Text of PM's remarks on National Panchayati Raj Day

Published By : Admin | April 24, 2015 | 13:46 IST

मंत्रिपरिषद के मेरे साथी, देश के अलग-अलग भागों से आए हुए पंचायत राज व्‍यवस्‍था के सभी प्रेरक महानुभाव,

जिन राज्‍यों को आज मुझे सम्‍मानित करने का सौभाग्‍य मिला है उन सभी राज्‍यों को मैं हृदय से बधाई देता हूं। आज जिला परिषदों को भी और ग्राम पंचायतों का भी सम्‍मान होने वाला है। उन सबको भी मैं हृदय से बहुत-बहुत अभिनंदन करता हूं। पंचायत राज दिवस पर मैं देशभर में पंचायत राज व्‍यवस्‍था से जुड़े हुए सक्रिय सभी महानुभावों को आज शुभकामनाएं देता हूं।

महात्‍मा गांधी हमेशा कहते थे कि भारत गांवों में बसता है। उन गांवों के विकास की तरफ हम कैसे आगे बढ़े दूर-सुदूर छोटे-छोटे गांवों के भी अब सपने बहुत बड़े हैं। और मुझे विश्‍वास है कि आप सब के नेतृत्‍व में गांव की चहुं दिशा में प्रगति होगी। मैं नहीं मानता हूं कि अब.. जैसे अभी हमारे चौधरी साहब बता रहे थे कि पहले से तीन गुना बजट होने वाला है आपका और तुरंत तालियां बज गई। कभी-कभी मुझे लगता है कि हम जो पंचायत में चुन करके आए हैं, कभी सोचा है कि हम 5 साल के कार्यकाल में हम हमारे गांव को क्‍या दें करके जाना चाहते है? कभी ये सोचा है कि हमारे 5 साल के बाद हमारा गांव हमें कैसे याद करेगा? जब तक हमारे मन में गांव के लिए कुछ कर गुजरना है - ये spirit पैदा नहीं होता है तो सिर्फ बजट के कारण स्थितियां बदलती नहीं हैं।

पिछले 60 साल में जितने रुपए आए होगे उसका सारा total लगा दिया जाए, और फिर देखा जाए कि भई गांव में क्‍या हुआ तो लगेगा कि इतने सारे रुपए गए तो परिणाम क्‍यों नहीं आया? और इसलिए कभी न कभी पंचायत level पर सोचना चाहिए। कुछ राज्‍य ऐसे हैं हमारे देश में जहां पर पंचायतें अपना five year plan बनाती हैं, पंचवर्षीय योजना बनाती हैं। 5 साल में इतने काम हम करेंगे और वो गांव के पंचायत के उसमें वो board पर लिख करके रखते हैं और उसके कारण एक निश्चित दिशा में काम होता है और गांव कुछ समस्‍याओं से बाहर आ जाता है। हम भी आदत डालें कि भई हम 5 साल में हमारे गांव में ये करके जाएंगे। अगर ये हम करते है तो आप देखिए कि बदलाव आना शुरू होगा।

बजट और leadership दोनों का combination कैसे परिणाम लाता है? हम जानते है कि गांव में CC road बनाना ये जैसे एक बहुत बड़ा काम है और बहुत महत्‍वपूर्ण काम है इस प्रकार की मानसिकता बनी हुई है। इसके पीछे कारण क्‍या है वो आप भी जानते है, मैं भी जानता हूं। लेकिन कुछ सरपंच ऐसे होते हैं जो CC road तो बना देते है, CC road तो बना देते है, लेकिन पहले से प्‍लान करके दोनों किनारों पर बढि़यां पेड़ लगा देते है। वृक्षारोपण करते है और जैसे ही गांव में entry करता तो ऐसा हरा-भरा गांव लगता है। तो बजट से तो CC road बनता है लेकिन उनकी leadership quality है कि गांव को जोड़ करके रोड़ बनते ही पौधे लगा देते हैं और वो वृक्ष बन जाते हैं और एकदम से गांव में कोई आता है तो बिल्‍कुल नजरिया ही बदल जाता है। कुछ दूसरे प्रकार के होते हैं सरपंच जो क्‍या करते हैं और गांव में से कोई धनी व्‍यक्ति कहीं कमाने गया तो उसको कहते है कि ऐसा करो भाई तुम गांव को gate लगा दो। तो बड़ा पत्‍थर का 2, 5, 10 लाख का gate लगवा देते हैं। उसको लगता है कि मैंने gate बनवा दिया तो बस गांव का काम हो गया। लेकिन दूसरे को लगता है कि मैं पेड़ लगाऊंगा। आप भी सोचिएं बैठे-बैठे कि सचमुच में जन-भागीदारी से जिसने पेड़ लगाएं हैं, CC road, enter होते ही आधे कि.मी., एक कि.मी. हरे-भरे वृक्षों की घटा के बीच से गांव जाता है तो वो दृश्‍य कैसा होता होगा? ये है leadership की quality कि हम किन चीजों को प्रधानता देते है। इस पर इस काम का प्रभाव होता है.. जिसमें आपको बजट का खर्च नहीं करना है, आपको बजट की चिंता नहीं करनी है। जो मिलने वाला है.. जैसे बताया गया कम से कम 15 लाख और ज्‍यादा से ज्‍यादा 1 करोड़ से भी ज्‍यादा।

