Solutions to all the problems is in development: PM Modi in West Bengal

Published By : Admin | April 7, 2016 | 20:07 IST
I have come here so ensure proper education for children, opportunities for youth and for development: PM Modi
I have only three agendas: Development, fast-paced development & all-round development
For 34 years the Left front ruled and ruined Bengal; TMC stands for Terror, Maut, Corruption: PM Modi
Left and Congress contest against one another in Kerala but in spite of ideological differnces are allies in West Bengal: PM
After coming to power, Mamata Di said Maa, Maati, Manush but now it's all about only Maut and Money: PM
Solutions to all the problems is in development: PM Modi in West Bengal
We will ensure overall development of Bengal and eliminate all the problems people face in the state: PM
 

मंच पर विराजमान सभी वरिष्ठ महानुभाव और विशाल संख्या में पधारे हुए आसनसोल के मेरे प्यारे भाईयों एवं बहनों 

आज मैं सुबह से पश्चिम बंगाल में दौरा कर रहा हूँ। टीवी पर आता है कि इस बार जून महीने में जो गर्मी पड़ती है, वो गर्मी अप्रैल महीने में शुरू हो गई है और इतनी भयंकर गर्मी के बीच पश्चिम बंगाल में चुनावी गर्मी है और आप लोगों का इतना जबर्दस्त उत्साह है। दिल्ली में बैठकर किसी को अंदाजा नहीं सकता कि पश्चिम बंगाल के चुनाव का मिजाज़ क्या है, यहाँ के लोगों का इरादा क्या है। मैंने ऐसा उत्साह पश्चिम बंगाल में कभी देखा नहीं था। मैं आप लोगों से एक शिकायत करना चाहता हूँ जब 2014 में लोकसभा का चुनाव था और मैं ख़ुद प्रधानमंत्री का उम्मीदवार था और इसी मैदान में आया था और तब इसकी आधी भीड़ भी नहीं थी। आज पश्चिम बंगाल का भविष्य तय करने के लिए आप जो उत्साह दिखा रहे हैं, ये मेरी शिकायत नहीं है, आपका अभिनंदन है। 

लेफ़्ट और टीएमसी और उसके पीछे भाग रही कांग्रेस, आने वाले दिनों में ये सभा देखने के बाद सोचेंगे कि कौन से गुंडे हैं जिनको आसनसोल भेजा जाए ताकि ये लोग मतदान न कर सकें, घपलेबाजी हो, हिंसा हो। ये सभा दीदी की भी नींद खराब कर देंगे और लेफ़्ट और सोनिया जी की भी नींद खराब कर देंगे। आप लोगों ने पूरे पश्चिम बंगाल को ये सन्देश दिया है कि अब पश्चिम बंगाल इन दोनों से मुक्ति चाहता है। क्या मिला पश्चिम बंगाल को? 34 साल तक लेफ्ट वालों ने बंगाल की प्रतिष्ठा, सम्मान को मिट्टी में मिला दिया और जब बाद में दीदी आई तो उन्होंने कहा था कि मां, माटी और मानुष लेकिन हमने 5 साल में हर दिन देखा – मौत का कारोबार, पैसों का कारोबार। 

यहाँ जिस प्रकार से बंगाल के लोगों के साथ धोखा किया गया, शारदा चिटफंड को कोई भूल सकता है क्या? गरीबों के पैसे डूबे हैं और ये पाप करने वाले जेलों में होने चाहिए थे, दीदी को ऐसे लोगों के खिलाफ़ कठोर कदम उठाने चाहिए थे लेकिन उन्होंने कुछ नहीं किया। ये सरकार गरीबों का धन लूटने वालों पर मेहरबानी करने वाली सरकार है। गरीब बेचारा कुछ सपने देखकर पैसे रखता था, बेटी की शादी हो या बच्चों की पढ़ाई लेकिन इन लुटेरों ने गरीब के पैसे हज़म कर लिये और उन्हें बेघर बना दिया। 

