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Development is the only solution for all problems related to poverty and unemployment: PM
India will progress only through the development of the States and for this the Centre and States have to work together: PM

देवियों और सज्‍जनों,

आज यहां अनेक शिलान्‍यास के और उद्घाटन के कार्यक्रम हुए। हम सब इस बात को अब भलीभांति समझने लगे हैं कि विकास का कोई पर्याय नहीं है। अगर हमें गरीबी से लड़ना है तो विकास करना होगा, हमें बेरोजगारी से लड़ना है, तो विकास करना होगा, हमें अशिक्षा से लड़ना है तो विकास करना होगा, यदि हमें आरोग्‍य की सुविधाएं मुहैया करानी होंगी तो विकास करना होगा। सब दुखों की अगर कोई एक दवाई है तो वो दवाई है – विकास। यह अच्‍छी बात है कि इन दिनों राज्‍यों के बीच भी विकास को लेकर एक स्‍पर्धा का माहौल बनता चला जा रहा है। राज्‍यों को लगने लगा है कि वो राज्‍य उस बात में मुझसे आगे निकल गया, अब हम कुछ कोशिश करेंगे, हम आगे निकलेंगे। आखिरकार देश को आगे बढ़ाना है तो राज्‍यों के विकास से ही आगे बढ़ने वाला है। इसलिए देश के विकास के लिए राज्‍यों का विकास.. इस मूलमंत्र को ले करके, केंद्र हो या राज्‍य हो, सबने मिलकर के काम करना, काम को आगे बढ़ाना, यह आवश्‍यक होता है।

विकास के कामों में राजनीति कितना नुकसान करती है उसका ब्‍यौरा आदरणीय मुख्‍यमंत्री जी ने विस्‍तार से दिया। अटल जी के समय में जो काम.. छ: महीने मिलते तो पूरा हो जाता, उसको पूरा होते-होते आज 2015 आ गया। मैं नीतीश जी की बात से सहमत हूं कि अटल जी की सरकार का चुनाव यदि थोड़ी देर से होता, छ: महीने मिल जाते तो उस समय अटल जी के मार्गदर्शन में.. और यही के रेल मंत्री थे नीतीश जी, यह काम पूरा हो गया होता। वो सही बोल रहे हैं। लेकिन बाद में सरकार बदल गई और रेल मंत्री यहां से ऐसे आए कि काम को रोक दिया गया और हमारे आने के बाद उसको चालू किया गया। अब, राजनीति जो करते हैं करें लेकिन नुकसान बिहार का हुआ, बिहार की जनता का हुआ। नीतीश कुमार की इस व्‍यथा के साथ मैं भी अपना स्‍वर मिलाता हूं।



लेकिन मैं इस मत का हूं कि हमें विकास की यात्रा को निरंतर गति देना चाहिए। आज नीतीश जी ने बहुत अच्‍छी बातें बताई कि भई IIT है, हमें यहां की आवश्‍यकताओं के अनुसार और यहां की क्षमता के अनुसार नई-नई faculties को लाना चाहिए। मुझे विश्‍वास है कि नए परिसर की क्षमता इतनी है, 500 बीघा ज़मीन है.. यह होगा। हम तो कोशिश यह कर रहे हैं कि दुनिया में जो top cost faculties हों उनको भी भारत में लाया जाए ताकि भारत के हमारे युवकों को देश के लिए जो आवश्‍यक है, जिस राज्‍य में IIT हैं, वहां जो आवश्‍यक है, उन विषयों को बल दिया जाए। सिर्फ दिल्‍ली में बैठ करके योजनाएं बनाने का वक्‍त पूरा हो गया। अब तो राज्य के मन में जो भाव उठते हैं, उसकी जो आवश्यकताएं होती हैं, उसके अनुसार ही दिल्ली को ढलना चाहिए, ये मेरी सोच है औऱ मैं उसी को आगे बढ़ा रहा हूं।

