Under PMFME Scheme, credit linked support of over Rs 770 crore to be provided to around 26,000 beneficiaries for micro projects in food processing sector

'ಪ್ರಧಾನಮಂತ್ರಿ ಕಿರು ಆಹಾರ ಸಂಸ್ಕರಣಾ ಉದ್ದಿಮೆಗಳ ಔಪಚಾರೀಕರಣ' (PMFME) ಯೋಜನೆಯಡಿ, ಆಹಾರ ಸಂಸ್ಕರಣಾ ವಲಯದಲ್ಲಿನ ಸೂಕ್ಷ್ಮ ಯೋಜನೆಗಳಿಗಾಗಿ ಸುಮಾರು 26,000 ಫಲಾನುಭವಿಗಳಿಗೆ ₹770 ಕೋಟಿಗೂ ಅಧಿಕ ಮೊತ್ತದ ಸಾಲ-ಸಂಯೋಜಿತ ನೆರವನ್ನು ವಿತರಿಸಲಾಗುವುದು.

ಪ್ರಧಾನಮಂತ್ರಿ ಶ್ರೀ ನರೇಂದ್ರ ಮೋದಿ ಅವರು ಸೆಪ್ಟೆಂಬರ್ 25 ರಂದು ಸಂಜೆ ಸುಮಾರು 6:15 ಗಂಟೆಗೆ ನವದೆಹಲಿಯ ಭಾರತ ಮಂಟಪದಲ್ಲಿ 'ವಿಶ್ವ ಆಹಾರ ಮೇಳ ಭಾರತ 2025' (World Food India 2025) ಕಾರ್ಯಕ್ರಮದಲ್ಲಿ ಭಾಗವಹಿಸಲಿದ್ದಾರೆ. ಈ ಸಂದರ್ಭದಲ್ಲಿ ಅವರು ಸಭೆಯನ್ನುದ್ದೇಶಿಸಿ ಮಾತನಾಡಲಿದ್ದಾರೆ.

'ವಿಶ್ವ ಆಹಾರ ಮೇಳ ಭಾರತ'ದ 2025ರ ಆವೃತ್ತಿಯು ಸೆಪ್ಟೆಂಬರ್ 25 ರಿಂದ 28 ರವರೆಗೆ ನಡೆಯಲಿದ್ದು, ಆಹಾರ ಸಂಸ್ಕರಣಾ ವಲಯ, ಆಹಾರ ಸುಸ್ಥಿರತೆ ಹಾಗೂ ಪೌಷ್ಟಿಕ ಮತ್ತು ಸಾವಯವ ಆಹಾರ ಉತ್ಪಾದನೆಯಲ್ಲಿ ಭಾರತದ ಸಾಮರ್ಥ್ಯವನ್ನು ಪ್ರದರ್ಶಿಸಲಿದೆ.

ಈ ಕಾರ್ಯಕ್ರಮದಲ್ಲಿ, ಪ್ರಧಾನಮಂತ್ರಿ ಕಿರು ಆಹಾರ ಸಂಸ್ಕರಣಾ ಉದ್ದಿಮೆಗಳ ಔಪಚಾರೀಕರಣ (PMFME) ಯೋಜನೆಯಡಿ, ಆಹಾರ ಸಂಸ್ಕರಣಾ ವಲಯದಲ್ಲಿ 2,510 ಕೋಟಿ ರೂ.ಗೂ ಅಧಿಕ ಮೌಲ್ಯದ ಸೂಕ್ಷ್ಮ ಯೋಜನೆಗಳಿಗಾಗಿ ಸುಮಾರು 26,000 ಫಲಾನುಭವಿಗಳಿಗೆ 770 ಕೋಟಿ ರೂ.ಗೂ ಅಧಿಕ ಸಾಲ ಸಂಪರ್ಕಿತ ಬೆಂಬಲವನ್ನು ಒದಗಿಸಲಾಗುವುದು.

