Text of PM’s address at the Civic Reception in Mauritius

Published By : Admin | March 12, 2015 | 18:30 IST

इतनी बारिश और आज Working Day उसके बावजूद भी यह नजारा - मैं आपके प्‍यार के लिए मैं आपका सदा सर्वदा ऋणी रहूंगा। मैं इतना जरूर कह सकता हूं कि मॉरीशियस ने मुझे जीत लिया है। अपना बना लिया है और जब आपने मुझे अपना बनाया है तो मेरी जिम्‍मेवारी भी बढ़ जाती है। और मैं आपको विश्‍वास दिलाता हूं इस जिम्‍मेवारी को निभाने में भारत कोई कमी नहीं रखेगा।

मैं मॉरीशियस के सभी नागरिकों का अभिनंदन करता हूं। दुनिया का कोई भी व्‍यक्ति आज के मॉरीशियस को अगर देखेगा, मॉरीशियस के इतिहास को जानेगा, तो उसके मन में क्‍या विचार आएगा? उसके मन में यही विचार आएगा कि सौ साल पहले जो यहां मजदूर बनकर आए थे, जिनको लाया गया था, उन लोगों ने इस धरती को कैसा नंदनवन बना दिया है! इस देश को कैसी नई ऊंचाईयों पर ले गए हैं! और तब मेहनत तो आपने की है, पसीना तो आपने बहाया है, कष्‍ट तो आपके पूर्वजों ने झेले हैं, लेकिन Credit हमारे खाते में जाती है। क्‍योंकि हर किसी को लगता है कि भई यह कौन लोग हैं? वो हैं जो हिंदुस्‍तान से आए थे ना, वो हैं।

20.5 PM's at civic reception in Mauritius (2)

और दुनिया को हिंदुस्‍तान की पहचान होगी कि दुनिया के लिए जो मजदूर था, जिसे खेतों से उठाकर के लाया गया था। जबरन लाया गया था। वो अगर जी-जान से जुड़ जाता है तो अपने आप धरती पर स्‍वर्ग खड़ा कर देता है। यह काम आपने किया है, आपके पूर्वजों ने किया है और इसलिए एक हिंदुस्‍तानी के नाते गर्व महसूस करता हूं और आपको नमन करता हूं, आपका अभिनंदन करता हूं, आपके पूर्वजों को प्रणाम करता हूं।

कभी-कभार आम अच्‍छा है या नहीं है, यह देखने के लिए सारे आम नहीं देखने पड़ते। एक-आधा आम देख लिया तो पता चल जाता है, हां भई, फसल अच्‍छी है। अगर दुनिया मारिशियस को देख ले तो उसको विश्‍वास हो जाएगा हिंदुस्‍तान कैसा होगा। वहां के लोग कैसे होंगे। अगर sample इतना बढि़या है, तो godown कैसा होगा! और इसलिए विश्‍व के सामने आज भारत गर्व के साथ कह सकता है कि हम उस महान विरासत की परंपरा में से पले हुए लोग हैं जो एक ही मंत्र लेकर के चले हैं।

जब दुनिया में भारत सोने की चिडि़या कहलाता था। जब दुनिया में सुसंस्‍कृ‍त समाज के रूप में भारत की पहचान थी, उस समय भी उस धरती के लोगों ने कभी दुनिया पर कब्‍जा करने की कोशिश नहीं की थी। दूसरे का छीनना यह उसके खून में नहीं था। एक सामान्‍य व्‍यक्ति भी वही भाषा बोलता है जो एक देश का प्रधानमंत्री बोलता है। इतनी विचारों की सौम्यता, सहजता ऐसे नहीं आती है, किताबों से नहीं आती हैं, यह हमारे रक्‍त में भरा पड़ा है, हमारे संस्‍कारों में भरा पड़ा है। और हमारा मंत्र था “वसुधैव कुटुम्‍बकम्”। पूरा विश्‍व हमारा परिवार है इस तत्‍व को लेकर के हम निकले हुए लोग हैं और इसी के कारण आज दुनिया के किसी भी कोन में कोई भारतीय मूल का कोई व्‍यक्ति गया है तो उसने किसी को पराजित करने की कोशिश नहीं की है, हर किसी को जीतने का प्रयास किया है, अपना बनाने का प्रयास किया है।

2014 का साल मॉरिशियस के लिए भी महत्‍वपूर्ण था। भारत के लिए भी महत्‍वपूर्ण था। भारत ने बहुत सालों से मिली-जुली सरकारें बना करती थी, गठबंधन की सरकारें बनती थी। एक पैर उसका तो एक पैर इसका, एक हाथ उसका तो एक हाथ इसका। मॉरिशियस का भी वही हाल था। यहां पर भी मिली-जुली सरकार बना करती थी।

2014 में जो हिंदुस्‍तान के नागरिकों ने सोचा वही मॉरिशियस के नागरिकों ने सोचा। हिंदुस्‍तान के नागरिकों ने 30 साल के बाद एक पूर्ण बहुमत वाली स्थिर सरकार बनाई। मॉरिशियस के लोगों ने भी पूर्ण बहुमत वाली स्थिर सरकार दी। और इसका मूल कारण यह है कि आज की जो पीढ़ी है, वो पीढ़ी बदलाव चाहती है। आज जो पीढ़ी है वो विकास चाहती है, आज जो पीढ़ी है वो अवसर चाहती है, उपकार नहीं। वो किसी के कृपा का मोहताज नहीं है। वो कहता है मेरे भुजा में दम है, मुझे मौका दीजिए। मैं पत्‍थर पर लकीर ऐसी बनाऊंगा जो दुनिया की ज़िन्दगी बदलने के काम आ सकती है। आज का युवा मक्‍खन पर लकीर बनाने का शौकीन नहीं है, वो पत्‍थर पर लकीर बनाना चाहता है। उसकी सोच बदली है उसके विचार बदले है और उसके मन में जो आशाएं आकांक्षाए जगी है, सरकारों का दायित्‍व बनता है वो नौजवानों की आशाओं-आकांक्षाओं की पूर्ति के लिए राष्‍ट्र को विकास की नई ऊंचाईयों पर ले जाएँ।

और मैं आज जब आपके बीच में आया हूं मेरी सरकार को ज्‍यादा समय तो नहीं हुआ है, लेकिन मैं इतना विश्‍वास से कह रहा हूं कि जिस भारत की तरफ कोई देखने को तैयार नहीं था और देखते भी थे, तो आंख दिखाने के लिए देखते थे। पहली बार आज दुनिया भारत को आंख नहीं दिखा दे रही है, भारत से आंख मिलाने की कोशिश कर रही है। सवा सौ करोड़ का देश, क्‍या दुनिया के भाग्‍य को बदलने का निमित्त नहीं बन सकता? क्‍या ऐसे सपने नहीं संजोने चाहिए? सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय, जगत हिताय च । जिस मंत्र को लेकर के हमारे पूर्वजों ने हमें पाला-पौसा है। क्‍या समय की मांग नहीं है, कि हम अपने पुरुषार्थ से, अपने पराक्रम से, अपनी कल्पनाशीलता से जगत को वो चीज़ें दें जिनके लिए जगत सदियों से तरसता रहा है? और मैं विशवास दिलाता हूँ, यह ताकत उस धरती में है। उन संस्कारों में है, जो जगत को समस्यायों के समाधान के लिए रास्‍ता दे सकते हैं।

20.5 PM's at civic reception in Mauritius (5)

आज पूरा विश्‍व और विशेषकर के छोटे-छोटे टापुओं पर बसे हुए देश इस बात से चिंतित है कि 50 साल, सौ साल के बाद उनका क्‍या होगा। Climate Change के कारण कहीं यह धरती समंदर में समा तो नहीं जाएगी? सदियों ने पूर्वजों ने परिश्रम करके जिसे नंदनवन बनाया, कहीं वो सपने डूब तो नहीं जाएंगे? सपने चकनाचूर हो नहीं जाएंगे क्‍या? सारी दुनिया Global Warming के कारण चिंतित है। और टापूओं पर रहने वाले छोटे-छोटे देश मुझे जिससे मिलना हुआ उनकी एक गहन चिंता रहती है कि यह दुनिया समझे अपने सुख के लिए हमें बलि न चढ़ा दे, यह सामान्‍य मानव सोचता है। और इसलिए, कौन सा तत्‍व है, कौन सा मार्गदर्शन है, कौन सा नेतृत्‍व है, जो उपभोग की इस परंपरा में से समाज को बचाकर के सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय जीवन की प्रशस्ति के लिए आगे आए? जब ऐसे संकट आते हैं तब भारत ही वो ताकत है जिस ताकत ने सदियों पहले... जब महात्‍मा गांधी साबरमती आश्रम में रहते थे, साबरमती नदी पानी से भरी रहती थी, लबालब पानी था। 1925-30 का कालखंड था, लेकिन उसके बावजूद भी अगर कोई महात्‍मा गांधी को पानी देता था और जरूरत से ज्‍यादा देता था, तो गांधी जी नाराज होकर कहते “भाई पानी बर्बाद मत करो, जितना जरूरत का है उतना ही दीजिए, अगर उसको आधे ग्लिास की जरूरत है तो पूरा ग्लिास भरकर मत दीजिए।“ नदी भरी पड़ी थी पानी सामने था, लेकिन सोच स्‍वयं के सुख की नहीं थी, सोच आने वाली पीढि़यों के सुख की थी और इसलिए गांधी हमें प्रशस्‍त करते थे कि हम उतना ही उपयोग करे जितना हमारी जरूरत है। अगर दुनिया गांधी के इस छोटे से सिद्धांत को मान लें कि हम जरूरत से ज्‍यादा उपभोग न करे, तो क्‍या Climate का संकट पैदा होगा क्‍या? बर्फ पिघलेगी क्‍या? समंदर उबलेंगे क्‍या? और मॉरिशियस जैसे देश के सामने जीने-मरने का संकट पैदा होगा क्‍या? नहीं होगा। यह छोटी सी बात।

हम उस परंपरा के लोग हैं जिस परंपरा में प्रकृति से प्रेम करना सिखाया गया है। हमी तो लोग हैं, जिन्‍हें “पृथ्‍वी यह माता है”, यह बचपन से सिखाया जाता है। शायद दुनिया में कोई ऐसी परंपरा नहीं होगी जो “पृथ्‍वी यह माता है” यह संकल्‍प कराती हो। और इतना ही नहीं बालक छोटी आयु में भी जब बिस्‍तर से नीचे पैर रखता है तो मां यह कहती है कि “देखो बेटे, जब बिस्‍तर से जमीन पर पैर रखते हो तो पहले यह धरती मां को प्रणाम करो। उसकी क्षमा मांगों, ताकि तुम उसके सीने पर पैर रख रहे हो।“ यह संस्‍कार थे, यही तो संस्‍कार है, जो धरती माता की रक्षा के लिए प्रेरणा देते थे और धरती माता की रक्षा का मतलब है यह प्रकृति, यह पर्यावरण, यह नदियां, यह जंगल... इसी की रक्षा का संदेश देते हैं। अगर यह बच जाता है, तो Climate का संकट पैदा नहीं होता है। हम ही तो लोग हैं जो नदी को मां कहते हैं। हमारे लिए जितना जीवन में मां का मूल्‍य है, उतना ही हमारे यहां नदी का मूल्‍य है। अगर जिस पल हम यह भूल गए कि नदी यह मां हैं और जब से हमारे दिमाग में घर कर गया कि आखिर नदी ही तो H2O है और क्‍या है। जब नदी को हमने H2O मान लिया, पानी है, H2O... जब नदी के प्रति मां का भाव मर जाता है, तो नदी की रखवाली करने की जिम्‍मेदारी भी खत्‍म हो जाती है।

