ସେୟାର
 
Comments
India will prosper only when development reaches every corner of the country: PM Modi #ParivartanRally
Bihar needs 'Vikas-Raj' not 'Jungle-Raj': PM Modi #ParivartanRally
Youth of Bihar can do wonders. They are extremely talented: PM #ParivartanRally
Those who practise casteism & do vote bank politics can never think of developing Bihar: PM #ParivartanRally
I have a dream that by 2022, every Indian must have their homes, 24/7 electricity & water: PM #ParivartanRally
'Mahaswarthbandhan' has ruined Bihar. NDA is dedicated to development of Bihar: PM Modi #ParivartanRally
Bihar has no place for 'Shaitan': PM #ParivartanRally
According to police, there have been over 4000 kidnapping cases. This proves the situation of Bihar under 'Jungle-Raj': PM

भारत माता की जय, भारत माता की जय

मिथिला पावन धरती के नमन करै छी। मंच पर विराजमान केंद्र में मंत्रिपरिषद के मेरे साथी श्रीमान रविशंकर प्रसाद जी, भाजपा के लोकप्रिय सांसद श्रीमान नित्यानंद राय जी, लोजपा के नेता श्री रामचंद्र पासवान जी, भाजपा के सांसद श्रीमान कीर्ति आज़ाद जी, भाई मुकेश सहनी जी और जिनको हमने जीवन भर एक तपस्वी के रूप में काम करते देखा है, पांच-पांच पीढ़ी राजनीति में जिनसे प्रेरणा लेती रही है, वैसे कैप्टन निशाद जी आज हमें आशीर्वाद देने आये हैं, मैं उनका बहुत आभारी हूँ कल्याणपुर से लोजपा के उम्मीदवार प्रिंस राज, वारिसनगर से लोजपा के उम्मीदवार चंद्रशेखर यादव, समस्तीपुर से भाजपा के उम्मीदवार श्रीमती रेणु कुशवाहा जी, रालोसपा के उम्मीदवार कुमार आनंद, मोरवा से भाजपा के उम्मीदवार सुरेश राय, सरायरंजन से भाजपा के उम्मीदवार श्री रंजीत निर्गुणी जी, मोइउद्दीन नगर से भाजपा के उम्मीदवार सत्येन्द्र सिंह जी, विभूतिपुर से लोजपा के उम्मीदवार रमेश कुमार राय, रोसड़ा से भाजपा के उम्मीदवार श्रीमती मंजू हजारी जी, हसनपुर से रालोसपा के उम्मीदवार श्री विनोद चौधरी जी और मंच पर विराजमान सभी वरिष्ठ महानुभाव।

चारों तरफ़ जहाँ भी मेरी नज़र पहुँचती है, मुझे लोग ही लोग नज़र आ रहे हैं। इतनी भयंकर गर्मी में आप घंटों से तपस्या कर रहे हैं। आपमें से किसी को कुछ भी नहीं चाहिए फिर भी आप लोग इतना कष्ट उठा रहे हैं। इतने भयंकर ताप में तप रहे हैं क्योंकि आप बिहार की बेहाली से परेशान हैं और बिहार को बचाना चाहते हैं। मेरे प्यारे भाईयों-बहनों, मैं आपको विश्वास दिलाता हूँ कि मैं आपकी तपस्या कभी बेकार जाने नहीं दूंगा। बिहार के भाग्य को बदलने के लिए आपने जो यज्ञ शुरू किया है, इस यज्ञ में मेरी भी कुछ आहूति होगी।

समस्तीपुर की धरती, हम सब के प्रेरक एवं जिनका जीवन दलित, पीड़ित, शोषित, वंचित लोगों के लिए प्रेरणा रहा है, ऐसे जननायक स्वर्गीय कर्पूरी ठाकुर की इस जन्मभूमि को मैं प्रणाम करता हूँ। मैं उनसे प्रार्थना करता हूँ कि वे जहाँ हैं, वहीँ से हमें आशीर्वाद दें ताकि हम आपके सपनों को पूरा कर सकें।

आज 8 अक्टूबर को लोकनायक जयप्रकाश नारायण की पुण्यतिथि है। ये राजनीति का रंग देखिये, सत्ता सुख के लिए राजनीति में रंग बदलने वाले लोगों को देखिये, उनके कारनामे देखिये ये वही लोग हैं जो कर्पूरी ठाकुर का नाम लेकर गरीबों के कल्याण की बातें करते थे, कांग्रेस के खिलाफ़ जंग लड़ने की बातें करते थे; ये लोग कभी जयप्रकाश नारायण के नाम के साये में अपना राजनीतिक कार्यक्रम चलाते थे। जयप्रकाश नारायण ने कांग्रेस के कुशासन एवं भ्रष्टाचार के खिलाफ़ एक जंग छेड़ा था, देश के नौजवानों को प्रेरणा दी थी। कल तक जो लोकनायक के गीत गाते थे, कर्पूरी ठाकुर की बातें सुनाते थे, आज वे कांग्रेस की गोद में जाकर बैठ गए हैं। मैं कल्पना कर सकता हूँ कि लोकनायक जयप्रकाश नारायण, कर्पूरी ठाकुर, राम मनोहर लोहिया जी की आत्मा जहाँ भी होगी, इन लोगों के आचरण के कारण उनकी आत्मा सबसे ज्यादा दुखी होती होगी।

कर्पूरी ठाकुर को श्रद्धांजलि देने का सही समय यह चुनाव है। ऐसे लोगों को उखाड़ कर फेंक देना ही कर्पूरी ठाकुर को सही श्रद्धांजलि होगी। मेरे बिहारवासी, आप बताएं कि बिहार में प्रगति, यहाँ का विकास होना चाहिए कि नहीं? नौजवानों को रोजगार मिलना चाहिए कि नहीं? कांग्रेस के नेता हों, लालू जी हों, यहाँ के मुख्यमंत्री जी हों, ये तीनों लोगों को जानना जरुरी है। कांग्रेस ने बिहार में 35 साल सरकार चलाई लेकिन क्या 35 साल राज करने के बाद भी बिहार का भला हुआ? जो 35 साल कुछ नहीं कर पाए, वे 5 साल में कुछ कर पाएंगे? लालू जी और यहाँ के मुख्यमंत्री जी, बड़ा भाई और छोटा भाई, बड़ा भाई ऐसा है जो छोटे भाई को कभी हत्यारा तो कभी तोता कहता है; इन्होंने बिहार में 25 साल राज किया लेकिन अगर 25 साल में कुछ नहीं कर पाए, वे 5 साल में कुछ कर पाएंगे क्या? इन तीनों ने मिलाकर बिहार में 60 साल राज किया है। 60 साल में कुछ भला हुआ क्या?

आप देखिये कि पहले ये तीनों एक-दूसरे के खिलाफ़ लड़ते थे, एक-दूसरे को बदनाम करते थे लेकिन आज ये तीनों सत्ता के लिए मिल गए बिहार की भलाई के लिए पहले कभी ये एक हुए क्या? ये सिर्फ़ सत्ता के लिए इकट्ठे हुए हैं। आप मुझे बताईये कि महास्वार्थबंधन के ये सारे कट्टे-बट्टे जब आपके पास वोट मांगने आएं तो इन्हें अपने काम का हिसाब देना चाहिए कि नहीं? बिहार को क्या वादे किये थे, और कौन-कौन से वादे पूरे किए, ये उन्हें बताना चाहिए कि नहीं? मुझे बताईये कि चुनाव के इतने दिन हो गए, ये अपने काम का हिसाब दे रहे हैं क्या? जो अपने 60 साल के काम का हिसाब नहीं दे रहे हैं, उन्हें फिर से 5 साल के लिए मौका देना चाहिए क्या?

आज पहली बार दिल्ली में ऐसी सरकार आई है जो बिहार के लिए समर्पित है, बिहार का भाग्य बदलने के लिए समर्पित है और ये मैं आज से नहीं कह रहा। 2013 में सितम्बर महीने में भाजपा का अधिवेशन हुआ था। उस अधिवेशन का मेरा कोई भाषण निकाल कर देख ले, उसमें मैंने कहा था कि अगर हमें हिंदुस्तान का भाग्य बदलना है तो भारत के हर कोने, हर राज्य का विकास होना जरुरी है। अगर सिर्फ भारत के पश्चिमी छोर का विकास हो और पूर्वोत्तर का न हो तो भारत कभी महान नहीं बन सकता है। केरल, कर्नाटक, गुजरात, गोवा, राजस्थान, हरियाणा, पंजाब आदि आगे बढे और अगर उड़ीसा, बिहार, बंगाल, असम, पूर्वोत्तर क्षेत्र पीछे रह जाए तो मेरा देश कभी आगे बढेगा क्या? मैं मानता हूँ कि अगर हिंदुस्तान को आगे ले जाना है तो पूर्वी हिंदुस्तान को और गति, और ताक़त देनी पड़ेगी।

बिहार के लिए घोषित 1 लाख 65 हज़ार का विकास का पैकेज सिर्फ़ बिहार का भला करेगा ऐसा नहीं है, ये पैकेज जब बिहार की धरती पर काम में आएंगे तो ये पूरे हिंदुस्तान की शक्ल-सूरत बदलने में मदद करेंगे। एक बार बिहार आगे बढ़ गया तो हिंदुस्तान कभी पीछे नहीं रह सकता। ये ताक़त है बिहार की। इसलिए मेरी पूरी कोशिश है कि बिहार के नौजवान को अवसर कैसे मिले, बिहार को ताक़त कैसे मिले। बिहार की शक्ति अभूतपूर्व है। अभी मैं अमेरिका गया था वहां मुझे बिहार के नागरिकों का एक दल मुझसे मिला। जब मेरा उनसे परिचय हुआ तो एक से बढकर एक होनहार लोग मेरे देश के नौजवान अमेरिका में इतना काम कर रहे हैं और खासकर बिहार के, इतना आनंद हुआ देखकर। जब उनसे बातें हुई तो उन्होंने यही कहा कि साहब हम आशा कर रहे हैं कि चुनाव के बाद बिहार की काया-पलट होनी शुरू हो जाएगी। मैंने अमेरिका में भी बिहार की चिंता करने वाले बिहार के लोगों को देखा। मुझे लगा कि जिस राज्य के पास ऐसे सामर्थ्यवान, शक्तिवान नौजवान हो, वो राज्य कभी पीछे नहीं रह सकता।