'ವಿಶ್ವ ಆಹಾರ ಮೇಳ ಭಾರತ'ವು ಸಿಇಒ ದುಂಡುಮೇಜಿನ ಸಭೆಗಳು, ತಾಂತ್ರಿಕ ಗೋಷ್ಠಿಗಳು, ಪ್ರದರ್ಶನಗಳು, ಮತ್ತು B2B (ವ್ಯಾಪಾರದಿಂದ ವ್ಯಾಪಾರಕ್ಕೆ), B2G (ವ್ಯಾಪಾರದಿಂದ ಸರ್ಕಾರಕ್ಕೆ) ಹಾಗೂ G2G (ಸರ್ಕಾರದಿಂದ ಸರ್ಕಾರಕ್ಕೆ) ಸಭೆಗಳು ಸೇರಿದಂತೆ ಅನೇಕ ವ್ಯಾಪಾರ ಸಂವಾದಗಳನ್ನು ಒಳಗೊಂಡಿರುತ್ತದೆ. ಇದರಲ್ಲಿ ಫ್ರಾನ್ಸ್, ಜರ್ಮನಿ, ಇರಾನ್, ಆಸ್ಟ್ರೇಲಿಯಾ, ದಕ್ಷಿಣ ಕೊರಿಯಾ, ಡೆನ್ಮಾರ್ಕ್, ಇಟಲಿ, ಥೈಲ್ಯಾಂಡ್, ಇಂಡೋನೇಷ್ಯಾ, ತೈವಾನ್, ಬೆಲ್ಜಿಯಂ, ಟಾಂಜಾನಿಯಾ, ಎರಿಟ್ರಿಯಾ, ಸೈಪ್ರಸ್, ಅಫ್ಘಾನಿಸ್ತಾನ, ಚೀನಾ ಮತ್ತು ಯುಎಸ್‌ಎ ಸೇರಿದಂತೆ 21 ಪ್ರದರ್ಶಕ ರಾಷ್ಟ್ರಗಳು ಹಾಗೂ 150 ಅಂತಾರಾಷ್ಟ್ರೀಯ ಪ್ರತಿನಿಧಿಗಳು ಭಾಗವಹಿಸಲಿದ್ದಾರೆ.

'ವಿಶ್ವ ಆಹಾರ ಮೇಳ ಭಾರತ'ದಲ್ಲಿ 'ಜಾಗತಿಕ ಆಹಾರ ಸಂಸ್ಕರಣಾ ಕೇಂದ್ರವಾಗಿ ಭಾರತ', 'ಆಹಾರ ಸಂಸ್ಕರಣೆಯಲ್ಲಿ ಸುಸ್ಥಿರತೆ ಮತ್ತು ನಿವ್ವಳ-ಶೂನ್ಯ ಗುರಿ', 'ಆಹಾರ ಸಂಸ್ಕರಣೆಯಲ್ಲಿನ ಹೊಸ ಸಾಧ್ಯತೆಗಳು', 'ಭಾರತದ ಸಾಕುಪ್ರಾಣಿಗಳ ಆಹಾರ ಉದ್ಯಮ', 'ಪೋಷಣೆ ಮತ್ತು ಆರೋಗ್ಯಕ್ಕಾಗಿ ಸಂಸ್ಕರಿಸಿದ ಆಹಾರಗಳು', 'ಸಸ್ಯಾಧಾರಿತ ಆಹಾರಗಳು', 'ನ್ಯೂಟ್ರಾಸೂಟಿಕಲ್ಸ್', 'ವಿಶೇಷ ಆಹಾರಗಳು' ಸೇರಿದಂತೆ ಅನೇಕ ವಿಷಯಗಳ ಕುರಿತು ಹಲವಾರು ವಿಷಯಾಧಾರಿತ ಗೋಷ್ಠಿಗಳು ನಡೆಯಲಿವೆ. ಇದು ಪ್ರತಿ ವಿಷಯಕ್ಕೆ ಮೀಸಲಾದ 14 ಮಂಟಪಗಳನ್ನು ಒಳಗೊಂಡಿದ್ದು, ಸುಮಾರು 100,000 ಸಂದರ್ಶಕರನ್ನು ಆಕರ್ಷಿಸುವ ನಿರೀಕ್ಷೆಯಿದೆ.

