Swami Vivekananda an inspiration for all youth and a shining example of how much could be accomplished in a short time-span: PM Modi 
Earlier people were inspired to die for the nation. Today it is about living for the nation & doing something for India: PM
The 125 crore people are united in an objective of taking the nation to new highs: PM Narendra Modi
Entire world is looking at India with so much hope because India is a land of opportunities: PM Modi
A youth is one who works towards his future goals, unmindful of the past: Prime Minister Modi
Without peace, unity and harmony, development cannot have any meaning: PM Narendra Modi
India has shown the world, that a land of such diversity, has a unique spirit to stay together: PM Modi
India's objective is to give youth the opportunities to make this century an Indian century: PM
If India can be a manufacturing hub, it is not because we have a market or raw materials...it is because we have skilled youngsters: PM
“Dignity of labour” must be inculcated among people: PM Narendra Modi
Development is about transforming the lives of the poor: Prime Minister Modi

भारत के कौने –कौन से आए मेरे नौजवान साथियों।

आज 12 जनवरी स्‍वामी विवेकानंद जी की जन्‍म जयंती हम युवा दिवस के रूप में मनाते हैं। इस देश में दो महापुरूषों को इस देश का युवा विशेष रूप से नमन करता रहा है। अगर कोई हमारे सामने भगत सिंह का नाम लें या कोई हमें स्‍वामी विवेकानंद की याद दिला दें तो उसी पल हमारा माथा उन महापुरूषों के चरणें में झुक जाता है। बहुत ही छोटी आयु में कोई क्‍या कर सकता है। अगर जीवन में संकल्‍प का सामर्थ्‍य हो, संकल्‍प के लिए समर्पित भाव हो और जीवन आहूत करने की अदम्‍य इच्‍छा हो, तो व्‍यक्ति के लिए उम्र कोई मायना नहीं रखती। मेरे सामने देश के हजारों युवक बैठे हैं, वो हिंदुस्‍तान के कौने-कौने से आए हैं। उनका लालन-पालन अलग-अलग हुआ है। उनकी खान-पान की आदतें अलग है, उनकी बोली अलग है, उनका पहनाव अलग है, लेकिन उसके बावजूद भी ये सारे नौजवान इस एक बात से जुड़े हुए हैं। उनके मन मंदिर में एक मंत्र लगातार गूंजता रहा है। और वह ही हम सब की प्रेरणा है। और वो मंत्र क्‍या है? आजादी के आंदोलन के समय जिस वंदे मारतरम की गूंज ने कश्‍मीर से कन्‍या कुमारी अटक से कटक पूरे हिंदुस्‍तान को आजादी के आंदोलन में पिरो दिया है। एक मंत्र होता है जो जीवन में कुछ कर दिखाने की प्रेरणा बन जाता है। आज वही मंत्र चाहे उसको भारत मां की जय के रूप में कहते हो, चाहे वंदे मातरम के रूप में कहते हो। पहले मां भारती को गुलामी की जंजीरों से मुक्‍त कराने के लिए वो हमारी ताकत बन गया था। और आज आजाद हिंदुस्‍तान में भारत को नई ऊचाईयों पर ले जाने के लिए, विकास की नई ऊंचाईयों को सिद्ध करने के लिए, समस्‍याओं से मुक्ति दिलाने के लिए, हिंदुस्‍तान के गांव, गरीब किसान, मजदूर उनके जीवन में बदलाव लाने के लिए यही मंत्र हमारी प्रेरणा बनता है। पहले देश के लिए मरने की प्रेरणा देता था। आज वही मंत्र हमें देश के लिए जीने की प्रेरणा देता है। और आप सब नौजवान अपने लिए नहीं, देश के लिए कुछ करने के इरादे से किसी न किसी संकल्‍प से बंधे हुए हैं। आप कुछ करना चाहते हैं। और यह देश प्रगति तब करता है जब सवा सौ करोड़ देशवासी किसी न किसी संकल्‍प से बंधे हो। उस संकल्‍प की पूर्ति के लिए कुछ कदम चलने के लिए प्रयासरत हो। मंजिल को पाने के लिए अविरत कोशिश करते हो, तो देश अपने आप उस मंजिलों को पार कर जाता है।

आज पूरे विश्‍व का परिवेश देखे पूरा विश्‍व आज भारत की तरफ एक बड़ी आशा भरी नजर से देख रहा है। क्‍यों ? इसलिए कि हिंदुस्‍तान एक संभावनाओं का देश है। आपार अवसर जहां इंतजार कर रहे हैं। दुनिया इसलिए हिंदुस्‍तान की तरफ देख रही है, क्‍योंकि आज हिंदुस्‍तान विश्‍व का सबसे युवा देश है। 65 प्रतिशत जनसंख्‍या 35 से कम आयु की हो, वो देश कितना सौभाग्‍यशाली है कि जिसके पास कोटि-कोटि युवा लोग हैं। और जहां युवा होता है, वहां संकल्‍पों की कोई मर्यादाएँ नहीं होतीं, सीमाएँ नहीं होतीं। कभी-कभार हमारे देश में युवा की परिभाषा को लेकर अलग-अलग हमें बातें सुनने को मिलती है। शासत्रों से ले करके अब तक युवा की परिभाषा बहुत हो चुकी है। हर किसी का अपना नजरिया होता है। कुछ लोगों के लिए उम्र का दायरा यह युवा की पहचान के रूप में माना जाता है। मैं कभी-कभी सोचता हूं कि युवा यह परिस्थिति का नाम नहीं है। युवा यह मनस्थिति का नाम है। मनस्थिति है, जो युवा की परिचायक होती है। जब कोई व्‍यक्ति अपने बीते हुए पल को बार-बार याद करता है, दोहराता रहता है तो मैं यह सीधा-सीधा अर्थ निकालता हूं कि वो अपनी युववाणी खो चुका है। वो बुढ़ापे की आरे चल चुका है। लेकिन जो बीते हुए कल को बार-बार दोहराने की बजाय आने वाले कल के सपने संजोता रहता है, वो उसके लिए मेरा मन हमेशा कहता है वो सच्‍चे अर्थ में युवा है। अगर आप अपने आप को युवा मानते हो तो युवा वो है जो बीते हुए कल की बातों को दोहरा करके अपने समय को बर्बाद नहीं करता है, लेकिन जो आने वाले सपनों को संजोने के लिए पल-पल प्रयास करता है और हर सपने को साकार करने के लिए अपने आप को खपा देता है।

देशभर से आए हुए युवा उन सपनों का सम्‍पुट है। हम देशभर के लोग विविधताओं के बीच यहां बैठे हैं, क्‍या कारण है। वो कौन सा कारण हमें जोड़ रहा है। सद्भावना यह अपने आप में एक बहुत बड़ी शक्ति होती है। क्‍या हमारे अंदर एक दूसरे के प्रति आदर-भाव न होता, सद्भाव न होता। अपनेपन का कोई नाता न होता, तो हम इतनी अपने आप से जुड़ सकते? भारत विकास करना चाहता है और इस बार आपकी इस युवा परिषद का विषय भी बड़ा महत्‍वपूर्ण है। एक तरफ व्‍यक्ति का, उसके सामर्थ्‍य का और युवा से जुड़े हुए विषय को ले करके आया है उसका एक पहलू है skill, दूसरा है भारत का क्‍या हो तो कहते है विकास। और तीसरी बात आपने कही है कैसे हो तो वो है सद्भाव। क्‍या, क्‍यों, कैसे? इस बात को ले करके इस समारोह को आप चार दिन चर्चा के लिए आज प्रारंभ कर रहे हैं। अगर हमारे देश में एकता नहीं होगी, जन-जन के प्रति सद्भाव नहीं होगा, आदर भाव नहीं होगा, दूसरे की परंपराएं, दूसरे के विचार, उसके प्रति अगर सम्‍मान का भाव नहीं होगा, तो शायद भारत को प्रगति में रुकावटें आएंगी, विकास में रुकावटें आएंगी और इसलिए समय की मांग है और हर नौजवान के जीवन का एक व्‍यवहार है कि हम शांति, एकता, सद्भावना, जो भारत जैसे विविधताओं से भरे हुए देश के लिए प्रगति की गारंटी है। भारत के पास सब कुछ हो, धन हो, दौलत हो, बेशुमार पैसे हों, हर नौजवान को नौकरी हो, हर परिवार में सुख और सम्‍पन्‍नता हो, लेकिन, लेकिन अगर देश में शांति, एकता और सद्भावना नहीं होगी, तो वो सारी सम्‍पत्ति किसी के काम नहीं आएगी। न वो देश का गौरव बढ़ाएगी, न आने वाली पीढि़यों के लिए भविष्‍य का कोई रास्‍ता बनाएगी। और इसलिए हम विकास कितना ही करें, कितनी ही ऊंचाइयों को पार करें, लेकिन शांति, एकता और सद्भावना, ये भारत की पहली आवश्‍यकता रहती है।

और भारत ने दुनिया को दिखाया है कि जिस देश के पास सैंकड़ों बोलियां हो, अनेक भाषाएं हों, अनेक परम्‍पराएं हों, अनगिनत विविधिताएं हों, उसके बाद भी साथ जीने-मरने का स्‍वभाव हो, ये हमारी बहुत बड़ी विरासत हैं जो हमारे पूर्वजों ने हमें दी हैं, स्‍वामी विवेकानंद जैसे महापुरुषों ने दी हैं और इसे हमने संजो के रखना है।

वेद से विवेकानंद तक और उपनिषद से उपग्रह तक हम इसी परम्‍परा में पले-बढ़े हैं। उस परम्‍पराओं को बार, बार, बार, बार स्‍मरण करते हुए, संजोते हुए भारत को एकता के सूत्र में बांधने के लिए सद्भावना को सेतु उसको हम जितना बल दें, देते रहना होगा।

उसी प्रकार से अगर व्‍यक्ति के जीवन में सामर्थ्‍य नहीं होगा तो राष्‍ट्र के जीवन में सामर्थ्‍य कहां से आएगा? 21वीं सदी एशिया की सदी है कहते हैं, 21वीं सदी हिदुस्‍तान की सदी बन सकती है कैसे? जब हम, हमारे देश के युवा शक्ति के समार्थ्‍य को पहचानेंगे। विकास यात्रा में उसको पिरोयें और विकास की ऊंचाइयों को पार करने के लिए उसे हम अपना भागीदार बना लें। तब जा करके, तब जा करके हम राष्‍ट्र के सपनों को पूरा कर सकते हैं। अनेक मार्ग हैं, उसमें एक महत्‍वपूर्ण मार्ग है हुनर, skill development, हमारे देश के नौजवान के हाथ में सिर्फ कागज और कलम होगी तो देश आगे नहीं बढ़ सकता है। अपार ज्ञान का भंडार तो हो ही हो, कागज और कलम का सामर्थ्‍य तो हो ही हो, लेकिन देश को आगे बढ़ने के लिए हुनर चाहिए, skill चाहिए, बदले हुए युग में जहां technology एक महत्‍वपूर्ण रोल अदा कर रही है, भारत के एक manufacturing hub बनने की संभावना है। अगर भारत दुनिया का एक manufacturing hub बन सकता है तो उसका पहला कारण ये नहीं है कि हमारे पास raw material है, पहला कारण ये नहीं है कि हमारे पास market है, पहला कारण ये नहीं है कि हमारी आवश्‍यकता है, पहला कारण ये है कि हमारे देश के पास, नौजवानों के पास अगर हुनर है तो वो सबसे बड़ी ताकत है। और इसलिए हमारी सरकार ने skill को, हुनर को बहुत महत्‍व दिया है।

देश की आजादी के बाद पहली बार skill development एक अलग ministry बनाई गई, skill development की अलग policy बनाई गई, skill development के लिए अलग बजट बनाया गया और हिन्‍दुस्‍तान में एक ऐसी जाल बिछाने की कोशिश है कि गरीब से गरीब व्‍यक्ति, अनपढ़ से अनपढ़ व्‍यक्ति भी अपने जीवन में कुछ करने के लिए इच्‍छा करता है तो उसको सीखने का अवसर मिलना चाहिए, उसके हाथ में कोई हुनर होना चाहिए और वो हुनर को प्राप्‍त कराने के लिए सरकार पुरजोर प्रयास कर रही है।

हमारे छत्‍तीसगढ़ में रमन सिंह जी ने तो skill को एक अधिकार के रूप में develop किया है। उन्‍होंने कानूनी व्‍यवस्‍था का प्रयास किया है। मैं पिछली बार जब छत्‍तीसगढ़ आया था तो skill development किस प्रकार के उन्‍होंने काम की रचनाएं की हैं उसको मैंने अपनी आंखों से देखा। जहां नक्‍सलवाद, नौजवानों को गुमराह करने के लिए भरपूर कोशिश करता है, उसी इलाके में, उसकी छाती पर, skill development के द्वारा सपनों को संजोने के प्रयास छत्‍तीसगढ़ में हो रहे हैं। ये बधाई के पात्र हैं। और जब आप छत्‍तीसगढ़ में हैं तो आपको बहुत सी बातें सुनने को मिलेंगी कि नौजवानों के विकास के लिए क्‍या-क्‍या वहां हो रहा है।

मैं ये ही आपसे कहना चाहता हूं कि हम भी इस बात को ले करके आगे बढ़ना चाहते हैं कि देश में skill development को कैसे बल दिया। skill development से मैं एक बात आप नौजवानों से कहना चाहता हूं, दुर्भाग्‍य से हमारे देश में हम लोगों ने एक ऐसी मनस्थिति बना ली है जो दिमाग से काम करता है वो बड़ा है और जो हाथ से काम करता है वो छोटा है। इस मनस्थिति को बदलना पड़ेगा। हम हमारी मां का इतना सम्‍मान करते हैं, मां का आदर करते हैं, हमारी मां कहा है। बहुत कम लोग होंगे जिसकी मां को दिमाग से काम करने का अवसर मिला है। बाकी सब लोग हम ऐसे हैं जिनकी मां हाथ से काम करती है, कपड़े धेाती हैं, खाना पकाती है, झाड़ू लगाती है, और उस मां का हम सम्‍मान करते हैं, मां का गौरव करते हैं। लेकिन समाज में हाथ से काम करने वाला हमें छोटा लगता है, बढि़या कपड़े पहन करके टेबल-कुर्सी पर बैठा हुआ बाबू हमें बड़ा लगता है, लेकिन हमें कोई ऑटो-रिक्‍शा का ड्राइवर हमें छोटा लगता है। कोई plumber, कोई mechanic , कोई turner, कोई fitter, कोई wireman, कोई फूलों का गुलदस्‍ता बनाने वाला, ये हमें छोटे लगते हैं, हमारी ये मानसिकता हमें बदलनी होगी। हमें उनके प्रति भी सद्भाव पैदा करना होगा और सद्भाव तब होगा जब शुरूआत समभाव से होगी। मेरे में और उसमें कोई अन्‍तर नहीं है, हमारे और उसके बीच में एक समभाव है। जब समभाव होगा तो सद्भाव अपने-आप पनपने लग जाएगा और इसलिए white caller job and blue caller job, ये शब्‍द हमारे यहां चल रहे हैं। जो अपने पैरों पर खड़ा है। जो अपने पैरों पर खड़ा है। जो अपने हाथ की ताकत से अपनी जिंदगी बनाता है। जिसकी उंगलियों में नया करने का दम होता है। उससे बड़ा गौरव करने के लिए क्‍या हो सकता है। और इसलिए हम skill development पर बल देना चाहते हैं। हम समाज में एक मनोवैज्ञानिक बदलाव लाना चाहते हैं। कोई काम छोटा नहीं होता और इसलिए हमने एक movement चलाया है। श्रम एव जयते। dignity of labor हम बल दे रहे हैं उस पर और इसलिए कभी-कभी क्‍या लगता है। कितना ही गरीब व्‍यक्ति हो, उसके मन में मनोवैज्ञानिक प्रभाव पैदा हो गया है कि जब तक बेटा graduate नहीं होता, मां-बाप को भी संकोच होता है कि कोई रिश्‍तेदारों को परिचय क्‍या करवाएं। और इसलिए उसको लगता है कि graduate होना बहुत अनिवार्य है। लेकिन क्‍या सातवीं कक्षा पास, 10वीं कक्षा पास बेटा ITI में गया हो। और Technically बड़ा सामर्थ्‍यवान हो तो उनको संकोच होता है, परिचय करवाने में। यह psychology को बदलना है। यह आवश्‍यक नहीं है कि हमारे पास graduate होने का प्रमाण पत्र हो और बेरोजगारी की जिंदगी हो। हम सातवीं क्‍यों न पास हो, 10वीं पास क्‍यों न हो, हमारे हाथ में हुनर होना चाहिए और अपने पसीने से पैसों को पैदा करने की ताकत होनी चाहिए। ऐसे समाज की अवस्‍था होनी चाहिए और इसलिए नौजवानों में बल देने का प्रयास हम कर रहे हैं। हम विकास की ओर जाना चाहते हैं। और विकास का मेरा सीधा-सीधा मतलब है। देश के गरीबों की जिंदगी में बदलाव, हिंदुस्‍तान के गावों की जिंदगी में बदलाव। गांव में अच्‍छी शिक्षा हो, गांव में अस्‍पताल हो, बच्‍चों को पढ़ने के लिए अच्‍छा टीचर हो। बूढ़े अगर बीमार हैं तो अच्‍छा डॉक्‍टर हो। सस्‍ती दवाइयां हो, रहने के लिए अच्‍छा घर हो। गांव में आने-आने के लिए अच्‍छे रास्‍ते हो, पीने के लिए शुद्ध पानी हो। आजादी के इतने सालों के बाद भी हम इसको पूरा नहीं कर पाए हैं और उसको पूरा करना हमारा एक दायित्‍व है। और विकास, यही विकास है। विकास यानी यह नहीं है कि हम कितने बड़े-बड़े भवन बनाते हैं। और कितनी बड़ी संख्‍या में बाबूओं को तैयार करते हैं। और इसलिए हमारा विकास का मॉडल सामान्‍य मानव की जिंदगी में बदलाव लाना है। और सामान्‍य मानव की जिंदगी में बदलाव लाने के लिए हमने skill development को महत्‍व दिया है।

आने वाले दिनों में चार दिन के बाद 16 तारीख को हमें एक कार्यक्रम को लॉन्‍ज कर रहे हैं – Startup India Standup India हमारे देश के नौजवानों के पास कल्‍पकता के वो धनी है, अनेक नई चीजों की उनके पास सोच है, समस्‍याओं के समाधान के लिए वो रास्‍ते खोजते हैं। हमारे यहां गांव में हमने देखा होगा खेत में काम करने वाला व्‍यक्ति भी अपने आप Technology develop कर देता है और उस Technology से अपना काम कर लेता है। अपनी एक ही मोटर साइकिल होगी, उस मोटरसाइकिल से दस प्रकार के काम लेना गांव का आदमी जानता है। इसका मतलब कि हमारे पास innovative सोच, innovation यह भारत के पास हैं। लेकिन उसे प्रतिष्‍ठा कैसे मिले, पुरस्‍कार कैसे मिले, प्रोत्‍साहन कैसे मिले, आगे बढ़ने के लिए रास्‍ता कैसे मिले। उस दिशा में सरकार एक गंभीरता से सोच करके उस योजना को लागू कर रही है। 16 तारीख को जब यह बड़ा कार्यक्रम होगा आप भी अपने-अपने इलाके में कहीं पर वीडियो कॉनफ्रेंस के द्वारा अगर इस कार्यक्रम में शरीक होते हैं, तो आपने शरीक होने का प्रयास करना चाहिए। और skill development का next stage होता है Startup India उसी प्रकार से सरकार ने मुद्रा योजना घोषित की है। प्रधानमंत्री मुद्रा योजना।

हमारे देश में बहुत लोग हैं जिनके पास कुछ करने की इच्‍छा है। लेकिन पैसों के आभाव में कर नहीं पाते। वो unfunded है। बैंकों के दरवाजे उनके लिए खुले नहीं थे। हमने बदलाव लाया और बैंकों के दरवाजों को खोल दिया।

बैंकों को, दरवाजों को खोल करके मुद्रा योजना के तहत उन नौजवानों को पैसे देने का प्रयास शुरू किया है और मुझ खुशी है कि बहुत ही कम समय में ये जो योजना बनाई गई, प्रधानमंत्री मुद्रा योजना, करीब-करीब दो करोड़ लोगों को बैंक से बिना कोई गारंटी, पैसे दिए गए। इतने कम समय में बैंकों के द्वारा दो करोड़ लोगों को पैसे मिल रहा है और करीब-करीब 80 हजार करोड़ रुपये नौजवानों के हाथ में रख दिए हैं। नौजवानों पर मेरा भरोसा है। देश की युवा शक्ति पर भरोसा है। देश के सपने अगर कहीं पर निवास करते हैं तो देश के युवा दिलों में रहते हैं। और इसलिए उस पर हमने ध्‍यान केंद्रित किया है। मैं चाहता हूं कि जो लोग कुछ कर गुजरना चाहते हैं, वे नौकरी की तलाश क्‍यों करें, अपने पैरों पर खड़े क्‍यों न हों। मैं नहीं चाहता हूं मेरे देश का नौजवान job seeker बने, मैं चाहता हूं मेरे देश का नौजवान job creator बने। मैं ऐसी जिंदगी जिऊंगा कि दो-चार और पांच लोगों को मैं कोई न कोई रोजगार दूंगा, ये भी हमारा सपना होना चाहिए। मैं रोजगार के लिए तड़पने वाला नौजवान नहीं हो सकता हूं, मैं रोजगार देने वाला एक साहसिक नौजवान हो सकता हूं। और ये ही तो जिंदगी का लक्ष्‍य होना चाहिए कि मैं ओरों के लिए कुछ कर सकता हूं। और एक बार ये सपना ले करके चलोगे तो कर भी पाओगे। और इसलिए आप अगर उस बात को ले करके चलते हैं तो मेरा आपसे अनुरोध है, मैं आपको विश्‍वास दिलाना चाहता हूं, मैं आपके साथ हूं। ये सरकार आपके साथ है, ये पूरा हिन्‍दुस्‍तान आपके साथ है। आप उस लिए सपने संजो करके ले करके निकलिए। और इसीलिए skill development का अपना एक महत्‍व है, start-up India, stand up India का महत्‍व है, प्रधानमंत्री मुद्रा योजना का महत्‍व है।

मैंने अभी एक स्‍वच्‍छता का अभियान चलाया है। 15 अगस्‍त को मैंने लालकिले से कहा था, लेकिन मैं आज गर्व से कह सकता हूं कि वो स्‍वच्‍छता अभियान किसी प्रधानमंत्री का अभियान नहीं है, वो नरेंद्र मोदी का अभियान नहीं है। देश के हर नागरिक ने इसको अपना बना लिया है। हर कोई उसमें कुछ न कुछ करना चाहता है। अभी मैंने कहा 26 जनवरी को हमारे महापुरुषों के जितने statue हैं, उसकी सफाई एक नागरिक के नाते हम क्‍यों न करें? और मेरे पास खबरें हैं कि देश भर में इतने नौजवान आगे आए हैं, इतने स्‍कूल कॉलेज आगे आए हैं, इतने संगठन आगे आए हैं, even मुझे बताया गया नेहरू युवा केंद्र हो, NCC हो, NSS हो, ये सब लोग मैदान में आए हैं। सबने तय कर लिया है कि अब हमारे गांव में महापुरुषों के statue और वो परिसर हम गंदा नहीं रहने देंगे। कुछ लोगों ने तो 26 जनवरी का भी इंतजार नहीं किया है और already काम शुरू कर दिया है। यही तो देश की ताकत होती है। लेकिन पहला एक समय था, हम सब देखते थे हां ये महापुरुष की प्रतिमा है, फिर बात भी करते देखो यार कितना गंदा है, कोई संभालता नहीं है। आज, आज हर कोई चर्चा करता है, यार ये हमारे गांव के अंदर ये छह महापुरुषों के पुतले हैं उसकी सफाई हम करेंगे। एक नया माहौल बना है। नेहरू युवा केंद्र के और NSS के नौजवानों ने इसका बीड़ा उठाया है। मुझे विश्‍वास है बहुत बड़ी सफलता मिलेगी।

इस बार आप पिछले करीब 20 साल से ये समागम करते आए हैं, मेरी आपसे आग्रह है, मेरा आपसे अनुरोध है, इस बार जाने से पहले आप 2019 का कोई संकल्‍प ले करके जा सकते हैं क्‍या और 2019 तक हम इतना करेंगे। मैं 2019 इसलिए कह रहा हूं कि 2019 महात्‍मा गांधी की 150वीं जयंती है। महात्‍मा गांधी को स्‍वच्‍छता बहुत पसंद थी। 2019 तक का हमारा कोई time table बना करके हम जा सकते हैं क्‍या। और हम हर महीने उसका लेखा-जोखा लें, हिसाबा-किताब करें, संकल्‍प तय करें, योजना बनाएं, रोडमैप बनाएं और आंखों को दिखने वाला परिवर्तन ला करके रहें और दूसरा सपना 2022 का हम लें।

एक 2019 का हमारा रोडमैप और दूसरा 2022 का रोडमैप हम लें। 2022 इसलिए कि भारत की आजादी के 75 साल हो रहे हैं। हिंदुस्‍तान की आजादी के 75 साल हम कैसे मनाएंगे। अभी से हम कैसी तैयारियां करेंगे। हम अपने आप को उसके लिए उसको कैसे तैयार करेंगे। हमारी अपनी संस्था हो, हमारा परिवार हो, हम व्‍यक्ति हो, हम खुद क्‍या कर सकते हैं। इस पर हम सोचते हैं। और इसलिए रायपुर से आप जब निकले तब 2019 और 2022 कोई न कोई लक्ष्‍य निर्धारित करके उसका रोडमैप तय करके निकलिए । उसके लिए कौन समय देगा, कितने घंटे देगा। यह संकल्‍प ले करके चलिए। उसी प्रकार से मैं विशेष रूप से नौजवानों का एक बात के लिए आभार व्‍यक्‍त करना चाहता हूं कि आज के इस युवा समारोह के लिए मैंने देश के नौजवानों को आग्रह किया था कि आप मुझे नरेंद्र मोदी एप आप मोबाइल पर उसको download कर सकते हैं। नरेंद्र मोदी एप पर अपने सुझाव भेजिए। मुझे इस बात का गर्व है कि देश के हर कौने से हजारों नौजवानों ने मुझे हजारो सुझाव भेजे। देश का नौजवान कितना जागरूक है और नरेंद्र मोदी एप मेरे लिए एक सरल माध्‍यम बन गया है कि मैं सीधे आपसे जुड़ जाता हूं। मैं उन सभी नौजवानों का अभिनंदन करना चाहता हूं, जिन्‍होंने समय निकाल करके, सोच करके देश के काम आने के लिए अपने विचारों से मुझे लाभान्वित कराया। हजारों नौजवानों ने मुझे सुझाव भेजे, मैं उन सबका आभारी हूं।

26 जनवरी मैंने देश के सामने, देश के नौजवानों के सामने एक विषय रखा है और आग्रह किया है कि हमारे यहां एक चर्चा होनी चाहिए। अधिकार और कर्तव्‍य। भारत के संविधान ने हमें दोनों जिम्‍मेदारियां दी हैं। लेकिन आजादी के बाद ज्‍यादातर हम लोगों की प्राथमिकता अधिकार पर रही है। कर्तव्‍य ज्‍यादातर व्‍यक्तिगत स्‍वभाव से जुड़ गया, समाज स्‍वभाव से छूट गया। कर्तव्‍य सामाजिक स्‍वभाव बनाना है। कुछ लोगों को कर्तव्‍य में रूचि हो, कर्तव्‍य करते रहे इससे देश नहीं चल सकता। सवा सौ करोड़ देशवासियों का कर्तव्‍य का भी स्‍वभाव बनना चाहिए। और अगर एक बार कर्तव्‍य की हवा बन जाती है तो अधिकारों की रक्षा अपने आप हो जाती है। मैं चाहूंगा कि 26 जनवरी को मैंने पिछली मन की बात में इस बार तो कहा, कईयों ने इस बात को आगे बढ़ाया है। आप भी इस बात को आगे बढ़ाएं ऐसी मैं अपेक्षा करता हूं। छत्‍तीसगढ़ का प्‍यार छत्‍तीसगढ़ की मेहमाननवाजी, आप सबको बहुत याद रहेगी। मेरा सौभाग्‍य रहा मुझे छत्‍तीसगढ़ में बहुत लम्‍बे अर्से तक रहने का अवसर मिला है, इसलिए मैं उनके प्‍यार को भली-भांति समझता हूं। उनके स्‍वागत करने की परंपरा को भली-भांति समझता हूं। लेकिन मैं इस बार इसका आनंद नहीं ले पा रहा हूं। क्‍योंकि कुछ जिम्‍मेदारियां यहां भी मेरे सिर पर रहती हैं। लेकिन मैं मन से आपके साथ हूं। इस समारोह की मैं सफलता के लिए शुभकामनाएं देता हूं और देख सकते हैं कि संकटों के बीच में भी कैसी जिंदगी गुजारी जा सकती है। छत्‍तीसगढ़ कुछ वर्षों से नक्‍सलवाद के कारण परेशान है। माओवाद के कारण परेशान है। और मैं नौजवानों को कहता हूं। हमारे हाथ में हुनर होना चाहिए, हत्‍या करने के लिए हमारा हाथ कभी काम नहीं आना चाहिए। यह हाथ हुनर से नए सपनों को संजोने के लिए काम आना चाहिए। यह हाथ किसी के सपनों को समाप्‍त करने के लिए हत्‍या का कारण नहीं बनना चाहिए। छत्‍तीसगढ़ के नौजवानों ने माओवाद की इस भयानकता के बीच भी छत्‍तीसगढ़ को भरपूर बढ़ाने का प्रसास किया है। छत्‍तसीगढ़ को नई ऊंचाईयों पर ले जाने की कोशिश की है। संकटों के बीच भी समाधान के रास्‍ते निकाले जा सकते हैं। संकटों के बीच में भी विकास की यात्रा की जा सकती है। संकटों के बीच भी संकल्‍पों को पूरा किया जा सकता है। यह छत्‍तीसगढ़ से हम अनुभव कर सकते हैं। आज उस धरती में हैं, रायपुर में हैं। आपको प्रेरणा मिलेगी। मेरी आप सबको बहुत-बहुत शुभकामनाएं। और हमारे खेल मंत्री श्रीमान सोनेवाल जी, वो आपके बीच में हैं। बड़े उत्‍साही हैं। जरूर उनका लाभ मिलेगा आपको। आप सबको बहुत-बहुत शुभकामनाएं, बहुत बहुत धन्‍यवाद।

