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विशाल संख्‍या में पधारे हुए सभी प्‍यारे भाईयों और बहनों और विशेष रूप से महाराष्‍ट्र से आये मित्रों को भी नमस्कार,

बोले सो निहाल..सत् श्री अकाल! शहीदों..अमर रहो! शहीदो..अमर रहो! शहीदों..अमर रहो!

आज मेरे लिए बड़ी प्रेरक घड़ी है। एक नई प्रेरणा जिनका नाम कानों पर पड़ते ही देश के हर नागरिक को मिलती है ऐसे सरदार भगत सिंह जी, सुखदेव, राजगुरू, बटूकेश्‍वर दत्‍त और भगत‍ सिंह जी की माता जी, जिस धरती पर एक वीर माता के साथ भारत माँ के प्‍यारे लाड़ले चार वीरों की समाधि को नमन करने का मुझे अवसर प्राप्‍त हुआ है। यह पंजाब की धरती की विशेषता है। इस धरती ने, आजादी के जंग में सबसे ज्‍यादा बलिदान दिया है। देश की रक्षा के लिए सीमा पर मोर्चा संभालते हुए अनेक वीर जवानों ने शहादत दी है।..और देश को आगे बढ़ाने के लिए यहां के किसानों ने अपना पसीना बहाकर के देश के अन्‍न भंडार भर दिये। यह ऐसी धरती है, जहां आजादी के पहले भी यहां के लोग देश के लिए जिए और आजादी के बाद भी देश के लिए जी रहे हैं। मैं इस धरती को, यहां के सभी वीरों को, यहां के सभी वीर माताओं को आदरपूर्वक नमन करता हूं।

अंग्रेजों ने.. उनको भगत सिंह का भय कितना रहता था.. तय तो यह हुआ था कि 24 मार्च को भगत सिंह जी को फांसी दे दी जाएगी। लेकिन घबराई हुई अंग्रेजी सल्‍तनत ने सारे नियमों का उल्‍लंघन करते हुए, सारी परंपराओं को तोड़ते हुए, चोरी छिपे से सरदार भगत सिंह जी को फांसी दी। और इतना ही नहीं, वो शरीर उनके परिवारजनों को देने की बजाय लाहौर जेल से लाकर के यहां पर किसी भी सम्‍मान के बिना मिट्टी के तेल में और अगल-बगल से कूड़ा कचरा इकट्ठा करके उनके शरीर को जला देने का काम उस सल्‍तनत ने किया। यही धरती है, यहां पर उनका शरीर विलीन हो गया। मैं आज भगत सिंह, सुखदेव राजगुरू.. उन वीरों की उस महान परंपरा को प्रणाम करने आया हूं।

भाईयों-बहनों आज हिंदुस्‍तान में किसी एक नाम को सुनते ही हिंदुस्‍तान के हर कोने में जवान, वृद्ध सबको चेतना जग जाती है, प्रेरणा मिल जाती है, वो नाम है सरदार भगत सिंह। उस नाम में वो ताकत है, जो आज भी देश के नौजवानों को देश के लिए जीने-मरने की प्रेरणा देता है। ऐसे महापुरूषों ने बलिदान दिया, तब जाकर के देश आजाद हुआ। उनके सपनों को पूरा करना.. और उन सपनों को पूरा करने के लिए जैसा भारत उन्‍होंने चाहा था वैसा भारत बनाने के लिए हम जितना करे उतना कम है।

हमारा गांव आबाद हो, हमारा किसान खुशहाल हो, हमारे नौजवान को रोजगार हो, दलित, पीडि़त, शोषित, वंचित, गांव, गरीब, शहर के मजदूर, उनके जीवन में बदलाव आए। जब तक हम देश में यह बदलाव नहीं लाते हैं, तब तक देश के लिए बलिदान देने वाले महापुरूषों को सच्‍ची श्रद्धांजलि अधूरी रहेगी।

भाईयों-बहनों हमारा सपना भी है, हमारा कर्तव्‍य भी है कि हम इस भारत मां को सुजलाम, सुफलाम बनाए। यह भारत मां, यहां के नौजवान अपनी आशा-आकांक्षा के अनुरूप जीवन में नई ऊंचाईयों को पार कर सके, हरेक को अवसर मिले विकास का, ऐसे देश को नई ऊंचाईयों पर ले जाने का प्रयास, हम सबका दायित्‍व बनता है। तब जाकर के इन महापुरूषों को सच्‍ची श्रद्धांजलि होगी।

हमने सपना देखा है – 2022! जब भारत की आजादी के 75 साल पूरे होंगे। हमारे देश में 75 साल एक अमृत पर्व होता है। इस अमृत पर्व का विशेष महत्‍व होता है। क्‍या हम 2022 में जब अमृत पर्व मनाएं तब इस देश में कोई भी परिवार ऐसा न हो, जिसके पास रहने के लिए अपना घर न हो।

भाईयों-बहनों आज भगत सिंह जी की समाधि पर मैं आया हूं। उस महापुरूष के बलिदान को याद करता हूं और मन करता है जी-जान से जुट जाएं देश के गरीब से गरीब व्‍यक्ति को भी.. जब आजादी का अमृत पर्व मनाएं तब उसका अपना घर मिल जाए। 2019! महात्‍मा गांधी के 150 साल पूरे होंगे। महात्‍मा गांधी के 150 साल कैसे मनाएं? क्‍या हमारे देश के महापुरूषों को हम स्‍वच्‍छ भारत नजराने के रूप में नहीं दे सकते? क्‍या यह भारत के सवा सौ करोड़ नागरिकों की जिम्‍मेवारी नहीं है कि हमारी भारत माता जिसके लिए इतने लोगों ने बलिदान दिये उसे हम स्‍वच्‍छ तो रखे, साफ-सुथरी रखें इस दायित्‍व को हम निभाएं और स्‍वच्‍छ भारत का सपना महात्‍मा गांधी के 150 साल पूरा होने के अवसर पर हम पूरा करें। हर गांव, हर गली, हर गली, हर परिवार, हर कोई अपने दायित्‍व को निभाएं।

और आज 23 मार्च ! राम मनोहर लोहिया जी का भी जन्‍म जयंती का अवसर है। राम मनोहर लोहिया जी एक ऐसे राजपुरूष थे, जब वो राजनीतिक आंदोलन चलाते थे, तो अपनी विचारधारा के साथ-साथ एक बात का ख्‍याल रखते थे। वे स्‍वच्‍छता का आंदोलन अपनी जवानी में चलाए करते थे। राम मनोहर लोहिया स्‍वच्‍छता का आंदोलन लगातार चलाया करते थे। आज उनकी भी जयंती है, भगत सिंह की शहादत का पर्व है और भारत माता के लिए जीने वाले इन लोगों को जब याद करते हैं तब हमारी भारत माता स्‍वच्‍छ हो, विकास की नई ऊंचाईयों को पार करने वाला हर नागरिक को अवसर हो। इस दिशा में हम आगे बढ़ना चाहते हैं।

मेरे किसान भाईयों-बहनों पंजाब ने देश को भूख से बचाया है। देश को अन्‍न देने का पुण्‍य का काम पंजाब के किसान ने किया है लेकिन आज पंजाब में पानी जमीन में गहरा होता जा रहा है। Danger रेखा से भी नीचे चला गया है। पानी परमात्‍मा का दिया हुआ प्रसाद है। पानी को बचाए बिना, हम न खेती बचा सकते हैं, न जीवन बचा सकते हैं और इसलिए मैं पंजाब के किसान भाईयो-बहनों से आग्रह करूंगा कि हम फसल पैदा करे, आधुनिक विज्ञान का प्रयोग करें। Per drop more crop, micro irrigation, टपक सिंचाई हो, स्प्रिंक्‍लर हो। बहुत सारी चींजें आज विज्ञान ने स्‍वीकार की है। कभी-कभी जब तक हमारा किसान, खेत पानी से लबालब भरा न हो तब तक उसकी आंखों को चैन नहीं पड़ता। उसको लगता है कि पूरा खेत पानी से पूरी तरह भरा होगा, तभी फसल होगी।

मेरे किसान भाईयों-बहनों मैं भी गरीब परिवार का.. मैंने इन सारी चीजों को निकट से देखा है और इसलिए मैं आपको कहता हूं कि विज्ञान बदल चुका है और इसलिए मैं आपको एक छोटी सी बात बताऊं। अगर कोई बालक घर में बीमार रहता है, वजन नहीं बढ़ता है, चेहरे पर मुस्‍कान नजर नहीं आती है, दुबला-पतला रहता है और मां-बाप की इच्‍छा रहती है कि बेटा तंदरूस्‍त हो, वजन बढ़े, दौड़े-कूदे। मां-बाप ऐसे में बादाम, केसर, पिस्‍ता यह डालकर के बाल्‍टी भर दूध रोज, बाल्‍टी भर दूध से उस बच्‍चे को अगर नहला दें तो वजन बढ़ेगा क्‍या? चेहरे पर मुस्‍कान आएगी क्‍या? तबियत ठीक होगी क्‍या? आप भी जानते हैं नहीं होगी। केसर, पिस्‍ता, बादाम वाला दूध हो, बाल्‍टी भर दूध हो, रोज दूध से नहलाते हो, लेकिन उसके शरीर में कुछ नहीं होगा। लेकिन अगर समझदार मां-बाप चम्‍मच से, एक चम्‍मच दूध पिलाएंगे, रोज 10 चम्‍मच, 15 चम्‍मच, 20 चम्‍मच पिलाना शुरू कर देंगे, तो बच्‍चे का वजन बढ़ने लगेगा। शरीर तंदरूस्‍त होगा। जो स्‍वभाव बच्‍चे का होता है, वही स्‍वभाव फसल का होता है और इसलिए फसल को ढेर सारा पानी देने से फसल अच्‍छी होती है, ऐसे पुराने विचारों को छोड़ना पड़ेगा। बूंद-बूंद पानी पिलाना से फसल ज्‍यादा होगी, अच्‍छी होगी, कम जमीन में भी ज्‍यादा पैदावार होगी और तब जाकर के पंजाब में जो पानी नीचे चला जा रहा है, वो पानी ऊपर आएगा। मेरे भाईयों बहनों बरसात का पानी, बूंद-बूंद पानी बचाएंगे, जमीन में उसको वापस डालेंगे, तभी जाकर के पंजाब की पानी की समस्‍या का समाधान कर पाएंगे।

हमारे पास नहरों का इतना बड़ा नेटवर्क है, लेकिन जितनी मात्रा में पानी जाना चाहिए उतना जा नहीं रहा है। शुरू के इलाके में तो पानी पहुंचता है लेकिन नहर का जहां आखिरी इलाका है, वहां पानी नहीं पहुंचता। हमने एक योजना बनाई है-‘प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना’। इस योजना के तहत हमारा सपना है कि हिंदुस्‍तान के हर किसान के खेत तक पानी पहुंचाया जाए, नदियों को जोड़ा जाए, नहरों को ठीक किया जाए, नई नहरों को बनाया जाए। अगर किसान को पानी पहुंच गया तो मैं विश्‍वास दिलाता हूं मिट्टी में से सोना पैदा करने की ताकत मेरे किसान भाईयों-बहनों में हैं और वो हिंदुस्‍तान के आर्थिक स्थिति को बदल सकते हैं। उस काम की और हमें जाना है।

