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भारत और जापान के बीच जो गहरे संबंध हैं, उन संबंधों का यश सिर्फ दो देशों की सरकारों को नहीं जाता है। उन संबंधों का यश आप जैसे सामाजिक जीवन के सभी वरिष्‍ठ लोगों ने जिस भावना के साथ एक छोटे से पौधे को अपनी बुद्धिमता-क्षमता के अनुसार एक विशाल वटवृक्ष बनाया है, इसके लिए आपको और आपके पूर्व के पीढि़यों को इसका यश जाता है। उनका हक बनता है और मैं इसलिए अब तक जिन-जिन लोगों ने भारत और जापान के संबंधों को सुदृढ़ किया है, उन सबका मैं हृदय से आभार व्‍यक्‍त करता हूं।

मुझे बताया गया है कि भारत-जापान एसोसिएशन को 110 साल हो गए हैं। मैं सोच रहा था कि आज के युग में एक फैमिली भी 100 साल तक इकट्ठे नहीं रहती है। अगर एक परिवार 100 साल तक इकट्ठा नहीं रह सकता है तो ये लीडरशिप की कितनी मैच्‍योरिटी होगी, दोनों देशों के नीति निर्धारकों की कितनी मैच्‍योरिटी होगी, जिसके कारण 110 साल तक ये संबंध और गहरा होता गया। ये अपने आप में, एक बहुत बड़ी प्रेरणा दायक घटना है।

मुझे यह भी बताया गया कि जापान की किसी भी देश के साथ इतनी पुरानी एक भी एसोसिएशन नहीं है, जितनी कि जापान और भारत की है। हमारे पूर्वजों ने ये जो महान नींव रखी है, मैं नहीं मानता हूं कि ये महान काम किसी तत्‍कालीन लाभ के लिए किया गया है। ये नींव पूरे मानव जाति के कल्‍याण को ध्‍यान में रखते हुए ये नींव रखी गई है जिसे दोनों देशों के महानुभावों ने और ताकतवर बनाया है।

अब हम इस पीढ़ी की और आने वाले पीढि़यों की जिम्‍मेदारी है, कि जो 110 साल की ये यात्रा है, एक तपस्‍या है, उसको हम अधिक प्राणवान कैसे बनायें, अधिक जीवंत कैसे बनायें और आने वाली पीढि़यों तक उसके संस्‍कार संक्रमण के लिए हम मिलकर के क्‍या कर सकते हैं, ये हम सबका दायित्‍व है।

कल जैसे प्रधानमंत्री आबे और मेरे बीच जो वार्ता हुई, हमारा एक जो तोक्यो डिक्‍लरेशन था, उसमें एक महत्‍वपूर्ण निर्णय हुआ है कि अब तक हम ‘स्‍ट्रे‍टेजिक ग्‍लोबल पार्टनर्स’ के रूप में काम करते थे, अब हमारा उसका स्‍टेटस ऊपर करके ‘स्‍पेशल स्‍ट्रेटेजिक ग्‍लोबल पार्टनर्स’ के रूप में आगे बढ़े हैं। ये हो सका है, इसके दो कारण हैं। एक, ये 110 साल पुरानी निरंतर हमारी ये एसोसिएशन, ये निरंतर संपर्क की व्‍यवस्‍था, इंडियन और जापानीज पार्लियामेंट्री एसोसिएशन की सक्रियता और दूसरा जो सबसे बड़ा कारण है, वह आज भले हम स्‍पेशल स्‍ट्रेटेजिक ग्‍लोबल पार्टनर्स के रूप में कागज पर हमने शायद लिखा हो, लेकिन जो चीज हमने कागज पे नहीं, हमारे दिलों में लिखी गई है, वह है जापान भारत की ‘स्पिरिचुअल पार्टनरशिप’।

मैं देख रहा हूं कि जापान में धीरे-धीरे हिंदी भाषा सीखने का जो उत्‍साह है, उमंग है, वह बढ़ता ही चला जा रहा है। उसी प्रकार से योग के संबंध में मैं देख रहा हूं कि जापान की रूचि और बढ़ रही है। यानी एक-एक बारीक चीज का संबंध हमारा जुड़ रहा है।

जापान का भारत पर कितना बड़ा हक है, मैं एक उदाहरण बताना चाहता हूं। अभी कुछ दिन पहले मुझे आपकी एक चिट्ठी मिली थी और चिट्ठी में आपने मुझे लिखा था कि मोदी जी आप आएंगे तो हिंदी में बोलिये। आप ही ने लिखी थी ना। जरा सा हमारे भारत के लोगों को आपका चेहरा बताइए। और इतनी बढि़या हिंदी में चिट्ठी लिखी है। प्‍लीज, ये हमारे लोग देखना चाहेंगे, आपको। इतनी, इतनी बढि़या हिंदी में चिट्ठी लिखी है उन्‍होंने मुझे और उन्‍होंने मुझे आग्रह किया है कि मोदी जी, मैं आपसे आग्रह करूंगा कि आप जापान के किसी भी कार्यक्रम में जाएं, कृपा करके हिंदी में बोलिये।

देखिए, एक-एक सामान्‍य व्‍यक्ति का ये जो लगाव है, ये जो अपनापन है, ये अपने आप में हैरान करने वाला हे। जब मैं यहां सुभाष चंद्र बोस की बात करूं तो मुझे यहां इतने लोग मिलेंगे, बड़े गौरव के साथ उन स्‍मृतियों को बताएंगे। मुझे ये भी बताया गया है कि आपके इन सदस्‍यों में एक सबसे वयोवृद्ध हैं। शायद उनकी उमर 95 इयर है। वे आज भी सुभाष बाबू की सारी घटनाओं का इतना वर्णन करते हैं, इतनी डिटेल बताते हैं। सुभाष बाबू उनसे शेक हैंड नहीं करते थे, गले लगते थे। वे सारी बातों को बताते हैं। वो यहां बैठे हैं खास इस काम के लिए आए हैं। खड़े हो पाएंगे, मैं उनको प्रणाम करता हूं। वो सुभाष बाबू के एक बहुत बड़े निकट के साथी रहे हैं।मैं उनको प्रणाम करता हूं।

आपको सुभाष बाबू की कौन सी साल, कौन सी डेट, सारी घटनाएं अभी भी याद हैं। मैंने हमारे एम्‍बेसेडर को कहा है कि हाइली प्रोफेशनल वीडियो टीम उनके साथ एक महीने के लिए लगा दिया जाए और उसका वीडियो रिकॉर्डिंग होना चाहिए। महीने भर कोई उसके साथ रहें, उनका इंटरव्‍यू लेते रहे और हर पुरानी बातों को रिकार्ड करे। क्‍योंकि यह एक जीते-जागते इतिहास की हमारे पास तवारीख हैं। तो ऐसी बहुत सी चीजें हमारे साथ जुड़ी हुई हैं।

मैं जब पहली बार जापान आया था तो मैं मोरी जी के घर गया था। बड़े प्‍यार से उन्‍होंने मुझे अपने घर पर बुलाया था, तो कड़ी की बात निकली। जापान में कड़ी बहुत फेमस है। तो मुझे बताया गया, बंगाल से जो परिवार आए थे, उन्‍होंने सबसे पहले कड़ी की शुरूआत की थी। वो आज एक प्रकार से जापान की फेवरेट डिश बन गई है। यानी कितनी निकटता कितनी बारीकी है। और मैं मानता हूं कि इसको हमें और महात्‍म्‍य देना चाहिए। और आगे बढ़ना चाहिए।

पार्लियामेंट्री ऐसोसिएशन का भी बहुत बड़ा योगदान है। इन संबंधों के कारण दोनों देशों की नीतियों में हमेशा उस बात पर ध्‍यान रखा गया है कि हमारे संबंधों को कोई खरोंच न आ जाए। कोई भी उस पर नुकसान न हो जाए।

पार्लियामेंट्री एसोसिएशन के लिए मेरे मन में कुछ विचार आए हैं। मैं चाहूंगा कि इसको आगे चलकर के हम इसको कुछ एक्‍सपैंड कर सकते हैं क्‍या ? एक तो मैं भारत के लिए इस पार्लियामेंट्री एसोसिएशन के लिए निमन्‍त्रण देता हूं। आप आइए और दिल्‍ली के सिवाए भी मैं चाहूंगा कि कुछ और लोकेशन पर भी जाइए और भारत को खुशी होगी, आप सबकी मेहमान नवाजी करने की। दो-तीन और चीजें अगर हम कर सकते हैं तो सोचें। एक पार्लियामेंट्री एसोसिएशन बहुत अच्‍छा चल रहा है। भारत से भी लोग यहीं आते हैं। यहां के भी पार्लियामेंट मेम्‍बर्स आते हैं और एक अंडरस्‍टेंडिंग ईच अदर, ये अपने आप में बहुत अच्‍छी प्रोग्रेस हो रही है। लेकिन समय रहते उसमें मुझे थोड़े बदलाव की मुझे जरूरत लगती है।

इसी पार्लियामेंटरी एसोसिएशन के साथ एक छोटा सा यंग पार्लियामेंटरी ऐसोसिएशन बना सकते हैं क्‍या ? जो दोनों देशों के यंगेस्‍ट पार्लियामेंटेरियंस हैं, उनका जरा मिलना-जुलना हो, वो अपनी नई पीढ़ी की सोच की चर्चा करें। उस दिशा में कुछ कर सकते हैं क्‍या ?

