भारत और जापान के बीच जो गहरे संबंध हैं, उन संबंधों का यश सिर्फ दो देशों की सरकारों को नहीं जाता है। उन संबंधों का यश आप जैसे सामाजिक जीवन के सभी वरिष्‍ठ लोगों ने जिस भावना के साथ एक छोटे से पौधे को अपनी बुद्धिमता-क्षमता के अनुसार एक विशाल वटवृक्ष बनाया है, इसके लिए आपको और आपके पूर्व के पीढि़यों को इसका यश जाता है। उनका हक बनता है और मैं इसलिए अब तक जिन-जिन लोगों ने भारत और जापान के संबंधों को सुदृढ़ किया है, उन सबका मैं हृदय से आभार व्‍यक्‍त करता हूं।

मुझे बताया गया है कि भारत-जापान एसोसिएशन को 110 साल हो गए हैं। मैं सोच रहा था कि आज के युग में एक फैमिली भी 100 साल तक इकट्ठे नहीं रहती है। अगर एक परिवार 100 साल तक इकट्ठा नहीं रह सकता है तो ये लीडरशिप की कितनी मैच्‍योरिटी होगी, दोनों देशों के नीति निर्धारकों की कितनी मैच्‍योरिटी होगी, जिसके कारण 110 साल तक ये संबंध और गहरा होता गया। ये अपने आप में, एक बहुत बड़ी प्रेरणा दायक घटना है।

मुझे यह भी बताया गया कि जापान की किसी भी देश के साथ इतनी पुरानी एक भी एसोसिएशन नहीं है, जितनी कि जापान और भारत की है। हमारे पूर्वजों ने ये जो महान नींव रखी है, मैं नहीं मानता हूं कि ये महान काम किसी तत्‍कालीन लाभ के लिए किया गया है। ये नींव पूरे मानव जाति के कल्‍याण को ध्‍यान में रखते हुए ये नींव रखी गई है जिसे दोनों देशों के महानुभावों ने और ताकतवर बनाया है।

अब हम इस पीढ़ी की और आने वाले पीढि़यों की जिम्‍मेदारी है, कि जो 110 साल की ये यात्रा है, एक तपस्‍या है, उसको हम अधिक प्राणवान कैसे बनायें, अधिक जीवंत कैसे बनायें और आने वाली पीढि़यों तक उसके संस्‍कार संक्रमण के लिए हम मिलकर के क्‍या कर सकते हैं, ये हम सबका दायित्‍व है।

कल जैसे प्रधानमंत्री आबे और मेरे बीच जो वार्ता हुई, हमारा एक जो तोक्यो डिक्‍लरेशन था, उसमें एक महत्‍वपूर्ण निर्णय हुआ है कि अब तक हम ‘स्‍ट्रे‍टेजिक ग्‍लोबल पार्टनर्स’ के रूप में काम करते थे, अब हमारा उसका स्‍टेटस ऊपर करके ‘स्‍पेशल स्‍ट्रेटेजिक ग्‍लोबल पार्टनर्स’ के रूप में आगे बढ़े हैं। ये हो सका है, इसके दो कारण हैं। एक, ये 110 साल पुरानी निरंतर हमारी ये एसोसिएशन, ये निरंतर संपर्क की व्‍यवस्‍था, इंडियन और जापानीज पार्लियामेंट्री एसोसिएशन की सक्रियता और दूसरा जो सबसे बड़ा कारण है, वह आज भले हम स्‍पेशल स्‍ट्रेटेजिक ग्‍लोबल पार्टनर्स के रूप में कागज पर हमने शायद लिखा हो, लेकिन जो चीज हमने कागज पे नहीं, हमारे दिलों में लिखी गई है, वह है जापान भारत की ‘स्पिरिचुअल पार्टनरशिप’।

मैं देख रहा हूं कि जापान में धीरे-धीरे हिंदी भाषा सीखने का जो उत्‍साह है, उमंग है, वह बढ़ता ही चला जा रहा है। उसी प्रकार से योग के संबंध में मैं देख रहा हूं कि जापान की रूचि और बढ़ रही है। यानी एक-एक बारीक चीज का संबंध हमारा जुड़ रहा है।

जापान का भारत पर कितना बड़ा हक है, मैं एक उदाहरण बताना चाहता हूं। अभी कुछ दिन पहले मुझे आपकी एक चिट्ठी मिली थी और चिट्ठी में आपने मुझे लिखा था कि मोदी जी आप आएंगे तो हिंदी में बोलिये। आप ही ने लिखी थी ना। जरा सा हमारे भारत के लोगों को आपका चेहरा बताइए। और इतनी बढि़या हिंदी में चिट्ठी लिखी है। प्‍लीज, ये हमारे लोग देखना चाहेंगे, आपको। इतनी, इतनी बढि़या हिंदी में चिट्ठी लिखी है उन्‍होंने मुझे और उन्‍होंने मुझे आग्रह किया है कि मोदी जी, मैं आपसे आग्रह करूंगा कि आप जापान के किसी भी कार्यक्रम में जाएं, कृपा करके हिंदी में बोलिये।