हम बिहार की सभी आवश्यकताओं पर बल दे रहे हैं। चुनाव और राजनीति में उन राजनेताओं को हम भली-भांति जानते हैं जिन्होंने जातिवाद और सम्प्रदायवाद का जहर घोला है। ये जातिवाद और सम्प्रदायवाद का जहर फैलाकर राजनीति करने वाले लोग कभी भी बिहार का भला नहीं कर पाएंगे। और इसलिए बिहार को जो जंगलराज झेलना पड़ा है, उसके बाद मैं यह पूछना चाहता हूँ कि क्या हमें यह जंगलराज फिर से वापस लाना है? भाईयों-बहनों, अगर बिहार को आगे ले जाना है तो बिहार को चाहिए – विकासराज। जंगलराज से पीछा छुड़ाईए और विकासराज का रास्ता पकड़िए और मैं आपके पास विकास की सौगात लेकर आया हूँ।

मैं हैरान हूँ कि पिछले दिनों से महास्वार्थबंधन के लोग ऐसे गुस्से में हैं कि उन्होंने बिहार के यदुवंश के लोगों को घोर अपमानित कर दिया और क्या खाते हैं, ऐसा बोला है कि मैं तो अपने मुख से बोल नहीं सकता। ये पाप मैं नहीं कर सकता। जब यदुवंश के लोगों और मीडिया ने उन्हें घेर लिया तो उन्होंने कहा कि मेरे अन्दर शैतान आ गया था, इसलिए मैंने ऐसा बोला। अब मेरे मन में सवाल है कि सारी दुनिया में अरबों-खरबों लोग हैं, हिंदुस्तान में करोड़ों लोग हैं, बिहार में करोड़ों लोग हैं लेकिन मुझे आश्चर्य हो रहा है कि शैतान को इन्हीं का ठिकाना मिला क्या, यही पता मिला क्या।

आप देखिये कि अगर आपको हार्ट अटैक आता है और आप डॉक्टर के पास जाते हैं तो डॉक्टर कहता है कि आपकी ये आदत गलत है, बुरी है इसके कारण ये हुआ है। अगर आपको डायबिटिज है और आप डॉक्टर के पास जाते हैं तो डॉक्टर कहता है कि आपकी ये आदत गलत है, खाने का ये स्वभाव ख़राब है, काम करने की यह पद्धति गलत है और इसके कारण आपको डायबिटिज हुआ है। लालू जी, बिहार जानना चाहता है कि आपमें ऐसी कौन सी बुराई है जो शैतान आपके अन्दर प्रवेश कर गया। शैतान को यही ठिकाना क्यों मिला, यह बड़ी खोज का विषय है। बिहार की जनता खोज कर निकाले कि इन्हीं के पास शैतान क्यों गया। हमें उनलोगों को चुनना है जिनके पास इंसान और इंसानियत हो। जिनके पास शैतान आकर बसते हों, ऐसे लोगों के लिए बिहार में जगह नहीं है। मैं आज आपसे आग्रह करने आया हूँ कि आप भाजपा के नेतृत्व में एनडीए के गठबंधन, जो बिहार के विकास के लिए काम करना चाहती है, को आशीर्वाद दें।

आप मुझे बताएं कि बिहार को रास्ते, अस्पताल, शिक्षक चाहिए कि नहीं? गरीबों को स्कूल, घर, नौजवान को रोजगार चाहिए कि नहीं? हमारा एक ही एजेंडा है कि बिहार विकास करे और इतना आगे बढे कि पूरा हिंदुस्तान आगे बढ़ जाए। मैं इसी सपने के साथ आपके पास आया हूँ। बिहार के लिए घोषित पैकेज बिहार के इतिहास की सबसे बड़ी घटना है और वो इसलिए है क्योंकि मैं बिहार की ताक़त को भली-भांति जानता हूँ। मैं तो कहता हूँ कि बिहार का पानी और बिहार की जवानी, इन दोनों का अगर सही उपयोग हो तो सिर्फ़ बिहार नहीं, पूरा हिंदुस्तान बदल जाएगा। यहाँ इतना पानी है लेकिन वही पानी कभी विनाश करता है तो कभी दूसरे इलाके में सूखे के लिए मजबूर करता है क्योंकि 60 साल यहाँ जिन्होंने राज किया, उन्हें यहाँ के पानी की परवाह नहीं थी। यहाँ की जवानी हिंदुस्तान या दुनिया में जहाँ भी जाती है, हिंदुस्तान का नाम रौशन कर देती है लेकिन उस जवानी को पलायन करना पड़ता है। अगर उन्हें बिहार में अवसर मिले तो बिहार बदल जाएगा कि नहीं? इसलिए भाईयों-बहनों, बिहार का पानी भी काम आना चाहिए और बिहार की जवानी भी काम आनी चाहिए।

मैं आज आपके पास विकास का मंत्र लेकर आया हूँ। हमारा सपना गरीबों को घर देने का है, उन घरों में बिजली पहुँचाने का सपना है। गरीबों की बातें करने वाले लोगों को कभी यह विचार आया था कि हमारी गरीब माताओं को खुले में शौच जाना पड़ता है और उन्हें अपमानित महसूस करना पड़ता है। गरीबों की बातें करने वाले लोगों ने कभी यह सोचा कि उनके लिए कम-से-कम शौचालय ही बना दें। इनमें से किसी को गरीबों के बारे में बात करने का अधिकार नहीं है जो 60 साल सरकार चलाने के बाद गरीबों को शौचालय तक नहीं दे पाए, वो हमें गरीबी सिखाने आए हैं।

इंदिरा गाँधी ने बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया था और कहा था कि गरीबों के लिए बैंक अकाउंट खोलने होंगे, बैंकों का पैसा गरीबों को मिलना चाहिए। आप मुझे बताईये कि गरीबों को बैंक तक जाने का मौका मिला था क्या? बैंक के दरवाजे गरीब ने कभी देखे थे क्या? 60 साल तक गरीब बैंकों से दूर रहा। हमने एक साल के भीतर देश के सभी नागरिकों का बैंकों में खाता खुलवा दिया। गरीबों के लिए काम कैसे क्या जाता है, ये इसका उदाहरण है। आने वाले दिनों में मुझे गरीबों को रहने के लिए घर देना है। 2022 में जब देश की आज़ादी के 75 वर्ष होंगे तो देश के हर परिवार के पास अपना घर हो, ये सपना पूरा करने के लिए मुझे आपका आशीर्वाद चाहिए।

भाईयों-बहनों, आपके मुख्यमंत्री ने 2010 चुनाव में आपको बिजली देने का वादा किया था? बिजली मिली? उन्होंने ये कहा था कि अगर बिजली नहीं दूंगा तो 2015 में वोट मांगने नहीं आऊंगा, ये कहा था? अभी फिर से वोट मांगने आये न? बिजली आई क्या? उनकी बातों पर भरोसा नहीं किया जा सकता। ये अहंकार की भाषा देखिये, घर में बिजली नहीं पहुँचाने के बावजूद वे आज फिर से वोट मांगने आये हैं। ये झूठे और खोखले वादे करके बिहार को फिर से जंगलराज बनाने के खेल खेले जा रहे हैं।

मुझे बताईये कि जंगलराज में सबसे बड़ा उद्योग कौन सा चला – अपहरण का उद्योग, अपहरण करो और फिर फ़िरौती मांगो। क्या फिर से अपहरण का राज चलने देना है? जनवरी महीने से जुलाई तक बिहार सरकार की पुलिस के आंकड़े के अनुसार 4000 अपहरण की घटनाएँ घटी हैं। आने वाले दिनों में दुर्गापूजा का अवसर आएगा। जब जंगलराज था तो लोग शाम में रामलीला देखने नहीं जा पाते थे क्योंकि डर लगता था कि कहीं कोई आकर के तकलीफ़ न कर जाए। कोई नई गाड़ी नहीं खरीद सकता था क्योंकि डर था कि अगर किसी नेता को पता लग गया तो गाड़ी जाएगी, पैसा भी जाएगा और मांगने जाऊंगा तो पिटाई होगी वो अलग। यही कारोबार चला था न? मैं इससे मुक्ति के लिए आपके पास आया हूँ। हमें फिर से जंगलराज आने नहीं देना है।

मैं आपके पास विकास के लिए वोट मांगने आया हूँ। मुझे विश्वास है कि ये जो जन सैलाब मैं देख रहा हूँ, मैं साफ़ कहता हूँ कि बिहार की जनता ने अहंकारवादियों का जो हाल लोकसभा के चुनाव में किया, उनका उससे भी बुरा हाल होने वाला है। कांग्रेस का अहंकार सातवें आसमान पर था। एक समय था जब जनता ने इन्हें लोकसभा में 440 सदस्य दिए थे, लेकिन अहंकार इतनी सीमा पर पहुंचा कि इसी जनता-जनार्दन ने उन्हें 40 पर लाकर बिठा दिया। जो लोग अहंकार में जी रहे हैं, वे समझें कि ये जनता-जनार्दन सबकुछ जानती है। जनता गलतियों को माफ़ करती है लेकिन धोखा कभी माफ़ नहीं करती।

बिहार का भाग्य बदलने के लिए और इसे विकास के रास्ते पर ले जाने के लिए पहली बार दिल्ली से सरकार कंधे से कंधा मिलाकर चलने आई है। हमें आशीर्वाद दीजिए और हमारे सभी उम्मीदवारों को विजयी बनाईए। सभी मेरे साथ मुट्ठी बंद करके बोलें –
भारत माता की जय, भारत माता की जय, भारत माता की जय!

