Published By : Admin |
September 24, 2025 | 18:33 IST
Share
पीएमएफएमई योजनेंतर्गत, अन्न प्रक्रिया क्षेत्रातील सूक्ष्म प्रकल्पांसाठी सुमारे 26,000 लाभार्थ्यांना 770 कोटी रुपयांहून अधिक कर्ज संबंधित सहाय्य प्रदान केले जाणार
पंतप्रधान नरेंद्र मोदी 25 सप्टेंबर रोजी संध्याकाळी 6:15 वाजता नवी दिल्ली मधील भारत मंडपम येथे वर्ल्ड फूड इंडिया 2025 मध्ये सहभागी होतील. यावेळी ते उपस्थितांना संबोधित करतील.
वर्ल्ड फूड इंडिया 2025 चे आयोजन 25 ते 28 सप्टेंबर दरम्यान करण्यात आले असून, या माध्यमातून अन्न प्रक्रिया क्षेत्र, अन्न शाश्वतता आणि पौष्टिक आणि सेंद्रिय अन्नाचे उत्पादन यामधील भारताचे सामर्थ्य प्रदर्शित केले जाईल.
वर्ल्ड फूड इंडियामध्ये, प्रधानमंत्री सूक्ष्म अन्न प्रक्रिया उद्योग औपचारिकीकरण (पीएमएफएमई) योजनेंतर्गत अन्न प्रक्रिया क्षेत्रातील 2,510 कोटी रुपयांपेक्षा जास्त किमतीच्या सूक्ष्म प्रकल्पांसाठी सुमारे 26,000 लाभार्थ्यांना 770 कोटी रुपयांपेक्षा जास्त पत-आधारित सहाय्य प्रदान केले जाईल.
वर्ल्ड फूड इंडियामध्ये मुख्य कार्यकारी अधिकाऱ्यांच्या गोलमेज बैठका, तांत्रिक सत्रे, प्रदर्शने आणि बी2बी (बिझनेस-टू-बिझनेस), बी2जी (बिझनेस-टू-गव्हर्नमेंट) आणि जी2जी (गव्हर्नमेंट-टू-गव्हर्नमेंट) बैठका यासह अनेक व्यावसायिक संवाद समाविष्ट असतील. यामध्ये 150 आंतरराष्ट्रीय सहभागींसह फ्रान्स, जर्मनी, इराण, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण कोरिया, डेन्मार्क, इटली, थायलंड, इंडोनेशिया, तैवान, बेल्जियम, टांझानिया, इरिट्रिया, सायप्रस, अफगाणिस्तान, चीन आणि अमेरिका यासह 21 प्रदर्शनकर्त्या देशांची प्रदर्शने देखील आयोजित केले जाईल.
वर्ल्ड फूड इंडियामध्ये जागतिक अन्न प्रक्रिया केंद्र म्हणून भारत, अन्न प्रक्रिया क्षेत्रात शाश्वतता आणि निव्वळ शून्य कार्बन उत्सर्जनाचे उद्दिष्ट, अन्न प्रक्रियेतील अग्रणी, भारतातील पाळीव प्राण्यांचे अन्न उद्योग, पोषण आणि आरोग्यासाठी प्रक्रियाकृत अन्न, वनस्पती-आधारित अन्नपदार्थ, न्यूट्रास्युटिकल्स, विशेष अन्न पदार्थ, यासारख्या विविध विषयांवर आधारित सत्रे देखील असतील. प्रदर्शनात 14 मंडप असतील, यापैकी प्रत्येक मंडप विशिष्ट संकल्पनेसाठी समर्पित असेल, आणि या ठिकाणी सुमारे 100,000 लोक भेट देतील असा अंदाज आहे.
The inauguration of Swaminarayan Temple is a new milestone in the cultural relations between India and France: PM Modi
September 06, 2026
Share
It is a matter of great joy that BAPS Swaminarayan Hindu Mandir is being inaugurated in Paris: PM
This temple will surely enrich the diversity of France and energize our cultural relations: PM
India-France Strategic Partnership is special as it rests on the strong foundation of old cultural and political bonds: PM
पूज्य महंत स्वामी, फ्रांस सरकार के सम्मानित प्रतिनिधिगण, उपस्थित अतिथिगण, इंडियन कम्युनिटी के मेरे साथी, देश दुनिया से जुड़े सभी हरि भक्त, देवियों और सज्जनों, जय स्वामीनारायण!
