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PM Modi lays foundation Stone of NHAI Projects in Sonepat, Haryana
If Infrastructure improves, quality of life also enhances: PM Modi
Good infrastructure has the potential to transform nations: PM
These roads won't only carry the vehicles, these roads would lead Haryana towards development: PM
There are so many districts not connected with a national highway. Bharat Mala project will change that: PM
We have made attempts to transform the railways- increase speed, extension, expansion, better stations. Lot of initiatives are happening: PM
We are dedicated to provide 24/7 power supply to the 18,000 villages that still don not have electrification: PM Modi

कभी-कभी लोगों के मन में विचार आता है कि पैसे होते हैं तो रास्‍ते बनते हैं लेकिन हकीकत ये है अगर रास्‍ते बनते हैं तो फिर पैसे अपने-आप बनना शुरू हो जाते हैं। आज के युग में विकास की सबसे पहली प्राथमिक आवश्‍यकता होती है Infrastructure चाहे वो बिजली की बात हो, पानी की हो, सड़क की हो, और जहां-जहां Infrastructure पहुंचता है वहां-वहां विकास की रफ्तार तेज होती है। Quality of life में भी बहुत बड़ा बदलाव, जब इस प्रकार की सुविधाएं तैयार होती हैं तब होता है। लेकिन ज्‍यादातर हमारे देश में सरकारें दुविधा में रहती हैं, उनको लगता है कि किसी मतदाता को कोई लाभ मिलेगा तो, तो चुनाव में लाभ मिलेगा लेकिन अगर सड़क बनती है तो लोगों को लगता है उसमें क्‍या है भई ये तो सरकार का काम है, मेरा क्‍या हुआ। और ये दुविधा कई वर्षों से हमारे देश में चल रही है। और शायद ये दुविधा ही हमारे देश में विकास की सबसे बड़ी रुकावट है। जो समाज में दलित है, पीडि़त है, शोषित है, वंचित है, उनकी चिंता करना, विकास के फल उन तक पहुंचें, विकास की यात्रा में उनकी समान भागीदारी हो, ये तो सुनिश्चित करना राज्‍य की प्राथमिकता होती ही है, होनी भी चाहिए। लेकिन साथ-साथ अगर सर्वांगीण विकास करना है, लंबे अर्से तक लोगों को आत्‍मनिर्भर बनाने की दिशा में आगे बढ़ना है, ये बहुत आवश्‍यक होता है कि Infrastructure को बल दिया जाए।

हरियाणा छोटा प्रदेश है लेकिन करीब-करीब 32 हजार करोड़ रुपये की योजनाएं सिर्फ roads के लिए आएं, ये छोटी बात नहीं है। ये 32 हजार करोड़ रुपये लगते हैं तो इलाके के नौजवानों को रोजगार भी मिलता है, मजदूरी करने वालों को भी काम मिलता है, लेकिन जब व्‍यवस्‍था खड़ी होती है तो विकास की गति भी बहुत तेज होती है।

आप में से अगर किसी को अध्‍ययन करना है तो कोरिया एक उत्‍तम नमूना है कि कोरिया कहां-से-कहां पहुंचा और वहां की शुरूआत, वहां के शासकों ने इस बात से की कि कोरिया के बीच से गुजरता हुआ एक बहुत बड़ा आधुनिक Highway बनाया जाए। बड़ा विवाद हुआ था उस देश में। विवाद इस बात का हुआ कि देश गरीब है, एक रोड के लिए इतने पैसे लगा रहे हो, स्‍कूल नहीं है, अस्‍पताल नहीं है, गरीबी है, और अब रोड के लिए इतने अरबों-खरबों लगा रहे हो। बड़ा विवाद हुआ था लेकिन उस समय के शासकों ने इन सारे आरोप-प्रत्‍यारोपों के बीच भी पूरे कोरिया के बीच से एक उत्‍तम रास्‍ता बनाने का तय कर लिया और बनाया। और उस एक रास्‍ते ने पूरे कोरिया के जीवन को बदल दिया। आज दुनिया के समृद्ध देशों में कोरिया का नाम आ गया है।

