Share
 
Comments
Development is the only solution for all problems related to poverty and unemployment: PM
India will progress only through the development of the States and for this the Centre and States have to work together: PM

देवियों और सज्‍जनों,

आज यहां अनेक शिलान्‍यास के और उद्घाटन के कार्यक्रम हुए। हम सब इस बात को अब भलीभांति समझने लगे हैं कि विकास का कोई पर्याय नहीं है। अगर हमें गरीबी से लड़ना है तो विकास करना होगा, हमें बेरोजगारी से लड़ना है, तो विकास करना होगा, हमें अशिक्षा से लड़ना है तो विकास करना होगा, यदि हमें आरोग्‍य की सुविधाएं मुहैया करानी होंगी तो विकास करना होगा। सब दुखों की अगर कोई एक दवाई है तो वो दवाई है – विकास। यह अच्‍छी बात है कि इन दिनों राज्‍यों के बीच भी विकास को लेकर एक स्‍पर्धा का माहौल बनता चला जा रहा है। राज्‍यों को लगने लगा है कि वो राज्‍य उस बात में मुझसे आगे निकल गया, अब हम कुछ कोशिश करेंगे, हम आगे निकलेंगे। आखिरकार देश को आगे बढ़ाना है तो राज्‍यों के विकास से ही आगे बढ़ने वाला है। इसलिए देश के विकास के लिए राज्‍यों का विकास.. इस मूलमंत्र को ले करके, केंद्र हो या राज्‍य हो, सबने मिलकर के काम करना, काम को आगे बढ़ाना, यह आवश्‍यक होता है।

विकास के कामों में राजनीति कितना नुकसान करती है उसका ब्‍यौरा आदरणीय मुख्‍यमंत्री जी ने विस्‍तार से दिया। अटल जी के समय में जो काम.. छ: महीने मिलते तो पूरा हो जाता, उसको पूरा होते-होते आज 2015 आ गया। मैं नीतीश जी की बात से सहमत हूं कि अटल जी की सरकार का चुनाव यदि थोड़ी देर से होता, छ: महीने मिल जाते तो उस समय अटल जी के मार्गदर्शन में.. और यही के रेल मंत्री थे नीतीश जी, यह काम पूरा हो गया होता। वो सही बोल रहे हैं। लेकिन बाद में सरकार बदल गई और रेल मंत्री यहां से ऐसे आए कि काम को रोक दिया गया और हमारे आने के बाद उसको चालू किया गया। अब, राजनीति जो करते हैं करें लेकिन नुकसान बिहार का हुआ, बिहार की जनता का हुआ। नीतीश कुमार की इस व्‍यथा के साथ मैं भी अपना स्‍वर मिलाता हूं।



लेकिन मैं इस मत का हूं कि हमें विकास की यात्रा को निरंतर गति देना चाहिए। आज नीतीश जी ने बहुत अच्‍छी बातें बताई कि भई IIT है, हमें यहां की आवश्‍यकताओं के अनुसार और यहां की क्षमता के अनुसार नई-नई faculties को लाना चाहिए। मुझे विश्‍वास है कि नए परिसर की क्षमता इतनी है, 500 बीघा ज़मीन है.. यह होगा। हम तो कोशिश यह कर रहे हैं कि दुनिया में जो top cost faculties हों उनको भी भारत में लाया जाए ताकि भारत के हमारे युवकों को देश के लिए जो आवश्‍यक है, जिस राज्‍य में IIT हैं, वहां जो आवश्‍यक है, उन विषयों को बल दिया जाए। सिर्फ दिल्‍ली में बैठ करके योजनाएं बनाने का वक्‍त पूरा हो गया। अब तो राज्य के मन में जो भाव उठते हैं, उसकी जो आवश्यकताएं होती हैं, उसके अनुसार ही दिल्ली को ढलना चाहिए, ये मेरी सोच है औऱ मैं उसी को आगे बढ़ा रहा हूं।

आज यहां एक Incubation centre का प्रारंभ हो रहा है। ये Incubation centre मैं मानता हूं, ये एक बहुत बड़ा नजराना है। IIT complex, इमारत से भी ज्यादा, ये Incubation centre बहुत बड़ा महत्वपूर्ण हमारा initiative है। इसलिए मैं इस बात से convince हूं। मैं जिस प्रदेश से आया हूं, लोगों ने परिश्रम किया होगा, परमात्मा ने कृपा की होगी, लक्ष्मी ने वहां जाना पसंद किया होगा लेकिन ये भूमि है, जहां सरस्वती वास करती है। यहां के नौजवान तेजस्‍वी हैं। और मैं मानता हूं, यहां की जो तेजस्विता है वो पूरे हिंदुस्तान को तेजस्वी बना सके, ऐसी तेजस्विता इस धरती पर है। ..और मुझे विश्वास है कि ये जो Incubation centre हम सोच रहे हैं, बनाने जा रहे हैं, वो भी एक विशेष मकसद से है।

आज हम देख रहे हैं कि Medical services, health sector ये सिर्फ डॉक्टर नाड़ी पकड़ लें, चार सवाल पूछ लें और निर्णय नहीं होता कि बीमारी क्या है, दवाई क्या दें? ढेर सारे मशीनों के अंदर से शरीर को गुजारा जाता है, भांति-भांति मशीनों को शऱीर पर लगाया जाता है उसके बाद बीमारी तय होती है, उसके बाद उपचार तय होता है। पूरे Health Sector में Technology का प्रभाव इतना बढ़ा है, इतने नये-नये संसाधनों का आविष्‍कार हो रहा है। आज भारत को गरीब व्‍यक्ति को अगर इन संसाधनों को मुहैया कराना पड़े.. विदेशों से लाना बहुत महंगा पड़ रहा है। इस पटना की धरती पर बिहार के मेरे नौजवानों की प्रतिभा को एक अवसर दिया जा रहा है कि इस incubation centre में प्रमुख रूप से Electronic and Digital mechanics के साथ किस प्रकार से हम Health Sector के नये विषयों में आविष्‍कार करें, उसका उत्‍पादन करें ताकि हमारे गरीब से गरीब के लिए हमारे अस्‍पतालों में भारत में बने हुए उत्‍तम से उत्‍तम साधन तैयार हों, जिसका लाभ गरीब को मिले, उस दिशा में हम काम करें। इसलिए यह incubation Centre भले ही पटना की धरती पर बनने वाला हो, लेकिन वह हिंदुस्‍तान के गरीबों के आरोग्‍य की आवश्‍यकताओं की पूर्ति करने का एक अहम कार्यक्रम बनेगा, यह मैं देख रहा हूं।

आखिरकार विकास करना है तो infrastructure का बहुत महत्‍व होता है। अगर infrastructure को बहुत महत्‍व नहीं दिया गया तो हम बहुत पिछड़कर रह जाएंगे। बिहार में चाहे rail हो, road हो air हो, उसको infrastructure मिलें, उसकी connectivity बढ़े, capacity बढ़ें, इस पर हम बल दे रहे हैं। हिंदुस्‍तान में शायद अधिकतम रेलमंत्री यदि किसी राज्‍य ने दिये है तो बिहार ने दिये हैं। जमाने से जैसे यह रेल डिपार्टमेंट बिहार के लिए reservation है। रेल मंत्री तो मिले हैं, रेल देने का काम मेरे दिमाग में भरा पड़ा है। मैं रेल के माध्‍यम से बिहार के दूर-सुदूर इलाकों को कैसे जोड़ पाऊं, मुख्‍य धारा में विकास की.. यहां infrastructure आता है, उसको कैसे आगे बढ़ाऊं, इस दिशा में योजनाएं लेकर के आगे चल रहा हूं।

आज एक महत्‍वपूर्ण कार्यक्रम हमने launch किया है। वैसे नीतीश जी ने धर्मेंद्र प्रधान जी की इतनी तारीफ कर दी है, उसी से मुझे समझ आता है कि इस प्रोजेक्‍ट का कितना महत्‍व है। नीतीश जी की बात सही है, आने वाले दिनों में जिस प्रकार से रोड का महत्‍व है, रेल का महत्‍व है वैसे ही गैस ग्रिड का भी महत्‍व है। पूरी economy में गैसे आधारित economy shape ले रही है और गैस पहुंचाने के लिए महंगा खर्चीला नेटवर्क खड़ा करना पड़ता है, infrastructure बनाना पड़ता है। मैं देख रहा हूं कि energy के sector में गैस की उपलब्धि उस देश की पूरी economy को बदल देती है। बिहार की economy को बदलने का एक बहुत बड़ा ताकतवर प्रयास.. गंगा तो हमारे पास है ही है, हम ऊर्जा गंगा को लेकर के आ रहे हैं आपके पास।



गैस पाइप लाइन बिछाएंगे सैंकड़ों किलोमीटर। पटना में पाइप लाइन से घर-घर गैस कैसे पहुंचे.. जैसे हमारे घर में गृहणी के kitchen में tap चालू करते ही पानी आता है, वैसे ही tap चालू करते ही गैस आ जाए, इसके लिए यह योजना है। हर परिवार को यह पहुंचे हैं .. सैंकड़ों किलोमीटर से दूर से पाइप लाइन आएगी, हां बड़ा महंगा कारोबार है लेकिन एक बार अगर वह लग गया तो सालों साल तक यहां के जीवन को भी लाभ होगा और यहां के quality of life में भी बहुत बड़ा फायदा होगा, economy में भी फायदा होगा।

जैसा नीतीश जी ने कहा कि बिजली का पैसा तक माफ कर दिया है, fertilizer कारखाने का। उस समय हमारे सुशील जी आया करते थे कि साहब हमसे 300 करोड़ क्‍यों ले रहे हो। लेकिन फिर भी बिहार ने तकलीफ झेल करके भी इस काम को किया है। वित्‍त मंत्री थे हमारे सुशील जी, कठिनाई होने के बावजूद भी किया। यह करने के बावजूद भी 10 साल बीत गए साहब, fertilizer कारखाने की किसी को याद नहीं आई। क्‍या गुनाह है बिहार का? बिहार की जेब से पैसा निकाल करके यहां की सरकार ने तकलीफ होने के बावजूद भी दिया लेकिन उसको रोक दिया गया। हमने तय किया है कि यह बिहार का यह हक है। यह fertilizer का काम चालू होगा। यहां के किसानों को सस्‍ता fertilizer मिले, यह काम हम करेंगे। बिहार की जनता का या बिहार की सरकार का कोई दोष नहीं था। बिहार की सरकार आगे आई थी। लेकिन काम रोक दिया गया। लेकिन भाईयों बहनों मैं आपको विश्‍वास दिलाता हूं कि यह काम भी पूरा होगा और नौजवानों को रोजगार भी मिलेगा और किसान को fertilizer भी पहुंचेगा, इसका पूरा प्रबंध करके हम आगे बढ़ेंगे।

