"भारतीय इतिहास में मेरठ सिर्फ एक शहर नहीं बल्कि संस्कृति और शक्ति का एक महत्वपूर्ण केंद्र रहा है"
"देश में खेलों के फलने-फूलने के लिए यह आवश्यक है कि युवाओं में खेलों में विश्वास हो और खेलों को एक व्यवसाय के रूप में अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाए। यही मेरा संकल्प और मेरा सपना भी है"
"गांवों और छोटे शहरों में खेल के बुनियादी ढांचे के आगमन के साथ, इन जगहों पर खिलाड़ियों की संख्या बढ़ रही है"
“संसाधनों और नई धाराओं के साथ उभरता खेल इकोसिस्टम नई संभावनाएं पैदा कर रहा है, इससे समाज में विश्वास पैदा होता है कि खेलों की ओर बढ़ना सही निर्णय है”
"मेरठ लोकल के लिए वोकल ही नहीं, लोकल को ग्लोबल में भी बदल रहा है"
"हमारा लक्ष्य स्पष्ट है, युवा न केवल रोल मॉडल बनें बल्कि अपने रोल मॉडल को भी पहचानें

भारत माता की, जय।

भारत माता की, जय।

यूपी की राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल जी, यहां के लोकप्रिय और ऊर्जावान मुख्यमंत्री श्रीमान योगी आदित्यनाथ जी, उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य जी, केंद्रीय मंत्रिमंडल के मेरे सहयोगी श्री संजीव बाल्यान जी, वीके सिंह जी, मंत्री श्री दिनेश खटीक जी, श्री उपेंद्र तिवारी जी, श्री कपिल देव अग्रवाल जी, संसद में मेरे साथी श्रीमान सत्यपाल सिंह जी, राजेंद्र अग्रवाल जी, विजयपाल सिंह तोमर जी, श्रीमती कांता कर्दम जी, विधायक भाई सोमेंद्र तोमर जी, संगीत सोम जी, जितेंद्र सतवाल जी, सत्य प्रकाश अग्रवाल जी, मेरठ ज़िला परिषद अध्यक्ष गौरव चौधरी जी, मुज़फ्फरनगर जिला परिषद अध्यक्ष वीरपाल जी, अन्य सभी जनप्रतिनिधिगण और मेरठ-मुजफ्फरनगर, दूर-दूर से आए मेरे प्यारे भाइयों और बहनों, आप सभी को वर्ष 2022 की बहुत-बहुत शुभकामनाएं।

साल की शुरुआत में मेरठ आना, अपने आप में मेरे लिए बहुत अहम है। भारत के इतिहास में मेरठ का स्थान सिर्फ एक शहर का नहीं है, बल्कि मेरठ हमारी संस्कृति, हमारे सामर्थ्य का भी महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। रामायण और महाभारत काल से लेकर जैन तीर्थंकरों और पंज-प्यारों में से एक भाई, भाई धर्मसिंह तक, मेरठ ने देश की आस्था को ऊर्जावान किया है।

सिंधु घाटी की सभ्यता से लेकर देश के पहले स्वतंत्रता संग्राम तक इस क्षेत्र ने दुनिया को दिखाया है कि भारत का सामर्थ्य क्या होता है। 1857 में बाबा औघड़नाथ मंदिर से आज़ादी की जो ललकार उठी, दिल्ली कूच का जो आह्वान हुआ, उसने गुलामी की अंधेरी सुरंग में देश को नई रोशनी दिखा दी। क्रांति की इसी प्रेरणा से आगे बढ़ते हुए हम आज़ाद हुए और आज गर्व से अपनी आज़ादी का अमृत महोत्सव मना रहे हैं। मेरा सौभाग्य है कि यहां आने से पहले मुझे बाबा औघड़नाथ मंदिर जाने का अवसर मिला। मैं अमर जवान ज्योति भी गया, स्वतंत्रता संग्राम संग्रहालय में उस अनुभूति को महसूस किया, जो देश की आजादी के लिए कुछ कर गुजरने वालों के दिलों में लालायित थी।

भाइयों और बहनों,

मेरठ और आसपास के इस क्षेत्र ने स्वतंत्र भारत को भी नई दिशा देने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। राष्ट्ररक्षा के लिए सीमा पर बलिदान हों या फिर खेल के मैदान में राष्ट्र के लिए सम्मान, राष्ट्रभक्ति की अलख को इस क्षेत्र ने सदा-सर्वदा प्रज्जवलित रखा है। नूरपुर मड़ैया ने चौधरी चरण सिंह जी के रूप में देश को एक विजनरी नेतृत्व भी दिया। मैं इस प्रेरणा स्थली का वंदन करता हूं, मेरठ और इस क्षेत्र के लोगों का अभिनंदन करता हूं।

भाइयों और बहनों,

मेरठ, देश की एक और महान संतान, मेजर ध्यान चंद जी की भी कर्मस्थली रहा है। कुछ महीने पहले केंद्र सरकार ने देश के सबसे बड़े खेल पुरस्कार का नाम दद्दा के नाम पर कर दिया। आज मेरठ की स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी मेजर ध्यान चंद जी को समर्पित की जा रही है। और जब इस यूनिवर्सिटी का नाम मेजर ध्‍यानचंद जी से जुड़ जाता है तो उनका पराक्रम तो प्रेरणा देता ही है, लेकिन उनके नाम में भी एक संदेश है। उनके नाम में जो शब्‍द है ध्‍यान, बिना ध्‍यान केंद्रित किए, बिना फोकस एक्टिविटी किए, कभी भी सफलता नहीं मिलती है। और इसलिए जिस यूनिवर्सिटी का नाम ध्‍यानचंद से जुड़ा हुआ हो वहां पूरे ध्‍यान से काम करने वाले नौजवान देश का नाम रोशन करेंगे, ये मुझे पक्‍का विश्‍वास है।

मैं उत्तर प्रदेश के नौजवानों को यूपी की पहली स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी के लिए बहुत-बहुत बधाई देता हूं। 700 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाली ये आधुनिक यूनिवर्सिटी दुनिया की श्रेष्ठ स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटीज़ में से एक होगी। यहां युवाओं को खेलों से जुड़ी अंतरराष्‍ट्रीय सुविधाएं तो मिलेंगी ही, ये एक करियर के रूप में स्पोर्ट्स को अपनाने के लिए ज़रूरी स्किल्स का निर्माण करेगी। यहां से हर साल 1000 से अधिक बेटे-बेटियां बेहतरीन खिलाड़ी बनकर निकलेंगे। यानि क्रांतिवीरों की नगरी, खेलवीरों की नगरी के रूप में भी अपनी पहचान को और सशक्त करेगी।

साथियों,

पहले की सरकारों में यूपी में अपराधी अपना खेल खेलते थे, माफिया अपना खेल खेलते थे। पहले यहां अवैध कब्जे के टूर्नामेंट होते थे, बेटियों पर फब्तियां कसने वाले खुलेआम घूमते थे। हमारे मेरठ और आसपास के क्षेत्रों के लोग कभी भूल नहीं सकते कि लोगों के घर जला दिए जाते थे और पहले की सरकार अपने खेल में लगी रहती थी। पहले की सरकारों के खेल का ही नतीजा था कि लोग अपना पुश्तैनी घर छोड़कर पलायन के लिए मजबूर हो गए थे।

