Text of PM's remarks on National Panchayati Raj Day

Published By : Admin | April 24, 2015 | 13:46 IST

मंत्रिपरिषद के मेरे साथी, देश के अलग-अलग भागों से आए हुए पंचायत राज व्‍यवस्‍था के सभी प्रेरक महानुभाव,

जिन राज्‍यों को आज मुझे सम्‍मानित करने का सौभाग्‍य मिला है उन सभी राज्‍यों को मैं हृदय से बधाई देता हूं। आज जिला परिषदों को भी और ग्राम पंचायतों का भी सम्‍मान होने वाला है। उन सबको भी मैं हृदय से बहुत-बहुत अभिनंदन करता हूं। पंचायत राज दिवस पर मैं देशभर में पंचायत राज व्‍यवस्‍था से जुड़े हुए सक्रिय सभी महानुभावों को आज शुभकामनाएं देता हूं।

महात्‍मा गांधी हमेशा कहते थे कि भारत गांवों में बसता है। उन गांवों के विकास की तरफ हम कैसे आगे बढ़े दूर-सुदूर छोटे-छोटे गांवों के भी अब सपने बहुत बड़े हैं। और मुझे विश्‍वास है कि आप सब के नेतृत्‍व में गांव की चहुं दिशा में प्रगति होगी। मैं नहीं मानता हूं कि अब.. जैसे अभी हमारे चौधरी साहब बता रहे थे कि पहले से तीन गुना बजट होने वाला है आपका और तुरंत तालियां बज गई। कभी-कभी मुझे लगता है कि हम जो पंचायत में चुन करके आए हैं, कभी सोचा है कि हम 5 साल के कार्यकाल में हम हमारे गांव को क्‍या दें करके जाना चाहते है? कभी ये सोचा है कि हमारे 5 साल के बाद हमारा गांव हमें कैसे याद करेगा? जब तक हमारे मन में गांव के लिए कुछ कर गुजरना है - ये spirit पैदा नहीं होता है तो सिर्फ बजट के कारण स्थितियां बदलती नहीं हैं।

पिछले 60 साल में जितने रुपए आए होगे उसका सारा total लगा दिया जाए, और फिर देखा जाए कि भई गांव में क्‍या हुआ तो लगेगा कि इतने सारे रुपए गए तो परिणाम क्‍यों नहीं आया? और इसलिए कभी न कभी पंचायत level पर सोचना चाहिए। कुछ राज्‍य ऐसे हैं हमारे देश में जहां पर पंचायतें अपना five year plan बनाती हैं, पंचवर्षीय योजना बनाती हैं। 5 साल में इतने काम हम करेंगे और वो गांव के पंचायत के उसमें वो board पर लिख करके रखते हैं और उसके कारण एक निश्चित दिशा में काम होता है और गांव कुछ समस्‍याओं से बाहर आ जाता है। हम भी आदत डालें कि भई हम 5 साल में हमारे गांव में ये करके जाएंगे। अगर ये हम करते है तो आप देखिए कि बदलाव आना शुरू होगा।

बजट और leadership दोनों का combination कैसे परिणाम लाता है? हम जानते है कि गांव में CC road बनाना ये जैसे एक बहुत बड़ा काम है और बहुत महत्‍वपूर्ण काम है इस प्रकार की मानसिकता बनी हुई है। इसके पीछे कारण क्‍या है वो आप भी जानते है, मैं भी जानता हूं। लेकिन कुछ सरपंच ऐसे होते हैं जो CC road तो बना देते है, CC road तो बना देते है, लेकिन पहले से प्‍लान करके दोनों किनारों पर बढि़यां पेड़ लगा देते है। वृक्षारोपण करते है और जैसे ही गांव में entry करता तो ऐसा हरा-भरा गांव लगता है। तो बजट से तो CC road बनता है लेकिन उनकी leadership quality है कि गांव को जोड़ करके रोड़ बनते ही पौधे लगा देते हैं और वो वृक्ष बन जाते हैं और एकदम से गांव में कोई आता है तो बिल्‍कुल नजरिया ही बदल जाता है। कुछ दूसरे प्रकार के होते हैं सरपंच जो क्‍या करते हैं और गांव में से कोई धनी व्‍यक्ति कहीं कमाने गया तो उसको कहते है कि ऐसा करो भाई तुम गांव को gate लगा दो। तो बड़ा पत्‍थर का 2, 5, 10 लाख का gate लगवा देते हैं। उसको लगता है कि मैंने gate बनवा दिया तो बस गांव का काम हो गया। लेकिन दूसरे को लगता है कि मैं पेड़ लगाऊंगा। आप भी सोचिएं बैठे-बैठे कि सचमुच में जन-भागीदारी से जिसने पेड़ लगाएं हैं, CC road, enter होते ही आधे कि.मी., एक कि.मी. हरे-भरे वृक्षों की घटा के बीच से गांव जाता है तो वो दृश्‍य कैसा होता होगा? ये है leadership की quality कि हम किन चीजों को प्रधानता देते है। इस पर इस काम का प्रभाव होता है.. जिसमें आपको बजट का खर्च नहीं करना है, आपको बजट की चिंता नहीं करनी है। जो मिलने वाला है.. जैसे बताया गया कम से कम 15 लाख और ज्‍यादा से ज्‍यादा 1 करोड़ से भी ज्‍यादा।

लेकिन इसके अतिरिक्‍त बहुत पैसा गांव में आता है। आंगनवाड़ी चलती है, प्राथमिक स्‍कूल चलता है, PHC centre चलता है, बहुत सी चीजें चलती है, जिसका खर्चा तो सरकारी राह से अपनी व्‍यवस्‍था से आता है। इसमें आपको कोई लेना-देना नहीं होता है। क्‍या कभी एक सरपंच के नाते, गांव की पंचायत के नाते हमने इन चीजों पर ध्‍यान केन्द्रित किया है क्‍या? कि भई, मेरे गांव में एक भी बच्‍चा ऐसा नहीं होगा कि जो टीकाकरण में वंचित रह जाए। हम पंचायत के लोग जी-जान से जुटेंगे, गांव को जगाएंगे कि भई टीकाकरण है, सभी बच्‍चों का हुआ है कि नहीं हुआ, चलो देखो! अब इसमें कोई पैसे लगते है है क्‍या? बजट नहीं लगता है, leadership लगती है। एक समाज के प्रति कुछ कार्य करने के दायित्व का भाव लगता है।

