा करना हमारा एक दायित्‍व है। और विकास, यही विकास है। विकास यानी यह नहीं है कि हम कितने बड़े-बड़े भवन बनाते हैं। और कितनी बड़ी संख्‍या में बाबूओं को तैयार करते हैं। और इसलिए हमारा विकास का मॉडल सामान्‍य मानव की जिंदगी में बदलाव लाना है। और सामान्‍य मानव की जिंदगी में बदलाव लाने के लिए हमने skill development को महत्‍व दिया है।

आने वाले दिनों में चार दिन के बाद 16 तारीख को हमें एक कार्यक्रम को लॉन्‍ज कर रहे हैं – Startup India Standup India हमारे देश के नौजवानों के पास कल्‍पकता के वो धनी है, अनेक नई चीजों की उनके पास सोच है, समस्‍याओं के समाधान के लिए वो रास्‍ते खोजते हैं। हमारे यहां गांव में हमने देखा होगा खेत में काम करने वाला व्‍यक्ति भी अपने आप Technology develop कर देता है और उस Technology से अपना काम कर लेता है। अपनी एक ही मोटर साइकिल होगी, उस मोटरसाइकिल से दस प्रकार के काम लेना गांव का आदमी जानता है। इसका मतलब कि हमारे पास innovative सोच, innovation यह भारत के पास हैं। लेकिन उसे प्रतिष्‍ठा कैसे मिले, पुरस्‍कार कैसे मिले, प्रोत्‍साहन कैसे मिले, आगे बढ़ने के लिए रास्‍ता कैसे मिले। उस दिशा में सरकार एक गंभीरता से सोच करके उस योजना को लागू कर रही है। 16 तारीख को जब यह बड़ा कार्यक्रम होगा आप भी अपने-अपने इलाके में कहीं पर वीडियो कॉनफ्रेंस के द्वारा अगर इस कार्यक्रम में शरीक होते हैं, तो आपने शरीक होने का प्रयास करना चाहिए। और skill development का next stage होता है Startup India उसी प्रकार से सरकार ने मुद्रा योजना घोषित की है। प्रधानमंत्री मुद्रा योजना।

हमारे देश में बहुत लोग हैं जिनके पास कुछ करने की इच्‍छा है। लेकिन पैसों के आभाव में कर नहीं पाते। वो unfunded है। बैंकों के दरवाजे उनके लिए खुले नहीं थे। हमने बदलाव लाया और बैंकों के दरवाजों को खोल दिया।

बैंकों को, दरवाजों को खोल करके मुद्रा योजना के तहत उन नौजवानों को पैसे देने का प्रयास शुरू किया है और मुझ खुशी है कि बहुत ही कम समय में ये जो योजना बनाई गई, प्रधानमंत्री मुद्रा योजना, करीब-करीब दो करोड़ लोगों को बैंक से बिना कोई गारंटी, पैसे दिए गए। इतने कम समय में बैंकों के द्वारा दो करोड़ लोगों को पैसे मिल रहा है और करीब-करीब 80 हजार करोड़ रुपये नौजवानों के हाथ में रख दिए हैं। नौजवानों पर मेरा भरोसा है। देश की युवा शक्ति पर भरोसा है। देश के सपने अगर कहीं पर निवास करते हैं तो देश के युवा दिलों में रहते हैं। और इसलिए उस पर हमने ध्‍यान केंद्रित किया है। मैं चाहता हूं कि जो लोग कुछ कर गुजरना चाहते हैं, वे नौकरी की तलाश क्‍यों करें, अपने पैरों पर खड़े क्‍यों न हों। मैं नहीं चाहता हूं मेरे देश का नौजवान job seeker बने, मैं चाहता हूं मेरे देश का नौजवान job creator बने। मैं ऐसी जिंदगी जिऊंगा कि दो-चार और पांच लोगों को मैं कोई न कोई रोजगार दूंगा, ये भी हमारा सपना होना चाहिए। मैं रोजगार के लिए तड़पने वाला नौजवान नहीं हो सकता हूं, मैं रोजगार देने वाला एक साहसिक नौजवान हो सकता हूं। और ये ही तो जिंदगी का लक्ष्‍य होना चाहिए कि मैं ओरों के लिए कुछ कर सकता हूं। और एक बार ये सपना ले करके चलोगे तो कर भी पाओगे। और इसलिए आप अगर उस बात को ले करके चलते हैं तो मेरा आपसे अनुरोध है, मैं आपको विश्‍वास दिलाना चाहता हूं, मैं आपके साथ हूं। ये सरकार आपके साथ है, ये पूरा हिन्‍दुस्‍तान आपके साथ है। आप उस लिए सपने संजो करके ले करके निकलिए। और इसीलिए skill development का अपना एक महत्‍व है, start-up India, stand up India का महत्‍व है, प्रधानमंत्री मुद्रा योजना का महत्‍व है।

मैंने अभी एक स्‍वच्‍छता का अभियान चलाया है। 15 अगस्‍त को मैंने लालकिले से कहा था, लेकिन मैं आज गर्व से कह सकता हूं कि वो स्‍वच्‍छता अभियान किसी प्रधानमंत्री का अभियान नहीं है, वो नरेंद्र मोदी का अभियान नहीं है। देश के हर नागरिक ने इसको अपना बना लिया है। हर कोई उसमें कुछ न कुछ करना चाहता है। अभी मैंने कहा 26 जनवरी को हमारे महापुरुषों के जितने statue हैं, उसकी सफाई एक नागरिक के नाते हम क्‍यों न करें? और मेरे पास खबरें हैं कि देश भर में इतने नौजवान आगे आए हैं, इतने स्‍कूल कॉलेज आगे आए हैं, इतने संगठन आगे आए हैं, even मुझे बताया गया नेहरू युवा केंद्र हो, NCC हो, NSS हो, ये सब लोग मैदान में आए हैं। सबने तय कर लिया है कि अब हमारे गांव में महापुरुषों के statue और वो परिसर हम गंदा नहीं रहने देंगे। कुछ लोगों ने तो 26 जनवरी का भी इंतजार नहीं किया है और already काम शुरू कर दिया है। यही तो देश की ताकत होती है। लेकिन पहला एक समय था, हम सब देखते थे हां ये महापुरुष की प्रतिमा है, फिर बात भी करते देखो यार कितना गंदा है, कोई संभालता नहीं है। आज, आज हर कोई चर्चा करता है, यार ये हमारे गांव के अंदर ये छह महापुरुषों के पुतले हैं उसकी सफाई हम करेंगे। एक नया माहौल बना है। नेहरू युवा केंद्र के और NSS के नौजवानों ने इसका बीड़ा उठाया है। मुझे विश्‍वास है बहुत बड़ी सफलता मिलेगी।

इस बार आप पिछले करीब 20 साल से ये समागम करते आए हैं, मेरी आपसे आग्रह है, मेरा आपसे अनुरोध है, इस बार जाने से पहले आप 2019 का कोई संकल्‍प ले करके जा सकते हैं क्‍या और 2019 तक हम इतना करेंगे। मैं 2019 इसलिए कह रहा हूं कि 2019 महात्‍मा गांधी की 150वीं जयंती है। महात्‍मा गांधी को स्‍वच्‍छता बहुत पसंद थी। 2019 तक का हमारा कोई time table बना करके हम जा सकते हैं क्‍या। और हम हर महीने उसका लेखा-जोखा लें, हिसाबा-किताब करें, संकल्‍प तय करें, योजना बनाएं, रोडमैप बनाएं और आंखों को दिखने वाला परिवर्तन ला करके रहें और दूसरा सपना 2022 का हम लें।

एक 2019 का हमारा रोडमैप और दूसरा 2022 का रोडमैप हम लें। 2022 इसलिए कि भारत की आजादी के 75 साल हो रहे हैं। हिंदुस्‍तान की आजादी के 75 साल हम कैसे मनाएंगे। अभी से हम कैसी तैयारियां करेंगे। हम अपने आप को उसके लिए उसको कैसे तैयार करेंगे। हमारी अपनी संस्था हो, हमारा परिवार हो, हम व्‍यक्ति हो, हम खुद क्‍या कर सकते हैं। इस पर हम सोचते हैं। और इसलिए रायपुर से आप जब निकले तब 2019 और 2022 कोई न कोई लक्ष्‍य निर्धारित करके उसका रोडमैप तय करके निकलिए । उसके लिए कौन समय देगा, कितने घंटे देगा। यह संकल्‍प ले करके चलिए। उसी प्रकार से मैं विशेष रूप से नौजवानों का एक बात के लिए आभार व्‍यक्‍त करना चाहता हूं कि आज के इस युवा समारोह के लिए मैंने देश के नौजवानों को आग्रह किया था कि आप मुझे नरेंद्र मोदी एप आप मोबाइल पर उसको download कर सकते हैं। नरेंद्र मोदी एप पर अपने सुझाव भेजिए। मुझे इस बात का गर्व है कि देश के हर कौने से हजारों नौजवानों ने मुझे हजारो सुझाव भेजे। देश का नौजवान कितना जागरूक है और नरेंद्र मोदी एप मेरे लिए एक सरल माध्‍यम बन गया है कि मैं सीधे आपसे जुड़ जाता हूं। मैं उन सभी नौजवानों का अभिनंदन करना चाहता हूं, जिन्‍होंने समय निकाल करके, सोच करके देश के काम आने के लिए अपने विचारों से मुझे लाभान्वित कराया। हजारों नौजवानों ने मुझे सुझाव भेजे, मैं उन सबका आभारी हूं।

26 जनवरी मैंने देश के सामने, देश के नौजवानों के सामने एक विषय रखा है और आग्रह किया है कि हमारे यहां एक चर्चा होनी चाहिए। अधिकार और कर्तव्‍य। भारत के संविधान ने हमें दोनों जिम्‍मेदारियां दी हैं। लेकिन आजादी के बाद ज्‍यादातर हम लोगों की प्राथमिकता अधिकार पर रही है। कर्तव्‍य ज्‍यादातर व्‍यक्तिगत स्‍वभाव से जुड़ गया, समाज स्‍वभाव से छूट गया। कर्तव्‍य सामाजिक स्‍वभाव बनाना है। कुछ लोगों को कर्तव्‍य में रूचि हो, कर्तव्‍य करते रहे इससे देश नहीं चल सकता। सवा सौ करोड़ देशवासियों का कर्तव्‍य का भी स्‍वभाव बनना चाहिए। और अगर एक बार कर्तव्‍य की हवा बन जाती है तो अधिकारों की रक्षा अपने आप हो जाती है। मैं चाहूंगा कि 26 जनवरी को मैंने पिछली मन की बात में इस बार तो कहा, कईयों ने इस बात को आगे बढ़ाया है। आप भी इस बात को आगे बढ़ाएं ऐसी मैं अपेक्षा करता हूं। छत्‍तीसगढ़ का प्‍यार छत्‍तीसगढ़ की मेहमाननवाजी, आप सबको बहुत याद रहेगी। मेरा सौभाग्‍य रहा मुझे छत्‍तीसगढ़ में बहुत लम्‍बे अर्से तक रहने का अवसर मिला है, इसलिए मैं उनके प्‍यार को भली-भांति समझता हूं। उनके स्‍वागत करने की परंपरा को भली-भांति समझता हूं। लेकिन मैं इस बार इसका आनंद नहीं ले पा रहा हूं। क्‍योंकि कुछ जिम्‍मेदारियां यहां भी मेरे सिर पर रहती हैं। लेकिन मैं मन से आपके साथ हूं। इस समारोह की मैं सफलता के लिए शुभकामनाएं देता हूं और देख सकते हैं कि संकटों के बीच में भी कैसी जिंदगी गुजारी जा सकती है। छत्‍तीसगढ़ कुछ वर्षों से नक्‍सलवाद के कारण परेशान है। माओवाद के कारण परेशान है। और मैं नौजवानों को कहता हूं। हमारे हाथ में हुनर होना चाहिए, हत्‍या करने के लिए हमारा हाथ कभी काम नहीं आना चाहिए। यह हाथ हुनर से नए सपनों को संजोने के लिए काम आना चाहिए। यह हाथ किसी के सपनों को समाप्‍त करने के लिए हत्‍या का कारण नहीं बनना चाहिए। छत्‍तीसगढ़ के नौजवानों ने माओवाद की इस भयानकता के बीच भी छत्‍तीसगढ़ को भरपूर बढ़ाने का प्रसास किया है। छत्‍तसीगढ़ को नई ऊंचाईयों पर ले जाने की कोशिश की है। संकटों के बीच भी समाधान के रास्‍ते निकाले जा सकते हैं। संकटों के बीच में भी विकास की यात्रा की जा सकती है। संकटों के बीच भी संकल्‍पों को पूरा किया जा सकता है। यह छत्‍तीसगढ़ से हम अनुभव कर सकते हैं। आज उस धरती में हैं, रायपुर में हैं। आपको प्रेरणा मिलेगी। मेरी आप सबको बहुत-बहुत शुभकामनाएं। और हमारे खेल मंत्री श्रीमान सोनेवाल जी, वो आपके बीच में हैं। बड़े उत्‍साही हैं। जरूर उनका लाभ मिलेगा आपको। आप सबको बहुत-बहुत शुभकामनाएं, बहुत बहुत धन्‍यवाद।

ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀ ମୋଦୀଙ୍କ 'ମନ କି ବାତ' ପାଇଁ ଆପଣଙ୍କ ବିଚାର ଏବଂ ଅନ୍ତର୍ଦୃଷ୍ଟି ପଠାନ୍ତୁ !
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ଦିୱାଲୀ ଅବସରରେ ଜମ୍ମୁ-କଶ୍ମୀର ନୌଶେରାରେ ଭାରତୀୟ ସଶସ୍ତ୍ରବାହିନୀର ସୈନିକମାନଙ୍କ ସହିତ ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀଙ୍କ ମତବିନିମୟ

ଲୋକପ୍ରିୟ ଅଭିଭାଷଣ

ଦିୱାଲୀ ଅବସରରେ ଜମ୍ମୁ-କଶ୍ମୀର ନୌଶେରାରେ ଭାରତୀୟ ସଶସ୍ତ୍ରବାହିନୀର ସୈନିକମାନଙ୍କ ସହିତ ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀଙ୍କ ମତବିନିମୟ
Capital expenditure of States more than doubles to ₹1.71-lakh crore as of Q2

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ଉତରାଖଣ୍ଡର ଦେହରାଡୁନରେ ଏକାଧିକ ପ୍ରକଳ୍ପର ଉଦଘାଟନ ଓ ଶିଳାନ୍ୟାସ ଅବସରରେ ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀଙ୍କ ଉଦବୋଧନ
December 04, 2021
ସେୟାର
 
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“ଆଜି ଭାରତ ଆଧୁନିକ ଭିତ୍ତିଭୂମି ପାଇଁ ଏକ ଲକ୍ଷକୋଟି ଟଙ୍କାରୁ ଅଧିକ ବିନିଯୋଗ କରିବା ପାଇଁ ଆଗେଇ ଚାଲିଛି । ଭାରତର ନୀତି ହେଉଛି “ଗତିଶକ୍ତି” ଦୁଇରୁ ତିନିଗୁଣ ଅଧିକ ଗତିରେ କାର୍ଯ୍ୟ ।
“ଆମର ପବର୍ତଗୁଡିକ କେବଳ ଆମ ବିଶ୍ୱାସ ଓ ସଂସ୍କୃତିର ଦୁର୍ଗ ନୁହେଁ ବରଂ ଆମ ଦେଶ ସୁରକ୍ଷାର ଦୁର୍ଗ ସଦୃଶ । ପାର୍ବତ୍ୟାଞ୍ଚଳରେ ବସବାସ କରୁଥିବା ଆମ ଦେଶବାସୀଙ୍କ ଜୀବନଧାରଣ ସୁଗମ କରିବ ହେଉଛି ସର୍ବୋଚ୍ଚ ପ୍ରାଥମିକତା”
“ସରକାର ଆଜି ବିଶ୍ୱର କୌଣସି ଦେଶର ଚାପର ବଶବର୍ତ୍ତୀ ହେବ ନାହିଁ। ଆମେ ସବୁବେଳେ ଦେଶ ଆଗ ସବୁବେଳେ ଆଗ ମନ୍ତ୍ରରେ ଦୀକ୍ଷିତ”
“ଆମେ ଯେତେବେଳେ କୌଣସି ଯୋଜନା ଆଣୁ, ଆମେ ତାହା ସମସ୍ତଙ୍କ ପାଇଁ ଆଣୁଛୁ ବିନା ବାଛବିଚାରରେ । ଆମେ ଭୋଟ ବ୍ୟାଙ୍କ ରାଜନୀତି ନ କରି ଜନସେବାକୁ ପ୍ରାଧାନ୍ୟ ଦେଉଛୁ । ଦେଶକୁ ମଜବୁତ କରିବା ଆମର ଉଦ୍ଦେଶ୍ୟ ।

ଉତରାଖଣ୍ଡ କା, ସଭି ଦାଣା ସୟାଣୌ, ଦିଦି- ଭୂଲିୟୈାଁ, ବଚ୍ଚି-ବୋଡିୟୋଁ ଔର ଭୈ-ବୈଣୋ। ଆପ ସବୁଥେଁ, ମ୍ୟାରୁ ପ୍ରଣାମ! ମିଥୈ ଭରୋସା ଛ, କି ଆପ ଲୋଗ କୁଶଲ ମଙ୍ଗଲ ହୋଲା! ମି ଆପ ଲୋଗୋଁ ଥେ ସେବା ଲଗୌଣ ଛୁ, ଆପ ସ୍ୱୀକାର କରା!

ଉତରାଖଣ୍ଡର ରାଜ୍ୟପାଳ ଶ୍ରୀମାନ ଗୁରମିତ ସିଂହ ମହୋଦୟ, ଏଠାକାର ଲୋକପ୍ରିୟ, ଉର୍ଜ୍ଜାବାନ ମୁଖ୍ୟମନ୍ତ୍ରୀ ଶ୍ରୀମାନ ପୁଷ୍କର ସିଂହ ଧାମୀ ମହାଶୟ, କେନ୍ଦ୍ର ମନ୍ତ୍ରିପରିଷଦରେ ମୋର ସହଯୋଗୀ ପ୍ରହ୍ଲାଦ ଯୋଶୀ ମହାଶୟ, ଅଜୟ ଭଟ୍ଟ ମହାଶୟ, ଉତରାଖଣ୍ଡର ମନ୍ତ୍ରୀ ଶତପାଲ ମହାଶୟ, ହରକ ସିଂହ ରାୱତ ମହାଶୟ, ରାଜ୍ୟ ମନ୍ତ୍ରିମଣ୍ଡଳର ଅନ୍ୟ ସଦସ୍ୟଗଣ, ସଂସଦରେ ମୋର ସହଯୋଗୀ ନିଶଙ୍କ ମହାଶୟ, ତୀରଥ ସିଂହ ରାୱତ ମହାଶୟ, ଅନ୍ୟ ସାଂସଦଗଣ, ଭାଇ ତ୍ରିବେନ୍ଦ୍ର ସିଂହ ରାୱତ ମହାଶୟ, ବିଜୟ ବହୁଗୁଣା ମହାଶୟ, ରାଜ୍ୟ ବିଧାନସଭାର ଅନ୍ୟ ସଦସ୍ୟଗଣ, ମେୟର ଶ୍ରୀ, ଜିଲା ପଂଚାୟତର ସଦସ୍ୟଗଣ, ଭାଇ ମଦନ କୌଶିକ ମହାଶୟ ଏବଂ ମୋର ପ୍ରିୟ ଭାଇ ଓ ଭଉଣୀମାନେ,

ଆପଣ ସମସ୍ତେ ଏତେ ବିପୁଳ ସଂଖ୍ୟାରେ ଆମକୁ ଆଶୀର୍ବାଦ ଦେବାପାଇଁ ଆସିଛନ୍ତି। ଆପଣଙ୍କ ସ୍ନେହ, ଆପଣଙ୍କ ଆଶୀର୍ବାଦର ପ୍ରସାଦ ପାଇ ଆମେ ସମସ୍ତେ ଅଭିଭୂତ ହୋଇ ଯାଇଛୁ। ଉତରାଖଣ୍ଡ, ସମଗ୍ର ଦେଶର କେବଳ ଆସ୍ଥା ହିଁ ନୁହେଁ ବରଂ ହେଉଛି କର୍ମ ଏବଂ କର୍ମଠତାର ଭୂମି। ଏଥିପାଇଁ ଏହି କ୍ଷେତ୍ରର ବିକାଶ ଏହାକୁ ଭବ୍ୟ ସ୍ୱରୂପ ଦେବା ଡବଲ ଇଞ୍ଜିନ ସରକାରର ହେଉଛି ସର୍ବୋଚ୍ଚ ପ୍ରାଥମିକତା । ଏହି ଭାବନାକୁ ନେଇ ବିଗତ ପାଂଚ ବର୍ଷରେ ଉତରାଖଣ୍ଡର ବିକାଶ ପାଇଁ କେନ୍ଦ୍ର ସରକାର 1ଲକ୍ଷ କୋଟି ଟଙ୍କାରୁ ଅଧିକର ପ୍ରକଳ୍ପକୁ ମଂଜୁରୀ ଦେଇଛନ୍ତି । ଏଠାକାର ସରକାର ଏହାକୁ ଦ୍ରୁତ ଗତିରେ କାର୍ଯ୍ୟରେ ପରିଣତ କରିଚାଲିଛନ୍ତି। ଏହାକୁ ଆଗକୁ ନେଇ, ଆଜି 18 ହଜାର କୋଟି ଟଙ୍କାରୁ ଅଧିକ ପ୍ରକଳ୍ପର ଲୋକାର୍ପଣ ଏବଂ ଶିଳାନ୍ୟାସ କରାଯାଇଛି । ଏଥିରେ ଯୋଗାଯୋଗ ହେଉ, ସ୍ୱାସ୍ଥ୍ୟ ହେଉ, ସଂସ୍କୃତି ହେଉ, ତୀର୍ଥାଟନ ହେଉ, ବିଜୁଳି ହେଉ, ପିଲାମାନଙ୍କ ପାଇଁ ବିଶେଷ କରି ଶିଶୁ ଅନୁକୂଳ ସହର ପ୍ରକଳ୍ପ ହେଉ, ପାଖାପାଖି ପ୍ରତ୍ୟେକ କ୍ଷେତ୍ର ସହିତ ଜଡ଼ିତ ପ୍ରକଳ୍ପ ସାମିଲ ହୋଇଛି । ବିଗତ ବର୍ଷରେ କଠୋର ପରିଶ୍ରମ ପରେ ତାହାର ଜରୁରୀ ପ୍ରକ୍ରିୟାଗୁଡ଼ିକ ସହିତ ଅତିକ୍ରମ କରିବା ପରେ, ଶେଷରେ ଆଜି ଏହି ଦିନ ଆସିଛି। ଏହି ପ୍ରକଳ୍ପଗୁଡ଼ିକ ବିଷୟରେ, ମୁଁ କେଦାରପୁରୀର ପବିତ୍ର ମାଟିରୁ କହିଥିଲି, ଆଜି ମୁଁ ଦେହରାଡୁନରୁ ଦୋହରାଉଛି। ଏହି ପ୍ରକଳ୍ପଗୁଡ଼ିକ ଏହି ଦଶକକୁ ଉତରାଖଣ୍ଡର ଦଶକ କରିବାରେ ପ୍ରମୁଖ ଭୂମିକା ତୁଲାଇବ। ଏହିସବୁ ପ୍ରକଳ୍ପଗୁଡ଼ିକ ପାଇଁ ଉତରାଖଣ୍ଡର ଲୋକଙ୍କୁ ବହୁତ-ବହୁତ ଶୁଭେଚ୍ଛା ଜଣାଉଛି, ବହୁତ-ବହୁତ ଅଭିନନ୍ଦନ ଜଣାଉଛି। ଯେଉଁ ଲୋକମାନେ ପଚାରୁଛନ୍ତି ଯେ ଡବଲ ଇଞ୍ଜିନ ସରକାରଙ୍କ ଦ୍ୱାରା ଲାଭ କ’ଣ, ସେମାନେ ଆଜି ତାହା ଦେଖିପାରୁଥିବେ ଯେ ଡବଲ ଇଞ୍ଜିନ ସରକାର କିଭଳି ଉତରାଖଣ୍ଡରେ ବିକାଶର ଗଙ୍ଗାକୁ ପ୍ରବାହିତ କରୁଛନ୍ତି।

