ऑपरेशन सिंदूर की सफलता, आतंकी ठिकानों को नेस्तनाबूद करने की ताकत, और कुछ ही घंटों में पाकिस्तान को घुटनों पर लाने की क्षमता; पूरी दुनिया ने भारत का यह नया रूप देखा है: पीएम
आज भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था है: प्रधानमंत्री
पिछले 11 वर्षों में हमारी अर्थव्यवस्था 10वें स्थान से ऊपर उठकर शीर्ष पांच में पहुंच गई है, अब हम शीर्ष तीन अर्थव्यवस्थाओं में से एक बनने की ओर तेज़ी से बढ़ रहे हैं: प्रधानमंत्री
विकसित भारत की यात्रा डिजिटल इंडिया के साथ-साथ आगे बढ़ेगी: प्रधानमंत्री
हमारी अगली बड़ी प्राथमिकता तकनीक में आत्मनिर्भर बनना होनी चाहिए: प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज कर्नाटक के बेंगलुरु में लगभग 7,160 करोड़ रुपये की लागत वाली बेंगलुरु मेट्रो की येलो लाइन का उद्घाटन और 15,610 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली बेंगलुरु मेट्रो चरण-3 परियोजना की आधारशिला रखी। उन्होंने बेंगलुरु के केएसआर रेलवे स्टेशन पर तीन वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनों को भी हरी झंडी दिखाई। इस अवसर पर उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि कर्नाटक की धरती पर कदम रखते ही उन्हें एक अलग ही आत्मीयता का एहसास हुआ। कर्नाटक की समृद्ध संस्कृति, यहां के लोगों के स्नेह और हृदय को गहराई से छू लेने वाली कन्नड़ भाषा की मधुरता का उल्लेख करते हुए, श्री मोदी ने बेंगलुरु की अधिष्ठात्री देवी अन्नम्मा थायी के चरणों में श्रद्धा सुमन अर्पित किए। यह स्मरण करते हुए कि सदियों पहले, नादप्रभु केम्पेगौड़ा ने बेंगलुरु शहर की नींव रखी थी, प्रधानमंत्री ने कहा कि केम्पेगौड़ा ने एक ऐसे शहर की कल्पना की थी जो परंपराओं से ओतप्रोत हो और उन्‍नति की नई ऊंचाइयों को छुए। प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘बेंगलुरु ने हमेशा उस भावना को जीया है और उसे संजोया है और आज, बेंगलुरु उसी सपने को साकार कर रहा है।’’

श्री मोदी ने कहा, ‘‘आज, बेंगलुरु एक ऐसे शहर के रूप में उभर रहा है जो नए भारत के उदय का प्रतीक बन गया है।’’ उन्होंने इसे एक ऐसा शहर बताया जिसकी आत्मा दार्शनिक ज्ञान से ओतप्रोत है और जिसके कार्य तकनीकी विशेषज्ञता को दर्शाते हैं। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि बेंगलुरु एक ऐसा शहर है जिसने भारत को वैश्विक आईटी मानचित्र पर गौरवान्वित किया है। उन्होंने बेंगलुरु की सफलता का श्रेय यहां के लोगों की कड़ी मेहनत और प्रतिभा को दिया।

प्रधानमंत्री ने बल देकर कहा, ‘‘21वीं सदी में, शहरी नियोजन और शहरी बुनियादी ढांचा हमारे शहरों की अहम ज़रूरतें हैं।’’ उन्होंने कहा कि बेंगलुरु जैसे शहरों को भविष्य के लिए तैयार रहना होगा। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि वर्तमान वर्षों में भारत सरकार ने बेंगलुरु के लिए हज़ारों करोड़ रुपये की परियोजनाएं शुरू की हैं और आज यह अभियान नई गति पकड़ रहा है। श्री मोदी ने बेंगलुरु मेट्रो की येलो लाइन का उद्घाटन किया और मेट्रो के तीसरे चरण की आधारशिला रखी। उन्होंने देश के विभिन्न हिस्सों को जोड़ने वाली तीन नई वंदे भारत ट्रेनों को भी हरी झंडी दिखाई। उन्होंने कहा कि बेंगलुरु और बेलगावी के बीच वंदे भारत सेवा शुरू होने से बेलगावी में व्यापार और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। इसके अतिरिक्त, नागपुर और पुणे के बीच और श्री माता वैष्णो देवी कटरा और अमृतसर के बीच वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनें शुरू की गईं। प्रधानमंत्री ने कहा कि इन सेवाओं से लाखों श्रद्धालुओं को लाभ होगा और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने इन परियोजनाओं और नई वंदे भारत ट्रेनों के लिए बेंगलुरु, कर्नाटक और पूरे देश के लोगों को शुभकामनाएं दी।