दूसरा, एक मेरे मन में विचार आता है, क्‍या दोनों देशों की वीमेन पार्लियामेंट मेम्‍बर्स का एसोसिएशन बन सकता है क्‍या। जिसमें महिला पार्लियामेंट मेम्‍बर्स के बारी-बारी से मिलने की संभावना बन सकती है क्‍या ?सभी महिलाओं ने सबसे पहले तालियां बजाई हैं।

तीसरा एक जो मुझे लगता है कि भारत इतना विशाल देश है। इतने राज्‍य हैं, हर राज्‍य की अपनी असेम्‍बली है, और असेम्‍बली के भी मेम्‍बर्स है। क्‍या कभी न कभी हम उन राज्‍यों से और एक ही राज्‍य से सभी एमएलए नहीं, लेकिन 5-6 राज्‍यों के दो-दो करके एमएलए यहां आए और यहां से भी उसी प्रकार से लोकल बॉडीज के लोग आयें । ये अगर हमारा बनता है तो इतना बड़ा विशाल देश है, भिन्‍न–भिन्‍न कोने में जाने का हो जाए। और हम यह तय कर सकते हैं कि जापान का कोई न कोई डेलीगेशन, हिंदुस्‍तान में 25 से भी ज्‍यादा राज्‍य हैं, हर महीने अगर दो डेलीगेशन आते हैं, और एक राज्‍य में एक डेलीगेशन जाता है और लोग आते चलें – आते चलें। अब देखिए, देखते ही देखते जापान में हिंदुस्‍तान की एक्‍सपर्टाइज वाले 1000 लोग तैयार हो जाएंगे।

आपने मुझे यहां बुलाया, मेरा सम्‍मान किया। मैं आपका बहुत-बहुत आभारी हूं। लेकिन मैं अनुभव करता हूं, मैं कारण नहीं जानता हूं। लेकिन, मैं जब भी जापान आया हूं और जब भी जापान के लोगों से मिलता हूं मुझे एक अलग सा अपनापन महसूस होता है। वो ये अपनापन क्‍या है, मैं नहीं जानता, शास्‍त्र कौन से होंगे। देखिए मुझे बहुत अपनापन लगता है और मुझे इतना प्‍यार मिलता है जापान से।

आपके एम्‍बेसडर मेरे यहां थे, वो मेरे यहां 3 साल रहे और मैंने देखा कि हम इतने मित्र की तरह साथ काम करते थे, इतनी हमारी दोस्‍ती बन गई थी। और इतने कामों को हम बढ़ा रहे थे और इसलिए मैं मानता हूं कि आपने जो अपनापन मुझे दिया है, वो प्रधानमंत्री पद से भी बहुत बड़ी चीज है। बहुत बड़ी चीज है, जो आपने मुझे दिया है। मैं इसको कभी भूल नहीं सकता हूं।

मैं आपका बहुत-बहुत आभारी हूं, और मेरी आप सबको बहुत-बहुत शुभकामनाएं।

धन्‍यवाद।

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মোৰ মৰমৰ দেশবাসীসকল, নমস্কাৰ। আজি, মই এনে এক সময়ত আপোনালোকৰ সৈতে 'মন কী বাত'ত উপস্থিত হৈছো য’ত আমাৰ সকলোৰে ধৈৰ্য, ক’ৰোনাই আমাৰ সকলোৰে দুখ-কষ্ট সহ্য কৰাৰ সীমা পৰীক্ষা কৰি আছে। বহুতে আমাক অকালতে এৰি গৈছে। ক’ৰোনাৰ প্ৰথমটো ঢৌক সফলতাৰে প্ৰতিহত কৰাৰ পিছত দেশখনত সাহসেৰে ভৰি পৰিছিল, আত্মবিশ্বাসেৰে ভৰি পৰিছিল, কিন্তু এই ধুমুহাই দেশখনক হতবাক কৰি তুলিছে।

বন্ধুসকল, শেহতীয়াকৈ এই সংকটৰ মোকাবিলা কৰিবলৈ মই বিভিন্ন খণ্ডৰ বিশেষজ্ঞসকলৰ সৈতে দীঘলীয়া আলোচনা কৰিছো। আমাৰ ফাৰ্মা-উদ্যোগৰ লোক, প্ৰতিষেধক নিৰ্মাতা বা অক্সিজেন উৎপাদনৰ সৈতে সম্পৰ্কিত লোক হওক বা চিকিৎসা ক্ষেত্ৰৰ বিষয়ে বিজ্ঞ লোক হওক, তেওঁলোকে নিজৰ গুৰুত্বপূৰ্ণ পৰামৰ্শ চৰকাৰক প্ৰদান কৰিছে। এই সময়ত, আমি এই যুঁজত জয়ী হ'বলৈ বিশেষজ্ঞ আৰু বৈজ্ঞানিক পৰামৰ্শক অগ্ৰাধিকাৰ দিব লাগিব। ভাৰত চৰকাৰে ৰাজ্য চৰকাৰৰ প্ৰচেষ্টা আগবঢ়াই নিয়াৰ বাবে সকলো শক্তিৰে কাম কৰি আছে। ৰাজ্য চৰকাৰসমূহেও তেওঁলোকৰ দায়িত্ব পালন কৰিবলৈ যথাসাধ্য ধৰণে চেষ্টা কৰি আছে।

বন্ধুসকল, দেশৰ চিকিৎসক আৰু স্বাস্থ্য কৰ্মীসকলে বৰ্তমান ক’ৰোনাৰ বিৰুদ্ধে এক ডাঙৰ যুঁজত অৱতীৰ্ণ হৈছে। যোৱা এবছৰত তেওঁলোকে ৰোগটোৰ বিষয়ে সকলো ধৰণৰ অভিজ্ঞতা লাভ কৰিছে। আমাৰ সৈতে বৰ্তমান মুম্বাইৰ প্ৰখ্যাত ড০ শশাংক যোশীজী উপস্থিত আছে।

ক’ৰোনা আৰু এই সম্পৰ্কীয় গৱেষণাৰ চিকিৎসাৰ ক্ষেত্ৰত ডাঃ শশাংকজীৰ যথেষ্ট অভিজ্ঞতা আছে, তেওঁ ইণ্ডিয়ান কলেজ অব্ ফিজিচিয়ানৰ ডীনো আছিল। ডাঃ শশাংকৰ সৈতে কথা পাতোঁ আহক:-

মোদী জী- নমস্কাৰ ডাঃ শশাংকজী

ডাঃ শশাংক- নমস্কাৰ মহোদয়

মোদী জী- মাত্ৰ কিছুদিন পূৰ্বে মই আপোনাৰ সৈতে কথা পাতিবলৈ সুযোগ পাইছিলো। মই আপোনাৰ চিন্তাৰ স্পষ্টতা ভাল পাইছিলো। মই ভাবিছিলো দেশৰ সকলো নাগৰিকে আপোনাৰ মতামতৰ বিষয়ে জনা উচিত। মই কি শুনিছো সেই বিষয়ে এটা প্ৰশ্ন হিচাপে মই আপোনাৰ সন্মুখত উপস্থাপন কৰি আছো। ডাঃ শশাংক, আপোনালোকে বৰ্তমান জীৱন ৰক্ষাৰ বাবে দিন-ৰাতিয়ে কাম কৰি আছে, প্ৰথমতে মই বিচাৰো যে আপুনি জনসাধাৰণক দ্বিতীয় ঢৌৰ বিষয়ে কওক। চিকিৎসীয়ভাৱে ই কেনেকৈ পৃথক আৰু কি কি সাৱধানতাৰ প্ৰয়োজন।

ডাঃ শশাংক- ধন্যবাদ মহোদয়, এইটো দ্বিতীয়টো ঢৌ। ই দ্ৰুতগতিত আহিছে, সেয়েহে ভাইৰাছটোৱে প্ৰথমটো ঢৌৰ তুলনাত দ্ৰুত গতিত কাম কৰি আছে, কিন্তু ভাল কথাটো হ'ল তাতকৈ ক্ষীপ্ৰতাৰে পুনৰুদ্ধাৰ হৈছে আৰু মৃত্যুৰ হাৰো যথেষ্ট কম। দুটা বা তিনিটা পাৰ্থক্য আছে, প্ৰথমতে, ই যুৱচাম আৰু শিশুসকলৰ মাজত সামান্য দৃশ্যমান হয়। ইয়াৰ লক্ষণবোৰ পূৰ্বৰ দৰে উশাহ লোৱা, শুকান কাহ, জ্বৰ, আৰু ইয়াৰ সৈতে অলপ গোন্ধ, সোৱাদ নাইকিয়া হোৱা। আৰু মানুহবোৰ অলপ ভয় খাইছে। ভয় কৰাৰ কোনো প্ৰয়োজন নাই। ৮০-৯০ শতাংশ লোকৰ কোনো লক্ষণ প্ৰদৰ্শন নহয়, আৰু মিউটেচন-মিউটেচনৰ বিষয়ে যি কোৱা হৈছে, তাতো ভয় খোৱাৰ প্ৰয়োজন নাই৷ আমি কাপোৰ সলনি কৰাৰ দৰে ভাইৰাছে ইয়াৰ ৰং সলনি কৰি আছে আৰু সেয়েহে ভয় কৰিব লগীয়া একো নাই আৰু আমি এই ঢৌবোৰো অতিক্ৰম কৰিম। ঢৌ আহে আৰু যায় আৰু এই ভাইৰাছবোৰো আহি থাকে আৰু গৈ থাকে, সেয়েহে ভিন্ন ভিন্ন লক্ষণে দেখা দিছে আৰু চিকিৎসাগতভাৱে আমি সাৱধান হোৱা উচিত। ১৪ ৰ পৰা ২১ দিনৰ ক’ভিড সময় তালিকা আছে য'ত আমি চিকিৎসকৰ পৰামৰ্শ লোৱা উচিত।

