Text of PM's remarks on National Panchayati Raj Day

Published By : Admin | April 24, 2015 | 13:46 IST

मंत्रिपरिषद के मेरे साथी, देश के अलग-अलग भागों से आए हुए पंचायत राज व्‍यवस्‍था के सभी प्रेरक महानुभाव,

जिन राज्‍यों को आज मुझे सम्‍मानित करने का सौभाग्‍य मिला है उन सभी राज्‍यों को मैं हृदय से बधाई देता हूं। आज जिला परिषदों को भी और ग्राम पंचायतों का भी सम्‍मान होने वाला है। उन सबको भी मैं हृदय से बहुत-बहुत अभिनंदन करता हूं। पंचायत राज दिवस पर मैं देशभर में पंचायत राज व्‍यवस्‍था से जुड़े हुए सक्रिय सभी महानुभावों को आज शुभकामनाएं देता हूं।

महात्‍मा गांधी हमेशा कहते थे कि भारत गांवों में बसता है। उन गांवों के विकास की तरफ हम कैसे आगे बढ़े दूर-सुदूर छोटे-छोटे गांवों के भी अब सपने बहुत बड़े हैं। और मुझे विश्‍वास है कि आप सब के नेतृत्‍व में गांव की चहुं दिशा में प्रगति होगी। मैं नहीं मानता हूं कि अब.. जैसे अभी हमारे चौधरी साहब बता रहे थे कि पहले से तीन गुना बजट होने वाला है आपका और तुरंत तालियां बज गई। कभी-कभी मुझे लगता है कि हम जो पंचायत में चुन करके आए हैं, कभी सोचा है कि हम 5 साल के कार्यकाल में हम हमारे गांव को क्‍या दें करके जाना चाहते है? कभी ये सोचा है कि हमारे 5 साल के बाद हमारा गांव हमें कैसे याद करेगा? जब तक हमारे मन में गांव के लिए कुछ कर गुजरना है - ये spirit पैदा नहीं होता है तो सिर्फ बजट के कारण स्थितियां बदलती नहीं हैं।

पिछले 60 साल में जितने रुपए आए होगे उसका सारा total लगा दिया जाए, और फिर देखा जाए कि भई गांव में क्‍या हुआ तो लगेगा कि इतने सारे रुपए गए तो परिणाम क्‍यों नहीं आया? और इसलिए कभी न कभी पंचायत level पर सोचना चाहिए। कुछ राज्‍य ऐसे हैं हमारे देश में जहां पर पंचायतें अपना five year plan बनाती हैं, पंचवर्षीय योजना बनाती हैं। 5 साल में इतने काम हम करेंगे और वो गांव के पंचायत के उसमें वो board पर लिख करके रखते हैं और उसके कारण एक निश्चित दिशा में काम होता है और गांव कुछ समस्‍याओं से बाहर आ जाता है। हम भी आदत डालें कि भई हम 5 साल में हमारे गांव में ये करके जाएंगे। अगर ये हम करते है तो आप देखिए कि बदलाव आना शुरू होगा।

बजट और leadership दोनों का combination कैसे परिणाम लाता है? हम जानते है कि गांव में CC road बनाना ये जैसे एक बहुत बड़ा काम है और बहुत महत्‍वपूर्ण काम है इस प्रकार की मानसिकता बनी हुई है। इसके पीछे कारण क्‍या है वो आप भी जानते है, मैं भी जानता हूं। लेकिन कुछ सरपंच ऐसे होते हैं जो CC road तो बना देते है, CC road तो बना देते है, लेकिन पहले से प्‍लान करके दोनों किनारों पर बढि़यां पेड़ लगा देते है। वृक्षारोपण करते है और जैसे ही गांव में entry करता तो ऐसा हरा-भरा गांव लगता है। तो बजट से तो CC road बनता है लेकिन उनकी leadership quality है कि गांव को जोड़ करके रोड़ बनते ही पौधे लगा देते हैं और वो वृक्ष बन जाते हैं और एकदम से गांव में कोई आता है तो बिल्‍कुल नजरिया ही बदल जाता है। कुछ दूसरे प्रकार के होते हैं सरपंच जो क्‍या करते हैं और गांव में से कोई धनी व्‍यक्ति कहीं कमाने गया तो उसको कहते है कि ऐसा करो भाई तुम गांव को gate लगा दो। तो बड़ा पत्‍थर का 2, 5, 10 लाख का gate लगवा देते हैं। उसको लगता है कि मैंने gate बनवा दिया तो बस गांव का काम हो गया। लेकिन दूसरे को लगता है कि मैं पेड़ लगाऊंगा। आप भी सोचिएं बैठे-बैठे कि सचमुच में जन-भागीदारी से जिसने पेड़ लगाएं हैं, CC road, enter होते ही आधे कि.मी., एक कि.मी. हरे-भरे वृक्षों की घटा के बीच से गांव जाता है तो वो दृश्‍य कैसा होता होगा? ये है leadership की quality कि हम किन चीजों को प्रधानता देते है। इस पर इस काम का प्रभाव होता है.. जिसमें आपको बजट का खर्च नहीं करना है, आपको बजट की चिंता नहीं करनी है। जो मिलने वाला है.. जैसे बताया गया कम से कम 15 लाख और ज्‍यादा से ज्‍यादा 1 करोड़ से भी ज्‍यादा।