मुझे आज मेरे किसान भाईयों-बहनों को मेरी एक चिंता भी मुझे बतानी है और वो चिंता.. मैं देख रहा हूं कि ज्‍यादा फसल के मोह में आज हम ऐसी-ऐसी गलतियां कर रहे हैं कि जिसके कारण हमारी जमीन बर्बाद हो गई है। जमीन अपनी ताकत खो रही है। अगर धरती माता अपनी ताकत खो देगी तो इस धरती पर पलने वाले बच्‍चों का पालन-पोषण कैसे होगा। हम जिस प्रकार से Chemical Fertilizer का उपयोग करते हैं.. पंजाब का क्‍या हाल करके रखा है किसान भाईयों-बहनों हमने! कितनी मात्रा में, कौन सा खाद डालना चाहिए.. हम कैसी बड़ी गलती कर रहे हैं। वैज्ञानिकों का कहना है, विज्ञान में सिद्ध हुआ है कि जितना पोटाश का उपयोग करते हैं उससे चार गुना से ज्‍यादा नाइट्रोजन का उपयोग फसल भी बर्बाद करता है, जमीन भी बर्बाद करता है। चार गुना से कम नाइट्रोजन उपयोग करना चाहिए लेकिन हमारे पंजाब में कितना उपयोग होता है, आपको मालूम है? 57 गुना! आप कल्‍पना कर सकते हैं जैसे परिवार में दवाई देनी है, लेकिन ज्‍यादा dose दे दें तो मौत भी हो जाती है वैसे नाइट्रोजन इतना गुना डालने के कारण हमारी फसल और हमारी जमीन सबको हम बर्बाद कर देते हैं। मैं पंजाब के किसानों से आग्रह करता हूं कि आप देश को दिशा दीजिए, आप देश का नेतृत्‍व कीजिए और तय कीजिए कि जितने अनुपात में Fertilizer चाहिए उससे ज्‍यादा डालने का पाप हम नहीं करेंगे, हम ऐसी गलती नहीं करेंगे। इतना ही नहीं पोटाश से फास्‍फोरस डब्‍बल से ज्‍यादा उपयोग नहीं करना चाहिए, वरना खेती बर्बाद हो जाती है। लेकिन हम क्‍या करते हैं, पंजाब के अंदर पोटास से फास्‍फोरस का उपयोग 13 गुना करते हैं। जबकि दो गुना से ज्‍यादा नहीं करना चाहिए। मुझे बताइये मेरे किसान बहनों-भाईयों कि पंजाब, पंजाब का गांव, पंजाब का किसान, पंजाब की फसल जिस पर पूरा हिंदुस्‍तान जी रहा है अगर वही बर्बाद हो जाएगा तो पूरा देश भूख मर जाएगा और इसलिए मेरे किसान भाईयों-बहनों मैं आपसे आग्रह करने आया हूं कि आप विज्ञान, आधुनिक यंत्र.. और जिसमें सरकार पूरी मदद करती है.. आप इसका सही उपयोग करें। इसका दुरूपयोग तत्‍काल तो हमें अच्‍छा लगता है, लेकिन लम्‍बे समय के लिए हमारा बहुत नुकसान करता है और इसलिए मेरे किसान भाईयों-बहनों इससे बचकर रहना चाहिए यह मैं विशेष रूप से आग्रह करना चाहता हूं।

सरकार ने किसानों के लिए एक महत्‍वपूर्ण योजना बनाई है। इस योजना को हमने लागू किया है और आप तक हम पहुंचाना चाहते हैं और वो है – Soil Health Card. जैसे नागरिक का Health Card होता है, उसका शरीर कैसा, Blood कैसा, तबियत कैसी है, कमियां क्‍या है, वो सब Health Card से पता चलता है। वैसा ही जैसे इंसान के शरीर का स्‍वभाव है, वैसा ही जमीन का भी स्‍वभाव है। जमीन को भी बीमारियां होती है, जमीन में भी कमियां होती हैं लेकिन हमें पता नहीं होता और उसके कारण हम.. जमीन का किसके लिए उपयोग करना चाहिए, नहीं कर पाते। इस बात को समझाने के लिए गांव-गांव किसानों को Soil Health Card देने की सरकार ने योजना बनाई है। आपकी जमीन कैसी है, आपकी जमीन की तबियत कैसी है, आपकी जमीन में कौन सी कमियां है, आपकी जमीन में कौन सी फसल अच्‍छी हो सकती है, आपको अगर दवाई डालनी है तो कौन सी दवाई की जरूरत है, आपको अगर Fertilizer डालना है तो कौन सा Fertilizer डालना है, कितना डालना है यह सारी बातें Soil Health Card से पता चलती हैं और यदि किसान Soil Health Card से योजना करके चलता है तो मैं विश्‍वास दिलाता हूं मेरे किसान बहनों-भाईयों छोटे किसान को भी साल का 40-50 रुपया, जो ज्ञान के अभाव के रूप में फालतू में खर्चा होता है, वो बच जाएगा। मेरे किसान को बहुत बड़ा फायदा होगा। इसलिए यह बहुत बडा काम पूरे देश में हमने चलाया है Soil Health Card का। और मुझे विश्‍वास है कि हमारे पंजाब के किसान भी इस बात की चिंता करेंगे।

मेरे किसान भाईयों बहनों एक तो पिछले साल बारिश कम हुई। हिंदुस्‍तान के कई राज्‍यों में कम बारिश के कारण किसानों को नुकसान हुआ, कहीं पर सूखा पड़ा गया और ऊपर से अभी-अभी ओले गिरे। मैं जानता हूं कि किसानों पर कितनी बड़ी आपत्ति आई होगी। मैंने भारत सरकार के अधिकारियों को, मंत्रियों को आदेश दिए हैं, सर्वे का काम शुरू हुआ है, राज्य सरकार और भारत सरकार मिलकर के आपके इस संकट की घड़ी में आपके साथ हैं। आपको जो नुकसान हुआ है.. हमारा किसान टिक सके.. जितनी भी मदद सरकार कर सकती है उसमें सरकार किसी भी हालत में पीछे नहीं रहेगी। यह मैं आपको विश्‍वास दिलाना चाहता हूं।

मेरे भाईयों-बहनों आज जब मैं सरदार भगत सिंह जी की शाहदत के इस पावन पर्व पर, इस पवित्र धरती पर आया हूं, तब मैं.. सरकार ने बजट में घोषणा की है.. क्‍योंकि पंजाब और किसान का अटूट नाता है और इसलिए अमृतसर में किसानों के लिए उपयोगी हो ऐसी Institute for Horticulture Education इसका आरंभ किया जाएगा और आज मैं जब यहां आया हूं तब इस नये Institute को हम सरदार भगत सिंह Post Graduate Institute for Horticulture Research and Education इस रूप में निर्माण करेंगे ताकि पंजाब किसान की जो नई पीढ़ी है उसके कारण उसको लाभ मिलेगा।

भाईयों बहनों भारत सरकार की यह सोच है कि अगर देश को आगे बढ़ाना है तो राज्‍यों को आगे बढ़ाना पड़ेगा। अगर हमारे राज्‍य मजबूत नहीं होंगे तो देश मजबूत नहीं होगा। अगर राज्‍य आगे नहीं बढ़ेंगें तो देश आगे नहीं बढ़ेगा और इसलिए हमारी सरकार की हर योजना राज्‍यों को मजबूत बनाने के लिए है। अभी इस बार 14th Finance Commission की रिपोर्ट के आधार पर अकेले पंजाब को कितना बड़ा लाभ होने वाला है। पंजाब इन रुपयों का सही इस्‍तेमाल करके कितना आगे बढ़ सकता है इसका मैं भली-भांति अंदाज कर सकता हूं और मुझे विश्‍वास है कि बादल साहब के नेतृत्‍व में प्रगतिशील निर्णयों के द्वारा पंजाब के जीवन को बदलने में यह रकम बहुत काम आने वाली है। पहले पिछली पंचवर्षीय योजना में भारत सरकार की तरफ से पंचवर्षीय योजना के तहत पंजाब को 20 हजार करोड़ रुपये मिले थे। भाईयों-बहनों आने वाले पांच साल के लिए यह रकम बढा़कर के 54 हजार करोड़ रुपये कर दी जाएगी, डबल से भी ज्‍यादा। इतना ही नहीं पंचायत और नगरपालिकाओं के लिए भारत सरकार ने पहले चार हजार करोड़ रुपया दिया था, इस बार हमने वो रकम बढा़कर के छह हजार करोड़ रुपये कर दी। जिसके कारण गांव के व्‍यक्ति को भी इसका फायदा पहुंचाने में काम आ जाएगी। इस बार भी पहले की तुलना में करीब-करीब चार हजार करोड़ रुपया ज्‍यादा, अतिरिक्‍त चार हजार रुपया पंजाब के विकास के लिए भारत सरकार की तिजोरी से आने वाला है।

स्थिति ऐसी हो गई है.. एक जमाना था कि दिल्‍ली के खजाने में देश की सभी तिजौरियों का करीब 60-65 प्रतिशत पैसा रहता था। राज्‍यों के पास 35-40 प्रतिशत रहता था। हमारे आने के बाद चित्र हमने बदल दिया है। अब राज्‍यों के पास करीब-करीब 60-62 प्रतिशत राशि रहेगी और केंद्र के पास सिर्फ 38% राशि रहेगी और राज्‍य मजबूत होंगे। राज्‍य विकास की नई ऊंचाईयों को पार करेंगे। उस दिशा में हम काम कर रहे हैं।

यहां पर रास्‍ते बनाने के लिए भारत सरकार की जो योजनाएं हैं.. रेल को बढ़ाने के लिए.. आज मेरे लिए खुशी की बात है कि अमृतसर से आनंदपुर साहब रेलवे की योजना का साकार रूप हमारे सामने खड़ा हुआ है। यह गर्व की बात है। आनंदपुर साहब यात्रियों के लिए एक मुख्‍य धाम है और किसी को भी हिमाचल में भी किसी जगह जाना है तो आनंदपुर साहब से ही जाते हैं। चिंतपुरणी जाना है, ज्‍वालाजी जाना है तो यहीं से जाते हैं। इस पूरे इलाके को इसका लाभ मिलने वाला है। एक प्रकार से विकास की नई ऊंचाईयों को पार करने की दिशा में हम लगातार प्रयासरत है।

..और मैं आपको विश्‍वास दिलाता हूं, मेरे पंजाब के किसान भाईयों-बहनों, आपने कभी सोचा था.. किसान 60 साल के बाद.. उसको कभी पेंशन मिल सकता है। सरकारी मुलाजिम को तो पेंशन मिल जाता है। किसान को पेंशन मिल सकता है क्‍या? 60 साल के बाद हर महीना उसको चैक मिल सकता है क्‍या? मेरे किसान भाईयों-बहनों इस बार भारत सरकार ने एक योजना बनाई है जिसमें Public Private Partnership के modal पर.. किसान को.. 60 साल के बाद अगर वो इस योजना से जुड़ जाता है, तो उसको हर महीना पांच हजार रुपया पेंशन की राशि मिल सकती है। हमारे देश के किसान का बुढ़ापा भी सुख, शांति और गौरव से बीते उस दिशा में काम करने का एक अहम कदम इस बार हमने बजट में उठाया है।

भाईयों-बहनों इन दिनों किसान को गुमराह करने के लिए भांति-भांति के प्रयास हुए हैं। कल मैंने रेडियो पर मेरी “मन की बात” में, किसानों ने जितने सवाल पूछे थे, सारे सवालों के मैंने जवाब दिये और मैं किसानों को विश्‍वास दिलाता हूं कि अगर इस देश को आगे बढ़ना है तो किसान की रक्षा करनी होगी, गांव का भला करना होगा, लेकिन साथ-साथ किसान के बेटों के लिए भी चिंता करनी होगी। किसान के बेटे को रोजगार चाहिए। आज सेना में जितने जवान हैं वो कौन है? 80% से ज्‍यादा जवान किसान मां-बाप के बेटे हैं। किसान अपने बेटे को सेना में भर्ती करता है, युद्ध के लिए भेजता है। उसे मालूम है कि अगर परिवार में तीन बच्‍चे हैं तो तीनों का जीवन आज खेती से गुजरता नहीं है। हर किसान को पूछो कि भई आपके तीन बेटे हैं क्‍या चाहते हो? हर किसान कहता है – एक बेटा तो खेती करेगा लेकिन दो को तो कहीं भेजना चाहता हूं, कहीं नौकरी कर ले, रोजी-रोटी कमा ले, पढ़-लिख करके अपना करोबार चला ले। हर किसान की यह चिंता है। अगर विकास नहीं होगा तो किसान के बच्‍चों का क्‍या होगा? क्‍या मेरे किसान के बच्‍चे दिल्‍ली और मुंबई की झुग्‍गी-झोपड़ी में जिंदगी गुजारने के लिए मजबूर होने चाहिए?

