Solutions to all the problems is in development: PM Modi in West Bengal

Published By : Admin | April 7, 2016 | 20:07 IST
ସେୟାର
 
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I have come here so ensure proper education for children, opportunities for youth and for development: PM Modi
I have only three agendas: Development, fast-paced development & all-round development
For 34 years the Left front ruled and ruined Bengal; TMC stands for Terror, Maut, Corruption: PM Modi
Left and Congress contest against one another in Kerala but in spite of ideological differnces are allies in West Bengal: PM
After coming to power, Mamata Di said Maa, Maati, Manush but now it's all about only Maut and Money: PM
Solutions to all the problems is in development: PM Modi in West Bengal
We will ensure overall development of Bengal and eliminate all the problems people face in the state: PM
 

मंच पर विराजमान सभी वरिष्ठ महानुभाव और विशाल संख्या में पधारे हुए आसनसोल के मेरे प्यारे भाईयों एवं बहनों 

आज मैं सुबह से पश्चिम बंगाल में दौरा कर रहा हूँ। टीवी पर आता है कि इस बार जून महीने में जो गर्मी पड़ती है, वो गर्मी अप्रैल महीने में शुरू हो गई है और इतनी भयंकर गर्मी के बीच पश्चिम बंगाल में चुनावी गर्मी है और आप लोगों का इतना जबर्दस्त उत्साह है। दिल्ली में बैठकर किसी को अंदाजा नहीं सकता कि पश्चिम बंगाल के चुनाव का मिजाज़ क्या है, यहाँ के लोगों का इरादा क्या है। मैंने ऐसा उत्साह पश्चिम बंगाल में कभी देखा नहीं था। मैं आप लोगों से एक शिकायत करना चाहता हूँ जब 2014 में लोकसभा का चुनाव था और मैं ख़ुद प्रधानमंत्री का उम्मीदवार था और इसी मैदान में आया था और तब इसकी आधी भीड़ भी नहीं थी। आज पश्चिम बंगाल का भविष्य तय करने के लिए आप जो उत्साह दिखा रहे हैं, ये मेरी शिकायत नहीं है, आपका अभिनंदन है। 

लेफ़्ट और टीएमसी और उसके पीछे भाग रही कांग्रेस, आने वाले दिनों में ये सभा देखने के बाद सोचेंगे कि कौन से गुंडे हैं जिनको आसनसोल भेजा जाए ताकि ये लोग मतदान न कर सकें, घपलेबाजी हो, हिंसा हो। ये सभा दीदी की भी नींद खराब कर देंगे और लेफ़्ट और सोनिया जी की भी नींद खराब कर देंगे। आप लोगों ने पूरे पश्चिम बंगाल को ये सन्देश दिया है कि अब पश्चिम बंगाल इन दोनों से मुक्ति चाहता है। क्या मिला पश्चिम बंगाल को? 34 साल तक लेफ्ट वालों ने बंगाल की प्रतिष्ठा, सम्मान को मिट्टी में मिला दिया और जब बाद में दीदी आई तो उन्होंने कहा था कि मां, माटी और मानुष लेकिन हमने 5 साल में हर दिन देखा – मौत का कारोबार, पैसों का कारोबार। 

यहाँ जिस प्रकार से बंगाल के लोगों के साथ धोखा किया गया, शारदा चिटफंड को कोई भूल सकता है क्या? गरीबों के पैसे डूबे हैं और ये पाप करने वाले जेलों में होने चाहिए थे, दीदी को ऐसे लोगों के खिलाफ़ कठोर कदम उठाने चाहिए थे लेकिन उन्होंने कुछ नहीं किया। ये सरकार गरीबों का धन लूटने वालों पर मेहरबानी करने वाली सरकार है। गरीब बेचारा कुछ सपने देखकर पैसे रखता था, बेटी की शादी हो या बच्चों की पढ़ाई लेकिन इन लुटेरों ने गरीब के पैसे हज़म कर लिये और उन्हें बेघर बना दिया। 

जब अच्छी एवं ईमानदार सरकार होती है तो गरीबों के लिए विभिन्न कल्याणकारी योजनाएं बनाती हैं। इन्होंने चिटफंड चलाया और हम प्रधानमंत्री जन-धन योजना लेकर आए; उन्होंने चिटफंड के नाम पर गरीबों से पैसे बनाए और हमने बिना पैसे गरीबों के खाते खोल दिए और मुफ़्त में अकाउंट खोलने की व्यवस्था कर दी। हमने गरीबों को रूपये कार्ड दिया ताकि उनके परिवार में कभी कोई संकट आ गया तो उसमें 2 लाख का बीमा होगा और परिवार को ये पैसा मिल जाएगा। अनेकों को ये मिला भी और जन-धन योजना के तहत हमने हिंदुस्तान के करोड़ों गरीबों के लिए बैंक के दरवाजे खोल दिए। असम हो, उड़ीसा हो, बंगाल हो, इन्होंने कहीं के गरीबों को नहीं छोड़ा। गरीबों को लूटने वालों को क्या चुनाव जीतना चाहिये? 

मैं आज आपसे आग्रह करने आया हूँ कि जिन-जिन लोगों ने गरीबों के पेट पर लात मारी है, ऐसे लोगों को इस चुनाव में एक पल के लिए भी स्वीकार नहीं करना चाहिए। 34 साल तक बंगाल में लेफ़्ट वालों की सरकार रही और उन्होंने बंगाल को बर्बाद कर दिया। दूर जाने की जरुरत नहीं है, 5 साल पहले चुनाव में कांग्रेस के नेता ने लेफ़्ट के खिलाफ़ क्या-क्या बोला था, ये आप वीडियो निकाल के सुन लो तो पता चल जाएगा कि लेफ़्ट वाले क्या करते थे और ये अजूबा देखो कि कांग्रेस वाले लेफ़्ट का कुर्ता पकड़ कर चल पड़े। जिस कांग्रेस पार्टी ने पहली बार केरल में लेफ़्ट की सरकार को धारा 356 लगाकर भंग कर दिया था और जिस कांग्रेस को लेफ़्ट के प्रति गुस्सा रहता था, आज पूरी कांग्रेस पार्टी लेफ़्ट के चरणों में जाकर बैठ गई है। ये जनता-जनार्दन जब देती है तो छप्पर फाड़कर देती है लेकिन जब ये लेती है तो कूड़े-कचरे की तरह साफ़ कर देती है। 

एक जमाना था जब कांग्रेस पार्टी 400 लोगों के साथ संसद में बैठती थी और जनता का गुस्सा ऐसा फूटा कि वे 40 पर आ गए। आज कांग्रेस की हालत देखो कि जीने-मरने के लिए लेफ़्ट के सामने झुकना पड़ा है और इनकी बेईमानी देखो - विचारधारा से अगर झगड़ा होता है तो ये केरल में भी होना चाहिए और वहां भी आमने-सामने लड़ना चाहिए लेकिन कांग्रेस का कमाल देखो कि केरल में वे कम्युनिस्ट को गाली दे रहे हैं और उनसे लड़ रहे हैं और बंगाल में कम्युनिस्ट को कंधे पर बिठाकर नाच रहे हैं। समझ नहीं आ रहा कि केरल में कुश्ती और बंगाल में दोस्ती? ये आप लोगों की आँखों में धूल झोंक रहे हैं। केरल में दोनों एक-दूसरे को गालियां देते हैं और बंगाल में कहते हैं कि बहुत अच्छे हैं और सबका भला करेंगे। 

एक जमाना था जब दीदी भ्रष्टाचार का नाम सुनती थी तो कुर्सी फेंक कर चली जाती थी लेकिन अब दीदी को क्या हो गया, ऐसा परिवर्तन कैसे आ गया। वो तो भ्रष्टाचार के खिलाफ़ रोड पर निकलती थीं, लाठियां झेलती थीं; आज इतना बड़ा स्कैंडल आ गया, टेंडर का सौदा होता है, नोटों की थप्पियाँ दी जा रही हैं और सब कैमरा पर है लेकिन इसके बावजूद दीदी ने कोई कदम नहीं उठाया। इसका मतलब है कि अब दीदी भ्रष्टाचार से एडजस्ट हो गई हैं; अब दीदी को ये सब ठीक लग रहा है। ये लुटते रूपये जनता के हैं और ये लूट बंद होना चाहिए। ये चुनाव एक ऐसा मौका है जब ऐसा करने वालों को राजनीति से हमेशा के लिए विदा कर देना चाहिए। 

मैं कभी कभी सोचता हूँ कि ये टीएमसी क्या है – टी फॉर टेरर, एम फॉर मौत और सी फॉर करप्शन। पांच सालों में टीएमसी का यह सीधा-सीधा मतलब निकल कर आया है। जब हम छोटे थे और लेफ़्ट वाले चुनाव जीतते थे तो हम लोगों से पूछते थे कि ये लेफ़्ट वाले चुनाव कैसे जीतते हैं तो समझदार लोग मुझे बताते थे कि यहाँ का चुनाव साइंटिफिक रिजीम करके जीता जाता था। साइंटिफिक रिजीम तो मैंने सुना था लेकिन दीदी के राज़ में मैं देख रहा हूँ - साइंटिफिक करप्शन। टेंडर का कारोबार टेंडर निकलने से पहले तय हो जाता है। 

