Good infrastructure has the potential to transform the nation: PM

Published By : Admin | November 5, 2015 | 17:34 IST
PM Modi lays foundation Stone of NHAI Projects in Sonepat, Haryana
If Infrastructure improves, quality of life also enhances: PM Modi
Good infrastructure has the potential to transform nations: PM
These roads won't only carry the vehicles, these roads would lead Haryana towards development: PM
There are so many districts not connected with a national highway. Bharat Mala project will change that: PM
We have made attempts to transform the railways- increase speed, extension, expansion, better stations. Lot of initiatives are happening: PM
We are dedicated to provide 24/7 power supply to the 18,000 villages that still don not have electrification: PM Modi

कभी-कभी लोगों के मन में विचार आता है कि पैसे होते हैं तो रास्‍ते बनते हैं लेकिन हकीकत ये है अगर रास्‍ते बनते हैं तो फिर पैसे अपने-आप बनना शुरू हो जाते हैं। आज के युग में विकास की सबसे पहली प्राथमिक आवश्‍यकता होती है Infrastructure चाहे वो बिजली की बात हो, पानी की हो, सड़क की हो, और जहां-जहां Infrastructure पहुंचता है वहां-वहां विकास की रफ्तार तेज होती है। Quality of life में भी बहुत बड़ा बदलाव, जब इस प्रकार की सुविधाएं तैयार होती हैं तब होता है। लेकिन ज्‍यादातर हमारे देश में सरकारें दुविधा में रहती हैं, उनको लगता है कि किसी मतदाता को कोई लाभ मिलेगा तो, तो चुनाव में लाभ मिलेगा लेकिन अगर सड़क बनती है तो लोगों को लगता है उसमें क्‍या है भई ये तो सरकार का काम है, मेरा क्‍या हुआ। और ये दुविधा कई वर्षों से हमारे देश में चल रही है। और शायद ये दुविधा ही हमारे देश में विकास की सबसे बड़ी रुकावट है। जो समाज में दलित है, पीडि़त है, शोषित है, वंचित है, उनकी चिंता करना, विकास के फल उन तक पहुंचें, विकास की यात्रा में उनकी समान भागीदारी हो, ये तो सुनिश्चित करना राज्‍य की प्राथमिकता होती ही है, होनी भी चाहिए। लेकिन साथ-साथ अगर सर्वांगीण विकास करना है, लंबे अर्से तक लोगों को आत्‍मनिर्भर बनाने की दिशा में आगे बढ़ना है, ये बहुत आवश्‍यक होता है कि Infrastructure को बल दिया जाए।

हरियाणा छोटा प्रदेश है लेकिन करीब-करीब 32 हजार करोड़ रुपये की योजनाएं सिर्फ roads के लिए आएं, ये छोटी बात नहीं है। ये 32 हजार करोड़ रुपये लगते हैं तो इलाके के नौजवानों को रोजगार भी मिलता है, मजदूरी करने वालों को भी काम मिलता है, लेकिन जब व्‍यवस्‍था खड़ी होती है तो विकास की गति भी बहुत तेज होती है।

आप में से अगर किसी को अध्‍ययन करना है तो कोरिया एक उत्‍तम नमूना है कि कोरिया कहां-से-कहां पहुंचा और वहां की शुरूआत, वहां के शासकों ने इस बात से की कि कोरिया के बीच से गुजरता हुआ एक बहुत बड़ा आधुनिक Highway बनाया जाए। बड़ा विवाद हुआ था उस देश में। विवाद इस बात का हुआ कि देश गरीब है, एक रोड के लिए इतने पैसे लगा रहे हो, स्‍कूल नहीं है, अस्‍पताल नहीं है, गरीबी है, और अब रोड के लिए इतने अरबों-खरबों लगा रहे हो। बड़ा विवाद हुआ था लेकिन उस समय के शासकों ने इन सारे आरोप-प्रत्‍यारोपों के बीच भी पूरे कोरिया के बीच से एक उत्‍तम रास्‍ता बनाने का तय कर लिया और बनाया। और उस एक रास्‍ते ने पूरे कोरिया के जीवन को बदल दिया। आज दुनिया के समृद्ध देशों में कोरिया का नाम आ गया है।