Infrastructure की ये ताकत होती है और इसलिए मार्ग के क्षेत्र में, हमारे नितिन गडकरी जी के नेतृत्‍व में शायद पिछले 60 साल में इतने व्‍यापक रूप से मार्ग निर्माण के काम पर कल्‍पना तक नहीं की गई होगी। एक तरफ भारतमाला योजना है, दूसरी तरफ सेतुभारतम योजना है। अटल बिहारी वाजपेयी जी ने भारत को उत्‍तर से दक्षिण, पूर्व से पश्चिम जोड़ने के लिए एक Golden चतुष्‍क का निर्माण करने का बीड़ा उठाया और उस काम में इतनी तेजी आई कि उनके कार्यकाल में जितना काम पूरा हुआ, उस काम को आज भी हिन्‍दुस्‍तान के विकास में एक अहम भूमिका अदा हो रही है, इस रूप में माना गया से है।

ये जो रास्‍ते बनने वाले हैं, वो रास्‍ते सिर्फ हमारे Vehicles को ले जाने वाले रास्‍ते नहीं हैं। ये मार्ग का निर्माण हरियाणा को गति देने वाला निर्माण है, ये मार्ग का निर्माण हरियाणा को विकास की नई ऊंचाईयों पर तेज गति से पहुंचाने का अभियान है।

सागरमाला योजना के तहत हिन्‍दुस्‍तान के समुद्र तट, उस समुद्र तट के साथ वो Infrastructure जोड़ा जाए ताकि हिन्‍दुस्‍तान का हर कोना सामुद्रिक व्‍यापार के लिए जहां जाना हो, उसको अच्‍छे से अच्‍छा तेज गति से connectivity मिले ताकि देश में व्‍यापार को बढ़ावा मिल सकता है। अगर अच्‍छा Infrastructure है और हिमाचल के apple हैं, उनको समुद्री मार्ग से दुनिया में कहीं पहुंचाना है, तेज गति से अगर पहुंचा दिया तो वो किसान भी सुखी होता है, और जहां पहुंचता है वहां भी अच्‍छा माल पहुंचता है। यानी एक प्रकार से इन सुविधाओं से गांव गरीब किसान भी जो मेहनत करके पैदा करता है, अच्‍छे बाजार में सही समय पर पहुंच करके अपने आर्थिक विकास की यात्रा को गति दे सकते हैं। और इसलिए हमारे बंदरों के साथ, सामुद्रिक बंदरों के साथ, सागरमाला के तहत road connectivity देने का अभियान है।

सेतुभारतम, आपने देखा होगा हमारे देश में दो तरफ सड़क बनी है, बीच में से रेल जा रही है, ऊपर पुलियां नहीं बन रही हैं, रोड खराब हो रहा है। वर्षों तक ये चलता था, कभी रेल permission नहीं दे रही है, कभी रोड वाले काम नहीं करते हैं। नितिन जी ने आ करके बीड़ा उठाया, रेल और रोड के बीच में सामंजस्‍य बन गया, और एक formula बनाएं कि अगर इतने parameter पूरे होते हैं तो permission आपो-आप मिल जाएगी, अब नीचे भले रेल जाती है, ऊपर bridge बनाने का काम चालू करो।

इतनी तेज गति से काम बढ़ रहा है, आपको हैरानी होगी। हमारे देश में कहीं रेल गुजर रही है और गांव विकसित हुआ। गांव को एक छोर इस तरफ है रेलवे के, दूसरा उस तरफ है। पानी की पाईप लाईन डालनी है तो railway department दो-दो, चार-चार साल तक permission नहीं देता। और उसके कारण एक ही गांव, बीच में से रेल जा रही, उधर पानी नहीं पहुंच रहा है। हमने कुछ नियम ऐसे बनाए हैं कि Infrastructure में इस प्रकार की जो कठिनाईयां हैं वो समय-सीमा में निश्चित parameter के तहत तत्‍काल लागू की जाएं और इसके कारण इतने काम जो अटके पड़े थे उनको गति मिली।

