हिंदुस्तान का भाग्य बदलना है तो भारत के हर कोने, हर राज्य का विकास होना जरुरी: प्रधानमंत्री मोदी #परिवर्तनरैली
यदि बिहार को जंगलराज से बचाना है तो राज्य में विकासराज चाहिए: नरेन्द्र मोदी #परिवर्तनरैली
बिहार की यह पावन धरती सामर्थ्यवान और शक्तिवान नौजवान से परिपूर्ण: प्रधानमंत्री मोदी #परिवर्तनरैली
जातिवाद और सम्प्रदायवाद का जहर फैलाकर राजनीति करनेवाले लोग बिहार की भलाई कतई नहीं कर सकते: नरेन्द्र मोदी #परिवर्तनरैली
मेरा यह सपना है कि 2022 तक हर हिन्दुस्तानी के पास अपना घर हो, हर घर में बिजली और पानी हो: प्रधानमंत्री मोदी #परिवर्तनरैली
एक तरफ महास्वार्थबंधन राज्य में जंगलराज लाने की कोशिश कर रहा है, वहीं हम राज्य में विकासराज्य लाने के लिए कृतसंकल्प हैं: प्रधानमंत्री
जिन लोगों के पास शैतान आकर बसते हों, ऐसे लोगों के लिए बिहार में कोई जगह नहीं है: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी #परिवर्तनरैली
इस वर्ष जनवरी महीने से जुलाई तक बिहार सरकार की पुलिस के आंकड़े के अनुसार 4000 अपहरण की घटनाएँ बिहार में आने वाले जंगलराज का सबूत: मोदी 

भारत माता की जय, भारत माता की जय

मिथिला पावन धरती के नमन करै छी। मंच पर विराजमान केंद्र में मंत्रिपरिषद के मेरे साथी श्रीमान रविशंकर प्रसाद जी, भाजपा के लोकप्रिय सांसद श्रीमान नित्यानंद राय जी, लोजपा के नेता श्री रामचंद्र पासवान जी, भाजपा के सांसद श्रीमान कीर्ति आज़ाद जी, भाई मुकेश सहनी जी और जिनको हमने जीवन भर एक तपस्वी के रूप में काम करते देखा है, पांच-पांच पीढ़ी राजनीति में जिनसे प्रेरणा लेती रही है, वैसे कैप्टन निशाद जी आज हमें आशीर्वाद देने आये हैं, मैं उनका बहुत आभारी हूँ कल्याणपुर से लोजपा के उम्मीदवार प्रिंस राज, वारिसनगर से लोजपा के उम्मीदवार चंद्रशेखर यादव, समस्तीपुर से भाजपा के उम्मीदवार श्रीमती रेणु कुशवाहा जी, रालोसपा के उम्मीदवार कुमार आनंद, मोरवा से भाजपा के उम्मीदवार सुरेश राय, सरायरंजन से भाजपा के उम्मीदवार श्री रंजीत निर्गुणी जी, मोइउद्दीन नगर से भाजपा के उम्मीदवार सत्येन्द्र सिंह जी, विभूतिपुर से लोजपा के उम्मीदवार रमेश कुमार राय, रोसड़ा से भाजपा के उम्मीदवार श्रीमती मंजू हजारी जी, हसनपुर से रालोसपा के उम्मीदवार श्री विनोद चौधरी जी और मंच पर विराजमान सभी वरिष्ठ महानुभाव।

चारों तरफ़ जहाँ भी मेरी नज़र पहुँचती है, मुझे लोग ही लोग नज़र आ रहे हैं। इतनी भयंकर गर्मी में आप घंटों से तपस्या कर रहे हैं। आपमें से किसी को कुछ भी नहीं चाहिए फिर भी आप लोग इतना कष्ट उठा रहे हैं। इतने भयंकर ताप में तप रहे हैं क्योंकि आप बिहार की बेहाली से परेशान हैं और बिहार को बचाना चाहते हैं। मेरे प्यारे भाईयों-बहनों, मैं आपको विश्वास दिलाता हूँ कि मैं आपकी तपस्या कभी बेकार जाने नहीं दूंगा। बिहार के भाग्य को बदलने के लिए आपने जो यज्ञ शुरू किया है, इस यज्ञ में मेरी भी कुछ आहूति होगी।

समस्तीपुर की धरती, हम सब के प्रेरक एवं जिनका जीवन दलित, पीड़ित, शोषित, वंचित लोगों के लिए प्रेरणा रहा है, ऐसे जननायक स्वर्गीय कर्पूरी ठाकुर की इस जन्मभूमि को मैं प्रणाम करता हूँ। मैं उनसे प्रार्थना करता हूँ कि वे जहाँ हैं, वहीँ से हमें आशीर्वाद दें ताकि हम आपके सपनों को पूरा कर सकें।

