Our heritage can become the harbinger of world unity: PM Modi

Published By : Admin | May 18, 2023 | 11:00 IST
Inaugurates virtual walkthrough of upcoming National Museum at North and South Blocks
Unveils Mascot of the International Museum Expo, Graphic Novel – A Day at the Museum, Directory of Indian Museums, Pocket Map of Kartavya Path, and Museum Cards
“Museum provides inspiration from the past and also gives a sense of duty towards the future”
“A new cultural infrastructure is being developed in the country”
“Government is running a special campaign to conserve local and rural museums along with the heritage of every state and every segment of society”
“Holy relics of Lord Buddha conserved over the generations are now uniting followers of Lord Buddha all over the world”
“Our heritage can become the harbinger of world unity”
“A mood preserving things of historical significance should be instilled in the society”
“Families, schools, institutions and cities should have their own museums”
“Youth can become a medium of global culture action”
“There should not be any such artwork in any museum of any country, which has reached there in an unethical way. We should make this a moral commitment for all the museums”
“We will conserve our heritage and will also create a new legacy”

कैबिनेट में मेरे सहयोगी जी. किशन रेड्डी जी, मीनाक्षी लेखी जी, अर्जुन राम मेघवाल जी, Louvre म्यूजियम के निदेशक मैनुअल रबाते जी, दुनिया के अलग-अलग देशों से आए अतिथि गण, अन्य महानुभाव, देवियों और सज्जनों, आप सभी को International Museum Day की बहुत-बहुत शुभकामनाएं। आज यहां म्यूजियम वर्ल्ड के दिग्गज जुटे हुए हैं। आज का ये अवसर इसलिए भी खास है क्योंकि भारत अपनी आजादी के 75 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में अमृत महोत्सव मना रहा है।

International Museum Expo में भी इतिहास के अलग-अलग अध्याय, आधुनिक तकनीक से जुड़कर जीवंत हो रहे हैं। जब हम किसी म्यूजियम में जाते हैं, तो ऐसा महसूस होता है जैसे बीते हुए कल से, उस दौर से हमारा परिचय हो रहा हो, हमारा साक्षात्कार हो रहा हो। म्यूजियम में जो दिखता है, वो तथ्यों के आधार पर होता है, प्रत्यक्ष होता है, Evidence Based होता है। म्यूजियम में हमें एक ओर अतीत से प्रेरणाएँ मिलती हैं, तो दूसरी ओर भविष्य के प्रति अपने कर्तव्यों का बोध भी होता है।

आपकी जो थीम है- Sustainability and Well Being, वो आज के विश्व की प्राथमिकताओं को highlight करती है, और इस आयोजन को और ज्यादा प्रासंगिक बनाती है। मुझे विश्वास है, आपके प्रयास, संग्रहालयों में युवा पीढ़ी की रुचि को और बढ़ाएँगे, उन्हें हमारी धरोहरों से परिचित कराएंगे। मैं आप सभी का इन प्रयासों के लिए अभिनंदन करता हूं।

यहां आने से पहले मुझे कुछ पल म्यूजियम में बिताने का अवसर मिला, हमें कई कार्यक्रमों में जाने का अवसर आता है सरकारी, गैर सरकारी, लेकिन मैं कह सकता हूं कि मन पर प्रभाव पैदा करने वाला पूरा प्लानिंग, उसका एजुकेशन और सरकार भी इस ऊंचाई के काम कर सकती है जिसके लिए बहुत गर्व होता है, वैसी व्यवस्था है। और मैं मानता हूं कि आज का ये अवसर भारत के म्यूजियम की दुनिया में एक बहुत बड़ा turning point ले करके आएगा। ऐसा मेरा पक्‍का विश्‍वास है।

साथियों,

गुलामी के सैकड़ों वर्षों के लंबे कालखंड ने भारत का एक नुकसान ये भी किया कि हमारी लिखित-अलिखित बहुत सारी धरोहर नष्ट कर दी गई। कितनी ही पांडुलिपियां, कितने ही पुस्तकालय, गुलामी के कालखंड में जला दिए गए, तबाह कर दिए गए। ये सिर्फ भारत का नुकसान नहीं हुआ है, ये पूरी दुनिया का, पूरी मानव जाति का नुकसान हुआ है। दुर्भाग्य से आजादी के बाद, अपनी धरोहरों को संरक्षित करने के जो प्रयास होने चाहिए थे, वो उतने हो नहीं पाए हैं।