ऑपरेशन सिंदूर के बाद बेंगलुरु की अपनी पहली यात्रा का ज़िक्र करते हुए, श्री मोदी ने ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय सेना की सफलता पर प्रकाश डाला और सीमा पार आतंकवादी ठिकानों को नष्ट करने की उनकी क्षमता का ज़िक्र किया। उन्होंने आतंकवादियों का बचाव करने आए पाकिस्तान को कुछ ही घंटों में घुटने टेकने पर मजबूर करने पर भारत की ताकत की सराहना की। प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘पूरी दुनिया ने नए भारत के इस नए रूप को देखा है।’’ उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर की सफलता का श्रेय तकनीक की शक्ति और रक्षा क्षेत्र में मेक इन इंडिया की ताकत को दिया। उन्होंने इस उपलब्धि में बेंगलुरु और कर्नाटक के युवाओं के महत्वपूर्ण योगदान को स्वीकार किया और इस सफलता में उनकी भूमिका के लिए सभी को बधाई दी।

यह देखते हुए कि बेंगलुरु अब प्रमुख वैश्विक शहरों के साथ पहचाना जाने लगा है, प्रधानमंत्री ने बल देकर कहा कि भारत को न केवल वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करनी चाहिए, बल्कि नेतृत्व भी करना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रगति तभी होगी जब हमारे शहर स्मार्ट, तेज़ और कुशल होंगे, और इस तरह उन्होंने आधुनिक बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को पूरा करने पर सरकार के संज्ञान को रेखांकित किया। श्री मोदी ने आरवी रोड से बोम्मासंद्रा तक बेंगलुरु मेट्रो की येलो लाइन शुरू करने की घोषणा की, जो बेंगलुरु के कई प्रमुख इलाकों को जोड़ेगी। उन्होंने कहा कि बसवनगुडी और इलेक्ट्रॉनिक सिटी के बीच यात्रा का समय अब काफ़ी कम हो जाएगा। उन्होंने कहा कि इससे लाखों लोगों के लिए जीवन और कार्य करने की सुगमता बढ़ेगी।

प्रधानमंत्री ने घोषणा की कि येलो लाइन के उद्घाटन के साथ ही, बेंगलुरु मेट्रो के तीसरे चरण, यानी ऑरेंज लाइन, की आधारशिला भी रखी गई है। उन्होंने कहा कि चालू होने के बाद, ऑरेंज लाइन, येलो लाइन के साथ मिलकर, प्रतिदिन 25 लाख यात्रियों के लिए यात्रा को सुगम बनाएगी। उन्होंने कहा कि इससे बेंगलुरु की परिवहन व्यवस्था सशक्त होगी और इसे नई ऊंचाइयों पर ले जाया जाएगा। श्री मोदी ने आगे कहा कि बेंगलुरु मेट्रो ने देश में सार्वजनिक अवसंरचना विकास का एक नया मॉडल पेश किया है। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि इंफोसिस फाउंडेशन, बायोकॉन और डेल्टा इलेक्ट्रॉनिक्स जैसी कंपनियों ने कई प्रमुख मेट्रो स्टेशनों के लिए आंशिक वित्तपोषण प्रदान किया है। उन्होंने कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) के इस अभिनव उपयोग की प्रशंसा करते हुए इसे प्रेरणा का स्रोत बताया और कॉरपोरेट क्षेत्र को उनके योगदान के लिए बधाई दी।