अभी कोलकाता में करप्शन का भंडा फूट गया। विवेकानंद ब्रिज अनेकों की ज़िन्दगी को तबाह कर गया जिन्होंने अपनों को खोया है, उनके प्रति मेरी संवेदना है लेकिन दीदी मौत पर भी राजनीति कर रही हैं। ब्रिज गिरा है, लाशें पड़ी हैं, घायल लोग कराह रहे हैं और दीदी मदद करने के नाम पर कुछ नहीं बोलती हैं और कहती हैं इस ब्रिज का कॉन्ट्रैक्ट तो लेफ़्ट वालों ने दिया था। मैं पूछता हूँ कि अगर ये ब्रिज बन जाता तो आप उद्घाटन करने जाती कि नहीं और आप ब्रिज बनाने के क्रेडिट लेने की कोशिश करती कि नहीं। अगर लेफ़्ट वालों ने पाप किया तो उस पाप को आपने आगे क्यों बढ़ाया। पूरे पश्चिम बंगाल में जो लेफ़्ट वाले करके गए, उसे ही आगे बढ़ाने का काम दीदी कर रही हैं और इसलिए पश्चिम बंगाल को लेफ़्ट और दीदी, दोनों से मुक्ति चाहिए। 

जिस प्रकार से टेरर का माहौल बनाया जा रहा है, अपने विरोधियों को ख़त्म करने की कोशिश हो रही है, ये लोकतंत्र और उसके प्रति आस्था का प्रतीक नहीं है। इस चुनाव में जो डिबेट चल रही है, उससे मैं हैरान हूँ। वो पूछते हैं कि ममता जी के राज़ में कितनी हत्याएं हुईं तो ममता जी कहती हैं कि आपके राज़ में इतनी हत्याएं हुईं, लेफ़्ट वाले कहते हैं कि आपके ज़माने में इतनी बलात्कार की घटनाएँ हुईं तो ममता जी कहती हैं कि आपके ज़माने में इतनी हुईं, दोनों के बीच दंगों की गिनती हो रही है। मैं पूछता हूँ कि चुनाव में यही डिबेट चलेगा क्या? ये आरोप-प्रत्यारोप गलत है। अच्छा होता कि ये कहते कि लेफ़्ट वालों ने इतना रास्ता बनाया था और हमने उससे ज्यादा बना दिया; लेफ़्ट वालों ने इतने स्कूल खोले थे और हमने उससे ज्यादा स्कूल खोल दिए, ये स्पर्धा होनी चाहिए थी लेकिन यहाँ स्पर्धा इस बात की हो रही है कि कौन ज्यादा बुरा है। 

भाईयों-बहनों, हमारी सरकार को 2 साल होने को आए हैं। आपने कभी अपने सांसद बाबुल सुप्रियो जो मेरी सरकार में महत्वपूर्ण मंत्री हैं, उनके ऊपर एक भी आरोप सुना है क्या? 2 साल से हम बैठे हैं, हमने एक भी पाप नहीं किया, ऐसे सरकार चलाई जाती है। हमारी सभी समस्याओं का समाधान चुनावी खोखलेबाजी से नहीं होने वाला है। मेरा 3 एजेंडा है – पहला विकास, दूसरा तेज़ गति से विकास और तीसरा चारों तरफ विकास, जिस पर मैं पिछले साल से काम कर रहा हूँ और यहाँ भी करना चाहता हूँ। आप मुझे सेवा करने का मौका दीजिए। हमारी सभी समस्याओं का समाधान विकास में है। 

आप हैरान होंगे कि ये पश्चिम बंगाल इतना प्यारा और प्रगतिशील था कि अंग्रेजों को भी कोलकाता में आकर अपना काम करने का मन कर गया था, ऐसा शानदार और जानदार हुआ करता था हमारा बंगाल। बंगाल पूरे देश को दिशा दिखाता था लेकिन आज इस बंगाल की स्थिति देखिये। सुभाष भाई के भतीजे, चन्द्र कुमार बोस भाजपा से चुनाव लड़ रहे हैं और दीदी ऐसी घबरा गई हैं और दीदी ने ऐसा टेरर दिया है कि कोई चन्द्र बोस को दफ्तर खोलने की जगह नहीं दे रहा है। लोग कहते हैं कि हम वोट दे देंगे लेकिन जब तक दीदी हैं तब तक हम आपको मकान नहीं दे पाएंगे वर्ना हम जिंदा नहीं रह पाएंगे। ये लोकतंत्र है क्या? 

आसनसोल सुंदर नगरी के रूप में जाना जाता था। अभी भारत सरकार पूरे देश में लगातार स्पर्धा करती है और ज्यूरी निष्पक्षता से उसकी जाँच करती है। 2016 के शुरू में इस देश के 72 शहरों में सफ़ाई को लेकर स्पर्धा हुई। दो महीने का समय दिया गया कि आपको क्या-क्या करना है। आपको जानकर दुःख होगा कि आसनसोल उस सूची में नीचे से दूसरे पायदान पर था। दीदी ने आसनसोल को ऐसा बना दिया कि पूरे हिंदुस्तान में इसकी इज्ज़त को मिट्टी में मिला दिया। आसनसोल एक औद्योगिक नगरी रही है, साफ़-सुथरा होना चाहिए लेकिन न बंगाल की सरकार को परवाह है और न यहाँ बैठे हुए लोगों को परवाह है। 

मैं कहता हूँ कि आप इन लोगों से मुक्ति लेकर बंगाल में भाजपा को स्वीकार करें। दिल्ली पूरी ताक़त लगाएगा और जितनी बुराईयाँ यहाँ पिछले कई वर्षों से हैं, उसे निकालने के लिए मैं कंधे से कंधा मिलकर काम करूँगा। साइंटिफिक रिजीम और साइंटिफिक करप्शन; पश्चिम बंगाल में सिंडिकेट के नाम पर सारा कारोबार हड़प लिया जाता है। कोयले की कालाबाजारी में सिंडिकेट का क्या नाता है और ये सिंडिकेट लेफ़्ट वालों ने शुरू किया और तृणमूल वालों ने उसे आगे बढ़ाया है। मैंने पहले भी कहा है कि जिन्होंने देश का कोयला भी नहीं छोड़ा, उन्हें हम नहीं छोड़ेंगे। आपने कुछ दिन पहले देखा होगा कि कोयले की कालाबाजारी करने वाले कुछ लोगों को सजा भी हो गई और जेल भी हो गया और अब आगे औरों की भी बारी है। 

हमने करप्शन के खिलाफ़ लड़ाई चलाई है और मैं जानता हूँ कि मैं जितना इन चीजों को ठीक करता हूँ, उतना इन लोगों को परेशानी ज्यादा होती है। इसलिए वे जोर से चिल्लाते हैं क्योंकि उनको पता है कि अब उनके जेल में जाने के दिन आ रहे हैं। विकास की बात को छोड़कर और बातें जो उठाई जा रही हैं, उसका मूल कारण यही है कि मुसीबत अब उनके कदमों तक पहुँचने की तयारी कर रही है। कहीं भी जोर से आवाज़ सुनाई दे तो समझ लेना कि मोदी ने कोई ऐसा कदम उठाया है जिससे बेईमान लोगों के लिए परेशानी आनी शुरू हो गई है। 

मैं आपके पास वोट मांगने आया हूँ। मुझे वोट चाहिए – बच्चों की पढ़ाई के लिए, नौजवानों की कमाई के लिए, बुजुर्गों की दवाई के लिए, अच्छी शिक्षा के लिए, अच्छे जीवन के लिए, विकास के लिए। आप पूरी तरह समर्थन देकर भाजपा के उम्मीदवारों को विजयी बनाईए। 

बहुत-बहुत धन्यवाद!
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October 05, 2022
ସେୟାର
 
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 ଜୋ ମାତା ନେଣା ଦେବିୟା ରୀ, ଜୋ ବଜିଏ ବାୱେ ରୀ ।

ବିଳାସପୁରବାସୀ... ଆଜି ଧନ୍ୟ ହୋଇଗଲି, ଆଜି... ମୋର... ଦଶହରାରେ, ଏହି ପାବନ ଅବସରରେ ମାତା ନେଣା ଦେବିୟା ରେ, ଆଶୀର୍ବାଦ ଯୋଗୁ, ଆପଣଙ୍କ ସହରରେ ଦର୍ଶନ କରିବାର ସୌଭାଗ୍ୟ ମିଳିଲା! ଆପଣଙ୍କ ସହରରେ ଯେଉଁ, ମୋର ରାମ ରାମ । ଏଠାରେ ଏମ୍ସ ପାଇଁ ବହୁତ ବହୁତ ଶୁଭେଚ୍ଛା ।