ଭାଇ  ଭଉଣୀମାନେ,

ଏହି ଶତାବ୍ଦୀର ପ୍ରାରମ୍ଭରେ, ଅଟଳ ବିହାରୀ ବାଜପେୟୀ ମହାଶୟ ଭାରତରେ ଯୋଗାଯୋଗକୁ ବୃଦ୍ଧି କରିବା ପାଇଁ ଅଭିଯାନ ଆରମ୍ଭ କରିଥିଲେ। କିନ୍ତୁ ତାଙ୍କ ପରେ 10 ବର୍ଷ ଦେଶରେ ଏଭଳି ସରକାର ଥିଲା, ଯେଉଁମାନେ ଦେଶର, ଉତରାଖଣ୍ଡର, ବହୁମୂଲ୍ୟ ସମୟ ବ୍ୟର୍ଥ କରିଦେଲେ । 10 ବର୍ଷ ପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ ଦେଶରେ ଭିତିଭୂମି ନାମରେ ଘୋଟାଲା ହେଲା, ଭ୍ରଷ୍ଟାଚାର ହେଲା। ଏହାଦ୍ୱାରା ଦେଶର ଯେଉଁ କ୍ଷତି ହେଲା, ତାହାର ଭରଣା ପାଇଁ ଆମେ ଦୁଇ ଗୁଣ ଗତିରେ ପରିଶ୍ରମ କଲୁ, ଆଉ ଆଜି ମଧ୍ୟ କରୁଛୁ। ଆଜି ଭାରତ, ଆଧୁନିକ ଭିତିଭୂମି ଉପରେ 100 ଲକ୍ଷ କୋଟି ଟଙ୍କାରୁ ମଧ୍ୟ ଅଧିକ ନିବେଶ କରିବା ଲକ୍ଷ୍ୟରେ ଆଗକୁ ଅଗ୍ରସର ହେଉଛି, ଆଜି ଭାରତର ନୀତି, ହେଉଛି ଗତିଶକ୍ତିର, ଦୁଇ ଗୁଣ- ତିନିଗୁଣ ଗତିରେ କାର୍ଯ୍ୟ କରିବାର ଅଛି। ବର୍ଷ- ବର୍ଷ ଧରି ଅଟକି ରହିଥିବା ପ୍ରକଳ୍ପଗୁଡ଼ିକୁ, ବିନା ପ୍ରସ୍ତୁତିରେ ଫିତା କାଟି ଦେବାଭଳି କାର୍ଯ୍ୟ ପଦ୍ଧତିକୁ ପଛରେ ପକାଇ ଆଜି ଭାରତ ନବନିର୍ମାଣରେ ଲାଗି ପଡ଼ିଛି। ଏକବିଂଶ ଶତାବ୍ଦୀର ଏହି ସମୟରେ, ଭାରତରେ ଯୋଗାଯୋଗର ଏକ ଏଭଳି ମହାଯଞ୍ଜ ଚାଲୁ ରହିଛି, ଯାହା ଭବିଷ୍ୟତ ଭାରତକୁ ବିକଶିତ ଦେଶର ଶୃଙ୍ଖଳାରେ ଆଣିବାରେ ବହୁତ ବଡ଼ ଭୂମିକା ତୁଲାଇବ। ଏହି ମହାଯଞ୍ଜର ହିଁ ଏକ ଯଞ୍ଜ ଆଜି ଏଠାରେ ଦେବଭୂମିରେ ହେଉଛି।

ଭାଇ  ଭଉଣୀମାନେ,

ଏହି ଦେବଭୂମିକୁ ଶ୍ରଦ୍ଧାଳୁମାନେ ମଧ୍ୟ ଆସୁଛନ୍ତି, ଉଦ୍ୟମୀମାନେ ମଧ୍ୟ ଆସୁଛନ୍ତି, ପ୍ରକୃତିପ୍ରେମୀ ପର୍ଯ୍ୟଟକ ମଧ୍ୟ ଆସୁଛନ୍ତି। ଏହି ଭୂମିର ଯେଉଁ ସାମର୍ଥ୍ୟ ରହିଛି, ତାହାକୁ ବୃଦ୍ଧି କରିବା ପାଇଁ ଏଠାରେ ଆଧୁନିକ ଭିତିଭୂମି ଉପରେ ଅଦ୍ଭୁତପୂର୍ବ କାର୍ଯ୍ୟ କରାଯାଉଛି। ଚାରିଧାମ ସବୁଦିନିଆ ସଡ଼କ ପ୍ରକଳ୍ପ ଅଧୀନରେ ଆଜି ଦେବପ୍ରୟାଗରୁ ଶ୍ରୀକୋଟ ଏବଂ ବ୍ରହ୍ମପୁରୀରୁ କୌଡିୟାଲା, ସେଠାକାର ପ୍ରକଳ୍ପକୁ ଲୋକାର୍ପଣ କରାଯାଇଛି। ଭଗବାନ ବଦ୍ରିନାଥଙ୍କ ପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ ପହଂଚିବାରେ ଲାମ-ବଗଡ଼ ଭୂସ୍ଖଳନ ଯୋଗୁଁ ଯେଉଁ ପ୍ରତିବନ୍ଧକ ସୃଷ୍ଟି ହେଉଥିଲା, ତାହା ମଧ୍ୟ ଏବେ ଦୂର ହୋଇ ଯାଉଛି। ଏହି ଭୂସ୍ଖଳନ ସାରା ଦେଶରେ କେତେ ତୀର୍ଥଯାତ୍ରୀଙ୍କୁ ବଦ୍ରିନାଥ ଯାତ୍ରା କରିବାରେ ପ୍ରତିବନ୍ଧକ ସୃଷ୍ଟି କରିଥିଲା ଅବାପୁଣି ଘଂଟା- ଘଂଟା ଧରି ପ୍ରତୀକ୍ଷା କରାଉଥିଲା ଆଉ କିଛି ଲୋକ ଥକି ଯାଇ ଫେରି ଯାଉଥିଲେ। ଏବେ ବଦ୍ରିନାଥ ଜୀଙ୍କ ଯାତ୍ରା, ପୂର୍ବ ଅପେକ୍ଷା ଅଧିକ ସୁରକ୍ଷିତ ଏବଂ ସୁଖଦ ହୋଇଯିବ । ଆଜି ବଦ୍ରିନାଥ ଜୀ, ଗଙ୍ଗୋତ୍ରୀ ଏବଂ ଯମୁନୋତ୍ରୀ ଧାମରେ ଅନେକ ସୁବିଧା ସହିତ ଜଡ଼ିତ ନୂତନ ପ୍ରକଳ୍ପର କାର୍ଯ୍ୟ ଆରମ୍ଭ ହୋଇଛି ।

ଭାଇ  ଭଉଣୀମାନେ,

ଉନ୍ନତ ଯୋଗାଯୋଗ ଏବଂ ସୁବିଧାଗୁଡ଼ିକ ଦ୍ୱାରା ପର୍ଯ୍ୟଟନ ଏବଂ ତୀର୍ଥାଟନକୁ କେତେ ଲାଭ ମିଳିଥାଏ, ବିଗତ ବର୍ଷରେ କେଦାରନାଥ ଧାମରେ ଆମେ ଅନୁଭବ କରିଛୁ। କେଦାରନାଥ ଦୁର୍ବିପାକ ପୂର୍ବରୁ 2012 ରେ 5 ଲକ୍ଷ 70 ହଜାର ଲୋକ ଦର୍ଶନ କରିଥିଲେ ଆଉ ତାହା ସେହି ସମୟର ଏକ ରେକର୍ଡ ଥିଲା, 2012 ରେ ଯାତ୍ରୀମାନଙ୍କର ସଂଖ୍ୟାର ଏକ ବହୁତ ବଡ଼ ରେକର୍ଡ ଥିଲା । ଯେତେବେଳେ କରୋନା ସମୟ ଆରମ୍ଭ ହେବା ପୂର୍ବରୁ, 2019 ରେ 10 ଲକ୍ଷରୁ ଅଧିକ ଲୋକ କେଦାରନାଥଙ୍କ ଦର୍ଶନ କରିବା ପାଇଁ ପହଂଚିଥିଲେ। ଅର୍ଥାତ କେଦାରଧାମର ପୁନଃନିର୍ମାଣ ଦ୍ୱାରା ନା କେବଳ ଶ୍ରଦ୍ଧାଳୁମାନଙ୍କର ସଂଖ୍ୟା ବୃଦ୍ଧି ପାଇଛି, ବରଂ ସେଠାକାର ଲୋକମାନଙ୍କର ରୋଜଗାର- ସ୍ୱରୋଜଗାରକୁ ମଧ୍ୟ ଅନେକ ସୁଯୋଗ ଉପଲବ୍ଧ କରାଇଛି।

 

