Solutions to all the problems is in development: PM Modi in West Bengal

Published By : Admin | April 7, 2016 | 20:07 IST
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I have come here so ensure proper education for children, opportunities for youth and for development: PM Modi
I have only three agendas: Development, fast-paced development & all-round development
For 34 years the Left front ruled and ruined Bengal; TMC stands for Terror, Maut, Corruption: PM Modi
Left and Congress contest against one another in Kerala but in spite of ideological differnces are allies in West Bengal: PM
After coming to power, Mamata Di said Maa, Maati, Manush but now it's all about only Maut and Money: PM
Solutions to all the problems is in development: PM Modi in West Bengal
We will ensure overall development of Bengal and eliminate all the problems people face in the state: PM
 

मंच पर विराजमान सभी वरिष्ठ महानुभाव और विशाल संख्या में पधारे हुए आसनसोल के मेरे प्यारे भाईयों एवं बहनों 

आज मैं सुबह से पश्चिम बंगाल में दौरा कर रहा हूँ। टीवी पर आता है कि इस बार जून महीने में जो गर्मी पड़ती है, वो गर्मी अप्रैल महीने में शुरू हो गई है और इतनी भयंकर गर्मी के बीच पश्चिम बंगाल में चुनावी गर्मी है और आप लोगों का इतना जबर्दस्त उत्साह है। दिल्ली में बैठकर किसी को अंदाजा नहीं सकता कि पश्चिम बंगाल के चुनाव का मिजाज़ क्या है, यहाँ के लोगों का इरादा क्या है। मैंने ऐसा उत्साह पश्चिम बंगाल में कभी देखा नहीं था। मैं आप लोगों से एक शिकायत करना चाहता हूँ जब 2014 में लोकसभा का चुनाव था और मैं ख़ुद प्रधानमंत्री का उम्मीदवार था और इसी मैदान में आया था और तब इसकी आधी भीड़ भी नहीं थी। आज पश्चिम बंगाल का भविष्य तय करने के लिए आप जो उत्साह दिखा रहे हैं, ये मेरी शिकायत नहीं है, आपका अभिनंदन है। 

लेफ़्ट और टीएमसी और उसके पीछे भाग रही कांग्रेस, आने वाले दिनों में ये सभा देखने के बाद सोचेंगे कि कौन से गुंडे हैं जिनको आसनसोल भेजा जाए ताकि ये लोग मतदान न कर सकें, घपलेबाजी हो, हिंसा हो। ये सभा दीदी की भी नींद खराब कर देंगे और लेफ़्ट और सोनिया जी की भी नींद खराब कर देंगे। आप लोगों ने पूरे पश्चिम बंगाल को ये सन्देश दिया है कि अब पश्चिम बंगाल इन दोनों से मुक्ति चाहता है। क्या मिला पश्चिम बंगाल को? 34 साल तक लेफ्ट वालों ने बंगाल की प्रतिष्ठा, सम्मान को मिट्टी में मिला दिया और जब बाद में दीदी आई तो उन्होंने कहा था कि मां, माटी और मानुष लेकिन हमने 5 साल में हर दिन देखा – मौत का कारोबार, पैसों का कारोबार। 

यहाँ जिस प्रकार से बंगाल के लोगों के साथ धोखा किया गया, शारदा चिटफंड को कोई भूल सकता है क्या? गरीबों के पैसे डूबे हैं और ये पाप करने वाले जेलों में होने चाहिए थे, दीदी को ऐसे लोगों के खिलाफ़ कठोर कदम उठाने चाहिए थे लेकिन उन्होंने कुछ नहीं किया। ये सरकार गरीबों का धन लूटने वालों पर मेहरबानी करने वाली सरकार है। गरीब बेचारा कुछ सपने देखकर पैसे रखता था, बेटी की शादी हो या बच्चों की पढ़ाई लेकिन इन लुटेरों ने गरीब के पैसे हज़म कर लिये और उन्हें बेघर बना दिया। 

जब अच्छी एवं ईमानदार सरकार होती है तो गरीबों के लिए विभिन्न कल्याणकारी योजनाएं बनाती हैं। इन्होंने चिटफंड चलाया और हम प्रधानमंत्री जन-धन योजना लेकर आए; उन्होंने चिटफंड के नाम पर गरीबों से पैसे बनाए और हमने बिना पैसे गरीबों के खाते खोल दिए और मुफ़्त में अकाउंट खोलने की व्यवस्था कर दी। हमने गरीबों को रूपये कार्ड दिया ताकि उनके परिवार में कभी कोई संकट आ गया तो उसमें 2 लाख का बीमा होगा और परिवार को ये पैसा मिल जाएगा। अनेकों को ये मिला भी और जन-धन योजना के तहत हमने हिंदुस्तान के करोड़ों गरीबों के लिए बैंक के दरवाजे खोल दिए। असम हो, उड़ीसा हो, बंगाल हो, इन्होंने कहीं के गरीबों को नहीं छोड़ा। गरीबों को लूटने वालों को क्या चुनाव जीतना चाहिये? 

मैं आज आपसे आग्रह करने आया हूँ कि जिन-जिन लोगों ने गरीबों के पेट पर लात मारी है, ऐसे लोगों को इस चुनाव में एक पल के लिए भी स्वीकार नहीं करना चाहिए। 34 साल तक बंगाल में लेफ़्ट वालों की सरकार रही और उन्होंने बंगाल को बर्बाद कर दिया। दूर जाने की जरुरत नहीं है, 5 साल पहले चुनाव में कांग्रेस के नेता ने लेफ़्ट के खिलाफ़ क्या-क्या बोला था, ये आप वीडियो निकाल के सुन लो तो पता चल जाएगा कि लेफ़्ट वाले क्या करते थे और ये अजूबा देखो कि कांग्रेस वाले लेफ़्ट का कुर्ता पकड़ कर चल पड़े। जिस कांग्रेस पार्टी ने पहली बार केरल में लेफ़्ट की सरकार को धारा 356 लगाकर भंग कर दिया था और जिस कांग्रेस को लेफ़्ट के प्रति गुस्सा रहता था, आज पूरी कांग्रेस पार्टी लेफ़्ट के चरणों में जाकर बैठ गई है। ये जनता-जनार्दन जब देती है तो छप्पर फाड़कर देती है लेकिन जब ये लेती है तो कूड़े-कचरे की तरह साफ़ कर देती है। 