आज यहां एक Incubation centre का प्रारंभ हो रहा है। ये Incubation centre मैं मानता हूं, ये एक बहुत बड़ा नजराना है। IIT complex, इमारत से भी ज्यादा, ये Incubation centre बहुत बड़ा महत्वपूर्ण हमारा initiative है। इसलिए मैं इस बात से convince हूं। मैं जिस प्रदेश से आया हूं, लोगों ने परिश्रम किया होगा, परमात्मा ने कृपा की होगी, लक्ष्मी ने वहां जाना पसंद किया होगा लेकिन ये भूमि है, जहां सरस्वती वास करती है। यहां के नौजवान तेजस्‍वी हैं। और मैं मानता हूं, यहां की जो तेजस्विता है वो पूरे हिंदुस्तान को तेजस्वी बना सके, ऐसी तेजस्विता इस धरती पर है। ..और मुझे विश्वास है कि ये जो Incubation centre हम सोच रहे हैं, बनाने जा रहे हैं, वो भी एक विशेष मकसद से है।

आज हम देख रहे हैं कि Medical services, health sector ये सिर्फ डॉक्टर नाड़ी पकड़ लें, चार सवाल पूछ लें और निर्णय नहीं होता कि बीमारी क्या है, दवाई क्या दें? ढेर सारे मशीनों के अंदर से शरीर को गुजारा जाता है, भांति-भांति मशीनों को शऱीर पर लगाया जाता है उसके बाद बीमारी तय होती है, उसके बाद उपचार तय होता है। पूरे Health Sector में Technology का प्रभाव इतना बढ़ा है, इतने नये-नये संसाधनों का आविष्‍कार हो रहा है। आज भारत को गरीब व्‍यक्ति को अगर इन संसाधनों को मुहैया कराना पड़े.. विदेशों से लाना बहुत महंगा पड़ रहा है। इस पटना की धरती पर बिहार के मेरे नौजवानों की प्रतिभा को एक अवसर दिया जा रहा है कि इस incubation centre में प्रमुख रूप से Electronic and Digital mechanics के साथ किस प्रकार से हम Health Sector के नये विषयों में आविष्‍कार करें, उसका उत्‍पादन करें ताकि हमारे गरीब से गरीब के लिए हमारे अस्‍पतालों में भारत में बने हुए उत्‍तम से उत्‍तम साधन तैयार हों, जिसका लाभ गरीब को मिले, उस दिशा में हम काम करें। इसलिए यह incubation Centre भले ही पटना की धरती पर बनने वाला हो, लेकिन वह हिंदुस्‍तान के गरीबों के आरोग्‍य की आवश्‍यकताओं की पूर्ति करने का एक अहम कार्यक्रम बनेगा, यह मैं देख रहा हूं।

आखिरकार विकास करना है तो infrastructure का बहुत महत्‍व होता है। अगर infrastructure को बहुत महत्‍व नहीं दिया गया तो हम बहुत पिछड़कर रह जाएंगे। बिहार में चाहे rail हो, road हो air हो, उसको infrastructure मिलें, उसकी connectivity बढ़े, capacity बढ़ें, इस पर हम बल दे रहे हैं। हिंदुस्‍तान में शायद अधिकतम रेलमंत्री यदि किसी राज्‍य ने दिये है तो बिहार ने दिये हैं। जमाने से जैसे यह रेल डिपार्टमेंट बिहार के लिए reservation है। रेल मंत्री तो मिले हैं, रेल देने का काम मेरे दिमाग में भरा पड़ा है। मैं रेल के माध्‍यम से बिहार के दूर-सुदूर इलाकों को कैसे जोड़ पाऊं, मुख्‍य धारा में विकास की.. यहां infrastructure आता है, उसको कैसे आगे बढ़ाऊं, इस दिशा में योजनाएं लेकर के आगे चल रहा हूं।

आज एक महत्‍वपूर्ण कार्यक्रम हमने launch किया है। वैसे नीतीश जी ने धर्मेंद्र प्रधान जी की इतनी तारीफ कर दी है, उसी से मुझे समझ आता है कि इस प्रोजेक्‍ट का कितना महत्‍व है। नीतीश जी की बात सही है, आने वाले दिनों में जिस प्रकार से रोड का महत्‍व है, रेल का महत्‍व है वैसे ही गैस ग्रिड का भी महत्‍व है। पूरी economy में गैसे आधारित economy shape ले रही है और गैस पहुंचाने के लिए महंगा खर्चीला नेटवर्क खड़ा करना पड़ता है, infrastructure बनाना पड़ता है। मैं देख रहा हूं कि energy के sector में गैस की उपलब्धि उस देश की पूरी economy को बदल देती है। बिहार की economy को बदलने का एक बहुत बड़ा ताकतवर प्रयास.. गंगा तो हमारे पास है ही है, हम ऊर्जा गंगा को लेकर के आ रहे हैं आपके पास।



