प्रधानमंत्री मोदी ने सोनीपत, हरियाणा में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की परियोजनाओं का शिलान्यास किया
बेहतर इन्फ्रास्ट्रक्चर से जीवन की गुणवत्ता भी बढ़ती है: प्रधानमंत्री मोदी
बेहतर इन्फ्रास्ट्रक्चर से राष्ट्र का नव-निर्माण किया जा सकता है: प्रधानमंत्री
इन सड़कों पर केवल वाहन नहीं चलेंगे बल्कि ये सड़कें हरियाणा को विकास के मार्ग पर ले जाएंगी: प्रधानमंत्री
कई ज़िले ऐसे हैं जो राष्ट्रीय राजमार्ग से जुड़े नहीं हैं। भारत माला परियोजना से ये स्थिति बदलेगी: प्रधानमंत्री
हमने रेल की गति बढ़ाने, विस्तार, और बेहतर स्टेशनों के साथ रेलवे को बदलने का प्रयास किया है। कई और पहल की जा रही है: प्रधानमंत्री
हम उन 18,000 गांवों में 24/7 बिजली आपूर्ति उपलब्ध कराने के लिए समर्पित हैं जहाँ अभी तक बिजली नहीं पहुंची है: प्रधानमंत्री मोदी

कभी-कभी लोगों के मन में विचार आता है कि पैसे होते हैं तो रास्‍ते बनते हैं लेकिन हकीकत ये है अगर रास्‍ते बनते हैं तो फिर पैसे अपने-आप बनना शुरू हो जाते हैं। आज के युग में विकास की सबसे पहली प्राथमिक आवश्‍यकता होती है Infrastructure चाहे वो बिजली की बात हो, पानी की हो, सड़क की हो, और जहां-जहां Infrastructure पहुंचता है वहां-वहां विकास की रफ्तार तेज होती है। Quality of life में भी बहुत बड़ा बदलाव, जब इस प्रकार की सुविधाएं तैयार होती हैं तब होता है। लेकिन ज्‍यादातर हमारे देश में सरकारें दुविधा में रहती हैं, उनको लगता है कि किसी मतदाता को कोई लाभ मिलेगा तो, तो चुनाव में लाभ मिलेगा लेकिन अगर सड़क बनती है तो लोगों को लगता है उसमें क्‍या है भई ये तो सरकार का काम है, मेरा क्‍या हुआ। और ये दुविधा कई वर्षों से हमारे देश में चल रही है। और शायद ये दुविधा ही हमारे देश में विकास की सबसे बड़ी रुकावट है। जो समाज में दलित है, पीडि़त है, शोषित है, वंचित है, उनकी चिंता करना, विकास के फल उन तक पहुंचें, विकास की यात्रा में उनकी समान भागीदारी हो, ये तो सुनिश्चित करना राज्‍य की प्राथमिकता होती ही है, होनी भी चाहिए। लेकिन साथ-साथ अगर सर्वांगीण विकास करना है, लंबे अर्से तक लोगों को आत्‍मनिर्भर बनाने की दिशा में आगे बढ़ना है, ये बहुत आवश्‍यक होता है कि Infrastructure को बल दिया जाए।

हरियाणा छोटा प्रदेश है लेकिन करीब-करीब 32 हजार करोड़ रुपये की योजनाएं सिर्फ roads के लिए आएं, ये छोटी बात नहीं है। ये 32 हजार करोड़ रुपये लगते हैं तो इलाके के नौजवानों को रोजगार भी मिलता है, मजदूरी करने वालों को भी काम मिलता है, लेकिन जब व्‍यवस्‍था खड़ी होती है तो विकास की गति भी बहुत तेज होती है।