पहले क्‍या–क्‍या खेल खेले जाते थे, अब योगी जी की सरकार ऐसे अपराधियों के साथ जेल-जेल खेल रही है। पांच साल पहले इसी मेरठ की बेटियां शाम होने के बाद अपने घर से निकलने से डरती थीं। आज मेरठ की बेटियां पूरे देश का नाम रौशन कर रही हैं। यहां मेरठ के सोतीगंज बाजार में गाड़ियों के साथ होने वाले खेल का भी अब द एंड हो रहा है। अब यूपी में असली खेल को बढ़ावा मिल रहा है, यूपी के युवाओं को खेल की दुनिया में छा जाने का मौका मिल रहा है।

साथियों,

हमारे यहां कहा जाता है - महाजनो येन गताः स पंथाः

अर्थात्, जिस पथ पर महान जन, महान विभूतियां चलें वही हमारा पथ है। लेकिन अब हिंदुस्‍तान बदल चुका है, अब हम 21वीं सदी में हैं। और इस 21वीं सदी के नए भारत में सबसे बड़ा दायित्व हमारे युवाओं के पास ही है। और इसलिए, अब मंत्र बदल गया है- 21वीं सदी का तो मंत्र है - युवा जनो येन गताः स पंथाः।

जिस मार्ग पर युवा चल दें, वही मार्ग देश का मार्ग है। जिधर युवाओं के कदम बढ़ जाएं, मंजिल अपने-आप चरण चूमने लग जाती है। युवा नए भारत का कर्णधार भी है, युवा नए भारत का विस्तार भी है। युवा नए भारत का नियंता भी है, और युवा नए भारत का नेतृत्वकर्ता भी है। हमारे आज के युवाओं के पास प्राचीनता की विरासत भी है, आधुनिकता का बोध भी है। और इसीलिए, जिधर युवा चलेगा उधर भारत चलेगा। और जिधर भारत चलेगा उधर ही अब दुनिया चलने वाली है। आज हम देखें तो साइंस से लेकर साहित्य तक, स्टार्ट-अप्स से लेकर स्पोर्ट्स तक, हर तरफ भारत के युवा ही छाए हुए हैं।

भाइयों और बहनों,

खेल की दुनिया में आने वाले हमारे युवा पहले भी सामर्थ्यवान थे, उनकी मेहनत में पहले भी कमी नहीं थी। हमारे देश में खेल संस्कृति भी बहुत समृद्ध रही है। हमारे गांवों में हर उत्सव, हर त्यौहार में खेल एक अहम हिस्सा रहता है। मेरठ में होने वाले दंगल और उसमें जो घी के पीपे और लड्डुओं की जीत का पुरस्कार मिलता है, उस स्वाद के लिए किसका मन मैदान में उतरने के लिए ना हो। लेकिन ये भी सही है कि पहले की सरकारों की नीतियों की वजह से, खेल और खिलाड़ियों को उनकी तरफ देखने का नजरिया बहुत अलग रहा। पहले शहरों में जब कोई युवा अपनी पहचान एक खिलाड़ी के रूप में बताता था, अगर वो कहता था मैं खिलाड़ी हूं, मैं फलाना खेल खेलता हूं, मैं उस खेल में आगे बढ़ा हूं, तो सामने वाले क्‍या पूछते थे, मालूम है? सामने वाला पूछता था- अरे बेटे खेलते हो ये तो ठीक है, लेकिन काम क्या करते हो? यानी खेल की कोई इज्‍जत ही नहीं मानी जाती थी।

गांव में यदि कोई खुद को खिलाड़ी बताता- तो लोग कहते थे चलो फौज या पुलिस में नौकरी के लिए खेल रहा होगा। यानि खेलों के प्रति सोच और समझ का दायरा बहुत सीमित हो गया था। पहले की सरकारों ने युवाओं के इस सामर्थ्य को महत्व ही नहीं दिया। ये सरकारों का दायित्व था कि समाज में खेल के प्रति जो सोच है, उस सोच को बदल करके खेल को बाहर निकालना बहुत जरूरी है। लेकिन हुआ उल्टा, ज्यादातर खेलों के प्रति देश में बेरुखी बढ़ती गई। परिणाम ये हुआ कि जिस हॉकी में गुलामी के कालखंड में भी मेजर ध्यानचंद जी जैसी प्रतिभाओं ने देश को गौरव दिलाया, उसमें भी मेडल के लिए हमें दशकों का इंतज़ार करना पड़ा।

दुनिया की हॉकी प्राकृतिक मैदान से एस्ट्रो टर्फ की तरफ बढ़ गई, लेकिन हम वहीं रह गए। जब तक हम जागे, तब-तक बहुत देर हो चुकी थी। ऊपर से ट्रेनिंग से लेकर टीम सेलेक्शन तक हर स्तर पर भाई-भतीजावाद, बिरादरी का खेल, भ्रष्टाचार का खेल, लगातार हर कदम पर भेदभाव और पारदर्शिता का तो नामोनिशान नहीं। साथियो, हॉकी तो एक उदाहरण है, ये हर खेल की कहानी थी। बदलती टेक्नॉलॉजी, बदलती डिमांड, बदलती स्किल्स के लिए देश में पहले की सरकारें, बेहतरीन इकोसिस्टम तैयार ही नहीं कर पाईं।

साथियों,

देश के युवाओं का जो असीम टैलेंट था, वो सरकारी बेरुखी के कारण बंदिशों में जकड़ा हुआ था। 2014 के बाद उसे जकड़न से बाहर निकालने के लिए हमने हर स्तर पर रिफॉर्म किए। खिलाड़ियों के सामर्थ्य को बढ़ाने के लिए हमारी सरकार ने अपने खिलाड़ियों को चार शस्त्र दिए हैं। खिलाड़ियों को चाहिए- संसाधन, खिलाड़ियों को चाहिए-ट्रेनिंग की आधुनिक सुविधाएं, खिलाड़ियों को चाहिए- अंतरराष्ट्रीय एक्सपोजर, खिलाड़ियों को चाहिए- चयन में पारदर्शिता। हमारी सरकार ने बीते वर्षों में भारत के खिलाड़ियों को ये चार शस्त्र जरूर मिलें, इसे सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। हमने स्पोर्ट्स को युवाओं की फिटनेस और युवाओं के रोज़गार, स्वरोज़गार, उनके करियर से जोड़ा है। टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम यानि Tops ऐसा ही एक प्रयास रहा है।