श्री मोदी ने कहा, “भारत वर्तमान में दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था है। पिछले ग्यारह वर्षों में, भारत की अर्थव्यवस्था वैश्विक स्तर पर 10वें स्थान से ऊपर उठकर शीर्ष पांच में पहुंच गई है और तेज़ी से शीर्ष तीन अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होने की ओर अग्रसर है।” उन्होंने इस गति का श्रेय स्पष्ट इरादे और ईमानदार प्रयासों से प्रेरित “सुधार, प्रदर्शन और परिवर्तन” की भावना को दिया। बुनियादी ढांचे के विकास पर विचार करते हुए, प्रधानमंत्री ने याद दिलाया कि 2014 में, मेट्रो सेवाएं केवल पांच शहरों तक ही सीमित थीं। उन्होंने कहा कि आज, मेट्रो नेटवर्क 24 शहरों में 1,000 किलोमीटर से अधिक तक फैला है, जिससे भारत विश्व स्तर पर तीसरा सबसे बड़ा मेट्रो नेटवर्क बन गया है। श्री मोदी ने यह भी बताया कि 2014 से पहले, केवल लगभग 20,000 किलोमीटर रेलवे मार्गों का विद्युतीकरण किया गया था। केवल पिछले ग्यारह वर्षों में, 40,000 किलोमीटर से अधिक रेलवे मार्गों का विद्युतीकरण किया गया है, जो सतत परिवहन विकास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

इस बात पर बल देते हुए कि भारत की उपलब्धियां न केवल जमीन पर बल्कि आसमान में भी बढ़ रही हैं, प्रधानमंत्री ने बताया कि 2014 में भारत में केवल 74 हवाई अड्डे थे और आज इनकी संख्या बढ़कर 160 से अधिक हो गई है। उन्होंने जलमार्ग अवसंरचना में उल्लेखनीय प्रगति की ओर भी ध्यान दिलाया और कहा कि 2014 में केवल तीन राष्ट्रीय जलमार्ग चालू थे; यह संख्या अब बढ़कर तीस हो गई है।

स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में भारत द्वारा की गई महत्वपूर्ण प्रगति पर चर्चा करते हुए, श्री मोदी ने इस बात पर प्रकाश डाला कि 2014 तक देश में केवल 7 एम्स और 387 मेडिकल कॉलेज थे, जबकि आज 22 एम्स और 704 मेडिकल कॉलेज लोगों की सेवा कर रहे हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले 11 वर्षों में देश भर में एक लाख से ज़्यादा नई मेडिकल सीटें जोड़ी गई हैं। उन्होंने इस विस्तार के प्रभाव पर बल दिया और बताया कि कैसे मध्यम वर्ग के बच्चों को इन बढ़े हुए अवसरों से बहुत लाभ हुआ है। श्री मोदी ने आगे बताया कि पिछले 11 वर्षों में, आईआईटी की संख्या 16 से बढ़कर 23, आईआईआईटी की संख्या 9 से बढ़कर 25 और आईआईएम की संख्या 13 से बढ़कर 21 हो गई है। उन्होंने कहा कि आज छात्रों के पास उच्च शिक्षा में पहले से कहीं अधिक अवसर उपलब्ध हैं।

प्रधानमंत्री ने इस बात पर ज़ोर दिया कि आज जैसे-जैसे देश तेज़ी से प्रगति कर रहा है, वैसे-वैसे गरीबों और वंचितों के जीवन में भी उसी गति से बदलाव आ रहा है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 4 करोड़ से ज़्यादा पक्के घर उपलब्ध कराए गए हैं। उन्होंने घोषणा की कि सरकार अब 3 करोड़ और घर बनाने के लिए तैयार है। श्री मोदी ने कहा कि सिर्फ़ 11 वर्षों में देश भर में 12 करोड़ से ज़्यादा शौचालय बनाए गए हैं। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि इस कदम ने करोड़ों माताओं और बहनों को सम्मान, स्वच्छता और सुरक्षा दी है।

श्री मोदी ने इस बात पर ज़ोर दिया कि देश में विकास की तेज़ गति भारत की आर्थिक वृद्धि से प्रेरित है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि 2014 से पहले भारत का कुल निर्यात केवल 468 अरब डॉलर तक पहुंच गया था, जबकि आज यह आंकड़ा बढ़कर 824 अरब डॉलर हो गया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि पहले भारत मोबाइल फोन आयात करता था, लेकिन अब देश मोबाइल हैंडसेट के शीर्ष पांच निर्यातकों में शामिल है। उन्होंने कहा कि इस बदलाव में बेंगलुरु की अहम भूमिका रही है। श्री मोदी ने आगे बताया कि 2014 से पहले भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात लगभग 6 अरब डॉलर था, जो अब बढ़कर लगभग 38 अरब डॉलर हो गया है।