ସାଥୀଗଣ,

ପୂର୍ବରୁ ଯେତେବେଳେ ମଧ୍ୟ ମୁଁ ଉତରାଖଣ୍ଡ ଆସୁଥିଲି, ଅବା ଉତରାଖଣ୍ଡ ଯିବା- ଆସିବା କରୁଥିବା ଲୋକଙ୍କୁ ସାକ୍ଷାତ କରୁଥିଲି, ସେମାନେ କହୁଥିଲେ- ମୋଦୀ ମହାଶୟ, ଦିଲ୍ଲୀରୁ ଦେହରାଦୁନର ଯାତ୍ରା ଗଣେଶପୁର ପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ ବହୁତ ସହଜରେ ହୋଇ ଯାଉଛି, କିନ୍ତୁ ଗଣେଶପୁରରୁ ଦେହରାଡୁନ ପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ ବହୁତ କଷ୍ଟକର ହେଉଛି, ଆଜି ମୁଁ ବହୁତ ଖୁସି ଯେ ଦିଲ୍ଲୀ- ଦେହରାଡୁନ ଅର୍ଥନୈତିକ କରିଡର ଶିଳାନ୍ୟାସ ହୋଇ ସାରିଛି । ଯେତେବେଳେ ଏହା ନିର୍ମାଣ ହୋଇଯିବ, ସେତେବେଳେ ଦିଲ୍ଲୀରୁ ଦେହରାଡୁନ ଯିବା- ଆସିବା କରିବା ପାଇଁ ଯେତେ ସମୟ ଲାଗୁଥିଲା, ତାହା ପ୍ରାୟ ଅଧା ହୋଇଯିବ। ଏଥିରେ ନା କେବଳ ଦେହରାଡୁନ ଲୋକଙ୍କୁ ଲାଭ ମିଳିବ, ବରଂ ହରିଦ୍ୱାର, ମୁଜଫରନଗର, ଶାମଲୀ, ବାଗପତ ଏବଂ ମୀରଠ ଯାଉଥିବା ଲୋକମାନଙ୍କୁ ମଧ୍ୟ ସୁବିଧା ହେବ। ଏହି ଆର୍ôଥକ କରିଡର ଏବେ ଦିଲ୍ଲୀରୁ ହରିଦ୍ୱାର ଯାତାୟାତ ସମୟକୁ ମଧ୍ୟ ହ୍ରାସ କରିଦେବ। ହରିଦ୍ୱାର ରିଂ-ରୋଡ଼ ପ୍ରକଳ୍ପ ଦ୍ୱାରା ହରିଦ୍ୱାର ସହରକୁ ଟ୍ରାଫିକ ଜାମ୍ ଭଳି ବର୍ଷ- ବର୍ଷ ଧରି ଲାଗି ରହିଥିବା ପୁରୁଣା ସମସ୍ୟାରୁ ମଧ୍ୟ ମୁକ୍ତି ମିଳିବ। ଏହାଦ୍ୱାରା କୁମାଉଁ କ୍ଷେତ୍ର ସହିତ ମଧ୍ୟ ସମ୍ପର୍କ ସହଜ ହେବ। ଏହା ବ୍ୟତୀତ ଋଷିକେଶର ପରିଚୟ, ଆମର ଲକ୍ଷ୍ମଣ ଝୁଲା ସେତୁ ନିକଟରେ ଆଉ ଏକ ନୂତନ ସେତୁର ମଧ୍ୟ ଆଜି ଶିଳାନ୍ୟାସ ହୋଇଛି।

ଭାଇ  ଭଉଣୀମାନେ,

ଦିଲ୍ଲୀ- ଦେହରାଡୁନ ଏକ୍ସପ୍ରେସ-ୱେ ପର୍ଯ୍ୟାବରଣ ସୁରକ୍ଷା ସହିତ ଆମ ବିକାଶ ମଡେଲର ମଧ୍ୟ ଏକ ପ୍ରମାଣ ହେବ। ଏଥିରେ ଗୋଟିଏ ପଟେ ଉଦ୍ୟୋଗ କରିଡର ହେବ, ଅପରପକ୍ଷରେ ଏହା ଏସିଆର ସର୍ବ ବୃହତ ତଥା ସୁଉଚ୍ଚ ବନ୍ୟଜନ୍ତୁ କରିଡର ମଧ୍ୟ ହେବ। ଏହି କରିଡର ଯାତାୟାତକୁ ମଧ୍ୟ ସରଳ କରିବ, ବନ୍ୟଜନ୍ତୁଙ୍କୁ ମଧ୍ୟ ସୁରକ୍ଷିତ ଭାବେ ଯାତାୟତ କରିବାରେ ସହାୟତା କରିବ।

ସାଥୀଗଣ,

ଉତରାଖଣ୍ଡରେ ଔଷଧୀୟ ଗୁଣଯୁକ୍ତ ଯେଉଁ ଯେଉଁ ସବୁ ଜଡି- ବୁଟି ଅଛି, ଯେଉଁ ପ୍ରାକୃତିକ ଉତ୍ପାଦ ଅଛି, ତାହାର ଚାହିଦା ସାରା ବିଶ୍ୱରେ ରହିଛି। ଏବେ ଉତରାଖଣ୍ଡର ଏହି ସାମର୍ଥ୍ୟର ମଧ୍ୟ ସମ୍ପୂର୍ଣ୍ଣ ଉପଯୋଗ ହୋଇ ପାରି ନାହିଁ। ଏବେ ଯେଉଁ ଆଧୁନିକ ଅତର ଏବଂ ସୁଗନ୍ଧ ପ୍ରୟୋଗଶାଳା ପ୍ରତିଷ୍ଠା ହୋଇଛି, ତାହା ଉତରାଖଣ୍ଡର ସାମର୍ଥ୍ୟକୁ ଆହୁରି ବୃଦ୍ଧ କରିବ।

ଭାଇ  ଭଉଣୀମାନେ,

ଆମର ପାହାଡ, ଆମର ସଂସ୍କୃତି- ଆମର ଆସ୍ଥାର ଗଡ଼ ହୋଇ ରହିଛି, ଏହା ମଧ୍ୟ ହେଉଛି ଆମ ଦେଶର ସୁରକ୍ଷାର ଦୁର୍ଗ । ପହାଡରେ ରହୁଥିବା ଲୋକଙ୍କର ଜୀବନ ସୁଗମ କରିବା ଦେଶର ସର୍ବୋଚ୍ଚ ପ୍ରାଥମିକତା ମଧ୍ୟରୁ ହେଉଛି ଗୋଟିଏ। କିନ୍ତୁ ଦୁର୍ଭାଗ୍ୟର କଥା ଯେ ଦଶକ- ଦଶକ ଧରି ଯେଉଁମାନେ ସରକାରରେ ରହିଲେ, ସେମାନଙ୍କର ନୀତି ଏବଂ ରଣନୀତିରେ ଦୂର- ଦୂରାନ୍ତ ପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ ଏହି ଚିନ୍ତାଧାରା କେଉଁଠି ନ ଥିଲା। ସେମାନଙ୍କ ପାଇଁ ଉତରାଖଣ୍ଡ ହେଉ ଅବା ହିନ୍ଦୁସ୍ତାନର ଅନ୍ୟାନ୍ୟ ଅଂଚଳ, ସେମାନଙ୍କର ଏକମାତ୍ର ଲକ୍ଷ୍ୟ ରହିଥିଲା, ନିଜର କୋଷ(ଅର୍ଥ) ବୃଦ୍ଧି କରିବା, ନିଜ ଘରକୁ ବୋହି ନେବା, ନିଜର ହିଁ ଧ୍ୟାନ ରଖିବା।

ଭାଇ  ଭଉଣୀମାନେ,

ଆମ ପାଇଁ ଉତରାଖଣ୍ଡ ହେଉଛି, ତପ ଏବଂ ତପସ୍ୟାର ମାର୍ଗ। ବର୍ଷ 2007 ରୁ 14 ମଧ୍ୟରେ ଯେଉଁ କେନ୍ଦ୍ର ସରକାର ଥିଲେ, ସେମାନେ 7 ବର୍ଷରେ ଉତରାଖଣ୍ଡ ରେ କେବଳ, ଆମ ପୂର୍ବରୁ ଯେଉଁ ସରକାର ଥିଲେ ସେମାନେ 7 ବର୍ଷରେ କେଉଁ କାର୍ଯ୍ୟ କଲେ? ପୂର୍ବ ସରକାର 7 ବର୍ଷରେ ଉତରାଖଣ୍ଡରେ କେବଳ 288, 300 କିଲୋମିଟର ମଧ୍ୟ ନୁହେଁ, କେବଳ 288 କିଲୋମିଟର ଜାତୀୟ ରାଜପଥ ନିର୍ମାଣ କରିଥିଲେ । ଯେତେବେଳେ ଆମ ସରକାର ନିଜର 7 ବର୍ଷରେ ଉତରାଖଣ୍ଡରେ 2 ହଜାର କିଲୋମିଟରରୁ ଅଧିକ ଦୀର୍ଘ ଜାତୀୟ ରାଜପଥର ନିର୍ମାଣ କରିଛନ୍ତି । ଆଜି ଆପଣମାନେ କୁହନ୍ତୁ ଭାଇ ଓ ଭଉଣୀମାନେ, ଏହାକୁ ଆପଣମାନେ କାର୍ଯ୍ୟ ବୋଲି ଭାବୁଛନ୍ତି ନା ଭାବୁ ନାହାଁନ୍ତି? କ’ଣ ଏହାଦ୍ୱାରା ଲୋକମାନଙ୍କର ଭଲ ହୋଇଛି ନା ନାହିଁ? ଏହାଦ୍ୱାରା ଉତରାଖଣ୍ଡକୁ ଲାଭ ମିଳିବ ନା ମିଳିବ ନାହିଁ? ଆପଣମାନଙ୍କର ଭବିଷ୍ୟତର ପିଢ଼ୀର ଲାଭ ହେବ ନା ହେବ ନାହିଁ? ଉତରାଖଣ୍ଡର ଯୁବକମାନଙ୍କର ଭାଗ୍ୟ ଖୋଲିବ ନା ଖୋଲିବ ନାହିଁ? କେବଳ ଏତିକି ନୁହେଁ, ପୂର୍ବ ସରକାର ଉତରାଖଣ୍ଡରେ ଜାତୀୟ ରାଜପଥ ଉପରେ 7 ବର୍ଷରେ ପାଖାପାଖି 600 କୋଟି ଟଙ୍କା ଖର୍ଚ୍ଚ କରିଥିଲେ। ଏବେ ଆପଣମାନେ ଟିକେ ଶୁଣି ନିଅନ୍ତୁ। ଯେତେବେଳେ କି ଆମ ସରକାର ଏହି ସାଢ଼େ 7 ବର୍ଷରେ 12 ହଜାର କୋଟି ଟଙ୍କାରୁ ଅଧିକ ଖର୍ଚ୍ଚ କରି ସାରିଛି, କେଉଁଠି 600 କୋଟି ଆଉ କେଉଁଠି 12 ହଜାର କୋଟି ଟଙ୍କା । ଆପଣମାନେ ମୋତେ କୁହନ୍ତୁ, ଆମ ପାଇଁ ଉତରାଖଣ୍ଡର ପ୍ରାଥମିକତା ଅଛି ନା ନାହିଁ? ଆପଣମାନଙ୍କୁ ବିଶ୍ୱାସ ହେଉଛି ନା ହେଉ ନାହିଁ? ଆମେ କରି ଦେଖାଇଛୁ ନା ଦେଖାଇ ନାହୁଁ? ଆମେ ମନ- ପ୍ରାଣ ଦେଇ ଉତରାଖଣ୍ଡ ପାଇଁ କାମ କରିଛୁ ନା କରି ନାହୁଁ?

