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किसी देश का इंफ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी उस देश के विकास के लिए नब्ज़ की तरह होता है। यह स्पष्ट है कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार द्वारा आधारभूत संरचनाओं के  विकास को प्राथमिकता दी गई है। नए भारत के सपने को पूरा करने के लिए एनडीए सरकार रेलवे, सड़क, जलमार्ग, विमानन और किफायती आवासों को विकसित करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है।

रेलवे

भारतीय रेल नेटवर्क विश्व के सबसे बड़े रेलवे नेटवर्कों में से एक है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में एनडीए सरकार के कार्यकाल के दौरान ट्रैक नवीनीकरण की गति, अनमैंड क्रॉसिंग को खत्म करने और ब्रॉड गेज लाइनों को शुरू करने की दिशा में काफी सुधार हुआ है।

भारतीय रेलवे ने वर्ष 2017-18 में 100 से भी कम दुर्घटनाओं के साथ अपना सर्वश्रेष्ठ सुरक्षा रिकॉर्ड दर्ज किया। आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2013-14 में 118 रेल दुर्घटनाएं दर्ज की गईं थी, जो वर्ष 2017-18 में कम होकर 73 तक हो गईं है। वर्ष 2009 -14 की तुलना में 20% अधिक की औसत गति के साथ वर्ष 2017-18 में 5,469 अनमैंड क्रॉसिंग को ख़त्म कर दिया गया है। ब्रॉड गेज रूट पर सभी अनमैंड क्रॉसिंग को बेहतर सुरक्षा के लिए वर्ष 2020 तक समाप्त कर दिया जाएगा।

 

रेलवे के विकास को नई गति देते हुए वर्ष 2017-18 के दौरान ट्रैक नवीनीकरण के कार्य में 50% की वृद्धि हुई है, जो वर्ष 2013-14 के 2,926 किलोमीटर की तुलना में अब 4,405 किलोमीटर है। प्रधानमंत्री मोदी की एनडीए सरकार के 4 वर्षों के दौरान शुरू किया गया ब्रॉड गेज (9,528 किलोमीटर) वर्ष 2009-14 के दौरान शुरू हुए ब्रॉड गेज (7,600 किलोमीटर) से कहीं अधिक है।

ऐसा पहली बार हुआ है कि देश का पूर्वोत्तर बाकी देश के साथ पूरी तरह से एकीकृत है, क्योंकि वहां संपूर्ण रेल नेटवर्क ब्रॉड गेज में बदल दिया गया है। आजादी के 70 वर्षों के बाद मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम राज्यों को भारतीय रेल के अंतर्गत लाया गया!

नए भारत के विकास के लिए हमें उच्च तकनीक की भी आवश्यकता है। बुलेट ट्रेन, जिसे मुंबई से अहमदाबाद तक चलाए जाने की योजना है, वह इस रूट पर लगने वाले वर्तमान 8 घंटे के समय को लगभग 2 घंटे तक कम कर देगी।

 

विमानन

नागर विमानन के क्षेत्र में भी तेजी से प्रगति हो रही है। UDAN (Ude Desh ka Aam Nagrik) के तहत किफायती हवाई यात्रा का वादा करने के बाद, एक ओर जहाँ स्वतंत्रता के बाद से वर्ष 2014 के बीच 75 हवाई अड्डों को शुरू किया गया, वहीं हमने केवल 4 वर्षों में 25 हवाई अड्डों को परिचालित किया है। जिन क्षेत्रीय हवाई अड्डों पर उनकी क्षमता से कम यात्री आते थे या जिनपर यात्री आते ही नहीं थे, उनको 2,500 रुपये प्रति घंटे की सब्सिडी वाले किराए ने कई भारतीयों के हवाई  यात्रा करने के सपने को पूरा करने में मदद की है। इसके परिणामस्वरूप पहली बार एसी ट्रेन की तुलना में अधिक लोगों ने हवाई जहाज से यात्रा की।

पिछले 3 वर्षों में  यात्री यातायात दर में 18-20% की वृद्धि के साथ, भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा विमानन बाजार बनकर उभरा है। वर्ष 2017 में घरेलू हवाई यात्रियों की संख्या 10 करोड़ के पार हो गई।