मैं इन दिनों हर महीने में एक बार राज्यों के मुख्य सचिवों के साथ बैठता हूं, video conference करता हूं और जितने project अटके पड़े हें, वो क्यों अटके हैं, किसके कारण अटके हैं, उसकी जरा पूछताछ करता हूं। आपको हैरानी होगी, पिछले 5-6 महीनों से मेरा ये अभियान चल रहा है। अब तक करीब चाल लाख करोड़ रुपए के अटके हुए project काम करना शुरू कर दिए हैं। सेतू भारतम के द्वारा इस देश में करीब पौने 400 ऐसे bridge बनाने की जरूरत है जो विकास के लिए bottle neck बने हुए हैं, रुकावट बने हुए हैं। अगर ये 400 सेतु बन जाते हैं तो पूरे देश में एक गति को नया आयाम मिलेगा।

सेतुभारतम के तहत अरबों-खरबों रुपया लगाकर के, एक focus के रूप में कि bridge बनाने के काम को बल देना है, कभी चौड़ा करना है, कहीं नया Parallel bridge बनाना है, कहीं नए bridge बनाने हैं। एक साथ सर्वे करके उसका काम करने का अभियान उठाया है, एक भारतमाला योजना बनाई है। आपको हैरानी होगी 60 साल के बाद इस देश में 123 district ऐसे हैं, यानी करीब-करीब 20 percent, 20 percent district ऐसे हैं, जो आज भी National Highway के साथ connectivity नहीं है और इसलिए भारतमाला project के तहत एक अभियान उठाया है कि जल्द से जल्द हिन्दुस्तान के 123 district जो National Highway से link नहीं हैं, उनको जोड़ने के लिए भारतमाला project चलाया है और आने वाले वर्षों में focus target योजना के साथ इस काम को करने की दिशा में हम आगे बढ़े जा रहे हैं।

दिल्ली के चारों तरफ पूरब और पश्चिम नई सड़क, दिल्ली को तो अनेक समस्याओं से तो मुक्त करेंगे ही करेंगे लेकिन इसके बाद हरियाणा के व्यक्ति को अगर राजस्थान जाना, या हरियाणा के व्यक्ति को उत्तर प्रदेश के किसी छोर पर जाना है, उसकी सारी समस्याओं का समाधान हो जाएगा, तेज गति से वो बाहर से बाहर अपना आगे बढ़ जाएगा और ये road की रचना ऐसी है कि भविष्य में वहां पर urban development तो होना ही होना है। जब road आता है तो विकास अपने आप होता ही होता है, कई कालोनियां बनना शुरू हो जाती है लेकिन ये road की रचना ऐसी है कि साथ में अगर नए शहर विकसित भी हो जाएंगे, नई locality विकसित भी हो जाएगी तो भी दोनों के बीच में कोई contradiction नहीं होगा, तकलीफ नहीं होगी। ऐसा सुरक्षित मार्ग बनाने के पीछे ये इतने अरबों-खरबों रुपए खर्च किए जा रहे हैं।

मैं हरियाणा सरकार को, श्रीमान नितिन जी को और उनके department की पूरी team को हृदय से बहुत-बहुत अभिनंदन करता हूं कि इस काम को वो बहुत तेजी से आगे बढ़ा रहे हैं और भारत को गति देने में एक बहुत बड़ी अहम भूमिका, railway हमने railway में आमूल-चूल परिवर्तन करने कि दिशा में प्रयास शुरू किया है, railway स्टेशनों में बदलाव लाने का प्रयास शुरू किया है, रेल की गति बढ़े, रेल expansion हो, रेल के नए area extension हो, रेल में जहां diesel से चल रहा है, वहां electricity कैसे आए, एक साथ अनेकों प्रकार के initiative लेकर के, भारत के रेल युग को एक आधुनिक रेल युग में परिवर्तन करने का प्रयास बहुत तेज गति से हमने उठाया है। बिजली, 2022 जब भारत आजादी के 75 साल मनाएं, हमारा सपना है कि तब हिंदुस्तान के हर गांव में सातों दिन, 24 घंटे, पूरे सालभर बिजली मिलनी चाहिए। ये काम सरल नहीं है, मैं जानता हूं, बिजली के उत्पादन में कितनी ताकत लगेगी, मैं जानता हूं, बिजली पहुंचाने में कितनी ताकत लेगगी, मैं जानता हूं लेकिन किसी ने तो कठिन काम भी हाथ में लेने पड़ते हैं और हमने बीड़ा उठाया है कि 2022 जब भारत आजादी के 75 साल मनाता होगा, हिंदुस्तान के अंदर जहां-जहां बिजली पहुंचानी होगी, वहां पहुंचेगी और 24 घंटे बिजली उपलब्ध होगी, इस दिशा में हम काम रहे हैं।