किसान के बच्‍चों को भी रोजगार चाहिए, किसान के बेटों का भी भला होना चाहिए और इसलिए मेरे भाईयों-बहनों हमारी सरकार किसान का तो भला चाहती है, गांव का भी भला चाहती है, किसान के बच्‍चों का भी भला चाहती है। इस तरह एक लम्‍बी सोच के साथ, देश के विकास की ओर आगे बढ़ने की दिशा में हमने प्रयास किया है। आज वीर सरदार भगत सिंह जी के आशीर्वाद मिले, सुखदेव-राजगुरू के आशीर्वाद मिले, भगत‍ सिंह जी की माता जी के आशीर्वाद मिले, हमारा देश विकास की नई ऊंचाईयों को पार करे और नई ऊंचाईयों को पार करते-करते हम आगे बढ़े।

भाईयों बहनों हमारे देश को भ्रष्‍टाचार ने तबाह कर दिया, बर्बाद कर दिया। कैसा-कैसा भ्रष्‍टाचार हुआ है! मैं आपको बताना चाहता हूं.. कोयला.. जब मैं यहां चुनाव में आया था और कोयले की चोरी की बात कर रहा था तो हमारे पुराने लोग जो सरकार में बैठे थे, वे गुस्‍सा हो जाते थे। सीएजी ने कहा था एक लाख 76 हजार करोड़ रुपया, अकेले कोयले में घोटाला हुआ है। यह आंकड़ा इतना बड़ा था कि लोगों के गले नहीं उतरता था। लोगों को यह तो लगता था कि भ्रष्‍टाचार तो किया होगा इनकी आदत है, लेकिन इतना नहीं हो सकता। ऐसा लोग सोचते थे। कुछ लोग तो ऐसे थे जो कहते थे - जीरो थ्‍योरी, जीरो थ्‍योरी। एक नये पैसे का घोटाला नहीं हुआ यह कहते थे। भाईयों बहनों 204 कोयले की खदान भ्रष्‍टाचार के कारण गुस्‍से में आकर के सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दी। अब हमारे आते ही यह हुआ।

पाप उन्‍होंने किया था.. बिजली कारखाने बंद हो जाने की नौबत आ गई। कारखानों में कोयला नहीं जाएगा तो कारखाने बंद हो जाएंगे ऐसी स्थिति पैदा हो गई। लेकिन हमने ईमानदारी की, पारदर्शिता की, नीतियों की योजना की और हमने तय किया कि हम सार्वजनिक रूप से Auction करेंगे, नीलामी करेंगे। और जो भी लेना चाहता है वो नीलामी में बोले पैसा, जो ज्‍यादा पैसा देगा, उसको मिलेगा। भाईयों बहनों क्‍या हुआ! 204 में से अब तक सिर्फ 20 खदानों की नीलामी हुई है, अभी तो 180 खदानों की नीलामी बाकी है। 204 खदानों में एक लाख 76 हजार करोड़ के घोटाले की बात थी। लेकिन यह घोटाला तो उससे भी बड़ा निकला। 204 में से सिर्फ 20 की नीलामी हुई है और आपको जानकर के आनंद होगा कि दिल्‍ली में आपने ईमानदार सरकार बिठाई है। उसका परिणाम यह हुआ है कि अब तक करीब-करीब दो लाख करोड़ रुपया सरकारी खजाने में आना तय हो चुका है। 180 खदान बाकी हैं। सब खदाने जाएंगी तो कितना बड़ा भंडार मिलेगा, यह रुपया किसके काम आएगा? गांव के काम आएगा, गरीब के काम आएगा, किसान के काम आएगा। देश विकास की नई ऊंचाईयों पर जाएगा।

कोयला छोडि़ए, इन्‍होंने कोई जगह पाप करने के लिए छोड़ी नहीं भाईयों। सरदार भगत‍ सिंह जी आत्‍मा दुखी होती होगी इन लोगों के कारण। LED Bulb! बिजली बचाने के लिए LED Bulb लगाने की बात है। आपको मालूम है 2014 में सरकार ने LED Bulb कितने रुपये में खरीदे। करीब-करीब 300 रुपयों में एक बल्‍ब खरीदा। हमने उसमें गहराई से काम किया, Department को लगाया, व्‍यापक रूप से काम किया। कंपनियों को भी दबाया। कोई रुपया-पैसा देने की बात बंद करो, गरीब का भला करो और आपको जानकर के खुशी होगी कि जो LED का Bulb एक साल पहले कुछ सरकारों ने 300 रुपये में खरीदा था आज उसकी कीमत 80 रुपये में हमने लाकर के रख दी। एक बल्‍ब पर दो सौ-सवा दौ सौ रुपये, चोरी होते थे। करोड़ा बल्‍ब जाएंगे तो कितने रुपये जाते होंगे। भाईयों बहनों आपने हमें ईमानदारी के लिए बिठाया है, ईमानदारी से काम करने के लिए बिठाया है और उसका परिणाम है कि आज 300 रुपये में बिकने वाला बल्‍ब.. जो भ्रष्‍टाचार के कारण रुपये खाए जाते थे, हमने उसकी कीमत 80-85 रुपया लाकर के रख दी है। सरकार 80-85 रुपये में खरीदेगी और LED का Bulb पहुंचेगा और उसके कारण गरीब से गरीब के घर में बिजली की बचत होगी। किसी का 200 रुपये बचेगा, किसी का 400 रुपये बचेगा। गरीब का हमें आशीर्वाद मिलेगा।

भाईयों बहनों ईमानदारी, देशभक्ति, अगर काम करने का जज्‍बा लेकर के.. सिर्फ देश के लिए जीना, सिर्फ देश के लिए मरना इस संकल्‍प को लेकर के चलते हैं तो कितने उत्‍तम परिणाम आते हैं यह आपके सामने मौजूद है। मैं फिर एक बार.. बादल साहब ने जितने विषय रखे हैं उन सभी बातों पर भारत सरकार गंभीरता से सोचेगी, उनके साथ भी मैं विस्‍तार से बातें करूंगा और भारत सरकार पंजाब के लिए जितना ज्‍यादा कर सकती है करने में कभी पीछे नहीं रहेगी।

मेरा तो पंजाब से अनेक रूप से नाता है। एक तो मैं यहां कई वर्षों तक रहा हूं। एक प्रकार से मेरी शिक्षा-दीक्षा, राजनीतिक शिक्षा-दीक्षा का अवसर मुझे बादल साहब की उंगली पकड़कर के सीखने का मुझे अवसर मिला है। यह मेरा सौभाग्‍य रहा है। दूसरी बात, मेरा जन्‍म गुजरात में हुआ है और जो पहले पंच प्‍यारे थे, उन पहले पंच प्‍यारों में एक गुजरात के द्वारका का था और इसलिए मेरा तो आपके साथ खून का नाता है। इसलिए पंजाब के लिए मैं जो कुछ भी कर सकता हूं, मुझे करने में खुशी होगी। यह कर्ज चुकाने का अवसर मुझे मिला है। मैं उसे चुकाकर रहूंगा।

इसी एक बात के साथ फिर एक बार मेरे साथ पूरी ताकत से बोलिये – शहीदो..अमर रहो! शहीदों..अमर रहो! शहीदो..अमर रहो! धन्यवाद।

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October 05, 2022
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ಜೈ ಮಾತಾ ನೈನಾ ದೇವಿ!
(ಸ್ಥಳೀಯ ಭಾಷೆಯಲ್ಲಿ ದಸರಾ ಶುಭಾಶಯ ಕೋರಿಕೆ)

ಹಿಮಾಚಲ ಪ್ರದೇಶದ ಘನತೆವೆತ್ತ ರಾಜ್ಯಪಾಲರಾದ ಶ್ರೀ ರಾಜೇಂದ್ರ ಅರ್ಲೇಕರ್ ಜಿ; ಹಿಮಾಚಲ ಪ್ರದೇಶದ ಜನಪ್ರಿಯ ಮುಖ್ಯಮಂತ್ರಿ ಶ್ರೀ ಜೈ ರಾಮ್ ಠಾಕೂರ್ ಜಿ; ಬಿಜೆಪಿ ರಾಷ್ಟ್ರೀಯ ಅಧ್ಯಕ್ಷರು, ನಮ್ಮ ಮಾರ್ಗದರ್ಶಕರು ಹಾಗೂ ಈ ಮಣ್ಣಿನ ಮಗ ಶ್ರೀ ಜೆ ಪಿ ನಡ್ಡಾ ಜೀ; ನನ್ನ ಸಂಪುಟ ಸಹೋದ್ಯೋಗಿ ಶ್ರೀ ಅನುರಾಗ್ ಠಾಕೂರ್ ಜಿ; ಹಿಮಾಚಲ ಪ್ರದೇಶದ ಬಿಜೆಪಿ ಅಧ್ಯಕ್ಷ ಮತ್ತು ನನ್ನ ಸಂಸದೀಯ ಸಹೋದ್ಯೋಗಿ ಸುರೇಶ್ ಕಶ್ಯಪ್ ಜಿ; ನನ್ನ ಸಂಸದೀಯ ಸಹೋದ್ಯೋಗಿಗಳಾದ ಕಿಶನ್ ಕಪೂರ್ ಜಿ, ಸಹೋದರಿ ಇಂದೂ ಗೋಸ್ವಾಮಿ ಜಿ ಮತ್ತು ಡಾ ಸಿಕಂದರ್ ಕುಮಾರ್ ಜಿ; ಇಲ್ಲಿರುವ ಎಲ್ಲಾ ಸಚಿವರು, ಸಂಸದರು ಮತ್ತು ಶಾಸಕರು, ಮತ್ತು ನಮ್ಮೆಲ್ಲರನ್ನು ಆಶೀರ್ವದಿಸಲು ಹೆಚ್ಚಿನ ಸಂಖ್ಯೆಯ ಜನರು ಇಲ್ಲಿಗೆ ಬಂದಿದ್ದಾರೆ. ನನ್ನ ಪ್ರೀತಿಯ ಸಹೋದರ ಸಹೋದರಿಯರೇ! ವಿಜಯದಶಮಿಯ ಸಂದರ್ಭದಲ್ಲಿ ನಿಮಗೆ ಮತ್ತು ಸಮಸ್ತ ನಾಡಿನ ಜನತೆಗೆ ಶುಭಾಶಯಗಳು!

ಈ ಮಂಗಳಕರ ಪವಿತ್ರ ಹಬ್ಬವು ಪ್ರತಿಯೊಂದು ದುಷ್ಟತನವನ್ನು ಜಯಿಸುವ ಮೂಲಕ ದೇಶವು 'ಅಮೃತ ಕಾಲ'ಕ್ಕಾಗಿ ಕೈಗೊಂಡಿರುವ ಪಂಚ ಪ್ರಾಣಗಳು' ಅಥವಾ ಸಂಕಲ್ಪಗಳನ್ನು ಸಾಧಿಸುವ ಹಾದಿಯಲ್ಲಿ ಮುನ್ನಡೆಯಲು ನಮಗೆ ಹೊಸ ಶಕ್ತಿ ನೀಡುತ್ತದೆ. ವಿಜಯದಶಮಿ ದಿನದಂದು ಆರೋಗ್ಯ, ಶಿಕ್ಷಣ, ಉದ್ಯೋಗ ಮತ್ತು ಮೂಲಸೌಕರ್ಯಕ್ಕೆ ಸಂಬಂಧಿಸಿದ ಸಾವಿರಾರು ಕೋಟಿ ರೂಪಾಯಿ ಮೌಲ್ಯದ ಯೋಜನೆಗಳನ್ನು ಹಿಮಾಚಲ ಪ್ರದೇಶದ ಜನರಿಗೆ ಒದಗಿಸಲು ನನಗೆ ಅವಕಾಶ ಸಿಕ್ಕಿರುವುದು ನನ್ನ ಪಾಲಿನ ಅದೃಷ್ಟ. ಕಾಕತಾಳೀಯವೆಂಬಂತೆ, ವಿಜಯದಶಮಿಯಂದು ಗೆಲುವಿನ ಗಳಿಗೆ ಒಲಿಯುವ ಅವಕಾಶ ಸಿಕ್ಕಿದೆ. ಇದಲ್ಲದೆ, ಇದು ಪ್ರತಿ ಭವಿಷ್ಯದ ವಿಜಯದ ಆರಂಭವನ್ನು ಸೂಚಿಸುತ್ತಿದೆ. ಬಿಲಾಸ್ಪುರ್ ಇಂದು ಪ್ರಮುಖ 2 ಉಡುಗೊರೆಗಳನ್ನು ಸ್ವೀಕರಿಸುತ್ತಿದೆ; ಒಂದು ಶಿಕ್ಷಣ ಮತ್ತು ಇನ್ನೊಂದು ಆರೋಗ್ಯಕ್ಕೆ ಸಂಬಂಧಿಸಿದ್ದಾಗಿದೆ. ಒಂದು ಹೈಡ್ರೋ ಕಾಲೇಜ್ ಆಗಿದ್ದರೆ, ಇನ್ನೊಂದು ಏಮ್ಸ್(ಅಖಿಲ ಭಾರತ ವೈದ್ಯಕೀಯ ವಿಜ್ಞಾನಗಳ ಮಹಾಸಂಸ್ಥೆ).