एक जमाना था जब कांग्रेस पार्टी 400 लोगों के साथ संसद में बैठती थी और जनता का गुस्सा ऐसा फूटा कि वे 40 पर आ गए। आज कांग्रेस की हालत देखो कि जीने-मरने के लिए लेफ़्ट के सामने झुकना पड़ा है और इनकी बेईमानी देखो - विचारधारा से अगर झगड़ा होता है तो ये केरल में भी होना चाहिए और वहां भी आमने-सामने लड़ना चाहिए लेकिन कांग्रेस का कमाल देखो कि केरल में वे कम्युनिस्ट को गाली दे रहे हैं और उनसे लड़ रहे हैं और बंगाल में कम्युनिस्ट को कंधे पर बिठाकर नाच रहे हैं। समझ नहीं आ रहा कि केरल में कुश्ती और बंगाल में दोस्ती? ये आप लोगों की आँखों में धूल झोंक रहे हैं। केरल में दोनों एक-दूसरे को गालियां देते हैं और बंगाल में कहते हैं कि बहुत अच्छे हैं और सबका भला करेंगे। 

एक जमाना था जब दीदी भ्रष्टाचार का नाम सुनती थी तो कुर्सी फेंक कर चली जाती थी लेकिन अब दीदी को क्या हो गया, ऐसा परिवर्तन कैसे आ गया। वो तो भ्रष्टाचार के खिलाफ़ रोड पर निकलती थीं, लाठियां झेलती थीं; आज इतना बड़ा स्कैंडल आ गया, टेंडर का सौदा होता है, नोटों की थप्पियाँ दी जा रही हैं और सब कैमरा पर है लेकिन इसके बावजूद दीदी ने कोई कदम नहीं उठाया। इसका मतलब है कि अब दीदी भ्रष्टाचार से एडजस्ट हो गई हैं; अब दीदी को ये सब ठीक लग रहा है। ये लुटते रूपये जनता के हैं और ये लूट बंद होना चाहिए। ये चुनाव एक ऐसा मौका है जब ऐसा करने वालों को राजनीति से हमेशा के लिए विदा कर देना चाहिए। 

मैं कभी कभी सोचता हूँ कि ये टीएमसी क्या है – टी फॉर टेरर, एम फॉर मौत और सी फॉर करप्शन। पांच सालों में टीएमसी का यह सीधा-सीधा मतलब निकल कर आया है। जब हम छोटे थे और लेफ़्ट वाले चुनाव जीतते थे तो हम लोगों से पूछते थे कि ये लेफ़्ट वाले चुनाव कैसे जीतते हैं तो समझदार लोग मुझे बताते थे कि यहाँ का चुनाव साइंटिफिक रिजीम करके जीता जाता था। साइंटिफिक रिजीम तो मैंने सुना था लेकिन दीदी के राज़ में मैं देख रहा हूँ - साइंटिफिक करप्शन। टेंडर का कारोबार टेंडर निकलने से पहले तय हो जाता है। 

अभी कोलकाता में करप्शन का भंडा फूट गया। विवेकानंद ब्रिज अनेकों की ज़िन्दगी को तबाह कर गया जिन्होंने अपनों को खोया है, उनके प्रति मेरी संवेदना है लेकिन दीदी मौत पर भी राजनीति कर रही हैं। ब्रिज गिरा है, लाशें पड़ी हैं, घायल लोग कराह रहे हैं और दीदी मदद करने के नाम पर कुछ नहीं बोलती हैं और कहती हैं इस ब्रिज का कॉन्ट्रैक्ट तो लेफ़्ट वालों ने दिया था। मैं पूछता हूँ कि अगर ये ब्रिज बन जाता तो आप उद्घाटन करने जाती कि नहीं और आप ब्रिज बनाने के क्रेडिट लेने की कोशिश करती कि नहीं। अगर लेफ़्ट वालों ने पाप किया तो उस पाप को आपने आगे क्यों बढ़ाया। पूरे पश्चिम बंगाल में जो लेफ़्ट वाले करके गए, उसे ही आगे बढ़ाने का काम दीदी कर रही हैं और इसलिए पश्चिम बंगाल को लेफ़्ट और दीदी, दोनों से मुक्ति चाहिए। 

जिस प्रकार से टेरर का माहौल बनाया जा रहा है, अपने विरोधियों को ख़त्म करने की कोशिश हो रही है, ये लोकतंत्र और उसके प्रति आस्था का प्रतीक नहीं है। इस चुनाव में जो डिबेट चल रही है, उससे मैं हैरान हूँ। वो पूछते हैं कि ममता जी के राज़ में कितनी हत्याएं हुईं तो ममता जी कहती हैं कि आपके राज़ में इतनी हत्याएं हुईं, लेफ़्ट वाले कहते हैं कि आपके ज़माने में इतनी बलात्कार की घटनाएँ हुईं तो ममता जी कहती हैं कि आपके ज़माने में इतनी हुईं, दोनों के बीच दंगों की गिनती हो रही है। मैं पूछता हूँ कि चुनाव में यही डिबेट चलेगा क्या? ये आरोप-प्रत्यारोप गलत है। अच्छा होता कि ये कहते कि लेफ़्ट वालों ने इतना रास्ता बनाया था और हमने उससे ज्यादा बना दिया; लेफ़्ट वालों ने इतने स्कूल खोले थे और हमने उससे ज्यादा स्कूल खोल दिए, ये स्पर्धा होनी चाहिए थी लेकिन यहाँ स्पर्धा इस बात की हो रही है कि कौन ज्यादा बुरा है। 

भाईयों-बहनों, हमारी सरकार को 2 साल होने को आए हैं। आपने कभी अपने सांसद बाबुल सुप्रियो जो मेरी सरकार में महत्वपूर्ण मंत्री हैं, उनके ऊपर एक भी आरोप सुना है क्या? 2 साल से हम बैठे हैं, हमने एक भी पाप नहीं किया, ऐसे सरकार चलाई जाती है। हमारी सभी समस्याओं का समाधान चुनावी खोखलेबाजी से नहीं होने वाला है। मेरा 3 एजेंडा है – पहला विकास, दूसरा तेज़ गति से विकास और तीसरा चारों तरफ विकास, जिस पर मैं पिछले साल से काम कर रहा हूँ और यहाँ भी करना चाहता हूँ। आप मुझे सेवा करने का मौका दीजिए। हमारी सभी समस्याओं का समाधान विकास में है। 