युग बदला है, बदले हुए युग में अब highway से ही काम सिर्फ नहीं है। Highways भी चाहिए, information wave भी चाहिए, Digital India का जो हमारा सपना है, उस Digital India के सपने का पूरा करने के लिए 21वीं सदी का जो महत्वपूर्ण Infrastructure है, वो है Highways के साथ-साथ eye ways आज सारी दुनिया आपके mobile phone में है और इसलिए उसके infrastructure को भी बल देना पड़ेगा। आधुनिक भारत की पहली शर्त बन गया है, eye ways होना और इसलिए Digital India के माध्यम से Optical Fiber Network का काम पूरा हिंदुस्तान में तेज गति से चल रहा है। मैं जब इन चीजों का review करता हूं तो मेरे ध्यान में आया, लाखों गांव ऐसे हैं कि जहां पर आज के युग में Digital connectivity नहीं है, वो भी एक कठिन काम है, हमने उसका बीड़ा उठाया है, काम तेजी से चल रहा है। जब मैं बिजली के लिए पूछ रहा था, मैं हैरान था 21वीं सदी के 15 साल बीत चुके हैं, आजादी के 70 साल होने जा रहे हैं लेकिन इस देश में 18 हजार गांव ऐसे हैं, जहां बिजली का खंभा तक नहीं लगा है, एक तार भी नहीं पहुंचा है। हमने बीड़ा उठाया है, मैंने लाल किले से इसकी घोषणा की थी कि एक हजार दिन में 18 हजार गांव जहां बिजली पहुंची नहीं है, वो दुर्गम से दुर्गम इलाके होंगे, पहाड़ की चोटी पर हो या रेगिस्तान में हो, हम वहां पर बिजली पहुंचाएंगे, इसका एक अभियान चलाया है।

भाइयों-बहनों आधुनिक भारत को बनाने के लिए Infrastructure की जितनी आवश्यकता है, उस पर हम तेज गति से काम पर लगे हैं, हरिय़ाणा उसमें बहुत प्रगति कर सकता है, सबसे ज्यादा फायदा हरियाणा ले सकता है और मनोहर जी इस बात को बल देकर के आगे बढ़ा रहे हैं। मैं फिर एक बार हरियाणा को बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं, आप सबका बहुत-बहुत धन्यवाद करता हूं। मेरे साथ बोलिए भारत माता की, भारत माता की।

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सात नव्या संरक्षण कंपन्यांच्या राष्ट्रार्पण समारंभात पंतप्रधानांचे भाषण
October 15, 2021
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“या सात कंपन्यांच्या निर्मितीमुळे डॉ कलाम यांच्या सक्षम भारताच्या स्वप्नाला पाठबळ मिळेल”
“या सात नव्या कंपन्या येत्या काळात भारताच्या सैन्य शक्तीचा मजबूत पाया ठरतील”
“65,000 कोटींपेक्षा जास्त मूल्यांच्या उत्पादनांची मागणी देशाच्या कंपन्यांवर वाढत्या विश्वासाचे द्योतक”
“संरक्षण क्षेत्रात यापूर्वी कधीही न दिसलेली पारदर्शकता, विश्वास आणि तंत्रज्ञान आधारित दृष्टीकोन आज दिसतो आहे.”
“गेल्या पाच वर्षात आपली संरक्षण निर्यात 325 टक्के वाढली आहे”
“स्पर्धात्मक किंमती आपली ताकद आहे तर, गुणवत्ता आणि विश्वासार्हता आपली ओळख बनायला हवी”

नमस्कार!