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ਅੱਜ ਭਾਰਤ ਨੇ ਪੱਕੇ ਇਰਾਦੇ ਨਾਲ ਬਹੁਤ ਵੱਡਾ ਸੁਪਨਾ ਵੇਖਿਆ ਹੈ; ਉਹ ਸੁਪਨਾ ਇਹ ਹੈ ਕਿ ਜਦੋਂ ਅਸੀਂ 2047 ਵਿੱਚ ਆਜ਼ਾਦੀ ਦੇ 100 ਸਾਲ ਮਨਾਵਾਂਗੇ, ਤਾਂ ਅਸੀਂ ‘ਵਿਕਸਿਤ ਭਾਰਤ’ ਦੀ ਸਿਰਜਣਾ ਕਰ ਲਵਾਂਗੇ: ਪ੍ਰਧਾਨ ਮੰਤਰੀ
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ਹਰ ਭਾਰਤੀ ‘ਮੇਕ ਇਨ ਇੰਡੀਆ’ ਅਤੇ ‘ਵੋਕਲ ਫ਼ਾਰ ਲੋਕਲ’ ਦੇ ਜਜ਼ਬੇ ਨੂੰ ਅਪਣਾ ਰਿਹਾ ਹੈ: ਪ੍ਰਧਾਨ ਮੰਤਰੀ
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ਸਾਨੂੰ ਤਿੰਨ ਚੀਜ਼ਾਂ ’ਤੇ ਧਿਆਨ ਦੇਣ ਦੀ ਲੋੜ ਹੈ; ਲਾਗਤ, ਗੁਣਵੱਤਾ ਅਤੇ ਪੱਧਰ: ਪ੍ਰਧਾਨ ਮੰਤਰੀ
ਸਾਡੀਆਂ ਫੈਕਟਰੀਆਂ ਮੁਕਾਬਲੇ ਯੋਗ ਹੋਣੀਆਂ ਚਾਹੀਦੀਆਂ ਹਨ, ਸਾਡੇ ਉਤਪਾਦ ਵਰਤਣ ਵਿੱਚ ਆਸਾਨ ਅਤੇ ਸਾਡੀ ਪੈਕਿੰਗ ਸਭ ਤੋਂ ਵਧੀਆ ਹੋਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ: ਪ੍ਰਧਾਨ ਮੰਤਰੀ
ਜਿਹੜੇ ਇਲਾਕੇ ਕਦੇ ਨਕਸਲੀ ਹਿੰਸਾ ਤੋਂ ਪ੍ਰਭਾਵਿਤ ਸਨ, ਉੱਥੇ ਹੁਣ ਸ਼ਾਂਤੀ, ਵਿਕਾਸ ਅਤੇ ਨਵੀਂ ਉਮੀਦ ਵੇਖਣ ਨੂੰ ਮਿਲ ਰਹੀ ਹੈ: ਪ੍ਰਧਾਨ ਮੰਤਰੀ
ਆਉਣ ਵਾਲੇ ਸਾਲਾਂ ਵਿੱਚ, ਇਹ ‘ਸਪਤਧਾਰਾਵਾਂ’ ਭਾਰਤ ਨੂੰ ਅੱਗੇ ਵਧਾਉਣਗੀਆਂ ਅਤੇ ਦੇਸ਼ ਨੂੰ ਨਵੀਆਂ ਬੁਲੰਦੀਆਂ ’ਤੇ ਲਿਜਾਣਗੀਆਂ: ਪ੍ਰਧਾਨ ਮੰਤਰੀ

ਮੇਰੇ ਪਿਆਰੇ ਦੇਸ਼ ਵਾਸੀਓ,

ਅੱਜ ਅਸੀਂ ਸਾਰੇ 80ਵਾਂ ਆਜ਼ਾਦੀ ਦਿਹਾੜਾ ਮਨਾ ਰਹੇ ਹਾਂ। ਅੱਜ ਹਰ ਦਿਲ ਦੀ ਧੜਕਣ ਵੰਦੇ ਮਾਤਰਮ ਦੀ ਆਵਾਜ਼ ਨਾਲ ਗੂੰਜ ਰਹੀ ਹੈ। ਅੱਜ ਹਰ ਘਰ ਤਿਰੰਗਾ ਹੈ, ਹਰ ਮਨ ਤਿਰੰਗਾ ਹੈ ਅਤੇ ਦੇਸ਼ ਉਤਸ਼ਾਹ ਅਤੇ ਉਮੰਗ ਨਾਲ ਨਵੇਂ ਸੰਕਲਪਾਂ ਨੂੰ ਲੈ ਕੇ ਅੱਜ ਅੱਗੇ ਵਧ ਰਿਹਾ ਹੈ। ਆਪ ਸਭ ਨੂੰ ਆਜ਼ਾਦੀ ਦਿਹਾੜੇ ਦੀਆਂ ਬਹੁਤ-ਬਹੁਤ ਸ਼ੁਭਕਾਮਨਾਵਾਂ। ਦੇਸ਼ ਅੱਜ ਉਨ੍ਹਾਂ ਮਹਾਨ ਸਪੂਤਾਂ ਨੂੰ ਸ਼ਰਧਾ ਨਾਲ ਯਾਦ ਕਰਦਾ ਹੈ, ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਨੇ ਦੇਸ਼ ਦੀ ਆਜ਼ਾਦੀ ਲਈ ਤਿਆਗ ਅਤੇ ਕੁਰਬਾਨੀ ਦਿੱਤੀ। ਆਪਣੀ ਤਪੱਸਿਆ, ਤਿਆਗ ਅਤੇ ਕੁਰਬਾਨੀ ਨਾਲ ਆਜ਼ਾਦੀ ਦੇ ਇੱਕੋ-ਇੱਕ ਟੀਚੇ ਨੂੰ ਲੈ ਕੇ ਆਪਣੀ ਪੂਰੀ ਜ਼ਿੰਦਗੀ ਸਮਰਪਿਤ ਕਰ ਦਿੱਤੀ। ਪੂਜਨੀਕ ਬਾਪੂ ਸਮੇਤ ਸਾਰੇ ਆਜ਼ਾਦੀ ਘੁਲਾਟੀਆਂ ਦੀ ਕੁਰਬਾਨੀ ਦੀ ਮਹਾਨ ਪਰੰਪਰਾ ਜਗਾਉਣ ਵਾਲੇ ਮਹਾਨ ਕ੍ਰਾਂਤੀਕਾਰੀਆਂ ਨੂੰ ਅੱਜ ਮੈਂ ਸ਼ਰਧਾਪੂਰਵਕ ਪ੍ਰਣਾਮ ਕਰਦਾ ਹਾਂ। ਅੱਜ ਜੋ ਇਸ ਸਮਾਰੋਹ ਵਿੱਚ ਹਾਜ਼ਰ ਹਨ, ਉਨ੍ਹਾਂ ਸਾਰਿਆਂ ਲਈ ਅੱਜ ਇੱਕ ਇਤਿਹਾਸਕ ਪਲ ਵੀ ਹੈ। ਆਜ਼ਾਦੀ ਤੋਂ ਬਾਅਦ 15 ਅਗਸਤ ਨੂੰ ਲਾਲ ਕਿਲ੍ਹੇ ’ਤੇ ਪਹਿਲੀ ਵਾਰ ਵੰਦੇ ਮਾਤਰਮ ਗੂੰਜ ਰਿਹਾ ਹੈ। ਅੱਜ ਜਦੋਂ ਅਸੀਂ ਦੇਸ਼ ਦੇ ਲੋਕ ਵੰਦੇ ਮਾਤਰਮ ਦੇ 150 ਸਾਲ ਮਨਾ ਰਹੇ ਹਾਂ, ਤਾਂ ਇਸ ਤੋਂ ਵੱਡਾ ਉੱਤਮ ਮੌਕਾ ਹੋਰ ਕੀ ਹੋ ਸਕਦਾ ਹੈ।

ਮੇਰੇ ਪਿਆਰੇ ਦੇਸ਼ ਵਾਸੀਓ,

ਪਿਛਲੇ ਦਿਨੀਂ, ਦੇਸ਼ ਦੇ ਕੁਝ ਹਿੱਸਿਆਂ ਵਿੱਚ ਹੜ੍ਹਾਂ ਦਾ ਪ੍ਰਕੋਪ ਰਿਹਾ, ਜ਼ਮੀਨ ਖਿਸਕਣ ਦਾ ਪ੍ਰਕੋਪ ਰਿਹਾ, ਕਈ ਪਰਿਵਾਰ ਪ੍ਰਭਾਵਿਤ ਹੋਏ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੇ ਦੁੱਖ-ਦਰਦ ਨੂੰ ਅਸੀਂ ਭਲੀ-ਭਾਂਤ ਅਨੁਭਵ ਕਰਦੇ ਹਾਂ। ਪੀੜਤ ਪਰਿਵਾਰਾਂ ਨੂੰ ਮੈਂ ਵਿਸ਼ਵਾਸ ਦਿਵਾਉਂਦਾ ਹਾਂ ਕਿ ਅਸੀਂ ਅਤੇ ਪੂਰਾ ਦੇਸ਼ ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੇ ਨਾਲ ਖੜ੍ਹੇ ਹਾਂ।

ਮੇਰੇ ਪਿਆਰੇ ਦੇਸ਼ ਵਾਸੀਓ,

ਕੋਈ ਵੀ ਰਾਸ਼ਟਰ ਉਦੋਂ ਮਹਾਨ ਬਣਦਾ ਹੈ, ਉਦੋਂ ਆਪਣੀਆਂ ਸਿੱਧੀਆਂ ਨੂੰ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕਰਦਾ ਹੈ, ਜਦੋਂ ਆਪਣੇ ਸੁਪਨਿਆਂ, ਆਪਣੇ ਸੰਕਲਪਾਂ ਅਤੇ ਆਪਣੀ ਸਮਰੱਥਾ ਦੇ ਦਮ ’ਤੇ ਅੱਗੇ ਵਧਦਾ ਹੈ।

ਮੇਰੇ ਦੇਸ਼ ਵਾਸੀਓ,

ਹੁਣ ਛੋਟੇ ਸੁਪਨਿਆਂ ਨਾਲ ਕੰਮ ਨਹੀਂ ਚੱਲਣ ਵਾਲਾ, ਸਾਨੂੰ ਵੱਡੇ ਸੁਪਨੇ ਚਾਹੀਦੇ ਹਨ ਕਿਉਂਕਿ ਵੱਡੇ ਸੁਪਨੇ ਸਾਡੀ ਸੋਚ ਨੂੰ ਵੀ ਵਿਸਥਾਰ ਦਿੰਦੇ ਹਨ। ਸਾਡੀ ਸੋਚ ਦੇ ਦਾਇਰੇ ਨੂੰ ਵੀ ਵਿਸਥਾਰਿਤ ਕਰਦੇ ਹਨ। ਸਾਡੇ ਸੰਕਲਪ ਦ੍ਰਿੜ੍ਹ ਹੋਣੇ ਚਾਹੀਦੇ ਹਨ, ਜਦੋਂ ਸੰਕਲਪ ਦ੍ਰਿੜ੍ਹ ਹੁੰਦਾ ਹੈ, ਤਾਂ ਮੁਸ਼ਕਲਾਂ ਤੋਂ, ਆਫ਼ਤਾਂ ਦੇ ਵਿਚਕਾਰੋਂ ਰਸਤੇ ਕੱਢਣ ਦੀ ਸਮਰੱਥਾ ਆਪਣੇ ਆਪ ਉੱਭਰ ਕੇ ਆਉਂਦੀ ਹੈ।

ਅਤੇ ਮੇਰੇ ਪਿਆਰੇ ਦੇਸ਼ ਵਾਸੀਓ,

ਸਾਡੇ ਸੰਕਲਪ ਵੀ ਉੱਚੇ ਹੋਣੇ ਚਾਹੀਦੇ ਹਨ ਕਿਉਂਕਿ ਜਦੋਂ ਸੁਪਨੇ ਉੱਚੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ, ਸੰਕਲਪ ਉੱਚੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ, ਤਾਂ ਸਾਡੀ ਸਮਰੱਥਾ ਦੀ ਉਚਾਈ ਵੀ ਵਧਦੀ ਹੈ, ਸਾਡੇ ਯਤਨਾਂ ਦੀ ਉਚਾਈ ਵੀ ਵਧਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਉਦੋਂ ਜਾ ਕੇ ਅਸੀਂ ਸੁਪਨਿਆਂ ਨੂੰ ਸਾਕਾਰ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹਾਂ।

ਮੇਰੇ ਪਿਆਰੇ ਦੇਸ਼ ਵਾਸੀਓ,

ਅੱਜ ਭਾਰਤ ਨੇ ਵੀ ਇੱਕ ਬਹੁਤ ਵੱਡਾ ਸੁਪਨਾ ਦੇਖਿਆ ਹੈ, ਦ੍ਰਿੜ੍ਹ ਸੰਕਲਪ ਨਾਲ ਦੇਖਿਆ ਹੈ, ਨਵੀਆਂ ਉਚਾਈਆਂ ਨੂੰ ਛੂਹਣ ਲਈ ਦੇਖਿਆ ਹੈ ਅਤੇ ਉਹ ਸੁਪਨਾ ਹੈ, ਜਦੋਂ ਆਜ਼ਾਦੀ ਦੇ 100 ਸਾਲ ਹੋਣਗੇ। 2047 ਵਿੱਚ ਅਸੀਂ ਵਿਕਸਤ ਭਾਰਤ ਬਣਾ ਕੇ ਰਹਾਂਗੇ। 140 ਕਰੋੜ ਦੇਸ਼ ਵਾਸੀਆਂ ਦੀ ਮਿਹਨਤ ਨਾਲ, ਇਸ ਟੀਚੇ ਨੂੰ ਅਸੀਂ ਹਾਸਲ ਕਰਨਾ ਹੈ ਅਤੇ ਜਦੋਂ ਦੁਨੀਆ ਦੀ ਸਭ ਤੋਂ ਵੱਡੀ ਆਬਾਦੀ ਵਾਲਾ ਦੇਸ਼ ਵਿਕਸਤ ਹੋਣ ਦਾ ਸੰਕਲਪ ਲੈਂਦਾ ਹੈ, ਤਾਂ ਇਹ ਦੁਨੀਆ ਦੀਆਂ ਨਜ਼ਰਾਂ ਵਿੱਚ ਵੀ ਸਾਡੀ ਹਿੰਮਤ ਦਾ ਪ੍ਰਤੀਕ ਬਣ ਜਾਂਦਾ ਹੈ। ਦੁਨੀਆ ਸਾਡੇ ਵੱਲ ਦੇਖਣ ਦਾ ਨਜ਼ਰੀਆ ਬਦਲਣ ਲਈ ਮਜਬੂਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ।

ਪਿਆਰੇ ਦੇਸ਼ ਵਾਸੀਓ,

ਅਤੇ ਮੈਂ ਇਹ ਬਿਨਾਂ ਕਿਸੇ ਕਾਰਨ ਦੇ ਨਹੀਂ ਕਹਿ ਰਿਹਾ ਹਾਂ। ਪਿਛਲੇ 12 ਸਾਲਾਂ ਵਿੱਚ ਦੇਸ਼ ਦੇ ਕਰੋੜਾਂ ਨਾਗਰਿਕਾਂ ਨੇ ਦਲਿਤ ਹੋਣ, ਦੱਬੇ-ਕੁਚਲੇ ਹੋਣ, ਹਾਸ਼ੀਏ 'ਤੇ ਧੱਕੇ ਗਏ ਹੋਣ, ਕਬਾਇਲੀ ਹੋਣ, ਪਿੰਡ ਵਿੱਚ ਰਹਿਣ ਵਾਲਾ ਹੋਵੇ, ਸ਼ਹਿਰ ਵਿੱਚ ਰਹਿਣ ਵਾਲਾ ਹੋਵੇ, ਗ਼ਰੀਬ ਹੋਵੇ, ਮੱਧ ਵਰਗ ਦਾ ਹੋਵੇ, ਨੌਜਵਾਨ ਹੋਵੇ, ਬਜ਼ੁਰਗ ਹੋਵੇ, ਔਰਤ ਹੋਵੇ, ਮਰਦ ਹੋਵੇ, ਉੱਤਰ ਹੋਵੇ, ਦੱਖਣ ਹੋਵੇ, ਪੂਰਬ ਹੋਵੇ, ਪੱਛਮ ਹੋਵੇ, ਹਰੇਕ ਨੇ ਪਿਛਲੇ 12 ਸਾਲਾਂ ਵਿੱਚ ਇੱਕ ਸੰਕਲਪ ਨਾਲ, ਸਮਰਪਣ ਨਾਲ, ਦੇਸ਼ ਨੂੰ ਨਵੀਆਂ ਉਚਾਈਆਂ ’ਤੇ ਲੈ ਜਾਣ ਵਿੱਚ ਹਰ ਤਰ੍ਹਾਂ ਨਾਲ ਯਤਨ ਕੀਤਾ ਹੈ। ਮੈਂ ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੇ ਇਨ੍ਹਾਂ ਯਤਨਾਂ ਨੂੰ ਆਦਰਪੂਰਵਕ ਪ੍ਰਵਾਨ ਕਰਦਾ ਹਾਂ ਅਤੇ ਉਸੇ ਦਾ ਨਤੀਜਾ ਹੈ ਕਿ ਇੰਨੇ ਘੱਟ ਸਮੇਂ ਵਿੱਚ 25 ਕਰੋੜ ਦੇਸ਼ ਵਾਸੀ, ਗ਼ਰੀਬੀ ਨੂੰ ਹਰਾ ਕੇ ਗ਼ਰੀਬੀ ਤੋਂ ਬਾਹਰ ਨਿਕਲੇ ਹਨ। ਇਨ੍ਹਾਂ ਦੇਸ਼ ਵਾਸੀਆਂ ਦੇ ਯਤਨਾਂ ਦਾ ਹੀ ਨਤੀਜਾ ਹੈ ਕਿ ਅਸੀਂ ਕਦੇ ਫ੍ਰੈਜਾਈਲ ਫਾਈਵ ਵਿੱਚ ਗਿਣੇ ਜਾਂਦੇ ਸੀ। 12 ਸਾਲਾਂ ਦੇ ਅੰਦਰ-ਅੰਦਰ ਅਸੀਂ ਸਭ ਤੋਂ ਤੇਜ਼ੀ ਨਾਲ ਵਧਦੀ ਵੱਡੀ ਆਰਥਿਕਤਾ ਬਣ ਗਏ ਹਾਂ।

ਸਾਥੀਓ,

ਦੇਸ਼ ਆਜ਼ਾਦ ਹੋਇਆ, ਬਹੁਤ ਸਾਰੇ ਸੁਪਨੇ ਲੈ ਕੇ ਆਜ਼ਾਦ ਹੋਇਆ, ਪਰ ਅਸੀਂ ਗਤੀ ਨਹੀਂ ਫੜ ਸਕੇ, ਰਫ਼ਤਾਰ ਨਹੀਂ ਫੜ ਸਕੇ। ਹੁੰਦੀ ਹੈ, ਚਲਦੀ ਹੈ, ਹੋ ਜਾਵੇਗਾ, ਦੇਖਿਆ ਜਾਵੇਗਾ, ਉਸੇ ਵਿੱਚ ਗੁਆਚੇ ਰਹੇ। 2014 ਤੱਕ ਆਉਂਦਿਆਂ-ਆਉਂਦਿਆਂ ਤਾਂ ਪੂਰੀ ਦੁਨੀਆ ਨੇ ਸਾਨੂੰ ਫ੍ਰੈਜਾਈਲ ਫਾਈਵ ਵਿੱਚ ਸੁੱਟ ਦਿੱਤਾ ਸੀ। ਅਜਿਹੇ ਸਮੇਂ, ਪਿਛਲੇ 12 ਸਾਲਾਂ ਵਿੱਚ ਭਾਰਤ ਨੇ ਇੱਕ ਨਵੀਂ ਰਫ਼ਤਾਰ ਫੜੀ ਹੈ, ਤੇਜ਼ ਗਤੀ ਨਾਲ ਅਸੀਂ ਅੱਗੇ ਵਧ ਰਹੇ ਹਾਂ ਅਤੇ ਦੇਸ਼ ਵਾਸੀਆਂ ਦਾ ਸੰਕਲਪ ਹੈ ਕਿ ਹੁਣ 140 ਕਰੋੜ ਦੇਸ਼ ਵਾਸੀਆਂ ਦੇ ਸੰਕਲਪ ਅਤੇ ਸਮਰੱਥਾ ਨੂੰ ਰੋਕਣਾ ਅਸੰਭਵ ਹੈ।

ਪਿਆਰੇ ਦੇਸ਼ ਵਾਸੀਓ,

ਪਿਛਲੇ 12 ਸਾਲਾਂ ਵਿੱਚ ਡਿਫੈਂਸ ਪ੍ਰੋਡਕਸ਼ਨ ਲਗਭਗ 4 ਗੁਣਾ ਹੋਇਆ। ਖਾਦੀ ਅਤੇ ਗ੍ਰਾਮ ਉਦਯੋਗ ਦਾ ਉਤਪਾਦਨ ਲਗਭਗ 5 ਗੁਣਾ ਹੋਇਆ, ਇਲੈਕਟ੍ਰੌਨਿਕ ਮੈਨੂਫੈਕਚਰਿੰਗ ਲਗਭਗ 7 ਗੁਣਾ ਵਧੀ, ਆਧੁਨਿਕ ਰੇਲਵੇ ਕੋਚਾਂ ਦਾ ਨਿਰਮਾਣ 21 ਗੁਣਾ ਵਧਿਆ, ਮੋਬਾਈਲ ਫੋਨ ਉਤਪਾਦਨ 35 ਗੁਣਾ ਵਧਿਆ, ਇੰਨਾ ਹੀ ਨਹੀਂ ਆਧੁਨਿਕ ਯੁੱਗ ਨੂੰ ਦੇਖਦਿਆਂ ਡਿਜੀਟਲ ਅਤੇ ਨਵੀਨਤਾ ਦੀ ਦੁਨੀਆ ਵਿੱਚ ਵੀ ਅਸੀਂ ਆਪਣਾ ਪਰਚਮ ਲਹਿਰਾਇਆ। ਇੰਟਰਨੈੱਟ ਯੂਜ਼ਰ, ਇੰਟਰਨੈੱਟ ਕੰਜ਼ਿਊਮਰ ਲਗਭਗ-ਲਗਭਗ ਚਾਰ ਗੁਣਾ ਵਧੇ, ਪੇਟੈਂਟ ਗ੍ਰਾਂਟ ਹੋਣ ਦੀ ਸੰਖਿਆ 4 ਗੁਣਾ ਵਧੀ, ਡਿਜੀਟਲ ਟ੍ਰਾਂਜ਼ੈਕਸ਼ਨ 100 ਗੁਣਾ ਵਧੇ, ਆਮ ਮਨੁੱਖ ਦੀਆਂ ਸਹੂਲਤਾਂ ਵੱਲ ਵੀ ਅਸੀਂ ਓਨੀ ਹੀ ਗੰਭੀਰਤਾ ਨਾਲ ਕੰਮ ਕੀਤਾ। ਹਰ ਸਾਲ ਔਸਤਨ 15 ਗੁਣਾ ਜ਼ਿਆਦਾ ਤੇਜ਼ੀ ਨਾਲ ਅਸੀਂ ਨਲ ਤੋਂ ਜਲ ਕੁਨੈਕਸ਼ਨ ਦਿੱਤੇ। ਹਰ ਸਾਲ ਔਸਤਨ ਛੇ ਗੁਣਾ ਜ਼ਿਆਦਾ ਰਫ਼ਤਾਰ ਨਾਲ ਲੋਕਾਂ ਨੂੰ ਗੈਸ ਕੁਨੈਕਸ਼ਨ ਦਿੱਤੇ। ਹਰ ਸਾਲ ਚਾਰ ਗੁਣਾ ਰਫ਼ਤਾਰ ਨਾਲ ਗ਼ਰੀਬਾਂ ਲਈ ਪਖਾਨੇ ਬਣਾਉਣ ਦਾ ਕੰਮ ਕੀਤਾ। ਹਰ ਸਾਲ ਤਿੰਨ ਗੁਣਾ ਜ਼ਿਆਦਾ ਤੇਜ਼ੀ ਨਾਲ ਗ਼ਰੀਬਾਂ ਨੂੰ ਘਰ ਦੇਣ ਦਾ ਕੰਮ ਕੀਤਾ। ਦੇਸ਼ ਨੇ ਸ਼ਾਸਨ ਵਿੱਚ ਵੀ ਬਹੁਤ ਬਦਲਾਅ ਲਿਆਂਦਾ। ਹਜ਼ਾਰਾਂ ਪਾਲਣਾ ਜ਼ਰੂਰਤਾਂ ਨੂੰ ਖ਼ਤਮ ਕਰ ਦਿੱਤਾ। ਸੈਂਕੜਿਆਂ ਦੀ ਤਾਦਾਦ ਵਿੱਚ ਪੁਰਾਣੇ ਕਾਨੂੰਨ ਖ਼ਤਮ ਕੀਤੇ। ਪਿਛਲੀ ਸ਼ਤਾਬਦੀ ਦੇ ਕਾਨੂੰਨਾਂ ਨਾਲ 21ਵੀਂ ਸ਼ਤਾਬਦੀ ਦੀ ਮਾਰਚ ਨਹੀਂ ਹੋ ਸਕਦੀ। ਅਸੀਂ ਆਧੁਨਿਕ ਇਨਫ੍ਰਾਸਟ੍ਰਕਚਰ ਲਈ ਮੈਟਰੋ ਦਾ ਵਿਸਥਾਰ ਕੀਤਾ ਹੈ, ਅਸੀਂ ਪਬਲਿਕ ਟਰਾਂਸਪੋਰਟ ਨੂੰ ਤਾਕਤ ਦਿੱਤੀ। ਜਿਸ ਰਫ਼ਤਾਰ ਨਾਲ ਕੰਮ, ਜਿਸ ਸਕੇਲ ’ਤੇ ਕੰਮ ਕੀਤਾ, ਇਹ ਸਭ, ਇਹ ਰਫ਼ਤਾਰ, ਇਹ ਵਿਸਥਾਰ, ਇਹ ਉਪਲਬਧੀ ਆਜ਼ਾਦੀ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਪਹਿਲੀ ਵਾਰ ਪਿਛਲੇ ਇੱਕ ਦਹਾਕੇ ਨੇ ਦੇਖੀ ਹੈ ਅਤੇ ਜਦੋਂ ਇੰਨੀਆਂ ਸਾਰੀਆਂ ਸਿੱਧੀਆਂ ਸਾਡੇ ਸਾਹਮਣੇ ਹੋਣ, ਇੰਨੀ ਤੇਜ਼ ਗਤੀ ਦਿਖਾਈ ਦਿੰਦੀ ਹੋਵੇ, ਦੇਸ਼ ਵਾਸੀਆਂ ਦੀ ਸਮਰੱਥਾ ਪਲ-ਪਲ ਮਜ਼ਬੂਤ ਹੁੰਦੀ ਹੋਵੇ, ਉਦੋਂ ਤਾਂ 2047 ਵਿੱਚ ਵਿਕਸਤ ਭਾਰਤ ਬਣਨ ਦਾ ਸੰਕਲਪ ਕਦੇ ਵੀ ਅਧੂਰਾ ਨਹੀਂ ਰਹਿ ਸਕਦਾ। ਇਹ ਸਾਰੇ ਅੰਕੜੇ ਇਸ ਗੱਲ ਦੀ ਗਵਾਹੀ ਦਿੰਦੇ ਹਨ ਕਿ ਅਸੀਂ ਅੱਗੇ ਵਧਣ ਵਾਲੇ ਹਾਂ।

