भारत और जापान के बीच जो गहरे संबंध हैं, उन संबंधों का यश सिर्फ दो देशों की सरकारों को नहीं जाता है। उन संबंधों का यश आप जैसे सामाजिक जीवन के सभी वरिष्‍ठ लोगों ने जिस भावना के साथ एक छोटे से पौधे को अपनी बुद्धिमता-क्षमता के अनुसार एक विशाल वटवृक्ष बनाया है, इसके लिए आपको और आपके पूर्व के पीढि़यों को इसका यश जाता है। उनका हक बनता है और मैं इसलिए अब तक जिन-जिन लोगों ने भारत और जापान के संबंधों को सुदृढ़ किया है, उन सबका मैं हृदय से आभार व्‍यक्‍त करता हूं।

मुझे बताया गया है कि भारत-जापान एसोसिएशन को 110 साल हो गए हैं। मैं सोच रहा था कि आज के युग में एक फैमिली भी 100 साल तक इकट्ठे नहीं रहती है। अगर एक परिवार 100 साल तक इकट्ठा नहीं रह सकता है तो ये लीडरशिप की कितनी मैच्‍योरिटी होगी, दोनों देशों के नीति निर्धारकों की कितनी मैच्‍योरिटी होगी, जिसके कारण 110 साल तक ये संबंध और गहरा होता गया। ये अपने आप में, एक बहुत बड़ी प्रेरणा दायक घटना है।

मुझे यह भी बताया गया कि जापान की किसी भी देश के साथ इतनी पुरानी एक भी एसोसिएशन नहीं है, जितनी कि जापान और भारत की है। हमारे पूर्वजों ने ये जो महान नींव रखी है, मैं नहीं मानता हूं कि ये महान काम किसी तत्‍कालीन लाभ के लिए किया गया है। ये नींव पूरे मानव जाति के कल्‍याण को ध्‍यान में रखते हुए ये नींव रखी गई है जिसे दोनों देशों के महानुभावों ने और ताकतवर बनाया है।

अब हम इस पीढ़ी की और आने वाले पीढि़यों की जिम्‍मेदारी है, कि जो 110 साल की ये यात्रा है, एक तपस्‍या है, उसको हम अधिक प्राणवान कैसे बनायें, अधिक जीवंत कैसे बनायें और आने वाली पीढि़यों तक उसके संस्‍कार संक्रमण के लिए हम मिलकर के क्‍या कर सकते हैं, ये हम सबका दायित्‍व है।

कल जैसे प्रधानमंत्री आबे और मेरे बीच जो वार्ता हुई, हमारा एक जो तोक्यो डिक्‍लरेशन था, उसमें एक महत्‍वपूर्ण निर्णय हुआ है कि अब तक हम ‘स्‍ट्रे‍टेजिक ग्‍लोबल पार्टनर्स’ के रूप में काम करते थे, अब हमारा उसका स्‍टेटस ऊपर करके ‘स्‍पेशल स्‍ट्रेटेजिक ग्‍लोबल पार्टनर्स’ के रूप में आगे बढ़े हैं। ये हो सका है, इसके दो कारण हैं। एक, ये 110 साल पुरानी निरंतर हमारी ये एसोसिएशन, ये निरंतर संपर्क की व्‍यवस्‍था, इंडियन और जापानीज पार्लियामेंट्री एसोसिएशन की सक्रियता और दूसरा जो सबसे बड़ा कारण है, वह आज भले हम स्‍पेशल स्‍ट्रेटेजिक ग्‍लोबल पार्टनर्स के रूप में कागज पर हमने शायद लिखा हो, लेकिन जो चीज हमने कागज पे नहीं, हमारे दिलों में लिखी गई है, वह है जापान भारत की ‘स्पिरिचुअल पार्टनरशिप’।

मैं देख रहा हूं कि जापान में धीरे-धीरे हिंदी भाषा सीखने का जो उत्‍साह है, उमंग है, वह बढ़ता ही चला जा रहा है। उसी प्रकार से योग के संबंध में मैं देख रहा हूं कि जापान की रूचि और बढ़ रही है। यानी एक-एक बारीक चीज का संबंध हमारा जुड़ रहा है।

जापान का भारत पर कितना बड़ा हक है, मैं एक उदाहरण बताना चाहता हूं। अभी कुछ दिन पहले मुझे आपकी एक चिट्ठी मिली थी और चिट्ठी में आपने मुझे लिखा था कि मोदी जी आप आएंगे तो हिंदी में बोलिये। आप ही ने लिखी थी ना। जरा सा हमारे भारत के लोगों को आपका चेहरा बताइए। और इतनी बढि़या हिंदी में चिट्ठी लिखी है। प्‍लीज, ये हमारे लोग देखना चाहेंगे, आपको। इतनी, इतनी बढि़या हिंदी में चिट्ठी लिखी है उन्‍होंने मुझे और उन्‍होंने मुझे आग्रह किया है कि मोदी जी, मैं आपसे आग्रह करूंगा कि आप जापान के किसी भी कार्यक्रम में जाएं, कृपा करके हिंदी में बोलिये।

देखिए, एक-एक सामान्‍य व्‍यक्ति का ये जो लगाव है, ये जो अपनापन है, ये अपने आप में हैरान करने वाला हे। जब मैं यहां सुभाष चंद्र बोस की बात करूं तो मुझे यहां इतने लोग मिलेंगे, बड़े गौरव के साथ उन स्‍मृतियों को बताएंगे। मुझे ये भी बताया गया है कि आपके इन सदस्‍यों में एक सबसे वयोवृद्ध हैं। शायद उनकी उमर 95 इयर है। वे आज भी सुभाष बाबू की सारी घटनाओं का इतना वर्णन करते हैं, इतनी डिटेल बताते हैं। सुभाष बाबू उनसे शेक हैंड नहीं करते थे, गले लगते थे। वे सारी बातों को बताते हैं। वो यहां बैठे हैं खास इस काम के लिए आए हैं। खड़े हो पाएंगे, मैं उनको प्रणाम करता हूं। वो सुभाष बाबू के एक बहुत बड़े निकट के साथी रहे हैं।मैं उनको प्रणाम करता हूं।

आपको सुभाष बाबू की कौन सी साल, कौन सी डेट, सारी घटनाएं अभी भी याद हैं। मैंने हमारे एम्‍बेसेडर को कहा है कि हाइली प्रोफेशनल वीडियो टीम उनके साथ एक महीने के लिए लगा दिया जाए और उसका वीडियो रिकॉर्डिंग होना चाहिए। महीने भर कोई उसके साथ रहें, उनका इंटरव्‍यू लेते रहे और हर पुरानी बातों को रिकार्ड करे। क्‍योंकि यह एक जीते-जागते इतिहास की हमारे पास तवारीख हैं। तो ऐसी बहुत सी चीजें हमारे साथ जुड़ी हुई हैं।

मैं जब पहली बार जापान आया था तो मैं मोरी जी के घर गया था। बड़े प्‍यार से उन्‍होंने मुझे अपने घर पर बुलाया था, तो कड़ी की बात निकली। जापान में कड़ी बहुत फेमस है। तो मुझे बताया गया, बंगाल से जो परिवार आए थे, उन्‍होंने सबसे पहले कड़ी की शुरूआत की थी। वो आज एक प्रकार से जापान की फेवरेट डिश बन गई है। यानी कितनी निकटता कितनी बारीकी है। और मैं मानता हूं कि इसको हमें और महात्‍म्‍य देना चाहिए। और आगे बढ़ना चाहिए।