ହିମାଚଳର ରାଜ୍ୟପାଳ ଶ୍ରୀ ରାଜେନ୍ଦ୍ର ଆର୍ଲେକର ଜୀ, ହିମାଚଳର ଲୋକପ୍ରିୟ ମୁଖ୍ୟମନ୍ତ୍ରୀ ଶ୍ରୀମାନ ଜୟରାମ ଠାକୁର ଜୀ, ଭାରତୀୟ ଜନତା ପାର୍ଟିର ରାଷ୍ଟ୍ରୀୟ ଅଧ୍ୟକ୍ଷ, ମୁଁ ସମସ୍ତଙ୍କ ମାର୍ଗଦର୍ଶକ ଏବଂ ଏହି ଧରିତ୍ରୀର ସନ୍ତାନ, ଶ୍ରୀମାନ ଜେପି ନଡ୍ଡା ଜୀ, କେନ୍ଦ୍ର ମନ୍ତ୍ରିମଣ୍ଡଳରେ ମୋର ସହଯୋଗୀ ଏବଂ ଆମର ସାଂସଦ ଶ୍ରୀ ଅନୁରାଗ ଠାକୁର ଜୀ, ହିମାଚଳ ଭାଜପାର ଅଧ୍ୟକ୍ଷ ଏବଂ ସଂସଦରେ ମୋର ସହଯୋଗୀ ସୁରେଶ କଶ୍ୟପ ଜୀ, ସଂସଦରେ ମୋର ସାଥି କିଶନ କପୁର ଜୀ, ଭଉଣୀ ଇନ୍ଦୁ ଗୋସ୍ୱାମୀ ଜୀ, ଡକ୍ଟର ସିକନ୍ଦର କୁମାର ଜୀ, ଅନ୍ୟ ମନ୍ତ୍ରୀଗଣ, ସାଂସଦ ଏବଂ ବିଧାୟକଗଣ ଏବଂ ବହୁ ସଂଖ୍ୟାରେ ମୋତେ ଏବଂ ଆମ ସମସ୍ତଙ୍କୁ ଆଶୀର୍ବାଦ ଦେବା ପାଇଁ ଆସିଥିବା ମୋର ପ୍ରିୟ ଭାଇ ଓ ଭଉଣୀମାନେ! ଆପଣ ସମସ୍ତଙ୍କୁ, ସମ୍ପୂର୍ଣ୍ଣ ଦେଶବାସୀଙ୍କୁ ବିଜୟା ଦଶମୀ ଅବସରରେ ବହୁତ ବହୁତ ଶୁଭକାମନା ।

ଏହି ପର୍ବ ସମସ୍ତ ଅଶୁଭକୁ ଅତିକ୍ରମ କରି ଅମୃତ କାଳ ପାଇଁ ଯେଉଁ ପଞ୍ଚ ପ୍ରାଣର ସଂକଳ୍ପ ଦେଶ ନେଇଛି, ତା’ ଉପରେ ଚାଲିବା ପାଇଁ ନୂତନ ଶକ୍ତି ଦେବ, ମୋର ସୌଭାଗ୍ୟ ଏହି କି ଯେ ବିଜୟା ଦଶମୀ ଅବସରରେ ହିମାଚଳ ପ୍ରଦେଶର ଲୋକମାନଙ୍କ ସ୍ୱାସ୍ଥ୍ୟ, ଶିକ୍ଷା, ରୋଜଗାର ଏବଂ ଭିତ୍ତିଭୂମିର ହଜାର ହଜାର, କୋଟି କୋଟି ଟଙ୍କାର ପ୍ରକଳ୍ପ, ଏହାକୁ ଉପହାର ଦେବାର ଅବସର ମିଳିଛି । ଆଉ ଏହା ମଧ୍ୟ ସଂଯୋଗ ଦେଖନ୍ତୁ । ବିଜୟା ଦଶମୀ ଥିବ ଏବଂ ବିଜୟର ବିଗୁଲର ଅବସର ଥିବ । ଏହା ଭବିଷ୍ୟତର ପ୍ରତ୍ୟେକ ଦୃଷ୍ଟିକୋଣର ଆରମ୍ଭ ନେଇ ଆସିଛି । ବିଳାସପୁରକୁ ଶିକ୍ଷା ଏବଂ ସ୍ୱାସ୍ଥ୍ୟ ସେବା ଦୁଇଟି ଉପହାର ମିଳିଛି । କହଲୁରା ରୀ.... ବଂଦଲେ ଧାରା ଉପ୍ପର, ହାଇଡ୍ରୋ କଲେଜ... କନେ ଥିଲ୍ଲେ ଏମ୍ସ... ହୁଣ ଏଥି ରୀ ପେହଚାନ ହୁଣୀ!

ଭାଇ ଏବଂ ଭଉଣୀମାନେ,

ଏଠାରେ ବିକାଶର ଯୋଜନାଗୁଡ଼ିକୁ ଆପଣଙ୍କୁ ଦେଇଦେବା ପରେ, ଯେମିତି ଜୟରାମ ଜୀ କହିଲେ, ଆହୁରି ଗୋଟିଏ ସାଂସ୍କୃତିକ ଐତିହ୍ୟର ସାକ୍ଷୀ ହେବାକୁ ଯାଉଛି ଏବଂ ବହୁବର୍ଷ ପରେ ମୋତେ ପୁଣିଥରେ କୁଲ୍ଲୁ ଦଶହରାରେ ଅଂଗଶ୍ରହଣ କରିବାକୁ ସୌଭାଗ୍ୟ ମିଳିବ । ଶହ ଶହ ଦେବୀ-ଦେବତାମାନଙ୍କ ସହିତ ଭଗବାନ ରଘୁନାଥ ଜୀଙ୍କର ଯାତ୍ରାରେ ସାମିଲ ହୋଇ ମୁଁ ଦେଶ ପାଇଁ ମଧ୍ୟ ଆଶୀର୍ବାଦ ମାଗିବି । ଏବଂ ଆଜି ଯେତେବେଳେ ଏଠାରେ ବିଳାସପୁରକୁ ଆସିଛି ସେତେବେଳେ ପୁରୁଣା ସ୍ମୃତିଗୁଡ଼ିକ ମନେପଡ଼େ ତାହା ହେବା ବହୁତ ସ୍ୱାଭାବିକ ଅଟେ । ସେତେବେଳେ ମଧ୍ୟ ଗୋଟିଏ ସମୟ ଥିଲା, ଏଠାରେ ପାଦରେ ବୁଲୁଥିଲି । କେତେବେଳେ ମୁଁ, ଧୂମଲ ଜୀ ନଡ୍ଡା ଜୀ, ପାଦରେ ଚାଲି ଚାଲି ଏଠିକାର ମାର୍କେଟକୁ ବାହାରି ପଡୁଥିଲେ । ଆମେ ଗୋଟିଏ ବହୁତ ବଡ଼ ରଥଯାତ୍ରାର କାର୍ଯ୍ୟକ୍ରମ ନେଇ ମଧ୍ୟ ଏହି ବିଳାସପୁର ଗଳି ଦେଇ ଯାଇଥିଲୁ । ଏବଂ ସେତେବେଳେ ସ୍ୱର୍ଣ୍ଣ ଜୟନ୍ତୀ ରଥଯାତ୍ରା ଏହି ବାଟ ଦେଇ ଏବଂ ତାହା ପୁଣି ମେନ ମାର୍କେଟରୁ ବାହାରିଥିଲା ଏବଂ ସେଠାରେ ଜନସଭା ହୋଇଥିଲା । ଏବଂ ଅନେକ ଥର ମୋର ଏଠାକୁ ଆସିବା ହେଲା, ଆପଣମାନଙ୍କ ମଧ୍ୟରେ ରହିବା ମଧ୍ୟ ହୋଇଛି ।

ହିମାଚଳର ଏହି ଭୂମିରେ କାମ କରିବାରେ ମୋତେ ନିରନ୍ତର ହିମାଚଳର ବିକାଶ ଯାତ୍ରାର ସହଯୋଗୀ ହେବାର ଅବସର ମିଳିଛି । ଏବଂ ମୁଁ ଏବେ ଶୁଣୁଥିଲି, ଅନୁରାଗ ଜୀ ବହୁତ ଜୋର ଜୋରରେ କହୁଥିଲେ, ଏହା ମୋଦୀ ଜୀ କରିଛନ୍ତି, ଏହା ମୋଦୀ ଜୀ କରିଛନ୍ତି, ଏହା ମୋଦୀ ଜୀ କରିଛନ୍ତି । ଏହା ମୋଦୀ ଜୀ କରିଛନ୍ତି ଏବଂ ଆମର ମୁଖ୍ୟମନ୍ତ୍ରୀ ଜୟରାମ ଜୀ ମଧ୍ୟ କହୁଥିଲେ, ମୋଦୀ ଜୀ କରିଛନ୍ତି, ମୋଦୀ ଜୀ କରିଛନ୍ତି । କିନ୍ତୁ ମୁଁ ସତ କହୁଛି, ସତ କହିବି କିଏ କରିଛନ୍ତି, କହିବି? ଏହା ଯାହା କିଛି ହେଉଛି ତାହା ଆପଣ କରିଛନ୍ତି । ଆପଣଙ୍କ କାରଣରୁ ହୋଇପାରିଛି। ଯଦି ଆପଣ ଦିଲ୍ଲୀରେ କେବଳ ମୋଦୀ ଜୀଙ୍କୁ ଆଶୀର୍ବାଦ ଦେବା ପାଇଁ ଏବଂ ହିମାଚଳର ମୋଦୀ ଜୀଙ୍କ ସାଥିମାନଙ୍କୁ ଆଶୀର୍ବାଦ ନ ଦେବେ ତେବେ ଏହି ସମସ୍ତ କାର୍ଯ୍ୟରେ ସେମାନେ ବାଧା ସୃଷ୍ଟି କରିଥାନ୍ତେ । ଏହା ଜୟରାମ ଜୀ ଏବଂ ତାଙ୍କ ଟିମ୍ ଯିଏକି ଯେଉଁ କାମ ଦିଲ୍ଲୀରୁ ମୁଁ ନେଇ ଆସିଥାଏ, ତାହାକୁ ଦ୍ରୁତ ଗତିରେ ଏହି ଲୋକମାନେ କରିଥାନ୍ତି, ଏଥିପାଇଁ ହେଉଛି । ଏବଂ ଏହା ଯଦି ଏପରି ହୋଇପାରିଛି ତେବେ ଆପଣଙ୍କର ଗୋଟିଏ ଭୋଟର ଶକ୍ତି ଅଟେ, ଯଦି ଟନେଲ ତିଆରି ହୋଇପାରିଛି ତାହା ଆପଣଙ୍କର ଗୋଟିଏ ଭୋଟର ତାକତ ଅଟେ, ହାଇଡ୍ରୋ ଇଞ୍ଜିନିୟରିଂ କଲେଜ ହୋଇଛି ତେବେ ଏହା ଆପଣଙ୍କ ଭୋଟର ତାକତ ଅଟେ, ଯଦି ମେଡିକାଲ ଡିଭାଇସ ପାର୍କ ତିଆରି ହେଉଛି ତେବେ ଏହା ମଧ୍ୟ ଆପଣଙ୍କର ଗୋଟିଏ ଭୋଟର ତାକତ ଅଟେ ଏବଂ ସେଥିପାଇଁ ଆଜି ମୁଁ ହିମାଚଳର ଅପେକ୍ଷାକୁ ଧ୍ୟାନରେ ରଖି ଗୋଟିଏ ପରେ ଗୋଟିଏ ବିକାଶର କାର୍ଯ୍ୟ କରୁଛି ।