जब अच्छी एवं ईमानदार सरकार होती है तो गरीबों के लिए विभिन्न कल्याणकारी योजनाएं बनाती हैं। इन्होंने चिटफंड चलाया और हम प्रधानमंत्री जन-धन योजना लेकर आए; उन्होंने चिटफंड के नाम पर गरीबों से पैसे बनाए और हमने बिना पैसे गरीबों के खाते खोल दिए और मुफ़्त में अकाउंट खोलने की व्यवस्था कर दी। हमने गरीबों को रूपये कार्ड दिया ताकि उनके परिवार में कभी कोई संकट आ गया तो उसमें 2 लाख का बीमा होगा और परिवार को ये पैसा मिल जाएगा। अनेकों को ये मिला भी और जन-धन योजना के तहत हमने हिंदुस्तान के करोड़ों गरीबों के लिए बैंक के दरवाजे खोल दिए। असम हो, उड़ीसा हो, बंगाल हो, इन्होंने कहीं के गरीबों को नहीं छोड़ा। गरीबों को लूटने वालों को क्या चुनाव जीतना चाहिये? 

मैं आज आपसे आग्रह करने आया हूँ कि जिन-जिन लोगों ने गरीबों के पेट पर लात मारी है, ऐसे लोगों को इस चुनाव में एक पल के लिए भी स्वीकार नहीं करना चाहिए। 34 साल तक बंगाल में लेफ़्ट वालों की सरकार रही और उन्होंने बंगाल को बर्बाद कर दिया। दूर जाने की जरुरत नहीं है, 5 साल पहले चुनाव में कांग्रेस के नेता ने लेफ़्ट के खिलाफ़ क्या-क्या बोला था, ये आप वीडियो निकाल के सुन लो तो पता चल जाएगा कि लेफ़्ट वाले क्या करते थे और ये अजूबा देखो कि कांग्रेस वाले लेफ़्ट का कुर्ता पकड़ कर चल पड़े। जिस कांग्रेस पार्टी ने पहली बार केरल में लेफ़्ट की सरकार को धारा 356 लगाकर भंग कर दिया था और जिस कांग्रेस को लेफ़्ट के प्रति गुस्सा रहता था, आज पूरी कांग्रेस पार्टी लेफ़्ट के चरणों में जाकर बैठ गई है। ये जनता-जनार्दन जब देती है तो छप्पर फाड़कर देती है लेकिन जब ये लेती है तो कूड़े-कचरे की तरह साफ़ कर देती है। 

एक जमाना था जब कांग्रेस पार्टी 400 लोगों के साथ संसद में बैठती थी और जनता का गुस्सा ऐसा फूटा कि वे 40 पर आ गए। आज कांग्रेस की हालत देखो कि जीने-मरने के लिए लेफ़्ट के सामने झुकना पड़ा है और इनकी बेईमानी देखो - विचारधारा से अगर झगड़ा होता है तो ये केरल में भी होना चाहिए और वहां भी आमने-सामने लड़ना चाहिए लेकिन कांग्रेस का कमाल देखो कि केरल में वे कम्युनिस्ट को गाली दे रहे हैं और उनसे लड़ रहे हैं और बंगाल में कम्युनिस्ट को कंधे पर बिठाकर नाच रहे हैं। समझ नहीं आ रहा कि केरल में कुश्ती और बंगाल में दोस्ती? ये आप लोगों की आँखों में धूल झोंक रहे हैं। केरल में दोनों एक-दूसरे को गालियां देते हैं और बंगाल में कहते हैं कि बहुत अच्छे हैं और सबका भला करेंगे। 

एक जमाना था जब दीदी भ्रष्टाचार का नाम सुनती थी तो कुर्सी फेंक कर चली जाती थी लेकिन अब दीदी को क्या हो गया, ऐसा परिवर्तन कैसे आ गया। वो तो भ्रष्टाचार के खिलाफ़ रोड पर निकलती थीं, लाठियां झेलती थीं; आज इतना बड़ा स्कैंडल आ गया, टेंडर का सौदा होता है, नोटों की थप्पियाँ दी जा रही हैं और सब कैमरा पर है लेकिन इसके बावजूद दीदी ने कोई कदम नहीं उठाया। इसका मतलब है कि अब दीदी भ्रष्टाचार से एडजस्ट हो गई हैं; अब दीदी को ये सब ठीक लग रहा है। ये लुटते रूपये जनता के हैं और ये लूट बंद होना चाहिए। ये चुनाव एक ऐसा मौका है जब ऐसा करने वालों को राजनीति से हमेशा के लिए विदा कर देना चाहिए। 

