प्रधानमंत्री ने सुजुकी के पहले मेड-इन-इंडिया बैटरी इलेक्ट्रिक वाहन ‘ई विटारा’ का उद्घाटन किया और उसे हरी झंडी दिखाई
भारत में बने EVs 100 देशों को निर्यात किए जाएंगे: पीएम
भारत के पास लोकतंत्र की शक्ति है, जनसांख्यिकी का लाभ है और कुशल कार्यबल का एक बहुत बड़ा भंडार है, जो हर भागीदार के लिए लाभदायक है: प्रधानमंत्री
अब दुनिया भर में जो ईवी चलेगी, उसमें लिखा होगा- मेड इन इंडिया!: प्रधानमंत्री
मेक इन इंडिया पहल ने वैश्विक ही नहीं, घरेलू निर्माताओं के लिए भी अनुकूल वातावरण तैयार किया है: प्रधानमंत्री
आने वाले समय में, भविष्य के उद्योगों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा: प्रधानमंत्री
भारत सेमीकंडक्टर क्षेत्र में उड़ान भर रहा है, देश में इसके 6 संयंत्र स्थापित होने वाले हैं: प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज गुजरात के हंसलपुर में ग्रीन मोबिलिटी पहल का उद्घाटन किया। हरित ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में यह एक बहुत बड़ा कदम है। इस अवसर पर उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि गणेशोत्सव के उल्लास के बीच, भारत की 'मेक इन इंडिया' यात्रा में एक नया अध्याय जुड़ रहा है। उन्होंने कहा कि यह ‘मेक इन इंडिया, मेक फॉर द वर्ल्ड’ के साझा लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण छलांग है। श्री मोदी ने कहा कि आज से भारत में निर्मित इलेक्ट्रिक वाहनों का निर्यात 100 देशों को किया जाएगा। उन्होंने देश में हाइब्रिड बैटरी इलेक्ट्रोड निर्माण की शुरुआत की भी घोषणा की। प्रधानमंत्री ने कहा कि आज का दिन भारत-जापान मैत्री को एक नया आयाम देगा। उन्होंने भारत के सभी नागरिकों, जापान और सुजुकी मोटर कॉर्पोरेशन को हार्दिक बधाई दी।

यह स्मरण करते हुए कि भारत की सफलता की कहानी के बीज 12-13 साल पहले बोए गए थे, श्री मोदी ने कहा कि 2012 में, उनके मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान, हंसलपुर में मारुति सुजुकी को ज़मीन आवंटित की गई थी। उन्होंने कहा कि उस समय भी आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया का ही विजन था। उन्होंने कहा कि वे शुरुआती प्रयास, अब देश के वर्तमान संकल्पों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

स्वर्गीय श्री ओसामु सुजुकी को अपनी हार्दिक श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत सरकार को उन्हें पद्म विभूषण से सम्मानित करने का गौरव प्राप्त हुआ है। उन्होंने कहा कि उन्हें मारुति सुजुकी इंडिया के लिए श्री ओसामु सुजुकी द्वारा देखे गए विजन के व्यापक विस्तार को देखकर प्रसन्नता हो रही है।

श्री मोदी ने कहा कि भारत के पास लोकतंत्र की मजबूती, जनसांख्यिकी का लाभ और कुशल कार्यबल का एक विशाल भंडार भी है जो हर साझेदार के लिए लाभजनक है। उन्होंने बताया कि सुजुकी जापान भारत में निर्माण कर रही है और यहां उत्पादित वाहन जापान को निर्यात किए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह न केवल भारत-जापान संबंधों की मज़बूती को दर्शाता है, बल्कि वैश्विक कंपनियों के भारत में बढ़ते विश्वास को भी दर्शाता है। उन्होंने कहा कि मारुति सुजुकी जैसी कंपनियां प्रभावी रूप से मेक इन इंडिया की ब्रांड एंबेसडर बन गई हैं। लगातार चार वर्षों से मारुति सुजुकी भारत की सबसे बड़ी कार निर्यातक रही है और प्रधानमंत्री ने घोषणा की कि आज से उसी पैमाने पर इलेक्ट्रिक वाहनों का निर्यात भी शुरू होगा। उन्होंने कहा कि दुनिया भर के दर्जनों देशों में चलने वाले इलेक्ट्रिक वाहनों पर गर्व से मेड इन इंडिया का लेबल लगा होगा।