आज सरकार देश के शीर्ष खिलाड़ियों को उनके खाने-पीने, फिटनेस से लेकर ट्रेनिंग तक, लाखों-करोड़ों रुपए की मदद दे रही है। खेलो इंडिया अभियान के माध्यम से आज बहुत कम उम्र में ही देश के कोने-कोने में टैलेंट की पहचान की जा रही है। ऐसे खिलाड़ियों को इंटरनेशनल लेवल का एथलीट बनाने के लिए उनकी हर संभव मदद की जा रही है। इन्हीं प्रयासों की वजह से आज जब भारत का खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय मैदान पर उतरता है, तो फिर उसका प्रदर्शन दुनिया भी सराहती है, देखती है। पिछले साल हमने ओलंपिक में देखा, हमने पैरालंपिक में देखा। जो इतिहास में पहले कभी नहीं हुआ, वो पिछले ओलंपिक में मेरे देश के वीर बेटे-बेटियों ने करके दिखाया। मेडल की ऐसी झड़ी लगा दी कि पूरा देश कह उठा, एक स्‍वर से वो बोल उठा- खेल के मैदान में भारत का उदय हो गया है।

भाइयों और बहनों,

आज हम देख रहे हैं कि उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड के अनेक छोटे-छोटे गांवों-कस्बों से, सामान्य परिवारों से बेटे-बेटियां भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। ऐसे खेलों में भी हमारे बेटे-बेटियां आगे आ रहे हैं, जिनमें पहले संसाधन संपन्न परिवारों के युवा ही हिस्सा ले पाते थे। इसी क्षेत्र के अनेक खिलाड़ियों ने ओलंपिक्स और पैरालंपिक्स में देश का प्रतिनिधित्व किया है। सरकार गांव-गांव में जो आधुनिक स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण कर रही है, उसका ही ये परिणाम है। पहले बेहतर स्टेडियम, सिर्फ बड़े शहरों में ही उपलब्ध थे, आज गांव के पास ही खिलाड़ियों को ये सुविधाएं दी जा रही हैं।

साथियों,

हम जब भी एक नई कार्य संस्कृति को बढ़ाने का प्रयास करते हैं, तो इसके लिए तीन चीजें जरूरी होती हैं- सानिध्य, सोच और संसाधन! खेलों से हमारा सानिध्य सदियों पुराना रहा है। लेकिन खेल की संस्कृति पैदा करने के लिए खेलों से हमारे पुराने संबंध से ही काम नहीं चलेगा। हमें इसके लिए एक नई सोच भी चाहिए। देश में खेलों के लिए जरूरी है कि हमारे युवाओं में खेलों को लेकर विश्वास पैदा हो, खेल को अपना प्रॉफ़ेशन बनाने का हौसला बढ़े। और यही मेरा संकल्प भी है, और ये मेरा सपना भी है! मैं चाहता हूँ कि जिस तरह दूसरे प्रॉफ़ेशन्स हैं, वैसे ही हमारे युवा स्पोर्ट्स को भी देखें। हमें ये भी समझना होगा कि जो कोई स्पोर्ट्स में जाएगा, वो वर्ल्ड नंबर 1 बनेगा, ये जरूरी नहीं है। अरे, देश में जब स्पोर्ट eco-system तैयार होता है तो स्पोर्ट्स मैनेजमेंट से लेकर स्पोर्ट्स राइटिंग और स्पोर्ट्स साइक्‍लॉजी तक, स्पोर्ट्स से जुड़ी कितनी ही संभावनाएं खड़ी होती हैं। धीरे-धीरे समाज में ये विश्वास पैदा होता है कि युवाओं का स्पोर्ट्स की तरफ जाना एक सही निर्णय है। इस तरह का eco-system तैयार करने के लिए जरूरत होती है- संसाधनों की। जब हम जरूरी संसाधन, जरूरी इनफ्रास्ट्रक्चर विकसित कर लेते हैं तो खेल की संस्कृति मजबूत होने लगती है। अगर खेलों के लिए जरूरी संसाधन होंगे तो देश में खेलों की संस्कृति भी आकार लेगी, विस्तार लेगी।

इसीलिए, आज इस तरह की स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटीज़ इतनी ही जरूरी हैं। ये स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटीज़ खेल की संस्कृति के पुष्पित-पल्लवित होने के लिए नर्सरी की तरह काम करती हैं। इसलिए ही आज़ादी के 7 दशक बाद 2018 में पहली नेशनल स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी हमारी सरकार ने मणिपुर में स्थापित की। बीते 7 सालों में देशभर में स्पोर्ट्स एजुकेशन और स्किल्स से जुड़े अनेकों संस्थानों को आधुनिक बनाया गया है। और अब आज मेजर ध्यान चंद स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी, स्पोर्ट्स में हायर एजुकेशन का एक और श्रेष्ठ संस्थान देश को मिला है।

साथियों,

खेल की दुनिया से जुड़ी एक और बात हमें याद रखनी है। और मेरठ के लोग तो इसे अच्छी तरह जानते हैं। खेल से जुड़ी सर्विस और सामान का वैश्विक बाज़ार लाखों करोड़ रुपए का है। यहां मेरठ से ही अभी 100 से अधिक देशों को स्पोर्ट्स का सामान निर्यात होता है। मेरठ, लोकल के लिए वोकल तो है ही, लोकल को ग्लोबल भी बना रहा है। देशभर में ऐसे अनेक स्पोर्ट्स क्लस्टर्स को भी आज विकसित किया जा रहा है। मकसद यही है कि देश स्पोर्ट्स के सामान और उपकरणों की मैन्यूफैक्चरिंग में भी आत्मनिर्भर बन सके।

अब जो नई नेशनल एजुकेशन पॉलिसी लागू हो रही है, उसमें भी खेल को प्राथमिकता दी गई है। स्पोर्ट्स को अब उसी श्रेणी में रखा गया है, जैसे साईंस, कॉमर्स, मैथेमेटिक्‍स, ज्‍योग्रॉफी या दूसरी पढ़ाई हो। पहले खेल को एक्स्ट्रा एक्टिविटी माना जाता था, लेकिन अब स्पोर्ट्स स्कूल में बाकायदा एक विषय होगा। उसका उतना ही महत्व होगा जितना बाकी विषयों का।

साथियों,

यूपी के युवाओं में तो इतनी प्रतिभा है, हमारे यूपी के युवा इतने प्रतिभावान हैं कि आसमान छोटा पड़ जाए। इसलिए यूपी में डबल इंजन सरकार कई विश्वविद्यालयों की स्थापना कर रही है। गोरखपुर में महायोगी गुरू गोरखनाथ आयुष यूनिवर्सिटी, प्रयागराज में डॉ राजेन्द्र प्रसाद विधि विश्वविद्यालय, लखनऊ में स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फारेंसिक साइंसेज़, अलीगढ़ में राजा महेंद्र प्रताप सिंह राज्य विश्वविद्यालय, सहारनपुर में मां शाकुँबरी विश्वविद्यालय और यहां मेरठ में मेजर ध्यानचंद स्पोर्टस यूनिवर्सिटी, हमारा ध्येय साफ है। हमारा युवा ना सिर्फ रोल मॉडल बने वो अपने रोल मॉडल पहचाने भी।