यह संस्‍कार हमें मिले हैं और उन्‍हीं संस्‍कारों के तहत हम प्रकृति की रक्षा से जुड़े हुए हैं। हमारे पूर्वजों ने हमें कहा है – मनुष्‍य को प्रकृति का दोहन करना चाहिए। कभी आपने बछड़े को उतनी ही दूध पीते देखा होगा, जितना बछड़े को जरूरत होगी। मां को काटने का, गाय को काटने का प्रयास कोई नहीं करता है। और इसलिए प्रकृति का भी दोहन होना चाहिए, प्रकृति को शोषण नहीं होना चाहिए। “Milking of Nature” हमारे यहां कहा गया है। “Exploitation of the Nature is a Crime.” अगर यह विचार और आदर्शों को लेकर के हम चलते हैं, तो हम मानव जिस संकट से जूझ रहा है, उस संकट से बचाने का रास्‍ता दे सकते हैं।

हम वो लोग हैं जिन्‍होंने पूरे ब्रह्माण को एक परिवार के रूप मे माना है। आप देखिए छोटी-छोटी चीजें होती हैं लेकिन जीवन को कैसे बनाती हैं। पूरे ब्रह्माण को परिवार मानना यह किताबों से नहीं, परिवार के संस्‍कारों से समझाया गया है। बच्‍चा छोटा होता है तो मां उसको खुले मैदान में ले जाकर के समझाती है कि “देखो बेटे, यह जो चांद दिखता है न यह चांद जो है न तेरा मामा है”। कहता है कि नहीं कहते? आपको भी कहा था या नहीं कहा था? क्‍या दुनिया में कभी सुना है जो कहता है सूरज तेरा दादा है, चांद तेरा मामा है, यानी पूरा ब्रह्माण तेरा परिवार है। यह संस्‍कार जिस धरती से मिलते हैं, वहां प्रकृति के साथ कभी संघर्ष नहीं हो सकता है, प्रकृति के साथ समन्‍वय होता है। और इसलिए आज विश्‍व जिस संकट को झेल रहा है, भारतीय चिंतन के आधार पर विश्‍व का नेतृत्व करने का समय आ गया है। Climate बचाने के लिए दुनिया हमें न सिखाये।

दुनिया, जब मॉरिशस कहेगा, ज्‍यादा मानेगी। उसका कारण क्‍या है, मालूम है? क्‍योंकि आप कह सकते हो कि “भई मैं मरने वाला हूं, मैं डूबने वाला हूं”। तो उसका असर ज्‍यादा होता है और इसलिए विश्‍व को जगाना.. मैं इन दिनों कई ऐसे क्षेत्रों में गया। मैं अभी फिजी में गया तो वहां भी मैं अलग-अलग आईलैंड के छोटे-छोटे देशों से मिला था। अब पूरा समय उनकी यही पीड़ा थी, यही दर्द था कोई तो हमारी सुने, कोई तो हमें बचाएं, कोई तो हमारी आने वाली पीढि़यों की रक्षा करे। और जो दूर का सोचते हैं उन्‍होंने आज से शुरू करना पड़ता है।

20.5 PM's at civic reception in Mauritius (3)

भाईयों-बहनों भारत आज विश्‍व का सबसे युवा देश है। 65% Population भारत की 35 साल से कम उम्र की है। यह मॉरिशियस 1.2 Million का है, और हिंदुस्‍तान 1.2 Billion का है। और उसमें 65% जनसंख्‍या 35 साल से कम है। पूरे विश्‍व में युवाशक्ति एक अनिवार्यता बनने वाला है। दुनिया को Workforce की जरूरत पड़ने वाली है। कितना ही ज्ञान हो, कितना ही रुपया हो, कितना ही डॉलर हो, पौंड हो, संपत्ति के भंडार हो, लेकिन अगर युवा पीढ़ी के भुजाओं का बल नहीं मिलता है, तो गाड़ी वहीं अटक जाती है। और इसलिए दुनिया को Youthful Manpower की आवश्‍यकता रहने वाली है, Human Resource की आवश्‍यकता रहने वाली है। भारत आज उस दिशा में आगे बढ़ना चाहता है कि आने वाले दिनों में विश्‍व को जिस मानवशक्ति की आवश्‍यकता है, हम भारत में ऐसी मानवशक्ति तैयार करें जो जगत में जहां जिसकी जरूरत हो, उसको पूरा करने के लिए हमारे पास वो काबिलियत हो, वो हुनर हो, वो सामर्थ्‍य हो।

और इसलिए Skill Development एक Mission mode में हमने आरंभ किया है। दुनिया की आवश्‍यकताओं का Mapping करके किस देश को आने वाले 20 साल के बाद कैसे लोग चाहिए, ऐसे लोगों को तैयार करने का काम आज से शुरू करेंगे। और एक बार भारत का नौजवान दुनिया में जाएगा तो सिर्फ भुजाएं लेकर के नहीं जाएगा, सिर्फ दो बाहू लेकर के नहीं जाएगा, दिल और दिमाग लेकर के भी जाएगा। और वो दिमाग जो वसुधैव कुटुम्‍बकम् की बात करता है। जगत को जोड़ने की बात करता है।

और इसलिए आने वाले दिनों में फिर एक बार युग का चक्‍कर चलने वाला है, जिस युग के चक्‍कर से भारत का नौजवान विश्‍व के बदलाव में दुनिया में फैलकर के एक catalytic agent के रूप में अपनी भूमिका का निर्माण कर सके, ऐसी संभावनाएं पड़ी है। उन संभावनाओं को एक अवसर मानकर के हिंदुस्‍तान आगे बढ़ना चाहता है। दुनिया में फैली हुई सभी मानवतावादी शक्तियां भारत को आशीर्वाद दें ता‍कि इस विचार के लोग इस मनोभूमिका के लोग विश्‍व में पहुंचे, विश्‍व में फैले और विश्‍व कल्‍याण के मार्ग में अपनी-अपनी भूमिका अदा करे। यह जमाना Digital World है। हर किसी के हाथ में मोबाइल है, हर कोई selfie ले रहा है। Selfie ले या न ले, बहुत धक्‍के मारता है मुझे। जगत बदल चुका है। Selfie लेता हैं, पलभर के अंदर अपने साथियों को पहुंचा देता है “देखो अभी-अभी मोदी जी से मिलकर आ गया।“ दुनिया तेज गति से बदल रही है। भारत अपने आप को उस दिशा में सज्ज कर रहा है और हिंदुस्‍तान के नौजवान जो IT के माध्‍यम से जगत को एक अलग पहचान दी है हिंदुस्‍तान की।

वरना एक समय था, हिंदुस्‍तान की पहचान क्‍या थी? मुझे बराबर याद है मैं एक बार ताइवान गया था। बहुत साल पहले की बात है, ताइवान सरकार के निमंत्रण पर गया था। तब तो मैं कुछ था नहीं, मुख्‍यमंत्री वगैरह कुछ नहीं था, ऐसे ही... जैसे यहां एक बार यहाँ मॉ‍रिशियस आया था। कुछ लोग हैं जो मुझे पुराने मिल गए आज। तो पांच-सात दिन का मेरा Tour था जो उनका Computer Engineer था वो मेरा interpretor था, वहां की सरकार ने लगाया था। तो पांच-सात दिन मैं सब देख रहा था, सुन रहा था, पूछ रहा था, तो उसके मन में curiosity हुई। तो उसने आखिरी एक दिन बाकी था, उसने मुझे पूछा था। बोला कि “आप बुरा न माने तो एक सवाल पूछना चाहता हूं।“ मैंने कहा “क्या?” बोले.. “आपको बुरा नहीं लगेगा न?“ मैंने कहा “पूछ लो भई लगेगा तो लगेगा, तेरे मन में रहेगा तो मुझे बुरा लगेगा।“ फिर “नहीं नहीं..” वो बिचारा भागता रहा। मैंने फिर आग्रह किया “बैठो, बैठो। मुझे बताओ क्‍या हुआ है।“ तो उसने मुझे पूछा “साहब, मैं जानना चाहता हूं क्‍या हिंदुस्‍तान आज भी सांप-सपेरों का देश है क्‍या? जादू-टोना वालों का देश है क्‍या? काला जादू चलता है क्‍या हिंदुस्‍तान में?” बड़ा बिचारा डरते-डरते मुझे पूछ रहा था। मैंने कहा “नहीं यार अब वो जमाना चला गया। अब हम लोगों में वो दम नहीं है। हम अब सांप से नहीं खेल सकते। अब तो हमारा devaluation इतना हो गया कि हम Mouse से खेलते हैं।“ और हिंदुस्‍तान के नौजवान का Mouse आज Computer पर click कर करके दुनिया को डुला देता है। यह ताकत है हमारे में।

हमारे नौजवानों ने Computer पर करामात करके विश्‍व के एक अलग पहचान बनाई है। विश्‍व को भारत की तरफ देखने का नजरिया बदलना पड़ा है। उस सामर्थ्‍य के भरोसे हिंदुस्‍तान को भी हम आगे बढ़ाना चाहते हैं।

20.5 PM's at civic reception in Mauritius (1)

एक जमाना था। जब Marx की theory आती थी तो कहते थे “Haves and Have nots” उसकी theory चलती थी। वो कितनी कामगर हुई है, उस विचार का क्‍या हुआ वो सारी दुनिया जानती है मैं उसकी गहराई में नहीं जाना चाहता। लेकिन मैं एक बात कहना चाहता हूं आज दुनिया Digital Connectivity से जो वंचित है और जो Digital World से जुड़े हुए हैं, यह खाई अगर ज्‍यादा बढ़ गई, तो विकास के अंदर बहुत बड़ी रूकावट पैदा होने वाली है। इसलिए Digital Access गरीब से गरीब व्‍यक्ति तक होना आने वाले दिनों में विकास के लिए अनिवार्य होने वाला है। हर किसी के हाथ में मोबाइल फोन है।