लेकिन इसके अतिरिक्‍त बहुत पैसा गांव में आता है। आंगनवाड़ी चलती है, प्राथमिक स्‍कूल चलता है, PHC centre चलता है, बहुत सी चीजें चलती है, जिसका खर्चा तो सरकारी राह से अपनी व्‍यवस्‍था से आता है। इसमें आपको कोई लेना-देना नहीं होता है। क्‍या कभी एक सरपंच के नाते, गांव की पंचायत के नाते हमने इन चीजों पर ध्‍यान केन्द्रित किया है क्‍या? कि भई, मेरे गांव में एक भी बच्‍चा ऐसा नहीं होगा कि जो टीकाकरण में वंचित रह जाए। हम पंचायत के लोग जी-जान से जुटेंगे, गांव को जगाएंगे कि भई टीकाकरण है, सभी बच्‍चों का हुआ है कि नहीं हुआ, चलो देखो! अब इसमें कोई पैसे लगते है है क्‍या? बजट नहीं लगता है, leadership लगती है। एक समाज के प्रति कुछ कार्य करने के दायित्व का भाव लगता है।

हमारे गांव में स्‍कूल तो है, teacher है, सरकार बजट खर्च कर रही है, हमने कभी देखा क्‍या - कि भई हमारे teacher आते है कि नहीं? बच्‍चे स्‍कूल जाते है कि नहीं? समय पर स्‍कूल चलता है कि नहीं चलता? बच्‍चे खेलकूद में हिस्‍सा लेते है कि नहीं लेते? बच्‍चे library का उपयोग करते है कि नहीं करते? Computer दिया है तो चलता है कि नहीं चलता? ये हम एक पंचायत के नाते.. हमारे गांव के बच्‍चे पढ़-लिख करके आगे बढ़ें, आपको बजट खर्च नहीं करना है, न ही बजट की चिंता करनी है सिर्फ आपको गांव की चिंता करनी है, आने वाली पीढ़ी की चिंता करनी है।

हमारे यहां आशा worker हैं, आशा worker को कभी पूछा है कि आपका काम कैसा चल रहा है, कोई कठिनाई है क्या? हर गांव में भी सरकार है लेकिन वो बिखरा पड़ा हुआ है। क्‍या हम एक प्रयास कर सकते है क्‍या कि सप्‍ताह में एक दिन, एक घंटे के लिए, जितने भी सरकारी व्‍यक्ति हैं गांव में, उनको बिठाएंगे एक साथ और बैठ करके अपना गांव, अपना विकास.. उसके लिए क्‍या कर सकते हैं। बैठ करके चर्चा करेंगे तो शिक्षक कहेंगा कि मुझे ये करना है लेकिन हो नहीं रहा है, तो आंगनवाड़ी worker कहेगी कि हां-हां चलो मैं मदद कर देती हूं, आशा worker कहेंगी कि अच्‍छा कोई बात नहीं, मैं कल आपके लिए 2 घंटे लगा दूंगी.. अगर गांव में हम leadership ले करके team बना लें, सरकार के इतने लोग हमारे यहां होते है लेकिन हमें भी पता नहीं होता। सरकार के इतने लोग हमारे यहां रहते हैं लेकिन हमें भी पता नहीं होता है। Even बस का driver, conductor भी रहता होगा और बस चलाता होगा, वो भी तो एक सरकार का मुलाजिम है। Constable होता होगा, वो भी एक मुलाजिम है। पटवारी है, वो भी एक मुलाजिम है।

क्या कभी हमने ये सोचा है, सप्ताह में एक घंटा कम से कम हम सरकार के रूप में एक साथ बैठेंगे? सामूहिक रूप से अपने पंचायत के विकास की चर्चा करेंगे। आप देखिए, देखते ही देखते बदलाव शुरू हो जाएगा, Team बनना शुरू हो जाएगा। और मैं वो बातें नहीं बता रहूं जिसमें बजट एक समस्या है। लेकिन वरना हमारे देश में एक ऐसा माहौल बना दिया गया है कि क्यों नहीं होता है, बजट नहीं है.. हकीकत वो नहीं है। बजट है लेकिन जो काम परिणाम नहीं देते हैं उसकी चिंता हमें ज्यादा करने की आवश्यकता है। हमारे गांव में कोई drop out होता है बच्चा, क्या हमें पीड़ा होती है क्या, हमारा खुद का बच्चा अगर स्कूल छोड़ दे तो हमें दुख होता है। अगर हम पंचायत के प्रधान हैं तो गांव का भी कोई बच्चा स्कूल छोड़ दे, हमें उतनी ही पीड़ा होनी चाहिए, पूरी पंचायत को दर्द होना चाहिए। अगर ये हम करते हैं, अगर ये हम करते हैं, मैं नहीं मानता हूं कि हमारे गांव में कोई अशिक्षित रहेगा। और कोई सरंपच ये तय करके कि मेरे कार्यकाल में पांच साल में एक भी बच्चा drop out नहीं होगा। अगर इतना भी कर ले तो मैं कहता हूं, उस सरपंच ने एक पीढ़ी की सेवा कर-करके जा रहा है। ऐसा मैं मानता हूं।

