Development is the only solution for all problems related to poverty and unemployment: PM
India will progress only through the development of the States and for this the Centre and States have to work together: PM

देवियों और सज्‍जनों,

आज यहां अनेक शिलान्‍यास के और उद्घाटन के कार्यक्रम हुए। हम सब इस बात को अब भलीभांति समझने लगे हैं कि विकास का कोई पर्याय नहीं है। अगर हमें गरीबी से लड़ना है तो विकास करना होगा, हमें बेरोजगारी से लड़ना है, तो विकास करना होगा, हमें अशिक्षा से लड़ना है तो विकास करना होगा, यदि हमें आरोग्‍य की सुविधाएं मुहैया करानी होंगी तो विकास करना होगा। सब दुखों की अगर कोई एक दवाई है तो वो दवाई है – विकास। यह अच्‍छी बात है कि इन दिनों राज्‍यों के बीच भी विकास को लेकर एक स्‍पर्धा का माहौल बनता चला जा रहा है। राज्‍यों को लगने लगा है कि वो राज्‍य उस बात में मुझसे आगे निकल गया, अब हम कुछ कोशिश करेंगे, हम आगे निकलेंगे। आखिरकार देश को आगे बढ़ाना है तो राज्‍यों के विकास से ही आगे बढ़ने वाला है। इसलिए देश के विकास के लिए राज्‍यों का विकास.. इस मूलमंत्र को ले करके, केंद्र हो या राज्‍य हो, सबने मिलकर के काम करना, काम को आगे बढ़ाना, यह आवश्‍यक होता है।

विकास के कामों में राजनीति कितना नुकसान करती है उसका ब्‍यौरा आदरणीय मुख्‍यमंत्री जी ने विस्‍तार से दिया। अटल जी के समय में जो काम.. छ: महीने मिलते तो पूरा हो जाता, उसको पूरा होते-होते आज 2015 आ गया। मैं नीतीश जी की बात से सहमत हूं कि अटल जी की सरकार का चुनाव यदि थोड़ी देर से होता, छ: महीने मिल जाते तो उस समय अटल जी के मार्गदर्शन में.. और यही के रेल मंत्री थे नीतीश जी, यह काम पूरा हो गया होता। वो सही बोल रहे हैं। लेकिन बाद में सरकार बदल गई और रेल मंत्री यहां से ऐसे आए कि काम को रोक दिया गया और हमारे आने के बाद उसको चालू किया गया। अब, राजनीति जो करते हैं करें लेकिन नुकसान बिहार का हुआ, बिहार की जनता का हुआ। नीतीश कुमार की इस व्‍यथा के साथ मैं भी अपना स्‍वर मिलाता हूं।



लेकिन मैं इस मत का हूं कि हमें विकास की यात्रा को निरंतर गति देना चाहिए। आज नीतीश जी ने बहुत अच्‍छी बातें बताई कि भई IIT है, हमें यहां की आवश्‍यकताओं के अनुसार और यहां की क्षमता के अनुसार नई-नई faculties को लाना चाहिए। मुझे विश्‍वास है कि नए परिसर की क्षमता इतनी है, 500 बीघा ज़मीन है.. यह होगा। हम तो कोशिश यह कर रहे हैं कि दुनिया में जो top cost faculties हों उनको भी भारत में लाया जाए ताकि भारत के हमारे युवकों को देश के लिए जो आवश्‍यक है, जिस राज्‍य में IIT हैं, वहां जो आवश्‍यक है, उन विषयों को बल दिया जाए। सिर्फ दिल्‍ली में बैठ करके योजनाएं बनाने का वक्‍त पूरा हो गया। अब तो राज्य के मन में जो भाव उठते हैं, उसकी जो आवश्यकताएं होती हैं, उसके अनुसार ही दिल्ली को ढलना चाहिए, ये मेरी सोच है औऱ मैं उसी को आगे बढ़ा रहा हूं।

