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विशाल संख्‍या में पधारे हुए सभी प्‍यारे भाईयों और बहनों और विशेष रूप से महाराष्‍ट्र से आये मित्रों को भी नमस्कार,

बोले सो निहाल..सत् श्री अकाल! शहीदों..अमर रहो! शहीदो..अमर रहो! शहीदों..अमर रहो!

आज मेरे लिए बड़ी प्रेरक घड़ी है। एक नई प्रेरणा जिनका नाम कानों पर पड़ते ही देश के हर नागरिक को मिलती है ऐसे सरदार भगत सिंह जी, सुखदेव, राजगुरू, बटूकेश्‍वर दत्‍त और भगत‍ सिंह जी की माता जी, जिस धरती पर एक वीर माता के साथ भारत माँ के प्‍यारे लाड़ले चार वीरों की समाधि को नमन करने का मुझे अवसर प्राप्‍त हुआ है। यह पंजाब की धरती की विशेषता है। इस धरती ने, आजादी के जंग में सबसे ज्‍यादा बलिदान दिया है। देश की रक्षा के लिए सीमा पर मोर्चा संभालते हुए अनेक वीर जवानों ने शहादत दी है।..और देश को आगे बढ़ाने के लिए यहां के किसानों ने अपना पसीना बहाकर के देश के अन्‍न भंडार भर दिये। यह ऐसी धरती है, जहां आजादी के पहले भी यहां के लोग देश के लिए जिए और आजादी के बाद भी देश के लिए जी रहे हैं। मैं इस धरती को, यहां के सभी वीरों को, यहां के सभी वीर माताओं को आदरपूर्वक नमन करता हूं।

अंग्रेजों ने.. उनको भगत सिंह का भय कितना रहता था.. तय तो यह हुआ था कि 24 मार्च को भगत सिंह जी को फांसी दे दी जाएगी। लेकिन घबराई हुई अंग्रेजी सल्‍तनत ने सारे नियमों का उल्‍लंघन करते हुए, सारी परंपराओं को तोड़ते हुए, चोरी छिपे से सरदार भगत सिंह जी को फांसी दी। और इतना ही नहीं, वो शरीर उनके परिवारजनों को देने की बजाय लाहौर जेल से लाकर के यहां पर किसी भी सम्‍मान के बिना मिट्टी के तेल में और अगल-बगल से कूड़ा कचरा इकट्ठा करके उनके शरीर को जला देने का काम उस सल्‍तनत ने किया। यही धरती है, यहां पर उनका शरीर विलीन हो गया। मैं आज भगत सिंह, सुखदेव राजगुरू.. उन वीरों की उस महान परंपरा को प्रणाम करने आया हूं।

भाईयों-बहनों आज हिंदुस्‍तान में किसी एक नाम को सुनते ही हिंदुस्‍तान के हर कोने में जवान, वृद्ध सबको चेतना जग जाती है, प्रेरणा मिल जाती है, वो नाम है सरदार भगत सिंह। उस नाम में वो ताकत है, जो आज भी देश के नौजवानों को देश के लिए जीने-मरने की प्रेरणा देता है। ऐसे महापुरूषों ने बलिदान दिया, तब जाकर के देश आजाद हुआ। उनके सपनों को पूरा करना.. और उन सपनों को पूरा करने के लिए जैसा भारत उन्‍होंने चाहा था वैसा भारत बनाने के लिए हम जितना करे उतना कम है।

हमारा गांव आबाद हो, हमारा किसान खुशहाल हो, हमारे नौजवान को रोजगार हो, दलित, पीडि़त, शोषित, वंचित, गांव, गरीब, शहर के मजदूर, उनके जीवन में बदलाव आए। जब तक हम देश में यह बदलाव नहीं लाते हैं, तब तक देश के लिए बलिदान देने वाले महापुरूषों को सच्‍ची श्रद्धांजलि अधूरी रहेगी।

भाईयों-बहनों हमारा सपना भी है, हमारा कर्तव्‍य भी है कि हम इस भारत मां को सुजलाम, सुफलाम बनाए। यह भारत मां, यहां के नौजवान अपनी आशा-आकांक्षा के अनुरूप जीवन में नई ऊंचाईयों को पार कर सके, हरेक को अवसर मिले विकास का, ऐसे देश को नई ऊंचाईयों पर ले जाने का प्रयास, हम सबका दायित्‍व बनता है। तब जाकर के इन महापुरूषों को सच्‍ची श्रद्धांजलि होगी।

हमने सपना देखा है – 2022! जब भारत की आजादी के 75 साल पूरे होंगे। हमारे देश में 75 साल एक अमृत पर्व होता है। इस अमृत पर्व का विशेष महत्‍व होता है। क्‍या हम 2022 में जब अमृत पर्व मनाएं तब इस देश में कोई भी परिवार ऐसा न हो, जिसके पास रहने के लिए अपना घर न हो।

भाईयों-बहनों आज भगत सिंह जी की समाधि पर मैं आया हूं। उस महापुरूष के बलिदान को याद करता हूं और मन करता है जी-जान से जुट जाएं देश के गरीब से गरीब व्‍यक्ति को भी.. जब आजादी का अमृत पर्व मनाएं तब उसका अपना घर मिल जाए। 2019! महात्‍मा गांधी के 150 साल पूरे होंगे। महात्‍मा गांधी के 150 साल कैसे मनाएं? क्‍या हमारे देश के महापुरूषों को हम स्‍वच्‍छ भारत नजराने के रूप में नहीं दे सकते? क्‍या यह भारत के सवा सौ करोड़ नागरिकों की जिम्‍मेवारी नहीं है कि हमारी भारत माता जिसके लिए इतने लोगों ने बलिदान दिये उसे हम स्‍वच्‍छ तो रखे, साफ-सुथरी रखें इस दायित्‍व को हम निभाएं और स्‍वच्‍छ भारत का सपना महात्‍मा गांधी के 150 साल पूरा होने के अवसर पर हम पूरा करें। हर गांव, हर गली, हर गली, हर परिवार, हर कोई अपने दायित्‍व को निभाएं।

और आज 23 मार्च ! राम मनोहर लोहिया जी का भी जन्‍म जयंती का अवसर है। राम मनोहर लोहिया जी एक ऐसे राजपुरूष थे, जब वो राजनीतिक आंदोलन चलाते थे, तो अपनी विचारधारा के साथ-साथ एक बात का ख्‍याल रखते थे। वे स्‍वच्‍छता का आंदोलन अपनी जवानी में चलाए करते थे। राम मनोहर लोहिया स्‍वच्‍छता का आंदोलन लगातार चलाया करते थे। आज उनकी भी जयंती है, भगत सिंह की शहादत का पर्व है और भारत माता के लिए जीने वाले इन लोगों को जब याद करते हैं तब हमारी भारत माता स्‍वच्‍छ हो, विकास की नई ऊंचाईयों को पार करने वाला हर नागरिक को अवसर हो। इस दिशा में हम आगे बढ़ना चाहते हैं।