ଆଉ ଭାଇ  ଭଉଣୀମାନେ,

ଏହା କେବଳ ଏକ ପରିସଂଖ୍ୟାନ ନୁହେଁ । ଯେତେବେଳେ ଭିତିଭୂମି ପାଇଁ ଏତେ ବଡ଼ ପ୍ରକଳ୍ପ ଉପରେ କାର୍ଯ୍ୟ ହୋଇଥାଏ, ସେତେବେଳେ କେତେଗୁଡ଼ିଏ ଜିନିଷର ଆବଶ୍ୟକତା ପଡ଼ିଥାଏ। ସିମେଂଟ ଆବଶ୍ୟକ, ଲୁହା ଆବଶ୍ୟକ, କାଠ ଦରକାର, ଇଟା ଦରକାର, ପଥର ଦରକାର, କାର୍ଯ୍ୟ କରିବା ପାଇଁ ଲୋକମାନଙ୍କର ଆବଶ୍ୟକତା ପଡ଼ିଥାଏ, ଉଦ୍ୟମୀ ଲୋକ ଆବଶ୍ୟକ, ସ୍ଥାନୀୟ ଯୁବକମାନଙ୍କୁ ଅନେକ ପ୍ରକାରର ଲାଭର ସୁଯୋଗ ସୃଷ୍ଟି ହୋଇଥାଏ। ଏହି କାର୍ଯ୍ୟରେ ଯେଉଁ ଶ୍ରମିକ ଲାଗି ଥାଆନ୍ତି, ଇଞ୍ଜିନିୟର ଲାଗି ଥାଆନ୍ତି, ପରିଚାଳନାର ଆବଶ୍ୟକତା ପଡ଼ିଥାଏ, ତାହା ମଧ୍ୟ ଅଧିକାଂଶ ଭାବେ ସ୍ଥାନୀୟ ସ୍ତରରରୁ ହିଁ ଯୋଗାଡ଼ ହୋଇଥାଏ। ଏଥିପାଇଁ ଭିତିଭୂମିର ଏହି ପ୍ରକଳ୍ପ, ନିଜ ସହିତ ଉତରାଖଣ୍ଡରେ ରୋଜଗାରର ଏକ ନୂଆ ଇକୋ- ସିଷ୍ଟମ ସୃଷ୍ଟି କରୁଛି, ହଜାର-ହଜାର ଯୁବକମାନଙ୍କୁ ରୋଜଗାର ଯୋଗାଉଛି। ଆଜି ମୁଁ ଗର୍ବର ସହିତ କହି ପାରୁଛି ପାଂଚ ବର୍ଷ ପୂର୍ବେ ମୁଁ କହିଥିଲି, ଯାହା କହିଥିଲି, ତାହାକୁ ଦ୍ୱିତୀୟ ଥର ପାଇଁ ମନେ ପକାଇବାର ଶକ୍ତି ରାଜନେତାମାନଙ୍କ ମଧ୍ୟରେ ଟିକେ କମ୍ ରହିଥାଏ, କିନ୍ତୁ ମୋ ପାଖରେ ଅଛି। ମନେ ପକାଇ ନିଅନ୍ତୁ, ମୁଁ କ’ଣ କହିଥିଲି ଆଉ ଆଜି ମୁଁ ଗର୍ବର ସହିତ କହୁଛି ଉତରାଖଣ୍ଡର ଜଳ ଏବଂ ଯୌବନ ଉତରାଖଣ୍ଡର କାର୍ଯ୍ୟରେ ହିଁ ଆସୁଛି!

ସାଥୀଗଣ,

ସୀମାବର୍ତୀ ପାହାଡ଼ ଅଂଚଳରେ ଭିତିଭୂମି ଉପରେ ମଧ୍ୟ ପୂର୍ବ ସରକାର ସେତେ ଅଧିକ ଗମ୍ଭୀରତାର ସହିତ କାର୍ଯ୍ୟ କରି ନାହାଁନ୍ତି, ଯେତେ କରିବାର ଉଚିତ ଥିଲା। ସୀମା ପାଖରେ ସଡ଼କ ନିର୍ମାଣ ହେଉ, ସେତୁ ତିଆରି ହେଉ, ଏ ଦିଗରେ ସେମାନେ ଧ୍ୟାନ ଦେଲେ ନାହିଁ। ୱାନ ରାଙ୍କ ୱାନ ପେନସନ ହେଉ, ଆଧୁନିକ ଅସ୍ତ୍ର- ଶସ୍ତ୍ର ହେଉ, ଅବା ପୁଣି ଆତଙ୍କବାଦୀମାନଙ୍କୁ ଉଚିତ ଜବାବ ଦେବା ହେଉ, ଯେଭଳି ସେମାନେ ପ୍ରତ୍ୟେକ କ୍ଷେତ୍ରରେ ସେନା ବାହିନୀକୁ ନିରାଶ କରିବାର, ହତୋତ୍ସାହିତ କରିବାର ଧରି ନିଅନ୍ତୁ ଶପଥ ନେଇଥିଲେ। କିନ୍ତୁ ଆଜି ଯେଉଁ ସରକାର ଅଛନ୍ତି, ସେମାନେ ବିଶ୍ୱର କୌଣସି ଦେଶର ଚାପରେ ଦବି ଯାଉ ନାହାଁନ୍ତି । ଆମେ ହେଉଛୁ ରାଷ୍ଟ୍ର ପ୍ରଥମ, ସଦୈବ ପ୍ରଥମର ମନ୍ତ୍ରରେ ଚାଲୁଥିବା ଲୋକ। ଆମେ ସୀମାବର୍ତୀ ପାହାଡ଼ିଆ ଅଂଚଳରେ ଶହ- ଶହ କିଲୋମିଟର ନୂତନ ସଡ଼କ ନିର୍ମାଣ କରିଛୁ। ପାଣିପାଗ ଏବଂ କଠିନ ଭୌଗୋଳିକ ପରିସ୍ଥିତି ସତ୍ୱେ ଏହି କାର୍ଯ୍ୟ ଦ୍ରୁତ ଗତିରେ କରାଯାଉଛି। ଆଉ ଏହି କାର୍ଯ୍ୟ ହେଉଛି କେତେ ଗୁରୁତ୍ୱପୂର୍ଣ୍ଣ, ଏହା ଉତରାଖଣ୍ଡର ପ୍ରତ୍ୟେକ ପରିବାର, ସେନା ବାହିନୀକୁ ନିଜର ପିଲାମାନଙ୍କୁ ପଠାଉଥିବା ପରିବାର, ବହୁତ ଭଲ ଭାବେ ବୁଝି ପାରୁଛନ୍ତି।

ସାଥୀଗଣ,

ଗୋଟିଏ ସମୟ ଥିଲା, ପାହାଡ଼ ଉପରେ ରହୁଥିବା ଲୋକ, ବିକାଶର ମୁଖ୍ୟ ଧାରା ସହିତ ସାମିଲ ହେବାର କେବଳ ସ୍ୱପ୍ନ ହିଁ ଦେଖୁଥିଲେ। ପିଢ଼ୀ ପରେ ପିଢ଼ୀ ବିତି ଯାଉଥିଲା, ସେମାନେ ଏହା ସ୍ୱପ୍ନ ଦେଖୁଥିଲେ ଆମକୁ କେବେ ପର୍ଯ୍ୟାପ୍ତ ବିଜୁଳି ମିଳିବ, ଆମକୁ କେବେ ପକ୍କା ଘର ତିଆରି ହୋଇ ମିଳିବ? ଆମ ଗାଁ ପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ ସଡ଼କ ଆସିବ ନା ନାହିଁ? ଭଲ ମେଡିକାଲ ସୁବିଧା ମିଳିବ ଅବା ନାହିଁ? ଆଉ ପଳାୟନର ଧାରା ଶେଷରେ କେବେ ବନ୍ଦ ହେବ? କେଜାଣି କେତେଗୁଡ଼ିଏ ପ୍ରଶ୍ନ ସେଠାକାର ଲୋକମାନଙ୍କ ମନରେ ଥିଲା।

କିନ୍ତୁ ସାଥୀଗଣ,

ଯେତେବେଳେ କିଛି କରିବାର ଉତ୍ସାହ ରହିଥାଏ, ସେତେବେଳ ସ୍ୱରୂପ ମଧ୍ୟ ବଦଳି ଯାଇଥାଏ ଏବଂ କାର୍ଯ୍ୟ କରିବାର ଆଭିମୁଖ୍ୟ ମଧ୍ୟ ବଦଳି ଯାଇଥାଏ। ଆଉ ଆପଣମାନଙ୍କର ଏହି ସ୍ୱପ୍ନ ପୂରଣ କରିବା ପାଇଁ ଆମେ ଦିନ- ରାତି ପରିଶ୍ରମ କରୁଛୁ। ଆଜି ସରକାର ଏହି କଥାକୁ ଅପେକ୍ଷା କରୁ ନାହାନ୍ତି ନାଗରିକ ଆପଣଙ୍କ ପାଖକୁ ନିଜର ସମସ୍ୟା ନେଇକରି ଆସିବେ ସେତେବେଳେ ସରକାର କିଛି ଚିନ୍ତା କରିବେ ଆଉ ତା’ ଉପରେ ପଦକ୍ଷେପ ନେବେ। ଏବେ ଏଭଳି ସରକାର ଅଛନ୍ତି ଯେଉଁମାନେ ସିଧାସଳଖ ନାଗରିଙ୍କ ପାଖକୁ ଯାଉଛନ୍ତି। ଆପଣମାନେ ମନେ ପକାନ୍ତୁ, ଗୋଟିଏ ସମୟ ଥିଲା ଯେତେବେଳେ ଉତରାଖଣ୍ଡରେ ଶହେ ପଚିଶ ଲକ୍ଷ ଘରକୁ ପାଇପ୍ ଯୋଗେ ପାଣି ପହଂଚୁ ଥିଲା। ଆଜି ସାଢେ 7 ଲକ୍ଷରୁ ଅଧିକ ଘରେ ପାଇପ୍ ଯୋଗେ ପାଣି ପହଂଚୁଛି। ଏବେ ଘରେ ସିଧାସଳଖ ରୋଷେଇ ଘର ପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ ପାଇପ୍ ଯୋଗେ ପାଣି ଆସୁଛି, ସେତେବେଳେ ମାଆ –ଭଉଣୀମାନେ ମୋତେ ଆଶୀର୍ବାଦ ଦେବେ ନା ଦେବେ ନାହିଁ? ପାଇପ୍ ଯୋଗେ ପାଣି ଆସୁଛି ସେତେବେଳେ ମାଆ –ଭଉଣୀମାନଙ୍କର କଷ୍ଟ ଦୂର ହେଉଛି ନା ହେଉ ନାହିଁ? ସେମାନଙ୍କୁ ସୁବିଧା ମିଳୁଛି ନା ମିଳୁ ନାହିଁ? ଆଉ ଏହି କାର୍ଯ୍ୟ, ଜଳ ଜୀବନ ମିଶନ ଆରମ୍ଭ ହେବାର ଦୁଇ ବର୍ଷ ମଧ୍ୟରେ ଆମେ କରି ଦେଇଛୁ। ଏହାର ବହୁତ ବଡ଼ ଲାଭ ଉତରାଖଣ୍ଡର ମାଆ ମାନଙ୍କୁ ଭଉଣୀମାନଙ୍କୁ, ଏଠାକାର ମହିଳାମାନଙ୍କୁ ହୋଇଛି। ଉତରାଖଣ୍ଡର ମାଆ –ଭଉଣୀ –ଝିଅମାନେ ସଦା ସର୍ବଦା ଆମ ସମସ୍ତଙ୍କ ଉପରେ ଏତେ ସ୍ନେହ ଭାବ ଦେଖାଇଛନ୍ତି। ଆମେ ସମସ୍ତେ ଦିନ -ରାତି ପରିଶ୍ରମ କରି, ସଚ୍ଚୋଟତାର ସହ କାର୍ଯ୍ୟ କରି, ଆମର ଏହି ମାଆ –ଭଉଣୀଙ୍କ ଜୀବନକୁ ସହଜ କରି, ସେମାନଙ୍କର ଋଣ ପରିଶୋଧ କରିବାର ନିରନ୍ତର ପ୍ରୟାସ କରୁଛୁ।