आप में से अगर किसी को अध्‍ययन करना है तो कोरिया एक उत्‍तम नमूना है कि कोरिया कहां-से-कहां पहुंचा और वहां की शुरूआत, वहां के शासकों ने इस बात से की कि कोरिया के बीच से गुजरता हुआ एक बहुत बड़ा आधुनिक Highway बनाया जाए। बड़ा विवाद हुआ था उस देश में। विवाद इस बात का हुआ कि देश गरीब है, एक रोड के लिए इतने पैसे लगा रहे हो, स्‍कूल नहीं है, अस्‍पताल नहीं है, गरीबी है, और अब रोड के लिए इतने अरबों-खरबों लगा रहे हो। बड़ा विवाद हुआ था लेकिन उस समय के शासकों ने इन सारे आरोप-प्रत्‍यारोपों के बीच भी पूरे कोरिया के बीच से एक उत्‍तम रास्‍ता बनाने का तय कर लिया और बनाया। और उस एक रास्‍ते ने पूरे कोरिया के जीवन को बदल दिया। आज दुनिया के समृद्ध देशों में कोरिया का नाम आ गया है।

Infrastructure की ये ताकत होती है और इसलिए मार्ग के क्षेत्र में, हमारे नितिन गडकरी जी के नेतृत्‍व में शायद पिछले 60 साल में इतने व्‍यापक रूप से मार्ग निर्माण के काम पर कल्‍पना तक नहीं की गई होगी। एक तरफ भारतमाला योजना है, दूसरी तरफ सेतुभारतम योजना है। अटल बिहारी वाजपेयी जी ने भारत को उत्‍तर से दक्षिण, पूर्व से पश्चिम जोड़ने के लिए एक Golden चतुष्‍क का निर्माण करने का बीड़ा उठाया और उस काम में इतनी तेजी आई कि उनके कार्यकाल में जितना काम पूरा हुआ, उस काम को आज भी हिन्‍दुस्‍तान के विकास में एक अहम भूमिका अदा हो रही है, इस रूप में माना गया से है।

ये जो रास्‍ते बनने वाले हैं, वो रास्‍ते सिर्फ हमारे Vehicles को ले जाने वाले रास्‍ते नहीं हैं। ये मार्ग का निर्माण हरियाणा को गति देने वाला निर्माण है, ये मार्ग का निर्माण हरियाणा को विकास की नई ऊंचाईयों पर तेज गति से पहुंचाने का अभियान है।

सागरमाला योजना के तहत हिन्‍दुस्‍तान के समुद्र तट, उस समुद्र तट के साथ वो Infrastructure जोड़ा जाए ताकि हिन्‍दुस्‍तान का हर कोना सामुद्रिक व्‍यापार के लिए जहां जाना हो, उसको अच्‍छे से अच्‍छा तेज गति से connectivity मिले ताकि देश में व्‍यापार को बढ़ावा मिल सकता है। अगर अच्‍छा Infrastructure है और हिमाचल के apple हैं, उनको समुद्री मार्ग से दुनिया में कहीं पहुंचाना है, तेज गति से अगर पहुंचा दिया तो वो किसान भी सुखी होता है, और जहां पहुंचता है वहां भी अच्‍छा माल पहुंचता है। यानी एक प्रकार से इन सुविधाओं से गांव गरीब किसान भी जो मेहनत करके पैदा करता है, अच्‍छे बाजार में सही समय पर पहुंच करके अपने आर्थिक विकास की यात्रा को गति दे सकते हैं। और इसलिए हमारे बंदरों के साथ, सामुद्रिक बंदरों के साथ, सागरमाला के तहत road connectivity देने का अभियान है।

सेतुभारतम, आपने देखा होगा हमारे देश में दो तरफ सड़क बनी है, बीच में से रेल जा रही है, ऊपर पुलियां नहीं बन रही हैं, रोड खराब हो रहा है। वर्षों तक ये चलता था, कभी रेल permission नहीं दे रही है, कभी रोड वाले काम नहीं करते हैं। नितिन जी ने आ करके बीड़ा उठाया, रेल और रोड के बीच में सामंजस्‍य बन गया, और एक formula बनाएं कि अगर इतने parameter पूरे होते हैं तो permission आपो-आप मिल जाएगी, अब नीचे भले रेल जाती है, ऊपर bridge बनाने का काम चालू करो।