बहुत-बहुत धन्यवाद

Share your ideas and suggestions for 'Mann Ki Baat' now!
Explore More
୭୬ତମ ସ୍ୱାଧୀନତା ଦିବସ ଉପଲକ୍ଷେ ଲାଲକିଲ୍ଲାର ପ୍ରାଚୀରରୁ ରାଷ୍ଟ୍ର ଉଦ୍ଦେଶ୍ୟରେ ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀଙ୍କ ଅଭିଭାଷଣ

ଲୋକପ୍ରିୟ ଅଭିଭାଷଣ

୭୬ତମ ସ୍ୱାଧୀନତା ଦିବସ ଉପଲକ୍ଷେ ଲାଲକିଲ୍ଲାର ପ୍ରାଚୀରରୁ ରାଷ୍ଟ୍ର ଉଦ୍ଦେଶ୍ୟରେ ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀଙ୍କ ଅଭିଭାଷଣ
How Direct Benefit Transfer Became India’s Booster During Pandemic, and Why World Bank is in Awe

Media Coverage

How Direct Benefit Transfer Became India’s Booster During Pandemic, and Why World Bank is in Awe
...

Nm on the go

Always be the first to hear from the PM. Get the App Now!
...
ହିମାଚଳ ପ୍ରଦେଶର ବିଳାସପୁର ଠାରେ ବିଭିନ୍ନ ବିକାଶମୂଳକ କାର୍ଯ୍ୟର ଶୁଭାରମ୍ଭ ଅବସରରେ ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀଙ୍କ ଅଭିଭାଷଣର ମୂଳପାଠ
October 05, 2022
ସେୟାର
 
Comments
PM dedicates AIIMS Bilaspur to the nation
PM inaugurates Government Hydro Engineering College at Bandla
PM lays foundation stone of Medical Device Park at Nalagarh
PM lays foundation stone of project for four laning of National Highway worth over Rs 1690 crores
“Fortunate to have been a part of Himachal Pradesh's development journey”
“Our government definitely dedicates the project for which we lay the foundation stone”
“Himachal plays a crucial role in 'Rashtra Raksha', and now with the newly inaugurated AIIMS at Bilaspur, it will also play pivotal role in 'Jeevan Raksha'”
“Ensuring dignity of life for all is our government's priority”
“Happiness, convenience, respect and safety of women are the foremost priorities of the double engine government”
“Made in India 5G services have started, and the benefits will be available in Himachal very soon”

 ଜୋ ମାତା ନେଣା ଦେବିୟା ରୀ, ଜୋ ବଜିଏ ବାୱେ ରୀ ।

ବିଳାସପୁରବାସୀ... ଆଜି ଧନ୍ୟ ହୋଇଗଲି, ଆଜି... ମୋର... ଦଶହରାରେ, ଏହି ପାବନ ଅବସରରେ ମାତା ନେଣା ଦେବିୟା ରେ, ଆଶୀର୍ବାଦ ଯୋଗୁ, ଆପଣଙ୍କ ସହରରେ ଦର୍ଶନ କରିବାର ସୌଭାଗ୍ୟ ମିଳିଲା! ଆପଣଙ୍କ ସହରରେ ଯେଉଁ, ମୋର ରାମ ରାମ । ଏଠାରେ ଏମ୍ସ ପାଇଁ ବହୁତ ବହୁତ ଶୁଭେଚ୍ଛା ।

ହିମାଚଳର ରାଜ୍ୟପାଳ ଶ୍ରୀ ରାଜେନ୍ଦ୍ର ଆର୍ଲେକର ଜୀ, ହିମାଚଳର ଲୋକପ୍ରିୟ ମୁଖ୍ୟମନ୍ତ୍ରୀ ଶ୍ରୀମାନ ଜୟରାମ ଠାକୁର ଜୀ, ଭାରତୀୟ ଜନତା ପାର୍ଟିର ରାଷ୍ଟ୍ରୀୟ ଅଧ୍ୟକ୍ଷ, ମୁଁ ସମସ୍ତଙ୍କ ମାର୍ଗଦର୍ଶକ ଏବଂ ଏହି ଧରିତ୍ରୀର ସନ୍ତାନ, ଶ୍ରୀମାନ ଜେପି ନଡ୍ଡା ଜୀ, କେନ୍ଦ୍ର ମନ୍ତ୍ରିମଣ୍ଡଳରେ ମୋର ସହଯୋଗୀ ଏବଂ ଆମର ସାଂସଦ ଶ୍ରୀ ଅନୁରାଗ ଠାକୁର ଜୀ, ହିମାଚଳ ଭାଜପାର ଅଧ୍ୟକ୍ଷ ଏବଂ ସଂସଦରେ ମୋର ସହଯୋଗୀ ସୁରେଶ କଶ୍ୟପ ଜୀ, ସଂସଦରେ ମୋର ସାଥି କିଶନ କପୁର ଜୀ, ଭଉଣୀ ଇନ୍ଦୁ ଗୋସ୍ୱାମୀ ଜୀ, ଡକ୍ଟର ସିକନ୍ଦର କୁମାର ଜୀ, ଅନ୍ୟ ମନ୍ତ୍ରୀଗଣ, ସାଂସଦ ଏବଂ ବିଧାୟକଗଣ ଏବଂ ବହୁ ସଂଖ୍ୟାରେ ମୋତେ ଏବଂ ଆମ ସମସ୍ତଙ୍କୁ ଆଶୀର୍ବାଦ ଦେବା ପାଇଁ ଆସିଥିବା ମୋର ପ୍ରିୟ ଭାଇ ଓ ଭଉଣୀମାନେ! ଆପଣ ସମସ୍ତଙ୍କୁ, ସମ୍ପୂର୍ଣ୍ଣ ଦେଶବାସୀଙ୍କୁ ବିଜୟା ଦଶମୀ ଅବସରରେ ବହୁତ ବହୁତ ଶୁଭକାମନା ।

ଏହି ପର୍ବ ସମସ୍ତ ଅଶୁଭକୁ ଅତିକ୍ରମ କରି ଅମୃତ କାଳ ପାଇଁ ଯେଉଁ ପଞ୍ଚ ପ୍ରାଣର ସଂକଳ୍ପ ଦେଶ ନେଇଛି, ତା’ ଉପରେ ଚାଲିବା ପାଇଁ ନୂତନ ଶକ୍ତି ଦେବ, ମୋର ସୌଭାଗ୍ୟ ଏହି କି ଯେ ବିଜୟା ଦଶମୀ ଅବସରରେ ହିମାଚଳ ପ୍ରଦେଶର ଲୋକମାନଙ୍କ ସ୍ୱାସ୍ଥ୍ୟ, ଶିକ୍ଷା, ରୋଜଗାର ଏବଂ ଭିତ୍ତିଭୂମିର ହଜାର ହଜାର, କୋଟି କୋଟି ଟଙ୍କାର ପ୍ରକଳ୍ପ, ଏହାକୁ ଉପହାର ଦେବାର ଅବସର ମିଳିଛି । ଆଉ ଏହା ମଧ୍ୟ ସଂଯୋଗ ଦେଖନ୍ତୁ । ବିଜୟା ଦଶମୀ ଥିବ ଏବଂ ବିଜୟର ବିଗୁଲର ଅବସର ଥିବ । ଏହା ଭବିଷ୍ୟତର ପ୍ରତ୍ୟେକ ଦୃଷ୍ଟିକୋଣର ଆରମ୍ଭ ନେଇ ଆସିଛି । ବିଳାସପୁରକୁ ଶିକ୍ଷା ଏବଂ ସ୍ୱାସ୍ଥ୍ୟ ସେବା ଦୁଇଟି ଉପହାର ମିଳିଛି । କହଲୁରା ରୀ.... ବଂଦଲେ ଧାରା ଉପ୍ପର, ହାଇଡ୍ରୋ କଲେଜ... କନେ ଥିଲ୍ଲେ ଏମ୍ସ... ହୁଣ ଏଥି ରୀ ପେହଚାନ ହୁଣୀ!

ଭାଇ ଏବଂ ଭଉଣୀମାନେ,

ଏଠାରେ ବିକାଶର ଯୋଜନାଗୁଡ଼ିକୁ ଆପଣଙ୍କୁ ଦେଇଦେବା ପରେ, ଯେମିତି ଜୟରାମ ଜୀ କହିଲେ, ଆହୁରି ଗୋଟିଏ ସାଂସ୍କୃତିକ ଐତିହ୍ୟର ସାକ୍ଷୀ ହେବାକୁ ଯାଉଛି ଏବଂ ବହୁବର୍ଷ ପରେ ମୋତେ ପୁଣିଥରେ କୁଲ୍ଲୁ ଦଶହରାରେ ଅଂଗଶ୍ରହଣ କରିବାକୁ ସୌଭାଗ୍ୟ ମିଳିବ । ଶହ ଶହ ଦେବୀ-ଦେବତାମାନଙ୍କ ସହିତ ଭଗବାନ ରଘୁନାଥ ଜୀଙ୍କର ଯାତ୍ରାରେ ସାମିଲ ହୋଇ ମୁଁ ଦେଶ ପାଇଁ ମଧ୍ୟ ଆଶୀର୍ବାଦ ମାଗିବି । ଏବଂ ଆଜି ଯେତେବେଳେ ଏଠାରେ ବିଳାସପୁରକୁ ଆସିଛି ସେତେବେଳେ ପୁରୁଣା ସ୍ମୃତିଗୁଡ଼ିକ ମନେପଡ଼େ ତାହା ହେବା ବହୁତ ସ୍ୱାଭାବିକ ଅଟେ । ସେତେବେଳେ ମଧ୍ୟ ଗୋଟିଏ ସମୟ ଥିଲା, ଏଠାରେ ପାଦରେ ବୁଲୁଥିଲି । କେତେବେଳେ ମୁଁ, ଧୂମଲ ଜୀ ନଡ୍ଡା ଜୀ, ପାଦରେ ଚାଲି ଚାଲି ଏଠିକାର ମାର୍କେଟକୁ ବାହାରି ପଡୁଥିଲେ । ଆମେ ଗୋଟିଏ ବହୁତ ବଡ଼ ରଥଯାତ୍ରାର କାର୍ଯ୍ୟକ୍ରମ ନେଇ ମଧ୍ୟ ଏହି ବିଳାସପୁର ଗଳି ଦେଇ ଯାଇଥିଲୁ । ଏବଂ ସେତେବେଳେ ସ୍ୱର୍ଣ୍ଣ ଜୟନ୍ତୀ ରଥଯାତ୍ରା ଏହି ବାଟ ଦେଇ ଏବଂ ତାହା ପୁଣି ମେନ ମାର୍କେଟରୁ ବାହାରିଥିଲା ଏବଂ ସେଠାରେ ଜନସଭା ହୋଇଥିଲା । ଏବଂ ଅନେକ ଥର ମୋର ଏଠାକୁ ଆସିବା ହେଲା, ଆପଣମାନଙ୍କ ମଧ୍ୟରେ ରହିବା ମଧ୍ୟ ହୋଇଛି ।