आज 8 अक्टूबर को लोकनायक जयप्रकाश नारायण की पुण्यतिथि है। ये राजनीति का रंग देखिये, सत्ता सुख के लिए राजनीति में रंग बदलने वाले लोगों को देखिये, उनके कारनामे देखिये ये वही लोग हैं जो कर्पूरी ठाकुर का नाम लेकर गरीबों के कल्याण की बातें करते थे, कांग्रेस के खिलाफ़ जंग लड़ने की बातें करते थे; ये लोग कभी जयप्रकाश नारायण के नाम के साये में अपना राजनीतिक कार्यक्रम चलाते थे। जयप्रकाश नारायण ने कांग्रेस के कुशासन एवं भ्रष्टाचार के खिलाफ़ एक जंग छेड़ा था, देश के नौजवानों को प्रेरणा दी थी। कल तक जो लोकनायक के गीत गाते थे, कर्पूरी ठाकुर की बातें सुनाते थे, आज वे कांग्रेस की गोद में जाकर बैठ गए हैं। मैं कल्पना कर सकता हूँ कि लोकनायक जयप्रकाश नारायण, कर्पूरी ठाकुर, राम मनोहर लोहिया जी की आत्मा जहाँ भी होगी, इन लोगों के आचरण के कारण उनकी आत्मा सबसे ज्यादा दुखी होती होगी।

कर्पूरी ठाकुर को श्रद्धांजलि देने का सही समय यह चुनाव है। ऐसे लोगों को उखाड़ कर फेंक देना ही कर्पूरी ठाकुर को सही श्रद्धांजलि होगी। मेरे बिहारवासी, आप बताएं कि बिहार में प्रगति, यहाँ का विकास होना चाहिए कि नहीं? नौजवानों को रोजगार मिलना चाहिए कि नहीं? कांग्रेस के नेता हों, लालू जी हों, यहाँ के मुख्यमंत्री जी हों, ये तीनों लोगों को जानना जरुरी है। कांग्रेस ने बिहार में 35 साल सरकार चलाई लेकिन क्या 35 साल राज करने के बाद भी बिहार का भला हुआ? जो 35 साल कुछ नहीं कर पाए, वे 5 साल में कुछ कर पाएंगे? लालू जी और यहाँ के मुख्यमंत्री जी, बड़ा भाई और छोटा भाई, बड़ा भाई ऐसा है जो छोटे भाई को कभी हत्यारा तो कभी तोता कहता है; इन्होंने बिहार में 25 साल राज किया लेकिन अगर 25 साल में कुछ नहीं कर पाए, वे 5 साल में कुछ कर पाएंगे क्या? इन तीनों ने मिलाकर बिहार में 60 साल राज किया है। 60 साल में कुछ भला हुआ क्या?

आप देखिये कि पहले ये तीनों एक-दूसरे के खिलाफ़ लड़ते थे, एक-दूसरे को बदनाम करते थे लेकिन आज ये तीनों सत्ता के लिए मिल गए बिहार की भलाई के लिए पहले कभी ये एक हुए क्या? ये सिर्फ़ सत्ता के लिए इकट्ठे हुए हैं। आप मुझे बताईये कि महास्वार्थबंधन के ये सारे कट्टे-बट्टे जब आपके पास वोट मांगने आएं तो इन्हें अपने काम का हिसाब देना चाहिए कि नहीं? बिहार को क्या वादे किये थे, और कौन-कौन से वादे पूरे किए, ये उन्हें बताना चाहिए कि नहीं? मुझे बताईये कि चुनाव के इतने दिन हो गए, ये अपने काम का हिसाब दे रहे हैं क्या? जो अपने 60 साल के काम का हिसाब नहीं दे रहे हैं, उन्हें फिर से 5 साल के लिए मौका देना चाहिए क्या?

आज पहली बार दिल्ली में ऐसी सरकार आई है जो बिहार के लिए समर्पित है, बिहार का भाग्य बदलने के लिए समर्पित है और ये मैं आज से नहीं कह रहा। 2013 में सितम्बर महीने में भाजपा का अधिवेशन हुआ था। उस अधिवेशन का मेरा कोई भाषण निकाल कर देख ले, उसमें मैंने कहा था कि अगर हमें हिंदुस्तान का भाग्य बदलना है तो भारत के हर कोने, हर राज्य का विकास होना जरुरी है। अगर सिर्फ भारत के पश्चिमी छोर का विकास हो और पूर्वोत्तर का न हो तो भारत कभी महान नहीं बन सकता है। केरल, कर्नाटक, गुजरात, गोवा, राजस्थान, हरियाणा, पंजाब आदि आगे बढे और अगर उड़ीसा, बिहार, बंगाल, असम, पूर्वोत्तर क्षेत्र पीछे रह जाए तो मेरा देश कभी आगे बढेगा क्या? मैं मानता हूँ कि अगर हिंदुस्तान को आगे ले जाना है तो पूर्वी हिंदुस्तान को और गति, और ताक़त देनी पड़ेगी।

