பிரதமர் மோரிசன் மற்றும் முன்னாள் பிரதமர் டோனி அபோட் ஆகியோரின் தலைமைக்கு பிரதமர் நன்றி
"இவ்வளவு குறுகிய காலத்தில் 'இந்த்ஆஸ் எக்டா' கையெழுத்தானது இரு நாடுகளுக்கும் இடையே உள்ள பரஸ்பர நம்பிக்கையின் ஆழத்தை பிரதிபலிக்கிறது"
"இந்த ஒப்பந்தத்தின் அடிப்படையில் நாம் விநியோகச் சங்கிலிகளின் உறுதியை மேம்படுத்த முடியும், மேலும் இந்தோ-பசிபிக் பிராந்தியத்தின் நிலைத்தன்மைக்கும் பங்களிக்க முடியும்."
"நம்மிடையேயான மாணவர்கள், தொழில் வல்லுநர்கள் மற்றும் சுற்றுலாப் பயணிகளின் பரிமாற்றத்தை இந்த ஒப்பந்தம் எளிதாக்கும், மக்களுடனான உறவுகளை இது மேலும் வலுப்படுத்தும்"
உலகக் கோப்பை இறுதிப் போட்டியை முன்னிட்டு ஆஸ்திரேலிய மகளிர் கிரிக்கெட் அணிக்கு பிரதமர் வாழ்த்துகளைத் தெரிவித்தார்

பிரதமர் மோரிசன் அவர்களே,

ஆஸ்திரேலியா மற்றும் இந்தியாவின் வர்த்தக அமைச்சர்களே,

எங்களுடன் இணைந்துள்ள இரு நாட்டு நண்பர்களே,

வணக்கம்!

எனது நண்பர் ஸ்காட் உடன் ஒரு மாதத்தில் எனது மூன்றாவது நேருக்கு நேர் உரையாடல் இதுவாகும். கடந்த வாரம் நடைபெற்ற காணொலி உச்சி மாநாட்டில் மிகவும் பயனுள்ள விவாதத்தை நாங்கள் நடத்தினோம். ​​பொருளாதார ஒத்துழைப்பு மற்றும் வர்த்தக ஒப்பந்தம் தொடர்பான பேச்சுவார்த்தையை விரைவில் முடிக்குமாறு எங்கள் குழுக்களுக்கு அப்போது அறிவுறுத்தியிருந்தோம். இன்று இந்த முக்கிய ஒப்பந்தம் கையெழுத்திடப்படுவதில் நான் மிகவும் மகிழ்ச்சியடைகிறேன். இந்த அசாதாரண சாதனைக்காக, இரு நாட்டு வர்த்தக அமைச்சர்கள் மற்றும் அவர்களது அதிகாரிகளை மனதார வாழ்த்துகிறேன்.

ஆஸ்திரேலியாவின் முன்னாள் பிரதமரும் தற்போதைய பிரதமர் மோரிசனின் வர்த்தகத் தூதுவருமான திரு டோனி அபோட்டையும் நான் குறிப்பாக வாழ்த்த விரும்புகிறேன். செயல்முறையை விரைவுப்படுத்த அவரது முயற்சிகள் உதவின.

நண்பர்களே,

மிகக் குறுகிய காலத்தில் இவ்வளவு முக்கியமான ஒப்பந்தம் நிறைவடைந்திருப்பது இரு நாடுகளுக்கும் இடையே பரஸ்பர நம்பிக்கை எந்தளவுக்கு உள்ளது என்பதைக் காட்டுகிறது. இது உண்மையில் நமது இருதரப்பு உறவுக்கு ஒரு முக்கியமானத் தருணம். பரஸ்பர தேவைகளை பூர்த்தி செய்யும் பெரும் ஆற்றலை நமது பொருளாதாரங்கள் கொண்டுள்ளன. இந்த ஒப்பந்தத்தின் மூலம் இந்த வாய்ப்புகளை முழுமையாகப் பயன்படுத்திக் கொள்ள முடியும் என்று நான் உறுதியாக நம்புகிறேன்.