ବିକାଶକୁ ନେଇ ଆମେ ଦେଶରେ ଦୀର୍ଘ ସମୟ ପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ ଗୋଟିଏ ବିକୃତ ଚିନ୍ତାଧାରା ଉପରେ ଦବି ଯିବାର ଦେଖିଛି । ଏହି ଭାବନା କ’ଣ ଥିଲା? ଭଲ ସଡ଼କ ହେବ ତେବେ କିଛି ରାଜ୍ୟମାନଙ୍କ ଏବଂ କିଛି ବଡ଼ ବଡ଼ ସହରରେ ହେବ, ଦିଲ୍ଲୀର ଆଖପାଖରେ ହେବ । ଭଲ ଶିକ୍ଷା ସଂସ୍ଥାନ ହେବ, ତେବେ ବହୁତ ବଡ଼ ବଡ଼ ସହରରେ ହେବ, ଭଲ ଡାକ୍ତରଖାନା ହେବ ତେବେ ତାହା ଦିଲ୍ଲୀରେ ହିଁ ହୋଇପାରିବ, ବାହାରେ କେଉଁଠି ହୋଇ ମଧ୍ୟ ପାରିବ ନାହିଁ । ଉଦ୍ୟୋଗ କାରବାର ହେବ ତେବେ ମଧ୍ୟ ବଡ଼ ବଡ଼ ସ୍ଥାନରେ ଲାଗିବ ଏବଂ ବିଶେଷ କରି ଦେଶର ପାହାଡ଼ିଆ ପ୍ରଦେଶରେ ମୌଳିକ ସୁବିଧାମାନ ସବୁଠାରୁ ଶେଷରେ, ବହୁ ବହୁ ବର୍ଷ ପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ ଅପେକ୍ଷା କରିବା ପରେ ପହଂଚୁଥିଲା। ସେହି ପୁରୁଣା ବିଚାରଧାରାର ପରିଣାମ ଏମିତି ହେଲା ଯେ ଏଥିରେ ଦେଶରେ ବିକାଶର ଏକ ବଡ଼ ଅସନ୍ତୁଳନତା ସୃଷ୍ଟି ହୋଇଗଲା । ଏହି କାରଣରୁ ଦେଶର ଗୋଟିଏ ବଡ଼ ଅଂଶ, ସେଠିକାର ଲୋକମାନେ ଅସୁବିଧାରେ, ଅଭାବରେ ରହିଲେ ।

ଗତ ୮ ବର୍ଷରେ ଦେଶ ଏବେ ସେହି ପୁରୁଣା ଚିନ୍ତାଧାରାକୁ ପଛରେ ପକାଇ, ନୂତନ ଚିନ୍ତାଧାରା, ଆଧୁନିକ ଚିନ୍ତାଧାରା ସହିତ ଆଗକୁ ବଢୁଛି । ବର୍ତ୍ତମାନ ଦେଖନ୍ତୁ, ଦୀର୍ଘ ସମୟ ପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ ଏବଂ ମୁଁ ଯେତେବେଳେ ଏଠାରେ ଥିଲି, ମୁଁ ଲଗାତାର ଦେଖୁଥିଲି, ଏଠାରେ ଗୋଟିଏ ୟୁନିଭର୍ସିଟିରୁ ହିଁ ରୋଜଗାର ହେଉଥିଲା । ଚିକିତ୍ସା ହେଉ କିମ୍ବା ପୁଣି ମେଡିକାଲର ପାଠପଢ଼ା, ଆଇଜିଏମସି ଶିମଲା ଏବଂ ଟାଟା ମେଡିକାଲ କଲେଜ ଉପରେ ହିଁ ନିର୍ଭର କରିବାକୁ ପଡୁଥିଲା । ବଡ଼ ରୋଗର ଚିକିତ୍ସା ହେଉ କିମ୍ବା ପୁଣି ଶିକ୍ଷା କିମ୍ବା ରୋଜଗାର, ଚଣ୍ଡିଗଡ଼ ଏବଂ ଦିଲ୍ଲୀ ଯିବା ସେତେବେଳେ ହିମାଚଳ ପାଇଁ ମଜବୁରୀ ହୋଇ ଯାଉଥିଲା । କିନ୍ତୁ ଗତ ଆଠ ବର୍ଷରେ ଆମର ଡବଲ ଇଞ୍ଜିନର ସରକାର ହିମାଚଳର ବିକାଶର ଗାଥାକୁ ନୂତନ ଅଧିକତମ ସୀମାରେ ପହଞ୍ଚାଇ ଦେଇଥିଲେ । ଆଜି ହିମାଚଳରେ ସେଣ୍ଟ୍ରାଲ ୟୁନିଭର୍ସିଟି ମଧ୍ୟ ଅଛି, ଆଇଆଇଟି ମଧ୍ୟ ଅଛି, ଟ୍ରିପଲ ଆଇଟି ମଧ୍ୟ ଅଛି, ଇଣ୍ଡିଆନ ଇନଷ୍ଟିଚୁ୍ୟଟ ଅଫ ମ୍ୟାନେଜମେଣ୍ଟ (ଆଇଆଇଏମ) ଭଳି ପ୍ରତିଷ୍ଠିତ ସଂସ୍ଥାନ ମଧ୍ୟ ଅଛି । ଦେଶରେ ମେଡିକାଲ ଶିକ୍ଷା ଏବଂ ସ୍ୱାସ୍ଥ୍ୟ ବିଭାଗରେ ସବୁଠାରୁ ବଡ଼ ସଂସ୍ଥାନ, ଏମ୍ସ ମଧ୍ୟ ବର୍ତ୍ତମାନ ବିଳାସପୁର ଏବଂ ହିମାଚଳର ଜନତାଙ୍କର ଗୌରବକୁ ବଢ଼ାଉଛି ।

ବିଳାସପୁର ଏମ୍ସ ଆହୁରି ପରିବର୍ତ୍ତନରେ ମଧ୍ୟ ଏକ ପ୍ରତୀକ ଅଟେ ଏବଂ ଏମ୍ସ ଭିତରେ ମଧ୍ୟ ଏହି ଗ୍ରୀନ ଏମ୍ସ ଭାବରେ ପରିଚିତ ହେବ । ସମ୍ପୂର୍ଣ୍ଣ ଭାବରେ ପର୍ଯ୍ୟାବରଣ ପ୍ରେମୀ ଏମ୍ସ, ପ୍ରକୃତି ପ୍ରେମୀ ଏମ୍ସ । ବର୍ତ୍ତମାନ ଆମର ସମସ୍ତ ସାଥୀମାନେ କହିଲେ, ପୂର୍ବ ସରକାର ଶିଳାନ୍ୟାସର ପ୍ରସ୍ତର ଲଗାଉଥିଲେ ଏବଂ ନିର୍ବାଚନ ବାହାରିବା ପରେ ଭୁଲି ଯାଉଥିଲେ । ଆଜି ମଧ୍ୟ ହିମାଚଳକୁ ଯିବେ, ଆମର ଧୁମଲ ଜୀ ଗୋଟିଏ ଥର କାର୍ଯ୍ୟକ୍ରମ କରିଥିଲେ । କେଉଁଠି କେଉଁଠି ପଥର ପଡ଼ିଥିଲା ତାକୁ ଖୋଜିବାକୁ ଏବଂ ବହୁତଗୁଡ଼ିଏ ଏମିତି କାର୍ଯ୍ୟକ୍ରମ ଯେଉଁଠି ଶିଳାନ୍ୟାସ ହୋଇଥିଲା, କାମ ହୋଇ ନ ଥିଲା ।

ମୋର ମନେ ଅଛି ମୁଁ ଗୋଟିଏ ଥର ରେଳବାଇର ରିଭୁ୍ୟ କରୁଥିଲି, ଆପଣଙ୍କର ଉନା ନିକଟେ ଗୋଟିଏ ରେଲୱେ ଲାଇନ ବିଛାଇବାର ଥିଲା । ୩୫ ବର୍ଷ ପୂର୍ବରୁ ନିର୍ଣ୍ଣୟ ହୋଇଥିଲା, ୩୫ ବର୍ଷ ପୂର୍ବରୁ ପାର୍ଲାମେଣ୍ଟରେ ଘୋଷଣା ହୋଇଥିଲା । କିନ୍ତୁ ପୁଣି ଫାଇଲ ବଡ଼ । ହିମାଚଳକୁ କିଏ ପଚାରିବ ଭାଇ । କିନ୍ତୁ ଇଏ ତ ହିମାଚଳର ପୁଅ ଏବଂ ହିମାଚଳକୁ ଭୁଲିପାରିବ ନାହିଁ, କିନ୍ତୁ ଆମର ସରକାରଙ୍କ ପରିଚୟ ଏହା ଯେ ଯେଉଁ ପ୍ରକଳ୍ପର ଶିଳାନ୍ୟାସ କରିଥାନ୍ତି, ତାହାର ଲୋକାର୍ପଣ ମଧ୍ୟ କରିଥାନ୍ତି । ଅଟକିବା, ଝୁଲିବା, ପଥଭ୍ରଷ୍ଟ ହେବା, ସେ ସମୟ ଚାଲିଗଲା ସାଥୀମାନେ!

