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विशाल संख्‍या में पधारे हुए सभी प्‍यारे भाईयों और बहनों और विशेष रूप से महाराष्‍ट्र से आये मित्रों को भी नमस्कार,

बोले सो निहाल..सत् श्री अकाल! शहीदों..अमर रहो! शहीदो..अमर रहो! शहीदों..अमर रहो!

आज मेरे लिए बड़ी प्रेरक घड़ी है। एक नई प्रेरणा जिनका नाम कानों पर पड़ते ही देश के हर नागरिक को मिलती है ऐसे सरदार भगत सिंह जी, सुखदेव, राजगुरू, बटूकेश्‍वर दत्‍त और भगत‍ सिंह जी की माता जी, जिस धरती पर एक वीर माता के साथ भारत माँ के प्‍यारे लाड़ले चार वीरों की समाधि को नमन करने का मुझे अवसर प्राप्‍त हुआ है। यह पंजाब की धरती की विशेषता है। इस धरती ने, आजादी के जंग में सबसे ज्‍यादा बलिदान दिया है। देश की रक्षा के लिए सीमा पर मोर्चा संभालते हुए अनेक वीर जवानों ने शहादत दी है।..और देश को आगे बढ़ाने के लिए यहां के किसानों ने अपना पसीना बहाकर के देश के अन्‍न भंडार भर दिये। यह ऐसी धरती है, जहां आजादी के पहले भी यहां के लोग देश के लिए जिए और आजादी के बाद भी देश के लिए जी रहे हैं। मैं इस धरती को, यहां के सभी वीरों को, यहां के सभी वीर माताओं को आदरपूर्वक नमन करता हूं।

अंग्रेजों ने.. उनको भगत सिंह का भय कितना रहता था.. तय तो यह हुआ था कि 24 मार्च को भगत सिंह जी को फांसी दे दी जाएगी। लेकिन घबराई हुई अंग्रेजी सल्‍तनत ने सारे नियमों का उल्‍लंघन करते हुए, सारी परंपराओं को तोड़ते हुए, चोरी छिपे से सरदार भगत सिंह जी को फांसी दी। और इतना ही नहीं, वो शरीर उनके परिवारजनों को देने की बजाय लाहौर जेल से लाकर के यहां पर किसी भी सम्‍मान के बिना मिट्टी के तेल में और अगल-बगल से कूड़ा कचरा इकट्ठा करके उनके शरीर को जला देने का काम उस सल्‍तनत ने किया। यही धरती है, यहां पर उनका शरीर विलीन हो गया। मैं आज भगत सिंह, सुखदेव राजगुरू.. उन वीरों की उस महान परंपरा को प्रणाम करने आया हूं।

भाईयों-बहनों आज हिंदुस्‍तान में किसी एक नाम को सुनते ही हिंदुस्‍तान के हर कोने में जवान, वृद्ध सबको चेतना जग जाती है, प्रेरणा मिल जाती है, वो नाम है सरदार भगत सिंह। उस नाम में वो ताकत है, जो आज भी देश के नौजवानों को देश के लिए जीने-मरने की प्रेरणा देता है। ऐसे महापुरूषों ने बलिदान दिया, तब जाकर के देश आजाद हुआ। उनके सपनों को पूरा करना.. और उन सपनों को पूरा करने के लिए जैसा भारत उन्‍होंने चाहा था वैसा भारत बनाने के लिए हम जितना करे उतना कम है।

हमारा गांव आबाद हो, हमारा किसान खुशहाल हो, हमारे नौजवान को रोजगार हो, दलित, पीडि़त, शोषित, वंचित, गांव, गरीब, शहर के मजदूर, उनके जीवन में बदलाव आए। जब तक हम देश में यह बदलाव नहीं लाते हैं, तब तक देश के लिए बलिदान देने वाले महापुरूषों को सच्‍ची श्रद्धांजलि अधूरी रहेगी।

भाईयों-बहनों हमारा सपना भी है, हमारा कर्तव्‍य भी है कि हम इस भारत मां को सुजलाम, सुफलाम बनाए। यह भारत मां, यहां के नौजवान अपनी आशा-आकांक्षा के अनुरूप जीवन में नई ऊंचाईयों को पार कर सके, हरेक को अवसर मिले विकास का, ऐसे देश को नई ऊंचाईयों पर ले जाने का प्रयास, हम सबका दायित्‍व बनता है। तब जाकर के इन महापुरूषों को सच्‍ची श्रद्धांजलि होगी।

हमने सपना देखा है – 2022! जब भारत की आजादी के 75 साल पूरे होंगे। हमारे देश में 75 साल एक अमृत पर्व होता है। इस अमृत पर्व का विशेष महत्‍व होता है। क्‍या हम 2022 में जब अमृत पर्व मनाएं तब इस देश में कोई भी परिवार ऐसा न हो, जिसके पास रहने के लिए अपना घर न हो।

भाईयों-बहनों आज भगत सिंह जी की समाधि पर मैं आया हूं। उस महापुरूष के बलिदान को याद करता हूं और मन करता है जी-जान से जुट जाएं देश के गरीब से गरीब व्‍यक्ति को भी.. जब आजादी का अमृत पर्व मनाएं तब उसका अपना घर मिल जाए। 2019! महात्‍मा गांधी के 150 साल पूरे होंगे। महात्‍मा गांधी के 150 साल कैसे मनाएं? क्‍या हमारे देश के महापुरूषों को हम स्‍वच्‍छ भारत नजराने के रूप में नहीं दे सकते? क्‍या यह भारत के सवा सौ करोड़ नागरिकों की जिम्‍मेवारी नहीं है कि हमारी भारत माता जिसके लिए इतने लोगों ने बलिदान दिये उसे हम स्‍वच्‍छ तो रखे, साफ-सुथरी रखें इस दायित्‍व को हम निभाएं और स्‍वच्‍छ भारत का सपना महात्‍मा गांधी के 150 साल पूरा होने के अवसर पर हम पूरा करें। हर गांव, हर गली, हर गली, हर परिवार, हर कोई अपने दायित्‍व को निभाएं।

और आज 23 मार्च ! राम मनोहर लोहिया जी का भी जन्‍म जयंती का अवसर है। राम मनोहर लोहिया जी एक ऐसे राजपुरूष थे, जब वो राजनीतिक आंदोलन चलाते थे, तो अपनी विचारधारा के साथ-साथ एक बात का ख्‍याल रखते थे। वे स्‍वच्‍छता का आंदोलन अपनी जवानी में चलाए करते थे। राम मनोहर लोहिया स्‍वच्‍छता का आंदोलन लगातार चलाया करते थे। आज उनकी भी जयंती है, भगत सिंह की शहादत का पर्व है और भारत माता के लिए जीने वाले इन लोगों को जब याद करते हैं तब हमारी भारत माता स्‍वच्‍छ हो, विकास की नई ऊंचाईयों को पार करने वाला हर नागरिक को अवसर हो। इस दिशा में हम आगे बढ़ना चाहते हैं।

मेरे किसान भाईयों-बहनों पंजाब ने देश को भूख से बचाया है। देश को अन्‍न देने का पुण्‍य का काम पंजाब के किसान ने किया है लेकिन आज पंजाब में पानी जमीन में गहरा होता जा रहा है। Danger रेखा से भी नीचे चला गया है। पानी परमात्‍मा का दिया हुआ प्रसाद है। पानी को बचाए बिना, हम न खेती बचा सकते हैं, न जीवन बचा सकते हैं और इसलिए मैं पंजाब के किसान भाईयो-बहनों से आग्रह करूंगा कि हम फसल पैदा करे, आधुनिक विज्ञान का प्रयोग करें। Per drop more crop, micro irrigation, टपक सिंचाई हो, स्प्रिंक्‍लर हो। बहुत सारी चींजें आज विज्ञान ने स्‍वीकार की है। कभी-कभी जब तक हमारा किसान, खेत पानी से लबालब भरा न हो तब तक उसकी आंखों को चैन नहीं पड़ता। उसको लगता है कि पूरा खेत पानी से पूरी तरह भरा होगा, तभी फसल होगी।

मेरे किसान भाईयों-बहनों मैं भी गरीब परिवार का.. मैंने इन सारी चीजों को निकट से देखा है और इसलिए मैं आपको कहता हूं कि विज्ञान बदल चुका है और इसलिए मैं आपको एक छोटी सी बात बताऊं। अगर कोई बालक घर में बीमार रहता है, वजन नहीं बढ़ता है, चेहरे पर मुस्‍कान नजर नहीं आती है, दुबला-पतला रहता है और मां-बाप की इच्‍छा रहती है कि बेटा तंदरूस्‍त हो, वजन बढ़े, दौड़े-कूदे। मां-बाप ऐसे में बादाम, केसर, पिस्‍ता यह डालकर के बाल्‍टी भर दूध रोज, बाल्‍टी भर दूध से उस बच्‍चे को अगर नहला दें तो वजन बढ़ेगा क्‍या? चेहरे पर मुस्‍कान आएगी क्‍या? तबियत ठीक होगी क्‍या? आप भी जानते हैं नहीं होगी। केसर, पिस्‍ता, बादाम वाला दूध हो, बाल्‍टी भर दूध हो, रोज दूध से नहलाते हो, लेकिन उसके शरीर में कुछ नहीं होगा। लेकिन अगर समझदार मां-बाप चम्‍मच से, एक चम्‍मच दूध पिलाएंगे, रोज 10 चम्‍मच, 15 चम्‍मच, 20 चम्‍मच पिलाना शुरू कर देंगे, तो बच्‍चे का वजन बढ़ने लगेगा। शरीर तंदरूस्‍त होगा। जो स्‍वभाव बच्‍चे का होता है, वही स्‍वभाव फसल का होता है और इसलिए फसल को ढेर सारा पानी देने से फसल अच्‍छी होती है, ऐसे पुराने विचारों को छोड़ना पड़ेगा। बूंद-बूंद पानी पिलाना से फसल ज्‍यादा होगी, अच्‍छी होगी, कम जमीन में भी ज्‍यादा पैदावार होगी और तब जाकर के पंजाब में जो पानी नीचे चला जा रहा है, वो पानी ऊपर आएगा। मेरे भाईयों बहनों बरसात का पानी, बूंद-बूंद पानी बचाएंगे, जमीन में उसको वापस डालेंगे, तभी जाकर के पंजाब की पानी की समस्‍या का समाधान कर पाएंगे।

हमारे पास नहरों का इतना बड़ा नेटवर्क है, लेकिन जितनी मात्रा में पानी जाना चाहिए उतना जा नहीं रहा है। शुरू के इलाके में तो पानी पहुंचता है लेकिन नहर का जहां आखिरी इलाका है, वहां पानी नहीं पहुंचता। हमने एक योजना बनाई है-‘प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना’। इस योजना के तहत हमारा सपना है कि हिंदुस्‍तान के हर किसान के खेत तक पानी पहुंचाया जाए, नदियों को जोड़ा जाए, नहरों को ठीक किया जाए, नई नहरों को बनाया जाए। अगर किसान को पानी पहुंच गया तो मैं विश्‍वास दिलाता हूं मिट्टी में से सोना पैदा करने की ताकत मेरे किसान भाईयों-बहनों में हैं और वो हिंदुस्‍तान के आर्थिक स्थिति को बदल सकते हैं। उस काम की और हमें जाना है।