மாணவர்கள், தொழில் வல்லுநர்கள் மற்றும் சுற்றுலாப் பயணிகளின் பரிமாற்றத்தை இந்த ஒப்பந்தம் எளிதாக்குகுவதோடு உறவுகளை மேலும் வலுப்படுத்துகிறது. இந்தியா-ஆஸ்திரேலியா பொருளாதார ஒத்துழைப்பு மற்றும் வர்த்தக ஒப்பந்தம் குறித்த திறமையான மற்றும் வெற்றிகரமான பேச்சுவார்த்தைக்கு இரு நாடுகளின் குழுக்களையும் மீண்டும் ஒருமுறை வாழ்த்துகிறேன்.

இன்றைய நிகழ்வில் கலந்துகொண்ட பிரதமர் மோரிசனுக்கு எனது மனமார்ந்த நன்றிகள். ஆஸ்திரேலியாவில் நடைபெறவிருக்கும் தேர்தலை வெற்றிகரமாக நடத்த எனது வாழ்த்துகள். மேலும், நாளை நடைபெறவுள்ள உலகக் கோப்பை இறுதிப் போட்டிக்கு ஆஸ்திரேலிய மகளிர் கிரிக்கெட் அணிக்கு வாழ்த்துகள்.

வணக்கம்!

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Text of PM’s remarks during inauguration of Swaminarayan Hindu Temple in Paris
September 06, 2026

पूज्य महंत स्वामी, फ्रांस सरकार के सम्मानित प्रतिनिधिगण, उपस्थित अतिथिगण, इंडियन कम्युनिटी के मेरे साथी, देश दुनिया से जुड़े सभी हरि भक्त, देवियों और सज्जनों, जय स्वामीनारायण!

आज फ्रांस की राजधानी पेरिस में भव्य स्वामीनारायण मंदिर का लोकार्पण हो रहा है। यह लोकार्पण भारत और फ्रांस के सांस्कृतिक संबंधों का नया युग स्तंभ है। पूज्य संत जनों और सनातन परंपरा के श्रेष्ठ जनों के आशीर्वाद के साथ आज इस लोकार्पण का मंच ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ के भाव का मंच बन गया है। भगवान स्वामीनारायण की कृपा और हमारे संतों का स्नेह, संतों का आशीर्वाद, मेरा सौभाग्य है कि मुझे ऐसे पुण्य अवसरों से जुड़ने का अवसर हमेशा मिलता रहता है। आज भी मैं भले ही पेरिस में आप सबके बीच उपस्थित नहीं हूं, लेकिन मन से और हृदय से, मैं स्वयं को आपके बीच ही अनुभव कर रहा हूं।

साथियों,

आज इस अवसर पर मैं परम पूज्य प्रमुख स्वामी जी महाराज का भी श्रद्धापूर्वक स्मरण करता हूं। प्राचीन काल में भारत का जो सांस्कृतिक आध्यात्मिक वैभव था, उन्होंने उसके पुनर्जागरण का एक अभियान शुरू किया था। आज उसका प्रकाश यूरोप समेत पूरी दुनिया में फैल रहा है। 2024 में अबू धाबी में भव्य मंदिर का लोकार्पण हुआ था। आज वहां हजारों लोग दर्शन करने जाते हैं और अब यहां पेरिस में स्वामीनारायण मंदिर का निर्माण सृजन की यह निरंतरता, यह संतों की संकल्प शक्ति का ही प्रमाण है। मैं पुनीत कार्य के लिए पूज्य महंत स्वामी का आभार प्रकट करता हूं, मैं उनके चरणों में प्रणाम करता हूं। मैं BAPS स्वामीनारायण संस्था को और करोड़ों हरि भक्तों को इस अवसर पर हृदय की गहराई से बधाई देता हूं।

साथियों,

BAPS के माध्यम से जब अलग-अलग देश में मंदिरों की प्राण प्रतिष्ठा होती है, तो वहां भारत के प्राचीन विचार और मानवीय मूल्य भी साथ-साथ ही जाते हैं और भारत का विचार कहता है ‘समानं मनः सह चित्तमेषाम्’ अर्थात हमारे मन समान हो, हमारे हृदय साथ जुड़े। इसलिए आज जब फ्रांस में इतना भव्य मंदिर बनकर तैयार हुआ है, यह फ्रांस की विविधता को तो समृद्ध करेगा ही, इससे भारत और फ्रांस के सांस्कृतिक संबंधों को भी ऊर्जा मिलेगी।

