Text of PM’s address at the Civic Reception in Mauritius

Published By : Admin | March 12, 2015 | 18:30 IST

इतनी बारिश और आज Working Day उसके बावजूद भी यह नजारा - मैं आपके प्‍यार के लिए मैं आपका सदा सर्वदा ऋणी रहूंगा। मैं इतना जरूर कह सकता हूं कि मॉरीशियस ने मुझे जीत लिया है। अपना बना लिया है और जब आपने मुझे अपना बनाया है तो मेरी जिम्‍मेवारी भी बढ़ जाती है। और मैं आपको विश्‍वास दिलाता हूं इस जिम्‍मेवारी को निभाने में भारत कोई कमी नहीं रखेगा।

मैं मॉरीशियस के सभी नागरिकों का अभिनंदन करता हूं। दुनिया का कोई भी व्‍यक्ति आज के मॉरीशियस को अगर देखेगा, मॉरीशियस के इतिहास को जानेगा, तो उसके मन में क्‍या विचार आएगा? उसके मन में यही विचार आएगा कि सौ साल पहले जो यहां मजदूर बनकर आए थे, जिनको लाया गया था, उन लोगों ने इस धरती को कैसा नंदनवन बना दिया है! इस देश को कैसी नई ऊंचाईयों पर ले गए हैं! और तब मेहनत तो आपने की है, पसीना तो आपने बहाया है, कष्‍ट तो आपके पूर्वजों ने झेले हैं, लेकिन Credit हमारे खाते में जाती है। क्‍योंकि हर किसी को लगता है कि भई यह कौन लोग हैं? वो हैं जो हिंदुस्‍तान से आए थे ना, वो हैं।

20.5 PM's at civic reception in Mauritius (2)

और दुनिया को हिंदुस्‍तान की पहचान होगी कि दुनिया के लिए जो मजदूर था, जिसे खेतों से उठाकर के लाया गया था। जबरन लाया गया था। वो अगर जी-जान से जुड़ जाता है तो अपने आप धरती पर स्‍वर्ग खड़ा कर देता है। यह काम आपने किया है, आपके पूर्वजों ने किया है और इसलिए एक हिंदुस्‍तानी के नाते गर्व महसूस करता हूं और आपको नमन करता हूं, आपका अभिनंदन करता हूं, आपके पूर्वजों को प्रणाम करता हूं।

कभी-कभार आम अच्‍छा है या नहीं है, यह देखने के लिए सारे आम नहीं देखने पड़ते। एक-आधा आम देख लिया तो पता चल जाता है, हां भई, फसल अच्‍छी है। अगर दुनिया मारिशियस को देख ले तो उसको विश्‍वास हो जाएगा हिंदुस्‍तान कैसा होगा। वहां के लोग कैसे होंगे। अगर sample इतना बढि़या है, तो godown कैसा होगा! और इसलिए विश्‍व के सामने आज भारत गर्व के साथ कह सकता है कि हम उस महान विरासत की परंपरा में से पले हुए लोग हैं जो एक ही मंत्र लेकर के चले हैं।

जब दुनिया में भारत सोने की चिडि़या कहलाता था। जब दुनिया में सुसंस्‍कृ‍त समाज के रूप में भारत की पहचान थी, उस समय भी उस धरती के लोगों ने कभी दुनिया पर कब्‍जा करने की कोशिश नहीं की थी। दूसरे का छीनना यह उसके खून में नहीं था। एक सामान्‍य व्‍यक्ति भी वही भाषा बोलता है जो एक देश का प्रधानमंत्री बोलता है। इतनी विचारों की सौम्यता, सहजता ऐसे नहीं आती है, किताबों से नहीं आती हैं, यह हमारे रक्‍त में भरा पड़ा है, हमारे संस्‍कारों में भरा पड़ा है। और हमारा मंत्र था “वसुधैव कुटुम्‍बकम्”। पूरा विश्‍व हमारा परिवार है इस तत्‍व को लेकर के हम निकले हुए लोग हैं और इसी के कारण आज दुनिया के किसी भी कोन में कोई भारतीय मूल का कोई व्‍यक्ति गया है तो उसने किसी को पराजित करने की कोशिश नहीं की है, हर किसी को जीतने का प्रयास किया है, अपना बनाने का प्रयास किया है।

2014 का साल मॉरिशियस के लिए भी महत्‍वपूर्ण था। भारत के लिए भी महत्‍वपूर्ण था। भारत ने बहुत सालों से मिली-जुली सरकारें बना करती थी, गठबंधन की सरकारें बनती थी। एक पैर उसका तो एक पैर इसका, एक हाथ उसका तो एक हाथ इसका। मॉरिशियस का भी वही हाल था। यहां पर भी मिली-जुली सरकार बना करती थी।

2014 में जो हिंदुस्‍तान के नागरिकों ने सोचा वही मॉरिशियस के नागरिकों ने सोचा। हिंदुस्‍तान के नागरिकों ने 30 साल के बाद एक पूर्ण बहुमत वाली स्थिर सरकार बनाई। मॉरिशियस के लोगों ने भी पूर्ण बहुमत वाली स्थिर सरकार दी। और इसका मूल कारण यह है कि आज की जो पीढ़ी है, वो पीढ़ी बदलाव चाहती है। आज जो पीढ़ी है वो विकास चाहती है, आज जो पीढ़ी है वो अवसर चाहती है, उपकार नहीं। वो किसी के कृपा का मोहताज नहीं है। वो कहता है मेरे भुजा में दम है, मुझे मौका दीजिए। मैं पत्‍थर पर लकीर ऐसी बनाऊंगा जो दुनिया की ज़िन्दगी बदलने के काम आ सकती है। आज का युवा मक्‍खन पर लकीर बनाने का शौकीन नहीं है, वो पत्‍थर पर लकीर बनाना चाहता है। उसकी सोच बदली है उसके विचार बदले है और उसके मन में जो आशाएं आकांक्षाए जगी है, सरकारों का दायित्‍व बनता है वो नौजवानों की आशाओं-आकांक्षाओं की पूर्ति के लिए राष्‍ट्र को विकास की नई ऊंचाईयों पर ले जाएँ।