ग्यारह साल पहले भारत का ऑटोमोबाइल निर्यात लगभग 16 अरब डॉलर था, प्रधानमंत्री ने कहा कि आज यह आंकड़ा दोगुने से भी ज़्यादा हो गया है, जिससे भारत दुनिया का चौथा सबसे बड़ा ऑटोमोबाइल निर्यातक बन गया है। उन्होंने कहा कि ये उपलब्धियां आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को सुदृढ़ करती हैं और उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि संगठित होकर देश आगे बढ़ेगा और एक विकसित भारत का निर्माण करेगा।

श्री मोदी ने कहा, ‘‘विकसित भारत की यात्रा डिजिटल इंडिया के साथ-साथ आगे बढ़ेगी।’’ उन्होंने कहा कि भारत एआई मिशन जैसी पहलों के माध्यम से, भारत वैश्विक एआई नेतृत्व की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने आगे कहा कि सेमीकंडक्टर मिशन भी गति पकड़ रहा है और भारत के पास शीघ्र ही अपनी स्वयं की मेड-इन-इंडिया चिप होगी। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत कम लागत वाले, उच्च तकनीक वाले अंतरिक्ष मिशनों का एक वैश्विक उदाहरण बन गया है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि भारत भविष्य की तकनीक के सभी क्षेत्रों में उन्‍नति कर रहा है और इस उन्‍नति का सबसे उल्लेखनीय पहलू गरीबों का सशक्तिकरण है। यह बताते हुए कि डिजिटलीकरण अब देश के हर गांव तक पहुंच गया है, प्रधानमंत्री ने कहा कि यूपीआई के माध्यम से, भारत दुनिया के 50 प्रतिशत से अधिक वास्तविक समय के लेनदेन के लिए उत्तरदायी है। उन्होंने कहा कि तकनीक सरकार और नागरिकों के बीच की खाई को पाटने में सहायता कर रही है। उन्होंने बताया कि आज 2,200 से अधिक सरकारी सेवाएं मोबाइल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हैं। उन्होंने आगे कहा कि उमंग ऐप के माध्यम से, नागरिक घर बैठे सरकारी कार्य पूरे कर सकते हैं, जबकि डिजिलॉकर के साथ, सरकारी प्रमाणपत्रों के प्रबंधन की परेशानी समाप्त हो गई है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत अब कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) से संचालित खतरे का पता लगाने जैसी तकनीकों में निवेश कर रहा है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि इसका उद्देश्‍य यह सुनिश्चित करना है कि डिजिटल क्रांति का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। उन्होंने स्वीकार किया कि बेंगलुरु इस राष्ट्रीय प्रयास में सक्रिय रूप से योगदान दे रहा है।

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘हमारी अगली बड़ी प्राथमिकता तकनीक में आत्मनिर्भर बनना होनी चाहिए।" उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि भारतीय तकनीकी कंपनियों ने पूरी दुनिया के लिए सॉफ्टवेयर और उत्पाद विकसित करके वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान स्‍थापित की है। उन्होंने बल देकर कहा कि अब समय आ गया है कि भारत अपनी आवश्‍यकताओं को और दृढ़ता से प्राथमिकता दे और नए उत्पादों के विकास में तेज़ी लाए, खासकर इसलिए क्योंकि अब हर क्षेत्र में सॉफ्टवेयर और ऐप्स का इस्तेमाल हो रहा है। श्री मोदी ने कहा कि भारत के लिए इस क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छूना ज़रूरी है। उभरते क्षेत्रों में नेतृत्व के लिए केंद्रित प्रयासों का आह्वान करते हुए, प्रधानमंत्री ने मेक इन इंडिया और विनिर्माण क्षेत्र में बेंगलुरु और कर्नाटक की उपस्थिति को मज़बूत करने की आवश्‍यकता पर बल दिया। उन्होंने आग्रह किया कि भारत के उत्पादों को ‘‘ज़ीरो डिफेक्ट, ज़ीरो इफ़ेक्ट’’ मानक का पालन करना चाहिए, यानी उनकी गुणवत्ता बेदाग़ होनी चाहिए और पर्यावरण पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं डालना चाहिए। उन्होंने विश्वास जताया कि कर्नाटक की प्रतिभा आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाएगी।

