ऑपरेशन सिंदूर की सफलता, आतंकी ठिकानों को नेस्तनाबूद करने की ताकत, और कुछ ही घंटों में पाकिस्तान को घुटनों पर लाने की क्षमता; पूरी दुनिया ने भारत का यह नया रूप देखा है: पीएम
आज भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था है: प्रधानमंत्री
पिछले 11 वर्षों में हमारी अर्थव्यवस्था 10वें स्थान से ऊपर उठकर शीर्ष पांच में पहुंच गई है, अब हम शीर्ष तीन अर्थव्यवस्थाओं में से एक बनने की ओर तेज़ी से बढ़ रहे हैं: प्रधानमंत्री
विकसित भारत की यात्रा डिजिटल इंडिया के साथ-साथ आगे बढ़ेगी: प्रधानमंत्री
हमारी अगली बड़ी प्राथमिकता तकनीक में आत्मनिर्भर बनना होनी चाहिए: प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज कर्नाटक के बेंगलुरु में लगभग 7,160 करोड़ रुपये की लागत वाली बेंगलुरु मेट्रो की येलो लाइन का उद्घाटन और 15,610 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली बेंगलुरु मेट्रो चरण-3 परियोजना की आधारशिला रखी। उन्होंने बेंगलुरु के केएसआर रेलवे स्टेशन पर तीन वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनों को भी हरी झंडी दिखाई। इस अवसर पर उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि कर्नाटक की धरती पर कदम रखते ही उन्हें एक अलग ही आत्मीयता का एहसास हुआ। कर्नाटक की समृद्ध संस्कृति, यहां के लोगों के स्नेह और हृदय को गहराई से छू लेने वाली कन्नड़ भाषा की मधुरता का उल्लेख करते हुए, श्री मोदी ने बेंगलुरु की अधिष्ठात्री देवी अन्नम्मा थायी के चरणों में श्रद्धा सुमन अर्पित किए। यह स्मरण करते हुए कि सदियों पहले, नादप्रभु केम्पेगौड़ा ने बेंगलुरु शहर की नींव रखी थी, प्रधानमंत्री ने कहा कि केम्पेगौड़ा ने एक ऐसे शहर की कल्पना की थी जो परंपराओं से ओतप्रोत हो और उन्‍नति की नई ऊंचाइयों को छुए। प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘बेंगलुरु ने हमेशा उस भावना को जीया है और उसे संजोया है और आज, बेंगलुरु उसी सपने को साकार कर रहा है।’’

श्री मोदी ने कहा, ‘‘आज, बेंगलुरु एक ऐसे शहर के रूप में उभर रहा है जो नए भारत के उदय का प्रतीक बन गया है।’’ उन्होंने इसे एक ऐसा शहर बताया जिसकी आत्मा दार्शनिक ज्ञान से ओतप्रोत है और जिसके कार्य तकनीकी विशेषज्ञता को दर्शाते हैं। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि बेंगलुरु एक ऐसा शहर है जिसने भारत को वैश्विक आईटी मानचित्र पर गौरवान्वित किया है। उन्होंने बेंगलुरु की सफलता का श्रेय यहां के लोगों की कड़ी मेहनत और प्रतिभा को दिया।

प्रधानमंत्री ने बल देकर कहा, ‘‘21वीं सदी में, शहरी नियोजन और शहरी बुनियादी ढांचा हमारे शहरों की अहम ज़रूरतें हैं।’’ उन्होंने कहा कि बेंगलुरु जैसे शहरों को भविष्य के लिए तैयार रहना होगा। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि वर्तमान वर्षों में भारत सरकार ने बेंगलुरु के लिए हज़ारों करोड़ रुपये की परियोजनाएं शुरू की हैं और आज यह अभियान नई गति पकड़ रहा है। श्री मोदी ने बेंगलुरु मेट्रो की येलो लाइन का उद्घाटन किया और मेट्रो के तीसरे चरण की आधारशिला रखी। उन्होंने देश के विभिन्न हिस्सों को जोड़ने वाली तीन नई वंदे भारत ट्रेनों को भी हरी झंडी दिखाई। उन्होंने कहा कि बेंगलुरु और बेलगावी के बीच वंदे भारत सेवा शुरू होने से बेलगावी में व्यापार और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। इसके अतिरिक्त, नागपुर और पुणे के बीच और श्री माता वैष्णो देवी कटरा और अमृतसर के बीच वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनें शुरू की गईं। प्रधानमंत्री ने कहा कि इन सेवाओं से लाखों श्रद्धालुओं को लाभ होगा और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने इन परियोजनाओं और नई वंदे भारत ट्रेनों के लिए बेंगलुरु, कर्नाटक और पूरे देश के लोगों को शुभकामनाएं दी।