ସାଥୀଗଣ,

ଡବଲ ଇଞ୍ଜିନର ସରକାର ଉତରାଖଣ୍ଡର ସ୍ୱାସ୍ଥ୍ୟ ଭିତିଭୂମି ଉପରେ ମଧ୍ୟ ଅଦ୍ଭୁତ ପୂର୍ବ କାର୍ଯ୍ୟ କରୁଛନ୍ତି। ଉତରାଖଣ୍ଡରେ 3ଟି ନୂତନ ମେଡିକାଲ କଲେଜକୁ ମଞ୍ଜୁରୀ ଦିଆ ଯାଇଛି। ଏତେ ଛୋଟ ରାଜ୍ୟରେ 3ଟି ମେଡିକାଲ କଲେଜ, ଆଜି ହରିଦ୍ୱାର ମେଡିକାଲ କଲେଜର ମଧ୍ୟ ଶିଳାନ୍ୟାସ କରାଯାଇଛି। ଋଷିକେଶ ଏମ୍ସ ସେବା ପ୍ରଦାନ କରୁଛି, କୁମାଉଁରେ ସାଟେଲାଇଟ କେନ୍ଦ୍ର ମଧ୍ୟ ଶୀଘ୍ର ସେବା ପ୍ରଦାନ କରିବା ଆରମ୍ଭ କରିବ। ଟିକାକରଣ କ୍ଷେତ୍ରରେ ମଧ୍ୟ ଉତରାଖଣ୍ଡ ଆଜି ଦେଶର ଅଗ୍ରଣୀ ରାଜ୍ୟ ମଧ୍ୟରେ ରହିଛି, ଆଉ ଏଥିପାଇଁ ମୁଁ ଧାମୀ ମହାଶୟଙ୍କୁ, ତାଙ୍କ ସାଥୀମାନଙ୍କୁ ସମଗ୍ର ଉତରାଖଣ୍ଡରୁ ସରକାରଙ୍କୁ ଶୁଭେଚ୍ଛା ଜଣାଉଛି। ଆଉ ଏହା ପଛରେ ମଧ୍ୟ ଉନ୍ନତ ମେଡିକାଲ ଭିତିଭୂମିର ବହୁତ ବଡ଼ ଭୂମିକା ରହିଛି। ଏହି କରୋନା ସମୟରେ ଉତରାଖଣ୍ଡରେ 50ରୁ ଅଧିକ ନୂତନ ଅମ୍ଳଜାନ ପ୍ଲାଂଟ ମଧ୍ୟ ପ୍ରତିଷ୍ଠା କରାଯାଇଛି।

ସାଥୀଗଣ,

ବହୁତ ଲୋକ ଚାହୁଁଛନ୍ତି, ଆପଣମାନଙ୍କ ମଧ୍ୟରୁ ସମସ୍ତଙ୍କ ମନରେ ଏହି ବିଚାର ବା ଚିନ୍ତାଧାରା ଆସୁଥିବ, ସମସ୍ତେ ଚାହୁଁଥିବେ, ତାଙ୍କର ସନ୍ତାନ ଡାକ୍ତର ହୁଅନ୍ତୁ, ତାଙ୍କର ସନ୍ତାନ ଇଞ୍ଜିନିୟର ହୁଅନ୍ତୁ, ତାଙ୍କର ପିଲା ପରିଚାଳନା(ମ୍ୟାନେଜମେଂଟ) କ୍ଷେତ୍ରକୁ ଆସନ୍ତୁ। କିନ୍ତୁ ଯଦି ନୂତନ ସଂସ୍ଥାନ ହିଁ ନିର୍ମାଣ ହୋଇ ନାହିଁ, ଆସନ ସଂଖ୍ୟା ହିଁ ବଢି ନାହିଁ, ସେତେବେଳେ ଆପଣମାନଙ୍କର ସ୍ୱପ୍ନ ପୂରଣ ହୋଇ ପାରିବ କି, ଆପଣଙ୍କର ପୁଅ ଡାକ୍ତର ହୋଇ ପାରିବ କି, ଆପଣଙ୍କର ଝିଅ ଡାକ୍ତର ହୋଇ ପାରିବ କି? ଆଜି ଦେଶରେ ପ୍ରତିଷ୍ଠା ହେଉଥିବା ନୂତନ ମେଡିକାଲ, ନୂତନ ଆଇଆଇଟି, ନୂତନ ଆଇଆଇଏମ, ବିଦ୍ୟାର୍ଥୀମାନଙ୍କ ପାଇଁ ବୃତିଗତ ପାଠ୍ୟକ୍ରମର ଆସନ ସଂଖ୍ୟା ବୃଦ୍ଧି, ଦେଶର ବର୍ତମାନ ଏବଂ ଭବିଷ୍ୟତ ପିଢୀଙ୍କ ଭବିଷ୍ୟତକୁ ସୁଦୃଢ କରିବାର କାର୍ଯ୍ୟ କରୁଛି। ଆମେ ସାଧାରଣ ମଣିଷର ସାମର୍ଥ୍ୟକୁ ବୃଦ୍ଧି କରି, ତାକୁ ସଶକ୍ତ କରି, ତାହାର କ୍ଷମତା ବଢାଇ, ତାକୁ ସମ୍ମାନର ସହିତ ବଂଚିବାର ନୂତନ ସୁଯୋଗ ଦେଉଛୁ।