भाईयों बहनों, विकास की इस अवधारणा में हमने यह भी हमेशा निरंतर प्रयास किया है, cooperative federalism का। हमारा मत है कि राज्‍यों को अगर सहायता मिले, राज्‍यों को अगर अवसर मिले तो देश के आगे बढ़ने की ताकत बहुत बढ़ जाएगी। इसलिए 14th finance commission जो कि लागू हुआ है, उसके कारण बहुत बड़ा लाभ राज्‍यों को हो रहा है। एक राज्‍य को हो रहा है, एक को नहीं हो रहा है, ऐसा नहीं है। सभी राज्‍यों को हो रहा है। इसलिए कोई बिहार को कम मिला, अधिक मिला, किसी और राज्‍य को कम मिला, अधिक मिला, ऐसा नहीं है। क्‍योंकि हमारी योजना है। आज स्थिति ऐसी है.. एक जमाना था भारत का खजाना जो था, केंद्र का और राज्‍य का उसमें से 65-70% खजाना दिल्‍ली की सरकार की तिजौरी में रहता था। 38-35% सभी राज्‍यों की मिला करके तिजौरी में रहता था। हमने ऐसा एक महत्‍वपूर्ण फैसला किया है, कठिन काम लिया है सर पर। लेकिन जैसा नीतीश जी ने कहा कि मोदी जी आप पर हमारी आशा है, उसको पूरा करने के लिए हमने एक महत्‍वपूर्ण फैसला किया है। वो फैसला है vote in finance commission जिसके कारण आने वाले दिनों में बिहार को .. अगर पांच साल के finance commission का मैं देखूं तो बिहार को 2015 से 2020 के दरम्यिान finance commission के द्वारा करीब-करीब पौने चार लाख करोड़ के करीब रुपया मिलने वाले हैं। पौने चार लाख करोड़ के करीब रुपया मिलने वाले हैं, जो पहले सिर्फ बीते हुए समय में सिर्फ डेढ़ लाख करोड़ रुपया मिला था। डेढ़ लाख का पौने चार लाख करोड़ रुपया आने वाले दिनों में.. क्‍योंकि हम मानते हैं कि यह प्रदेश आगे बढ़ना चाहिए।

मेरा यह विश्‍वास है कि पूरब में जब तक प्रगति नहीं होती है, देश कभी आगे नहीं बढ़ सकता। चाहे बिहार हो, चाहे पूर्वी उत्‍तर प्रदेश हो, चाहे ओडि़शा हो, चाहे पश्चिम बंगाल हो, चाहे झारखंड हो असम हो, नागालैंड हो, मिजोरम हो, यह सारा हिंदुस्‍तान का पूर्वी भाग यह जब विकसित नहीं होता है, यह भारत माता हमारी समृध नहीं हो सकती है। इसलिए बिहार का विकास, यह हमारा प्राइम एजेंडा है। पूर्वी भारत का विकास, हमारा मकसद है, हमारा लक्ष्‍य है। उसको आगे बढ़ाने के लिए अनेक विध हम नई योजनाएं लाने वाले हैं, उसको पूरा करेंगे।

आने वाले कुछ दिनों में हमारे कुछ साथियों से मैंने कहा है कि आप जाइये, शिलान्‍यास कीजिए, उद्घाटन कीजिए, काम को आगे बढ़ाइये। जैसे मुजफ्फरपुर स्‍वर्ण-वर्ष नेशनल हाइवे, 77 किलोमीटर को double lane करने का काम पूर्ण हो चुका है। करीब छ: सौ करोड़ रुपया की लागत लगी है। पटना-गया-डोबी रोड के four laning का काम मंजूर हो गया है। करीब 1231 करोड़ रुपये की लागत है। पटना-कोयलावर-भोजपुर और भोजपुर-बक्‍सर रोड के भी four laning का काम मंजूर हो चुका है। लागत है करीब 2012 करोड़ रुपया। भागलपुर बाइपास का काम मंजूर हो गया है। लागत है करीब 230 करोड़ रुपया। शिवहरी-सीतामढ़ी-जयनगर-निरहिया रोड का भी सुधार मंजूर कर दिया गया है। लागत है करीब 701 करोड़ रुपया। फतवा-हरनोद-बारा रोड का काम भी मंजूर कर दिया है। लागत है करीब 590 करोड़ रुपया। यह सारे नेशनल हाइवे के प्रोजेक्‍ट जो इस सरकार ने already मंजूर कर दिये हैं, इन सबकी लागत होती है करीब-करीब पांच हजार करोड़ रुपया। क्‍योंकि मैं जानता हूं कि बिहार को विकास की नई ऊंचाईयों पर ले जाने के लिए इन चीजों का भरपूर उपयोग होना चाहिए। और हम इसको करना चाहते हैं।



आपको याद होगा पिछले लोकसभा के चुनाव में मैं यहां आया था। गांधी मैदान में बम धमाकों के बीच, मैं भाषण कर रहा था। उस समय मैंने कहा था कि केंद्र में हम सत्‍ता में आएंगे तो बिहार को विशेष पैकेज देंगे। उस समय मैंने घोषणा की थी.. चुनाव के पहले मैंने घोषणा की थी, मैंने कहा था कि 50 हजार करोड़ रुपयों का पैकेज बिहार को दिया जाएगा। भाईयों बहनों मैं जब दिल्‍ली में बैठा, बारीकी से चीजों को देखा तो मैं इस नतीजे पर पहुंचा कि मेरे दिल दिमाग में बिहार की जो कल्‍पना है, बिहार को अगर मुझे उस ऊंचाई पर ले जाने में बिहार को साथ लेकर के चलना है तो 50 हजार करोड़ से बात बनने वाली नहीं है। उसे और अधिक करने की आवश्‍यकता है। मैं आज उसकी घोषणा नहीं करूंगा, मैं सही समय पर आ करके उसकी घोषणा करूंगा, लेकिन मैं इतना कहता हूं कि मैंने जो वादा किया उसको तो निभाऊंगा, उससे भी आगे मामला ले जाऊंगा, यह आपको मैं वादा करने आया हूं। ताकि बिहार को विकास की यात्रा में कोई रूकावट नहीं आनी चाहिए और विकास की यात्रा तेज गति से आगे बढ़नी चाहिए।

इसी एक अपेक्षा के साथ, मुझे विश्‍वास है कि आज जिन योजनाओं का आरंभ हुआ है, जिन कार्यक्रमों की शुरूआत हो गई है, और भी हमारे मंत्रिगण के लोग आने वाले हैं, वो इस बात को आगे बढ़ाएंगे। आज यहां पर देशभर के कृषि वैज्ञानिकों को मैंने बुलाया है, पटना की धरती पर। अब इस कार्यक्रम के बाद उनके साथ बैठने वाला हूं, क्‍योंकि मैं मानता हूं कि हिंदुस्‍तान की second green revolution की संभावना अगर कहीं है, तो हिंदुस्‍तान के पूर्वी इलाके में हैं। बिहार में है, बंगाल में है, असम में है, पूर्वी उत्‍तर प्रदेश में है। second green revolution की संभावना इस इलाके में है। इसलिए मैंने देशभर के कृषि वैज्ञानिकों को आज पटना की धरती पर बुलाया है। वो यहां बैठ करके विचार-विमर्श करने वाले हैं। आने वाले दिनों में यहां के कृषि क्षेत्र को एक नई ताकत देने की दिशा में प्रयास करने वाले हैं।

मैं फिर एक बार बिहार सरकार का, बिहार की जनता-जर्नादन का, यहां के मुख्‍यमंत्री जी का स्‍वागत सम्‍मान के लिए हृदय से बहुत-बहुत अभिनंदन करता हूं।

बहुत-बहुत धन्‍यवाद।

Pariksha Pe Charcha with PM Modi
Explore More
It is now time to leave the 'Chalta Hai' attitude & think of 'Badal Sakta Hai': PM Modi

Popular Speeches

It is now time to leave the 'Chalta Hai' attitude & think of 'Badal Sakta Hai': PM Modi
9,200 oxygen concentrators, 5,243 O2 cylinders, 3.44L Remdesivir vials delivered to states: Govt

Media Coverage

9,200 oxygen concentrators, 5,243 O2 cylinders, 3.44L Remdesivir vials delivered to states: Govt
...

