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PM Modi lays foundation Stone of NHAI Projects in Sonepat, Haryana
If Infrastructure improves, quality of life also enhances: PM Modi
Good infrastructure has the potential to transform nations: PM
These roads won't only carry the vehicles, these roads would lead Haryana towards development: PM
There are so many districts not connected with a national highway. Bharat Mala project will change that: PM
We have made attempts to transform the railways- increase speed, extension, expansion, better stations. Lot of initiatives are happening: PM
We are dedicated to provide 24/7 power supply to the 18,000 villages that still don not have electrification: PM Modi

कभी-कभी लोगों के मन में विचार आता है कि पैसे होते हैं तो रास्‍ते बनते हैं लेकिन हकीकत ये है अगर रास्‍ते बनते हैं तो फिर पैसे अपने-आप बनना शुरू हो जाते हैं। आज के युग में विकास की सबसे पहली प्राथमिक आवश्‍यकता होती है Infrastructure चाहे वो बिजली की बात हो, पानी की हो, सड़क की हो, और जहां-जहां Infrastructure पहुंचता है वहां-वहां विकास की रफ्तार तेज होती है। Quality of life में भी बहुत बड़ा बदलाव, जब इस प्रकार की सुविधाएं तैयार होती हैं तब होता है। लेकिन ज्‍यादातर हमारे देश में सरकारें दुविधा में रहती हैं, उनको लगता है कि किसी मतदाता को कोई लाभ मिलेगा तो, तो चुनाव में लाभ मिलेगा लेकिन अगर सड़क बनती है तो लोगों को लगता है उसमें क्‍या है भई ये तो सरकार का काम है, मेरा क्‍या हुआ। और ये दुविधा कई वर्षों से हमारे देश में चल रही है। और शायद ये दुविधा ही हमारे देश में विकास की सबसे बड़ी रुकावट है। जो समाज में दलित है, पीडि़त है, शोषित है, वंचित है, उनकी चिंता करना, विकास के फल उन तक पहुंचें, विकास की यात्रा में उनकी समान भागीदारी हो, ये तो सुनिश्चित करना राज्‍य की प्राथमिकता होती ही है, होनी भी चाहिए। लेकिन साथ-साथ अगर सर्वांगीण विकास करना है, लंबे अर्से तक लोगों को आत्‍मनिर्भर बनाने की दिशा में आगे बढ़ना है, ये बहुत आवश्‍यक होता है कि Infrastructure को बल दिया जाए।

हरियाणा छोटा प्रदेश है लेकिन करीब-करीब 32 हजार करोड़ रुपये की योजनाएं सिर्फ roads के लिए आएं, ये छोटी बात नहीं है। ये 32 हजार करोड़ रुपये लगते हैं तो इलाके के नौजवानों को रोजगार भी मिलता है, मजदूरी करने वालों को भी काम मिलता है, लेकिन जब व्‍यवस्‍था खड़ी होती है तो विकास की गति भी बहुत तेज होती है।

आप में से अगर किसी को अध्‍ययन करना है तो कोरिया एक उत्‍तम नमूना है कि कोरिया कहां-से-कहां पहुंचा और वहां की शुरूआत, वहां के शासकों ने इस बात से की कि कोरिया के बीच से गुजरता हुआ एक बहुत बड़ा आधुनिक Highway बनाया जाए। बड़ा विवाद हुआ था उस देश में। विवाद इस बात का हुआ कि देश गरीब है, एक रोड के लिए इतने पैसे लगा रहे हो, स्‍कूल नहीं है, अस्‍पताल नहीं है, गरीबी है, और अब रोड के लिए इतने अरबों-खरबों लगा रहे हो। बड़ा विवाद हुआ था लेकिन उस समय के शासकों ने इन सारे आरोप-प्रत्‍यारोपों के बीच भी पूरे कोरिया के बीच से एक उत्‍तम रास्‍ता बनाने का तय कर लिया और बनाया। और उस एक रास्‍ते ने पूरे कोरिया के जीवन को बदल दिया। आज दुनिया के समृद्ध देशों में कोरिया का नाम आ गया है।

Infrastructure की ये ताकत होती है और इसलिए मार्ग के क्षेत्र में, हमारे नितिन गडकरी जी के नेतृत्‍व में शायद पिछले 60 साल में इतने व्‍यापक रूप से मार्ग निर्माण के काम पर कल्‍पना तक नहीं की गई होगी। एक तरफ भारतमाला योजना है, दूसरी तरफ सेतुभारतम योजना है। अटल बिहारी वाजपेयी जी ने भारत को उत्‍तर से दक्षिण, पूर्व से पश्चिम जोड़ने के लिए एक Golden चतुष्‍क का निर्माण करने का बीड़ा उठाया और उस काम में इतनी तेजी आई कि उनके कार्यकाल में जितना काम पूरा हुआ, उस काम को आज भी हिन्‍दुस्‍तान के विकास में एक अहम भूमिका अदा हो रही है, इस रूप में माना गया से है।

ये जो रास्‍ते बनने वाले हैं, वो रास्‍ते सिर्फ हमारे Vehicles को ले जाने वाले रास्‍ते नहीं हैं। ये मार्ग का निर्माण हरियाणा को गति देने वाला निर्माण है, ये मार्ग का निर्माण हरियाणा को विकास की नई ऊंचाईयों पर तेज गति से पहुंचाने का अभियान है।

सागरमाला योजना के तहत हिन्‍दुस्‍तान के समुद्र तट, उस समुद्र तट के साथ वो Infrastructure जोड़ा जाए ताकि हिन्‍दुस्‍तान का हर कोना सामुद्रिक व्‍यापार के लिए जहां जाना हो, उसको अच्‍छे से अच्‍छा तेज गति से connectivity मिले ताकि देश में व्‍यापार को बढ़ावा मिल सकता है। अगर अच्‍छा Infrastructure है और हिमाचल के apple हैं, उनको समुद्री मार्ग से दुनिया में कहीं पहुंचाना है, तेज गति से अगर पहुंचा दिया तो वो किसान भी सुखी होता है, और जहां पहुंचता है वहां भी अच्‍छा माल पहुंचता है। यानी एक प्रकार से इन सुविधाओं से गांव गरीब किसान भी जो मेहनत करके पैदा करता है, अच्‍छे बाजार में सही समय पर पहुंच करके अपने आर्थिक विकास की यात्रा को गति दे सकते हैं। और इसलिए हमारे बंदरों के साथ, सामुद्रिक बंदरों के साथ, सागरमाला के तहत road connectivity देने का अभियान है।

सेतुभारतम, आपने देखा होगा हमारे देश में दो तरफ सड़क बनी है, बीच में से रेल जा रही है, ऊपर पुलियां नहीं बन रही हैं, रोड खराब हो रहा है। वर्षों तक ये चलता था, कभी रेल permission नहीं दे रही है, कभी रोड वाले काम नहीं करते हैं। नितिन जी ने आ करके बीड़ा उठाया, रेल और रोड के बीच में सामंजस्‍य बन गया, और एक formula बनाएं कि अगर इतने parameter पूरे होते हैं तो permission आपो-आप मिल जाएगी, अब नीचे भले रेल जाती है, ऊपर bridge बनाने का काम चालू करो।

इतनी तेज गति से काम बढ़ रहा है, आपको हैरानी होगी। हमारे देश में कहीं रेल गुजर रही है और गांव विकसित हुआ। गांव को एक छोर इस तरफ है रेलवे के, दूसरा उस तरफ है। पानी की पाईप लाईन डालनी है तो railway department दो-दो, चार-चार साल तक permission नहीं देता। और उसके कारण एक ही गांव, बीच में से रेल जा रही, उधर पानी नहीं पहुंच रहा है। हमने कुछ नियम ऐसे बनाए हैं कि Infrastructure में इस प्रकार की जो कठिनाईयां हैं वो समय-सीमा में निश्चित parameter के तहत तत्‍काल लागू की जाएं और इसके कारण इतने काम जो अटके पड़े थे उनको गति मिली।

मैं इन दिनों हर महीने में एक बार राज्यों के मुख्य सचिवों के साथ बैठता हूं, video conference करता हूं और जितने project अटके पड़े हें, वो क्यों अटके हैं, किसके कारण अटके हैं, उसकी जरा पूछताछ करता हूं। आपको हैरानी होगी, पिछले 5-6 महीनों से मेरा ये अभियान चल रहा है। अब तक करीब चाल लाख करोड़ रुपए के अटके हुए project काम करना शुरू कर दिए हैं। सेतू भारतम के द्वारा इस देश में करीब पौने 400 ऐसे bridge बनाने की जरूरत है जो विकास के लिए bottle neck बने हुए हैं, रुकावट बने हुए हैं। अगर ये 400 सेतु बन जाते हैं तो पूरे देश में एक गति को नया आयाम मिलेगा।

सेतुभारतम के तहत अरबों-खरबों रुपया लगाकर के, एक focus के रूप में कि bridge बनाने के काम को बल देना है, कभी चौड़ा करना है, कहीं नया Parallel bridge बनाना है, कहीं नए bridge बनाने हैं। एक साथ सर्वे करके उसका काम करने का अभियान उठाया है, एक भारतमाला योजना बनाई है। आपको हैरानी होगी 60 साल के बाद इस देश में 123 district ऐसे हैं, यानी करीब-करीब 20 percent, 20 percent district ऐसे हैं, जो आज भी National Highway के साथ connectivity नहीं है और इसलिए भारतमाला project के तहत एक अभियान उठाया है कि जल्द से जल्द हिन्दुस्तान के 123 district जो National Highway से link नहीं हैं, उनको जोड़ने के लिए भारतमाला project चलाया है और आने वाले वर्षों में focus target योजना के साथ इस काम को करने की दिशा में हम आगे बढ़े जा रहे हैं।

दिल्ली के चारों तरफ पूरब और पश्चिम नई सड़क, दिल्ली को तो अनेक समस्याओं से तो मुक्त करेंगे ही करेंगे लेकिन इसके बाद हरियाणा के व्यक्ति को अगर राजस्थान जाना, या हरियाणा के व्यक्ति को उत्तर प्रदेश के किसी छोर पर जाना है, उसकी सारी समस्याओं का समाधान हो जाएगा, तेज गति से वो बाहर से बाहर अपना आगे बढ़ जाएगा और ये road की रचना ऐसी है कि भविष्य में वहां पर urban development तो होना ही होना है। जब road आता है तो विकास अपने आप होता ही होता है, कई कालोनियां बनना शुरू हो जाती है लेकिन ये road की रचना ऐसी है कि साथ में अगर नए शहर विकसित भी हो जाएंगे, नई locality विकसित भी हो जाएगी तो भी दोनों के बीच में कोई contradiction नहीं होगा, तकलीफ नहीं होगी। ऐसा सुरक्षित मार्ग बनाने के पीछे ये इतने अरबों-खरबों रुपए खर्च किए जा रहे हैं।