देखिए, एक-एक सामान्‍य व्‍यक्ति का ये जो लगाव है, ये जो अपनापन है, ये अपने आप में हैरान करने वाला हे। जब मैं यहां सुभाष चंद्र बोस की बात करूं तो मुझे यहां इतने लोग मिलेंगे, बड़े गौरव के साथ उन स्‍मृतियों को बताएंगे। मुझे ये भी बताया गया है कि आपके इन सदस्‍यों में एक सबसे वयोवृद्ध हैं। शायद उनकी उमर 95 इयर है। वे आज भी सुभाष बाबू की सारी घटनाओं का इतना वर्णन करते हैं, इतनी डिटेल बताते हैं। सुभाष बाबू उनसे शेक हैंड नहीं करते थे, गले लगते थे। वे सारी बातों को बताते हैं। वो यहां बैठे हैं खास इस काम के लिए आए हैं। खड़े हो पाएंगे, मैं उनको प्रणाम करता हूं। वो सुभाष बाबू के एक बहुत बड़े निकट के साथी रहे हैं।मैं उनको प्रणाम करता हूं।

आपको सुभाष बाबू की कौन सी साल, कौन सी डेट, सारी घटनाएं अभी भी याद हैं। मैंने हमारे एम्‍बेसेडर को कहा है कि हाइली प्रोफेशनल वीडियो टीम उनके साथ एक महीने के लिए लगा दिया जाए और उसका वीडियो रिकॉर्डिंग होना चाहिए। महीने भर कोई उसके साथ रहें, उनका इंटरव्‍यू लेते रहे और हर पुरानी बातों को रिकार्ड करे। क्‍योंकि यह एक जीते-जागते इतिहास की हमारे पास तवारीख हैं। तो ऐसी बहुत सी चीजें हमारे साथ जुड़ी हुई हैं।

मैं जब पहली बार जापान आया था तो मैं मोरी जी के घर गया था। बड़े प्‍यार से उन्‍होंने मुझे अपने घर पर बुलाया था, तो कड़ी की बात निकली। जापान में कड़ी बहुत फेमस है। तो मुझे बताया गया, बंगाल से जो परिवार आए थे, उन्‍होंने सबसे पहले कड़ी की शुरूआत की थी। वो आज एक प्रकार से जापान की फेवरेट डिश बन गई है। यानी कितनी निकटता कितनी बारीकी है। और मैं मानता हूं कि इसको हमें और महात्‍म्‍य देना चाहिए। और आगे बढ़ना चाहिए।

पार्लियामेंट्री ऐसोसिएशन का भी बहुत बड़ा योगदान है। इन संबंधों के कारण दोनों देशों की नीतियों में हमेशा उस बात पर ध्‍यान रखा गया है कि हमारे संबंधों को कोई खरोंच न आ जाए। कोई भी उस पर नुकसान न हो जाए।

पार्लियामेंट्री एसोसिएशन के लिए मेरे मन में कुछ विचार आए हैं। मैं चाहूंगा कि इसको आगे चलकर के हम इसको कुछ एक्‍सपैंड कर सकते हैं क्‍या ? एक तो मैं भारत के लिए इस पार्लियामेंट्री एसोसिएशन के लिए निमन्‍त्रण देता हूं। आप आइए और दिल्‍ली के सिवाए भी मैं चाहूंगा कि कुछ और लोकेशन पर भी जाइए और भारत को खुशी होगी, आप सबकी मेहमान नवाजी करने की। दो-तीन और चीजें अगर हम कर सकते हैं तो सोचें। एक पार्लियामेंट्री एसोसिएशन बहुत अच्‍छा चल रहा है। भारत से भी लोग यहीं आते हैं। यहां के भी पार्लियामेंट मेम्‍बर्स आते हैं और एक अंडरस्‍टेंडिंग ईच अदर, ये अपने आप में बहुत अच्‍छी प्रोग्रेस हो रही है। लेकिन समय रहते उसमें मुझे थोड़े बदलाव की मुझे जरूरत लगती है।

इसी पार्लियामेंटरी एसोसिएशन के साथ एक छोटा सा यंग पार्लियामेंटरी ऐसोसिएशन बना सकते हैं क्‍या ? जो दोनों देशों के यंगेस्‍ट पार्लियामेंटेरियंस हैं, उनका जरा मिलना-जुलना हो, वो अपनी नई पीढ़ी की सोच की चर्चा करें। उस दिशा में कुछ कर सकते हैं क्‍या ?

