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Swami Vivekananda an inspiration for all youth and a shining example of how much could be accomplished in a short time-span: PM Modi 
Earlier people were inspired to die for the nation. Today it is about living for the nation & doing something for India: PM
The 125 crore people are united in an objective of taking the nation to new highs: PM Narendra Modi
Entire world is looking at India with so much hope because India is a land of opportunities: PM Modi
A youth is one who works towards his future goals, unmindful of the past: Prime Minister Modi
Without peace, unity and harmony, development cannot have any meaning: PM Narendra Modi
India has shown the world, that a land of such diversity, has a unique spirit to stay together: PM Modi
India's objective is to give youth the opportunities to make this century an Indian century: PM
If India can be a manufacturing hub, it is not because we have a market or raw materials...it is because we have skilled youngsters: PM
“Dignity of labour” must be inculcated among people: PM Narendra Modi
Development is about transforming the lives of the poor: Prime Minister Modi

भारत के कौने –कौन से आए मेरे नौजवान साथियों।

आज 12 जनवरी स्‍वामी विवेकानंद जी की जन्‍म जयंती हम युवा दिवस के रूप में मनाते हैं। इस देश में दो महापुरूषों को इस देश का युवा विशेष रूप से नमन करता रहा है। अगर कोई हमारे सामने भगत सिंह का नाम लें या कोई हमें स्‍वामी विवेकानंद की याद दिला दें तो उसी पल हमारा माथा उन महापुरूषों के चरणें में झुक जाता है। बहुत ही छोटी आयु में कोई क्‍या कर सकता है। अगर जीवन में संकल्‍प का सामर्थ्‍य हो, संकल्‍प के लिए समर्पित भाव हो और जीवन आहूत करने की अदम्‍य इच्‍छा हो, तो व्‍यक्ति के लिए उम्र कोई मायना नहीं रखती। मेरे सामने देश के हजारों युवक बैठे हैं, वो हिंदुस्‍तान के कौने-कौने से आए हैं। उनका लालन-पालन अलग-अलग हुआ है। उनकी खान-पान की आदतें अलग है, उनकी बोली अलग है, उनका पहनाव अलग है, लेकिन उसके बावजूद भी ये सारे नौजवान इस एक बात से जुड़े हुए हैं। उनके मन मंदिर में एक मंत्र लगातार गूंजता रहा है। और वह ही हम सब की प्रेरणा है। और वो मंत्र क्‍या है? आजादी के आंदोलन के समय जिस वंदे मारतरम की गूंज ने कश्‍मीर से कन्‍या कुमारी अटक से कटक पूरे हिंदुस्‍तान को आजादी के आंदोलन में पिरो दिया है। एक मंत्र होता है जो जीवन में कुछ कर दिखाने की प्रेरणा बन जाता है। आज वही मंत्र चाहे उसको भारत मां की जय के रूप में कहते हो, चाहे वंदे मातरम के रूप में कहते हो। पहले मां भारती को गुलामी की जंजीरों से मुक्‍त कराने के लिए वो हमारी ताकत बन गया था। और आज आजाद हिंदुस्‍तान में भारत को नई ऊचाईयों पर ले जाने के लिए, विकास की नई ऊंचाईयों को सिद्ध करने के लिए, समस्‍याओं से मुक्ति दिलाने के लिए, हिंदुस्‍तान के गांव, गरीब किसान, मजदूर उनके जीवन में बदलाव लाने के लिए यही मंत्र हमारी प्रेरणा बनता है। पहले देश के लिए मरने की प्रेरणा देता था। आज वही मंत्र हमें देश के लिए जीने की प्रेरणा देता है। और आप सब नौजवान अपने लिए नहीं, देश के लिए कुछ करने के इरादे से किसी न किसी संकल्‍प से बंधे हुए हैं। आप कुछ करना चाहते हैं। और यह देश प्रगति तब करता है जब सवा सौ करोड़ देशवासी किसी न किसी संकल्‍प से बंधे हो। उस संकल्‍प की पूर्ति के लिए कुछ कदम चलने के लिए प्रयासरत हो। मंजिल को पाने के लिए अविरत कोशिश करते हो, तो देश अपने आप उस मंजिलों को पार कर जाता है।

आज पूरे विश्‍व का परिवेश देखे पूरा विश्‍व आज भारत की तरफ एक बड़ी आशा भरी नजर से देख रहा है। क्‍यों ? इसलिए कि हिंदुस्‍तान एक संभावनाओं का देश है। आपार अवसर जहां इंतजार कर रहे हैं। दुनिया इसलिए हिंदुस्‍तान की तरफ देख रही है, क्‍योंकि आज हिंदुस्‍तान विश्‍व का सबसे युवा देश है। 65 प्रतिशत जनसंख्‍या 35 से कम आयु की हो, वो देश कितना सौभाग्‍यशाली है कि जिसके पास कोटि-कोटि युवा लोग हैं। और जहां युवा होता है, वहां संकल्‍पों की कोई मर्यादाएँ नहीं होतीं, सीमाएँ नहीं होतीं। कभी-कभार हमारे देश में युवा की परिभाषा को लेकर अलग-अलग हमें बातें सुनने को मिलती है। शासत्रों से ले करके अब तक युवा की परिभाषा बहुत हो चुकी है। हर किसी का अपना नजरिया होता है। कुछ लोगों के लिए उम्र का दायरा यह युवा की पहचान के रूप में माना जाता है। मैं कभी-कभी सोचता हूं कि युवा यह परिस्थिति का नाम नहीं है। युवा यह मनस्थिति का नाम है। मनस्थिति है, जो युवा की परिचायक होती है। जब कोई व्‍यक्ति अपने बीते हुए पल को बार-बार याद करता है, दोहराता रहता है तो मैं यह सीधा-सीधा अर्थ निकालता हूं कि वो अपनी युववाणी खो चुका है। वो बुढ़ापे की आरे चल चुका है। लेकिन जो बीते हुए कल को बार-बार दोहराने की बजाय आने वाले कल के सपने संजोता रहता है, वो उसके लिए मेरा मन हमेशा कहता है वो सच्‍चे अर्थ में युवा है। अगर आप अपने आप को युवा मानते हो तो युवा वो है जो बीते हुए कल की बातों को दोहरा करके अपने समय को बर्बाद नहीं करता है, लेकिन जो आने वाले सपनों को संजोने के लिए पल-पल प्रयास करता है और हर सपने को साकार करने के लिए अपने आप को खपा देता है।