मैं हरियाणा सरकार को, श्रीमान नितिन जी को और उनके department की पूरी team को हृदय से बहुत-बहुत अभिनंदन करता हूं कि इस काम को वो बहुत तेजी से आगे बढ़ा रहे हैं और भारत को गति देने में एक बहुत बड़ी अहम भूमिका, railway हमने railway में आमूल-चूल परिवर्तन करने कि दिशा में प्रयास शुरू किया है, railway स्टेशनों में बदलाव लाने का प्रयास शुरू किया है, रेल की गति बढ़े, रेल expansion हो, रेल के नए area extension हो, रेल में जहां diesel से चल रहा है, वहां electricity कैसे आए, एक साथ अनेकों प्रकार के initiative लेकर के, भारत के रेल युग को एक आधुनिक रेल युग में परिवर्तन करने का प्रयास बहुत तेज गति से हमने उठाया है। बिजली, 2022 जब भारत आजादी के 75 साल मनाएं, हमारा सपना है कि तब हिंदुस्तान के हर गांव में सातों दिन, 24 घंटे, पूरे सालभर बिजली मिलनी चाहिए। ये काम सरल नहीं है, मैं जानता हूं, बिजली के उत्पादन में कितनी ताकत लगेगी, मैं जानता हूं, बिजली पहुंचाने में कितनी ताकत लेगगी, मैं जानता हूं लेकिन किसी ने तो कठिन काम भी हाथ में लेने पड़ते हैं और हमने बीड़ा उठाया है कि 2022 जब भारत आजादी के 75 साल मनाता होगा, हिंदुस्तान के अंदर जहां-जहां बिजली पहुंचानी होगी, वहां पहुंचेगी और 24 घंटे बिजली उपलब्ध होगी, इस दिशा में हम काम रहे हैं।

युग बदला है, बदले हुए युग में अब highway से ही काम सिर्फ नहीं है। Highways भी चाहिए, information wave भी चाहिए, Digital India का जो हमारा सपना है, उस Digital India के सपने का पूरा करने के लिए 21वीं सदी का जो महत्वपूर्ण Infrastructure है, वो है Highways के साथ-साथ eye ways आज सारी दुनिया आपके mobile phone में है और इसलिए उसके infrastructure को भी बल देना पड़ेगा। आधुनिक भारत की पहली शर्त बन गया है, eye ways होना और इसलिए Digital India के माध्यम से Optical Fiber Network का काम पूरा हिंदुस्तान में तेज गति से चल रहा है। मैं जब इन चीजों का review करता हूं तो मेरे ध्यान में आया, लाखों गांव ऐसे हैं कि जहां पर आज के युग में Digital connectivity नहीं है, वो भी एक कठिन काम है, हमने उसका बीड़ा उठाया है, काम तेजी से चल रहा है। जब मैं बिजली के लिए पूछ रहा था, मैं हैरान था 21वीं सदी के 15 साल बीत चुके हैं, आजादी के 70 साल होने जा रहे हैं लेकिन इस देश में 18 हजार गांव ऐसे हैं, जहां बिजली का खंभा तक नहीं लगा है, एक तार भी नहीं पहुंचा है। हमने बीड़ा उठाया है, मैंने लाल किले से इसकी घोषणा की थी कि एक हजार दिन में 18 हजार गांव जहां बिजली पहुंची नहीं है, वो दुर्गम से दुर्गम इलाके होंगे, पहाड़ की चोटी पर हो या रेगिस्तान में हो, हम वहां पर बिजली पहुंचाएंगे, इसका एक अभियान चलाया है।

भाइयों-बहनों आधुनिक भारत को बनाने के लिए Infrastructure की जितनी आवश्यकता है, उस पर हम तेज गति से काम पर लगे हैं, हरिय़ाणा उसमें बहुत प्रगति कर सकता है, सबसे ज्यादा फायदा हरियाणा ले सकता है और मनोहर जी इस बात को बल देकर के आगे बढ़ा रहे हैं। मैं फिर एक बार हरियाणा को बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं, आप सबका बहुत-बहुत धन्यवाद करता हूं। मेरे साथ बोलिए भारत माता की, भारत माता की।

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ଉତରାଖଣ୍ଡର ଦେହରାଡୁନରେ ଏକାଧିକ ପ୍ରକଳ୍ପର ଉଦଘାଟନ ଓ ଶିଳାନ୍ୟାସ ଅବସରରେ ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀଙ୍କ ଉଦବୋଧନ
December 04, 2021
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“ଆଜି ଭାରତ ଆଧୁନିକ ଭିତ୍ତିଭୂମି ପାଇଁ ଏକ ଲକ୍ଷକୋଟି ଟଙ୍କାରୁ ଅଧିକ ବିନିଯୋଗ କରିବା ପାଇଁ ଆଗେଇ ଚାଲିଛି । ଭାରତର ନୀତି ହେଉଛି “ଗତିଶକ୍ତି” ଦୁଇରୁ ତିନିଗୁଣ ଅଧିକ ଗତିରେ କାର୍ଯ୍ୟ ।
“ଆମର ପବର୍ତଗୁଡିକ କେବଳ ଆମ ବିଶ୍ୱାସ ଓ ସଂସ୍କୃତିର ଦୁର୍ଗ ନୁହେଁ ବରଂ ଆମ ଦେଶ ସୁରକ୍ଷାର ଦୁର୍ଗ ସଦୃଶ । ପାର୍ବତ୍ୟାଞ୍ଚଳରେ ବସବାସ କରୁଥିବା ଆମ ଦେଶବାସୀଙ୍କ ଜୀବନଧାରଣ ସୁଗମ କରିବ ହେଉଛି ସର୍ବୋଚ୍ଚ ପ୍ରାଥମିକତା”
“ସରକାର ଆଜି ବିଶ୍ୱର କୌଣସି ଦେଶର ଚାପର ବଶବର୍ତ୍ତୀ ହେବ ନାହିଁ। ଆମେ ସବୁବେଳେ ଦେଶ ଆଗ ସବୁବେଳେ ଆଗ ମନ୍ତ୍ରରେ ଦୀକ୍ଷିତ”
“ଆମେ ଯେତେବେଳେ କୌଣସି ଯୋଜନା ଆଣୁ, ଆମେ ତାହା ସମସ୍ତଙ୍କ ପାଇଁ ଆଣୁଛୁ ବିନା ବାଛବିଚାରରେ । ଆମେ ଭୋଟ ବ୍ୟାଙ୍କ ରାଜନୀତି ନ କରି ଜନସେବାକୁ ପ୍ରାଧାନ୍ୟ ଦେଉଛୁ । ଦେଶକୁ ମଜବୁତ କରିବା ଆମର ଉଦ୍ଦେଶ୍ୟ ।

ଉତରାଖଣ୍ଡ କା, ସଭି ଦାଣା ସୟାଣୌ, ଦିଦି- ଭୂଲିୟୈାଁ, ବଚ୍ଚି-ବୋଡିୟୋଁ ଔର ଭୈ-ବୈଣୋ। ଆପ ସବୁଥେଁ, ମ୍ୟାରୁ ପ୍ରଣାମ! ମିଥୈ ଭରୋସା ଛ, କି ଆପ ଲୋଗ କୁଶଲ ମଙ୍ଗଲ ହୋଲା! ମି ଆପ ଲୋଗୋଁ ଥେ ସେବା ଲଗୌଣ ଛୁ, ଆପ ସ୍ୱୀକାର କରା!

ଉତରାଖଣ୍ଡର ରାଜ୍ୟପାଳ ଶ୍ରୀମାନ ଗୁରମିତ ସିଂହ ମହୋଦୟ, ଏଠାକାର ଲୋକପ୍ରିୟ, ଉର୍ଜ୍ଜାବାନ ମୁଖ୍ୟମନ୍ତ୍ରୀ ଶ୍ରୀମାନ ପୁଷ୍କର ସିଂହ ଧାମୀ ମହାଶୟ, କେନ୍ଦ୍ର ମନ୍ତ୍ରିପରିଷଦରେ ମୋର ସହଯୋଗୀ ପ୍ରହ୍ଲାଦ ଯୋଶୀ ମହାଶୟ, ଅଜୟ ଭଟ୍ଟ ମହାଶୟ, ଉତରାଖଣ୍ଡର ମନ୍ତ୍ରୀ ଶତପାଲ ମହାଶୟ, ହରକ ସିଂହ ରାୱତ ମହାଶୟ, ରାଜ୍ୟ ମନ୍ତ୍ରିମଣ୍ଡଳର ଅନ୍ୟ ସଦସ୍ୟଗଣ, ସଂସଦରେ ମୋର ସହଯୋଗୀ ନିଶଙ୍କ ମହାଶୟ, ତୀରଥ ସିଂହ ରାୱତ ମହାଶୟ, ଅନ୍ୟ ସାଂସଦଗଣ, ଭାଇ ତ୍ରିବେନ୍ଦ୍ର ସିଂହ ରାୱତ ମହାଶୟ, ବିଜୟ ବହୁଗୁଣା ମହାଶୟ, ରାଜ୍ୟ ବିଧାନସଭାର ଅନ୍ୟ ସଦସ୍ୟଗଣ, ମେୟର ଶ୍ରୀ, ଜିଲା ପଂଚାୟତର ସଦସ୍ୟଗଣ, ଭାଇ ମଦନ କୌଶିକ ମହାଶୟ ଏବଂ ମୋର ପ୍ରିୟ ଭାଇ ଓ ଭଉଣୀମାନେ,

ଆପଣ ସମସ୍ତେ ଏତେ ବିପୁଳ ସଂଖ୍ୟାରେ ଆମକୁ ଆଶୀର୍ବାଦ ଦେବାପାଇଁ ଆସିଛନ୍ତି। ଆପଣଙ୍କ ସ୍ନେହ, ଆପଣଙ୍କ ଆଶୀର୍ବାଦର ପ୍ରସାଦ ପାଇ ଆମେ ସମସ୍ତେ ଅଭିଭୂତ ହୋଇ ଯାଇଛୁ। ଉତରାଖଣ୍ଡ, ସମଗ୍ର ଦେଶର କେବଳ ଆସ୍ଥା ହିଁ ନୁହେଁ ବରଂ ହେଉଛି କର୍ମ ଏବଂ କର୍ମଠତାର ଭୂମି। ଏଥିପାଇଁ ଏହି କ୍ଷେତ୍ରର ବିକାଶ ଏହାକୁ ଭବ୍ୟ ସ୍ୱରୂପ ଦେବା ଡବଲ ଇଞ୍ଜିନ ସରକାରର ହେଉଛି ସର୍ବୋଚ୍ଚ ପ୍ରାଥମିକତା । ଏହି ଭାବନାକୁ ନେଇ ବିଗତ ପାଂଚ ବର୍ଷରେ ଉତରାଖଣ୍ଡର ବିକାଶ ପାଇଁ କେନ୍ଦ୍ର ସରକାର 1ଲକ୍ଷ କୋଟି ଟଙ୍କାରୁ ଅଧିକର ପ୍ରକଳ୍ପକୁ ମଂଜୁରୀ ଦେଇଛନ୍ତି । ଏଠାକାର ସରକାର ଏହାକୁ ଦ୍ରୁତ ଗତିରେ କାର୍ଯ୍ୟରେ ପରିଣତ କରିଚାଲିଛନ୍ତି। ଏହାକୁ ଆଗକୁ ନେଇ, ଆଜି 18 ହଜାର କୋଟି ଟଙ୍କାରୁ ଅଧିକ ପ୍ରକଳ୍ପର ଲୋକାର୍ପଣ ଏବଂ ଶିଳାନ୍ୟାସ କରାଯାଇଛି । ଏଥିରେ ଯୋଗାଯୋଗ ହେଉ, ସ୍ୱାସ୍ଥ୍ୟ ହେଉ, ସଂସ୍କୃତି ହେଉ, ତୀର୍ଥାଟନ ହେଉ, ବିଜୁଳି ହେଉ, ପିଲାମାନଙ୍କ ପାଇଁ ବିଶେଷ କରି ଶିଶୁ ଅନୁକୂଳ ସହର ପ୍ରକଳ୍ପ ହେଉ, ପାଖାପାଖି ପ୍ରତ୍ୟେକ କ୍ଷେତ୍ର ସହିତ ଜଡ଼ିତ ପ୍ରକଳ୍ପ ସାମିଲ ହୋଇଛି । ବିଗତ ବର୍ଷରେ କଠୋର ପରିଶ୍ରମ ପରେ ତାହାର ଜରୁରୀ ପ୍ରକ୍ରିୟାଗୁଡ଼ିକ ସହିତ ଅତିକ୍ରମ କରିବା ପରେ, ଶେଷରେ ଆଜି ଏହି ଦିନ ଆସିଛି। ଏହି ପ୍ରକଳ୍ପଗୁଡ଼ିକ ବିଷୟରେ, ମୁଁ କେଦାରପୁରୀର ପବିତ୍ର ମାଟିରୁ କହିଥିଲି, ଆଜି ମୁଁ ଦେହରାଡୁନରୁ ଦୋହରାଉଛି। ଏହି ପ୍ରକଳ୍ପଗୁଡ଼ିକ ଏହି ଦଶକକୁ ଉତରାଖଣ୍ଡର ଦଶକ କରିବାରେ ପ୍ରମୁଖ ଭୂମିକା ତୁଲାଇବ। ଏହିସବୁ ପ୍ରକଳ୍ପଗୁଡ଼ିକ ପାଇଁ ଉତରାଖଣ୍ଡର ଲୋକଙ୍କୁ ବହୁତ-ବହୁତ ଶୁଭେଚ୍ଛା ଜଣାଉଛି, ବହୁତ-ବହୁତ ଅଭିନନ୍ଦନ ଜଣାଉଛି। ଯେଉଁ ଲୋକମାନେ ପଚାରୁଛନ୍ତି ଯେ ଡବଲ ଇଞ୍ଜିନ ସରକାରଙ୍କ ଦ୍ୱାରା ଲାଭ କ’ଣ, ସେମାନେ ଆଜି ତାହା ଦେଖିପାରୁଥିବେ ଯେ ଡବଲ ଇଞ୍ଜିନ ସରକାର କିଭଳି ଉତରାଖଣ୍ଡରେ ବିକାଶର ଗଙ୍ଗାକୁ ପ୍ରବାହିତ କରୁଛନ୍ତି।

