Development is the only solution for all problems related to poverty and unemployment: PM
India will progress only through the development of the States and for this the Centre and States have to work together: PM

देवियों और सज्‍जनों,

आज यहां अनेक शिलान्‍यास के और उद्घाटन के कार्यक्रम हुए। हम सब इस बात को अब भलीभांति समझने लगे हैं कि विकास का कोई पर्याय नहीं है। अगर हमें गरीबी से लड़ना है तो विकास करना होगा, हमें बेरोजगारी से लड़ना है, तो विकास करना होगा, हमें अशिक्षा से लड़ना है तो विकास करना होगा, यदि हमें आरोग्‍य की सुविधाएं मुहैया करानी होंगी तो विकास करना होगा। सब दुखों की अगर कोई एक दवाई है तो वो दवाई है – विकास। यह अच्‍छी बात है कि इन दिनों राज्‍यों के बीच भी विकास को लेकर एक स्‍पर्धा का माहौल बनता चला जा रहा है। राज्‍यों को लगने लगा है कि वो राज्‍य उस बात में मुझसे आगे निकल गया, अब हम कुछ कोशिश करेंगे, हम आगे निकलेंगे। आखिरकार देश को आगे बढ़ाना है तो राज्‍यों के विकास से ही आगे बढ़ने वाला है। इसलिए देश के विकास के लिए राज्‍यों का विकास.. इस मूलमंत्र को ले करके, केंद्र हो या राज्‍य हो, सबने मिलकर के काम करना, काम को आगे बढ़ाना, यह आवश्‍यक होता है।

विकास के कामों में राजनीति कितना नुकसान करती है उसका ब्‍यौरा आदरणीय मुख्‍यमंत्री जी ने विस्‍तार से दिया। अटल जी के समय में जो काम.. छ: महीने मिलते तो पूरा हो जाता, उसको पूरा होते-होते आज 2015 आ गया। मैं नीतीश जी की बात से सहमत हूं कि अटल जी की सरकार का चुनाव यदि थोड़ी देर से होता, छ: महीने मिल जाते तो उस समय अटल जी के मार्गदर्शन में.. और यही के रेल मंत्री थे नीतीश जी, यह काम पूरा हो गया होता। वो सही बोल रहे हैं। लेकिन बाद में सरकार बदल गई और रेल मंत्री यहां से ऐसे आए कि काम को रोक दिया गया और हमारे आने के बाद उसको चालू किया गया। अब, राजनीति जो करते हैं करें लेकिन नुकसान बिहार का हुआ, बिहार की जनता का हुआ। नीतीश कुमार की इस व्‍यथा के साथ मैं भी अपना स्‍वर मिलाता हूं।



लेकिन मैं इस मत का हूं कि हमें विकास की यात्रा को निरंतर गति देना चाहिए। आज नीतीश जी ने बहुत अच्‍छी बातें बताई कि भई IIT है, हमें यहां की आवश्‍यकताओं के अनुसार और यहां की क्षमता के अनुसार नई-नई faculties को लाना चाहिए। मुझे विश्‍वास है कि नए परिसर की क्षमता इतनी है, 500 बीघा ज़मीन है.. यह होगा। हम तो कोशिश यह कर रहे हैं कि दुनिया में जो top cost faculties हों उनको भी भारत में लाया जाए ताकि भारत के हमारे युवकों को देश के लिए जो आवश्‍यक है, जिस राज्‍य में IIT हैं, वहां जो आवश्‍यक है, उन विषयों को बल दिया जाए। सिर्फ दिल्‍ली में बैठ करके योजनाएं बनाने का वक्‍त पूरा हो गया। अब तो राज्य के मन में जो भाव उठते हैं, उसकी जो आवश्यकताएं होती हैं, उसके अनुसार ही दिल्ली को ढलना चाहिए, ये मेरी सोच है औऱ मैं उसी को आगे बढ़ा रहा हूं।

आज यहां एक Incubation centre का प्रारंभ हो रहा है। ये Incubation centre मैं मानता हूं, ये एक बहुत बड़ा नजराना है। IIT complex, इमारत से भी ज्यादा, ये Incubation centre बहुत बड़ा महत्वपूर्ण हमारा initiative है। इसलिए मैं इस बात से convince हूं। मैं जिस प्रदेश से आया हूं, लोगों ने परिश्रम किया होगा, परमात्मा ने कृपा की होगी, लक्ष्मी ने वहां जाना पसंद किया होगा लेकिन ये भूमि है, जहां सरस्वती वास करती है। यहां के नौजवान तेजस्‍वी हैं। और मैं मानता हूं, यहां की जो तेजस्विता है वो पूरे हिंदुस्तान को तेजस्वी बना सके, ऐसी तेजस्विता इस धरती पर है। ..और मुझे विश्वास है कि ये जो Incubation centre हम सोच रहे हैं, बनाने जा रहे हैं, वो भी एक विशेष मकसद से है।