हमारे गांव में स्‍कूल तो है, teacher है, सरकार बजट खर्च कर रही है, हमने कभी देखा क्‍या - कि भई हमारे teacher आते है कि नहीं? बच्‍चे स्‍कूल जाते है कि नहीं? समय पर स्‍कूल चलता है कि नहीं चलता? बच्‍चे खेलकूद में हिस्‍सा लेते है कि नहीं लेते? बच्‍चे library का उपयोग करते है कि नहीं करते? Computer दिया है तो चलता है कि नहीं चलता? ये हम एक पंचायत के नाते.. हमारे गांव के बच्‍चे पढ़-लिख करके आगे बढ़ें, आपको बजट खर्च नहीं करना है, न ही बजट की चिंता करनी है सिर्फ आपको गांव की चिंता करनी है, आने वाली पीढ़ी की चिंता करनी है।

हमारे यहां आशा worker हैं, आशा worker को कभी पूछा है कि आपका काम कैसा चल रहा है, कोई कठिनाई है क्या? हर गांव में भी सरकार है लेकिन वो बिखरा पड़ा हुआ है। क्‍या हम एक प्रयास कर सकते है क्‍या कि सप्‍ताह में एक दिन, एक घंटे के लिए, जितने भी सरकारी व्‍यक्ति हैं गांव में, उनको बिठाएंगे एक साथ और बैठ करके अपना गांव, अपना विकास.. उसके लिए क्‍या कर सकते हैं। बैठ करके चर्चा करेंगे तो शिक्षक कहेंगा कि मुझे ये करना है लेकिन हो नहीं रहा है, तो आंगनवाड़ी worker कहेगी कि हां-हां चलो मैं मदद कर देती हूं, आशा worker कहेंगी कि अच्‍छा कोई बात नहीं, मैं कल आपके लिए 2 घंटे लगा दूंगी.. अगर गांव में हम leadership ले करके team बना लें, सरकार के इतने लोग हमारे यहां होते है लेकिन हमें भी पता नहीं होता। सरकार के इतने लोग हमारे यहां रहते हैं लेकिन हमें भी पता नहीं होता है। Even बस का driver, conductor भी रहता होगा और बस चलाता होगा, वो भी तो एक सरकार का मुलाजिम है। Constable होता होगा, वो भी एक मुलाजिम है। पटवारी है, वो भी एक मुलाजिम है।

क्या कभी हमने ये सोचा है, सप्ताह में एक घंटा कम से कम हम सरकार के रूप में एक साथ बैठेंगे? सामूहिक रूप से अपने पंचायत के विकास की चर्चा करेंगे। आप देखिए, देखते ही देखते बदलाव शुरू हो जाएगा, Team बनना शुरू हो जाएगा। और मैं वो बातें नहीं बता रहूं जिसमें बजट एक समस्या है। लेकिन वरना हमारे देश में एक ऐसा माहौल बना दिया गया है कि क्यों नहीं होता है, बजट नहीं है.. हकीकत वो नहीं है। बजट है लेकिन जो काम परिणाम नहीं देते हैं उसकी चिंता हमें ज्यादा करने की आवश्यकता है। हमारे गांव में कोई drop out होता है बच्चा, क्या हमें पीड़ा होती है क्या, हमारा खुद का बच्चा अगर स्कूल छोड़ दे तो हमें दुख होता है। अगर हम पंचायत के प्रधान हैं तो गांव का भी कोई बच्चा स्कूल छोड़ दे, हमें उतनी ही पीड़ा होनी चाहिए, पूरी पंचायत को दर्द होना चाहिए। अगर ये हम करते हैं, अगर ये हम करते हैं, मैं नहीं मानता हूं कि हमारे गांव में कोई अशिक्षित रहेगा। और कोई सरंपच ये तय करके कि मेरे कार्यकाल में पांच साल में एक भी बच्चा drop out नहीं होगा। अगर इतना भी कर ले तो मैं कहता हूं, उस सरपंच ने एक पीढ़ी की सेवा कर-करके जा रहा है। ऐसा मैं मानता हूं।

नरेगा का काम हर गांव में चलता है। क्या हम उसमें पानी के लिए प्राथमिकता दें? जितनी ताकत लगानी है, लगाएं लेकिन पानी का प्रबंधन करने के लिए ही नरेगा का उपयोग करें, तो क्या कभी पानी का संकट आएगा क्या? हम व्यवस्थाओं को विकसित कर सकते हैं। आवश्यकता ये है कि मिलकर के नेतृत्व दें। हमारे गांव में कुछ लोग तो होंगे जो सरकार में कभी न कभी मुलाजिम रहे हों। Teacher रहे हों, पटवारी रहे हों और retired हो गए हों। यानी सरकार का पेंशन लेते हों। सरकारी मुलाजिम होने के नाते, निवृत्त होने के बाद पेंशन लेते हों। किसी गांव में तीन होंगे, पांच होंगे, दस होंगे, पंद्रह होंगे। क्या महीने में एक बार इन retired लोगों की मिटिंग कर सकते हैं? उनका अनुभव क्योंकि वो खाली हैं, समय हैं उनके पास, अगर मान लीजिए गांव में 5 retired teacher हैं। उनको कहें कि देखिए भई अपने गांव में चार बच्चे ऐसे हैं, बहुत बेचारे पीछे रह गए, थोड़ा सा समय दीजिए, थोड़ा सा इन बेचारों को पढाइए ना। अगर वो retired हुआ होगा न तो भी उसके DNA में teaching पड़ा हुआ होगा। उसको कहोगे हां-हां चलिए मैं समझ लेता हूं। इन चार गरीब बच्चों को मैं पढ़ा दूंगा, मैं उनकी चिंता करूंगा। हम थोड़ा motivate करें लोगों को, हम नेतृत्व करें आप देखिए गांव हमारा ऐसा नहीं हो सकता क्‍या? अपना गांव.. और मैंने देखा जी, देश में मैंने कई गांव ऐसे देखे हैं कि जहां उस सरपंच की सक्रियता के कारण गांव में परिवर्तन आया है।