दूसरा, एक मेरे मन में विचार आता है, क्‍या दोनों देशों की वीमेन पार्लियामेंट मेम्‍बर्स का एसोसिएशन बन सकता है क्‍या। जिसमें महिला पार्लियामेंट मेम्‍बर्स के बारी-बारी से मिलने की संभावना बन सकती है क्‍या ?सभी महिलाओं ने सबसे पहले तालियां बजाई हैं।

तीसरा एक जो मुझे लगता है कि भारत इतना विशाल देश है। इतने राज्‍य हैं, हर राज्‍य की अपनी असेम्‍बली है, और असेम्‍बली के भी मेम्‍बर्स है। क्‍या कभी न कभी हम उन राज्‍यों से और एक ही राज्‍य से सभी एमएलए नहीं, लेकिन 5-6 राज्‍यों के दो-दो करके एमएलए यहां आए और यहां से भी उसी प्रकार से लोकल बॉडीज के लोग आयें । ये अगर हमारा बनता है तो इतना बड़ा विशाल देश है, भिन्‍न–भिन्‍न कोने में जाने का हो जाए। और हम यह तय कर सकते हैं कि जापान का कोई न कोई डेलीगेशन, हिंदुस्‍तान में 25 से भी ज्‍यादा राज्‍य हैं, हर महीने अगर दो डेलीगेशन आते हैं, और एक राज्‍य में एक डेलीगेशन जाता है और लोग आते चलें – आते चलें। अब देखिए, देखते ही देखते जापान में हिंदुस्‍तान की एक्‍सपर्टाइज वाले 1000 लोग तैयार हो जाएंगे।

आपने मुझे यहां बुलाया, मेरा सम्‍मान किया। मैं आपका बहुत-बहुत आभारी हूं। लेकिन मैं अनुभव करता हूं, मैं कारण नहीं जानता हूं। लेकिन, मैं जब भी जापान आया हूं और जब भी जापान के लोगों से मिलता हूं मुझे एक अलग सा अपनापन महसूस होता है। वो ये अपनापन क्‍या है, मैं नहीं जानता, शास्‍त्र कौन से होंगे। देखिए मुझे बहुत अपनापन लगता है और मुझे इतना प्‍यार मिलता है जापान से।

आपके एम्‍बेसडर मेरे यहां थे, वो मेरे यहां 3 साल रहे और मैंने देखा कि हम इतने मित्र की तरह साथ काम करते थे, इतनी हमारी दोस्‍ती बन गई थी। और इतने कामों को हम बढ़ा रहे थे और इसलिए मैं मानता हूं कि आपने जो अपनापन मुझे दिया है, वो प्रधानमंत्री पद से भी बहुत बड़ी चीज है। बहुत बड़ी चीज है, जो आपने मुझे दिया है। मैं इसको कभी भूल नहीं सकता हूं।

मैं आपका बहुत-बहुत आभारी हूं, और मेरी आप सबको बहुत-बहुत शुभकामनाएं।

धन्‍यवाद।

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মহামান্য, সন্মানীয় শ্ৰীমতী অজাৰেল অৰ্নেষ্টা,

ৰাষ্ট্ৰীয় সদনৰ অধ্যক্ষ সন্মানীয় শ্ৰীমতী ছিলভান লেমিয়েল,

চৰকাৰ প্ৰশাসনৰ নেতাসকল,

বিৰোধী দলৰ নেতা সন্মানীয় মিষ্টাৰ বেউনা জৰ্জ,

ৰাষ্ট্ৰীয় সদনৰ সন্মানীয় সদস্যসকল,

আৰু মোৰ প্ৰিয় ভাই-ভনীসকল,

নমস্কাৰ!

শুভ দুপৰীয়া!

এই ৰাষ্ট্ৰীয় সদনত ভাষণ দিয়া প্ৰথমজন ভাৰতীয় প্ৰধানমন্ত্ৰী হিচাপে আপোনালোকৰ সন্মুখত থিয় দিয়াটো মোৰ বাবে এক বিশেষ সন্মান। অধ্যক্ষ মহোদয়, আপোনাৰ আন্তৰিকতাপূৰ্ণ কথাৰ বাবে ধন্যবাদ জনাইছোঁ।

আজি মোক "গাৰ্ডিয়েন অব দ্য ব্লু হৰাইজন" সন্মান প্ৰদান কৰাৰ বাবে ৰাষ্ট্ৰপতি এৰ্মিনী আৰু ছেচেলছৰ জনসাধাৰণকো ধন্যবাদ জনাইছোঁ। ইয়াৰ দ্বাৰা পৰিৱেশ সংৰক্ষণৰ দিশত নিৰন্তৰ কাম কৰি থকা সকলোৱে উৎসাহিত হব। মই লগত লৈ আহিছোঁ ভাৰতৰ ১৪০ কোটি জনসাধাৰণৰ মৰম আৰু শুভেচ্ছা।