ਮੇਰੇ ਪਿਆਰੇ ਦੇਸ਼ ਵਾਸੀਓ,

ਪਰ ਉਸ ਲਈ ਆਤਮ-ਵਿਸ਼ਵਾਸ ਦੀ ਜ਼ਰੂਰਤ ਹੁੰਦੀ ਹੈ, ਸਵੈ ਮਾਣ ਦੀ ਜ਼ਰੂਰਤ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਨਾਲ ਹੀ ਨਾਲ ਆਤਮ-ਨਿਰਭਰ ਭਾਰਤ ਹੋਣਾ ਵੀ ਬਹੁਤ ਜ਼ਰੂਰੀ ਹੁੰਦਾ ਹੈ। ਅਤੇ ਇਸ ਲਈ ਬੀਤੇ ਸਾਲਾਂ ਵਿੱਚ ਸਾਡਾ ਭਰੋਸਾ ਰਿਹਾ ਹੈ ਕਿ ਭਾਰਤ ਨੂੰ ਸਾਨੂੰ ਹੁਣ ਦੂਜੇ ਦੇਸ਼ਾਂ ’ਤੇ ਨਿਰਭਰ ਰਹਿ ਕੇ ਨਹੀਂ ਜਿਉਣਾ ਚਾਹੀਦਾ, ਸਾਨੂੰ ਆਤਮ-ਨਿਰਭਰ ਬਣਨਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ। ਦੁਨੀਆ ਵਿੱਚ ਬਹੁਤ ਕੁਝ ਮਿਲਦਾ ਹੈ, ਸਸਤਾ ਮਿਲਦਾ ਹੈ, ਜਲਦੀ ਮਿਲ ਸਕਦਾ ਹੈ, ਪਰ ਉਸ ਨਾਲ ਸਾਡੀ ਸਮਰੱਥਾ ਤਿਆਰ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦੀ, ਨਾ ਸਾਡੀ ਸਮਰੱਥਾ ਦੀ ਕਸੌਟੀ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸ ਲਈ ਸਾਨੂੰ ਵੀ ਆਪਣੀਆਂ ਸਮਰੱਥਾਵਾਂ ਨੂੰ ਵਧਾਉਣਾ ਹੈ, ਆਪਣੇ ਹਿੱਤਾਂ ਦੀ ਸੁਰੱਖਿਆ ਸਾਨੂੰ ਖੁਦ ਕਰਨੀ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸ ਲਈ ਆਤਮਨਿਰਭਰ ਭਾਰਤ ਦਾ ਸੰਕਲਪ ਬਹੁਤ ਦ੍ਰਿੜ੍ਹਤਾ ਨਾਲ ਅਸੀਂ ਲੈ ਕੇ ਅੱਗੇ ਵਧ ਰਹੇ ਹਾਂ। ਮੇਕ ਇਨ ਇੰਡੀਆ, ਸਵਦੇਸ਼ੀ, ਵੋਕਲ ਫ਼ਾਰ ਲੋਕਲ, ਇਨ੍ਹਾਂ ਸਾਰੇ ਖੇਤਰਾਂ ਵਿੱਚ ਅੱਜ ਹਰ ਭਾਰਤੀ ਦਾ ਮਨ ਜੁੜ ਰਿਹਾ ਹੈ।

ਮੇਰੇ ਪਿਆਰੇ ਦੇਸ਼ ਵਾਸੀਓ,

ਮੈਂ ਤੁਹਾਨੂੰ ਇੱਕ ਉਦਾਹਰਨ ਦਿੰਦਾ ਹਾਂ ਸੈਮੀਕੰਡਕਟਰ ਦਾ, ਦੇਸ਼ ਆਜ਼ਾਦ ਹੋਣ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਦੁਨੀਆ ਵਿੱਚ ਤਾਂ ਸੈਮੀਕੰਡਕਟਰ ਦੀ ਚਰਚਾ ਹੋ ਚੁੱਕੀ ਸੀ। ਸਾਡੇ ਇੱਥੇ ਵੀ ਗੱਲਾਂ ਹੁੰਦੀਆਂ ਸਨ, ਪਰ ਸੈਮੀਕੰਡਕਟਰ ਦਾ ਕੋਈ ਵੱਡਾ ਪਲਾਨ ਅਸੀਂ ਅੱਗੇ ਨਹੀਂ ਵਧਾ ਸਕੇ ਅਤੇ ਅੱਜ ਸਥਿਤੀ ਕੀ ਹੈ? ਅੱਜ ਦੀ ਡਿਜੀਟਲ ਦੁਨੀਆ ਵਿੱਚ, ਅੱਜ ਦੀ ਤਕਨਾਲੋਜੀ ਵਿੱਚ, ਚਿੱਪ ਦੀ ਮਹੱਤਤਾ ਅਸੀਂ ਸਮਝਦੇ ਹਾਂ। ਕੋਈ ਵੀ ਇਲੈਕਟ੍ਰੌਨਿਕ ਸਾਮਾਨ ਹੋਵੇਗਾ, ਸਾਡੇ ਮੈਡੀਕਲ ਉਪਕਰਨ ਹੋਣਗੇ, ਸਾਡੇ ਟਰਾਂਸਪੋਰਟ ਦੇ ਰਸਤੇ ਹੋਣਗੇ, ਹਰੇਕ ਵਿੱਚ ਚਿੱਪ ਲਾਜ਼ਮੀ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸ ਚਿੱਪ ਤੋਂ ਬਿਨਾਂ ਦੁਨੀਆ ਰੁਕ ਜਾਵੇਗੀ, ਅਜਿਹੀ ਸਥਿਤੀ ਪੈਦਾ ਹੋ ਚੁੱਕੀ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸ ਲਈ ਭਾਰਤ ਨੇ ਆਤਮਨਿਰਭਰ ਹੋਣ ਦੀ ਦਿਸ਼ਾ ਵਿੱਚ ਆਪਣਾ ਸੈਮੀਕੰਡਕਟਰ ਪਲਾਂਟ, ਵੱਡਾ ਸੈਮੀਕੰਡਕਟਰ ਪਲਾਂਟ, ਤਿੰਨ ਸੈਮੀਕੰਡਕਟਰ ਪਲਾਂਟ ਸ਼ੁਰੂ ਹੋ ਚੁੱਕੇ ਹਨ। ਅਤੇ ਮੈਨੂੰ ਦੱਸਿਆ ਗਿਆ ਹੈ ਕਿ ਉੱਥੇ ਜੋ ਉਤਪਾਦ ਹੋ ਰਿਹਾ ਹੈ, ਉਹ ਨਿਰਯਾਤ ਹੋਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਹੋ ਚੁੱਕਾ ਹੈ ਅਤੇ ਮੈਂ ਦੇਸ਼ ਵਾਸੀਆਂ ਨੂੰ ਕਹਿਣਾ ਚਾਹੁੰਦਾ ਹਾਂ, ਆਉਣ ਵਾਲੇ ਸੱਤ-ਅੱਠ ਸਾਲਾਂ ਵਿੱਚ ਹੋਰ 5-7 ਜਾਂ 8 ਸੈਮੀਕੰਡਕਟਰ ਪਲਾਂਟ ਬਹੁਤ ਹੀ ਜਲਦ ਸ਼ੁਰੂ ਹੋਣ ਵਾਲੇ ਹਨ। ਇਹ ਆਤਮ-ਨਿਰਭਰ ਭਾਰਤ ਸਾਨੂੰ ਵਿਕਸਤ ਭਾਰਤ ਦੀ ਦਿਸ਼ਾ ਵਿੱਚ ਜਾਣ ਦਾ ਵੱਡਾ ਮਾਰਗ ਤਿਆਰ ਕਰਦਾ ਹੈ।

ਮੇਰੇ ਪਿਆਰੇ ਦੇਸ਼ ਵਾਸੀਓ,

ਅਜਿਹੀ ਹੀ ਇੱਕ ਚਰਚਾ ਕ੍ਰਿਟੀਕਲ ਮਿਨਰਲ ਦੀ ਹੋ ਰਹੀ ਹੈ। ਪੂਰੀ ਤਕਨਾਲੋਜੀ ਕ੍ਰਿਟੀਕਲ ਮਿਨਰਲ ’ਤੇ ਨਿਰਭਰ ਹੈ। ਭਾਰਤ ਇਸ ਵਿੱਚ ਵੀ ਆਪਣੇ ਆਪ ਨੂੰ ਸੁਰੱਖਿਅਤ ਕਰਨ ਵਿੱਚ ਜੁਟਿਆ ਹੋਇਆ ਹੈ। ਕ੍ਰਿਟੀਕਲ ਮਿਨਰਲ ਦਾ ਟੀਚਾ ਸਾਂਝਾ ਕੀਤਾ ਜਾਵੇ, ਨੈਸ਼ਨਲ ਕ੍ਰਿਟੀਕਲ ਮਿਨਰਲਸ ਇਹ ਅਸੀਂ ਲਾਂਚ ਕੀਤਾ। ਬਜਟ ਵਿੱਚ ਕ੍ਰਿਟੀਕਲ ਮਿਨਰਲਸ ਕੌਰੀਡੋਰ ਦਾ ਅਸੀਂ ਐਲਾਨ ਕੀਤਾ ਹੈ, ਕਈ ਦੇਸ਼ਾਂ ਨਾਲ ਸਮਝੌਤੇ ਹੋ ਰਹੇ ਹਨ, ਦੁਨੀਆ ਦੇ ਕਈ ਦੇਸ਼ ਹੁਣ ਇਸ ਕ੍ਰਿਟੀਕਲ ਮਿਨਰਲਸ ਦੀ ਦਿਸ਼ਾ ਵਿੱਚ ਭਾਰਤ ’ਤੇ ਭਰੋਸਾ ਕਰਨ ਲੱਗੇ ਹਨ।

ਮੇਰੇ ਪਿਆਰੇ ਦੇਸ਼ ਵਾਸੀਓ,

ਜਿਵੇਂ ਸੈਮੀਕੰਡਕਟਰ ਦੀ ਗੱਲ ਹੋਵੇ, ਕ੍ਰਿਟੀਕਲ ਮਿਨਰਲ ਦੀ ਗੱਲ ਹੋਵੇ, ਓਵੇਂ ਹੀ ਜਿਸ ਤਕਨਾਲੋਜੀ ਦੀ ਦਿਸ਼ਾ ਵਿੱਚ ਅਸੀਂ ਜਾ ਰਹੇ ਹਾਂ, ਦੁਨੀਆ ਜਾ ਰਹੀ ਹੈ, ਉਸ ਵਿੱਚ ਊਰਜਾ ਦਾ ਮਹੱਤਵ ਹੋਰ ਵਧਦਾ ਚਲਿਆ ਜਾ ਰਿਹਾ ਹੈ। ਹੁਣ ਊਰਜਾ ਤੋਂ ਬਿਨਾਂ ਵੀ ਨਵੀਂ ਦੁਨੀਆ ਨੂੰ ਚਲਾਉਣਾ ਮੁਸ਼ਕਿਲ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸ ਲਈ ਸਾਨੂੰ ਚਿੱਪ ਹੋਵੇ, ਏਆਈ ਹੋਵੇ, ਡਾਟਾ ਸੈਂਟਰ ਹੋਵੇ, ਸਾਨੂੰ ਬਹੁਤ ਵੱਡੀ ਮਾਤਰਾ ਵਿੱਚ ਬਿਜਲੀ ਦੀ ਜ਼ਰੂਰਤ ਹੋਵੇਗੀ। ਊਰਜਾ ਸੁਰੱਖਿਆ, ਇਹ ਸਾਡੇ ਸਮੇਂ ਦੀ ਮੰਗ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸ ਲਈ ਅਸੀਂ ਪਹਿਲਾਂ ਤੋਂ ਹੀ ਉਸ ਦਿਸ਼ਾ ਵਿੱਚ ਇੱਕ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਇੱਕ ਮਜ਼ਬੂਤ ਕਦਮ ਚੁੱਕੇ ਹਨ। ਊਰਜਾ ਸੁਰੱਖਿਆ ਦਾ ਇੱਕ ਵੱਡਾ ਮਾਧਿਅਮ ਹੈ, ਪਰਮਾਣੂ ਊਰਜਾ ਨਿਊਕਲੀਅਰ ਐਨਰਜੀ, ਅਸੀਂ ਸੰਸਦ ਵਿੱਚ ਸ਼ਾਂਤੀ ਐਕਟ ਪਾਸ ਕਰਕੇ, ਇੱਕ ਨਵੇਂ ਟੀਚੇ ’ਤੇ ਜਾਣ ਦਾ ਰਸਤਾ ਤੈਅ ਕਰ ਲਿਆ ਹੈ। 2047 ਤੱਕ ਅਸੀਂ 100 ਗੀਗਾਵਾਟ ਨਿਊਕਲੀਅਰ ਪਾਵਰ ਦਾ ਟੀਚਾ ਲੈ ਕੇ ਚੱਲ ਰਹੇ ਹਾਂ। ਇਸੇ ਇੱਕ ਦਹਾਕੇ ਵਿੱਚ ਅਸੀਂ ਪੰਜ ਨਵੇਂ ਨਿਊਕਲੀਅਰ ਰਿਐਕਟਰ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰਨ ਦਾ ਟੀਚਾ ਲੈ ਕੇ ਚੱਲ ਰਹੇ ਹਾਂ। ਇਸ ਸਾਲ ਭਾਰਤ ਨੇ ਫਾਸਟ ਬ੍ਰੀਡਰ ਨਿਊਕਲੀਅਰ ਤਕਨਾਲੋਜੀ ਵਿੱਚ ਮੁਹਾਰਤ ਹਾਸਲ ਕਰਕੇ ਇੱਕ ਮਹੱਤਵਪੂਰਨ ਪੜਾਅ ਪਾਰ ਕੀਤਾ ਹੈ ਅਤੇ ਉਸ ਦੇ ਕਾਰਨ ਪਰਮਾਣੂ ਈਂਧਨ ਵਿੱਚ ਆਤਮ-ਨਿਰਭਰ ਬਣਨ ਦੀ ਦਿਸ਼ਾ ਵਿੱਚ ਅਸੀਂ ਇੱਕ ਬਹੁਤ ਵੱਡਾ ਸਫ਼ਲਤਾ ਦਾ ਕਦਮ ਰੱਖਿਆ ਹੈ।

ਮੇਰੇ ਪਿਆਰੇ ਦੇਸ਼ ਵਾਸੀਓ,

ਕਈ ਵਾਰ ਸਾਧਨਾਂ ਦੀ ਘਾਟ ਕਾਰਨ ਦੇਸ਼ ਰੁਕਦਾ ਨਹੀਂ ਹੈ, ਪਰ ਰੁਕਣ ਦਾ ਕਾਰਨ ਸੋਚ ਦੀਆਂ ਹੱਦਾਂ ਹੁੰਦੀਆਂ ਹਨ। ਜਦੋਂ ਸੋਚ ਬੱਝ ਜਾਂਦੀ ਹੈ, ਹੱਦਾਂ ਵਿੱਚ ਸੜਨ ਲੱਗ ਜਾਂਦੀ ਹੈ, ਉਦੋਂ ਅਸੀਂ ਆਪਣੀ ਸਮਰੱਥਾ ਨੂੰ ਵੀ ਪਛਾਣ ਨਹੀਂ ਪਾਉਂਦੇ ਹਾਂ। ਦੇਸ਼ ਨੂੰ ਅੱਜ ਕੱਚੇ ਤੇਲ ’ਤੇ ਨਿਰਭਰ ਰਹਿਣਾ ਪੈ ਰਿਹਾ ਹੈ ਅਤੇ ਇਹ ਸਾਡੀ ਗ਼ਲਤ ਸੋਚ ਦੇ ਕਾਰਨ ਹੈ। ਤੁਸੀਂ ਜਾਣ ਕੇ ਹੈਰਾਨ ਹੋ ਜਾਵੋਗੇ, ਅਸੀਂ ਸਮੁੰਦਰੀ ਤਟ ’ਤੇ 99% ਸਾਡੇ ਸਮੁੰਦਰੀ ਤਟ ਦਾ ਪੂਰਾ ਹਿੱਸਾ ਅਜਿਹੀ ਸੋਚ ਦੇ ਕਾਰਨ ਨੋ-ਗੋ ਏਰੀਆ ਐਲਾਨ ਕਰਕੇ ਰੱਖਿਆ ਸੀ, ਅਸੀਂ ਹੀ ਸਮੁੰਦਰ ਦੇ ਅੰਦਰ ਜਾ ਕੇ ਖੋਜ ਨਾ ਕਰਨ ਦਾ ਫੈਸਲਾ ਕਰ ਲਿਆ ਸੀ। ਇਹ ਸੋਚ ਦੀ ਕਮੀ ਸੀ, ਅਸੀਂ ਫੈਸਲਾ ਕੀਤਾ, ਇਹ ਨਹੀਂ ਚੱਲ ਸਕਦਾ। ਅਸੀਂ ਉਸ 99% ਨੂੰ, ਜੋ ਕਦੇ ਨੋ-ਗੋ ਏਰੀਆ ਹੋਇਆ ਕਰਦੇ ਸਨ, ਅਸੀਂ ਉਸ ਨੂੰ ਗੋ ਅਹੈੱਡ ਏਰੀਆ ਦੇ ਰੂਪ ਵਿੱਚ ਖੋਲ੍ਹ ਦਿੱਤਾ ਹੈ ਅਤੇ ਹੁਣ ਅਸੀਂ ਸਮੁੰਦਰ ਦੇ ਅੰਦਰ ਵੀ ਖੋਜ ਕਰਨ ਦੀ ਅਤੇ ਨਵੇਂ-ਨਵੇਂ ਭੰਡਾਰ ਖੋਜਣ ਦੀ ਦਿਸ਼ਾ ਵਿੱਚ ਅਸੀਂ ਝੁਕਾਅ ਰੱਖਦੇ ਹਾਂ, ਅਸੀਂ ਯਤਨ ਕਰ ਰਹੇ ਹਾਂ। ਅਸੀਂ ਪਿਛਲੇ ਸਾਲ ਉਸੇ ਦਿਸ਼ਾ ਵਿੱਚ ਇੱਕ ਮਹੱਤਵਪੂਰਨ ਕਦਮ ਰੱਖਦਿਆਂ, ਸਮੁੰਦਰ ਮੰਥਨ ਦਾ ਐਲਾਨ ਕੀਤਾ ਸੀ ਅਤੇ ਪਿਛਲੇ ਦਿਨੀਂ ਅਸੀਂ 85,000 ਕਰੋੜ ਰੁਪਏ ਇਸ ਕੰਮ ਲਈ ਅਲਾਟ ਕਰਕੇ ਕੰਮ ਨੂੰ ਗਤੀ ਦੇਣ ਦਾ ਫੈਸਲਾ ਕਰ ਲਿਆ ਹੈ।

ਮੇਰੇ ਪਿਆਰੇ ਦੇਸ਼ ਵਾਸੀਓ,

ਊਰਜਾ ਸੁਰੱਖਿਆ, ਇਸ ਦਾ ਮੈਂ ਕਿਹਾ ਕਿ ਸਾਨੂੰ ਵਿਕਲਪਕ ਸਰੋਤਾਂ ਵੱਲ ਵੀ ਪੂਰੀ ਸ਼ਕਤੀ ਲਗਾਉਣਾ ਬਹੁਤ ਜ਼ਰੂਰੀ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸ ਲਈ ਊਰਜਾ ਦੀ ਸਹੀ ਵਰਤੋਂ ਵਧਾਉਂਦਿਆਂ ਭਾਰਤ ਇਸੇ ਦਿਸ਼ਾ ਵਿੱਚ ਅੱਜ ਤੇਜ਼ੀ ਨਾਲ ਕੰਮ ਕਰ ਰਿਹਾ ਹੈ। 2014 ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਮਤਲਬ ਅੱਜ ਤੋਂ 12 ਸਾਲ ਪਹਿਲਾਂ, ਸਾਡੇ ਦੇਸ਼ ਵਿੱਚ ਸਿਰਫ਼ 70 ਸ਼ਹਿਰਾਂ ਵਿੱਚ ਪਾਈਪ ਨਾਲ ਗੈਸ ਦੀ ਵਿਵਸਥਾ ਸੀ, ਪਾਈਪ ਨਾਲ ਗੈਸ ਦੀ ਵੰਡ ਹੁੰਦੀ ਸੀ। 12 ਸਾਲਾਂ ਵਿੱਚ ਇਨ੍ਹਾਂ 70 ਸ਼ਹਿਰਾਂ ਨੂੰ ਅਸੀਂ 700 ਸ਼ਹਿਰਾਂ ਤੱਕ ਪਹੁੰਚਾ ਦਿੱਤਾ ਹੈ। ਇਹ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਰਫ਼ਤਾਰ, ਇਹ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਵਿਸਥਾਰ। 2014 ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਮੁਸ਼ਕਿਲ ਨਾਲ 20-22 ਲੱਖ ਘਰਾਂ ਵਿੱਚ ਪਾਈਪ ਨਾਲ ਗੈਸ ਪਹੁੰਚਦੀ ਸੀ, ਅੱਜ ਪੌਣੇ ਦੋ ਕਰੋੜ ਘਰਾਂ ਵਿੱਚ ਪਾਈਪ ਨਾਲ ਗੈਸ ਪਹੁੰਚਾਉਣ ਦਾ ਕੰਮ ਹੋ ਰਿਹਾ ਹੈ। 12 ਸਾਲ ਪਹਿਲਾਂ ਦੇਸ਼ ਵਿੱਚ ਸੋਲਰ ਐਨਰਜੀ ਦੀ ਸਮਰੱਥਾ ਸਿਰਫ਼ 2 ਗੀਗਾਵਾਟ ਸੀ, 2 ਗੀਗਾਵਾਟ, ਅੱਜ 160 ਗੀਗਾਵਾਟ ਦਾ ਟੀਚਾ ਅਸੀਂ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕੀਤਾ ਹੈ।

ਮੇਰੇ ਪਿਆਰੇ ਦੇਸ਼ ਵਾਸੀਓ,

ਮੈਂ ਇੱਕ ਹੋਰ ਜਾਣਕਾਰੀ ਦਿੰਦਾ ਹਾਂ, ਅਸੀਂ ਇਸ ਦਾ ਲਾਭ ਦੇਸ਼ ਦੇ ਮੱਧ ਵਰਗ ਨੂੰ, ਆਮ ਪਰਿਵਾਰ ਨੂੰ ਮਿਲੇ, ਇਸ ਪਾਸੇ ਵੀ ਓਨਾ ਹੀ ਧਿਆਨ ਕੇਂਦ੍ਰਿਤ ਕੀਤਾ ਹੈ। ਅਸੀਂ ਪੀਐੱਮ ਸੂਰਯਘਰ ਮੁਫ਼ਤ ਬਿਜਲੀ ਯੋਜਨਾ ਚਾਲੂ ਕੀਤੀ ਅਤੇ ਅੱਜ ਮੈਨੂੰ ਸੰਤੁਸ਼ਟੀ ਹੈ ਕਿ ਇੰਨੇ ਘੱਟ ਸਮੇਂ ਵਿੱਚ 50 ਲੱਖ ਘਰਾਂ ਦਾ ਸੋਲਰ ਐਨਰਜੀ ਦਾ ਕੰਮ, ਅਸੀਂ ਅੰਕੜਾ ਪਾਰ ਕਰ ਚੁੱਕੇ ਹਾਂ, ਤੇਜ਼ੀ ਨਾਲ ਚੱਲ ਰਿਹਾ ਹੈ ਅਤੇ ਉਸ ਦੇ ਕਾਰਨ ਹਜ਼ਾਰਾਂ ਘਰਾਂ ਦਾ ਬਿਜਲੀ ਬਿਲ ਜ਼ੀਰੋ ਹੋ ਗਿਆ ਹੈ, ਹਜ਼ਾਰਾਂ ਘਰ ਆਪਣੀ ਬਿਜਲੀ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਕਰਨ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਵਾਧੂ ਬਿਜਲੀ ਅੱਜ ਵੇਚ ਕੇ ਕਮਾਈ ਕਰ ਰਹੇ ਹਨ। ਹਰ ਪਰਿਵਾਰ ਨੂੰ ਅਸੀਂ ਇਸ ਕੰਮ ਲਈ 80,000 ਰੁਪਏ ਸਰਕਾਰ ਵੱਲੋਂ ਇੱਕ-ਇੱਕ ਪਰਿਵਾਰ ਨੂੰ ਮਦਦ ਦਿੱਤੀ ਜਾ ਰਹੀ ਹੈ, ਉਦੋਂ ਜਾ ਕੇ ਅਸੀਂ ਇਸ ਕੰਮ ਨੂੰ ਪੂਰਾ ਕਰ ਰਹੇ ਹਾਂ।

ਮੇਰੇ ਪਿਆਰੇ ਦੇਸ਼ ਵਾਸੀਓ,

ਤੁਹਾਨੂੰ ਜਾਣ ਕੇ ਹੈਰਾਨੀ ਹੋਵੇਗੀ, ਇਹ ਜੋ ਸਾਡੀ ਰੇਲਵੇ ਹੈ, ਉਸ ਦੇ ਇਲੈਕਟ੍ਰੀਫਿਕੇਸ਼ਨ ਦਾ ਕੰਮ ਸਾਡੇ ਦੇਸ਼ ਵਿੱਚ 1925 ਵਿੱਚ ਸ਼ੁਰੂ ਹੋਇਆ ਸੀ। 1925 ਵਿੱਚ ਇਲੈਕਟ੍ਰੀਫਿਕੇਸ਼ਨ ਦਾ ਕੰਮ ਸ਼ੁਰੂ ਹੋਇਆ, ਪਰ 90 ਸਾਲਾਂ ਵਿੱਚ 1925 ਤੋਂ ਲੈ ਕੇ 90 ਸਾਲਾਂ ਵਿੱਚ ਸਿਰਫ਼ 30% ਰੇਲ ਦਾ ਇਲੈਕਟ੍ਰੀਫਿਕੇਸ਼ਨ ਹੋਇਆ ਸੀ। ਯਾਨੀ 90 ਸਾਲਾਂ ਵਿੱਚ 30%, ਸਾਡੀ ਰਫ਼ਤਾਰ ਦੇਖੋ, ਟੀਚੇ ਨੂੰ ਪਾਉਣ ਲਈ ਸਾਡੀ ਦੌੜ ਦੇਖ ਲਵੋ। ਅਸੀਂ ਇਸ ਇੱਕ ਦਹਾਕੇ ਦੇ ਅੰਦਰ ਸ਼ਤ-ਪ੍ਰਤੀਸ਼ਤ ਕੰਮ ਪੂਰਾ ਕਰ ਦਿੱਤਾ। 90 ਸਾਲਾਂ ਵਿੱਚ 30%, 10 ਸਾਲਾਂ ਵਿੱਚ 70%, ਇਹ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਕੰਮ ਅਤੇ ਇਸ ਦੇ ਕਾਰਨ ਡੀਜ਼ਲ, ਜੋ ਸਾਨੂੰ ਬਾਹਰੋਂ ਲਿਆਉਣਾ ਪੈਂਦਾ ਹੈ, ਉਸ ਦੀ ਬੱਚਤ ਹੋਈ। ਬਿਜਲੀ ਨਾਲ ਸਾਡੀਆਂ ਟ੍ਰੇਨਸ ਚੱਲੀਆਂ, ਵਾਤਾਵਰਨ ਨੂੰ ਫਾਇਦਾ ਹੋਣ ਲੱਗਿਆ।

ਮੇਰੇ ਪਿਆਰੇ ਦੇਸ਼ ਵਾਸੀਓ,

ਅਸੀਂ ਇੱਥੇ ਹੀ ਨਹੀਂ ਰੁਕੇ ਹਾਂ। ਅਸੀਂ ਦੁਨੀਆ ਦੇ ਅੰਦਰ ਪਿੱਛੇ ਰਹਿਣਾ ਨਹੀਂ ਚਾਹੁੰਦੇ, ਪਿਛਲੇ ਦਿਨੀਂ ਤੁਸੀਂ ਖ਼ਬਰ ਸੁਣੀ ਹੋਵੇਗੀ, ਭਾਰਤ ਨੇ ਈਂਧਨ ਦੇ ਇਸ ਨਵੇਂ ਖੇਤਰ ਨੂੰ ਵੀ ਛੂਹ ਲਿਆ ਹੈ। ਦੇਸ਼ ਨੇ ਪਹਿਲੀ ਹਾਈਡ੍ਰੋਜਨ ਨਾਲ ਚੱਲਣ ਵਾਲੀ ਟ੍ਰੇਨ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰ ਦਿੱਤੀ ਹੈ ਅਤੇ ਮੈਨੂੰ ਖੁਸ਼ੀ ਹੈ ਕਿ ਇਹ ਸਭ ਤੋਂ ਲੰਬੀ ਟ੍ਰੇਨ ਹੈ ਅਤੇ ਸਭ ਤੋਂ ਤਾਕਤਵਰ ਟ੍ਰੇਨ ਹੈ ਅਤੇ ਦੁਨੀਆ ਵਿੱਚ ਹਾਈਡ੍ਰੋਜਨ ਟ੍ਰੇਨ ਦੇ ਖੇਤਰ ਵਿੱਚ ਵੀ ਭਾਰਤ ਨੇ ਆਪਣਾ ਝੰਡਾ ਗੱਡ ਦਿੱਤਾ ਹੈ।