ଭାଇ  ଭଉଣୀମାନେ,

ଏହି ଶତାବ୍ଦୀର ପ୍ରାରମ୍ଭରେ, ଅଟଳ ବିହାରୀ ବାଜପେୟୀ ମହାଶୟ ଭାରତରେ ଯୋଗାଯୋଗକୁ ବୃଦ୍ଧି କରିବା ପାଇଁ ଅଭିଯାନ ଆରମ୍ଭ କରିଥିଲେ। କିନ୍ତୁ ତାଙ୍କ ପରେ 10 ବର୍ଷ ଦେଶରେ ଏଭଳି ସରକାର ଥିଲା, ଯେଉଁମାନେ ଦେଶର, ଉତରାଖଣ୍ଡର, ବହୁମୂଲ୍ୟ ସମୟ ବ୍ୟର୍ଥ କରିଦେଲେ । 10 ବର୍ଷ ପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ ଦେଶରେ ଭିତିଭୂମି ନାମରେ ଘୋଟାଲା ହେଲା, ଭ୍ରଷ୍ଟାଚାର ହେଲା। ଏହାଦ୍ୱାରା ଦେଶର ଯେଉଁ କ୍ଷତି ହେଲା, ତାହାର ଭରଣା ପାଇଁ ଆମେ ଦୁଇ ଗୁଣ ଗତିରେ ପରିଶ୍ରମ କଲୁ, ଆଉ ଆଜି ମଧ୍ୟ କରୁଛୁ। ଆଜି ଭାରତ, ଆଧୁନିକ ଭିତିଭୂମି ଉପରେ 100 ଲକ୍ଷ କୋଟି ଟଙ୍କାରୁ ମଧ୍ୟ ଅଧିକ ନିବେଶ କରିବା ଲକ୍ଷ୍ୟରେ ଆଗକୁ ଅଗ୍ରସର ହେଉଛି, ଆଜି ଭାରତର ନୀତି, ହେଉଛି ଗତିଶକ୍ତିର, ଦୁଇ ଗୁଣ- ତିନିଗୁଣ ଗତିରେ କାର୍ଯ୍ୟ କରିବାର ଅଛି। ବର୍ଷ- ବର୍ଷ ଧରି ଅଟକି ରହିଥିବା ପ୍ରକଳ୍ପଗୁଡ଼ିକୁ, ବିନା ପ୍ରସ୍ତୁତିରେ ଫିତା କାଟି ଦେବାଭଳି କାର୍ଯ୍ୟ ପଦ୍ଧତିକୁ ପଛରେ ପକାଇ ଆଜି ଭାରତ ନବନିର୍ମାଣରେ ଲାଗି ପଡ଼ିଛି। ଏକବିଂଶ ଶତାବ୍ଦୀର ଏହି ସମୟରେ, ଭାରତରେ ଯୋଗାଯୋଗର ଏକ ଏଭଳି ମହାଯଞ୍ଜ ଚାଲୁ ରହିଛି, ଯାହା ଭବିଷ୍ୟତ ଭାରତକୁ ବିକଶିତ ଦେଶର ଶୃଙ୍ଖଳାରେ ଆଣିବାରେ ବହୁତ ବଡ଼ ଭୂମିକା ତୁଲାଇବ। ଏହି ମହାଯଞ୍ଜର ହିଁ ଏକ ଯଞ୍ଜ ଆଜି ଏଠାରେ ଦେବଭୂମିରେ ହେଉଛି।

ଭାଇ  ଭଉଣୀମାନେ,

ଏହି ଦେବଭୂମିକୁ ଶ୍ରଦ୍ଧାଳୁମାନେ ମଧ୍ୟ ଆସୁଛନ୍ତି, ଉଦ୍ୟମୀମାନେ ମଧ୍ୟ ଆସୁଛନ୍ତି, ପ୍ରକୃତିପ୍ରେମୀ ପର୍ଯ୍ୟଟକ ମଧ୍ୟ ଆସୁଛନ୍ତି। ଏହି ଭୂମିର ଯେଉଁ ସାମର୍ଥ୍ୟ ରହିଛି, ତାହାକୁ ବୃଦ୍ଧି କରିବା ପାଇଁ ଏଠାରେ ଆଧୁନିକ ଭିତିଭୂମି ଉପରେ ଅଦ୍ଭୁତପୂର୍ବ କାର୍ଯ୍ୟ କରାଯାଉଛି। ଚାରିଧାମ ସବୁଦିନିଆ ସଡ଼କ ପ୍ରକଳ୍ପ ଅଧୀନରେ ଆଜି ଦେବପ୍ରୟାଗରୁ ଶ୍ରୀକୋଟ ଏବଂ ବ୍ରହ୍ମପୁରୀରୁ କୌଡିୟାଲା, ସେଠାକାର ପ୍ରକଳ୍ପକୁ ଲୋକାର୍ପଣ କରାଯାଇଛି। ଭଗବାନ ବଦ୍ରିନାଥଙ୍କ ପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ ପହଂଚିବାରେ ଲାମ-ବଗଡ଼ ଭୂସ୍ଖଳନ ଯୋଗୁଁ ଯେଉଁ ପ୍ରତିବନ୍ଧକ ସୃଷ୍ଟି ହେଉଥିଲା, ତାହା ମଧ୍ୟ ଏବେ ଦୂର ହୋଇ ଯାଉଛି। ଏହି ଭୂସ୍ଖଳନ ସାରା ଦେଶରେ କେତେ ତୀର୍ଥଯାତ୍ରୀଙ୍କୁ ବଦ୍ରିନାଥ ଯାତ୍ରା କରିବାରେ ପ୍ରତିବନ୍ଧକ ସୃଷ୍ଟି କରିଥିଲା ଅବାପୁଣି ଘଂଟା- ଘଂଟା ଧରି ପ୍ରତୀକ୍ଷା କରାଉଥିଲା ଆଉ କିଛି ଲୋକ ଥକି ଯାଇ ଫେରି ଯାଉଥିଲେ। ଏବେ ବଦ୍ରିନାଥ ଜୀଙ୍କ ଯାତ୍ରା, ପୂର୍ବ ଅପେକ୍ଷା ଅଧିକ ସୁରକ୍ଷିତ ଏବଂ ସୁଖଦ ହୋଇଯିବ । ଆଜି ବଦ୍ରିନାଥ ଜୀ, ଗଙ୍ଗୋତ୍ରୀ ଏବଂ ଯମୁନୋତ୍ରୀ ଧାମରେ ଅନେକ ସୁବିଧା ସହିତ ଜଡ଼ିତ ନୂତନ ପ୍ରକଳ୍ପର କାର୍ଯ୍ୟ ଆରମ୍ଭ ହୋଇଛି ।

ଭାଇ  ଭଉଣୀମାନେ,

ଉନ୍ନତ ଯୋଗାଯୋଗ ଏବଂ ସୁବିଧାଗୁଡ଼ିକ ଦ୍ୱାରା ପର୍ଯ୍ୟଟନ ଏବଂ ତୀର୍ଥାଟନକୁ କେତେ ଲାଭ ମିଳିଥାଏ, ବିଗତ ବର୍ଷରେ କେଦାରନାଥ ଧାମରେ ଆମେ ଅନୁଭବ କରିଛୁ। କେଦାରନାଥ ଦୁର୍ବିପାକ ପୂର୍ବରୁ 2012 ରେ 5 ଲକ୍ଷ 70 ହଜାର ଲୋକ ଦର୍ଶନ କରିଥିଲେ ଆଉ ତାହା ସେହି ସମୟର ଏକ ରେକର୍ଡ ଥିଲା, 2012 ରେ ଯାତ୍ରୀମାନଙ୍କର ସଂଖ୍ୟାର ଏକ ବହୁତ ବଡ଼ ରେକର୍ଡ ଥିଲା । ଯେତେବେଳେ କରୋନା ସମୟ ଆରମ୍ଭ ହେବା ପୂର୍ବରୁ, 2019 ରେ 10 ଲକ୍ଷରୁ ଅଧିକ ଲୋକ କେଦାରନାଥଙ୍କ ଦର୍ଶନ କରିବା ପାଇଁ ପହଂଚିଥିଲେ। ଅର୍ଥାତ କେଦାରଧାମର ପୁନଃନିର୍ମାଣ ଦ୍ୱାରା ନା କେବଳ ଶ୍ରଦ୍ଧାଳୁମାନଙ୍କର ସଂଖ୍ୟା ବୃଦ୍ଧି ପାଇଛି, ବରଂ ସେଠାକାର ଲୋକମାନଙ୍କର ରୋଜଗାର- ସ୍ୱରୋଜଗାରକୁ ମଧ୍ୟ ଅନେକ ସୁଯୋଗ ଉପଲବ୍ଧ କରାଇଛି।

 