Infrastructure की ये ताकत होती है और इसलिए मार्ग के क्षेत्र में, हमारे नितिन गडकरी जी के नेतृत्‍व में शायद पिछले 60 साल में इतने व्‍यापक रूप से मार्ग निर्माण के काम पर कल्‍पना तक नहीं की गई होगी। एक तरफ भारतमाला योजना है, दूसरी तरफ सेतुभारतम योजना है। अटल बिहारी वाजपेयी जी ने भारत को उत्‍तर से दक्षिण, पूर्व से पश्चिम जोड़ने के लिए एक Golden चतुष्‍क का निर्माण करने का बीड़ा उठाया और उस काम में इतनी तेजी आई कि उनके कार्यकाल में जितना काम पूरा हुआ, उस काम को आज भी हिन्‍दुस्‍तान के विकास में एक अहम भूमिका अदा हो रही है, इस रूप में माना गया से है।

ये जो रास्‍ते बनने वाले हैं, वो रास्‍ते सिर्फ हमारे Vehicles को ले जाने वाले रास्‍ते नहीं हैं। ये मार्ग का निर्माण हरियाणा को गति देने वाला निर्माण है, ये मार्ग का निर्माण हरियाणा को विकास की नई ऊंचाईयों पर तेज गति से पहुंचाने का अभियान है।

सागरमाला योजना के तहत हिन्‍दुस्‍तान के समुद्र तट, उस समुद्र तट के साथ वो Infrastructure जोड़ा जाए ताकि हिन्‍दुस्‍तान का हर कोना सामुद्रिक व्‍यापार के लिए जहां जाना हो, उसको अच्‍छे से अच्‍छा तेज गति से connectivity मिले ताकि देश में व्‍यापार को बढ़ावा मिल सकता है। अगर अच्‍छा Infrastructure है और हिमाचल के apple हैं, उनको समुद्री मार्ग से दुनिया में कहीं पहुंचाना है, तेज गति से अगर पहुंचा दिया तो वो किसान भी सुखी होता है, और जहां पहुंचता है वहां भी अच्‍छा माल पहुंचता है। यानी एक प्रकार से इन सुविधाओं से गांव गरीब किसान भी जो मेहनत करके पैदा करता है, अच्‍छे बाजार में सही समय पर पहुंच करके अपने आर्थिक विकास की यात्रा को गति दे सकते हैं। और इसलिए हमारे बंदरों के साथ, सामुद्रिक बंदरों के साथ, सागरमाला के तहत road connectivity देने का अभियान है।

सेतुभारतम, आपने देखा होगा हमारे देश में दो तरफ सड़क बनी है, बीच में से रेल जा रही है, ऊपर पुलियां नहीं बन रही हैं, रोड खराब हो रहा है। वर्षों तक ये चलता था, कभी रेल permission नहीं दे रही है, कभी रोड वाले काम नहीं करते हैं। नितिन जी ने आ करके बीड़ा उठाया, रेल और रोड के बीच में सामंजस्‍य बन गया, और एक formula बनाएं कि अगर इतने parameter पूरे होते हैं तो permission आपो-आप मिल जाएगी, अब नीचे भले रेल जाती है, ऊपर bridge बनाने का काम चालू करो।

इतनी तेज गति से काम बढ़ रहा है, आपको हैरानी होगी। हमारे देश में कहीं रेल गुजर रही है और गांव विकसित हुआ। गांव को एक छोर इस तरफ है रेलवे के, दूसरा उस तरफ है। पानी की पाईप लाईन डालनी है तो railway department दो-दो, चार-चार साल तक permission नहीं देता। और उसके कारण एक ही गांव, बीच में से रेल जा रही, उधर पानी नहीं पहुंच रहा है। हमने कुछ नियम ऐसे बनाए हैं कि Infrastructure में इस प्रकार की जो कठिनाईयां हैं वो समय-सीमा में निश्चित parameter के तहत तत्‍काल लागू की जाएं और इसके कारण इतने काम जो अटके पड़े थे उनको गति मिली।

मैं इन दिनों हर महीने में एक बार राज्यों के मुख्य सचिवों के साथ बैठता हूं, video conference करता हूं और जितने project अटके पड़े हें, वो क्यों अटके हैं, किसके कारण अटके हैं, उसकी जरा पूछताछ करता हूं। आपको हैरानी होगी, पिछले 5-6 महीनों से मेरा ये अभियान चल रहा है। अब तक करीब चाल लाख करोड़ रुपए के अटके हुए project काम करना शुरू कर दिए हैं। सेतू भारतम के द्वारा इस देश में करीब पौने 400 ऐसे bridge बनाने की जरूरत है जो विकास के लिए bottle neck बने हुए हैं, रुकावट बने हुए हैं। अगर ये 400 सेतु बन जाते हैं तो पूरे देश में एक गति को नया आयाम मिलेगा।