ହିମାଚଳର ଏହି ଭୂମିରେ କାମ କରିବାରେ ମୋତେ ନିରନ୍ତର ହିମାଚଳର ବିକାଶ ଯାତ୍ରାର ସହଯୋଗୀ ହେବାର ଅବସର ମିଳିଛି । ଏବଂ ମୁଁ ଏବେ ଶୁଣୁଥିଲି, ଅନୁରାଗ ଜୀ ବହୁତ ଜୋର ଜୋରରେ କହୁଥିଲେ, ଏହା ମୋଦୀ ଜୀ କରିଛନ୍ତି, ଏହା ମୋଦୀ ଜୀ କରିଛନ୍ତି, ଏହା ମୋଦୀ ଜୀ କରିଛନ୍ତି । ଏହା ମୋଦୀ ଜୀ କରିଛନ୍ତି ଏବଂ ଆମର ମୁଖ୍ୟମନ୍ତ୍ରୀ ଜୟରାମ ଜୀ ମଧ୍ୟ କହୁଥିଲେ, ମୋଦୀ ଜୀ କରିଛନ୍ତି, ମୋଦୀ ଜୀ କରିଛନ୍ତି । କିନ୍ତୁ ମୁଁ ସତ କହୁଛି, ସତ କହିବି କିଏ କରିଛନ୍ତି, କହିବି? ଏହା ଯାହା କିଛି ହେଉଛି ତାହା ଆପଣ କରିଛନ୍ତି । ଆପଣଙ୍କ କାରଣରୁ ହୋଇପାରିଛି। ଯଦି ଆପଣ ଦିଲ୍ଲୀରେ କେବଳ ମୋଦୀ ଜୀଙ୍କୁ ଆଶୀର୍ବାଦ ଦେବା ପାଇଁ ଏବଂ ହିମାଚଳର ମୋଦୀ ଜୀଙ୍କ ସାଥିମାନଙ୍କୁ ଆଶୀର୍ବାଦ ନ ଦେବେ ତେବେ ଏହି ସମସ୍ତ କାର୍ଯ୍ୟରେ ସେମାନେ ବାଧା ସୃଷ୍ଟି କରିଥାନ୍ତେ । ଏହା ଜୟରାମ ଜୀ ଏବଂ ତାଙ୍କ ଟିମ୍ ଯିଏକି ଯେଉଁ କାମ ଦିଲ୍ଲୀରୁ ମୁଁ ନେଇ ଆସିଥାଏ, ତାହାକୁ ଦ୍ରୁତ ଗତିରେ ଏହି ଲୋକମାନେ କରିଥାନ୍ତି, ଏଥିପାଇଁ ହେଉଛି । ଏବଂ ଏହା ଯଦି ଏପରି ହୋଇପାରିଛି ତେବେ ଆପଣଙ୍କର ଗୋଟିଏ ଭୋଟର ଶକ୍ତି ଅଟେ, ଯଦି ଟନେଲ ତିଆରି ହୋଇପାରିଛି ତାହା ଆପଣଙ୍କର ଗୋଟିଏ ଭୋଟର ତାକତ ଅଟେ, ହାଇଡ୍ରୋ ଇଞ୍ଜିନିୟରିଂ କଲେଜ ହୋଇଛି ତେବେ ଏହା ଆପଣଙ୍କ ଭୋଟର ତାକତ ଅଟେ, ଯଦି ମେଡିକାଲ ଡିଭାଇସ ପାର୍କ ତିଆରି ହେଉଛି ତେବେ ଏହା ମଧ୍ୟ ଆପଣଙ୍କର ଗୋଟିଏ ଭୋଟର ତାକତ ଅଟେ ଏବଂ ସେଥିପାଇଁ ଆଜି ମୁଁ ହିମାଚଳର ଅପେକ୍ଷାକୁ ଧ୍ୟାନରେ ରଖି ଗୋଟିଏ ପରେ ଗୋଟିଏ ବିକାଶର କାର୍ଯ୍ୟ କରୁଛି ।

ବିକାଶକୁ ନେଇ ଆମେ ଦେଶରେ ଦୀର୍ଘ ସମୟ ପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ ଗୋଟିଏ ବିକୃତ ଚିନ୍ତାଧାରା ଉପରେ ଦବି ଯିବାର ଦେଖିଛି । ଏହି ଭାବନା କ’ଣ ଥିଲା? ଭଲ ସଡ଼କ ହେବ ତେବେ କିଛି ରାଜ୍ୟମାନଙ୍କ ଏବଂ କିଛି ବଡ଼ ବଡ଼ ସହରରେ ହେବ, ଦିଲ୍ଲୀର ଆଖପାଖରେ ହେବ । ଭଲ ଶିକ୍ଷା ସଂସ୍ଥାନ ହେବ, ତେବେ ବହୁତ ବଡ଼ ବଡ଼ ସହରରେ ହେବ, ଭଲ ଡାକ୍ତରଖାନା ହେବ ତେବେ ତାହା ଦିଲ୍ଲୀରେ ହିଁ ହୋଇପାରିବ, ବାହାରେ କେଉଁଠି ହୋଇ ମଧ୍ୟ ପାରିବ ନାହିଁ । ଉଦ୍ୟୋଗ କାରବାର ହେବ ତେବେ ମଧ୍ୟ ବଡ଼ ବଡ଼ ସ୍ଥାନରେ ଲାଗିବ ଏବଂ ବିଶେଷ କରି ଦେଶର ପାହାଡ଼ିଆ ପ୍ରଦେଶରେ ମୌଳିକ ସୁବିଧାମାନ ସବୁଠାରୁ ଶେଷରେ, ବହୁ ବହୁ ବର୍ଷ ପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ ଅପେକ୍ଷା କରିବା ପରେ ପହଂଚୁଥିଲା। ସେହି ପୁରୁଣା ବିଚାରଧାରାର ପରିଣାମ ଏମିତି ହେଲା ଯେ ଏଥିରେ ଦେଶରେ ବିକାଶର ଏକ ବଡ଼ ଅସନ୍ତୁଳନତା ସୃଷ୍ଟି ହୋଇଗଲା । ଏହି କାରଣରୁ ଦେଶର ଗୋଟିଏ ବଡ଼ ଅଂଶ, ସେଠିକାର ଲୋକମାନେ ଅସୁବିଧାରେ, ଅଭାବରେ ରହିଲେ ।

ଗତ ୮ ବର୍ଷରେ ଦେଶ ଏବେ ସେହି ପୁରୁଣା ଚିନ୍ତାଧାରାକୁ ପଛରେ ପକାଇ, ନୂତନ ଚିନ୍ତାଧାରା, ଆଧୁନିକ ଚିନ୍ତାଧାରା ସହିତ ଆଗକୁ ବଢୁଛି । ବର୍ତ୍ତମାନ ଦେଖନ୍ତୁ, ଦୀର୍ଘ ସମୟ ପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ ଏବଂ ମୁଁ ଯେତେବେଳେ ଏଠାରେ ଥିଲି, ମୁଁ ଲଗାତାର ଦେଖୁଥିଲି, ଏଠାରେ ଗୋଟିଏ ୟୁନିଭର୍ସିଟିରୁ ହିଁ ରୋଜଗାର ହେଉଥିଲା । ଚିକିତ୍ସା ହେଉ କିମ୍ବା ପୁଣି ମେଡିକାଲର ପାଠପଢ଼ା, ଆଇଜିଏମସି ଶିମଲା ଏବଂ ଟାଟା ମେଡିକାଲ କଲେଜ ଉପରେ ହିଁ ନିର୍ଭର କରିବାକୁ ପଡୁଥିଲା । ବଡ଼ ରୋଗର ଚିକିତ୍ସା ହେଉ କିମ୍ବା ପୁଣି ଶିକ୍ଷା କିମ୍ବା ରୋଜଗାର, ଚଣ୍ଡିଗଡ଼ ଏବଂ ଦିଲ୍ଲୀ ଯିବା ସେତେବେଳେ ହିମାଚଳ ପାଇଁ ମଜବୁରୀ ହୋଇ ଯାଉଥିଲା । କିନ୍ତୁ ଗତ ଆଠ ବର୍ଷରେ ଆମର ଡବଲ ଇଞ୍ଜିନର ସରକାର ହିମାଚଳର ବିକାଶର ଗାଥାକୁ ନୂତନ ଅଧିକତମ ସୀମାରେ ପହଞ୍ଚାଇ ଦେଇଥିଲେ । ଆଜି ହିମାଚଳରେ ସେଣ୍ଟ୍ରାଲ ୟୁନିଭର୍ସିଟି ମଧ୍ୟ ଅଛି, ଆଇଆଇଟି ମଧ୍ୟ ଅଛି, ଟ୍ରିପଲ ଆଇଟି ମଧ୍ୟ ଅଛି, ଇଣ୍ଡିଆନ ଇନଷ୍ଟିଚୁ୍ୟଟ ଅଫ ମ୍ୟାନେଜମେଣ୍ଟ (ଆଇଆଇଏମ) ଭଳି ପ୍ରତିଷ୍ଠିତ ସଂସ୍ଥାନ ମଧ୍ୟ ଅଛି । ଦେଶରେ ମେଡିକାଲ ଶିକ୍ଷା ଏବଂ ସ୍ୱାସ୍ଥ୍ୟ ବିଭାଗରେ ସବୁଠାରୁ ବଡ଼ ସଂସ୍ଥାନ, ଏମ୍ସ ମଧ୍ୟ ବର୍ତ୍ତମାନ ବିଳାସପୁର ଏବଂ ହିମାଚଳର ଜନତାଙ୍କର ଗୌରବକୁ ବଢ଼ାଉଛି ।