पार्लियामेंट्री ऐसोसिएशन का भी बहुत बड़ा योगदान है। इन संबंधों के कारण दोनों देशों की नीतियों में हमेशा उस बात पर ध्‍यान रखा गया है कि हमारे संबंधों को कोई खरोंच न आ जाए। कोई भी उस पर नुकसान न हो जाए।

पार्लियामेंट्री एसोसिएशन के लिए मेरे मन में कुछ विचार आए हैं। मैं चाहूंगा कि इसको आगे चलकर के हम इसको कुछ एक्‍सपैंड कर सकते हैं क्‍या ? एक तो मैं भारत के लिए इस पार्लियामेंट्री एसोसिएशन के लिए निमन्‍त्रण देता हूं। आप आइए और दिल्‍ली के सिवाए भी मैं चाहूंगा कि कुछ और लोकेशन पर भी जाइए और भारत को खुशी होगी, आप सबकी मेहमान नवाजी करने की। दो-तीन और चीजें अगर हम कर सकते हैं तो सोचें। एक पार्लियामेंट्री एसोसिएशन बहुत अच्‍छा चल रहा है। भारत से भी लोग यहीं आते हैं। यहां के भी पार्लियामेंट मेम्‍बर्स आते हैं और एक अंडरस्‍टेंडिंग ईच अदर, ये अपने आप में बहुत अच्‍छी प्रोग्रेस हो रही है। लेकिन समय रहते उसमें मुझे थोड़े बदलाव की मुझे जरूरत लगती है।

इसी पार्लियामेंटरी एसोसिएशन के साथ एक छोटा सा यंग पार्लियामेंटरी ऐसोसिएशन बना सकते हैं क्‍या ? जो दोनों देशों के यंगेस्‍ट पार्लियामेंटेरियंस हैं, उनका जरा मिलना-जुलना हो, वो अपनी नई पीढ़ी की सोच की चर्चा करें। उस दिशा में कुछ कर सकते हैं क्‍या ?

दूसरा, एक मेरे मन में विचार आता है, क्‍या दोनों देशों की वीमेन पार्लियामेंट मेम्‍बर्स का एसोसिएशन बन सकता है क्‍या। जिसमें महिला पार्लियामेंट मेम्‍बर्स के बारी-बारी से मिलने की संभावना बन सकती है क्‍या ?सभी महिलाओं ने सबसे पहले तालियां बजाई हैं।

तीसरा एक जो मुझे लगता है कि भारत इतना विशाल देश है। इतने राज्‍य हैं, हर राज्‍य की अपनी असेम्‍बली है, और असेम्‍बली के भी मेम्‍बर्स है। क्‍या कभी न कभी हम उन राज्‍यों से और एक ही राज्‍य से सभी एमएलए नहीं, लेकिन 5-6 राज्‍यों के दो-दो करके एमएलए यहां आए और यहां से भी उसी प्रकार से लोकल बॉडीज के लोग आयें । ये अगर हमारा बनता है तो इतना बड़ा विशाल देश है, भिन्‍न–भिन्‍न कोने में जाने का हो जाए। और हम यह तय कर सकते हैं कि जापान का कोई न कोई डेलीगेशन, हिंदुस्‍तान में 25 से भी ज्‍यादा राज्‍य हैं, हर महीने अगर दो डेलीगेशन आते हैं, और एक राज्‍य में एक डेलीगेशन जाता है और लोग आते चलें – आते चलें। अब देखिए, देखते ही देखते जापान में हिंदुस्‍तान की एक्‍सपर्टाइज वाले 1000 लोग तैयार हो जाएंगे।

आपने मुझे यहां बुलाया, मेरा सम्‍मान किया। मैं आपका बहुत-बहुत आभारी हूं। लेकिन मैं अनुभव करता हूं, मैं कारण नहीं जानता हूं। लेकिन, मैं जब भी जापान आया हूं और जब भी जापान के लोगों से मिलता हूं मुझे एक अलग सा अपनापन महसूस होता है। वो ये अपनापन क्‍या है, मैं नहीं जानता, शास्‍त्र कौन से होंगे। देखिए मुझे बहुत अपनापन लगता है और मुझे इतना प्‍यार मिलता है जापान से।

आपके एम्‍बेसडर मेरे यहां थे, वो मेरे यहां 3 साल रहे और मैंने देखा कि हम इतने मित्र की तरह साथ काम करते थे, इतनी हमारी दोस्‍ती बन गई थी। और इतने कामों को हम बढ़ा रहे थे और इसलिए मैं मानता हूं कि आपने जो अपनापन मुझे दिया है, वो प्रधानमंत्री पद से भी बहुत बड़ी चीज है। बहुत बड़ी चीज है, जो आपने मुझे दिया है। मैं इसको कभी भूल नहीं सकता हूं।

मैं आपका बहुत-बहुत आभारी हूं, और मेरी आप सबको बहुत-बहुत शुभकामनाएं।

धन्‍यवाद।

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ਮਹਾਮਹਿਮ, ਮਾਣਯੋਗ ਸ਼੍ਰੀਮਤੀ ਅਜ਼ਰੈਲ ਅਰਨੇਸਤਾ,

ਨੈਸ਼ਨਲ ਅਸੈਂਬਲੀ ਦੇ ਸਪੀਕਰ, ਮਾਣਯੋਗ ਮਿਸੇਸ ਸਿਲਵਾਨ ਲੇਮਿਆਏਲ,

ਸਰਕਾਰੀ ਕਾਰਜਾਂ ਦੇ ਪ੍ਰਤੀਨਿਧੀ,

ਵਿਰੋਧੀ ਧਿਰ ਦੇ ਮਾਣਯੋਗ ਨੇਤਾ ਮਿਸਟਰ ਬਾਣੋ ਜਰਜ,

ਨੈਸ਼ਨਲ ਅਸੈਂਬਲੀ ਦੇ ਮਾਣਯੋਗ ਮੈਂਬਰਾਨ,

ਅਤੇ ਮੇਰੇ ਪਿਆਰੇ ਭਰਾਵੋ ਅਤੇ ਭੈਣੋ,

ਨਮਸਕਾਰ!

ਬੋਨ ਅਪ੍ਰੇਮਿਡੀ!

ਇਸ ਨੈਸ਼ਨਲ ਅਸੈਂਬਲੀ ਨੂੰ ਸੰਬੋਧਨ ਕਰਨ ਵਾਲੇ ਪਹਿਲੇ ਭਾਰਤੀ ਪ੍ਰਧਾਨ ਮੰਤਰੀ ਵਜੋਂ ਤੁਹਾਡੇ ਸਾਹਮਣੇ ਹਾਜ਼ਰ ਹੋਣਾ ਮੇਰੇ ਲਈ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ ਸਨਮਾਨ ਦੀ ਗੱਲ ਹੈ। ਮਾਣਯੋਗ ਸਪੀਕਰ ਜੀ, ਤੁਹਾਡੇ ਨਿੱਘੇ ਅਤੇ ਸਤਿਕਾਰ ਭਰੇ ਸ਼ਬਦਾਂ ਲਈ ਤੁਹਾਡਾ ਧੰਨਵਾਦ।

