विशाल संख्‍या में पधारे हुए सभी प्‍यारे भाईयों और बहनों और विशेष रूप से महाराष्‍ट्र से आये मित्रों को भी नमस्कार,

बोले सो निहाल..सत् श्री अकाल! शहीदों..अमर रहो! शहीदो..अमर रहो! शहीदों..अमर रहो!

आज मेरे लिए बड़ी प्रेरक घड़ी है। एक नई प्रेरणा जिनका नाम कानों पर पड़ते ही देश के हर नागरिक को मिलती है ऐसे सरदार भगत सिंह जी, सुखदेव, राजगुरू, बटूकेश्‍वर दत्‍त और भगत‍ सिंह जी की माता जी, जिस धरती पर एक वीर माता के साथ भारत माँ के प्‍यारे लाड़ले चार वीरों की समाधि को नमन करने का मुझे अवसर प्राप्‍त हुआ है। यह पंजाब की धरती की विशेषता है। इस धरती ने, आजादी के जंग में सबसे ज्‍यादा बलिदान दिया है। देश की रक्षा के लिए सीमा पर मोर्चा संभालते हुए अनेक वीर जवानों ने शहादत दी है।..और देश को आगे बढ़ाने के लिए यहां के किसानों ने अपना पसीना बहाकर के देश के अन्‍न भंडार भर दिये। यह ऐसी धरती है, जहां आजादी के पहले भी यहां के लोग देश के लिए जिए और आजादी के बाद भी देश के लिए जी रहे हैं। मैं इस धरती को, यहां के सभी वीरों को, यहां के सभी वीर माताओं को आदरपूर्वक नमन करता हूं।

अंग्रेजों ने.. उनको भगत सिंह का भय कितना रहता था.. तय तो यह हुआ था कि 24 मार्च को भगत सिंह जी को फांसी दे दी जाएगी। लेकिन घबराई हुई अंग्रेजी सल्‍तनत ने सारे नियमों का उल्‍लंघन करते हुए, सारी परंपराओं को तोड़ते हुए, चोरी छिपे से सरदार भगत सिंह जी को फांसी दी। और इतना ही नहीं, वो शरीर उनके परिवारजनों को देने की बजाय लाहौर जेल से लाकर के यहां पर किसी भी सम्‍मान के बिना मिट्टी के तेल में और अगल-बगल से कूड़ा कचरा इकट्ठा करके उनके शरीर को जला देने का काम उस सल्‍तनत ने किया। यही धरती है, यहां पर उनका शरीर विलीन हो गया। मैं आज भगत सिंह, सुखदेव राजगुरू.. उन वीरों की उस महान परंपरा को प्रणाम करने आया हूं।

भाईयों-बहनों आज हिंदुस्‍तान में किसी एक नाम को सुनते ही हिंदुस्‍तान के हर कोने में जवान, वृद्ध सबको चेतना जग जाती है, प्रेरणा मिल जाती है, वो नाम है सरदार भगत सिंह। उस नाम में वो ताकत है, जो आज भी देश के नौजवानों को देश के लिए जीने-मरने की प्रेरणा देता है। ऐसे महापुरूषों ने बलिदान दिया, तब जाकर के देश आजाद हुआ। उनके सपनों को पूरा करना.. और उन सपनों को पूरा करने के लिए जैसा भारत उन्‍होंने चाहा था वैसा भारत बनाने के लिए हम जितना करे उतना कम है।

हमारा गांव आबाद हो, हमारा किसान खुशहाल हो, हमारे नौजवान को रोजगार हो, दलित, पीडि़त, शोषित, वंचित, गांव, गरीब, शहर के मजदूर, उनके जीवन में बदलाव आए। जब तक हम देश में यह बदलाव नहीं लाते हैं, तब तक देश के लिए बलिदान देने वाले महापुरूषों को सच्‍ची श्रद्धांजलि अधूरी रहेगी।

भाईयों-बहनों हमारा सपना भी है, हमारा कर्तव्‍य भी है कि हम इस भारत मां को सुजलाम, सुफलाम बनाए। यह भारत मां, यहां के नौजवान अपनी आशा-आकांक्षा के अनुरूप जीवन में नई ऊंचाईयों को पार कर सके, हरेक को अवसर मिले विकास का, ऐसे देश को नई ऊंचाईयों पर ले जाने का प्रयास, हम सबका दायित्‍व बनता है। तब जाकर के इन महापुरूषों को सच्‍ची श्रद्धांजलि होगी।

हमने सपना देखा है – 2022! जब भारत की आजादी के 75 साल पूरे होंगे। हमारे देश में 75 साल एक अमृत पर्व होता है। इस अमृत पर्व का विशेष महत्‍व होता है। क्‍या हम 2022 में जब अमृत पर्व मनाएं तब इस देश में कोई भी परिवार ऐसा न हो, जिसके पास रहने के लिए अपना घर न हो।

भाईयों-बहनों आज भगत सिंह जी की समाधि पर मैं आया हूं। उस महापुरूष के बलिदान को याद करता हूं और मन करता है जी-जान से जुट जाएं देश के गरीब से गरीब व्‍यक्ति को भी.. जब आजादी का अमृत पर्व मनाएं तब उसका अपना घर मिल जाए। 2019! महात्‍मा गांधी के 150 साल पूरे होंगे। महात्‍मा गांधी के 150 साल कैसे मनाएं? क्‍या हमारे देश के महापुरूषों को हम स्‍वच्‍छ भारत नजराने के रूप में नहीं दे सकते? क्‍या यह भारत के सवा सौ करोड़ नागरिकों की जिम्‍मेवारी नहीं है कि हमारी भारत माता जिसके लिए इतने लोगों ने बलिदान दिये उसे हम स्‍वच्‍छ तो रखे, साफ-सुथरी रखें इस दायित्‍व को हम निभाएं और स्‍वच्‍छ भारत का सपना महात्‍मा गांधी के 150 साल पूरा होने के अवसर पर हम पूरा करें। हर गांव, हर गली, हर गली, हर परिवार, हर कोई अपने दायित्‍व को निभाएं।

और आज 23 मार्च ! राम मनोहर लोहिया जी का भी जन्‍म जयंती का अवसर है। राम मनोहर लोहिया जी एक ऐसे राजपुरूष थे, जब वो राजनीतिक आंदोलन चलाते थे, तो अपनी विचारधारा के साथ-साथ एक बात का ख्‍याल रखते थे। वे स्‍वच्‍छता का आंदोलन अपनी जवानी में चलाए करते थे। राम मनोहर लोहिया स्‍वच्‍छता का आंदोलन लगातार चलाया करते थे। आज उनकी भी जयंती है, भगत सिंह की शहादत का पर्व है और भारत माता के लिए जीने वाले इन लोगों को जब याद करते हैं तब हमारी भारत माता स्‍वच्‍छ हो, विकास की नई ऊंचाईयों को पार करने वाला हर नागरिक को अवसर हो। इस दिशा में हम आगे बढ़ना चाहते हैं।

मेरे किसान भाईयों-बहनों पंजाब ने देश को भूख से बचाया है। देश को अन्‍न देने का पुण्‍य का काम पंजाब के किसान ने किया है लेकिन आज पंजाब में पानी जमीन में गहरा होता जा रहा है। Danger रेखा से भी नीचे चला गया है। पानी परमात्‍मा का दिया हुआ प्रसाद है। पानी को बचाए बिना, हम न खेती बचा सकते हैं, न जीवन बचा सकते हैं और इसलिए मैं पंजाब के किसान भाईयो-बहनों से आग्रह करूंगा कि हम फसल पैदा करे, आधुनिक विज्ञान का प्रयोग करें। Per drop more crop, micro irrigation, टपक सिंचाई हो, स्प्रिंक्‍लर हो। बहुत सारी चींजें आज विज्ञान ने स्‍वीकार की है। कभी-कभी जब तक हमारा किसान, खेत पानी से लबालब भरा न हो तब तक उसकी आंखों को चैन नहीं पड़ता। उसको लगता है कि पूरा खेत पानी से पूरी तरह भरा होगा, तभी फसल होगी।

मेरे किसान भाईयों-बहनों मैं भी गरीब परिवार का.. मैंने इन सारी चीजों को निकट से देखा है और इसलिए मैं आपको कहता हूं कि विज्ञान बदल चुका है और इसलिए मैं आपको एक छोटी सी बात बताऊं। अगर कोई बालक घर में बीमार रहता है, वजन नहीं बढ़ता है, चेहरे पर मुस्‍कान नजर नहीं आती है, दुबला-पतला रहता है और मां-बाप की इच्‍छा रहती है कि बेटा तंदरूस्‍त हो, वजन बढ़े, दौड़े-कूदे। मां-बाप ऐसे में बादाम, केसर, पिस्‍ता यह डालकर के बाल्‍टी भर दूध रोज, बाल्‍टी भर दूध से उस बच्‍चे को अगर नहला दें तो वजन बढ़ेगा क्‍या? चेहरे पर मुस्‍कान आएगी क्‍या? तबियत ठीक होगी क्‍या? आप भी जानते हैं नहीं होगी। केसर, पिस्‍ता, बादाम वाला दूध हो, बाल्‍टी भर दूध हो, रोज दूध से नहलाते हो, लेकिन उसके शरीर में कुछ नहीं होगा। लेकिन अगर समझदार मां-बाप चम्‍मच से, एक चम्‍मच दूध पिलाएंगे, रोज 10 चम्‍मच, 15 चम्‍मच, 20 चम्‍मच पिलाना शुरू कर देंगे, तो बच्‍चे का वजन बढ़ने लगेगा। शरीर तंदरूस्‍त होगा। जो स्‍वभाव बच्‍चे का होता है, वही स्‍वभाव फसल का होता है और इसलिए फसल को ढेर सारा पानी देने से फसल अच्‍छी होती है, ऐसे पुराने विचारों को छोड़ना पड़ेगा। बूंद-बूंद पानी पिलाना से फसल ज्‍यादा होगी, अच्‍छी होगी, कम जमीन में भी ज्‍यादा पैदावार होगी और तब जाकर के पंजाब में जो पानी नीचे चला जा रहा है, वो पानी ऊपर आएगा। मेरे भाईयों बहनों बरसात का पानी, बूंद-बूंद पानी बचाएंगे, जमीन में उसको वापस डालेंगे, तभी जाकर के पंजाब की पानी की समस्‍या का समाधान कर पाएंगे।