आज यहां एक Incubation centre का प्रारंभ हो रहा है। ये Incubation centre मैं मानता हूं, ये एक बहुत बड़ा नजराना है। IIT complex, इमारत से भी ज्यादा, ये Incubation centre बहुत बड़ा महत्वपूर्ण हमारा initiative है। इसलिए मैं इस बात से convince हूं। मैं जिस प्रदेश से आया हूं, लोगों ने परिश्रम किया होगा, परमात्मा ने कृपा की होगी, लक्ष्मी ने वहां जाना पसंद किया होगा लेकिन ये भूमि है, जहां सरस्वती वास करती है। यहां के नौजवान तेजस्‍वी हैं। और मैं मानता हूं, यहां की जो तेजस्विता है वो पूरे हिंदुस्तान को तेजस्वी बना सके, ऐसी तेजस्विता इस धरती पर है। ..और मुझे विश्वास है कि ये जो Incubation centre हम सोच रहे हैं, बनाने जा रहे हैं, वो भी एक विशेष मकसद से है।

आज हम देख रहे हैं कि Medical services, health sector ये सिर्फ डॉक्टर नाड़ी पकड़ लें, चार सवाल पूछ लें और निर्णय नहीं होता कि बीमारी क्या है, दवाई क्या दें? ढेर सारे मशीनों के अंदर से शरीर को गुजारा जाता है, भांति-भांति मशीनों को शऱीर पर लगाया जाता है उसके बाद बीमारी तय होती है, उसके बाद उपचार तय होता है। पूरे Health Sector में Technology का प्रभाव इतना बढ़ा है, इतने नये-नये संसाधनों का आविष्‍कार हो रहा है। आज भारत को गरीब व्‍यक्ति को अगर इन संसाधनों को मुहैया कराना पड़े.. विदेशों से लाना बहुत महंगा पड़ रहा है। इस पटना की धरती पर बिहार के मेरे नौजवानों की प्रतिभा को एक अवसर दिया जा रहा है कि इस incubation centre में प्रमुख रूप से Electronic and Digital mechanics के साथ किस प्रकार से हम Health Sector के नये विषयों में आविष्‍कार करें, उसका उत्‍पादन करें ताकि हमारे गरीब से गरीब के लिए हमारे अस्‍पतालों में भारत में बने हुए उत्‍तम से उत्‍तम साधन तैयार हों, जिसका लाभ गरीब को मिले, उस दिशा में हम काम करें। इसलिए यह incubation Centre भले ही पटना की धरती पर बनने वाला हो, लेकिन वह हिंदुस्‍तान के गरीबों के आरोग्‍य की आवश्‍यकताओं की पूर्ति करने का एक अहम कार्यक्रम बनेगा, यह मैं देख रहा हूं।

आखिरकार विकास करना है तो infrastructure का बहुत महत्‍व होता है। अगर infrastructure को बहुत महत्‍व नहीं दिया गया तो हम बहुत पिछड़कर रह जाएंगे। बिहार में चाहे rail हो, road हो air हो, उसको infrastructure मिलें, उसकी connectivity बढ़े, capacity बढ़ें, इस पर हम बल दे रहे हैं। हिंदुस्‍तान में शायद अधिकतम रेलमंत्री यदि किसी राज्‍य ने दिये है तो बिहार ने दिये हैं। जमाने से जैसे यह रेल डिपार्टमेंट बिहार के लिए reservation है। रेल मंत्री तो मिले हैं, रेल देने का काम मेरे दिमाग में भरा पड़ा है। मैं रेल के माध्‍यम से बिहार के दूर-सुदूर इलाकों को कैसे जोड़ पाऊं, मुख्‍य धारा में विकास की.. यहां infrastructure आता है, उसको कैसे आगे बढ़ाऊं, इस दिशा में योजनाएं लेकर के आगे चल रहा हूं।

आज एक महत्‍वपूर्ण कार्यक्रम हमने launch किया है। वैसे नीतीश जी ने धर्मेंद्र प्रधान जी की इतनी तारीफ कर दी है, उसी से मुझे समझ आता है कि इस प्रोजेक्‍ट का कितना महत्‍व है। नीतीश जी की बात सही है, आने वाले दिनों में जिस प्रकार से रोड का महत्‍व है, रेल का महत्‍व है वैसे ही गैस ग्रिड का भी महत्‍व है। पूरी economy में गैसे आधारित economy shape ले रही है और गैस पहुंचाने के लिए महंगा खर्चीला नेटवर्क खड़ा करना पड़ता है, infrastructure बनाना पड़ता है। मैं देख रहा हूं कि energy के sector में गैस की उपलब्धि उस देश की पूरी economy को बदल देती है। बिहार की economy को बदलने का एक बहुत बड़ा ताकतवर प्रयास.. गंगा तो हमारे पास है ही है, हम ऊर्जा गंगा को लेकर के आ रहे हैं आपके पास।