लोगों में धरोहरों के प्रति जागरूकता की कमी ने इस क्षति को और ज्यादा बढ़ा दिया। और इसीलिए, आज़ादी के अमृतकाल में भारत ने जिन ‘पंच-प्राणों’ की घोषणा की है, उनमें प्रमुख है- अपनी विरासत पर गर्व! अमृत महोत्सव में हम भारत की धरोहरों को संरक्षित करने के साथ ही नया कल्चरल इंफ्रास्ट्रक्चर भी बना रहे हैं। देश के इन प्रयासों में स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास भी है, और हजारों वर्षों की सांस्कृतिक विरासत भी है।

मुझे बताया गया है कि आपने इस आयोजन में लोकल और रूरल म्यूजियम पर विशेष महत्व दिया है। भारत सरकार भी लोकल और रूरल म्यूजियम को संरक्षित करने के लिए एक विशेष अभियान चला रही है। हमारे हर राज्य, हर क्षेत्र और हर समाज के इतिहास को संरक्षित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। हम स्वाधीनता संग्राम में अपनी tribal community के योगदान को अमर बनाने के लिए 10 विशेष म्यूज़ियम्स भी बना रहे हैं।

मैं समझता हूँ कि, ये पूरे विश्व में एक ऐसी अनूठी पहल है जिसमें Tribal Diversity की इतनी व्यापक झलक दिखने वाली है। नमक सत्याग्रह के दौरान महात्मा गांधी जिस पथ पर चले थे, उस दांडी पथ को भी संरक्षित किया गया है। जिस स्थान पर गांधी जी ने नमक कानून तोड़ा था, वहां आज एक भव्य मेमोरियल बना हुआ है। आज देश और दुनिया से लोग दांडी कुटीर देखने गांधीनगर आते हैं।

हमारे संविधान के मुख्य शिल्पी, बाबा साहेब आंबेडकर का जहां महापरिनिर्वाण हुआ, वो स्थान दशकों से बदहाल था। हमारी सरकार ने इस स्थान को, दिल्ली में 5 अलीपुर रोड को नेशनल मेमोरियल में परिवर्तित किया है। बाबा साहेब के जीवन से जुड़े पंच तीर्थ, महू में जहां उनका जन्म हुआ, लंदन में जहां वो रहे, नागपुर में जहां उन्होंने दीक्षा ली, मुंबई की चैत्य भूमि जहां उनकी समाधि है, ऐसे स्थानों का भी विकास किया जा रहा है। भारत की 580 से ज्यादा रियासतों को जोड़ने वाले सरदार साहब की गगनचुंबी प्रतिमा- स्टैच्यू ऑफ यूनिटी आज देश का गौरव बनी हुई है। स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के भीतर भी एक म्यूजियम बना हुआ है।

चाहे पंजाब में जलियावालां बाग हो, गुजरात में गोविंद गुरू जी का स्मारक हो, यूपी के वाराणसी में मान महल म्यूजियम हो, गोवा में म्यूजियम ऑफ क्रिश्चियन आर्ट हो, ऐसे अनेक स्थानों को संरक्षित किया गया है। म्यूज़ियम से जुड़ा एक और अनूठा प्रयास भारत में हुआ है। हमने राजधानी दिल्ली में देश के सभी पूर्व प्रधानमंत्रियों की यात्रा और योगदान को समर्पित पीएम-म्यूज़ियम बनाया है। आज पूरे देश से लोग आकर पीएम म्यूज़ियम में, आज़ादी के बाद की भारत की विकास यात्रा के साक्षी बन रहे हैं। मैं यहां आए अपने अतिथियों से विशेष आग्रह करूंगा कि एक बार इस म्यूजियम को भी अवश्य देखें।

साथियों,

जब कोई देश, अपनी विरासत को सहेजना शुरू कर देता है, तो इसका एक और पक्ष उभरकर सामने आता है। ये पक्ष है- दूसरे देशों के साथ संबंधों में आत्मीयता। जैसे कि भगवान बुद्ध के महापरिनिर्वाण के बाद भारत ने उनके पवित्र अवशेषों को पीढ़ी-दर-पीढ़ी संरक्षित किया है। और आज वो पवित्र अवशेष भारत ही नहीं, दुनिया के करोड़ों बौद्ध अनुयायियों को एक साथ जोड़ रहे हैं। अभी पिछले वर्ष ही हमने बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर 4 पवित्र अवशेषों को मंगोलिया भेजा था। वो अवसर पूरे मंगोलिया के लिए आस्था का एक महापर्व बन गया था।