ऑपरेशन सिंदूर के बाद बेंगलुरु की अपनी पहली यात्रा का ज़िक्र करते हुए, श्री मोदी ने ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय सेना की सफलता पर प्रकाश डाला और सीमा पार आतंकवादी ठिकानों को नष्ट करने की उनकी क्षमता का ज़िक्र किया। उन्होंने आतंकवादियों का बचाव करने आए पाकिस्तान को कुछ ही घंटों में घुटने टेकने पर मजबूर करने पर भारत की ताकत की सराहना की। प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘पूरी दुनिया ने नए भारत के इस नए रूप को देखा है।’’ उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर की सफलता का श्रेय तकनीक की शक्ति और रक्षा क्षेत्र में मेक इन इंडिया की ताकत को दिया। उन्होंने इस उपलब्धि में बेंगलुरु और कर्नाटक के युवाओं के महत्वपूर्ण योगदान को स्वीकार किया और इस सफलता में उनकी भूमिका के लिए सभी को बधाई दी।

यह देखते हुए कि बेंगलुरु अब प्रमुख वैश्विक शहरों के साथ पहचाना जाने लगा है, प्रधानमंत्री ने बल देकर कहा कि भारत को न केवल वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करनी चाहिए, बल्कि नेतृत्व भी करना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रगति तभी होगी जब हमारे शहर स्मार्ट, तेज़ और कुशल होंगे, और इस तरह उन्होंने आधुनिक बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को पूरा करने पर सरकार के संज्ञान को रेखांकित किया। श्री मोदी ने आरवी रोड से बोम्मासंद्रा तक बेंगलुरु मेट्रो की येलो लाइन शुरू करने की घोषणा की, जो बेंगलुरु के कई प्रमुख इलाकों को जोड़ेगी। उन्होंने कहा कि बसवनगुडी और इलेक्ट्रॉनिक सिटी के बीच यात्रा का समय अब काफ़ी कम हो जाएगा। उन्होंने कहा कि इससे लाखों लोगों के लिए जीवन और कार्य करने की सुगमता बढ़ेगी।

प्रधानमंत्री ने घोषणा की कि येलो लाइन के उद्घाटन के साथ ही, बेंगलुरु मेट्रो के तीसरे चरण, यानी ऑरेंज लाइन, की आधारशिला भी रखी गई है। उन्होंने कहा कि चालू होने के बाद, ऑरेंज लाइन, येलो लाइन के साथ मिलकर, प्रतिदिन 25 लाख यात्रियों के लिए यात्रा को सुगम बनाएगी। उन्होंने कहा कि इससे बेंगलुरु की परिवहन व्यवस्था सशक्त होगी और इसे नई ऊंचाइयों पर ले जाया जाएगा। श्री मोदी ने आगे कहा कि बेंगलुरु मेट्रो ने देश में सार्वजनिक अवसंरचना विकास का एक नया मॉडल पेश किया है। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि इंफोसिस फाउंडेशन, बायोकॉन और डेल्टा इलेक्ट्रॉनिक्स जैसी कंपनियों ने कई प्रमुख मेट्रो स्टेशनों के लिए आंशिक वित्तपोषण प्रदान किया है। उन्होंने कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) के इस अभिनव उपयोग की प्रशंसा करते हुए इसे प्रेरणा का स्रोत बताया और कॉरपोरेट क्षेत्र को उनके योगदान के लिए बधाई दी।

श्री मोदी ने कहा, “भारत वर्तमान में दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था है। पिछले ग्यारह वर्षों में, भारत की अर्थव्यवस्था वैश्विक स्तर पर 10वें स्थान से ऊपर उठकर शीर्ष पांच में पहुंच गई है और तेज़ी से शीर्ष तीन अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होने की ओर अग्रसर है।” उन्होंने इस गति का श्रेय स्पष्ट इरादे और ईमानदार प्रयासों से प्रेरित “सुधार, प्रदर्शन और परिवर्तन” की भावना को दिया। बुनियादी ढांचे के विकास पर विचार करते हुए, प्रधानमंत्री ने याद दिलाया कि 2014 में, मेट्रो सेवाएं केवल पांच शहरों तक ही सीमित थीं। उन्होंने कहा कि आज, मेट्रो नेटवर्क 24 शहरों में 1,000 किलोमीटर से अधिक तक फैला है, जिससे भारत विश्व स्तर पर तीसरा सबसे बड़ा मेट्रो नेटवर्क बन गया है। श्री मोदी ने यह भी बताया कि 2014 से पहले, केवल लगभग 20,000 किलोमीटर रेलवे मार्गों का विद्युतीकरण किया गया था। केवल पिछले ग्यारह वर्षों में, 40,000 किलोमीटर से अधिक रेलवे मार्गों का विद्युतीकरण किया गया है, जो सतत परिवहन विकास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