Nm on the go

Always be the first to hear from the PM. Get the App Now!
...
Share
 
Comments
At this moment, we have to give utmost importance to what doctors, experts and scientists are advising: PM
Do not believe in rumours relating to vaccine, urges PM Modi
Vaccine allowed for those over 18 years from May 1: PM Modi
Doctors, nursing staff, lab technicians, ambulance drivers are like Gods: PM Modi
Several youth have come forward in the cities and reaching out those in need: PM
Everyone has to take the vaccine and always keep in mind - 'Dawai Bhi, Kadai Bhi': PM Modi

মোৰ মৰমৰ দেশবাসীসকল, নমস্কাৰ। আজি, মই এনে এক সময়ত আপোনালোকৰ সৈতে 'মন কী বাত'ত উপস্থিত হৈছো য’ত আমাৰ সকলোৰে ধৈৰ্য, ক’ৰোনাই আমাৰ সকলোৰে দুখ-কষ্ট সহ্য কৰাৰ সীমা পৰীক্ষা কৰি আছে। বহুতে আমাক অকালতে এৰি গৈছে। ক’ৰোনাৰ প্ৰথমটো ঢৌক সফলতাৰে প্ৰতিহত কৰাৰ পিছত দেশখনত সাহসেৰে ভৰি পৰিছিল, আত্মবিশ্বাসেৰে ভৰি পৰিছিল, কিন্তু এই ধুমুহাই দেশখনক হতবাক কৰি তুলিছে।

বন্ধুসকল, শেহতীয়াকৈ এই সংকটৰ মোকাবিলা কৰিবলৈ মই বিভিন্ন খণ্ডৰ বিশেষজ্ঞসকলৰ সৈতে দীঘলীয়া আলোচনা কৰিছো। আমাৰ ফাৰ্মা-উদ্যোগৰ লোক, প্ৰতিষেধক নিৰ্মাতা বা অক্সিজেন উৎপাদনৰ সৈতে সম্পৰ্কিত লোক হওক বা চিকিৎসা ক্ষেত্ৰৰ বিষয়ে বিজ্ঞ লোক হওক, তেওঁলোকে নিজৰ গুৰুত্বপূৰ্ণ পৰামৰ্শ চৰকাৰক প্ৰদান কৰিছে। এই সময়ত, আমি এই যুঁজত জয়ী হ'বলৈ বিশেষজ্ঞ আৰু বৈজ্ঞানিক পৰামৰ্শক অগ্ৰাধিকাৰ দিব লাগিব। ভাৰত চৰকাৰে ৰাজ্য চৰকাৰৰ প্ৰচেষ্টা আগবঢ়াই নিয়াৰ বাবে সকলো শক্তিৰে কাম কৰি আছে। ৰাজ্য চৰকাৰসমূহেও তেওঁলোকৰ দায়িত্ব পালন কৰিবলৈ যথাসাধ্য ধৰণে চেষ্টা কৰি আছে।

বন্ধুসকল, দেশৰ চিকিৎসক আৰু স্বাস্থ্য কৰ্মীসকলে বৰ্তমান ক’ৰোনাৰ বিৰুদ্ধে এক ডাঙৰ যুঁজত অৱতীৰ্ণ হৈছে। যোৱা এবছৰত তেওঁলোকে ৰোগটোৰ বিষয়ে সকলো ধৰণৰ অভিজ্ঞতা লাভ কৰিছে। আমাৰ সৈতে বৰ্তমান মুম্বাইৰ প্ৰখ্যাত ড০ শশাংক যোশীজী উপস্থিত আছে।

ক’ৰোনা আৰু এই সম্পৰ্কীয় গৱেষণাৰ চিকিৎসাৰ ক্ষেত্ৰত ডাঃ শশাংকজীৰ যথেষ্ট অভিজ্ঞতা আছে, তেওঁ ইণ্ডিয়ান কলেজ অব্ ফিজিচিয়ানৰ ডীনো আছিল। ডাঃ শশাংকৰ সৈতে কথা পাতোঁ আহক:-

মোদী জী- নমস্কাৰ ডাঃ শশাংকজী

ডাঃ শশাংক- নমস্কাৰ মহোদয়

মোদী জী- মাত্ৰ কিছুদিন পূৰ্বে মই আপোনাৰ সৈতে কথা পাতিবলৈ সুযোগ পাইছিলো। মই আপোনাৰ চিন্তাৰ স্পষ্টতা ভাল পাইছিলো। মই ভাবিছিলো দেশৰ সকলো নাগৰিকে আপোনাৰ মতামতৰ বিষয়ে জনা উচিত। মই কি শুনিছো সেই বিষয়ে এটা প্ৰশ্ন হিচাপে মই আপোনাৰ সন্মুখত উপস্থাপন কৰি আছো। ডাঃ শশাংক, আপোনালোকে বৰ্তমান জীৱন ৰক্ষাৰ বাবে দিন-ৰাতিয়ে কাম কৰি আছে, প্ৰথমতে মই বিচাৰো যে আপুনি জনসাধাৰণক দ্বিতীয় ঢৌৰ বিষয়ে কওক। চিকিৎসীয়ভাৱে ই কেনেকৈ পৃথক আৰু কি কি সাৱধানতাৰ প্ৰয়োজন।

ডাঃ শশাংক- ধন্যবাদ মহোদয়, এইটো দ্বিতীয়টো ঢৌ। ই দ্ৰুতগতিত আহিছে, সেয়েহে ভাইৰাছটোৱে প্ৰথমটো ঢৌৰ তুলনাত দ্ৰুত গতিত কাম কৰি আছে, কিন্তু ভাল কথাটো হ'ল তাতকৈ ক্ষীপ্ৰতাৰে পুনৰুদ্ধাৰ হৈছে আৰু মৃত্যুৰ হাৰো যথেষ্ট কম। দুটা বা তিনিটা পাৰ্থক্য আছে, প্ৰথমতে, ই যুৱচাম আৰু শিশুসকলৰ মাজত সামান্য দৃশ্যমান হয়। ইয়াৰ লক্ষণবোৰ পূৰ্বৰ দৰে উশাহ লোৱা, শুকান কাহ, জ্বৰ, আৰু ইয়াৰ সৈতে অলপ গোন্ধ, সোৱাদ নাইকিয়া হোৱা। আৰু মানুহবোৰ অলপ ভয় খাইছে। ভয় কৰাৰ কোনো প্ৰয়োজন নাই। ৮০-৯০ শতাংশ লোকৰ কোনো লক্ষণ প্ৰদৰ্শন নহয়, আৰু মিউটেচন-মিউটেচনৰ বিষয়ে যি কোৱা হৈছে, তাতো ভয় খোৱাৰ প্ৰয়োজন নাই৷ আমি কাপোৰ সলনি কৰাৰ দৰে ভাইৰাছে ইয়াৰ ৰং সলনি কৰি আছে আৰু সেয়েহে ভয় কৰিব লগীয়া একো নাই আৰু আমি এই ঢৌবোৰো অতিক্ৰম কৰিম। ঢৌ আহে আৰু যায় আৰু এই ভাইৰাছবোৰো আহি থাকে আৰু গৈ থাকে, সেয়েহে ভিন্ন ভিন্ন লক্ষণে দেখা দিছে আৰু চিকিৎসাগতভাৱে আমি সাৱধান হোৱা উচিত। ১৪ ৰ পৰা ২১ দিনৰ ক’ভিড সময় তালিকা আছে য'ত আমি চিকিৎসকৰ পৰামৰ্শ লোৱা উচিত।

মোদী জী- ডাঃ শশাংক, আপুনি উল্লেখ কৰা বিশ্লেষণ মোৰ বাবেও আকৰ্ষণীয়, মই বহুতো চিঠি পাইছো, য'ত চিকিৎসাৰ বিষয়ে মানুহৰ বহুতো আশংকা আছে, কিছুমান ঔষধৰ যথেষ্ট চাহিদা বাঢ়িছে, সেয়েহে মই বিচাৰো যে আপুনি জনসাধাৰণক ক’ভিডৰ চিকিৎসাৰ বিষয়ে কওক।

ডাঃ শশাংক- হয়, মহাশয়, নিদানিক চিকিৎসা লোকসকলে অতি পলমকৈ আৰম্ভ কৰে আৰু স্বয়ংক্ৰিয়ভাৱে ৰোগ ভাল হ’ব, এই বুলি বিশ্বাস কৰে, ম’বাইলত কি আহে তাৰ ওপৰত বিশ্বাস ৰাখে, আৰু যদি আপুনি চৰকাৰী তথ্য অনুসৰণ কৰে, তেন্তে কষ্টৰ সন্মুখীন হ’বলগীয়া নহয়। ক’ভিডৰ চিকিৎসাৰ যি প্ৰট’ক’ল আছে তাত তিনি প্ৰকাৰৰ তীব্ৰতা আছে, পাতল বা মৃদু ক’ভিডৰ বাবে ক্লিনিক চিকিৎসা প্ৰটোকল, মজলীয়া বা মডাৰেট ক’ভিড আৰু তীব্ৰ ক’ভিড যাক গুৰুতৰ ক’ভিড বুলি কোৱা হয়। সেয়েহে পাতল ক’ভিডৰ বাবে, আমি অক্সিজেন নিৰীক্ষণ কৰো, নাড়ী নিৰীক্ষণ কৰো, জ্বৰ নিৰীক্ষণ কৰো, কেতিয়াবা পেৰাচিটামলৰ দৰে ঔষধ ব্যৱহাৰ কৰো আৰু নিজৰ চিকিৎসকৰ সৈতে যোগাযোগ কৰো৷ যি মজলীয়া ক’ভিড, মডাৰেট ক’ভিড বা শক্তিশালী ক’ভিড আছে, তেন্তে চিকিৎসকৰ সৈতে যোগাযোগ কৰাটো অতি গুৰুত্বপূৰ্ণ। সঠিক আৰু সুলভ ঔষধ উপলব্ধ আছে। ইয়াত ষ্টেৰইড যি আছে ই জীৱন ৰক্ষা কৰিব পাৰে, ইনহেলাৰ দিব পাৰো, টেবলেট আমি দিব পাৰো, আৰু একে সময়তে আমি জীৱনদায়িনী অক্সিজেন দিব পাৰো আৰু ইয়াৰ বাবে সৰু সৰু চিকিৎসা আছে কিন্তু প্ৰায়ে যি ঘটি আছে সেয়া হ'ল ৰেমডেচিভিৰ নামৰ এটা নতুন পৰীক্ষামূলক ঔষধ উপলব্ধ হৈছে। এই ঔষধৰ গুৰুত্বপূৰ্ণ কথাটো হ'ল চিকিৎসালয়ত দুই তিনি দিন কমকৈ থাকিব পাৰি আৰু নিদানিক পুনৰুদ্ধাৰত সহায়ো কৰে। এই ঔষধটোৱেও কেতিয়া কাম কৰে, যেতিয়া ইয়াক প্ৰথম ৯-১০ দিনত দিয়া হয় আৰু ইয়াক পাঁচ দিনলৈ দিয়া হয়, এই যে মানুহবোৰে ৰেমডেচিভিৰৰ পিছে পিছে দৌৰি আছে, সেয়া কৰা আৱশ্যক নহয়। এয়া হৈছে অলপ ঔষধৰ কাম, যাক অক্সিজেনৰ প্ৰয়োজন, প্ৰাণ বায়ু অক্সিজেনৰ প্ৰয়োজন, যাক চিকিৎসালয়ত ভৰ্তি কৰোৱা হয় আৰু চিকিৎসকে ক'লেহে গ্ৰহণ কৰিব লাগে। গতিকে সকলো মানুহে ইয়াক বুজি পোৱাটো অতি গুৰুত্বপূৰ্ণ। আমি প্ৰাণায়াম কৰিম, আমাৰ শৰীৰৰ হাঁওফাঁও অলপ সম্প্ৰসাৰিত কৰিম আৰু আমাৰ তেজ পাতল কৰা বেজী যাক আমি হেপাৰিন বুলি কও, এই সৰু সৰু ঔষধ দিলে ৯৮% লোক যদি আৰোগ্য হয় তেন্তে ইতিবাচক হৈ থকাটো অতি গুৰুত্বপূৰ্ণ কথা। চিকিৎসকৰ পৰামৰ্শৰ সৈতে চিকিৎসা প্ৰট’কল গ্ৰহণ কৰাটো অতি গুৰুত্বপূৰ্ণ। আৰু এই ব্যয়বহুল ঔষধৰ পিছত দৌৰাৰ কোনো প্ৰয়োজন নাই, মহোদয়, আমাৰ ওচৰত ভাল চিকিৎসা আছে, প্ৰাণবায়ু অক্সিজেন আছে, ভেণ্টিলেটৰৰ সুবিধাও আছে, সকলো আছে, মহোদয়, আৰু, কেতিয়াবা যদি এই ঔষধ উপলব্ধ হয় তেন্তে ইয়াক উপযুক্ত লোকসকলক দিব লাগে৷ যথেষ্ট বিভ্ৰান্তিৰ সৃষ্টি হৈছে আৰু সেয়েহে, মই এই স্পষ্টীকৰণ দিব বিচাৰো যে মহোদয়, আমাৰ ওচৰত বিশ্বৰ সৰ্বশ্ৰেষ্ঠ চিকিৎসা উপলব্ধ আছে। আপুনি দেখিব যে ভাৰতত পুনৰুদ্ধাৰৰ হাৰ সৰ্বশ্ৰেষ্ঠ৷ যদি আপুনি ইউৰোপৰ সৈতে তুলনা কৰে, আমেৰিকাই একেই চিকিৎসা প্ৰট’কলৰ দ্বাৰা ৰোগীসকলক চিকিৎসা কৰি আছে৷