मेरे किसान भाईयों-बहनों पंजाब ने देश को भूख से बचाया है। देश को अन्‍न देने का पुण्‍य का काम पंजाब के किसान ने किया है लेकिन आज पंजाब में पानी जमीन में गहरा होता जा रहा है। Danger रेखा से भी नीचे चला गया है। पानी परमात्‍मा का दिया हुआ प्रसाद है। पानी को बचाए बिना, हम न खेती बचा सकते हैं, न जीवन बचा सकते हैं और इसलिए मैं पंजाब के किसान भाईयो-बहनों से आग्रह करूंगा कि हम फसल पैदा करे, आधुनिक विज्ञान का प्रयोग करें। Per drop more crop, micro irrigation, टपक सिंचाई हो, स्प्रिंक्‍लर हो। बहुत सारी चींजें आज विज्ञान ने स्‍वीकार की है। कभी-कभी जब तक हमारा किसान, खेत पानी से लबालब भरा न हो तब तक उसकी आंखों को चैन नहीं पड़ता। उसको लगता है कि पूरा खेत पानी से पूरी तरह भरा होगा, तभी फसल होगी।

मेरे किसान भाईयों-बहनों मैं भी गरीब परिवार का.. मैंने इन सारी चीजों को निकट से देखा है और इसलिए मैं आपको कहता हूं कि विज्ञान बदल चुका है और इसलिए मैं आपको एक छोटी सी बात बताऊं। अगर कोई बालक घर में बीमार रहता है, वजन नहीं बढ़ता है, चेहरे पर मुस्‍कान नजर नहीं आती है, दुबला-पतला रहता है और मां-बाप की इच्‍छा रहती है कि बेटा तंदरूस्‍त हो, वजन बढ़े, दौड़े-कूदे। मां-बाप ऐसे में बादाम, केसर, पिस्‍ता यह डालकर के बाल्‍टी भर दूध रोज, बाल्‍टी भर दूध से उस बच्‍चे को अगर नहला दें तो वजन बढ़ेगा क्‍या? चेहरे पर मुस्‍कान आएगी क्‍या? तबियत ठीक होगी क्‍या? आप भी जानते हैं नहीं होगी। केसर, पिस्‍ता, बादाम वाला दूध हो, बाल्‍टी भर दूध हो, रोज दूध से नहलाते हो, लेकिन उसके शरीर में कुछ नहीं होगा। लेकिन अगर समझदार मां-बाप चम्‍मच से, एक चम्‍मच दूध पिलाएंगे, रोज 10 चम्‍मच, 15 चम्‍मच, 20 चम्‍मच पिलाना शुरू कर देंगे, तो बच्‍चे का वजन बढ़ने लगेगा। शरीर तंदरूस्‍त होगा। जो स्‍वभाव बच्‍चे का होता है, वही स्‍वभाव फसल का होता है और इसलिए फसल को ढेर सारा पानी देने से फसल अच्‍छी होती है, ऐसे पुराने विचारों को छोड़ना पड़ेगा। बूंद-बूंद पानी पिलाना से फसल ज्‍यादा होगी, अच्‍छी होगी, कम जमीन में भी ज्‍यादा पैदावार होगी और तब जाकर के पंजाब में जो पानी नीचे चला जा रहा है, वो पानी ऊपर आएगा। मेरे भाईयों बहनों बरसात का पानी, बूंद-बूंद पानी बचाएंगे, जमीन में उसको वापस डालेंगे, तभी जाकर के पंजाब की पानी की समस्‍या का समाधान कर पाएंगे।

हमारे पास नहरों का इतना बड़ा नेटवर्क है, लेकिन जितनी मात्रा में पानी जाना चाहिए उतना जा नहीं रहा है। शुरू के इलाके में तो पानी पहुंचता है लेकिन नहर का जहां आखिरी इलाका है, वहां पानी नहीं पहुंचता। हमने एक योजना बनाई है-‘प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना’। इस योजना के तहत हमारा सपना है कि हिंदुस्‍तान के हर किसान के खेत तक पानी पहुंचाया जाए, नदियों को जोड़ा जाए, नहरों को ठीक किया जाए, नई नहरों को बनाया जाए। अगर किसान को पानी पहुंच गया तो मैं विश्‍वास दिलाता हूं मिट्टी में से सोना पैदा करने की ताकत मेरे किसान भाईयों-बहनों में हैं और वो हिंदुस्‍तान के आर्थिक स्थिति को बदल सकते हैं। उस काम की और हमें जाना है।

मुझे आज मेरे किसान भाईयों-बहनों को मेरी एक चिंता भी मुझे बतानी है और वो चिंता.. मैं देख रहा हूं कि ज्‍यादा फसल के मोह में आज हम ऐसी-ऐसी गलतियां कर रहे हैं कि जिसके कारण हमारी जमीन बर्बाद हो गई है। जमीन अपनी ताकत खो रही है। अगर धरती माता अपनी ताकत खो देगी तो इस धरती पर पलने वाले बच्‍चों का पालन-पोषण कैसे होगा। हम जिस प्रकार से Chemical Fertilizer का उपयोग करते हैं.. पंजाब का क्‍या हाल करके रखा है किसान भाईयों-बहनों हमने! कितनी मात्रा में, कौन सा खाद डालना चाहिए.. हम कैसी बड़ी गलती कर रहे हैं। वैज्ञानिकों का कहना है, विज्ञान में सिद्ध हुआ है कि जितना पोटाश का उपयोग करते हैं उससे चार गुना से ज्‍यादा नाइट्रोजन का उपयोग फसल भी बर्बाद करता है, जमीन भी बर्बाद करता है। चार गुना से कम नाइट्रोजन उपयोग करना चाहिए लेकिन हमारे पंजाब में कितना उपयोग होता है, आपको मालूम है? 57 गुना! आप कल्‍पना कर सकते हैं जैसे परिवार में दवाई देनी है, लेकिन ज्‍यादा dose दे दें तो मौत भी हो जाती है वैसे नाइट्रोजन इतना गुना डालने के कारण हमारी फसल और हमारी जमीन सबको हम बर्बाद कर देते हैं। मैं पंजाब के किसानों से आग्रह करता हूं कि आप देश को दिशा दीजिए, आप देश का नेतृत्‍व कीजिए और तय कीजिए कि जितने अनुपात में Fertilizer चाहिए उससे ज्‍यादा डालने का पाप हम नहीं करेंगे, हम ऐसी गलती नहीं करेंगे। इतना ही नहीं पोटाश से फास्‍फोरस डब्‍बल से ज्‍यादा उपयोग नहीं करना चाहिए, वरना खेती बर्बाद हो जाती है। लेकिन हम क्‍या करते हैं, पंजाब के अंदर पोटास से फास्‍फोरस का उपयोग 13 गुना करते हैं। जबकि दो गुना से ज्‍यादा नहीं करना चाहिए। मुझे बताइये मेरे किसान बहनों-भाईयों कि पंजाब, पंजाब का गांव, पंजाब का किसान, पंजाब की फसल जिस पर पूरा हिंदुस्‍तान जी रहा है अगर वही बर्बाद हो जाएगा तो पूरा देश भूख मर जाएगा और इसलिए मेरे किसान भाईयों-बहनों मैं आपसे आग्रह करने आया हूं कि आप विज्ञान, आधुनिक यंत्र.. और जिसमें सरकार पूरी मदद करती है.. आप इसका सही उपयोग करें। इसका दुरूपयोग तत्‍काल तो हमें अच्‍छा लगता है, लेकिन लम्‍बे समय के लिए हमारा बहुत नुकसान करता है और इसलिए मेरे किसान भाईयों-बहनों इससे बचकर रहना चाहिए यह मैं विशेष रूप से आग्रह करना चाहता हूं।