ಸಹೋದರ, ಸಹೋದರಿಯರೆ,
ಜೈರಾಮ್ ಜಿ ಪ್ರಸ್ತಾಪಿಸಿದಂತೆ, ಈ ಅಭಿವೃದ್ಧಿ ಯೋಜನೆಗಳನ್ನು ಇಲ್ಲಿ ನಿಮಗೆ ಹಸ್ತಾಂತರಿಸಿದ ನಂತರ, ನಾನು ಮತ್ತೊಂದು ಸಾಂಸ್ಕೃತಿಕ ಪರಂಪರೆಗೆ ಸಾಕ್ಷಿಯಾಗಲಿದ್ದೇನೆ. ಹಲವಾರು ವರ್ಷಗಳ ನಂತರ ಮತ್ತೊಮ್ಮೆ ಕುಲ್ಲು ದಸರಾದ ಭಾಗವಾಗುವ ಸೌಭಾಗ್ಯ ನನಗೆ ದೊರೆಯಲಿದೆ. ಭಗವಾನ್ ರಘುನಾಥ ಜೀ ಮತ್ತು ಇತರ ನೂರಾರು ದೇವತೆಗಳ ದಸರಾ ರಥಯಾತ್ರೆಯಲ್ಲಿ ಭಾಗವಹಿಸುವ ಮೂಲಕ ನಾನು ಇಡೀ ದೇಶದ ಪರವಾಗಿ ಆಶೀರ್ವಾದ ಪಡೆಯುತ್ತೇನೆ. ಇಂದು ನಾನು ಇಲ್ಲಿ ಬಿಲಾಸ್ಪುರಕ್ಕೆ ಬಂದಿದ್ದೇನೆ, ನನ್ನ ಹಳೆಯ ನೆನಪುಗಳು ಮರುಕಳಿಸುತ್ತಿವೆ. ನಾವು ಈ ಪ್ರದೇಶದಲ್ಲಿ ತಿರುಗಾಡುತ್ತಿದ್ದ ಕಾಲವೊಂದಿತ್ತು. ಕೆಲವೊಮ್ಮೆ ನಾನು, ಧುಮಲ್ ಜಿ ಮತ್ತು ನಡ್ಡಾ ಜೀ ಮಾರುಕಟ್ಟೆಯಲ್ಲಿ ಸುತ್ತಾಡುತ್ತಿದ್ದೆವು.  ನಾವು ಇಲ್ಲಿ ಬಿಲಾಸ್‌ಪುರದ ಬೀದಿಗಳಲ್ಲಿ ಬೃಹತ್ ರಥಯಾತ್ರೆ ಕಾರ್ಯಕ್ರಮದೊಂದಿಗೆ ನಡೆದು ಹೋಗಿದ್ದೆವು. ತದನಂತರ ಸ್ವರ್ಣ ಜಯಂತಿ ರಥಯಾತ್ರೆಯೂ ಮುಖ್ಯ ಮಾರುಕಟ್ಟೆಯ ಮೂಲಕ ಸಾಗಿತ್ತು,  ಸಾರ್ವಜನಿಕ ಸಭೆಯೂ ನಡೆದಿತ್ತು. ನಾನು ಹಲವಾರು ಬಾರಿ ಇಲ್ಲಿಗೆ ಬಂದಿದ್ದೇನೆ ಮತ್ತು ಇದೀಗ ನಿಮ್ಮೆಲ್ಲರ ನಡುವೆ ಇದ್ದೇನೆ.

ಹಿಮಾಚಲ ಪ್ರದೇಶದಲ್ಲಿ ಕೆಲಸ ಮಾಡುತ್ತಿರುವಾಗ ನಿರಂತರವಾಗಿ ಇಲ್ಲಿನ ಅಭಿವೃದ್ಧಿ ಪಯಣಕ್ಕೆ ಸಾಕ್ಷಿಯಾಗುವ ಅವಕಾಶ ಸಿಕ್ಕಿದೆ. ನಾನು ಈ ಮೊದಲಿನ ಭಾಷಣಗಳನ್ನು ಕೇಳಿದ್ದೇನೆ. ಅನುರಾಗ್ ಜೀ ಅವರು, ಮೋದಿ ಜೀ ಇದನ್ನು ಮಾಡಿದರು ಮತ್ತು ಅದನ್ನು ಮಾಡಿದರು ಎಂದು ಬಹಳ ಉತ್ಸಾಹದಿಂದ ಮಾತನಾಡುತ್ತಿದ್ದರು. ನಡ್ಡಾ ಜೀ ಮತ್ತು ನಮ್ಮ ಮುಖ್ಯಮಂತ್ರಿ ಜೈರಾಮ್ ಜಿ ಕೂಡ, ಮೋದಿ ಜೀ ಇದು ಮತ್ತು ಅದನ್ನು ಮಾಡಿದರು ಎಂದು ಹೇಳುತ್ತಿದ್ದರು. ಆದರೆ ನಾನು ಕಟುಸತ್ಯ ಹೇಳಬಯಸುತ್ತೇನೆ. ಈ ಕೆಲಸಗಳನ್ನು ಮಾಡಿದವರು ಯಾರು? ನಾನು ಹೇಳಬೇಕೇ? ಇಂದು ಏನೇ ಕೆಲಸಗಳು ಆಗಿದ್ದರೂ ಅದಕ್ಕೆ ನೀವೆಲ್ಲಾ ಕಾರಣ. ನೀವು ಅದನ್ನು ಮಾಡಿದ್ದೀರಿ. ನಿಮ್ಮಿಂದಾಗಿ ಇದೆಲ್ಲಾ ಆಯಿತು. ನೀವು ದೆಹಲಿಯಲ್ಲಿ ಮೋದಿ ಜಿ ಅವರ ಮೇಲೆ ಮಾತ್ರ ನಿಮ್ಮ ಆಶೀರ್ವಾದ ಧಾರೆ ಎರೆದು, ಹಿಮಾಚಲ ಪ್ರದೇಶದಲ್ಲಿರುವ ಮೋದಿ ಜಿ ಸಹೋದ್ಯೋಗಿಗಳ ಮೇಲೆ ಧಾರೆ ಎರೆಯದೆ ಇದ್ದಿದ್ದರೆ, ಆಗ ಇಲ್ಲಿನ ಎಲ್ಲ ಕೆಲಸಗಳು ಅಥವಾ ಯೋಜನೆಗಳಲ್ಲಿ ಅಡೆತಡೆಗಳು ಮತ್ತು ಅಡಚಣೆಗಳು ಇರುತ್ತಿದ್ದವು. ದೆಹಲಿಯಲ್ಲಿ ರೂಪಿಸಲಾದ ಯೋಜನೆಗಳು ಇಲ್ಲಿ ತ್ವರಿತ ಗತಿಯಲ್ಲಿ ಅನುಷ್ಠಾನಗೊಳ್ಳಲು ಜೈರಾಮ್ ಜಿ ಮತ್ತು ಅವರ ತಂಡ ಕಾರಣವಾಗಿದೆ. ಆದ್ದರಿಂದಲೇ ಈ ಅಭಿವೃದ್ಧಿ ಬದಲಾವಣೆಗಳು ಆಗುತ್ತಿವೆ. ಅಖಿಲ ಭಾರತ ವೈದ್ಯಕೀಯ ವಿಜ್ಞಾನಗಳ ಮಹಾಸಂಸ್ಥೆ(ಎಐಐಎಂಎಸ್)ಯನ್ನು ನಿಮ್ಮ 'ಪ್ರತಿಯೊಂದು ಮತ'ದ ಶಕ್ತಿಯಿಂದ ನಿರ್ಮಿಸಲಾಗಿದೆ. ಒಂದು ಸುರಂಗ ನಿರ್ಮಿಸಿದ್ದರೆ ಅದು ನಿಮ್ಮ ಮತದ ಶಕ್ತಿಯಿಂದಾಗಿ; ಹೈಡ್ರೊ ಇಂಜಿನಿಯರಿಂಗ್ ಕಾಲೇಜು ಸ್ಥಾಪನೆಯಾದರೆ ಮತ್ತೆ ಅದು ನಿಮ್ಮ ಮತದ ಶಕ್ತಿ; ವೈದ್ಯಕೀಯ ಸಾಧನ ಉದ್ಯಾನ ಸ್ಥಾಪಿಸಲಾಗುತ್ತಿದ್ದರೆ, ಅದು ಮತ್ತೆ ನಿಮ್ಮ ಶಕ್ತಿಯಿಂದ ಆಗುತ್ತದೆ.  ‘ಒಂದೇ ಒಂದುಮತ’ಕ್ಕೆ ಅಷ್ಟೊಂದು ಅಧಿಕಾರವಿದೆ. ಹಾಗಾಗಿ ಇಂದು ಹಿಮಾಚಲ ಪ್ರದೇಶ ಜನರ ನಿರೀಕ್ಷೆಯನ್ನು ಗಮನದಲ್ಲಿಟ್ಟುಕೊಂಡು ಒಂದರ ಹಿಂದೆ ಒಂದರಂತೆ ಅಭಿವೃದ್ಧಿ ಯೋಜನೆಗಳನ್ನು ಆರಂಭಿಸುತ್ತಿದ್ದೇನೆ.