মোদী জী- ডাঃ শশাংক আপোনাক বহুত ধন্যবাদ। ডাঃ শশাংকই আমাক দিয়া তথ্য অতি গুৰুত্বপূৰ্ণ আৰু এয়া আমাৰ সকলোৰে বাবে উপযোগী হ'ব।

বন্ধুসকল, মই আপোনালোক সকলোকে অনুৰোধ জনাইছো, যদি আপোনাক কোনো তথ্যৰ প্ৰয়োজন হয়, আন কোনো আশংকা আচে তেন্তে সঠিক উৎসৰ পৰা তথ্য প্ৰাপ্ত কৰক। আপোনাৰ পাৰিবাৰিক চিকিৎসক, ওচৰৰ চিকিৎসকৰ সৈতে ফোনযোগে যোগাযোগ কৰক আৰু তেওঁলোকৰ পৰামৰ্শ লওক। মই দেখিছো যে আমাৰ বহুতো চিকিৎসকে নিজেই এই দায়িত্ব গ্ৰহণ কৰি আছে। বহুতো চিকিৎসকে সামাজিক মাধ্যমৰ জৰিয়তে লোকসকলক অৱগত কৰি আছে। ফোনত, হোৱাটছএপৰ জৰিয়তেও পৰামৰ্শ দি আছে। বহুতো চিকিৎসালয়ৰ ৱেবছাইট আছে য'ত তথ্যও উপলব্ধ আৰু আপুনি তাত চিকিৎসকৰ পৰামৰ্শও ল'ব পাৰে। এইটো অতি প্ৰশংসনীয় কাম হৈছে।

মোৰ সৈতে শ্ৰীনগৰৰ ডাঃ নাভিদ নাজিৰ শ্বাহে যোগদান কৰিছে। ডাঃ নাভিদ শ্ৰীনগৰৰ এখন চৰকাৰী চিকিৎসা মহাবিদ্যালয়ৰ অধ্যাপক। নাভিদজীয়ে তেওঁৰ তত্বাৱধানত বহুতো ক’ৰোনা ৰোগীক চিকিৎসা কৰিছে আৰু ডাঃ নাভিদে এই পবিত্ৰ ৰমজান মাহতো তেওঁৰ কাম কৰি আছে আৰু তেওঁ আমাৰ সৈতে কথা পাতিবলৈ আহৰি উলিয়াইছে। তেওঁৰ সৈতে কথা পাতো আহক।

মোদী জী- নাভিদজী নমস্কাৰ৷

ডাঃ নাভিদ- নমস্কাৰ মহোদয়৷

মোদী জী- ড০ নাভিদ 'মন কী বাত'ৰ আমাৰ শ্ৰোতাসকলে এই কঠিন সময়ত আতংক ব্যৱস্থাপনাৰ প্ৰশ্ন উত্থাপন কৰিছে। আপুনি আপোনাৰ অভিজ্ঞতাৰ পৰা তেওঁলোকক কেনেদৰে সঁহাৰি দিব?

ডাঃ নাভিদ- চাওক, যেতিয়া ক’ৰোনা আৰম্ভ হৈছিল, কাশ্মীৰত কোভিড চিকিৎসালয় হিচাপে নিৰ্ধাৰিত প্ৰথম চিকিৎসালয়খন আমাৰ মহানগৰ চিকিৎসালয় আছিল। সেই সময়ত এক ভয়ৰ পৰিৱেশ আছিল৷ মানুহে ভাবিছিল যে ক’ৰোনা সংক্ৰমণ হ’লে ইয়াক মৃত্যুদণ্ড বুলি গণ্য কৰা হ'ব আৰু এনে পৰিস্থিতিত, ডাঃ চাহিবান অথবা পেৰা-মেডিকেল কৰ্মচাৰীসকল যিসকলে আমাৰ চিকিৎসালয়ত কাম কৰিছিল, তেওঁলোকৰ মাজত ভয় আছিল যে আমি এই ৰোগীসকলৰ কিদৰে সন্মুখীন হ'ম। আমাৰ সংক্ৰমণ নহয়তো? কিন্তু আমি এইটোও দেখিছিলো যে যদি আমি সম্পূৰ্ণৰূপে পৰিধান কৰা সুৰক্ষামূলক গীয়েৰৰ পদক্ষেপসমূহ কাৰ্যকৰী কৰো তেতিয়া আমি সুৰক্ষিত থাকিব পাৰো আৰু আমাৰ বাকী কৰ্মচাৰীসকলেও সুৰক্ষিত থাকিব পাৰে আৰু লগতে আমি দেখিছিলো যে কিছুমান ৰোগী এনে আছিল যি লক্ষণহীন আছিল, যাৰ ৰোগৰ কোনো লক্ষণ নাছিল। আমি দেখিছোযে ঔষধ গ্ৰহণ নকৰা ৯০-৯৫% ৰো অধিক ৰোগীও আৰোগ্য হয়, সেয়েহে বিগত সময়ৰ পৰা ক’ৰোনাৰ ভয় যথেষ্ট হ্ৰাস পাইছে। আজি আমি এইবাৰৰ ক’ৰোনাৰ দ্বিতীয় ঢৌতো আতংকিত হ'ব নালাগে৷ যদি আমি এছ.অ’.পিৰ সুৰক্ষামূলক ব্যৱস্থা ৰূপায়ণ কৰো, যেনে মাস্ক পৰিধাৰ কৰা, হেণ্ড চেনিটাইজাৰ ব্যৱহাৰ কৰা, শাৰীৰিক দূৰত্ব বিধি বা সামাজিক সমাৱেশ পৰিহাৰ কৰা, তেতিয়া আমি আমাৰ দৈনন্দিন কামবোৰো কৰিব পাৰিম আৰু এই ৰোগৰ পৰাও সুৰক্ষা লাভ কৰিব পাৰিম।

মোদী জী- ডাঃ নাভিদ, প্ৰতিষেধকক লৈ লোকসকলৰ বহুতো প্ৰশ্ন আছে, যেনে কিমান সুৰক্ষা প্ৰতিষেধকে প্ৰদান কৰিব পাৰে, প্ৰতিষেধক গ্ৰহণৰ পিছত তেওঁলোক কিমান আত্মবিশ্বাসী হ'ব পাৰে? আপুনি মোক ইয়াৰ বিষয়ে জনালে শ্ৰোতাসকল বহু উপকৃত হ'ব।