सरकार ने किसानों के लिए एक महत्‍वपूर्ण योजना बनाई है। इस योजना को हमने लागू किया है और आप तक हम पहुंचाना चाहते हैं और वो है – Soil Health Card. जैसे नागरिक का Health Card होता है, उसका शरीर कैसा, Blood कैसा, तबियत कैसी है, कमियां क्‍या है, वो सब Health Card से पता चलता है। वैसा ही जैसे इंसान के शरीर का स्‍वभाव है, वैसा ही जमीन का भी स्‍वभाव है। जमीन को भी बीमारियां होती है, जमीन में भी कमियां होती हैं लेकिन हमें पता नहीं होता और उसके कारण हम.. जमीन का किसके लिए उपयोग करना चाहिए, नहीं कर पाते। इस बात को समझाने के लिए गांव-गांव किसानों को Soil Health Card देने की सरकार ने योजना बनाई है। आपकी जमीन कैसी है, आपकी जमीन की तबियत कैसी है, आपकी जमीन में कौन सी कमियां है, आपकी जमीन में कौन सी फसल अच्‍छी हो सकती है, आपको अगर दवाई डालनी है तो कौन सी दवाई की जरूरत है, आपको अगर Fertilizer डालना है तो कौन सा Fertilizer डालना है, कितना डालना है यह सारी बातें Soil Health Card से पता चलती हैं और यदि किसान Soil Health Card से योजना करके चलता है तो मैं विश्‍वास दिलाता हूं मेरे किसान बहनों-भाईयों छोटे किसान को भी साल का 40-50 रुपया, जो ज्ञान के अभाव के रूप में फालतू में खर्चा होता है, वो बच जाएगा। मेरे किसान को बहुत बड़ा फायदा होगा। इसलिए यह बहुत बडा काम पूरे देश में हमने चलाया है Soil Health Card का। और मुझे विश्‍वास है कि हमारे पंजाब के किसान भी इस बात की चिंता करेंगे।

मेरे किसान भाईयों बहनों एक तो पिछले साल बारिश कम हुई। हिंदुस्‍तान के कई राज्‍यों में कम बारिश के कारण किसानों को नुकसान हुआ, कहीं पर सूखा पड़ा गया और ऊपर से अभी-अभी ओले गिरे। मैं जानता हूं कि किसानों पर कितनी बड़ी आपत्ति आई होगी। मैंने भारत सरकार के अधिकारियों को, मंत्रियों को आदेश दिए हैं, सर्वे का काम शुरू हुआ है, राज्य सरकार और भारत सरकार मिलकर के आपके इस संकट की घड़ी में आपके साथ हैं। आपको जो नुकसान हुआ है.. हमारा किसान टिक सके.. जितनी भी मदद सरकार कर सकती है उसमें सरकार किसी भी हालत में पीछे नहीं रहेगी। यह मैं आपको विश्‍वास दिलाना चाहता हूं।

मेरे भाईयों-बहनों आज जब मैं सरदार भगत सिंह जी की शाहदत के इस पावन पर्व पर, इस पवित्र धरती पर आया हूं, तब मैं.. सरकार ने बजट में घोषणा की है.. क्‍योंकि पंजाब और किसान का अटूट नाता है और इसलिए अमृतसर में किसानों के लिए उपयोगी हो ऐसी Institute for Horticulture Education इसका आरंभ किया जाएगा और आज मैं जब यहां आया हूं तब इस नये Institute को हम सरदार भगत सिंह Post Graduate Institute for Horticulture Research and Education इस रूप में निर्माण करेंगे ताकि पंजाब किसान की जो नई पीढ़ी है उसके कारण उसको लाभ मिलेगा।

भाईयों बहनों भारत सरकार की यह सोच है कि अगर देश को आगे बढ़ाना है तो राज्‍यों को आगे बढ़ाना पड़ेगा। अगर हमारे राज्‍य मजबूत नहीं होंगे तो देश मजबूत नहीं होगा। अगर राज्‍य आगे नहीं बढ़ेंगें तो देश आगे नहीं बढ़ेगा और इसलिए हमारी सरकार की हर योजना राज्‍यों को मजबूत बनाने के लिए है। अभी इस बार 14th Finance Commission की रिपोर्ट के आधार पर अकेले पंजाब को कितना बड़ा लाभ होने वाला है। पंजाब इन रुपयों का सही इस्‍तेमाल करके कितना आगे बढ़ सकता है इसका मैं भली-भांति अंदाज कर सकता हूं और मुझे विश्‍वास है कि बादल साहब के नेतृत्‍व में प्रगतिशील निर्णयों के द्वारा पंजाब के जीवन को बदलने में यह रकम बहुत काम आने वाली है। पहले पिछली पंचवर्षीय योजना में भारत सरकार की तरफ से पंचवर्षीय योजना के तहत पंजाब को 20 हजार करोड़ रुपये मिले थे। भाईयों-बहनों आने वाले पांच साल के लिए यह रकम बढा़कर के 54 हजार करोड़ रुपये कर दी जाएगी, डबल से भी ज्‍यादा। इतना ही नहीं पंचायत और नगरपालिकाओं के लिए भारत सरकार ने पहले चार हजार करोड़ रुपया दिया था, इस बार हमने वो रकम बढा़कर के छह हजार करोड़ रुपये कर दी। जिसके कारण गांव के व्‍यक्ति को भी इसका फायदा पहुंचाने में काम आ जाएगी। इस बार भी पहले की तुलना में करीब-करीब चार हजार करोड़ रुपया ज्‍यादा, अतिरिक्‍त चार हजार रुपया पंजाब के विकास के लिए भारत सरकार की तिजोरी से आने वाला है।

स्थिति ऐसी हो गई है.. एक जमाना था कि दिल्‍ली के खजाने में देश की सभी तिजौरियों का करीब 60-65 प्रतिशत पैसा रहता था। राज्‍यों के पास 35-40 प्रतिशत रहता था। हमारे आने के बाद चित्र हमने बदल दिया है। अब राज्‍यों के पास करीब-करीब 60-62 प्रतिशत राशि रहेगी और केंद्र के पास सिर्फ 38% राशि रहेगी और राज्‍य मजबूत होंगे। राज्‍य विकास की नई ऊंचाईयों को पार करेंगे। उस दिशा में हम काम कर रहे हैं।

यहां पर रास्‍ते बनाने के लिए भारत सरकार की जो योजनाएं हैं.. रेल को बढ़ाने के लिए.. आज मेरे लिए खुशी की बात है कि अमृतसर से आनंदपुर साहब रेलवे की योजना का साकार रूप हमारे सामने खड़ा हुआ है। यह गर्व की बात है। आनंदपुर साहब यात्रियों के लिए एक मुख्‍य धाम है और किसी को भी हिमाचल में भी किसी जगह जाना है तो आनंदपुर साहब से ही जाते हैं। चिंतपुरणी जाना है, ज्‍वालाजी जाना है तो यहीं से जाते हैं। इस पूरे इलाके को इसका लाभ मिलने वाला है। एक प्रकार से विकास की नई ऊंचाईयों को पार करने की दिशा में हम लगातार प्रयासरत है।

..और मैं आपको विश्‍वास दिलाता हूं, मेरे पंजाब के किसान भाईयों-बहनों, आपने कभी सोचा था.. किसान 60 साल के बाद.. उसको कभी पेंशन मिल सकता है। सरकारी मुलाजिम को तो पेंशन मिल जाता है। किसान को पेंशन मिल सकता है क्‍या? 60 साल के बाद हर महीना उसको चैक मिल सकता है क्‍या? मेरे किसान भाईयों-बहनों इस बार भारत सरकार ने एक योजना बनाई है जिसमें Public Private Partnership के modal पर.. किसान को.. 60 साल के बाद अगर वो इस योजना से जुड़ जाता है, तो उसको हर महीना पांच हजार रुपया पेंशन की राशि मिल सकती है। हमारे देश के किसान का बुढ़ापा भी सुख, शांति और गौरव से बीते उस दिशा में काम करने का एक अहम कदम इस बार हमने बजट में उठाया है।