মোদী জী- ডাঃ শশাংক, আপুনি উল্লেখ কৰা বিশ্লেষণ মোৰ বাবেও আকৰ্ষণীয়, মই বহুতো চিঠি পাইছো, য'ত চিকিৎসাৰ বিষয়ে মানুহৰ বহুতো আশংকা আছে, কিছুমান ঔষধৰ যথেষ্ট চাহিদা বাঢ়িছে, সেয়েহে মই বিচাৰো যে আপুনি জনসাধাৰণক ক’ভিডৰ চিকিৎসাৰ বিষয়ে কওক।

ডাঃ শশাংক- হয়, মহাশয়, নিদানিক চিকিৎসা লোকসকলে অতি পলমকৈ আৰম্ভ কৰে আৰু স্বয়ংক্ৰিয়ভাৱে ৰোগ ভাল হ’ব, এই বুলি বিশ্বাস কৰে, ম’বাইলত কি আহে তাৰ ওপৰত বিশ্বাস ৰাখে, আৰু যদি আপুনি চৰকাৰী তথ্য অনুসৰণ কৰে, তেন্তে কষ্টৰ সন্মুখীন হ’বলগীয়া নহয়। ক’ভিডৰ চিকিৎসাৰ যি প্ৰট’ক’ল আছে তাত তিনি প্ৰকাৰৰ তীব্ৰতা আছে, পাতল বা মৃদু ক’ভিডৰ বাবে ক্লিনিক চিকিৎসা প্ৰটোকল, মজলীয়া বা মডাৰেট ক’ভিড আৰু তীব্ৰ ক’ভিড যাক গুৰুতৰ ক’ভিড বুলি কোৱা হয়। সেয়েহে পাতল ক’ভিডৰ বাবে, আমি অক্সিজেন নিৰীক্ষণ কৰো, নাড়ী নিৰীক্ষণ কৰো, জ্বৰ নিৰীক্ষণ কৰো, কেতিয়াবা পেৰাচিটামলৰ দৰে ঔষধ ব্যৱহাৰ কৰো আৰু নিজৰ চিকিৎসকৰ সৈতে যোগাযোগ কৰো৷ যি মজলীয়া ক’ভিড, মডাৰেট ক’ভিড বা শক্তিশালী ক’ভিড আছে, তেন্তে চিকিৎসকৰ সৈতে যোগাযোগ কৰাটো অতি গুৰুত্বপূৰ্ণ। সঠিক আৰু সুলভ ঔষধ উপলব্ধ আছে। ইয়াত ষ্টেৰইড যি আছে ই জীৱন ৰক্ষা কৰিব পাৰে, ইনহেলাৰ দিব পাৰো, টেবলেট আমি দিব পাৰো, আৰু একে সময়তে আমি জীৱনদায়িনী অক্সিজেন দিব পাৰো আৰু ইয়াৰ বাবে সৰু সৰু চিকিৎসা আছে কিন্তু প্ৰায়ে যি ঘটি আছে সেয়া হ'ল ৰেমডেচিভিৰ নামৰ এটা নতুন পৰীক্ষামূলক ঔষধ উপলব্ধ হৈছে। এই ঔষধৰ গুৰুত্বপূৰ্ণ কথাটো হ'ল চিকিৎসালয়ত দুই তিনি দিন কমকৈ থাকিব পাৰি আৰু নিদানিক পুনৰুদ্ধাৰত সহায়ো কৰে। এই ঔষধটোৱেও কেতিয়া কাম কৰে, যেতিয়া ইয়াক প্ৰথম ৯-১০ দিনত দিয়া হয় আৰু ইয়াক পাঁচ দিনলৈ দিয়া হয়, এই যে মানুহবোৰে ৰেমডেচিভিৰৰ পিছে পিছে দৌৰি আছে, সেয়া কৰা আৱশ্যক নহয়। এয়া হৈছে অলপ ঔষধৰ কাম, যাক অক্সিজেনৰ প্ৰয়োজন, প্ৰাণ বায়ু অক্সিজেনৰ প্ৰয়োজন, যাক চিকিৎসালয়ত ভৰ্তি কৰোৱা হয় আৰু চিকিৎসকে ক'লেহে গ্ৰহণ কৰিব লাগে। গতিকে সকলো মানুহে ইয়াক বুজি পোৱাটো অতি গুৰুত্বপূৰ্ণ। আমি প্ৰাণায়াম কৰিম, আমাৰ শৰীৰৰ হাঁওফাঁও অলপ সম্প্ৰসাৰিত কৰিম আৰু আমাৰ তেজ পাতল কৰা বেজী যাক আমি হেপাৰিন বুলি কও, এই সৰু সৰু ঔষধ দিলে ৯৮% লোক যদি আৰোগ্য হয় তেন্তে ইতিবাচক হৈ থকাটো অতি গুৰুত্বপূৰ্ণ কথা। চিকিৎসকৰ পৰামৰ্শৰ সৈতে চিকিৎসা প্ৰট’কল গ্ৰহণ কৰাটো অতি গুৰুত্বপূৰ্ণ। আৰু এই ব্যয়বহুল ঔষধৰ পিছত দৌৰাৰ কোনো প্ৰয়োজন নাই, মহোদয়, আমাৰ ওচৰত ভাল চিকিৎসা আছে, প্ৰাণবায়ু অক্সিজেন আছে, ভেণ্টিলেটৰৰ সুবিধাও আছে, সকলো আছে, মহোদয়, আৰু, কেতিয়াবা যদি এই ঔষধ উপলব্ধ হয় তেন্তে ইয়াক উপযুক্ত লোকসকলক দিব লাগে৷ যথেষ্ট বিভ্ৰান্তিৰ সৃষ্টি হৈছে আৰু সেয়েহে, মই এই স্পষ্টীকৰণ দিব বিচাৰো যে মহোদয়, আমাৰ ওচৰত বিশ্বৰ সৰ্বশ্ৰেষ্ঠ চিকিৎসা উপলব্ধ আছে। আপুনি দেখিব যে ভাৰতত পুনৰুদ্ধাৰৰ হাৰ সৰ্বশ্ৰেষ্ঠ৷ যদি আপুনি ইউৰোপৰ সৈতে তুলনা কৰে, আমেৰিকাই একেই চিকিৎসা প্ৰট’কলৰ দ্বাৰা ৰোগীসকলক চিকিৎসা কৰি আছে৷

মোদী জী- ডাঃ শশাংক আপোনাক বহুত ধন্যবাদ। ডাঃ শশাংকই আমাক দিয়া তথ্য অতি গুৰুত্বপূৰ্ণ আৰু এয়া আমাৰ সকলোৰে বাবে উপযোগী হ'ব।

বন্ধুসকল, মই আপোনালোক সকলোকে অনুৰোধ জনাইছো, যদি আপোনাক কোনো তথ্যৰ প্ৰয়োজন হয়, আন কোনো আশংকা আচে তেন্তে সঠিক উৎসৰ পৰা তথ্য প্ৰাপ্ত কৰক। আপোনাৰ পাৰিবাৰিক চিকিৎসক, ওচৰৰ চিকিৎসকৰ সৈতে ফোনযোগে যোগাযোগ কৰক আৰু তেওঁলোকৰ পৰামৰ্শ লওক। মই দেখিছো যে আমাৰ বহুতো চিকিৎসকে নিজেই এই দায়িত্ব গ্ৰহণ কৰি আছে। বহুতো চিকিৎসকে সামাজিক মাধ্যমৰ জৰিয়তে লোকসকলক অৱগত কৰি আছে। ফোনত, হোৱাটছএপৰ জৰিয়তেও পৰামৰ্শ দি আছে। বহুতো চিকিৎসালয়ৰ ৱেবছাইট আছে য'ত তথ্যও উপলব্ধ আৰু আপুনি তাত চিকিৎসকৰ পৰামৰ্শও ল'ব পাৰে। এইটো অতি প্ৰশংসনীয় কাম হৈছে।

মোৰ সৈতে শ্ৰীনগৰৰ ডাঃ নাভিদ নাজিৰ শ্বাহে যোগদান কৰিছে। ডাঃ নাভিদ শ্ৰীনগৰৰ এখন চৰকাৰী চিকিৎসা মহাবিদ্যালয়ৰ অধ্যাপক। নাভিদজীয়ে তেওঁৰ তত্বাৱধানত বহুতো ক’ৰোনা ৰোগীক চিকিৎসা কৰিছে আৰু ডাঃ নাভিদে এই পবিত্ৰ ৰমজান মাহতো তেওঁৰ কাম কৰি আছে আৰু তেওঁ আমাৰ সৈতে কথা পাতিবলৈ আহৰি উলিয়াইছে। তেওঁৰ সৈতে কথা পাতো আহক।

মোদী জী- নাভিদজী নমস্কাৰ৷

ডাঃ নাভিদ- নমস্কাৰ মহোদয়৷

মোদী জী- ড০ নাভিদ 'মন কী বাত'ৰ আমাৰ শ্ৰোতাসকলে এই কঠিন সময়ত আতংক ব্যৱস্থাপনাৰ প্ৰশ্ন উত্থাপন কৰিছে। আপুনি আপোনাৰ অভিজ্ঞতাৰ পৰা তেওঁলোকক কেনেদৰে সঁহাৰি দিব?