बिहार के लिए घोषित 1 लाख 65 हज़ार का विकास का पैकेज सिर्फ़ बिहार का भला करेगा ऐसा नहीं है, ये पैकेज जब बिहार की धरती पर काम में आएंगे तो ये पूरे हिंदुस्तान की शक्ल-सूरत बदलने में मदद करेंगे। एक बार बिहार आगे बढ़ गया तो हिंदुस्तान कभी पीछे नहीं रह सकता। ये ताक़त है बिहार की। इसलिए मेरी पूरी कोशिश है कि बिहार के नौजवान को अवसर कैसे मिले, बिहार को ताक़त कैसे मिले। बिहार की शक्ति अभूतपूर्व है। अभी मैं अमेरिका गया था वहां मुझे बिहार के नागरिकों का एक दल मुझसे मिला। जब मेरा उनसे परिचय हुआ तो एक से बढकर एक होनहार लोग मेरे देश के नौजवान अमेरिका में इतना काम कर रहे हैं और खासकर बिहार के, इतना आनंद हुआ देखकर। जब उनसे बातें हुई तो उन्होंने यही कहा कि साहब हम आशा कर रहे हैं कि चुनाव के बाद बिहार की काया-पलट होनी शुरू हो जाएगी। मैंने अमेरिका में भी बिहार की चिंता करने वाले बिहार के लोगों को देखा। मुझे लगा कि जिस राज्य के पास ऐसे सामर्थ्यवान, शक्तिवान नौजवान हो, वो राज्य कभी पीछे नहीं रह सकता।

हम बिहार की सभी आवश्यकताओं पर बल दे रहे हैं। चुनाव और राजनीति में उन राजनेताओं को हम भली-भांति जानते हैं जिन्होंने जातिवाद और सम्प्रदायवाद का जहर घोला है। ये जातिवाद और सम्प्रदायवाद का जहर फैलाकर राजनीति करने वाले लोग कभी भी बिहार का भला नहीं कर पाएंगे। और इसलिए बिहार को जो जंगलराज झेलना पड़ा है, उसके बाद मैं यह पूछना चाहता हूँ कि क्या हमें यह जंगलराज फिर से वापस लाना है? भाईयों-बहनों, अगर बिहार को आगे ले जाना है तो बिहार को चाहिए – विकासराज। जंगलराज से पीछा छुड़ाईए और विकासराज का रास्ता पकड़िए और मैं आपके पास विकास की सौगात लेकर आया हूँ।

मैं हैरान हूँ कि पिछले दिनों से महास्वार्थबंधन के लोग ऐसे गुस्से में हैं कि उन्होंने बिहार के यदुवंश के लोगों को घोर अपमानित कर दिया और क्या खाते हैं, ऐसा बोला है कि मैं तो अपने मुख से बोल नहीं सकता। ये पाप मैं नहीं कर सकता। जब यदुवंश के लोगों और मीडिया ने उन्हें घेर लिया तो उन्होंने कहा कि मेरे अन्दर शैतान आ गया था, इसलिए मैंने ऐसा बोला। अब मेरे मन में सवाल है कि सारी दुनिया में अरबों-खरबों लोग हैं, हिंदुस्तान में करोड़ों लोग हैं, बिहार में करोड़ों लोग हैं लेकिन मुझे आश्चर्य हो रहा है कि शैतान को इन्हीं का ठिकाना मिला क्या, यही पता मिला क्या।

आप देखिये कि अगर आपको हार्ट अटैक आता है और आप डॉक्टर के पास जाते हैं तो डॉक्टर कहता है कि आपकी ये आदत गलत है, बुरी है इसके कारण ये हुआ है। अगर आपको डायबिटिज है और आप डॉक्टर के पास जाते हैं तो डॉक्टर कहता है कि आपकी ये आदत गलत है, खाने का ये स्वभाव ख़राब है, काम करने की यह पद्धति गलत है और इसके कारण आपको डायबिटिज हुआ है। लालू जी, बिहार जानना चाहता है कि आपमें ऐसी कौन सी बुराई है जो शैतान आपके अन्दर प्रवेश कर गया। शैतान को यही ठिकाना क्यों मिला, यह बड़ी खोज का विषय है। बिहार की जनता खोज कर निकाले कि इन्हीं के पास शैतान क्यों गया। हमें उनलोगों को चुनना है जिनके पास इंसान और इंसानियत हो। जिनके पास शैतान आकर बसते हों, ऐसे लोगों के लिए बिहार में जगह नहीं है। मैं आज आपसे आग्रह करने आया हूँ कि आप भाजपा के नेतृत्व में एनडीए के गठबंधन, जो बिहार के विकास के लिए काम करना चाहती है, को आशीर्वाद दें।