मैं जब मुख्यमंत्री था, एक घटना ने मुझे बहुत.. यानी मेरे मन को बहुत आंदोलित किया था। खेड़ा district में, जहां सरदार पटेल साहब का जन्म हुआ था। एक गांव के अंदर पंचायत प्रधान के नीचे women reservation था। Women reservation था तो गांव वालों ने तय किया कि प्रधान अगर women है तो सभी member women क्यों न बनाई जाए? और गांव ने तय किया कि कोई पुरुष चुनाव नहीं लड़ेगा। सब के सब पंचायत के member भी महिलाएं बनेंगी। Reservation तो one-third था लेकिन सबने तय किया गांव वालों ने। एक दिन उन्होंने मेरे से समय मांगा पंचायत की सभी महिला सदस्यों ने और पंचायत के प्रधान ने। मेरे लिए बड़ा surprise था कि ये गांव बड़ा कमाल है भाई, सारे पुरुषों ने अपने आप withdraw को कर लिया और महिलाओं के हाथ में कारोबार दे दिया। तो मेरा भी मन कर लिया कि चलो मिलूं तो वो सब मुझे कोई 17 member का वो पंचायत थी। तो वो मिलने आईं। और ये बात कोई 2005 या 2006 की है। तो उसमें सबसे ज्यादा जो पढ़ी-लिखी महिला थी प्रधान थी, वो पांचवी कक्षा तक पढ़ी हुई थी। यानी इतना पिछड़ा हुआ गांव था कोई ज्यादा पढ़े-लिखे हुए लोग नहीं थे। तो ऐसे ही मेरा मन कर गया, मैंने पूछा उनको, मैंने कहा अब पंचायत सभी महिलाओं के हाथ में है, आपको गांव का कारोबार चलाना है तो क्या करना है, आपकी योजना क्या है करनी की? उन्होंने जो जवाब दिया, मैं नहीं मानता हूं हिंदुस्तान की सरकार में कभी इस रूप में सोचा गया होगा। कम से कम मैं मुख्यमंत्री था, मैंने इस रूप में नहीं सोचा था। उस जवाब ने मुझे सोचने के लिए मजबूर कर दिया था। ठेठ गांव की सामान्य महिलाएं थी।

मैंने उनसे पूछा कि अब पांच साल आपको कारोबार चलाना है तो क्या आपके मन में है? उस प्रधान ने जो कि पढ़ी-लिखी नहीं थी, उसने मुझे जवाब दिया। उसने मुझे कहा, “हम चाहते हैं कि हमारे गांव में कोई गरीब न रहे।“ अब देखिए क्या कल्पना है ये, क्या कभी हमारे देश में पंचायत ने, नगरपालिका ने, महानगरपालिका ने, मिल-बैठकर के तय किया कि हम हमारे गांव में उस प्रकार की योजनाएं चलाएंगे कि गरीब गांव में कोई न रहे। एक बार इतने बड़े level पर काम शुरू हो जाए, कितना बड़ा फर्क पड़ता है! क्या हम कभी पंचायत के प्रधान के नाते विचार कर सकते हैं कि भई कम से कम 5 परिवार, ज्यादा मैं नहीं कह रहा हूं, 5 परिवार पंचायत की रचना में कुछ काम ऐसा निकालेंगे, उनको फलों का पेड़ बोने के लिए दे देंगे, कुछ करेंगे लेकिन 5 को तो गरीबी से बाहर लाएंगे।

अगर हिंदुस्तान में एक गांव साल में 5 लोगों को गरीबी से बाहर लाता है, पूरे हिंदुस्तान में कितना बड़ा फर्क पड़ता है जी? क्या कुछ नहीं कर सकते, आप कभी अंदाज लगाइए। और ये सारी बातें मैं बताता हूं कि बजट के constraint वाले काम नहीं हैं - हमारी संकल्प शक्ति, हमारी कल्पकता, इसके ऊपर जुड़े हुए हैं। अगर इस पर हम बल दें तो हम सच्‍चे अर्थ में इस व्यवस्था को अपने गांव के विकास के लिए परिवर्तित कर सकते हैं।

हम तब तक गांव का विकास नहीं कर पाएंगे जब तक हम गांव के प्रति गौरव और सम्मान का भाव पैदा नहीं करते हैं। उस गांव में पैदा हुए, मतलब सम्मान होना चाहिए। आप देखिए जिस गांव में महात्मा गांधी का जन्म हुआ होगा, उस गांव का व्यक्ति कभी कहीं मिलेगा तो कहेगा, मैं उस गांव से हूं जहां महात्मा गांधी पैदा हुए थे। कहेगा कि नहीं कहेगा? हर किसी को रहता है, कि कोई ऐसी बात होती है, गांव का गर्व होता है उसको। क्या हमने कभी हमारे गांव में,के प्रति एक लगाव पैदा हो, गांव के प्रति गर्व पैदा हो, ऐसी कोई चीज करते हैं क्या? नहीं करते हैं। क्या गांव का जन्मदिन मनाया जा सकता है क्या? हो सकता है कि record पर नहीं होगा तो गांव तय करे कि किस दिन को जन्मदिन मनाया जाएगा। उस दिन गांव इकट्ठा हो और गांव के बाहर जो लोग रहने गए हो, शहरों में रोजी-रोटी कमाने के लिए, किसी ने बड़ी प्रगति की हो, कोई पढ़-लिख करके डॉक्टर बना हो, उस दिन सबको बुलाया जाए। एक दिन सब लोग, नए-पुराने सब साथ रहें। कुछ बालकों के कार्यक्रम हो जाएं, कुछ बड़ों के कार्यक्रम हो जाएं, senior citizen के कुछ कार्यक्रम हो जाएं, गांव में सबसे बड़ी उम्र वाले व्यक्ति का सम्मान हो जाए। और एक अपनेपन का भाव! जो गांव से बाहर गए होंगे, उनको भी लगेगा उस दिन कि चलो भई अब तो हम रोजी-रोटी कमा रहे हैं, बड़े शहर में रहे रहे हैं चलिए अगले साल इतना हमारी तरफ से गांव के लिए दान दे देंगे, हमारे गांव में ये विकास कर दो। आप देखिए जन-भागीदारी का ऐसा माहौल बनेगा, गांव का रूप-रंग बदल जाएगा।

