भारत और जापान के बीच जो गहरे संबंध हैं, उन संबंधों का यश सिर्फ दो देशों की सरकारों को नहीं जाता है। उन संबंधों का यश आप जैसे सामाजिक जीवन के सभी वरिष्‍ठ लोगों ने जिस भावना के साथ एक छोटे से पौधे को अपनी बुद्धिमता-क्षमता के अनुसार एक विशाल वटवृक्ष बनाया है, इसके लिए आपको और आपके पूर्व के पीढि़यों को इसका यश जाता है। उनका हक बनता है और मैं इसलिए अब तक जिन-जिन लोगों ने भारत और जापान के संबंधों को सुदृढ़ किया है, उन सबका मैं हृदय से आभार व्‍यक्‍त करता हूं।

मुझे बताया गया है कि भारत-जापान एसोसिएशन को 110 साल हो गए हैं। मैं सोच रहा था कि आज के युग में एक फैमिली भी 100 साल तक इकट्ठे नहीं रहती है। अगर एक परिवार 100 साल तक इकट्ठा नहीं रह सकता है तो ये लीडरशिप की कितनी मैच्‍योरिटी होगी, दोनों देशों के नीति निर्धारकों की कितनी मैच्‍योरिटी होगी, जिसके कारण 110 साल तक ये संबंध और गहरा होता गया। ये अपने आप में, एक बहुत बड़ी प्रेरणा दायक घटना है।

मुझे यह भी बताया गया कि जापान की किसी भी देश के साथ इतनी पुरानी एक भी एसोसिएशन नहीं है, जितनी कि जापान और भारत की है। हमारे पूर्वजों ने ये जो महान नींव रखी है, मैं नहीं मानता हूं कि ये महान काम किसी तत्‍कालीन लाभ के लिए किया गया है। ये नींव पूरे मानव जाति के कल्‍याण को ध्‍यान में रखते हुए ये नींव रखी गई है जिसे दोनों देशों के महानुभावों ने और ताकतवर बनाया है।

अब हम इस पीढ़ी की और आने वाले पीढि़यों की जिम्‍मेदारी है, कि जो 110 साल की ये यात्रा है, एक तपस्‍या है, उसको हम अधिक प्राणवान कैसे बनायें, अधिक जीवंत कैसे बनायें और आने वाली पीढि़यों तक उसके संस्‍कार संक्रमण के लिए हम मिलकर के क्‍या कर सकते हैं, ये हम सबका दायित्‍व है।

कल जैसे प्रधानमंत्री आबे और मेरे बीच जो वार्ता हुई, हमारा एक जो तोक्यो डिक्‍लरेशन था, उसमें एक महत्‍वपूर्ण निर्णय हुआ है कि अब तक हम ‘स्‍ट्रे‍टेजिक ग्‍लोबल पार्टनर्स’ के रूप में काम करते थे, अब हमारा उसका स्‍टेटस ऊपर करके ‘स्‍पेशल स्‍ट्रेटेजिक ग्‍लोबल पार्टनर्स’ के रूप में आगे बढ़े हैं। ये हो सका है, इसके दो कारण हैं। एक, ये 110 साल पुरानी निरंतर हमारी ये एसोसिएशन, ये निरंतर संपर्क की व्‍यवस्‍था, इंडियन और जापानीज पार्लियामेंट्री एसोसिएशन की सक्रियता और दूसरा जो सबसे बड़ा कारण है, वह आज भले हम स्‍पेशल स्‍ट्रेटेजिक ग्‍लोबल पार्टनर्स के रूप में कागज पर हमने शायद लिखा हो, लेकिन जो चीज हमने कागज पे नहीं, हमारे दिलों में लिखी गई है, वह है जापान भारत की ‘स्पिरिचुअल पार्टनरशिप’।

मैं देख रहा हूं कि जापान में धीरे-धीरे हिंदी भाषा सीखने का जो उत्‍साह है, उमंग है, वह बढ़ता ही चला जा रहा है। उसी प्रकार से योग के संबंध में मैं देख रहा हूं कि जापान की रूचि और बढ़ रही है। यानी एक-एक बारीक चीज का संबंध हमारा जुड़ रहा है।

जापान का भारत पर कितना बड़ा हक है, मैं एक उदाहरण बताना चाहता हूं। अभी कुछ दिन पहले मुझे आपकी एक चिट्ठी मिली थी और चिट्ठी में आपने मुझे लिखा था कि मोदी जी आप आएंगे तो हिंदी में बोलिये। आप ही ने लिखी थी ना। जरा सा हमारे भारत के लोगों को आपका चेहरा बताइए। और इतनी बढि़या हिंदी में चिट्ठी लिखी है। प्‍लीज, ये हमारे लोग देखना चाहेंगे, आपको। इतनी, इतनी बढि़या हिंदी में चिट्ठी लिखी है उन्‍होंने मुझे और उन्‍होंने मुझे आग्रह किया है कि मोदी जी, मैं आपसे आग्रह करूंगा कि आप जापान के किसी भी कार्यक्रम में जाएं, कृपा करके हिंदी में बोलिये।

देखिए, एक-एक सामान्‍य व्‍यक्ति का ये जो लगाव है, ये जो अपनापन है, ये अपने आप में हैरान करने वाला हे। जब मैं यहां सुभाष चंद्र बोस की बात करूं तो मुझे यहां इतने लोग मिलेंगे, बड़े गौरव के साथ उन स्‍मृतियों को बताएंगे। मुझे ये भी बताया गया है कि आपके इन सदस्‍यों में एक सबसे वयोवृद्ध हैं। शायद उनकी उमर 95 इयर है। वे आज भी सुभाष बाबू की सारी घटनाओं का इतना वर्णन करते हैं, इतनी डिटेल बताते हैं। सुभाष बाबू उनसे शेक हैंड नहीं करते थे, गले लगते थे। वे सारी बातों को बताते हैं। वो यहां बैठे हैं खास इस काम के लिए आए हैं। खड़े हो पाएंगे, मैं उनको प्रणाम करता हूं। वो सुभाष बाबू के एक बहुत बड़े निकट के साथी रहे हैं।मैं उनको प्रणाम करता हूं।

आपको सुभाष बाबू की कौन सी साल, कौन सी डेट, सारी घटनाएं अभी भी याद हैं। मैंने हमारे एम्‍बेसेडर को कहा है कि हाइली प्रोफेशनल वीडियो टीम उनके साथ एक महीने के लिए लगा दिया जाए और उसका वीडियो रिकॉर्डिंग होना चाहिए। महीने भर कोई उसके साथ रहें, उनका इंटरव्‍यू लेते रहे और हर पुरानी बातों को रिकार्ड करे। क्‍योंकि यह एक जीते-जागते इतिहास की हमारे पास तवारीख हैं। तो ऐसी बहुत सी चीजें हमारे साथ जुड़ी हुई हैं।