आप मुझे बताएं कि बिहार को रास्ते, अस्पताल, शिक्षक चाहिए कि नहीं? गरीबों को स्कूल, घर, नौजवान को रोजगार चाहिए कि नहीं? हमारा एक ही एजेंडा है कि बिहार विकास करे और इतना आगे बढे कि पूरा हिंदुस्तान आगे बढ़ जाए। मैं इसी सपने के साथ आपके पास आया हूँ। बिहार के लिए घोषित पैकेज बिहार के इतिहास की सबसे बड़ी घटना है और वो इसलिए है क्योंकि मैं बिहार की ताक़त को भली-भांति जानता हूँ। मैं तो कहता हूँ कि बिहार का पानी और बिहार की जवानी, इन दोनों का अगर सही उपयोग हो तो सिर्फ़ बिहार नहीं, पूरा हिंदुस्तान बदल जाएगा। यहाँ इतना पानी है लेकिन वही पानी कभी विनाश करता है तो कभी दूसरे इलाके में सूखे के लिए मजबूर करता है क्योंकि 60 साल यहाँ जिन्होंने राज किया, उन्हें यहाँ के पानी की परवाह नहीं थी। यहाँ की जवानी हिंदुस्तान या दुनिया में जहाँ भी जाती है, हिंदुस्तान का नाम रौशन कर देती है लेकिन उस जवानी को पलायन करना पड़ता है। अगर उन्हें बिहार में अवसर मिले तो बिहार बदल जाएगा कि नहीं? इसलिए भाईयों-बहनों, बिहार का पानी भी काम आना चाहिए और बिहार की जवानी भी काम आनी चाहिए।

मैं आज आपके पास विकास का मंत्र लेकर आया हूँ। हमारा सपना गरीबों को घर देने का है, उन घरों में बिजली पहुँचाने का सपना है। गरीबों की बातें करने वाले लोगों को कभी यह विचार आया था कि हमारी गरीब माताओं को खुले में शौच जाना पड़ता है और उन्हें अपमानित महसूस करना पड़ता है। गरीबों की बातें करने वाले लोगों ने कभी यह सोचा कि उनके लिए कम-से-कम शौचालय ही बना दें। इनमें से किसी को गरीबों के बारे में बात करने का अधिकार नहीं है जो 60 साल सरकार चलाने के बाद गरीबों को शौचालय तक नहीं दे पाए, वो हमें गरीबी सिखाने आए हैं।

इंदिरा गाँधी ने बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया था और कहा था कि गरीबों के लिए बैंक अकाउंट खोलने होंगे, बैंकों का पैसा गरीबों को मिलना चाहिए। आप मुझे बताईये कि गरीबों को बैंक तक जाने का मौका मिला था क्या? बैंक के दरवाजे गरीब ने कभी देखे थे क्या? 60 साल तक गरीब बैंकों से दूर रहा। हमने एक साल के भीतर देश के सभी नागरिकों का बैंकों में खाता खुलवा दिया। गरीबों के लिए काम कैसे क्या जाता है, ये इसका उदाहरण है। आने वाले दिनों में मुझे गरीबों को रहने के लिए घर देना है। 2022 में जब देश की आज़ादी के 75 वर्ष होंगे तो देश के हर परिवार के पास अपना घर हो, ये सपना पूरा करने के लिए मुझे आपका आशीर्वाद चाहिए।

भाईयों-बहनों, आपके मुख्यमंत्री ने 2010 चुनाव में आपको बिजली देने का वादा किया था? बिजली मिली? उन्होंने ये कहा था कि अगर बिजली नहीं दूंगा तो 2015 में वोट मांगने नहीं आऊंगा, ये कहा था? अभी फिर से वोट मांगने आये न? बिजली आई क्या? उनकी बातों पर भरोसा नहीं किया जा सकता। ये अहंकार की भाषा देखिये, घर में बिजली नहीं पहुँचाने के बावजूद वे आज फिर से वोट मांगने आये हैं। ये झूठे और खोखले वादे करके बिहार को फिर से जंगलराज बनाने के खेल खेले जा रहे हैं।