हर किसी को दुनिया के साथ जुड़ने की उत्‍सुकता... मुझे याद है मैं जब गुजरात में मुख्‍यमंत्री था तो एक आदिवासी जंगल में एक तहसील है वहां मेरा जाना नहीं हुआ था। बहुत पिछड़ा हुआ इलाका था interior में था, लेकिन मेरा मन करता था कि ऐसा नहीं होना चाहिए मैं मुख्‍यमंत्री रहूं और यह एक इलाका छूट जाए, तो मैंने हमारे अधिकारियों से कहा कि भाई मुझे वहां जाना है जरा कार्यक्रम बनाइये। खैर बड़ी मुश्किल से कार्यक्रम बना अब वहां तो कोई ऐसा प्रोजेक्‍ट भी नहीं था क्‍या करे। कोई ऐसा मैदान भी नहीं था जहां जनसभा करे, तो एक Chilling Centre बना था। दूध रखने के लिए, जो दूध बेचने वाले लोग होते हैं वो Chilling Centre में दूध देते हैं, वहां Chilling Plant में Chilling होता है फिर बाद में बड़ा Vehicle आता है तो Dairy में ले जाता है। छोटा सा प्रोजेक्‍ट था 25 लाख रुपये का। लेकिन मेरा मन कर गया कि भले छोटा हो पर मुझे वहां जाना है। तो मैं गया और उससे तीन किलोमीटर दूर एक आम सभा के लिए मैदान रखा था, स्‍कूल का मैदान था, वहां सभा रखी गयी। लेकिन जब मैं वहां गया Chilling Centre पर तो 20-25 महिलाएं जो दूध देने वाली थी, वो वहां थी, तो मैंने जब उद्घाटन किया.. यह आदिवासी महिलाएं थी, पिछड़ा इलाका था। वे सभी मोबाइल से मेरी फोटो ले रही थी। अब मेरे लिए बड़ा अचरज था तो मैं कार्यक्रम के बाद उनके पास गया और मैंने उनसे पूछा कि “मेरी फोटो लेकर क्‍या करोगे?” उन्‍होंने जो जवाब दिया, वो जवाब मुझे आज भी प्रेरणा देता है। उन्‍होंने कहा कि “नहीं, नहीं यह तो जाकर के हम Download करवा देंगे।“ यानी वो पढ़े-लिखे लोग नहीं थे, वो आदिवासी थे, दूध बेचकर के अपनी रोजी-रोटी कमाते थे, लेकिन वहां की महिलाएं हाथ से मोबाइल से फोटो निकाल रही हैं, और मुझे समझा रही है कि हम Download करा देंगे। तब से मैंने देखा कि Technology किस प्रकार से मानवजात के जीवन का हिस्‍सा बनती चली जा रही है। अगर हमने विकास के Design बना लिये हैं तो उस Technology का महत्‍व हमें समझना होगा।

और भारत Digital India का सपना देख कर के चल रहा है। कभी हिंदुस्‍तान की पहचान यह बन जाती थी कोई भी यहां अगर किसी को कहोगे भारत... “अरे छोड़ो यार, भ्रष्‍टाचार है, छोड़ो यार रिश्‍वत का मामला है।“ ऐसा सुनते हैं न? अब सही करना है। अभी-अभी आपने सुना होगा, यह अखबार में बहुत कम आया है। वैसे बहुत सी अच्‍छी चीजें होती है जो अखबार टीवी में कम आती है। एक-आध कोन में कहीं आ जाती है। भारत में कोयले को लेकर के भ्रष्‍टाचार की बड़ी चर्चा हुई थी। CAG ने कहा था एक लाख 76 हजार करोड़ के corruption की बात हुई थी। हमारी सरकार आई और सुप्रीम कोर्ट ने 204 जो खदानें थी उसको रद्द कर दिया। कोयला निकालना ही पाबंदी लग गई। अब बिजली के कारखाने कैसे चलेंगे? हमारे लिए बहुत जरूरी था कि इस काम को आगे बढ़ाएं। हमने एक के बाद एक निर्णय लिए, तीने महीने के अंदर उसमें Auction करना शुरू कर दिया और 204 Coal Blocks खदानें जो ऐसे ही कागज पर चिट्ठी लिखकर के दे रही है यह मदन भाई को दे देना, यह मोहन भाई को दे देना या रज्‍जू भाई को... ऐसा ही दे दिया। तो सुप्रीम ने गलत किया था, हमने उसका Auction किया था। अब तक सिर्फ 20 का Auction हुआ है। 204 में से 20 का Auction हुआ है। और 20 के Auction में दो लाख करोड़ से ज्‍यादा रकम आई है।

Corruption जा सकता है या नहीं जा सकता है? Corruption जा सकता है या नहीं जा सकता है? अगर हम नीतियों के आधार पर देश चलाएं, पारदर्शिता के साथ चलाएं, तो हम भ्रष्‍टाचार से कोई भी व्‍यवस्‍था को बाहर निकाल सकते हैं और भ्रष्‍टाचार मुक्‍त व्‍यवस्‍थाओं को विकसित कर सकते हैं। हिंदुस्‍तान ने बीड़ा उठाया है, हम उस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

भारत विकास की नई ऊंचाईयों पर जा रहा है। भारत ने एक सपना देखा है “Make In India” हम दुनिया को कह रहे हैं कि आइये हिंदुस्‍तान में पूंजी लगाइये, हिंदुस्‍तान में Manufacturing कीजिए। भारत में आपको Low Cost Manufacturing होगा, Skilled Manpower मिलेगा। Zero loss का माहौल मिलेगा। Redtape की जगह Red Carpet मिलेगा। आइये और आप अपना नसीब आजमाइये और मैं देख रहा हूं आज दुनिया का भारत में बहुत रूचि लगने लगी। दुनिया के सारे देश जिनको पता है कि हां भारत एक जगह है, जहां पूंजी निवेश कर सकते हैं, वहां Manufacturing करेंगे और दुनिया के अंदर Export करेंगे।

बहुत बड़ी संभावनाओं के साथ देश विकास की ऊंचाईयों को पार कर रहा है। मुझे विश्‍वास है कि आप जो सपने देख रहे हो वो कहीं पर भी बैठे होंगे, लेकिन आप आज कहीं पर भी क्‍यों न हो, लेकिन कौन बेटा है जो मां को दुखी देखना चाहता है? सदियों पहले भले वो देश छोड़ा हो, लेकिन फिर भी आपके मन में रहता होगा कि “भारत मेरी मां है। मेरी मां कभी दुखी नहीं होनी चाहिए।“ यह आप भी चाहते होंगे। जो आप चाहते हो। आप यहां आगे बढि़ए, प्रगति कीजिए और आपने जो भारत मां की जिम्‍मेवारी हमें दी है, हम उसको पूरी तरह निभाएंगे ताकि कभी आपको यह चिंता न रहे कि आपकी भारत माता का हाल क्‍या है। यह मैं विश्‍वास दिलाने आया हूं।

20 PM Modi floral tribute at Gandhi Statue at Mahatama Gandhi institute of Mauritius (1)

मैं कल से यहां आया हूं, जो स्‍वागत सम्‍मान दिया है, जो प्‍यार मिला है इसके लिए मैं मॉरीशियस का बहुत आभारी हूं। यहां की सरकार का आभारी हूं, प्रधानमंत्री जी का आभारी हूं, आप सबका बहुत आभार हूं। और आपने जो स्‍वागत किया, जो सम्‍मान दिया इसके लिए मैं फिर एक बार धन्‍यवाद करता हूं। और आज 12 मार्च आपका National Day है, Independence Day है। और 12 मार्च 1930 महात्‍मा गांधी साबरमती आश्रम से चले थे, दांडी की यात्रा करने के लिए। और वो दांडी यात्रा कोई कल्‍पना नहीं कर सकता था कि नमक सत्‍याग्रह पूरी दुनिया के अंदर एक क्रांति ला सकता है। जिस 12 मार्च को दांडी यात्रा का प्रारंभ हुआ था उसी 12 मार्च को महात्‍मा गांधी से जुड़े हुए पर्व से मॉरिशियस की आजादी का पर्व है। मैं उस पर्व के लिए आपको बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं, बहुत बधाई देता हूं।

फिर एक बार आप सबका बहुत-बहुत धन्‍यवाद।

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Rozgar Mela reflects our Government’s commitment to empowering the Yuva Shakti with new opportunities: PM
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Sectors like clean energy, critical minerals, green hydrogen, and sustainable manufacturing are advancing rapidly and partnerships in these areas are creating new opportunities: PM Modi
Every Indian is moving forward with the resolve of building a Viksit Bharat by 2047: PM Modi at Rozgar Mela
Today, Rapid transformation is clearly visible even in rural areas; Enhanced connectivity has opened new avenues for farmers, small traders, and students: PM
Viksit Bharat will be built by the efforts of such youth who view their work as a means of national service: PM Modi

ಸ್ನೇಹಿತರೆ,

ದೇಶಾದ್ಯಂತ ಸಾವಿರಾರು ಯುವಕರಿಗೆ ಇಂದು ಬಹಳ ಮುಖ್ಯವಾದ ದಿನ. 51,000ಕ್ಕೂ ಹೆಚ್ಚಿನ ಯುವಕರು ಇಂದು ಸರ್ಕಾರಿ ಉದ್ಯೋಗಗಳಿಗೆ ನೇಮಕಾತಿ ಪತ್ರಗಳನ್ನು ಪಡೆದಿದ್ದಾರೆ. ನೀವು ದೇಶದ ಅಭಿವೃದ್ಧಿ ಪ್ರಯಾಣದಲ್ಲಿ ಪ್ರಮುಖ ಪಾಲುದಾರರಾಗುತ್ತಿದ್ದೀರಿ, ಅಂದರೆ ಜವಾಬ್ದಾರಿಯುತ ಪಾಲುದಾರರು. ರೈಲ್ವೆ, ಬ್ಯಾಂಕಿಂಗ್, ರಕ್ಷಣೆ, ಆರೋಗ್ಯ, ಶಿಕ್ಷಣ ಮತ್ತು ಇತರ ಹಲವು ಕ್ಷೇತ್ರಗಳಲ್ಲಿ ನೀವು ಹೊಸ ಜವಾಬ್ದಾರಿಗಳನ್ನು ವಹಿಸಿಕೊಳ್ಳಲಿದ್ದೀರಿ. ಮುಂಬರುವ ವರ್ಷಗಳಲ್ಲಿ, ಅಭಿವೃದ್ಧಿ ಹೊಂದಿದ ಭಾರತದ ಸಂಕಲ್ಪವನ್ನು ಪೂರೈಸುವಲ್ಲಿ ನೀವು ನಿರ್ಣಾಯಕ ಪಾತ್ರ ವಹಿಸುತ್ತೀರಿ.

ಸ್ನೇಹಿತರೆ,

ಈ ಹಂತವನ್ನು ತಲುಪಲು ನೀವು ದೀರ್ಘ ತಯಾರಿ ಮತ್ತು ಕಠಿಣ ಪರಿಶ್ರಮದ ಮೂಲಕ ಬಂದಿದ್ದೀರಿ. ಈ ಸಾಧನೆಗಾಗಿ ನಾನು ನಿಮಗೆ ಮತ್ತು ನಿಮ್ಮ ಕುಟುಂಬಗಳಿಗೆ ನನ್ನ ಹೃತ್ಪೂರ್ವಕ ಅಭಿನಂದನೆಗಳನ್ನು ಸಲ್ಲಿಸುತ್ತೇನೆ. ನಿಮ್ಮನ್ನು ಇಲ್ಲಿಗೆ ಕರೆತರುವಲ್ಲಿ ನಿಮ್ಮ ಪೋಷಕರು ಮತ್ತು ಕುಟುಂಬಗಳ ಕೊಡುಗೆ ಅಪಾರವಾಗಿದೆ. ನಾವು ಈ ಹಂತಕ್ಕೆ ತಲುಪಲು ಕುಟುಂಬ ಮತ್ತು ಸಮಾಜ ಮಾತ್ರವೇ ದೊಡ್ಡ ಪಾತ್ರವನ್ನು ವಹಿಸಿರುವುದಿಲ್ಲ. ನಾವು ಇಲ್ಲಿಗೆ ಬಂದಿರುವುದು ನಮ್ಮಿಂದಾಗಿ ಅಥವಾ ನಮ್ಮ ಕುಟುಂಬಗಳಿಂದಾಗಿ ಮಾತ್ರ ಅಲ್ಲ. ಈ ವಿಶಾಲ ರಾಷ್ಟ್ರದ 140 ಕೋಟಿ ನಾಗರಿಕರ ಕೊಡುಗೆಯೂ ಸಹ ಬಹಳ ಮಹತ್ವದ್ದಾಗಿದೆ. ಆದ್ದರಿಂದ, ನಮ್ಮ ಜವಾಬ್ದಾರಿ ನಮ್ಮ ಮತ್ತು ನಮ್ಮ ಕುಟುಂಬಗಳ ಕಡೆಗೆ ಮಾತ್ರವಲ್ಲ, ಇಡೀ ಸಮಾಜದ ಕಡೆಗೂ ಹೋಗಬೇಕು. ಈ ಎಲ್ಲಾ ಕೆಲಸಗಳಿಗೆ ನೀವು ಇನ್ನಷ್ಟು ಸಮರ್ಥರಾಗುತ್ತೀರಿ ಎಂಬ ವಿಶ್ವಾಸ ನನಗಿದೆ. ನಿಮಗೆಲ್ಲರಿಗೂ ಶುಭ ಹಾರೈಸುತ್ತೇನೆ.