आप हैरान होंगे कि ये पश्चिम बंगाल इतना प्यारा और प्रगतिशील था कि अंग्रेजों को भी कोलकाता में आकर अपना काम करने का मन कर गया था, ऐसा शानदार और जानदार हुआ करता था हमारा बंगाल। बंगाल पूरे देश को दिशा दिखाता था लेकिन आज इस बंगाल की स्थिति देखिये। सुभाष भाई के भतीजे, चन्द्र कुमार बोस भाजपा से चुनाव लड़ रहे हैं और दीदी ऐसी घबरा गई हैं और दीदी ने ऐसा टेरर दिया है कि कोई चन्द्र बोस को दफ्तर खोलने की जगह नहीं दे रहा है। लोग कहते हैं कि हम वोट दे देंगे लेकिन जब तक दीदी हैं तब तक हम आपको मकान नहीं दे पाएंगे वर्ना हम जिंदा नहीं रह पाएंगे। ये लोकतंत्र है क्या? 

आसनसोल सुंदर नगरी के रूप में जाना जाता था। अभी भारत सरकार पूरे देश में लगातार स्पर्धा करती है और ज्यूरी निष्पक्षता से उसकी जाँच करती है। 2016 के शुरू में इस देश के 72 शहरों में सफ़ाई को लेकर स्पर्धा हुई। दो महीने का समय दिया गया कि आपको क्या-क्या करना है। आपको जानकर दुःख होगा कि आसनसोल उस सूची में नीचे से दूसरे पायदान पर था। दीदी ने आसनसोल को ऐसा बना दिया कि पूरे हिंदुस्तान में इसकी इज्ज़त को मिट्टी में मिला दिया। आसनसोल एक औद्योगिक नगरी रही है, साफ़-सुथरा होना चाहिए लेकिन न बंगाल की सरकार को परवाह है और न यहाँ बैठे हुए लोगों को परवाह है। 

मैं कहता हूँ कि आप इन लोगों से मुक्ति लेकर बंगाल में भाजपा को स्वीकार करें। दिल्ली पूरी ताक़त लगाएगा और जितनी बुराईयाँ यहाँ पिछले कई वर्षों से हैं, उसे निकालने के लिए मैं कंधे से कंधा मिलकर काम करूँगा। साइंटिफिक रिजीम और साइंटिफिक करप्शन; पश्चिम बंगाल में सिंडिकेट के नाम पर सारा कारोबार हड़प लिया जाता है। कोयले की कालाबाजारी में सिंडिकेट का क्या नाता है और ये सिंडिकेट लेफ़्ट वालों ने शुरू किया और तृणमूल वालों ने उसे आगे बढ़ाया है। मैंने पहले भी कहा है कि जिन्होंने देश का कोयला भी नहीं छोड़ा, उन्हें हम नहीं छोड़ेंगे। आपने कुछ दिन पहले देखा होगा कि कोयले की कालाबाजारी करने वाले कुछ लोगों को सजा भी हो गई और जेल भी हो गया और अब आगे औरों की भी बारी है। 

हमने करप्शन के खिलाफ़ लड़ाई चलाई है और मैं जानता हूँ कि मैं जितना इन चीजों को ठीक करता हूँ, उतना इन लोगों को परेशानी ज्यादा होती है। इसलिए वे जोर से चिल्लाते हैं क्योंकि उनको पता है कि अब उनके जेल में जाने के दिन आ रहे हैं। विकास की बात को छोड़कर और बातें जो उठाई जा रही हैं, उसका मूल कारण यही है कि मुसीबत अब उनके कदमों तक पहुँचने की तयारी कर रही है। कहीं भी जोर से आवाज़ सुनाई दे तो समझ लेना कि मोदी ने कोई ऐसा कदम उठाया है जिससे बेईमान लोगों के लिए परेशानी आनी शुरू हो गई है। 

मैं आपके पास वोट मांगने आया हूँ। मुझे वोट चाहिए – बच्चों की पढ़ाई के लिए, नौजवानों की कमाई के लिए, बुजुर्गों की दवाई के लिए, अच्छी शिक्षा के लिए, अच्छे जीवन के लिए, विकास के लिए। आप पूरी तरह समर्थन देकर भाजपा के उम्मीदवारों को विजयी बनाईए। 

बहुत-बहुत धन्यवाद!
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হিমাচল প্রদেশের বিলাসপুরে বিবিধ উন্নয়নমূলক প্রকল্পের উদ্বোধন উপলক্ষে প্রধানমন্ত্রীর ভাষণ
October 05, 2022
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PM lays foundation stone of project for four laning of National Highway worth over Rs 1690 crores
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জয় মাতা নয়না দেবী, জয় বজিয়ে বাবা। 

বিলাসপুরে এসেছি, আমার জীবন ধন্য হয়ে গেছে। আজ শুভ দশহরা, এই পবিত্র উৎসব উপলক্ষে মা নয়না দেবীর আশীর্বাদ পাওয়া আর আপনাদের মতো ভক্তদের সঙ্গে সাক্ষাতের সৌভাগ্য আমার হয়েছে। আপনাদের সকলকে আমার ‘রাম রাম’। কনে এইমস্‌ – এর জন্য আপনাদের সকলকে অনেক অনেক শুভেচ্ছা। 