आज हम देख रहे हैं कि Medical services, health sector ये सिर्फ डॉक्टर नाड़ी पकड़ लें, चार सवाल पूछ लें और निर्णय नहीं होता कि बीमारी क्या है, दवाई क्या दें? ढेर सारे मशीनों के अंदर से शरीर को गुजारा जाता है, भांति-भांति मशीनों को शऱीर पर लगाया जाता है उसके बाद बीमारी तय होती है, उसके बाद उपचार तय होता है। पूरे Health Sector में Technology का प्रभाव इतना बढ़ा है, इतने नये-नये संसाधनों का आविष्‍कार हो रहा है। आज भारत को गरीब व्‍यक्ति को अगर इन संसाधनों को मुहैया कराना पड़े.. विदेशों से लाना बहुत महंगा पड़ रहा है। इस पटना की धरती पर बिहार के मेरे नौजवानों की प्रतिभा को एक अवसर दिया जा रहा है कि इस incubation centre में प्रमुख रूप से Electronic and Digital mechanics के साथ किस प्रकार से हम Health Sector के नये विषयों में आविष्‍कार करें, उसका उत्‍पादन करें ताकि हमारे गरीब से गरीब के लिए हमारे अस्‍पतालों में भारत में बने हुए उत्‍तम से उत्‍तम साधन तैयार हों, जिसका लाभ गरीब को मिले, उस दिशा में हम काम करें। इसलिए यह incubation Centre भले ही पटना की धरती पर बनने वाला हो, लेकिन वह हिंदुस्‍तान के गरीबों के आरोग्‍य की आवश्‍यकताओं की पूर्ति करने का एक अहम कार्यक्रम बनेगा, यह मैं देख रहा हूं।

आखिरकार विकास करना है तो infrastructure का बहुत महत्‍व होता है। अगर infrastructure को बहुत महत्‍व नहीं दिया गया तो हम बहुत पिछड़कर रह जाएंगे। बिहार में चाहे rail हो, road हो air हो, उसको infrastructure मिलें, उसकी connectivity बढ़े, capacity बढ़ें, इस पर हम बल दे रहे हैं। हिंदुस्‍तान में शायद अधिकतम रेलमंत्री यदि किसी राज्‍य ने दिये है तो बिहार ने दिये हैं। जमाने से जैसे यह रेल डिपार्टमेंट बिहार के लिए reservation है। रेल मंत्री तो मिले हैं, रेल देने का काम मेरे दिमाग में भरा पड़ा है। मैं रेल के माध्‍यम से बिहार के दूर-सुदूर इलाकों को कैसे जोड़ पाऊं, मुख्‍य धारा में विकास की.. यहां infrastructure आता है, उसको कैसे आगे बढ़ाऊं, इस दिशा में योजनाएं लेकर के आगे चल रहा हूं।

आज एक महत्‍वपूर्ण कार्यक्रम हमने launch किया है। वैसे नीतीश जी ने धर्मेंद्र प्रधान जी की इतनी तारीफ कर दी है, उसी से मुझे समझ आता है कि इस प्रोजेक्‍ट का कितना महत्‍व है। नीतीश जी की बात सही है, आने वाले दिनों में जिस प्रकार से रोड का महत्‍व है, रेल का महत्‍व है वैसे ही गैस ग्रिड का भी महत्‍व है। पूरी economy में गैसे आधारित economy shape ले रही है और गैस पहुंचाने के लिए महंगा खर्चीला नेटवर्क खड़ा करना पड़ता है, infrastructure बनाना पड़ता है। मैं देख रहा हूं कि energy के sector में गैस की उपलब्धि उस देश की पूरी economy को बदल देती है। बिहार की economy को बदलने का एक बहुत बड़ा ताकतवर प्रयास.. गंगा तो हमारे पास है ही है, हम ऊर्जा गंगा को लेकर के आ रहे हैं आपके पास।



गैस पाइप लाइन बिछाएंगे सैंकड़ों किलोमीटर। पटना में पाइप लाइन से घर-घर गैस कैसे पहुंचे.. जैसे हमारे घर में गृहणी के kitchen में tap चालू करते ही पानी आता है, वैसे ही tap चालू करते ही गैस आ जाए, इसके लिए यह योजना है। हर परिवार को यह पहुंचे हैं .. सैंकड़ों किलोमीटर से दूर से पाइप लाइन आएगी, हां बड़ा महंगा कारोबार है लेकिन एक बार अगर वह लग गया तो सालों साल तक यहां के जीवन को भी लाभ होगा और यहां के quality of life में भी बहुत बड़ा फायदा होगा, economy में भी फायदा होगा।