और मैं आज जब आपके बीच में आया हूं मेरी सरकार को ज्‍यादा समय तो नहीं हुआ है, लेकिन मैं इतना विश्‍वास से कह रहा हूं कि जिस भारत की तरफ कोई देखने को तैयार नहीं था और देखते भी थे, तो आंख दिखाने के लिए देखते थे। पहली बार आज दुनिया भारत को आंख नहीं दिखा दे रही है, भारत से आंख मिलाने की कोशिश कर रही है। सवा सौ करोड़ का देश, क्‍या दुनिया के भाग्‍य को बदलने का निमित्त नहीं बन सकता? क्‍या ऐसे सपने नहीं संजोने चाहिए? सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय, जगत हिताय च । जिस मंत्र को लेकर के हमारे पूर्वजों ने हमें पाला-पौसा है। क्‍या समय की मांग नहीं है, कि हम अपने पुरुषार्थ से, अपने पराक्रम से, अपनी कल्पनाशीलता से जगत को वो चीज़ें दें जिनके लिए जगत सदियों से तरसता रहा है? और मैं विशवास दिलाता हूँ, यह ताकत उस धरती में है। उन संस्कारों में है, जो जगत को समस्यायों के समाधान के लिए रास्‍ता दे सकते हैं।

20.5 PM's at civic reception in Mauritius (5)

आज पूरा विश्‍व और विशेषकर के छोटे-छोटे टापुओं पर बसे हुए देश इस बात से चिंतित है कि 50 साल, सौ साल के बाद उनका क्‍या होगा। Climate Change के कारण कहीं यह धरती समंदर में समा तो नहीं जाएगी? सदियों ने पूर्वजों ने परिश्रम करके जिसे नंदनवन बनाया, कहीं वो सपने डूब तो नहीं जाएंगे? सपने चकनाचूर हो नहीं जाएंगे क्‍या? सारी दुनिया Global Warming के कारण चिंतित है। और टापूओं पर रहने वाले छोटे-छोटे देश मुझे जिससे मिलना हुआ उनकी एक गहन चिंता रहती है कि यह दुनिया समझे अपने सुख के लिए हमें बलि न चढ़ा दे, यह सामान्‍य मानव सोचता है। और इसलिए, कौन सा तत्‍व है, कौन सा मार्गदर्शन है, कौन सा नेतृत्‍व है, जो उपभोग की इस परंपरा में से समाज को बचाकर के सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय जीवन की प्रशस्ति के लिए आगे आए? जब ऐसे संकट आते हैं तब भारत ही वो ताकत है जिस ताकत ने सदियों पहले... जब महात्‍मा गांधी साबरमती आश्रम में रहते थे, साबरमती नदी पानी से भरी रहती थी, लबालब पानी था। 1925-30 का कालखंड था, लेकिन उसके बावजूद भी अगर कोई महात्‍मा गांधी को पानी देता था और जरूरत से ज्‍यादा देता था, तो गांधी जी नाराज होकर कहते “भाई पानी बर्बाद मत करो, जितना जरूरत का है उतना ही दीजिए, अगर उसको आधे ग्लिास की जरूरत है तो पूरा ग्लिास भरकर मत दीजिए।“ नदी भरी पड़ी थी पानी सामने था, लेकिन सोच स्‍वयं के सुख की नहीं थी, सोच आने वाली पीढि़यों के सुख की थी और इसलिए गांधी हमें प्रशस्‍त करते थे कि हम उतना ही उपयोग करे जितना हमारी जरूरत है। अगर दुनिया गांधी के इस छोटे से सिद्धांत को मान लें कि हम जरूरत से ज्‍यादा उपभोग न करे, तो क्‍या Climate का संकट पैदा होगा क्‍या? बर्फ पिघलेगी क्‍या? समंदर उबलेंगे क्‍या? और मॉरिशियस जैसे देश के सामने जीने-मरने का संकट पैदा होगा क्‍या? नहीं होगा। यह छोटी सी बात।

हम उस परंपरा के लोग हैं जिस परंपरा में प्रकृति से प्रेम करना सिखाया गया है। हमी तो लोग हैं, जिन्‍हें “पृथ्‍वी यह माता है”, यह बचपन से सिखाया जाता है। शायद दुनिया में कोई ऐसी परंपरा नहीं होगी जो “पृथ्‍वी यह माता है” यह संकल्‍प कराती हो। और इतना ही नहीं बालक छोटी आयु में भी जब बिस्‍तर से नीचे पैर रखता है तो मां यह कहती है कि “देखो बेटे, जब बिस्‍तर से जमीन पर पैर रखते हो तो पहले यह धरती मां को प्रणाम करो। उसकी क्षमा मांगों, ताकि तुम उसके सीने पर पैर रख रहे हो।“ यह संस्‍कार थे, यही तो संस्‍कार है, जो धरती माता की रक्षा के लिए प्रेरणा देते थे और धरती माता की रक्षा का मतलब है यह प्रकृति, यह पर्यावरण, यह नदियां, यह जंगल... इसी की रक्षा का संदेश देते हैं। अगर यह बच जाता है, तो Climate का संकट पैदा नहीं होता है। हम ही तो लोग हैं जो नदी को मां कहते हैं। हमारे लिए जितना जीवन में मां का मूल्‍य है, उतना ही हमारे यहां नदी का मूल्‍य है। अगर जिस पल हम यह भूल गए कि नदी यह मां हैं और जब से हमारे दिमाग में घर कर गया कि आखिर नदी ही तो H2O है और क्‍या है। जब नदी को हमने H2O मान लिया, पानी है, H2O... जब नदी के प्रति मां का भाव मर जाता है, तो नदी की रखवाली करने की जिम्‍मेदारी भी खत्‍म हो जाती है।

यह संस्‍कार हमें मिले हैं और उन्‍हीं संस्‍कारों के तहत हम प्रकृति की रक्षा से जुड़े हुए हैं। हमारे पूर्वजों ने हमें कहा है – मनुष्‍य को प्रकृति का दोहन करना चाहिए। कभी आपने बछड़े को उतनी ही दूध पीते देखा होगा, जितना बछड़े को जरूरत होगी। मां को काटने का, गाय को काटने का प्रयास कोई नहीं करता है। और इसलिए प्रकृति का भी दोहन होना चाहिए, प्रकृति को शोषण नहीं होना चाहिए। “Milking of Nature” हमारे यहां कहा गया है। “Exploitation of the Nature is a Crime.” अगर यह विचार और आदर्शों को लेकर के हम चलते हैं, तो हम मानव जिस संकट से जूझ रहा है, उस संकट से बचाने का रास्‍ता दे सकते हैं।