भाईयों-बहनों इन दिनों किसान को गुमराह करने के लिए भांति-भांति के प्रयास हुए हैं। कल मैंने रेडियो पर मेरी “मन की बात” में, किसानों ने जितने सवाल पूछे थे, सारे सवालों के मैंने जवाब दिये और मैं किसानों को विश्‍वास दिलाता हूं कि अगर इस देश को आगे बढ़ना है तो किसान की रक्षा करनी होगी, गांव का भला करना होगा, लेकिन साथ-साथ किसान के बेटों के लिए भी चिंता करनी होगी। किसान के बेटे को रोजगार चाहिए। आज सेना में जितने जवान हैं वो कौन है? 80% से ज्‍यादा जवान किसान मां-बाप के बेटे हैं। किसान अपने बेटे को सेना में भर्ती करता है, युद्ध के लिए भेजता है। उसे मालूम है कि अगर परिवार में तीन बच्‍चे हैं तो तीनों का जीवन आज खेती से गुजरता नहीं है। हर किसान को पूछो कि भई आपके तीन बेटे हैं क्‍या चाहते हो? हर किसान कहता है – एक बेटा तो खेती करेगा लेकिन दो को तो कहीं भेजना चाहता हूं, कहीं नौकरी कर ले, रोजी-रोटी कमा ले, पढ़-लिख करके अपना करोबार चला ले। हर किसान की यह चिंता है। अगर विकास नहीं होगा तो किसान के बच्‍चों का क्‍या होगा? क्‍या मेरे किसान के बच्‍चे दिल्‍ली और मुंबई की झुग्‍गी-झोपड़ी में जिंदगी गुजारने के लिए मजबूर होने चाहिए?

किसान के बच्‍चों को भी रोजगार चाहिए, किसान के बेटों का भी भला होना चाहिए और इसलिए मेरे भाईयों-बहनों हमारी सरकार किसान का तो भला चाहती है, गांव का भी भला चाहती है, किसान के बच्‍चों का भी भला चाहती है। इस तरह एक लम्‍बी सोच के साथ, देश के विकास की ओर आगे बढ़ने की दिशा में हमने प्रयास किया है। आज वीर सरदार भगत सिंह जी के आशीर्वाद मिले, सुखदेव-राजगुरू के आशीर्वाद मिले, भगत‍ सिंह जी की माता जी के आशीर्वाद मिले, हमारा देश विकास की नई ऊंचाईयों को पार करे और नई ऊंचाईयों को पार करते-करते हम आगे बढ़े।

भाईयों बहनों हमारे देश को भ्रष्‍टाचार ने तबाह कर दिया, बर्बाद कर दिया। कैसा-कैसा भ्रष्‍टाचार हुआ है! मैं आपको बताना चाहता हूं.. कोयला.. जब मैं यहां चुनाव में आया था और कोयले की चोरी की बात कर रहा था तो हमारे पुराने लोग जो सरकार में बैठे थे, वे गुस्‍सा हो जाते थे। सीएजी ने कहा था एक लाख 76 हजार करोड़ रुपया, अकेले कोयले में घोटाला हुआ है। यह आंकड़ा इतना बड़ा था कि लोगों के गले नहीं उतरता था। लोगों को यह तो लगता था कि भ्रष्‍टाचार तो किया होगा इनकी आदत है, लेकिन इतना नहीं हो सकता। ऐसा लोग सोचते थे। कुछ लोग तो ऐसे थे जो कहते थे - जीरो थ्‍योरी, जीरो थ्‍योरी। एक नये पैसे का घोटाला नहीं हुआ यह कहते थे। भाईयों बहनों 204 कोयले की खदान भ्रष्‍टाचार के कारण गुस्‍से में आकर के सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दी। अब हमारे आते ही यह हुआ।

पाप उन्‍होंने किया था.. बिजली कारखाने बंद हो जाने की नौबत आ गई। कारखानों में कोयला नहीं जाएगा तो कारखाने बंद हो जाएंगे ऐसी स्थिति पैदा हो गई। लेकिन हमने ईमानदारी की, पारदर्शिता की, नीतियों की योजना की और हमने तय किया कि हम सार्वजनिक रूप से Auction करेंगे, नीलामी करेंगे। और जो भी लेना चाहता है वो नीलामी में बोले पैसा, जो ज्‍यादा पैसा देगा, उसको मिलेगा। भाईयों बहनों क्‍या हुआ! 204 में से अब तक सिर्फ 20 खदानों की नीलामी हुई है, अभी तो 180 खदानों की नीलामी बाकी है। 204 खदानों में एक लाख 76 हजार करोड़ के घोटाले की बात थी। लेकिन यह घोटाला तो उससे भी बड़ा निकला। 204 में से सिर्फ 20 की नीलामी हुई है और आपको जानकर के आनंद होगा कि दिल्‍ली में आपने ईमानदार सरकार बिठाई है। उसका परिणाम यह हुआ है कि अब तक करीब-करीब दो लाख करोड़ रुपया सरकारी खजाने में आना तय हो चुका है। 180 खदान बाकी हैं। सब खदाने जाएंगी तो कितना बड़ा भंडार मिलेगा, यह रुपया किसके काम आएगा? गांव के काम आएगा, गरीब के काम आएगा, किसान के काम आएगा। देश विकास की नई ऊंचाईयों पर जाएगा।

कोयला छोडि़ए, इन्‍होंने कोई जगह पाप करने के लिए छोड़ी नहीं भाईयों। सरदार भगत‍ सिंह जी आत्‍मा दुखी होती होगी इन लोगों के कारण। LED Bulb! बिजली बचाने के लिए LED Bulb लगाने की बात है। आपको मालूम है 2014 में सरकार ने LED Bulb कितने रुपये में खरीदे। करीब-करीब 300 रुपयों में एक बल्‍ब खरीदा। हमने उसमें गहराई से काम किया, Department को लगाया, व्‍यापक रूप से काम किया। कंपनियों को भी दबाया। कोई रुपया-पैसा देने की बात बंद करो, गरीब का भला करो और आपको जानकर के खुशी होगी कि जो LED का Bulb एक साल पहले कुछ सरकारों ने 300 रुपये में खरीदा था आज उसकी कीमत 80 रुपये में हमने लाकर के रख दी। एक बल्‍ब पर दो सौ-सवा दौ सौ रुपये, चोरी होते थे। करोड़ा बल्‍ब जाएंगे तो कितने रुपये जाते होंगे। भाईयों बहनों आपने हमें ईमानदारी के लिए बिठाया है, ईमानदारी से काम करने के लिए बिठाया है और उसका परिणाम है कि आज 300 रुपये में बिकने वाला बल्‍ब.. जो भ्रष्‍टाचार के कारण रुपये खाए जाते थे, हमने उसकी कीमत 80-85 रुपया लाकर के रख दी है। सरकार 80-85 रुपये में खरीदेगी और LED का Bulb पहुंचेगा और उसके कारण गरीब से गरीब के घर में बिजली की बचत होगी। किसी का 200 रुपये बचेगा, किसी का 400 रुपये बचेगा। गरीब का हमें आशीर्वाद मिलेगा।