जैसा नीतीश जी ने कहा कि बिजली का पैसा तक माफ कर दिया है, fertilizer कारखाने का। उस समय हमारे सुशील जी आया करते थे कि साहब हमसे 300 करोड़ क्‍यों ले रहे हो। लेकिन फिर भी बिहार ने तकलीफ झेल करके भी इस काम को किया है। वित्‍त मंत्री थे हमारे सुशील जी, कठिनाई होने के बावजूद भी किया। यह करने के बावजूद भी 10 साल बीत गए साहब, fertilizer कारखाने की किसी को याद नहीं आई। क्‍या गुनाह है बिहार का? बिहार की जेब से पैसा निकाल करके यहां की सरकार ने तकलीफ होने के बावजूद भी दिया लेकिन उसको रोक दिया गया। हमने तय किया है कि यह बिहार का यह हक है। यह fertilizer का काम चालू होगा। यहां के किसानों को सस्‍ता fertilizer मिले, यह काम हम करेंगे। बिहार की जनता का या बिहार की सरकार का कोई दोष नहीं था। बिहार की सरकार आगे आई थी। लेकिन काम रोक दिया गया। लेकिन भाईयों बहनों मैं आपको विश्‍वास दिलाता हूं कि यह काम भी पूरा होगा और नौजवानों को रोजगार भी मिलेगा और किसान को fertilizer भी पहुंचेगा, इसका पूरा प्रबंध करके हम आगे बढ़ेंगे।

भाईयों बहनों, विकास की इस अवधारणा में हमने यह भी हमेशा निरंतर प्रयास किया है, cooperative federalism का। हमारा मत है कि राज्‍यों को अगर सहायता मिले, राज्‍यों को अगर अवसर मिले तो देश के आगे बढ़ने की ताकत बहुत बढ़ जाएगी। इसलिए 14th finance commission जो कि लागू हुआ है, उसके कारण बहुत बड़ा लाभ राज्‍यों को हो रहा है। एक राज्‍य को हो रहा है, एक को नहीं हो रहा है, ऐसा नहीं है। सभी राज्‍यों को हो रहा है। इसलिए कोई बिहार को कम मिला, अधिक मिला, किसी और राज्‍य को कम मिला, अधिक मिला, ऐसा नहीं है। क्‍योंकि हमारी योजना है। आज स्थिति ऐसी है.. एक जमाना था भारत का खजाना जो था, केंद्र का और राज्‍य का उसमें से 65-70% खजाना दिल्‍ली की सरकार की तिजौरी में रहता था। 38-35% सभी राज्‍यों की मिला करके तिजौरी में रहता था। हमने ऐसा एक महत्‍वपूर्ण फैसला किया है, कठिन काम लिया है सर पर। लेकिन जैसा नीतीश जी ने कहा कि मोदी जी आप पर हमारी आशा है, उसको पूरा करने के लिए हमने एक महत्‍वपूर्ण फैसला किया है। वो फैसला है vote in finance commission जिसके कारण आने वाले दिनों में बिहार को .. अगर पांच साल के finance commission का मैं देखूं तो बिहार को 2015 से 2020 के दरम्यिान finance commission के द्वारा करीब-करीब पौने चार लाख करोड़ के करीब रुपया मिलने वाले हैं। पौने चार लाख करोड़ के करीब रुपया मिलने वाले हैं, जो पहले सिर्फ बीते हुए समय में सिर्फ डेढ़ लाख करोड़ रुपया मिला था। डेढ़ लाख का पौने चार लाख करोड़ रुपया आने वाले दिनों में.. क्‍योंकि हम मानते हैं कि यह प्रदेश आगे बढ़ना चाहिए।

मेरा यह विश्‍वास है कि पूरब में जब तक प्रगति नहीं होती है, देश कभी आगे नहीं बढ़ सकता। चाहे बिहार हो, चाहे पूर्वी उत्‍तर प्रदेश हो, चाहे ओडि़शा हो, चाहे पश्चिम बंगाल हो, चाहे झारखंड हो असम हो, नागालैंड हो, मिजोरम हो, यह सारा हिंदुस्‍तान का पूर्वी भाग यह जब विकसित नहीं होता है, यह भारत माता हमारी समृध नहीं हो सकती है। इसलिए बिहार का विकास, यह हमारा प्राइम एजेंडा है। पूर्वी भारत का विकास, हमारा मकसद है, हमारा लक्ष्‍य है। उसको आगे बढ़ाने के लिए अनेक विध हम नई योजनाएं लाने वाले हैं, उसको पूरा करेंगे।

आने वाले कुछ दिनों में हमारे कुछ साथियों से मैंने कहा है कि आप जाइये, शिलान्‍यास कीजिए, उद्घाटन कीजिए, काम को आगे बढ़ाइये। जैसे मुजफ्फरपुर स्‍वर्ण-वर्ष नेशनल हाइवे, 77 किलोमीटर को double lane करने का काम पूर्ण हो चुका है। करीब छ: सौ करोड़ रुपया की लागत लगी है। पटना-गया-डोबी रोड के four laning का काम मंजूर हो गया है। करीब 1231 करोड़ रुपये की लागत है। पटना-कोयलावर-भोजपुर और भोजपुर-बक्‍सर रोड के भी four laning का काम मंजूर हो चुका है। लागत है करीब 2012 करोड़ रुपया। भागलपुर बाइपास का काम मंजूर हो गया है। लागत है करीब 230 करोड़ रुपया। शिवहरी-सीतामढ़ी-जयनगर-निरहिया रोड का भी सुधार मंजूर कर दिया गया है। लागत है करीब 701 करोड़ रुपया। फतवा-हरनोद-बारा रोड का काम भी मंजूर कर दिया है। लागत है करीब 590 करोड़ रुपया। यह सारे नेशनल हाइवे के प्रोजेक्‍ट जो इस सरकार ने already मंजूर कर दिये हैं, इन सबकी लागत होती है करीब-करीब पांच हजार करोड़ रुपया। क्‍योंकि मैं जानता हूं कि बिहार को विकास की नई ऊंचाईयों पर ले जाने के लिए इन चीजों का भरपूर उपयोग होना चाहिए। और हम इसको करना चाहते हैं।