साथियों,

सरकारों की भूमिका अभिभावक की तरह होती है। योग्यता होने पर बढ़ावा भी दें और गलती होने पर ये कहकर ना टाल दें कि लड़कों से गलती हो जाती है। आज योगी जी की सरकार, युवाओं की रिकॉर्ड सरकारी नियुक्तियां कर रही है। ITI से ट्रेनिंग पाने वाले हजारों युवाओं को बड़ी कंपनियों में रोज़गार दिलवाया गया है। नेशनल अप्रेंटिसशिप योजना हो या फिर प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना, लाखों युवाओं को इसका लाभ दिया गया है। अटल जी की जयंती पर यूपी सरकार ने विद्यार्थियों को टेबलेट और स्मार्टफोन देने का भी अभियान शुरू किया है।

साथियों,

केंद्र सरकार की एक और योजना के बारे में भी यूपी के नौजवानों को जानना जरूरी है। ये योजना है- स्वामित्व योजना। इस योजना के तहत केंद्र सरकार, गांवों में रहने वाले लोगों को, उनकी प्रॉपर्टी के मालिकाना हक से जुड़े कागज- घरौनी दे रही है। घरौनी मिलने पर, गांव के युवाओं को, अपना काम-धंधा शुरू करने लिए बैंकों से आसानी से मदद मिल पाएगी। ये घरौनी, गरीब, दलित, वंचित, पीड़ित, पिछड़े, समाज के हर वर्ग को अपने घर पर अवैध कब्ज़े की चिंता से भी मुक्ति दिलाएगी। मुझे खुशी है कि स्वामित्व योजना को योगी जी की सरकार बहुत तेजी से आगे बढ़ा रही है। यूपी के 75 जिलों में 23 लाख से अधिक घरौनी दी जा चुकी है। चुनाव के बाद, योगी जी की सरकार, इसी अभियान को और तेज करेगी।

भाइयों और बहनों,

इस क्षेत्र के ज्यादातर युवा ग्रामीण इलाकों में रहते हैं। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए भी हमारी सरकार निरंतर काम कर रही है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के माध्यम से कल ही, यूपी के लाखों किसानों के बैंक खातों में करोड़ों रुपए ट्रांसफर किए गए हैं। इसका बहुत बड़ा लाभ, इस क्षेत्र के छोटे किसानों को भी हो रहा है।

साथियों,

जो पहले सत्ता में थे, उन्होंने आपको गन्ने का मूल्य, किस्तों में तरसा-तरसा कर दिया। योगी जी सरकार में जितना गन्ना किसानों को भुगतान किया गया है, उतना पिछली दोनों सरकार के दौरान किसानों को नहीं मिला था। पहले की सरकारों में चीनी मिलें कौड़ियों के भाव बेची जाती थीं, मुझसे ज्‍यादा आप जानते हैं, जानते हैं कि नहीं जानते हैं? चीनी मिलें बेची गईं कि नहीं बेची गईं? भ्रष्‍टाचार हुआ कि नहीं हुआ? योगी जी की सरकार में मिलें बंद नहीं होतीं, यहां तो उनका विस्तार होता है, नई मिलें खोली जाती हैं। अब यूपी, गन्ने से बनने वाले इथेनॉल के उत्पादन में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। बीते साढ़े 4 साल में लगभग 12 हज़ार करोड़ रुपए का इथेनॉल यूपी से खरीदा गया है। सरकार कृषि इंफ्रास्ट्रक्चर और फूड प्रोसेसिंग, ऐसे उद्योगों को भी तेज़ी से विस्तार दे रही है। आज ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर पर, भंडारण की व्यवस्था बनाने पर, कोल्ड स्टोरेज पर एक लाख करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं।

भाइयों और बहनों,

डबल इंजन की सरकार युवाओं के सामर्थ्य के साथ ही इस क्षेत्र के सामर्थ्य को भी बढ़ाने के लिए काम कर रही है। मेरठ का रेवड़ी-गजक, हैंडलूम, ब्रास बैंड, आभूषण, ऐसे कारोबार यहां की शान हैं। मेरठ-मुज्जफरनगर में छोटे और लघु उद्योगों का और विस्तार हो, यहां बड़े उद्योगों का मज़बूत आधार बने, यहां के कृषि उत्पादों, यहां की उपज को नए बाज़ार मिले, इसके लिए भी आज अनेकविध प्रयास किए जा रहे हैं। इसलिए, इस क्षेत्र को देश का सबसे आधुनिक और सबसे कनेक्टेड रीजन बनाने के लिए काम हो रहा है। दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे की वजह से दिल्ली अब एक घंटे की दूरी पर रह गई है। अभी कुछ दिन पहले ही जो गंगा एक्सप्रेसवे का काम शुरू हुआ है, वो भी मेरठ से ही शुरू होगा। ये मेरठ की कनेक्टिविटी यूपी के दूसरे शहरों से और संबंधों को, व्‍यवहार को आसान बनाने में काम करेगी। देश का पहला रीजनल रेपिड रेल ट्रांजिट सिस्टम भी मेरठ को राजधानी से जोड़ रहा है। मेरठ देश का पहला ऐसा शहर होगा जहां मेट्रो और हाई स्पीड रैपिड रेल एक साथ दौड़ेंगी। मेरठ का आईटी पार्क जो पहले की सरकार की सिर्फ घोषणा बनकर रह गया था, उसका भी लोकार्पण हो चुका है।

साथियों,

यही डबल बेनिफिट, डबल स्पीड, डबल इंजन की सरकार की पहचान है। इस पहचान को और सशक्त करना है। मेरे पश्चिमी उत्‍तर प्रदेश के लोग जानते हैं कि आप उधर हाथ लंबा करोगे तो लखनऊ में योगीजी, और इधर हाथ लंबा करोगे तो दिल्‍ली में मैं हूं ही आपके लिए। विकास की गति को और बढ़ाना है। नए साल में हम नए जोश के साथ आगे बढ़ेंगे। मेरे नौजवान सा‍थियो, आज पूरा हिंदुस्‍तान मेरठ की ताकत देख रहा है, पश्चिमी उत्‍तर प्रदेश की ताकत देख रहा है, नौजवानों की ताकत देख रहा है। ये ताकत देश की ताकत है और इस ताकत को और बढ़ावा देने के लिए एक नए विश्‍वस के साथ एक बार फिर आपको मेजर ध्यानचंद स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी के लिए बहुत-बहुत बधाई!

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पीएम मोदी का 'प्रभात खबर' के साथ इंटरव्यू
May 19, 2024

प्रश्न- भाजपा का नारा है-‘अबकी बार 400 पार’, चार चरणों का चुनाव हो चुका है, अब आप भाजपा को कहां पाते हैं?