ବିଳାସପୁର ଏମ୍ସ ଆହୁରି ପରିବର୍ତ୍ତନରେ ମଧ୍ୟ ଏକ ପ୍ରତୀକ ଅଟେ ଏବଂ ଏମ୍ସ ଭିତରେ ମଧ୍ୟ ଏହି ଗ୍ରୀନ ଏମ୍ସ ଭାବରେ ପରିଚିତ ହେବ । ସମ୍ପୂର୍ଣ୍ଣ ଭାବରେ ପର୍ଯ୍ୟାବରଣ ପ୍ରେମୀ ଏମ୍ସ, ପ୍ରକୃତି ପ୍ରେମୀ ଏମ୍ସ । ବର୍ତ୍ତମାନ ଆମର ସମସ୍ତ ସାଥୀମାନେ କହିଲେ, ପୂର୍ବ ସରକାର ଶିଳାନ୍ୟାସର ପ୍ରସ୍ତର ଲଗାଉଥିଲେ ଏବଂ ନିର୍ବାଚନ ବାହାରିବା ପରେ ଭୁଲି ଯାଉଥିଲେ । ଆଜି ମଧ୍ୟ ହିମାଚଳକୁ ଯିବେ, ଆମର ଧୁମଲ ଜୀ ଗୋଟିଏ ଥର କାର୍ଯ୍ୟକ୍ରମ କରିଥିଲେ । କେଉଁଠି କେଉଁଠି ପଥର ପଡ଼ିଥିଲା ତାକୁ ଖୋଜିବାକୁ ଏବଂ ବହୁତଗୁଡ଼ିଏ ଏମିତି କାର୍ଯ୍ୟକ୍ରମ ଯେଉଁଠି ଶିଳାନ୍ୟାସ ହୋଇଥିଲା, କାମ ହୋଇ ନ ଥିଲା ।

ମୋର ମନେ ଅଛି ମୁଁ ଗୋଟିଏ ଥର ରେଳବାଇର ରିଭୁ୍ୟ କରୁଥିଲି, ଆପଣଙ୍କର ଉନା ନିକଟେ ଗୋଟିଏ ରେଲୱେ ଲାଇନ ବିଛାଇବାର ଥିଲା । ୩୫ ବର୍ଷ ପୂର୍ବରୁ ନିର୍ଣ୍ଣୟ ହୋଇଥିଲା, ୩୫ ବର୍ଷ ପୂର୍ବରୁ ପାର୍ଲାମେଣ୍ଟରେ ଘୋଷଣା ହୋଇଥିଲା । କିନ୍ତୁ ପୁଣି ଫାଇଲ ବଡ଼ । ହିମାଚଳକୁ କିଏ ପଚାରିବ ଭାଇ । କିନ୍ତୁ ଇଏ ତ ହିମାଚଳର ପୁଅ ଏବଂ ହିମାଚଳକୁ ଭୁଲିପାରିବ ନାହିଁ, କିନ୍ତୁ ଆମର ସରକାରଙ୍କ ପରିଚୟ ଏହା ଯେ ଯେଉଁ ପ୍ରକଳ୍ପର ଶିଳାନ୍ୟାସ କରିଥାନ୍ତି, ତାହାର ଲୋକାର୍ପଣ ମଧ୍ୟ କରିଥାନ୍ତି । ଅଟକିବା, ଝୁଲିବା, ପଥଭ୍ରଷ୍ଟ ହେବା, ସେ ସମୟ ଚାଲିଗଲା ସାଥୀମାନେ!

ସାଥୀମାନେ,

ରାଷ୍ଟ୍ରର ରକ୍ଷାରେ ସବୁବେଳେ ହିମାଚଳର ବହୁତ ବଡ଼ ଯୋଗଦାନ ରହିଛି, ଯେଉଁ ହିମାଚଳ ପୁରା ଦେଶରେ ରାଷ୍ଟ୍ରର ରକ୍ଷାରେ ବୀରମାନଙ୍କ ପାଇଁ ଜଣାଯାଇଛି ସେହି ହିମାଚଳ ଏବେ ଏହି ଏମ୍ସ ପରେ ଜୀବନ ରକ୍ଷା ପାଇଁ ମଧ୍ୟ ମହତ୍ତ୍ୱପୂର୍ଣ୍ଣ ଭୂମିକା ନିର୍ବାହ କରିବ । ୨ଠ୧୪ ମସିହା ପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ ହିମାଚଳରେ କେବଳ ୩ଟି ମେଡିକାଲ, କଲେଜ ଥିଲା, ସେଥିମଧ୍ୟରୁ ୨ଟି ସରକାରୀ ଥିଲା । ଗତ ୮ ବର୍ଷ ମଧ୍ୟରେ ୫ଟି ନୂତନ ସରକାରୀ ମେଡିକାଲ କଲେଜ ହିମାଚଳରେ ତିଆରି ହୋଇଛି । ୨ଠ୧୪ ପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ ଅଣ୍ଡର ଏବଂ ପୋଷ୍ଟ ଗ୍ରାଜୁଏଟଙ୍କୁ ମିଶାଇ କେବଳ ୫ଠଠ ବିଦ୍ୟାର୍ଥୀ ପଢ଼ି ପାରୁଥିଲେ । ଆଜି ଏହି ସଂଖ୍ୟା ୧୨ଠଠରୁ ଅଧିକ, ଅର୍ଥାତ ଦୁଇଗୁଣରୁ ମଧ୍ୟ ଅଧିକ ହୋଇଯାଇଛି । ଏମ୍ସରେ ପ୍ରତ୍ୟେକ ବର୍ଷ ଅନେକ ନୂଆ ଡାକ୍ତର ହେବେ, ନର୍ସିଂ ସହିତ ଜଡ଼ିତ ଯୁବକମାନେ ଏଠାରେ ଟ୍ରେନିଂ ପାଇବେ, ଏବଂ ମୋତେ ଜୟରାମ ଜୀଙ୍କ ଟିମକୁ, ଜୟରାମ ଜୀଙ୍କୁ, ଭାରତ ସରକାରଙ୍କ ସ୍ୱାସ୍ଥ୍ୟ ମନ୍ତ୍ରୀ ଏବଂ ସ୍ୱାସ୍ଥ୍ୟ ମନ୍ତ୍ରଣାଳୟକୁ ବିଶେଷ ଭାବେ କୃତଜ୍ଞତା ଜଣାଉଛି । ଯେତେବେଳେ ନଡ୍ଡା ଜୀ ସ୍ୱାସ୍ଥ୍ୟ ମନ୍ତ୍ରୀ ଥିଲେ, ସେହି ସମୟରେ ଆମେ ନିର୍ଣ୍ଣୟ ନେଇଥିଲୁ ସେତେବେଳେ ନଡ୍ଡା ଜୀଙ୍କ ଉପରେ ବହୁତ ବଡ଼ ଦାୟିତ୍ୱ ଆସିଗଲା, ମୁଁ ଶିଳାନ୍ୟାସ ମଧ୍ୟ କରିଥିଲେ । ଏହି ଅବଧିରେ କରୋନାର ଭୟଙ୍କର ମହାମାରୀ ଆସିଲା ଏବଂ ଆମେ ଜାଣିଛୁ ଯେ ହିମାଚଳର ଲୋକ ହିମାଚଳର କୌଣସି ମଧ୍ୟ କନଷ୍ଟ୍ରକସନର କାମ କରିଥାଏ ସେତେବେଳେ ବହୁତ ଅସୁବିଧା ଆସିଥାଏ, ଗୋଟିଏ ଗୋଟିଏ ଜିନିଷ ପାହାଡ଼ ଉପରକୁ ଆଣିବା କେତେ କଷ୍ଟକର ହୋଇଥାଏ । ଯେଉଁ କାମ ତଳେ ଗୋଟିଏ ଘଣ୍ଟାରେ ହୋଇଥାଏ, ତାହାକୁ ସେଠାରେ ପାହାଡ଼ରେ କରିବା ପାଇଁ ଗୋଟିଏ ଦିନ ଲାଗି ଯାଇଥାଏ । ତାହା ପରେ ମଧ୍ୟ, କରୋନାର କଠିନ ସମୟ ଥିବା ସତ୍ତ୍ୱେ ମଧ୍ୟ ଭାରତ ସରକାରଙ୍କ ସ୍ୱାସ୍ଥ୍ୟ ମନ୍ତ୍ରଣାଳୟ ଏବଂ ଜୟରାମ ଜୀଙ୍କ ରାଜ୍ୟ ସରକାରଙ୍କ ଟିମ ମିଳିତ ଭାବେ ଯେଉଁ କାର୍ଯ୍ୟ କଲେ, ଆଜି ଏମ୍ସ ଦଣ୍ଡମାନ, ଏମ୍ସ କାମ କରିବା ଆରମ୍ଭ ହୋଇଯାଇଛି ।

ମେଡିକାଲ କଲେଜ ନୁହେଁ, ଆମେ ଆଉ ଏକ ଦିଗରେ ଆଗକୁ ବଢ଼ିବା, ଔଷଧ ଏବଂ ଜୀବନରକ୍ଷକ ଟିକାର ନିର୍ମାତା ଭାବରେ ମଧ୍ୟ ହିମାଚଳର ଭୂମିକାର ବହୁତ ଅଧିକ ବିସ୍ତାର କରାଯାଉଛି । ବଲ୍କ ଟ୍ରଗ୍ସ ପାର୍କ ପାଇଁ ଦେଶରେ କେବଳ ତିନୋଟି ରାଜ୍ୟକୁ ବିଛାଯାଇଛି ଏବଂ ସେଥିରୁ ଗୋଟିଏ ଏମିତି କେଉଁ ରାଜ୍ୟ ଅଛି ଭାଇ, କେଉଁ ରାଜ୍ୟ ଅଛି? ହିମାଚଳ ଅଟେ, ଆପଣଙ୍କୁ ଗର୍ବ ଲାଗୁଛି କି ନାହିଁ? ଏହା ଆପଣଙ୍କ ପିଲାମାନଙ୍କର ଉଜ୍ଜ୍ୱଳ ଭବିଷ୍ୟତର ଶିଳାନ୍ୟାସ ଅଟେ କି ନୁହେଁ? ଏହା ଆପଣଙ୍କର ପିଲାମାନଙ୍କର ଉଜ୍ଜ୍ୱଳ ଭବିଷ୍ୟତର ଗ୍ୟାରେଣ୍ଟି କି ନୁହେଁ? ଆମେ କାମ ବଡ଼ ଦୃଢ଼ତାର ସହିତ କରିଥାଉ ଏବଂ ଆଜିର ପିଢ଼ି ପାଇଁ ମଧ୍ୟ କରିଥାଉ, ଆଗାମୀ ପିଢ଼ି ପାଇଁ ମଧ୍ୟ କରିଥାଉ ।