गैस पाइप लाइन बिछाएंगे सैंकड़ों किलोमीटर। पटना में पाइप लाइन से घर-घर गैस कैसे पहुंचे.. जैसे हमारे घर में गृहणी के kitchen में tap चालू करते ही पानी आता है, वैसे ही tap चालू करते ही गैस आ जाए, इसके लिए यह योजना है। हर परिवार को यह पहुंचे हैं .. सैंकड़ों किलोमीटर से दूर से पाइप लाइन आएगी, हां बड़ा महंगा कारोबार है लेकिन एक बार अगर वह लग गया तो सालों साल तक यहां के जीवन को भी लाभ होगा और यहां के quality of life में भी बहुत बड़ा फायदा होगा, economy में भी फायदा होगा।

जैसा नीतीश जी ने कहा कि बिजली का पैसा तक माफ कर दिया है, fertilizer कारखाने का। उस समय हमारे सुशील जी आया करते थे कि साहब हमसे 300 करोड़ क्‍यों ले रहे हो। लेकिन फिर भी बिहार ने तकलीफ झेल करके भी इस काम को किया है। वित्‍त मंत्री थे हमारे सुशील जी, कठिनाई होने के बावजूद भी किया। यह करने के बावजूद भी 10 साल बीत गए साहब, fertilizer कारखाने की किसी को याद नहीं आई। क्‍या गुनाह है बिहार का? बिहार की जेब से पैसा निकाल करके यहां की सरकार ने तकलीफ होने के बावजूद भी दिया लेकिन उसको रोक दिया गया। हमने तय किया है कि यह बिहार का यह हक है। यह fertilizer का काम चालू होगा। यहां के किसानों को सस्‍ता fertilizer मिले, यह काम हम करेंगे। बिहार की जनता का या बिहार की सरकार का कोई दोष नहीं था। बिहार की सरकार आगे आई थी। लेकिन काम रोक दिया गया। लेकिन भाईयों बहनों मैं आपको विश्‍वास दिलाता हूं कि यह काम भी पूरा होगा और नौजवानों को रोजगार भी मिलेगा और किसान को fertilizer भी पहुंचेगा, इसका पूरा प्रबंध करके हम आगे बढ़ेंगे।

भाईयों बहनों, विकास की इस अवधारणा में हमने यह भी हमेशा निरंतर प्रयास किया है, cooperative federalism का। हमारा मत है कि राज्‍यों को अगर सहायता मिले, राज्‍यों को अगर अवसर मिले तो देश के आगे बढ़ने की ताकत बहुत बढ़ जाएगी। इसलिए 14th finance commission जो कि लागू हुआ है, उसके कारण बहुत बड़ा लाभ राज्‍यों को हो रहा है। एक राज्‍य को हो रहा है, एक को नहीं हो रहा है, ऐसा नहीं है। सभी राज्‍यों को हो रहा है। इसलिए कोई बिहार को कम मिला, अधिक मिला, किसी और राज्‍य को कम मिला, अधिक मिला, ऐसा नहीं है। क्‍योंकि हमारी योजना है। आज स्थिति ऐसी है.. एक जमाना था भारत का खजाना जो था, केंद्र का और राज्‍य का उसमें से 65-70% खजाना दिल्‍ली की सरकार की तिजौरी में रहता था। 38-35% सभी राज्‍यों की मिला करके तिजौरी में रहता था। हमने ऐसा एक महत्‍वपूर्ण फैसला किया है, कठिन काम लिया है सर पर। लेकिन जैसा नीतीश जी ने कहा कि मोदी जी आप पर हमारी आशा है, उसको पूरा करने के लिए हमने एक महत्‍वपूर्ण फैसला किया है। वो फैसला है vote in finance commission जिसके कारण आने वाले दिनों में बिहार को .. अगर पांच साल के finance commission का मैं देखूं तो बिहार को 2015 से 2020 के दरम्यिान finance commission के द्वारा करीब-करीब पौने चार लाख करोड़ के करीब रुपया मिलने वाले हैं। पौने चार लाख करोड़ के करीब रुपया मिलने वाले हैं, जो पहले सिर्फ बीते हुए समय में सिर्फ डेढ़ लाख करोड़ रुपया मिला था। डेढ़ लाख का पौने चार लाख करोड़ रुपया आने वाले दिनों में.. क्‍योंकि हम मानते हैं कि यह प्रदेश आगे बढ़ना चाहिए।