देशाच्या संरक्षणाशी संबंधित या महत्वपूर्ण कार्यक्रमात आपल्याबरोबर सहभागी झालेले देशाचे संरक्षण मंत्री  राजनाथ सिंह , संरक्षण राज्यमंत्री  अजय भट्ट, संरक्षण मंत्रालयाचे सर्व अधिकारी आणि देशभरातून सहभागी झालेले सर्व सहकारी,

आता दोन दिवसांपूर्वीच नवरात्रीच्या या पवित्र पर्वादरम्यान अष्‍टमीच्या दिवशी मला देशाला सर्वांगीण नियोजनासंबंधी गतिशक्ति या कार्यक्रमाचा प्रारंभ करण्याची संधी मिळाली आणि आज विजयादशमीच्या पवित्र दिनी देशाला मजबूत करण्यासाठी, देशाला अजेय बनवण्यासाठी जे लोक दिवसरात्र झटत आहेत, त्यांच्या सामर्थ्यात आणखी आधुनिकता आणण्यासाठी एका नव्या दिशेने जाण्याची संधी आणि ती देखील  विजयादशमीच्या पवित्र दिवशी मिळणे हा  खरेच शुभ संकेत घेऊन आला आहे. या कार्यक्रमाची सुरुवात भारताची  महान परंपरा कायम ठेवत  शस्त्र पूजनाने करण्यात आली आहे. आपण शक्तीला सृजनाचे माध्यम मानतो. याच भावनेने, आज देश आपले  सामर्थ्य वाढवत आहे, आणि तुम्ही सर्व देशाच्या या संकल्पांचे सारथी देखील आहात. मी तुम्हा सर्वांना आणि संपूर्ण देशाला याप्रसंगी पुन्हा एकदा   विजया दशमीच्या  हार्दिक शुभेच्छा देतो.

मित्रांनो,

आजच माजी  राष्ट्रपती, भारतरत्न, डॉक्टर ए पी जे  अब्दुल कलाम यांची  जयंती देखील आहे.  कलाम साहेबांनी ज्याप्रमाणे आपले आयुष्य सामर्थ्यवान भारताच्या निर्मितीसाठी समर्पित केले, ते आपणा सर्वांसाठी प्रेरणादायी आहे. संरक्षण क्षेत्रात आज ज्या 7 नव्या कंपन्या प्रवेश करत आहेत त्या समर्थ राष्ट्राच्या त्या संकल्पांना आणखी मजबुती प्रदान करतील.

मित्रांनो,

यावर्षी भारताने आपल्या स्वातंत्र्याच्या  75 व्या वर्षात प्रवेश केला आहे. स्वातंत्र्याच्या या अमृतकाळात देश एका नव्या भविष्याच्या निर्माणासाठी नवीन संकल्प करत आहे. आणि जे काम गेली अनेक दशके रखडले होते ते पूर्ण देखील करत आहे.  41 आयुध कारखान्यांना नवे स्वरूप देण्याचा  निर्णय, 7 नव्या कंपन्यांची ही सुरुवात देशाच्या याच संकल्प यात्रेचा भाग आहे. हा  निर्णय गेली 15-20 वर्षे रखडलेला होता. मला पूर्ण विश्वास आहे की या सर्व सात कंपन्या आगामी काळात भारताच्या सैन्य सामर्थ्याचा एक खूप मोठा आधार बनतील. 

मित्रांनो,

आपल्या आयुध कारखान्यांची गणना कधी काळी जगातील  शक्तिशाली संस्थांमध्ये केली जायची. या कारखान्यांकडे शंभर-दीडशे वर्षांहून अधिक अनुभव आहे. जागतिक युद्धाच्या वेळी भारताच्या आयुध कारखान्यांचे सामर्थ्य जगाने पाहिले आहे. आपल्याकडे उत्तम संसाधने होती, जागतिक दर्जाचे कौशल्य होते. स्वातंत्र्यानंतर  या कारखान्यांचा दर्जा सुधारण्याची, आधुनिक तंत्रज्ञान स्वीकारण्याची आपल्याला गरज होती. मात्र याकडे लक्ष दिले गेले नाही.  काळाच्या ओघात भारत आपल्या सामरिक गरजांसाठी इतर देशांवर अवलंबून राहू लागला. ही स्थिती बदलण्यात या सात नवीन कंपन्या  मोठी भूमिका बजावतील.