प्रधानमंत्री ने कहा कि इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) का सबसे महत्वपूर्ण घटक बैटरी है और कुछ साल पहले तक भारत में बैटरियां पूरी तरह से आयातित होती थीं। उन्होंने कहा कि ईवी विनिर्माण को मज़बूती प्रदान करने के लिए भारत में घरेलू बैटरी उत्पादन शुरू करना जरूरी है। श्री मोदी ने याद दिलाया कि 2017 में इसी दृष्टिकोण के साथ टीडीएसजी बैटरी प्लांट की नींव रखी गई थी। उन्होंने घोषणा की कि टीडीएसजी की एक नई पहल के तहत, तीन जापानी कंपनियां पहली बार भारत में संयुक्त रूप से बैटरी सेल का निर्माण करेंगी। उन्होंने कहा कि बैटरी सेल इलेक्ट्रोड का उत्पादन भी भारत में ही स्थानीय स्तर पर किया जाएगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह स्थानीयकरण भारत की आत्मनिर्भरता को सशक्त करेगा। उन्होंने कहा कि इससे हाइब्रिड इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र के विकास को गति मिलेगी। उन्होंने इस ऐतिहासिक शुरुआत के लिए शुभकामनाएं दीं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि कुछ साल पहले तक इलेक्ट्रिक वाहनों को सिर्फ एक विकल्प के तौर पर ही देखा जाता था। उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रिक वाहन कई चुनौतियों का ठोस समाधान पेश करते हैं। उन्होंने याद दिलाया कि पिछले साल अपनी सिंगापुर यात्रा के दौरान उन्होंने पुराने वाहनों और एम्बुलेंस को हाइब्रिड इलेक्ट्रिक वाहनों में बदलने का प्रस्ताव रखा था। श्री मोदी ने इस चुनौती को स्वीकार करने और सिर्फ छह महीने के भीतर एक कार्यशील प्रोटोटाइप तैयार करने के लिए मारुति सुजुकी की सराहना की। उन्होंने बताया कि उन्होंने हाइब्रिड एम्बुलेंस के प्रोटोटाइप की व्यक्तिगत रूप से समीक्षा की है और कहा कि ये हाइब्रिड एम्बुलेंस पीएम ई-ड्राइव योजना के बिल्कुल अनुरूप हैं। प्रधानमंत्री ने बताया कि इस 11,000 करोड़ रुपए की योजना के तहत ई-एम्बुलेंस के लिए एक खास बजट आवंटित किया गया है। उन्होंने कहा कि हाइब्रिड इलेक्ट्रिक वाहन प्रदूषण कम करने में मदद करेंगे और पुराने वाहनों को बदलने का एक व्यावहारिक विकल्प पेश करेंगे।

मोदी ने कहा कि स्वच्छ ऊर्जा और स्वच्छ गतिशीलता भारत के भविष्य का प्रतिनिधित्व करते हैं ऐसे प्रयासों के माध्यम से भारत तेजी से स्वच्छ ऊर्जा और स्वच्छ गतिशीलता के लिए एक विश्वसनीय केंद्र के रूप में उभर रहा है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि ऐसे समय में जब दुनिया आपूर्ति श्रृंखला व्यवधानों से जूझ रही है, पिछले एक दशक में भारत के नीतिगत निर्णय अत्यधिक प्रभावी साबित हो रहे हैं। 2014 में राष्ट्र की सेवा का अवसर मिलने पर इस परिवर्तन की तैयारी शुरू करने का स्मरण करते हुए, प्रधानमंत्री ने मेक इन इंडिया अभियान की शुरुआत और वैश्विक तथा घरेलू, दोनों ही निर्माताओं के लिए अनुकूल वातावरण के निर्माण पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत अपने विनिर्माण क्षेत्र को कुशल और विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि इस दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने के लिए औद्योगिक गलियारे विकसित किए जा रहे हैं और साथ ही देश भर में प्लग-एंड-प्ले बुनियादी ढांचा और लॉजिस्टिक्स पार्क स्थापित किए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि कई क्षेत्रों के निर्माताओं को उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना के तहत लाभ प्रदान किए जा रहे हैं।