मैं कभी कभी सोचता हूँ कि ये टीएमसी क्या है – टी फॉर टेरर, एम फॉर मौत और सी फॉर करप्शन। पांच सालों में टीएमसी का यह सीधा-सीधा मतलब निकल कर आया है। जब हम छोटे थे और लेफ़्ट वाले चुनाव जीतते थे तो हम लोगों से पूछते थे कि ये लेफ़्ट वाले चुनाव कैसे जीतते हैं तो समझदार लोग मुझे बताते थे कि यहाँ का चुनाव साइंटिफिक रिजीम करके जीता जाता था। साइंटिफिक रिजीम तो मैंने सुना था लेकिन दीदी के राज़ में मैं देख रहा हूँ - साइंटिफिक करप्शन। टेंडर का कारोबार टेंडर निकलने से पहले तय हो जाता है। 

अभी कोलकाता में करप्शन का भंडा फूट गया। विवेकानंद ब्रिज अनेकों की ज़िन्दगी को तबाह कर गया जिन्होंने अपनों को खोया है, उनके प्रति मेरी संवेदना है लेकिन दीदी मौत पर भी राजनीति कर रही हैं। ब्रिज गिरा है, लाशें पड़ी हैं, घायल लोग कराह रहे हैं और दीदी मदद करने के नाम पर कुछ नहीं बोलती हैं और कहती हैं इस ब्रिज का कॉन्ट्रैक्ट तो लेफ़्ट वालों ने दिया था। मैं पूछता हूँ कि अगर ये ब्रिज बन जाता तो आप उद्घाटन करने जाती कि नहीं और आप ब्रिज बनाने के क्रेडिट लेने की कोशिश करती कि नहीं। अगर लेफ़्ट वालों ने पाप किया तो उस पाप को आपने आगे क्यों बढ़ाया। पूरे पश्चिम बंगाल में जो लेफ़्ट वाले करके गए, उसे ही आगे बढ़ाने का काम दीदी कर रही हैं और इसलिए पश्चिम बंगाल को लेफ़्ट और दीदी, दोनों से मुक्ति चाहिए। 

जिस प्रकार से टेरर का माहौल बनाया जा रहा है, अपने विरोधियों को ख़त्म करने की कोशिश हो रही है, ये लोकतंत्र और उसके प्रति आस्था का प्रतीक नहीं है। इस चुनाव में जो डिबेट चल रही है, उससे मैं हैरान हूँ। वो पूछते हैं कि ममता जी के राज़ में कितनी हत्याएं हुईं तो ममता जी कहती हैं कि आपके राज़ में इतनी हत्याएं हुईं, लेफ़्ट वाले कहते हैं कि आपके ज़माने में इतनी बलात्कार की घटनाएँ हुईं तो ममता जी कहती हैं कि आपके ज़माने में इतनी हुईं, दोनों के बीच दंगों की गिनती हो रही है। मैं पूछता हूँ कि चुनाव में यही डिबेट चलेगा क्या? ये आरोप-प्रत्यारोप गलत है। अच्छा होता कि ये कहते कि लेफ़्ट वालों ने इतना रास्ता बनाया था और हमने उससे ज्यादा बना दिया; लेफ़्ट वालों ने इतने स्कूल खोले थे और हमने उससे ज्यादा स्कूल खोल दिए, ये स्पर्धा होनी चाहिए थी लेकिन यहाँ स्पर्धा इस बात की हो रही है कि कौन ज्यादा बुरा है। 

भाईयों-बहनों, हमारी सरकार को 2 साल होने को आए हैं। आपने कभी अपने सांसद बाबुल सुप्रियो जो मेरी सरकार में महत्वपूर्ण मंत्री हैं, उनके ऊपर एक भी आरोप सुना है क्या? 2 साल से हम बैठे हैं, हमने एक भी पाप नहीं किया, ऐसे सरकार चलाई जाती है। हमारी सभी समस्याओं का समाधान चुनावी खोखलेबाजी से नहीं होने वाला है। मेरा 3 एजेंडा है – पहला विकास, दूसरा तेज़ गति से विकास और तीसरा चारों तरफ विकास, जिस पर मैं पिछले साल से काम कर रहा हूँ और यहाँ भी करना चाहता हूँ। आप मुझे सेवा करने का मौका दीजिए। हमारी सभी समस्याओं का समाधान विकास में है। 