 

ಸ್ನೇಹಿತರೆ,

ನಿಮಗೆಲ್ಲರಿಗೂ ತಿಳಿದಿದೆ, ನಾನು 5 ದೇಶಗಳಿಗೆ ಭೇಟಿ ನೀಡಿ ಹಿಂತಿರುಗಿದೆ. ಅದು ಕೇವಲ 5 ದೇಶಗಳಾಗಿದ್ದರೂ ಆ ಸಮಯದಲ್ಲಿ ನಾನು ಡಜನ್ ಗಟ್ಟಲೆ ರಾಷ್ಟ್ರಗಳ ಪ್ರಮುಖ ಕಂಪನಿಗಳ ನಾಯಕರೊಂದಿಗೆ ಚರ್ಚೆಗಳು ಮತ್ತು ಸಭೆಗಳನ್ನು ನಡೆಸಿದೆ. ಎಲ್ಲೆಡೆ ನನಗೆ ಒಂದು ವಿಷಯ ಸಾಮಾನ್ಯವೆನಿಸಿತು - ಭಾರತದ ಯುವಜನರು ಮತ್ತು ಭಾರತದ ತಾಂತ್ರಿಕ ಪ್ರಗತಿಯ ಬಗ್ಗೆ ಜಗತ್ತು ತುಂಬಾ ಉತ್ಸುಕವಾಗಿದೆ. ಇಂದು ಜಗತ್ತು ಭಾರತದ ಅಭಿವೃದ್ಧಿ ಪ್ರಯಾಣದ ಭಾಗವಾಗಲು ಬಯಸುತ್ತಿದೆ. ಭಾರತವೂ ವಿವಿಧ ದೇಶಗಳೊಂದಿಗೆ ಪಾಲುದಾರಿಕೆ ಹೊಂದಿದೆ. ಭಾರತದ ಯುವಕರಿಗೆ ಅವಕಾಶಗಳನ್ನು ಖಚಿತಪಡಿಸಿಕೊಳ್ಳುವುದು, ಉದ್ಯೋಗ ಒದಗಿಸುವುದು ಮತ್ತು ಅವರ ಸಾಮರ್ಥ್ಯವನ್ನು ಬೆಳಗಿಸುವುದು ಇದರ ಉದ್ದೇಶ. ನನ್ನ ದೇಶದ ಯುವಜನರು ಜಾಗತಿಕ ಮಾನ್ಯತೆಯನ್ನು ಪಡೆಯಬೇಕೆಂದು ನಾನು ಬಯಸುತ್ತೇನೆ. ಉದಾಹರಣೆಗೆ, ಈ ಪ್ರವಾಸ ಸಮಯದಲ್ಲಿ, ನೆದರ್ಲ್ಯಾಂಡ್ಸ್‌ನೊಂದಿಗೆ ನಾವು ಸೆಮಿಕಂಡಕ್ಟರ್ ಗಳು, ನೀರು, ಕೃಷಿ ಮತ್ತು ಮುಂದುವರಿದ ಉತ್ಪಾದನೆಯ ಬಗ್ಗೆ ಚರ್ಚಿಸಿದ್ದೇವೆ. ಸ್ವೀಡನ್‌ನೊಂದಿಗೆ ಕೃತಕ ಬುದ್ಧಿಮತ್ತೆ ಮತ್ತು ಡಿಜಿಟಲ್ ನಾವೀನ್ಯತೆಯಲ್ಲಿ ಸಹಕಾರ, ನಾರ್ವೆಯೊಂದಿಗೆ ಹಸಿರು ತಂತ್ರಜ್ಞಾನ ಮತ್ತು ಕಡಲ ಸಹಕಾರ, ಯುಎಇಯೊಂದಿಗೆ ಕಾರ್ಯತಂತ್ರ ಇಂಧನ ಮತ್ತು ತಂತ್ರಜ್ಞಾನ ಪಾಲುದಾರಿಕೆಗಳ ಕುರಿತು ಪ್ರಮುಖ ಒಪ್ಪಂದಗಳು ಮತ್ತು ಇಟಲಿಯೊಂದಿಗೆ ರಕ್ಷಣಾ, ನಿರ್ಣಾಯಕ ಖನಿಜಗಳು ಮತ್ತು ವಿಜ್ಞಾನ ಮತ್ತು ತಂತ್ರಜ್ಞಾನದಂತಹ ಮಹತ್ವದ ಕ್ಷೇತ್ರಗಳಲ್ಲಿ ಒಪ್ಪಂದಗಳು ಏರ್ಪಟ್ಟವು.

ಸ್ನೇಹಿತರೆ,

ಈ ಎಲ್ಲಾ ಒಪ್ಪಂದಗಳು ಭಾರತದ ಯುವಕರಿಗೆ ನೇರ ಪ್ರಯೋಜನ ನೀಡುತ್ತವೆ. ಈ ವಿಷಯಗಳು ಭಾರತಕ್ಕೆ ಉಜ್ವಲ ಮತ್ತು ಸಮರ್ಥ ಭವಿಷ್ಯದ ಭರವಸೆ ತರುತ್ತವೆ ಎಂಬುದನ್ನು ನೀವು ಗಮನಿಸಿರಬೇಕು. ಪ್ರತಿಯೊಂದು ಹೊಸ ಹೂಡಿಕೆ, ಪ್ರತಿಯೊಂದು ತಂತ್ರಜ್ಞಾನ ಪಾಲುದಾರಿಕೆ, ಪ್ರತಿಯೊಂದು ಕೈಗಾರಿಕಾ ಸಹಭಾಗಿತ್ವವು ಭಾರತದ ಯುವಕರಿಗೆ ಹೊಸ ಅವಕಾಶಗಳನ್ನು ತರುವುದಲ್ಲದೆ, ಲೆಕ್ಕವಿಲ್ಲದಷ್ಟು ಹೊಸ ಸಾಧ್ಯತೆಗಳನ್ನು ಸೃಷ್ಟಿಸುತ್ತದೆ.

ನನ್ನ ಯುವ ಸ್ನೇಹಿತರೆ,

ನಾವು ನೆನಪಿನಲ್ಲಿಟ್ಟುಕೊಳ್ಳಬೇಕು - ಮುಂಬರುವ ಹೂಡಿಕೆಗಳು ಮತ್ತು ಪಾಲುದಾರಿಕೆಗಳು ಮುಂದಿನ 3-4 ದಶಕಗಳವರೆಗೆ ಜಾಗತಿಕ ಬೆಳವಣಿಗೆಯನ್ನು ವ್ಯಾಖ್ಯಾನಿಸುವ ಕೈಗಾರಿಕೆಗಳನ್ನು ರೂಪಿಸುವ ಕ್ಷೇತ್ರಗಳು ಇವಾಗಿವೆ. ಖಂಡಿತವಾಗಿಯೂ, ಭಾರತದ ಯುವಕರು ಇದರಲ್ಲಿ ಬಹಳ ಮಹತ್ವದ ಪಾತ್ರ ವಹಿಸುತ್ತಾರೆ.

ಸ್ನೇಹಿತರೆ,

ಭಾರತವು ಜಗತ್ತಿಗೆ ವಿಶ್ವಾಸಾರ್ಹ ಪೂರೈಕೆ ಸರಪಳಿಯ ಪಾಲುದಾರನಾಗುತ್ತಿರುವುದು ಹೇಗೆ ಎಂಬುದಕ್ಕೆ ನಾನು ನಿಮಗೆ ಒಂದು ಉದಾಹರಣೆ ನೀಡುತ್ತೇನೆ. ನಿಮ್ಮಲ್ಲಿ ಹಲವರು ಡಚ್ ಸೆಮಿಕಂಡಕ್ಟರ್ ಕಂಪನಿ ಎಎಸ್‌ಎಂಎಲ್ ಬಗ್ಗೆ ಪರಿಚಿತರಾಗಿದ್ದೀರಿ. ಎಎಸ್‌ಎಂಎಲ್ ಭಾರತದ ಟಾಟಾ ಕಂಪನಿಯೊಂದಿಗೆ ಒಪ್ಪಂದಕ್ಕೆ ಸಹಿ ಹಾಕಿದೆ. ಈ ಕಂಪನಿಯು ಅಂತಹ ಒಪ್ಪಂದವನ್ನು ಮಾಡಿಕೊಂಡಿರುವ ವಿಶ್ವದ ಕೆಲವೇ ದೇಶಗಳಲ್ಲಿ ಭಾರತವೂ ಒಂದು. ಎಎಸ್‌ಎಂಎಲ್ ಮತ್ತು ಟಾಟಾ ಎಲೆಕ್ಟ್ರಾನಿಕ್ಸ್ ನಡುವಿನ ಈ ಏಕೈಕ ಒಪ್ಪಂದವು ಭಾರತದಲ್ಲಿ ಲೆಕ್ಕವಿಲ್ಲದಷ್ಟು ಹೊಸ ಉದ್ಯೋಗಾವಕಾಶಗಳನ್ನು ಸೃಷ್ಟಿಸುತ್ತದೆ, ಮುಂದಿನ ಪೀಳಿಗೆಯ ತಂತ್ರಜ್ಞಾನಕ್ಕೆ ದ್ವಾರವನ್ನು ತೆರೆಯುತ್ತದೆ. ಅದೇ ರೀತಿ, ಸ್ವೀಡನ್‌ನೊಂದಿಗೆ ತಂತ್ರಜ್ಞಾನ ಮತ್ತು ಎಐ ಪಾಲುದಾರಿಕೆಗಳು, ಯುಎಇಯೊಂದಿಗೆ ಸೂಪರ್‌ಕಂಪ್ಯೂಟಿಂಗ್ ಸಹಕಾರ - ಇವು ಭಾರತದ ತಾಂತ್ರಿಕ ಸಾಮರ್ಥ್ಯವನ್ನು ಹೆಚ್ಚು ಬಲಪಡಿಸುತ್ತದೆ. ಈ ಒಪ್ಪಂದಗಳು ನಮ್ಮ ಯುವಕರಿಗೆ ಹೊಸ ಅವಕಾಶಗಳನ್ನು ಖಂಡಿತವಾಗಿ ಸೃಷ್ಟಿಸುತ್ತವೆ.