सेतुभारतम के तहत अरबों-खरबों रुपया लगाकर के, एक focus के रूप में कि bridge बनाने के काम को बल देना है, कभी चौड़ा करना है, कहीं नया Parallel bridge बनाना है, कहीं नए bridge बनाने हैं। एक साथ सर्वे करके उसका काम करने का अभियान उठाया है, एक भारतमाला योजना बनाई है। आपको हैरानी होगी 60 साल के बाद इस देश में 123 district ऐसे हैं, यानी करीब-करीब 20 percent, 20 percent district ऐसे हैं, जो आज भी National Highway के साथ connectivity नहीं है और इसलिए भारतमाला project के तहत एक अभियान उठाया है कि जल्द से जल्द हिन्दुस्तान के 123 district जो National Highway से link नहीं हैं, उनको जोड़ने के लिए भारतमाला project चलाया है और आने वाले वर्षों में focus target योजना के साथ इस काम को करने की दिशा में हम आगे बढ़े जा रहे हैं।

दिल्ली के चारों तरफ पूरब और पश्चिम नई सड़क, दिल्ली को तो अनेक समस्याओं से तो मुक्त करेंगे ही करेंगे लेकिन इसके बाद हरियाणा के व्यक्ति को अगर राजस्थान जाना, या हरियाणा के व्यक्ति को उत्तर प्रदेश के किसी छोर पर जाना है, उसकी सारी समस्याओं का समाधान हो जाएगा, तेज गति से वो बाहर से बाहर अपना आगे बढ़ जाएगा और ये road की रचना ऐसी है कि भविष्य में वहां पर urban development तो होना ही होना है। जब road आता है तो विकास अपने आप होता ही होता है, कई कालोनियां बनना शुरू हो जाती है लेकिन ये road की रचना ऐसी है कि साथ में अगर नए शहर विकसित भी हो जाएंगे, नई locality विकसित भी हो जाएगी तो भी दोनों के बीच में कोई contradiction नहीं होगा, तकलीफ नहीं होगी। ऐसा सुरक्षित मार्ग बनाने के पीछे ये इतने अरबों-खरबों रुपए खर्च किए जा रहे हैं।

मैं हरियाणा सरकार को, श्रीमान नितिन जी को और उनके department की पूरी team को हृदय से बहुत-बहुत अभिनंदन करता हूं कि इस काम को वो बहुत तेजी से आगे बढ़ा रहे हैं और भारत को गति देने में एक बहुत बड़ी अहम भूमिका, railway हमने railway में आमूल-चूल परिवर्तन करने कि दिशा में प्रयास शुरू किया है, railway स्टेशनों में बदलाव लाने का प्रयास शुरू किया है, रेल की गति बढ़े, रेल expansion हो, रेल के नए area extension हो, रेल में जहां diesel से चल रहा है, वहां electricity कैसे आए, एक साथ अनेकों प्रकार के initiative लेकर के, भारत के रेल युग को एक आधुनिक रेल युग में परिवर्तन करने का प्रयास बहुत तेज गति से हमने उठाया है। बिजली, 2022 जब भारत आजादी के 75 साल मनाएं, हमारा सपना है कि तब हिंदुस्तान के हर गांव में सातों दिन, 24 घंटे, पूरे सालभर बिजली मिलनी चाहिए। ये काम सरल नहीं है, मैं जानता हूं, बिजली के उत्पादन में कितनी ताकत लगेगी, मैं जानता हूं, बिजली पहुंचाने में कितनी ताकत लेगगी, मैं जानता हूं लेकिन किसी ने तो कठिन काम भी हाथ में लेने पड़ते हैं और हमने बीड़ा उठाया है कि 2022 जब भारत आजादी के 75 साल मनाता होगा, हिंदुस्तान के अंदर जहां-जहां बिजली पहुंचानी होगी, वहां पहुंचेगी और 24 घंटे बिजली उपलब्ध होगी, इस दिशा में हम काम रहे हैं।