आप हैरान होंगे कि ये पश्चिम बंगाल इतना प्यारा और प्रगतिशील था कि अंग्रेजों को भी कोलकाता में आकर अपना काम करने का मन कर गया था, ऐसा शानदार और जानदार हुआ करता था हमारा बंगाल। बंगाल पूरे देश को दिशा दिखाता था लेकिन आज इस बंगाल की स्थिति देखिये। सुभाष भाई के भतीजे, चन्द्र कुमार बोस भाजपा से चुनाव लड़ रहे हैं और दीदी ऐसी घबरा गई हैं और दीदी ने ऐसा टेरर दिया है कि कोई चन्द्र बोस को दफ्तर खोलने की जगह नहीं दे रहा है। लोग कहते हैं कि हम वोट दे देंगे लेकिन जब तक दीदी हैं तब तक हम आपको मकान नहीं दे पाएंगे वर्ना हम जिंदा नहीं रह पाएंगे। ये लोकतंत्र है क्या? 

आसनसोल सुंदर नगरी के रूप में जाना जाता था। अभी भारत सरकार पूरे देश में लगातार स्पर्धा करती है और ज्यूरी निष्पक्षता से उसकी जाँच करती है। 2016 के शुरू में इस देश के 72 शहरों में सफ़ाई को लेकर स्पर्धा हुई। दो महीने का समय दिया गया कि आपको क्या-क्या करना है। आपको जानकर दुःख होगा कि आसनसोल उस सूची में नीचे से दूसरे पायदान पर था। दीदी ने आसनसोल को ऐसा बना दिया कि पूरे हिंदुस्तान में इसकी इज्ज़त को मिट्टी में मिला दिया। आसनसोल एक औद्योगिक नगरी रही है, साफ़-सुथरा होना चाहिए लेकिन न बंगाल की सरकार को परवाह है और न यहाँ बैठे हुए लोगों को परवाह है। 

मैं कहता हूँ कि आप इन लोगों से मुक्ति लेकर बंगाल में भाजपा को स्वीकार करें। दिल्ली पूरी ताक़त लगाएगा और जितनी बुराईयाँ यहाँ पिछले कई वर्षों से हैं, उसे निकालने के लिए मैं कंधे से कंधा मिलकर काम करूँगा। साइंटिफिक रिजीम और साइंटिफिक करप्शन; पश्चिम बंगाल में सिंडिकेट के नाम पर सारा कारोबार हड़प लिया जाता है। कोयले की कालाबाजारी में सिंडिकेट का क्या नाता है और ये सिंडिकेट लेफ़्ट वालों ने शुरू किया और तृणमूल वालों ने उसे आगे बढ़ाया है। मैंने पहले भी कहा है कि जिन्होंने देश का कोयला भी नहीं छोड़ा, उन्हें हम नहीं छोड़ेंगे। आपने कुछ दिन पहले देखा होगा कि कोयले की कालाबाजारी करने वाले कुछ लोगों को सजा भी हो गई और जेल भी हो गया और अब आगे औरों की भी बारी है। 

हमने करप्शन के खिलाफ़ लड़ाई चलाई है और मैं जानता हूँ कि मैं जितना इन चीजों को ठीक करता हूँ, उतना इन लोगों को परेशानी ज्यादा होती है। इसलिए वे जोर से चिल्लाते हैं क्योंकि उनको पता है कि अब उनके जेल में जाने के दिन आ रहे हैं। विकास की बात को छोड़कर और बातें जो उठाई जा रही हैं, उसका मूल कारण यही है कि मुसीबत अब उनके कदमों तक पहुँचने की तयारी कर रही है। कहीं भी जोर से आवाज़ सुनाई दे तो समझ लेना कि मोदी ने कोई ऐसा कदम उठाया है जिससे बेईमान लोगों के लिए परेशानी आनी शुरू हो गई है। 

मैं आपके पास वोट मांगने आया हूँ। मुझे वोट चाहिए – बच्चों की पढ़ाई के लिए, नौजवानों की कमाई के लिए, बुजुर्गों की दवाई के लिए, अच्छी शिक्षा के लिए, अच्छे जीवन के लिए, विकास के लिए। आप पूरी तरह समर्थन देकर भाजपा के उम्मीदवारों को विजयी बनाईए। 

बहुत-बहुत धन्यवाद!
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ମହାମହିମ,

ସମ୍ମାନନୀୟ ଅତିଥିବୃନ୍ଦ,

ନମସ୍କାର!