হিমাচল প্রদেশের রাজ্যপাল মাননীয় শ্রী আরলেকরজী, হিমাচল প্রদেশের জনপ্রিয় মুখ্যমন্ত্রী শ্রী জয়রাম ঠাকুরজী, ভারতীয় জনতা পার্টির জাতীয় সভাপতি, আমাদের সকলের পথপ্রদর্শক এবং এই ভূমির সন্তান শ্রী জে পি নাড্ডাজী আমার কেন্দ্রীয় মন্ত্রিসভার সহযোগী ও সাংসদ শ্রী অনুরাগ সিং ঠাকুরজী, হিমাচল প্রদেশ ভারতীয় জনতা পার্টির অধ্যক্ষ ও সংসদে আমার সঙ্গী শ্রী সুরেশ কশ্যপজী, সাংসদ কিষাণ কাপুরজী, ভগিনী ইন্দু গোস্বামীজী, ডঃ সিকান্দর কুমারজী, অন্য মন্ত্রী, সাংসদ ও বিধায়কগণ আর এখানে আমাদের সবাইকে আশীর্বাদ দেওয়ার জন্য বিপুল সংখ্যায় সমাগত আমার প্রিয় হিমাচল প্রদেশের ভাই ও বোনেরা! আপনাদের সকলকে দেশবাসীকে বিজয়া দশমী উপলক্ষে অনেক অনেক শুভেচ্ছা। 

এই পবিত্র উৎসব সমস্ত অশুভ শক্তির বিরুদ্ধে জয়, অমৃতকালের জন্য আমরা যে ৫টি সংকল্প দেশের জন্য নিয়েছি, সেই সংকল্পগুলি বাস্তবায়নের লক্ষ্যে নতুন প্রাণশক্তি সঞ্চার করবে। আমার সৌভাগ্য যে আজ এই বিজয়া দশমীর দিনে হিমাচল প্রদেশের জনগণের উদ্দেশে স্বাস্থ্য, শিক্ষা, কর্মসংস্থান ও পরিকাঠামো খাতে কয়েক হাজার কোটি টাকার প্রকল্পগুলি উপহার দেওয়ার সু্যোগ পেয়েছি। আর সুযোগ পেয়েছি, এই বিজয়া দশমীর দিনেই বিজয়ার রণসিঙ্গাতে ফু দেওয়া, যা ভবিষ্যতে সমস্ত বিজয়ের সম্ভাবনাকে সূচিত করছে। বিলাসপুর তো শিক্ষা ও স্বাস্থ্য পরিষেবার ‘ডবল গিফ্‌ট’ পেয়েছে। কহলু’তে বন্দলে ধারার উপরে হাইড্রো কলেজ আর নীচে কনে’তে এইমস্‌ হাসপাতাল - এই দুটি এখন থেকে এই এলাকার পরিচয় হয়ে উঠবে। 

ভাই ও বোনেরা, 

এখানে এই উন্নয়নমূলক প্রকল্পগুলি আপনাদের উদ্দেশে সমর্পণের পর, যেমন জয়রামজী একটু আগেই বললেন, আমরা আরেকটি সাংস্কৃতিক ঐতিহ্যের সাক্ষী হয়ে উঠতে চলেছি। এছাড়া, অনেক বছর পর আমার আরেকবার কুল্লুর বিখ্যাত দশহরা উৎসবে অংশগ্রহণের সৌভাগ্য হবে। কয়েকশো দেবদেবীর সঙ্গে ভগবান রঘুনাথজীর যাত্রা সমারোহে সামিল হয়ে আমি দেশের জন্যও আশীর্বাদ প্রার্থনা করবো। আর আজ যখন বিলাসপুরে এসেছি, তখন অনেক পুরনো স্মৃতি জেগে ওঠা অত্যন্ত স্বাভাবিক। একটা সময় ছিল, যখন আমি এখানে ধুমলজী ও নাড্ডাজীর সঙ্গে পায়ে হেঁটে বাজার করতাম, ঘুরে বেড়াতাম। আমরা এখানে একটি বড় রথযাত্রা কর্মসূচিতে বিলাসপুরের অলিগলিতে শোভাযাত্রা করেছি। আর স্বর্ণ জয়ন্তী রথযাত্রা হ’ল, সেটিও এখানকার মেইন মার্কেট হয়ে এগিয়েছে এবং সেখানে একটি জনসভাও হয়েছিল। এছাড়াও, অনেকবার আমি এখানে এসেছি, আপনাদের সঙ্গে থেকেছি। 

হিমাচলের এই ভূমিতে কাজ করার সময় ক্রমাগত হিমাচল প্রদেশে উন্নয়ন যাত্রার সহযোগী হওয়ার সৌভাগ্য হয়েছে। একটু আগেই অনুরাগজী, আমাদের নাড্ডাজী এবং আমাদের মুখ্যমন্ত্রী জয়রামজী তাঁদের ভাষণে আমার প্রশংসায় পঞ্চমুখ হয়ে বলছিলেন যে, মোদীজী এটা করেছিলেন – ওটা করেছিলেন – এটা বলেছিলেন – ওটা বলেছিলেন। কিন্তু আমি সত্যি কথা বলছি, এখানে যা কিছু হচ্ছে, তা আমি নই, আপনারাই করেছেন, আপনাদের জন্যই হয়েছে। যদি আপনারা আমাকে আশীর্বাদ দিয়ে দিল্লিতে না পাঠাতেন, তা হলে এসব সম্ভব হ’ত না, আর হিমাচল প্রদেশে আমার সঙ্গী-সাথীদের যদি আশীর্বাদ না দিতেন, তা হলে অন্যরা এত দ্রুত এসব কাজ হতে দিত না। এসব তো জয়রামজী ও তাঁর টিম তৎপরতা দেখিয়ে দিল্লি থেকে আদায় করে ছেড়েছেন। এই এইমস্‌ হাসপাতাল, এখানকার সুড়ঙ্গ আপনাদের ভোটের শক্তিতেই হয়েছে। এই হাইড্রো ইঞ্জিনিয়ারিং কলেজ আর এই মেডিকেল ডিভাইস পার্কও আপনাদের ভোটের শক্তিতেই হয়েছে। সেজন্য আজ হিমাচল প্রদেশের প্রত্যাশাগুলির দিকে লক্ষ্য রেখে আমরা একের পর এক উন্নয়ন কর্মসূচি এগিয়ে নিয়ে যেতে পারছি। 