युग बदला है, बदले हुए युग में अब highway से ही काम सिर्फ नहीं है। Highways भी चाहिए, information wave भी चाहिए, Digital India का जो हमारा सपना है, उस Digital India के सपने का पूरा करने के लिए 21वीं सदी का जो महत्वपूर्ण Infrastructure है, वो है Highways के साथ-साथ eye ways आज सारी दुनिया आपके mobile phone में है और इसलिए उसके infrastructure को भी बल देना पड़ेगा। आधुनिक भारत की पहली शर्त बन गया है, eye ways होना और इसलिए Digital India के माध्यम से Optical Fiber Network का काम पूरा हिंदुस्तान में तेज गति से चल रहा है। मैं जब इन चीजों का review करता हूं तो मेरे ध्यान में आया, लाखों गांव ऐसे हैं कि जहां पर आज के युग में Digital connectivity नहीं है, वो भी एक कठिन काम है, हमने उसका बीड़ा उठाया है, काम तेजी से चल रहा है। जब मैं बिजली के लिए पूछ रहा था, मैं हैरान था 21वीं सदी के 15 साल बीत चुके हैं, आजादी के 70 साल होने जा रहे हैं लेकिन इस देश में 18 हजार गांव ऐसे हैं, जहां बिजली का खंभा तक नहीं लगा है, एक तार भी नहीं पहुंचा है। हमने बीड़ा उठाया है, मैंने लाल किले से इसकी घोषणा की थी कि एक हजार दिन में 18 हजार गांव जहां बिजली पहुंची नहीं है, वो दुर्गम से दुर्गम इलाके होंगे, पहाड़ की चोटी पर हो या रेगिस्तान में हो, हम वहां पर बिजली पहुंचाएंगे, इसका एक अभियान चलाया है।

भाइयों-बहनों आधुनिक भारत को बनाने के लिए Infrastructure की जितनी आवश्यकता है, उस पर हम तेज गति से काम पर लगे हैं, हरिय़ाणा उसमें बहुत प्रगति कर सकता है, सबसे ज्यादा फायदा हरियाणा ले सकता है और मनोहर जी इस बात को बल देकर के आगे बढ़ा रहे हैं। मैं फिर एक बार हरियाणा को बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं, आप सबका बहुत-बहुत धन्यवाद करता हूं। मेरे साथ बोलिए भारत माता की, भारत माता की।

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July 20, 2026
May this session witness productive discussions that strengthen India's development journey: PM
We pray that the monsoon remains proactive and the Monsoon Session remains productive, contributing to the welfare of the nation: PM
Over the past month, the country has achieved several milestones at the national, international and space levels that have filled every Indian with pride: PM
Despite the challenges in West Asia, India continued to grow as the fastest-growing major economy in the world, reflecting its strength and determination: PM
Smooth functioning of Parliament, meaningful discussions and a collective resolve to take the country forward are the need of the hour: PM

ବନ୍ଧୁଗଣ, ଆପଣ ସମସ୍ତଙ୍କୁ ସ୍ୱାଗତ।

 

ମୌସୁମୀ ବର୍ଷା ଏବେ ତାହାର ସକାରାତ୍ମକ ପ୍ରଭାବ ଦେଖାଇବା ଆରମ୍ଭ କରିଛି ଏବଂ ସଂସଦର ମୌସୁମୀ ଅଧିବେଶନ ମଧ୍ୟ ଆରମ୍ଭ ହେଉଛି। ମୌସୁମୀ ବର୍ଷା ହେଉ କିମ୍ବା ମୌସୁମୀ ଅଧିବେଶନ ଉଭୟ ଯେତେବେଳେ ସକ୍ରିୟ ହୁଅନ୍ତି, ସେତେବେଳେ ସେମାନେ ଅତ୍ୟନ୍ତ ଫଳପ୍ରଦ ହୋଇଉଠନ୍ତି। ଆଉ ଯେତେବେଳେ ଉଭୟ ଫଳପ୍ରଦ ହୁଅନ୍ତି, ସେତେବେଳେ ଦେଶର କଲ୍ୟାଣ ହେବା ସହିତ ସମସ୍ତ ଜୀବଜଗତର କଲ୍ୟାଣ ସୁନିଶ୍ଚିତ ହୋଇଥାଏ। ଏହି ଆଶା ଓ ପ୍ରାର୍ଥନା ସହିତ ଆମେ କାମନା କରୁଛୁ ଯେ, ମୌସୁମୀ ସକ୍ରିୟ ରହୁ ଏବଂ ସଂସଦର ମୌସୁମୀ ଅଧିବେଶନ ମଧ୍ୟ ସମାନ ଭାବରେ ଫଳପ୍ରଦ ହେଉ।