ବ୍ରିକ୍ସର ବିସ୍ତୃତ ପରିବାରରେ ଆପଣ ସମସ୍ତଙ୍କୁ ହାର୍ଦ୍ଦିକ ସ୍ୱାଗତ।

ଆଜି ଏହି ସଭାଗୃହ ବିଭିନ୍ନ ମହାଦେଶ, ସଂସ୍କୃତି ଏବଂ ବିକାଶ ଯାତ୍ରାକୁ ଏକତ୍ରିତ କରିଛି । ଏହା ବ୍ରିକ୍ସର ବର୍ଦ୍ଧିତ ଶକ୍ତି, ଆକର୍ଷଣ ଏବଂ ଅଭୂତପୂର୍ବ ବିଶ୍ୱାସର ପ୍ରମାଣ।

ବନ୍ଧୁଗଣ,

ଭାରତର ଅଧ୍ୟକ୍ଷତାରେ ଆମେ ଆମର ସମସ୍ତ ପ୍ରୟାସକୁ ସ୍ଥିରତା , ନବସୃଜନ , ସହଯୋଗ ଏବଂ ସ୍ଥାୟିତ୍ୱ ,ଏହି ଚାରିଟି ସ୍ତମ୍ଭ ଉପରେ କେନ୍ଦ୍ରିତ କରିଛୁ। ମୁଁ ଖୁସି ଯେ ଆପଣଙ୍କ ସହଯୋଗ ଏବଂ ସମର୍ଥନ ସହିତ, ଆମେ ଆମର ସାମୂହିକ ଦୃଷ୍ଟିକୋଣକୁ ପରସ୍ପର ଲାଭଦାୟକ ସହଯୋଗରେ ପରିଣତ କରିପାରିଛୁ ।

ଆଜି, ବିଶ୍ୱରେ ଉତ୍ତେଜନାର ସଂଖ୍ୟା ନିରନ୍ତର ବୃଦ୍ଧି ପାଉଛି, ଏବଂ ଏହା ସାଧାରଣ ଲୋକଙ୍କ ଜୀବନ ଉପରେ ଏକ ଅତ୍ୟନ୍ତ ନକାରାତ୍ମକ ଏବଂ ବ୍ୟାପକ ପ୍ରଭାବ ପକାଉଛି।

ମହାମାରୀ, ଜଳବାୟୁ ବିପର୍ଯ୍ୟୟ ଏବଂ ଯୋଗାଣ-ଶୃଙ୍ଖଳାରେ ବାଧା ଆମକୁ ଦେଖାଇଦେଇଛି ଯେ, ଆଜିର ପରସ୍ପର ସଂଯୁକ୍ତ ବିଶ୍ୱରେ କୌଣସି ସଙ୍କଟ କେବଳ ଗୋଟିଏ ଅଞ୍ଚଳ ମଧ୍ୟରେ ସୀମିତ ରହେ ନାହିଁ। ସେଥିପାଇଁ ବ୍ରିକ୍ସ ଗୋଷ୍ଠୀରେ ସ୍ଥିରତା ବୃଦ୍ଧି ଉପରେ ଆମେ ବିଶେଷ ଗୁରୁତ୍ୱ ଦେଇଛୁ। ସମସ୍ୟାଗୁଡ଼ିକୁ ସମୟ ପୂର୍ବରୁ ଚିହ୍ନଟ କରିବା, ସେଥିପାଇଁ ପ୍ରସ୍ତୁତ ରହିବା ଏବଂ ତୁରନ୍ତ ପଦକ୍ଷେପ ନେବା ମଧ୍ୟ ସେତିକି ଆବଶ୍ୟକ।