উন্নয়ন নিয়ে আমাদের দেশে দীর্ঘ সময় ধরে একটি বিকৃত ভাবনা প্রকট হয়ে উঠছিল। ভালো সড়ক, ভালো শিক্ষা প্রতিষ্ঠান, ভালো হাসপাতাল শুধু কিছু কিছু রাজ্যের রাজধানী আর দিল্লির আশেপাশে নির্মিত হ’ত। এর বাইরে হ’তই না। ব্যবসা-বাণিজ্য শিল্প প্রতিষ্ঠানও শুধু কিছু কিছু রাজ্যের রাজধানী আর দিল্লির আশেপাশে গড়ে উঠত। বিশেষ করে, দেশের পাহাড়ি রাজ্য ও প্রত্যন্ত এলাকাগুলিতে মৌলিক সুযোগ-সুবিধা দীর্ঘকাল অপেক্ষার পর পৌঁছতো। সেই পুরনো ভাবনার ফলেই দেশের উন্নয়নের ক্ষেত্রে একটি ভারসাম্যহীনতা সৃষ্টি হয়েছিল। এর ফলে, দেশের একটা বড় অংশ ও সেখানকার জনগণ অনেক সমস্যার সম্মুখীন হয়েছেন, অভাবের শিকার হয়েছেন। 

বিগত ৮ বছরে দেশ এখন সেই পুরনো ভাবনাকে পেছনে ফেলে নতুন ও আধুনিক ভাবনা নিয়ে এগিয়ে চলেছে। এখন দেখুন, দীর্ঘ সময় ধরে আমরা দেখেছি যে, এখানকার জনগণকে একটি বিশ্ববিদ্যালয়ের উপরই নির্ভরশীল থাকতে হ’ত। আর চিকিৎসা থেকে শুরু করে চিকিৎসা শাস্ত্র নিয়ে পড়াশুনা করতে হলে আইজিএমসি সিমলা এবং টাটা মেডিকেল কলেজের উপর নির্ভর করতে হ’ত। কোনও কঠিন রোগের চিকিৎসা আর শিক্ষা ও কর্মসংস্থানের জন্য হিমাচল প্রদেশের জনগণকে চন্ডীগড় কিংবা দিল্লি যেতে হ’ত। কিন্তু বিগত ৮ বছরে আমাদের ডবল ইঞ্জিন সরকার হিমাচলের উন্নয়ন গাথাকে নতুন মাত্রায় পৌঁছে দিয়েছে। আজ হিমাচলে কেন্দ্রীয় বিশ্ববিদ্যালয়, আইআইটি, আইআইআইটি এবং আইআইএম – এর মতো প্রতিষ্ঠানগুলিও গড়ে উঠেছে। দেশে চিকিৎসা শিক্ষা ও স্বাস্থ্যের সর্ববৃহৎ প্রতিষ্ঠান এইমস্‌-ও এখন বিলাসপুর তথা হিমাচল প্রদেশের জনগণের গর্বের বিষয় হয়ে উঠেছে। 

বিলাসপুর এইমস্‌ আরেকটি পরিবর্তনেরও প্রতীক। সেটি হ’ল – পরিবেশ-বান্ধব এইমস্‌। সমস্ত এইমস্‌ – এর মধ্যে সবচেয়ে সবুজ - প্রকৃতিপ্রেমী এইমস্‌। আমরা সকলে জানি, আগের সরকারগুলি ভোটের আগে শিলান্যাসের পাথর বসিতে যেত, আর ভোটের পর ভুলে যেত। আজও হিমাচল প্রদেশের অনেক জায়গায় এরকম পাথর খুঁজে বের করছেন আমাদের ধুমলজী। কোথায় কোথায় এরকম পাথর রয়েছে, কিন্তু কাজ হয়নি, সেগুলি খুঁজে সেই অসম্পূর্ণ উন্নয়নমূলক কাজগুলি সম্পূর্ণ করার লক্ষ্যে ধুমলজী কাজ করছেন। 

আমার মনে আছে, একবার রেলপথের সমীক্ষা করতে গিয়ে দেখি যে, আমাদের ঊনার কাছে একটি রেললাইন পাতার সিদ্ধান্ত নেওয়া হয়েছিল ৩৫ বছর আগে। সংসদে ঘোষণা হয়েছিল, তারপর সব ফাইল বন্ধ। হিমাচলের কথা কে মনে রাখবেন ভাই! কিন্তু, এই হিমাচলের সন্তান এই হিমাচলকে কখনই ভুলতে পারবেন না। আমাদের সরকারের পরিচয় হ’ল যে, আমরা যে প্রকল্পের শিলান্যাস করি, তার উদ্বোধনও করি। আটকে দেওয়া, ঝুলিয়ে রাখা, বিভ্রান্ত করার যুগ আমরা পেরিয়ে এসেছি বন্ধুগণ! 

বন্ধুগণ,

দেশ রক্ষার ক্ষেত্রে সর্বদাই হিমাচলের অনেক বড় অবদান ছিল। যে হিমাচল প্রদেশের সৈনিকরা গোটা দেশের সুরক্ষার জন্য জীবন উৎসর্গ করে, এখন থেকে সেই সৈনিকদের পরিবার ও আত্মীয় স্বজনদের চিকিৎসার জন্য এইমস্‌ - এর মতো বড় হাসপাতাল গুরুত্বপূর্ণ ভূমিকা পালন করবে। ২০১৪ সাল পর্যন্ত হিমাচল প্রদেশে মাত্র ৩টি মেডিকেল কলেজ ছিল। এর মধ্যে ২টি ছিল সরকারের। আর বিগত ৮ বছরে হিমাচলে আরও ৫টি নতুন সরকারি মেডিকেল কলেজ গড়ে উঠেছে। ২০১৪ সাল পর্যন্ত এই রাজ্যে পোস্ট গ্র্যাজুয়েট সহ ৫০০ জন পড়ুয়ার আসন ছিল। আজ সেই সংখ্যা বেড়ে দ্বিগুণেরও বেশি, ১ হাজার ২০০-রও বেশি হয়েছে। এবার এই এইমস্‌ থেকেও প্রতি বছর অনেক নতুন চিকিৎসক, নার্স ও অন্যান্য চিকিৎসা কর্মী পাশ প্রশিক্ষণ নেবেন। সেজন্য আমি জয়রামজী ও তাঁর টিমকে ভারত সরকার আরোগ্য মন্ত্রী ও আরোগ্য মন্ত্রককে বিশেষভাবে শুভেচ্ছা জানাচ্ছি। আমাদের নাড্ডাজী যখন স্বাস্থ্য মন্ত্রী ছিলনে, তখনই তিনি এই সিদ্ধান্ত নিয়েছিলেন, আমি শিলান্যাস করেছিলাম। এরপর তো নাড্ডাজী আরও বড় দায়িত্ব নিলেন। তারপর, এল ভয়ঙ্কর বিশ্বব্যাপী করোনা মহামারী। তখনও হিমাচলের পাহাড়ে এই উন্নয়নমূলক কাজগুলি থেমে থাকেনি। আপনারা সকলে জানেন, তখন এই কাজ করে যাওয়া কতটা কঠিন ছিল। একেকটি জিনিসকে পাহাড়ে তুলে আনতে কত না সমস্যার সম্মুখীন হতে হ’ত। যে কাজ সমতল এলাকায় ১ ঘন্টায় হয়ে যায়, সেই কাজ এই পাহাড়ে সম্পন্ন করতে এক দিন লেগে যায়। তা সত্ত্বেও কেন্দ্রীয় সরকারের আরোগ্য মন্ত্রক ও জয়রামজীর নেতৃত্বে রাজ্য সরকারের টিম এই কাজ করে দেখিয়েছে। আজ এইমস্‌ – এর শুভ উদ্বোধন হ’ল। কিছুদিন ধরেই এখানে বিশ্বমানের চিকিৎসা পরিষেবা প্রদান শুরু হয়ে গেছে। 