मुझे आज मेरे किसान भाईयों-बहनों को मेरी एक चिंता भी मुझे बतानी है और वो चिंता.. मैं देख रहा हूं कि ज्‍यादा फसल के मोह में आज हम ऐसी-ऐसी गलतियां कर रहे हैं कि जिसके कारण हमारी जमीन बर्बाद हो गई है। जमीन अपनी ताकत खो रही है। अगर धरती माता अपनी ताकत खो देगी तो इस धरती पर पलने वाले बच्‍चों का पालन-पोषण कैसे होगा। हम जिस प्रकार से Chemical Fertilizer का उपयोग करते हैं.. पंजाब का क्‍या हाल करके रखा है किसान भाईयों-बहनों हमने! कितनी मात्रा में, कौन सा खाद डालना चाहिए.. हम कैसी बड़ी गलती कर रहे हैं। वैज्ञानिकों का कहना है, विज्ञान में सिद्ध हुआ है कि जितना पोटाश का उपयोग करते हैं उससे चार गुना से ज्‍यादा नाइट्रोजन का उपयोग फसल भी बर्बाद करता है, जमीन भी बर्बाद करता है। चार गुना से कम नाइट्रोजन उपयोग करना चाहिए लेकिन हमारे पंजाब में कितना उपयोग होता है, आपको मालूम है? 57 गुना! आप कल्‍पना कर सकते हैं जैसे परिवार में दवाई देनी है, लेकिन ज्‍यादा dose दे दें तो मौत भी हो जाती है वैसे नाइट्रोजन इतना गुना डालने के कारण हमारी फसल और हमारी जमीन सबको हम बर्बाद कर देते हैं। मैं पंजाब के किसानों से आग्रह करता हूं कि आप देश को दिशा दीजिए, आप देश का नेतृत्‍व कीजिए और तय कीजिए कि जितने अनुपात में Fertilizer चाहिए उससे ज्‍यादा डालने का पाप हम नहीं करेंगे, हम ऐसी गलती नहीं करेंगे। इतना ही नहीं पोटाश से फास्‍फोरस डब्‍बल से ज्‍यादा उपयोग नहीं करना चाहिए, वरना खेती बर्बाद हो जाती है। लेकिन हम क्‍या करते हैं, पंजाब के अंदर पोटास से फास्‍फोरस का उपयोग 13 गुना करते हैं। जबकि दो गुना से ज्‍यादा नहीं करना चाहिए। मुझे बताइये मेरे किसान बहनों-भाईयों कि पंजाब, पंजाब का गांव, पंजाब का किसान, पंजाब की फसल जिस पर पूरा हिंदुस्‍तान जी रहा है अगर वही बर्बाद हो जाएगा तो पूरा देश भूख मर जाएगा और इसलिए मेरे किसान भाईयों-बहनों मैं आपसे आग्रह करने आया हूं कि आप विज्ञान, आधुनिक यंत्र.. और जिसमें सरकार पूरी मदद करती है.. आप इसका सही उपयोग करें। इसका दुरूपयोग तत्‍काल तो हमें अच्‍छा लगता है, लेकिन लम्‍बे समय के लिए हमारा बहुत नुकसान करता है और इसलिए मेरे किसान भाईयों-बहनों इससे बचकर रहना चाहिए यह मैं विशेष रूप से आग्रह करना चाहता हूं।

सरकार ने किसानों के लिए एक महत्‍वपूर्ण योजना बनाई है। इस योजना को हमने लागू किया है और आप तक हम पहुंचाना चाहते हैं और वो है – Soil Health Card. जैसे नागरिक का Health Card होता है, उसका शरीर कैसा, Blood कैसा, तबियत कैसी है, कमियां क्‍या है, वो सब Health Card से पता चलता है। वैसा ही जैसे इंसान के शरीर का स्‍वभाव है, वैसा ही जमीन का भी स्‍वभाव है। जमीन को भी बीमारियां होती है, जमीन में भी कमियां होती हैं लेकिन हमें पता नहीं होता और उसके कारण हम.. जमीन का किसके लिए उपयोग करना चाहिए, नहीं कर पाते। इस बात को समझाने के लिए गांव-गांव किसानों को Soil Health Card देने की सरकार ने योजना बनाई है। आपकी जमीन कैसी है, आपकी जमीन की तबियत कैसी है, आपकी जमीन में कौन सी कमियां है, आपकी जमीन में कौन सी फसल अच्‍छी हो सकती है, आपको अगर दवाई डालनी है तो कौन सी दवाई की जरूरत है, आपको अगर Fertilizer डालना है तो कौन सा Fertilizer डालना है, कितना डालना है यह सारी बातें Soil Health Card से पता चलती हैं और यदि किसान Soil Health Card से योजना करके चलता है तो मैं विश्‍वास दिलाता हूं मेरे किसान बहनों-भाईयों छोटे किसान को भी साल का 40-50 रुपया, जो ज्ञान के अभाव के रूप में फालतू में खर्चा होता है, वो बच जाएगा। मेरे किसान को बहुत बड़ा फायदा होगा। इसलिए यह बहुत बडा काम पूरे देश में हमने चलाया है Soil Health Card का। और मुझे विश्‍वास है कि हमारे पंजाब के किसान भी इस बात की चिंता करेंगे।

मेरे किसान भाईयों बहनों एक तो पिछले साल बारिश कम हुई। हिंदुस्‍तान के कई राज्‍यों में कम बारिश के कारण किसानों को नुकसान हुआ, कहीं पर सूखा पड़ा गया और ऊपर से अभी-अभी ओले गिरे। मैं जानता हूं कि किसानों पर कितनी बड़ी आपत्ति आई होगी। मैंने भारत सरकार के अधिकारियों को, मंत्रियों को आदेश दिए हैं, सर्वे का काम शुरू हुआ है, राज्य सरकार और भारत सरकार मिलकर के आपके इस संकट की घड़ी में आपके साथ हैं। आपको जो नुकसान हुआ है.. हमारा किसान टिक सके.. जितनी भी मदद सरकार कर सकती है उसमें सरकार किसी भी हालत में पीछे नहीं रहेगी। यह मैं आपको विश्‍वास दिलाना चाहता हूं।

मेरे भाईयों-बहनों आज जब मैं सरदार भगत सिंह जी की शाहदत के इस पावन पर्व पर, इस पवित्र धरती पर आया हूं, तब मैं.. सरकार ने बजट में घोषणा की है.. क्‍योंकि पंजाब और किसान का अटूट नाता है और इसलिए अमृतसर में किसानों के लिए उपयोगी हो ऐसी Institute for Horticulture Education इसका आरंभ किया जाएगा और आज मैं जब यहां आया हूं तब इस नये Institute को हम सरदार भगत सिंह Post Graduate Institute for Horticulture Research and Education इस रूप में निर्माण करेंगे ताकि पंजाब किसान की जो नई पीढ़ी है उसके कारण उसको लाभ मिलेगा।

भाईयों बहनों भारत सरकार की यह सोच है कि अगर देश को आगे बढ़ाना है तो राज्‍यों को आगे बढ़ाना पड़ेगा। अगर हमारे राज्‍य मजबूत नहीं होंगे तो देश मजबूत नहीं होगा। अगर राज्‍य आगे नहीं बढ़ेंगें तो देश आगे नहीं बढ़ेगा और इसलिए हमारी सरकार की हर योजना राज्‍यों को मजबूत बनाने के लिए है। अभी इस बार 14th Finance Commission की रिपोर्ट के आधार पर अकेले पंजाब को कितना बड़ा लाभ होने वाला है। पंजाब इन रुपयों का सही इस्‍तेमाल करके कितना आगे बढ़ सकता है इसका मैं भली-भांति अंदाज कर सकता हूं और मुझे विश्‍वास है कि बादल साहब के नेतृत्‍व में प्रगतिशील निर्णयों के द्वारा पंजाब के जीवन को बदलने में यह रकम बहुत काम आने वाली है। पहले पिछली पंचवर्षीय योजना में भारत सरकार की तरफ से पंचवर्षीय योजना के तहत पंजाब को 20 हजार करोड़ रुपये मिले थे। भाईयों-बहनों आने वाले पांच साल के लिए यह रकम बढा़कर के 54 हजार करोड़ रुपये कर दी जाएगी, डबल से भी ज्‍यादा। इतना ही नहीं पंचायत और नगरपालिकाओं के लिए भारत सरकार ने पहले चार हजार करोड़ रुपया दिया था, इस बार हमने वो रकम बढा़कर के छह हजार करोड़ रुपये कर दी। जिसके कारण गांव के व्‍यक्ति को भी इसका फायदा पहुंचाने में काम आ जाएगी। इस बार भी पहले की तुलना में करीब-करीब चार हजार करोड़ रुपया ज्‍यादा, अतिरिक्‍त चार हजार रुपया पंजाब के विकास के लिए भारत सरकार की तिजोरी से आने वाला है।

स्थिति ऐसी हो गई है.. एक जमाना था कि दिल्‍ली के खजाने में देश की सभी तिजौरियों का करीब 60-65 प्रतिशत पैसा रहता था। राज्‍यों के पास 35-40 प्रतिशत रहता था। हमारे आने के बाद चित्र हमने बदल दिया है। अब राज्‍यों के पास करीब-करीब 60-62 प्रतिशत राशि रहेगी और केंद्र के पास सिर्फ 38% राशि रहेगी और राज्‍य मजबूत होंगे। राज्‍य विकास की नई ऊंचाईयों को पार करेंगे। उस दिशा में हम काम कर रहे हैं।

यहां पर रास्‍ते बनाने के लिए भारत सरकार की जो योजनाएं हैं.. रेल को बढ़ाने के लिए.. आज मेरे लिए खुशी की बात है कि अमृतसर से आनंदपुर साहब रेलवे की योजना का साकार रूप हमारे सामने खड़ा हुआ है। यह गर्व की बात है। आनंदपुर साहब यात्रियों के लिए एक मुख्‍य धाम है और किसी को भी हिमाचल में भी किसी जगह जाना है तो आनंदपुर साहब से ही जाते हैं। चिंतपुरणी जाना है, ज्‍वालाजी जाना है तो यहीं से जाते हैं। इस पूरे इलाके को इसका लाभ मिलने वाला है। एक प्रकार से विकास की नई ऊंचाईयों को पार करने की दिशा में हम लगातार प्रयासरत है।

..और मैं आपको विश्‍वास दिलाता हूं, मेरे पंजाब के किसान भाईयों-बहनों, आपने कभी सोचा था.. किसान 60 साल के बाद.. उसको कभी पेंशन मिल सकता है। सरकारी मुलाजिम को तो पेंशन मिल जाता है। किसान को पेंशन मिल सकता है क्‍या? 60 साल के बाद हर महीना उसको चैक मिल सकता है क्‍या? मेरे किसान भाईयों-बहनों इस बार भारत सरकार ने एक योजना बनाई है जिसमें Public Private Partnership के modal पर.. किसान को.. 60 साल के बाद अगर वो इस योजना से जुड़ जाता है, तो उसको हर महीना पांच हजार रुपया पेंशन की राशि मिल सकती है। हमारे देश के किसान का बुढ़ापा भी सुख, शांति और गौरव से बीते उस दिशा में काम करने का एक अहम कदम इस बार हमने बजट में उठाया है।