श्री मोदी ने कहा कि चाहे केंद्र सरकार हो या राज्य सरकारें, सभी जनता की सेवा के लिए प्रतिबद्ध हैं और नागरिकों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि इस दिशा में एक प्रमुख ज़िम्मेदारी नए सुधारों को लागू करना है। प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले एक दशक में केंद्र सरकार ने लगातार सुधारों को आगे बढ़ाया है। उदाहरण के तौर पर, उन्होंने कानूनों को अपराधमुक्त करने के लिए जन विश्वास विधेयक के पारित होने का उदाहरण दिया और घोषणा की कि जन विश्वास 2.0 भी पेश किया जा रहा है। उन्होंने राज्य सरकारों को अनावश्यक आपराधिक प्रावधानों वाले कानूनों की पहचान करने और उन्हें समाप्त करने की दिशा में काम करने के लिए प्रोत्साहित किया। श्री मोदी ने मिशन कर्मयोगी पहल का उल्लेख किया, जिसका उद्देश्य सरकारी कर्मचारियों को योग्यता-आधारित प्रशिक्षण प्रदान करना है। उन्होंने सुझाव दिया कि राज्य अपने अधिकारियों के लिए भी इस शिक्षण ढांचे को अपना सकते हैं। आकांक्षी जिला कार्यक्रम और आकांक्षी ब्लॉक कार्यक्रम पर संज्ञान लेते हुए, प्रधानमंत्री ने राज्यों से इसी तरह उन क्षेत्रों की पहचान करने का निवेदन किया जिन पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। उन्होंने राज्य स्तर पर निरंतर सुधार प्रयासों का आह्वान करते हुए अपने भाषण का समापन किया और विश्वास व्यक्त किया कि ये संयुक्त पहल कर्नाटक को विकास की नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगी। उन्होंने कहा कि हम सब मिलकर विकसित भारत के दृष्टिकोण को पूरा करेंगे।

इस कार्यक्रम में कर्नाटक के राज्यपाल, श्री थावरचंद गहलोत, कर्नाटक के मुख्यमंत्री, श्री सिद्धारमैया, केंद्रीय मंत्री श्री मनोहर लाल, श्री एचडी कुमारस्वामी, श्री अश्विनी वैष्णव, श्री वी. सोमन्ना, सुश्री शोभा करंदलाजे सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

पृष्ठभूमि

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने बेंगलुरु मेट्रो फेज-2 परियोजना के तहत आरवी रोड (रागीगुड्डा) से बोम्मासंद्रा तक येलो लाइन का उद्घाटन किया। इस लाइन की लंबाई 19 किलोमीटर से अधिक है और इसमें 16 स्टेशन हैं। इस पर लगभग 7,160 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इस येलो लाइन के खुलने से, बेंगलुरु में मेट्रो का परिचालन नेटवर्क 96 किलोमीटर से ज़्यादा हो जाएगा और इस क्षेत्र की एक बड़ी आबादी को सेवा मुहैया कराएगा।

प्रधानमंत्री ने 15,610 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली बेंगलुरु मेट्रो चरण-3 परियोजना की आधारशिला भी रखी। इस परियोजना की कुल लंबाई 44 किलोमीटर से अधिक होगी और इसमें 31 एलिवेटेड स्टेशन होंगे। यह बुनियादी ढांचा परियोजना शहर की बढ़ती परिवहन जरूरतों को पूरा करेगी और आवासीय, औद्योगिक, वाणिज्यिक और शैक्षणिक क्षेत्रों की आवश्‍यकताओं को पूरा करेगी।

प्रधानमंत्री ने बेंगलुरु से तीन वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनों को भी हरी झंडी दिखाई। इनमें बेंगलुरु से बेलगावी, अमृतसर से श्री माता वैष्णो देवी कटरा और नागपुर (अजनी) से पुणे तक की ट्रेनें शामिल हैं। ये हाई-स्पीड ट्रेनें क्षेत्रीय संपर्क को आवश्‍यक रूप से बढ़ाएंगी, यात्रा समय को कम करेंगी और यात्रियों को विश्वस्तरीय यात्रा का अनुभव प्रदान करेंगी।

पूरा भाषण पढ़ने के लिए यहां क्लिक कीजिए

Explore More
आज सम्पूर्ण भारत, सम्पूर्ण विश्व राममय है: अयोध्या में ध्वजारोहण उत्सव में पीएम मोदी

लोकप्रिय भाषण

आज सम्पूर्ण भारत, सम्पूर्ण विश्व राममय है: अयोध्या में ध्वजारोहण उत्सव में पीएम मोदी
India's coffee exports jump 27% in Jan-Apr on strong robusta, instant coffee demand