ಬಹು ದಿನಗಳ ಹಿಂದಿನಿಂದಲೂ ಸಹ ದೇಶದಲ್ಲಿ ಅಭಿವೃದ್ಧಿ ವಿಚಾರದಲ್ಲಿ ವಿಕೃತ ಚಿಂತನೆ ನಡೆಯುವುದನ್ನು ಕಂಡಿದ್ದೇವೆ. ಈ ಆಲೋಚನೆ ಏನು? ‘ಕೆಲವು ರಾಜ್ಯಗಳು, ಕೆಲವು ದೊಡ್ಡ ನಗರಗಳು ಮತ್ತು ದೆಹಲಿಯ ಸುತ್ತಮುತ್ತ ಮಾತ್ರ ಒಳ್ಳೆಯ ರಸ್ತೆಗಳು ಇರಬೇಕು; ಎಲ್ಲ ಉನ್ನತ ದರ್ಜೆಯ ಶಿಕ್ಷಣ ಸಂಸ್ಥೆಗಳು ದೊಡ್ಡ ನಗರಗಳಲ್ಲಿ ಇರಬೇಕು; ಎಲ್ಲ ಉತ್ತಮ ಆಸ್ಪತ್ರೆಗಳು ದೆಹಲಿಯಲ್ಲಿರಬೇಕು ಮತ್ತು ಬೇರೆಲ್ಲಿಯೂ ಅಲ್ಲ; ದೊಡ್ಡ ಕೈಗಾರಿಕೆಗಳು ಮತ್ತು ವ್ಯವಹಾರಗಳನ್ನು ದೊಡ್ಡ ನಗರಗಳಲ್ಲಿ ಮಾತ್ರ ಸ್ಥಾಪಿಸಬೇಕು. ವಾಸ್ತವವಾಗಿ, ನಿರ್ದಿಷ್ಟವಾಗಿ ದೇಶದ ಗುಡ್ಡಗಾಡು ಪ್ರದೇಶಗಳಲ್ಲಿ ಮೂಲಭೂತ ಸೌಕರ್ಯಗಳು ಹಲವಾರು ವರ್ಷಗಳ ಕಾಲ ಕಾದ ನಂತರ ಕೊನೆಗೆ ಮಾತ್ರ ತಲುಪುತ್ತವೆ. ಆ ಹಳೆಯ ಚಿಂತನೆಯ ಪರಿಣಾಮವೆಂದರೆ, ಅದು ದೇಶದಲ್ಲಿ ಅಭಿವೃದ್ಧಿಯ ದೊಡ್ಡ ಅಸಮತೋಲನವನ್ನು ಸೃಷ್ಟಿಸಿತು. ಈ ಕಾರಣದಿಂದಾಗಿ, ದೇಶದ ಹೆಚ್ಚಿನ ಭಾಗವು ಅನನುಕೂಲತೆಯ ಅಡಿ ವಾಸಿಸುವಂತಾಗಿತ್ತು.
ಆದರೆ ಕಳೆದ 8 ವರ್ಷಗಳಲ್ಲಿ ಆ ಹಳೆಯ ಚಿಂತನೆ ಬಿಟ್ಟು ಈಗ ಹೊಸ ಚಿಂತನೆ, ಆಧುನಿಕ ಚಿಂತನೆಯೊಂದಿಗೆ ದೇಶ ಮುನ್ನಡೆಯುತ್ತಿದೆ. ನಾನು ಇಲ್ಲಿಗೆ ಬಂದಾಗಲೆಲ್ಲಾ, ಇಲ್ಲಿನ ಜನರು ಕೇವಲ ಒಂದು ವಿಶ್ವವಿದ್ಯಾಲಯವನ್ನು ಅವಲಂಬಿಸಿರುವುದನ್ನು ನಾನು ನಿರಂತರವಾಗಿ ಗಮನಿಸುತ್ತಿದ್ದೆ. ಚಿಕಿತ್ಸೆ ಅಥವಾ ವೈದ್ಯಕೀಯ ಶಿಕ್ಷಣಕ್ಕೆ ಬಂದಾಗ, ಜನರು ಐಜಿಎಂಸಿ ಶಿಮ್ಲಾ ಅಥವಾ ಟಾಟಾ ಮೆಡಿಕಲ್ ಕಾಲೇಜ್ ಅವಲಂಬಿಸಿದ್ದರು.  ಗಂಭೀರ ಕಾಯಿಲೆಗಳು, ಶಿಕ್ಷಣ ಅಥವಾ ಉದ್ಯೋಗದ ಬಗ್ಗೆ ಹೇಳುವುದಾದರೆ, ಹಿಮಾಚಲದ ಜನರು ಆ ಸಮಯದಲ್ಲಿ ಚಂಡೀಗಢ ಮತ್ತು ದೆಹಲಿಗೆ ಹೋಗಬೇಕಾಗಿತ್ತು. ಆದರೆ ಕಳೆದ 8 ವರ್ಷಗಳಲ್ಲಿ ನಮ್ಮ ಡಬಲ್ ಇಂಜಿನ್ ಸರ್ಕಾರ ಹಿಮಾಚಲದ ಅಭಿವೃದ್ಧಿಯ ಯಶೋಗಾಥೆಯನ್ನು ಹೊಸ ಆಯಾಮಕ್ಕೆ ಕೊಂಡೊಯ್ದಿದೆ. ಇಂದು ಹಿಮಾಚಲವು ಕೇಂದ್ರೀಯ ವಿಶ್ವವಿದ್ಯಾಲಯ, ಐಐಟಿ, ಐಐಐಟಿ ಮತ್ತು ಇಂಡಿಯನ್ ಇನ್‌ಸ್ಟಿಟ್ಯೂಟ್ ಆಫ್ ಮ್ಯಾನೇಜ್‌ಮೆಂಟ್(ಐಐಎಂ) ಅನ್ನು ಸಹ ಹೊಂದಿದೆ. ಈಗ ದೇಶದ ವೈದ್ಯಕೀಯ ಶಿಕ್ಷಣ ಮತ್ತು ಆರೋಗ್ಯದ ಅತಿದೊಡ್ಡ ಸಂಸ್ಥೆಯಾದ ಐಮ್ಸ್, ಬಿಲಾಸ್‌ಪುರ ಮತ್ತು ಹಿಮಾಚಲ ಜನರ ಹೆಮ್ಮೆ ಹೆಚ್ಚಿಸುತ್ತಿದೆ.
 ಬಿಲಾಸ್ಪುರ್ ಏಮ್ಸ್ ಮತ್ತೊಂದು ಬದಲಾವಣೆಯ ಸಂಕೇತವಾಗಿದೆ. ಇದನ್ನು ಸಂಪೂರ್ಣವಾಗಿ ಪರಿಸರ ಸ್ನೇಹಿಯಾಗಿರುವ ಗ್ರೀನ್ ಏಮ್ಸ್ ಎಂದು ಕರೆಯಲಾಗುವುದು. ಹಿಂದಿನ ಸರ್ಕಾರಗಳು ಶಂಕುಸ್ಥಾಪನೆ ಮಾಡಿ ಚುನಾವಣೆಯ ನಂತರ ಅದನ್ನು ಮರೆತುಬಿಡುತ್ತಿದ್ದವು ಎಂದು ನಮ್ಮ ಸಹೋದ್ಯೋಗಿಗಳೆಲ್ಲರೂ ಸ್ವಲ್ಪ ಸಮಯದ ಹಿಂದೆ ಉಲ್ಲೇಖಿಸಿದ್ದರು. ಧುಮಾಲ್ ಜಿ ಅವರು ಶಂಕುಸ್ಥಾಪನೆ ಮಾಡಿದ ಎಲ್ಲಾ ಯೋಜನೆಗಳನ್ನು ಹುಡುಕಲು ಒಮ್ಮೆ ಆಂದೋಲನವನ್ನೇ ಆಯೋಜಿಸಿದ್ದರು, ಆದರೆ ಆ ಯೋಜನೆಗಳೆಲ್ಲಾ ಪೂರ್ಣವಾಗಲೇ ಇಲ್ಲ.

ನಾನು ಒಮ್ಮೆ ರೈಲ್ವೆ ಯೋಜನೆಯ ಪರಾಮರ್ಶೆ ಮಾಡಿದ್ದು ನನಗೆ ಇನ್ನೂ ನೆನಪಿದೆ. ಉನಾ ಬಳಿ ರೈಲು ಮಾರ್ಗ ಹಾಕಬೇಕಿತ್ತು. ಈ ನಿರ್ಧಾರವನ್ನು 35 ವರ್ಷಗಳ ಹಿಂದೆ ತೆಗೆದುಕೊಳ್ಳಲಾಗಿದೆ. ಸಂಸತ್ತಿನಲ್ಲಿ ಘೋಷಣೆಯಾಯಿತು, ಆದರೆ ನಂತರ ಅದರ ಕಡತಗಳನ್ನು ಮುಚ್ಚಿಡಲಾಯಿತು. ಹಿಮಾಚಲದ ಅಭಿವೃದ್ಧಿಯನ್ನು ಯಾರು ಪ್ರಶ್ನಿಸುತ್ತಿದ್ದರು?  ನಮ್ಮ ಸರ್ಕಾರದ ವಿಶೇಷತೆ ಏನೆಂದರೆ, ಯೋಜನೆಗೆ ಶಂಕುಸ್ಥಾಪನೆ ವೇಳೆ ಉದ್ಘಾಟನೆಯೂ ನಡೆಯಲಿದೆ. ಸ್ಥಗಿತಗೊಂಡ ಮತ್ತು ನಿಧಾನಗತಿಯ ಯೋಜನೆಗಳ ಯುಗ ಕಳೆದುಹೋಗಿದೆ ಸ್ನೇಹಿತರೇ!