 

ಸ್ನೇಹಿತರೆ,

ಇಂದು ಸ್ವಚ್ಛ ಇಂಧನ, ನಿರ್ಣಾಯಕ ಖನಿಜಗಳು, ಹಸಿರು ಹೈಡ್ರೋಜನ್ ಮತ್ತು ಸುಸ್ಥಿರ ಉತ್ಪಾದನೆಗೆ ಸಂಬಂಧಿಸಿದ ವಲಯಗಳು ವೇಗವಾಗಿ ಬೆಳೆಯುತ್ತಿವೆ. ಈ ಕ್ಷೇತ್ರಗಳಲ್ಲಿನ ಪಾಲುದಾರಿಕೆಗಳು ಹೊಸ ಆರ್ಥಿಕತೆ ಮತ್ತು ಹೊಸ ಅವಕಾಶಗಳಿಗೆ ಬಾಗಿಲು ತೆರೆಯುತ್ತಿವೆ. ಸ್ವೀಡನ್, ನಾರ್ವೆ ಮತ್ತು ಇಟಲಿಯಂತಹ ದೇಶಗಳೊಂದಿಗೆ ಹಸಿರು ಪರಿವರ್ತನೆ ಮತ್ತು ಸುಸ್ಥಿರ ತಂತ್ರಜ್ಞಾನದಲ್ಲಿ ಸಹಕಾರ ಹೆಚ್ಚುತ್ತಿದೆ. ಇದು ಸ್ವಚ್ಛ ಉತ್ಪಾದನೆಗೆ ಸಂಬಂಧಿಸಿದ ಭವಿಷ್ಯದ ಕೈಗಾರಿಕೆಗಳಲ್ಲಿ ಭಾರತವನ್ನು ಬಲಪಡಿಸುತ್ತದೆ. ಇದರ ಜೊತೆಗೆ ಭಾರತವು ಬಂದರುಗಳು, ಸಾಗಣೆ ಮತ್ತು ಕಡಲ ಮೂಲಸೌಕರ್ಯಕ್ಕೆ ಸಂಬಂಧಿಸಿದ ಒಪ್ಪಂದಗಳ ಮೇಲೆ ವೇಗವಾಗಿ ಕೆಲಸ ಮಾಡುತ್ತಿದೆ. ಯುಎಇ ಮತ್ತು ನಾರ್ವೆಯೊಂದಿಗಿನ ಪಾಲುದಾರಿಕೆಗಳು ಭಾರತದ ಹಡಗು ನಿರ್ಮಾಣ ಪರಿಸರ ವ್ಯವಸ್ಥೆಯನ್ನು ಬಲಪಡಿಸುತ್ತದೆ. ಹಡಗು ನಿರ್ಮಾಣಕ್ಕೆ ಹೆಚ್ಚಿನ ಪ್ರಮಾಣದ ಕೌಶಲ್ಯಪೂರ್ಣ ಮಾನವಶಕ್ತಿಯ ಅಗತ್ಯವಿದೆ ಎಂಬುದು ನಿಮಗೆ ಚೆನ್ನಾಗಿ ತಿಳಿದಿದೆ. ಇದರರ್ಥ ಭಾರತದ ಎಂಜಿನಿಯರ್‌ಗಳು, ತಂತ್ರಜ್ಞರು ಮತ್ತು ಕೌಶಲ್ಯಪೂರ್ಣ ಕೆಲಸಗಾರರ ಬೇಡಿಕೆಯು ನೀವು ಊಹಿಸಲೂ ಸಾಧ್ಯವಾಗದ ಮಟ್ಟಕ್ಕೆ ಏರುತ್ತದೆ, ಇದು ವಿಶಾಲ ಅವಕಾಶಗಳನ್ನು ಸೃಷ್ಟಿಸುತ್ತದೆ.

ಸ್ನೇಹಿತರೆ,

ಪ್ರತಿ ಹೊಸ ಪಾಲುದಾರಿಕೆಯೊಂದಿಗೆ ಭಾರತೀಯ ನವೋದ್ಯಮಗಳು, ಸಂಶೋಧಕರು ಮತ್ತು ಯುವ ವೃತ್ತಿಪರರು ಪ್ರಪಂಚದೊಂದಿಗೆ ಸಂಪರ್ಕ ಸಾಧಿಸಲು ನಾವು ಹೊಸ ಮಾರ್ಗಗಳನ್ನು ರೂಪಿಸುತ್ತಿದ್ದೇವೆ. ಇದು ಭಾರತೀಯ ಯುವಜನರಿಗೆ ಸುಧಾರಿತ ಪರಿಣತಿ, ಜಾಗತಿಕ ಮಾರುಕಟ್ಟೆಗಳು ಮತ್ತು ಬೆಳವಣಿಗೆಗೆ ಹೊಸ ಅವಕಾಶಗಳಿಗೆ ಪ್ರವೇಶ ನೀಡುತ್ತದೆ. ಇಂದು ನಾವೀನ್ಯತೆ ನೀಡುವ, ನಿರ್ಮಿಸುವ ಮತ್ತು ಹೆಚ್ಚಿನ ಪ್ರಮಾಣದಲ್ಲಿ ತಲುಪಿಸಬಲ್ಲ ದೇಶಗಳನ್ನು ಜಗತ್ತು ಗೌರವಿಸುತ್ತದೆ. ಭಾರತವು 3 ದಿಕ್ಕುಗಳಲ್ಲಿಯೂ ವೇಗವಾಗಿ ಮುಂದುವರಿಯುತ್ತಿದೆ. ಈ ರೂಪಾಂತರದ ಹಿಂದಿನ ದೊಡ್ಡ ಶಕ್ತಿ ನೀವಾಗಿದ್ದೀರಿ - ನನ್ನ ಯುವ ಜನರು. ನಾನು ಜಗತ್ತಿನ ಎಲ್ಲೇ ಹೋದರೂ, ಭಾರತದ ಯುವ ಶಕ್ತಿಯ ಬಗ್ಗೆ ಚರ್ಚಿಸಲು ನಾನು ಸಾಕಷ್ಟು ಸಮಯ ತೆಗೆದುಕೊಳ್ಳುತ್ತೇನೆ.

ಸ್ನೇಹಿತರೆ,

ಇಂದು ಪ್ರತಿಯೊಬ್ಬ ಭಾರತೀಯನು 2047ರ ವೇಳೆಗೆ ಅಭಿವೃದ್ಧಿ ಹೊಂದಿದ ಭಾರತ ನಿರ್ಮಿಸುವ ಸಂಕಲ್ಪದೊಂದಿಗೆ ಮುಂದುವರಿಯುತ್ತಿದ್ದಾನೆ. ಈ ಗುರಿ ಸಾಧಿಸಲು ದೇಶವು ವಿವಿಧ ಕ್ಷೇತ್ರಗಳಲ್ಲಿ ಹೂಡಿಕೆ ಮಾಡುತ್ತಿದೆ. ಈ ಹೂಡಿಕೆಯು ಯುವಕರಿಗೆ ಲಕ್ಷಾಂತರ ಹೊಸ ಉದ್ಯೋಗಾವಕಾಶಗಳನ್ನು ಸೃಷ್ಟಿಸುತ್ತಿದೆ. ಉದಾಹರಣೆಗೆ, ಭಾರತವು ಸೆಮಿಕಂಡಕ್ಟರ್  ಉತ್ಪಾದನೆಗಾಗಿ ಸಂಪೂರ್ಣ ಪೂರೈಕೆ ಸರಪಳಿ ನಿರ್ಮಿಸುತ್ತಿದೆ. ಮುಂಬರುವ ವರ್ಷಗಳಲ್ಲಿ ಭಾರತದ 10 ಪ್ರಮುಖ ಸೆಮಿಕಂಡಕ್ಟರ್ ಘಟಕಗಳು ಜಾಗತಿಕವಾಗಿ ತಮ್ಮ ಛಾಪು ಮೂಡಿಸುತ್ತವೆ. ಇವು ಭಾರತದ ಯುವಕರ ಸಾಮರ್ಥ್ಯ, ಬುದ್ಧಿಶಕ್ತಿ ಮತ್ತು ಬದ್ಧತೆಯಿಂದ ನಡೆಸಲ್ಪಡುತ್ತವೆ, ಸ್ವಾಭಾವಿಕವಾಗಿ ಅವು ಉದ್ಯೋಗಗಳನ್ನು ಸೃಷ್ಟಿಸುತ್ತವೆ. ಭಾರತವು ಹಡಗು ನಿರ್ಮಾಣ, ಹಡಗು ದುರಸ್ತಿ ಮತ್ತು ಕೂಲಂಕುಷ ಪರೀಕ್ಷೆಯ ಪರಿಸರ ವ್ಯವಸ್ಥೆಯನ್ನು ಸಹ ಅಭಿವೃದ್ಧಿಪಡಿಸುತ್ತಿದೆ. ಇದಕ್ಕಾಗಿ ಸುಮಾರು 75,000 ಕೋಟಿ ರೂಪಾಯಿ ಹೂಡಿಕೆ ಮಾಡಲಾಗುತ್ತಿದೆ. ಅದೇ ರೀತಿ, ನಾವು ಭಾರತದೊಳಗೆ ಸಂಪೂರ್ಣ ಎಂಆರ್ ಒ ಪರಿಸರ ವ್ಯವಸ್ಥೆ - ನಿರ್ವಹಣೆ, ಕೂಲಂಕುಷ ಪರೀಕ್ಷೆ ಮತ್ತು ದುರಸ್ತಿ ಸೌಲಭ್ಯಗಳನ್ನು ನಿರ್ಮಿಸುತ್ತಿದ್ದೇವೆ. ಇದು ವಾಯುಯಾನ ವಲಯವನ್ನು ಹೆಚ್ಚು ಬೆಂಬಲಿಸುತ್ತದೆ ಮತ್ತು ಭಾರತದ ಯುವಕರಿಗೆ ಹೊಸ ಉದ್ಯೋಗ ವಲಯವನ್ನು ತೆರೆಯುತ್ತದೆ.

ಸ್ನೇಹಿತರೆ,

ಇಂದು ಭಾರತವು ಪ್ರಮುಖ ಎಲೆಕ್ಟ್ರಾನಿಕ್ಸ್ ತಯಾರಕ ರಾಷ್ಟ್ರವಾಗಿದೆ. ನಾವು ಭಾರತದೊಳಗೆ ಎಲೆಕ್ಟ್ರಾನಿಕ್ಸ್‌ನ ಸಂಪೂರ್ಣ ಮೌಲ್ಯ ಸರಪಳಿಯನ್ನು ನಿರ್ಮಿಸುತ್ತಿದ್ದೇವೆ. ಪಿಎಲ್ಐ ಯೋಜನೆಯ ಮೂಲಕ, ದೇಶದಲ್ಲಿ ಎಲೆಕ್ಟ್ರಾನಿಕ್ಸ್‌ ದಾಖಲೆಯ ಉತ್ಪಾದನೆ ನಡೆಯುತ್ತಿದೆ, ಯುವಕರಿಗೆ ಲಕ್ಷಾಂತರ ಉದ್ಯೋಗಗಳು ಸೃಷ್ಟಿಯಾಗುತ್ತಿವೆ.