लेकिन इसके अतिरिक्‍त बहुत पैसा गांव में आता है। आंगनवाड़ी चलती है, प्राथमिक स्‍कूल चलता है, PHC centre चलता है, बहुत सी चीजें चलती है, जिसका खर्चा तो सरकारी राह से अपनी व्‍यवस्‍था से आता है। इसमें आपको कोई लेना-देना नहीं होता है। क्‍या कभी एक सरपंच के नाते, गांव की पंचायत के नाते हमने इन चीजों पर ध्‍यान केन्द्रित किया है क्‍या? कि भई, मेरे गांव में एक भी बच्‍चा ऐसा नहीं होगा कि जो टीकाकरण में वंचित रह जाए। हम पंचायत के लोग जी-जान से जुटेंगे, गांव को जगाएंगे कि भई टीकाकरण है, सभी बच्‍चों का हुआ है कि नहीं हुआ, चलो देखो! अब इसमें कोई पैसे लगते है है क्‍या? बजट नहीं लगता है, leadership लगती है। एक समाज के प्रति कुछ कार्य करने के दायित्व का भाव लगता है।

हमारे गांव में स्‍कूल तो है, teacher है, सरकार बजट खर्च कर रही है, हमने कभी देखा क्‍या - कि भई हमारे teacher आते है कि नहीं? बच्‍चे स्‍कूल जाते है कि नहीं? समय पर स्‍कूल चलता है कि नहीं चलता? बच्‍चे खेलकूद में हिस्‍सा लेते है कि नहीं लेते? बच्‍चे library का उपयोग करते है कि नहीं करते? Computer दिया है तो चलता है कि नहीं चलता? ये हम एक पंचायत के नाते.. हमारे गांव के बच्‍चे पढ़-लिख करके आगे बढ़ें, आपको बजट खर्च नहीं करना है, न ही बजट की चिंता करनी है सिर्फ आपको गांव की चिंता करनी है, आने वाली पीढ़ी की चिंता करनी है।

हमारे यहां आशा worker हैं, आशा worker को कभी पूछा है कि आपका काम कैसा चल रहा है, कोई कठिनाई है क्या? हर गांव में भी सरकार है लेकिन वो बिखरा पड़ा हुआ है। क्‍या हम एक प्रयास कर सकते है क्‍या कि सप्‍ताह में एक दिन, एक घंटे के लिए, जितने भी सरकारी व्‍यक्ति हैं गांव में, उनको बिठाएंगे एक साथ और बैठ करके अपना गांव, अपना विकास.. उसके लिए क्‍या कर सकते हैं। बैठ करके चर्चा करेंगे तो शिक्षक कहेंगा कि मुझे ये करना है लेकिन हो नहीं रहा है, तो आंगनवाड़ी worker कहेगी कि हां-हां चलो मैं मदद कर देती हूं, आशा worker कहेंगी कि अच्‍छा कोई बात नहीं, मैं कल आपके लिए 2 घंटे लगा दूंगी.. अगर गांव में हम leadership ले करके team बना लें, सरकार के इतने लोग हमारे यहां होते है लेकिन हमें भी पता नहीं होता। सरकार के इतने लोग हमारे यहां रहते हैं लेकिन हमें भी पता नहीं होता है। Even बस का driver, conductor भी रहता होगा और बस चलाता होगा, वो भी तो एक सरकार का मुलाजिम है। Constable होता होगा, वो भी एक मुलाजिम है। पटवारी है, वो भी एक मुलाजिम है।

क्या कभी हमने ये सोचा है, सप्ताह में एक घंटा कम से कम हम सरकार के रूप में एक साथ बैठेंगे? सामूहिक रूप से अपने पंचायत के विकास की चर्चा करेंगे। आप देखिए, देखते ही देखते बदलाव शुरू हो जाएगा, Team बनना शुरू हो जाएगा। और मैं वो बातें नहीं बता रहूं जिसमें बजट एक समस्या है। लेकिन वरना हमारे देश में एक ऐसा माहौल बना दिया गया है कि क्यों नहीं होता है, बजट नहीं है.. हकीकत वो नहीं है। बजट है लेकिन जो काम परिणाम नहीं देते हैं उसकी चिंता हमें ज्यादा करने की आवश्यकता है। हमारे गांव में कोई drop out होता है बच्चा, क्या हमें पीड़ा होती है क्या, हमारा खुद का बच्चा अगर स्कूल छोड़ दे तो हमें दुख होता है। अगर हम पंचायत के प्रधान हैं तो गांव का भी कोई बच्चा स्कूल छोड़ दे, हमें उतनी ही पीड़ा होनी चाहिए, पूरी पंचायत को दर्द होना चाहिए। अगर ये हम करते हैं, अगर ये हम करते हैं, मैं नहीं मानता हूं कि हमारे गांव में कोई अशिक्षित रहेगा। और कोई सरंपच ये तय करके कि मेरे कार्यकाल में पांच साल में एक भी बच्चा drop out नहीं होगा। अगर इतना भी कर ले तो मैं कहता हूं, उस सरपंच ने एक पीढ़ी की सेवा कर-करके जा रहा है। ऐसा मैं मानता हूं।