ਮੈਂ ਅੱਜ ਇਸ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਬਲੂ ਹੋਰਾਈਜ਼ਨ ਦੇ "ਗਾਰਡੀਅਨ" ਸਨਮਾਨ ਨਾਲ ਮੈਨੂੰ ਸਨਮਾਨਿਤ ਕਰਨ ਲਈ ਮੈਂ ਰਾਸ਼ਟਰਪਤੀ ਏਰਮੀਨੀ ਅਤੇ ਸੇਸ਼ੇਲਸ ਦੇ ਲੋਕਾਂ ਦਾ ਵੀ ਧੰਨਵਾਦ ਕਰਦਾ ਹਾਂ। ਇਹ ਸਨਮਾਨ ਉਨ੍ਹਾਂ ਸਾਰੇ ਲੋਕਾਂ ਨੂੰ ਹੋਰ ਪ੍ਰੇਰਿਤ ਕਰੇਗਾ, ਜੋ ਵਾਤਾਵਰਨ ਦੀ ਸੁਰੱਖਿਆ ਲਈ ਲਗਾਤਾਰ ਯਤਨ ਕਰ ਰਹੇ ਹਨ। ਮੈਂ ਆਪਣੇ ਨਾਲ ਭਾਰਤ ਦੇ 1.4 ਅਰਬ ਲੋਕਾਂ ਵੱਲੋਂ ਦਿਲੋਂ ਵਧਾਈਆਂ ਅਤੇ ਸ਼ੁਭਕਾਮਨਾਵਾਂ ਲੈ ਕੇ ਆਇਆ ਹਾਂ।

 

ਹਿੰਦ ਮਹਾਸਾਗਰ ਖੇਤਰ ਦਾ ਪਹਿਲਾ ਦੇਸ਼, ਜਿਸ ਦਾ ਮੈਂ ਪ੍ਰਧਾਨ ਮੰਤਰੀ ਵਜੋਂ 2015 ਵਿੱਚ ਦੌਰਾ ਕੀਤਾ ਸੀ, ਉਹ ਸੇਸ਼ੇਲਸ ਸੀ। ਇਹ ਪ੍ਰਧਾਨ ਮੰਤਰੀ ਵਜੋਂ ਮੇਰੀ ਪਹਿਲੀ ਅਫ਼ਰੀਕਾ ਯਾਤਰਾ ਵੀ ਸੀ। ਮੈਂ ਇੱਥੇ ਇਸ ਲਈ ਆਇਆ ਸੀ ਕਿਉਂਕਿ ਮੇਰਾ ਵਿਸ਼ਵਾਸ ਸੀ ਕਿ ਹਿੰਦ ਮਹਾਸਾਗਰ ਬਾਰੇ ਭਾਰਤ ਦੇ ਦ੍ਰਿਸ਼ਟੀਕੋਣ ਵਿੱਚ ਸੇਸ਼ੇਲਸ ਦਾ ਇੱਕ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ ਸਥਾਨ ਹੈ। ਅੱਜ, ਜਦੋਂ ਮੈਂ ਇੱਕ ਦਹਾਕੇ ਬਾਅਦ ਮੁੜ ਇੱਥੇ ਆਇਆ ਹਾਂ, ਤਾਂ ਉਹ ਪੱਕਾ ਵਿਸ਼ਵਾਸ ਪਹਿਲਾਂ ਨਾਲੋਂ ਵੀ ਵੱਧ ਮਜ਼ਬੂਤ ਹੋ ਗਿਆ ਹੈ।

ਅਤੇ ਜਦੋਂ ਤੁਸੀਂ ਆਪਣੀ ਆਜ਼ਾਦੀ ਦੇ ਪੰਜਾਹ ਸਾਲ ਪੂਰੇ ਹੋਣ ਦਾ ਜਸ਼ਨ ਮਨਾ ਰਹੇ ਹੋ, ਤਾਂ ਇਸ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ ਮੌਕੇ 'ਤੇ ਤੁਹਾਡੇ ਨਾਲ ਸ਼ਾਮਲ ਹੋ ਕੇ ਮੈਨੂੰ ਬਹੁਤ ਖ਼ੁਸ਼ੀ ਹੋ ਰਹੀ ਹੈ। ਮੈਂ ਤੁਹਾਨੂੰ ਅਤੇ ਸੇਸ਼ੇਲਸ ਦੇ ਲੋਕਾਂ ਨੂੰ ਇਸ ਸੁਨਹਿਰੀ ਮੌਕੇ 'ਤੇ ਦਿਲੋਂ ਵਧਾਈ ਦਿੰਦਾ ਹਾਂ।

ਮਾਣਯੋਗ ਮੈਂਬਰਾਨ,

ਇਸ ਨੈਸ਼ਨਲ ਅਸੈਂਬਲੀ ਨੂੰ ਸੰਬੋਧਨ ਕਰਨਾ ਮੇਰੇ ਲਈ ਇੱਕ ਵਿਲੱਖਣ ਸਨਮਾਨ ਹੈ। ਇਸ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ ਸਨਮਾਨ ਲਈ ਮੈਂ ਤੁਹਾਡਾ ਧੰਨਵਾਦ ਕਰਦਾ ਹਾਂ। ਮੈਂ ਇਸ ਮੌਕੇ 'ਤੇ ਅੱਠਵੀਂ ਨੈਸ਼ਨਲ ਅਸੈਂਬਲੀ ਦੇ ਨਵੇਂ ਚੁਣੇ ਗਏ ਮੈਂਬਰਾਂ ਨੂੰ ਵਧਾਈ ਦਿੰਦਾ ਹਾਂ। ਮਾਣਯੋਗ ਸਪੀਕਰ ਜੀ, ਇਸ ਮਾਣਯੋਗ ਸਦਨ ਦੀ ਪਹਿਲੀ ਮਹਿਲਾ ਸਪੀਕਰ ਬਣਨ 'ਤੇ ਮੈਂ ਤੁਹਾਨੂੰ ਵੀ ਸ਼ੁਭਕਾਮਨਾਵਾਂ ਦਿੰਦਾ ਹਾਂ।

ਮਾਣਯੋਗ ਮੈਂਬਰਾਨ,

ਅੱਜ ਇਹ ਯਾਦ ਰੱਖਣਾ ਮਹੱਤਵਪੂਰਨ ਹੈ ਕਿ ਸਾਡੀ ਦੋਸਤੀ ਪੰਜਾਹ ਸਾਲ ਪਹਿਲਾਂ ਕੂਟਨੀਤਿਕ ਸਬੰਧਾਂ ਦੀ ਸਥਾਪਨਾ ਨਾਲ ਸ਼ੁਰੂ ਨਹੀਂ ਹੋਈ ਸੀ। ਇਸ ਦੀ ਸ਼ੁਰੂਆਤ ਇਸ ਤੋਂ ਕਾਫ਼ੀ ਪਹਿਲਾਂ ਹੋ ਚੁੱਕੀ ਸੀ। ਅਗਸਤ, 1770 ਵਿੱਚ, ਸੇਂਟ ਐਨ ਟਾਪੂ 'ਤੇ ਪਹੁੰਚੇ ਥੇਲੇਮਾਕ ਜਹਾਜ਼ ਦੇ ਯਾਤਰੀਆਂ ਵਿੱਚ ਪੰਜ ਭਾਰਤੀ ਵੀ ਸ਼ਾਮਲ ਸਨ। ਉਸ ਯਾਤਰਾ ਨੇ ਉਨ੍ਹਾਂ ਅਨੇਕਾਂ ਲੋਕਾਂ ਲਈ ਰਸਤਾ ਖੋਲ੍ਹਿਆ ਜੋ ਬਾਅਦ ਵਿੱਚ ਇੱਥੇ ਆਏ। ਸਮੇਂ ਦੇ ਨਾਲ ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੀਆਂ ਕਹਾਣੀਆਂ ਆਧੁਨਿਕ ਸੇਸ਼ੇਲਸ ਦੀ ਕਹਾਣੀ ਦਾ ਹਿੱਸਾ ਬਣ ਗਈਆਂ।