मैं जब पहली बार जापान आया था तो मैं मोरी जी के घर गया था। बड़े प्‍यार से उन्‍होंने मुझे अपने घर पर बुलाया था, तो कड़ी की बात निकली। जापान में कड़ी बहुत फेमस है। तो मुझे बताया गया, बंगाल से जो परिवार आए थे, उन्‍होंने सबसे पहले कड़ी की शुरूआत की थी। वो आज एक प्रकार से जापान की फेवरेट डिश बन गई है। यानी कितनी निकटता कितनी बारीकी है। और मैं मानता हूं कि इसको हमें और महात्‍म्‍य देना चाहिए। और आगे बढ़ना चाहिए।

पार्लियामेंट्री ऐसोसिएशन का भी बहुत बड़ा योगदान है। इन संबंधों के कारण दोनों देशों की नीतियों में हमेशा उस बात पर ध्‍यान रखा गया है कि हमारे संबंधों को कोई खरोंच न आ जाए। कोई भी उस पर नुकसान न हो जाए।

पार्लियामेंट्री एसोसिएशन के लिए मेरे मन में कुछ विचार आए हैं। मैं चाहूंगा कि इसको आगे चलकर के हम इसको कुछ एक्‍सपैंड कर सकते हैं क्‍या ? एक तो मैं भारत के लिए इस पार्लियामेंट्री एसोसिएशन के लिए निमन्‍त्रण देता हूं। आप आइए और दिल्‍ली के सिवाए भी मैं चाहूंगा कि कुछ और लोकेशन पर भी जाइए और भारत को खुशी होगी, आप सबकी मेहमान नवाजी करने की। दो-तीन और चीजें अगर हम कर सकते हैं तो सोचें। एक पार्लियामेंट्री एसोसिएशन बहुत अच्‍छा चल रहा है। भारत से भी लोग यहीं आते हैं। यहां के भी पार्लियामेंट मेम्‍बर्स आते हैं और एक अंडरस्‍टेंडिंग ईच अदर, ये अपने आप में बहुत अच्‍छी प्रोग्रेस हो रही है। लेकिन समय रहते उसमें मुझे थोड़े बदलाव की मुझे जरूरत लगती है।

इसी पार्लियामेंटरी एसोसिएशन के साथ एक छोटा सा यंग पार्लियामेंटरी ऐसोसिएशन बना सकते हैं क्‍या ? जो दोनों देशों के यंगेस्‍ट पार्लियामेंटेरियंस हैं, उनका जरा मिलना-जुलना हो, वो अपनी नई पीढ़ी की सोच की चर्चा करें। उस दिशा में कुछ कर सकते हैं क्‍या ?

दूसरा, एक मेरे मन में विचार आता है, क्‍या दोनों देशों की वीमेन पार्लियामेंट मेम्‍बर्स का एसोसिएशन बन सकता है क्‍या। जिसमें महिला पार्लियामेंट मेम्‍बर्स के बारी-बारी से मिलने की संभावना बन सकती है क्‍या ?सभी महिलाओं ने सबसे पहले तालियां बजाई हैं।

तीसरा एक जो मुझे लगता है कि भारत इतना विशाल देश है। इतने राज्‍य हैं, हर राज्‍य की अपनी असेम्‍बली है, और असेम्‍बली के भी मेम्‍बर्स है। क्‍या कभी न कभी हम उन राज्‍यों से और एक ही राज्‍य से सभी एमएलए नहीं, लेकिन 5-6 राज्‍यों के दो-दो करके एमएलए यहां आए और यहां से भी उसी प्रकार से लोकल बॉडीज के लोग आयें । ये अगर हमारा बनता है तो इतना बड़ा विशाल देश है, भिन्‍न–भिन्‍न कोने में जाने का हो जाए। और हम यह तय कर सकते हैं कि जापान का कोई न कोई डेलीगेशन, हिंदुस्‍तान में 25 से भी ज्‍यादा राज्‍य हैं, हर महीने अगर दो डेलीगेशन आते हैं, और एक राज्‍य में एक डेलीगेशन जाता है और लोग आते चलें – आते चलें। अब देखिए, देखते ही देखते जापान में हिंदुस्‍तान की एक्‍सपर्टाइज वाले 1000 लोग तैयार हो जाएंगे।

आपने मुझे यहां बुलाया, मेरा सम्‍मान किया। मैं आपका बहुत-बहुत आभारी हूं। लेकिन मैं अनुभव करता हूं, मैं कारण नहीं जानता हूं। लेकिन, मैं जब भी जापान आया हूं और जब भी जापान के लोगों से मिलता हूं मुझे एक अलग सा अपनापन महसूस होता है। वो ये अपनापन क्‍या है, मैं नहीं जानता, शास्‍त्र कौन से होंगे। देखिए मुझे बहुत अपनापन लगता है और मुझे इतना प्‍यार मिलता है जापान से।

आपके एम्‍बेसडर मेरे यहां थे, वो मेरे यहां 3 साल रहे और मैंने देखा कि हम इतने मित्र की तरह साथ काम करते थे, इतनी हमारी दोस्‍ती बन गई थी। और इतने कामों को हम बढ़ा रहे थे और इसलिए मैं मानता हूं कि आपने जो अपनापन मुझे दिया है, वो प्रधानमंत्री पद से भी बहुत बड़ी चीज है। बहुत बड़ी चीज है, जो आपने मुझे दिया है। मैं इसको कभी भूल नहीं सकता हूं।

मैं आपका बहुत-बहुत आभारी हूं, और मेरी आप सबको बहुत-बहुत शुभकामनाएं।

धन्‍यवाद।

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ମାନ୍ୟବର, ସମ୍ମାନନୀୟା ଅଜାରେଲ ଅର୍ନେଷ୍ଟା, ନ୍ୟାସନାଲ ଆସେମ୍‍ବ୍ଲିର ବାଚସ୍ପତି, ମାନନୀୟା ସିଲଭାନ ଲେମିୟେଲ, ସରକାରୀ ଦଳର ନେତା, ମାନନୀୟ ବୈନୋ ଜର୍ଜ, ବିରୋଧୀ ଦଳର ନେତା, ଉପସ୍ଥିତ ମାନନୀୟ ସଦସ୍ୟବୃନ୍ଦ, ଏବଂ ମୋର ପ୍ରିୟ ଭଉଣୀ ଓ ଭାଇମାନେ, ନମସ୍କାର! 