भाईयों-बहनों इन दिनों किसान को गुमराह करने के लिए भांति-भांति के प्रयास हुए हैं। कल मैंने रेडियो पर मेरी “मन की बात” में, किसानों ने जितने सवाल पूछे थे, सारे सवालों के मैंने जवाब दिये और मैं किसानों को विश्‍वास दिलाता हूं कि अगर इस देश को आगे बढ़ना है तो किसान की रक्षा करनी होगी, गांव का भला करना होगा, लेकिन साथ-साथ किसान के बेटों के लिए भी चिंता करनी होगी। किसान के बेटे को रोजगार चाहिए। आज सेना में जितने जवान हैं वो कौन है? 80% से ज्‍यादा जवान किसान मां-बाप के बेटे हैं। किसान अपने बेटे को सेना में भर्ती करता है, युद्ध के लिए भेजता है। उसे मालूम है कि अगर परिवार में तीन बच्‍चे हैं तो तीनों का जीवन आज खेती से गुजरता नहीं है। हर किसान को पूछो कि भई आपके तीन बेटे हैं क्‍या चाहते हो? हर किसान कहता है – एक बेटा तो खेती करेगा लेकिन दो को तो कहीं भेजना चाहता हूं, कहीं नौकरी कर ले, रोजी-रोटी कमा ले, पढ़-लिख करके अपना करोबार चला ले। हर किसान की यह चिंता है। अगर विकास नहीं होगा तो किसान के बच्‍चों का क्‍या होगा? क्‍या मेरे किसान के बच्‍चे दिल्‍ली और मुंबई की झुग्‍गी-झोपड़ी में जिंदगी गुजारने के लिए मजबूर होने चाहिए?

किसान के बच्‍चों को भी रोजगार चाहिए, किसान के बेटों का भी भला होना चाहिए और इसलिए मेरे भाईयों-बहनों हमारी सरकार किसान का तो भला चाहती है, गांव का भी भला चाहती है, किसान के बच्‍चों का भी भला चाहती है। इस तरह एक लम्‍बी सोच के साथ, देश के विकास की ओर आगे बढ़ने की दिशा में हमने प्रयास किया है। आज वीर सरदार भगत सिंह जी के आशीर्वाद मिले, सुखदेव-राजगुरू के आशीर्वाद मिले, भगत‍ सिंह जी की माता जी के आशीर्वाद मिले, हमारा देश विकास की नई ऊंचाईयों को पार करे और नई ऊंचाईयों को पार करते-करते हम आगे बढ़े।

भाईयों बहनों हमारे देश को भ्रष्‍टाचार ने तबाह कर दिया, बर्बाद कर दिया। कैसा-कैसा भ्रष्‍टाचार हुआ है! मैं आपको बताना चाहता हूं.. कोयला.. जब मैं यहां चुनाव में आया था और कोयले की चोरी की बात कर रहा था तो हमारे पुराने लोग जो सरकार में बैठे थे, वे गुस्‍सा हो जाते थे। सीएजी ने कहा था एक लाख 76 हजार करोड़ रुपया, अकेले कोयले में घोटाला हुआ है। यह आंकड़ा इतना बड़ा था कि लोगों के गले नहीं उतरता था। लोगों को यह तो लगता था कि भ्रष्‍टाचार तो किया होगा इनकी आदत है, लेकिन इतना नहीं हो सकता। ऐसा लोग सोचते थे। कुछ लोग तो ऐसे थे जो कहते थे - जीरो थ्‍योरी, जीरो थ्‍योरी। एक नये पैसे का घोटाला नहीं हुआ यह कहते थे। भाईयों बहनों 204 कोयले की खदान भ्रष्‍टाचार के कारण गुस्‍से में आकर के सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दी। अब हमारे आते ही यह हुआ।

पाप उन्‍होंने किया था.. बिजली कारखाने बंद हो जाने की नौबत आ गई। कारखानों में कोयला नहीं जाएगा तो कारखाने बंद हो जाएंगे ऐसी स्थिति पैदा हो गई। लेकिन हमने ईमानदारी की, पारदर्शिता की, नीतियों की योजना की और हमने तय किया कि हम सार्वजनिक रूप से Auction करेंगे, नीलामी करेंगे। और जो भी लेना चाहता है वो नीलामी में बोले पैसा, जो ज्‍यादा पैसा देगा, उसको मिलेगा। भाईयों बहनों क्‍या हुआ! 204 में से अब तक सिर्फ 20 खदानों की नीलामी हुई है, अभी तो 180 खदानों की नीलामी बाकी है। 204 खदानों में एक लाख 76 हजार करोड़ के घोटाले की बात थी। लेकिन यह घोटाला तो उससे भी बड़ा निकला। 204 में से सिर्फ 20 की नीलामी हुई है और आपको जानकर के आनंद होगा कि दिल्‍ली में आपने ईमानदार सरकार बिठाई है। उसका परिणाम यह हुआ है कि अब तक करीब-करीब दो लाख करोड़ रुपया सरकारी खजाने में आना तय हो चुका है। 180 खदान बाकी हैं। सब खदाने जाएंगी तो कितना बड़ा भंडार मिलेगा, यह रुपया किसके काम आएगा? गांव के काम आएगा, गरीब के काम आएगा, किसान के काम आएगा। देश विकास की नई ऊंचाईयों पर जाएगा।

कोयला छोडि़ए, इन्‍होंने कोई जगह पाप करने के लिए छोड़ी नहीं भाईयों। सरदार भगत‍ सिंह जी आत्‍मा दुखी होती होगी इन लोगों के कारण। LED Bulb! बिजली बचाने के लिए LED Bulb लगाने की बात है। आपको मालूम है 2014 में सरकार ने LED Bulb कितने रुपये में खरीदे। करीब-करीब 300 रुपयों में एक बल्‍ब खरीदा। हमने उसमें गहराई से काम किया, Department को लगाया, व्‍यापक रूप से काम किया। कंपनियों को भी दबाया। कोई रुपया-पैसा देने की बात बंद करो, गरीब का भला करो और आपको जानकर के खुशी होगी कि जो LED का Bulb एक साल पहले कुछ सरकारों ने 300 रुपये में खरीदा था आज उसकी कीमत 80 रुपये में हमने लाकर के रख दी। एक बल्‍ब पर दो सौ-सवा दौ सौ रुपये, चोरी होते थे। करोड़ा बल्‍ब जाएंगे तो कितने रुपये जाते होंगे। भाईयों बहनों आपने हमें ईमानदारी के लिए बिठाया है, ईमानदारी से काम करने के लिए बिठाया है और उसका परिणाम है कि आज 300 रुपये में बिकने वाला बल्‍ब.. जो भ्रष्‍टाचार के कारण रुपये खाए जाते थे, हमने उसकी कीमत 80-85 रुपया लाकर के रख दी है। सरकार 80-85 रुपये में खरीदेगी और LED का Bulb पहुंचेगा और उसके कारण गरीब से गरीब के घर में बिजली की बचत होगी। किसी का 200 रुपये बचेगा, किसी का 400 रुपये बचेगा। गरीब का हमें आशीर्वाद मिलेगा।

भाईयों बहनों ईमानदारी, देशभक्ति, अगर काम करने का जज्‍बा लेकर के.. सिर्फ देश के लिए जीना, सिर्फ देश के लिए मरना इस संकल्‍प को लेकर के चलते हैं तो कितने उत्‍तम परिणाम आते हैं यह आपके सामने मौजूद है। मैं फिर एक बार.. बादल साहब ने जितने विषय रखे हैं उन सभी बातों पर भारत सरकार गंभीरता से सोचेगी, उनके साथ भी मैं विस्‍तार से बातें करूंगा और भारत सरकार पंजाब के लिए जितना ज्‍यादा कर सकती है करने में कभी पीछे नहीं रहेगी।

मेरा तो पंजाब से अनेक रूप से नाता है। एक तो मैं यहां कई वर्षों तक रहा हूं। एक प्रकार से मेरी शिक्षा-दीक्षा, राजनीतिक शिक्षा-दीक्षा का अवसर मुझे बादल साहब की उंगली पकड़कर के सीखने का मुझे अवसर मिला है। यह मेरा सौभाग्‍य रहा है। दूसरी बात, मेरा जन्‍म गुजरात में हुआ है और जो पहले पंच प्‍यारे थे, उन पहले पंच प्‍यारों में एक गुजरात के द्वारका का था और इसलिए मेरा तो आपके साथ खून का नाता है। इसलिए पंजाब के लिए मैं जो कुछ भी कर सकता हूं, मुझे करने में खुशी होगी। यह कर्ज चुकाने का अवसर मुझे मिला है। मैं उसे चुकाकर रहूंगा।

इसी एक बात के साथ फिर एक बार मेरे साथ पूरी ताकत से बोलिये – शहीदो..अमर रहो! शहीदों..अमर रहो! शहीदो..अमर रहो! धन्यवाद।

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October 05, 2022
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“Made in India 5G services have started, and the benefits will be available in Himachal very soon”

 ଜୋ ମାତା ନେଣା ଦେବିୟା ରୀ, ଜୋ ବଜିଏ ବାୱେ ରୀ ।

ବିଳାସପୁରବାସୀ... ଆଜି ଧନ୍ୟ ହୋଇଗଲି, ଆଜି... ମୋର... ଦଶହରାରେ, ଏହି ପାବନ ଅବସରରେ ମାତା ନେଣା ଦେବିୟା ରେ, ଆଶୀର୍ବାଦ ଯୋଗୁ, ଆପଣଙ୍କ ସହରରେ ଦର୍ଶନ କରିବାର ସୌଭାଗ୍ୟ ମିଳିଲା! ଆପଣଙ୍କ ସହରରେ ଯେଉଁ, ମୋର ରାମ ରାମ । ଏଠାରେ ଏମ୍ସ ପାଇଁ ବହୁତ ବହୁତ ଶୁଭେଚ୍ଛା ।

ହିମାଚଳର ରାଜ୍ୟପାଳ ଶ୍ରୀ ରାଜେନ୍ଦ୍ର ଆର୍ଲେକର ଜୀ, ହିମାଚଳର ଲୋକପ୍ରିୟ ମୁଖ୍ୟମନ୍ତ୍ରୀ ଶ୍ରୀମାନ ଜୟରାମ ଠାକୁର ଜୀ, ଭାରତୀୟ ଜନତା ପାର୍ଟିର ରାଷ୍ଟ୍ରୀୟ ଅଧ୍ୟକ୍ଷ, ମୁଁ ସମସ୍ତଙ୍କ ମାର୍ଗଦର୍ଶକ ଏବଂ ଏହି ଧରିତ୍ରୀର ସନ୍ତାନ, ଶ୍ରୀମାନ ଜେପି ନଡ୍ଡା ଜୀ, କେନ୍ଦ୍ର ମନ୍ତ୍ରିମଣ୍ଡଳରେ ମୋର ସହଯୋଗୀ ଏବଂ ଆମର ସାଂସଦ ଶ୍ରୀ ଅନୁରାଗ ଠାକୁର ଜୀ, ହିମାଚଳ ଭାଜପାର ଅଧ୍ୟକ୍ଷ ଏବଂ ସଂସଦରେ ମୋର ସହଯୋଗୀ ସୁରେଶ କଶ୍ୟପ ଜୀ, ସଂସଦରେ ମୋର ସାଥି କିଶନ କପୁର ଜୀ, ଭଉଣୀ ଇନ୍ଦୁ ଗୋସ୍ୱାମୀ ଜୀ, ଡକ୍ଟର ସିକନ୍ଦର କୁମାର ଜୀ, ଅନ୍ୟ ମନ୍ତ୍ରୀଗଣ, ସାଂସଦ ଏବଂ ବିଧାୟକଗଣ ଏବଂ ବହୁ ସଂଖ୍ୟାରେ ମୋତେ ଏବଂ ଆମ ସମସ୍ତଙ୍କୁ ଆଶୀର୍ବାଦ ଦେବା ପାଇଁ ଆସିଥିବା ମୋର ପ୍ରିୟ ଭାଇ ଓ ଭଉଣୀମାନେ! ଆପଣ ସମସ୍ତଙ୍କୁ, ସମ୍ପୂର୍ଣ୍ଣ ଦେଶବାସୀଙ୍କୁ ବିଜୟା ଦଶମୀ ଅବସରରେ ବହୁତ ବହୁତ ଶୁଭକାମନା ।