भाईयों बहनों ईमानदारी, देशभक्ति, अगर काम करने का जज्‍बा लेकर के.. सिर्फ देश के लिए जीना, सिर्फ देश के लिए मरना इस संकल्‍प को लेकर के चलते हैं तो कितने उत्‍तम परिणाम आते हैं यह आपके सामने मौजूद है। मैं फिर एक बार.. बादल साहब ने जितने विषय रखे हैं उन सभी बातों पर भारत सरकार गंभीरता से सोचेगी, उनके साथ भी मैं विस्‍तार से बातें करूंगा और भारत सरकार पंजाब के लिए जितना ज्‍यादा कर सकती है करने में कभी पीछे नहीं रहेगी।

मेरा तो पंजाब से अनेक रूप से नाता है। एक तो मैं यहां कई वर्षों तक रहा हूं। एक प्रकार से मेरी शिक्षा-दीक्षा, राजनीतिक शिक्षा-दीक्षा का अवसर मुझे बादल साहब की उंगली पकड़कर के सीखने का मुझे अवसर मिला है। यह मेरा सौभाग्‍य रहा है। दूसरी बात, मेरा जन्‍म गुजरात में हुआ है और जो पहले पंच प्‍यारे थे, उन पहले पंच प्‍यारों में एक गुजरात के द्वारका का था और इसलिए मेरा तो आपके साथ खून का नाता है। इसलिए पंजाब के लिए मैं जो कुछ भी कर सकता हूं, मुझे करने में खुशी होगी। यह कर्ज चुकाने का अवसर मुझे मिला है। मैं उसे चुकाकर रहूंगा।

इसी एक बात के साथ फिर एक बार मेरे साथ पूरी ताकत से बोलिये – शहीदो..अमर रहो! शहीदों..अमर रहो! शहीदो..अमर रहो! धन्यवाद।

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October 05, 2022
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जै माता नैणा देविया री, जै बजिए बाबे री।
बिलासपुरा आल्यो... अऊं धन्य ओइ गया, आज्ज...मिंजो.....दशैरे रे, इस पावन मौके पर, माता नैणा देविया रे, आशीर्वादा ने, तुहाँ सारयां रे दर्शना रा सौभाग्य मिल्या! तुहाँ सारयां जो, मेरी राम-राम। कने एम्स री बड़ी-बड़ी बदाई।

हिमाचलचे राज्यपाल राजेंद्र आर्लेकरजी, हिमाचलचे लोकप्रिय मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर जी, भारतीय जनता पार्टीचे राष्ट्रीय अध्यक्ष, आपणा सर्वांचे मार्गदर्शक आणि याच भूमीचे सुपुत्र जेपी नड्डाजी, केंद्रीय मंत्रिमंडळातील माझे सहकारी आणि आपले खासदार अनुराग ठाकुरजी, हिमाचल भाजपाचे अध्यक्ष आणि संसदेतील माझे सहकारी सुरेश कश्यपजी, संसदेतील माझे सहकारी किशन कपूरजी, इंदु गोस्वामीताई, डॉ सिकंदर कुमारजी, इतर मंत्री, खासदार आणि आमदार, आणि मोठ्या संख्येने आम्हा सर्वांना आशीर्वाद देण्यासाठी आलेल्या माझ्या प्रिय बंधू आणि भगिनींनो ! तुम्हा सर्वांना, सर्व देशवासियांना विजयादशमी निमित्त अनेकानेक शुभेच्छा.

हे पवित्र पर्व, प्रत्येक वाईट गोष्टीवर मात करून, अमृत काळासाठी देशाने जो पंच प्रणचा संकल्प केला आहे, त्या मार्गावर चालण्यासाठी नवी ऊर्जा देईल. विजयादशमीच्या निमित्ताने हिमाचल प्रदेशच्या लोकांना आरोग्य, शिक्षण, रोजगार आणि पायाभूत विकासाशी संबंधित हजारो कोटी रुपये खर्चाच्या प्रकल्पांची भेट देण्याची संधी मला मिळाली आहे. हे माझे सौभाग्य आहे. आणि योगायोग बघा, विजयादशमी आहे आणि विजयाचे रणशिंग फुंकण्याची संधी मिळणे, हा भविष्यातील प्रत्येक विजयाचा शुभसंकेत आहे. बिलासपूरला तर आरोग्य आणि शिक्षणाची दुहेरी भेट मिळाली आहे. कहलूरा री... बंदले धारा ऊप्पर, हाइड्रो कालेज ... कने थल्ले एम्स... हुण एथी री पहचान हूणी !

बंधू आणि भगिनींनो,
इथे विकास योजनांचे लोकार्पण केल्यानंतर, जयरामजी म्हणाले, त्याप्रमाणे मी आणखी एका सांस्कृतिक वारशाचा साक्षीदार होणार आहे आणि खूप वर्षांनंतर मला पुन्हा एकदा कुल्लू दसरा सोहळ्याचा भाग बनण्याचे सौभाग्य लाभले आहे. शेकडो देवी-देवतांसह भगवान रघुनाथजींच्या यात्रेत सहभागी होऊन मी देशासाठी आशीर्वाद देखील मागणार आहे. आज बिलासपुरला आलो आहे तर जुन्या आठवणी ताज्या होणे अगदी स्वाभाविक आहे. एक काळ होता, इथे पायी फिरायचो. कधी मी, धूमल जी, नड्डा जी, पायी इथल्या बाजारातून जायचो. एका खूप मोठ्या रथयात्रेच्या कार्यक्रमात आम्ही बिलासपुरच्या गल्ल्यांमध्ये फिरलो आहोत. आणि तेव्हा सुवर्ण जयंती रथयात्रा इथून आणि ते देखील मुख्य बाजारपेठेतून गेली होती आणि तिथे जाहीर सभा झाली होती. आणि अनेकदा मी इथे आलो आहे, तुम्हा लोकांबरोबर राहिलो आहे.  

हिमाचलच्या या भूमीवर काम करत असताना मला नेहमीच हिमाचलच्या विकास यात्रेचा एक भाग बनण्याची संधी मिळाली आहे. आता मी ऐकत होतो, अनुरागजी अगदी मोठमोठ्याने बोलत होते, हे मोदीजींनी केले, हे मोदीजींनी केले, असे मोदीजी म्हणाले. आपले नड्डाजी देखील म्हणत होते, हे मोदीजींनी केले, हे मोदीजींनी केले आणि आपले मुख्‍यमंत्री जयरामजी देखील म्हणत होते, हे मोदीजींनी केले, मोदीजींनी केले. मी तुम्हाला सत्य सांगतो, कुणी केले, सांगू? हे जे काही होत आहे, ते तुम्ही केले आहे. तुमच्यामुळे झाले आहे. जर तुम्ही दिल्‍लीमध्ये केवळ मोदीजींना आशीर्वाद दिला असता आणि हिमाचलमध्ये मोदीजींच्या सहकाऱ्यांना आशीर्वाद दिला नसता तर या सर्व कामांमध्ये त्यांनी अडथळे निर्माण केले असते. हे जयराम जी आणि त्यांच्या टीमचे यश आहे. जे काम दिल्लीहून मी घेऊन येतो, ती कामे हे जलद गतीने पूर्ण करतात, म्हणून ती कामे होत आहेत. आणि हे एम्‍स उभे राहिले आहे, ती तुमच्या एका मताची ताकद आहे, भुयारी मार्ग बनला आहे, तो तुमच्या एका मताची ताकद आहे. जल अभियांत्रिकी महाविद्यालय उभे राहिले आहे, ती तुमच्या मताची ताकद आहे. मेडिकल डिवाइस पार्क बनत आहे, ते देखील तुमच्या एका मताची ताकद आहे. आणि म्हणूनच आज मी हिमाचलच्या अपेक्षा लक्षात घेऊन एकापाठोपाठ एक विकासकामे करतो आहे.