श्री मोदी ने उल्लेख किया कि बड़े सुधारों के जरिए निवेशकों के सामने लंबे समय से चली आ रही चुनौतियां हल हो गई हैं और इन सुधारों ने निवेशकों के लिए भारतीय विनिर्माण क्षेत्र में निवेश करना आसान बना दिया है। उन्होंने इन प्रयासों के ठोस परिणामों पर प्रकाश डाला और बताया कि अकेले इसी दशक में भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन में लगभग 500 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। प्रधानमंत्री ने कहा कि 2014 की तुलना में मोबाइल फोन उत्पादन में 2,700 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई है और पिछले एक दशक में रक्षा उत्पादन में भी 200 प्रतिशत से ज्यादा की वृद्धि देखी गई है। उन्होंने कहा कि यह सफलता देश के सभी राज्यों को प्रेरित कर रही है और सुधारों व निवेश को लेकर राज्यों के बीच एक स्वस्थ प्रतिस्पर्धा उभरी है जिसका लाभ पूरे देश को मिल रहा है। श्री मोदी ने राज्यों से वैश्विक निवेशकों को आकर्षित करने के लिए विकासोन्मुखी नीतियों और सुधारों के साथ-साथ व्यापार सुगमता बढ़ाने का आग्रह किया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत यहीं नहीं रुकेगा, जिन क्षेत्रों में भारत ने अच्छा प्रदर्शन किया है, वहां और भी अधिक उत्कृष्टता हासिल करना हमारा लक्ष्य है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि सरकार इस प्रगति को निरंतरता देने के लिए मिशन मैन्युफैक्चरिंग को प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने कहा कि भारत का ध्यान अब भविष्य के उद्योगों की ओर जाएगा। देश भर में छह संयंत्रों की स्थापना के साथ सेमीकंडक्टर क्षेत्र की बढ़ती प्रगति के बारे में बात करते हुए श्री मोदी ने भारत में सेमीकंडक्टर विनिर्माण को और आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई।

श्री मोदी ने आगे कहा कि भारत सरकार रेयर-अर्थ मैग्नेट की कमी के कारण ऑटो उद्योग के सामने आने वाली चुनौतियों को लेकर भी सजग है। इस क्षेत्र में राष्ट्रीय क्षमताओं को मज़बूत करने के लिए, उन्होंने राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन की शुरुआत का उल्लेख किया। इस मिशन के अंतर्गत, महत्वपूर्ण खनिजों की पहचान के लिए भारत के विभिन्न स्थानों पर 1,200 से ज़्यादा अन्वेषण अभियान चलाए जाएंगे।

प्रधानमंत्री ने अगले सप्ताह जापान की अपनी यात्रा की जानकारी देते हुए कहा कि भारत और जापान के बीच संबंध, केवल कूटनीतिक संबंधों में ही सीमित न रह कर इससे कहीं आगे तक फैले हैं और ये संबंध संस्कृति और आपसी विश्वास पर आधारित हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देश एक-दूसरे की प्रगति में अपनी प्रगति देखते हैं। श्री मोदी ने कहा कि मारुति सुजुकी के साथ शुरू हुआ यह सफ़र अब बुलेट ट्रेन की गति तक पहुंच गया है। भारत-जापान साझेदारी की औद्योगिक क्षमता को साकार करने की प्रमुख पहल गुजरात में शुरू हुई थी। प्रधानमंत्री ने याद दिलाया कि 20 साल पहले जब वाइब्रेंट गुजरात शिखर सम्मेलन का शुभारंभ हुआ था, तब जापान एक प्रमुख साझेदार था। उन्होंने गुजरात के लोगों द्वारा जापान के लोगों के प्रति दिखाए गए स्नेह की सराहना की। प्रधानमंत्री ने बताया कि उद्योग से संबंधित नियम और कानून जापानी भाषा में छापे गए थे ताकि उन्हें समझना आसान हो सके। उन्होंने यह भी बताया कि जापानी मेहमानों के लिए जापानी व्यंजनों की व्यवस्था की गई थी। उन्होंने गोल्फ के प्रति जापानियों के प्रेम की सराहना की और कहा कि उनके हितों को ध्यान में रखते हुए 7-8 नए गोल्फ कोर्स विकसित किए गए थे। श्री मोदी ने आगे कहा कि भारत के कॉलेज और विश्वविद्यालय अब जापानी भाषा की शिक्षा को प्राथमिकता दे रहे हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत के निरंतर प्रयास, भारत और जापान के बीच लोगों के बीच आपसी संपर्क को मज़बूत कर रहे हैं। दोनों देश अब कौशल विकास और मानव संसाधन के क्षेत्र में एक-दूसरे की ज़रूरतों को पूरा करने में सक्षम हैं। उन्होंने मारुति सुजुकी जैसी कंपनियों से ऐसी पहलों में सक्रिय रूप से भाग लेने और युवा आदान-प्रदान कार्यक्रमों को बढ़ावा देने का आग्रह किया।