बुद्ध के जो रेलिक्स हमारे पड़ोसी देश श्रीलंका में हैं, बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर उन्हें भी यहाँ कुशीनगर लाया गया था। ऐसे ही, गोवा में सेंट क्वीन केटेवान के पवित्र अवशेषों की धरोहर भी भारत के पास संरक्षित रही है। मुझे याद है, जब हमने सेंट क्वीन केटेवान के रेलिक्स को जॉर्जिया भेजा था तो वहां कैसे राष्ट्रीय पर्व का माहौल बन गया था। उस दिन जॉर्जिया के अनेकों नागरिक वहां के सड़कों पर एक बड़ा मैले जैसा माहौल हो गया था, उमड़ पड़े थे। यानी, हमारी विरासत, वैश्विक एकता-World Unity का भी सूत्रधार बनती है। और इसलिए, इस विरासत को संजाने वाले हमारे म्यूजियम्स की भूमिका भी और ज्यादा बढ़ जाती है।

साथियों,

जैसे हम परिवार में साधनों को आने वाले कल के लिए जोड़ते हैं, वैसे ही हमें पूरी पृथ्वी को एक परिवार मानकर अपने संसाधनों को बचाना है। मेरा सुझाव है कि हमारे म्यूज़ियम्स इन वैश्विक प्रयासों में active participants बनें। हमारी धरती ने बीती सदियों में कई प्राकृतिक आपदाएँ झेली हैं। इनकी स्मृतियाँ और निशानियाँ आज भी मौजूद हैं। हमें ज्यादा से ज्यादा म्यूज़ियम्स में इन निशानियों की, इनसे जुड़ी तस्वीरों की गैलरी की दिशा में सोचना चाहिए।

हम अलग-अलग समय में धरती की बदलती तस्वीर का चित्रण भी कर सकते हैं। इससे आने वाले समय में, लोगों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ेगी। मुझे बताया गया है कि इस expo में gastronomic experience के लिए भी स्पेस बनाया गया है। यहाँ आयुर्वेद और मिलेट्स-श्रीअन्न पर आधारित व्यंजनों का अनुभव भी लोगों को मिलेगा।

भारत के प्रयासों से आयुर्वेद और मिलेट्स-श्रीअन्न दोनों ही इन दिनों एक ग्लोबल मूवमेंट बन चुके हैं। हम श्रीअन्न और अलग-अलग वनस्पतियों की हजारों वर्षों की यात्रा के आधार पर भी नए म्यूज़ियम बना सकते हैं। इस तरह के प्रयास इस नॉलेज सिस्टम को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाएंगे और उन्हें अमर बनाएँगे।

 

साथियों,

इन सभी प्रयासों में हमें सफलता तभी मिलेगी, जब हम ऐतिहासिक वस्तुओं के संरक्षण को, देश का स्वभाव बनाएं। अब सवाल ये कि अपनी धरोहरों का संरक्षण, देश के सामान्य नागरिक का स्वभाव बनेगा कैसे? मैं एक छोटा सा उदाहरण देता हूं। क्यों ना भारत में हर परिवार, अपने घर में अपना एक पारिवारिक संग्रहालय बनाए? घर के ही लोगों के विषय में, अपने ही परिवार की जानकारियां। इसमें घर की, घर के बुजुर्गों की, पुरानी और कुछ खास चीजें रखीं जा सकती हैं। आज आप जो एक पेपर लिखते हैं, वो आपको सामान्य लगता है। लेकिन आपकी लेखनी में वही कागज का टुकड़ा, तीन-चार पीढ़ी के बाद एक Emotional Property बन जाएगा। ऐसे ही हमारे स्कूलों को भी, हमारे भिन्‍न-भिन्‍न संस्थानों और संगठनों को भी अपने-अपने म्यूजियम जरूर बनाने चाहिए। देखिएगा, इससे कितनी बड़ी और ऐतिहासिक पूंजी भविष्य के लिए तैयार होगी।

जो देश के विभिन्न शहर हैं, वो भी अपने यहां सिटी म्यूजियम जैसे प्रकल्पों को आधुनिक स्वरूप में तैयार कर सकते हैं। इसमें उन शहरों से जुड़ी ऐतिहासिक वस्तुएं रख सकते हैं। विभिन्न पंथों में जो रिकॉर्ड रखने की पुरानी परंपरा हम देखते हैं, वो भी हमें इस दिशा में काफी मदद करेगी।