नरेगा का काम हर गांव में चलता है। क्या हम उसमें पानी के लिए प्राथमिकता दें? जितनी ताकत लगानी है, लगाएं लेकिन पानी का प्रबंधन करने के लिए ही नरेगा का उपयोग करें, तो क्या कभी पानी का संकट आएगा क्या? हम व्यवस्थाओं को विकसित कर सकते हैं। आवश्यकता ये है कि मिलकर के नेतृत्व दें। हमारे गांव में कुछ लोग तो होंगे जो सरकार में कभी न कभी मुलाजिम रहे हों। Teacher रहे हों, पटवारी रहे हों और retired हो गए हों। यानी सरकार का पेंशन लेते हों। सरकारी मुलाजिम होने के नाते, निवृत्त होने के बाद पेंशन लेते हों। किसी गांव में तीन होंगे, पांच होंगे, दस होंगे, पंद्रह होंगे। क्या महीने में एक बार इन retired लोगों की मिटिंग कर सकते हैं? उनका अनुभव क्योंकि वो खाली हैं, समय हैं उनके पास, अगर मान लीजिए गांव में 5 retired teacher हैं। उनको कहें कि देखिए भई अपने गांव में चार बच्चे ऐसे हैं, बहुत बेचारे पीछे रह गए, थोड़ा सा समय दीजिए, थोड़ा सा इन बेचारों को पढाइए ना। अगर वो retired हुआ होगा न तो भी उसके DNA में teaching पड़ा हुआ होगा। उसको कहोगे हां-हां चलिए मैं समझ लेता हूं। इन चार गरीब बच्चों को मैं पढ़ा दूंगा, मैं उनकी चिंता करूंगा। हम थोड़ा motivate करें लोगों को, हम नेतृत्व करें आप देखिए गांव हमारा ऐसा नहीं हो सकता क्‍या? अपना गांव.. और मैंने देखा जी, देश में मैंने कई गांव ऐसे देखे हैं कि जहां उस सरपंच की सक्रियता के कारण गांव में परिवर्तन आया है।

मैं जब मुख्यमंत्री था, एक घटना ने मुझे बहुत.. यानी मेरे मन को बहुत आंदोलित किया था। खेड़ा district में, जहां सरदार पटेल साहब का जन्म हुआ था। एक गांव के अंदर पंचायत प्रधान के नीचे women reservation था। Women reservation था तो गांव वालों ने तय किया कि प्रधान अगर women है तो सभी member women क्यों न बनाई जाए? और गांव ने तय किया कि कोई पुरुष चुनाव नहीं लड़ेगा। सब के सब पंचायत के member भी महिलाएं बनेंगी। Reservation तो one-third था लेकिन सबने तय किया गांव वालों ने। एक दिन उन्होंने मेरे से समय मांगा पंचायत की सभी महिला सदस्यों ने और पंचायत के प्रधान ने। मेरे लिए बड़ा surprise था कि ये गांव बड़ा कमाल है भाई, सारे पुरुषों ने अपने आप withdraw को कर लिया और महिलाओं के हाथ में कारोबार दे दिया। तो मेरा भी मन कर लिया कि चलो मिलूं तो वो सब मुझे कोई 17 member का वो पंचायत थी। तो वो मिलने आईं। और ये बात कोई 2005 या 2006 की है। तो उसमें सबसे ज्यादा जो पढ़ी-लिखी महिला थी प्रधान थी, वो पांचवी कक्षा तक पढ़ी हुई थी। यानी इतना पिछड़ा हुआ गांव था कोई ज्यादा पढ़े-लिखे हुए लोग नहीं थे। तो ऐसे ही मेरा मन कर गया, मैंने पूछा उनको, मैंने कहा अब पंचायत सभी महिलाओं के हाथ में है, आपको गांव का कारोबार चलाना है तो क्या करना है, आपकी योजना क्या है करनी की? उन्होंने जो जवाब दिया, मैं नहीं मानता हूं हिंदुस्तान की सरकार में कभी इस रूप में सोचा गया होगा। कम से कम मैं मुख्यमंत्री था, मैंने इस रूप में नहीं सोचा था। उस जवाब ने मुझे सोचने के लिए मजबूर कर दिया था। ठेठ गांव की सामान्य महिलाएं थी।

मैंने उनसे पूछा कि अब पांच साल आपको कारोबार चलाना है तो क्या आपके मन में है? उस प्रधान ने जो कि पढ़ी-लिखी नहीं थी, उसने मुझे जवाब दिया। उसने मुझे कहा, “हम चाहते हैं कि हमारे गांव में कोई गरीब न रहे।“ अब देखिए क्या कल्पना है ये, क्या कभी हमारे देश में पंचायत ने, नगरपालिका ने, महानगरपालिका ने, मिल-बैठकर के तय किया कि हम हमारे गांव में उस प्रकार की योजनाएं चलाएंगे कि गरीब गांव में कोई न रहे। एक बार इतने बड़े level पर काम शुरू हो जाए, कितना बड़ा फर्क पड़ता है! क्या हम कभी पंचायत के प्रधान के नाते विचार कर सकते हैं कि भई कम से कम 5 परिवार, ज्यादा मैं नहीं कह रहा हूं, 5 परिवार पंचायत की रचना में कुछ काम ऐसा निकालेंगे, उनको फलों का पेड़ बोने के लिए दे देंगे, कुछ करेंगे लेकिन 5 को तो गरीबी से बाहर लाएंगे।

अगर हिंदुस्तान में एक गांव साल में 5 लोगों को गरीबी से बाहर लाता है, पूरे हिंदुस्तान में कितना बड़ा फर्क पड़ता है जी? क्या कुछ नहीं कर सकते, आप कभी अंदाज लगाइए। और ये सारी बातें मैं बताता हूं कि बजट के constraint वाले काम नहीं हैं - हमारी संकल्प शक्ति, हमारी कल्पकता, इसके ऊपर जुड़े हुए हैं। अगर इस पर हम बल दें तो हम सच्‍चे अर्थ में इस व्यवस्था को अपने गांव के विकास के लिए परिवर्तित कर सकते हैं।