उत्तर- चार चरणों के चुनाव में भाजपा और एनडीए की सरकार को लेकर लोगों ने जो उत्साह दिखाया है, उसके आधार पर मैं कह सकता हूं कि हम 270 सीटें जीत चुके हैं. अब बाकी के तीन चरणों में हम 400 का आंकड़ा पार करने वाले हैं. 400 पार का नारा, भारत के 140 करोड़ लोगों की भावना है, जो इस रूप में व्यक्त हो रही है. दशकों तक जम्मू-कश्मीर में आर्टिकल 370 को देश ने सहन किया. लोगों के मन में यह स्वाभाविक प्रश्न था कि एक देश में दो विधान कैसे चल सकता है. जब हमें अवसर मिला, हमने आर्टिकल 370 को खत्म कर जम्मू-कश्मीर में भारत का संविधान लागू किया. इससे देश में एक अभूतपूर्व उत्साह का प्रवाह हुआ. लोगों ने तय किया कि जिस पार्टी ने आर्टिकल 370 को खत्म किया, उसे 370 सीटें देंगे. इस तरह भाजपा को 370 सीट और एनडीए को 400 सीट देने का लोगों का इरादा पक्का हुआ. मैं पूरे देश में जा रहा हूं. उत्तर से दक्षिण, पूरब से पश्चिम मैंने लोगों में 400 पार नारे को सच कर दिखाने की प्रतिबद्धता देखी है. मैं पूरी तरह से आश्वस्त हूं कि इस बार जनता 400 से ज्यादा सीटों पर हमारी जीत सुनिश्चित करेगी.

प्रश्न- लोग कहते हैं कि हम मोदी को वोट कर रहे हैं, प्रत्याशी के नाम पर नहीं. लोगों का इतना भरोसा है, इस भरोसे को कैसे पूरा करेंगे?

उत्तर- देश की जनता का यह विश्वास मेरी पूंजी है. यह विश्वास मुझे शक्ति देता है. यही शक्ति मुझे दिन रात काम करने को प्रेरित करती है. मेरी सरकार लगातार एक ही मंत्र पर काम कर रही है, वंचितों को वरीयता. जिन्हें किसी ने नहीं पूछा, मोदी उनको पूजता है. इसी भाव से मैं अपने आदिवासी भाई-बहनों, दलित, पिछड़े, गरीब, युवा, महिला, किसान सभी की सेवा कर रहा हूं. जनता का भरोसा मेरे लिए एक ड्राइविंग फोर्स की तरह काम करता है.

देखिए, जो संसदीय व्यवस्था है, उसमें पीएम पद का एक चेहरा होता है, लेकिन जनता सरकार बनाने के लिए एमपी को चुनती है. इस चुनाव में चाहे भाजपा का पीएम उम्मीदवार हो या एमपी उम्मीदवार, दोनों एक ही संदेश लेकर जनता के पास जा रहे हैं. विकसित भारत का संदेश. पीएम उम्मीदवार नेशनल विजन की गारंटी है, तो हमारा एमपी उम्मीदवार स्थानीय आकांक्षाओं को पूरा करने की गारंटी है.

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) एक टीम की तरह काम करती है और इस टीम के लिए उम्मीदवारों के चयन में हमने बहुत ऊर्जा और समय खर्च किया है. हमने उम्मीदवारों के चयन का तरीका बदल दिया है. हमने किसी सीट पर उम्मीदवार के चयन में कोई समझौता नहीं किया, न ही किसी तरह के दबाव को महत्व दिया. जिसमें योग्यता है, जिसमें जनता की उम्मीदों को पूरा करने का जज्बा है, उसका चयन किया गया है. हमें मिल कर हर सीट पर कमल खिलाना है. भाजपा और एनडीए की यह टीम 140 करोड़ भारतीयों की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए हमेशा समर्पित रहेगी.

प्रश्न- आपने 370 को हटाया, राम मंदिर बनवा दिया. अब तीसरी बार आपकी सरकार अगर लौटती है, तो कौन से वे बड़े काम हैं, जिन्हें आप पहले पूरा करना चाहेंगे?

उत्तर- जब आप चुनाव जीत कर आते हैं, तो आपके साथ जनता-जनार्दन का आशीर्वाद होता है. देश के करोड़ों लोगों की ऊर्जा होती है. जनता में उत्साह होता है. इससे आपके काम करने की गति स्वाभाविक रूप से बढ़ जाती है. 2024 के चुनाव में जिस तरीके से भाजपा को समर्थन मिल रहा है, ऐसे में ज्यादातर लोगों के मन में यह सवाल आ रहा है कि तीसरी बार सरकार में आने के बाद क्या बड़े काम होने वाले हैं.

यह चर्चा इसलिए भी हो रही है, क्योंकि 2014 और 2019 में चुनाव जीतने के बाद ही सरकार एक्शन मोड में आ गयी थी. 2019 में हमने पहले 100 दिन में ही आर्टिकल 370 और तीन तलाक से जुड़े फैसले लिये थे. बैंकों के विलय जैसा महत्वपूर्ण फैसला भी सरकार बनने के कुछ ही समय बाद ले लिया गया था. हालांकि इन फैसलों के लिए आधार बहुत पहले से तैयार कर लिया गया था.

इस बार भी हमारे पास अगले 100 दिनों का एक्शन प्लान है, अगले पांच वर्षों का रोडमैप है और अगले 25 वर्षों का विजन है. मुझे देशभर के युवाओं ने बहुत अच्छे सुझाव भेजे हैं. युवाओं के उत्साह को ध्यान में रखते हुए हमने 100 दिनों के एक्शन प्लान में 25 दिन और जोड़ दिये हैं. 125 में से 25 दिन भारत के युवाओं से जुड़े निर्णय के होंगे. हम आज जो भी कदम उठा रहे हैं, उसमें इस बात का ध्यान रख रहे हैं कि इससे विकसित भारत का लक्ष्य प्राप्त करने में कैसे मदद मिल सकती है.

प्रश्न- दक्षिण पर आपने काफी ध्यान दिया है. लोकप्रियता भी बढ़ी है. वोट प्रतिशत भी बढ़ेगा, लेकिन क्या सीट जीतने लायक स्थिति साउथ में बनी है?

उत्तर- देखिए, दक्षिण भारत में बीजेपी अब भी सबसे बड़ी पार्टी है. पुद्दुचेरी में हमारी सरकार है. कर्नाटक में हम सरकार में रह चुके हैं. 2024 के चुनाव में मैंने दक्षिण के कई जिलों में रैलियां और रोड शो किये हैं. मैंने लोगों की आंखों में बीजेपी के लिए जो स्नेह और विश्वास देखा है, वह अभूतपूर्व है. इस बार दक्षिण भारत के नतीजे चौंकाने वाले होंगे.

तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में हम सबसे ज्यादा सीटें जीतेंगे. लोगों ने आंध्र विधानसभा में एनडीए की सरकार बनाने के लिए वोट किया है. कर्नाटक में भाजपा एक बार फिर सभी सीटों पर जीत हासिल करेगी. मैं आपको पूरे विश्वास से कह रहा हूं कि तमिलनाडु में इस बार के परिणाम बहुत ही अप्रत्याशित होंगे और भारतीय जनता पार्टी के पक्ष में होंगे.

प्रश्न- ओडिशा और पश्चिम बंगाल से भाजपा को बहुत उम्मीदें हैं. भाजपा कितनी सीटें जीतने की उम्मीद करती है?