विकासाच्या बाबतीत आपण देशात प्रदीर्घ काळ एका विकृत विचारसरणीचा प्रभाव पाहिला आहे. काय होती ही विचारसरणी? चांगले रस्ते काही राज्ये आणि काही मोठ्या शहरांमध्येच असतील, दिल्लीच्या आसपास असतील. उत्तम शिक्षण संस्था मोठमोठ्या शहरांमध्येच असतील. चांगली रुग्णालये असतील तर ती दिल्लीतच असू शकतील, बाहेर असूच शकत नाहीत. उद्योग-धंदे उभे राहतील ते देखील मोठमोठ्या ठिकाणी उभे राहतील आणि विशेषतः देशातील डोंगराळ भागात मूलभूत सुविधा सर्वात शेवटी, अनेक वर्षांच्या प्रतीक्षेनंतर पोहचल्या. त्या जुन्या विचारांचा परिणाम असा झाला की देशात विकासाचा एक मोठा असमतोल निर्माण झाला. यामुळे देशाचा एक मोठा भाग, तिथले लोक यांच्यापर्यंत सुविधा पोहोचल्याच नाहीत.

गेल्या 8 वर्षांत देश आता ती जुनी विचारसरणी मागे सारून नव्या विचारांसह, आधुनिक विचारांसह पुढे जात आहे. आता पहा, मी जेव्हा इथे यायचो तेव्हा मी नेहमीच पहायचो, इथल्या एका विद्यापीठावरूनच जायचो. आणि उपचार असो किंवा वैद्यकीय शिक्षण, आयजीएमसी शिमला आणि टाटा वैद्यकीय महाविद्यालयावरच अवलंबून होते. गंभीर आजारांवरील उपचार असतील किंवा मग शिक्षण किंवा रोजगार, चंडीगढ़ आणि दिल्लीला जाणे हे तेव्हा हिमाचलसाठी मोजके पर्याय होते. मात्र गेल्या 8 वर्षांत दुहेरी इंजिनाच्या सरकारने हिमाचलच्या विकासगाथेला नव्या शिखरावर पोहोचवले आहे. आज हिमाचलमध्ये केंद्रीय विद्यापीठ देखील आहे, आयआयटी देखील आहे, ट्रिपल आयटी देखील आहे, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मॅनेजमेंट सारख्या प्रतिष्ठित संस्था देखील आहेत. देशात वैद्यकीय शिक्षण आणि आरोग्यसंबंधी सर्वात मोठी संस्था एम्स देखील आता बिलासपुर आणि हिमाचलच्या जनतेच्या गौरवात वाढ घालते आहे.  

बिलासपुर एम्स आणखी एका बदलाचे प्रतीक आहे आणि एम्‍समध्येही ते ग्रीन एम्‍स नावाने ओळखले जाईल, पूर्णपणे पर्यावरणस्नेही एम्‍स, निसर्गस्नेही एम्स. आताच आमच्या सर्व सहकाऱ्यांनी सांगितले, याआधीची सरकारे पायाभरणीचा दगड ठेवायची आणि निवडणुका झाल्यावर विसरून जायची. आजही हिमाचलला जाल, आपल्या धूमलजींनी एकदा कार्यक्रम घेतला होता. कुठे कुठे दगड पडलेत, आणि असे दगड पडले होते, काम झाले नव्हते.  

मला आठवते आहे, मी एकदा रेल्वेच्या कामाचा आढावा घेत होतो, तुमच्या उनाजवळ रेल्वे वाहिनी टाकायची होती. हा निर्णय 35 वर्षांपूर्वी झाला होता, 35 वर्षांपूर्वी. संसदेत घोषणा झाली, पण नंतर फाइल बंद झाली. हिमाचलला कोण विचारतो? पण हा तर हिमाचलचा मुलगा आहे आणि हिमाचलला विसरू शकत नाही. आपल्या सरकारची ओळख अशी आहे की ते ज्या प्रकल्पाची मुहूर्तमेढ रोवते, त्याचे लोकार्पणही करते. अडकणे, रेंगाळणे, भरकटणे, ते युग गेले मित्रांनो!

मित्रांनो,

देशाच्या संरक्षणात हिमाचलचे नेहमीच मोठे योगदान राहिले आहे, देशाच्या संरक्षणासाठी लढणाऱ्या वीरांमुळे देशभरात ओळखले जाणारे हिमाचल आता या एम्सनंतर जीवन रक्षणातही महत्त्वाची भूमिका बजावणार आहे. 2014 सालापर्यंत हिमाचलमध्ये फक्त 3 वैद्यकीय महाविद्यालये होती, त्यापैकी 2 सरकारी होती. गेल्या 8 वर्षांत हिमाचलमध्ये 5 नवीन सरकारी वैद्यकीय महाविद्यालये बांधण्यात आली आहेत. 2014 पर्यंत केवळ 500 विद्यार्थी पदवी आणि पदव्युत्तर शिक्षण घेऊ शकत होते, आज ही संख्या 1200 पेक्षा जास्त म्हणजेच दुप्पटीपेक्षा अधिक झाली आहे. एम्समध्ये दरवर्षी अनेक नवीन डॉक्टर तयार होतील, नर्सिंगशी संबंधित तरुणांना येथे प्रशिक्षण मिळेल. मला विशेषत: जयरामजी यांच्या चमुचे, जयरामजी यांचे, आरोग्य मंत्री, केंद्र सरकार आणि आरोग्य मंत्रालयाचे अभिनंदन करायचे आहे. नड्डाजी आरोग्यमंत्री होते, त्यावेळी आम्ही निर्णय घेतला, तेव्हा नड्डाजींवर मोठी जबाबदारी आली, मी पायाभरणीही केली. या काळात कोरोनाचा भयंकर साथरोग आला आणि आपल्याला माहित आहे की हिमाचलमध्ये कोणतेही बांधकाम करायचे म्हटले तर किती कठीण असते. पर्वतावर प्रत्येक वस्तू आणणे किती अवघड असते. जे काम खाली तासाभरात होते, ते इथे डोंगरात करायला एक दिवस लागतो. असे असूनही, कोरोनाची अडचण असूनही, केंद्र सरकारच्या आरोग्य मंत्रालयाने आणि जयरामजींच्या राज्य सरकारच्या चमुने केलेले काम, आज एम्सच्या रुपाने समोर आहे, एम्सने काम सुरू केले आहे.

केवळ वैद्यकीय महाविद्यालयच नाही तर आम्ही आणखी वेगळ्या दिशेने वाटचाल केली आहे. औषधे आणि जीवनरक्षक लसींचा निर्माता म्हणूनही हिमाचलची भूमिका मोठ्या प्रमाणात विस्तारते आहे. बल्क ड्रग्ज पार्कसाठी देशातील फक्त तीन राज्यांची निवड करण्यात आली आहे. त्यापैकी एक कोणते राज्य आहे भावांनो, ते राज्य कोणते? हिमाचल आहे, तुम्हाला अभिमान वाटतो की नाही? तुमच्या मुलांच्या उज्ज्वल भविष्याचा हा पाया आहे की नाही? ही तुमच्या मुलांच्या उज्ज्वल भविष्याची हमी आहे की नाही? आम्ही मोठ्या ताकदीने काम करतो आणि आजच्या पिढीसाठी तसेच पुढच्या पिढीसाठीही करतो.