हमारे पास नहरों का इतना बड़ा नेटवर्क है, लेकिन जितनी मात्रा में पानी जाना चाहिए उतना जा नहीं रहा है। शुरू के इलाके में तो पानी पहुंचता है लेकिन नहर का जहां आखिरी इलाका है, वहां पानी नहीं पहुंचता। हमने एक योजना बनाई है-‘प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना’। इस योजना के तहत हमारा सपना है कि हिंदुस्‍तान के हर किसान के खेत तक पानी पहुंचाया जाए, नदियों को जोड़ा जाए, नहरों को ठीक किया जाए, नई नहरों को बनाया जाए। अगर किसान को पानी पहुंच गया तो मैं विश्‍वास दिलाता हूं मिट्टी में से सोना पैदा करने की ताकत मेरे किसान भाईयों-बहनों में हैं और वो हिंदुस्‍तान के आर्थिक स्थिति को बदल सकते हैं। उस काम की और हमें जाना है।

मुझे आज मेरे किसान भाईयों-बहनों को मेरी एक चिंता भी मुझे बतानी है और वो चिंता.. मैं देख रहा हूं कि ज्‍यादा फसल के मोह में आज हम ऐसी-ऐसी गलतियां कर रहे हैं कि जिसके कारण हमारी जमीन बर्बाद हो गई है। जमीन अपनी ताकत खो रही है। अगर धरती माता अपनी ताकत खो देगी तो इस धरती पर पलने वाले बच्‍चों का पालन-पोषण कैसे होगा। हम जिस प्रकार से Chemical Fertilizer का उपयोग करते हैं.. पंजाब का क्‍या हाल करके रखा है किसान भाईयों-बहनों हमने! कितनी मात्रा में, कौन सा खाद डालना चाहिए.. हम कैसी बड़ी गलती कर रहे हैं। वैज्ञानिकों का कहना है, विज्ञान में सिद्ध हुआ है कि जितना पोटाश का उपयोग करते हैं उससे चार गुना से ज्‍यादा नाइट्रोजन का उपयोग फसल भी बर्बाद करता है, जमीन भी बर्बाद करता है। चार गुना से कम नाइट्रोजन उपयोग करना चाहिए लेकिन हमारे पंजाब में कितना उपयोग होता है, आपको मालूम है? 57 गुना! आप कल्‍पना कर सकते हैं जैसे परिवार में दवाई देनी है, लेकिन ज्‍यादा dose दे दें तो मौत भी हो जाती है वैसे नाइट्रोजन इतना गुना डालने के कारण हमारी फसल और हमारी जमीन सबको हम बर्बाद कर देते हैं। मैं पंजाब के किसानों से आग्रह करता हूं कि आप देश को दिशा दीजिए, आप देश का नेतृत्‍व कीजिए और तय कीजिए कि जितने अनुपात में Fertilizer चाहिए उससे ज्‍यादा डालने का पाप हम नहीं करेंगे, हम ऐसी गलती नहीं करेंगे। इतना ही नहीं पोटाश से फास्‍फोरस डब्‍बल से ज्‍यादा उपयोग नहीं करना चाहिए, वरना खेती बर्बाद हो जाती है। लेकिन हम क्‍या करते हैं, पंजाब के अंदर पोटास से फास्‍फोरस का उपयोग 13 गुना करते हैं। जबकि दो गुना से ज्‍यादा नहीं करना चाहिए। मुझे बताइये मेरे किसान बहनों-भाईयों कि पंजाब, पंजाब का गांव, पंजाब का किसान, पंजाब की फसल जिस पर पूरा हिंदुस्‍तान जी रहा है अगर वही बर्बाद हो जाएगा तो पूरा देश भूख मर जाएगा और इसलिए मेरे किसान भाईयों-बहनों मैं आपसे आग्रह करने आया हूं कि आप विज्ञान, आधुनिक यंत्र.. और जिसमें सरकार पूरी मदद करती है.. आप इसका सही उपयोग करें। इसका दुरूपयोग तत्‍काल तो हमें अच्‍छा लगता है, लेकिन लम्‍बे समय के लिए हमारा बहुत नुकसान करता है और इसलिए मेरे किसान भाईयों-बहनों इससे बचकर रहना चाहिए यह मैं विशेष रूप से आग्रह करना चाहता हूं।

सरकार ने किसानों के लिए एक महत्‍वपूर्ण योजना बनाई है। इस योजना को हमने लागू किया है और आप तक हम पहुंचाना चाहते हैं और वो है – Soil Health Card. जैसे नागरिक का Health Card होता है, उसका शरीर कैसा, Blood कैसा, तबियत कैसी है, कमियां क्‍या है, वो सब Health Card से पता चलता है। वैसा ही जैसे इंसान के शरीर का स्‍वभाव है, वैसा ही जमीन का भी स्‍वभाव है। जमीन को भी बीमारियां होती है, जमीन में भी कमियां होती हैं लेकिन हमें पता नहीं होता और उसके कारण हम.. जमीन का किसके लिए उपयोग करना चाहिए, नहीं कर पाते। इस बात को समझाने के लिए गांव-गांव किसानों को Soil Health Card देने की सरकार ने योजना बनाई है। आपकी जमीन कैसी है, आपकी जमीन की तबियत कैसी है, आपकी जमीन में कौन सी कमियां है, आपकी जमीन में कौन सी फसल अच्‍छी हो सकती है, आपको अगर दवाई डालनी है तो कौन सी दवाई की जरूरत है, आपको अगर Fertilizer डालना है तो कौन सा Fertilizer डालना है, कितना डालना है यह सारी बातें Soil Health Card से पता चलती हैं और यदि किसान Soil Health Card से योजना करके चलता है तो मैं विश्‍वास दिलाता हूं मेरे किसान बहनों-भाईयों छोटे किसान को भी साल का 40-50 रुपया, जो ज्ञान के अभाव के रूप में फालतू में खर्चा होता है, वो बच जाएगा। मेरे किसान को बहुत बड़ा फायदा होगा। इसलिए यह बहुत बडा काम पूरे देश में हमने चलाया है Soil Health Card का। और मुझे विश्‍वास है कि हमारे पंजाब के किसान भी इस बात की चिंता करेंगे।

मेरे किसान भाईयों बहनों एक तो पिछले साल बारिश कम हुई। हिंदुस्‍तान के कई राज्‍यों में कम बारिश के कारण किसानों को नुकसान हुआ, कहीं पर सूखा पड़ा गया और ऊपर से अभी-अभी ओले गिरे। मैं जानता हूं कि किसानों पर कितनी बड़ी आपत्ति आई होगी। मैंने भारत सरकार के अधिकारियों को, मंत्रियों को आदेश दिए हैं, सर्वे का काम शुरू हुआ है, राज्य सरकार और भारत सरकार मिलकर के आपके इस संकट की घड़ी में आपके साथ हैं। आपको जो नुकसान हुआ है.. हमारा किसान टिक सके.. जितनी भी मदद सरकार कर सकती है उसमें सरकार किसी भी हालत में पीछे नहीं रहेगी। यह मैं आपको विश्‍वास दिलाना चाहता हूं।

मेरे भाईयों-बहनों आज जब मैं सरदार भगत सिंह जी की शाहदत के इस पावन पर्व पर, इस पवित्र धरती पर आया हूं, तब मैं.. सरकार ने बजट में घोषणा की है.. क्‍योंकि पंजाब और किसान का अटूट नाता है और इसलिए अमृतसर में किसानों के लिए उपयोगी हो ऐसी Institute for Horticulture Education इसका आरंभ किया जाएगा और आज मैं जब यहां आया हूं तब इस नये Institute को हम सरदार भगत सिंह Post Graduate Institute for Horticulture Research and Education इस रूप में निर्माण करेंगे ताकि पंजाब किसान की जो नई पीढ़ी है उसके कारण उसको लाभ मिलेगा।

भाईयों बहनों भारत सरकार की यह सोच है कि अगर देश को आगे बढ़ाना है तो राज्‍यों को आगे बढ़ाना पड़ेगा। अगर हमारे राज्‍य मजबूत नहीं होंगे तो देश मजबूत नहीं होगा। अगर राज्‍य आगे नहीं बढ़ेंगें तो देश आगे नहीं बढ़ेगा और इसलिए हमारी सरकार की हर योजना राज्‍यों को मजबूत बनाने के लिए है। अभी इस बार 14th Finance Commission की रिपोर्ट के आधार पर अकेले पंजाब को कितना बड़ा लाभ होने वाला है। पंजाब इन रुपयों का सही इस्‍तेमाल करके कितना आगे बढ़ सकता है इसका मैं भली-भांति अंदाज कर सकता हूं और मुझे विश्‍वास है कि बादल साहब के नेतृत्‍व में प्रगतिशील निर्णयों के द्वारा पंजाब के जीवन को बदलने में यह रकम बहुत काम आने वाली है। पहले पिछली पंचवर्षीय योजना में भारत सरकार की तरफ से पंचवर्षीय योजना के तहत पंजाब को 20 हजार करोड़ रुपये मिले थे। भाईयों-बहनों आने वाले पांच साल के लिए यह रकम बढा़कर के 54 हजार करोड़ रुपये कर दी जाएगी, डबल से भी ज्‍यादा। इतना ही नहीं पंचायत और नगरपालिकाओं के लिए भारत सरकार ने पहले चार हजार करोड़ रुपया दिया था, इस बार हमने वो रकम बढा़कर के छह हजार करोड़ रुपये कर दी। जिसके कारण गांव के व्‍यक्ति को भी इसका फायदा पहुंचाने में काम आ जाएगी। इस बार भी पहले की तुलना में करीब-करीब चार हजार करोड़ रुपया ज्‍यादा, अतिरिक्‍त चार हजार रुपया पंजाब के विकास के लिए भारत सरकार की तिजोरी से आने वाला है।