ਪਿਆਰੇ ਦੇਸ਼ ਵਾਸੀਓ,

ਪਿਛਲੇ 10-12 ਸਾਲ ਅਸੀਂ ਲਗਾਤਾਰ 2047 ਦੇ ਟੀਚੇ ਨੂੰ ਪਾਉਣ ਲਈ ਦੌੜ ਰਹੇ ਹਾਂ। ਇੱਕ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਇੱਕ ਪੜਾਅ ਸਰ ਕਰ ਰਹੇ ਹਾਂ। ਅਸੀਂ ਸੋਚਿਆ ਵੀ ਨਹੀਂ ਸੀ ਕਿ ਸਾਨੂੰ ਇਸ ਵਿੱਚ ਵੀ ਕੁੱਝ ਮੁਸੀਬਤਾਂ ਝੱਲਣੀਆਂ ਪੈਣਗੀਆਂ। ਪਿਛਲੇ 10-12 ਸਾਲਾਂ ਵਿੱਚ ਕਿੰਨੇ ਸੰਕਟਾਂ ਦਾ ਸਾਹਮਣਾ ਕਰਨਾ ਪਿਆ। ਕੋਰੋਨਾ ਵਰਗੀ ਵਿਸ਼ਵ-ਵਿਆਪੀ ਮਹਾਮਾਰੀ ਨੇ ਪੂਰੀ ਦੁਨੀਆ ਨੂੰ ਚਿੰਤਾ ਵਿੱਚ ਪਾ ਦਿੱਤਾ ਸੀ, ਸਾਰੀਆਂ ਵਿਵਸਥਾਵਾਂ ਚਰਮਰਾ ਗਈਆਂ ਸਨ, ਕੋਰੋਨਾ ਤੋਂ ਬਾਹਰ ਨਿਕਲੇ, ਯੁੱਧ ਦੀ ਭਿਆਨਕਤਾ ਦੀਆਂ ਖ਼ਬਰਾਂ ਆਉਣ ਲੱਗੀਆਂ, ਕਿਤੇ ਯੂਕ੍ਰੇਨ ਤਾਂ ਕਿਤੇ ਪੱਛਮੀ ਏਸ਼ੀਆ, ਹਰ ਜਗ੍ਹਾ ’ਤੇ ਤਣਾਅ ਦਾ ਮਾਹੌਲ ਅਤੇ ਪਤਾ ਨਹੀਂ ਭਵਿੱਖਵਾਣੀ ਕਰਨ ਵਾਲਿਆਂ ਨੇ ਤਾਂ ਨਾ ਜਾਣੇ ਕੀ-ਕੀ ਐਲਾਨ ਕਰ ਦਿੱਤੇ ਸਨ। ਦੇਸ਼ ਨੂੰ ਡਰਾਉਣਾ, ਡਰ ਅਤੇ ਚਿੰਤਾ ਦੀ ਸਥਿਤੀ ਵਿੱਚ ਰੱਖਣਾ, ਇਸੇ ਵਿੱਚ ਕੁੱਝ ਲੋਕਾਂ ਨੂੰ ਆਨੰਦ ਆਉਂਦਾ ਹੈ। ਵੈਕਸੀਨ ਨਹੀਂ ਮਿਲੇਗੀ, ਕੋਵਿਡ ਵਿੱਚ ਲੋਕ ਬਚਣਗੇ ਨਹੀਂ, ਕੁੱਝ ਵੀ ਨਹੀਂ ਹੋਣ ਵਾਲਾ। ਵੈਸਟ ਏਸ਼ੀਆ ਦਾ ਸੰਕਟ ਆਇਆ, ਪੈਟਰੋਲ ਪੰਪ ’ਤੇ ਪੈਟਰੋਲ ਨਹੀਂ ਮਿਲੇਗਾ, ਗੈਸ ਨਹੀਂ ਮਿਲੇਗੀ, ਡੀਜ਼ਲ ਨਹੀਂ ਮਿਲੇਗਾ, ਖਾਦ ਨਹੀਂ ਮਿਲੇਗੀ, ਸਾਰੀ ਦੁਨੀਆ ਭਰ ਦੀਆਂ ਅਫ਼ਵਾਹਾਂ ਫੈਲਾ ਕੇ, ਭਾਰਤ ਦੇ ਲੋਕਾਂ ਨੂੰ ਡਰਾਉਣ ਦਾ, ਚਿੰਤਾ ਦੇ ਅੰਦਰ ਡੁਬੋ ਦੇਣ ਦਾ, ਕੁੱਝ ਲੋਕਾਂ ਨੂੰ ਆਨੰਦ ਆ ਰਿਹਾ ਸੀ। ਪਰ ਦੇਸ਼ ਨੇ ਦੇਖ ਲਿਆ ਕਿ ਪਿਛਲੇ 10-12 ਸਾਲਾਂ ਦੀਆਂ ਸੋਚੀਆਂ-ਸਮਝੀਆਂ ਯੋਜਨਾਵਾਂ ਰੰਗ ਲਿਆ ਰਹੀਆਂ ਹਨ ਅਤੇ ਅਸੀਂ ਇੰਨੇ ਵੱਡੇ ਸੰਕਟ ਦੇ ਬਾਵਜੂਦ ਵੀ 'ਨਾਗਰਿਕ ਦੇਵੋ ਭਵ:' ਦੇ ਮੰਤਰ ਨੂੰ ਲੈ ਕੇ ਜਿਉਂਦਿਆਂ ਭਾਰਤ ਨੇ ਜੋ ਤਿਆਰੀਆਂ ਕੀਤੀਆਂ ਸਨ, ਇੱਕ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਇੱਕ ਕਦਮ ਚੁੱਕਿਆ ਸੀ, ਸੋਚਿਆ ਨਹੀਂ ਸੀ ਕਿ ਇਹ ਸੰਕਟ ਆਵੇਗਾ, ਪਰ ਉਸ ਸੰਕਟ ਦੇ ਸਮੇਂ ਵਿੱਚ ਇਹ ਸਾਰੀਆਂ ਚੀਜ਼ਾਂ ਕੰਮ ਆ ਗਈਆਂ ਅਤੇ ਅੱਜ ਦੇਸ਼ ਵਿੱਚ ਗੈਸ ਵੀ ਹੈ, ਪੈਟਰੋਲ ਵੀ ਹੈ, ਯੂਰੀਆ ਵੀ ਹੈ। ਅਸੀਂ ਆਪਣੀ ਤਾਕਤ ’ਤੇ ਖੜ੍ਹੇ ਹੋ ਰਹੇ ਹਾਂ, ਚੱਲ ਰਹੇ ਹਾਂ।

ਮੇਰੇ ਪਿਆਰੇ ਦੇਸ਼ ਵਾਸੀਓ,

ਦੁਨੀਆ ਦੇ ਇਨ੍ਹਾਂ ਸੰਕਟਾਂ ਦਾ ਪ੍ਰਭਾਵ ਹਰ ਕਿਸੇ ’ਤੇ ਹੋਇਆ, ਅਸੀਂ ਵੀ ਅਛੂਤੇ ਨਹੀਂ ਹਾਂ। ਯੂਰੀਆ ਦੀ ਕੀਮਤ ਦੁਨੀਆ ਵਿੱਚ 3000 ਰੁਪਏ ਪਹੁੰਚ ਗਈ ਇੱਕ ਬੋਰੀ ਦੀ। ਅੱਜ ਵੀ ਅਸੀਂ ਮੇਰੇ ਦੇਸ਼ ਦੇ ਕਿਸਾਨਾਂ ਨੂੰ ਉਹ ਬੋਝ ਸਹਿਣ ਲਈ ਮਜ਼ਬੂਰ ਨਹੀਂ ਕਰ ਰਹੇ, ਸਰਕਾਰ ਆਪਣੇ ਮੋਢਿਆਂ ’ਤੇ ਉਹ ਬੋਝ ਚੁੱਕ ਰਹੀ ਹੈ ਅਤੇ ਦੁਨੀਆ ਤੋਂ ਜੋ 3000 ਰੁਪਏ ਵਿੱਚ ਯੂਰੀਆ ਦਾ ਬੋਰਾ ਸਾਨੂੰ ਮਿਲਦਾ ਹੈ, ਉਹ ਸਾਡੇ ਕਿਸਾਨਾਂ ਨੂੰ ਅਸੀਂ ਸਿਰਫ਼ 300 ਰੁਪਏ ਵਿੱਚ ਦੇ ਰਹੇ ਹਾਂ। ਇੰਨਾ ਹੀ ਨਹੀਂ ਡੀਏਪੀ, ਅੱਜ ਦੁਨੀਆ ਵਿੱਚ ਬਾਜ਼ਾਰ 5000 ਪਹੁੰਚ ਚੁੱਕਿਆ ਹੈ, ਪਰ ਮੇਰੇ ਦੇਸ਼ ਦੇ ਕਿਸਾਨਾਂ ਨੂੰ ਦਿੱਕਤ ਨਾ ਹੋਵੇ, ਇਸ ਲਈ 1350 ਰੁਪਏ ਵਿੱਚ ਅੱਜ ਵੀ ਡੀਏਪੀ ਦੇਣ ਦਾ ਕੰਮ ਅਸੀਂ ਕਰ ਰਹੇ ਹਾਂ।

ਮੇਰੇ ਪਿਆਰੇ ਦੇਸ਼ ਵਾਸੀਓ,

ਇੱਕ ਸਮਾਂ ਸੀ, ਜਦੋਂ ਮੈਂ ਆਤਮ-ਨਿਰਭਰਤਾ ਦੀ ਗੱਲ ਕਰ ਰਿਹਾ ਸੀ, ਤਾਂ ਕੁੱਝ ਲੋਕ ਏਅਰ ਕੰਡੀਸ਼ਨ ਚੈਂਬਰ ਵਿੱਚ ਬੈਠ ਕੇ ਸੋਚਣ ਵਾਲੇ ਲੋਕ ਸਾਨੂੰ ਦੱਸ ਰਹੇ ਸਨ, ਗਲੋਬਲਾਈਜ਼ੇਸ਼ਨ ਦਾ ਕੀ ਹੋਵੇਗਾ। ਪਰ ਦੁਨੀਆ ਦੇਖ ਰਹੀ ਹੈ ਕਿ ਪਿਛਲੇ ਇੱਕ ਦਹਾਕੇ ਵਿੱਚ ਅਜਿਹਾ ਲੱਗ ਰਿਹਾ ਹੈ ਕਿ ਦੁਨੀਆ ਨੇ ਗਲੋਬਲਾਈਜ਼ੇਸ਼ਨ ਬੋਲਣਾ ਹੀ ਬੰਦ ਕਰ ਦਿੱਤਾ ਹੈ। ਜਿੱਥੋਂ ਗਲੋਬਲਾਈਜ਼ੇਸ਼ਨ ਦੀਆਂ ਆਵਾਜ਼ਾਂ ਆਉਂਦੀਆਂ ਸਨ, ਉਹ ਬੰਦ ਹੋ ਗਈਆਂ, ਸੁਣਾਈ ਨਹੀਂ ਦਿੰਦੀਆਂ। ਦੁਨੀਆ ਦਾ ਹਰ ਦੇਸ਼ ਆਪਣੇ-ਆਪਣੇ ਸਵਾਲਾਂ ਦੇ ਮਿਜ਼ਾਜ ਵੱਲ ਗਿਆ ਹੈ, ਪਰ ਬਦਕਿਸਮਤੀ ਨਾਲ ਇਸ ਸੰਕਟ ਦੇ ਕਾਲ-ਖੰਡ ਵਿੱਚ ਕੁੱਝ ਲੋਕਾਂ ਨੇ ਆਪਣਾ ਰੁਤਬਾ ਦਿਖਾਉਣ ਲਈ ਸਾਧਨਾਂ ਨੂੰ ਵੈਪਨਾਈਜ਼ ਕਰਨ ਦਾ ਖੇਡ ਖੇਡਿਆ ਹੈ। ਦੁਨੀਆ ਆਪਣੇ ਕੋਲ ਜੋ ਕੁੱਝ ਵੀ ਹੈ, ਉਸ ਨੂੰ ਵੈਪਨਾਈਜ਼ ਕਰਨ ਵਿੱਚ ਲੱਗੀ ਹੈ। ਸਾਧਨਾਂ ਦਾ ਵੈਪਨਾਈਜ਼, ਰਿਸੋਰਸ ਦਾ ਵੈਪਨਾਈਜ਼, ਪੈਟਰੋਲ, ਡੀਜ਼ਲ, ਖਾਦ, ਦਵਾਈਆਂ, ਤਕਨਾਲੋਜੀ ਦੀਆਂ ਚਿੱਪਸ, ਇੰਨਾ ਹੀ ਨਹੀਂ ਭੂ-ਭਾਗ ਨੂੰ ਵੀ ਵੈਪਨਾਈਜ਼ ਕੀਤਾ ਜਾ ਰਿਹਾ ਹੈ। ਅਤੇ ਅਜਿਹੇ ਸਮੇਂ ਜੇਕਰ ਅਸੀਂ ਆਤਮਨਿਰਭਰਤਾ ਦੇ ਮੰਤਰ ਨੂੰ ਲੈ ਕੇ 10 ਸਾਲ ਸਹੀ ਦਿਸ਼ਾ ਵਿੱਚ ਨਾ ਚੱਲੇ ਹੁੰਦੇ, ਤਾਂ ਅਸੀਂ ਕਲਪਨਾ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹਾਂ ਕਿ ਅਜਿਹੀਆਂ ਚੁਣੌਤੀਆਂ ਦਾ ਮਜ਼ਬੂਤੀ ਨਾਲ ਮੁਕਾਬਲਾ ਕਿਵੇਂ ਕਰਦੇ ਅਤੇ ਸਾਡੀਆਂ ਤਿਆਰੀਆਂ ਨਿਰੰਤਰ ਵਧਦੀਆਂ ਜਾ ਰਹੀਆਂ ਹਨ।

ਮੇਰੇ ਪਿਆਰੇ ਦੇਸ਼ ਵਾਸੀਓ,

ਦੂਜੇ ਪਾਸੇ ਅੱਜ ਭਾਰਤ ਦਾ ਪ੍ਰੋਫਾਈਲ ਪੂਰੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਵਧ ਰਿਹਾ ਹੈ। ਅੱਜ ਭਾਰਤ ਦੁਨੀਆ ਲਈ ਇੱਕ ਪ੍ਰਵਾਨਿਤ ਅਤੇ ਸਨਮਾਨਯੋਗ ਦੇਸ਼ ਦੇ ਰੂਪ ਵਿੱਚ ਬਣ ਰਿਹਾ ਹੈ। ਭਾਰਤ ਕੋਲ ਸਥਿਰ ਪੌਲੀਟੀਕਲ ਮੈਂਡੇਟ ਹੈ, ਸਥਿਰ ਸਰਕਾਰ ਹੈ, ਭਾਰਤ ਦਾ ਵਾਈਬ੍ਰੈਂਟ ਲੋਕਤੰਤਰ ਹੈ, ਭਾਰਤ ਦਾ ਮਜ਼ਬੂਤ ਨਿਆਂ ਤੰਤਰ ਹੈ ਅਤੇ ਸਾਡੇ ਸਭ ਨੂੰ ਦਿਸ਼ਾ ਦੇਣ ਵਾਲਾ ਭਾਰਤ ਦਾ ਸੰਵਿਧਾਨ ਹੈ ਅਤੇ ਹੁਣ ਦੁਨੀਆ ਸਾਡੀ ਇਸ ਸਮਰੱਥਾ ਨੂੰ ਪਛਾਣਨ ਲੱਗੀ ਹੈ। ਅਤੇ ਇਸ ਲਈ 2014 ਤੋਂ ਬਾਅਦ, ਦੁਨੀਆ ਦੇ ਲਗਭਗ 40 ਦੇਸ਼ਾਂ ਨਾਲ ਸਾਡਾ ਐੱਫਟੀਏ ਸਮਝੌਤਾ ਹੋ ਰਿਹਾ ਹੈ। ਤੁਸੀਂ ਦੇਖੋ, ਕਿੱਡਾ ਵੱਡਾ ਮੌਕਾ ਆਇਆ ਹੈ, ਪਰ ਮੈਂ ਇਹ ਜੋ ਵਪਾਰ ਸਮਝੌਤੇ ਹੋਏ ਹਨ, ਇਹ ਇੱਕ ਬਹੁਤ ਵੱਡਾ ਮੌਕਾ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸ ਲਈ ਖਾਸ ਕਰਕੇ ਮੈਂ ਮੇਰੇ ਐੱਮਐੱਸਐੱਮਈਜ਼ ਨੂੰ ਕਹਿਣਾ ਚਾਹਾਂਗਾ ਕਿ ਸਾਨੂੰ ਇਸ ਮੌਕੇ ਨੂੰ ਛੱਡਣਾ ਨਹੀਂ ਹੈ। ਦੁਨੀਆ ਵਿੱਚ ਅਸੀਂ ਪਹੁੰਚਣਾ ਹੈ, ਭਾਰਤ ਦੇ ਉਤਪਾਦ ਦੀ ਹਰ ਚੀਜ਼ ਦੁਨੀਆ ਦੇ ਬਾਜ਼ਾਰ ਵਿੱਚ ਪਹੁੰਚੇ ਅਤੇ ਭਾਵੇਂ ਸਾਡਾ ਟੈਕਸਟਾਈਲ ਹੋਵੇ, ਸਾਡੀ ਮਸ਼ੀਨਰੀ ਹੋਵੇ, ਦਵਾਈਆਂ ਹੋਣ, ਅਸੀਂ ਮੌਕਾ ਛੱਡਣਾ ਨਹੀਂ ਹੈ, ਪਰ ਆਲਮੀ ਜੋ ਪੈਰਾਮੀਟਰਜ਼ ਹਨ, ਉਸ ਪੈਰਾਮੀਟਰ ਨੂੰ ਸਾਨੂੰ ਪਾਰ ਕਰਨਾ ਹੋਵੇਗਾ। ਸਾਨੂੰ ਦੁਨੀਆ ਤੋਂ ਜੋ ਮਿਲਦਾ ਹੈ, ਉਸ ਤੋਂ ਚੰਗਾ ਦੇਣਾ ਪਵੇਗਾ। ਦੁਨੀਆ ਵਿੱਚ ਜੋ ਮਿਲਦਾ ਹੈ, ਉਸ ਤੋਂ ਸਸਤਾ ਦੇਣਾ ਪਵੇਗਾ ਅਤੇ ਪੰਜਾਬ ਦੇ ਲੁਧਿਆਣਾ ਤੋਂ ਲੈ ਕੇ ਤਾਮਿਲਨਾਡੂ ਦੇ ਤਿਰੂਪੁਰ ਤੱਕ ਸਾਡਾ ਟੈਕਸਟਾਈਲ ਸੈਕਟਰ ਦੁਨੀਆ ਵਿੱਚ ਪਹੁੰਚ ਸਕਦਾ ਹੈ। ਇੰਨਾ ਹੀ ਨਹੀਂ, ਕੇਰਲਮ ਤੋਂ ਲੈ ਕੇ ਗੁਜਰਾਤ ਅਤੇ ਤਾਮਿਲਨਾਡੂ ਤੋਂ ਲੈ ਕੇ ਬੰਗਾਲ, ਇਹ ਸਾਡਾ ਸਮੁੰਦਰੀ ਤਟ, ਸਾਡੇ ਮਛੇਰੇ ਭੈਣ-ਭਰਾ ਅੱਜ ਇਸ ਐੱਫਟੀਏ ਦੇ ਕਾਰਨ ਸਾਡੇ ਸ਼੍ਰਿੰਪ ਯਾਨੀ ਝੀਂਗਾ, ਉਸ ਦੇ ਐਕਸਪੋਰਟ ਦੀ ਬਹੁਤ ਸੰਭਾਵਨਾ ਵਧੀ ਹੈ। ਸਾਡੇ ਸੀ ਫੂਡ ਦੀ ਦੁਨੀਆ ਵਿੱਚ ਪਹੁੰਚ ਬਣਨ ਦੀ ਸੰਭਾਵਨਾ ਵਧੀ ਹੋਈ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸ ਲਈ ਮੈਂ ਚਾਹਾਂਗਾ ਕਿ ਸਾਨੂੰ ਇਸ ਸਥਿਤੀ ਦਾ ਫਾਇਦਾ ਚੁੱਕਦਿਆਂ, ਅਸੀਂ ਅੱਗੇ ਵਧਦਿਆਂ, ਅਸੀਂ ਇਨ੍ਹਾਂ ਕੰਮਾਂ ਨੂੰ ਪਾਰ ਕਰਨ ਲਈ ਯਤਨ ਕਰੀਏ।

ਮੇਰੇ ਪਿਆਰੇ ਦੇਸ਼ ਵਾਸੀਓ,

ਮੈਂ ਇਹ ਜੋ ਭੂਮਿਕਾ ਤੁਹਾਡੇ ਸਾਹਮਣੇ ਰੱਖੀ ਹੈ, ਉਸ ਦੇ ਪਿੱਛੇ 2047 ਦਾ ਟੀਚਾ ਇਨ੍ਹਾਂ ਮਜ਼ਬੂਤ ਨੀਹਾਂ ’ਤੇ ਖੜ੍ਹਾ ਹੈ। 2047 ਵਿਕਸਤ ਭਾਰਤ ਦਾ ਟੀਚਾ ਅਸੀਂ ਪਿਛਲੇ 10-12 ਸਾਲਾਂ ਵਿੱਚ ਦੇਸ਼ ਵਾਸੀਆਂ ਨੇ ਜੋ ਸਮਰੱਥਾ ਦਿਖਾਈ ਹੈ, ਉਸ ਸਮਰੱਥਾ ਦਾ ਹਿੱਸਾ ਹੈ।

ਅਤੇ ਇਸ ਲਈ ਮੇਰੇ ਪਿਆਰੇ ਭਰਾਵੋ-ਭੈਣੋ,

ਸਦੀ ਦਾ ਇੱਕ ਚੌਥਾਈ ਹਿੱਸਾ ਬੀਤ ਚੁੱਕਾ ਹੈ ਅਤੇ ਅਗਲਾ ਇੱਕ ਚੌਥਾਈ ਸਾਡੇ ਲਈ ਬਹੁਤ ਮਹੱਤਵਪੂਰਨ ਹੈ। ਹੁਣ ਅਸੀਂ ਰੁਕ ਨਹੀਂ ਸਕਦੇ ਹਾਂ, ਸਾਡੀ ਰਫ਼ਤਾਰ ਨਹੀਂ ਰੁਕ ਸਕਦੀ, ਸਾਡੀ ਦਿਸ਼ਾ ਤੈਅ ਹੋ ਚੁੱਕੀ ਹੈ, ਅਸੀਂ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕਰਕੇ ਰਹਿਣਾ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸ ਲਈ ਸਾਨੂੰ ਆਪਣਾ ਵਰਕ ਕਲਚਰ ਬਦਲਣਾ ਹੋਵੇਗਾ, ਸਾਡੇ ਵਰਕ ਕਲਚਰ ਨੂੰ ਬਦਲਦਿਆਂ ਸਾਨੂੰ ਸਾਡੀ ਸੋਚ ਨੂੰ ਵੀ ਬਦਲਣਾ ਹੋਵੇਗਾ, ਸਾਨੂੰ ਸਾਡੇ ਕੰਮ ਦੀ ਰਫ਼ਤਾਰ ਨੂੰ ਵੀ ਬਦਲਣਾ ਹੋਵੇਗਾ। ਜੋ ਕੰਮ ਪਿਛਲੇ 5-7 ਦਹਾਕਿਆਂ ਵਿੱਚ ਨਹੀਂ ਹੋਏ ਹਨ, ਉਹ ਕੰਮ ਸਾਨੂੰ ਆਉਣ ਵਾਲੇ 5-7 ਸਾਲਾਂ ਵਿੱਚ ਕਰਨੇ ਹਨ ਅਤੇ ਮੇਰਾ ਭਰੋਸਾ ਹੈ, ਮੇਰੇ ਦੇਸ਼ ਦੀ ਯੁਵਾ ਸ਼ਕਤੀ ’ਤੇ, ਮੇਰੇ ਦੇਸ਼ ਦੇ ਨੌਜਵਾਨਾਂ ’ਤੇ, ਮੇਰੇ ਦੇਸ਼ ਦੀਆਂ ਮਾਤਾਵਾਂ-ਭੈਣਾਂ ’ਤੇ, ਮੇਰੇ ਦੇਸ਼ ਦੇ ਕਿਸਾਨਾਂ ’ਤੇ, ਮੇਰੇ ਦੇਸ਼ ਦੇ ਮਜ਼ਦੂਰਾਂ ’ਤੇ ਕਿ ਅਸੀਂ, ਅਸੀਂ ਇਸ ਸੁਪਨੇ ਨੂੰ ਸਾਕਾਰ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹਾਂ। ਅਤੇ ਇਸ ਲਈ ਸਾਨੂੰ ਰਿਫੌਰਮ ਦੀ ਰਫ਼ਤਾਰ ਨੂੰ ਵੀ ਅੱਗੇ ਵਧਾਉਣਾ ਹੈ ਅਤੇ ਜਦੋਂ ਮੈਂ ਰਿਫੌਰਮ ਦੀ ਗੱਲ ਕਰ ਰਿਹਾ ਹਾਂ, ਰਿਫੌਰਰਮ ਨਾ ਹੀ ਸਾਡੇ ਲਈ ਕੰਪਲਸ਼ਨ ਹੈ, ਨਾ ਹੀ ਰਿਫੌਰਮ ਇਹ ਸਾਡੇ ਲਈ ਕੋਈ ਬਜ਼ਵਰਡ ਹੈ, ਸਾਡੀ ਇਹ ਰਿਫੌਰਮ ਇਹ ਕਨਵਿਕਸ਼ਨ ਹੈ, ਆਊਟ ਆਫ਼ ਕਨਵਿਕਸ਼ਨ। ਅਸੀਂ ਰਿਫੌਰਮ ਐਕਸਪ੍ਰੈੱਸ ’ਤੇ ਚੱਲ ਪਏ ਹਾਂ ਅਤੇ ਅਸੀਂ ਆਉਣ ਵਾਲੇ ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਵੀ ਨੇਕਸਟ ਲੈਵਲ ਰਿਫੌਰਮ ਵੱਲ ਵਧਣ ਵਾਲੇ ਹਾਂ ਅਤੇ ਇਸ ਲਈ ਸਰਕਾਰ, ਸਮਾਜ, ਉਦਯੋਗ, ਉਤਪਾਦਕ, ਕਿਸਾਨ, ਹਰ ਕਿਸੇ ਨੂੰ ਆਪਣੀਆਂ ਟ੍ਰੈਡਿਸ਼ਨਲ ਵਿਵਸਥਾਵਾਂ ਵਿੱਚ ਰਿਫੌਰਮ ਕਰਨਾ ਪਵੇਗਾ, ਸੋਚ ਵਿੱਚ ਰਿਫੌਰਮ ਕਰਨਾ ਹੋਵੇਗਾ, ਆਪਣੇ ਟੀਚਿਆਂ ਨੂੰ ਰਿਫੌਰਮ ਕਰਨਾ ਹੋਵੇਗਾ।

ਅਤੇ ਇਸ ਲਈ ਮੇਰੇ ਪਿਆਰੇ ਦੇਸ਼ ਵਾਸੀਓ,

ਸਾਨੂੰ ਇੱਕ ਨਿਸ਼ਚਿਤ ਦਿਸ਼ਾ ਲੈ ਕੇ ਚੱਲਣਾ ਹੋਵੇਗਾ। ਮੈਂ ਅੱਜ ਉਸ ਯੁੱਗ ਨੂੰ ਵੀ ਯਾਦ ਕਰਨਾ ਚਾਹਾਂਗਾ, ਜਦੋਂ ਦੇਸ਼ ਭਾਰਤ ਦੀ ਸਮਰੱਥਾ ਸਪਤ ਸਿੰਧੂ ਦੇ ਰੂਪ ਵਿੱਚ ਅਸੀਂ ਜਾਣਦੇ ਸੀ, ਅਸੀਂ ਸਮਝਦੇ ਸੀ, ਅਸੀਂ ਸੁਣਦੇ ਸੀ ਅਤੇ ਵਿਕਸਤ ਭਾਰਤ ਬਣਾਉਣ ਲਈ ਸਾਨੂੰ ਨਵੀਂ ਧਾਰਾ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ। ਅੱਜ ਲਾਲ ਕਿਲ੍ਹੇ ਦੀ ਫ਼ਸੀਲ ਤੋਂ ਮੈਂ ਦੇਸ਼ ਦੇ ਸਾਹਮਣੇ ਸ਼ਕਤੀ ਦੀ ਇਸ ਸਪਤ ਧਾਰਾ ਦਾ ਸੱਦਾ ਦਿੰਦਾ ਹਾਂ। ਆਉਣ ਵਾਲੇ 5-7 ਸਾਲਾਂ ਵਿੱਚ, ਜੋ ਪਿਛਲੇ 5-7 ਦਹਾਕਿਆਂ ਵਿੱਚ ਨਹੀਂ ਹੋਇਆ, ਉਹ ਸਪਤ ਧਾਰਾ ਦੀ ਸਮਰੱਥਾ ਨਾਲ, ਸ਼ਕਤੀ ਨਾਲ, ਅਸੀਂ ਦੇਸ਼ ਨੂੰ ਨਵੀਂ ਉਚਾਈ, ਨਵੀਂ ਰਫ਼ਤਾਰ ਦਿਆਂਗੇ ਅਤੇ ਨਵੇਂ ਟੀਚਿਆਂ ਨੂੰ ਪਾਰ ਕਰਨ ਵਾਲੀ ਸਮਰੱਥਾ ਦਿਆਂਗੇ। ਅਤੇ ਇਸ ਦੇ ਨਾਲ-ਨਾਲ ਦੇਸ਼ ਦੀ ਯੁਵਾ ਸ਼ਕਤੀ ਦੀ ਸਮਰੱਥਾ ਦਾ ਭਰਪੂਰ ਰਾਸ਼ਟਰ ਨਿਰਮਾਣ ਵਿੱਚ ਉਪਯੋਗ ਹੋਵੇਗਾ, ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੀ ਸ਼ਕਤੀ ਜੋੜੀ ਜਾਵੇਗੀ। ਆਉਣ ਵਾਲੇ ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਜਦੋਂ ਮੈਂ ਸਪਤ ਧਾਰਾ ਦੀ ਗੱਲ ਕਰਦਾ ਹਾਂ, ਸਪਤ ਧਾਰਾ ਦੀ ਪਹਿਲੀ ਸ਼ਕਤੀ ਹੈ - ਮੈਨੂਫੈਕਚਰਿੰਗ ਪਾਵਰ।