मित्रांनो,

आत्मनिर्भर भारत अभियान अंतर्गत , भारताला स्वबळावर जगातील सर्वात मोठी  सैन्य ताकद बनवणे, भारतात आधुनिक सैन्य उद्योगाचा विकास करणे हे देशाचे उद्दिष्ट आहे. मागील सात वर्षात देशाने  'मेक इन इंडिया' मंत्रासह आपला हा  संकल्प पुढे नेण्याचे काम केले आहे. आज देशातील संरक्षण क्षेत्रात जेवढी पारदर्शकता आहे, विश्वास आहे आणि तंत्रज्ञानप्रणित दृष्टिकोन आहे, तो यापूर्वी कधीही नव्हता. स्वातंत्र्यानंतर प्रथमच आपल्या संरक्षण क्षेत्रात एवढ्या मोठ्या सुधारणा होत आहेत, अडकवणाऱ्या-रखडवणाऱ्या धोरणांच्या जागी एक खिडकी प्रणालीची  व्यवस्था करण्यात आली आहे. यामुळे आपल्या उद्योगांचा आत्मविश्वास उंचावला आहे. आपल्या भारतीय कंपन्यांनी संरक्षण उद्योगामध्येही  आपल्यासाठी संधी शोधायला सुरुवात केली आहे. आणि आता खासगी क्षेत्र आणि  सरकार एकत्रितपणे राष्ट्र सुरक्षेच्या मोहिमेत पुढे मार्गक्रमण करत आहेत.

उत्तरप्रदेश आणि तामिळनाडू इथे विकसित होत असलेल्या संरक्षण मार्गिकांचे उदाहरण आपल्यासमोर आहे. इतक्या कमी काळात मोठमोठ्या कंपन्यांनी, ‘मेक इन इंडिया’ मध्ये आपला रस दाखवला आहे. यामुळे युवकांसाठी देशात नव्या संधी देखील निर्माण होत आहेत, तसेच पुरवठा साखळीच्या रूपाने, अनेक सूक्ष्म, लघु आणि मध्यम उद्योगांसाठी देखील अनेक संधी उपलब्ध झाल्या आहेत. देशात जे धोरणात्मक परिवर्तन केले गेले, त्याचाच परिणाम म्हणून गेल्या पाच वर्षात, संरक्षण क्षेत्रातील उत्पादनांची निर्यात 325 टक्क्यांपेक्षाही अधिक वाढली आहे.

मित्रांनो,

काही दिवसांपूर्वीच संरक्षण मंत्रालयाने अशा 100 पेक्षा अधिक युद्ध सामग्रीच्या उपकरणांची यादी जाहीर केली होती, ज्यांची आता परदेशातून आयात केली जाणार नाही. या नव्या कंपन्यांसाठी देखील देशाने आताच, 65 हजार कोटी रुपयांच्या उत्पादनांची मागणी नोंदवली आहे.  आपल्या संरक्षण कंपन्यांवर देशाच्या असलेल्या विश्वासाचेच हे द्योतक आहे. देशाचा संरक्षण कंपन्यांवरचा वाढता विश्वासच यातून व्यक्त होतो. एक कंपनी शस्त्रास्त्रे आणि दारुगोळ्याच्या गरजा पूर्ण करेल, तर दुसरी  कंपनी लष्कराला लागणारी वाहने तयार करेल. त्याचप्रमाणे, अत्याधुनिक वाहने आणि उपकरणे असतील, किंवा सैन्यदलांना सुविधा प्रदान करणारी उपकरणे असतील, ऑप्टिकल इलेक्ट्रॉनिक्स असो किंवा पॅराशुट्स असो, आमचे उद्दिष्ट आहे, भारतातील प्रत्येक कंपनीने एकेका क्षेत्रातील सर्वोच्च दर्जाची उत्पादने विकसित करण्याचे कौशल्य मिळवावे, त्यासोबतच, एक जागतिक ब्रांड म्हणून देखील आपला नावलौकिक वाढवावा. स्पर्धात्मक मूल्य हे आपले बलस्थान असेल, तर गुणवत्ता आणि विश्वासार्हता ही आपली ओळख असायला हवी.