इस बात पर बल देते हुए कि भारत की उपलब्धियां न केवल जमीन पर बल्कि आसमान में भी बढ़ रही हैं, प्रधानमंत्री ने बताया कि 2014 में भारत में केवल 74 हवाई अड्डे थे और आज इनकी संख्या बढ़कर 160 से अधिक हो गई है। उन्होंने जलमार्ग अवसंरचना में उल्लेखनीय प्रगति की ओर भी ध्यान दिलाया और कहा कि 2014 में केवल तीन राष्ट्रीय जलमार्ग चालू थे; यह संख्या अब बढ़कर तीस हो गई है।

स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में भारत द्वारा की गई महत्वपूर्ण प्रगति पर चर्चा करते हुए, श्री मोदी ने इस बात पर प्रकाश डाला कि 2014 तक देश में केवल 7 एम्स और 387 मेडिकल कॉलेज थे, जबकि आज 22 एम्स और 704 मेडिकल कॉलेज लोगों की सेवा कर रहे हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले 11 वर्षों में देश भर में एक लाख से ज़्यादा नई मेडिकल सीटें जोड़ी गई हैं। उन्होंने इस विस्तार के प्रभाव पर बल दिया और बताया कि कैसे मध्यम वर्ग के बच्चों को इन बढ़े हुए अवसरों से बहुत लाभ हुआ है। श्री मोदी ने आगे बताया कि पिछले 11 वर्षों में, आईआईटी की संख्या 16 से बढ़कर 23, आईआईआईटी की संख्या 9 से बढ़कर 25 और आईआईएम की संख्या 13 से बढ़कर 21 हो गई है। उन्होंने कहा कि आज छात्रों के पास उच्च शिक्षा में पहले से कहीं अधिक अवसर उपलब्ध हैं।

प्रधानमंत्री ने इस बात पर ज़ोर दिया कि आज जैसे-जैसे देश तेज़ी से प्रगति कर रहा है, वैसे-वैसे गरीबों और वंचितों के जीवन में भी उसी गति से बदलाव आ रहा है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 4 करोड़ से ज़्यादा पक्के घर उपलब्ध कराए गए हैं। उन्होंने घोषणा की कि सरकार अब 3 करोड़ और घर बनाने के लिए तैयार है। श्री मोदी ने कहा कि सिर्फ़ 11 वर्षों में देश भर में 12 करोड़ से ज़्यादा शौचालय बनाए गए हैं। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि इस कदम ने करोड़ों माताओं और बहनों को सम्मान, स्वच्छता और सुरक्षा दी है।

श्री मोदी ने इस बात पर ज़ोर दिया कि देश में विकास की तेज़ गति भारत की आर्थिक वृद्धि से प्रेरित है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि 2014 से पहले भारत का कुल निर्यात केवल 468 अरब डॉलर तक पहुंच गया था, जबकि आज यह आंकड़ा बढ़कर 824 अरब डॉलर हो गया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि पहले भारत मोबाइल फोन आयात करता था, लेकिन अब देश मोबाइल हैंडसेट के शीर्ष पांच निर्यातकों में शामिल है। उन्होंने कहा कि इस बदलाव में बेंगलुरु की अहम भूमिका रही है। श्री मोदी ने आगे बताया कि 2014 से पहले भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात लगभग 6 अरब डॉलर था, जो अब बढ़कर लगभग 38 अरब डॉलर हो गया है।

ग्यारह साल पहले भारत का ऑटोमोबाइल निर्यात लगभग 16 अरब डॉलर था, प्रधानमंत्री ने कहा कि आज यह आंकड़ा दोगुने से भी ज़्यादा हो गया है, जिससे भारत दुनिया का चौथा सबसे बड़ा ऑटोमोबाइल निर्यातक बन गया है। उन्होंने कहा कि ये उपलब्धियां आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को सुदृढ़ करती हैं और उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि संगठित होकर देश आगे बढ़ेगा और एक विकसित भारत का निर्माण करेगा।