ਮੇਰੇ ਪਿਆਰੇ ਦੇਸ਼ ਵਾਸੀਓ,

ਸਾਨੂੰ ਮੈਨੂਫੈਕਚਰਿੰਗ ਸੈਕਟਰ ਨੂੰ ਬਹੁਤ ਅੱਗੇ ਵਧਾਉਣਾ ਹੋਵੇਗਾ ਅਤੇ ਪ੍ਰੋਡਕਸ਼ਨ ਵਧਾਉਣ ਦੇ ਨਾਲ-ਨਾਲ ਸਾਨੂੰ ਛੋਟੇ-ਛੋਟੇ ਪੁਰਜ਼ੇ ਵੀ ਬਣਾਉਣੇ ਹਨ ਅਤੇ ਵੱਡੇ-ਵੱਡੇ ਪ੍ਰੋਡਕਟ ਵੀ ਬਣਾਉਣੇ ਹਨ। ਪੂਰੀ ਵੈਲਿਊ ਚੇਨ ਸਾਡੀ ਹੋਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਉਸ ਨੂੰ ਲੈ ਕੇ ਚੱਲਣਾ, ਸਾਨੂੰ ਕੰਪੋਨੈਂਟ ਵੀ ਚਾਹੀਦੇ ਹਨ ਅਤੇ ਸਾਨੂੰ ਕੰਪਲੀਟ ਮੈਨੂਫੈਕਚਰਿੰਗ ਵੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ, ਕੰਪਲੀਟ ਪ੍ਰੋਡਕਟ ਵੀ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ। ਡਿਜ਼ਾਈਨ ਤੋਂ ਲੈ ਕੇ ਮੈਨੂਫੈਕਚਰਿੰਗ ਤੱਕ ਭਾਰਤ ਨੂੰ ਗਲੋਬਲ ਸਪਲਾਈ ਚੇਨ ਦਾ ਭਰੋਸੇਮੰਦ ਕੇਂਦਰ ਬਣਨਾ ਹੋਵੇਗਾ। ਇਸ ਲਈ ਮੈਂ ਤਿੰਨ ਚੀਜ਼ਾਂ ’ਤੇ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ ਜ਼ੋਰ ਦੇਣਾ ਚਾਹੁੰਦਾ ਹਾਂ। ਮੈਨੂਫੈਕਚਰਿੰਗ ਦੇ ਖੇਤਰ ਵਿੱਚ ਜੋ ਮੇਰੇ ਭਰਾ-ਭੈਣ ਹਨ, ਇਹ ਸਮੇਂ ਦਾ ਮੌਕਾ ਹੈ, ਇਸ ਮੌਕੇ ਨੂੰ ਜਾਣ ਨਾ ਦਿਓ ਅਤੇ ਇਸ ਲਈ ਸਾਨੂੰ ਕੋਸਟ, ਕੁਆਲਿਟੀ ਅਤੇ ਸਕੇਲ, ਇਸ ਦੇ ਵਿਸ਼ੇ ਵਿੱਚ ਆਲਮੀ ਮਾਪਦੰਡਾਂ ’ਤੇ ਖਰਾ ਉਤਰਨਾ ਪਵੇਗਾ। ਸਾਡੀਆਂ ਫੈਕਟਰੀਆਂ ਮੁਕਾਬਲਾਤਮਕ ਹੋਣ, ਸਾਡੇ ਉਤਪਾਦ ਯੂਜ਼ਰ ਫ੍ਰੈਂਡਲੀ ਹੋਣ, ਸਾਡੀ ਪੈਕੇਜਿੰਗ ਦੁਨੀਆ ਦੇ ਲੋਕਾਂ ਨੂੰ ਲੁਭਾਉਣ ਵਾਲੀ ਹੋਵੇ, ਆਕਰਸ਼ਿਤ ਕਰਨ ਵਾਲੀ ਹੋਵੇ। ਸਾਡਾ ਜ਼ੀਰੋ ਡਿਫੈਕਟ ਪ੍ਰਿਸੀਜ਼ਨ ਮੈਨੂਫੈਕਚਰਿੰਗ, ਇਹ ਸਾਡੀ ਪਛਾਣ ਬਣਨਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ। ਹਰ ਨਿਰਮਾਤਾ, ਹਰ ਉੱਦਮੀ, ਹਰ ਐੱਮਐੱਸਐੱਮਈਜ਼ ਨੂੰ ਮੈਂ ਕਹਿਣਾ ਚਾਹੁੰਦਾ ਹਾਂ, ਗਲੋਬਲ ਬਾਜ਼ਾਰ ਵਿੱਚ ਸਾਡੀ ਪਛਾਣ ਭਰੋਸੇਯੋਗਤਾ ਅਤੇ ਗੁਣਵੱਤਾ ਦੇ ਅਧਾਰ ’ਤੇ ਹੋਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ। ਗੁਣਵੱਤਾ ਦੇ ਸਬੰਧ ਵਿੱਚ ਨੋ ਸਮਝੌਤਾ ਅਤੇ ਇਸ ਲਈ ਸਾਡਾ ਮੰਤਰ ਕੁਆਲਿਟੀ, ਕੁਆਲਿਟੀ, ਕੁਆਲਿਟੀ ਹੋਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ। ਇਹੋ ਸਾਡੀ ਗਲੋਬਲ ਬ੍ਰਾਂਡ ਵੈਲਿਊ ਬਣੇਗਾ।

ਮੇਰੇ ਪਿਆਰੇ ਦੇਸ਼ ਵਾਸੀਓ,

ਇਸ ਸਪਤ ਧਾਰਾ ਦੀ ਦੂਜੀ ਸ਼ਕਤੀ ਹੈ - ਖੇਤੀਬਾੜੀ ਅਤੇ ਫੂਡ ਪ੍ਰੋਡਕਸ਼ਨ। ਫੂਡ ਪ੍ਰੋਸੈਸਿੰਗ, ਸਾਨੂੰ ਇਸ ਦਿਸ਼ਾ ਵਿੱਚ ਅੱਗੇ ਵਧਣਾ ਹੋਵੇਗਾ। ਸਾਡੇ ਕਿਸਾਨਾਂ ਲਈ ਹੁਣ ਦੁਨੀਆ ਦੇ ਬਾਜ਼ਾਰ ਖੁੱਲ੍ਹ ਚੁੱਕੇ ਹਨ, ਐੱਫਟੀਏ ਦੇ ਕਾਰਨ ਸਾਨੂੰ ਇੱਕ ਬਹੁਤ ਵੱਡਾ ਬਾਜ਼ਾਰ ਮਿਲ ਰਿਹਾ ਹੈ, ਸਾਨੂੰ ਉੱਥੇ ਪਹੁੰਚਣਾ ਹੈ, ਸਾਨੂੰ ਉਸ ਜਗ੍ਹਾ ਨੂੰ ਹੱਥ ਲਗਾਉਣਾ ਹੈ, ਸਾਨੂੰ ਖੇਤ ਤੋਂ ਲੈ ਕੇ ਨਿਰਯਾਤ ਬਾਜ਼ਾਰ ਵੱਲ ਜਾਣਾ ਹੋਵੇਗਾ। ਸਾਡਾ ਰਵਾਇਤੀ ਖਾਣ-ਪੀਣ ਹੋਵੇ, ਸਾਡੇ ਮਿਲੇਟਸ ਹੋਣ, ਸਾਡੇ ਮਸਾਲੇ ਹੋਣ, ਸਾਡੇ ਫਲ ਹੋਣ, ਫੁੱਲ ਹੋਣ, ਕੀ ਕੁੱਝ ਨਹੀਂ ਹੈ ਸਾਡੇ ਕੋਲ। ਉਹ ਗਲੋਬਲ ਬ੍ਰਾਂਡਸ ਬਣਨੇ ਚਾਹੀਦੇ ਹਨ, ਸਾਡੇ ਕਿਸਾਨ ਕੈਮੀਕਲ ਫ੍ਰੀ ਖੇਤੀ ਨੂੰ ਬਲ ਦੇਣਗੇ, ਦੁਨੀਆ ਵਿੱਚ ਇਨ੍ਹਾਂ ਦੀ ਮੰਗ ਹੋਰ ਵਧਣ ਵਾਲੀ ਹੈ ਅਤੇ ਜੋ ਗਲੋਬਲ ਪੈਰਾਮੀਟਰਜ਼ ਦੇ ਅੰਦਰ ਹਰ ਪ੍ਰਕਾਰ ਨਾਲ ਸਿੱਧ ਹੋਣ ਵਾਲੇ ਸਾਡੇ ਐਗਰੋ ਪ੍ਰੋਡਕਟ ਹੋਣਗੇ, ਤਾਂ ਉਸ ਦੁਨੀਆ ਵਿੱਚ ਅਸੀਂ ਆਸਾਨੀ ਨਾਲ ਪਹੁੰਚ ਪਾਵਾਂਗੇ। ਮੇਰੀ ਸਪਤ ਧਾਰਾ ਦੀ ਤੀਜੀ ਸ਼ਕਤੀ ਹੈ - ਤਕਨਾਲੋਜੀ ਅਤੇ ਨਵੀਨਤਾ।

ਮੇਰੇ ਪਿਆਰੇ ਦੇਸ਼ ਵਾਸੀਓ,

ਅੱਜ ਜ਼ਮਾਨਾ ਏਆਈ ਦਾ ਹੈ, ਕਵਾਂਟਮ ਦਾ ਹੈ, ਪੁਲਾੜ ਦਾ ਹੈ, ਰੋਬੋਟਿਕਸ ਦਾ ਹੈ, ਡਾਟਾ ਸੈਂਟਰਾਂ ਦਾ ਹੈ, ਪੂਰੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਇੱਕ ਨਵਾਂ ਖੇਤਰ ਖੁੱਲ੍ਹ ਚੁੱਕਾ ਹੈ। ਅਤੇ ਇਮਰਜਿੰਗ ਟੈਕਨਾਲੋਜੀਜ਼ ਇਹ ਵੀ ਹਰ ਪਲ ਸਾਨੂੰ ਚੁਣੌਤੀ ਦੇ ਰਹੀਆਂ ਹਨ ਅਤੇ ਇਸ ਲਈ ਦੇਸ਼ ਨੂੰ ਦੁਨੀਆ ਲਈ ਬਾਜ਼ਾਰ ਨਹੀਂ ਬਣਾ ਦੇਣਾ, ਸਾਨੂੰ ਨਵੀਨਤਾ ਦਾ ਹਬ ਬਣਨਾ ਹੈ। ਅਸੀਂ ਯੂਪੀਆਈ ਅਤੇ ਡਿਜੀਟਲ ਪਬਲਿਕ ਇਨਫ੍ਰਾਸਟ੍ਰਕਚਰ ਵਿੱਚ ਲੋਹਾ ਮਨਵਾ ਲਿਆ ਹੈ, ਸਾਡੀ ਤਾਕਤ ਦਾ ਅਹਿਸਾਸ ਕਰਵਾ ਦਿੱਤਾ ਹੈ। ਹੁਣ ਭਾਰਤ ਨੂੰ ਡਿਜੀਟਲ ਪਬਲਿਕ ਟੈਕਨਾਲੋਜੀਜ਼, ਉਸ ਨੂੰ ਵੀ ਦੁਨੀਆ ਦੇ ਕੋਨੇ-ਕੋਨੇ ਤੱਕ ਪਹੁੰਚਾਉਣਾ ਹੈ। ਭਾਰਤ ਨੂੰ ਨੈਕਸਟ ਜਨਰੇਸ਼ਨ ਕਮਿਊਨੀਕੇਸ਼ਨ ਤਕਨਾਲੋਜੀ ਵਿੱਚ ਲੀਡ ਕਰਨਾ ਹੈ। ਮੇਡ ਇਨ ਇੰਡੀਆ 6ਜੀ ਹਰ ਕੋਨੇ ਵਿੱਚ ਪਹੁੰਚੇ ਇਹ ਸਾਡਾ ਟੀਚਾ ਹੋਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਸਾਨੂੰ ਇਸ ਵਿੱਚ ਤੇਜ਼ੀ ਕਰਨੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸ ਲਈ ਸਾਡਾ ਯਤਨ ਘੱਟ ਨਹੀਂ ਹੋਣਾ ਚਾਹੀਦਾ। ਸਪਤ ਧਾਰਾ ਦੀ ਚੌਥੀ ਸ਼ਕਤੀ ਹੈ - ਗਤੀ ਸ਼ਕਤੀ। ਇਹ ਗਤੀ ਸ਼ਕਤੀ, ਦੇਸ਼ ਦੇ ਅੰਦਰ ਸੀਮਲੈੱਸ ਫਾਸਟ ਕਨੈਕਟੀਵਿਟੀ ’ਤੇ ਸਾਨੂੰ ਬਲ ਦੇਣਾ ਹੋਵੇਗਾ। ਸ਼ਹਿਰਾਂ ਨੂੰ ਹਾਈ ਸਪੀਡ ਰੇਲ ਨਾਲ ਸਾਨੂੰ ਜੋੜਨਾ ਹੋਵੇਗਾ। ਮੌਡਰਨ ਹਾਈਵੇਜ਼ ਚਾਹੀਦੇ ਹਨ, ਇਨਲੈਂਡ ਵਾਟਰਵੇਜ਼ ਚਾਹੀਦੇ ਹਨ, ਏਅਰਪੋਰਟਸ ਚਾਹੀਦੇ ਹਨ, ਮਲਟੀਮੋਡਲ ਲੌਜਿਸਟਿਕਸ ਦੀ ਵਿਵਸਥਾ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ। ਸਾਨੂੰ ਪੋਰਟਸ ਨੂੰ ਸਿਰਫ਼ ਸਾਮਾਨ ਉਤਾਰਨ-ਚੜ੍ਹਾਉਣ ਦੀ ਜਗ੍ਹਾ ਨਹੀਂ, ਦੁਨੀਆ ਦੇ ਸ਼ਿਪਸ ਆ ਕੇ ਲੰਗਰ ਹੋ ਜਾਣ ਇੰਨਾ ਹੀ ਨਹੀਂ, ਸਾਨੂੰ ਸਾਡੇ ਪੋਰਟਸ ਨੂੰ ਪੋਰਟ ਲੈੱਡ ਡਿਵੈਲਪਮੈਂਟ ਗ੍ਰੋਥ ਦੀ ਦਿਸ਼ਾ ਵਿੱਚ ਅੱਗੇ ਵਧਾਉਣਾ ਹੋਵੇਗਾ। ਸਾਡੀ ਪੰਜਵੀਂ ਸ਼ਕਤੀ ਹੈ ਸਪਤ ਧਾਰਾ ਦੀ ਉਹ ਹੈ - ਰੱਖਿਆ ਸ਼ਕਤੀ। ਅਤੇ ਇਹ ਰੱਖਿਆ ਸ਼ਕਤੀ ਦਾ ਮਹੱਤਵ ਹਰ ਤਰ੍ਹਾਂ ਨਾਲ ਹੈ।

ਮੇਰੇ ਪਿਆਰੇ ਦੇਸ਼ ਵਾਸੀਓ,

ਡਿਫ਼ੈਂਸ ਵਿੱਚ ਆਤਮ-ਨਿਰਭਰ ਹੋਣਾ, ਹੁਣ ਭਾਰਤ ਨੇ ਅਨੁਭਵ ਕਰ ਲਿਆ ਹੈ, ਦੁਨੀਆ ਨੇ ਅਨੁਭਵ ਕਰ ਲਿਆ ਹੈ, ਇਸ ਤੋਂ ਬਿਨਾ ਕੋਈ ਚਾਰਾ ਨਹੀਂ ਹੈ। ਦੁਨੀਆ ਜਦੋਂ ਆਪਣੀ-ਆਪਣੀ ਹੀ ਸੋਚ ਰਿਹਾ ਹੈ, ਉਦੋਂ ਭਾਰਤ ਵਿਸ਼ਵ ਲਈ ਬਾਜ਼ਾਰ ਬਣ ਕੇ ਨਹੀਂ ਰਹਿ ਸਕਦਾ। ਸਾਨੂੰ ਡਿਫ਼ੈਂਸ ਦੇ ਖੇਤਰ ਵਿੱਚ ਆਤਮ-ਨਿਰਭਰ ਹੋਣਾ ਪਵੇਗਾ। ਨੈਕਸਟ ਜਨਰੇਸ਼ਨ ਡਿਫ਼ੈਂਸ ਤਕਨਾਲੋਜੀ ਡਿਵੈਲਪ ਕਰਕੇ ਸਾਨੂੰ ਗਲੋਬਲ ਸਪਲਾਇਰ ਬਣਨ ਦੀ ਦਿਸ਼ਾ ਵਿੱਚ ਸਾਨੂੰ ਟੀਚਾ ਲੈ ਕੇ ਚੱਲਣਾ ਹੈ। ਸਾਨੂੰ ਡਰੋਨ, ਕਾਊਂਟਰ ਡਰੋਨ ਸਿਸਟਮ ਨੂੰ ਵਿਕਸਤ ਕਰਨਾ ਹੋਵੇਗਾ ਅਤੇ ਹਾਈਪਰਸੋਨਿਕ ਡਿਫ਼ੈਂਸ ਟੈਕਨਾਲੋਜੀਜ਼, ਉਸ ’ਤੇ ਸਾਨੂੰ ਲੀਡਰਸ਼ਿਪ ਲੈਣੀ ਹੋਵੇਗੀ।

ਸਾਥੀਓ,

ਸਾਈਬਰ ਸੁਰੱਖਿਆ ਵੀ ਅੱਜ ਹਰ ਘਰ ਲਈ ਇੱਕ ਸਮੱਸਿਆ ਬਣ ਰਹੀ ਹੈ। ਉਹ ਵੀ ਇੱਕ ਰੱਖਿਆ ਦਾ ਖੇਤਰ ਹੈ, ਜਿਸ ਵਿੱਚ ਸਾਡੇ ਨੌਜਵਾਨਾਂ ਦੀ ਜੋ ਸਮਰੱਥਾ ਹੈ, ਉਸ ਸਮਰੱਥਾ ਦੀ ਵਰਤੋਂ ਅਸੀਂ ਦੇਸ਼ ਅਤੇ ਦੁਨੀਆ ਲਈ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹਾਂ। ਸਾਡੀ ਸਪਤ ਧਾਰਾ ਦੀ ਛੇਵੀਂ ਸ਼ਕਤੀ ਹੈ - ਗ੍ਰੀਨ ਇਕੋਨੋਮੀ, ਬਲੂ ਇਕੋਨੋਮੀ, ਜੋ ਗ੍ਰੀਨ ਜੌਬਸ ਨੂੰ ਵੀ ਜਨਮ ਦਿੰਦੀ ਹੈ। ਸਾਨੂੰ ਗ੍ਰੀਨ ਹਾਈਡ੍ਰੋਜਨ, ਅਖੁੱਟ ਊਰਜਾ, ਐਨਰਜੀ ਸਟੋਰੇਜ, ਗ੍ਰੀਨ ਮੋਬੀਲਿਟੀ, ਗਲੋਬਲ ਸਕੇਲ ’ਤੇ ਗ੍ਰੀਨ ਮੈਨੂਫੈਕਚਰਿੰਗ, ਸਾਨੂੰ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕਰਕੇ ਰਹਿਣਾ ਹੈ। ਦੁਨੀਆ ਵਿੱਚ, ਦੁਨੀਆ ਜਦੋਂ ਗਲੋਬਲ ਵਾਰਮਿੰਗ ਦੀ ਚਰਚਾ ਕਰਦੀ ਰਹਿੰਦੀ ਹੈ, ਅਸੀਂ ਰਸਤੇ ਖੋਜਦੇ ਰਹਿੰਦੇ ਹਾਂ, ਅਸੀਂ ਸਮੱਸਿਆਵਾਂ ਦਾ ਹੱਲ ਦੇ ਰਹੇ ਹਾਂ ਅਤੇ ਭਾਰਤ ਇਸ ਗ੍ਰੀਨ ਮੂਵਮੈਂਟ ਦੀ ਬਹੁਤ ਵੱਡੀ ਸਮਰੱਥਾ ਲੈ ਕੇ ਚੱਲਿਆ ਹੈ। ਭਾਰਤ ਕੋਲ ਬਲੂ ਇਕੋਨੋਮੀ ਲਈ ਵੀ ਬਹੁਤ ਵੱਡਾ ਮੌਕਾ ਹੈ, ਬਹੁਤ ਲੰਬੀ ਸਾਡੀ ਕੋਸਟ ਲਾਈਨ ਹੈ, ਬਲੂ ਇਕੋਨੋਮੀ ਲਈ ਬਹੁਤ ਵੱਡੇ ਮੌਕੇ ਹਨ, ਫਿਸ਼ਰੀਜ਼ ਹਨ, ਕੋਸਟਲ ਸੈਰ-ਸਪਾਟਾ ਹੈ, ਓਸ਼ੀਅਨ ਤਕਨਾਲੋਜੀ ਹੈ, ਅਜਿਹੇ ਕਿੰਨੇ ਹੀ ਖੇਤਰ ਹਨ, ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਵਿੱਚ ਅਸੀਂ ਅੱਗੇ ਵਧ ਸਕਦੇ ਹਾਂ।

ਮੇਰੇ ਪਿਆਰੇ ਦੇਸ਼ ਵਾਸੀਓ,

ਭਾਰਤ ਸਪਤ ਧਾਰਾ ਦੀ ਜਦੋਂ ਗੱਲ ਲੈ ਕੇ ਚੱਲਿਆ ਹੈ, ਉਦੋਂ ਸਾਡੀ ਸਤਵੀਂ ਧਾਰਾ ਹੈ ਅਤੇ ਦੁਨੀਆ ਲਈ ਇਸ ਦਾ ਆਪਣਾ ਵੀ ਇੱਕ ਮਹੱਤਵ ਹੈ ਅਤੇ ਉਹ ਹੈ - ਭਾਰਤ ਦੀ ਸੌਫਟ ਪਾਵਰ। ਭਾਰਤ ਦੀ ਸੌਫਟ ਪਾਵਰ ਦੀ ਤਾਕਤ ਹੈ। ਅੱਜ ਯੋਗ ਨੇ ਪੂਰੀ ਦੁਨੀਆ ਨੂੰ ਭਾਰਤ ਨਾਲ ਜੋੜ ਕੇ ਰੱਖਿਆ ਹੋਇਆ ਹੈ। ਯੋਗ ਦੁਨੀਆ ਲਈ ਇੱਕ ਊਰਜਾ ਬਣਦਾ ਜਾ ਰਿਹਾ ਹੈ। ਭਾਰਤ ਲਈ ਵਿਸ਼ਵਾਸ ਦਾ ਵੱਡਾ ਕਾਰਨ ਬਣਦਾ ਜਾ ਰਿਹਾ ਹੈ। ਜਿਸ ਭਾਰਤ ਕੋਲ ਆਸਥਾ ਦੇ ਕੇਂਦਰ ਹੋਣ, ਜਿਸ ਭਾਰਤ ਕੋਲ ਆਯੁਰਵੇਦ ਹੋਵੇ, ਜਿਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਭਾਰਤ ਕੋਲ ਹੋਲਿਸਟਿਕ ਹੈਲਥ ਕੇਅਰ ਦੀ ਵਿਵਸਥਾ ਹੋਵੇ, 'ਹੀਲ ਇਨ ਇੰਡੀਆ' ਦੀ ਮੂਵਮੈਂਟ ਹੋਵੇ, ਅਸੀਂ ਦੁਨੀਆ ਦੇ ਅੰਦਰ ਸਾਡੀ ਸਮਰੱਥਾ ਨੂੰ ਲੈ ਕੇ ਜਾ ਸਕਦੇ ਹਾਂ। ਹੈਂਡੀਕ੍ਰਾਫ਼ਟ ਹੋਵੇ, ਸੱਭਿਆਚਾਰ ਹੋਵੇ, ਸਾਡੀਆਂ ਫ਼ਿਲਮਾਂ ਹੋਣ, ਸਾਡਾ ਕ੍ਰਿਏਟਿਵ ਵਰਲਡ ਹੋਵੇ, ਵੀਐੱਫਐਕਸ ਹੋਵੇ, ਸਾਡਾ ਐਨੀਮੇਸ਼ਨ ਹੋਵੇ, ਸਾਡੀ ਗੇਮਿੰਗ ਹੋਵੇ, ਡਿਜੀਟਲ ਕੰਟੈਂਟ ਹੋਵੇ, ਕ੍ਰਿਏਟਿਵ ਵਰਲਡ ਦੇ ਅੰਦਰ ਭਾਰਤ ਆਪਣਾ ਰੁਤਬਾ ਦਿਖਾ ਸਕਦਾ ਹੈ। ਸਾਨੂੰ ਉਸ ਨੂੰ ਇੱਕ ਆਲਮੀ ਸਮਰੱਥਾ ਦੇ ਰੂਪ ਵਿੱਚ ਵਿਕਸਤ ਕਰਨਾ ਹੋਵੇਗਾ। ਅੱਜ ਭਾਰਤ ਨੇ ਵੇਵਸ ਸਮਿਟ ਨੂੰ ਇੱਕ ਬਹੁਤ ਵੱਡੀ ਤਾਕਤ ਦਿੱਤੀ ਹੈ। ਦੁਨੀਆ ਹੌਲੀ-ਹੌਲੀ ਭਾਰਤ ਦਾ ਇਹ ਜੋ ਵਰਲਡ ਆਡੀਓ ਵਿਜ਼ੂਅਲ ਐਂਡ ਐਂਟਰਟੇਨਮੈਂਟ ਸਮਿਟ ਹੈ, ਉਸ ਦੀ ਰਾਹ ਦੇਖਦੀ ਰਹਿੰਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਉਹ ਭਾਰਤ ਦੀ ਸੌਫਟ ਪਾਵਰ ਨੂੰ ਭਾਰਤ ਦੀ ਕ੍ਰਿਏਟਿਵ ਦੁਨੀਆ ਨੂੰ ਦੁਨੀਆ ਨਾਲ ਜਾਣੂ ਕਰਵਾਏਗਾ।

ਮੇਰੇ ਪਿਆਰੇ ਦੇਸ਼ ਵਾਸੀਓ,

ਭਾਰਤ ਕੋਲ ਵਿਸ਼ਾਲ ਵਣ ਸੰਪਦਾਵਾਂ ਹਨ। ਸਾਡੇ ਕੋਲ 100 ਤੋਂ ਜ਼ਿਆਦਾ ਰਾਸ਼ਟਰੀ ਪਾਰਕ ਹਨ। ਸਮਰੱਥਾ ਬਹੁਤ ਹੈ, ਪਰ ਵਿਦੇਸ਼ੀ ਟੂਰਿਸਟਸ ਨੂੰ ਆਕਰਸ਼ਿਤ ਕਰਨ ਵਿੱਚ ਅਸੀਂ ਪਿੱਛੇ ਰਹੇ ਹਾਂ। ਸਾਡੇ ਕੋਲ ਮੌਕਾ ਹੈ ਸਾਡੀ ਸੌਫਟ ਪਾਵਰ ਦੇ ਮਾਧਿਅਮ ਨਾਲ ਦੁਨੀਆ ਦੇ ਟੂਰਿਸਟਾਂ ਨੂੰ ਭਾਰਤ ਵੱਲ ਆਕਰਸ਼ਿਤ ਕਰਨ ਦਾ, ਸਾਡੀ ਸਮਰੱਥਾ ਅਸੀਂ ਦੁਨੀਆ ਨੂੰ ਦਿਖਾਉਣੀ ਹੈ। ਅਸੀਂ ਇਹ ਕੰਮ ਕਰੀਏ ਅਤੇ ਅਸੀਂ ਜਲਦੀ ਤੋਂ ਜਲਦੀ ਅਸੀਂ ਇਨ੍ਹਾਂ ਲੋਕਾਂ ਨੂੰ ਅੱਜ ਦੁਨੀਆ ਵਿੱਚ ਖੇਡਾਂ ਜੋ ਹਨ, ਉਹ ਵੀ ਇੱਕ ਬਹੁਤ ਵੱਡਾ ਭਾਰਤ ਪ੍ਰਤੀ ਆਕਰਸ਼ਨ ਦਾ ਕੇਂਦਰ, ਦੁਨੀਆ ਦੇ ਖੇਡਾਂ ਦੇ ਇਵੈਂਟ ਭਾਰਤ ਵਿੱਚ ਕਿਉਂ ਨਾ ਹੋਣ। ਕੌਨਸਰਟ ਇਕੋਨੋਮੀ ਬਹੁਤ ਵਧ ਰਹੀ ਹੈ, ਦੇਸ਼ ਦੇ ਨੌਜਵਾਨਾਂ ਦਾ ਆਕਰਸ਼ਨ ਹੈ। ਦੁਨੀਆ ਦਾ ਹਰ ਕੋਈ ਕਲਾਕਾਰ ਚਾਹੁੰਦਾ ਹੈ, ਕਦੇ ਨਾ ਕਦੇ ਭਾਰਤ ਦੀ ਧਰਤੀ ’ਤੇ ਆਪਣਾ ਕੌਨਸਰਟ ਕਰੇ। ਇਹ ਬਹੁਤ ਵੱਡਾ ਮੌਕਾ ਹੈ, ਸਾਨੂੰ ਇਸ ਨੂੰ ਮੋਬੀਲਾਈਜ਼ ਕਰਨ ਲਈ ਵਿਵਸਥਾਵਾਂ ਖੜ੍ਹੀਆਂ ਕਰਨੀਆਂ ਹੋਣਗੀਆਂ।

ਸਾਥੀਓ,

ਸਪਤ ਧਾਰਾ ਦੀਆਂ ਇਹ ਸੱਤ ਸ਼ਕਤੀਆਂ, ਸਪਤ ਸ਼ਕਤੀਆਂ ਦਾ ਉਦੇਸ਼ ਸਿਰਫ਼ ਇੱਕ ਸੈਕਟਰ ਵਿੱਚ ਤਰੱਕੀ ਕਰਨ ਦਾ ਨਹੀਂ ਹੈ। ਇੱਕ ਹੋਲਿਸਟਿਕ ਪਹੁੰਚ ਦੇ ਨਾਲ ਅਸੀਂ ਰਾਸ਼ਟਰ ਦਾ ਜੋ ਟੀਚਾ ਲੈ ਕੇ ਅਸੀਂ ਚੱਲ ਰਹੇ ਹਾਂ, ਜੋ ਅਭਿਲਾਸ਼ਾ ਲੈ ਕੇ ਚੱਲ ਰਹੇ ਹਾਂ, ਉਸ ਸਕੇਲ ਨੂੰ ਸਾਨੂੰ ਪਾਰ ਕਰਨ ਦੀ ਦਿਸ਼ਾ ਵਿੱਚ ਕੰਮ ਕਰਨਾ ਹੈ।