ଏହି ପର୍ବ ସମସ୍ତ ଅଶୁଭକୁ ଅତିକ୍ରମ କରି ଅମୃତ କାଳ ପାଇଁ ଯେଉଁ ପଞ୍ଚ ପ୍ରାଣର ସଂକଳ୍ପ ଦେଶ ନେଇଛି, ତା’ ଉପରେ ଚାଲିବା ପାଇଁ ନୂତନ ଶକ୍ତି ଦେବ, ମୋର ସୌଭାଗ୍ୟ ଏହି କି ଯେ ବିଜୟା ଦଶମୀ ଅବସରରେ ହିମାଚଳ ପ୍ରଦେଶର ଲୋକମାନଙ୍କ ସ୍ୱାସ୍ଥ୍ୟ, ଶିକ୍ଷା, ରୋଜଗାର ଏବଂ ଭିତ୍ତିଭୂମିର ହଜାର ହଜାର, କୋଟି କୋଟି ଟଙ୍କାର ପ୍ରକଳ୍ପ, ଏହାକୁ ଉପହାର ଦେବାର ଅବସର ମିଳିଛି । ଆଉ ଏହା ମଧ୍ୟ ସଂଯୋଗ ଦେଖନ୍ତୁ । ବିଜୟା ଦଶମୀ ଥିବ ଏବଂ ବିଜୟର ବିଗୁଲର ଅବସର ଥିବ । ଏହା ଭବିଷ୍ୟତର ପ୍ରତ୍ୟେକ ଦୃଷ୍ଟିକୋଣର ଆରମ୍ଭ ନେଇ ଆସିଛି । ବିଳାସପୁରକୁ ଶିକ୍ଷା ଏବଂ ସ୍ୱାସ୍ଥ୍ୟ ସେବା ଦୁଇଟି ଉପହାର ମିଳିଛି । କହଲୁରା ରୀ.... ବଂଦଲେ ଧାରା ଉପ୍ପର, ହାଇଡ୍ରୋ କଲେଜ... କନେ ଥିଲ୍ଲେ ଏମ୍ସ... ହୁଣ ଏଥି ରୀ ପେହଚାନ ହୁଣୀ!

ଭାଇ ଏବଂ ଭଉଣୀମାନେ,

ଏଠାରେ ବିକାଶର ଯୋଜନାଗୁଡ଼ିକୁ ଆପଣଙ୍କୁ ଦେଇଦେବା ପରେ, ଯେମିତି ଜୟରାମ ଜୀ କହିଲେ, ଆହୁରି ଗୋଟିଏ ସାଂସ୍କୃତିକ ଐତିହ୍ୟର ସାକ୍ଷୀ ହେବାକୁ ଯାଉଛି ଏବଂ ବହୁବର୍ଷ ପରେ ମୋତେ ପୁଣିଥରେ କୁଲ୍ଲୁ ଦଶହରାରେ ଅଂଗଶ୍ରହଣ କରିବାକୁ ସୌଭାଗ୍ୟ ମିଳିବ । ଶହ ଶହ ଦେବୀ-ଦେବତାମାନଙ୍କ ସହିତ ଭଗବାନ ରଘୁନାଥ ଜୀଙ୍କର ଯାତ୍ରାରେ ସାମିଲ ହୋଇ ମୁଁ ଦେଶ ପାଇଁ ମଧ୍ୟ ଆଶୀର୍ବାଦ ମାଗିବି । ଏବଂ ଆଜି ଯେତେବେଳେ ଏଠାରେ ବିଳାସପୁରକୁ ଆସିଛି ସେତେବେଳେ ପୁରୁଣା ସ୍ମୃତିଗୁଡ଼ିକ ମନେପଡ଼େ ତାହା ହେବା ବହୁତ ସ୍ୱାଭାବିକ ଅଟେ । ସେତେବେଳେ ମଧ୍ୟ ଗୋଟିଏ ସମୟ ଥିଲା, ଏଠାରେ ପାଦରେ ବୁଲୁଥିଲି । କେତେବେଳେ ମୁଁ, ଧୂମଲ ଜୀ ନଡ୍ଡା ଜୀ, ପାଦରେ ଚାଲି ଚାଲି ଏଠିକାର ମାର୍କେଟକୁ ବାହାରି ପଡୁଥିଲେ । ଆମେ ଗୋଟିଏ ବହୁତ ବଡ଼ ରଥଯାତ୍ରାର କାର୍ଯ୍ୟକ୍ରମ ନେଇ ମଧ୍ୟ ଏହି ବିଳାସପୁର ଗଳି ଦେଇ ଯାଇଥିଲୁ । ଏବଂ ସେତେବେଳେ ସ୍ୱର୍ଣ୍ଣ ଜୟନ୍ତୀ ରଥଯାତ୍ରା ଏହି ବାଟ ଦେଇ ଏବଂ ତାହା ପୁଣି ମେନ ମାର୍କେଟରୁ ବାହାରିଥିଲା ଏବଂ ସେଠାରେ ଜନସଭା ହୋଇଥିଲା । ଏବଂ ଅନେକ ଥର ମୋର ଏଠାକୁ ଆସିବା ହେଲା, ଆପଣମାନଙ୍କ ମଧ୍ୟରେ ରହିବା ମଧ୍ୟ ହୋଇଛି ।

ହିମାଚଳର ଏହି ଭୂମିରେ କାମ କରିବାରେ ମୋତେ ନିରନ୍ତର ହିମାଚଳର ବିକାଶ ଯାତ୍ରାର ସହଯୋଗୀ ହେବାର ଅବସର ମିଳିଛି । ଏବଂ ମୁଁ ଏବେ ଶୁଣୁଥିଲି, ଅନୁରାଗ ଜୀ ବହୁତ ଜୋର ଜୋରରେ କହୁଥିଲେ, ଏହା ମୋଦୀ ଜୀ କରିଛନ୍ତି, ଏହା ମୋଦୀ ଜୀ କରିଛନ୍ତି, ଏହା ମୋଦୀ ଜୀ କରିଛନ୍ତି । ଏହା ମୋଦୀ ଜୀ କରିଛନ୍ତି ଏବଂ ଆମର ମୁଖ୍ୟମନ୍ତ୍ରୀ ଜୟରାମ ଜୀ ମଧ୍ୟ କହୁଥିଲେ, ମୋଦୀ ଜୀ କରିଛନ୍ତି, ମୋଦୀ ଜୀ କରିଛନ୍ତି । କିନ୍ତୁ ମୁଁ ସତ କହୁଛି, ସତ କହିବି କିଏ କରିଛନ୍ତି, କହିବି? ଏହା ଯାହା କିଛି ହେଉଛି ତାହା ଆପଣ କରିଛନ୍ତି । ଆପଣଙ୍କ କାରଣରୁ ହୋଇପାରିଛି। ଯଦି ଆପଣ ଦିଲ୍ଲୀରେ କେବଳ ମୋଦୀ ଜୀଙ୍କୁ ଆଶୀର୍ବାଦ ଦେବା ପାଇଁ ଏବଂ ହିମାଚଳର ମୋଦୀ ଜୀଙ୍କ ସାଥିମାନଙ୍କୁ ଆଶୀର୍ବାଦ ନ ଦେବେ ତେବେ ଏହି ସମସ୍ତ କାର୍ଯ୍ୟରେ ସେମାନେ ବାଧା ସୃଷ୍ଟି କରିଥାନ୍ତେ । ଏହା ଜୟରାମ ଜୀ ଏବଂ ତାଙ୍କ ଟିମ୍ ଯିଏକି ଯେଉଁ କାମ ଦିଲ୍ଲୀରୁ ମୁଁ ନେଇ ଆସିଥାଏ, ତାହାକୁ ଦ୍ରୁତ ଗତିରେ ଏହି ଲୋକମାନେ କରିଥାନ୍ତି, ଏଥିପାଇଁ ହେଉଛି । ଏବଂ ଏହା ଯଦି ଏପରି ହୋଇପାରିଛି ତେବେ ଆପଣଙ୍କର ଗୋଟିଏ ଭୋଟର ଶକ୍ତି ଅଟେ, ଯଦି ଟନେଲ ତିଆରି ହୋଇପାରିଛି ତାହା ଆପଣଙ୍କର ଗୋଟିଏ ଭୋଟର ତାକତ ଅଟେ, ହାଇଡ୍ରୋ ଇଞ୍ଜିନିୟରିଂ କଲେଜ ହୋଇଛି ତେବେ ଏହା ଆପଣଙ୍କ ଭୋଟର ତାକତ ଅଟେ, ଯଦି ମେଡିକାଲ ଡିଭାଇସ ପାର୍କ ତିଆରି ହେଉଛି ତେବେ ଏହା ମଧ୍ୟ ଆପଣଙ୍କର ଗୋଟିଏ ଭୋଟର ତାକତ ଅଟେ ଏବଂ ସେଥିପାଇଁ ଆଜି ମୁଁ ହିମାଚଳର ଅପେକ୍ଷାକୁ ଧ୍ୟାନରେ ରଖି ଗୋଟିଏ ପରେ ଗୋଟିଏ ବିକାଶର କାର୍ଯ୍ୟ କରୁଛି ।