 

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The inauguration of Swaminarayan Temple is a new milestone in the cultural relations between India and France: PM Modi
September 06, 2026
It is a matter of great joy that BAPS Swaminarayan Hindu Mandir is being inaugurated in Paris: PM
This temple will surely enrich the diversity of France and energize our cultural relations: PM
India-France Strategic Partnership is special as it rests on the strong foundation of old cultural and political bonds: PM

पूज्य महंत स्वामी, फ्रांस सरकार के सम्मानित प्रतिनिधिगण, उपस्थित अतिथिगण, इंडियन कम्युनिटी के मेरे साथी, देश दुनिया से जुड़े सभी हरि भक्त, देवियों और सज्जनों, जय स्वामीनारायण!

आज फ्रांस की राजधानी पेरिस में भव्य स्वामीनारायण मंदिर का लोकार्पण हो रहा है। यह लोकार्पण भारत और फ्रांस के सांस्कृतिक संबंधों का नया युग स्तंभ है। पूज्य संत जनों और सनातन परंपरा के श्रेष्ठ जनों के आशीर्वाद के साथ आज इस लोकार्पण का मंच ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ के भाव का मंच बन गया है। भगवान स्वामीनारायण की कृपा और हमारे संतों का स्नेह, संतों का आशीर्वाद, मेरा सौभाग्य है कि मुझे ऐसे पुण्य अवसरों से जुड़ने का अवसर हमेशा मिलता रहता है। आज भी मैं भले ही पेरिस में आप सबके बीच उपस्थित नहीं हूं, लेकिन मन से और हृदय से, मैं स्वयं को आपके बीच ही अनुभव कर रहा हूं।

साथियों,

आज इस अवसर पर मैं परम पूज्य प्रमुख स्वामी जी महाराज का भी श्रद्धापूर्वक स्मरण करता हूं। प्राचीन काल में भारत का जो सांस्कृतिक आध्यात्मिक वैभव था, उन्होंने उसके पुनर्जागरण का एक अभियान शुरू किया था। आज उसका प्रकाश यूरोप समेत पूरी दुनिया में फैल रहा है। 2024 में अबू धाबी में भव्य मंदिर का लोकार्पण हुआ था। आज वहां हजारों लोग दर्शन करने जाते हैं और अब यहां पेरिस में स्वामीनारायण मंदिर का निर्माण सृजन की यह निरंतरता, यह संतों की संकल्प शक्ति का ही प्रमाण है। मैं पुनीत कार्य के लिए पूज्य महंत स्वामी का आभार प्रकट करता हूं, मैं उनके चरणों में प्रणाम करता हूं। मैं BAPS स्वामीनारायण संस्था को और करोड़ों हरि भक्तों को इस अवसर पर हृदय की गहराई से बधाई देता हूं।

साथियों,

BAPS के माध्यम से जब अलग-अलग देश में मंदिरों की प्राण प्रतिष्ठा होती है, तो वहां भारत के प्राचीन विचार और मानवीय मूल्य भी साथ-साथ ही जाते हैं और भारत का विचार कहता है ‘समानं मनः सह चित्तमेषाम्’ अर्थात हमारे मन समान हो, हमारे हृदय साथ जुड़े। इसलिए आज जब फ्रांस में इतना भव्य मंदिर बनकर तैयार हुआ है, यह फ्रांस की विविधता को तो समृद्ध करेगा ही, इससे भारत और फ्रांस के सांस्कृतिक संबंधों को भी ऊर्जा मिलेगी।