आपको याद होगा पिछले लोकसभा के चुनाव में मैं यहां आया था। गांधी मैदान में बम धमाकों के बीच, मैं भाषण कर रहा था। उस समय मैंने कहा था कि केंद्र में हम सत्‍ता में आएंगे तो बिहार को विशेष पैकेज देंगे। उस समय मैंने घोषणा की थी.. चुनाव के पहले मैंने घोषणा की थी, मैंने कहा था कि 50 हजार करोड़ रुपयों का पैकेज बिहार को दिया जाएगा। भाईयों बहनों मैं जब दिल्‍ली में बैठा, बारीकी से चीजों को देखा तो मैं इस नतीजे पर पहुंचा कि मेरे दिल दिमाग में बिहार की जो कल्‍पना है, बिहार को अगर मुझे उस ऊंचाई पर ले जाने में बिहार को साथ लेकर के चलना है तो 50 हजार करोड़ से बात बनने वाली नहीं है। उसे और अधिक करने की आवश्‍यकता है। मैं आज उसकी घोषणा नहीं करूंगा, मैं सही समय पर आ करके उसकी घोषणा करूंगा, लेकिन मैं इतना कहता हूं कि मैंने जो वादा किया उसको तो निभाऊंगा, उससे भी आगे मामला ले जाऊंगा, यह आपको मैं वादा करने आया हूं। ताकि बिहार को विकास की यात्रा में कोई रूकावट नहीं आनी चाहिए और विकास की यात्रा तेज गति से आगे बढ़नी चाहिए।

इसी एक अपेक्षा के साथ, मुझे विश्‍वास है कि आज जिन योजनाओं का आरंभ हुआ है, जिन कार्यक्रमों की शुरूआत हो गई है, और भी हमारे मंत्रिगण के लोग आने वाले हैं, वो इस बात को आगे बढ़ाएंगे। आज यहां पर देशभर के कृषि वैज्ञानिकों को मैंने बुलाया है, पटना की धरती पर। अब इस कार्यक्रम के बाद उनके साथ बैठने वाला हूं, क्‍योंकि मैं मानता हूं कि हिंदुस्‍तान की second green revolution की संभावना अगर कहीं है, तो हिंदुस्‍तान के पूर्वी इलाके में हैं। बिहार में है, बंगाल में है, असम में है, पूर्वी उत्‍तर प्रदेश में है। second green revolution की संभावना इस इलाके में है। इसलिए मैंने देशभर के कृषि वैज्ञानिकों को आज पटना की धरती पर बुलाया है। वो यहां बैठ करके विचार-विमर्श करने वाले हैं। आने वाले दिनों में यहां के कृषि क्षेत्र को एक नई ताकत देने की दिशा में प्रयास करने वाले हैं।

मैं फिर एक बार बिहार सरकार का, बिहार की जनता-जर्नादन का, यहां के मुख्‍यमंत्री जी का स्‍वागत सम्‍मान के लिए हृदय से बहुत-बहुत अभिनंदन करता हूं।

बहुत-बहुत धन्‍यवाद।

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'नशा मुक्त युवा के लिए विकसित भारत संकल्प अभियाना'च्या शुभारंभाप्रसंगी पंतप्रधानांनी दुरदृश्य प्रणालीद्वारे केलेल्या संबोधनाचा मूळ मजकूर
August 02, 2026
I urge every citizen, especially our youth, to join this movement: PM
Today, as the nation has set the goal of a Viksit Bharat, it is imperative that the country's youth remain fit, brimming with self-confidence and permanently steer clear of drugs: PM
We must protect every youth from falling into the trap of addiction: PM
Society’ support, yoga and meditation give strength to our inner selves against addiction and today facilities like rehabilitation centers also help quit addiction: PM
Even if a youth has mistakenly fallen into the trap of addiction, it absolutely does not mean that all doors are closed for them: PM
We must always remember that if a child in the house falls victim to addiction, we must not hide it but seek medical help to free the child from addiction: PM
We should also create a culture of open communication with children in the family, so that you can hold their hand before they get caught in such a whirlpool: PM
I appeal to our professors to discuss the perils of drug abuse with their students and spearhead a movement against addiction on campuses to achieve significant results: PM

नमस्कार!