गैस पाइप लाइन बिछाएंगे सैंकड़ों किलोमीटर। पटना में पाइप लाइन से घर-घर गैस कैसे पहुंचे.. जैसे हमारे घर में गृहणी के kitchen में tap चालू करते ही पानी आता है, वैसे ही tap चालू करते ही गैस आ जाए, इसके लिए यह योजना है। हर परिवार को यह पहुंचे हैं .. सैंकड़ों किलोमीटर से दूर से पाइप लाइन आएगी, हां बड़ा महंगा कारोबार है लेकिन एक बार अगर वह लग गया तो सालों साल तक यहां के जीवन को भी लाभ होगा और यहां के quality of life में भी बहुत बड़ा फायदा होगा, economy में भी फायदा होगा।

जैसा नीतीश जी ने कहा कि बिजली का पैसा तक माफ कर दिया है, fertilizer कारखाने का। उस समय हमारे सुशील जी आया करते थे कि साहब हमसे 300 करोड़ क्‍यों ले रहे हो। लेकिन फिर भी बिहार ने तकलीफ झेल करके भी इस काम को किया है। वित्‍त मंत्री थे हमारे सुशील जी, कठिनाई होने के बावजूद भी किया। यह करने के बावजूद भी 10 साल बीत गए साहब, fertilizer कारखाने की किसी को याद नहीं आई। क्‍या गुनाह है बिहार का? बिहार की जेब से पैसा निकाल करके यहां की सरकार ने तकलीफ होने के बावजूद भी दिया लेकिन उसको रोक दिया गया। हमने तय किया है कि यह बिहार का यह हक है। यह fertilizer का काम चालू होगा। यहां के किसानों को सस्‍ता fertilizer मिले, यह काम हम करेंगे। बिहार की जनता का या बिहार की सरकार का कोई दोष नहीं था। बिहार की सरकार आगे आई थी। लेकिन काम रोक दिया गया। लेकिन भाईयों बहनों मैं आपको विश्‍वास दिलाता हूं कि यह काम भी पूरा होगा और नौजवानों को रोजगार भी मिलेगा और किसान को fertilizer भी पहुंचेगा, इसका पूरा प्रबंध करके हम आगे बढ़ेंगे।

भाईयों बहनों, विकास की इस अवधारणा में हमने यह भी हमेशा निरंतर प्रयास किया है, cooperative federalism का। हमारा मत है कि राज्‍यों को अगर सहायता मिले, राज्‍यों को अगर अवसर मिले तो देश के आगे बढ़ने की ताकत बहुत बढ़ जाएगी। इसलिए 14th finance commission जो कि लागू हुआ है, उसके कारण बहुत बड़ा लाभ राज्‍यों को हो रहा है। एक राज्‍य को हो रहा है, एक को नहीं हो रहा है, ऐसा नहीं है। सभी राज्‍यों को हो रहा है। इसलिए कोई बिहार को कम मिला, अधिक मिला, किसी और राज्‍य को कम मिला, अधिक मिला, ऐसा नहीं है। क्‍योंकि हमारी योजना है। आज स्थिति ऐसी है.. एक जमाना था भारत का खजाना जो था, केंद्र का और राज्‍य का उसमें से 65-70% खजाना दिल्‍ली की सरकार की तिजौरी में रहता था। 38-35% सभी राज्‍यों की मिला करके तिजौरी में रहता था। हमने ऐसा एक महत्‍वपूर्ण फैसला किया है, कठिन काम लिया है सर पर। लेकिन जैसा नीतीश जी ने कहा कि मोदी जी आप पर हमारी आशा है, उसको पूरा करने के लिए हमने एक महत्‍वपूर्ण फैसला किया है। वो फैसला है vote in finance commission जिसके कारण आने वाले दिनों में बिहार को .. अगर पांच साल के finance commission का मैं देखूं तो बिहार को 2015 से 2020 के दरम्यिान finance commission के द्वारा करीब-करीब पौने चार लाख करोड़ के करीब रुपया मिलने वाले हैं। पौने चार लाख करोड़ के करीब रुपया मिलने वाले हैं, जो पहले सिर्फ बीते हुए समय में सिर्फ डेढ़ लाख करोड़ रुपया मिला था। डेढ़ लाख का पौने चार लाख करोड़ रुपया आने वाले दिनों में.. क्‍योंकि हम मानते हैं कि यह प्रदेश आगे बढ़ना चाहिए।