ସାଥୀଗଣ,

ପୂର୍ବରୁ ଯେତେବେଳେ ମଧ୍ୟ ମୁଁ ଉତରାଖଣ୍ଡ ଆସୁଥିଲି, ଅବା ଉତରାଖଣ୍ଡ ଯିବା- ଆସିବା କରୁଥିବା ଲୋକଙ୍କୁ ସାକ୍ଷାତ କରୁଥିଲି, ସେମାନେ କହୁଥିଲେ- ମୋଦୀ ମହାଶୟ, ଦିଲ୍ଲୀରୁ ଦେହରାଦୁନର ଯାତ୍ରା ଗଣେଶପୁର ପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ ବହୁତ ସହଜରେ ହୋଇ ଯାଉଛି, କିନ୍ତୁ ଗଣେଶପୁରରୁ ଦେହରାଡୁନ ପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ ବହୁତ କଷ୍ଟକର ହେଉଛି, ଆଜି ମୁଁ ବହୁତ ଖୁସି ଯେ ଦିଲ୍ଲୀ- ଦେହରାଡୁନ ଅର୍ଥନୈତିକ କରିଡର ଶିଳାନ୍ୟାସ ହୋଇ ସାରିଛି । ଯେତେବେଳେ ଏହା ନିର୍ମାଣ ହୋଇଯିବ, ସେତେବେଳେ ଦିଲ୍ଲୀରୁ ଦେହରାଡୁନ ଯିବା- ଆସିବା କରିବା ପାଇଁ ଯେତେ ସମୟ ଲାଗୁଥିଲା, ତାହା ପ୍ରାୟ ଅଧା ହୋଇଯିବ। ଏଥିରେ ନା କେବଳ ଦେହରାଡୁନ ଲୋକଙ୍କୁ ଲାଭ ମିଳିବ, ବରଂ ହରିଦ୍ୱାର, ମୁଜଫରନଗର, ଶାମଲୀ, ବାଗପତ ଏବଂ ମୀରଠ ଯାଉଥିବା ଲୋକମାନଙ୍କୁ ମଧ୍ୟ ସୁବିଧା ହେବ। ଏହି ଆର୍ôଥକ କରିଡର ଏବେ ଦିଲ୍ଲୀରୁ ହରିଦ୍ୱାର ଯାତାୟାତ ସମୟକୁ ମଧ୍ୟ ହ୍ରାସ କରିଦେବ। ହରିଦ୍ୱାର ରିଂ-ରୋଡ଼ ପ୍ରକଳ୍ପ ଦ୍ୱାରା ହରିଦ୍ୱାର ସହରକୁ ଟ୍ରାଫିକ ଜାମ୍ ଭଳି ବର୍ଷ- ବର୍ଷ ଧରି ଲାଗି ରହିଥିବା ପୁରୁଣା ସମସ୍ୟାରୁ ମଧ୍ୟ ମୁକ୍ତି ମିଳିବ। ଏହାଦ୍ୱାରା କୁମାଉଁ କ୍ଷେତ୍ର ସହିତ ମଧ୍ୟ ସମ୍ପର୍କ ସହଜ ହେବ। ଏହା ବ୍ୟତୀତ ଋଷିକେଶର ପରିଚୟ, ଆମର ଲକ୍ଷ୍ମଣ ଝୁଲା ସେତୁ ନିକଟରେ ଆଉ ଏକ ନୂତନ ସେତୁର ମଧ୍ୟ ଆଜି ଶିଳାନ୍ୟାସ ହୋଇଛି।

ଭାଇ  ଭଉଣୀମାନେ,

ଦିଲ୍ଲୀ- ଦେହରାଡୁନ ଏକ୍ସପ୍ରେସ-ୱେ ପର୍ଯ୍ୟାବରଣ ସୁରକ୍ଷା ସହିତ ଆମ ବିକାଶ ମଡେଲର ମଧ୍ୟ ଏକ ପ୍ରମାଣ ହେବ। ଏଥିରେ ଗୋଟିଏ ପଟେ ଉଦ୍ୟୋଗ କରିଡର ହେବ, ଅପରପକ୍ଷରେ ଏହା ଏସିଆର ସର୍ବ ବୃହତ ତଥା ସୁଉଚ୍ଚ ବନ୍ୟଜନ୍ତୁ କରିଡର ମଧ୍ୟ ହେବ। ଏହି କରିଡର ଯାତାୟାତକୁ ମଧ୍ୟ ସରଳ କରିବ, ବନ୍ୟଜନ୍ତୁଙ୍କୁ ମଧ୍ୟ ସୁରକ୍ଷିତ ଭାବେ ଯାତାୟତ କରିବାରେ ସହାୟତା କରିବ।

ସାଥୀଗଣ,

ଉତରାଖଣ୍ଡରେ ଔଷଧୀୟ ଗୁଣଯୁକ୍ତ ଯେଉଁ ଯେଉଁ ସବୁ ଜଡି- ବୁଟି ଅଛି, ଯେଉଁ ପ୍ରାକୃତିକ ଉତ୍ପାଦ ଅଛି, ତାହାର ଚାହିଦା ସାରା ବିଶ୍ୱରେ ରହିଛି। ଏବେ ଉତରାଖଣ୍ଡର ଏହି ସାମର୍ଥ୍ୟର ମଧ୍ୟ ସମ୍ପୂର୍ଣ୍ଣ ଉପଯୋଗ ହୋଇ ପାରି ନାହିଁ। ଏବେ ଯେଉଁ ଆଧୁନିକ ଅତର ଏବଂ ସୁଗନ୍ଧ ପ୍ରୟୋଗଶାଳା ପ୍ରତିଷ୍ଠା ହୋଇଛି, ତାହା ଉତରାଖଣ୍ଡର ସାମର୍ଥ୍ୟକୁ ଆହୁରି ବୃଦ୍ଧ କରିବ।

ଭାଇ  ଭଉଣୀମାନେ,

ଆମର ପାହାଡ, ଆମର ସଂସ୍କୃତି- ଆମର ଆସ୍ଥାର ଗଡ଼ ହୋଇ ରହିଛି, ଏହା ମଧ୍ୟ ହେଉଛି ଆମ ଦେଶର ସୁରକ୍ଷାର ଦୁର୍ଗ । ପହାଡରେ ରହୁଥିବା ଲୋକଙ୍କର ଜୀବନ ସୁଗମ କରିବା ଦେଶର ସର୍ବୋଚ୍ଚ ପ୍ରାଥମିକତା ମଧ୍ୟରୁ ହେଉଛି ଗୋଟିଏ। କିନ୍ତୁ ଦୁର୍ଭାଗ୍ୟର କଥା ଯେ ଦଶକ- ଦଶକ ଧରି ଯେଉଁମାନେ ସରକାରରେ ରହିଲେ, ସେମାନଙ୍କର ନୀତି ଏବଂ ରଣନୀତିରେ ଦୂର- ଦୂରାନ୍ତ ପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ ଏହି ଚିନ୍ତାଧାରା କେଉଁଠି ନ ଥିଲା। ସେମାନଙ୍କ ପାଇଁ ଉତରାଖଣ୍ଡ ହେଉ ଅବା ହିନ୍ଦୁସ୍ତାନର ଅନ୍ୟାନ୍ୟ ଅଂଚଳ, ସେମାନଙ୍କର ଏକମାତ୍ର ଲକ୍ଷ୍ୟ ରହିଥିଲା, ନିଜର କୋଷ(ଅର୍ଥ) ବୃଦ୍ଧି କରିବା, ନିଜ ଘରକୁ ବୋହି ନେବା, ନିଜର ହିଁ ଧ୍ୟାନ ରଖିବା।

ଭାଇ  ଭଉଣୀମାନେ,

ଆମ ପାଇଁ ଉତରାଖଣ୍ଡ ହେଉଛି, ତପ ଏବଂ ତପସ୍ୟାର ମାର୍ଗ। ବର୍ଷ 2007 ରୁ 14 ମଧ୍ୟରେ ଯେଉଁ କେନ୍ଦ୍ର ସରକାର ଥିଲେ, ସେମାନେ 7 ବର୍ଷରେ ଉତରାଖଣ୍ଡ ରେ କେବଳ, ଆମ ପୂର୍ବରୁ ଯେଉଁ ସରକାର ଥିଲେ ସେମାନେ 7 ବର୍ଷରେ କେଉଁ କାର୍ଯ୍ୟ କଲେ? ପୂର୍ବ ସରକାର 7 ବର୍ଷରେ ଉତରାଖଣ୍ଡରେ କେବଳ 288, 300 କିଲୋମିଟର ମଧ୍ୟ ନୁହେଁ, କେବଳ 288 କିଲୋମିଟର ଜାତୀୟ ରାଜପଥ ନିର୍ମାଣ କରିଥିଲେ । ଯେତେବେଳେ ଆମ ସରକାର ନିଜର 7 ବର୍ଷରେ ଉତରାଖଣ୍ଡରେ 2 ହଜାର କିଲୋମିଟରରୁ ଅଧିକ ଦୀର୍ଘ ଜାତୀୟ ରାଜପଥର ନିର୍ମାଣ କରିଛନ୍ତି । ଆଜି ଆପଣମାନେ କୁହନ୍ତୁ ଭାଇ ଓ ଭଉଣୀମାନେ, ଏହାକୁ ଆପଣମାନେ କାର୍ଯ୍ୟ ବୋଲି ଭାବୁଛନ୍ତି ନା ଭାବୁ ନାହାଁନ୍ତି? କ’ଣ ଏହାଦ୍ୱାରା ଲୋକମାନଙ୍କର ଭଲ ହୋଇଛି ନା ନାହିଁ? ଏହାଦ୍ୱାରା ଉତରାଖଣ୍ଡକୁ ଲାଭ ମିଳିବ ନା ମିଳିବ ନାହିଁ? ଆପଣମାନଙ୍କର ଭବିଷ୍ୟତର ପିଢ଼ୀର ଲାଭ ହେବ ନା ହେବ ନାହିଁ? ଉତରାଖଣ୍ଡର ଯୁବକମାନଙ୍କର ଭାଗ୍ୟ ଖୋଲିବ ନା ଖୋଲିବ ନାହିଁ? କେବଳ ଏତିକି ନୁହେଁ, ପୂର୍ବ ସରକାର ଉତରାଖଣ୍ଡରେ ଜାତୀୟ ରାଜପଥ ଉପରେ 7 ବର୍ଷରେ ପାଖାପାଖି 600 କୋଟି ଟଙ୍କା ଖର୍ଚ୍ଚ କରିଥିଲେ। ଏବେ ଆପଣମାନେ ଟିକେ ଶୁଣି ନିଅନ୍ତୁ। ଯେତେବେଳେ କି ଆମ ସରକାର ଏହି ସାଢ଼େ 7 ବର୍ଷରେ 12 ହଜାର କୋଟି ଟଙ୍କାରୁ ଅଧିକ ଖର୍ଚ୍ଚ କରି ସାରିଛି, କେଉଁଠି 600 କୋଟି ଆଉ କେଉଁଠି 12 ହଜାର କୋଟି ଟଙ୍କା । ଆପଣମାନେ ମୋତେ କୁହନ୍ତୁ, ଆମ ପାଇଁ ଉତରାଖଣ୍ଡର ପ୍ରାଥମିକତା ଅଛି ନା ନାହିଁ? ଆପଣମାନଙ୍କୁ ବିଶ୍ୱାସ ହେଉଛି ନା ହେଉ ନାହିଁ? ଆମେ କରି ଦେଖାଇଛୁ ନା ଦେଖାଇ ନାହୁଁ? ଆମେ ମନ- ପ୍ରାଣ ଦେଇ ଉତରାଖଣ୍ଡ ପାଇଁ କାମ କରିଛୁ ନା କରି ନାହୁଁ?