साथियों,

मुझे खुशी है कि म्यूज़ियम आज युवाओं के लिए सिर्फ एक विजिटिंग प्लेस ही नहीं बल्कि एक करियर ऑप्शन भी बन रहे हैं। लेकिन मैं चाहूँगा कि हम अपने युवाओं को केवल म्यूज़ियम वर्कर्स की दृष्टि से ना देखें। हिस्ट्री और आर्किटैक्चर जैसे विषयों से जुड़े ये युवा ग्लोबल कल्चरल एक्सचेंज के मीडियम बन सकते हैं। ये युवा दूसरे देशों में जा सकते हैं, वहाँ के युवाओं से दुनिया के अलग-अलग कल्चर्स के बारे में सीख सकते हैं, भारत के कल्चर के बारे में उन्हें बता सकते हैं। इनका अनुभव और अतीत से जुड़ाव, अपने देश की विरासत के संरक्षण के लिए बहुत ही प्रभावी सिद्ध होगा

साथियों,

आज जब हम साझी विरासत की बात कर रहे हैं, तो मैं एक साझी चुनौती का भी जिक्र करना चाहता हूं। ये चुनौती है- कलाकृतियों की तस्करी और appropriation. भारत जैसे प्राचीन संस्कृति वाले देश सैकड़ों वर्षों से इससे जूझ रहे हैं। आजादी के पहले और आजादी के बाद भी हमारे देश से अनेकों कलाकृतियां Unethical तरीके से बाहर ले जाई गई हैं। हमें इस तरह के अपराध को रोकने के लिए मिलकर काम करना होगा।

मुझे खुशी है कि आज दुनियाभर में भारत की बढ़ती साख के बीच, अब विभिन्न देश, भारत को उसकी धरोहरें लौटाने लगे हैं। बनारस से चोरी हुई मां अन्नपूर्णा की मूर्ति हो, गुजरात से चोरी हुई महिषासुरमर्दिनी की प्रतिमा हो, चोल साम्राज्य के दौरान निर्मित नटराज की प्रतिमाएं हों, करीब 240 प्राचीन कलाकृतियों को भारत वापस लाया गया है। जबकि इसके पहले कई दशकों तक ये संख्या 20 नहीं पहुंची थी। इन 9 वर्षों में भारत से सांस्कृतिक कलाकृतियों की तस्करी भी काफी कम हुई है।

मेरा दुनियाभर के कला पारखियों से आग्रह है, विशेषकर म्यूजियम से जुड़े लोगों से अपील है कि इस क्षेत्र में सहयोग को और बढ़ाएं। किसी भी देश के किसी भी म्यूज़ियम में कोई ऐसी कलाकृति नहीं हो, जो unethical तरीके से वहाँ पहुंची हो। हमें सभी म्यूज़ियम्स के लिए इसे एक moral commitment बनाना चाहिए।

साथियों,

मुझे विश्वास है, हम अतीत से जुड़े रहकर भविष्य के लिए नए ideas पर इसी तरह काम करते रहेंगे। हम विरासत को सहेंजेंगे भी, और नई विरासत का निर्माण भी करेंगे। इसी कामना के साथ, आप सभी का हृदय से बहुत बहुत धन्यवाद!

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नमस्ते!

बों जू!

ऐसा लग रहा है, आप सब छुट्टी के मूड में हैं।

साथियों,

ये पेरिस शहर, Lights का शहर है, रंगों का शहर है, यहां Art है, Ideas हैं, और innovation की प्रेरणा भी है। इस शहर को भारत के अलग-अलग राज्यों से आए आप सभी लोग और भी खूबसूरत बना देते हैं। नए नए रंगों से भर देते हैं।

कोई तमिल है, कोई पंजाबी है, कोई गुजराती है, तो कोई मराठी है, और कोई बंगाली है। भारत के हर कोने का प्रतिनिधित्व यहां दिखाई देता है।

साथियों,

मैं जब 14 जून को नीस पहुंचा था तो सबसे पहले भारत इनोवेट्स कार्यक्रम में शामिल हुआ था। आज जब मैं फ्रांस से वापसी की तैयारी में हूं तो लग रहा है जैसे भारत कनेक्ट्स कार्यक्रम में आ गया हूं।

फ्रांस में रहने वाले आप लोगों ने 21वीं सदी के भारत-फ्रांस रिश्तों को जिस तरह कनेक्ट किया है, वो हमारी Strategic Partnership की बहुत बड़ी ताकत बन रही है। मैं आप सभी के लिए भारत से 140 करोड़ देशवासियों की शुभकामनाएं लेकर आया हूं। इस आत्मीय स्वागत के लिए, मैं आप सभी का हृदय से आभार व्यक्त करता हूं।