साथियों,

बीते वर्षों में भारत और फ्रांस के संबंध नई ऊंचाइयों तक पहुंचे हैं। मेरे मित्र, प्रेसिडेंट मैक्रों के साथ मिलकर दोनों देश एक Special Global Strategic Partnership बना रहे हैं। Technology, AI और Defence से लेकर Space और Climate Action तक हम एक नई गति और नई ऊर्जा के साथ मिलकर के आगे बढ़ रहे हैं। हम 2026 को India-France Year of Innovation के रूप में भी सेलिब्रेट कर रहे हैं। भारत-फ्रांस की ये Strategic Partnership इसलिए भी खास है, क्योंकि ये हमारे पुराने सांस्कृतिक-राजनैतिक सम्बन्धों की मजबूत बुनियाद पर टिकी है। इतिहास गवाह है, फ्रांस में भारतीय सैनिकों के बलिदान का इतिहास आज भी मन-मंदिर में जीवित है। भाषा से जुड़े विषयों में रुचि रखने वाले लोग यह भी जानते हैं कि फ्रेंच स्कॉलर्स ने संस्कृत को लोकप्रिय बनाने में कितनी अहम भूमिका निभाई है। रामकृष्ण परमहंस और स्वामी विवेकानंद पर रोमाँ रोलाँ की की लेखनी हमारी सोसाइटीज़ को और करीब लाई है। पेरिस से पुडुचेरी के अरबिंदो आश्रम तक 'The mother' की spiritual journey, उसने कितने ही भारतीय और फ्रेंच साधकों को inspire किया है।

साथियों,

दशकों पहले श्रील प्रभुपाद स्वामी भी फ्रांस आए थे। इस्कॉन के जरिए भारत फ्रांस के बीच आध्यात्मिक सम्बन्धों का नया अध्याय उन्होंने शुरू किया था। आज योग भी भारत-फ्रांस के people to people कनेक्ट का एक माध्यम बन चुका है। 'इंटरनेशनल योगा डे' पर एफिल टॉवर के सामने से आने वाली तस्वीरें फ्रांस में योग की लोकप्रियता का उदाहरण बनती हैं और अब BAPS के इस भव्य मंदिर के जरिए, हमारे उन सांस्कृतिक सम्बन्धों में एक नया अध्याय जुड़ रहा है।

साथियों,

इन दिनों, भारत फ्रांस Joint Ventures की संभावनाओं पर बातें होती हैं। स्वामीनारायण मंदिर ने इस संभावना में भी एक नया आयाम जोड़ा है। यह मंदिर 'मेड इन इंडिया' है और 'बिल्ट इन फ्रांस' है। इसके काफी पत्थरों को भारत में तराशा गया है। भारत की प्राचीन प्रतिभा यहाँ फ्रांस में आधुनिक इंजीनियरिंग से आकर जुड़ चुकी है। पेरिस में इस भव्य मंदिर ने आकार लिया है। इसलिए, मैं आशा करता हूँ, यह मंदिर सदियों तक भारत और फ्रांस के बीच सहयोग और संभावनाओं का भी प्रतीक बनकर उभरेगा।

साथियों,

स्वामीनारायण मंदिर हमेशा से भक्ति के साथ-साथ सेवा का माध्यम भी रहे हैं। मुझे बताया गया है, यह मंदिर भी सेवा प्रकल्पों का वैसा ही केंद्र बनेगा। मुझे विश्वास है कि यहाँ से भारतीय संस्कृति के जो स्वर निकलेंगे, उनका लाभ पूरे यूरोप में लोगों को मिलेगा। भविष्य में मुझे जब भी समय मिलेगा, मैं इस मंदिर में दर्शन करने का प्रयास अवश्य करूंगा। इन्हीं शब्दों के साथ, एक बार फिर आज के इस लोकार्पण समारोह में सम्मिलित सभी अतिथिगणों को, सभी परिवारों को, सभी हरि भक्तों को और पूरी Indian Diaspora को मेरी ओर से इस शुभारंभ पर्व की ढेरों शुभकामनाएं!

बहुत-बहुत धन्यवाद!

मर्सी बोकू!

जय स्वामीनारायण!