इतनी तेज गति से काम बढ़ रहा है, आपको हैरानी होगी। हमारे देश में कहीं रेल गुजर रही है और गांव विकसित हुआ। गांव को एक छोर इस तरफ है रेलवे के, दूसरा उस तरफ है। पानी की पाईप लाईन डालनी है तो railway department दो-दो, चार-चार साल तक permission नहीं देता। और उसके कारण एक ही गांव, बीच में से रेल जा रही, उधर पानी नहीं पहुंच रहा है। हमने कुछ नियम ऐसे बनाए हैं कि Infrastructure में इस प्रकार की जो कठिनाईयां हैं वो समय-सीमा में निश्चित parameter के तहत तत्‍काल लागू की जाएं और इसके कारण इतने काम जो अटके पड़े थे उनको गति मिली।

मैं इन दिनों हर महीने में एक बार राज्यों के मुख्य सचिवों के साथ बैठता हूं, video conference करता हूं और जितने project अटके पड़े हें, वो क्यों अटके हैं, किसके कारण अटके हैं, उसकी जरा पूछताछ करता हूं। आपको हैरानी होगी, पिछले 5-6 महीनों से मेरा ये अभियान चल रहा है। अब तक करीब चाल लाख करोड़ रुपए के अटके हुए project काम करना शुरू कर दिए हैं। सेतू भारतम के द्वारा इस देश में करीब पौने 400 ऐसे bridge बनाने की जरूरत है जो विकास के लिए bottle neck बने हुए हैं, रुकावट बने हुए हैं। अगर ये 400 सेतु बन जाते हैं तो पूरे देश में एक गति को नया आयाम मिलेगा।

सेतुभारतम के तहत अरबों-खरबों रुपया लगाकर के, एक focus के रूप में कि bridge बनाने के काम को बल देना है, कभी चौड़ा करना है, कहीं नया Parallel bridge बनाना है, कहीं नए bridge बनाने हैं। एक साथ सर्वे करके उसका काम करने का अभियान उठाया है, एक भारतमाला योजना बनाई है। आपको हैरानी होगी 60 साल के बाद इस देश में 123 district ऐसे हैं, यानी करीब-करीब 20 percent, 20 percent district ऐसे हैं, जो आज भी National Highway के साथ connectivity नहीं है और इसलिए भारतमाला project के तहत एक अभियान उठाया है कि जल्द से जल्द हिन्दुस्तान के 123 district जो National Highway से link नहीं हैं, उनको जोड़ने के लिए भारतमाला project चलाया है और आने वाले वर्षों में focus target योजना के साथ इस काम को करने की दिशा में हम आगे बढ़े जा रहे हैं।

दिल्ली के चारों तरफ पूरब और पश्चिम नई सड़क, दिल्ली को तो अनेक समस्याओं से तो मुक्त करेंगे ही करेंगे लेकिन इसके बाद हरियाणा के व्यक्ति को अगर राजस्थान जाना, या हरियाणा के व्यक्ति को उत्तर प्रदेश के किसी छोर पर जाना है, उसकी सारी समस्याओं का समाधान हो जाएगा, तेज गति से वो बाहर से बाहर अपना आगे बढ़ जाएगा और ये road की रचना ऐसी है कि भविष्य में वहां पर urban development तो होना ही होना है। जब road आता है तो विकास अपने आप होता ही होता है, कई कालोनियां बनना शुरू हो जाती है लेकिन ये road की रचना ऐसी है कि साथ में अगर नए शहर विकसित भी हो जाएंगे, नई locality विकसित भी हो जाएगी तो भी दोनों के बीच में कोई contradiction नहीं होगा, तकलीफ नहीं होगी। ऐसा सुरक्षित मार्ग बनाने के पीछे ये इतने अरबों-खरबों रुपए खर्च किए जा रहे हैं।