ଆଉ ଭାଇ  ଭଉଣୀମାନେ,

ଏହା କେବଳ ଏକ ପରିସଂଖ୍ୟାନ ନୁହେଁ । ଯେତେବେଳେ ଭିତିଭୂମି ପାଇଁ ଏତେ ବଡ଼ ପ୍ରକଳ୍ପ ଉପରେ କାର୍ଯ୍ୟ ହୋଇଥାଏ, ସେତେବେଳେ କେତେଗୁଡ଼ିଏ ଜିନିଷର ଆବଶ୍ୟକତା ପଡ଼ିଥାଏ। ସିମେଂଟ ଆବଶ୍ୟକ, ଲୁହା ଆବଶ୍ୟକ, କାଠ ଦରକାର, ଇଟା ଦରକାର, ପଥର ଦରକାର, କାର୍ଯ୍ୟ କରିବା ପାଇଁ ଲୋକମାନଙ୍କର ଆବଶ୍ୟକତା ପଡ଼ିଥାଏ, ଉଦ୍ୟମୀ ଲୋକ ଆବଶ୍ୟକ, ସ୍ଥାନୀୟ ଯୁବକମାନଙ୍କୁ ଅନେକ ପ୍ରକାରର ଲାଭର ସୁଯୋଗ ସୃଷ୍ଟି ହୋଇଥାଏ। ଏହି କାର୍ଯ୍ୟରେ ଯେଉଁ ଶ୍ରମିକ ଲାଗି ଥାଆନ୍ତି, ଇଞ୍ଜିନିୟର ଲାଗି ଥାଆନ୍ତି, ପରିଚାଳନାର ଆବଶ୍ୟକତା ପଡ଼ିଥାଏ, ତାହା ମଧ୍ୟ ଅଧିକାଂଶ ଭାବେ ସ୍ଥାନୀୟ ସ୍ତରରରୁ ହିଁ ଯୋଗାଡ଼ ହୋଇଥାଏ। ଏଥିପାଇଁ ଭିତିଭୂମିର ଏହି ପ୍ରକଳ୍ପ, ନିଜ ସହିତ ଉତରାଖଣ୍ଡରେ ରୋଜଗାରର ଏକ ନୂଆ ଇକୋ- ସିଷ୍ଟମ ସୃଷ୍ଟି କରୁଛି, ହଜାର-ହଜାର ଯୁବକମାନଙ୍କୁ ରୋଜଗାର ଯୋଗାଉଛି। ଆଜି ମୁଁ ଗର୍ବର ସହିତ କହି ପାରୁଛି ପାଂଚ ବର୍ଷ ପୂର୍ବେ ମୁଁ କହିଥିଲି, ଯାହା କହିଥିଲି, ତାହାକୁ ଦ୍ୱିତୀୟ ଥର ପାଇଁ ମନେ ପକାଇବାର ଶକ୍ତି ରାଜନେତାମାନଙ୍କ ମଧ୍ୟରେ ଟିକେ କମ୍ ରହିଥାଏ, କିନ୍ତୁ ମୋ ପାଖରେ ଅଛି। ମନେ ପକାଇ ନିଅନ୍ତୁ, ମୁଁ କ’ଣ କହିଥିଲି ଆଉ ଆଜି ମୁଁ ଗର୍ବର ସହିତ କହୁଛି ଉତରାଖଣ୍ଡର ଜଳ ଏବଂ ଯୌବନ ଉତରାଖଣ୍ଡର କାର୍ଯ୍ୟରେ ହିଁ ଆସୁଛି!

ସାଥୀଗଣ,

ସୀମାବର୍ତୀ ପାହାଡ଼ ଅଂଚଳରେ ଭିତିଭୂମି ଉପରେ ମଧ୍ୟ ପୂର୍ବ ସରକାର ସେତେ ଅଧିକ ଗମ୍ଭୀରତାର ସହିତ କାର୍ଯ୍ୟ କରି ନାହାଁନ୍ତି, ଯେତେ କରିବାର ଉଚିତ ଥିଲା। ସୀମା ପାଖରେ ସଡ଼କ ନିର୍ମାଣ ହେଉ, ସେତୁ ତିଆରି ହେଉ, ଏ ଦିଗରେ ସେମାନେ ଧ୍ୟାନ ଦେଲେ ନାହିଁ। ୱାନ ରାଙ୍କ ୱାନ ପେନସନ ହେଉ, ଆଧୁନିକ ଅସ୍ତ୍ର- ଶସ୍ତ୍ର ହେଉ, ଅବା ପୁଣି ଆତଙ୍କବାଦୀମାନଙ୍କୁ ଉଚିତ ଜବାବ ଦେବା ହେଉ, ଯେଭଳି ସେମାନେ ପ୍ରତ୍ୟେକ କ୍ଷେତ୍ରରେ ସେନା ବାହିନୀକୁ ନିରାଶ କରିବାର, ହତୋତ୍ସାହିତ କରିବାର ଧରି ନିଅନ୍ତୁ ଶପଥ ନେଇଥିଲେ। କିନ୍ତୁ ଆଜି ଯେଉଁ ସରକାର ଅଛନ୍ତି, ସେମାନେ ବିଶ୍ୱର କୌଣସି ଦେଶର ଚାପରେ ଦବି ଯାଉ ନାହାଁନ୍ତି । ଆମେ ହେଉଛୁ ରାଷ୍ଟ୍ର ପ୍ରଥମ, ସଦୈବ ପ୍ରଥମର ମନ୍ତ୍ରରେ ଚାଲୁଥିବା ଲୋକ। ଆମେ ସୀମାବର୍ତୀ ପାହାଡ଼ିଆ ଅଂଚଳରେ ଶହ- ଶହ କିଲୋମିଟର ନୂତନ ସଡ଼କ ନିର୍ମାଣ କରିଛୁ। ପାଣିପାଗ ଏବଂ କଠିନ ଭୌଗୋଳିକ ପରିସ୍ଥିତି ସତ୍ୱେ ଏହି କାର୍ଯ୍ୟ ଦ୍ରୁତ ଗତିରେ କରାଯାଉଛି। ଆଉ ଏହି କାର୍ଯ୍ୟ ହେଉଛି କେତେ ଗୁରୁତ୍ୱପୂର୍ଣ୍ଣ, ଏହା ଉତରାଖଣ୍ଡର ପ୍ରତ୍ୟେକ ପରିବାର, ସେନା ବାହିନୀକୁ ନିଜର ପିଲାମାନଙ୍କୁ ପଠାଉଥିବା ପରିବାର, ବହୁତ ଭଲ ଭାବେ ବୁଝି ପାରୁଛନ୍ତି।

ସାଥୀଗଣ,

ଗୋଟିଏ ସମୟ ଥିଲା, ପାହାଡ଼ ଉପରେ ରହୁଥିବା ଲୋକ, ବିକାଶର ମୁଖ୍ୟ ଧାରା ସହିତ ସାମିଲ ହେବାର କେବଳ ସ୍ୱପ୍ନ ହିଁ ଦେଖୁଥିଲେ। ପିଢ଼ୀ ପରେ ପିଢ଼ୀ ବିତି ଯାଉଥିଲା, ସେମାନେ ଏହା ସ୍ୱପ୍ନ ଦେଖୁଥିଲେ ଆମକୁ କେବେ ପର୍ଯ୍ୟାପ୍ତ ବିଜୁଳି ମିଳିବ, ଆମକୁ କେବେ ପକ୍କା ଘର ତିଆରି ହୋଇ ମିଳିବ? ଆମ ଗାଁ ପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ ସଡ଼କ ଆସିବ ନା ନାହିଁ? ଭଲ ମେଡିକାଲ ସୁବିଧା ମିଳିବ ଅବା ନାହିଁ? ଆଉ ପଳାୟନର ଧାରା ଶେଷରେ କେବେ ବନ୍ଦ ହେବ? କେଜାଣି କେତେଗୁଡ଼ିଏ ପ୍ରଶ୍ନ ସେଠାକାର ଲୋକମାନଙ୍କ ମନରେ ଥିଲା।

କିନ୍ତୁ ସାଥୀଗଣ,

ଯେତେବେଳେ କିଛି କରିବାର ଉତ୍ସାହ ରହିଥାଏ, ସେତେବେଳ ସ୍ୱରୂପ ମଧ୍ୟ ବଦଳି ଯାଇଥାଏ ଏବଂ କାର୍ଯ୍ୟ କରିବାର ଆଭିମୁଖ୍ୟ ମଧ୍ୟ ବଦଳି ଯାଇଥାଏ। ଆଉ ଆପଣମାନଙ୍କର ଏହି ସ୍ୱପ୍ନ ପୂରଣ କରିବା ପାଇଁ ଆମେ ଦିନ- ରାତି ପରିଶ୍ରମ କରୁଛୁ। ଆଜି ସରକାର ଏହି କଥାକୁ ଅପେକ୍ଷା କରୁ ନାହାନ୍ତି ନାଗରିକ ଆପଣଙ୍କ ପାଖକୁ ନିଜର ସମସ୍ୟା ନେଇକରି ଆସିବେ ସେତେବେଳେ ସରକାର କିଛି ଚିନ୍ତା କରିବେ ଆଉ ତା’ ଉପରେ ପଦକ୍ଷେପ ନେବେ। ଏବେ ଏଭଳି ସରକାର ଅଛନ୍ତି ଯେଉଁମାନେ ସିଧାସଳଖ ନାଗରିଙ୍କ ପାଖକୁ ଯାଉଛନ୍ତି। ଆପଣମାନେ ମନେ ପକାନ୍ତୁ, ଗୋଟିଏ ସମୟ ଥିଲା ଯେତେବେଳେ ଉତରାଖଣ୍ଡରେ ଶହେ ପଚିଶ ଲକ୍ଷ ଘରକୁ ପାଇପ୍ ଯୋଗେ ପାଣି ପହଂଚୁ ଥିଲା। ଆଜି ସାଢେ 7 ଲକ୍ଷରୁ ଅଧିକ ଘରେ ପାଇପ୍ ଯୋଗେ ପାଣି ପହଂଚୁଛି। ଏବେ ଘରେ ସିଧାସଳଖ ରୋଷେଇ ଘର ପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ ପାଇପ୍ ଯୋଗେ ପାଣି ଆସୁଛି, ସେତେବେଳେ ମାଆ –ଭଉଣୀମାନେ ମୋତେ ଆଶୀର୍ବାଦ ଦେବେ ନା ଦେବେ ନାହିଁ? ପାଇପ୍ ଯୋଗେ ପାଣି ଆସୁଛି ସେତେବେଳେ ମାଆ –ଭଉଣୀମାନଙ୍କର କଷ୍ଟ ଦୂର ହେଉଛି ନା ହେଉ ନାହିଁ? ସେମାନଙ୍କୁ ସୁବିଧା ମିଳୁଛି ନା ମିଳୁ ନାହିଁ? ଆଉ ଏହି କାର୍ଯ୍ୟ, ଜଳ ଜୀବନ ମିଶନ ଆରମ୍ଭ ହେବାର ଦୁଇ ବର୍ଷ ମଧ୍ୟରେ ଆମେ କରି ଦେଇଛୁ। ଏହାର ବହୁତ ବଡ଼ ଲାଭ ଉତରାଖଣ୍ଡର ମାଆ ମାନଙ୍କୁ ଭଉଣୀମାନଙ୍କୁ, ଏଠାକାର ମହିଳାମାନଙ୍କୁ ହୋଇଛି। ଉତରାଖଣ୍ଡର ମାଆ –ଭଉଣୀ –ଝିଅମାନେ ସଦା ସର୍ବଦା ଆମ ସମସ୍ତଙ୍କ ଉପରେ ଏତେ ସ୍ନେହ ଭାବ ଦେଖାଇଛନ୍ତି। ଆମେ ସମସ୍ତେ ଦିନ -ରାତି ପରିଶ୍ରମ କରି, ସଚ୍ଚୋଟତାର ସହ କାର୍ଯ୍ୟ କରି, ଆମର ଏହି ମାଆ –ଭଉଣୀଙ୍କ ଜୀବନକୁ ସହଜ କରି, ସେମାନଙ୍କର ଋଣ ପରିଶୋଧ କରିବାର ନିରନ୍ତର ପ୍ରୟାସ କରୁଛୁ।