ବିକାଶକୁ ନେଇ ଆମେ ଦେଶରେ ଦୀର୍ଘ ସମୟ ପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ ଗୋଟିଏ ବିକୃତ ଚିନ୍ତାଧାରା ଉପରେ ଦବି ଯିବାର ଦେଖିଛି । ଏହି ଭାବନା କ’ଣ ଥିଲା? ଭଲ ସଡ଼କ ହେବ ତେବେ କିଛି ରାଜ୍ୟମାନଙ୍କ ଏବଂ କିଛି ବଡ଼ ବଡ଼ ସହରରେ ହେବ, ଦିଲ୍ଲୀର ଆଖପାଖରେ ହେବ । ଭଲ ଶିକ୍ଷା ସଂସ୍ଥାନ ହେବ, ତେବେ ବହୁତ ବଡ଼ ବଡ଼ ସହରରେ ହେବ, ଭଲ ଡାକ୍ତରଖାନା ହେବ ତେବେ ତାହା ଦିଲ୍ଲୀରେ ହିଁ ହୋଇପାରିବ, ବାହାରେ କେଉଁଠି ହୋଇ ମଧ୍ୟ ପାରିବ ନାହିଁ । ଉଦ୍ୟୋଗ କାରବାର ହେବ ତେବେ ମଧ୍ୟ ବଡ଼ ବଡ଼ ସ୍ଥାନରେ ଲାଗିବ ଏବଂ ବିଶେଷ କରି ଦେଶର ପାହାଡ଼ିଆ ପ୍ରଦେଶରେ ମୌଳିକ ସୁବିଧାମାନ ସବୁଠାରୁ ଶେଷରେ, ବହୁ ବହୁ ବର୍ଷ ପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ ଅପେକ୍ଷା କରିବା ପରେ ପହଂଚୁଥିଲା। ସେହି ପୁରୁଣା ବିଚାରଧାରାର ପରିଣାମ ଏମିତି ହେଲା ଯେ ଏଥିରେ ଦେଶରେ ବିକାଶର ଏକ ବଡ଼ ଅସନ୍ତୁଳନତା ସୃଷ୍ଟି ହୋଇଗଲା । ଏହି କାରଣରୁ ଦେଶର ଗୋଟିଏ ବଡ଼ ଅଂଶ, ସେଠିକାର ଲୋକମାନେ ଅସୁବିଧାରେ, ଅଭାବରେ ରହିଲେ ।

ଗତ ୮ ବର୍ଷରେ ଦେଶ ଏବେ ସେହି ପୁରୁଣା ଚିନ୍ତାଧାରାକୁ ପଛରେ ପକାଇ, ନୂତନ ଚିନ୍ତାଧାରା, ଆଧୁନିକ ଚିନ୍ତାଧାରା ସହିତ ଆଗକୁ ବଢୁଛି । ବର୍ତ୍ତମାନ ଦେଖନ୍ତୁ, ଦୀର୍ଘ ସମୟ ପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ ଏବଂ ମୁଁ ଯେତେବେଳେ ଏଠାରେ ଥିଲି, ମୁଁ ଲଗାତାର ଦେଖୁଥିଲି, ଏଠାରେ ଗୋଟିଏ ୟୁନିଭର୍ସିଟିରୁ ହିଁ ରୋଜଗାର ହେଉଥିଲା । ଚିକିତ୍ସା ହେଉ କିମ୍ବା ପୁଣି ମେଡିକାଲର ପାଠପଢ଼ା, ଆଇଜିଏମସି ଶିମଲା ଏବଂ ଟାଟା ମେଡିକାଲ କଲେଜ ଉପରେ ହିଁ ନିର୍ଭର କରିବାକୁ ପଡୁଥିଲା । ବଡ଼ ରୋଗର ଚିକିତ୍ସା ହେଉ କିମ୍ବା ପୁଣି ଶିକ୍ଷା କିମ୍ବା ରୋଜଗାର, ଚଣ୍ଡିଗଡ଼ ଏବଂ ଦିଲ୍ଲୀ ଯିବା ସେତେବେଳେ ହିମାଚଳ ପାଇଁ ମଜବୁରୀ ହୋଇ ଯାଉଥିଲା । କିନ୍ତୁ ଗତ ଆଠ ବର୍ଷରେ ଆମର ଡବଲ ଇଞ୍ଜିନର ସରକାର ହିମାଚଳର ବିକାଶର ଗାଥାକୁ ନୂତନ ଅଧିକତମ ସୀମାରେ ପହଞ୍ଚାଇ ଦେଇଥିଲେ । ଆଜି ହିମାଚଳରେ ସେଣ୍ଟ୍ରାଲ ୟୁନିଭର୍ସିଟି ମଧ୍ୟ ଅଛି, ଆଇଆଇଟି ମଧ୍ୟ ଅଛି, ଟ୍ରିପଲ ଆଇଟି ମଧ୍ୟ ଅଛି, ଇଣ୍ଡିଆନ ଇନଷ୍ଟିଚୁ୍ୟଟ ଅଫ ମ୍ୟାନେଜମେଣ୍ଟ (ଆଇଆଇଏମ) ଭଳି ପ୍ରତିଷ୍ଠିତ ସଂସ୍ଥାନ ମଧ୍ୟ ଅଛି । ଦେଶରେ ମେଡିକାଲ ଶିକ୍ଷା ଏବଂ ସ୍ୱାସ୍ଥ୍ୟ ବିଭାଗରେ ସବୁଠାରୁ ବଡ଼ ସଂସ୍ଥାନ, ଏମ୍ସ ମଧ୍ୟ ବର୍ତ୍ତମାନ ବିଳାସପୁର ଏବଂ ହିମାଚଳର ଜନତାଙ୍କର ଗୌରବକୁ ବଢ଼ାଉଛି ।

ବିଳାସପୁର ଏମ୍ସ ଆହୁରି ପରିବର୍ତ୍ତନରେ ମଧ୍ୟ ଏକ ପ୍ରତୀକ ଅଟେ ଏବଂ ଏମ୍ସ ଭିତରେ ମଧ୍ୟ ଏହି ଗ୍ରୀନ ଏମ୍ସ ଭାବରେ ପରିଚିତ ହେବ । ସମ୍ପୂର୍ଣ୍ଣ ଭାବରେ ପର୍ଯ୍ୟାବରଣ ପ୍ରେମୀ ଏମ୍ସ, ପ୍ରକୃତି ପ୍ରେମୀ ଏମ୍ସ । ବର୍ତ୍ତମାନ ଆମର ସମସ୍ତ ସାଥୀମାନେ କହିଲେ, ପୂର୍ବ ସରକାର ଶିଳାନ୍ୟାସର ପ୍ରସ୍ତର ଲଗାଉଥିଲେ ଏବଂ ନିର୍ବାଚନ ବାହାରିବା ପରେ ଭୁଲି ଯାଉଥିଲେ । ଆଜି ମଧ୍ୟ ହିମାଚଳକୁ ଯିବେ, ଆମର ଧୁମଲ ଜୀ ଗୋଟିଏ ଥର କାର୍ଯ୍ୟକ୍ରମ କରିଥିଲେ । କେଉଁଠି କେଉଁଠି ପଥର ପଡ଼ିଥିଲା ତାକୁ ଖୋଜିବାକୁ ଏବଂ ବହୁତଗୁଡ଼ିଏ ଏମିତି କାର୍ଯ୍ୟକ୍ରମ ଯେଉଁଠି ଶିଳାନ୍ୟାସ ହୋଇଥିଲା, କାମ ହୋଇ ନ ଥିଲା ।

ମୋର ମନେ ଅଛି ମୁଁ ଗୋଟିଏ ଥର ରେଳବାଇର ରିଭୁ୍ୟ କରୁଥିଲି, ଆପଣଙ୍କର ଉନା ନିକଟେ ଗୋଟିଏ ରେଲୱେ ଲାଇନ ବିଛାଇବାର ଥିଲା । ୩୫ ବର୍ଷ ପୂର୍ବରୁ ନିର୍ଣ୍ଣୟ ହୋଇଥିଲା, ୩୫ ବର୍ଷ ପୂର୍ବରୁ ପାର୍ଲାମେଣ୍ଟରେ ଘୋଷଣା ହୋଇଥିଲା । କିନ୍ତୁ ପୁଣି ଫାଇଲ ବଡ଼ । ହିମାଚଳକୁ କିଏ ପଚାରିବ ଭାଇ । କିନ୍ତୁ ଇଏ ତ ହିମାଚଳର ପୁଅ ଏବଂ ହିମାଚଳକୁ ଭୁଲିପାରିବ ନାହିଁ, କିନ୍ତୁ ଆମର ସରକାରଙ୍କ ପରିଚୟ ଏହା ଯେ ଯେଉଁ ପ୍ରକଳ୍ପର ଶିଳାନ୍ୟାସ କରିଥାନ୍ତି, ତାହାର ଲୋକାର୍ପଣ ମଧ୍ୟ କରିଥାନ୍ତି । ଅଟକିବା, ଝୁଲିବା, ପଥଭ୍ରଷ୍ଟ ହେବା, ସେ ସମୟ ଚାଲିଗଲା ସାଥୀମାନେ!

ସାଥୀମାନେ,

ରାଷ୍ଟ୍ରର ରକ୍ଷାରେ ସବୁବେଳେ ହିମାଚଳର ବହୁତ ବଡ଼ ଯୋଗଦାନ ରହିଛି, ଯେଉଁ ହିମାଚଳ ପୁରା ଦେଶରେ ରାଷ୍ଟ୍ରର ରକ୍ଷାରେ ବୀରମାନଙ୍କ ପାଇଁ ଜଣାଯାଇଛି ସେହି ହିମାଚଳ ଏବେ ଏହି ଏମ୍ସ ପରେ ଜୀବନ ରକ୍ଷା ପାଇଁ ମଧ୍ୟ ମହତ୍ତ୍ୱପୂର୍ଣ୍ଣ ଭୂମିକା ନିର୍ବାହ କରିବ । ୨ଠ୧୪ ମସିହା ପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ ହିମାଚଳରେ କେବଳ ୩ଟି ମେଡିକାଲ, କଲେଜ ଥିଲା, ସେଥିମଧ୍ୟରୁ ୨ଟି ସରକାରୀ ଥିଲା । ଗତ ୮ ବର୍ଷ ମଧ୍ୟରେ ୫ଟି ନୂତନ ସରକାରୀ ମେଡିକାଲ କଲେଜ ହିମାଚଳରେ ତିଆରି ହୋଇଛି । ୨ଠ୧୪ ପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ ଅଣ୍ଡର ଏବଂ ପୋଷ୍ଟ ଗ୍ରାଜୁଏଟଙ୍କୁ ମିଶାଇ କେବଳ ୫ଠଠ ବିଦ୍ୟାର୍ଥୀ ପଢ଼ି ପାରୁଥିଲେ । ଆଜି ଏହି ସଂଖ୍ୟା ୧୨ଠଠରୁ ଅଧିକ, ଅର୍ଥାତ ଦୁଇଗୁଣରୁ ମଧ୍ୟ ଅଧିକ ହୋଇଯାଇଛି । ଏମ୍ସରେ ପ୍ରତ୍ୟେକ ବର୍ଷ ଅନେକ ନୂଆ ଡାକ୍ତର ହେବେ, ନର୍ସିଂ ସହିତ ଜଡ଼ିତ ଯୁବକମାନେ ଏଠାରେ ଟ୍ରେନିଂ ପାଇବେ, ଏବଂ ମୋତେ ଜୟରାମ ଜୀଙ୍କ ଟିମକୁ, ଜୟରାମ ଜୀଙ୍କୁ, ଭାରତ ସରକାରଙ୍କ ସ୍ୱାସ୍ଥ୍ୟ ମନ୍ତ୍ରୀ ଏବଂ ସ୍ୱାସ୍ଥ୍ୟ ମନ୍ତ୍ରଣାଳୟକୁ ବିଶେଷ ଭାବେ କୃତଜ୍ଞତା ଜଣାଉଛି । ଯେତେବେଳେ ନଡ୍ଡା ଜୀ ସ୍ୱାସ୍ଥ୍ୟ ମନ୍ତ୍ରୀ ଥିଲେ, ସେହି ସମୟରେ ଆମେ ନିର୍ଣ୍ଣୟ ନେଇଥିଲୁ ସେତେବେଳେ ନଡ୍ଡା ଜୀଙ୍କ ଉପରେ ବହୁତ ବଡ଼ ଦାୟିତ୍ୱ ଆସିଗଲା, ମୁଁ ଶିଳାନ୍ୟାସ ମଧ୍ୟ କରିଥିଲେ । ଏହି ଅବଧିରେ କରୋନାର ଭୟଙ୍କର ମହାମାରୀ ଆସିଲା ଏବଂ ଆମେ ଜାଣିଛୁ ଯେ ହିମାଚଳର ଲୋକ ହିମାଚଳର କୌଣସି ମଧ୍ୟ କନଷ୍ଟ୍ରକସନର କାମ କରିଥାଏ ସେତେବେଳେ ବହୁତ ଅସୁବିଧା ଆସିଥାଏ, ଗୋଟିଏ ଗୋଟିଏ ଜିନିଷ ପାହାଡ଼ ଉପରକୁ ଆଣିବା କେତେ କଷ୍ଟକର ହୋଇଥାଏ । ଯେଉଁ କାମ ତଳେ ଗୋଟିଏ ଘଣ୍ଟାରେ ହୋଇଥାଏ, ତାହାକୁ ସେଠାରେ ପାହାଡ଼ରେ କରିବା ପାଇଁ ଗୋଟିଏ ଦିନ ଲାଗି ଯାଇଥାଏ । ତାହା ପରେ ମଧ୍ୟ, କରୋନାର କଠିନ ସମୟ ଥିବା ସତ୍ତ୍ୱେ ମଧ୍ୟ ଭାରତ ସରକାରଙ୍କ ସ୍ୱାସ୍ଥ୍ୟ ମନ୍ତ୍ରଣାଳୟ ଏବଂ ଜୟରାମ ଜୀଙ୍କ ରାଜ୍ୟ ସରକାରଙ୍କ ଟିମ ମିଳିତ ଭାବେ ଯେଉଁ କାର୍ଯ୍ୟ କଲେ, ଆଜି ଏମ୍ସ ଦଣ୍ଡମାନ, ଏମ୍ସ କାମ କରିବା ଆରମ୍ଭ ହୋଇଯାଇଛି ।