मैं हरियाणा सरकार को, श्रीमान नितिन जी को और उनके department की पूरी team को हृदय से बहुत-बहुत अभिनंदन करता हूं कि इस काम को वो बहुत तेजी से आगे बढ़ा रहे हैं और भारत को गति देने में एक बहुत बड़ी अहम भूमिका, railway हमने railway में आमूल-चूल परिवर्तन करने कि दिशा में प्रयास शुरू किया है, railway स्टेशनों में बदलाव लाने का प्रयास शुरू किया है, रेल की गति बढ़े, रेल expansion हो, रेल के नए area extension हो, रेल में जहां diesel से चल रहा है, वहां electricity कैसे आए, एक साथ अनेकों प्रकार के initiative लेकर के, भारत के रेल युग को एक आधुनिक रेल युग में परिवर्तन करने का प्रयास बहुत तेज गति से हमने उठाया है। बिजली, 2022 जब भारत आजादी के 75 साल मनाएं, हमारा सपना है कि तब हिंदुस्तान के हर गांव में सातों दिन, 24 घंटे, पूरे सालभर बिजली मिलनी चाहिए। ये काम सरल नहीं है, मैं जानता हूं, बिजली के उत्पादन में कितनी ताकत लगेगी, मैं जानता हूं, बिजली पहुंचाने में कितनी ताकत लेगगी, मैं जानता हूं लेकिन किसी ने तो कठिन काम भी हाथ में लेने पड़ते हैं और हमने बीड़ा उठाया है कि 2022 जब भारत आजादी के 75 साल मनाता होगा, हिंदुस्तान के अंदर जहां-जहां बिजली पहुंचानी होगी, वहां पहुंचेगी और 24 घंटे बिजली उपलब्ध होगी, इस दिशा में हम काम रहे हैं।

युग बदला है, बदले हुए युग में अब highway से ही काम सिर्फ नहीं है। Highways भी चाहिए, information wave भी चाहिए, Digital India का जो हमारा सपना है, उस Digital India के सपने का पूरा करने के लिए 21वीं सदी का जो महत्वपूर्ण Infrastructure है, वो है Highways के साथ-साथ eye ways आज सारी दुनिया आपके mobile phone में है और इसलिए उसके infrastructure को भी बल देना पड़ेगा। आधुनिक भारत की पहली शर्त बन गया है, eye ways होना और इसलिए Digital India के माध्यम से Optical Fiber Network का काम पूरा हिंदुस्तान में तेज गति से चल रहा है। मैं जब इन चीजों का review करता हूं तो मेरे ध्यान में आया, लाखों गांव ऐसे हैं कि जहां पर आज के युग में Digital connectivity नहीं है, वो भी एक कठिन काम है, हमने उसका बीड़ा उठाया है, काम तेजी से चल रहा है। जब मैं बिजली के लिए पूछ रहा था, मैं हैरान था 21वीं सदी के 15 साल बीत चुके हैं, आजादी के 70 साल होने जा रहे हैं लेकिन इस देश में 18 हजार गांव ऐसे हैं, जहां बिजली का खंभा तक नहीं लगा है, एक तार भी नहीं पहुंचा है। हमने बीड़ा उठाया है, मैंने लाल किले से इसकी घोषणा की थी कि एक हजार दिन में 18 हजार गांव जहां बिजली पहुंची नहीं है, वो दुर्गम से दुर्गम इलाके होंगे, पहाड़ की चोटी पर हो या रेगिस्तान में हो, हम वहां पर बिजली पहुंचाएंगे, इसका एक अभियान चलाया है।

भाइयों-बहनों आधुनिक भारत को बनाने के लिए Infrastructure की जितनी आवश्यकता है, उस पर हम तेज गति से काम पर लगे हैं, हरिय़ाणा उसमें बहुत प्रगति कर सकता है, सबसे ज्यादा फायदा हरियाणा ले सकता है और मनोहर जी इस बात को बल देकर के आगे बढ़ा रहे हैं। मैं फिर एक बार हरियाणा को बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं, आप सबका बहुत-बहुत धन्यवाद करता हूं। मेरे साथ बोलिए भारत माता की, भारत माता की।