 

ಸ್ನೇಹಿತರೆ,

ಇಂತಹ ಅನೇಕ ಅಭಿಯಾನಗಳಲ್ಲಿ ಭಾರತದ ಸಾರ್ವಜನಿಕ ಮತ್ತು ಖಾಸಗಿ ವಲಯಗಳು ಒಟ್ಟಾಗಿ ಬೃಹತ್ ಹೂಡಿಕೆಗಳನ್ನು ಮಾಡುತ್ತಿವೆ. ಈ ಹೂಡಿಕೆಗಳು ದೇಶದ ಯುವಕರಿಗೆ ಉದ್ಯೋಗಗಳನ್ನು ನೀಡುತ್ತಿವೆ, ಅವರ ಕನಸುಗಳನ್ನು ನನಸಾಗಿಸುತ್ತಿವೆ. ಸರ್ಕಾರಿ ಉದ್ಯೋಗಿಗಳಾಗಿ - ನಿಮ್ಮ ನೇಮಕಾತಿ ಪತ್ರಗಳನ್ನು ಸ್ವೀಕರಿಸಿದ ನಂತರ ನೀವು ಅದನ್ನು ಈಗ ಕೊಂಡೊಯ್ಯುವ ಗುರುತಾಗಿ - ದೇಶಕ್ಕೆ ವ್ಯವಹಾರ ಮಾಡುವ ಸುಲಭತೆ ಎಷ್ಟು ಮುಖ್ಯ ಎಂಬುದನ್ನು ನೀವು ಯಾವಾಗಲೂ ನೆನಪಿನಲ್ಲಿಡಬೇಕು.

ಸ್ನೇಹಿತರೆ,

ಭಾರತದ ಬೆಳವಣಿಗೆಯ ಯಶೋಗಾಥೆ ಮತ್ತು ಉದ್ಯೋಗ ಸೃಷ್ಟಿ - ಎರಡೂ ನಿಮಗೆ ಚೆನ್ನಾಗಿ ತಿಳಿದಿದೆ. ಇದರಲ್ಲಿ ಮೂಲಸೌಕರ್ಯವು ದೊಡ್ಡ ಪಾತ್ರ ವಹಿಸುತ್ತದೆ. ಹಳ್ಳಿಗಳು, ಸಣ್ಣ ಪಟ್ಟಣಗಳು ​​ಮತ್ತು ದೂರದ ಪ್ರದೇಶಗಳು ಅಭಿವೃದ್ಧಿಯೊಂದಿಗೆ ಸಂಪರ್ಕ ಹೊಂದಿದಾಗ, ಪ್ರಗತಿಯ ಪ್ರಯೋಜನಗಳು ಹೆಚ್ಚಿನ ಜನರನ್ನು ತಲುಪುತ್ತವೆ. ಕಳೆದ 12 ವರ್ಷಗಳಲ್ಲಿ ರೈಲ್ವೆ, ಹೆದ್ದಾರಿಗಳು, ವಿಮಾನ ನಿಲ್ದಾಣಗಳು, ಸರಕು ಸಾಗಣೆಗಳು, ಬಂದರುಗಳು ಮತ್ತು ಡಿಜಿಟಲ್ ಮೂಲಸೌಕರ್ಯಗಳಲ್ಲಿ ಅಭೂತಪೂರ್ವ ವಿಸ್ತರಣೆ ಕಂಡುಬಂದಿದೆ. ಪ್ರತಿಯೊಂದು ಹಂತದಲ್ಲೂ ಅಭಿವೃದ್ಧಿ ನಡೆದಿದೆ. ಇಂದು ನೀವು ಯಾವುದೇ ದಿಕ್ಕಿನಲ್ಲಿ 100 ಕಿಲೋಮೀಟರ್ ಪ್ರಯಾಣಿಸಿದರೆ, ಭಾರತ ಸರ್ಕಾರದ ಕೆಲವು ಯೋಜನೆಗಳು ನಡೆಯುತ್ತಿರುವುದನ್ನು ನೀವು ನೋಡುತ್ತೀರಿ. ಹಳ್ಳಿಗಳು ಸಹ ತ್ವರಿತ ಬದಲಾವಣೆಗೆ ಸಾಕ್ಷಿಯಾಗುತ್ತಿವೆ. ಸುಧಾರಿತ ಸಂಪರ್ಕದೊಂದಿಗೆ ರೈತರು, ಸಣ್ಣ ವ್ಯಾಪಾರಿಗಳು ಮತ್ತು ವಿದ್ಯಾರ್ಥಿಗಳಿಗೆ ಹೊಸ ಮಾರ್ಗಗಳು ತೆರೆದಿವೆ. ಇಂದು ಲಕ್ಷಾಂತರ ಕುಟುಂಬಗಳು ಪಕ್ಕಾ ಮನೆಗಳನ್ನು ಪಡೆದಿವೆ. ವಾಸ್ತವವಾಗಿ, ನಾವು ನಿರ್ಮಿಸುತ್ತಿರುವ ಮನೆಗಳ ಸಂಖ್ಯೆ ಅನೇಕ ದೇಶಗಳ ಒಟ್ಟು ವಸತಿ ದಾಸ್ತಾನುಗಳನ್ನು ಮೀರಿದೆ. ಅಷ್ಟೇ ಅಲ್ಲ, ನನ್ನ ಸ್ವಚ್ಛ ಭಾರತ ಅಭಿಯಾನವನ್ನು ಜನರು ಮರೆಯಲು ನಾನು ಎಂದಿಗೂ ಬಿಡುವುದಿಲ್ಲ, ನಾನೂ ಸಹ ಅದನ್ನು ಮರೆಯುವುದಿಲ್ಲ - ಅಲ್ಲಿ ಶೌಚಾಲಯಗಳು ಬಹಳ ಮುಖ್ಯವಾದ ಪಾತ್ರ ವಹಿಸುತ್ತವೆ ಎಂದು ನಾವು ಅದನ್ನು ಒತ್ತಿ ಹೇಳುತ್ತಿದ್ದೇವೆ. ವಿದ್ಯುತ್ ಲಕ್ಷಾಂತರ ಮನೆಗಳನ್ನು ತಲುಪಿದೆ. ಮೇಲ್ಛಾವಣಿಯ ಸೌರಶಕ್ತಿಯು ಅನೇಕ ಹೊಸ ಮಾರಾಟಗಾರರನ್ನು ಕ್ಷೇತ್ರಕ್ಕೆ ತಂದಿದೆ. ಜಲ ಜೀವನ್ ಮಿಷನ್‌ನೊಂದಿಗೆ ನಲ್ಲಿ ನೀರು ಮನೆಗಳನ್ನು ತಲುಪುತ್ತಿದೆ. ನಗರಗಳಲ್ಲಿ ಪಿಎನ್ ಜಿ ಸಂಪರ್ಕಗಳನ್ನು ವಿಸ್ತರಿಸಲು ಬಯಸಿದಾಗ, ಜನರು ಪ್ಲಂಬರ್‌ಗಳ ಕೊರತೆ ಎದುರಿಸಿದ್ದನ್ನು ನಾನು ಇತ್ತೀಚೆಗೆ ಗಮನಿಸುತ್ತಿದ್ದೆ - ಏಕೆಂದರೆ ಅನೇಕ ಪ್ಲಂಬರ್‌ಗಳು ಈಗಾಗಲೇ ಜಲ ಜೀವನ್ ಮಿಷನ್‌ನಲ್ಲಿ ತೊಡಗಿಸಿಕೊಂಡಿದ್ದರು. ಕೆಲವೊಮ್ಮೆ ಕೌಶಲ್ಯಪೂರ್ಣ ಜನರ ಬೇಡಿಯುಕೆ ಪೂರೈಕೆಯನ್ನು ಮೀರುತ್ತದೆ, ಅವಕಾಶಗಳು ಎಷ್ಟು ವೇಗವಾಗಿ ಬೆಳೆಯುತ್ತಿವೆ ಎಂಬುದನ್ನು ಇದು ತೋರಿಸುತ್ತದೆ.

ಸ್ನೇಹಿತರೆ,

ಈ ಎಲ್ಲಾ ಬದಲಾವಣೆಗಳ ಪರಿಣಾಮವು ಸಾಮಾನ್ಯ ನಾಗರಿಕರ ಅನುಕೂಲಕ್ಕೆ ಸೀಮಿತವಾಗಿಲ್ಲ. ರಸ್ತೆಗಳು ಹಳ್ಳಿಗಳನ್ನು ತಲುಪಿದಾಗ, ಮಾರುಕಟ್ಟೆಗಳಿಗೆ ಪ್ರವೇಶ ಸುಲಭವಾಗುತ್ತದೆ. ಸುಧಾರಿತ ವಿದ್ಯುತ್ ಸೌಲಭ್ಯಗಳೊಂದಿಗೆ ಸಣ್ಣ ಕೈಗಾರಿಕೆಗಳು ಮತ್ತು ವ್ಯವಹಾರಗಳು ಬೆಳೆಯಲು ಪ್ರಾರಂಭಿಸುತ್ತವೆ. ಹಳ್ಳಿಗಳಲ್ಲೂ ಕೃಷಿ ಮೌಲ್ಯವರ್ಧನೆ ಕಾಣಲು ಪ್ರಾರಂಭಿಸುತ್ತದೆ. ಮೊದಲು ಅವರು ಕೆಂಪು ಮೆಣಸಿನಕಾಯಿಗಳನ್ನು ಮಾರಾಟ ಮಾಡುತ್ತಿದ್ದರು, ಈಗ ವಿದ್ಯುತ್‌ ಬಳಸಿ ಅವರು ಮೆಣಸಿನ ಪುಡಿ ಉತ್ಪಾದಿಸುತ್ತಾರೆ, ಅದನ್ನು ಪ್ಯಾಕ್ ಮಾಡುತ್ತಾರೆ ಮತ್ತು ಮಾರಾಟ ಮಾಡುತ್ತಾರೆ. ಹೀಗಾಗಿ, ಹಳ್ಳಿಗಳಲ್ಲಿನ ಗುಡಿ ಕೈಗಾರಿಕೆಗಳು ವಿಸ್ತರಿಸುತ್ತಲೇ ಇರುತ್ತವೆ. ಹೆಚ್ಚಿದ ಡಿಜಿಟಲ್ ಸಂಪರ್ಕದೊಂದಿಗೆ, ಗ್ರಾಮಸ್ಥರು ಇಡೀ ವಿಶ್ವದೊಂದಿಗೆ ಸಂಪರ್ಕ ಸಾಧಿಸುತ್ತಿದ್ದಾರೆ, ಆಧುನಿಕತೆ ಅಳವಡಿಸಿಕೊಳ್ಳುತ್ತಿದ್ದಾರೆ. ನಗರಗಳು ಮತ್ತು ಹಳ್ಳಿಗಳ ನಡುವಿನ ವ್ಯತ್ಯಾಸ ಕ್ರಮೇಣ ಕಣ್ಮರೆಯಾಗುತ್ತಿದೆ. ಇದು ಆರ್ಥಿಕತೆಯ ವೇಗ ಹೆಚ್ಚಿಸಿದೆ. ಇದೆಲ್ಲವೂ ದೇಶದ ಯುವಕರಿಗೆ ಉಜ್ವಲ ಭವಿಷ್ಯ ಖಾತರಿಪಡಿಸುವ ಸಕಾರಾತ್ಮಕ ಪರಿಣಾಮ ಬೀರುತ್ತದೆ. ಉದ್ಯೋಗಗಳು ಸೃಷ್ಟಿಯಾಗುತ್ತವೆ, ಆದರೆ ಅದನ್ನು ಮೀರಿ ರಾಷ್ಟ್ರವು ಹೊಸ ಸ್ವಾಭಿಮಾನದೊಂದಿಗೆ ಮುಂದುವರಿಯುತ್ತದೆ, ಲಕ್ಷಾಂತರ ಜನರು ಹೊಸ ಅವಕಾಶಗಳನ್ನು ಪಡೆಯುತ್ತಾರೆ.