मुझे बताईये कि जंगलराज में सबसे बड़ा उद्योग कौन सा चला – अपहरण का उद्योग, अपहरण करो और फिर फ़िरौती मांगो। क्या फिर से अपहरण का राज चलने देना है? जनवरी महीने से जुलाई तक बिहार सरकार की पुलिस के आंकड़े के अनुसार 4000 अपहरण की घटनाएँ घटी हैं। आने वाले दिनों में दुर्गापूजा का अवसर आएगा। जब जंगलराज था तो लोग शाम में रामलीला देखने नहीं जा पाते थे क्योंकि डर लगता था कि कहीं कोई आकर के तकलीफ़ न कर जाए। कोई नई गाड़ी नहीं खरीद सकता था क्योंकि डर था कि अगर किसी नेता को पता लग गया तो गाड़ी जाएगी, पैसा भी जाएगा और मांगने जाऊंगा तो पिटाई होगी वो अलग। यही कारोबार चला था न? मैं इससे मुक्ति के लिए आपके पास आया हूँ। हमें फिर से जंगलराज आने नहीं देना है।

मैं आपके पास विकास के लिए वोट मांगने आया हूँ। मुझे विश्वास है कि ये जो जन सैलाब मैं देख रहा हूँ, मैं साफ़ कहता हूँ कि बिहार की जनता ने अहंकारवादियों का जो हाल लोकसभा के चुनाव में किया, उनका उससे भी बुरा हाल होने वाला है। कांग्रेस का अहंकार सातवें आसमान पर था। एक समय था जब जनता ने इन्हें लोकसभा में 440 सदस्य दिए थे, लेकिन अहंकार इतनी सीमा पर पहुंचा कि इसी जनता-जनार्दन ने उन्हें 40 पर लाकर बिठा दिया। जो लोग अहंकार में जी रहे हैं, वे समझें कि ये जनता-जनार्दन सबकुछ जानती है। जनता गलतियों को माफ़ करती है लेकिन धोखा कभी माफ़ नहीं करती।

बिहार का भाग्य बदलने के लिए और इसे विकास के रास्ते पर ले जाने के लिए पहली बार दिल्ली से सरकार कंधे से कंधा मिलाकर चलने आई है। हमें आशीर्वाद दीजिए और हमारे सभी उम्मीदवारों को विजयी बनाईए। सभी मेरे साथ मुट्ठी बंद करके बोलें –
भारत माता की जय, भारत माता की जय, भारत माता की जय!

बहुत-बहुत धन्यवाद

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महामहिम, माननीय मीसेस अजरेल अर्नेस्ता,

नेशनल असेंबली के अध्यक्ष, माननीय मिसेस सिलवान लेमियाएल,

सरकारी व्यवसाय के प्रतिनिधि,

माननीय नेता प्रतिपक्ष मिस्त्र बाणो जरज,

नेशनल असेंबली के माननीय सदस्य,

और मेरे प्यारे भाइयों और बहनों ,

नमस्कार!

बॉन एप्रेमिडी!

इस नेशनल असेंबली को संबोधित करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री के रूप में आपके सामने उपस्थित होना विशेष सम्मान की बात है। अध्यक्ष महोदया, आपके गर्मजोशी भरे शब्दों के लिए मैं आपका धन्यवाद।

मैं आज पहले ब्लू होराइजन के “गार्जियन के साथ मुझे सम्मानित करने के लिए राष्ट्रपति एर्मिनी और सेशेल्स के लोगों को भी धन्यवाद देता हूं। यह उन सभी को प्रोत्साहित करेगा जो पर्यावरण संरक्षण के लिए निरंतर प्रयास कर रहे हैं। मैं अपने साथ भारत के 1.4 अरब लोगों की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं लेकर आया हूं।

हिंद महासागर क्षेत्र का जो पहला देश है जहां मैंने प्रधानमंत्री के रूप में दौरा किया था, वह 2015 में सेशेल्स था। प्रधानमंत्री के रूप में यह मेरी पहली अफ्रीका यात्रा भी थी। मैं यहां इसलिए आया क्योंकि मेरा मानना था कि सेशेल्स हिंद महासागर के लिए भारत के दृष्टिकोण में एक विशेष स्थान रखता है। आज, जब मैं एक दशक बाद यहां फिर आया हूं, तो वह दृढ़ विश्वास पहले से कहीं अधिक मजबूत हुआ है।

और आप जब अपनी स्वतंत्रता के पचास वर्ष पूरे होने का उत्सव मना रहे हैं तो मुझे आपके साथ जुड़कर प्रसन्नता हो रही है। इस विशेष अवसर पर आपको और सेशेल्स के लोगों को शुभकामनाएं।