ମେଡିକାଲ କଲେଜ ନୁହେଁ, ଆମେ ଆଉ ଏକ ଦିଗରେ ଆଗକୁ ବଢ଼ିବା, ଔଷଧ ଏବଂ ଜୀବନରକ୍ଷକ ଟିକାର ନିର୍ମାତା ଭାବରେ ମଧ୍ୟ ହିମାଚଳର ଭୂମିକାର ବହୁତ ଅଧିକ ବିସ୍ତାର କରାଯାଉଛି । ବଲ୍କ ଟ୍ରଗ୍ସ ପାର୍କ ପାଇଁ ଦେଶରେ କେବଳ ତିନୋଟି ରାଜ୍ୟକୁ ବିଛାଯାଇଛି ଏବଂ ସେଥିରୁ ଗୋଟିଏ ଏମିତି କେଉଁ ରାଜ୍ୟ ଅଛି ଭାଇ, କେଉଁ ରାଜ୍ୟ ଅଛି? ହିମାଚଳ ଅଟେ, ଆପଣଙ୍କୁ ଗର୍ବ ଲାଗୁଛି କି ନାହିଁ? ଏହା ଆପଣଙ୍କ ପିଲାମାନଙ୍କର ଉଜ୍ଜ୍ୱଳ ଭବିଷ୍ୟତର ଶିଳାନ୍ୟାସ ଅଟେ କି ନୁହେଁ? ଏହା ଆପଣଙ୍କର ପିଲାମାନଙ୍କର ଉଜ୍ଜ୍ୱଳ ଭବିଷ୍ୟତର ଗ୍ୟାରେଣ୍ଟି କି ନୁହେଁ? ଆମେ କାମ ବଡ଼ ଦୃଢ଼ତାର ସହିତ କରିଥାଉ ଏବଂ ଆଜିର ପିଢ଼ି ପାଇଁ ମଧ୍ୟ କରିଥାଉ, ଆଗାମୀ ପିଢ଼ି ପାଇଁ ମଧ୍ୟ କରିଥାଉ ।

ସେହିଭଳି ଭାବରେ ମେଡିକାଲ ଡିଭାଇସ ପାର୍କ ପାଇଁ ୪ଟି ରାଜ୍ୟକୁ ବଛାଯାଇଛି, ଯେଉଁଠାରେ ଆଜି ମେଡିକାଲରେ ଟେକ୍ନୋଲୋଜୀର ଭରପୂର ଉପଯୋଗ ହେଉଛି । ବିଶେଷ ଭାବରେ ଉପକରଣର ଆବଶ୍ୟକତା ପଡ଼ିଥାଏ, ତାହାକୁ ତିଆରି କରିବା ପାଇଁ ଦେଶରେ ୪ଟି ରାଜ୍ୟ ବଛାଯାଇଛି, ଏତେ ବଡ଼ ଭାରତ ବର୍ଷ, ଏତେ ବଡ଼ ଜନସଂଖ୍ୟା, ହିମାଚଳ ହେଉଛି ମୋର ଗୋଟିଏ ଛୋଟ ରାଜ୍ୟ, କିନ୍ତୁ ଏହା ବୀରମାନଙ୍କର ଭୂମି ଅଟେ ଏବଂ ମୁଁ ଏଠିକାର ରୁଟି ଖାଇଛି, ମୋତେ କରଜ ମଧ୍ୟ ଶୁଝିବାକୁ ଅଛି ଏବଂ ସେଥିପାଇଁ ଚତୁର୍ଥ ମେଡିକାଲ ଡିଭାଇସ୍ ପାର୍କ କେଉଁଠାରେ ତିଆରି ହେଉଛି, ଆପଣଙ୍କ ହିମାଚଳରେ ତିଆରି ହେଉଛି ସାଥୀମାନେ । ବିଶ୍ୱରୁ ବଡ଼ ବଡ଼ ଲୋକମାନେ ଏଠାକୁ ଆସିବେ । ନାଲାଗଡ଼ରେ ଏହି ମେଡିକାଲ ଡିଭାଇସ ପାର୍କର ଶିଳାନ୍ୟାସ ଏହାର ଏକ ଅଂଶ ଅଟେ । ଏହି ଡିଭାଇସ ପାର୍କର ନିର୍ମାଣ ପାଇଁ ହଜାର ହଜାର କୋଟି ଟଙ୍କାର ନିବେଶ ଏଠାରେ ହେବ । ଏହା ସହ ଜଡ଼ିତ ଅନେକ ଛୋଟ ଏବଂ ଲଘୁ ଉଦ୍ୟୋଗ ଆଖ ପାଖରେ ବିକଶିତ ହେବ । ଏହାଦ୍ୱାରା ଏଠିକାର ହଜାର ହଜାର ଯୁବଗୋଷ୍ଠୀଙ୍କୁ ରୋଜଗାର ଅବସର ମିଳିବ ।

ସାଥୀମାନେ,

ହିମାଚଳର ଆଉ ଏକ ପକ୍ଷ ରହିଛି, ଯେଉଁଠାରେ ଏଠାରେ ବିକାଶର ଅନନ୍ତ ସମ୍ଭାବନା ଲୁଚି ରହିଛି, ଏହି ପକ୍ଷ ଅଟେ ମେଡିକାଲ ଟୁରିଜିମର । ଏଠିକାର ଆସୁଥିବା ପବନ, ଏଠିକାର ମୌସମ, ଏଠିକାର ବାତାବରଣ, ଏଠିକାର ଜଡ଼ିବୁଟି, ଏଠିକାର ଭଲ ସ୍ୱାସ୍ଥ୍ୟ ପାଇଁ ବହୁତ ଉପଯୁକ୍ତ ବାତାବରଣ । ଆଜି ଭାରତ ମେଡିକାଲ ଟୁରିଜିମକୁ ନେଇ ବିଶ୍ୱରେ ଏକ ବହୁତ ବଡ଼ ଆକର୍ଷଣର କେନ୍ଦ୍ର ହେବାକୁ ଯାଉଛି । ଯେତେବେଳେ ଦେଶ ଏବଂ ଦୁନିଆର ଲୋକମାନେ ଭାରତରେ ମେଡିକାଲ ଚିକିତ୍ସା ପାଇଁ ଆସିବାକୁ ଚାହିଁବେ ସେତେବେଳେ ଏଠିକାର ପ୍ରାକୃତିକ ସୌନ୍ଦର୍ଯ୍ୟ ଏତେ ବଢ଼ିଆ ଯେ ଏଠାକୁ ଆସିବେ । ଏକ ପ୍ରକାରରେ ତାଙ୍କ ପାଇଁ ଆରୋଗ୍ୟର ଲାଭ ମଧ୍ୟ ହେବ ଏବଂ ପର୍ଯ୍ୟଟନର ମଧ୍ୟ ଲାଭ ହେବ । ହିମାଚଳରେ ଦୁଇଟି ହାତରେ ଲଡୁ ରହିଛି ।

ସାଥୀମାନେ,

କେନ୍ଦ୍ର ସରକାରଙ୍କର ପ୍ରୟାସ ରହିଛି ଯେ ଗରିବ ଏବଂ ମଧ୍ୟମ ବର୍ଗର ଚିକିତ୍ସା, ତା’ ଉପରେ ଖର୍ଚ୍ଚ ଅତି କମ ହେଉ, ଏଠାରେ ଚିକିତ୍ସା ମଧ୍ୟ ଭଲ ମିଳୁ ଏବଂ ଏଥିପାଇଁ ତାଙ୍କୁ ଦୂରକୁ ଯିବାକୁ ନ ପଡୁ । ସେଥିପାଇଁ ଆଜି ଏମ୍ସ ମେଡିକାଲ କଲେଜ, ଜିଲ୍ଲା ହସ୍ପିଟାଲରେ କ୍ରିଟିକାଲ କେୟାର ସୁବିଧାମାନ ଏବଂ ଗାଁରେ ହେଲଥ ଏଣ୍ଡ ୱେଲନେସ ସେଣ୍ଟର ତିଆରି କରିବାରେ ସିମଲେସ ସଂଯୋଗୀକରଣ ଉପରେ ଆମେ କାର୍ଯ୍ୟ କରୁଛୁ । ତା’ ଉପରେ ଧ୍ୟାନ ଦିଆଯାଉଛି । ଆୟୁଷ୍ମାନ ଯୋଜନା ଅନ୍ତର୍ଗତ ହିମାଚଳର ଅଧିକାଂଶ ପରିବାରକୁ ୫ ଲକ୍ଷ ଟଙ୍କା ପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ ମାଗଣା ଚିକିତ୍ସାର ସୁବିଧା ମିଳିପାରୁଛି ।