ବୋନ୍ ଆପ୍ରେମିଡି!  

ଏହି ଜାତୀୟ ସଭାକୁ ସମ୍ବୋଧନ କରିବାରେ ପ୍ରଥମ ଭାରତୀୟ ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀ ଭାବେ ଆପଣମାନଙ୍କ ସମ୍ମୁଖରେ ଉପସ୍ଥିତ ହେବା ମୋ ପାଇଁ ଏକ ସ୍ୱତନ୍ତ୍ର ସମ୍ମାନର ବିଷୟ। ମାନ୍ୟବର ବାଚସ୍ପତି, ଆପଣଙ୍କର ଗଭୀର ଶ୍ରଦ୍ଧା ଓ ଆନ୍ତରିକତା ପାଇଁ ମୁଁ ଆପଣଙ୍କୁ ଧନ୍ୟବାଦ ଜଣାଉଛି।

ଆଜି ସକାଳେ ମୋତେ ‘ଗାର୍ଡିଆନ୍ ଅଫ୍ ଦି ବ୍ଲୁ ହରାଇଜନ୍’ ସମ୍ମାନରେ ସମ୍ମାନିତ କରିଥିବାରୁ ମୁଁ ରାଷ୍ଟ୍ରପତି ଏର୍ମିନି ଏବଂ ସେଶେଲ୍ସର ଜନସାଧାରଣଙ୍କୁ ମଧ୍ୟ ଧନ୍ୟବାଦ ଜଣାଉଛି। ପରିବେଶ ସଂରକ୍ଷଣ ପାଇଁ ନିରନ୍ତର ପ୍ରୟାସ କରୁଥିବା ସମସ୍ତ ବ୍ୟକ୍ତିବିଶେଷଙ୍କୁ ଏହା ଉତ୍ସାହିତ କରିବ। ମୁଁ ମୋ ସହିତ ଭାରତର ୧୪୦ କୋଟି ଜନସାଧାରଣଙ୍କ ଆନ୍ତରିକ ଶୁଭେଚ୍ଛା ଓ ଅଭିନନ୍ଦନ ନେଇ ଆସିଛି। 

୨୦୧୫ ମସିହାରେ ଭାରତ ମହାସାଗରୀୟ ଅଞ୍ଚଳରେ ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀ ଭାବେ ମୁଁ ଗସ୍ତ କରିଥିବା ପ୍ରଥମ ଦେଶ ହେଉଛି ସେଶେଲ୍ସ। ସେତେବେଳେ ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀ ଭାବେ ଆଫ୍ରିକାକୁ ମଧ୍ୟ ଏହା ମୋର ପ୍ରଥମ ଗସ୍ତ ଥିଲା। ମୁଁ ଏଠାକୁ ଆସିଥିଲି କାରଣ ମୋର ବିଶ୍ୱାସ ଯେ ଭାରତ ମହାସାଗର ପାଇଁ ଭାରତର ପରିକଳ୍ପନାରେ ସେଶେଲ୍ସ ଏକ ସ୍ୱତନ୍ତ୍ର ସ୍ଥାନ ଅଧିକାର କରେ। ଆଜି ଏକ ଦଶନ୍ଧି ପରେ ଯେତେବେଳେ ମୁଁ ଏଠାକୁ ପୁଣିଥରେ ଆସିଛି, ସେହି ବିଶ୍ୱାସ ଆହୁରି ଦୃଢ଼ ହୋଇଛି। 

ଆପଣମାନେ ସ୍ୱାଧୀନତାର ପଚାଶ ବର୍ଷ ପୂର୍ତ୍ତି ପାଳନ କରୁଥିବାବେଳେ ଆପଣମାନଙ୍କ ସହ ସାମିଲ ହୋଇ ମୁଁ ଅତ୍ୟନ୍ତ ଆନନ୍ଦିତ। ଏହି ସ୍ୱତନ୍ତ୍ର ଅବସରରେ ଆପଣଙ୍କୁ ଏବଂ ସେଶେଲ୍ସର ଜନସାଧାରଣଙ୍କୁ ଅନେକ ଅନେକ ଅଭିନନ୍ଦନ।

ସମ୍ମାନନୀୟ ସଦସ୍ୟବୃନ୍ଦ,

ଏହି ଜାତୀୟ ସଭାକୁ ସମ୍ବୋଧିତ କରିବା ଏକ ବିରଳ ସୌଭାଗ୍ୟ। ଏହି ସ୍ୱତନ୍ତ୍ର ସମ୍ମାନ ପାଇଁ ଧନ୍ୟବାଦ। ଏହି ଅଷ୍ଟମ ଜାତୀୟ ସଭାର ନବନିର୍ବାଚିତ ସଦସ୍ୟମାନଙ୍କୁ ମୋର ଶୁଭେଚ୍ଛା ଓ ଅଭିନନ୍ଦନ । ଏହି ଗରିମାମୟ ଗୃହର ପ୍ରଥମ ମହିଳା ବାଚସ୍ପତି ହୋଇଥିବାରୁ ମାନ୍ୟବର ବାଚସ୍ପତି, ମୁଁ ଆପଣଙ୍କୁ ମଧ୍ୟ ମୋର ଅଭିନନ୍ଦନ ଜଣାଉଛି।

 

ସମ୍ମାନନୀୟ ସଦସ୍ୟବୃନ୍ଦ,

ଆଜି ଏହା ମନେ ପକାଇବା ଗୁରୁତ୍ୱପୂର୍ଣ୍ଣ ଯେ ଆମର ବନ୍ଧୁତା ପଚାଶ ବର୍ଷ ପୂର୍ବେ ଆମର କୂଟନୈତିକ ସମ୍ପର୍କ ପ୍ରତିଷ୍ଠା ସହିତ ଆରମ୍ଭ ହୋଇନଥିଲା। ବରଂ, ଏହାର ବହୁ ପୂର୍ବରୁ ଆରମ୍ଭ ହୋଇଥିଲା। ଅଗଷ୍ଟ ୧୭୭୦ରେ, ସେଣ୍ଟ ଆନ୍ ଦ୍ୱୀପରେ ‘ଦି ଥେଲେମାକ’ ଜାହାଜରେ ଏଠାରେ ପହଞ୍ଚିଥିବା ଲୋକଙ୍କ ମଧ୍ୟରେ ପାଞ୍ଚ ଜଣ ଭାରତୀୟ ଥିଲେ। ସେହି ଯାତ୍ରା ପରବର୍ତ୍ତୀ ସମୟରେ ଅନେକ ଲୋକଙ୍କୁ ଏଠାକୁ ଆସିବା ଲାଗି ବାଟ ଦେଖାଇଥିଲା। ସମୟକ୍ରମେ, ସେମାନଙ୍କର କାହାଣୀ ଆଧୁନିକ ସେଶେଲ୍ସର କାହାଣୀର ଏକ ଅଂଶ ପାଲଟିଗଲା।