हम तब तक गांव का विकास नहीं कर पाएंगे जब तक हम गांव के प्रति गौरव और सम्मान का भाव पैदा नहीं करते हैं। उस गांव में पैदा हुए, मतलब सम्मान होना चाहिए। आप देखिए जिस गांव में महात्मा गांधी का जन्म हुआ होगा, उस गांव का व्यक्ति कभी कहीं मिलेगा तो कहेगा, मैं उस गांव से हूं जहां महात्मा गांधी पैदा हुए थे। कहेगा कि नहीं कहेगा? हर किसी को रहता है, कि कोई ऐसी बात होती है, गांव का गर्व होता है उसको। क्या हमने कभी हमारे गांव में,के प्रति एक लगाव पैदा हो, गांव के प्रति गर्व पैदा हो, ऐसी कोई चीज करते हैं क्या? नहीं करते हैं। क्या गांव का जन्मदिन मनाया जा सकता है क्या? हो सकता है कि record पर नहीं होगा तो गांव तय करे कि किस दिन को जन्मदिन मनाया जाएगा। उस दिन गांव इकट्ठा हो और गांव के बाहर जो लोग रहने गए हो, शहरों में रोजी-रोटी कमाने के लिए, किसी ने बड़ी प्रगति की हो, कोई पढ़-लिख करके डॉक्टर बना हो, उस दिन सबको बुलाया जाए। एक दिन सब लोग, नए-पुराने सब साथ रहें। कुछ बालकों के कार्यक्रम हो जाएं, कुछ बड़ों के कार्यक्रम हो जाएं, senior citizen के कुछ कार्यक्रम हो जाएं, गांव में सबसे बड़ी उम्र वाले व्यक्ति का सम्मान हो जाए। और एक अपनेपन का भाव! जो गांव से बाहर गए होंगे, उनको भी लगेगा उस दिन कि चलो भई अब तो हम रोजी-रोटी कमा रहे हैं, बड़े शहर में रहे रहे हैं चलिए अगले साल इतना हमारी तरफ से गांव के लिए दान दे देंगे, हमारे गांव में ये विकास कर दो। आप देखिए जन-भागीदारी का ऐसा माहौल बनेगा, गांव का रूप-रंग बदल जाएगा।

कभी आपने सोचा है, हमारी आने वाली पीढ़ी को तैयार करना है तो.. मैं कई बार गांव को पूछता हूं, भई आपके गांव में सबसे वृद्ध-oldest, oldest tree कौन सा है, कौन सा वृक्ष है जो सबसे बूढ़ा होगा? गांव को पता नहीं है, क्यों? ध्यान ही नहीं है! क्या हम पंचायत के लोग तय कर सकते हैं कि चलो भई ये सबसे बड़ी आयु का वृक्ष कौन सा दिखता है, ये सबसे बड़ा है, स्कूल के बच्चों को ले जाइए कि देखो भई अपने गांव की सबसे बड़ी आयु का वृक्ष ये है, ये है सबसे बड़ा वो, 200 साल उम्र होगी उसकी, 100 साल होगी उसकी, 80 साल होगी उसकी, जो भी होगा। चलो भई उसका भी सम्मान करे, उसका भी गौरव करें। यही तो है जो गांव के विकास का सबसे बड़ा साक्ष्य है। He is a witness! हम किस प्रकार से अपने गांव के गौरव को जोड़ें, गांव के साथ अपने आप कैसे लगाव लोगों का पैदा करें? आप देखिए अपने आप बदलाव आना शुरू हो जाएगा। और इसलिए मैं आग्रह करता हूं कि आप नेतृत्व दीजिए, अनेक नई कल्पकताओं के साथ नेतृत्व दीजिए।

हमारे देश ने बहुत बड़ा निर्णय किया है। कभी-कभी पश्चिम के देशों से बातें होती हैं और जब कहते हैं कि भारत में महिलाओं के लिए पंचायती व्यवस्था में reservation है तो कईयों आश्चर्य होता है। हिंदुस्तान में political process में decision making process में महिलाओं को इतना बड़ा अधिकार दिया गया है कि विश्व के बहुत बड़े-बड़े देशों के लिए surprise होता है। लेकिन कभी-कभी हमारे यहां क्या होता है।.. एक पहले तो मैं सरकार से जुड़ा हुआ नहीं था, संगठन के काम में लगा रहता था तो देशभर में मेरा भ्रमण होता था। तो लोगों से मिलता था। मिलता था तो थोड़ा परिचय भी करता था, एक बार परिचय देकर मैंने कहा, आप कौन हैं? तो उसने कहा मैं so and so SP हूं। तो मैंने कहा SP हैं! और political meeting में कैसे आ गए? क्योंकि मैं... SP यानी Superintendent of Police.. ये ही मेरे दिमाग में था। क्योंकि SP यानी पुलिस – पुलिसवाला हो के ये meeting में कैसे आ गए? तो मैंने कहा SP... तो बोले नहीं-नहीं मैं सरकारी नहीं हूं तो मैंने बोला क्या हैं? तो बोले “मैं सरपंच पति हूं।“

अब कानून ने तो empower कर दिया लेकिन जो SP कारोबार चला रहे हैं भई... है ना? हकीकत है ना? अब कानून ने महिलाओं को अधिकार दिया है तो उनको मौका भी देना चाहिए। और मैं कहता हूं जी, वो बहुत अच्‍छा काम करेंगी आप विश्‍वास कीजिए, बहुत अच्‍छा काम करेंगी। सच्‍चे अर्थों में गांव में परिवर्तन होंगे। अभी आपने छत्‍तीसगढ़ का भाषण सुना। बिना हाथ में कागज़ लिए गांव में क्या काम किया है, उन्‍होंने बताया कि नहीं बताया? और पता है उनको कि सरपंच के नाते अपने गांव में कितने काम हैं, किन-किन कामों पर ध्‍यान देना चाहिए, सब चीज का पता है। ये सामर्थ्‍य है हमारी माताओं-बहनों में। इसलिए ये SP वाला जो culture है वो बंद होना चाहिए। उनको अवसर देना चाहिए, उनको काम करने के लिए प्रोत्‍साहित करना चाहिए। और हम अवसर देंगे तो वे परिणाम भी दिखाएंगे।

तो मैं आज पंचायती राज दिवस पर आप सबको हृदय से बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं। जो award winner हैं, उनसे आप बात करेंगे तो पता चलेगा कि उन्‍होंने अपने-अपने यहां बहुत नए-नए प्रयोग किए होंगे, जो आपको भी काम आ सकते हैं। लेकिन अगर गांव तय करे तो दुनिया देखने के लिए आए, ऐसा गांव बन सकता है जी। ये ताकत होती है गांव की, एक परिवार होता है, अपनापन होता है, सुख-दु:ख के साथी होते हैं।

उस भाव को फिर से हम जगाएं और गांवों को बहुत आगे बढ़ाएं, इसी एक अपेक्षा के साथ बहुत-बहुत शुभकामनाएं।

धन्‍यवाद।

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भारत माता की… भारत माता की…

राम राम भाई सारे नै!