कभी आपने सोचा है, हमारी आने वाली पीढ़ी को तैयार करना है तो.. मैं कई बार गांव को पूछता हूं, भई आपके गांव में सबसे वृद्ध-oldest, oldest tree कौन सा है, कौन सा वृक्ष है जो सबसे बूढ़ा होगा? गांव को पता नहीं है, क्यों? ध्यान ही नहीं है! क्या हम पंचायत के लोग तय कर सकते हैं कि चलो भई ये सबसे बड़ी आयु का वृक्ष कौन सा दिखता है, ये सबसे बड़ा है, स्कूल के बच्चों को ले जाइए कि देखो भई अपने गांव की सबसे बड़ी आयु का वृक्ष ये है, ये है सबसे बड़ा वो, 200 साल उम्र होगी उसकी, 100 साल होगी उसकी, 80 साल होगी उसकी, जो भी होगा। चलो भई उसका भी सम्मान करे, उसका भी गौरव करें। यही तो है जो गांव के विकास का सबसे बड़ा साक्ष्य है। He is a witness! हम किस प्रकार से अपने गांव के गौरव को जोड़ें, गांव के साथ अपने आप कैसे लगाव लोगों का पैदा करें? आप देखिए अपने आप बदलाव आना शुरू हो जाएगा। और इसलिए मैं आग्रह करता हूं कि आप नेतृत्व दीजिए, अनेक नई कल्पकताओं के साथ नेतृत्व दीजिए।

हमारे देश ने बहुत बड़ा निर्णय किया है। कभी-कभी पश्चिम के देशों से बातें होती हैं और जब कहते हैं कि भारत में महिलाओं के लिए पंचायती व्यवस्था में reservation है तो कईयों आश्चर्य होता है। हिंदुस्तान में political process में decision making process में महिलाओं को इतना बड़ा अधिकार दिया गया है कि विश्व के बहुत बड़े-बड़े देशों के लिए surprise होता है। लेकिन कभी-कभी हमारे यहां क्या होता है।.. एक पहले तो मैं सरकार से जुड़ा हुआ नहीं था, संगठन के काम में लगा रहता था तो देशभर में मेरा भ्रमण होता था। तो लोगों से मिलता था। मिलता था तो थोड़ा परिचय भी करता था, एक बार परिचय देकर मैंने कहा, आप कौन हैं? तो उसने कहा मैं so and so SP हूं। तो मैंने कहा SP हैं! और political meeting में कैसे आ गए? क्योंकि मैं... SP यानी Superintendent of Police.. ये ही मेरे दिमाग में था। क्योंकि SP यानी पुलिस – पुलिसवाला हो के ये meeting में कैसे आ गए? तो मैंने कहा SP... तो बोले नहीं-नहीं मैं सरकारी नहीं हूं तो मैंने बोला क्या हैं? तो बोले “मैं सरपंच पति हूं।“

अब कानून ने तो empower कर दिया लेकिन जो SP कारोबार चला रहे हैं भई... है ना? हकीकत है ना? अब कानून ने महिलाओं को अधिकार दिया है तो उनको मौका भी देना चाहिए। और मैं कहता हूं जी, वो बहुत अच्‍छा काम करेंगी आप विश्‍वास कीजिए, बहुत अच्‍छा काम करेंगी। सच्‍चे अर्थों में गांव में परिवर्तन होंगे। अभी आपने छत्‍तीसगढ़ का भाषण सुना। बिना हाथ में कागज़ लिए गांव में क्या काम किया है, उन्‍होंने बताया कि नहीं बताया? और पता है उनको कि सरपंच के नाते अपने गांव में कितने काम हैं, किन-किन कामों पर ध्‍यान देना चाहिए, सब चीज का पता है। ये सामर्थ्‍य है हमारी माताओं-बहनों में। इसलिए ये SP वाला जो culture है वो बंद होना चाहिए। उनको अवसर देना चाहिए, उनको काम करने के लिए प्रोत्‍साहित करना चाहिए। और हम अवसर देंगे तो वे परिणाम भी दिखाएंगे।

तो मैं आज पंचायती राज दिवस पर आप सबको हृदय से बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं। जो award winner हैं, उनसे आप बात करेंगे तो पता चलेगा कि उन्‍होंने अपने-अपने यहां बहुत नए-नए प्रयोग किए होंगे, जो आपको भी काम आ सकते हैं। लेकिन अगर गांव तय करे तो दुनिया देखने के लिए आए, ऐसा गांव बन सकता है जी। ये ताकत होती है गांव की, एक परिवार होता है, अपनापन होता है, सुख-दु:ख के साथी होते हैं।

उस भाव को फिर से हम जगाएं और गांवों को बहुत आगे बढ़ाएं, इसी एक अपेक्षा के साथ बहुत-बहुत शुभकामनाएं।

धन्‍यवाद।

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भारत माता की जय...

भारत माता की जय...

भारत माता की जय...