ডাঃ নাভিদ- চাওক, যেতিয়া ক’ৰোনা আৰম্ভ হৈছিল, কাশ্মীৰত কোভিড চিকিৎসালয় হিচাপে নিৰ্ধাৰিত প্ৰথম চিকিৎসালয়খন আমাৰ মহানগৰ চিকিৎসালয় আছিল। সেই সময়ত এক ভয়ৰ পৰিৱেশ আছিল৷ মানুহে ভাবিছিল যে ক’ৰোনা সংক্ৰমণ হ’লে ইয়াক মৃত্যুদণ্ড বুলি গণ্য কৰা হ'ব আৰু এনে পৰিস্থিতিত, ডাঃ চাহিবান অথবা পেৰা-মেডিকেল কৰ্মচাৰীসকল যিসকলে আমাৰ চিকিৎসালয়ত কাম কৰিছিল, তেওঁলোকৰ মাজত ভয় আছিল যে আমি এই ৰোগীসকলৰ কিদৰে সন্মুখীন হ'ম। আমাৰ সংক্ৰমণ নহয়তো? কিন্তু আমি এইটোও দেখিছিলো যে যদি আমি সম্পূৰ্ণৰূপে পৰিধান কৰা সুৰক্ষামূলক গীয়েৰৰ পদক্ষেপসমূহ কাৰ্যকৰী কৰো তেতিয়া আমি সুৰক্ষিত থাকিব পাৰো আৰু আমাৰ বাকী কৰ্মচাৰীসকলেও সুৰক্ষিত থাকিব পাৰে আৰু লগতে আমি দেখিছিলো যে কিছুমান ৰোগী এনে আছিল যি লক্ষণহীন আছিল, যাৰ ৰোগৰ কোনো লক্ষণ নাছিল। আমি দেখিছোযে ঔষধ গ্ৰহণ নকৰা ৯০-৯৫% ৰো অধিক ৰোগীও আৰোগ্য হয়, সেয়েহে বিগত সময়ৰ পৰা ক’ৰোনাৰ ভয় যথেষ্ট হ্ৰাস পাইছে। আজি আমি এইবাৰৰ ক’ৰোনাৰ দ্বিতীয় ঢৌতো আতংকিত হ'ব নালাগে৷ যদি আমি এছ.অ’.পিৰ সুৰক্ষামূলক ব্যৱস্থা ৰূপায়ণ কৰো, যেনে মাস্ক পৰিধাৰ কৰা, হেণ্ড চেনিটাইজাৰ ব্যৱহাৰ কৰা, শাৰীৰিক দূৰত্ব বিধি বা সামাজিক সমাৱেশ পৰিহাৰ কৰা, তেতিয়া আমি আমাৰ দৈনন্দিন কামবোৰো কৰিব পাৰিম আৰু এই ৰোগৰ পৰাও সুৰক্ষা লাভ কৰিব পাৰিম।

মোদী জী- ডাঃ নাভিদ, প্ৰতিষেধকক লৈ লোকসকলৰ বহুতো প্ৰশ্ন আছে, যেনে কিমান সুৰক্ষা প্ৰতিষেধকে প্ৰদান কৰিব পাৰে, প্ৰতিষেধক গ্ৰহণৰ পিছত তেওঁলোক কিমান আত্মবিশ্বাসী হ'ব পাৰে? আপুনি মোক ইয়াৰ বিষয়ে জনালে শ্ৰোতাসকল বহু উপকৃত হ'ব।

ডাঃ নাভিদ- যিহেতু ক’ৰোনাৰ সংক্ৰমণ পোহৰলৈ আহিছে, আমাৰ ওচৰত ক’ভিড ১৯-ৰ বাবে কোনো কাৰ্যকৰী চিকিৎসা উপলব্ধ নাই, আমি এই ৰোগৰ সৈতে মাত্ৰ দুটা বস্তুৰে যুঁজিব পাৰো, এটা সুৰক্ষামূলক পদক্ষেপ আৰু আমি ইতিমধ্যে কৈ আহিছো যে যদি এটা কাৰ্যকৰী প্ৰতিষেধক আমাৰ ওচৰলৈ আহে, তেন্তে ই আমাক এই ৰোগৰ পৰা আৰোগ্য কৰিব পাৰে৷ এই সময়ত আমাৰ দেশত দুটা ভেকছিন উপলব্ধ আছে। কভাক্সিন আৰু কভিশ্বিল্ড যাক ইয়াত নিৰ্মাণ কৰা হৈছে। আৰু কোম্পানীবোৰেও নিজৰ যিবোৰ পৰীক্ষণ কৰিছে, তাতো দেখা গৈছে যে কাৰ্যকাৰিতা ৬০% তকৈ অধিক আৰু যদি আমি জম্মু আৰু কাশ্মীৰৰ কথা কও, এতিয়ালৈকে ১৫ ৰ পৰা ১৬ লাখ লোকে আমাৰ কেন্দ্ৰীয়শাসিত অঞ্চলত এই প্ৰতিষেধক লাভ কৰিছে। হয়, ছ'চিয়েল মিডিয়াত ইয়াক লৈ বহুতো ভুল ধাৰণা উপলব্ধ হৈছে যে এইবোৰৰ পাৰ্শ্বক্ৰিয়া আছে৷ এতিয়ালৈকে আমাৰ সকলো প্ৰতিষেধকত কোনো পাৰ্শ্বক্ৰিয়া পোৱা হোৱা নাই। কেৱল সেইটোৱেই সকলো প্ৰতিষেধকৰ সৈতে হয়, কাৰোবাৰ জ্বৰ, গোটেই শৰীৰত বিষ বা বেজী দিয়া স্থানত বিষ হয়, আমি প্ৰতিটো ৰোগীৰ পাৰ্শ্বক্ৰিয়াত দেখিছোঁ আমি কোনো স্থুল প্ৰভাৱ দেখা নাই, আমি কোনো বিৰূপ প্ৰভাৱ দেখা নাই। আৰু অৱশ্যে, লোকসকলৰ মাজত আন এটা আশংকাও আছিল যে টীকাকৰণৰ পিছত কিছুমান লোকে অৰ্থাৎ টীকাকৰণৰ পিছতো পজিটিভ হৈছে, কোম্পানীবোৰৰ পৰা নিৰ্দেশনা প্ৰকাশ কৰা হৈছে যে যদি কাৰোবাক টীকাকৰণ কৰা হয় তাৰ পিছতো পজিটিভ হ’ব পাৰে। তাৰ পিছত সংক্ৰমণ হ'ব পাৰে, ই পজিটিভ হ'ব পাৰে। কিন্তু ৰোগৰ যি তীব্ৰতা সেয়া ৰোগীসকলৰ দেহত দেখা পোৱা নাযায়৷ সেয়ে ইয়াৰ ক্ষেত্ৰত থকা ভুল ধাৰণাসমূহ আঁতৰাব লাগে আৰু ১ মে’ৰ পৰা সমগ্ৰ দেশতে ১৮ বছৰৰ ঊৰ্ধৰ লোকসকলৰ টীকাকৰণৰ কাম আৰম্ভ হ’ব, তেওঁলোককো আপীল কৰিছো, আহক আপোনালোক আৰু প্ৰতিষেধক গ্ৰহণ কৰক৷ ইয়াৰ দ্বাৰা নিজেও সুৰক্ষিত হৈ থকাৰ লগতে আমাৰ সমাজখনো ক’ভিড-১৯ৰ আক্ৰমণৰ পৰা সুৰক্ষিত হৈ পৰিব৷

মোদী জী- ডাঃ নাভিদ, আপোনাক বহু ধন্যবাদ৷ ৰমজানৰ পবিত্ৰ মাহ উপলক্ষেও আপোনালৈ অলেখ শুভকামনা থাকিল৷