त्याचप्रमाणे मेडिकल डिव्हाईस पार्कसाठी 4 राज्यांची निवड करण्यात आली आहे. तिथे आज तंत्रज्ञानाचा मोठ्या प्रमाणावर औषधोपचारात वापर केला जात आहे. विशेष प्रकारची उपकरणे बनवण्यासाठी देशात चार राज्यांची निवड करण्यात आली आहे. एवढा मोठा भारत, एवढी मोठी लोकसंख्या, हिमाचल हे माझे छोटे राज्य आहे, पण ही वीरांची भूमी आहे आणि मी इथली भाकरी खाल्ली आहे, मला कर्जही फेडावे लागेल. आणि म्हणून चौथे मेडिकल डिव्हाईस पार्क कुठे बांधले जात आहे? हे चौथे मेडिकल डिव्हाईस पार्क कुठे बांधले जात आहे - तुमच्या हिमाचलमध्ये बांधले जाते आहे मित्रांनो. जगभरातून मोठी माणसे इथे येतील. नालागड येथील या मेडिकल डिव्हाईस पार्कची पायाभरणी हा त्याचाच एक भाग आहे. या डिव्हाईस पार्कच्या उभारणीसाठी येथे हजारो कोटी रुपयांची गुंतवणूक करण्यात येणार आहे. याच्याशी संबंधित अनेक छोटे-मोठे उद्योग जवळपास विकसित होतील. यामुळे येथील हजारो तरुणांना रोजगाराची संधी उपलब्ध होणार आहे.

मित्रांनो,

हिमाचलची आणखी एक बाजू आहे, यामध्ये विकासाच्या अनंत शक्यता दडलेल्या आहेत. ही वैद्यकीय पर्यटनाची जमेची बाजू आहे. इथले हवामान, इथले वातावरण, इथली वनौषधी उत्तम आरोग्यासाठी अतिशय उपयुक्त आहे. भारत हे आज वैद्यकीय पर्यटनाच्या दृष्टीने जगाचे मोठे आकर्षण केंद्र बनत आहे. देशातील आणि जगातील लोक वैद्यकीय उपचारांसाठी भारतात येऊ लागले की येथील नैसर्गिक सौंदर्य इतके अप्रतिम आहे की ते येथे येतील, एक प्रकारे त्यांना आरोग्याचाही फायदा होईल आणि पर्यटनालाही फायदा होईल. हिमाचलचा तर फायदाच फायदा आहे.

मित्रांनो,

गरीब आणि मध्यमवर्गीयांना कमीत कमी खर्चात उपचार मिळावेत, उपचार पद्धतीही चांगली असावी आणि त्यासाठी त्यांना फार दूर जावे लागणार नाही, असा केंद्र सरकारचा प्रयत्न आहे. म्हणून आज आम्ही एम्स वैद्यकीय महाविद्यालय, जिल्हा रुग्णालयांमध्ये अतिदक्षता सुविधा आणि गावागावात आरोग्य आणि आरोग्यसेवा केंद्रे बांधून अखंड संपर्क व्यवस्थेवर काम करत आहोत. यावर भर दिला जात आहे. आयुष्मान भारत योजनेंतर्गत हिमाचलमधील बहुतांश कुटुंबांना ५ लाख रुपयांपर्यंत मोफत उपचाराची सुविधा मिळत आहेत.

या योजनेंतर्गत देशभरात आतापर्यंत 3 कोटी 60 लाख गरीब रुग्णांवर मोफत उपचार करण्यात आले असून यापैकी दीड लाख लाभार्थी हे माझ्या हिमाचलमधील आहेत. देशातील या सर्वं नागरिकांच्या उपचारांवर सरकारने आतापर्यंत 45 हजार कोटी रूपयांपेक्षा जास्त खर्च केला आहे. जर आयुष्मान भारत योजना नसती तर त्याच्या जवळपास दुप्पट म्हणजे सुमारे 90 हजार कोटी रुपये या रुग्णांच्या कुटुंबीयांना त्यांच्या खिशातून द्यावे लागले असते. म्हणजेच गरीब आणि मध्यमवर्गीय कुटुंबाला उत्तम उपचारासह एवढ्या मोठ्या बचतीचाही लाभ झाला आहे.

मित्रांनो,

माझ्यासाठी आणखी एक समाधानाची बाब म्हणजे सरकारच्या अशा योजनांचा सर्वाधिक लाभ आपल्या माता, भगिनी, मुलींना मिळाला आहे. आणि आपल्याला माहीत आहे, आपल्या आई बहिणींचा एक स्वभाव आहे, कितीही वेदना झाल्या, कितीही शारिरीक त्रास झाला तरी त्या घरातील कोणाला सांगत नाहीत. ती सहनही करत राहते, कामसुद्धा करत राहते, पूर्ण कुटुंबाला सांभाळून घेते कारण तिच्या मनात असा विचार असतो की कुटुंबातील सदस्यांना, आपल्या मुलांना जर आपल्या आजाराची माहिती कळली तर ते कर्ज काढून माझे उपचार करतील आणि आई विचार करते की, मी थोडा काळ आजार सहन करेन पण मुलांवर कर्जाचा डोंगर होऊ देणार नाही. मी रूग्णालयात जाऊन खर्च करणार नाही. या मातांची चिंता कोण करणार? माझ्या मातांनी या यातना मुकाट्याने सहन करायच्या का? हा मुलगा मग काय कामाचा, या भावनेतूनच आयुष्मान भारत योजनेचा जन्म झाला आहे. ज्या योजनेमुळे माझ्या माता- भगिनींना आजारांच्या समस्या सहन कराव्या लागणार नाहीत. निव्वळ असहाय्यतेच्या भावनेतून त्यांना हे जीवन जगावे लागणार नाही. आयुष्मान भारत योजनेच्या अंतर्गत लाभान्वित होणाऱ्यांमध्ये माताभगिनींचे प्रमाण 50 टक्क्यांपेक्षा जास्त आहत. आमच्या माता भगिनी आणि कन्या आहेत.

मित्रांनो,

शौचालय बनवण्यासाठी सुरू केलेले स्वच्छ भारत अभियान असो, मोफत गॅस जोडणी देणारी उज्वला योजना असो, मोफत सॅनिटरी नॅपकिन देणारे अभियान असो, मातृवंदना योजनेच्या अंतर्गत प्रत्येक गर्भवतीला पोषक आहारासाठी हजारो रूपयांची मदत करण्याची योजना असो, किंवा प्रत्येक घरी पाणीपुरवठा करण्यासाठी आमचे हर घर जल अभियान असो, माझ्या माता भगिनींना सशक्त बनवण्यासाठी असलेली ही कामे आम्ही एकापाठोपाठ एक करत चाललो आहोत. माता-भगिनी-कन्यांना  सुख, सुविधा, सन्मान, सुरक्षा आणि आरोग्य पुरवण्यास दुहेरी इंजिनचे सरकारने, म्हणजे केंद्रात आणि राज्यात एकाच पक्षाच्या आमच्या सरकारने प्रथम प्राधान्य दिले आहे.