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यहां विरासत एक कंटिन्यू प्रोसेस है, जो हमारी संसदीय व्यवस्था को समृद्ध बनाती है: राज्यसभा में पीएम मोदी
March 18, 2026
राजनीति में कोई विराम नहीं होता; आपका अनुभव और योगदान राष्ट्र के जीवन का अभिन्न अंग बना रहेगा: प्रधानमंत्री
समाज द्वारा दी गई जिम्मेदारियों के प्रति पूर्णतः समर्पित रहने के बारे में इन वरिष्ठ नेताओं से बहुत कुछ सीखने को मिलता है: प्रधानमंत्री
यहां की विरासत एक सतत प्रक्रिया है जो हमारी संसदीय प्रणाली को समृद्ध बनाती है: प्रधानमंत्री
संसदीय प्रणाली को द्वितीय मत की अवधारणा से असीम शक्ति प्राप्त होती है; यह द्वितीय मत हमारे लोकतंत्र में एक विशाल योगदान है जिसे हमें निश्चित ही संजो कर रखना चाहिए: प्रधानमंत्री
यहां व्‍यतीत छह वर्ष राष्ट्र के प्रति अपने योगदान को आकार देने और आत्म-विकास के लिए अमूल्य हैं: प्रधानमंत्री
सेवानिवृत्त सदस्यों का राष्ट्र निर्माण में अमूल्य योगदान निरंतर महसूस किया जाता रहेगा, चाहे वे औपचारिक प्रणाली के भीतर से या स्वतंत्र सामाजिक कार्य के माध्यम से सेवा कर रहे हों: प्रधानमंत्री

इस विशेष अवसर पर आपने मुझे अपनी भावनाएं प्रकट करने के लिए जो अवसर दिया, इसके लिए मैं आपका बहुत-बहुत आभारी हूं।

आदरणीय सभापति जी,

सदन के अंदर अनेक विषयों पर चर्चाएं होती हैं, हर किसी का बहुत ही महत्वपूर्ण योगदान होता है, कुछ खट्टे-मीठे अनुभव भी रहते हैं। लेकिन आज जब ऐसा अवसर आता है, तो स्वाभाविक रूप से दलगत भावना से ऊपर उठकर के हम सबके भीतर एक समान भाव प्रकट होता है, क्या? ये हमारे साथी अब किसी और विशेष काम के लिए आगे बढ़ रहे हैं। यहां से जो साथी विदाई ले रहे हैं, कुछ फिर से आने के लिए विदाई ले रहे हैं, और कुछ विदाई के बाद यहां का अनुभव लेकर के समाज जीवन में कुछ ना कुछ विशेष योगदान के लिए जा रहे हैं। जो जा रहे हैं, लेकिन आने वाले नहीं है, उनको भी मैं कहना चाहूंगा कि राजनीति में कोई फुल स्टॉप नहीं होता है, भविष्य आपका भी इंतजार कर रहा है, और आपका अनुभव, आपका योगदान राष्ट्र जीवन में हमेशा-हमेशा बना रहेगा।