ସାଥୀଗଣ,

ଡବଲ ଇଞ୍ଜିନର ସରକାର ଉତରାଖଣ୍ଡର ସ୍ୱାସ୍ଥ୍ୟ ଭିତିଭୂମି ଉପରେ ମଧ୍ୟ ଅଦ୍ଭୁତ ପୂର୍ବ କାର୍ଯ୍ୟ କରୁଛନ୍ତି। ଉତରାଖଣ୍ଡରେ 3ଟି ନୂତନ ମେଡିକାଲ କଲେଜକୁ ମଞ୍ଜୁରୀ ଦିଆ ଯାଇଛି। ଏତେ ଛୋଟ ରାଜ୍ୟରେ 3ଟି ମେଡିକାଲ କଲେଜ, ଆଜି ହରିଦ୍ୱାର ମେଡିକାଲ କଲେଜର ମଧ୍ୟ ଶିଳାନ୍ୟାସ କରାଯାଇଛି। ଋଷିକେଶ ଏମ୍ସ ସେବା ପ୍ରଦାନ କରୁଛି, କୁମାଉଁରେ ସାଟେଲାଇଟ କେନ୍ଦ୍ର ମଧ୍ୟ ଶୀଘ୍ର ସେବା ପ୍ରଦାନ କରିବା ଆରମ୍ଭ କରିବ। ଟିକାକରଣ କ୍ଷେତ୍ରରେ ମଧ୍ୟ ଉତରାଖଣ୍ଡ ଆଜି ଦେଶର ଅଗ୍ରଣୀ ରାଜ୍ୟ ମଧ୍ୟରେ ରହିଛି, ଆଉ ଏଥିପାଇଁ ମୁଁ ଧାମୀ ମହାଶୟଙ୍କୁ, ତାଙ୍କ ସାଥୀମାନଙ୍କୁ ସମଗ୍ର ଉତରାଖଣ୍ଡରୁ ସରକାରଙ୍କୁ ଶୁଭେଚ୍ଛା ଜଣାଉଛି। ଆଉ ଏହା ପଛରେ ମଧ୍ୟ ଉନ୍ନତ ମେଡିକାଲ ଭିତିଭୂମିର ବହୁତ ବଡ଼ ଭୂମିକା ରହିଛି। ଏହି କରୋନା ସମୟରେ ଉତରାଖଣ୍ଡରେ 50ରୁ ଅଧିକ ନୂତନ ଅମ୍ଳଜାନ ପ୍ଲାଂଟ ମଧ୍ୟ ପ୍ରତିଷ୍ଠା କରାଯାଇଛି।

ସାଥୀଗଣ,

ବହୁତ ଲୋକ ଚାହୁଁଛନ୍ତି, ଆପଣମାନଙ୍କ ମଧ୍ୟରୁ ସମସ୍ତଙ୍କ ମନରେ ଏହି ବିଚାର ବା ଚିନ୍ତାଧାରା ଆସୁଥିବ, ସମସ୍ତେ ଚାହୁଁଥିବେ, ତାଙ୍କର ସନ୍ତାନ ଡାକ୍ତର ହୁଅନ୍ତୁ, ତାଙ୍କର ସନ୍ତାନ ଇଞ୍ଜିନିୟର ହୁଅନ୍ତୁ, ତାଙ୍କର ପିଲା ପରିଚାଳନା(ମ୍ୟାନେଜମେଂଟ) କ୍ଷେତ୍ରକୁ ଆସନ୍ତୁ। କିନ୍ତୁ ଯଦି ନୂତନ ସଂସ୍ଥାନ ହିଁ ନିର୍ମାଣ ହୋଇ ନାହିଁ, ଆସନ ସଂଖ୍ୟା ହିଁ ବଢି ନାହିଁ, ସେତେବେଳେ ଆପଣମାନଙ୍କର ସ୍ୱପ୍ନ ପୂରଣ ହୋଇ ପାରିବ କି, ଆପଣଙ୍କର ପୁଅ ଡାକ୍ତର ହୋଇ ପାରିବ କି, ଆପଣଙ୍କର ଝିଅ ଡାକ୍ତର ହୋଇ ପାରିବ କି? ଆଜି ଦେଶରେ ପ୍ରତିଷ୍ଠା ହେଉଥିବା ନୂତନ ମେଡିକାଲ, ନୂତନ ଆଇଆଇଟି, ନୂତନ ଆଇଆଇଏମ, ବିଦ୍ୟାର୍ଥୀମାନଙ୍କ ପାଇଁ ବୃତିଗତ ପାଠ୍ୟକ୍ରମର ଆସନ ସଂଖ୍ୟା ବୃଦ୍ଧି, ଦେଶର ବର୍ତମାନ ଏବଂ ଭବିଷ୍ୟତ ପିଢୀଙ୍କ ଭବିଷ୍ୟତକୁ ସୁଦୃଢ କରିବାର କାର୍ଯ୍ୟ କରୁଛି। ଆମେ ସାଧାରଣ ମଣିଷର ସାମର୍ଥ୍ୟକୁ ବୃଦ୍ଧି କରି, ତାକୁ ସଶକ୍ତ କରି, ତାହାର କ୍ଷମତା ବଢାଇ, ତାକୁ ସମ୍ମାନର ସହିତ ବଂଚିବାର ନୂତନ ସୁଯୋଗ ଦେଉଛୁ।