आज आपण सर्व देशवासी एका महान आणि महत्त्वपूर्ण संकल्पासाठी एकत्र आलो आहोत. या संकल्पाला घेऊन, या कार्यक्रमाशी जोडले गेलेले सर्व पूज्य संतजन, विविध राज्यांचे प्रतिनिधित्व करणारे राज्यपाल, सर्व मुख्यमंत्री, इतर सर्व लोकप्रतिनिधी, तसेच देशभरातील 28 हजार पेक्षा जास्त ठिकाणांवरून जोडले गेलेले 1 कोटीहून अधिक युवा मित्रांनो, मी आज या शुभप्रसंगी, पवित्र संकल्पासाठी कोट्यवधी युवकांचे मनःपूर्वक अभिनंदन करतो. आज आपण सर्व ज्या अभियानाचे साक्षीदार बनत आहोत, ते अभियान केवळ एका व्यक्तीसाठी नाही, तर कुटुंबासाठी आहे, समाजासाठीही आहे आणि सर्वात महत्त्वाचे म्हणजे, हे राष्ट्रासाठी आहे.

मित्रांनो,

‘विकसित भारत संकल्प अभियान’ अंतर्गत ‘नशामुक्त युवा’ या अभियानाचे नावच त्यामागील संकल्प स्पष्ट करते. कारण आज देशाने विकसित भारताचे ध्येय निश्चित केले आहे. ते साध्य करण्यासाठी देशातील युवकाने शारीरिकदृष्ट्या निरोगी, मानसिकदृष्ट्या सक्षम, आत्मविश्वासाने परिपूर्ण आणि अमली पदार्थांसारख्या घातक व्यसनांपासून कायमस्वरूपी दूर राहणे आवश्यक आहे. हेच या अभियानाचे मुख्य उद्दिष्ट आहे. म्हणून आपण सर्वांनी हा संकल्प घ्यायचा आहे, आपल्या युवकांनी व्यसन आणि अमली पदार्थांचे दुष्परिणाम समजून घ्यावेत, त्याबाबत सर्वतोपरी जागरूक राहावे आणि त्यापासून दूर राहावे. या संकल्पाच्या पूर्ततेमध्ये ‘राष्ट्रीय नशा मुक्त युवा’ अभियानाची मोठी भूमिका आहे.

मित्रांनो,

काशीचा खासदार असण्याच्या नात्याने मला आनंद आहे की, या अभियानाचा प्रायोगिक प्रकल्प गेल्या वर्षी काशीच्या पवित्र भूमीवरून सुरू झाला होता. त्यामुळे या अभियानात वैज्ञानिक दृष्टिकोनासोबतच आध्यात्मिक ऊर्जा, संतांचे आशीर्वाद आणि महान सांस्कृतिक वारसाही आहे. शतकानुशतके व्यसनाला नाकारत आलेल्या आपल्या संस्कृतीचे समर्पणही या अभियानामागे आहे. हेच कारण आहे, देशातील 125 पेक्षा जास्त आध्यात्मिक संघटना कोट्यवधी देशवासीयांच्या हितासाठी आज आपल्यासोबत जोडल्या गेल्या आहेत. सामाजिक संघटनांनी, स्वयंसेवी संघटनांनी या दिशेने संकल्प घेतला आहे. सर्वांनी मिळून ‘काशी डिक्लेरेशन’ च्या माध्यमातून या अभियानाचा कृती आराखडा तयार केला आहे. आज आपण पाहत आहोत की, काशीच्या भूमीतून सुरू झालेला हा लोककल्याणकारी विचार आता राष्ट्रीय अभियानाचे रूप धारण करून देशव्यापी उपक्रम बनला आहे. आजपासून देशभरात ‘नशामुक्त युवा’ अभियानाचा औपचारिक शुभारंभ होत आहे.

मित्रांनो,

काही कार्ये अशी असतात की एखादी व्यक्ती ती एकट्याने करण्याचा प्रयत्न करते, तेव्हा कधीकधी ती निराश होते, थकवा जाणवतो आणि दीर्घकाळ सातत्याने प्रयत्न करण्याची प्रेरणा कमी होते. परंतु जेव्हा तीच कार्ये सामूहिक अभियानाचे रूप धारण करतात आणि कोट्यवधी लोक खांद्याला खांदा लावून त्यात सहभागी होतात, तेव्हा एकट्याने काही करू न शकणाऱ्यांनाही नवी ऊर्जा मिळते. सामूहिक प्रयत्नांची स्वतःची एक मोठी ताकद असते आणि आज हीच ताकद घेऊन हे अभियान प्रत्येक युवा मनाला प्रेरणा देणार आहे. काही वेळापूर्वी देशातील लाखो तरुणांनी नशामुक्तीची शपथ घेतली आहे. तुम्ही तुमचे जीवन व्यसनांपासून दूर ठेवण्याचा संकल्प केला आहे. तसेच, तुमच्या शाळेत, महाविद्यालयात आणि समाजात नशामुक्तीचा संदेश पोहोचवण्याचाही संकल्प केला आहे.