ସେହିଭଳି ଭାବରେ ମେଡିକାଲ ଡିଭାଇସ ପାର୍କ ପାଇଁ ୪ଟି ରାଜ୍ୟକୁ ବଛାଯାଇଛି, ଯେଉଁଠାରେ ଆଜି ମେଡିକାଲରେ ଟେକ୍ନୋଲୋଜୀର ଭରପୂର ଉପଯୋଗ ହେଉଛି । ବିଶେଷ ଭାବରେ ଉପକରଣର ଆବଶ୍ୟକତା ପଡ଼ିଥାଏ, ତାହାକୁ ତିଆରି କରିବା ପାଇଁ ଦେଶରେ ୪ଟି ରାଜ୍ୟ ବଛାଯାଇଛି, ଏତେ ବଡ଼ ଭାରତ ବର୍ଷ, ଏତେ ବଡ଼ ଜନସଂଖ୍ୟା, ହିମାଚଳ ହେଉଛି ମୋର ଗୋଟିଏ ଛୋଟ ରାଜ୍ୟ, କିନ୍ତୁ ଏହା ବୀରମାନଙ୍କର ଭୂମି ଅଟେ ଏବଂ ମୁଁ ଏଠିକାର ରୁଟି ଖାଇଛି, ମୋତେ କରଜ ମଧ୍ୟ ଶୁଝିବାକୁ ଅଛି ଏବଂ ସେଥିପାଇଁ ଚତୁର୍ଥ ମେଡିକାଲ ଡିଭାଇସ୍ ପାର୍କ କେଉଁଠାରେ ତିଆରି ହେଉଛି, ଆପଣଙ୍କ ହିମାଚଳରେ ତିଆରି ହେଉଛି ସାଥୀମାନେ । ବିଶ୍ୱରୁ ବଡ଼ ବଡ଼ ଲୋକମାନେ ଏଠାକୁ ଆସିବେ । ନାଲାଗଡ଼ରେ ଏହି ମେଡିକାଲ ଡିଭାଇସ ପାର୍କର ଶିଳାନ୍ୟାସ ଏହାର ଏକ ଅଂଶ ଅଟେ । ଏହି ଡିଭାଇସ ପାର୍କର ନିର୍ମାଣ ପାଇଁ ହଜାର ହଜାର କୋଟି ଟଙ୍କାର ନିବେଶ ଏଠାରେ ହେବ । ଏହା ସହ ଜଡ଼ିତ ଅନେକ ଛୋଟ ଏବଂ ଲଘୁ ଉଦ୍ୟୋଗ ଆଖ ପାଖରେ ବିକଶିତ ହେବ । ଏହାଦ୍ୱାରା ଏଠିକାର ହଜାର ହଜାର ଯୁବଗୋଷ୍ଠୀଙ୍କୁ ରୋଜଗାର ଅବସର ମିଳିବ ।

ସାଥୀମାନେ,

ହିମାଚଳର ଆଉ ଏକ ପକ୍ଷ ରହିଛି, ଯେଉଁଠାରେ ଏଠାରେ ବିକାଶର ଅନନ୍ତ ସମ୍ଭାବନା ଲୁଚି ରହିଛି, ଏହି ପକ୍ଷ ଅଟେ ମେଡିକାଲ ଟୁରିଜିମର । ଏଠିକାର ଆସୁଥିବା ପବନ, ଏଠିକାର ମୌସମ, ଏଠିକାର ବାତାବରଣ, ଏଠିକାର ଜଡ଼ିବୁଟି, ଏଠିକାର ଭଲ ସ୍ୱାସ୍ଥ୍ୟ ପାଇଁ ବହୁତ ଉପଯୁକ୍ତ ବାତାବରଣ । ଆଜି ଭାରତ ମେଡିକାଲ ଟୁରିଜିମକୁ ନେଇ ବିଶ୍ୱରେ ଏକ ବହୁତ ବଡ଼ ଆକର୍ଷଣର କେନ୍ଦ୍ର ହେବାକୁ ଯାଉଛି । ଯେତେବେଳେ ଦେଶ ଏବଂ ଦୁନିଆର ଲୋକମାନେ ଭାରତରେ ମେଡିକାଲ ଚିକିତ୍ସା ପାଇଁ ଆସିବାକୁ ଚାହିଁବେ ସେତେବେଳେ ଏଠିକାର ପ୍ରାକୃତିକ ସୌନ୍ଦର୍ଯ୍ୟ ଏତେ ବଢ଼ିଆ ଯେ ଏଠାକୁ ଆସିବେ । ଏକ ପ୍ରକାରରେ ତାଙ୍କ ପାଇଁ ଆରୋଗ୍ୟର ଲାଭ ମଧ୍ୟ ହେବ ଏବଂ ପର୍ଯ୍ୟଟନର ମଧ୍ୟ ଲାଭ ହେବ । ହିମାଚଳରେ ଦୁଇଟି ହାତରେ ଲଡୁ ରହିଛି ।

ସାଥୀମାନେ,

କେନ୍ଦ୍ର ସରକାରଙ୍କର ପ୍ରୟାସ ରହିଛି ଯେ ଗରିବ ଏବଂ ମଧ୍ୟମ ବର୍ଗର ଚିକିତ୍ସା, ତା’ ଉପରେ ଖର୍ଚ୍ଚ ଅତି କମ ହେଉ, ଏଠାରେ ଚିକିତ୍ସା ମଧ୍ୟ ଭଲ ମିଳୁ ଏବଂ ଏଥିପାଇଁ ତାଙ୍କୁ ଦୂରକୁ ଯିବାକୁ ନ ପଡୁ । ସେଥିପାଇଁ ଆଜି ଏମ୍ସ ମେଡିକାଲ କଲେଜ, ଜିଲ୍ଲା ହସ୍ପିଟାଲରେ କ୍ରିଟିକାଲ କେୟାର ସୁବିଧାମାନ ଏବଂ ଗାଁରେ ହେଲଥ ଏଣ୍ଡ ୱେଲନେସ ସେଣ୍ଟର ତିଆରି କରିବାରେ ସିମଲେସ ସଂଯୋଗୀକରଣ ଉପରେ ଆମେ କାର୍ଯ୍ୟ କରୁଛୁ । ତା’ ଉପରେ ଧ୍ୟାନ ଦିଆଯାଉଛି । ଆୟୁଷ୍ମାନ ଯୋଜନା ଅନ୍ତର୍ଗତ ହିମାଚଳର ଅଧିକାଂଶ ପରିବାରକୁ ୫ ଲକ୍ଷ ଟଙ୍କା ପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ ମାଗଣା ଚିକିତ୍ସାର ସୁବିଧା ମିଳିପାରୁଛି ।

ଏହି ଯୋଜନା ଅନ୍ତର୍ଗତ ବର୍ତ୍ତମାନ ପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ ଦେଶରେ ୩ କୋଟି ୬ଠ ଲକ୍ଷ ଗରୀବ ରୋଗୀ ମାଗଣାରେ ଚିକିତ୍ସା ପାଇସାରିଛନ୍ତି ଏବଂ ସେଥିରୁ ଦେଢ଼ ଲକ୍ଷ ଲାଭାର୍ଥୀ ମୋର ହିମାଚଳର ମୋର ପରିବାରଗଣ ଅଟନ୍ତି । ଦେଶରେ ଏହି ସମସ୍ତ ସାଥୀମାନଙ୍କ ଚିକିତ୍ସା ଉପରେ ସରକାର ବର୍ତ୍ତମାନ ପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ ୪୫ ହଜାର କୋଟି ଟଙ୍କାରୁ ଅଧିକ ଖର୍ଚ୍ଚ କରିସାରିଛନ୍ତି । ଯଦି ଆୟୁଷ୍ମାନ ଭାରତ ଯୋଜନା ନ ଥାନ୍ତା । ତେବେ ଏହା ପାଖାପାଖି ଦୁଇଗୁଣ ଅର୍ଥାତ ପ୍ରାୟତଃ ୯ଠ ହଜାର କୋଟି ଟଙ୍କାର ଯେଉଁ ରୋଗୀ ଥିଲେ, ସେହି ପରିବାରକୁ ନିଜ ପକେଟରୁ ଦେବାକୁ ପଡ଼ିଥାନ୍ତା । ଅର୍ଥାତ ଏତେ ବଡ଼ ସଞ୍ଚୟ ମଧ୍ୟ ଗରୀବ ଏବଂ ମଧ୍ୟମ ବର୍ଗର ପରିବାରକୁ ଉତ୍ତମ ମାନର ଚିକିତ୍ସା ସହିତ ମିଳିଛି ।