हम वो लोग हैं जिन्‍होंने पूरे ब्रह्माण को एक परिवार के रूप मे माना है। आप देखिए छोटी-छोटी चीजें होती हैं लेकिन जीवन को कैसे बनाती हैं। पूरे ब्रह्माण को परिवार मानना यह किताबों से नहीं, परिवार के संस्‍कारों से समझाया गया है। बच्‍चा छोटा होता है तो मां उसको खुले मैदान में ले जाकर के समझाती है कि “देखो बेटे, यह जो चांद दिखता है न यह चांद जो है न तेरा मामा है”। कहता है कि नहीं कहते? आपको भी कहा था या नहीं कहा था? क्‍या दुनिया में कभी सुना है जो कहता है सूरज तेरा दादा है, चांद तेरा मामा है, यानी पूरा ब्रह्माण तेरा परिवार है। यह संस्‍कार जिस धरती से मिलते हैं, वहां प्रकृति के साथ कभी संघर्ष नहीं हो सकता है, प्रकृति के साथ समन्‍वय होता है। और इसलिए आज विश्‍व जिस संकट को झेल रहा है, भारतीय चिंतन के आधार पर विश्‍व का नेतृत्व करने का समय आ गया है। Climate बचाने के लिए दुनिया हमें न सिखाये।

दुनिया, जब मॉरिशस कहेगा, ज्‍यादा मानेगी। उसका कारण क्‍या है, मालूम है? क्‍योंकि आप कह सकते हो कि “भई मैं मरने वाला हूं, मैं डूबने वाला हूं”। तो उसका असर ज्‍यादा होता है और इसलिए विश्‍व को जगाना.. मैं इन दिनों कई ऐसे क्षेत्रों में गया। मैं अभी फिजी में गया तो वहां भी मैं अलग-अलग आईलैंड के छोटे-छोटे देशों से मिला था। अब पूरा समय उनकी यही पीड़ा थी, यही दर्द था कोई तो हमारी सुने, कोई तो हमें बचाएं, कोई तो हमारी आने वाली पीढि़यों की रक्षा करे। और जो दूर का सोचते हैं उन्‍होंने आज से शुरू करना पड़ता है।

20.5 PM's at civic reception in Mauritius (3)

भाईयों-बहनों भारत आज विश्‍व का सबसे युवा देश है। 65% Population भारत की 35 साल से कम उम्र की है। यह मॉरिशियस 1.2 Million का है, और हिंदुस्‍तान 1.2 Billion का है। और उसमें 65% जनसंख्‍या 35 साल से कम है। पूरे विश्‍व में युवाशक्ति एक अनिवार्यता बनने वाला है। दुनिया को Workforce की जरूरत पड़ने वाली है। कितना ही ज्ञान हो, कितना ही रुपया हो, कितना ही डॉलर हो, पौंड हो, संपत्ति के भंडार हो, लेकिन अगर युवा पीढ़ी के भुजाओं का बल नहीं मिलता है, तो गाड़ी वहीं अटक जाती है। और इसलिए दुनिया को Youthful Manpower की आवश्‍यकता रहने वाली है, Human Resource की आवश्‍यकता रहने वाली है। भारत आज उस दिशा में आगे बढ़ना चाहता है कि आने वाले दिनों में विश्‍व को जिस मानवशक्ति की आवश्‍यकता है, हम भारत में ऐसी मानवशक्ति तैयार करें जो जगत में जहां जिसकी जरूरत हो, उसको पूरा करने के लिए हमारे पास वो काबिलियत हो, वो हुनर हो, वो सामर्थ्‍य हो।

और इसलिए Skill Development एक Mission mode में हमने आरंभ किया है। दुनिया की आवश्‍यकताओं का Mapping करके किस देश को आने वाले 20 साल के बाद कैसे लोग चाहिए, ऐसे लोगों को तैयार करने का काम आज से शुरू करेंगे। और एक बार भारत का नौजवान दुनिया में जाएगा तो सिर्फ भुजाएं लेकर के नहीं जाएगा, सिर्फ दो बाहू लेकर के नहीं जाएगा, दिल और दिमाग लेकर के भी जाएगा। और वो दिमाग जो वसुधैव कुटुम्‍बकम् की बात करता है। जगत को जोड़ने की बात करता है।

और इसलिए आने वाले दिनों में फिर एक बार युग का चक्‍कर चलने वाला है, जिस युग के चक्‍कर से भारत का नौजवान विश्‍व के बदलाव में दुनिया में फैलकर के एक catalytic agent के रूप में अपनी भूमिका का निर्माण कर सके, ऐसी संभावनाएं पड़ी है। उन संभावनाओं को एक अवसर मानकर के हिंदुस्‍तान आगे बढ़ना चाहता है। दुनिया में फैली हुई सभी मानवतावादी शक्तियां भारत को आशीर्वाद दें ता‍कि इस विचार के लोग इस मनोभूमिका के लोग विश्‍व में पहुंचे, विश्‍व में फैले और विश्‍व कल्‍याण के मार्ग में अपनी-अपनी भूमिका अदा करे। यह जमाना Digital World है। हर किसी के हाथ में मोबाइल है, हर कोई selfie ले रहा है। Selfie ले या न ले, बहुत धक्‍के मारता है मुझे। जगत बदल चुका है। Selfie लेता हैं, पलभर के अंदर अपने साथियों को पहुंचा देता है “देखो अभी-अभी मोदी जी से मिलकर आ गया।“ दुनिया तेज गति से बदल रही है। भारत अपने आप को उस दिशा में सज्ज कर रहा है और हिंदुस्‍तान के नौजवान जो IT के माध्‍यम से जगत को एक अलग पहचान दी है हिंदुस्‍तान की।

वरना एक समय था, हिंदुस्‍तान की पहचान क्‍या थी? मुझे बराबर याद है मैं एक बार ताइवान गया था। बहुत साल पहले की बात है, ताइवान सरकार के निमंत्रण पर गया था। तब तो मैं कुछ था नहीं, मुख्‍यमंत्री वगैरह कुछ नहीं था, ऐसे ही... जैसे यहां एक बार यहाँ मॉ‍रिशियस आया था। कुछ लोग हैं जो मुझे पुराने मिल गए आज। तो पांच-सात दिन का मेरा Tour था जो उनका Computer Engineer था वो मेरा interpretor था, वहां की सरकार ने लगाया था। तो पांच-सात दिन मैं सब देख रहा था, सुन रहा था, पूछ रहा था, तो उसके मन में curiosity हुई। तो उसने आखिरी एक दिन बाकी था, उसने मुझे पूछा था। बोला कि “आप बुरा न माने तो एक सवाल पूछना चाहता हूं।“ मैंने कहा “क्या?” बोले.. “आपको बुरा नहीं लगेगा न?“ मैंने कहा “पूछ लो भई लगेगा तो लगेगा, तेरे मन में रहेगा तो मुझे बुरा लगेगा।“ फिर “नहीं नहीं..” वो बिचारा भागता रहा। मैंने फिर आग्रह किया “बैठो, बैठो। मुझे बताओ क्‍या हुआ है।“ तो उसने मुझे पूछा “साहब, मैं जानना चाहता हूं क्‍या हिंदुस्‍तान आज भी सांप-सपेरों का देश है क्‍या? जादू-टोना वालों का देश है क्‍या? काला जादू चलता है क्‍या हिंदुस्‍तान में?” बड़ा बिचारा डरते-डरते मुझे पूछ रहा था। मैंने कहा “नहीं यार अब वो जमाना चला गया। अब हम लोगों में वो दम नहीं है। हम अब सांप से नहीं खेल सकते। अब तो हमारा devaluation इतना हो गया कि हम Mouse से खेलते हैं।“ और हिंदुस्‍तान के नौजवान का Mouse आज Computer पर click कर करके दुनिया को डुला देता है। यह ताकत है हमारे में।