শুধু মেডিকেল কলেজ নয়, জীবনদায়ী ওষুধ প্রস্তুত এবং রোগ-প্রতিরোধক টিকা উৎপাদনের ক্ষেত্রেও হিমাচল প্রদেশের ভূমিকাকে অনেক গুণ বিস্তারিত করা হচ্ছে। বাল্ক ড্রাগস্‌ পার্ক গড়ে তোলার জন্য দেশের মাত্র ৩টি রাজ্যকে বেছে নেওয়া হয়েছে। এর মধ্যে হিমাচল অন্যতম। তাই, এটি এই রাজ্যের শিশুদের উজ্জ্বল ভবিষ্যৎ সুনিশ্চিত করারও শিলান্যাস। এভাবে আমরা বর্তমান প্রজন্মের পাশাপাশি, ভবিষ্যৎ প্রজন্মের কথা মাথায় রেখে কাজ করে চলেছি। 

আজ চিকিৎসায় আধুনিক প্রযুক্তির ব্যবহার বেড়েছে। আধুনিক প্রযুক্তির নানা সরঞ্জাম উৎপাদনের জন্য একই রকমভাবে মেডিকেল ডিভাইস পার্কের জন্য যে ৪টি রাজ্যকে বেছে নেওয়া হয়েছে, তার মধ্যেও হিমাচল প্রদেশ অন্যতম। এত বড় দেশ, এত জনসংখ্যা, আমার হিমাচল প্রদেশ তো অনেক ছোট রাজ্য। কিন্তু, এটি বীরদের ভূমি। আর আমি এই রাজ্যের রুটি খেয়েছি। এই ঋণ আমাকে শোধ করতেই হ’ত। এর ফলে, বিশ্বের অনেক বড় বড় মানুষ এখানে আসবেন। নালাগড়ে কয়েক হাজার কোটি টাকা বিনিয়োগে নির্মীয়মান এই মেডিকেল ডিভাইস পার্কের শিলান্যাসের মাধ্যমে একটি নতুন অধ্যায়ের সূচনা হ’ল। এর পাশাপাশি, অনেক আনুষঙ্গিক সরঞ্জাম উৎপাদনের জন্য অতিক্ষুদ্র, ক্ষুদ্র ও মাঝারি শিল্পোদ্যোগও এই এলাকায় গড়ে উঠবে। ফলে, এই এলাকায় হাজার হাজার নবীন প্রজন্মের মানুষের কর্মসংস্থান হবে। 

বন্ধুগণ, 

হিমাচল প্রদেশের আরেকটি দিক রয়েছে, যাতে উন্নয়নের অনন্ত সম্ভাবনা সুপ্ত রয়েছে। সেটি হ’ল – স্বাস্থ্য ও পর্যটন। এখানকার আবহাওয়া, প্রকৃতি, পরিবেশ, ভেষজ বৃক্ষ ও লতাগুল্ম – এই সব কিছু সুস্বাস্থ্যের অনুকুল। আজ ভারত স্বাস্থ্য ও পর্যটনের ক্ষেত্রে বিশ্বের একটি বড় আকর্ষণের কেন্দ্র হয়ে উঠছে। যখন দেশের নানা প্রান্ত এবং বিশ্বের বিভিন্ন দেশ থেকে মানুষ চিকিৎসার জন্য আসতে চাইবেন, তখন এখানকার প্রাকৃতিক সৌন্দর্য ও উন্নত চিকিৎসা পরিষেবার কথা জেনে তাঁরা আরোগ্য লাভের পাশাপাশি, পর্যটনের কথা মাথায় রেখেও এখানে আসতে চাইবেন। এভাবে হিমাচল দু’ভাবেই উপকৃত হবে। 

বন্ধুগণ, 

কেন্দ্রীয় সরকার চাইছে যে, গরীব ও মধ্যবিত্তদের সুলভে উন্নত চিকিৎসা হোক। আর সেই চিকিৎসার জন্য যেন তাঁদের দূরে না যেতে হয়। সেজন্য আজ এইমস্‌ মেদিকেল কলেজ ছাড়াও, প্রতিটি জেলা হাসপাতালে ‘ক্রিটিকাল কেয়ার’ পরিষেবা এবং গ্রামে গ্রামে ক্রমাগত হেলথ অ্যান্ড ওয়েলনেস সেন্টার গড়ে তোলার কাজে জোর দিয়েছে। আয়ুষ্মান ভারত যোজনার মাধ্যমে হিমাচল প্রদেশের অধিকাংশ পরিবার ৫ লক্ষ টাকা পর্যন্ত বিনামূল্যে চিকিৎসার সুবিধা পাচ্ছেন। 