साथियों,

बीते वर्षों में भारत और फ्रांस के संबंध नई ऊंचाइयों तक पहुंचे हैं। मेरे मित्र, प्रेसिडेंट मैक्रों के साथ मिलकर दोनों देश एक Special Global Strategic Partnership बना रहे हैं। Technology, AI और Defence से लेकर Space और Climate Action तक हम एक नई गति और नई ऊर्जा के साथ मिलकर के आगे बढ़ रहे हैं। हम 2026 को India-France Year of Innovation के रूप में भी सेलिब्रेट कर रहे हैं। भारत-फ्रांस की ये Strategic Partnership इसलिए भी खास है, क्योंकि ये हमारे पुराने सांस्कृतिक-राजनैतिक सम्बन्धों की मजबूत बुनियाद पर टिकी है। इतिहास गवाह है, फ्रांस में भारतीय सैनिकों के बलिदान का इतिहास आज भी मन-मंदिर में जीवित है। भाषा से जुड़े विषयों में रुचि रखने वाले लोग यह भी जानते हैं कि फ्रेंच स्कॉलर्स ने संस्कृत को लोकप्रिय बनाने में कितनी अहम भूमिका निभाई है। रामकृष्ण परमहंस और स्वामी विवेकानंद पर रोमाँ रोलाँ की की लेखनी हमारी सोसाइटीज़ को और करीब लाई है। पेरिस से पुडुचेरी के अरबिंदो आश्रम तक 'The mother' की spiritual journey, उसने कितने ही भारतीय और फ्रेंच साधकों को inspire किया है।

साथियों,

दशकों पहले श्रील प्रभुपाद स्वामी भी फ्रांस आए थे। इस्कॉन के जरिए भारत फ्रांस के बीच आध्यात्मिक सम्बन्धों का नया अध्याय उन्होंने शुरू किया था। आज योग भी भारत-फ्रांस के people to people कनेक्ट का एक माध्यम बन चुका है। 'इंटरनेशनल योगा डे' पर एफिल टॉवर के सामने से आने वाली तस्वीरें फ्रांस में योग की लोकप्रियता का उदाहरण बनती हैं और अब BAPS के इस भव्य मंदिर के जरिए, हमारे उन सांस्कृतिक सम्बन्धों में एक नया अध्याय जुड़ रहा है।

साथियों,

इन दिनों, भारत फ्रांस Joint Ventures की संभावनाओं पर बातें होती हैं। स्वामीनारायण मंदिर ने इस संभावना में भी एक नया आयाम जोड़ा है। यह मंदिर 'मेड इन इंडिया' है और 'बिल्ट इन फ्रांस' है। इसके काफी पत्थरों को भारत में तराशा गया है। भारत की प्राचीन प्रतिभा यहाँ फ्रांस में आधुनिक इंजीनियरिंग से आकर जुड़ चुकी है। पेरिस में इस भव्य मंदिर ने आकार लिया है। इसलिए, मैं आशा करता हूँ, यह मंदिर सदियों तक भारत और फ्रांस के बीच सहयोग और संभावनाओं का भी प्रतीक बनकर उभरेगा।

साथियों,

स्वामीनारायण मंदिर हमेशा से भक्ति के साथ-साथ सेवा का माध्यम भी रहे हैं। मुझे बताया गया है, यह मंदिर भी सेवा प्रकल्पों का वैसा ही केंद्र बनेगा। मुझे विश्वास है कि यहाँ से भारतीय संस्कृति के जो स्वर निकलेंगे, उनका लाभ पूरे यूरोप में लोगों को मिलेगा। भविष्य में मुझे जब भी समय मिलेगा, मैं इस मंदिर में दर्शन करने का प्रयास अवश्य करूंगा। इन्हीं शब्दों के साथ, एक बार फिर आज के इस लोकार्पण समारोह में सम्मिलित सभी अतिथिगणों को, सभी परिवारों को, सभी हरि भक्तों को और पूरी Indian Diaspora को मेरी ओर से इस शुभारंभ पर्व की ढेरों शुभकामनाएं!

बहुत-बहुत धन्यवाद!

मर्सी बोकू!

जय स्वामीनारायण!