हमारे नौजवानों ने Computer पर करामात करके विश्‍व के एक अलग पहचान बनाई है। विश्‍व को भारत की तरफ देखने का नजरिया बदलना पड़ा है। उस सामर्थ्‍य के भरोसे हिंदुस्‍तान को भी हम आगे बढ़ाना चाहते हैं।

20.5 PM's at civic reception in Mauritius (1)

एक जमाना था। जब Marx की theory आती थी तो कहते थे “Haves and Have nots” उसकी theory चलती थी। वो कितनी कामगर हुई है, उस विचार का क्‍या हुआ वो सारी दुनिया जानती है मैं उसकी गहराई में नहीं जाना चाहता। लेकिन मैं एक बात कहना चाहता हूं आज दुनिया Digital Connectivity से जो वंचित है और जो Digital World से जुड़े हुए हैं, यह खाई अगर ज्‍यादा बढ़ गई, तो विकास के अंदर बहुत बड़ी रूकावट पैदा होने वाली है। इसलिए Digital Access गरीब से गरीब व्‍यक्ति तक होना आने वाले दिनों में विकास के लिए अनिवार्य होने वाला है। हर किसी के हाथ में मोबाइल फोन है।

हर किसी को दुनिया के साथ जुड़ने की उत्‍सुकता... मुझे याद है मैं जब गुजरात में मुख्‍यमंत्री था तो एक आदिवासी जंगल में एक तहसील है वहां मेरा जाना नहीं हुआ था। बहुत पिछड़ा हुआ इलाका था interior में था, लेकिन मेरा मन करता था कि ऐसा नहीं होना चाहिए मैं मुख्‍यमंत्री रहूं और यह एक इलाका छूट जाए, तो मैंने हमारे अधिकारियों से कहा कि भाई मुझे वहां जाना है जरा कार्यक्रम बनाइये। खैर बड़ी मुश्किल से कार्यक्रम बना अब वहां तो कोई ऐसा प्रोजेक्‍ट भी नहीं था क्‍या करे। कोई ऐसा मैदान भी नहीं था जहां जनसभा करे, तो एक Chilling Centre बना था। दूध रखने के लिए, जो दूध बेचने वाले लोग होते हैं वो Chilling Centre में दूध देते हैं, वहां Chilling Plant में Chilling होता है फिर बाद में बड़ा Vehicle आता है तो Dairy में ले जाता है। छोटा सा प्रोजेक्‍ट था 25 लाख रुपये का। लेकिन मेरा मन कर गया कि भले छोटा हो पर मुझे वहां जाना है। तो मैं गया और उससे तीन किलोमीटर दूर एक आम सभा के लिए मैदान रखा था, स्‍कूल का मैदान था, वहां सभा रखी गयी। लेकिन जब मैं वहां गया Chilling Centre पर तो 20-25 महिलाएं जो दूध देने वाली थी, वो वहां थी, तो मैंने जब उद्घाटन किया.. यह आदिवासी महिलाएं थी, पिछड़ा इलाका था। वे सभी मोबाइल से मेरी फोटो ले रही थी। अब मेरे लिए बड़ा अचरज था तो मैं कार्यक्रम के बाद उनके पास गया और मैंने उनसे पूछा कि “मेरी फोटो लेकर क्‍या करोगे?” उन्‍होंने जो जवाब दिया, वो जवाब मुझे आज भी प्रेरणा देता है। उन्‍होंने कहा कि “नहीं, नहीं यह तो जाकर के हम Download करवा देंगे।“ यानी वो पढ़े-लिखे लोग नहीं थे, वो आदिवासी थे, दूध बेचकर के अपनी रोजी-रोटी कमाते थे, लेकिन वहां की महिलाएं हाथ से मोबाइल से फोटो निकाल रही हैं, और मुझे समझा रही है कि हम Download करा देंगे। तब से मैंने देखा कि Technology किस प्रकार से मानवजात के जीवन का हिस्‍सा बनती चली जा रही है। अगर हमने विकास के Design बना लिये हैं तो उस Technology का महत्‍व हमें समझना होगा।

और भारत Digital India का सपना देख कर के चल रहा है। कभी हिंदुस्‍तान की पहचान यह बन जाती थी कोई भी यहां अगर किसी को कहोगे भारत... “अरे छोड़ो यार, भ्रष्‍टाचार है, छोड़ो यार रिश्‍वत का मामला है।“ ऐसा सुनते हैं न? अब सही करना है। अभी-अभी आपने सुना होगा, यह अखबार में बहुत कम आया है। वैसे बहुत सी अच्‍छी चीजें होती है जो अखबार टीवी में कम आती है। एक-आध कोन में कहीं आ जाती है। भारत में कोयले को लेकर के भ्रष्‍टाचार की बड़ी चर्चा हुई थी। CAG ने कहा था एक लाख 76 हजार करोड़ के corruption की बात हुई थी। हमारी सरकार आई और सुप्रीम कोर्ट ने 204 जो खदानें थी उसको रद्द कर दिया। कोयला निकालना ही पाबंदी लग गई। अब बिजली के कारखाने कैसे चलेंगे? हमारे लिए बहुत जरूरी था कि इस काम को आगे बढ़ाएं। हमने एक के बाद एक निर्णय लिए, तीने महीने के अंदर उसमें Auction करना शुरू कर दिया और 204 Coal Blocks खदानें जो ऐसे ही कागज पर चिट्ठी लिखकर के दे रही है यह मदन भाई को दे देना, यह मोहन भाई को दे देना या रज्‍जू भाई को... ऐसा ही दे दिया। तो सुप्रीम ने गलत किया था, हमने उसका Auction किया था। अब तक सिर्फ 20 का Auction हुआ है। 204 में से 20 का Auction हुआ है। और 20 के Auction में दो लाख करोड़ से ज्‍यादा रकम आई है।