ସାଥୀମାନେ,

ରାଷ୍ଟ୍ରର ରକ୍ଷାରେ ସବୁବେଳେ ହିମାଚଳର ବହୁତ ବଡ଼ ଯୋଗଦାନ ରହିଛି, ଯେଉଁ ହିମାଚଳ ପୁରା ଦେଶରେ ରାଷ୍ଟ୍ରର ରକ୍ଷାରେ ବୀରମାନଙ୍କ ପାଇଁ ଜଣାଯାଇଛି ସେହି ହିମାଚଳ ଏବେ ଏହି ଏମ୍ସ ପରେ ଜୀବନ ରକ୍ଷା ପାଇଁ ମଧ୍ୟ ମହତ୍ତ୍ୱପୂର୍ଣ୍ଣ ଭୂମିକା ନିର୍ବାହ କରିବ । ୨ଠ୧୪ ମସିହା ପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ ହିମାଚଳରେ କେବଳ ୩ଟି ମେଡିକାଲ, କଲେଜ ଥିଲା, ସେଥିମଧ୍ୟରୁ ୨ଟି ସରକାରୀ ଥିଲା । ଗତ ୮ ବର୍ଷ ମଧ୍ୟରେ ୫ଟି ନୂତନ ସରକାରୀ ମେଡିକାଲ କଲେଜ ହିମାଚଳରେ ତିଆରି ହୋଇଛି । ୨ଠ୧୪ ପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ ଅଣ୍ଡର ଏବଂ ପୋଷ୍ଟ ଗ୍ରାଜୁଏଟଙ୍କୁ ମିଶାଇ କେବଳ ୫ଠଠ ବିଦ୍ୟାର୍ଥୀ ପଢ଼ି ପାରୁଥିଲେ । ଆଜି ଏହି ସଂଖ୍ୟା ୧୨ଠଠରୁ ଅଧିକ, ଅର୍ଥାତ ଦୁଇଗୁଣରୁ ମଧ୍ୟ ଅଧିକ ହୋଇଯାଇଛି । ଏମ୍ସରେ ପ୍ରତ୍ୟେକ ବର୍ଷ ଅନେକ ନୂଆ ଡାକ୍ତର ହେବେ, ନର୍ସିଂ ସହିତ ଜଡ଼ିତ ଯୁବକମାନେ ଏଠାରେ ଟ୍ରେନିଂ ପାଇବେ, ଏବଂ ମୋତେ ଜୟରାମ ଜୀଙ୍କ ଟିମକୁ, ଜୟରାମ ଜୀଙ୍କୁ, ଭାରତ ସରକାରଙ୍କ ସ୍ୱାସ୍ଥ୍ୟ ମନ୍ତ୍ରୀ ଏବଂ ସ୍ୱାସ୍ଥ୍ୟ ମନ୍ତ୍ରଣାଳୟକୁ ବିଶେଷ ଭାବେ କୃତଜ୍ଞତା ଜଣାଉଛି । ଯେତେବେଳେ ନଡ୍ଡା ଜୀ ସ୍ୱାସ୍ଥ୍ୟ ମନ୍ତ୍ରୀ ଥିଲେ, ସେହି ସମୟରେ ଆମେ ନିର୍ଣ୍ଣୟ ନେଇଥିଲୁ ସେତେବେଳେ ନଡ୍ଡା ଜୀଙ୍କ ଉପରେ ବହୁତ ବଡ଼ ଦାୟିତ୍ୱ ଆସିଗଲା, ମୁଁ ଶିଳାନ୍ୟାସ ମଧ୍ୟ କରିଥିଲେ । ଏହି ଅବଧିରେ କରୋନାର ଭୟଙ୍କର ମହାମାରୀ ଆସିଲା ଏବଂ ଆମେ ଜାଣିଛୁ ଯେ ହିମାଚଳର ଲୋକ ହିମାଚଳର କୌଣସି ମଧ୍ୟ କନଷ୍ଟ୍ରକସନର କାମ କରିଥାଏ ସେତେବେଳେ ବହୁତ ଅସୁବିଧା ଆସିଥାଏ, ଗୋଟିଏ ଗୋଟିଏ ଜିନିଷ ପାହାଡ଼ ଉପରକୁ ଆଣିବା କେତେ କଷ୍ଟକର ହୋଇଥାଏ । ଯେଉଁ କାମ ତଳେ ଗୋଟିଏ ଘଣ୍ଟାରେ ହୋଇଥାଏ, ତାହାକୁ ସେଠାରେ ପାହାଡ଼ରେ କରିବା ପାଇଁ ଗୋଟିଏ ଦିନ ଲାଗି ଯାଇଥାଏ । ତାହା ପରେ ମଧ୍ୟ, କରୋନାର କଠିନ ସମୟ ଥିବା ସତ୍ତ୍ୱେ ମଧ୍ୟ ଭାରତ ସରକାରଙ୍କ ସ୍ୱାସ୍ଥ୍ୟ ମନ୍ତ୍ରଣାଳୟ ଏବଂ ଜୟରାମ ଜୀଙ୍କ ରାଜ୍ୟ ସରକାରଙ୍କ ଟିମ ମିଳିତ ଭାବେ ଯେଉଁ କାର୍ଯ୍ୟ କଲେ, ଆଜି ଏମ୍ସ ଦଣ୍ଡମାନ, ଏମ୍ସ କାମ କରିବା ଆରମ୍ଭ ହୋଇଯାଇଛି ।

ମେଡିକାଲ କଲେଜ ନୁହେଁ, ଆମେ ଆଉ ଏକ ଦିଗରେ ଆଗକୁ ବଢ଼ିବା, ଔଷଧ ଏବଂ ଜୀବନରକ୍ଷକ ଟିକାର ନିର୍ମାତା ଭାବରେ ମଧ୍ୟ ହିମାଚଳର ଭୂମିକାର ବହୁତ ଅଧିକ ବିସ୍ତାର କରାଯାଉଛି । ବଲ୍କ ଟ୍ରଗ୍ସ ପାର୍କ ପାଇଁ ଦେଶରେ କେବଳ ତିନୋଟି ରାଜ୍ୟକୁ ବିଛାଯାଇଛି ଏବଂ ସେଥିରୁ ଗୋଟିଏ ଏମିତି କେଉଁ ରାଜ୍ୟ ଅଛି ଭାଇ, କେଉଁ ରାଜ୍ୟ ଅଛି? ହିମାଚଳ ଅଟେ, ଆପଣଙ୍କୁ ଗର୍ବ ଲାଗୁଛି କି ନାହିଁ? ଏହା ଆପଣଙ୍କ ପିଲାମାନଙ୍କର ଉଜ୍ଜ୍ୱଳ ଭବିଷ୍ୟତର ଶିଳାନ୍ୟାସ ଅଟେ କି ନୁହେଁ? ଏହା ଆପଣଙ୍କର ପିଲାମାନଙ୍କର ଉଜ୍ଜ୍ୱଳ ଭବିଷ୍ୟତର ଗ୍ୟାରେଣ୍ଟି କି ନୁହେଁ? ଆମେ କାମ ବଡ଼ ଦୃଢ଼ତାର ସହିତ କରିଥାଉ ଏବଂ ଆଜିର ପିଢ଼ି ପାଇଁ ମଧ୍ୟ କରିଥାଉ, ଆଗାମୀ ପିଢ଼ି ପାଇଁ ମଧ୍ୟ କରିଥାଉ ।