ସାଥୀଗଣ,

ସମୟ ସହିତ ଆମ ଦେଶର ରାଜନୀତିରେ ଅନେକ ପ୍ରକାରର ବିକୃତିମାନ ଆସି ଯାଇଛି ଆଉ ଆଜି ଏସଂପର୍କରେ ମଧ୍ୟ ଉତରାଖଣ୍ଡର ପବିତ୍ର ଭୂମିରେ କିଛି କଥା କହିବାକୁ ଚାହୁଁଛି । କିଛି ରାଜନୈତିକ ଦଳ ଦ୍ୱାରା, ସମାଜରେ ଭେଦଭାବ ସୃଷ୍ଟି କରି, କେବଳ ଗୋଟିଏ ସମ୍ପ୍ରଦାୟକୁ, ସେ ନିଜ ଜାତିର ହେଉ, କୌଣସି ସ୍ୱତନ୍ତ୍ର ଧର୍ମର ହେଉ, ଅବା ନିଜର ଛୋଟ ଅଂଚଳର ପରିସରର ହେଉ, ସେହି ଆଡ଼କୁ ଧ୍ୟାନ ଦେବା। ଏହି ପ୍ରୟାସ ହୋଇଛି ଆଉ ସେଥିରେ ହିଁ ସେମାନଙ୍କୁ ଭୋଟ ବ୍ୟାଙ୍କ ଦୃଷ୍ଟିଗୋଚର ହୋଇଛି। ଏତିକି ନିୟନ୍ତ୍ରଣ କରିଦିଅ, ଭୋଟ ବ୍ୟାଙ୍କ କରିଦିଅ, ଗାଡ଼ି ଚାଲୁଥିବ। ଏହି ରାଜନୈତିକ ଦଳ ଗୋଟିଏ ପ୍ରକ୍ରିୟା ମଧ୍ୟ ଆପଣାଇଛନ୍ତି। ସେମାନଙ୍କର ବିକୃତିଗୁଡ଼ିକର ଆଉ ଏକ ରୂପ ଏହା ମଧ୍ୟ ହେଉଛି ଏବଂ ସେହି ରାସ୍ତା ହେଉଛି ଜନତାଙ୍କୁ କେବେ ସୁଦୃଢ଼ ହେବାକୁ ନ ଦେବା, ବାରମ୍ବାର ପ୍ରୟାସ କରିବା ଯେ ଜନତା କେବେ ସୁଦୃଢ଼ ହୋଇ ନ ଯାଆନ୍ତୁ। ସେମାନେ ତ ଏହା ଚାହୁଁଥିଲେ, ଏହି ଜନତା -ଜନାର୍ଦ୍ଦନ ସଦା ସର୍ବଦା ଅସହାୟ ହୋଇ ରୁହନ୍ତୁ, ଅସହାୟ କରିଦିଅ, ଜନତାଙ୍କୁ ନିଜର ମୋହରା କରି ଦିଅ। ଫଳରେ ସେମାନଙ୍କର କ୍ଷମତା ଠିକ- ଠାକ ହୋଇ ରହିବ। ଏହି ବିକୃତ ରାଜନୀତିର ଆଧାର ରହିଛି ଯେ ଲୋକମାନଙ୍କର ଆବଶ୍ୟକତା ପୂରଣ କର ନାହିଁ । ସେମାନଙ୍କୁ ଆଶ୍ରିତ କରିରଖ। ଏମାନଙ୍କର ସମସ୍ତ ପ୍ରୟାସ ଏହି ଦିଗରେ ହୋଇଛି ଯେ ଜନତା -ଜନାର୍ଦ୍ଦନଙ୍କୁ କେବେ ଶକ୍ତିଶାଳୀ କରିବାକୁ ଦେବା ନାହିଁ। ଦୁର୍ଭାଗ୍ୟକୁ ଏହି ରାଜନୈତିକ ଦଳମାନେ ଲୋକମାନଙ୍କ ମଧ୍ୟରେ ଏହି ଚିନ୍ତାଧାରା ସୃଷ୍ଟି କରିଦେଲେ ଯେ ସରକାର ହେଉଛନ୍ତି ଆମର ମାଆ-ବାପା। ଏବେ ଯାହା କିଛି ମଧ୍ୟ ମିଳିବ ସରକାରଙ୍କ ଠାରୁ ହିଁ ମିଳିବ, ତେବେ ଯାଇ ଆମର ଗୁଜୁରାଣ ମେଂଟିବ। ଲୋକମାନଙ୍କ ମନରେ ଏହା ଘର କରି ନେଲା। ଅର୍ଥାତ ଗୋଟିଏ ପଟେ ଦେଶର ସାଧାରଣ ମଣିଷର ସ୍ୱାଭିମାନ, ତାହାର ଗୌରବ ବୁଝି -ବିଚାରି ରଣନୀତି ଦ୍ୱାରା ପଦଦଳିତ କରି ଦିଆଗଲା, ତାକୁ ଆଶ୍ରିତ କରି ଦିଆଗଲା ଏବଂ ଏହା ଦୁଃଖର କଥା ଯେ ଏହାସବୁ କରି ଚାଲିଲେ ଆଉ କେବେ କାହାକୁ ସାମାନ୍ୟତମ ଧାରଣା ହେବାକୁ ଦେଲେ ନାହିଁ। କିନ୍ତୁ ଏହି ଚିନ୍ତାଧାରା ଏହି ଅଭିବ୍ୟକ୍ତିରୁ ଭିନ୍ନ, ଆମେ ଏକ ନୂତନ ରାସ୍ତା ବାଛିଚୁ। ଆମେ ଯେଉଁ ରାସ୍ତା ବାଛିଚୁ, ତାହା ହେଉଛି କଠିନ, ସେହି ପଥ ହେଉଛି କଷ୍ଟକର କିନ୍ତୁ ଦେଶ ହିତରେ, ଦେଶର ଲୋକଙ୍କ ହିତ ପାଇଁ ହେଉଛି । ଆଉ ଆମର ମାର୍ଗ ହେଉଛି –ସବକା ସାଥ୍- ସବକା ବିକାଶ ଅର୍ଥାତ ସମସ୍ତଙ୍କ ସହିତ -ସମସ୍ତଙ୍କର ବିକାଶ। ଆମେ କହିଛୁ ଯାହା ମଧ୍ୟ ଯୋଜନା ଆଣିବୁ, ସମସ୍ତଙ୍କ ପାଇଁ ଆଣିବୁ, ଭେଦଭାବ ବିନା ଆଣିବୁ। ଆମେ ଭୋଟ ବ୍ୟାଙ୍କର ରାଜନୀତିକୁ ଆଧାର କରିବୁ ନାହିଁ ବରଂ ଲୋକଙ୍କ ସେବାକୁ ପ୍ରାଥମିକତା ଦେବୁ। ଆମର ଅଭିବ୍ୟକ୍ତି ରହିଲା ଯେ ଦେଶକୁ ସୁଦୃଢ଼ କରିବାର ଅଛି। ଆମର ଦେଶ କେବେ ସୁଦୃଢ଼ ହେବ? ଯେତେବେଳେ ପ୍ରତ୍ୟେକ ପରିବାର ସୁଦୃଢ଼ ହେବ। ଆମେ ଏଭଳି ସମାଧାନ ବାହାର କଲୁ, ଏଭଳି ଯୋଜନାମାନ ପ୍ରସ୍ତୁତ କଲୁ ଯାହା ଭୋଟ ବ୍ୟାଙ୍କ ତରାଜୁରେ ଠିକ ଭାବେ ନ ରହୁ, କିନ୍ତୁ ତାହା ବିନା ଭେଦଭାବରେ ଆପଣଙ୍କ ଜୀବନ ସହଜ କରିବ, ଆପଣମାନଙ୍କୁ ନୂତନ ସୁଯୋଗ ପ୍ରଦାନ କରିବ, ଆପଣମାନଙ୍କୁ ଶକ୍ତିଶାଳୀ କରିବ। ଆଉ ଆପଣମାନେ ମଧ୍ୟ ଚାହିଁବେ ନାହିଁ ଯେ ନିଜର ପିଲାମାନଙ୍କ ପାଇଁ ଏକ ଏଭଳି ବାତାବରଣ ଛାଡ଼ିଯିବା, ଯେଉଁଥିରେ ଆପଣମାନଙ୍କର ପିଲାମାନେ ସଦା ସର୍ବଦା ଆଶ୍ରିତ ଜୀବନ ବିତାନ୍ତୁ। ଯେଉଁସବୁ ସମସ୍ୟା ଆପଣମାନଙ୍କୁ ପାରମ୍ପରିକ ଭାବେ ମିଳିଛି, ଯେଉଁ ଅସୁବିଧା ମଧ୍ୟରେ ଆପଣମାନଙ୍କୁ ଜୀବନ ବିତାଇବାକୁ ପଡ଼ିଛି, ଆପଣମାନେ ମଧ୍ୟ ଚାହିଁବେ ନାହିଁ ଯେ ଆପଣ ମଧ୍ୟ ସେହି ପରମ୍ପରା, ସେହି ଅସୁବିଧା ସବୁକୁ ପିଲାମାନଙ୍କୁ ଦେଇକରି ଯିବା ପାଇଁ । ଆପଣମାନଙ୍କୁ ଆମେ ଆଶ୍ରିତ ନୁହେଁ ବରଂ ଆତ୍ମ ନିର୍ଭରଶୀଳ କରାଇବାକୁ ଚାହୁଁଛୁ । ଯେପରି ଆମେ କହିଥିଲୁ ଯେ ଯେଉଁମାନେ ହେଉଛନ୍ତି ଆମର ଅନ୍ନଦାତା ସେମାନେ ମଧ୍ୟ ଉର୍ଜ୍ଜାଦାତା ହୁଅନ୍ତୁ। ତେବେ ଏଥିପାଇଁ ଆମେ ଚାଷ ଜମିର ନିକଟରେ ହିଡ଼ରେ ସୋଲାର ପ୍ୟାନେଲ ଲଗାଇବାର କୁସୁମ ଯୋଜନା ନେଇକରି ଆସିଲୁ। ଏହାଦ୍ୱାରା କୃଷକଙ୍କ କ୍ଷେତରେ ବିଜୁଳି ଉତ୍ପାଦନ କରିବାର ସୁବିଧା ହେଲା। ନା ଆମେ କୃଷକମାନଙ୍କୁ କାହାର ଆଶ୍ରିତ କଲୁ ଆଉ ନା ହିଁ ତା’ମନରେ ଏହି ଭାବ ଆସିଲା ଯେ ମାଗଣାରେ ବିଜୁଳି ନେଉଛୁ। ଆଉ ଏହି ପ୍ରୟାସରେ ମଧ୍ୟ ତାକୁ ବିଜୁଳି ମିଳିଲା ଆଉ ଦେଶ ଉପରେ ମଧ୍ୟ ଚାପ ପଡ଼ିଲା ନାହିଁ ଏବଂ ସେ ଗୋଟିଏ ପକ୍ଷରେ ଆତ୍ମନିର୍ଭର ହେଲା ଆଉ ଏହି ଯୋଜନା ଦେଶର ଅନେକ ସ୍ଥାନରେ ଆମର କୃଷକମାନେ କାର୍ଯ୍ୟକାରୀ କରିଛନ୍ତି। ସେହିପରି ଆମେ ସାରା ଦେଶରେ ଉଜାଲା ଯୋଜନା ଆରମ୍ଭ କରିଥିଲୁ। ପ୍ରୟାସ ଥିଲା ଯେ ଘରେ କମ୍ ବିଜୁଳି ବିଲ ଆସୁ। ଏଥିପାଇଁ ସାରା ଦେଶରେ ଆଉ ଏଠାରେ ଉତରାଖଣ୍ଡରେ କୋଟି -କୋଟି ଏଲଇଡ଼ି ବଲବ୍ ଦିଆଗଲା ଆଉ ପୂର୍ବରୁ ଏଲଇଡ଼ି ବଲବ୍ 300-400 ଟଙ୍କାରେ ଆସୁଥିଲା, ଆମେ ତାହାକୁ 40-50 ଟଙ୍କାକୁ ନେଇ ଆସିଲୁ। ଆଜି ପ୍ରାୟତଃ ପ୍ରତ୍ୟେକ ଘରେ ଏଲଇଡ଼ି ବଲବର ବ୍ୟବହାର ହେଉଛି ଆଉ ଲୋକଙ୍କ ବିଜୁଳି ବିଲ ମଧ୍ୟ କମ୍ ଆସୁଛି। ଅନେକ ଘରେ ଯେଉଁମାନେ ମଧ୍ୟମବର୍ଗ, ନିମ୍ନ ମଧ୍ୟମବର୍ଗ ପରିବାର ଅଛନ୍ତି, ପ୍ରତ୍ୟେକ ମାସରେ 500-600 ଟଙ୍କା ପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ ବିଜୁଳି ବିଲ କମ୍ ହୋଇଛି।

ସାଥୀଗଣ,

ଏହିପରି ଆମେ ମୋବାଇଲ ଫୋନ୍ ଦର ଶସ୍ତା କଲୁ, ଇଂଟରନେଟ୍ ଶସ୍ତା କଲୁ, ଗାଁ-ଗାଁରେ ସାଧାରଣ ସେବାକେନ୍ଦ୍ର ଖୋଲା ଯାଉଛି, ଅନେକ ସୁବିଧା ଗାଁରେ ପହଂଚୁଛି। ଏବେ ଗାଁର ଲୋକଙ୍କୁ ରେଳ ଟିକଟ ସଂରକ୍ଷଣ କରିବା ହେଉ, ତେବେ ତାଙ୍କୁ ସହର ଆସିବାକୁ ପଡ଼ୁନାହିଁ, ଗୋଟିଏ ଦିନ ନଷ୍ଟ କରିବାକୁ ପଡ଼ୁନାହିଁ, 100-200-300 ଟଙ୍କା ବସ୍ ଭଡ଼ା ଦେବାକୁ ପଡ଼ୁନାହିଁ । ସେ ନିଜ ଗାଁରେ ହିଁ ସାଧାରଣ ସେବାକେନ୍ଦ୍ରରେ ଅନ୍ ଲାଇନ୍ ରେଳ ଟିକଟ ବୁକିଂ କରାଇ ପାରୁଛି । ସେହିପରି ଆପଣମାନେ ଦେଖିଥିବେ ଏବେ ଉତରାଖଣ୍ଡରେ ହୋମ ଷ୍ଟେ, ପ୍ରାୟ ପ୍ରତ୍ୟେକ ଗାଁରେ ତାହା କଥା ପହଂଚି ସାରିଛି। ଏବେ କିଛି ସମୟ ପୂର୍ବରୁ ମୋତେ ଉତରାଖଣ୍ଡର ଲୋକମାନଙ୍କ ସହିତ କଥା ହେବାର ସୁଯୋଗ ମଧ୍ୟ ମିଳିଥିଲା, ଯେଉଁମାନେ ବହୁତ ସଫଳତାର ସହିତ ହୋମ ଷ୍ଟେ ଚଳାଉଛନ୍ତି। ଯେତେବେଳେ ଏତେ ଯାତ୍ରୀ ଆସିବେ, ପୂର୍ବ ତୁଳନାରେ ଦୁଇ ଗୁଣା -ତିନି ଗୁଣା ଯାତ୍ରୀ ଆସିବା ଆରମ୍ଭ ହୋଇଛି। ଯେତେବେଳେ ଏତେ ଯାତ୍ରୀ ଆସିବେ, ସେତେବେଳେ ହୋଟେଲର ଉପଲବ୍ଧତାର ପ୍ରଶ୍ନ ଉଠିବା ହେଉଛି ସ୍ୱାଭାବିକ ଆଉ ରାତା -ରାତି ଏତେ ହୋଟେଲ ମଧ୍ୟ ତିଆରି ହୋଇ ପାରିବ ନାହିଁ। କିନ୍ତୁ ପ୍ରତ୍ୟେକ ଘରେ ଗୋଟିଏ -ଗୋଟିଏ ବଖରା ତିଆରି କରାଯାଇ ପାରିବ, ଭଲ ସୁବିଧା ସହିତ ତିଆରି କରାଯାଇ ପାରିବ। ଆଉ ମୋର ବିଶ୍ୱାସ ଯେ, ଉତରାଖଣ୍ଡ, ହୋମ ଷ୍ଟେ ତିଆରି କରିବାରେ, ସୁବିଧାଗୁଡ଼ିକର ସମ୍ପ୍ରସାରଣ କରିବାରେ, ସମଗ୍ର ଦେଶକୁ ଏକ ନୂତନ ପଥ ଦେଖାଇ ପାରିବ।

ସାଥୀଗଣ,

ଏହି ପ୍ରକାରର ପରିବର୍ତନ ଆମେ ଦେଶର ପ୍ରତ୍ୟେକ କୋଣ -ଅନୁକୋଣରେ ଆଣି ପାରୁଛୁ। ଏହିଭଳି ପରିବର୍ତନ ଦ୍ୱାରା ଦେଶ ଏକବିଂଶ ଶତାବ୍ଦୀରେ ଆଗକୁ ବଢ଼ିବ, ଏହି ଧରଣର ପରିବର୍ତନ ଉତରାଖଣ୍ଡର ଲୋକମାନଙ୍କୁ ଆତ୍ମନିର୍ଭର କରିବ।