देशभर से आए हुए युवा उन सपनों का सम्‍पुट है। हम देशभर के लोग विविधताओं के बीच यहां बैठे हैं, क्‍या कारण है। वो कौन सा कारण हमें जोड़ रहा है। सद्भावना यह अपने आप में एक बहुत बड़ी शक्ति होती है। क्‍या हमारे अंदर एक दूसरे के प्रति आदर-भाव न होता, सद्भाव न होता। अपनेपन का कोई नाता न होता, तो हम इतनी अपने आप से जुड़ सकते? भारत विकास करना चाहता है और इस बार आपकी इस युवा परिषद का विषय भी बड़ा महत्‍वपूर्ण है। एक तरफ व्‍यक्ति का, उसके सामर्थ्‍य का और युवा से जुड़े हुए विषय को ले करके आया है उसका एक पहलू है skill, दूसरा है भारत का क्‍या हो तो कहते है विकास। और तीसरी बात आपने कही है कैसे हो तो वो है सद्भाव। क्‍या, क्‍यों, कैसे? इस बात को ले करके इस समारोह को आप चार दिन चर्चा के लिए आज प्रारंभ कर रहे हैं। अगर हमारे देश में एकता नहीं होगी, जन-जन के प्रति सद्भाव नहीं होगा, आदर भाव नहीं होगा, दूसरे की परंपराएं, दूसरे के विचार, उसके प्रति अगर सम्‍मान का भाव नहीं होगा, तो शायद भारत को प्रगति में रुकावटें आएंगी, विकास में रुकावटें आएंगी और इसलिए समय की मांग है और हर नौजवान के जीवन का एक व्‍यवहार है कि हम शांति, एकता, सद्भावना, जो भारत जैसे विविधताओं से भरे हुए देश के लिए प्रगति की गारंटी है। भारत के पास सब कुछ हो, धन हो, दौलत हो, बेशुमार पैसे हों, हर नौजवान को नौकरी हो, हर परिवार में सुख और सम्‍पन्‍नता हो, लेकिन, लेकिन अगर देश में शांति, एकता और सद्भावना नहीं होगी, तो वो सारी सम्‍पत्ति किसी के काम नहीं आएगी। न वो देश का गौरव बढ़ाएगी, न आने वाली पीढि़यों के लिए भविष्‍य का कोई रास्‍ता बनाएगी। और इसलिए हम विकास कितना ही करें, कितनी ही ऊंचाइयों को पार करें, लेकिन शांति, एकता और सद्भावना, ये भारत की पहली आवश्‍यकता रहती है।

और भारत ने दुनिया को दिखाया है कि जिस देश के पास सैंकड़ों बोलियां हो, अनेक भाषाएं हों, अनेक परम्‍पराएं हों, अनगिनत विविधिताएं हों, उसके बाद भी साथ जीने-मरने का स्‍वभाव हो, ये हमारी बहुत बड़ी विरासत हैं जो हमारे पूर्वजों ने हमें दी हैं, स्‍वामी विवेकानंद जैसे महापुरुषों ने दी हैं और इसे हमने संजो के रखना है।

वेद से विवेकानंद तक और उपनिषद से उपग्रह तक हम इसी परम्‍परा में पले-बढ़े हैं। उस परम्‍पराओं को बार, बार, बार, बार स्‍मरण करते हुए, संजोते हुए भारत को एकता के सूत्र में बांधने के लिए सद्भावना को सेतु उसको हम जितना बल दें, देते रहना होगा।

उसी प्रकार से अगर व्‍यक्ति के जीवन में सामर्थ्‍य नहीं होगा तो राष्‍ट्र के जीवन में सामर्थ्‍य कहां से आएगा? 21वीं सदी एशिया की सदी है कहते हैं, 21वीं सदी हिदुस्‍तान की सदी बन सकती है कैसे? जब हम, हमारे देश के युवा शक्ति के समार्थ्‍य को पहचानेंगे। विकास यात्रा में उसको पिरोयें और विकास की ऊंचाइयों को पार करने के लिए उसे हम अपना भागीदार बना लें। तब जा करके, तब जा करके हम राष्‍ट्र के सपनों को पूरा कर सकते हैं। अनेक मार्ग हैं, उसमें एक महत्‍वपूर्ण मार्ग है हुनर, skill development, हमारे देश के नौजवान के हाथ में सिर्फ कागज और कलम होगी तो देश आगे नहीं बढ़ सकता है। अपार ज्ञान का भंडार तो हो ही हो, कागज और कलम का सामर्थ्‍य तो हो ही हो, लेकिन देश को आगे बढ़ने के लिए हुनर चाहिए, skill चाहिए, बदले हुए युग में जहां technology एक महत्‍वपूर्ण रोल अदा कर रही है, भारत के एक manufacturing hub बनने की संभावना है। अगर भारत दुनिया का एक manufacturing hub बन सकता है तो उसका पहला कारण ये नहीं है कि हमारे पास raw material है, पहला कारण ये नहीं है कि हमारे पास market है, पहला कारण ये नहीं है कि हमारी आवश्‍यकता है, पहला कारण ये है कि हमारे देश के पास, नौजवानों के पास अगर हुनर है तो वो सबसे बड़ी ताकत है। और इसलिए हमारी सरकार ने skill को, हुनर को बहुत महत्‍व दिया है।

देश की आजादी के बाद पहली बार skill development एक अलग ministry बनाई गई, skill development की अलग policy बनाई गई, skill development के लिए अलग बजट बनाया गया और हिन्‍दुस्‍तान में एक ऐसी जाल बिछाने की कोशिश है कि गरीब से गरीब व्‍यक्ति, अनपढ़ से अनपढ़ व्‍यक्ति भी अपने जीवन में कुछ करने के लिए इच्‍छा करता है तो उसको सीखने का अवसर मिलना चाहिए, उसके हाथ में कोई हुनर होना चाहिए और वो हुनर को प्राप्‍त कराने के लिए सरकार पुरजोर प्रयास कर रही है।

हमारे छत्‍तीसगढ़ में रमन सिंह जी ने तो skill को एक अधिकार के रूप में develop किया है। उन्‍होंने कानूनी व्‍यवस्‍था का प्रयास किया है। मैं पिछली बार जब छत्‍तीसगढ़ आया था तो skill development किस प्रकार के उन्‍होंने काम की रचनाएं की हैं उसको मैंने अपनी आंखों से देखा। जहां नक्‍सलवाद, नौजवानों को गुमराह करने के लिए भरपूर कोशिश करता है, उसी इलाके में, उसकी छाती पर, skill development के द्वारा सपनों को संजोने के प्रयास छत्‍तीसगढ़ में हो रहे हैं। ये बधाई के पात्र हैं। और जब आप छत्‍तीसगढ़ में हैं तो आपको बहुत सी बातें सुनने को मिलेंगी कि नौजवानों के विकास के लिए क्‍या-क्‍या वहां हो रहा है।