सौभी के राम राम!..सौभी के राम राम!..सौभी के राम राम! मां बालासुन्दरी, रेणुका माँ और परशुराम के धरते...महर्षि जमदग्नि के तपस्थले...चुड़ेश्वर महादेव, शिरगुल देवता, महासू देवता की पुण्य धरा...गुरु गोबिंद सिंह रे धरते पांदी आये के मुखे बहुत-बहुत खुशी असो !

मेरे साथ बोलिए…भारत माता की जय...भारत माता की जय... भारत माता की जय। ऐसा लग रहा है कि अपने घर आया हूं। मेरे लिए न तो नाहन नया है, न ही सिरमौर नया है। लेकिन मुझे कहना पड़ेगा आज का माहौल नया है। मैं यहां संगठन का काम करता था। आप लोगों के बीच में रहता था। चुनाव भी लड़वाता था। लेकिन यहां सिरमौर में इतनी बड़ी रैली मैं खुद कभी नहीं कर पाया। पार्टी की मीटिंग लेता था, सबको समझाता था। मुझे लगता है, यहां के इतिहास की ये सबसे बड़ी रैली होगी और मैं हेलीपैड से यहां आ रहा था। पूरे रास्ते भर शायद इससे दो गुना लोग रोड पर खड़े हैं। आपका ये प्यार और आशीर्वाद मुझे हमेशा-हमेशा हिमाचली बना कर रखता है। और जब सिरमौर आए तो हमारे स्वर्गीय श्यामा शर्मा जी उनके घर में हमारी बैठकें हुआ करती थीं। हमारे चंद्र मोहन ठाकुर जी...बलदेव भंडारी जी...जगत सिंह नेगी जी...इतने सारे कार्यकर्ताओं की याद , अच्छे अनुभव मेरे लिए एक प्रकार से यादों की अमानत है। सभी के घरों से असकली...पटान्दे और सिडकू आया करते थे। और यहां एक होटल ब्लैक मैंगो हुआ करता था, हमारी अल्पसंख्यक मोर्चा की बैठकें वहीं हुआ करती थीं। जब देश मोदी को जानता तक नहीं था, तब भी आपने आशीर्वाद और प्यार देने में कोई कमी नहीं रखी है। समय बदला है, लेकिन मोदी नहीं बदला है...मोदी का हिमाचल से रिश्ता वही पुरानी रिश्ता है।

मैं जैसे गर्व से कहता हूं कि हिमाचल मेरा घर है, वैसे ही आपको पता नहीं होगा कि अफगानिस्तान के एक राष्ट्रपति थे श्रीमान करजई, वो भी कहते थे कि हिमाचल मेरा घर है। क्योंकि वो शिमला में पढ़े थे। और अभी आपने मुझे जो लोइया पहनाया है ना, वो यहीं से जाकर अफगानिस्तान में, थोड़ा फैशन डिजाइन करके उसको उन्होंने अपना पहनावा बना दिया है जी। यही हिमाचल की ताकत है जो इतना लगाव रखती है।

साथियों,

आज मैं आपसे तीसरी बार भाजपा सरकार के लिए आशीर्वाद मांगने आया हूं...मुझे आशीर्वाद मेरे लिए नहीं चाहिए, मुझे आशीर्वाद मेरे परिवारवालों के लिए नहीं चाहिए, मुझे आशीर्वाद मेरी जात-बिरादरी वालों के लिए नहीं चाहिए...मुझे आशीर्वाद ताकतवर भारत बनाने के लिए चाहिए...मुझे आशीर्वाद चाहिए...विकसित भारत बनाने के लिए...मुझे आशीर्वाद चाहिए...विकसित हिमाचल के लिए...देश में पांच चरणों के चुनाव हो चुके हैं। BJP-NDA की सरकार बननी पक्की हो चुकी है। अब हिमाचल 4-0 से हैट्रिक लगाएगा...हम तो देवभूमि के लोग हैं, हमारी एक भी चीज बेकार नहीं जाने देते, तो क्या कोई हिमाचली अपना वोट बेकार जाने देगा क्या। अपना वोट बेकार जाने देगा क्या। वो उसी को वोट देगा जिसकी सरकार बनेगी और वो जिसको वोट देगा उसी की सरकार बनेगी, ये हिमाचल में पक्का है। मेरे साथ बोलिए...फिर एक बार...मोदी सरकार ! फिर एक बार...मोदी सरकार !

साथियों,

हिमाचल प्रदेश सीमा से सटा हुआ राज्य है। हिमाचल के लोग एक मजबूत और ताकतवर सरकार का मतलब जानते हैं। मोदी आपके लिए जान की बाजी लगा देगा...लेकिन आप पर संकट नहीं आने देगा। आपने कांग्रेस का वो दौर देखा है, जब एक कमजोर सरकार देश में हुआ करती थी। उस समय पाकिस्तान हमारे सिर पर चढ़कर नाचता था। कांग्रेस की कमजोर सरकार, दुनिया में गुहार लगाती फिरती थी। मोदी ने कहा- भारत अब दुनिया के पास भीख नहीं मांगेगा, अब भारत अपनी लड़ाई खुद लड़ेगा...और फिर भारत ने घर में घुसकर मारा...आज देखिए...पाकिस्तान की क्या हालत हो गई है।

साथियों,

हिमाचल के ऊंचे पहाड़ों ने मुझे अपना हौसला बुलंद रखना सिखाया है और हिमाचल की बर्फिली पहाड़ियों ने मुझे ठंढ़े दिमाग से काम करना भी सिखाया है। हिमाचल के ऊंचे पहाड़ों ने मुझे अपना सिर गर्व से ऊंचा रखना सिखाया है। मैं मां भारती का अपमान नहीं सह सकता। लेकिन कांग्रेस, मां भारती के अपमान से भी बाज नहीं आती। कांग्रेस को भारत माता की जय कहने से दिक्कत है...कांग्रेस को वंदे मातरम कहने से दिक्कत है...ऐसी कांग्रेस कभी हिमाचल का भला नहीं कर सकती।