ਇਹ ਸਾਨੂੰ ਯਾਦ ਦਿਵਾਉਂਦਾ ਹੈ ਕਿ ਸਾਡੇ ਦਰਮਿਆਨ ਦੇ ਰਿਸ਼ਤੇ ਸਰਕਾਰਾਂ ਨੇ ਨਹੀਂ ਬਣਾਏ ਸਨ। ਇਹ ਲੋਕਾਂ ਨੇ ਬਣਾਏ, ਪਰਿਵਾਰਾਂ ਨੇ ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਪਾਲਿਆ-ਪੋਸਿਆ ਅਤੇ ਪੀੜ੍ਹੀਆਂ ਤੱਕ ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਕਾਇਮ ਰੱਖਿਆ। ਹਿੰਦ ਮਹਾਸਾਗਰ ਨੇ ਇਸ ਨੂੰ ਸੰਭਵ ਬਣਾਇਆ। ਹਿੰਦ ਮਹਾਸਾਗਰ ਭਾਰਤ ਅਤੇ ਸੇਸ਼ੇਲਸ ਨੂੰ ਵੱਖ ਨਹੀਂ ਕਰਦਾ, ਸਗੋਂ ਸਾਨੂੰ ਜੋੜਦਾ ਹੈ। ਇਸੇ ਲਈ ਅਸੀਂ ਅਜਨਬੀਆਂ ਵਾਂਗ ਨਹੀਂ ਮਿਲਦੇ, ਸਗੋਂ ਪੁਰਾਣੇ ਦੋਸਤਾਂ ਵਾਂਗ ਮਿਲਦੇ ਹਾਂ।

ਮਾਣਯੋਗ ਮੈਂਬਰਾਨ,

ਸੇਸ਼ੇਲਸ ਦੀ ਸਭ ਤੋਂ ਵੱਡੀ ਤਾਕਤ ਇੱਥੇ ਦੇ ਲੋਕ ਹਨ। ਪੀੜ੍ਹੀਆਂ ਤੋਂ ਦੁਨੀਆ ਦੇ ਵੱਖ-ਵੱਖ ਹਿੱਸਿਆਂ ਤੋਂ ਲੋਕ ਇੱਥੇ ਆਏ। ਉਹ ਆਪਣੇ ਨਾਲ ਵੱਖ-ਵੱਖ ਭਾਸ਼ਾਵਾਂ, ਰੀਤ-ਰਿਵਾਜ, ਵਿਸ਼ਵਾਸ ਅਤੇ ਪਰੰਪਰਾਵਾਂ ਲੈ ਕੇ ਆਏ। ਅਤੇ ਇਕੱਠੇ ਮਿਲ ਕੇ ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੇ ਇੱਕ ਸਾਂਝੀ ਪਹਿਚਾਣ ਬਣਾਈ, ਜੋ ਮਾਣ ਨਾਲ ਸੇਸ਼ੇਲੋਅਸ ਹੈ।

ਜਿਵੇਂ ਕਿ ਇਸ ਨੈਸ਼ਨਲ ਅਸੈਂਬਲੀ ਦਾ ਆਦਰਸ਼ ਵਾਕ ਹੈ — "ਵਿਭਿੰਨਤਾ ਵਿੱਚ ਏਕਤਾ।" ਇਸ ਨੂੰ ਕ੍ਰਿਓਲ ਸੰਗੀਤ ਦੀਆਂ ਧੁਨਾਂ ਵਿੱਚ ਸੁਣਿਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ। ਇਸ ਨੂੰ ਮੌਤਿਆ ਨਾਚ ਦੀ ਲੈਅ ਵਿੱਚ ਦੇਖਿਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ। ਇਸ ਨੂੰ ਫੈਸਟੀਵਲ ਕ੍ਰਿਓਲ ਦੌਰਾਨ ਮਹਿਸੂਸ ਕੀਤਾ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ।

 

ਜਦੋਂ ਇੱਕ ਰਾਸ਼ਟਰ ਆਪਣੀ ਵਿਰਾਸਤ ਦੀ ਅਮੀਰੀ ਦਾ ਜਸ਼ਨ ਮਨਾਉਂਦਾ ਹੈ, ਤਾਂ ਸਾਡੇ ਸੱਭਿਆਚਾਰਾਂ ਵਿਚਲੇ ਰਿਸ਼ਤੇ ਰੋਜ਼ਾਨਾ ਦੀ ਜ਼ਿੰਦਗੀ ਵਿੱਚ ਵੀ ਨਜ਼ਰ ਆਉਂਦੇ ਹਨ। ਇਹ ਕਾਰੀ ਕੋਕੋ, ਸਮੋਸੇ ਅਤੇ ਚਟਨੀ ਦੇ ਸਵਾਦ ਵਿੱਚ ਮਹਿਸੂਸ ਕੀਤੇ ਜਾ ਸਕਦੇ ਹਨ। ਇਹ ਨਵਰਾਤਰੀ ਦੌਰਾਨ ਗਰਬਾ ਨਾਚ, ਦੀਵਾਲੀ ਅਤੇ ਥਾਈ ਪੋਂਗਲ ਦੇ ਜਸ਼ਨਾਂ ਵਿੱਚ ਵੀ ਦਿਖਾਈ ਦਿੰਦੇ ਹਨ। ਇਹੀ ਕ੍ਰਿਓਲ ਭਾਵਨਾ ਹੈ ਜੋ ਸਾਨੂੰ ਆਪਣੀ ਦੋਸਤੀ ਦੇ ਭਵਿੱਖ ਪ੍ਰਤੀ ਪੂਰਾ ਭਰੋਸਾ ਦਿੰਦੀ ਹੈ।

ਮਾਣਯੋਗ ਮੈਂਬਰਾਨ,

ਸਮੁੰਦਰੀ ਗੁਆਂਢੀ ਹੋਣ ਦੇ ਨਾਤੇ, ਅਸੀਂ ਮੰਨਦੇ ਹਾਂ ਕਿ ਇੱਕ ਦੀ ਸੁਰੱਖਿਆ ਦੂਜੇ ਦੀ ਸੁਰੱਖਿਆ ਨੂੰ ਮਜ਼ਬੂਤ ਕਰਦੀ ਹੈ। ਇੱਕ ਦੀ ਖ਼ੁਸ਼ਹਾਲੀ ਦੂਜੇ ਦੀ ਖ਼ੁਸ਼ਹਾਲੀ ਵਿੱਚ ਯੋਗਦਾਨ ਪਾਉਂਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਖੇਤਰ ਦੀ ਸਥਿਰਤਾ ਨਾਲ ਸਾਨੂੰ ਸਾਰਿਆਂ ਨੂੰ ਲਾਭ ਹੁੰਦਾ ਹੈ।

ਇਹ ਸਾਲ ਸਾਡੀ ਭਾਈਵਾਲੀ ਦੀ ਮਜ਼ਬੂਤੀ ਦੀ ਇੱਕ ਪ੍ਰਭਾਵਸ਼ਾਲੀ ਯਾਦ ਦਿਵਾਉਂਦਾ ਹੈ। ਪੰਜਾਹ ਸਾਲ ਪਹਿਲਾਂ, ਤੁਹਾਡੀ ਆਜ਼ਾਦੀ ਦੀ ਸ਼ੁਰੂਆਤ ਦੇ ਸਮੇਂ, ਭਾਰਤੀ ਨੌਸੈਨਾ ਦਾ ਜਹਾਜ਼ ਆਈਐੱਨਐੱਸ ਨੀਲਗਿਰੀ ਦੋਸਤੀ ਅਤੇ ਏਕਤਾ ਦੇ ਪ੍ਰਤੀਕ ਵਜੋਂ ਪੋਰਟ ਵਿਕਟੋਰੀਆ ਵਿੱਚ ਮੌਜੂਦ ਸੀ। ਅਤੇ ਅੱਜ, ਆਈਐੱਨਐੱਸ ਤਰਕਸ਼ ਅਤੇ ਆਈਐੱਨਐੱਸ ਇਕਸ਼ਕ ਤੁਹਾਡੇ ਨਾਲ ਤੁਹਾਡੀ ਸਵਰਨ ਜਯੰਤੀ ਦਾ ਜਸ਼ਨ ਮਨਾਉਣ ਲਈ ਪੋਰਟ ਵਿਕਟੋਰੀਆ ਵਿੱਚ ਮੌਜੂਦ ਹਨ।