मैं ये ही आपसे कहना चाहता हूं कि हम भी इस बात को ले करके आगे बढ़ना चाहते हैं कि देश में skill development को कैसे बल दिया। skill development से मैं एक बात आप नौजवानों से कहना चाहता हूं, दुर्भाग्‍य से हमारे देश में हम लोगों ने एक ऐसी मनस्थिति बना ली है जो दिमाग से काम करता है वो बड़ा है और जो हाथ से काम करता है वो छोटा है। इस मनस्थिति को बदलना पड़ेगा। हम हमारी मां का इतना सम्‍मान करते हैं, मां का आदर करते हैं, हमारी मां कहा है। बहुत कम लोग होंगे जिसकी मां को दिमाग से काम करने का अवसर मिला है। बाकी सब लोग हम ऐसे हैं जिनकी मां हाथ से काम करती है, कपड़े धेाती हैं, खाना पकाती है, झाड़ू लगाती है, और उस मां का हम सम्‍मान करते हैं, मां का गौरव करते हैं। लेकिन समाज में हाथ से काम करने वाला हमें छोटा लगता है, बढि़या कपड़े पहन करके टेबल-कुर्सी पर बैठा हुआ बाबू हमें बड़ा लगता है, लेकिन हमें कोई ऑटो-रिक्‍शा का ड्राइवर हमें छोटा लगता है। कोई plumber, कोई mechanic , कोई turner, कोई fitter, कोई wireman, कोई फूलों का गुलदस्‍ता बनाने वाला, ये हमें छोटे लगते हैं, हमारी ये मानसिकता हमें बदलनी होगी। हमें उनके प्रति भी सद्भाव पैदा करना होगा और सद्भाव तब होगा जब शुरूआत समभाव से होगी। मेरे में और उसमें कोई अन्‍तर नहीं है, हमारे और उसके बीच में एक समभाव है। जब समभाव होगा तो सद्भाव अपने-आप पनपने लग जाएगा और इसलिए white caller job and blue caller job, ये शब्‍द हमारे यहां चल रहे हैं। जो अपने पैरों पर खड़ा है। जो अपने पैरों पर खड़ा है। जो अपने हाथ की ताकत से अपनी जिंदगी बनाता है। जिसकी उंगलियों में नया करने का दम होता है। उससे बड़ा गौरव करने के लिए क्‍या हो सकता है। और इसलिए हम skill development पर बल देना चाहते हैं। हम समाज में एक मनोवैज्ञानिक बदलाव लाना चाहते हैं। कोई काम छोटा नहीं होता और इसलिए हमने एक movement चलाया है। श्रम एव जयते। dignity of labor हम बल दे रहे हैं उस पर और इसलिए कभी-कभी क्‍या लगता है। कितना ही गरीब व्‍यक्ति हो, उसके मन में मनोवैज्ञानिक प्रभाव पैदा हो गया है कि जब तक बेटा graduate नहीं होता, मां-बाप को भी संकोच होता है कि कोई रिश्‍तेदारों को परिचय क्‍या करवाएं। और इसलिए उसको लगता है कि graduate होना बहुत अनिवार्य है। लेकिन क्‍या सातवीं कक्षा पास, 10वीं कक्षा पास बेटा ITI में गया हो। और Technically बड़ा सामर्थ्‍यवान हो तो उनको संकोच होता है, परिचय करवाने में। यह psychology को बदलना है। यह आवश्‍यक नहीं है कि हमारे पास graduate होने का प्रमाण पत्र हो और बेरोजगारी की जिंदगी हो। हम सातवीं क्‍यों न पास हो, 10वीं पास क्‍यों न हो, हमारे हाथ में हुनर होना चाहिए और अपने पसीने से पैसों को पैदा करने की ताकत होनी चाहिए। ऐसे समाज की अवस्‍था होनी चाहिए और इसलिए नौजवानों में बल देने का प्रयास हम कर रहे हैं। हम विकास की ओर जाना चाहते हैं। और विकास का मेरा सीधा-सीधा मतलब है। देश के गरीबों की जिंदगी में बदलाव, हिंदुस्‍तान के गावों की जिंदगी में बदलाव। गांव में अच्‍छी शिक्षा हो, गांव में अस्‍पताल हो, बच्‍चों को पढ़ने के लिए अच्‍छा टीचर हो। बूढ़े अगर बीमार हैं तो अच्‍छा डॉक्‍टर हो। सस्‍ती दवाइयां हो, रहने के लिए अच्‍छा घर हो। गांव में आने-आने के लिए अच्‍छे रास्‍ते हो, पीने के लिए शुद्ध पानी हो। आजादी के इतने सालों के बाद भी हम इसको पूरा नहीं कर पाए हैं और उसको पूरा करना हमारा एक दायित्‍व है। और विकास, यही विकास है। विकास यानी यह नहीं है कि हम कितने बड़े-बड़े भवन बनाते हैं। और कितनी बड़ी संख्‍या में बाबूओं को तैयार करते हैं। और इसलिए हमारा विकास का मॉडल सामान्‍य मानव की जिंदगी में बदलाव लाना है। और सामान्‍य मानव की जिंदगी में बदलाव लाने के लिए हमने skill development को महत्‍व दिया है।

आने वाले दिनों में चार दिन के बाद 16 तारीख को हमें एक कार्यक्रम को लॉन्‍ज कर रहे हैं – Startup India Standup India हमारे देश के नौजवानों के पास कल्‍पकता के वो धनी है, अनेक नई चीजों की उनके पास सोच है, समस्‍याओं के समाधान के लिए वो रास्‍ते खोजते हैं। हमारे यहां गांव में हमने देखा होगा खेत में काम करने वाला व्‍यक्ति भी अपने आप Technology develop कर देता है और उस Technology से अपना काम कर लेता है। अपनी एक ही मोटर साइकिल होगी, उस मोटरसाइकिल से दस प्रकार के काम लेना गांव का आदमी जानता है। इसका मतलब कि हमारे पास innovative सोच, innovation यह भारत के पास हैं। लेकिन उसे प्रतिष्‍ठा कैसे मिले, पुरस्‍कार कैसे मिले, प्रोत्‍साहन कैसे मिले, आगे बढ़ने के लिए रास्‍ता कैसे मिले। उस दिशा में सरकार एक गंभीरता से सोच करके उस योजना को लागू कर रही है। 16 तारीख को जब यह बड़ा कार्यक्रम होगा आप भी अपने-अपने इलाके में कहीं पर वीडियो कॉनफ्रेंस के द्वारा अगर इस कार्यक्रम में शरीक होते हैं, तो आपने शरीक होने का प्रयास करना चाहिए। और skill development का next stage होता है Startup India उसी प्रकार से सरकार ने मुद्रा योजना घोषित की है। प्रधानमंत्री मुद्रा योजना।