ଏହା ଆମକୁ ମନେ ପକାଇଦିଏ ଯେ ଆମ ମଧ୍ୟରେ ଥିବା ସମ୍ପର୍କ ସରକାରଙ୍କ ଦ୍ୱାରା ସୃଷ୍ଟି ହୋଇନାହିଁ। ଏହା ଲୋକମାନଙ୍କ ଦ୍ୱାରା ଗଢ଼ାଯାଇଛି, ପରିବାର ଦ୍ୱାରା ବଢ଼ିଛି ଏବଂ ପିଢ଼ି ପରେ ପିଢ଼ି ଧରି ବଜାୟ ରହିଛି। ଭାରତ ମହାସାଗର ଏହାକୁ ସମ୍ଭବ କରିଛି। ଭାରତ ମହାସାଗର ଭାରତ ଏବଂ ସେଶେଲ୍ସକୁ ପୃଥକ କରେ ନାହିଁ; ଏହା ଆମକୁ ଯୋଡ଼ିଥାଏ। ସେଥିପାଇଁ ଆମେ ଅପରିଚିତ ଭାବରେ ନୁହେଁ, ବରଂ ପୁରୁଣା ବନ୍ଧୁ ଭାବରେ ପରସ୍ପରକୁ ଭେଟୁଛୁ।

ସମ୍ମାନନୀୟ ସଦସ୍ୟବୃନ୍ଦ,

ସେଶେଲ୍ସର ସବୁଠାରୁ ବଡ଼ ଶକ୍ତି ହେଉଛି ଏହାର ଜନସାଧାରଣ। ପିଢ଼ି ପରେ ପିଢ଼ି ଧରି ବିଶ୍ୱର ସବୁ ପ୍ରାନ୍ତରୁ ଲୋକ ଏଠାକୁ ଆସିଛନ୍ତି। ଏହି ସମୟରେ ସେମାନେ ନିଜ ସହିତ ବିଭିନ୍ନ ଭାଷା, ରୀତିନୀତି, ବିଶ୍ୱାସ ଏବଂ ପରମ୍ପରା ନେଇ ଆସିଥିଲେ ଏବଂ ଏକତ୍ରିତ ହୋଇ, ସେମାନେ ଏକ ମିଳିତ ପରିଚୟ ସୃଷ୍ଟି କରିଛନ୍ତି ଯାହା ଗର୍ବର ସହ ସେଶେଲୋଇସ୍ ଭାବେ ପରିଚିତ ହେଉଛି।

ଏହି ଜାତୀୟ ସଭାର ମହତ୍‍ ଉଦ୍ଦେଶ୍ୟ ହେଉଛି - ବିବିଧତା ମଧ୍ୟରେ ଏକତା। ଏହା କ୍ରିଓଲ୍ ସଙ୍ଗୀତର ସ୍ୱରରେ ଶୁଣିବାକୁ ମିଳେ। ଏହା ମୌତିଆ ନୃତ୍ୟର ତାଳରେ ଦେଖିବାକୁ ମିଳେ। ଏହା ଫେଷ୍ଟିଭାଲ୍ କ୍ରିଓଲ୍ ସମୟରେ ଅନୁଭବ କରାଯାଇପାରେ।

ଯେତେବେଳେ ଏହି ଦେଶ ନିଜର ସମୃଦ୍ଧ ଐତିହ୍ୟ ପାଳନ କରୁଛି, ସେତେବେଳେ ଆମ ସଂସ୍କୃତି ମଧ୍ୟରେ ଥିବା ସମ୍ପର୍କ ଦୈନନ୍ଦିନ ଜୀବନରେ ମଧ୍ୟ ଦୃଶ୍ୟମାନ ହେଉଛି। ଏହା କାରି କୋକୋ , ସାମୋସା ଏବଂ ଚଟଣିର ସ୍ୱାଦରେ ଅନୁଭବ କରାଯାଇପାରେ। ଏହା ଦୀପାବଳି, ଥାଇ ପୋଙ୍ଗଲ ଏବଂ ନବରାତ୍ରି ସମୟରେ ଗରବା ନୃତ୍ୟର ଉତ୍ସବରେ ଦେଖିବାକୁ ମିଳେ। ଏହା ହେଉଛି ସେହି କ୍ରିଓଲ୍ ଭାବନା, ଯାହା ଆମକୁ ଆମର ବନ୍ଧୁତାର ଭବିଷ୍ୟତ ପ୍ରତି ଅଶେଷ ଆତ୍ମବିଶ୍ୱାସ ପ୍ରଦାନ କରେ।

ସମ୍ମାନନୀୟ ସଦସ୍ୟବୃନ୍ଦ,

ସାମୁଦ୍ରିକ ପଡ଼ୋଶୀ ଭାବରେ, ଆମେ ସ୍ୱୀକାର କରୁ ଯେ ଜଣଙ୍କର ନିରାପତ୍ତା ଅନ୍ୟ ଜଣଙ୍କର ସୁରକ୍ଷାକୁ ବଢ଼ାଇଥାଏ। ଜଣଙ୍କର ସମୃଦ୍ଧି ଅନ୍ୟ ଜଣଙ୍କର ସମୃଦ୍ଧିରେ ଯୋଗଦାନ ଦେଇଥାଏ। ଏବଂ ଏହି ଅଞ୍ଚଳର ସ୍ଥିରତା ଆମ ସମସ୍ତଙ୍କୁ ଲାଭାନ୍ୱିତ କରିଥାଏ।