ਪੰਜਾਹ ਸਾਲ ਬੀਤਣ ਨਾਲ ਬਹੁਤ ਸਾਰੀਆਂ ਚੀਜ਼ਾਂ ਬਦਲ ਗਈਆਂ ਹਨ। ਪਰ ਇਸ ਨਾਲ ਇੱਕ-ਦੂਜੇ ਪ੍ਰਤੀ ਸਾਡੀ ਵਚਨਬੱਧਤਾ ਨਹੀਂ ਬਦਲੀ। ਦਹਾਕਿਆਂ ਤੋਂ ਸਾਡੀਆਂ ਰੱਖਿਆ ਫ਼ੌਜਾਂ, ਤਟ ਰੱਖਿਅਕ ਬਲਾਂ ਅਤੇ ਸਮੁੰਦਰੀ ਏਜੰਸੀਆਂ ਨੇ ਸਿਖਲਾਈ ਅਤੇ ਸਹਿਯੋਗ ਰਾਹੀਂ ਇਕੱਠੇ ਕੰਮ ਕੀਤਾ ਹੈ। ਭਾਰਤ ਸੇਸ਼ੇਲਸ ਰੱਖਿਆ ਬਲਾਂ ਅਤੇ ਸੇਸ਼ੇਲਸ ਤੱਟ ਰੱਖਿਅਕ ਬਲ ਦੀ ਪੇਸ਼ੇਵਰਤਾ ਅਤੇ ਸਮਰਪਣ ਦੀ ਡੂੰਘੀ ਕਦਰ ਕਰਦਾ ਹੈ। ਉਹ ਤੁਹਾਡੇ ਆਪਣੇ ਵਿਸ਼ਾਲ ਸਮੁੰਦਰੀ ਖੇਤਰ ਦੇ ਨਾਲ-ਨਾਲ ਵਿਆਪਕ ਹਿੰਦ ਮਹਾਸਾਗਰ ਖੇਤਰ ਦੀ ਸੁਰੱਖਿਆ ਵਿੱਚ ਮਹੱਤਵਪੂਰਨ ਭੂਮਿਕਾ ਨਿਭਾਉਂਦੇ ਹਨ। ਸਮੁੰਦਰੀ ਸੁਰੱਖਿਆ, ਸਮਰੱਥਾ ਨਿਰਮਾਣ, ਹਾਈਡਰੋਗ੍ਰਾਫੀ ਅਤੇ ਸਮੁੰਦਰੀ ਖੇਤਰ ਬਾਰੇ ਜਾਗਰੂਕਤਾ ਵਿੱਚ ਸਾਡਾ ਸਹਿਯੋਗ ਇੱਕ ਸੁਰੱਖਿਅਤ ਅਤੇ ਹੋਰ ਵੱਧ ਸੁਰੱਖਿਅਤ ਖੇਤਰ ਲਈ ਸਾਡੀ ਸਾਂਝੀ ਵਚਨਬੱਧਤਾ ਨੂੰ ਦਰਸਾਉਂਦਾ ਹੈ।

ਅੱਜ ਸਵੇਰੇ ਮੈਂ ਰਾਸ਼ਟਰਪਤੀ ਏਰਮੀਨੀ ਨਾਲ ਮੁਲਾਕਾਤ ਕੀਤੀ ਅਤੇ ਸਾਡੀ ਭਾਈਵਾਲੀ ਵਿੱਚ ਹਾਸਲ ਕੀਤੀ ਗਈ ਸ਼ਾਨਦਾਰ ਪ੍ਰਗਤੀ ਦੀ ਸਮੀਖਿਆ ਕੀਤੀ। ਅਸੀਂ ਭਵਿੱਖ ਲਈ ਆਪਣੇ ਸਾਂਝੇ ਦ੍ਰਿਸ਼ਟੀਕੋਣ 'ਤੇ ਵੀ ਚਰਚਾ ਕੀਤੀ। ਸਾਡਾ ਦ੍ਰਿਸ਼ਟੀਕੋਣ ਮਹਾਸਾਗਰ ਦੇ ਵਿਚਾਰ — ਖੇਤਰਾਂ ਵਿੱਚ ਸੁਰੱਖਿਆ ਅਤੇ ਵਿਕਾਸ ਲਈ ਆਪਸੀ ਅਤੇ ਸਮੁੱਚੀ ਤਰੱਕੀ 'ਚ ਸ਼ਾਮਲ ਹੈ।

ਇਹ ਦ੍ਰਿਸ਼ਟੀਕੋਣ ਮੰਨਦਾ ਹੈ ਕਿ ਸਾਡਾ ਭਵਿੱਖ ਆਪਸ ਵਿੱਚ ਜੁੜਿਆ ਹੋਇਆ ਅਤੇ ਇੱਕ-ਦੂਜੇ 'ਤੇ ਨਿਰਭਰ ਹੈ। ਅਤੇ ਅਸੀਂ ਇੱਕ ਸੁਰੱਖਿਅਤ ਅਤੇ ਹੋਰ ਵੱਧ ਸੁਰੱਖਿਅਤ ਹਿੰਦ ਮਹਾਸਾਗਰ ਖੇਤਰ ਲਈ ਮਿਲ ਕੇ ਕੰਮ ਕਰਨਾ ਜਾਰੀ ਰੱਖਾਂਗੇ।

ਮਾਣਯੋਗ ਮੈਂਬਰਾਨ,

ਜਦੋਂ ਲੋਕ ਨਕਸ਼ੇ ਨੂੰ ਵੇਖਦੇ ਹਨ, ਤਾਂ ਉਹ ਸੇਸ਼ੇਲਸ ਨੂੰ ਹਿੰਦ ਮਹਾਸਾਗਰ ਵਿੱਚ ਸਥਿਤ ਟਾਪੂਆਂ ਦੇ ਇੱਕ ਸਮੂਹ ਵਜੋਂ ਵੇਖ ਸਕਦੇ ਹਨ। ਪਰ ਅਸੀਂ ਇਸ ਤੋਂ ਕਾਫ਼ੀ ਵੱਡੀ ਤਸਵੀਰ ਵੇਖਦੇ ਹਾਂ। ਅਸੀਂ ਇੱਕ ਅਜਿਹਾ ਰਾਸ਼ਟਰ ਵੇਖਦੇ ਹਾਂ ਜਿਸਦਾ ਦਾਇਰਾ ਉਸਦੇ ਸਮੁੰਦਰੀ ਤੱਟਾਂ ਤੋਂ ਕਾਫ਼ੀ ਅੱਗੇ ਤੱਕ ਫੈਲਿਆ ਹੋਇਆ ਹੈ। ਤੁਹਾਡਾ ਸਮੁੰਦਰੀ ਖੇਤਰ ਲਗਭਗ 1.4 ਮਿਲੀਅਨ ਵਰਗ ਕਿਲੋਮੀਟਰ ਤੱਕ ਫੈਲਿਆ ਹੋਇਆ ਹੈ।

 