ସେହିଭଳି ଭାବରେ ମେଡିକାଲ ଡିଭାଇସ ପାର୍କ ପାଇଁ ୪ଟି ରାଜ୍ୟକୁ ବଛାଯାଇଛି, ଯେଉଁଠାରେ ଆଜି ମେଡିକାଲରେ ଟେକ୍ନୋଲୋଜୀର ଭରପୂର ଉପଯୋଗ ହେଉଛି । ବିଶେଷ ଭାବରେ ଉପକରଣର ଆବଶ୍ୟକତା ପଡ଼ିଥାଏ, ତାହାକୁ ତିଆରି କରିବା ପାଇଁ ଦେଶରେ ୪ଟି ରାଜ୍ୟ ବଛାଯାଇଛି, ଏତେ ବଡ଼ ଭାରତ ବର୍ଷ, ଏତେ ବଡ଼ ଜନସଂଖ୍ୟା, ହିମାଚଳ ହେଉଛି ମୋର ଗୋଟିଏ ଛୋଟ ରାଜ୍ୟ, କିନ୍ତୁ ଏହା ବୀରମାନଙ୍କର ଭୂମି ଅଟେ ଏବଂ ମୁଁ ଏଠିକାର ରୁଟି ଖାଇଛି, ମୋତେ କରଜ ମଧ୍ୟ ଶୁଝିବାକୁ ଅଛି ଏବଂ ସେଥିପାଇଁ ଚତୁର୍ଥ ମେଡିକାଲ ଡିଭାଇସ୍ ପାର୍କ କେଉଁଠାରେ ତିଆରି ହେଉଛି, ଆପଣଙ୍କ ହିମାଚଳରେ ତିଆରି ହେଉଛି ସାଥୀମାନେ । ବିଶ୍ୱରୁ ବଡ଼ ବଡ଼ ଲୋକମାନେ ଏଠାକୁ ଆସିବେ । ନାଲାଗଡ଼ରେ ଏହି ମେଡିକାଲ ଡିଭାଇସ ପାର୍କର ଶିଳାନ୍ୟାସ ଏହାର ଏକ ଅଂଶ ଅଟେ । ଏହି ଡିଭାଇସ ପାର୍କର ନିର୍ମାଣ ପାଇଁ ହଜାର ହଜାର କୋଟି ଟଙ୍କାର ନିବେଶ ଏଠାରେ ହେବ । ଏହା ସହ ଜଡ଼ିତ ଅନେକ ଛୋଟ ଏବଂ ଲଘୁ ଉଦ୍ୟୋଗ ଆଖ ପାଖରେ ବିକଶିତ ହେବ । ଏହାଦ୍ୱାରା ଏଠିକାର ହଜାର ହଜାର ଯୁବଗୋଷ୍ଠୀଙ୍କୁ ରୋଜଗାର ଅବସର ମିଳିବ ।

ସାଥୀମାନେ,

ହିମାଚଳର ଆଉ ଏକ ପକ୍ଷ ରହିଛି, ଯେଉଁଠାରେ ଏଠାରେ ବିକାଶର ଅନନ୍ତ ସମ୍ଭାବନା ଲୁଚି ରହିଛି, ଏହି ପକ୍ଷ ଅଟେ ମେଡିକାଲ ଟୁରିଜିମର । ଏଠିକାର ଆସୁଥିବା ପବନ, ଏଠିକାର ମୌସମ, ଏଠିକାର ବାତାବରଣ, ଏଠିକାର ଜଡ଼ିବୁଟି, ଏଠିକାର ଭଲ ସ୍ୱାସ୍ଥ୍ୟ ପାଇଁ ବହୁତ ଉପଯୁକ୍ତ ବାତାବରଣ । ଆଜି ଭାରତ ମେଡିକାଲ ଟୁରିଜିମକୁ ନେଇ ବିଶ୍ୱରେ ଏକ ବହୁତ ବଡ଼ ଆକର୍ଷଣର କେନ୍ଦ୍ର ହେବାକୁ ଯାଉଛି । ଯେତେବେଳେ ଦେଶ ଏବଂ ଦୁନିଆର ଲୋକମାନେ ଭାରତରେ ମେଡିକାଲ ଚିକିତ୍ସା ପାଇଁ ଆସିବାକୁ ଚାହିଁବେ ସେତେବେଳେ ଏଠିକାର ପ୍ରାକୃତିକ ସୌନ୍ଦର୍ଯ୍ୟ ଏତେ ବଢ଼ିଆ ଯେ ଏଠାକୁ ଆସିବେ । ଏକ ପ୍ରକାରରେ ତାଙ୍କ ପାଇଁ ଆରୋଗ୍ୟର ଲାଭ ମଧ୍ୟ ହେବ ଏବଂ ପର୍ଯ୍ୟଟନର ମଧ୍ୟ ଲାଭ ହେବ । ହିମାଚଳରେ ଦୁଇଟି ହାତରେ ଲଡୁ ରହିଛି ।

ସାଥୀମାନେ,

କେନ୍ଦ୍ର ସରକାରଙ୍କର ପ୍ରୟାସ ରହିଛି ଯେ ଗରିବ ଏବଂ ମଧ୍ୟମ ବର୍ଗର ଚିକିତ୍ସା, ତା’ ଉପରେ ଖର୍ଚ୍ଚ ଅତି କମ ହେଉ, ଏଠାରେ ଚିକିତ୍ସା ମଧ୍ୟ ଭଲ ମିଳୁ ଏବଂ ଏଥିପାଇଁ ତାଙ୍କୁ ଦୂରକୁ ଯିବାକୁ ନ ପଡୁ । ସେଥିପାଇଁ ଆଜି ଏମ୍ସ ମେଡିକାଲ କଲେଜ, ଜିଲ୍ଲା ହସ୍ପିଟାଲରେ କ୍ରିଟିକାଲ କେୟାର ସୁବିଧାମାନ ଏବଂ ଗାଁରେ ହେଲଥ ଏଣ୍ଡ ୱେଲନେସ ସେଣ୍ଟର ତିଆରି କରିବାରେ ସିମଲେସ ସଂଯୋଗୀକରଣ ଉପରେ ଆମେ କାର୍ଯ୍ୟ କରୁଛୁ । ତା’ ଉପରେ ଧ୍ୟାନ ଦିଆଯାଉଛି । ଆୟୁଷ୍ମାନ ଯୋଜନା ଅନ୍ତର୍ଗତ ହିମାଚଳର ଅଧିକାଂଶ ପରିବାରକୁ ୫ ଲକ୍ଷ ଟଙ୍କା ପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ ମାଗଣା ଚିକିତ୍ସାର ସୁବିଧା ମିଳିପାରୁଛି ।

ଏହି ଯୋଜନା ଅନ୍ତର୍ଗତ ବର୍ତ୍ତମାନ ପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ ଦେଶରେ ୩ କୋଟି ୬ଠ ଲକ୍ଷ ଗରୀବ ରୋଗୀ ମାଗଣାରେ ଚିକିତ୍ସା ପାଇସାରିଛନ୍ତି ଏବଂ ସେଥିରୁ ଦେଢ଼ ଲକ୍ଷ ଲାଭାର୍ଥୀ ମୋର ହିମାଚଳର ମୋର ପରିବାରଗଣ ଅଟନ୍ତି । ଦେଶରେ ଏହି ସମସ୍ତ ସାଥୀମାନଙ୍କ ଚିକିତ୍ସା ଉପରେ ସରକାର ବର୍ତ୍ତମାନ ପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ ୪୫ ହଜାର କୋଟି ଟଙ୍କାରୁ ଅଧିକ ଖର୍ଚ୍ଚ କରିସାରିଛନ୍ତି । ଯଦି ଆୟୁଷ୍ମାନ ଭାରତ ଯୋଜନା ନ ଥାନ୍ତା । ତେବେ ଏହା ପାଖାପାଖି ଦୁଇଗୁଣ ଅର୍ଥାତ ପ୍ରାୟତଃ ୯ଠ ହଜାର କୋଟି ଟଙ୍କାର ଯେଉଁ ରୋଗୀ ଥିଲେ, ସେହି ପରିବାରକୁ ନିଜ ପକେଟରୁ ଦେବାକୁ ପଡ଼ିଥାନ୍ତା । ଅର୍ଥାତ ଏତେ ବଡ଼ ସଞ୍ଚୟ ମଧ୍ୟ ଗରୀବ ଏବଂ ମଧ୍ୟମ ବର୍ଗର ପରିବାରକୁ ଉତ୍ତମ ମାନର ଚିକିତ୍ସା ସହିତ ମିଳିଛି ।

ସାଥୀମାନେ,

ମୋ ପାଇଁ ଆହୁରି ଗୋଟିଏ ସନ୍ତୋଷର ବିଷୟ ହେଉଛି । ସରକାରଙ୍କ ଏହି ପ୍ରକାରର ଯୋଜନା ଓ ଅଧିକ ଲାଭ ଆମର ମା’ମାନଙ୍କୁ, ଭଉଣୀମାନଙ୍କୁ ଏବଂ ଝିଅମାନଙ୍କୁ ମିଳୁଛି । ଏବଂ ଆମେ ଜାଣୁ, ଆମ ମା’ ଏବଂ ଭଉଣୀମାନଙ୍କର ସ୍ୱଭାବ ଅଛି ଯେ, ଯେତେ ଯନ୍ତ୍ରଣା ହେଉ ନା କାହିଁକି, ଶରୀରରେ କେତେ କଷ୍ଟ ହେଉଥାଉ, କିନ୍ତୁ ସେମାନେ ପରିବାରରେ କାହାକୁ କୁହନ୍ତି ନାହିଁ । ସେ ସହ୍ୟ ମଧ୍ୟ କରିଥାନ୍ତି, କାମ ମଧ୍ୟ କରିଥାନ୍ତି, ପୁରା ପରିବାରର ଯତ୍ନ ମଧ୍ୟ ନେଇଥାନ୍ତି, କାରଣ ତାଙ୍କ ମନରେ ରହିଥାଏ ଯେ ଯଦି ରୋଗ ବିଷୟରେ ଲୋକମାନଙ୍କୁ ଜଣାପଡ଼ିବ, ପିଲାମାନଙ୍କୁ ଜଣାପଡ଼ିବ ତେବେ ସେମାନେ କରଜ କରି ମଧ୍ୟ ମୋର ଚିକିତ୍ସା କରାଇବେ, ଏବଂ ମା’ ଭାବନ୍ତି, ମୁଁ ନିଜେ ଅସୁସ୍ଥତାରେ କିଛି ସମୟ ବାହାର କରିବି, କିନ୍ତୁ ମୁଁ ପିଲାମାନଙ୍କୁ ଋଣଗ୍ରସ୍ତ ହେବାକୁ ଦେବି ନାହିଁ, ମୁଁ ଡାକ୍ତରଖାନା ଯାଇ ଟଙ୍କା ଖର୍ଚ୍ଚ କରିବି ନାହିଁ । ଏହି ମାଆମାନଙ୍କ ବିଷୟରେ ଚିନ୍ତା କିଏ କରିବ? କ’ଣ ମୋର ମାଆମାନେ ଏହି ପ୍ରକାରର କଷ୍ଟକୁ ଚୁପଚାପ ସହିବେ । ଏଇ ପୁଅ କେଉଁ କାମର ଆରେ, ସେହି ଭାବନାରେ ଆୟୁଷ୍ମାନ ଭାରତ ଯୋଜନାର ଜନ୍ମ ହେଲା, ଯାହାକି ମାଆମାନଙ୍କୁ, ଭଉଣୀମାନଙ୍କ ଅସୁସ୍ଥତା ସହ ବଂଚିବାକୁ ପଡ଼ିବ ନାହିଁ । ଜୀବନରେ କିଭଳି ବାଧ୍ୟତାମୂଳକ ଭାବେ ବଂଚିବାକୁ ପଡ଼ିବ ନାହିଁ । ଆୟୁଷ୍ମାନ ଭାରତ ଯୋଜନା ଅଧିନରେ ଲାଭ ପାଉଥିବା ମା’ ଭଉଣୀମାନେ ୫ଠ ପ୍ରତିଶତରୁ ଅଧିକ ଅଛନ୍ତି । ଆମର ମା’ମାନେ - ଭଉଣୀମାନେ ଏବଂ ଝିଅମାନେ ଅଛନ୍ତି ।