ଏହି ବର୍ଷ ଆମର ଶକ୍ତିଶାଳୀ ଭାଗିଦାରୀର ଗଭୀରତାକୁ ସ୍ମରଣୀୟ କରିବା ଲାଗି ସୁଯୋଗ ପ୍ରଦାନ କରୁଛି। ପଚାଶ ବର୍ଷ ପୂର୍ବେ, ଆପଣଙ୍କ ସ୍ୱାଧୀନତାର ପ୍ରାରମ୍ଭରେ, ବନ୍ଧୁତା ଏବଂ ଏକତାର ପ୍ରତୀକ ସ୍ୱରୂପ ଭାରତୀୟ ନୌସେନା ଜାହାଜ ‘ଆଇଏନ୍ଏସ୍ ନୀଳଗିରି’ ପୋର୍ଟ ଭିକ୍ଟୋରିଆରେ ଉପସ୍ଥିତ ଥିଲା। ଏବଂ ଆଜି, ଆପଣମାନଙ୍କ ସହ ସୁବର୍ଣ୍ଣ ଜୟନ୍ତୀ ପାଳନ କରିବା ପାଇଁ ‘ଆଇଏନ୍ଏସ୍ ତରକଶ୍’ ଏବଂ ‘ଆଇଏନ୍ଏସ୍ ଇକ୍ଷକ’ ପୋର୍ଟ ଭିକ୍ଟୋରିଆରେ ଲଙ୍ଗର ପକାଇଛନ୍ତି।

 

ପଚାଶ ବର୍ଷର ସମୟ ଅନେକ ଜିନିଷ ବଦଳାଇ ଦେଇଛି। କିନ୍ତୁ ପରସ୍ପର ପ୍ରତି ଥିବା ଆମର ପ୍ରତିବଦ୍ଧତାକୁ ନୁହେଁ। ଦଶନ୍ଧି ଦଶନ୍ଧି ଧରି ଆମର ପ୍ରତିରକ୍ଷା ବାହିନୀ, ତଟରକ୍ଷୀ ବାହିନୀ ଏବଂ ସାମୁଦ୍ରିକ ସଂସ୍ଥାଗୁଡ଼ିକ ମିଳିତ ଭାବେ ପ୍ରଶିକ୍ଷଣ ଗ୍ରହଣ କରିଛନ୍ତି ଏବଂ ନିବିଡ଼ ଭାବେ କାର୍ଯ୍ୟ କରିଛନ୍ତି। ଭାରତ, ସେଶେଲ୍ସ ପ୍ରତିରକ୍ଷା ବାହିନୀ ଏବଂ ସେଶେଲ୍ସ କୋଷ୍ଟଗାର୍ଡର ପେସାଦାର ଦକ୍ଷତା ଓ ନିଷ୍ଠାକୁ ଗଭୀର ଭାବେ ସମ୍ମାନ କରେ। ଆପଣଙ୍କର ନିଜସ୍ୱ ବିଶାଳ ସାମୁଦ୍ରିକ କ୍ଷେତ୍ର ସହିତ ବ୍ୟାପକ ଭାରତ ମହାସାଗର ଅଞ୍ଚଳକୁ ସୁରକ୍ଷିତ ରଖିବାରେ ସେମାନେ ଏକ ପ୍ରମୁଖ ଭୂମିକା ଗ୍ରହଣ କରନ୍ତି। ସାମୁଦ୍ରିକ ସୁରକ୍ଷା, କ୍ଷମତା ବୃଦ୍ଧି, ହାଇଡ୍ରୋଗ୍ରାଫି ଏବଂ ସାମୁଦ୍ରିକ କ୍ଷେତ୍ର ସଚେତନତା କ୍ଷେତ୍ରରେ ଆମର ସହଯୋଗ ଏକ ନିରାପଦ ଏବଂ ଅଧିକ ସୁରକ୍ଷିତ ଅଞ୍ଚଳ ପ୍ରତି ଆମର ମିଳିତ ପ୍ରତିବଦ୍ଧତାକୁ ପ୍ରତିଫଳିତ କରେ।

ଆଜି ସକାଳେ ମୁଁ ରାଷ୍ଟ୍ରପତି ଏର୍ମିନିଙ୍କୁ ଭେଟି ଆମର ଭାଗିଦାରୀ କ୍ଷେତ୍ରରେ ହାସଲ ହୋଇଥିବା ଉଲ୍ଲେଖନୀୟ ପ୍ରଗତିର ସମୀକ୍ଷା କରିଛି। ଆମେ ଭବିଷ୍ୟତ ପାଇଁ ଆମର ମିଳିତ ପରିକଳ୍ପନା ସମ୍ପର୍କରେ ମଧ୍ୟ ଆଲୋଚନା କରିଛୁ। ଆମର ଏହି ପରିକଳ୍ପନା ‘ମହାସାଗର’ ଅର୍ଥାତ୍ ଅଞ୍ଚଳଗୁଡ଼ିକ ମଧ୍ୟରେ ସୁରକ୍ଷା ଏବଂ ବିକାଶ ପାଇଁ ପାରସ୍ପରିକ ଏବଂ ସାମଗ୍ରିକ ପ୍ରଗତିର ଚିନ୍ତାଧାରା ମଧ୍ୟରେ ସନ୍ନିହିତ ରହିଛି।

ଏହି ପରିକଳ୍ପନା ସ୍ୱୀକାର କରେ ଯେ ଆମର ଭବିଷ୍ୟତ ପରସ୍ପର ସହ ଜଡ଼ିତ ଏବଂ ପରସ୍ପର ଉପରେ ନିର୍ଭରଶୀଳ। ଏବଂ, ଏକ ନିରାପଦ ଏବଂ ଅଧିକ ସୁରକ୍ଷିତ ଭାରତ ମହାସାଗର ଅଞ୍ଚଳ ପାଇଁ ଆମେ ଏକାଠି କାର୍ଯ୍ୟ କରିବା ଜାରି ରଖିବୁ।

ସମ୍ମାନନୀୟ ସଦସ୍ୟବୃନ୍ଦ,

ଲୋକମାନେ ଯେତେବେଳେ ମାନଚିତ୍ରକୁ ଦେଖନ୍ତି, ସେମାନେ ସେଚେଲ୍ସକୁ ଭାରତ ମହାସାଗରର ଏକ ଦ୍ୱୀପପୁଞ୍ଜ ଭାବରେ ଦେଖିପାରନ୍ତି। କିନ୍ତୁ ଆମେ ଏହାଠାରୁ ବହୁତ ବଡ଼ କିଛି ଦେଖୁ। ଆମେ ଏପରି ଏକ ଦେଶକୁ ଦେଖୁ, ଯାହାର ଦିଗ୍‌ବଳୟ ଏହାର ଉପକୂଳଠାରୁ ବହୁ ଦୂର ପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ ବିସ୍ତୃତ। ଆପଣଙ୍କର ସାମୁଦ୍ରିକ କ୍ଷେତ୍ର ପ୍ରାୟ ୧୪ ଲକ୍ଷ ବର୍ଗ କିଲୋମିଟର ପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ ବ୍ୟାପିଛି।