 

पोत परिवहन

भारत प्रधानमंत्री मोदी की सरकार के तहत पोत परिवहन के क्षेत्र में भी तेजी से अपने कदम आगे बढ़ा रहा है। बंदरगाह-केन्द्रित विकास में तेजी लाते हुए, प्रमुख बंदरगाहों का टर्न अराउंड टाइम जो वर्ष 2013-14 में 94 घंटे था, वह अब एक तिहाई घटकर वर्ष 2017-18 में 64 घंटे तक हो गया है।

प्रमुख बंदरगाहों पर मालगाड़ी के यातायात पर नजर डाले तो वर्ष 2010-11 में यह 570.32 मीट्रिक टन से घटकर वर्ष 2012-13 में 545.79 मीट्रिक टन हो गया था। लेकिन एनडीए सरकार के अंतर्गत वर्ष 2017-18 के दौरान यह 679.367 मीट्रिक टन तक बढ़ गया, जो 100 मीट्रिक टन से भी अधिक की वृद्धि है!

अंतर्देशीय जलमार्ग परिवहन की लागत को काफी कम करते हैं और कार्बन फुटप्रिंट कम करने के साथ-साथ अर्थव्यवस्था को भी बढ़ाते हैं। पिछले 30 वर्षों में 5 राष्ट्रीय जलमार्गों की तुलना में हमने बीते 4 वर्षों में 106 राष्ट्रीय जलमार्ग जोड़े हैं।

 

सड़कों का विकास

मल्टी-मॉडल एकीकरण द्वारा राजमार्गों का विस्तार भारतमाला परियोजना के तहत किया जा रहा है। वर्ष 2013-14 के राष्ट्रीय राजमार्गों के 92,851 किलोमीटर नेटवर्क को वर्ष 2017-18 में बढ़ाकर 1,20,543 किलोमीटर का कर दिया गया है।

 

सुरक्षित सड़कों के लिए, सेतु भारतम परियोजना में 20,800 करोड़ रुपये के कुल बजट के साथ सभी राष्ट्रीय राजमार्गों को रेल क्रॉसिंग से मुक्त करने के लिए रेलवे ओवरब्रिज बनाने के लिए लागू किया गया है।

सड़क निर्माण की गति लगभग दोगुनी हो गई है। जहाँ वर्ष 2013-14 के दौरान राजमार्ग निर्माण की गति प्रतिदिन 12 किलोमीटर थी, वह वर्ष 2017-18 के दौरान 27 किलोमीटर प्रतिदिन हो गई।

 

अरुणाचल प्रदेश की बढ़ती कनेक्टिविटी के लिए भारत की सबसे लंबी सुरंग, चेनानी-नाशरी, जम्मू में भारत कि सबसे लम्बी सुरंग बनाना, ढोला-सदिया सेतु, के रुप में अरुणाचल प्रदेश से कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए भारत का सबसे लम्बा पुल बनाना, हमारे अब तक अप्रयुक्त क्षेत्रों तक विकास पहुँचाने की प्रतिबद्धता की गवाही देता है। भरूच में नर्मदा पर और कोटा में चंबल पर पुल बनने से भी उन क्षेत्रों में सड़क कनेक्टिविटी में सुधार आया है।



 

सड़कें ग्रामीण विकास कि गति को बढ़ाती है। इनके महत्व को ध्यान में रखते हुए, लगभग 1.69 लाख किलोमीटर ग्रामीण सड़कों का निर्माण पिछले 4 वर्षों में किया गया है। सड़क निर्माण की औसत गति जो वर्ष 2013-14 में प्रतिदिन 69 किलोमीटर थी वह वर्ष 2017-18 में बढ़कर 134 किलोमीटर प्रतिदिन हो गई है। फिलहाल, वर्ष 2014 के 56% की तुलना में ग्रामीण सड़क कनेक्टिविटी 82% से ज्यादा है, जिससे गांव भारत की विकास गाथा के महत्वपूर्ण हिस्से बन गए हैं।