Corruption जा सकता है या नहीं जा सकता है? Corruption जा सकता है या नहीं जा सकता है? अगर हम नीतियों के आधार पर देश चलाएं, पारदर्शिता के साथ चलाएं, तो हम भ्रष्‍टाचार से कोई भी व्‍यवस्‍था को बाहर निकाल सकते हैं और भ्रष्‍टाचार मुक्‍त व्‍यवस्‍थाओं को विकसित कर सकते हैं। हिंदुस्‍तान ने बीड़ा उठाया है, हम उस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

भारत विकास की नई ऊंचाईयों पर जा रहा है। भारत ने एक सपना देखा है “Make In India” हम दुनिया को कह रहे हैं कि आइये हिंदुस्‍तान में पूंजी लगाइये, हिंदुस्‍तान में Manufacturing कीजिए। भारत में आपको Low Cost Manufacturing होगा, Skilled Manpower मिलेगा। Zero loss का माहौल मिलेगा। Redtape की जगह Red Carpet मिलेगा। आइये और आप अपना नसीब आजमाइये और मैं देख रहा हूं आज दुनिया का भारत में बहुत रूचि लगने लगी। दुनिया के सारे देश जिनको पता है कि हां भारत एक जगह है, जहां पूंजी निवेश कर सकते हैं, वहां Manufacturing करेंगे और दुनिया के अंदर Export करेंगे।

बहुत बड़ी संभावनाओं के साथ देश विकास की ऊंचाईयों को पार कर रहा है। मुझे विश्‍वास है कि आप जो सपने देख रहे हो वो कहीं पर भी बैठे होंगे, लेकिन आप आज कहीं पर भी क्‍यों न हो, लेकिन कौन बेटा है जो मां को दुखी देखना चाहता है? सदियों पहले भले वो देश छोड़ा हो, लेकिन फिर भी आपके मन में रहता होगा कि “भारत मेरी मां है। मेरी मां कभी दुखी नहीं होनी चाहिए।“ यह आप भी चाहते होंगे। जो आप चाहते हो। आप यहां आगे बढि़ए, प्रगति कीजिए और आपने जो भारत मां की जिम्‍मेवारी हमें दी है, हम उसको पूरी तरह निभाएंगे ताकि कभी आपको यह चिंता न रहे कि आपकी भारत माता का हाल क्‍या है। यह मैं विश्‍वास दिलाने आया हूं।

20 PM Modi floral tribute at Gandhi Statue at Mahatama Gandhi institute of Mauritius (1)

मैं कल से यहां आया हूं, जो स्‍वागत सम्‍मान दिया है, जो प्‍यार मिला है इसके लिए मैं मॉरीशियस का बहुत आभारी हूं। यहां की सरकार का आभारी हूं, प्रधानमंत्री जी का आभारी हूं, आप सबका बहुत आभार हूं। और आपने जो स्‍वागत किया, जो सम्‍मान दिया इसके लिए मैं फिर एक बार धन्‍यवाद करता हूं। और आज 12 मार्च आपका National Day है, Independence Day है। और 12 मार्च 1930 महात्‍मा गांधी साबरमती आश्रम से चले थे, दांडी की यात्रा करने के लिए। और वो दांडी यात्रा कोई कल्‍पना नहीं कर सकता था कि नमक सत्‍याग्रह पूरी दुनिया के अंदर एक क्रांति ला सकता है। जिस 12 मार्च को दांडी यात्रा का प्रारंभ हुआ था उसी 12 मार्च को महात्‍मा गांधी से जुड़े हुए पर्व से मॉरिशियस की आजादी का पर्व है। मैं उस पर्व के लिए आपको बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं, बहुत बधाई देता हूं।

फिर एक बार आप सबका बहुत-बहुत धन्‍यवाद।

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भारत माता की... जय!

भारत माता की... जय!

भारत माता की… जय!

यहां कुछ लोग चित्र लेकर के आए हैं, हमारे साथियों को कहता हूं वे आपसे सारे कलेक्ट कर लें। और इसके पीछे अगर आपका एड्रेस लिखा होगा तो मैं आपको चिट्ठी भेजूंगा... जरा एसपीजी के लोग इसको कलेक्ट कर लीजिए... ताकि बाद में मैं अपनी सभा शुरू करूं। जो भी चित्र लेकर के आए हैं और देना चाहते हैं वो मेरी टीम को दे दें... बहुत-बहुत धन्यवाद। बहुत-बहुत धन्यवाद आप सबका। मेरा भाषण शुरू करने से पहले यहां जो कैंडिडेट हैं, जो इस चुनाव में उम्मीदवार है, उन सबसे मेरा आग्रह है कि कैंडिडेट जरा यहां कतार लगा दें... सारे कैंडिडेट... बस... बस.. बहुत आगे मत जाइए भाई... मैं एक दो मिनट, मेरे सभी उम्मीदवारों को मिल कर के आता हूं, उसके बाद भाषण शुरू करते हैं... बोलो भारत माता की... जॉय माँ काली…जॉय भोलेनाथ…जॉय जलपेश बाबा… नमोश्कार ! केमोन आछेन, आमार दिनाजपुर बाशी? दक्षिण दिनाजपुर की इस पुण्य धरती को… कुशमंडी की इस पावन भूमि को… मैं श्रद्धापूर्वकर प्रणाम करता हूँ।

साथियों,

सबसे पहले तो मैं आप सबसे क्षमा मांगता हूं। क्षमा इसलिए कि हमारे साथियों ने इस सभा का प्लानिंग किया और पंडाल बनाया है वो बहुत छोटा पड़ गया...और इसके कारण जितने लोग अंदर है उससे तीन गुना लोग बाहर धूप में खड़े हैं। जो लोग धूप में खड़े हैं मैं उन सबसे क्षमा मांगता हूं। लेकिन आपको विश्वास दिलाता हूं कि ताप में आप जो तप रहे हैं मैं आपके इस परिश्रम को बेकार नहीं जाने दूंगा। मैं आपके इस प्यार को सवा गुना करके लौटाऊंगा विकास करके लौटाऊंगा। ये अद्भुत दृश्य है और वहां हेलीपैड के आसपास तो मानो पता नहीं, ऐसा लग रहा है कि बड़ा कमाल कर दिया इस बार बंगाल ने। साथियों, इस बार का बंगाल चुनाव...एक तरफ टीएमसी का भय है दूसरी तरफ भाजपा का भरोसा है। ये लड़ाई भय को पराजित करने की है ये लड़ाई भरोसे पर पश्चिम बंगाल को आगे बढ़ाने की है। आज मैं आपको ये भरोसा दिलाने आया हूं...कि अब, टीएमसी के भय का राज जाने वाला है। जाएगा ना... जाएगा ना.. मैं जहां-जहां गया ऐसा ही मिजाज... पूरे बंगाल में नजर आ रहा है। अब टीएमसी के झूठ और लूट, टीएमसी की झूठ और उनकी दुकान बंद होने वाली है। बंगाल से भय जाएगा... अब बंगाल में भरोसा आएगा...उन्नोयन आएगा। मेरे साथ बोलिए... दोनों हाथ ऊपर करके बोलिए.. पूरी ताकत से बोलिए... पाल्टानो दोरकार… पाल्टानो दोरकार… पाल्टानो दोरकार… पाल्टानो दोरकार… चाइ बीजेपी शोरकार!