প্ৰধানমন্ত্ৰী হিচাপে ভাৰত মহাসাগৰ অঞ্চললৈ মোৰ প্ৰথমটো ভ্ৰমণ আছিল ২০১৫ চনত ছেচেলছলৈ।প্ৰধানমন্ত্ৰী হিচাপেও মই প্ৰথমবাৰৰ বাবে আফ্ৰিকা ভ্ৰমণ কৰিছিলো। মই ইয়ালৈ আহিছোঁ কাৰণ মই বিশ্বাস কৰোঁ যে ভাৰত মহাসাগৰৰ প্ৰতি ভাৰতৰ দৃষ্টিভংগীত ছেচেলছৰ এক বিশেষ স্থান আছে। আজি এটা দশকৰ পাছত ইয়ালৈ উভতি অহাৰ লগে লগে মোৰ বিশ্বাস আগতকৈ অধিক সুদৃঢ় হৈ পৰিছে।

 

আৰু আপোনালোকৰ স্বাধীনতাৰ ৫০ বছৰ উদযাপনত আপোনালোকৰ সৈতে অংশগ্ৰহণ কৰি মই আনন্দিত হৈছোঁ। এই বিশেষ অনুষ্ঠানত আপোনাক আৰু ছেচেলছৰ জনসাধাৰণলৈ অভিনন্দন জ্ঞাপন কৰিছোঁ।

সন্মানীয় সদস্যসকল,

এই ৰাষ্ট্ৰীয় সদনত ভাষণ দিয়াটো এক বিৰল সন্মান। এই বিশেষ সুবিধাৰ বাবে ধন্যবাদ। এই সুযোগতে অষ্টম ৰাষ্ট্ৰীয় সংসদৰ নৱনিৰ্বাচিত সদস্যসকলক অভিনন্দন জনাইছোঁ। অধ্যক্ষ মহোদয়, মই আপোনাক এই আগষ্ট অধিৱেশনৰ প্ৰথম মহিলা অধ্যক্ষ হোৱাৰ বাবেও অভিনন্দন জ্ঞাপন কৰিছোঁ।

সন্মানীয় সদস্যসকল,

আজি এটা কথা মনত ৰখা দৰকাৰ যে পঞ্চাশ বছৰ আগতে আমাৰ কূটনৈতিক সম্পৰ্ক স্থাপনৰ পৰাই আমাৰ বন্ধুত্বৰ আৰম্ভণি হোৱা নাছিল। তাৰো বহু আগতেই সেয়া আৰম্ভ হৈছিল। ১৭৭০ চনৰ আগষ্ট মাহত "থেলেমাক" জাহাজত চেণ্ট এন্নে দ্বীপত উপস্থিত হোৱাসকলৰ ভিতৰত পাঁচজন ভাৰতীয়ও আছিল। সেই যাত্ৰাই আন বহুতৰে বাট মুকলি কৰি দিলে। সময়ৰ লগে লগে তেওঁলোকৰ কাহিনী আধুনিক ছেচেলছৰ কাহিনীৰ অংশ হৈ পৰিল।

ই আমাক মনত পেলাই দিয়ে যে আমাৰ সম্পৰ্ক চৰকাৰে সৃষ্টি কৰা নাছিল। এই সম্পৰ্কবোৰ মানুহে গঢ়ি তুলিছিল, পৰিয়ালসমূহে ইয়াক প্ৰতিপালন কৰিছিল আৰু প্ৰজন্মৰ পিছত প্ৰজন্মই এয়া বৰ্তাই ৰাখিছিল। ভাৰত মহাসাগৰে এই কাম সম্ভৱ কৰি তুলিছিল। ভাৰত মহাসাগৰে ভাৰত আৰু ছেচেলছক বিচ্ছিন্ন নকৰে। ই আমাক সংযোগ কৰে। সেইবাবেই আমি অচিনাকি মানুহৰ দৰে লগালগি নহওঁ; আমি পুৰণি বন্ধুৰ দৰে মিলিত হওঁ।

সন্মানীয় সদস্যসকল,

ছেচেলছৰ আটাইতকৈ ডাঙৰ শক্তি হৈছে ইয়াৰ জনসাধাৰণ। প্ৰজন্মৰ পিছত প্ৰজন্ম ধৰি পৃথিৱীৰ বিভিন্ন প্ৰান্তৰ পৰা মানুহ ইয়ালৈ আহিছে। তেওঁলোকে লগত লৈ আহিছিল বিভিন্ন ভাষা, ৰীতি-নীতি, বিশ্বাস আৰু পৰম্পৰা। তেওঁলোকে একেলগে এনে এক উমৈহতীয়া পৰিচয়ৰ সৃষ্টি কৰিছে যাৰ বাবে ছেচেলছৰ জনসাধাৰণে গৌৰৱ বোধ কৰে।