मेरा यह विश्‍वास है कि पूरब में जब तक प्रगति नहीं होती है, देश कभी आगे नहीं बढ़ सकता। चाहे बिहार हो, चाहे पूर्वी उत्‍तर प्रदेश हो, चाहे ओडि़शा हो, चाहे पश्चिम बंगाल हो, चाहे झारखंड हो असम हो, नागालैंड हो, मिजोरम हो, यह सारा हिंदुस्‍तान का पूर्वी भाग यह जब विकसित नहीं होता है, यह भारत माता हमारी समृध नहीं हो सकती है। इसलिए बिहार का विकास, यह हमारा प्राइम एजेंडा है। पूर्वी भारत का विकास, हमारा मकसद है, हमारा लक्ष्‍य है। उसको आगे बढ़ाने के लिए अनेक विध हम नई योजनाएं लाने वाले हैं, उसको पूरा करेंगे।

आने वाले कुछ दिनों में हमारे कुछ साथियों से मैंने कहा है कि आप जाइये, शिलान्‍यास कीजिए, उद्घाटन कीजिए, काम को आगे बढ़ाइये। जैसे मुजफ्फरपुर स्‍वर्ण-वर्ष नेशनल हाइवे, 77 किलोमीटर को double lane करने का काम पूर्ण हो चुका है। करीब छ: सौ करोड़ रुपया की लागत लगी है। पटना-गया-डोबी रोड के four laning का काम मंजूर हो गया है। करीब 1231 करोड़ रुपये की लागत है। पटना-कोयलावर-भोजपुर और भोजपुर-बक्‍सर रोड के भी four laning का काम मंजूर हो चुका है। लागत है करीब 2012 करोड़ रुपया। भागलपुर बाइपास का काम मंजूर हो गया है। लागत है करीब 230 करोड़ रुपया। शिवहरी-सीतामढ़ी-जयनगर-निरहिया रोड का भी सुधार मंजूर कर दिया गया है। लागत है करीब 701 करोड़ रुपया। फतवा-हरनोद-बारा रोड का काम भी मंजूर कर दिया है। लागत है करीब 590 करोड़ रुपया। यह सारे नेशनल हाइवे के प्रोजेक्‍ट जो इस सरकार ने already मंजूर कर दिये हैं, इन सबकी लागत होती है करीब-करीब पांच हजार करोड़ रुपया। क्‍योंकि मैं जानता हूं कि बिहार को विकास की नई ऊंचाईयों पर ले जाने के लिए इन चीजों का भरपूर उपयोग होना चाहिए। और हम इसको करना चाहते हैं।



आपको याद होगा पिछले लोकसभा के चुनाव में मैं यहां आया था। गांधी मैदान में बम धमाकों के बीच, मैं भाषण कर रहा था। उस समय मैंने कहा था कि केंद्र में हम सत्‍ता में आएंगे तो बिहार को विशेष पैकेज देंगे। उस समय मैंने घोषणा की थी.. चुनाव के पहले मैंने घोषणा की थी, मैंने कहा था कि 50 हजार करोड़ रुपयों का पैकेज बिहार को दिया जाएगा। भाईयों बहनों मैं जब दिल्‍ली में बैठा, बारीकी से चीजों को देखा तो मैं इस नतीजे पर पहुंचा कि मेरे दिल दिमाग में बिहार की जो कल्‍पना है, बिहार को अगर मुझे उस ऊंचाई पर ले जाने में बिहार को साथ लेकर के चलना है तो 50 हजार करोड़ से बात बनने वाली नहीं है। उसे और अधिक करने की आवश्‍यकता है। मैं आज उसकी घोषणा नहीं करूंगा, मैं सही समय पर आ करके उसकी घोषणा करूंगा, लेकिन मैं इतना कहता हूं कि मैंने जो वादा किया उसको तो निभाऊंगा, उससे भी आगे मामला ले जाऊंगा, यह आपको मैं वादा करने आया हूं। ताकि बिहार को विकास की यात्रा में कोई रूकावट नहीं आनी चाहिए और विकास की यात्रा तेज गति से आगे बढ़नी चाहिए।