रोजगार उत्पादन में पर्यटन अत्यधिक महत्वपूर्ण होता है। पर्यटन के क्षेत्र को बढ़ावा देने के साथ साथ तीर्थयात्रा के अनुभव को सुधारने के लिए, चार धाम महामार्ग विकास परियोजना की शुरुआत की गई है। यह यात्रा को और अधिक सुरक्षित, तेज़ और सुविधाजनक बनाने का काम करेगा। इसके तहत 12,000 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत पर 900 किलोमीटर के राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण की योजना है।

 

इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा मिलने से, माल ढुलाई तेजी से होती है  जिससे हमारी अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है। एनडीए सरकार के प्रयासों के कारण, वर्ष 2017-18 में सबसे ज्यादा माल ढुलाई (1,160 मीट्रिक टन) दर्ज की गई।

शहरी परिवर्तन

स्मार्ट सिटीज के माध्यम से शहरी परिवर्तन के लिए लगभग 100 शहरी केन्द्रों को चयनित किया गया है जिससे क्वालिटी ऑफ़ लिविंग, शहरी नियोजन और विकास प्रक्रियाओं में सुधार होगा। इन शहरों में विभिन्न विकास परियोजनाओं से लगभग 10 करोड़ भारतीयों के जीवन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। इन परियोजनाओं का खर्च 2,01,979 करोड़ रूपए है।

ग्रामीण और शहरी दोनों इलाकों में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत करीब 1 करोड़ किफायती घर बनाए गए हैं। मध्यम और नव मध्यम वर्गों के लाभ के लिए, 9 लाख रुपये और 12 लाख रुपये के आवास ऋण 4% और 3% के ब्याज अनुदान के लिए योग्य हैं।

 

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भारत देश सवा सौ करोड़ भारतीयों की आकांक्षाओं का देश है। एक मजबूत अर्थव्यवस्था के साथ, देश प्रथम वाली कूटनीति, बहादुर रक्षा बलों और बढ़ती शक्ति के साथ, विश्व अब भारत को एक नई शक्ति के रूप में देख रहा है।

भारत दुनिया की सबसे तेजी से उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं में से एक के रूप में आर्थिक मोर्चे पर अपनी ताकत का प्रदर्शन कर रहा है। सरकार द्वारा किए गए सुधारों से भारत की वित्तीय स्थिती को मजबूती मिली है। आज भारत निवेश के लिए सबसे आकर्षक स्थलों में से एक है। 2013 से 2017 के बीच जीडीपी (मौजूदा कीमतों में) में 31 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जबकि वैश्विक जीडीपी में 4 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

भारत की बढ़ आर्थिक ताकत तो बढ़ ही रही है साथ ही अन्य देशों के साथ संबंधों में भी सुधार आ रहा है। यह सरकार के राजनयिक प्रयासों का नतीजा है कि पहली बार भारत ने 2 नहीं, बल्कि 3 बड़े समूहों की सदस्यता हासिल की है जिनमें मिसाइल टेक्नोलॉजी कंट्रोल रिजीम (एमटीसीआर), वासेनार अरेंजमेंट (डब्ल्यूए) और ऑस्ट्रेलिया समूह (एजी) शामिल हैं। इन समूहों में प्रवेश से भारत को अपने स्वदेशी निर्मित हथियार और स्पेस कार्यक्रमों के लिए उच्च स्तरीय तकनीक के सुगम आदान-प्रदान में मदद मिलेगी।

भारत ने अंतर्राष्ट्रीय समुद्री विवादों के समाधान के लिए इंटरनेशनल ट्रिब्‍यूनल फॉर द लॉ ऑफ द सी (आइटीएलओएस) में सफलतापूर्वक अपनी जगह बना ली है। यह जगह ऐसे समय में मिली है जब कई देश समुद्र क्षेत्र पर अनचाहा दावा करने की कोशिश करने वालों के प्रयासों को विफल करने में मदद के लिए भारत की तरफ देख रहे हैं।

राष्ट्रीय सुरक्षा के क्षेत्र में सरकार द्वारा दिखाए गए साहस से इस धारणा की पुष्टि होती है कि भारत के रक्षा बल दुश्मन को अपनी भाषा में जवाब देने में सक्षम हैं। सीमा पार आतंकवादियों के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक करके सेना ने अपने पराक्रम, अपने साहस और देश की सैन्य शक्ति का प्रदर्शन किया है। सरकार ने लंबे समय से चली आ रही ‘वन रैंक, वन पेंशन’ की मांग को पूरा करके यह दर्शाया है कि सरकार पूरी तरह से देश के रक्षा बलों का समर्थन करती है।