स्थिति ऐसी हो गई है.. एक जमाना था कि दिल्‍ली के खजाने में देश की सभी तिजौरियों का करीब 60-65 प्रतिशत पैसा रहता था। राज्‍यों के पास 35-40 प्रतिशत रहता था। हमारे आने के बाद चित्र हमने बदल दिया है। अब राज्‍यों के पास करीब-करीब 60-62 प्रतिशत राशि रहेगी और केंद्र के पास सिर्फ 38% राशि रहेगी और राज्‍य मजबूत होंगे। राज्‍य विकास की नई ऊंचाईयों को पार करेंगे। उस दिशा में हम काम कर रहे हैं।

यहां पर रास्‍ते बनाने के लिए भारत सरकार की जो योजनाएं हैं.. रेल को बढ़ाने के लिए.. आज मेरे लिए खुशी की बात है कि अमृतसर से आनंदपुर साहब रेलवे की योजना का साकार रूप हमारे सामने खड़ा हुआ है। यह गर्व की बात है। आनंदपुर साहब यात्रियों के लिए एक मुख्‍य धाम है और किसी को भी हिमाचल में भी किसी जगह जाना है तो आनंदपुर साहब से ही जाते हैं। चिंतपुरणी जाना है, ज्‍वालाजी जाना है तो यहीं से जाते हैं। इस पूरे इलाके को इसका लाभ मिलने वाला है। एक प्रकार से विकास की नई ऊंचाईयों को पार करने की दिशा में हम लगातार प्रयासरत है।

..और मैं आपको विश्‍वास दिलाता हूं, मेरे पंजाब के किसान भाईयों-बहनों, आपने कभी सोचा था.. किसान 60 साल के बाद.. उसको कभी पेंशन मिल सकता है। सरकारी मुलाजिम को तो पेंशन मिल जाता है। किसान को पेंशन मिल सकता है क्‍या? 60 साल के बाद हर महीना उसको चैक मिल सकता है क्‍या? मेरे किसान भाईयों-बहनों इस बार भारत सरकार ने एक योजना बनाई है जिसमें Public Private Partnership के modal पर.. किसान को.. 60 साल के बाद अगर वो इस योजना से जुड़ जाता है, तो उसको हर महीना पांच हजार रुपया पेंशन की राशि मिल सकती है। हमारे देश के किसान का बुढ़ापा भी सुख, शांति और गौरव से बीते उस दिशा में काम करने का एक अहम कदम इस बार हमने बजट में उठाया है।

भाईयों-बहनों इन दिनों किसान को गुमराह करने के लिए भांति-भांति के प्रयास हुए हैं। कल मैंने रेडियो पर मेरी “मन की बात” में, किसानों ने जितने सवाल पूछे थे, सारे सवालों के मैंने जवाब दिये और मैं किसानों को विश्‍वास दिलाता हूं कि अगर इस देश को आगे बढ़ना है तो किसान की रक्षा करनी होगी, गांव का भला करना होगा, लेकिन साथ-साथ किसान के बेटों के लिए भी चिंता करनी होगी। किसान के बेटे को रोजगार चाहिए। आज सेना में जितने जवान हैं वो कौन है? 80% से ज्‍यादा जवान किसान मां-बाप के बेटे हैं। किसान अपने बेटे को सेना में भर्ती करता है, युद्ध के लिए भेजता है। उसे मालूम है कि अगर परिवार में तीन बच्‍चे हैं तो तीनों का जीवन आज खेती से गुजरता नहीं है। हर किसान को पूछो कि भई आपके तीन बेटे हैं क्‍या चाहते हो? हर किसान कहता है – एक बेटा तो खेती करेगा लेकिन दो को तो कहीं भेजना चाहता हूं, कहीं नौकरी कर ले, रोजी-रोटी कमा ले, पढ़-लिख करके अपना करोबार चला ले। हर किसान की यह चिंता है। अगर विकास नहीं होगा तो किसान के बच्‍चों का क्‍या होगा? क्‍या मेरे किसान के बच्‍चे दिल्‍ली और मुंबई की झुग्‍गी-झोपड़ी में जिंदगी गुजारने के लिए मजबूर होने चाहिए?

किसान के बच्‍चों को भी रोजगार चाहिए, किसान के बेटों का भी भला होना चाहिए और इसलिए मेरे भाईयों-बहनों हमारी सरकार किसान का तो भला चाहती है, गांव का भी भला चाहती है, किसान के बच्‍चों का भी भला चाहती है। इस तरह एक लम्‍बी सोच के साथ, देश के विकास की ओर आगे बढ़ने की दिशा में हमने प्रयास किया है। आज वीर सरदार भगत सिंह जी के आशीर्वाद मिले, सुखदेव-राजगुरू के आशीर्वाद मिले, भगत‍ सिंह जी की माता जी के आशीर्वाद मिले, हमारा देश विकास की नई ऊंचाईयों को पार करे और नई ऊंचाईयों को पार करते-करते हम आगे बढ़े।

भाईयों बहनों हमारे देश को भ्रष्‍टाचार ने तबाह कर दिया, बर्बाद कर दिया। कैसा-कैसा भ्रष्‍टाचार हुआ है! मैं आपको बताना चाहता हूं.. कोयला.. जब मैं यहां चुनाव में आया था और कोयले की चोरी की बात कर रहा था तो हमारे पुराने लोग जो सरकार में बैठे थे, वे गुस्‍सा हो जाते थे। सीएजी ने कहा था एक लाख 76 हजार करोड़ रुपया, अकेले कोयले में घोटाला हुआ है। यह आंकड़ा इतना बड़ा था कि लोगों के गले नहीं उतरता था। लोगों को यह तो लगता था कि भ्रष्‍टाचार तो किया होगा इनकी आदत है, लेकिन इतना नहीं हो सकता। ऐसा लोग सोचते थे। कुछ लोग तो ऐसे थे जो कहते थे - जीरो थ्‍योरी, जीरो थ्‍योरी। एक नये पैसे का घोटाला नहीं हुआ यह कहते थे। भाईयों बहनों 204 कोयले की खदान भ्रष्‍टाचार के कारण गुस्‍से में आकर के सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दी। अब हमारे आते ही यह हुआ।

पाप उन्‍होंने किया था.. बिजली कारखाने बंद हो जाने की नौबत आ गई। कारखानों में कोयला नहीं जाएगा तो कारखाने बंद हो जाएंगे ऐसी स्थिति पैदा हो गई। लेकिन हमने ईमानदारी की, पारदर्शिता की, नीतियों की योजना की और हमने तय किया कि हम सार्वजनिक रूप से Auction करेंगे, नीलामी करेंगे। और जो भी लेना चाहता है वो नीलामी में बोले पैसा, जो ज्‍यादा पैसा देगा, उसको मिलेगा। भाईयों बहनों क्‍या हुआ! 204 में से अब तक सिर्फ 20 खदानों की नीलामी हुई है, अभी तो 180 खदानों की नीलामी बाकी है। 204 खदानों में एक लाख 76 हजार करोड़ के घोटाले की बात थी। लेकिन यह घोटाला तो उससे भी बड़ा निकला। 204 में से सिर्फ 20 की नीलामी हुई है और आपको जानकर के आनंद होगा कि दिल्‍ली में आपने ईमानदार सरकार बिठाई है। उसका परिणाम यह हुआ है कि अब तक करीब-करीब दो लाख करोड़ रुपया सरकारी खजाने में आना तय हो चुका है। 180 खदान बाकी हैं। सब खदाने जाएंगी तो कितना बड़ा भंडार मिलेगा, यह रुपया किसके काम आएगा? गांव के काम आएगा, गरीब के काम आएगा, किसान के काम आएगा। देश विकास की नई ऊंचाईयों पर जाएगा।

कोयला छोडि़ए, इन्‍होंने कोई जगह पाप करने के लिए छोड़ी नहीं भाईयों। सरदार भगत‍ सिंह जी आत्‍मा दुखी होती होगी इन लोगों के कारण। LED Bulb! बिजली बचाने के लिए LED Bulb लगाने की बात है। आपको मालूम है 2014 में सरकार ने LED Bulb कितने रुपये में खरीदे। करीब-करीब 300 रुपयों में एक बल्‍ब खरीदा। हमने उसमें गहराई से काम किया, Department को लगाया, व्‍यापक रूप से काम किया। कंपनियों को भी दबाया। कोई रुपया-पैसा देने की बात बंद करो, गरीब का भला करो और आपको जानकर के खुशी होगी कि जो LED का Bulb एक साल पहले कुछ सरकारों ने 300 रुपये में खरीदा था आज उसकी कीमत 80 रुपये में हमने लाकर के रख दी। एक बल्‍ब पर दो सौ-सवा दौ सौ रुपये, चोरी होते थे। करोड़ा बल्‍ब जाएंगे तो कितने रुपये जाते होंगे। भाईयों बहनों आपने हमें ईमानदारी के लिए बिठाया है, ईमानदारी से काम करने के लिए बिठाया है और उसका परिणाम है कि आज 300 रुपये में बिकने वाला बल्‍ब.. जो भ्रष्‍टाचार के कारण रुपये खाए जाते थे, हमने उसकी कीमत 80-85 रुपया लाकर के रख दी है। सरकार 80-85 रुपये में खरीदेगी और LED का Bulb पहुंचेगा और उसके कारण गरीब से गरीब के घर में बिजली की बचत होगी। किसी का 200 रुपये बचेगा, किसी का 400 रुपये बचेगा। गरीब का हमें आशीर्वाद मिलेगा।