ডাঃ নাভিদ- অশেষ ধন্যবাদ৷

মোদী জী- বন্ধুসকল, যিহেতু ক’ৰোনাৰ এই সংকটৰ সময়ছোৱাত প্ৰতিষেধকৰ গুৰুত্ব সকলোৱে জানে, মই আপোনালোকক প্ৰতিষেধকৰ বিষয়ে কোনো উৰাবাতৰিত ভোল নাযাবলৈ অনুৰোধ জনাইছো। আপোনালোকে এইটোও জানিব যে ভাৰত চৰকাৰে সকলো ৰাজ্য চৰকাৰলৈ বিনামূলীয়া প্ৰতিষেধক প্ৰেৰণ কৰিছে যিবোৰ ৪৫ বছৰৰ অধিক বয়সৰ লোকসকলে গ্ৰহণ কৰিব পাৰে। এতিয়া, ১ মে'ৰ পৰা, দেশৰ ১৮ বছৰৰ অধিক বয়সৰ সকলোৰে বাবে প্ৰতিষেধক উপলব্ধ হ'ব। এতিয়া কৰ্পোৰেট খণ্ড, দেশৰ কোম্পানীবোৰেও তেওঁলোকৰ কৰ্মচাৰীসকলক প্ৰতিষেধক দিয়াৰ অভিযানত অংশগ্ৰহণ কৰিবলৈ সক্ষম হ'ব। মই এইটোও ক'ব লাগিব যে ভাৰত চৰকাৰে চলাই থকা বিনামূলীয়া প্ৰতিষেধক প্ৰদান কাৰ্যসূচী অব্যাহত থাকিব। মই ৰাজ্যসমূহক ভাৰত চৰকাৰৰ এই বিনামূলীয়া প্ৰতিষেধক অভিযানৰ লাভালাভ যিমান পাৰি সিমান লোকক তেওঁলোকৰ ৰাজ্যত প্ৰদান কৰিবলৈও অনুৰোধ জনাইছো।

 

বন্ধুসকল, আমি সকলোৱে জানো যে আমাৰ বাবে মানসিকভাৱে নিজৰ, আমাৰ পৰিয়ালৰ যত্ন লোৱাটো কিমান কঠিন, কিন্তু আমাৰ চিকিৎসালয়ৰ নাৰ্চিং কৰ্মচাৰীসকলে একেটা কাম একেলগে বহুতো ৰোগীৰ বাবে কৰিব লাগিব। সেৱাৰ এই অনুভূতি আমাৰ সমাজৰ এক ডাঙৰ শক্তি। কেৱল নাৰ্চেহে নাৰ্চিং কৰ্মচাৰীৰ দ্বাৰা কৰা সেৱা আৰু কঠোৰ পৰিশ্ৰমৰ বিষয়ে ভালদৰে ক'ব পাৰে। সেইবাবে মই ৰায়পুৰৰ ড০ বি আৰ আম্বেদকাৰৰ মেডিকেল কলেজ চিকিৎসালয়ত সেৱা আগবঢ়োৱা ভগ্নী ভাৱনা ধ্ৰুৱজীক 'মন কী বাত'লৈ আমন্ত্ৰণ জনাইছো, তেওঁ বহুতো ক’ৰোনা ৰোগীৰ যত্ন লৈ আছে। আহক! তেওঁৰ সৈতে কথা পাতো –

মোদী জী- নমস্কাৰ ভাৱনা জী!

ভাৱনা- আদৰণীয় প্ৰধানমন্ত্ৰী মহোদয়, নমস্কাৰ!

মোদী জী- ভাৱনা জী…

ভাৱনা- হয় মহোদয়৷

মোদী জী- ‘মন কী বাত’ শুনি থকা শ্ৰোতাসকলক আপুনি জনাওক যে আপোনাৰ পৰিয়ালত আপোনাৰ ইমান দায়িত্ব, ইমান কাম, তথাপিও আপুনি ক’ৰোনা ৰোগীসকলৰ সৈতে কাম কৰি আছে৷ ক’ৰোনাৰ ৰোগীসকলৰ সৈতে আপোনাৰ যি অভিজ্ঞতা হৈছে সেয়া দেশবাসীয়ে নিশ্চয় শুনিব বিচাৰিব আৰু ছিষ্টাৰ, নাৰ্চসকল ৰোগীৰ নিকটতম হয় আৰু দীৰ্ঘসময়লৈ সম্পৰ্ক থাকে৷ প্ৰতিটো কথা বিশদভাৱে তেওঁ বুজাই দিব পাৰে৷ কওক৷

ভাৱনা- হয়, মহোদয়৷ ক’ভিডৰ সৈতে মোৰ মুঠ অভিজ্ঞতা হৈছে ২ মাহ। আমি ১৪ দিনৰ কৰ্তব্য কৰোঁ আৰু ১৪ দিনৰ পিছত আমাক বিশ্ৰাম দিয়া হয়। তাৰ পিছত, ২ মাহৰ পিছত, আমাৰ এই ক’ভিড কৰ্তব্যবোৰৰ পুনৰাবৃত্তি কৰা হয় মহোদয়। যেতিয়া মই প্ৰথম ক’ভিড কৰ্তব্যত যোগদান কৰিছিলো, মই প্ৰথমে মোৰ পৰিয়ালৰ সদস্যসকলক এই ক’ভিড কৰ্তব্যৰ বিষয়ে জনাইছিলো। এয়া মে’ মাহৰ কথা আছিল আৰু মই কোৱাৰ লগে লগে সকলোৱে ভয় খাইছিল, মোক ভয় খাইছিল, কৈছিল যে ভালদৰে কাম কৰিবা, এক আৱেগিক পৰিস্থিতিৰ সৃষ্টি হৈছিল মহোদয়। ইয়াৰ মাজতে, যেতিয়া মোৰ ছোৱালীয়ে মোক সুধিছিল, মা আপুনি ক’ভিড ডিউটিলৈ যাব, সেই সময়ত মোৰ বাবে এয়া যথেষ্ট আৱেগিক মুহূৰ্ত আছিল, কিন্তু, যেতিয়া মই ক’ভিড ৰোগীৰ ওচৰলৈ গৈছিলো, মই ঘৰত এটা দায়িত্ব এৰি আহিছিলো আৰু যেতিয়া মই ক’ভিড ৰোগীসকলৰ কাষলৈ গ’লো, তেওঁলোক বহু বেছি উদ্বিগ্ন হৈ আছিল, সকলো ৰোগী ক’ভিডৰ নামত ইমান ভয় খাইছিল যে তেওঁলোকে বুজি পোৱা নাছিল যে তেওঁলোকৰ কি হৈছে, পৰৱৰ্তী সময়ত তেওঁলোকে কি কৰিব। আমি তেওঁলোকৰ ভয় দূৰ কৰিবলৈ এটা ভাল স্বাস্থ্যকৰ পৰিৱেশ দিছিলো মহোদয়। যেতিয়া আমাক এই ক’ভিড কৰ্তব্য কৰিবলৈ কোৱা হৈছিল, প্ৰথমতে, আমাক পিপিই কিট পিন্ধিবলৈ কোৱা হৈছিল, যিটো অতি কঠিন৷ পিপিই কিট পিন্ধি কৰ্তব্য সমাপন কৰাটো অতিশয় কঠিন। মহাশয়, এইটো আমাৰ বাবে বৰ কঠিন আছিল, মই ৱাৰ্ড, আইচিইউ, আইচ’লেচন সকলোতে ২ মাহৰ কৰ্তব্যত সকলো ঠাইতে ১৪-১৪ দিন কৰ্তব্য পালন কৰিছিলো৷

মোদী- অৰ্থাৎ, মুঠ আপুনি এবছৰ ধৰি এনেদৰে কাম কৰি আহিছে৷

ভাৱনা- হয় মহোদয়, মই তালৈ যোৱাৰ আগতে মই নাজানিছিলো মোৰ সহকৰ্মীসকল কোন। আমি দলৰ সদস্যৰ দৰে কাম কৰিছিলো মহোদয়৷ আমি তেওঁলোকৰ যিকোনো সমস্যা ভাগ বতৰা কৰো, আমি ধৈৰ্য্যশীল হৈ তেওঁলোকৰ দুঃশ্চিন্তা আঁতৰ কৰো মহোদয়, বহুতো লোক আছিল যিয়ে ক’ভিডৰ নামটো শুনিয়েই ভয় খাইছিল। সেই সকলোবোৰ লক্ষণ তেওঁলোকৰ দেখা দিছিল, যেতিয়া আমি সেইবোৰ ইতিহাস তৈয়াৰ কৰিছিলো, কিন্তু ভয়ৰ বাবে, তেওঁলোকে পৰীক্ষা কৰোৱাব পৰা নাছিল, সেয়েহে আমি তেওঁলোকক বুজাই দিছিলো, আৰু মহোদয়, যেতিয়া তীব্ৰতা বাঢ়ি আহিছিল, হাঁওফাঁও সংক্ৰমিত হোৱাত আইচিইউৰ প্ৰয়োজন হৈছিল৷ লগতে তেওঁলোকৰ সম্পূৰ্ণ পৰিয়াল আহিছিল। গতিকে আমি এনেকুৱা ১-২টা ঘটনা দেখিছিলো মহোদয় আৰু এনে নহয়, আমি প্ৰতিটো বয়সৰ গোটৰ সৈতে কাম কৰিছিলো মহোদয়। তাত সৰু ল'ৰা-ছোৱালী, মহিলা, পুৰুষ, বৃদ্ধ, সকলো ধৰণৰ ৰোগী আছিল। যেতিয়া আমি তেওঁলোকৰ সকলোৰে সৈতে কথা পাতিছিলো, সকলোৱে কৈছিল যে আমি ভয়ত আহিব পৰা নাই, সকলোৰে পৰা সেইটোৱেই আমি উত্তৰ পাইছিলো। গতিকে আমি তেওঁলোকক বুজালো যে ভয় একো নহয়। আপোনালোকে আমাক সমৰ্থন কৰক, আমি আপোনালোকক সমৰ্থন কৰিম। আপুনি প্ৰট’কল অনুসৰণ কৰক, কেৱল আমি তেওঁলোকৰ সৈতে এইখিনি কৰিব পাৰিলো মহোদয়।

মোদী জী- ভাৱনা জী, মই আপোনাৰ সৈতে কথা পাতি খুব ভাল পালো, আপুনি খুব ভাল তথ্য দিলে। আপুনিআপোনাৰ নিজৰ অভিজ্ঞতাৰ পৰা কৈছে, নিশ্চিতভাৱে দেশবাসীৰ বাবে ই ইতিবাচকত বাৰ্তা হ'ব। ভাৱনা জী, আপোনাক বহুত বহুত ধন্যবাদ!