नरेगा का काम हर गांव में चलता है। क्या हम उसमें पानी के लिए प्राथमिकता दें? जितनी ताकत लगानी है, लगाएं लेकिन पानी का प्रबंधन करने के लिए ही नरेगा का उपयोग करें, तो क्या कभी पानी का संकट आएगा क्या? हम व्यवस्थाओं को विकसित कर सकते हैं। आवश्यकता ये है कि मिलकर के नेतृत्व दें। हमारे गांव में कुछ लोग तो होंगे जो सरकार में कभी न कभी मुलाजिम रहे हों। Teacher रहे हों, पटवारी रहे हों और retired हो गए हों। यानी सरकार का पेंशन लेते हों। सरकारी मुलाजिम होने के नाते, निवृत्त होने के बाद पेंशन लेते हों। किसी गांव में तीन होंगे, पांच होंगे, दस होंगे, पंद्रह होंगे। क्या महीने में एक बार इन retired लोगों की मिटिंग कर सकते हैं? उनका अनुभव क्योंकि वो खाली हैं, समय हैं उनके पास, अगर मान लीजिए गांव में 5 retired teacher हैं। उनको कहें कि देखिए भई अपने गांव में चार बच्चे ऐसे हैं, बहुत बेचारे पीछे रह गए, थोड़ा सा समय दीजिए, थोड़ा सा इन बेचारों को पढाइए ना। अगर वो retired हुआ होगा न तो भी उसके DNA में teaching पड़ा हुआ होगा। उसको कहोगे हां-हां चलिए मैं समझ लेता हूं। इन चार गरीब बच्चों को मैं पढ़ा दूंगा, मैं उनकी चिंता करूंगा। हम थोड़ा motivate करें लोगों को, हम नेतृत्व करें आप देखिए गांव हमारा ऐसा नहीं हो सकता क्‍या? अपना गांव.. और मैंने देखा जी, देश में मैंने कई गांव ऐसे देखे हैं कि जहां उस सरपंच की सक्रियता के कारण गांव में परिवर्तन आया है।

मैं जब मुख्यमंत्री था, एक घटना ने मुझे बहुत.. यानी मेरे मन को बहुत आंदोलित किया था। खेड़ा district में, जहां सरदार पटेल साहब का जन्म हुआ था। एक गांव के अंदर पंचायत प्रधान के नीचे women reservation था। Women reservation था तो गांव वालों ने तय किया कि प्रधान अगर women है तो सभी member women क्यों न बनाई जाए? और गांव ने तय किया कि कोई पुरुष चुनाव नहीं लड़ेगा। सब के सब पंचायत के member भी महिलाएं बनेंगी। Reservation तो one-third था लेकिन सबने तय किया गांव वालों ने। एक दिन उन्होंने मेरे से समय मांगा पंचायत की सभी महिला सदस्यों ने और पंचायत के प्रधान ने। मेरे लिए बड़ा surprise था कि ये गांव बड़ा कमाल है भाई, सारे पुरुषों ने अपने आप withdraw को कर लिया और महिलाओं के हाथ में कारोबार दे दिया। तो मेरा भी मन कर लिया कि चलो मिलूं तो वो सब मुझे कोई 17 member का वो पंचायत थी। तो वो मिलने आईं। और ये बात कोई 2005 या 2006 की है। तो उसमें सबसे ज्यादा जो पढ़ी-लिखी महिला थी प्रधान थी, वो पांचवी कक्षा तक पढ़ी हुई थी। यानी इतना पिछड़ा हुआ गांव था कोई ज्यादा पढ़े-लिखे हुए लोग नहीं थे। तो ऐसे ही मेरा मन कर गया, मैंने पूछा उनको, मैंने कहा अब पंचायत सभी महिलाओं के हाथ में है, आपको गांव का कारोबार चलाना है तो क्या करना है, आपकी योजना क्या है करनी की? उन्होंने जो जवाब दिया, मैं नहीं मानता हूं हिंदुस्तान की सरकार में कभी इस रूप में सोचा गया होगा। कम से कम मैं मुख्यमंत्री था, मैंने इस रूप में नहीं सोचा था। उस जवाब ने मुझे सोचने के लिए मजबूर कर दिया था। ठेठ गांव की सामान्य महिलाएं थी।