आज बुद्ध पूर्णिमा है। मैं समस्त देशवासियों को अनेक-अनेक शुभकामनाएं देता हूं। मैं श्रद्धेय गुरु जयराम दास, चमन ऋषि और महान सेनानी राव तुलाराम जी को नमन करता हूं। मैं रेजांगला के शहीदों और अहीरवाल की इस भूमि को प्रणाम करता हूं। मैं अगर हरियाणा में आऊं तो पुरानी यादें ताजा ना हो जाए, ऐसा हो नहीं सकता। यहां भी वहां भी बहुत सारे परिचित चेहरे नजर आ रहे हैं। पुरानी-पुरानी यादें भी, क्योंकि हरियाणा तो वर्षों तक एक प्रकार से मेरा घर ही बन गया था। और मैं बड़े गर्व के साथ कहता हूं मुझे राजनीति की बहुत सारी शिक्षा हरियाणा और पंजाब से मिली। और यह मेरा सौभाग्य रहा इस मिट्टी ने भी मुझे गढ़ा है। वो 1995 का शायद कालखंड होगा जब मैं प्रभारी के रूप में यहां आया था। लेकिन आमतौर पर प्रभारी आते हैं दौरा करने के लिए। मैं यहां ‘मुकाब’ करने आ गया था। मैं यहीं पर रहता था और उस समय हमारे मनोहर लाल जी संगठन का काम देखते थे। उस समय हमारे रमेश जोशी जी अध्यक्ष हुआ करते थे। रमेश जी, मैं, मनोहर लाल जी ने हरियाणा की खूब खाक छानी थी। मैंने यहां माताओं-बहनों के हाथ का खाना भी खूब खाया है। और हमारे नारनौल के सुरजा हलवाई और महेंद्रगढ़ की मिठाई शायद इसी के कारण ये हमारा राबिला डायबिटिक हो गया। लेकिन अब भी उतनी ही अच्छी बनती है ना सब कुछ। गर्मी के सीजन में एक गिलास राबड़ी, मोटी रोटी और एक प्याज सारी भूख मिटा देता था। जिद सिदा सादा खाना वो मेरा हरियाणा।

साथियों,

हरियाणा के घी-मक्खन का जोर तो आज पूरी दुनिया देख रही है। सारी भारत-विरोधी ताक़तें लगी रहतीं हैं। लेकिन, मोदी इनके झुकाए नहीं झुकता है। अभी मोदी को आपका कर्ज चुकाने के लिए बहुत काम करना है। हमारे हरियाणा को नई ऊंचाई पर लेकर जाना है। और इसके लिए जरूरी है- फिर एक बार, फिर एक बार, फिर एक बार।

साथियों,

ये चुनाव देश का प्रधानमंत्री चुनने का चुनाव है। आप प्रधानमंत्री ही नहीं चुनेंगे, देश का भविष्य भी चुनेंगे। एक ओर आपका जांचा-परखा सेवक मोदी है। दूसरी ओर कौन है? कोई अता-पता ही नहीं है। और हरियाणा के लिए तो मोदी मतलब, शायद यहां हरियाणा में आपको कम से कम 5000 लोग ऐसे मिल जाएंगे जो दूर से चिल्ला के कहेंगे, ऐ मोदी जी जरा रुक जाओ। ऐसे कहने वाले 5000 लोग मिल जाएंगे यानि हरियाणा के साथ मेरा जो अपनापन रहा है, हरियाणा ने मुझे जो प्यार दिया है और इसलिए हरियाणा का अधिकार भी मुझ पर बनता है। चलते-फिरते मुझे कह सकता है ऐ मोदी जी गलत कर रहे हो, ऐसा मत करो। इतना मेरा आपसे नाता रहा है। और पिछले 10 साल में आपने उस प्यार में कभी कमी नहीं आने दी इससे बड़ा सौभाग्य क्या हो सकता है। और ये इंडी अलायंस वालों का हाल तो ऐसा है कि गाय ने दूध दिया नहीं, लेकिन घी खाने के लिए इंडी वालों में झगड़ा शुरू हो गया। अब ये लोग कह रहे हैं हर साल एक आदमी भारत का प्रधानमंत्री होगा। पांच साल 5 पीएम। आप मुझे बताइए, ऐसे देश चलेगा क्या? चलेगा क्या? और हमारे हरियाणा के लोगों में तो ग्रामीण भाषा में चौपाल में बैठ कर के जो ठहाके लेने की ताकत है ना। मुझे पक्का विश्वास है कि 5 साल में पांच प्रधानमंत्री, 5000 चुटकुले हरियाणा वाले बना देंगे। साथियों ये लोग देश को फिर से गड्ढे में धकेलेंगे नहीं तो क्या करेंगे?