श्री मोदी ने कहा, ‘‘विकसित भारत की यात्रा डिजिटल इंडिया के साथ-साथ आगे बढ़ेगी।’’ उन्होंने कहा कि भारत एआई मिशन जैसी पहलों के माध्यम से, भारत वैश्विक एआई नेतृत्व की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने आगे कहा कि सेमीकंडक्टर मिशन भी गति पकड़ रहा है और भारत के पास शीघ्र ही अपनी स्वयं की मेड-इन-इंडिया चिप होगी। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत कम लागत वाले, उच्च तकनीक वाले अंतरिक्ष मिशनों का एक वैश्विक उदाहरण बन गया है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि भारत भविष्य की तकनीक के सभी क्षेत्रों में उन्‍नति कर रहा है और इस उन्‍नति का सबसे उल्लेखनीय पहलू गरीबों का सशक्तिकरण है। यह बताते हुए कि डिजिटलीकरण अब देश के हर गांव तक पहुंच गया है, प्रधानमंत्री ने कहा कि यूपीआई के माध्यम से, भारत दुनिया के 50 प्रतिशत से अधिक वास्तविक समय के लेनदेन के लिए उत्तरदायी है। उन्होंने कहा कि तकनीक सरकार और नागरिकों के बीच की खाई को पाटने में सहायता कर रही है। उन्होंने बताया कि आज 2,200 से अधिक सरकारी सेवाएं मोबाइल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हैं। उन्होंने आगे कहा कि उमंग ऐप के माध्यम से, नागरिक घर बैठे सरकारी कार्य पूरे कर सकते हैं, जबकि डिजिलॉकर के साथ, सरकारी प्रमाणपत्रों के प्रबंधन की परेशानी समाप्त हो गई है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत अब कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) से संचालित खतरे का पता लगाने जैसी तकनीकों में निवेश कर रहा है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि इसका उद्देश्‍य यह सुनिश्चित करना है कि डिजिटल क्रांति का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। उन्होंने स्वीकार किया कि बेंगलुरु इस राष्ट्रीय प्रयास में सक्रिय रूप से योगदान दे रहा है।

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘हमारी अगली बड़ी प्राथमिकता तकनीक में आत्मनिर्भर बनना होनी चाहिए।" उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि भारतीय तकनीकी कंपनियों ने पूरी दुनिया के लिए सॉफ्टवेयर और उत्पाद विकसित करके वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान स्‍थापित की है। उन्होंने बल देकर कहा कि अब समय आ गया है कि भारत अपनी आवश्‍यकताओं को और दृढ़ता से प्राथमिकता दे और नए उत्पादों के विकास में तेज़ी लाए, खासकर इसलिए क्योंकि अब हर क्षेत्र में सॉफ्टवेयर और ऐप्स का इस्तेमाल हो रहा है। श्री मोदी ने कहा कि भारत के लिए इस क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छूना ज़रूरी है। उभरते क्षेत्रों में नेतृत्व के लिए केंद्रित प्रयासों का आह्वान करते हुए, प्रधानमंत्री ने मेक इन इंडिया और विनिर्माण क्षेत्र में बेंगलुरु और कर्नाटक की उपस्थिति को मज़बूत करने की आवश्‍यकता पर बल दिया। उन्होंने आग्रह किया कि भारत के उत्पादों को ‘‘ज़ीरो डिफेक्ट, ज़ीरो इफ़ेक्ट’’ मानक का पालन करना चाहिए, यानी उनकी गुणवत्ता बेदाग़ होनी चाहिए और पर्यावरण पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं डालना चाहिए। उन्होंने विश्वास जताया कि कर्नाटक की प्रतिभा आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाएगी।

श्री मोदी ने कहा कि चाहे केंद्र सरकार हो या राज्य सरकारें, सभी जनता की सेवा के लिए प्रतिबद्ध हैं और नागरिकों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि इस दिशा में एक प्रमुख ज़िम्मेदारी नए सुधारों को लागू करना है। प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले एक दशक में केंद्र सरकार ने लगातार सुधारों को आगे बढ़ाया है। उदाहरण के तौर पर, उन्होंने कानूनों को अपराधमुक्त करने के लिए जन विश्वास विधेयक के पारित होने का उदाहरण दिया और घोषणा की कि जन विश्वास 2.0 भी पेश किया जा रहा है। उन्होंने राज्य सरकारों को अनावश्यक आपराधिक प्रावधानों वाले कानूनों की पहचान करने और उन्हें समाप्त करने की दिशा में काम करने के लिए प्रोत्साहित किया। श्री मोदी ने मिशन कर्मयोगी पहल का उल्लेख किया, जिसका उद्देश्य सरकारी कर्मचारियों को योग्यता-आधारित प्रशिक्षण प्रदान करना है। उन्होंने सुझाव दिया कि राज्य अपने अधिकारियों के लिए भी इस शिक्षण ढांचे को अपना सकते हैं। आकांक्षी जिला कार्यक्रम और आकांक्षी ब्लॉक कार्यक्रम पर संज्ञान लेते हुए, प्रधानमंत्री ने राज्यों से इसी तरह उन क्षेत्रों की पहचान करने का निवेदन किया जिन पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। उन्होंने राज्य स्तर पर निरंतर सुधार प्रयासों का आह्वान करते हुए अपने भाषण का समापन किया और विश्वास व्यक्त किया कि ये संयुक्त पहल कर्नाटक को विकास की नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगी। उन्होंने कहा कि हम सब मिलकर विकसित भारत के दृष्टिकोण को पूरा करेंगे।