 

ಸ್ನೇಹಿತರೆ,

ಇಂದು ಭಾರತದ ಯುವಕರು ಹಿಂದೆಂದಿಗಿಂತಲೂ ಹೆಚ್ಚಾಗಿ ಮುಂದುವರಿಯಲು ಮತ್ತು ತಮ್ಮ ಕನಸುಗಳನ್ನು ನನಸಾಗಿಸಲು ಅವಕಾಶಗಳನ್ನು ಹೊಂದಿದ್ದಾರೆ. ನಾನು ಯಾರನ್ನೂ ದೂಷಿಸುತ್ತಿಲ್ಲ. ವಾಸ್ತವವೆಂದರೆ ಎಲ್ಲವೂ ಬಹಳ ವೇಗದಲ್ಲಿ, ವಿಶಾಲ ಪ್ರಮಾಣದಲ್ಲಿ ಮತ್ತು ಅಪಾರ ವೈವಿಧ್ಯತೆಯೊಂದಿಗೆ ನಡೆಯುತ್ತಿದೆ. ಉತ್ಪಾದನೆ, ತಂತ್ರಜ್ಞಾನ, ನವೋದ್ಯಮಗಳು, ಡಿಜಿಟಲ್ ಸೇವೆಗಳು, ರೈಲ್ವೆಗಳು, ರಕ್ಷಣೆ ಮತ್ತು ಬಾಹ್ಯಾಕಾಶ - ಈ ವಲಯಗಳಲ್ಲಿ ಲೆಕ್ಕವಿಲ್ಲದಷ್ಟು ಅವಕಾಶಗಳು ನಮಗಾಗಿ ಕಾಯುತ್ತಿವೆ. ಸಾಧ್ಯವಾದಷ್ಟು ಯುವಜನರು ಈ ಅವಕಾಶಗಳಿಂದ ಪ್ರಯೋಜನ ಪಡೆಯಬಹುದು. ದೇಶದ ಯುವಕರು ತಮ್ಮ ಪ್ರತಿಭೆಯನ್ನು ಪ್ರದರ್ಶಿಸಲು ಪ್ರತಿಯೊಂದು ಅವಕಾಶವನ್ನು ಪಡೆಯುತ್ತಾರೆ ಎಂದು ಖಚಿತಪಡಿಸಿಕೊಳ್ಳುವುದು ನಮ್ಮ ಪ್ರಯತ್ನವಾಗಿದೆ. ಅದಕ್ಕಾಗಿಯೇ ಕೌಶಲ್ಯ ಅಭಿವೃದ್ಧಿ, ಉದ್ಯಮ-ಸಂಬಂಧಿತ ಶಿಕ್ಷಣ ಮತ್ತು ಭವಿಷ್ಯದ ತಂತ್ರಜ್ಞಾನಗಳ ಮೇಲೆ ನಿರಂತರ ಒತ್ತು ನೀಡಲಾಗುತ್ತಿದೆ. ಐಟಿಐಗಳನ್ನು ಆಧುನೀಕರಿಸಲಾಗುತ್ತಿದೆ. ರಾಷ್ಟ್ರೀಯ ಕೌಶಲ್ಯ ತರಬೇತಿ ಸಂಸ್ಥೆಗಳನ್ನು ಬಲಪಡಿಸಲಾಗುತ್ತಿದೆ. ಪಿಎಂ ಸೇತುನಂತಹ ಅಭಿಯಾನಗಳು ಈ ದಿಕ್ಕಿನಲ್ಲಿ ಕಾರ್ಯ ನಿರ್ವಹಿಸುತ್ತಿವೆ.

ಸ್ನೇಹಿತರೆ,

ಇತ್ತೀಚಿನ ವರ್ಷಗಳಲ್ಲಿ ದೇಶದಲ್ಲಿ ಸ್ವ-ಉದ್ಯೋಗ ಮತ್ತು ಉದ್ಯಮಶೀಲತೆಯ ಹೊಸ ಸಂಸ್ಕೃತಿ ಅಭಿವೃದ್ಧಿಗೊಂಡಿದೆ. ಭಾರತವು ವಿಶ್ವದ 3ನೇ ಅತಿದೊಡ್ಡ ನವೋದ್ಯಮ ಪರಿಸರ ವ್ಯವಸ್ಥೆಯಾಗಿದೆ. ಈ ಅಂಕಿಅಂಶವನ್ನು ನೆನಪಿಡಿ - ದೇಶದಲ್ಲಿ 2,30,000ಕ್ಕೂ ಹೆಚ್ಚು ಮಾನ್ಯತೆ ಪಡೆದ ನವೋದ್ಯಮಗಳಿವೆ. ಅವುಗಳಲ್ಲಿ ಪ್ರತಿಯೊಂದೂ ಯುವಜನರ ಗುಂಪುಗಳನ್ನು ಒಳಗೊಂಡಿದೆ. ಮುಖ್ಯವಾದ ಅಂಶವೆಂದರೆ, ಈ ಬದಲಾವಣೆ ಕೇವಲ ದೊಡ್ಡ ನಗರಗಳಿಗೆ ಮಾತ್ರ ಸೀಮಿತವಾಗಿಲ್ಲ ಎಂಬುದೇ ನನಗೆ ಅತ್ಯಂತ ತೃಪ್ತಿ ನೀಡುತ್ತದೆ. ಇತ್ತೀಚಿನ ದಿನಗಳಲ್ಲಿ 2 ಮತ್ತು 3ನೇ ಶ್ರೇಣಿಯ ನಗರಗಳ ಯುವಕರು ಸಹ ಹೆಚ್ಚಿನ ಸಂಖ್ಯೆಯಲ್ಲಿ ಸ್ಟಾರ್ಟಪ್‌ಗಳು ಮತ್ತು ನಾವೀನ್ಯತೆಯ ಜಗತ್ತಿನಲ್ಲಿ ತಮ್ಮ ಶಕ್ತಿ ತೋರಿಸುತ್ತಿದ್ದಾರೆ. ಅವರ ಸಾಮರ್ಥ್ಯಗಳನ್ನು ಗುರುತಿಸಲಾಗುತ್ತಿದೆ. ಈ ರೂಪಾಂತರವು ದೇಶದ ಆರ್ಥಿಕತೆಯ ಪ್ರಮುಖ ಭಾಗವಾಗಿದೆ. ಈ ಬದಲಾವಣೆಯಲ್ಲಿ ನಮ್ಮ ಮಹಿಳಾ ಶಕ್ತಿಯ ಪಾತ್ರವೂ ನಿರಂತರವಾಗಿ ಹೆಚ್ಚುತ್ತಿದೆ. ಇಂದು ಹೆಚ್ಚಿನ ಸಂಖ್ಯೆಯ ಮಹಿಳಾ ನೇತೃತ್ವದ ಸ್ಟಾರ್ಟಪ್‌ಗಳು ನಮಗೆ ಹೆಮ್ಮೆ ತುಂಬುತ್ತಿವೆ. ಭಾರತದಲ್ಲಿ ಮಹಿಳೆಯರು ಸ್ಟಾರ್ಟಪ್‌ಗಳಲ್ಲಿ ಪ್ರಮುಖ ಪಾತ್ರ ವಹಿಸುತ್ತಿದ್ದಾರೆ, ಅನೇಕರು ಹೆಚ್ಚಿನ ಸಂಖ್ಯೆಯಲ್ಲಿ ಮುಂದೆ ಬರುತ್ತಿದ್ದಾರೆ ಎಂದು ನಾನು ವಿಶ್ವಾದ್ಯಂತದ ಜನರಿಗೆ ಹೇಳುತ್ತೇನೆ. ಮುದ್ರಾ ಯೋಜನೆಯಡಿ, ಲಕ್ಷಾಂತರ ಮಹಿಳೆಯರು ಆರ್ಥಿಕ ಬೆಂಬಲ ಪಡೆದಿದ್ದಾರೆ. ಪಿಎಂ ಸ್ವನಿಧಿಯಂತಹ ಯೋಜನೆಗಳು ಲಕ್ಷಾಂತರ ಮಹಿಳೆಯರಿಗೆ ಸ್ವಾವಲಂಬಿಗಳಾಗಲು ಅವಕಾಶ ನೀಡಿವೆ. ಇಂದು ಹಳ್ಳಿಗಳು ಮತ್ತು ಸಣ್ಣ ಪಟ್ಟಣಗಳಲ್ಲಿ ಹಿಂದೆಂದಿಗಿಂತಲೂ ಹೆಚ್ಚು ಮಹಿಳೆಯರು ಸ್ವಂತವಾಗಿ ಹೊಸ ಉದ್ಯಮಗಳನ್ನು ಪ್ರಾರಂಭಿಸುತ್ತಿದ್ದಾರೆ.

ಸ್ನೇಹಿತರೆ,

ಈ ನೀತಿಗಳು ಮತ್ತು ನಿರ್ಧಾರಗಳ ನಡುವೆ, ನೀವು ಇನ್ನೊಂದು ವಿಷಯವನ್ನು ನೆನಪಿನಲ್ಲಿಟ್ಟುಕೊಳ್ಳಬೇಕು. ಯಾವುದೇ ವ್ಯವಸ್ಥೆಯ ನಿಜವಾದ ಶಕ್ತಿ ಅದರ ಜನರಲ್ಲಿದೆ. ಜನರ ಶಕ್ತಿ "ಜನಶಕ್ತಿ" ರಾಷ್ಟ್ರದ ಶಕ್ತಿಯಾಗುತ್ತದೆ. ನೀವು ಭಾಗವಾಗುತ್ತಿರುವ ವ್ಯವಸ್ಥೆಯು ಲಕ್ಷಾಂತರ ನಾಗರಿಕರ ಜೀವನದ ಭರವಸೆಗಳು ಮತ್ತು ಆಕಾಂಕ್ಷೆಗಳಿಗೆ ನೇರವಾಗಿ ಸಂಬಂಧಿಸಿದೆ. ಸರ್ಕಾರಿ ಉದ್ಯೋಗಗಳು ಜನರ ಜೀವನ ಸುಲಭಗೊಳಿಸುವ ಮಾಧ್ಯಮವಾಗಿದೆ. ನೀವು ಯಾವುದೇ ಇಲಾಖೆಯಲ್ಲಿ ಕೆಲಸ ಮಾಡಿದರೂ ನಿಮ್ಮ ನಡವಳಿಕೆ, ಸೂಕ್ಷ್ಮತೆ ಮತ್ತು ಕಾರ್ಯಶೈಲಿಯು ಬಹಳ ಮುಖ್ಯವಾಗುತ್ತದೆ. ರಾಷ್ಟ್ರವು ನಿಮ್ಮ ಮೇಲೆ ನಂಬಿಕೆ ಇಟ್ಟಿದೆ. ಈಗ ನಿಮ್ಮ ಕೆಲಸ, ನಡವಳಿಕೆ, ಮಾತು ಮತ್ತು ವರ್ತನೆಯ ಮೂಲಕ ಆ ನಂಬಿಕೆ ಬಲಪಡಿಸುವುದು ನಿಮ್ಮ ಜವಾಬ್ದಾರಿಯಾಗಿದೆ. ನಿಮ್ಮನ್ನು ಭೇಟಿಯಾಗುವ ನಾಗರಿಕರಿಗೆ ಹೊಸ ಆತ್ಮವಿಶ್ವಾಸ ತುಂಬಬೇಕು, ಹೊಸ ಭರವಸೆಯೊಂದಿಗೆ ಮುಂದುವರಿಯಲು ಅವರನ್ನು ಪ್ರೇರೇಪಿಸಬೇಕು. ಆದ್ದರಿಂದ, ಪ್ರತಿಯೊಬ್ಬ ಯುವ ಕರ್ಮಯೋಗಿಯೂ ತಮ್ಮ ಕೆಲಸವನ್ನು ಒಂದು ಜವಾಬ್ದಾರಿಯಾಗಿ ನೋಡಬೇಕು.