मेरा यह विश्‍वास है कि पूरब में जब तक प्रगति नहीं होती है, देश कभी आगे नहीं बढ़ सकता। चाहे बिहार हो, चाहे पूर्वी उत्‍तर प्रदेश हो, चाहे ओडि़शा हो, चाहे पश्चिम बंगाल हो, चाहे झारखंड हो असम हो, नागालैंड हो, मिजोरम हो, यह सारा हिंदुस्‍तान का पूर्वी भाग यह जब विकसित नहीं होता है, यह भारत माता हमारी समृध नहीं हो सकती है। इसलिए बिहार का विकास, यह हमारा प्राइम एजेंडा है। पूर्वी भारत का विकास, हमारा मकसद है, हमारा लक्ष्‍य है। उसको आगे बढ़ाने के लिए अनेक विध हम नई योजनाएं लाने वाले हैं, उसको पूरा करेंगे।

आने वाले कुछ दिनों में हमारे कुछ साथियों से मैंने कहा है कि आप जाइये, शिलान्‍यास कीजिए, उद्घाटन कीजिए, काम को आगे बढ़ाइये। जैसे मुजफ्फरपुर स्‍वर्ण-वर्ष नेशनल हाइवे, 77 किलोमीटर को double lane करने का काम पूर्ण हो चुका है। करीब छ: सौ करोड़ रुपया की लागत लगी है। पटना-गया-डोबी रोड के four laning का काम मंजूर हो गया है। करीब 1231 करोड़ रुपये की लागत है। पटना-कोयलावर-भोजपुर और भोजपुर-बक्‍सर रोड के भी four laning का काम मंजूर हो चुका है। लागत है करीब 2012 करोड़ रुपया। भागलपुर बाइपास का काम मंजूर हो गया है। लागत है करीब 230 करोड़ रुपया। शिवहरी-सीतामढ़ी-जयनगर-निरहिया रोड का भी सुधार मंजूर कर दिया गया है। लागत है करीब 701 करोड़ रुपया। फतवा-हरनोद-बारा रोड का काम भी मंजूर कर दिया है। लागत है करीब 590 करोड़ रुपया। यह सारे नेशनल हाइवे के प्रोजेक्‍ट जो इस सरकार ने already मंजूर कर दिये हैं, इन सबकी लागत होती है करीब-करीब पांच हजार करोड़ रुपया। क्‍योंकि मैं जानता हूं कि बिहार को विकास की नई ऊंचाईयों पर ले जाने के लिए इन चीजों का भरपूर उपयोग होना चाहिए। और हम इसको करना चाहते हैं।



आपको याद होगा पिछले लोकसभा के चुनाव में मैं यहां आया था। गांधी मैदान में बम धमाकों के बीच, मैं भाषण कर रहा था। उस समय मैंने कहा था कि केंद्र में हम सत्‍ता में आएंगे तो बिहार को विशेष पैकेज देंगे। उस समय मैंने घोषणा की थी.. चुनाव के पहले मैंने घोषणा की थी, मैंने कहा था कि 50 हजार करोड़ रुपयों का पैकेज बिहार को दिया जाएगा। भाईयों बहनों मैं जब दिल्‍ली में बैठा, बारीकी से चीजों को देखा तो मैं इस नतीजे पर पहुंचा कि मेरे दिल दिमाग में बिहार की जो कल्‍पना है, बिहार को अगर मुझे उस ऊंचाई पर ले जाने में बिहार को साथ लेकर के चलना है तो 50 हजार करोड़ से बात बनने वाली नहीं है। उसे और अधिक करने की आवश्‍यकता है। मैं आज उसकी घोषणा नहीं करूंगा, मैं सही समय पर आ करके उसकी घोषणा करूंगा, लेकिन मैं इतना कहता हूं कि मैंने जो वादा किया उसको तो निभाऊंगा, उससे भी आगे मामला ले जाऊंगा, यह आपको मैं वादा करने आया हूं। ताकि बिहार को विकास की यात्रा में कोई रूकावट नहीं आनी चाहिए और विकास की यात्रा तेज गति से आगे बढ़नी चाहिए।