साथियों,

ये TMC, मां-माटी-मानुष को लेकर, झूठ बोलकर सत्ता में आई थी। आज ये दुनियाभर की उटपटांग बातें करती है। दिनरात हमें गालियां देती रहती है। झूठे दावे करती रहती है। लेकिन ये टीएमसी सरकार 15 साल से यहां बैठी हुई है 15 साल से। अरे 15 साल में क्या किया बंगाल की जनता को बताओ ना...बताते हैं क्या... क्या काम किया है बताते हैं क्या...अब आप सोचिए.. जो 15 सालों तक कुछ नहीं किया तो आगे पांच साल देकर के कुछ पाओगे क्या... कुछ करेंगे क्या.. और ज्यादा बर्बाद करेंगे कि नहीं करेंगे। इन्होंने बंगाल को कौन सा डवलपमेंट मॉडल दिया है? साथियों, ये 15 साल की बात इसलिए नहीं करते...क्योंकि तब TMC का झूठ, विश्वासघात और टीएमसी की दुर्नीति का कच्चा चिट्ठा खुल जाएगा। टीएमसी ने 15 साल में एक ही मॉडल डेवलप किया है...कौन सा मॉडल यहां सिंडिकेट ही सरकार है... और सरकार ही सिंडिकेट है।

साथियों,

आप ज़रा एक बात सोचकर देखिए... TMC, बंगाल के बाहर कई जगह पे चुनाव लड़ के गई थी, असम में चुनाव लड़के गई थी... गोवा में चुनाव लड़ने गई थी। कहीं पर भी एक वोट कोई नहीं देता है इनको। अरोस-पड़ोस के राज्य इनको पहचान गए... लेकिन वहां उनकी गुंडई नहीं चलती, बेइमानी नहीं चलती और इसलिए कोई उनको पूछने वाला नहीं है। साथियों, TMC, बंगाल से बाहर इसलिए नहीं जीत पाती...क्योंकि इनके पास कोई विजन नहीं है... कोई विचार नहीं है, कोई नीति नहीं है कोई नीयत नहीं है। TMC, गवर्नेंस के नाम पर बहुत बड़ा जीरो है जीरो।..इनकी एक ही काम में मास्टरी है। पीएचडी करके रखा हुआ है। कुछ लोगों ने तो डबल-डबल पीएचडी कर लिया है। और उनकी मास्टरी किसमें हैं। गुंडागर्दी करना। करप्शन करना... इनमें नए-नए खेल करते रहते हैं। इनको लोगों को डराना, बूथ लूटना आता है। बंगाल में ये TMC वाले यही करते रहे हैं...यहां भी TMC के कैंडिडेट्स का बायोडेटा ही...बूथ लूटने के कारनामों से भरा हुआ है। ऐसे लोगों को बंगाल में सरकार चलाने का कोई हक नहीं है।

साथियों,

भारत, विकसित हो, ये हम सभी का संकल्प है। लेकिन भारत तभी विकसित होगा...जब हमारा बंगाल भी विकसित होगा। आप मुझे बताइए बंगाल विकसित होना चाहिए कि नहीं होना चाहिए... बंगाल विकसित होना चाहिए कि नहीं होना चाहिए... बंगाल हिंदुस्तान में नंबर एक होना चाहिए कि नहीं होना चाहिए। क्या ये टीएमसी वाले कर सकते हैं क्या.. कर सकते हैं क्या... और इसके लिए जरूरी है यहां से TMC का भय वाला राज जाना ही चाहिए और बीजेपी का भरोसा वाला राज आना चाहिए। आएगा... आएगा... और इसलिए मैंने विकसित बंगाल बनाने के लिए 6 गारंटियां दी हैं। ये मोदी की गारंटी है। होके रहता है। कल ही बंगाल बीजेपी ने...अपना घोषणापत्र जारी किया है। और इस घोषणापत्र में, ये घोषणापत्र भरोसापत्र है। इसमें, मोदी की इन छह गारंटियों को पूरा करने का पूरा रोडमैप है। मोदी की गारंटी है... कि बीजेपी सरकार, भय को खत्म करके भरोसा कायम करेगी। सरकार पर, कानून पर जनता का भरोसा लौटाएगी। बंगाल बीजेपी ने कहा है... कि हम TMC के 15 साल के भ्रष्टाचार, दंगे, रेप, मर्डर...ऐसे हर अत्याचार को सामने लाने के लिए व्हाइट पेपर लाएंगे। और TMC की राजनीतिक हिंसा के जो पीड़ित हैं...उनको न्याय दिलाने के लिए सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज के नेतृत्व में एक कमीशन बनाया जाएगा।

साथियों,

मुझे बताया गया है... कि यहां की अनेक बेटियां बंगाल के लिए फुटबॉल खेलती हैं। जहां के बेटे-बेटियों में इतना टैलेंट भरा हो वहां फुटबॉल के साथ क्या होता है, ये हमने कुछ महीने पहले कोलकाता में देखा। टीएमसी के नेताओं ने, मंत्रियों ने...फुटबॉल को भी सिंडिकेट के हवाले कर दिया। कितनी शर्मनाक तस्वीरें पूरी दुनिया ने कोलकाता से ये टीएमसी वालों के कारनामें देखे थे। ये महाजंगलराज की ही निशानी है।

साथियों,

हमने एक और ऐतिहासिक घटना भी देखी है। मैदान पर, मोहन बागान और ईस्ट बंगाल की स्पर्धा ऐतिहासिक है... दोनों विजय प्राप्त करने के लिए जी-जान से जुट जाते हैं। जीतने के लिए पूरी ताकत लगा देते हैं लेकिन आरजी-कर मेडिकल कॉलेज में...एक डॉक्टर बेटी के साथ अन्याय किया गया, मर्डर किया गया...तो बंगाल का हर परिवार, हर युवा सड़क पर आ गया था। यहां तक कि...मोहन बागान और ईस्ट बंगाल भी बेटियों के खिलाफ हुई निर्ममता के खिलाफ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हो गए थे। यानि बेटियों का सम्मान और जान को बचाने के लिए...हम सभी को एकजुट होकर निर्मम सरकार को सबक सिखाना है। यहां दिनाजपुर में ही...बीते सालों में बहनों-बेटियों के साथ बहुत ही विभत्स घटनाएं सामने आई हैं। हमें उन्हें भूलना नहीं चाहिए।