ଏହାକୁ ଦୃଷ୍ଟିରେ ରଖି, ସଂକ୍ରାମକ ରୋଗର ପ୍ରତିରୋଧ ଏବଂ ପ୍ରତିକ୍ରିୟା ପାଇଁ ବ୍ରିକ୍ସ ସମନ୍ୱିତ ପ୍ରାରମ୍ଭିକ ଚେତାବନୀ ପ୍ରଣାଳୀ ଉପରେ ସହମତ ହୋଇଛି। ବିପର୍ଯ୍ୟୟ ପରିଚାଳନା ପାଇଁ ପ୍ରାରମ୍ଭିକ ସତର୍କତା ତଥ୍ୟ ସମନ୍ୱୟ ନିର୍ଦ୍ଦେଶାବଳୀ ପ୍ରସ୍ତୁତ କରାଯାଇଛି। ବ୍ରିକ୍ସ ଲଜିଷ୍ଟିକ୍ସ ଯୋଗାଣ-ଶୃଙ୍ଖଳା ସହଯୋଗ ଢାଞ୍ଚା ଆମର ଯୋଗାଣ ଶୃଙ୍ଖଳାକୁ ଅଧିକ ବିଶ୍ୱସନୀୟ ଏବଂ ସ୍ଥିର କରିବାରେ ସହାୟକ ହେବ।

ବନ୍ଧୁଗଣ,

ନବସୃଜନ କ୍ଷେତ୍ରରେ ବ୍ରିକ୍ସ ଇନ୍‌କ୍ୟୁବେଟର ନେଟୱର୍କ ଆମର ଷ୍ଟାର୍ଟଅପ୍ ଏବଂ ଇନ୍‌କ୍ୟୁବେଟରଗୁଡ଼ିକୁ ପରସ୍ପର ସହିତ ଯୋଡ଼ିବ। ନବସୃଜନଶୀଳ ଏବଂ ବ୍ୟାପକ ଭାବେ ପ୍ରୟୋଗଯୋଗ୍ୟ ସମାଧାନକୁ ପ୍ରୋତ୍ସାହନ ଦେବା ପାଇଁ ଆମେ ବ୍ରିକ୍ସ ଷ୍ଟାର୍ଟଅପ୍ ଇନୋଭେସନ୍ ଫଣ୍ଡର ପ୍ରସ୍ତାବ ରଖିଛୁ।

ବ୍ରିକ୍ସ ଡିଜିଟାଲ କୃଷି ନେଟୱର୍କ କୃଷକମାନଙ୍କ ପାଇଁ ନୂତନ ସମ୍ଭାବନା ସୃଷ୍ଟି କରିବ। ଏହା ମାଧ୍ୟମରେ କୃତ୍ରିମ ବୁଦ୍ଧିମତ୍ତା , ଭୂସ୍ଥାନିକ ପ୍ରଯୁକ୍ତିବିଦ୍ୟା ଏବଂ ଡିଜିଟାଲ ସାର୍ବଜନୀନ ଭିତ୍ତିଭୂମିକୁ କୃଷକମାନଙ୍କ ପ୍ରକୃତ ଆବଶ୍ୟକତା ସହିତ ଯୋଡ଼ାଯିବ।

ପ୍ରଯୁକ୍ତିବିଦ୍ୟା ଏବଂ ଗୁରୁତ୍ୱପୂର୍ଣ୍ଣ ଖଣିଜ ପଦାର୍ଥର ଅସ୍ତ୍ରୀକରଣ ଆମର ସହଭାଗୀ ପ୍ରଗତିକୁ ବାଧା ଦେଇପାରେ। ତେଣୁ, ଆମେ ପ୍ରଯୁକ୍ତିବିଦ୍ୟା ଗ୍ରହଣରେ ଅନ୍ତର୍ଭୁକ୍ତି ଉପରେ ଗୁରୁତ୍ୱାରୋପ କରିଛୁ।

ବନ୍ଧୁଗଣ,

ଭାରତ ବ୍ରିକ୍ସର ମଞ୍ଚ ମାଧ୍ୟମରେ ବନ୍ଧୁତ୍ୱ, ସହଭାଗିତା ଏବଂ ସହଯୋଗକୁ ଆଗକୁ ବଢ଼ାଇଛି।

ଆମର ପ୍ରୟାସ ରହିଛି ଯେ, ବ୍ରିକ୍ସ ସହଯୋଗ କେବଳ ସରକାରମାନଙ୍କ ମଧ୍ୟରେ ସୀମିତ ନ ରହୁ। ଆମର ଉଦ୍ୟୋଗୀ, କୃଷକ, ଗବେଷକ, ମହିଳା, ଯୁବବର୍ଗ ଏବଂ ସାଧାରଣ ନାଗରିକମାନେ ମଧ୍ୟ ଏହାର ସକ୍ରିୟ ଅଂଶୀଦାର ହୁଅନ୍ତୁ।