इस कार्यक्रम में कर्नाटक के राज्यपाल, श्री थावरचंद गहलोत, कर्नाटक के मुख्यमंत्री, श्री सिद्धारमैया, केंद्रीय मंत्री श्री मनोहर लाल, श्री एचडी कुमारस्वामी, श्री अश्विनी वैष्णव, श्री वी. सोमन्ना, सुश्री शोभा करंदलाजे सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

पृष्ठभूमि

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने बेंगलुरु मेट्रो फेज-2 परियोजना के तहत आरवी रोड (रागीगुड्डा) से बोम्मासंद्रा तक येलो लाइन का उद्घाटन किया। इस लाइन की लंबाई 19 किलोमीटर से अधिक है और इसमें 16 स्टेशन हैं। इस पर लगभग 7,160 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इस येलो लाइन के खुलने से, बेंगलुरु में मेट्रो का परिचालन नेटवर्क 96 किलोमीटर से ज़्यादा हो जाएगा और इस क्षेत्र की एक बड़ी आबादी को सेवा मुहैया कराएगा।

प्रधानमंत्री ने 15,610 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली बेंगलुरु मेट्रो चरण-3 परियोजना की आधारशिला भी रखी। इस परियोजना की कुल लंबाई 44 किलोमीटर से अधिक होगी और इसमें 31 एलिवेटेड स्टेशन होंगे। यह बुनियादी ढांचा परियोजना शहर की बढ़ती परिवहन जरूरतों को पूरा करेगी और आवासीय, औद्योगिक, वाणिज्यिक और शैक्षणिक क्षेत्रों की आवश्‍यकताओं को पूरा करेगी।

प्रधानमंत्री ने बेंगलुरु से तीन वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनों को भी हरी झंडी दिखाई। इनमें बेंगलुरु से बेलगावी, अमृतसर से श्री माता वैष्णो देवी कटरा और नागपुर (अजनी) से पुणे तक की ट्रेनें शामिल हैं। ये हाई-स्पीड ट्रेनें क्षेत्रीय संपर्क को आवश्‍यक रूप से बढ़ाएंगी, यात्रा समय को कम करेंगी और यात्रियों को विश्वस्तरीय यात्रा का अनुभव प्रदान करेंगी।

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जॉय जगन्नाथ! जॉय मां किचकेश्वरी! मोर सबू भाई,भौणी,मां,मौसी मानंकु मोर नमोस्कार।

माननीय राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू जी, राज्यपाल श्री हरि बाबु जी, यहां के लोकप्रिय मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी जी, उप मुख्यमंत्री कनक वर्धन सिंह देव जी, प्रवती परीदा जी, ओडिशा के मंत्री गणेश सिंह खूंटिया जी, कृष्ण चंद्र महापात्र जी, सांसद नबा चरण माझी जी, मनमोहन सामल जी, बैजयंत पांडा जी, अन्य महानुभाव, भाइयों और बहनों।

हमारा ओडिशा इन दिनों उत्सवों के आनंद में डूबा हुआ है। यहाँ का गणपर्व रज, पिछले हफ्ते ही धूमधाम से मनाया गया है। महाप्रभु जगन्नाथ जी की रथ यात्रा की तैयारियां भी पुरजोश चल रही है। मयूरभंज के बारीपदा रथ यात्रा को लेकर भी उत्साह का माहौल है। और, इस सबके बीच ही लोकतन्त्र का विकास का उत्सव भी चल रहा है। ओडिशा की बीजेपी सरकार ने अपने 2 साल भी पूर्ण किए हैं। इस मौके पर, आप सबके बीच आना, मयूरभंज आने का ये सौभाग्य, और इतनी बड़ी संख्या में आप सबकी उपस्थिति, ये अवसर मेरे लिए बहुत खास है। आपका अपनापन मुझे बार-बार यहां खींच लाता है। मैं आप सभी का हृदय से बहुत-बहुत अभिनंदन करता हूँ। और ओडिशा की जनता को डबल इंजन सरकार में विकास यात्रा की भी बधाई देता हूँ, शुभकामनाएं देता हूं। साथ ही, इस अवसर पर मैं पंडित रघुनाथ मुर्मू जी, डॉ. दमयंती बेश्रा जी, और श्री चरण हेम्ब्रम जी जैसी विभूतियों को भी नमन करता हूँ। रघुनाथ मुर्मू जी ने संथाली भाषा के लिए ओल चिकी लिपि का निर्माण किया था। हमारी सरकार ने संथाली भाषा में भारत के संविधान को प्रस्तुत किया है। ओडिशा की संतानों को पद्म सम्मान देकर सम्मानित किया है। पिछले 2 वर्षों में ओडिशा सरकार भी इन सभी विभूतियों के सपनों को पूरा करने में दिन रात पुरुषार्थ कर रही है।