ভাৱনা- ধন্যবাদ মহোদয়, জয় হিন্দ মহোদয়৷

মোদী জী- জয় হিন্দ!

ভাৱনা জী আৰু নাৰ্চিং ষ্টাফৰ দৰে হাজাৰ-লক্ষাধিক ভাই-ভনীয়ে তেওঁলোকৰ কৰ্তব্য ভালদৰে কৰি আছে। এইটো আমাৰ সকলোৰে বাবে এক ডাঙৰ অনুপ্ৰেৰণা। আপোনালোকে আপোনালোকৰ স্বাস্থ্যৰ প্ৰতিও যথেষ্ট মনোযোগ দিয়া উচিত। নিজৰ পৰিয়ালৰো যত্ন লওক।

বন্ধুসকল, আমাৰ সৈতে বৰ্তমান বেংগালুৰুৰ চিষ্টাৰ সুৰেখা জী জড়িত হৈছে। সুৰেখা জী কে.চি সাধাৰণ চিকিৎসালয়ৰ জ্যেষ্ঠ নাৰ্চিং বিষয়া। আহক! তেওঁলোকৰ অভিজ্ঞতাৰ বিষয়ে জানো –

মোদী জী- নমস্কাৰ সুৰেখা জী!

সুৰেখা- আমাৰ দেশ প্ৰধানমন্ত্ৰীৰ সৈতে কথা পাতিবলৈ পাই মই গৌৰৱ আৰু সন্মানিত অনুভৱ কৰিছো মহোদয়৷

মোদী জী- সুৰেখা জী, আপুনি সকলো সহকৰ্মী নাৰ্ছ আৰু চিকিৎসালয়ৰ কৰ্মচাৰীৰ সৈতে উৎকৃষ্ট কাম কৰি আছে। ভাৰতবাসী আপোনালোক সকলোৰে প্ৰতি কৃতজ্ঞ। ক’ভিড-১৯ৰ বিৰুদ্ধে এই যুঁজত নাগৰিকসকলৰ বাবে আপোনাৰ বাৰ্তা কি।

সুৰেখা- হয় মহোদয়। এজন দায়িত্বশীল নাগৰিক হিচাপে মই সঁচাকৈয়ে ক'ব বিচাৰো যে অনুগ্ৰহ কৰি আপোনাৰ চুবুৰীয়াসকলৰ প্ৰতি নম্ৰ হওক আৰু আগতীয়া পৰীক্ষা আৰু সঠিক ট্ৰেকিঙে আমাক মৃত্যুৰ হাৰ হ্ৰাস কৰাত সহায় কৰে আৰু তাৰোপৰি অনুগ্ৰহ কৰি যদি আপুনি কোনো লক্ষণ দেখা পাইছে তেন্তে নিজকে আচুতীয়াকৈ ৰাখক আৰু ওচৰৰ চিকিৎসকৰ পৰামৰ্শ লওক তথা যিমান সম্ভৱ সিমান সোনকালে চিকিৎসা কৰাওক। সেয়েহে, সমাজত এই ৰোগটোৰ বিষয়ে সজাগতা আনিব লাগিব আৰু ইতিবাচক হ'ব লাগিব, আতংকিত নহ'ব আৰু চাপত নাথাকিব। ই ৰোগীৰ অৱস্থা বেয়া কৰে। আমি আমাৰ চৰকাৰৰ ওচৰত এটা প্ৰতিষেধক উপলব্ধ হোৱাৰ বাবে গৌৰৱান্বিত আৰু মই ইতিমধ্যে মোৰ নিজৰ অভিজ্ঞতাৰ সৈকে প্ৰতিষেধক গ্ৰহণ কৰিছো, মই ভাৰতৰ নাগৰিকসকলক ক'ব বিচাৰিছো যে কোনো প্ৰতিষেধকেই লগে লগে ১০০% সুৰক্ষা প্ৰদান নকৰে। ৰোগ প্ৰতিৰোধ ক্ষমতা গঢ়িবলৈ সময় লাগে। অনুগ্ৰহ কৰি টীকাকৰণ কৰিবলৈ ভয় নকৰিব। অনুগ্ৰহ কৰি নিজকে টীকাকৰণ কৰক; এক নিম্নতম পাৰ্শ্বক্ৰিয়াই দেখা দিব পাৰে আৰু মই এই বাৰ্তা প্ৰদান কৰিব বিচাৰো যে, ঘৰত থাকক, সুস্থ হৈ থাকক, অসুস্থ লোকসকলৰ সংস্পৰ্শ পৰিহাৰ কৰক আৰু অপ্ৰয়োজনীয়ভাৱে নাক, চকু আৰু মুখ স্পৰ্শ কৰা পৰিহাৰ কৰক। অনুগ্ৰহ কৰি শাৰীৰিকভাৱে দূৰত্ব ৰখা, মাস্ক ভালদৰে পিন্ধা, নিয়মীয়াকৈ হাত ধোৱা আৰু আপুনি ঘৰতে অনুশীলন কৰিব পৰা ঘৰুৱা প্ৰতিকাৰৰ অভ্যাস কৰক। অনুগ্ৰহ কৰি আয়ুৰ্বেদিক কাঢ়া খাওক, বাষ্প উশাহত লওক আৰু প্ৰতিদিনে মুখ কুলিকুলি কৰক আৰু উশাহ-নিশাহৰ ব্যায়ামো কৰিব পাৰে। আৰু এটা কথা, অনুগ্ৰহ কৰি ফ্ৰণ্টলাইন কৰ্মী আৰু পেছাদাৰীসকলৰ প্ৰতি সহানুভূতি প্ৰদৰ্শন কৰক। আমাক আপোনাৰ সমৰ্থন আৰু সহযোগিতাৰ প্ৰয়োজন। আমি একেলগে যুঁজিম। আমি মহামাৰীৰ মাজেৰে পাৰ হ'ম। এইটোৱেই মোৰ জনসাধাৰণলৈ বাৰ্তা মহোদয়।

মোদী জী- ধন্যবাদ সুৰেখা জী৷

সুৰেখা- ধন্যবাদ মহোদয়৷

সুৰেখাজী, সঁচাকৈয়ে, আপুনি অতি কঠিন সময়ত নেতৃত্ব বহন কৰি আছে। আপুনি নিজৰো যত্ন লওক! আপোনাৰ পৰিয়াললৈও মোৰ শুভেচ্ছা থাকিল। মই দেশৰ জনসাধাৰণক সুৰেখাজীয়ে তেওঁৰ অভিজ্ঞতাৰ পৰা জনোৱা অনুভূতিবোৰ প্ৰকাশ কৰিবলৈও অনুৰোধ কৰিম। ক’ৰোনাৰ বিৰুদ্ধে যুঁজিবলৈ ইতিবাচক মনোভাৱ অতি গুৰুত্বপূৰ্ণ আৰু দেশবাসীয়ে ইয়াক বজাই ৰাখিব লাগিব।

বন্ধুবৰ্গ, চিকিৎসক আৰু নাৰ্চিং কৰ্মচাৰীৰ লগতে লেব-টেকনিচিয়ান আৰু এম্বুলেন্স চালকৰ দৰে ফ্ৰণ্টলাইন কৰ্মীসকলে এই মুহূৰ্তত ঈশ্বৰৰ দৰে কাম কৰি আছে। যেতিয়া এম্বুলেন্স এজন ৰোগীৰ ওচৰলৈ যায়, তেওঁলোকে এম্বুলেন্স চালকক দেৱদূতৰ দৰে অনুভৱ কৰে। দেশবাসীয়ে এই সকলোবোৰৰ সেৱা, তেওঁলোকৰ অভিজ্ঞতাৰ বিষয়ে জানিব লাগিব। মোৰ লগত এনে এজন ভদ্ৰলোক আছে, শ্ৰীযুত প্ৰেম বাৰ্মাজী, যি এজন এম্বুলেন্স চালক, তেওঁৰ নাম অনুসৰি। প্ৰেম বাৰ্মাজীয়ে তেওঁৰ কাম, তেওঁৰ কৰ্তব্য, সকলো প্ৰেম আৰু নিষ্ঠাৰে কৰে। আহক! তেওঁৰ সৈতে কথা পাতো –