साथियों,

इंडी गठबंधन के लोग ये घोर सांप्रदायिक हैं, घोर जातिवादी हैं, घोर परिवारवादी लोग हैं। (अरे वो ताऊजी को परेशान मत कर भाई थोड़ा इधर-उधर हो जा रे) देश की जनता इंडी जमात के इरादे पहले ही भांप चुकी है। इसलिए, इनका ये हाल हुआ है, पांच चरणों में ही इंडी जमात का ढोल फट गया है और आपने देखा होगा तीसरे चरण के बाद इन्होंने रोना-धोना शुरू कर दिया। इलेक्शन कमीशन आंकड़े क्यों नहीं देता है? आंकड़े देर से क्यों देता है? इलेक्शन कमीशन ऐसा क्यों करता है? इलेक्शन कमीशन वैसा क्यों करता है? उधर ईवीएम बंद हो गया, उधर ईवीएम चलता नहीं है, उधर ईवीएम का ये...यानि उन्होंने ग्राउंड बनाना शुरू कर दिया है कि पराजय का ठीकरा किसके सिर पर फोड़ा जाए और इसलिए बराबर जमकर के इस बार ईवीएम को गालियां दे रहे हैं। हम सब जानते हैं भाई जिस भूमि में कोई पैदावर ना हो, कोई किसान उसमें एक भी बीज डालेगा क्या? जिसमें फसल ना हो ऐसी जमीन पर या ऐसे सीजन में कोई किसान एक भी बीज डालेगा क्या? जब पता है कि इनकी सरकार नहीं बनने वाली तो कोई उधर वोट डालेगा क्या? कोई डालेगा क्या? ये हरियाणा वालों को कहने की जरूरत ही नहीं है। क्योंकि उनको मालूम है भाई इनकी सरकार सात जन्म में भी बनने वाली नहीं है। और कांग्रेस को दिया हर वोट बेकार ही होना है। इसलिए आपको सरकार बनाने के लिए वोट करना है। और सरकार किसकी बनने जा रही है? किसकी सरकार बनेगी? बच्चे-बच्चे को पता है किसकी सरकार बनेगी?

साथियों,

चौबीस के इस चुनाव में पूरा देश कांग्रेस की सच्चाई जान गया है। कांग्रेस औऱ इंडी वालों के लिए देश से भी बड़ा उसका अपना वोटबैंक है। इन लोगों ने वोटबैंक के लिए देश का विभाजन करवाया। एक भारत और दो-दो मुस्लिम राष्ट्र बनाए। अब इंडी वाले लोग कह रहे हैं कि बचे हुए भारत पर भी पहला अधिकार मुसलमानों का है। इन्होंने SC, ST, OBC इनको जो बाबा साहेब आंबेडकर ने आरक्षण दिया है, भारत के संविधान ने जो आरक्षण दिया है। इसको छीनकर के वे वोट जिहाद करने वाले लोगों को देना चाहते हैं। आपने कल अखबारों में देखा होगा, टीवी पर देखा होगा, सोशल मीडिया में देखा होगा। बंगाल की हाई कोर्ट का जजमेंट आया है और बंगाल में भी इंडी जमात का SC, ST, OBC के आरक्षण के खिलाफ उनका जो षड्यंत्र है, आरक्षण विरोधी उनकी जो मानसिकता है उसका भंडा फूट गया है। बंगाल में इन लोगों ने क्या किया। बंगाल में इन लोगों ने मुसलमानों को रातों रात ओबीसी का सर्टिफिकेट दे दिया था। जो आरक्षण ओबीसी को मिलना चाहिए वह सारा का सारा मुसलमानों को और वह भी घुसपैठियों में बांटा जा रहा था। हाई कोर्ट ने बंगाल में पिछले 10- 12 साल में मुसलमानों को दिए सारे ओबीसी सर्टिफिकेट रदद कर दिए। अब आप देखिए, कोर्ट ना होती तो क्या होता। ये पिछड़े समाज के लोग करते क्या, ये मेरे दलित भाई बहन क्या करते, ये मेरे आदिवासी भाई बहन क्या करते। लेकिन साथियों आप ये इंडी जमात वालों की मानसिकता देखिए। बंगाल की सीएम ने घोषणा कर दी है कि वो हाई कोर्ट का फैसला नहीं मानेगी। वो मुसलमानों को ओबीसी का आरक्षण देकर रहेगी। आप मुझे बताइए, कांग्रेस हो टीएमसी हो इंडी गठबंधन के सारे दल तो अपने वोट बैंक के साथ डटकर खड़े हो गए हैं। फिर आपके साथ, हरियाणा के साथ कौन खड़ा होगा? कौन खड़ा होगा? इसलिए मैं हरियाणा के हर SC, हर ST, हर OBC को भरोसा देने आया हूं जब तक मोदी जिंदा है। कोई माई का लाल दलित का, आदिवासी का, पिछड़ों का आरक्षण छीन नहीं सकता है। वंचितों का जो अधिकार है, मोदी उसका चौकीदार है। और भाइयों-बहनों ये चुनावी भाषण नहीं है, ये मोदी की गारंटी है।

साथियों,

अपने वोटबैंक को खुश करने के लिए इंडी गठबंधन वाले कुछ भी कर सकते हैं। हमारे यहां हरियाणा में हर कोई दिन में दो सौ-चार सौ बार राम-राम बोलता है। हर दस कदम पे वो राम-राम बोलेगा ही। राम-राम के बिना हरियाणा में कोई काम होता है क्या? लेकिन, कांग्रेस का बस चले तो हरियाणा में राम का नाम लेने वालों को ये गिरफ्तार कर ले। कांग्रेस पूरे देश से ही राम को हटाना चाहती है। कांग्रेस जब तक सत्ता में रही, उसने राममंदिर नहीं बनने दिया। कांग्रेस ने राममंदिर प्राणप्रतिष्ठा तक का बहिष्कार कर दिया है। और अब तो शहजादे के सलाहकार ने तो एक और बड़ा खुलासा किया है। कांग्रेस अब अगर सत्ता में आई तो राममंदिर पर ताला लगाने की फिराक में है। कांग्रेस चाहती है कि हरियाणा के लोग रामलला के दर्शन तक नहीं कर पाएं। वो राम लला को फिर से टेंट में भेजना चाहते हैं। क्या हरियाणा के लोग ऐसा होने देंगे क्या? राम लला को फिर से अपमानित करेंगे क्या, क्या ऐसे लोगों को मेरा हरियाणा जवाब देगा कि नहीं देगा? हर बूथ में चुन-चुन कर उनको साफ करेगा कि नहीं करेगा?