मैंने उनसे पूछा कि अब पांच साल आपको कारोबार चलाना है तो क्या आपके मन में है? उस प्रधान ने जो कि पढ़ी-लिखी नहीं थी, उसने मुझे जवाब दिया। उसने मुझे कहा, “हम चाहते हैं कि हमारे गांव में कोई गरीब न रहे।“ अब देखिए क्या कल्पना है ये, क्या कभी हमारे देश में पंचायत ने, नगरपालिका ने, महानगरपालिका ने, मिल-बैठकर के तय किया कि हम हमारे गांव में उस प्रकार की योजनाएं चलाएंगे कि गरीब गांव में कोई न रहे। एक बार इतने बड़े level पर काम शुरू हो जाए, कितना बड़ा फर्क पड़ता है! क्या हम कभी पंचायत के प्रधान के नाते विचार कर सकते हैं कि भई कम से कम 5 परिवार, ज्यादा मैं नहीं कह रहा हूं, 5 परिवार पंचायत की रचना में कुछ काम ऐसा निकालेंगे, उनको फलों का पेड़ बोने के लिए दे देंगे, कुछ करेंगे लेकिन 5 को तो गरीबी से बाहर लाएंगे।

अगर हिंदुस्तान में एक गांव साल में 5 लोगों को गरीबी से बाहर लाता है, पूरे हिंदुस्तान में कितना बड़ा फर्क पड़ता है जी? क्या कुछ नहीं कर सकते, आप कभी अंदाज लगाइए। और ये सारी बातें मैं बताता हूं कि बजट के constraint वाले काम नहीं हैं - हमारी संकल्प शक्ति, हमारी कल्पकता, इसके ऊपर जुड़े हुए हैं। अगर इस पर हम बल दें तो हम सच्‍चे अर्थ में इस व्यवस्था को अपने गांव के विकास के लिए परिवर्तित कर सकते हैं।

हम तब तक गांव का विकास नहीं कर पाएंगे जब तक हम गांव के प्रति गौरव और सम्मान का भाव पैदा नहीं करते हैं। उस गांव में पैदा हुए, मतलब सम्मान होना चाहिए। आप देखिए जिस गांव में महात्मा गांधी का जन्म हुआ होगा, उस गांव का व्यक्ति कभी कहीं मिलेगा तो कहेगा, मैं उस गांव से हूं जहां महात्मा गांधी पैदा हुए थे। कहेगा कि नहीं कहेगा? हर किसी को रहता है, कि कोई ऐसी बात होती है, गांव का गर्व होता है उसको। क्या हमने कभी हमारे गांव में,के प्रति एक लगाव पैदा हो, गांव के प्रति गर्व पैदा हो, ऐसी कोई चीज करते हैं क्या? नहीं करते हैं। क्या गांव का जन्मदिन मनाया जा सकता है क्या? हो सकता है कि record पर नहीं होगा तो गांव तय करे कि किस दिन को जन्मदिन मनाया जाएगा। उस दिन गांव इकट्ठा हो और गांव के बाहर जो लोग रहने गए हो, शहरों में रोजी-रोटी कमाने के लिए, किसी ने बड़ी प्रगति की हो, कोई पढ़-लिख करके डॉक्टर बना हो, उस दिन सबको बुलाया जाए। एक दिन सब लोग, नए-पुराने सब साथ रहें। कुछ बालकों के कार्यक्रम हो जाएं, कुछ बड़ों के कार्यक्रम हो जाएं, senior citizen के कुछ कार्यक्रम हो जाएं, गांव में सबसे बड़ी उम्र वाले व्यक्ति का सम्मान हो जाए। और एक अपनेपन का भाव! जो गांव से बाहर गए होंगे, उनको भी लगेगा उस दिन कि चलो भई अब तो हम रोजी-रोटी कमा रहे हैं, बड़े शहर में रहे रहे हैं चलिए अगले साल इतना हमारी तरफ से गांव के लिए दान दे देंगे, हमारे गांव में ये विकास कर दो। आप देखिए जन-भागीदारी का ऐसा माहौल बनेगा, गांव का रूप-रंग बदल जाएगा।

कभी आपने सोचा है, हमारी आने वाली पीढ़ी को तैयार करना है तो.. मैं कई बार गांव को पूछता हूं, भई आपके गांव में सबसे वृद्ध-oldest, oldest tree कौन सा है, कौन सा वृक्ष है जो सबसे बूढ़ा होगा? गांव को पता नहीं है, क्यों? ध्यान ही नहीं है! क्या हम पंचायत के लोग तय कर सकते हैं कि चलो भई ये सबसे बड़ी आयु का वृक्ष कौन सा दिखता है, ये सबसे बड़ा है, स्कूल के बच्चों को ले जाइए कि देखो भई अपने गांव की सबसे बड़ी आयु का वृक्ष ये है, ये है सबसे बड़ा वो, 200 साल उम्र होगी उसकी, 100 साल होगी उसकी, 80 साल होगी उसकी, जो भी होगा। चलो भई उसका भी सम्मान करे, उसका भी गौरव करें। यही तो है जो गांव के विकास का सबसे बड़ा साक्ष्य है। He is a witness! हम किस प्रकार से अपने गांव के गौरव को जोड़ें, गांव के साथ अपने आप कैसे लगाव लोगों का पैदा करें? आप देखिए अपने आप बदलाव आना शुरू हो जाएगा। और इसलिए मैं आग्रह करता हूं कि आप नेतृत्व दीजिए, अनेक नई कल्पकताओं के साथ नेतृत्व दीजिए।