भाईयों बहनों ईमानदारी, देशभक्ति, अगर काम करने का जज्‍बा लेकर के.. सिर्फ देश के लिए जीना, सिर्फ देश के लिए मरना इस संकल्‍प को लेकर के चलते हैं तो कितने उत्‍तम परिणाम आते हैं यह आपके सामने मौजूद है। मैं फिर एक बार.. बादल साहब ने जितने विषय रखे हैं उन सभी बातों पर भारत सरकार गंभीरता से सोचेगी, उनके साथ भी मैं विस्‍तार से बातें करूंगा और भारत सरकार पंजाब के लिए जितना ज्‍यादा कर सकती है करने में कभी पीछे नहीं रहेगी।

मेरा तो पंजाब से अनेक रूप से नाता है। एक तो मैं यहां कई वर्षों तक रहा हूं। एक प्रकार से मेरी शिक्षा-दीक्षा, राजनीतिक शिक्षा-दीक्षा का अवसर मुझे बादल साहब की उंगली पकड़कर के सीखने का मुझे अवसर मिला है। यह मेरा सौभाग्‍य रहा है। दूसरी बात, मेरा जन्‍म गुजरात में हुआ है और जो पहले पंच प्‍यारे थे, उन पहले पंच प्‍यारों में एक गुजरात के द्वारका का था और इसलिए मेरा तो आपके साथ खून का नाता है। इसलिए पंजाब के लिए मैं जो कुछ भी कर सकता हूं, मुझे करने में खुशी होगी। यह कर्ज चुकाने का अवसर मुझे मिला है। मैं उसे चुकाकर रहूंगा।

इसी एक बात के साथ फिर एक बार मेरे साथ पूरी ताकत से बोलिये – शहीदो..अमर रहो! शहीदों..अमर रहो! शहीदो..अमर रहो! धन्यवाद।

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August 02, 2026
I urge every citizen, especially our youth, to join this movement: PM
Today, as the nation has set the goal of a Viksit Bharat, it is imperative that the country's youth remain fit, brimming with self-confidence and permanently steer clear of drugs: PM
We must protect every youth from falling into the trap of addiction: PM
Society’ support, yoga and meditation give strength to our inner selves against addiction and today facilities like rehabilitation centers also help quit addiction: PM
Even if a youth has mistakenly fallen into the trap of addiction, it absolutely does not mean that all doors are closed for them: PM
We must always remember that if a child in the house falls victim to addiction, we must not hide it but seek medical help to free the child from addiction: PM
We should also create a culture of open communication with children in the family, so that you can hold their hand before they get caught in such a whirlpool: PM
I appeal to our professors to discuss the perils of drug abuse with their students and spearhead a movement against addiction on campuses to achieve significant results: PM

ନମସ୍କାର!

ଆଜି, ଆମେ ସମସ୍ତ ଦେଶବାସୀ ଏକ ମହାନ ଏବଂ ଗୁରୁତ୍ୱପୂର୍ଣ୍ଣ ସଙ୍କଳ୍ପ ସାକାର ପାଇଁ ଏକତ୍ରିତ ହୋଇଛୁ। ଏହି ପବିତ୍ର ଅବସରରେ, ଏହି ସଙ୍କଳ୍ପକୁ ନେଇ ଆୟୋଜିତ ଏବଂ କାର୍ଯ୍ୟକ୍ରମ ସହ ଜଡିତ ସମସ୍ତ ପୂଜ୍ୟ ସନ୍ଥମହାତ୍ମାମାନଙ୍କୁ, ବିଭିନ୍ନ ରାଜ୍ୟର ପ୍ରତିନିଧିତ୍ୱ କରୁଥିବା ସମସ୍ତ ରାଜ୍ୟପାଳ, ସମସ୍ତ ମୁଖ୍ୟମନ୍ତ୍ରୀ, ଅନ୍ୟ ସମସ୍ତ ଜନପ୍ରତିନିଧିବୃନ୍ଦ ଏବଂ ଦେଶର ୨୮ ହଜାରରୁ ଅଧିକ ସ୍ଥାନରୁ କାର୍ଯ୍ୟକ୍ରମରେ ଯୋଡ଼ିହୋଇଥିବା ଏକ କୋଟିରୁ ଅଧିକ ଯୁବ ବନ୍ଧୁମାନଙ୍କୁ ମୁଁ ହାର୍ଦ୍ଦିକ ଅଭିନନ୍ଦନ ଜଣାଉଛି। ଆଜି ଆମେ ସମସ୍ତେ ଯେଉଁ ଅଭିଯାନର ସାକ୍ଷୀ ହୋଇଛୁ, ସେହି ଅଭିଯାନ କେବଳ ଜଣେ ବ୍ୟକ୍ତି ପାଇଁ ନୁହେଁ; ଏହା ପରିବାର ପାଇଁ, ସମାଜ ପାଇଁ ଏବଂ ସବୁଠାରୁ ବଡ଼ କଥା ହେଉଛି, ଏହା ସମଗ୍ର ରାଷ୍ଟ୍ର ପାଇଁ ଉତ୍ସର୍ଗୀକୃତ ଏକ ଅଭିଯାନ।

 ବନ୍ଧୁଗଣ,

‘ବିକଶିତ ଭାରତ ସଙ୍କଳ୍ପ ଅଭିଯାନ’ ପାଇଁ ‘ନିଶା ମୁକ୍ତ ଯୁବ’ ଆନ୍ଦୋଳନର ନାମ ହିଁ ଏହାର ଉଦ୍ଦେଶ୍ୟକୁ ସ୍ପଷ୍ଟ ଭାବରେ ପ୍ରତିଫଳିତ କରୁଛି। ଦେଶ ଏକ ବିକଶିତ ଭାରତର ଲକ୍ଷ୍ୟ ହାସଲ କରିବା ପାଇଁ ପ୍ରୟାସ କରୁଥିବାରୁ, ଆମର ଯୁବପିଢ଼ି ଶାରୀରିକ ଏବଂ ମାନସିକ ଭାବରେ ସୁସ୍ଥ ରହିବା, ଆତ୍ମବିଶ୍ୱାସରେ ପରିପୂର୍ଣ୍ଣ ହେବା ଏବଂ ନିଶା ସେବନ ଭଳି ଘାତକ ଅଭ୍ୟାସର କବଳରୁ ସର୍ବଦା ମୁକ୍ତ ରହିବା ଅତ୍ୟନ୍ତ ଜରୁରୀ। ଏହା ହେଉଛି ଅଭିଯାନର ମୂଳ ଉଦ୍ଦେଶ୍ୟ। ସେଥିପାଇଁ ଆମ ସମସ୍ତଙ୍କୁ ଏହି ସଙ୍କଳ୍ପ ନେବାକୁ ହେବ ଯେ, ଆମର ଯୁବପିଢ଼ି ନିଶା ଓ ଡ୍ରଗ୍ସର କୁପ୍ରଭାବକୁ ଭଲଭାବରେ ବୁଝିବେ, ପ୍ରତ୍ୟେକ କ୍ଷେତ୍ରରେ ସଚେତନ ରହିବେ ଏବଂ ଏହାଠାରୁ ଦୂରେଇ ରହିବେ। ଏହି ସଙ୍କଳ୍ପକୁ ସାକାର କରିବାରେ ‘ଜାତୀୟ ନିଶା ମୁକ୍ତ ଯୁବ ଅଭିଯାନ’ ଏକ ବଡ଼ ଭୂମିକା ଗ୍ରହଣ କରିବ।

ବନ୍ଧୁଗଣ,

କାଶୀର ସାଂସଦ ଭାବରେ, ମୁଁ ଖୁସି ଯେ, ଏହି ଅଭିଯାନ ଗତ ବର୍ଷ କାଶୀର ପବିତ୍ର ଭୂମିରୁ ଏକ ପାଇଲଟ୍ ପ୍ରକଳ୍ପ ଭାବରେ ଆରମ୍ଭ କରାଯାଇଥିଲା। ସେଥିପାଇଁ ଏହି ଅଭିଯାନରେ ବୈଜ୍ଞାନିକ ସ୍ପଷ୍ଟତା ସହିତ ଆଧ୍ୟାତ୍ମିକ ଶକ୍ତି, ସନ୍ଥମହାତ୍ମାମାନଙ୍କର ଆଶୀର୍ବାଦ ଏବଂ ଆମର ମହାନ ସାଂସ୍କୃତିକ ଐତିହ୍ୟର ପ୍ରେରଣା ମଧ୍ୟ ନିହିତ ରହିଛି। ଏଥିରେ ସେହି ସାଂସ୍କୃତିକ ସମର୍ପଣର ଭାବନା ମଧ୍ୟ ଜଡିତ ରହିଛି, ଯାହା ଶତାବ୍ଦୀ ଶତାବ୍ଦୀ ଧରି ନିଶାକୁ ପ୍ରତ୍ୟାଖ୍ୟାନ କରିଆସିଛି। ଏହି କାରଣରୁ ଦେଶର ୧୨୫ରୁ ଅଧିକ ଆଧ୍ୟାତ୍ମିକ ସଂଗଠନ କୋଟି କୋଟି ଦେଶବାସୀଙ୍କ କଲ୍ୟାଣ ପାଇଁ ଆଜି ଆମ ସହ ଯୋଡ଼ି ହୋଇଛନ୍ତି। ସାମାଜିକ ସଂଗଠନ ଏବଂ ବିଭିନ୍ନ ଏନ୍‌ଜିଓ ମଧ୍ୟ ଏହି ଦିଗରେ ସଙ୍କଳ୍ପବଦ୍ଧ ହୋଇଛନ୍ତି। ସମସ୍ତେ ମିଶି ‘କାଶୀ ଘୋଷଣାନାମା’ ମାଧ୍ୟମରେ ଏକ ରୋଡମ୍ୟାପ୍ ପ୍ରସ୍ତୁତ କରିଛନ୍ତି। ଆଜି ଆମେ ଦେଖୁଛୁ, କାଶୀରୁ ଆରମ୍ଭ ହୋଇଥିବା ସେହି କଲ୍ୟାଣକାରୀ ପଦକ୍ଷେପ ଏବେ ଏକ ଜାତୀୟ ପ୍ରକଳ୍ପରେ ପରିଣତ ହୋଇଛି। ଆଜିଠାରୁ ସମଗ୍ର ଦେଶରେ ‘ନିଶାମୁକ୍ତ ଯୁବ’ ଅଭିଯାନର ଶୁଭାରମ୍ଭ ହେଉଛି।