ಸ್ನೇಹಿತರೆ,
ರಾಷ್ಟ್ರ ರಕ್ಷಣೆಯಲ್ಲಿ ಹಿಮಾಚಲ ಪ್ರದೇಶ ಸದಾ ಕಾಲವೂ ಉತ್ತಮ ಕೊಡುಗೆ ನೀಡುತ್ತಾ ಬಂದಿದೆ. ರಾಷ್ಟ್ರ ರಕ್ಷಿಸುವ ವೀರರಿಗೆ ದೇಶದಲ್ಲೇ  ಹೆಸರುವಾಸಿಯಾದ ಹಿಮಾಚಲ ಪ್ರದೇಶವು ಈಗ ಏಮ್ಸ್ ಮೂಲಕ ಜನರ ಜೀವ ಉಳಿಸುವಲ್ಲಿ ಪ್ರಮುಖ ಪಾತ್ರ ವಹಿಸಲಿದೆ. 2014ರ ವರೆಗೆ ಹಿಮಾಚಲದಲ್ಲಿ ಕೇವಲ 3 ವೈದ್ಯಕೀಯ ಕಾಲೇಜುಗಳು ಇದ್ದವು. ಅವುಗಳಲ್ಲಿ 2 ಸರ್ಕಾರಿ ಕಾಲೇಜುಗಳಾಗಿವೆ. ಕಳೆದ 8 ವರ್ಷಗಳಲ್ಲಿ, ಹಿಮಾಚಲದಲ್ಲಿ 5 ಹೊಸ ಸರ್ಕಾರಿ ವೈದ್ಯಕೀಯ ಕಾಲೇಜುಗಳನ್ನು ಸ್ಥಾಪಿಸಲಾಗಿದೆ. 2014ರ ವರೆಗೆ ಕೇವಲ 500 ವಿದ್ಯಾರ್ಥಿಗಳು ಪದವಿ ಮತ್ತು ಸ್ನಾತಕೋತ್ತರ ವೈದ್ಯಕೀಯ ಕೋರ್ಸ್‌ಗಳಲ್ಲಿ ಅಧ್ಯಯನ ಮಾಡಬಹುದಾಗಿತ್ತು. ಇಂದು ಈ ಸಂಖ್ಯೆ 1200ಕ್ಕಿಂತ ಹೆಚ್ಚಾಗಿದೆ, ಅಂದರೆ 2 ಪಟ್ಟು ಹೆಚ್ಚಾಗಿದೆ. ಪ್ರತಿ ವರ್ಷ ಅನೇಕ ಹೊಸ ವೈದ್ಯರು ಏಮ್ಸ್ ನಿಂದ ಹೊರಬರುತ್ತಾರೆ, ಯುವಕರು ಇಲ್ಲಿ ನರ್ಸಿಂಗ್‌ಗೆ ಸಂಬಂಧಿಸಿದ ತರಬೇತಿ ಪಡೆಯುತ್ತಾರೆ. ಇದಕ್ಕೆಲ್ಲಾ ಕಾರಣರಾದ ಜೈರಾಮ್ ಜಿ ಅವರ ತಂಡವನ್ನು ನಾನು ವಿಶೇಷವಾಗಿ ಅಭಿನಂದಿಸುತ್ತೇನೆ. ಜೆ ಪಿ ನಡ್ಡಾ ಆರೋಗ್ಯ ಸಚಿವರಾಗಿದ್ದಾಗ ನಾವು ಈ ನಿರ್ಧಾರ ಕೈಗೊಂಡಿದ್ದೆವು. ಹಾಗಾಗಿ ಅವರಿಗೆ ದೊಡ್ಡ ಜವಾಬ್ದಾರಿ ಇತ್ತು. ಇಲ್ಲಿ ಶಿಲಾನ್ಯಾಸವನ್ನೂ ಮಾಡಿದ್ದೆ. ಅದು ಭಯಾನಕ ಕೊರೊನಾ ಸಾಂಕ್ರಾಮಿಕದ ಅವಧಿ. ಜತೆಗೆ, ಹಿಮಾಚಲದಲ್ಲಿ ಪ್ರತಿಯೊಂದು ವಸ್ತುವನ್ನು ಪರ್ವತಗಳ ಮೇಲಿಂದ ತಂದು ನಿರ್ಮಾಣ ಕೆಲಸ ಮಾಡುವುದು ಕಷ್ಟ ಎಂದು ನಮಗೆ ತಿಳಿದಿದೆ. ಬಯಲು ಸೀಮೆಯಲ್ಲಿ ಒಂದು ಗಂಟೆಯಲ್ಲಿ ಮಾಡುವ ಕೆಲಸ ಮಲೆನಾಡಿನಲ್ಲಿ ಮುಗಿಯಲು ಒಂದು ದಿನ ಬೇಕಾಗುತ್ತದೆ. ಅದರ ಹೊರತಾಗಿಯೂ ಮತ್ತು ಕೊರೊನಾ ಸಾಂಕ್ರಾಮಿಕದ ಹೊರತಾಗಿಯೂ, ಭಾರತ ಸರ್ಕಾರದ ಆರೋಗ್ಯ ಸಚಿವಾಲಯ ಮತ್ತು ಜೈರಾಮ್ ಜಿ ಅವರ ನೇತೃತ್ವದಲ್ಲಿ ರಾಜ್ಯ ಸರ್ಕಾರದ ತಂಡವು ಏಮ್ಸ್ ಅನ್ನು ಯಶಸ್ವಿಯಾಗಿ ಪೂರ್ಣಗೊಳಿಸಿದೆ. ಇಂದು ಏಮ್ಸ್  ಕಾರ್ಯ ನಿರ್ವಹಿಸಲು ಪ್ರಾರಂಭಿಸಿದೆ.
ವೈದ್ಯಕೀಯ ಕಾಲೇಜು ಮಾತ್ರವಲ್ಲ, ನಾವು ಮತ್ತೊಂದು ದಿಕ್ಕಿನಲ್ಲಿ ಸಾಗಿದ್ದೇವೆ. ಔಷಧಿಗಳು ಮತ್ತು ಜೀವ ಉಳಿಸುವ ಲಸಿಕೆಗಳ ತಯಾರಕ ತಾಣವಾಗಿ ಹಿಮಾಚಲದ ಪಾತ್ರವನ್ನು ಹೆಚ್ಚು ವಿಸ್ತರಿಸಲಾಗುತ್ತಿದೆ. ಬಲ್ಕ್ ಡ್ರಗ್ಸ್ ಪಾರ್ಕ್ ಯೋಜನೆಗೆ ದೇಶದ 3 ರಾಜ್ಯಗಳನ್ನು ಮಾತ್ರ ಆಯ್ಕೆ ಮಾಡಲಾಗಿದೆ. ಅವುಗಳಲ್ಲಿ ಒಂದು ರಾಜ್ಯ ಯಾವುದು? ಹೌದು, ಅದು ಹಿಮಾಚಲ ಪ್ರದೇಶ. ನೀವು ಅದರ ಬಗ್ಗೆ ಹೆಮ್ಮೆಪಡುತ್ತೀರೋ ಅಥವಾ ಇಲ್ಲವೋ? ನಿಮ್ಮ ಮಕ್ಕಳ ಉಜ್ವಲ ಭವಿಷ್ಯಕ್ಕೆ ಇದು ಅಡಿಪಾಯವೇ ಅಥವಾ ಇಲ್ಲವೇ? ಇದು ನಿಮ್ಮ ಮಕ್ಕಳ ಉಜ್ವಲ ಭವಿಷ್ಯದ ಗ್ಯಾರಂಟಿಯೋ ಅಥವಾ ಇಲ್ಲವೋ? ನಾವು ಈಗಿನ ಪೀಳಿಗೆಗೆ  ಮಾತ್ರವಲ್ಲದೆ, ಮುಂದಿನ ಪೀಳಿಗೆಗೂ ಶ್ರದ್ಧೆಯಿಂದ ಕೆಲಸ ಮಾಡುತ್ತೇವೆ.
ಅದೇ ರೀತಿ, ವೈದ್ಯಕೀಯ ಸಾಧನ ಉದ್ಯಾನಕ್ಕೆ 4 ರಾಜ್ಯಗಳನ್ನು ಆಯ್ಕೆ ಮಾಡಲಾಗಿದ್ದು, ವೈದ್ಯಕೀಯದಲ್ಲಿ ತಂತ್ರಜ್ಞಾನವನ್ನು ವ್ಯಾಪಕವಾಗಿ ಬಳಸಲಾಗುತ್ತಿದೆ. ವಿಶೇಷ ರೀತಿಯ ಉಪಕರಣಗಳನ್ನು ತಯಾರಿಸಲು ದೇಶದ 4 ರಾಜ್ಯಗಳನ್ನು ಆಯ್ಕೆ ಮಾಡಲಾಗಿದೆ. ಭಾರತವು ಬೃಹತ್ ಜನಸಂಖ್ಯೆ ಹೊಂದಿರುವ ವಿಶಾಲ ದೇಶವಾಗಿದೆ, ಆದರೆ ಹಿಮಾಚಲವು ಬಹಳ ಚಿಕ್ಕ ರಾಜ್ಯವಾಗಿದೆ. ಆದರೆ ಇದು ವೀರರ ನಾಡು ಮತ್ತು ಈ ಸ್ಥಳದಲ್ಲಿ ನನ್ನ ಪಾಲಿನ ಅನ್ನವಿದೆ. ಆದ್ದರಿಂದ, ನಾನು ಅದನ್ನು ಹಿಂತಿರುಗಿಸಲೇಬೇಕು. 4ನೇ ವೈದ್ಯಕೀಯ ಸಾಧನ ಉದ್ಯಾನವನ್ನು ಎಲ್ಲಿ ನಿರ್ಮಿಸಲಾಗುತ್ತಿದೆ ಎಂದು ನೀವು ಊಹಿಸಬಹುದು? ಸ್ನೇಹಿತರೇ, ಹಿಮಾಚಲದಲ್ಲಿ 4ನೇ ವೈದ್ಯಕೀಯ ಸಾಧನ ಉದ್ಯಾನ ನಿರ್ಮಿಸಲಾಗುತ್ತಿದೆ. ವಿಶ್ವಾದ್ಯಂತ ಇರುವ ವಿವಿಧ ದಿಗ್ಗಜರು ಇಲ್ಲಿಗೆ ಬರುತ್ತಾರೆ. ನಲಗಢದಲ್ಲಿ ಈ ವೈದ್ಯಕೀಯ ಸಾಧನ ಉದ್ಯಾನಕ್ಕೆ ಶಂಕುಸ್ಥಾಪನೆ ಈ ಯೋಜನೆಯ ಭಾಗವಾಗಿದೆ. ಈ ಡಿವೈಸ್ ಪಾರ್ಕ್ ನಿರ್ಮಾಣಕ್ಕೆ ಇಲ್ಲಿ ಸಾವಿರಾರು ಕೋಟಿ ರೂ ವ್ಯಯಿಸಲಾಗುತ್ತದೆ.  ಇದಕ್ಕೆ ಸಂಬಂಧಿಸಿದ ಅನೇಕ ಸಣ್ಣ ಮತ್ತು ಮಧ್ಯಮ ಪ್ರಮಾಣದ ಉದ್ಯಮಗಳು ಸಮೀಪದಲ್ಲೇ ಅಭಿವೃದ್ಧಿ ಹೊಂದುತ್ತವೆ. ಇದರಿಂದ ಇಲ್ಲಿನ ಸಾವಿರಾರು ಯುವಕರಿಗೆ ಉದ್ಯೋಗಾವಕಾಶ ದೊರೆಯಲಿದೆ.

ಸ್ನೇಹಿತರೆ,
ಹಿಮಾಚಲದ ಮತ್ತೊಂದು ಮುಖವಿದೆ, ಇದರಲ್ಲಿ ಅಭಿವೃದ್ಧಿಯ ಅನಂತ ಸಾಧ್ಯತೆಗಳು ಅಡಗಿವೆ. ಅದು ವೈದ್ಯಕೀಯ ಪ್ರವಾಸೋದ್ಯಮ ಆಗಿರಬಹುದು, ಇಲ್ಲಿನ ಹವಾಮಾನ, ಪರಿಸರ, ಇಲ್ಲಿನ ಗಿಡಮೂಲಿಕೆಗಳು ಉತ್ತಮ ಆರೋಗ್ಯಕ್ಕೆ ಸೂಕ್ತವಾಗಿವೆ. ಇಂದು ಭಾರತವು ವೈದ್ಯಕೀಯ ಪ್ರವಾಸೋದ್ಯಮ ದೃಷ್ಟಿಯಿಂದ ವಿಶ್ವದ ಪ್ರಮುಖ ಆಕರ್ಷಣೆಯ ಕೇಂದ್ರವಾಗುತ್ತಿದೆ. ದೇಶದ ಮತ್ತು ಪ್ರಪಂಚದ ಜನರು ವೈದ್ಯಕೀಯ ಚಿಕಿತ್ಸೆಗಾಗಿ ಭಾರತಕ್ಕೆ ಬರಲು ಬಯಸಿದಾಗ, ಈ ನೆಲದ ನೈಸರ್ಗಿಕ ಸೌಂದರ್ಯವಿರುವ ಈ ಸ್ಥಳಕ್ಕೆ ಪ್ರವಾಸ ಮಾಡಲು ಬಯಸುತ್ತದೆ. ಒಂದು ರೀತಿಯಲ್ಲಿ, ಅವರು 2 ರೀತಿಯ ಪ್ರಯೋಜನ ಪಡೆಯುತ್ತಾರೆ. ಒಂದು ಆರೋಗ್ಯ ಮತ್ತು ಇನ್ನೊಂದು ಪ್ರವಾಸೋದ್ಯಮ. ಹಾಗಾಗಿ ಹಿಮಾಚಲ ಪ್ರದೇಶ ಎರಡೂ ರೀತಿಯಲ್ಲಿ ಲಾಭ ಪಡೆಯುತ್ತದೆ.

ಸ್ನೇಹಿತರೆ,
ಬಡ ಮತ್ತು ಮಧ್ಯಮ ವರ್ಗದವರ ಚಿಕಿತ್ಸಾ ವೆಚ್ಚವನ್ನು ಕಡಿಮೆ ಮಾಡಿ, ಚಿಕಿತ್ಸೆಯ ಗುಣಮಟ್ಟ ಉತ್ತಮವಾಗಿಸಿ, ಚಿಕಿತ್ಸೆ ಹತ್ತಿರದಲ್ಲೇ ಲಭ್ಯವಾಗುವಂತೆ ಮಾಡಲು ಕೇಂದ್ರ ಸರ್ಕಾರ ಪ್ರಯತ್ನಿಸುತ್ತಿದೆ. ಆದ್ದರಿಂದ ಇಂದು ನಾವು ಏಮ್ಸ್ ವೈದ್ಯಕೀಯ ಕಾಲೇಜು, ಜಿಲ್ಲಾಸ್ಪತ್ರೆಗಳಲ್ಲಿ ಕ್ರಿಟಿಕಲ್ ಕೇರ್ ಸೌಲಭ್ಯಗಳು ಮತ್ತು ಹಳ್ಳಿಗಳಲ್ಲಿ ಆರೋಗ್ಯ ಮತ್ತು ಯೋಗಕ್ಷೇಮ ಕೇಂದ್ರಗಳನ್ನು ನಿರ್ಮಿಸುವ ಮೂಲಕ ತಡೆರಹಿತ ಸಂಪರ್ಕಕ್ಕಾಗಿ ಕೆಲಸ ಮಾಡುತ್ತಿದ್ದೇವೆ. ಈ ಅಂಶಗಳಿಗೆ ಈಗ ಒತ್ತು ನೀಡಲಾಗುತ್ತಿದೆ. ಆಯುಷ್ಮಾನ್ ಭಾರತ್ ಯೋಜನೆಯಡಿ, ಹಿಮಾಚಲದ ಬಹುತೇಕ ಕುಟುಂಬಗಳು 5 ಲಕ್ಷ ರೂ.ವರೆಗೆ ಉಚಿತ ಚಿಕಿತ್ಸೆ ಪಡೆಯುತ್ತಿವೆ.
 
ಈ ಯೋಜನೆಯಡಿ ಇದುವರೆಗೆ ದೇಶಾದ್ಯಂತ 3 ಕೋಟಿ 60 ಲಕ್ಷ ಬಡ ರೋಗಿಗಳಿಗೆ ಉಚಿತ ಚಿಕಿತ್ಸೆ ನೀಡಲಾಗಿದೆ. ಈ ಪೈಕಿ 1.5 ಲಕ್ಷ ಫಲಾನುಭವಿಗಳು ಹಿಮಾಚಲದವರಾಗಿದ್ದಾರೆ. ಈವರೆಗೆ ದೇಶದಲ್ಲಿ ಇವರೆಲ್ಲರ ಚಿಕಿತ್ಸೆಗೆ ಸರ್ಕಾರ 45 ಸಾವಿರ ಕೋಟಿ ರೂಪಾಯಿಗೂ ಹೆಚ್ಚು ಖರ್ಚು ಮಾಡಿದೆ. ಆಯುಷ್ಮಾನ್ ಭಾರತ್ ಯೋಜನೆ ಇಲ್ಲದಿದ್ದರೆ, ಈ ಬಡ ಕುಟುಂಬಗಳು ಚಿಕಿತ್ಸೆಗಾಗಿ ಸುಮಾರು 2 ಪಟ್ಟು ಅಂದರೆ ಸುಮಾರು 90 ಸಾವಿರ ಕೋಟಿ ರೂಪಾಯಿಯನ್ನು ತಮ್ಮ ಜೇಬಿನಿಂದ ಪಾವತಿಸಬೇಕಾಗಿತ್ತು. ಅಂದರೆ, ಬಡ ಮತ್ತು ಮಧ್ಯಮ ವರ್ಗದ ಕುಟುಂಬಗಳು ಗುಣಮಟ್ಟದ ಚಿಕಿತ್ಸೆ ಪಡೆಯುತ್ತಿವೆ, ಆರೋಗ್ಯಕ್ಕೆ ಆಗುತ್ತಿದ್ದ ವೆಚ್ಚದಲ್ಲಿ ಈಗ  ತುಂಬಾ ಹಣ ಉಳಿಯುತ್ತಿದೆ.