ਇਹ ਸੇਸ਼ੇਲਸ ਨੂੰ ਇੱਕ ਛੋਟਾ ਟਾਪੂ ਦੇਸ਼ ਨਹੀਂ, ਸਗੋਂ ਇੱਕ ਵੱਡਾ ਸਮੁੰਦਰੀ ਦੇਸ਼ ਬਣਾਉਂਦਾ ਹੈ। ਸਮੁੰਦਰੀ ਅਰਥ-ਵਿਵਸਥਾ ਬਾਰੇ ਵਿਸ਼ਵ ਪੱਧਰੀ ਚਰਚਾਵਾਂ ਦਾ ਹਿੱਸਾ ਬਣਨ ਤੋਂ ਕਾਫ਼ੀ ਪਹਿਲਾਂ ਹੀ ਸੇਸ਼ੇਲਸ ਇਸ ਖੇਤਰ ਵਿੱਚ ਅਗਵਾਈ ਕਰ ਰਿਹਾ ਸੀ। ਚਾਹੇ ਸਮੁੰਦਰੀ ਈਕੋਸਿਸਟਮ ਦੀ ਰਾਖੀ ਕਰਨੀ ਹੋਵੇ ਜਾਂ ਬਲੂ ਬਾਂਡਜ਼ ਵਰਗੀਆਂ ਨਵੀਨਤਾਵਾਂ ਨੂੰ ਅੱਗੇ ਵਧਾਉਣਾ ਹੋਵੇ, ਤੁਹਾਡੇ ਦੇਸ਼ ਨੇ ਮਹੱਤਵਪੂਰਨ ਵਿਸ਼ਵ ਪੱਧਰੀ ਵਿਚਾਰ-ਵਟਾਂਦਰਿਆਂ ਨੂੰ ਦਿਸ਼ਾ ਦੇਣ ਵਿੱਚ ਯੋਗਦਾਨ ਪਾਇਆ ਹੈ। ਮਿਲ ਕੇ ਅਸੀਂ ਮੱਛੀ ਪਾਲਣ, ਸਮੁੰਦਰੀ ਵਿਗਿਆਨ, ਤੱਟੀ ਪ੍ਰਬੰਧਨ, ਅਖੁੱਟ ਊਰਜਾ ਅਤੇ ਟਿਕਾਊ ਸੈਰ-ਸਪਾਟੇ ਵਿੱਚ ਭਾਈਵਾਲੀ ਨੂੰ ਹੋਰ ਮਜ਼ਬੂਤ ਕਰ ਸਕਦੇ ਹਾਂ।

ਮੈਨੂੰ ਕੱਲ੍ਹ ਪ੍ਰਸਿੱਧ ਕੋਕੋ ਡੇ ਮੇਰ ਰੁੱਖ ਦਾ ਪੌਦਾ ਲਗਾਉਣ ਦਾ ਸਨਮਾਨ ਪ੍ਰਾਪਤ ਹੋਇਆ। ਸੇਸ਼ੇਲਸ ਵਾਂਗ ਹੀ ਇਹ ਵੀ ਵਿਲੱਖਣ, ਅਨਮੋਲ ਹੈ ਅਤੇ ਦੁਨੀਆ ਵਿੱਚ ਇੱਕ ਵਿਸ਼ੇਸ਼ ਸਥਾਨ ਰੱਖਦਾ ਹੈ। ਇਸ ਕੁਦਰਤੀ ਅਚੰਭੇ ਦੀ ਰਾਖੀ ਅਤੇ ਸੰਭਾਲ ਲਈ ਤੁਹਾਡੇ ਵੱਲੋਂ ਕੀਤੇ ਜਾ ਰਹੇ ਯਤਨ ਇੱਕ ਵੱਡੇ ਦਰਸ਼ਨ ਨੂੰ ਦਰਸਾਉਂਦੇ ਹਨ ਕਿ ਮਨੁੱਖਤਾ ਨੂੰ ਕੁਦਰਤ ਨਾਲ ਤਾਲਮੇਲ ਵਿੱਚ ਰਹਿਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ।

ਇਹ ਭਾਵਨਾ ਭਾਰਤ ਵਿੱਚ ਵੀ ਡੂੰਘਾਈ ਨਾਲ ਗੂੰਜਦੀ ਹੈ। ਆਓ ਅਸੀਂ ਮਿਲ ਕੇ ਇਹ ਯਕੀਨੀ ਬਣਾਈਏ ਕਿ ਆਉਣ ਵਾਲੀਆਂ ਪੀੜ੍ਹੀਆਂ ਨੂੰ ਅਜਿਹੇ ਮਹਾਸਾਗਰ ਵਿਰਾਸਤ ਵਿੱਚ ਮਿਲਣ ਜੋ ਅੱਜ ਸਾਡੇ ਵੱਲੋਂ ਵਰਤੇ ਜਾ ਰਹੇ ਮਹਾਸਾਗਰਾਂ ਨਾਲੋਂ ਵੱਧ ਸਿਹਤਮੰਦ, ਵੱਧ ਸੁਰੱਖਿਅਤ ਅਤੇ ਵੱਧ ਖ਼ੁਸ਼ਹਾਲ ਹੋਣ।

ਮਾਣਯੋਗ ਮੈਂਬਰਾਨ,

ਗਲੋਬਲ ਸਾਊਥ ਅਤੇ ਖ਼ਾਸ ਕਰਕੇ ਟਾਪੂ ਦੇਸ਼ ਜਲਵਾਯੂ ਤਬਦੀਲੀ ਤੋਂ ਸਭ ਤੋਂ ਵੱਧ ਪ੍ਰਭਾਵਿਤ ਹਨ। ਇਸਦਾ ਅਸਰ ਸਾਡੀਆਂ ਤੱਟ-ਰੇਖਾਵਾਂ, ਸਮੁੰਦਰੀ ਈਕੋਸਿਸਟਮ, ਮੌਸਮ ਦੇ ਮਿਜ਼ਾਜ ਅਤੇ ਸਾਡੇ ਭਾਈਚਾਰਿਆਂ 'ਤੇ ਪਹਿਲਾਂ ਹੀ ਸਪੱਸ਼ਟ ਦਿਖਾਈ ਦੇ ਰਿਹਾ ਹੈ। ਸਾਡਾ ਦੋਵਾਂ ਦਾ ਪੱਕਾ ਵਿਸ਼ਵਾਸ ਹੈ ਕਿ ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਨੇ ਜਲਵਾਯੂ ਤਬਦੀਲੀ ਵਿੱਚ ਸਭ ਤੋਂ ਘੱਟ ਯੋਗਦਾਨ ਪਾਇਆ ਹੈ, ਉਨ੍ਹਾਂ ਨੂੰ ਇਸਦੇ ਨਤੀਜਿਆਂ ਦਾ ਸਭ ਤੋਂ ਵੱਡਾ ਬੋਝ ਨਹੀਂ ਝੱਲਣਾ ਚਾਹੀਦਾ।

ਜਲਵਾਯੂ ਕਾਰਵਾਈ ਨੂੰ ਨਿਆਂ, ਜ਼ਿੰਮੇਵਾਰੀ ਅਤੇ ਸਮਾਨਤਾ ਦੇ ਸਿਧਾਂਤਾਂ ਨਾਲ ਸੇਧ ਮਿਲਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ। ਇਹੀ ਜਲਵਾਯੂ ਨਿਆਂ ਦਾ ਅਸਲ ਸਾਰ ਹੈ।