ସାଥୀଗଣ,

ସମୟ ସହିତ ଆମ ଦେଶର ରାଜନୀତିରେ ଅନେକ ପ୍ରକାରର ବିକୃତିମାନ ଆସି ଯାଇଛି ଆଉ ଆଜି ଏସଂପର୍କରେ ମଧ୍ୟ ଉତରାଖଣ୍ଡର ପବିତ୍ର ଭୂମିରେ କିଛି କଥା କହିବାକୁ ଚାହୁଁଛି । କିଛି ରାଜନୈତିକ ଦଳ ଦ୍ୱାରା, ସମାଜରେ ଭେଦଭାବ ସୃଷ୍ଟି କରି, କେବଳ ଗୋଟିଏ ସମ୍ପ୍ରଦାୟକୁ, ସେ ନିଜ ଜାତିର ହେଉ, କୌଣସି ସ୍ୱତନ୍ତ୍ର ଧର୍ମର ହେଉ, ଅବା ନିଜର ଛୋଟ ଅଂଚଳର ପରିସରର ହେଉ, ସେହି ଆଡ଼କୁ ଧ୍ୟାନ ଦେବା। ଏହି ପ୍ରୟାସ ହୋଇଛି ଆଉ ସେଥିରେ ହିଁ ସେମାନଙ୍କୁ ଭୋଟ ବ୍ୟାଙ୍କ ଦୃଷ୍ଟିଗୋଚର ହୋଇଛି। ଏତିକି ନିୟନ୍ତ୍ରଣ କରିଦିଅ, ଭୋଟ ବ୍ୟାଙ୍କ କରିଦିଅ, ଗାଡ଼ି ଚାଲୁଥିବ। ଏହି ରାଜନୈତିକ ଦଳ ଗୋଟିଏ ପ୍ରକ୍ରିୟା ମଧ୍ୟ ଆପଣାଇଛନ୍ତି। ସେମାନଙ୍କର ବିକୃତିଗୁଡ଼ିକର ଆଉ ଏକ ରୂପ ଏହା ମଧ୍ୟ ହେଉଛି ଏବଂ ସେହି ରାସ୍ତା ହେଉଛି ଜନତାଙ୍କୁ କେବେ ସୁଦୃଢ଼ ହେବାକୁ ନ ଦେବା, ବାରମ୍ବାର ପ୍ରୟାସ କରିବା ଯେ ଜନତା କେବେ ସୁଦୃଢ଼ ହୋଇ ନ ଯାଆନ୍ତୁ। ସେମାନେ ତ ଏହା ଚାହୁଁଥିଲେ, ଏହି ଜନତା -ଜନାର୍ଦ୍ଦନ ସଦା ସର୍ବଦା ଅସହାୟ ହୋଇ ରୁହନ୍ତୁ, ଅସହାୟ କରିଦିଅ, ଜନତାଙ୍କୁ ନିଜର ମୋହରା କରି ଦିଅ। ଫଳରେ ସେମାନଙ୍କର କ୍ଷମତା ଠିକ- ଠାକ ହୋଇ ରହିବ। ଏହି ବିକୃତ ରାଜନୀତିର ଆଧାର ରହିଛି ଯେ ଲୋକମାନଙ୍କର ଆବଶ୍ୟକତା ପୂରଣ କର ନାହିଁ । ସେମାନଙ୍କୁ ଆଶ୍ରିତ କରିରଖ। ଏମାନଙ୍କର ସମସ୍ତ ପ୍ରୟାସ ଏହି ଦିଗରେ ହୋଇଛି ଯେ ଜନତା -ଜନାର୍ଦ୍ଦନଙ୍କୁ କେବେ ଶକ୍ତିଶାଳୀ କରିବାକୁ ଦେବା ନାହିଁ। ଦୁର୍ଭାଗ୍ୟକୁ ଏହି ରାଜନୈତିକ ଦଳମାନେ ଲୋକମାନଙ୍କ ମଧ୍ୟରେ ଏହି ଚିନ୍ତାଧାରା ସୃଷ୍ଟି କରିଦେଲେ ଯେ ସରକାର ହେଉଛନ୍ତି ଆମର ମାଆ-ବାପା। ଏବେ ଯାହା କିଛି ମଧ୍ୟ ମିଳିବ ସରକାରଙ୍କ ଠାରୁ ହିଁ ମିଳିବ, ତେବେ ଯାଇ ଆମର ଗୁଜୁରାଣ ମେଂଟିବ। ଲୋକମାନଙ୍କ ମନରେ ଏହା ଘର କରି ନେଲା। ଅର୍ଥାତ ଗୋଟିଏ ପଟେ ଦେଶର ସାଧାରଣ ମଣିଷର ସ୍ୱାଭିମାନ, ତାହାର ଗୌରବ ବୁଝି -ବିଚାରି ରଣନୀତି ଦ୍ୱାରା ପଦଦଳିତ କରି ଦିଆଗଲା, ତାକୁ ଆଶ୍ରିତ କରି ଦିଆଗଲା ଏବଂ ଏହା ଦୁଃଖର କଥା ଯେ ଏହାସବୁ କରି ଚାଲିଲେ ଆଉ କେବେ କାହାକୁ ସାମାନ୍ୟତମ ଧାରଣା ହେବାକୁ ଦେଲେ ନାହିଁ। କିନ୍ତୁ ଏହି ଚିନ୍ତାଧାରା ଏହି ଅଭିବ୍ୟକ୍ତିରୁ ଭିନ୍ନ, ଆମେ ଏକ ନୂତନ ରାସ୍ତା ବାଛିଚୁ। ଆମେ ଯେଉଁ ରାସ୍ତା ବାଛିଚୁ, ତାହା ହେଉଛି କଠିନ, ସେହି ପଥ ହେଉଛି କଷ୍ଟକର କିନ୍ତୁ ଦେଶ ହିତରେ, ଦେଶର ଲୋକଙ୍କ ହିତ ପାଇଁ ହେଉଛି । ଆଉ ଆମର ମାର୍ଗ ହେଉଛି –ସବକା ସାଥ୍- ସବକା ବିକାଶ ଅର୍ଥାତ ସମସ୍ତଙ୍କ ସହିତ -ସମସ୍ତଙ୍କର ବିକାଶ। ଆମେ କହିଛୁ ଯାହା ମଧ୍ୟ ଯୋଜନା ଆଣିବୁ, ସମସ୍ତଙ୍କ ପାଇଁ ଆଣିବୁ, ଭେଦଭାବ ବିନା ଆଣିବୁ। ଆମେ ଭୋଟ ବ୍ୟାଙ୍କର ରାଜନୀତିକୁ ଆଧାର କରିବୁ ନାହିଁ ବରଂ ଲୋକଙ୍କ ସେବାକୁ ପ୍ରାଥମିକତା ଦେବୁ। ଆମର ଅଭିବ୍ୟକ୍ତି ରହିଲା ଯେ ଦେଶକୁ ସୁଦୃଢ଼ କରିବାର ଅଛି। ଆମର ଦେଶ କେବେ ସୁଦୃଢ଼ ହେବ? ଯେତେବେଳେ ପ୍ରତ୍ୟେକ ପରିବାର ସୁଦୃଢ଼ ହେବ। ଆମେ ଏଭଳି ସମାଧାନ ବାହାର କଲୁ, ଏଭଳି ଯୋଜନାମାନ ପ୍ରସ୍ତୁତ କଲୁ ଯାହା ଭୋଟ ବ୍ୟାଙ୍କ ତରାଜୁରେ ଠିକ ଭାବେ ନ ରହୁ, କିନ୍ତୁ ତାହା ବିନା ଭେଦଭାବରେ ଆପଣଙ୍କ ଜୀବନ ସହଜ କରିବ, ଆପଣମାନଙ୍କୁ ନୂତନ ସୁଯୋଗ ପ୍ରଦାନ କରିବ, ଆପଣମାନଙ୍କୁ ଶକ୍ତିଶାଳୀ କରିବ। ଆଉ ଆପଣମାନେ ମଧ୍ୟ ଚାହିଁବେ ନାହିଁ ଯେ ନିଜର ପିଲାମାନଙ୍କ ପାଇଁ ଏକ ଏଭଳି ବାତାବରଣ ଛାଡ଼ିଯିବା, ଯେଉଁଥିରେ ଆପଣମାନଙ୍କର ପିଲାମାନେ ସଦା ସର୍ବଦା ଆଶ୍ରିତ ଜୀବନ ବିତାନ୍ତୁ। ଯେଉଁସବୁ ସମସ୍ୟା ଆପଣମାନଙ୍କୁ ପାରମ୍ପରିକ ଭାବେ ମିଳିଛି, ଯେଉଁ ଅସୁବିଧା ମଧ୍ୟରେ ଆପଣମାନଙ୍କୁ ଜୀବନ ବିତାଇବାକୁ ପଡ଼ିଛି, ଆପଣମାନେ ମଧ୍ୟ ଚାହିଁବେ ନାହିଁ ଯେ ଆପଣ ମଧ୍ୟ ସେହି ପରମ୍ପରା, ସେହି ଅସୁବିଧା ସବୁକୁ ପିଲାମାନଙ୍କୁ ଦେଇକରି ଯିବା ପାଇଁ । ଆପଣମାନଙ୍କୁ ଆମେ ଆଶ୍ରିତ ନୁହେଁ ବରଂ ଆତ୍ମ ନିର୍ଭରଶୀଳ କରାଇବାକୁ ଚାହୁଁଛୁ । ଯେପରି ଆମେ କହିଥିଲୁ ଯେ ଯେଉଁମାନେ ହେଉଛନ୍ତି ଆମର ଅନ୍ନଦାତା ସେମାନେ ମଧ୍ୟ ଉର୍ଜ୍ଜାଦାତା ହୁଅନ୍ତୁ। ତେବେ ଏଥିପାଇଁ ଆମେ ଚାଷ ଜମିର ନିକଟରେ ହିଡ଼ରେ ସୋଲାର ପ୍ୟାନେଲ ଲଗାଇବାର କୁସୁମ ଯୋଜନା ନେଇକରି ଆସିଲୁ। ଏହାଦ୍ୱାରା କୃଷକଙ୍କ କ୍ଷେତରେ ବିଜୁଳି ଉତ୍ପାଦନ କରିବାର ସୁବିଧା ହେଲା। ନା ଆମେ କୃଷକମାନଙ୍କୁ କାହାର ଆଶ୍ରିତ କଲୁ ଆଉ ନା ହିଁ ତା’ମନରେ ଏହି ଭାବ ଆସିଲା ଯେ ମାଗଣାରେ ବିଜୁଳି ନେଉଛୁ। ଆଉ ଏହି ପ୍ରୟାସରେ ମଧ୍ୟ ତାକୁ ବିଜୁଳି ମିଳିଲା ଆଉ ଦେଶ ଉପରେ ମଧ୍ୟ ଚାପ ପଡ଼ିଲା ନାହିଁ ଏବଂ ସେ ଗୋଟିଏ ପକ୍ଷରେ ଆତ୍ମନିର୍ଭର ହେଲା ଆଉ ଏହି ଯୋଜନା ଦେଶର ଅନେକ ସ୍ଥାନରେ ଆମର କୃଷକମାନେ କାର୍ଯ୍ୟକାରୀ କରିଛନ୍ତି। ସେହିପରି ଆମେ ସାରା ଦେଶରେ ଉଜାଲା ଯୋଜନା ଆରମ୍ଭ କରିଥିଲୁ। ପ୍ରୟାସ ଥିଲା ଯେ ଘରେ କମ୍ ବିଜୁଳି ବିଲ ଆସୁ। ଏଥିପାଇଁ ସାରା ଦେଶରେ ଆଉ ଏଠାରେ ଉତରାଖଣ୍ଡରେ କୋଟି -କୋଟି ଏଲଇଡ଼ି ବଲବ୍ ଦିଆଗଲା ଆଉ ପୂର୍ବରୁ ଏଲଇଡ଼ି ବଲବ୍ 300-400 ଟଙ୍କାରେ ଆସୁଥିଲା, ଆମେ ତାହାକୁ 40-50 ଟଙ୍କାକୁ ନେଇ ଆସିଲୁ। ଆଜି ପ୍ରାୟତଃ ପ୍ରତ୍ୟେକ ଘରେ ଏଲଇଡ଼ି ବଲବର ବ୍ୟବହାର ହେଉଛି ଆଉ ଲୋକଙ୍କ ବିଜୁଳି ବିଲ ମଧ୍ୟ କମ୍ ଆସୁଛି। ଅନେକ ଘରେ ଯେଉଁମାନେ ମଧ୍ୟମବର୍ଗ, ନିମ୍ନ ମଧ୍ୟମବର୍ଗ ପରିବାର ଅଛନ୍ତି, ପ୍ରତ୍ୟେକ ମାସରେ 500-600 ଟଙ୍କା ପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ ବିଜୁଳି ବିଲ କମ୍ ହୋଇଛି।

ସାଥୀଗଣ,

ଏହିପରି ଆମେ ମୋବାଇଲ ଫୋନ୍ ଦର ଶସ୍ତା କଲୁ, ଇଂଟରନେଟ୍ ଶସ୍ତା କଲୁ, ଗାଁ-ଗାଁରେ ସାଧାରଣ ସେବାକେନ୍ଦ୍ର ଖୋଲା ଯାଉଛି, ଅନେକ ସୁବିଧା ଗାଁରେ ପହଂଚୁଛି। ଏବେ ଗାଁର ଲୋକଙ୍କୁ ରେଳ ଟିକଟ ସଂରକ୍ଷଣ କରିବା ହେଉ, ତେବେ ତାଙ୍କୁ ସହର ଆସିବାକୁ ପଡ଼ୁନାହିଁ, ଗୋଟିଏ ଦିନ ନଷ୍ଟ କରିବାକୁ ପଡ଼ୁନାହିଁ, 100-200-300 ଟଙ୍କା ବସ୍ ଭଡ଼ା ଦେବାକୁ ପଡ଼ୁନାହିଁ । ସେ ନିଜ ଗାଁରେ ହିଁ ସାଧାରଣ ସେବାକେନ୍ଦ୍ରରେ ଅନ୍ ଲାଇନ୍ ରେଳ ଟିକଟ ବୁକିଂ କରାଇ ପାରୁଛି । ସେହିପରି ଆପଣମାନେ ଦେଖିଥିବେ ଏବେ ଉତରାଖଣ୍ଡରେ ହୋମ ଷ୍ଟେ, ପ୍ରାୟ ପ୍ରତ୍ୟେକ ଗାଁରେ ତାହା କଥା ପହଂଚି ସାରିଛି। ଏବେ କିଛି ସମୟ ପୂର୍ବରୁ ମୋତେ ଉତରାଖଣ୍ଡର ଲୋକମାନଙ୍କ ସହିତ କଥା ହେବାର ସୁଯୋଗ ମଧ୍ୟ ମିଳିଥିଲା, ଯେଉଁମାନେ ବହୁତ ସଫଳତାର ସହିତ ହୋମ ଷ୍ଟେ ଚଳାଉଛନ୍ତି। ଯେତେବେଳେ ଏତେ ଯାତ୍ରୀ ଆସିବେ, ପୂର୍ବ ତୁଳନାରେ ଦୁଇ ଗୁଣା -ତିନି ଗୁଣା ଯାତ୍ରୀ ଆସିବା ଆରମ୍ଭ ହୋଇଛି। ଯେତେବେଳେ ଏତେ ଯାତ୍ରୀ ଆସିବେ, ସେତେବେଳେ ହୋଟେଲର ଉପଲବ୍ଧତାର ପ୍ରଶ୍ନ ଉଠିବା ହେଉଛି ସ୍ୱାଭାବିକ ଆଉ ରାତା -ରାତି ଏତେ ହୋଟେଲ ମଧ୍ୟ ତିଆରି ହୋଇ ପାରିବ ନାହିଁ। କିନ୍ତୁ ପ୍ରତ୍ୟେକ ଘରେ ଗୋଟିଏ -ଗୋଟିଏ ବଖରା ତିଆରି କରାଯାଇ ପାରିବ, ଭଲ ସୁବିଧା ସହିତ ତିଆରି କରାଯାଇ ପାରିବ। ଆଉ ମୋର ବିଶ୍ୱାସ ଯେ, ଉତରାଖଣ୍ଡ, ହୋମ ଷ୍ଟେ ତିଆରି କରିବାରେ, ସୁବିଧାଗୁଡ଼ିକର ସମ୍ପ୍ରସାରଣ କରିବାରେ, ସମଗ୍ର ଦେଶକୁ ଏକ ନୂତନ ପଥ ଦେଖାଇ ପାରିବ।

ସାଥୀଗଣ,

ଏହି ପ୍ରକାରର ପରିବର୍ତନ ଆମେ ଦେଶର ପ୍ରତ୍ୟେକ କୋଣ -ଅନୁକୋଣରେ ଆଣି ପାରୁଛୁ। ଏହିଭଳି ପରିବର୍ତନ ଦ୍ୱାରା ଦେଶ ଏକବିଂଶ ଶତାବ୍ଦୀରେ ଆଗକୁ ବଢ଼ିବ, ଏହି ଧରଣର ପରିବର୍ତନ ଉତରାଖଣ୍ଡର ଲୋକମାନଙ୍କୁ ଆତ୍ମନିର୍ଭର କରିବ।