 

ಸ್ನೇಹಿತರೆ,

ಈ ನೀತಿಗಳು ಮತ್ತು ನಿರ್ಧಾರಗಳ ನಡುವೆ, ನೀವು ಇನ್ನೊಂದು ವಿಷಯವನ್ನು ನೆನಪಿನಲ್ಲಿಟ್ಟುಕೊಳ್ಳಬೇಕು. ಯಾವುದೇ ವ್ಯವಸ್ಥೆಯ ನಿಜವಾದ ಶಕ್ತಿ ಅದರ ಜನರಲ್ಲಿದೆ. ಜನರ ಶಕ್ತಿ "ಜನಶಕ್ತಿ" ರಾಷ್ಟ್ರದ ಶಕ್ತಿಯಾಗುತ್ತದೆ. ನೀವು ಭಾಗವಾಗುತ್ತಿರುವ ವ್ಯವಸ್ಥೆಯು ಲಕ್ಷಾಂತರ ನಾಗರಿಕರ ಜೀವನದ ಭರವಸೆಗಳು ಮತ್ತು ಆಕಾಂಕ್ಷೆಗಳಿಗೆ ನೇರವಾಗಿ ಸಂಬಂಧಿಸಿದೆ. ಸರ್ಕಾರಿ ಉದ್ಯೋಗಗಳು ಜನರ ಜೀವನ ಸುಲಭಗೊಳಿಸುವ ಮಾಧ್ಯಮವಾಗಿದೆ. ನೀವು ಯಾವುದೇ ಇಲಾಖೆಯಲ್ಲಿ ಕೆಲಸ ಮಾಡಿದರೂ ನಿಮ್ಮ ನಡವಳಿಕೆ, ಸೂಕ್ಷ್ಮತೆ ಮತ್ತು ಕಾರ್ಯಶೈಲಿಯು ಬಹಳ ಮುಖ್ಯವಾಗುತ್ತದೆ. ರಾಷ್ಟ್ರವು ನಿಮ್ಮ ಮೇಲೆ ನಂಬಿಕೆ ಇಟ್ಟಿದೆ. ಈಗ ನಿಮ್ಮ ಕೆಲಸ, ನಡವಳಿಕೆ, ಮಾತು ಮತ್ತು ವರ್ತನೆಯ ಮೂಲಕ ಆ ನಂಬಿಕೆ ಬಲಪಡಿಸುವುದು ನಿಮ್ಮ ಜವಾಬ್ದಾರಿಯಾಗಿದೆ. ನಿಮ್ಮನ್ನು ಭೇಟಿಯಾಗುವ ನಾಗರಿಕರಿಗೆ ಹೊಸ ಆತ್ಮವಿಶ್ವಾಸ ತುಂಬಬೇಕು, ಹೊಸ ಭರವಸೆಯೊಂದಿಗೆ ಮುಂದುವರಿಯಲು ಅವರನ್ನು ಪ್ರೇರೇಪಿಸಬೇಕು. ಆದ್ದರಿಂದ, ಪ್ರತಿಯೊಬ್ಬ ಯುವ ಕರ್ಮಯೋಗಿಯೂ ತಮ್ಮ ಕೆಲಸವನ್ನು ಒಂದು ಜವಾಬ್ದಾರಿಯಾಗಿ ನೋಡಬೇಕು.

ನನಗೆ ನೀವು ಇನ್ನೂ ಹೆಚ್ಚಿನವರು. ಹಿಂದಿನ ಕಾಲದಲ್ಲಿ ನಾವು "ಸಹಸ್ರಬಾಹು" - ಸಾವಿರ ತೋಳುಗಳನ್ನು ಹೊಂದಿರುವವರ ಬಗ್ಗೆ ಕೇಳಿದ್ದೇವೆ. ಇಂದು ನೀವು ಸರ್ಕಾರದ ತೋಳುಗಳಾಗಿದ್ದೀರಿ, ಅದೇ ನಿಜವಾದ ಶಕ್ತಿ. ಈಗಾಗಲೇ ಸೇವೆಯಲ್ಲಿರುವವರು ಮತ್ತು ಹೊಸದಾಗಿ ಸೇರುತ್ತಿರುವವರು ಎಲ್ಲರೂ ಇದರ ಭಾಗವಾಗಿದ್ದಾರೆ. ಭಾರತದ ಜನರ ಆಕಾಂಕ್ಷೆಗಳು ಜಾಸ್ತಿಯಾಗುತ್ತಿವೆ, ನಾನು ಇದನ್ನು ಅಭಿವೃದ್ಧಿಯ ಸಕಾರಾತ್ಮಕ ಸಂಕೇತ ಎಂದು ನೋಡುತ್ತೇನೆ. ನಾವು ನಮ್ಮ ಜನರ ಆಕಾಂಕ್ಷೆಗಳನ್ನು ಅರ್ಥ ಮಾಡಿಕೊಳ್ಳಬೇಕು, ಅದನ್ನು ಪೂರೈಸಲು ಅದೇ ವೇಗದಲ್ಲಿ ಕೆಲಸ ಮಾಡಬೇಕು. ಇದರಲ್ಲಿ ಸಾರ್ವಜನಿಕ ಸೇವೆಗೆ ಪ್ರವೇಶಿಸುವ ಯುವ ಜನರ ಪಾತ್ರ ಬಹಳ ಮುಖ್ಯವಾಗಿದೆ. ನೀವು ನಿರಂತರವಾಗಿ ಕಲಿಯುತ್ತಲೇ ಇರಬೇಕು. ಹೊಸ ತಂತ್ರಜ್ಞಾನಗಳು, ಹೊಸ ವ್ಯವಸ್ಥೆಗಳು ಮತ್ತು ಹೊಸ ಅಗತ್ಯಗಳಿಗೆ ನೀವು ನಿಮ್ಮನ್ನು ಸಿದ್ಧಪಡಿಸಿಕೊಳ್ಳಬೇಕು. ಐಜಿಒಟಿ ಕರ್ಮಯೋಗಿ ವೇದಿಕೆಯು ಇದರಲ್ಲಿ ನಿಮಗೆ ಹೆಚ್ಚು ಸಹಾಯ ಮಾಡುತ್ತದೆ. ಕರ್ಮಯೋಗಿ ಆರಂಭದಂತಹ ಮಾಡ್ಯೂಲ್‌ಗಳು ನಿಮ್ಮ ಜವಾಬ್ದಾರಿಗಳನ್ನು ಅರ್ಥ ಮಾಡಿಕೊಳ್ಳಲು ನಿಮಗೆ ಸುಲಭವಾಗಿಸುತ್ತದೆ. ಈ ಸಂಪನ್ಮೂಲಗಳನ್ನು ಸದುಪಯೋಗ ಪಡಿಸಿಕೊಳ್ಳುವಂತೆ ನಾನು ನಿಮ್ಮನ್ನು ಒತ್ತಾಯಿಸುತ್ತೇನೆ.

ಸ್ನೇಹಿತರೆ,

ಇಂದು ಭಾರತದ ಯುವಕರು ವಿಶ್ವಾದ್ಯಂತ ಪ್ರತಿಯೊಂದು ಕ್ಷೇತ್ರದಲ್ಲೂ ತಮ್ಮ ಛಾಪು ಮೂಡಿಸುತ್ತಿದ್ದಾರೆ. ಅದೇ ಮನೋಭಾವ, ಅದೇ ಶಕ್ತಿ ಸಾರ್ವಜನಿಕ ಸೇವೆಯಲ್ಲಿಯೂ ಗೋಚರಿಸಬೇಕು. ತಮ್ಮ ಕೆಲಸವನ್ನು ರಾಷ್ಟ್ರ ಸೇವೆ, ಜನರ ಸೇವೆ ಮಾಡುವ ಮಾಧ್ಯಮವಾಗಿ ನೋಡುವ ಅಂತಹ ಯುವಕರ ಪ್ರಯತ್ನಗಳ ಮೂಲಕ ಅಭಿವೃದ್ಧಿ ಹೊಂದಿದ ಭಾರತವನ್ನು ನಿರ್ಮಿಸಲಾಗುತ್ತದೆ. ನಮ್ಮ ಸಂಪ್ರದಾಯದಲ್ಲಿ, ಸಾರ್ವಜನಿಕ ಸೇವೆಯೇ ದೈವಿಕ ಸೇವೆ ಎಂದು ಹೇಳಲಾಗುತ್ತದೆ. ಇಂದು ನೇಮಕಾತಿ ಪತ್ರಗಳನ್ನು ಸ್ವೀಕರಿಸುವ ಯುವ ಜನರು ಭಾರತದ ಅಭಿವೃದ್ಧಿ ಪ್ರಯಾಣಕ್ಕೆ ಹೊಸ ಆವೇಗ ನೀಡುತ್ತಾರೆ ಎಂಬ ಸಂಪೂರ್ಣ ವಿಶ್ವಾಸ ನನಗಿದೆ. ನಿಮ್ಮ ಕೆಲಸ ಮತ್ತು ನಿರ್ಧಾರಗಳ ಮೂಲಕ, ಅಭಿವೃದ್ಧಿ ಹೊಂದಿದ ಭಾರತದ ಸಂಕಲ್ಪವು ಈಡೇರುತ್ತದೆ. ನೀವು ನಮ್ಮ ಮಂತ್ರ - ನಾಗರಿಕನೇ ದೈವ ಎಂಬುದನ್ನು ಎಂದಿಗೂ ಮರೆಯಬಾರದು. ನಾಗರಿಕರ ಕಲ್ಯಾಣ ನಮ್ಮ ಕರ್ತವ್ಯ. ಮತ್ತೊಮ್ಮೆ, ಇಂದು ನೇಮಕಾತಿ ಪತ್ರಗಳನ್ನು ಸ್ವೀಕರಿಸುತ್ತಿರುವ ಎಲ್ಲಾ ಯುವಕರಿಗೆ, ಅವರ ಭವಿಷ್ಯಕ್ಕಾಗಿ ಮತ್ತು ರಾಷ್ಟ್ರ ಸೇವೆ ಮಾಡುವ ಈ ಅವಕಾಶ ಪೂರೈಸಿದ್ದಕ್ಕಾಗಿ ನನ್ನ ಶುಭಾಶಯಗಳನ್ನು ಕೋರುತ್ತೇನೆ.

ಎಲ್ಲರಿಗೂ ತುಂಬು ಧನ್ಯವಾದಗಳು.