ਮੇਰੇ ਪਿਆਰੇ ਦੇਸ਼ ਵਾਸੀਓ,

ਕੁੱਝ ਚੀਜ਼ਾਂ ਮੈਂ ਦੱਸੀਆਂ ਹਨ, ਪਰ ਮੈਂ ਇਸ ਤੋਂ ਵੀ ਅੱਗੇ ਸੋਚਦਾ ਹਾਂ। ਮੈਂ ਜ਼ਰਾ ਦੇਸ਼ ਨੂੰ ਝੰਜੋੜਨਾ ਚਾਹੁੰਦਾ ਹਾਂ। ਮੈਂ ਦੇਸ਼ ਦੀ ਸ਼ਕਤੀ ਨੂੰ ਵੀ ਝੰਜੋੜਨਾ ਚਾਹੁੰਦਾ ਹਾਂ। ਦੇਸ਼ ਭਾਵ ਸਿਰਫ਼ ਸਰਕਾਰ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦੀ, ਦੇਸ਼ ਭਾਵ ਹਰ ਨਾਗਰਿਕ ਜੁੜਦਾ ਹੈ। ਕੀ ਅਸੀਂ ਸੋਚ ਨਹੀਂ ਸਕਦੇ ਕਿ ਫਾਰਚੂਨ 500 ਦੀ ਚਰਚਾ ਤਾਂ ਬਹੁਤ ਸੁਣਦੇ ਹਾਂ। ਆਉਣ ਵਾਲੇ ਇੱਕ ਦਹਾਕੇ ਵਿੱਚ ਇਨ੍ਹਾਂ ਫਾਰਚੂਨ 500 ਵਿੱਚ 50 ਕੰਪਨੀਆਂ ਭਾਰਤ ਦੀਆਂ ਕਿਉਂ ਨਾ ਹੋਣ, ਇਹ ਟੀਚਾ ਸਾਡਾ ਕਿਉਂ ਨਾ ਹੋਵੇ। ਅੱਜ ਬੈਂਕਿੰਗ ਸੈਕਟਰ ਫਲ-ਫੁੱਲ ਰਿਹਾ ਹੈ। ਦੁਨੀਆ ਦੇ ਟੌਪ ਬੈਂਕਾਂ ਵਿੱਚ ਭਾਰਤ ਦੇ ਬੈਂਕ ਦਾ ਝੰਡਾ ਵੀ ਕਿਉਂ ਨਾ ਲਹਿਰਾਉਂਦਾ ਹੋਵੇ। ਭਾਰਤ ਦਾ ਬੈਂਕ ਵੀ ਟੌਪ ਬੈਂਕਾਂ, ਪੰਜ ਬੈਂਕਾਂ ਵਿੱਚ ਭਾਰਤ ਦਾ ਵੀ ਇੱਕ ਬੈਂਕ ਹੋਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ। ਭਾਰਤ ਦੀ ਫਾਰਮਾ, ਫਾਰਮਾ ਦੀ ਦਿਸ਼ਾ ਵਿੱਚ ਅਸੀਂ ਬਹੁਤ ਕੰਮ ਕੀਤਾ ਹੈ। ਪਰ ਸਮੇਂ ਦੀ ਮੰਗ ਹੈ ਕਿ ਦੁਨੀਆ ਦੀਆਂ ਪੰਜ ਵੱਡੀਆਂ ਫਾਰਮਾ ਕੰਪਨੀਆਂ ਵਿੱਚ ਭਾਰਤ ਦੀਆਂ ਵੀ ਇੱਕ-ਦੋ ਫਾਰਮਾ ਕੰਪਨੀਆਂ ਦਾ ਨਾਂ ਗੂੰਜਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ। ਭਾਰਤ ਦੀ ਉਸ ਵਿੱਚ ਆਪਣੀ ਥਾਂ ਬਣਨੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ। ਲੌਅ ਫਰਮਾਂ ਹੁੰਦੀਆਂ ਹਨ, ਰੇਟਿੰਗ ਏਜੰਸੀਆਂ ਹੁੰਦੀਆਂ ਹਨ। ਕੀ ਸਮੇਂ ਦੀ ਮੰਗ ਨਹੀਂ ਹੈ ਕਿ ਗਲੋਬਲ ਲੀਡਰਸ਼ਿਪ ਹੁਣ ਸਾਡੇ ਹੱਥ ਵਿੱਚ ਹੋਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ। ਹੁਨਰ ਹੈ, ਸਮਰੱਥਾ ਹੈ, ਸਾਡਾ ਲੰਬਾ ਇਤਿਹਾਸ ਵੀ ਹੈ, ਭਾਸ਼ਾਵਾਂ ’ਤੇ ਸਾਡੀ ਮੁਹਾਰਤ ਹੈ। ਸਾਨੂੰ ਦੁਨੀਆ ਵਿੱਚ ਪਹੁੰਚਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ। ਸਾਡੀ ਕੋਈ ਕੰਸਲਟਿੰਗ ਫਰਮ, ਅਕਾਊਂਟਿੰਗ ਫਰਮ, ਦੁਨੀਆ ਦੀਆਂ ਟੌਪ ਫਰਮਾਂ ਦੇ ਅੰਦਰ ਕਿਉਂ ਨਹੀਂ ਹੋਣੀ ਚਾਹੀਦੀ।

ਭਾਰਤ ਦੀਆਂ ਤਕਨਾਲੋਜੀ ਕੰਪਨੀਆਂ ਦੁਨੀਆ ਦੇ ਅੰਦਰ ਸਿਰਮੌਰ ਹੋਣ, ਇਹ ਸਾਡਾ ਟੀਚਾ ਹੋਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ। ਸਾਡੇ ਅਜਿਹੇ ਬ੍ਰਾਂਡ ਹੋਣ, ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਨਾਲ ਦੁਨੀਆ ਆਕਰਸ਼ਿਤ ਹੁੰਦੀ ਹੋਵੇ। ਸਾਡੇ ਬ੍ਰਾਂਡ ਸਾਡੇ ਦੇਸ਼ ਦੀ ਪਛਾਣ ਹੋਣ ਅਤੇ ਦੁਨੀਆ ਲਈ ਇੱਕ ਡੈਸਟੀਨੇਸ਼ਨ ਬਣ ਜਾਣ, ਉਸ ਦਿਸ਼ਾ ਵਿੱਚ ਸਾਨੂੰ ਕੰਮ ਕਰਨਾ ਹੈ। ਅਤੇ ਇਸ ਲਈ ਮੈਂ ਰਾਜ ਸਰਕਾਰਾਂ ਨੂੰ ਕਹਿਣਾ ਚਾਹੁੰਦਾ ਹਾਂ, ਮੈਂ ਸਥਾਨਕ ਸਵਰਾਜ ਦੀਆਂ ਸੰਸਥਾਵਾਂ ਨੂੰ ਕਹਿਣਾ ਚਾਹੁੰਦਾ ਹਾਂ, ਭਾਰਤ ਸਰਕਾਰ ਦੀ ਵੀ ਇਹ ਜ਼ਿੰਮੇਵਾਰੀ ਹੈ ਕਿ ਸਾਨੂੰ ਸਾਡੇ ਰਿਫੌਰਮ ਦੀ ਰਫ਼ਤਾਰ ਵਧਾਉਣੀ ਹੋਵੇਗੀ। ਸਾਨੂੰ 2047 ਦੇ ਟੀਚੇ ਦੇ ਅਨੁਰੂਪ ਸਾਡੀਆਂ ਵਿਵਸਥਾਵਾਂ ਨੂੰ ਵਿਕਸਤ ਕਰਨਾ ਹੋਵੇਗਾ। ਅਸੀਂ ਬੀਤੇ ਹੋਏ ਕਾਲ ਦੇ ਨੀਤੀ-ਨਿਯਮਾਂ ਨਾਲ ਨਹੀਂ ਚੱਲ ਸਕਦੇ। ਸਾਨੂੰ ਆਉਣ ਵਾਲੇ ਸੁਪਨਿਆਂ ਦੇ ਹਿਸਾਬ ਨਾਲ ਨੀਤੀ-ਨਿਯਮਾਂ ਨੂੰ ਘੜਨਾ ਹੋਵੇਗਾ ਅਤੇ ਇਸ ਨੂੰ ਜੇਕਰ ਅਸੀਂ ਘੜਾਂਗੇ, ਤਾਂ ਮੈਨੂੰ ਪੂਰਾ ਵਿਸ਼ਵਾਸ ਹੈ ਅਤੇ ਮੈਂ ਦੇਸ਼ ਵਾਸੀਆਂ ਨੂੰ ਭਰੋਸਾ ਦਿੰਦਾ ਹਾਂ। ਇਸੇ ਰਸਤੇ ਮਿਹਨਤ ਵਿੱਚ ਕੋਈ ਕਮੀ ਨਾ ਰੱਖਦਿਆਂ ਅਸੀਂ ਵਿਕਸਤ ਭਾਰਤ ਦਾ ਸੁਪਨਾ ਪਾਰ ਕਰਕੇ ਰਹਾਂਗੇ। ਅਸੀਂ ਸਾਰਿਆਂ ਨੇ ਮਿਲ ਕੇ ਚੱਲਣਾ ਹੈ। ਕੇਂਦਰ ਸਰਕਾਰ ਹੋਵੇ, ਰਾਜ ਸਰਕਾਰ ਹੋਵੇ, ਇੰਡਸਟਰੀ ਹੋਵੇ, ਅਸੀਂ ਸਭ ਨੇ ਮਿਲ ਕੇ ਅੱਗੇ ਵਧਣਾ ਹੈ। ਸਾਨੂੰ ਰਿਫੋਰਮਸ ਕਰਦੇ ਰਹਿਣਾ ਹੈ। ਰਿਫੌਰਮਸ ਨੂੰ ਅੱਗੇ ਵਧਾਉਂਦੇ ਰਹਿਣਾ ਹੈ। ਅਤੇ ਮੈਂ ਪਹਿਲਾਂ ਵੀ ਕਿਹਾ ਸੀ, ਅਸੀਂ ਰਿਫੌਰਮ ਕੰਪਲਸ਼ਨ ਨਾਲ ਨਹੀਂ, ਕਨਵਿਕਸ਼ਨ ਨਾਲ ਕਰ ਰਹੇ ਹਾਂ। ਟੀਚੇ ਨੂੰ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕਰਨ ਲਈ ਕਰ ਰਹੇ ਹਾਂ।

ਮੇਰੇ ਪਿਆਰੇ ਦੇਸ਼ ਵਾਸੀਓ,

ਜਦੋਂ ਮੈਂ ਇਸ ਵਿਕਸਤ ਭਾਰਤ ਦੀ ਗੱਲ ਕਰ ਰਿਹਾ ਹਾਂ, ਦੇਸ਼ ਨੂੰ ਤੇਜ਼ ਰਫ਼ਤਾਰ ਨਾਲ ਅੱਗੇ ਵਧਾਉਣ ਦੀ ਗੱਲ ਕਰ ਰਿਹਾ ਹਾਂ, ਉਸ ਦਾ ਸਭ ਤੋਂ ਵੱਡਾ ਲਾਭਪਾਤਰੀ ਕੌਣ ਹੈ, ਇਨ੍ਹਾਂ ਸਾਰੇ ਯਤਨਾਂ ਦਾ ਸਭ ਤੋਂ ਵੱਡਾ ਸਾਧਕ ਕੌਣ ਹੈ, ਜੇਕਰ ਸਾਧਕ ਹੈ ਤਾਂ ਮੇਰੇ ਦੇਸ਼ ਦਾ ਨੌਜਵਾਨ ਹੈ, ਮੇਰੇ ਦੇਸ਼ ਦੀ ਨੌਜਵਾਨ ਸ਼ਕਤੀ ਹੈ। ਵਿਕਸਤ ਭਾਰਤ ਦੀ ਯਾਤਰਾ ਵਿੱਚ ਨੌਜਵਾਨਾਂ ਦੀ ਬਹੁਤ ਵੱਡੀ ਭੂਮਿਕਾ ਹੈ। ਇੰਨਾ ਹੀ ਨਹੀਂ, ਵਿਕਸਤ ਭਾਰਤ ਦਾ ਸਭ ਤੋਂ ਵੱਡਾ ਲਾਭਪਾਤਰੀ ਵੀ ਮੇਰੇ ਦੇਸ਼ ਦਾ ਨੌਜਵਾਨ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸ ਲਈ ਸਾਨੂੰ ਵਿਕਸਤ ਭਾਰਤ ਦੇ ਟੀਚੇ ਨੂੰ ਨੌਜਵਾਨਾਂ ਨਾਲ ਜੋੜ ਕੇ ਅੱਗੇ ਵਧਾਉਣਾ ਹੈ। ਨੌਜਵਾਨਾਂ ਨੂੰ ਸਾਡੀ ਸਰਬਉੱਚ ਪਹਿਲ ਦੇ ਨਾਲ ਸਾਨੂੰ ਅੱਗੇ ਵਧਣਾ ਹੈ।

ਸਾਥੀਓ,

ਪਿਛਲੇ 10-12 ਸਾਲਾਂ ਵਿੱਚ ਉਸ ਦਿਸ਼ਾ ਵਿੱਚ ਬਹੁਤ ਕੁੱਝ ਹੋਇਆ ਹੈ। ਸਟਾਰਟਅੱਪ ਇੰਡੀਆ ਅਭਿਆਨ, ਅੱਜ ਪੂਰੇ ਦੇਸ਼ ਵਿੱਚ ਢਾਈ ਲੱਖ ਤੋਂ ਜ਼ਿਆਦਾ ਰਜਿਸਟਰਡ ਸਟਾਰਟਅੱਪਸ ਬਣ ਗਏ ਹਨ। ਦੇਸ਼ ਦੇ ਨੌਜਵਾਨ, ਖ਼ੁਦ ਤਾਂ ਕੰਮ ਕਰ ਰਹੇ ਹਨ, ਹੋਰਾਂ ਨੂੰ ਵੀ ਰੁਜ਼ਗਾਰ ਦੇ ਰਹੇ ਹਨ। 1 ਲੱਖ ਕਰੋੜ ਰੁਪਏ, ਨਵੀਨਤਾ ਫੰਡ ਭਾਰਤ ਸਰਕਾਰ ਨੇ ਐਲਾਨ ਕੀਤਾ ਹੈ। ਮੈਂ ਦੇਸ਼ ਦੇ ਨੌਜਵਾਨਾਂ ਨੂੰ ਕਹਿਣਾ ਚਾਹੁੰਦਾ ਹਾਂ, ਤੁਸੀਂ ਆਪਣੇ ਸੁਪਨਿਆਂ ਨੂੰ ਲੈ ਕੇ ਆਓ, ਸਾਧਨਾਂ ਦੀ ਕਮੀ ਨਹੀਂ ਰਹਿਣ ਦਿਆਂਗੇ। 1 ਲੱਖ ਕਰੋੜ ਰੁਪਏ, ਤੁਹਾਡੇ ਦਿਲ-ਦਿਮਾਗ ਨੂੰ ਸਮਰੱਥਾ ਦੇਣ ਦੀ ਇੱਕ ਵਿਵਸਥਾ ਅਸੀਂ ਕਰ ਦਿੱਤੀ ਹੈ। ਖੋਜ ਦੇ ਨਵੇਂ ਮੌਕੇ ਮਿਲੇ, ਡਿਜੀਟਲ ਇੰਡੀਆ ਦਾ ਨਵਾਂ ਸਸਤਾ ਡਾਟਾ, ਇਸ ਨੇ ਨੌਜਵਾਨਾਂ ਨੂੰ ਸਸ਼ਕਤ ਕੀਤਾ ਹੈ। ਦੁਨੀਆ ਵਿੱਚ ਸਸਤਾ ਡਾਟਾ ਕਿਤੇ ਹੈ, ਤਾਂ ਭਾਰਤ ਦੀ ਧਰਤੀ ’ਤੇ ਹੈ ਅਤੇ ਦੇਸ਼ ਦੇ ਨੌਜਵਾਨਾਂ ਨੂੰ ਉਸ ਨੇ ਨਵੀਂ ਤਾਕਤ ਦਿੱਤੀ ਹੈ। ਸਕਿੱਲ ਇੰਡੀਆ ਅਸੀਂ ਰਾਸ਼ਟਰੀ ਪ੍ਰੋਗਰਾਮ ਬਣਾਇਆ ਹੈ। ਪੁਲਾੜ ਸੈਕਟਰ ਨੂੰ ਅਸੀਂ ਓਪਨ ਕਰ ਦਿੱਤਾ। ਨੈਸ਼ਨਲ ਡਰੋਨ ਪਾਲਿਸੀ ਅਸੀਂ ਬਣਾਈ ਹੈ। ਖੇਲੋ ਇੰਡੀਆ ਪਾਲਿਸੀ ਬਣਾਈ ਹੈ। 35 ਸਾਲਾਂ ਤੱਕ ਐਜੂਕੇਸ਼ਨ ਪਾਲਿਸੀ ਨਹੀਂ ਸੀ, ਨਵੀਂ ਐਜੂਕੇਸ਼ਨ ਪਾਲਿਸੀ ਲੈ ਕੇ ਆਏ ਹਾਂ ਅਤੇ ਇਸ ਦਾ ਫਾਇਦਾ ਮਿਡਲ ਕਲਾਸ ਦੇ ਪਰਿਵਾਰਾਂ ਨੂੰ ਹੋਇਆ ਹੈ।

ਸਾਥੀਓ,

2004 ਤੋਂ 2014, ਅੰਕੜੇ ਮੈਨੂੰ ਤੁਹਾਨੂੰ ਦੇਣੇ ਚਾਹੀਦੇ ਹਨ। 2004 ਤੋਂ 2014, ਸਾਡੇ ਦੇਸ਼ ਵਿੱਚ 350 ਤੋਂ ਵੀ ਘੱਟ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀਸ ਸਨ ਅਤੇ ਅੱਜ 10-12 ਸਾਲਾਂ ਦੇ ਅੰਦਰ-ਅੰਦਰ, ਕਰੀਬ 650 ਨਵੀਆਂ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀਸ ਜੁੜ ਚੁੱਕੀਆਂ ਹਨ। ਕਰੀਬ 1000 ਦੇ ਅੰਕੜੇ ’ਤੇ ਅਸੀਂ ਪਹੁੰਚ ਰਹੇ ਹਾਂ। 2014 ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਮੈਡੀਕਲ ਦੀਆਂ ਸਿਰਫ਼ 400 ਸੀਟਸ ਹੋਇਆ ਕਰਦੀਆਂ ਸਨ, ਅੱਜ ਕਰੀਬ-ਕਰੀਬ 850 ਸੀਟਾਂ ਮੈਡੀਕਲ ਦੀਆਂ ਹੋ ਰਹੀਆਂ ਹਨ। ਇੰਨਾ ਹੀ ਨਹੀਂ, ਹੁਣ ਵਿਦੇਸ਼ੀ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀਸ ਵੀ ਭਾਰਤ ਦੀ ਧਰਤੀ ’ਤੇ ਆ ਰਹੀਆਂ ਹਨ। ਭਾਰਤ ਦੇ ਅੰਦਰ ਵਿਦੇਸ਼ੀ ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ ਦੀ ਡਿਗਰੀ ਮੇਰੇ ਨੌਜਵਾਨ ਨੂੰ ਮਿਲੇ, ਇਸ ਦਾ ਪ੍ਰਬੰਧ ਵੀ ਹੋ ਚੁੱਕਿਆ ਹੈ। ਸਾਡੇ ਦੇਸ਼ ਦਾ ਨੌਜਵਾਨ ਮਨ ਬਚਪਨ ਤੋਂ ਹੀ ਤਕਨਾਲੋਜੀ ਵੱਲ ਆਕਰਸ਼ਿਤ ਹੋਵੇ, ਉਸ ਦਿਸ਼ਾ ਵਿੱਚ ਅਸੀਂ ਕੰਮ ਕਰ ਰਹੇ ਹਾਂ ਅਤੇ ਇਸ ਲਈ ਅਸੀਂ ਕਰੀਬ 10,000 ਤੋਂ ਜ਼ਿਆਦਾ ਅਟਲ ਟਿੰਕਰਿੰਗ ਲੈਬਾਂ ਛੋਟੇ-ਛੋਟੇ ਬੱਚਿਆਂ ਦੇ ਹਵਾਲੇ ਕਰ ਦਿੱਤੀਆਂ ਹਨ, ਤਾਂ ਜੋ ਉਨ੍ਹਾਂ ਦਾ ਨਵੀਨਤਾ ਅਤੇ ਤਕਨਾਲੋਜੀ ਦੇ ਅੰਦਰ ਮਨ ਬਣੇ। ਅਸੀਂ ਕਈ ਰਸਤੇ ਖੋਲ੍ਹੇ, ਅਸੀਂ ਸਟਾਰਟਅੱਪ ਓਪਨ ਕਰ ਦਿੱਤਾ। ਤੁਸੀਂ ਦੇਖਿਆ ਹੋਵੇਗਾ, ਭਾਰਤ ਦੇ ਪ੍ਰਾਈਵੇਟ ਸਟਾਰਟਅੱਪ, 28 ਸਾਲ ਦੀ ਐਵਰੇਜ ਉਮਰ ਦੇ ਬੱਚਿਆਂ ਨੇ, ਨੌਜਵਾਨਾਂ ਨੇ, ਦੁਨੀਆ ਵਿੱਚ ਪਹਿਲੀ, ਪਹਿਲੇ ਹੀ ਟ੍ਰਾਇਲ ਵਿੱਚ ਆਪਣਾ ਸੈਟੇਲਾਈਟ ਲਾਂਚ ਕਰ ਦਿੱਤਾ ਅਤੇ ਰੌਕੇਟ ਲਾਂਚ ਕਰ ਦਿੱਤਾ ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੇ ਬਹੁਤ ਵੱਡਾ ਕੰਮ ਕਰ ਦਿੱਤਾ।

ਸਾਥੀਓ,

ਅੱਜ ਕਰੀਬ ਢਾਈ ਲੱਖ ਤੋਂ ਜ਼ਿਆਦਾ ਰਜਿਸਟਰਡ ਸਟਾਰਟਅੱਪਸ ਹਨ। ਅਸੀਂ ਪਿਛਲੇ ਦਿਨੀਂ ਏਆਈ ਇੰਪੈਕਟ ਸਮਿਟ ਕੀਤਾ ਸੀ। ਏਆਈ ਦਾ ਵਿਸਤਾਰ ਬਹੁਤ ਤੇਜ਼ੀ ਨਾਲ ਵਧ ਰਿਹਾ ਹੈ। ਲਾਲ ਕਿਲ੍ਹੇ ਤੋਂ ਮੈਂ ਦੇਸ਼ ਦੇ ਨੌਜਵਾਨਾਂ ਲਈ ਐਲਾਨ ਕਰਨਾ ਚਾਹੁੰਦਾ ਹਾਂ। ਅਸੀਂ ਤੈਅ ਕੀਤਾ ਹੈ ਕਿ ਆਉਣ ਵਾਲੇ ਇੱਕ ਸਾਲ ਵਿੱਚ 1 ਕਰੋੜ ਨੌਜਵਾਨਾਂ ਨੂੰ ਏਆਈ ਸਕਿੱਲ ਲਈ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਦੇਣ ਦਾ ਅਸੀਂ ਕੰਮ ਕਰਾਂਗੇ ਤਾਂ ਜੋ ਸਾਡੇ ਦੇਸ਼ ਦਾ ਨੌਜਵਾਨ ਏਆਈ ਦੀ ਦੁਨੀਆ ਵਿੱਚ ਵੀ ਅਗਵਾਈ ਕਰਨ ਦੀ ਸਮਰੱਥਾ ਰੱਖੇ।

ਮੇਰੇ ਸਾਥੀਓ,

ਬਾਇਓਇਕੋਨੋਮੀ ਇੱਕ ਨਵਾਂ ਖੇਤਰ ਹੈ। ਇੱਕ ਸਮਾਂ ਸੀ 2014 ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ, ਸਿਰਫ਼ 60,000 ਕਰੋੜ ਰੁਪਏ ਦਾ ਬਾਇਓਇਕੋਨੋਮੀ ਦਾ ਕੰਮ ਹੁੰਦਾ ਸੀ। ਮੇਰੇ ਦੇਸ਼ ਦੇ ਨੌਜਵਾਨੋ, ਤੁਸੀਂ ਕੀ ਕਮਾਲ ਕਰ ਦਿੱਤਾ ਹੈ। ਦੇਖੋ, ਨੀਤੀਆਂ ਜਦੋਂ ਸਹੀ ਹੁੰਦੀਆਂ ਹਨ, ਟੀਚਾ ਜਦੋਂ ਸਾਫ਼ ਹੁੰਦਾ ਹੈ, ਤਾਂ ਮੇਰੇ ਦੇਸ਼ ਦੇ ਨੌਜਵਾਨ ਕਿਹੋ ਜਿਹਾ ਕਰ ਕੇ ਦਿਖਾਉਂਦੇ ਹਨ। ਬਾਇਓਇਕੋਨੋਮੀ ਵਿੱਚ ਦੇਸ਼ ਦੀ ਯੁਵਾ ਸ਼ਕਤੀ ਨੇ ਸਮਰੱਥਾ ਦਿਖਾਈ। 2014 ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਜੋ 60 ਹਜ਼ਾਰ ਕਰੋੜ ਦਾ ਕਾਰੋਬਾਰ ਸੀ, ਅੱਜ ਉਹ ਬਾਇਓਇਕੋਨੋਮੀ 20 ਲੱਖ ਕਰੋੜ ਪਹੁੰਚ ਚੁੱਕੀ ਹੈ ਸਾਥੀਓ। 2009-10 ਦਾ ਕਾਲ-ਖੰਡ ਸੀ, ਸਿਰਫ਼ 1.5 ਲੱਖ ਡੇਢ ਲੱਖ ਇਲੈਕਟ੍ਰਿਕ ਵਾਹਨ ਵਿਕੇ ਸਨ, 2009-10 ਵਿੱਚ ਡੇਢ ਲੱਖ ਇਲੈਕਟ੍ਰਿਕ ਵਾਹਨ। ਇਸ 25-26 ਵਿੱਚ 25 ਲੱਖ ਇਲੈਕਟ੍ਰਿਕ ਵਾਹਨ ਵਿਕੇ ਹਨ।

ਮੇਰੇ ਪਿਆਰੇ ਦੇਸ਼ ਵਾਸੀਓ,

ਹਵਾਬਾਜ਼ੀ ਖੇਤਰ ਵੀ ਮੇਰੇ ਨੌਜਵਾਨਾਂ ਲਈ ਬਹੁਤ ਤੇਜ਼ੀ ਨਾਲ ਅੱਗੇ ਵਧ ਰਿਹਾ ਹੈ। ਨਵੇਂ ਏਅਰਪੋਰਟ, ਨਵੇਂ ਰੂਟ, ਨਵੇਂ-ਨਵੇਂ ਰੁਜ਼ਗਾਰ ਦੇ ਮੌਕੇ ਬਣਾ ਰਹੇ ਹਨ। ਮੇਂਟੇਨੈਂਸ, ਓਵਰਹਾਲਿੰਗ, ਇਸ ਦੇ ਕਾਰਨ ਵੀ ਦੇਸ਼ ਵਿੱਚ ਬਹੁਤ ਵੱਡੀ ਮਾਤਰਾ ਵਿੱਚ ਸਕਿਲਡ ਮੈਨਪਾਵਰ ਨੂੰ ਕੰਮ ਮਿਲ ਰਿਹਾ ਹੈ। ਮੇਡ ਇਨ ਇੰਡੀਆ ਹਵਾਈ ਜਹਾਜ਼ ਬਣਾਉਣ ਦੀ ਦਿਸ਼ਾ ਵਿੱਚ ਅਸੀਂ ਸਫ਼ਲਤਾ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕੀਤੀ ਹੈ। ਮੇਡ ਇਨ ਇੰਡੀਆ ਡਿਫ਼ੈਂਸ ਟ੍ਰਾਂਸਪੋਰਟ ਏਅਰਕ੍ਰਾਫ਼ਟ ਸੀ295 ਪਹਿਲਾਂ ਹੀ ਆਪਣੀ ਉਡਾਣ ਭਰ ਚੁੱਕਿਆ ਹੈ, ਸਫ਼ਲ ਉਡਾਣ ਭਰ ਚੁੱਕਾ ਹੈ। ਇਹ ਦੇਸ਼ ਦੇ ਨੌਜਵਾਨਾਂ ਲਈ, ਮੇਰੇ ਸਾਥੀਓ ਡਰੋਨ ਨੇ ਵੀ ਬਹੁਤ ਵੱਡਾ ਕੰਮ ਕੀਤਾ ਹੈ। ਸਵਾਮਿਤਵ ਯੋਜਨਾ, ਪਿੰਡਾਂ ਵਿੱਚ ਡਰੋਨ ਨਾਲ ਸਵਾਮਿਤਵ ਯੋਜਨਾ ਸਫ਼ਲ ਹੋ ਰਹੀ ਹੈ। ਕਰੀਬ ਸਵਾ ਤਿੰਨ ਕਰੋੜ ਪਰਿਵਾਰਾਂ ਨੂੰ ਸਵਾਮਿਤਵ ਯੋਜਨਾ ਦਾ ਲਾਭ ਮਿਲਿਆ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸ ਦੇ ਕਾਰਨ 140 ਲੱਖ ਕਰੋੜ ਰੁਪਏ ਵਰਗੀ ਸੰਪਤੀ ਅਨਲੌਕ ਹੋਈ ਹੈ, ਜਿਸ ਦੇ ਕਾਰਨ ਬੈਂਕ ਤੋਂ ਲੋਨ ਮਿਲ ਸਕਦਾ ਹੈ, ਲੋਕ ਆਪਣਾ ਕਾਰੋਬਾਰ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹਨ।