ସାଥୀଗଣ,

ସମାଜର ଆବଶ୍ୟକତା ପାଇଁ କିଛି କରିବା ଏବଂ ଭୋଟ ବ୍ୟାଙ୍କ କରିବା ପାଇଁ କିଛି କରିବା, ଉଭୟ ମଧ୍ୟରେ ବହୁତ ବଡ଼ ପ୍ରଭେଦ ରହିଛି। ଯେତେବେଳେ ଆମ ସରକାର ଗରିବ ମାନଙ୍କୁ ମାଗଣା ଘର ତିଆରି କରି ଦେଇଥାନ୍ତି, ସେତେବେଳେ ତାହା ତାଙ୍କ ଜୀବନର ସବୁଠାରୁ ବଡ଼ ଚିନ୍ତା ଦୂର କରିଥାଏ। ଯେତେବେଳେ ଆମ ସରକାର ଗରିବମାନଙ୍କୁ 5 ଲକ୍ଷ ଟଙ୍କା ପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ ମାଗଣା ଚିକିତ୍ସାର ସୁବିଧା ଦେଇଥାନ୍ତି, ସେତେବେଳେ ତାହା ତାଙ୍କୁ ଜମିବାଡ଼ି ବିକ୍ରି କରିବାରୁ ବଂଚାଇଥାଏ, ତାଙ୍କୁ କରଜର କୁଚକ୍ରରେ ଫସିବାରୁ ବଂଚାଇଥାଏ। ଯେତେବେଳେ ଆମ ସରକାର କରୋନା କାଳରେ ପ୍ରତ୍ୟେକ ଗରିବଙ୍କୁ ମାଗଣା ଖାଦ୍ୟାନ୍ନ ସୁନିଶ୍ଚିତ କରିଥାଏ, ସେତେବେଳେ ତାକୁ ଭୋକିଲା ରହିବାରୁ ବଂଚାଇଥାଏ, ମୋତେ ଜଣାଅଛି ଯେ ଦେଶର ଗରିବ, ଦେଶର ମଧ୍ୟମବର୍ଗ ଏହି ସତ୍ୟତାକୁ ବୁଝିଥାଆନ୍ତି। ସେତେବେଳେ ପ୍ରତ୍ୟେକ କ୍ଷେତ୍ର, ପ୍ରତ୍ୟେକ ରାଜ୍ୟରୁ ଆମ କାର୍ଯ୍ୟକୁ, ଆମର ଯୋଜନାଗୁଡ଼ିକୁ ଜନତା ଜନାର୍ଦ୍ଦନଙ୍କ ଆଶୀର୍ବାଦ ମିଳିଥାଏ ଆଉ ସର୍ବଦା ମିଳୁଥିବ।

ସାଥୀଗଣ,

ସ୍ୱାଧୀନତାର ଏହି ଅମୃତ କାଳରେ, ଦେଶ ଯେଉଁ ପ୍ରଗତିର ବେଗ ଧରିଛି ତାହା ଏବେ ଆଉ ଅଟକିବ ନାହିଁ, ଆଉ ରହିଯିବ ନାହିଁ ଏବଂ ଏହା ଥକି ଯିବ  ନାହିଁ ବରଂ ଆହୁରି ଅଧିକ ବିଶ୍ୱାସ ଏବଂ ସଂକଳ୍ପ ସହିତ ଆଗକୁ ବଢ଼ିବ। ଆଗାମୀ 5 ବର୍ଷ ଉତରାଖଣ୍ଡକୁ ରଜତ ଜୟନ୍ତି ଆଡ଼କୁ ନେଇଯିବ। ଏଭଳି କୌଣସି ଲକ୍ଷ୍ୟ  ନାହିଁ ଯାହା ଉତରାଖଣ୍ଡ ହାସଲ କରି ପାରିବ ନାହିଁ। ଏଭଳି କୌଣସି ସଂକଳ୍ପ ନାହିଁ ଯାହା ଏହି ଦେବଭୂମିରେ ସିଦ୍ଧ ହୋଇ ପାରିବ ନାହିଁ। ଆପଣମାନଙ୍କ ପାଖରେ ଧାମୀ ମହାଶୟଙ୍କ ରୂପରେ ଯୁବ ନେତୃତ୍ୱ ମଧ୍ୟ ଅଛି, ତାଙ୍କର ଅନୁଭବୀ ଟିମ ମଧ୍ୟ ଅଛି। ଆମ ପାଖରେ ବରିଷ୍ଠ ନେତାମାନଙ୍କର ବହୁତ ବଡ଼ ଶୃଙ୍ଖଳା ଅଛି। 30-30 ବର୍ଷ,  40-40 ବର୍ଷ ଅନୁଭବ ସହିତ ନେତାମାନଙ୍କର ଟିମ୍ ଅଛି, ଯିଏ ଉତରାଖଣ୍ଡର ଉଜ୍ଜ୍ୱଳ ଭବିଷ୍ୟତ ପାଇଁ ସମର୍ପିତ ଅଛନ୍ତି।

 

ଆଉ ମୋର ପ୍ରିୟ ଭାଇ  ଭଉଣୀମାନେ,

ଯାହା ସାରା ଦେଶରେ ଖେଳେଇ ହୋଇ ରହିଛି, ତାହା ଉତରାଖଣ୍ଡକୁ ସୁନ୍ଦର କରି ପାରିବ ନାହିଁ। ଆପଣମାନଙ୍କ ଆଶୀର୍ବାଦରେ ବିକାଶର ଏହି ଡବଲ ଇଞ୍ଜିନ ଉତରାଖଣ୍ଡର ଦ୍ରୁତ ବିକାଶ କରି ଚାଲିବ, ଏହି ବିଶ୍ୱାସର ସହିତ ମୁଁ ପୁଣି ଆପଣ ସମସ୍ତଙ୍କୁ ଶୁଭେଚ୍ଛା ଜଣାଉଛି। ଆଜି ଯେତେବେଳେ ଦେବଭୂମିକୁ ଆସିଛି, ବୀର ମାତାମାନଙ୍କର ଭୂମିକୁ ଆସିଛି, ସେତେବେଳେ କିଛି ଭାବ ପୁଷ୍ପ, କିଛି ଶ୍ରଦ୍ଧାସୁମନ ଅର୍ପଣ କରୁଛି, ମୁଁ କିଛି ପଂକ୍ତିର ସହିତ ନିଜର କଥା ସମାପ୍ତ କରୁଛି-

ଯେଉଁଠାରେ ପବନ ବହେ ସଂକଳ୍ପ ପାଇଁ,

ଯେଉଁଠାରେ ପର୍ବତ ଗର୍ବ ଶିଖାଇଥାଏ,

ଯେଉଁଠାରେ ଉଚ୍ଚ ନିଚ୍ଚ ସମସ୍ତ ପଥ

ବାସ୍ ଭକ୍ତିର ସ୍ୱରରେ ଗାଇ ଥାଆନ୍ତି,

ସେହି ଦେବଭୂମିର ଧ୍ୟାନ ଦ୍ୱାରା ହିଁ

ସେହି ଦେବଭୂମିର ଧ୍ୟାନ ଦ୍ୱାରା ହିଁ

ମୁଁ ସର୍ବଦା ଧନ୍ୟ ହୋଇ ଯାଉଛି

ଏହା ମୋର ଭାଗ୍ୟ,

ମୋର ସୌଭାଗ୍ୟ,

ମୁଁ ତୁମକୁ ମୁଣ୍ଡ ନୁଆଇଁ ପ୍ରଣାମ କରୁଛି

ମୁଁ ତୁମକୁ ମୁଣ୍ଡ ନୁଆଇଁ ପ୍ରଣାମ କରୁଛି

ଆଉ ଧନ୍ୟ-ଧନ୍ୟ ହୋଇ ଯାଉଛି

ତୁମେ ହେଉଛ ଭାରତ ମାତାର ପଣତ

ତୁମେ ହେଉଛ ଜୀବନର ଖରା-ଛାଇ

କେବଳ ଛୁଇଁ ଦେଲେ ହିଁ ମୁକ୍ତି ପାଇଯିବ

ସବୁଠାରୁ ପବିତ୍ର ସେହି ଧରଣୀ ହେଉଛ ତୁମେ

କେବଳ ତନ-ମନକୁ ସମର୍ପଣ ଦ୍ୱାରା

ମୁଁ ଦେବଭୂମିକୁ ଆସିଥାଏ

ମୁଁ ଦେବଭୂମିକୁ ଆସିଥାଏ

ଏହା ମୋର ଭାଗ୍ୟ,

ମୋର ସୌଭାଗ୍ୟ,

ମୁଁ ତୁମକୁ ମୁଣ୍ଡ ନୁଆଇଁ ପ୍ରଣାମ କରୁଛି

ମୁଁ ତୁମକୁ ମୁଣ୍ଡ ନୁଆଇଁ ପ୍ରଣାମ କରୁଛି

ଆଉ ଧନ୍ୟ-ଧନ୍ୟ ହୋଇ ଯାଉଛି

ଯେଉଁଠାରେ ଆଞ୍ଜୁଳିରେ ଗଙ୍ଗାଜଳ ଥାଏ

ଯେଉଁଠାରେ ପ୍ରତ୍ୟେକଙ୍କର ମନ କେବଳ ନିଶ୍ଛଳ ଥାଏ

ଯେଉଁଠାରେ ଗାଁଗାଁରେ ଦେଶଭକ୍ତ

ଯେଉଁଠାରେ ନାରୀମାନଙ୍କ ନିକଟରେ ପ୍ରକୃତ ବଳ ଥାଏ

ସେହି ଦେବଭୂମିର ଆଶୀର୍ବାଦ ପାଇଁ

ମୁଁ ଚାଲି ଯାଇଥାଏ

ସେହି ଦେବଭୂମିର ଆଶୀର୍ବାଦ ପାଇଁ

ମୁଁ ଚାଲି ଯାଇଥାଏ

ଏହା ମୋର ଭାଗ୍ୟ,

ମୋର ସୌଭାଗ୍ୟ,

ମୁଁ ତୁମକୁ ମୁଣ୍ଡ ନୁଆଇଁ ପ୍ରଣାମ କରୁଛି

ମୁଁ ତୁମକୁ ମୁଣ୍ଡ ନୁଆଇଁ ପ୍ରଣାମ କରୁଛି

ଆଉ ଧନ୍ୟ-ଧନ୍ୟ ହୋଇ ଯାଉଛି

ମାଣ୍ଡିଆର ରୁଟି

ହୁକ୍କାର ଧୂଆଁ

ପ୍ରତ୍ୟେକଙ୍କ ମନ ହୋଇଥାଏ

ଶିବ ଜୀଙ୍କର ଜପ

ଋଷି-ମୁନୀଙ୍କର ଏହି

ଏହି ତପ ଭୂମି

କେତେ ବୀରଙ୍କର

ଏହା ହେଉଛି ଜନ୍ମଭୂମି

ମୁଁ ଦେବଭୂମିକୁ ଆସିଥାଏ,

ମୁଁ ତୁମକୁ ମୁଣ୍ଡ ନୁଆଇଁ ପ୍ରଣାମ କରୁଛି

ଆଉ ଧନ୍ୟ-ଧନ୍ୟ ହୋଇ ଯାଉଛି

ମୁଁ ତୁମକୁ ମୁଣ୍ଡ ନୁଆଇଁ ପ୍ରଣାମ କରୁଛି

ଆଉ ଧନ୍ୟ-ଧନ୍ୟ ହୋଇ ଯାଉଛି

ମୋ ସହିତ କୁହନ୍ତୁ, ଭାରତ ମାତା କୀ ଜୟ! ଭାରତ ମାତା କୀ ଜୟ! ଭାରତ ମାତା କୀ ଜୟ!

ବହୁତ –ବହୁତ ଧନ୍ୟବାଦ!