ਭਾਰਤ ਨੇ ਉਦਾਹਰਨ ਪੇਸ਼ ਕਰਦੇ ਹੋਏ ਅਗਵਾਈ ਕਰਨ ਦੀ ਕੋਸ਼ਿਸ਼ ਕੀਤੀ ਹੈ। ਪਿਛਲੇ ਇੱਕ ਦਹਾਕੇ ਵਿੱਚ ਅਸੀਂ ਅਖੁੱਟ ਊਰਜਾ ਖੇਤਰ ਵਿੱਚ ਦੁਨੀਆ ਦੇ ਸਭ ਤੋਂ ਵੱਡੇ ਵਿਸਥਾਰ ਵੱਲ ਕੰਮ ਕੀਤਾ ਹੈ। ਅਸੀਂ ਮਿਸ਼ਨ ਲਾਈਫ ਭਾਵ ਵਾਤਾਵਰਨ ਅਨੁਕੂਲ ਜੀਵਨ ਸ਼ੈਲੀ ਰਾਹੀਂ ਟਿਕਾਊ ਜੀਵਨ ਸ਼ੈਲੀ ਨੂੰ ਉਤਸ਼ਾਹਿਤ ਕੀਤਾ ਹੈ। ਅੰਤਰਰਾਸ਼ਟਰੀ ਸੌਰ ਗਠਜੋੜ, ਆਫ਼ਤ-ਰੋਧੀ ਬੁਨਿਆਦੀ ਢਾਂਚੇ ਲਈ ਗਠਜੋੜ, ਵਿਸ਼ਵ ਜੈਵ-ਈਂਧਨ ਗਠਜੋੜ ਅਤੇ ਏਕ ਪੇੜ ਮਾਂ ਕੇ ਨਾਮ ਵਰਗੀਆਂ ਪਹਿਲਕਦਮੀਆਂ ਰਾਹੀਂ ਅਸੀਂ ਭਾਗੀਦਾਰ ਦੇਸ਼ਾਂ ਨਾਲ ਮਿਲ ਕੇ ਹਰਿਤ ਤਬਦੀਲੀ ਨੂੰ ਅੱਗੇ ਵਧਾਇਆ ਹੈ।

ਭਾਰਤ ਸੇਸ਼ੇਲਸ ਨਾਲ ਮਿਲ ਕੇ ਕੰਮ ਕਰਦਾ ਰਹੇਗਾ ਤਾਂ ਜੋ ਛੋਟੇ ਟਾਪੂ ਵਿਕਾਸਸ਼ੀਲ ਦੇਸ਼ਾਂ ਦੀਆਂ ਚਿੰਤਾਵਾਂ ਨੂੰ ਉਹ ਮਹੱਤਵ ਮਿਲੇ ਜਿਸ ਦੇ ਉਹ ਹੱਕਦਾਰ ਹਨ।

ਮਾਣਯੋਗ ਮੈਂਬਰਾਨ,

ਸੇਸ਼ੇਲਸ ਅਤੇ ਭਾਰਤ ਦੋਵੇਂ ਅਜਿਹੀ ਦੁਨੀਆ ਚਾਹੁੰਦੇ ਹਨ, ਜਿੱਥੇ ਵਿਕਾਸ ਹੋਰ ਵੱਧ ਸੰਮਲਿਤ ਹੋਵੇ। ਅਸੀਂ ਦੋਵੇਂ ਅਜਿਹੀ ਦੁਨੀਆ ਦੀ ਕਾਮਨਾ ਕਰਦੇ ਹਾਂ ਜਿੱਥੇ ਅੰਤਰਰਾਸ਼ਟਰੀ ਸੰਸਥਾਵਾਂ ਸਮਕਾਲੀ ਹਕੀਕਤਾਂ ਨੂੰ ਦਰਸਾਉਣ। ਸਾਡਾ ਵਿਸ਼ਵਾਸ ਹੈ ਕਿ ਸਾਡਾ ਸਾਂਝਾ ਭਵਿੱਖ ਸਮੂਹਿਕ, ਸੰਮਲਿਤ ਅਤੇ ਨਿਰਪੱਖ ਢੰਗ ਨਾਲ ਤਿਆਰ ਕੀਤਾ ਜਾਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ।

 

ਇਸੇ ਵਿਸ਼ਵਾਸ ਨੇ ਜੀ-20 ਦੀ ਪ੍ਰਧਾਨਗੀ ਦੌਰਾਨ ਭਾਰਤ ਦੇ ਯਤਨਾਂ ਨੂੰ ਦਿਸ਼ਾ ਦਿੱਤੀ। ਇਸੇ ਭਾਵਨਾ ਨਾਲ ਅਸੀਂ ਗਲੋਬਲ ਸਾਊਥ ਦੀਆਂ ਤਰਜੀਹਾਂ ਨੂੰ ਅੰਤਰਰਾਸ਼ਟਰੀ ਚਰਚਾ ਦੇ ਕੇਂਦਰ ਵਿੱਚ ਲਿਆਉਣ ਲਈ ਕੰਮ ਕੀਤਾ। ਇਸੇ ਭਾਵਨਾ ਨਾਲ ਅਸੀਂ ਜੀ-20 ਦੇ ਸਥਾਈ ਮੈਂਬਰ ਵਜੋਂ ਅਫ਼ਰੀਕੀ ਸੰਘ ਦਾ ਸਵਾਗਤ ਕੀਤਾ। ਇਹੀ ਉਹ ਭਾਵਨਾ ਹੈ ਜੋ ਗਲੋਬਲ ਸਾਊਥ ਨੂੰ ਇੱਕਜੁੱਟ ਕਰਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਇਹੀ ਉਹ ਦ੍ਰਿਸ਼ਟੀ ਹੈ, ਜਿਸ ਨਾਲ ਭਾਰਤ ਅਤੇ ਸੇਸ਼ੇਲਸ ਮਿਲ ਕੇ ਅੱਗੇ ਵਧਦੇ ਰਹਿਣਗੇ।

ਮਾਣਯੋਗ ਮੈਂਬਰਾਨ,

ਜਿਵੇਂ ਅਸੀਂ ਪਿਛਲੇ ਪੰਜਾਹ ਸਾਲਾਂ ਦੀਆਂ ਪ੍ਰਾਪਤੀਆਂ ਦਾ ਜਸ਼ਨ ਮਨਾ ਰਹੇ ਹਾਂ, ਉਸੇ ਤਰ੍ਹਾਂ ਸਾਨੂੰ ਭਵਿੱਖ ਵੱਲ ਵੀ ਦੇਖਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ। ਸੇਸ਼ੇਲਸ ਦਾ ਭਵਿੱਖ ਉਸਦੇ ਨੌਜਵਾਨਾਂ ਵੱਲੋਂ ਤਿਆਰ ਕੀਤਾ ਜਾਵੇਗਾ। ਸਾਨੂੰ ਮਾਣ ਹੈ ਕਿ ਸੇਸ਼ੇਲਸ ਦੇ ਵਿਦਿਆਰਥੀਆਂ, ਪੇਸ਼ਾਵਰਾਂ, ਅਧਿਕਾਰੀਆਂ ਅਤੇ ਸੁਰੱਖਿਆ ਬਲਾਂ ਨੇ ਦਹਾਕਿਆਂ ਤੱਕ ਭਾਰਤ ਵਿੱਚ ਸਿਖਲਾਈ ਅਤੇ ਅਧਿਐਨ ਕੀਤਾ ਹੈ।

ਅਸਲ ਵਿੱਚ ਇਹ ਕਿਹਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਕਿ ਸੇਸ਼ੇਲਸ ਦੇ ਹਰ ਪੰਜਾਹ ਲੋਕਾਂ ਵਿੱਚੋਂ ਇੱਕ ਨੇ ਭਾਰਤ ਵਿੱਚ ਕਿਸੇ ਨਾ ਕਿਸੇ ਰੂਪ ਵਿੱਚ ਸਿਖਲਾਈ ਪ੍ਰਾਪਤ ਕੀਤੀ ਹੈ। ਉਹ ਹੁਨਰ, ਦੋਸਤੀ ਅਤੇ ਤਜ਼ਰਬੇ ਨਾਲ ਆਪਣੇ ਦੇਸ਼ ਵਾਪਸ ਆਏ, ਜੋ ਅੱਜ ਵੀ ਸਾਡੀ ਭਾਈਵਾਲੀ ਨੂੰ ਮਜ਼ਬੂਤ ਕਰ ਰਹੇ ਹਨ।