এই ৰাষ্ট্ৰীয় সদনৰ মূলমন্ত্ৰ হল– ‘বৈচিত্ৰ্যত ঐক্য’। এই কথা ক্ৰেয়ল সংগীতৰ সুৰত শুনা যায়। মৌত্য নৃত্যৰ ছন্দত ইয়াক দেখা যায়। ক্ৰেয়ল উতসৱৰৰ সময়ত ইয়াক অনুভৱ কৰিব পাৰি।

দেশখনে যেতিয়া নিজৰ চহকী ঐতিহ্যক উদযাপন কৰে, তেতিয়া আমাৰ সংস্কৃতিৰ মাজৰ সংযোগ দৈনন্দিন জীৱনতো স্পষ্ট হৈ পৰে। কাৰি কোকো, চামোছা, চাটনিৰ সোৱাদত সেয়া অনুভৱ কৰিব পাৰি। দীপাৱলী, থাই পংগল, নৱৰাত্ৰিৰ সময়ত গৰ্বা নৃত্য উদযাপনত সেইবোৰ দেখা যায়। এই ক্ৰেয়ল মনোভাৱেই আমাক আমাৰ বন্ধুত্বৰ ভৱিষ্যতৰ ওপৰত অতিশয় আস্থাশীল কৰে।

 

সন্মানীয় সদস্যসকল,

সামুদ্ৰিক প্ৰতিবেশী হিচাপে আমি বুজোঁ যে এজনৰ সুৰক্ষাই আনজনৰ নিৰাপত্তা বৃদ্ধি কৰে। এজনৰ সমৃদ্ধিয়ে আনজনৰ সমৃদ্ধিত অৰিহণা যোগায়। আৰু এই অঞ্চলৰ স্থিতিশীলতাই আমাক সকলোকে উপকৃত কৰে।

এই বছৰটো আমাৰ অংশীদাৰিত্বৰ গভীৰতাৰ এক শক্তিশালী সোঁৱৰণী। পঞ্চাশ বছৰ আগতে আপোনালোকৰ স্বাধীনতাৰ প্ৰাকক্ষণত ভাৰতীয় নৌসেনাৰ জাহাজ আই এন এছ নীলগিৰি প’ৰ্ট ভিক্টোৰিয়াত বন্ধুত্ব আৰু সংহতিৰ প্ৰতীক হিচাপে থিয় হৈ আছিল। আৰু আজি আই এন এছ তাৰ্কাশ আৰু আই এন এছ ইছাকে আপোনালোকৰ সৈতে সোণালী জয়ন্তী উদযাপন কৰিবলৈ প’ৰ্ট ভিক্টোৰিয়াত ৰৈ আছে।

যোৱা পঞ্চাশ বছৰত বহু কথাই সলনি হৈছে। কিন্তু ইজনে সিজনৰ প্ৰতি থকা আমাৰ দায়বদ্ধতা অপৰিৱৰ্তিত হৈ আছে। দশক দশক ধৰি আমাৰ প্ৰতিৰক্ষা বাহিনী, উপকূলৰক্ষী আৰু সামুদ্ৰিক সংস্থাসমূহে একেলগে প্ৰশিক্ষণ লৈ আহিছে আৰু কাম কৰি আহিছে। ছেচেলছৰ প্ৰতিৰক্ষা বাহিনী আৰু ছেচেলছ ক’ষ্ট গাৰ্ডৰ পেছাদাৰিত্ব আৰু নিষ্ঠাক ভাৰতে গভীৰভাৱে সন্মান কৰে। আপোনাৰ বিশাল সামুদ্ৰিক আধিপত্যৰ লগতে বিস্তৃত ভাৰত মহাসাগৰ অঞ্চলৰ নিৰাপত্তাত ই গুৰুত্বপূৰ্ণ ভূমিকা পালন কৰে। সামুদ্ৰিক সুৰক্ষা, সামৰ্থ্য বিকাশ, হাইড্ৰ’গ্ৰাফী আৰু সামুদ্ৰিক আধিপত্যৰ সজাগতাৰ ক্ষেত্ৰত আমাৰ সহযোগিতাই এটা সুৰক্ষিত অঞ্চলৰ প্ৰতি আমাৰ ভাগ-বতৰা কৰা দায়বদ্ধতাক প্ৰতিফলিত কৰে।