साथियों,

आज मैं ऐसे समय में फ्रांस आया हूं जब कुछ ही दिन पहले हमारी सरकार के 12 वर्ष पूरे हुए हैं। चुने हुए प्रधानमंत्री के रूप निरंतर 12 साल तक देश की सेवा करना मेरे जीवन का बहुत बड़ा सौभाग्य रहा है। यह भारत के लोकतंत्र की शक्ति है जिसने एक चायवाले को यहां तक पहुंचा दिया।

साथियों,

बीते 12 वर्ष, 140 करोड़ भारतीयों के अद्भुत सामर्थ्य के रहे हैं। 12 साल के इस कालखंड में भारत का GDP दोगुना हुआ है। Airports की संख्या दोगुनी हुई है। Universities की संख्या भी दोगुनी हो गई है। Highway Construction की स्पीड तीन गुना बढ़ गई। और Metro Network, चार गुणा बड़ा हो गया है।

मैं आपको कुछ और फैक्ट्स दूंगा, उससे आप अंदाजा लगा पाएंगे कि भारत किस स्पीड और कितने बड़े स्केल पर काम कर रहा है। पिछले 12 वर्षों में भारत का Defence Export 35 गुणा यानि Thirty Five Times बढ़ गया है।

औऱ एक फैक्ट सुनिए भारत में मोबाइल मैन्यूफैक्टरिंग यूनिट्स में, 100 गुणा की बढ़ोतरी हुई है। 100 times. भारत अब दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा mobile phone manufacturer है। इसी गति, इसी प्रगति का नतीजा है कि आज भारत दुनिया की Fastest Growing Major Economy है।

साथियों,

आज भारत की कहानी सिर्फ Economic Progress की कहानी नहीं है। सिर्फ यहाँ अटक नहीं जाती है। ये Social Transformation की भी कहानी है।

पिछले 12 साल में देश में 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले हैं। यानि एक ऐसी प्रगति जिसका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रहा है। फ्रांस में जितने घर हैं, उससे भी अधिक पक्के घर बीते 12 वर्ष में हमने जरूरतमंदों के लिए बनाए हैं।

अब हर परिवार के पास, गरीब से गरीब क्यों न हो, Bank Account है। Financial Inclusion एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का अभियान बना है।

साथियों,

इन 12 वर्षों की उपलब्धियों में, एक उपलब्धि ऐसी भी है जिसे किसी आंकड़े से, या अंकों से, नहीं मापा जा सकता। वह है 140 करोड़ भारतीयों का आत्मविश्वास।

आज का भारत और आज के भारत का युवा बहुत बड़े सपने देख रहा है। भारत का किसान नई संभावनाओं के साथ आगे बढ़ रहा है। भारत की महिलाएं नए नेतृत्व का परिचय दे रही हैं। इसलिए ये सिर्फ Achievements के 12 साल नहीं हैं, ये भारत की एस्पिरेशन्स को नई बुलंदी देने का कालखंड रहा है।

साथियों,

एक समय था जब दूर-दराज के गांवों तक आधुनिक सुविधाएं पहुंचाना वाकई बहुत मुश्किल भरा था। आज उन्हीं गांवों में बिजली भी है, इंटरनेट भी है, और डिजिटल सेवाओं की पूरी दुनिया भी है। आज एक क्लिक पर, कभी भी, कहीं भी बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध हैं।

आज मोबाइल फोन, भारत के नागरिकों को अनेक सुविधाओं से कनेक्ट कर रहा है। हमारे किसान, हमारे मछुआरे, हमारे dairy farmers, हमारी महिलाएं, हमारे स्टूडेंट्स, सभी टेक्नोलॉजी के माध्यम से सशक्त हो रहे हैं, और अपने लिए नए अवसर बना रहे हैं।

साथियों,

आपने 125 करोड़ से अधिक Aadhaar IDs के बारे में सुना है। लेकिन आज भारत सिर्फ पहचान को डिजिटल नहीं बना रहा। आज करीब 90 करोड़ भारतीयों की Unique Digital Health IDs बनाई जा चुकी हैं। जिससे मेडिकल रिकॉर्ड सुरक्षित और accessible बन गए हैं। इससे हेल्थकेयर डिलीवरी और अधिक आसान और efficient हो रही है।