माननीय सदस्यगण,

इस नेशनल असेंबली को संबोधित करना एक दुर्लभ विशेषाधिकार है। इस विशेष सम्मान के लिए आपका धन्यवाद। मैं इस अवसर पर इस आठवीं नेशनल असेंबली के नवनिर्वाचित सदस्यों को बधाई देता हूं। अध्यक्ष महोदया, इस प्रतिष्ठित सदन की पहली महिला अध्यक्ष बनने पर मैं आपको भी शुभकामनाएं देता हूं।

माननीय सदस्यगण,

आज यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि हमारी दोस्ती पचास साल पहले हमारे राजनयिक संबंधों की स्थापना के साथ शुरू नहीं हुई थी। इसकी शुरुआत बहुत पहले हो गई थी। अगस्त 1770 में, सेंट ऐनी द्वीप पर थेलेमाक जहाज पर सवार होने वालों में पांच भारतीय थे। उस यात्रा ने कई और लोगों को रास्ता दिखाया जो उसका अनुसरण कर रहे थे। समय के साथ, उनकी कहानियाँ आधुनिक सेशेल्स की कहानी का हिस्सा बन गईं।

यह हमें याद दिलाता है कि हमारे बीच के बंधन सरकारों द्वारा नहीं बनाए गए थे। वे लोगों द्वारा बनाए गए थे, परिवारों द्वारा पोषित किए गए थे और पीढ़ियों तक कायम रहे। हिंद महासागर ने इसे संभव बनाया। हिंद महासागर भारत और सेशेल्स को अलग नहीं करता है। यह हमें जोड़ता है। इसीलिए हम अजनबी बनकर नहीं मिलते बल्कि हम पुराने दोस्त के रूप में मिलते हैं।

माननीय सदस्यगण,

सेशेल्स की सबसे बड़ी शक्ति वहां के लोग हैं। पीढ़ियों से, दुनिया के सभी हिस्सों से लोग यहां पहुंचे। वे अपने साथ विभिन्न भाषाएँ, रीति-रिवाज, मान्यताएँ और परंपराएँ लेकर आये। और साथ में, उन्होंने एक साझा पहचान बनाई जो गर्व से सेशेलोइस है।

जैसा कि इस नेशनल असेंबली का आदर्श वाक्य है - विविधता में एकता। इसे क्रियोल संगीत की धुनों में सुना जा सकता है। इसे मौत्या नृत्य की लय में देखा जा सकता है। इसे फेस्टिवल क्रेओल के दौरान अनुभव किया जा सकता है।

जब राष्ट्र अपनी विरासत की समृद्धि का उत्सव मनाता है, तो हमारी संस्कृतियों के बीच संबंध रोजमर्रा की जिंदगी में भी दिखाई देते हैं। इन्हें कारी कोको, समोसा और चटनी के स्वाद में महसूस किया जा सकता है। वे नवरात्रि के दौरान गरबा नृत्य, दीपावली और थाई पोंगल के उत्सवों में पाए जा सकते हैं। यह क्रियोल भावना है जो हमें अपनी दोस्ती के भविष्य में बहुत आत्मविश्वास देती है।

माननीय सदस्यगण,

समुद्री पड़ोसियों के रूप में, हम मानते हैं कि एक की सुरक्षा दूसरे की सुरक्षा में वृद्धि करती है। एक की समृद्धि दूसरे की समृद्धि में योगदान करती है और क्षेत्र की स्थिरता से हम सभी को लाभ होता है।

यह वर्ष हमारी साझेदारी की मज़बूती का एक शक्तिशाली अनुस्मारक प्रदान करता है। पचास साल पहले, आपकी आजादी की शुरुआत में, एक भारतीय नौसैनिक जहाज, आईएनएस नीलगिरि, दोस्ती और एकजुटता के प्रतीक के रूप में पोर्ट विक्टोरिया में मौजूद था। और आज, आईएनएस तरकश और आईएनएस इक्षक आपके साथ स्वर्ण जयंती का उत्सव मनाने के लिए पोर्ट विक्टोरिया में मौजूद हैं।

पचास साल बीतने से कई चीजें बदल गई हैं। लेकिन इससे एक-दूसरे के लिए हमारी प्रतिबद्धता नहीं बदली है। दशकों से, हमारे रक्षा बलों, तट रक्षकों और समुद्री एजेंसियों ने एक साथ मिलकर प्रशिक्षण के साथ काम किया है। भारत सेशेल्स रक्षा बलों और सेशेल्स तट रक्षक की व्यावसायिकता और समर्पण को गहराई से महत्व देता है। वे आपके अपने विशाल समुद्री क्षेत्र के साथ-साथ व्यापक हिंद महासागर क्षेत्र की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। समुद्री सुरक्षा, क्षमता निर्माण, हाइड्रोग्राफी और समुद्री क्षेत्र की जागरूकता में हमारा सहयोग एक सुरक्षित और अधिक सुरक्षित क्षेत्र के लिए हमारी साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