इसी एक अपेक्षा के साथ, मुझे विश्‍वास है कि आज जिन योजनाओं का आरंभ हुआ है, जिन कार्यक्रमों की शुरूआत हो गई है, और भी हमारे मंत्रिगण के लोग आने वाले हैं, वो इस बात को आगे बढ़ाएंगे। आज यहां पर देशभर के कृषि वैज्ञानिकों को मैंने बुलाया है, पटना की धरती पर। अब इस कार्यक्रम के बाद उनके साथ बैठने वाला हूं, क्‍योंकि मैं मानता हूं कि हिंदुस्‍तान की second green revolution की संभावना अगर कहीं है, तो हिंदुस्‍तान के पूर्वी इलाके में हैं। बिहार में है, बंगाल में है, असम में है, पूर्वी उत्‍तर प्रदेश में है। second green revolution की संभावना इस इलाके में है। इसलिए मैंने देशभर के कृषि वैज्ञानिकों को आज पटना की धरती पर बुलाया है। वो यहां बैठ करके विचार-विमर्श करने वाले हैं। आने वाले दिनों में यहां के कृषि क्षेत्र को एक नई ताकत देने की दिशा में प्रयास करने वाले हैं।

मैं फिर एक बार बिहार सरकार का, बिहार की जनता-जर्नादन का, यहां के मुख्‍यमंत्री जी का स्‍वागत सम्‍मान के लिए हृदय से बहुत-बहुत अभिनंदन करता हूं।

बहुत-बहुत धन्‍यवाद।

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नमस्कार, केंद्रीय मंत्रिमंडळातले माझे सहकारी महेंद्रनाथ पांडे जी, आर. के. सिंह जी, इतर सर्व वरिष्ठ मंत्रिवर्ग, या कार्यक्रमामध्ये सहभागी झालेले सर्व युवा सहकारी, व्यावसायिक, इतर मान्यवर आणि बंधू आणि भगिनींनो,

कोरोनाच्या विरोधामध्ये सुरू केलेल्या महायुद्धामध्ये आज एका महत्वपूपर्ण मोहिमेचा पुढचा टप्पा प्रारंभ होत आहे. कोरोनाच्या पहिल्या लाटेच्यावेळी देशामध्ये हजारो व्यावसायिक, कौशल्य विकास मोहिमेशी जोडले गेले. अशा प्रकारे केलेल्या प्रयत्नांमुळे देशाला कोरोनाच्या विरोधात लढा देण्यासाठी खूप मोठी शक्ती मिळाली. आता कोरोनाच्या दुस-या लाटेमध्ये कोरोना विषाणूचे  वारंवार बदलणारे स्वरूप आपल्यासमोर नवनवीन आव्हाने कशा पद्धतीने निर्माण करीत आहे, हे तुम्ही लोकांनी पाहिले आहे. हा विषाणू आपल्यामध्ये अजूनही आहे आणि जोपर्यंत तो असणार आहे, तोपर्यंत त्याचे स्वरूप बदलत राहण्याची शक्यता निर्माण झाली आहे. म्हणूनच सर्व प्रकारे औषधोपचार करताना दक्षता बाळगण्याबरोबरच आगामी आव्हानांना परतवून लावण्यासाठी देशामध्ये तयारी अधिक जास्त करावी लागणार आहे. हे लक्ष्य साध्य करण्यासाठी आज देशामध्ये कोरोना आघाडीवर कार्यरत राहणा-या एक लाख योद्ध्यांना तयार करण्याचे महाअभियान सुरू करण्यात येत आहे.