 

ବନ୍ଧୁଗଣ,

ଗତ ଏକ ମାସ ମଧ୍ୟରେ ଦେଶ ଅନେକ ଐତିହାସିକ ସଫଳତା ହାସଲ କରିଛି। ଏହି ସଫଳତା ପ୍ରତ୍ୟେକ ଦେଶବାସୀଙ୍କୁ ଗର୍ବିତ କରିଛି। ଏହି ସଫଳତାଗୁଡ଼ିକ ଜାତୀୟ, ଆନ୍ତର୍ଜାତିକ ଏବଂ ମହାକାଶ କ୍ଷେତ୍ର ପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ ପରିବ୍ୟାପ୍ତ। ଭାରତ ପାଇଁ ଏଗୁଡ଼ିକ ଗୌରବର ମୁହୂର୍ତ୍ତ। ଗତ ବର୍ଷ ମୌସୁମୀ ଅଧିବେଶନ ଆରମ୍ଭ ହେବାର ଠିକ୍ ପୂର୍ବରୁ ଜଣେ ଭାରତୀୟ ନାଗରିକ ଆନ୍ତର୍ଜାତିକ ମହାକାଶ କେନ୍ଦ୍ରରେ ପହଞ୍ଚିଥିଲେ। ଗତକାଲି, ଗୋଟିଏ ଦିନ ପୂର୍ବରୁ, ଭାରତର ଏକ ଯୁବ ଷ୍ଟାର୍ଟଅପ୍ ଏକ ଅସାଧାରଣ କୃତିତ୍ୱ ହାସଲ କରିଛନ୍ତି। ବିଶ୍ୱର ଖୁବ୍ କମ୍ ଦେଶରେ ଏଭଳି ବେସରକାରୀ ସାହସିକ ପଦକ୍ଷେପ ଦେଖିବାକୁ ମିଳେ। ଆମର ଯୁବ ଉଦ୍ଭାବକମାନେ ମହାକାଶ କ୍ଷେତ୍ରରେ ଭାରତର ଆକାଂକ୍ଷାକୁ ନୂତନ ଉଚ୍ଚତାକୁ ନେଇଯାଇଛନ୍ତି ଏବଂ ଏହା ପ୍ରକୃତରେ ଏକ ଅତ୍ୟନ୍ତ ଉଲ୍ଲେଖନୀୟ ସଫଳତା। ମୋତେ କୁହାଯାଇଛି ଯେ, ‘ସ୍କାଏରୁଟ୍’ ଷ୍ଟାର୍ଟଅପ୍‌ରେ କାମ କରୁଥିବା ସମସ୍ତ ସଦସ୍ୟମାନଙ୍କର ହାରାହାରି ବୟସ ମାତ୍ର ୨୮ ବର୍ଷ। ଏଭଳି ଯୁବକମାନେ ଏହି ଅସାଧାରଣ କାର୍ଯ୍ୟ କରି ଦେଖାଇଛନ୍ତି। ମୁଁ କୌଣସି ୫୬ ବର୍ଷର ‘ଯୁବକ’ଙ୍କ କଥା କହୁନାହିଁ; ମୁଁ ଆମ ଦେଶର ସେହି ଷ୍ଟାର୍ଟଅପ୍‌ର କଥା କହୁଛି, ଯେଉଁଠି ହାରାହାରି ୨୮ ବର୍ଷ ବୟସର ଯୁବକମାନେ ଅନ୍ତରୀକ୍ଷରେ ଭାରତର ପତାକା ଉଡ଼ାଇଛନ୍ତି। ସେମାନଙ୍କୁ ମୋର ଅନେକ ଅନେକ ଅଭିନନ୍ଦନ। ଏଭଳି ସଫଳତା ଭାରତକୁ ଆତ୍ମବିଶ୍ୱାସରେ ପରିପୂର୍ଣ୍ଣ କରେ। ବିଶ୍ୱସ୍ତରରେ ଭାରତର ପ୍ରତିଷ୍ଠା ଏବଂ ପରିଚୟ ସର୍ବମାନ୍ୟ ଓ ସର୍ବସ୍ୱୀକୃତ ହୋଇ ଚାଲିଛି।