मित्रांनो,

आज घेतलेला हा संकल्प येणाऱ्या 100 आठवड्यांपर्यंत सातत्याने असाच पुढे नेला जाईल. प्रत्येक रविवारी, कला, संस्कृती, क्रीडा, ध्यान, अध्यात्म आणि सेवेशी संबंधित विविध उपक्रम आयोजित केले जातील. नशा मुक्तीचा संदेश नवीन लोकांपर्यंत पोहोचेल. या माध्यमातून नशामुक्तीचा संदेश अधिकाधिक लोकांपर्यंत पोहोचविला जाईल. येणारे 100 रविवार हे नशामुक्त भारताच्या दिशेने उचललेली 100 भक्कम पावले ठरतील.

मित्रांनो,

आज देशभरातील हजारो शाळा, महाविद्यालये आणि विद्यापीठातील लाखो विद्यार्थी या कार्यक्रमाशी ऑनलाइन जोडले गेले आहेत. माय भारत चे लाखो स्वयंसेवकही आज या अभियानाशी जोडले गेले आहेत. माझे राष्ट्रीय सेवा योजना (NSS) चे युवकही आज आपल्या सोबत आहेत. देशाच्या विविध भागांतून, विविध संस्थांतून आणि विविध पार्श्वभूमीतील एक कोटीहून अधिक युवक आज या अभियानासाठी एकत्र आले आहेत. माझी आपण सर्वांना विनंती आहे की, या व्यापक जनआंदोलनाचे नेतृत्व तुम्हीच करणार आहात. भारतातील युवक किती जागरूक, समंजस आणि आपल्या कर्तव्यांप्रती किती कटिबद्ध आहे, यावरील माझा विश्वास तुम्ही अधिक दृढ केला आहे. या अभियानासाठी मी आपण सर्वांना मनःपूर्वक शुभेच्छा देतो.

माझ्या युवा मित्रांनो,

तुम्ही भारताची अमृत पिढी आहात. तुम्ही पुढील 20 ते 25 वर्षांत केवळ तुमच्या स्वतःच्या जीवनाला दिशा देणार नाही, तर 2047 पर्यंत विकसित भारताचे ध्येय साकार करण्यामध्येही तुमचीच सर्वात महत्त्वाची भूमिका असेल. विकसित भारताच्या यशाचे शिखर गाठण्याचा आणि त्या यशाचे फळ उपभोगण्याचा मानही तुम्हालाच मिळणार आहे. देशाला तुमच्या ऊर्जेची, कल्पनाशक्तीची आणि प्रतिभेची गरज आहे. त्यामुळे देशाच्या भविष्यासाठी आणि तुमच्या स्वतःच्या आयुष्यासाठी व्यसनमुक्त राहणे अत्यंत आवश्यक आहे. व्यसनामुळे माणसाचे लक्ष भरकटते आणि हळूहळू तो स्वतःच्या स्वप्नांपासून दूर जातो. थोड्याच वेळापूर्वी आपल्या युवा मित्रांनी प्रभावी नाट्यप्रयोग सादर केला. त्यांनी व्यसनाची समस्या, त्यातून निर्माण होणारे संकट आणि त्यावर सामूहिक प्रयत्नांतून मात करण्याचा मार्ग कमी वेळेत अतिशय प्रभावीपणे दाखवून दिला. हा नाट्यप्रयोग लहान असला, तरी पण जसे त्यांनी सांगितले, चला आपण नाटक पाहूया! हे नाटक नव्हते, हा आम्हा लोकांसाठी एक खूप मोठा संदेश होता. आपल्याला जागे करत होता, आपल्याला संघर्ष करण्यासाठी प्रेरित करत होता.

मित्रांनो,

आज आपण पाहतो की, भारतातील युवा स्टार्टअप्सच्या क्षेत्रात आघाडीवर आहेत, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) क्षेत्रात नेतृत्व करत आहेत, क्रीडा क्षेत्रात तिरंगा अभिमानाने फडकवत आहेत आणि अवकाशापासून विज्ञानापर्यंत नवनवे विक्रम प्रस्थापित करत आहेत. परंतु एखादा युवक जर अमली पदार्थांच्या व्यसनाच्या आहारी गेला, तर केवळ एक युवक हरवत नाही, तर एक स्वप्न अकाली संपते. एक संपूर्ण कुटुंब उद्ध्वस्त होते आणि समाजालाही त्याचे परिणाम भोगावे लागतात. व्यसन केवळ शरीराचे नुकसान करत नाही; ते एका आईच्या चेहऱ्यावरील हास्य हिरावून घेते. ते एका वडिलांच्या स्वप्नांचा चुराडा करते. बहिणीच्या राखीच्या अपेक्षांना धक्का देते. लहान भावाच्या आदर्श व्यक्तिमत्त्वालाच हरवून बसते. घरातील ज्येष्ठांना दररोज आपल्या लेकराला हळूहळू स्वतःचे अस्तित्व गमावताना पाहण्याचे दुःख सहन करावे लागते. जेव्हा एखादे कुटुंब आणि समाज अशा संकटाला सामोरे जातात, तेव्हा त्याचा परिणाम राष्ट्राच्या सामर्थ्यावरही होतो. म्हणूनच भारताचे शत्रू देशही कटकारस्थान रचून आपल्या युवकांना अमली पदार्थांच्या व्यसनाच्या विळख्यात ओढण्याचा प्रयत्न करतात. अमली पदार्थांचा पुरवठा करून पैसा कमावणे आणि भारतासारख्या देशाला कमकुवत करणे, हा त्यांच्या दहशतवादी कारवायांचाच एक भाग असतो. म्हणूनच प्रत्येक युवकाला व्यसनाच्या विळख्यात अडकण्यापासून वाचवणे, ही आपली सामूहिक जबाबदारी आहे.