আজি পুৱা মই ৰাষ্ট্ৰপতি হাৰ্মিনী– ‘টন পেট’ৰ সৈতে সাক্ষাৎ কৰি আমাৰ অংশীদাৰিত্বৰ আকৰ্ষণীয় অগ্ৰগতিৰ পৰ্যালোচনা কৰিলোঁ। ইয়াৰ লগতে আমি ভৱিষ্যতৰ বাবে আমাৰ ভাগ-বতৰা কৰা দৃষ্টিভংগীৰ বিষয়েও আলোচনা কৰোঁ। আমাৰ দৃষ্টিভংগী ‘মহাসাগৰ’ৰ ধাৰণাটোত সন্নিৱিষ্ট হৈ আছে– অৰ্থাৎ বিভিন্ন অঞ্চলৰ নিৰাপত্তা আৰু উন্নয়নৰ বাবে পাৰস্পৰিক আৰু সৰ্বাংগীণ অগ্ৰগতি।

এই দৃষ্টিভংগীয়ে স্বীকাৰ কৰে যে আমাৰ ভৱিষ্যত আন্তঃসংযোগী আৰু আন্তঃনিৰ্ভৰশীল। আৰু ভাৰত মহাসাগৰীয় অঞ্চলটোক অধিক সুৰক্ষিত কৰাৰ বাবে আমি একেলগে কাম কৰি যাম।

 

সন্মানীয় সদস্যসকল,

মানুহে মানচিত্ৰ চালে হয়তো ছেচেলছক ভাৰত মহাসাগৰৰ দ্বীপৰ এটা অংশ হিচাপে দেখা পাব। কিন্তু আমি বহুত ডাঙৰ কিবা এটা দেখিবলৈ পাওঁ। আমি এনে এখন দেশ দেখিবলৈ পাওঁ, যাৰ সীমান্ত ইয়াৰ বহু বাহিৰলৈ বিস্তৃত। আপোনালোকৰ সামুদ্ৰিক ভূখণ্ড প্ৰায় ১.৪ মিলিয়ন বৰ্গ কিলোমিটাৰ বিস্তৃত।

ই নিশ্চিত কৰে যে ছেচেলছ কেৱল এখন সৰু দ্বীপৰাষ্ট্ৰ নহয়, বৰঞ্চ ‘বৃহৎ সাগৰীয় দেশ’ হৈ পৰিছে। ‘নীল অৰ্থনীতি’ গোলকীয় আলোচনাৰ অংশ হোৱাৰ বহু আগতেই ছেচেলছ আগৰণুৱা আছিল। সাগৰীয় পৰিৱেশতন্ত্ৰক সুৰক্ষা দিয়াই হওক বা ‘ব্লু বণ্ড’ৰ দৰে উদ্ভাৱনক প্ৰচাৰ কৰাই হওক, আপোনালোকৰ দেশখনে গুৰুত্বপূৰ্ণ গোলকীয় আলোচনাক গঢ় দিয়াত সহায় কৰিছে। আমি একেলগে মীন, সামুদ্ৰিক বিজ্ঞান, উপকূলীয় ব্যৱস্থাপনা, নৱীকৰণযোগ্য শক্তি আৰু বহনক্ষম পৰ্যটনৰ ক্ষেত্ৰত অংশীদাৰিত্ব গঢ়ি তুলিব পাৰোঁ।

কালি মই বিখ্যাত কোকো ডি মেৰ এজোপা গছ ৰোপণ কৰাৰ গৌৰৱ লাভ কৰিলোঁ। ছেচেলছৰ দৰেই ইও অনন্য আৰু বহুমূলীয়া, আৰু ই বিশ্বত এক বিশেষ স্থান দখল কৰিছে। এই প্ৰাকৃতিক আশ্চৰ্যটোক ৰক্ষা আৰু সংৰক্ষণৰ বাবে আপোনালোকৰ প্ৰচেষ্টাই মানৱতা প্ৰকৃতিৰ সৈতে মিলাপ্ৰীতিৰে জীয়াই থাকিব লাগিব বোলা এক বৃহত্তৰ দৃষ্টিভংগী প্ৰতিফলিত কৰে।

এই আৱেগ ভাৰততো গভীৰভাৱে অনুভৱ হয়। আহক আমি একেলগে কাম কৰোঁ যাতে ভৱিষ্যত প্ৰজন্মই আজিৰ তুলনাত সুস্থ, সুৰক্ষিত আৰু চহকী এখন সাগৰ উত্তৰাধিকাৰী সূত্ৰে লাভ কৰে।