 ବନ୍ଧୁଗଣ,

କିଛି କାମ ଏପରି ଥାଏ, ଯାହାକୁ କୌଣସି ବ୍ୟକ୍ତି ଏକାକୀ କରିବାକୁ ଚେଷ୍ଟା କଲେ ବେଳେବେଳେ ନିରାଶ ହୋଇଯାଏ, ଥକ୍କାପଣ ଅନୁଭବ କରେ ଏବଂ ଦୀର୍ଘ ଯାତ୍ରା କରିବା ପାଇଁ ମନ ପ୍ରସ୍ତୁତ ହୋଇପାରେ ନାହିଁ। କିନ୍ତୁ ସେହି କାମ ଯେତେବେଳେ ଏକ ସାମୂହିକ ଅଭିଯାନର ରୂପ ନିଏ, କୋଟି କୋଟି ଲୋକ କାନ୍ଧକୁ କାନ୍ଧ ମିଳାଇ ଏକାଠି ଆଗକୁ ବଢ଼ନ୍ତି, ସେତେବେଳେ ଯେଉଁମାନେ ବ୍ୟକ୍ତିଗତ ଭାବେ କିଛି କରିପାରୁ ନଥିଲେ, ସେମାନଙ୍କୁ ମଧ୍ୟ ଏକ ନୂତନ ଶକ୍ତି ମିଳିଥାଏ। ସାମୂହିକ ପ୍ରୟାସର ଏକ ସ୍ୱତନ୍ତ୍ର ଶକ୍ତି ଥାଏ ଏବଂ ଆଜି ସେହି ଶକ୍ତିକୁ ନେଇ ଏହି ଅଭିଯାନ ପ୍ରତ୍ୟେକ ଯୁବ ହୃଦୟକୁ ସ୍ପର୍ଶ କରିବାକୁ ଯାଉଛି। କିଛି ସମୟ ପୂର୍ବରୁ ଦେଶର ଲକ୍ଷ ଲକ୍ଷ ଯୁବକ ଓ ଯୁବତୀ ନିଶାମୁକ୍ତିର ଶପଥ ନେଇଛନ୍ତି। ଆପଣମାନେ ନିଜ ଜୀବନକୁ ନିଶାଠାରୁ ଦୂରେଇ ରଖିବାର ସଙ୍କଳ୍ପ ନେଇଛନ୍ତି। ଆପଣମାନେ ନିଜ ବିଦ୍ୟାଳୟ, ନିଜ ମହାବିଦ୍ୟାଳୟ ଏବଂ ନିଜ ସମାଜରେ ନିଶାମୁକ୍ତିର ବାର୍ତ୍ତା ପହଞ୍ଚାଇବା ପାଇଁ ମଧ୍ୟ ସଙ୍କଳ୍ପବଦ୍ଧ ହୋଇଛନ୍ତି।

 ବନ୍ଧୁଗଣ,

ଆଜି ନିଆଯାଇଥିବା ଏହି ସଙ୍କଳ୍ପ ଆଗାମୀ ୧୦୦ ସପ୍ତାହ ପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ ଏଭଳି ନିରନ୍ତର ଆଗକୁ ବଢ଼ିଚାଲିବ। ପ୍ରତ୍ୟେକ ରବିବାର କଳା, ସଂସ୍କୃତି, କ୍ରୀଡ଼ା, ଧ୍ୟାନ, ଆଧ୍ୟାତ୍ମିକତା ଏବଂ ସମାଜ ସେବା ସହ ଜଡ଼ିତ ବିଭିନ୍ନ କାର୍ଯ୍ୟକ୍ରମ ଆୟୋଜିତ ହେବ। ନିଶାମୁକ୍ତ ଜୀବନର ବାର୍ତ୍ତା ନୂତନ ଲୋକଙ୍କ ପାଖରେ ପହଞ୍ଚିବ। ଆଗାମୀ ୧୦୦ଟି ରବିବାର ନିଶାମୁକ୍ତ ଭାରତ ଦିଗରେ ୧୦୦ଟି ସୁଦୃଢ଼ ପଦକ୍ଷେପ ପ୍ରମାଣିତ ହେବ।

ବନ୍ଧୁଗଣ,

ଆଜି ହଜାର ହଜାର ବିଦ୍ୟାଳୟ, ମହାବିଦ୍ୟାଳୟ ଏବଂ ବିଶ୍ୱବିଦ୍ୟାଳୟର ଲକ୍ଷ ଲକ୍ଷ ଛାତ୍ରଛାତ୍ରୀ ଏହି କାର୍ଯ୍ୟକ୍ରମ ସହ ଅନଲାଇନ୍ ମାଧ୍ୟମରେ ଯୋଡ଼ି ହୋଇଛନ୍ତି। ‘ମାଇ ଭାରତ’ର ସ୍ୱେଚ୍ଛାସେବକମାନେ ମଧ୍ୟ ଲକ୍ଷାଧିକ ସଂଖ୍ୟାରେ ଆଜି ଏହି କାର୍ଯ୍ୟକ୍ରମରେ ସାମିଲ ହୋଇଛନ୍ତି। ମୋର ଏନ୍‌ଏସ୍‌ଏସ୍‌’ର ଯୁବ ବନ୍ଧୁମାନେ ମଧ୍ୟ ଆଜି ଆମ ସହ ଉପସ୍ଥିତ ଅଛନ୍ତି। ଦେଶର ବିଭିନ୍ନ ଅଞ୍ଚଳରୁ, ବିଭିନ୍ନ ଅନୁଷ୍ଠାନରୁ ଏବଂ ବିଭିନ୍ନ ପୃଷ୍ଠଭୂମିରୁ ଏକ କୋଟିରୁ ଅଧିକ ଯୁବପିଢ଼ି ଆଜି ଏକାଠି ହୋଇଛନ୍ତି। ମୋର ଆପଣମାନଙ୍କ ପ୍ରତି ଅନୁରୋଧ, ଆପଣମାନେ ସମସ୍ତେ ଏହି ବିଶାଳ ଆନ୍ଦୋଳନର ନେତୃତ୍ୱ ନିଅନ୍ତୁ। ଆପଣମାନେ ମୋର ଏହି ବିଶ୍ୱାସକୁ ଆହୁରି ଦୃଢ଼ କରିଛନ୍ତି ଯେ, ଭାରତର ଯୁବପିଢ଼ି କେତେ ସଚେତନ, କେତେ ସମବେଦନାପୂର୍ଣ୍ଣ ଏବଂ ନିଜର କର୍ତ୍ତବ୍ୟ ପ୍ରତି କେତେ ଗମ୍ଭୀର। ଏହି ଅଭିଯାନର ସଫଳତା ପାଇଁ ମୁଁ ଆପଣମାନଙ୍କୁ ସମସ୍ତଙ୍କୁ ଅନେକ ଅନେକ ଶୁଭକାମନା ଜଣାଉଛି।