ਮੇਰੇ ਪਿਆਰੇ ਦੇਸ਼ ਵਾਸੀਓ,

ਸਾਡੇ ਮੱਧ ਵਰਗੀ ਪਰਿਵਾਰਾਂ ਦੇ ਸਾਹਮਣੇ ਇੱਕ ਬਹੁਤ ਵੱਡਾ ਬੋਝ ਬਣ ਚੁੱਕੀ ਹੈ ਕੋਚਿੰਗ ਕਲਾਸਾਂ ਦਾ ਮੁਕਾਬਲਾ, ਹਰ ਮਾਂ-ਬਾਪ ਨੂੰ ਲੱਗ ਰਿਹਾ ਹੈ ਕਿ ਕੋਚਿੰਗ ਕਲਾਸ ਵਿੱਚ ਬੱਚੇ ਨੂੰ ਨਹੀਂ ਭੇਜਿਆ, ਤਾਂ ਅਸੀਂ ਨਾਮਵਰ ਪਰਿਵਾਰ ਨਹੀਂ ਹਾਂ। ਇਨ੍ਹਾਂ ਗ਼ਰੀਬ ਅਤੇ ਮਿਡਲ ਕਲਾਸ ਪਰਿਵਾਰਾਂ ਦੀ ਅਸੀਂ ਚਿੰਤਾ ਕਰਦਿਆਂ ਹਜ਼ਾਰਾਂ-ਕਰੋੜ ਰੁਪਏ ਦਾ ਉਨ੍ਹਾਂ ਦਾ ਖ਼ਰਚ ਹੈ, ਉਹ ਵੀ ਬਚੇ, ਬੇਟੇ ਵੀ ਆਪਣੇ ਆਸ-ਪਾਸ ਰਹਿ ਸਕਣ, ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੀ ਦੇਖਭਾਲ ਹੋ ਸਕੇ, ਪਰਿਵਾਰ ’ਤੇ ਆਰਥਿਕ ਬੋਝ ਨਾ ਆਵੇ ਅਤੇ ਇਸ ਲਈ ਅਸੀਂ ਨੌਜਵਾਨਾਂ ਲਈ ਵੱਖ-ਵੱਖ ਪ੍ਰੀਖਿਆਵਾਂ ਦੀ ਫ੍ਰੀ ਔਨਲਾਈਨ ਕੋਚਿੰਗ ਅਸੀਂ ਕਰਨ ਦਾ ਫ਼ੈਸਲਾ ਕੀਤਾ ਹੈ। ਡਿਜੀਟਲ ਪਬਲਿਕ ਇਨਫ੍ਰਾਸਟ੍ਰਕਚਰ ਹੈ, ਸਾਡੇ ਕੋਲ ਉੱਤਮ ਹੁਨਰ ਹੈ, ਅਧਿਆਪਕ ਹਨ, ਉਨ੍ਹਾਂ ਸਾਧਨਾਂ ਨੂੰ ਜੋੜ ਕੇ ਅਸੀਂ ਦੇਸ਼ ਦੇ ਨੌਜਵਾਨਾਂ ਨੂੰ ਫ੍ਰੀ ਕੋਚਿੰਗ ਦੇਣ ਦਾ ਇੱਕ ਪੂਰਾ ਨੈੱਟਵਰਕ ਅਸੀਂ ਖੜ੍ਹਾ ਕਰਨ ਵਾਲੇ ਹਾਂ।

ਮੇਰੇ ਪਿਆਰੇ ਦੇਸ਼ ਵਾਸੀਓ,

ਮੈਂ ਹਮੇਸ਼ਾ ਕਹਿੰਦਾ ਆਇਆ ਹਾਂ, ਜੋ ਖੇਡੇ, ਉਹ ਖਿੜੇ। ਜਦੋਂ ਮੈਂ ਜੋ ਖੇਡੇ, ਉਹ ਖਿੜੇ ਦੀ ਗੱਲ ਕਰ ਰਿਹਾ ਹਾਂ, ਉਦੋਂ ਮੇਰੇ ਪਿਆਰੇ ਦੇਸ਼ ਵਾਸੀਓ, ਅੱਜ ਭਾਰਤ ਖੇਡਾਂ ਦੀ ਦੁਨੀਆ ਵਿੱਚ ਆਪਣੀ ਥਾਂ ਬਣਾ ਰਿਹਾ ਹੈ। ਹੁਣ ਖੇਡਾਂ ਦੇ ਪੋਡੀਅਮ ’ਤੇ ਭਾਰਤ ਦਾ ਰਾਸ਼ਟਰੀ ਗੀਤ ਸੁਣਾਈ ਦਿੰਦਾ ਹੈ, ਭਾਰਤ ਦਾ ਰਾਸ਼ਟਰ-ਗਾਨ ਸੁਣਾਈ ਦਿੰਦਾ ਹੈ, ਭਾਰਤ ਦਾ ਤਿਰੰਗਾ ਝੰਡਾ ਲਹਿਰਾਉਂਦਾ ਨਜ਼ਰ ਆ ਰਿਹਾ ਹੈ। ਟੌਪਸ ਯੋਜਨਾ ਨੇ ਬਹੁਤ ਵੱਡੀ ਸਫ਼ਲਤਾ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕੀਤੀ ਹੈ। ਖੇਲੋ ਇੰਡੀਆ ਗੇਮਜ਼, ਯੂਨੀਵਰਸਿਟੀ ਗੇਮਜ਼, ਵਿੰਟਰ ਗੇਮਜ਼, ਬੀਚ ਗੇਮਜ਼, ਸਪੋਰਟਸ ਇਨਫ੍ਰਾਸਟ੍ਰਕਚਰ, ਸਪੋਰਟਸ ਲਈ ਕੋਚਿੰਗ, ਸਪੋਰਟਸ ਮੈਡੀਸਨ, ਸਪੋਰਟਸ ਲਈ ਨਿਊਟ੍ਰੀਸ਼ਨ, ਇਨ੍ਹਾਂ ਸਾਰੇ ਵਿਸ਼ਿਆਂ ਵਿੱਚ ਭਾਰਤ ਹੁਣ ਮਹਾਰਤ ਹਾਸਲ ਕਰਨ ਦੀ ਦਿਸ਼ਾ ਵਿੱਚ ਅੱਗੇ ਵਧ ਰਿਹਾ ਹੈ। ਨੌਜਵਾਨਾਂ ਲਈ ਪੂਰਾ ਨਵਾਂ ਖੇਤਰ - ਖਿਡਾਰੀ ਨਾ ਬਣ ਸਕਣ, ਤਾਂ ਉਸ ਦੇ ਸਪੋਰਟ ਸਿਸਟਮ ਵਿੱਚ ਵੀ ਬਹੁਤ ਵੱਡਾ ਖੇਤਰ ਖੁੱਲ੍ਹ ਰਿਹਾ ਹੈ। ਖੇਡਾਂ ਦੀ ਦੁਨੀਆ ਵਿੱਚ ਭਾਰਤ ਦਾ ਪ੍ਰਦਰਸ਼ਨ ਬਿਹਤਰ ਹੁੰਦਾ ਜਾ ਰਿਹਾ ਹੈ ਅਤੇ ਅਸੀਂ 2036 ਵਿੱਚ ਓਲੰਪਿਕ ਦੇ ਮਜ਼ਬੂਤ ਦਾਅਵੇਦਾਰ ਬਣ ਕੇ ਅੱਗੇ ਵਧ ਰਹੇ ਹਾਂ, ਅਤੇ 2030 ਵਿੱਚ ਕਾਮਨਵੈਲਥ ਗੇਮਜ਼ ਨੂੰ ਭਾਰਤ ਹੁਣ ਹੋਸਟ ਕਰਨ ਵਾਲਾ ਹੈ।

ਅਤੇ ਮੇਰੇ ਸਾਥੀਓ,

ਦੁਨੀਆ ਵਿੱਚ ਜੋ ਓਲੰਪਿਕ ਦੀਆਂ ਖੇਡਾਂ ਹੁੰਦੀਆਂ ਹਨ, ਕਰੀਬ 40 ਪ੍ਰਕਾਰ ਦੀਆਂ ਗੇਮਸ ਹੁੰਦੀਆਂ ਹਨ ਅਤੇ ਕਰੀਬ 325-350 ਮੁਕਾਬਲੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ ਓਲੰਪਿਕ ਵਿੱਚ ਅਤੇ ਤੁਹਾਨੂੰ ਜਾਣ ਕੇ ਦੁੱਖ ਹੋਵੇਗਾ ਮੇਰੇ ਦੇਸ਼ ਵਾਸੀਓ। ਮੇਰੇ ਨੌਜਵਾਨੋ, ਮੈਂ ਤੁਹਾਨੂੰ ਚੁਣੌਤੀ ਦਿੰਦਾ ਹਾਂ, ਮੈਂ ਸੱਦਾ ਦਿੰਦਾ ਹਾਂ, ਮੈਂ ਤੁਹਾਡੀ ਮਦਦ ਚਾਹੁੰਦਾ ਹਾਂ, 325 ਜਿੰਨੇ ਮੁਕਾਬਲੇ ਵਿੱਚ ਭਾਰਤ ਦੋ ਤਿਹਾਈ ਖੇਡਾਂ ਵਿੱਚ ਕਿਤੇ ਹੁੰਦਾ ਹੀ ਨਹੀਂ ਹੈ। ਸਾਡੀ ਮੌਜੂਦਗੀ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦੀ, ਅਸੀਂ ਕੁਆਲੀਫਾਈ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦੇ ਹਾਂ, ਅਸੀਂ ਤੈਅ ਕੀਤਾ ਹੈ ਕਿ 2036 ਵਿੱਚ ਜੋ ਓਲੰਪਿਕ ਹੋਵੇਗਾ, ਅਸੀਂ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹਾਂ ਕਿ ਉਹ ਭਾਰਤ ਵਿੱਚ ਹੋਵੇ, ਪਰ 2036 ਵਿੱਚ ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਵਿਧਾਵਾਂ ਵਿੱਚ ਅੱਜ ਭਾਰਤ ਖੇਡਦਾ ਨਹੀਂ ਹੈ, ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਵਿਧਾਵਾਂ ਵਿੱਚ ਭਾਰਤ ਕੁਆਲੀਫਾਈ ਨਹੀਂ ਕਰਦਾ ਹੈ, ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਮੁਕਾਬਲਿਆਂ ਨੂੰ ਭਾਰਤ ਨੇ ਛੱਡ ਕੇ ਰੱਖਿਆ ਹੈ, ਤਿੰਨ ਚੌਥਾਈ ਹਿੱਸਾ ਸਾਡਾ ਇੰਤਜ਼ਾਰ ਕਰ ਰਿਹਾ ਹੈ, ਭਾਰਤ ਉਸ ’ਤੇ ਜ਼ੋਰ ਦੇਵੇਗਾ ਅਤੇ ਇਸ ਲਈ ਅਸੀਂ ਟੈਲੇਂਟ ਹੰਟ ਦਾ ਇੱਕ ਅਭਿਆਨ ਵੀ ਚਲਾਉਣਾ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹਾਂ। ਸਾਨੂੰ ਜੇਕਰ 2036 ਲਈ ਖਿਡਾਰੀ ਚਾਹੀਦੇ ਹਨ, ਤਾਂ ਅੱਜ ਜੋ 5 ਸਾਲ, 10 ਸਾਲ, 15 ਸਾਲ ਦੀ ਉਮਰ ਦੇ ਇਹ ਨੌਜਵਾਨ ਹਨ, ਬੇਟੇ ਹਨ, ਉਨ੍ਹਾਂ ਵੱਲ ਧਿਆਨ ਦੇਣਾ ਹੋਵੇਗਾ, ਉਨ੍ਹਾਂ ਬੇਟੀਆਂ ’ਤੇ ਧਿਆਨ ਦੇਣਾ ਹੋਵੇਗਾ। ਅਤੇ ਇਸ ਲਈ 5 ਤੋਂ 15 ਉਮਰ ਦੇ ਬੱਚਿਆਂ ਵਿੱਚ ਖੇਡ ਪ੍ਰਤਿਭਾ ਲੱਭਣ ਲਈ ਪਿੰਡ-ਪਿੰਡ, ਸ਼ਹਿਰ-ਸ਼ਹਿਰ, ਸਕੂਲ-ਸਕੂਲ ਇੱਕ ਟੈਲੇਂਟ ਹੰਟ ਦਾ ਅਭਿਆਨ ਚਲਾਇਆ ਜਾਵੇਗਾ, ਬੱਚਿਆਂ ਦੀ ਪ੍ਰਤਿਭਾ ਨੂੰ ਦੇਖਿਆ ਜਾਵੇਗਾ ਅਤੇ ਫਿਰ ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਸਪੈਸ਼ਲ ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਦੇ ਕੇ ਦੇਸ਼ ਲਈ ਖੇਡਣ ਵਾਲੇ ਚੰਗੇ ਖਿਡਾਰੀ ਬਣਾਏ ਜਾਣਗੇ।

ਮੇਰੇ ਪਿਆਰੇ ਨੌਜਵਾਨੋ,

ਦੇਸ਼ ਦੇ ਸਾਹਮਣੇ, ਦੇਸ਼ ਦੇ ਨੌਜਵਾਨਾਂ ਦੇ ਸਾਹਮਣੇ, ਨਸ਼ਾ ਇੱਕ ਬਹੁਤ ਵੱਡਾ ਸੰਕਟ ਬਣਦਾ ਜਾ ਰਿਹਾ ਹੈ। ਨਸ਼ਾ ਮੁਕਤ ਭਾਰਤ, ਇਹ ਸਾਡੇ ਸਭ ਦੀ ਸਮੂਹਿਕ ਜ਼ੁੰਮੇਵਾਰੀ ਹੋਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ। ਸਾਡੇ ਉੱਜਵਲ ਭਵਿੱਖ ਲਈ ਸਾਡੀ ਯੁਵਾ ਪੀੜ੍ਹੀ ਮਜ਼ਬੂਤ ਹੋਵੇ, ਸਾਡੀ ਯੁਵਾ ਸਮਰੱਥਾ ਸਾਡੇ ਦੇਸ਼ ਦੇ ਕੰਮ ਆਵੇ, ਇਸ ਲਈ ਨਸ਼ਾ ਮੁਕਤ ਭਾਰਤ, ਪਿਛਲੇ ਦਿਨੀਂ ਮਾਈ ਭਾਰਤ ਦੇ ਵਲੰਟੀਅਰਸ ਨੇ, ਦੇਸ਼ ਦੇ ਐੱਨਜੀਓਜ਼ ਨੇ, ਦੇਸ਼ ਦੇ ਸਮਾਜਿਕ-ਸੱਭਿਆਚਾਰਕ ਸੰਗਠਨਾਂ ਨੇ, ਦੇਸ਼ ਦੇ ਅਧਿਆਤਮਿਕ ਪੁਰਖਾਂ ਨੇ ਮਿਲ ਕੇ ਨਸ਼ਾ ਮੁਕਤ ਭਾਰਤ ਦਾ 100 ਹਫ਼ਤਿਆਂ ਦਾ ਇੱਕ ਪ੍ਰੋਗਰਾਮ ਤੈਅ ਕੀਤਾ ਹੈ। 100 ਹਫ਼ਤਿਆਂ ਤੱਕ ਇੱਕ ਅਭਿਆਨ ਚੱਲਣ ਵਾਲਾ ਹੈ। ਮੈਂ ਹਰ ਪਰਿਵਾਰ ਨੂੰ ਕਹਿਣਾ ਚਾਹੁੰਦਾ ਹਾਂ ਕਿ ਤੁਸੀਂ ਵੀ ਇਸ ਅਭਿਆਨ ਦਾ ਹਿੱਸਾ ਬਣੋ, ਤੁਸੀਂ ਇਸ ਦੇ ਨਾਲ ਜੁੜੋ ਅਤੇ ਦੇਸ਼ ਦੇ ਨਸ਼ਾ ਮੁਕਤ ਭਾਰਤ ਦੇ ਸੁਪਨੇ ਨੂੰ ਪੂਰਾ ਕਰਨ ਲਈ ਤੁਸੀਂ ਅੱਗੇ ਆਓ।

ਮੇਰੇ ਪਿਆਰੇ ਦੇਸ਼ ਵਾਸੀਓ,

21ਵੀਂ ਸਦੀ ਵਿੱਚ ਦਹਾਕਿਆਂ ਪੁਰਾਣੀਆਂ ਜੋ ਚੁਣੌਤੀਆਂ ਹਨ, ਉਨ੍ਹਾਂ ਚੁਣੌਤੀਆਂ ਨੂੰ ਖ਼ਤਮ ਕਰਨਾ ਬਹੁਤ ਜ਼ਰੂਰੀ ਹੈ। ਨਕਸਲਵਾਦ, ਮਾਓਵਾਦ ਨੇ ਲੱਖਾਂ ਨੌਜਵਾਨਾਂ ਦੇ ਭਵਿੱਖ ਨੂੰ ਤਬਾਹ ਕਰ ਦਿੱਤਾ। ਅਨੇਕਾਂ ਮਾਵਾਂ ਦੇ ਜਵਾਨ ਨੌਜਵਾਨਾਂ ਨੂੰ ਖੋਹ ਲਿਆ, ਬਰਬਾਦ ਕਰ ਦਿੱਤਾ, ਹਰ ਮਾਂ-ਬਾਪ ਦੇ ਸੁਪਨਿਆਂ ਨੂੰ ਚੂਰ-ਚੂਰ ਕਰ ਦਿੱਤਾ। ਇਸ ਨਕਸਲਵਾਦ ਨੇ ਚਾਰ-ਚਾਰ ਦਹਾਕਿਆਂ ਤੱਕ ਹਿੰਦੁਸਤਾਨ ਦੇ ਬਹੁਤ ਵੱਡੇ ਹਿੱਸੇ ਨੂੰ, ਬਹੁਤ ਵੱਡੀ ਆਬਾਦੀ ਨੂੰ ਦਬੋਚ ਕੇ ਰੱਖਿਆ ਸੀ, ਬੰਦੂਕ ਦੀ ਨੋਕ ’ਤੇ ਦਬੋਚ ਕੇ ਰੱਖਿਆ ਸੀ, ਸੰਵਿਧਾਨ ਦੀਆਂ ਧੱਜੀਆਂ ਉਡਾ ਦਿੱਤੀਆਂ ਸਨ ਅਤੇ ਦੇਸ਼ ਦੇ ਆਮ ਨਾਗਰਿਕਾਂ ਦੀ ਸੁਰੱਖਿਆ ਵਿੱਚ 3500 ਤੋਂ ਜ਼ਿਆਦਾ ਸਾਡੀ ਪੁਲਿਸ ਦੇ ਸੁਰੱਖਿਆ ਬਲ ਦੇ ਜਵਾਨ ਸ਼ਹੀਦ ਹੋ ਗਏ। ਜੰਗ ਦੇ ਅੰਦਰ ਜਿੰਨੇ ਸੈਨਿਕ ਮਰਦੇ ਹਨ, ਉਸ ਤੋਂ ਜ਼ਿਆਦਾ ਸਾਡੇ ਪੁਲਿਸ ਜਵਾਨਾਂ ਨੂੰ ਜਾਨ ਦੀ ਬਾਜ਼ੀ ਲਗਾਉਣੀ ਪਈ, ਤਾਂ ਜੋ ਦੇਸ਼ ਦੇ ਆਮ ਮਨੁੱਖ ਨੂੰ ਸੁਰੱਖਿਆ ਮਿਲੇ। ਇਸ ਨਕਸਲਵਾਦ ਨੇ ਧਰਤੀ ਨੂੰ ਲਹੂ-ਲੁਹਾਨ ਕਰ ਦਿੱਤਾ ਸੀ। 2014 ਵਿੱਚ ਤੁਸੀਂ ਜਦੋਂ ਸਾਨੂੰ ਮੌਕਾ ਦਿੱਤਾ, ਉਸੇ ਦਿਨ ਅਸੀਂ ਸੰਕਲਪ ਲਿਆ ਸੀ ਕਿ ਅਸੀਂ ਦੇਸ਼ ਨੂੰ ਨਕਸਲਵਾਦ ਤੋਂ ਮੁਕਤ ਕਰਾਂਗੇ ਅਤੇ ਅੱਜ ਮੈਨੂੰ ਖ਼ੁਸ਼ੀ ਹੈ ਕਿ ਨਕਸਲੀ ਮਾਓਵਾਦੀ ਹਿੰਸਾ ਦੀ ਆਖ਼ਰੀ ਸਾਹ ਵੀ ਸ਼ਾਇਦ ਰਹਿਣ ਦੀ ਹੁਣ ਤਾਂ ਤਾਕਤ ਨਹੀਂ ਰਹੀ ਹੈ, ਪੂਰੀ ਤਰ੍ਹਾਂ ਉਸ ਨੂੰ ਖ਼ਤਮ ਕਰਨ ਦੀ ਦਿਸ਼ਾ ਵਿੱਚ, ਜਿੱਥੇ ਕਦੇ ਨਕਸਲਵਾਦੀਆਂ ਦੀਆਂ ਗੋਲ਼ੀਆਂ ਚੱਲਦੀਆਂ ਸਨ, ਜਿੱਥੇ ਕਦੇ ਧਰਤੀ ਖੂਨ ਨਾਲ ਰੰਗੀ ਰਿਹਾ ਕਰਦੀ ਸੀ, ਅੱਜ ਉਨ੍ਹਾਂ ਹੀ ਨਕਸਲ ਖੇਤਰਾਂ ਵਿੱਚ, ਉਨ੍ਹਾਂ ਹੀ ਇਲਾਕਿਆਂ ਵਿੱਚ, ਨਕਸਲ ਮੁਕਤ ਹੋਣ ਦੇ ਕਾਰਨ ਵਿਕਾਸ, ਵਿਸ਼ਵਾਸ ਅਤੇ ਯਤਨ ਦਾ ਤਿਰੰਗਾ ਲਹਿਰਾ ਰਿਹਾ ਹੈ।

ਮੇਰੇ ਪਿਆਰੇ ਦੇਸ਼ ਵਾਸੀਓ,

ਪਰ ਇਸ ਚੁਣੌਤੀ ਨੂੰ ਅਸੀਂ ਘੱਟ ਨਹੀਂ ਆਂਕਣਾ ਹੈ। ਇਸ ਚੁਣੌਤੀ ਤੋਂ ਸਾਨੂੰ ਹੋਰ ਵੀ ਸਾਵਧਾਨ ਰਹਿਣ ਦੀ ਜ਼ਰੂਰਤ ਹੈ। ਸਾਲਾਂ ਤੱਕ ਦੇਸ਼ ਦੀ ਸੱਤਾ ਵਿੱਚ ਮਾਓਵਾਦੀ ਸੋਚ ਦੇ ਲੋਕ ਗਲਿਆਰਿਆਂ ਵਿੱਚ ਆਪਣੀ ਜਗ੍ਹਾ ਬਣਾ ਕੇ ਬੈਠੇ ਸਨ। ਸਰਕਾਰੀ ਕਮੇਟੀਆਂ ਵਿੱਚ ਸਲਾਹਕਾਰ ਦੇ ਰੂਪ ਵਿੱਚ ਵੀ ਇਹ ਮਾਓਵਾਦੀ ਸੋਚ ਨੇ ਨੀਤੀਆਂ ਨੂੰ ਪ੍ਰਭਾਵਿਤ ਕੀਤਾ ਸੀ।

ਮੇਰੇ ਪਿਆਰੇ ਦੇਸ਼ ਵਾਸੀਓ,

ਜੰਗਲਾਂ ਵਿੱਚ ਸਾਨੂੰ ਹਥਿਆਰਬੰਦ ਨਕਸਲੀਆਂ ਦਾ ਖ਼ਾਤਮਾ ਕਰਨ ਵਿੱਚ, ਉਸ ਸੰਕਟ ਤੋਂ ਦੇਸ਼ ਨੂੰ ਮੁਕਤ ਕਰਵਾਉਣ ਵਿੱਚ ਸਫ਼ਲਤਾ ਮਿਲੀ ਹੈ। ਪਰ ਹਥਿਆਰਬੰਦ ਨਕਸਲੀ ਤਾਂ ਗਏ, ਪਰ ਬੁੱਧੀਜੀਵੀ ਨਕਸਲੀ, ਇਹ ਬੁੱਧੀਜੀਵੀ ਨਕਸਲੀ ਮੌਕੇ ਦੀ ਭਾਲ ਵਿੱਚ ਹਨ। ਹਿੰਸਾ ਅਤੇ ਅਰਾਜਕਤਾ ਦੇ ਉਹ ਰਸਤੇ ਖੋਜ ਰਹੇ ਹਨ। ਸਮਾਜ ਨੂੰ ਗ਼ਲਤ ਰਾਹ ’ਤੇ ਘਸੀਟਣ ਲਈ ਭਾਂਤ-ਭਾਂਤ ਦੇ ਦਾਅ ਲਗਾ ਰਹੇ ਹਨ। ਇਨ੍ਹਾਂ ਬੁੱਧੀਜੀਵੀ ਨਕਸਲੀਆਂ ਨੂੰ ਪਛਾਣਨਾ ਹੋਵੇਗਾ। ਇਨ੍ਹਾਂ ਬੁੱਧੀਜੀਵੀ ਨਕਸਲੀਆਂ ਨੂੰ ਅਲੱਗ-ਥਲੱਗ ਕਰਨਾ ਹੋਵੇਗਾ ਅਤੇ ਰਾਸ਼ਟਰ ਨੂੰ ਵਿਕਸਤ ਰਾਸ਼ਟਰ ਬਣਾਉਣ ਦੀ ਮੁੱਖਧਾਰਾ ਨਾਲ ਦੇਸ਼ ਦੀ ਯੁਵਾ ਪੀੜ੍ਹੀ ਨੂੰ ਜੋੜਨਾ ਹੋਵੇਗਾ।

ਮੇਰੇ ਪਿਆਰੇ ਦੇਸ਼ ਵਾਸੀਓ,

ਸੁਰੱਖਿਅਤ ਭਾਰਤ ਬਣਾਉਣਾ ਸਾਡੀ ਸਭ ਦੀ ਜ਼ੁੰਮੇਵਾਰੀ ਹੈ। ਚੁਣੌਤੀ ਸਰਹੱਦ ਦੇ ਅੰਦਰ ਹੋਵੇ ਜਾਂ ਸਰਹੱਦ ਤੋਂ ਬਾਹਰ, ਭਾਰਤ ਹਰ ਸਥਿਤੀ ਲਈ ਤਿਆਰ ਹੈ। ਅੱਜ ਜੰਗ ਦਾ ਸੁਭਾਅ ਬਦਲ ਰਿਹਾ ਹੈ। ਹੁਣ ਜੰਗ ਸਰਹੱਦ ’ਤੇ ਹੀ ਹੁੰਦਾ ਹੈ, ਇਹ ਗਾਰੰਟੀ ਨਹੀਂ ਹੈ। ਅੱਜ ਜੰਗ ਸਰਹੱਦ ਦੇ ਅੰਦਰ ਕਿਤੇ ਰਿਫ਼ਾਇਨਰੀ ਵਿੱਚ ਜਾ ਕੇ, ਕਿਤੇ ਬੈਂਕਿੰਗ ਸੈਕਟਰ ਵਿੱਚ ਜਾ ਕੇ, ਕਿਤੇ ਡਾਟਾ ਸੈਂਟਰ ਵਿੱਚ ਜਾ ਕੇ, ਇੱਕ ਤਰ੍ਹਾਂ ਨਾਲ ਲੜਾਈ ਦਾ ਨਵਾਂ ਰੂਪ - ਇਨਫ੍ਰਾਸਟ੍ਰਕਚਰ ਤੋੜੇ ਜਾ ਰਹੇ ਹਨ, ਫੈਕਟਰੀਆਂ ਤੋੜੀਆਂ ਜਾ ਰਹੀਆਂ ਹਨ। ਅਸੀਂ ਮਿਸ਼ਨ ਸੁਦਰਸ਼ਨ ਚੱਕਰ ਦਾ ਪਿਛਲੇ ਸਾਲਾਂ ਵਿੱਚ ਐਲਾਨ ਕੀਤਾ ਸੀ। ਬਹੁਤ ਤੇਜ਼ੀ ਨਾਲ ਉਸ ’ਤੇ ਕੰਮ ਚੱਲ ਰਿਹਾ ਹੈ। ਅੱਜ ਡਿਫ਼ੈਂਸ ਐਕਸਪੋਰਟ ਸਾਡਾ ਕਰੀਬ 50 ਗੁਣਾ ਵਧਿਆ ਹੈ। ਕਰੀਬ 100 ਦੇਸ਼ਾਂ ਵਿੱਚ ਸਾਡੇ ਅਸਤਰ-ਸ਼ਸਤਰ ਪਹੁੰਚ ਰਹੇ ਹਨ। ਆਲਮੀ ਪਟਲ ’ਤੇ ਭਾਰਤ ਦੀ ਪ੍ਰਤਿਸ਼ਠਾ ਹੌਲੀ-ਹੌਲੀ ਵਧ ਰਹੀ ਹੈ। ਬਦਲਦੇ ਹੋਏ ਸਮੇਂ ਵਿੱਚ ਅਸਤਰ-ਸ਼ਸਤਰ ਵੱਲ ਕੰਮ ਕਰਨਾ ਹੈ, ਸੈਨਿਕ ਬਲਾਂ ਦੀ ਸਮਰੱਥਾ ਵਧਾਉਣੀ ਹੈ। ਪਰ ਨਾਲ ਹੀ ਨਾਲ ਨਾਗਰਿਕਾਂ ਨੂੰ ਵੀ ਤਿਆਰ ਕਰਨਾ ਹੋਵੇਗਾ। ਪਿਛਲੀ ਸ਼ਤਾਬਦੀ ਦੀਆਂ ਜੰਗਾਂ ਦੇ ਅਨੁਰੂਪ ਜੋ ਸਿਵਲ ਡਿਫ਼ੈਂਸ ਦੀਆਂ ਵਿਵਸਥਾਵਾਂ ਸਾਡੇ ਦੇਸ਼ ਵਿੱਚ ਵਿਕਸਤ ਹੋਈਆਂ ਹਨ, ਉਹ ਕਾਲ-ਬਾਹਰੀ ਹੋ ਚੁੱਕੀਆਂ ਹਨ ਅਤੇ ਇਸ ਲਈ ਮੈਂ ਅੱਜ ਲਾਲ ਕਿਲ੍ਹੇ ਤੋਂ ਐਲਾਨ ਕਰ ਰਿਹਾ ਹਾਂ ਕਿ, ਅਸੀਂ ਆਉਣ ਵਾਲੇ ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਸਿਵਲ ਡਿਫ਼ੈਂਸ ਦਾ ਇੱਕ ਵਾਈਬ੍ਰੈਂਟ ਨੈੱਟਵਰਕ ਖੜ੍ਹਾ ਕਰਾਂਗੇ। ਆਧੁਨਿਕ ਵਿਵਸਥਾਵਾਂ ਨਾਲ ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਜਾਣੂ ਕਰਵਾਵਾਂਗੇ। ਆਧੁਨਿਕ ਸੰਕਟਾਂ ਤੋਂ ਨਾਗਰਿਕਾਂ ਦੀ ਰੱਖਿਆ ਕਰਨ ਦੀ ਕੀ ਵਿਵਸਥਾ ਹੋ ਸਕਦੀ ਹੈ, ਇੱਕ ਬਹੁਤ ਵੱਡੀ ਵਲੰਟਰੀ ਫੋਰਸ ਸਿਵਲ ਡਿਫ਼ੈਂਸ ਦੀ ਆਧੁਨਿਕ ਚੁਣੌਤੀਆਂ ਨੂੰ ਪਾਰ ਕਰਨ ਵਾਲੀ ਅਸੀਂ ਬਣਾਉਣ ਵਾਲੇ ਹਾਂ।