মোদী জী- নমস্কাৰ প্ৰেম জী৷

প্ৰেম জী- নমস্কাৰ মহোদয়৷

মোদী জী- ভাই! প্ৰেম৷

প্ৰেম জী- হয় মহোদয়৷

মোদী জী- আপুনি নিজৰ কামৰ বিষয়ে৷

প্ৰেম জী- হয় মহোদয়৷

মোদী জী- সামান্য বিশদভাৱে কওক৷ আপোনাৰ অভিজ্ঞতাৰ বিষয়ে কওক৷

প্ৰেম জী- মই কেটছ এম্বুলেন্সত চালকৰ পদত আছো আৰু কণ্ট্ৰ’লত আমালৈ এটা টেবত কল আহে। আমি 102 ৰ পৰা কলৰ ৰোগীৰ কাষলৈ যাও। আমি দুবছৰ ধৰি এই কাম অব্যাহত ৰাখিছো। নিজৰ কিট পিন্ধি, নিজৰ হাতমোজা পিন্ধি, মাস্ক পিন্ধি, ৰোগীয়ে য'ত তেওঁক লৈ যাবলৈ কয়, যিকোনো চিকিৎসালয়তে, আমি যিমান সম্ভৱ সিমান সোনকালে তেওঁলোকক গন্তব্যস্থানলৈ প্ৰেৰণ কৰো।

মোদী জী- আপুনিটো প্ৰতিষেধকৰ দুয়োটা পালিয়েই গ্ৰহণ কৰিছে৷

প্ৰেম জী- নিশ্চয় মহোদয়৷

মোদী জী- আনসকল লোকে যি প্ৰতিষেধক গ্ৰহণ কৰিছে৷ তেওঁলোকলৈ আপোনাৰ বাৰ্তা কি?

প্ৰেম জী- নিশ্চিতভাৱে মহোদয়। সকলোৱেই এই প্ৰতিষেধকৰ পালি গ্ৰহণ কৰা উচিত আৰু ই পৰিয়ালৰ বাবেও ভাল কথা। এতিয়া মোৰ মায়ে মোক এই চাকৰিটো এৰি দিবলৈ কৈছে। মই ক’লো, মা, যদি মই মোৰ চাকৰি এৰি দিও, কোনে ৰোগীসকলক গন্তব্যস্থানলৈ প্ৰেৰণ কৰিব? কাৰণ এই ক’ৰোনা কালত সকলোৱে পলাই গৈছে। সকলোৱে তেওঁলোকৰ চাকৰি এৰি আছে। মায়েও মোক কৈছে এই চাকৰি এৰি দিব লাগে। মই কৈছিলো যে নহয় মা, মই মোৰ চাকৰি এৰি নিদিও।

মোদী জী- প্ৰেম জী, মাক দুখী নকৰিব, তেওঁক বুজাব৷

প্ৰেম জী- হয়৷

মোদী জী- কিন্তু আপুনি যি এই মাৰ কথা কথা নহয়৷

প্ৰেম জী- হয়৷

মোদী জী- ই হৃদয়স্পৰ্শী আছিল৷

প্ৰেম জী- হয়৷

মোদী জী- আপোনাৰ মাতৃকো৷

প্ৰেম জী- হয়৷

মোদী জী-মোৰ প্ৰণাম জনাব৷

প্ৰেম জী- নিশ্চয়৷

মোদী জী- হয়৷

প্ৰেম জী- হয়৷

মোদী জী- আৰু প্ৰেম জী, আপোনাৰ জৰিয়তে

প্ৰেম জী- হয়

মোদী জী- এম্বুলেঞ্চ চলোৱা সকলো চালকে

প্ৰেম জী- হয়

মোদী জী- তেওঁলোকে কিমান বিপদশংকুল কাম কৰি আছে৷

প্ৰেম জী- হয়

মোদী জী- আৰু প্ৰত্যেকৰে মাতৃয়ে কি ভাবে?

প্ৰেম জী- নিশ্চয় মহোদয়

মোদী জী- এইখিনি কথা যেতিয়া শ্ৰোতা ৰাইজে শুনিব

প্ৰেম জী- হয়

মোদী জী- মই ভাবো যে প্ৰত্যেকৰে হৃদয় চুই যাব

প্ৰেম জী- হয়

মোদী জী- প্ৰেম জী, অশেষ ধন্যবাদ৷ আপুনি এক প্ৰকাৰে প্ৰেমৰ গংগা বোৱাই আছে৷

প্ৰেম জী- ধন্যবাদ মহোদয়৷

মোদী জী- ধন্যবাদ ভাই৷

প্ৰেম জী- ধন্যবাদ৷

বন্ধুসকল, প্ৰেম বাৰ্মাজী আৰু তেওঁৰ দৰে হাজাৰ হাজাৰ লোকে আজি তেওঁলোকৰ জীৱন বিপদত পেলাই জনসাধাৰণৰ সেৱা কৰি আছে। ক’ৰোনাৰ বিৰুদ্ধে এই যুঁজত ৰক্ষা পোৱা সকলোৰে জীৱনত এম্বুলেন্স চালকসকলেও যথেষ্ট অৱদান আগবঢ়াইছে। প্ৰেমজী, মই আপোনাক আৰু সমগ্ৰ দেশৰ আপোনাৰ সকলো সহকৰ্মীক বহুতো সাধুবাদ দিছো। আপুনি সময়মতে গৈ থাককক, জীৱন ৰক্ষা কৰি থাকক।

মোৰ মৰমৰ দেশবাসীসকল, এইটো সঁচা যে বহুতো লোক ক’ৰোনাৰ দ্বাৰা সংক্ৰমিত হৈছে, কিন্তু, ক’ৰোনাৰ পৰা আৰোগ্য হোৱা লোকৰ সংখ্যাও সমানে বেছি। গুৰুগ্ৰামৰ প্ৰীতি চতুৰ্বেদীজীয়েও শেহতীয়াকৈ ক’ৰোনাক পৰাজিত কৰিছে। প্ৰীতিজীয়ে আমাৰ সৈতে 'মন কী বাত'ত যোগদান কৰিছে। তেওঁৰ অভিজ্ঞতা আমাৰ সকলোৰে বাবে যথেষ্ট উপযোগী হ'ব।

মোদী জী- প্ৰীতি জী নমস্কাৰ

প্ৰীতি জী- নমস্কাৰ মহোদয়৷ আপোনাৰ ভাল নে?

মোদী জী- মোৰ ভাল ৷ সবাতোকৈ প্ৰথমে আপুনি ক’ভিড-১৯ৰ পৰা

প্ৰীতি জী- হয়

মোদী জী- সফলতাৰে যুঁজি অহাৰ বাবে

প্ৰীতি জী- হয়

মোদী জী- আপোনাক প্ৰশংসা কৰিছো

প্ৰীতি জী- অশেষ ধন্যবাদ মহোদয়

মোদী জী- আপোনাৰ স্বাস্থ্যৰ শীঘ্ৰ আৰোগ্য হওক তাৰে কামনা কৰিলো ৷

প্ৰীতি জী- ধন্যবাদ মহোদয় ৷

মোদী জী- প্ৰীতি জী

প্ৰীতি জী- হয়

মোদী জী- এই ঢৌত কেৱল আপোনাৰেই নম্বৰ লাগিছিল নে পৰিয়ালৰ আন সদস্যৰো হৈছিল ৷

প্ৰীতি জী- নহয় নহয় মহোদয়, মোৰ অকলে হৈছিল৷

মোদী জী- ভগৱানৰ কৃপা৷ আচ্ছা মই বিচাৰিম যে

প্ৰীতি জী- হয়

মোদী জী- আপুনি আপোনাৰ এই পীড়া অৱস্থাৰ কিছু অভিজ্ঞতা যদি বৰ্ণনা কৰে তেন্তে শ্ৰোতাসকলে নিজকে এনে সময়ত কিদৰে চম্ভালিব লাগে সেই বিষয়ে সঠিক মাৰ্গদৰ্শন লাভ কৰিব ৷

প্ৰীতি জী- হয় মহোদয়, নিশ্চয়৷ মই আৰম্ভণিৰ পৰ্যায়ত অত্যাধিক আলস্য ভাৱ অনুভৱ কৰিছিলো, আৰু তাৰ পিছত মোৰ ডিঙিত অলপ বিষ যেন হৈছিল। ইয়াৰ পিছত মই লক্ষণবোৰ অলপ অনুভৱ কৰা যেন পালো আৰু সেয়েহে মই পৰীক্ষা কৰোৱালো। পিছদিনা প্ৰতিবেদন দিয়াৰ লগে লগে, মই পজিটিভ ঘোষিত হোৱা লগে লগে, মই নিজকে আচুতীয়াকৈ ৰাখিলো ৷ এটা কোঠাত নিজতে পৃথক কৰি চিকিৎসকৰ পৰামৰ্শ গ্ৰহণ কৰিলো ৷ তেওঁলোকৰ ঔষধ গ্ৰহণ কৰা আৰম্ভ কৰিলো।