मैंने आज सुबह राष्ट्रपति एर्मिनी - टन पैट - से मुलाकात की और हमारी साझेदारी में हासिल की गई उल्लेखनीय प्रगति की समीक्षा की। हमने भविष्य के लिए अपने साझा दृष्टिकोण पर भी चर्चा की। हमारा दृष्टिकोण महासागर के विचार - क्षेत्रों में सुरक्षा और विकास के लिए पारस्परिक और समग्र उन्नति में शामिल है।

यह दृष्टिकोण मानता है कि हमारा भविष्य आपस में जुड़ा हुआ और एक-दूसरे पर निर्भर है। और, हम एक सुरक्षित तथा अधिक सुरक्षित हिंद महासागर क्षेत्र के लिए मिलकर काम करना जारी रखेंगे।

माननीय सदस्यगण,

जब लोग मानचित्र को देखते हैं, तो वे सेशेल्स को हिंद महासागर में द्वीपों के एक समूह के रूप में देख सकते हैं। लेकिन हम कुछ ज्यादा ही बड़ा देखते हैं। हम एक ऐसे राष्ट्र को देखते हैं जिसका क्षितिज उसके तटों से कहीं आगे तक फैला हुआ है। आपका समुद्री क्षेत्र लगभग 1.4 मिलियन वर्ग किलोमीटर तक फैला हुआ है।

यह सेशेल्स को एक छोटा द्वीप देश नहीं - बल्कि एक बड़ा महासागरीय देश बनाता है। समुद्री अर्थव्यवस्था के वैश्विक चर्चाओं का हिस्सा बनने से बहुत पहले, सेशेल्स पहले से ही इसका नेतृत्व कर रहा था। चाहे समुद्री इकोसिस्टम की रक्षा करना हो या ब्लू बॉन्ड्स जैसे नवाचारों को आगे बढ़ाना हो, आपके देश ने महत्वपूर्ण वैश्विक वार्तालापों को आकार देने में सहायता की है। साथ मिलकर, हम मत्स्य पालन, समुद्री विज्ञान, तटीय प्रबंधन, नवीकरणीय ऊर्जा और टिकाऊ पर्यटन में साझेदारी कर सकते हैं।

मुझे कल, प्रतिष्ठित कोको डे मेर पेड़ का पौधा लगाने का सम्मान मिला। सेशेल्स की तरह ही - यह अद्वितीय, मूल्यवान है और दुनिया में एक विशेष स्थान रखता है। इस प्राकृतिक आश्चर्य की रक्षा और संरक्षण के लिए आपके द्वारा किए जा रहे प्रयास एक बड़े दर्शन को प्रदर्शित करते हैं - कि मानवता को प्रकृति के साथ सद्भाव में रहना चाहिए।

यह भावना भारत में भी गहराई से प्रतिध्वनित होती है। आइए हम यह सुनिश्चित करने के लिए मिलकर काम करें कि आने वाली पीढ़ियों को ऐसे महासागर विरासत में मिलें जो उन महासागरों की तुलना में अधिक स्वस्थ, सुरक्षित और प्रचुर मात्रा में हों जिनका हम आज आनंद ले रहे हैं।

माननीय सदस्यगण,

ग्लोबल साउथ और विशेष रूप से द्वीप राष्ट्र, जलवायु परिवर्तन से सबसे अधिक प्रभावित हैं। इसका प्रभाव हमारी तटरेखाओं, समुद्री इकोसिस्टम, मौसम के मिजाज और हमारे समुदायों पर पहले से ही दिखाई दे रहा है। हम दोनों का दृढ़ विश्वास है कि जिन लोगों ने जलवायु परिवर्तन में सबसे कम योगदान दिया है, उन्हें इसके परिणामों का सबसे बड़ा बोझ नहीं उठाना चाहिए।

जलवायु कार्रवाई को निष्पक्षता, जिम्मेदारी और समानता द्वारा निर्देशित किया जाना चाहिए। यही जलवायु न्याय का सार है।

भारत ने उदाहरण पेश करके नेतृत्व करने की कोशिश की है। पिछले दशक में, हमने नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में दुनिया के सबसे बड़े विस्तार की दिशा में कार्य किया है। हमने मिशन लाइफ यानी पर्यावरण के अनुकूल जीवनशैली के माध्यम से स्थायी जीवन शैली का समर्थन किया है। अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन, आपदा प्रतिरोधी बुनियादी ढांचे के लिए गठबंधन, वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन और एक पेड माँ के नाम जैसी हमारी पहलों के माध्यम से हमने हरित संक्रमण को बढ़ावा देने के लिए भागीदार देशों के साथ काम किया है।