आदरणीय सभापति जी,

इस सदन में, जो भी सदस्य माननीय हमारे विदाई ले रहे हैं, कुछ सदन सदस्य ऐसे हैं, जिनको शायद उस समय जाने का समय कार्यकाल आएगा जब सदन नहीं चलता होगा, कुछ है जिनको ऑलरेडी सदन के दरमियान ही विदाई मिल रही है। लेकिन ये जाने वाले सभी माननीय सांसदों का बहुत ही उत्तम योगदान है, इसलिए, लेकिन मैं जरूर कहूंगा, आदरणीय देवगोड़ा जी, आदरणीय खड़गे जी, आदरणीय शरद पवार जी, ये ऐसे वरिष्ठ लोग हैं, जिनके जीवन का आधे से अधिक उम्र संसदीय कार्य प्रणाली में गई है, और इतने लंबे अनुभव के बाद भी सभी नए सांसदों ने सीखना चाहिए, वैसे समर्पित भाव से सदन में आना, जो भी हमसे-उनसे बन सकता है, उतना योगदान करना, यानी समाज में से जो जिम्मेवारी मिली है, उसके प्रति पूरी तरह समर्पित रहना। ये इन सब वरिष्ठ लोगों से हम जैसे सबको सीखने जैसा है। और मैं उनके योगदान की भूरी-भरी सराहना करूंगा, क्योंकि इतना लंबा कार्यकाल छोटा नहीं होता जी, बहुत महत्वपूर्ण है। उसी प्रकार से हमारे उपसभापति जी, हरिवंश जी विदाई ले रहे हैं। हरिवंश जी को लंबे समय तक इस सदन में अपनी जिम्मेवारी निभाने का अवसर मिला है। बहुत ही मृदुभाषी, सदन को चलाने में सबका विश्वास जितने का निरंतर जिन्होंने प्रयास किया और मैंने देखा है कि संकट के समय ज्यादातर उपसभापति के ही जिम्मे आ जाता है कि भाई आप संभाल लेना जरा, तो उनको एक लंबा एक्सपीरियंस होता है, सबको जान भी लेते हैं, भली-भांति जान लेते हैं। लेकिन उनका भी योगदान है। और जब भी, और मैंने देखा कि जब सदन का समय नहीं होता है, तो देश के कोने में, कोने में, कहीं ना कहीं वो यूथ के साथ मिलना- जुलना, देश की परिस्थितियों के संबंध में उनको अवगत कराना, उनमें एक देश के प्रति संवेदनाएं पैदा करना, वो भी निरंतर काम है। वो कलम के धनी तो है ही है, लेकिन कर्म कठोर के नाते भी मैं कहूंगा कि उन्होंने भारत के हर कोने में जाकर के अपना काम किया है।

आदरणीय सभापति जी,

कभी-कभी किसी समय हम सुनते थे कि सदन में बहुत ही हास्य विनोद व्यंग का अवसर मिलता रहता है। इन दिनों शायद धीरे-धीरे कम होता जा रहा है, क्योंकि 24x7 मीडिया की दुनिया ऐसी है कि हर कोई कॉनशियस रहता है, लेकिन हमारे अठावले जी, है जी, सदा बहार है, अठावले जी जा रहे हैं, लेकिन यहां पर किसी को खोट महसूस नहीं होगी, वो व्यंग विनोद भरपूर परोसते रहेंगे, ऐसा मुझे पूरा भरोसा है।

आदरणीय सभापति जी,

सदन में से हर दो साल के अंतराल के बाद एक बड़ा समूह हमारे बीच से जाता है, लेकिन ये ऐसी व्यवस्था है कि जो नया समूह आता है, उनको बाकी जो लंबे समय से, चार साल से बैठे हुए साथी हैं, अनुभव है, नए लोगों को तुरंत उनसे कुछ ना कुछ सीखने का अवसर मिलता है, और इसलिए एक प्रकार से यहां की जो विरासत है, वो कंटिन्यू प्रोसेस हमेशा रहती है, यह बहुत बड़ा लाभ होता है। मुझे पक्का विश्वास है कि जिनको इस बार जाना नहीं है, वो भी जो नए माननीय सांसद आएंगे, उनको, उनके अनुभव का लाभ मिलेगा और उनका योगदान भी सदन को और समृद्ध करेगा, ऐसा मेरा पूरा विश्वास है।