ইতিমধ্যেই এই প্রকল্পের মাধ্যমে সারা দেশে ৩ কোটি ৬০ লক্ষেরও বেশি দরিদ্র রোগীরা বিনামূল্যে চিকিৎসা পেয়েছেন। এদের মধ্যে দেড় লক্ষেরও বেশি সুফলভোগী আমার হিমাচল প্রদেশে আত্মীয়-পরিজন। দেশের মধ্যে এই দরিদ্র ও মধ্যবিত্তদের চিকিৎসা খাতে সরকার ইতিমধ্যে ৪৫ হাজার কোটি টাকারও বেশি খরচ করেছে। এখন আয়ুষ্মান ভারত যোজনা না থাকলে আমার এই গরীব ও মধ্যবিত্ত পরিবারের মানুষকে এই চিকিৎসার জন্য নিজেদের পকেট থেকে প্রায় ৯০ হাজার কোটি টাকা খরচ করতে হ’ত। আমাদের এই উদ্যোগে দরিদ্র ও মধ্যবিত্ত পরিবারের সদস্যদের উন্নত চিকিৎসার পাশাপাশি, বিপুল পরিমাণ অর্থ সাশ্রয়ও হয়েছে। 

বন্ধুগণ, 

আমার জন্য আরেকটি খুশির বিষয় হ’ল – সরকারের এ ধরনের প্রকল্পগুলির মাধ্যমে সবচেয়ে বেশি উপকৃত হয়েছেন আমাদের মা-বোন-কন্যারা। আমরা সকলে জানি, শরীরে যত কষ্টই থাকুক না কেন, আমাদের মা-বোনেরা স্বভাবগত কারণে কাউকে সেটা বলেন না, সহ্য করে যান। নিরলস কাজ করে যান, গোটা পরিবারকে সামলান। তাঁরা ভাবেন যে, ঋণ করে আমার চিকিৎসা করলে ছেলেমেয়েদের ভরণ-পোষণের জন্য টাকা কোথায় পাব। সেজন্য তাঁরা নীরবে কষ্ট সহ্য করে যেতেন। কিন্তু, তাঁদের এই সন্তান দেশের প্রধানমন্ত্রী হয়ে তাঁদের এই কষ্ট মেনে নিতে পারেনি। সেই ভাবনা থেকেই আয়ুষ্মান ভারত যোজনার জন্ম। আমাদের মা ও বোনেদের জীবনে এত কষ্ট না সহ্য করতে হয়। আমরা দেখেছি, এই আয়ুষ্মান ভারত যোজনা চালু হওয়ার ফলে ৫০ শতাংশেরও বেশি সুফলভোগী হয়েছেন আমাদের মা-বোন-কন্যারা। 

বন্ধুগণ, 

শৌচালয় নির্মাণ থেকে শুরু করে স্বচ্ছ ভারত অভিযান, বিনামূল্যে রান্নার গ্যাস সিলিন্ডার সরবরাহের জন্য উজ্জ্বলা যোজনা, বিনামূল্যে স্যানিটারি ন্যাপকিন সরবরাহ অভিযান, মাতৃ বন্দনা যোজনার মাধ্যমে প্রত্যেক গর্ভবতী মহিলার পুষ্টি সুনিশ্চিত করতে হাজার হাজার টাকা সাহায্য এবং প্রত্যেক বাড়িতে নলবাহিত জল পৌঁছে দেওয়ার অভিযান – এইসব কিছু আমাদের মা-বোনদের কষ্ট দূর করার কথা ভেবে চালু করা হয়েছে। আমাদের ডবল ইঞ্জিন সরকারের অনেক বড় অগ্রাধিকার হ’ল – মা, বোন ও কন্যাদের সুখ, সুবিধা, সম্মান, সুরক্ষা এবং সুস্বাস্থ্য সুনিশ্চিত করা। 

কেন্দ্রীয় সরকারের যত প্রকল্প রয়েছে, সেগুলিকে জয়রামজী এবং তাঁর গোটা টিম দ্রুতগতিতে হিমাচল প্রদেশে বাস্তবায়িত করে চলেছে। প্রত্যেক বাড়িতে নলবাহিত জল পৌঁছে দেওয়ার কাজ কত দ্রুত সম্পন্ন হয়েছে, তা আপনারা সকলেই দেখেছেন। বিগত সাত দশকে হিমাচল প্রদেশে যত বাড়িতে নলের মাধ্যমে জল পৌঁছেছে, তার দ্বিগুণেরও বেশি বাড়িতে মাত্র গত তিন বছরে পৌঁছে দেওয়া হয়েছে। এই তিন বছরে হিমাচল প্রদেশে ৮ লক্ষেরও বেশি নতুন পরিবারকে নল বাহিত জল পৌঁছে দেওয়া হয়েছে। 

ভাই ও বোনেরা, 

এই সাফল্যের জন্য সারা দেশে জয়রামজী ও তাঁর টিম অত্যন্ত প্রশংসিত। এই প্রশংসা বিবিধ সামাজিক সুরক্ষার প্রকল্প বাস্তবায়ন থেকে শুরু করে কেন্দ্রীয় সরকারের বিভিন্ন প্রকল্পের বিস্তারকে সুসম্পন্ন করার জন্যও। আজ হিমাচল প্রদেশে সম্ভবত এমন কোনও পরিবার নেই, যার কোনও না কোনও সদস্য পেনশন পান না। বিশেষ করে, অসহায়, জটিল কোনও রোগে আক্রান্ত সদস্য যে পরিবারগুলিতে রয়েছেন, তাঁদের জন্য পেনশন সুনিশ্চিত করা এবং চিকিৎসার খরচ বহন করা – অত্যন্ত প্রশংসনীয়। হিমাচল প্রদেশের হাজার হাজার পরিবারের সদস্যরা ‘এক পদ, এক পেনশন’ বাস্তবায়নের সুফলও পাচ্ছেন। 

বন্ধুগণ, 

হিমাচল প্রদেশ আজ অনেক সুযোগ-সুবিধা ও সম্ভাবনার প্রদেশ। আরেকটি কারণে আমি জয়রামজীকে শুভেচ্ছা জানাতে চাই। তা হ’ল – টিকাকরণের সাফল্য। হিমাচল প্রদেশ দেশের প্রথম রাজ্য, যেখানে ১০০ শতাংশ করোনা টিকাকরণ সম্পন্ন হয়েছে। ‘চলছে, চলবে’ – এই মনোভাব নিয়ে কাজ করার মানসিকতার ঊর্ধ্বে উঠে আপনারা দৃঢ় সংকল্প হয়ে যা ভাবেন – সেটাই করেন। 