आने वाले वर्षों में सभी प्रमुख क्षेत्रों में निरंतर प्रगति की आवश्यकता पर बल देते हुए, प्रधानमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि आज के प्रयास 2047 तक विकसित भारत की नींव को मजबूत करेंगे। उन्होंने अपना वक्तव्य इस विश्वास को दोहराते हुए समाप्त किया कि जापान इस लक्ष्य को प्राप्त करने में एक विश्वसनीय भागीदार बना रहेगा।

इस कार्यक्रम में गुजरात के मुख्यमंत्री श्री भूपेन्द्रभाई पटेल, भारत में जापान के राजदूत श्री ओनो केइची, सुजुकी मोटर कॉर्पोरेशन के अधिकारी तथा अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

पृष्ठभूमि

प्रधानमंत्री ने अहमदाबाद के हंसलपुर स्थित सुजुकी मोटर प्लांट में दो ऐतिहासिक शुरुआत किए। ये महत्वपूर्ण पहल, भारत को ग्रीन मोबिलिटी के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करती हैं और साथ ही मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत के प्रति प्रधानमंत्री की प्रतिबद्धता को भी आगे बढ़ाती हैं।

मेक इन इंडिया की सफलता का एक प्रमुख उदाहरण प्रस्तुत करते हुए, प्रधानमंत्री ने सुजुकी के पहले वैश्विक बैटरी इलेक्ट्रिक वाहन (बीईवी) ‘ई विटारा’ का उद्घाटन किया और इसे हरी झंडी दिखाई। भारत में निर्मित इन बीईवी का निर्यात यूरोप और जापान जैसे उन्नत बाजारों सहित 100 से अधिक देशों में किया जाएगा। इस उपलब्धि के साथ, भारत अब सुजुकी के इलेक्ट्रिक वाहनों के वैश्विक विनिर्माण केंद्र के रूप में कार्य करेगा।

प्रधानमंत्री ने गुजरात स्थित टीडीएस लिथियम-आयन बैटरी संयंत्र में हाइब्रिड बैटरी इलेक्ट्रोड के उत्पादन की शुरुआत की। तोशिबा, डेंसो और सुजुकी का यह संयुक्त उद्यम संयंत्र, घरेलू विनिर्माण और स्वच्छ ऊर्जा नवाचार को बढ़ावा देगा। अब अस्सी प्रतिशत से अधिक बैटरी का निर्माण भारत में ही किया जाएगा।

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आर्य वैद्यशाला ने आयुर्वेद के संरक्षण, संवर्धन और विकास में अहम भूमिका निभाई: पीएम मोदी
January 28, 2026
Ayurveda in India has transcended time and region, guiding humanity to understand life, achieve balance and live in harmony with nature: PM
We have consistently focused on preventive health, the National AYUSH Mission was launched with this vision: PM
We must adapt to the changing times and increase the use of modern technology and AI in Ayurveda: PM

नमस्कारम !

केरला के गवर्नर श्रीमान राजेंद्र आर्लेकर जी,आर्य वैद्य शाला से जुड़े सभी महानुभाव, देवियों और सज्जनों,

आज इस गरिमामय अवसर पर, आप सभी से जुड़ना मेरे लिए खुशी का अवसर है। आयुर्वेद को सहेजने, संरक्षित करने और आगे बढ़ाने में, आर्य वैद्यशाला का महत्वपूर्ण योगदान है। अपने 125 वर्षों की यात्रा में इस संस्था ने, आयुर्वेद को इलाज की एक सशक्त व्यवस्था के रूप में स्थापित किया है। आज इस अवसर पर, मैं आर्य वैद्यशाला के संस्थापक,वैद्यरत्नम पी एस वरियर जी के योगदानों को याद करता हूं। आयुर्वेद के प्रति उनकी approach और लोक कल्याण के लिए उनका समर्पण, आज भी हमें प्रेरित करता है।