ସାଥୀଗଣ,

ସମାଜର ଆବଶ୍ୟକତା ପାଇଁ କିଛି କରିବା ଏବଂ ଭୋଟ ବ୍ୟାଙ୍କ କରିବା ପାଇଁ କିଛି କରିବା, ଉଭୟ ମଧ୍ୟରେ ବହୁତ ବଡ଼ ପ୍ରଭେଦ ରହିଛି। ଯେତେବେଳେ ଆମ ସରକାର ଗରିବ ମାନଙ୍କୁ ମାଗଣା ଘର ତିଆରି କରି ଦେଇଥାନ୍ତି, ସେତେବେଳେ ତାହା ତାଙ୍କ ଜୀବନର ସବୁଠାରୁ ବଡ଼ ଚିନ୍ତା ଦୂର କରିଥାଏ। ଯେତେବେଳେ ଆମ ସରକାର ଗରିବମାନଙ୍କୁ 5 ଲକ୍ଷ ଟଙ୍କା ପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ ମାଗଣା ଚିକିତ୍ସାର ସୁବିଧା ଦେଇଥାନ୍ତି, ସେତେବେଳେ ତାହା ତାଙ୍କୁ ଜମିବାଡ଼ି ବିକ୍ରି କରିବାରୁ ବଂଚାଇଥାଏ, ତାଙ୍କୁ କରଜର କୁଚକ୍ରରେ ଫସିବାରୁ ବଂଚାଇଥାଏ। ଯେତେବେଳେ ଆମ ସରକାର କରୋନା କାଳରେ ପ୍ରତ୍ୟେକ ଗରିବଙ୍କୁ ମାଗଣା ଖାଦ୍ୟାନ୍ନ ସୁନିଶ୍ଚିତ କରିଥାଏ, ସେତେବେଳେ ତାକୁ ଭୋକିଲା ରହିବାରୁ ବଂଚାଇଥାଏ, ମୋତେ ଜଣାଅଛି ଯେ ଦେଶର ଗରିବ, ଦେଶର ମଧ୍ୟମବର୍ଗ ଏହି ସତ୍ୟତାକୁ ବୁଝିଥାଆନ୍ତି। ସେତେବେଳେ ପ୍ରତ୍ୟେକ କ୍ଷେତ୍ର, ପ୍ରତ୍ୟେକ ରାଜ୍ୟରୁ ଆମ କାର୍ଯ୍ୟକୁ, ଆମର ଯୋଜନାଗୁଡ଼ିକୁ ଜନତା ଜନାର୍ଦ୍ଦନଙ୍କ ଆଶୀର୍ବାଦ ମିଳିଥାଏ ଆଉ ସର୍ବଦା ମିଳୁଥିବ।

ସାଥୀଗଣ,

ସ୍ୱାଧୀନତାର ଏହି ଅମୃତ କାଳରେ, ଦେଶ ଯେଉଁ ପ୍ରଗତିର ବେଗ ଧରିଛି ତାହା ଏବେ ଆଉ ଅଟକିବ ନାହିଁ, ଆଉ ରହିଯିବ ନାହିଁ ଏବଂ ଏହା ଥକି ଯିବ  ନାହିଁ ବରଂ ଆହୁରି ଅଧିକ ବିଶ୍ୱାସ ଏବଂ ସଂକଳ୍ପ ସହିତ ଆଗକୁ ବଢ଼ିବ। ଆଗାମୀ 5 ବର୍ଷ ଉତରାଖଣ୍ଡକୁ ରଜତ ଜୟନ୍ତି ଆଡ଼କୁ ନେଇଯିବ। ଏଭଳି କୌଣସି ଲକ୍ଷ୍ୟ  ନାହିଁ ଯାହା ଉତରାଖଣ୍ଡ ହାସଲ କରି ପାରିବ ନାହିଁ। ଏଭଳି କୌଣସି ସଂକଳ୍ପ ନାହିଁ ଯାହା ଏହି ଦେବଭୂମିରେ ସିଦ୍ଧ ହୋଇ ପାରିବ ନାହିଁ। ଆପଣମାନଙ୍କ ପାଖରେ ଧାମୀ ମହାଶୟଙ୍କ ରୂପରେ ଯୁବ ନେତୃତ୍ୱ ମଧ୍ୟ ଅଛି, ତାଙ୍କର ଅନୁଭବୀ ଟିମ ମଧ୍ୟ ଅଛି। ଆମ ପାଖରେ ବରିଷ୍ଠ ନେତାମାନଙ୍କର ବହୁତ ବଡ଼ ଶୃଙ୍ଖଳା ଅଛି। 30-30 ବର୍ଷ,  40-40 ବର୍ଷ ଅନୁଭବ ସହିତ ନେତାମାନଙ୍କର ଟିମ୍ ଅଛି, ଯିଏ ଉତରାଖଣ୍ଡର ଉଜ୍ଜ୍ୱଳ ଭବିଷ୍ୟତ ପାଇଁ ସମର୍ପିତ ଅଛନ୍ତି।

 

ଆଉ ମୋର ପ୍ରିୟ ଭାଇ  ଭଉଣୀମାନେ,

ଯାହା ସାରା ଦେଶରେ ଖେଳେଇ ହୋଇ ରହିଛି, ତାହା ଉତରାଖଣ୍ଡକୁ ସୁନ୍ଦର କରି ପାରିବ ନାହିଁ। ଆପଣମାନଙ୍କ ଆଶୀର୍ବାଦରେ ବିକାଶର ଏହି ଡବଲ ଇଞ୍ଜିନ ଉତରାଖଣ୍ଡର ଦ୍ରୁତ ବିକାଶ କରି ଚାଲିବ, ଏହି ବିଶ୍ୱାସର ସହିତ ମୁଁ ପୁଣି ଆପଣ ସମସ୍ତଙ୍କୁ ଶୁଭେଚ୍ଛା ଜଣାଉଛି। ଆଜି ଯେତେବେଳେ ଦେବଭୂମିକୁ ଆସିଛି, ବୀର ମାତାମାନଙ୍କର ଭୂମିକୁ ଆସିଛି, ସେତେବେଳେ କିଛି ଭାବ ପୁଷ୍ପ, କିଛି ଶ୍ରଦ୍ଧାସୁମନ ଅର୍ପଣ କରୁଛି, ମୁଁ କିଛି ପଂକ୍ତିର ସହିତ ନିଜର କଥା ସମାପ୍ତ କରୁଛି-

ଯେଉଁଠାରେ ପବନ ବହେ ସଂକଳ୍ପ ପାଇଁ,

ଯେଉଁଠାରେ ପର୍ବତ ଗର୍ବ ଶିଖାଇଥାଏ,

ଯେଉଁଠାରେ ଉଚ୍ଚ ନିଚ୍ଚ ସମସ୍ତ ପଥ

ବାସ୍ ଭକ୍ତିର ସ୍ୱରରେ ଗାଇ ଥାଆନ୍ତି,

ସେହି ଦେବଭୂମିର ଧ୍ୟାନ ଦ୍ୱାରା ହିଁ

ସେହି ଦେବଭୂମିର ଧ୍ୟାନ ଦ୍ୱାରା ହିଁ

ମୁଁ ସର୍ବଦା ଧନ୍ୟ ହୋଇ ଯାଉଛି

ଏହା ମୋର ଭାଗ୍ୟ,

ମୋର ସୌଭାଗ୍ୟ,

ମୁଁ ତୁମକୁ ମୁଣ୍ଡ ନୁଆଇଁ ପ୍ରଣାମ କରୁଛି

ମୁଁ ତୁମକୁ ମୁଣ୍ଡ ନୁଆଇଁ ପ୍ରଣାମ କରୁଛି

ଆଉ ଧନ୍ୟ-ଧନ୍ୟ ହୋଇ ଯାଉଛି

ତୁମେ ହେଉଛ ଭାରତ ମାତାର ପଣତ

ତୁମେ ହେଉଛ ଜୀବନର ଖରା-ଛାଇ

କେବଳ ଛୁଇଁ ଦେଲେ ହିଁ ମୁକ୍ତି ପାଇଯିବ

ସବୁଠାରୁ ପବିତ୍ର ସେହି ଧରଣୀ ହେଉଛ ତୁମେ

କେବଳ ତନ-ମନକୁ ସମର୍ପଣ ଦ୍ୱାରା

ମୁଁ ଦେବଭୂମିକୁ ଆସିଥାଏ

ମୁଁ ଦେବଭୂମିକୁ ଆସିଥାଏ

ଏହା ମୋର ଭାଗ୍ୟ,

ମୋର ସୌଭାଗ୍ୟ,

ମୁଁ ତୁମକୁ ମୁଣ୍ଡ ନୁଆଇଁ ପ୍ରଣାମ କରୁଛି

ମୁଁ ତୁମକୁ ମୁଣ୍ଡ ନୁଆଇଁ ପ୍ରଣାମ କରୁଛି

ଆଉ ଧନ୍ୟ-ଧନ୍ୟ ହୋଇ ଯାଉଛି

ଯେଉଁଠାରେ ଆଞ୍ଜୁଳିରେ ଗଙ୍ଗାଜଳ ଥାଏ

ଯେଉଁଠାରେ ପ୍ରତ୍ୟେକଙ୍କର ମନ କେବଳ ନିଶ୍ଛଳ ଥାଏ

ଯେଉଁଠାରେ ଗାଁଗାଁରେ ଦେଶଭକ୍ତ

ଯେଉଁଠାରେ ନାରୀମାନଙ୍କ ନିକଟରେ ପ୍ରକୃତ ବଳ ଥାଏ

ସେହି ଦେବଭୂମିର ଆଶୀର୍ବାଦ ପାଇଁ

ମୁଁ ଚାଲି ଯାଇଥାଏ

ସେହି ଦେବଭୂମିର ଆଶୀର୍ବାଦ ପାଇଁ

ମୁଁ ଚାଲି ଯାଇଥାଏ

ଏହା ମୋର ଭାଗ୍ୟ,

ମୋର ସୌଭାଗ୍ୟ,

ମୁଁ ତୁମକୁ ମୁଣ୍ଡ ନୁଆଇଁ ପ୍ରଣାମ କରୁଛି

ମୁଁ ତୁମକୁ ମୁଣ୍ଡ ନୁଆଇଁ ପ୍ରଣାମ କରୁଛି

ଆଉ ଧନ୍ୟ-ଧନ୍ୟ ହୋଇ ଯାଉଛି

ମାଣ୍ଡିଆର ରୁଟି

ହୁକ୍କାର ଧୂଆଁ

ପ୍ରତ୍ୟେକଙ୍କ ମନ ହୋଇଥାଏ

ଶିବ ଜୀଙ୍କର ଜପ

ଋଷି-ମୁନୀଙ୍କର ଏହି

ଏହି ତପ ଭୂମି

କେତେ ବୀରଙ୍କର

ଏହା ହେଉଛି ଜନ୍ମଭୂମି

ମୁଁ ଦେବଭୂମିକୁ ଆସିଥାଏ,

ମୁଁ ତୁମକୁ ମୁଣ୍ଡ ନୁଆଇଁ ପ୍ରଣାମ କରୁଛି

ଆଉ ଧନ୍ୟ-ଧନ୍ୟ ହୋଇ ଯାଉଛି

ମୁଁ ତୁମକୁ ମୁଣ୍ଡ ନୁଆଇଁ ପ୍ରଣାମ କରୁଛି

ଆଉ ଧନ୍ୟ-ଧନ୍ୟ ହୋଇ ଯାଉଛି

ମୋ ସହିତ କୁହନ୍ତୁ, ଭାରତ ମାତା କୀ ଜୟ! ଭାରତ ମାତା କୀ ଜୟ! ଭାରତ ମାତା କୀ ଜୟ!

ବହୁତ –ବହୁତ ଧନ୍ୟବାଦ!