ସାଥୀମାନେ,

ମୋ ପାଇଁ ଆହୁରି ଗୋଟିଏ ସନ୍ତୋଷର ବିଷୟ ହେଉଛି । ସରକାରଙ୍କ ଏହି ପ୍ରକାରର ଯୋଜନା ଓ ଅଧିକ ଲାଭ ଆମର ମା’ମାନଙ୍କୁ, ଭଉଣୀମାନଙ୍କୁ ଏବଂ ଝିଅମାନଙ୍କୁ ମିଳୁଛି । ଏବଂ ଆମେ ଜାଣୁ, ଆମ ମା’ ଏବଂ ଭଉଣୀମାନଙ୍କର ସ୍ୱଭାବ ଅଛି ଯେ, ଯେତେ ଯନ୍ତ୍ରଣା ହେଉ ନା କାହିଁକି, ଶରୀରରେ କେତେ କଷ୍ଟ ହେଉଥାଉ, କିନ୍ତୁ ସେମାନେ ପରିବାରରେ କାହାକୁ କୁହନ୍ତି ନାହିଁ । ସେ ସହ୍ୟ ମଧ୍ୟ କରିଥାନ୍ତି, କାମ ମଧ୍ୟ କରିଥାନ୍ତି, ପୁରା ପରିବାରର ଯତ୍ନ ମଧ୍ୟ ନେଇଥାନ୍ତି, କାରଣ ତାଙ୍କ ମନରେ ରହିଥାଏ ଯେ ଯଦି ରୋଗ ବିଷୟରେ ଲୋକମାନଙ୍କୁ ଜଣାପଡ଼ିବ, ପିଲାମାନଙ୍କୁ ଜଣାପଡ଼ିବ ତେବେ ସେମାନେ କରଜ କରି ମଧ୍ୟ ମୋର ଚିକିତ୍ସା କରାଇବେ, ଏବଂ ମା’ ଭାବନ୍ତି, ମୁଁ ନିଜେ ଅସୁସ୍ଥତାରେ କିଛି ସମୟ ବାହାର କରିବି, କିନ୍ତୁ ମୁଁ ପିଲାମାନଙ୍କୁ ଋଣଗ୍ରସ୍ତ ହେବାକୁ ଦେବି ନାହିଁ, ମୁଁ ଡାକ୍ତରଖାନା ଯାଇ ଟଙ୍କା ଖର୍ଚ୍ଚ କରିବି ନାହିଁ । ଏହି ମାଆମାନଙ୍କ ବିଷୟରେ ଚିନ୍ତା କିଏ କରିବ? କ’ଣ ମୋର ମାଆମାନେ ଏହି ପ୍ରକାରର କଷ୍ଟକୁ ଚୁପଚାପ ସହିବେ । ଏଇ ପୁଅ କେଉଁ କାମର ଆରେ, ସେହି ଭାବନାରେ ଆୟୁଷ୍ମାନ ଭାରତ ଯୋଜନାର ଜନ୍ମ ହେଲା, ଯାହାକି ମାଆମାନଙ୍କୁ, ଭଉଣୀମାନଙ୍କ ଅସୁସ୍ଥତା ସହ ବଂଚିବାକୁ ପଡ଼ିବ ନାହିଁ । ଜୀବନରେ କିଭଳି ବାଧ୍ୟତାମୂଳକ ଭାବେ ବଂଚିବାକୁ ପଡ଼ିବ ନାହିଁ । ଆୟୁଷ୍ମାନ ଭାରତ ଯୋଜନା ଅଧିନରେ ଲାଭ ପାଉଥିବା ମା’ ଭଉଣୀମାନେ ୫ଠ ପ୍ରତିଶତରୁ ଅଧିକ ଅଛନ୍ତି । ଆମର ମା’ମାନେ - ଭଉଣୀମାନେ ଏବଂ ଝିଅମାନେ ଅଛନ୍ତି ।

ସାଥୀମାନେ,

ଶୌଚାଳୟ ନିର୍ମାଣ କରିବାରେ ସ୍ୱଚ୍ଛ ଭାରତ ଅଭିଯାନ ହେଉ, ମାଗଣା ଗ୍ୟାସ ସଂଯୋଗ ଯୋଗାଇଦେବା ପାଇଁ ଉଜ୍ୱାଲା ଯୋଜନା ହେଉ, ମାଗଣା ସାନିଟାରୀ ନାପକିନ ଯୋଗାଇଦେବା ଅଭିଯାନ ହେଉ, ମାତୃବନ୍ଦନ ଯୋଜନା ଅନ୍ତର୍ଗତ ପ୍ରତ୍ୟେକ ଗର୍ଭବତୀ ମହିଳାଙ୍କୁ ପୋଷକ ଆହର ପାଇଁ ହଜାରେ ଟଙ୍କା ସହାୟତା ହେଉ, କିମ୍ବା ବର୍ତ୍ତମାନ ହର ଘର ଜଲ ପ୍ରତ୍ୟେକଙ୍କ ଘରେ ପହଂଚାଇବା ପାଇଁ ଆମର ଅଭିଯାନ ହେଉ, ଏହା ମୋର ମା ଏବଂ ଭଉଣୀମାନଙ୍କୁ ସଶକ୍ତ କରିବା କାମ ଆମେ ଗୋଟିଏ ପରେ ଗୋଟିଏ କାର୍ଯ୍ୟ ଜାରି ରଖିଛୁ, ମା’ମାନଙ୍କୁ, ଭଉଣୀମାନଙ୍କୁ, ଝିଅମାନଙ୍କର ସୁବିଧା, ସମ୍ମାନ, ସୁରକ୍ଷା ଏବଂ ସ୍ୱାସ୍ଥ୍ୟ ଏହା ଡବଲ ଇଞ୍ଜିନ ସରକାରଙ୍କ ସବୁଠାରୁ ବହୁତ ବଡ଼ ପ୍ରାଥମିକତା ଅଟେ ।

କେନ୍ଦ୍ର ସରକାର ଯାହା ବି କିଛି ଯୋଜନାମାନ ତିଆରି କରିଛନ୍ତି, ତାକୁ ଜୟରାମ ଜୀ ଏବଂ ତାଙ୍କର ପୁରା ଟିମ, ତାଙ୍କ ସରକାର ସେମାନଙ୍କୁ ଅତି ଦ୍ରୁତ ଗତିରେ ତାହାକୁ ଏହି ଭୂମିକୁ ଆଣିଛନ୍ତି ଏବଂ ତାହା ପରିସର ମଧ୍ୟ ବିସ୍ତାର କରିଛନ୍ତି। ହର ଘର ନଲ ସେ ଜଲ ପହଂଚାଇବାର କାର୍ଯ୍ୟ ଏଠାରେ କେତେ ଦ୍ରୁତ ଗତିରେ ହୋଇଛି, ଏହା ଆମ ସମସ୍ତଙ୍କ ସାମ୍ନାରେ ଅଛି, ଗତ ୭ ଦଶନ୍ଧି ମଧ୍ୟରେ ହିମାଚଳରେ ଦିଆଯାଇଥିବା ଟ୍ୟାପ ସଂଯୋଗର ସଂଖ୍ୟାକୁ ଆମେ ଦୁଇଗୁଣରୁ ଅଧିକ କେବଳ ଗତ ୩ ବର୍ଷ ମଧ୍ୟରେ ଆମେ ଦେଇସାରିଛୁ, ଆମେ ଲୋକଙ୍କୁ ଭେଟି ମଧ୍ୟ ସାରିଛୁ । ଏହି ତିନି ବର୍ଷ ମଧ୍ୟରେ ସାଢ଼େ ଆଠ ଲକ୍ଷରୁ ଅଧିକ ନୂତନ ପରିବାରଙ୍କୁ ପାଇପ ଜଳର ସୁବିଧା ମିଳିପାରିଛି ।

ଭାଇ ଏବଂ ଭଉଣୀମାନେ,

ଅନ୍ୟ ଏକ ପ୍ରସଙ୍ଗରେ ଦେଶ ଜୟରାମ ଜୀ ଏବଂ ତାଙ୍କ ଦଳକୁ ବହୁତ ପ୍ରଶଂସା କରୁଛି । ଏହି ପ୍ରଶଂସା ସାମାଜିକ ସୁରକ୍ଷାକୁ ନେଇ କେନ୍ଦ୍ର ସରକାରଙ୍କ ଉଦ୍ୟମକୁ ବିସ୍ତାର କରିଥିବାରୁ ଏହି ପ୍ରଶଂସା ଦିଆଯାଉଛି । । ଆଜି ହିମାଚଳରେ କୌଣସି ପରିବାର ନାହିଁ, ଯେଉଁଠାରେ କୌଣସି ନା କୌଣସି ସଦସ୍ୟଙ୍କୁ ପେନସନ ସୁବିଧା ମିଳିନାହିଁ । ବିଶେଷ ଭାବରେ ଯେଉଁ ସାଥିମାନେ ବେସାହାରା ଅଛି, ଯାହାଙ୍କୁ ବଡ଼ ରୋଗ ହୋଇଯାଇଛି, ଏଭଳି ପରିବାରକୁ ପେନସନ ଏବଂ ଚିକିତ୍ସା ଖର୍ଚ୍ଚ ସମ୍ବନ୍ଧୀୟ ସହାୟତା ଯୋଗାଇଦେବା ପ୍ରୟସା ପ୍ରଶଂସନୀୟ ଅଟେ । ହିମାଚଳ ପ୍ରଦେଶର ହଜାର ହଜାର ପରିବାର ମଧ୍ୟ ୱାନ ରାଙ୍କ, ୱାନ ପେନସନ କାର୍ଯ୍ୟକାରୀ ହେବା ଦ୍ୱାରା ମଧ୍ୟ ବହୁତ ବଡ଼ ଲାଭ ପାଇଛନ୍ତି ।

ସାଥୀମାନେ,

ହିମାଚଳ ସୁଯୋଗର ଏକ ପ୍ରଦେଶ ଅଟେ । ଏବଂ ମୁଁ ଆଉଥରେ ଜୟରାମ ଜୀଙ୍କୁ କୃତଜ୍ଞତା ଜଣାଉଛି । ସାରା ଦେଶରେ ଟିକାକରଣ କାର୍ଯ୍ୟ ଚାଲିଛି । କିନ୍ତୁ ଆପଣଙ୍କ ଜୀବନର ସୁରକ୍ଷା ପାଇଁ ହିମାଚଳ ହେଉଛି ଦେଶର ପ୍ରଥମ ରାଜ୍ୟ ଯିଏ ଶତ ପ୍ରତିଶତ ଟିକାକରଣ ସମାପ୍ତ କରିଛି । ଏହା ଚାଲିଛି, ଏହା ଚାଲିଥାଏ, ଏହା କୌଣସି ବିଷୟ ନୁହେଁ; ଯଦି ଆପଣ ନିଷ୍ପତ୍ତି ନେଇଛନ୍ତି, ତେବେ ଆପଣଙ୍କୁ ତାହା କରିବାକୁ ପଡ଼ିବ ।