मित्रांनो,

या नव्या व्यवस्थेमुळे, आपल्याकडे आयुध निर्माणी कारखान्यात जी गुणवत्ता आहे, ज्यांना काही तरी नवीन करायचं आहे, त्यांना आपली प्रतिभा दाखविण्याचे पूर्ण स्वातंत्र्य मिळेल, असा मला विश्वास आहे. जेंव्हा अशा प्रकारच्या कौशल्याला नवोन्मेषाची संधी मिळते, काहीतरी करून दाखविण्याची संधी मिळते, तेव्हा ते चमत्कार करून दाखवतात. तुम्ही तुमच्या कौशल्याने, जी उत्पादने बनवून दाखवाल त्यामुळे भारताच्या संरक्षण क्षेत्राची क्षमता तर वाढवालच, स्वातंत्र्यानंतर जी एक पोकळी निर्माण झाली होती, ती देखील भरून काढू शकाल.

मित्रांनो,

21 व्या शतकात कुठला देश असो की कुठली कंपनी, त्याची वाढ आणि ब्रँड व्हॅल्यू त्याच्या संशोधन आणि नवोन्मेषावरून ठरवली जाते. सॉफ्टवेअर पासून अवकाश क्षेत्रापर्यंत, भारताची वाढ,  भारताची नवी ओळख याचे सर्वात मोठे उदाहरण आहे. म्हणूनच, सर्व सातही कंपन्यांना माझा विशेष आग्रह आहे की संशोधन आणि नवोन्मेष तुमच्या कार्यसंस्कृतीचा भाग असला पाहिजे. त्याला प्राधान्य दिले गेले पाहिजे. तुम्हाला दुसऱ्या कंपन्यांची केवळ बरोबरीच करायची नसून, भविष्यातील तंत्रज्ञानात देखील त्यांच्या पुढे जायचं आहे. म्हणूनच तुम्ही नवा विचार, संशोधक वृत्ती असलेल्या युवकांना जास्तीत जास्त संधी दिल्या गेल्या पाहिजेत, त्यांना विचाराचे पूर्ण स्वातंत्र्य दिले पाहिजे. माझं देशातील स्टार्टअप्सना देखील सांगणं आहे, या सात कंपन्यांच्या माध्यमातून आज देशाने जी नवी सुरवात केली आहे, त्याचा तुम्हीही भाग बना. तुमचे संशोधन, तुमची उत्पादने या कंपन्यांच्या मदतीने एकमेकांच्या क्षमतांचा लाभ मिळवू शकतील हा विचार तुम्ही करायला हवा.

मित्रांनो,

सरकारने सर्व कंपन्यांना एक दर्जेदार, पोषक असे उत्पादनाचे वातावरण देण्यासोबतच,कार्यान्वयनाची संपूर्ण स्वायत्तताही दिली आहे. यासोबतच, या कंपन्यांमध्ये कार्यरत असणाऱ्या कर्मचाऱ्यांच्या हितांचे रक्षण होईल, हे ही सुनिश्चित करण्यात आले आहे. आपल्या अनुभवांचा आणि ज्ञानाचा देशाला खूप लाभ मिळेल, असा मला पूर्ण विश्वास आहे. आपण सगळे मिळून, आत्मनिर्भर भारताचा आपला संकल्प पूर्ण करुया.

याच भावनेने, पुन्हा एकदा आपल्या सर्वांना विजयादशमीच्या खूप खूप शुभेच्छा ! आपल्या सर्वांना खूप खूप धन्यवाद !!