 ମୋର ଯୁବ ବନ୍ଧୁମାନେ,

ଆପଣମାନେ ଭାରତର ଅମୃତ ପିଢ଼ି (ଅମୃତ ଭଳି ଯୁଗର ପିଢ଼ି)। ଆସନ୍ତା ୨୦-୨୫ ବର୍ଷ ମଧ୍ୟରେ ଆପଣମାନେ ନିଜ ଜୀବନକୁ ଦିଗ୍‌ଦର୍ଶନ ଦେବେ ଏବଂ ଆପଣମାନେ ହିଁ ୨୦୪୭ ମସିହା ସୁଦ୍ଧା ଦେଶକୁ ବିକଶିତ ଭାରତର ଲକ୍ଷ୍ୟରେ ପହଞ୍ଚାଇବେ। ସେହି ବିକଶିତ ଭାରତର ଶିଖରରେ ଆପଣମାନେ ହିଁ ରହିବେ ଏବଂ ତାହାର ସମସ୍ତ ସଫଳତା ଓ ଗୌରବର ଫଳ ଉପଭୋଗ କରିବାର ସୁଯୋଗ ମଧ୍ୟ ଆପଣମାନଙ୍କୁ ହିଁ ମିଳିବ। ଦେଶକୁ ଆପଣମାନଙ୍କର ଶକ୍ତି, ଆପଣମାନଙ୍କର କଳ୍ପନାଶକ୍ତି ଏବଂ ଆପଣମାନଙ୍କର ପ୍ରତିଭାର ଆବଶ୍ୟକତା ରହିଛି। ସେଥିପାଇଁ ଦେଶର ସ୍ୱାର୍ଥରେ ଏବଂ ନିଜ ଜୀବନର ଉଜ୍ଜ୍ୱଳ ଭବିଷ୍ୟତ ପାଇଁ, ନିଜକୁ ନିଶାମୁକ୍ତ ରଖିବା ଅତ୍ୟନ୍ତ ଜରୁରୀ। ନିଶା ମଣିଷର ଲକ୍ଷ୍ୟରୁ ଧ୍ୟାନକୁ ବିଚ୍ୟୁତ କରିଦିଏ ଏବଂ ଧୀରେ ଧୀରେ ଜଣେ ଯୁବକଙ୍କୁ ତାଙ୍କ ନିଜ ସ୍ୱପ୍ନଠାରୁ ଦୂରକୁ ନେଇଯାଏ। କିଛି ସମୟ ପୂର୍ବରୁ ଯେଉଁ ଯୁବ ବନ୍ଧୁମାନେ ନାଟ୍ୟ ପରିବେଷଣ କରିଥିଲେ, ସେମାନେ ଅତ୍ୟନ୍ତ କମ୍ ସମୟ ମଧ୍ୟରେ ଖୁବ ସୁନ୍ଦର ଭାବରେ ସମସ୍ୟାକୁ ଉପସ୍ଥାପନ କରିଥିଲେ। ସେମାନେ ଏହି ସମସ୍ୟାରୁ ସୃଷ୍ଟି ହେଉଥିବା ସଙ୍କଟକୁ ମଧ୍ୟ ଦେଖାଇଥିଲେ ଏବଂ ଏଥିରୁ ମୁକ୍ତି ପାଇବା ପାଇଁ ସାମୂହିକ ପ୍ରୟାସର ପଥ ମଧ୍ୟ ପ୍ରଦର୍ଶନ କରିଥିଲେ। ନାଟ୍ୟ ପରିବେଷଣଟି ସଂକ୍ଷିପ୍ତ ଥିଲା, କିନ୍ତୁ ସେମାନେ ଯେପରି କହିଥିଲେ- “ଆସନ୍ତୁ, ଆମେ ନାଟକ ଦେଖିବା!” ଏହା କେବଳ ଏକ ନାଟକ ନଥିଲା; ଏହା ଆମ ସମସ୍ତଙ୍କ ପାଇଁ ଏକ ଅତ୍ୟନ୍ତ ମହତ୍ତ୍ୱପୂର୍ଣ୍ଣ ବାର୍ତ୍ତା ଥିଲା। ଏହା ଆମକୁ ସଚେତନ କରୁଥିଲା, ଆମକୁ ଜାଗ୍ରତ କରୁଥିଲା ଏବଂ ଏହି ସମସ୍ୟା ବିରୋଧରେ ସଂଘର୍ଷ କରିବା ପାଇଁ ପ୍ରେରଣା ଯୋଗାଉଥିଲା।

 ବନ୍ଧୁଗଣ,

ଆଜିକାଲି ଆମେ ଦେଖୁଛୁ, ଆଜିର ଯୁବପିଢ଼ି ଷ୍ଟାର୍ଟଅପ୍ ଜଗତରେ ନିଜର ଛାପ ଛାଡ଼ୁଛନ୍ତି, କୃତ୍ରିମ ବୁଦ୍ଧିମତ୍ତା (ଏଆଇ) କ୍ଷେତ୍ରରେ ନେତୃତ୍ୱ ନେଉଛନ୍ତି, କ୍ରୀଡ଼ା କ୍ଷେତ୍ରରେ ତ୍ରିରଙ୍ଗାକୁ ଗର୍ବର ସହ ଉଡ଼ାଉଛନ୍ତି ଏବଂ ମହାକାଶରୁ ଆରମ୍ଭ କରି ବିଜ୍ଞାନ ପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ ନୂଆ ନୂଆ କୀର୍ତ୍ତିମାନ ସ୍ଥାପନ କରୁଛନ୍ତି। କିନ୍ତୁ ବନ୍ଧୁଗଣ, ଯେତେବେଳେ କୌଣସି ଯୁବକ ମାଦକ ଦ୍ରବ୍ୟର ଶିକାର ହୋଇଥାଏ, ସେତେବେଳେ କେବଳ ଜଣେ ଯୁବକ ପରାଜିତ ହୁଏ ନାହିଁ; ଏକ ସ୍ୱପ୍ନ ପରାଜିତ ହୁଏ। ସେହି ସ୍ୱପ୍ନର ଅକାଳ ମୃତ୍ୟୁ ଘଟେ। ଏକ ପରିବାର ଭାଙ୍ଗିପଡ଼େ। ସମଗ୍ର ପରିବାର ଛିନ୍ନଭିନ୍ନ ହୋଇଯାଏ ଏବଂ ସମାଜରେ ମଧ୍ୟ ଅବହେଳା ଓ ଘୃଣାର ଶିକାର ହୁଏ। ମାଦକ ଦ୍ରବ୍ୟ କେବଳ ଶରୀରକୁ କ୍ଷତି ପହଞ୍ଚାଏ ନାହିଁ; ଏହା ଜଣେ ମାଆଙ୍କ ମୁହଁରୁ ହସ ଛଡ଼ାଇ ନେଇଥାଏ। ଏହା ଜଣେ ବାପାଙ୍କର ସ୍ୱପ୍ନକୁ ଚୂର୍ଣ୍ଣବିଚୂର୍ଣ୍ଣ କରିଦିଏ। ଏହା ଜଣେ ଭଉଣୀଙ୍କ ରାକ୍ଷୀର ଆଶାକୁ ଦୁର୍ବଳ କରିଦିଏ। ଏହା ଜଣେ ସାନ ଭାଇଙ୍କ ଆଦର୍ଶକୁ ଛଡ଼ାଇ ନେଇଥାଏ। ଘରର ବୟୋଜ୍ୟେଷ୍ଠମାନେ ପ୍ରତିଦିନ ଏହି ଯନ୍ତ୍ରଣାକୁ ଅନୁଭବ କରନ୍ତି ଯେ, ସେମାନଙ୍କର ନିଜ ସନ୍ତାନ ଧୀରେ ଧୀରେ ନିଜକୁ ହରାଇ ଚାଲିଛି, ନିଜକୁ ଧ୍ୱଂସ କରୁଛି, ତିଳ ତିଳ କରି କ୍ଷୟ ହେଉଛି ଏବଂ ସେମାନଙ୍କ ଆଖି ଆଗରେ ହିଁ ନଷ୍ଟ ହୋଇଯାଉଛି। ଯେତେବେଳେ ପରିବାର ଓ ସମାଜରେ ଏପରି ଘଟଣା ଘଟେ, ସେତେବେଳେ କେଉଁଠି ନା କେଉଁଠି ରାଷ୍ଟ୍ରର ଶକ୍ତି ମଧ୍ୟ ଦୁର୍ବଳ ହୋଇପଡ଼େ। ଏହି କାରଣରୁ ଶତ୍ରୁ ଦେଶମାନେ ମଧ୍ୟ ଷଡଯନ୍ତ୍ର କରି ଆମ ଦେଶର ଯୁବପିଢ଼ିଙ୍କୁ ନିଶାର କବଳକୁ ଟାଣି ନେବା ପାଇଁ କୌଣସି ଉଦ୍ୟମ ବାକି ରଖନ୍ତି ନାହିଁ। ଡ୍ରଗ୍ସ ଯୋଗାଣ ଦ୍ୱାରା ଅର୍ଥ ଉପାର୍ଜନ କରିବା ଏବଂ ଭାରତ ଭଳି ଏକ ଦେଶକୁ ଧ୍ୱଂସ କରିବା ସେମାନଙ୍କ ଆତଙ୍କବାଦୀ ଷଡଯନ୍ତ୍ରର ଏକ ଅଂଶ। ସେଥିପାଇଁ ଆମକୁ ପ୍ରତ୍ୟେକ ଯୁବକଙ୍କୁ ନିଶାର କବଳରେ ପଡ଼ିବାରୁ ସୁରକ୍ଷିତ ରଖିବାକୁ ହେବ।

 ବନ୍ଧୁଗଣ,

ନିଶାମୁକ୍ତ ରହି ଆପଣମାନଙ୍କୁ ନିଜର ସାମର୍ଥ୍ୟର ସୁରକ୍ଷା କରିବାକୁ ହେବ। ଆପଣମାନେ ସବୁବେଳେ ମନେ ରଖିବେ ଯେ, ମାଦକ ଦ୍ରବ୍ୟ କିଛି ସମୟ ପାଇଁ ହୁଏତ ନିଶାର ‘ଉଚ୍ଚ’ ଉନ୍ମାଦ ଅନୁଭୂତି ଦେଇଥାଏ, କିନ୍ତୁ ଏହା ଆପଣଙ୍କ କ୍ୟାରିୟର ଏବଂ ପାରିବାରିକ ଜୀବନକୁ ‘ନିଚ’ ସ୍ତରକୁ ଟାଣି ନେଇଯାଏ। ତେଣୁ କୌଣସି ପରିସ୍ଥିତିରେ ମଧ୍ୟ ଆମେ ନିଶାକୁ ସାମାଜିକ ସ୍ୱୀକୃତି ଦେବା ଉଚିତ୍ ନୁହେଁ।