ସାଥୀମାନେ,

ଶୌଚାଳୟ ନିର୍ମାଣ କରିବାରେ ସ୍ୱଚ୍ଛ ଭାରତ ଅଭିଯାନ ହେଉ, ମାଗଣା ଗ୍ୟାସ ସଂଯୋଗ ଯୋଗାଇଦେବା ପାଇଁ ଉଜ୍ୱାଲା ଯୋଜନା ହେଉ, ମାଗଣା ସାନିଟାରୀ ନାପକିନ ଯୋଗାଇଦେବା ଅଭିଯାନ ହେଉ, ମାତୃବନ୍ଦନ ଯୋଜନା ଅନ୍ତର୍ଗତ ପ୍ରତ୍ୟେକ ଗର୍ଭବତୀ ମହିଳାଙ୍କୁ ପୋଷକ ଆହର ପାଇଁ ହଜାରେ ଟଙ୍କା ସହାୟତା ହେଉ, କିମ୍ବା ବର୍ତ୍ତମାନ ହର ଘର ଜଲ ପ୍ରତ୍ୟେକଙ୍କ ଘରେ ପହଂଚାଇବା ପାଇଁ ଆମର ଅଭିଯାନ ହେଉ, ଏହା ମୋର ମା ଏବଂ ଭଉଣୀମାନଙ୍କୁ ସଶକ୍ତ କରିବା କାମ ଆମେ ଗୋଟିଏ ପରେ ଗୋଟିଏ କାର୍ଯ୍ୟ ଜାରି ରଖିଛୁ, ମା’ମାନଙ୍କୁ, ଭଉଣୀମାନଙ୍କୁ, ଝିଅମାନଙ୍କର ସୁବିଧା, ସମ୍ମାନ, ସୁରକ୍ଷା ଏବଂ ସ୍ୱାସ୍ଥ୍ୟ ଏହା ଡବଲ ଇଞ୍ଜିନ ସରକାରଙ୍କ ସବୁଠାରୁ ବହୁତ ବଡ଼ ପ୍ରାଥମିକତା ଅଟେ ।

କେନ୍ଦ୍ର ସରକାର ଯାହା ବି କିଛି ଯୋଜନାମାନ ତିଆରି କରିଛନ୍ତି, ତାକୁ ଜୟରାମ ଜୀ ଏବଂ ତାଙ୍କର ପୁରା ଟିମ, ତାଙ୍କ ସରକାର ସେମାନଙ୍କୁ ଅତି ଦ୍ରୁତ ଗତିରେ ତାହାକୁ ଏହି ଭୂମିକୁ ଆଣିଛନ୍ତି ଏବଂ ତାହା ପରିସର ମଧ୍ୟ ବିସ୍ତାର କରିଛନ୍ତି। ହର ଘର ନଲ ସେ ଜଲ ପହଂଚାଇବାର କାର୍ଯ୍ୟ ଏଠାରେ କେତେ ଦ୍ରୁତ ଗତିରେ ହୋଇଛି, ଏହା ଆମ ସମସ୍ତଙ୍କ ସାମ୍ନାରେ ଅଛି, ଗତ ୭ ଦଶନ୍ଧି ମଧ୍ୟରେ ହିମାଚଳରେ ଦିଆଯାଇଥିବା ଟ୍ୟାପ ସଂଯୋଗର ସଂଖ୍ୟାକୁ ଆମେ ଦୁଇଗୁଣରୁ ଅଧିକ କେବଳ ଗତ ୩ ବର୍ଷ ମଧ୍ୟରେ ଆମେ ଦେଇସାରିଛୁ, ଆମେ ଲୋକଙ୍କୁ ଭେଟି ମଧ୍ୟ ସାରିଛୁ । ଏହି ତିନି ବର୍ଷ ମଧ୍ୟରେ ସାଢ଼େ ଆଠ ଲକ୍ଷରୁ ଅଧିକ ନୂତନ ପରିବାରଙ୍କୁ ପାଇପ ଜଳର ସୁବିଧା ମିଳିପାରିଛି ।

ଭାଇ ଏବଂ ଭଉଣୀମାନେ,

ଅନ୍ୟ ଏକ ପ୍ରସଙ୍ଗରେ ଦେଶ ଜୟରାମ ଜୀ ଏବଂ ତାଙ୍କ ଦଳକୁ ବହୁତ ପ୍ରଶଂସା କରୁଛି । ଏହି ପ୍ରଶଂସା ସାମାଜିକ ସୁରକ୍ଷାକୁ ନେଇ କେନ୍ଦ୍ର ସରକାରଙ୍କ ଉଦ୍ୟମକୁ ବିସ୍ତାର କରିଥିବାରୁ ଏହି ପ୍ରଶଂସା ଦିଆଯାଉଛି । । ଆଜି ହିମାଚଳରେ କୌଣସି ପରିବାର ନାହିଁ, ଯେଉଁଠାରେ କୌଣସି ନା କୌଣସି ସଦସ୍ୟଙ୍କୁ ପେନସନ ସୁବିଧା ମିଳିନାହିଁ । ବିଶେଷ ଭାବରେ ଯେଉଁ ସାଥିମାନେ ବେସାହାରା ଅଛି, ଯାହାଙ୍କୁ ବଡ଼ ରୋଗ ହୋଇଯାଇଛି, ଏଭଳି ପରିବାରକୁ ପେନସନ ଏବଂ ଚିକିତ୍ସା ଖର୍ଚ୍ଚ ସମ୍ବନ୍ଧୀୟ ସହାୟତା ଯୋଗାଇଦେବା ପ୍ରୟସା ପ୍ରଶଂସନୀୟ ଅଟେ । ହିମାଚଳ ପ୍ରଦେଶର ହଜାର ହଜାର ପରିବାର ମଧ୍ୟ ୱାନ ରାଙ୍କ, ୱାନ ପେନସନ କାର୍ଯ୍ୟକାରୀ ହେବା ଦ୍ୱାରା ମଧ୍ୟ ବହୁତ ବଡ଼ ଲାଭ ପାଇଛନ୍ତି ।

ସାଥୀମାନେ,

ହିମାଚଳ ସୁଯୋଗର ଏକ ପ୍ରଦେଶ ଅଟେ । ଏବଂ ମୁଁ ଆଉଥରେ ଜୟରାମ ଜୀଙ୍କୁ କୃତଜ୍ଞତା ଜଣାଉଛି । ସାରା ଦେଶରେ ଟିକାକରଣ କାର୍ଯ୍ୟ ଚାଲିଛି । କିନ୍ତୁ ଆପଣଙ୍କ ଜୀବନର ସୁରକ୍ଷା ପାଇଁ ହିମାଚଳ ହେଉଛି ଦେଶର ପ୍ରଥମ ରାଜ୍ୟ ଯିଏ ଶତ ପ୍ରତିଶତ ଟିକାକରଣ ସମାପ୍ତ କରିଛି । ଏହା ଚାଲିଛି, ଏହା ଚାଲିଥାଏ, ଏହା କୌଣସି ବିଷୟ ନୁହେଁ; ଯଦି ଆପଣ ନିଷ୍ପତ୍ତି ନେଇଛନ୍ତି, ତେବେ ଆପଣଙ୍କୁ ତାହା କରିବାକୁ ପଡ଼ିବ ।