हमारे देश में बहुत लोग हैं जिनके पास कुछ करने की इच्‍छा है। लेकिन पैसों के आभाव में कर नहीं पाते। वो unfunded है। बैंकों के दरवाजे उनके लिए खुले नहीं थे। हमने बदलाव लाया और बैंकों के दरवाजों को खोल दिया।

बैंकों को, दरवाजों को खोल करके मुद्रा योजना के तहत उन नौजवानों को पैसे देने का प्रयास शुरू किया है और मुझ खुशी है कि बहुत ही कम समय में ये जो योजना बनाई गई, प्रधानमंत्री मुद्रा योजना, करीब-करीब दो करोड़ लोगों को बैंक से बिना कोई गारंटी, पैसे दिए गए। इतने कम समय में बैंकों के द्वारा दो करोड़ लोगों को पैसे मिल रहा है और करीब-करीब 80 हजार करोड़ रुपये नौजवानों के हाथ में रख दिए हैं। नौजवानों पर मेरा भरोसा है। देश की युवा शक्ति पर भरोसा है। देश के सपने अगर कहीं पर निवास करते हैं तो देश के युवा दिलों में रहते हैं। और इसलिए उस पर हमने ध्‍यान केंद्रित किया है। मैं चाहता हूं कि जो लोग कुछ कर गुजरना चाहते हैं, वे नौकरी की तलाश क्‍यों करें, अपने पैरों पर खड़े क्‍यों न हों। मैं नहीं चाहता हूं मेरे देश का नौजवान job seeker बने, मैं चाहता हूं मेरे देश का नौजवान job creator बने। मैं ऐसी जिंदगी जिऊंगा कि दो-चार और पांच लोगों को मैं कोई न कोई रोजगार दूंगा, ये भी हमारा सपना होना चाहिए। मैं रोजगार के लिए तड़पने वाला नौजवान नहीं हो सकता हूं, मैं रोजगार देने वाला एक साहसिक नौजवान हो सकता हूं। और ये ही तो जिंदगी का लक्ष्‍य होना चाहिए कि मैं ओरों के लिए कुछ कर सकता हूं। और एक बार ये सपना ले करके चलोगे तो कर भी पाओगे। और इसलिए आप अगर उस बात को ले करके चलते हैं तो मेरा आपसे अनुरोध है, मैं आपको विश्‍वास दिलाना चाहता हूं, मैं आपके साथ हूं। ये सरकार आपके साथ है, ये पूरा हिन्‍दुस्‍तान आपके साथ है। आप उस लिए सपने संजो करके ले करके निकलिए। और इसीलिए skill development का अपना एक महत्‍व है, start-up India, stand up India का महत्‍व है, प्रधानमंत्री मुद्रा योजना का महत्‍व है।

मैंने अभी एक स्‍वच्‍छता का अभियान चलाया है। 15 अगस्‍त को मैंने लालकिले से कहा था, लेकिन मैं आज गर्व से कह सकता हूं कि वो स्‍वच्‍छता अभियान किसी प्रधानमंत्री का अभियान नहीं है, वो नरेंद्र मोदी का अभियान नहीं है। देश के हर नागरिक ने इसको अपना बना लिया है। हर कोई उसमें कुछ न कुछ करना चाहता है। अभी मैंने कहा 26 जनवरी को हमारे महापुरुषों के जितने statue हैं, उसकी सफाई एक नागरिक के नाते हम क्‍यों न करें? और मेरे पास खबरें हैं कि देश भर में इतने नौजवान आगे आए हैं, इतने स्‍कूल कॉलेज आगे आए हैं, इतने संगठन आगे आए हैं, even मुझे बताया गया नेहरू युवा केंद्र हो, NCC हो, NSS हो, ये सब लोग मैदान में आए हैं। सबने तय कर लिया है कि अब हमारे गांव में महापुरुषों के statue और वो परिसर हम गंदा नहीं रहने देंगे। कुछ लोगों ने तो 26 जनवरी का भी इंतजार नहीं किया है और already काम शुरू कर दिया है। यही तो देश की ताकत होती है। लेकिन पहला एक समय था, हम सब देखते थे हां ये महापुरुष की प्रतिमा है, फिर बात भी करते देखो यार कितना गंदा है, कोई संभालता नहीं है। आज, आज हर कोई चर्चा करता है, यार ये हमारे गांव के अंदर ये छह महापुरुषों के पुतले हैं उसकी सफाई हम करेंगे। एक नया माहौल बना है। नेहरू युवा केंद्र के और NSS के नौजवानों ने इसका बीड़ा उठाया है। मुझे विश्‍वास है बहुत बड़ी सफलता मिलेगी।

इस बार आप पिछले करीब 20 साल से ये समागम करते आए हैं, मेरी आपसे आग्रह है, मेरा आपसे अनुरोध है, इस बार जाने से पहले आप 2019 का कोई संकल्‍प ले करके जा सकते हैं क्‍या और 2019 तक हम इतना करेंगे। मैं 2019 इसलिए कह रहा हूं कि 2019 महात्‍मा गांधी की 150वीं जयंती है। महात्‍मा गांधी को स्‍वच्‍छता बहुत पसंद थी। 2019 तक का हमारा कोई time table बना करके हम जा सकते हैं क्‍या। और हम हर महीने उसका लेखा-जोखा लें, हिसाबा-किताब करें, संकल्‍प तय करें, योजना बनाएं, रोडमैप बनाएं और आंखों को दिखने वाला परिवर्तन ला करके रहें और दूसरा सपना 2022 का हम लें।