সন্মানীয় সদস্যসকল,

গোলকীয় দক্ষিণ আৰু বিশেষকৈ দ্বীপৰাষ্ট্ৰসমূহ জলবায়ু পৰিৱৰ্তনৰ দ্বাৰা আটাইতকৈ বেছি প্ৰভাৱিত। ইয়াৰ প্ৰভাৱ ইতিমধ্যে আমাৰ উপকূল, সাগৰীয় পৰিৱেশতন্ত্ৰ, বতৰৰ ধৰণ আৰু আমাৰ সম্প্ৰদায়ত দেখা গৈছে। আমি দুয়োখন দেশে দৃঢ়তাৰে বিশ্বাস কৰোঁ যে জলবায়ু পৰিৱৰ্তনত যিসকলে কম অৰিহণা যোগাইছে তেওঁলোকে ইয়াৰ পৰিণতিৰ আটাইতকৈ গধুৰ বোজা বহন কৰা উচিত নহয়।

জলবায়ু কাৰ্যসূচী ন্যায়পৰায়ণতা, দায়িত্বশীলতা আৰু সমতাৰ ওপৰত ভিত্তি কৰি হ’ব লাগিব। এইটোৱেই হৈছে ‘জলবায়ু ন্যায়’ৰ সাৰমৰ্ম।

ভাৰতে আদৰ্শৰ স্থাপন কৰিবলৈ চেষ্টা কৰিছে। যোৱা দশকত আমি বিশ্বৰ অন্যতম বৃহৎ নৱীকৰণযোগ্য শক্তি সম্প্ৰসাৰণৰ কাম হাতত লৈছোঁ। আমি ‘মিছন লাইফ’ৰ জৰিয়তে বহনক্ষম জীৱনশৈলীৰ প্ৰচাৰ কৰিছোঁ– অৰ্থাৎ পৰিৱেশৰ বাবে জীৱনশৈলী। আন্তঃৰাষ্ট্ৰীয় সৌৰ মিত্ৰজোঁট, দুৰ্যোগ স্থিতিস্থাপক আন্তঃগাঁথনিৰ বাবে মিত্ৰজোঁট, গ্ল’বেল বায়’ফুৱেলছ এলায়েন্স আৰু ‘এক পেড় মা কে নাম’ৰ দৰে আমাৰ পদক্ষেপৰ জৰিয়তে আমি অংশীদাৰ দেশসমূহৰ সৈতে ‘সেউজ পৰিৱৰ্তন’ক প্ৰসাৰিত কৰাৰ বাবে কাম কৰিছোঁ।

 

আৰু ভাৰতে ছেচেলছৰ সৈতে ঘনিষ্ঠভাৱে কাম কৰি ক্ষুদ্ৰ দ্বীপ উন্নয়নশীল ৰাষ্ট্ৰসমূহৰ উদ্বেগক যাতে যথাযথ মনোযোগ দিয়া হয় তাৰ বাবে প্ৰতিশ্ৰুতিবদ্ধ।

সন্মানীয় সদস্যসকল,

ছেচেলছ আৰু ভাৰত দুয়োখনেই এনে এখন পৃথিৱীৰ কামনা কৰে, য’ত উন্নয়ন অধিক সৰ্বাংগীণ হ’ব। আন্তঃৰাষ্ট্ৰীয় প্ৰতিষ্ঠানসমূহে আজিৰ বাস্তৱতাক প্ৰতিফলিত কৰা এখন পৃথিৱী আমাৰ কাম্য। আমি বিশ্বাস কৰোঁ যে আমাৰ ভাগ-বতৰা কৰা ভৱিষ্যতক সামূহিকভাৱে, সৰ্বাংগীণভাৱে আৰু ন্যায্যভাৱে গঢ় দিব লাগিব।

এই দৃষ্টিভংগীয়ে ভাৰতৰ জি-২০ৰ অধ্যক্ষতাৰ সময়ত ভাৰতৰ প্ৰচেষ্টাক পথ প্ৰদৰ্শন কৰিছিল। এই মনোভাবেৰে আমি আন্তঃৰাষ্ট্ৰীয় আলোচনাত গোলকীয় দক্ষিণৰ অগ্ৰাধিকাৰসমূহ কেন্দ্ৰীভূত কৰাৰ কাম কৰিলোঁ। আৰু এই মনোভাৱেৰে আমি আফ্ৰিকান ইউনিয়নক জি-২০ৰ স্থায়ী সদস্য হিচাপে আদৰণি জনাইছিলোঁ। এইটোৱেই হৈছে গোলকীয় দক্ষিণক একত্ৰিত কৰাৰ অন্তৰনিহিত শক্তি। আৰু এই দৃষ্টিভংগীৰেই ভাৰত আৰু ছেচেলছ একেলগে আগবাঢ়ি যাব।