ডাঃ নাভিদ- যিহেতু ক’ৰোনাৰ সংক্ৰমণ পোহৰলৈ আহিছে, আমাৰ ওচৰত ক’ভিড ১৯-ৰ বাবে কোনো কাৰ্যকৰী চিকিৎসা উপলব্ধ নাই, আমি এই ৰোগৰ সৈতে মাত্ৰ দুটা বস্তুৰে যুঁজিব পাৰো, এটা সুৰক্ষামূলক পদক্ষেপ আৰু আমি ইতিমধ্যে কৈ আহিছো যে যদি এটা কাৰ্যকৰী প্ৰতিষেধক আমাৰ ওচৰলৈ আহে, তেন্তে ই আমাক এই ৰোগৰ পৰা আৰোগ্য কৰিব পাৰে৷ এই সময়ত আমাৰ দেশত দুটা ভেকছিন উপলব্ধ আছে। কভাক্সিন আৰু কভিশ্বিল্ড যাক ইয়াত নিৰ্মাণ কৰা হৈছে। আৰু কোম্পানীবোৰেও নিজৰ যিবোৰ পৰীক্ষণ কৰিছে, তাতো দেখা গৈছে যে কাৰ্যকাৰিতা ৬০% তকৈ অধিক আৰু যদি আমি জম্মু আৰু কাশ্মীৰৰ কথা কও, এতিয়ালৈকে ১৫ ৰ পৰা ১৬ লাখ লোকে আমাৰ কেন্দ্ৰীয়শাসিত অঞ্চলত এই প্ৰতিষেধক লাভ কৰিছে। হয়, ছ'চিয়েল মিডিয়াত ইয়াক লৈ বহুতো ভুল ধাৰণা উপলব্ধ হৈছে যে এইবোৰৰ পাৰ্শ্বক্ৰিয়া আছে৷ এতিয়ালৈকে আমাৰ সকলো প্ৰতিষেধকত কোনো পাৰ্শ্বক্ৰিয়া পোৱা হোৱা নাই। কেৱল সেইটোৱেই সকলো প্ৰতিষেধকৰ সৈতে হয়, কাৰোবাৰ জ্বৰ, গোটেই শৰীৰত বিষ বা বেজী দিয়া স্থানত বিষ হয়, আমি প্ৰতিটো ৰোগীৰ পাৰ্শ্বক্ৰিয়াত দেখিছোঁ আমি কোনো স্থুল প্ৰভাৱ দেখা নাই, আমি কোনো বিৰূপ প্ৰভাৱ দেখা নাই। আৰু অৱশ্যে, লোকসকলৰ মাজত আন এটা আশংকাও আছিল যে টীকাকৰণৰ পিছত কিছুমান লোকে অৰ্থাৎ টীকাকৰণৰ পিছতো পজিটিভ হৈছে, কোম্পানীবোৰৰ পৰা নিৰ্দেশনা প্ৰকাশ কৰা হৈছে যে যদি কাৰোবাক টীকাকৰণ কৰা হয় তাৰ পিছতো পজিটিভ হ’ব পাৰে। তাৰ পিছত সংক্ৰমণ হ'ব পাৰে, ই পজিটিভ হ'ব পাৰে। কিন্তু ৰোগৰ যি তীব্ৰতা সেয়া ৰোগীসকলৰ দেহত দেখা পোৱা নাযায়৷ সেয়ে ইয়াৰ ক্ষেত্ৰত থকা ভুল ধাৰণাসমূহ আঁতৰাব লাগে আৰু ১ মে’ৰ পৰা সমগ্ৰ দেশতে ১৮ বছৰৰ ঊৰ্ধৰ লোকসকলৰ টীকাকৰণৰ কাম আৰম্ভ হ’ব, তেওঁলোককো আপীল কৰিছো, আহক আপোনালোক আৰু প্ৰতিষেধক গ্ৰহণ কৰক৷ ইয়াৰ দ্বাৰা নিজেও সুৰক্ষিত হৈ থকাৰ লগতে আমাৰ সমাজখনো ক’ভিড-১৯ৰ আক্ৰমণৰ পৰা সুৰক্ষিত হৈ পৰিব৷

মোদী জী- ডাঃ নাভিদ, আপোনাক বহু ধন্যবাদ৷ ৰমজানৰ পবিত্ৰ মাহ উপলক্ষেও আপোনালৈ অলেখ শুভকামনা থাকিল৷

ডাঃ নাভিদ- অশেষ ধন্যবাদ৷

মোদী জী- বন্ধুসকল, যিহেতু ক’ৰোনাৰ এই সংকটৰ সময়ছোৱাত প্ৰতিষেধকৰ গুৰুত্ব সকলোৱে জানে, মই আপোনালোকক প্ৰতিষেধকৰ বিষয়ে কোনো উৰাবাতৰিত ভোল নাযাবলৈ অনুৰোধ জনাইছো। আপোনালোকে এইটোও জানিব যে ভাৰত চৰকাৰে সকলো ৰাজ্য চৰকাৰলৈ বিনামূলীয়া প্ৰতিষেধক প্ৰেৰণ কৰিছে যিবোৰ ৪৫ বছৰৰ অধিক বয়সৰ লোকসকলে গ্ৰহণ কৰিব পাৰে। এতিয়া, ১ মে'ৰ পৰা, দেশৰ ১৮ বছৰৰ অধিক বয়সৰ সকলোৰে বাবে প্ৰতিষেধক উপলব্ধ হ'ব। এতিয়া কৰ্পোৰেট খণ্ড, দেশৰ কোম্পানীবোৰেও তেওঁলোকৰ কৰ্মচাৰীসকলক প্ৰতিষেধক দিয়াৰ অভিযানত অংশগ্ৰহণ কৰিবলৈ সক্ষম হ'ব। মই এইটোও ক'ব লাগিব যে ভাৰত চৰকাৰে চলাই থকা বিনামূলীয়া প্ৰতিষেধক প্ৰদান কাৰ্যসূচী অব্যাহত থাকিব। মই ৰাজ্যসমূহক ভাৰত চৰকাৰৰ এই বিনামূলীয়া প্ৰতিষেধক অভিযানৰ লাভালাভ যিমান পাৰি সিমান লোকক তেওঁলোকৰ ৰাজ্যত প্ৰদান কৰিবলৈও অনুৰোধ জনাইছো।

 

বন্ধুসকল, আমি সকলোৱে জানো যে আমাৰ বাবে মানসিকভাৱে নিজৰ, আমাৰ পৰিয়ালৰ যত্ন লোৱাটো কিমান কঠিন, কিন্তু আমাৰ চিকিৎসালয়ৰ নাৰ্চিং কৰ্মচাৰীসকলে একেটা কাম একেলগে বহুতো ৰোগীৰ বাবে কৰিব লাগিব। সেৱাৰ এই অনুভূতি আমাৰ সমাজৰ এক ডাঙৰ শক্তি। কেৱল নাৰ্চেহে নাৰ্চিং কৰ্মচাৰীৰ দ্বাৰা কৰা সেৱা আৰু কঠোৰ পৰিশ্ৰমৰ বিষয়ে ভালদৰে ক'ব পাৰে। সেইবাবে মই ৰায়পুৰৰ ড০ বি আৰ আম্বেদকাৰৰ মেডিকেল কলেজ চিকিৎসালয়ত সেৱা আগবঢ়োৱা ভগ্নী ভাৱনা ধ্ৰুৱজীক 'মন কী বাত'লৈ আমন্ত্ৰণ জনাইছো, তেওঁ বহুতো ক’ৰোনা ৰোগীৰ যত্ন লৈ আছে। আহক! তেওঁৰ সৈতে কথা পাতো –

মোদী জী- নমস্কাৰ ভাৱনা জী!

ভাৱনা- আদৰণীয় প্ৰধানমন্ত্ৰী মহোদয়, নমস্কাৰ!

মোদী জী- ভাৱনা জী…

ভাৱনা- হয় মহোদয়৷

মোদী জী- ‘মন কী বাত’ শুনি থকা শ্ৰোতাসকলক আপুনি জনাওক যে আপোনাৰ পৰিয়ালত আপোনাৰ ইমান দায়িত্ব, ইমান কাম, তথাপিও আপুনি ক’ৰোনা ৰোগীসকলৰ সৈতে কাম কৰি আছে৷ ক’ৰোনাৰ ৰোগীসকলৰ সৈতে আপোনাৰ যি অভিজ্ঞতা হৈছে সেয়া দেশবাসীয়ে নিশ্চয় শুনিব বিচাৰিব আৰু ছিষ্টাৰ, নাৰ্চসকল ৰোগীৰ নিকটতম হয় আৰু দীৰ্ঘসময়লৈ সম্পৰ্ক থাকে৷ প্ৰতিটো কথা বিশদভাৱে তেওঁ বুজাই দিব পাৰে৷ কওক৷

ভাৱনা- হয়, মহোদয়৷ ক’ভিডৰ সৈতে মোৰ মুঠ অভিজ্ঞতা হৈছে ২ মাহ। আমি ১৪ দিনৰ কৰ্তব্য কৰোঁ আৰু ১৪ দিনৰ পিছত আমাক বিশ্ৰাম দিয়া হয়। তাৰ পিছত, ২ মাহৰ পিছত, আমাৰ এই ক’ভিড কৰ্তব্যবোৰৰ পুনৰাবৃত্তি কৰা হয় মহোদয়। যেতিয়া মই প্ৰথম ক’ভিড কৰ্তব্যত যোগদান কৰিছিলো, মই প্ৰথমে মোৰ পৰিয়ালৰ সদস্যসকলক এই ক’ভিড কৰ্তব্যৰ বিষয়ে জনাইছিলো। এয়া মে’ মাহৰ কথা আছিল আৰু মই কোৱাৰ লগে লগে সকলোৱে ভয় খাইছিল, মোক ভয় খাইছিল, কৈছিল যে ভালদৰে কাম কৰিবা, এক আৱেগিক পৰিস্থিতিৰ সৃষ্টি হৈছিল মহোদয়। ইয়াৰ মাজতে, যেতিয়া মোৰ ছোৱালীয়ে মোক সুধিছিল, মা আপুনি ক’ভিড ডিউটিলৈ যাব, সেই সময়ত মোৰ বাবে এয়া যথেষ্ট আৱেগিক মুহূৰ্ত আছিল, কিন্তু, যেতিয়া মই ক’ভিড ৰোগীৰ ওচৰলৈ গৈছিলো, মই ঘৰত এটা দায়িত্ব এৰি আহিছিলো আৰু যেতিয়া মই ক’ভিড ৰোগীসকলৰ কাষলৈ গ’লো, তেওঁলোক বহু বেছি উদ্বিগ্ন হৈ আছিল, সকলো ৰোগী ক’ভিডৰ নামত ইমান ভয় খাইছিল যে তেওঁলোকে বুজি পোৱা নাছিল যে তেওঁলোকৰ কি হৈছে, পৰৱৰ্তী সময়ত তেওঁলোকে কি কৰিব। আমি তেওঁলোকৰ ভয় দূৰ কৰিবলৈ এটা ভাল স্বাস্থ্যকৰ পৰিৱেশ দিছিলো মহোদয়। যেতিয়া আমাক এই ক’ভিড কৰ্তব্য কৰিবলৈ কোৱা হৈছিল, প্ৰথমতে, আমাক পিপিই কিট পিন্ধিবলৈ কোৱা হৈছিল, যিটো অতি কঠিন৷ পিপিই কিট পিন্ধি কৰ্তব্য সমাপন কৰাটো অতিশয় কঠিন। মহাশয়, এইটো আমাৰ বাবে বৰ কঠিন আছিল, মই ৱাৰ্ড, আইচিইউ, আইচ’লেচন সকলোতে ২ মাহৰ কৰ্তব্যত সকলো ঠাইতে ১৪-১৪ দিন কৰ্তব্য পালন কৰিছিলো৷