साथियों,

इन उपलब्धियों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इनमें से अधिकांश चीजें कुछ वर्ष पहले तक कल्पना जैसी लगती थीं। कौन सोच सकता था कि गांव-गांव तक हाई-स्पीड इंटरनेट पहुंचेगा ? कौन सोच सकता था कि दूर-सुदूर के गांवों में भी QR code जीवन का हिस्सा बन जायेगा ? गांव में कोई बहन, ड्रोन से खेती करने में मदद करेगी, ये भी असंभव लगता था।

लेकिन आज यह सब, भारत के करोड़ों लोगों के जीवन का सामान्य हिस्सा बनता जा रहा है। और आपको गर्व होगा साथियों, यही नए भारत की पहचान है।

जो कभी सपना था, वह आज सच्चाई है। जो कभी नामुमकिन लगता था, वो आज मुमकिन हुआ है, औऱ ये करने के पीछे सबसे बड़ी ताकत क्या है? किसकी वजह से ये सब संभव हुआ है? यह मोदी के कारण नहीं, वो ताकत है- भारत का लोकतंत्र, भारत की डेमोक्रेसी। इस डेमोक्रेसी में सबका साथ है, सबका विकास है।

साथियों,

आज से 50 या 100 साल बाद जब भारत के इस कालखंड की समीक्षा होगी, तो ये बात उभरकर सामने आएगी कि इस कालखंड को भारत की Aspirations ने ड्राइव किया। यह भारत के एस्पिरेशन्स का नया युग है।

जहां बिजली पहुंची है, वहां लोग सिर्फ बिजली नहीं चाहते, वे Smart Living चाहते हैं। जहां ट्रेन पहुंची है, वहां लोग High-Speed Connectivity चाहते हैं। जहां हाईवे बने हैं, वहां लोग World-Class Expressways चाहते हैं। जहां इंटरनेट पहुंचा है, वहां लोग AI और Digital Innovation में नेतृत्व चाहते हैं।

यानि आज भारत के लोग अपने जीवन को भी Next Level पर ले जाना चाहते हैं, और भारत को भी Next Level पर ले जाना उनका मकसद है, उनका संकल्प है, उनके सपने है।

और साथियों,

यही Aspirations आज भारत की विकास यात्रा की सबसे बड़ी शक्ति हैं। मैं आपको भारत की Space Journey का उदाहरण दूंगा।

भारत ने चंद्रयान को चंद्रमा के South Pole पर उतारा। दुनिया ने इसे एक बहुत बड़ी उपलब्धि माना। लेकिन भारत इसे अपनी मंजिल मानकर रुका नहीं। आज देश गगनयान की तैयारी कर रहा है। भारत अंतरिक्ष में अपना Space Station बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

हमारे Space Startups Global Space Economy में अपनी जगह बनाने के लिए पुरजोश काम कर रहे हैं, आगे बढ़ रहे हैं।

साथियों,

Green Energy के क्षेत्र में भी भारत की यही एस्पिरेशंस दिखाई देती है। Solar Power में भारत की उपलब्धियों की दुनिया भर में लगातार चर्चा हो रही हैं। लेकिन भारत अगली छलांग की तैयारी कर रहा है।

Green Hydrogen में बड़े निवेश हो रहे हैं। Advanced Nuclear Energy पर तेजी से काम हो रहा है। आपने भारत के Fast Breeder nuclear Reactor से जुड़ी प्रोग्रेस के बारे में भी सुना ज़रूर होगा। ये भारत के न्यूक्लियर एनर्जी लैंडस्केप में क्रांतिकारी परिवर्तन करने का बहुत बड़ा अचीवमेंट हमारे सीसेन्टिस्टों ने किया है।

साथियों,

आज का भारत भविष्य का पूरा Ecosystem बना रहा है। भारत एक साथ हर उस क्षेत्र में निवेश कर रहा है, जो आने वाले दशकों की दिशा तय करेगा।

अभी आपने कुछ दिन पहले ही देखा है नीस में भारत इनोवेट्स का एक आयोजन किया। ये इवेंट भारत के डीप टेक सामर्थ्य को दुनिया तक पहुंचाने का एक और माध्यम था। इसमें भारत के 120 Deep-Tech Startups उपस्थित थे। Bharat Innovates में करीब एक हजार चार सौ B2B Meetings हुईं है। कई Startups के लिए Investment Commitments आगे बढ़ीं, Commercial Orders के लिए रास्ते खुले। French और European Universities तथा Incubators के साथ Engagements बढ़ रही हैं।