हमारे देश ने बहुत बड़ा निर्णय किया है। कभी-कभी पश्चिम के देशों से बातें होती हैं और जब कहते हैं कि भारत में महिलाओं के लिए पंचायती व्यवस्था में reservation है तो कईयों आश्चर्य होता है। हिंदुस्तान में political process में decision making process में महिलाओं को इतना बड़ा अधिकार दिया गया है कि विश्व के बहुत बड़े-बड़े देशों के लिए surprise होता है। लेकिन कभी-कभी हमारे यहां क्या होता है।.. एक पहले तो मैं सरकार से जुड़ा हुआ नहीं था, संगठन के काम में लगा रहता था तो देशभर में मेरा भ्रमण होता था। तो लोगों से मिलता था। मिलता था तो थोड़ा परिचय भी करता था, एक बार परिचय देकर मैंने कहा, आप कौन हैं? तो उसने कहा मैं so and so SP हूं। तो मैंने कहा SP हैं! और political meeting में कैसे आ गए? क्योंकि मैं... SP यानी Superintendent of Police.. ये ही मेरे दिमाग में था। क्योंकि SP यानी पुलिस – पुलिसवाला हो के ये meeting में कैसे आ गए? तो मैंने कहा SP... तो बोले नहीं-नहीं मैं सरकारी नहीं हूं तो मैंने बोला क्या हैं? तो बोले “मैं सरपंच पति हूं।“

अब कानून ने तो empower कर दिया लेकिन जो SP कारोबार चला रहे हैं भई... है ना? हकीकत है ना? अब कानून ने महिलाओं को अधिकार दिया है तो उनको मौका भी देना चाहिए। और मैं कहता हूं जी, वो बहुत अच्‍छा काम करेंगी आप विश्‍वास कीजिए, बहुत अच्‍छा काम करेंगी। सच्‍चे अर्थों में गांव में परिवर्तन होंगे। अभी आपने छत्‍तीसगढ़ का भाषण सुना। बिना हाथ में कागज़ लिए गांव में क्या काम किया है, उन्‍होंने बताया कि नहीं बताया? और पता है उनको कि सरपंच के नाते अपने गांव में कितने काम हैं, किन-किन कामों पर ध्‍यान देना चाहिए, सब चीज का पता है। ये सामर्थ्‍य है हमारी माताओं-बहनों में। इसलिए ये SP वाला जो culture है वो बंद होना चाहिए। उनको अवसर देना चाहिए, उनको काम करने के लिए प्रोत्‍साहित करना चाहिए। और हम अवसर देंगे तो वे परिणाम भी दिखाएंगे।

तो मैं आज पंचायती राज दिवस पर आप सबको हृदय से बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं। जो award winner हैं, उनसे आप बात करेंगे तो पता चलेगा कि उन्‍होंने अपने-अपने यहां बहुत नए-नए प्रयोग किए होंगे, जो आपको भी काम आ सकते हैं। लेकिन अगर गांव तय करे तो दुनिया देखने के लिए आए, ऐसा गांव बन सकता है जी। ये ताकत होती है गांव की, एक परिवार होता है, अपनापन होता है, सुख-दु:ख के साथी होते हैं।

उस भाव को फिर से हम जगाएं और गांवों को बहुत आगे बढ़ाएं, इसी एक अपेक्षा के साथ बहुत-बहुत शुभकामनाएं।

धन्‍यवाद।

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Text of PM Modi's speech at a public meeting in Cuttack, Odisha
May 20, 2024
Jagannath temple in Puri is not safe under BJD rule. 'Ratna Bhandar' keys have been missing for the last 6 years: PM Modi
Your enthusiasm is telling that Odisha is going to create a new history after 25 years, says PM Modi while addressing a rally in Cuttack
Cuttack is a catalyst for increasing the capabilities and capacities of Bharat to make it a developed nation: PM Modi

जय जगन्नाथ !

जय जगन्नाथ !

जय जगन्नाथ !

जय श्रीराम !

जय श्रीराम !

एठी उपस्थित समस्त मान्यगण व्यक्तिनंकू मोर नमस्कार! देवी मां चामुंडा, चंडी मंदिर, डमडमणी पीठ, मां भट्टारिका, प्रभु नीलमाधव की धरती पर आप जनता-जनार्दन के दर्शन करके मेरा जीवन धन्य हो गया। यहां इतनी बड़ी संख्या में माताएं-बहनें आई हैं, हमारे नौजवान जो फर्स्ट टाइम वोटर्स हैं, वो तो उमंग से भरे हुए नजर आ रहे हैं। आपका उत्साह-आपका जोश ये दिखा रहा है कि 25 साल बाद ओडिशा नया इतिहास रचने जा रहा है। ओडिशा में 10 जून को भाजपा का पहला सीएम शपथ लेगा, ये तय है। और आपके आशीर्वाद से तीसरी बार मोदी सरकार दिल्ली में शपथ लेगी, ये भी तय है।