মোদী- অৰ্থাৎ, মুঠ আপুনি এবছৰ ধৰি এনেদৰে কাম কৰি আহিছে৷

ভাৱনা- হয় মহোদয়, মই তালৈ যোৱাৰ আগতে মই নাজানিছিলো মোৰ সহকৰ্মীসকল কোন। আমি দলৰ সদস্যৰ দৰে কাম কৰিছিলো মহোদয়৷ আমি তেওঁলোকৰ যিকোনো সমস্যা ভাগ বতৰা কৰো, আমি ধৈৰ্য্যশীল হৈ তেওঁলোকৰ দুঃশ্চিন্তা আঁতৰ কৰো মহোদয়, বহুতো লোক আছিল যিয়ে ক’ভিডৰ নামটো শুনিয়েই ভয় খাইছিল। সেই সকলোবোৰ লক্ষণ তেওঁলোকৰ দেখা দিছিল, যেতিয়া আমি সেইবোৰ ইতিহাস তৈয়াৰ কৰিছিলো, কিন্তু ভয়ৰ বাবে, তেওঁলোকে পৰীক্ষা কৰোৱাব পৰা নাছিল, সেয়েহে আমি তেওঁলোকক বুজাই দিছিলো, আৰু মহোদয়, যেতিয়া তীব্ৰতা বাঢ়ি আহিছিল, হাঁওফাঁও সংক্ৰমিত হোৱাত আইচিইউৰ প্ৰয়োজন হৈছিল৷ লগতে তেওঁলোকৰ সম্পূৰ্ণ পৰিয়াল আহিছিল। গতিকে আমি এনেকুৱা ১-২টা ঘটনা দেখিছিলো মহোদয় আৰু এনে নহয়, আমি প্ৰতিটো বয়সৰ গোটৰ সৈতে কাম কৰিছিলো মহোদয়। তাত সৰু ল'ৰা-ছোৱালী, মহিলা, পুৰুষ, বৃদ্ধ, সকলো ধৰণৰ ৰোগী আছিল। যেতিয়া আমি তেওঁলোকৰ সকলোৰে সৈতে কথা পাতিছিলো, সকলোৱে কৈছিল যে আমি ভয়ত আহিব পৰা নাই, সকলোৰে পৰা সেইটোৱেই আমি উত্তৰ পাইছিলো। গতিকে আমি তেওঁলোকক বুজালো যে ভয় একো নহয়। আপোনালোকে আমাক সমৰ্থন কৰক, আমি আপোনালোকক সমৰ্থন কৰিম। আপুনি প্ৰট’কল অনুসৰণ কৰক, কেৱল আমি তেওঁলোকৰ সৈতে এইখিনি কৰিব পাৰিলো মহোদয়।

মোদী জী- ভাৱনা জী, মই আপোনাৰ সৈতে কথা পাতি খুব ভাল পালো, আপুনি খুব ভাল তথ্য দিলে। আপুনিআপোনাৰ নিজৰ অভিজ্ঞতাৰ পৰা কৈছে, নিশ্চিতভাৱে দেশবাসীৰ বাবে ই ইতিবাচকত বাৰ্তা হ'ব। ভাৱনা জী, আপোনাক বহুত বহুত ধন্যবাদ!

ভাৱনা- ধন্যবাদ মহোদয়, জয় হিন্দ মহোদয়৷

মোদী জী- জয় হিন্দ!

ভাৱনা জী আৰু নাৰ্চিং ষ্টাফৰ দৰে হাজাৰ-লক্ষাধিক ভাই-ভনীয়ে তেওঁলোকৰ কৰ্তব্য ভালদৰে কৰি আছে। এইটো আমাৰ সকলোৰে বাবে এক ডাঙৰ অনুপ্ৰেৰণা। আপোনালোকে আপোনালোকৰ স্বাস্থ্যৰ প্ৰতিও যথেষ্ট মনোযোগ দিয়া উচিত। নিজৰ পৰিয়ালৰো যত্ন লওক।

বন্ধুসকল, আমাৰ সৈতে বৰ্তমান বেংগালুৰুৰ চিষ্টাৰ সুৰেখা জী জড়িত হৈছে। সুৰেখা জী কে.চি সাধাৰণ চিকিৎসালয়ৰ জ্যেষ্ঠ নাৰ্চিং বিষয়া। আহক! তেওঁলোকৰ অভিজ্ঞতাৰ বিষয়ে জানো –

মোদী জী- নমস্কাৰ সুৰেখা জী!

সুৰেখা- আমাৰ দেশ প্ৰধানমন্ত্ৰীৰ সৈতে কথা পাতিবলৈ পাই মই গৌৰৱ আৰু সন্মানিত অনুভৱ কৰিছো মহোদয়৷

মোদী জী- সুৰেখা জী, আপুনি সকলো সহকৰ্মী নাৰ্ছ আৰু চিকিৎসালয়ৰ কৰ্মচাৰীৰ সৈতে উৎকৃষ্ট কাম কৰি আছে। ভাৰতবাসী আপোনালোক সকলোৰে প্ৰতি কৃতজ্ঞ। ক’ভিড-১৯ৰ বিৰুদ্ধে এই যুঁজত নাগৰিকসকলৰ বাবে আপোনাৰ বাৰ্তা কি।

সুৰেখা- হয় মহোদয়। এজন দায়িত্বশীল নাগৰিক হিচাপে মই সঁচাকৈয়ে ক'ব বিচাৰো যে অনুগ্ৰহ কৰি আপোনাৰ চুবুৰীয়াসকলৰ প্ৰতি নম্ৰ হওক আৰু আগতীয়া পৰীক্ষা আৰু সঠিক ট্ৰেকিঙে আমাক মৃত্যুৰ হাৰ হ্ৰাস কৰাত সহায় কৰে আৰু তাৰোপৰি অনুগ্ৰহ কৰি যদি আপুনি কোনো লক্ষণ দেখা পাইছে তেন্তে নিজকে আচুতীয়াকৈ ৰাখক আৰু ওচৰৰ চিকিৎসকৰ পৰামৰ্শ লওক তথা যিমান সম্ভৱ সিমান সোনকালে চিকিৎসা কৰাওক। সেয়েহে, সমাজত এই ৰোগটোৰ বিষয়ে সজাগতা আনিব লাগিব আৰু ইতিবাচক হ'ব লাগিব, আতংকিত নহ'ব আৰু চাপত নাথাকিব। ই ৰোগীৰ অৱস্থা বেয়া কৰে। আমি আমাৰ চৰকাৰৰ ওচৰত এটা প্ৰতিষেধক উপলব্ধ হোৱাৰ বাবে গৌৰৱান্বিত আৰু মই ইতিমধ্যে মোৰ নিজৰ অভিজ্ঞতাৰ সৈকে প্ৰতিষেধক গ্ৰহণ কৰিছো, মই ভাৰতৰ নাগৰিকসকলক ক'ব বিচাৰিছো যে কোনো প্ৰতিষেধকেই লগে লগে ১০০% সুৰক্ষা প্ৰদান নকৰে। ৰোগ প্ৰতিৰোধ ক্ষমতা গঢ়িবলৈ সময় লাগে। অনুগ্ৰহ কৰি টীকাকৰণ কৰিবলৈ ভয় নকৰিব। অনুগ্ৰহ কৰি নিজকে টীকাকৰণ কৰক; এক নিম্নতম পাৰ্শ্বক্ৰিয়াই দেখা দিব পাৰে আৰু মই এই বাৰ্তা প্ৰদান কৰিব বিচাৰো যে, ঘৰত থাকক, সুস্থ হৈ থাকক, অসুস্থ লোকসকলৰ সংস্পৰ্শ পৰিহাৰ কৰক আৰু অপ্ৰয়োজনীয়ভাৱে নাক, চকু আৰু মুখ স্পৰ্শ কৰা পৰিহাৰ কৰক। অনুগ্ৰহ কৰি শাৰীৰিকভাৱে দূৰত্ব ৰখা, মাস্ক ভালদৰে পিন্ধা, নিয়মীয়াকৈ হাত ধোৱা আৰু আপুনি ঘৰতে অনুশীলন কৰিব পৰা ঘৰুৱা প্ৰতিকাৰৰ অভ্যাস কৰক। অনুগ্ৰহ কৰি আয়ুৰ্বেদিক কাঢ়া খাওক, বাষ্প উশাহত লওক আৰু প্ৰতিদিনে মুখ কুলিকুলি কৰক আৰু উশাহ-নিশাহৰ ব্যায়ামো কৰিব পাৰে। আৰু এটা কথা, অনুগ্ৰহ কৰি ফ্ৰণ্টলাইন কৰ্মী আৰু পেছাদাৰীসকলৰ প্ৰতি সহানুভূতি প্ৰদৰ্শন কৰক। আমাক আপোনাৰ সমৰ্থন আৰু সহযোগিতাৰ প্ৰয়োজন। আমি একেলগে যুঁজিম। আমি মহামাৰীৰ মাজেৰে পাৰ হ'ম। এইটোৱেই মোৰ জনসাধাৰণলৈ বাৰ্তা মহোদয়।

মোদী জী- ধন্যবাদ সুৰেখা জী৷

সুৰেখা- ধন্যবাদ মহোদয়৷

সুৰেখাজী, সঁচাকৈয়ে, আপুনি অতি কঠিন সময়ত নেতৃত্ব বহন কৰি আছে। আপুনি নিজৰো যত্ন লওক! আপোনাৰ পৰিয়াললৈও মোৰ শুভেচ্ছা থাকিল। মই দেশৰ জনসাধাৰণক সুৰেখাজীয়ে তেওঁৰ অভিজ্ঞতাৰ পৰা জনোৱা অনুভূতিবোৰ প্ৰকাশ কৰিবলৈও অনুৰোধ কৰিম। ক’ৰোনাৰ বিৰুদ্ধে যুঁজিবলৈ ইতিবাচক মনোভাৱ অতি গুৰুত্বপূৰ্ণ আৰু দেশবাসীয়ে ইয়াক বজাই ৰাখিব লাগিব।