ଏହି ଯୋଜନା ଅନ୍ତର୍ଗତ ବର୍ତ୍ତମାନ ପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ ଦେଶରେ ୩ କୋଟି ୬ଠ ଲକ୍ଷ ଗରୀବ ରୋଗୀ ମାଗଣାରେ ଚିକିତ୍ସା ପାଇସାରିଛନ୍ତି ଏବଂ ସେଥିରୁ ଦେଢ଼ ଲକ୍ଷ ଲାଭାର୍ଥୀ ମୋର ହିମାଚଳର ମୋର ପରିବାରଗଣ ଅଟନ୍ତି । ଦେଶରେ ଏହି ସମସ୍ତ ସାଥୀମାନଙ୍କ ଚିକିତ୍ସା ଉପରେ ସରକାର ବର୍ତ୍ତମାନ ପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ ୪୫ ହଜାର କୋଟି ଟଙ୍କାରୁ ଅଧିକ ଖର୍ଚ୍ଚ କରିସାରିଛନ୍ତି । ଯଦି ଆୟୁଷ୍ମାନ ଭାରତ ଯୋଜନା ନ ଥାନ୍ତା । ତେବେ ଏହା ପାଖାପାଖି ଦୁଇଗୁଣ ଅର୍ଥାତ ପ୍ରାୟତଃ ୯ଠ ହଜାର କୋଟି ଟଙ୍କାର ଯେଉଁ ରୋଗୀ ଥିଲେ, ସେହି ପରିବାରକୁ ନିଜ ପକେଟରୁ ଦେବାକୁ ପଡ଼ିଥାନ୍ତା । ଅର୍ଥାତ ଏତେ ବଡ଼ ସଞ୍ଚୟ ମଧ୍ୟ ଗରୀବ ଏବଂ ମଧ୍ୟମ ବର୍ଗର ପରିବାରକୁ ଉତ୍ତମ ମାନର ଚିକିତ୍ସା ସହିତ ମିଳିଛି ।

ସାଥୀମାନେ,

ମୋ ପାଇଁ ଆହୁରି ଗୋଟିଏ ସନ୍ତୋଷର ବିଷୟ ହେଉଛି । ସରକାରଙ୍କ ଏହି ପ୍ରକାରର ଯୋଜନା ଓ ଅଧିକ ଲାଭ ଆମର ମା’ମାନଙ୍କୁ, ଭଉଣୀମାନଙ୍କୁ ଏବଂ ଝିଅମାନଙ୍କୁ ମିଳୁଛି । ଏବଂ ଆମେ ଜାଣୁ, ଆମ ମା’ ଏବଂ ଭଉଣୀମାନଙ୍କର ସ୍ୱଭାବ ଅଛି ଯେ, ଯେତେ ଯନ୍ତ୍ରଣା ହେଉ ନା କାହିଁକି, ଶରୀରରେ କେତେ କଷ୍ଟ ହେଉଥାଉ, କିନ୍ତୁ ସେମାନେ ପରିବାରରେ କାହାକୁ କୁହନ୍ତି ନାହିଁ । ସେ ସହ୍ୟ ମଧ୍ୟ କରିଥାନ୍ତି, କାମ ମଧ୍ୟ କରିଥାନ୍ତି, ପୁରା ପରିବାରର ଯତ୍ନ ମଧ୍ୟ ନେଇଥାନ୍ତି, କାରଣ ତାଙ୍କ ମନରେ ରହିଥାଏ ଯେ ଯଦି ରୋଗ ବିଷୟରେ ଲୋକମାନଙ୍କୁ ଜଣାପଡ଼ିବ, ପିଲାମାନଙ୍କୁ ଜଣାପଡ଼ିବ ତେବେ ସେମାନେ କରଜ କରି ମଧ୍ୟ ମୋର ଚିକିତ୍ସା କରାଇବେ, ଏବଂ ମା’ ଭାବନ୍ତି, ମୁଁ ନିଜେ ଅସୁସ୍ଥତାରେ କିଛି ସମୟ ବାହାର କରିବି, କିନ୍ତୁ ମୁଁ ପିଲାମାନଙ୍କୁ ଋଣଗ୍ରସ୍ତ ହେବାକୁ ଦେବି ନାହିଁ, ମୁଁ ଡାକ୍ତରଖାନା ଯାଇ ଟଙ୍କା ଖର୍ଚ୍ଚ କରିବି ନାହିଁ । ଏହି ମାଆମାନଙ୍କ ବିଷୟରେ ଚିନ୍ତା କିଏ କରିବ? କ’ଣ ମୋର ମାଆମାନେ ଏହି ପ୍ରକାରର କଷ୍ଟକୁ ଚୁପଚାପ ସହିବେ । ଏଇ ପୁଅ କେଉଁ କାମର ଆରେ, ସେହି ଭାବନାରେ ଆୟୁଷ୍ମାନ ଭାରତ ଯୋଜନାର ଜନ୍ମ ହେଲା, ଯାହାକି ମାଆମାନଙ୍କୁ, ଭଉଣୀମାନଙ୍କ ଅସୁସ୍ଥତା ସହ ବଂଚିବାକୁ ପଡ଼ିବ ନାହିଁ । ଜୀବନରେ କିଭଳି ବାଧ୍ୟତାମୂଳକ ଭାବେ ବଂଚିବାକୁ ପଡ଼ିବ ନାହିଁ । ଆୟୁଷ୍ମାନ ଭାରତ ଯୋଜନା ଅଧିନରେ ଲାଭ ପାଉଥିବା ମା’ ଭଉଣୀମାନେ ୫ଠ ପ୍ରତିଶତରୁ ଅଧିକ ଅଛନ୍ତି । ଆମର ମା’ମାନେ - ଭଉଣୀମାନେ ଏବଂ ଝିଅମାନେ ଅଛନ୍ତି ।

ସାଥୀମାନେ,

ଶୌଚାଳୟ ନିର୍ମାଣ କରିବାରେ ସ୍ୱଚ୍ଛ ଭାରତ ଅଭିଯାନ ହେଉ, ମାଗଣା ଗ୍ୟାସ ସଂଯୋଗ ଯୋଗାଇଦେବା ପାଇଁ ଉଜ୍ୱାଲା ଯୋଜନା ହେଉ, ମାଗଣା ସାନିଟାରୀ ନାପକିନ ଯୋଗାଇଦେବା ଅଭିଯାନ ହେଉ, ମାତୃବନ୍ଦନ ଯୋଜନା ଅନ୍ତର୍ଗତ ପ୍ରତ୍ୟେକ ଗର୍ଭବତୀ ମହିଳାଙ୍କୁ ପୋଷକ ଆହର ପାଇଁ ହଜାରେ ଟଙ୍କା ସହାୟତା ହେଉ, କିମ୍ବା ବର୍ତ୍ତମାନ ହର ଘର ଜଲ ପ୍ରତ୍ୟେକଙ୍କ ଘରେ ପହଂଚାଇବା ପାଇଁ ଆମର ଅଭିଯାନ ହେଉ, ଏହା ମୋର ମା ଏବଂ ଭଉଣୀମାନଙ୍କୁ ସଶକ୍ତ କରିବା କାମ ଆମେ ଗୋଟିଏ ପରେ ଗୋଟିଏ କାର୍ଯ୍ୟ ଜାରି ରଖିଛୁ, ମା’ମାନଙ୍କୁ, ଭଉଣୀମାନଙ୍କୁ, ଝିଅମାନଙ୍କର ସୁବିଧା, ସମ୍ମାନ, ସୁରକ୍ଷା ଏବଂ ସ୍ୱାସ୍ଥ୍ୟ ଏହା ଡବଲ ଇଞ୍ଜିନ ସରକାରଙ୍କ ସବୁଠାରୁ ବହୁତ ବଡ଼ ପ୍ରାଥମିକତା ଅଟେ ।

କେନ୍ଦ୍ର ସରକାର ଯାହା ବି କିଛି ଯୋଜନାମାନ ତିଆରି କରିଛନ୍ତି, ତାକୁ ଜୟରାମ ଜୀ ଏବଂ ତାଙ୍କର ପୁରା ଟିମ, ତାଙ୍କ ସରକାର ସେମାନଙ୍କୁ ଅତି ଦ୍ରୁତ ଗତିରେ ତାହାକୁ ଏହି ଭୂମିକୁ ଆଣିଛନ୍ତି ଏବଂ ତାହା ପରିସର ମଧ୍ୟ ବିସ୍ତାର କରିଛନ୍ତି। ହର ଘର ନଲ ସେ ଜଲ ପହଂଚାଇବାର କାର୍ଯ୍ୟ ଏଠାରେ କେତେ ଦ୍ରୁତ ଗତିରେ ହୋଇଛି, ଏହା ଆମ ସମସ୍ତଙ୍କ ସାମ୍ନାରେ ଅଛି, ଗତ ୭ ଦଶନ୍ଧି ମଧ୍ୟରେ ହିମାଚଳରେ ଦିଆଯାଇଥିବା ଟ୍ୟାପ ସଂଯୋଗର ସଂଖ୍ୟାକୁ ଆମେ ଦୁଇଗୁଣରୁ ଅଧିକ କେବଳ ଗତ ୩ ବର୍ଷ ମଧ୍ୟରେ ଆମେ ଦେଇସାରିଛୁ, ଆମେ ଲୋକଙ୍କୁ ଭେଟି ମଧ୍ୟ ସାରିଛୁ । ଏହି ତିନି ବର୍ଷ ମଧ୍ୟରେ ସାଢ଼େ ଆଠ ଲକ୍ଷରୁ ଅଧିକ ନୂତନ ପରିବାରଙ୍କୁ ପାଇପ ଜଳର ସୁବିଧା ମିଳିପାରିଛି ।

ଭାଇ ଏବଂ ଭଉଣୀମାନେ,

ଅନ୍ୟ ଏକ ପ୍ରସଙ୍ଗରେ ଦେଶ ଜୟରାମ ଜୀ ଏବଂ ତାଙ୍କ ଦଳକୁ ବହୁତ ପ୍ରଶଂସା କରୁଛି । ଏହି ପ୍ରଶଂସା ସାମାଜିକ ସୁରକ୍ଷାକୁ ନେଇ କେନ୍ଦ୍ର ସରକାରଙ୍କ ଉଦ୍ୟମକୁ ବିସ୍ତାର କରିଥିବାରୁ ଏହି ପ୍ରଶଂସା ଦିଆଯାଉଛି । । ଆଜି ହିମାଚଳରେ କୌଣସି ପରିବାର ନାହିଁ, ଯେଉଁଠାରେ କୌଣସି ନା କୌଣସି ସଦସ୍ୟଙ୍କୁ ପେନସନ ସୁବିଧା ମିଳିନାହିଁ । ବିଶେଷ ଭାବରେ ଯେଉଁ ସାଥିମାନେ ବେସାହାରା ଅଛି, ଯାହାଙ୍କୁ ବଡ଼ ରୋଗ ହୋଇଯାଇଛି, ଏଭଳି ପରିବାରକୁ ପେନସନ ଏବଂ ଚିକିତ୍ସା ଖର୍ଚ୍ଚ ସମ୍ବନ୍ଧୀୟ ସହାୟତା ଯୋଗାଇଦେବା ପ୍ରୟସା ପ୍ରଶଂସନୀୟ ଅଟେ । ହିମାଚଳ ପ୍ରଦେଶର ହଜାର ହଜାର ପରିବାର ମଧ୍ୟ ୱାନ ରାଙ୍କ, ୱାନ ପେନସନ କାର୍ଯ୍ୟକାରୀ ହେବା ଦ୍ୱାରା ମଧ୍ୟ ବହୁତ ବଡ଼ ଲାଭ ପାଇଛନ୍ତି ।