भाइयों और बहनों,

कटक, देश के सबसे पुराने शहरों में से एक है। यहां इतिहास भी है, विरासत भी है। यहां नेताजी सुभाष चंद्र बोस, उत्कल गौरव मधुसूदन दास, उत्कलमणि गोपबंधु दास, उत्कल केसरी हरेकृष्ण महताब ऐसे अनेक महानुभावों की प्रेरणा है। ये आधुनिक शिक्षा की नगरी है। ये विकसित भारत का सामर्थ्य बढ़ाने वाली धरती है।

साथियों,

जिस कटक का जिस ओडिशा का इतना बड़ा महत्व है उसे क्या कोई ऐसा व्यक्ति संभाल सकता है जिसको ओडिशा की संस्कृति की समझ न हो? जिसको यहां की मिट्टी की संवेदना की समझ न हो? BJD को आपने इस शताब्दी के 24-25 साल देकर देखे हैं और आपने देखा है कि परिणाम क्या निकला। अब अगले 25 वर्ष ओडिशा के विकास के लिए बहुत जरूरी हैं। (यहां बहुत सारे लोग अपने कुछ न कुछ चित्र पेंटिंग लेकर के आए हैं। जरा एसपीजी के लोग सारा कलेक्ट कर लीजिए, जो नौजवान और बच्चे कुछ लाए हैं पीछे अपना नाम पता लिख दें। मैं जरूर आपको चिट्ठी भेजूंगा। ये सुभाष बाबू बन के आया है नौजवान। बोलिए भारत माता की, भारत माता की। जिसको जो देना है अभी दे दो बाद में मुझे कोई रह जाए ऐसा ना हो जय श्री राम, जय श्री राम।) ओडिशा को अब BJD की Slow रफ्तार सरकार पीछे छोड़कर डबल इंजन वाली भाजपा सरकार चुननी है। और मेरा आपसे आग्रह है अभी मीडिया वालों ने, कुछ लोगों ने शुरू कर दिया है कि यहां हंग असेंबली बनेगी, हंग असेंबली बनेगी। यह सरासर गपबाजी है, यहां भाजपा की पूर्ण बहुमत वाली सरकार बनने वाली है। और भाजपा ही अगले 25 वर्ष में उड़ीसा को विकास की नई ऊंचाई पर पहुंचाएगी।

साथियों,

ओडिशा, BJD के भ्रष्टाचारी रैकेट से यहां के लोग तंग आ गए हैं। जो BJD, चिटफंड जैसे फर्ज़ीवाड़े से गरीब लोगों को धोखा देती है, BJD ने ओडिशा को क्या दिया? अगर BJD ने ओडिशा को दिया है तो Land mafia दिया है, sand mafia दिया है, coal mafia दिया है, mining mafia दिया है। BJD के विधायक और मंत्री 24X7 इसी में लगे हुए हैं। ऐसे में यहां इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास संभव है क्या? संभव है क्या? यहां इन्वेस्टमेंट आ सकता है क्या? यहां रोज़गार बन सकता है क्या? मैं तो हैरान हूं, मेरे यहां गुजरात में शायद उड़ीसा का कोई ऐसा ब्लॉक नहीं होगा, वहां के लोग गुजरात में आकर के रोजी रोटी ना कमाते हों। जो प्रदेश इतना समृद्ध है उस प्रदेश को ऐसे बर्बाद करने वाले लोगों को यह चुनाव तो सजा करने के लिए चुनाव है उन लोगों को।

भाइयों और बहनों,

BJD सरकार कैसे काम करती है, इसका कच्चा-चिट्ठा अब जनता के सामने आ रहा है। जबसे मोदी सरकार बनी है, तबसे ओडिशा के विकास के लिए मैंने रिकॉर्ड पैसा दिल्ली से यहां भेजा है, पहले टैक्स का जितना पैसा केंद्र सरकार से ओडिशा को आता था, मोदी ने उससे 3 गुना ज्यादा पैसा ओडिशा को दिया है। कांग्रेस की सरकार के दौरान जब पुरानी खनन नीति थी तब ओडिशा को करीब 5 हज़ार करोड़ रुपए मिलते थे। मोदी ने नई खनन नीति बनाई। आज ओडिशा को खनन से ही लगभग 50 हज़ार करोड़ रुपए की आय हो रही है। अब आप सोचिए कांग्रेस के जमाने में 5000 करोड़, मोदी के जमाने में 50 हजार करोड़ रुपया यहां मिलता है इसके अतिरिक्त डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन के तहत भी ओडिशा को 26 हज़ार करोड़ रुपए से अधिक मिल चुके हैं। यानि मोदी सरकार यहां पहले के मुकाबले कई गुना ज्यादा पैसा भेज रही है। लेकिन ओडिशा में BJD की भ्रष्ट सरकार इस पैसा का गोलमाल कर रही है। मैं ओडिशा के करीब-करीब हर जिले में जा चुका हूं। यहां सड़क, बिजली, पानी, स्कूल-कॉलेज, अस्पताल हर चीज़ का अभाव है। तो ये पैसा किसकी जेब में गया? यहां कटक में ही देखिए, जलभराव का कितना बड़ा संकट हर साल रहता है? मैं यहां हाईवे के, रेलवे के इतने सारे प्रोजेक्ट्स भेजता हूं। लेकिन BJD के नेताओं को जब तक कट-कमीशन नहीं मिलता तब तक वो हर प्रोजेक्ट को लटकाए रखते हैं। BJD नेता, अपने करीबी ठेकेदारों को ही ठेके दिलवाकर, आपको हर तरफ से लूट रहे हैं। आप मुझे बताइए, ओडिशा के साथ ये लूट बंद होनी चाहिए या नहीं? ऐसा नहीं दोनों हाथ ऊपर करके पूरी ताकत से बताइए ये लूट बंद होनी चाहिए? यह लूट बंद होनी चाहिए? यह लूट कौन बंद करेगा? यह लूट बंद कौन करेगा? यह लूट बंद कौन करेगा? मोदी मोदी को मत करो, यह आपका एक वोट है ना वो ये लूट बंद करेगा। आपके वोट की ताकत है जो उड़ीसा का भाग्य बदल सकती है।