मित्रांनो,

या महामारीने जगातला प्रत्येक देश, प्रत्येक संस्था, प्रत्येक समाज, प्रत्येक कुटुंब, अगदी प्रत्येक व्यक्तीच्या  सामर्थ्‍याची, त्याच्या मर्यादांची पुन्हा पुन्हा परीक्षा घेतली आहे. तसेच या महामारीने विज्ञान, सरकार, समाज, संस्था आणि व्यक्ती या रूपामध्येही आपल्या क्षमतांचा विस्तार करण्यासाठी सतर्कही केले आहे. पीपीई संच आणि चाचणीच्या पायाभूत सुविधा यांच्यापासून कोविड दक्षता केंद्र आणि औषधोपचार यांच्याशी संबंधित पायाभूत सुविधांचे जे मोठे महाजाल आज भारतामध्ये बनले आहे, अर्थात, अजूनही हे काम सुरू आहे, हा त्याचाच परिणाम आहे. आज देशाच्या दुर्गमातल्या दुर्गम भागातल्या रूग्णालयांमध्येही व्हँटिलेटर्स, ऑक्सिजन कॉन्सनट्रेटर्स पोहोचविण्यासाठीही वेगाने प्रयत्न केले जात आहेत. दीड हजारपेक्षा जास्त ऑक्सिजन प्रकल्प बनविण्याचे काम युद्धपातळीवर केले जात आहे आणि भारताच्या प्रत्येक जिल्ह्यामध्ये ऑक्सिजन पोहोचवण्यासाठी जलदरित्या प्रयत्न सुरू आहेत. या प्रयत्नांमध्येच कुशल मनुष्यबळाचा एक मोठा सेतू असणे गरजेचे आहे. या सेतूबरोबरच नवीन लोक जोडले जाणेही तितकेच गरजेचे आहे. ही आवश्यकता लक्षात घेऊन कोरोनाबरोबर युद्ध करणा-या सध्याच्या फौजेला पुरक ठरेल अशी कुमक तयार करण्यात येत आहे. यासाठी देशातल्या जवळपास एक लाख युवकांना प्रशिक्षित करण्याचे लक्ष्य निश्चित केले आहे. हा अभ्यासक्रम दोन-तीन महिन्यांमध्ये पूर्ण होईल, त्यामुळेच हे लोक ताबडतोब कामासाठी उपलब्धही होवू शकणार आहेत. आणि एक कुशल, प्रशिक्षित सहायकाच्या रूपाने वर्तमान व्यवस्थेला खूप मोठ्या प्रमाणावर मदत होऊ शकणार आहे. त्यांच्यावर असलेला कामाचे ओझे कमी होवू शकणार आहे. देशाच्या प्रत्येक राज्य आणि केंद्रशासित प्रदेशांकडून आलेल्या मागणीच्या आधारे देशातल्या अव्वल दर्जाच्या वैद्यकीय तज्ज्ञांनी हा विशेष अभ्यासक्रम तयार केला आहे. आज नवीन सहा ‘कस्टमाईज्ड‘ अभ्यासक्रम सुरू करण्यात येत आहेत. नर्सिंगशी संबंधित सामान्य कार्य असो, घरामध्ये घेण्यात येणारी दक्षता असो, अतिदक्षता विभागात करावयाची मदत असो, नमुने गोळा करणे, वैद्यकीय तंत्रज्ञ असो, नव-नवीन उपकरणे वापरण्यासाठी प्रशिक्षण असेल, अशा विविध गोष्टींसाठी युवकांना तयार करण्यात येत आहे. यामध्ये नवीन युवकांना कौशल्य प्राप्त होईल आणि जे आधीपासूनच या प्रकारच्या कामामध्ये प्रशिक्षित झाले आहेत, त्यांनाही उन्नत कौशल्य प्राप्त करण्याची संधी मिळेल. या अभियानामुळे कोविडच्या विरोधात लढत असलेल्या आपल्या आरोग्य क्षेत्रातल्या आघाडीच्या तुकडीला नवीन शक्तीही मिळू शकणार आहे आणि आपल्या युवकांना रोजगाराच्या नवीन संधी प्राप्त होवून त्यांच्यासाठी उत्पन्नाची सुविधा मिळणार आहे.