केंद्र सरकारने ज्या योजना तयार केल्या आहेत, त्या जयरामजी आणि त्यांच्या चमुतील सर्व सहकार्यांनी अतिशय वेगाने आणि कळकळीने साकारल्या आहेत आणि त्यांची व्याप्तीही वाढवली आहे. प्रत्येक घरात नळाने पाणीपुरवठा करण्याचे आमचे काम (हर घर नल से जल) येथे किती वेगाने झाले आहे, हे आमच्यासमोर आहे. गेल्या 7 दशकांमध्ये जितक्या नळ जोडण्या हिमाचल प्रदेशात दिल्या गेल्या आहेत, त्याच्या दुपटीहूनही अधिक नळ जोडण्या फक्त गेल्या तीन वर्षांत आम्ही दिल्या आहेत, लोकांना मिळाल्या आहेत. या तीन वर्षांत, 8.50 लाखांपेक्षा जास्त नवीन कुटुंबांना पाईपने पाण्याची सुविधा पुरवण्यात आली आहे.

बंधु आणि भगिनींनो,

जयरामजी आणि त्यांच्या सहकाऱ्यांचे आणखी एका बाबतीत संपूर्ण देश कौतुक करत आहे. सामाजिक सुरक्षेसाठी केंद्र सरकारचे प्रयत्न आणखी विस्तारित करण्यासाठी, हे कौतुक केले जात आहे. आज हिमाचल प्रदेशातील असे एखादेच कुटुंब असेल की ज्यात कोणत्या ना कोणत्या सदस्याला एखाद्या तरी निवृत्ती वेतनाची सुविधा मिळत नसेल. विशेषत: जे निराश्रित आहेत, एखाद्या गंभीर आजाराने ग्रासलेले आहेत, अशा कुटुंबांना निवृत्ती वेतन योजना आणि उपचारांसाठी खर्च देण्यासाठी अर्थसहाय्य करण्याचे प्रयत्न कौतुकास्पद आहेत. हिमाचल प्रदेशातील हजारो कुटुंबांना एक श्रेणी- एक निवृत्ती वेतन( वन रँक-वन पेन्शन) लागू झाल्यामुळेही मोठा लाभ झाला आहे.

मित्रांनो,

हिमाचल प्रदेश हे संधी देणारे राज्य आहे. आणि मी जयरामजींचे आणखी एका बाबीसाठी अभिनंदन करतो. लसीकरणाचे काम तर संपूर्ण देशातच सुरू आहे, परंतु लोकांच्या जीवनाच्या सुरक्षिततेसाठी हिमाचल प्रदेश असे पहिले राज्य आहे की ज्याने लसीकरणाचे काम शंभर टक्के पूर्ण केले आहे. करू, नंतर बघू वगैरे असा प्रकार नाही, एकदा निश्चय केला आहे तर काम पूर्ण करायचे आहे.

येथे वीज निर्माण होते पाण्यावर, फळे आणि भाजीपाल्यासाठी अत्यंत सुपीक जमीन आहे आणि रोजगाराच्या अगणित संधी देणारा पर्यटन व्यवसायही येथे आहे. या संधींचा लाभ घेण्यात केवळ चांगल्या संपर्काचा अभाव हाच एक सर्वात मोठा अडसर होता. पण 2014 नंतर उत्तमोत्तम पायाभूत सुविधा हिमाचल प्रदेशातील गावागावांपर्यंत पोहचवण्याचे प्रयत्न सुरू झाले आहेत. आज हिमाचल प्रदेशातील रस्ते रूंद करण्याचे कामही सर्वत्र सुरू आहे. यावेळी हिमाचल प्रदेशात रस्त्यांची संपर्क व्यवस्था तयार करण्याच्या कामांवर जवळपास 50 हजार कोटी रूपये खर्च करण्यात येत आहेत. पिंजौर ते नालागढ चारपदरी महामार्गाचे काम जेव्हा पूर्ण होईल, तेव्हा औद्योगिक क्षेत्र असलेल्या नालागढ आणि बद्दीला तर त्याचा लाभ मिळेलच, पण चंडीगढ आणि अंबालाहून विलासपूर, मंडी आणि मनालीच्या दिशेने जाणाऱ्या पर्यटकांसाठीही सुविधा वाढणार आहेत. इतकेच नव्हे तर, हिमाचल प्रदेशच्या लोकांना गोलगोल फिरणाऱ्या रस्त्यांपासून मुक्ती देण्यासाठी बोगद्यांचे जाळे पसरण्याचे काम सुरू आहे.

मित्रांनो,

डिजिटल संपर्काच्या बाबतीतही हिमाचल प्रदेशात अभूतपूर्व असे काम झाले आहे. गेल्या 8 वर्षात, मेड इन इंडिया मोबाईल फोन स्वस्त झाले आणि गावागावांत नेटवर्कही पोहचले. उत्कृष्ट 4 जी संपर्कामुळे हिमाचल प्रदेशात डिजिटल व्यवहारही अतिशय गतीने वाढत आहेत. डिजिटल इंडियाचा सर्वाधिक लाभ जर कुणाला होत असेल तर माझ्या हिमाचलच्या बंधु-भगिनींना होत आहे, माझ्या हिमाचलच्या नागरिकांना होत आहे. अन्यथा बिल भरण्यापासून ते बँकांशी संबंधित कामे असोत, प्रवेशाचे काम असो, अर्ज करायचा असो, अशा प्रत्येक लहानसहान कामांसाठी पहाड उतरून कार्यालयांमध्ये जावे लागत असे आणि त्यासाठी एक एक दिवस मोडत असे आणि कधी तर रात्रीही थांबावे लागत असे. आता तर देशात प्रथमच मेड इन इंडिया 5 जी सेवाही सुरू झाली आहे आणि तिचा लाभ हिमाचल प्रदेशला लवकरच मिळणार आहे.

भारताने ड्रोनसंबंधी जे नियम बनवले आहेत आणि त्यात बदल केला आहे. त्यानंतर ड्रोनसंबंधी धोरण बनवणारे देशातील पहिले राज्य म्हणून मी हिमाचल प्रदेशचे अभिनंदन करतो. आता मालवाहतुकीसाठी ड्रोनचा उपयोग खूप जास्त प्रमाणात वाढणार आहे. यात किन्नोरपर्यंतचे आमचे बटाटे आम्ही ड्रोनद्वारे मोठ्या बाजारात त्वरित आणू शकतो. आमची फळे खराब होत असत. आता ती ड्रोनद्वारे आम्ही उचलून आणू शकतो. अनेक प्रकारचे लाभ येत्या दिवसांत होणार आहेत. याच प्रकारचा विकास, ज्यामुळे प्रत्येक नागरिकाची सुविधा वाढेल, त्याला समृद्धीशी जोडले जाईल, यासाठी आम्ही प्रयत्न करत आहोत. हाच विकसित भारत, विकसित हिमाचल प्रदेशाचा संकल्प साकार करेल.

आज विजयादशमीच्या पवित्र पर्वानिमित्त विजय नाद करण्याचा मला संधी मिळाली याचा मला आनंद वाटतो. आपणा सर्वांच्या आशिर्वादाने हे करण्याची संधी मिळाली. मी एम्ससह सर्व विकास प्रकल्पांसाठी आपल्याला खूप खूप शुभेच्छा देतो. दोन्ही मुठी वळून माझ्याबरोबर बोला

भारत माता की जय पूर्ण ताकतीनिशी बोला

भारत माता की जय

भारत माता की जय

भारत माता की जय

खूप खूप धन्यवाद.