भाइयों और बहनों,

BJD के इस भ्रष्टाचार का बहुत बड़ा नुकसान आप नौजवानों को ही हो रहा है। यहां से नौजवानों को पलायन करना पड़ता है। BJD सरकार यहां निवेश के लिए उचित माहौल नहीं बना पाई। एक माफिया है जो हर सेक्टर पर कब्ज़ा करके बैठा हुआ है, वो यहां कंपटीशन आने ही नहीं देता। 10 जून को हमारी सरकार आने दीजिए, भाजपा सरकार इस माफिया की कमर तोड़ने वाली है।

साथियों,

मोदी सरकार शिक्षा-कौशल विकास और आत्मनिर्भर भारत पर बल दे रही है। 10 साल में ओडिशा को IIM, आईजर ब्रह्मपुर… इंस्‍टीट्यूट ऑफ कैमिकल टैक्नॉलॉजी भुवनेश्वर, ऐसे अनेक संस्थान मिले। टेक्नॉलॉजी और टेक्सटाइल से लेकर इथेनॉल तक हर सेक्टर में मोदी सरकार ने बड़े लक्ष्य रखे हैं। इससे कटक में भी उद्योगों की संभावनाएं बढ़ेंगी। और अभी हमारे मित्र महताब जी मुझे बता रहे थे यहां पहले इतने उद्योग थे, एक के बाद एक सबको ताले लग गए। यहां का आर्थिक जीवन तबाह हो गया और इससे यहां के नौजवानों को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। और इसलिए साथियों, हमें यहां निवेश चाहिए, हमें उद्योग चाहिए, हमें पुराने उद्योगों का पुनर्जीवन चाहिए। साथियों और वह जब होगा और मैं आपको दिलाता हूं विश्वास, ये भाजपा में ताकत है वह कर सकती है। मैं उड़िया वासियों को वादा करता हूं, मेरे पास लंबे समय तक एक राज्य को चलाने का अनुभव है। भले मैं दिल्ली में प्रधानमंत्री रहूंगा लेकिन उड़ीसा में जो बीजेपी का मुख्यमंत्री बनेगा, उड़ीसा में जो बीजेपी की सरकार बनेगी उसको कभी भी कोई तकलीफ नहीं आने दूंगा।

साथियों,

BJD सरकार को कटक के लोगों की परेशानी से कोई सरोकार नहीं है। कटक चारों तरफ नदियों से घिरा है। लेकिन यहां पीने के पानी की समस्या है। मोदी नल से जल देना चाहता है लेकिन ये रोड़े अटकाते हैं। मोदी ने देश के गांव और शहरों में गरीबों के 4 करोड़ पक्के घर बनाए हैं। आने वाले सालों में 3 करोड़ और नए घर बनाने की गारंटी दी है। ओडिशा में भी करीब 30 लाख गरीबों के घर बने हैं। लेकिन BJD आपके लिए नए घर बनाने में लगातार अड़चनें पैदा कर रही है। गरीब को पक्का घर मिलने से रोके, ऐसा काम आपका दुश्मन ही कर सकता है।

भाइयों और बहनों,

आप यहां डबल इंजन की भाजपा सरकार बनाइए तो आपका बिजली का बिल भी ज़ीरो होगा और बिजली से कमाई भी होगी। ये कमाल मोदी सरकार की, पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना से होगा। और उसकी रजिस्ट्री चल रही है आप अभी भी रजिस्ट्री करवा सकते हैं ऑनलाइन जाकर के। घर की छत पर सोलर पैनल के लिए मोदी सरकार आपको 75 हजार रुपये से ज्यादा देगी हर घर के ऊपर। और अतिरिक्त बिजली भाजपा सरकार यहां जो बनेगी वह आपसे खरीदेगी। अब मुझे बताइए आपको डबल मुनाफा हुआ कि नहीं हुआ। डबल फायदा हुआ कि नहीं हुआ। पैसे की बचत हुई कि नहीं हुई। वह पैसे आपके बच्चों के काम आएंगे कि नहीं आएंगे?