भारत सेशेल्स के साथ काम करना जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि छोटे द्वीप विकासशील देशों की चिंताओं पर उस प्रकार ध्यान दिया जाए जिसके वे हकदार हैं।

माननीय सदस्यगण,

सेशेल्स और भारत दोनों एक ऐसी दुनिया चाहते हैं जहां विकास अधिक समावेशी हो। हम दोनों एक ऐसी दुनिया की तलाश में हैं जहां अंतरराष्ट्रीय संस्थान समकालीन वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित करें। हमारा मानना है कि हमारे साझा भविष्य को सामूहिक, समावेशी और निष्पक्ष रूप से आकार दिया जाना चाहिए।

इस विश्वास ने हमारे जी-20 की अध्यक्षता के दौरान भारत के प्रयासों को निर्देशित किया। इसी भावना से हमने ग्लोबल साउथ की प्राथमिकताओं को अंतरराष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में रखने के लिए काम किया। इसी भावना से हमने जी-20 के स्थायी सदस्य के रूप में अफ्रीकी संघ का स्वागत किया। यही वह भावना है जो ग्लोबल साउथ को एकजुट करती है और यही परिकल्पना है कि भारत और सेशल्स एक साथ आगे बढ़ते रहेंगे।

माननीय सदस्यगण,

जैसा कि हम पिछले पचास वर्षों की उपलब्धियों का उत्सव मना रहे हैं, हमें आगे भी देखना चाहिए। सेशेल्स का भविष्य उसके युवाओं द्वारा आकार लिया जाएगा। हमें गर्व है कि सेशेल्स के विद्यार्थियों, पेशेवरों, अधिकारियों और सुरक्षा बलों ने दशकों तक भारत में प्रशिक्षण और अध्ययन किया है।

वास्तव में, यह कहा जाता है कि सेशेल्स में हर पचास लोगों में से एक ने भारत में कुछ प्रशिक्षण प्राप्त किया है। वे कौशल, दोस्ती और अनुभवों के साथ घर लौटे हैं जो आज भी हमारी साझेदारी को मजबूत कर रहे हैं।

मुझे युवाओं के लिए इंटर्नशिप प्रदान करने की आपकी इग्नाइट पहल के बारे में जानकर खुशी हुई। यह एक उत्कृष्ट रूपरेखा है और हम इस क्षेत्र में सहयोग के लिए नए रास्ते तलाश सकते हैं।

इस तरह के सहयोग का मुख्य फोकस क्षेत्र डिजिटल नवाचार हो सकता है। भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (डीपीआई) ने प्रदर्शित किया है कि कैसे प्रौद्योगिकी अवसर का विस्तार कर सकती है, शासन में सुधार कर सकती है, वित्तीय समावेशन को बढ़ावा दे सकती है और करोड़ों लोगों के लिए सेवाएं प्रदान कर सकती है।

हमें अपने अनुभवों और विशेषज्ञता को साझा करने में खुशी होगी क्योंकि आप अपने स्वयं के डिजिटल परिवर्तन को आगे बढ़ा रहे हैं। मुझे विश्वास है कि सेशेल्स के युवा इन अवसरों को उसी दृढ़ संकल्प के साथ अपनाएंगे जिसने स्वतंत्रता के पहले पचास वर्षों का मार्गदर्शन किया था।

माननीय सदस्यगण,

आज, जैसा कि मैं इस ऐतिहासिक स्वर्ण जयंती वर्ष में आपके सामने उपस्थित हूं, हमारे लोग ढाई शताब्दियों से भी अधिक पुरानी दोस्ती का उत्सव मना रहे हैं। कुछ साझेदारियाँ इतनी गहरी नींव पर बनी होती हैं। और इतनी गर्मजोशी, विश्वास और सद्भावना के साथ कुछ साझेदारियाँ बढ़ी हैं।

जैसे-जैसे हम भविष्य की ओर देखते हैं, आइए हम इन नींवों पर निर्माण करना जारी रखें। भारत आपका विश्वसनीय भागीदार बना रहेगा। हम आपकी उपलब्धियों का उत्सव मनाएंगे। हम आपकी आकांक्षाओं का समर्थन करेंगे। और हम आपके साथ एक दोस्त के रूप में उपस्थित रहेंगे।

पिछले पचास साल उल्लेखनीय रहे हैं। लेकिन मेरा दृढ़ विश्वास है कि सेशेल्स की कहानी के सबसे अच्छे अध्याय अभी लिखे जाने बाकी हैं। और हमारी सबसे अच्छी दोस्ती अभी होनी शेष है।