ਮੇਰੇ ਪਿਆਰੇ ਦੇਸ਼ ਵਾਸੀਓ,

ਰਾਸ਼ਟਰ ਦੇ ਨਿਰਮਾਣ ਵਿੱਚ ਅੱਜ ਸਾਡੀਆਂ ਭੈਣਾਂ-ਬੇਟੀਆਂ ਦਾ ਯੋਗਦਾਨ ਸਾਡੇ ਸਭ ਲਈ ਬਹੁਤ ਵੱਡੀ ਪ੍ਰੇਰਨਾ ਦਾ ਕਾਰਨ ਬਣਿਆ ਹੋਇਆ ਹੈ। ਫ਼ਾਈਟਰ ਜੈੱਟ ਹੋਵੇ ਜਾਂ ਸ਼ਹਿਰੀ ਹਵਾਬਾਜ਼ੀ, ਸਾਡੀਆਂ ਬੇਟੀਆਂ ਸਭ ਤੋਂ ਅੱਗੇ ਦਿਖਾਈ ਦੇ ਰਹੀਆਂ ਹਨ। ਖੇਡ-ਕੁੱਦ ਦਾ ਮੈਦਾਨ ਹੋਵੇ, ਸਾਡੀਆਂ ਬੇਟੀਆਂ ਅੱਗੇ ਦਿਖਾਈ ਦੇ ਰਹੀਆਂ ਹਨ। ਸਟੈੱਮ ਐਜੂਕੇਸ਼ਨ ਵਿੱਚ ਭਰਤੀ ਹੋਣ ਦੀ ਪ੍ਰਕਿਰਿਆ ਹੋਵੇ, ਸਭ ਤੋਂ ਜ਼ਿਆਦਾ ਸਾਡੀਆਂ ਬੇਟੀਆਂ ਅੱਗੇ ਦਿਖ ਰਹੀਆਂ ਹਨ। ਅੱਜ ਸੈਨਾ ਵਿੱਚ ਵੀ ਐੱਨਡੀਏ ਤੋਂ ਜੋ ਬੇਟੀਆਂ ਨਿਕਲੀਆਂ ਹਨ, ਉਹ ਬਹੁਤ ਰੌਬ ਨਾਲ ਦੇਸ਼ ਦੀ ਸੈਨਾ ਦੀ ਅਗਵਾਈ ਕਰਨ ਦੀ ਸਮਰੱਥਾ ਦਿਖਾਉਣ ਲੱਗੀਆਂ ਹਨ। ਮੇਰੀਆਂ ਬੇਟੀਆਂ ਦੀ ਤਾਕਤ ਕਿਹੋ ਜਿਹੀ ਹੈ, ਮੈਂ ਪਿਛਲੇ ਦਿਨੀਂ ਸਾਨੰਦ ਵਿੱਚ ਇੱਕ ਸੈਮੀਕੰਡਕਟਰ ਪਲਾਂਟ ਵਿੱਚ ਗਿਆ ਸੀ, ਉੱਥੇ ਕਬਾਇਲੀ ਬੇਟੀਆਂ, ਦੇਸ਼ ਦੇ ਵੱਖ-ਵੱਖ ਕੋਨਿਆਂ ਤੋਂ ਆਈਆਂ ਹੋਈਆਂ ਬੇਟੀਆਂ ਕੰਮ ਕਰ ਰਹੀਆਂ ਸਨ। ਉਹ ਉਨ੍ਹਾਂ ਪਿੰਡਾਂ ਤੋਂ ਆਈਆਂ ਸਨ ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਪਾਸਪੋਰਟ ਕੀ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਪਤਾ ਤੱਕ ਨਹੀਂ ਸੀ। ਉਹ ਬੇਟੀਆਂ ਵਿਦੇਸ਼ਾਂ ਵਿੱਚ ਗਈਆਂ, ਟ੍ਰੇਨਿੰਗ ਲੈ ਕੇ ਆਈਆਂ ਅਤੇ ਅੱਜ ਚਿੱਪ ਨਿਰਮਾਣ ਦਾ ਕੰਮ ਕਰ ਰਹੀਆਂ ਹਨ ਅਤੇ ਬਹੁਤ ਭਰੋਸਾ, ਮੈਂ ਜੋ ਉਨ੍ਹਾਂ ਦਾ ਭੋਰਸਾ ਦੇਖਿਆ, ਮੈਂ ਸੱਚਮੁੱਚ ਵਿੱਚ ਬਹੁਤ ਪ੍ਰਭਾਵਿਤ ਹੋਇਆ ਸੀ। ਅੱਜ 3 ਕਰੋੜ ਭੈਣਾਂ ਨੂੰ ਅਸੀਂ ਲਖਪਤੀ ਦੀਦੀ ਬਣਾਉਣ ਦਾ ਟੀਚਾ ਤੈਅ ਕੀਤਾ ਸੀ, ਉਸ ਨੂੰ ਪਾਰ ਕਰ ਲਿਆ ਹੈ। ਹੁਣ ਅਸੀਂ 6 ਕਰੋੜ ਲਖਪਤੀ ਦੀਦੀ ਬਣਾਉਣ ਦੇ ਟੀਚੇ ਨੂੰ ਲੈ ਕੇ ਅੱਗੇ ਵਧ ਰਹੇ ਹਾਂ। 3 ਕਰੋੜ ਨਵੀਆਂ ਲਖਪਤੀ ਦੀਦੀਆਂ ਬਣਨਾ ਮਤਲਬ ਪੇਂਡੂ ਆਰਥਿਕਤਾ ਵਿੱਚ ਬਹੁਤ ਵੱਡਾ ਬਦਲਾਅ ਮਹਿਲਾ ਸ਼ਕਤੀ ਰਾਹੀਂ ਆਉਣ ਵਾਲਾ ਹੈ।

ਮੇਰੇ ਪਿਆਰੇ ਦੇਸ਼ ਵਾਸੀਓ,

ਅੱਜ ਪੰਚਾਇਤਾਂ ਵਿੱਚ, ਨਗਰ ਪਾਲਿਕਾ ਵਿੱਚ, ਮਹਾਨਗਰ ਪਾਲਿਕਾ ਵਿੱਚ, ਬਹੁਤ ਵੱਡੀ ਮਾਤਰਾ ਵਿੱਚ ਸਾਡੀਆਂ ਮਹਿਲਾਵਾਂ ਜਨ-ਪ੍ਰਤੀਨਿਧੀ ਬਣ ਕੇ ਦੇਸ਼ ਦਾ ਮਾਰਗ-ਦਰਸ਼ਨ ਕਰ ਰਹੀਆਂ ਹਨ, ਸਮੱਸਿਆਵਾਂ ਦਾ ਹੱਲ ਕਰ ਰਹੀਆਂ ਹਨ, ਬਹੁਤ ਹੀ ਸਮਰੱਥ ਲੀਡਰਸ਼ਿਪ ਦੇ ਰਹੀਆਂ ਹਨ ਅਤੇ ਇਸੇ ਨੂੰ ਧਿਆਨ ਵਿੱਚ ਰਖਦਿਆਂ ਅਸੀਂ ਸੰਸਦ ਵਿੱਚ 'ਨਾਰੀ ਸ਼ਕਤੀ ਵੰਦਨ ਅਧਿਨਿਯਮ' ਪਾਸ ਕੀਤਾ ਸੀ। ਪਰ ਕਿਸੇ ਨਾ ਕਿਸੇ ਕਾਰਨ ਰਾਜਨੀਤੀ ਦੇ ਅਖਾੜੇ ਵਿੱਚ ਪਿਛਲੇ 40 ਸਾਲਾਂ ਤੋਂ ਇਹ ਸੁਪਨਾ ਹਮੇਸ਼ਾ ਰਾਜਨੀਤਿਕ ਅਖਾੜੇ ਦਾ ਸ਼ਿਕਾਰ ਹੋ ਗਿਆ ਹੈ। ਮੈਂ ਦੇਸ਼ ਦੇ ਸਾਰੇ ਰਾਜਨੀਤਿਕ ਦਲਾਂ ਨੂੰ ਅੱਜ ਲਾਲ ਕਿਲ੍ਹੇ ਦੀ ਫ਼ਸੀਲ ਤੋਂ ਤਿਰੰਗੇ ਝੰਡੇ ਦੀ ਛਾਂ ਵਿੱਚ ਖੜ੍ਹੇ ਹੋ ਕੇ ਬੇਨਤੀ ਕਰਦਾ ਹਾਂ, ਤਾਕੀਦ ਕਰਦਾ ਹਾਂ। ਆਓ, ਉਨ੍ਹਾਂ ਮਹਿਲਾਵਾਂ ਦੀ ਸਮਰੱਥਾ ਦੇ ਪੁਜਾਰੀ ਬਣੋ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਮਹਿਲਾਵਾਂ ਦੇ ਸਨਮਾਨ ਵਿੱਚ ਅੱਗੇ ਆਓ ਅਤੇ ਜਲਦ ਤੋਂ ਜਲਦ ਸਾਡੀਆਂ ਮਾਵਾਂ-ਭੈਣਾਂ ਨੂੰ 33% ਵਿਧਾਨ ਸਭਾ ਅਤੇ ਲੋਕ ਸਭਾ ਵਿੱਚ ਪ੍ਰਤੀਨਿਧਤਾ ਮਿਲੇ, ਉਹ ਭਾਰਤ ਦੀ ਨੀਤੀ ਘੜਨ ਦੇ ਅੰਦਰ ਆਪਣਾ ਯੋਗਦਾਨ ਦੇਣ। ਸਮੇਂ ਦੀ ਮੰਗ ਹੈ ਅਤੇ ਮੈਂ ਸਾਰੇ ਰਾਜਨੀਤਿਕ ਦਲਾਂ ਨੂੰ ਫਿਰ ਤੋਂ ਤਾਕੀਦ ਕਰਦਾ ਹਾਂ, ਆਓ ਮਹਿਲਾ ਰਾਖਵਾਂਕਰਨ ਲਾਗੂ ਕਰਕੇ ਮਹਿਲਾ ਸਨਮਾਨ ਵਿੱਚ ਤੁਸੀਂ ਵੀ ਜੁੜੋ, ਤੁਸੀਂ ਵੀ ਜਸ ਲਵੋ, ਤੁਸੀਂ ਵੀ ਕ੍ਰੈਡਿਟ ਲਵੋ, ਪਰ ਮੇਰੀਆਂ ਮਾਵਾਂ-ਭੈਣਾਂ ਨੂੰ ਹੱਕ ਦਿਓ।

ਮੇਰੇ ਪਿਆਰੇ ਦੇਸ਼ ਵਾਸੀਓ,

ਵਿਕਸਤ ਭਾਰਤ ਦਾ ਸੰਕਲਪ ਉਦੋਂ ਹੀ ਪੂਰਾ ਹੋਵੇਗਾ, ਜਦੋਂ ਵਿਕਾਸ ਆਖ਼ਰੀ ਵਿਅਕਤੀ ਤੱਕ ਪਹੁੰਚੇਗਾ। 2014 ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਸਿਰਫ਼ 25 ਕਰੋੜ ਲੋਕਾਂ ਕੋਲ ਸੋਸ਼ਲ ਸੁਰੱਖਿਆ ਦਾ ਕਵਰ ਸੀ, ਸਿਰਫ਼ 25 ਕਰੋੜ ਕੋਲ।

ਸਾਥੀਓ,

ਪਿਛਲੇ 5-7 ਦਹਾਕਿਆਂ ਵਿੱਚ ਸਿਰਫ਼ 25 ਕਰੋੜ, ਅਸੀਂ ਇੱਕ ਦਹਾਕੇ ਦੇ ਅੰਦਰ-ਅੰਦਰ 100 ਕਰੋੜ ਦੇਸ਼ ਵਾਸੀਆਂ ਨੂੰ ਸੋਸ਼ਲ ਸੁਰੱਖਿਆ ਦਾ ਕਵਚ ਦਿੱਤਾ ਹੈ। ਆਯੁਸ਼ਮਾਨ ਭਾਰਤ ਯੋਜਨਾ ਨਾਲ 70 ਸਾਲ ਦੀ ਉਮਰ ਦੇ ਬਜ਼ੁਰਗਾਂ ਲਈ ਵੀ ਅੱਜ 5 ਲੱਖ ਰੁਪਏ ਤੱਕ ਮੁਫ਼ਤ ਦਵਾਈ ਦੀ ਵਿਵਸਥਾ ਹੋ ਰਹੀ ਹੈ। ਕਰੋੜਾਂ-ਕਰੋੜਾਂ ਪਰਿਵਾਰਾਂ ਨੂੰ ਇਸ ਦੇ ਕਾਰਨ ਬਹੁਤ ਵੱਡੀ ਸਹੂਲਤ ਮਿਲੀ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸ ਆਯੁਸ਼ਮਾਨ ਕਾਰਡ ਦੇ ਕਾਰਨ 2 ਲੱਖ ਕਰੋੜ ਰੁਪਏ ਜੋ ਦਵਾਈ ਅਤੇ ਆਪ੍ਰੇਸ਼ਨ ਦੇ ਪਿੱਛੇ ਖ਼ਰਚ ਹੋਣੇ ਸਨ, ਉਹ ਮੇਰੇ ਪਰਿਵਾਰਾਂ ਦੇ ਬਚੇ ਹਨ, ਉਹ ਗ਼ਰੀਬ ਪਰਿਵਾਰ ਹਨ, ਉਹ ਮੱਧ ਵਰਗ ਦੇ ਪਰਿਵਾਰ ਹਨ, ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਇੰਨੀ ਵੱਡੀ ਮਦਦ ਮਿਲੀ ਹੈ!

ਮੇਰੇ ਪਿਆਰੇ ਦੇਸ਼ ਵਾਸੀਓ,

ਅੱਜ ਮੈਨੂੰ ਇੱਕ ਕੰਮ ਲਈ ਤੁਹਾਡੀ ਮਦਦ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ। ਮੈਂ ਤੁਹਾਡੇ ਸਭ ਤੋਂ ਇੱਕ ਮਦਦ ਮੰਗ ਰਿਹਾ ਹਾਂ। ਸਾਰੇ ਨੌਜਵਾਨਾਂ ਤੋਂ ਮੈਂ ਚਾਹੁੰਦਾ ਹਾਂ ਕਿ ਤੁਸੀਂ ਇਸ ਦੀ ਅਗਵਾਈ ਕਰੋ। ਤੁਹਾਡਾ ਇੱਕ ਜਾਂ ਦੋ ਘੰਟੇ ਦੇਸ਼ ਨੂੰ ਬਹੁਤ ਵੱਡੀ ਸ਼ਕਤੀ ਦੇਣ ਵਾਲੇ ਹਨ। ਤੁਹਾਨੂੰ ਲੱਗੇਗਾ ਇੱਕ-ਦੋ ਘੰਟਿਆਂ ਵਿੱਚ ਮੈਂ ਦੇਸ਼ ਦੀ ਕੀ ਸ਼ਕਤੀ, ਮੈਂ ਦੱਸਦਾ ਹਾਂ। ਤੁਸੀਂ ਬਹੁਤ ਵੱਡੀ ਸ਼ਕਤੀ ਬਣਨ ਵਾਲੇ ਹੋ ਅਤੇ ਇਸ ਲਈ ਹਰ ਘਰ ਵਿੱਚ ਮਾਹੌਲ ਬਣੇ। ਇਨ੍ਹਾਂ ਦਿਨਾਂ ਵਿੱਚ ਦੇਸ਼ ਵਿੱਚ ਜਨਗਣਨਾ ਦਾ ਕੰਮ ਹੋ ਰਿਹਾ ਹੈ। ਮਰਦਮਸ਼ੁਮਾਰੀ ਦਾ ਕੰਮ ਹੋ ਰਿਹਾ ਹੈ, ਗਿਣਤੀ ਚੱਲ ਰਹੀ ਹੈ ਅਤੇ ਗਿਣਤੀ ਸਿਰਫ਼ ਅੰਕੜਿਆਂ ਨਾਲ ਗੱਲ ਬਣਦੀ ਨਹੀਂ ਹੈ। ਉਸ ਦੀਆਂ ਬਾਰੀਕੀਆਂ ਤੋਂ ਨੀਤੀਆਂ ਬਣਦੀਆਂ ਹਨ, ਯੋਜਨਾਵਾਂ ਬਣਦੀਆਂ ਹਨ, ਦੇਸ਼ ਅੱਗੇ ਵਧਣ ਦੀ ਆਪਣੀ ਰੂਪ-ਰੇਖਾ ਤਿਆਰ ਕਰਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸ ਲਈ ਸਟੀਕ ਜਾਣਕਾਰੀਆਂ ਹੋਣਾ ਬਹੁਤ ਜ਼ਰੂਰੀ ਹੈ। ਕਦੇ-ਕਦੇ ਜੋ ਸਰਕਾਰ ਵੱਲੋਂ ਪ੍ਰਤੀਨਿਧੀ ਆਉਂਦੇ ਹਨ, ਉਹ ਇੰਨੀ ਜਲਦੀ ਵਿੱਚ ਹੁੰਦੇ ਹਨ, ਕਦੇ ਸਪੈਲਿੰਗ ਇੱਕ ਲਿਖ ਦਿੰਦੇ ਹਨ, ਕਦੇ ਅਲੱਗ ਲਿਖ ਦਿੰਦੇ ਹਨ ਅਤੇ ਇਸ ਦੇ ਕਾਰਨ ਅੰਤ ਵਿੱਚ ਸਾਨੂੰ ਨਤੀਜੇ ਸਹੀ ਮਿਲਣ ਵਿੱਚ ਦਿੱਕਤਾਂ ਆਉਂਦੀਆਂ ਹਨ।

ਹੁਣ ਜਦੋਂ ਤਕਨਾਲੋਜੀ ਮੌਜੂਦ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸ ਵਾਰ ਫ਼ੈਸਲਾ ਕੀਤਾ ਹੈ ਕਿ ਤੁਸੀਂ ਖ਼ੁਦ ਵੀ ਜਨਗਣਨਾ ਵਿੱਚ ਆਪਣੀਆਂ ਜਾਣਕਾਰੀਆਂ ਆਪਣੇ ਮੋਬਾਈਲ ਫ਼ੋਨ ਤੋਂ ਭਰ ਕੇ ਦੇ ਸਕਦੇ ਹੋ। ਬਾਅਦ ਵਿੱਚ ਕੋਈ ਬਾਬੂ ਆਉਣਗੇ, ਕੋਈ ਪ੍ਰਤੀਨਿਧੀ ਆਉਣਗੇ, ਤੁਹਾਡੇ ਨਾਲ ਚਰਚਾ ਕਰਨਗੇ, ਪਰ ਤੁਸੀਂ ਪਰਿਵਾਰ ਦੇ ਸਾਰੇ ਬੈਠ ਕੇ ਜੇਕਰ ਡਿਜੀਟਲੀ ਆਪਣੀ ਰਜਿਸਟਰੀ ਕਰਵਾ ਦਿਓ, ਸਾਰੀਆਂ ਬਾਰੀਕੀਆਂ ਸਪੈਲਿੰਗ ਵਿੱਚ ਵੀ ਗ਼ਲਤੀ ਨਾ ਹੋਵੇ, ਕੋਈ ਵੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਵਿੱਚ ਗ਼ਲਤੀ ਨਾ ਹੋਵੇ, ਤੁਸੀਂ ਜਿੰਨੀ ਸਹੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਦਿਓਗੇ, ਦੇਸ਼ ਨੂੰ ਅੱਗੇ ਵਧਣ ਵਿੱਚ ਬਹੁਤ ਵੱਡੀ ਮਦਦ ਮਿਲੇਗੀ ਅਤੇ ਇਸ ਲਈ ਮੈਂ ਦੇਸ਼ ਦੇ ਨੌਜਵਾਨਾਂ ਨੂੰ ਕਹਿੰਦਾ ਹਾਂ ਕਿ ਤੁਸੀਂ ਆਪਣੇ ਪਰਿਵਾਰ ਦੇ ਲੋਕਾਂ ਨੂੰ ਬਿਠਾ ਕੇ ਪੂਰੇ ਫਾਰਮ ਨੂੰ ਸਮਝੋ। ਪਹਿਲਾਂ ਕਾਗਜ਼ ’ਤੇ ਫਾਰਮ ਨੂੰ ਭਰ ਦਿਓ, ਕੋਈ ਗ਼ਲਤੀ ਹੈ, ਤਾਂ ਠੀਕ ਕਰ ਲਵੋ ਅਤੇ ਫਿਰ ਟੈਕਨਾਲੋਜੀਕਲੀ ਉਸ ਨੂੰ ਡਿਜੀਟਲੀ, ਇਸ ਨੂੰ ਅੱਪਲੋਡ ਕਰ ਦਿਓ। ਤੁਸੀਂ ਦੇਖੋ, ਇੰਨਾ ਵੱਡਾ ਕੰਮ ਦੇਸ਼ ਕਰ ਲਵੇਗਾ ਅਤੇ ਦੇਸ਼ ਦਾ ਸਮਾਂ ਅਤੇ ਸ਼ਕਤੀ ਸਹੀ ਕੰਮ ਲਈ ਵਰਤੋਂ ਵਿੱਚ ਆਵੇਗੀ ਅਤੇ ਇਸ ਲਈ ਮੇਰੇ ਦੇਸ਼ ਦੇ ਨੌਜਵਾਨਾਂ ਨੂੰ ਜਨਗਣਨਾ ਦੇ ਇਸ ਕੰਮ ਵਿੱਚ ਸਰਗਰਮੀ ਨਾਲ ਜੁੜਨ ਲਈ ਮੈਂ ਤਾਕੀਦ ਕਰਦਾ ਹਾਂ।

ਮੇਰੇ ਪਿਆਰੇ ਦੇਸ਼ ਸੇਵਕੋ,

ਮੈਂ ਲਾਲ ਕਿਲ੍ਹੇ ਤੋਂ ਪੰਚ ਪ੍ਰਣ ਦੀ ਗੱਲ ਕਹੀ ਸੀ। ਇਸ ਪੰਚ ਪ੍ਰਣ ਨੇ ਦੇਸ਼ ਨੂੰ ਆਪਣੇ ਸਵੈ ਮਾਣ ਵੱਲ ਲੈ ਕੇ ਅੱਗੇ ਵਧਣ ਦਾ, ਟੀਚਿਆਂ ਨੂੰ ਪਾਰ ਕਰਨ ਦੀ ਸਮਰੱਥਾ ਦੇ ਨਾਲ ਅੱਗੇ ਵਧਣ ਦਾ ਇੱਕ ਬਹੁਤ ਵੱਡੀ ਸ਼ਕਤੀ ਦਿੱਤੀ ਹੈ। ਸਾਨੂੰ ਗ਼ੁਲਾਮੀ ਦੀ ਮਾਨਸਿਕਤਾ ਹਰ ਪਲ ਮਿਟਾਉਂਦੇ ਹੀ ਰਹਿਣਾ ਹੈ। ਜਿਸ ਭਾਰਤ ਦਾ ਸੁਪਨਾ ਨੇਤਾਜੀ ਸੁਭਾਸ਼ ਚੰਦਰ ਬੋਸ ਨੇ ਦੇਖਿਆ ਸੀ, ਬਾਬਾ ਸਾਹਿਬ ਅੰਬੇਡਕਰ ਨੇ ਦੇਖਿਆ ਸੀ, ਪੰਡਿਤ ਨਹਿਰੂ ਨੇ ਦੇਖਿਆ ਸੀ, ਸਰਦਾਰ ਪਟੇਲ, ਭਗਤ ਸਿੰਘ, ਸੁਖਦੇਵ ਰਾਜਗੁਰੂ ਨੇ ਦੇਖਿਆ ਸੀ, ਡਾਕਟਰ ਸ਼ਿਆਮਾ ਪ੍ਰਸਾਦ ਮੁਖਰਜੀ ਨੇ ਦੇਖਿਆ ਸੀ, ਭਗਵਾਨ ਬਿਰਸਾ ਮੁੰਡਾ ਨੇ ਦੇਖਿਆ ਸੀ, ਜਯੋਤੀਬਾ ਫੁਲੇ ਨੇ ਦੇਖਿਆ ਸੀ, ਉਨ੍ਹਾਂ ਸਭ ਤੋਂ ਪ੍ਰੇਰਨਾ ਲੈ ਕੇ ਅਸੀਂ ਅੱਗੇ ਵਧੀਏ। ਆਓ ਇਸ ਸੰਕਲਪ ਨੂੰ ਅਸੀਂ ਦੁਹਰਾਈਏ। ਖ਼ੁਦ ਤੋਂ ਉੱਪਰ ਰਾਸ਼ਟਰ ਦਾ ਹਿੱਤ ਹੋਵੇ। ਖ਼ੁਦ ਤੋਂ ਉੱਪਰ ਰਾਸ਼ਟਰ ਦਾ ਹਿੱਤ ਹੋਵੇ ਅਤੇ ਜ਼ੁੰਮੇਵਾਰੀ ਹੀ ਸਾਡੀ ਪਛਾਣ ਹੋਵੇ। ਮੈਂ ਸਾਰੇ ਦੇਸ਼ ਵਾਸੀਆਂ ਨੂੰ ਕਹਾਂਗਾ ਸਮਾਂ ਸਾਡਾ ਹੈ, ਮੈਂ ਸਾਰੇ ਦੇਸ਼ ਵਾਸੀਆਂ ਨੂੰ ਕਹਾਂਗਾ ਸਮਾਂ ਸਾਡਾ ਹੈ, ਮੌਕਾ ਸਾਡਾ ਹੈ, ਸੰਕਲਪ ਸਾਡਾ ਹੈ, ਆਓ ਸੁਪਨਿਆਂ ਨੂੰ ਸੰਕਲਪ ਬਣਾਈਏ, ਸੰਕਲਪ ਨੂੰ ਸਮਰੱਥਾ ਬਣਾਈਏ ਅਤੇ ਸਮਰੱਥਾ ਨੂੰ ਸਫ਼ਲਤਾ ਵਿੱਚ ਬਦਲ ਕੇ ਰਹੀਏ। ਆਓ ਹਰ ਕਦਮ ਨੂੰ ਵਿਕਾਸ ਦਾ ਕਦਮ ਬਣਾਈਏ, ਕਦਮ ਨਾਲ ਕਦਮ ਮਿਲਾਈਏ, ਮਨ ਨਾਲ ਮਨ ਮਿਲਾਈਏ, ਟੀਚੇ ਨਾਲ ਜੁੜੇ ਰਹੀਏ, ਇੱਕ ਦੀਵੇ ਨਾਲ ਹਜ਼ਾਰ ਦੀਵੇ ਜਗਣ, ਆਓ ਮਿਲ ਕੇ ਵਿਕਸਤ ਭਾਰਤ ਬਣਾਈਏ। ਇਸੇ ਇੱਕ ਭਾਵਨਾ ਦੇ ਨਾਲ ਇਸ ਮੰਗਲ ਪੁਰਬ ’ਤੇ ਤੁਹਾਨੂੰ ਸਭ ਨੂੰ ਕਈ-ਕਈ ਸ਼ੁਭਕਾਮਨਾਵਾਂ।

ਮੇਰੇ ਨਾਲ ਬੋਲੋ

ਭਾਰਤ ਮਾਤਾ ਦੀ ਜੈ!

ਭਾਰਤ ਮਾਤਾ ਦੀ ਜੈ!

ਭਾਰਤ ਮਾਤਾ ਦੀ ਜੈ!

ਵੰਦੇ ਮਾਤਰਮ!

ਵੰਦੇ ਮਾਤਰਮ!

ਵੰਦੇ ਮਾਤਰਮ!

ਬਹੁਤ-ਬਹੁਤ ਧੰਨਵਾਦ!