ବନ୍ଧୁଗଣ,

ଆମ ସମାଜରେ ସବୁବେଳେ ନିଶାକୁ ଏକ ସାମାଜିକ କୁପ୍ରଥା ଭାବେ ଦେଖାଯାଇଛି। ଆମ ସନ୍ଥ ଓ ଗୁରୁମାନେ ସଦାସର୍ବଦା ଏହାଠାରୁ ଦୂରେଇ ରହିବା ପାଇଁ ଆମକୁ ସତର୍କ କରିଆସିଛନ୍ତି। ଶ୍ରୀ ଗୁରୁ ଗ୍ରନ୍ଥ ସାହିବରେ ମଧ୍ୟ କୁହାଯାଇଛି-

“ଜିତୁ ପୀତୈ ମତି ଦୂରି ହୋଇ, ବରଲୁ ପବୈ ବିଚି ଆଇ।

ଆପଣା ପରାଇଆ ନ ପଛାଣଇ, ଖସମହୁ ଧକେ ଖାଇ॥”

 ଅର୍ଥାତ୍, ଯେଉଁ ପଦାର୍ଥର ସେବନ ଦ୍ୱାରା ମଣିଷର ବୁଦ୍ଧି ଓ ବିବେକ ନଷ୍ଟ ହୋଇଯାଏ, ସେ ନିଜ-ପରର ଭେଦଭାବ ଭୁଲିଯାଏ, ସେହିପରି ନିଶା ତାକୁ ଅଧୋଗତି ଓ ପତନର ପଥକୁ ନେଇଯାଏ।

 ବନ୍ଧୁଗଣ,

ଆମ ସଂସ୍କୃତିରେ ନିଶାରୁ ବଞ୍ଚିବା ପାଇଁ ସଚେତନବାଣୀ ଦିଆଯାଇଛି ଏବଂ ଯଦି କେହି ନିଶାର କବଳରେ ପଡ଼ିଯାଆନ୍ତି, ତାହାରୁ ମୁକ୍ତି ପାଇବାର ଉପାୟ ମଧ୍ୟ ବତାଇ ଦିଆଯାଇଛି। ସମାଜର ସହଯୋଗ, ଯୋଗ ଓ ଧ୍ୟାନର ଶକ୍ତି ନିଶା ବିରୋଧରେ ଆମର ଅନ୍ତରାତ୍ମାକୁ ଦୃଢ଼ କରିଥାଏ। ଆଜି ନିଶା ଛାଡ଼ିବା ପାଇଁ ପୁନର୍ବାସ କେନ୍ଦ୍ର ପରି ସୁବିଧା ମଧ୍ୟ ଉପଲବ୍ଧ ଅଛି। ତେଣୁ ଯଦି କୌଣସି ଯୁବକ ଅଜାଣତରେ ନିଶାର ଶିକାର ହୋଇଯାଏ, ତାହାର ଅର୍ଥ ଏହା ନୁହେଁ ଯେ ତାଙ୍କ ପାଇଁ ସମସ୍ତ ରାସ୍ତା ବନ୍ଦ ହୋଇଗଲା। ଆମେ ସର୍ବଦା ଏହି କଥା ମନେ ରଖିବା ଉଚିତ ଯେ, ଘରର କୌଣସି ପିଲା ଯଦି ନିଶାର ଶିକାର ହୋଇଥାଏ, ତେବେ ସାମାଜିକ ପ୍ରତିଷ୍ଠା କ୍ଷୁର୍ଣ୍ଣ ହେବାର ଭୟରେ ଏହାକୁ ଲୁଚାଇବା ଉଚିତ ନୁହେଁ। ଯେଉଁଠି ସହାୟତାର ଆବଶ୍ୟକତା ଅଛି, ସେଠାରେ ସହଯୋଗ ମାଗନ୍ତୁ, ତାଙ୍କ ସହ ଖୋଲାଖୋଲି କଥା ହୁଅନ୍ତୁ ଏବଂ ବିଶେଷଜ୍ଞମାନଙ୍କ ପରାମର୍ଶ ନିଅନ୍ତୁ। ଚିକିତ୍ସା ସହାୟତା ନେଇ ନିଜ ସନ୍ତାନଙ୍କୁ ନିଶାମୁକ୍ତ କରିବା ପାଇଁ ପ୍ରୟାସ କରନ୍ତୁ। ଆମ ପରିବାରରେ ପିଲାମାନଙ୍କ ସହ ଖୋଲାଖୋଲି ଆଲୋଚନାର ଏକ ସଂସ୍କୃତି ଗଢ଼ି ତୋଳିବା ମଧ୍ୟ ଆବଶ୍ୟକ, ଯାହାଦ୍ୱାରା ସେମାନେ ଏପରି ବିପଦର ସମ୍ମୁଖୀନ ହେବା ପୂର୍ବରୁ ଆମେ ସେମାନଙ୍କର ମାର୍ଗଦର୍ଶନ କରିପାରିବା। ଅଭିଭାବକମାନେ ଟିକେ ସତର୍କ ରହିଲେ ଏହାର ସଙ୍କେତ ସହଜରେ ପାଇପାରିବେ। ଯଦି ପିଲାର ବ୍ୟବହାରରେ ପରିବର୍ତ୍ତନ ଆସୁଛି, ସେ ସବୁବେଳେ ଅନ୍ୟମନସ୍କ ରହୁଛି, ମୁହଁ ଲୁଚାଉଛି, ନିଜକୁ କୋଠରୀରେ ବନ୍ଦ ରଖୁଛି, ବିଳମ୍ବିତ ରାତିରେ ଘରକୁ ଫେରୁଛି କିମ୍ବା ବାରମ୍ବାର ଅସ୍ୱାଭାବିକ ଭାବେ ଟଙ୍କା ମାଗୁଛି, ତେବେ ଏସବୁ ସଙ୍କେତରୁ ବୁଝିହେବ ଯେ, କିଛି ନା କିଛି ଅସୁବିଧା ହେଉଛି। ଏପରି ସମୟରେ ସଚେତନ ହୋଇ ଠିକ୍ ସମୟରେ ପଦକ୍ଷେପ ନେବା ଅତ୍ୟନ୍ତ ଜରୁରୀ।

ବନ୍ଧୁଗଣ,

ମୁଁ ଆମ କଲେଜ ଓ ବିଶ୍ୱବିଦ୍ୟାଳୟର ପ୍ରଫେସର ବନ୍ଧୁମାନଙ୍କୁ ମଧ୍ୟ ଏକ ନିବେଦନ କରିବାକୁ ଚାହୁଚି। ଆପଣମାନେ ପାଠ୍ୟକ୍ରମର ପାଠପଢା ସହିତ ଛାତ୍ରଛାତ୍ରୀମାନଙ୍କ ସହ ମାଦକ ଦ୍ରବ୍ୟର କୁପ୍ରଭାବ ବିଷୟରେ ମଧ୍ୟ ଆଲୋଚନା କରନ୍ତୁ। ନିଶା ବିରୋଧରେ ନିଜ ଶିକ୍ଷାନୁଷ୍ଠାନ ପରିସରରେ ଏକ ସଚେତନତା ଆନ୍ଦୋଳନ ଆରମ୍ଭ କରନ୍ତୁ। ଆପଣମାନଙ୍କର ପ୍ରୟାସ ବହୁତ ବଡ଼ ବଡ଼ ପରିଣାମ ଆଣିପାରିବ। ଏଥିସହିତ ବନ୍ଧୁଗଣ, ଆମକୁ ଆଉ ଏକ କଥା ମଧ୍ୟ ମନେ ରଖିବାକୁ ହେବ। ଯେଉଁ ଯୁବକ-ଯୁବତୀମାନେ ନିଶା ବିରୋଧରେ ସଂଘର୍ଷ କରି ସେଥିରୁ ମୁକ୍ତି ପାଇଛନ୍ତି, ସେମାନେ ଦୁର୍ବଳ ନୁହନ୍ତି; ବରଂ ଯିଏ ନିଶାକୁ ପରାସ୍ତ କରି ବାହାରି ଆସିଛି, ସେ ହିଁ ପ୍ରକୃତ ଯୋଦ୍ଧା। ସମାଜ ସେମାନଙ୍କୁ ସମ୍ମାନ ଦେବା ଉଚିତ, ଆପଣାର କରିବା ଉଚିତ ଏବଂ ସେମାନଙ୍କୁ ଜୀବନରେ ଦ୍ୱିତୀୟ ସୁଯୋଗ ଦେବା ଉଚିତ। କାରଣ ମାଦକ ଦ୍ରବ୍ୟ ସହ ଜଡ଼ିତ କାହାରି ଅତୀତ ତାଙ୍କର ପରିଚୟ ହୋଇପାରିବ ନାହିଁ; ତାଙ୍କର ସାହସ ହିଁ ତାଙ୍କର ପ୍ରକୃତ ପରିଚୟ।