इसी एक अपेक्षा के साथ, मुझे विश्‍वास है कि आज जिन योजनाओं का आरंभ हुआ है, जिन कार्यक्रमों की शुरूआत हो गई है, और भी हमारे मंत्रिगण के लोग आने वाले हैं, वो इस बात को आगे बढ़ाएंगे। आज यहां पर देशभर के कृषि वैज्ञानिकों को मैंने बुलाया है, पटना की धरती पर। अब इस कार्यक्रम के बाद उनके साथ बैठने वाला हूं, क्‍योंकि मैं मानता हूं कि हिंदुस्‍तान की second green revolution की संभावना अगर कहीं है, तो हिंदुस्‍तान के पूर्वी इलाके में हैं। बिहार में है, बंगाल में है, असम में है, पूर्वी उत्‍तर प्रदेश में है। second green revolution की संभावना इस इलाके में है। इसलिए मैंने देशभर के कृषि वैज्ञानिकों को आज पटना की धरती पर बुलाया है। वो यहां बैठ करके विचार-विमर्श करने वाले हैं। आने वाले दिनों में यहां के कृषि क्षेत्र को एक नई ताकत देने की दिशा में प्रयास करने वाले हैं।

मैं फिर एक बार बिहार सरकार का, बिहार की जनता-जर्नादन का, यहां के मुख्‍यमंत्री जी का स्‍वागत सम्‍मान के लिए हृदय से बहुत-बहुत अभिनंदन करता हूं।

बहुत-बहुत धन्‍यवाद।

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March 24, 2026

माननीय सभापति जी,

पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध और उससे बनी परिस्थितियों से हम सभी परिचित हैं। मैं आज संसद के उच्च सदन के सामने और देशवासियों के सामने इन विकट परिस्थितियों पर सरकार का पक्ष साझा करने के लिए उपस्थित हुआ हूं। पश्चिम एशिया में चल रहे इस युद्ध को तीन सप्ताह से अधिक का समय हो चुका है। इस युद्ध ने पूरे विश्व में गंभीर ऊर्जा संकट पैदा कर दिया है। भारत के लिए भी यह स्थिति चिंताजनक है। इस युद्ध से हमारे व्यापार के रास्ते प्रभावित हो रहे हैं। इससे पेट्रोल, डीजल, गैस और फर्टिलाइजर जैसे जरूरी सामान के रूटीन सप्लाई प्रभावित हो रही है। गल्फ देशों में करीब एक करोड़ भारतीय रहते हैं, वहां काम करते हैं। उनके जीवन और आजीविका की सुरक्षा भी भारत के लिए बहुत बड़ी चिंता है। होर्मुज स्ट्रेट में दुनिया के अनेक जहाज फंसे हैं, उनमें बहुत बड़ी संख्या में भारतीय क्रू मेंबर्स हैं। यह भी भारत के लिए एक बड़ी चिंता का विषय है। ऐसी विकट परिस्थिति में आवश्यक है कि भारत की संसद के इस उच्च सदन से शांति और संवाद की एकजुट आवाज पूरे विश्व में जाए।

सभापति जी,

युद्ध की शुरुआत के बाद से मैंने पश्चिम एशिया के ज्यादातर देशों के राष्ट्राध्यक्षों के साथ दो राउंड फोन पर बात की है। हम गल्फ के सभी देशों के साथ लगातार संपर्क में हैं। हम ईरान, इजरायल और अमेरिका के साथ भी संपर्क में हैं। हमारा लक्ष्य डायलॉग और डिप्लोमेसी के माध्‍यम से क्षेत्र में शांति की बहाली का है। हमने डि एस्केलेशन और होर्मुज स्ट्रेट खोले जाने पर भी उनसे बात की है। कमर्शियल जहाजों पर हमला और होर्मुज स्ट्रेट जैसे अंतरराष्ट्रीय जल मार्ग में रुकावट अस्वीकार्य है। भारत ने नागरिकों पर, सिविल इंफ्रास्ट्रक्चर पर, एनर्जी और ट्रांसपोर्ट से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमलों का विरोध किया है। भारत डिप्लोमेसी के जरिए युद्ध के इस माहौल में भी भारतीय जहाजों के सुरक्षित आवागमन के लिए सतत प्रयास कर रहा है। भारत ने इस समस्या के समाधान के लिए संवाद का ही रास्ता सुझाया है। इस युद्ध में किसी के भी जीवन पर संकट मानवता के हित में नहीं है। इसलिए भारत का सतत प्रयास सभी पक्षों को जल्द से जल्द शांतिपूर्ण समाधान के लिए प्रोत्साहित करने का है।