 

ବନ୍ଧୁଗଣ,

ଏହା କେବଳ ଏକ ସଂଯୋଗ ନୁହେଁ, ବରଂ ଏକ ସଶକ୍ତ ବାର୍ତ୍ତା। ଏହା ଅତ୍ୟନ୍ତ ଦୃଢ଼ତାର ସହିତ ଏହି ସନ୍ଦେଶ ପ୍ରଦାନ କରୁଛି ଯେ, ଆମ ଦେଶର ଯୁବପିଢ଼ିଙ୍କର ସାମର୍ଥ୍ୟ ଏବଂ ସେମାନଙ୍କର ଆକାଂକ୍ଷା ମହାକାଶ ପରି ଅସୀମ। ଦେଶ ପାଇଁ ଏହାଠାରୁ ବଡ଼ ପ୍ରେରଣାଦାୟକ ବାର୍ତ୍ତା ଆଉ କିଛି ହୋଇପାରିବ ନାହିଁ।

 

ବନ୍ଧୁଗଣ,

ଆଜି ଦେଶ ଯେଉଁ 'ସଂସ୍କାର ଏକ୍ସପ୍ରେସ'ର ଦ୍ରୁତଗାମୀ ପଥରେ ଆଗେଇ ଚାଲିଛି, ତାହାର ଫଳସ୍ୱରୂପ ଆମ ଦେଶର ଯୁବକମାନେ ଏଭଳି ବଡ଼ ସାହସିକ ପଦକ୍ଷେପ ନେବାର କ୍ଷମତା ହାସଲ କରୁଛନ୍ତି ଏବଂ ସେଥିରେ ସଫଳତା ମଧ୍ୟ ଅର୍ଜନ କରୁଛନ୍ତି।

 

ବନ୍ଧୁଗଣ,

ନିକଟ ଅତୀତରେ ରାଜସ୍ଥାନରେ ଏକ ବୃହତ୍ ତୈଳ ବିଶୋଧନାଗାର ଦେଶକୁ ସମର୍ପଣ କରାଯାଇଛି। ଏହାର କିଛି ସପ୍ତାହ ପୂର୍ବରୁ, ଦେଶର ତୃତୀୟ ସେମିକଣ୍ଡକ୍ଟର କାରଖାନାକୁ ମଧ୍ୟ ରାଷ୍ଟ୍ର ଉଦ୍ଦେଶ୍ୟରେ ଉତ୍ସର୍ଗ କରାଯାଇଥିଲା। କିଛି ଦିନ ପୂର୍ବରୁ ସବୁଜ ହାଇଡ୍ରୋଜେନ୍‌ ଇନ୍ଧନ ଚାଳିତ ଟ୍ରେନ୍‌କୁ ମଧ୍ୟ ଦେଶବାସୀଙ୍କୁ ସମର୍ପଣ କରାଯାଇଥିଲା। ବିଶ୍ୱରେ ଏଭଳି ସୁବିଧା ଥିବା ଦେଶର ସଂଖ୍ୟା ଖୁବ୍ କମ୍। କିନ୍ତୁ ଭାରତ ଯେଉଁ ହାଇଡ୍ରୋଜେନ୍‌ ଟ୍ରେନ୍‌ ଦେଶବାସୀଙ୍କୁ ସମର୍ପଣ କରିଛି, ତାହା ବିଶ୍ୱର ସବୁଠାରୁ ଶକ୍ତିଶାଳୀ ଇଞ୍ଜିନ୍‌ ବିଶିଷ୍ଟ ଏବଂ ସବୁଠାରୁ ଲମ୍ବା ହାଇଡ୍ରୋଜେନ୍‌ ଟ୍ରେନ୍‌। ଏହା ଆମ ଦେଶର ବୈଜ୍ଞାନିକ, ଇଞ୍ଜିନିୟର, ଉଦ୍ଭାବକ, ଉଦ୍ୟୋଗୀ ଓ ଶ୍ରମିକମାନଙ୍କର ସାମୂହିକ ପ୍ରୟାସର ପ୍ରତ୍ୟକ୍ଷ ଫଳାଫଳ । ସେମାନେ ଗୋଟିଏ ଲକ୍ଷ୍ୟକୁ ସାମ୍ନାରେ ରଖି ଦେଶ ପାଇଁ ବଞ୍ଚୁଛନ୍ତି, ଦେଶ ପାଇଁ କାମ କରୁଛନ୍ତି, ଏବଂ ସେହି ସମର୍ପଣର ଫଳସ୍ୱରୂପ ଆଜି ଏଭଳି ସଫଳତା ସମ୍ଭବ ହୋଇପାରିଛି।