एक 2019 का हमारा रोडमैप और दूसरा 2022 का रोडमैप हम लें। 2022 इसलिए कि भारत की आजादी के 75 साल हो रहे हैं। हिंदुस्‍तान की आजादी के 75 साल हम कैसे मनाएंगे। अभी से हम कैसी तैयारियां करेंगे। हम अपने आप को उसके लिए उसको कैसे तैयार करेंगे। हमारी अपनी संस्था हो, हमारा परिवार हो, हम व्‍यक्ति हो, हम खुद क्‍या कर सकते हैं। इस पर हम सोचते हैं। और इसलिए रायपुर से आप जब निकले तब 2019 और 2022 कोई न कोई लक्ष्‍य निर्धारित करके उसका रोडमैप तय करके निकलिए । उसके लिए कौन समय देगा, कितने घंटे देगा। यह संकल्‍प ले करके चलिए। उसी प्रकार से मैं विशेष रूप से नौजवानों का एक बात के लिए आभार व्‍यक्‍त करना चाहता हूं कि आज के इस युवा समारोह के लिए मैंने देश के नौजवानों को आग्रह किया था कि आप मुझे नरेंद्र मोदी एप आप मोबाइल पर उसको download कर सकते हैं। नरेंद्र मोदी एप पर अपने सुझाव भेजिए। मुझे इस बात का गर्व है कि देश के हर कौने से हजारों नौजवानों ने मुझे हजारो सुझाव भेजे। देश का नौजवान कितना जागरूक है और नरेंद्र मोदी एप मेरे लिए एक सरल माध्‍यम बन गया है कि मैं सीधे आपसे जुड़ जाता हूं। मैं उन सभी नौजवानों का अभिनंदन करना चाहता हूं, जिन्‍होंने समय निकाल करके, सोच करके देश के काम आने के लिए अपने विचारों से मुझे लाभान्वित कराया। हजारों नौजवानों ने मुझे सुझाव भेजे, मैं उन सबका आभारी हूं।

26 जनवरी मैंने देश के सामने, देश के नौजवानों के सामने एक विषय रखा है और आग्रह किया है कि हमारे यहां एक चर्चा होनी चाहिए। अधिकार और कर्तव्‍य। भारत के संविधान ने हमें दोनों जिम्‍मेदारियां दी हैं। लेकिन आजादी के बाद ज्‍यादातर हम लोगों की प्राथमिकता अधिकार पर रही है। कर्तव्‍य ज्‍यादातर व्‍यक्तिगत स्‍वभाव से जुड़ गया, समाज स्‍वभाव से छूट गया। कर्तव्‍य सामाजिक स्‍वभाव बनाना है। कुछ लोगों को कर्तव्‍य में रूचि हो, कर्तव्‍य करते रहे इससे देश नहीं चल सकता। सवा सौ करोड़ देशवासियों का कर्तव्‍य का भी स्‍वभाव बनना चाहिए। और अगर एक बार कर्तव्‍य की हवा बन जाती है तो अधिकारों की रक्षा अपने आप हो जाती है। मैं चाहूंगा कि 26 जनवरी को मैंने पिछली मन की बात में इस बार तो कहा, कईयों ने इस बात को आगे बढ़ाया है। आप भी इस बात को आगे बढ़ाएं ऐसी मैं अपेक्षा करता हूं। छत्‍तीसगढ़ का प्‍यार छत्‍तीसगढ़ की मेहमाननवाजी, आप सबको बहुत याद रहेगी। मेरा सौभाग्‍य रहा मुझे छत्‍तीसगढ़ में बहुत लम्‍बे अर्से तक रहने का अवसर मिला है, इसलिए मैं उनके प्‍यार को भली-भांति समझता हूं। उनके स्‍वागत करने की परंपरा को भली-भांति समझता हूं। लेकिन मैं इस बार इसका आनंद नहीं ले पा रहा हूं। क्‍योंकि कुछ जिम्‍मेदारियां यहां भी मेरे सिर पर रहती हैं। लेकिन मैं मन से आपके साथ हूं। इस समारोह की मैं सफलता के लिए शुभकामनाएं देता हूं और देख सकते हैं कि संकटों के बीच में भी कैसी जिंदगी गुजारी जा सकती है। छत्‍तीसगढ़ कुछ वर्षों से नक्‍सलवाद के कारण परेशान है। माओवाद के कारण परेशान है। और मैं नौजवानों को कहता हूं। हमारे हाथ में हुनर होना चाहिए, हत्‍या करने के लिए हमारा हाथ कभी काम नहीं आना चाहिए। यह हाथ हुनर से नए सपनों को संजोने के लिए काम आना चाहिए। यह हाथ किसी के सपनों को समाप्‍त करने के लिए हत्‍या का कारण नहीं बनना चाहिए। छत्‍तीसगढ़ के नौजवानों ने माओवाद की इस भयानकता के बीच भी छत्‍तीसगढ़ को भरपूर बढ़ाने का प्रसास किया है। छत्‍तसीगढ़ को नई ऊंचाईयों पर ले जाने की कोशिश की है। संकटों के बीच भी समाधान के रास्‍ते निकाले जा सकते हैं। संकटों के बीच में भी विकास की यात्रा की जा सकती है। संकटों के बीच भी संकल्‍पों को पूरा किया जा सकता है। यह छत्‍तीसगढ़ से हम अनुभव कर सकते हैं। आज उस धरती में हैं, रायपुर में हैं। आपको प्रेरणा मिलेगी। मेरी आप सबको बहुत-बहुत शुभकामनाएं। और हमारे खेल मंत्री श्रीमान सोनेवाल जी, वो आपके बीच में हैं। बड़े उत्‍साही हैं। जरूर उनका लाभ मिलेगा आपको। आप सबको बहुत-बहुत शुभकामनाएं, बहुत बहुत धन्‍यवाद।

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October 23, 2021
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"પ્રકૃતિ અને આનંદ સિવાય, ગોવા વિકાસનું નવું મોડલ દર્શાવે છે તથા પંચાયતથી પ્રશાસન સુધી વિકાસના સામૂહિક પ્રયાસો અને દ્રઢતાનું પ્રતિબિંબ રજૂ કરે છે"
"ગોવાએ ODF, વીજળી, નળથી જળ, ગરીબોને રાશન જેવી તમામ મહત્ત્વની યોજનાઓમાં 100% સફળતા મેળવી છે"
"સ્વયંપૂર્ણ ગોવા ટીમ ગોવાની નવી ટીમ સ્પિરિટનું પરિણામ છે"
"ગોવામાં વિકાસ પામી રહેલું ઇન્ફ્રાસ્ટ્રક્ચર ખેડૂતોની આવક, પશુપાલકો અને આપણાં માછીમારોની આવક વધારવામાં પણ મદદ કરશે"
"પ્રવાસન કેન્દ્રિત રાજ્યોએ રસીકરણ ઝૂંબેશમાં વિશેષ ઝૂંબેશમાં વિશેષ ધ્યાન પ્રાપ્ત કર્યુ છે અને ગોવાએ તેનાથી મહત્ત્વપૂર્ણ લાભ પ્રાપ્ત કર્યો છે"