বন্ধুবৰ্গ, চিকিৎসক আৰু নাৰ্চিং কৰ্মচাৰীৰ লগতে লেব-টেকনিচিয়ান আৰু এম্বুলেন্স চালকৰ দৰে ফ্ৰণ্টলাইন কৰ্মীসকলে এই মুহূৰ্তত ঈশ্বৰৰ দৰে কাম কৰি আছে। যেতিয়া এম্বুলেন্স এজন ৰোগীৰ ওচৰলৈ যায়, তেওঁলোকে এম্বুলেন্স চালকক দেৱদূতৰ দৰে অনুভৱ কৰে। দেশবাসীয়ে এই সকলোবোৰৰ সেৱা, তেওঁলোকৰ অভিজ্ঞতাৰ বিষয়ে জানিব লাগিব। মোৰ লগত এনে এজন ভদ্ৰলোক আছে, শ্ৰীযুত প্ৰেম বাৰ্মাজী, যি এজন এম্বুলেন্স চালক, তেওঁৰ নাম অনুসৰি। প্ৰেম বাৰ্মাজীয়ে তেওঁৰ কাম, তেওঁৰ কৰ্তব্য, সকলো প্ৰেম আৰু নিষ্ঠাৰে কৰে। আহক! তেওঁৰ সৈতে কথা পাতো –

মোদী জী- নমস্কাৰ প্ৰেম জী৷

প্ৰেম জী- নমস্কাৰ মহোদয়৷

মোদী জী- ভাই! প্ৰেম৷

প্ৰেম জী- হয় মহোদয়৷

মোদী জী- আপুনি নিজৰ কামৰ বিষয়ে৷

প্ৰেম জী- হয় মহোদয়৷

মোদী জী- সামান্য বিশদভাৱে কওক৷ আপোনাৰ অভিজ্ঞতাৰ বিষয়ে কওক৷

প্ৰেম জী- মই কেটছ এম্বুলেন্সত চালকৰ পদত আছো আৰু কণ্ট্ৰ’লত আমালৈ এটা টেবত কল আহে। আমি 102 ৰ পৰা কলৰ ৰোগীৰ কাষলৈ যাও। আমি দুবছৰ ধৰি এই কাম অব্যাহত ৰাখিছো। নিজৰ কিট পিন্ধি, নিজৰ হাতমোজা পিন্ধি, মাস্ক পিন্ধি, ৰোগীয়ে য'ত তেওঁক লৈ যাবলৈ কয়, যিকোনো চিকিৎসালয়তে, আমি যিমান সম্ভৱ সিমান সোনকালে তেওঁলোকক গন্তব্যস্থানলৈ প্ৰেৰণ কৰো।

মোদী জী- আপুনিটো প্ৰতিষেধকৰ দুয়োটা পালিয়েই গ্ৰহণ কৰিছে৷

প্ৰেম জী- নিশ্চয় মহোদয়৷

মোদী জী- আনসকল লোকে যি প্ৰতিষেধক গ্ৰহণ কৰিছে৷ তেওঁলোকলৈ আপোনাৰ বাৰ্তা কি?

প্ৰেম জী- নিশ্চিতভাৱে মহোদয়। সকলোৱেই এই প্ৰতিষেধকৰ পালি গ্ৰহণ কৰা উচিত আৰু ই পৰিয়ালৰ বাবেও ভাল কথা। এতিয়া মোৰ মায়ে মোক এই চাকৰিটো এৰি দিবলৈ কৈছে। মই ক’লো, মা, যদি মই মোৰ চাকৰি এৰি দিও, কোনে ৰোগীসকলক গন্তব্যস্থানলৈ প্ৰেৰণ কৰিব? কাৰণ এই ক’ৰোনা কালত সকলোৱে পলাই গৈছে। সকলোৱে তেওঁলোকৰ চাকৰি এৰি আছে। মায়েও মোক কৈছে এই চাকৰি এৰি দিব লাগে। মই কৈছিলো যে নহয় মা, মই মোৰ চাকৰি এৰি নিদিও।

মোদী জী- প্ৰেম জী, মাক দুখী নকৰিব, তেওঁক বুজাব৷

প্ৰেম জী- হয়৷

মোদী জী- কিন্তু আপুনি যি এই মাৰ কথা কথা নহয়৷

প্ৰেম জী- হয়৷

মোদী জী- ই হৃদয়স্পৰ্শী আছিল৷

প্ৰেম জী- হয়৷

মোদী জী- আপোনাৰ মাতৃকো৷

প্ৰেম জী- হয়৷

মোদী জী-মোৰ প্ৰণাম জনাব৷

প্ৰেম জী- নিশ্চয়৷

মোদী জী- হয়৷

প্ৰেম জী- হয়৷

মোদী জী- আৰু প্ৰেম জী, আপোনাৰ জৰিয়তে

প্ৰেম জী- হয়

মোদী জী- এম্বুলেঞ্চ চলোৱা সকলো চালকে

প্ৰেম জী- হয়

মোদী জী- তেওঁলোকে কিমান বিপদশংকুল কাম কৰি আছে৷

প্ৰেম জী- হয়

মোদী জী- আৰু প্ৰত্যেকৰে মাতৃয়ে কি ভাবে?

প্ৰেম জী- নিশ্চয় মহোদয়

মোদী জী- এইখিনি কথা যেতিয়া শ্ৰোতা ৰাইজে শুনিব

প্ৰেম জী- হয়

মোদী জী- মই ভাবো যে প্ৰত্যেকৰে হৃদয় চুই যাব

প্ৰেম জী- হয়

মোদী জী- প্ৰেম জী, অশেষ ধন্যবাদ৷ আপুনি এক প্ৰকাৰে প্ৰেমৰ গংগা বোৱাই আছে৷

প্ৰেম জী- ধন্যবাদ মহোদয়৷

মোদী জী- ধন্যবাদ ভাই৷

প্ৰেম জী- ধন্যবাদ৷

বন্ধুসকল, প্ৰেম বাৰ্মাজী আৰু তেওঁৰ দৰে হাজাৰ হাজাৰ লোকে আজি তেওঁলোকৰ জীৱন বিপদত পেলাই জনসাধাৰণৰ সেৱা কৰি আছে। ক’ৰোনাৰ বিৰুদ্ধে এই যুঁজত ৰক্ষা পোৱা সকলোৰে জীৱনত এম্বুলেন্স চালকসকলেও যথেষ্ট অৱদান আগবঢ়াইছে। প্ৰেমজী, মই আপোনাক আৰু সমগ্ৰ দেশৰ আপোনাৰ সকলো সহকৰ্মীক বহুতো সাধুবাদ দিছো। আপুনি সময়মতে গৈ থাককক, জীৱন ৰক্ষা কৰি থাকক।

মোৰ মৰমৰ দেশবাসীসকল, এইটো সঁচা যে বহুতো লোক ক’ৰোনাৰ দ্বাৰা সংক্ৰমিত হৈছে, কিন্তু, ক’ৰোনাৰ পৰা আৰোগ্য হোৱা লোকৰ সংখ্যাও সমানে বেছি। গুৰুগ্ৰামৰ প্ৰীতি চতুৰ্বেদীজীয়েও শেহতীয়াকৈ ক’ৰোনাক পৰাজিত কৰিছে। প্ৰীতিজীয়ে আমাৰ সৈতে 'মন কী বাত'ত যোগদান কৰিছে। তেওঁৰ অভিজ্ঞতা আমাৰ সকলোৰে বাবে যথেষ্ট উপযোগী হ'ব।

মোদী জী- প্ৰীতি জী নমস্কাৰ

প্ৰীতি জী- নমস্কাৰ মহোদয়৷ আপোনাৰ ভাল নে?

মোদী জী- মোৰ ভাল ৷ সবাতোকৈ প্ৰথমে আপুনি ক’ভিড-১৯ৰ পৰা

প্ৰীতি জী- হয়

মোদী জী- সফলতাৰে যুঁজি অহাৰ বাবে

প্ৰীতি জী- হয়

মোদী জী- আপোনাক প্ৰশংসা কৰিছো

প্ৰীতি জী- অশেষ ধন্যবাদ মহোদয়

মোদী জী- আপোনাৰ স্বাস্থ্যৰ শীঘ্ৰ আৰোগ্য হওক তাৰে কামনা কৰিলো ৷

প্ৰীতি জী- ধন্যবাদ মহোদয় ৷

মোদী জী- প্ৰীতি জী

প্ৰীতি জী- হয়

মোদী জী- এই ঢৌত কেৱল আপোনাৰেই নম্বৰ লাগিছিল নে পৰিয়ালৰ আন সদস্যৰো হৈছিল ৷

প্ৰীতি জী- নহয় নহয় মহোদয়, মোৰ অকলে হৈছিল৷

মোদী জী- ভগৱানৰ কৃপা৷ আচ্ছা মই বিচাৰিম যে

প্ৰীতি জী- হয়

মোদী জী- আপুনি আপোনাৰ এই পীড়া অৱস্থাৰ কিছু অভিজ্ঞতা যদি বৰ্ণনা কৰে তেন্তে শ্ৰোতাসকলে নিজকে এনে সময়ত কিদৰে চম্ভালিব লাগে সেই বিষয়ে সঠিক মাৰ্গদৰ্শন লাভ কৰিব ৷