उत्तर- मैं ओडिशा और पश्चिम बंगाल में जहां भी जा रहा हूं, मुझे दो बातें हर जगह देखने को मिल रही हैं. एक तो भाजपा पर लोगों का भरोसा और दूसरा दोनों ही राज्यों में वहां की सरकार से भारी नाराजगी. लोगों की आकांक्षाओं को मार कर राज करने को सरकार चलाना नहीं कह सकते. ओडिशा और पश्चिम बंगाल में लोगों की आकांक्षाओं, भविष्य और सम्मान को कुचला गया है. पश्चिम बंगाल की टीएमसी सरकार भ्रष्टाचार, गुंडागर्दी का दूसरा नाम बन गयी है. लोग देख रहे हैं कि कैसे वहां की सरकार ने महिलाओं की सुरक्षा को ताक पर रख दिया है.

संदेशखाली की पीड़ितों की आवाज दबाने की कोशिश की गयी. लोगों को अपने त्योहार मनाने से रोका जा रहा है. टीएमसी सरकार लोगों तक केंद्र की योजनाओं का फायदा नहीं पहुंचने दे रही. इसका जवाब वहां के लोग अपने वोट से देंगे. पश्चिम बंगाल के लोग भाजपा को एक उम्मीद के तौर पर देख रहे हैं. बंगाल में इस बार हम बड़ी संख्या में सीटें हासिल करेंगे. मैं ओडिशा के लोगों से कहना चाहता हूं कि उनकी तकलीफें जल्द खत्म होने वाली हैं. चुनाव नतीजों में हम ना सिर्फ लोकसभा की ज्यादा सीटें जीतेंगे, बल्कि विधानसभा में भी भाजपा की सरकार बनेगी.

पहली बार ओडिशा के लोगों को डबल इंजन की सरकार के फायदे मिलेंगे. बीजेडी की सरकार हमारी जिन योजनाओं को ओडिशा में लागू नहीं होने दे रही, हमारी सरकार बनते ही उनका फायदा लोगों तक पहुंचने लगेगा. बीजेडी ने अपने कार्यकाल में सबसे ज्यादा नुकसान उड़िया संस्कृति और भाषा का किया है. मैंने ओडिशा को भरोसा दिया है कि राज्य का अगला सीएम भाजपा का होगा, और वह व्यक्ति होगा, जो ओडिशा की मिट्टी से निकला हो, जो ओडिशा की संस्कृति, परंपरा और उड़िया लोगों की भावनाओं को समझता हो.

ये मेरी गारंटी है कि 10 जून को ओडिशा का बेटा सीएम पद की शपथ लेगा. राज्य के लोग अब एक ऐसी सरकार चाहते हैं, जो उनकी उड़िया पहचान को विश्व पटल पर ले जाए, इसलिए उनका भरोसा सिर्फ भाजपा पर है.

प्रश्न- बिहार और झारखंड में पार्टी का प्रदर्शन कैसा रहेगा, आप क्या उम्मीद करते हैं?

उत्तर- मेरा विश्वास है कि इस बार बिहार और झारखंड में भाजपा को सभी सीटों पर जीत हासिल होगी. दोनों राज्यों के लोग एक बात स्पष्ट रूप से समझ गये हैं कि इंडी गठबंधन में शामिल पार्टियों को जब भी मौका मिलेगा, तो वे भ्रष्टाचार ही करेंगे. इंडी ब्लॉक में शामिल पार्टियां परिवारवाद से आगे निकल कर देश और राज्य के विकास के बारे में सोच ही नहीं सकतीं.

झारखंड में नेताओं और उनके संबंधियों के घर से नोटों के बंडल बाहर निकल रहे हैं. यह किसका पैसा है? ये गरीब के हक का पैसा है. ये पैसा किसी गरीब का अधिकार छीन कर इकट्ठा किया गया है. अगर वहां भ्रष्टाचार पर रोक रहती, तो यह पैसा कई लोगों तक पहुंचता. उस पैसे से हजारों-लाखों लोगों का जीवन बदल सकता था, लेकिन जनता का वोट लेकर ये नेता गरीबों का ही पैसा लूटने लगे. दूसरी तरफ जनता के सामने केंद्र की भाजपा सरकार है, जिस पर 10 साल में भ्रष्टाचार का एक भी दाग नहीं लगा.

आज झारखंड में जिहादी मानसिकता वाले घुसपैठिये झुंड बना कर हमला करते हैं और झारखंड सरकार उन्हें समर्थन देती है. इन घुसपैठियों ने राज्य में हमारी बहनों-बेटियों की सुरक्षा को खतरे में डाल दिया है. वहीं अगर बिहार की बात करें, तो जो पुराने लोग हैं, उन्हें जंगलराज याद है. जो युवा हैं, उन्होंने इसका ट्रेलर कुछ दिन पहले देखा है.

आज राजद और इंडी गठबंधन बिहार में अपने नहीं, नीतीश जी के काम पर वोट मांग रहा है. इंडी गठबंधन के नेता तुष्टीकरण में इतने डूब चुके हैं एससी-एसटी-ओबीसी का पूरा का पूरा आरक्षण मुस्लिम समाज को देना चाहते हैं. जनता इस साजिश को समझ रही है. इसलिए, भाजपा को वोट देकर इसका जवाब देगी.

प्रश्न- संपत्ति का पुनर्वितरण इन दिनों बहस का मुद्दा बना हुआ है. इस पर आपकी क्या राय है?

उत्तर- शहजादे और उनके सलाहकारों को पता है कि वे सत्ता में नहीं आने वाले. इसीलिए ऐसी बात कर रहे हैं. यह माओवादी सोच है, जो सिर्फ अराजकता को जन्म देगी. इंडी गठबंधन की परेशानी यह है कि वे तुष्टीकरण से आगे कुछ भी सोच नहीं पा रहे. वे किसी तरह एक समुदाय का वोट पाना चाहते हैं, इसलिए अनाप-शनाप बातें कर रहे हैं. लूट-खसोट की यह सोच कभी भी भारत की संस्कृति का हिस्सा नहीं रही. वे एक्सरे कराने की बात कर रहे हैं, उनका प्लान है कि एक-एक घर में जाकर लोगों की बचत, उनकी जमीन, संपत्ति और गहनों का हिसाब लिया जायेगा. कोई भी इस तरह की व्यवस्था को स्वीकार नहीं करेगा. पिछले 10 वर्षों में हमारा विकास मॉडल लोगों को अपने पैरों पर खड़ा करने का है. इसके लिए हम लोगों तक वे मूलभूत सुविधाएं पहुंचा रहे हैं, जो दशकों पहले उन्हें मिल जाना चाहिए था. हम रोजगार के नये अवसर तैयार कर रहे हैं, ताकि लोग सम्मान के साथ जी सकें.

प्रश्न- भारत की अर्थव्यवस्था लगातार मजबूत हो रही है. भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने जा रहा है. आम आदमी को इसका लाभ कैसे मिलेगा?