आत्मनिर्भर भारताचे सपन, स्वयंपूर्ण गोवा येव-जणे-तल्येन, साकार करपी गोयकारांक येवकार। तुमच्या.सारख्याए धड.पड.करपी, लोकांक लागून, गोंय राज्याचो गरजो, गोयांतच भागपाक सुरू जाल्यात, ही खोशयेची गजाल आसा।

ज्यावेळी सरकारची मदत आणि  जनतेचे परिश्रम एकत्रितपणे काम करतात, त्यावेळी कशा पद्धतीने परिवर्तन घडून येते, आत्मविश्वास कसा दुणावतो, याचा आपण सर्वांनी स्वयंपूर्ण गोव्याच्या लाभार्थींबरोबर चर्चा करताना अनुभव घेतला. गोव्यामध्ये आलेल्या या सार्थक परिवर्तनाचा मार्ग दाखविणारे लोकप्रिय आणि ऊर्जावान मुख्यमंत्री डॉक्टर प्रमोद सावंत, केंद्रीय मंत्रिमंडळातले माझे वरिष्ठ सहयोगी श्रीपाद नाईक, गोव्याचे उपमुख्यमंत्री मनोहर आजगावकर, उपमुख्यमंत्री चंद्रकांत केवलेकर, राज्य सरकारमधले इतर मंत्री, खासदार, आमदार, स्थानिक संस्थांचे सर्व प्रतिनिधी, जिल्हा परिषद सदस्य, पंचायत सदस्य, इतर लोकप्रतिनिधी आणि माझ्या प्रिय गोव्याच्या  बंधू आणि भगिनींनो!!

असे म्हणतात की, गोवा म्हणजे आनंद, गोवा म्हणचे निसर्ग, गोवा म्हणजे पर्यटन, मात्र आज मी असेही म्हणेन - गोवा म्हणजे विकासाचे नवीन मॉडेल! गोवा म्हणजे सामूहिक प्रयत्नांचे प्रतिबिंब. गोवा म्हणजे पंचायतीपासून ते प्रशासनापर्यंत विकासासाठी असलेली एकजूटता!

मित्रांनो,

गेल्या काही वर्षांमध्ये देशाने अभावाच्या स्थितीतून बाहेर पडून आवश्यकता-आकांक्षांची पूर्तता करण्याचे आपले ध्येय बनवले आहे. ज्या मूलभूत सुविधांपासून देशातले नागरिक दशकांपासून वंचित होते, त्या सर्व सुविधा देशवासियांना मिळाव्यात यासाठी सर्वोच्च प्राधान्य दिले आहे. यंदाच्या वर्षी 15 ऑगस्ट रोजी मी लाल किल्ल्यावरून भाषण देताना सांगितले होते की, आपल्याला आता या योजना ‘सॅच्युरेशन’ म्हणजेच अगदी शंभर टक्के लक्ष्यपूर्तीपर्यंत न्यायच्या आहेत. या ध्येयाच्या पूर्तीमध्ये प्रमोद सावंत आणि त्यांच्या टीमच्या नेतृत्वाखाली गोवा अग्रणी भूमिका बजावत आहे.  खुल्या जागेत शौच करण्याच्या पद्धतीमधून भारताला मुक्त करण्याचे लक्ष्य निश्चित केले गेले. गोव्याने हे लक्ष्य अगदी शंभर टक्के गाठले. देशाने प्रत्येक घरामध्ये विजेची जोडणी देण्याचे लक्ष्य निश्चित केले. हे लक्ष्यही गोवा राज्याने पूर्ण केले. प्रत्येक घरामध्ये नळाव्दारे पाणी अभियान सुरू केल्यानंतर गोव्याने सर्वात प्रथम हे काम पूर्ण केले. गरीबांना मोफत अन्नधान्य देण्याच्या कामातही गोव्यामध्ये शंभर टक्के काम करण्यात आले आहे.

 

मित्रांनो,

दोनच दिवसांपूर्वी भारताने लसीच्या 100 कोटी मात्रा देण्याचा एक विराट- विक्रमी, महत्वपूर्ण टप्पा पार केला आहे. यामध्येही गोवा आघाडीवर असून गोव्यातल्या सर्व पात्र म्हणजे अगदी 100 टक्के  लोकांना लसीची पहिली मात्रा देऊन झाली आहे. आता लसीची दुसरी मात्रा  सर्वांनी घ्यावी, हे लक्ष्य शंभर टक्के साध्य करण्यासाठी गोवा आपली शक्ती वापरत आहे.

 

बंधू आणि भगिनींनो,

महिलांच्या सुविधेसाठी आणि त्यांच्या सन्मानासाठी केंद्र सरकारने ज्या योजना बनविल्या आहेत, त्या सर्व योजनांचे कार्य गोव्याच्या भूमीमध्ये यशस्वीपणे पार पाडण्यात आले आहे, इतकेच नाही तर या कामांचा विस्तारही करण्यात येत आहे. या गोष्टीचा मला आनंद होत आहे. मग यामध्ये शौचालयांचे बांधकाम असो, उज्ज्वला गॅस जोडणी असो किंवा मग बँकेमध्ये जन-धन खाती उघडणे असो, गोव्यामध्ये महिलांसाठी आवश्यक सुविधा देण्याचे काम खूप चांगले झाले आहे. या कारणामुळेच कोरोनाच्या लॉकडाऊनमध्ये हजारो भगिनींना मोफत गॅस सिलेंडर मिळू शकले होते. तसेच त्यांच्या बँक खात्यामध्ये पैसेही जमा होवू शकले. घराघरामध्ये आता नळाव्दारे पाणी पोहोचवून गोवा सरकारने भगिनीवर्गाला मोठीच सुविधा करून दिली आहे. आता गोवा सरकार, गृह आधार आणि दीनदयाल विशेष सामाजिक सुरक्षा यासारख्या योजनांच्या माध्यमातून गोव्यातल्या भगिनींचे जीवन आणखी चांगले बनविण्याचे काम करीत आहे.  

बंधू आणि भगिनींनो,

ज्यावेळी कठीण-अवघड काळ असतो, ज्यावेळी आव्हाने समोर असतात,  त्याचवेळी आपल्याकडे खरे किती सामर्थ्य आहे, ही गोष्ट समजते. गेल्या दीड-दोन वर्षांमध्ये गोव्यासमोर शंभर वर्षातून आलेले सर्वात मोठे महामारीचे संकट आले. गोव्याने भीषण चक्रीवादळाचा सामना केला, महापूराचा प्रकोपही झेलला. या आपत्तींमुळे गोव्याच्या पर्यटन क्षेत्रापुढे किती संकटे आली असतील, याची जाणीव मला आहे. मात्र अशी आव्हाने सामोरी आली असतानाही, गोव्याचे सरकार केंद्र सरकारच्या सहकार्यामुळे दुप्पट ताकदीने गोव्यातल्या लोकांना मदत करण्यासाठी कार्यरत आहे. आम्ही गोव्यामध्ये विकास कार्य थांबवू दिली नाहीत. प्रमोद सावंत  आणि त्यांच्या संपूर्ण टीमचे मी अभिनंदन करू इच्छितो. या सर्वांनी मिळून स्वयंपूर्ण गोवा अभियानाला गोव्याच्या विकासाचा आधार बनविले आहे. आता या अभियानाला अधिक वेगवान करण्यासाठी ‘सरकार तुमच्या दारी’ या योजनेचे मोठे पाऊल उचलण्यात आले आहे.