साथियों,

यही कांग्रेस है जिसने भारत के सीमावर्ती इलाकों को अपने हाल पर छोड़ दिया था। जब बॉर्डर स्टेट में सड़क बनाने की बात आती थी...तो कांग्रेस के हाथ-पांव फूल जाते थे। कांग्रेस डर जाती थी कि अगर सड़क बनाई तो उसी सड़क से दुश्मन भीतर आ जाएगा। ऐसी डरपोक सोच मोदी के मिजाज के साथ मेल नहीं खाती। मोदी ने कांग्रेस के मुकाबले कई गुना ज्यादा पैसे दिए हैं...मोदी ने कहा है बॉर्डर पर सड़कें बनाओ...इंफ्रास्ट्रक्चर बनाओ...आज बॉर्डर किनारे सैकड़ों किलोमीटर नई सड़कें बनी हैं...आज बॉर्डर किनारे रहने वाले फौजियों का, हमारे लोगों का जीवन आसान हुआ है।

साथियों,

कांग्रेस ने 4 दशक तक फौजी परिवारों को वन रैंक वन पेंशन के लिए तरसाया। कांग्रेस ने कैसा मजाक उड़ाया, हमारे पूर्व सैनिकों की आंख में धूल झोंकी और ऐसा पाप करने में उन्हें शर्म भी नहीं आई। जब 2013 में भारतीय जनता पार्टी ने मुझे प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार तय किया और मेरी पहली रैली पूर्व सैनिकों की हुई थी रेवाड़ी में और रेवाड़ी में मैंने पूर्व सैनिकों से वादा किया था, मैंने गारंटी दी थी कि मैं वन रैंक-वन पेंशन लागू करूंगा। कांग्रेस वाले डर गए मोदी ने नया खेल खेला है तो क्या करें। तो उन्होंने रातों-रात अफरा-तफरी में बजट में कहा कि हम भी वन रैंक-वन पेंशन लागू करेंगे। किया क्या 500 करोड़ रुपये का टोकन डालकर कह दिया कि वन रैंक-वन पेंशन लागू करेंगे। ये हमारी फौज के साथ मजाक है। ऐसे किसी बच्चे को कहते हैं ना कि कोई बात नहीं तुझे शाम को मुंबई ले जाऊंगा और बच्चा सो जाए, ऐसा पाप किया किया था उन्होंने। लेकिन मोदी है जिसने आकर के वन रैंक वन पेंशन लागू किया। उन्होंने 500 करोड़ में खेल खेला था 2014 का चुनाव जीतने के लिए, जिसका कोई मतलब नहीं था, मोदी ने OROP लाया, तो हम सवा लाख करोड़ रुपये फौजियों को दे चुके हैं। आप मुझे बताइए भाई, कहां 500 करोड़ और कहां सवा लाख करोड़। ये 500 करोड़ मजाक था कि नहीं था। फौजियों की बेईज्जती करने का इरादा था कि नहीं था। फौजियों का अपमान था कि नहीं था। इसलिए ही लोग कहते हैं..मोदी जो गारंटी देता है..वो गारंटी पूरा होने की गारंटी होती है।

भाइयों और बहनों,

एक तरफ मोदी की गारंटी है...तो दूसरी तरफ कांग्रेस का बर्बादी का मॉडल। सत्ता पाने के लिए कांग्रेस ने हिमाचल के लोगों से खूब झूठ बोला...कहा पहली कैबिनेट में ही ये होगा...वो होगा...पता नहीं क्या-क्या बता दिया और मेरे हिमाचल के लोग बड़े भले और बड़े प्यारे लोग हैं। उनको लगा कि हो सकता है कि ये ईमानदारी से बोलते होंगे। पहली कैबिनेट में तो कुछ हुआ नहीं। बल्कि कैबिनेट ही टूट-फूट गई।

साथियों,

यहां इतनी बड़ी संख्या में माताएं-बहनें आई हैं..आप मुझे बताइए...कांग्रेस ने कहा था आपको 1500 रुपए देगी...क्या 1500 रुपए मिला क्या, किसी के घर में आया क्या। कांग्रेस ने गोबर का पैसा देने का वादा किया था। किसी को मिला क्या। जरा जोर से बताओ-डरो मत, मिला क्या। ये अब ज्यादा दिन रहने वाले नहीं है। जरा हिम्मत से बोलो। मैं नौजवानों से पूछता हूं...पहली कैबिनेट में 1 लाख नौकरियां मिलनी थीं...ये वादा किया था, मिल गईं क्या। इनके दिल्ली के आकाओं को पता चले की कैसा झूठ का खेल, इस पवित्र भूमि के पवित्र लोगों के साथ किया है। ये तालाबाज कांग्रेस है..तालाबाज। अरे नौकरी तो छोड़ो...इस तालाबाज कांग्रेस सरकार ने...नौकरी की परीक्षा कराने वाले आयोग को ही ताला लगा दिया। अब ये तालाबाज सरकार आपके भविष्य का ताला खोल सकती है क्या। दिल्ली के जिस शाही परिवार ने हिमाचल को ये धोखा दिया...उसने मुड़कर फिर यहां अपनी शक्ल तक नहीं दिखाई है।

भाइयों और बहनों,

मैं पिछले 30 साल से आपके साथ रहा हूं और शायद ही कोई ऐसा वर्ष होगा। जब मैंने हिमाचल आकर इस मिट्टी को अपने माथे ना चढ़ाया हो। गुजरात में मुख्यमंत्री रहा, आपसे कुछ मांगा नहीं था। लेकिन आपके प्यार और आशीर्वाद को कभी भूल नहीं सकता हूं। मेरे पर आपका कर्ज है। और मैं हर मौके की तलाश में होता हूं कि मैं हिमाचल का कर्ज कैसे उतारूं।