आदरणीय सभापति जी,

हम लोग जानते हैं कि जीवन में या सार्वजनिक जीवन में, जब भी कोई महत्वपूर्ण निर्णय करना होता है, तो परिवार के लोग बैठकर के मन बना लेते हैं कि ऐसा करना है, लेकिन फिर भी कहते हैं, अरे ऐसा करो, उनसे जरा पूछ लीजिए, एक सेकेंड ओपिनियन ले लीजिए, किसी वरिष्ठ से और घर में वरिष्ठ कहेंगे, मोहल्ले में देखो भाई, वो काफी अनुभवी है, जरा उनसे पूछ लो, एक बार उनका मन क्या करता है। अगर कोई बीमार है, तो भी कहते हैं यार ऐसा करो भाई, एक और डॉक्टर से जरा ओपिनियन ले लो, सेकेंड ओपिनियन का बहुत महत्व होता है। मैं समझता हूं, हमारे संसदीय प्रणाली में इस सेकेंड ओपिनियन की बहुत बड़ी ताकत रही है। एक सदन में कुछ निर्णय होता है, दूसरे सदन में फिर आता है, सेकेंड ओपिनियन के लिए। अगर इस सदन में होता है, तो उस सदन में जाता है सेकेंड ओपिनियन के लिए, और ये सेकेंड ओपिनियन उस सारी बहस को, उस सारे निर्णय प्रक्रिया को एक बहुत बड़ा नया आयाम दे देती है, और वो मैं समझता हूं कि हमारी निर्णय प्रक्रिया को समृद्ध करती है। तो इसलिए, सदन में जो माननीय सांसद बैठते हैं, उनके लिए एक खुलापन रहता है कि भाई चलो इस सदन में नहीं तो, उस सदन में एक अच्छा ओपिनियन नया आएगा, उस सदन में नहीं तो, इस सदन में एक नया ओपिनियन आएगा। तो ये सेकेंड ओपिनियन, ये हमारे लोकतंत्र में एक बहुत बड़ा कंट्रीब्यूशन है, जो जिस विरासत को हमें संभालना, हमारे जो माननीय सांसद विदाई ले रहे हैं, उनका तो योगदान रहा ही है, और इसके लिए भी मैं उनका साधुवाद करता हूं।

आदरणीय सभापति जी,

जो हमारे माननीय सांसद विदाई ले रहे हैं, बहुत आने वाले दिनों में तो शायद ये अवसर रहने वाला ही नहीं है, लेकिन ये माननीय सांसद ऐसे हैं कि जिनको पुराने संसद के भवन में भी बैठने का मौका मिला और नए संसद भवन में भी बैठने का मौका मिला। उनको दोनों इमारतों में, उनको राष्ट्र के कल्याण के लिए अपना योगदान देने का अवसर मिला है, और उनके कार्यकाल में ही, उनको इस नए सदन के निर्माण प्रक्रिया में और नए सदन की निर्णय प्रक्रिया में भी हिस्सा बनने का अवसर मिला है, ये एक विशेष उनके जीवन में याद रहेगी, नई स्मृति रहेगी।

आदरणीय सभापति जी,

मैं सभी माननीय सांसदों के और मैं मानता हूं कि ये सदन अपने आप में एक बहुत बड़ी ओपन यूनिवर्सिटी है, राष्ट्र जीवन की कई बारीकियों से परिचित होने का अवसर सदन में प्राप्त होता है। एक प्रकार से हमारे यहां शिक्षा भी होती है, हमारी दीक्षा भी होती है। ये 6 साल यहां जो रहने का अवसर मिलता है, वो जीवन को गढ़ने का, राष्ट्र जीवन के गढ़तम्य योगदान का तो महत्व है ही है, क्योंकि निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा है, लेकिन स्वयं के जीवन को गढ़ने का भी एक अमूल्य अवसर होता है। और इसलिए जब माननीय सांसद यहां आते हैं, उस समय की उनकी जो भी सोच-समझ और क्षमता है, जब जाते हैं, तो अनेक गुना वो बढ़ती है, उसका विस्तार होता है, और अनुभव की एक बहुत बड़ी ताकत होती है। अब तब जाकर के जाने के बाद राष्ट्र जीवन का उनका निरंतर योगदान बना रहे हैं। वो अपने तरीके से व्यवस्था के तहत हो सकते हैं, व्यवस्था के तहत ना भी हो सके, लेकिन उनका अमूल्य योगदान मिलता ही रहे, राष्ट्र जीवन के निर्माण में उनका अनुभव हमेशा-हमेशा उपयोगी हो, ये मेरी उन सभी माननीय सांसदों को मेरी शुभकामनाएं हैं। और मैं फिर से एक बार सभी माननीय सांसदों के योगदान का गौरव गान करता हूं, साधुवाद करता हूं।

बहुत-बहुत धन्यवाद।