आज फ्रांस की राजधानी पेरिस में भव्य स्वामीनारायण मंदिर का लोकार्पण हो रहा है। यह लोकार्पण भारत और फ्रांस के सांस्कृतिक संबंधों का नया युग स्तंभ है। पूज्य संत जनों और सनातन परंपरा के श्रेष्ठ जनों के आशीर्वाद के साथ आज इस लोकार्पण का मंच ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ के भाव का मंच बन गया है। भगवान स्वामीनारायण की कृपा और हमारे संतों का स्नेह, संतों का आशीर्वाद, मेरा सौभाग्य है कि मुझे ऐसे पुण्य अवसरों से जुड़ने का अवसर हमेशा मिलता रहता है। आज भी मैं भले ही पेरिस में आप सबके बीच उपस्थित नहीं हूं, लेकिन मन से और हृदय से, मैं स्वयं को आपके बीच ही अनुभव कर रहा हूं।
साथियों,
आज इस अवसर पर मैं परम पूज्य प्रमुख स्वामी जी महाराज का भी श्रद्धापूर्वक स्मरण करता हूं। प्राचीन काल में भारत का जो सांस्कृतिक आध्यात्मिक वैभव था, उन्होंने उसके पुनर्जागरण का एक अभियान शुरू किया था। आज उसका प्रकाश यूरोप समेत पूरी दुनिया में फैल रहा है। 2024 में अबू धाबी में भव्य मंदिर का लोकार्पण हुआ था। आज वहां हजारों लोग दर्शन करने जाते हैं और अब यहां पेरिस में स्वामीनारायण मंदिर का निर्माण सृजन की यह निरंतरता, यह संतों की संकल्प शक्ति का ही प्रमाण है। मैं पुनीत कार्य के लिए पूज्य महंत स्वामी का आभार प्रकट करता हूं, मैं उनके चरणों में प्रणाम करता हूं। मैं BAPS स्वामीनारायण संस्था को और करोड़ों हरि भक्तों को इस अवसर पर हृदय की गहराई से बधाई देता हूं।
साथियों,
BAPS के माध्यम से जब अलग-अलग देश में मंदिरों की प्राण प्रतिष्ठा होती है, तो वहां भारत के प्राचीन विचार और मानवीय मूल्य भी साथ-साथ ही जाते हैं और भारत का विचार कहता है ‘समानं मनः सह चित्तमेषाम्’ अर्थात हमारे मन समान हो, हमारे हृदय साथ जुड़े। इसलिए आज जब फ्रांस में इतना भव्य मंदिर बनकर तैयार हुआ है, यह फ्रांस की विविधता को तो समृद्ध करेगा ही, इससे भारत और फ्रांस के सांस्कृतिक संबंधों को भी ऊर्जा मिलेगी।
साथियों,
बीते वर्षों में भारत और फ्रांस के संबंध नई ऊंचाइयों तक पहुंचे हैं। मेरे मित्र, प्रेसिडेंट मैक्रों के साथ मिलकर दोनों देश एक Special Global Strategic Partnership बना रहे हैं। Technology, AI और Defence से लेकर Space और Climate Action तक हम एक नई गति और नई ऊर्जा के साथ मिलकर के आगे बढ़ रहे हैं। हम 2026 को India-France Year of Innovation के रूप में भी सेलिब्रेट कर रहे हैं। भारत-फ्रांस की ये Strategic Partnership इसलिए भी खास है, क्योंकि ये हमारे पुराने सांस्कृतिक-राजनैतिक सम्बन्धों की मजबूत बुनियाद पर टिकी है। इतिहास गवाह है, फ्रांस में भारतीय सैनिकों के बलिदान का इतिहास आज भी मन-मंदिर में जीवित है। भाषा से जुड़े विषयों में रुचि रखने वाले लोग यह भी जानते हैं कि फ्रेंच स्कॉलर्स ने संस्कृत को लोकप्रिय बनाने में कितनी अहम भूमिका निभाई है। रामकृष्ण परमहंस और स्वामी विवेकानंद पर रोमाँ रोलाँ की की लेखनी हमारी सोसाइटीज़ को और करीब लाई है। पेरिस से पुडुचेरी के अरबिंदो आश्रम तक 'The mother' की spiritual journey, उसने कितने ही भारतीय और फ्रेंच साधकों को inspire किया है।
साथियों,
दशकों पहले श्रील प्रभुपाद स्वामी भी फ्रांस आए थे। इस्कॉन के जरिए भारत फ्रांस के बीच आध्यात्मिक सम्बन्धों का नया अध्याय उन्होंने शुरू किया था। आज योग भी भारत-फ्रांस के people to people कनेक्ट का एक माध्यम बन चुका है। 'इंटरनेशनल योगा डे' पर एफिल टॉवर के सामने से आने वाली तस्वीरें फ्रांस में योग की लोकप्रियता का उदाहरण बनती हैं और अब BAPS के इस भव्य मंदिर के जरिए, हमारे उन सांस्कृतिक सम्बन्धों में एक नया अध्याय जुड़ रहा है।
साथियों,
इन दिनों, भारत फ्रांस Joint Ventures की संभावनाओं पर बातें होती हैं। स्वामीनारायण मंदिर ने इस संभावना में भी एक नया आयाम जोड़ा है। यह मंदिर 'मेड इन इंडिया' है और 'बिल्ट इन फ्रांस' है। इसके काफी पत्थरों को भारत में तराशा गया है। भारत की प्राचीन प्रतिभा यहाँ फ्रांस में आधुनिक इंजीनियरिंग से आकर जुड़ चुकी है। पेरिस में इस भव्य मंदिर ने आकार लिया है। इसलिए, मैं आशा करता हूँ, यह मंदिर सदियों तक भारत और फ्रांस के बीच सहयोग और संभावनाओं का भी प्रतीक बनकर उभरेगा।
साथियों,
स्वामीनारायण मंदिर हमेशा से भक्ति के साथ-साथ सेवा का माध्यम भी रहे हैं। मुझे बताया गया है, यह मंदिर भी सेवा प्रकल्पों का वैसा ही केंद्र बनेगा। मुझे विश्वास है कि यहाँ से भारतीय संस्कृति के जो स्वर निकलेंगे, उनका लाभ पूरे यूरोप में लोगों को मिलेगा। भविष्य में मुझे जब भी समय मिलेगा, मैं इस मंदिर में दर्शन करने का प्रयास अवश्य करूंगा। इन्हीं शब्दों के साथ, एक बार फिर आज के इस लोकार्पण समारोह में सम्मिलित सभी अतिथिगणों को, सभी परिवारों को, सभी हरि भक्तों को और पूरी Indian Diaspora को मेरी ओर से इस शुभारंभ पर्व की ढेरों शुभकामनाएं!