এই রাজ্যে এখন হাইড্রো ইলেক্ট্রিক প্রকল্পের মাধ্যমে যথেষ্ট বিদ্যুৎ উৎপাদন হয়। উর্বর মাটি থেকে পর্যাপ্ত পরিমাণ ফল ও সব্জি উৎপাদিত হয়। আর এই রাজ্যে পর্যটন শিল্পে রয়েছে পরিসীম কর্মসংস্থানের সম্ভাবনা। এই সম্ভাবনাগুলি উন্নত যোগাযোগ ব্যবস্থার অভাবে বাস্তবায়িত করা যাচ্ছিল না। ২০১৪ সালের পর থেকে হিমাচল প্রদেশের গ্রামে গ্রামে যোগাযোগ ব্যবস্থার উন্নত পরিকাঠামো গড়ে তোলার কাজ চলছে। হিমাচল প্রদেশের সর্বত্র সড়ক প্রশস্তিকরণের কাজও চলছে। এই যোগাযোগ ব্যবস্থা উন্নয়ন খাতে ৫০ হাজার কোটি টাকারও বেশি খরচ করা হচ্ছে। পিঞ্জর থেকে নালাগড় মহাসড়ককে চারলেনে পরিণত করার কাজ যেদিন সম্পন্ন হবে, সেদিন নালাগড় ও বদ্দির শিল্পাঞ্চলগুলি যেমন লাভবান হবে, তেমনই চন্ডীগড় ও আম্বালা থেকে বিলাসপুর মান্ডি এবং মানালির দিকে যাঁরা সফর করবেন, তাঁরাও উন্নত পরিষেবা পাবেন। শুধু তাই নয়, আঁকা-বাঁকা পথ ধরে দীর্ঘ পথ সফরের সময় ও অর্থ সাশ্রয়ের জন্য গোটা হিমাচল প্রদেশে অনেক সুড়ঙ্গ পথ তৈরি করা হচ্ছে। 

বন্ধুগণ, 

ডিজিটাল যোগাযোগ ব্যবস্থা বিস্তারের ক্ষেত্রেও হিমাচল প্রদেশে বিগত ৮ বছরে অভূতপূর্ব কাজ হয়েছে। ভারতে তৈরি মোবাইল ফোন সুলভে পাওয়া যাচ্ছে। আর গ্রামে গ্রামে মোবাইল নেটওয়ার্ক পৌঁছেছে। উন্নত ফোর-জী যোগাযোগ ব্যবস্থার কারণে হিমাচল প্রদেশ ডিজিটাল লেনদেনের ক্ষেত্রেও দ্রুতগতিতে এগিয়ে চলেছে। ডিজিটাল ইন্ডিয়া প্রকল্পে দেশে সর্বাধিক উপকৃত রাজ্যগুলির মধ্যে আমার হিমাচল প্রদেশ অন্যতম। তা না হলে, নানা ধরণের বিল মেটানো থেকে শুরু করে, ব্যাঙ্কের কাজ, নানা ভর্তির ফর্ম, নানা প্রকার দরখাস্ত ভরা এরকম ছোট ছোট কাজের জন্য পাহাড় থেকে সমতলে আসতে হ’ত, বিভিন্ন অফিস ঘুরে ঘুরে জুতোর শুকতলা খসাতে হ’ত। একদিনে কাজ না হলে রাতে থেকে যেতে হ’ত। এখন দেশে প্রথমবার ভারতে তৈরি ফাইভ-জি মোবাইল পরিষেবাও শুরু হয়ে গেছে। অতিসত্ত্বর এর মাধ্যমে হিমাচল প্রদেশের মানুষ অনেক উপকৃত হবেন। 

ভারতে আগে ড্রোন নিয়ে যেত বাধা-নিষেধ ছিল, সেই নিয়ম পরিবর্তন করার পর, যে রাজ্যগুলি অনেক উপকৃত হয়েছে, হিমাচল তার অন্যতম। দেশে হিমাচল প্রদেশই প্রথম রাজ্য, যেখানে রাজ্যের জন্য ড্রোন নীতি রচনা করা হয়েছে। এখন ড্রোনের মাধ্যমে পণ্য পরিবহণ ক্রমে বাড়ছে। এর ফলে, যেমন কিন্নৌর থেকে আলু ড্রোনের মাধ্যমে তুলে এনে দ্রুত বড় বাজারে পৌঁছে দেওয়া যাচ্ছে, তেমনই রাজ্যের বিভিন্ন প্রান্ত থেকে ড্রোনের মাধ্যমে দ্রুত পচনশীল ফল তাজা অবস্থাতেই বাজারে পৌঁছে দেওয়া যাচ্ছে। ক্রেতা ও বিক্রেতা উভয়ই লাভবান হচ্ছেন। এ ধরনের উন্নয়নে প্রত্যেক নাগরিকের সুবিধা হচ্ছে। প্রত্যেকেই যাতে সমৃদ্ধ হন, সেই চিন্তা মাথায় রেখে আমাদের ডবল ইঞ্জিন সরকার কাজ করে চলেছে। এভাবেই আমরা উন্নত ভারত, উন্নত হিমাচল প্রদেশের সংকল্পকে বাস্তবায়িত করব। 

আমি অত্যন্ত আনন্দিত যে, বিজয়া দশমীর এই পবিত্র উৎসবে বিজয়নাদ ও রণসিঙ্গাতে ফু দিয়ে বিজয়ের সম্ভাবনা সুদৃঢ় করার সৌভাগ্যও আমার হয়েছে। আর এই সবকিছু আপনাদের সকলের এত ভালোবাসা ও আশীর্বাদের ফলেই সম্ভব হয়েছে। আমি আরেকবার এইমস্‌ সহ সমস্ত উন্নয়ন প্রকল্পের জন্য আপনাদের সকলকে অনেক অনেক শুভেচ্ছা জানাই। আপনারা সবাই আমার সঙ্গে দু’হাত তুলে উচ্চস্বরে বলুন – ভারতমাতা কি জয়, আরে উচ্চস্বরে বলুন – 

ভারতমাতা কি জয়,

ভারতমাতা কি জয়, 

ভারতমাতা কি জয়।

অনেক অনেক ধন্যবাদ