ସାଥୀମାନେ,

ହିମାଚଳ ସୁଯୋଗର ଏକ ପ୍ରଦେଶ ଅଟେ । ଏବଂ ମୁଁ ଆଉଥରେ ଜୟରାମ ଜୀଙ୍କୁ କୃତଜ୍ଞତା ଜଣାଉଛି । ସାରା ଦେଶରେ ଟିକାକରଣ କାର୍ଯ୍ୟ ଚାଲିଛି । କିନ୍ତୁ ଆପଣଙ୍କ ଜୀବନର ସୁରକ୍ଷା ପାଇଁ ହିମାଚଳ ହେଉଛି ଦେଶର ପ୍ରଥମ ରାଜ୍ୟ ଯିଏ ଶତ ପ୍ରତିଶତ ଟିକାକରଣ ସମାପ୍ତ କରିଛି । ଏହା ଚାଲିଛି, ଏହା ଚାଲିଥାଏ, ଏହା କୌଣସି ବିଷୟ ନୁହେଁ; ଯଦି ଆପଣ ନିଷ୍ପତ୍ତି ନେଇଛନ୍ତି, ତେବେ ଆପଣଙ୍କୁ ତାହା କରିବାକୁ ପଡ଼ିବ ।

ଏଠାରେ ହାଇଡ୍ରୋରୁ ବିଦୁତ ଉତ୍ପନ୍ନ ହୋଇଥାଏ, ଫଳ ଏବଂ ପନିପରିବା ପାଇଁ ଉର୍ବର ଜମି ଅଛି ଏବଂ ଏଠାରେ ପର୍ଯ୍ୟଟନ ଅନ୍ତତଃ ନିଯୁକ୍ତି ସୁଯୋଗ ଦେଇଥାଏ । ଏହି ଅବସର ସମ୍ମୁଖରେ ଉନ୍ନତ ସଂଯୋଗୀକରଣର ଅଭାବ ସବୁଠାରୁ ବଡ଼ ପ୍ରତିବନ୍ଧକ ଥିଲା । ୨ଠ୧୪ ପରଠାରୁ ହିମାଚଳ ପ୍ରଦେଶର ଉତ୍ତମ ଭିତ୍ତିଭୂମି ଗାଁ- ଗାଁ ପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ ପହଂଚାଇବାକୁ ଉଦ୍ୟମ ଚାଲିଛି । ଆଜି ହିମାଚଳର ରାସ୍ତା ପ୍ରଶସ୍ତ ହେବାର କାର୍ଯ୍ୟ ମଧ୍ୟ ଚାରିଆଡ଼େ ଚାଲିଛି । ବର୍ତ୍ତମାନ ହିମାଚଳରେ ସଂଯୋଗ କାର୍ଯ୍ୟରେ ପ୍ରାୟ ୫ଠ ହଜାର କୋଟି ଟଙ୍କା ଖର୍ଚ୍ଚ କରାଯାଉଛି । ଯେତେବେଳେ ପିଞ୍ଜୋରରୁ ନାଲାଗଡ଼ ରାଜପଥ ପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ ଚାରି ଲେନର କାର୍ଯ୍ୟ ଶେଷ ହେବ, ସେତେବେଳେ ନାଲାଗଡ଼ ଏବଂ ବାଡ଼ିର ଶିଳ୍ପାଞ୍ଚଳ କେବଳ ଲାଭବାନ ହେବ ନାହିଁ, ଚଣ୍ଡିଗଡ଼ ଏବଂ ଅମ୍ବାଲା ଠାରୁ ବିଳାସପୁର, ମାଣ୍ଡି ଏବଂ ମନାଲି ଅଭିମୁଖେ ଯାଉଥିବା ଯାତ୍ରୀମାନେ ମଧ୍ୟ ଅଧିକ ସୁବିଧା ପାଇବେ । କେବଳ ଏତିକି ନୁହେଁ, ହିମାଚଳବାସୀଙ୍କୁ ଧୂଆଁମୁକ୍ତ ରାସ୍ତାରୁ ମୁକ୍ତି ଦେବା ପାଇଁ ସୁଡ଼ଙ୍ଗର ଏକ ଜାଲ ମଧ୍ୟ ବିଛାଯାଉଛି ।

ସାଥୀମାନେ,

ଡିଜିଟାଲ ସଂଯୋଗକୁ ନେଇ ମଧ୍ୟ ହିମାଚଳରେ ଅଭୁତପୂର୍ବ କାର୍ଯ୍ୟ ହୋଇଛି । ଗତ ୮ ବର୍ଷରେ ମେଡ ଇନ ଇଣ୍ଡିଆ ମୋବାଇଲ ଫୋନ ମଧ୍ୟ ଶସ୍ତା ହୋଇପାରିଛି ଏବଂ ଗାଁ ଗାଁରେ ମଧ୍ୟ ନେଟୱାର୍କ ପହଂଚିଛି । ଉନ୍ନତ ୪ଜି ସଂଯୋଗ ହେତୁ ହିମାଚଳ ପ୍ରଦେଶ ମଧ୍ୟ ଡିଜିଟାଲ କାରବାରରେ ବହୁତ ଦ୍ରୁତ ଗତିରେ ଗତି କରୁଛି । ଯଦି କେହି ଡିଜିଟାଲ ଇଣ୍ଡିଆର ସର୍ବାଧିକ ଲାଭ ପାଉଛନ୍ତି, ତେବେ ମୋର ହିମାଚଳ ଭାଇ ଓ ଭଉଣୀମାନେ ଏହା ପାଇଛନ୍ତି । ମୋର ହିମାଚଳ ନାଗରିକମାନେ ଏହା ପାଇଛନ୍ତି । ଅନ୍ୟଥା ବିଲ ଭରିବା ଠାରୁ ନେଇ ବ୍ୟାଙ୍କ ସହିତ ଯୋଡ଼ି ହେବା କାର୍ଯ୍ୟ ହେଉ, ଆଡମିସନ ହେଉ, ଆପ୍ଲିକେସନ ହେଉ, ଏମିତି ପ୍ରତ୍ୟେକ ଛୋଟ ଛୋଟ କାମ ପାଇଁ ପାହାଡ଼ରୁ ତଳକୁ ଓହ୍ଲାଇବା ଏବଂ ଅଫିସ କାମ ପାଇଁ ପାହାଡ଼ରୁ ତଳକୁ ଓହ୍ଲାଇବା ଏବଂ ଅଫିସ ଯିବା ପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ ଏହା ଗୋଟିଏ ଦିନ ଲାଗୁଥିଲା, ଗୋଟେ ଗୋଟେ ଦିନ ଲାଗୁଥିଲା, ବେଳେବେଳେ ରାତିରେ ରହିବାକୁ ପଡୁଥିଲା । ବର୍ତ୍ତମାନ ଦେଶରେ ପ୍ରଥମ ଥର ପାଇଁ ମେଡ ଇନ ଇଣ୍ଡିଆ ୫ଜି ସେବା ମଧ୍ୟ ଆରମ୍ଭ ହୋଇସାରିଛି, ଯାହାର ଲାଭ ଖୁବଶୀଘ୍ର ହିମାଚଳ ପାଇଁ ଉପଲବ୍ଧ ହେବ । ଭାରତ ଡ୍ରେନକୁ ନେଇ ଯେଉଁ ନିୟମ କରିଛି, ପରିବର୍ତ୍ତନ କରିଛି, ତାହା ପରେ ଆହୁରି ମୁଁ ହିମାଚଳକୁ ଏଥିପାଇଁ ମଧ୍ୟ ଶୁଭେଚ୍ଛା ଜଣାଉଛି । ହିମାଚଳ ହେଉଛି ଦେଶର ପ୍ରଥମ ରାଜ୍ୟ, ଯାହା ରାଜ୍ୟର ଡ୍ରୋନ ନୀତି ଆପଣାଉଛି । ବର୍ତ୍ତମାନ ଡ୍ରୋନରୁ ପରିବହନ ପାଇଁ ଡ୍ରୋନର ବ୍ୟବହାର ବହୁତ ବୃଦ୍ଧି ପାଇବ ଏବଂ ଏଥିରେ କିନ୍ନର ପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ ଆମର ଯଦି ଆଳୁ ମଧ୍ୟ ଅଛି; ତେବେ ଆମେ ସେଠାରୁ ଡ୍ରୋନରୁ ଉଠାଇ ବଡ଼ ମଣ୍ଡିରେ ତୁରନ୍ତ ଆଣିପାରିବା । ଆମର ଫଳ ଖରାପ ହୋଇ ଯାଉଥିଲେ, ଡ୍ରୋନରେ ଉଠାଇ ଆଣିପାରିବା । ଅନେକ ପ୍ରକାରର ଲାଭ ଆଗାମୀ ଦିନରେ ହେବ । ଏହି ପ୍ରକାରର ବିକାଶ, ଯାହାଦ୍ୱାରା ପ୍ରତ୍ୟେକ ନାଗରିକଙ୍କର ସୁବିଧା ବଢ଼ିବ, ପ୍ରତ୍ୟେକ ନାଗରିକ ସମୃଦ୍ଧି ସହିତ ଯୋଡ଼ି ହେବ, ଏଥିପାଇଁ ଆମେ ପ୍ରୟାସରତ ଅଛୁ । ଏହି ବିକଶିତ ଭାରତ, ବିକଶିତ ହିମାଚଳ ପ୍ରଦେଶର ସଂକଳ୍ପକୁ ସିଦ୍ଧ କରିବ ।

ମୋତେ ଖୁସି ଲାଗୁଛି ବିଜୟା ଦଶମୀର ପାବନ ପର୍ବରେ ବିଜୟ ନାଦ କରିବାର ଅବସର ମିଳିଲା ଏବଂ ମୋତେ ବିଜୟର ଧ୍ୱନି ବଜାଇ ବିଜୟର ଉତ୍ସବ ମନାଇବାର ଅବସର ମିଳିଲା । ଏବଂ ଆପଣ ସମସ୍ତଙ୍କର ଏତେ ଆଶୀର୍ବାଦ ଭିତରେ ଏହିସବୁ କରିବାର ଅବସର ମିଳିଲା । ମୁଁ ପୁଣିଥରେ ଏମ୍ସ ସହିତ ସମସ୍ତ ବିକାଶ ପରିଯୋଜନା ପାଇଁ ଆପଣମାନଙ୍କୁ ବହୁତ ବହୁତ ଶୁଭେଚ୍ଛା ଜଣାଉଛି । ଦୁଇଟି ମୁଠାକୁ ବନ୍ଦ କରି ମୋ ସହିତ କୁହନ୍ତୁ-

ଭାରତ ମାତା କି ଜୟ । ସମ୍ପୂର୍ଣ୍ଣ ଶକ୍ତିର ସହିତ ଶବ୍ଦ ଶୁଭିବା ଦରକାର-

ଭାରତ ମାତା କି - ଜୟ!

ଭାରତ ମାତା କି - ଜୟ!

ଭାରତ ମାତା କି - ଜୟ!

ବହୁତ ବହୁତ ଧନ୍ୟବାଦ!