ଆମେ ବ୍ରିକ୍ସ ସଂଯୋଗ ମାଧ୍ୟମରେ ଦକ୍ଷତା ବିକାଶ, ନିଯୁକ୍ତିଯୋଗ୍ୟତା, କର୍ମକ୍ଷେତ୍ରରେ ମହିଳାଙ୍କ ଅଂଶଗ୍ରହଣ, ସାମାଜିକ ସୁରକ୍ଷା ଏବଂ କ୍ଷମତା ବିକାଶକୁ ପ୍ରୋତ୍ସାହିତ କରିଛୁ।

କ୍ଷୁଦ୍ର ଉଦ୍ୟୋଗଗୁଡ଼ିକୁ ଜ୍ଞାନ, ଅର୍ଥ ଏବଂ ନୂତନ ବଜାର ସହିତ ଯୋଡ଼ିବା ପାଇଁ ବ୍ରିକ୍ସ ଏମଏସଏମଇ ସହଯୋଗ ପୋର୍ଟାଲ ପ୍ରତିଷ୍ଠା ପାଇଁ ପଦକ୍ଷେପ ନିଆଯାଇଛି।

ଆମ ସହରଗୁଡ଼ିକ ମଧ୍ୟରେ ଶ୍ରେଷ୍ଠ ପ୍ରଚଳନଗୁଡ଼ିକର ଆଦାନ-ପ୍ରଦାନ ପାଇଁ ବ୍ରିକ୍ସ ଅର୍ବାନ୍ ମୋବିଲିଟି ହବ୍ ପ୍ରତିଷ୍ଠା କରାଯାଇଛି।

ବନ୍ଧୁଗଣ,

ଭାରତୀୟ ସଭ୍ୟତାରେ ପ୍ରକୃତିକୁ ମା’ର ସ୍ଥାନ ଦିଆଯାଇଛି। ଶତାବ୍ଦୀ ଧରି ଆମର ବିଶ୍ୱାସ ରହିଆସିଛି ଯେ ବିକାଶ ଏବଂ ପରିବେଶ ପରସ୍ପରର ବିକଳ୍ପ ନୁହନ୍ତି, ବରଂ ପରସ୍ପରର ପରିପୂରକ। ବ୍ରିକ୍ସରେ ମଧ୍ୟ ଆମେ ମାନବ ବିକାଶ ଏବଂ ପରିବେଶ ମଧ୍ୟରେ ସନ୍ତୁଳନ ଉପରେ ଗୁରୁତ୍ୱ ଦେଇଛୁ।

ଏହା ହିଁ ସ୍ଥାୟିତ୍ୱର ମୂଳଦୁଆ। ଏହା ଭବିଷ୍ୟତ ପିଢ଼ି ପ୍ରତି ଆମର ଦାୟିତ୍ୱ ମଧ୍ୟ। ଏହି ଦିଗରେ ଆମେ ଅନେକ କ୍ଷେତ୍ରରେ ଅଗ୍ରଗତି କରିଛୁ।

ସ୍ମାର୍ଟ ଗ୍ରିଡ୍ ଏବଂ ଶକ୍ତି ସଂରକ୍ଷଣ ପାଇଁ ଆମେ ବ୍ରିକ୍ସ ଡିଜିଟାଲ ସେଣ୍ଟର ଅଫ୍ ଏକ୍ସଲେନ୍ସ ପ୍ରତିଷ୍ଠା କରିଛୁ। ଏହା ଆମର ସ୍ୱଚ୍ଛ ଶକ୍ତି ବ୍ୟବସ୍ଥାକୁ ଅଧିକ ବିଶ୍ୱସନୀୟ, ଦକ୍ଷ ଏବଂ ସୁଗମ କରିବାରେ ସହାୟକ ହେବ।