मित्रांनो,

कौशल्य, पुनः कौशल्य आणि कौशल्य वृद्धी हा मंत्र किती महत्वपूर्ण आहे, हे कोरोना काळाने पुन्हा एकदा सिद्ध केले आहे. आरोग्य क्षेत्रातले लोक कुशल तर होतेच, कोरोनाशी दोन हात करताना तेही बरेच काही नवीन शिकले. याचा अर्थ त्यांनी स्वतःला पुन्हा एकदा कुशल बनवले. त्याचबरोबर त्यांच्याकडे जे कौशल्य आधीपासूनच होते, त्याचाही त्यांनी विस्तार केला. बदलत्या परिस्थितीनुसार आपल्याकडील कौशल्य उन्नत करणे अथवा त्याचे मूल्यवर्धन करणे, म्हणजे उन्नत कौशल्य प्राप्त करणे आहे. ही आजच्या काळाची एक मागणी आहे. आणि आता ज्या वेगाने जीवनाच्या प्रत्येक क्षेत्रामध्ये तंत्रज्ञानाचा प्रवेश होत आहे, तो पाहता सातत्याने आणि वेगाने व्यवस्थेमध्ये उन्नत कौशल्य आणणे अनिवार्य झाले आहे. कुशलता, पुन्हा एकदा कौशल्य प्राप्त करणे आणि उन्नत कौशल्य यांचे महत्व समजून घेऊन देशामध्ये स्किल इंडिया मिशन सुरू केले होते. पहिल्यांदाच वेगळ्या प्रकारे कौशल्य विकास मंत्रालय बनवण्याचे काम असो, देशभरामध्ये प्रधानमंत्री कौशल्य विकास केंद्र उघडणे असो, आयटीआयच्या संख्या वाढविणे असो, यामध्ये लाखो नवीन जागा तयार करणे असो, यावर सातत्याने काम केले गेले आहे. आज कुशल भारत अभियानामुळे दरवर्षी लाखो युवकांच्या आजच्या गरजा लक्षात घेवून त्यानुसार त्यांना प्रशिक्षण देण्यासाठी खूप मोठी मदत मिळत आहे. या गोष्टीविषयी देशामध्ये खूप काही चर्चा होवू शकलेली नाही की, कौशल्य विकास अभियानाने कोरोनाच्या या काळामध्ये देशाला किती मोठी शक्ती दिली, याचाही चर्चा झाली नाही. गेल्या वर्षी ज्यावेळेपासून कोरोनाचे आव्हान आपल्या समोर उभे ठाकले, त्यावेळीही कौशल्य विकास मंत्रालयाने देशभरातल्या लाखो आरोग्य कर्मचा-यांना प्रशिक्षित करण्याच्या कामामध्ये खूप महत्वपूर्ण भूमिका बजावली आहे. ‘मागणी लक्षात घेवून कुशल वर्ग तयार करण्याच्या भावनेने या मंत्रालयाने जे काम केले. त्याप्रमाणेच आज आता अधिक वेगाने काम होत आहे.

मित्रांनो,

आपली लोकसंख्या पाहिली तर, आरोग्य क्षेत्रामध्ये डॉक्टर, परिचारिका आणि निम-वैद्यकीय क्षेत्राशी जोडल्या गेलेल्या सेवा आहेत, त्यांचा विस्तार करीत राहणे, तितकेच आवश्यक आहे. यासाठीही गेल्या काही वर्षांमध्ये एक लक्ष्य निश्चित करून काम केले गेले आहे. गेल्या सात वर्षांमध्ये नवीन एम्स, नवीन वैद्यकीय महाविद्यालये आणि नवीन परिचारिका महाविद्यालयांची निर्मिती करण्यावरही जास्त भर दिला गेला आहे. यामध्ये बहुतांश संस्थांचे काम आता सुरूही झाले आहे. त्याचप्रमाणे, वैद्यकीय शिक्षण आणि त्याच्याशी जोडल्या गेलेल्या संस्थांमध्ये सुधारणा करण्यासाठी प्रोत्साहन दिले जात आहे. आज ज्या वेगाने, ज्या गांभीर्याने आरोग्य व्यावसायिक तयार करण्यासाठी काम केले जात आहे, ते अभूतपूर्व आहे.