প্ৰীতি জী- হয় মহোদয়, নিশ্চয়৷ মই আৰম্ভণিৰ পৰ্যায়ত অত্যাধিক আলস্য ভাৱ অনুভৱ কৰিছিলো, আৰু তাৰ পিছত মোৰ ডিঙিত অলপ বিষ যেন হৈছিল। ইয়াৰ পিছত মই লক্ষণবোৰ অলপ অনুভৱ কৰা যেন পালো আৰু সেয়েহে মই পৰীক্ষা কৰোৱালো। পিছদিনা প্ৰতিবেদন দিয়াৰ লগে লগে, মই পজিটিভ ঘোষিত হোৱা লগে লগে, মই নিজকে আচুতীয়াকৈ ৰাখিলো ৷ এটা কোঠাত নিজতে পৃথক কৰি চিকিৎসকৰ পৰামৰ্শ গ্ৰহণ কৰিলো ৷ তেওঁলোকৰ ঔষধ গ্ৰহণ কৰা আৰম্ভ কৰিলো।

মোদী জী- আপোনাৰ এই তৎকালীন পদক্ষেপৰ ফলত পৰিয়ালৰ অন্য লোক বাচি গ’ল৷

প্ৰীতি জী- হয় মহোদয়। বাকী সকলোৰে পৰীক্ষা কৰোৱা হ’ল। সকলোৰে নিগেটিভ আছিল। মই পজিটিভ আছিলো। তাৰ পূৰ্বেই মই এটা কোঠাৰ ভিতৰত নিজকে পৃথক কৰি ৰাখিছিলো। মই প্ৰয়োজনীয় সকলো সামগ্ৰী ৰাখিছিলো আৰু নিজেই কোঠাটো বন্ধ কৰি দিছিলো। আৰু তাৰ লগতে মই ঔষধটো পুনৰ চিকিৎসকৰ পৰামৰ্শৰ সৈতে আৰম্ভ কৰিছিলো। মহাশয়, ঔষধৰ লগতে মই কেৱল যোগ, আয়ুৰ্বেদিক কৰাই নহয় বৰঞ্চ মই কাঢ়া গ্ৰহণ কৰাও আৰম্ভ কৰিছিলো ৷ ৰোগ প্ৰতিৰোধ ক্ষমতা বৃদ্ধিৰ বাবে, মই দিনটোত যেতিয়াই মোৰ খাদ্য খাও, তেতিয়াই মই যি প্ৰ'টিন সমৃদ্ধ আহাৰ, স্বাস্থ্যকৰ খাদ্য গ্ৰহণ কৰিছিলো। মই অত্যাধিক জুলীয়া খাদ্য খাইছিলো, ষ্টীম লৈছিলো, গাৰ্গল কৰিছিলো আৰু গৰম পানীৰ সেক লৈছিলো। মই মোৰ দৈনিক জীৱনৰ এই সকলোবোৰ বস্তুৱেই গ্ৰহণ কৰিছো। আৰু মহোদয়, মই আটাইতকৈ ডাঙৰ কথাটো ক'ব বিচাৰো যে এই কেইটা দিনত আতংকিত হোৱাৰ কোনো প্ৰয়োজন নাই। মই মানসিকভাৱে শক্তিশালী হ'ব লাগিব যাৰ বাবে মোক যোগাভ্যাসে, উশাহ-নিশাহৰ ব্যায়ামে যথেষ্ট সহায় কৰিছিল ৷

মোদী জী- হয়৷ আচ্ছা, প্ৰীতি, এতিয়া আপোনাৰ সকলো কাৰ্য সম্পন্ন হ’ল৷ আপুনি সংকটমুক্ত হ’ল৷

প্ৰীতি জী- হয়৷

মোদী জী- এতিয়া আপোনাৰ পৰীক্ষাৰ ফলাফলো নিগেটিভ আহিছে৷

প্ৰীতি জী- হয়৷

মোদী জী- তেন্তে এতিয়া আপোনাৰ স্বাস্থ্যৰ বাবে কি কৰে?

প্ৰীতি জী- মহোদয়, প্ৰথম কথাটো হ’ল মই যোগাভ্যাস বন্ধ কৰা নাই ৷

মোদী জী- হয়

প্ৰীতি জী- ৰোগ প্ৰতিৰোধক ক্ষমতা বৃদ্ধিৰ বাবে মই কাঢ়াও খাই আছো আৰু স্বাস্থ্যকৰ খাদ্যও গ্ৰহণ কৰি আছো৷

মোদী জী- হয়

প্ৰীতি জী- নিজকে পূৰ্বে মই বহু আওকাণ কৰিছিলো, এতিয়া ধ্যান দিবলৈ আৰম্ভ কৰিছো ৷

মোদী জী- ধন্যবাদ প্ৰীতি জী৷

প্ৰীতি জী- অশেষ ধন্যবাদ মহোদয় ৷

মোদী জী- আপুনি যি তথ্য প্ৰদান কৰিলে, মই ভাবো বহু লোক উপকৃত হ’ব ইয়াৰ জৰিয়তে৷ আপুনি সুস্বাস্থ্যবান হৈ থাকক, আপোনাৰ পৰিয়ালৰ লোক স্বাস্থ্যৱান হৈ থাকক, আপোনালৈ মোৰ তৰফৰ পৰা অশেষ শুভকামনা থাকিল ৷

মোৰ মৰমৰ দেশবাসীসকল, যিদৰে আজি আমাৰ চিকিৎসা ক্ষেত্ৰৰ লোকসকলে, ফ্ৰণ্টলাইন কৰ্মীসকলে অহৰ্নিশে সেৱাত জড়িত হৈ আছে ৷ একেদৰে সমাজৰ আন লোকসকল এই মুহূৰ্তত এনেয়ে থকা নাই। দেশবাসী পুনৰ একত্ৰিত হৈছে আৰু ক’ৰোনাৰ বিৰুদ্ধে যুঁজ দিছে। আজিকালি মই দেখিবলৈ পাইছো যে কোনোবাই কোৱেৰাণ্টাইনত বাস কৰা পৰিয়ালক পাচলি, গাখীৰ, ফল, ঔষধ আদি প্ৰদান কৰি আছে। কোনোবাই ৰোগীসকললৈ বিনামূলীয়া এম্বুলেন্স সেৱা আগবঢ়াইছে। আনকি দেশৰ বিভিন্ন প্ৰান্তত এই প্ৰত্যাহ্বানপূৰ্ণ সময়তো, স্বয়ং-সহায়ক সংগঠনবোৰ আগবাঢ়ি আহিছে আৰু আনক সহায় কৰিবলৈ যি পাৰি সেয়া কৰিবলৈ চেষ্টা কৰি আছে। এইবাৰ, গাওঁবোৰত নতুন সজাগতাও দেখা গৈছে। ক’ভিড নিয়মবোৰ কঠোৰভাৱে অনুসৰণ কৰি, মানুহে তেওঁলোকৰ গাওঁখনক ক’ৰোনাৰ পৰা সুৰক্ষিত কৰি আছে, বাহিৰৰ পৰা অহা লোকসকলৰ বাবেও সঠিক ব্যৱস্থা কৰা হৈছে। স্থানীয় বাসিন্দাসকলৰ সৈতে কাম কৰি থকা চহৰসমূহতো বহু যুৱক-যুৱতীয়ে তেওঁলোকৰ এলেকাত ক’ৰোনাৰ ঘটনা বৃদ্ধি নোহোৱাটো নিশ্চিত কৰিবলৈ আগবাঢ়ি আহিছে, অৰ্থাৎ এফালে দেশখনে চিকিৎসালয়, ভেণ্টিলেটৰ আৰু ঔষধৰ বাবে দিন-ৰাতিয়ে কাম কৰি আছে, আনফালে দেশবাসীয়েও ক’ৰোনাৰ মোকাবিলা কৰি আছে। এই অনুভৱে আমাক ইমান শক্তি প্ৰদান কৰে, ই আমাক ইমান বিশ্বাস দিয়ে। যিকোনো প্ৰচেষ্টাই হওক, ই সমাজৰ বাবে এক মহান সেৱা। ইয়েই সমাজৰ শক্তি বৃদ্ধি কৰে।

মোৰ মৰমৰ দেশবাসীসকল, আজি আমি ক’ৰোনা মহামাৰীৰ ওপৰত 'মন কী বাত'ৰ সমগ্ৰ আলোচনা কৰিছো, কিয়নো আজি আমাৰ আটাইতকৈ ডাঙৰ অগ্ৰাধিকাৰ হৈছে এই ৰোগক পৰাস্ত কৰা। আজি ভগৱান মহাবীৰৰ জয়ন্তীও। মই এই উপলক্ষে সকলো দেশবাসীক শুভকামনা জনাইছো। ভগৱান মহাবীৰৰ বাৰ্তাই আমাক তপস্যা আৰু আত্মসংযমৰ অনুপ্ৰেৰণা যোগায়। পবিত্ৰ ৰমজান মাহো চলি আছে। তাৰ পিছত আছে বুদ্ধ পূৰ্ণিমা। গুৰু টেগ বাহাদুৰজীৰ ৪০০তম প্ৰকাশ পৰ্বও আছে। এটা গুৰুত্বপূৰ্ণ দিন হৈছে পোচিচে বৈশাক-ঠাকুৰৰ জন্ম জয়ন্তী। তেওঁলোক সকলোৱে আমাক আমাৰ কৰ্তব্য পালন কৰিবলৈ অনুপ্ৰাণিত কৰে। নাগৰিক হিচাপে, আমি আমাৰ জীৱনত যিমান পাৰি সিমান দক্ষতাৰে আমাৰ কৰ্তব্য পালন কৰিম। আমি সংকটৰ পৰা মুক্ত হৈ ভৱিষ্যতৰ পথত যিমান পাৰি দ্ৰুত গতিত আগবাঢ়িম। এই ইচ্ছাৰ সৈতে, মই আপোনালোক সকলোকে আকৌ এবাৰ প্ৰতিষেধক গ্ৰহণ কৰাৰ বাবে অনুৰোধ জনাইছো আৰু সাৱধানো হ’ব লাগিব। 'ঔষধো – কঠোৰ নিয়মানুৱৰ্তিতাও'। এই মন্ত্ৰটো কেতিয়াও নাপাহৰিব। আমি শীঘ্ৰেই এই দুৰ্যোগৰ পৰা ওলাই আহিবলৈ সক্ষম হ'ম। এই বিশ্বাসেৰে আপোনালোকলৈ অশেষ ধন্যবাদ। নমস্কাৰ।