सभापति जी,

संकट की स्थिति में देश-विदेश में भारतीयों की सुरक्षा हमारी बहुत बड़ी प्राथमिकता है। युद्ध शुरू होने के बाद से लेकर अब तक 3 लाख 75 हज़ार से अधिक भारतीय सुरक्षित भारत लौट चुके हैं। ईरान से ही अभी तक 1000 से अधिक भारतीय सुरक्षित वापस लौटे हैं। इनमें 700 से अधिक मेडिकल की पढ़ाई करने वाले युवा हैं। हमारी सरकार संकट के इस समय में पूरी संवेदनशीलता से कम कर रही है। सभी देशों ने वहां मौजूद भारतीयों की सुरक्षा का पूरा आश्वासन दिया है। हालांकि यह बहुत दुखद है कि हमलों के कारण कुछ भारतीयों की मृत्यु हुई है और कुछ घायल भी हुए हैं। ऐसे मुश्किल हालात में परिवारजनों को आवश्यक मदद दी जा रही है। जो घायल हैं, उनका बेहतर इलाज सुनिश्चित कराया जा रहा है।

सभापति जी,

होर्मुज स्ट्रेट विश्व व्यापार के सबसे बड़े रूट्स में से एक है। विशेष तौर पर कच्चे तेल, गैस और फर्टिलाइजर से जुड़ा परिवहन इस क्षेत्र से बहुत बड़ी मात्रा में होता है। युद्ध के बाद से ही होर्मुज स्ट्रेट मैं जहाजों का आना-जाना बहुत चुनौतीपूर्ण हो गया है, लेकिन विपरीत परिस्थितियों के बावजूद हमारी सरकार ने संवाद से, कूटनीति के माध्यम से रास्ते बनाने का प्रयास किया है। प्रयास यह है कि जहां से भी संभव हो, वहां से तेल और गैस की सप्लाई भारत पहुंचे। ऐसी हर कोशिश के नतीजे भी देश देख रहा है। बीते कुछ दिनों में दुनिया के अनेक देशों से कच्‍चा तेल और एलपीजी से भरे जहाज भारत आए हैं। इस दिशा में हमारे प्रयास आने वाले दिनों में भी जारी रहेंगे।

सभापति जी,

भारत का प्रयास है कि तेल हो, गैस हो, फर्टिलाइजर हो, ऐसे हर जरूरी सामान से जुड़े जहाज भारत तक सुरक्षित पहुंचे। लेकिन इस युद्ध से बनी वैश्विक परिस्थितियों अगर लंबे समय तक बनी रहती हैं, तो गंभीर दुष्परिणाम तय है। इसलिए भारत अपनी रेसिलियंस बढ़ाने के लिए जो भी प्रयास बीते वर्षों में किए हैं, उनको और गति दे रहा है।

सभापति जी,

कोई भी संकट हो, वह हमारे हौसलों और हमारे प्रयास दोनों की परीक्षा लेता है। देश ऐसे संकटों का बेहतर तरीके से सामना कर सके, इसके लिए बीते 11 वर्षों में निरंतर निर्णय लिए गए हैं। एनर्जी इंपोर्ट का डायवर्सिफिकेशन ऐसे ही प्रयासों का हिस्सा है। पहले क्रूड ऑयल, एलएनजी, एलपीजी, ऐसी एनर्जी जरूरतों के लिए 27 देशों से इंपोर्ट किया जाता था। वहीं आज भारत 41 देशों से एनर्जी इंपोर्ट कर रहा है। बीते दशक में भारत ने संकट के ऐसे ही समय के लिए कच्चे तेल के भंडारों को भी प्राथमिकता दी है। हमारी तेल कंपनियां संकट के समय के लिए काफी मात्रा में पेट्रोल और डीजल का भंडार रखती हैं। बीते 11 वर्षों में 53 लाख मीट्रिक टन से अधिक तक स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व भी डेवलप किया गया है और 65 लाख मीट्रिक टन से अधिक के रिजर्व की व्यवस्था पर देश काम कर रहा है। साथ ही, बीते दशक में भारत की रिफायनिंग कैपेसिटी भी अच्छी-खासी बढ़ाई गई है। मैं आपके माध्यम से सदन को और देश को या यह देना चाहता हूं कि भारत के पास क्रूड ऑयल के पर्याप्त स्टोरेज के और निरंतर सप्लाई की व्यवस्थाएं हैं।