भाइयों और बहनों,

कांग्रेस और इंडी-गठबंधन...स्वार्थी है...अवसरवादी है। तीन चीजें इनमें कॉमन मिलेंगी, ये पत्रकार मित्र इसपर गौर कर सकते हैं, रिसर्च कर सकते हैं। आपको बड़ा खजाना दे रहा हूं, काम आज जाएगा। कांग्रेस और उसके साथियों में ये तीन चीजें कॉमन मिलेंगी। ये घोर सांप्रदायिक हैं। ये घोर जातिवादी हैं। ये घोर परिवारवादी हैं। आपको ये तीन चीजें हरेक में कॉमन मिलेंगी। ये मीडियावाले दिमाग खपाएंगे तो बहुत खजाना खोलकर ले आएंगे। 60 सालों तक कांग्रेस ने सोचा ही नहीं कि सामान्य वर्ग में भी गरीब होते हैं। क्या ब्राह्मण के परिवार में कोई गरीब होता नहीं है, क्या बनिए के परिवार में कोई गरीब होता नहीं है। उच्च वर्ग के समाज में गरीब होते हैं कि नहीं होते हैं। उनकी परवाह नहीं थी। चिंता ही नहीं थी। कांग्रेस ने इस समाज के बारे में कभी सोचा नहीं। मोदी ने कर के दिखाया। जिस समय ये समाज आरक्षण से बाहर था, उनको सुखी संपन्न माना जाता था, मोदी ने उनके गरीब बच्चों के लिए 10 परसेंट आरक्षण किया और इस देश में कोई झगड़ा नहीं हुआ। और किसी का लूट कर नहीं किया और इसके कारण हमारे समाज के लोगों को अलग-अलग स्थान पर अवसर मिला है। कांग्रेस ने हमारे गिरिपार के हाटी समुदाय को भी आरक्षण नहीं दिया। ये होता है प्यार, जब नेकदिली से काम होता है, न्यायिक काम होता है। तो मन उत्साह से भर जाता है, ये दिखता है जी। और ये सारे काम मोदी ने आपका कर्ज उतारने के लिए किए हैं।

साथियों,

मैं आज हिमाचल के लोगों को कांग्रेस और इंडी गठबंधन की एक और साजिश से भी सावधान करने आया हूं। ये चुनाव है इसलिए मैं नहीं बोल रहा हूं दोस्तों। मेरे दिल में एक आग है। ये भारत को तबाह करने के लिए कैसे -कैसे खेल खेल रहे हैं और आप चौंक जाएंगे दोस्तों, हमारी संविधान सभा ने, बाबासाहेब अम्बेडकर ने जो हमारे SC-ST-OBC समुदाय है, जिनको आरक्षण दिया, ये कांग्रेस वाले और उनके वो सारे आरक्षण खत्म करके अपनी वोट बैंक जो वोट जिहाद की बातें करते हैं, उन मुसलमानों को दे देना चाहते है। और ये सिर्फ बातें नहीं करते हैं, कर्नाटका में कांग्रेस सरकार बनते ही उन्होंने कर दिया, ओबीसी के जो आरक्षण के अधिकार थे, वो उनसे छीनकर मुसलमान को दे दिए, यानि देंगे ऐसा नहीं, दे दिए और वे इस मॉडल पर काम करना चाहते हैं। आप मुझे बताइए, इस तरह का काम क्या मेरे हिमाचल के लोगों को मंजूर है क्या...जरा पूरी ताकत से बताइए ना...क्या ऐसे लोगों को आप स्वीकार करेंगे। क्या ऐसे विचार को आप स्वीकार करेंगे। ऐसे लोगों का हर पोलिंग बूथ में सफाया होना चाहिए की नहीं होना चाहिए। ये चुनाव उनको कहने का मौका है रूक जाओ... ये चुनाव उनको कहने का मौका है रूक जाओ। बहुत हो चुका अब हम देश को तोड़ने नहीं देंगे।

साथियों,

इंडी-गठबंधन की साजिश का ताज़ा उदाहरण पश्चिम बंगाल में सामने आया है। दो दिन पहले ही कलकत्ता हाईकोर्ट ने वहां 77 मुस्लिम जातियों के आरक्षण को खारिज किया है। आप कल्पना कर सकते हैं...मुसलमानों की 77 जातियों को इंडी गठबंधन वालों ने रातों-रात OBC घोषित कर दिया था। औऱ OBC बनाने के बाद उनका हक उनको दे दिया था। इन 77 मुस्लिम जातियों को नौकरियों में, पढ़ाई में, हर जगह मलाई मिल रही थी। ऐसा करके इंडी गठबंधन ने OBC के हक पर डाका डाल दिया था। ऐसा करके इन लोगों ने संविधान की धज्जियां उड़ा दी थीं। संविधान के पीठ में छुरा घोंपा है। अब कलकत्ता हाईकोर्ट के फैसले के बाद ये इंडी गठबंधन वाले बौखलाए हुए हैं। बंगाल की मुख्यमंत्री तो सीधे-सीधे कोर्ट का आदेश मानने से इनकार कर रही हैं। इनके लिए संविधान कोई मायने नहीं रखता..इनके लिए अदालतें कोई मायने नहीं रखतीं..इनका सबसे सगा अगर कोई है...तो वो इनका वोट बैंक है।

साथियों,

अपने वोट बैंक को खुश करने के लिए ही कांग्रेस राम मंदिर का भी विरोध कर रही है। कांग्रेस भाजपा वालों का मजाक उड़ाती थी...कहती थी- मंदिर वहीं बनाएंगे, तारीख नहीं बताएंगे। हमें रोज चुभने वाली बातें करते थे। हमने तारीख भी बताई...समय भी बताया...लेकिन इन लोगों ने प्राण प्रतिष्ठा का बहिष्कार कर दिया। आप हिमाचल के लोग मुझे बताइए...जब राम लला भव्य मंदिर में विराजित हुए, प्राण प्रतिष्ठा हुई, आपको आनंद हुआ कि नहीं हुआ, आपने अपने गांव में दिवाली मनाई की नहीं मनाई। घर में दिवाली मनाई की नहीं मनाई। हर हिंदुस्तानी खुश हुआ की नहीं हुआ, 500 साल की लड़ाई हमारे सभी पूर्वजों को भी खुशी हुई होगी कि नहीं हुई होगी। लेकिन कांग्रेस पार्टी इसको भी बर्दाश्त नहीं कर पा रही है। कांग्रेस के साथी ने एक रहस्य खोला है। फर्स्ट फैमिली के राजदार हैं वो, उन्होंने कहा कि कांग्रेस के अंदर साजिश चल रही है कि अगर सत्ता में आए तो राम मंदिर को ताला लगा देंगे। और राम लला के टेंट में रहने को मजबूर कर देंगे। ये इनकी सोच है। क्या आप ऐसा होने देंगे क्या। ऐसा अवसर उनको लेने देंगे क्या। इसलिए हर पोलिंग बूथ पर इनकी सफाई करना जरूरी है। मेरा जो स्वच्छता अभियान है ना, ये चुनाव के दिन 1 तारीख को आपको मजबूती से करना है..करेंगे।