ଏହା ସେଚେଲ୍ସକୁ ଏକ କ୍ଷୁଦ୍ର ଦ୍ୱୀପ ରାଷ୍ଟ୍ର ନୁହେଁ — ବରଂ ଏକ "ବିଶାଳ ମହାସାଗରୀୟ ଦେଶ" ଭାବେ ଗଢ଼ିତୋଳିଛି। ବ୍ଲୁ ଇକୋନୋମି ବିଶ୍ୱସ୍ତରୀୟ ଆଲୋଚନାର ଅଂଶ ହେବାର ବହୁ ପୂର୍ବରୁ, ସେଚେଲ୍ସ ଏହି ଦିଗରେ ପଥ ପ୍ରଦର୍ଶନ କରୁଥିଲା। ସାମୁଦ୍ରିକ ସ୍ୱାସ୍ଥ୍ୟ ପ୍ରଣାଳୀର ସୁରକ୍ଷା ହେଉ କିମ୍ବା ବ୍ଲୁ ବଣ୍ଡ୍ ଭଳି ଅଭିନବ ଚିନ୍ତାଧାରାକୁ ଆଗକୁ ବଢ଼ାଇବା ହେଉ, ଆପଣଙ୍କ ଦେଶ ଗୁରୁତ୍ୱପୂର୍ଣ୍ଣ ବିଶ୍ୱସ୍ତରୀୟ ଆଲୋଚନାକୁ ରୂପ ଦେବାରେ ସାହାଯ୍ୟ କରିଛି। ଏକାଠି ମିଶି ଆମେ ମତ୍ସ୍ୟ ଚାଷ, ସାମୁଦ୍ରିକ ବିଜ୍ଞାନ, ଉପକୂଳ ପରିଚାଳନା, ଅକ୍ଷୟ ଶକ୍ତି ଏବଂ ସ୍ଥାୟୀ ପର୍ଯ୍ୟଟନ କ୍ଷେତ୍ରରେ ଅଂଶୀଦାରିତା ଗଠନ କରିପାରିବା।

ଗତକାଲି, ମୋତେ ପ୍ରତିଷ୍ଠିତ ‘କୋକୋ ଡି ମେର’ ଗଛର ଏକ ଚାରା ରୋପଣ କରିବାର ସୌଭାଗ୍ୟ ମିଳିଥିଲା। ସେଚେଲ୍ସ ଭଳି ଏହା ମଧ୍ୟ ଅନନ୍ୟ, ମୂଲ୍ୟବାନ ଏବଂ ବିଶ୍ୱରେ ଏକ ସ୍ୱତନ୍ତ୍ର ସ୍ଥାନ ଅଧିକାର କରିଛି। ଏହି ପ୍ରାକୃତିକ ବିସ୍ମୟକୁ ସୁରକ୍ଷିତ ଏବଂ ସଂରକ୍ଷିତ ରଖିବା ପାଇଁ ଆପଣମାନଙ୍କ ଦ୍ୱାରା କରାଯାଉଥିବା ପ୍ରୟାସ ଏକ ବଡ଼ ଦର୍ଶନକୁ ପ୍ରତିଫଳିତ କରେ ଯେ ମାନବଜାତି ପ୍ରକୃତି ସହିତ ସମନ୍ୱୟ ରକ୍ଷା କରି ବଞ୍ଚିବା ଉଚିତ।

ଏହି ଭାବନା ଭାରତରେ ମଧ୍ୟ ଗଭୀର ଭାବେ ଅନୁରଣିତ ହୁଏ। ଆସନ୍ତୁ ଏକାଠି ମିଶି କାର୍ଯ୍ୟ କରିବା ଯେପରି ଆମର ଭବିଷ୍ୟତ ପିଢ଼ି ଏପରି ମହାସାଗର ପାଇପାରିବେ, ଯାହା ଆଜି ଆମେ ଉପଭୋଗ କରୁଥିବା ମହାସାଗର ତୁଳନାରେ ଅଧିକ ସୁସ୍ଥ, ନିରାପଦ ଏବଂ ସମୃଦ୍ଧ ହୋଇଥିବ।

ସମ୍ମାନନୀୟ ସଦସ୍ୟବୃନ୍ଦ,

ଗ୍ଲୋବାଲ୍ ସାଉଥ୍, ଏବଂ ବିଶେଷ କରି ଦ୍ୱୀପ ରାଷ୍ଟ୍ରଗୁଡ଼ିକ ଜଳବାୟୁ ପରିବର୍ତ୍ତନ ଦ୍ୱାରା ସବୁଠାରୁ ଅଧିକ ପ୍ରଭାବିତ ହେଉଛନ୍ତି। ଏହାର ପ୍ରଭାବ ଆମର ଉପକୂଳବର୍ତ୍ତୀ ଅଞ୍ଚଳ, ସାମୁଦ୍ରିକ ପରିବେଶ, ପାଣିପାଗର ଢାଞ୍ଚା ଏବଂ ଆମର ସମୁଦାୟଗୁଡ଼ିକରେ ଏବେଠାରୁ ଦୃଶ୍ୟମାନ ହେଉଛି। ଆମେ ଦୁହେଁ ଦୃଢ଼ ଭାବରେ ବିଶ୍ୱାସ କରୁ ଯେ ଯେଉଁମାନେ ଜଳବାୟୁ ପରିବର୍ତ୍ତନରେ ସବୁଠାରୁ କମ୍ ଯୋଗଦାନ ଦେଇଛନ୍ତି, ସେମାନେ ଏହାର ପରିଣାମର ସବୁଠାରୁ ବଡ଼ ବୋଝ ବହନ କରିବା ଉଚିତ ନୁହେଁ।

 

ଜଳବାୟୁ କାର୍ଯ୍ୟାନୁଷ୍ଠାନ ସଦ୍ଭାବନା, ଦାୟିତ୍ୱବୋଧ ଏବଂ ସମାନତା ଦ୍ୱାରା ପରିଚାଳିତ ହେବା ଆବଶ୍ୟକ। ଏହା ହିଁ ଜଳବାୟୁ ନ୍ୟାୟର ପ୍ରକୃତ ସାରମର୍ମ।