उत्तर- यह बहुत ही अच्छा सवाल है आपका. तीसरे कार्यकाल में भारत की अर्थव्यवस्था दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनेगी. जब मैं यह कहता हूं कि तो इसका मतलब सिर्फ एक आंकड़ा नहीं है. दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था सम्मान के साथ देशवासियों के लिए समृद्धि भी लाने वाला है. दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था का मतलब है बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, कनेक्टिविटी का विस्तार, ज्यादा निवेश और ज्यादा अवसर. आज सरकार की योजनाओं का लाभ जितने लोगों तक पहुंच रहा है, उसका दायरा और बढ़ जायेगा.

भाजपा ने तीसरे टर्म में आयुष्मान भारत योजना का लाभ 70 वर्ष से ऊपर के सभी बुजुर्गों को देने की गारंटी दी है. हमने गरीबों के लिए तीन करोड़ और पक्के मकान बनाने का संकल्प लिया है. तीन करोड़ लखपति दीदी बनाने की बात कही है. जब अर्थव्यवस्था मजबूत होगी, तो हमारी योजनाओं का और विस्तार होगा और ज्यादा लोग लाभार्थी बनेंगे.

प्रश्न- आप लोकतंत्र में विपक्ष को कितना जरूरी मानते हैं और उसकी क्या भूमिका होनी चाहिए?

उत्तर- लोकतंत्र में सकारात्मक विपक्ष बहुत महत्वपूर्ण है. विपक्ष का मजबूत होना लोकतंत्र के मजबूत होने की निशानी है. इसे दुर्भाग्य ही कहेंगे कि पिछले 10 वर्षों में विपक्ष व्यक्तिगत विरोध करते-करते देश का विरोध करने लगा. विपक्ष या सत्ता पक्ष लोकतंत्र के दो पहलू हैं, आज कोई पार्टी सत्ता में है, कभी कोई और रही होगी, लेकिन आज विपक्ष सरकार के विरोध के नाम पर कभी देश की सेना को बदनाम कर रहा है, कभी सेना के प्रमुख को अपशब्द कह रहा है. कभी सर्जिकल स्ट्राइक पर सवाल उठाता है, तो कभी एयरस्ट्राइक पर संदेह जताता है. सेना के सामर्थ्य पर उंगली उठा कर वे देश को कमजोर करना चाहते हैं.

आप देखिए, विपक्ष कैसे पाकिस्तान की भाषा बोलने लगा है. जिस भाषा में वहां के नेता भारत को धमकी देते थे, वही आज कांग्रेस के नेता बोलने लगे हैं. मैं इतना कह सकता हूं कि विपक्ष अपनी इस भूमिका में भी नाकाम हो गया है. वे देश के लोगों का विश्वास नहीं जीत पा रहे, इसलिए देश के खिलाफ बोल रहे हैं.

प्रश्न- झारखंड में बड़े पैमाने पर नोट पकड़े गये, भ्रष्टाचार से इस देश को कैसे मुक्ति मिलेगी?

उत्तर- देखिए, जब कोई सरकार तुष्टीकरण, भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद के दलदल में फंस जाती है तो इस तरह की चीजें देखने को मिलती हैं. मैं आपको एक आंकड़ा देता हूं. 2014 से पहले, कांग्रेस के 10 साल के शासन में ईडी ने छापे मार कर सिर्फ 35 लाख रुपये बरामद किये थे. पिछले 10 वर्ष में इडी के छापे में 2200 करोड़ रुपये नकद बरामद हुए हैं. यह अंतर बताता है कि जांच एजेंसियां अब ज्यादा सक्रियता से काम कर रही हैं.

आज देश के करोड़ों लाभार्थियों को डीबीटी के माध्यम से सीधे खाते में पैसे भेजे जा रहे हैं. कांग्रेस के एक प्रधानमंत्री ने कहा था कि दिल्ली से भेजे गये 100 पैसे में से लाभार्थी को सिर्फ 15 पैसे मिलते हैं. बीच में 85 पैसे कांग्रेस के भ्रष्टाचार तंत्र की भेंट चढ़ जाते थे. हमने जनधन खाते खोले, उन्हें आधार और मोबाइल नंबर से लिंक किया, इसके द्वारा भ्रष्टाचार पर चोट की. डीबीटी के माध्यम से हमने लाभार्थियों तक 36 लाख करोड़ रुपये पहुंचाये हैं. अगर यह व्यवस्था नहीं होती, तो 30 लाख करोड़ रुपये बिचौलियों की जेब में चले जाते. मैंने संकल्प लिया है कि मैं देश से भ्रष्टाचार को खत्म करके रहूंगा. जो भी भ्रष्टाचारी होगा, उस पर कार्रवाई जरूर होगी. मेरे तीसरे टर्म ये कार्रवाई और तेज होगी.

प्रश्न- विपक्ष सरकार पर केंद्रीय एजेंसियों- इडी और सीबीआइ के दुरुपयोग का आरोप लगा रहा है. इस पर आपका क्या कहना है?

उत्तर- आपको यूपीए का कार्यकाल याद होगा, तब भ्रष्टाचार और घोटाले की खबरें आती रहती थीं. उस स्थिति से बाहर निकलने के लिए लोगों ने भाजपा को अपना आशीर्वाद दिया, लेकिन आज इंडी गठबंधन में शामिल दलों की जहां सरकार है, वहां यही सिलसिला जारी है. फिर जब जांच एजेंसियां इन पर कार्रवाई करती हैं तो पूरा विपक्ष एकजुट होकर शोर मचाने लगता है. एक घर से अगर करोड़ों रुपये बरामद हुए हैं, तो स्पष्ट है कि वो पैसा भ्रष्टाचार करके जमा किया गया है. इस पर कार्रवाई होने से विपक्ष को दर्द क्यों हो रहा है? क्या विपक्ष अपने लिए छूट चाहता है कि वे चाहे जनता का पैसा लूटते रहें, लेकिन एजेंसियां उन पर कार्रवाई न करें.

मैं विपक्ष और उन लोगों को चुनौती देना चाहता हूं, जो कहते हैं कि सरकार किसी भी एजेंसी का दुरुपयोग कर रही है. एक भी ऐसा केस नहीं हैं जहां पर कोर्ट ने एजेंसियों की कार्रवाई को गलत ठहराया हो. भ्रष्टाचार में फंसे लोगों के लिए जमानत पाना मुश्किल हो रहा है. जो जमानत पर बाहर हैं, उन्हें फिर वापस जाना है. मैं डंके की चोट पर कहता हूं कि एजेंसियों ने सिर्फ भ्रष्टाचारियों के खिलाफ कार्यवाही की है.

प्रश्न- विपक्ष हमेशा इवीएम की विश्वसनीयता पर सवाल उठाता है, आपकी क्या राय है?