साथियों,

मोदी ने बंगाल की बहनों-बेटियों के लिए भी एक गारंटी दी है। बेटियों के साथ हुए हर अन्याय, हर रेप केस की फाइल खुलेगी...अपराध करने वाले और अपराधियों को बचाने वाले... कोई नहीं बचेगा। चुन-चुन कर के हिसाब लिया जाएगा। ये कैसे होगा...ये बंगाल बीजेपी ने घोषणापत्र में स्पष्ट किया है। एक रिटायर्ड हाईकोर्ट की महिला जज को जिम्मेदारी दी जाएगी। वे, रेप और अन्य अत्याचार से जुड़े पीड़ितों की सुनवाई करेंगी। महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए...हर ब्लॉक में महिला थाने बनाए जाएंगे।

साथियों,

आम नागरिकों की सुरक्षा को लेकर TMC सरकार कितनी उदासीन है..मैं इसका एक और उदाहरण आपको देता हूं। TMC की निर्मम सरकार ने पुलिस में महिलाओं की बहुत कम भर्ती की है। यहां आपके पड़ोस में बिहार है... वहां डबल इंजन की बीजेपी-NDA सरकार है। वहां पुलिस में तेईस-चौबीस परसेंट महिला पुलिस कर्मी हैं...लेकिन बंगाल जैसे इतने बड़े राज्य में... सिर्फ दस परसेंट महिला पुलिसकर्मी भी नहीं है, और उसमें भी ज्यादातर तो रिटायर्ड होने की उमर में पहुंच चुकी हैं। मां-माटी-मानुष बड़ी-बड़ी बातें कहकर सरकार बनाने वाली टीएमसी की ये सच्चाई है। मैं बंगाल की माताओं बहनों को भरोसा देता हूं, मैं बंगाल के लोगों को भरोसा देता हूं। जब बंगाल में 4 मई को बीजेपी सरकार बनेगी...तो फिर बड़े पैमाने पर महिला पुलिसकर्मियों की भी भर्ती की जाएगी। और ये भी मैं आपको गारंटी देता हूं महिला कल्याण हमारी प्राथमिकता में है। बीजेपी की सरकार जिस भी राज्य में है...वो बेटियों को सुरक्षा भी देती है... और उन्हें कमाई का भरोसा भी देती है। पश्चिम बंगाल भाजपा ने भी बहनों के लिए बहुत ही शानदार योजना बनाई है। अभी यहां बहनों को जितना पैसा मिलता है...पश्चिम बंगाल भाजपा डबल देने वाली है डबल। प्रेग्नेंसी के दौरान भी हज़ारों रुपए की मदद देने की घोषणा की गई है। इसके अलावा...सरकारी नौकरियों में तैंतीस प्रतिशत आरक्षण से बंगाल की बेटियों को बहुत फायदा होगा।

साथियों,

TMC के महा-जंगलराज ने... सबसे अधिक यहां के युवाओं का, यहां के सरकारी कर्मचारियों का नुकसान किया है। आज भारत की यूनिवर्सिटीज़... दुनिया की शीर्ष यूनिवर्सटीज़ में शामिल हो रही है। दुनिया की हर बड़ी रैंकिंग में हमारी यूनिवर्सिटीज कमाल कर रही हैं। लेकिन बंगाल में कुछ उल्टा ही हो रहा है, कुछ अलग ही हो रहा है। दिनाजपुर यूनिवर्सिटी... TMC की दुर्नीति का बहुत बड़ा प्रमाण बन गई है। मैं अखबार में पढ़ा था...दिनाजपुर यूनिवर्सिटी के पास अपना कैंपस तक नहीं है। कॉलेज और हॉस्टल के कमरों से यूनिवर्सिटी चलाई जा रही है। बच्चे बीच में ही पढ़ाई छोड़ने को मजबूर हैं। यहां परमानेंट टीचर भी ना के बराबर हैं... और जो गेस्ट टीचर्स हैं भी...उनको भी 400-500 रुपए सिर्फ मिलता है।

साथियों,

ये सिर्फ एक यूनिवर्सिटी की बात नहीं है...बंगाल की दर्जनभर यूनिवर्सिटीज़ की यही स्थिति है। TMC की निर्मम सरकार... इस तरह युवाओं का भविष्य बर्बाद कर रही है। आपका भविष्य बर्बाद कर रही है। आपकी संतानों का भविष्य बर्बाद कर रही है। पढ़ाई की सुविधा है नहीं...कमाई के लिए बाहर जाना पड़ता है...और गलती से भर्ती निकलती है...तो TMC के मंत्री नौकरी ही लूट लेते हैं। आपने देखा...शिक्षक भर्ती में घोटाला करने वालों के घर से कैसे नोटों के पहाड़ निकले थे। याद है ना नोटो के पहाड़ निकले थे। अब बहुत हो गया...एनफ इज एनफ। आर नोय ! आर नोय ! एखोन बदोल चाई..बदोल चाई..

साथियों,

हालात बदलने के लिए ही बंगाल बीजेपी ने...बंगाल के युवाओं...बंगाल के शिक्षकों...बंगाल के हर सरकारी कर्मचारी को गारंटी दी है। जिन्होंने युवाओं को लूटा है, उनका हिसाब होगा, पक्का हिसाब होगा। सात-सात जन्म तक याद ऱके ऐसा हिसाब होगा। और सरकारी कर्मचारियों को भय से मुक्त किया जाएगा... बीजेपी सरकार, पूरी तरह से सेवन्थ पे-कमीशन लागू करेगी। बंगाल के मेरे सभी सरकारी कर्मचारी भाई-बहन ये मोदी आपको गारंटी देता है। यहां हमारी सरकार बनने के बाद बंगाल के सभी सरकारी कर्मचारियों को सेवंथ पे कमीशन दिया जाएगा। साथियों, बंगाल के युवाओं की मदद के लिए बीजेपी ने पूरा खाका खींचा है। बेरोजगार युवाओं के लिए हर महीने हज़ारों रुपए की मदद...भर्ती परीक्षाओं की तैयारी करने वालों को मदद...और अपना कारोबार करने के लिए भी युवाओं को सरकारी मदद...बीजेपी इस संकल्प को लेकर आगे बढ़ रही है।