ଭାରତ ନିଜେ ଉଦାହରଣ ସୃଷ୍ଟି କରି ଆଗକୁ ବଢ଼ିବାକୁ ଚେଷ୍ଟା କରିଛି। ଗତ ଏକ ଦଶନ୍ଧି ମଧ୍ୟରେ, ଆମେ ଅକ୍ଷୟ ଶକ୍ତିର ବିଶ୍ୱର ଅନ୍ୟତମ ବୃହତ୍ତମ ସମ୍ପ୍ରସାରଣ କରିଛୁ। ଆମେ ‘ମିଶନ ଲାଇଫ୍’-ଲାଇଫ୍ ଷ୍ଟାଇଲ୍ ଫର ଏନଭାରନମେଣ୍ଟ ମାଧ୍ୟମରେ ସ୍ଥାୟୀ ଜୀବନଶୈଳୀକୁ ପ୍ରୋତ୍ସାହିତ କରିଛୁ। ଆମର ଆନ୍ତର୍ଜାତିକ ସୌର ମେଣ୍ଟ, ବିପର୍ଯ୍ୟୟ ପ୍ରତିରୋଧୀ ଭିତ୍ତିଭୂମି ପାଇଁ, ଗ୍ଲୋବାଲ ବାୟୋଫୁଏଲ୍ସ ଆଲାଇନ୍ସ, ଏବଂ ‘ଏକ ପେଡ୍ ମାଆ କେ ନାମ’ ଭଳି ପଦକ୍ଷେପ ମାଧ୍ୟମରେ ଆମେ ସବୁଜ ପରିବର୍ତ୍ତନକୁ ତ୍ୱରାନ୍ୱିତ କରିବା ପାଇଁ ଅଂଶୀଦାର ଦେଶଗୁଡ଼ିକ ସହିତ କାର୍ଯ୍ୟ କରିଛୁ।

ଏବଂ କ୍ଷୁଦ୍ର ଦ୍ୱୀପ ବିକାଶଶୀଳ ରାଷ୍ଟ୍ରଗୁଡ଼ିକର ସମସ୍ୟା ଯେପରି ଉପଯୁକ୍ତ ଗୁରୁତ୍ୱ ପାଇପାରିବ, ତାହା ନିଶ୍ଚିତ କରିବା ପାଇଁ ଭାରତ ସେଚେଲ୍ସ ସହିତ ମିଳିତ ଭାବେ କାର୍ଯ୍ୟ ଜାରି ରଖିବାକୁ ପ୍ରତିବଦ୍ଧ।

ସମ୍ମାନନୀୟ ସଦସ୍ୟବୃନ୍ଦ,

ସେଚେଲ୍ସ ଏବଂ ଭାରତ, ଦୁହେଁ ଏପରି ଏକ ବିଶ୍ୱ ଚାହାନ୍ତି ଯେଉଁଠାରେ ବିକାଶ ଆହୁରି ଅଧିକ ସମାବେଶୀ ହେବ। ଆମେ ଦୁହେଁ ଏପରି ଏକ ବିଶ୍ୱ ଚାହାନ୍ତି ଯେଉଁଠାରେ ଆନ୍ତର୍ଜାତୀୟ ଅନୁଷ୍ଠାନଗୁଡ଼ିକ ସମସାମୟିକ ବାସ୍ତବତାକୁ ପ୍ରତିଫଳିତ କରିବେ। ଆମେ ବିଶ୍ୱାସ କରୁ ଯେ ଆମର ମିଳିତ ଭବିଷ୍ୟତ ସାମୂହିକ, ସମାବେଶୀ ଏବଂ ନ୍ୟାୟସଙ୍ଗତ ଭାବରେ ଗଢ଼ାଯିବା ଉଚିତ।

ଏହି ବିଶ୍ୱାସ ହିଁ ଆମର ଜି-୨୦ ସଭାପତିତ୍ୱ କାଳରେ ଭାରତର ପ୍ରୟାସଗୁଡ଼ିକୁ ମାର୍ଗଦର୍ଶନ କରିଥିଲା। ଏହି ଭାବନାକୁ ନେଇ ଆମେ ଆନ୍ତର୍ଜାତିକ ଆଲୋଚନାର କେନ୍ଦ୍ରବିନ୍ଦୁରେ ଗ୍ଲୋବାଲ ସାଉଥର ପ୍ରାଥମିକତାଗୁଡ଼ିକୁ ସ୍ଥାପନ କରିବା ପାଇଁ କାର୍ଯ୍ୟ କରିଥିଲୁ। ଏବଂ ଏହି ଭାବନାରେ ହିଁ ଆମେ ଆଫ୍ରିକୀୟ ସଂଘକୁ ଜି-୨୦ ର ଏକ ସ୍ଥାୟୀ ସଦସ୍ୟ ଭାବରେ ସ୍ୱାଗତ କରିଥିଲୁ। ଏହା ହେଉଛି ସେହି ଭାବନା ଯାହା ଗ୍ଲୋବାଲ ସାଉଥ୍‌କୁ ଏକତ୍ରିତ କରେ। ଏବଂ ଏହା ହେଉଛି ସେହି ପରିକଳ୍ପନା ଯାହାକୁ ଭାରତ ଏବଂ ସେଚେଲ୍ସ ଏକାଠି ମିଶି ଆଗକୁ ବଢ଼ାଇବା ଜାରି ରଖିବେ।

ସମ୍ମାନନୀୟ ସଦସ୍ୟବୃନ୍ଦ,

ଗତ ପଚାଶ ବର୍ଷର ସଫଳତାକୁ ଆମେ ପାଳନ କରୁଥିବା ବେଳେ, ଆମକୁ ଆଗକୁ ମଧ୍ୟ ଦେଖିବାକୁ ହେବ। ସେଶେଲ୍ସର ଭବିଷ୍ୟତ ଏହାର ଯୁବପିଢ଼ିଙ୍କ ଦ୍ୱାରା ରୂପାନ୍ତରିତ ହେବ। ଆମେ ଗର୍ବିତ ଯେ ସେଚେଲ୍ସର ଛାତ୍ରଛାତ୍ରୀ, ବୃତ୍ତିଗତ ବ୍ୟକ୍ତିବିଶେଷ, ଅଧିକାରୀ ଏବଂ ସୁରକ୍ଷା ବାହିନୀ ଦଶନ୍ଧି ଦଶନ୍ଧି ଧରି ଭାରତରେ ପ୍ରଶିକ୍ଷଣ ଏବଂ ଶିକ୍ଷା ଗ୍ରହଣ କରିଛନ୍ତି।

ବାସ୍ତବରେ, ଏହା କୁହାଯାଏ ଯେ ସେଚେଲ୍ସର ପ୍ରତି ପଚାଶ ଜଣ ଲୋକଙ୍କ ମଧ୍ୟରୁ ଜଣେ ଭାରତରେ କୌଣସି ନା କୌଣସି ପ୍ରଶିକ୍ଷଣ ଗ୍ରହଣ କରିଛନ୍ତି। ସେମାନେ ନିଜ ସହିତ ଏପରି ଦକ୍ଷତା, ବନ୍ଧୁତା ଏବଂ ଅନୁଭୂତି ନେଇ ସ୍ୱଦେଶ ଫେରିଛନ୍ତି, ଯାହା ଆଜି ଆମର ଅଂଶୀଦାରିତାକୁ ସୁଦୃଢ଼ କରିବା ଜାରି ରଖିଛି।

 

ଯୁବପିଢ଼ିଙ୍କୁ ଇଣ୍ଟର୍ନସିପ୍ ପ୍ରଦାନ କରିବା ପାଇଁ ଆପଣଙ୍କର ‘ଇଗ୍ନାଇଟ୍’ ପଦକ୍ଷେପ ବିଷୟରେ ଜାଣି ମୁଁ ଅତ୍ୟନ୍ତ ଆନନ୍ଦିତ ହେଲି। ଏହା ଏକ ଚମତ୍କାର ବ୍ୟବସ୍ଥା, ଏବଂ ଆମେ ଏହି କ୍ଷେତ୍ରରେ ସହଯୋଗର ନୂତନ ଦିଗଗୁଡ଼ିକୁ ସନ୍ଧାନ କରିପାରିବା।

ଏଭଳି ସହଯୋଗ ପାଇଁ ଏକ ପ୍ରମୁଖ ଧ୍ୟାନ କେନ୍ଦ୍ରିତ କ୍ଷେତ୍ର ଡିଜିଟାଲ୍ ନବୋନ୍ମେଷ ହୋଇପାରେ। ଭାରତର ଡିଜିଟାଲ୍ ପବ୍ଲିକ୍ ଇନଫ୍ରାଷ୍ଟ୍ରକ୍ଚର ପ୍ରଦର୍ଶନ କରିଛି ଯେ କିପରି ପ୍ରଯୁକ୍ତିବିଦ୍ୟା ସୁଯୋଗର ସମ୍ପ୍ରସାରଣ କରିପାରେ, ଶାସନରେ ସୁଧାର ଆଣିପାରେ, ଆର୍ଥିକ ଅନ୍ତର୍ଭୁକ୍ତିକରଣକୁ ତ୍ୱରାନ୍ୱିତ କରିପାରେ ଏବଂ କୋଟି କୋଟି ଜନସାଧାରଣଙ୍କ ପାଖରେ ସେବା ପହଞ୍ଚାଇ ପାରେ।

ଆପଣ ନିଜର ଡିଜିଟାଲ୍ ରୂପାନ୍ତରଣ ଦିଗରେ ଆଗକୁ ବଢ଼ୁଥିବା ବେଳେ ଆମର ଅନୁଭୂତି ଏବଂ ଦକ୍ଷତାକୁ ଆପଣଙ୍କ ସହ ବାଣ୍ଟିବାକୁ ଆମେ ଅତ୍ୟନ୍ତ ଖୁସି ହେବୁ। ମୋର ଦୃଢ଼ ବିଶ୍ୱାସ ଯେ ସେଚେଲ୍ସର ଯୁବପିଢ଼ି ଏହି ସୁଯୋଗଗୁଡ଼ିକୁ ସେହି ସଂକଳ୍ପ ସହିତ ଆପଣେଇବେ, ଯାହା ସ୍ୱାଧୀନତାର ପ୍ରଥମ ପଚାଶ ବର୍ଷକୁ ମାର୍ଗଦର୍ଶନ କରିଥିଲା।

ସମ୍ମାନନୀୟ ସଦସ୍ୟବୃନ୍ଦ,

ଆଜି, ଏହି ଐତିହାସିକ ସୁବର୍ଣ୍ଣ ଜୟନ୍ତୀ ବର୍ଷରେ ଆପଣମାନଙ୍କ ସମ୍ମୁଖରେ ଉପସ୍ଥିତ ରହି, ଆମର ଜନସାଧାରଣ ଏପରି ଏକ ବନ୍ଧୁତାକୁ ପାଳନ କରୁଛନ୍ତି ଯାହା ଅଢ଼େଇ ଶତାବ୍ଦୀରୁ ଅଧିକ ପୁରୁଣା। ଏଭଳି ଗଭୀର ଭିତ୍ତିଭୂମି ଉପରେ ଖୁବ୍ କମ୍ ଭାଗିଦାରୀ ଗଢ଼ାଯାଇଥାଏ। ଏବଂ ଖୁବ୍ କମ୍ ଭାଗିଦାରୀ ଏଭଳି ଆନ୍ତରିକତା, ବିଶ୍ୱାସ ଏବଂ ସଦ୍ଭାବନା ସହିତ ଆଗକୁ ବଢ଼ିଥାଏ।

ଆମେ ଆଗକୁ ଦେଖୁଥିବା ବେଳେ, ଆସନ୍ତୁ ଏହି ଭିତ୍ତିଭୂମିକୁ ଆହୁରି ସୁଦୃଢ଼ କରିବା। ଭାରତ ସଦାସର୍ବଦା ଆପଣଙ୍କର ଏକ ବିଶ୍ୱସ୍ତ ସହଯୋଗୀ ହୋଇ ରହିବ। ଆମେ ଆପଣଙ୍କର ସଫଳତାକୁ ପାଳନ କରିବୁ। ଆମେ ଆପଣଙ୍କର ଆକାଂକ୍ଷାକୁ ସମର୍ଥନ କରିବୁ। ଏବଂ ଆମେ ସବୁବେଳେ ଜଣେ ବନ୍ଧୁ ଭାବରେ ଆପଣଙ୍କ ପାଖରେ ଛିଡ଼ା ହେବୁ।

ଗତ ପଚାଶ ବର୍ଷ ଅତି ଉଲ୍ଲେଖନୀୟ ରହିଛି। କିନ୍ତୁ ମୋର ଦୃଢ଼ ବିଶ୍ୱାସ ଯେ ସେଶେଲ୍ସ କାହାଣୀର ସର୍ବୋତ୍ତମ ଅଧ୍ୟାୟଗୁଡ଼ିକ ଏପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ ଲେଖାଯିବା ବାକି ଅଛି। ଏବଂ ଆମ ବନ୍ଧୁତାର ସବୁଠାରୁ ସୁନ୍ଦର ସମୟ ଆଗକୁ ଆସିବାକୁ ଯାଉଛି।