प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण सहित रक्षा खरीद समझौते और रक्षा क्षेत्र के बुनियादी ढांचे में सुधार के काम में तेजी आई है।

 

कला एवं सस्कृति के क्षेत्र में बात की जाए तो भारत ‘वसुधैव कुटुंबकम’ के सिद्धांत में भरोसा करता है। भारत पूरे विश्व को एक परिवार मानता है। भारत का मानना है कि विश्व की समस्याओं का समाधान सद्भाव और सामूहिक भागीदारी में है और अभी सबसे बड़ी चुनौति जलवायु परिवर्तन की है जो पूरी तरह से मानवता के लिए एक बड़ा खतरा है। पेरिस में COP21 में अग्रणी भूमिका निभाने के अलावा भारत ने अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन का नेतृत्व किया है। अद्वितीय गठबंधन सौर ऊर्जा का उपयोग करने और ग्रह को नुकसान पहुंचाए बिना भविष्य की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए 100 से अधिक देशों का एक समूह है।

भारत की कला एवं सस्कृति के क्षेत्र में एक और उपलब्धि है और वो है योग को वैश्विक मान्यता मिलना। प्रधानमंत्री मोदी ने योग के लिए कहा था:

“योग मन की शांति सुनिश्चित करता है। व्यक्ति को परिवार और समाज से जोड़ता है, आपसी स्नेह और मम भाव पैदा करता है। ऐसे ही समरस समाज शांतिप्रिय राष्ट्र का निर्माण करते हैं। ऐसे राष्ट्रों से ही एक सौहार्द और सद्भाव से पूर्ण सुंदर विश्व का निर्माण होता है।”

योग प्राचीन भारतीय संतों की ओर से मानवता को दिया गया बहुमूल्य उपहार है और 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के रूप में घोषित किए जाने से उस उपहार की तरफ दुनिया का एक बार फिर से ध्यान आकर्षित हुआ है। यूएन में प्रधानमंत्री मोदी द्वारा प्रस्तावित उस प्रस्ताव का 173 देशों ने समर्थन किया था, जो यूएन के इतिहास में अभूतपूर्व स्तर का समर्थन था। यूनेस्को ने योग को अमूर्त सांस्कृतिक धरोहरों की सूची में शामिल किया है। योग उम्र, लिंग, जाति, पंथ, धर्म और राष्ट्रों के बंधन और सीमाओं से परे है।

एक अन्य क्षेत्र जहां भारत दृढ़तापूर्वक एक तकनीकी शक्ति का केंद्र बन रहा है वह है भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम। विश्व स्तरीय वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की टीम के साथ भारत अंतरिक्ष जगत में अग्रणी हो गया है। इसरो ने एक ही उड़ान में 104 उपग्रहों, जिसमें से 101 सह-यात्री उपग्रह अमेरिका, नीदरलैंड्स, स्विट्जरलैंड, इज़राइल, कज़ाखस्तान और संयुक्त अरब अमीरात के अंतर्राष्ट्रीय ग्राहक उपग्रह थे, को सफलतापूर्वक लॉन्च करके विश्व रिकॉर्ड स्थापित किया है। IRNSS-1G के सफल लांच के साथ ही भारत का स्वदेशी वैश्विक नेविगेशन सिस्टम स्थापित हो गया है। इससे भारत उन चंद देशों की सूची में शामिल हो गया है जिनके पास अपनी उपग्रह नेविगेशन प्रणाली है।

विभिन्न क्षेत्रों में भारतीयों द्वारा किए गए बड़े कार्यों से सभी के लिए एक बेहतर भविष्य बनाने में मदद मिल रही है। विज्ञान, प्रौद्योगिकी और आर्थिक विकास में हो रही इस तरक्की के माध्यम से हम न केवल स्वदेश में ही समस्याओं को हल कर रहे हैं बल्कि सफलता की ऐसी नई कहानियां लिख रहे हैं जिन्हें मानवता के कल्याण के लिए विश्व के अन्य हिस्सों में भी दोहराया जा सके।