साथियों,

आज का ये अवसर इसलिए भी विशेष है, क्योंकि मयूरभंज की धरती पर पली-बढ़ीं, ओडिशा की बेटी, माननीय राष्ट्रपति जी हमारे बीच उपस्थित हैं। आज उनका जन्मदिन भी है। मैं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू जी को जन्मदिन की हार्दिक बधाई और शुभकमानाएं देता हूं, मैं उनके दीर्घायु होने और उत्तम स्वास्थ्य की कामना करता हूं। जनगन्नाथ जी भगवान के श्री चरणों में प्रार्थना करता हूं। ओडिशा की बेटी आज देश के इतने बड़े पद पर पहुंची हैं, हमारा मार्गदर्शन कर रही हैं, ये हम सभी के लिए बहुत गौरव की बात है। राष्ट्रपति जी का व्यक्तित्व, उनका उदार और सहृदय स्वभाव, राष्ट्र और समाज की सेवा के लिए उनका अटल समर्पण, उन्होंने मयूरभंज ही नहीं, पूरे ओडिशा की पहचान सशस्त की है। मैं इस अवसर पर, उनका विशेष रूप से अभिनंदन करता हूँ।

साथियों,

ये कार्यक्रम जब बना, तो इसमें मूल कारण तो लॉजिस्टिक था, लंबे अर्से से यहां आने के लिए चर्चा चल रही थी, लेकिन कोई तालमेल नहीं बैठता था। 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योगा दिवस कोलकाता में तय हुआ, तो फिर मैंने कहा अच्छा है, आज बंग दिवस भी है, तो क्यों न मैं सुबह मयूरभंज होकर के शाम को फिर कोलकाता के कार्यक्रम में जाऊं। और इसके कारण ये 20 जून तय हुई। लेकिन कुछ चीजें ऐसी होती हैं, जिसकी मंगल कामनाएं ईश्वरआधीन होती हैं, और इसलिए आज एक शुभ मंगल हो गया, कि राष्ट्रपति का जन्मदिन भी, मुझे आज उनके गांव में जाकर के, उनको शुभकामनाएं देने का अवसर मिला।

साथियों,

आज मैं राष्ट्रपति जी के साथ पहाड़पुर भी गया था। मैं इस क्षेत्र के बच्चों के लिए उनके द्वारा बनवाए गए स्कूल भी गया। बच्चों के साथ कुछ यादगार समय बिताने का अवसर मुझे मिला। मैं देख रहा था, बच्चों के चेहरों की चमक, राष्ट्रपति जी की उपस्थिति और आत्मीयता, वहां मुझे ऐसा कुछ भी नहीं लगा, किसी बच्चे को ये लगा हो कि राष्ट्रपति जी आई हैं, हर बच्चे को लगता था उनकी मां आई है। वे बच्चे भी बहुत भाग्यवान हैं, कैसे इस क्षेत्र के गरीब, वंचित और आदिवसी समाज के बच्चों को प्रेरणा मिल रही है, उन्हें देश के लिए कुछ बड़ा करने का आत्मविश्वास मिल रहा है। मैं राष्ट्रपति जी का आभारी हूं कि उन्होंने इन अनुभवों से गुजरने का आज मुझे अवसर दिया। ये मेरा दिन, एक प्रकार से मेरी शिक्षा का दिवस था, कुछ सीखने का अवसर था मेरे लिए।

साथियों,

मैं आपको सरकार का ये निर्णय भी बताना चाहता हूं कि पहाड़पुर गांव को, अब तेजी से सुर्यग्राम, सोलर विलेज के रूप में विकसित किया जाएगा। यानी यहां हर घर में सोलर बिजली बने, इसे सुनिश्चित किया जाएगा। और हम तो बड़ा गर्व के साथ कह सकते हैं कि यही ओडिशा है, जहां कोणार्क में सुर्य मंदिर की एक पहचान है, वैसे ही पहाड़पुर सुर्यग्राम की पहचान बन जाएगा। सुर्यग्राम, से पूरा गांव सोलर विलेज के रूप में पहचाना जाए, इस दिशा में काम तुरंत शुरू हो ऐसा मेरा प्रयास रहेगा। इस अभियान से, पहाड़पुर के लोगों को मुफ्त सोलर बिजली भी मिलेगी और जो ज्यादा बिजली होगी, वो उनकी आय भी बढ़ाएगी।

साथियों,

ओडिशा में डबल इंजन सरकार के 2 साल कई मायनों में ऐतिहासिक रहे हैं। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी जी के नेतृत्व में, आज ओडिशा तेज गति से विकास के रास्ते पर आगे बढ़ रहा है। आज यहां गरीब कल्याण की योजनाओं से सामान्य मानवी का जीवन बदल रहा है। ओडिशा में आर्थिक गतिविधियाँ निवेश और उद्योगों को आकर्षित करने का सामर्थ्य आज नज़र आ रहा है। यहाँ रोजगार के नए अवसरों के लिए तेजी से काम हो रहा है।