सभापति जी,

हमारी सरकार की कोशिश है कि ईंधन के किसी एक ही स्रोत पर ज्यादा निर्भरता ना रहे। सरकार घरेलू गैस सप्लाई में एलपीजी के अलावा पीएनजी पर भी बल दे रही है। बीते दशक में देश में पीएनजी कनेक्शन पर अभूतपूर्व काम हुआ है। बीते दिनों में इस काम को और तेज किया गया है। साथ ही, एलजी के घरेलू उत्पादन को भी बड़े पैमाने पर बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।

सभापति जी,

बीते वर्षों में सरकार का निरंतर प्रयास रहा है कि हर सेक्टर में दूसरे देशों पर निर्भरता कम से कम हो। हम ज्यादा से ज्यादा आत्मनिर्भर हों, यही एकमात्र विकल्प है। जैसे भारत का 90% से अधिक तेल विदेशी जहाजों पर होता है, यह स्थिति किसी भी वैश्विक संकट में भारत की स्थिति को और भी गंभीर बना देती है। इसलिए सरकार ने मेड इन इंडिया जहाज बनाने के लिए करीब 70000 करोड़ रुपए का अभियान शुरू किया है। भारत आज शिप बिल्डिंग, शिप ब्रेकिंग, मेंटेनेंस एंड ओवरहालिंग, ऐसी हर सुविधा का निर्माण पर तेज गति से कम कर रहा है। भारत अपने डिफेंस सेक्टर को भी अधिक रेसिलियंट बना रहा है। बीते दशक में किए गए प्रयासों से भारत आज अपनी जरूरत के अधिकांश हथियार भारत में ही बना रहा है। एक समय था, जब भारत अपने जीवन रक्षक दावों के कच्चे माल यानी API के लिए भी दूसरे देशों पर बहुत अधिक निर्भर था। बीते वर्षों में देश ने भारत में ही API इकोसिस्टम बनाने के लिए अनेक प्रयास किए हैंं। इसी प्रकार रेयर अर्थ मिनिरल्स में विदेशी निर्भरता को कम करने के लिए भी बड़े कदम उठाए जा रहे हैं।

आदरणीय सभापति जी,

वर्तमान संकट ने पूरी दुनिया की इकोनॉमी को हिला दिया है। अभी तक पश्चिम एशिया में जो नुकसान हुआ है, उससे रिकवर होने में भी दुनिया को बहुत समय लगेगा। भारत में इसका कम से कम दुष्प्रभाव हो, इसके लिए निरंतर प्रयास किया जा रहे हैं। हमारे इकोनॉमी के फंडामेंटल्‍स मजबूत हैं और सरकार पल-पल बदलते हालात पर नजर रखे हुए हैं। सरकार इसके शॉर्ट टर्म, मीडियम टर्म और लॉन्ग टर्म ऐसे हर प्रभाव के लिए एक रणनीति के साथ काम कर रही है। भारत सरकार ने एक इंटर मिनिस्ट्रियल ग्रुप भी बनाया है, यह ग्रुप नियमित मिलता है और हमारे इंपोर्ट एक्सपोर्ट में आने वाली हर दिक्कत का आकलन करता है और यह ग्रुप आवश्यक समाधान पर भी निरंतर काम करता रहा है। जैसे कोरोना के समय में अलग-अलग सेक्टर्स की चुनौतियों से निपटने के लिए एक्सपोर्ट्स और ऑफिसर्स के empowered groups बने थे, वैसे ही कल ही ऐसे 7 नए empowered groups का भी गठन किया गया है। यह ग्रुप सप्लाई चैन, पेट्रोल-डीजल, फर्टिलाइजर, गैस, महंगाई, ऐसे विषयों पर त्वरित और दूरगामी रणनीति के तहत कार्यवाही करने का काम करेंगे। मुझे पूरा भरोसा है कि इस साझा प्रयासों से हम परिस्थितियों का बेहतर सामना कर पाएंगे।