କୃଷି-ପରିସଂସ୍ଥାନ ଏବଂ ପୁନର୍ଜୀବନଶୀଳ କୃଷି ପାଇଁ ସେଣ୍ଟର୍ସ ଅଫ୍ ଏକ୍ସଲେନ୍ସ ପାରମ୍ପରିକ ଜ୍ଞାନକୁ ଆଧୁନିକ ବିଜ୍ଞାନ ସହିତ ଯୋଡ଼ିବ। ସମୁଦାୟଭିତ୍ତିକ ଜଳବାୟୁ ଅନୁକୂଳନ ପାଇଁ ପ୍ରସ୍ତୁତ କରାଯାଇଥିବା ସିଦ୍ଧାନ୍ତଗୁଡ଼ିକ ସ୍ୱଦେଶୀ ଜ୍ଞାନକୁ ଜଳବାୟୁ କାର୍ଯ୍ୟାନୁଷ୍ଠାନର ଏକ ଗୁରୁତ୍ୱପୂର୍ଣ୍ଣ ଆଧାରରେ ପରିଣତ କରିବ।

ବନ୍ଧୁଗଣ,

ଏହି ଚାରିଟି ସ୍ତମ୍ଭ ଉପରେ ଆଗକୁ ବଢ଼ି, ବ୍ରିକ୍ସ ମାଧ୍ୟମରେ ଆମେ ସମାବେଶୀ ବିଶ୍ୱ ଅଭିବୃଦ୍ଧିକୁ ପ୍ରୋତ୍ସାହନ ଦେବାର ପ୍ରୟାସ କରିଛୁ। କାରଣ ଆମର ବିଶ୍ୱାସ ଯେ, ବ୍ରିକ୍ସରେ ବିକଶିତ ସମାଧାନଗୁଡ଼ିକର ଲାଭ କେବଳ ବ୍ରିକ୍ସ ମଧ୍ୟରେ ସୀମିତ ରହିବା ଉଚିତ ନୁହେଁ। ଏଗୁଡ଼ିକୁ ଗ୍ଲୋବାଲ୍ ସାଉଥ୍‌ର ଆବଶ୍ୟକତା ଅନୁରୂପ ଅନୁକୂଳନଯୋଗ୍ୟ ଏବଂ ସୁଗମ କରାଯିବା ଉଚିତ।

ବନ୍ଧୁଗଣ,

ମୋର ବ୍ୟକ୍ତିଗତ ଅନୁଭବରୁ ମୁଁ କହିପାରେ ଯେ, ବ୍ରିକ୍ସ ପ୍ରତି ଗ୍ଲୋବାଲ୍ ସାଉଥ୍‌ର ଦେଶଗୁଡ଼ିକର ବିଶ୍ୱାସ ବୃଦ୍ଧି ପାଇଛି, କାରଣ ବ୍ରିକ୍ସରେ ସେମାନଙ୍କର ସ୍ୱର ଶୁଣାଯାଏ। ସେମାନଙ୍କ ଅଭିଜ୍ଞତାକୁ ସମ୍ମାନ ଦିଆଯାଏ ଏବଂ ସମାଧାନ ସେମାନଙ୍କ ପାଇଁ ନୁହେଁ, ବରଂ ସେମାନଙ୍କ ସହିତ ସୃଷ୍ଟି କରାଯାଏ।

ବ୍ରିକ୍ସର ଶକ୍ତି ଆମର ବିବିଧତା ଏବଂ ସହଯୋଗରେ ନିହିତ।

ଆମେ ଭିନ୍ନ ବାସ୍ତବତାରେ ମୂଳ ହୋଇପାରୁ, କିନ୍ତୁ ସହଯୋଗ ମାଧ୍ୟମରେ ଆମେ ଏକାଠି ଆଗକୁ ବଢ଼ୁ ଏବଂ ସମଗ୍ର ମାନବତା ପାଇଁ ବିକଶିତ ହେଉ।

ଆମର ବିବିଧତା ଆମର ପରିଚୟ ହୋଇ ରହୁ, ଆମର ସହଯୋଗ ଆମର ପ୍ରେରଣା ହେଉ ଏବଂ ଆମର ପ୍ରଗତି ସମଗ୍ର ମାନବତାର କଲ୍ୟାଣରେ ଆସୁ।

ଆପଣ ସମସ୍ତଙ୍କୁ ଅନେକ ଅନେକ ଧନ୍ୟବାଦ।