Media Coverage

India's coffee exports jump 27% in Jan-Apr on strong robusta, instant coffee demand
NM on the go

Nm on the go

Always be the first to hear from the PM. Get the App Now!
...
List of Outcomes: State Visit of President of the Socialist Republic of Vietnam to India
May 06, 2026

MoU / Agreement

 

SI No.TitleBrief description
1. MoU on Mutual Cooperation between IREL (India) Ltd. and Institute for Technology of Radioactive and Rare Elements (ITRRE) of Vietnam MoU formalizes the long-standing commitment on both sides to expand bilateral cooperation in the areas of rare earth elements, among other new-age technologies.
2. Cultural Exchange Programme between Ministry of Culture, India and the Ministry of Culture, Sports and Tourism of Vietnam for 2026-30 A Cultural Agreement was signed between India and Vietnam in 1976. The specific activities and exchanges to be carried out under this agreement are agreed upon within the framework of a Cultural Exchange Programme (CEP) valid for a period of five years (2026-2030).
3. MOU between Reserve Bank of India (RBI) and State Bank of Vietnam (SBV) on Cooperation in the area of Payment Systems and Innovation in Digital Payments The MoU aims to establish a framework for cooperation in the area of financial innovation and digital payments.
4. MoU between Central Drugs Standard Control Organization (CDSCO), Ministry of Health and Family Welfare of India and Drug Administration of Vietnam (DAV), Ministry of Health of Vietnam on Cooperation in the field of Medical Products Regulation The MoU seeks to establish a framework for cooperation in the field of medical products regulation, including pharmaceuticals, biological products, medical devices, and cosmetics.
5. MoU on Establishment of Friendship and Cooperation between Brihanmumbai Municipal Corporation, Mumbai and Ho Chi Minh City People’s Committee The Agreement aims to establish a formal framework for enabling both megacities to share expertise in urban management and economic development.
6. MoU between ICCR and Univesity of Science and Education – The Da Nang University on the Establishment of the ICCR Chair of India Studies The MoU establishes an ICCR Chair in the University of Da Nang in Vietnam.
7. MoU between Nalanda University, Rajgir, and Ho Chi Minh National Academy of Politics (HCMA), Hanoi This MoU strengthens the longstanding initiatives of India to facilitate capacity building & training to Vietnam.
8. MoU between the Ministry of Electronics and Information Technology of India and the Ministry of Science and Technology of Vietnam on Cooperation in the Field of Digital Technologies This MoU deepens bilateral commitment to strengthen cooperation in Digital Technologies and IT domain.
9. MoU between NPCI International Payments Limited (NIPL) and National Payment Corporation of Vietnam (NAPAS) This MoU establishes institutional linkages between India’s NIPL and Vietnam’s NAPAS on Cross Border QR code interoperability to enable payments.
10. MOU between the Office of the Comptroller and Auditor General of India and the State Audit Office of Vietnam in the field of Public Sector Audit This MoU renews the 2010 MoU between the two Audit institutions of India and Vietnam and makes it more flexible and dynamic.
11. MOU between Ministry of Tourism of India and Ministry of Sports, Culture and Tourism of Vietnam on Cooperation in the field of Tourism. This MoU promotes people-to-people linkages between the two countries.
12. MoU between ICCR and University of Social Sciences and Humanities on the establishment of the ICCR Chair of Indian Studies The MoU establishes an ICCR Chair in the University of Social Sciences and Humanities.
13. MoU between Gyan Bharatam, Ministry of Culture & University of Social Sciences and Humanities, Vietnam National University, Ho Chi Minh City (USSH, VNUHCM) on Digitization of Cham Manuscripts The MoU establishes institutional linkages between NMM, Indira Gandhi National Centre for Arts and USSH, VNUHCM for survey, documentation, conservation, digitisation and online dissemination of Cham manuscripts of Indian origin currently preserved in Vietnam.

Announcements

 

SI No.Title
1. Elevation of bilateral ties to Enhanced Comprehensive Strategic Partnership
2. New trade goal of USD 25 billion by 2030
3. Vietnam joining the Indo Pacific Oceans Initiative (IPOI)
4. Announcement of export of Indian grapes to Vietnam and Vietnamese Durian to India
5. Establishment of the Site Interpretation Centre at UNESCO World Heritage Site at My Son