आदरणीय सभापति जी,

सरकार यह भी प्रयास कर रही है कि आने वाले बुवाई के सीजन में किसानों को पर्याप्त खाद मिलती रहे। सरकार ने खाद की पर्याप्त सप्लाई के लिए आवश्यक तैयारियां की हैं। सरकार का निरंतर प्रयास है कि किसानों पर किसी भी संकट का बोझ ना पड़े। मैं देश के किसानों को फिर आश्वस्त करूंगा कि सरकार हर चुनौती के समाधान के लिए उनके साथ खड़ी है।

आदरणीय सभापति जी,

यह राज्यों का सदन है। आने वाले समय में यह संकट हमारे देश की बड़ी परीक्षा लेने वाला है और इस परीक्षा में सफलता के लिए राज्यों का सहयोग बहुत आवश्यक है। इसलिए इस सदन के माध्यम से मैं देश के सभी राज्यों की सरकारों से भी कुछ आग्रह करना चाहता हूं। संकट के समय गरीबों पर, श्रमिकों पर, प्रवासी साथियों पर बहुत बड़ा असर पड़ता है। इसलिए पीएम गरीब कल्याण अन्‍न योजना का लाभ समय पर मिलता रहे, यह सुनिश्चित करना होगा। जहां प्रवासी श्रमिक साथी काम करते हैं, उनकी परेशानियों को दूर करने के लिए प्रोएक्टिव कदम उठाए जाएं। ऐसी स्थितियों पर नजर रखने के लिए राज्य सरकारें विशेष व्यवस्थाएं करें, तो इससे काफी सुविधा होगी। राज्य सरकारों को एक और चुनौती पर भी बहुत अधिक ध्यान देना होगा, ऐसे समय में कालाबाजारी करने वाले, जमाखोरी करने वाले बहुत एक्टिव हो जाते हैं। जहां से भी ऐसी शिकायतें आती हैं, वहां पर त्वरित कार्यवाही होनी चाहिए। जरूरी चीजों की सप्लाई निर्बाध चलती रहे, यह सुनिश्चित करना हर राज्‍य की प्राथमिकता होनी चाहिए।

आदरणीय सभापति जी,

मैं सभी राज्य सरकारों से एक अनुरोध और करना चाहता हूं। संकट चाहे कितना भी बड़ा हो, भारत की तेज ग्रोथ बनाए रखना, हम सभी का दायित्व है। हमें इसके लिए हर जरूरी कदम, हर जरूरी रिफॉर्म्स तेजी से करते रहने होंगे। यह राज्य सरकारों के पास बहुत बड़ा अवसर भी है। यह टीम इंडिया की भी बहुत बड़ी परीक्षा है। कोरोना के महासंकट में केंद्र और राज्यों ने टीम इंडिया बनकर कोविड मैनेजमेंट का एक बेहतरीन मॉडल सामने रखा था। अलग-अलग पॉलिटिकल पार्टी की सरकारें होने के बावजूद टेस्टिंग, वैक्सीनेशन से लेकर जरूरी चीजों की आपूर्ति टीम इंडिया के प्रयासों से ही निश्चित हो पाई थी। हमें उसी भावना के साथ आगे भी काम करना है। सभी राज्य सरकारों और केंद्र सरकार के प्रयासों से देश इस गंभीर वैश्विक संकट का प्रभावी रूप से सामना कर पाएगा।

आदरणीय सभापति जी,

यह संकट अलग प्रकार का है और इसके समाधान भी अलग प्रकार से ही तय किया जा रहे हैं। हमें धीरज के साथ, संयम के साथ, शांत मन से हर चुनौती का मुकाबला करना है।

आदरणीय सभापति जी,

जैसा कि हम देख रहे हैं कि इस युद्ध को लेकर पल-पल में हालात बदल रहे हैं। इसलिए मैं देशवासियों से भी कहूंगा कि हमें हर चुनौती के लिए तैयार रहना ही होगा। इस युद्ध के दुष्प्रभाव लंबे समय तक रहने की प्रबल आशंका है। लेकिन मैं देशवासियों को भरोसा देता हूं, सरकार सतर्क है, तत्पर है और पूरी गंभीरता से रणनीति बना रही है, हर निर्णय ले रही है। देश की जनता का हित हमारे लिए सर्वोपरि है। यही हमारी पहचान है, यही हमारी ताकत है। इसी भावना के साथ मैं अपना वक्तव्य समाप्त करता हूं।

बहुत-बहुत धन्यवाद!