Student Exchanges, Joint Research, और Innovation Support के नए रास्ते बने। इसलिए Bharat Innovates सिर्फ एक Summit नहीं रहा। यह Innovation Diplomacy का एक नया मॉडल बना है।

और आज ही पेरिस में VivaTech इवेंट के जरिए, इस यात्रा को हमने और आगे बढ़ाया। नीस में हमने Ideas को Capital से जोड़ा और पेरिस में Indian Innovation को Global Scale से जोड़ा। आज दुनिया देख रही है भारत केवल भविष्य के लिए तैयार नहीं हो रहा है। भारत भविष्य को आकार दे रहा है।

साथियों,

एक समय था, जब देशों के बीच रिश्ते केवल व्यापार से तय होते थे। आज व्यापार के साथ-साथ Trust यानि भरोसा भी उतना ही महत्वपूर्ण हो गया है।

हर देश Reliable Supply Chains चाहता है। हर देश Stable Partnerships चाहता है। हर देश ऐसे साथियों की तलाश में है, जिन पर लंबे समय तक भरोसा किया जा सके। और ऐसे समय में, भारत विश्व में एक Trusted Partner के रूप में उभर रहा है।

एवियां में G7 बैठक के दौरान मैंने trust based partnerships बनाने पर ज़ोर दिया। ग्लोबल साउथ के देशों के साथ equal पार्टनर्स के रूप में आगे बढ़ने का आह्वान किया। भारत का G7 समिट में संदेश था Global Governance तभी प्रभावी होगी जब वह Inclusive होगी। Global Growth तभी Sustainable होगी जब वह शेयर्ड होगी। और Global Technology तभी मानवता के लिए उपयोगी होगी जब वह Trusted होगी।

साथियों,

भारत और दुनिया के बीच व्यापारिक रिश्तों में नई ऊर्जा नज़र आ रही है। फ्रांस के साथ भारत का ट्रेड लगतार बढ़ रहा है। पिछले कुछ वर्षों में भारत ने दुनिया के अनेक देशों के साथ Free Trade Agreements किए हैं। यूरोपियन यूनियन हो, यूनाइटेड किंगडम हो दुनिया के हर देश, हर रीजन के साथ भारत समझौते कर रहा है।

अगले महीने से भारत और UK के बीच ट्रेड एग्रीमेंट भी लागू हो जाएगा। यह एग्रीमेंट भारत के farmers, workers और innovators को अनेक नए अवसर प्रदान करेगा।

साथियों,

आज दुनिया Uncertainty और Disruption के दौर से गुजर रही है। ऐसे समय में भारत और फ्रांस की साझेदारी विश्वास, स्थिरता और सहयोग का एक मजबूत स्तंभ बन रहा है।

इस वर्ष हमने भारत और फ्रांस के संबंधों को Special Global Strategic Partnership का दर्जा दिया था। नीस में मेरे मित्र President Macron और मैंने हमारे संबंधों को force for global good बनाने पर चर्चा की। Defence से लेकर space और नुक्लियर तक AI और क्रिटीकल मिनरल्स से लेकर high speed railway तक, हर क्षेत्र में हम मिलकर आगे बढ़ेंगे।

साथियों,

Solar energy हो, या AI के क्षेत्र में सहयोग हो, भारत और फ्रांस मिलकर ऐसे समाधान विकसित कर रहे हैं जो पूरी मानवता के हित में हैं। पिछले वर्ष पेरिस में और इस वर्ष दिल्ली में हमने AI Summit को Co-chair किया।

अब हम साथ मिलकर अगले वर्ष “तृष्णा” satellite को लॉन्च करने जा रहें हैं। यह “तृष्णा” satellite जो विश्व में फूड और वाटर सिक्युरिटी सुनिश्चित करने में योगदान देगा।

और साथियों,

यह सभी गवर्नमेंट टू गवर्नमेंट पहलो में आप सभी का योगदान बहुत महत्वपूर्ण है। ये आप हैं जो भारत और यूरोप के बीच सबसे मजबूत सेतु हैं। आप दोनों समाजों को समझते हैं। दोनों बाजारों को समझते हैं। आने वाले समय में Talent, Trade, Technology, Tourism और Investment के नए अवसरों को आगे बढ़ाने में आपकी भूमिका लगातार बढ़ने वाली हैं।

साथियों,

भारत और फ्रांस के रिश्तों को साझा इतिहास, साझा मूल्यों और साझा विश्वास ने आगे बढ़ाया है। विश्व युद्धों के दौरान फ्रांस की धरती पर बलिदान देने वाले भारतीय सैनिकों की स्मृतियां आज भी हमें जोड़ती हैं।