साथियों,

केरला की आर्य वैद्यशाला, भारत की उस उपचार परंपरा का जीवंत प्रतीक है, जिसने सदियों से मानवता की सेवा की है। भारत में आयुर्वेद किसी एक काल या एक क्षेत्र में सीमित नहीं रहा। हर दौर में इस प्राचीन चिकित्सा पद्धति ने जीवन को समझने, संतुलन बनाने, और प्रकृति के साथ तालमेल बिठाने का रास्ता दिखाया है। आज आर्य वैद्यशाला 600 से अधिक आयुर्वेदिक औषधियों का निर्माण करती है, देश के अलग-अलग क्षेत्रों में संस्था के अस्पताल, आयुर्वेदिक तरीके से मरीजों का इलाज कर रहे हैं, जिनमें दुनिया के 60 से अधिक देशों के मरीज शामिल होते हैं। आर्य वैद्यशाला ने ये भरोसा अपने काम से बनाया है। जब लोग कष्ट में होते हैं, तो आप सभी उनके लिए बहुत बड़ी उम्मीद बनते हैं।

साथियों,

आर्य वैद्यशाला के लिए सेवा, केवल एक विचार नहीं है,ये भावना उनके Action, Approach और Institutions में भी दिखाई देती है। संस्था का Charitable Hospital पिछले 100 वर्षों से, 100 वर्ष ये कोई कम समय नहीं है, 100 वर्षों से निरंतर लोगों की सेवा में जुटा है। इसमें अस्पताल से जुड़े सभी लोगों का योगदान है। मैं अस्पताल के वैद्य, डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ और अन्य सभी लोगों का भी अभिनंदन करता हूं। चैरिटेबल अस्पताल की 100 वर्षों की यात्रा पूरी करने के लिए आप सब बधाई के पात्र हैं। केरला के लोगों ने आयुर्वेद की जिन परंपराओं को सदियों से जीवंत बनाए रखा है। आप उन परंपराओं का संरक्षण भी कर रहे हैं, संवर्धन भी कर रहे हैं।

साथियों,

देश में लंबे समय तक प्राचीन चिकित्सा पद्धतियों को साइलो में देखा जाता रहा। पिछले 10-11 वर्षों में इस अप्रोच में बड़ा बदलाव हुआ है। अब स्वास्थ्य सेवाओं को होलिस्टिक नजरिए से देखा जा रहा है। आयुर्वेद, यूनानी, होम्योपैथिक, सिद्ध और योग, इन सबको हम एक Umbrella के नीचे लाए हैं, और इसके लिए विशेष तौर पर आयुष मंत्रालय बनाया गया है। हमने preventive health पर निरंतर फोकस किया है। इसी सोच के साथ, नेशनल आयुष मिशन लॉन्च किया गया, 12 हजार से अधिक आयुष वेलनेस सेंटर्स खोले गए, इन सेंटर्स में योग, preventive care, community health services, ये सब कुछ उपलब्ध कराई जाती हैं। हमने देश के अन्य अस्पतालों को भी आयुष सेवाओं से जोड़ा, आयुष दवाओं की regular supply पर भी ध्यान दिया। इसका उद्देश्य साफ है, कि भारत के परंपरागत चिकित्सा इस ज्ञान का लाभ, देश के कोने-कोने के लोगों को मिले।

साथियों,

सरकार की नीतियों का स्पष्ट प्रभाव आयुष सेक्टर पर दिखाई दिया है। AYUSH manufacturing sector तेज़ी से आगे बढ़ा है और इसका विस्तार हुआ है। भारतीय पारंपरिक वेलनेस को दुनिया तक पहुंचाने के लिए, सरकार ने Ayush Export Promotion Council की स्थापना की है। हमारी कोशिश है कि AYUSH products और services को, global markets में बढ़ावा मिल सके। इसका बहुत सकारात्मक प्रभाव भी हम देख रहे हैं। साल 2014 में भारत से लगभग 3 हजार करोड़ रुपए के आयुष और हर्बल प्रॉडक्ट्स एक्सपोर्ट होते थे। वहीं अब भारत से 6500 करोड़ रुपए के आयुष और हर्बल प्रॉडक्ट्स एक्सपोर्ट होने लगे हैं। इसका बहुत बड़ा फायदा देश के किसानों को भी हो रहा है।