साथियों,

कांग्रेस हमारी आस्था का ही नहीं, हमारे तिरंगे का भी अपमान करती है। 370 के नाम पर कश्मीर को देश से अलग किसने रखा? 70 साल तक कश्मीर में तिरंगा किसने नहीं फहरने दिया? आज ये लोग कह रहे हैं, ये सत्ता में आए तो फिर से 370 वापस लाएंगे। क्या हम कश्मीर में हुए बलिदानों को बेकार जाने देंगे? कांग्रेस के मंसूबों को क्या हरियाणा कामयाब होने देगा क्या?

साथियों,

कांग्रेस ने देश के पूर्व फौजियों के साथ भी धोखा किया। उन्हें दशकों तक पूर्व फौजियों को वन रैंक, वन पेंशन नहीं मिलने दी। कांग्रेस झूठ बोलती थी कि OROP के 500 करोड़ रुपए पूर्व फौजियों को देंगे। अब ये चुनाव जीतने के लिए पूर्व सैनिकों के साथ धोखा किया गया और कांग्रेस के जेहन में सेना के प्रति, सैनिकों के प्रति नफरत का भाव भरा पड़ा है और 1962 में पंडित नेहरू की जो औरा का गुब्बारा जो फूट गया। चाइना के हाथों जो हमारी पिटाई हुई, वो उसके लिए गुनहगार हमारी देश की सेना को मानते हैं। और आज भी वो परिवार उसी मिजाज में हमारी सेना का अपमान करने के मौके ढूंढती रहती है। और उसी बदले की भाव से उसने 500 करोड़ रुपये ऐसे ही फेंक दिया और कह दिया कि OROP हो जाएगा। OROP होने का मतलब क्या होता है वह मोदी ने आकर के बताया। मोदी ने आकर के जब OROP लागू किया वन रैंक वन पेंशन लागू किया। उन्होंने 500 करोड़ रुपये का खेल खेला था। आपकी आंखों में धूल झोंकने का पाप किया था। मोदी ने जब एक्चुअली OROP लगाया, सवा लाख करोड़ रुपया लगा। कितना? अरे जरा बताइए ना, सवा लाख करोड़ रुपया। अब कोई मुझे बताए कहां 500 करोड़ और कहां सवा लाख करोड़। ये सवा लाख करोड़ रुपया पूर्व सैनिकों के परिवारों के बैंक के खाते में जमा हो चुका है। जब सैनिकों का मान रखने का जज्बा होता है तो काम भी उसी जज्बे से होता है।

साथियों,

हमारे हरियाणा को भी लूटने में कांग्रेस ने कोई कोर कसर नहीं छोड़ी थी। मैंने तो अपनी आंखो से देखा है कांग्रेस के समय में क्या हाल था हरियाणा का। जो मुख्यमंत्री बनता था, वो अपने जिले के बाहर नहीं देखता था। ऐसा कोई क्षेत्र नहीं, जिसे लूटने का खुला खेल न चलता हो! आपको याद है न, नौकरी दिलवाने के नाम पर ये लोग ज़मीनें बिकवा देते थे। ट्रान्सफर पोस्टिंग की तो खुली इंडस्ट्री चलती थी। सड़कें गड्ढों में होती थीं। उद्योगों पर संकट आने लगा था। आप कल्पना करिए, अगर कांग्रेस कुछ दिन और रह जाती, तो हरियाणा का क्या हाल करती!

साथियों,

बीते 10 वर्षों में हमने कांग्रेस के पाप धोने में बहुत मेहनत की है। आज हरियाणा में आधुनिक हाइवे और एक्सप्रेसवे बन रहे हैं। अब न दिल्ली दूर है, न चंडीगढ़ दूर है। अब नारनौल वाले सुबह चंडीगढ़ जाते हैं, शाम को वापस घर! गुरुग्राम वालों का तो जीवन ही द्वारका एक्सप्रेसवे ने आसान कर दिया। इसीलिए, अब इस पूरे एरिया में नए नए उद्योग लग रहे हैं। रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं।

भाइयों बहनों,

मैं गुरुग्राम के युवाओं से भी कहना चाहता हूं। अगले 5 साल, ये देश में एक बड़ी क्रांति का समय होने वाला है। आप देखिए कैसे नए-नए सेक्टर हमारे नौजवानों का भाग्य बदलने वाले हैं। सेमीकंडक्टर सेक्टर, ड्रोन सेक्टर, स्टार्टअप सेक्टर, फूड प्रोसेसिंग, ग्रीन एनर्जी सेक्टर, ग्रीन हाइड्रोजन फार्मा हब अनगिनत और इन सब में बहुत से ज्यादा काम मेरे देश के नौजवानों को मिलने वाला है। आपके हर सपने पूरे होंगे, क्योंकि आपका सपना ये मोदी का संकल्प हैं।