ଏଠାରେ ହାଇଡ୍ରୋରୁ ବିଦୁତ ଉତ୍ପନ୍ନ ହୋଇଥାଏ, ଫଳ ଏବଂ ପନିପରିବା ପାଇଁ ଉର୍ବର ଜମି ଅଛି ଏବଂ ଏଠାରେ ପର୍ଯ୍ୟଟନ ଅନ୍ତତଃ ନିଯୁକ୍ତି ସୁଯୋଗ ଦେଇଥାଏ । ଏହି ଅବସର ସମ୍ମୁଖରେ ଉନ୍ନତ ସଂଯୋଗୀକରଣର ଅଭାବ ସବୁଠାରୁ ବଡ଼ ପ୍ରତିବନ୍ଧକ ଥିଲା । ୨ଠ୧୪ ପରଠାରୁ ହିମାଚଳ ପ୍ରଦେଶର ଉତ୍ତମ ଭିତ୍ତିଭୂମି ଗାଁ- ଗାଁ ପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ ପହଂଚାଇବାକୁ ଉଦ୍ୟମ ଚାଲିଛି । ଆଜି ହିମାଚଳର ରାସ୍ତା ପ୍ରଶସ୍ତ ହେବାର କାର୍ଯ୍ୟ ମଧ୍ୟ ଚାରିଆଡ଼େ ଚାଲିଛି । ବର୍ତ୍ତମାନ ହିମାଚଳରେ ସଂଯୋଗ କାର୍ଯ୍ୟରେ ପ୍ରାୟ ୫ଠ ହଜାର କୋଟି ଟଙ୍କା ଖର୍ଚ୍ଚ କରାଯାଉଛି । ଯେତେବେଳେ ପିଞ୍ଜୋରରୁ ନାଲାଗଡ଼ ରାଜପଥ ପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ ଚାରି ଲେନର କାର୍ଯ୍ୟ ଶେଷ ହେବ, ସେତେବେଳେ ନାଲାଗଡ଼ ଏବଂ ବାଡ଼ିର ଶିଳ୍ପାଞ୍ଚଳ କେବଳ ଲାଭବାନ ହେବ ନାହିଁ, ଚଣ୍ଡିଗଡ଼ ଏବଂ ଅମ୍ବାଲା ଠାରୁ ବିଳାସପୁର, ମାଣ୍ଡି ଏବଂ ମନାଲି ଅଭିମୁଖେ ଯାଉଥିବା ଯାତ୍ରୀମାନେ ମଧ୍ୟ ଅଧିକ ସୁବିଧା ପାଇବେ । କେବଳ ଏତିକି ନୁହେଁ, ହିମାଚଳବାସୀଙ୍କୁ ଧୂଆଁମୁକ୍ତ ରାସ୍ତାରୁ ମୁକ୍ତି ଦେବା ପାଇଁ ସୁଡ଼ଙ୍ଗର ଏକ ଜାଲ ମଧ୍ୟ ବିଛାଯାଉଛି ।

ସାଥୀମାନେ,

ଡିଜିଟାଲ ସଂଯୋଗକୁ ନେଇ ମଧ୍ୟ ହିମାଚଳରେ ଅଭୁତପୂର୍ବ କାର୍ଯ୍ୟ ହୋଇଛି । ଗତ ୮ ବର୍ଷରେ ମେଡ ଇନ ଇଣ୍ଡିଆ ମୋବାଇଲ ଫୋନ ମଧ୍ୟ ଶସ୍ତା ହୋଇପାରିଛି ଏବଂ ଗାଁ ଗାଁରେ ମଧ୍ୟ ନେଟୱାର୍କ ପହଂଚିଛି । ଉନ୍ନତ ୪ଜି ସଂଯୋଗ ହେତୁ ହିମାଚଳ ପ୍ରଦେଶ ମଧ୍ୟ ଡିଜିଟାଲ କାରବାରରେ ବହୁତ ଦ୍ରୁତ ଗତିରେ ଗତି କରୁଛି । ଯଦି କେହି ଡିଜିଟାଲ ଇଣ୍ଡିଆର ସର୍ବାଧିକ ଲାଭ ପାଉଛନ୍ତି, ତେବେ ମୋର ହିମାଚଳ ଭାଇ ଓ ଭଉଣୀମାନେ ଏହା ପାଇଛନ୍ତି । ମୋର ହିମାଚଳ ନାଗରିକମାନେ ଏହା ପାଇଛନ୍ତି । ଅନ୍ୟଥା ବିଲ ଭରିବା ଠାରୁ ନେଇ ବ୍ୟାଙ୍କ ସହିତ ଯୋଡ଼ି ହେବା କାର୍ଯ୍ୟ ହେଉ, ଆଡମିସନ ହେଉ, ଆପ୍ଲିକେସନ ହେଉ, ଏମିତି ପ୍ରତ୍ୟେକ ଛୋଟ ଛୋଟ କାମ ପାଇଁ ପାହାଡ଼ରୁ ତଳକୁ ଓହ୍ଲାଇବା ଏବଂ ଅଫିସ କାମ ପାଇଁ ପାହାଡ଼ରୁ ତଳକୁ ଓହ୍ଲାଇବା ଏବଂ ଅଫିସ ଯିବା ପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ ଏହା ଗୋଟିଏ ଦିନ ଲାଗୁଥିଲା, ଗୋଟେ ଗୋଟେ ଦିନ ଲାଗୁଥିଲା, ବେଳେବେଳେ ରାତିରେ ରହିବାକୁ ପଡୁଥିଲା । ବର୍ତ୍ତମାନ ଦେଶରେ ପ୍ରଥମ ଥର ପାଇଁ ମେଡ ଇନ ଇଣ୍ଡିଆ ୫ଜି ସେବା ମଧ୍ୟ ଆରମ୍ଭ ହୋଇସାରିଛି, ଯାହାର ଲାଭ ଖୁବଶୀଘ୍ର ହିମାଚଳ ପାଇଁ ଉପଲବ୍ଧ ହେବ । ଭାରତ ଡ୍ରେନକୁ ନେଇ ଯେଉଁ ନିୟମ କରିଛି, ପରିବର୍ତ୍ତନ କରିଛି, ତାହା ପରେ ଆହୁରି ମୁଁ ହିମାଚଳକୁ ଏଥିପାଇଁ ମଧ୍ୟ ଶୁଭେଚ୍ଛା ଜଣାଉଛି । ହିମାଚଳ ହେଉଛି ଦେଶର ପ୍ରଥମ ରାଜ୍ୟ, ଯାହା ରାଜ୍ୟର ଡ୍ରୋନ ନୀତି ଆପଣାଉଛି । ବର୍ତ୍ତମାନ ଡ୍ରୋନରୁ ପରିବହନ ପାଇଁ ଡ୍ରୋନର ବ୍ୟବହାର ବହୁତ ବୃଦ୍ଧି ପାଇବ ଏବଂ ଏଥିରେ କିନ୍ନର ପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ ଆମର ଯଦି ଆଳୁ ମଧ୍ୟ ଅଛି; ତେବେ ଆମେ ସେଠାରୁ ଡ୍ରୋନରୁ ଉଠାଇ ବଡ଼ ମଣ୍ଡିରେ ତୁରନ୍ତ ଆଣିପାରିବା । ଆମର ଫଳ ଖରାପ ହୋଇ ଯାଉଥିଲେ, ଡ୍ରୋନରେ ଉଠାଇ ଆଣିପାରିବା । ଅନେକ ପ୍ରକାରର ଲାଭ ଆଗାମୀ ଦିନରେ ହେବ । ଏହି ପ୍ରକାରର ବିକାଶ, ଯାହାଦ୍ୱାରା ପ୍ରତ୍ୟେକ ନାଗରିକଙ୍କର ସୁବିଧା ବଢ଼ିବ, ପ୍ରତ୍ୟେକ ନାଗରିକ ସମୃଦ୍ଧି ସହିତ ଯୋଡ଼ି ହେବ, ଏଥିପାଇଁ ଆମେ ପ୍ରୟାସରତ ଅଛୁ । ଏହି ବିକଶିତ ଭାରତ, ବିକଶିତ ହିମାଚଳ ପ୍ରଦେଶର ସଂକଳ୍ପକୁ ସିଦ୍ଧ କରିବ ।

ମୋତେ ଖୁସି ଲାଗୁଛି ବିଜୟା ଦଶମୀର ପାବନ ପର୍ବରେ ବିଜୟ ନାଦ କରିବାର ଅବସର ମିଳିଲା ଏବଂ ମୋତେ ବିଜୟର ଧ୍ୱନି ବଜାଇ ବିଜୟର ଉତ୍ସବ ମନାଇବାର ଅବସର ମିଳିଲା । ଏବଂ ଆପଣ ସମସ୍ତଙ୍କର ଏତେ ଆଶୀର୍ବାଦ ଭିତରେ ଏହିସବୁ କରିବାର ଅବସର ମିଳିଲା । ମୁଁ ପୁଣିଥରେ ଏମ୍ସ ସହିତ ସମସ୍ତ ବିକାଶ ପରିଯୋଜନା ପାଇଁ ଆପଣମାନଙ୍କୁ ବହୁତ ବହୁତ ଶୁଭେଚ୍ଛା ଜଣାଉଛି । ଦୁଇଟି ମୁଠାକୁ ବନ୍ଦ କରି ମୋ ସହିତ କୁହନ୍ତୁ-

ଭାରତ ମାତା କି ଜୟ । ସମ୍ପୂର୍ଣ୍ଣ ଶକ୍ତିର ସହିତ ଶବ୍ଦ ଶୁଭିବା ଦରକାର-

ଭାରତ ମାତା କି - ଜୟ!

ଭାରତ ମାତା କି - ଜୟ!

ଭାରତ ମାତା କି - ଜୟ!

ବହୁତ ବହୁତ ଧନ୍ୟବାଦ!