ଏଠାରେ ହାଇଡ୍ରୋରୁ ବିଦୁତ ଉତ୍ପନ୍ନ ହୋଇଥାଏ, ଫଳ ଏବଂ ପନିପରିବା ପାଇଁ ଉର୍ବର ଜମି ଅଛି ଏବଂ ଏଠାରେ ପର୍ଯ୍ୟଟନ ଅନ୍ତତଃ ନିଯୁକ୍ତି ସୁଯୋଗ ଦେଇଥାଏ । ଏହି ଅବସର ସମ୍ମୁଖରେ ଉନ୍ନତ ସଂଯୋଗୀକରଣର ଅଭାବ ସବୁଠାରୁ ବଡ଼ ପ୍ରତିବନ୍ଧକ ଥିଲା । ୨ଠ୧୪ ପରଠାରୁ ହିମାଚଳ ପ୍ରଦେଶର ଉତ୍ତମ ଭିତ୍ତିଭୂମି ଗାଁ- ଗାଁ ପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ ପହଂଚାଇବାକୁ ଉଦ୍ୟମ ଚାଲିଛି । ଆଜି ହିମାଚଳର ରାସ୍ତା ପ୍ରଶସ୍ତ ହେବାର କାର୍ଯ୍ୟ ମଧ୍ୟ ଚାରିଆଡ଼େ ଚାଲିଛି । ବର୍ତ୍ତମାନ ହିମାଚଳରେ ସଂଯୋଗ କାର୍ଯ୍ୟରେ ପ୍ରାୟ ୫ଠ ହଜାର କୋଟି ଟଙ୍କା ଖର୍ଚ୍ଚ କରାଯାଉଛି । ଯେତେବେଳେ ପିଞ୍ଜୋରରୁ ନାଲାଗଡ଼ ରାଜପଥ ପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ ଚାରି ଲେନର କାର୍ଯ୍ୟ ଶେଷ ହେବ, ସେତେବେଳେ ନାଲାଗଡ଼ ଏବଂ ବାଡ଼ିର ଶିଳ୍ପାଞ୍ଚଳ କେବଳ ଲାଭବାନ ହେବ ନାହିଁ, ଚଣ୍ଡିଗଡ଼ ଏବଂ ଅମ୍ବାଲା ଠାରୁ ବିଳାସପୁର, ମାଣ୍ଡି ଏବଂ ମନାଲି ଅଭିମୁଖେ ଯାଉଥିବା ଯାତ୍ରୀମାନେ ମଧ୍ୟ ଅଧିକ ସୁବିଧା ପାଇବେ । କେବଳ ଏତିକି ନୁହେଁ, ହିମାଚଳବାସୀଙ୍କୁ ଧୂଆଁମୁକ୍ତ ରାସ୍ତାରୁ ମୁକ୍ତି ଦେବା ପାଇଁ ସୁଡ଼ଙ୍ଗର ଏକ ଜାଲ ମଧ୍ୟ ବିଛାଯାଉଛି ।

ସାଥୀମାନେ,

ଡିଜିଟାଲ ସଂଯୋଗକୁ ନେଇ ମଧ୍ୟ ହିମାଚଳରେ ଅଭୁତପୂର୍ବ କାର୍ଯ୍ୟ ହୋଇଛି । ଗତ ୮ ବର୍ଷରେ ମେଡ ଇନ ଇଣ୍ଡିଆ ମୋବାଇଲ ଫୋନ ମଧ୍ୟ ଶସ୍ତା ହୋଇପାରିଛି ଏବଂ ଗାଁ ଗାଁରେ ମଧ୍ୟ ନେଟୱାର୍କ ପହଂଚିଛି । ଉନ୍ନତ ୪ଜି ସଂଯୋଗ ହେତୁ ହିମାଚଳ ପ୍ରଦେଶ ମଧ୍ୟ ଡିଜିଟାଲ କାରବାରରେ ବହୁତ ଦ୍ରୁତ ଗତିରେ ଗତି କରୁଛି । ଯଦି କେହି ଡିଜିଟାଲ ଇଣ୍ଡିଆର ସର୍ବାଧିକ ଲାଭ ପାଉଛନ୍ତି, ତେବେ ମୋର ହିମାଚଳ ଭାଇ ଓ ଭଉଣୀମାନେ ଏହା ପାଇଛନ୍ତି । ମୋର ହିମାଚଳ ନାଗରିକମାନେ ଏହା ପାଇଛନ୍ତି । ଅନ୍ୟଥା ବିଲ ଭରିବା ଠାରୁ ନେଇ ବ୍ୟାଙ୍କ ସହିତ ଯୋଡ଼ି ହେବା କାର୍ଯ୍ୟ ହେଉ, ଆଡମିସନ ହେଉ, ଆପ୍ଲିକେସନ ହେଉ, ଏମିତି ପ୍ରତ୍ୟେକ ଛୋଟ ଛୋଟ କାମ ପାଇଁ ପାହାଡ଼ରୁ ତଳକୁ ଓହ୍ଲାଇବା ଏବଂ ଅଫିସ କାମ ପାଇଁ ପାହାଡ଼ରୁ ତଳକୁ ଓହ୍ଲାଇବା ଏବଂ ଅଫିସ ଯିବା ପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ ଏହା ଗୋଟିଏ ଦିନ ଲାଗୁଥିଲା, ଗୋଟେ ଗୋଟେ ଦିନ ଲାଗୁଥିଲା, ବେଳେବେଳେ ରାତିରେ ରହିବାକୁ ପଡୁଥିଲା । ବର୍ତ୍ତମାନ ଦେଶରେ ପ୍ରଥମ ଥର ପାଇଁ ମେଡ ଇନ ଇଣ୍ଡିଆ ୫ଜି ସେବା ମଧ୍ୟ ଆରମ୍ଭ ହୋଇସାରିଛି, ଯାହାର ଲାଭ ଖୁବଶୀଘ୍ର ହିମାଚଳ ପାଇଁ ଉପଲବ୍ଧ ହେବ । ଭାରତ ଡ୍ରେନକୁ ନେଇ ଯେଉଁ ନିୟମ କରିଛି, ପରିବର୍ତ୍ତନ କରିଛି, ତାହା ପରେ ଆହୁରି ମୁଁ ହିମାଚଳକୁ ଏଥିପାଇଁ ମଧ୍ୟ ଶୁଭେଚ୍ଛା ଜଣାଉଛି । ହିମାଚଳ ହେଉଛି ଦେଶର ପ୍ରଥମ ରାଜ୍ୟ, ଯାହା ରାଜ୍ୟର ଡ୍ରୋନ ନୀତି ଆପଣାଉଛି । ବର୍ତ୍ତମାନ ଡ୍ରୋନରୁ ପରିବହନ ପାଇଁ ଡ୍ରୋନର ବ୍ୟବହାର ବହୁତ ବୃଦ୍ଧି ପାଇବ ଏବଂ ଏଥିରେ କିନ୍ନର ପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ ଆମର ଯଦି ଆଳୁ ମଧ୍ୟ ଅଛି; ତେବେ ଆମେ ସେଠାରୁ ଡ୍ରୋନରୁ ଉଠାଇ ବଡ଼ ମଣ୍ଡିରେ ତୁରନ୍ତ ଆଣିପାରିବା । ଆମର ଫଳ ଖରାପ ହୋଇ ଯାଉଥିଲେ, ଡ୍ରୋନରେ ଉଠାଇ ଆଣିପାରିବା । ଅନେକ ପ୍ରକାରର ଲାଭ ଆଗାମୀ ଦିନରେ ହେବ । ଏହି ପ୍ରକାରର ବିକାଶ, ଯାହାଦ୍ୱାରା ପ୍ରତ୍ୟେକ ନାଗରିକଙ୍କର ସୁବିଧା ବଢ଼ିବ, ପ୍ରତ୍ୟେକ ନାଗରିକ ସମୃଦ୍ଧି ସହିତ ଯୋଡ଼ି ହେବ, ଏଥିପାଇଁ ଆମେ ପ୍ରୟାସରତ ଅଛୁ । ଏହି ବିକଶିତ ଭାରତ, ବିକଶିତ ହିମାଚଳ ପ୍ରଦେଶର ସଂକଳ୍ପକୁ ସିଦ୍ଧ କରିବ ।

ମୋତେ ଖୁସି ଲାଗୁଛି ବିଜୟା ଦଶମୀର ପାବନ ପର୍ବରେ ବିଜୟ ନାଦ କରିବାର ଅବସର ମିଳିଲା ଏବଂ ମୋତେ ବିଜୟର ଧ୍ୱନି ବଜାଇ ବିଜୟର ଉତ୍ସବ ମନାଇବାର ଅବସର ମିଳିଲା । ଏବଂ ଆପଣ ସମସ୍ତଙ୍କର ଏତେ ଆଶୀର୍ବାଦ ଭିତରେ ଏହିସବୁ କରିବାର ଅବସର ମିଳିଲା । ମୁଁ ପୁଣିଥରେ ଏମ୍ସ ସହିତ ସମସ୍ତ ବିକାଶ ପରିଯୋଜନା ପାଇଁ ଆପଣମାନଙ୍କୁ ବହୁତ ବହୁତ ଶୁଭେଚ୍ଛା ଜଣାଉଛି । ଦୁଇଟି ମୁଠାକୁ ବନ୍ଦ କରି ମୋ ସହିତ କୁହନ୍ତୁ-

ଭାରତ ମାତା କି ଜୟ । ସମ୍ପୂର୍ଣ୍ଣ ଶକ୍ତିର ସହିତ ଶବ୍ଦ ଶୁଭିବା ଦରକାର-

ଭାରତ ମାତା କି - ଜୟ!

ଭାରତ ମାତା କି - ଜୟ!

ଭାରତ ମାତା କି - ଜୟ!

ବହୁତ ବହୁତ ଧନ୍ୟବାଦ!