मित्रांनो,

आजच्या या कार्यक्रमामध्ये आपल्या आरोग्य क्षेत्रातल्या एक अतिशय मजबूत स्तंभाची चर्चा करणे, मला जरूरीचे वाटते. साधारणपणे आपल्या या सहका-यांविषयी चर्चा करण्याचा विषय राहून जातो. हे सहकारी आहेत- आपल्या आशा-एनएम आंगणवाडी आणि गावांगावांमध्ये दवाखान्यांमध्ये कार्यरत असलेले आमचे आरोग्य कर्मचारी. आपले हे सहकारी संक्रमण रोखण्यापासून ते दुनियेतले सर्वात मोठे लसीकरणाचे अभियान चालविण्यापर्यंत अतिशय महत्वपूर्ण भूमिका बजावत आहेत. मौसमी हवामानाची स्थिती, भौगोलिक परिस्थिती कितीही विपरीत असो, हे सहकारी एका-एका देशवासियाच्या सुरक्षेसाठी रात्रंदिवस झटत आहेत. गावांमध्ये लसीकरणाची मोहीम यशस्वी करण्यासाठी आपल्या या सहका-यांनी खूप मोठी भूमिका बजावली आहे. 21 जूनपासून देशामध्ये लसीकरण अभियानाचा विस्तार होत आहे. या कार्यक्रमालाही आपले हे सहकारी खूप शक्ती, ताकद देत आहेत. मी आज सार्वजनिक स्वरूपात त्यांचे खूप-खूप कौतुक करतो. आपल्या या सहका-यांनी केलेल्या कामाची प्रशंसा करतो.

मित्रांनो,

21 जूनपासून जे लसीकरण अभियान सुरू होत आहे, त्याच्याशी संबंधित मार्गदर्शक सूचना जारी करण्यात आल्या आहेत. आत्तापर्यंत 45 वर्षावरील व्यक्तींना जी सुविधा मिळत होती तीच सुविधा यापुढे 18 वर्षांवरील व्यक्तींना मिळणार आहे. केंद्र सरकार, प्रत्येक देशवासियाला मोफत लस देण्यासाठी कटिबद्ध आहे. आपल्याला कोरोना कार्यपद्धतीचेही योग्य प्रकारे, संपूर्ण पालन करायचे आहे. मास्क आणि दो गज अंतर राखणे अतिशय गरजेचे आहे. अखेरीस मी, हा विशेष अभ्यासक्रम करणा-या सर्व युवकांना खूप-खूप शुभेच्छा देतो. मला विश्वास आहे की, आपण शिकत असलेले नवीन कौशल्य देशवासियांचे जीवन वाचविण्यासाठी सातत्याने उपयोगी ठरणार आहे. आणि तुम्हालाही आपल्या जीवनात एका नवीन क्षेत्रात होत असलेला प्रवेश आनंददायी ठरेल. कारण ज्यावेळी तुम्ही याआधी रोजगारासाठी नवीन जीवनाचा प्रारंभ करीत होता, आता मात्र त्याच कामाला मानवी जीवनाचे रक्षण करण्याचे कार्य आपोआपच जोडले गेले आहे. लोकांचे जीवन वाचविण्याच्या कामामध्ये तुम्ही सहभागी होत आहात. गेल्या दीड वर्षात रात्रंदिवस काम करणा-या आपल्या डॉक्टरांनी, आपल्या परिचारिकांनी कामाचा इतका भार पेलला आहे की, आता तुमच्या कामामुळे त्यांना खूप मदत मिळणार आहे. त्यांनाही एक नवीन शक्ती मिळणार आहे. म्हणूनच हे अभ्यासक्रम तुमच्या जीवनामध्ये नवीन संधी घेवून येत आहेत. या पवित्र कार्यासाठी, मानव सेवेच्या कार्यासाठी ईश्वराने तुम्हाला भरपूर शक्ती द्यावी. आपण लवकरात लवकर या अभ्यासक्रमातले बारकावे शिकून घ्यावेत. स्वतःला एक उत्तम व्यक्ती बनविण्याचा प्रयत्न करावा. तुमच्यामध्ये निर्माण होणा-या कौशल्यामुळे प्रत्येकाचा जीव वाचविण्याचे काम होणार आहे. यासाठी माझ्यावतीने तुम्हा सर्वांना खूप-खूप शुभेच्छा आहेत.

खूप - खूप धन्यवाद!!