মোদী জী- আপোনাৰ এই তৎকালীন পদক্ষেপৰ ফলত পৰিয়ালৰ অন্য লোক বাচি গ’ল৷

প্ৰীতি জী- হয় মহোদয়। বাকী সকলোৰে পৰীক্ষা কৰোৱা হ’ল। সকলোৰে নিগেটিভ আছিল। মই পজিটিভ আছিলো। তাৰ পূৰ্বেই মই এটা কোঠাৰ ভিতৰত নিজকে পৃথক কৰি ৰাখিছিলো। মই প্ৰয়োজনীয় সকলো সামগ্ৰী ৰাখিছিলো আৰু নিজেই কোঠাটো বন্ধ কৰি দিছিলো। আৰু তাৰ লগতে মই ঔষধটো পুনৰ চিকিৎসকৰ পৰামৰ্শৰ সৈতে আৰম্ভ কৰিছিলো। মহাশয়, ঔষধৰ লগতে মই কেৱল যোগ, আয়ুৰ্বেদিক কৰাই নহয় বৰঞ্চ মই কাঢ়া গ্ৰহণ কৰাও আৰম্ভ কৰিছিলো ৷ ৰোগ প্ৰতিৰোধ ক্ষমতা বৃদ্ধিৰ বাবে, মই দিনটোত যেতিয়াই মোৰ খাদ্য খাও, তেতিয়াই মই যি প্ৰ'টিন সমৃদ্ধ আহাৰ, স্বাস্থ্যকৰ খাদ্য গ্ৰহণ কৰিছিলো। মই অত্যাধিক জুলীয়া খাদ্য খাইছিলো, ষ্টীম লৈছিলো, গাৰ্গল কৰিছিলো আৰু গৰম পানীৰ সেক লৈছিলো। মই মোৰ দৈনিক জীৱনৰ এই সকলোবোৰ বস্তুৱেই গ্ৰহণ কৰিছো। আৰু মহোদয়, মই আটাইতকৈ ডাঙৰ কথাটো ক'ব বিচাৰো যে এই কেইটা দিনত আতংকিত হোৱাৰ কোনো প্ৰয়োজন নাই। মই মানসিকভাৱে শক্তিশালী হ'ব লাগিব যাৰ বাবে মোক যোগাভ্যাসে, উশাহ-নিশাহৰ ব্যায়ামে যথেষ্ট সহায় কৰিছিল ৷

মোদী জী- হয়৷ আচ্ছা, প্ৰীতি, এতিয়া আপোনাৰ সকলো কাৰ্য সম্পন্ন হ’ল৷ আপুনি সংকটমুক্ত হ’ল৷

প্ৰীতি জী- হয়৷

মোদী জী- এতিয়া আপোনাৰ পৰীক্ষাৰ ফলাফলো নিগেটিভ আহিছে৷

প্ৰীতি জী- হয়৷

মোদী জী- তেন্তে এতিয়া আপোনাৰ স্বাস্থ্যৰ বাবে কি কৰে?

প্ৰীতি জী- মহোদয়, প্ৰথম কথাটো হ’ল মই যোগাভ্যাস বন্ধ কৰা নাই ৷

মোদী জী- হয়

প্ৰীতি জী- ৰোগ প্ৰতিৰোধক ক্ষমতা বৃদ্ধিৰ বাবে মই কাঢ়াও খাই আছো আৰু স্বাস্থ্যকৰ খাদ্যও গ্ৰহণ কৰি আছো৷

মোদী জী- হয়

প্ৰীতি জী- নিজকে পূৰ্বে মই বহু আওকাণ কৰিছিলো, এতিয়া ধ্যান দিবলৈ আৰম্ভ কৰিছো ৷

মোদী জী- ধন্যবাদ প্ৰীতি জী৷

প্ৰীতি জী- অশেষ ধন্যবাদ মহোদয় ৷

মোদী জী- আপুনি যি তথ্য প্ৰদান কৰিলে, মই ভাবো বহু লোক উপকৃত হ’ব ইয়াৰ জৰিয়তে৷ আপুনি সুস্বাস্থ্যবান হৈ থাকক, আপোনাৰ পৰিয়ালৰ লোক স্বাস্থ্যৱান হৈ থাকক, আপোনালৈ মোৰ তৰফৰ পৰা অশেষ শুভকামনা থাকিল ৷

মোৰ মৰমৰ দেশবাসীসকল, যিদৰে আজি আমাৰ চিকিৎসা ক্ষেত্ৰৰ লোকসকলে, ফ্ৰণ্টলাইন কৰ্মীসকলে অহৰ্নিশে সেৱাত জড়িত হৈ আছে ৷ একেদৰে সমাজৰ আন লোকসকল এই মুহূৰ্তত এনেয়ে থকা নাই। দেশবাসী পুনৰ একত্ৰিত হৈছে আৰু ক’ৰোনাৰ বিৰুদ্ধে যুঁজ দিছে। আজিকালি মই দেখিবলৈ পাইছো যে কোনোবাই কোৱেৰাণ্টাইনত বাস কৰা পৰিয়ালক পাচলি, গাখীৰ, ফল, ঔষধ আদি প্ৰদান কৰি আছে। কোনোবাই ৰোগীসকললৈ বিনামূলীয়া এম্বুলেন্স সেৱা আগবঢ়াইছে। আনকি দেশৰ বিভিন্ন প্ৰান্তত এই প্ৰত্যাহ্বানপূৰ্ণ সময়তো, স্বয়ং-সহায়ক সংগঠনবোৰ আগবাঢ়ি আহিছে আৰু আনক সহায় কৰিবলৈ যি পাৰি সেয়া কৰিবলৈ চেষ্টা কৰি আছে। এইবাৰ, গাওঁবোৰত নতুন সজাগতাও দেখা গৈছে। ক’ভিড নিয়মবোৰ কঠোৰভাৱে অনুসৰণ কৰি, মানুহে তেওঁলোকৰ গাওঁখনক ক’ৰোনাৰ পৰা সুৰক্ষিত কৰি আছে, বাহিৰৰ পৰা অহা লোকসকলৰ বাবেও সঠিক ব্যৱস্থা কৰা হৈছে। স্থানীয় বাসিন্দাসকলৰ সৈতে কাম কৰি থকা চহৰসমূহতো বহু যুৱক-যুৱতীয়ে তেওঁলোকৰ এলেকাত ক’ৰোনাৰ ঘটনা বৃদ্ধি নোহোৱাটো নিশ্চিত কৰিবলৈ আগবাঢ়ি আহিছে, অৰ্থাৎ এফালে দেশখনে চিকিৎসালয়, ভেণ্টিলেটৰ আৰু ঔষধৰ বাবে দিন-ৰাতিয়ে কাম কৰি আছে, আনফালে দেশবাসীয়েও ক’ৰোনাৰ মোকাবিলা কৰি আছে। এই অনুভৱে আমাক ইমান শক্তি প্ৰদান কৰে, ই আমাক ইমান বিশ্বাস দিয়ে। যিকোনো প্ৰচেষ্টাই হওক, ই সমাজৰ বাবে এক মহান সেৱা। ইয়েই সমাজৰ শক্তি বৃদ্ধি কৰে।

মোৰ মৰমৰ দেশবাসীসকল, আজি আমি ক’ৰোনা মহামাৰীৰ ওপৰত 'মন কী বাত'ৰ সমগ্ৰ আলোচনা কৰিছো, কিয়নো আজি আমাৰ আটাইতকৈ ডাঙৰ অগ্ৰাধিকাৰ হৈছে এই ৰোগক পৰাস্ত কৰা। আজি ভগৱান মহাবীৰৰ জয়ন্তীও। মই এই উপলক্ষে সকলো দেশবাসীক শুভকামনা জনাইছো। ভগৱান মহাবীৰৰ বাৰ্তাই আমাক তপস্যা আৰু আত্মসংযমৰ অনুপ্ৰেৰণা যোগায়। পবিত্ৰ ৰমজান মাহো চলি আছে। তাৰ পিছত আছে বুদ্ধ পূৰ্ণিমা। গুৰু টেগ বাহাদুৰজীৰ ৪০০তম প্ৰকাশ পৰ্বও আছে। এটা গুৰুত্বপূৰ্ণ দিন হৈছে পোচিচে বৈশাক-ঠাকুৰৰ জন্ম জয়ন্তী। তেওঁলোক সকলোৱে আমাক আমাৰ কৰ্তব্য পালন কৰিবলৈ অনুপ্ৰাণিত কৰে। নাগৰিক হিচাপে, আমি আমাৰ জীৱনত যিমান পাৰি সিমান দক্ষতাৰে আমাৰ কৰ্তব্য পালন কৰিম। আমি সংকটৰ পৰা মুক্ত হৈ ভৱিষ্যতৰ পথত যিমান পাৰি দ্ৰুত গতিত আগবাঢ়িম। এই ইচ্ছাৰ সৈতে, মই আপোনালোক সকলোকে আকৌ এবাৰ প্ৰতিষেধক গ্ৰহণ কৰাৰ বাবে অনুৰোধ জনাইছো আৰু সাৱধানো হ’ব লাগিব। 'ঔষধো – কঠোৰ নিয়মানুৱৰ্তিতাও'। এই মন্ত্ৰটো কেতিয়াও নাপাহৰিব। আমি শীঘ্ৰেই এই দুৰ্যোগৰ পৰা ওলাই আহিবলৈ সক্ষম হ'ম। এই বিশ্বাসেৰে আপোনালোকলৈ অশেষ ধন্যবাদ। নমস্কাৰ।