मित्रांनो,

ही गोष्‍ट म्हणजे ‘प्रो पीपल, प्रोअॅक्टिव्ह गव्हर्नन्स’च्या भावनेचा विस्तार आहे. गेल्या सात वर्षांपासून देश या संकल्पनेनुसार पुढे जात आहे. अशाप्रकारे जिथे प्रशासन कार्य केले जाते, तिथे सरकार स्वतःहून नागरिकांकडे जाते आणि त्यांच्या समस्यांवर तोडगा काढते. गोव्याने तर गावपातळीवर, पंचायत स्तरावर, जिल्हा स्तरावर एक चांगले मॉडेल विकसित केले आहे. मला पूर्ण विश्वास आहे की, ज्या प्रकारे केंद्राच्या अनेक अभियानांमध्ये आत्तापर्यंत गोव्याने आपले शंभर टक्के योगदान दिले आहे, आणि त्या योजना यशस्वी केल्या आहेत, तसेच इतर लक्ष्यही सर्वांच्या प्रयत्नांमधून तुम्ही लवकरच पूर्ण करणार आहात, असा मला ठाम विश्वास आहे.

 

मित्रांनो,

मी गोव्याविषयी बोलावे आणि फुटबॉलविषयी बोलायचं नाही, असे होऊच  शकत नाही. फुटबॉलविषयीचे गोवेकरांचे प्रेम खूप काही वेगळेच आहे. फुटबॉलची गोव्यात असलेली ‘क्रेझ’ अगदी वेगळीच आहे. फुटबॉलमध्ये मग ‘डिफेन्स’ असो अथवा ‘फॉरवर्ड’ सर्व काही गोलशी निगडित असते.  कुणाला गोल करण्यापासून वाचवायचं आहे तर कुणाला गोल करायचा आहे. आपआपला गोल ‘साधून घेण्याची’ ही भावना गोव्यामध्ये कधीच कमी नाही. मात्र आधी जी सरकारे होती, त्यांच्यामध्ये संघभावनेचा, एक सकारात्मक वातावरण निर्माण करण्याचा अभाव होता. दीर्घकाळापर्यंत गोव्यामध्ये राजकीय स्वार्थ हा सुशासनावर भारी पडत होता. गोव्यातल्या संमजस लोकांनी इथली राजकीय अस्थिरता संपुष्टात आणून स्थिरता आणली आहे. माझे मित्र स्वर्गीय मनोहर पर्रिकर जी यांनी गोव्यामध्ये जो वेगवान विकास घडवून आणला, गोव्याला ज्या विश्वासाने विकासाच्या आघाडीवर वेगाने नेले, तेच कार्य प्रमोद जी आणि त्यांची टीम संपूर्ण इमानदारीने करीत असल्याने नवीन विक्रम प्रस्थापित होत आहे. आज गोवा नव्या आत्मविश्वासाने पुढे जात आहे. टीम गोव्याच्या या नवीन ‘टीम स्पिरीट’चा परिणाम म्हणजे स्वयंपूर्ण गोव्याचा संकल्प आहे.

 

बंधू आणि भगिनींनो,

गोव्याकडे एक अतिशय समृद्ध ग्रामीण संपदाही आहे. आणि एक आकर्षक नागरी जीवनही आहे. गोव्याकडे शेत-शिवारही आहे आणि नील अर्थव्यवस्थेच्या विकासाच्या असंख्य संधीही आहेत. आत्मनिर्भर भारताच्या निर्माणासाठी जे काही आवश्यक-गरजेचे आहे, ते सर्व काही गोव्याकडे आहे. म्हणूनच गोव्याचा संपूर्ण विकास करण्‍यासाठी  हे डबल इंजिनचे सरकार त्याला प्राधान्य देत आहे.

मित्रहो,

डबल इंजिन सरकार गोव्याच्या ग्रामीण शहरी आणि समुद्र किनाऱ्याशी  निगडीत पायाभूत सुविधांवर विशेष लक्ष पुरवत आहे.

गोव्याचा दुसरा विमानतळ असो, वाहतूक केंद्र म्हणजे लॉजिस्टिक हब असो, भारतातील दुसऱ्या क्रमांकाचा सर्वात मोठा केबल ब्रिज असो किंवा हजारो कोटी रुपये खर्चून तयार केलेला नॅशनल हायवे असो या सगळ्यांमुळे गोव्याच्या राष्ट्रीय आणि आंतरराष्ट्रीय कनेक्टिव्हिटीला नवीन दिशा मिळणार आहेत‌.

 

बंधू-भगिनींनो,

गोव्यात विकसित होत असलेल्या पायाभूत सुविधा या शेतकरी, पशुपालक आणि आमच्या मच्छिमार बांधवांची कमाई वाढण्यासाठी उपयुक्त ठरतील. ग्रामीण पायाभूत सुविधांच्या आधुनिकीकरणासाठी यावर्षी गोव्याला देण्यात येणाऱ्या निधीत पाचपट वाढ करण्यात आली आहे.

ग्रामीण पायाभूत सुविधांच्या विकासासाठी केंद्र सरकारने 500 कोटी रुपये गोव्यासाठी मंजूर केले आहेत. त्यामुळे कृषी आणि पशुपालन क्षेत्रात गोव्यामध्ये जे काम होत आहे त्याला वेग येईल.

 

बंधू-भगिनींनो,

शेतकरी आणि मच्छीमारांना बँकेशी तसंच बाजारपेठेशी जोडण्यासाठी ज्या ज्या योजना केंद्र सरकारने आखल्या आहेत त्या लोकांपर्यंत पोचण्यावर गोवा सरकार काम करत आहे. गोव्यामध्ये छोट्या शेतकऱ्यांची संख्या जास्त आहे. मग ते फळे ,भाज्या विकणारे असोत वा मासेमारीच्या व्यवसायातील असोत. या छोट्या शेतकऱ्यांना, पशुपालन करणाऱ्यांना किंवा मच्छिमारांना बँकेकडून कर्ज मिळवणे म्हणजे एक मोठेच आव्हान होते. त्यांना होणारा त्रास लक्षात घेऊन किसान क्रेडिट कार्ड या योजनेचा विस्तार केला गेला आहे.