उत्तर- विपक्ष को अब यह स्पष्ट हो चुका है कि उसकी हार तय है. यह भी तय हो चुका है कि जनता ने उन्हें तीसरी बार भी बुरी तरह नकार दिया है. ये लोग इवीएम के मुद्दे पर अभी-अभी सुप्रीम कोर्ट से हार कर आये हैं. ये हारी हुई मानसिकता से चुनाव लड़ रहे हैं, इसलिए पहले से बहाने ढूंढ कर रखा है. इनकी मजबूरी है कि ये हार के लिए शहजादे को दोष नहीं दे सकते. आप इनका पैटर्न देखिए, चुनाव शुरू होने से पहले ये इवीएम पर आरोप लगाते हैं. उससे बात नहीं तो इन्होंने मतदान प्रतिशत के आंकड़ों का मुद्दा उठाना शुरू किया है. जब मतगणना होगी तो गड़बड़ी का आरोप लगायेंगे और जब शपथ ग्रहण होगा, तो कहेंगे कि लोकतंत्र खतरे में है. चुनाव आयोग ने पत्र लिख कर खड़गे जी को जवाब दिया है, उससे इनकी बौखलाहट और बढ़ गयी है. ये लोग चाहे कितना भी शोर मचा लें, चाहे संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठा लें, जनता इनकी बहानेबाजी को समझती है. जनता को पता है कि इसी इवीएम से जीत मिलने पर कैसे उनके नरेटिव बदल जाते हैं. इवीएम पर आरोप को जनता गंभीरता से नहीं लेती.

प्रश्न- आपने आदिवासियों के विकास के लिए अनेक योजनाएं शुरू की हैं. आप पहले प्रधानमंत्री हैं, जो भगवान बिरसा की जन्मस्थली उलिहातू भी गये. आदिवासी समाज के विकास को लेकर आपका विजन क्या है?

उत्तर- इस देश का दुर्भाग्य रहा है कि आजादी के बाद छह दशक तक जिन्हें सत्ता मिली, उन लोगों ने सिर्फ एक परिवार को ही देश की हर बात का श्रेय दिया. उनकी चले, तो वे यह भी कह दें कि आजादी की लड़ाई भी अकेले एक परिवार ने ही लड़ी थी. हमारे आदिवासी भाई-बहनों का इस देश की आजादी में, इस देश के समाज निर्माण में जो योगदान रहा, उसे भुला दिया गया. भगवान बिरसा मुंडा के योगदान को ना याद करना कितना बड़ा पाप है. देश भर में ऐसे कितने ही क्रांतिकारी हैं जिन्हें इस परिवार ने भुला दिया.

जिन आदिवासी इलाकों तक कोई देखने तक नहीं जाता था, हमने वहां तक विकास पहुंचाया है. हम आदिवासी समाज के लिए लगातार काम कर रहे हैं. जनजातियों में भी जो सबसे पिछड़े हैं, उनके लिए विशेष अभियान चला कर उन्हें विकास की मुख्यधारा से जोड़ा है. इसके लिए सरकार ने 24 हजार करोड़ रुपये की योजना बनायी है.

भगवान बिरसा मुंडा के जन्म दिवस को भाजपा सरकार ने जनजातीय गौरव दिवस घोषित किया. एकलव्य विद्यालय से लेकर वन उपज तक, सिकेल सेल एनीमिया उन्मूलन से लेकर जनजातीय गौरव संग्रहालय तक, हर स्तर पर विकास कर रहे हैं. एनडीए के सहयोग से पहली बार एक आदिवासी बेटी देश की राष्ट्रपति बनी है.अगले वर्ष भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जन्म जयंती है. भाजपा ने संकल्प लिया है कि 2025 को जनजातीय गौरव वर्ष के रूप में मनाया जायेगा.

प्रश्न- देश के मुसलमानों और ईसाइयों के मन में भाजपा को लेकर एक अविश्वास का भाव है. इसे कैसे दूर करेंगे?

उत्तर- हमारी सरकार ने पिछले 10 वर्षों में एक काम भी ऐसा नहीं किया है, जिसमें कोई भेदभाव हुआ हो. पीएम आवास का घर मिला है, तो सबको बिना भेदभाव के मिला है. उज्ज्वला का गैस कनेक्शन मिला है, तो सबको मिला है. बिजली पहुंची है, तो सबके घर पहुंची है. नल से जल का कनेक्शन देने की बात आयी, तो बिना जाति, धर्म पूछे हर किसी को दी गयी. हम 100 प्रतिशत सैचुरेशन की बात करते हैं. इसका मतलब है कि सरकार की योजनाओं का लाभ हर व्यक्ति तक पहुंचे, हर परिवार तक पहुंचे. यही तो सच्चा सामाजिक न्याय है.

इसके अलावा मुद्रा लोन, जनधन खाते, डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर, स्टार्ट अप- ये सारे काम सबके लिए हो रहे हैं. हमारी सरकार सबका साथ सबका विकास के विजन पर काम करती है. दूसरी तरफ, जब कांग्रेस को मौका मिला, तो उसने समाज में विभाजन की नीति अपनायी. दशकों तक वोटबैंक की राजनीति करके सत्ता पाती रही, लेकिन अब जनता इनकी सच्चाई समझ चुकी है.

भाजपा को लेकर अल्पसंख्यकों में अविश्वास की बातें कांग्रेसी इकोसिस्टम का गढ़ा हुआ है. कभी कहा गया कि बीजेपी शहरों की पार्टी है. फिर कहा गया कि बीजेपी ऐसी जगहों में नहीं जीत सकती, जहां पर अल्पसंख्यक अधिक हैं. आज नागालैंड सहित नॉर्थ ईस्ट के दूसरे राज्यों में हमारी सरकार है, जहां क्रिश्चियन समुदाय बहुत बड़ा है. गोवा में बार-बार भाजपा को चुना जाता है. ऐसे में अविश्वास की बात कहीं टिकती नहीं.

प्रश्न- झारखंड और बिहार के कई इलाकों में घुसपैठ बढ़ी है, यहां तक कि डेमोग्रेफी भी बदल गयी है. इस पर कैसे अंकुश लगेगा?

उत्तर- झारखंड को एक नयी समस्या का सामना करना पड़ रहा है. जेएमएम सरकार की तुष्टीकरण की नीति से वहां घुसपैठ को जम कर बढ़ावा मिल रहा है. बांग्लादेशी घुसपैठियों की वजह से वहां की आदिवासी संस्कृति को खतरा पैदा हो गया है, कई इलाकों की डेमोग्राफी तेजी से बदल रही है. बिहार के बॉर्डर इलाकों में भी यही समस्या है. झारखंड में आदिवासी समाज की महिलाओं और बेटियों को टारगेट करके लैंड जिहाद किया जा रहा है. आदिवासियों की जमीन पर कब्जे की एक खतरनाक साजिश चल रही है.

ऐसी खबरें मेरे संज्ञान में आयी हैं कि कई आदिवासी बहनें इन घुसपैठियों का शिकार बनी हैं, जो गंभीर चिंता का विषय है. बच्चियों को जिंदा जलाया जा रहा है. उनकी जघन्य हत्या हो रही है. पीएफआइ सदस्यों ने संताल परगना में आदिवासी बच्चियों से शादी कर हजारों एकड़ जमीन को अपने कब्जे में ले लिया है. आदिवासियों की जमीन की सुरक्षा के लिए, आदिवासी बेटी की रक्षा के लिए, आदिवासी संस्कृति को बनाये रखने के लिए भाजपा प्रतिबद्ध है.

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स्रोत: प्रभात खबर