साथियों,

कांग्रेस के विश्वासघात का भुक्तभोगी तो हरियाणा का किसान भी रहा है। यहां उसने किसान को सिंचाई के पानी तक का इंतजाम नहीं किया। हम नहरों को जोड़कर यहां तक पानी पहुंचा रहे हैं। हमारी सरकार हरियाणा में 14 फसलों को MSP पर खरीद रही है। हमारे भिवानी का किसान बाजरा, और यहां जो बाजरे की खेती है और हमारा यहां का किसान जो बाजरा पैदा करता है मेरे प्रिय बाजरे में से वो है। और मुझे याद है यहां जब भी आया बाजरे की खिचड़ी खाई और मजा है कि जब बाजरे की खिचड़ी खाओ तो आधी खिचड़ी आधा घी, तब बोले खिचड़ी खाने का मजा होता है। अब मैं गुजराती आदमी इतना खा तो नहीं सकता था, लेकिन उनका प्यार हरियाणा के लोगों का, यहां का बाजरा आज भी वो मुझे याद हमेशा रहता है। लेकिन अब आपके बाजरे के श्री अन्न के प्रचार की जिम्मेदारी खुद मोदी ने ले रखी है। मैंने जितने मिलेट हैं, जितना मोटा अनाज है उसके लिए एक नाम दे दिया श्री अन्न। और मैं दुनियाभर में उसका एंबेसडर बन गया हूं, उसका सेल्समैन बन गया हूं। आपने देखा होगा हमारे देश में जी 20 की समिट हुई। दुनियाभर के बड़े-बड़े नेता यहां आए थे। दुनिया की सबसे बड़ी ताकत जिसको कहें वो सब जी 20 में थी और मोदी ने उनको क्या खिलाया। मोदी ने उनको बाजरा खिलाया। और बड़े-बड़े नेताओं को मैंने कहा ये सुपर फूड है। और उसका एक परिणाम ये आया कि मुझे अभी अमेरिका बुलाया था वाइट हाउस में भोजन था। वाइट हाउस में उस दिन काफी लोगों को उन्होंने खाने पर बुलाया था देश भर के लोगों को और सबको उन्होंने बाजरा खिलाया वाइट हाउस में अमेरिका में। साथियों इससे क्या मोदी का प्रचार हुआ क्या। इससे प्रचार हुआ हरियाणा का, हरियाणा के किसानों का, हरियाणा के बाजरे का।

साथियों,

इस क्षेत्र के विकास के लिए हमने चौधरी बंसीलाल के साथ मिलकर सरकार चलाई थी। चौधरी बंसीलाल भिवानी-महेंद्रगढ़ के विकास के लिए कटिबद्ध थे। और मुझे बड़ा मेरा सौभाग्य रहा चौधरी बंसीलाल जी से मेरी बड़ी निकटता रही और वो रात को देर तक जागने के आदी थे। तो कभी-कभी हमारी मीटिंग रात को एक बजे के बाद शुरू होती थी और कभी-कभी सुबह तक चलती थी। उनके पास अनुभव की इतनी बातें हुआ करती थी और मैं देखता था कि जब भी बातों में स्वामी दयानंद सरस्वती जी की बात आती थी, ऐसी एक मीटिंग नहीं होगी कि स्वामी दयानंद सरस्वती की बात निकली हो और चौधरी बंसीलाल जी की आंख से आंसू ना टपके हों और वह मुझे इतना प्यार करते थे क्योंकि मैं गुजरात का था, दयानंद सरस्वती जी का जन्म गुजरात में हुआ था, तो एक नाता ऐसा बन गया था और गवर्नेंस की दुनिया में भी साथ-साथ काम किया, वर्षों तक साथ में काम किया।

साथियों,

लेकिन यह जो महापुरुष है उन सबसे प्रेरणा लेते हुए आज मेरी भी गारंटी है कि हरियाणा का विकास हम रुकने नहीं देंगे। लेकिन इसके लिए 25 मई को भिवानी महेंद्रगढ़ से चौधरी धरमबीर सिंह जी, और गुरुग्राम से राव इंदरजीत सिंह जी मेरे इन दोनों साथियों को भारी बहुमत से विजयी बनाइए और आप जब उनको कमल के निशान पर वोट देंगे ना वो वोट सीधा सधा मोदी के खाते में जाएगा। तो आप पुराने सारे रिकॉर्ड तोड़ेंगे? मतदान ज्यादा से ज्यादा कराएंगे? हर पोलिंग बूथ में विजय प्राप्त करेंगे? अच्छा मेरा एक काम है करेंगे आप लोग। अरे क्या कमाल है भाई, ठंडे हो गए एकदम। मेरा पर्सनल काम है करेंगे। अरे मैं भी तो हरियाणा वाला हूं यार बोलो ना मेरा एक काम करेंगे। देखिए पहले तो मैं यहां गांव गांव जाता था हर इलाके में गया हूं हजारों परिवारों में गया हूं लेकिन अब समय की कठिनाई है जा नहीं पाता हूं। तो मुझे आपकी मदद चाहिए, करोगे मदद सब लोग करोगे। ऐसे ही नहीं बता रहे हो ना सही में करोगे ना। एक काम करना यहां से जाने के बाद ज्यादा से ज्यादा परिवारों में जाना, ज्यादा से ज्यादा घरों में जाना और हर परिवार के लोगों को बिठा कर के कहना कि अपने मोदी जी आए थे, मोदी जी ने आपको राम राम कहा है। मेरा राम राम पहुंचा दो मुझे तसल्ली हो जाएगी। मुझे लगेगा कि चलो भाई इन सबके मुझे आशीर्वाद मिल जाएंगे। तो आप करेंगे, मेरा राम राम पहुंचाएंगे हर परिवार में, हर घर में पहुंचाएंगे।

बोलिए भारत माता की... भारत माता की... भारत माता की...

बहुत-बहुत धन्यवाद