 

ବନ୍ଧୁଗଣ,

ଆମେ ସମସ୍ତେ ଭଲଭାବେ ଜାଣୁଛୁ ଏବଂ ସମଗ୍ର ବିଶ୍ୱ ମଧ୍ୟ ଏହାକୁ ନେଇ ଚିନ୍ତିତ ଯେ, ବିଭିନ୍ନ ସ୍ଥାନରେ କ୍ରମାଗତ ଭାବେ ଯୁଦ୍ଧ ପରିସ୍ଥିତି ସୃଷ୍ଟି ହେଉଛି। ଭାରତ ପରି ଶକ୍ତି ଆବଶ୍ୟକତା ପାଇଁ ଅନ୍ୟ ଦେଶ ଉପରେ ନିର୍ଭରଶୀଳ ଦେଶମାନଙ୍କ ସମ୍ମୁଖରେ ପଶ୍ଚିମ ଏସିଆରେ ଚାଲିଥିବା ଯୁଦ୍ଧ ଏକ ବଡ଼ ସଙ୍କଟର କାରଣ ପାଲଟିଛି। ପେଟ୍ରୋଲ, ଡିଜେଲ, ଏଲ୍‌ପିଜି, ସାର, ରସାୟନ ସମେତ ପ୍ରାୟ ସମସ୍ତ କ୍ଷେତ୍ରରେ ଅନେକ ବାଧା ଓ ସଙ୍କଟ ଦେଖାଦେଇଛି। ଏସବୁ ପ୍ରତିକୂଳତା ପରିସ୍ଥିତି ସତ୍ତ୍ୱେ ମଧ୍ୟ ଭାରତ ୭.୭ ପ୍ରତିଶତ ଅଭିବୃଦ୍ଧି ହାର ସହ ବିଶ୍ୱର ପ୍ରମୁଖ ଅର୍ଥନୀତିଗୁଡ଼ିକ ମଧ୍ୟରେ ସବୁଠାରୁ ଦ୍ରୁତ ଅଗ୍ରଗତି କରୁଥିବା ଦେଶ ଭାବେ ନିଜ ସ୍ଥାନ ବଜାୟ ରଖିଛି। ଏହା ଭାରତର ସାମର୍ଥ୍ୟର ପରିଚାୟକ। ଏହା ପ୍ରମାଣ କରୁଛି ଯେ, ଭାରତ କିପରି ଉତ୍ସାହ ଓ ଉଦ୍ଦୀପନା ସହ ନୂତନ ଉଚ୍ଚତା ଛୁଇଁବାକୁ ଚାହୁଛି। ଏଭଳି ସମୟରେ ମୌସୁମୀ ଅଧିବେଶନ ଆରମ୍ଭ ହେଉଛି। ଦେଶ ବିକାଶର ଗତି ଧରି ସାରିଛି ଏବଂ ସଂସଦର ସକାରାତ୍ମକ ଚେତନା ସେହି ଗତିରେ ନୂତନ ଶକ୍ତି ସଞ୍ଚାର କରିପାରିବ। ରାଷ୍ଟ୍ରର ଲକ୍ଷ୍ୟ ପୂରଣ ପାଇଁ ସକାରାତ୍ମକ ମନୋଭାବ ଅତ୍ୟନ୍ତ ଆବଶ୍ୟକ। ଆମ ସଂସଦରେ ଅନେକ ଅଭିଜ୍ଞ ସାଂସଦ ଅଛନ୍ତି। ସେମାନେ ଯେକୌଣସି ଦଳର ହୁଅନ୍ତୁ ନା କାହିଁକି, ସେମାନଙ୍କର ଗଭୀର ଅଭିଜ୍ଞତା ରହିଛି। ଏଭଳି ସମୟରେ ସେମାନଙ୍କର ଅନୁଭବ ଓ ଜ୍ଞାନର ଆବଶ୍ୟକତା ସଂସଦକୁ ଅଛି ଏବଂ ଦେଶକୁ ମଧ୍ୟ ଅଛି। ସେଥିପାଇଁ ସଂସଦ ସୁଚାରୁରୂପେ ଚାଲିବା, ଫଳପ୍ରଦ ଆଲୋଚନା ହେବା ଏବଂ ମିଳିମିଶି ଦେଶକୁ ଆଗକୁ ନେବା ପାଇଁ ସଂକଳ୍ପ ନେବା-ଏହା ସମୟର ସବୁଠାରୁ ବଡ଼ ଆବଶ୍ୟକତା ବୋଲି ମୁଁ ମନେ କରେ। ଆକାଂକ୍ଷାରେ ପରିପୂର୍ଣ୍ଣ ଆମ ଦେଶର ଯୁବପିଢ଼ି ଚାହୁଛନ୍ତି ଯେ, ଆମେ ଆହୁରି ଆଗକୁ ବଢ଼ିବା। ଆଜି ସମୟର ଆହ୍ୱାନ ହେଉଛି ଯେ, ରାଷ୍ଟ୍ରନିଷ୍ଠା ଓ ଦେଶପ୍ରେମରେ ସମର୍ପିତ ସ୍ୱରଗୁଡ଼ିକୁ ସଂସଦରେ ଉପଯୁକ୍ତ ମଞ୍ଚ ମିଳୁ, ସେମାନେ ନିଜର ସ୍ୱରକୁ ସଶକ୍ତ ଭାବେ ଉପସ୍ଥାପନ କରନ୍ତୁ ଏବଂ ଦେଶକୁ ଦିଗଦର୍ଶନ ଦିଅନ୍ତୁ। ସେଥିପାଇଁ ମୁଁ ଆଶା କରୁଛି ଏବଂ ମୋର ଦୃଢ଼ ବିଶ୍ୱାସ ଯେ, ଯେଉଁଠାରେ ତଥ୍ୟ ଓ ତର୍କ ରହେ, ସେଠାରେ ଝଡ଼ ସୃଷ୍ଟି କରିବା ପାଇଁ ସ୍ଥାନ ନଥାଏ। ଯଦି ତର୍କ ଦୃଢ଼ ଓ ତଥ୍ୟ ଶକ୍ତିଶାଳୀ ଥାଏ, ତେବେ ଶାନ୍ତ ଚିତ୍ତରେ ମଧ୍ୟ ନିଜର କଥାକୁ ପ୍ରଭାବଶାଳୀ ଭାବରେ ରଖାଯାଇପାରେ। ମୁଁ ଆଶା କରୁଛି ଯେ, ତର୍କ ଓ ତଥ୍ୟ ଆଧାରରେ ସଦନର ଆଲୋଚନାକୁ ସମୃଦ୍ଧ କରାଯିବ। ପ୍ରତ୍ୟେକ ସ୍ୱରକୁ ସୁଯୋଗ ମିଳୁ, ପ୍ରତ୍ୟେକ ଚିନ୍ତାଧାରାକୁ ସମ୍ମାନ ମିଳୁ - ଏହା ହିଁ ଆମ ସଂସଦର ମୂଳ ଭୂମିକା। ମୁଁ ସମସ୍ତ ସାଂସଦଙ୍କୁ ଏହି ସଦନର କାର୍ଯ୍ୟକଳାପରେ ସକ୍ରିୟ ଓ ଉତ୍ସାହର ସହ ଅଂଶଗ୍ରହଣ କରିବା ପାଇଁ ଆହ୍ୱାନ ଜଣାଉଛି। ଆଜି ସକାଳେ ମାନ୍ୟବର ଲୋକସଭା ବାଚସ୍ପତି ମହୋଦୟ ମଧ୍ୟ ସୋସିଆଲ ମିଡିଆ ମାଧ୍ୟମରେ ଦେଶର ସାଂସଦମାନଙ୍କୁ ସ୍ୱାଗତ ଜଣାଇ ନିଜର ଭାବନା ପ୍ରକାଶ କରିଛନ୍ତି। ମୁଁ ମଧ୍ୟ ସେହି ସ୍ୱାଗତରେ ମୋର ସ୍ୱର ମିଶାଉଛି।

 

ଆପଣ ସମସ୍ତଙ୍କୁ ଅନେକ ଅନେକ ଧନ୍ୟବାଦ।

 

ନମସ୍କାର।