সন্মানীয় সদস্যসকল,

বিগত পঞ্চাশ বছৰৰ কৃতিত্বক আমি উদযাপন কৰাৰ লগে লগে ভৱিষ্যতৰ ফালেও চাব লাগিব। ছেচেলছৰ ভৱিষ্যত গঢ় দিব ইয়াৰ যুৱক-যুৱতীয়ে। আমি গৌৰৱান্বিত যে ছেচেলছৰ ছাত্ৰ-ছাত্ৰী, পেছাদাৰী, বিষয়া আৰু নিৰাপত্তা বাহিনীয়ে ভাৰতত দশক দশক ধৰি প্ৰশিক্ষণ আৰু অধ্যয়ন কৰি আহিছে।

দৰাচলতে কোৱা হয় যে প্ৰতি পঞ্চাশজন ছেচেলছ বাসিন্দাৰ ভিতৰত এজনে ভাৰতত কোনো ধৰণৰ প্ৰশিক্ষণ লাভ কৰিছে। তেওঁলোকে দক্ষতা, বন্ধুত্ব, অভিজ্ঞতা লৈ ঘৰলৈ উভতি আহিছে, যিয়ে আমাৰ অংশীদাৰিত্বক শক্তিশালী কৰি ৰাখিছে।

যুৱক-যুৱতীসকলক ইন্টাৰশ্বিপ প্ৰদানৰ বাবে আপোনালোকৰ ইগনিট (IGNITE) পদক্ষেপৰ বিষয়ে জানি মই আনন্দিত হৈছোঁ। এইটো এটা উৎকৃষ্ট কাঠামো, আৰু আমি এই ক্ষেত্ৰত সহযোগিতাৰ নতুন পথ অন্বেষণ কৰিব পাৰোঁ।

এনে সহযোগিতাৰ বাবে এটা মূল কেন্দ্ৰ হ’ব পাৰে ডিজিটেল উদ্ভাৱন। ভাৰতৰ ডিজিটেল পাব্লিক ইনফ্ৰাষ্ট্ৰাকচাৰে (ডিপিআই) প্ৰদৰ্শন কৰিছে যে প্ৰযুক্তিয়ে কেনেকৈ সুযোগ সম্প্ৰসাৰণ কৰিব পাৰে, প্ৰশাসন ব্যৱস্থা উন্নত কৰিব পাৰে, বিত্তীয় অন্তৰ্ভুক্তিক প্ৰসাৰিত কৰিব পাৰে, লাখ লাখ লোকক সেৱা আগবঢ়াব পাৰে।

আপুনি আপোনাৰ ডিজিটেল ৰূপান্তৰৰ সৈতে আগবাঢ়ি যোৱাৰ লগে লগে আমি আমাৰ অভিজ্ঞতা আৰু জ্ঞান ভাগ-বতৰা কৰিবলৈ আনন্দ পাম। মোৰ বিশ্বাস যে ছেচেলছৰ যুৱক-যুৱতীসকলে স্বাধীনতাৰ প্ৰথম পঞ্চাশ বছৰক পথ প্ৰদৰ্শন কৰা একে সংকল্পৰে এই সুযোগসমূহক আঁকোৱালি ল’ব।

সন্মানীয় সদস্যসকল,

আজি এই ঐতিহাসিক সোণালী জয়ন্তী বৰ্ষত আপোনালোকৰ সন্মুখত থিয় দিওঁতে আমাৰ মানুহে ডেৰ শতিকাতকৈও অধিক সময়ৰ বন্ধুত্ব উদযাপন কৰিছে। ইমান গভীৰ ভেটিৰ আধাৰত অতি কম অংশীদাৰিত্ব গঢ় লৈ উঠে। আৰু এয়া ইমান আন্তৰিকতা, বিশ্বাস আৰু সদিচ্ছাৰে আগবাঢ়িছে যিটো অতি কমেইহে হয়।

ভৱিষ্যতলৈ লক্ষ্য ৰাখি আহক আমি এই ভেটিটোক শক্তিশালী কৰি যাওঁ। ভাৰত আপোনালোকৰ বিশ্বাসযোগ্য অংশীদাৰ হৈ থাকিব। আমি আপোনালোকৰ সফলতাক উদযাপন কৰিম। আপোনালোকৰ আকাংক্ষা আৰু লক্ষ্যত উপনীত হোৱাত আমি আপোনাক সহায় কৰিম। আৰু আমি বন্ধু হিচাপে আপোনালোকৰ লগত থিয় দিম।

বিগত পঞ্চাশটা বছৰ উল্লেখযোগ্য আছিল। কিন্তু মোৰ দৃঢ় বিশ্বাস যে ছেচেলছৰ কাহিনীৰ শ্ৰেষ্ঠ অধ্যায়বোৰ এতিয়াও লিখা হোৱা নাই। আৰু আমাৰ বন্ধুত্বৰ শ্ৰেষ্ঠ পৰ্যায়টো এতিয়াও আহিবলৈ বাকী আছে।