साथियों,

बंगाल के राजबंशी समाज की... संथाल समाज की...जनजातीय समाज की...पूरे बंगाल और भारत की प्रगति, इस प्रगति में इन समाजों की बहुत बड़ी भूमिका है। चुरका मुर्मू जी, जीतु संथाल जी...ऐसे अनेक नायकों का हम पर बहुत बड़ा कर्ज़ है। उनके जीवन पर हमारा गर्व है। बीजेपी सरकार ने भगवान बिरसा मुंडा के जन्म दिवस को...जनजातीय गौरव दिवस घोषित किया। ताकि देश, आदिवासी समाज के योगदान को याद रखे, उससे प्रेरणा ले।

साथियों,

हमारा निरंतर ये प्रयास है कि आदिवासी क्षेत्रों का तेज़ विकास हो। आदिवासी समाज दशकों तक माओवादी आतंक से प्रभावित था। हमारी सरकार ने, माओवादी आतंक से आदिवासी समाज को करीब-करीब मुक्त करा दिया है। माताएं मुझे आशीर्वाद दे रही है... उनके बेटे सालों बाद घर वापस आए हैं। बीजेपी आदिवासी समाज की हर स्तर पर भागीदारी बढ़ा रही है। हमारे मुख्यमंत्री आदिवासी हैं... मंत्री आदिवासी हैं। और बीजेपी ने पहली बार एक आदिवासी बेटी, द्रौपदी मुर्मू जी को राष्ट्रपति पद के लिए चुना है। असम में मेरी पहली सरकार बनी तो पहला मुख्यमंत्री आदिवासी बना... ओड़िशा में मेरी पहली सरकार बनी तो पहला मुख्यमंत्री आदिवासी बना। छत्तीसगढ़ का मुख्यमंत्री आदिवासी बना। झारखंड में पहली बार सरकार बनी तो वहां का मुख्यमंत्री भी आदिवासी बना। ये हमारा ट्रैक रिकॉर्ड है। एक तरफ बीजेपी ट्राइबल समाज का सम्मान करती है...वहीं TMC ट्राइबल समाज के अपमान का कोई मौका नहीं छोड़ती। राष्ट्रपति द्रौपदी मूर्मू जी कुछ समय पहले बंगाल में संथाल समाज के एक कार्यक्रम में आई थीं। लेकिन टीएमसी ने न संविधान की मर्यादा रखी... और न ही, आदिवासी समाज का मान रखा। और ना ही देश की माताओ-बहनों का सम्मान रखा। और इसलिए माताओं-बहनों का अपमान करने वाली, आदिवासी समाज का अपमान करने वाली, संविधान का अपमान करने वाली TMC को सबक सिखाना है। सिखाओगे.. टीएमसी को सबक सिखाओगे...

साथियों,

टीएमसी कभी आदिवासी क्षेत्रों का उन्नोयन नहीं कर सकती। मैं आपको पीएम जनमन योजना का उदाहरण देता हूं। देश के हर राज्य में आदिवासियों को इस योजना का लाभ मिल रहा है। केंद्र सरकार इस योजना पर करीब 25 हजार करोड़ रुपए खर्च कर रही है। पास में ओडिशा में ही...जहां बीजेपी की सरकार है... वहां पीएम जनमन योजना के तहत आदिवासियों के... तीस हज़ार से अधिक घर बने हैं। त्रिपुरा में भी ट्राइबल समाज के लिए 16 हजार से ज्यादा घर बनवाए गए हैं। लेकिन यहां, TMC की आदिवासी विरोधी सरकार ने...पीएम जनमन योजना के तहत जानते हैं कितने घर बनाए हैं? बताऊं... जीरो.. जीरो... पूरी तरह शून्य...एक भी घर नहीं बनाया, पैसे भारत सरकार देती है... आदिवासी समाज से इनकी दुश्मनी क्या है.. पक्का घर भी देने को तैयार नहीं है...

साथियों,

आपके जीवन में पानी की कमी से कोई संकट ना आए... इसलिए मोदी घर-घर नल से जल पहुंचाने में जुटा है। बीजेपी शासित राज्यों में...इस योजना के तहत भी अच्छा काम हो रहा है। बिहार में पंचानबे परसेंट... यानि करीब-करीब हर घर तक नल से जल पहुंच चुका है। त्रिपुरा में पिच्यासी परसेंट घरों तक... नल से जल पहुंच चुका है। वजह यही है... क्योंकि वहां बीजेपी की डबल इंजन सरकार है। बंगाल के मेरे भाइयों और बहनों... यहां आपके घर में नल लगे...नल से जल आए... इसके लिए भी दिल्ली से पैसा भेजा गया है। लेकिन ये निर्मम सरकार उस पर बैठ गई है। बंगाल में अभी भी, गांव की करीब-करीब आधी आबादी ऐसी है... जहां नल का कनेक्शन नहीं है। आप बीजेपी को लाइए... बीजेपी सरकार यहां घर-घर नल भी लगाएगी और जल पहुंचाने के लिए दिन-रात एक कर देगी। ये मोदी की गारंटी है।

साथियों,

मोदी की एक और गारंटी आपको याद रखनी है। मतुआ, नामशूद्र, ऐसे हर शरणार्थी परिवारों को संविधान के तहत पूरा हक मिलेगा... ये मोदी की गारंटी है.. और जो घुसपैठिये हैं, घुसपैठियों को पूरे भारत से बाहर खदेड़ा जाएगा। बंगाल बीजेपी ने इसकी भी पूरी तैयारी की है। CAA कानून के तहत, हर शरणार्थी की तेज़ी से सहायता की जाएगी।

साथियों,

बीजेपी, पश्चिम बंगाल को फिर से वैभवशाली बनाने के लिए मैदान में है। इसलिए, इन सभी साथियों के लिए, ये जितने मेरे उम्मीदवार है आपका आशीर्वाद मांगने आया हूं। आपका समर्थन मांगने आया हूं। आपने 35 साल लेफ्ट को दिए...15 साल TMC की निर्ममता को दिए... एक मौका मोदी को, एक मौका बीजेपी को देकर देखिए...

साथियों,

आप जिससे भी मिलें... घर-घर जाएंगे... पोलिंग बूथ को मजबूत बनाएंगे.. ज्यादा से ज्यादा मतदान कराएंगे... सभी सीटें जिताएंगे। आप घर-घर जाएंगे तो मेरा एक काम करेंगे... हाथ ऊपर करके बताइए मेरा काम करेंगें... पक्का करेंगे... हर घर जाके कहना। मोदी जी आए थे... और मोदी जी ने परिवार के सबको पॉइला बोइशाख की शुभकामनाएं दी हैं। मेरे साथ बोलिए... भारत माता की... भारत माता की... भारत माता की... भारत माता की... वंदे... वंदे... वंदे... वंदे... वंदे... वंदे... वंदे... वंदे...