साथियों,

ओडिशा भाजपा ने माताओं-बहनों के लिए जो गारंटियां दी हैं, आज उनकी पूरे देश में चर्चा हो रही है। सुभद्रा योजना से माताओं-बहनों को बहुत मदद मिलेगी। आप कल्पना कीजिए, 10 साल पहले तक माताओं-बहनों के बैंक खाते तक नहीं थे। अब ऐसी-ऐसी शानदार योजनाएं भाजपा माताओं-बहनों के नाम पर ला रही हैं। मोदी की एक और गारंटी, देश की 3 करोड़ बहनों को लखपति दीदी बनाने का मेरा संकल्प है। तीन करोड़ लखपति दीदी बनेगी, आप कल्पना कर सकते हैं हमारी इकोनॉमी कितनी तेज चलेगी। लखपति दीदियों ने हर साल एक लाख रुपये से ज्यादा की आय और वो भी स्वाभिमान के साथ। आशा और आंगनबाड़ी से जुड़ी बहनों के लिए भी ओडिशा भाजपा ने बहुत बड़ी घोषणा की है। आंगनबाड़ी से जुड़ी बहनों को 12 हज़ार रुपए तक की सैलरी मिलेगी, ये ओडिशा भाजपा ने कहा है। इसके साथ-साथ जब यहां आयुष्मान योजना लागू होगी तो कटक के किसी भी परिवार को अपने बुजुर्गों के इलाज के लिए कोई चिंता नहीं करनी पड़ेगी। ये दिल्ली में जो बेटा बैठा है न वो करेगा। बुजुर्गों को मुफ्त इलाज की गारंटी, ये मोदी की गारंटी है।

भाइयों और बहनों,

विकास और विरासत, ये भाजपा का एजेंडा है। आपने देखा कि दिल्ली में जो जी-20 का शिखर सम्मेलन हुआ, उसमें दुनियाभर के दिग्गज नेता आए थे और सबको मोदी ने कोणार्क के चक्र के सामने खड़ा किया। कोणार्क के चक्र के सामने फोटो निकाली और उनके घरों में आज कोणार्क का सूर्य चक्र पहुंच गया। इससे पूरी दुनिया में कोणार्क का गौरव बढ़ा है। लेकिन BJD सरकार को ओडिशा की धरोहर की कोई चिंता नहीं है। जगन्नाथ जी के श्री रत्न भंडार को लेकर जो कुछ हो रहा है, उससे पूरा ओडिशा बहुत गुस्से में है। अब लोग कहते हैं कि श्री रत्न भंडार की चाबी तमिलनाडु चली गई है। अभी किसने भेजी है भाई तलमलनाडु। ये तमिलनाडु कौन ले गया है। ऐसे लोगों को माफ करोगे क्या? जिस तरह श्री रत्न भंडार की चाबी खो गई और फिर जांच रिपोर्ट को दबा दिया गया और इस मामले पर बहुत बड़े गंभीर सवाल उठते हैं। लेकिन मैं उड़ीसा के मेरे भाई बहनों को कहना चाहता हूं, साथियों ये मोदी है मैं सोमनाथ की धरती से आया हूं। जगन्नाथ की धरती की पूजा कर रहा हूं और मेरे लिए जितने भगवान सोमनाथ दादा के आशीर्वाद है इतने ही महाप्रभु जगन्नाथ जी के आशीर्वाद है। मुझ पर सोमनाथ दादा का भी कर्ज है मुझ पर महाप्रभु जगन्नाथ जी का भी कर्ज है। और इसलिए मैं उड़ीसा के एक-एक नागरिक को गारंटी देता हूं आप आश्वस्त रहिए यहां भाजपा सरकार बनते ही यह चाबी का राज खोला जाएगा। जांच रिपोर्ट आपके सामने आएगी और अगर किसी ने गड़बड़ की है तो मोदी किसी को छोड़ता नहीं है।

भाइयों और बहनों,

ये चुनाव ओडिशा के विकास और ओडिया गौरव को बचाने का है। इसलिए, ये जितने भी हमारे साथी MLA का चुनाव लड़ रहे हैं। उन सबको चुन करके हमें ओडिशा की सरकार, बीजेपी की सरकार बनानी है। सारे एमएलए के उम्मीदवार आगे आ जाएं। एमएलए के उम्मीदवार आगे आ जाएं। यह चुनाव देश को एक मजबूत सरकार देने का भी है इसलिए कटक से मित्र भर्तृहरि महताब जी को इस बार बहुत बड़ी लीड से दिल्ली भेजना है और इनको मिला हर वोट सीधा-सीधा मोदी के खाते में आएगा। तो ज्यादा से ज्यादा मतदान कराएंगे, हर पोलिंग बूथ जीतेंगे।

बोलिए भारत माता की,

भारत माता की,

भारत माता की।

बहुत-बहुत धन्यवाद