छोट्या शेतकऱ्यांना तत्परतेने किसान क्रेडिट कार्ड दिले जात आहे तर दुसरीकडे पशुपालन करणाऱ्यांना तसेच मच्छिमारांना यात प्रथमच सामावून घेतले गेले आहे.गोव्यासुद्धा अगदी थोड्या काळात शेकडो नवीन किसान क्रेडिट कार्ड दिली गेली आहेत आणि करोडो रुपयांची मदत हे दिली गेली आहे. पंतप्रधान शेतकरी सम्मान निधीची  गोव्यातल्या शेतकऱ्यांना खूप मदत झाली आहे. अशाच प्रयत्नांमुळे अनेक नवीन साथीदार सुद्धा शेतीकडे वळले आहेत. एका वर्षातच गोव्यामध्ये फळांचे आणि  भाज्यांचे उत्पादन जवळपास 40 टक्‍क्‍यांनी वाढले. दूध उत्पादनाच्या  प्रमाणातही  चाळीस टक्‍क्‍यांहूनअधिक  वाढ झाली  आहे.

 

मित्रहो,

अन्न प्रक्रिया केंद्र ही स्वावलंबी गोव्याची मोठी ताकत बनणार आहे. विशेषतः मत्स्य प्रक्रिया या क्षेत्रात गोवा भारताची ताकद बनवू शकतो. भारत खूप वर्षांपूर्वीपासून मासे निर्यात करत आला आहे.भारतातील मासे पूर्व आशियाई देशांमध्ये प्रक्रिया झाल्यानंतर जगभरातील बाजारामध्ये पोचतात. ही परिस्थिती बदलण्यासाठी मत्स्य उत्पादन क्षेत्राला पहिल्यांदाच मोठ्या स्तरावर मदत दिली जात आहे. माशांचचा व्यापार किंवा व्यवहारांसाठी विशेष मंत्रालय ते मच्छीमारांच्या होड्यांचे आधुनिकीकरण अशा प्रत्येक स्तरावर प्रोत्साहन दिलं जात आहे. प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा या योजनेअंतर्गत गोव्यातील मच्छिमारांना खूप मदत मिळत आहे.

 

मित्रहो,

गोव्याचे पर्यावरण आणि गोव्याचा पर्यटन या दोन्हीचा विकास भारताच्या विकासाशी थेट जोडलेला आहे. गोवा हे भारताच्या पर्यटन क्षेत्राचे एक महत्त्वाचे केंद्र आहे. वेगाने वाढणाऱ्या भारताच्या अर्थव्यवस्थेत पर्यटन आणि अतिथी क्षेत्राचा वाटा सातत्याने वाढत आहे. साहजिकच यात गोव्याचा वाटा खूप मोठा आहे . गेल्या काही वर्षांमध्ये पर्यटन आणि अतिथी क्षेत्रांना वेग देण्याच्या दृष्टीने प्रत्येक प्रकारे मदत दिली जात आहे. विजा ऑन अरायवल ही सुविधा व्यापक प्रमाणावर राबवली जात आहे. कनेक्टिविटीशिवाय पर्यटनाशी संलग्न पायाभूत सुविधा विकासासाठी केंद्र सरकारने गोव्याला करोडो रुपयांची मदत दिली आहे.

 

मित्रहो,

भारतातील लसीकरण मोहिमेतसुद्धा गोव्या सह पर्यटनाचे केंद्र असलेल्या राज्यांना विशेष प्रोत्साहन दिले गेले. यामध्ये गोव्यालाही मोठा फायदा मिळाला. गोव्याने दिवस-रात्र प्रयत्न करून राज्यातल्या सर्व पात्र लोकांना लसींची पहिली मात्रा दिली. इतर राज्यांनीही विशेष प्रोत्साहन दिले. आता आपल्या देशानेही लसीकरणाचा 100 कोटींचा आकडा ओलांडला आहे . यामुळे देशवासियांचा, पर्यटकांचा विश्वास वाढला आहे.

आता आपण दिवाळी ख्रिसमस आणि नववर्षाच्या तयारीत गुंतलेला आहात. अशावेळी सणांच्या आणि सुट्ट्यांच्या या या मोसमात गोव्यातील पर्यटन क्षेत्रात नवीन उर्जा दिसायला लागणार आहे. गोव्यात स्वदेशी आणि विदेशी दोन्ही पर्यटकाची हालचाल नक्कीच वाढणार आहे. गोव्याच्या पर्यटन उद्योगासाठी हे शुभकारक आहे.

 

बंधू-भगिनींनो,

जेव्हा गोवा विकासाच्या प्रत्येक शक्यतेचा शंभर टक्के उपयोग करेल तेव्हाच गोवा स्वयंपूर्ण बनेल. स्वयंपूर्ण गोवा म्हणजे सर्वसामान्य लोकांच्या आकांक्षा आणि अपेक्षांना प्रत्यक्षात आणण्याचा संकल्प आहे स्वयंपूर्ण गोवा म्हणजे माता-भगिनी आणि लेकींच्‍या आरोग्य सुविधा सुरक्षा आणि सन्मानाची खात्री आहे.

स्वयंपूर्ण गोव्यात तरुणांसाठी रोजगार आणि स्वयंरोजगाराच्या संधी आहेत, गोव्याच्या समृद्ध भविष्याची झलक आहे. हा केवळ पाच महिन्याचा किंवा पाच वर्षांचा कार्यक्रम नाही , तर येत्या पंचवीस वर्षांसाठी आखलेल्या दूरदर्शीपणाचा पहिला टप्पा आहे. या टप्प्यापर्यंत पोहोचण्यासाठी गोव्यातील प्रत्येकाने आपल्याला याच्याशी जोडून घेतले पाहिजे. म्हणून गोव्याला डबल इंजिन विकासासाठी सातत्य आवश्यक आहे

गोव्याला सध्या आहे तसे स्पष्ट धोरण हवे आहे. आतासारखे स्थिर सरकार हवे आहे. आणि आता आहे तसे ऊर्जावान नेतृत्व हवे आहे. संपूर्ण गोव्यातून मिळालेल्या प्रचंड आशीर्वादाने आम्ही स्वयंपूर्ण गोवा हा संकल्प पूर्ण करू या विश्वासासौबतच आपल्याला खूप खूप शुभेच्छा.

खूप खूप धन्यवाद!