साथियों,

केंद्र सरकार का विज़न है- पूर्वी भारत के विकास से भारत का विकास। इसीलिए, हम पूर्वोदय की नीति पर काम कर रहे हैं। जिस पूर्वी भारत को काँग्रेस के दौर में पिछड़ेपन का पर्याय बना दिया गया था, आज वो प्रगति का प्रवेश द्वार बन रहा है। आज ओडिशा खुद इस बदलाव का साक्षी बन रहा है।

साथियों,

ओडिशा के पास समुद्र है, खनिज संपदा है, कृषि की शक्ति है और सबसे सामर्थ्यवान यहां युवा प्रतिभा है। इस सामर्थ्य का पूरा उपयोग करने के लिए हम मिलकर काम कर रहे हैं। इसीलिए, आज ओडिशा में रेलवे इनफ्रास्ट्रक्चर में रिकॉर्ड निवेश हो रहा है। नई सड़कें और आर्थिक कॉरिडोर बन रहे हैं। पोर्ट्स का विस्तार हो रहा है। ऊर्जा, सेमीकंडक्टर, ग्रीन एनर्जी और आधुनिक उद्योगों में निवेश आ रहा है। आज भी यहां ओडिशा के विकास से जुड़ी अनेक महत्वपूर्ण परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास हुआ है। इन परियोजनाओं पर लगभग 47 हजार करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। बिजली, सड़क, रेलवे, स्वास्थ्य और शिक्षा से जुड़ी इन परियोजनाओं से, आप सभी लोगों को बहुत सुविधा होने वाली है। मैं इन परियोजनाओं के लिए ओडिशा के लोगों को बहुत बहुत बधाई देता हूं।

साथियों,

हमारी सरकार ओडिशा के संसाधनों को, ओडिशा की संभावनाओं में बदल रही है। ओडिशा में बड़ा निवेश आए, यहाँ नए उद्योग लगें, इसके लिए उत्कर्ष ओडिशा जैसे अभियान चलाए जा रहे हैं। इसके तहत, अब तक करीब 20 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव मिल चुके हैं। साढ़े 3 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा की अनेक मेगा परियोजनाओं पर भी काम चल रहा है। उद्योगों के लिए अनुकूल वातावरण बने, इसके लिए ओडिशा के समग्र विकास पर ध्यान दिया जा रहा है। पावर सेक्टर में 6 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा का निवेश हो रहा है। समृद्ध शहर योजना के तहत शहरी विकास को गति दी जा रही है। आने वाले वर्षों में इन प्रयासों का परिणाम हमें देखने को मिलने वाला है।

साथियों,

डबल इंजन सरकार की बड़ी विशेषता ये है कि वो खुद जनता तक पहुँचती है। हमारा प्रयास है कि सामान्य नागरिक को किसी समस्या के समाधान के लिए अनावश्यक चक्कर न लगाने पड़े। इन्हीं प्रयासों का परिणाम है कि युवाओं, महिलाओं, किसानों और आम लोगों की अपेक्षाएँ आज पूरी हो रही हैं। आप देखिए, धान खरीद में किसानों को 3,100 रुपये प्रति क्विंटल देने का निर्णय लिया गया। सुभद्रा योजना के माध्यम से एक करोड़ से अधिक माताओं और बहनों तक आर्थिक सहायता पहुंचाई गई। आयुष्मान भारत को लागू करके ओडिशा के परिवारों के लिए देशभर के अस्पतालों में इलाज का रास्ता खोला गया। आदिवासी विद्यार्थियों की पढ़ाई बीच में न छूटे, इसके लिए माधो सिंह हाथ-खर्चा योजना शुरू की गई। महाप्रभु श्री जगन्नाथ जी के भक्तों की भावनाओं का सम्मान करते हुए श्रीमंदिर के श्रद्धालुओं के लिए सारे द्वार खोल दिए गए, चारों-चार द्वार खोल दिए गए। डबल इंजन की ताकत मिलने से आज यहां चारों दिशाओं में विकास सुनिश्चित हो रहा है।

साथियों,

यहां बीते दिनों स्वच्छता को लेकर जो विशेष अभियान चला है, उसकी भी मुझे जानकारी मिली है। और मैं देख रहा था सोशल मीडिया में तो सफाई अभियान छाया हुआ है, यानी स्वच्छता से स्वागत, मैं ओडिशा की इस पहल के लिए, यहां के नगारिको का, सरकार का, मुख्यमंत्री जी का, इस प्रशंसनीय पहल के लिए बहुत ही प्रशंसा करता हूं, संतोष व्यक्त करता हूं।

साथियों,

स्वच्छता हमारे जीवन शैली का हिस्सा होनी चाहिए, हर रोज की आदत होनी चाहिए। मैं यहां स्वच्छता अभियान से जुड़े सभी लोगों का हृदय से बहुत-बहुत अभिनंदन करता हूं।