ಸ್ನೇಹಿತರೆ,
ಇನ್ನೊಂದು ಕಾರಣಕ್ಕಾಗಿ ನಾನು ಸಂತಸಪಡುತ್ತೇನೆ. ಸರ್ಕಾರದ ಇಂತಹ ಯೋಜನೆಗಳಿಂದ ನಮ್ಮ ತಾಯಂದಿರು, ಸಹೋದರಿಯರು ಮತ್ತು ಹೆಣ್ಣು ಮಕ್ಕಳು ಹೆಚ್ಚು ಪ್ರಯೋಜನ ಪಡೆದಿದ್ದಾರೆ. ದೇಹದಲ್ಲಿ ಸಾಕಷ್ಟು ನೋವು ಮತ್ತು ತೊಂದರೆಗಳಿದ್ದರೂ, ನಮ್ಮ ತಾಯಂದಿರು ಮತ್ತು ಸಹೋದರಿಯರು ಅದರ ಬಗ್ಗೆ ಮೌನವಾಗಿಡುವ ಸ್ವಭಾವ ಹೊಂದಿದ್ದಾರೆ ಎಂಬುದು ನಮಗೆ ತಿಳಿದಿದೆ. ಅವರು ಕುಟುಂಬದಲ್ಲಿ ಯಾರಿಗೂ ಹೇಳುವುದಿಲ್ಲ. ಅವರು ತಮ್ಮಷ್ಟಕ್ಕೆ ನೋವು ಸಹಿಸಿಕೊಂಡು ಕೆಲಸ ಮಾಡುತ್ತಲೇ ಇರುತ್ತಾರೆ. ಜತೆಗೆ, ಅವರು ಇಡೀ ಕುಟುಂಬವನ್ನು ನೋಡಿಕೊಳ್ಳುತ್ತಾರೆ. ಏಕೆಂದರೆ ಕಾಯಿಲೆ ಬಮದಾಗ ಕುಟುಂಬದ ಸದಸ್ಯರಿಗೆ  ಅಥವಾ ಮಕ್ಕಳಿಗೆ ಗೊತ್ತಾದರೆ ಸಾಲ ಮಾಡಿ ಚಿಕಿತ್ಸೆ ಕೊಡಿಸುತ್ತಾರೆ ಎಂಬ ಭಾವನೆ ಅವರದು. ತಾಯಿಯಾದವಳು ಅನಾರೋಗ್ಯ ಸಹಿಸಿಕೊಳ್ಳುತ್ತೇನೆ ಎಂದು ಭಾವಿಸುತ್ತಾಳೆ, ಆದರೆ ತನ್ನ ಮಕ್ಕಳನ್ನು ಸಾಲ ಮಾಡಲು ಬಿಡುವುದಿಲ್ಲ. ಹಾಗಾಗಿ ಆಸ್ಪತ್ರೆಗಳಿಗೆ ಹಣ ಖರ್ಚು ಮಾಡುತ್ತಿರಲಿಲ್ಲ. ಈ ತಾಯಂದಿರ ಬಗ್ಗೆ ಯಾರು ಯೋಚಿಸುತ್ತಾರೆ? ಈ ತಾಯಂದಿರು ಮೌನವಾಗಿ ಇಂತಹ ದುಃಖವನ್ನು ಅನುಭವಿಸಬೇಕೇ? ಹೀಗಿರುವಾಗ ನನ್ನಂಥ ಮಗನಿಂದ ಏನು ಪ್ರಯೋಜನ? ಆದ್ದರಿಂದ, ಅದೇ ಉತ್ಸಾಹದಲ್ಲಿ ನನ್ನ ತಾಯಂದಿರು ಮತ್ತು ಸಹೋದರಿಯರು ಅನಾರೋಗ್ಯ ಬಾಧೆಯಿಂದ ಬದುಕಬಾರದು ಎಂಬ ದೂರದೃಷ್ಟಿಯಿಂದ ಆಯುಷ್ಮಾನ್ ಭಾರತ್ ಯೋಜನೆ ಹುಟ್ಟಿಕೊಂಡಿತು. ಆಯುಷ್ಮಾನ್ ಭಾರತ್ ಯೋಜನೆಯಡಿ, ತಾಯಂದಿರು ಮತ್ತು ಸಹೋದರಿಯರೇ ಶೇಕಡಾ 50ಕ್ಕಿಂತ ಹೆಚ್ಚಿನ ಫಲಾನುಭವಿಗಳು ಇದ್ದಾರೆ.

ಸ್ನೇಹಿತರೆ,
ಶೌಚಾಲಯ ನಿರ್ಮಿಸುವ ಸ್ವಚ್ಛ ಭಾರತ ಅಭಿಯಾನವಾಗಲಿ, ಉಚಿತ ಗ್ಯಾಸ್ ಸಂಪರ್ಕ ನೀಡುವ ಉಜ್ವಲ ಯೋಜನೆಯಾಗಲಿ, ಉಚಿತ ಸ್ಯಾನಿಟರಿ ನ್ಯಾಪ್ಕಿನ್ ನೀಡುವ ಅಭಿಯಾನವಾಗಲಿ, ಮಾತೃ ವಂದನಾ ಯೋಜನೆಯಡಿ ಪ್ರತಿ ಗರ್ಭಿಣಿ ಮಹಿಳೆಗೆ ಪೌಷ್ಟಿಕ ಆಹಾರಕ್ಕಾಗಿ ನೀಡುವ ಸಾವಿರಾರು ರೂಪಾಯಿ ಸಹಾಯವಾಗಲಿ, ಮನೆಗಳಿಗೆ ನಲ್ಲಿ ನೀರು ಸರಬರಾಜು ಮಾಡುವ ನಮ್ಮ ಅಭಿಯಾನ, ನನ್ನ ತಾಯಂದಿರು ಮತ್ತು ಸಹೋದರಿಯರನ್ನು ಸಬಲೀಕರಣಗೊಳಿಸಲು ನಾವು ಈ ಎಲ್ಲ ಕೆಲಸಗಳನ್ನು ಒಂದರ ನಂತರ ಒಂದರಂತೆ ಮಾಡುತ್ತಿದ್ದೇವೆ. ತಾಯಂದಿರು, ಸಹೋದರಿಯರು, ಹೆಣ್ಣು ಮಕ್ಕಳ ಸಂತೋಷ, ಅನುಕೂಲತೆ, ಗೌರವ, ಸುರಕ್ಷತೆ ಮತ್ತು ಆರೋಗ್ಯವು ಡಬಲ್ ಎಂಜಿನ್ ಸರ್ಕಾರದ ಅತಿದೊಡ್ಡ ಆದ್ಯತೆಯಾಗಿದೆ.

ಜೈರಾಮ್ ಜಿ ಮತ್ತು ಅವರ ಇಡೀ ತಂಡವು ಕೇಂದ್ರ ಸರ್ಕಾರವು ರೂಪಿಸಿದ ಯೋಜನೆಗಳನ್ನು ಅತ್ಯಂತ ವೇಗದಲ್ಲಿ ಸಾಕಾರಗೊಳಿಸಿದೆ ಮತ್ತು ಹೆಚ್ಚಿನ ಉತ್ಸಾಹದಿಂದ ತಮ್ಮ ವ್ಯಾಪ್ತಿಯನ್ನು ವಿಸ್ತರಿಸಿದೆ. ಅದು ನಮ್ಮೆಲ್ಲರ ಕಣ್ಣ ಮುಂದೆಯೇ ಇದೆ. ಪ್ರತಿ ಮನೆಗೂ ನಲ್ಲಿ ನೀರು ಒದಗಿಸುವ ಕಾಮಗಾರಿ ತ್ವರಿತ ಗತಿಯಲ್ಲಿ ಪೂರ್ಣಗೊಂಡಿದೆ. ಕಳೆದ 7 ದಶಕಗಳಲ್ಲಿ ಹಿಮಾಚಲ ಪ್ರದೇಶಕ್ಕೆ ನೀಡಲಾದ ನಲ್ಲಿ ನೀರು ಸಂಪರ್ಕಗಳ ಸಂಖ್ಯೆಯನ್ನು ಕಳೆದ 3 ವರ್ಷಗಳಲ್ಲಿ ನಾವು 2 ಪಟ್ಟು ಹೆಚ್ಚು ನೀಡಿದ್ದೇವೆ. ಈ 3 ವರ್ಷಗಳಲ್ಲಿ 8.5 ಲಕ್ಷಕ್ಕೂ ಹೆಚ್ಚು ಹೊಸ ಕುಟುಂಬಗಳು ಪೈಪ್‌ಲೈನ್‌ ನೀರಿನ ಸೌಲಭ್ಯ ಪಡೆದಿವೆ.

ಸಹೋದರ, ಸಹೋದರಿಯರೆ,
ಇನ್ನೊಂದು ವಿಚಾರಕ್ಕಾಗಿ ಜೈರಾಮ್ ಜಿ ಮತ್ತು ಅವರ ತಂಡವನ್ನು ರಾಷ್ಟ್ರವು ತುಂಬಾ ಶ್ಲಾಘಿಸುತ್ತಿದೆ. ಅದು ಸಾಮಾಜಿಕ ಭದ್ರತೆಗೆ ಸಂಬಂಧಿಸಿದಂತೆ ಕೇಂದ್ರ ಸರ್ಕಾರದ ಪ್ರಯತ್ನಗಳನ್ನು ವಿಸ್ತರಿಸಿರುವುದಕ್ಕಾಗಿ. ಇಂದು ಹಿಮಾಚಲದಲ್ಲಿ ಪಿಂಚಣಿ ಸೌಲಭ್ಯ ಪಡೆಯದ ಯಾವುದೇ ಕುಟುಂಬವಿಲ್ಲ. ಅಂತಹ ಕುಟುಂಬಗಳಿಗೆ ವಿಶೇಷವಾಗಿ ನಿರ್ಗತಿಕರಿಗೆ ಅಥವಾ ಕೆಲವು ಗಂಭೀರ ಕಾಯಿಲೆಗಳಿಂದ ಬಳಲುತ್ತಿರುವವರಿಗೆ ಪಿಂಚಣಿ ಮತ್ತು ವೈದ್ಯಕೀಯ ವೆಚ್ಚಗಳಿಗೆ ಸಂಬಂಧಿಸಿದ ಸಹಾಯ ಒದಗಿಸುವ ಪ್ರಯತ್ನಗಳು ಶ್ಲಾಘನೀಯ. ಹಿಮಾಚಲ ಪ್ರದೇಶದ ಸಾವಿರಾರು ಕುಟುಂಬಗಳು 'ಒಂದು ಶ್ರೇಣಿ-ಒಂದು ಪಿಂಚಣಿ' ಅನುಷ್ಠಾನದಿಂದ ಅಪಾರ ಪ್ರಯೋಜನ ಪಡೆದಿವೆ.
 ಸ್ನೇಹಿತರೆ,
ಹಿಮಾಚಲ ಪ್ರದೇಶವು ಅವಕಾಶಗಳ ನಾಡು. ನಾನು ಮತ್ತೊಮ್ಮೆ ಜೈರಾಮ್ ಜಿ ಅವರನ್ನು ಅಭಿನಂದಿಸಲು ಬಯಸುತ್ತೇನೆ. ದೇಶಾದ್ಯಂತ ಕೋವಿಡ್ ಲಸಿಕೆ ಹಾಕುವ ಕೆಲಸ ನಡೆಯುತ್ತಿದೆ. ಆದರೆ ನಿಮ್ಮ ಸುರಕ್ಷತೆಗಾಗಿ 100ಪ್ರತಿಶತ ಲಸಿಕೆ ನೀಡಿಕೆ ಪೂರ್ಣಗೊಳಿಸಿದ ದೇಶದ ಮೊದಲ ರಾಜ್ಯ ಹಿಮಾಚಲವಾಗಿದೆ. ಆದ್ದರಿಂದ, ಇಲ್ಲಿ ಕೊರತೆಯ ಕೆಲಸಗಳಿಗೆ ಅವಕಾಶವಿಲ್ಲ. ಒಮ್ಮೆ ನಿರ್ಧರಿಸಿದ ನಂತರ ಅದನ್ನು ಮಾಡಬೇಕು, ಮಾಡಲಾಗಿದೆ.