मित्रांनो,

व्यसनमुक्त राहून तुम्हाला तुमच्या क्षमतांचे संरक्षण करायचे आहे. हे लक्षात ठेवा, अमली पदार्थ काही काळासाठी 'हाय' (High) असल्याची भावना देतात; पण ते तुमचे करिअर आणि कौटुंबिक आयुष्य 'लो' (Low) म्हणजेच अधोगतीकडे नेतात. त्यामुळे व्यसनाला कोणत्याही स्वरूपात स्वीकारता कामा नये.

मित्रांनो,

आपल्या समाजात व्यसनाकडे नेहमीच एक वाईट प्रवृत्ती म्हणून पाहिले गेले आहे. आपल्या संतांनी आणि गुरुजनांनी आपल्याला त्यापासून दूर राहण्याचा उपदेश केला आहे. श्री गुरु ग्रंथ साहिबमध्येही म्हटले आहे—"जितु पीतै मति दूरि होइ बरलु पवै विचि आइ।आपणा पराइआ न पछाणई खसमहु धके खाइ॥" याचा अर्थ असा की, ज्या पदार्थाच्या सेवनामुळे बुद्धी आणि विवेक नष्ट होतो, माणूस आपले-परके यातील फरक विसरतो, असे व्यसन त्याला अधःपतनाच्या मार्गावर नेते.

मित्रांनो,

आपल्या संस्कृतीत व्यसनापासून दूर राहण्याचा इशाराही दिला गेला आहे आणि जर व्यसन जडलेच, तर त्यातून बाहेर पडण्याचे मार्गही सांगितले आहेत. समाजाचे सहकार्य, योग आणि ध्यान यांची शक्ती व्यसनाविरुद्ध लढण्यासाठी आपल्या अंतर्मनाला बळ देते. आज तर व्यसनमुक्तीसाठी पुनर्वसन केंद्रे यांसारख्या सुविधाही उपलब्ध आहेत. म्हणूनच, एखादा युवक चुकून व्यसनाच्या आहारी गेला, तर याचा अर्थ त्याच्यासाठी सर्व मार्ग बंद झाले असा अजिबात होत नाही. घरातील एखादे मूल व्यसनाधीन झाले असेल, तर सामाजिक प्रतिष्ठेच्या नावाखाली ही गोष्ट लपवू नका. आवश्यक असेल तेथे मदत मागा, त्याच्याशी मोकळेपणाने संवाद साधा, तज्ज्ञांचे मार्गदर्शन घ्या आणि वैद्यकीय उपचारांच्या मदतीने त्याला व्यसनमुक्त करण्याचा प्रयत्न करा. आपल्या कुटुंबात मुलांशी मोकळेपणाने संवाद साधण्याची संस्कृती विकसित झाली पाहिजे, जेणेकरून ते अशा विळख्यात अडकण्यापूर्वीच आपण त्यांचा हात धरू शकू. थोडे लक्ष दिल्यास बदल सहज लक्षात येतात—मुलाच्या वागण्यात अचानक बदल होणे, तो हरवलेला किंवा गप्पगप्प राहणे, चेहरा लपवणे, खोलीत स्वतःला बंद करून घेणे, उशिरापर्यंत घरी न येणे, वारंवार आणि अवाजवी पैसे मागणे—ही सर्व लक्षणे काहीतरी बिनसल्याची सूचना देतात. अशा संकेतांकडे दुर्लक्ष न करता वेळेवर योग्य पावले उचलणे अत्यंत आवश्यक आहे.

मित्रांनो,

मी आपल्या महाविद्यालये आणि विद्यापीठांतील प्राध्यापकांनाही एक आवाहन करू इच्छितो. अभ्यासक्रम शिकवण्याबरोबरच विद्यार्थ्यांशी अमली पदार्थांच्या दुष्परिणामांबाबत संवाद साधा. आपल्या परिसरात व्यसनमुक्तीची चळवळ उभी करा. तुमचे प्रयत्न मोठे आणि सकारात्मक परिणाम घडवू शकतात. आणि मित्रांनो, आणखी एक महत्त्वाची गोष्ट आपण लक्षात ठेवली पाहिजे. जे युवक व्यसनाशी लढून त्यातून बाहेर पडतात, ते कमकुवत नसतात. उलट, जो व्यसनावर मात करून त्यातून बाहेर पडतो, तो खरा योद्धा असतो. समाजाने अशा युवकांचा सन्मान करावा, त्यांना आपलेपणा द्यावा आणि आयुष्यात पुन्हा उभे राहण्याची दुसरी संधी द्यावी. कारण एखाद्याचा व्यसनाशी संबंधित भूतकाळ ही त्याची ओळख असू शकत नाही; त्याचे धैर्य आणि त्याने केलेला संघर्ष हीच त्याची खरी ओळख असते.