 ବନ୍ଧୁଗଣ,

ନିଶା ବିରୋଧୀ ଅଭିଯାନରେ ଆଜି ସରକାର ମଧ୍ୟ ଦୃଢ଼ତାର ସହ ଯୁବପିଢ଼ିଙ୍କ ସହ ଛିଡ଼ା ହୋଇଛନ୍ତି। ଦେଶରେ ନିଶା ବ୍ୟବସାୟୀ ଓ ଚୋରାଚାଲାଣକାରୀଙ୍କ ବିରୋଧରେ କଠୋର କାର୍ଯ୍ୟାନୁଷ୍ଠାନ ନିଆଯାଉଛି। ପୂର୍ବ ତୁଳନାରେ ଗିରଫଦାରୀଙ୍କ ସଂଖ୍ୟା ବହୁଗୁଣିତ ହୋଇଛି। ହଜାର ହଜାର କୋଟି ଟଙ୍କା ମୂଲ୍ୟର ମାଦକ ଦ୍ରବ୍ୟ ମଧ୍ୟ ଜବତ କରାଯାଇଛି। ଏହା ପ୍ରମାଣ କରୁଛି ଯେ, ମାଦକ ଦ୍ରବ୍ୟ ବିରୋଧରେ ଆମ ସରକାର କେତେ କଠୋର ଆଭିମୁଖ୍ୟ ଗ୍ରହଣ କରିଛନ୍ତି। ମୋର ବିଶ୍ୱାସ ଯେ, କେନ୍ଦ୍ର ସରକାର, ରାଜ୍ୟ ସରକାର ଏବଂ ସମସ୍ତ ସମ୍ପୃକ୍ତ ପକ୍ଷ ଏହାକୁ ମିଶନ ମୋଡ୍‌ରେ ଆଗେଇ ନେବେ। ମୋର ଏହା ମଧ୍ୟ ବିଶ୍ୱାସ ଯେ, ଆମ ଦେଶର ଯୁବପିଢ଼ି ନିଶାମୁକ୍ତ ରହି ନିଜର ଯୁବଶକ୍ତିକୁ କେବଳ ସୁରକ୍ଷିତ ରଖିବେ ନାହିଁ, ବରଂ ବିକଶିତ ଭାରତର ସଂକଳ୍ପକୁ ସାକାର କରିବା ଦିଗରେ ମଧ୍ୟ ଆଗକୁ ବଢ଼ାଇବେ। ଆଜି ମୋ ସମ୍ମୁଖରେ ଅନେକ ମହାନ ସନ୍ଥ-ମହାତ୍ମାଙ୍କୁ ଦେଖି ମୁଁ ଦୂରରୁ ସେମାନଙ୍କୁ ଆନ୍ତରିକ ପ୍ରଣାମ ଜଣାଉଛି। ଦେଶର କୋଣ ଅନୁକୋଣରେ କାର୍ଯ୍ୟ କରୁଥିବା ସମସ୍ତ ସାମାଜିକ ସଂସ୍ଥା, ଆଧ୍ୟାତ୍ମିକ ସଂସ୍ଥା ଏବଂ ଆଧ୍ୟାତ୍ମିକ ଗୁରୁଜନଙ୍କୁ ମୁଁ ଏକ ବିନମ୍ର ଅନୁରୋଧ କରୁଛି। ଆପଣମାନଙ୍କର ଦେଶବ୍ୟାପୀ ସଂଗଠନ ରହିଛି, ଆପଣମାନଙ୍କ ସହ ଯୁବ ସ୍ୱେଚ୍ଛାସେବକ ଓ ଭକ୍ତମାନେ ମଧ୍ୟ ଯୋଡ଼ି ହୋଇଛନ୍ତି। ଆସନ୍ତା ୧୦୦ ଦିନ ମଧ୍ୟରେ ପ୍ରତ୍ୟେକ ସଂଗଠନ ଗୋଟିଏ ସପ୍ତାହର ଦାୟିତ୍ୱ ନେଇପାରିବ। ସେହି ସପ୍ତାହରେ ସମଗ୍ର ଦେଶରେ ସେହି ସଂଗଠନ ନେତୃତ୍ୱ ନେଉ, ଅନ୍ୟ ସମସ୍ତ ସଂଗଠନ ତାହା ସହ ଯୋଡ଼ି ହୁଅନ୍ତୁ ଏବଂ ରବିବାର ଦିନ ଏକ ବିଶାଳ କାର୍ଯ୍ୟକ୍ରମର ଆୟୋଜନ କରନ୍ତୁ। ପରବର୍ତ୍ତୀ ସପ୍ତାହରେ ଅନ୍ୟ ଏକ ସଂଗଠନ ଏହି ଦାୟିତ୍ୱ ନେଉ, ସପ୍ତାହବ୍ୟାପୀ ବିଭିନ୍ନ କାର୍ଯ୍ୟକ୍ରମ କରାଯାଉ ଏବଂ ରବିବାର ଦିନ ଏକ ବୃହତ୍ କାର୍ଯ୍ୟକ୍ରମ ହେଉ। ଯଦି ଆମ ଦେଶର ଏଭଳି ୧୦୦ଟି ଆଧ୍ୟାତ୍ମିକ, ସାମାଜିକ ଓ ଯୁବ ସଂଗଠନ ପ୍ରତ୍ୟେକ ଗୋଟିଏ ସପ୍ତାହର ଦାୟିତ୍ୱ ନିଅନ୍ତି ଏବଂ ଅନ୍ୟ ସମସ୍ତ ଶକ୍ତି ସେମାନଙ୍କ ସହ ମିଶି ରବିବାର ଦିନ ସାମୂହିକ କାର୍ଯ୍ୟକ୍ରମ କରନ୍ତି, ତେବେ ଆପଣମାନେ କଳ୍ପନା କରିପାରିବେ ଯେ, ଦେଶରେ କେତେ ବିରାଟ ଜନଆନ୍ଦୋଳନ ସୃଷ୍ଟି ହୋଇପାରିବ। ଆପଣମାନେ ସମୟ ବାହାର କରି ଏହି ପବିତ୍ର କାର୍ଯ୍ୟରେ ଆମ ସମସ୍ତଙ୍କୁ ଆଶୀର୍ବାଦ କରିଛନ୍ତି। ଏଥିପାଇଁ ମୁଁ ସମସ୍ତ ସନ୍ଥ, ଆଚାର୍ଯ୍ୟ ଏବଂ ବିଭିନ୍ନ ସଂଗଠନର ନେତୃବୃନ୍ଦଙ୍କୁ ସହୃଦୟତାର ସହିତ କୃତଜ୍ଞତା ଜଣାଉଛି। ଏହି ଅଭିଯାନରେ ସାମିଲ ହୋଇଥିବା ଏକ କୋଟିରୁ ଅଧିକ ଯୁବକ-ଯୁବତୀଙ୍କୁ ମୁଁ ବିଶେଷ ଭାବରେ ଅଭିନନ୍ଦନ ଜଣାଉଛି। ଆପଣମାନେ ଏକ ବହୁତ ବଡ଼ କାମ କରିଛନ୍ତି। ମୁଁ ‘ମାଇ ଭାରତ’ର ସମସ୍ତ ସ୍ୱେଚ୍ଛାସେବୀଙ୍କୁ ମଧ୍ୟ ଅଭିନନ୍ଦନ ଜଣାଉଛି। ସେମାନେ ଯେଉଁ କାମ କରିବାକୁ ସଂକଳ୍ପ କରନ୍ତି, ତାହାକୁ ଆଜିକାଲି ସଫଳତାର ସହ କରି ଦେଖାଉଛନ୍ତି। କିଛିଦିନ ପୂର୍ବରୁ ମୋତେ ‘ମାଇ ଭାରତ’ର ସ୍ୱେଚ୍ଛାସେବୀମାନଙ୍କ ସହ ସାକ୍ଷାତ କରିବାର ସୁଯୋଗ ମିଳିଥିଲା। ସେମାନେ ଭାରତର ସୀମାନ୍ତ ଗ୍ରାମଗୁଡ଼ିକୁ ଯାଇ ସେଠାରେ ଏକ ସପ୍ତାହ ରହିଥିଲେ। ଯେଉଁ ଗ୍ରାମକୁ କେବେ ଦେଶର ସୀମାନ୍ତ ଗ୍ରାମ ବୋଲି କୁହାଯାଉଥିଲା, ଆଜି ଆମେ ତାହାକୁ ଦେଶର ପ୍ରଥମ ଗ୍ରାମ ବୋଲି କହୁଛୁ। ସେଠାରୁ ଫେରିବା ପରେ ସେମାନଙ୍କ ଅନୁଭୂତି ଅତ୍ୟନ୍ତ ପ୍ରେରଣାଦାୟକ ଥିଲା। ଆଜି ‘ମାଇ ଭାରତ’ର ସ୍ୱେଚ୍ଛାସେବୀମାନେ ଏତେ ବଡ଼ କାର୍ଯ୍ୟକ୍ରମର ଆୟୋଜନ କରିପାରୁଛନ୍ତି, ଏହା ସେମାନଙ୍କର ରାଷ୍ଟ୍ର ପ୍ରତି ସଚେତନ, ସମର୍ପିତ ଭାବନାର ଏକ ଉଜ୍ଜ୍ୱଳ ପ୍ରତୀକ। ମୁଁ ସେମାନଙ୍କୁ ହାର୍ଦ୍ଦିକ ଅଭିନନ୍ଦନ ଓ ଶୁଭେଚ୍ଛା ଜଣାଉଛି। ମୋର ପୂର୍ଣ୍ଣ ବିଶ୍ୱାସ ଯେ, ଆପଣମାନଙ୍କର ଏହି ସାମୂହିକ ପ୍ରୟାସ ଦ୍ୱାରା ଏହି ଆନ୍ଦୋଳନ ଘରେ ଘରେ ପହଞ୍ଚିବ, ପ୍ରତ୍ୟେକ ଯୁବପିଢ଼ିର ହୃଦୟରେ ସ୍ଥାନ ପାଇବ ଏବଂ ମାଦକ ଦ୍ରବ୍ୟ ବ୍ୟବସାୟୀଙ୍କ ପାଇଁ ଏକ ବଡ଼ ସଂଶୟର କାରଣ ପାଲଟିବ। ଆସନ୍ତୁ, ଆମେ ସମସ୍ତେ ମିଳିମିଶି ଏହି ଅଭିଯାନକୁ ଆଗକୁ ବଢ଼ାଇବା। ଆପଣ ସମସ୍ତଙ୍କୁ ମୋର ଅନେକ ଅନେକ ଶୁଭକାମନା।

 ଆପଣଙ୍କୁ ବହୁତ ବହୁତ ଧନ୍ୟବାଦ!