ಇಲ್ಲಿ ಜಲವಿದ್ಯುತ್‌ನಿಂದ ವಿದ್ಯುತ್ ಉತ್ಪಾದಿಸಲಾಗುತ್ತದೆ. ಹಣ್ಣು ಮತ್ತು ತರಕಾರಿಗಳಿಗೆ ಫಲವತ್ತಾದ ಭೂಮಿ ಇದೆ. ಇಲ್ಲಿನ ಪ್ರವಾಸೋದ್ಯಮ ಅಂತ್ಯವಿಲ್ಲದ ಉದ್ಯೋಗಾವಕಾಶಗಳನ್ನು ಒದಗಿಸುತ್ತದೆ. ಉತ್ತಮ ಸಂಪರ್ಕ ಕೊರತೆಯು ಈ ಅವಕಾಶಗಳಿಗೆ ದೊಡ್ಡ ಅಡಚಣೆಯಾಗಿತ್ತು. ಹಿಮಾಚಲ ಪ್ರದೇಶದ ಪ್ರತಿ ಹಳ್ಳಿಯಲ್ಲೂ ಅತ್ಯುತ್ತಮ ಮೂಲಸೌಕರ್ಯಗಳನ್ನು ತರಲು 2014ರಿಂದಲೂ ಪ್ರಯತ್ನಗಳನ್ನು ಮಾಡಲಾಗುತ್ತಿದೆ. ಇಂದು ಹಿಮಾಚಲದ ರಸ್ತೆಗಳ ವಿಸ್ತರಣೆ ಕೆಲಸವೂ ಎಲ್ಲೆಡೆ ನಡೆಯುತ್ತಿದೆ. ಪ್ರಸ್ತುತ ಹಿಮಾಚಲದ ಸಂಪರ್ಕ ಯೋಜನೆಗಳಿಗೆ ಸುಮಾರು 50 ಸಾವಿರ ಕೋಟಿ ರೂಪಾಯಿ ಖರ್ಚು ಮಾಡಲಾಗುತ್ತಿದೆ. ಪಿಂಜೋರ್‌ನಿಂದ ನಲಗಢದವರೆಗಿನ ಚತುಷ್ಪಥ ಹೆದ್ದಾರಿ ಕಾಮಗಾರಿ ಪೂರ್ಣಗೊಂಡರೆ, ನಲಗಢ ಮತ್ತು ಬಡ್ಡಿಯಂತಹ ಕೈಗಾರಿಕಾ ಪ್ರದೇಶಗಳಿಗೆ ಮಾತ್ರವಲ್ಲ, ಚಂಡೀಗಢ ಮತ್ತು ಅಂಬಾಲದಿಂದ ಬಿಲಾಸ್‌ಪುರ, ಮಂಡಿ ಮತ್ತು ಮನಾಲಿ ಕಡೆಗೆ ಪ್ರಯಾಣಿಸುವ ಪ್ರಯಾಣಿಕರಿಗೂ ಪ್ರಯೋಜನವಾಗಲಿದೆ. ಇದಲ್ಲದೆ, ಹಿಮಾಚಲ ಜನರನ್ನು ಕಿರಿದಾದ ರಸ್ತೆಗಳಿಂದ ಮುಕ್ತಗೊಳಿಸಲು ಸುರಂಗಗಳ ಜಾಲವನ್ನು ಸಹ ನಿರ್ಮಿಸಲಾಗುತ್ತಿದೆ.

ಸ್ನೇಹಿತರೆ,
ಡಿಜಿಟಲ್ ಸಂಪರ್ಕ ಕಲ್ಪಿಸುವ ವಿಷಯದಲ್ಲೂ ಹಿಮಾಚಲದಲ್ಲಿ ಅಭೂತಪೂರ್ವ ಕೆಲಸ ಮಾಡಲಾಗಿದೆ. ಕಳೆದ 8 ವರ್ಷಗಳಲ್ಲಿ 'ಮೇಡ್ ಇನ್ ಇಂಡಿಯಾ' ಮೊಬೈಲ್ ಫೋನ್‌ಗಳು ಅಗ್ಗವಾಗುತ್ತಿರುವುದು ಮಾತ್ರವಲ್ಲದೆ, ನೆಟ್‌ವರ್ಕ್ ಪ್ರತಿ ಹಳ್ಳಿಗೂ ತಲುಪಿದೆ. ಉತ್ತಮ 4ಜಿ ಸಂಪರ್ಕದಿಂದಾಗಿ ಹಿಮಾಚಲ ಪ್ರದೇಶವು ಡಿಜಿಟಲ್ ವಹಿವಾಟಿನ ವಿಷಯದಲ್ಲಿ ಅತ್ಯಂತ ವೇಗವಾಗಿ ಚಲಿಸುತ್ತಿದೆ. 'ಡಿಜಿಟಲ್ ಇಂಡಿಯಾ' ಅಭಿಯಾನದ ಗರಿಷ್ಠ ಲಾಭವನ್ನು ಹಿಮಾಚಲದ ನನ್ನ ಸಹೋದರ, ಸಹೋದರಿಯರು ಪಡೆಯುತ್ತಿದ್ದಾರೆ. ಮೊದಲು ಜನರು ಬಿಲ್ ಪಾವತಿ ಅಥವಾ ಬ್ಯಾಂಕ್ ಸಂಬಂಧಿತ ಕೆಲಸಗಳು, ಅಪ್ಲಿಕೇಷನ್ ಅಥವಾ ಅರ್ಜಿಗಳಂತಹ ಪ್ರತಿಯೊಂದು ಸಣ್ಣ ಕೆಲಸಕ್ಕೂ ಬಯಲು ಪ್ರದೇಶದಲ್ಲಿರುವ ಕಚೇರಿಗಳಿಗೆ ಹೋಗಬೇಕಾಗಿತ್ತು. ಇದು ಒಂದು ದಿನ ಅಥವಾ ಅದಕ್ಕಿಂತ ಹೆಚ್ಚು ಸಮಯ ತೆಗೆದುಕೊಳ್ಳುತ್ತಿತ್ತು. ಕೆಲವೊಮ್ಮೆ ರಾತ್ರಿ ಅಲ್ಲೇ ಉಳಿಯಬೇಕಾಗಿತ್ತು. ಇದೀಗ ದೇಶದಲ್ಲೇ ಪ್ರಥಮ ಬಾರಿಗೆ 'ಮೇಡ್ ಇನ್ ಇಂಡಿಯಾ' 5ಜಿ ತಂತ್ರಜ್ಞಾನ ಸೇವೆಗಳು ಆರಂಭವಾಗಿದ್ದು, ಇದರ ಲಾಭ ಅತಿ ಶೀಘ್ರದಲ್ಲಿ ಹಿಮಾಚಲ ಪ್ರದೇಶಕ್ಕೆ ತಲುಪಲಿದೆ.

ಡ್ರೋನ್‌ ತಯಾರಿಕೆಗೆ ಸಂಬಂಧಿಸಿದಂತೆ ಭಾರತವು ರೂಪಿಸಿದ ಮತ್ತು ಬದಲಾಯಿಸಿದ ಕಾನೂನುಗಳಿಗಾಗಿ ನಾನು ಹಿಮಾಚಲ ಪ್ರದೇಶವನ್ನು ಅಭಿನಂದಿಸುತ್ತೇನೆ. ರಾಜ್ಯದ ಡ್ರೋನ್ ನೀತಿಯನ್ನು ರೂಪಿಸಿದ ದೇಶದ ಮೊದಲ ರಾಜ್ಯ ಹಿಮಾಚಲ. ಈಗ ಸಾರಿಗೆಗಾಗಿ ಡ್ರೋನ್‌ಗಳ ಬಳಕೆ ಬೃಹತ್ ಪ್ರಮಾಣದಲ್ಲಿ ಹೆಚ್ಚಾಗಲಿದೆ. ಉದಾಹರಣೆಗೆ, ನಾವು ಕಿನ್ನೌರ್‌ನಿಂದ ಡ್ರೋನ್‌ಗಳ ಮೂಲಕ ಆಲೂಗಡ್ಡೆ ಎತ್ತಿಕೊಂಡು ಅತಿ ಕಡಿಮೆ ಸಮಯದಲ್ಲಿ ಕೆಲವು ದೊಡ್ಡ ಮಾರುಕಟ್ಟೆಗೆ ತರಬಹುದು. ನಮ್ಮ ಹಣ್ಣುಗಳು ನಾಶವಾಗುತ್ತಿದ್ದವು, ಆದರೆ ಈಗ ಡ್ರೋನ್‌ಗಳಿಂದ ಎತ್ತಿಕೊಂಡು ಹೋಗಬಹುದು. ಮುಂದಿನ ದಿನಗಳಲ್ಲಿ ಹಲವಾರು ಅನುಕೂಲಗಳು ಆಗಲಿವೆ. ನಾವು ಈ ರೀತಿಯ ಅಭಿವೃದ್ಧಿಗಾಗಿ ಶ್ರಮಿಸುತ್ತಿದ್ದೇವೆ, ಇದು ಪ್ರತಿಯೊಬ್ಬ ನಾಗರಿಕನ ಅನುಕೂಲತೆಯನ್ನು ಹೆಚ್ಚಿಸುತ್ತದೆ, ಪ್ರತಿಯೊಬ್ಬ ನಾಗರಿಕನ ಸಮೃದ್ಧಿ ಸಾಧ್ಯವಾಗಲಿದೆ. ಇದು 'ಅಭಿವೃದ್ಧಿ ಹೊಂದಿದ ಭಾರತ' ಮತ್ತು ಅಭಿವೃದ್ಧಿ ಹೊಂದಿದ ಹಿಮಾಚಲ ಪ್ರದೇಶದ ಸಂಕಲ್ಪವನ್ನು ಈಡೇರಿಸಲಿದೆ.

ವಿಜಯದಶಮಿಯ ಶುಭ ಸಂದರ್ಭದಲ್ಲಿ ನಿಮ್ಮೆಲ್ಲರ ಆಶೀರ್ವಾದದ ನಡುವೆ ವಿಜಯದ ಘೋಷ ಮೊಳಗಿಸುವ ಅವಕಾಶ ಸಿಕ್ಕಿರುವುದಕ್ಕೆ ನನಗೆ ಖುಷಿಯಾಗಿದೆ. ಏಮ್ಸ್ ಸೇರಿದಂತೆ ಎಲ್ಲ ಅಭಿವೃದ್ಧಿ ಯೋಜನೆಗಳಿಗಾಗಿ ನಾನು ಮತ್ತೊಮ್ಮೆ ನಿಮ್ಮೆಲ್ಲರನ್ನು ಅಭಿನಂದಿಸುತ್ತೇನೆ. ಎರಡೂ ಮುಷ್ಟಿಗಳನ್ನು ಜೋಡಿಸಿ, ನನ್ನೊಂದಿಗೆ ಗಟ್ಟಿಯಾಗಿ ಹೇಳಿ –

ಭಾರತ್ ಮಾತಾ ಕೀ ಜೈ! ಜೋರಾಗಿ ಹೇಳಿ

ಭಾರತ್ ಮಾತಾ ಕೀ ಜೈ!
ಭಾರತ್ ಮಾತಾ ಕೀ ಜೈ!
ಭಾರತ್ ಮಾತಾ ಕೀ ಜೈ!

ಎಲ್ಲರಿಗೂ ತುಂಬು ಹೃದಯದ ಧನ್ಯವಾದಗಳು!