भाइयों और बहनों,

भाजपा सरकार, हिमाचल प्रदेश के विकास के लिए पूरी कोशिश कर रही है। कोई सोचता नहीं था कि हिमाचल में भी IIIIT, IIM और AIIMS जैसे संस्थान हो सकते हैं। लेकिन मोदी है तो...मुमकिन है। मोदी है तो...मुमकिन है। मोदी है तो...मुमकिन है। हिमाचल को बल्क ड्रग्स पार्क और मेडिकल डिवाइस पार्क मिला है। हिमाचल देश के उन पहले राज्यों में हैं, जहां वंदे भारत ट्रेन शुरु हुई।

साथियों,

मोदी के लिए किसान, गरीब, महिला और युवा का सशक्तिकरण, बड़ी प्राथमिकता है। 5 किलो मुफ्त अनाज और 5 लाख रुपए का मुफ्त इलाज...मोदी की गारंटी है। हमारे किसानों-बागवानों के खाते में भी पीएम किसान सम्मान निधि के 6 हज़ार रुपए आते रहेंगे।

साथियों,

मोदी ने स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी 3 करोड़ बहनों को..ये आंकड़ा छोटा नहीं है...3 करोड़ बहनों को लखपति दीदी बनाने की गारंटी दी है...उनमें से हजारों बहनें हिमाचल की होंगी। मोदी आपका बिजली बिल जीरो करने के लिए भी एक बड़ी योजना लेकर आपकी सेवा में हाजिर है। और योजना शुरू होगी नहीं...योजना शुरू कर दी और योजना का नाम है पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना। इससे आपका बिल जीरो हो जाएगा। और इतना ही नहीं जो बिजली आप पैदा करेंगे, वो बिजली बेचकर कमाई भी करेंगे। ये कैसे होगा आपके घर पर सोलर पैनल लगाने के लिए सरकार आपको 75 हजार रुपए देगी। 75 Thousand Rupees. आप खुद अपने घर में बिजली पैदा कीजिए, आपकी जरूरत की बिजली मुफ्त में उपयोग कीजिए, अतिरिक्त बिजली आप सरकार को बेच दीजिए और कमाई कीजिए। ये मुफ्त बिजली योजना मोदी लेकर आया है और मेरे सिरमौर वाले साथी आलरेडी ऑनलाइन बुकिंग चालू है और आप अपना नाम रजिस्टर करवा दीजिए। मोदी ने पहले जैसे गारंटियां पूरी की...मोदी ये गारंटी भी जरूर पूरी करेगा। उसी प्रकार से साथियों जो मुफ्त अनाज योजना है, मोदी का संकल्प है गरीब के घर का चूल्हा जलते रहना चाहिए, गरीब के घर का बच्चा भूखा सोना नहीं चाहिए, इसलिए मुफ्त अनाज योजना, अगले पांच साल तक चालू रहेगी।

साथियों,

आपको शिमला लोकसभा सीट से हमारे बहुत निकट साथी भाई सुरेश कश्यप जी को भारी वोटों से विजयी बनाना है। और भाई सुरेश जी को आप वोट देंगे ना तो वो सीधा-सीधा कमल के खाते में जाएगा। मोदी के खाते में जाएगा। हर गांव जाएंगे, ज्यादा से ज्यादा मतदान कराएंगे, हर पोलिंग बूथ को जिताएंगे। अच्छा मेरा एक काम करेंगे... मेरा एक काम करेंगे...कमाल हो यार सुरेश के लिए तो बड़े जोर से बोल रहे हो, मेरी लिए बोला तो ठंढ़े हो गए। ये पॉलीटिकल काम नहीं है करोगे। चुनाव वाला काम नहीं है करोगे, मेरा पर्सनल है करोगे। पक्का करोगे एक काम कीजिए। देखिए जब मैं हिमाचल में था, गांव-गांव भटकता था, लोगों के घर जाता था मिलता था। अब आप लोगों ने मुझे ऐसा काम में लगा दिया कि मैं सबके पास जा नहीं पाता हूं, मिल नहीं पाता हूं। तो मेरा एक काम कीजिए, ज्यादा से ज्यादा परिवारों में जाइए। ज्यादा से ज्यादा लोगों को मिलिए और जाकर के कहना मोदी जी सिरमौर आए थे। मोदी जी ने आपको प्रणाम कहा है। मेरा प्रणाम पहुंचा देंगे। हर घर में मेरा प्रणाम पहुंचा देंगे। पहुंचा देंगे, पक्का पहुंचा देंगे। दूसरा काम, हम तो देवभूमि के लोग हैं, हमारे अपने हर गांव के देवी-देवता होते हैं। अपने देवता होते हैं। देवता का आगमन होता है। हर गांव के अंदर एक पूजा स्थल होता है। आप सब मिलकर के एक गांव में जाकर मेरी तरफ से मत्था टेकना आशीर्वाद मांगना, ताकि विकसित भारत का सपना जितना जल्द हो सके हम पूरा कर सकें।

मेरे साथ बोलिए...भारत माता की जय...

भारत माता की जय...

भारत माता की जय

बहुत-बहुत धन्यवाद