मित्रांनो,

अमली पदार्थांविरोधातील या लढ्यात सरकारही आज युवकांच्या खांद्याला खांदा लावून उभे आहे. देशभरात अमली पदार्थांच्या तस्करांविरुद्ध आणि अवैध व्यापार करणाऱ्यांविरुद्ध कठोर कारवाई केली जात आहे. पूर्वीच्या तुलनेत अनेकपटींनी अधिक अटक करण्यात आल्या आहेत आणि हजारो कोटी रुपयांचे अमली पदार्थ जप्त करण्यात आले आहेत. यावरून या समस्येविरुद्ध सरकार किती कठोर आणि कटिबद्ध आहे, हे स्पष्ट होते. मला विश्वास आहे की केंद्र सरकार, राज्य सरकारे आणि सर्व संबंधित यंत्रणा हे अभियान मिशन मोडमध्ये राबवतील. तसेच मला खात्री आहे की भारतातील युवक व्यसनमुक्त राहून केवळ आपल्या युवा शक्तीचे संरक्षण करणार नाहीत, तर विकसित भारताच्या संकल्पपूर्तीतही सक्रिय योगदान देतील. आज माझ्यासमोर उपस्थित असलेल्या अनेक पूज्य संतांना मी माझ्यासमोर पाहत आहे, त्यांना मी मनःपूर्वक प्रणाम करतो. देशभरात कार्यरत असलेल्या सर्व सामाजिक संस्था, आध्यात्मिक संस्था, पूज्य गुरुजन तुमचे देशाच्या कानाकोपऱ्यात संघटन आहे, तुमचे तरुण कार्यकर्ते देखील आहेत. माझी एक विनंती आहे. येत्या 100 आठवड्यांत प्रत्येक संस्था एक-एक आठवडा आपल्या जबाबदारीवर घेऊ शकते. त्या आठवड्यात संपूर्ण देशभर विविध उपक्रमांचे नेतृत्व करावे आणि रविवारी मोठ्या प्रमाणावर कार्यक्रम आयोजित करावेत. पुढील आठवड्यात दुसरी संस्था, त्यानंतर तिसरी संस्था अशा प्रकारे सर्वांनी पुढाकार घ्यावा. जर आपल्या देशातील सामाजिक, आध्यात्मिक आणि युवा संघटनांनी प्रत्येकी एक आठवडा जबाबदारी स्वीकारली आणि सर्वांनी मिळून प्रत्येक रविवारी मोठे जनजागृती अभियान राबवले, तर देशात किती व्यापक आणि प्रभावी जनआंदोलन उभे राहू शकते, याची आपण कल्पनाही करू शकत नाही. या पवित्र कार्यासाठी वेळ काढून आम्हाला आशीर्वाद दिल्याबद्दल मी सर्व संत, आचार्य आणि विविध संस्थांच्या पदाधिकाऱ्यांचे मनःपूर्वक आभार मानतो. या अभियानात सहभागी झालेल्या एक कोटीहून अधिक युवकांचे मी विशेष अभिनंदन करतो. तुम्ही अत्यंत महत्त्वाचे कार्य हाती घेतले आहे. माय भारतच्या स्वयंसेवकांचेही मी विशेष अभिनंदन करतो. त्यांनी जे ठरवले ते कृतीत उतरवण्याची त्यांची क्षमता आज पुन्हा सिद्ध झाली आहे. काही दिवसांपूर्वी मला माय भारतच्या स्वयंसेवकांना भेटण्याची संधी मिळाली होती. त्यांनी भारताच्या सीमावर्ती गावांमध्ये जाऊन एक-एक आठवडा मुक्काम केला. ज्यांना पूर्वी देशाचे शेवटचे गाव म्हटले जात होते, त्या गावांना आज आपण देशाचे पहिले गाव म्हणतो. तेथील त्यांचे अनुभव अत्यंत प्रेरणादायी होते. आज इतक्या मोठ्या प्रमाणावर हा कार्यक्रम यशस्वीपणे आयोजित करण्याची क्षमता माय भारतच्या स्वयंसेवकांनी दाखवून दिली आहे. हे त्यांच्या राष्ट्राप्रती असलेल्या जागरूकतेचे, समर्पणाचे आणि सेवाभावाचे प्रतीक आहे. मी त्यांचे मनःपूर्वक अभिनंदन करतो. मला पूर्ण विश्वास आहे की आपल्या सर्वांच्या सामूहिक प्रयत्नांमुळे ही चळवळ घराघरांत पोहोचेल, प्रत्येक युवकाच्या मनापर्यंत पोहोचेल आणि अमली पदार्थांच्या अवैध व्यापार करणाऱ्यांसाठी मोठा धाक निर्माण करेल. चला, आपण सर्वजण मिळून हा संकल्प पुढे नेऊया. आपणा सर्वांना मनःपूर्वक शुभेच्छा!

खूप-खूप धन्यवाद !