ਮੈਨੂੰ ਨੌਜਵਾਨਾਂ ਲਈ ਇੰਟਰਨਸ਼ਿਪ ਮੁਹੱਈਆ ਕਰਵਾਉਣ ਸਬੰਧੀ ਤੁਹਾਡੀ ਇਗਨਾਈਟ ਪਹਿਲਕਦਮੀ ਬਾਰੇ ਜਾਣ ਕੇ ਖ਼ੁਸ਼ੀ ਹੋਈ। ਇਹ ਇੱਕ ਸ਼ਾਨਦਾਰ ਢਾਂਚਾ ਹੈ ਅਤੇ ਅਸੀਂ ਇਸ ਖੇਤਰ ਵਿੱਚ ਸਹਿਯੋਗ ਲਈ ਨਵੇਂ ਰਸਤੇ ਖੋਜ ਸਕਦੇ ਹਾਂ।

ਅਜਿਹੇ ਸਹਿਯੋਗ ਦਾ ਇੱਕ ਮੁੱਖ ਕੇਂਦਰੀ ਖੇਤਰ ਡਿਜੀਟਲ ਨਵੀਨਤਾ ਹੋ ਸਕਦਾ ਹੈ। ਭਾਰਤ ਦੇ ਡਿਜੀਟਲ ਪਬਲਿਕ ਇਨਫ੍ਰਾਸਟਰਕਚਰ (ਡੀਪੀਆਈ) ਨੇ ਇਹ ਦਰਸਾਇਆ ਹੈ ਕਿ ਤਕਨਾਲੋਜੀ ਕਿਸ ਤਰ੍ਹਾਂ ਮੌਕਿਆਂ ਦਾ ਵਿਸਥਾਰ ਕਰ ਸਕਦੀ ਹੈ, ਸੁਸ਼ਾਸਨ ਵਿੱਚ ਸੁਧਾਰ ਲਿਆ ਸਕਦੀ ਹੈ, ਵਿੱਤੀ ਸਮਾਵੇਸ਼ ਨੂੰ ਉਤਸ਼ਾਹਿਤ ਕਰ ਸਕਦੀ ਹੈ ਅਤੇ ਕਰੋੜਾਂ ਲੋਕਾਂ ਤੱਕ ਸੇਵਾਵਾਂ ਪਹੁੰਚਾ ਸਕਦੀ ਹੈ।

ਜਿਵੇਂ-ਜਿਵੇਂ ਤੁਸੀਂ ਆਪਣੇ ਡਿਜੀਟਲ ਤਬਦੀਲੀ ਨੂੰ ਅੱਗੇ ਵਧਾ ਰਹੇ ਹੋ, ਸਾਨੂੰ ਆਪਣੇ ਤਜ਼ਰਬੇ ਅਤੇ ਮੁਹਾਰਤ ਤੁਹਾਡੇ ਨਾਲ ਸਾਂਝੇ ਕਰਨ ਵਿੱਚ ਖ਼ੁਸ਼ੀ ਹੋਵੇਗੀ। ਮੈਨੂੰ ਵਿਸ਼ਵਾਸ ਹੈ ਕਿ ਸੇਸ਼ੇਲਸ ਦੇ ਨੌਜਵਾਨ ਇਨ੍ਹਾਂ ਮੌਕਿਆਂ ਨੂੰ ਉਸੇ ਦ੍ਰਿੜ੍ਹ ਇਰਾਦੇ ਨਾਲ ਅਪਣਾਉਣਗੇ ਜਿਸ ਨੇ ਆਜ਼ਾਦੀ ਦੇ ਪਹਿਲੇ ਪੰਜਾਹ ਸਾਲਾਂ ਦਾ ਮਾਰਗ-ਦਰਸ਼ਨ ਕੀਤਾ ਸੀ।

ਮਾਣਯੋਗ ਮੈਂਬਰਾਨ,

ਅੱਜ, ਜਦੋਂ ਮੈਂ ਇਸ ਇਤਿਹਾਸਕ ਸਵਰਨ ਜਯੰਤੀ ਵਰ੍ਹੇ ਵਿੱਚ ਤੁਹਾਡੇ ਸਾਹਮਣੇ ਮੌਜੂਦ ਹਾਂ, ਤਾਂ ਸਾਡੇ ਲੋਕ ਢਾਈ ਸਦੀਆਂ ਤੋਂ ਵੀ ਪੁਰਾਣੀ ਦੋਸਤੀ ਦਾ ਜਸ਼ਨ ਮਨਾ ਰਹੇ ਹਨ। ਕੁਝ ਭਾਈਵਾਲੀਆਂ ਇੰਨੀ ਡੂੰਘੀ ਨੀਂਹ 'ਤੇ ਹੀ ਖੜ੍ਹੀਆਂ ਹੁੰਦੀਆਂ ਹਨ। ਅਤੇ ਕੁਝ ਭਾਈਵਾਲੀਆਂ ਇੰਨੀ ਗਰਮਜੋਸ਼ੀ, ਭਰੋਸੇ ਅਤੇ ਸਦਭਾਵਨਾ ਨਾਲ ਹੀ ਅੱਗੇ ਵਧਦੀਆਂ ਹਨ।

ਜਿਵੇਂ-ਜਿਵੇਂ ਅਸੀਂ ਭਵਿੱਖ ਵੱਲ ਦੇਖਦੇ ਹਾਂ, ਆਓ ਇਨ੍ਹਾਂ ਮਜ਼ਬੂਤ ਨੀਂਹਾਂ 'ਤੇ ਨਿਰਮਾਣ ਕਰਨਾ ਜਾਰੀ ਰੱਖੀਏ। ਭਾਰਤ ਤੁਹਾਡਾ ਭਰੋਸੇਯੋਗ ਭਾਈਵਾਲ ਬਣਿਆ ਰਹੇਗਾ। ਅਸੀਂ ਤੁਹਾਡੀਆਂ ਪ੍ਰਾਪਤੀਆਂ ਦਾ ਜਸ਼ਨ ਮਨਾਵਾਂਗੇ। ਅਸੀਂ ਤੁਹਾਡੀਆਂ ਆਸਾਂ-ਉਮੀਦਾਂ 'ਚ ਸਾਥ ਦੇਵਾਂਗੇ। ਅਤੇ ਅਸੀਂ ਇੱਕ ਸੱਚੇ ਦੋਸਤ ਵਜੋਂ ਹਰ ਸਮੇਂ ਤੁਹਾਡੇ ਨਾਲ ਖੜ੍ਹੇ ਰਹਾਂਗੇ।

ਪਿਛਲੇ ਪੰਜਾਹ ਸਾਲ ਬੇਮਿਸਾਲ ਰਹੇ ਹਨ। ਪਰ ਮੇਰਾ ਪੱਕਾ ਵਿਸ਼ਵਾਸ ਹੈ ਕਿ ਸੇਸ਼ੇਲਸ ਦੀ ਕਹਾਣੀ ਦੇ ਸਭ ਤੋਂ ਵਧੀਆ ਅਧਿਆਇ ਅਜੇ ਲਿਖੇ ਜਾਣੇ ਬਾਕੀ ਹਨ। ਅਤੇ ਸਾਡੀ ਸਭ ਤੋਂ ਵਧੀਆ ਦੋਸਤੀ ਅਜੇ ਹੋਣੀ ਬਾਕੀ ਹੈ।