साथियों,

मैंने अपने जीवन का कुछ महत्वपूर्ण कालखंड जनजातीय क्षेत्रों में एक वालंटियर के रूप में काम करते हुए बिताया है। माननीय राष्ट्रपति जी तो बरसों तक ऐसे क्षेत्रों में चुनौतियां का सामना करती रही हैं। आप और हम जानते हैं कि जनजातीय क्षेत्रों में जीवन की सुविधाएं आसानी से नहीं पहुंचती थीं। इसलिए, हमारी सरकार ने जनजातीय विकास को बहुत प्राथमिकता दी है। हमने ऐसे इलाकों को सुविधाओं से जोड़ने के लिए धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान शुरू किया। इसके तहत स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क, आवास से जुड़े विभाग मिलकर के सर्वागीण विकास के लिए काम कर रहे हैं। ताकि वहां रहने वाले लोगों की कठिनाइयां दूर हो सकें। इसी तरह, पीएम जनमन अभियान तो राष्ट्रपति जी के साथ हुई चर्चाओं का, उनके मार्गदर्शन का ही परिणाम है। ये विशेष रूप से देश के ऐसे जनजातीय समूहों के लिए है, जो जनजातीय समुदाय में भी सबसे पीछे रह गए हैं। ऐसे जनजातीय समुदायों तक अब सरकार स्वयं चलकर उनके गांव, उनके दरवाजे तक पहुंच रही है।

साथियों,

आदिवासी समाज के उत्थान के लिए हम आदिवासी युवाओं को शिक्षा और रोजगार के अवसरों से जोड़ रहे हैं। इन बच्चों को पढ़ाई की बेहतर सुविधा मिले, इसके लिए देश में करीब 500 एकलव्य मॉडल स्कूल खोले गए हैं। करीब साढ़े सात सौ एकलव्य स्कूल स्वीकृत किए गए हैं। प्री-मैट्रिक और पोस्ट मैट्रिक लेवल पर, डेढ़ करोड़ से अधिक आदिवासी बच्चों को सैकड़ों करोड़ रुपए की स्कॉलर्शिप दी गई है। मुझे ये बताते हुए भी खुशी है कि यहां मयूरभंज में एक और नवोदय विद्यालय बनाने के लिए भी स्वीकृति दे दी गई है।

साथियों,

दूर-दराज इलाकों में रहने के कारण, जनजातीय समाज स्वास्थ्य से जुड़ी कठिनाइयों का भी शिकार रहा है। सिकल सेल एनीमिया जैसी बीमारियाँ एक बहुत बड़ी चुनौती रही हैं। हमने इनके खिलाफ देश भर में अभियान चलाया, चार करोड़ से ज्यादा हेल्थ कार्ड बांटे, मुफ्त इलाज के लिए करोड़ों आदिवासी लाभार्थियों को आयुष्मान कार्ड दिये। जल जीवन मिशन के तहत घर-घर साफ पानी पहुंचाया जा रहा है। इन प्रयासों का परिणाम आज हमें दिख रहा है। आदिवासी समाज दशकों पुरानी कठिनाइयों से बाहर आ रहा है, और, विकास की मुख्यधारा का हिस्सा बन रहा है।

साथियों,

आने वाले समय में हमारे सामने दो महत्वपूर्ण पड़ाव हैं। 2036 में ओडिशा के गठन के 100 वर्ष पूरे होंगे। और, 2047 में भारत की स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे होने वाले हैं। यानी, ओडिशा और देश का लक्ष्य एक ही दिशा में है। ओडिशा की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी, तो भारत मजबूत होगा। मुझे ओडिशा के सामर्थ्य पर भरोसा है। हमें मिलकर ओडिशा को विकास की बुलंदियों पर पहुंचाना है।

साथियों,

कल 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस भी मनाया जाना है। ज्ञान और योग की धरती ओडिशा, योग यहाँ के संस्कारों का हिस्सा रहा है। मैं ओडिशा की धरती से पूरे देश से, पूरी दुनिया के लोगों से आह्वान करता हूँ, आप सब ज्यादा से ज्यादा संख्या में योग दिवस में हिस्सा लें। मैं एक बार फिर आप सभी को आज के अवसर, और विकास परियोजनाओं की बहुत-बहुत बधाई देता हूं। मैं माननीय राष्ट्रपति जी का विशेष रूप से आभार प्रकट करता हूं, कि मुझे उनके साथ उनकी कर्मभूमि को देखने का मौका मिला। एक बार फिर उन्हें जन्मदिन की बहुत-बहुत बधाई। बहुत-बहुत धन्यवाद।

जय जगन्नथ।

जय जगन्नथ।

जय जगन्नथ।