साथियों,

भारत आज AYUSH based Medical Value Travel के लिए, एक भरोसेमंद destination के रूप में भी उभर रहा है। इसलिए हमने, AYUSH Visa, जैसे कदम भी उठाए हैं। इससे विदेशों से आने वाले लोगों को आयुष चिकित्सा की बेहतर सुविधाएं मिल रही हैं।

साथियों,

आयुर्वेद जैसी प्राचीन चिकित्सा पद्धति को प्रमोट करने के लिए, सरकार हर बड़े मंच पर इसे गर्व से आगे रख रही है। चाहे ब्रिक्स देशों का सम्मेलन हो, या जी-20 देशों की बैठक हो, जहां भी अवसर मिला, मैंने आयुर्वेद को होलिस्टिक हेल्थ के माध्यम के रूप में प्रस्तुत किया। गुजरात के जामनगर में वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन- WHO के Global Traditional Medicine Centre की स्थापना भी की जा रही है। जामनगर में ही Institute of Teaching and Research in Ayurveda, इसने काम करना शुरू कर दिया है। आयुर्वेदिक दवाओं की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए, गंगा नदी के किनारों पर औषधीय खेती को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।

साथियों,

आज मैं आप सभी से देश की एक और उपलब्धि साझा करना चाहता हूं। आप सभी जानते हैं कि अभी European Union के साथ trade agreement की ऐतिहासिक घोषणा हुई है। मुझे ये बताते हुए खुशी है कि ये trade agreement, Indian traditional medicine services और practitioners को एक बड़ा boost देगा। EU member states में जहाँ regulations मौजूद नहीं हैं, वहाँ हमारे AYUSH practitioners, भारत में हासिल की गई अपनी professional qualifications के आधार पर, अपनी services प्रदान कर सकेंगे। इसका बहुत बड़ा लाभ आयुर्वेद और योग से जुड़े हमारे युवाओं को होगा। इस एग्रीमेंट से यूरोप में आयुष wellness centers की स्थापना में भी मदद मिलेगी। आयुर्वेद-आयुष से जुड़े आप सभी महानुभावों को मैं इस एग्रीमेंट की बधाई देता हूं।

साथियों,

आयुर्वेद के माध्यम से भारत में सदियों से इलाज का काम होता रहा है। लेकिन ये भी दुर्भाग्य रहा है कि, हमें देश में और ज्यादातर विदेशों में, लोगों को आयुर्वेद का महत्व समझाना पड़ता है। इसकी एक बड़ी वजह है, एविडेंस बेस्ड रिसर्च की कमी, रिसर्च पेपरर्स की कमी, जब साइंस के सिद्धांतों पर आयुर्वेदिक पद्धति को परखा जाता है, तो लोगों का भरोसा और मजबूत होता है। इसलिए मुझे इस बात की खुशी है कि, आर्य वैद्यशाला ने आयुर्वेद को साइंस और रिसर्च की कसौटी पर लगातार परखा है। ये CSIR और I.I.T जैसे संस्थानों के साथ मिलकर काम कर रही है। Drug Research, Clinical Research और कैंसर केयर पर भी आपका फोकस रहा है। आयुष मंत्रालय के सहयोग से, Cancer Research के लिए Centre of Excellence की स्थापना करना, इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

साथियों,

अब हमें बदलते समय के अनुसार, आयुर्वेद में आधुनिक टेक्नॉलजी और AI का उपयोग भी बढ़ाना चाहिए। बीमारी की संभावनाओं का पता लगाने के लिए, अलग-अलग पद्धितियों से इलाज के लिए, काफी कुछ इनोवेटिव किया जा सकता है।

साथियों,

आर्य वैद्यशाला ने दिखाया है कि परंपरा और आधुनिकता साथ चल सकती हैं, और स्वास्थ्य सेवा लोगों के जीवन में भरोसे का आधार बन सकती है। इस संस्था ने आयुर्वेद की पुरानी समझ को सहेजते हुए, आधुनिक जरूरतों को अपनाया है। इलाज को व्यवस्थित बनाया गया है और मरीजों तक सेवाएं पहुंचाई गई हैं। मैं आर्य वैद्यशाला को इस प्रेरक यात्रा के लिए फिर से बधाई देता हूं। मेरी कामना है कि यह संस्था आने वाले वर्षों में भी, इसी समर्पण और सेवा भावना के साथ लोगों के जीवन को बेहतर बनाती रहे। बहुत-बहुत धन्यवाद।

नमस्कारम।