मुझे पहले नव शापेल में श्रद्धांजलि देने का अवसर मिला, पिछले वर्ष प्रेसिडेंट मैक्रों के साथ मार्सेय के वॉर मेमोरियल जाने का अवसर भी मिला। ये हमारी साझा विरासत है।

फ्रांस, भारतीयों के योगदान को संजोता भी है और सराहता भी है। भारतीय मूल की नूर इनायत खान हों, जिन्होंने फ्रांस की Resistance के लिए अपना जीवन बलिदान किया, या महाराजा रणजीत सिंह के साथ काम करने वाले जनरल जां फ्रांस्वा अलार हों ये सभी भारत और फ्रांस की साझा विरासत के प्रतीक हैं।

भारत के राज्य पुडुचेरी में भी फ्रेंच विरासत की झलक दिखाई देती है। वहां का Architecture, वहां की कला-संस्कृति और खान-पान सभी में हमारे संबंधों की महेक है।

साथियों,

इस समय फ्रांस समेत पूरी दुनिया में International Yoga Day की तैयारी भी चल रही है। इस अवसर पर मैं, फ्रांस में योग को आगे बढ़ाने वाले श्रीमान महेश घाट्राड्याल जी को भी आदरपूर्वक श्रद्धांजलि देता हूं। मैं पद्म पुरस्कार से सम्मानित, शार्लोत शोपां जी को भी प्रणाम करता हूं। जिन्होंने सौ वर्ष की आयु में भी, योग के माध्यम से फ़्रांस को भारत की विरासत से जोड़ा है। उनका जीवन यह सिद्ध करता है: Yoga does not add years to life, it adds life to years.

साथियों,

मैं फ्रेद नेग्री जी को भी आदरपूर्वक श्रद्धापूर्वक याद करता हूं। भारतीय विरासत को संरक्षित करने में उनका योगदान अतुल्य रहा है।

साथियों,

भारत और फ्रांस को कनेक्ट करने वाली एक और चीज है, और वो है फुटबॉल। इस वक्त यहां फुटबॉल फीवर पूरे जोर पर है। फ्रांस में इसकी दीवानगी, चप्पे-चप्पे पर दिखती है। लेकिन भारत में भी फुटबॉल का क्रेज़ सिर चढ़कर बोलता है।

खासतौर पर फ्रांस की टीम के फैन्स भारत में बहुत अधिक हैं। फ़्रांस ने इस वर्ल्ड कप की शुरुआत एक जोरदार जीत से शुरू की है। मैं फ्रांस की टीम को बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं।

साथियों,

जाने से पहले, आप सभी के लिए कुछ और अच्छी खबरें भी लेकर के आया हूँ। वो आपके लिए हैं। पिछले वर्ष, मार्सेय में कॉन्सुलेट खोला गया, इससे काफी अधिक सुविधा मिल रही है। कुछ हफ्ते पहले, Indian Nationals के लिए French Airports पर Visa-free Transit की व्यवस्था शुरू हो गई है।

Students और Professionals की Mobility बढ़ाना हो, या Educational Qualifications की Mutual Recognition की बात हो, या फिर French Universities के भारत में Campus खोलना हो, इन सभी पर हम मिलकर आगे बढ़ रहें हैं।

अब फ्रांस में UPI के उपयोग का दायरा भी और बढ़ने जा रहा है। यानि भारत-फ्रांस कनेक्ट भी Instant और आपसी Payment भी Instant!

साथियों,

इन सभी पहलों से, हम भारत और फ़्रांस को और करीब ला रहें हैं। और मैं फिर कहूंगा इस साझेदारी की नींव, इस रिश्ते की असली ताकत आप सभी हैं। आप सब मेरे देशवासी हैं।

आज जब भारत तेज़ी से विकसित भारत के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है, तो मैं आप सभी से भारत के साथ और गहराई से जुडने का आग्रह करूंगा। इससे भारत की विकास यात्रा को नई शक्ति मिलेगी, और आपको अपनी पुरखों की धरती की सेवा करने का अवसर भी मिलेगा।

इन्हीं शब्दों के साथ आप सभी के प्रेम आपके उत्साह और इस आत्मीय स्वागत के लिए मैं एक बार फिर आप सभी का आभार व्यक्त करता हूं।

भारत माता की जय!

बहुत बहुत धन्यवाद।